Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 15 - SexBaba
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Incest बरसात की रात,,,(Completed)

रघु ट्यूबवेल की टंकी में ठंडे पानी का मजा ले रहा था पानी उसके छाती तक था,,,, बहुत दिनों बाद करो ट्यूबवेल की टंकी में घुसकर नहाने का आनंद ले रहा था और अपनी मां की तरफ देख रहा था जो कि अपनी साड़ी को धीरे धीरे उतार कर एक तरफ झाड़ियों पे रख रही थी,,, रघु,, तिरछी नजरों से अपनी मां की तरफ देख रहा था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि कुछ ही देर में उसकी मां भी उसी में ट्यूबवेल की टंकी में नहाने के लिए आने वाली थी,,, पहली बार उसकी मां उसके बेहद करीब नहाने वाली थी,,, रघु को समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से अपनी ही मां के सामने नहाएगा,,, और यही बात कजरी के मन में भी चल रही थी,,, उसके तन बदन में भी अजीब सी बेचैनी छाई हुई थी उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा था,,, अपने बेटे की आंखों के सामने उसके बेहद करीब नहाने का अनुभव कैसा होता है इससे वह भी पूरी तरह से अंजान थी,,,। देखते ही देखते कजरी अपने आप को अपने बेटे के बेहद करीब उस टंकी में जाने के लिए तैयार कर ली,,, एक बार उस ट्यूबवेल की टंकी में घुसने से पहले वह चारों तरफ निगाह घुमाकर पूरी तरह से तसल्ली कर ली कि कोई उसे देख तो नहीं रहा है,,,, ना जाने आज कजरी के मन में क्या चल रहा था,,, इस बात का अंदाजा रघु को भी नहीं था,,। कजरी धीरे धीरे टंकी की तरफ आगे बढ़ने लगी जो कि पानी से लबालब भरा हुआ था और उसमें से पानी निकल कर खेतों में जा रहा था,,,रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि जैसे-जैसे उसकी मां टंकी की तरफ आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे उसकी दोनों टांगों के बीच उसके मुसल में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, धीरे-धीरे उसके पजामे में तंबू बन गया,,, कजरी आगे बढ़ी और थोड़े से ऊंची पत्थर पर अपने पैर रखकर टंकी के पत्थर पर बैठ गई और पहले पानी से भरी टंकी में अपने दोनों पैर डालकर पानी की गहराई और उसकी ठंडक का अंदाजा लगाने लगी,,, पानी बहुत ठंडा था लेकिन गर्मी में बहुत ही शीतलता प्रदान कर रहा था,,, टंकी में घुसने से पहले विवाह ट्यूबवेल के पानी के आगे अपने दोनों हाथ लगाकर उसमें से ठंडे ठंडे पानी को पी कर अपने गले को तर करने लगी,,, रघु अपनी मां को बड़े गौर से देख रहा था हाथ में पानी लेकर पीने की वजह से पानी उसके ब्लाउज कर गिर रहा था जिसकी वजह से उसका ब्लाउज गीला होने के साथ-साथ अंदर के मनमोहक दृश्य को उजागर कर रहा था,,। पानी की बुंदो का यू ब्लाउज को गीला करना और उसके अंदर के बेहद खूबसूरत नग्नता को ब्लाउज की ऊपरी सतह पर उजागर करना यह सब रघु के लिए कामवासना को और ज्यादा बढ़ावा दे रहे थे,,, रघु का दील जोर से उछल रहा था,,, रघु दोनों हाथों से टंकी के पानी को छप छपाते हुए अपनी मां के खूबसूरत नजारे को देखकर मस्त हो रहा था कजरी अपने पेटिकोट को घुटनो पर चढ़ा कर पानी के अंदर अपने पैर को डालकर अपने पैरों को हिला रही थी अपनी मां की गोरी गोरी टांग को देख कर,, रघु का लंड पजामे में गदर मचा रहा था,,।कजरी कोठी इस बात का आभास था कि जिस तरह से वह पानी पी रही थी पानी के कारण इसका ब्लाउज पूरी तरह से गीता होने लगा था और पल भर में उसका पूरा ब्लाउज पानी से गीला हो करके ब्लाउज के अंदर की चूचियों के गोलाकार आकार को एकदम से उजागर कर रहा था जोकि रघु के दिल पर कामुकता भरी छुरीयां चला रहा था,,,। रघु से रहा नहीं जा रहा था वह चाहता था कि उसकी मां जल्द से जल्द पानी के अंदर आ जाए ताकि कोई ना कोई बहाने से उसके अंगों को छूने का उसे मौका मिल जाए,,, इसलिए वो खुद ही अपनी मां से बोला,,,।

अब ऊपर बैठी ही रहोगी अंदर भी आओगी,,,(अपने दोनों हाथ से पानी लेकर अपने चेहरे पर मारते हुए रघु बोला,, कजरी अपने बेटे की उत्सुकता देखकर उत्साहित हो गई और धीरे से पांव अंदर डालकर अपना दूसरा पांव भी पानी में डालकर टंकी की गहराई में उतरने लगी,,, ट्यूबवेल का पानी काफी ठंडा था,,,जिसकी वजह से कजरी को अपने बदन में ठंडक का एहसास हो रहा था लेकिन वह ठंडक उसे बेहद भा भी रहा था,, क्योंकि गर्मी अत्यधिक थी,,, वह तो गनीमत थी कि तीनों ने मिलकर काम को जल्दी से पूरा कर लिया था वरना एकदम दोपहर हो जाती तो गर्मी की वजह से और ज्यादा हालत खराब हो जाती,,,,)

पानी बहुत ठंडा है रघु,,,,(कजरी अपने दोनों पैरों को टंकी की गहराई में धीरे-धीरे उतारते हुए बोली)

गर्मी में ठंडा पानी ही सुकून देता है मां,,,, और देखो तो तुम कितनी गर्म हो गई हो,,,,(रघु एक बहाने से अपनी मां के दोनों हाथों को पकड़ते हुए बोला,,,) जब बदन गरम हो जाए तो,,, ठंडा पानी पड़ने से ही बदन शांत होता है,,,,।

तु ठीक कह रहा है,,,, रघु,,,(कजरी पूरी तरह से टंकी के अंदर उसकी गहराई में अपने दोनों पैरों को रखकर अपने आप को संभालते हुए बोली,, उसे इतना तो समझ में आ रहा था कि उसका बेटा दो अर्थ वाली बातें कर रहा था लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह जानबूझकर ऐसा कह रहा था या उसके मन से यूं ही औपचारिक रूप से निकल गया था,,, लेकिन फिर भी अपने बेटे की कही गई बात का दूसरा अर्थ निकाल कर कजरी अपने तन बदन में सुरसुरा हट का अनुभव कर रही थी,,,, टंकी में भरे हुए पानी में उतरते ही कजरी का बेटी कौन है हवा भरे गुब्बारे की तरह होने लगा और पूरा का पूरा पेटीकोट टंकी के पानी के ऊपरी सतह पर आ गया यह देखते ही रघु के लंड में खलबली मचने लगी क्योंकि,,,वह अच्छी तरह से जानता था कि पेटीकोट का इस तरह से हवा भरे गुब्बारे की तरह फूलकर पानी के ऊपरी सतह पर फुल कर गुब्बारा बन जाने का मतलब था कि उसकी मां कमर के नीचे से पूरी तरह से नंगी हो चुकी है,,,, कजरी को जैसे ही इस बात का एहसास हुआ वह तुरंत अपने हाथों से पानी के ऊपरी सतह पर फूली हुई अपनी पेटीकोट को पकड़कर नीचे की तरफ दबाने की कोशिश करने लगी रघु अपनी मां की यह मद भरी हरकत को देखकर अपने अंदर उत्तेजना का संचार होता हुआ महसूस कर रहा था,,, रघु की हालत खराब हो रही थी क्योंकि रुको यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां पानी के अंदर अपने नंगे पन को ढकने की कोशिश कर रही थी जो कि पानी के अंदर वह अपनी कोशिश को अंजाम नहीं दे पा रही थी,,,, वह रघु की तरफ देख भी रही थी औरकमर के नीचे के नंगे पन को ढकने की कोशिश भी कर रही थी और इसी अफरा-तफरी में वह अपने आप को संभाल नहीं पाई और पानी के अंदर ही टंकी के नीचली सतह पर पैर फिसल जाने की वजह से वह सीधा रघु के ऊपर जा गिरी रघु उसे संभालने की कोशिश करते हुए पानी के अंदर ही अपने दोनों हाथ उसे पकड़ने के चक्कर में उसके गोलाकार नितंबों पर रखकर पकड़ लिया हालांकि वह अपनी मां को संभाल लिया था लेकिन पानी के अंदर अपने दोनों हाथों से वह अपनी मां की गांड को थामे हुए था जैसे ही रघु को इस बात का एहसास हुआ उसके तन बदन में बिजली सी दौड़ने लगी उसका पूरा वजूद उत्तेजना के मारे कांपने लगा,,, उसके दोनों पैरों में थरथराहट महसूस होने लगी,,,कजरी भी अपने बेटे के दोनों हाथों को अपनी गांड पर महसूस कर के ऊपर से नीचे तक गनगना गई,,,, पल भर में ही उसकी सांसो की गति तेज हो गई,,, रघु टंकी के अंदर के बाहर का सहारा लेकर खड़ा था और उसकी मां उसके ऊपर एकदम से जा गीरी थी लेकिन फिर भी रघु उसे अपने हाथों से संभाल लिया था और उसे चोट लगने नहीं दिया था,, अभी भी रघु को का हाथ उसकी मां की गांड पर था एकदम नंगी बिल्कुल कोरी,,, नरम नरम रुई की तरह,,, रघुअपनी मां की भारी-भरकम गोल गोल गांड को छूने का स्पर्श करने का उसे दबाने के एहसास से वंचित नहीं रहना चाहता था,,,इसलिए अपनी मां को संभालने की अफरातफरी में वह अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़कर उसकी दोनों फांकों को अपनी हथेली में भर कर उसे हल्के हल्के दबाना शुरू कर दिया था,,,रघु अपने दोनों हाथों में अब तक ना जाने कितनी औरतों की गांड को लेकर दबा चुका था लेकिन जो मजा उसे अपनी मां की गांड दबाने में आ रहा था वैसा मजा उसे आज तक नहीं आया था पहली बार उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि साड़ी के अंदर से साड़ी के सतह पर दिखने वाली गोलाकार कड़क गांड अंदर से कितनी नरम नरम थी,,,,, कजरी संभल कर स्थिर हो पाती इससे पहले ही रघु अपना काम कर चुका था,,,कजरी को भी इस बात का आभास हो चुका था कि उसका बेटा उसे संभालने के चक्कर में अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को पकड़े हुए हैं बरसों के बाद किसी मर्द के हाथों में उसकी दोनों मदमस्त गोरी गोरी कहां थे और वह भी किसी गैर के नहीं बल्कि अपने खुद के सगे बेटे के हाथों में,,, इस बात का एहसास उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था तभी कजरी को अपनी दोनों टांगों के बीच कुछ कड़क चीज महसूस होने लगी,,, कजरी अभी भी कमर के नीचे से पूरी तरह से नंगी थी उसका पेटीकोट गुब्बारे की तरह टंकी के पानी की सतह के ऊपर फुला हुआ था जिसे कजरी चाह कर भी नीचे नहीं कर पाई थी,,, रघु भी जानता था कि पर जाने के अंदर उसका खड़ा लंड सीधे उसकी मां की मखमली बुर के ऊपर दस्तक दे रहा था,,,, रघु को यह अद्भुत सुख संभोग से भी कहीं ज्यादा ऊत्तेजनिया और संतुष्टि भरा एहसास दिला रहा था,,, आखिरकार एक औरत होने के नाते कब तक कजरी अभी दोनों टांगों के बीच कड़क चीज के चुभने का गलत अंदाजा लगाती,,, जैसे ही कचरी को इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बुर्के ऊपर कड़क चीज चोदने वाली कोई और नहीं उसके बेटे का खड़ा लंड है तो इस बात के एहसास से वह पूरी तरह से पानी-पानी हो गई,, और पल भर में ही टंकी के ठंडे पानी के अंदर ही उसकी बुर पानी छोड़ने लगी,,,। कजरी हैरान थी क्योंकि पहली बार हुआ इस कदर मदहोश होते हुए चुदाई का एहसास को महसूस करते हुए झड़ी थी,,,इतनी जल्दी वह कभी भी नहीं झड़ी थी जितनी जल्दी उसके बेटे ने अपने खड़े लंड का एहसास उसकी बुर के ऊपर करा कर उसे पानी छोड़ने पर मजबूर कर दिया था,,,। उत्तेजना के मारे कजरी अपनी सांसो को दुरुस्त नहीं कर पा रही थी,,,। रघु अपने अंदर इतना अत्यधिक ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था कि उसका बस चलता तो इसी समय अपनी मां की दोनों टांगें फैलाकर अपनी खड़े लंड को उसकी नंगी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर दिया होता,, लेकिन शायद अभी उचित समय नहीं था इसलिए वह अपने आप को एकदम वश में कर के रखे हुए था,,, यही हाल कजरी का भी था अगर उसका बेटा अपने हाथों से उसकी दोनों टांगे फैलाकर उसकी चुदाई करने लगता तो शिकायत कैसी उसे रोक पाने में असक्षम थी,,। कचरी अपने आप को संभाल कर पीछे अपने पैर लेते हुए बोली,,,।

ना जाने कैसे पैर फिसल गया,,,,,

हा मा,,,, अच्छा हुआ कि चोट नहीं लगा,,,,।

सही समय पर तूने थाम लिया वरना मैं गिर जाती,,,,

मैं तुमको गिरने नहीं दूंगा,,,, देखो तो सही तुम्हारा पेटीकोट कैसे गुब्बारे की तरफ फूल गया है,,,,(अपने बेटे के मुंह से यह बात सुनते ही वह एकदम शर्म से पानी पानी होने लगी और अगले ही पल रघु अपने हाथों से पानी की ऊपरी सतह पर गुब्बारे जैसी बोली हुई पेटीकोट को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे पानी के अंदर करते हुए बोला,,।) रुक जाओ में ही ठीक कर देता हूं,,,(कजरी एकदम शर्म से थोड़ी जा रही थी क्योंकि उसका बेटा अपने हाथों से उसके नंगे पन को ढकने की कोशिश कर रहा था लेकिन रघु की यह हरकत उसे काफी हद तक उत्तेजित भी कर रही थी रघु पेटीकोट को पानी के नीचे करते हुए अपने दोनों हाथों को उसकी मोटी मोटी जांघों पर रखकर नीचे की तरफ फिसलाने लगा था,,,,रघु को अपनी मां की चिकनी चिकनी जांघों का स्पर्श बेहद मदहोश कर देने वाला लग रहा था,,, और कजरी को भी अच्छा ही लग रहा था देखते ही देखते रघु अपनी मां की पेटीकोट को एकदम सही कर दिया लेकिन उसे छुने का उसके नंगे पन के एहसास को अपने अंदर महसूस करने के सुख को भी प्राप्त कर लिया था,,, कजरी शर्म के मारे अपने बेटे से आंख नहीं मिला पा रही थी,,,

और दूसरी तरफ बिरजू शालू का हाथ पकड़े हुए उसे घनी झाड़ियों के बीच ले गया,,,।

क्या है मुझे इस तरह से यहां लाने का क्या मतलब है,,,?(शालू धीरे से बोली)

क्या तुम्हें नहीं पता एक प्रेमी प्रेमिका को इस तरह से झाड़ियों में क्यों ले जाता है,,,,( बिरजू शालू को अपनी बाहों में भरते हुए बोला,,,)

नहीं मुझे तो बिल्कुल भी नहीं पता,,,,

अभी बताता हूं,,,,(इतना कहने के साथ बिरजू शालू के होठों पर अपने होंठ रखकर चुंबन करने लगा,,, थोड़ी ही देर में सालु भी गर्म होने लगी,,,लेकिन शालू के मन में यही था कि बिरजू उसके बदन की प्यास उसकी गर्मी नहीं मिटा पाएगा,,, इसलिए वह बिरजू के चुंबन का आनंद लेते हुए बोली,,,)

रहने दो काम शुरू तो कर देते हो लेकिन पूरा नहीं कर पाते,,,

आज पूरा करूंगा मेरी जान,,,, आज तुम्हें बीच मझधार में छोड़कर नहीं जाऊंगा,,,,(इतना कहने के साथ ही बिरजू अपने हाथों से सालु के सलवार की डोरी खोलने लगा,,, शालू हैरान भी थी कि आज बिरजू में इतनी ताकत कहां से आ गई इसलिए वह बोली)

क्या बात है आज इतनी हिम्मत कहां से आ गई,,,,।

तुम्हारे प्यार में बहुत ताकत है सालु,,,,(इतना कहने के साथ ही बिरजू सालु के सलवार का नाड़ा को खोल दिया और उसे नीचे घुटनों तक सरका दिया,,, शालू का दिल जोरो से धड़कने लगा झाड़ियों के बीच वह अपने प्रेमी से मिल रही थी और उसमें एकाकार होने जा रही थी उसे डर भी लग रहा था कि कोई देख ना ले इसलिए अपने चारों तरफ नजर घुमाकर देखते हुए बोली,,)

बिरजू अगर किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,।

कुछ नहीं होगा मेरी जान और यहां कोई देखने वाला नहीं है इतनी घनी झाड़ियों के बीच कोई नहीं आता,,, बस अब पीछे की तरफ घूम जाओ अपनी गांड को थोड़ा उठा दो,,,

(बिरजू के मुंह से ऐसा की गंदी बातें शालू को बेहद रोचक लग रही थी इसलिए तुरंत वह वीडियो की बात मानते हुए अपनी गांड को,,, बिरजू की तरफ कर दी और झाड़ियों को पकड़कर अपनी गोलाकार तरबूज जेसी गांड को हवा में उछाल दी,,,, बिरजू तो सालु की गोरी गोरी नंगी गांड देखकर एकदम से उत्तेजित हो गया,,, और तुरंत अपने पजामा का नाड़ा खोल कर घुटनों तक नीचे गिरा कर अपने खड़े लंड को हाथ में ले लिया और,, थोड़ा सा थूक लगाकर उसे सालु की गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रख दिया,,,। सालु की सांसे अटक गईहालांकि उसे अपने छोटे भाई रघु के लंड के स्पर्श जितनी गर्माहट महसूस नहीं हुई लेकिन फिर भी वह बिरजू का मन रखने के लिए उसके साथ संभोग करने के लिए तैयार हो गए थे क्योंकि उसके साथ उसे शादी जो करना था,,, लेकिन इस बार बिरजू गजब की ताकत दिखा रहा था और देखते ही देखते सालु की कमर को पकड़ कर वो धीरे धीरे अपने लंड सालु की गुलाबी बोर के नाम से डालना शुरू कर दिया,,, शालू को धीरे-धीरे मजा आने लगा था देखते ही देखते बिरजू अपना पूरा लंड सालु कि गुलाबी छेद में डाल दिया,,,, और देखते ही देखते वह सालु को चोदना शुरू कर दिया,,,, शालू को मजा आ रहा था,,, महीनों की कोशिश के बाद आज जाकर बिरजू अपने मर्दाना लय में आया था,,।

दूसरी तरफ ट्यूबवेल की टंकी में दोनों मां बेटे आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे हालांकि दोनों संभोग के मंजिल तक नहीं पहुंच पाए थे लेकिन उस सफ़र से गुजर रहे थे और उन्हें इस समय मंजिल से ज्यादा सफर का आनंद मिल रहा था,,, उत्तेजना के मारे कजरी की बुर कचोरी की तरफ फूल चुकी थी,,, पजामे के अंदर होने के बावजूद भी जिस तरह का स्पर्श कजरी को अपने बेटे का लंड अपनी पेड़ के ऊपर हुआ था उसे महसूस करके वह अपने मन में यही प्रार्थना कर रही थी कि काश वह अपने बेटे के नंगे लंड को अपनी बुर पर महसूस कर पाती,,,।

थोड़ी देर बाद वह साबुन लेकर उसे अपने बदन पर लगाने लगी,,, रघु प्यासी नजरों से अपनी मां को ही देख रहा था,,, वाकई में जितनी भी औरतें उसने अपने बेहद करीब देखा था उस में से सबसे ज्यादा खूबसूरत उसे अपनी मां की लग रही थी,, पीठ तक कजरी का हांथ नहीं पहुंच पा रहा था तो रघु अपनी मां से बोला,,,।

लाओ मे लगा देता हूं,,,,,,(इतना सुनकर कजरी अपनी बेटियों को साबुन थमा दी और उसकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई,,, रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था उत्तेजना के परम शिखर पर वह पूरी तरह से विराजमान हो चुका था,,, कांपते हाथों से रघु अपनी मां की पीठ पर साबुन लगाने लगा हालांकि ब्लाउज पहने होने की वजह से वह ठीक तरह से साबुन लगा नहीं पा रहा था और अपनी मां को यह भी नहीं कह पा रहा था कि अपना ब्लाउज उतार दो,,,कजरी के मन में भी यही हो रहा था कि काश उसका बेटा उसे अपना ब्लाउज उतारने के लिए कह दे,,, कुछ देर तक वह उसी तरह से ब्लाउज के ऊपर से ही साबुन लगाता रहा रघु की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया होता ना देख कर कजरी बोली,,,)

साबुन ठीक तरह से नहीं लगा पा रहा है ना,,,।

हां मां ब्लाउज है ना इसके लिए,,,

(रघु की बात सुनते ही कजरी का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसकी बात सुनकर उसने भी ऐसा लग रहा था कि रघु भी शायद यही चाहता है कि वह अपना ब्लाउज उतार दे इसलिए वह बोली,,)

अच्छा रुक जा मैं ब्लाउज थोड़ा ऊपर कर देती हुं,,,(कजरी चाहती तो अपना पूरा ब्लाउज उतारने की बात कर सकती थी लेकिन वह अपने बेटे के सामने इतनी भी ज्यादा बेशर्म नही बनना चाहती थी इसलिए थोड़ा सा लिहाज रख कर वह अपने ब्लाउज को थोड़ा ऊपर करने के लिए बोली थी इसलिए वह अपने ब्लाउज के पीछे के तीन बटन को खोलकर ब्लाउज को ऊपर की तरफ कर दी एक बटन अभी भी ब्लाउज में लगा हुआ था जिसकी वजह से ऐसा लग रहा था कि ब्लाउज पहनी हुई है लेकिन जिस तरह से ब्लाउज को वह अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ कर दी थी उसे सेवकों को लगने लगा था कि उसके दोनों खरबूजे बाहर उछल रहे होंगे और वास्तव में ऐसा ही हो रहा था उसकी दोनों चूचियां पानी में डूबी हुई थी,,, अपने बेटे के इतने करीब रहकर अपने वस्त्रों को इस कदर से अस्त व्यस्त कर के उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,, इस बार कजरी को कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं पड़ी और रघु खुद ही उसकी नंगी पीठ पर साबुन लगाने लगा,,,धीरे-धीरे साबुन लगाने के बहाने रखो अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया इतना करीब कि उसका खड़े लंड उसके लिए तंबू पर हल्के हल्के से स्पर्श होने लगा था जो कि पानी के अंदर भी साफ महसूस हो रहा था,,, कचरी का दिल जोरों से धड़क रहा था,, उसकी सांसे अटक रही थी ट्यूबवेल की पाइप में से पानी दोनों के सिर पर गिर रहा था दोनों भीग रहे थे,,,, रघु मेरे पर इतना ज्यादा आगे की तरफ आ जाता था कि उसका खड़ा लंड पजामे मेंहोने के बावजूद भी कजरी को पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी दोनों गांड की फांकों के बीच चुभता हुआ महसूस हो रहा था,,,। रघु के साथ-साथ कजरी को भी मजा आ रहा था कजरी के मन में इस बात का डर दिखाकर कहीं उसकी बेटी सालु ना आ जाए,,, अपने बेटे के हाथों से साबुन लगवा कर उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,,वह चाहती थी कि उसका बेटा अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी चूचियों पर भी साबुन लगाएं,,, इसलिए वह खुद ही बोली,,,।

आगे भी लगा दे रघु,,,,

(बस फिर क्या था कजरी ने तो रघु के मन की बात बोल दी थी इसलिए वह बिना कुछ सोचे समझे ही अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की छातियों पर साबुन लगाने लगा हालांकि उसकी दोनों चूचियां पानी के अंदर डूबी हुई थी लेकिन फिर भी वह उसे साबुन लगाने के बहाने उसे छुने का आनंद प्राप्त कर रहा था,,,।उसके एक हाथ में शामिल था लेकिन वह दोनों हाथों से अपनी मां की चूची पकड़ कर उस पर साबुन लगाने के बहाने उसे दबा रहा था जो कि यह बात कजरी को भी अच्छी तरह से समझ में आ रहा था लेकिन उसे अपने बेटे के हाथों की हरकत बेहद आनंददायक लग रही थी,,,कजरी के मुंह से हल्की हल्की सिसकारी फूट पड़ रही थी जो कि ट्यूबवेल में से निकल रहे पानी के शोर में दब जा रही थी,,,चारों तरफ हरियाली छाई हुई थी चारों तरफ घनी झाड़ियां के खेतों के बीच में बनाती बगैर किसी भी दूर चलते राही के नजर में नहीं आ सकता था और ना ही दूर दूर तक कोई नजर आ रहा था इसलिए डर उसे सिर्फ अपनी बेटी सालु से था कि वह किसी भी वक्त वहां आ सकती थी,,। रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था उसकी नंगी छाती उसकी मां की नंगी पीठ पर सटी हुई थी उसे अधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,। ट्यूबवेल की पाइप में से पानी बड़ी तेजी से दोनों के ऊपर गिर रहा था जिसकी वजह से अपने आप ही कजरी का पेटीकोट नीचे की तरफ सरक रहा था,, जिसे कजरी संभालने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी,, लेकिन इस बात का एहसास रघु को हो इसलिए वह जानबूझकर बोली,,

मेरा पेटीकोट नीचे सरक रहा है,,,,

पानी की वजह से मां,,,,, पानी इतना ज्यादा है ना और टंकी के अंदर ही इधर उधर उड़ल रहा है इसलिए आपकी पेटीकोट नीचे उतर रही है मेरा पैजामा भी नीचे खसक रहा है,,,।

(अपने बेटे के मुंह से इतनी बात सुनते ही कजरी की बुर फुदकने लगी,,, वह बोली कुछ नहीं वह तो यहीं चाहती थी कि उसके बेटे का पजामा नीचे सरक जाए,,, लेकिन रघु का पैजामा अपने आप नहीं सरक रहा था बल्कि वह खुद अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने पजामे के नाड़े को खोल रहा था,,, रघु अपनी इस खुद की हरकत पर अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,। उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह अपना पजामा खोल कर अपनी मां को चोदने जा रहा है,,, हालांकि अपने हाथ की हरकत को अपनी मां की चुचियों पर जारी रखें हुए था,, ब्लाउज का एक बटन बंद होने के बावजूद भी रघु के हाथों में कजरी की दोनों चूचियां बड़ी आसानी से आ जा रही थी लेकिन कजरी की चूचियां काफी बड़ी थी खरबूजे के आकार की लेकिन उसमें ढीलापन बिल्कुल भी नहीं था एकदम जवान लड़की की तरह एकदम टाइट और कड़क थे लेकिन दबाने पर एहसास होता था कि जैसे दशहरी आम,,,, रघु को आनंद ही आनंद मिल रहा था,,,कजरी लगातार अपने नितंबों पर अपने बेटे के मुसल की रगड़ को महसूस करके काफी उत्तेजित हुए जा रही थी,,,अब तो रघु ने अपनी पजामे का नाड़ा खोल कर उसे नीचे कर दिया था और पानी के अंदर उसका लंड एकदम नंगा हो चुका था कचरी को अपने बेटे की इस अद्भुत हरकत का एहसास तब हुआ जब रघु उसकी दोनों चूचियों पर साबुन लगाते हुए,,, उसके बेहद करीब आ गया इतना करीब कि उसका खड़ा लंड उसकी दोनों टांगों के बीच सीधे-सीधे उसकी बुर वाली जगह पर रगड़ खाने लगी,,, कजरी के तन बदन में अजीब सी कुलुकुलाहट होने लगी,,, कजरी को अपने बेटे के लंड की ताकत और उसकी लंबाई का अंदाजा इससे ही लग गया कि उसके पीछे पड़ा था लेकिन फिर भी उसकी दोनों टांगों के बीच से होता हुआ उसका लंड सीधे दिल के ऊपर मानो उसकी बुर की गुलाबी फांको पर चुंबन कर रहा हो और वहां तक बड़ी आसानी से पहुंच गया था,,,, इस अहसास से कजरी के तनबदन में झुंनझुनी फैलने लगी,,, रघु अपने दोनों हाथों से अपनी मां की दोनों चूचियों को मसल रहा था अब वह साबुन नहीं लगा रहा था बल्कि उसकी चूचियों की मालिश कर रहा था जो कि ट्यूबवेल की पाइप में से पानी सीधे उसकी छातियों पर ही गिर रहा था जिससे कजरी की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,, कजरी का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसकी टांगों के बीच उसके बेटे का लंड बिल्कुल नंगा है और उसकी नंगी बुर पर दस्तक दे रहा है,,, कजरी अपनी सांसो को दुरुस्त नहीं कर पा रही थी उसकी सांसें उखड़ने लगी थी,,,।

रघु तो मानो सातवें आसमान में उड़ रहा हूो वह अपनी मां की दोनों चुचियों को पकड़कर इन सूचियों का सहारा लेकर अपनी मां की नंगी पीठ के साथ-साथ उसके नितंबों पर एकदम से सट गया था,,,,और उसका लंड उसकी दोनों टांगों के बीच से गुजरता हुआ सीधे उसकी बुर के ऊपरी भाग पर स्पर्श कर रहा था,,,। टंकी पानी से लबालब भरी हुई थी और दोनों की अंदर मौजूदगी की वजह से पानी में ज्वार भाटा की तरह हलन चलन हो रहा था जिसका फायदा रघु को बराबर मिल रहा था क्योंकि उसका बदन इस तरह से हील रहा था मानों जैसे वह अपनी मां की चुदाई कर रहा हो,,। और रघु की मां कजरी भी उसका साथ बराबर देते हुए टंकी के दीवाल को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी गांड को उसकी तरफ ही ऊचकआए हुए थी,,,, दोनों को मजा आ रहा था,,,, बरसों के बाद कजरी की सूखी जमीन पर ओस की बूंदे गिला कर रही थी,,,

रघु बराबर से साबुन लगाने के बहाने अपनी मां की दोनों चूचियों से जी भर कर खेल रहा था उन्हें अपने हाथ में लेकर उन्हें दबाने का मजा उसे बेहद संतुष्टि प्रदान कर रहा था ,,हालांकि वह अपनी मां की चूचियों को अपनी आंखों से देख नहीं पा रहा था क्योंकि उसकी मां की पीठ उसकी तरफ थी और वह दोनों हाथ आगे की तरफ लाकर उसकी चूचियों को दबा रहा था जो कि टंकी के पानी में पूरी तरह से डुबी हुई थी,,।अपने बेटे के हाथों द्वारा स्तन मर्दन का आनंद लेते हुए कजरी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी निकल जा रही थी लेकिन ऊपर माथे पर पानी गिरने की वजह से उसकी आवाज रघु के कानो तक नहीं पहुंच पा रही थी।

रघु के दोनों हाथों में लड्डू तो नहीं लेकिन लड्डू से भी बेशकीमती और स्वादिष्ट उसकी मां की चूचियां और नीचे दोनों टांगों के बीच लंड की रगड़ जोकि उसकी मां की बुर्के मुहाने तक रगड खा रहा था जिससे प्रभु की उत्तेजना और ज्यादा प्रज्वलित हो रही थी,,,।

बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा था,,,ना तो कजरी नहीं और ना ही रघु ने कभी सपने में भी सोचा था कि दोनों मां-बेटे इस तरह से एक साथ लगभग लगभग नग्न अवस्था में ट्यूबेल की टंकी में नहाएंगे,,, कजरी की हालत खराब हो रही थी क्योंकि बरसो के बाद किसी मर्दाना लंड ने उसकी बुर को छुआ था जिससे वह पानी में भी पानी पानी हो रही थी,,,,रघु के लंड की रगड उसकी बुर के ऊपर इतनी ज्यादा दबाव डाल रही थी कि ना चाहते हुए भी उसकी बुर ने दूसरी बार पानी फेंक दिया,,, अद्भुत अतुल्य चरम सुख का अहसास कजरी को हो रहा था,,। कजरी बादलों में उड़ रही थी उसके मन में यही हो रहा था कि जितनी हिम्मत है उसका बेटा दिखा रहा है काश और हिम्मत दिखाते हुए अपने लंड को उसकी बुर में डाल देता,,,,, और यही मन रघु का भी कर रहा था जिस तरह से अपने लंड को अपनी मां की बुर पर रगड़ रहा था उसकी इच्छा भी हो रहा था कि वह अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसे चोदना शुरू कर दे,,। लेकिन इसे आगे बढ़ने की दोनों की हिम्मत नहीं हो रही थी शर्म और हया दोनों को आगे बढ़ने से रोक रही थी कजरी तो शायद अपने मन पर काबू कर पाने में असमर्थ साबित हो रही थी और वह खुद ही अपने बेटे को अपनी बुर में लंड डालने के लिए बोल देती लेकिन उसे इस बात का डर था कि कहीं शालू ना आ जाए और काफी समय भी हो रहा था,,,,

सालु अपनी मां से सौच करने को बोल कर गई थी,,उसे गए काफी समय हो गया था इसलिए कजरी का दिल जोरों से धड़क रहा था उसे डर था कि कहीं शालू आ ना जाए और उन दोनों को इस हाल में ना देख ले,,,, इसलिए वह रघु को रोकते हुए बोली,,,,।

बस बेटा,,,,, मैं नहा ली हूं अब मुझे बाहर निकलना चाहिए वरना पानी ज्यादा ठंडा है कहीं सर्दी लग गई तो बुखार आ जाएगा,,,,

(इतना कहकर वह निकलने को हुई तो तभी उसे याद आया कि ऊसकआ पेटीकोट तो नीचे सरक गया है और वह नीचे जो करो पानी सकती थी क्योंकि ऐसा करने से उसे पानी में अपना मुंह डालना पड़ता ऐसा उससे नहीं हो पाता इसलिए वह रघु से बोली,,,)

रघु मेरी पेटी कोट नीचे गिर गई है तू जरा पानी में घुस कर निकाल दे,,,

(इतना सुनते ही रघु पानी में डुबकी लगाने और नीचे हाथ डालकर अपनी मां की पेटीकोट को उठाने लगा लेकिन इस दौरान ,,, अनजाने में ही उसका सर उसकी मां की दोनों टांगों के बीच रगड़ खाने लगा कजरी को अपने बेटे का सिर अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी फुली हुई बुर के ऊपर महसूस होते ही एक बार फिर से वह उत्तेजित होने लगी,,, एक बार फिर से उसके बदन में कशमसाहट की तरंगे फैलने लगी,,,, जैसे ही इस बात का आभास रघु को हुआ इस मौके का फायदा उठाते हुए वह अपना मुंह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच कर दिया जिससे उसकी नाक सीधे कजरी की बुर की पतली दरार के बीच रगड़ खाने लगी,,।

एक बार फिर से कजरी के बदन में कंपन होने लगा और रघु का लंड और ज्यादा कड़क हो गया,,, ज्यादा देर तक रघु अपनी इस हरकत को जारी नहीं रख सकता था इसलिए तुरंत वह अपनी मां की पेटीकोट को हाथ में लेकर ऊपर आ गया,,, कजरी अपने बेटे से नजर तक मिलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी,,,। हालांकि जब वो पानी में डुबकी लगाया था तब वह अपने ब्लाउज के सारे बटन बंद कर ली थी,,, रघु अपनी मां को पेटीकोट थमाते समय उसके ब्लाउज को देखा था लेकिन उसे निराशा हाथ लगी थी,,, कजरी अपने हाथ में पेटीकोट पकड़कर अजीब सी दुविधा में फंसी हुई थी क्योंकि इस हालत में बाहर निकलने का मतलब था कि वह पूरी तरह से नंगी थी और वह इस हालत में अपने बेटे की आंखों के सामने नंगी नहीं दीखना चाहती थी इसलिए वह पेटिकोट का अपने सिर के ऊपर से डालकर पहनने लगी,,, और टंकी से बाहर आकर अपने कपड़े पहन कर वहां से चलती बनी वह अपने बेटे से नजर तक मिला नहीं पा रही थी लेकिन एक मलाल उसके मन में रह गया था कि अपने बेटे के खड़े मोटे लंड को अपनी गांड पर और अपनी बुर पर महसूस कर चुकी थी लेकिन उसे अपने हाथ में पकड़ कर उसकी गर्माहट को उसकी लंबाई को नाप नहीं पाई थी,,,

दूसरी तरफ रघु भी अपना हाथ मलता रह गया था आज उसे जो सुख मिला था वह बेहद अद्भुत था और कल्पना से बिल्कुल परे था दूसरी तरफ शालू अपने प्रेमी बिरजू से चुदवा कर वापस लौट आई थी,,,, रघु को वहां अकेला देख कर बोली,,,।

मां कहां गई,,,

वह तो नहा कर कब से चली गई,,,, लेकिन दीदी मेरा मन बहुत कर रहा है तुम्हारी लेने के लिए,,,

यहां पर,,,,

तो क्या इस टंकी में पानी के अंदर बहुत मजा आएगा,,,, तुम अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर अंदर आ जाओ यहा कोई देखने वाला नहीं है,,,,।

(अपनी भाई की बात सुनकर उसके तन बदन में भी सुरसुरा हट होने लगे और उसकी बुर में खुजली होने लगी जो कि कुछ देर पहले ही अपने प्रेमी के लंड को लेकर आई थी लेकिन अपने भाई के प्रस्ताव से वहां इनकार नहीं कर पाई और तुरंत अपने सारे कपड़े उतार कर वही रख दी ,,और नंगी हो गई अच्छी तरह से जानती थी कि यहां कोई आने वाला नहीं है इसलिए वह पूरी तरह से निश्चिंत थी और अकेले ही बनवा भी टंकी के अंदर उतर गई जहां पर एक बार फिर से रघु अपनी बड़ी बहन की बुर में पीछे से अपना लंड डालते हुए से चोदना शुरू कर दिया पानी के अंदर चुदाई का उन दोनों का पहला मौका था और बेहद उत्तेजक तरीके से अपनी बहन को चोद रहा था,,,)
 
आहहहहहह आहहहहहह,,,,,ऊईईईईईईईई,मां,,,,,,,, मार डाला रे,,,, क्या खाया है आज तूने,,,,,,ऊफफ,,,,,आहहहहहह,,,,

(शालू के मुंह से लगातार सिसकारी के साथ-साथ दर्द भरी कराहने की आवाज भी निकल रही थी,,, वाकई में ऐसा लग रहा था कि आज रघु में घोड़े की शक्ति आ गई है,,,और यह सब उसकी मां कजरी कीमत मस्त जवानी का नतीजा उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी की खुशबू वह महसूस कर चुका था उसके बदन की गर्मी को अपने अंदर तपता हुआ महसूस कर चुका था,,, गजब की ताकत और लय दिखा रहा था रघु,,, पानी के अंदर भी गजब की फुर्ती का प्रदर्शन हो रहा था ,,, तेज गति से आगे पीछे हो रही रुकी कमर की वजह से छोटे से टंकी में भी लग रहा था जैसे पानी का सैलाब उठ रहा हो,,, शालू के चेहरे पर उत्तेजना मदहोशी उत्साह और आश्चर्य जनक का संपूर्ण भाव नजर आ रहा था उसका मुंह खुला का खुला रह गया था मानो बुर के अंदर घुसा लंड मुंह से बाहर आ जाएगा,,,, भले ही रघुअपनी बड़ी बहन शालू को चोद रहा था लेकिन उसके मन में शालू के बदन की जगह उसकी मां का खूबसूरत जिस्म ही था,,, जिसे भोगने की चाह में वह अपने अंदर घोड़े की स्फूर्ति और ताकत महसूस कर रहा था,,,, आखिरकार साधु एक बार फिर से अपना पानी छोड़ दी और कुछ देर बाद रघु भी अपनी बहन की बुर में ही भलभला कर झड़ गया,,,।

घर पर पहुंचने तक और पहुंचने के बाद भी कजरी की बुर टंकी के अंदर के दृश्य को याद करके पानी छोड़ रही थी,,,

वह आईने में अपना चेहरा देख कर उस पर फैली शर्म की लाली को देखकर खुद ही शर्मा गई,,, आज से पहले उसने अपनी जवानी की शुरुआत से लेकर अब तक इस तरह की उत्तेजना का अनुभव कभी नहीं कर पाई थी,,, अपने बालों को संवारते हुए बार-बार कजरी को अपने दोनों टांगों के बीच अपनी बुर के ऊपर अपने बेटे के खड़े लंड के कड़क पन का एहसास हो रहा था जो कि यह एहसास उसके तन बदन में अजीब सी चिकोटि काट रहा था,,, कजरी कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी पल आएगा कि जब वह अपने बेटे के सामने इस तरह से पूरी तरह से बेशर्मी का खुला प्रदर्शन करेगी भले ही ऐसा करने में उसे थोड़ी बहुत शर्म का एहसास हो रहा था लेकिन उसे अद्भुत आनंद की अनुभूति भी हो रही थी जिससे वह इंकार नहीं कर पा रही थी,,,अभी भी वह उस पल के बारे में सोच कर उत्तेजना से गदगद हो जा रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुसते घुसते रह गया,,,, कजरी को इस बात का एहसास हो गया था कि उसका बेटा नादान बिल्कुल भी नहीं था उसे औरत और मर्द के बीच इस तरह के छेड़छाड़ और आकर्षण के बारे में पूरी तरह से मालूम था तभी तो उसकी मौजूदगी में उसके बेटे का लंड इस कदर खड़ा और कड़क हो गया था अगर उसके अंदर इस तरह की अनुभूति और ज्ञान नहीं होता तो उसका लंड बिल्कुल खड़ा नहीं होता,,, इसका मतलब साफ था कि टंकी के अंदर जो कुछ भी हो रहा था उससे उसके बेटा पूरी तरह से उत्तेजित था और पूरी तरह से समझता भी था,,,, आईने में अपने बालों को कंघी से संवारते हुए कजरी के मन में भावनाओं के साथ साथ प्रश्नों का बवंडर उठ रहा था,,, जिसमें वह पूरी तरह से फंस चुकी थी और उसमे से निकलने का रास्ता ढूंढ रही थी,,,। उसके अंदर उठना एक सवाल बार-बार उसके दिमाग और उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था कि क्या वाकई में उसका बेटा उसको चोदना चाहता था,,,इतना तो अच्छी तरह से समझते थे कि जो कुछ भी उसका बेटा उसके साथ कर रहा था या टंकी में जो कुछ भी हो रहा था अनजाने में तो बिल्कुल भी नहीं हो रहा था,,, जिस तरह से वह उसकी चूचियों पर साबुन लगा रहा था,,,आमतौर पर इस तरह से कोई भी साबुन नहीं लगाता बल्कि उसका बेटा साबुन नहीं लगाया था बल्कि साबुन लगाने के बहाने उसकी चूचियों से खेल रहा था उसे जोर जोर से दबा रहा थाना उससे आनंद ले रहा था तभी तो पल भर मे ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होकर उसके नितंबों पर ठोकर मार रहा था,,, और टांगों के बीच घुस कर अपने लिए जगह तलाश कर रहा था,,, कजरी यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि उसका बेटा इस बात से भी भली-भांति अवगत था कि नीचे उसका लंड उसकी मां के कौन से अंग पर रगड़ खा रहा है और ठोकर मार रहा है,,,, यह सब सोचकर कजरी इसी निष्कर्ष पर आ रही थी कि,,, उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो चुका है और उसे चोदने के लिए बुर चाहिए थी तभी तो वह उसके साथ इस तरह की कामुक हरकत कर रहा था,,,,यह सब सोचकर कजरी का दिमाग एकदम से चकराने लगा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और उसकी बुर पूरी तरह से पानी-पानी हो रही थी जिसे वह अपनी ही पेटीकोट से साफ कर रही थी,,।

थोड़ी देर में शालू और रघु भी घर पर पहुंच गए शालू तो लोगों के साथ पूरी तरह से सहज थी लेकिन कजरी अपनी बेटे के साथ असहज महसूस कर रही थी शर्म के मारे उसे आंख तक नहीं मिला पा रही थी,,,

दूसरे दिन सुबह ही शालू को उल्टी होने लगी,,,, शालू को उल्टी करता हुआ देखकर उसकी मां उसे एक लोटा पानी भर कर ला कर दी और वह फिर से सामान्य हो गई लेकिन 1 घंटे बाद फिर से वह उल्टी करने लगी,,, लेकिन अब कजरी का दिन जोरो से धड़कने लगा उसका दिमाग घूमने लगा अनुभव से भरी हुई कजरी को इतना समझ में आ गया था कि शालू जिस तरह की उल्टी कर रही है वह बिल्कुल सामान्य नहीं है,,,। कजरी एकदम से घबरा गई थी,,,, वह शालू के पास गई और बोली,,,

यह सब क्या है सालु,,, तुझे कैसा लग रहा है,,,

मुझे अजीब सा लग रहा है मां चक्कर आ रहा है,,, बार बार उल्टी हो रही है,,,, लगता है खाना पचा नहीं है,,,।

(सालु की बात सुनते ही कजरी उसका हाथ पकड़कर घर के अंदर ले गई और उसे खटिए पर बैठा कर उसे डांटते हुए बोली,,,)

देख मुझसे झूठ मत बोल,,, यह उल्टी जो तू कर रही है यह सामान्य बिल्कुल भी नहीं है,,,।

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है मां की तु क्या बोल रही है,,,।(इस बात का अंदाजा शालू को भी बिल्कुल नहीं था इसलिए वह आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

जिस तरह से तू उल्टी कर रही है यह सब तेरे पांव भारी होने की निशानी है तु पेट से है,,,,(कजरी एकदम गुस्से से बोली,, और यह सुनते ही शालू के पैरों तले से जमीन खिसकने लगी उसे चक्कर आने लगा,,,, वह हैरान होते हुए बोली,,)

यह तुम क्या कह रही हो मां,,,, ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता,,,,

भगवान करे ऐसा बिल्कुल भी ना हो लेकिन निशानी तो सब वैसे ही है,,,, बता सालु,,,,, तेरे पेट में पल रहा बच्चा किसका है,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर सालु को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, शालू के पास अपनी मां के सवाल का जवाब बिल्कुल भी नहीं था वह क्या बोलती खामोश रही,,, वह तो कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि ऐसा दिन भी आएगा,,,, शालू को इस तरह से खामोश बैठी देखकर कजरी गुस्से में चिल्लाते हुए बोली,,,)

बोल हरामजादी खामोश क्यों है,,,, किससे मुंह पर कालिख पोतवा कर आई है,,,।(कजरी शालू की बांहों को पकड़कर उसे झकझोरते हुए बोली,,,,पहली बार शालू अपनी मां के मुंह से अपने लिए इस तरह की गाली सुन रही थी और पहली बार कजरी अपने ही बेटी पर इस तरह से गुस्सा हो गई थी बात ही कुछ ऐसी थी,,, अगर यह बात बाहर पहुंच जाए तो तो कजरी किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाती,,,, फिर भी शालू खामोश थी अब वह अपनी मां से क्या कहती,,, शालू की खामोशी कजरी के दिल में शुल की तरह चुभ रही थी ,,, इसलिए कजरी एक मोटा सा डंडा उठा ली,,, यह देखकर शालू घबरा गई,,,)

बताती है या इस डंडे से तेरी चमड़ी निकाल लु,,,(कजरी एकदम क्रोधित होते हुए बोली और शालू अपनी मां का गुस्सा देखकर डर गई और अपने मन में सारी गणित लगाने लगी वह चित्र से जानती थी कि उसका छोटा भाई राकू ही दिन रात की चुदाई करता आ रहा था,,, और बिरजू तो कल हीं पहली बार ही सफलतापूर्वक उसके चुदाई कर पाया था,,। 1 दिन की चुदाई से दूसरे दिन ही गर्भ रहने का सवाल ही नहीं उठता था,,, यह सब अपने मन में सोचते हो सालु एकदम से घबरा गई क्योंकि जो उसकी मां कह रही थी अगर इस बात में सच्चाई है तो उसके पेट में उसके ही भाई का बच्चा था,,,। सानू की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा उसे कुछ सूझ नहीं रहा था लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं कर सकती थी कि बिना किसी से संभोग किए उसके पेट से होने का तो सवाल ही नहीं उठता था,,, और यह बात उसकी मां अच्छी तरह से जानती थी कि शालू और बिरजू दोनों के बीच प्रेम संबंध है और जाहिर है कि ऐसे में शारीरिक संबंध होना लाजमी था ,,,। इसलिए सालों रोते हुए बोली,,,)

मेरी इसमें कोई गलती नहीं है ,,,, बिरजू,,,,, बिरजू का ही दोष है,,,,,।

यह सुनते ही कजरी एक डंडा शालू की पीठ पर मारते हुए बोली,,,,

हरामजादी कुत्तिया शादी तक रुक नहीं सकती थी अगर उस बड़े बाप की औलाद है ना तेरा हाथ थामने से इंकार कर दिया तब क्या करेगी तू कहां जाएगी यह बात समाज से कैसे छुपाएगी,,,, इसके बारे में जरा भी सोची थी तु,,,

मुझे माफ कर दो,,,मां,,,,,,, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,।

(शालू अपनी मां के आगे हाथ जोड़ते हुए रो रही थी और उससे बोल रही थी अपनी बेटी को इस तरह से रोते हुए देख कर एक मां का दिल एकदम से व्यतीथ हो गया,,, और वह शालू को अपने गले लगा कर रोने लगी,,, और रोते हुए अपनी बेटी को दिलासा देते हुए बोली,,,)

मैं जानती हूं बेटी इस में तेरी कोई गलती नहीं है उस बड़े बाप की औलाद की ही गलती है,,,, तू चिंता मत कर मैं कोई ना कोई रास्ता जरूर निकाल लूंगी,,,, और हां इस बारे में किसी को जरा भी कानो कान भनक नहीं लगनी चाहिए सब कुछ वैसे ही चलते रहना चाहिए मानो सब कुछ सामान्य है,,,, में खेतों में जा रही हूं,,,, तू आराम कर और किसी को भी यह बात मत बताना,,,,,(कजरी यह कह कर उठते हुए) अब जल्दी ही जमीदार से बात करनी होगी,,,

(इतना कहकर कजरी खेतों की तरफ चली गई और साधु वहीं बैठी सुबकते रही,,,, रघु इधर उधर से घूमकर घर पर आया और सालों को इस तरह से रोता हुआ देखकर एकदम से परेशान हो क्या और उसके करीब जाकर उसका दोनों हाथ अपने हाथों में लेकर बोला,,,)

क्या हुआ दीदी तुम रो क्यों रही हो,,,?

( रघु की बात सुनकर सालु बोली कुछ नहीं बस रोए जा रही थी,,, यह देखकर बार-बार रखो उसे समझा रहा था लेकिन सालु थी कि कुछ बोलने को तैयार नहीं थी,,, इस‌ समय ना जाने क्यों उसे रघु पर गुस्सा आ रहा था,,,)

बोलो ना दीदी क्या हुआ अगर बोलो कि नहीं तो पता कैसे चलेगा,,,

(इतना सुनकर वह रघु की तरफ गुस्से से देखने लगी,,, रघु को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी बहन ऐसा क्यों कर रही है,,,)

मुझे क्यों गुस्से से देख रही हो बताओगी भी क्या हुआ,,,?

यह सब तेरी वजह से हुआ है,,,(शालू रोते हुए बोली)

मेरी वजह से क्या हुआ है मेरी वजह से,,,(रघु आश्चर्य जताते हुए बोला)

तुम्हारी वजह से मैं पेट से हो गई हूं,,,,(शालू रोते हुए एकदम से शर्मा कर दूसरी तरफ मुंह करके बोली,,,, इतना सुनकर रघु के भी हाथ पांव सुन्न हो गए,,,,)

यह क्या कह रही हो दीदी,,,

सच कह रही हूं,,,

लेकिन यह कैसे हो गया,,,,?

यह भी बताना पड़ेगा,,,,

लेकिन इसमें मेरा तो कसूर नहीं है,,,।

देख कसूर तेरा हो या मेरा लेकिन भुगतने को तो मुझे ही है,,,

(दोनों भाई बहन एकदम परेशान थी दोनों को कुछ भी सूझ नहीं रहा था दोनों खामोश होकर खटिए पर एक साथ बैठे हुए थे दोनों में जवानी की आग बुझाने के लिए एक दूसरे के बदन का सहारा लिया दोनों पूरी तरह से एक दूसरे से मस्ती का आनंद लिया,,, लेकिन दोनों ने कभी यह नहीं सोचा था कि उन दोनों का यह वासना से भरा खेल एक दिन यह मोड़ भी ले लेगा,,,शालू अपने भाई से रोज मौका मिलते ही चुदवाती हुई है रघु भी अपनी बड़ी बहन को उसकी गर्म जवानी के मदहोशी में मदहोश होकर उसे चोदता रहा लेकिन दोनों को नहीं पता था कि दोनों का यह वासना भरा खेल इस अंजाम तक पहुंच जाएगा कि सालु के पांव भारी हो जाएंगे,,,, दोनों खामोश थे शालू की आंखों से आंसू गिरना बंद हो गया था लेकिन उसका दिल रो रहा था अपने आप को कोस रही थी उस पल को कोस रही थी जब वह अपने भाई के प्रति आकर्षित हुई थी,,, शुन्य मनस्क होकर,,, सालु सामने की दीवार की तरफ देखते हुए बोली,,,।)

अब क्या होगा रघु,,, आज नहीं तो कल समाज को इस बारे में पता चल ही जाएगा तब लोग पूछेंगे तो मैं क्या कहूंगी क्या जवाब दुंगी,,,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तेरी मैं कुछ सोचता हूं,,,

क्या सोचेगा तू करते समय बिल्कुल भी नहीं सोचा तो अब क्या सोचेगा,,,,।

तुम तो देखने से कह रही हो कि सारी गलती मेरी ही है मैं तो कोई तुम्हारे साथ जबरदस्ती तो किया नहीं था,,,, जो कुछ भी हुआ था आकर्षण के चलते हुआ था,,,,

यही तो रोना है रघु,,, अगर किसी को इस बारे में पता चल गया की हम दोनों के बीच अवैध संबंध के चलते ऐसा हुआ है तो हम लोग बर्बाद हो जाएंगे मां तो मर ही जाएगी,,,,(शालू रोते हुए बोली)

नहीं नहीं तेरी ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मैं ऐसा नहीं होने दूंगा,,,, तुम सिर्फ मुझे एक बात बताओ,,, क्या तुम्हारी और बिरजू के बीच कुछ हुआ है,,,,

(रघु के मुंह से यह सवाल सुनकर शालू फिर से रघु को गुस्से से देखने लगी,,)

दीदी गुस्सा करने का वक्त नहीं है जो मैं पूछता हूं वह बताओ,,,

(इस बार शालू बोली कुछ नहीं बस हां मै सिर हिला दी,,)

कब,,,, मतलब कितना दिन हुआ,,,।

कल ही तो,,,

क्या कल,,,,,(रघु आश्चर्य जताते हुए बोला क्योंकि अभी तक उसे ऐसा लगता था की शायद यह सब बिरजू की वजह से हुआ हो,,,इन दोनों के बीच कल ही हुआ था तो संभव था कि जो कुछ भी हुआ है वह उसी के वजह से हुआ है,,, रघु अपने मन में यह सब सोच रहा था और कल वाली बात सुनकर सालु से बोला,,,)

कल तो तुम मेरे और मां के साथ खेत पर ही काम कर रही थी घर पर आ गई इसके बाद कहीं गई नहीं तो कल कैसे हो गया,,,,

( रघु के ईस सवाल पर शालू को शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि भले ही दोनों के बीच शारीरिक संबंध का रिश्ता था लेकिन फिर भी दूसरों के साथ के संबंध के बारे में बताने में उसे शर्म महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी वह रघु से बोली,,)

कल जब टंकी में नहाने के लिए जा रहे थे तब मैं एक बहाने से वहां से चली गई थी,,,, बिरजू ने ही मुझे इशारा करके बुलाया था,,,, और खेतों में ले जाकर,,,(इतना काकरवा खामोश हो गई,,,, )

चलो कोई बात नहीं अच्छा ही हुआ कि तुमने उसके साथ चुदवा ली,,,, क्योंकि अब हम दावे के साथ कह सकते हैं कि तुम्हारे पेट में बिरजू का ही बच्चा है ,,,। और यह सुनकर जमीदार अपने बेटे की शादी तुमसे कराने के लिए राजी हो जाएगा,,,

अगर ऐसा नहीं हुआ तो अगर वह इनकार कर दिया तो,,,

ऐसा नहीं होगा,,, बिरजू की शादी तुमसे ही होगी मुझे मालकिन पर पूरा विश्वास है,,,,

(रघु की बातें सुनकर सालु को कुछ राहत महसूस हुई,, तो रघु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

मां को इस बारे में पता है,,,।

हां उनसे ही तो मुझे पता चला,,,

मां क्या बोली,,,

वो तो मुझ पर बहुत गुस्सा कर रहे थे लेकिन फिर भी बोली कि सब सही हो जाएगा,,,

फिर क्यों चिंता करती हो,,,, सब सही हो जाएगा,,,,

रात को खाना खाते समय कजरी अपने बेटे रघु से बोली,,।

रखो अब हमें देर नहीं करना चाहिए जल्द से जल्द शालू के हाथ पीले हो जाए तो गंगा नहाए समझ लो,,,,

इतनी जल्दी क्या है मां,,,(रखो अपनी मां की बात को कहने का मतलब अच्छी तरह से समझ रहा था लेकिन फिर भी सोच रहा था कि देखे ही उसकी मां क्या कहती है,,,)

नहीं नहीं शालू अब बड़ी हो गई है शादी की उम्र निकली जा रही है जल्द से जल्द उसका शादी कर देना चाहिए तो अपनी मालकिन से बात कर और जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी शादी का इंतजाम कर दे,,,,

(रघु अपनी मां के चेहरे पर चिंता की लकीरों को अच्छी तरह से पढ़ रहा था मैं जानता था कि एक कुंवारी लड़कियों का बिन ब्याही मां बन जाना मां बाप के लिए कितना कष्ट दायक होता है,,,)

तुम चिंता मत करो मा मैं दो-तीन दिन में ही मालकिन से बात कर लेता हूं और सब कुछ तय कर लेता हूं,,,,

सोते समय जब कजरी सो गई इसके बाद शालू उठकर रघु के पास आई,,, यह देख कर रघु चुटकी लेते हुए बोला,,,।

क्या दीदी आज भी लेना है क्या तुम्हें,,,

बदमाश कहीं का,,,,मैं लेने नहीं मैं तुझसे यह कह रही हूं कि क्या बिरजू मान जाएगा कि मेरे पेट में उसका ही बच्चा है अभी 1 दिन तो हुआ है,,,

मान जाएगा दीदी,,, मैं जानता हूं उसे यह सब गणित बिल्कुल समझ में नहीं आएगा उसे बस इतना ही समझ में आता है कि वह तुम्हारी चुदाई कर चुका है,,,,(चुदाई वाली बात सुनकर शालू शर्मा गई,,,,) बस इतना ही काफी है,,, और वैसे भी वह अपने मां-बाप से यह तो नहीं कह पाएगा ना कि मैं कल ही सालु को चोदा हुं,,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो दीदी,,,, जाकर सो जाओ और अगर नींद नहीं आ रही है तो एक बार फिर से चढ जाओ,,, शादी के बाद फिर ना जानें कब मौका मिले,,,।

यह मुसीबत कम है क्या,,,?

