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लाला बहुत खुश नजर आ रहा था वैसे भी काफी दिन हो गए थे उसे नई तितली को पकड़े,,, और जब से उसने कजरी के दोनों मदमस्त छलकती जवानी को देखा था तबसे तो वह पागल हो गया था,,, कजरी को भौंकने की लालसा उसके मन में दिन-ब-दिन प्रज्वलित होती जा रही थी,,,कजरी के हाव भाव को देखकर वह समझ गया था कि कजरी को हासिल कर पाना इतना आसान नहीं है,,, रात दिन उसके दिलो-दिमाग में बस कजरी ही छाई हुई थी,,, कई दिनों से उसे अपनी गर्मी शांत करने का जुगाड़ नहीं मिल पा रहा था,,, कुछ दिनों तक वह अपने हाथ से हिला कर काम चलाता रहा,,, कजरी के मादक भराव दार मटकते हुए नितंबों को याद करके और कजरी की दोनों छलकती जवानी के हीलोरो को याद करके,,, अपने हाथ से ही कल्पना में कजरी के साथ संभोग आसन में लिप्त होकर वह अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करता आ रहा था,,, लेकिन कजरी उसके दिलो दिमाग से निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी,,,
पिछले साल ही वहां अपने बेटे का विवाह किया था और एक महीना ही हुआ था उसका होना आए,, बड़ी बेटी तो प्रताप सिंह के वहां बहू बनकर आराम की जिंदगी जी रही थी,,, घर में बहू क्या जाने के बाद से लाला संभाल संभाल कर कदम रखने लगा था वह नहीं चाहता था कि उसकी वासना की कहानी उसकी बहू को पता चले,,, वैसे अब तक उसके बेटे को भी लाला की करतूतों के बारे में जरा सा भी पता नहीं था,,, और लाला यही चाहता भी था हरिया और भोला दोनों लाला के बेहद वफादार साथी थे,,, और इस तरह का काम लाला इन्हीं से लेता था यह दोनों ही गांव में या दूरदराज से इस तरह की मजबूर औरतों को लेकर आते थे और उन्हें पैसे की मदद करके लाला अपनी वासना शांत करता था,,, और जब तक पैसे पूरी तरह से चुकता नहीं हो जाते थे तब तक लाला उस औरत के साथ अपनी मनमानी करता रहता था,,, और आज उसकी जाल में मीना फस चुकी थी,,,।
लाला अपने पुराने मकान पर जाने के लिए तैयार हो रहा था वह अपना धोती और कुर्ता पहनकर गीत गुनगुना रहा था कि तभी,,, दरवाजा खुला और अंदर से उसकी बहू हाथ में भोजन की थाली लिए उसके करीब आने लगी और बोली।
बाबुजी कहीं जा रहे हैं क्या भोजन तैयार हो चुका है,,,
बहू में आ कर खा लूंगा कहीं जरूरी काम से जा रहा हूं,,,
ठीक है बाबूजी,,,, आइएगा तो आवाज दीजिएगा,,,
ठीक है बहु तुम जाओ,,,,
(लाला का इतना कहना था कि लाला की बहू भोजन की थाली लिए वापस कमरे में जाने लगी और लाला उसकी गोलाकार नितंबों को जो की कसी हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही उभर कर नजर आ रही थी उसे देखते ही मन में गरम आहें भरने का और तब तक देखता रहा जब तक कि वह अंदर जाकर दरवाजा नहीं बंद कर ली,,,, लाला अपनी बहू की खूबसूरत चेहरे को तो ठीक से नहीं देख पाता था क्योंकि वह हमेशा घूंघट में ही रहती थी लेकिन,,, बाकी के अंगों को बाहर साड़ी के ऊपर से ही उनके आकार के बारे में पता लगा लेता था,,,, अपनी बहू की चूड़ियों की खनक पायल की छनक को सुनते ही उसके तन बदन में वासना की लहर दौड़ ने लगती थी वह काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगता था और इस समय भी वह अपनी बहू के गोलाकार नितंबों को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और सारी कसर पुराने घर पर मीना के ऊपर निकालने की मन में ठान लिया था,,,, वह तैयार होते होते अपनी बहू के बारे में सोच रहा था,,, जैसी खूबसूरत थी वैसा ही खूबसूरत नाम भी था कोमल अभी अभी शादी हुई थी इसलिए वह धीरे-धीरे फूल की तरह खीलना शुरू की थी,,, अपनी बहू को मन को देखते हैं उसे अपने बेटे के ऊपर गुस्सा आने लगता था क्योंकि ना जाने क्यों लाला को ऐसा लगता था कि उसका बेटा उसकी बहू को ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है,,,। दरवाजा बंद हो चुका था लेकिन धोती के अंदर हलचल मजा आ गया था,,, अपनी बहू की हाजिरी मैं लाला कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाता था,,अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए वह जल्द से जल्द अपने पुराने घर पर पहुंचना चाहता था इसलिए जल्दी ही घर से निकल गया,,
वहां पहुंचा तो पहले से ही हरिया भोला और वह औरत वहां पर मौजूद थे,,,, उस औरत पर नजर पड़ते ही लाला की धोती में हलचल मच ना शुरू हो गया,,,, लाला का यह पुराना घर आम के बागों के बीचो बीच था,,, यहां के आम बेहद स्वादिष्ट और मीठे होते हैं,,, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि यहां के आम को तोड़ सके जिसका कारण हरिया और भोला ही थे,,,जो कोई भूले से भी यहां के आम को तोड़ता था तो हरिया और भोला उसकी टांगे तोड़ देते थे,,,
चलो मीना अंदर चलो,,,(इतना सुनना था कि हरिया ने जल्दी से दरवाजा खोल दिया और मीना शर्माते हुए घर में प्रवेश कर गई,,, और लाला अपनी जेब में से 5 रु का नोट निकालकर हरिया को थमाते हुए बोला,,,)
