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- Dec 5, 2013
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गीता ने जब देखा की, राजेश नदी किनारे अकेला बैठा है, अपने ख्यालों में खोया हुआ है। वह उसके पास गई।
उसने राजेश को आवाज दी।
गीता _राजेश,,
राजेश,,,
राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया, वह कही खोया हुआ था। तब गीता उसकी कंधे पर हाथ रखी,,,
गीता _राजेश,,,
राजेश, अपने ख्यालों से बाहर आया।
राजेश _गीता दी तुम यहां,,,
गीता _वहीं सवाल तो मैं तुम्हे पुछने वाली थी। तुम यहां क्या कर रहे हो।
राजेश _बस ऐसे ही,, अपना अकेला पन इन हसीन वादियों के साथ बाटने, चला आया।
पर आप यहां कैसे?
गीता _मै तो जिला कार्यालय मीटिंग में गई थी, यहां सड़क किनारे तुम्हारा बाइक खड़ा देखा तो, तुम्हे ढूढते यहां चला आया।
वैसे जगह काफी खूबसूरत है, लगता है तुम यहां पहले भी किसी के साथ आते रहे हो।
राजेश _जगह ही ऐसी है दी, राही को रुकने पर मजबूर कर देता है।
गीता _पर लोग यहां अकेले तो नही आते ,,
राजेश _ये तो किस्मत की बात है दी , इंसान का समय हमेशा, एक जैसा तो नही रहता न। कभी कोई हमारे साथ होती है तो कभी हम अकेले रह जाते हैं।
गीता _तुम दिव्या को मिस कर रहे हों?
राजेश _दिव्या जी को मैने अपना सच्चा दोस्त माना था, दी, पर वह मुझे बिना बताए ही चली गई।
मतलब वह मुझे अपना दोस्त नहीं समझती थी।
पहले निशा जी, और अब दिव्या जी, शायद मेरे जीवन में अकेला पन ही लिखा है।
जब भी कोई मुझे अपना लगने लगता है, मुझे छोड़ कर चली जाती है।
वैसे आपको, इस सुन सान जगह पर नही आना चाहिए था दी।
गीता _राजेश दिव्या ने, तुमसे सच बताने से मना कि थी, पर मुझे लगता है कि सच बताना जरूरी है नही तो बहुत देर हो जायेगी।
राजेश _कैसा सच दी?
गीता _यही की दिव्या, विदेश नही गई है
राजेश _क्या?
गीता _हां, दिव्या विदेश नही गई है ।
राजेश _तो फिर कहा है दिव्या जी।
गीता _वह, नानी के पास गई है, सेवा आश्रम ।
राजेश _अगर वह नानी के पास गई है तो फिर झूठ बोलने की क्या जरूरत पड़ी?
गीता _क्यों कि वह मां बनने वाली है?
राजेश _क्या,,
दी ये आप क्या कह रही है?
गीता _वही जो सच है।
वह मां बनने वाली हैं ?
इससे पहले लोगो को पता चलता की वह बियाहे, मां बनने वाली हैं? लोग हमारे खानदान पर कीचड़ उछाले, वह यहां से चली गईं।
राजेश _पर ये कैसे हो सकता है दी, दिव्या जी ने तो मुझे कभी बताया ही नहीं की कोई उसका यार दोस्त भी है, फिर वो मां कैसे बन सकती है?
गीता _क्यों, तुम तो हो न उसके दोस्त?
राजेश _दी मै कुछ समझा नही।
गीता _राजेश उसके पेट मे जो बच्चा है वह तुम्हारा है?
राजेश _दी ये आप क्या कह रही है? दिव्या जी के पेट में मेरा बच्चा कैसे आ सकता है?
गीता _तुम चौंक गए न।
तुम्हे पता नही उस रात क्या huwa था?
राजेश _तुम किस रात की बात कर रहे हो दी?
गीता _राजेश, वह दिन याद करो जब गणेश पुर मेले का उद्घाटन था, मुझे सर पिता जी को नक्सली अपने साथ ले गए थे। तुमने और दिव्या ने अपनी जान जोखिम में डाल कर हमे बचाया, हम नदी के रास्ते लकड़ी के नाव से रात में निकल रहे थे।
राजेश _हां दी वो सब तो मुझे याद है।
गीता _तुम्हे यह भी याद होगा, नाव हम सबका भार नही उठा पाया तो तुम नदी में ही तैरते हुए, नाव को किनारे तक पहुंचाने की कोशिश करने लगे।
राजेश _हां दी ये सब तो मुझे याद है।
गीता _उसके बाद क्या हुआ था तुम्हे याद है?
राजेश _नही दी, उसके बाद तो सुबह मैं अपने आपको झोपड़ी के खाट में लेटा पाया।
गीता _राजेश तुम्हे पता नहीं है उस रात क्या हुआ था। नदी का पानी इतना ठंडा था की पानी में डूबे रहने से तुम्हारा पुरा शरीर ठंड से अकड़ गया था। तुम बेहोश हो गए थे।
तुम्हारा शरीर का खून जम गया था। नब्ज एकदम धीमा हो गया था।
हमने कई उपाये किए तुम्हे होश ही नहीं आया।
तब दिव्या ने तुम्हे बचाने के लिए वह किया जो आज उसके जीवन का अभिशाप बन गया।
राजेश _दी, दिव्या जी ने मेरी जान बचाने के लिए क्या किया?
दिव्या _वह निर्वस्त्र होकर तुम्हे अपनी जिस्म की गर्मी दिया। जिस्म की गर्मी से तुम धीरे धीरे होस में आने लगे। फिर वही huwa जिसका डर था।
तुमने उसकी कौमार्य भंग कर दिया।
राजेश _नही, ऐसा नहीं हो सकता? मै दिव्या जी के साथ ऐसा सोच भी नही सकता।
गीता _ये सच है, राजेश।
राजेश _पर ये सब चीजे मुझसे छिपाने की क्या जरूरत थी? दिव्या जी ने मुझे बताया क्यूं नही?