(इतना कह कर सालु वहां से चली गई और सो गई,,)
 
कजरी को बहुत चिंता हो रही थी,,, और चिंता होना लाजमी था क्योंकि वह शालू की मां थी,, वह नहीं चाहती थी कि उसकी बदनामी हो समाज में नाम खराब है और शादी में किसी भी प्रकार की दिक्कत पैदा हो,,, वह तो भगवान से मन ही मन रोज प्रार्थना करती थी कि कैसे भी करके शालू की शादी हो जाए बस,,,, जैसे जैसे दिन गुजर रहा था वैसे वैसे कजरी की चिंता बढ़ती जा रही थी,,, वह रोज रघु को जमीदार से शादी की बात करने को कहती और रघु भी दोनों मालकिन को जमीदार के ऊपर शादी का दबाव बनाने के लिए कहती रहती थी,,,, लेकिन दोनों की हिम्मत नहीं होती थी कि वह जमीदार को शादी की बात कर सके और वह भी शालू के साथ क्योंकि वह दोनों भी अच्छी तरह से जानती थी कि रघु के परिवार में और उनके परिवार में जमीन आसमान का फर्क था,,,,

लेकिन जमीदार की बीवी रात के समय जब जमीदार उसके साथ संभोग रत थे,,, जमीदार की बीवी सालु की शादी की बात छेड़ते हुए बोली,,,,।

आपसे एक बात करनी थी,,,,(जमीदार के झटको की वजह से हक लाते हुए उसकी आवाज निकली)

क्या बात करनी थी,,,,(जमीदार अपनी कमर को हिलाते हुए बोला)

शादी की बात करनी थी,,,

किसकी शादी,,,,

अरे विरजू की और किसकी,,, मेरी नजर में एक लड़की है बहुत सुंदर,,,, उसका नाम शालू है,,, अपने गांव की कजरी की लड़की,,,,

कजरी की,,,,(अपने धक्को पर काबु करते हुए जमीदार बोला,,,)

हां बहुत ही अच्छा परिवार है,,, अरे उसी की बड़ी बहन,,, जो तांगे से मुझे मेरे मायके लेकर गया था,,,,

तुम पागल हो गई हो,,,, हमारी और उसकी बराबरी कर रही हो,,,, यह बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है,,,(जमीदार अपने दोनों हाथों का कसाव अपनी बीवी की चूचियों पर बढ़ाता हुआ बोला,,,)

पर एक बार देखने में क्या हर्ज है मुझे पूरा यकीन है कि एक बार उसको देखोगे तो आपका इरादा बदल जाएगा,,,।(जमीदार को अपनी बाहों के घेरे में करते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं मेरा इरादा कभी नहीं बदलने वाला,,, और वैसे भी मैं अपने समधी को वादा कर चुका हूं क्योंकि उन्होंने भी मुझे एक लड़की के बारे में बताया है वह भी ऊंचे घराने की तो नहीं लेकिन उनके कहे अनुसार बहुत सुंदर है,,, अब मैं उनकी बात नहीं काट सकता,,,(जमीदार अपनी कमर की रफ्तार को बढ़ाता हुआ बोला,,,)

मेरी जुबान का क्या,,,, मैं भी उससे वादा कर चुकी हूं कि बिरजू की शादी उसकी बहन से ही होगी और वैसे भी अपना बिरजू उससे प्रेम करता है,,,।

(अपनी बीवी की यह बात सुनकर जमीदार थोड़ा सा परेशान हो गया लेकिन फिर अपने आप को संभालते हुए और अपने लंड को अपनी बीवी की बुर में पेलते हुए बोला)

तो क्या हुआ प्रेम तो सभी को हो जाता है पर यह जरूरी तो नहीं किसी से प्रेम हो उसे शादी भी हो,,,, हम बिरजू की शादी वहीं करेंगे जहां हम चाहते हैं,,,,

लेकिन सुनो तो,,,,(जमीदारी की बीवी बात को संभालने की गरज से बोली)

हम कुछ नहीं सुनना चाहते,,,, चुदवा रही हो अच्छे से चुदवाओ मेरा दिमाग मत खराब करो,,,,(अब उसके पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे वह अच्छी तरह से जानती थी कि अब बहस करना ठीक नहीं है ,,,, जमींदार वैसे भी अपनी मनमानी ही करता था वह किसी की भी दखल गिरी बर्दाश्त नहीं करता था खासकर के औरतों की भले ही वह क्यों ना उसकी बीवी हो,,,, जमीदार अपनी बीवी की एक चूची को मुंह में भर कर पीते हुए अपनी कमर को बड़ी तेजी से हिलाने लगा,,, जो कि इस बात का संकेत था कि उसका पानी निकलने वाला है,,,, जमीदार की बीवी अपने पति से कभी भी संतुष्ट नहीं हो पाई थी क्योंकि जमीदार एक उम्र दराज व्यक्ति थे और जमीदार की बीवी एकदम जवान, हसीन गदराए बदन की मालकिन थी,,, उसे रघु जैसा हट्टा कट्टा नौजवान चाहिए था जोकि उसके बदन की गर्मी को शांत कर सके,,,पूरा रखो उसकी उम्मीद पर पूरी तरह से खरा उतरा था उसके लिए तो रघु खरा सोना था लेकिन अब उसे जमीदार पर बेहद क्रोध आने लगा था वह बड़ेआत्मविश्वास के साथ रघु को इस बात का दिलासा दी थी कि उसकी बहन उसके घर की बहू बनेगी,,, लेकिन जमीदार ने सब कुछ बिगाड़ के रख दिया था उसके अरमानों पर पानी फेंक दिया था,,, वह उसी तरह से पीठ के बल अपनी दोनों टांगे फैलाए पड़ी रही और जमीदार तब तक उसकी बुर को रौंदता रहा जब तक कि उसका पानी नही निकल गया,,,। अपनी बीवी की चुदाई करने के बाद वह उसके बगल में करवट लेकर पसर गया और सोने से पहले अपनी बीवी को हिदायत देते हुए बोला,,,।

कल सुबह हम अपने समधी के साथ लड़की देखने जा रहे हैं सुबह तैयारी कर लेना,,,।( और इतना कहकर वह करवट लेकर सो गया,,, मानो की उसकी बीवी की कोई कदर ही नहीं थी उसके मन की कभी भी नहीं हो पाती थी जमीदार केवल उसे अपनी रातों को रंगीन करने के लिए ही लाया था,,, कहने को तो वह घर की मालकिन पीने की मालकिन जैसा उसे किसी भी प्रकार का अधिकार नहीं प्राप्त था,,,, इसलिए अपनी किस्मत को कोसते हुए वह दूसरी तरफ करवट लेकर सो गई,,,।)

दूसरे दिन रघु,,, नीम की दातून करते हुए घर के पीछे की तरफ जा रहा था तो उसके कानों में जानी पहचानी सीटी की मधुर आवाज सुनाई देने लगी,,, सीटी की आवाज सुनते ही उसका मन अधीर हो गया वह एकदम से व्याकुल हो गया,,, पर अपने चारों तरफ इधर उधर नजर घुमा कर देखने लगा लेकिन उसे कहीं भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था तो वह ध्यान से सीटी की आवाज वाली दिशा में ध्यान लगाकर सुनने लगा तो,,, वह सीटी की आवाज सामने की झाड़ियों में से आती हुई उसे सुनाई दी,,,,,, रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था वह धीरे-धीरे उन झाड़ियों के करीब जाने लगा,,,,, सीटी की आवाज को वह अच्छी तरह से पहचानता था इसीलिए तो उसका मन एकदम व्याकुल हुए जा रहा था,,,,वह बड़े ही आराम से धीरे धीरे कदम रख रहा था क्योंकि सूखी हुई पत्तियां नीचे गिरी हुई थी जिसकी आवाज से हो सकता था की झाड़ियों के बीच कोई चौकन्ना हो जाए,,,, लेकिन रघु किसी भी प्रकार की गलती नहीं करना चाहता था,,,

धीरे-धीरे वह झाड़ियों के बिल्कुल करीब पहुंच गया,,, और हल्के से झाड़ियों को अपने हाथों से अलग करते हुए जैसे ही उसकी नजर झाड़ियों के अंदर बीच में गई उसके होश उड़ गए उसके दिल की धड़कन बढ़ गई क्योंकि सिटी की मधुर आवाज सुनकर जिस नजारे कि उसने कल्पना किया था ठीक वैसा ही नजारा उसकी आंखों के सामने था,,,, एक बार फिर से उसकी नजरों ने अपनी मां को पेशाब करते हुए देख लिया था,,, उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,,, सिटी की मधुर आवाज सुनकर उसके मन में जिस चित्र की कल्पना उभर रही थी ठीक वैसी ही चलचित्र उसकी आंखों के सामने उपसी हुई थी,,,,,कजरी निश्चिंत होकर अपनी साड़ी को कमर तक उठाए उसे कमर पर लपेट कर अपनी गोलाकार गांड को दिखाते हुए पेशाब कर रही थी,,,हालांकि वह इस बात से पूरी तरह से बेखबर थी कि उसकी गोरी गोरी मदमस्त कर देने वाली गांड को पीछे से खड़ा होकर उसका लड़का देख रहा है,,,,,, पल भर में ही रघु का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,,, वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसलने लगा,,,,,, खेत में ट्यूबवेल की टंकी में नहाते समय अपनी मां की खूबसूरती से पूरी तरह से वाकिफ हो चुका था और अपने मर्दाना मस्ताए लंड को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी मखमली गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर महसूस भी कर चुका था,,, लेकिन एक जवान लड़के का मन कहां मानने वाला था,,, यह जानते हुए भी कि अपनी मां को इस अवस्था में देखना ठीक नहीं है,,फिर भी रघु टस से मस नहीं हो रहा था आखिरकार नजारा ही ऐसा अद्भुत मादकता से भरा हुआ था कि रघु तो क्या उसकी जगह कोई भी मर्द होता तो उसकी पलक झपकना भूल जाती,,,, वास्तव में कजरी की गांड बेहद खूबसूरत गोल गोल और एकदम गोरी थी,, अंधेरे में भी जिसके होने का आभास हो जाए,, अभी भी रघु के कानों में उसकी मां की बुर से आ रही सीटी की आवाज गूंज रही थी मतलब साफ था कि अभी भी कजरी बड़ी शिद्दत से पेशाब कर रही थी,,,,, रघु का लंड तो पजामे के अंदर बवाल मचाए हुए था,,,, ऐसा लग रहा था किसी भी वक्त वह पैजामा फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,, सुबह-सुबह इतना बेहतरीन खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा ऐसा कभी रघु ने बिल्कुल भी नहीं सोचा था,,, रघु बड़े गौर से अपनी मां की खूबसूरत गांड को देख रहा था जो कि उस समय ट्यूबवेल की टंकी में उसके बेहद करीब थी जिसकी गर्माहट और गोलेपन का एहसास उसे बड़ी अच्छी तरह से हुआ था,,, लेकिन एक कसक प्रभु के मन में रह गई थी कि वह अपनी मां की गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे मसल नहीं पाया,,,कजरी सी जगह पर बैठी हुई थी उसके चारों तरफ घनी झाड़ियां थी धांसू की हुई थी और गौर से देखने पर रखो कोई भी आभास हुआ कि उसकी मां उस जगह मैं इसे धीरे-धीरे आलू खोद रही थी,,,, उसकी मां एक साथ दो काम कर रही थी पैसा भी कर रही थी और खेतों में से आलू की खोद रही थी,,, जिसकी शायद सुबह सुबह सब्जियां बनानी थी,,,,

कजरी इस बात से बेखबर थी वह निश्चिंत होकर मुतने में लगी हुई थी और आलू खोदने में,,,, लेकिन तभी उसे आहट सुनाई थी,,,,वह एकदम से सचेत हो गई,,, वह घबराकर पीछे मुड़ कर देखना नहीं चाहती थी हालाकी ऊसे डर भी लग रहा था,,,, कि ना जाने कौन उसे इस तरह से पेशाब करते हुए देख रहा है,,, एकाएक उसकी पेशाब की धार एकदम से कमजोर पड़ गई,,,, और वह धीरे से अपनी नजरों को तिरछी करके पीछे की तरफ देखी तो उसे केवल पैजामा नजर आया और वह उस पजामे को अच्छी तरह से पहचानती थी,,,, जिसे वह रोज सुबह धोती थी,,,, इस बात का एहसास होते हैं कि पीछे खड़ा शख्स जान पहचान का क्या उसका खुद का बेटा रघु है उसका दिल धक से करके रह गया,,, उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह समझ गई कि उसका बेटा फिर से उसे पेशाब करते हुए देख रहा है,,,,लेकिन इस समय ना जाने क्यों उसे अपने बेटे की हरकत पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं आ रहा था जैसा कि पहली बार वह खेतों में अपने बेटे को अपने आप को पेशाब करते हुए देखकर गुस्से से आगबबूला हो गई थी,,,, , लेकिन आज तो अपने बेटे की हरकत पर,, उसे प्यार आ रहा था और अपने अंदर की उसे उत्तेजना महसूस हो रही थी,,,, एक औरत के लिए भी वहां पर देहाती शर्मसार कर देने वाला होता है जब वह पेशाब करती हो और उसे पीछे से कोई चोरी-छिपे देख रहा है,,, क्योंकि वैसे भी औरतें हमेशा छुप कर पर्दे में ही पेशाब करती है,,,,,,एक औरत मर्द के सामने तभी पेशाब करती है जब आपस में वह दोनों पूरी तरह से खुल गए होते हैं और दोनों के अंदर वासना की चिंगारी बराबर भड़कती रहती है तब वह एक दूसरे को खुश करने के लिए उन्माद जगाने के लिए इस तरह की हरकत कर बैठते हैं,,,,। लेकिन यहां तो पहले अनजाने में ही हुआ था लेकिन जब इस बात का आभास कजरी को हो गया कि उसका बेटा पीछे से खड़ा होकर उसकी नंगी गांड को और उसे पेशाब करते हुए देख रहा है तब कजरी के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी ऊफान मारने लगी,,,,,, उसका दिल धड़कने लगा,,,और जो कुछ पल के लिए किसी की अपने पीछे आहट सुनकर उसकी पेशाब रुक गई थी वह अब उत्तेजना के मारे और तेज धार छोड़ते हुए मुतने लगी,,, रघु की धड़कनें तेज चलने लगी थी उसकी हालत खराब होती जा रही थी ट्यूबवेल की टंकी में जिस तरह की हरकत वह अपनी मां के साथ कर चुका था उसका दिल यही कर रहा था कि वह पीछे से जा करके अपनी मां बुर ‌में पीछे से लंड डाल दे,,, क्योंकि उस दिन उसकी मां उसकी हरकत की वजह से उसे एक शब्द तक नहीं बोली थी,,, लेकिन इस तरह की हरकत करने में उसे डर भी लग रहा था कि कहीं उसकी मां उसके गाल पर थप्पड़ ना लगा दे,,,,

और दूसरी तरफ कजरी के तन बदन में वासना की आग सुलग रही थी इस समय वह अपने मन में सोच रही थी कि ऐसा क्या करें कि उसका बेटा पूरी तरह से उसकी जवानी का कायल हो जाए,,,क्योंकि वह जानती थी कि झाड़ियों के बीच इस तरह से वह बैठी है उसके बेटे को सिर्फ उसकी गोरी गोरी गांड नजर आ रही होगी लेकिन उसका असली और अनमोल खजाना उसके बेटे की नजरों से अभी काफी दूर है इसलिए वह चाहती थी कि उसका बेटा उसके गुलाबी खजाने को अपनी आंखों से देखें,,,,,, वैसे भी वह खेत में से आलू खोदकर निकाल रही थी,,,, इसलिए वह अपना मन बना चुकी थी अपने बेटे को अपनी गुलाबी बुर के दर्शन कराने के लिए,,, इसलिए वह एक बहाने से आगे झुकना चाहते थे आलू खोदने के बहाने ताकि उसका बेटा उसके गुलाबी बुर को अपनी नंगी आंखों से देख सकें,,, लेकिन ऐसा सोचकर ही कजरी की बुर से पानी बहा जा रहा था,,,, जिंदगी में पहली बार उसके साथ इस तरह की घटना घट रही थी उसने आज तक अपने पति के सामने भी के साथ करने की हिम्मत नहीं की थी क्योंकि वह पहले से ही बहुत शर्मीले किस्म की औरत थी,,,, और किसी मर्द के सामने पेशाब करने के बारे में तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी,,,, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं सोचने का नजरिया बदल चुका था अपने बेटे में उसे अब अपना बेटा नहीं बल्कि हट्टा कट्टा जवान मर्द नजर आता था,,,,

कजरी से रहा नहीं जा रहा था उसके तन बदन में उन्मादक हीलोरे गोते लगा रही थी,,, अपना दोनों हाथ पीछे की तरफ लाकर अपनी गोरी गोरी गांड पर रखकर उसे हल्के हल्के सहलाने लगी,,, अपनी मां की यह हरकत देखकर रघु के तन बदन में शोले भड़कने लगे,,, पजामे में उसका लंड फट पड़ने की कगार पर आ गया था,,, रघु से रहा नहीं जा रहा थाऔर वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया,,,। तभी रघु की आंखों ने जो देखा उसे देख कर उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कजरी अपने बेटे को अपनी गुलाबी बुर दिखाना चाहती थी और इसीलिए वह आगे की तरफ झुक कर आलू खोदने के बहाने अपनी गोरी गोरी गांड को थोड़ा सा ऊपर उठा दी,,, जिससे उसके गुलाबी बुर गुलाबी पत्तियों सहित रघु की आंखों के सामने चमकने लगी,,, यह नजारा देखकर तो रघु कि सांस ही अटक गई,,,, कजरी जानबूझकर आगे झुक कर मिट्टी में से आलू खोदने का क्रियाकलाप कर रही थी जबकि हकीकत यही था कि वह अपने ही बेटे को अपनी गुलाबी बुर के दर्शन करा रही थी,,, और यही देखने के लिए वह चुपके से अपनी नजरों को तिरछी करके पीछे की तरफ देखी तो अपने बेटे की हालत देखकर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी और उसे अपने बेटे की हालत पर तरस भी आ रहा था क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो गया था कि जिस तरह से वह नीचे झुकी हुई है साफ तौर पर उसकी बुर उसके बेटे की आंखों में अपनी चमक छोड़ रही होगी,,, रघु का मुंह खुला का खुला रह गया था कजरी अपनी तिरछी नजरों को नीचे की तरफ पिलाकर उसके पजामे की स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां पर अपनी नजरों को टिकाई तो उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि उसके पजामे में जबरदस्त तंबू बना हुआ था,,, यह देख कर ही कजरी की बुर से मदन रस की बूंदे नीचे टपकने लगी,,,,,,, हालांकि अब कजरी की बुर से पेशाब की धार टूट चुकी थी,,, लेकिन वह फिर भी उसी अवस्था में अपनी गांड को ऊपर उठाएं झुकी रही और खेतों में से आलू खोदने का कार्यक्रम जारी रखी,,,,, उत्तेजना से पूरी तरह से रघु मस्त हो चुका था,, उसे ऐसा लग रहा था कि बिना लंड हीलाए ही उसका लंड पानी छोड़ देगा,,,।,,,

और ऐसा हो भी जाता अगर उसकी बड़ी बहन की आवाज उसके कानों में ना पड़ती तो क्योंकि वह उसे ढूंढते हुए उसी दिशा में आ रही थी वह तुरंत एकदम हक्का-बक्का हो गया,,, और अपने कदमों को पीछे ले लिया,,, कजरी के कानों में भी उसकी बेटी की आवाज पड चुकी थी इसलिए वह भी तुरंत,,, खोदे हुए आलू को बटोरने लगी,,,,।

यहां क्या कर रहा है तू अभी दांतुन हीं कर रहा है,,,, खाना बन गया है पहले जाकर नहा ले फिर खा लेना,,,, और मा कहां है,,, आलू खोदने के लिए गई थी अभी तक वापस नहीं आई पता नहीं कहां रह गई तुझे मालूम है कहां है,,,,

नहीं मुझे कैसे मालूम हो सकता है मैं तो अभी अभी उठ कर आया हूं,,,,(रघु अपनी नजरों को इधर-उधर घुमाते हुए बोला तभी शालू की नजर उसके पजामे पर पड़ी तो वह एकदम दंग रह गई,,, पजामे के अंदर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था,,, इसलिए वह आश्चर्य से अपने हाथ की उंगली से उसके पजामे की तरफ इशारा करते हुए बोली,,,)

यह क्या है सुबह-सुबह,,,,,

कककक,,,कुछ नही,,,,, यह तो तुमको देखते ही खड़ा हो गया दीदी,,,,,(रघु एकदम शरारती अंदाज में बोला)

बाप रे सुबह सुबह तुझे यही सब सुझता है,,,,

क्या करूं दीदी तुम हो ही इतनी खूबसूरत,,,,

चल रहने दे मस्का लगाने को अभी कुछ नहीं होने वाला जा जाकर नहा ले,,,,

(इतना सुनकर बिना बोले रघु वहां से चला गया और शालू अपनी मां को खोजने लगी उसे लगा कि उसकी मां किसी से बात करने में लग गई होगी क्योंकि वैसे भी अक्सर वह गांव की औरतों के साथ बात करने बैठती थी तो घंटे बिता देती थी,,,, इसलिए वह खुद ही आलू खोदने के लिए झाड़ियों के करीब जाने लगी जहां पर कजरी अभी भी उसी अवस्था में बैठी हुई थी और खोदे हुए आलू को इकट्ठा कर रही थी,,,।

जैसे ही वहां झाड़ियों के बेहद करीब पहुंचीउसकी नजर झाड़ने के बीच बैठी अपनी मां पर पड़ गई जो कि अभी भी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और वह बैठी हुई थी मानों जैसे की पेशाब कर रही हो,,,,,,।

क्या मां तुम अभी तक यहीं बैठी हुई हो मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हुंं,,,

(पीछे से आ रही आवाज को सुनते ही,, कजरी एकदम से हड़बड़ा गई और तुरंत उठ कर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को दुरुस्त करने लगी,,,,)

वो ,,वो,,,मममम,, में,,,, आने ही वाली थी कि मेरे पेट में दर्द होने लगा इसलिए मैं यहां बैठ गई,,,, तू चल मैं आती हूं,,,,(इतना कहकर वह नीचे झुक कर होते हुए आलू को अपनी साड़ी के पल्लू में इकट्ठा करने लगी,,, कजरी शर्मा से अपनी बेटी से नजरें नहीं मिला पा रही थी,,, शालू को भी सब कुछ सामान्य ही लग रहा था कि तभी उसके दिमाग की घंटी बजना शुरू हो गई,,,, क्योंकि उसे याद आ गया कि उसका भाई रघु भी यहीं से वापस आ रहा था,,,, अपनी मां की हालत अपने भाई रघु के पजामे की स्थिति को देखकर उसका दिल जोर से धड़कने लगा,,,, उसके मन में शंका के बादल उमड़ने लगे,,,,क्योंकि वह अपनी आंखों से अपनी मां की गांड को देख चुकी थी जो कि कमर के नीचे से पूरी तरह से नंगी थी और वह बैठी हुई थी और इस बात का भी आभास उसे था कि उसका भाई वापस जाते समय उसे नजर चुरा रहा था और उसके पहचानने की स्थिति कुछ और बयां कर रही थी,,,,, वह वापस लौटते समय अपने मन में यही सोचने लगी कि कहीं उसका भाई खड़ा होकर अपनी ही मां की गांड को देखकर उत्तेजित तो नहीं हो रहा था,,,, क्योंकि उसके लंड की भी हालत कुछ ठीक नहीं थी,,,, ऐसा तभी होता है जब एक मर्द उत्तेजित दृश्य को देख ले,,, और ऐसा ही हुआ होगा,,,, रघु इधर झाड़ियों में पेशाब करने आया होगा और उसे मां दिख गई होगी,,,उसकी नंगी गोरी गोरी गांड देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया होगा तभी तो पजामे में उसका लंड खड़ा हो गया था,,,,।

सच्चाई से वाकिफ होते ही शालू के तन बदन मे अजीब सी हलचल होने लगी,,, यह सोच कर कि उसका छोटा भाई अपनी ही सगी मां को गंदी नजरों से देख रहा है इस बातों से उसे पहले तो गुस्सा आया लेकिन फिर तन बदन में अजीब सी चिकोटि काटने लगी,,, अपनी भाई की गंदी नजरों को अपनी मां के बारे में सोचते हैं उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी वह इस बारे में अपने भाई से बात करना चाहती थी और मौके की तलाश में थी,,,।

दूसरी तरफ रघु अपने लंड की गर्मी को शांत करना चाहता था,,, इसलिए अपने छोटे से लकड़ी के बने हुए स्नानागार में जाकर अपनी मां को याद करके मुठ मारने लगा,,, और गर्मी बाहर निकलते ही वहां नहा धोकर वापस खाना खाने के लिए आ गया तब तक उसकी मां भी वहां आ चुकी थी शालू अपनी मां की उपस्थिति में अपने भाई से बात नहीं कर पाई,,, और खाना खाकर रघु वहां से बाहर चला गया,,,,।

जमीदार लड़की देखने के लिए जाने वाला था इसलिए वह तांगा लेकर अपने समधी लाला के घर की तरफ निकल गया,,, जहां पर लाला,,,अपनी बहू कोमल की खूबसूरत नितंबों की थिरकन को आते जाते देखकर लार टपका रहा था,,, उसका गला सूख रहा था उसी प्यास लगी थी लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी प्यास बुझाने के लिए उसे अपनी बहु कोमल के पास जाना चाहिए या मटके के पास,,,, वैसे तो अक्सर वह अपनी बहू से पानी मांग लिया करता था लेकिन आज वह खुद ही मटके से पानी लेने के लिए उठ खड़ा हुआ और रसोई घर की तरफ जाने लगा जहां पर उसकी बहू खड़ी होकर लकड़ी के पाटिया पर सब्जी काट रही थी,,, अपनी बहू पर नजर पड़ते ही उसकी धोती में हलचल होने लगी और मटके के करीब जाते-जाते वह अपना एक हाथ अपनी बहू को हमारी के नितंबों पर रखकर उसे जोर से दबा दिया,,,।

आहहहह,,, बाबूजी यह क्या कर रहे हैं आप,,,,(कोमल चौक ते हुए बोली,,,)

कुछ नहीं मेरी प्यारी बहू तेरी खूबसूरत मुलायम बदन का जायजा ले रहा था,,,।

जमीदार अपनी बहू के साथ मनमानी करता हुआ

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बाबू जी आपको इस तरह की हरकत करते हुए शर्म आनी चाहिए,,,,।

शर्म तो आती है मेरी रानी लेकिन क्या करूं तुझ पे तरस भी तो आता है,,,, साला मेरा बेटा ही नालायक और निकम्मा निकल गया कितनी खूबसूरत औरत को छोड़कर ना जाने कहां भटक रहा है,,,,(मटके में गिलास डालकर उसे पानी से भरते हुए बाहर निकालते हुए) आखिरकार तु एक औरत है तुझे भी तो अपने जिस्म में आग लगती हुई महसूस होती होगी,,, तुझे भी तो अपनी दोनों टांगों के बीच कुछ कुछ होता होगा,,,,(इतना कहकर लाला पानी पीने लगा और अपने ससुर की इस तरह की गंदी बात सुनकर कोमल शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,,)

आपको शर्म आनी चाहिए बाबूजी मुझसे इस तरह से बातें करते हुए मैं आपकी बेटी समान हूं,,,।

तू एक औरत है और वह भी प्यासी,,,, और मेरा पूरा अधिकार बनता है तुझे प्यास से मुक्त कराने के लिए,,,,(इतना कहने के साथ है कि लाला अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपनी बहू का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसे सीधे अपनी बाहों में भरकर उसके लाल-लाल होठों को चूमने की कोशिश करने लगा,,, की तभी बाहर दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,।)

लालाजी,,,, अरे ओ लाला जी कहां हो,,,,,

(इतना सुनते ही उसके होश उड़ गए अपने समधी की आवाज वह अच्छी तरह से पहचानता था,,,इसलिए तुरंत राधा को अपनी बाहों से आजाद करता हुआ बिना कुछ बोले वह दरवाजे की तरफ जाने लगा,,,)

अरे आया समधी जी,,,,(इतना कहने के साथ ही वह दरवाजा खोल दिया सामने उसके समधी खड़े थे,,)

अरे आज हमें लड़की देखने जाना था तुम भूल गए क्या,,,?

अरे भूला नहीं हूं सरकार आइए पहले जलपान तो कीजिए,,,

नहीं नहीं रहने दो मैं जलपान करके आया हूं,,,, हमें देर हो रही है हमें चलना चाहिए,,,, तांगा तैयार है,,,।

जी सरकार में अभी आया,,,,(इतना कहकर बा अंदर गया और गमछा लेकर बाहर आ गया दोनों तांगे पर बैठकर लड़की देखने के लिए दूसरे गांव की तरफ निकल गए और कोमल दीवाल से सेट करें बैठ गई और अपनी किस्मत पर रोने लगी,,,, थोड़ी देर बीता ही था कि दरवाजे पर फिर दस्तक होने लगी,,,, कोमल घबरा गई उसे लगा कि उसका ससुर फिर वापस आ गया है,,,)
 
लाला और जमीदार दोनों लड़की देखने के लिए जा चुके थे अंदर दरवाजा बंद करके कोमल सुबक रही थी,,, उसे अपनी किस्मत पर रोना आ रहा था,,,,उस मनहूस घड़ी के लिए अपने आप को कोस रही थी जब वह शादी करके इस घर में आई थी पति का सुख तो उसे मिला नहीं ऊपर से उसका ससुर उस पर गंदी नजर रखने लगा था कोमल अपने मन में यही सोच रही थी कि भला वह अपने ससुर की नजरों से कब तक बची रहेगी,,,, वो तो किस्मत अच्छी रही थी कि कोई ना कोई आ जाता है,,,, अगर जिस दिन कोई समय पर नहीं पहुंचा तो उसका क्या होगा उसकी इज्जत का क्या होगा,,,। वह यही सोच कर रो रही थी,,,, कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,, दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर कोमल घबरा गई उसे लगने लगा कि उसका ससुर फिर वापस आ गया है,,,, उसके चेहरे पर चिंता की लकीर उपसने लगी,,, तभी जब दस्तक के साथ-साथ रघु की आवाज उसके कानों में पड़ी तो वह खुशी से चहक ने लगी उसकी सारी चिंता हवा में फुर्र हो गई,,।

लालाजी ,,,,,,,दरवाजा खोलिए ,,,,,,,लालाजी,,,

(इतना सुनते ही कोमल तुरंत उठ खड़ी हुई और भागते हुए जाकर दरवाजा खोल दी सामने दरवाजे पर रघु को खड़ा देखकर उसके होठों पर मुस्कान तेरने लगी,,, और रघु भी दरवाजे पर कोमल को देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगा,,,)

लालाजी नहीं है क्या,,,?

नहीं वह तो बाहर गए हैं,,,( कानों में रस घोलने वाली मधुर आवाज में बोली,,, रघु तो कोमल की आवाज सुनकर ही उत्तेजित हो जाता था और ऐसा हुआ भी उसके तन बदन के तार बजने लगे,,,)

कब तक लौटेंगे,,,,

कुछ कहकर नहीं गए हैं लेकिन जल्दी नहीं लौटेंगे वो किसी दूसरे गांव गए हैं,,,।

(कोमल की बातें सुनकर रघु की आंखों में चमक आने लगी,,, कोमल की खूबसूरती को वह पहले ही देख चुका था,,, उसके बदन के कटाव को उसकी बनावट की मुरत पहले ही उसके मन में बस चुकी थी,,, रघु कोमल को गले लगाना चाहता था उसे अपनी बाहों में भर कर उससे प्यार करना चाहता था लेकिन उसे डर भी लगता था,,, कि कहीं लाला को ईस बारे में पता चल गया तो क्या होगा,,, कोमल घूंघट डाले उसी तरह से खड़ी थी,,, रघु लाला की अनुपस्थिति में उसे बातें करना चाहता था उसके मन का राज जानना चाहता था लेकिन कैसे कहे उसे पता नहीं चल रहा था इसलिए वह जानबूझकर बहाना बनाते हुए बोला,,)

अच्छा ठीक है मैं फिर आ जाऊंगा अभी चलता हूं,,,।

(कोमल उसे जाने नहीं देना चाहती थी उससे बातें करना चाहती थी,,,,,, इसलिए उसकी यह बात सुनकर उसका मन उदास हो गया मुझे ऐसे ही जाने के लिए वापस मुड़ा वैसे ही कोमल बोल पड़ी,,,)

आए हो तो पानी तो पीकर जाओ बाबूजी का तांगा चलाते हो अगर बाबूजी को पता चल गया कि तुम घर पर आए थे और मैं तुम्हें पानी भी नहीं पूछी तो वह खामखा नाराज होंगे,,,।

(कोमल की बातें सुनकर रघु के चेहरे पर खुशी के भाव झलकने लगे और वह मुस्कुरा दिया,,,)

जैसी तुम्हारी इच्छा,,,,,लेकिन घर में कोई नहीं है क्या मेरा आना ठीक होगा,,,

हां क्यों नहीं,,,, आ जाओ,,,, यहां कौन देखने वाला है,,,,

(कोमल की यह बात सुनकर रघु के तन बदन में हलचल होने लगी,,,, वो भी देखना चाहता था कि कोमल के मन में क्या है,,, इसलिए वह बिना कुछ बोले घर में प्रवेश कर गया कोमल उसे बैठने के लिए बोली बार अंदर पानी लेने के लिए चली गई,,,, रघु से जाते हुए देखता रह गया क्योंकि कसी हुई साड़ी में उसके नितंबों का उभार जानलेवा नजर आ रहा था,,, तभी अंदर से कोमल एक हाथ में पानी भरा लोटा और दूसरे हाथ में मीठे गुड़ की प्लेट लेकर आई,,, उसके हाथों में पानी के साथ गुड़ देखकर रघु औपचारिकता बस बोला,,,)

अरे इसकी क्या जरूरत थी छोटी मालकिन,,,,

छोटी मालकिन नहीं कोमल नाम है हमारा,,,,(गुड वाली प्लेट को रखो की तरफ बढ़ाते हुए बोली,,,रख मुस्कुराते हुए उस प्लेट में से गुड़ का एक टुकड़ा उठाकर उसे तोड़ते हुए बोला,,,)

हमारे लिए तो तुम छोटी मालकिन ही हो,,,

नहीं हमें यह नहीं पसंद की कोई हमें मालकिन कहे,,,, तुम मुझे कोमल कहकर पुकारा करो,,,।

लेकिन क्या तुम्हें कोमल कहना उचित रहेगा कोई सुन लिया तो,,,,

सुन लिया तो सुन लिया मुझे उस की बिल्कुल भी परवाह नहीं है मैं तुम्हें अपना दोस्त समझती हूं,,,,

(इस बात पर रघु के चेहरे पर मुस्कान खिलने लगी और वह खुशी-खुशी गुड़ के टुकड़े को अपने मुंह में डालकर खाते हुए दूसरे टुकड़े को कोमल की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

तो यह दोस्त की तरफ से मुंह मीठा करने के लिए हमारी दोस्ती की मिठाई,,,

(रघु की बात सुन तेरी कोमल हंसने लगी और मिठाई के उस टुकड़े को लेकर अपने मोतियों जैसे दांत के नीचे रखकर काट कर उसे खाने लगी,,, रघु उसकी खूबसूरती उसके मोहक रूप को देखकर एकदम से फिदा हो गया,,, वह उसे देखता ही रह गया,,,,उसे इस तरह से अपनी तरफ देखता हूं आप आकर कोमल शर्मा गई और अपनी नजरों को नीचे कर ली,,, लेकिन फिर भी रघु उसे देखता ही रह गया,,, इस बार कोमल से रहा नहीं गया और वो शरमाते हुए बोली,,)

ऐसे क्या देख रहे हो,,,?

