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अंकित पूरी तरह से नंगा हो चुका था। रात के 10:30 बज रहे थे समय का भाव था इस बात का एहसास अंकित को अच्छे से था वह सारा मामला समेटना चाहता था लेकिन मजा भी भरपूर लेना चाहता था इसलिए अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे हिलाते हुए वह मां बेटी दोनों के चुंबन को तोड़ दिया और सुमन के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अपने लंड की तरफ झुकाने लगा,,,, देखते ही देखते उत्तेजना से मदहोश हुई सुमन अंकित के मोटे-मोटे लंड के करीब आ गई,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित क्या करवाना चाहता है। लेकिन अपनी मां की मौजूदगी में हुआ एकदम से तो अंकित के लंड को मुंह में नहीं ले सकती थी इसलिए थोड़ा नखरा दिखाते हुए बोली।
यह क्या कर रहा है,,,?
क्या कर रहा हूं,,, अरे तुम्हें करना है,, मुझे बस मजा लेना है और तुम्हें भी बहुत मजा आएगा,,,।
लेकिन करना क्या है,,?( सुमन अंजान बनते हुए बोली,,, सुषमा अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित क्या करवाना चाहता है उसे लग रहा था कि उसकी बेटी को नहीं मालूम कि क्या किया जाता है उसे क्या खबर थी कि उसकी बेटी एक नंबर की छिनार बन चुकी थी उसे सब कुछ मालूम था कि कब क्या करना है और वास्तविकता यही थी कि जो कुछ भी अंकित सीखा था सर्वप्रथम सुमन ने ही उसे सिखाई थी। वह गहरी सांस लेते हुए अंकित की हरकत को देख रही थी क्योंकि अब इस खेल में सुमन शामिल थी सुषमा की नजर में सुमन बेहद मासूम लड़की थी और वह ऐसा कभी नहीं चाहती कि वह किसी लड़के के साथ इस तरह से संबंध बनाएं और वह भी उसकी आपके सामने लेकिन हालात पूरी तरह से बदल चुके थे हालात के हाथों वह मजबूर हो चुकी थी वह अपनी बेटी की चुदाई अपनी आंखों के सामने देखने के लिए लाचार हो चुकी थी वह कुछ कर नहीं सकती थी बस अपनी आंखों से देख सकती थी लेकिन इसमें भी उसका एक अलग ही मजा था भले ही यह एक मां के लिए बेहद शर्मनाक पल था लेकिन जिस तरह से सुषमा अंकित के साथ मजे लूट रही थी और उसकी बेटी ने अपनी आंखों से देख ली थी और जिस तरह से दोनों के बीच स्तन मर्दन और चुंबन हुआ था उसे देखते हुए सुषमा को अपनी बेटी की कामुक हरकत देखने में आनंद आने लगा था वह देखना चाहती थी कि उसकी बेटी अब क्या करती है इसलिए सुमन की बात सुनकर अंकित बोला,,,)
ज्यादा कुछ नहीं करना है बस इसे अपने मुंह में लेकर चूसना है,,,,।
इसे छी,,,, मुझसे नहीं होगा यह सब,,,।(सुमन जानबूझकर बुरा सा मुंह बनाते हुए बोली)
अरे तुम्हारे लिए नया-नया है ना इसलिए तुम्हें समझ में नहीं आ रहा है इसमें बहुत मजा आता है अपनी मां से पूछो तुम्हारी मां तो मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर ही नहीं निकालती क्यों आंटी बताओ सुमन को,,,,
(अब सुषमा क्या कहती वह तो शर्म से पानी पानी में जा रही थी क्योंकि बात ही बात में अंकित में सुमन को यह बता दिया था कि उसकी मां उसके लंड को मजे लेकर चुस्ती है सुषमा को लग रहा था कि यह बात सुमन नहीं जानती जबकि उसे सब कुछ मालूम था कि उसकी मां अंकित के साथ क्या-क्या कर चुकी है शर्म के मारे सुषमा कुछ बोल नहीं पाई वह खामोशी से कभी सुमन की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देख रही थी,,,, सुषमा की खामोशी को देखकर अंकित फिर से बोला,,,)
बताओ ना आंटी सुमन दीदी को तो कुछ मालूम ही नहीं है बस जवान हो गई है,,,,,।
(अंकित की बात सुनकर इस बार सुषमा चुप नहीं रह पाई और मजबूरन से बोलना पड़ा)
हां हां सुमन बेटी अंकित सही कह रहा है इसमें बहुत मजा आता है एक बार तुम करके देखो,,,,।
क्या कह रही हो मम्मी क्या तुम भी यह सब करचुकी हो,,,।
यह सब करना जरूरी होता है अगर मजा लेना है तो,,,, (सुमन की बात सुनकर अंकित बोल पड़ा और उसकी और में सुर मिलाते हुए सुषमा भी बोल पड़ी)
हां यह सब करना बहुत जरूरी होता है तभी असली मजा मिलता है,,,।
तुम्हें गंदा नहीं लगता मम्मी यह सब करने में,,
जब किए नहीं रहो तो गंदा लगता है,, लेकिन जैसे ही करने लगोगे तो तुम्हारे बदन में मदहोशी छाने लगेगी खुमारी छाने लगेगी और तुम्हें यह सब कुछ अच्छा लगने लगेगा। एक बार करके तो देखो,,,, ( बदनाम होने की दर से ना चाहते हुए भी सुषमा को यह सब कहना पड़ रहा था उसकी मजबूरी थी लेकिन इस मजबूरी में भी उसका एक अलग ही मजा था भले ही या बेहद शर्मसार कर देने वाली स्थिति थी लेकिन फिर भी सुषमा अपनी आंखों से अपनी बेटी को एक जवान लड़के के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने में कैसा लगता है वह अपनी आंखों से देखना चाहती थी। सुमन को तो मालूम नहीं था कि इस खेल में कितना मजा आता है बस बस सिर्फ अपनी मां के सामने नाटक कर रही थी इसलिए मैं अपनी मां की तरफ से हरी झंडी का इशारा बातें ही वह धीरे से अपने प्यासे होठों को अंकित के लंड की तरफ आगे बढ़ाने लगी और जैसे ही लंड के सुपारी को अपने मुंह के अंदर भरी जानबूझकर वह बुरा सा मुंह बनाने लगी, ताकि उसकी मां को सपना होगी वह पहले भी ऐसा सुख भोग चुकी है,,,,, सुमन की सांसों पर नीचे हो रही थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां खड़ी थी और अपनी मां के सामने इस तरह की शर्मनाकहरकत करने में उसे भी शर्म महसूस हो रही थी लेकिन बेशर्म बनने में जो मजा है उसे इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि इस समय अपनी मां की मौजूदगी में इस तरह की हरकत करने में उसके तन बदन में कैसी हलचल हो रही है। लेकिन फिर भी जानबूझकर बुरा सा मुंह बनाते हुए वह सुपाड़े को अपने मुंह से बाहर निकाल दी और बोली,,,)
बड़ा अजीब लग रहा है,,,,।
(यह देखते ही अंकित से रहा नहीं किया और वह अपने लंड को हाथ से पकड़ कर जबरदस्ती अपने लंड को उसके लाल-लाल होठों के बीच डालने लगा और बोला,,,)
, पहले कुछ देर अपने मुंह के अंदर लेकर चूसो तो सही अपने आप मजा आने लगेगा,,,,,,।
(अंकित पूरी तरह से बेशर्म बन चुका था अपनी मां की उम्र की औरत के सामने वह उसकी ही बेटी के साथ मजे लेने पर उतारू हो चुका था,,,, यह सब देखकर सुषमा का बदन उत्तेजना से गनगना जा रहा था,,,, थोड़ी ही देर में सुमन एक मंजी हुई खिलाड़ी की तरह अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी सुमन की हरकत पर अंकित के मुंह से गरमा गरम सिलकारी की आवाज फूट रही थी वह अपनी आंखों को बंद करके अपनी कमर को हौले हौले से आगे पीछे करके हिलाते हुए मदहोश हुआ जा रहा था।
सहहहहह आहहहहहह,,,,, ऊमममममम,,,,, बहुत मजा आ रहा है सुमन दीदी तुम तो कमाल कर रही हो बिल्कुल अपनी मां की तरह तुम्हारी मां भी इसी तरह से मजा लेती है और मुझे पागल बना देती है,,,,, ऊमममममम इसी तरह से,, उफफफ,,,,,,,, (ऐसा कहते हुए वह धीरे से अपनी आंख खोल और सुषमा की तरफ देखा तो सुषमा की हालत खराब हो जा रही थी वह अपने हाथों से ही अपनी चूची को दबा रही थी शायद अपनी बेटी को अपनी आंखों के सामने इस तरह की हरकत करते हुए देखकर वह मदहोश में जा रही थी यह देखकर अंकित उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों को अपने होठों में भरकर उसका रस चूसना शुरू कर दिया और अपना एक हाथ उसकी बुर पर रखकर उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों को मसलना शुरू कर दिया,,,, अंकित की हरकत से सुमन की मां एक बार फिर से चुदवासी होने लगी थी,, अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसते हुए सुमन अपनी मां की मदहोशी देख रही थी और एक हाथ उठाकर अपनी मां की गांड पर रखकर उसे सहला रही थी मसाला रही थी और उस पर चपत लग रही थी,,, अपनी बेटी के हथेलियों का स्पर्श पाकर सुषमा की हालत खराब होने लगी थी उसका चेहरा फिर से उत्तेजना से टमाटर की तरह लाल होने लगा था अंकित उसके होठों का रसपान करते हुए लगातार अपनी हथेली से उसकी बुर को रगड़कर गर्म कर रहा था,,,,, कुछ देर तक किसी तरह से मजा लेने के बाद वह सुमन का हाथ पकड़ कर उसकी मां की बुर पर उसकी हथेली रख दिया और सुमन भी अपनी मां की गुलाबी बुर को सहलाना शुरू कर दी,,,, अपनी बेटी की हथेली का स्पर्श सुषमा को पागल बना रहा था वह मैं दोष में जा रही थी वह कभी सोची भी नहीं थी कि एक दिन ऐसा आएगा कि उसकी बेटी उसकी बुर को सहलाएगी दबाएगी मसलेगी मुझे सब कुछ बड़ा अजीब था लेकिन बेहद आनंददायक था जिसमें सुषमा पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थी छत पर पूरी तरह से कामुकता भरा व्यभिचार चल रहा था सुषमा और अंकित दोनों पूरी तरह से नग्न अवस्था में थे लेकिन सुमन के बदन पर अभी भी वस्त्र थे अंकित ने अभी उसके वस्त्र को उतारा नहीं था,,,,, छत पर अंधेरा होने की वजह से किसी के देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था। आज सुमन का जन्मदिन था और जन्मदिन पर उसे एक अद्भुत तोहफा मिल रहा था जिसे वह जिंदगी भर भुलने वाली नहीं थी,,,
देखते ही देखते सुमन लपालप अंकित के लंड को अपने मुंह में लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,, सुमन अंकित के लंड को जड़ तक मुंह में लेकर चूस रही थी ऐसा करने में लंड उसके गले के नीचे तक उतर जा रहा था जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी लेकिन वह अपने आनंद में कोई कमी बाकी रखना नहीं चाहती थी इसलिए बड़े चाव से वह इस तरह की हरकत कर रही थी। वह मजे ले लेकर चूस रही थी और अंकित मदहोश होकर चुसवा रहा था। आज उसके सामने एक अलग ही लक्ष्य था दो औरतों को संतुष्ट करने का लक्ष्य ,आज उसे अपनी मर्दानगी साबित करना था और मां बेटी दोनों की नजर में हीरो बन जाना था कहीं तक सुमन और सुषमा के मन में यही प्रश्न उठ रहा था कि क्या हुआ दोनों को संतुष्ट कर पाएगा इस प्रश्न के बावजूद भी दोनों इस खेल का भरपूर मजा ले रहे थे और एक बार सुषमा तो झाड़ भी चुकी थी जबकि उसकी बुर में लंड घुस के बाहर आ चुका था लेकिन वह लंड की चुदाई से नहीं बल्कि अंकित की चटाई से झड़ी थी,,,,।
