Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 13 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

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प्रेजेंट

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राज-- बाबा मैं मनोरमा से शादी करना चाहता हों. कुछ दिनों बाद राज ने बाबा से अपने दिल की बात बोल दी.

बाबा-- मैं पहले से hi जान गया था राज बीटा. ऐसा hi कुछ मुझे सुनने को मिलने वाला है. मुझे अपनी बेटी की खुशियों से बढ़कर कुछ नहीं चाहिए राज बीटा. मेरी बेटी तुम्हारे आने से आने से बहुत खिल उठी है. वह भी तुम्हारे बिना रह नहीं सकती. तुम दोनों एक हो जाओ. ये मेरे दिल की भी इच्छा है. पर राज बीटा समस्या कुछ और है. तुम.. तुम खुद को भूल चुके हो. तुम अपने बारे में कुछ नहीं जानते. कभी न कभी तुम्हारी यादें वापिस आएँगी. तब फिर यहाँ रह नहीं सकोगे. तुम अपने पीछे नजाने क्या कुछ छोड़ के आये हो. तुम्हारे हाथ पर माँ लिखा है. ज़रूर तुम अपनी माँ से बहुत प्यार करते हो. यहाँ रह नहीं पाओगे. कैसे फिर ऐसे लड़के से मैं अपनी बेटी की शादी कर सकता हों. जो का नहीं है. जिसे एक दिन वापिस लौटना है.

राज सोच में पद गया. कुछ देर सोचता रहा फिर bola--baba मई नहीं जनता. मेरे कोई परिवार है भी या नहीं. अगर है तोह कोण कोण है. मैं कुछ भी नहीं जनता. मैं कुछ जनता हों तो बस इतना. मई मनोरमा को खो नहीं सकता. हाँ अगर कभी ऐसा हुआ तोह मैं वडा करता हों, मनोरमा को और आपको अपने साथ ले जाऊँगा.

बाबा-- नहीं बीटा. मैं अपनी बस्ती नहीं छोड़ सकता. मेरी आखरी सांस तक यहीं पूरी होगी. मैं जंगली हों. जंगल में पैदा हुआ. जंगल में hi मरूंगा. शहर गया तोह मैं सांस भी नहीं ले पाऊँगा. यहाँ सब मेरे हाँ. वहां तुम दोनों के शिव कोई नहीं होगा. मैं ऐसा नहीं कर सकता.

राज-- तोह फिर मैं मनोरमा को अपने साथ ले जाऊँगा. और आपसे मिलने आता रहूँगा.

बाबा की ऑंखें नाम हो गई-- मेरी एक hi बेटी है राज बीटा. मैं उसे खुद से दूर होते हुए भी तोह नहीं देख सकता..

राज परेशान हो गया. कैसे बाबा को मनाये-- बाबा अभी तोह मई कुछ नहीं जनता मैं तब क्या करूँगा. पर मुझे एक बात पर पूरा विश्वास है बाबा. याददाश्त जाने से पहले मैं कैसा था. नहीं जनता. पर एक बात ज़रूर जनता हों. मैं जिसे एक बार अपना बना लून, उसे छोड़ नहीं सकता. ये बात मेरे दिल में ऐसी है जो मुझे हर पल हर लम्हा महसूस होती रहती है बाबा. मुझे खुद से जुडी कोई चीज या इंसान बहुत प्यारा लगता है. यहाँ भी जो मुझसे प्यार करते हाँ. मेरे दिल में भी उनके लिए उतना hi प्यार है. जितना सबके दिल में मेरे लिए. बाबा मसला मेरे दिमाग का है दिल का नहीं. मैं कभी भी आपको निराश नहीं करूँगा. ज़रूर कुछ करूँगा.. जिससे आपको परेशानी नहीं बनेगी.

बाबा-- तुम्हारी याददाश्त लौट आती है. तुम यहाँ से चले जाते हो. अगर मैं अपनी बेटी का हाथ तुम्हारे हाथ में नहीं दूंगा तोह मैं ये बात भी जनता हों. मेरी बेटी उम्र भर के लिए दुखी हो जाएगी. वह भी तुमसे उतना hi प्यार करती है राज बीटा. जितना तुम उससे करने लगे. तुमसे अच्छा लड़का मुझे मेरी बेटी के लिए कोई और नहीं मिलेगा. सच कहूं तोह मुझे मेरी hi बस्ती में मेरी बेटी लायक कभी कोई नहीं दिखा. मेरी बेटी हीरा है राज बीटा. और तुम भी एक हीरे हो. तुझे एक नज़र देख कर hi मैं जान गया था. उम्र बीत चुकी है इंसानो के बीच रहते हुए. एक बेटी का बाप भी हों. कैसे नै सब समझ सकता.

राज ने बाबा के हाथ थाम लिए-- बाबा बहगवां पर भरोसा रखें. ज़रूर वह अच्छा hi करेगा..

बाबा-- ठीक है मैं बस्ती वळून से बात करके देखता हो. मैं कोई भी फ़ासिला अकेला नहीं ले सकता. सब एक साथ रहते हाँ. सबकी बात को जानना ज़रूरी है.

मनोरमा दरवाज़े पर कड़ी सब सुन रही थी. साड़ी बातें जान कर गुलाब के जैसे उसके गालों की लाली बढ़ गई थी..

बाबा उठ कर बस्ती वळून से मिलने चले गए तोह राज ने मुद कर मनोरमा को देखा. मनोरमा शर्मा राज को देखने लगी..

राज- मनोरमा तुम खुश होना..

मनोरमा शर्मा गयी थी. फिर भी राज की बात पर मस्ती करते हुए-- नहीं.. मैं खुश नहीं हों. एक आंख से तुम भंगे हो. नक् भी कुछ टेढ़ी है तुम्हारी. रंग के भी सांवले हो. मेरी जैसी गोरी चिति लड़की का तुमसे कोई जोड़ नहीं बनता.. मुझे नहीं करनी तुमसे शादी. जाओ बस्ती में कोई और अपने लायक ढूंढ लो. मेरे लिए तोह किसी राजकुमार को आना पड़ेगा..

राज-- हाहाहाहा.. राजकुमार.. वह भी एक जंगली बिल्ली के लिए.. जाओ जाओ. तुमसे तोह अच्छा है मई किसी गाढ़ी से शादी कर लूँ.

मनोरमा साडी शर्म भूल कर गर्म हो गयी.. भाग कर आई और राज की पीठ पर मुक्के मारने लगी.-- जाओ करलो किसी गाढ़ी से शादी.. मुझे भी तुमसे सुंदर लड़का मिल जायेगा. बड़ा आया हुँहहह..

राज और भी खुल कर हसने लगी. कुछ देर में मनोरमा राज के गाल को चुम कर अंदर भाग गयी..

राज-- सरे बदले लूंगा तुमसे.. बस एक बाद शादी हो लेने दो..

मनोरमा-- मेरा भी बड़ा उधर रहता है तुम्हारी तरफ.. मुझे भी तुमसे सभी उधर चुकता करने है. मैं भी उस दिन के इंतज़ार में हों.

राज-- हाहाहा.. और मैं उस दिन की रात के इंतज़ार में हों.

मनोरमा-- बेशरम.. फिर खिलखिला कर हस्ती हुई अंदर भाग गई.

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फलशबैक

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राज सुबह किचन में घुसा तोह चची और आराधना किचन में बिजी थी. बाकि सब सोइ पड़ी थी. किसी की छूट में दर्द और सूजन थी तोह दीपिका की गांड राज ने मार मार कर सुजा दी थी.. सुबह उठ कर राज ने देखा तोह तोह उसे अफ़सोस भी हुआ और हसी भी आई थी. फिर दीपिका को किश करके बाथरूम में घुस गया था..

अब राज किचन में घुसा तोह अपनी माँ को पीछे से जा कर बहन में भर लिए.

राज-- कैसे है मेरी जान.

आराधना ने चची को देखा और कुछ शर्मा गई-- मैं अच्छी हों राज जी..

चची-- हाँ अब तोह ये तुम्हरे लिए राज जी होंगे हाँ.

चची मज़े लेते हुए बोली.. राज ने पीछे से अपनी माँ को बहन में भरा था. तोह निचे से अपने लुंड को अपनी माँ की गांड पर नहीं लगाया था. आराधना को राज का ऐसा करना अच्छा लगा था..

राज ने साइड आराधना के गाल पर किश कर दी.. और एक हाथ बढ़ा कर चची के गाल पर फेर दिए था..

चची-- क्या बात है. आज बड़ा तमीज़ से पेश आ रहे हो.

चची की बात पर आराधना मुस्कुरा गई.

राज-- सोचा बाद में हमेशा hi आप सब की बजा बजा कर सुजनी है तोह इस बने नए रिलेशन में कुछ दिन आप सबको सम्मान और बहुत सा प्यार दे डॉन.

आराधना-- बड़ी अच्छी बात कहीं आपने राज.. मुझे भी ख़ुशी हुई आपकी ऐसी बात से.

पहले जब भी आपको मौका मिलता था तोह आप कहीं न कहीं हाथ लगा दिए करते थे. अब तोह मैं और सब पूरी की पूरी आपकी हो चुकी हाँ. आप हमारे साथ कुछ भी करने का हक़ प् चुके हाँ. अब तोह हम आपको रोक भी नहीं सकती. फिर भी आपने हमेशा पहले जैसे अंदाज़ में परेशान नहीं किया. एक नारी ऐसा hi प्यार और सम्मान तोह चाहती है अपने पति से..

राज ने अपनी माँ को घुमा दिए और माथे पर किश कर दिए.

राज-- अरे माँ आप तोह स्पेशल हो मेरे लिए. और सब भी स्पेशल हाँ मेरे लिए. आप सब ने मुझे बदल दिए है. वर्ण मुझे ऐसे ठंडा प्यार कभी हज़म नहीं करता था. अब होने लगा है. रेगुलर इसी हल में रहूँगा तोह परेशानी बनेगी मुझे. मुझे परेशानी बनेगी तोह फिर मैं सबको परेशान करूँगा.. इसलिए कुछ दिनों के मज़े मिले हाँ आप सबको तो कर लें मज़े..

आराधना ने भी राज के माथे पर दोनों गालों पर किश कर दी.

राज-- हमें छोट चाहिए भी नहीं. हम सब मस्ती भी करेंगे खुल कर प्यार भी.. क्यों दीदी.

चची-- हाँ क्यों नहीं. मुझे भी अब की नयी मिली ज़िन्दगी और स्टाइल बहुत पसंद आये हाँ. मैं भी कुछ सालो की बची ज़िन्दगी को पुरे मज़े से जीना चाहती हों.

"कोण कोण मज़े करना चाहती है."

देखा तोह दिशा थी.

आराधना ने सुना था. देखा नहीं था. वह राज से चुद कर सो गई थी. राज अपनी माँ की आँखों में प्रश्न देख कर दिशा को माँ के बारे में और माँ को दिशा के बारे में बताने लगा.
 
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फ्लैशबैक

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आराधना-- अरे ये दिशा है. कितनी प्यारी है ये. आराधना आगे बढ़कर दिशा को अपने गले से लगा गई.

दिशा भी आराधना से ऐसी मिली. जैसे आराधना उसकी अपनी माँ हो.

दिशा-- मैं आपको मम्मी कहा करुँगी.. मेरी मम्मी नहीं रही न.

आराधना खुश होक-- हाँ.. ज़रूर. बहगवां ने मुझे दो दो बेटियां और दे दी हाँ.

राज-- हाहाहा.. दूसरी तो आपकी सौतन है मेरी जान. वह आपकी बेटी कहाँ से हुई.

दिशा और चची हसने लगी

आराधना-- बहु तो मेरी लिए वो है न. और बहु बेटी भी होती है.

चची-- अब वो बहु नहीं रही. जब बीटा नहीं रहा था. तो बहु कहा से आई. अब तो तुम भी भी बेटे की पत्नी बन गई हो. बीटा बन गया पति तोह बेटे की पत्नी बन गई सौतन.

हाहाहा.. सब हसने लगे.

दिशा भी हस्ते हुए-- दीदी को सौतन hi बनायें आप मुम्मु जी. वह हाँ भी तोह आप की उम्र की.

आराधना-- इस का क्या मतलब हुआ.. मैं बूढी और वो अभी तक जवान है

राज खूब मज़े लेने लगा

दिशा-- हेहेहे.. दीदी उम्र से बड़ी हाँ. बाकि हर साइड से वह काम उम्र की हाँ. मैंने देखा रत को.. दीदी का सब कुछः कच्ची कलियों जैसा था.

आराधना हैरान होक-- तुम भी साथ थी रत में क्या.

दिशा-- हाँ और हमेशा साथ रहूँगा.. फिर जीजू के लुंड को पकड़ कर मसलता हुए- उफ़ रत तोह जीजू ने मेरी छूट और गांड के खूब पटाखे निकले हाँ. दीदी के साथ मिलकर मिलान का मज़ा hi आ गया..

आराधना अब हसी- तू तोह अपनी दीदी की हर चीज hi शेयर करने लगी.

दिशा-- मैंने तोह अपने बेबी का भी सब शेयर कर दिए. जीजू मेरा पति नहीं बन सके तोह क्या हुआ. जीजू मेरा दूदू पि कर मेरा छोटू बन गए हाँ.

हाहाहा.. सब हसने लगे.. राज ने फिरसे दिशा का चुका पकड़ लिए.. चल फिर से पीला न मुझे अपना दूदू.. सुबह सुबह भूक लगी है तुम्हारे छोटू को.

दिशा-- हेहेहे. वह तोह मई दूसरे छोटू को पीला ै. कुछ देर में दूदू फिरसे आएगा तोह पि लेना..

चची-- देखा आराधना.. जो जैसा होता है. उसे सब वैसे hi मिलते हाँ. राज जैसा है. सब खुद से hi उसके जैसे बनते जा रहे हाँ.

आराधना दिशा के गाल पर किश करती हुई-- अच्छी बात है. सब एक जैसे होंगे तोह जीने का मज़ा बढ़ जायेगा.

दिशा-- कुछः महीनो में ये भी तोह भर जायेंगे..

दिशा आराधना का चुका पकड़ क्र मसलते हुए बोली..

आराधना मस्ती करती हुई-- आह्हः बेशरम अपने जीजू के सामने hi अपनी मम्मी के चुके पकड़ कर मसल रही है.

राज-- मसलने दो. रत मैंने निचोड़ा था. पर खली मिले मुझे. दिशा एक माँ है. इसके छूने, दबाने से शायद इनके अंदर सच में दूदू आ जाये.

आराधना-- अब नहीं आने वाला इनमे दूदू..

चची-- आएगा.. देखना. राज का घोडा कैसे इनके अंदर दूदू भरता है.

राज-- आजके भी तोह भरे जा सकते हाँ.

चची बड़े स्टाइल से हाथ को घूमते हुए-- अब इनके भरने से समय बीत चूका. अब ये पहले हुए तोह मिलेंगे तुम्हे. पर दूदू से भरे हुए नहीं.

राज-- दिशा तुम चची के दूदू भी मसल दो. क्या पता. इसी साल चची फिरसे हरी भरी हो जाये..

