Incest यह क्या हुआ - Page 28 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

गीता ने जब देखा की, राजेश नदी किनारे अकेला बैठा है, अपने ख्यालों में खोया हुआ है। वह उसके पास गई।

उसने राजेश को आवाज दी।

गीता _राजेश,,

राजेश,,,

राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया, वह कही खोया हुआ था। तब गीता उसकी कंधे पर हाथ रखी,,,

गीता _राजेश,,,

राजेश, अपने ख्यालों से बाहर आया।

राजेश _गीता दी तुम यहां,,,

गीता _वहीं सवाल तो मैं तुम्हे पुछने वाली थी। तुम यहां क्या कर रहे हो।

राजेश _बस ऐसे ही,, अपना अकेला पन इन हसीन वादियों के साथ बाटने, चला आया।

पर आप यहां कैसे?

गीता _मै तो जिला कार्यालय मीटिंग में गई थी, यहां सड़क किनारे तुम्हारा बाइक खड़ा देखा तो, तुम्हे ढूढते यहां चला आया।

वैसे जगह काफी खूबसूरत है, लगता है तुम यहां पहले भी किसी के साथ आते रहे हो।

राजेश _जगह ही ऐसी है दी, राही को रुकने पर मजबूर कर देता है।

गीता _पर लोग यहां अकेले तो नही आते ,,

राजेश _ये तो किस्मत की बात है दी , इंसान का समय हमेशा, एक जैसा तो नही रहता न। कभी कोई हमारे साथ होती है तो कभी हम अकेले रह जाते हैं।

गीता _तुम दिव्या को मिस कर रहे हों?

राजेश _दिव्या जी को मैने अपना सच्चा दोस्त माना था, दी, पर वह मुझे बिना बताए ही चली गई।

मतलब वह मुझे अपना दोस्त नहीं समझती थी।

पहले निशा जी, और अब दिव्या जी, शायद मेरे जीवन में अकेला पन ही लिखा है।

जब भी कोई मुझे अपना लगने लगता है, मुझे छोड़ कर चली जाती है।

वैसे आपको, इस सुन सान जगह पर नही आना चाहिए था दी।

गीता _राजेश दिव्या ने, तुमसे सच बताने से मना कि थी, पर मुझे लगता है कि सच बताना जरूरी है नही तो बहुत देर हो जायेगी।

राजेश _कैसा सच दी?

गीता _यही की दिव्या, विदेश नही गई है

राजेश _क्या?

गीता _हां, दिव्या विदेश नही गई है ।

राजेश _तो फिर कहा है दिव्या जी।

गीता _वह, नानी के पास गई है, सेवा आश्रम ।

राजेश _अगर वह नानी के पास गई है तो फिर झूठ बोलने की क्या जरूरत पड़ी?

गीता _क्यों कि वह मां बनने वाली है?

राजेश _क्या,,

दी ये आप क्या कह रही है?

गीता _वही जो सच है।

वह मां बनने वाली हैं ?

इससे पहले लोगो को पता चलता की वह बियाहे, मां बनने वाली हैं? लोग हमारे खानदान पर कीचड़ उछाले, वह यहां से चली गईं।

राजेश _पर ये कैसे हो सकता है दी, दिव्या जी ने तो मुझे कभी बताया ही नहीं की कोई उसका यार दोस्त भी है, फिर वो मां कैसे बन सकती है?

गीता _क्यों, तुम तो हो न उसके दोस्त?

राजेश _दी मै कुछ समझा नही।

गीता _राजेश उसके पेट मे जो बच्चा है वह तुम्हारा है?

राजेश _दी ये आप क्या कह रही है? दिव्या जी के पेट में मेरा बच्चा कैसे आ सकता है?

गीता _तुम चौंक गए न।

तुम्हे पता नही उस रात क्या huwa था?

राजेश _तुम किस रात की बात कर रहे हो दी?

गीता _राजेश, वह दिन याद करो जब गणेश पुर मेले का उद्घाटन था, मुझे सर पिता जी को नक्सली अपने साथ ले गए थे। तुमने और दिव्या ने अपनी जान जोखिम में डाल कर हमे बचाया, हम नदी के रास्ते लकड़ी के नाव से रात में निकल रहे थे।

राजेश _हां दी वो सब तो मुझे याद है।

गीता _तुम्हे यह भी याद होगा, नाव हम सबका भार नही उठा पाया तो तुम नदी में ही तैरते हुए, नाव को किनारे तक पहुंचाने की कोशिश करने लगे।

राजेश _हां दी ये सब तो मुझे याद है।

गीता _उसके बाद क्या हुआ था तुम्हे याद है?

राजेश _नही दी, उसके बाद तो सुबह मैं अपने आपको झोपड़ी के खाट में लेटा पाया।

गीता _राजेश तुम्हे पता नहीं है उस रात क्या हुआ था। नदी का पानी इतना ठंडा था की पानी में डूबे रहने से तुम्हारा पुरा शरीर ठंड से अकड़ गया था। तुम बेहोश हो गए थे।

तुम्हारा शरीर का खून जम गया था। नब्ज एकदम धीमा हो गया था।

हमने कई उपाये किए तुम्हे होश ही नहीं आया।

तब दिव्या ने तुम्हे बचाने के लिए वह किया जो आज उसके जीवन का अभिशाप बन गया।

राजेश _दी, दिव्या जी ने मेरी जान बचाने के लिए क्या किया?

दिव्या _वह निर्वस्त्र होकर तुम्हे अपनी जिस्म की गर्मी दिया। जिस्म की गर्मी से तुम धीरे धीरे होस में आने लगे। फिर वही huwa जिसका डर था।

तुमने उसकी कौमार्य भंग कर दिया।

राजेश _नही, ऐसा नहीं हो सकता? मै दिव्या जी के साथ ऐसा सोच भी नही सकता।

गीता _ये सच है, राजेश।

राजेश _पर ये सब चीजे मुझसे छिपाने की क्या जरूरत थी? दिव्या जी ने मुझे बताया क्यूं नही?

गीता _क्या बताती वह, तुम तो निशा से प्यार करते हो न। दिव्या यह बता कर की वह तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हैं? तुम पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहती थी। वैसे भी तुम्हारा इंटर व्यू था।

इन सबका तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़ सकता था। दिव्या नही चाहती थी कि तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़े, वह तुम पर दबाव भी नहीं बनाना चाहती थी।

हमने उसे बच्चा गिराने के लिए कहा, पर वह नही मानी। वह तुम्हारे बच्चे को जन्म देना चाहती है!

पिता जी तो उसकी दूसरे से शादी कराने की बात कर रहे थे। पर दिव्या नही मानी।

अब दिव्या के पास कोई और चारा नहीं बचा था, इसलिए उसे यहां से जाना पड़ा।

राजेश _दिव्या जी को मेरे कारण इतना कुछ सहना पड़ा, धिक्कार है मुझे।

मुझे उसके पास जाना है, दी कहा है दिव्या जी बताओ मुझे। पता नहीं वह किस हालत में होगी ?

गीता _मैने बताया तो था, वह नानी के पास गई है। यहां से 300km दूर नानी का सेवा आश्रम है।

वह वहीं गई है।

राजेश _दिव्या जी मै आ रहा हूं, मै अकेले आपको दुनिया से संघर्ष करने नही दूंगा। चाहे जो भी हो जाए।

राजेश और गीता वहां से घर चलें आए।

रत्नवती _बेटी आज आने में देर कर दी?

गीता _हां मां, मुझे रास्ते में राजेश मिला था, वह अकेला था। नदी किनारे बैठा था। मां राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा है।

मैने राजेश को सब सच बता दिया कि दिव्या विदेश नही बल्कि नानी के घर गई है, उनकी सेवा आश्रम में।

रत्नवती _बेटी ये तूने क्या किया? दिव्या ने मना किया था, बताने को।

गीता _मैने जो किया ठीक किया मां, शायद दिव्या की इसी में भलाई है। मै जानती हूं, दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है, और दिव्या निशा के कारण राजेश से यह बात छिपाती है। मां दिव्या ने जो जो त्याग किया है उसके लिए उसे फल मिलना चाहिए मां। राजेश कल सेवा आश्रम जा रहा है, दिव्या से मिलने।

रत्नवती _बेटी, अब क्या होगा?

गीता _जो भी होगा, अच्छा ही होगा मां।

गीता और रत्नवती की बाते ठाकुर ने छुपकर सुन लिया।

ठाकुर _मुझे उस साले को रोकना होगा? वो साले दिव्या से मिले और मेरी इज्जत को मिट्टी में मिला दे, मै उस साले को ही मिट्टी में मिला दूंगा।

दिव्या जब आश्रम पहुंची, तो ठाकुर ने पहले ही, अपने आदमियों को, वहां तैनात कर दिया था। आश्रम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।

वहा की जानकारी उसको मिलती रहे।

उसने अपने खास आदमी भैरव को वहा भेजा था।

उसने भैरव को फोन लगाया।

भैरव _हुकुम आपने मुझे याद किया।

ठाकुर _हा भैरव।

वो समय आ चुका है, जिसके लिए तुम्हे वहा भेजा था। मुझे पता था वो शाला एक दिन आश्रम जरूर पहुंचेगा, वो शाला राजेश कल आश्रम पहुंच रहा है।

पर तुम्हे उसे आश्रम में पहुंचने से पहले ही ख़त्म करना होगा।

भैरव _हुकुम आप चिन्ता न करे। राजेश, आश्रम नही पहुंचेगा।

ठाकुर _भैरव, उस साले को ख़त्म करना आसान नहीं है बहुत ताकतवर है साला, उसे खत्म करने की कई बार कोशिश किया गया, पर हर बार बच निकलता है।

तुम लोग उसे सामने से नही नही हरा सकते। उसे धोखे से मारना।

भैरव _मै समझ गया हुकुम। इस बार वह नही बचेगा आप निश्चिंत रहिए।

उसके बाद भैरव, राजेश को ख़त्म करने के लिए योजना बनाने में जुट गया।

इधर राजेश घर पहुंचा,,,

पदमा _अरे बेटा तू कहा गया था?

राजेश _कही नही ताई, बस यूं ही टहलने के लिए।

पदमा _अरे बेटा कही जाता है तो बताकर जाया कर, हमे तुम्हारी चिन्ता होने लगती है।

राजेश आंगन में लगे खाट पर लेट गया।

पदमा _बहु, राजेश के लिए चाय ले आ।

पूनम _ जी मां जी,

राजेश _नही ताई चाय को रहने दो, पीने का मन नही है।

पदमा _क्या बात है बेटा, कुछ चिंतित लग रहा है?

राजेश _ताई मै कल चंद्रपुर जा रहा हूं। वहा एक गांव है शिवपुर।

पदमा _पर वहा क्या काम है बेटा?

राजेश _हां ताई, वहा कुछ काम है, जो अभी आपको नही बता सकता। वहा से आने के बाद ही आपको बताऊंगा।

पदमा _ऐसा क्या काम आ गया है बेटा, कही कोई लड़ाई झगडे वाली बात तो नही। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।

राजेश _नही ताई, ऐसी कोई बात नही है। मै जाकर जल्द ही वापस लौट आऊंगा।

रात में भोजन के समय घर के सभी लोगो को पदमा ने यह बात बताई की राजेश कल चंद्रपुर जा रहा है।

भुवन _राजेश, मुझे लगता है की तुम्हारा अकेले जाना ठीक नही है, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा।

राजेश _भईया मुझे वहा कितने दिन लगेंगे, एक दो तीन दिनो में आ जाऊ या सप्ताह लगेंगे। कह नही सकता, यहां आपकों खेती के काम सम्हालने है। इसलिए मेरा अकेला जाना ही उचित है।

रात में सबके सो जाने के बाद पूनम राजेश के कमरे में आई।

राजेश _भाभी आप इस वक्त

पूनम _तुम भी तो इतनी रात तक जाग रहे हो।

क्या बात है देवर जी। आज आप कुछ ज्यादा ही चिंतित लग रहे हैं।

राजेश _हां भाभी, आज मैं चिंतित हूं ।

पूनम _चिंता का कारण आप अपनी भाभी को नही बताओगे।

राजेश _भाभी, बात ऐसी है जो मैं अभी किसी को नहीं बता सकता मुझे माफ करना भाभी।

पूनम _कोई बात नही देवर जी। कल आपको चंद्रपुर जाना है। आप इस तरह जागते रहेंगे तो, तबियत बिगड़ सकती है।

राजेश _अभी इन आंखो में नींद मुस्किल हैं भाभी, मुझे रात जाग कर ही बितानी होगी।

आप मेरी चिंता न कीजिए, जाइए सो जाइए।

पूनम _मै तुम्हारी नींद में कुछ मदद कर दू।

पूनम ने अपनी ब्लाउज की बटन खोलते हुए कहा,,

राजेश _भाभी आज मेरा मन नही है, प्लीज

पूनम _तुम्हारा मन नही है तो क्या,मेरा तो मन है, लगता है तुम्हारा, मन अपने भाभी से भर गया है। जब से इंटरव्यू दिलाकर आए हो। एक बार भी प्यार से गले नही लगाए होऔर कल फिर जा रहे हो। देवर जी तुम मतलबी निकले।

पूनम की आंखो में आंसू भर आए।

वह आंसू पोछते हुवे, कमरे से जानें लगी।

तभी राजेश ने उसकी हाथ को पकड़ लिया।

राजेश _भाभी , मुझसे नाराज़ हो गई क्या?

पुनम _नही, देवर जी आपको क्या लगता है, सिर्फ निशा और दिव्या ही आपसे प्यार करती है और कोई नहीं।

आपने तो कभी किसी औरत की दिल की बात जानना चाहा नही, रात को भोग कर सुबह सब भूल गए।

पर औरत के साथ ऐसा नहीं है, हा मै ये जानती हूं कि अपनी पति के अलावा दूसरे मर्द को चाहना गलत है।

पर दिल कहा किसी की सुनता है। जिसको ये दिल भाता है बस उसी का होकर रह जाता है।

तुम मर्दों को तो औरत बस मन बहलाने की चीज लगती है। कुछ दिन खेल लिए फिर जी भर गया तो भूल गए।

राजेश _भाभी मुझे माफ कर दो, आपकी भावनाओं को मैं समझ नही पाया। अभी मैं कुछ दिनो से तनाव में हूं।

पुनम _कोई बात नही देवर जी, अब मुझे जाने दो, आगे मै आपसे कोई शिकायत नहीं करूंगी।

राजेश _नही भाभी, पता नही आगे क्या होने वाला है। आगे हमे मिलने का मौका मिलेगा कि नही कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए आज की रात, अपने सारे गीले सिकवे दूर कर लो।

पुनम राजेश की आंखों में देखी, फिर वह उसके करीब गई। फिर अपनी ओंठ राजेश की ओंठ पर रख चूसने लगीं।

राजेश भी पुनम की साथ देने लगा।

दोनो के बीच कुछ देर तक चूमा चाटी चलता रहा। उसके कपड़े कब उतरे उन्हे पता ही नहीं चला। राजेश ने पूनम की दूदू को मसल मसल कर खूब निचोड़ निचोड़ कर पिया। उसकी chut चांट चांट कर उसे खूब मज़े दिए। पुनम ने भी राजेशका लंद चूस चूस कर उसका लंद खूब लंबा और मोटा कार दिया।

राजेश रात भर पुनम को पेलता रहा। उसे कामसूत्र के कोइ भी आसन नहीं बचा जिसका उसने उपयोग न किया हो।

रात भर कमरे के अदंर पुनम की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनकने की आवाज गूंजती रही।

पुनम को पूरी तरह तृप्त करने के बाद, राजेश उसकी योनि में बीज छोड़कर उसके ऊपर ढेर हो गया।

राजेश थक चुका था उसे नींद आ गई।

पुनम कुछ देर बाद उठा अपने कपड़े पहने फिर राजेश के ऊपर चादर डाल कर उसकी माथा चूम कर वहा से चली गईं।

सुबह राजेश का नींद खुला तो 7बज चूके थे।

उसे याद आया उसे तो चंद्रपुर जाना है। वह नहाने चला गया। बहाकर आया।

पुनम ने उसके लिए चाय नाश्ता की तैयार कर ली थी।

पदमा _बेटा चाय नाश्ता तैयार हो गया है, चाय नाश्ता करके ही जाना।

राजेश ने चाय नाश्ता किया फिर अपना बैग पर कुछ कपड़े और सामान लेकर जाने को तैयार हो गया।

पदमा _बेटा तुम अपना ख्याल रखना।

राजेश _जी ताई।

भुवान _यार पहुंचते ही फोन करना, और हाल चाल बताते रहना।

राजेश _जी भईया।

राजेश सन से इजाजत लेकर, चंद्रपुर के लिए अपनी बाइक से निकल पड़ा। सूरज पुर से चंद्रपुर जिला जाना था वहा एक गांव शिवपुर जो नदी किनारे बसा था। वही था सेवा आश्रम।

राजेश बाइक को तेजी से दौड़ाता huwa चले जा रहा था।

बीच बीच में लोगो से रास्ता पूछ लेता था। कही रास्ता अच्छा था तो कही खराब, उसे शिवपुर पहुंचते पहुंचते शाम हो गया।

इधर भैरव और उसके साथी, रास्ते पर जगह जगह छिपे हुए थे। राजेश की पहुंचने की जानकारी भैरव को हो चुका था। भैरव सिंह ने ही राजेश को अस्त्र शस्त्र चलाना सिखाया था। उसके ताकत से भैरव सिंह भी वाकिफ था।

भैरव सिंह एक भिखारी का रूप बना लिया और सड़क पर चलने लगा जिस मार्ग से राजेश आ रहा था।

राजेश ने जब बूढ़े व्यक्ति को देखा।

राजेश _बाबा ये सेवा शिव पुर आसपास है क्या?

भैरव सिंह _हा, बेटा शिव पुर पास में ही है। तुम्हे किसके घर जाना है।

राजेश _बाबा मुझसे सेवा आश्रम जाना है।

भैरव सिंह _बेटा सेवा आश्रम तो मैं भी जा रहा हूं।

राजेश _अच्छा बाबा तो आप मेरे बाइक पर बैठिए। हम दोनों की मंजिल एक ही है।

भैरव सिंह _ठीक है बेटा।

राजेश _बाबा, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपको पहले से जानता हूं।

भैरव _अरे बेटा, दुनिया में तो एक ही सकल की कई आदमी होते है। देखा होगा किसी मेरे हमसक्ल को।

राजेश _हो सकता है बाबा।

भैरव _बेटा इस रास्ते से चलो , ये हमे आश्रम तक जल्दी पहुंचाएगी।

राजेश _पर बाबा ये रास्ता तो थोड़ी खराब लग रही है।

भैरव _आगे रास्ता ठीक है बेटा।

कुछ दूर चलने के बाद रास्ता आगे बंद था।

राजेश _बाबा, ये रास्ता तो आगे बंद है।

भैरव _बेटा मै बूढ़ा हूं न मेरी आंखें कमजोर हो गई है, लगता है हम गलत रास्ते पर आ गए। तुम गाड़ी रोको बेटा।

राजेश ने गाड़ी रोका।

भैरव सिंह अपने पास छुरा छिपाकर रखा था। उसे वह निकाल लिया।

और राजेश पीठ पर घोप दिया।

आस पास घने पेड़ों के बीच भैरव के साथी भाई छिपे थे वे भी बाहर निकल आए।

और राजेश सम्हल पाता उसके पहले ही लाठी से उसके सिर पर कई वार कर दिया। राजेश का सिर फट गया।

राजेश के आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह लोगो को पहचानने की कोशिश करने लगा। पर पहचान न सका। वह वहीं पर लहूलुहान बेहोश होकर गिर पडा।

भैरव सिंह _अब ये नही बचेगा। इसने ठाकुर खानदान के इज्जत से खेला था, उसकी सजा मिली साले को।

उसके बाद भैरव और उसके साथी वहा से चले गए। और ठाकुर को इस बात की जानकारी दिया।

भैरव _हुकुम हवेली की इज्जत से खेलने वाले को हमने खत्म कर दिया।

ठाकुर बहुत खुश huwa

इधर अंधेरा होने को था। किसान लोग खेत में काम करने वाले किसानों का घर जाने का समय था।

दो किसान अपने खेत से काम करके घर के लिए जा रहे थे। उसने रास्ते में लहूलुहान किसी व्यक्ति को पड़ा देखा।

किसान _ये कौन है? लगता है किसी ने इज पर जान लेवा हमला किया है।

एक किसान _देखो तो इसकी सांसे चल भी रही है या मर गया है।

दूसरे किसान ने राजेश का हाथ छूकर अवलोकन किया।

किसान २_ये मरा नहीं है। ये बेहोश हो गया है। इसकी सांसे अभी भी चल रही है।

किसान १_इसे हमे आश्रम ले जाना चाहिए। वहा शायद इसकी जान बच जाए।

आश्रम में एक बडा हॉस्पिटल भी था जहा आश्रम में रहने वाले लोगो के साथ साथ आस पास के गांव के लोग भी इलाज कराने के लिए आते थे।

दोनो किसानों ने किसी तरह राजेश को आश्रम तक पहुंचाया ।

हॉस्पिटल में कई डॉक्टर, नर्स एवम कर्मचारी कार्य कर रहे थे। अन्य बड़े बड़े डाक्टर भी सेवा आश्रम से जुड़े हुए थे। आवश्यकता पड़ने पर उन्हे बुलाया जाता था। दिव्या भी डॉक्टर के रूप में सेवा देने के साथ साथ अन्य जिम्मेदारी भी सम्हाल रही थी।

आश्रम के डॉक्टरों ने किसानों से पूछा _कोन है ये, इसकी ये हालात कैसे हुई?

किसान _ये कोई अजनबी है, ये हमे रास्ते पर पड़ा मिला। लगता है इस पर किसी ने जानलेवा हमला किया है।

हमने देखा इसकी सांसे अभी भी चल रही है तो हम इसे आश्रम ले आएं। शायद इसकी जान बच जाए।

डाक्टर _इसकी हालत तो काफी खराब लग रही है।

लोगो की भीड़ देख कर दिव्या ने नर्स से पूछा।

दिव्या _क्या बात है, नीरा वहा इतनी भीड़ क्यू है।

दिव्या हॉस्पिटल में एडमिट कुछ मरीजों की हालचाल पूछ कर बाहर निकल रहीं थीं।

नर्स _दीदी, एक नया केस आया है। कोई युवा है। किसी ने उस पर जानलेवा हमला किया है। डाक्टर बता रहे थे की उसका बचना मुश्किल है।

इधर डाक्टर लोगो ने राजेश का पर्स चेक किया। उसमे रखे परिचय कार्ड से उसके बारे में पता चला कि इस युवक का नाम राजेश है और ये राजधानी का रहने वाला है।

दिव्या अन्य मरीजों को देख रही थी तभी उसके कानो पे राजेश शब्द सुनाई पढ़ा वह चौंकी।

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

वहकापते कदमों से, उस युवा की ओर बड़ने लगा जिसे डाक्टरों ने घेर रखा था।

दिव्या जब युवक के पास पहुंची। उसे देखते ही। चीख पड़ी।

सवहा सभी लोग चौंक पड़े।

वहा के बुजुर्ग हेड डाक्टर _दिव्या बेटी क्या तुम इसे जानते हो।

दिव्या _ये राजेश है,ये यहां पहुंचा कैसे किसने की इसकी ये हालात। राजेश, उठो,,,

दिव्या रोने लगी,,

बुजुर्ग डॉक्टर _बेटी तुम डॉक्टर होकर भावुक हो रही हो, धैर्य रखो।

दिव्या _डॉक्टर, राजेश को कुछ नहीं होना चाहिए। जल्दी इलाज सुरू करो, दिव्या चीखी।

राजेश को आपातकाल कक्ष में ले जाया गया।

वहा पर राजेश का गहन जांच किया गया। उसके पीठ पर घुपे छुरे को निकाला गया।

जांच के दौरान पाया गया कि उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है।

इधर दिव्या की हालात की बात राजवती तक पहुंची। वह भी दौड़ी भागी हॉस्पिटल पहुंची।

राजवती _बेटी क्या हुआ क्यों रो रही हो?

दिव्या _नानी राजेश की हालात काफी नाजुक हैं। पता नहीं क्या होगा?

राजवती _पर बेटी राजेश वहा आया कैसे और मेरे उसके साथ ये सब huwa कैसे?