कुछ देर तक सुमन लंड चूस कर भरपूर मजा लुटती रही,,,, खेल को आगे बढ़ाना जरूरी था इसलिए अंकित धीरे से अपने लंड को सुमन के मुंह से बाहर खींच लिया और बिल्कुल भी देर ना करते हुए फिर से वह अपनी हथेली को सुमन के सर के पीछे रख दिया और दबाव बनाता हुआ उसे उसकी मां की टांगों के बीच ले जाने लगा सुमन समझ गई की अंकित क्या करना चाहता है और इस बात का एहसास सुषमा को होते ही उसका बदन उत्तेजना से सिहर उठा,, उसकी सांसों की गति के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे होने लगी,,, जैसे ही अंकित ने सुमन के लाल-लाल होठों को उसकी मां की बुर के एकदम करीब लाया सुमन अपनी नजर उठाकर अंकीत की तरफ और अपनी मां की तरफ देखने लगी,,,, वह कुछ बोल पाती इससे पहले ही सुषमा मदहोश होकर खुद ही अपनी बर को आगे की तरफ करके उसके होठों से सटा दी,,, यह बेहद उत्तेजित और उत्साहित कर देने वाला पल था जब एक मां खुद ही अपनी बेटी के होठों पर अपनी बुर सटा रही थी,,, अपनी मां के छीनरपन को देखकर सुमन पानी पानी हो गई और वह अपने होठों को एकदम से खोलकर अपनी मां की भरी हुई जवान के केंद्र बिंदु पर लथेडने लगी इस बार सुमन ने यह नहीं कहीं की यह सब उसे नहीं मालूम या उसे पता नहीं है वह मदहोश हो चुकी थी अपनी मां के रंडी पन को देखकर,,, सुमन के लिए पहला मौका था जब वह किसी औरत की बुर को अपने होठों से चैट रही थी अब तक वह खुद अपनी बुर को मर्दों से चटवाती आ रही थी लेकिन आज उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में बुर चाटने में कितना मजा आता है तभी तो मर्द चोदने से पहले टांगे फैलाकर औरत की बुर जी भर कर चाटते हैं,,, आज पहली बार से औरत की बुर से उठने वाली मादक खुशबू का एहसास हो रहा था जो कि उसे पागल बना रहा था वह पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रही थी।
माहौल पूरी तरह से मदहोशी से भरा हुआ था सुमन का जन्मदिन उसकी जिंदगी का यादगार जन्मदिन बन चुका था अंकित अभी भी सुमन के सर के पीछे अपनी हथेली रखा हुआ था और एक हाथ सुमन की मां की चूची पर रखकर उसे दबा रहा था,,, सुषमा अपनी बेटी की हरकत से चारों खाने चित हो चुकी थी मां बेटी दोनों पहली बार औरत के एहसास का मजा ले रहे थे। कुछ देर बाद अंकित सुषमा के पीछे आगे और उसके बदन से एकदम से सट गया,,, सुषमा अपनी मोटी मोटी जांघों को अपनी बेटी के कंधों पर रखकर उसे जी भर कर अपनी जवानी का रस चटा रही थी,,, इस दौरान सुषमा की दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए अंकित सुषमा की दोनों टांगों के पीछे से अपने मोटे से बड़े लंड को सुमन की तरफ करके सुषमा की पर की गर्माहट को महसूस कर रहा था अपनी मां की बुर को चाटते हुए अंकित के लंड को देखकर उसके सुपाड़े की झलक पाकर,,, सुमन से रहा नहीं क्या और अपनी मां की बुर से अपने होंठ को हटाकर और फिर से अंकित के लंड को मुंह में भर ली और चूसना शुरू कर दी, अब वह बड़ी-बड़ी से अपनी मां की बुर चाट रही थी और अंकित के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी वह दोनों को मजा दे रही थी और अंकित मदहोश हुआ जा रहा था चुदवासा हुआ जा रहा था,, देखते ही देखते हो सुषमा की बुर के अंदर अपनी तो उंगलियां डालकर अंदर बाहर करने लगा,,, अब सुषमा को दोहरा आनंद मिल रहा था एक तरफ उसकी बेटी थी जो उसकी बुर को चाट रही थी और दूसरी तरफ अंकित उसकी चूचियों को दबाता हुआ अपनी दो उंगली को उसकी बुर में पेल रहा था,,, इस दोहरे हमले को सुषमा ज्यादा देर तक झेल नहीं पाई और एक बार फिर से भरभरा कर झड़ने लगी।
सुमन की मां दो बार अपना पानी निकाल चुकी थी,,, ऐसा शायद ही हो कि वह अपनी जवानी के दिनों में ही इस तरह से कम समय के अंतराल में दो बार झड़ी हो,,, और यह संभव है कि दो बार चुदाई से ही झड़ी होगी,,, लेकिन पहली बार वह सिर्फ बुर चटाई से वह अपना पानी निकाल चुकी थी। समय का अभाव बराबर बना हुआ था क्योंकि अब थोड़ा समय ज्यादा बिक रहा था और जैसे-जैसे समय बीत रहा था वैसे-वैसे अंकित परेशान भी हो रहा था कि कहीं उसकी मां आ जाए क्योंकि ऐसे समय पर अगर उसकी मां वापस आ जाती है तो उसके किए किराए पर पानी फिर जाएगा फिर ऐसा माहौल बनने में समय लग जाएगा सब कुछ निपटा देना चाहता था इसीलिए वह सुमन को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर खड़ी किया और अपने हाथों से उसका कुर्ता पकडकर ऊपर की तरफ उठाने लगा उसका साथ देते हुए, सुमन भी अपने दोनों हाथों पर की तरफ करके अपनी कुर्ती उतरवाने में मदद करने लगी,,, देखते ही देखते अंकित सुमन की कुर्ती उतर चुका था कुर्ती के अंदर उसकी क्रीम कलर की ब्रा उसकी दोनों चूचियों को जकड़े हुए थी,,,, सुषमा अपनी सांसों को दुरुस्त करते हुए पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गई थी,,,, और अपनी बेटी को अंकित के हाथों मदहोश होते हुए देख रही थी क्रीम कलर की ब्रा में जकड़ी हुई चूचियों को देखकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,।
कुछ भी कहो मां बेटी दोनों के पास कीमती खजाना है एक के पास खरबूजा तो दूसरे के पास संतरा है,,,, (और इतना कहने के साथ ही वह सुमन को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके दोनों च को दबाना शुरू कर दिया सुमन अपनी मां की आंखों के सामने अंकित से मजा लेने लगी थी उसके बदन में उत्तेजना का सागर उठ रहा था वह गहरी गहरी सांस लेते हुए अंकित के द्वारा स्तन मर्दन का आनंद ले रही थी अंकित का लंड अपनी औकात में खड़ा था जो सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था जिससे सुमन का बदन कसमसा रहा था,,, अंकित ने सुमन से ज्यादा उसकी मां की चुदाई कर चुका था। सुषमा कुर्सी पर बैठे-बैठे दोनों की कम लीला को देख रही थी उसे साथ दिखाई दे रहा था कि अंकित क्या कर रहा था उसकी जवान लड़की की चुचियों को मसल रहा था और सुषमा को यह भी दिखाई दे रहा था कि उसका मोटा सा बड़ा लंड उसकी बेटी के सलवार के अंदर धंशा हुआ था,,, लेकिन इस नजारे को देखकर सुषमा को गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि उसके बदन में सुरसुराहट छा रही थी मदहोशी का नशा छा रहा था अगर वह खुद अपनी बेटी के हाथों रंगरेलियां मनाते हुए पकड़ी ना गई होती तो शायद अपनी आंखों से इस तरह से देखकर वह अपनी बेटी और अंकित दोनों को करने के लिए उन दोनों पैर टूट पड़ी होती लेकिन किस्मत को कुछ ओर ही मंजूर था,,,, देखते ही देखते अंकित अपने हाथों से सुमन की ब्रा खोलने लगा और अगले ही पल वह ब्रा उतार कर उसकी नंगी चूची को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया अंकित को बहुत मजा आ रहा था वह सुषमा की तरफ देखकर बोला।
देख रही हो आंटी तुम रहती हो कि तुम्हारी बेटी नादान है लेकिन देखो तुम्हारी बेटी की चुची मर्दों को पागल बनाने के लिए तैयार हो गई है अब देखना मैं कैसे दबा दबा कर तुम्हारे जैसा खरबूजा बना दूंगा,,,, ऊमममममम,,,,,, (ऐसा कहते हुए वहां चूचियों को दबाते हुए सुमन के गर्दन पर चुंबन करने लगा कुछ देर तक अंकित इसी तरह से सुमन की चूची से खेलता रहा और सुमन आनंदमय होकर अपनी आंखों को बंद करके अद्भुत काम क्रीड़ा का मजा लेने लगी। और फिर देखते ही देखते च को एक हाथ से दबाते हुए दूसरे हाथ से सुमन की सलवार खोलने लगा यह देखकर सुमन का दिल जोरो से धड़कने लगा और सुषमा भी अपनी दोनों टांगों को खोलकर खुद ही अपनी बुर को सहलाने लगी क्योंकि वह जानती थी कि अंकित उसकी बेटी को नंगी करने वाला है। इस बीच लगा था और उसका मोटा तगड़ा मूसल उसकी बेटी की सलवार में घुसने की कोशिश कर रहा था। सुषमा ने जिस तरह से अपनी बेटी के सामने बेटी को उतारने में शर्मिंदगी का एहसास लिए हुए अपने हाथ से पेटीकोट को पकड़ ली थी सुमन ने ऐसा कुछ भी नहीं कि वह तो उतावली हो रही थी नंगी होने के लिए और अंकित की बिल्कुल देर नहीं किया वह सलवार का नाड़ा खोलकर अपने हाथों से उसे नीचे की तरफ आने लगा और जैसे ही सलवार उसके कदमों में पहुंची सुमन खुद अपने पैरों का सहारा लेकर सलवार को अपने पैर से बाहर निकाल दी और मरुन रंग की चड्डी में अपनी जवानी का प्रदर्शन करने लगी,,,, अंकित कुछ देर तक उसे इसी अवस्था में अपनी बाहों में लेकर उससे प्यार करता रहा उसके बदन पर अपनी हथेलियां घूमाता रहा,,, और फिर उसे सुषमा के पास लेकर आया,,, सुमन को अपनी मां के कंधों का सहारा लेकर उसे खड़ी कर दिया सुमन और उसकी मां का चेहरा आमने-सामने था सुमन से रहा नहीं गया और सुमन अपने होठों को अपनी मां के होठों से सटा दी दोनों के बीच गहरा चुंबन का आदान-प्रदान शुरू हो गया और अंकित घुटनों के बल बैठकर सुमन की चड्डी उतारने लगा सुमन भी अपनी गांड को हवा में उठाए हुए थे जिससे उसकी खूबसूरत गांव लाजवाब लग रही थी जैसे ही अंकित ने सुमन के बदन से उसकी चड्डी को उतार कर उसे नंगी किया अंकित बिल्कुल भी तेज नहीं किया उसकी खूबसूरत गांड की बीच की गहरी दरार में अपनी नाक ले जाने में,,,,।