सब मस्ती करने लगे.. किचन का सब छोड़ कर मास्ति करने लगे. सब खूब हस्ते रहे.

राज कुछः देर और ठहर कर अपने दोस्तों के पास जा pohncha..woh सब कोठी के गेट के पास उसे मिले.. सब गेटकीपर के पास बैठे थे.. वहां धुप थी.

बिन्नी जो एक गर्म चादर अपने गिर्द लपेटे हुए एक कुर्सी पर बैठा था. राज को देख कर उठा तोह जूरी और विक्की भी उठ खड़े हुए

राज-- बिन्नी तुझे ज़यादा सर्दी लग रही है क्या.

बिन्नी का मोह उतरा हुआ था-- हाँ यार रत पता नहीं कैसे बुखार आ गया.

राज-- अच्छा मुझे बताया क्यों नहीं. दवा ली क्या

बिन्नी-- हाँ ली है. अब कुछ बेहतर हों.

राज वहीँ एक कुर्सी पर बेथ gaya..sab बेथ गए.. राज गेटकीपर से बोलै-- ोये लौडू तू सुना.. तू कैसा है.

मैं ठीक हों साब.. गेटकीपर बोलै तोह राज ने उसकी जंग पर एक धप्प मार दी..

राज-- मणि मैं कोई साब नहीं हों. देख नहीं रहा. गली के सरे आवारा मेरे यार हाँ. हम भी तेरे जैसे हाँ. तू भी मुझे राज hi बोलै कर. कोई मेहमान आये तोह फिर कुछ भी बोल सकता है. मुझे साब बनने की छह नहीं है. हम सब एक हाँ.

मणि-- आप बहुत अच्छे हो साब.

राज-- तू नहीं सुधरेगा साले.

सब हसने लगे

विक्की--- सुधरे तो हम भी नहीं. ये कैसे सुधरेगा. साला तेरे सामने तो हम भी खुद को तेरा नौकर hi समझते हाँ.

राज-- हाहाहा. जिस दिन ये आदत तुम तीनो के अंदर से गई. उसी दिन तुम तीनो भी कुछ बन जाओगे.

जूरी-- अब ऐसी भी बात नहीं है राज. अब हम शहर में रहने आ गए हाँ तो देखने कितनी जल्दी हम भी बदल जायेंगे.

बिन्नी बीमार था. फिर भी भूकने से बाज़ नहीं आया-- हाहाहा.. जिस माँ के लौड़े ने अपनी दो दो बहनो की छूट एक hi समय पर खुलती देखि हो. वह शहर आ कर कैसे नहीं बदलेगा..

हाहाहा. राज भी ज़ोर से हसने लगा.

विक्की-- और जिसके लौड़े पर उसकी दीदी ने लत मरी हो. वह लौड़ा फिर शहर के धमाल न मचाये. ये कैसे हो सकता है.

राज-- हाहाहा.. इसका मतलब है. इस लौडू को और भी कमल का बनाने के लिए इसकी दोनों बहनो को फिरसे और बार बार छोड़ना पड़ेगा. इसके लौड़े पर भी बार बार लात पड़ेगी तोह ये जल्दी सुधर जायेगा. जल्दी बदल जायेगा.

हाहाहा.. सब हसने लगे तोह चौकीदार मोह खोले सबको देखने लगा.

जूरी-- तू क्या देख रहा है साले. तेरी कोई नहीं है क्या..

मणि-- हाँ न मेरी 3 बहनो हाँ. वह भी गाओं में..

बिन्नी-- हाहाहा.. शहर लौंडा बनना है तोह तीनो बहनो को यहीं ले आया और राज से छुड़वा ले. देखना वह कैसी चालक बनती है. तू भी कमल का बन जायेगा..

राज-- हाहाहा. बेहेन के लौड़े.. उसे को लपेट रहा है. देख नहीं रहा वह कितना सीधा है.

बिन्नी-- सीधा है तोह ये भाग जायेगा. हमारे साथ रहना है तोह हरामी बनना पड़ेगा इसे. बोल मणि साले.. तेरी कोनसे वाली बेहेन ज़यादा सोहनी है..

मणि शरमिंद्र सा होने लगा..

विक्की ने मणि के लौड़े को पकड़ कर मसला तोह पता चला उसका लौड़ा पहले से hi कुछ गर्म कुछ सख्त है.

विक्की-- हाहाहा. राज ये भी हरामी है. ऊपर से शरीफ है. अंदर से पूरा हरामी है..

बिन्नी- फिर तो ये मेरे जैसा होगा. छुप छुप कर अपनी माँ और बहनो को नंगा देखता होगा.

हाहाहा.. मणि का सर झुक गया.

राज ने मणि को अपने साथ वाली कुर्सी पर बिठा दिए. पहले वहां जूरी बैठा हुआ था.

राज-- तुझे पता है. मैं अपने गाओं की बहुत काम छूट छोड़ी है. वहां रहता तोह जो बच गई थी. उनके अंदर भी अपना लुंड घुसा देता.. ज़बरदस्ती सिर्फ एक से करि थी. बाकि सब अपनी मर्ज़ी से लुंड लेने लगी थी. कोई भी छूट हो. वो लुंड लेने के लिए बेचैन रहती है. पर लुंड होना चाहिए मर्दों वाला. हर छूट में लुंड छूट की मर्ज़ी से घुसे.. छूट वाली को मज़ा आया. उसके दिल में दर्द न हो. ऊपर से नखरे करे और अंदर मैं में पुरे पुरे मज़े ले तोह फिर वह छूट वाली अपनी माँ हो या बेहेन कोई फर्क नहीं पड़ता.. अगर तू भी अपनी माँ और बहनो को सोचता है. तोह सोच कर मुठ मत मरना. दुम्म है तोह प्यार करके उनको छोड़ देना.. नहीं तोह किसी को छुप छुप कर नंगे देख कर मुठ मत मरना.. मुठ मरने से लुंड का दुम्म भी ख़तम होता है. और हिम्मत भी. फिर कभी अपनी hi माँ और बहनो को छोड़ने की हिम्मत नहीं मिलती. वहीँ माँ और बेहेन छूट की गर्मी बर्दाश्त न करते हुए बहार किसी और का लुंड लेके अपनी छूट की गर्मी ख़तम कर लेती हाँ. तू देखना अगर कभी तेरी माँ और बेहेन की छूट की गर्मी बढे तोह बहार से शांत होने का वह सोचें तोह उससे पहले hi तू उनकी छूटो के अंदर लुंड घुसा कर उनकी छूट अग्नि को शांत क्र देना..

राज दे तोह लेक्चर रहा था मणि को.. पर जैसा ज्ञान था. सब पहले तोह सुन रहे थे.

जब राज खामोश हुआ तोह तीनो हरामी दोस्त उठ कर खड़े हो गए और ज़ोर ज़ोर से हसने लगे..

हहहहहहहहहहहहहहहहहह...

राज ने पहले तो सब को ग़ुस्से से देखा.. फिर वह भी ज़ोर ज़ोर से हसने लगा.. मणि की पीठ पर धप्प मार दी. पहले तोह मणि कच्चा होने लगा. राज की बातें सुनकर जहाँ उसे अजीब सा लगा था. शर्म भी बड़ी आई थी. वहीँ उसका लुंड भी पुरे चरम पर ा गया था..

सब हसने लगे तोह वह भी खुद को रोक नहीं पाया और ज़ोर से हसने लगा....
 
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फ्लैशबैक

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मणि 24 साल का था. वह भी गाओं से था. इस कोठी में पहले से था. बिन्नी, विक्की और जूरी तीनो ने आते hi उससे दोस्ती कर ली थी. उसे भी अपने जैसा बना रहे थे.

वह कुछ शर्मीला लड़का था. पर राज ने जैसा बोलै था, वह खुद को अपनी माँ और बहनो को नंगा इमेजिन करने से रोक नहीं पाया था. उसका लुंड भी खड़ा हो गया था.

वह है तोह रहा था सब के साथ. पर उसका लुंड भी खड़ा दिखा दे रहा था सबको.

राज-- देखो देखो माँ के लौडो. तुम तीनो का लौड़ा इसके लौड़े जितना सख्त नहीं है. शर्म करो कुछ.. सालो तुम तीनो तो मुठ मार मार कर hi अपने लुंड ढीले कर बैठे हो. ये तुम तीनो से बढ़कर चुड़क्कड़ बनेगा.. फिर मणि के कंधे पर हाथ मरते हुए-- साले तू भी अपनी माँ और बहनो को छोड़ने की सोच रहा है. चल बता तूने कभी देखा है अपनी माँ और बहनो को नंगा..

तीनो फिरसे हसने लगे. मणि पहले है रहा था अब बेथ कर अपने लुंड को टांगों के बीच छुपाते हुए शरमाने लगा

राज-- बोल दे.. दिल में मत रख

मणि जिजकता हुआ-- हाँ देखा है. कई बार देखा.

राज-- छुप कर देखा है या खुले में

मणि-- छुप कर hi देखूंगा. खुल कर देखा तोह घर से hi निकल देंगे.

बिन्नी-- जा आज तू छूती क्र और ले आओ अपनी माँ और बहनो को. सरे दोस्त मिलकर मौज करेंगे..

हाहाहा सब है पड़े. मणि बिन्नी को ग़ुस्से से देखने लगा..

बिन्नी-- ाचा ाचा ग़ुस्सा न कर. तू अकेला hi सबकी मार लेना. अब खुश

सब फिर हसे तोह मणि मोह फेर क्र शर्माने लगा..

राज-- ऐसा रहेगा तोह कभी भी हंडिया पाकी नहीं मिलेगी. तेरा लुंड ऐसे hi लीक होता रहेगा सोच सोच के.

मणि-- मुझसे नहीं होगा साब. माँ बड़ी घुसे वाली है.

जूरी-- तू एक बार ले तो आ. राज खुद hi उसका ग़ुस्सा उसकी छूट के पानी के साथ निकल देगा.

राज-- माँ के लौडो तुम सब भी अपनी अपनी माँ और बहनो को ले आओ. पहले मणि को उन सब की छूट और गांड दो. फिर बात करना.

विक्की--- मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है. इसमें दम है तोह कुछ भी कर ले. छूट पर तोह उसका hi नाम लिख जाता है. जिस लुंड वाले में दम हो.

बिन्नी-- और दुम्म वाला यहाँ पर एक hi है..

सब राज को देख कर हसने लगे.. कुछ देर में राज कोठी पर चला गया. वहीँ सब मणि के साथ मकाज़ करने लगे. मणि कुछ और खुलने लगा. मणि को भी अब सबसे साथ खुल कर बात करने में मज़ा आने लगा था. सब हरामी एक जैसे थे. कोई शर्म नहीं थी.

ब्रेकफास्ट के बाद विराट आया और दिशा और बच्चू को अपने साथ ले गया. राज के साथ उसकी अब अच्छी फ्रेंडशिप हो गई थी.

चची और आराधना ने मिलकर सबकी छूट सिकाई कर दी थी. अब सब नार्मल थी. बस एक दीपिका की हालत ज़यादा ख़राब थी. वह रूम में hi रही थी.

उसकी गांड का हाल देख कर चची और आराधना खूब हसी थी.

दिन में राज ने चची और माँ को दो दो बार और छोड़ा. और दोनों बार माँ की छूट में hi माल भरा..

आराधना-- क्या बाद है राज जी.. मेरी छूट को भर कर बच्चा निकलने का मैं है क्या.

राज आराधना के चुके को मसलते हुए-- हाँ मुझे इन में फिरसे दूध देखना है. मेरा बच्चा मेरी hi माँ के पेट से निकल कर कैसा दिखेगा. मुझे ये देखना है....

आराधना-- ये तोह भगवन की करनी होगी. अब इस उम्र में मैं पता नहीं बच्चा जान भी सकती हों या नहीं.. क्या पता.

राज-- अरे आप अभी भी हरी भरी है. अभी भी आप कई बच्चे जान सकती हाँ. जितना हो सका उतने hi तोह मैं भी निकलने की कोशिश करूँगा..

आराधना हस्ते हुए-- हेहेहे.. जितनी यहाँ हाँ.. सब बच्चे जानने लगे तोह तेरे बच्चू की लाइन लग जाएगी.

राज-- तो अच्छी बात है न. कितनी अजीब बात होगी न. मैं अपनी hi बच्चू की दादी नानी और माँ एक साथ बानगी.

राज-- हाहाहा.. यही तोह देखना है मुझे.. कैसे लगेगा, जब आपकी गॉड में मेरा बच्चा होगा.. दीदियो की गॉड में भी मेरा बच्चा होगा. सब के बच्चे भी आपको माँ कहेंगे. नानी दादी कोई नहीं कहेगा.

आराधना-- हेहेहे.. सब को तोह मैं माँ नहीं कहने दूंगी. कोई तोह मुझे नानी दादी कहेगा.. नानी दादी की हसरत दिल में लिए तोह मई कबसे जी रही हों.

राज-- यही तोह मज़े की बात होगी..

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प्रेजेंट

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दिल्ली के hi एक इलाके में एक बड़ी हाउसिंग स्कीम.. जहाँ बहुत से बेसहारा फैमिलीज़ को रहने के लिए घर बना कर दिए गए थे.

5कम एरिया पर पहेली ये हाउसिंग सेमे के एक साइड में अंडर कंस्ट्रक्शन एक बहुत बड़ी कोठी.. कोठी के अंदर के बहुत से रूम्स को रहने लायक बना दिया गया था. कोठी और पूरी स्कीम पर जारी काम बहुत ज़यादा स्पीड से इंडिंग पॉइंट की और बढ़ रहा था.

एक कमरे में सिमरन बीएड पर बैठी अपने दोनों बेबीज को एक साथ फीड कर रही थी. कमरे के अंदर सजावट नाम की कोई चीज नहीं थी.

ये हाउसिंग स्कीम राज का सपना था. राज ने ये जगा देख कर दाद्दु को बोल दिए था. इसे बिकने न दिए जाये. वह एक दिन यहाँ पर बहुत बड़ी हाउसिंग स्कीम बनाएगा.. जहाँ पर हज़ारों बेसहारा परिवार रहेंगे.. ऐसे परिवार जिनके पास घर न हों.

राज का सपना अब सिमरन पूरा कर रही थी. सब काम बड़ी स्पीड से जारी था. बहुत से बेसहारा फॅमिलेस आ कर रहने लगी थी...

सिमरन जो हमेशा व्विप रूम में रहने की आदि थी. एकदुम्म से hi वह बदल कर रह गई थी. उसकी लाइफ बहुत ज़यादा सिंपल हो गई थी. खुद भी सजती संवारती नहीं थी. दोनों बेबीज के आने से पहले उसकी लाइफ में रंग जैसे ख़तम होकर रह गए थे.

दोनों बेबीज के आ जाने से वह उसके अंदर फिरसे जैसे उतरने लगे थे. पहले एक भयंकर संजीदगी उसके चेहरे पर छै रहती थी. पर अब दोनों बेबीज के कारण उसका चेहरा कुछ कुछ खिल उठा था.

बड़े प्यार से दोनों बेबीज को के साथ फीड करती हुई वह अपने बेबीज को देख रही थी.