तुम दोनों भी जाओ ऐश करो,,,
(इतना सुनते ही दोनों लाला को नमस्कार कर के वहां से चले गए और लाला जल्द से जल्द दरवाजे के अंदर प्रवेश कर गया,,, और दरवाजा को अंदर से बंद कर दिया,,, पुराना घर भी काफी बड़ा था जिसके एक कमरे में लाला और मीना दोनों खड़े थे लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए मीना की तरफ देखा तो वह बिस्तर के करीब खड़ी होकर दीवाल की तरफ देख रही थी तो लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए बोला,)
शरमाओ मत मीना इसे अपना ही घर समझो आराम से बैठ जाओ,,,
(लाला की बात सुनकर मीना शर्मा और डर के मारे बिस्तर पर बैठ गई और लाला कुंडी लगाकर मिला की तरफ घूम गया,,,और उसके करीब जाने लगा जैसे जैसे नाना मीना के करीब आता जा रहा था मीना के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि मीना को मालूम था कि नाना क्या करने वाला है और पैसे देने के एवज में उससे क्या चाहता है,,, लेकिन वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी मजबूर थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे,,, जो कि उसकी मदद लाला ही कर सकता था,,,)
देखो मीना मुझसे शर्मा ने कि या डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है अरे मैं तो पगली तुम लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहता हूं,,(ऐसा कहते हुए लाला मीना के एकदम करीब पहुंच गया,,, और दूसरी तरफ घर के पीछे रघु और उसका दोस्त खड़े थे और घर के पीछे लगे आम के पेड़ के ऊपर पके हुए आम को देखकर ललचा रहे थे,,,)
अरे यार रघु वो आम तो काफी ऊपर है,,, वहां तक तो मैं नहीं चढ पाऊंगा तुझे ही जाना होगा,,,
साले बहन चोद मुझे मालूम था तु ऐसा ही बोलेगा,,, ठीक है मैं चढ़ जाता हूं लेकिन तू बराबर निगरानी रखना कहीं कोई आ ना जाए,,
तू चिंता मत कर रघु,,,
(इतना सुनते ही रखो ऊपर पेड़ पर चढ़ने लगा.. और दूसरी तरफ कमरे के अंदर लाला साड़ी के ऊपर से ही उसके बड़े-बड़े चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,,,)
आहहहह,,, मालिक दुखता है,,,
दुखेगा तभी तो बाद में मजा आएगा,,,,(ऐसा कहते हुए लाला उसकी साड़ी को उसके कंधे पर से हटा कर एक तरफ कर दिया जिससे उसकी भारी-भरकम छाती लाला की आंखों के सामने अपना प्रदर्शन करने लगी कसी हुई ब्लाउज में मीना की भारी-भरकम चूचियां बड़ी मुश्किल से समा पा रही थी,,,)
अरे पगली तू एकदम पागल है क्या,,, देख तो सही तेरी चूची कैसे बाहर आने के लिए तड़प रही है और तू है कि उन्हें ब्लाउज में कैद करके रखी है,,,,(ऐसा कहते हुए लाला ब्लाउज के बटन खोलने लगा तो मीना बीच में बोल पड़ी,,)
मालिक क्या ऐसा नहीं हो सकता कि यह सब किए बिना ही आप मुझे पैसे उधार दे दे,,,
मीना तु सच में एकदम मूरख है,,, अरे भगवान कसम मैं तुझे 50 रुपए ऐसे ही दे दु और तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लुं,,, और बदले में मैं तेरे साथ अपना मुंह काला भी ना करु,,लेकिन तो शायद नहीं जानती कि पैसा कमाने में में कितना मेहनत किया है रात दिन एक कर के पसीना पाया हूं तब जाकर एक एक फूटी कौड़ी जमा करके यहां तक पहुंचा हूं,,(इस दौरान लाला लगातार उसे ब्लाउज के बटन खोल कर जा रहा था और आखरी बटन खोलते हुए बोला,,) मीना रानी रुपए के बदले में मैं शायद तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लु लेकिन पैसे कमाने में जो मेहनत लगी है उस मेहनत के बदले में मैं तुझसे हर जाना जरूर लूंगा,,,
(इतना कहने के साथ ही लाला मीणा के ब्लाउज के आखिरी बटन को भी खोल दिया और आखरी बटन खोलते ही मीना की भारी-भरकम गोलाकार चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराने लगी,, और मीना की बड़ी बड़ी चूची को देखकर लाला की आंखों में चमक आ गई और उसके मुंह में पानी आ गया वह दोनों हाथ आगे बढ़ाकर नीना की चूचियों को दोनों हाथों में थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,, मीना अच्छी तरह से समझ गई थी कि लाला के आगे गिडगिडाने से कोई फायदा नहीं है,,, और मीना इसे किस्मत का खेल समझ कर सब कुछ सहने के लिए तैयार हो गया,,, लाला पागलों की तरह उसकी चूचियों से खेल रहा था,,,धीरे-धीरे करके उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूची को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया,,, लाला की कामुक हरकतों से मीना एकदम शर्म से गड़ी जा रही थी क्योंकि लाला अपनी उम्र का भी लिहाज नहीं कर रहा था,,, देखते ही देखते लाला मीना के ऊपर पूरी तरह से छा गया,,, एक तरफ लाला मीना की चूचियों से खेल रहा था और दूसरी तरफ रखो धीरे-धीरे पेड़ के ऊपर चढ रहा था,,,लाला मीणा की चुचियों से खेलता हुआ दूसरा हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसके पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा,,जब मीना को इस बात का आभासस हुआ तो अपना हाथ आगे बढ़ा कर लाला को रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,।