अंकित की गांड की दरार के बीचो-बीच अपना मुंह ले जा करके उससे उठ रही मादक खुशबू को अपने सीने में उतारने लगा,,,,, अंकित की हरकत से सुमन का भजन कम आने लगा और इस दौरान अपनी मां के होठों का रसपान करते हुए अपना एक हाथ अपनी मां की चूची पर रख दी और उसे दबाने लगी यही क्रिया सुषमा भी अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर अपनी बेटी के संतरों को थाम ली और उससे खेलने लगी। सुमन अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठाकर अपने दोनों टांगों को खोल दी ताकि अंकित के होंठ और उसकी जीत उसके गुलाबी छेद तक आराम से पहुंच सके, और ऐसा ही हुआ अंकित कीजिए बढ़िया आराम से सुमन की गुलाबी छेद तक पहुंच गए और अंकित अपनी जीभ बाहर निकाल कर सुमन की पनियाई बर को चाटने लगा,,,, सुमन की हालत खराब होने लगी,,, अंकित पागलों की तरह सुमन की बुर को चाट रहा था चांदनी रात में सुषमा के घर की छत मदहोशी का आशियाना बन चुका था वह कभी सोच भी नहीं थी कि वह इस तरह से अपनी जवानी और अपनी बेटी की जवानी के साथ मिलकर एक जवान लड़के के साथ छत पर गुलछर्रे उडाएगी,,, और सही मायने में देखा जाए तो जिस खूबसूरत घटना की आशंका मन में नहीं होती और वहीं घटना घट जाए तो वह जीवन को आनंदित बना देती है और ऐसा ही तीनों के साथ हो रहा था,,,, मां बेटी दोनों के चुंबन के बीच सुमन के मुंह से हल्की-हल्की शिसकारी की आवाज निकल रही थी वह अपनी जवानी की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लगातार उसकी बुर से मदन रस की बारिश हो रही थी,,,, अंकित समझ गया था कि अब उसे क्या करना है क्योंकि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका था हथौड़ा मारने की देरी थी,,,,, इसलिए अंकित धीरे से अपनी जगह पर उठकर खड़ा हो गया,,, सुमन की दोनों टांगों के बीच खड़ा था सुमन अपनी मां के ऊपर झुकी हुई थी,,,, अंकित को खड़ा देखकर सुषमा समझ गई कि अब वह क्या करने वाला है इसलिए वह चुंबन को कुछ देर के लिए तोड़कर वह गहरी सांस लेते हुए अंकित से बोली।
थोड़ा आराम से अभी नाजुक है,,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो आंटी तुम्हारी बेटी मेरी जान है और मैं अपनी जान को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा देखने में कितनी आराम से अपने लंड को तुम्हारी बेटी की बुर में डालता हूं,,,,, इतनी आराम से डालूंगा कि तुम्हारी बेटी के चेहरे पर दर्द की सिकन दिखाई नहीं देगी वह मजे लेकर चुदवाएगी,,,,, (सुषमा को लग रहा था कि आज पहली बार उसकी बेटी के बुर में लंड जाने वाला है लेकिन वह नहीं जानती थी कि अब तक न जाने कितने मर्दों को वह अपने ऊपर ले चुकी थी,,,, और अंकित जानता था कि सुमन की बुर में उसके लंड का सांचा बन चुका है और बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई में घुस जाएगा वह तो जानबूझकर सुषमा को दिलासा देने के लिए बोल रहा था,,,,, सुमन हालत को अच्छी तरह से समझती थी इसलिए बिना कुछ बोले फिर से अपनी मां के लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चुसना शुरू कर दी ,,, इस बीच सुषमा अपनी दोनों टांगों को खोली हुई थी। और सुमन अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बुर पर अपनी हथेली रखकर उसे मसाला रही थी जिससे उसकी मां को बहुत मजा आ रहा था। अंकित पूरी तरह से तैयार था सुमन की बुर में लंड डालने के लिए और उससे अब रहा भी नहीं जा रहा था क्योंकि काफी देर से अपना लंड खड़ा किए दो-दो औरतों के बीच सिर्फ मजे ले रहा था। सुमन के आने से पहले वह सुमन की मां की चुदाई कर रहा था लेकिन बिन झड़े ही सुमन क्या जाने की वजह से उसे अपना लंड सुषमा की बुर से बाहर निकालना पड़ा तब से उसका लंड खड़ा का खड़ा ही था। सुमन का बदन कसमसा रहा था,, क्योंकि वह जानती थी कि अब क्या होने वाला है उसे एहसास था कि कुछ ही देर में अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुसने वाला है और वह भी उसकी मां की आंखों के सामने यह एक रोमांच कारी पल था जिसके लिए वह बेहद उत्सुक और उत्साहित थी,,,
आखिरकार वह पल आ ही गया, अंकित उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे कुछ देर चलता रहा और फिर ढेर सारा दुख अपने लंड के सुपारी पर लगाकर अपनी हथेली से सुमन की बुर को हल्का सा खोलने की कोशिश करने लगा,,, वैसे तो अंकित को सुमन की बुर को अपनी उंगली से खोलने का कोई इरादा नहीं था क्योंकि यह काम उसका लंड बड़े अच्छे से कर सकता था लेकिन सिर्फ बुर का सुराख देखने के लिए हुआ ऐसा कर रहा था और जैसे ही अंकित की आंखों के सामने सुमन की गुलाबी छेद नजर आई वैसे ही वह अपने मोटे सुपाड़े को उस पर सटा दिया और धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में डाल दिया,,,, अपनी मां के सामने सुमन जानबूझकर दर्द होने का नाटक कर रही थी और उसके इस नाटक की वजह से सुषमा परेशान थी कि कहीं उसकी बुर फट न जाए,,,,, लेकिन जब अंकित ने अपना पूरा लंड उसकी बुर में डालकर कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर मुस्कुराकर सुषमा की तरफ देखा और बोला।
देख ली आंटी बिल्कुल भी दर्द नहीं हुआ,,,।
(इतना सुनकर सुषमा को राहत महसूस होने लगी और फिर अंकित अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया सुमन की चुदाई उसकी मां की आंखों के सामने करने लगा,,, सुमन आनंदित हो उठी अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की लड़ाई नाप रहा था और अंकित उसकी कमरधा में अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया था,,,, मां बेटी दोनों को एक दूसरे से मजा लेटा हुआ देखकर अंकित का वासना से भरा हुआ दिमाग बड़ी तेजी से कम कर रहा था। वह सुमन की कमर पकड़े हुए ही उसे थोड़ा पीछे की तरफ ले आया,,,, और फिर अपना हाथ आगे बढ़कर एक बार फिर से सुमन के सर पर हाथ रखकर उसका सर नीचे की तरफ झुकने लगा सुषमा की दोनों टांगों के बीच अब किसी को समझ में समझाने का जरूरत नहीं था सुमन समझ गई कि उसे क्या करना है और सुषमा भी समझ गई कि अंकित क्या करवाना चाह रहा है। सुमन की बुर में लंड घुसा हुआ था एक अलग ही उत्तेजना उसके दिलों दिमाग पर छाई हुई थी इसलिए अपनी आंखों के सामने अपनी मां की गुलाबी बर देखकर उसे रानी की और वह पागलों की तरह अपनी मां की बुर पर टूट पड़ी और उसे चाटना शुरू कर दी,,,,, सुमन की मन मस्त हो गई मदहोश हो गई अपनी आंखों को बंद करके कुर्सी पर दोनों हाथ रखे अपनी टांगे फैलाए मजा लेने लगी,,,, और अंकित धक्के पर धक्का लगना शुरू कर दिया,,, सुषमा अपने मन में यही सोच रही थी कि जितना सीधा हुआ अंकित को समझ रही थी वह इतना सीधा बिल्कुल भी नहीं है वह बहुत हारामी लड़का है आज उसे एहसास हो गया था बस सीधा होने का नाटक ही करता है,,,
सुषमा और अंकित दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे अंकित अपने मन में ही सोच रहा था कि यही नजारा कुछ दिनों बाद उसके घर में भी होने वाला है जब वह अपनी मां की चुदाई करते हुए अपनी बहन की बुर चाटेगा या फिर बिल्कुल इसी तरह से वह अपनी बहन की बुर में लंड डालेगा और उसकी बहन उसकी मां की बुर चाटेगी,,, यह सब सोच कर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी और वह जोर-जोर से धक्के लगाने लगा,,,,, सुमन की बुर से फच्च फच्च की आवाज आ रही थी जो की पूरी छत पर गूंज रही थी,,। मां बेटी दोनों मजा लूट रही थी अंकित के दोनों हाथों में रसगुल्ला था। अंकित का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से सुमन की बुर की गहराई नापता हुआ मजा दे रहा था। अंकित अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर सुमन की चूची को पकड़ कर दबाते हुए मजा ले रहा था उसकी कमर लगातार एक ही लय में आगे पीछे हो रही थी,,, कुछ देर तक किसी तरह से चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को सुमन की बुर से बाहर निकाला और फिर सुमन को सुषमा की गोद में बैठा दिया और उसकी टांगों को खोल दिया,,,,, सुषमा की हालत खराब हो जा रही थी वह उत्तेजना में चूर हो चुकी थी अपनी आंखों के सामने अपनी बेटी की चुदाई होता देखकर वह खुद लंड के लिए तड़प रही थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित जानबूझकर उसे तड़पा रहा था। बेटी को उसकी मां की गोद में बैठकर उसकी दोनों टांगों को खोलकर अंकित इस अवस्था में उसकी बुर में लंड डाली और उसे चोदना शुरू कर दिया और ऐसी अवस्था में वह उसकी मां के फोटो का रसपान करता हुआ खुद सुमन की चूची को दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रहा था एक साथ मां बेटी दोनों के साथ मजा ले रहा था,,,,, सुषमा को डर था की कही कुर्सी टूट न जाए,,,, लेकिन मदहोशी में उसका यह डर गायब हो चुका था। सुमन के चेहरे पर चुदाई का सुख संतुष्टि एकदम साफ दिखाई दे रही थी वह अपनी मां की गोद में बैठी हुई थी उसकी मां की गांड सुषमा की मोटी मोटी जांघों पर टिकी हुई थी यह अलग ही उत्तेजना प्रदान कर रही थी।
कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद वह अपने दोनों बाजुओं को सुमन की दोनों टांगों के बीच डाल दिया और दम लगता हुआ उसे अपनी गोद में उठा दिया सुमन घबरा गई कि कहीं वह उसे गिरा ना दे इसलिए वह बोली।
मैं गिर जाऊंगी मुझे नीचे उतार,,,।
बिल्कुल भी नहीं मेरी रानी तुम्हें गोद में लेकर तुम्हारी चुदाई करूंगा,,,, (और इतना कहने के साथ ही सुषमा की आंखों के सामने वह उसकी बेटी को अपनी गोद में लेकर बड़े आराम से चोदना शुरू कर दिया उसकी हिम्मत देखकर सुषमा अंकित की मर्दानगी पर फिदा हो गई,,,,,, लेकिन इस बीच सुमन का बदन अकडने लगा,,, वह जानती थी कि उसका पानी निकलने वाला है फिर भी जानबूझकर बोली।)
ओहहहहह मुझे कुछ हो रहा है,,,, आहहहहह मैं पागल हुए जा रही हूं,,,, मुझे संभालो अंकित,,,,, ओहहहहह यह क्या हो रहा है मुझे,,,।
(अंकित तो जानता ही था कि उसका पानी निकलने वाला है वह झड़ने वाली है और सुषमा भी समझ गई थी कि उसकी बेटी झड़ने वाली है लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी अंकित जोर-जोर से धक्के लगाता हुआ बोला)