कमरे में और भी कई मायें मौजूद थी. वह भी अपने अपने बेबी के साथ मौजूद थी. कमरे बहुत बड़ा था. कमरे के साथ जुड़ा हुआ था एक और कमरा. उसका दूर खुला हुआ था. उस कमरे में भी बहुत से मायें मौजूद थे. दोनों रूम के बहरी दूर बंद थे.

सिमरन दोनों बबाइएस को देखते हुए अपने आस पास देखने लगी. आज सब यहाँ पर मौजूद थे. आज राज को सबसे दूर हुए एक साल हो गया था. कोई भी राज को मारा हुआ नहीं समझ रहा था.

सबको यकीं था. राज एक दिन लौट कर आएगा.

आराधना भी अपने बेबी को फीड करवा रही थी. उसका बेबी सिमरन के बेबीज से बड़ा था. पास hi सुनैना और अर्चना मौसी और नानी भी बैठी हुई थी.. तीनो मामियां साथ वाले रूम में था.. सब मौजूद थे यहाँ पर..

इशिता पास बैठी थी. एक बेबी के मोह से निप्पल निकला तोह वह घूर कर इशिता को देखने लगा.

इशिता-- हेहेहे.. कमीना कहीं का. देखो तोह कैसे घोरने लगा है मुझे

सिमरन- न कर न. उसे भूक लगी है.

इशिता-- मैं कहाँ इसे रोक रही हो. इसका भला hi तोह कर रही हों. कुछ बचा कर रखेगा तोह बाद में भी काम आ जायेगा. सारा एक hi बार में पि गया तोह

आराधना- फिर भी कोनसी कमी आ जाएगी इसे. दूध की कमी इसे या किसी और को तोह होने से रही.

आराधना अपने चुके और दुसरो के चुके देखती हुई बोली.. सिमरन के होंटो पर मुस्कान आ गई.

सिमरन-- हाँ माँ. राज का कोई भी बीटा या बेटी भूका नहीं रह सकता. हरामी जाने कहा चला गया इस लम्बी लाइन लगा कर.

न चाहते हुए भी सिमरन मज़ाक कर गयी. बोलने को तोह बोल गई. पर फिर खुद से hi दुखी हो गई.

मानसी उठी और सिमरन के गाल को चुम लिया-- दीदी अब ऐसे hi हसी मज़ाक करती रहे. देखने कैसे ये बुरा समय कट्टा है. जल्द hi जीजू लौट आएंगे तोह आपको हस्ता हुआ देख कर खिल उठेंगे.

सिमरन हसरत से अपनी बेहेन की बातें सुन रही थी.

सिमरन-- पता नहीं कब ख़तम होगा हम सब का इंतज़ार..

सिमरन दीपिका को देखते हुए बोली..

दीपिका का दर्द इन सब में बढ़कर था.. जितनी सीरियस वह थी, इतनी सीरियस वह कभी नहीं हुआ करती थी.

सब कुछ न कुछ हसी मज़ाक कर लिया करती थी. पर दीपिका किसी से कोई मज़ाक नहीं करती थी. दीपिका hi थी. जिसको यकीं था, राज एक दिन ज़रूर लौट कर आएगा.

दीपिका के यकीं पर सबका यकीं भी बनने लगा. एक समय पर आराधना का यकीं भी कमज़ोर पड़ने लगा था. उस दिन दीपिका भूल गई थी, वह अपनी माँ से बहस कर रही है. वह कुछः अपनी माँ को सूना गई. सुनकर आराधना को अपने कानो से धुंआ निकलता हुआ महसूस होने लगा था.

आराधना कुछ शर्मसार भी हो गई थी. एक माँ का यकीं सबसे बढ़कर होता है. पर यहाँ दीपिका नंबर ले गई थी. वह बस एक hi रत लगाए हुए थी. राज आएगा. भले hi उसे कुछः ज़यादा समय लग जाये.

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वहीँ राज की शादी मनोरमा से हो गई थी. राज बस्ती में रह कर मनोरमा के साथ ज़िन्दगी गुजरने लगा..

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फ्लैशबैक

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दीपिका ने अपनी माँ आराधना के साथ मिलकर राज पर कब्ज़ा कर लिया था. दीपिका आराधना और राज मिलकर एक hi रूम में सोते थे. तीनो मिलकर थ्रीसम के मज़ा लिया करते.. दीपिका ने अभी तक अपनी छूट नहीं खुलवाई थी.

एक तोह छूट के दर्द से दूर रहना चाहती थी. दूसरे उसे गांड मरवाने में बहुत मज़ा आ रहा था. अभी उसका फिरसे दर्द लेने का मूड नहीं था. तोह दीपिका अपनी माँ के साथ मिलकर राज के साथ सेक्स करती और खूब अपने हिल हिल कर अपनी गांड में लुंड लेती..

चची को नंदनी के साथ छोड़ता तोह तीनो बहनो को एक साथ.. राज के मज़े थे तोह सबके भी खूब मज़े थे..

अब तक राज जितनी बार भी झाड़ा था. सबकी छूट में hi झाड़ा था.. एक हफ्ते में hi वह तकरीबन सबकी छूट को भर गया था.. वहीँ अनीता की कोठी जा कर दोनों बहनो के साथ थ्रीसम करता..

अनीता और भी खिलने लगी थी. खिलने तो दिशा भी लगी थी. विराट के नॉलेज में आये बिना hi वह राज चुद रही थी..

8तह डे.. दिन के 5 बजे राज अनीता के घर से वापिस कोठी लौट रहा था. राज बाइक पर था. वह एक जगा से गुज़रा तोह एक फुटपाथ के किनारे पर सर झुकाये बैठे एक लड़के को देख कर राज ने बाइक धीरे कर दी.. राज घोर से उस लड़के को देखने laga..raj ने बाइक उसके बराबर ले जा कर रोक दी. वह लड़का हथु में फाइल लिए हुए बहुत दुखी बैठा हुआ था..

राज ने लड़के के पास बाइक रोकी तोह वह सर उठा कर राज को देखने लगा. राज ने देखा.. लड़के की ऑंखें नाम थी. निराशा थी उसके चेहरे पर. एक ऐसी निराशा जो अगर किसी की आँखों में दिखे तोह वह ज़िन्दगी से, दुन्या के दुखों से हार जाता है.

और ऐसे समय वह या तोह मुजरिम बन जाता है. या भी ज़िन्दगी ख़तम कर देता है.

राज बाइक से उतरा और उसके बराबर जा बैठा.. उसके हाथ से फाइल लेकर खोल कर देखने लगा.. लड़का खली नज़रों से राज को देखने लगा. जैसे उसे राज के कुछ भी करने से फर्क न पद रहा हो. और न hi पड़ने वाला हो.

राज-- तोह मर. जुनैद आप सिफारिश न होने पर जॉब के लिए दर दर भटक रहे हाँ. काबिल होते हुए भी, अच्छे मार्क्स होते हुए भी एक नौकरी के लिए आपको भटकना पद रहा है.
 
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जुनैद एक फेकि सी, ज़ख़्मी सी मुस्कान के साथ राज को देखने लगा.

राज-- कितनी देर से नौकरी के लिए मारे मारे फिर रहे हो.

जुनैद-- दो साल से.

राज-- ओह्ह.. नौकरी के शिव और कोई काम भी करते हो क्या.

जुनैद-- क्या करोगे जान कर. छोडो मेरे बारे में पूछना. लाओ मेरी फाइल मुझे दो. जुनैद उठता हुआ बोलै तोह राज उसे फाइल थमा कर बोलै.. तुम्हारा घर कहाँ है.

जुनैद राज को घूरने हुए-- jaao..jaao अपना काम करो.

राज हसने लगा-- ज़िन्दगी से काफी ुक्तये हुए लग रहे हो.

जुनैद-- तुम्हे इससे क्या.. इतना बोल कर जुनैद एक साइड चलने लगा.

राज ने बाइक स्टार्ट करि और जुनैद के बराबर चलने लगा.. चलो बाइक पर बैठो. तुम्हारे घर चलते हाँ.

जुनैद राज को घूरने लगा-- क्यों मेरे घर क्यों जाना है तुझे..

राज-- तेरी गांड मारनी है साले. राज अपने असली रंग में आते हुए बोलै तोह जुनैद अब ग़ुस्से से राज को देखने लगा..

जुनैद-- मंद योर लैंग्वेज

राज-- मुझे संस्कारों की भाषा समझ में नहीं आती. क्या करूँ चहु भी तोह अच्छा नहीं बोल सकता.. मेरे जान्ने वाले मुझे हरामी बोलते है. और तोह और मुझे मेरी बहने भी हरामी बोलती हाँ. चल बेथ तेरे घर चलते हाँ. वहां माँ होगी बहने होगी.. उनसे मिलने का मैं हो रहा है मेरा..

जुनैद-- तुम अपनी हद से बढ़ रहे हो मिस्टर.

राज-- हों तोह हरामी.. पर जनम के समय मेरा नाम राज रखा गया था.. कोई हरामी कहता है तोह कोई राज. तेरा जो दिल करे बोल लेना. राज कहेगा तोह भी चलेगा.. हरामी कहेगा तोह मुझे मज़ा आएगा.

राज कुछ ऐसे बोलै. जुनैद न चाहते हुए भी है पड़ा.. राज ऐसे अंदाज़ में बोल कर जुनैद को कुछ मेंटली हल्का करना चाहता था. हुआ भी ऐसे hi.

जुनैद बाइक पर बैठता हुआ.. तू कोण है. मेरे पास क्यों नहीं आया. नहीं जनता. पर तू दूसरों से हटके लगा. वर्ण कोई भी मिलता है, तोह अपनी पहचान छुपा कर खुद को बढ़कर बोलने की करता है.

राज-- मैं कोण है. ये सब तुझे पता चल जायेगा.. पहले घर चलते हाँ. सबसे मिलते हाँ. फिर आगे की बात करूँगा. इतना समझ ले. तेरी नौकरी तोह लत गयी. अब मुझे तेरे परिवार को देखना. उसने मिलना है. मुझे जानना है, तेरा परिवार कैसा है. कैसा रेहन सहन है तेरा.. मुझे सब जानना है.

जुनैद नौकरी की बात सुनकर झटका खा गया था. उसे एक ख़ुशी भी मिली थी और मैं में राज को देख कर ये भी आया था. राज जैसा लड़का उसे कैसे नौकरी दे सकता है.. खुद बाइक पर है. आगे भी उससे काम है.

राज जुनैद से पूछता है जुनैद के घर जा पोहंचा. लउकीली जुनैद का घर राज वाली सोसाइटी में hi था.

राज ये देख कर हैरान भी हुआ और खुश भी..

जुनैद-- ये है मेरा घर.

राज बाइक साइड में स्टैंड करके उतरता हुआ-- अपना है या कराये का.

जुनैद साद होक-- कराये का है. तभी तोह लाइफ डिस्टर्ब चल रही है.

दूर खुला हुआ था. राज ने जुनैद को देखा-- चल अंदर चलते हाँ. राज ने जुनैद के बाज़ो को थमा और अंदर घुस गया.. जुनैद देख कर हैरान हुआ..

घर में सब जुनैद के साथ राज को देख कर हैरान हुए. ऐसे अचानक से बिना बताये जुनैद किसी अनजान लड़के को घर के अंदर ले आया था.

राज ने देखा.. घर 3 कमरों का था. एक सहन था. एक बरामदा था. एक लाइन में hi तीन कमरे बने हुए थे. और बरामदे में चारपाई पड़ी थी. वहीँ सब बैठे हुए थे.

राज को एक 50 के करीब की औरत दिखी.. एक बूढी औरत.. एक 50 के करीब का मर्द 3 लड़कियां एक 18 साल का लड़का वहां मौजूद थे..

लड़कियों ने राज को देख कर अपने सर के दुपटे सही किये तोह मर्द और लड़का उठ खड़े हुए...

राज आगे बढ़ा और जुनैद के बोलने से पहले hi बोल पड़ा-- मेरा नाम राज है. और मैं दादी का पोता हों.. राज दादी के पैरों में बेथ गया..

जुनैद के साथ साथ सब देखते रह गए.. सब जुनैद को हैरानगी के साथ देखने लगे.

दादी ज़रूर बहुत ज़यादा खुश हो गई थी. वह राज के सर पर हाथ फेरने लगी.

कुछ देर में राज सब से मिलकर सब से है है कर बातें कर रहा था. जुनैद की टेंशन जा चुकी थी. मायूसी वाला फेस अब चमक रहा था. जुनैद नहीं जनता था, राज उसके लिए क्या करेगा. पर वह अपने परिवार को इतना खुश देख कर ज़रूर खुश था.

राज खड़ा हुआ-- चलें आप सब मेरे साथ चलें.

दादी हैरान हुई-- कहाँ चलें हम सब राज बीटा.

राज-- यहीं पास में hi मेरी कोठी है. अभी कुछ दिन हुए ली है. वहां मेरी माँ मेरी बहने और चाचा की फॅमिली है. मैं यहाँ पर बुसिनेस शुरू करने वाला हों और मुझे जुनैद जैसों की ज़रूरत रहेगी. आप सब भी वहीँ रहना. जुनैद काम करेगा और आप को कराये के घर से निजात मिल जाएगी.

सब ने मन किया पर राज से बढ़कर कोण था. कुछ देर में सब एक साथ वहां से निकल रहे थे.

कुछ hi मिनटों में सब कोठी पर थे.. वहां सबका बढ़िया से सवागत हुआ. जुनैद और उसके भाई को राज के हरामी दोस्तों ने संभल लिया था.

राज जूरी को लेकर एक साइड गया-- सुन जूरी, तू ऐसा कर नौरीन की फॅमिली को अपनी फॅमिली को यहीं बुलवा ले. ऐसा मेरे जाने के बाद करना. अभी सिमरन वहां नज़र रखे हुए होगी.

जोरि- पर तू ऐसा क्यों करना चाहता है.

राज-- साले तू अब भी नहीं समझा

जूरी-- नहीं.?

राज हस्ता हुआ-- तेरी माँ और बहनो के साथ साथ नौरीन और उसके घर वळून की भी बजानी है मुझे.

जूरी का मोहन खुल गया-- बहनचोद खुल के बता मुझे समझ नहीं ै.. ये काम तोह तू वहां भी कर सकता था.

राज- नरेन की शादी जुनैद से कर देते हाँ, और उज़्मा की जुनैद के भाई से, कैसा रहेगा.. नौरीन के साथ जो किया था. जुनैद जैसे अच्छा लड़के से उसकी शादी करवा कर उसकी लाइफ सेट करवा दूंगा. इससे वह भी मुझसे खुश हो जाएगी. और मेरे दिल का गिल्ट भी ख़तम हो जायेगा

जूरी खुश होक-- साले तोह सच में बहुत बड़ा हरामी है. किसी को भूलता नहीं है तू.

शाम के बाद दीपिका छत पर कड़ी थी. वह दिवार के साथ लगी बहार देख रही थी.. ठंडी हवा चल रही थी. उसके बाल लहरा रहे थे. सर्दी थी, फिर भी उसे मज़ा आ रहा था. वह राज के साथ बीत रही लाइफ के हसीं पलों की यादों में खोई हुई सामने देख रही थी.