दिव्या _मुझे कुछ नही मालूम नानी, उसकी ये हालात किसने की और वह शिव पुर पहुंचा कैसे? नानी उसे कुछ नहीं होना चाहिए।

राजवती _बेटा, धैर्य रखो, सब ठीक होगा बेटा, तुम खुद एक डॉक्टर हो। तुम तो एक साहसी लड़की हो। तुम इतनी भावूक कैसी हो सकती हो?

दिव्या _नानी मै राजेश से बहुत प्यार करती हूं, अगर राजेश ही नहीं रहा तो मेरा जीना व्यर्थ है। उसे बचा लो।

बुजुर्ग डॉक्टर आपात कालीन रूम से बाहर निकला।

राजवती _क्या huwa डॉक्टर, राजेश ठीक तो है न।

डॉक्टर _माता जी, राजेश की हालात काफी गंभीर है। उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है। आपरेशन करना पड़ेगा। और यह ऑपरेशन स्पेसलिष्ट ही कर सकता है।

राजवती _ठीक है आप उसे फोन लगाइए और मुझसे बात कराइए।

डॉक्टर ने स्पेलिस्ट डॉक्टर को फोन लगाया। राजवती ने उससे बात किया।

स्पेशलिस्ट डॉक्टर राजधानी में ही था। उसे आने में 6से 7घंटे लग सकता था। राजवती ने उसे चार्टेड प्लेन से आने को कहा, सारा खर्च आश्रम उठाएगा।

स्पेशलिस्ट डॉक्टर चार्टेड प्लेन से 2घंटे में ही आश्रम पहुंच गया।

उसने राजेश का ऑपरेशन किया।

ऑपरेशन कक्ष से बाहर निकला।

राजवती _डॉक्टर राजेश ठीक तो है न।

डॉक्टर _मैने उसका ऑपरेशन कर दिया है माता जी। पर उसकी स्थिति काफी नाजुक हैं । उसे 24घंटे के अदंर होश आ गया तो ठीक, नही तो कुछ कहा नहीं जा सकता।

दिव्या _नही मेरे राजेश को कुछ नहीं हो सकता, वह जरूर उठेगा,,,

दिव्या, आश्रम अपने कमरे में रखी श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने जाकर फरियाद करने लगी।
 
आखिर 24घंटे बीतने के पहले राजेश होश में आ गया।

इस बात की जानकारी नर्स ने दिव्या को जाकर दी।

दिव्या बेशुद भगवान के मूर्ती के सामने पड़ी थी।

नर्स _दीदी उठो,,,

दिव्या ने अपनी आंखें खोली,,

नर्स _दीदी राजेश को होश आ गया है,,,

दिव्या _क्या कहा तुमने, राजेश को होश आ गया,,

नर्स _हा दीदी, वो तुम्हे याद कर रहा है।

दिव्या_क्या?

दिव्या _ राजेश

दिव्या उठी और भागते हुवे , राजेश के पास पहुंची,,,

दरवाजे के पास जाकर खड़ी हो गई।

राजेश ने दिव्या की ओर मुड़ कर देखा।

राजेश _दिव्या जी,,,

धीमे स्वर में कहा,,

दिव्या दौड़कर राजेश के पास गई और घुटने पर खड़ी हो गईं।

दिव्या _राजेश तुम होश में आ गए,,

राजेश के हाथ को पकड़ कर कहा ,,,

राजेश _दिव्या की मुझे माफ कर दीजिए,,,

धीमे स्वर में कहा,,

मेरे कारण आपको इतने कष्ट सहने पढ़ रहे हैं।

दिव्या _राजेश, इसमें तुम्हारी कोई गलती नही,किस्मत में जो होना लिखा था वो हो गया,,, इसमें तुम अपने को दोषी न समझो,,,

तभी वहां राजवती पहुंची साथ में उस क्षेत्र के थानेदार भी थे। राजवती ने इस घटने की जानकार थाने को दी थी और रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।

थानेदार _राजेश क्या तुम हमें बता सकते हो की तुम पर हमला किसने किया था?

राजेश जान चुका था कि हमला ठाकुर के कहने पर उसके आदमियों ने किया था।

राजेश ने हमलावरों को पहचानने से इंकार कर दिया।

राजेश _नही थानेदार साहब, वे कौन लोग थे, मुझे पता नही।

थानेदार _क्या तुम्हे किसी पर शक है?

दिव्या _देखिए थानेदार साहब, अभी राजेश की हालत ठीक नहीं है, इन सब सवालों से उसके उसके दिमाक पर दबाव बढ़, ये सब बाते आप बाद में पूछ लेना।

राजवती _दिव्या ठीक कह रही है थानेदार साहब, राजेश जब ठीक हो जाए तो सब जानकारी ले लेना। लेकिन जिन लोगो ने राजेश पर हमला किया है, जब उसे पता चलेगा राजेश बच गया है तो वे राजेश पर फिर से हमला की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए अपने दो जवानों को राजेश की सुरक्षा के लिए तैनात कर दो।

थानेदार _ठीक है माता जी।

थानेदार ने अपना 2 जवान राजेश की सुरक्षा के लिए लगा दिया।

जवान दरवाजे बाहर बैठ कर निगरानी करने लगे।

दिव्या ने पुलिस जवानों को साफ हिदायत दे दी थी की उसके इजाजत के बिना राजेश के कमरे मे कोई भी प्रवेश न करे।

इधर गीता ने दिव्या को फोन किया।

गीता _दिव्या कैसी है तू?

दिव्या _यहां सब ठीक नही है दी ,,

दिव्या ने अपने रूवासी होते हुए कहा,,

गीता _क्या huwa दिव्या?

दिव्या _क्या आपने राजेश को सारी सच्चाई बताई?

गीता _सॉरी दिव्या, राजेश यहां तुम्हे बहुत मिस कर रहा था। उसकी दशा देखकर मुझे सच बताना पढ़ा।

वह तुम्हारे पास जाने वाला था, वो पहुंचा क्या?

दिव्या _दी राजेश राजेश पर कुछ लोगो ने हमला कर दिया था, उसकी हालात बहुत खराब थी दी, बहुत मुस्किल से उसकी जान बच सकी है।

गीता _क्या राजेश को कुछ लोगो ने जान से मारने की कोशिश की।

अभी कैसा है राजेश।

गीता _अभी वो खतरे से बाहर है दी।

दिव्या _किसने किया था राजेश पर हमला।

दिव्या _पता नही दी, राजेश ने अभी कुछ बताया नही है?

गीता _दिव्या तू घबरा मत, मै वहां आ रही हूं। तू अपना और राजेश का ख्याल रखना।

दिव्या _जी दी।

गीता ने यह बात अपनी मां को बताई।

रत्नवती _मुझे लगता है राजेश पर हमला तुम्हारे पिता ने कराया है। उसे पता चल गया होगा की राजेश दिव्या से मिलने जा रहा है।

गीता _ मुझे पता नहीं था पिता जी सच में ऐसी हरकत करेंगे नही तो मैं राजेश को सच्चाई नहीं बताती।हमे आश्रम चलना चाहिए। वहा दिव्या बहुत दुखी हैं।

रत्नवती _ठीक है बेटी वहा जाने की तैयारी करो, मै तुम्हारे पिता से मिलकर आती हूं।

रत्नवती ठाकुर के पास पहुंची,,,

रत्नवती _ये आपने अच्छा नही किया?

ठाकुर _मैंने क्या किया?

रत्नवती _भोले मत बनो। राजेश पर आपने हमला करवाया है न।

ठाकुर _मेरे घर के इज्जत से खेलने वाले को मैं ऐसे ही जाने दूंगा? साले को उसकी करनी की सजा मिली। और तू अपनी मुंह बन्द रखो, नही तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

रत्नवती _क्या करोगे, मारोगे मुझे, मारो लो मारो,,,

मैने पहले ही कहा था आपको, आपकी सारी जुल्मों को अब तक देखती और सहती आ रही थी। पर बात मेरी बेटियों की खुशियों पर आयेगी तो मैं चुप नही बैठूंगी।

राजेश पर हमला कराकर आपने अच्छा नही किया। भगवान की कृपा है कि राजेश बच गया, अगर उसे कुछ हो गया होता न तो पूरी दुनिया को चीख चीख कर बताती कि उसकी जान तुमने ली है।

ठाकुर _क्या वो साला बच गया?

रत्नवती _शुक्र मनाओ की वह बच गया, नही तो अपनी पत्नी और बेटियों से हाथ धो बैठते । और सुन लो आज के बाद ऐसी हरकत करने के बारे में भी सोंचे तो मैं और गीता दोनो हवेली छोड़कर सदा के लिए मां के पास चले जायेंगे आश्रम।

रत्नवती वहा से चली गईं,,,

ठाकुर शराब पीने लगा,,,

गीता और रत्नावति दोनो आश्रम के लिए निकल पड़े।

शाम तक वे आश्रम पहुंच गए।

वे दोनो राजेश से मिले, उसकी हालत देखकर दोनो को काफी दुख हुआ।

राजेश _मां जी आप यहां,,

रत्नवती _हा बेटा, दिव्या ने तुम्हारे बारे में हमें बताया, तो रहा नहीं गया तुम्हे देखने चले आए।

मै आपसे माफी मांगती हूं बेटा,,,

राजेश _किस बात के लिए मां जी,,,

रत्नवती _तुम पर हमला बेटा मेरे पति ने ही कराया है और शायद ये बात तुम भी जानते होगे। इसलिए मैं माफी मांगती हूं तुमसे।

राजेश _जानता हूं मां जी, पर आपकों माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं, ये तो मेरे कर्मों की सजा मुझको मिली है। मेरे कारण दिव्या की को इतना कुछ सहना और त्यागना पड़ा है।

रत्नवती _ये तो तुम्हारा बड़प्पन है बेटा।

इधर दिव्या को जब पता चला कि राजेश पर हमला उसके पिता ने ही करवाया है, उसे गुस्सा आया।

वह अपने पिता जी को फोन लगाया।

ठाकुर _बेटी दिव्या कैसी है तू, वहा सब ठीक तो है न?

दिव्या _पिता जी आप अनजान बनने का नाटक मत करिए मुझे सब पता चल गया है। राजेश पर आपने ही हमला करवाया है न।

ठाकुर _ये सच नही है बेटी, लगता है किसी ने तुमको बहकाया है।

दिव्या _मां कभी झूठ नहीं बोल सकती, अब तक आपको मै भगवान की तरह पूजती रही। लेकिन मुझे अब पता चला कि आप उस लायक नहीं है। जिस आदमी ने आपकी बेटियों की इज्जत बचाया ,आपका जान बचाया उसके साथ आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। मेरे साथ जो कुछ भी huwa उसके लिए राजेश दोषी नहीं है यह सब जानते हुवे भी। आज

आप मेरे नजरो से गिर गए पिता जी।

दिव्या _अब मै आपके सामने कभी नहीं आऊंगी।

दिव्या ने फोन रख दिया। और रोने लगी।

ठाकुर, दिव्या की बात सुनकर,,,

ये क्या हो गया? ये साला राजेश ने मुझे बर्बाद कर दिया। मेरी पत्नी और बेटियां सब मेरे खिलाफ हो गए। पर उस साले से बदला लेकर रहूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए।

ठाकुर और ज्यादा शराब पीने लगा।

बिंदिया _बस करो ठाकुर और कितना पियोगे।

ठाकुर _चुप कर साली,,

उस साले के कारण मेरी बेटी और पत्नी मेरे खिलाफ हो गई है। उस साले ने मुझे बर्बाद कर दिया है।

बिंदिया _शराब पीने से क्या क्रोध शांत हो जायेगा, ज्यादा शराब पीने से आपका लिवर खराब न हो जाए। आपकी क्रोध शांत करने के लिए आज रात नई लड़कि का प्रबंध किया है मैने? आप अपना गुस्सा उस लङकी की chut पर उतारिए। वो चीखेंगी। तो आपको सुकून मिलेगा।

ठाकुर _पर ये लड़कि कहा कि है?

बिंदिया _पास वाले गांव की है। मुनीम ने बताया कि उस के पिता जी कर्ज नही चुका पा रहे हैं तो एक रात अपनी बेटी को हवेली भेजने के लिए राजी हो गए हैं। 18की है एकदम अनछुई कली।

ठाकुर _बिंदिया तू कितनी अच्छी है मेरी जान तू मेरी कितना ख्याल रखती है।

उस को बुलाकर दुल्हन बनाकर मेरे कमरे मे भेजो। आज हवेली में उनकी चीख गूंजेगी। मै अपना सारा गुस्सा उस लड़की की सील तोड़ कर उतारूंगा।

हा हा हा हा हा,,,,

ठाकुर हंसने लगा।

इधर आश्रम में गीता और रत्नवती आज रुकी,,

दिव्या राजेश की देखभाल में लगी हुई थी। वह रात में भी राजेश के कमरे में ही राजेश के पलंग के नीचे चटाई बिछाकर सोने लगी ताकि राजेश को रात में उसकी जरूरत न पढ़ जाए।

इधर उस रात रत्नवती ,गीता और राजवती आपस में राजेश और दिव्या के बारे में ही बात कर रहे थे।

रत्नवती _अब तो दिव्या की जिंदगी में खुशियां तभी आयेगी, जब राजेश से उसकी शादी हो जायेगी।

गीता_जानती हूं मां दिव्या राजेश से बहुत प्यार करती है। पर ये तभी संभव हो पाएगा जब राजेश दिव्या को शादी के लिए स्वयं प्रपोज करेगा। दिव्या कभी भी राजेश को शादी के लिए नही कहेगी।

राजवती _भगवान पर भरोसा रखो बेटी, भगवान दिव्या को उसका त्याग का फल जरूर देगा।

इधर रात में हवेली में बिंदिया ने उस लङकी की नहलाई शरीर पर उगे अनचाहे बालों की सफ़ाई कर दुल्हन की तरह सजा कर ठाकुर के कमरे में सेज पर बिठा दी।

बिंदिया _जाओ ठाकुर साहब दुलहन आपकी इन्तजार कर रही है।

ठाकुर हाथ में मोंगरे का माला डाला था उसके सूंघते हुए। लढ़खराते कदमों से कमरे में प्रवेश किया।

जब उसने दुलहन का घूंघट उठाया तो उसकी खूबसूरती देख कर दिल खुश हो गया।

उसने लङकी के एक एक कर सारे गहन उतारे फिर कपड़े उतार कर नंगी कर दिया। और स्वयं भी नंगा हो गया।

उसके बाद ठाकुर ने लङकी की सील तोडी और बेदर्दी से चोदने लगा। पुरे बिस्तर पर खून फेल गया। राजेश का सारा गुस्सा उस लङकी पर उतारने लगा। रात भर हवेली में उस लङकी की चीखे गूंजने लगी।

अगले दिन सुबह गीता और रत्नवती , राजवती से इजाजत लेकर और दिव्या का हौसला अफजाई कर दोनो आश्रम से घर के लिए निकल पड़े।

दिव्या राजेश की देखभाल में लगी रही 5दिन निकल गए।

पदमा ने भुवन से राजेश फोन लगा कर उसकी हाल चाल पुछने को कहा।

राजेश का मोबाइल स्विच ऑफ बताया।

घर के लोगो को राजेश की चिन्ता होने लगी।

पदमा ने भुवन से कहा की अपने दोस्तों को लेकर आश्रम चले जाओ, वहा राजेश का हाल चाल पता करो, पुरे एक सप्ताह हो गए राजेश की कोई खबर ही नहीं। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।

पदमा के कहने पर भुवन, अपने कुछ दोस्तों को लेकर आश्रम के लिए निकल पड़ा।

वे आश्रम में जाकर पता लगाया की क्या राजेश नाम का कोइ लडका यहां आया है, वह आश्रम जाने के लिए ही सूरज पुर से निकला था, उसके बाद से उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है, कृपया हमारी मदद कीजिए।

आश्रम के एक सेवा दार भुवन और उसके दोस्तों को दिव्या के पास लेकर गया।

भुवन और उसके दोस्त दिव्या को देखकर चौंक गए।

भुवन _दीदी आप यहां,

दिव्या _भुवन तुम यहां,,,

भुवन _ दिव्या दीदी हम तो राजेश से मिलने यहां आए हैं। एक सप्ताह पहले वह गांव से निकला था, आश्रम के लिए। जब उसकी कोई खोज खबर नही मिली तो हमें उसकी बड़ी चिंता हुई ।

इसलिए हम उनसे मिलने आश्रम आए हैं। पर आप यहां कैसी। हमे तो बताया गया था कि आप आगे की पढाई के लिए, विदेश गई है।

दिव्या _कुछ समस्या के कारण मुझे आश्रम आना पड़ा।

भुवन _मतलब राजेश यहां आश्रम आपसे मिलने के लिए आया है।

दिव्या _अच्छा किया, आप लोग यहां आ गए राजेश आप लोगो से मिले गा तो उसे अच्छा लगेगा उसकी हालत में जल्दी सुधार होगी।

भुवन _दिव्या दी, क्या हुआ है राजेश को।

दिव्या ने भुवन और उसके दोस्तों को सारी सच्चाई बता दिया।

दिव्या ने भुवान और उसके दोस्तों को राजेश के पास लेकर गई।

दिव्या _राजेश देखो तो तुमसे मिलने कौन आया है?

राजेश _अरे भुवन भईया आप।

भुवन और उसके दोस्त राजेश की हालात देख कर काफी दुखी हुवे।

भुवन _इतना कुछ हो गया हमे पता ही नहीं चला। जब इतने दिनो तक तुम्हारा कोई खबर नहीं आया तो घर के सभी लोग चिंतित हुवे, तुम्हारा खोज खबर लेने के लिए ही भेजा है घर वालों ने हमें।

राजेश _माफ करना भईया मेरी यह हालत जानकर आप लोग दुखी और चिंतित न हो जाए इसलिए मैंने कोई काल नही किया। वैसे भी मेरा मोबाइल पता नहीं कहा है?

दिव्या _राजेश तुम जल्दी से अच्छे हो जाओ फिर मैं तुम्हारे लिए एक अच्छी सी मोबाइल गिफ्ट करूंगी।

भुवन _राजेश, ठाकुर साहब ने आप पर हमला करवा कर अछा नही किया?

राजेश _आपको किसने बताया की ठाकुर साहब ने मुझ पर हमला करवा या है।

भुवन _दिव्या दी ने हमें सच बता दिया है। आप दिव्या जी से मिलने यहां आ रहे थे, ठाकुर साहब नही चाहते थे आप दिव्या दीदी से मिले इसलिए उसने तुम पर हमला करवाया।

ठाकुर की ये हरकत उस पर बहुत भारी पड़ेगी।

राजेश _देखो गुस्से में आकर तुम लोग कोई उल्टी सुल्टी हरकत न कर देना जिससे लेने के बदले देना पड़ जाए। मुझे बिना बताए कोई कदम नहीं उठाना।

भुवन और उसके दोस्त दो दिन आश्रम में रुके और अगले दिन अपने गांव के लिए निकल पड़े।

गांव पहुंचने के बाद, राजेश के स्थिति एसऔर ठाकुर के करनी के बारे में सबको बताया।

सभी लोग राजेश से मिलने के लिए आश्रम आना चाहते थे।

भुवन ने उन्हें बताया कि राजेश ने उन्हें आने से मना किया है कुछ दिनों में वह ठीक हो जाएंगे फिर वह खुद गांव आ जायेंगे। दिव्या जी उसकी बहुत अच्छी देखभाल कर रही है।

गांव के लोगो को जब पता चला की दिव्या विदेश नही गई है बल्कि वह शिव पुर गई है और वहां अपने नानी के आश्रम के हॉस्पिटल में अपनी सेवा दे रही है।

तब लोगो ने यह समझा कि ठाकुर ने दिव्या को राजेश से दूर करने के लिए ही यहां से अपनी नानी के पास आश्रम भेजी, और लोगो को झूठ बोला गया की वह विदेश गई है। जब राजेश को सचाई पता चला तो दिव्या से मिलने शिवपुर गया।

ठाकुर को यह बात पता चल गया होगा तो उसने राजेश को पर हमला करवा कर उसे जान से मारने की कोशिश की।

सूरज पुर और आसपास के गांव वाले ठाकुर के इस करनी से काफी क्रोधित हुए। वैसे भी ठाकुर के अत्याचार से आस पास के गांव वालों के अदंर उसके खिलाफ काफी आक्रोश था।

वे सभी ठाकुर को सबक सिखाने के लिए मौके की तालाश में थे।

और वह मौका आ चुका था। सामने चुनाव था। आस पास के गांव के लोग ठकुर को सबक सिखाने के लिए योजना बनाने लगे।

वह इस बार चुनाव में ठाकुर के खिलाप प्रत्यासी उतारेंगे। और ठाकुर को सबक सिखाएंगे।

इधर दिव्या की सेवा से राजेश की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ अब उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दिया गया।

अब उसे राजवती ने अपने भवन में ही एक कमरे में राजेश को ठहरने का इंतजाम कर दिया।

अब राजेश दिव्या के साथ सुबह और शाम प्रार्थना सभा में जाने लगा।

आश्रम के हरे भरे गार्डन में भी दोनो समय बिताने लगे।

एक दिन राजवती ने राजेश को अपने पास बुलाई और बोली।

राजवती _राजेश बेटा जरा इधर आना।

राजेश _जी माता जी,,

राजवती _बेटा तुम मुझे माता जी नही, नानी मां कहा करो।

राजेश _जी, आपको कुछ काम था मुझसे।

राजवती _बेटा कुछ दिनो से मैं तुमसे कुछ बात कहने वाली थी पर तुम्हारे स्वास्थ्य के कारण कह नही पाई।

राजेश _बोलो नानी मां क्या बात है।

राजवती_बेटा बात दिव्या को लेकर है।

वैसे तो वो बहुत साहसी लड़की है, लेकिन उस दिन जब तुमको लहूलुहान देखी तो वह अपनी सुध बुध खो बैठी वह डॉक्टर होकर भी अत्यंत भावुक हो गईं। जानते हो इसका कारण क्या हैं?

वो तुमसे बेपनाह मुहब्बत करती है बेटा, मुझे पता है कि यह बात वह तुमसे कभी नहीं कहेगी। क्यों कि वह बता रही थी कि तुम किसी अन्य लङकी से प्यार करते हो, पर इतना मै तुमसे मै पुरे विश्वास के साथ कह सकती हूं की दिव्या जितनी प्यार तुम्हे और कोई नहीं कर सकती बेटा, वो तो पूरी जिंदगी तुम्हारी याद के सहारे ही गुजार देगी। वह अपनी दिल की बात कभी नहीं कहेगी।अब आगे तुम्हारी मर्ज़ी बेटा, तुम क्या फैसला लेते हो। तुम पर किसी का की दबाव नहीं है।

एक दिन राजेश और दिव्या गार्डन में टहल रहे थे।

राजेश _दिव्या जी आप जानती हो निशा ने मुझे क्यों छोड़ा, क्यों कि मेरे कई औरतों से संबंध थे। जब उन्हे पता चला तो वह ये सदमा बर्दास्त नही कर सकी और वह विदेश चली गई।

दिव्या जी तुम त्याग कि देवी हो मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं। मै आपको धोखा में भी नहीं रहना चाहता पहले भी मैने एक दोस्त खो दिया है। अब आपको धोखे में रख कर, मै आपको खोना नहीं चाहता।

सच पूछो तो मैं आपके काबिल नहीं हूं। मेरे आज भी कई औरतों से संबंध है। मै टू यह बात कहने की हिम्मत भी नहीं कर सकता, लेकिन नानी मां की बात सुनकर मैं आपसे कहने की हिम्मत जुटा पा रहा हूं।

दिव्या _क्या बात है राजेश, तुम्हारे मन में जो भी बात है, निःसंकोच कह सकते हो।

राजेश _क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

दिव्या राजेश की आंखों में एक टक देखती रही। उसकी आंखो में आंसू छलक आए।

वह राजेश के गले से लिपट गई।

वह राजेश को ऐसे चूमने चाटने लगी। जैसे बरसो बिछड़ने के बाद प्रेमी प्रेमिका मिलते हो। उसकी आंखो से आंसू बह रही थी।

अगले दिन वे दोनो आश्रम के पास नदी किनारे घूमने गए। वे दोनो प्यार के गीत गाने लगें।

माहिया तेरी कसम हाय जीना नहीं जीना मुझे तेरे बिना हाय।

साथिया तेरी कसम हाय तेरे बिना जीना भी है क्या जीना हाय,,,
 
रात को सोते समय,,,

राजवती _बेटी तुम आज बहुत खुश लग रही हो, क्या बात है?