बस अब तुम मस्ती के सागर में डूबने वाली हो काश के मुझे पकड़ लो मेरी रानी,,, (अंकित की बात सुनकर सुमन ने बिल्कुल ऐसा ही की और उनकी जोर-जोर से धक्का लगता हुआ उसे चरम सुख के करीब ले गया और देखते ही देखते सुमन झड़ने लगी लेकिन अंकित बरकरार था वह लगातार सुमन की बुर में झटके पर झटका लगा रहा था,,,,, वह अंकित के गले लगा कर अपना मदन रस झाड़ रही थी और अंकित था कि इस अवस्था में भी उसकी चुदाई कर रहा था वह एकदम शांत हो चुकी थी अंकित समझ गया था कि सुमन का काम हो गया है इसलिए वह धीरे से अपनी गोद में से सुमन को नीचे उतारा और उसकी मां की तरफ आगे बढ़ गया,,, और सुषमा से बोला)
देख रही हो मेरी छम्मक छल्लो तुम्हारी बेटी का पानी निकल गया लेकिन अभी तक मुझे मजा नहीं आया असली मजा तुम्हारे साथ ही आएगा बस अब जल्दी से घोड़ी बन जाओ,,,,।
दूसरी तरफ पार्टी में भोजन का कार्यक्रम चल रहा था,,,, सुगंधा जहां बैठकर भोजन कर रही थी वहीं पास में मैडम का पति भी बैठकर भोजन कर रहा था सुगंध अपने आप को उसकी मौजूदगी में असहज महसूस कर रही थी,,, और जब से इस बात पर नूपुर ने अपनी प्रिंसिपल को गौर करने के लिए बोली थी तब से बिंदु की नजर अपने पति पर ही थी और बिंदु अपने पति के व्यवहार से काफी गुस्से में थी और सबसे ज्यादा गुस्सा उसे सुगंधा पर आ रहा था लेकिन वह ऐसे माहौल में ऐसे कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,, बिंदु का पति बार-बार सुगंधा को खाने के लिए पूछ रहा था कभी मिठाई तो कभी सब्जी तो कभी पूरी वह अपने हाथों से उसे परोश रहा था। दूर बैठी बिंदु अपने पति की हरकत को देख रही थी अगर माहौल का इलाज ना होता तो इसी समय वह सुगंधा को बेइज्जत करके अपने घर से निकाल दी होती,,,, क्योंकि बिंदु को ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंध उसके पति पर डोरे डाल रही थी लेकिन हकीकत कुछ हो ही था उसका पति उसे पर लट्टु हो चुका था,,,,।
दूसरी तरफ माहौल पूरी तरह से बन चुका था अंकित की बात मानते हुए सुषमा कुर्सी पर से उठी और कुर्सी का सहारा लेकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को अंकित की तरफ परोस कर घोड़ी बन गई,,, गहरी सांस लेते हुए सुमन अपनी मां की जवानी को देख रही थी,,, और उसे आज इस बात का एहसास हो रहा था कि कपड़े उतारने के बाद उसकी मां को वाकई में बहुत खूबसूरत लगती थी। घोड़ी बनी हुई सुषमा नजर पीछे घूमर अंकित को देख रही थी और अंकित सुमन की तरफ देखते हुए अपने लंबे को पिलाता हुआ उसकी मां की तरफ आगे बढ़ रहा था बेशर्मी भरी मुस्कान अपने होठों पर लाते हुए बोल भी रहा था।
देखो जान अब कैसे मैं तुम्हारी मां की चुदाई करता हूं तुम्हारी मां को ऐसा चोदूंगा कि तुम्हारी मां 2 दिन तक लंगडा कर चलेगी,,,,, आज देखना तुम्हारी मां की बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,, (अंकित की ऐसी बेशर्मी भरी बातें सुनकर सुमन शर्मा से पानी पानी हो गई और सुषमा भी शर्मा गई क्योंकि अगर अकेले अंकित यह सब बात करता तो कोई बात नहीं थी लेकिन वह उसकी बेटी की मौजूदगी में उसके लिए इतनी गंदी गंदी बात बोल रहा था लेकिन फिर भी वह अंकित की बात सुनकर मत हो गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दी ताकि उसका गुलाबी छेद अंकित को बराबर दिखाई दे सके,,,, अंकित की उत्तेजना चरम शिखर पर थी वह बड़ी-बड़ी गांड देखकर मदहोश हो गया और दो चार चपत सुमन की मां की गांड पर लगा दिया और उसकी गोरी गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया। और फिर अपने लंड को एक बार फिर से सुषमा की बुर में डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,,, अंकित के अद्भुत चुदाई से मस्त होकर सुषमा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी सुमन को डर था कि कहीं इस तरह की आवाज उसके पड़ोसी ना सुन ले इसलिए वह तुरंत अपनी मां के सामने आकर खड़ी हो गई अपनी टांगें खोलकर अपनी बुर को अपनी मां के होठों से सटा दी,,,, अपनी बेटी की हरकत से सुषमा मदहोश हो गई एकदम से चुदवाती होकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलने लगी और अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपनी बेटी की बुर की मलाई चाटने लगी,,,, अंकित बड़े जोर शोर से लगा हुआ था सुषमा की चुदाई करने में उसे बहुत मजा आया था,, वह धक्के लगाता हुआ बार-बार सुषमा की गांड पर चपत लगा दे रहा था जिससे सुषमा को दर्द तो होता था लेकिन मजा भी बहुत आता था। अंकित की किस्मत बड़ी तेज थी आज पहली बार वह दो औरतों की एक साथ चुदाई कर रहा था,,,, वैसे यह सुख उसे नैनीताल में मिल चुका था लेकिन वह अनजान थी जो उसकी मां के साथ चुदाई का सुख प्राप्त की थी लेकिन यह दोनों तो परिचित थे इसलिए एक अलग ही मजा अंकित को मिल रहा था।
हर धक्के के साथ सुषमा अपने आप को संभाल नहीं पाती थी और आगे की तरफ लुढ़क जा रही थी,,, वह तो गनीमत थी कि वह दोनों हाथ से अपनी बेटी को पकड़े हुए थे इसलिए वह समझ जा रही थी वरना अंकित का धक्का वह बर्दाश्त नहीं कर पाती देखते ही देखते सुषमा भी चरम सुख के करीब पहुंच चुकी थी और अंकित भी आप झड़ने वाला था इसलिए वह जोर-जोर से धक्का लगना शुरू कर दिया था और कुछ ही धक्को के बाद दोनों एक साथ झड़ने लगे और सुषमा भी पागलों की तरह अपनी बेटी की बुर को चाट कर उसे भी झड़ने पर मजबूर कर दी। सुषमा आज अंकित की मर्दानगी का लोहा मान चुकी थी वह समझ चुकी थी कि अंकित किसी और ही माटी का बना हुआ है वरना इतनी देर से उसका लंड खड़ा था लेकिन दोनों को संतुष्ट करने के बाद ही उसका पानी निकला था वरना दो चार धक्को में ही मर्द पानी पानी हो जाते हैं और औरत को बिल्कुल भी संतुष्टि नहीं मिलती। कुछ देर बाद तीनों अपने-अपने कपड़े पहन रहे थे तीनों के चेहरे पर संतुष्टि भरे भाव थे लगभग 12:30 का समय हो चुका था किसी भी समय उसकी मां आ सकती थी। कपड़े पहनते हुए अंकित सुषमा से बोला।
आज मेरा सपना पूरा हो गया जब से तुम्हें नंगी नहाते हुए देखा था तब से मैं तुम मां बेटी दोनों को एक साथ चोदने का सपना देखा था लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि मेरा सपना इतनी जल्दी पूरा हो जाएगा,,,, आज की रात में जिंदगी भर नहीं भूलूंगा,,,।
वह तो सब ठीक है लेकिन यह सब बात तो किसी को बताना नहीं,,, (सुषमा अपनी चड्डी पहनते हुए बोली,,)
पागल हो गई हो क्या भला मैं यह सब बात किसी को क्यों बताने लगा आखिरकार इसमें मेरी भी तो बदनामी है,,,,।
लेकिन अभी तो तो बोल रहा था कि मैं सबको बता दूंगा,,,।
वह तो मैं सिर्फ तुम्हें डरा रहा था ताकि तुम डर कर मेरी बात मान लो और ऐसा ही हुआ अगर तुम मुझे नहीं भी करने देती तो मैं यह सब बात किसी को बताता नहीं क्योंकि मेरी भी तो इज्जत है मेरी भी परिवार की इज्जत है,,,,।
ओहहहहह सच में तो बहुत बड़ा हारामी है,,,,, (अपनी पेटीकोट को ऊपर चढ़ा कर उसका नाडा बांधते हुए सुषमा बोली और दूर खड़ी अपनी सलवार पहनती हुई सुमन यह सब सुनकर मुस्कुरा रही थी,,,,, अपनी पेंट का बटन बंद करते हुए अंकित सुषमा से बोला)
लेकिन सच में आंटी जो मजा आज मुझे मिला है मैं जिंदगी भर नहीं बोलूंगा और मैं उम्मीद करता हूं कि आगे भी जब हमें मौका मिलेगा तो इसी तरह से छत पर आ जाएंगे,,,, हे ना,,,।
बदमाश,,,,, (इतना क्या कर रहा है सुषमा अपनी ब्रा पहनने लगी थोड़ी देर में तीनों अपने-अपने कपड़े पहन चुके थे और अंकित अब अपने घर के लिए जाने वाला था,,,, वह सुषमा और सुमन से बोला,,,)
मम्मी आने वाली होगी मुझे जाना होगा अगर वह आज की रात पार्टी में रुक जाती तो आज की रात सुबह तक मैं तुम दोनों को ऐसा मजा देता की तुम मां बेटी मस्त हो जाती,,,,,,, (यह सुनकर मां बेटी दोनों शर्मा गए और अंकित मुस्कुराता हुआ अपने घर चला गया घर पर पहुंचे उसे 15 मिनट ही हुआ था कि उसके घर के सामने एक कर आकर रुकी जिसकी आवाज से साफ सुनाई दी थी कल की आवाज सुनकर उसे न जाने क्यों लगा कि उसकी मां आई है और वह अपने कमरे से निकलकर दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया हालांकि अभी तक उसने दरवाजा खोला नहीं था और जैसे ही दरवाजे पर दस्तक हुई वह तुरंत दरवाजा खोला तो देखा उसकी मां खड़ी थी और सामने कर में एक शख्स उन दोनों की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था और हाथ हिलाता हुआ वहां से चला गया,,, यह देखकर अंकित बोला,,,)
यह कौन है मम्मी,,,,?
यह हमारी प्रिंसिपल के पति हैं खाना खाने के बाद में उनके घर से निकली हुई थी कि वह मुझे छोड़ने के लिए यहां तक आ गए,,,,
ऊमममम,,,, देखना संभालना कहीं ऐसा ना हो कि वह तुम्हारी लेने की चक्कर में हो,,,,,।
धत् बेशर्म कुछ भी कहता रहता है वह बहुत सीधे इंसान है,,,।
सीधे इंसान के मन में लेने की ज्यादा इच्छा होती है याद रखना,,,,,, ( ईतना कहते हुए अंकित दरवाजा बंद कर दिया,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मजा आया ना पार्टी में,,,।
बहुत लेकिन मैं थक गई हूं मुझे नींद आ रही है,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह सीधा अपने कमरे में चली गई,,,,, जो कुछ भी उसके बेटे ने कहा था सुगंधा सोचने पर मजबूर हो गई थी कि उसकी प्रिंसिपल के पति की नजर वाकई में गंदी थी कार में वैसे तो वह बैठना नहीं चाहती थी और उसके साथ आना नहीं चाहती थी लेकिन उसके आग्रह पर उसे बैठना ही पड़ा लेकिन वह कार के पीछे बैठना चाहती थी,,, लेकिन उसने आगे बैठने के लिए जीद कर लिया और कार चलते हुए बात-बात पर किसी बहाने से उसकी जान पर हाथ रख दे रहा था,,, यह सब सुगंधा अच्छी तरह से समझती थी लेकिन शर्म और झिझक के मारे वह कुछ बोल नहीं पाई और नहीं अपने बेटे को बता भाई वह सीधा अपने कमरे में जाकर बिना कपड़े बदले ही सो गई।)
यह क्या कर रहा है,,,?