राज आया और उसके गाल को चुम कर उसे पीछे से hi हुग कर लिया.. दीपिका ने देखा तोह खुश हो गई.

दीपिका-- बड़ा प्यार आ रहा है मुझपर

राज-- प्यार तू हर रोज़ hi आता है. बार बार आता ha.raj दीपिका की कमर पर हाथ फेरते हुए बोलै.. दीपिका ने पंत शर्ट पहनी हुई थी.

दीपिका-- नया परिवार मुझे बहुत पसंद आया राज.. सब बहुत अच्छे हाँ. तुमने उनकी मदद करके भी बहुत सही किया है. वह डेसेर्स भी करते थे. जुडाइड की तीनो बहने बड़ी ज़हीन बड़ी समझदार हाँ.

राज दीपिका की शर्ट में हाथ घुसा कर कमर को मसलते हुए-- हाँ अक्सर ग़ुरबत के कारण बहुत से लोग अपनी ज़हानत को दबा जाने पर मजबूर हो जाते हाँ. अब जुनैद का भाई फरहान भी ज़हीन लड़का है. अभी वह पढ़ रहा है. अब जुनैद सेट हो गया तोह, वह रिलैक्स होक अपनी पढाई पर धयान दे सकेगा. उसकी बहने भी पढ़ रही हाँ. अच्छे मार्क्स के साथ पास होकर वह भी जॉब करते हुए अपनी लाइफ को सेट कर सकती हाँ. अब हम तोह बिज़नेस कर hi रहे हाँ. सब को साथ मिल लेंगे. एक परिवार खुशहाल हो जायेगा तोह भगवन हमें बिज़नेस में सक्सेस और मैं को शांति देगा..

दीपिका खुद से अपनी पंत लूसे करके निचे करती हुई-- चल घुसा अपना लुंड मेरी गांड में.. मुझे इस ठंडी हवा में तुझसे चुद के मज़ा लेना है.

राज-- हाहाहा.. हर बार गांड में hi क्यों लेती हो मेरी जान.. छूट की सील कब खुल रही हो..

राज-- क्या करूँ राज. कसम से गांड में लेने में मुझे बहुत मज़ा आने लगा है. तू अब जाएगा तोह जल्द hi लौट कर फिरसे आना. फिर सुकून से अगले छेड़ भी खुलवा लूंगी. अभी एक छेड़ खुला है तोह मैं हो रहा है, उसके hi भरपूर मज़ा लून.

राज भी ज़िप खोल कर लुंड को बहार निकलते हुए लुंड पर थूक लगा कर लुंड को गीला करने लगा.. दीपिका खुद से कुछ बेंड हो गई थी. राज ने लुंड दीपिका की गांड पर सेट किया और धक्का मार कर उसे दीपिका की गांड में घुसा दिया.

दीपिका-- उम्मम्मम्मम्म उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ठंडी हवा में गर्म गर्म लौड़ा.. मज़ा hi आ गया.. तू दूर तोह बंद कर आया है न.

राज-- हाँ मेरा भी कुछ ऐसा hi मूड होने लगा था तोह दूर बंद कर आया था. राज धक्के मारता हुआ पुर लुंड दीपिका की गांड में घुसते हुए बोलै..

दीपिका बहार देखते हुए दीवार को थामे हुए थी.. राज दीपिका की कमर को मसलते हुए उसकी गांड मार रहा था..

दीपिका- राज जल्दी से सब ख़तम करो यार. मुझे लम्बे समय तक मज़े करने हाँ. अभी बहुत समय लगने वाला है.

राज-- हाँ अब देर नहीं होगी मेरी जान. अब देखना कितनी जल्दी सब को एक करता हों.

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एक हफ्ता और रहा वहां पर राज. इस एक हफ्ते में राज ने अपनी बहनो की शादी अपने दोस्तों से करवा दी थी. दो दोस्तों को और गाओं से बुलवा लिया था. वह भी काम का बता कर आये थे. सिमरन की कोई टेंशन नहीं थी.

चरों बहने समाज की नज़रों में राज के दोस्तों की पत्नियां थी. पर रियल में राज की थी.

राज ने अनीता के साथ उसी के घर में विराट के परिवार के सामने सिंपल शादी कर ली थी. अब कभी वहीँ रहती तोह कभी राज वाली कोठी पर आ जाती. अनीता को उसकी लाइफ की सबसे बड़ी ख़ुशी मिल गई थी.

अनीता के साथ पैसे शेयर करके राज ने बिज़नेस भी शुरू कर दिए था. राज के तीनो हरामी दोस्त जो गाओं में लड़कियों को देख कर मुठ मारा करते थे. वह शहरी बाबू बनकर बिज़नेस सीख रहे थे.

जुनैद राज वाली ब्रांच का हेड बन गया था. बड़ा जीनियस लड़का था. राज के बड़ा काम आ रहा था. अनीता भी जुनैद पर स्पेशल धयान दे रही थी. जुनैद बड़ी स्पीड के साथ सब सीखता चला जा रहा था. कोठी के पास hi एक और कोठी रेंट पर ले ली गई थी. जुनैद और उसकी फॅमिली वहीँ रहती थी. वह अब ज़यादा रिलैक्स थे अलग से रहने पर उन्हें एक सुकून मिला था. अब राज का उसपर एहसान तोह था. पर अलग रिहायश होने के कारन, जॉब होने के कारण जुनैद के दिल पर भार नहीं था.. वह पुरे मैं से राज के लिए खुद को बाँट चूका था.

राज ने नौरीन और ुंजा के लिए बात कर ली थी. जुनैद की तोह लाइफ सेट हो गई थी. अब राज ने खुद उसके लिए लड़की धुंडी थी तोह जुनैद ने हामी भर ली थी. उसे अच्छी जॉब के साथ साथ अपने परिवार के लिए सब करने का मौका मिल रहा था. तोह राज की कैसे न मन्नते. और फिर जैसा राज था. जैसा राज का परिवार था. ज़रूर नौरीन और उज़्मा भी सुलझी हुई लड़कियां होंगी. ऐसा जुनैद ने सोच लिया था.

जुनैद और उसके परिवार के सभी भी राज के इस फैसले पर हाँ बोल गए थे..

राज सब सेट करके, सबके साथ अच्छे से टाइम स्पेंड करके वहां से दिल्ली के लिए निकल पड़ा...
 
114

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सिमरन को राज का कहीं से भी पता नहीं चल पाया था. पहले तोह वह बहुत ग़ुस्से में आ गयी थी. फिर बाद में नार्मल हो गई थी.

राज यहाँ उससे फिरसे छुप कर उसे हरा गया था. जान कर सिमरन को अच्छा भी लगा था और मज़ा भी आया था. राज जैसा भी था. उसे चोट दे hi देता था. सिमरन को जहाँ राज पर ग़ुस्सा आता था. वहीँ सोच कर एक अंजनी ख़ुशी भी मिलती थी. वह सोच सोच अकेले में है भी दिए करती थी. राज हर मामले में खुद को उसकी टक्कर का सबत करता आया था..

सिमरन राज को बार बार हरा कर अपनी ईगो को सतीफी करना चाहती थी. पर जब भी वह राज से हारती थी तोह उसके अंदर एक मस्ती भरी लहर भी दौड़ जाया करती थी. उसे मज़ा आने लगता था.. घर वळून के सामने वह शो नहीं करवाया करती थी.

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राज सीढ़ी सबसे पहले अपने नानी नानी के पास जा पोहंचा. राज बता क्र नहीं आया था. दोनों श्रुति के पास थे. पुराने घर में अब नाना नानी नहीं रहते थे.

नाना नानी दोनों लॉन में बैठे हुए धुप सेक रहे थे. दोनों का रुख गेट के अपपोसिते था. राज अंदर दाखिल हुआ तोह श्रुति राज को देख कर ख़ुशी के मारे चीखने hi वाली थी. राज ने होंटो पर ऊँगली रख कर उसे खामोश रहने को बोल दिए.. श्रुति अपने होंठ दबा कर अपनी आवाज़ और अपनी हसी दबा गई थी. वह समझ गई थी, राज नाना नानी को छेड़ने के मूड में है.

राज चुप चाप दोनों के पीछे जा पोहंचा.. दोनों अपनी hi बातों में मगन थे.

नाना-- मल्टी क्यों हर समय मेरे लुंड के पीछे रहती हो. पता नहीं क्यों अब मेरा लुंड भी हर समय मूड में रहने लगा है.

नानी हस्ते हुए-- नेहा और नैना के रहते ये इसका मूड कभी बिगड़ भी सकता है क्या.

नाना हस्ते हुए- बड़ी शैतान है दोनों. जब भी आती हाँ. मेरे लुंड की वात लगा देती हाँ.

नानी-- शर्मा जी लाइफ के मज़े हो रहे हाँ न फिर.

नाना-- पता नहीं राज ने क्यों मुझे ऐसा बना दिए है. तुम तोह जानती हो. मैंने उम्र भर तुम्हारे शिव कभी किसी को हाथ भी नहीं लगाया था. अब इस उम्र में मुझे नजाने और क्या कुछ करना पड़ेगा..

नानी-- हेहेहे.. राज बेटे की बात hi क्या है.

नाना-- चलो अब झुक कर मेरा लुंड hi चूस डालो.. कितने देर से इसे हाथ में लिए खेल रही हो. अब तोह पानी भी निकलने वाला हो गया.

नानी-- मैं नहीं लेने वाली इसे मोह में शर्मा जी. अब इसे हाथ से hi खली करुँगी मैं.

नाना-- ये गलत है मल्टी. इसे खड़ा hi न किया करो. अगर कुछ नहीं करना तोह.

नानी-- हेहेहे.. इससे खेलने में ज़यादा मज़ा आता है.

नाना-- और मुझे इसे तेरे मोह में देख के ज़यादा मज़ा आता है.

राज-- चूस लो न नानी. क्यों नाना को तरसा रहे हाँ आप..

दोनों राज की आवाज़ सुनकर उछाल पड़े.. दोनों ने पलट कर राज को देख कर ख़ुशी से उठ खड़े हुए..

नानी घूम कर राज को गले से लगा गई. राज का मोह चूमने लगी. वहीँ नाना की शलवार खुल कर निचे आ गिरी थी. नाना का धयान अपनी शलवार की और नहीं हुआ था. कमीज़ आगे आ कर नाना के लुंड को छुपा गई थी. पर कमीज़ के आगे से लुंड उठा हुआ दिखाई दे रहा था.

दूर कड़ी श्रुति भी वहीँ आते हुए हसने लगी थी..

नानी-- तू आ गया मेरे लाल.

राज-- आना hi था नानी मुझे. कितने दिन हो गए आपकी गांड में लुंड डाले हुए. रहा नहीं गया तोह चला आया.

नाना भी बेशर्म बनकर-- अपनी नानी की गांड बाद में मार लेना.. पहले अपने नाना के गले लग कर उसके कलेजे को ठंडा कर दे..

राज नाना के लंड को देख कर-- लुंड से लुंड टकरा जाएगा नाना जी..

नानी सुनकर ज़ोर से है पड़ी.. नाना अपने लुंड को देखने लगे. फिर वह भी हसने लगे.

श्रुति पास ा कर राज के गले लग कर राज को किश करने लगी.

श्रुति-- मेरे पास लुंड नहीं है राज.. होता तोह मई तेरे लुंड से टकरा कर खूब मज़े लेती.. राज ने श्रुति के मुम्मे मसल दिए.. श्रुति सिसक पड़ी.. नाना झुक कर अपनी शॉवर ऊपर करके बांध गए थे.

नाना-- मिलना तोह है न.. अब इसे तोह ठंडा होने में टाइम लगेगा..

राज ऐसे hi नाना से मिला और जल्दी छोड़ भी दिए नाना को. नाना, नानी और श्रुति है पड़े..

राज-- क्यों नाना नेहा और नैना आपका ख्याल तोह रखती हाँ न.

नाना- हाँ.. कुछ ज़यादा hi ख्याल रखने लगी हाँ मेरा.. पता नहीं उन दोनों को मेरे साथ क्यों मज़ा आता है.

नानी-- हेहेहे.. सब राज का कमल है.

श्रुति-- राज स्पेशल है न. जिससे भी मिलता है. वह राज का दीवाना हो जाता है.

नानी-- कैसे है मेरी आराधना और सब

राज-- एकदुम्म बढ़िया.. राज वहीँ बेथ कर सबको वहां का सब बताने लगा.

नाना-- तुम सबसे शादी कर आये.?

नाना हैरान होक बोले

नानी-- हेहेहे.. ये कुछ भी कर सकता है. आपके सामने मेरी गांड मार सकता है तोह कुछ भी कर सकता है.

नाना- राज बीटा, अब समय बदल hi गया है तोह मुझे मेरी बेटी से कब मिलवा रहे हो.

राज-- जल्द hi नाना जी.. चलो अंदर चलते हाँ.

कुछ देर में सब अंदर थे.. नाना का लुंड सो चूका था. अब उन्हें बेचैनी काम थी. श्रुति राज की गॉड में बेथ कर उसे किश करने लगी. नानी साथ बेथ कर कभी राज के शरीर पर हाथ फेरने लगती तोह कभी श्रुति के बदन पर..

नाना बेथ कर है रहे थे.

नाना- आते hi शरू हो गए. थके नहीं क्या तुम अपनी माँ और बहनो को छोड़ छोड़ कर..

नानी-- राज असली मर्द है शर्मा जी. आपके जैसा नहीं.. यद् है न शादी की पहले वाली रातें..

नाना बेशर्मो के जैसे हस्ते हुए-- हाँ हाँ सब याद है.

नानी-- राज बीटा, तेरे नैना तीसरी बार काम hi अपना लुंड खड़ा कर पते थे. थक कर सो जाया करते थे.

राज-- अब कसार पूरी हो रही है न. नेहा और नैना के रहते, मजाल है जो नाना का लुंड पूरी रात भी छोड़ छोड़ कर ढीला हो.

नानी-- सब वियाग्रा का कमल है. वर्ण कहाँ इस उम्र में इनके लुंड में करेंट आने लगा.

नाना-- जो भी है. मर्दानगी तोह आ hi गई है न..

शरूरी राज की शर्ट खोलने लगी. साथ hi अपनी शर्ट और पंत भी उतार कर राज की गॉड में बेथ गई

नानी-- पंतय नहीं उतरेगी तुम..

श्रुति-- ये राज का काम है. खुद hi उतरेगा..

राज हस्ता हुआ श्रुति की ब्रा उतर कर नानी के ऊपर फ़ेंक गया.

राज- नानी जल्दी से नंगी हो जाएँ.. मुझे जैम कर छोड़ना है आपको.

नानी- मैं भी तेरे नाना से चुद चुद के ऊब गई हों. मुझे भी एक दुमदार चुदाई की ज़रूरत है.. इतना बोल कर नानी भी नंगी होने लगी.

नाना-- अरे मेरा लुंड भी खड़ा होने लगा है. मैं क्या करूँगा..