अगर बुरा ना मानो तो बता दु कि ऐसे क्यों देख रहा हूं,,,

हम तुम्हारी बात का बुरा नहीं मानेगे,,,,

तुम बहुत खूबसूरत हो छोटी मालकिन,,,,

छोटी मालकिन,,,,!(कोमल आश्चर्य जताते हुए बोली)

मेरा मतलब है कोमल जी,,,,

कोमल जी नहीं,,,, केवल कोमल

अच्छा बाबा कोमल,,,,, लेकिन सच कह रहा हूं तुम बहुत खूबसूरत हो,,,, तुम्हारे पति तो अपने आप को बहुत खुशनसीब समझते होंगे,,, समझते क्या होंगे खुशनसीब हैं जो तुम जैसी बीवी उन्हें मिली है,,,,

( रघु की यह बात सुनकर कोमल,,, के जख्म ताजा हो गई और दूसरी तरफ देखते हुए हंसने लगी और एकाएक जोर जोर से हंसने लगी उसे हंसता हुआ देख कर रघु को अजीब लगने लगा,,,, वह हंसती जा रही थी,,,,, तभी एकाएक शांत हो गई और रघु की तरफ देखते हूए बोली,,,)

तुम भी वही समझते हो जो दूसरे लोग समझते हैं बड़े घर की बहू जरूरी नहीं है कि दुनिया की सबसे खुशनसीब बहू होगी सबसे खुशनसीब पत्नी होगी सबसे खुशनसीब बीवी होगी,,,,, बड़े घर में भी बदनसीबी जन्म लेती है,,,,

मैं कुछ समझा नहीं,,,,

समझ जाते तो जो बात तुम कहे हो वह कभी नहीं कहते,,,(कोमल दुखी मन से घर की छत को देखते हुए बोली,,)

क्या तुम इस बड़े घर में बड़े घर की बहू होने के नाते खुश नहीं हो,,,,

रहने दो रघु हमारी किस्मत ही शायद यही है,,,,(इतना कहकर कोमल खामोश हो गई और उसकी ये खामोशी रघु को भाले की नोक की तरह चुभने लगी,,, वह कोमल से सारी बातें सुनना चाहता था इसलिए बोला,,,)

कोमल तुमने मुझे अपना दोस्त माना है और एक दोस्त से अपने मन की बात कह देनी चाहिए,,, मुझे बताओ कोमल क्या तुम खुश नहीं हो,,,।

एक औरत के लिए खुशी क्या होती है रघु,,, इसके मायने भी शायद मैं भूल चुकी हूं,,,,, एक औरत के लिए सबसे बड़ी खुशी होती है उसका पति जोर ऊससे प्यार करें ढेर सारा प्यार करें उसके सुख दुख का ख्याल रखें,,, एक औरत के लिए खुशनसीबी होती है उसका ससुराल उसका घर जहां पर उसे सम्मान मिले प्यार मिले,,, बाप के रूप में ससुर और मां का रूप में सांस मिले,,,। लेकिन मेरे नसीब में तो कुछ भी नहीं ना पति का प्यार ना ससुर का स्नेह और सास तो मेरी किस्मत में ही नहीं,,,

(कोमल की बातें सुनकर रघु एकदम हैरान था,,,)

तो क्या तुम्हें तुम्हारे पति का प्यार नहीं मिलता,,,,।

प्यार,,,,, वो जब हमारे पास रहते ही नहीं है तो प्यार कैसे मिलेगा,,,,

मैं कुछ समझा नहीं,,,

शादी के बाद बड़ी मुश्किल से 1 साल तक ही वह हमारे साथ है उसके बाद कहां चले गए आज तक ना मुझे पता है ना ससुर जी को,,,

क्या कह रही हो कोमल क्या लाला जी ने भी अपने बेटे को खोजने की दरकार नहीं लिए,,,,।

खोजने की उन्हें तो अपने बेटे की पड़ी ही नहीं है,,,, उल्टा उनकी गंदी नजर मुझ पर हैं,,,

(कमल की बात सुनकर रघु बुरी तरह से चौक गया,, उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ तो वह फिर से बोला,,,)

क्या कही तुमने,,,

वही जो तुम सुन रहे हो,,,,

मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कोमल,,,,

मुझे तो अभी तक यकीन नहीं हो पा रहा है,,,, कि मेरे ससुर जी इतने गंदे इंसान होंगे,,,,(कोमल दुखी मन से बोली)

तुम्हारे ससुर जी गंदे इंसान हैं यह तो मुझे मालूम था लेकिन अपने ही घर में गंदी नजर रखेंगे यह मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था,,,

तुम्हें कैसे मालूम है,,,,

मैं तो अपनी आंखों से देख चुका हूं कोमल,,, ,,,

अपनी आंखों से,,,,,, क्या देख चुके हो,,,,(कोमल उत्सुकता वश बोली,,, और रघु उसकी आंखों में अपने ससुर के गंदे कारनामे को जानने की उत्सुकता साफ नजर आ रही थी और यही मौका भी था रघु के पास उसके मन को बहकाने के लिए,,,, वैसे भी अब तक वह यह बात अच्छी तरह से जान चुका था कि औरत को सहारा की जरूरत होती है खास करके तब जब घर से उसे प्यार नहीं मिलता और ऐसे में थोड़ा सा भी सहारा देने का मतलब था कि उसे पूरी तरह से अपनी बना लेना,,,, और रघु कोमल को भी अपना बना लेना चाहता था क्योंकि वह समझ चुका था कि बरसों से उसे पति का प्यार,,, शरीर सुख नहीं मिला है,,,,,, इसलिए रघु कोमल को पूरी तरह से अपनी बातों के जादू में लपेट लेना चाहता था अपनी तरफ आकर्षित कर लेना चाहता था ताकि जो सुख उसे उसका पति ना दे सका वह सुख उसे वह दे सके,,,)

बहुत कुछ देख चुका हूं कोमल,,,, तुम्हारे ससुर बहुत ही गंदे इंसान हैं,,,, उनका राज में जान चुका हूं तभी तो उन्होंने मुझे तांगा चलाने की नौकरी दे दी है और मुझे कुछ ज्यादा बोलते भी नहीं है,,,,

(कोमल की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी रघु की बात सुनकर वह बोली,,,)

ऐसा क्या देख लिया तुमने की ससुर को तुम्हें नौकरी देनी पड़ी,,,,

मैं जो देखा हूं वह तुम्हें बताने लायक नहीं है,,,, रहने दो कोमल,,,

नहीं नहीं मुझे सुनना है में भी तो सुनु मेरे ससुर कितने गंदे इंसान हैं इंसान के रूप में हैवान है,,,।

( कोमल की बात सुनकर रघु समझ गया कि कोमल सब को सुनना चाहती है भले ही वह बात कितनी भी गंदी हो और उसकी वही उत्सुकता रघु के लिए उस तक पहुंचने का रास्ता बनने वाला था,,, रघु भी अपनी बातों को नमक नीचे लगाकर बताने में माहिर था,,, लेकिन फिर भी वह जानबूझकर ना नुकुर करते हुए बोला,,,)

रहने दो कोमल तुम एक औरत हो और औरत को ईस‌तरह की गंदी बातें नहीं सुनना चाहिए,,,।

रघु गंदा इंसान औरत के साथ गंदा काम कर सकता है और मैं सुन भी नहीं सकती,,,,। तुम कहो मैं सुनूंगी,,,, मुझे सब कुछ सुनना है,,, ताकि मैं अपने आपको अपने ससुर की गंदी नजरों से बचा सकूं,,,,

मैं तुम्हें सब कुछ बताता हूं लेकिन क्या तुम्हारे ससुर भी तुम्हारे साथ भी,,,,

नहीं नहीं रघु,,, हमने अभी तक अपने ससुर को अपने बदन को छूने तक नहीं दीया है,,, लेकिन तू गंदी नजरों से मुझे डर लगने लगा है वह मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करते हैं आखिरकार मैं एक औरत हूं कब तक अपने आप को एक मजबूत हाथों से बचा सकती हूं,,,,

(कोमल की बातें सुनकर रघु के मन में सुकून महसूस होने लगा उसे इस बात की तसल्ली हो गई थी उसके ससुर ने अभी तक उसके साथ गंदा काम नहीं कर पाया है,,,वह मन ही मन खुश था लेकिन अपनी खुशी को अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने देना चाहता था इसलिए वह बोला)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो कोमल मैं हूं ना,,,, मैं तुम्हारी इज्जत पर आंच भी नहीं आने दूंगा,,,

(रघु कि इस तरह की सांत्वना भरी बातें सुनकर कोमल का मन प्रसन्न हो गया,,,, और वह बोली,,,)

चलो कोई तो है जो मेरी चिंता करता है और मेरी रक्षा करने के लिए तैयार है,,,, मैं तुमसे बहुत खुश हूं रघु,,, तुम बहुत अच्छे लड़के हो,,,

और तुम भी बहुत अच्छी हो,,,,

(रघु उसकी खूबसूरती में खोता चला जा रहा था,,, कोमल अब रघु से पर्दा नहीं की थी और अच्छे से रघु को कोमल का खूबसूरत चेहरा नजर आ रहा था,,,, रघु उसे एकटक देखता ही रह गया,,, तो कोमल बोली,,,)

देखते ही रहोगे या बताओगे भी कि हमारे ससुर को कौन सा गंदा काम करते देखे हो,,,,

(कोमल की उत्सुकता देखकर रघु भी कहां पीछे रहने वाला था वह नमक मिर्च लगाकर अपनी बात को सुनाना शुरू किया,,,)

वैसे तो तुम्हारे ससुर को जो गंदा काम करते मैंने देखा है वह तुम्हें बताना तो नहीं चाहिए था लेकिन एक दोस्त होने के नाते मैं तुम्हें बता रहा हूं,,,।
 
रघु अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था और कोमल रघु के साथ होने की वजह से खुश थी उसे रघु का साथ अच्छा लगने लगा था,,,,, और भाई यह जाने के लिए उत्सुक थी कि उसके ससुर ने ऐसा कौन सा गंदा काम कर दिया हां जो कि रघु उसे बताना नहीं चाहता था,,,, कोमल के चेहरे पर उसकी उत्सुकता साफ नजर आ रही थी,,, इस समय घर पर केवल कोमल और रघु ही थे और लाला देर से आने वाला था,,, इसलिए कोमल थोड़ा निश्चित थी,,,रघु अपनी बातों को नमक मिर्ची लगा कर बताना शुरू किया,,,।

कोमल अब तुमसे क्या कहूं कि मैंने उस दिन क्या देखा था दोपहर का समय था मैं और रामु दोनों बगीचे में घूम रहे थे,,, और वो भी लाला के आम के बगीचे में ही,,, क्योंकि हम दोनों को आम खाना था,,,। अच्छा तुम कभी गई हो अपने आम के बगीचे पर,,,।

नहीं तो मैं तो कभी नहीं गई और मुझे वहां लेकर कौन जाएगा जब से आई हूं तब से इस घर की चारदीवारी में कैद हूं,,,(कोमल उदास मन से बोली)

कोई बात नहीं मैं तुम्हें घुमा दूंगा,,,,अच्छा तुम्हें बता रहा था कि हम दोनों को आम खाना था और अच्छे आम तुम्हारे बगीचे में ही मिलते हैं,,,(रघु कोमल की दोनों चूचियों की तरफ देखते हुए बोला जो कि ब्लाउज में कैद थे,, पहले तो कोमल को सब कुछ सामान्य सा लगा लेकिन उसकी बात का मतलब और उसकी नजरों को देख कर उसे समझ में आ गया और वह शर्म से पानी पानी होने लगी,,,) हम दोनों दोपहर के समय तुम्हारे बगीचे में पहुंच गए तुम्हारे आम तोड़ने के लिए,,,(इस बार भी रघु आम वाली बात कोमल की चूचियों को देखते हुए बोला,,,,, रघु की दो अर्थ वाली बात कोमल के तन बदन में आग लगा रही थी,,,)

फिर क्या हुआ,,,,? (कोमल उत्सुकता दर्शाते हुए बोली,,)

फिर क्या बगीचे में एक घर बना हुआ है जो कि बाहर से थोड़ा खंडहर जैसा ही दिखता है लेकिन काफी बड़ा है उसके बगल में एक आम का पेड़ है बहुत बड़ा,,, और उस आम के पेड़ के फल बहुत ही मीठे होते हैं इसलिए मैं उस पेड़ पर चढ़ गया मुझे ऐसा लगा था कि बगीचे में कोई नहीं होगा,,, और मैं निश्चिंत होकर पेड़ पर चढ़ने लगा,,,, मैं थोड़ा ऊंचाई तक चढ गया जहां से उस घर की खिड़की नजर आती थी,,,, मैंने ऐसे ही उस खिड़की के अंदर झांकने की कोशिश किया पहले तो कुछ नजर नहीं आया लेकिन ध्यान से देखने पर जो नजारा मेरी आंखों ने देखा मुझे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,,,.।

ऐसा क्या देख लिया तुमने,,,,?

रघु लााला की करतुत कोमल को बताते हुए

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कैसे कहूं तुमसे कहने में शर्म आती है,,,(रघु जानबूझकर शर्मा का बहाना करते हुए बोला,,)

हमसे क्यों शर्मा रहे हो,,, हम दोनों तो दोस्त हैं और दोस्त में शर्म नहीं होनी चाहिए,,,, मैं भी तो बिना शर्माए सब कुछ बता दि,,,

हां यह ठीक है,,, तुम मुझे दोस्त समझकर सब कुछ बता दी तो मैं भी तुम्हें दोस्त समझकर सब कुछ बता देता हूं,,,(कोमल की उत्सुकता रघु की उत्तेजना को बढ़ावा दे रही थी,,, इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

मैं खिड़की में से जो देखा वह सचमुच अविश्वसनीय था मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि लाला का यह रूप भी मुझे देखने को मिलेगा,,,

कौन सा रूप,,?

एक औरत जो कि पास के ही गांव की थी वह बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी उसके ब्लाउज के सारे बटन खुले हुए थे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम नंगी थी,,,,(रघु जानबूझकर नंगी और चूचियां जैसे अश्लील शब्दों का प्रयोग कर रहा था और इन शब्दों का प्रयोग करते समय वह कोमल के चेहरे की तरफ देख भी ले रहा था वह देखना चाहता था कि इन शब्दों को सुनकर उसके चेहरे का भाव बदलता है या नहीं लेकिन अश्लील शब्दों को सुनकर कोमल के चेहरे का भाव बदल जा रहा था खास करके रघु के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,) बिल्कुल नंगी,,, वह औरत लाला को ही देख रही थी,,, जोकि लाला अपना कुर्ता उतार रहे थे मुझे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था लेकिन जो मेरी आंखें देख रही थी वह गलत भी नहीं था सब कुछ सनातन सत्य था मैं खिड़की में से अंदर झांकता रह गया,,। लाला अपना कुर्ता उतारने के बाद धोती पहने हुए ही उस औरत के ऊपर चढ़ गए और अपने दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पकड़कर दबाना शुरू कर दिए,,,

(रघु की चूचियां दबाने वाली बात सुनकर कोमल के कोमल अंग में थिरकन शुरू हो गई,,) मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि लाला ऐसा कर सकते हैं लेकिन सब कुछ सच था कुछ भी बनावट नहीं था खिड़की में से मुझे साफ दिख रहा था लाला दोनों हाथों से उस औरत की चुची पकड़ कर जोर जोर से दबा रहे थे मानो दशहरी आम को अपने हाथ में लेकर दबा रहे हो,,, और इतनी ज्यादा जोर से दबा रहे थे कि उस औरत की कराहने की आवाज मुझे बाहर सुनाई दे रही थी,,,,,, मैं तो भूल ही गया कि मैं यहां क्या करने आया हूं,,,, मैं तो बस खिड़की से अंदर का नजारा देखता ही रह गया,,,, थोड़ी देर बाद दबाने के बाद लाला बारी बारी से उस औरत की चूची को अपने मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिए,,,(कोमल अपने ससुर के बारे में इतनी गंदी बात सुनकर एकदम से सिहर उठी लेकिन जिस अंदाज में रघु उसे बता रहा था कोमल के बदन में हलचल सी हो रही थी उसकी कही बातों के बारे में वह कल्पना करने लगी थी कि कैसे उसके ससुर उस औरत के साथ रंगरेलियां मना रहे थे,,, रघु अपनी कहानी बताते समय कमल के चेहरे को बराबर पढ़ रहा था जब जब उसके मुंह से गलती से भी निकल रहे थे तब तब कोमल के चेहरे पर लालीमा छी रही थी,, रघु अपनी बात को जारी रखते हुए बोला।)

लाला और गांव की औरत

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कोमल मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार वह औरत उन्हीं इंकार क्यों नहीं कर रही है क्योंकि उसके चेहरे से ऐसा ही लग रहा था कि लाला की हरकत से उसे बहुत दर्द हो रहा है,,,, तभी लाला खड़े हुए और अपने बदन पर से अपनी धोती को भी उतार फेंके,,, लाला उस औरत के सामने एकदम नंगा खड़े थे,,, उनका लंड जो कि कोई खास नहीं था लेकिन फिर भी खड़ा हो चुका था,,,(रघु जानबूझकर अपने होठों पर लंड शब्द लाया था,,, और लंड शब्द कहते हुए कोमल की नजरों के सामने ही तेजा में में अपनी खड़े लंड को नीचे बैठाने की कोशिश करने लगा और इसकी यह कोशिश को कोमल देख रही थी और रघु की इस तरह की हरकत पर उसके बदन में सनसनी सी दौड़ने लगी थी ,,,)

क्या कह रहे हो रघु हमें तो यकीन ही नहीं हो रहा है,,,,, मेरे ससुर जी ईतने गंदे इंसान है,,,,,(कोमल आश्चर्य जताते हुए बोली)

मुझे भी यकीन नहीं होता अगर मैं यह सब अपनी आंखों से ना देखता तो,,,,, मैं तो सब कुछ देख कर हैरान हो गया था औरत बिस्तर पर लेटी हुई थी और लाला एकदम नंगा होकर उसके करीब जा रहे थे,,, और देखते-देखते उसकी दोनों टांगों को फैला कर साड़ी को उठाते हुए उसकी कमर तक कर दिए,,, कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो गई सच कहूं तो कोमल मैं तुमसे झूठ नहीं कहूंगा पहली बार किसी औरत को मैं कमर के नीचे नंगी देख रहा था,,,

तततत,,,,, तुम्हें कैसा लग रहा था,,,,(रघु की बातें सुनकर मदहोश होते हुए उत्तेजित स्वर में कोमल बोली,,)

मैं तुमसे झूठ नहीं कहूंगा कोमल,,,मैं तो एकदम पागल हो गया मुझे तो समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या देख रहा हूं जिंदगी में पहली बार में वो देख रहा था,,,,

वो,,, क्या,,,?

अरे वही जो साड़ी के अंदर होता है,,,,,(रघु बेशर्मी दिखाते हुए लेकिन थोड़ा सा घबराने का नाटक करते हुए बोला।)

बोलोगे नहीं तो पता कैसे चलेगा,,,,(कोमल रघु की तरफ देखते हुए बोली,,, रघु जानता था कि पति का प्यार ही से नहीं मिलता इसलिए उसकी बातें सुनकर वह गर्म होने लगी है,,, अरे रघु तो ऐसे ही मौके की तलाश में रहता था,,,वह, बात को घुमाते हुए बोला,,,)

अब कैसे बताऊं,,,,,,

बता दो हम तो तुम्हारे दोस्त हैं,,,,

अरे वही जो साड़ी के अंदर होता है ना,,,,, बबबब,, बुर,,,,,

( रघु जानबूझकर घबराने और हकलाने का नाटक करते हुए बोला,,, रघु के मुंह से बुर शब्द सुनकर कोमल की हालत खराब हो गई,,,शर्म के मारे उसके गाल लाल हो गए और हल्की मुस्कान के साथ अपने नजरों को नीचे झुका दी,, गुरु शब्द सुनकर उसके अंदर क्या प्रभाव पड़ा यह रघु अच्छी तरह से समझ गया था,,, वह समझ गया था कि कोमल प्यार के लिए तरस रही है भरपूर प्यार,,,, जो कि अब वह उसे देखा यह भी अपने अंदर ही निश्चय कर लिया था,,, बुर शब्द सुनकर कोमल कुछ बोल नहीं पाई,,,, पर रघु उसके मन की मनोमंथन को समझते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

हां सच कह रहा हूं कोमल जिंदगी में पहली बार में किसी औरत की बुर को देख रहा था,,,,(इस बार भी ना डरे बिना हक लाए रघु कोमल के सामने बुर शब्द बोल गया,,,) मैं मदहोश हो चुका था उस औरत की दोनों टांगों के बीच का वह अंग मेरे होश उड़ा रहा था सोचो मैं इतनी दूर से देख रहा था तब मेरा यह हाल था लाला का क्या हाल हुआ होगा,,,

क्या हुआ लाला का,,,,(कोमल लोगों की बातों में इतने मजबूर हो गई कि अपने ससुर को लाला कहकर बोलने लगी,,,)

लाला तो एकदम पागल हो गए,,, लाला उस औरत की दोनों टांगों के बीच जाकर बैठ गए,,,

क्या करने के लिए,,,,

चाटने के लिए,,,,

चाटने के लिए,,,, क्या चाटने के लिए,,(कोमल आश्चर्य से बोली,)

बुर चाटने के लिए,,,,, उस औरत की बुर चाटने के लिए,,,(रघु एकदम तपाक से बोला)

क्या,,,,?

हां मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं जिस तरह से तुम्हें आश्चर्य हो रहा है मुझे भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,, भला औरत की बुर कोई आदमी चाट सकता है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था,,,(रघु सब कुछ जानता था कि जानबूझकर कोमल के सामने इस तरह से अनजान बनने की कोशिश कर रहा था क्योंकि यह बात वह भी अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को अपनी बुर चटवाने में सबसे ज्यादा मजा आता है,,,, और ऊस मजा को प्राप्त करने के लिए औरत किसी भी हद तक चली जाती है,,, कोमल के चेहरे पर बुर चाटने वाली बात का असर एकदम साफ झलक रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था लेकिन उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी उसके मन में यही चल रहा था कि क्या वाकई में मर्द औरत की बुर चाटते हैं,,, वह तो शादीशुदा जिंदगी में भी अब तक कुंवारी ही थी तो उसे कैसे पता चलता कि औरत की बुर भी चाटी जाती है,,,)

लाना अपना मुंह उस औरत की दोनों टांगों में डालकर उसकी बुर चाटना शुरू कर दीए,,,,, लाला पागल हुए जा रहे थे,,,, वह औरतजो लाला के द्वारा चूची दबाने पर दर्द से कराह रही थी इस बार लाला की हरकत की वजह से उसके मुंह से अजीब अजीब से गर्म सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,

(रघु की बातें और कोमल की कल्पना कमल की दोनों टांगों के बीच हालत खराब कर के रख दिया उसकी बुर गीली होती जा रही थी,,, पहली बार उसे अपनी बुर से पानी बहता हुआ महसूस हो रहा था,,, रघु की खुद की हालत खराब होती जा रही थी बार-बार वह अपने पजामे में खड़े लंड को बैठाने की कोशिश कर रहा था जोकीयह हरकत भी वह कोमल की आंखों के सामने जानबूझकर कर रहा था ताकि कोमल का ध्यान उसकी दोनों टांगों के बीच जाए और ऐसा हो भी रहा था,,,)

उस औरत की आवाज में और उसके चेहरे को देखकर साफ पता चल रहा था कि लाला की हरकत की वजह से उसे मजा आने लगा था,,, धीरे-धीरे लाला उसकी साड़ी की गांठ खोलने लगी और देखते ही देखते मेरी आंखों के सामने

ही,, ऊस औरत को उसके साड़ी के साथ-साथ उसका पेटीकोट और ब्लाउज उतार कर एकदम नंगी कर दिए,,,

पहली बार मैं अपनी आंखों से किसी औरत को संपूर्ण रूप से नंगी देख रहा था,,,, गजब का दृश्य था,,,(रघु बताते बताते इतना गरम हो गया कि गरम आंहे लेने लगा,,, प्रभु की हालत में देखकर कोमल की भी हालत खराब होने लगी,,, वह कांपते स्वर में बोली,,)

फिर क्या हुआ,,,,

फिर क्या लाला ने अपने हाथों से उस औरत की दोनों टांगे फैलाकर उसकी बुर पर ढेर सारा थूक लगाए और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दीए,,, मैं तो देख कर हैरान हो गया लाला की कमर बड़ी तेजी से आगे पीछे हो रही थी और पलंग पर लेटी हुई उस औरत की दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह इधर-उधर हील रही थी,,, लाला उसे बड़ी बेरहमी से चोद रहे थे... मेरी खुद की हालत खराब हो रही थी,,,

(कोमल की सांसे भारी हो चली थी,,,)

और थोड़ी ही देर में लाला उसके ऊपर गिर कर हांफने लगी,,, सच में कोमल उस दिन का दृश्य मेरे दिमाग से मिट नहीं रहा है,,,,।

लेकिन मेरे समझ में आ नहीं रहा है कि वह औरत कौन थी और वह लाला को मना क्यों नहीं कर पा रही थी,,,

यह तो मैं बताना भूल ही गया,,,,उस औरत की चुदाई करने के बाद लाला और वह औरत अपने अपने कपड़े पहनने लगे और लाला अपनी कुर्ते में से पैसे निकाल कर उसे देते हुए बोलेगी जब भी पैसे की जरूरत पड़े उसके पास चली आना,,,, लाला की बात सुनकर में सारा माजरा समझ गया क्योंकि लाला उन औरतों की मदद करते थे जिन औरतों को पैसे की जरूरत होती थी और उसके बदले में लाना उसकी चुदाई भी करते थे और बाद में पैसे भी वसूल करते थे और पैसे वसूल करने के लिए अपने पास लट्ठ पहलवान भी रखे हुए हैं,,,

बाप रे मेरे ससुर इतने गंदे हैं,,,, हमे तो डर लगता है रघु कि मेरा क्या होगा,,,,

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तुम्हे कुछ नहीं होगा कोमल,,, मैं हूं ना मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा,,,,,

(कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही,,, रघु के द्वारा कही गई उसके ससुर की कहानी कोमल के कोमल मन पर हथौड़ी बरसा रही थी उसका मन देखने लगा था उसकी दोनों टांगों के बीच की हालत खराब थी,,,, रघु से क्या कहे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,रघुवंश की प्यासी जवानी का रसपान करना चाहता था लेकिन जल्दबाजी दिखाने में उसे डर भी लग रहा था कि कहीं अगर वह नाराज हो गई तो क्या होगा क्योंकि उसके मन में क्या चल रहा है अभी रघु पूरी तरह से नहीं जानता था और अपनी बेवकूफी से इतनी खूबसूरत औरत को अपने हाथों से नहीं जाने देना चाहता था,,, रघु उसके साथ आज पूरा दिन बिताना चाहता था उसे बगीचा घुमाना चाहता था इसलिए उसके सामने प्रस्ताव रखते हुए बोला,,,।)

तुम चलोगी मेरे साथ बगीचा घूमने झरने में नहाने ऊंची ऊंची पहाड़ियों पर बहुत मजा आएगा,,,

क्या सच में तुम हमें ले चलोगे,,,,

हां ले चलूंगा अगर तुम चलने के लिए तैयार हो तो,,,

मैं तो तैयार ही हुं,,,स्केट खाने से निकलना चाहती हूं खुली हवा में सांस लेना चाहती हूं,,,,

तो चलो फिर देर किस बात की है,,,

रुको हम अभी आते हैं,,,(इतना कहकर वह उठकर कमरे के अंदर बनी गुसल खाने की तरफ चली गई और बाहर से दरवाजा बंद कर दी,,, रघु की गरमा गरम बातें सुनकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और उसकी बुर पसीजने लगी थी इसलिए उसे जोरों की पेशाब लग गई थी और वह गुसल खाने में जाकर अपनी साड़ी उठाकर बैठकर मुतना शुरू कर दी थी,,, रघु को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह दरवाजा क्यों बंद कर दी,,,इसलिए वह दरवाजे के करीब जाकर अंदर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन दरवाजे पर ऐसा कोई भी दरार या छेद नहीं था जिसे अंदर देखा जा सके लेकिन उसके कानों में जो आवाज गूंज रही थी उसे सुनते ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,, गुशल खाने के अंदर से बंद दरवाजे के पीछे सीटी की आवाज आ रही थी,, जिसे सुनते ही रघु को समझते देर नहीं लगी कि कोमल मूत रही थी,,,, इस बात का एहसास से ही रघु पूरी तरह से मदहोश हो गया उसका मन कर रहा था कि दरवाजा तोड़कर अंदर घुस जाए और कोमल की चुदाई करदे लेकिन वह बना काम बिगाड़ना नहीं चाहता था,,,, इसलिए वह उस मधुर आवाज को सुनकर मदहोश होता हुआ दरवाजे के बाहर ही खड़ा रहा,,, लेकिन जैसे ही उसकी चूड़ियों की खनक और पायल की आवाज है उसके कानों में पड़ी वह तुरंत दूर खड़ा हो गया और थोड़ी ही देर में दरवाजा खोल कर कोमल बाहर आ गई और मुस्कुराते हुए उसके साथ बगीचा घूमने के लिए निकल गई,,।
 
कोमल के लिए यह पहला मौका था जब वह ससुराल में आने के बाद पहली बार घर से बाहर निकल रही थी खुली हवा में सांस लेने के लिए,,, और किसी गैर जवान लड़के के साथ,,, कोमल का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, उसे इस बात का डर था कि कहीं कोई देखना नहीं और यह भी चिंता सताए जा रही थी कहीं वो उसके ससुर जल्दी घर पर वापस ना जाए लेकिन फिर भी मन के किसी कोने में उसे अपने ससुर की बिल्कुल भी ठीक नहीं थी क्योंकि जिस तरह की हरकत उसके ससुर उसके साथ कर रहे थे और जिस तरह की बातें उसने रघु के मुंह से सुनी थी उसको लेकर वह अपने ससुर से बिल्कुल भी शर्म करना नहीं चाहती थी,,, इसलिए अपने ससुर का डर होने के बावजूद भी उसे अपने ससुर से डर नहीं लग रहा था,,, घूंघट डाले वह घर से बाहर निकल गई रघु उसे घर के पीछे के रास्ते से ले गया ताकि कोई उन दोनों को एक साथ देख ना ले,,, रघु आगे आगे चल रहा था और कोमल पीछे पीछे,,, रघु का मन ऊंचे आकाश में उड़ रहा था,,, एक बड़े घर की बहू को जो साथ घुमाने के लिए ले आया था,,,,,,

दोपहर का समय था वैसे भी इस समय कड़ी धूप होने की वजह से घर से कोई भी बाहर नहीं निकलता था लेकिन फिर भी रघु अपनी तरफ से पूरी एहतियात बरतना चाहता था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसकी वजह से कोमल को खरी-खोटी सुननी पड़े,,, देखते ही देखते दोनों घर से काफी दूर आ गए ऊंची नीची कच्ची पगडंडी से होते हुए दोनों गुजर रहे थे,,,कभी रघु आगे चलता तो कभी कोमल उसके पायल की छनक ने की आवाज पूरे वातावरण को और मनमोहक बना रही थी,,, रघु कोमल के पायल की खनक में पूरी तरह से अपने आप को मग्न कर चुका था,,, जब भी कोमल आगे चलती तब रघु की नजर कोमल के गोलाकार नितंबों पर टिक जाती थी जो कि कसी हुई साड़ी में बेहद आकर्षक उभार लिए निखर रही थी,,, रघु को उसके पति पर गुस्सा भी आ रहा था और अच्छा भी लग रहा था क्योंकि अगर उसका पति नकारा ना होता तो शायद इतना अच्छा सुनहरा मौका उसे आज हाथ में लगता ,, आगे-आगे चल रही कोमल की गोलाकार गांड को देखकर रघु का मन बहक रहा था,,, रघु इस सुनसान जगह का फायदा उठाना चाहता था वह कोमल की मर्जी के बिना ही उसके साथ अपनी मनमानी करना चाहता था लेकिन ऐसा करने से उसका मन रोक रहा था,,,,,। वह यही चाहता था कि कोमल अपनी मर्जी से उसका तन मन उसे न्योछावर कर दे,,, क्योंकि यह बात होगी अच्छी तरह से जानता था कि जबरदस्ती से ज्यादा मजा ,,, सहमति से आता है,,,। कोमल के मन में भी रघु के द्वारा बताई गई उसके ससुर की कहानी उसके दिमाग में घूम रही थी,,, और ऊस बात को लेकर उसके बदन में सुरूर सा छा रहा था,,,,,दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों चुप्पी साधे हुए थे लेकिन रघु इस चुप्पी को तोड़ते हुए बोला,,,।