दिव्या _नानी राजेश मुझसे शादी करना चाहता है। रजवती के गले से लिपट कर बोली।

राजवती _क्या? बेटी ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है।

देखना तुम दोनो की शादी मै कितनी धूमधाम दे कराती हूं। मै कल ही पंडित जी को बुलाकर शुभ मुहूर्त निकलवाती हूं।

नानी, दिव्य राजवती से कस के लिपट ली।

राजवती _यह बात अपनी मां को बताई की नही।

वो तुम्हारी कितना चिंता करती है यह जानेगी तो वो बहुत खुश हो जायेगी। मै उसे अभी फोन करती हूं।

राजवती ने रत्नवती को फोन लगाई।

रत्नवती _मां इतनी रात को, क्या बात है वहा सब ठीक तो है?

राजवती _अरे बेटी बहुत बड़ी खुशखबरी है, मुझसे रहा न गया, सोचा तुमको बता दू, तुम दिव्या को लेकर बहुत चिंतित जो रहती हो।

रत्नवती _क्या बात है मां बड़ी खुश लग रही हो।

राजवती _बात ही ऐसी है, राजेश और दिव्या दोनो शादी करने जा रहे हैं।

रत्नवती _ये तो बड़ी खुशी की बात है मां,

राजवती _मै कल पंडित जी से शादी का शुभ मुहूर्त निकलवा रही हूं, देखना मै राजेश और दिव्या के शादी कितनी धूम धाम से कराती हूं।

पहली बार यह आश्रम दुलहन की तरह सजेगा।

रत्नवती _हां मां, हम दिव्या की शादी धूमधाम से करेंगे।

यह खुशखबरी बताने के लिए रत्नवती , गीता कमरे मे गई।

गीता _मां इतनी रात को मेरे कमरे में, कुछ काम था क्या?

रत्नवती _बेटी बात ही इतनी खुशी की है कि मैं खुद को रोक नहीं पाई और तुम्हे बताने चली आई। अभी आश्रम से मां का फोन आया था।

मां बता रही थी की राजेश और दिव्या दोनो शादी करने जा रहे हैं।

गीता _ओह सह मां, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है

रत्नवती _हां बेटी अब दिव्या बेटी की जिंदगी को सारी तकलीफ दुर हो जायेगी।

गीता _हा मां, आख़िर दिव्या को उसका प्यार मिल ही गया। हर किसी की किस्मत ऐसी नही होती।

रत्नवती _अरे बेटी, अगर तुम्हे भी कोई पसन्द हो तो बता दो, तुम दोनो की शादी एक साथ करा देंगे।

गीता _नही मां, कबीर के जाने के बाद अब मुझे शादी में कोई इंट्रेस्ट नही।

अब तो मैं अपनी पूरी जिंदगी समाज सेवा में निकाल देना चाहतीं हूं।

मां तुम पिता जी को दिव्या और राजेश की शादी करने की बात, अभी मत बताना। पिता जी शादी पे अडंगा डालने की कोशिश करेंगे।

रत्नवती _बेटी तुम चिन्ता मत करो, तुम्हारा पिता जी ऐसा कुछ नहीं करेगा।

मैने उसे समझा दिया है, राजेश पर फिर से हमला huwa तो मैं और मेरी बेटी हवेली छोड़कर, चले जायेंगे। अब वह ऐसा नहीं करेगा।

राजेश और दिव्या की शादी करने की बात आस पास के क्षेत्रों में आग की तरह फैल गई।

राजवती ने पंडित को बुलाकर शुभ मुहूर्त निकलवाया। आज से एक सप्ताह बाद, दोनो की शादी की तिथि तय हुआ।

राजवती शादी की तैयारी में लग गई।

भुवन ने राजेश को फोन किया,,,

भुवन _राजेश मां तुमसे बात करना चाहतीं है, लो बात करो।

पदमा _राजेश बेटा जो हम सुन रहे हैं क्या वो सच है? तुम ठाकुर की बेटी से शादी कर रहे हों।

राजेश _हा ताई आपने सही सुना है।

पदमा _बेटा ये ठाकुर तुम्हरे जान के पीछे पड़ा है और तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो। बेटा वो ठाकुर तुम्हे फिर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

राजेश _ताई, आप चिंता न करे, वो ठाकुर मेरा कुछ नही बिगाड़ पाएगा।

पदमा _क्या तुमने ए बात अपने मां को बताई।

राजेश _, नही ताई,

पदमा _तुम्हारी मां इसके लिए कभी नही तैयार होगी।

राजेश _टाई मै मां को मना लूंगा। मुझे पुरा भरोसा है मां मान जायेगी।

पदमा _बेटा तू अपना ख्याल रखना। जी ताई।

पदमा ने भुवन को सुनिता के पास फोन लगाने के लिए कहा।

भुवन_प्रणाम चाची।

सुनीता _अरे भुवन बेटा तुम, खुश रहो, वहा गांव में सब ठीक तो है न।

भुवन _चाची, लो मां से बात करो, वही बताएगी, यहां का हाल चाल।

पदमा _सुनिता कैसी है तू?

सुनीता _मै ठीक हूं दी, आप लोग कैसे है? वहा सब ठीक तो हैं, भुवन की बातो से लगा, वहा कुछ ठीक नहीं है।

पदमा _हा, सुनिता, तुम कुछ बताने लिए ही फोन किया था।

सुनीता _क्या बात है दीदी, बताओ ,,

पदमा _राजेश ठाकुर की बेटी दिव्या से शादी करने जा रहा है।

सुनीता _क्या?

पदमा _हां, ये सच है

सुनीता _राजेश ने मुझे अब तक कुछ नहीं बताया है इस बारे में आख़िर मै उसकी मां हूं जिंदगी का इतना बड़ा फैसला आख़िर वो मुझसे बिना पूछे कैसे ले सकता है।

पदमा _सुनिता तुम जल्दी गांव आ जाओ, कही देर न जो जाए।

सुनीता _दीदी हम कल ही गांव पहुंचती हूं।

सुनीता ने यह बात शेखर के बताया। शेखर को भी राजेश का फिक्र होने लगा।

उसने ट्रेन के लिए टिकट उपलब्ध न होने के कारण वे कार से ही गांव के लिए निकल पड़े।

वह सुबह 6बजे घर से निकले गांव पहुंचते उन्हे रात हो गए।

गांव के घर पहुंचते ही।

सुनीता _भुवन बेटा, राजेश कहा है? बुलाओ उसे,

पदमा ने सारी बाते सच सच बता दिया कि राजेश यहां नही शिव पुर स्थित सेवा आश्रम में है। उसके ऊपर हुवे हमले के बारे में सब बाते बता दो।

सुनीता _दीदी इतना कुछ हो गया और हमे आप लोगो ने बताया ही नहीं।

पदमा _माफ कर दो सुनिता, राजेश ने हमले के बारे में आपको बताने सी मना किया था, तुम डर न जाओ इसलिए। पर बात उसकी शादी तक पहुंच गई है,,, इसलिए तुम्हे बताना जरूरी समझी।

तभी वहां कविता भी आ पहुंची,,

कविता _कैसी हो दीदी, लोगो ने बताया की आप लोग आए हो तो हम लोग मिलने चले आए,,

पदमा _कविता इतना कुछ हो रहा है आप ने भी मुझे तुमने भी मुझे बताया नही,,

कविता _दीदी पदमा दीदी ने तो आपको बताया ही होगा राजेश ने आपको बताने से मना किया था।

पर शादी के फैसले से उसे रॉक तो सकते थे।

कविता _दीदी राजेश एक समझदार लडका है जो भी कर रहा है सोच समझ कर रहा होगा।

वैसे दिव्या बहुत अच्छी लङकी है।

पदमा _बात दिव्या की नही है, बात ठाकुर की है वह जरूर इस शादी के खिलाफ होगा और राजेश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

कविता _दीदी उसकी चिन्ता तो हम सबको है।

हम सब कल वहा चलेंगे, उससे बात करेंगे।

भुवन _ चाची आप लोग चिंता न करे, गांव के सारे लडके तैयार है ठाकुर उसका अब कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

अगले दिन राजेश और दिव्या राजवती, शादी की तैयारी पर ही चर्चा कर रहे थे कि सेवादार ने बताया की कोई व्यक्ति राजेश से मिलने आया है।

राजेश उस व्यक्ति से मिलने गया।

राजेश _लाखन काका आप यहां।

लाखन _राजेश, मुझे पता चला है कि तुम ठाकुर की बेटी से शादी करने जा रहे हो, और यह भी पता चला है कि ठाकुर के आदमियों ने तुम पर जानलेवा हमला किया था, तो तुमसे मिलने चला आया।

ठाकुर डे हम बदला लेना चाहते हैं पर तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो ये बात मुझे कुछ समझ नहीं आया।

राजेश _लाखन काका, गलती ठाकुर ने किया है उसकी बेटियो ने नही, वे बहुत अच्छे लोग हैं, ठाकुर की जुल्मों में उनका कोई हाथ नहीं,ठकुराइन और उसकी बेटियां तो हमेशा लोगो के भला के बारे में ही सोंचती है। अगर आपको लगता है कि दिव्या से शादी के बाद मैं उस ठाकुर को उसके किए की सजा नही दिलाऊंगा, तो ऐसा नहीं है। ठाकुर को उसकी करनी का फल भुगतना ही पड़ेगा।

लाखन _ओह मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। सुना है ठाकुर इस शादी के खिलाफ है वह शादी को रोकने का प्रयास कर सकता है। पर तुम निश्चिंत रहो ठाकुर के आदमी ऐसा कुछ नहीं कर पाएगा। मै अपने साथियों को आस पास तैनात कर दूंगा। वे आस पास नजर रखेंगे। ठाकुर के आदमी अगर आस पास भी नजर आए तो वे बचेंगे नही।

इधर हवेली में,,,

मुनीम _हुजूर, उधर आश्रम में दिव्या और राजेश की शादी की तैयारी चल रही है और आप हाथ में हाथ धरे बैठे हैं, क्या आप भी उस दो टके के लडके को अपना दामाद बनाने के लिए राजी हो गए हैं।

ठाकुर _मुनीम जी मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या

किया जाय। अब तो पत्नी और बेटियां भी मेरे खिलाफ हो गए हैं। रत्नवती ने मुझे धमकी दिया है की मैने अब राजेश को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी किया तो वे घर छोड़ कर चले जायेंगे।

तभी वहां रत्नवती पहुंची,,,

रत्नवती _मै आपको ये बताने आई हूं कि मैं और गीता आश्रम जा रहे हैं, दिव्या और राजेश की शादी हो रही है। क्या आप भी चलेंगे?

ठाकुर _मुझे इस शादी में कोई इंट्रेस्ट नही। मै उस दो टके के लडके को अपना दामाद स्वीकार नहीं कर सकता।

रत्नवती _ठीक है, पर तुम्हे मेरी बात याद है न शादी में विघ्न डालने की कोई भी कोशिश किए तो,,,,

रत्नवती वहा से चली गईं,,,

इधर शाम तक सुनिता, पदमा कविता स्वीटी शेखर और माखन सभी आश्रम पहुंच गए थे।

सेवा दार उन्हें राजवती के पास लेकर गए।

सेवादार _ये इस आश्रम की माता है, इस आश्रम की फाउंडर । माता जी ये लोग राजेश भईया से मिलने के लिए आए हैं।

राजवती _आप लोग कौन है, और राजेश से क्यों मिलना चाहती हो।

सुनीता _मै राजेश की मां हूं। और ये उनके पिता।

राजवती _ओह बड़ी खुशी हुई आप लोग यहां चल आए। आप लोगो के शादी मे शामिल होना बहुत जरूरी था।

राजवती ने सेवादार से सब के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने के लिए कहा।

सुनीता _हमे राजेश सी मिलना था, कहा है वो,,,

राजवती _वे दोनो कुछ काम से गए हैं मै उन्हें बुलाती हूं।

राजवती ने दिव्या और राजेश को बुलाने भेजा।

दिव्या और राजेश दोनो कुछ देर में वहां पहुंचे।

राजेश उन सबको वहा देख कर चौंका,,

राजेश _मां आप लोग यहां,,,

राजेश ने सबका पैर छूकर प्रणाम किया। दिव्या ने भी सबका पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनीता _राजेश मुझे तुमसे कुछ बाते करनी है।

अकेले में,,,

राजेश दिव्या की ओर देखने लगा,,,

दिव्या ने हा में इशारा किया,,,

राजेश _क्या बात है मां सबके सामने भी तो कह सकती हो!

सुनीता _नही मुझे तुमसे कुछ पूछना है।

राजवती _बेटा, जाओ अपने कमरे में अपनी मां को ले जाओ,

राजेश और सुनिता कमरे में गए।

सुनीता _ये सब क्या है? तुम जानते हो ठाकुर हमारा दुश्मन है और तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो, और एक बार अपनी मां से पूछा नही क्या मैंने यही संस्कार दिया है।

राजेश_सॉरी मां मैं फोन करके बताना ही चाहता था, यहां नेटवर्क का इशू था।

सुनीता _राजेश चलो मै तुम्हे यहां से ले जाने आई हूं। तुम मेरे साथ शहर चलोगे।

राजेश _मां ये आप क्या कह रही हो दिव्या जी और मेरी शादी होने वाली है, और तुम मुझे अपने साथ ले जाना चाहतीं हो।

सुनीता _देखो बेटा मै मानती हूं दिव्या एक अच्छी लङकी है पर उसके पिता जी, वो ठाकुर तुम्हे अपना दामाद कभी स्वीकार नहीं करेगा। वो तुम्हे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

राजेश _मां क्या आप चाहती हो तुम्हारा बेटा किसी के नजरो में गिर जाए। जिस लङकी ने मेरी दिन रात सेवा की मेरी जान बचाई, उसे मै जमाने के ताने से मरने के लिए छोड़ दू।

सुनीता _बेटा तुम क्या कहना चाहते हो मै कुछ समझा नही।

राजेश ने सुनिता को सारी बाते सच सच बता दिया, किस प्रकार दिव्या ने उसकी जान बचाने के लिए अपनी इज्जत दाव में लगा दी, और वह आज उसके बच्चे की मां बनने वाली हैं।

उस बच्चे को गिराया नही वह उसे जन्म देने सब कुच छोड़कर इस आश्रम में रहने चली आई। कितना कष्ट सहा है राजेश के लिए उसने।

राजेश _बोलो मां सब कुछ सच जानने के बाद भी क्या तुम चाहती हो मै दिव्या के उसकी हालत पार छोड़कर तुम्हारे साथ शहर चला जाऊ। तो ठीक है चलो मै माता जी से कह देता हूं,,,

सुनीता रुक गई,,

राजेश _मां क्या हुआ?

सुनीता _नही बेटा, सच जानने के बाद, मै जान गई हूं की दिव्या ज्यादा प्यार करने वाली लङकी तुम्हे और नही मिलेगी। अब जो होगा देखा जाएगा बेटा, दिव्या तुम्हारी दुलहन जरूर बनेगी।

राजेश _मां

राजेश ने सुनिता को अपने गले से लगा लिया। मां मुझे यकीन था, तुम यहीं सच जानने के बाद यही फैसला करोगी।

दोनो कमरे से बाहर निकले।

सुनीता _दिव्या बेटी मेरे पास आना।

दिव्या _जी मां जी,,,

सुनीता_बेटी राजेश ने मुझे सब सच बता दिया, उसकी जान बचाने के लिए तुमने क्या कुछ नहीं किया।

तुम एक लङकी नही देवी हो बेटा, तुम मेरी बहु बनो इससे बड़ी खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती।

दिव्या _मां जी मैंने जो कुछ भी किया वो मेरा फर्ज था।

इधर सभी लोग सुनिता के की बात सुनकर हैरत में थे।

सुनीता _अब तो तुम दोनो की शादी धूमधाम से सारी रीति रिवाज और रश्म से करेंगे। कल से ही सारी रस्में सुरु हो जायेगी।

कुछ देर बाद ही वहा रत्नावती और गीता भी वहा पहूंच गई।

रत्ननावती और सुनिता ने शादी की तैयारी शुरू कर दी। अब बचे हुए हर दिन शादी की कोई न कोई रश्म होने लगें।

पूनम भुवन और आरती भी वहा पहूंच गए। शादी के रस्मों में शामिल हुवे।

हल्दी रस्म

सभी बारी बारी से राजेश पर हल्दी लगा रहे थे।

राजेश सिर्फ एक छोटा सफेद कपड़ा कमर पर लपेटा था।

पूनम _ने राजेश के पुरे शरीर पर हल्दी मल रही थी।

सभी औरते आपस में हसी ठिठोली कर रहे थे। राजेश को छेड़ रहे थे।

तभी कविता ने पुनम को इशारा किया।

राजेश _भाभी हो गया न और कितना हल्दी लगाओगी।

पूनम _देवर जी, अभी सभी जगह कहा लगा है। एक जगह तो अभी बांकी है वहा पर हल्दी लगाने का अधिकार भाभी का ही होता है। इसलिए यह जिम्मेदारी मुझे सौंपा गया है।

पूनम ने हाथ में हल्दी लेकर सीधा राजेश के अंडर वियर के अंदर घुसा दिया।

राजेश चौंक गया।

सभी औरते हसने लगे।

पूनम राजेश के लंद और अंडकोष पे अच्छे से हल्दी मलने लगा।

राजेश _भाभी क्या कर रही हो छोड़ों न।

पदमा _बाबुवा लगाने दे अच्छे से तुम्हारी भाभी को सबसे ज्यादा जरूरत तो हल्दी लगाने की यही पर होती है।

सभी लोगो हंसने लगे।

सुनीता भी अपनी मुंह छिपाकर हसने लगीं।

कविता _पूनम अगर तुमने लगा लिया तो हटो मुझे लगाने दो।

पूनम _हा भई जानती हू ऐसी खास जगह पर हल्दी लगाने का अधिकार भाभी की बाद चाची का ही होती है।

पूनम वहा से हट गई। अब कविता ने राजेश के पुरे शरीर में हल्दी मलने के बाद हाथ में हल्दी लेकर राजेश के अंडर वियर में हाथ घुसा दिया, और राजेश के अंडकोष में हल्दी लगाने लगी। उसके लंद को हल्दी और तेल से मूठ मारने लगी।

राजेश गर्म हो गया न चाहते हुए भी उसका लंद खडा हो गया

बड़ा उभार देखकर सब समझ गए की राजेश का खडा हो गया है। सभी मुंह छिपाकर हसने लगे।

राजेश शर्मिंदा हो रहा था।

स्वीटी _मां , देखो तो भईया का घोड़ा तो,,,

सुनीता _चुप बेशरम,,,

सभी औरतों ने बारी बारी से राजेश के पुरे शरीर में हल्दी मला, पर राजेश के लंद पार हल्दी लगाने का अधिकार भाभी और चाची को ही था।

सुनीता ने देखा की राजेश का लंद हल्दी रश्म के बाद भी तना huwa है अभी कुछ और रस्म निभाने है और पुरुष भी उपस्थित रहेंगे।

सुनीता चिंतित हो गई,, अगर ऐसे ही खड़ा रहा तो राजेश पर सब हसेंगे।

राजेश बेटा अब बांकी का रस्म कल करेंगे । जाकर अपने कमरे में आराम करो।

उधर राजवती, गीता और रत्नवती और आश्रम की सेविकाएं, दिव्या के पुरे शरीर में हल्दी मल रही थी। सेविकाओं ने तो दिव्या के boor में भी अच्छे से हल्दी मल दी। दिव्या शर्म से पानी पानी हो गई। सभी औरते हंसने लगी। हल्दी रस्म पूरी होने के बाद।

सभी लोग अपने अपने कमरे मे जाकर सोने लगे।

रात में राजेश आराम कर रहा था। तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

राजेश ने दरवाज़ा खोला..

राजेश _भाभी आप इस वक्त,,,

कुछ काम था क्या?

पूनम _मै ये देखने आई थी कि तुम्हे किसी चीज की जरूरत तो नही।

राजेश _भाभी, मुझे तो किसी चीज की जरूरत नहीं है अभी,,

पूनम _अच्छा देवर जी, फिर ये अब तक खड़ा क्यू है?

पूनम ने राजेश के अंडरवियर के ऊपर से ही लंद को पकड़ कर सहलाते हुए कहा।

राजेश _भाभी, ये क्या कर रही हो छोड़ों कोई आ गया तो।

पूनम _अरे कोई नहीं आएगा। सब सो रहे हैं। मै तो तुम्हारी मदद के लिए ही आई हूं मुझे पता था कि तुम्हारा घोड़ा जब खड़ा हो जाता है तो कुंआ का बिना पानी पिए बैठता नही। इसलिए तुम्हारे पास आई हूं। तुम मेरी कुंवे का पानी अपने घोड़े को पिलाकर इसकी प्यास बुझाओ।

पूनम ने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया। और राजेश का अंडरवियर खीच कर लंद बाहर निकाल कर चूसने लगी।

राजेश पहले ही गर्म था वह और भी गर्म होने लगा। उसका लंद झटका मारने लगा।

तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

राजेश और पूनम घबरा गए।

पूनम _देवर की अब क्या होगा? कही दिव्या जी होगा?

राजेश _एक काम करो तुम बाथरूम में छिप जाओ।

पूनम _बाथरूम में जाकर छिप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला_चाची आप, इस वक्त कुछ काम था क्या?

सविता _मुझे नींद नहीं आ रही थी तो तुमसे बात चीत करने चली आई।

राजेश _पर इस वक्त?

सविता _क्यू क्या हुआ? तुम तो ऐसे चौंक रहे हों जैसे पहली बार रात में तुम्हारे कमरे में आ रही हूं।

राजेश _पर चाची जगह तो अलग है न।

सविता _मैने खुद को समझाने की बहुत कोशिश की पर मेरा मन नही माना,,,

राजेश _बोलो क्या बात करनी है।

सविता _जब से तुम्हारे मूसल पे हल्दी लगाया है मेरा मन बडा बेचैन है।

मेरे अंदर का पानी बाहर निकल कर मुझे परेशान कर रहा है वैसे भाई कितने दिन हो गए। पानी निकालने के खेल खेले हुए । कल तुम्हारी शादी हो जायेगी। उसके बाद तो तुम दिव्या के ही होकर रह जाओगे। इसलिए आज मेरे शरीर में जो पानी जमा है उसे बहा दो ताकि तुम्हारी यादों में तड़पती न रहु।

सविता राजेश का अंडरवियर खीच कर उसके लंद बाहर निकाल कर चूसने लगी।

राजेश _आह चाची, आह क्या कर रही हो?

आह कोई आ जाएगा?

राजेश सवीता की बालो को सहलाने लगी।

कुछ देर बाद फिर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

दोनो चौंक गए।

सविता डर गई,,,

कौन हो सकता है अब क्या करे?

राजेश _चाची आप आलमारी में छुप जाओ।

सविता अलमारी में छिप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला।

राजेश _ताई आप इस वक्त, कुछ काम था क्या?