नानी- आज आप मुठ मारें.. इसके शिव आपको कुछ और नहीं करने को मिलने वाला.. आज कितने दिनों के बाद राज आया है. मैं सिर्फ राज से hi छोडूंगी.

नानी नंगी हो कर वहीँ सोफे पर राज की और अपनी दोनों तनेगन खोल कर बेथ गई. राज श्रुति को किश करते हुए एक हाथ से श्रुति के बूब्स मसलते हुए नानी की छूट में ऊँगली करने लगा..

नाना भी अपनी शलवार खोल कर अपने लुंड को हिलने लगे..

कुछ देर में नानी की छूट पानी पानी हुई तोह श्रुति भी बहुत ज़यादा बेचैन हो उठी थी. वह उठी और राज को खड़ा करके राज को नंगा करने लगी.

फनफनाता हुआ लुंड श्रुति के सामने आया तोह शरती मोह में लेकर चूसने लगी..

लुंड गीली हुआ तोह श्रुति घोड़ी बनकर नानी की छूट चाटने लगी.. राज श्रुति के पीछे हुआ और उसकी गीली छूट पर लुंड सेट करके रगड़ने लगा

श्रुति-- उम्म्म्म कितने दिनों बाद आज मेरी छूट ने लुंड के स्पर्श को पाया है. राज तुम्हारे बाद मैंने किसी और पर धयान नै दिया.

राज-- जनता हों मेरी जान. इसी लिए तोह पहले यहीं आया हों. पहले तुझे और नानी को ठंडा करना ज़रूरी था. राज ने हलके हलके कई धक्को में अपने लुंड को श्रुति की छूट में उतार दिए. श्रुति मस्त होक नानी की छूट चाटने लगी. नानी भी अपने चुके मसलने लगी थी. नानी भी नए अंदाज़ में चुदाई सीख गई थी. नानी को भी थ्रीसम का मज़ा आने लगा था.

राज कभी श्रुति की छूट में लुंड दाल कर उसे छोड़ने लगता तोह कभी गांड में.. श्रुति सिसकते हुए झाड़ गई.. श्रुति जैसे मदहोश सी हो गई थी. गरमा गरमा पानी छूट से निकल क्र वह बेसुध हो गई थी.

रह सोफे पर बेथ कर नानी को अपनी गॉड में बिठा गया. नानी नाने को देख कर एक स्माइल करती हुई अपनी छूट राज के लुंड पर रख कर सारा लुंड अपनी छूट में ले गई. फिर राज को किश करती हुई ऊपर निचे होने लगी. राज नानी के चुत्तड़ मसलते हुए नानी को छोड़ने लगा.

नाना झड़ने के बाद उठ कर चले गए थे. वहीँ बैठे रहते तोह उनके लुंड की वात लगी रहती.

नानी-- राज बीटा, दीवाना बना दिए है तुमने तोह मुझे.. नानी हप्ते हुए बोली

राज-- मैंने या मेरे लौड़े ने..

नानी हस्ते हुए-- असल बात तोह तुम्हारी है. इस उम्र में मुझे लुंड से ज़यादा प्यार की ज़रूरत थी. तुमने प्यार देकर वह ज़रूरत पूरी कर दी. लुंड तोह तेरा मुहे बोनस के रूप में मिला है.

राज-- तो फिर गांड में लोना. छूट बहुत खुली है आपकी. ज़यादा मज़ा नहीं मिलता मुझे.

नानी-- हाँ, अब कहाँ तुझे मज़ा मिलेगा. आराधना की बरसों से सूखी टाइट छूट पेल के आया है तू. चरों बहनो की सील खोल के आया है तू. सबकी सील पैक छूट मिली हाँ तुझे. अब कहाँ तुझे मेरे भोसड़े में मज़ा मिलेगा..

राज-- तू कुछ लगा कर भोसड़े को छूट बना ले न

नानी-- रहने दे.. अब मुझे ज़रूरत नहीं है. तू जल्दी से मेरा पानी निकल.. फिर गांड में दाल के मज़े कर लेना..

नानी स्पीड से उछाल उछाल कर राज का लंड लेने लगी. राज भी नानी के चुत्तड़ उठा कर निचे से पुरे जोश के साथ नानी को छोड़ने लगा.. कुछ देर में नानी झाड़ गई तोह राज नानी को वहीँ सोफे पर उल्टा लिटा कर नानी की गांड मारने लगा.

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सिमरन अपने कमरे में मस्त नींद ले रही थी. आज फिर वह अपने रूम का दूर खुला रखे चैन की नींद सो रही थी. राज बहुत दिनों से नहीं लौटा था. तोह बिना डरे वह दूर खुला रख कर सोने लगी थी.

जो भी सुबह आता वह दूर खोल कर उसे उठा कर बीएड टिया दे जाया करता था..

सिमरन ब्लैंकेट ओढ़े खुली शर्ट और निक्कर में सो रही थी. बड़ी मज़े की नींद में थी वह.. एकदुम्म से hi उसे जैसे खवाब में राज दिखाई देने लगा.. वह एक हसीं बाघ में खुद को देखने लगी. वह एक जगा लेती हुई थी. राज आया और उससे लिपट कर उसे प्यार करने लगा..

सिमरन खवाब में hi-- क्या कर रहे हो राज.. छोडो मुझे. जब देखो, मुझसे चिपकने लगते हो. देखो मैंने पहले भी कहा था. अब भी कह रही हों. मुझे जीतना है तोह मेरा दिल जीतो. फिर मैं पूरी की पूरी तुम्हारी हो जाऊँगी. ऐसे मेरे बदन को बार बार छू कर मेरे अंदर अंगारे मत भरो.. मई बहक भी गयी तोह भी तुम्हारे लिए सही नहीं होगा. मई बहक जाने के बाद खुद को काबू में न रख स्की. तेरे साथ बहुत आगे निकल गई तोह होश में आने के बाद मैं तुम्हार साथ गलर कर जाऊँगी. तुम मुझे अच्छे से जानते हो न राज..

राज-- हाँ मेरी जान तुम्हे नहीं जानोंगे तोह किसे जानोगे. तुम इतनी हसीं इतनी पायरी हो. तुम्हे इस हाल में देख कर. तुम्हारी खुशबु पा कर मैं खुद पर काबू नहीं रख पता.

सिमरन सुनकर निहाल हो उठी. अपनी तरफ पर झूम उठी.. राज ने सिमरन की शर्ट में हाथ दाल क्र सिमरन के बिना ब्रा वाले बूब्स को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिए..

सिमरन-- उफ्फफ्फ्फ़ राज मत करो aisa..mat लगाओ मेरे अंदर आग, मैं सच कह रही हो. मैं तुम्हारे स्पर्श पर बहकने लगती हों. कहीं ऐसा न हो. मैं बहक कर बहुत आगे निकल जाऊं. बाद में तुम्हारे अगेंस्ट फिर मैं वह कर जाओं. जो तुम सोच भी नहीं सकते..

राज-- प्यार कर रहा हों अपनी पत्नी को. ये सब ग़लत भी तोह नहीं है न.

राज सिमरन की शर्ट ऊपर कर उसके नंगे बूब्स कास कास के दबाने लगा.. सिमरन राज के गर्म हाथ के स्पर्श पर सच में पागल होने लगी. उसके बूब्स देर किये बिना hi फूलने लगे. उसके निप्पल अपनी लाइफ में पहले बार सख्त होने लगे..

सिरमन बड़बड़ाई-- पता नहीं क्यों आज मेरा खुद पर कण्ट्रोल इतनी जल्दी टूटने लगा है.

राज नहीं रुका तोह सिरमन राज को पलट कर राज पर पागलों की तरह टूट पड़ी.. राज को वीलडली किश करते हुए अपने चुके राज के सीने पर रगड़ने लगी.. राज के खड़े लुंड पर वह अपनी छूट ऐसे रगड़ने लगी. जैसे बिना किसी देरी के अपनी छूट का पानी निकल देना चाहती हो..

सिमरन सब कुछ भूल कर पागल हो उठी और दीवाना वार राज को के होंटो का रास पीते हुए अपनी छूट को राज के लुंड पर घिसने लगी.. देर नहीं लगी और सिमरन हंप्टी हुई राज के गले पर मोह रख कर हांपने लगी.. राज सिमरन की पीठ सहलाते हुए सिमरन को साइड में लिटा कर वहां से उठ कर चला गया..

कुछ देर में सिमरन रिलैक्स हुई तो एक झटके में उठ कड़ी हुई.. वह आस पास देखने लगी. खुद को अपने कमरे में पा कर वह हैरान हो गई. दूर को देखा तोह वह बंद था. लॉक नहीं लगा था. जैसा पहले था. अब भी वैसे hi था.

खुद को देखा तोह उसकी शर्ट ऊपर थी. सिमरन बीएड से कूदि और भाग कर बाथरूम में जा घुसी.. अपनी छूट पर हाथ लगा कर अपनी गीली निक्कर को देखने लगी. अपने बूब्स को पकड़ कर चेक करने लगी. उसे रियल में भी अपने बूब्स पर राज के स्पर्श का एहसास होने लगा था..

सिरमन-- ये कैसे हो सकता है. नहीं. ऐसे तोह पहले कभी नहीं हुआ. मैं कैसे राज के साथ इतना आगे बढ़ सकती हों. मैं ऐसी लड़की तोह नहीं हों. खवाब में भी मैं राज के साथ ऐसा सब नहीं कर सकती. नहीं मैं सेक्स के लिए इतनी उतावली नहीं हो सकती. मेरे अंदर इतनी जल्दी गर्ल्स फीलिंग्स आ भी कैसे सकती हाँ. नूवो नेवर..

सिमरन मिरर में खुद को ग़ुस्से से देखते हुए अपनी छूट और अपने बूब्स को छू छू कर देख रही थी.. उसे कभी खुद पर घुसा नहीं आया. आज आ रहा था. वह भी बहुत ज़यादा.. कैसे वह एक नार्मल लड़की के जैसे खवाब में hi राज के लिए पागल हो उठी थी. राज के साथ मज़े करते हुए अपनी छूट का पानी निकल गई थी.

सिमरन को बड़ा ग़ुस्सा था. कभी उसकी छूट गीली भी नहीं हुई थी. लास्ट बार राज हरामी ने उसकी छूट में थोड़ी सी आग लगा दी थी. आज तोह पूरी बाढ़ hi आ गई थी..

गर्म पानी टब में भरने के बाद सिमरन नंगी होकर टब में बेथ गई.

1 घंटे बाद सिमरन त्यार होकर निचे पोहंची.. तो सब के बीच राज को देख कर उसे झटका लगा.. एक बार तोह उसके कदम hi लड़खड़ा गए थे. राज उसे देख क्र स्माइल करने लगा तोह सिमरन खवाब वाली घटना को लेके विचार करने पर मजबूर हो गई.

क्या वह सिर्फ एक खवाब hi था............. आआआआआ
 
115

****

मम्मी- आओ न सिमरन बेटी. रुक क्यों गई..

चची मैं में.. मतलब सिमरन नहीं जानती राज आया है. रोह फिर राज सिमरन के रूम में जा के क्या कर आया है. सिमरन ऐसे शॉकेड होक राज को क्यों देख रही है. हम्म्म्म कहीं राज ने कोई शरारत तोह नहीं करि. हाँ. ऐसा hi कुछ है. सिमरन का चेहरा भी तोह आज कुछ निखरा निखरा दिख रहा है. राज वही बात होगी. चल के देखती हों. और कन्फर्म करती हों. अगर ऐसी बात है तोह सबको बताना पड़ेगी. कितना मज़ा आएगा. नहीं किसी को बताया तोह सिमरन तोह मुझे फायर धोक देगी..'

चची उठी और ऊपर जाने लगी. अब सिमरन कैसे चची के मैं की बात जान सकती थी. सिमरन सब की और बढ़ी तोह राज उठ कर उसे पकड़ कर अपने गले से लगा गया..

राज-- बहुत मिस किया न मुझे..

सिमरन राज की आँखों में घोर से देखती हुई-- हाँ बहुत मिस किया. तुम मेरे कर्म में आये थे न.. सिमरन धीरे से बोली तोह राज के होंटो पर हरामियों वाली मुस्कान आ गई.. सिमरन पल भर में hi जल कर राख हो गई.. बड़ा ग़ुस्सा आया उसे राज की आँखों में देख कर.. सब थे तोह खुद पर काबू प् गई थी. बड़ी मुश्किल से उसने खुद पर काबू पाया था.

राज और सिमरन एक साथ बेथ गए.

सिमरन बड़े प्यार से-- कहाँ रहे इतने दिन तुम..

दादी-- कितना प्यार बढ़ गया है न तुम दोनों में.. भगवन किसी की बुरी नज़र से बचाये.

सिमरन मैं में-- दादी राज के लिए ख़ास तौर पर दुआ करें. अब इसकी खैर नहीं. बड़ा गलत किया है इसने मेरे साथ. इस गलती का परिणाम बोहत गलत होगा. राज को ऐसी चोट दूंगी. उम्र भर भूलेगा नहीं..

राज सिमरन के फेस को hi देख रहा था. हरामी था. कैसे नहीं समझ सकता था. सिरमन के गहरी नींद होने का फायदा उठा कर उसके शरीर के मज़े ले गया था. सिमरन के अंदर आग भी लगा गया था. सिमरन के अंदर अपनी गर्मी भी उतार गया था.

सिमरन-- हाँ दादी. राज बहुत अच्छा है. मैं भी खुद को अंदर से बहुत बदला हुआ महसूस करती हों. इसे कहीं भी जाने से पहले मुझे बता के जाना चाहिए.. पर ये है कह मुझे बता कर hi नहीं जाता.

मम्मी-- न न राज बीटा. इसे कभी बता कर मत जाना. पता नहीं कोनसा नया गुल खिला जाये..

सब हसने लगे..

मानसी-- आप तोह ऐसे hi बोलती रहती हाँ मम्मी.. सच में दीदी बहुत बदल गई हाँ. कितने दिन हो गए दीदी पुराने रूप में फिरसे नहीं आयी.

सिमरन-- और अब आऊँगी भी नहीं.. देखना सब कितनी जल्दी और भी अच्छा होता जायेगा.

कुछ सिमरन को राज के लिए नरम देख कर बहुत खुश थे. तोह कुछ सिमरन को देख कर कंफ्यूज थे. राकेश वर्मा को कोई चिंता नहीं थी. दादी की चिंता भी अब जा चुकी थी. वह जान गई थी, राज कितना बड़ा हरामी है.

उसी समय चची भी वहीँ आ गई. चची ने सिमरन मुमयम और दादी को इशारे से बोल दिए. सिमरन की निक्कर और पंतय ऊपर गीली पड़ी हाँ. दोनों जान कर अपने हूंतो को दबा गई. दोनों बहुत खुश थी. सिमरन और राज के बीच दूरियां काम होने लगी थी.

उसी समय सब उठे और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर ब्रेकफास्ट करने लगे..

ब्रेकफास्ट के बाद सिमरन राज को bye बोल कर ऊनि के लिए निकल गई. राज सबसे साथ कुछ और समय बिता कर वहां से निकल पड़ा..