अच्छा कोमल क्या तुम्हारा घूमने का मन बिल्कुल भी नहीं करता,,,।

क्यों नहीं करता शादी से पहले मैं अपने गांव में अपने घर पर सारा दिन इधर उधर अपनी सहेलियों के साथ घूमती रहती थी नदी में नहाना पेड़ों पर चढ़ाना बेर तोड़ना आम तोड़ना,,,, यही दिन भर का काम था और शादी के बाद ससुराल में आकर सब कुछ जैसे धुंधला सा हो गया लेकिन आज तुमने मुझे फिर से बचपन का दिन याद दिला दिया,,, यह खेत खलिहान,,,, ऊंची नीची पगडंडिया ,,,बड़े-बड़े पेड़,,, यही सब तो मेरी जिंदगी थी,,, लेकिन सब कुछ छुटता चला जा रहा है,,,(इतना कहते हुए वह जैसे ही अपना अगला कदम बढ़ाए ऊंची नीची पगडंडियों पर वह अपने पैर को बराबर नहीं रख पाई और वह फिसल कर गिरने ही वाली थी कि तभी रघु अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसे झट से संभालते हुए पकड़ लिया,,,, लेकिन उसे संभालने के चक्कर में उसके दोनों हाथ कोमल की चूचियों पर पड़ गए,,, और कोमल को सहारा देने के चक्कर में उसे संभालने में रघु की हथेलियों का कसाव ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूचियों पर बढ़ गया था जब तक कोमल संभल नहीं गई तब तक उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज में होने के बावजूद भी रघु के हथेली में थी,,,, पहले तो रघु की प्राथमिकता कोमल को गिरने से बचाने में थी लेकिन जैसे उसे इस बात का एहसास हुआ किउसके दोनों हाथ उसकी चूचियों पर हैं तो वह इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वो जाने अनजाने में ही वह ब्लाउज के ऊपर से ही कुछ सेकेंड तक कोमल की दोनों रसभरी चुचियों को दबाने के आनंद से पूरी तरह से काम बिभोर हो गया,,, लेकिन जैसे ही कोमल को अपनी छातियों पर दर्द का एहसास हुआ ,,, तो उसका ध्यान रखो की हथेलियों की तरफ गया रघु उसकी दोनों चूचियों पर अपनी हथेलियों को रखकर उस पर अपनी हथेलीयो का कसाव बनाए हुए था,,,, कोमल उसका ध्यान उसकी गलती पर दिलाती उससे पहले ही रघु उसे संभाल कर अपने दोनों हाथों को पीछे खींच चुका था,,,। कोमल को लगा कि शायद उससे अनजाने में उसे संभालने के चक्कर में हो गया था लेकिन फिर भी जिस तरह से रघु ने उसकी तो हम सूचियों को ब्लाउज के ऊपर सही दबाया था कोमल पूरी तरह से सिहर उठी थी इस तरह से उसके पति ने कभी उसकी चूचीयो को हाथ तक नहीं लगाया था इसलिए पहली बार रघु के जवान हाथों में अपनी दशहरी आम को पाकर वह पूरी तरह से रोमांचित हो उठी थी,,, दर्द तो हुआ था लेकिन उत्तेजना की सिहरन उसके पूरे बदन में दौड़ने लगी थी,,,, उसके खूबसूरत चेहरे पर शर्म की लालिमा छाने लगी थी,,,। रघु मौके की नजाकत को समझते हुए बात की दिशा को दूसरी तरफ रुख देते हुए बोला,,,।

अच्छा हुआ समय रहते में संभाल लिया वरना गिर जाती,,,

पैर फिसल गया था,,,,

आराम से रखा करो पैर,,, गिरकर चोट लग जाती तो,,,,,, तुम्हें सही सलामत ले जाना और ले आना मेरी जिम्मेदारी है,,,

(रघु कि यह बातें कोमल के कोमल मन पर फूल बरसा रहे थे रघु की बातें उसे अपनेपन का एहसास दिला रही थी,,, इस तरह से एक पति क्या लगता है और बोलता है,,,, ना जाने क्यों रघु की बातें सुनकर कोमल को रघु से अपनेपन का एहसास हो रहा था,,,, वह शर्म के मारे नजरें झुकाए हुए ही बोली,,,।)

तुम हो तभी तो मुझे किसी बात की चिंता नहीं है,,,,

(कोमल के कहने के अंदाज़ का रघु पूरी तरह से कायल हो गया उसे भी कोमल से अपनेपन का एहसास हो रहा था,,,वह मन ही मन खुश हो रहा था,,, और दूर हाथ दिखाते हुए रघु बोला,,,)

वह दिखाई दे रहा है तुम्हारे आम का बगीचा,,,(इतना कहते हुए रघु एक बार फिर से कोमल की छातियों की तरफ घूर कर देखते हुए बोला इस बार कोमल रघु की नजरों की वजह से शर्म से पानी पानी होने लगी,,, लेकिन अनजान बनने का नाटक करते हुए बगीचे की तरफ देख कर बोली,,,)

वाह,,, रघु तुम मुझे बहुत ही अच्छी जगह लेकर आए हो मैं बता नहीं सकती कि मैं कितनी खुश हूं,,,,(कोमल के चेहरे से ही इस बात का आभास हो रहा था कि यहां पर आकर कोमल बहुत खुश थी शायद खेत खलियान बाग बगीचे नदिया तालाब यह सब कोमल की जिंदगी का अहम हिस्सा था जिससे वह बिछड़ती चली जा रही थी,,,दोनों वहीं खड़े बगीचे की तरफ देख रहे थे चारों तरफ बड़े-बड़े आम के पेड़ एकदम घना जंगल की तरह लग रहा था चारों तरफ खेत लहलहा रहे थे,,,, दूर दूर तक आदमी का नामो निशान नहीं था,,, तभी रघुवह पुराना घर दिखाते हुए बोला जहां पर वह लाला को पहली बार गांव की औरत के साथ संभोग का आनंद लूटते हुए देखा था,,,)

देखो कोमल वह घर दिखाई दे रहा है ना,,, वो वही घर है जिसमें लाला गांव की औरत की चुदाई कर रहा था,,,( चुदाई शब्द सुनकर कोमल के तन बदन में हलचल सी होने लगी और रघु ने यह सब्द जानबूझकर बोला था,,,रघु की बात सुनकर कोमल पूरी कुछ नहीं बस उसी दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा दिया और पीछे पीछे रघु उसकी गोलाकार गांड को मटकते हुए देखकर गर्म आहे भरता हुआ वह भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा,,, कोमल की मटकती गांड देखकर रघु का लंड अकड़ रहा था,, कोमल भी बहुत खुश थी और अजीब सा सुरूर तन बदन को अपनी आगोश में लिए हुए था,,, ठंडी ठंडी हवा चल रही थी बड़े बड़े घने पेड़ होने की वजह से धूप बिल्कुल भी नहीं लग रही थी,,, थोड़ी ही देर में रघु उस घर का दरवाजा खोल कर अंदर प्रवेश करने लगा चारों तरफ धूल मिट्टी नजर आ रही थी और बीच में वह बिस्तर पड़ा हुआ था जिस पर दो तकिया और बिछौना लपेटा हुआ था रघु समझ गया था कि लाला इस बगीचे में बने घर का उपयोग किस काम के लिए करता था,,, और रघु यही बात अपने अंदाज में कोमल को बताते हुए बोला,,,।

कोमल इस खंडहर नुमा घर में बड़े सलीके से रखा हुआ इस बिस्तर का मतलब समझ रही हो,,,,, लाला आए दिन यहां पर नई नई औरतों को लाकर उसकी चुदाई करता था,,,(कोमल की तरफ से किसी भी प्रकार का जवाब सुने बिना ही वह बोला,,,, रघु की बात सुनकर कोमल के तन बदन में कुछ कुछ होने लगा था,,, रघु बेझिझक चुदाई की बातें कर रहा था और इस तरह की अश्लील बातें करते समय उसके चेहरे पर जरा भी घबराहट या शर्म नजर नहीं आ रही थी ,,। रघु बहुत ही रुचि लेकर उसे सब कुछ बता रहा था,,)

कोमल मैं उस खिड़की से देख रहा था ( सामने की खिड़की की तरफ इशारा करते हुए बोला) खिड़की के बाहर जो आम का पेड़ नजर आ रहा है ना मैं उसी पर चढ़ा हुआ था और उस खिड़की में से मैंने जो देखा,,, वही मैं तुम्हें बता रहा हूं,,, यही विस्तर था,,,, इसी पर वह औरत अपनी दोनों टांगे फैला कर लेटी हुई थी ,,,, और लाला उसकी बुर चाट रहे थे,,,,(बुर चाटने वाली बात सुनकर कोमल एकदम शर्म से पानी पानी हो गई वह कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,) मुझे साफ साफ नजर आ रहा था लाला उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए अपना लंड उसकी बुर में पेल रहे थे,,,,(रघु की बातें कोमल की दोनों टांगों के बीच चिकोटी काटती हुई महसूस हो रही थी,,,। कोमल को अपनी बुर के अंदर अजीब सी गुदगुदी होती हुई महसूस हो रही थी,,,। रघु की बातें उसके तन बदन में सुरूर पैदा कर रही थी,,, रघु की बातें वह कल्पनातीत कर रही थी,,, वह अपने मन में ही उस नजारे के बारे में सोच रही थी कल्पना कर रही थी कि कैसे उस बिस्तर पर सारा दृश्य खेला गया होगा वह अपनी कल्पना में साफ तौर पर देख पा रही थी उस गांव वाली औरत को जिसे वह जानती तक नहीं थी वह बिस्तर पर लेटी हुई थी और उसके ससुर अपने हाथों से उसकी टांगे फैला रहे थे और देते देते उसके ससुर से दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर अपना मुंह रखकर उसकी बुर चाटना शुरू कर दिए थे,,,, कोमल अपनी सांसो को गहरी होती हुई महसूस कर रही थी जब वह कल्पना में अपने ससुर को उस औरत को चोदते हुए पाती है,,,, कल्पना में उसकी निगाहें अपने ससुर के कमर पर टिकी हुई थी जो कि बड़ी तेजी से आगे पीछे हो रही थी,,,, और उस औरत के चेहरे पर जो उसके ससुर के हर धक्के पर मदहोश हो जा रही थी,,,, उस औरत की बुर में बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रहा उसके ससुर का लंड उसे कल्पना में साफ नजर आ रहा था,,,।

उस दृश्य को कल्पना करके कोमल खुद मदहोश हो जा रही थी,, वह अपने आप को कमजोर होती हुई महसूस कर रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं रघु की बातों से उन्मादक स्थिति में आकर वह भी उसी बिस्तर पर रघु के साथ हमबिस्तर ना हो जाए इसलिए वो जल्द से जल्द इस खंडहर नुमा घर से बाहर निकलना चाहती थी इसलिए वह रघु की बात सुनकर आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

हमें यकीन नहीं हो रहा है कि हमारा ससुर इतना गंदा इंसान हैं,,, हमें तो अब शर्म आने लगी है उसे अपना ससुर कहते हुए,,,,छी,,,,,, इस घर में एक पल भी करना हमारे लिए मुश्किल हो रहा है,,,(इतना कहने के साथ ही वह उस खंडहर नुमा घर से बाहर निकल गई,,,। और रघु भी उसके पीछे-पीछे बाहर आ गया अपनी बातों को कहकर और कोमल की उपस्थिति में वो काफी उत्तेजित हो चुका था जिससे उसके पजामे में तंबू सा बन गया था जिसे वह अपनी हथेली से बार-बार कोमल की नजरों से बचा रहा था लेकिन कोमल की नजर उसके पजामे के अग्रभाग पर पहुंच ही गई और वहां पर बने तंबू को देखकर उसके तन बदन में हलचल सी होने लगी,,,, और कोमल इधर-उधर बड़े-बड़े आम के पेड़ को देखने लगी जिस पर आम लदे हुए थे,,।)

रघु वो देखो कितने बड़े बड़े आम है,,, मुझे आप बहुत पसंद है,,,।

मुझे भी कोमल,,,(रघु कोमल की छातियों की तरफ देखते हुए बोला,,, एक बार फिर से रघु की नजरों से कोमल शर्म से पानी पानी हो गई,,,)

तुम तोड़कर लेकर आओ,,, हमे आम खाना है,,,,

बस इतनी सी बात अभी तोडकर लाया,,,,(इतना कहते हुए वह तुरंत पेड़ पर चढ़ने की तैयारी करने लगा और जैसे ही अपने पैर को पेड़ पर रखा जैसे ही वह कोमल की तरफ देखते हूए बोला)

कोमल तुम्हें भी तो पेड़ों पर चढ़ना अच्छा लगता था ना तो क्यों ना आज अपने मन की मुराद पूरी कर लो एक बार फिर से अपना बचपन जी लो,,,

नहीं नहीं अब हमसे नहीं होगा,,,

क्यों नहीं होगा,,,, होगा जरूर होगा,,,,, तुम कोशिश तो करो,,,, मैं भी तुमको पेड़ पर चढ़ते हुए देखना चाहता हूं क्योंकि मैंने आज तक किसी औरत को साड़ी पहनकर पेड़ पर चढ़ते नहीं देखा,,,, हां लड़कियों को देखा हुं,,,,

(रघु की बात कोमल बड़े ध्यान से सुन रही थी उसे लग रहा था कि जैसे रघु यह देखना चाह रहा था कि उसे पेड़ पर चढ़ना आता है या नहीं इसलिए कोमल को थोड़ा गुस्सा आ गया और वह बोली)

अच्छा तो तुम यह देखना चाहते हो कि हम पेड़ पर चढ़ पाते हैं कि नहीं,,,, तुम्हें हमारी कही गई बात सब झूठ लग रही है ना तो अभी हम दिखाते हैं,,,, रुक जाओ,,,,(इतना कहकर कॉमर्स अपनी साड़ी को पीछे से पकड़ कर उसे ऊपर उठाते हुए अपनी कमर में खोंस ली,,,, यह देख कर रघु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी जिससे वह अपनी साड़ी को पकड़कर उठाते हुए अपनी कमर में खुशी थी उसकी यह अदा रघु के दिल पर छुरिया चला रही थी,,, रघु का लंड उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी को सलामी भर रहा था,,,, कोमल पूरी तैयारी के साथ पेड़ पर चढ़ना शुरू कर दी,,,, दोनों हाथों से पेड़ को पकड़ कर उस पर पांव रखकर चढ़ने की कोशिश करने लगी,,,, रघु के मन में कुछ और चल रहा था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था बस बस इंतजार कर रहा था कि कब कोमल पेड़ पर चढ़ जाए,,,पेड़ पर चढ़ते समय किस तरह से अपना बैलेंस बना रही थी उससे उसकी गोलाकार नितंब कुछ ज्यादा ही उभर कर आंखों में चमक पैदा कर रही थी,,,,रघु का मन कर रहा था कि पीछे से जाकर उसे अपनी बाहों में भर ले और उसकी गोल गोल गांड पर अपना लंड रगड़ दे,,,। रघु वही खड़ा गरम आहे भर रहा था,,, कोमल जैसे तैसे करके पेड़ पर चढ़ने लगी,,, तीन चार फीट चढ़ने के बाद उसे थोड़ा मुश्किल होने लगी तो वह रघु की तरफ देखते हूए बोली,,,।

थोड़ा मदद करोगे बहुत दिन गुजर गए पेड़ पर चढ़े इसलिए थोड़ी दिक्कत हो रही है,,,

कोई बात नहीं तुम्हारी मदद करने के लिए तो मैं हमेशा तैयार हूं,,,,(इतना कहते हुए रघु आगे बढ़ा और कोमल को पीछे से सहारा देते हुए उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा,,,, कोमल धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगी लेकिन थोड़ी ऊंचाई पर और पहुंचने के बाद उसे थोड़ी और दिक्कत होने लगी रघु उसकी टांग पकड़ कर उसे ऊपर उठाने की कोशिश कर रहा था लेकिन ठीक से उठा नहीं पा रहा था,,,, तो कोमल ही बोली,,,)

क्या कर रहे हो रघु ,,, हट्टे कट्टे जवान हो लेकिन मुझे नहीं उठा पा रहे हो,,,,

(कोमल की बात सुनकर रघु एकदम तेश में आ गया और बोला,,)

उठाने को तो मैं तुम्हें अपनी गोद में उठाकर इधर उधर भाग सकता हूं लेकिन तुम्हारा बदन छुने में मुझे डर लगता है कि कहीं तुम मुझे डांट ना दो,,,,

अरे नहीं डाटुंगी,,,, तुम बताओ मुझे,,,,

(कोमल की इतनी सी बात सुनते ही रघु एकदम से उत्तेजित होता हुआ उसे सहारा देकर ऊपर उठाते हुए सीधे सीधे उसकी गांड को अपनी हथेली से सहारा देकर ऊपर की तरफ उठाने लगा,,,, धीरे-धीरे कोमल ऊपर की तरफ बढ़ रही थी और रघु उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, और देखते ही देखते रघुकोमल की बड़ी बड़ी गोल-गोल कांड को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर और जोर लगाते हुए उसे ऊपर की तरफ ऊठाने लगा,,,कोमल को इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि रघु उसकी गांड पकड़कर उसे ऊपर उठाएगा इसलिए वह उसे ना डांटने के लिए बोल चुकी थी,,, कोमल के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी क्योंकि यह दूसरी बार था जब गैर मर्द के हाथों में उसकी चूची के साथ-साथ उसकी गांड भी आ चुकी थी जिसे वह जोर से अपनी हथेली में दबोचे हुए उसे ऊपर उठा रहा था,,,, कोमल का दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन अपने वादे के मुताबिक वह बिल्कुल भी ऐतराज ना जताते हुए पेड़ पर चल रही थी लेकिन अजीब सी कशमकश से गुजर भी रही थी क्योंकि उसे तो अंदाजा भी नहीं था कि रघु इस तरह की हरकत करेगा,,,, कोमल जानबूझकर यह जताना चाहती थी कि उसे रघु की हरकत के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं है,,, और वह देखते ही देखते पेड़ पर चढ़ गई,,,, रघु नीचे ही खड़ा था,,, जहां से कोमल एकदम साफ नजर आ रही थी,,, और बिल्कुल साफ तौर पर नजर आ रही थी उसकी साड़ी के अंदर छिपा हुआ उसका खजाना,,, उसका बेहद खूबसूरत बेशकीमती गांड,,,,,आहहहहहहहहहह,,,, देख कर ही रघु के मुंह से गरम आह निकल गई,,, क्या खूबसूरत नजारा था,,,, बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ,,, जिस डाली पर कोमल चढ़ी हुई थी ठीक उसी डाली के नीचे रघु खड़ा था और साड़ी के अंदर से झलकता हुआ उसका बेशकीमती खजाने को देखकर मस्त हुआ जा रहा था,,,,,,, साड़ी के अंदर रघु को सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,, उसकी गोलाकार तरबूज जेसी गांड की दोनों फांकों के बीच की गहरी पतली दरार,,,सससहहहहहह,,,,,आहहहहहहहहह,,,,,देख देख कर ही रघु के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी,,,, हालांकि उसे कोमल की गुलाबी पुर नजर नहीं आ रही थी लेकिन पुरानी जगह से हल्के हल्के रेशमी बाल फांकों के बीच से बाहर निकले हुए नजर आ रहे थे,,, रेशमी बाल के गुच्छे को देखकर अनुभवी रघु इस बात का अंदाजा लग गया कि यह रेशमी बाल कोमल के झांट के बाल हैं उसकी बुर पर रेशमी बालों का झुरमुट है,,,,,,, यह एहसास रघु के लंड के अकड़ पन को और ज्यादा बढ़ावा देने लगा,,,, रघु की आंखें सब कुछ साफ देख रही थी,, क्योंकि पहले के जमाने की औरतें कच्छी नहीं पहनती थी,,,इस बात से बेखबर कि नीचे खड़ा रघु उसके बेशकीमती खजाने को देख कर मजा ले रहा है वह आम तोड़ने में ही मस्त हो गई,,, कोमल जो हम अच्छा लगता था उसे तोड़कर नीचे गिरा दे रही थी,,,, कोमल को आम तोड़ता हुआ देख कर रघु को और ज्यादा उत्तेजना का आभास हो रहा था,,,रघु जानबूझकर उसे दूर दूर के आम दिखा रहा था ताकि वह एक दूसरे डाली पर अपने पांव फैला कर रखें और उसे कोमल की टांगों के बीच का खूबसूरत हिस्सा साफ साफ नजर आने लगे और ऐसा हो भी रहा था,,,, रघु का लंड पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा हो गया था,,, बेहद मादक दृश्य देखकर रघु को इस बात का डर था कि कहीं उसका लंड पानी ना फेंक दे,,, तभी एक और बड़े आम को तोड़ने के लिए कोमल अपना पैर दूसरी डाली पर रख दी,,, और नीचे देखते हुए रघु से बोली,,,

कौन सा ये वाला आम,,,,(ना कहते हुए जैसे ही हो और उसकी नजरों कै सीधान को समझी,,, वह तो तुरंत शर्म से पानी पानी हो गई,,, उसे समझ में आ गया कि रखो नीचे खड़ा होकर उसकी साडी के अंदर झांक रहा है,,,, दोनों पैर को एक दूसरी डाली पर फैला कर रखी हुई थी और उसे समझ में आ गया था कि जिस स्थिति में वह खड़ी थी नीचे खड़ा रघु उसकी साड़ी के अंदर से सब कुछ देख रहा होगा,,, कोमल को समझ में आ गया कि वह किस लिए उसे पेड़ पर चढ़ने के लिए बोला था,,,। उसे शर्म आ रही थी और वह बिना हम थोड़े यह बोलते हुए उतरने लगी की,,,)

बस इतना बहुत हो गया,,,,(और यह कहते हुए वह नीचे उतर गई नीचे उतर कर वह ठीक से रघु से नजरें नहीं मिला पा रही थी,,,। वह अपने मन में यही सोच सोच कर शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी कि रघु नीचे खड़ा उसके गुप्त‌अंगो को देख लिया होगा,,)

दो चार और तोड़ दी होती तो,,,,

नहीं नहीं बस इतना काफी है,,,,,

(इतना कहते हुए वह वहीं पर पेड़ की छाया के नीचे बैठ गई और कच्चे आम को दांतों से काट कर खाने लगी,,, रघु से आम खाता हुआ देख कर खुश हो रहा था आम खाते हुए उसका खूबसूरत चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था,,, कुछ देर तक दोनों वहीं बैठे रहे,,,,, अभी रघु का मन भरा नहीं था वह जिस उम्मीद से कोमल को अपने साथ लेकर आया था उसकी उम्मीद अभी पूरी नहीं हुई थी इसलिए वह बोला,,,)

कोमल तुम्हें झरना देखना है ठंडा पानी गिरता हुआ,,, ठंडे पानी में नहाने का कितना मजा आता है,,,

(झरने वाली बात सुनकर कोमल एकदम खुश हो गई,, और वहां चलने के लिए तैयार हो गई रघु उसे झरने की तरफ ले कर जाने लगा जो कि गांव से बाहर पहाड़ियों के बीच में थी,,,)
 
कोमल की उत्सुकता झरने को देखने के लिए बढ़ती जा रही थी,,,, कुदरत के अनमोल खजाने को देखने की चाह में कोमल अपने अनमोल खजाने कि अनजाने में ही नुमाइश कर चुकी थी,,, जिसका प्रभाव रघु के ऊपर बुरी तरह से पड़ रहा था,,, जो नजारा उसने अभी-अभी कोमल की साड़ी के अंदर देखा था,,, साड़ी के अंदर की गर्माहट उसके तन बदन में महसूस हो रही थी,,,रघु संपूर्ण रूप से उसके अनमोल गुप्त खजाने के दर्शन तो नहीं कर पाया था लेकिन उसकी संरचना को भलीभांति से देख कर उसके आकार का मुआयना कर चुका था,,, ऊंची नीची पगडंडियों,,टेढ़े मेढ़े रास्तों से दोनों चले जा रहे थे चारों तरफ घनी झाड़ियां ऊंचे ऊंचे पेड़ छाए हुए थे जो की पूरी तरह से जंगल का एहसास करा रहे थे,,, बहुत साल पहले यह पूरा जंगल ही था लेकिन धीरे-धीरे मानव वसाहत की वजह से इधर से जंगली जानवर पलायन कर गए,,,।

रघु यह तो पूरा जंगल जैसा है कहीं जंगली जानवर मिल गए तो,,,,।

मिल गए तो क्या हुआ मैं हूं ना,,,, मुझ पर भरोसा नहीं है क्या,,,?

नहीं भरोसा तो बहुत है,,,, लेकिन फिर भी डर लगता है,,,,

मगर तुम्हारे साथ हूं तो तुम्हें डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है,,,, शेर भालू चीता मेरे होते हुए तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते,,,

यहां है क्या,,,(कोमल डरते हुए बोली)

नहीं नहीं यहां कोई भी नहीं है,,,, यह जगह पूरी तरह से सुरक्षित है,,,,

कहीं मेरे ससुर जी घर पर वापस आ गए तो,,,

मुझे नहीं लगता कि इतनी जल्दी वापस लौटेंगे,,,, अगर आ भी गए तो कोई बहाना बना देना,,,,

कौन सा बहाना,,,

अरे कोई भी बहाना औरतों के पास तो वैसे भी हजारों बहाने होते हैं,,,,,,,, लेकिन कोमल क्या सच में तुम्हारे ससुर जी तुम पर गंदी नजर रखते हैं,,,, वैसे भी मुझे उस आदमी का बिल्कुल भी भरोसा नहीं है,,,।

लगता है तुम्हें हम पर विश्वास नहीं हो रहा है,,,,

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है तुम कह रही हो तो सच ही होगा वैसे भी उस आदमी का असली रूप में देख चुका हूं लेकिन मुझे विश्वास नहीं होता कि घर की बहू पर ही वह गंदी नजर रखता है,,,

रघु तुम नहीं जानते कि हम कितनी मुसीबत में जी रहे हैं,,, वह तो किस्मत अच्छी थी कि हम बच गए हमारी इज्जत बची वरना बगीचे वाली औरत की तरह हमारी भी हालत कर देता,,,।

तो क्या तुम्हारे ससुर तुम्हें चोद देते,,,,(रघु एकदम से जानबूझकर गंदी भाषा का प्रयोग करते हुए तपाक से बोला,,, उसकी यह बात सुनकर कोमल एकदम से सन्न रह गई ,,, उसे रघु से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि वह उसके सामने इस तरह से खुले शब्द में बोल देगा,,, कोमल इसकी सवाल का जवाब नहीं दे पाई और शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,)

बहुत गंदे इंसान है तुम्हारे ससुर,,,,, खैर अब मैं तुम्हारी हमेशा रक्षा करूंगा,,,

(रघु कि यह विश्वास भरी बातें उसे बहुत अच्छी लगती थी,, लेकिन कभी-कभी उसके मुंह से खुले शब्द सुनकर वह अंदर ही अंदर सिहर उठती थी,,, कोमल बिना जवाब दिए आगे बढ़ती चली जा रही थी,,,, मौसम बहुत सुहावना हो चुका था दोपहर का समय था लेकिन आसमान में बादल छाने लगे थे,,, हालांकि बारिश होने की कोई भी उम्मीद नजर नहीं आ रही थी लेकिन धूप बिल्कुल भी नहीं थी ठंडी ठंडी पवन बह रही थी,,,, दोनों चले जा रहे थे रघु निश्चिंत होकर उसे अपने साथ लिए जा रहा था,,,, कोमल को अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था कि वहां किसी गैर लड़के के साथ सबकी नजरों से बचकर झरने की तरफ जा रही थी अगर यह बात किसी को पता चल जाए तो बहुत ही बदनामी हो जाए क्योंकि गांव में अक्सर इस तरह से औरतों को दूसरे लड़कों के साथ घूमने की इजाजत बिल्कुल भी नहीं थी,,, चलते हुए भी रघु अपनी आंखों को सेंक ले रहा था,,। कोमल के गोलाकार नितंब पानी भरे गुब्बारों की तरह हील डुल रहे थे,,,। और उसके हिलते हुए नितंबों को देखकर रघु का लंड पजामे में हरकत कर रहा था,,।,,, रास्ते भर कोमल यही सोच कर परेशान हो रही थी कि नीचे खड़ा रघु उसके साड़ी के अंदर झांक रहा था,,,,,, क्या उसके मन में भी वही सब चलता है जो दूसरे मर्दों के मन में चलता है,,, क्या वो भी उसके प्रति गंदे ख्याल रखता है,,, यही सब सोचकर परेशान हो रही थी लेकिन ना जाने क्यों उसे रघु की हरकत कहीं ना कहीं अच्छी भी लग रही थी,, भले ही वह सीधी-सादी बहुत ही अच्छी और संस्कारी औरत थी लेकिन, एक बात से वह भी इनकार नहीं कर सकती क्योंकि वह अंदर ही अंदर तन से प्यासी थी पति के प्यार से पैसे थी शारीरिक सुख से वंचित भी इसीलिए कहीं ना कहीं रघु की हरकतें उसे अच्छी लग रही थी उसके तन बदन में सिहरन पैदा कर रही थी,,,।

देखते ही देखते स्थान आ गया जहां पर रघु उसे लेकर आना चाहता था,,, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली,,, पहाड़ों के बीच से नीचे गिरता हुआ झरना और झरने का पानी धीरे धीरे तालाब में इकट्ठा होना बेहद नयनरम्य दृश्य लग रहा था,,, दोनों छोटी सी टेकरी पर खड़े हो गए और सामने से पहाड़ पर से गिर रहे झरने को देखने लगे कोमल तो खुशी से फूली नहीं समा रही थी कुदरत की बेहद खूबसूरत कलाकृति उसे देखने को मिलेगी यहां पर एकदम शांति छाई हुई थी केवल झरने का शोर और पंछियों की कलबलाहट सुनाई दे रही थी,,, जो कि कानो को बेहद मधुर लग रही थी,,,,

देखो कोमल कितना खूबसूरत नजारा है,,,,

मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि इतना खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा कुदरत की बनाई हुई इतनी खूबसूरत कलाकृति होगी,,,, कसम से रघु हम यहां आकर बहुत खुश हैं,,, तुमने हमें स्वर्ग में लाकर खड़ा कर दिया है,,,, (कोमल आश्चर्य से कुदरत के उस खूबसूरत नजारे को देखती जा रही थी वह मन ही मन बहुत खुश थी,,, मौसम की बड़ा सुहाना हो चुका था एकदम ठंडी ठंडी हवा तेज चल रही हवा के साथ साथ झरने से गिरते हुए पानी की बूंदे,, उसके तन बदन मैं ठंडक भर दे रहे थे रघु के मन में तो कुछ और चल रहा था,,,, इस झरने को देख कर उसे वह बात याद आ गई जब इसी जगह पर वह अनजाने में ही अपनी बहन सालों को संपूर्ण रूप से नंगी तालाब से निकलकर भागते हुए देखा था लेकिन उस समय उसे इस बात का पता बिल्कुल भी नहीं था कि जिस लड़की को वह पूरी तरह से नग्न अवस्था में देखा है वह उसकी बड़ी बहन ने,,, रघु का लंड उस वाक्ये को याद करके अंगड़ाई लेने लगा,,, उसका मन कोमल को संपूर्ण रूप से नंगी देखने को कर रहा था और इसीलिए वह कोमल से बोला,,।)

कोमल क्या तुम कभी झरने के नीचे खड़ी होकर नहाने का मजा ली हो,,,,

नहीं,,,, लेकिन मैं सच में झरने के नीचे खड़े होकर नहाने का मजा लेना चाहती हूं,,,।

तो देर किस बात की है चलो,,,,

लेकिन कपड़े,,,,, गीले हो जाएंगे तो पहन कर क्या जाएंगे,,, नहीं नहीं जाने दो,,,,(कोमल उदास मन से बोली हो झरने के नीचे खड़ी होकर ठंडे ठंडे पानी का मजा लेना चाहती थी लेकिन उसने दूसरे कपड़े भी नहीं लेकर आई थी,,,,और कपड़े गीले हो गए तो सुखेंगे भी नहीं क्योंकि धूप बिल्कुल भी नहीं थी,,, रघु को अपना काम ना बनता देख कर वह बोला,,,)

क्या करती हो कोमल तूम कितनी मुसीबत के बाद यहां पर आज तुम्हारी हो और यहां आ कर वापस लौट जाओगी अब पता नहीं इस तरह का मौका मिले या ना मिले,,, मेरी मानो आज अपने मन की इच्छा पूरी कर लो,,,,(रघु अपने मन में उठ रही उत्कंठा को अपनी जबान पर लाते हुए बोला)

मेरा मन भी कर रहा है लेकिन,,,,,(कोमल अपनी इच्छा को दबाते हुए बोली)

लेकिन क्या,,,,,?