पदमा _तू सोया है कि नही बस पता करने आई थी। हल्दी रस्म के समय तू उत्तेजित हो गया था। तो मुझे लगा की तुम्हे आज ठीक से नींद नहीं आएगी। और देखो मेरा अनुमान सच निकला तुम अभी तक जग रहे हो।

और ये तुम्हारा सांप भी। पदमा ने राजेश के अंडरवियर की ओर इसारा करते हुवे कहा। वैसे सच कहूं तो हल्दी रश्म के समय औरतों की हसी ठिठोली छेड़ छाड़ से मैं भी गर्म हो गई थी, मुझे भी नींद नहीं आ रही थी। इसलीय तुम्हारे पास आई हूं।

पदमा ने राजेश के बेड पर लेट गई और अपनी पेटी कोट और साड़ी ऊपर उठा दी।

पदमा _बेटा, अपनी ताई को आज जमकर बजा और उसकी प्यास बुझाओ।

राजेश बेड में चढ़ गया और अपनी दो उंगलियां पदमा की योनि में घुसा कर अदंर बाहर करने लगा।

फिर अपना खड़ा लंद उसकी योनि में सेट कर गाच से पेल दिया। लंद उसकी योनि को चीरकर आधे से ज्यादा अदंर घुस गया।

पदमा कराह उठी। राजेश ने फिर एक जोर जोर धक्का मारा।

पदमा की boor फाड़कर पुरा अंदर घुस गया लंद का टोपा सीधा उसके बच्चेदानी से टकराया।

पदमा सिसकने चीख उठी।

अब राजेश पदमा की ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी चूची को थाम लिया और मसल मसल कर तेज तेज चोदने लगा।

पदमा की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगी। पूनम और सविता उसकी सिसकारियां सुनकर और गर्म हो गई। अपनी chut सहलाने लगी।

तभी फिर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

पदमा और राजेश चौंक गए।

पदमा _बेटा अब क्या होगा? हम पकड़े गए तो बहुत बदनामी होगी।

राजेश _ताई, तुम तुम बेड के नीचे छुप जाओ, मै देखता हूं। कौन है।

पदमा बेड सेउतरी अपने कपड़े ठीककी फिर बेड के नीचे छुप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला _मां, आप इस वक्त।

सुनीता _हूं देखने आई थी की मेरा बेटा अब तक सोया है कि नही।

तुम्हारे कमरे किसकी आवाज आ रही थी बेटा।

राजेश _मां किसी की भी तो नही, लगता है ये आपका कोई वहम है।

सुनीता _कौन छिपा है बाहर निकलो? नही तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

तीनो औरते बाहर निकली।

सुनीता तीनो को देखकर सब चौंक गई। पदमा भी पूनम और सविता को देखकर चौंक गई।

सुनीता _ये सब क्या है? कल राजेश की शादी होने वाली है। और तुम लोग, ये हरकत कर रहे हों।

दिव्या या उसके परिवार के किसी को भी पता चल गया तो।

पदमा _सुनिता हमे माफ कर दो, हल्दी रश्म के हसीं ठिठोली छेड़ छाड़ से हम गर्म हो गए थे। नींद नहीं आ रही थी।

तो हमने सोचा कल तो राजेश की शादी हो जायेगी फिर हम उससे संभोग का सुख फिर नही मिलेगा इसलीये हमारा मन नही माना और हम यहां चले आए।

सुनीता _राजेश तुम भी इन लोगो की बात में आ गए।

पदमा _वो क्या मना करेगा बेचारा, उसका तो हल्दी रश्म के बाद से अब तक खड़ा huwa है।

सभी औरते मुंह छिपाकर हसने लगीं।

सुनीता ने राजेश के अंडर वियर की ओर देखा। एक बडा उभार देख कर समझ गई।

राजेश का खड़ा हुआ है।

सुनीता _राजेश तुम क्या चाहते हो?

राजेश _आप लोगो की खुशी।

सुनीता _हमे खुश करने के लिए क्या अपनी बीबीi से धोखा करोगे।

राजेश _मां मैने उसे प्रपोज करने से पहले ही बता दिया था कि मेरे कई औरतों से संबंध है।

सुनीता _क्या?

राजेश _हां मां।

सुनीता _फिर भी वो शादी के लिए मान गई।

राजेश _हा मां।

सुनीता _शादी के पहले तुम्हारे कई औरतो से संबंध भले ही हो पर बेटा मई नही चाहती तुम शादी के बाद भी दिव्या से छिपाकर तुम दूसरी औरतों के साथ संबंध बनाओ।

राजेश _आप ठीक कह रही है, मैं दिव्या जी से छिपाकर किसी से संबंध नहीं बनाऊंगा।

सुनीता _मुझे तुमसे यही उम्मीद है बेटा।

पदमा _पर सुनिता आखिरी बार तो हमें राजेश से संभोग सुख ले लेने दो। फिर हम आपसे वादा करते है। हम राजेश से कभी संभोग के लिए नही कहेंगे।

सुनीता कुछ देर सोची,,

ठीक है पर ये आखिरी बार है जितनी मजा लेना है ले लो।

फिर मौका नहीं मिलेगा।

सभी औरते खुश हो गई।

उसके बाद सभी औरते नंगी। हो गई।

पदमा _सुनिता तू क्यू खड़ी है। तुम भी आखरी बार मजा ले लो अपने बेटे से चुदने का।

पूनम उतार दो सुनिता के कपड़े।

सुनीता की कपड़े उतार कर उसे भी नंगी कर दी।

सभी औरते बारी बारी से राजेश का लंद चूसने लगी।

पूनम _देवर जी तुम मेरा दूदू पियो। दूदू पीने से तुम्हे ताकत मिलेगा। हम चारों की चीखे निकालने के लिए।

राजेश पूनम की चूची पकड़ कर मसल मसल कर गटागट उसकी दूध पीने लगा।

उसके बाद राजेश बेड पर लेट गया।

सविता _पहले कौन सवारी करेगा लंद की।

सुनीता _पहले हक मेरा है मै उसकी मां हूं। इसलिए उसके घोड़े की सवारी पहले मैं करूंगी।

सभी औरते मुस्कुराने लगी।

सुनीता बेड पार चढ़ गई और राजेश के लंद को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी योनि द्वार पर रखी और बैठ गई। लंद सरसराता huwa जड़ तक अन्दर घुस गया।

राजेश ने अपने दोनो हाथो से उसकी चूतड पकड़ लिया।

सुनीता उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश भी ऊपर की ओर धक्के लगाने लगा। लंद गच घच्छ अंदर बाहर होने लगा। सुनिता जन्नत में पहुंच गई वह चीखने चिल्लाने लगी।

पदमा _ये रण्डी तो खूब चीख रही है इसकी आवाज सुनकर पुरा आश्रम उठ जाएगा। उसके मुंह में कपड़ा ठूंस।

सविता ने अपनी पेंटी सुनिता के मुंह में ठूंस दिया।

सुनीता कुछ देर में झड़ गई।

अब पदमा ने सुनिता का स्थान ले ली। वह भी लंद पर उछल उछल कर चुदने लगी। उसे चीखती देख पूनम ने अपनी सास के मुंह में अपनी पेंटी ठूस दी।

कुछ देर में ही पदमा भी झड़ गई।

उसके बाद सविता ने पोजीसन सम्हाली। सविता के बाद पूनम भी राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

और वह भी झड़ गई।

अब राजेश ने सुनिता को kutiya बना दिया और पीछे से अपना लंद उसकी boor में घाप से पेल दिया। फिर दनादन चोदना शुरु कर दिया।

उसके बाद राजेश ने तीनो को घोड़ी बना कर बारी बारी पेलने और उन सबकी चीखे निकालने लगा।

राजेश ने सुनिता को गोद में उठाया और उसे अपने land में बिठा कर हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा। एक एककरके सभी औरतों को इसी पोजीशन में चोदा।

अब राजेश ने सुनिता को घोड़ी बनाया और उसकी गाड़ में लंद घुसा कर पेलना शुरु कर दिया। सुनिता चीखने लगी तो पूनम ने अपनी पेंटी उसकी मुंह में ठूंस दी। उसके बाद बारी बारी से सभी की गाड़ मारकर फाड़ दिया। रात भर चुदते रहे। सुबह चार बजे तक सभी थक कर वही राजेश से लिपट कर सो गए थे। सुबह 5बजते ही वे वहा से निकल कर अपने अपने कमरे में चली गई।
 
प्लांट के अधिकारियो ने मजदूर यूनियन के पुराने पदाधिकारियों से किसी तरह संपर्क बनाया और उन्हे गुप्त रूप से रात 8बजे बंगले पे कंपनी की मालकिन सुजाता मैडम से मिलने के लिए कहा।

इधर राजेश कंपनी के अधिकारियो से मोबाइलसे संपर्क में रहा और जानकारी लेता रहा।

अधिकारियो ने राजेश को बताया कि मजदूर यूनियन के पुराने पदाधिकारी मैडम से मिलने के लिए तैयार हो गए हैं।

रात के 8बजे सभी पुराने पदाधिकारी लोगों से छिपते छिपाते किसी तरह बंगला में पहुंचे। जब सभी पूर्व पदाधिकारी मीटिंग हॉल में इकठ्ठा हो गए तब राजेश और सुजाता ने हाल में प्रवेश किया।

सभी पूर्व पदाधिकारियों ने सुजाता का अभिवादन किया।

प्लांट के मुख्य प्रबंधक _मैम ये महेंद्र सिंग है, मजदूर यूनियन के पूर्व अध्यक्ष।

महेंद्र सिंग ने हाथ जोड़ सुजाता को नमस्कार किया।

महेंद्र सिंग _मैडम जी आपने हमे कैसे याद किया?

राजेश _महेंद्र सिंग, तुम प्लांट की स्थिति से वाकिफ हो, हड़ताल के कारण हमारे कंपनी मुसीबत बे आ गई है। अगर हड़ताल कुछ और दिन चला तो प्लांट बंद करना पड़ेगा, और यह प्लांट बंद हो गया तो यहां काम करने वाले गरीब मजदूरों के लिए हित में नहीं होगा। इन बातों को ध्यान में न रखते हुए वर्तमान यूनियन लीडर अपने मांगो को लेकर जिद पर अड़ा हुआ है, वह समझौता के लिए तैयार ही नहीं है। आप इस यूनियन के पुराने लीडर रहे हैं। आप से कई मज़दूर जुड़े हुए होंगे। आप मजदूरों और कंपनी दोनों के हित को ध्यान में रखकर, आप हमारा साथ दीजिए।

महेंद्र सिंग_ साहब, हम लोग के साथ साथ कई मजदूर भी चाहते है कि हड़ताल को वापस लिया जाए लेकिन ये राकेश सिंह और उसके साथी गुंडे प्रवृत्ति के लोग हैं उसके खिलाफ जाने से सभी डरते हैं। कोई उनका विरोध नहीं कर पा रहा है।

कम्पनी की हालत जानकर हम भी काफी चिंतित है।

कम्पनी की भलाई के लिए हम आपके साथ है बोलिए हमे क्या करना होगा?

राजेश _अगर तुम लोग हमारा साथ दो तो राकेश सिंह और उसके साथी किसी का कुछ नहीं कर पाएगा।

अन्य पधाधिकारी _बोलिए साहब हमे क्या करना है, हम आपके साथ है।

राजेश _देखिए, जीतने भी मज़दूर हड़ताल वापस लेने के पक्ष में है आप लोग उनसे सम्पर्क कर उन्हे एक जुट करो।

कल मैम हड़ताल मंच पर सभी मजदूरो के सामने अपनी बात रखेगी तुम लोग भीड़ में अलग अलग जगह बैठे रहोगे और मैडम की बातो का समर्थन करोगे।

बस इतना कर दिए तो समझो काल हड़ताल टूटने से कोई रोक न सकेगा।

महेंद्र सिंग _ठीक है साहब हम आपके बताए अनुसार ही कार्य करेंगे?

राजेश _तो ठीक है, कल प्रातः 12बजे मैम मजदूरों के बीच अपनी बात रखेगी, आप सभी अपने समर्थकों को तैयार रखना और इस बात का ध्यान रखना की राकेश और उसके साथियों को इस बात का कोई भनक भी न लगे।

महेंद्र सिंग _ठीक है साहब, आप चिंता न करें इस बात की जानकारी हमारे विरोधियों को बिलकुल नहीं होगी।

राजेश _तो ठीक है आप लोग जाइए और कल की तैयारी में लग जाइए।

सभी लोग वहा से चले गए।

लोगों के जाने के बाद प्लांट के एक अधिकारी ने कहा मैडम भोजन तैयार है, आप लोग डिनर कर लीजिए।

सुजाता _ठीक है, चलिए सभी डिनर कर लेते हैं।

डिनर करने के बाद, अधिकारी अपने घर चले गए।

इधर राजेश और सुजाता अपने कमरे में पहुंचे।

राजेश, सुजाता के कमरे में ही रह कर उसे कल मज़दूरों के सामने किस तरह अपनी बाते रखना है समझाने लगा।

सुजाता _पर राजेश, मज़दूरों के बीच कही मामला बिगड़ गया तो, वहा पर हिंसा भी हो सकता है।

राजेश _हमे हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना होगा, यहां के थाना प्रभारी से कह दो की मैं कल मज़दूरों के बीच अपनी बातो को रखने जा रही हूं किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो उसके लिए अपना पुलिस फोर्स तैनात रखे।

सुजाता _हां, ये ठीक रहेगा।

राजेश _अच्छा मैम रात काफी हो गई है अब आप आराम कीजिए, मै भी अपने कमरे में जाता हूं।

सुजाता _ठीक है, राजेश, गुड नाईट। कल सुबह मिलते है।

राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।

अगले दिन, हड़ताल स्थल पर सभी पूर्व पदाधिकारी और उसके समर्थकअपनीतैयारी के साथ मौजूद थे ।

करीब बारह बजे के समय सभी मज़दूर धरना स्थल पर पहुंच गए थे।

मज़दूरों की काफी भीड़ थी। थाना प्रभारी भी अपने दल बल के साथ हड़ताल स्थल पर उपस्थित हो चुके थे।

तभी अधिकारियो ने राजेश को काल कर कहा कि सब तैयारिया हो चुकी है धरना स्थल पर मज़दूरों की काफी भीड़ है। आप लोग धरने स्थल पर पहुंच जाइए।

राजेश _ठीक है हम लोग अभी पहुंच रहे हैं।

मैम चलिए, अब सही समय आ गया है, अपनी योजना को सफल बनाने का।

सुजाता _राजेश सब ठीक तो होगा न।

राजेश _मैम सब ठीक होगा, आप भरोसा रखे।

सुजाता और भगत धरने स्थल के लिए निकल पड़े साथ में बॉडी गार्ड भी था।

कुछ समय में दोनों धरना स्थल पर पहुंच ठीक कुछ समयपहले मुख्य प्रबंधक भी वहा पर पहुंचे थे वह सुजाता और राजेश का इंतजार कर रहा था।

अब तीनों मंच कि और आगे बड़े सभी मज़दूर कंपनी की मालकिन को आश्चर्य से देख रहे थे।

उन्हे इसकी उम्मीद नहीं थी की धरना स्थल पर मैडम पहुंचेगी।

मज़दूर संघ भी आश्चर्य में थे।

मंच पर एक नेता भाषण दे रहे थे।

जैसे ही उसने कंपनी की मालकिन को आते देखा, वह वह कम शब्दों में ही अपनी बाते खत्म कर दी।

प्रबन्धक ने माइक संभाला

उसने माइक पर मजदूरों को बताया की कंपनीआपलोगो की अधिकांशमांगे मान ली है, और आप आप लोगों के लिए ये खुशी की बात है कि मालकिन खुद ही आप लोगो से बात करने आई है।

उम्मीद है आप लोग उनकी बातों को ध्यान से सुनेंगे और मजदूरों और कंपनी की भलाई के लिए हम किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाएंगे।

सुजाता ने माइक अपने हाथो में ले लिया,

सुजाता _मेरे कंपनीके मज़दूर भाईयो, मै आज आपके बीच मालकिन बनकर नही आई हूं। हमारा कंपनी एक परिवार है और मैं और आप सभी इस कम्पनी के सदस्य है, और इस परिवार के मुखिया होने के नाते आपलोगो से मिलने आई हूं।

मेरे भाईयो आप लोगो के मेहनत के कारण से ही हमारा कंपनी बुलंदियों को छू पाया था। लेकिन आज आप लोगो की नाराजगी के कारण हमारा यह कंपनी अपने बुरे दौर से गुज़र रहा है।

मैं आप लोगों को यह बताने आई हूं की हमारी कंपनी आपकी सभी जायज मांगों को मान ली है।

कुछ चीजों पर गतिरोध बना हुआ है जिसे हमे आपस में विचार विमर्श कर उसे भी दूर करना है।

हमारी कंपनी सदा अपने हर सदस्यों का ख्याल रखा है। और आगे आगे भी रखेगी।

मैं यह घोसना करती हूं कि किसी भी मज़दूर भाई का सेवा के दौरान आकस्मिक निधन होता है तो उसके परिवार को 10लाख रुपए दिया जाएगा।

उसके परिवार केएक सदस्य को सेवा पर रखा जाएगा।

किसी भी मज़दूर भाई के साथ कुछ हादसा होता है तो उसका पूरा इलाज कंपनी के द्वारा कराया जाएगा और उसके परिवार को मजदुरी भी मिलती रहेगी।

जब आप इस कम्पनी से सेवामुक्त हो जायेंगे तो जीवकोपार्जन के लिए पेंशन का प्रावधान बनाया जायेगा।

जहां तक वेतन में 50% वेतन में वृद्धि का सवाल है अभी तत्काल में 12% वेतन में वृद्धि की घोषणा करती हूं। यह 12 %वृद्धि हर साल किया जाएगा। जो आसपास के किसी भी कंपनी से कही अधिक है।

साथ ही आपको यह भी बताना चाहूंगी आपको दिवाली पर जो बोनस दिया जाता है वह बोनस अब कंपनी को प्राप्त होने वाले लाभ के बराबर दिया जायेगा।

मेरे भाईयो हमारी कंपनी सदेव आप लोगों के साथ खडा है, आप लोगो की भलाई के लिए कार्य किया है, मै आप लोगों को विश्वास दिलाती हूं की जब कंपनी की स्थिति अच्छी होगी तो आपके हित में और भी फैसले लिए जायेंगे।

अब आगे हमे कंपनी के हित के लिए कार्य करना होगा। क्यू की आज कंपनी की जो स्थिति है। उससे आप सभी भली भांति परिचित हैं।

आप लोगों से मै निवेदन करती हूं की आप लोग कंपनी की हित को ध्यान में रखते हुए अपने काम पर लौट आए, क्यू की कंपनी के हित में ही हम सबकी हित छुपा huwa है।

मैने अपनी बात आप सबके सामने रखी, अब मैं आप लोगों का विचार सुनना चाहती हूं।

तभी महेंद्र सिंग मंच पर आ गया,,

महेंद्र सिंग _भाईयो, हमारी कंपनी की मुखिया का बाते मैने सुना, वह हमारी लगभग सभी मांगे मान चुकी है। भाईयो आज कंपनी की जो स्थिति हैहम सब उससे अंजान नही है, अगर हम सब अपनी जिद पर अड़े रहे तो पता नही कंपनी का क्या होगा? हो सकता है कंपनी ही बिक जाए।

क्या आप चाहते हैं हमारी कंपनी बिक जाए।

बोलिए, यह खामोश रहने का समय नहीं है।

मजदूरों ने कहा नही हम कंपनी को बिकने नही देंगे।

हा मै जानता हूं की हमारे कोई भी मज़दूर भाई नही चाहते की कंपनी बिक जाए।

कम्पनी की भलाई के लिए जरूरी है की जब हमारी अधिकांश मांगे मान ली गई हो तो हमे भी उदार दिखाते हुए काम पर लौट जाना चाहिए।

बोलो कौन कौन मेरे बातो से सहमत हैं।

एक एक करके खड़े होकर पूर्व के मज़दूर यूनियन के पदाधिकारी खड़े होकर महेंद्र सिंग को अपना समर्थन देने लगे।

धीरे धीरे वे सभी मज़दूर जो राकेश सिंह के भय से अपनी आवाज नहीं उठा पा रहे थे वे भी खड़े होकर महेंद्र सिंग का समर्थन करने लगे।

जब राकेश सिंह ने देखा मामला बिगड़ रहा है उसने माइक सम्हाल ली।

राकेश सिंह _साथियों, इन लोगो के बहकावे में आप लोग मत आइए यह महेंद्र सिंग भी कंपनी मालकिन से मिला huwa है। अगर हम आज झुक गए तो हमारी मांगे कभी पूरी नहीं होगी।

तभी एक मज़दूर ने खड़े होकर कहा,

जब कंपनी रहेगी तभी तो हम मांग कर सकेंगे। जब कंपनी ही नहीं रहेगी तो किससे मांग करेगें।

हम तुम्हारे बहकावे में नहीं आएंगे।

आपने हमे बहुत गुमराह किया है।

अब हम वही करेगें जो महेंद्र बाबू कहेंगे।

क्यों भाईयो?

सभी मज़दूर चिल्लाने लगे,

महेंद्र बाबू हम आपके साथ है।

महेंद्र बाबू जिंदा बाद, सुजाता मैडम जिंदा बाद।

तभी मज़दूर यूनियन के एक सदस्य मंच पर आ गया।

साथियों आप लोगो ने मुझे भी हौसला बड़ा दिया सच्चाई सब के सामने रखने की, अब तक मै चुप था क्यू कि मुझे डर था की अगर मैने सच्चाई बता दिया तो यूनियन के पदाधिकारी मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

साथियों मैने खुद ही अपने आंखो से देखा है यूनियन लीडर को हड़ताल न वापस लेने के लिए हमारे कंपनी के लोगो कुछ लोगो से पैसा लेते हुए।

सभी मज़दूर क्रोधित हो गए,

चिल्लाने लगे, मारो साले को, मज़दूर मंच की ओर बड़ने लगे।

राकेश _ये झूठ बोल रहा है, मुझ पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है।

पर मज़दूर माने नही, और वर्तमान यूनियन के सभी पदाधिकारियों को पीटने लगे।

पुलिस वालो ने मजदूरों को रोकने का बहुत प्रयास किया।पर मज़दूर रुके नहीं।

कुछ लोग राकेश सिंह को मंच से दूर ले गए वहां मजदूरों ने जमकर पिटाई किया।

मामला बिगड़ता देख राजेश ने सुजाता को माइक पर सबको शांत हो जाने के लिए बोलने कहा।

सुजाता _कृपया, आप सभी से निवेदन है कि आप सभी शान्त हो जाइए।

महेंद्र सिंह ने भी कहा साथियों अपने गुस्सा को काबू में रखिए और शांत हो जाइए।

मजदूरों ने यूनियन के पदाधिकारियों की पिटाई रोक दिया।

महेन्द्र सिंग_ भाईयो, इन लोगो को छोड़ दीजिए, कंपनी फैसला लेगी की इनके साथ क्या करना है।

सुजाता _इन लोगो ने लालच में आकर, कंपनी और मजदूरों दोनों के लिए मुसीबत खड़ी की है इसलिए कंपनी सेइन लोगो को बाहर निकाला जाता है।

सभी यूनियन पदाधिकारी की हालत पिटाई से खराब हो चुकी थीं।

वे वहा से जानें में ही अपना भलाई समझा।

अपमान का घुट पीकर वे सभी वहा से चले गए।

महेंद्र सिंह _साथियों, कंपनी को हमारी हड़ताल की वजह से काफी नुकसान पहुंचा है। अब हमारा फर्ज है की हम दिन रात मेहनत कर हमारी कंपनी का मान सम्मान फिर से से वापस दिलाए। हम सबको आज से ही अपने काम पर लग जाना चाहिए।

मैडम जी मै हम सभी मज़दूर भाईयो की ओर से आपसे माफी मांगता हूं।

हम लालची लोगो के बहकावे में आकर अपने कंपनी के साथ साथ अपने ही लिए गड्डे खोद रहे थे।

सुजाता _भाईयो, जो होना था हो गया, कंपनी को आप लोगो की जरूरत है। आप लोग अपने कार्य पर लग जाइए। कंपनी आपके हितों की रक्षा करेगी मै यह आप सभी से वादा करती हूं।

सभी मज़दूर चिल्लाने लगे, सुजाता मैडम ,जिंदा बाद सुजाता मैडम,जिंदा बाद।

फिर सभी मज़दूर फिर से कारखने की ओर चलने लगे। कारखाने का सायरन बजने लगा।

जब सभी मज़दूर अपने कार्य में लग गए।

वहा पर काफी देर तक महेंद्र सिंग, सुजाता राजेश और प्लांट के मुख्य अधिकारियो के बीच सलाह मशविरा होता रहा।

महेंद्र सिंग ने भरोसा दिलाया की आगे ऐसी स्थिति कभी नहीं आएगी।

उसके बाद राजेश और सुजाता, बंगला में आ गए।

सुजाता, राजेश को गले से लगा ली।

ओह राजेश आखिर तुमने कर दिखाया।

राजेश _मैम मैने क्या किया? जो कुछ भी किया आपने किया मैने तो सिर्फ मार्गदर्शन किया।

अब मीडिया वालो को बोलो की सभी न्यूज चैनलों पर यह खबर चलाए।

सुजाता के कहने पर सभी न्यूज चैनलों ने यह खबर चलाने लगे की, सुजाता एंडविशाल ग्रुप्सकी सोनपुर स्थित सीमेंट प्लांट में मजदूरों ने हड़ताल खत्म कर आज से ही काम पर लौटे।

जिसका सकारात्मक असर शेयर मार्केट पर पड़ा और कुछ ही देर में सुजाता की कंपनी के शेयर में तेजी आने लगा।

इधर रीता के सीईओ ने यह बात रीता को बताई की सुजाता की सीमेंट प्लांट के मजदूरों ने हड़ताल वापस ले लिया है।

रीता _हूं, जानती थी यही होने वाला है। उस लड़के के लड़के ने आखिर कर दिखाया।

रीता ने सुजाता को काल की,

सुजाता _बोलो रीता।

रीता _सुना है मजदूरों ने हड़ताल वापस ले लिया।

सुजाता _हां,re, ये सब राजेश की वजह से हो पाया।

रीता _ बधाई हो।जानती हूं, राजेश कुछ न कुछ जरूर करेगा।

वैसे कब वापस आ रही हो।

सुजाता कल दोपहर में निकलेंगे।

रीता _ठीक है, तुम वापस आओ फिर मुलाकात करते हैं।

सुजाता ने निशा को काल की।

सुजाता _बेटी, कैसी हो? तुम्हारे डैड कैसे हैं?