ऐसे मत खोलिए मालिक ऐसे ही कर लीजिए,,,
अरे मीना रानी तू बहुत भोली है,,,तू बहुत खूबसूरत है तेरे नंगे बदन को देखने के लिए ही तो मैं तुझे यहां लेकर आया हूं अगर उस तरह से करना होता तो तुझे वही घर के कोने में ले जाकर के साड़ी ऊपर कर के तुझे चोद ना दिया होता,,,
(इतना कहने के साथ लाला पेटिकोट की डोरी को भी खोल दिया और देखते ही देखते मीना बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई उसके सारे कपड़े बिस्तर के नीचे बिखरे पड़े थे,,, और लाला चुचियों से निपट कर उसकी दोनों टांगों के बीच छा गया था लाला पागलों की तरह उसकी मलाईदार बुर को चाट रहा था,,, बिना कब तक अपने आप को संभाल कर रखती अपनी अभिलाषा ऊपर कब तक काबू कर पाती लाला की कामुक हरकतों ने उसे मदहोश कर दिया था और देखते ही देखते लाला की बुर चटाई से मदहोश होने लगी उत्तेजित होने लगी लेकिन फिर भी अपनी उत्तेजना को वह अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने देना चाह रही थी,,, वह उसी तरह से बिस्तर पर पड़ी थी और लाला उसकी दोनों टांगों के बीच अपना असर दिखा रहा था,,, तभी लाला उसे बोला,,,
मीरा रानी अगर तुम्हें पैसे चाहिए तो तुम्हें भी मुझे प्यार करना होगा जैसा एक बीबी अपने पति को करती हो उस तरह से,,, अगर इसी तरह से पडे रहना है तो मैं तुम्हें पैसे बिल्कुल भी नहीं दूंगा,,,(इतना कहने के साथ ही फिर से लाला मीना की बुर चाटने लगा मीना मजबूर हो चुकी थी उत्तेजित थी लेकिन वह अपनी तरफ से ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहती थी जिससे वह अपनी नजरों में गिर जाए,,, लेकिन लाला ने उसे मजबूर कर दिया था इसलिए मजबूरी बस वह तेरी दोनों हाथ नीचे की कल्पना कर लाना क्योंकि को पकड़कर अपनी दूर पर दबाना शुरू कर दी,,,बिना की इस हरकत की वजह से लाला काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसे मीना की बुर चाटने में बहुत मजा आ रहा था और साथ ही मीना की गरम सिसकारी की आवाज उसे और ज्यादा मदहोश कर रही थी,,,लाला इस बात से अनजान की इस आम के बगीचे में उसे कोई नहीं देख पाएगा वह मीना के साथ रंगरेलियां मनाने में व्यस्त था लेकिन वह नहीं जानता था कि,, आज उसका भांडा फूटने वाला है क्योंकि कमरे के ऊपर की खिड़की से लगे हुए आम की डाली तक रघु पहुंच चुका था,,, वह कमरे के अंदर लाला अपनी धोती खोल कर एकदम नंगा हो गया था इस उम्र में भी उसका लंड काफी मोटा तगड़ा और एकदम टाइट था,, जोकि देसी घी का कमान था लाला सोने से पहले अपने लिंग पर सरसों के तेल के नहीं बल्कि देसी घी की मालिश किया करता था और जी भर के हिलाया करता था उसी का नतीजा था कि अब तक लाला के लंड की ताकत बरकरार थी ,,, मीना चोर नजरों से लाला के नंगे खड़े लंड को देखी तो सिहर उठी,,, इस उम्र में भी लाला का लंड कुछ ज्यादा ही टाइट था,,, लाला अपने लंड को हिलाते हुएमीना की दोनों टांगों के बीच आ गया और देखते ही देखते उसकी गुलाबी बुरर के अंदर अपना लंड डाल दिया,,, जैसे ही लंड मीना की बुर के अंदर प्रवेश किया मीना के मुंह से आह निकल गई,,, जिस तरह का दर्द का अनुभव मीना की थी उस दर्द की उम्मीद मीना को बिल्कुल भी नहीं थी देखते ही देखते लाला उसे चोदना शुरू कर दियामीना मजबूर थी बेबस थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे इसलिए वह जिंदगी में पहली बार लाला जैसे इंसान के सामने अपने हाथ से लाए थे और जिसके एवज में उसे अपने साड़ी का पल्लू नीचे गिराना पड़ा था लेकिन,,, एक मजदूर और बेबस औरत होने से पहले वह एक सामान्य औरत थी इसलिए तो ना चाहते हुए भी लाला की चुदाई से मस्त होकर उसके मुंह से गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,
आम के पेड़ पर चढ़कर रघु पके हुए आम की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ही था कि उसके कानों में कमरे से आ रही गर्म से इस कार्य की आवाज पड़ गई,,, रघु उस आवाज को सुनकर एकदम हैरान हो गया क्योंकि आम के बगीचे पर वैसे भी हमेशा सन्नाटा छाया रहता था और इस तरह की आवाज आना संभव था हलवाई की बीवी की गरम सिसकारियों की आवाज उसे अब तक याद थी,,,इसीलिए उसके कान में जेसे ही इस तरह की आवाज पड़ी वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ हो रहा है,,, वह खिड़की में अपनी नजरों को बढ़ाएं अंदर देखने की कोशिश करने लगा और थोड़ी ही देर में उसे अंदर का नजारा एकदम साफ नजर आने लगा,,, कमरे के बीचो बीच पड़ा बिस्तर और उस पर एकदम नंगी लेटी हुई औरत और औरत के बीच में खोया हुआ लाला उसे साफ नजर आने लगे उसे समझते देर नहीं लगी कि इस आम के बगीचे में क्या हो रहा है वह ध्यान से