क्या कर रहा हूं,,, अरे तुम्हें करना है,, मुझे बस मजा लेना है और तुम्हें भी बहुत मजा आएगा,,,।
लेकिन करना क्या है,,?( सुमन अंजान बनते हुए बोली,,, सुषमा अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित क्या करवाना चाहता है उसे लग रहा था कि उसकी बेटी को नहीं मालूम कि क्या किया जाता है उसे क्या खबर थी कि उसकी बेटी एक नंबर की छिनार बन चुकी थी उसे सब कुछ मालूम था कि कब क्या करना है और वास्तविकता यही थी कि जो कुछ भी अंकित सीखा था सर्वप्रथम सुमन ने ही उसे सिखाई थी। वह गहरी सांस लेते हुए अंकित की हरकत को देख रही थी क्योंकि अब इस खेल में सुमन शामिल थी सुषमा की नजर में सुमन बेहद मासूम लड़की थी और वह ऐसा कभी नहीं चाहती कि वह किसी लड़के के साथ इस तरह से संबंध बनाएं और वह भी उसकी आपके सामने लेकिन हालात पूरी तरह से बदल चुके थे हालात के हाथों वह मजबूर हो चुकी थी वह अपनी बेटी की चुदाई अपनी आंखों के सामने देखने के लिए लाचार हो चुकी थी वह कुछ कर नहीं सकती थी बस अपनी आंखों से देख सकती थी लेकिन इसमें भी उसका एक अलग ही मजा था भले ही यह एक मां के लिए बेहद शर्मनाक पल था लेकिन जिस तरह से सुषमा अंकित के साथ मजे लूट रही थी और उसकी बेटी ने अपनी आंखों से देख ली थी और जिस तरह से दोनों के बीच स्तन मर्दन और चुंबन हुआ था उसे देखते हुए सुषमा को अपनी बेटी की कामुक हरकत देखने में आनंद आने लगा था वह देखना चाहती थी कि उसकी बेटी अब क्या करती है इसलिए सुमन की बात सुनकर अंकित बोला,,,)
ज्यादा कुछ नहीं करना है बस इसे अपने मुंह में लेकर चूसना है,,,,।
इसे छी,,,, मुझसे नहीं होगा यह सब,,,।(सुमन जानबूझकर बुरा सा मुंह बनाते हुए बोली)
अरे तुम्हारे लिए नया-नया है ना इसलिए तुम्हें समझ में नहीं आ रहा है इसमें बहुत मजा आता है अपनी मां से पूछो तुम्हारी मां तो मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर ही नहीं निकालती क्यों आंटी बताओ सुमन को,,,,
(अब सुषमा क्या कहती वह तो शर्म से पानी पानी में जा रही थी क्योंकि बात ही बात में अंकित में सुमन को यह बता दिया था कि उसकी मां उसके लंड को मजे लेकर चुस्ती है सुषमा को लग रहा था कि यह बात सुमन नहीं जानती जबकि उसे सब कुछ मालूम था कि उसकी मां अंकित के साथ क्या-क्या कर चुकी है शर्म के मारे सुषमा कुछ बोल नहीं पाई वह खामोशी से कभी सुमन की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देख रही थी,,,, सुषमा की खामोशी को देखकर अंकित फिर से बोला,,,)
बताओ ना आंटी सुमन दीदी को तो कुछ मालूम ही नहीं है बस जवान हो गई है,,,,,।
(अंकित की बात सुनकर इस बार सुषमा चुप नहीं रह पाई और मजबूरन से बोलना पड़ा)
हां हां सुमन बेटी अंकित सही कह रहा है इसमें बहुत मजा आता है एक बार तुम करके देखो,,,,।
क्या कह रही हो मम्मी क्या तुम भी यह सब करचुकी हो,,,।
यह सब करना जरूरी होता है अगर मजा लेना है तो,,,, (सुमन की बात सुनकर अंकित बोल पड़ा और उसकी और में सुर मिलाते हुए सुषमा भी बोल पड़ी)
हां यह सब करना बहुत जरूरी होता है तभी असली मजा मिलता है,,,।
तुम्हें गंदा नहीं लगता मम्मी यह सब करने में,,
जब किए नहीं रहो तो गंदा लगता है,, लेकिन जैसे ही करने लगोगे तो तुम्हारे बदन में मदहोशी छाने लगेगी खुमारी छाने लगेगी और तुम्हें यह सब कुछ अच्छा लगने लगेगा। एक बार करके तो देखो,,,, ( बदनाम होने की दर से ना चाहते हुए भी सुषमा को यह सब कहना पड़ रहा था उसकी मजबूरी थी लेकिन इस मजबूरी में भी उसका एक अलग ही मजा था भले ही या बेहद शर्मसार कर देने वाली स्थिति थी लेकिन फिर भी सुषमा अपनी आंखों से अपनी बेटी को एक जवान लड़के के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने में कैसा लगता है वह अपनी आंखों से देखना चाहती थी। सुमन को तो मालूम नहीं था कि इस खेल में कितना मजा आता है बस बस सिर्फ अपनी मां के सामने नाटक कर रही थी इसलिए मैं अपनी मां की तरफ से हरी झंडी का इशारा बातें ही वह धीरे से अपने प्यासे होठों को अंकित के लंड की तरफ आगे बढ़ाने लगी और जैसे ही लंड के सुपारी को अपने मुंह के अंदर भरी जानबूझकर वह बुरा सा मुंह बनाने लगी, ताकि उसकी मां को सपना होगी वह पहले भी ऐसा सुख भोग चुकी है,,,,, सुमन की सांसों पर नीचे हो रही थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां खड़ी थी और अपनी मां के सामने इस तरह की शर्मनाकहरकत करने में उसे भी शर्म महसूस हो रही थी लेकिन बेशर्म बनने में जो मजा है उसे इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि इस समय अपनी मां की मौजूदगी में इस तरह की हरकत करने में उसके तन बदन में कैसी हलचल हो रही है। लेकिन फिर भी जानबूझकर बुरा सा मुंह बनाते हुए वह सुपाड़े को अपने मुंह से बाहर निकाल दी और बोली,,,)
बड़ा अजीब लग रहा है,,,,।
(यह देखते ही अंकित से रहा नहीं किया और वह अपने लंड को हाथ से पकड़ कर जबरदस्ती अपने लंड को उसके लाल-लाल होठों के बीच डालने लगा और बोला,,,)
, पहले कुछ देर अपने मुंह के अंदर लेकर चूसो तो सही अपने आप मजा आने लगेगा,,,,,,।
(अंकित पूरी तरह से बेशर्म बन चुका था अपनी मां की उम्र की औरत के सामने वह उसकी ही बेटी के साथ मजे लेने पर उतारू हो चुका था,,,, यह सब देखकर सुषमा का बदन उत्तेजना से गनगना जा रहा था,,,, थोड़ी ही देर में सुमन एक मंजी हुई खिलाड़ी की तरह अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी सुमन की हरकत पर अंकित के मुंह से गरमा गरम सिलकारी की आवाज फूट रही थी वह अपनी आंखों को बंद करके अपनी कमर को हौले हौले से आगे पीछे करके हिलाते हुए मदहोश हुआ जा रहा था।
सहहहहह आहहहहहह,,,,, ऊमममममम,,,,, बहुत मजा आ रहा है सुमन दीदी तुम तो कमाल कर रही हो बिल्कुल अपनी मां की तरह तुम्हारी मां भी इसी तरह से मजा लेती है और मुझे पागल बना देती है,,,,, ऊमममममम इसी तरह से,, उफफफ,,,,,,,, (ऐसा कहते हुए वह धीरे से अपनी आंख खोल और सुषमा की तरफ देखा तो सुषमा की हालत खराब हो जा रही थी वह अपने हाथों से ही अपनी चूची को दबा रही थी शायद अपनी बेटी को अपनी आंखों के सामने इस तरह की हरकत करते हुए देखकर वह मदहोश में जा रही थी यह देखकर अंकित उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों को अपने होठों में भरकर उसका रस चूसना शुरू कर दिया और अपना एक हाथ उसकी बुर पर रखकर उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों को मसलना शुरू कर दिया,,,, अंकित की हरकत से सुमन की मां एक बार फिर से चुदवासी होने लगी थी,, अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसते हुए सुमन अपनी मां की मदहोशी देख रही थी और एक हाथ उठाकर अपनी मां की गांड पर रखकर उसे सहला रही थी मसाला रही थी और उस पर चपत लग रही थी,,, अपनी बेटी के हथेलियों का स्पर्श पाकर सुषमा की हालत खराब होने लगी थी उसका चेहरा फिर से उत्तेजना से टमाटर की तरह लाल होने लगा था अंकित उसके होठों का रसपान करते हुए लगातार अपनी हथेली से उसकी बुर को रगड़कर गर्म कर रहा था,,,,, कुछ देर तक किसी तरह से मजा लेने के बाद वह सुमन का हाथ पकड़ कर उसकी मां की बुर पर उसकी हथेली रख दिया और सुमन भी अपनी मां की गुलाबी बुर को सहलाना शुरू कर दी,,,, अपनी बेटी की हथेली का स्पर्श सुषमा को पागल बना रहा था वह मैं दोष में जा रही थी वह कभी सोची भी नहीं थी कि एक दिन ऐसा आएगा कि उसकी बेटी उसकी बुर को सहलाएगी दबाएगी मसलेगी मुझे सब कुछ बड़ा अजीब था लेकिन बेहद आनंददायक था जिसमें सुषमा पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थी छत पर पूरी तरह से कामुकता भरा व्यभिचार चल रहा था सुषमा और अंकित दोनों पूरी तरह से नग्न अवस्था में थे लेकिन सुमन के बदन पर अभी भी वस्त्र थे अंकित ने अभी उसके वस्त्र को उतारा नहीं था,,,,, छत पर अंधेरा होने की वजह से किसी के देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था। आज सुमन का जन्मदिन था और जन्मदिन पर उसे एक अद्भुत तोहफा मिल रहा था जिसे वह जिंदगी भर भुलने वाली नहीं थी,,,
देखते ही देखते सुमन लपालप अंकित के लंड को अपने मुंह में लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,, सुमन अंकित के लंड को जड़ तक मुंह में लेकर चूस रही थी ऐसा करने में लंड उसके गले के नीचे तक उतर जा रहा था जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी लेकिन वह अपने आनंद में कोई कमी बाकी रखना नहीं चाहती थी इसलिए बड़े चाव से वह इस तरह की हरकत कर रही थी। वह मजे ले लेकर चूस रही थी और अंकित मदहोश होकर चुसवा रहा था। आज उसके सामने एक अलग ही लक्ष्य था दो औरतों को संतुष्ट करने का लक्ष्य ,आज उसे अपनी मर्दानगी साबित करना था और मां बेटी दोनों की नजर में हीरो बन जाना था कहीं तक सुमन और सुषमा के मन में यही प्रश्न उठ रहा था कि क्या हुआ दोनों को संतुष्ट कर पाएगा इस प्रश्न के बावजूद भी दोनों इस खेल का भरपूर मजा ले रहे थे और एक बार सुषमा तो झाड़ भी चुकी थी जबकि उसकी बुर में लंड घुस के बाहर आ चुका था लेकिन वह लंड की चुदाई से नहीं बल्कि अंकित की चटाई से झड़ी थी,,,,।