निशा _मॉम मैऔरडैड ठीक है ।आप वहा ठीक तो है न।

निशा _हां बेटा मै भी बिलकुल , बेटी एक खुशखबरी है। मजदूरों ने हड़ताल वापस ले लिया है और आज से ही काम पर लौट आए है।

निशा _मॉम, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है मॉम।

सुजाता _हा बेटा, ये सब राजेश की वजह से हो पाया।

निशा _मॉम, अब आप लोग जल्दी से वापस आ जाओ। आपके बिना यहां अच्छा नही लग रहा।

सुजाता _कल दोपहर को हम घर के लिए निकलेंगे बेटा, कुछ काम है उसे निपटा कर।

अच्छा बेटा मै फ़ोन रखती हूं अपना और अपने पिता जी का ख्याल रखना।

निशा _ओके मॉम, लव यू।

सुजाता _लव यू टू बेटा।

निशा फ़ोन रखने के बाद,,, अपने कमरे में बेड में लेट कर,,

ओह राजेश आखिर तुमने कर दिखाया,,

वह अपनी मोबाइल के गैलरी पर रखी राजेश के फोटो को देखने लगी और मंद मंद मुस्कुराने लगी।

इधर राजेश और सुजाता डिनर करने के बाद फिर से प्लांट पे काम काज का जायेजा लेने के लिए चला गया।

दिनभर वही रुक कर काम काज देखते रहे जब वहा से लौटे तो रात के 8बज चुके थे।

बंगला में आने के बाद दोनों अपने कमरे में फ्रेश होने लगे, कुछ देर आराम करने के बाद, नौकरानी ने कमरे में आकर डिनर के लिए पूछा।

सुजाता ने नौकरानी को डिनर की तैयारी करने को कह दिया।

और राजेश के कमरे में चली गई।

सुजाता _क्या कर रहे हो राजेश?

राजेश _मैम आप, कुछ नहीं बस आराम कर रहा था।

सुजाता _मुझे लगता हैं तुम किसी के याद में खोए थे।

राजेश _मैम मै किसकी याद में खाऊंगा।

सुजाता _अपनी किसी गर्लफ्रेंड की।

कौन है वो खुशनशीब मै भी तो जानू?

राजेश _मैम, लड़कियों में तो सिर्फ दो ही दोस्त हैं, एक सीमा और दूसरी निशा और तो कोई है नहीं, जिसकी यादों में हम खोए रहे।

सुजाता _चल झूठे कही के ऐसा कैसे हो सकता है? क्या तुमने अभी तक किसी को प्रपोज नही किया।

राजेश _न।

सुजाता _बताओ, तुम्हें कैसी लड़की चाहिए।

राजेश _बिल्कुल आप ही की तरह।

सुजाता _क्या मै इतनी खूबसूरत हूं?

राजेश _ये भी पूछने की बात है। खुद को आईने में देखो, कितनी सुंदर हो स्वर्ग की किसी अप्सरा की तरह।

सुजाता _चल हट झूठा कही, चली डिनर का समय हो गया है।

सुजाता वहा से शरमाते हुवे चली गई।

रात में डिनर करने के बाद वे कुछ देर हाल में ही बैठ कार बात चीत करते रहे। फिर अपने अपने कमरे में सोने चले गए।

कमरे में जानें के बाद, सुजाता अपनी नाइटी पहन ली और बेड पर लेट कर राजेश के द्वारा कही बातो की उसे मेरी जैसी लड़की चाहिए,को याद कर मुस्करा रही थी।

सोने की कोशिश कर रही थी पर नींद नहीं आ रही थी। वह उठी और राजेश के कमरे की ओर चली गई और दरवाजा खटखटाई।

राजेश ने दरवाजा खोला।

राजेश _मैम, आप इस वक्त।

सुजाता _ओह राजेश मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो सोचा तुमसे थोड़ी देर बात चीत कर लू।

कही तुम्हें डिस्टर्ब तो नही कर दिया।

राजेश _नही मैम आइए न।

सुजाता कमरे के अंदर आकर बेड पर बैठ गई।

सुजाता _राजेश, मै सोच रही थी कि यहां आस पास बहुत से मनोरम दृश्य है हम कल सुबह घूमने चले। पास में ही यहां पर एक झरना भी है क्यू ना हम वहा नहाने का मजा ले। पता नहि फिर यहां आने का कब मौका मिले।

राजेश _ओ तो ठीक है मैम पर वहा पर मौजुद लोग यदि तुमको पहचान लिया कि तुम सुजाता और विशाल ग्रुप की मालकिन हो वे सभी नहाना छोड़कर तुम्हें नहाते देखेंगे और वीडियो बनाकर वायरल कर देंगे।

सुजाता _अरे बाबा मै पूरी साड़ी पहनकर नहाऊंगी। और यहां आकर कपडे चेंज करूंगी।

अपने बॉडी गार्ड को भी नही ले जाऊंगी। सिर्फ हम दोनों ही जायेंगे। कोई नही जान पाएगा। हम बिलकुल सिंपल सा ड्रेस पहनेंगे।

क्या तुम मेरी इतनी सी इच्छा पूरी नहीं कर सकते?

राजेश _ठीक है, मैम।

सुजाता _खुश होकर, ठीक है कल सुबह तैयार रहना।

अब मै चलती हूं। तुम भी सो जाओ काफी रात हो गई है।

इधर निशा, अपने बेड पर करवट लेकर लेटी थी और मोबाइल पर राजेश की फ़ोटो को देख रही थी।

उसकी आंख लग गई।

वह सपने देखने लगी,

उसने सपने में देखा की वह राजेश को किसी सुनसान जगह पर नदी किनारे मिलने बुलाई है।

वह काफी देर से राजेश का इंतजार कर रही है और राज काफी देर बाद आया।

राजेश _बोलो निशा, मुझे यहां क्यूं बुलाई?

निशा _पहले ये बताओ तुम्हें लेट कैसे हो गया? मुझे तो लगा की तुम नही आओगे।

राज_तुम बुलाओगी और मैं न आऊं ऐसा भला हो सकता है।

बोलो क्यूं बुलाई?

निशा _मुझे तुमसे कुछ कहना है?

राजेश _कहो न जो कहना है?

निशा _हूं, मुझे समझ नहीं आ रहा ये बात तुमसे कैसे कहूं, मुझे शर्म आ रही।

राजेश _अच्छा ऐसी बात है तो लिखकर बता दो क्या कहना है?

निशा _हा ये ठीक रहेगा।

तुम पीछे मुंह करो।

राजेश पीछे घूम गया।

वहा पर एक बड़ा सा चट्टान था। निशा ने एक सफेद पत्थर का छोटा टुकड़ा उठाया और चट्टान पर i Love you लिख दी और चट्टान के पीछे जाकर छिप गई।

फिर बोली।

राज अब देखो क्या लिखी है मैने।

राजेश ने पीछे घूमकर देखा I love you Raj पड़कर मुस्कुराने लगा।

राजेश ने चट्टान के पीछे गया।

निशा शर्म के मारे अपने दोनों हाथों से अपनी चेहरा छिपा ली।

राज ने उनके दोनों हाथो को चेहरे से हटाकर कहा,,,

सच में।

निशा ने अपनी झुकी नजरो को उठाकर राज की ओर देखा, फिर हा में सिर हिलाया।

राजेश ने निशा को बाहों मे भर लिया।

निशा भी राजेश से लिपट गई।

फिर दोनों गीत गाने लगे,,

हम तुम्हें इतना प्यार करेगें।

हम तुम्हें इतना प्यार करेगें।

कि लोग हमें याद करेगें।

कि लोग हमें याद करेगें।

हम भूले तो हम हरजाई।

तुम भूले तो तुम हरजाई, हो।

हम भूले तो हम हरजाई।

तुम भूले तो तुम हरजाई

हमने आज किया ये वादा

हमने ये आज कसम ये उठाई

साथ जिएंगे साथ मरेंगे

साथ जिएंगे साथ मरेंगे।

की लोग हमें याद करेगें।

कि लोग हमें याद करेगें

हम तुम्हें इतना प्यार करेगें।

गाना खत्म होने के बाद राजेश ने निशा से एक किस मांगा।

निशा _न शादी के बाद।

राजेश नही माना और निशा की पकड़ने के लिए दौड़ा निशा भागने लगी, तभी निशा का पैर फिशल गया और वह जोर से चिल्लाते हुए ओह मां।

तभी निशा की नींद खुल गई,,

उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी।

उसने अपने आसपास देखा, वह समझ गई की वह सपने देख रही थीं।

वह खुद पर शर्मिंदा महसूस करते हुए, राजेश की फ़ोटो को मोबाइल पे फिर से देखी,

तुमने मुझपर ये कैसा जादू कर दिया है।

अब तुम भी सो जाओ और मुझे भी सोने दो।

उसने मोबाइल स्विच ऑफ कर सो गई।
 
अगली सुबह सुजाता सो कर उठने के बाद फ्रेश हुई और राजेश के कमरे में चली गई। राजेश अभी तक सोया ही था।

सुजाता ने दरवाजा खटखटाई, राजेश ने दरवाजा खोला।

सुजाता _ये क्या राजेश तुम अभी तक तैयार नहीं हुवे हो? मैने कल तुमसे कहा था ना कि हम सुबह घूमने चलेंगे।

राजेश _ओह सॉरी मैम, कल लेट से सोया ना इसलिए उठने में लेट हो गई। मै फटाफट अभी रेडी होकर आता हूं।

सुजाता _ओके, जल्दी करना, सुबह का मौसम और ज्यादा सुहावना लगता हैं।

सुजाता नीचे हाल में आकर राजेश का वेट करने लगी।

राजेश कुछ ही समय में तैयार होकर नीचे पहुंचा।

राजेश _चलिए मैम मै रेडी हू।

सुजाता _रुको कॉफी पीकर चलते हैं।

राजेश _हा ये ठीक रहेगा।

सुजाता ने नौकरों सी काफी बनाने पहले ही कह दिया था। दोनों कॉफी पीने के बाद दोनों कार से निकल पड़े। मनोरम दृश्यों का आनंद उठाने और झरने में नहाने। वह ड्राइव और बॉडीगार्ड को साथ नही ले गई।

सोनपुर से निकलकर कुछ दूर चलने के बाद।

प्रकृति की सुंदरता देखते ही बन रहा था। चारो तरफ पहाड़, नदी घने पेड़, तरह तरह के पेड़ पौधे। मन को आनंदित कर रहे थे।

सुजाता _रुको राजेश, देखो कितना सुंदर नजारा है। मन करता है यही बस जाऊं।

चारो तरफ फूलो की खुशबू, मन को आनंदित कर रहा था पक्षियों की आवाजवातावरण में संगीत भर रहा था।

तभी एक बैलगाड़ी सुजाता को जाती हुई दिखाई दी, जिसमे घास फूस ले जाया जा रहा था।

सुजाता _राजेश, मुझे बैलगाड़ी पे बैठना है। गाड़ी रुको।

राजेश _कही बैल गाड़ी से गिर गई तो।

सुजाता _हूं, तुम मुझे इतना कमजोर समझते हो। मै भाई अपने कालेज के दिनों में बेस्ट स्टूडेंट्स थी, समझे।

राजेश _ओह, तब तो आप बैल गाड़ी को सवारी कर सकती हो।

राजेश _ओ बैल गाड़ी वाले भैया, जरा रुकना तो।

बैलगाड़ी वाला _बोलो बाबू, क्या काम है?

राजेश _हमारी मेमसाब आपकी बैल गाड़ी में बैठना चाहती है।

बैलगाड़ी वाला_बिठा दे बाबू जी, मैम साहब को गाड़ी पर, पर थोड़ा सम्हल के बैठने कहना।

राजेश _लो मैम कर लीजिए अपनी बैलगाड़ी में बैठने की इच्छा पूरी।

सुजाता बैलगाड़ी में चढ़ने की कोशिश करने लगी पर वह नाकाम रही।

सुजाता _अब देख क्या रहे हो?, चढ़ने में मेरी मदद करो।

राजेश _ओह,क्यूअगली सुबह सुजाता सो कर उठने के बाद फ्रेश हुई और राजेश के कमरे में चली गई। राजेश अभी तक सोया ही था। सुजाता ने दरवाजा खटखटाई, राजेश ने दरवाजा खोला। सुजाता _ये क्या राजेश तुम अभी तक तैयार नहीं हुवे हो? मैने कल तुमसे कहा था ना कि हम सुबह घूमने चलेंगे। राजेश _ओह सॉरी मैम, कल लेट से सोया ना इसलिए उठने में लेट हो गई। मै फटाफट अभी रेडी होकर आता हूं। सुजाता _ओके, जल्दी करना, सुबह का मौसम और ज्यादा सुहावना लगता हैं। सुजाता नीचे हाल में आकर राजेश का वेट करने लगी। राजेश कुछ ही समय में तैयार होकर नीचे पहुंचा। राजेश _चलिए मैम मै रेडी हू। सुजाता _रुको कॉफी पीकर चलते हैं। राजेश _हा ये ठीक रहेगा। सुजाता ने नौकरों सी काफी बनाने पहले ही कह दिया था। दोनों कॉफी पीने के बाद दोनों कार से निकल पड़े। मनोरम दृश्यों का आनंद उठाने और झरने में नहाने। वह ड्राइव और बॉडीगार्ड को साथ नही ले गई। सोनपुर से निकलकर कुछ दूर चलने के बाद। प्रकृति की सुंदरता देखते ही बन रहा था। चारो तरफ पहाड़, नदी घने पेड़, तरह तरह के पेड़ पौधे। मन को आनंदित कर रहे थे। सुजाता _रुको राजेश, देखो कितना सुंदर नजारा है। मन करता है यही बस जाऊं। चारो तरफ फूलो की खुशबू, मन को आनंदित कर रहा था पक्षियों की आवाजवातावरण में संगीत भर रहा था। तभी एक बैलगाड़ी सुजाता को जाती हुई दिखाई दी, जिसमे घास फूस ले जाया जा रहा था। सुजाता _राजेश, मुझे बैलगाड़ी पे बैठना है। गाड़ी रुको। राजेश _कही बैल गाड़ी से गिर गई तो। सुजाता _हूं, तुम मुझे इतना कमजोर समझते हो। मै भाई अपने कालेज के दिनों में बेस्ट स्टूडेंट्स थी, समझे। राजेश _ओह, तब तो आप बैल गाड़ी को सवारी कर सकती हो। राजेश _ओ बैल गाड़ी वाले भैया, जरा रुकना तो। बैलगाड़ी वाला _बोलो बाबू, क्या काम है? राजेश _हमारी मेमसाब आपकी बैल गाड़ी में बैठना चाहती है। बैलगाड़ी वाला_बिठा दे बाबू जी, मैम साहब को गाड़ी पर, पर थोड़ा सम्हल के बैठने कहना। राजेश _लो मैम कर लीजिए अपनी बैलगाड़ी में बैठने की इच्छा पूरी। सुजाता बैलगाड़ी में चढ़ने की कोशिश करने लगी पर वह नाकाम रही। सुजाता _अब देख क्या रहे हो?, चढ़ने में मेरी मदद करो।

राजेश ओह क्यू नही?

राजेश ने सुजाता को अपनी बाहों में उठा लिया।

सुजाता राजेश की आंखो में देखते हुवे बोली, सम्हाल के बिठाना गिरा न देना।

राजेश ने सुजाता को बैल गाड़ी में बिठा दिया।

बैल गाड़ी वाले ने बैल को हांकना सुरू किया।

बैल गाड़ी में बैठने से सुजाता एक अलग ही रोमांच का अनुभव करने लगी।

वह बैल गाड़ी में बैठ कर प्राकृतिक नजारों का आनद उठाने लगी ।

राजेश बैलगाड़ी के पीछे पीछे धीरे धीरे कार चलाते हुए चलने लगा।

इधर सुजाता का मन नाचने और गाने का कर रहा था।

और वह गाना शुरू कर दी।

कांटो से खीच के ये आंचल

तोड़ के बंधन बांधे पायल

कोई न रोको दिल की उड़ान को

दिल ओ चला, हा हा हा हा

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है

अपने ही बस में नहीं मै

दिल है कहीं तो हूं कहीं मैं

हो अपने ही बस में नहीं मै

दिल है कहीं तो कही मैं

हो जाने का पया के मेरी जिंदगी ने

हस कर कहा,,,,,,,,,

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है

गाड़ी वाला गाड़ी आगे बढ़ाता रहा, वहा के मनोरम दृश्य को देखने सुजाता गाड़ी से उतर गई।

और मनोरम दृश्य को देखने दौड़ने लगी।

राजेश भी कार रोककर उसके पीछे पीछे दौड़ने लगा।

सुजाता फिट नाचने गाने लगी,

कल के अंधेरा से निकल के

देखा है आंखे मलते मलते

हो कल के अंधेरा से निकल के

देखा है आंखे मलते मलते

हो फूल ही फूल जिंदगी बहार है

तय कर लिया,,,,,,

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है।

इस प्रकार नाचते गाते वे लोग झरने के पास पहुंच गए।

वहा पर पहले से कुछ लोग मौजूद थे झरने पे नहाने का मजा ले रहे थे।

सुजाता और राजेश दोनों खूबसूरत झरने को देखकर रोमांचित हो गए।

सुजाता _चलो राजेश झरने में नहाने का मजा लेते हैं।

सुजाता आगे आगे और राजेश पीछे पीछे चलते हुए झरने के के पास पहुंच गए।

सुजाता झरने के नीचे जाने लगी

राजेश _मैम संभल कर, कही पैर फिसल न जाए।

सुजाता झरने के नीचे खड़ी हो गई और नहाने लगी।

राजेश सुजाता को झरने के नीचे नहाते हुए देखने लगा।

कुछ लोग और भी नहा रहे थे।

सुजाता _राजेश, वहा क्यू खड़ा है आओ न।

राजेश भी झरने के नीचे चला गया।

दोनों झरने के पानी में नहाने लगे।

नहाते समय पानी में सुजाता की साड़ी उसकी बदन से चिपक गई।

जिससे वह और भी खूबसूरत और हॉट लगने लगीं।

वहा पर मौजुद लोग, सुजाता की खूबसूरती को ही निहारने लगे।

तभी वहां पर सुजाता की कंपनी से निकाला गया मज़दूर यूनियन का एक सदस्य भी मौजुद था।

उसने जब राजेश और सुजाता को नहाते देखा।

वह सदस्य अपने साथी से कहा,,

यार ये तो कंपनी की मालकिन सुजाता और वही लड़का है जिसके कारण हम लोगो को कंपनी से निकाल दिया गया।

ये लोग मजे करने आए हैं, हमे कंपनी से बेइज्जत कर।

मुझे अभी राकेश भाई को बताना चाहिए।

वह व्यक्ति राके श सिंह को काल किया।

राकेश सिंह _क्या है बे, क्यू काल किया।

सदस्य _भैया, सुजाता मैडम और वह लौंडा यहां झरने में नहाने आए है।

खूब इंजॉय कर रहे हैं दोनों,

राकेश _अबे क्या कह रहा है? कोई और होंगे।

इतनी अमीर महिला इस तरह खुले में नहाएगी?

सदस्य _नही भैया ये वही है, मै फ़ोटो खीच कर भेजता हूं।

राकेश _ठीक है भेजो।

उस व्यक्ति ने सुजाता की फ़ोटो खीच कर राकेश सिंह को भेज दिया।

राकेश सिंह ने जब फ़ोटो देखा, तो सुजाता और राजेश को पहचान लिया।

राकेश सिंह ने उस व्यक्ति को फ़ोन किया।

राकेश सिंह _अबे सुन इन लोगो ने कंपनी से हमे अपमानित कर निकलवा दिया, आज हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे हैं।

इनसे बदला लेने का अच्छा मौका मिला है।

तुम इन दोनों पर नजर रख।

मैं अपने साथियों को लेकर वहा पहुंचता हूं।

सदस्य _ठीक है भैया।

इधर राजेश और सुजाता इन बातों से बेखबर नहाने का मजा लेने लगे।

सुजाता ने देखा की झरने का पानी नीचे बहकर जहां जा रहा था वहा एक बड़ा सा कुंड बना था जिसमे कई लोग जल क्रीड़ा कर रहे थे।

सुजाता _राजेश, चलो न हम भी कुंड पर चलते हैं वहा नहाने का मजा लेंगे।

दोनों कुंड में जाकर नहाने लगे।

सुजाता _राजेश तुम भागो मै तुम्हें पकड़ती हूं।

राजेश _मैम रहने दो आप मुझे नही पकड़ पाएंगी।

सुजाता _अच्छा देखते हैं।

सुजाता राजेश की ओर पकड़ने के लिए दौड़ी। राजेश पानी के अंदर से तैरते हुए दूसरे जगह पहुंच गया।

सुजाता निराश हो गई। वह राजेश को पकड़ने की कोशिश करते करते थक गई।

वह निराश हो गई।

अंत में अंतिम बार प्रयास की, इस बार राजेश भागा नही।

सुजाता ने राजेश को जोर से अपनी बाहों मे भर कर करा, लो पकड़ लिया। बच्चू आख़िर तुम पकड़े गए।

सुजाता राजेश को जोर से पकड़कर चिपक गई थी।

राजेश _मैम क्या कर रही हो सब देख रहे हैं अब छोड़ो।

सुजाता _न, तुमने मुझे मुझे बहुत थकाया, इतनी आसानी से छोडूंगी नही।

राजेश _सब देख रहे हैं छोड़ो।

सुजाता ने लोगो की ओर देखा सभी की नजर दोनों पर ही थी। वह शर्मिंदा महसूस करने लगी।

राजेश _मैम अब चलो, काफी देर हो चुकी है।

दोनों कुंड से बाहर निकले। और बाल संवारने लगे।

राजेश _मैम, अब चलो यहाँ से सभी लोग आप ही को घूर रहे हैं।

सुजाता _पर यहां पर तो बहुत लोग नहा रहे हैं फिर मुझे ही क्यू घूर रहे हैं।

राजेश _क्यू की तुम बहुत खूबसूरत और हॉट लग रही हो।

सुजाता _चल हट बदमाश कही का, मुझपे बुरी नजर डालता है।

राजेश _ठीक है मै अपनी आंखे बंद कर लेता हूं।

सुजाता _हां ये ठीक रहेगा, तुम अपनी आंखे बंद कर मेरी उंगली पकड़ कर चलो।

राजेश _अच्छा जी लो आंखे बंद कर लिया, पर तुम तो आंखे बंद करने के बाद भी नजर आ रही हो।

सुजाता _हूं, तो मुझसे बदमाशी कर रहे हो।

राजेश _हूं थोड़ा थोड़ा।

दोनों हसने लगे।

राजेश _मैम ,दोनों थोड़ी देर धूप में खड़े हो जाते हैं।

कपड़ा कुछ सुख जायेगा फिर ऐसे ही घर चले जायेंगे, घर जाकर चेंज कर लेंगे।

सुजाता _हां ठीक है।

इधर राकेश सिंह अपने साथी से राजेश और सुजाता की पल पल की जानकारी ले रहा था।

राकेश सिंह ने अपने साथियों के साथ प्लान बनाया।

राकेश सिंह _देखो वहा झरने के पास लोगो की भीड़ है, हम कुछ नहीं कर पाएंगे।

वे लोग इसी रास्ते से वापस आयेंगे। रास्ता सुनसान है आस पास घने जंगल है। हमे यही पर उन्हें रोकना होगाऔर दोनों को रास्ते से घने जंगल में ले जायेंगे।

फिर अपने अपमान की बदला लेंगे।

उधर कुछ देर रुकने के बाद राजेश और सुजाता कार से अपने घर के लिए निकल पड़े।

इसकी जानकारी राकेश सिंह के साथी ने राकेश को फ़ोन पर बताया।

राकेश सिंह _उन लोग आने ही वाले हैं तुम सब झाड़ियों में छुप जाओ।

राकेश सिंह ने अपने एक साथी को सड़क पर लिटा दिया।

एक बाइक को भी गिरा दिया।

जैसे उसका एक्सीडेंट हो गया हो।

सभी लोग छिप गए।

राजेश और सुजाता इस बात से अंजान वे बात चीत करते हुए कार से वहा पर पहुंचे।

सामने रोड पर किसी व्यक्ति को पड़ा हुआ देखकर राजेश ने कार रोक दिया।

सुजाता _राजेश, कार क्यू रोक दिया?