मेरे कपड़े गीले हो गए तो,,,,

अरे गीले कैसे होंगे,,,, उन्हें उतारकर चलो ना,,,, कपड़े ही नहीं रहेंगे तो गीले कैसे होंगे,,, मैं तो जब भी यहां नहाता हूं तो कपड़े उतार कर नहाता हूं,,,,

अरे तुम तो लड़के हो तुम्हारा चलता है लेकिन हम,,,,

तो क्या हुआ तुम भी तो कपड़े उतार कर नहा सकती हो और वैसे भी यहां पर दूसरा कोई देखने वाला थोड़ी है,,,

तुम तो हो ना,,,,(तिरछी नजर से देखते हुए कोमल बोली)

अरे मैं तो तुम्हारा दोस्त हूं और दोस्त से कैसी शर्म,,,,(रघु कोमल को बहकाते हुए बोला,,,)

नहीं नहीं मुझे शर्म आती है,,,,

अरे यार शर्म कैसी,,,,,(रघु को अपना काम बिगडता हुआ नजर आ रहा था उसे लगने लगा था कि कोमल अपने कपड़े उतारने के लिए कभी भी तैयार नहीं होगी इसलिए वह बोला,,,)

अच्छा ठीक है कोमल पहले तुम नहा लो,,,, मैं अपनी नजर दूसरी तरफ करके रखता हूं तुम्हें देखूंगा भी नहीं मैं नहीं चाहता कि यहां से तुम अपना मन मार कर वापस लौटो,,,,

नहीं नहीं हमें तुम्हारा विश्वास बिल्कुल भी नहीं है,,,

ससुर नहीं हु, में तुम्हारा,,, जो मुझ पर विश्वास नहीं कर रही हो मैं एक बार बोल दिया तो बोल दिया मैं तुम्हारी,,, तरफ देखूंगा भी नहीं,,,, मुझ पर तुम्हें विश्वास तो है ना,,,,

(रघु की बात सुनकर उसे विश्वास तो नहीं हो रहा था लेकिन रघु पर थोड़ा थोड़ा भरोसा जरूर करती थी इसलिए उसकी बात मानते हो क हां मैं सिर हिला दि,,,।)

यह हुई ना बात,,,, अब जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ,,,,,(रघु जानबूझकर उसे कपड़े उतार कर नंगी होने के लिए कह रहा था,,,,) और झरने में जाकर नहाने का मजा लो,,,,(रघु की जल्दी से नंगी होने वाली बात सुनकर कोमल का दिल जोरो से धड़कने लगा,,, बड़ा बेशर्म हो कर रघु ने यह बात कही थी,,, रघु जानबूझकर उसे अपने शब्दों के जाल में फसाना चाहता था और ऐसा हो भी रहा था रघु के मुंह से निकला हुआ एक एक अश्लील शब्द कोमल के कोमल मन पर हथौड़े की तरह वार कर रहा था,,, इस तरह के गंदे शब्द वह पहली बार सुन रही थी नंगी होने वाली बात को वह कुछ ज्यादा ही अपने मन पर ले रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि मानो कोई उससे संभोग करने के लिए उसे कपड़े उतार कर नंगी होने के लिए कह रहा है,,,, कोमल को समझ में नहीं आ रहा था कि वो रखो की बात माने या ना माने झरने में नहाने की लालच से ऐसा करने से रोक भी नहीं रही थी,,, वह झरने में नहाना चाहती थी,,, अगर धूप निकली होती तो वह कपड़े पहने हुए ही झरने के नीचे नहाने लग जाती क्योंकि दो की वजह से उसके कपड़े सूख जाते हैं लेकिन धूप बिल्कुल भी नहीं थी और ऐसे नहीं कपड़ा सीखना नामुमकिन था और घर जाने पर अगर किले कपड़े में उसके ससुर उसे देख लेते तो क्या जवाब देती,,,, इसलिए वह रघु की तरफ देखी और थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,।)

तुम दूसरी तरफ मुंह करके खड़े हो जाओ और कसम है तुम्हें अगर मेरी तरफ देखे तो,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो कमाल मैं अपने वादे पर अटल हूं,,,, एक बार बोल दिया तो बोल दिया,,(ऐसा कहते हुए रघु दूसरी तरफ मुंह करके खड़ा हो गया और कोमल उसे देखकर धीरे-धीरे बड़े से पत्थर के पीछे जाने लगी,,, रघु का मन उत्सुकता से भरा जा रहा था,,, कोमल का दिल जोरों से धड़क रहा था वह पत्थर के पीछे खड़ी होकर धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतारने लगी,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था साड़ी उतार कर बड़े से पत्थर के ऊपर रख दे जहां से तिरछी नजर से रघु उस पत्थर की तरफ देख रहा था उसे पत्र के पीछे खड़ी कोमल तो नहीं दिख रही थी लेकिन पत्थर के ऊपर रखी हुई साड़ी जरूर दिख रही थी जिसे देख कर उसे यकीन हो गया कि कोमल अपने कपड़े उतार रही है और साड़ी उतार कर पत्थर पर रख चुकी थी,,, ब्लाउज की बारी थी,,,, रघु उत्सुकता से तिरछी नजर से पत्थर की तरह देखे जा रहा था जहां पर थोड़ी ही देर में पत्थर पर ब्लाउज रखा गया था जिसे देखकर पजामे के अंदर रघु का लंड अंगड़ाई लेने लगा,,, ब्लाउज के बटन खोलते हुए कोमल का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, मैं जानती थी कि किसी गैर मर्द की उपस्थिति में इस तरह से कपड़े उतारना गलत है लेकिन फिर भी वह जैसे किसी मोह पास में बंध चुकी थी,,,ना चाहते हुए भी अपने क्लाउड के सारे बटन खोल कर ब्लाउज को पत्थर के ऊपर रख दी थी उसके नारंगी जैसी गोल-गोल चूचियां एकदम उजागर हो गई थी हालांकि इस समय रघु की नजर उसकी चूचियों पर नहीं थी लेकिन फिर भी ब्लाऊज को देख कर ही वह कोमल की कोमल चुचियों की गोलाई के बारे में अंदाजा लगा रहा था,,,, कोमल का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अब बारी पेटीकोट की थी,,, और अपनी पेटीकोट की डोरी को खोलते समय उसे अपने अंदर एक गंदी औरत होने का एहसास हो रहा था,,,क्योंकि अपनी पेटीकोट की डोरी खोलते समय है उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे वह किसी पराए मर्द से चुदने के लिए अपनी पेटिकोट की डोरी खोलकर नंगी होने जा रही है,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था देखते ही देखते पेटीकोट की डोरी खुलते ही कमर के इर्द-गिर्द एक असली भी पेटीकोट ढीली हो गई और ढीली होकर उसके कदमों में गिर गई,,, मानो कोमल की जवानी प्रदर्शित होने के लिए मचल रही हो पत्थर के पीछे को पूरी तरह से नंगी थी संपूर्ण नंगी गोरे-गोरे खूबसूरत बदन पर कपड़े का रेसा भी नहीं था,,,, दूध जैसा चमकता बदन खूबसूरती का गोदाम लग रहा था बदन पर चर्बी की मात्रा बिल्कुल भी नहीं थी एकदम सुडौल काया,,,, गोलाकार नारंगी जैसी चुचियां,,, केले के तने के समान चिकनी चिकनी जांघें ,,,औ दोनों टांगों के बीच उसकी पतली गहरी दरार झांट के रेशमी बालों से घीरी हुई,,, ऐसा लग रहा था कि मानो जंगल के बीच में से नदी बह रही हो,,,, बड़े पत्थर के ऊपर पेटीकोट के रखते ही,,रघु का लंड पजामे के अंदर टन टनाकर खड़ा हो गया,,,, उसे यकीन हो गया कि कोमल उसकी बातों में आ चुकी है,,, और ऊसकी बात मानकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई है,,। कोमल के नंगे पन के एहसास से रघु पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूबने लगा और ना चाहते हुए भी उसका हाथ पजामे के अग्रभाग पर आ गया,,,, कोमल इस तरह से पहाड़ियों के बीच अपने कपड़े उतार कर नंगी होकर शर्म महसूस कर रही थी वह यहा से भाग जाना चाहती थीक्योंकि उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि वह जो भी कर रही है गलत कर रही है अौर इस बारे में किसी को भी पता चल गया तो वह बदनाम हो जाएगी,, लेकिन फिर भी उसका मन उसे वही रोके हुए था उसे अपने मन की करने देने के लिए उकसा रहा था,,, इसलिए वो झरने में जाने के लिए तैयार हो गई पत्थर की ओर से बाहर निकलने से पहले वह पत्थर पकड़ कर चोर नजरों से रघु की तरफ देखने लगी रघु जानता था कि कपड़े उतार कर नंगी हो जाने के बाद किसी भी समय कोमल बाहर आ सकती थी इसलिए वह अपनी नजर सामने ही किए हुए खड़ा रहा और यह देखकर कोमल के होठों पर मुस्कुराहट तैरने लगी क्योंकि उसे विश्वास हो गया कि रघु पलट कर उसकी तरफ नहीं देखेगा,,,, और पूरी तरह से विश्वास हो जाने के बाद,,, कोमल पत्थर की ओर से बाहर निकली और अपनी हथेली को अपनी दोनों टांगों के बीच की दरार पर रखकर पैर संभाल कर रखते हुए झरने की तरफ जाने लगी,,, उसके पायल की छन छन की आवाज से रघु को इस बात का एहसास हो रहा था कि कोमल पत्थर की ओर से बाहर आने के बाद झरने की तरफ जा रही थी इसलिए,,, रघु नजर घुमाकर कोमल को देखने लगा कोमल संपूर्ण रूप से नंगी थी,,, एकदम नंगी बिना कपड़ों की और बिना कपड़ों के भी वह बेहद खूबसूरत लग रही थी,,, नग्नता में कोमल की खूबसूरती उसका हुस्न देखकर रघु की आंखें फटी की फटी रह गई,,,, कोमल अद्भुत खूबसूरती का खजाना थी वह झरने की तरफ जा रहे थे जिससे उसके गोलाकार नितंब आपस में रगड़ खाते हुए दाएं बाएं ऊपर नीचे हो रही थी,, और यह देख कर रघु का धैर्य जवाब दे रहा था,,। उसका मन कर रहा था कि उसके पीछे पीछे वह अभी झरने की तरफ चला जाए लेकिन वह जल्दबाजी दिखाना नहीं चाहता था क्योंकि जब उसके कहने से वह कपड़े उतार चुकी है तब तो धीरे धीरे टांग खोलने में भी उसे कोई दिक्कत नहीं होगी,,, यही सोच कर रघु अपना मन मार कर वहीं खड़ा का खड़ा रह गया,,, और कोमल धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाते हुए झरने की तरफ जा रही थी उसके लिए जिंदगी में यह पहला मौका था जब वह बिना कपड़ों के संपूर्ण रूप से नंगी होकर टहल रही थी और वह भी इस खुली जगह पर,,, उसे भी संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में घूमना कुछ अजीब सा लग रहा था लेकिन बदन में उत्तेजना कि‌सिहरन भी फेल रही थी,,,, वह चलते हुए यही सोच रही थी कि रघु उसे देख तो नहीं रहा होगा,,, कोई भी इंसान अपने वादे पर पक्का तो रह सकता है लेकिन औरतों के मामले में उसका धैर्य कब जवाब दे जाए यह नहीं कहा जा सकता,,,,इसलिए और अभी के बारे में भी यही सोच रही थी कि वह उसे देख तो नहीं रहा होगा अगर देख रहा होगा तो उस समय वह उसे पूरी तरह से नंगी देख रहा होगा उसकी गोलाकार गांड ऊसे दिखाई दे रही होगी,,, अगर ऐसा है तो वह उसके नंगे बदन को देख कर क्या सोच रहा होगा क्या रघु भी वही सोच रहा होगा जो दूसरे मर्द सोचते हैं,,,यही सोचते हुए वचन की तरफ चली जा रही थी लेकिन पीछे मुड़कर देखने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी अपने मन में यह सोच रही थी कि अगर वह उसे देखता ही होगा तो वह उससे नजर कैसे मिला पाएंगी,,, मन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसका ध्यान खुद ही अपनी चुचियों पर चला गया जो कि बेहद ठोस और गोलाकार थी,,, यह तो वह अच्छी तरह से जानते थे कि ठोस नजर आने वाली चूची दबाने पर कितनी नरम-नरम होती है,,,।अपनी चुचियों की गोलाई को देख कर उसे इस बात का अफसोस होने लगा कि उसके पति ने उसे स्त्री सुख का अहसास नहीं कराया,,, यह सोचते हुए कोमल झरने के बेहद करीब पहुंच गई जहां से उसे पानी के छींटे उसके बदन पर पड़ रही थी और उसे ठंडे पन का एहसास हो रहा था,,, आज उसका सपना पूरा होनेवाला था,,, प्रकृति से उसे हमेशा से लगाव रहा था,,,, खेतों में घूमना छोटी-छोटी पहाड़ियों पर चढ़ना नदी में नहाना यह सब उसेअच्छा लगता था इसलिए तो आज झरना देखकर वह बेहद खुश हो गई थी और झरने में नहाने की लालच की वजह से ही वहएक गैर मर्द के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने के लिए तैयार हो चुकी थी और हो भी गई थी,,, देखते ही देखते कोमल झरने के नीचे पहुंच गई पहली बार जब उसके सिर पर झरने का ठंडा पानी पड़ा तो वह ठंड से सिहर गई,,, लेकिन एक झटके में उसका पूरा बदन पानी से तरबतर हो गया धीरे-धीरे उसे मजा आने लगा,,,, रघु उसे देखे जा रहा था,,,

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थोड़ी देर में कोमल सब कुछ भूल गई उसे यह भी याद नहीं रहा कि थोड़ी ही दूर पर एक जवान लड़का खड़ा है,,, वहां अपनी सुध बुध भूल कर झरने के पानी में नहाने का आनंद लूटने लगी उसे इस बात का भी अहसास तक नहीं हुआ कि उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं है वह निश्चिंत होकर पूरी तरह से मगन होकर नहाने का मजा लेने लगी वह अपना हाथ अपने बदन पर चारों तरफ घुमाने लगी मानो की अपने घर में बने गुसल खाने में नहा रही हो,,, उसका दोनों हाथ उसके बदन पर चारों तरफ घूम रहे थे भले ही वह उसकी गोल-गोल चूचियां हो या टांगों के बीच की पतली दरार हो,,, नितंबों पर दोनों हाथ को फेरते हुए मानो वह उस पर साबुन लगा रही हो,, जो देखकर रघु का दिमाग चकराने लगा क्योंकि जिस तरह से वह निश्चिंत होकर अपने बदन पर हाथ फेर रही थी,,, रघु यकीन नहीं कर पा रहा था किसकी आंखों के सामने कोमल ही है क्योंकि कोमल बेहद शर्मीली औरत थी,,, लेकिन इस समय कोमल का व्यवहार निश्चिंत पूर्ण और थोड़ा बेशर्मी वाला हो गया था इसमें कोमल की कोई भी गलती नहीं थी वह तो भूल चुकी थी कि वह कहां पर है कौन सी जगह पर है और किस के सामने,,, लेकिन कोमल की हरकत का मतलब रघु गलत समझने लगा उसे लगने लगा था कि शायद कोमल उसकी तरफ इशारा तो नहीं कर रही है,,,,कोमल की हरकत को देख कर रखो क्या मेरे में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी हालांकि वह पहले से ही काफी उत्तेजित हो चुका था उसे नंगी देखकर और उसकी हरकतों को देख कर तो वह मदहोश होने लगा,,,, उत्तेजना और बदन की प्यास से रघु का गला सूखता जा रहा था,,,, उससे रहा नहीं जा रहा था झरने का पानी जिस तरह से उसके कोमल खूबसूरत नंगे बदन पर फिसल रहा था,,, उसी तरह से रघु की नियत कोमल के खूबसूरत नंगे बदन को देखकर फिसल रहा था वैसे भी रघुऔरतों के मामले में कुछ ज्यादा ही लालची हो चुका खूबसूरत औरत देखते ही उसके मुंह में पानी आने लगता था लेकिन यहां तो कोमल की खूबसूरत नंगे बदन और उसकी हरकत को देख कर उसके मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आना शुरू हो गया था,,,,रघु से सब्र कर पाना अब मुश्किल बजा रहा था इसलिए वह तुरंत अपने कपड़े उतारकर एकदम नंगा हो गया,,,, कोमल नहाने में मस्त थी झरने का पानी उसके खूबसूरत बदन को ठंडा कर रहा था,,,,,,, उसे तो इस बात का पता तक नहीं था कि रघु जो उसे यहां लेकर आया था जो कि उसे इस अवस्था में ना देखने का वादा किया था और उसके खूबसूरत नंगे बदन को देख कर अपना धैर्य खो बैठा है और अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो चुका है,,, रघु झरने में नहा रही कोमल की तरफ आगे बढ़ता हुआ अपने लंड को हिला रहा था एक तरह से वह कोमल की बुर में अपने लंड को डालने के लिए उसे पूरी तरह से तैनात करते हुए तैयार कर रहा था,,,

रघु के लिए यह अवस्था ही ऐसी थी बिल्कुल काबू से बाहर कोमल की मदहोश जवानी रघु को पल-पल बेकाबू कर रही थी,,, देखते ही देखते गरम आहें भरते हुए रघु झरने के नीचे ना रहे कोमल के बेहद करीब पहुंच गया उसके ऊपर भी झरने का पानी गिरने लगा,,,, रघु ठीक कोमल के पीछे जाकर खड़ा हो गया उसके नितंबों पर से फिसल रही पानी की बूंदे रघु के प्यास को और ज्यादा बढ़ा रही थी उसका मन कर रहा था कि नीचे बैठ कर उसके नितंबों से गिर रही पानी की बूंदों को जीभ लगाकर चाट कर अपनी प्यास बुझा ले,,,, रघु का लंड सीधा टनटनाकर खड़ा था,। और इतना करीब था कि अगर थोड़ा सा भी कोमल पीछे होती तो रघु का लंड सीधे उसकी गांड पर स्पर्श करता ,,,, और यही हुआ भी,,,, कोमल तो अपने में मशगूल थी उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि उसके पीछे रघु नंगा और अपने लंड को खड़ा करके खड़ा है,,,, और अचानक ही कोमल अपने घुटनों को अपने हाथ से मलने के लिए नीचे झुकी ही थी कि उसकी गांड पर कोई ठोस चीज की चुभन महसूस हुई और वह डर के मारे पीछे पलट कर देखी तो उसके होश उड़ गए पीछे रघु एकदम नंगा होकर खड़ा था उसका लंड उसकी गांड की दरार के बीचो बीच फंस चुका था,,,,,, अपने आप को संभालने के चक्कर में आगे की तरफ गिरने ही वाली थी कि तुरंत रघु अपना दोनों हाथ उसकी कमर पर रख कर उसे थाम लिया और उसी स्थिति में पकड़ लिया मानो कि जैसे किसी औरत को घोड़ी बनाकर चोद रहा हो,,,, नीचे गिरने के डर से वह पूरी तरह से सहम उठी थी,,,

उसे डर से वह निकल पाती इससे पहले ही रखो का लंड का गर्म सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी पत्तियों पर रगड़ खाने लगी,,,, कोमल को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि उसके बदन में यह कैसी भावना जागरूक हो रही है वह पूरी तरह से अद्भुत अहसास में डूबने लगी पल भर में ही ठंडे पानी की बौछार में भी उसका खूबसूरत गर्म बदन और भी ज्यादा गर्म होने लगा,, रघु उसी तरह से पकड़े हुए बोला,,,।

क्या करती हो कोमल अभी तो तुम नीचे गिर गई होती,,,,(ऐसा कहते हुए रघु उसकी कमर पकड़कर ऊसे ऊपर उठाने लगा,,,) मैं कहा था ना तुमसे अबसे तुम्हारी रक्षा में करूंगा,,,

(कोमल को अपनी कमर पर,, मजबूत हथेलियों का स्पर्श और उसका कसाव बेहद आनंददायक और रोमांचक लग रहा था उसे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था वो कुछ बोल नहीं पा रही थी सिर्फ उसके मुंह से इतना ही निकला,,,)

तुम यहां तुम तो वादा किए थे,,,, फिर,,,,,(कोमल रघु की आंखों में देखते हुए पूरी रही थी कि उसके होठों पर अपनी उंगली रखकर ऊसे चुप करते हुए रघु बोला,,)

कुछ मत कहो कोमल,,, तुम्हारी खूबसूरती देखकर मुझसे रहा नहीं गया बेवकूफ है तुम्हारा पति जो इतनी खूबसूरत अप्सरा जैसी पत्नी को छोड़कर दर-दर भटक रहा है अगर तुम मेरी पत्नी होती तो मे तो रात दिन तुम्हें अपनी बाहों में लेकर तुम्हें प्यार करता,,,,(ऐसा कहते हो मेरे को अपनी प्यासे होठों को कोमल के खूबसूरत गुलाबी तपते हुए होठों के करीब ले जाने लगा,,, कोमल को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह अपने होठों को अपने चेहरे को दूसरी तरफ फेर लेना चाहती थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई,,, ना जाने कैसी कशिश थी कि वह अपने काबू में नहीं थी,,,और देखते ही देखते रघु अपने होठों को उसके गुलाबी होठों पर रखकर उसे मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,,, पल भर में ही कोमल प्यासी जवानी की आग में पिघलने लगी,, वह रघु को रोकने की भी कोशिश नहीं कर रही थी,,, चुंबन होठों पर हो रहा था लेकिन सुरसुराहट टांगों के बीच की पत्नी दरार में हो रहा था,,, कोमल कुछ समझ नही पा रही थी,,। शायद उसके होठों से पहली बार कोई इस तरह की हरकत कर रहा था कोमल की तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध ना होता देखकर रघु की हिम्मत बढने लगी और उसके होठों को चूसते हुए अपना एक हाथ उसकी मखमली रसभरी नारंगी पर रख दिया,, और उसे जोर से दबा दिया,,,,।

आहहहहहहह,,,,

(सिर्फ इतना ही कोमल के मुख से निकल पाया और रघु दूसरा हाथ दूसरी चूची पर रखकर दबाना शुरू कर दिया,,, कोमल के कोमल तन तन बदन में अजीब सी हलचल होना शुरू हो गई रघु शराबी की तरह कोमल के होठों से शराब के बुंदो का रसपान कर रहा था,,, कोमल को समझ में नहीं आ रहा था कि वह उसका साथ दे या हट जाए,,,यह जानते हुए भी कि जो कुछ भी कहो रहा है वह गलत हो रहा है फिर भी वह अपने जिस्म के प्यास के अधीन होकर पर रखो को इनकार नहीं कर पा रही थी वह पूरी तरह से असमर्थ हो चुकी थी,,रघु पागलों की तरह उसके रसीले होंठों का रसपान करना है और दोनों हाथों से चूची को दबाते हुए अपने खड़े लंड की ठोकर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी फुली हुई मखमली बुर के ऊपर मार रहा था,,, रघु के लंड की ठोकर अपनी बुर के ऊपर महसूस करके कोमल पूरी मदहोश हो चुकी है उसे समझ में नहीं आ रहा था उसके घुटने थरथर कांप रहे थे,,,,,,कोमल प्यासी थी शादीशुदा जिंदगी में की कुंवारी लड़की की तरह जी रही थी पति का सुख कभी प्राप्त नहीं हुआ था शारीरिक सुख क्या है इसकी परिभाषा उसे नहीं मालूम थी इसलिए रघु के प्रयास से वह पूरी तरह से काम विह्वल हो गई,,, और कुछ ही देर बाद चुंबन में वह रघु का साथ देने लगी,,, उसके होंठ अपने आप खुल चुके थे और उसके खुले हुए होठों को महसूस करके रघु फूले नहीं समा रहा था फोटो के खुलने का मतलब था कि उसकी सहमति प्राप्त हो चुकी थी और होठ खुलने के बाद टांग खुलने में ज्यादा देर नहीं लगता,,, रघु तो मदहोश होकर अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दिया ऊपर झरने का पानी और नीचे बुर से मदन रस बराबर बह रहा था,,,,,रघु को इस बात का डर था कि मदहोश होकर कहीं पांव फिसल गया तो सीधा दोनों नीचे तालाब में जाकर गिरेंगे,,, इसलिए रघुएक झटके में ही उसे अपनी गोद में उठा लिया और झरने से बाहर निकलने लगा कोमल के लिए बोलने लायक कुछ भी नहीं था ,,, रघु अच्छे से मजा लेना चाहता था इसलिए बड़े पत्थर के करीब रखे हुए कपड़ों पर उसे धीरे से बिठा दिया,,, और कोमल भीबड़े आराम से कपड़ों पर बैठ गई को पूरी तरह से नंगी थी पानी में भीगी हुई और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,, रघु भी पूरा नंगा था उसका लंड पूरी तरह से खडा हो चुका था,,,,तिरछी नजरों से शरमाते हुए कोमल उसकी दोनों टांगों के बीच निगाह डाली तो उसके खड़े लंड की मोटाई और लंबाई देखकर उसके होश उड़ गए,,, शर्मा कर घबराकर तुरंत उसकी निगाहें नीचे हो गई,,, रघु की हालत खराब हो रही थी कोमल का भीगा बदन उसकी उत्तेजना को ज्यादा बढ़ा रहा था,,, रघु से रहा नहीं जा रहा था वह जानता था कि वह कोमल के साथ जो कुछ भी करेगा कोमल पूरी तरह से मस्त हो जाएगी वरना अगर उसे अच्छा नहीं लगता तो वह उसे कब से धक्का देकर हटा दी होती,,, इसी आत्मविश्वास से वह कोमल के करीब बैठ गया उसकी दोनों टांगों को फैलाने लगा,,,।

यह क्या कर रहे हो रघु,,,,(रघु की तरफ शर्माते हुए देखकर वह बोली,,,)

तुम्हें स्त्री होने का गौरव प्राप्त कराने जा रहा हूं,,,(ऐसा कहते हुए और कोमल की दोनों टांगों को खोल दिया,,, कोमल की दोनों टांगों के बीच उसकी गुलाबी बुर को देखकर रघु की आंखें चौंधिया गई,,,, वह कोमल की गुलाबी बुर को देखता ही रह गया कोमल की रसीली बुर को देखकर

उसे इस बात का अंदाजा लग गया कि वाकई में कोमल पूरी तरह से अनचुदी बुर की मालकिन थी,,, एक शादीशुदा औरत की कुंवारी बुर पाकर रघु खुशी से झूम उठा,,,,, उसकी गुलाबी बुर के इर्द-गिर्द रसीली बालों का झुरमुट नजर आ रहा था,,, रघु कोमल के झांट के बाल देख कर और ज्यादा उत्तेजित हो गया,,।

वाह,,,, कोमल जितनी चेहरा खूबसूरत तुम हो उतनी ही ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी दोनों टांगों के बीच यह गुलाबी बुर है,,,,(रघु एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, और कोमल रघु के मुंह से अपनी बुर की तारीफ सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी हो गई,,,, वह शर्म के मारे गड़ी जा रही थी,,, वह बुत बनकर उसी तरह से बैठी रह गई,,, रघु पागलों की तरह उसकी दोनों टांगों के बीच में नजर गड़ाए हुए उसकी गुलाबी बुर को देखे जा रहा था,,,। बेहद उत्तेजनात्मक मादकता से भरा हुआ नजारा था चारों तरफ हरियाली और पहाड़ी छाई हुई थी झरना बह रहा था,,, मौसम बहुत ही सुहावना हो चुका था और छोटी सी टेकन के पास में कपड़ों के ढेर पर खूबसूरती से भरी हुई कोमल अपनी दोनों टांगें फैलाए बैठी हुई थी,,, जो कि उसकी टांगों को रघु ने ही अपने हाथों से फैलाया था,,, रघु की हरकत की वजह से और पहली बार इस तरह के वाक्ये के बदौलतकोमल के बदन में भी सुरूर चढ़ना शुरु हो गया था जिसका असर उसे दोनों टांगों के बीच अपनी रसीली गुलाबी बुर के अंदर महसूस हो रही थी,,, उसमें से उसे अपना मदन रस बहता हुआ साथ महसूस हो रहा था,,,।

अभी दोनों के पास बहुत समय था,,, रघु इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठाना चाहता था,,,वह कोमल की मदमस्त जवानी का रस पूरी तरह से निचोड़ लेना चाहता था,,, इसलिए मैं अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर सीधे उसे कोमल की मदमस्त चिकनी मोटी जांग पर रख दिया,,,कोमल पहली बार अपनी चिकनी जांघों पर मर्दाना हाथों का स्पर्श पाकर पूरी तरह से सिहर उठी और उसके मुंह से अनायास ही सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,।

ससससहहहह,,,,,,,,,,

क्या हुआ कोमल,,,?(रघु जानबूझकर उसकी जान को अपनी हथेली से दबाते हुए बोला)

कककक,, कुछ नहीं,,,(कोमल घबराते हुए और शरमाते हुए हकला कर बोली)

तुम बहुत खूबसूरत हो कोमल,,, मुझे यकीन नहीं होता तो इतनी खूबसूरत औरत को छोड़कर एक आदमी भला यहां वहां क्यों भटक रहा होगा,,,(रघु अपना दूसरा हाथ भी उसकी दूसरी जांघ पर रखकर उसे सहलाते हुए बोला,,,अपने हथेलियों की हरकत का असर वाह कोमल की खूबसूरत चेहरे पर अच्छी तरह से देख रहा था,,, वह जानबूझकर कोमल को बातों में उलझा ना चाहता था,,,,) कोमल क्या तुम्हारे पति ने इस तरह से तुम्हारी खूबसूरत जांघों को अपनी हथेली से सह लाया है,,,।

(रघु को इस तरह के सवाल का जवाब अपने मुंह से देने में असमर्थ हूं इसलिए ना में सिर हिला कर जवाब दी,,)

तब तो बेवकूफ है तुम्हारा पति,,,, अगर मेरे पास ऐसी बीवी होती तो पता है मैं क्या करता,,,?(कोमल की तरफ देखकर रघु बोला)

क्या करते,,,?(कोमल शरमाते हुए बोली,,,,भाभी देखना चाहती थी कि एक आदमी अगर औरत को प्यार करता है उसे मानता है तो वह उसके साथ कैसा व्यवहार करता है,,, क्योंकि अपनी पत्नी की तरफ से उसे किसी भी तरह के व्यवहार का ना तो अंदाजा था ना तो कभी महसूस ही कर पाई थी पति की तरफ से उसे हमेशा दुख ही प्राप्त हुआ था,,)

बताऊं मैं क्या करता,,,,,( इतना कहते हुए रघु उसकी जांघों को अपनी हथेली से चलाते हुए धीरे-धीरे उसकी दोनों टांगों के बीच जाने लगा और अपने होठों को उसकी मखमली चिकनी जांघ पर रखकर उसे चूमने लगा,,, कोमल की हालत खराब हो रही थी वहरघु की बातों से और उसकी हरकत से पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी,,, वह उसकी जांघों को बेतहाशा चूम रहा था यह तो रास्ता था मंजिल तक पहुंचने के लिए और मंजिल थी उसकी गुलाबी बुर,,,, लेकिन पहले वह रास्ते का मजा ले रहा था,,, क्योंकि मंजिल से ज्यादा सफर में मजा आता है,,,, रघु दोनों हाथों की हथेलियों को उत्तेजना बस उसकी चिकनी मोटी जांघों जोर-जोर से दबाते हुए उस पर अपने होंठों से लगातार चुंबन किया जा रहा था,,, उत्तेजना के मारे कोमल की सांसे गहरी चलने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बदन में क्या हो रहा है,,,, उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह इस समय झरने के करीब नंगी होकर बैठी है,,,शायद बदन की प्यास ही कुछ ऐसी होती है कि सब कुछ भुला देती है,,,। देखते ही देखते रघु का हाथ कोमल की चिकनी बुर पर चला गयाअपनी कोमल के नाजुक अंग को सहलाने लगा क्योंकि उत्तेजना के मारे पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, अपनी बुर के ऊपर मर्दाना हाथ पडते ही वह पूरी तरह से कामोत्तेजना के सागर में डूबने लगी उसकी सांसों की गति तेज हो गई,,। कोमल मदहोश हुए जा रही थी उसका मन अपने काबू में नहीं था शायद पहली बार उसके बदन से कोई मर्द इस तरह से प्यार कर रहा था और प्यार करने पर औरतों को कैसा एहसास होता है यह भी उसे पहली बार ही हो रहा था,,, रघु कोमल की रेशमी झांटों की झुरमुटो मे धीरे-धीरे उंगली घुमाते हुए ,, ऊसकी गुलाबी बुर से खेलने लगा,,, जब जब उसकी गुलाबी छीन पर रखो की उंगली रगड़ खा जाती तब तब कोमल की सांस अटक जा रही थी,,,, रघु की उंगलियां कोमल के मदन रस में भीग चुकी थी,,, रघु अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था कोमल की कोमल बदन से खेलते हुए वह मदहोश होने लगा था,,,