खिड़की से अंदर की तरफ देखने रहना लाला बड़े जोरों से अपनी कमर हिला रहा था और साथ ही उस औरत की दोनों बेटियों को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था,,,, मीना काफी उत्तेजित हो चुकी थी उसे उम्मीद नहीं थी कि लाला इस तरह की चुदाई करेगा,,, लाला का लंड बड़ी तेजी से मीना कि बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंदर का नजारा देखकर रघु भी काफी उत्तेजित हो गया,,,, उसे इस तरह से खिड़की के अंदर झांकता हुआ देखकर नीचे खड़ा उसका दोस्त ऊसे आवाज लगाने लगा तो वह उसे उंगली के इशारे से चुप रहने को कहा और वह शांत हो गया,,, आम तोड़ना भूलकर रघु खिड़की के अंदर का नजारा अपनी आंखों से देख कर मस्त होने लगा और यह देखकर भी हैरान था कि लाला इस उम्र में भी काफी तेजी से चुदाई कर रहा था,,,लाला आंखों को बंद करके बिना की जगह कजरी और अपनी बहू की कल्पना कर रहा था उसे काफी आनंद भी आ रहा था वह जोर-जोर से अपनी कमर आगे पीछे हीला रहा था,,,, थोड़ी ही देर में मीना के साथ-साथ लाला भी झड़ गया,,,
लाला और मीना अपने अपने कपड़े पहन लिए,,, और लाला मीना के हाथ में 50 रुपए थमाते हुए बोला,,,।
जब भी तुझे पैसे की जरूरत हो बेझिजक मेरे पास चली आना,,,
ठीक है मालिक,,,(इतना कहकर मीणा लाला से पैसे लेकर कमरे से बाहर निकल गई और चारों तरफ नजर घुमा कर जल्दी-जल्दी आम के बगीचे से बाहर जाने लगी,,, लाला भी जाता है इससे पहले ही रघु आम तोड़ना भूल कर जल्दी से नीचे उतरा और आगे से दरवाजे पर पहुंच गया जहां पर लाला दरवाजा बंद करके ताला लगा रहा था,,,,।
क्या बात है लाला आज तो तुम्हारे चेहरे पर कुछ और ही चमक नजर आ रही है,,,
तू तू कौन है यहां मेरे आम के बगीचे में क्या कर रहा है तुझे आने से डर नहीं लगता,,,,
नहीं लाला मुझे कहीं भी आने से डर नहीं लगता,,,डरना तो तुम्हें चाहिए जो गांव की भोली भाली औरतों को उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर उनके साथ शरीर संबंध बनाते हो,,
यह क्या बक रहा है तू और है कौन तू,,,, तू जो भी कह रहा है वह बिल्कुल झूठ है समझा,,,, और मेरे रास्ते के बीच में कभी मत आना वरना,,,
वरना क्या लाला,,,,, अगर तुम्हारी यह करतूत पूरे गांव वालों को बता दूं ना,,, तो गांव वाले मिलकर तुम्हारी बॉटी बोटी नोच डालेंगे,,,, और हां मैं कजरी का बेटा हूं रघु,,,,
(कजरी का नाम सुनते ही लाला की आंखों में चमक आ गई कुछ देर के लिए बस शांत होकर कुछ सोचने लगा और बोला)
अरे रघु तू अपनी कजरी का बेटा है पहले क्यों नहीं बताया,,, बेटा जो कुछ भी त8 देखा वह सब कुछ भूल जा,,, और हां आज से यह समझना कि है आम का बगीचा तेरा ही है जब मन करे जितना मन करें उतना आम तोड़कर तू खा सकता है,,,, मेरी तरफ से तुझे पूरी छूट है,,,,
(लाला की बात सुनते ही रघु एकदम खुश हो गया और खुश होता हुआ बोला,,,)
क्या कह रहे हो लाला।
मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं बेटा,,, आम का बगीचा समझ ले आज से तेरा ही है,,, और हां,,,(इतना कहकर लाला कुर्ते की जेब में अपना हाथ डालकर इधर-उधर टटोलते हुए,,,) कहां गई कहां गई,,,, हां यह रही,,,, ले बेटा यह दो रुपया पकड़,,, ओर जाकर एस कर,,,(रघु तुरंत लाला के हाथ में से 2 रुपए का सिक्का ले लिया,, और सिक्के को आगे पीछे घुमा कर देखते हुए बोला)
तुम मजाक तो नहीं कर रहे हो लाला,,,
अरे बेटा भगवान कसम मैं कभी झूठ नहीं बोलता वह तो तू कजरी का बेटा है इसके लिए मुझे तुझ पर प्यार आ रहा है बहुत मेहनत करती है बेचारी,,,,और हां बेटा इतना जरूर याद रखना कि जो कुछ भी तूने आज देखा है इस बारे में किसी को बताना नहीं और अगर नहीं बताएगा तो इसी तरह ऐस करता रहेगा,,, और बता दिया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,।
तुम चिंता मत करो लाला,,, यह राज मेरे सीने में दफन रहेगा हां लेकिन इस तरह से ही मुझ पर मेहरबान रहना अगर चला भी इधर उधर कुछ कीए तो तुम्हारा भांडा फोड़ दूंगा,,,,
खुश रहो बेटा,,,(इतना कहकर लाला वहां से चला गया और रघु कभी सिक्के की तरफ तो कभी लाला की तरफ देख ले रहा था,,, रघु के दोस्त को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब चल क्या रहा है,,, वह रघु से पूछने की कोशिश किया तो रघु सिर्फ इतना ही बोला,,)
तू आम खा,,, गुठलियों के बारे में सोचने का काम मेरा है,, और चल आज हलवाई की दुकान पर फिर से तेरा मुंह मीठा कराता