राजेश _मैम सामने देखो।

लगता है किसी का एक्सीडेंट हो गया है।

मैं देखता हूं।

सुजाता _राजेश और सुजाता दोनों कार से उतरे।

राजेश उस आदमी के पास गया और उसे हिला कर देखा।

वह आदमी अपने हांथ में मिर्ची पाउडर रखा था उसने राजेश की आंखो में मिर्ची पाउडर फेक दिया।

राजेश की आंखो में तेज जलन होने लगीं। वह अपनी आंखे नही खोल पा रहा था।

तभी राकेश सिंह और उसके साथी सामने आए और हसने लगे।

राकेश सिंह _मैडम पहचाना।

सुजाता _राकेश सिंह तुम।

राकेश सिंह _हां मैडम जी मै।

पकड़ लो इन दोनों को और ले चलो जंगल के अंदर।

सुजाता को दो लॉग पकड़ लिए।

सुजाता _छोड़ो मुझे।

इधर बांकी लोग राजेश को पकड़ने लगे लेकिन राजेश को काबू में नहीं कर पा रहे थे।

तभी एक ने बड़े डंडे से राजेश के सिर पर वार किया जिससे राजेश का सिर फट गया वह चक्कर खा कर बेहोश सा हो गया।

साला बहुत छटपटा रहा था।

सुजाता चीखी, राजेश।

राजेश के सिर से खून बह रहा था वह बेशुध सा हो गया।

सुजाता _भगवान के लिए छोड़ दो हमे, तुम लोग बहुत गलत कर रहे हो।

राकेश सिंह _राकेश सिंह जब तक अपने अपमान का बदला नही ले लेता। शांत नहि बैठता। हा हा हा

तुमने हमें अपमानित कर अपने कंपनी से बाहर किया।

इस अपमान का बदला तेरे यार के सामने तेरी इज्जत लूट कर लेंगे।

ले चलो दोनों को जंगल में।

राकेश सिंह के साथी राजेश और सुजाता को घसीटते हुए जंगल के अंदर ले जानें लगे। सुजाता मदद के लिए चिल्लाती रही पर वहा सुनने वाला कोई नहीं था।

राकेश सिंह _ये जगह ठीक है, बांध दो इसके यार को पेड़ से।

सुजाता _नही राजेश को छोड़ दो।

राजेश को रस्सी की सहायता से दो उसके दोनों हाथो को दो पेड़ो से बांध दिया।

राकेश _हाय सच में तू कयामत लग रही है। क्या मस्त मॉल है तू। तुम्हारी लेने में बड़ा मजा आयेगा।

सुजाता _छोड़ दो हमे जाने दो, पुलिस वाले तुम लोगो को छोड़ेंगे नहीं।

किसी को पता चलेगा तब न तुम्हारी चीख किसी को सुनाई नही देगी। इसी लिए तो हम तुम दोनों को यहां पर लाए है जानेमन।

अबे होश में लाओ रe इनके यार को, सुना है हड़ताल तुड़वाने के पीछे इसी लौंडे का दिमाक था।

अब साला अपनी आंखो से अपनी महबूबा की इज्जत लुटते देखेगा। तब हमारे अपमान का बदला पूरा होगा।

राकेश सिंह के साथी राजेश के ऊपर पानी डालने लगे। उसे कुछ कुछ होश आने लगा।

राकेश सिंह _Rajeshके बाल पकड़कर कहा,अबे होश में आ , देख तेरी दिलरुबा का हम क्या हाल करने वाले है। देख अपनी आंखो से, और डालो re पानी इसके ऊपर

राजेश के चेहरे पर और पानी डाला गया। राजेश कुछ होश में आया उसने खुद को पेड़ से बंधा पाया, सामने राकेश सिंह खड़ा था, दो लोग सुजाता को पकड़े हुवे थे, बांकि लोग राजेश के आस पास खड़े थे।

राजेश _राकेश सिंह तू।

कुत्ते छोड़ दे मैडम को क्यू अपनी मौत को दावत दे रहा है।

राकेश सिंह _साले बल चला गया है पर तेरा अकड़ नही गया है। वैसे बॉडी तो काफी अच्छी बना रखी है। पर लगता हैं सिर्फ दिखाने के लिए है।

तेरे आंखो के सामने तेरी महबूबा का इज़्जत लूट कर हम अपने अपमानो का बदला लेंगे। अगर तेरे में दम है तो बचा ले अपनी महबूबा को।

राजेश _कुत्ते, अगर तुमने मैडम को हाथ भी लगाया न तो मां कसम तुम सबका हाथ पाव तोड़ कर रख दूंगा।

सभी लोग राजेश की बात सुनकर हसने लगे,,

हमारा हाथ पांव तोड़ेगा ये,, हा हा हा,,

अभी तू बच्चा है, बात तो बड़ी बड़ी कर रहा है,,

अब तू देख तेरे सामने तेरी मैम की इज्जत कैसे लुटते है?

राकेश सिंह, सुजाता की ओर आगे बड़ा,,

राजेश _कुत्ते, रुक जा, ऐसी गुस्ताखी भी न कर,, क्यू अपनी मौत को बुला रहा है?

राकेश सिंह ने आगे बड़ा और सुजाता की साड़ी के पल्लू को पकड़ लिया।

राजेश _कुत्ते मै कहता हूं रुक जाओ।

इधर राकेश सिंह सुजाता की पल्लू को पकड़ कर खींचने लगा, सुजाता खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

राकेश _आजा मेरी रानी क्या मस्त मॉल है तू, तेरी लेने में तो बड़ा मजा आयेगा।

सभी हसने लगे।

सुजाता _साड़ी की पल्लू छुड़ाने की कोशिश करने लगी,नही छोड़ दो, हमे जाने दो।

तभी राकेश सिंह साड़ी की पल्लू को जोर लगा कर खींचने लगा।

राजेश बहुत गुस्से में आ गया, वह जोर से दहाड़ने लगा,आ,,,,,,

उसने अपनी पूरी ताकत से रस्सी को तोड़ने का प्रयास करने लगा।

राकेश सिंह और उसके साथी हसने लगे।

इधर सुजाता अब राकेश सिंह को रोक पाने में असमर्थ हो गई वह जोर से चीखी, राजेश बचाओ मुझे।

राजेश ने एक बार फिर अपना पूरा जोर लगा दिया , इस बार जिस पेड़ से बंधा था ज्यादा मोटे नही थे, पेड़ ही उखड़ गया।

राजेश को दहाड़ पूरे जंगल में गूंजने लगा।

राकेश और उसके साथी भयभित हो गए।

राकेश _मारो साले को।

एक ने डंडे से राजेश के पीठ पर प्रहार किया, राजेश टस से मस न huwa वह ।

उसने फिर दूसरी बार प्रहार किया राजेश ने उसका प्रहार रोक दिया फिर एक जोर का मुक्का उसके चेहरे पर मारा।

उस व्यक्ति का पूरा दांत बाहर आ गया, उसका मुंह लहुलुहाहन हो गया।

राकेश सिंह के साथियों ने राजेश पर एक साथ धावा बोल दिया। राजेश पर लाठी डंडों से प्रहार किया।

राजेश की पकड़ में जो भी आता उसे बुरी तरह मार कर अधमरा कर देता।

इस तरह एक एक करके राकेश सिंह के सभी साथी जमीन पर लुढ़कते गए, और फिर उठ न सके।

अंत में राकेश सिंह ने चाकू से राजेश पर प्रहार कर दिया,

राजेश की भुजा पर चाकू लगी,

सुजाता चीखी _राजेश,,,

तभी राकेश सिंह ने दूसरा प्रहार किया पर राजेश ने उसका प्रहार रोक एक जोर का लात उसके पेट में मारा, राकेश सिंह हवा में उड़कर दूर जा गिरा।

राजेश ने उसे गर्दन से पकड़कर उठाया और एक जोर का मुक्का उसके मुंह पे मारा मुंह से खून की धार निकल गया।

राजेश बहुत गुस्से में था, वह राकेश सिंह के जांघो पर जोर से प्रहार किया इस प्रहार से उसका जांघ टूट गया, इसके बाद भी राजेश

राजेश _कुत्ते तूने इसी हाथ से मैम को छुआ ने देख इसकी क्या हालत करता हु।

राजेश ने राकेश सिंह के हाथ पर अपने पैर से जोर का प्रहार किया जिससे राकेश सिंह का हाथ टूट चुका था।

राजेश का गुस्सा शांत ही नहीं हो रहा था वह एक पत्थर उठाकर राकेश सिंह को खत्म करने को उठाया।

तभी सुजाता दौड़ते हुवे उसके पास आई और राजेश से लिपट गई।

सुजाता _नही राजेश उसे छोड़ दो, मत मारो।

राजेश _नही मैम इसने तुम्हें हाथ लगाने की जरूरत कैसे की मैं नही छोडूंगा।

सुजाता _नही राजेश, तुम्हें मेरी कसम इसे छोड़ दो, मै नही चाहती की तुम किसी मुसीबत में फसो।

सुजाता की कसम देने से राजेश रुक गया।

राकेश सिंह और उसके सभी साथी उठ पाने की स्थिति में नहीं थे इधर राजेश भी लड़ते लड़ते घायल हो चुका था।

उसके पैर लड़खड़ाने लगे।

सुजाता ने उसको सहारा देकर किसी तरह धीरे धीरे उस जंगल से बाहर निकाला और थाना प्रभारी को सारी घटना के बारे में बता दिया।

थाना प्रभारी तुरंत वहां अपने साथियों के साथ पहुंच गया।

राकेश और उसके साथी बुरी तरह घायल थे उसे अस्पताल ले जाया गया। और राजेश को भी अस्पताल ले जानें के लिए बोला।

राजेश _नही, मुझे घर ले चलिए।

सुजाता _पर राजेश, तुम्हारी हालत बहुत खराब है।

राजेश _मैम मैं नही चाहता की जो भी घटना घटित हुआ उसके बारे में लोगो को पता चले, यह हमारे कंपनी के लिए ठीक नहीं, निवेशकों में गलत संदेश जा सकता है।

सुजाता _ओह, राजेश मुझे ये कंपनी वगैरा कुछ नहीं चाहिए।

मुझे तुम्हारी सलामती चाहिए।

राजेश,_मैम मै ठीक हूं, मुझे घर ले चलिए।

थाना प्रभारी सर इस घटाना के बारे में आप किसी से कुछ न कहना।

थाना प्रभारी _ठीक है राजेश अगर आप लोग यही चाहते हो तो ऐसा ही होगा लेकिन इन सालो को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाऊंगा।

सुजाता गाड़ी चलाकर राजेश को बंगला में ले गया।

बांग्ला में ले जानें के बाद वहा नौकरों की मदद से उसे अपने कमरे में ले जाकर लिटा दिया

और डॉक्टर को बुलाया।

कुछ देर बाद नर्स के साथ डॉक्टर पहुंच गया।

वह राजेश की स्थिति का मुआइना करने लगा।

राजेश के सारे कपड़े उतारने कहा जो जगह जगह फट चुके थे खून धूल और मिट्टी लगे हुए थे।

राजेश के शरीर से पूरे कपड़े उतार कर निर्वस्त्र कर दिया।

सुजाता की आंखो से आंसु निकलने लगे थे।

राजेश की शरीर की पहले अच्छे से सफाई किया गया। राजेश के शरीर के ऊपर एक पतला चादर डाल दिया।

जगह जगह उसके शरीर पर चोट के निशान थे।

डाक्टर ने राजेश के शरीर पर लगे चोटों पर लगाने के लिए मलहम, दर्द निवारक गोली, कुछ एन टीबायोटिक दिया।

उसे इंजेक्शन लगाकर सुजाता से राजेश को आराम करने देने को कहा। डाक्टर ने कहा समय समय पर मलहम लगा ने और दवा खिलाने से कुछ ही दिन में राजेश ठीक हो जायेगा। घबराने की बात नही है।

अभी नर्स को यही छोड़ रहा हूं।

यह राजेश कादेखभाल करेगी।

सुजाता _ठीक है डाक्टर।

राजेश आराम करने लगा।

इधर सुजाता फिर से नहाकर नए कपडे पहन ली।

नर्स रूम में ही कुर्सी पर बैठ कर अपनी मोबाइल पर समय व्यतीत कर रही थी।

नर्स _इनके दवाई का समय हो गया है। इसे उठाओ।

सुजाता ने राजेश के बालो को प्यार से सहलाते हुए राजेश को उठाने लगी।

राजेश अपने आंखे खोला।

सुजाता _राजेश अब कैसा महसूस कर रहे हो।

राजेश_ पहले से बेटर।

नर्स _पहले इसे कुछ खिलाओ। उसके बाद इन्हें मलहम लगा कर दवाई खिलाएंगे।

सुजाता ने काल कर नौकरों को रोटी दाल सब्जी लाने को कहा।

नौकर भोजन लेकर आया।

सुजाता ने राजेश को बेड पर बिठाया और अपने हाथो से खाना खिलाने के लिए आगे बड़ी,,

राजेश _मैम आप ने भोजन की।

सुजाता _राजेश, तुम पहले खा लो फिर मैं खा लूंगी।

राजेश _नही आप भी साथ में खाओगी, तब खाऊंगा।

सुजाता _ओ हो राजेश, मै खा लूंगी न बाबा तुम पहले खा लो।

राजेश _न, पहले तुम खाओ फिर मुझे।

सुजाता ने राजेश को खिलाती फिर वह भी खाती इस प्रकार जब दोनों ने भोजन कर लिया।

नर्स बोली _इसके पूरे शरीर में मलहम लगाना होगा।

राजेश को पेट के बल लिटा दिया राजेश पूरा निर्वस्त्र था। नर्स मलहम लेकर राजेश के पूरे शरीर में मलने लगी।

उसके पीठ कूल्हे फिर पैर।

राजेश को सीधा होकर लेटने कहा।

नर्स ने राजेश के सीने फिर, उसके पेट फिर उसने राजेश के लैंड पर भी मलहम लगाने लगीं।

नर्स राजेश के लंबे land देखकर मुस्कुरा रही थी।

इधर सुजाता को नर्स पर बहुत गुस्सा आ रहा था, उसका मन कर रहा था कि वह नर्स की गालों पर दो चार तमाचा लगा दे ।

पर चोट तो पूरे शरीर पर लगीं थीं तो नर्स ने काफी देर तक राजेश के land उसके अंडकोष पर ऊपर चादर डालकर मालिश किया।

राजेश को भी अच्छा फील हो रहा था।

वह अपना आंख बंद कर लेटा रहा।

इधर सुजाता गुस्से से आग बगुला हो रही थी।

सुजाता _अब नीचे भी मालिश करो।

नर्स _हा, ठीक है।

पैरो की मालिश करने के बाद राजेश को दवा पिलाया गया।

राजेश के शरीर पर चादर ओढ़ा दिया, राजेश को आराम करने कहा गया।

सुजाता ने नर्स से बोली _देखो अब तुम हॉस्पिटल जाओ, मै राजेश की देखभाल कर लूंगी ।

मैं डाक्टर से बात कर ली हूं।

नर्स _ठीक है मैम जैसी आपकी ईच्छा।

नर्स चली गई।

सुजाता को निशा का फ़ोन आया।

सुजाता _बोलो बेटा, तुम और तुम्हारे पापा ठीक तो हो न।

निशा _हा मॉम, मै ठीक हूं। आप और राजेश कैसे है?

सुजाता _हम लॉग भी ठीक है बेटा।

निशा _मॉम, आप लोग आज आने वाले थे।

सुजाता _बेटा, यहां अभी कुछ काम बाकी है, 2_3दिन बाद ही हम आ पाएंगे।

तब तक अपना और अपने डैड का ख्याल रखना बेटी।

निशा _ओके मॉम पर जल्दी आने की कौशिश करना।

सुजाता _मै जितनी जल्दी हो सके आ जाऊंगी बेटा तुम चिंता न करना।

निशा _ओके मॉम, लव यू मॉम बाई

सुजाता _लव यू टू बेटा।

शाम को 6बजे राजेश उठा।

सुजाता _राजेश अब कैसा फील कर रहे हो।

पहले से बेटर।

दर्द से कुछ राहत मिला।

सुजाता _गुड।

राजेश ये सब मेरे कारण ही huwa, मैने ही बाहर घूमने जाने के लिए तुमसे जिद किया।

राजेश मुझे माफ कर दो।

राजेश _मैम इसमें आपकी क्या गलती है? आख़िर आप भी एक औरत हो। हर औरत की एक चाह होती है घूमने फिरने की।

गलती तो उस राकेश सिंह और उसके साथियों की है जो मौके के तलाश में थे।

सुजाता _राजेश तुमने मेरी जान बचाने अपने जान की परवाह नही की ।

राजेश _मैम, निशा ने मुझे आपकी हिफाजत करने के लिए कहा था। अगर आपको कुछ हो जाता तो मैं निशा को क्या जवाब देता।

राजेश को सुजाता ने कुछ फल फूल खाने को दिया।

फिर राजेश को आराम करने कहा।

रात को 8बजे राजेश भोजन करनेफिर को उठाया।

राजेश को सुजाता ने अपने हाथो से खाना खिलाया और खुद भी खाई।

भोजन कर लेने के बाद दोनों एक दूसरे से बाते करते रहे।

करीब दस बजे।

सुजाता _राजेश अब सोने का समय हो चुका है, मै तुम्हारे शरीर में मलहम लगा देती हूं।

सुजाता ने बाथरूम में जाकर अपना साड़ी उतार कर नाइटी पहन ली थीं। नाइटी में सुजाता बहुत खूबसूरत और हॉट लग रही थी।

जब सुजाता नाइटी पहन कर कमरे में आई तो राजेश को उसने घूरते हुवे पाया।

सुजाता _शरमाते हुवे क्या देख रहे हो?

राजेश _आपकी खुबसूरती।

सुजाता _मै तुम्हें इतनी खूबसूरत लगती हूं।

राजेश_हूं।सिर्फ मुझे ही क्यू तुम हो ही खूबसूरत?

सुजाता _चल हट झूठा कही का।

इधर बंगला में सभी नौकर भी सो गए थे।

बंगला में बिल्कुल शांति फैली थी।

सुजाता _चलो अब पेट के बल लेट जाओ पीठ पर मलहम लगा दू।

राजेश पेट के बल लेट गया।

सुजाता उसके शरीर के ऊपर से चादर हटा दिया

जब उसने राजेश के पीठ पर डंडे के निशान देखी तो उसकी आंखे भर आई।

वह राजेश से लिपट गई ओह राजेश तुमने मेरे लिए कितना दर्द सहा है।

वह उनके जिस्मों को चूमने लगा।

और हाथो में मलहम लेकर उसके पीठ पर मालिश करती हुई नीचे बड़ने लगी।

सुजाता ने

राजेश की कमर फिर उसके कूल्हे पर मालिश करने लगी। वह शर्म भी महसूस कर रही थी और उत्तेजना भी।

सुजाता _राजेश अब सीधा लिटा दिया।

राजेश सीधा होकर लेट गया।

राजेश जैसे ही पीठ के बल लेटा उसका land सुजाता के नजरो के सामने आ गया।

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

राजेश सुजाता की खूबसूरती को निहार रहा था।

सुजाता किसी तरह अपने दिल की धड़कन को सम्हालते हुए, राजेश के ऊपर झुकी और उसके सीने परडंडेके प्रहार से खून जम जानें से बने निशान को चूमने लगी।

सुजाता _ओह राजेश I love you, तुम कितने बहादुर हो।

सुजाता राजेश के पूरे बदन को चूमता huwa नीचे बड़ा।

जैसे जैसे वह नीचे बड़ रही थीं सुजाता को दिल की धड़कन भी बड़ रही थीं।

राजेश को भी बहुत अच्छा लग रहा था।

सुजाता जब कमर से नीचे पहुंची। वह राजेश के land को देखने लगीं। फिर वह राजेश की चहरे की तरफ देखी। राजेश आंखे बंद कर आने वाला पल का इंतजार में था।

सुजाता ने राजेश के land को हाथ में लेकर पहले चूमा उसे सहलाया फिर उसके सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसने लगीं। कितनी सालो के बाद वह किसी का land मुंह में लेकर चूस रही थी।

इधर सुजाता के मुंह में राजेश अपने land का अहसास पाकर राजेश का शरीर भी गर्म हो ने लगा।

इधर सुजाता ने land मुंह में लेकर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

राजेश का land धीरे धीरे मोटा और लंबा होकर एक दम लोहे की तरह सख्त हो गया।

राजेश के मोटे एवम तगड़े land देखकर सुजाता भी काफी उत्तेजित हो गई थी।

उसकी बुर पानी फेकने लगी थी।

जब से विशाल की तबियत खराब huwa था, उसके पास सुजाता को शारीरिक सुख दे पाने का ताकत नहीं बचा था।

आज राजेश के मोटे और तगड़े land को देखकर, उसकी अंदर की औरत जाग चुकी थीं। वह से राजेश से वह प्यार करने लगीं थीं।

उसे राजेश के इतने मोटे और लम्बे land से प्यार के साथ भय भी लग रहा था।

कही वह राजेश के land को न ले पाई तो ,,

नही मुझे राजेश को हर हाल में संतुष्ट करना है,

वह राजेश की ओंठ की आंखो में देखा । राजेश भी सुजाता की ही देख रहा था।

सुजाता उपर आया और राजेश के ओंठ को मुंह में भरकर चूसने लगा।

राजेश भी उसकी ओंठ चूस कर सहयोग करने लगा।

फिर सुजाता बेड से उठी और खड़ी होकर अपनी नाइटी निकाल दी फिर अपनी ब्रा और पैंटी भी निकाल कर नंगी हो गई।

सुजाता की बड़ी बड़ी सुडौल चुचियों, एक दम गोरा बदन और मस्त फुली हुई चिकनी chut ऐसा लग रहा था कि स्वर्गकीकोई अप्सरा लग रही थी जिसे देखकर राजेशका land हवा में ठुमके लगाने लगा।

सुजाता एक फिर राजेश का land पकड़कर चूसने लगी।

फिर वह बेड में उपर चढ़ गई।

और राजेश की land को हाथ में पकड़ कर अपनी बुर की छेद पर रख कर उसे अंदर लेने की कोशिश करने लगी।

बड़ी कोशिशों के बाद land का टोपा बुर को चीरकर अंदर घुसने में कामयाब huwa। सुजाता ने थोड़ी राहत की सांस ली।

फिर उसने land पर अपनी बुर का दबाव बनाते हुए धीरे धीरे बैठने लगी land बुर में आधे से ज्यादा घुस चुका था।

अब सुजाता ने राजेश की ओंठ चूसते हुए अपना एक चूची राजेश के मुंह में डाल दिया।

राजेश सुजाता की चुचक को मुंह में भरकर चूसने लगा।

सुजाता की मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

उसकी बुर से पानी निकलकर राजेश के land पर बहने लगा।

अब सुजाता बहुत ज्यादा उत्तेजी हो गई वह राजेश के land उठक बैठक करने लगीं।

Land धीरे धीरे बुर में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गया।

सुजाता को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बुर ने राजेश के land को पूरी तरह निगल गई है।

वह land पर अब उछल उछल कर चुदने लगी।

उसे राजेश से चुदने में बहुत मजा आने लगा। उसके मुख से कामुक सिसकारी निकल कर कमरे में गूंजने लगी।