इशिता राज को देख कर बड़ी खुश हुई थी. वहीँ उसके अंदर राज को पा लेने की छह और भी बढ़ गई थी. उसकी छूट अब रेगुलर बहने लगी थी. उससे कण्ट्रोल नहीं बन प् रहा था..

इशिता ने संजना को कॉलेज न जाने का बोल कर अपनी एक दूसरी कोठी पर पोहचने को बोल दिए था..

इशिता वहां पोहंची तोह संजना उसे वहीँ मिली.. इशिता संजना को एक रूम में लेकर दूर लॉक कर गई. संजना को बीएड पर गिरा कर उसके ऊपर चढ़ दौड़ी.

संजना तोह इशिता को देख कर हैरान हो गई थी. इशिता इतनी उतावली पहले कभी नहीं हुई थी..

इशिता की बेचैनी को देख कर संजना भी किश में उसका साथ देने लगी. कुछ देर की किश कर बाद दोनों अलग हुई तोह संजना बोली-- इशिता आज क्या बात हुई..

इशिता-- आज जीजू ए थे यार घर पर.. उन्हें देख कर कण्ट्रोल नहीं हुआ. तोह सोचा तुझसे मज़ा कर लूँ.. जीजू के निचे लेटने का पता नहीं कब मौका बने. तब तक मुझसे रुका नहीं जायेगा. इसलिए तुझे यहाँ पर बुला लिया.

sanjana--hehehe.. तू भी कसम से पूरी पागल है. ऐसी बात थी तोह सबको भी आने का बोल देती. मिलकर मज़े करती..

इशिता-- नहीं यार मुझे तेरे साथ मज़ा करना था. उनके साथ बातों बातें करके मज़े मिल जाते हाँ. पर तुझसे मुझे कुछ तोह सटिस्फैक्शन मिल जाता है.

दोनों नुदे होकर फिर एक दूसरे से लिपट गई. संजना भी राज के लिए पागल थी. बहुत दिनों से राज के लिए मचल रही थी. अपनी दीदी के साथ मस्ती करके छूट का पानी निकल लिया करती थी. पर इशिता के साथ भी उसे खूब मज़ा आता था. दोनों एक दूसरे के अंगों के मज़े लेने लगी..

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राज उर्वशी को कॉल करके फार्महाउस पर बुला लिए.. जब वह पोहंची तोह उसके साथ आदित्य को देख कर राज हैरान हुआ.

राज पहले आदित्य से मिला.. आदित्य खुश मिज़ाजी से राज से मिला. राज तब हैरान हुआ जब उर्वशी के गले मिली तोह आदित्य के सामने hi राज को किश करने लगी.

राज हैरान हुआ तोह आदित्य हसने लगा.. उर्वशी भी किश तोड़ कर हसने लगी.

राज-- ये सब क्या है. मैं कुछ समझ नहीं पाया.

उर्वशी-- आदि hi बताएगा.

आदित्य-- वह क्या है राज. उर्वशी मेरी लिए स्पेशल भी है और ख़ास भी. मुझे इससे मोहबत hi इतनी है. मैं इसके लिए कुछ भी कर जाता हों. इसने मुझे अपने बारे में सब बता दिए था पहले से hi. इसे कभी कभी स्ट्रॉन्गेर्स के साथ टाइम स्पेंड करने की बड़ी बुरी आदत है. देखा जाए तो एक मर्द होने के नाते मेरे लिए ये बात बड़ी शर्म की बात है. उर्वशी अब मेरी पत्नी है. मेरे रहते हुए ये किसी और के साथ भी सेक्स करे. एक पति ये कभी सहन नहीं कर सकता. पर मुझे करना पड़ता है. यू क्नोव राज. हमारी सोसाइटी में सेक्स अब आम हो चूका.. कोई पत्नी अपने पति की मर्ज़ी के बिना सेक्स करे तोह बाद में पता चलने पर हालत बिगड़ने लगते हाँ. और हमारे हाँ तोह आम है. पत्नी पति की गैर मौजूदगी में कैयो के साथ सेक्स कर लेती है. उसका पति भी उसे सटिस्फी करता रहता है. फिर भी वह खुद को रोक नहीं पाती और कई और के साथ भी वह सेक्स कर जाती है. उर्वशी सबसे अलग है. वह मेरे नॉलेज में सब कर जाती है. मैंने कई बार इसे मन भी किया. पर ये अपनी आदत से मजबूर है. समझ लो तोह जैसे ये इसकी हॉबी है. और हुब्बी को तोह छोड़ा जा सकता है, हॉबी को नहीं.. आदित्य हस्ते हुए बोलै.. तोह राज और उर्वशी दोनों हसने लगे..

आदित्य-- उर्वशी तुम्हारे साथ भी सेक्स करने के बाद मुझे सब बता गई थी. मुझे बुरा भी लगा था. पर मैं कुछ कह नहीं सकता था. मैं हैरान तब हुआ, जब मुझे उर्वशी तुम्हारे बाद किसी और में इन्वॉल्व होते हुए नहीं दिखी. मैंने पूछा तोह बोली. अब्ब बास. अब किसी और के साथ मैं सेक्स नहीं करुँगी. करुँगी तोह तुम्हारे साथ या फिर राज के साथ. राज अगर उसके न भी करे तोह भी वह अब किसी और के साथ सेक्स नहीं करेगी..

राज तुम सोच भी नहीं सकते.. मैं कितना सुरप्रीसेड हुआ था. उर्वशी और स्ट्रॉन्गेर्स के साथ मज़े करने बंद कर दे.. राज जो काम मैं कभी नहीं कर पाया. वह तुमने कर दिखाया. मुझे अपनी वैल्यू और इज़्ज़त की भी फ़िक्र रहा करती थी. दर था कहीं कोई मुझे ये न कह दे. तुम्हारी पत्नी तोह मेरे साथ रातें काली करती है. अब तुम्हारे बाद मुझे कभी डर नहीं रहेगा.. इस मामले में मैं अब रात को सुकून से सोता हों.

राज सब सुन और जान कर हैरान भी हुआ और खुल कर हसने भी लगा.

राज-- तो इसका मतलब है. अब मैं उर्वशी के साथ कभी भी कुछ भी कर सकता हों.

आदित्य हस्ते हुए-- मैं अगर 30 साल और उर्वशी के साथ बीतता हों तोह उर्वशी इन 30 सालों में सैंकड़ों मर्द बदल लेगी. अब तुम्हारे होने से वह मेरे बाद तुम्हारे साथ करेगी तोह मेरे लिए अच्छी बात है. बुरा होते हुए भी मेरे लिए अच्छी न्यूज़ है ये. मैं तो बड़ा खुश हुआ हों राज.. सच में मुझे कभी कोई ऐतराज़ नहीं होगा..

राज-- तो इसे ख़ुशी में एक पार्टी होनी चाहिए..

उर्वशी-- हाहाहा.. यही सोच के आये थे हम दोनों.. गाड़ी में सारा सामान मौजूद है.

आदित्य-- जब उर्वशी खुद को रोक नहीं सकती तोह मुझे तुझे पार्टनर बना hi लेना चाहिए. कौनसा रोज़ रोज़ तुम मुझे डिस्टर्ब करोगे.. अब तोह तुम्हारे बाद उर्वशी सिर्फ मेरी hi है. पहले नजाने किस किस की थी बन जाया करती थी..

तीनो हसने लगे.. उर्वशी हस्ती हुई बहार गई और गाडी के अंदर से ड्रिंक्स उठा लाइ..

राज-- तोह फिर चलो दोनों मिलकर अपने अपने लुंड पर शराब गिरते हाँ. उर्वशी हम दोनों के लुंड से कटरा कटरा बह रही शराब को पीयेगी.

आदित्य-- हाहाहा.. क्या खूब कहा तुमने राज. आज थ्रीसम के साथ साथ डिफरेंट स्टाइल से भी उर्वशी के मज़े लेने का मौका मिलेगा..

उर्वशी राज को मीठी नज़रों से देखती हुई अपनी शर्ट उतरने लगी.
 
116

***

राज-- आदि तेरी पत्नी तोह मेरे सामने hi नंगी होने लगी. राज हस्ते हुए बोलै. तोह आदि भी है पड़ा..

आदि-- कर ले तू भी आज मेरे साथ मिलकर मौज कर ले. ले ले मज़ा मेरे साथ मिलकर मेरी पत्नी के.. हाहाहा.. मैं भी आज किसी के साथ मिलकर अपनी जान की लूँगा. ज़रूर आज मुझे भी खूब मज़ा आने वाला है.

राज -- चल फिर हम दोनों भी नंगे होते हाँ.. राज शर्ट फिर पंत उतरने लगा.. आदि बी राज और उर्वशी को देखता हुआ, हस्ता हुआ नंगा होने लगा.

कुछ देर में तीनो नंगे थे..

राज-- अरे वाह्ह. तुम जानती थी आज मैं आने वाला हों. बड़ा चमका के आई हो आज तुम अपनी छूट को.

उर्वशी-- हेहेहे

आदि-- अब तोह मुझे भी रोज़ इसकी छूट चमकी हुई मिलती है. बोलती है. इसे राज ने चूमा चूसा और छोड़ा है. तोह फिर इसके इसके गिर्द झाड़ियां ऊगा कर इसे बदनुमा बनाओ.

राज-- वाहह क्या बात है मेरी डार्लिंग की.. उर्वशी है पड़ी. राज ने उर्वशी को खेंच कर अपनी बहन में भरा और किश करने लगा..

राज का लुंड उर्वशी की छूट पर लगते hi हार्ड होने लगा. आदि साइड खड़ा हुआ दोनों को किश करते देख रहा था. राज के लुंड को फूलते देखा तोह है पड़ा..

आदि-- अब समझा.. उर्वी क्यों तुम्हारी इतनी दीवानी है. साले तेरा लुंड भी बड़ा कड़क है यार.

उर्वशी किश तोड़ कर राज के लुंड को थाम कर दबती हुई आदि से बोली-- लुंड तोह कहीं भी बड़ा मिल जाता है आदि. पर राज सच में बहुत खास है. एक तुम ख़ास हो और एक राज..

आदि ठंडी आह भरते हुए-- अब मैं कहाँ ख़ास रहा हों. राज hi राज है अब तोह चरों और.. राज नंबर ले गया है मुझसे..

राज-- हाहाहा.. चल तू भी नंबर लगा ले..

आदि-- अब तोह लगाने hi पडेग.. देखो तोह मेरा लुंड भी कितना टाइट हो गया है. रोज़ छोड़ता हों. पर जब भी उर्वी को नंगा देखता हों. साला खड़ा हो जाता है.

राज-- फिर तोह तेरा लुंड भी कमल का हुआ न फिर..

आदि-- नहीं इसे मेरे लुंड का कमल नहीं है. इसमें तोह उर्वी के फिगर का कमल है.

अदि हँसा तोह उर्वशी और राज भी है पड़े..

राज-- चलो उर्वी अब दोनों लुंड पर बूँद बूँद शराब गिरते हाँ.. तुम निचे से पीना.

उर्वशी-- मेरा सौभाग्य. मैंने सोचा नहीं था. मुझे कभी थ्रीसम करना पड़ेगा. आदि के साथ किसी को शेयर करना पड़ेगा. दो दो के साथ एक समय पर मुझे इतना मज़ा करने को मिलेगा.. उफ्फफ्फ्फ़ आज बहुत मज़ा आने वाला है मुझे..

उर्वशी बहुत खुश दिखाई दे रही थी. उर्वशी निचे बैठी तोह राज और आदि दोनों उर्वशी के पास खड़े हो गए. दोनों के एक एक बोतल शराब की भी उठा ली थी.

उर्वशी ने पहले दोनों के लुंड पर एक एक किश करि. आदि का 6.5 लुंड खड़ा हो चूका था. वह राज के लुंड से छोटा था. पर तूफ़ान उठाये हुए था. उर्वशी के हाथ में आते hi, उर्वशी के होंटो की गर्माहट पाते hi वह और भी अकड़ने लगा था.

आदि राज को देख कर-- देखा राज उर्वी की सुंदरता का कमल. देखा साला कैसे मेरा लुंड झटके पर झटके मार रहा है.

राज-- हाहाहा.. झटके तो मेरा एनाकोंडा भी मर रहा है. देख कैसे फूलने लगा है. उर्वी सच में बड़ी कमल की है.

दोनों हसने लगी. उर्वी दोनों को स्माइल से देखने लगी. फिर दोनों अपने अपने पेट पर बूँद बूँद शराब गिराने लगे. उर्वी बड़ी महारित से दोनों लुंड चाट चूस कर शराब के कतरे अपने पेट में उतरने लगी..

धीरे धीरे शराब की मात्रा बढ़ने लगी.. उर्वी भी स्पीडसे दोनों लुंड चूसने लगी. दो दो लुंड के मज़े के साथ साथ उर्वी शराब के नशे में भी होने लगी.

कुछ देर ये सन चलता रहा. उर्वी का मोह, उसके चुके और निचे का सब शराब से गीला हो चूका था. कुछ शराब निचे भी बह रही थी.

राज ने उर्वी को खड़ा किया और उसके गले पर शराब की बोतल लगा कर शराब उंडेलने लगा. आदि बैक से उर्वी के ऊपर शराब गिराने लगा.. दोनों मिलकर फिर ुरवा को चाटने लगे.. उर्वी के शबाब पर बह रही शराब को चाटने लगे..

उर्वी-- आह्ह्ह्हह राजज.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ आदी.. कितना मज़ा डोज मुझे. शराब का नशा काम है क्या जो अब तुम दोनों मुझे और भी मदहोश करते जा रहे हो.

राज-- अरे मेरी जान.. आज तुझे जन्नत की सैर करवाने का मैं है.

आदि-- और ऐसी सैर.. जैसी तुझे मैं पहले कभी नहीं करा सका..

राज निचे बैठा और उर्वी की छूट पर आई शराब चाटने लगा... आदि निचे बैठा और उर्वी की गांड पर और भी शराब गिरा कर चाटने लगा..

राज और आदि को बहुत मज़ा आ रहा था ऐसा करने में.. राज ने भी शराबी छूट कभी नहीं छाती थी. आज चाट रहा था. चुतरस का नशा hi बहुत होता है. ऊपर से चुतरस में शराब का नशा मिला तोह राज भी पागल होने लगा.

उर्वी दोनों छेड़ चटवा कर पागल हुई जा रही थी. एक साथ साथ दो दो मर्दों से मज़े ले रही थी. वह कड़ी कड़ी कंपनी लगी. वह नशे से झूमने भी लगी थी. शराब के नशा. दो दो लुंड चूसने का नशा. अब छूट और गांड पर दो दो गर्म जीब. उर्वी की हालत बहुत ख़राब होने लगी.

उर्वी-- अह्ह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ माय गॉड.. मैं मर जंगा. पागल हो जाऊँगी.. इतना मज़ा.. इतना सवाद.. इतनी बेचैनी.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ इतना मज़ा... आआअह्ह्ह्ह उर्वी अपनी दोनों टांगें खोल गयी..