कुछ देर तक सुमन लंड चूस कर भरपूर मजा लुटती रही,,,, खेल को आगे बढ़ाना जरूरी था इसलिए अंकित धीरे से अपने लंड को सुमन के मुंह से बाहर खींच लिया और बिल्कुल भी देर ना करते हुए फिर से वह अपनी हथेली को सुमन के सर के पीछे रख दिया और दबाव बनाता हुआ उसे उसकी मां की टांगों के बीच ले जाने लगा सुमन समझ गई की अंकित क्या करना चाहता है और इस बात का एहसास सुषमा को होते ही उसका बदन उत्तेजना से सिहर उठा,, उसकी सांसों की गति के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे होने लगी,,, जैसे ही अंकित ने सुमन के लाल-लाल होठों को उसकी मां की बुर के एकदम करीब लाया सुमन अपनी नजर उठाकर अंकीत की तरफ और अपनी मां की तरफ देखने लगी,,,, वह कुछ बोल पाती इससे पहले ही सुषमा मदहोश होकर खुद ही अपनी बर को आगे की तरफ करके उसके होठों से सटा दी,,, यह बेहद उत्तेजित और उत्साहित कर देने वाला पल था जब एक मां खुद ही अपनी बेटी के होठों पर अपनी बुर सटा रही थी,,, अपनी मां के छीनरपन को देखकर सुमन पानी पानी हो गई और वह अपने होठों को एकदम से खोलकर अपनी मां की भरी हुई जवान के केंद्र बिंदु पर लथेडने लगी इस बार सुमन ने यह नहीं कहीं की यह सब उसे नहीं मालूम या उसे पता नहीं है वह मदहोश हो चुकी थी अपनी मां के रंडी पन को देखकर,,, सुमन के लिए पहला मौका था जब वह किसी औरत की बुर को अपने होठों से चैट रही थी अब तक वह खुद अपनी बुर को मर्दों से चटवाती आ रही थी लेकिन आज उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में बुर चाटने में कितना मजा आता है तभी तो मर्द चोदने से पहले टांगे फैलाकर औरत की बुर जी भर कर चाटते हैं,,, आज पहली बार से औरत की बुर से उठने वाली मादक खुशबू का एहसास हो रहा था जो कि उसे पागल बना रहा था वह पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रही थी।
माहौल पूरी तरह से मदहोशी से भरा हुआ था सुमन का जन्मदिन उसकी जिंदगी का यादगार जन्मदिन बन चुका था अंकित अभी भी सुमन के सर के पीछे अपनी हथेली रखा हुआ था और एक हाथ सुमन की मां की चूची पर रखकर उसे दबा रहा था,,, सुषमा अपनी बेटी की हरकत से चारों खाने चित हो चुकी थी मां बेटी दोनों पहली बार औरत के एहसास का मजा ले रहे थे। कुछ देर बाद अंकित सुषमा के पीछे आगे और उसके बदन से एकदम से सट गया,,, सुषमा अपनी मोटी मोटी जांघों को अपनी बेटी के कंधों पर रखकर उसे जी भर कर अपनी जवानी का रस चटा रही थी,,, इस दौरान सुषमा की दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए अंकित सुषमा की दोनों टांगों के पीछे से अपने मोटे से बड़े लंड को सुमन की तरफ करके सुषमा की पर की गर्माहट को महसूस कर रहा था अपनी मां की बुर को चाटते हुए अंकित के लंड को देखकर उसके सुपाड़े की झलक पाकर,,, सुमन से रहा नहीं क्या और अपनी मां की बुर से अपने होंठ को हटाकर और फिर से अंकित के लंड को मुंह में भर ली और चूसना शुरू कर दी, अब वह बड़ी-बड़ी से अपनी मां की बुर चाट रही थी और अंकित के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी वह दोनों को मजा दे रही थी और अंकित मदहोश हुआ जा रहा था चुदवासा हुआ जा रहा था,, देखते ही देखते हो सुषमा की बुर के अंदर अपनी तो उंगलियां डालकर अंदर बाहर करने लगा,,, अब सुषमा को दोहरा आनंद मिल रहा था एक तरफ उसकी बेटी थी जो उसकी बुर को चाट रही थी और दूसरी तरफ अंकित उसकी चूचियों को दबाता हुआ अपनी दो उंगली को उसकी बुर में पेल रहा था,,, इस दोहरे हमले को सुषमा ज्यादा देर तक झेल नहीं पाई और एक बार फिर से भरभरा कर झड़ने लगी।
सुमन की मां दो बार अपना पानी निकाल चुकी थी,,, ऐसा शायद ही हो कि वह अपनी जवानी के दिनों में ही इस तरह से कम समय के अंतराल में दो बार झड़ी हो,,, और यह संभव है कि दो बार चुदाई से ही झड़ी होगी,,, लेकिन पहली बार वह सिर्फ बुर चटाई से वह अपना पानी निकाल चुकी थी। समय का अभाव बराबर बना हुआ था क्योंकि अब थोड़ा समय ज्यादा बिक रहा था और जैसे-जैसे समय बीत रहा था वैसे-वैसे अंकित परेशान भी हो रहा था कि कहीं उसकी मां आ जाए क्योंकि ऐसे समय पर अगर उसकी मां वापस आ जाती है तो उसके किए किराए पर पानी फिर जाएगा फिर ऐसा माहौल बनने में समय लग जाएगा सब कुछ निपटा देना चाहता था इसीलिए वह सुमन को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर खड़ी किया और अपने हाथों से उसका कुर्ता पकडकर ऊपर की तरफ उठाने लगा उसका साथ देते हुए, सुमन भी अपने दोनों हाथों पर की तरफ करके अपनी कुर्ती उतरवाने में मदद करने लगी,,, देखते ही देखते अंकित सुमन की कुर्ती उतर चुका था कुर्ती के अंदर उसकी क्रीम कलर की ब्रा उसकी दोनों चूचियों को जकड़े हुए थी,,,, सुषमा अपनी सांसों को दुरुस्त करते हुए पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गई थी,,,, और अपनी बेटी को अंकित के हाथों मदहोश होते हुए देख रही थी क्रीम कलर की ब्रा में जकड़ी हुई चूचियों को देखकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,।
कुछ भी कहो मां बेटी दोनों के पास कीमती खजाना है एक के पास खरबूजा तो दूसरे के पास संतरा है,,,, (और इतना कहने के साथ ही वह सुमन को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके दोनों च को दबाना शुरू कर दिया सुमन अपनी मां की आंखों के सामने अंकित से मजा लेने लगी थी उसके बदन में उत्तेजना का सागर उठ रहा था वह गहरी गहरी सांस लेते हुए अंकित के द्वारा स्तन मर्दन का आनंद ले रही थी अंकित का लंड अपनी औकात में खड़ा था जो सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था जिससे सुमन का बदन कसमसा रहा था,,, अंकित ने सुमन से ज्यादा उसकी मां की चुदाई कर चुका था। सुषमा कुर्सी पर बैठे-बैठे दोनों की कम लीला को देख रही थी उसे साथ दिखाई दे रहा था कि अंकित क्या कर रहा था उसकी जवान लड़की की चुचियों को मसल रहा था और सुषमा को यह भी दिखाई दे रहा था कि उसका मोटा सा बड़ा लंड उसकी बेटी के सलवार के अंदर धंशा हुआ था,,, लेकिन इस नजारे को देखकर सुषमा को गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि उसके बदन में सुरसुराहट छा रही थी मदहोशी का नशा छा रहा था अगर वह खुद अपनी बेटी के हाथों रंगरेलियां मनाते हुए पकड़ी ना गई होती तो शायद अपनी आंखों से इस तरह से देखकर वह अपनी बेटी और अंकित दोनों को करने के लिए उन दोनों पैर टूट पड़ी होती लेकिन किस्मत को कुछ ओर ही मंजूर था,,,, देखते ही देखते अंकित अपने हाथों से सुमन की ब्रा खोलने लगा और अगले ही पल वह ब्रा उतार कर उसकी नंगी चूची को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया अंकित को बहुत मजा आ रहा था वह सुषमा की तरफ देखकर बोला।
देख रही हो आंटी तुम रहती हो कि तुम्हारी बेटी नादान है लेकिन देखो तुम्हारी बेटी की चुची मर्दों को पागल बनाने के लिए तैयार हो गई है अब देखना मैं कैसे दबा दबा कर तुम्हारे जैसा खरबूजा बना दूंगा,,,, ऊमममममम,,,,,, (ऐसा कहते हुए वहां चूचियों को दबाते हुए सुमन के गर्दन पर चुंबन करने लगा कुछ देर तक अंकित इसी तरह से सुमन की चूची से खेलता रहा और सुमन आनंदमय होकर अपनी आंखों को बंद करके अद्भुत काम क्रीड़ा का मजा लेने लगी। और फिर देखते ही देखते च को एक हाथ से दबाते हुए दूसरे हाथ से सुमन की सलवार खोलने लगा यह देखकर सुमन का दिल जोरो से धड़कने लगा और सुषमा भी अपनी दोनों टांगों को खोलकर खुद ही अपनी बुर को सहलाने लगी क्योंकि वह जानती थी कि अंकित उसकी बेटी को नंगी करने वाला है। इस बीच लगा था और उसका मोटा तगड़ा मूसल उसकी बेटी की सलवार में घुसने की कोशिश कर रहा था। सुषमा ने जिस तरह से अपनी बेटी के सामने बेटी को उतारने में शर्मिंदगी का एहसास लिए हुए अपने हाथ से पेटीकोट को पकड़ ली थी सुमन ने ऐसा कुछ भी नहीं कि वह तो उतावली हो रही थी नंगी होने के लिए और अंकित की बिल्कुल देर नहीं किया वह सलवार का नाड़ा खोलकर अपने हाथों से उसे नीचे की तरफ आने लगा और जैसे ही सलवार उसके कदमों में पहुंची सुमन खुद अपने पैरों का सहारा लेकर सलवार को अपने पैर से बाहर निकाल दी और मरुन रंग की चड्डी में अपनी जवानी का प्रदर्शन करने लगी,,,, अंकित कुछ देर तक उसे इसी अवस्था में अपनी बाहों में लेकर उससे प्यार करता रहा उसके बदन पर अपनी हथेलियां घूमाता रहा,,, और फिर उसे सुषमा के पास लेकर आया,,, सुमन को अपनी मां के कंधों का सहारा लेकर उसे खड़ी कर दिया सुमन और उसकी मां का चेहरा आमने-सामने था सुमन से रहा नहीं गया और सुमन अपने होठों को अपनी मां के होठों से सटा दी दोनों के बीच गहरा चुंबन का आदान-प्रदान शुरू हो गया और अंकित घुटनों के बल बैठकर सुमन की चड्डी उतारने लगा सुमन भी अपनी गांड को हवा में उठाए हुए थे जिससे उसकी खूबसूरत गांव लाजवाब लग रही थी जैसे ही अंकित ने सुमन के बदन से उसकी चड्डी को उतार कर उसे नंगी किया अंकित बिल्कुल भी तेज नहीं किया उसकी खूबसूरत गांड की बीच की गहरी दरार में अपनी नाक ले जाने में,,,,।