आह, उन, उई मां आह अन,,

कमरे में फ्च उईफ़च gach gach की आवाज गूंजने लगा।

सुजाता उछल उछल कर पूरा land अपनी बुर में लेने लगीं वह बहुत गर्म हो चुकी थी।

चुद वाने में ऐसा मजा उसे कभी नहीं आया था।

Land बुर को चीरता हुआ गपागप अंदर बाहर हो रहा था।

सुजाता उछल उछल कर जमकर चुद रही थी।

पर वह अपने को ज्यादा देर तक न रोक सकी और आह मां, आह करके झड़ गई, और राजेश के उपर ढेर हो गई।

राजेश का land अभी भी सुजाता की बुर के अंदर खड़ा था।

कुछ देर बाद जब सुजाता होश में आई वह फिर से राजेश के ओंठ चूसने लगीं राजेश भी उसकी ओंठ चूस कर सहयोग करने लगा।

फिर सुजाता राजेश के मुंह में अपने चुचक डालकर चुसवाने लगीं।

सुजाता धीरे धीरे फिर गर्म हो गई।

सुजाता की बुर फिर पानी फेकने लगी।

सुजाता ने राजेश के land पर फिर उछल उछल कर chudna शुरू कर दिया।

फिर से कमरा सुजाता की कामुक सिसकारी से गूंजने लगी।

आह ओह अन अन,, आई,, उन मां,,

राजेश का land सुजाता की बुर के हर हिस्से को अच्छी तरह रगड़ रहा था।

जिससे सुजाता को ऐसा अधभूत आनंद मिल रहा था जिसकी कल्पना उसने कभी नहीं की थी।

दोनों की शरीर की ऊर्जा उसके बुर और land पर ही समाहित हो चुके थे।

राजेश को भी सुजाता को चोदने से ऐसा अनुभव हो रहा था जैसे वह किसी कुंवारी chut को चोद रहा हो। बिल्कुल कसा कसा अंदर बाहर हो रहा था।

सुजाता दो बार झड़ चुकी थी, वह राजेश को हर हाल में संतुष्ट करना चाहती थीं ।

वह फिर से मैदान में डट जाती और उछल उछल कर चुदने लगती। वह राजेश की मर्दानगी की दीवानी हो गई।

कुछ देर अब राजेश भी अपने को और ज्यादा देर तक नहीं रोक सका और आह मां, आह करके कराहते हुवे सुजाता के बुर में ही झड़ने लगा।

गर्म गर्म वीर्य से सुजाता का बुर पूरी तरह भर गया। सुजाता भी एक बार फिर से झड़ गई।

वह बुरी तरह थक गई थी।

वह राजेश के उपर ही ढेर हो गई।

फिर राजेश के बाहों में ही सो गई।

 
अगली सुबह जब सुजाता की नींद खुली। खुद को राजेश के बाहों में निर्वस्त्र लेटी हुईपाकर, शर्म महसूस करने लगी।

उसने राजेश की ओर देखा, जो अभी भी गहरी नींद में सो रहा था।

सुजाता को उस पर बड़ा प्यार आया, वह राजेश की माथा चूम कर बेड से उठी , उसे chut पर दर्द महसूस हुई।वह लंगड़ाती हुई चलकर सीधा बाथरूम में घुस गई।

अपने बुर की हालत देखी, जो कुछ सूजी हुई लग रही थी। वह अपनी बुर की हालत देखकर मुस्कुराने लगी।

वह बाथरुम में फ्रेश होकर नहाने लगी।

वह अपने शरीर की सभी अंगों की अच्छी तरह से सफाई की।

नहाने के बाद वह अपने बदन में टावेल लपेटकर, बाथरुम से बाहर निकली और ड्रेसिंग टेबल के सामने रखी कुर्सी पर बैठे कर अपने को आईने में निहारने लगी।

वह अपने Ko आईने में निहारकर मुस्कुरा एवम शर्मा रही थी।

वह अपने बदन पर सुगंधित तेल लगाने के बाद

वह अपनी आंखो में काजल लगाने लगीं। और अपने होंठो पर हल्का लिपिस्टिक।

वैसे वह सुबह सुबह ये सब लगाती नही थी पर पता नही उसे आज क्यू ये सब करने का उसका मन कर रहा था।

फिर एक नई सूट निकालकर पहन ली।

तभी राजेश की नींद खुल गई।

उसे बाथरुम जाना था, फ्रेश होने के लिए।

वह अपने बेड से उठा, पर लड़खड़ाने लगा।

तभी सुजाता उसे दौड़कर सम्हाली।

सुजाता _राजेश, उठने से पहले,मुझे बता दिए होते, अभी तुम पूरी तरह ठीक नहीं हुवे हो।

राजेश _ओ मैम मुझे बाथरुम जाना था।

सुजाता _चलो,मै ले चलती हूं।

राजेश इस समय निर्वस्त्र था, उसे सुजाता के सामने शर्म महसूस हो रहा था।

पर अकेले बाथरुम जा पाने के स्थिति में नहीं था। अतः वह सुजाता के बाहों के सहारे बाथरुम में गया।

उसे पेशाब लगी थी, उसका land पेशाब के कारण तना हुआ था।

जिसे देखकर सुजाता मन ही मन हस रही थी।

बाथरुम में ले जानें के बाद, राजेश सुजाता को पकड़कर खड़ा रहा और एक हाथ से अपना land पकड़कर मूतने लगा।

सुजाता राजेश को मूतता huwa देखकर मुस्कुराने लगी।

पेशाब कर लेने के बाद,

राजेश _मैम, मुझे कमोड use करना है।

सुजाता ने राजेश को कमोड पर बिठा दिया,

राजेश _मैम आप बाहर जाओ ना, मैम आपको बुलाऊंगा।

सुजाता _मुस्कुराते हुए बोली क्यू शर्म आ रही है क्या? मेरे रहने से।

अच्छा मै बाहर हूं, जब हो जाए तो आवाज देना।

शौच करने के बाद, राजेश ने सुजाता को आवाज दिया।

राजेश _मैम, मुझे नहाना है।

सुजाता _राजेश पहले मैं डाक्टर से पूछ लूंकि तुम्हें नहाना है कि नही।

सुजाता ने डाक्टर को फ़ोन कर पूछी, डॉक्टर ने गर्म पानी से नहलाने को कहा।

सुजाता ने राजेश के लिए गीजर पे पानी गर्म किया, और फिर राजेश को नहलाने के लिए अपनी सूट निकालकर ब्रा और पैंटी में आ गई।

राजेश को गर्म पानी से नहलाने लगी, एंटीसेप्टिक साबुन लगाकर उसकी शरीर की अच्छे से सफाई की।

राजेश _मैम आपको मेरे कारण कितने कष्ट उठाने पड़ रहे हैं।

सुजाता _राजेश, ये जो तुम्हारी हालत हुई है उसके लिए मैं ही जिम्मेदार हूं। तुम्हारे लिए जितनी भी करू, कुछ भी नहीं।

नहाने के बाद शरीर को टावेल से अच्छे से पोछा।

सुजाता _राजेश, अब तुम आराम करो।

एक मिनट, पहले मैं बेड शीट बदल दू।

सुजाता ने राजेश को आराम करने के लिए फिर से लिटा दिया।

कुछ समय बाद डाक्टर आया और राजेश का चेक अप किया।

डाक्टर_राजेश, कोई तकलीफ तो नही, पहले से कैसे महसूस कर रहे हो।

राजेश _जी पहले से बेहतर फील कर रहा हूं।

शरीर में दर्द पहले से कम हो गया है।

डाक्टर _गुड, 2दिनों में तुम पहले की तरह चलने फिरने लगोगे।

डाक्टर ने सुजाता को राजेश के लिए कुछ और दवाई दी और उसके भोजन के बारे में बताया।

उसे भोजन में दाल, रोटी, सब्जी , फल एवम दूध देने को कहा।

डाक्टर के जानें के कुछ देर बाद। नौकर राजेश के लिए भोजन बनाकर लाई।

सुजाता ने अपने हाथो से दाल रोटी सब्जी खिलाया, उसे दूध पिलाया।

फिर राजेश के पूरे शरीर पर मलहम लगाया।

मलहम लगाते समय जब सुजाता ने राजेश की land की मालिश की तो सुजाता की मुलायम हाथो का अहसास पाकर राजेश का land फिर से अकड़ गया।

सुजाता मुस्कुराने लगी।

सुजाता ने प्यार से उसके land को चूमा फिर राजेश की आंखो में देखते हुए उसकी सुपाड़े को मुंह भरकर चूसने लगी।

राजेश ने सुजाता को land चूसते हुए देखता रहा।

कुछ देर land चूसने के बाद।

वह राजेश की बाहों में लेट गई।

उसकी सीने पे सिर रखकर बोली।

सुजाता _राजेश अब समझ में आया की मै बार बार तुम्हारी सपने क्यू देखती थीं।

जब सपने में मै बाढ़ से डूब रही होती तो, मुझे तुम बचाने आते थे।

राजेश _मैम, ये आप क्या कह रही हो, मै और आपके सपने में।

सुजाता _ हा, राजेश, तुम मेरे सपनो में आते थे। मुझे डूबने से बचाने, आज वो सच हो गया।

तभी राजेश को सुनीता का फ़ोन आया।

राजेश _हां मां बोलो।

सुनीता _बेटा, कैसा है तू ।

राजेश _मां ठीक हूं, मै।

सुनीता _घर कब आ रहा है।

राजेश _मां, एक दो दिन और रुकने पड़ेंगे।

सुनीता _बेटा मुझे तुम्हारी बड़ी चिंता हो रही है, तुम जल्दी घर आ जाओ।

राजेश _मां, मेरी चिंता न करो, मै बिल्कुल ठीक हू।

मैं एक दो दिनों में घर आ जाऊंगा।

सुनीता _ठीक है बेटे, अपना ख्याल रखना।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता ने फोन रख दिया।

सुजाता _ओह राजेश, कितना अच्छा होता कि हम यही रह जाते।

मैं तुमसे दूर नहीं रहना चाहती। शहर जाते ही, तुम मुझसे दूर हो जाओगे। I love you राजेश, मै अब तुमसे दूर नहीं रह पाऊंगी।

राजेश _मैम मै आपकी जज्बातों को समझ सकता हूं। लेकिन भावना में आकर हमें ऐसे काम नही करने चाहिए जिससे हमारे परिवार वालो को दुख पहुंचे।उस शहर में तुम्हारी एक बेटी है निशा और मेरी मां और पिता जी ,जो हमारे घर आने का इंतजार कर रहे है। मेरी मां मुझे लेकर न जानें कितने सपने सजोई है। हमे उनकी भावनाओं का कद्र करना चाहिए।

सुजाता _ राजेश, रिश्ते नाते अपनी जगह सही है लेकिन आज तुमने मेरे निरश जीवन में एक नया रंग भर दिया है।

देखो मेरे इन आंखो को, इसमें मैने काजल लगाई है देखो मेरे इन ओंठो को इस पर मैंने रंग चढ़ाया है। मैं तो ये सब करना कब की भूल चुकी थी।

मैं तो अपने लिए कब की जीना ही छोड़ दी थी। सिर्फ निशा के लिए ही जी रही थी, आज पहली बार मेरे मन में मुझे अपने लिए जीने के लिए उमंग पैदा huwa है।

क्या मैं तुम्हें पसंद नही?

राजेश _मैम, ये आप क्या कह रही है?, मै खुशनशीब हूं जो तुम्हारा इतना करीब हूं। जिसने तुम्हारे दिल में जगह पाया। तुम्हारा प्यार पाया। न जानें कितने लोग तुम्हारे करीब आने के लिए तरसते होंगेऔर तुम मेरी बाहों में हो। यह मेरी किस्मत है।

सुजाता _ओह राजेश, तुम मुझे मैम न बोलो,मुझे अपनी जान कहो प्लीज।

इधर सीमा , निशा के घर कालेज जाने के लिए आई।

निशा तैयार हो रही थी।

सीमा _क्या बात है ?मैमसाब आज बड़ी खुश लग हो।

_तू आ गई, तू फ़ोन पर मुझे कुछ बताना चाहती थी, बोलो मेरी बहना को क्या बताना है मुझे।

निशा _सीमा कैसे कहूं मुझे शर्म आ रही है।

सीमा _ओ हो क्या बात है मैं भी तो जानू आख़िर ये शर्म हया किस लिए।

निशा _सीमा, मुझे,,,

सीमा _हा बोलो, तुम्हें क्या,, क्यू शर्मा और घबरा रही हो,,

निशा _सीमा मुझे प्यार हो गया है।

सीमा _हुं तो तुम्हें ये बात आज पता चल रही है कि तुम्हें प्यार हो गया है।

निशा _हां।

सीमा _मै तो बहुत पहले से जानती हूं की तुम राजेश से प्यार करती हो।

निशा _पर वो कैसे?

सीमा _मै इतनी बुद्ध भी नही,,

अब छोड़ो, अच्छा ये बताओ की आगे क्या सोचा है?

राजेश को तुम यह बात जितनी जल्दी हो सके बता दो, अगर उसने किसी और से प्यार कर लिया तो जिंदगी भर पछताएगी।

निशा _सीमा मै क्या करू तुम ही बताओ?

सीमा _तुम राजेश से कह दो की तुम उससे प्यार करती हो।

निशा _मै ये कैसे कह पाऊंगी? मुझसे नही हो पाएगा। कही उसने न कर दिया तो।

सीमा _नही, वो न नही कहेगा।

निशा _क्यू, तुम इतनी विश्वास से कैसे कह सकती हो।

सीमा _क्यों कि वह तुमसे प्यार करता है? मैने उनकी आंखों में तुम्हारे लिए प्यार देखा है।

निशा _चल झूठी कही की,,

सीमा _वह सोनपुर से आएगा तो तुम मौका देख कर उसे अपनी दिल की बात कह देना।

निशा _सीमा तुम मेरी मदद करना न प्लीज।

सीमा _इजहार तो तुमको ही करना पड़ेगा।

मैं भी देखना चाहती हूं, मैम साब अपनी प्यार का इजहार करती हुई कैसी लगती हैं?

निशा _मतलब तू मेरी मजा लेना चाहती है।

सीमा _हूं।

इधर सुजाता रात में राजेश को भोजन कराकर खुद भोजन की उसके बाद अपनी सूट उतार कर बहुत ही सेक्सी नाइटी पहन ली, राजेश सुजाता को नाइटी पहनता huwa देख गर्म होने लगा।

सुजाता ने राजेश के पूरे शरीर पे चुम्बन लेते हुए मलहम लगाने लगी।

राजेश का land तो सुबह से ही तना हुआ था।

राजेश के आंखो में देखते हुए सुजाता एक एक कर अपनी सारे अंतः वस्त्र उतार कर निर्वस्त्र हो गई। और अपनी बालो को खुला छोड़ दी।

सुजाता की इस अवतार को देख राजेश के land झटके मारने लगा।

राजेश के आंखो में देखते हुए उसके करीब गई। उसकी सांसे तेज हो गई थी।

वह राजेश की ओंठ को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी। राजेश भी उसका सहयोग करने लगा।

फिर उसके सीने को चूमते हुवे नीचे गई, और राजेश के land को मुंह में भरकर चूसने लगी।

राजेश सुजाता की बालो को प्यार से सहलाने लगा।

कुछ देर तक land चूसने के बाद सुजाता ने अपना दूदू राजेश के मुंह में डाल दिया।

राजेश एक हाथ से सुजाता की दूदू मसल मसल कर पीने लगा।

सुजाता के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

उसकी सांसे तेज तेज चलने लगी।

अब सुजाता राजेश के land को पकड़ कर उसे अपनी बुर के छेद में रख कर उस पर बैठ गई। फिर राजेश के ओंठ को चूसते हुए।

धीरे धीरे land को बुर में अंदर बाहर करने लगी।

राजेश भी एक हाथ से सुजाता की कमर पकड़ी रखा था।

सुजाता अब राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

आह मां आह, अन आह, आह,, उन,,,,

राजेश और सुजाता दोनों एक बार फिर संभोग की परम सुख को प्राप्त करने लगे।

कुछ देर में ही सुजाताअपनीचरम अवस्थामें पहुंच कर झड़ गई।

वह राजेश की सीने में लुड़क गई।

कुछ देर बाद फिर से वह अपनी चूची राजेश के मुंह में डाल दी।

राजेश सुजाता की चूची मुंह में भरकर फिर चूसने लगा।

सुजाता अब राजेश की ओर पीठ कर land के उपर बैठ गई।

उसके बाद वह फिर से राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

कमरा एक बार फिर सुजाता की आह, उह, उन, उई मां, आह, की कराहो से गूंजने लगी।

राजेश की land सुजाता की बुर की गहराइयों को नापने लगा।

Land सुजाता की बच्चेदानी के मुंह को ठोक रहा था जिससे सुजाता बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई।

वह तेज तेज उछलने लगी।

इधर राजेश भी अपना कमर उठाकर land को बुर में और अधिक गहराई तक पहुंचाने की कोशिश करने लगा। उसके बदन का सारा दर्द कही खो गया था।

दोनों जन्नत की सैर पर निकल गए थे।

सुजाता बिना land को बाहर निकाले राजेश की ओर मुड़ गई और फिर उछल उछल कर चुदने लगी।

दोनों एक दूसरे के ओंठ चूसने लगे,

कुछ देर सुस्ताने के बाद सुजाता फिर मैदान सम्हाल लेती।

इस तरह लगभग घण्टे भर की धमकेदार chudai के बाद दोनों झड़ गए।

सुजाता राजेश की सीने में लुड़क कर लेट गई।

सुजाता ,राजेश के land को बुर से बिना बाहर निकाले ही राजेश की बाहों मे सो गई।

जब सुबह सुजाता की नींद खुली, वह राजेश की ओर प्यार से देखने लगी और उसकी बालों को सहलाने लगी।

वह बेड से उठी, बाथरुम में जाकर फ्रेश हुई और बाथरुम से बाहर निकल फिर से निर्वस्त्र ही राजेश की बाहों मे जाकर लेट गई।

इधर राजेश का नींद खुला, वह सुजाता के अपनी बाहों में पाया।

वह सुजाता की बालो को सहलाने लगा।

सुजाता की नींद खुल गई,

एक दूसरे को देखने लगे।

राजेश _मैम आप अभी तक सोई हो।

सुबह के 8बजने को है।

मुझे बाथरुम जाना है।

सुजाता _आज हम दोनों साथ में नहाएंगे।

सुजाता ने राजेश को बाथरुम ले गया फिर राजेश को फ्रेश कराकर।

सावर चालू कर दिया।

दोनो सावर के नीचे खड़े होकर, एक दूसरे को चूमते चाटते हुए नहाने लगे।

राजेश के पूरे बदन पर साबुन लगाकर अपने शरीर को राजेश की बदन से घिसने लगी।

दोनो काफी देर तक नहाने के बाद।

राजेश के शरीर को टावेल से अच्छी तरह पोछकर साफ किया। इस समय दोनो ही निर्वस्त्र थे।

राजेश की बालो पर कंघी की।

उसे बेड पर बिठा दिया, और खुद ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ कर सजने सवरने लगीं।

बहुत ही सुंदर साड़ी निकालकर पहन ली। और श्रृंगार करने लगी।

सुजाता, इस साड़ी में स्वर्ग की अप्सरा सी लगने लगी।

राजेश सुजाता के पास गया और उसे बाहों में भरकर आईने में देखने लगा।

राजेश _तुम स्वर्ग की अप्सरा लग रही हो।

सुजाता मुड़ी और राजेश से लिपट गई,,

वह गीत गाने लगी,,

आपके प्यार में हम संवरनेलगे

देख के आपको हम निखरने लगे

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

टूट के बाजुओं में बिखरने लगे

आपके प्यार में हम संवरने लगे।

रूप की आंच से तन पिघल जायेगा

आग लग जाएगी,मन मचल जाएगा

रूप की आंच से तन पिघल जायेगा

आग लग जाएगी मन मचल जाएगा

ये लब जरा टकराए जो, दिलबर के ओंठ से

चिंगारिया उड़ने लगीं शबनम की चोट से

हम सनम हद से आगे गुजरने लगे

हम सनम हद से आगे गुजरने लगे

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

टूट के बाजुओं में में बिखरने लगे

टूट के बाजुओं में बिखरने लगे

आपके प्यार में हम संवरने लगे।

इधर निशा सोनपुर राजेश का आने का इंतजार करने लगी।

वह कालेज से छुट्टीके बाद घर न आकर, सीमा के साथ नदी किनारे चली गईं ।

और राजेश के साथ, बिताए पलो को याद करने लगी।

वह नदी किनारे गीत गाने लगी,,

ऐ हवा मेरे संग संग चल

मेरे दिल में हुई है हल चल

कहे नदिया का पानी कल कल

तुझे आस मिलन की पल पल

है हवा,,,,,,,,

तूने ये कैसा जादू किया है

बिन डोर के मुझे बांध दिया है

तूने ये कैसा जादू किया है

बिन डोर के मुझे बांध दिया है

ऐ हवा मेरे संग संग चल

मेरे दिल में हुई है हल चल,,,

रुक न सकू मै दौड़ी आऊं

फिर कुछ सोच के मै घबराऊ

ऐ हवा मेरे संग संग चल

मेरे दिल में हुई है हल चल,,,,
 
आप सभी का शुक्रिया सपोर्ट करने के लिए, आप लोगो का कमेंट्स पढ़कर ही आगे लिखने के लिए बल मिलता है।
 
सोनपुर में तीन दिन और ठहरने के बाद आख़िर राजेश ओर सुनीता घर के लिए शहर को निकल गए। इन तीन दिनों को उन दोनो ने जी भर कर जिया क्यों की सुजाता जानती थी कि शहर में जानें के बाद वे शायद ही खुल कर मिल पाए।

उन्हे शहर में स्वतंत्रता नही मिलने वाली थी। इसलिए सुजाता ने सोनपुर में हर पल को जी भर के जिया।

इधर राजेश अब ठीक से चलने फिरने लगा था। पर उसकी सिर का चोंट अभी भी पूर्ण रूप से ठीक नहीं huwa था।

जब वे घर पहुंचे तो शाम के 5बज रहे थे। निशा कालेज से घर पहुंच चुकी थी। वह राजेश और अपनी मां कीआने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।

उसका दिल धड़कने लगा था, राजेश से मिलने के लिए।

जब राजेश और सुजाता घर पहुंचे। निशा तेजी से भागते हुए दरवाजे की चौंखट से झांकते हुए, राजेश को कार से उतरते हुए देखने लगी।

जैसे जैसे वे घर की ओर आने लगें उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी।

जब सुजाता, और राजेश दरवाजे के पास पहुंची निसा ने दौड़कर अपनी मां को सीने से लगा ली।

सुजाता _अरे बेटा क्या हुआ घबराई हुई लग रही है।

निशा _मॉम आप मुझे छोड़कर इतने दिन क्यू रही?

सुजाता _ओह बेटा, मजबूर थी, काम के सिलसिले में रुकना पड़ा।

निशा _मॉम , राजेश के सिर पर ये चोंट कैसी?

राजेश _ओ निशा क्या है न कि हम लोग बाहर टहलने के लिए निकले थे कि मेरा पैर फिसल गया और मेरे सिर पर चोंट लग गया।

निशा _मुझे आप लोगो ने बताया क्यू नही?

राजेश _तुम परेशान न हो जाओ इसलिए,,

राजेश और सुजाता दोनों सोफे पर बैठ कर आराम करने लगें।

सुजाता_बेटा तुम्हारे डैड कैसे हैं।

निशा _मॉम, डैड ठीक है। अभी वह आराम कर रहे हैं।

सुजाता _बेटा राजेश के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने कहो,,,

निशा _जी मां

राजेश _नही मैम, नाश्ता नही करूंगा। सिर्फ कॉफी ओ भी निशा की हाथो से बनी काफी, मै भी तो जानू निशा को काफी बनाने आती है की नही।

निशा _न बाबा, मै नही बनाऊंगी, मुझे नही आता काफी बनाने, कही बिगड़ गया तो आप लोग मेरा मजाक उड़ावोगे।

सुजाता हंसते हुवे बोली,

निशा ठीक कह रही है राजेश, इसने तो अब तक कीचन के अंदर गई ही नही होगी।

राजेश _क्या? मेरा तो इच्छा था कि निशा जी की हाथो से बना काफी ,पीने का ,पर कोई बात नही ।

नौकरों की हाथ से बनी काफी से काम चला लेंगे।

निशा निराश हो गई, वह राजेश की अपेक्षाओं पे खरी नहीं उतरी।

सुजाता _राजेश, मै काफ़ी बनाकर ले आती हूं।

निशा _नही मॉम, काफी मै ही बना कर लाऊंगी।

सुजाता _क्या? वह हंसने लगीं।

निशा _हां।

निशा मुंह बनाते हुए किचन में चली गईं।

वहा नौकरानी लोगो से पूछने लगी कि काफी कैसे बनाते हैं।

एक नौकरानी ने कहा _बिटिया रहने दे ना मैं बना देती हूं ,घर में इतने नौकरों के होते ,आप काफ़ी बनाए ये हमे अच्छा नही लगेगा।

निशा _ नही, बिमला आंटी काफी तो मैं ही बनाऊंगी।

बताओ क्या करनी है?