सससहहहहह आहहहहहहह,,,,,(रघु जब जब उसकी चिकनी मांसल जांघों को अपनी हथेली में लेकर दबाते हुए अपनी उंगली का स्पर्श उसकी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों पर करता तब तक उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी,, और उसकी गरम सिसकारी की आवाज सुनकर रघु और ज्यादा बेचैन हो जाता,,, रघुउसके गुलाबी छेद से निकल रहे मदन रस का स्वाद लेना चाहता था इसलिए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था,,, रघु अपने लिए जगह बना रहा था,, वह देखते ही देखते कोमल की दोनों टांगों के बीच में आ चुका था,,, पंछियों के चहकने की आवाज झरने के पानी की मधुर आवाज के साथ साथ कोमल के मुख से रह-रहकर निकल रही गर्म सिसकारी की आवाज पूरे वातावरण में नशा घोल रहा था,,। कोमल शर्मा रही थी उसका पूरा वजूद अद्भुत एहसास की आगोश में घिर चुका था,,, देखते ही देखते रघुअपने दोनों हाथों से उसकी दोनों जांघों को पकड़कर थोड़ा सा और फैला दिया,,,, कोमल की गुलाबी बुर देखकर रघु के मुंह में पानी आ रहा था,,, इतना बेहतरीन खूबसूरत नजारा उसने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखा हालांकि उसने अपनी जिंदगी में कई औरतों की बुर को नजर भर कर देख चुका था लेकिन जो मजा और जो नशा ऊसको कोमल की बुर में आ रहा था वह किसी की बुर नहीं आया था,,,।

कोमल अपनी नजरों को नीचे करके रघु की तरफ चोरी-छिपे देख रही थी,,, रघु की जीभ लजीज अंग देखकर लपलपा रही थी,, कोमल रघु को अपनी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर के करीब बढ़ता हुआ साफ दिखाई दे रहा था,,,।

जैसे-जैसे उसका मुंह गुलाबी बुर की तरफ़ बढ़ रहा था वैसे वैसे कोमल के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,। और कोमल कुछ समझ पाती इससे पहले ही रघु अपनी प्यासी होठों को जाटों के झुरमुटो के बीच घिरी हुई उसकी गुलाबी बुर के छेद पर रख दिया,,,,।

सहहहहहह आहहहहहहहहहह,,,,(रघु की हरकत की वजह से कोमल के मुख से बस इतना ही निकला और उसका बदन ऐंठने लगा,,,, कोमल रघु को रोक नहीं पाई क्योंकि रघु की यह हरकत कोमल के तन बदन में अजीब सी उत्तेजना के साथ-साथ उसे एकदम से चुदवासी बना दिया था,,,,और जैसे ही उसने अपनी बुर के गुलाबी छेद के अंदर हल्की सी जीभ घुसती हुई महसूस की वैसे ही उत्तेजना का दबाव ना सहन कर पाने के कारण उसकी बुर से भलभला कर मदन रस बहने लगा,,,, यह कोमल के लिए अद्भुत था अतुल्य था उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि,,, उसे इस तरह के अद्भुत सुख का अहसास होगा,,, रघु का घोड़ा दौड़ चुका था,,, अब रुकने वाला नहीं था कोमल की जवानी का दीवाना का पहले ही हो चुका था बस उसके खूबसूरत बदन को भोगने का सपना देखता रहता था और आज यह सपना पूरा हो रहा था रखो पागलों की तरह उसकी गुलाबी बुर को चाट रहा था,,, मानो की बुर ना होकर मीठी खीर से भरी कटोरी हो,,,उसकी बुर से निकला मदन रस का एक एक बूंद रघु अपनी जीभ से चाट कर अपने गले के नीचे उतार रहा था,,।कोमल को अजीब लग रहा था गंदा लग रहा था क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कि औरत की पेशाब वाली जगह को कोई मुंह लगाकर कैसे चाट सकता है,,,, लेकिन फिर भी ना जाने कैसी कशिश थी कि वह रघु की हरकत में पूरी तरह से खो चुकी थी उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था,,,,वह आसमान की तरफ नजर करके अपनी बुर चटाई का मजा ले रही थी,,, आसमान में उसे पंछी उड़ते हुए नजर आ रहे थे बड़ा ही मोहक दृश्य था इस तरह से खुले में संभोग से पहले संभोग रस में डूबने का अलग ही मजा था,,, रघु की सांसे भी तेजी से चल रही थी,,,वह जानता था कि उसके मोटे तगड़े लंड के लिए कोमल की गुलाबी बुर का गुलाबी छोटा सा छेद पर्याप्त नहीं है,,, इसलिए वह अपने लंड के लिए रास्ता बनाने की खातिर उसकी बुर को चाटते हुए ऊसमें अपनी एक उंगली डालना शुरू किया,,, गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में उंगली का प्रवेश,,, कोमल को अद्भुत लग रहा था और देखते ही देखते रघु अपनी एक उंगली को पूरी तरह से, कोमल की बुर में प्रवेश करा दिया,,,,एक उंगली के जाते ही उसे दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन वह इस दर्द को सहन कर गई,,

लेकिन जैसे ही रघु अपनी दूसरी उंगली को उसकी बुर के अंदर डालना शुरू किया उसे दर्द ज्यादा होने लगा और अपना एक हाथ बढ़ा कर रघू का हाथ पकड़ कर उसे रोकने लगी,,,।

रघु कोमल की चुदाई करता हुआ

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नहीं नहीं रघु हमें दर्द हो रहा है,,,

दर्द के बाद ही मजा आएगा कोमल,,,,

नहीं रहने दो हमें नहीं लगता कि हम यह दर्द सहन कर पाएंगे,,,

क्यों नहीं सहन कर पाओगी हर औरत यह दर्द सहन करती है तभी तो चुदाई का मजा लेती है,,,,

लेकिन हमसे यह नहीं हो पाएगा,,,,

(रघु समझ गया कि अगर यह दूसरी उंगली नहीं डालने दे रही है तो उसका मोटा लंड कैसे डालने देगी इसलिए उसे रास्ते पर लाना बेहद जरूरी था,,, इसलिए बिना कुछ बोले अपनी एक उंगली को ही अंदर बाहर करते हुए वह फिर से अपने होठों को उसकी गुलाबी बुर के छेद पर रख कर चाटने लगा,,,। एक बार फिर से कोमल मदहोश होने लगी उस पर खुमारी जाने लगी उसकी आंखों में नशा छाने लगा और ना चाहते हुए इस बार ना जाने कैसे उसका एक हाथ रघु के सिर पर आ गया और वह उसे उत्तेजना बस दबाने लगी,,,यह कैसे हो गया यह कोमल को भी नहीं पता चला बस वह उस पल के आनंद में खो जाना चाहती थी,,,, रघु मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी दूसरी उंगली उसकी बुर में डालना शुरू कर दिया दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था,,, इसलिए हल्की-हल्की दर्द से कराहते हुए,,वह मस्त होने लगी,,,। रघु देखते ही देखते उसे आनंद देते हुए अपनी दोनों ऊंगली एक साथ अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,, कोमल को मजा आने लगा वह मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी ठीक तरह से कभी लंड का साथ अपनी बुर में ना चखने के कारण रघु की दोनों उंगली से उसे दर्द हो रहा था और उसे लंड का मजा भी मिल रहा था,,,,

रघु और कोमल

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अब कैसा लग रहा है कोमल,,,,,

बहुत मजा आ रहा है रघु,,,,आहहहहहहह,,,, हमसे रहा नहीं जा रहा है,,,, ना जाने हमें क्या हो रहा है,,,,

क्या इस तरह से तुम्हारे पति ने तुमसे कभी प्यार नहीं किया,,,

नहीं कभी भी नहीं,,,, हमें तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि कोई इस तरह से प्यार करता होगा,,, इससे तो पेशाब किया जाता है तुम उस पर मुंह लगाकर कैसे चाट रहे हो तुम्हें गंदा नहीं लगता,,,,(आंखों में खुमारी भरते हुए कोमल बोली ,,,)

हम हम मर्दों को यही पसंद है और सब औरतों को भी यही अच्छा लगता है,,,,

क्या सबको,,,,?(कोमल आश्चर्य से दूरी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके साथ ही यह पहली बार ऐसा हो रहा है वह यह नहीं जानती थी कि सभी औरतों को अपनी बुर चटवाना और मर्दों को चाटना कितना पसंद है,,,)

हां सबको सभी औरतों को यह पसंद है,,,(रखो अपनी दोनों उंगली को उसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए बोला और उसे इशारे से अपनी दोनों टांगों के बीच देखने के लिए इशारा करके बोला) देख रही हो और कितनी आराम से दोनों उंगली अंदर बाहर जा रही है और तुम्हें दर्द नहीं बल्कि मजा आ रहा है,,, मैं कहता था ना कि दर्द के बाद ही मजा आता है,,(कोमल भी हैरान थी वाकई में उसे पता भी नहीं चला कब और दर्द से गुजर गई और आनंद के सागर में डूबने लगी उसे मज़ा आ रहा था रघु की हरकत ऊसे और आनंद दे रही थी कोमल की शर्म धीरे-धीरे खत्म हो रही थी,,, रघु अब कोमल को चोदना चाहता था,,,। इसलिए वह अपने घुटनों के बल बैठ कर अपनी खड़े मोटे लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,,

देखना कोमल मुझे पूरा विश्वास है कि तुम मेरे मोटे लंड को बड़े आराम से अपनी बुर के अंदर ले लोगी फिर देखना तुम्हें कितना मजा आता है,,,, तुम्हें इस बात का एहसास होगा कि तुम सच में शादी शुदा जिंदगी का असली मजा कभी नहीं ले पाई हो जो अब मैं तुम्हें दूंगा,,,,।

नहीं नहीं हमे तो डर लग रहा है तुम्हारा कितना बड़ा और मोटा है,,,(कोमल आश्चर्य से रघु के मोटे तगड़े लंड को देखते हुए बोली)

कुछ नहीं होगा कोमल मुझ पर विश्वास रखो,,, मुझ पर यकीन करो,,,तुम्हें इतना मजा दूंगा कि तुम्हें लगेगा कि तुम आसमान में उड़ रही हो,,,,

(रघु की बातों से उसे भरोसा तो हो रहा था और वह उत्सुक और उतावली भी थी संभोग सुख से वाकिफ होने के लिए लेकिन उसे रघु के लंड को देखकर डर भी लग रहा था लेकिन फिर भी प्रभु जिस तरह से कह रहा था कि दर्द के बाद ही असली मजा आता है अपने मन में उस दर्द को सहने की क्षमता बढ़ा रही थी वह बोली कुछ नहीं बस रघु को देखती रह गई रघु उसकी ख़ामोशी को उसकी हामी समझकर उसके करीब बड़ा और उसे अपनी बाहों में लेकर एक बार फिर से उसके गुलाबी होठों को चूसते हुए उसकी नारंगी ओ को अपने दोनों हाथों से पकड़कर दबाना शुरू कर दिया एक बार फिर से कमल के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, जोर-जोर से रघु उसकी चूचियों को दबा रहा था और देखते ही देखते वह उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दियाकोमल पूरी तरह से गर्म हो गई उसके मुंह से गर्म सिसकारी निकलने लगी और उस सिसकारी को सुनकर रघु और ज्यादा चुदवासा हुआ जा रहा था,,, वह बारी-बारी से कोमल की दोनों चूचियों को पीकर उसका मजा लेने लगा,,, कोमल को मजा आ रहा था वह आनंदित हो रही थी यही मौका उसे ठीक है ना वो धीरे धीरे उसके होठों को चूसता हुआ उसे कपड़ों पर लिटा दिया और धीरे-धीरे उसकी दोनों टांगों को फैलाना शुरू कर दिया रघु उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बना लिया और अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों के नीचे रखकर उसे थाम कर अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी जांघों पर चढ़ा लिया,,, दोनों की धड़कन में तेज चल रही थी सबसे ज्यादा उत्सुकता कोमल को थी क्योंकि रघु इस काम में पहले से ही माहीर था,,,,रघु का लंड लपक रहा था कोमल की बुर के अंदर जाने के लिए कोमल उत्सुकता से शर्मसार होते हुए भी अपनी दोनों टांगों के बीच नजरे गड़ाए हुए थी,,,वह देखना चाहती थी कि एक लंड बुर के अंदर किस तरह से प्रवेश करता है,,,,रघु जानता था कि शुरुआत में थोड़ी तकलीफ होगी इसलिए पहले से ही ढेर सारा थूक अपने लंड के सुपाडे पर लगाकर और उसकी बुर के गुलाबी छेद पर लगा दिया,,, जैसे ही रघु अपने लंड के सुपाड़े को कोमल की बुर के मुहाने पर रखा,,, कोमल को ऐसा लगा मानो जैसे उसकी सांसें थम गई हो,,,, उसका दिल और तेजी से धड़कने लगा और धीरे धीरे रखो अपने लंड के सुपाड़े को उसके छेद के अंदर डालना शुरू कर दिया,,,,थोड़ी दिक्कत हो रही थी लेकिन धीरे-धीरे चिकनाहट की वजह से और अपनी दो उंगली के करामत की वजह से रघु का लंड कोमल की बुर के अंदर घुस रहा था,,, रघुअपने हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसे दिशा दिखाते हुए कोमल की बुर में डाल रहा था,,, कोमल को दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन वह इस दर्द को भी जाना चाहती थी उसे असली सुख को महसूस करने की उत्सुकता थी और चाहती थी इसलिए वह इस दर्द की परवाह नहीं कर रही थी लेकिन फिर भी दर्द की वजह से उसके चेहरे पर के भाव पल पल पल रहे थे देखते देखते रघु का लंड का आगे वाला भाग कोमल की बुर के अंदर प्रवेश कर गया यह प्रभा के लिए बेहद प्रसन्नता की बात थी और कोमल के लिए तो यह अतुल्य सुख था,,। सुपाड़े के प्रवेश करते ही रघु रुक गया था,,,वह कोमल के चेहरे को देख रहा था और इस तरह से रघु को अपने आपको देखता हुआ पाकर कोमल एकदम से शर्मिंदा हो गई और दूसरी तरफ नजर घुमा ली,,, उसकी यह सादगी रघु को अच्छी लगी रघु अब आगे का कार्यक्रम निपटाने में लग गया धीरे-धीरे उसका लंड बुर के अंदर सरक रहा था और कोमल का दर्द बढ़ता जा रहा था,,,।

आहहहहह,,, रघु दर्द कर रहा है,,,

बस बस थोड़ा सा और,,,,

नहीं तुम्हारा बहुत मोटा है मुझे नहीं लगता घुस पाएगा,,,

मुझ पर विश्वास है कि नहीं,,,

तुम पर मुझे पूरा विश्वास है लेकिन डर लग रहा है,,,,

डर और दर्द में ज्यादा फर्क नहीं होता लेकिन दर्द के आगे ही मजा आता है यह बात मैं तुमसे पहले भी बता चुका हूं,,,,

धीरे धीरे,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो कोमल,,,,

(और इतना कहते हुए रघु आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ने लगा,,, धैर्य और हिम्मत रंग ला रही थी रघु का आनंद धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा था और देखते ही देखते पूरा का पूरा कोमल की गुलाबी बुर के अंदर समा गया,,,।)

अब देखो कोमल,, तुम्हें मेरा लंड नजर आ रहा है,,,

(कोमल हैरान थी,, उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था वास्तव में इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी गुलाबी बुर के छेद में मानो खो गया था,,, अद्भुत नजारा था अविश्वसनीय लेकिन कोमल के लिए रघु का तो यह रोज का था,,,।

कोमल के चेहरे पर हेरानी और आश्चर्य के भाव को रघु पढ़ चुका था,, इसलिए वहां दोनों हाथों से कमर की कमर को थाम कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया,,,कोमल की खुशी और उत्तेजना का कोई ठिकाना ना था आज बहुत खुश थी शादीशुदा जिंदगी में पहली बार उसकी चुदाई हो रही थी चुदाई का सुख औरत को कैसा महसूस होता है यह उसे पहली बार ज्ञात हो रहा था,,, उस पहाड़ियों से घिरी हुई जगह मैं कोमल की गरम सिसकारियां गुजने लगी,,। रघु की कमर लगातार आगे पीछे हो रही थी और कोमल अपनी दोनों टांगों के बीच नजर गड़ाए हुए ऊस नजारे का मजा ले रही थी,, पहली बार वह अपनी आंखों से मोटे तगड़े लंड को बुर में घुसते हुए अंदर बाहर होते हुए देख रही थी,,,,,, उसे आश्चर्य के साथ साथ मजा भी आ रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रघु का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी छोटी सी बुर के छोटे से छेद में घुसकर पूरी तरह से गायब हो गई,,,,,,, कोमल के लिए यह आश्चर्य से बिल्कुल कम नहीं था,,,।

ओहहहह कोमल मेरी रानी ,,,आहहहहहहहह,,,, बहुत मजा आ रहा है कोमल रानी,,,,ऊहहहहहहह,,,, गजब की बुर है तुम्हारी एकदम कशी हुई,,,,आहहहहहहहह,,, कोमल रानी,,,,

हमें भी बहुत मजा आ रहा है,,सहहहहहह,,,आहहहहह,,, सच में रघु हमें पता नहीं था कि इस खेल में इतना मजा आता है,,,,,आहहहहह,,,,आहहहहहह,,,,आहहहहहह,,(कोमल के कहते हुए जोश में आकर रघु जोर-जोर से दो चार धक्के लगा दिया,,, और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर कोमल के दोनों संतरो को अपने हाथों में थाम लिया,,,,, और उसे जोर-जोर से दबाते हुए अपनी कमर हिलाने लगा इस तरह से स्तन मर्दन के साथ चुदवाने मे कोमल को बहुत मजा आ रहा था वह एक बार झड़ चुकी थी,,, थोड़ी ही देर में दोनों अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगे,,, कमर की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,रघु को एहसास हो गया कि कोमल का पानी निकलने वाला है इसलिए वह दोनों हाथ उसके नीचे पीठ की तरफ डालकर उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया,,, कोमल की गोल-गोल चुचियां रघु की चौड़ी छाती से दब रही थी और उत्तेजना के मारे उसकी तनी हुई निप्पल भाले की नोक की तरह रघु के सीने में चुभ रही थी,, लेकिन दोनों का मजा आ रहा था मस्ती के सागर में कोमल पूरी तरह से डूब चुकी थी और वह अपने दोनों हाथ को वर्गों की पीठ पर रखकर उसकी पीठ को सहलाने लगी ,,,

सससहहहहह आहहहहह,,, रघु हमें कुछ और है ,,,,हमें कुछ हो रहा है रघु,,,,,आहहहहहह,,,,

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तुम्हारा पानी निकलने वाला है मेरी जान,,,, बस देखती जाओ,,,

इतना कहने के साथ ही रघु जोर जोर से धक्के लगाने लगा बिना रुके बिना थके वह लगातार अपनी कमर हीला रहा था,,, थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ झड़ गए रघु उसकी बाहों में हांफने लगा,,,, कोमल की अनुचुदी बुर रघु के मोटे तगड़े लंड से चूद चुकी थी,,,, गजब के एहसास से कोमल पूरी तरह से भर चुकी थी रघु उसे अपनी बाहों में लिए उसके ऊपर लेटा रहा,,,

थोड़ी देर बाद जब वासना का तूफान शांत हुआ तब,,,, कोमल शर्म से पानी पानी हो रही थी,,, रघु से आंख तक मिलाने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,,, जैसे तैसे करके वह रघु को अपने ऊपर से हटाई,,, और अपने नंगे पन के एहसास से वह शर्म से गडी जा रही थी,,, वह जल्दी से पत्थर के पीछे गई और अपने कपड़े पहनने लगी,,, रघु भी अच्छी तरह से समझता था,,, इसलिए वह भी अपने कपड़े पहन लिया,,,वहां पर रुकना आप कोमल के लिए मुनासिब नहीं था इसलिए वह बिना कुछ बोले वहां से चलती बनी रास्ते भर वह रघु से एक शब्द तक नहीं बोल पाई,,,, घर पर वह समय से पहुंच गई थी उसके ससुर अभी घर नहीं लौटे थे,।

रघु वहां से अपने घर चला गया,,।
 
रघु बहुत खुश था,,, एक और बड़े घर की बहू जो उसके नीचे आ चुकी थी,,,, कसी हुई जवान बुर चोदने में उसे अत्यधिक आनंद की अनुभूति हुई थी,,, यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी खूबसूरत और जवान औरत को छोड़कर उसका पति न जाने कहां भटक रहा था और एक तरह से अच्छा ही था कि वह घर छोड़कर भटक रहा था वरना इतनी खूबसूरत जवान औरत को चोदने का सुख उसे प्राप्त नहीं हो पाता,,,।

दूसरी तरफ आज कोमल का अंग अंग महक रहा था पहली बार उसकी जवानी किसी मर्दाना हाथों से महकी थी,,। पहली बार वह जानी थी कि संभोग सुख कैसा होता है,,, मर्द औरत के साथ किस तरह से चुदाई करता है,,, वह मन ही मन रघु को धन्यवाद दे रही थी जो उसने उसे स्त्री सुख से वाकिफ कराया था,,, अभी भी उसकी आंखों के सामने रघु का मोटा तगड़ा लंबा लंड नाच उठता था,,, रघु से चुदाई का भरपूर आनंद प्राप्त करने के बाद भी उसे यकीन नहीं हो,, था कि रघु का मोटा तगड़ा लंड और उसका बैगन की तरह मोटा सुपाड़ा उसकी छोटी सी बुर के छोटे से छेद में कैसे घुसा होगा,,, लेकिन कोमल के लिए नामुमकिन लगने वाला कार्य मुमकिन कर दिखाया था रघु ने,,, अभी भी उसे अपनी बुर के अंदर रघु के लंड की रगड़ महसूस हो रही थी,,, वह रघु के साथ गरमा गरम चुदाई को याद करके गुशल खाने में घुस कर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,, और नहाने लगी,,,,,

कोमल खाना बना चुकी थी,, लेकिन अभी तक उसके ससुर घर पर नहीं आए थे,,, वैसे भी उसे अब घर पर अपने ससुर की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती थी क्योंकि अब वह अपने ससुर के गंदी नजरों को पहचानने लगी थी,,, ससुर की प्यासी नजरें उसे अपने बदन पर हमेशा चुभती हुई महसूस होती थी,,। काफी देर हो गई थी और अभी तक कमल के ससुर घर नहीं आए थे इसलिए वह खाना खाकर अपने कमरे में चली गई लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि अपनी जवानी में पहली बार वह मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड का स्वाद चख चुकी थी,,, जिसकी वजह से उसे अपनी दोनों टांगों के बीच मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था रघु की याद उसे बहुत आ रही थी और वह बिस्तर पर करवटें बदल रही थी,,,, वह रघु के साथ दोबारा चुदवाना चाहती थी,, संभोग का आनंद लेना चाहती थी,,, लेकिन रघु तो अपने घर पर खाना खाकर सोने की तैयारी में था कि तभी छत पर चटाई बिछाकर लेटी हुई कजरी उसे आवाज देते हुए बोली,,,।

रघु,,,,,ओ,,,,, रघु,,,,,,

क्या हुआ मा",,,,,,,(रघु अपने लिए चटाई बिछा रहा था और उसे बिछाए बिना ही अपनी मां की आवाज सुनकर अपनी मां के पास पहुंच गया,,,)

बेटा मेरे पैर तो दबा दें बहुत दर्द कर रहा है,,,,(चेहरे पर दर्द की पीड़ा लाते हुए कजरी वाली लेकिन उसे दर्द बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन आज उसके मन में पता नहीं क्या चल रहा था,,, जिस दिन से कजरी पानी की टंकी में अपने बेटे के साथ नहाई थी और उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की दीवारों पर महसूस की थी तब से वह रघु के साथ के लिए तड़प रही थी और आज अपने पैर दबवाने के बहाने वह अपने बेटे को कुछ दिखाना चाहती थी,,, वह अपने मन में यह सोच कर रखी थी कि क्या होगा यह नहीं जानती लेकिन अगर कुछ हुआ तो वह जरूर अपने बेटे का पूरा साथ देगी,,,एक तरह से वह अपने मन को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी अपने बेटे के साथ संभोग करने के लिए,,, रघु भी अपनी मां की बात मानते हुए वहीं बैठ गया और पैर दबाने लगा,,,, वह दूसरी तरफ मुंह करके एक करवट पर लेटी हुई थी जिससे रघु कि नजर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर बराबर जा रही थी जो कि इस समय साड़ी में होने के बावजूद भी अपना पूरा जलवा दिखा रही थी,,,, रघु,,, साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां के पैर दबाने लगा,,, अपने बेटे की मर्दाना हथेलियों का स्पर्श और उसकी पकड़ अपने पैरों पर उसे बहुत ही अच्छी लग रही थी,,,, उसका रोम-रोम पुलकित हुआ जा रहा था,,, कुछ देर तक रघु अपनी मां के कलाकार नितंबों को देखकर मस्त होता हुआ साड़ी के ऊपर से ही घुटनों तक पैर दबाता,,रहा,,,, कजरी को भी मजा आ रहा था उसके मन में अपने बेटे को लेकर कामुक भावनाएं जागरूक हो रही थी जिसके चलते उसकी दोनों टांगों के बीच पतली दरार में पानी का सैलाब उठ रहा था,,, कजरी जानबूझकर अपने बेटे की तरफ पीठ करके लेटी हुई थी ताकि रघु की नजर उसके नितंबों पर आराम से पड़े और ऐसा हो भी रहा था,,,, थोड़ी देर बाद अपनी मां के पैर दबाते हुए रघु बोला,,,।)

अब कैसा लग रहा है मां,,,?

बहुत अच्छा लग रहा है बेटा लेकिन सुकून नहीं मिल रहा है,, दर्द अभी भी बराबर बना हुआ है,,,

अभी ठीक हो जाएगा,,,( और इतना कहकर वो फिर से पैर दबाने लगा,,,रघु की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाकर उसके नंगे पैरों को दबाएं,,, उसके गोरेपन को अपनी आंखों से देखें लेकिन वह अपनी मर्जी से ऐसा कर सकने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था वैसे भी चांदनी रात होने की वजह से सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,, कजरी भी यही चाहती थी,,, उसकी भी इच्छा यही हो रही थी किउसका बेटा उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसके नंगे जिसमें पर मालिश करें उसे दबाए ताकि उसे सुकून मिल सके उसकी जवानी की गर्मी शांत हो सके,,, इसलिए अपने बेटे की तरफ से किसी भी प्रकार की पहल ना होता देख कर वह बोली,,,)

रुक जा ऐसे आराम नहीं मिलेगा,,, ले तेल की कटोरी और से मेरे घुटनों पर लगाकर मालिश कर,,,(अपने पास में पड़ी हुई पेड़ की कटोरी को अपने हाथ से उठा कर रघु की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,,, और रघु भी उसे अपने हाथ में थाम लिया,,, कजरी खुद ही करवट बदलते हुए पीठ के बल लेट गई और अपनी साड़ी को अपने दोनों हाथों से घुटनों तक उठा दी,,,, हालांकि उसके पैर चटाई पर सटे हुए थे वह अपने पैरों को उठाई बिल्कुल भी नहीं थी,,, लेकिन साड़ी पटना तक आ चुकी थी यह देख कर रघु के तन बदन में हलचल होने लगी अपनी मां की गोरी गोरी पिंडलियों को देखकर उसका मन बहकने लगा,,, और वह जल्दी से कटोरी में से तेल को अपनी हथेली में गिरा कर अपनी मां की घुटनों से लेकर पैर तक लगाकर उसे दबाते हुए मालिश करने लगा,,, रघु को मजा आ रहा था उत्तेजना के मारे धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होने लगा था,,, कजरी भी आनंदित हुए जा रही थी अपनी उत्तेजना से गहरी होती सांसो को वह सामान्य करने की पूरी कोशिश कर रही थी,,, रघु,,,, रघु मौके का फायदा उठाना चाहता था अपनी मां के चेहरे पर बदलते भाव को अच्छी तरह से पहचान रहा था इसलिए जब जब वह घुटनों तक अपने हाथ को ले जाता तब तक अपनी उंगलियों को अपनी मां की साड़ी के अंदर तक सरका देता और उसकी नरम नरम मोटी जांघों को अपनी उंगलियों से दबाकर उस का आनंद ले रहा था,,,कजरी भी अपने बेटे की ऊंगलियों का दबाव अपनी जांघों पर महसूस करके मस्त हुए जा रही थी,, रघु की हरकत बढ़ती जा रही थी थोड़ी-थोड़ी मूली करके वह अपनी हथेली तक को अपनी मां की जांघों तक पहुंचा दे रहा था,,,, कजरी मस्त हुए जा रही थी रघु भी बेहाल हुआ जा रहा था,,,। बार-बार मालिश करने के बहाने वहां अपने हाथ को अपनी मां की साड़ी के अंदर डालकर उसकी चिकनी जांघों को छूने का दबाने का मजा ले रहा था,,,, उत्तेजना के मारे कजरी का गला सूख रहा था,,, वह अपने बेटे को किसी ने किसी बहाने से अपनी बुर दिखाना चाहती थी,,, क्योंकि वो जानती थी कि मर्द चाहे जितना भी अपने ऊपर काबू कर ले लेकिन एक बार औरत की बुर देख लेने के बाद अपने ऊपर वह काबू नहीं कर पाता,,,और यदि वह चाहती थी कि अगर एक बार उसका बेटा उसकी बुर के दर्शन कर लेगा तो जरूर उसके अंदर अपना लंड डाले बिना नहीं रह पाएगा,,, इसलिए वह अपनी बुर अपने बेटे को दिखाने के लिए आतुर हुए जा रही थी,,,)

अब कैसा लग रहा है मां,,,,,(रघु कटोरी में से थोड़ा सा और तेल अपनी हथेली में गिराते हुए बोला,,,)

अब ऐसा लग रहा है थोड़ा थोड़ा आराम हो रहा है तेरे हाथों में तो जादू है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतनी अच्छी मालिश कर लेता है,,,(ऐसा कहते हुए कजरी एक बहाने से अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा फैलाकर चौड़ा कर ली,,,, रघु अभी अपने दोनों हथेलियों में सरसों के तेल को बराबर लगा रहा था,,, और कजरी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) रुक थोड़ा पैरों को मोड़कर देखु दर्द होता है कि नहीं,,,,(और इतना कहने के साथ ही कजरी अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके अपने पैरों को घुटने से मोड दी,,,अच्छी तरह से जानती थी कि पैरों को इस तरह से मोड़ने पर क्या होने वाला है और जैसा वह सोच रही थी वैसा ही हुआ,,, लेकिन रघु इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था और इसलिए ही अपनी आंखों के सामने इस तरह का नजारा देखकर वह पूरी तरह से आश्चर्य से भर गया उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,कजरी ने जिस तरह से फुर्ती दिखाते अपनी दोनों टांगों को घुटनों से मोड़ ली थी,, उसके साड़ी सीधे कमर तक जल्दी से सरक गई थी और जिसकी वजह से उसकी दोनों टांगों के बीच की वह पतली धरा बेहद खूबसूरती लिए नजर आने लगी थी और उसके इर्द-गिर्द हल्के हल्के रेशमी मुलायम बालों का झुरमुट सा नजर आ रहा था चांदनी रात में रघु अपनी मां की बुर को बहुत ही अच्छी तरह से देख पा रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि मानो या पल यही थम गया हो,,, क्योंकि रघु बिना पलक झपकाए अपनी मां की बुर को देखता ही जा रहा था उसके मन में, उसके तन में प्यास जगने लगी थी हलचल सी मच ने लगी थी,,, कचरी अपनी दोनों टांगों को फैलाए हुए थीअपनी गर्दन को उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच देखकर रघु की तरफ देख ले रही थी बार-बार वह यही क्रिया को कर रही थी,,, मानो जैसे उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह इस तरह की शर्मनाक हरकत को अंजाम दे रहई है,,,इससे पहले कभी और सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से वह कभी अंग प्रदर्शन करेगी और वह भी अपने ही बेटे की आंखों के सामने क्योंकि कजरी कभी भी ऐसी नहीं थी और बेहद शर्म सील और संस्कारी थी,,, लेकिन अपने बेटे की नजरो ने उसे मजबूर कर दिया था और उसके बदन की चाहत भी यही थी जिसे वह बरसो से दबा कर रखी थी,,, तेरे दिल में चाहत उफान मारने लगी जिसका नतीजा यह हुआ कि आज वह अपने बेटे की आंखों के सामने दोनों टांगें फैलाकर उसे अपनी बुर दिखाकर उसे उकसा रही थी,,, रघु की आंखें फटी की फटी रह गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें चांदनी रात में उसकी मां की बुर और ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,।