अंकित की गांड की दरार के बीचो-बीच अपना मुंह ले जा करके उससे उठ रही मादक खुशबू को अपने सीने में उतारने लगा,,,,, अंकित की हरकत से सुमन का भजन कम आने लगा और इस दौरान अपनी मां के होठों का रसपान करते हुए अपना एक हाथ अपनी मां की चूची पर रख दी और उसे दबाने लगी यही क्रिया सुषमा भी अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर अपनी बेटी के संतरों को थाम ली और उससे खेलने लगी। सुमन अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठाकर अपने दोनों टांगों को खोल दी ताकि अंकित के होंठ और उसकी जीत उसके गुलाबी छेद तक आराम से पहुंच सके, और ऐसा ही हुआ अंकित कीजिए बढ़िया आराम से सुमन की गुलाबी छेद तक पहुंच गए और अंकित अपनी जीभ बाहर निकाल कर सुमन की पनियाई बर को चाटने लगा,,,, सुमन की हालत खराब होने लगी,,, अंकित पागलों की तरह सुमन की बुर को चाट रहा था चांदनी रात में सुषमा के घर की छत मदहोशी का आशियाना बन चुका था वह कभी सोच भी नहीं थी कि वह इस तरह से अपनी जवानी और अपनी बेटी की जवानी के साथ मिलकर एक जवान लड़के के साथ छत पर गुलछर्रे उडाएगी,,, और सही मायने में देखा जाए तो जिस खूबसूरत घटना की आशंका मन में नहीं होती और वहीं घटना घट जाए तो वह जीवन को आनंदित बना देती है और ऐसा ही तीनों के साथ हो रहा था,,,, मां बेटी दोनों के चुंबन के बीच सुमन के मुंह से हल्की-हल्की शिसकारी की आवाज निकल रही थी वह अपनी जवानी की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लगातार उसकी बुर से मदन रस की बारिश हो रही थी,,,, अंकित समझ गया था कि अब उसे क्या करना है क्योंकि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका था हथौड़ा मारने की देरी थी,,,,, इसलिए अंकित धीरे से अपनी जगह पर उठकर खड़ा हो गया,,, सुमन की दोनों टांगों के बीच खड़ा था सुमन अपनी मां के ऊपर झुकी हुई थी,,,, अंकित को खड़ा देखकर सुषमा समझ गई कि अब वह क्या करने वाला है इसलिए वह चुंबन को कुछ देर के लिए तोड़कर वह गहरी सांस लेते हुए अंकित से बोली।
थोड़ा आराम से अभी नाजुक है,,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो आंटी तुम्हारी बेटी मेरी जान है और मैं अपनी जान को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा देखने में कितनी आराम से अपने लंड को तुम्हारी बेटी की बुर में डालता हूं,,,,, इतनी आराम से डालूंगा कि तुम्हारी बेटी के चेहरे पर दर्द की सिकन दिखाई नहीं देगी वह मजे लेकर चुदवाएगी,,,,, (सुषमा को लग रहा था कि आज पहली बार उसकी बेटी के बुर में लंड जाने वाला है लेकिन वह नहीं जानती थी कि अब तक न जाने कितने मर्दों को वह अपने ऊपर ले चुकी थी,,,, और अंकित जानता था कि सुमन की बुर में उसके लंड का सांचा बन चुका है और बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई में घुस जाएगा वह तो जानबूझकर सुषमा को दिलासा देने के लिए बोल रहा था,,,,, सुमन हालत को अच्छी तरह से समझती थी इसलिए बिना कुछ बोले फिर से अपनी मां के लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चुसना शुरू कर दी ,,, इस बीच सुषमा अपनी दोनों टांगों को खोली हुई थी। और सुमन अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बुर पर अपनी हथेली रखकर उसे मसाला रही थी जिससे उसकी मां को बहुत मजा आ रहा था। अंकित पूरी तरह से तैयार था सुमन की बुर में लंड डालने के लिए और उससे अब रहा भी नहीं जा रहा था क्योंकि काफी देर से अपना लंड खड़ा किए दो-दो औरतों के बीच सिर्फ मजे ले रहा था। सुमन के आने से पहले वह सुमन की मां की चुदाई कर रहा था लेकिन बिन झड़े ही सुमन क्या जाने की वजह से उसे अपना लंड सुषमा की बुर से बाहर निकालना पड़ा तब से उसका लंड खड़ा का खड़ा ही था। सुमन का बदन कसमसा रहा था,, क्योंकि वह जानती थी कि अब क्या होने वाला है उसे एहसास था कि कुछ ही देर में अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुसने वाला है और वह भी उसकी मां की आंखों के सामने यह एक रोमांच कारी पल था जिसके लिए वह बेहद उत्सुक और उत्साहित थी,,,
आखिरकार वह पल आ ही गया, अंकित उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे कुछ देर चलता रहा और फिर ढेर सारा दुख अपने लंड के सुपारी पर लगाकर अपनी हथेली से सुमन की बुर को हल्का सा खोलने की कोशिश करने लगा,,, वैसे तो अंकित को सुमन की बुर को अपनी उंगली से खोलने का कोई इरादा नहीं था क्योंकि यह काम उसका लंड बड़े अच्छे से कर सकता था लेकिन सिर्फ बुर का सुराख देखने के लिए हुआ ऐसा कर रहा था और जैसे ही अंकित की आंखों के सामने सुमन की गुलाबी छेद नजर आई वैसे ही वह अपने मोटे सुपाड़े को उस पर सटा दिया और धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में डाल दिया,,,, अपनी मां के सामने सुमन जानबूझकर दर्द होने का नाटक कर रही थी और उसके इस नाटक की वजह से सुषमा परेशान थी कि कहीं उसकी बुर फट न जाए,,,,, लेकिन जब अंकित ने अपना पूरा लंड उसकी बुर में डालकर कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर मुस्कुराकर सुषमा की तरफ देखा और बोला।
देख ली आंटी बिल्कुल भी दर्द नहीं हुआ,,,।
(इतना सुनकर सुषमा को राहत महसूस होने लगी और फिर अंकित अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया सुमन की चुदाई उसकी मां की आंखों के सामने करने लगा,,, सुमन आनंदित हो उठी अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की लड़ाई नाप रहा था और अंकित उसकी कमरधा में अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया था,,,, मां बेटी दोनों को एक दूसरे से मजा लेटा हुआ देखकर अंकित का वासना से भरा हुआ दिमाग बड़ी तेजी से कम कर रहा था। वह सुमन की कमर पकड़े हुए ही उसे थोड़ा पीछे की तरफ ले आया,,,, और फिर अपना हाथ आगे बढ़कर एक बार फिर से सुमन के सर पर हाथ रखकर उसका सर नीचे की तरफ झुकने लगा सुषमा की दोनों टांगों के बीच अब किसी को समझ में समझाने का जरूरत नहीं था सुमन समझ गई कि उसे क्या करना है और सुषमा भी समझ गई कि अंकित क्या करवाना चाह रहा है। सुमन की बुर में लंड घुसा हुआ था एक अलग ही उत्तेजना उसके दिलों दिमाग पर छाई हुई थी इसलिए अपनी आंखों के सामने अपनी मां की गुलाबी बर देखकर उसे रानी की और वह पागलों की तरह अपनी मां की बुर पर टूट पड़ी और उसे चाटना शुरू कर दी,,,,, सुमन की मन मस्त हो गई मदहोश हो गई अपनी आंखों को बंद करके कुर्सी पर दोनों हाथ रखे अपनी टांगे फैलाए मजा लेने लगी,,,, और अंकित धक्के पर धक्का लगना शुरू कर दिया,,, सुषमा अपने मन में यही सोच रही थी कि जितना सीधा हुआ अंकित को समझ रही थी वह इतना सीधा बिल्कुल भी नहीं है वह बहुत हारामी लड़का है आज उसे एहसास हो गया था बस सीधा होने का नाटक ही करता है,,,
सुषमा और अंकित दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे अंकित अपने मन में ही सोच रहा था कि यही नजारा कुछ दिनों बाद उसके घर में भी होने वाला है जब वह अपनी मां की चुदाई करते हुए अपनी बहन की बुर चाटेगा या फिर बिल्कुल इसी तरह से वह अपनी बहन की बुर में लंड डालेगा और उसकी बहन उसकी मां की बुर चाटेगी,,, यह सब सोच कर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी और वह जोर-जोर से धक्के लगाने लगा,,,,, सुमन की बुर से फच्च फच्च की आवाज आ रही थी जो की पूरी छत पर गूंज रही थी,,। मां बेटी दोनों मजा लूट रही थी अंकित के दोनों हाथों में रसगुल्ला था। अंकित का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से सुमन की बुर की गहराई नापता हुआ मजा दे रहा था। अंकित अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर सुमन की चूची को पकड़ कर दबाते हुए मजा ले रहा था उसकी कमर लगातार एक ही लय में आगे पीछे हो रही थी,,, कुछ देर तक किसी तरह से चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को सुमन की बुर से बाहर निकाला और फिर सुमन को सुषमा की गोद में बैठा दिया और उसकी टांगों को खोल दिया,,,,, सुषमा की हालत खराब हो जा रही थी वह उत्तेजना में चूर हो चुकी थी अपनी आंखों के सामने अपनी बेटी की चुदाई होता देखकर वह खुद लंड के लिए तड़प रही थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित जानबूझकर उसे तड़पा रहा था। बेटी को उसकी मां की गोद में बैठकर उसकी दोनों टांगों को खोलकर अंकित इस अवस्था में उसकी बुर में लंड डाली और उसे चोदना शुरू कर दिया और ऐसी अवस्था में वह उसकी मां के फोटो का रसपान करता हुआ खुद सुमन की चूची को दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रहा था एक साथ मां बेटी दोनों के साथ मजा ले रहा था,,,,, सुषमा को डर था की कही कुर्सी टूट न जाए,,,, लेकिन मदहोशी में उसका यह डर गायब हो चुका था। सुमन के चेहरे पर चुदाई का सुख संतुष्टि एकदम साफ दिखाई दे रही थी वह अपनी मां की गोद में बैठी हुई थी उसकी मां की गांड सुषमा की मोटी मोटी जांघों पर टिकी हुई थी यह अलग ही उत्तेजना प्रदान कर रही थी।
कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद वह अपने दोनों बाजुओं को सुमन की दोनों टांगों के बीच डाल दिया और दम लगता हुआ उसे अपनी गोद में उठा दिया सुमन घबरा गई कि कहीं वह उसे गिरा ना दे इसलिए वह बोली।
मैं गिर जाऊंगी मुझे नीचे उतार,,,।
बिल्कुल भी नहीं मेरी रानी तुम्हें गोद में लेकर तुम्हारी चुदाई करूंगा,,,, (और इतना कहने के साथ ही सुषमा की आंखों के सामने वह उसकी बेटी को अपनी गोद में लेकर बड़े आराम से चोदना शुरू कर दिया उसकी हिम्मत देखकर सुषमा अंकित की मर्दानगी पर फिदा हो गई,,,,,, लेकिन इस बीच सुमन का बदन अकडने लगा,,, वह जानती थी कि उसका पानी निकलने वाला है फिर भी जानबूझकर बोली।)
ओहहहहह मुझे कुछ हो रहा है,,,, आहहहहह मैं पागल हुए जा रही हूं,,,, मुझे संभालो अंकित,,,,, ओहहहहह यह क्या हो रहा है मुझे,,,।
(अंकित तो जानता ही था कि उसका पानी निकलने वाला है वह झड़ने वाली है और सुषमा भी समझ गई थी कि उसकी बेटी झड़ने वाली है लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी अंकित जोर-जोर से धक्के लगाता हुआ बोला)