नौकरानी के बताए अनुसार निशा ने काफ़ी बनाकर ले आई।

राजेश _वाउ, ये हुई न बात। मुझे पता था तुम कर सकती हो।

निशा _आप तो मेरा मजाक बना रहे थे।

राजेश _वो तो चैलेंज देने के लिए था।

निशा _ अब पीकर बताओ कॉफी कैसी बनी है।

राजेश ने कॉफी पीकर देखा,

निशा _कैसी है, कुछ बोलते क्यू नही?

राजेश _बहुत गंदी,,

निशा का चेहरा उतर गया।

सुजाता और राजेश हसने लगे ।

निशा _मैने तो पहले ही कहा था, मुझसे नही बन पाएगी।

राजेश _ओह तुम तो निराश हो गई, सच में कॉफी बहुत टेस्टी बनी है।

सुजाता _हां बेटा, बहुत अच्छी कॉफी बनाई हो।

निशा _मॉम आप भी इसका साथ दे रहे हो। मेरा मजाक बनाने में।

सुजाता _नही, बेटा मै भला अपनी निशु की मजाक कैसे बना सकती हूं सच में कॉफी बहुत टेस्टी बनी है।

राजेश _हूं।

निशा खुश हो गई।

कॉफी पीने के बाद राजेश बोला

राजेश _मैम अब मै चलता हूं, मॉम राह देख रही होगी।

सुजाता _ठीक है राजेश, ड्राइवर तुम्हें घर छोड़ देगा। हा और आज से ये घर तुम्हारा भी है यहां आते जाते रहना ।तुम्हे यहां आने जानें के लिए किसी की परमिशन लेने की आवश्यकता नहीं है।

राजेश _अच्छा मैम मै चलता हूं।

निशा जी अब मैं चलू।

निशा ने हा में सिर हिलाया।

राजेश जानें लगा, वह कार के पास पहुंचने ही वाला था कि निशा ने राजेश को आवाज दी।

निशा _राजेश!

निशा की आवाज सुनकर राजेश रुक गया।

राजेश निशा के पास आया।

राजेश _, निशा जी कुछ कहना था मुझसे।

निशा_ओ,,,

राजेश _बोलो निशा जी क्या कहना है?

निशा _ओ,,,

राजेश _आप घबरा क्यू रही हो।

निशा _थैंक्स राजेश, हमे मुसीबत सेनिकालने के लिए।

वह राजेश के गले लग गई।

राजेश _तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो तुम्हारे लिए इतना नही कर सकता।

तुम्हें मुझे धन्य वाद देकर शर्मिंदा न करो।

निशा _ओह राजेश तुम कितने अच्छे हो।

राजेश _आप भी तो बहुत अच्छी हो,,,

निशा _राजेश मुझे तुमसे कुछ कहना है?

राजेश _,, बोलो निशा जी क्या कहना है?

निशा _ओ,ओ,,

तुम कॉफी पीने फिर कब आओगे,,

राजेश हसने लगा, जब आप बुलाए

अब मैं चलूं ,

निशा _हा में सिर हिलाया।

राजेश अपना घर चला गया।

निशा राजेश को अपनी दिल की बात कहने की बहुत कोशिश की पर वह बोल ना पाई।

वह निराश होकर अपने कमरे में चली गई और सीमा को फ़ोन कर बताने लगी।

इधर राजेश अपना घर पहुंचा, दरवाजे का बेल बजाया।

सुनीता_लगता है राजेश आ गया,,

वह तेजी से दरवाजे की ओर गई, दरवाजा खोली।

इधर स्वीटी को भी पता था कि राजेश आने वाला है।

वह भी दरवाजे के पास आ गई।

दरवाजा खुलते ही।

सुनिता ने सामने राजेश को देखा,,

राजेश ने सुनिता का पैर छू कर चरणस्पर्श किया।

सुनिता ने राजेश को उठाकर गले लगा लिया।

आ गया मेरा बेटा।

राजेश _हा मां।

सुनिता ने राजेश के सिर पर पट्टी लगा देखा तो

सुनिता _बेटा , तुम्हारे सिर पर चोंट कैसी?

राजेश _कुछ नही huwa है मां, ओ थोड़ा सा खरोच लगा है।

राजेश सोफे पर बैठ गया। सुनिता भी उसके पास बैठ गई।

स्वीटी वही खड़ी थी।

सुनिता _बेटा, बताता क्यू नही तुम्हारे सिर पर चोंट कैसी लगी?

स्वीटी _मां, मुझे तो लगता हैं किसी औरत के चक्कर में ये पिट के आया है।

सुनिता _स्वीटी, ये क्या अनाप शनाप बोल रही है अपने भाई के बारे में।

स्वीटी _फिर बताता क्यू नही, चोंट कैसे लगी?

इनको अपनी मां बाप और बहन की चिंता तो है नही। चला है दूसरे की भलाई करने।

सुनिता _बेटा बताता क्यू नही किसी के साथ मार पीट huwa है क्या?

राजेश _मां, हड़ताल खत्म कराने से मज़दूर यूनियन के कुछ लोग नाराज होकर मूझपर हमला कर दिया।

सुनिता _इतनी बडी बात मुझे बताया क्यू नही?

राजेश _तुम घबरा ना जाओ, इसलिए।

सुजाता _बेटा, मुझे पहले से ही डर था, वहा कुछ दंगा फसाद न हो। अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो, हम लोगो का क्या होता?

स्वीटी _हम लोगो की चिंता होती तो ये वहा जाता ही क्यू?

राजेश _मां मै बिल्कुल ठीक हू, क्या तुम चाहती हो की तुम्हारा बेटा मुस्किलो से भाग कर भगोड़ा कहलाए। अपने दोस्तो की मदद न करने।

सुनिता _नही बेटा, मै ये नही चाहती कोइ तुम्हें स्वार्थी कहे। तभी तो तुम्हें जाने की इजाजत दी।

पर मां हूं ना चिंता तो होगी ही।

राजेश _, ओह मेरी प्यारी मां, तुम्हें तो खुश होना चाहिए की तुम्हरा बेटा, कामयाब होकर आया है।

सुनिता _मुझे तुम पर गर्व है बेटा।

अब तुम अपने कमरे में जाकर आराम करो।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश स्वीटी से बोला,

राजेश _कैसी है मेरी गुड़िया,,,

स्वीटी _आपको मेरी फिक्र करने की आवश्यकता नहीं।

मैं एक दम मजे से हूं।

वह अपना मुंह बनाते, अपने कमरे में चली गई।

और राजेश अपने कमरे में।

रात में सोने के समय, सुजाता ने राजेश को काल किया।

सुजाता _, सो गए क्या?

राजेश _नही मैम , बस सोने की तैयारी में था।

सुजाता _क्या तुम्हें मेरी याद नही आ रही?

तुम मर्द लोग भी कितने आसानी से भूल जाते हो।

राजेश _नही, मैम कैसे भुल सकता हूं आपके साथ बिताए पलो को, मै तो अब भी महसूस कर रहा हूं।

तुम्हारी बदन की खुशबू का अहसास मेरी नाक में अब तक हो रही है।

सुजाता _चुप झूठा कही का।

मैं तुम्हें बहुत मिस कर रही हूं।

राजेश _मै भी।

सुजाता_अच्छा सुनो कल मै तेरी मां से मिलूंगी।

राजेश _क्यू?

सुजाता _डिनर में इनवाइट करने।

जब उसका बेटा ने हमारी कंपनी को मुसीबत से बचाया है तो मां बाप से तो मिलना ही पड़ेगा। नही तो लोग मुझे मतलबी कहेंगे।

राजेश _कितना समय आ रही हो?

सुजाता _सोच रही हूं कल ऑफिस जाते समय आपके मम्मी से मिलती चलूं।

वैसे तुम्हारी मम्मी ने तुम्हारे सिर के चोंट के बारे में पूछी होगी। तुमने क्या बताया?

राजेश _स्वीटी बोल रही थी की किसी औरत के चक्कर में पिटकर आया है।

सुजाता हसने लगी।

राजेश _हस क्यू रही हो?

सुजाता _ठीक ही तो बोली।

राजेश _उन्हे क्या पता बदले में प्यार भी तो खूब मिला?

सुजाता _और नही चाहिए क्या मेरा प्यार? लगता हैं जी भर गया।

राजेश _हाय, इतनी जल्दी जी कैसा भर सकता है? तुम बुलाओ तो सही, तुम्हारा दीवाना हाजिर हो जायेगा। प्यार करने।

सुजाता _अच्छा, देखते हैं। देखो मैंने तुम्हें अपना सबकुछ दे दिया है, मुझे धोखा मत देना प्लीज। मै तुम्हें दूसरी औरत के साथ बर्दास्त नही कर पाऊंगी।

राजेश _ओह, तो मुझे अपनी कैद में रखना चाहती हो।

सुजाता _तुम जो भी समझो। पर तुम सिर्फ मेरे हो।

राजेश _इतना प्यार करती हो मुझसे।

सुजाता _हां, निशा के बाद तुमसे। पर मुझे तुम पर शक हो रहा है, कही तुम मुझे धोखा न दे दो।

क्यू कि तुमने खुलकर अपनी दिल की बात नही बताई है।

राजेश _मै तो उस हर शख्स से प्यार करता हूं जो मुझे प्यार करता है। उन सबमें तुम्हारा स्थान श्रेष्ठ है।

सुजाता _मतलब मै तुम्हारे दिल में विशेष स्थान रखती हूं।

राजेश _बिल्कुल।

सुजाता _ओह, थैंक्स राजेश मै यही सुनना चाहती थी।

आई लव यू राजेश।

राजेश _i Love you जानू

सुजाता _ओके बाय, रात को मेरे सपनो में आना।

राजेश _ओके bye sweetheart

अगले दिन जब राजेश कालेज के लिए निकला।

स्वीटी वही रोड पर खड़ी थी, अपनी सहेली की इंतजार करते।

राजेश _चलो बैठो।

स्वीटी _न, आप जाओ। मै अपनी सहेली के साथ जाऊंगी।

राजेश _तुम अब तक नाराज हो मुझसे।

स्वीटी ने कुछ नहीं कहा,,

राजेश ने फिर switi को बैठने कहा,,,

स्वीटी बाइक में बैठ गई और चुप ही रही।

राजेश _देखो स्वीटीतुम अभी छोटी हो, तुम जो चाहती हो वो ठीक नहीं तुम्हें इन सब चीजों में ध्यान नहीं देना चाहिए।

स्वीटी _मै अब बच्ची नही रही। मेरी क्लास की कई लड़कियां सेक्स कर चुके हैं।

राजेश _सीमा और निशा को देखो, वो कितनी अच्छी है, उनकी तरह क्यू नही सोचती?

स्वीटी _जब मां के साथ कर सकते हो तो मेरे साथ क्यू नही?

राजेश _मां की बात और है। उसे मेरी जरूरत है। पापा काम के बोझ के कारण मां का साथ नही दे बाते।

आखिर वह अपनी भावनाओं को दबाकर कब तक घुट घुट कर जीती रहेगी। इसलिए मुझे मां को बेटे के प्यार के साथ साथ पति का प्यार भी देना पड़ता है।

दोनो कालेज पहुंच गए।

इधर सुनिता किचन में काम कर रही थी। तभी दरवाजे की बेल बजी।

सुनिता _इस समय कौन हो सकता है?

सुनिता ने दरवाजा खोली।

सामने सुजाता खड़ी थी।

सुजाता _नमस्ते दी, सुजाता ने हाथ जोड़ कर कहा।

मैं सुजाता हूं।

सुनिता _आपको कौन नही पहचानेगा, आप सुजाता और विशाल ग्रुप्स की मालकिन है।

सुनीता _आइए न।

सुजाता घर के अंदर आई ओर सोफे पर बैठ गई।

सुनिता _अप बैठिए, मै पानी लेकर आती हूं।

कॉफी लेंगी आप।

सुजाता _जी रहने दीजिए न दीदी, क्यू तकलीफ उठा राही है आप।

सुनिता _इसमें तकलीफ कैसी, पहली बार तो घर सा राही है आप मेरी। ये तो मेरा फर्ज है।

सुनिता कॉफी बनाने लगी।

सुजाता घर का मुआइना करने लगी। कॉफी बनाते समय वह सोचने लगी। पता नहीं अचानक से क्यों आई है। मूझे तो इन बड़े लोगों से डर लगता है।

सुनीता कॉफी लेकर आई।

सुनीता _लीजिए कॉफी लीजिए।

सुजाता _धन्यवाद दी।

सुनिता _सुजाता जी आप कुछ काम से आई थी क्या? राजेश तो कालेज चला गया है।

सुजाता _नही दी मै आपसे ही मिलने आई हूं।

आपको तो पता ही है हमारी कंपनी कितनी मुसीबत में फस गई थी।

राजेश ने अगर मदद न की होती तो हमारी कंपनी डूब चुकी होती। आप बडी किस्मत वाली है दीदी जो इतना होनहार बेटे की मां हो, राजेश की प्रतिभा असाधारण है। उसने बिना किसी स्वार्थ के हमारी मदद की।

सुनिता _ ये आप क्या कह रही है?

निशा राजेश की दोस्त है, दोस्त का परिवार मुसीबत में हो तो उसकी मदद करना उसका फर्ज है।

सुजाता _दी, आपने राजेश को इतने अच्छे संस्कार दिए हैं, उसी का परिणाम है जो कुछ ही समय में सबका दिल जीत लेता है।

राजेश ने हमारी मदद की हमारा भी कुछ फर्ज बनता है इसलिए मैं आज आप लोगो को डिनर में आमन्त्रित करने आई हूं।

सुनिता _सुजाता जी इसकी क्या आवश्यकता है?

सुजाता _नही दीदी, आप लोग आएंगे तो हमें खुशी होगी प्लीज इनकार मत कीजिए।

सुनिता _ठीक है । हम आ जाएंगे।

सुजाता _धन्यवाद दी मै आप लोगों का इन्तजार करूंगी।

अब मुझे इजाजत दीजिए।

सुजाता ने हाथ जोड़ कर जाने की इजाजत मांगी।

सुनिता ने भी हाथ जोड़ कर, हा में सिर हिलाई।

राजेश जब भगत और अन्य दोस्तो से मिला,,

भगत _भाई आपके सिर पर चोंट कैसी?

राजेश _कुछ नही यार, कुछ गुंडे थे जिन्हे सबक सिखाना जरूरी था, उसकी को सबक सिखाते यह चोट लग गई।

भगत _भाई, अगर कुछ कसर बांकी रह गई हो तो हमें बताओ शालो को घर में घुस कर मारेंगे।

राजेश _अरे नही, वो और मार खाने लायक नहीं बचे हैं।

और कैसा चल रहा है कालेज।

भगत _कालेज में तो सब ठीक ही चल रहा है पर भाई तेरे बिना, मजा ही नही आता।

हम तो आप ही का इंतजार कर रहे थे कि आप कब आएंगे।

तभी क्लास की घंटी बजी और सभी क्लास में चले गए।

इधर सीमा और निशा क्लास में,

निशा _सीमा मैने बहुत कोशिश की राजेश को अपने दिल की बात बताने की, पर बता न सकी।

सीमा _हूं, कोशिश जारी रखो। जब भी मौका मिले बता देना।

निशा _मॉम ने आज राजेश और उनकी फैमिली को डिनर के लिए इनवाइट किया है।

सीमा _ओह, ये तो बडी अच्छी बात है, तुम मौका देख कर राजेश से अपनी दिल की बात कह देना।

निशा _पता नही इतने लोगो के बीच मौका मिल पाएगा की नही।

सीमा तुम भी शामिल होना डिनर में।

सीमा _ठीक है।

कालेज में छुट्टी होने के बाद राजेश घर पहुंचा। सुनिता किचन में काम कर रही थी।

राजेश किचन में जाकर अपनी सुनिता को पीछेसे बाहों मे भर लिया।

सुनिता _आ गया मेरा बेटा कालेज से।

राजेश _हा, मां।

सुनिता _पता है, तुम्हारे कालेज जानें के बाद सुजाता आई थी।

राजेश _क्या? पर वो क्यू आई थी?

सुनिता _वह हमे डिनर में आमन्त्रित की है।

राजेश _तो आपने क्या कहा?

सुनिता _वह बार बार निवेदन कर रही थी इसलिए मैं इनकार ना कार सकी।

हमे रात 7: 30बजे उसके घर के लिए निकलना होगा। मैने तुम्हारे पापा को कह दिया है घर जल्दी आने को, उसने हमें तैयार रहने को बोला है।

तुम और स्वीटी भी तैयार हो जाना समय पर।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपने कमरे में चला गया।

, शाम के 7बजने के बाद सुनिता स्वीटी के कमरे में आई।

सुनिता _बेटी तुम जल्दी तयार हो जाओ,

Switi _क्यू मां कहा चलना है?

सुजाता _लो,बेटा मै तो तुम्हें बताना ही भूल गई, बेटा हमे सुजाता जी ने रात्रि भोज के लिए आमन्त्रित किया है। तुम जल्दी तैयार हो जाओ।

स्वीटी _नही, मां, मै नही जाऊंगी।

सुनिता _क्यू क्या huwa?

स्वीटी _क्यू की वहा मेरा जानें का मन नही।

सुनिता _बेटा यू तुम क्या कह रही हो, वे लोग तुम्हारे बारे में पूछेंगे तो हम क्या जवाब देंगे। क्या तुम हमें शर्मिंदा कर्ण चाहती हो।

Switi _, मां अगर वे मेरे बारे में पूछेंगे तो बता देना उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं।

सुनिता _अपनी मां से झूठ बुलवाना चाहती है, जल्दी से तैयार हो जाओ, बहुत हो गया तुम्हरा नाटक।

सुनिता वहा से निकल कर राजेश के कमरे में गई।

राजेश _मां,आप।

सुनिता _बेटा जरा मेरे कमरे में आना।

राजेश _क्यू मां कुछ काम था क्या?

सुनिता _हा बेटा।

राजेश सुनिता के पीछे पीछे उसके कमरे में चला गया।

सुनिता _ने अपनी कपड़े की आलमारी खोल के बोली। बेटा मै कौन सी साड़ी पहनु मुझे तो कुछ समझ ही नही आ रहा।

राजेश ने सुनिता को पीछे से बाहों मे भरते हुए कहा, मां आप पर तो कोई भी साड़ी हो खूब जचती है, इतनी सुंदर जो हो।

वो तो हर बेटे को अपनी मां सबसे सुंदर लगती हैं।

राजेश _नही मां, आप सच में बहुत सुंदर है।

सुनिता _अच्छा, अब तारीफ करना बंद कर और बता कौन सी साड़ी पहनू।

राजेश ने एक साड़ी अपनी पसंद की निकाली।

राजेश _मॉम ये साड़ी पहनो, देखना सुजाता मैम तुम्हारे सामने फीकी लगेगी।

सुनिता _सुजाता, भी किसी अप्सरा से कम नहीं है। वह निशा की मां नही बड़ी बहन लगती है।

राजेश _मां, तुम भी तो स्वीटी की मां नही उसकी बडी बहन लगती हो।

सुनिता _अपनी मां की झूठी तारीफ करना बंद करो और जाओ तुम भी तैयार हो जाओ तुम्हारे पापा आते होंगे फिर हम निकलेंगे।

राजेश _मां, मुझे पहन कर दिखाओ कि इस साड़ी में कैसी लगती हो?

सुनिता _अच्छा , ठीक है तुम जाओ अपने कमरे में, थोड़े देर बाद आकर देख लेना कैसी लग रही हूं?

राजेश _नही, मुझे यही रहूंगा।

सुनिता _क्या? मतलब तुम्हें बदमाशी सूझ रही है। चल भाग यहां से बदमाश कही का।

सुनिता ने राजेश को धकेलते हुवे दरवाजे से बाहर कर दी। और मुस्कुराते हुवे आईने के सामने खड़ी होकर साड़ी बदलने लगी।

राजेश निराश होकर अपने कमरे में जाकर, तैयार होने लगा। नया जींस और शर्ट पहन लिया।

राजेश तैयार होकर अपनी मां के कमरे के पास जाकर दरवाजा खटखटाया।

सुनिता ने दरवाजा खोली।

राजेश _राजेश, सुनिता को देखता ही रह गया।

सुनिता _अरे बेटा कहा खो गया।

राजेश _मां, सच में तुम स्वर्ग की कोई अप्सरा लग रही हो।

सुनिता आईने के पास गई और अपनी मंगल सूत्र पहनते हुवे बोली,, हूं तू फिर शुरू हो गया।

राजेश ने सुनिता को पीछे से बाहों मे भर कर आईने में देखते हुए बोला।

राजेश _मां, मै सच कह रहा। तुम सच में अप्सरा लग रही हो। और वह सुनिता की ओंठ चूम लिया।

सुनिता _बदमाश ये क्या कर रहा है? तेरी नियत बिगड़ रही है। छोड़ मुझे तेरे पापा किसी भी समय पहुंच सकते हैं।

राजेश ने सुनिता को पीछे से और कस कर जकड़ लिया। और उसकी गर्दन पर चुम्बन लेने लगा।

सुनिता _बेटा, ये क्या कर रहा है तू? लगता हैं तू फिर बावला हो गया है।

राजेश एक हाथ से सुनिता की पेट सहलाने लगा।

और एक हाथ से उसकी चूची मसलते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा।

सुनिता _, राजेश, छोड़ो भी, तुम्हारे पापा किसी भी समय आ जायेंगे। ये समय नहीं अभी ये सब करने वाली का।

पर राजेश ने अपना कार्य जारी रखा जिसका प्रभाव सुनिता पर ये पड़ा की वह सिसकने लगी।

सुनीता _बेटा छोड़ो न, तुम्हारे पापा आ जायेंगे छोड़ो न, क्या कर रहे हो?

राजेश की हरकतों से सुनीता गर्म होने लगी। उसके मुंह से हल्की हल्की कामुक सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश सुनिता को बेड में ले जाकर अपनी गोद में बिठा कर अपनी दोनो हाथो से उसकी चूची मसलता हुआ, उसके ओंठ चूसने लगा।

राजेश की हरकतों से सुनीता बहुत गर्म हो गई उसकी बुर से पानी छुटने लगी, मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

राजेश का land भी तनकर खड़ा हो गया था।

तभी दरवाजे की बेल बजी।

सुनिता _राजेश अब छोड़ो, तुम्हारा पापा आ गया।

राजेश _नही मां, थोड़ी देर और प्यार करने दो न। बड़ा मन कर रहा है।

सुनिता _अरे बाबा, अब जो भी करना है रात में कर लेना, अभी छोड़ो मुझे।

राजेश _क्या सच में मां, आज रात में प्यार करने दोगी। देखो अपनी बात से मुकर नही जाना।

सुनिता _नही मुकरूंगी बाबा अब छोड़ो भी।

राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया। सुनिता दरवाजा खोलने चली गई।

शेखर _अरे भाग्यवान, इतनी देर क्यू हो गई दरवाज़ा खोलने में।

सुनीता _वो क्या है न जी की मैं तैयार हो रही थी।

अब आप भी जल्दी तैयार हो जाइए। बच्चे लोग तैयार हो चुके हैं।

शेखर _ठीक है, डार्लिंग। कुछ देर में

शेखर भी तैयार हो गया फिर चारो कार में बैठकर निशा की घर के लिए निकले गए।

 
धन्य वाद दोस्तों आप सभी का कमेंट्स पड़कर अच्छा लगा , आप सभी का प्रोत्साहन के लिए हृदय से धन्यवाद,
 
शुक्रिया दोस्तो आप सभी का कमेंट्स पढ़कर अच्छा लगा, प्रोत्साहन के लिए आप सभी का हृदय से धन्यवाद,,,,☺️
 
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