कुछ दूरी पर एक पेड़ के ऊपर चढ़ा हुआ राज पर नज़र रखे हुए सिमरन का एक आदमी.. पेड़ पर बैठे हुए hi अपने लुंड को मसल रहा था. उसे एक खिड़की से सब व्यू दिख रहा था. वह मैरिड पर्सन था. लाइव थ्रीसम देख कर वह पागल होने लगा था.. वह अंदर का सन देख कर खुद पर काबू नहीं रख पा रहा था..

उसका मोबाइल विबरते हुआ तोह वह वह मोबाइल निकल कर देखने लगा.. सिमरन की कॉल थी.

वह अपने जज़्बातो पर काबू पाते हुए बोलै-- yyy..yes मैडम..

सिमरन-- क्या कर रहा है राज..

सिमरन को मालूम पद गया था. राज यहाँ पर आया था. बाद में कोण आया था उसके पास ये बात वह नहीं जान पायेगी.

वह आदमी बोलै-- मैडम उर्वशी मां आज फिर आयी हाँ. woh..woh दोनों.

सिमरन- ठीक है. ठीक है. आगे कुछ बोलने की ज़रूरत नहीं है. सतर्क रहो. राज जहाँ भी जाए. उसे फॉलो करते रहना.

आदमी-- जी मैडम..

कॉल डिसकनेक्ट हुई तोह वह आदमी बड़बड़ाने लगा.. मैं तोह राज सर और सिमरन मैडम के चक्कर में आ कर फस hi गया. सिमरन मैडम की नहीं मंटा तोह वह मुझे जान से मर देगी. सिमरन मैडम की मंटा हों. राज सर मुझे अपने ाएस पास देख कर मेरी पत्नी की मार जायेंगे..

ये वला आदमी राज पर नज़र रखने वळून का हेड था. राज को पता चला तोह उसे पता चले बिना hi एक रात उसके घर में घुस गया था. उस हेड के सामने hi उसकी पैंटी को नंगा करके अपना खड़ा लुंड उसकी छूट के छेड़ पर फंसा कर बोलै था

राज-- साले मुझपर निगाह रखेगा.. भूल कर भी कोई ऐसे वैसे खबर सिमरन को मत देना.. जिससे मेरा काम ख़राब हो.. सिमरन को मुझपर हावी होने का मौका मिले.. वर्ण देख लिया तूने मई कितना बड़ा हरामी हों. सिमरन को बीच सड़क पर किश कर सकता हों. बीच सड़क पर उसे अपनी पत्नी बना सकता हों तोह तेरे सामने तेरी पत्नी को छोड़ भी सकता हों..

उसकी पत्नी मज़े में भी आ गई थी और बहुत दर भी गई थी.. उसके बाद उस हेड की हिम्मत नहीं हुई थी. राज से पन्गा लेने की..

अभी भी वह पेड़ पर बैठा हुआ अंदर नज़र बनाये हुए सब सोच रहा था.

मुझे क्या ज़रूरत है अपनी राज सर से पन्गा लेने की.. जान जाती है तोह जाए. पर मैं राज सर से अपनी पत्नी को तोह नहीं छुड़वा सकता..

अंदर का सन अब बदल चूका था.. आदि लेता हुआ था. उर्वी आदि के ऊपर लेती दोनों पेअर साइड में किये आदि को किश कर रही थी. राज भी पीछे आ के उर्वी की छूट में लुंड घुसाए उर्वी को छोड़ रहा था. आदि का लुंड उसके पेट से लगा, उर्वी के निचे दबा हुआ था...

राज ने जैम कर उर्वी की छूट मारी.. फिर अपनी आदि को बोल दिए.. उर्वी कुछ ऊपर होकर अदि का लुंड अपनी छूट में ले गयी थी.

राज उर्वी की गांड में लुंड दाल कर छोड़ने लगा.. अब उर्वी दो दो लुंड से चुद रही थी. राज ने पहले छूट पेली थी. अब वह उर्वी की गांड पेल रहा था. उर्वी को बहुत मज़ा आया था. शराब के नशे के बाद अब लुंड के नशे में थी वह..

दोनों धमाके दर तरीके से उर्वी को छोड़ने लगे..

बहार पेड़ पर निगाह रखे हुए हेड भी अपना लुंड मसल मसल कर झाड़ चूका था.. वह निचे उतरा और कुछ दूरी पर खड़ा होकर राज के बारे में सोचने लगा.

राज सर के तोह खूब मज़े हाँ. कैसे उर्वशी मैडम के पति के साथ मिलकर सेक्स कर रहा है.. सच में राज सर बहुत डेंजरस हाँ. मेरी तौबा जो मैं राज सर के खिलाफ भी गया था..

वह दूर कड़ी अपनी गाडी में बैठा.. ड्यूटी तोह निभानी hi थी.. वही निभाने लगा..

अंदर राज ने उर्वशी की गांड साडी hi खोल दी थी.. बाद में जब आदि ने अपना लुंड उर्वी की गांड में डाला तोह है पड़ा..

आदि-- आज शराब का नशा न होता तोह मुझे खुली छूट और गांड में लुंड डालने का मज़ा नहीं आने वाला था. हाहाहा साले राज तेरा लुंड तोह छेड़ को इतना खुला कर देता है. मेरे जैसे लुंड वाले को पता hi नहीं चलता, वह घुसा भी है कह नहीं घुसा..

उर्वी राज को मीठी नजरों से देखने लगी तोह राज हरामियों वाले अंदाज़ में है पड़ा..

चुदाई के बाद तीनो फ्रेस हुए.. उर्वी राज की गॉड में बेथ गयी..

राज-- तुम दोनों कुछ दिन ठहर कर इंदौर जाना. अभी जाओगे तोह सिमरन को शक हो जायेगा..

आदि- तुम चिंता मत करो.. फोन पर hi मैंने जुनैद और अनीता मैडम से साडी बात कर ली है. ऑनलाइन hi मैं सब देख रहा हों. ज़यादा काम तोह मैं घर बैठे hi कर लेता हों.

राज-- कैसे लगा फिर मेरा साथ..

आदि है कर-- उर्वी वाला साथ या बिज़नेस वाला..

उर्वी-- हेहेहे.. दोनों..

आदि-- बिज़नेस मन तोह मैं तब hi बन गया था राज.. जब तुमने उर्वी की मार ली थी. मेरी किस्मत भी उसी समय खुल गयी.. जिस समय

राज-- हाहाहा.. जिस समय उर्वी की छूट और गांड खुली थी..

तीनो हसने लगे.. कुछ देर की और बातों के बाद उर्वी और आदि राज से मिलकर चले गए..

राज भी कुछ देर में निकल पड़ा.. अब राज की मंज़िल थी. मौसा, अर्चना मौसी और तीनो मामियां.. मौसी के दर्द को काम करना था. मौसा को ऐसा सबक़ सीखना था. वह पागल हो जाता.. तीनो ममियों को छोड़ लेता तोह फिर आगे की कोई परेशानी नहीं रहती. सब खुद से अपने अपने परिवार को नाना नानी से मिलने के लिए बोल देती...

राज अपने अगले मिशन के लिए निकल पड़ा.... निशा मंझले मां की बेटी भी राज को याद थी. उसकी लाइफ को भी सेट करना था.... उसकी शादी तुड़वा कर उसे लाइफ में एक एआईएम के साथ जीने का मौका देना था. निशा के लिए जो कुछ भी करना था. वो तो राज करता hi पर निशा की मासूम छूट और गांड उसके मंद से निकल hi नहीं रही थी. बिना देखे hi राज पर निशा का नशा चढ़ा हुआ था.
 
117

***

राज सुनैना के घर पोहंचा तोह उसे पता चला. शिवानी ै थी. वह जो कुछ भी बता कर गई थी. राज सब जान गया. राज को पता चला, सिमरन उसपर बहुत ज़यादा नज़र बनाये हुए है.

राज समझता था, सिमरन बहुत आगे का सोच कर चलती है. राज खुद भी तो हरामी था. कैसे न सब समझता.

अब उसे अपने खेल को जल्दी ख़तम करना था. अब उसका अंदर बहुत बदल चूका था. हरामीपन में बदलाव आ गया था.

घर पर दादी और सुनैना hi थी. राज वहीँ एक सोफे पर बैठा हुआ था. एक साइड दादी तो दूसरी साइड सुनैना बैठी हुई थी..

राज सुनैना से-- डेट आई क्या.

सुनैना शर्मा कर-- नहीं आई..

राज ने सुनैना को भूम लिया.

दादी-- लगता है, सुनैना फिरसे माँ बनने जा रही है.

दादी-- दादी आप भी माँ बनना चाहेंगी

दादी-- हेहेहे.. अब इस उम्र में मैं माँ तोह बन नहीं सकती. अगर बन भी गई तोह मेरा अंत पक्का है. मैं अंदर से भी बूढी हो चुकी है. 9 महीने तक चल नहीं सकुंगी.

सुनैना भी हसने लगी..

राज-- तरय करने में क्या जाता है.

सुनैना-- हाँ मैं भी तोह देखु माँ जी अब इस उम्र में कैसे दिखती हाँ बढे हुए पेट के साथ..

दादी-- हाहाहा.. अब तोह ये हसरत hi रहेगी.. अब ऐसा होना मुमकिन नहीं है.

राज-- तोह पेट न बढ़ा कर आपकी गांड को पीछे से बढ़ा देते हाँ. वहीँ निकल आये तोह भी बात बन जाएगी..

दादी-- राज बीटा क्यों इस उम्र में मेरी गांड इतनी खुली करना चाहते हो. क्या ज़रूरत है भला अब उसे खुला करने की. आगे वाला hi छेड़ काफी है खुले के लिए.

सुनैना-- राज.. दादी अखिल बेटे से बहुत खुश हाँ.

राज-- अखिल बदला या पहले जैसा hi है

सुनैना- नहीं अब वह बहुत बदल गया है. घर में ज़यादा रहता है. माँ को जी पूरा पूरा सम्मान भी देता है.

राज सुनैना को किश करते हुए, उसके चुके प्रेस करते हुए-- आपको देख कर उसकी नज़रे तोह नहीं बहकती..

सुनैना-- नहीं ऐसा नहीं है.

राज ने वहीँ अपने लुंड को नंगा किया तोह दादी और सुनैना दोनों मिलकर राज के लुंड से खेलने लगी. पहले दादी झुकी और राज के लुंड को चूसने लगी.. दादी हटी तोह सुअनीना राज के लुंड पर अपना हक़ जितने लगी. एक पत्नी बनने के बाद वह राज की हर एक चीज में हिस्सेदार बन गयी थी. अब शायद वह राज के बच्चे की माँ भी बन्न रही थी.

कैसे न फिर वह पुरे मैं से राज के लुंड को न चुस्ती. लुंड चूसने के बाद सुनैना ने वहीँ कपडे उतारे और नंगी होकर राज की गॉड में बेथ गयी..

राज ने अपने लुंड को हाथ में पकड़ा और सुनैना की छूट पर सेट कर दिए.. सुनैना दिलरुबाई से राज को देखती लुंड को अपनी में लेते हुए निचे होने लगी..

पूरा लुंड उसकी छूट में गया तोह राज के गले में बहन दाल कर वह राज को किश करने लगी..

बड़े प्यार से, बड़े धीमे अंदाज़ से वह राज के होंटो को पिने लगी. राज भी सुनैना की तालाब को समझते हुए उसके होंटो का जल पान करने लगा..

कुछ देर में सुअनीना ने अपने होंठ अलग किये.. हम्म्म आज कितने दिनों बाद आपका प्यार मिल रहा है. कितनी किस्मत वाली हों मैं, जो मुझे आप पति के रूप में मिले.

राज-- किस्मत तोह मेरी खुली है सुअनीना जी.. आप मेरे लिए भी बहुत स्पेशल है. आपका प्यार बड़ा अनमोल है मेरे लिए..

सुनैना खिल उठी-- नहीं राज जी. अनमोल मई नहीं हों, अनमोल तोह आप हाँ. आपके कारण मुझे कितने सुख, कितनी खुशियां मिली हाँ. मैं तोह आपकी बहुत आभारी हों राज जी.

राज-- ऐसी बात है तोह फिर दिखाएँ मुझे अपने जलवे. दिखाएँ मुझे अपना प्यार..

सुनैना-- जी अभी दिखती हों.

सुनैना राज के चेहरे को चट्टी हुई राज के लुंड को बड़े प्यार से ऊपर निचे होने लगी. छूट में घुसा राज का लुंड भी गीला और चिकना हो चूका था. बड़ी अकड़ आ गई थी राज के लुंड में.. थोड़ा थोड़ा करके वह सुनैना की छूट से बहार आता तोह दादी को लगता, जैसे समंदर के अंदर से कोई मछली पानी से निकल कर झांक रही ho.dadi भी राज के लुंड पर हाथ चलने लगी. सुनैना की छूट पर उँगलियाँ फेरने लगी.

राज सुअनीना के चुके मसलता हुआ दादी से बोलै-- आअह्ह्ह रंडी दादी, तेरे हाथ कितने गरम हाँ.

दादी-- क्या करूँ राज बीटा. तुमने और अखिल ने मेरे अंदर भी आग भर दी है. जब भी चुदाई का समय होता है तोह मेरा बदन भट्टी बनने लगता है. देखो तोह कैसे मेरे निचे का सोफे पानी पानी होने लगा है. मेरी छूट भी अब पल पल पानी छोड़ने लगी है.

राज ने एक हाथ से दादी की छूट में ऊँगली करनी शुरू क्र दी. दूसरे हाथ से सुनैना का चुका मसलने लगा.. सुनैना राज को चूमती हुई स्पीड बढ़ने लगी.

धीरे धीरे उसकी स्पीड बढ़ती चली गई. उसकी छूट का पानी लुंड के लुंड से बाह बाह कर निचे सोफे पर आने लगा..

कुछः मिंटो के इस खेल में सुनैना राज के गले लग कर बुरी तरह से झाड़ चुकी थी.. वह लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए खुद को नार्मल करने लगी..

जब वह नार्मल हुई तोह राज उससे बोलै-- जाएँ सुनैना जी, आप जा कर फ्रेश हो जाइये.. फिर हम खाना खाएंगे..

सुनैना-- जी राज जी.. मैं नाहा कर खाना बनती हों.

सुअनीना चली गई तोह राज दादी से-- चलो रंडी दादी अब सोफे पर hi घोड़ी बन जाये.

दादी-- अब मेरी गांड तोह नहीं मारोगे न.

राज-- क्यों गांड में लेने का मैं नहीं है

दादी-- एक बार चूस के मज़े करा दो, फिर गांड भी मार लेना. कितने से तेरा लुंड मेरी छूट में नहीं गया. मुझे भी तेरे लुंड की आदत पद चुकी है राज बीटा.

राज-- चलो तोह फिर बन जाओ घोड़ी.

दादी घोड़ी बानी तोह राज दादी की गीली छूट में लुंड दाल कर दादी के चुत्तड़ मसल मसल कर दादी को छोड़ने लगा. दादी पहले hi बहुत गर्म थी. राज और सुनैना की चुदाई देख कर पागल थी.. थोड़ी hi देर में वह भी चुतरस बहा गई.