उत्तेजना के मारे कजरी का भी गला सूख रहा थावह चाहती थी कि उसका बेटा कुछ हरकत करें उसकी बुर को अपने हाथों से छूए उसे दबाए उसे प्यार करें,,, और यही रघु भी चाहता था,,अपनी मां की पर को अपने हाथों से छूना चाहता था उसकी गर्माहट को अपनी हथेलियों पर महसुस करना चाहता था,,,लेकिन ऐसा कर पाने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था ना जाने क्यों वह अपनी मां के सामने मूर्ति बना हुआ था,,,वरना अगर उसकी मां की जगह कोई और औरत होती तो अब तक वह उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसके ऊपर चढ़ गया होता,,, शायद यह दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता था जो दोनों को कुछ आता तक आगे बढ़ने से रोक रहा था लेकिन फिर भी दोनों को भरपूर आनंद प्राप्त हो रहा था और कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,

बेहद उत्तेजनात्मक और मादकता से भरा हुआ यह नजारा था,,,चांदनी रात में छत के ऊपर कजरी अपनी दोनों टांगे फैला है अपने बेटे को अपनी बुर दिखा रही थी और रघु प्यासी नजरों से अपनी मां की बुर को देख रहा था,,,, रघु से रहा नहीं जा रहा था वह अपनी मां की गुलाबी दूर को स्पर्श करने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया वैसे सीढ़ियों पर पायल के छनकने की आवाज आने लगी,,, रघु एकदम से सतर्क हो गया और कजरी तुरंत अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी साड़ी को एकदम नीचे पैरों की तरफ कर दी,,, शालू कुछ देख पाती इससे पहले ही कजरी अपने आप को दुरुस्त कर चुकी थी और रघु अपनी मां के पैर दबाने लगा था,,, शालू छत के ऊपर आ चुकी थी और रघु को इस तरह से पैर दबाते हुए देख कर बोली,,,।

क्या बात है आज सूरज पश्चिम से कैसे ऊग गया,,,

(रघु के जवाब देने से पहले ही कजरी बोली,,)

आज थकान महसूस हो रही थी इसलिए रघु पैर दबाने लगा,,,

चल तू हट जा मेरे पैर दबा देती हुं,,,

(और इतना कह कर सालु अपनी मां के पैर दबाने लगी और रघु वहीं पास में बैठ कर बातें करने लगा,,, दूसरी तरफ आज लाला घर पर नहीं आया था कोमल इंतजार करते करते सो गई,,, लाला घर पर नहीं लेकिन अपने आम के बगीचे में बने बस घर में था जहां पर वह गांव की औरतों के साथ रंगरलिया मनाया करता था,,,।)

लाला,,,, प्रताप सिंह अपनी बेटी की शादी हमारी लड़की से कर तो लेंगे ना,,,

हां हां मुझ पर विश्वास नहीं है क्या तुम्हें तभी तो आज प्रताप सिंह को तुम्हारी लड़की दिखाने के लिए लाया था और प्रताप सिंह बहुत खुश भी हैं,,,।(लाला एकदम नग्नावस्था में बिस्तर पर लेटी उस औरत की दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखकर अपनी कमर हिला रहा था,,,।)

तो क्या,, मेरी बेटी की शादी जमीदार के घर में हो जाएगी,,,।

हो जाएगी अरे समझो हो गई,,,(लाला जोर-जोर से धक्का लगाते हुए बोला,,,)

धोखा तो नहीं होगा ना लाला,,,(वह औरत लाला की नंगी पीठ पर अपनी हथेली रखकर उसे सहलाते हुए बोली,,)

तुम मेरी शरण में हो धोखा की तो कोई बात की गुंजाइश ही नहीं है तुम शायद नहीं जानती कि जमीदार मेरे रिश्तेदार हैं मेरे समधी हैं वह मेरी बात को कभी नहीं टाल सकते,,, बस तुम यूं ही मेरी रात रंगीन किया करो,,,

तभी तो मैं शाम ढलते ही यहां पहुंच गई हूं लाला,,,

हां ऐसे ही मुझे मजा लिया करो देखना बहुत ही जल्दी तुम्हारी लड़की जमीदार के घर की बहू बन जाएगी,,,

ओहहहह,,, लाला,,,(और इतना कहकर वो औरत लाला के गले में बाहें डालकर उसके होठों को चूमने लगी और लाला जोश में आकर जोर-जोर से अपना लंड उस औरत की बुर में पेलने लगा,,, यह कार्यक्रम सुबह तक चलता रहा और सुबह की पहली किरण के साथ ही औरत आम के बगीचे से निकल कर अपने घर की तरफ चली गई,,,)
 
प्रताप सिंह सुबह खाना खाते समय बहुत खुश नजर आ रहे थे इसलिए उनकी बीवी बोली,,।

क्या बात है आज आप बहुत खुश नजर आ रहे हैं,,?(पंखी से हवा देते हुए वह बोली,,)

खुश होने वाली बात हीं है तुम सुनोगी तो तुम भी खुश हो जाओगी,,,

ऐसी कौन सी बात है,,,?

मैंने बिरजू के लिए लड़की पसंद कर ली है बहुत सुंदर है,,, अपने समधी ने ही यह रिश्ता करवाया है,,,

(इतना सुनते ही प्रताप सिंह की बीवी और पानी लेकर आ रही प्रताप सिंह की बहू दोनों एकदम से सकते में आ गए,, वह दोनों पहले एक दूसरे को और फिर प्रताप सिंह को आश्चर्य से देखने लगे,,, क्योंकि दोनों यही चाहते थे कि रघु की बहन शालू इस घर में बहू बनकर आए ताकि शालू के बहाने रखो का इस घर में आना-जाना हमेशा बना रहे और दोनों अपने बदन की प्यास रघु से बुझाती रहें,, लेकिन प्रताप सिंह के लिए फैसले से दोनों के अरमानों पर पानी फिरता हुआ दिखाई देने लगा,,, इसलिए प्रताप सिंह की बीवी बोली,,,।)

नहीं नहीं यह आप क्या कर रहे हैं मैं पहले भी आपसे कह चुकी हूं कि बिरजू किसी और से प्यार करता है और वह लड़की रघु की बहन है,,,

मैं कुछ नहीं जानता,,,, मेरा फैसला अटल है,,,

अपने बेटे की खुशी के बारे में तो सोचिए,,,

उसकी खुशी किस में है यह उसे क्या मालूम,,, वह तो अभी अच्छे बुरे की परख करना नहीं जानता,,,,

वह बच्चा नहीं है बड़ा हो चुका है उसे अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा हक है,,,।

यह हक मैंने अभी ऊसे नहीं दिया है,,,वो वही करेगा जो मैं कहूंगा,,,

बाबू जी ऐसा मत करिए,,, रघु की बहन शालू बहुत खूबसूरत है सुंदर है और संस्कारी है,, इस घर के लिए और बिरजू के लिए वह लड़की एकदम ठीक रहेगी,,,

बहु इस घर के लिए कौन ठीक रहेगा कौन नहीं इसका फैसला तुम नहीं करोगी,,,

लेकिन बाबू जी,,,

बस इससे ज्यादा मैं कुछ भी नहीं सुनना चाहता,,, मैं फैसला कर लिया तो कर लिया मैं उस लड़की के बाप को जबान दे कर आया हूं,,,, 1 सप्ताह बाद बिरजू और उस लड़की की सगाई है,,,,(इतना कहकर प्रताप सिंह उठ कर चला गया,,,)

अब क्या होगा माजी अगर चालू कीजिएगा इस घर में कोई और लड़की आ गई तो हम दोनों का क्या होगा,,,

मैं भी यही सोच रही हूं राधा,,,, कुछ ना कुछ तो करना होगा,,,

लेकिन क्या करना होगा हम दोनों तो कुछ कर भी नहीं सकते,,,।

एक काम करो किसी को भेजकर रघु को दोपहर के समय घर के पीछे बुलाओ,,, उसे बताना जरूरी है,,, वरना वहां पर कभी विश्वास नहीं करेगा,,,।

ठीक है माजी,,,

शालू बिरजू के साथ जीवन बिताने का सपना समझो रही थी कचरी भी अपनी बेटी की शादी बड़े घर में होने की उम्मीद जगाए बैठी थी और रघु बड़ी मालकिन पर पूरा भरोसा करके निश्चिंत होकर खेतों में गाय चराते हुए ललिया की बेटी रानी से बातें कर रहा था,,।

तू बहुत झूठी है,,,

ऐसा क्यों बोल रहा है तू,,,

फिर क्या बोलूं पता है ना उस दिन तेरी गाय दूर तक चली गई थी और मैं ला कर दिया था,,, याद है कि नहीं,,,?

मुझे याद है,,,

फिर तो यह भी याद होगा कि क्या शर्त हुई थी,,,

मुझे नहीं मालूम,,,

नाटक करना शुरू कर दी,,,

इसमें कौन सी नाटक वाली बात है,,,

बात है ही ना तू वादा करके मुकर गई,,, पता है कि मुझे चुम्मा देने के लिए वादा करी थी,,,

छी,,,, कितनी गंदी बात बोलता है तु,,,

इसमें कौन सी गंदी बात है क्या करूं जिंदगी में किसी को चुम्मा देगी नहीं,,,

नहीं किसी को नहीं दूंगी,,,,

अपने पति को भी नहीं,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं,,,,

चल रहने दे वो तो जबरदस्ती ले लेगा,,,, चुम्मा भी और तेरी वो भी,,,(इतना कहते हुए रघु वही घास के ढेर पर बैठ गया,,, तेरी वह भी ले लेने वाली बात सुनकर रानी सन्न रह गई क्योंकि वह समझती थी कि रघु क्या कह रहा है और किसके बारे में कह रहा है लेकिन फिर भी,,, वह आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

वह भी,,, क्या मतलब है,,,

चल तू इतनी भी नादान नहीं है कि मेरे कहने के मतलब को ना समझी हो,,,

सच में मुझे नहीं मालूम कि तू क्या कह रहा है,,,,

चल जाने दे छोड़,,, वादा तो पूरा करती नहीं है मतलब बताने का क्या फायदा,,,

तू वादा ही ऐसा करवाता है,,,, शर्म आती है,,।

इसमें शर्म की क्या बात है,,,

शर्म वाली ही तो बात है,,,, कोई लड़की क्यआ चुम्मा देती है,,।

क्यों नहीं देती हर लड़की देती है,,, चुम्मा में कितना मजा आता है,,,आहहहहहहहह,,,,(मस्ती से सिसकते हुए बोला,,)

तो क्या तेरी बहन भी चुम्मा दी है किसी को,,,

(अपनी बहन का जिक्र आते ही रघु गुस्से से तिलमिला उठा,,, कोई और वक्त होता तो शायद वह रानी के गाल पर तमाचा जड़ दिया होता लेकिन वो रानी को धीरे-धीरे लाइन पर लाना चाहता था,,, ताकि रानी की बुर का मजा ले सके,,, इसलिए खराब लगने के बावजूद भी वह बड़े ही सहज भाव से बोला,,)

क्या पता देती भी होगी सब लोग देते हैं वह भी देती होगी,,,

बाप रे तुझे शर्म नहीं आती अपनी बहन के बारे में इस तरह की बातें करते हुए,,,

इसमें कैसी शर्म हर औरत और लड़कियों का काम ही है देना और हम मर्दों का काम है लेना,,,तेरी मां भी तो किसी ने किसी को चुम्मा भी देती होगी और अपनी वो भी देती होगी,,,,,

देख मां के बारे में कुछ मत बोलना वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,

तू खामखा गुस्सा करती है मैं तो सच्चाई बता रहा हूं तेरी मां कौन सी बुढी हो गई है अभी भी एकदम जवान लगती है,,, देखी नहीं है जब चलती है तो,, उसकी बड़ी बड़ी गांड कैसे मटकती है,,,(रघु जानबूझकर उसे बहकाने के लिए उसकी मां के बारे में गंदी गंदी बातें कर रहा था,, और उसका असर रानी के ऊपर होता हुआ साफ दिखाई दे रहा था,,,) कसम से देखने वालों का लैंड खड़ा हो जाता है,,,(रघु अब हर एक शब्द में अश्लीलता ला रहा था,, रानी रघु के मुंह से लंड शब्द सुनते ही अंदर ही अंदर मस्त होने लगी,,, अपने चेहरे पर जानबूझकर गुस्सा का भाव ला रही थी,,,)

देख रघु तो यह सब बातें मत बोल मुझे अच्छा नहीं लगता,,,

देख इसमें कोई अच्छा लगने या ना लगने वाली बात नहीं है यह तो सच्चाई है और एक लड़की होने के नाते तू भी अच्छी तरह से समझती है,,, क्या तू कभी अपनी मां की खूबसूरती पर गौर नहीं की है,,, अपनी मां के साथ आते जाते हैं कभी गैरों की नजरों को देखी नहीं है कि किस तरह से तेरी मां की खूबसूरती के ऊपर से नीचे तक निहारती रहती है,,, कसम से देखने वाले को मजा आ जाता है,,,

(रघु की बातें गंदी होने के बावजूद भी रानी को ना जाने क्यों अच्छी लगने लगी थी,,, वह भी रघु के पास बैठी हुई थी और जानबूझकर गुस्सा दिखाने का नाटक कर रही थी,,, रघु यह तरीका रामू पर आजमा चुका था और रामू अपनी मां के बारे में गंदी बातें सुनकर मस्त हो जाता था,,, ठीक वैसा ही उसकी बहन रानी के साथ हो रहा था,,, रानी जवान हो चुकी थी उसके बदन के हर एक अंग में अत्यधिक उभार आना शुरू हो गया था,,, कमीज के अंदर उसके कश्मीरी सेव धीरे-धीरे मिठास भर रहे थे,,,, टांगों के बीच गुलाबी दरार पर मखमली बाल आना शुरू हो गया था,,,, रघु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

तु चुम्मा की बात कर रही है,,, मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मां चोरी छिपे अपनी दोनों टांगे फैलाकर किसी जमाने लंड का मजा लेती होगी,,, तभी तो उसके चेहरे पर इतनी निखार है,,,

तब तो तेरी मां भी किसी से चुदवाती होगी,,,, तभी तो तेरी मां भी इतनी खूबसूरत है,,,(तैश में आकर रानी के मुंह से चुदाई शब्द निकल गया,,, रघु बहुत खुश हुआ क्योंकि वह यही तो चाहता था,,, लेकिन रानी अपने मुंह से निकले गंदे शब्द की वजह से शर्म से पानी पानी हो गई,,, और इसी पल का मौका उठाते हुए,, रघु रानी से बोला,,,।)

,,,, हो सकता है बताऊं कैसे,,, बताऊं,,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु रानी को अपनी बाहों में कस लिया,,,)

नहीं नहीं रघु ऐसा बिल्कुल मत कर,,, कोई देख लेगा,,,(बस कोई देख लेगा शब्द सुनकर रघु समझ गया कि रानी के मन में क्या चल रहा है,,, इसलिए वह उसे हरी हरी घास पर लेटाते हुए बोला,,,)

कोई नहीं देखेगा मेरी रानी,,,,(और इतना कहने के साथ ही रघु रानी के खूबसूरत लाल-लाल होठों को मुंह में भर कर चूसने लगा,,,, थोड़ी ही देर में रानी को मजा आने लगा रानी के लिए पहला मौका था जब वह किसी जवान लड़के की बाहो में थी और वह उसे चुंबन कर रहा था,,। थोड़ी ही देर में दोनों एकदम मस्त हो गए,,, कमीज के ऊपर से रघु उसके दोनों कश्मीरी सेव को दबाना शुरू कर दिया पहली बार कोई उसकी चूचियों को दबा रहा था उसे मजा आ रहा था,,, रानी की चूचियां अभी आकार में बड़ी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन मजा बराबर दे रही थी,,,रानी के मुंह से रह-रहकर दर्द से कराहने के साथ-साथ मस्ती भरी सिसकारियां की आवाज निकल रही थी,,,। धीरे धीरे रघु अपना हाथ नीचे सलवार के ऊपर से ही उसकी चूचियों को मसलने का आनंद लेने लगा इसमें रानी को बहुत मजा आ रहा था,,। यह देखकर रघु उसकी सलवार की डोरी को खोलना शुरू कर दिया लेकिन रानी अपना हाथ उसके हाथ पर रख कर उसे रोकने की कोशिश करने लगी,,, लेकिन रघु कहां मानने वाला था,,, जिस जगह पर दोनों मजे ले रहे थे वह जगह थोड़ी खुली जगह पर थी इसलिए रघु खड़ा हुआ और रानी को अपनी गोद में उठा लिया और उसे लेकर घनी झाड़ियों मैं जाने लगा जिस तरह से रघु उसे अपनी गोद में उठाया था रानी को उसका यह तरीका और हरकत बहुत अच्छी लग रही थी वह शर्म से अपनी आंखों को बंद कर ली थी और सर हमसे इस तरह से आंखें बंद होता देख कर रघु को एहसास हो गया कि रानी की तरफ से पूरी तरह से स्वी कृति है,,,

रघु इस तरह से रानी की सलवार की डोरी खोल कर उसकी गुलाबी बुर देखकर मदहोश हो गया

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पजामे में रघु का लंड पूरी तरह से खडा हो गया और सीधा सलवार के ऊपर से ही रानी की गांड पर ठोकर मारने लगा,,, इससे रानी और ज्यादा उत्तेजित हो गई उत्तेजना के मारे उसका चेहरा उसके गोरे गोरे गाल कश्मीरी सेव की तरह लाल हो गए,,, घनी झाड़ियों में ले जाते ही घास पर लिटा कर रघु उसकी सलवार की डोरी खोल कर उसे एक झटके में उतार दिया कमर के नीचे रानी पूरी तरह से नंगी हो गई,,, उसकी खूबसूरती और कमर के नीचे नंगे पन को देखते हुए रघु एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,,।

वाह रानी तू तो सचमुच की रानी है कसम से तु बहुत खूबसूरत है,,,,(रघु के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर रानी शर्मा गई,,, हालांकि अभी तक कमर के नीचे से नंगी कर देने के बावजूद भी रघु रानी की बुर को नहीं देखा था वह उसकी कमीज़ उतारने लगा और रानी अपनी कमीज उतरवाने में उसका सहयोग करने लगी अगले ही पल रानी उसकी आंखों के सामने घास पर एकदम नंगी लेटी हुई थी,,, रघु के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था रघु एक पल की भी देरी करना गवारा नहीं समझ रहा था इसलिए अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों टांगे फैलाकर वह सीधा उसकी बुर पर अपनी प्यासे होठ रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,, रानी के लिए बेहद अद्भुत था पल भर में ही रानी छोड़ गई उसकी बुर से पानी का सैलाब फुट पड़ा,,, लेकिन रघु,, बिल्कुल भी नहीं रुका वह लगातार अपनी जीभ को उसकी मखमली बुर में डालकर उसे चाटता रहा नतीजे एक बार फिर से वह गरम हो गए और गर्म सिसकारी लेने लगी,,, कुछ देर तक उसकी बुर चाटने का आनंद लेने के बाद रघु ऊपर की तरफ नजर करके उसके दोनों कश्मीरी सेव को ललचाए आंखों से देखने लगा और अगले ही पल उसके दोनों कश्मीरी सेव को अपने दोनों हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया रानी के मुख से दर्द भरी कराह फूट पड़ी लेकिन जैसे ही रघु उसके दोनों कश्मीरी सेव को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया वैसे ही उसके मुख से गर्म सिसकारी की मस्ती भरी आवाज गूंजने लगी,,, दोनों को मजा आ रहा था रानी मदहोश हुए जा रही थी,,, यही मौका देख कर रघु अपने कपड़े उतारने लगा पजामे को उतरते ही उसका खड़ा लंड हवा में लहराने लगा यह देखकर रानी के होश उड़ गए,,,,वह अंदर ही अंदर सिहर उठी लेकिन डर के मारे कुछ बोल नहीं पाई,,,, रघु घुटनों के बल बैठकर उसकी मोटी मोटी जांघों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया,,, रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, और यही हाल रानी का भी था,,, रघु ढेर सारा अपने लंड को सुपाड़े पर लगाकर उसे पूरी तरह से गिला कर लिया उसके बाद थोड़ा सा थुक ऊसकी बुर पर भी लगा दिया वैसे भी पहले से ही उसकी बुर पूरी तरह से पनिया चुकी थी,,,, रघु जानता था कि थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी लेकिन उसे विजय हासिल जरूर होगा लेकिन रानी का दिल जोरों से धड़क रहा था वह घबरा रही थी डर रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रघु को इतना मोटा तगड़ा लैंड उसकी बुर में घुस जाएगा,,, रघु धीरे-धीरे प्रयास करना शुरू कर दिया,,,, वह जल्दबाजी बिल्कुल भी नहीं दिखा रहा था और इसका परिणाम उसे मिल रहा था रानी को दर्द तो हो रहा था लेकिन रघु की हरकतों की वजह से उसे आनंद भी आ रहा था,,।

आखिरकार धीरे-धीरे और रघु की सूझबूझ की वजह से रघु का मोटा तगड़ा लंबा लंड बुर की अंदरूनी अड़चनों को दूर करता हुआ उसकी तह तक घुस गया,,, पल भर के लिए रानी फिर से दर्द से बिलबिला उठी लकी रघु अच्छी तरह से जानता था दर्द को मजे में बदलने के लिए वह रानी के ऊपर चूक गया और उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और तब तक उसे पीता रहा जब तक की रानी के मुंह से आ रही दर्द के कराहने की आवाज मस्ती भरी सिसकारियां में नहीं बदल गई,,,, जैसे ही रानी के मुंह से मस्ती भरी आवाज निकलना शुरू हुई वैसे ही रघु की कमर ऊपर नीचे होना शुरू हो गई रघु रानी को चोदना शुरू कर दिया था,,, रानी को मजा आने लगा जैसे-जैसे लंडरानी की बुर के अंदर बाहर हो रहा था जैसे वैसे उसकी आनंद की परिभाषा बदलती जा रही थी,,।

रघु झाड़ियों के अंदर रानी की चुदाई करता हुआ

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अब कैसा लग रहा है रानी,,,

सहहहहहह,,,आहहहहहहह,,, रघु अब मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,

रानी भी रघु से चुदाई का मजा लेते हुए

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मेरी रानी इस खेल में मजा ही आता है तभी तो सभी औरतें यही खेल खेलते हैं घर में या चोरी छुपे बाहर जैसा कि तुम और मैं,,,,,

आहहहहहह,,,,,, रघु,,,,,,ऊफफ,,,,,

रानी की मस्ती को देखते हुए रघु जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया आखिरकार तकरीबन आधे घंटे की जबरदस्त गरमा गरम चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए,,, रानी पहली बार चुदाई का मजा ली थी,, रानी की बुर का उद्घाटन हो चुका था दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर झाड़ियों से बाहर आ गया,,,।

रानी चुदवाने के बाद

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हाय दैया,,,,वो,,, देख रघु मेरी गाय फिर से दूर चली गई है,,, जा,, जल्दी से वापस ले आ,,, अब तो तुझे कुछ नहीं चाहिए ना,,,।

चाहिए ना लेकिन आज नहीं फिर किसी दिन,,,(इतना क्या कर रघु मुस्कुराने लगा,,)

दूंगी,,,, जा पहले मेरी गाय वापस ले आ,,,

(रघु बहुत खुश हुआ और दौड़ता हुआ उस गाय के पीछे जाने लगा,,, थोड़ी देर बाद प्रताप सिंह की बीवी का नौकर रघु को ढूंढता हुआ उसके पास आया और बड़ी मालकिन मुझे बुला रहे हैं ऐसा संदेश कह कर उसे अपने साथ ले गया,,, रघु को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर क्या बात हुई जो मालकिन उसे बुला रही है,,।)
 
रघु को जैसे ही खबर मिली रघु वैसे ही प्रताप सिंह के घर की तरफ चल दिया,,, प्रताप सिंह की बीवी दरवाजे पर खड़ी थी और रघु को देखते हैं वह घर के पीछे इशारा करके चल दी,,, प्रताप सिंह की बीवी का इशारा पाते ही रघु का मन खुशी से झूमने लगा,, उसे लगा कि आज बड़ी मालकिन का मन हो गया है इसलिए वह इस तरह से उसे बुला रही है अभी-अभी बार रहने की चुदाई करके आया था लेकिन फिर भी बड़ी मालकिन को देखते ही ऊसके लंड मैं हरकत होना शुरू हो गया था,, वो खुश होता हुआ प्रताप सिंह की बीवी के पीछे पीछे जाने लगा,,, दोनों ऊसी जगह पहुंच गए जहां पर वह राधा की जमकर चुदाई किया था,,, इसीलिए आव देखा ना ताव वह तुरंत जमीदार की बीवी को अपने बाहों में भर कर उसे चूमने लगा,,, और चुमते हुए बोला,,,

औहहह,,, बड़ी मालकिन आज ज्यादा मन कर रहा है क्या,,,?

यह क्या कर रहे हो रघु,,,(रघु को दूर हटाते हुए बोली,, तब तक दरवाजे के पीछे खड़ी हो कर देख रही रहा था अभी बाहर आ गई और बोली,,)

रघु यह प्यार करने का समय नहीं है,,,(राधा को दरवाजे के पीछे से निकलता हुआ देखकर रघु एकदम से घबरा गया,,,)

तुम शायद नहीं जानते कि,,, मेरे ससुर ने लड़की देख ली है और उससे रिश्ता तय करने की ठान लीए है,,,।

क्या,,,,?(रघु एकदम से चौकते हुए बोला,,,)

हां राधा बहु जो कह रही है वह बिल्कुल सच है इसीलिए हमने तो नहीं यहां तत्काल बुलाया है,,,

नहीं यह नहीं हो सकता,,, तुम दोनों जने मुझसे वादा की थी,,,।

हां हमें मालूम है इसीलिए तो तुम्हें यहां बुलाए हैं,,,

लेकिन तुमने मालिक से बात नहीं किए,,,,

किए लेकिन वो मानने को तैयार ही नहीं है,,,

ऐसे कैसे हो सकता है तुम उनकी बीवी हो,,,, बड़ी मालकिन भला आपकी बात को कैसे टाल सकते हैं,,,

तुम नहीं जानते रघु,,, वो बहुत जिद्दी है,,, वह जो एक बार फैसला कर लेते हैं तो फिर किसी की नहीं सुनते,,,

इसका मतलब यह शादी होकर रहेगी,,,

हां रघु यही सच है हम लोगों ने तो बहुत कोशिश कीए लेकिन वह माने नहीं,,,(राधा एक कदम आगे बढ़ते हुए बोली)

मतलब साफ है कि तुम दोनों ने मुझे धोखा दिया है,,,, बड़ी मालकिन तुम तो कहती थी कि तुम्हारी बहन मेरे घर में बहू बनकर आएगी यह मेरा वादा है लेकिन अब क्या हुआ,,,।

हां हां रघु मैं जानती हूं तभी तो मैं एकदम परेशान हूं तुम्हारी बहन इस घर में बहु बनकर आए तो इसमें हम लोगों का ही फायदा है,,,,(बड़ी मालकिन रघु को समझाते हुए बोली,,,)

लेकिन अब यह मुमकिन कैसे होगा,,,।

यह तो हमें भी नहीं सुझ रहा है कि कौन सी युक्ति लगाएं कि बात बन जाए,,,(राधा बेचैन होते हुए बोली,,,) और तो और यह रिश्ता हमारे बाबु जी ने लगवाया है,,, इसलिए और भी ज्यादा मुश्किल है,,,।

(तीनों परेशान थे,,, बड़ी मालकिन और राधा दोनों की चिंता इसलिए बढी हुई थी कि अगर सालु की शादी इस घर में नहीं हुई तो रघु का इस घर में आना-जाना उतना नहीं हो पाएगा,

सीधे-साधे लफ्जों में कहां जाए तो सास बहू दोनों को अपनी बुर की चिंता थी,,,शालू की शादी अपने घर में करा कर वो लोग जब चाहे तब रघु से चुदाई का भरपूर मजा लूट सकते थे इसलिए वह लोग भी शालू की शादी अपने घर में कराना चाहते थे और रघु की चिंता जायज थी क्योंकि उसकी बड़ी बहन पेट से थी अगर ऐसा नहीं होता तो शायद रघु भी इतनी चिंता नहीं करता लेकिन शालू के पेट से हो जाने की वजह से अगर यह रिश्ता इस घर में ना हुआ तो कहीं नहीं हो पाएगा और तो और उनका परिवार किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाएगा,,, इसलिए रघु की हालत और ज्यादा खराब थी लेकिन यह भी सच था कि शालू अपने भाई से चुदवा कर ही पेट से हुई थी,,, उसके पेट से होने में बिरजू का किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं था वह तो भाई बहन दोनों जानबूझकर,,, अपनी गलती का भुगतान बिरजू से करवाना चाहते थे,,, रघु हैरान था उसे कुछ सूझ नहीं रहा था,,,वह एकदम रुवांसा हो गया था,,, और लगभग लगभग रोते हुए ही वह बोला,,,।

तुम दोनों जन नहीं जानती कि हम कितनी बड़ी मुसीबत में पड़ जाएंगे अगर यह सादी सालु से नहीं हुई तो,,, शालू पेट से है उसके पेट में बिरजू का बच्चा है,,,

(इतना सुनते ही जमीदार की बीवी और राधा एकदम से सन्न रह गए,,,)

यह क्या कह रहे हो रघु,,,,(जमीदार की बीवी एकदम से चोंकते हुए बोली,,,)

मैं सच कह रहा हूं मालकिन,,, शालू के पेट में बिरजू का बच्चा है,,,(रघु शर्मिंदा होकर नजरें झुका कर बोला)

नहीं यह नहीं हो सकता,,,,।(बड़ी मालकिन एकदम हैरान होते हुए बोली,,)

यह सच है मालकिन,,,, बिरजू और शालू के बीच शारीरिक संबंध है,,

हे भगवान यह क्या हो गया,,,(बड़ी मालकिन एकदम से उदास होते हुए बोली,,)

माजी यह तो बिल्कुल भी ठीक नहीं हुआ,,,कर शालू की शादी बिरजू से नहीं हुई क्यों हो सकता है शालू की शादी किसी से ना हो क्योंकि कोई राजी नहीं होगा शादी करने के लिए और बदनामी होगी अलग से,,,(राधा बड़ी मालकिन से चिंता दर्शाते हुए बोली,,)

अब क्या किया जाए राधा बहु,,,,

मैं तो कहती हूं एक बार हम तीनों को चलकर बाबू जी से बात कर लेनी चाहिए देखते हैं क्या निष्कर्ष निकलता है,,,

हां तुम ठीक कह रही हो बहू,,,,

(इतना कहकर तीनों जमीदार के कमरे की ओर चल दिए,,, रघु पूरी तरह से निराश हो चुका था अच्छी तरह से जानता था कि उसकी वजह से ही उसकी बहन पेट से हुई है अगर यह शादी नहीं होगी तो वह लोग कहीं के नहीं रह जाएंगे,,, रघु ने बड़ी मालकिन कुछ इस तरह से ईसारा घर के पीछे बुलाते हुए देखा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि आज बड़ी मालकिन की फिर से चुदाई करेगा लेकिन शादी वाली बात सुनकर वह चारों खाने चित हो चुका था,,, थोड़ी ही देर में तीनों जमीदार के कमरे में पहुंच गए जहां पर वह कुर्सी पर बैठकर हुक्का गुडगुडा रहा था,,,। तीनों को अपने कमरे में देखकर वह बोला,,,)

क्या बात है,,,, रघु तुम यहां,,,?(हुक्का को मुंह से बाहर निकाल कर आश्चर्य से जमीदार बोला)

यह आपसे कुछ बात कहना चाहता है,,,(जमीदार की बीवी रघु की तरफ इशारा करते हुए बोली)

हां हां बोलो,,,,
 
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