लाला बहुत खुश नजर आ रहा था वैसे भी काफी दिन हो गए थे उसे नई तितली को पकड़े,,, और जब से उसने कजरी के दोनों मदमस्त छलकती जवानी को देखा था तबसे तो वह पागल हो गया था,,, कजरी को भौंकने की लालसा उसके मन में दिन-ब-दिन प्रज्वलित होती जा रही थी,,,कजरी के हाव भाव को देखकर वह समझ गया था कि कजरी को हासिल कर पाना इतना आसान नहीं है,,, रात दिन उसके दिलो-दिमाग में बस कजरी ही छाई हुई थी,,, कई दिनों से उसे अपनी गर्मी शांत करने का जुगाड़ नहीं मिल पा रहा था,,, कुछ दिनों तक वह अपने हाथ से हिला कर काम चलाता रहा,,, कजरी के मादक भराव दार मटकते हुए नितंबों को याद करके और कजरी की दोनों छलकती जवानी के हीलोरो को याद करके,,, अपने हाथ से ही कल्पना में कजरी के साथ संभोग आसन में लिप्त होकर वह अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करता आ रहा था,,, लेकिन कजरी उसके दिलो दिमाग से निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी,,,
पिछले साल ही वहां अपने बेटे का विवाह किया था और एक महीना ही हुआ था उसका होना आए,, बड़ी बेटी तो प्रताप सिंह के वहां बहू बनकर आराम की जिंदगी जी रही थी,,, घर में बहू क्या जाने के बाद से लाला संभाल संभाल कर कदम रखने लगा था वह नहीं चाहता था कि उसकी वासना की कहानी उसकी बहू को पता चले,,, वैसे अब तक उसके बेटे को भी लाला की करतूतों के बारे में जरा सा भी पता नहीं था,,, और लाला यही चाहता भी था हरिया और भोला दोनों लाला के बेहद वफादार साथी थे,,, और इस तरह का काम लाला इन्हीं से लेता था यह दोनों ही गांव में या दूरदराज से इस तरह की मजबूर औरतों को लेकर आते थे और उन्हें पैसे की मदद करके लाला अपनी वासना शांत करता था,,, और जब तक पैसे पूरी तरह से चुकता नहीं हो जाते थे तब तक लाला उस औरत के साथ अपनी मनमानी करता रहता था,,, और आज उसकी जाल में मीना फस चुकी थी,,,।
लाला अपने पुराने मकान पर जाने के लिए तैयार हो रहा था वह अपना धोती और कुर्ता पहनकर गीत गुनगुना रहा था कि तभी,,, दरवाजा खुला और अंदर से उसकी बहू हाथ में भोजन की थाली लिए उसके करीब आने लगी और बोली।
बाबुजी कहीं जा रहे हैं क्या भोजन तैयार हो चुका है,,,
बहू में आ कर खा लूंगा कहीं जरूरी काम से जा रहा हूं,,,
ठीक है बाबूजी,,,, आइएगा तो आवाज दीजिएगा,,,
ठीक है बहु तुम जाओ,,,,
(लाला का इतना कहना था कि लाला की बहू भोजन की थाली लिए वापस कमरे में जाने लगी और लाला उसकी गोलाकार नितंबों को जो की कसी हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही उभर कर नजर आ रही थी उसे देखते ही मन में गरम आहें भरने का और तब तक देखता रहा जब तक कि वह अंदर जाकर दरवाजा नहीं बंद कर ली,,,, लाला अपनी बहू की खूबसूरत चेहरे को तो ठीक से नहीं देख पाता था क्योंकि वह हमेशा घूंघट में ही रहती थी लेकिन,,, बाकी के अंगों को बाहर साड़ी के ऊपर से ही उनके आकार के बारे में पता लगा लेता था,,,, अपनी बहू की चूड़ियों की खनक पायल की छनक को सुनते ही उसके तन बदन में वासना की लहर दौड़ ने लगती थी वह काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगता था और इस समय भी वह अपनी बहू के गोलाकार नितंबों को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और सारी कसर पुराने घर पर मीना के ऊपर निकालने की मन में ठान लिया था,,,, वह तैयार होते होते अपनी बहू के बारे में सोच रहा था,,, जैसी खूबसूरत थी वैसा ही खूबसूरत नाम भी था कोमल अभी अभी शादी हुई थी इसलिए वह धीरे-धीरे फूल की तरह खीलना शुरू की थी,,, अपनी बहू को मन को देखते हैं उसे अपने बेटे के ऊपर गुस्सा आने लगता था क्योंकि ना जाने क्यों लाला को ऐसा लगता था कि उसका बेटा उसकी बहू को ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है,,,। दरवाजा बंद हो चुका था लेकिन धोती के अंदर हलचल मजा आ गया था,,, अपनी बहू की हाजिरी मैं लाला कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाता था,,अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए वह जल्द से जल्द अपने पुराने घर पर पहुंचना चाहता था इसलिए जल्दी ही घर से निकल गया,,
वहां पहुंचा तो पहले से ही हरिया भोला और वह औरत वहां पर मौजूद थे,,,, उस औरत पर नजर पड़ते ही लाला की धोती में हलचल मच ना शुरू हो गया,,,, लाला का यह पुराना घर आम के बागों के बीचो बीच था,,, यहां के आम बेहद स्वादिष्ट और मीठे होते हैं,,, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि यहां के आम को तोड़ सके जिसका कारण हरिया और भोला ही थे,,,जो कोई भूले से भी यहां के आम को तोड़ता था तो हरिया और भोला उसकी टांगे तोड़ देते थे,,,
चलो मीना अंदर चलो,,,(इतना सुनना था कि हरिया ने जल्दी से दरवाजा खोल दिया और मीना शर्माते हुए घर में प्रवेश कर गई,,, और लाला अपनी जेब में से 5 रु का नोट निकालकर हरिया को थमाते हुए बोला,,,)
तुम दोनों भी जाओ ऐश करो,,,
(इतना सुनते ही दोनों लाला को नमस्कार कर के वहां से चले गए और लाला जल्द से जल्द दरवाजे के अंदर प्रवेश कर गया,,, और दरवाजा को अंदर से बंद कर दिया,,, पुराना घर भी काफी बड़ा था जिसके एक कमरे में लाला और मीना दोनों खड़े थे लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए मीना की तरफ देखा तो वह बिस्तर के करीब खड़ी होकर दीवाल की तरफ देख रही थी तो लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए बोला,)