राज ने अपना लुंड दादी की छूट से निकल पर कुछदेर गांड पर रगड़ कर गांड को चिकना किया.. फिर गांड में दाल कर दादी की गांड मारने लगा..

दादी--- आह्ह्ह्ह राज बीटा धीरे धीरे.. बहुत दर्द हो रहा है

राज-- क्यों रंडी दादी.. अखिल से गांड नहीं मरवाती रोज़ क्या..

दादी-- उसका लुंड छोटा है न.

राज-- तोह मैं क्या करूँ.. अब भुटगो

दादी-- धीरे करोगे तोह दर्द काम होगा. और मज़ा भी ज़यादा आएगा.

राज दादी की मानते हुए नोर्मल्ली स्पीड से दादी की गांड मारने लगा..

राज भी कुछ देर में दादी की गांड में झड़ने लगा.. राज वहां से एक बाथरूम में जा घुसा और नहाने लगा..

दादी राज को जाते हुए देखने लगी.

दादी-- तेरे जितना मज़ा अखिल से नहीं मिलता राज बीटा. पर तू कइयों के साथ लगा रहता है. मुझे रोज़ तोह छोड़ नहीं सकेगा.. अब मुझे भी रोज़ छोड़ने की आदत पद गई है. जिस दी अखिल न चोदे.. उस दिन खुद से छूट में ऊँगली करने को मैं होने लगता है.
 
118

***

संजना जब घर लौटी तोह राज को देख कर बड़ी खुश हुई..

राज संजना को किश करते हुए-- आज तोह आग hi नहीं दिख रही तुममे तोह.. क्या बात है.

संजना कुछ शर्मा कर-- ww..woh इशिता के साथ

राज-- इशिता के sath..ohh मतलब आज आग ज़यादा लगी थी तोह बुझा आई इशिता से hi

संजना-- उसने hi मुझे बुलाया था. वह भी आप को घर में देख कर मचल उठी थी.

राज-- लगता है, मुझे hi उसकी आग अच्छे से बुझानी पड़ेगी..

संजना-- उसकी hi बुझाते रहेंगे आप क्या.. मेरी आग का ख्याल नहीं आपको.. कितने दिनों से तरखा रहे हाँ आप मुझे..

राज- आज कहाँ मिली थी उससे

संजना-- उसी की एक कोठी में.

राज-- दो एक दिन में उसे यहीं बुला कर तुम दोनों को एक साथ ठंडा करूँगा..

संजना खिल उठी-- सच

राज-- अरे मेरी जान इतने दिनों से तड़प रही है. अब उसे तोह भी खुश कर hi देता हों. कब तक तड़पती रहेगी.

संजना-- हाँ राज. मैं बहुत तड़प रही हों. बड़ी आग लगी है मेरे अंदर.. बुझती hi नहीं है. हर कुछ समय के बाद भड़कने लगती है. मुझे साडी साडी रत जलाये रखती है.

राज-- कार्डो तुझे भी एक hi बार में ठंडा..

संजना राज के कलर से खेलती हुई-- एक hi बार में ठंडी नहीं होने वाली..

राज-- देख लेता हो...

कुछ देर में रुपाली आई तोह राज वह को देख कर भागती हुई वह राज से लिपट गई. किसी की परवा किये बिना hi वह राज को किश करने लगी.

दादी-- कितनी उतावली हो रही ये तो..

सब हसने लगे. शैफाली नहीं थी. बाकि सब थे.. सब देख कर हसने लगे..

रुपाली-- कितने दिन लगा दिए तुमने तोह. पता है कितनी मुश्किल से ये समय काटा है मैंने. दिल hi नहीं लग रहा था तुम्हरे बिना मेरा तोह.

राज-- अब लौट आया हों तो दिल भी लगे और आग भी ठंडी होगी.

रुपाली-- आग तोह अब कभी ठंडी नहीं होगी राज.. अब तोह शरीर की आग में प्यार शामिल हो गया है. प्यार इस आग को नया रंग दे चूका है. अब ये कभी नै बुझने वाली..

सुनैना-- यही हाल तोह सब का भी है. राज के लये तोह सब पागल हाँ.

संजना-- हाँ अब बची है, पता नहीं उसका क्या बनेगा..

राज-- उसे भी देख लूंगा..

शाम से बाद राज अर्चना मौसी के घर जा पोहंचा. राज को पता चला था. उसके मौसा किसी काम से आउट ऑफ़ स्टेशन थे. राज ने मोके का फयदा उठाना सही समझा और वहां के लिए निकल पड़ा.

शाम से पहले वह रुपाली को ठंडा कर चूका था. रुपाली भी खुश और फ्रेश हो गई थी.

राज वहां पोहंचा तोह सब उसे देख कर चहक उठे थे. सब को राज बहुत पसंद आया था.. राज की सेवा करि गई. राज वहां ऐसे बैठा. जैसे उसका अपना घर हो.

अर्चना-- कहाँ रहे इतने दिन राज बीटा.

राज-- घर गया हुआ था शिवानी ने बताया नहीं क्या आप को.

अर्चना-- नहीं तोह. उसने तोह हमें नहीं बताया.

राहुल-- दीदी तोह अक्सर अपने मूड में रहती है. या काम में.. कैसे हमें बताती.

ऋतू-- दीदी बहुत थक भी तो जाती हाँ न. उनका काम भी तोह बोहत टफ है न.

अनिल-- और सुनाओ, कैसी जा रही है तुम्हारी लाइफ

राज स्माइल से-- एकदुम्म मस्त. और आपकी

अनिल अपनी माँ को देख कर-- बस हमारी भी गुज़र hi रही है.

अर्चना-- मुझे क्यों ऐसे देख रहे हो. मैं ठीक हों. मुझे कुछ नहीं हुआ.

अनिल-- हाँ देख रहा हों. पापा 4 दिन के लिए नहीं आने वाले तभी आप आज रिलैक्स दिख रही हाँ. वर्ण

अर्चना-- ऐसा नहीं है अनिल बीटा. तेरे पापा हाँ, उनके बारे में ऐसा मत बोलै करें.

अनिल अपने होंटो भेंचने लगा-- कभी कभी तोह मुझे लगता, पापा का मेंटली इलाज होना चाहिए

अर्चना-- ीीिललललल.. अपने शब्दों पर कण्ट्रोल करना seekho.apne पापा के बारे ऐसे नहीं बोलते.. जैसे भी हाँ, तुम सब के लिए अच्छे हाँ न.

राहुल-- कहाँ अच्छे हाँ माँ वह.. आये दिन के लेक्चर और अजीब अजीब बातें सुनकर अब तोह मेरा मैं भी ख़राब होने लगा है. सच कहूं तोह कभी कभी अजीब से फैसले लेने का मैं करता है..

राज दिल hi दिल में हसने लगा.. उसे एक प्लान सूझ गया था. कैसे मौसा को लाइन पर लाना है.

राज-- अनिल तुम्हारी पढाई कब कम्पलीट हो रही है.

अनिल-- बस 2-3 महीने में.. क्यों?

राज- अभी से बेस्ट जॉब मिल जाए तोह

अनिल उछाल पड़ा-- क्या मतलब है तुम्हारा..

सब भी राज को देखने लगे थे.

raj--ha मेरे पास एक पैकेज.. उससे तुम अपनी लाइफ अपने मज़े से जी सकते हो. खुद के लिए वह सब कर सकते हो, जो तुम सब के दिलों में है. वह सड़ियल इंसान भी किसी को कुछ नहीं कह सकेंगे. वह भी सरे के सरे बदल कर रह जायेंगे.. फिर जिस रूप में आप उन्हें बदलना चाहेंगे, वह उसी रूप में खुद को ढालने पर मजबूर हो जायेंगे.

अर्चना मौसी सबसे बढ़कर शॉकेड हुई थी.

अर्चना-- इम्पॉसिबल.. ऐसा मुमकिन नहीं है. दुन्या इधर से उधर हो सकती है. पर वह नहीं बदल सकते..

राज-- अगर मैं ऐसा कर दिखाओं तोह..

ऋतू और निधि-- ऐसे तोह हमारे भी सरे खवाब पुरे हो सकेंगे.. शिवानी दीदी की जैसी डेरिंग नहीं है हममे. हम पापा से लड़ कर अपने फ्यूचर के लिए नहीं बोल सकते.. न hi अपना फ्यूचर बना सकते हाँ.. तुमने सब कर दिखाया तोह हम सब तुम्हारे घुलम हो जायेंगे..

राज अपनी मौसी को देखने लगा.. अर्चना मौसी भी आँखों में खवाब से लिए राज को देखने लगी..

राज-- तोह फिर समझो, आज से आशीष साहिब बदल गए..

राहुल -- क्या ऐसा सच में हो सकता है.

राज-- 1--% सुरती देता हों

अनिल-- कैसे होगा ये सब..

राज-- मैंने कहा था न, मैं इस शहर में बिज़नेस ंद स्टडी के लिए आया हों तोह उसी काम में भी मैंने ये पिछले कुछ दिन बिताये हाँ. बस जितनी भी बातें हुई हाँ, वह अपने पापा और ख़ास कर शिवानी मैडम को मत बताइयेगा.. बाकि मैं सब संभल लूंगा.

सब- ठीक है, हम किसी को नहीं बताएँगे.. पर हमें करना क्या होगा..

राज- वह इन 4 दिनों में डिटेल से सबको समझा दूंगा मैं..
 
119

***

डिनर से पहले शिवानी भी लौट आई. राज ने बोल दिए था. शिवानी को वह अपने अंदाज़ में हैंडल करेगा. उसी के चलते आगे का प्लान आगे बढ़ेगा..

सब तोह जैसे राज के दीवाने हो गए थे. राज ने जो भी बोलै था. उसे जान कर राज पर यकीं भी कर बैठे थे.. राज ने सबसे कसम लेकर अपने इंदौर वाले सेटअप बारे बता दिए था.

अनीता से बात करवा कर सबको और भी अपने करीब कर लिया था.. सबका विश्वास राज पर और भी स्ट्रांग बन गया था..

राज पुरे घर में ैसिलय घूमने लगा.. सब अपने अपने कामो में बिजी रहे.. राज शिवानी के कमरे में घुस कर एक साइड छुप गया था..

शिवानी घर आई तोह सबके दमकते चेहरे देख कर हैरान हुई

शिवानी-- क्या बात है. सब तोह ऐसे खुश हाँ, जैसे कल दिवाली हो..

ऋतू-- क्या दीदी. दिवाली पर hi हम खुश होते हाँ क्या. और भी कई दिन हमने ऐसे hi ख़ुशी में बिताये हाँ.

शिवानी ऋतू को घूरते हुए-- सबसे बड़ी hi नहीं रही हों मैं. एक पुलिस वाली भी हों. कोण कहाँ से बोल रहा, किस के मैं में क्या चल रहा है. वह भी मैं सब जानती हों.

निधि-- हँ.. बड़ी आई मैं की बात जान्ने वाली. फिर वह बोली.. ऐसी बात है दीदी तोह बताएं, हम क्यों खुश हाँ.

मौसी है पड़ी.. शिवानी अपनी माँ की हसी में खोने लगी-- माँ आप की हंसी में आज खनक बहुत है. सच में कितनी पायरी हसी है आपकी.

अर्चना- चल चल जल्दी से फ्रेश होल फिर डिनर भी करना है. बड़ी आई मेरी हसी में खनक का बोलने वाली. अर्चना के होंटो पर दबी दबी स्माइल थी.

राज के आने से, उसकी बातें सुनके वह खिल उठी थी. राज वैसे भी उसे अपने दिल के करीब लगने लगा था.

शिवानी हैरत में गम सबको देखती अपने कमरे में जा घुसी.. दूर को अंदर से लॉक करके वह पहले शीशे के सामने पोहंची. खुद को देखने लगी. उसके होंटो पर एक प्यारी स्माइल आ गई. घूम फिर कर खुद को देखने लगी.

राज उसे ऐसा करते देख कर मैं में हसने लगा.. हर लड़की, चाहे वह पुलिस वाली हो या कोई पॉलिटिशियन.. अकेले में सिर्फ एक लड़की के जैसे hi सोचती है. शिवानी भी कुछ देर खुद को आईने में देखती रही. फिर अपनी शर्ट के बटन खोलने लगी.

राज धीरे धीरे ोपण हो रहे शिवानी के फिगर को निहारने लगा. शर्ट फिर फिर पंत शिवानी के बदन से अलग हुई. शिवानी ब्रा पंतय में आने के बाद फिरसे खुद को आईने में देखने लगी.

एक बार फिरसे शिवानी घूम फिर कर अपने शरीर को देखने लगी. इतनी आगे की होने के बाद भी शिवानी कुंवारी थी. शिवानी आज तक मर्दों से दूर रही थी. उसका सुंदर शरीर बरसों से एक मर्द के लिए मचल रहा था. पर शिवानी ने किसी को अपने करीब नहीं आने दिए था. शिवानी और टाइप की लड़की थी. उसकी लाइफ का एक गोआल था. उसी को सामने रखते हुए वह जी रही थी.

अपने शरीर को देखते हुए शिवानी को सिमरन की बातें याद आयी तोह शिवानी खुद को कमरे में अकेले जान कर बड़बड़ाने लगी.

राज ने सुना पर उसे कुछ समझ नहीं आई..

शिवानी फिर बाथरूम की और पलटी. ब्रा पंतय में मस्त चल चलती हुई, राज पर बिजलियाँ गिरते हुए वह बाथरूम की और जाने लगी. राज एक जगा छुपा हुआ उसे देख रहा था. राज मैं में-- शिवानी कितना सुंदर कितना चमकदार शरीर है तुम्हारा. कितनी सख्त जान भी हो तुम..

शिवानी बाथरूम में घुसी तोह दूर लॉक नहीं किया.. राज भी एक परदे की ूत से बहार निकला और वहीँ खुद भी एक अंडरवियर में होकर बाथरूम की और जाने लगा..

राज हरामी था. किसी की उसे भला क्या परवा हो सकती थी. वह भी कुछ देर में अंडरवियर में बाथरूम के दूर के पास जा पोहंचा. अंदर शिवानी पेशाब करके फ्री हो चुकी थी. शिवानी ब्रा और पंतय में बाथ टब को गरम पानी से भरने लगी.

राज के आने की आहात वह नहीं प् सकीय थी. एक पुलिस वाली होकर भी अपने रूम में किसी और की मौजूदगी जान नहीं पाई थी. शिवानी मस्ती में थी. ख्यालों की दुन्या में थी. एक जवान लकड़ी थी. कभी वह खुद को सोच रही थी तोह कभी अपने घर वळून के बदले अंदाज़ को.

खुद के लिए मस्त थी तोह घर वळून के लिए विचारों में गम..

राज एकदुम्म से hi बाथरूम में घुसा. शिवानी को भी किसी के बाथरूम में घुसने का एहसास हुआ. वह ग़ुस्से में पलट पड़ी. कुछ बोलने वाली थी. राज को देख कर शॉकेड हो गई.

शिवानी-- तुमममम!

राज हरामी स्माइल के साथ-- हाँ मैं!
 
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