बस अब तुम मस्ती के सागर में डूबने वाली हो काश के मुझे पकड़ लो मेरी रानी,,, (अंकित की बात सुनकर सुमन ने बिल्कुल ऐसा ही की और उनकी जोर-जोर से धक्का लगता हुआ उसे चरम सुख के करीब ले गया और देखते ही देखते सुमन झड़ने लगी लेकिन अंकित बरकरार था वह लगातार सुमन की बुर में झटके पर झटका लगा रहा था,,,,, वह अंकित के गले लगा कर अपना मदन रस झाड़ रही थी और अंकित था कि इस अवस्था में भी उसकी चुदाई कर रहा था वह एकदम शांत हो चुकी थी अंकित समझ गया था कि सुमन का काम हो गया है इसलिए वह धीरे से अपनी गोद में से सुमन को नीचे उतारा और उसकी मां की तरफ आगे बढ़ गया,,, और सुषमा से बोला)
देख रही हो मेरी छम्मक छल्लो तुम्हारी बेटी का पानी निकल गया लेकिन अभी तक मुझे मजा नहीं आया असली मजा तुम्हारे साथ ही आएगा बस अब जल्दी से घोड़ी बन जाओ,,,,।
दूसरी तरफ पार्टी में भोजन का कार्यक्रम चल रहा था,,,, सुगंधा जहां बैठकर भोजन कर रही थी वहीं पास में मैडम का पति भी बैठकर भोजन कर रहा था सुगंध अपने आप को उसकी मौजूदगी में असहज महसूस कर रही थी,,, और जब से इस बात पर नूपुर ने अपनी प्रिंसिपल को गौर करने के लिए बोली थी तब से बिंदु की नजर अपने पति पर ही थी और बिंदु अपने पति के व्यवहार से काफी गुस्से में थी और सबसे ज्यादा गुस्सा उसे सुगंधा पर आ रहा था लेकिन वह ऐसे माहौल में ऐसे कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,, बिंदु का पति बार-बार सुगंधा को खाने के लिए पूछ रहा था कभी मिठाई तो कभी सब्जी तो कभी पूरी वह अपने हाथों से उसे परोश रहा था। दूर बैठी बिंदु अपने पति की हरकत को देख रही थी अगर माहौल का इलाज ना होता तो इसी समय वह सुगंधा को बेइज्जत करके अपने घर से निकाल दी होती,,,, क्योंकि बिंदु को ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंध उसके पति पर डोरे डाल रही थी लेकिन हकीकत कुछ हो ही था उसका पति उसे पर लट्टु हो चुका था,,,,।
दूसरी तरफ माहौल पूरी तरह से बन चुका था अंकित की बात मानते हुए सुषमा कुर्सी पर से उठी और कुर्सी का सहारा लेकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को अंकित की तरफ परोस कर घोड़ी बन गई,,, गहरी सांस लेते हुए सुमन अपनी मां की जवानी को देख रही थी,,, और उसे आज इस बात का एहसास हो रहा था कि कपड़े उतारने के बाद उसकी मां को वाकई में बहुत खूबसूरत लगती थी। घोड़ी बनी हुई सुषमा नजर पीछे घूमर अंकित को देख रही थी और अंकित सुमन की तरफ देखते हुए अपने लंबे को पिलाता हुआ उसकी मां की तरफ आगे बढ़ रहा था बेशर्मी भरी मुस्कान अपने होठों पर लाते हुए बोल भी रहा था।
देखो जान अब कैसे मैं तुम्हारी मां की चुदाई करता हूं तुम्हारी मां को ऐसा चोदूंगा कि तुम्हारी मां 2 दिन तक लंगडा कर चलेगी,,,,, आज देखना तुम्हारी मां की बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,, (अंकित की ऐसी बेशर्मी भरी बातें सुनकर सुमन शर्मा से पानी पानी हो गई और सुषमा भी शर्मा गई क्योंकि अगर अकेले अंकित यह सब बात करता तो कोई बात नहीं थी लेकिन वह उसकी बेटी की मौजूदगी में उसके लिए इतनी गंदी गंदी बात बोल रहा था लेकिन फिर भी वह अंकित की बात सुनकर मत हो गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दी ताकि उसका गुलाबी छेद अंकित को बराबर दिखाई दे सके,,,, अंकित की उत्तेजना चरम शिखर पर थी वह बड़ी-बड़ी गांड देखकर मदहोश हो गया और दो चार चपत सुमन की मां की गांड पर लगा दिया और उसकी गोरी गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया। और फिर अपने लंड को एक बार फिर से सुषमा की बुर में डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,,, अंकित के अद्भुत चुदाई से मस्त होकर सुषमा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी सुमन को डर था कि कहीं इस तरह की आवाज उसके पड़ोसी ना सुन ले इसलिए वह तुरंत अपनी मां के सामने आकर खड़ी हो गई अपनी टांगें खोलकर अपनी बुर को अपनी मां के होठों से सटा दी,,,, अपनी बेटी की हरकत से सुषमा मदहोश हो गई एकदम से चुदवाती होकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलने लगी और अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपनी बेटी की बुर की मलाई चाटने लगी,,,, अंकित बड़े जोर शोर से लगा हुआ था सुषमा की चुदाई करने में उसे बहुत मजा आया था,, वह धक्के लगाता हुआ बार-बार सुषमा की गांड पर चपत लगा दे रहा था जिससे सुषमा को दर्द तो होता था लेकिन मजा भी बहुत आता था। अंकित की किस्मत बड़ी तेज थी आज पहली बार वह दो औरतों की एक साथ चुदाई कर रहा था,,,, वैसे यह सुख उसे नैनीताल में मिल चुका था लेकिन वह अनजान थी जो उसकी मां के साथ चुदाई का सुख प्राप्त की थी लेकिन यह दोनों तो परिचित थे इसलिए एक अलग ही मजा अंकित को मिल रहा था।
हर धक्के के साथ सुषमा अपने आप को संभाल नहीं पाती थी और आगे की तरफ लुढ़क जा रही थी,,, वह तो गनीमत थी कि वह दोनों हाथ से अपनी बेटी को पकड़े हुए थे इसलिए वह समझ जा रही थी वरना अंकित का धक्का वह बर्दाश्त नहीं कर पाती देखते ही देखते सुषमा भी चरम सुख के करीब पहुंच चुकी थी और अंकित भी आप झड़ने वाला था इसलिए वह जोर-जोर से धक्का लगना शुरू कर दिया था और कुछ ही धक्को के बाद दोनों एक साथ झड़ने लगे और सुषमा भी पागलों की तरह अपनी बेटी की बुर को चाट कर उसे भी झड़ने पर मजबूर कर दी। सुषमा आज अंकित की मर्दानगी का लोहा मान चुकी थी वह समझ चुकी थी कि अंकित किसी और ही माटी का बना हुआ है वरना इतनी देर से उसका लंड खड़ा था लेकिन दोनों को संतुष्ट करने के बाद ही उसका पानी निकला था वरना दो चार धक्को में ही मर्द पानी पानी हो जाते हैं और औरत को बिल्कुल भी संतुष्टि नहीं मिलती। कुछ देर बाद तीनों अपने-अपने कपड़े पहन रहे थे तीनों के चेहरे पर संतुष्टि भरे भाव थे लगभग 12:30 का समय हो चुका था किसी भी समय उसकी मां आ सकती थी। कपड़े पहनते हुए अंकित सुषमा से बोला।
आज मेरा सपना पूरा हो गया जब से तुम्हें नंगी नहाते हुए देखा था तब से मैं तुम मां बेटी दोनों को एक साथ चोदने का सपना देखा था लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि मेरा सपना इतनी जल्दी पूरा हो जाएगा,,,, आज की रात में जिंदगी भर नहीं भूलूंगा,,,।
वह तो सब ठीक है लेकिन यह सब बात तो किसी को बताना नहीं,,, (सुषमा अपनी चड्डी पहनते हुए बोली,,)
पागल हो गई हो क्या भला मैं यह सब बात किसी को क्यों बताने लगा आखिरकार इसमें मेरी भी तो बदनामी है,,,,।
लेकिन अभी तो तो बोल रहा था कि मैं सबको बता दूंगा,,,।
वह तो मैं सिर्फ तुम्हें डरा रहा था ताकि तुम डर कर मेरी बात मान लो और ऐसा ही हुआ अगर तुम मुझे नहीं भी करने देती तो मैं यह सब बात किसी को बताता नहीं क्योंकि मेरी भी तो इज्जत है मेरी भी परिवार की इज्जत है,,,,।
ओहहहहह सच में तो बहुत बड़ा हारामी है,,,,, (अपनी पेटीकोट को ऊपर चढ़ा कर उसका नाडा बांधते हुए सुषमा बोली और दूर खड़ी अपनी सलवार पहनती हुई सुमन यह सब सुनकर मुस्कुरा रही थी,,,,, अपनी पेंट का बटन बंद करते हुए अंकित सुषमा से बोला)
लेकिन सच में आंटी जो मजा आज मुझे मिला है मैं जिंदगी भर नहीं बोलूंगा और मैं उम्मीद करता हूं कि आगे भी जब हमें मौका मिलेगा तो इसी तरह से छत पर आ जाएंगे,,,, हे ना,,,।
बदमाश,,,,, (इतना क्या कर रहा है सुषमा अपनी ब्रा पहनने लगी थोड़ी देर में तीनों अपने-अपने कपड़े पहन चुके थे और अंकित अब अपने घर के लिए जाने वाला था,,,, वह सुषमा और सुमन से बोला,,,)
मम्मी आने वाली होगी मुझे जाना होगा अगर वह आज की रात पार्टी में रुक जाती तो आज की रात सुबह तक मैं तुम दोनों को ऐसा मजा देता की तुम मां बेटी मस्त हो जाती,,,,,,, (यह सुनकर मां बेटी दोनों शर्मा गए और अंकित मुस्कुराता हुआ अपने घर चला गया घर पर पहुंचे उसे 15 मिनट ही हुआ था कि उसके घर के सामने एक कर आकर रुकी जिसकी आवाज से साफ सुनाई दी थी कल की आवाज सुनकर उसे न जाने क्यों लगा कि उसकी मां आई है और वह अपने कमरे से निकलकर दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया हालांकि अभी तक उसने दरवाजा खोला नहीं था और जैसे ही दरवाजे पर दस्तक हुई वह तुरंत दरवाजा खोला तो देखा उसकी मां खड़ी थी और सामने कर में एक शख्स उन दोनों की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था और हाथ हिलाता हुआ वहां से चला गया,,, यह देखकर अंकित बोला,,,)
यह कौन है मम्मी,,,,?
यह हमारी प्रिंसिपल के पति हैं खाना खाने के बाद में उनके घर से निकली हुई थी कि वह मुझे छोड़ने के लिए यहां तक आ गए,,,,
ऊमममम,,,, देखना संभालना कहीं ऐसा ना हो कि वह तुम्हारी लेने की चक्कर में हो,,,,,।
धत् बेशर्म कुछ भी कहता रहता है वह बहुत सीधे इंसान है,,,।
सीधे इंसान के मन में लेने की ज्यादा इच्छा होती है याद रखना,,,,,, ( ईतना कहते हुए अंकित दरवाजा बंद कर दिया,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मजा आया ना पार्टी में,,,।
बहुत लेकिन मैं थक गई हूं मुझे नींद आ रही है,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह सीधा अपने कमरे में चली गई,,,,, जो कुछ भी उसके बेटे ने कहा था सुगंधा सोचने पर मजबूर हो गई थी कि उसकी प्रिंसिपल के पति की नजर वाकई में गंदी थी कार में वैसे तो वह बैठना नहीं चाहती थी और उसके साथ आना नहीं चाहती थी लेकिन उसके आग्रह पर उसे बैठना ही पड़ा लेकिन वह कार के पीछे बैठना चाहती थी,,, लेकिन उसने आगे बैठने के लिए जीद कर लिया और कार चलते हुए बात-बात पर किसी बहाने से उसकी जान पर हाथ रख दे रहा था,,, यह सब सुगंधा अच्छी तरह से समझती थी लेकिन शर्म और झिझक के मारे वह कुछ बोल नहीं पाई और नहीं अपने बेटे को बता भाई वह सीधा अपने कमरे में जाकर बिना कपड़े बदले ही सो गई।)