शरमाओ मत मीना इसे अपना ही घर समझो आराम से बैठ जाओ,,,
(लाला की बात सुनकर मीना शर्मा और डर के मारे बिस्तर पर बैठ गई और लाला कुंडी लगाकर मिला की तरफ घूम गया,,,और उसके करीब जाने लगा जैसे जैसे नाना मीना के करीब आता जा रहा था मीना के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि मीना को मालूम था कि नाना क्या करने वाला है और पैसे देने के एवज में उससे क्या चाहता है,,, लेकिन वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी मजबूर थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे,,, जो कि उसकी मदद लाला ही कर सकता था,,,)
देखो मीना मुझसे शर्मा ने कि या डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है अरे मैं तो पगली तुम लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहता हूं,,(ऐसा कहते हुए लाला मीना के एकदम करीब पहुंच गया,,, और दूसरी तरफ घर के पीछे रघु और उसका दोस्त खड़े थे और घर के पीछे लगे आम के पेड़ के ऊपर पके हुए आम को देखकर ललचा रहे थे,,,)
अरे यार रघु वो आम तो काफी ऊपर है,,, वहां तक तो मैं नहीं चढ पाऊंगा तुझे ही जाना होगा,,,
साले बहन चोद मुझे मालूम था तु ऐसा ही बोलेगा,,, ठीक है मैं चढ़ जाता हूं लेकिन तू बराबर निगरानी रखना कहीं कोई आ ना जाए,,
तू चिंता मत कर रघु,,,
(इतना सुनते ही रखो ऊपर पेड़ पर चढ़ने लगा.. और दूसरी तरफ कमरे के अंदर लाला साड़ी के ऊपर से ही उसके बड़े-बड़े चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,,,)
आहहहह,,, मालिक दुखता है,,,
दुखेगा तभी तो बाद में मजा आएगा,,,,(ऐसा कहते हुए लाला उसकी साड़ी को उसके कंधे पर से हटा कर एक तरफ कर दिया जिससे उसकी भारी-भरकम छाती लाला की आंखों के सामने अपना प्रदर्शन करने लगी कसी हुई ब्लाउज में मीना की भारी-भरकम चूचियां बड़ी मुश्किल से समा पा रही थी,,,)
अरे पगली तू एकदम पागल है क्या,,, देख तो सही तेरी चूची कैसे बाहर आने के लिए तड़प रही है और तू है कि उन्हें ब्लाउज में कैद करके रखी है,,,,(ऐसा कहते हुए लाला ब्लाउज के बटन खोलने लगा तो मीना बीच में बोल पड़ी,,)
मालिक क्या ऐसा नहीं हो सकता कि यह सब किए बिना ही आप मुझे पैसे उधार दे दे,,,
मीना तु सच में एकदम मूरख है,,, अरे भगवान कसम मैं तुझे 50 रुपए ऐसे ही दे दु और तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लुं,,, और बदले में मैं तेरे साथ अपना मुंह काला भी ना करु,,लेकिन तो शायद नहीं जानती कि पैसा कमाने में में कितना मेहनत किया है रात दिन एक कर के पसीना पाया हूं तब जाकर एक एक फूटी कौड़ी जमा करके यहां तक पहुंचा हूं,,(इस दौरान लाला लगातार उसे ब्लाउज के बटन खोल कर जा रहा था और आखरी बटन खोलते हुए बोला,,) मीना रानी रुपए के बदले में मैं शायद तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लु लेकिन पैसे कमाने में जो मेहनत लगी है उस मेहनत के बदले में मैं तुझसे हर जाना जरूर लूंगा,,,
(इतना कहने के साथ ही लाला मीणा के ब्लाउज के आखिरी बटन को भी खोल दिया और आखरी बटन खोलते ही मीना की भारी-भरकम गोलाकार चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराने लगी,, और मीना की बड़ी बड़ी चूची को देखकर लाला की आंखों में चमक आ गई और उसके मुंह में पानी आ गया वह दोनों हाथ आगे बढ़ाकर नीना की चूचियों को दोनों हाथों में थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,, मीना अच्छी तरह से समझ गई थी कि लाला के आगे गिडगिडाने से कोई फायदा नहीं है,,, और मीना इसे किस्मत का खेल समझ कर सब कुछ सहने के लिए तैयार हो गया,,, लाला पागलों की तरह उसकी चूचियों से खेल रहा था,,,धीरे-धीरे करके उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूची को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया,,, लाला की कामुक हरकतों से मीना एकदम शर्म से गड़ी जा रही थी क्योंकि लाला अपनी उम्र का भी लिहाज नहीं कर रहा था,,, देखते ही देखते लाला मीना के ऊपर पूरी तरह से छा गया,,, एक तरफ लाला मीना की चूचियों से खेल रहा था और दूसरी तरफ रखो धीरे-धीरे पेड़ के ऊपर चढ रहा था,,,लाला मीणा की चुचियों से खेलता हुआ दूसरा हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसके पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा,,जब मीना को इस बात का आभासस हुआ तो अपना हाथ आगे बढ़ा कर लाला को रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,।
ऐसे मत खोलिए मालिक ऐसे ही कर लीजिए,,,
अरे मीना रानी तू बहुत भोली है,,,तू बहुत खूबसूरत है तेरे नंगे बदन को देखने के लिए ही तो मैं तुझे यहां लेकर आया हूं अगर उस तरह से करना होता तो तुझे वही घर के कोने में ले जाकर के साड़ी ऊपर कर के तुझे चोद ना दिया होता,,,
(इतना कहने के साथ लाला पेटिकोट की डोरी को भी खोल दिया और देखते ही देखते मीना बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई उसके सारे कपड़े बिस्तर के नीचे बिखरे पड़े थे,,, और लाला चुचियों से निपट कर उसकी दोनों टांगों के बीच छा गया था लाला पागलों की तरह उसकी मलाईदार बुर को चाट रहा था,,, बिना कब तक अपने आप को संभाल कर रखती अपनी अभिलाषा ऊपर कब तक काबू कर पाती लाला की कामुक हरकतों ने उसे मदहोश कर दिया था और देखते ही देखते लाला की बुर चटाई से मदहोश होने लगी उत्तेजित होने लगी लेकिन फिर भी अपनी उत्तेजना को वह अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने देना चाह रही थी,,, वह उसी तरह से बिस्तर पर पड़ी थी और लाला उसकी दोनों टांगों के बीच अपना असर दिखा रहा था,,, तभी लाला उसे बोला,,,
मीरा रानी अगर तुम्हें पैसे चाहिए तो तुम्हें भी मुझे प्यार करना होगा जैसा एक बीबी अपने पति को करती हो उस तरह से,,, अगर इसी तरह से पडे रहना है तो मैं तुम्हें पैसे बिल्कुल भी नहीं दूंगा,,,(इतना कहने के साथ ही फिर से लाला मीना की बुर चाटने लगा मीना मजबूर हो चुकी थी उत्तेजित थी लेकिन वह अपनी तरफ से ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहती थी जिससे वह अपनी नजरों में गिर जाए,,, लेकिन लाला ने उसे मजबूर कर दिया था इसलिए मजबूरी बस वह तेरी दोनों हाथ नीचे की कल्पना कर लाना क्योंकि को पकड़कर अपनी दूर पर दबाना शुरू कर दी,,,बिना की इस हरकत की वजह से लाला काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसे मीना की बुर चाटने में बहुत मजा आ रहा था और साथ ही मीना की गरम सिसकारी की आवाज उसे और ज्यादा मदहोश कर रही थी,,,लाला इस बात से अनजान की इस आम के बगीचे में उसे कोई नहीं देख पाएगा वह मीना के साथ रंगरेलियां मनाने में व्यस्त था लेकिन वह नहीं जानता था कि,, आज उसका भांडा फूटने वाला है क्योंकि कमरे के ऊपर की खिड़की से लगे हुए आम की डाली तक रघु पहुंच चुका था,,, वह कमरे के अंदर लाला अपनी धोती खोल कर एकदम नंगा हो गया था इस उम्र में भी उसका लंड काफी मोटा तगड़ा और एकदम टाइट था,, जोकि देसी घी का कमान था लाला सोने से पहले अपने लिंग पर सरसों के तेल के नहीं बल्कि देसी घी की मालिश किया करता था और जी भर के हिलाया करता था उसी का नतीजा था कि अब तक लाला के लंड की ताकत बरकरार थी ,,, मीना चोर नजरों से लाला के नंगे खड़े लंड को देखी तो सिहर उठी,,, इस उम्र में भी लाला का लंड कुछ ज्यादा ही टाइट था,,, लाला अपने लंड को हिलाते हुएमीना की दोनों टांगों के बीच आ गया और देखते ही देखते उसकी गुलाबी बुरर के अंदर अपना लंड डाल दिया,,, जैसे ही लंड मीना की बुर के अंदर प्रवेश किया मीना के मुंह से आह निकल गई,,, जिस तरह का दर्द का अनुभव मीना की थी उस दर्द की उम्मीद मीना को बिल्कुल भी नहीं थी देखते ही देखते लाला उसे चोदना शुरू कर दियामीना मजबूर थी बेबस थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे इसलिए वह जिंदगी में पहली बार लाला जैसे इंसान के सामने अपने हाथ से लाए थे और जिसके एवज में उसे अपने साड़ी का पल्लू नीचे गिराना पड़ा था लेकिन,,, एक मजदूर और बेबस औरत होने से पहले वह एक सामान्य औरत थी इसलिए तो ना चाहते हुए भी लाला की चुदाई से मस्त होकर उसके मुंह से गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,
आम के पेड़ पर चढ़कर रघु पके हुए आम की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ही था कि उसके कानों में कमरे से आ रही गर्म से इस कार्य की आवाज पड़ गई,,, रघु उस आवाज को सुनकर एकदम हैरान हो गया क्योंकि आम के बगीचे पर वैसे भी हमेशा सन्नाटा छाया रहता था और इस तरह की आवाज आना संभव था हलवाई की बीवी की गरम सिसकारियों की आवाज उसे अब तक याद थी,,,इसीलिए उसके कान में जेसे ही इस तरह की आवाज पड़ी वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ हो रहा है,,, वह खिड़की में अपनी नजरों को बढ़ाएं अंदर देखने की कोशिश करने लगा और थोड़ी ही देर में उसे अंदर का नजारा एकदम साफ नजर आने लगा,,, कमरे के बीचो बीच पड़ा बिस्तर और उस पर एकदम नंगी लेटी हुई औरत और औरत के बीच में खोया हुआ लाला उसे साफ नजर आने लगे उसे समझते देर नहीं लगी कि इस आम के बगीचे में क्या हो रहा है वह ध्यान से खिड़की से अंदर की तरफ देखने रहना लाला बड़े जोरों से अपनी कमर हिला रहा था और साथ ही उस औरत की दोनों बेटियों को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था,,,, मीना काफी उत्तेजित हो चुकी थी उसे उम्मीद नहीं थी कि लाला इस तरह की चुदाई करेगा,,, लाला का लंड बड़ी तेजी से मीना कि बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंदर का नजारा देखकर रघु भी काफी उत्तेजित हो गया,,,, उसे इस तरह से खिड़की के अंदर झांकता हुआ देखकर नीचे खड़ा उसका दोस्त ऊसे आवाज लगाने लगा तो वह उसे उंगली के इशारे से चुप रहने को कहा और वह शांत हो गया,,, आम तोड़ना भूलकर रघु खिड़की के अंदर का नजारा अपनी आंखों से देख कर मस्त होने लगा और यह देखकर भी हैरान था कि लाला इस उम्र में भी काफी तेजी से चुदाई कर रहा था,,,लाला आंखों को बंद करके बिना की जगह कजरी और अपनी बहू की कल्पना कर रहा था उसे काफी आनंद भी आ रहा था वह जोर-जोर से अपनी कमर आगे पीछे हीला रहा था,,,, थोड़ी ही देर में मीना के साथ-साथ लाला भी झड़ गया,,,
लाला और मीना अपने अपने कपड़े पहन लिए,,, और लाला मीना के हाथ में 50 रुपए थमाते हुए बोला,,,।
जब भी तुझे पैसे की जरूरत हो बेझिजक मेरे पास चली आना,,,
ठीक है मालिक,,,(इतना कहकर मीणा लाला से पैसे लेकर कमरे से बाहर निकल गई और चारों तरफ नजर घुमा कर जल्दी-जल्दी आम के बगीचे से बाहर जाने लगी,,, लाला भी जाता है इससे पहले ही रघु आम तोड़ना भूल कर जल्दी से नीचे उतरा और आगे से दरवाजे पर पहुंच गया जहां पर लाला दरवाजा बंद करके ताला लगा रहा था,,,,।
क्या बात है लाला आज तो तुम्हारे चेहरे पर कुछ और ही चमक नजर आ रही है,,,
तू तू कौन है यहां मेरे आम के बगीचे में क्या कर रहा है तुझे आने से डर नहीं लगता,,,,
नहीं लाला मुझे कहीं भी आने से डर नहीं लगता,,,डरना तो तुम्हें चाहिए जो गांव की भोली भाली औरतों को उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर उनके साथ शरीर संबंध बनाते हो,,
यह क्या बक रहा है तू और है कौन तू,,,, तू जो भी कह रहा है वह बिल्कुल झूठ है समझा,,,, और मेरे रास्ते के बीच में कभी मत आना वरना,,,
वरना क्या लाला,,,,, अगर तुम्हारी यह करतूत पूरे गांव वालों को बता दूं ना,,, तो गांव वाले मिलकर तुम्हारी बॉटी बोटी नोच डालेंगे,,,, और हां मैं कजरी का बेटा हूं रघु,,,,
(कजरी का नाम सुनते ही लाला की आंखों में चमक आ गई कुछ देर के लिए बस शांत होकर कुछ सोचने लगा और बोला)
अरे रघु तू अपनी कजरी का बेटा है पहले क्यों नहीं बताया,,, बेटा जो कुछ भी त8 देखा वह सब कुछ भूल जा,,, और हां आज से यह समझना कि है आम का बगीचा तेरा ही है जब मन करे जितना मन करें उतना आम तोड़कर तू खा सकता है,,,, मेरी तरफ से तुझे पूरी छूट है,,,,
(लाला की बात सुनते ही रघु एकदम खुश हो गया और खुश होता हुआ बोला,,,)
क्या कह रहे हो लाला।
मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं बेटा,,, आम का बगीचा समझ ले आज से तेरा ही है,,, और हां,,,(इतना कहकर लाला कुर्ते की जेब में अपना हाथ डालकर इधर-उधर टटोलते हुए,,,) कहां गई कहां गई,,,, हां यह रही,,,, ले बेटा यह दो रुपया पकड़,,, ओर जाकर एस कर,,,(रघु तुरंत लाला के हाथ में से 2 रुपए का सिक्का ले लिया,, और सिक्के को आगे पीछे घुमा कर देखते हुए बोला)
तुम मजाक तो नहीं कर रहे हो लाला,,,
अरे बेटा भगवान कसम मैं कभी झूठ नहीं बोलता वह तो तू कजरी का बेटा है इसके लिए मुझे तुझ पर प्यार आ रहा है बहुत मेहनत करती है बेचारी,,,,और हां बेटा इतना जरूर याद रखना कि जो कुछ भी तूने आज देखा है इस बारे में किसी को बताना नहीं और अगर नहीं बताएगा तो इसी तरह ऐस करता रहेगा,,, और बता दिया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,।
तुम चिंता मत करो लाला,,, यह राज मेरे सीने में दफन रहेगा हां लेकिन इस तरह से ही मुझ पर मेहरबान रहना अगर चला भी इधर उधर कुछ कीए तो तुम्हारा भांडा फोड़ दूंगा,,,,
खुश रहो बेटा,,,(इतना कहकर लाला वहां से चला गया और रघु कभी सिक्के की तरफ तो कभी लाला की तरफ देख ले रहा था,,, रघु के दोस्त को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब चल क्या रहा है,,, वह रघु से पूछने की कोशिश किया तो रघु सिर्फ इतना ही बोला,,)
तू आम खा,,, गुठलियों के बारे में सोचने का काम मेरा है,, और चल आज हलवाई की दुकान पर फिर से तेरा मुंह मीठा कराता हूं
सच में रघु
अरे मैं कभी झूठ बोलता हूं क्या,,,(इतना कह कर रघु अपने दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर बगीचे से बाहर जाने लगा,,, और लाला आज बहुत खुश था भले ही रघु ने उसे गांव की औरतों की चुदाई करते हुए देख लिया था लेकिन वहां कजरी का बेटा था इस बात से उसे इस बात की तसल्ली हो गई थी कि रघु के द्वारा ही वह कजरी तक पहुंचेगा,,, यही सोचता हूं वाह-वाह अपने घर की तरफ चला गया।)
हूं
सच में रघु
Yyy
अरे मैं कभी झूठ बोलता हूं क्या,,,(इतना कह कर रघु अपने दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर बगीचे से बाहर जाने लगा,,, और लाला आज बहुत खुश था भले ही रघु ने उसे गांव की औरतों की चुदाई करते हुए देख लिया था लेकिन वहां कजरी का बेटा था इस बात से उसे इस बात की तसल्ली हो गई थी कि रघु के द्वारा ही वह कजरी तक पहुंचेगा,,, यही सोचता हूं वाह-वाह अपने घर की तरफ चला गया।)
Kya baat hai