गीता _क्या बताती वह, तुम तो निशा से प्यार करते हो न। दिव्या यह बता कर की वह तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हैं? तुम पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहती थी। वैसे भी तुम्हारा इंटर व्यू था।
इन सबका तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़ सकता था। दिव्या नही चाहती थी कि तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़े, वह तुम पर दबाव भी नहीं बनाना चाहती थी।
हमने उसे बच्चा गिराने के लिए कहा, पर वह नही मानी। वह तुम्हारे बच्चे को जन्म देना चाहती है!
पिता जी तो उसकी दूसरे से शादी कराने की बात कर रहे थे। पर दिव्या नही मानी।
अब दिव्या के पास कोई और चारा नहीं बचा था, इसलिए उसे यहां से जाना पड़ा।
राजेश _दिव्या जी को मेरे कारण इतना कुछ सहना पड़ा, धिक्कार है मुझे।
मुझे उसके पास जाना है, दी कहा है दिव्या जी बताओ मुझे। पता नहीं वह किस हालत में होगी ?
गीता _मैने बताया तो था, वह नानी के पास गई है। यहां से 300km दूर नानी का सेवा आश्रम है।
वह वहीं गई है।
राजेश _दिव्या जी मै आ रहा हूं, मै अकेले आपको दुनिया से संघर्ष करने नही दूंगा। चाहे जो भी हो जाए।
राजेश और गीता वहां से घर चलें आए।
रत्नवती _बेटी आज आने में देर कर दी?
गीता _हां मां, मुझे रास्ते में राजेश मिला था, वह अकेला था। नदी किनारे बैठा था। मां राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा है।
मैने राजेश को सब सच बता दिया कि दिव्या विदेश नही बल्कि नानी के घर गई है, उनकी सेवा आश्रम में।
रत्नवती _बेटी ये तूने क्या किया? दिव्या ने मना किया था, बताने को।
गीता _मैने जो किया ठीक किया मां, शायद दिव्या की इसी में भलाई है। मै जानती हूं, दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है, और दिव्या निशा के कारण राजेश से यह बात छिपाती है। मां दिव्या ने जो जो त्याग किया है उसके लिए उसे फल मिलना चाहिए मां। राजेश कल सेवा आश्रम जा रहा है, दिव्या से मिलने।
रत्नवती _बेटी, अब क्या होगा?
गीता _जो भी होगा, अच्छा ही होगा मां।
गीता और रत्नवती की बाते ठाकुर ने छुपकर सुन लिया।
ठाकुर _मुझे उस साले को रोकना होगा? वो साले दिव्या से मिले और मेरी इज्जत को मिट्टी में मिला दे, मै उस साले को ही मिट्टी में मिला दूंगा।
दिव्या जब आश्रम पहुंची, तो ठाकुर ने पहले ही, अपने आदमियों को, वहां तैनात कर दिया था। आश्रम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।
वहा की जानकारी उसको मिलती रहे।
उसने अपने खास आदमी भैरव को वहा भेजा था।
उसने भैरव को फोन लगाया।
भैरव _हुकुम आपने मुझे याद किया।
ठाकुर _हा भैरव।
वो समय आ चुका है, जिसके लिए तुम्हे वहा भेजा था। मुझे पता था वो शाला एक दिन आश्रम जरूर पहुंचेगा, वो शाला राजेश कल आश्रम पहुंच रहा है।
पर तुम्हे उसे आश्रम में पहुंचने से पहले ही ख़त्म करना होगा।
भैरव _हुकुम आप चिन्ता न करे। राजेश, आश्रम नही पहुंचेगा।
ठाकुर _भैरव, उस साले को ख़त्म करना आसान नहीं है बहुत ताकतवर है साला, उसे खत्म करने की कई बार कोशिश किया गया, पर हर बार बच निकलता है।
तुम लोग उसे सामने से नही नही हरा सकते। उसे धोखे से मारना।
भैरव _मै समझ गया हुकुम। इस बार वह नही बचेगा आप निश्चिंत रहिए।
उसके बाद भैरव, राजेश को ख़त्म करने के लिए योजना बनाने में जुट गया।
इधर राजेश घर पहुंचा,,,
पदमा _अरे बेटा तू कहा गया था?
राजेश _कही नही ताई, बस यूं ही टहलने के लिए।
पदमा _अरे बेटा कही जाता है तो बताकर जाया कर, हमे तुम्हारी चिन्ता होने लगती है।
राजेश आंगन में लगे खाट पर लेट गया।
पदमा _बहु, राजेश के लिए चाय ले आ।
पूनम _ जी मां जी,
राजेश _नही ताई चाय को रहने दो, पीने का मन नही है।
पदमा _क्या बात है बेटा, कुछ चिंतित लग रहा है?
राजेश _ताई मै कल चंद्रपुर जा रहा हूं। वहा एक गांव है शिवपुर।
पदमा _पर वहा क्या काम है बेटा?
राजेश _हां ताई, वहा कुछ काम है, जो अभी आपको नही बता सकता। वहा से आने के बाद ही आपको बताऊंगा।
पदमा _ऐसा क्या काम आ गया है बेटा, कही कोई लड़ाई झगडे वाली बात तो नही। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।
राजेश _नही ताई, ऐसी कोई बात नही है। मै जाकर जल्द ही वापस लौट आऊंगा।
रात में भोजन के समय घर के सभी लोगो को पदमा ने यह बात बताई की राजेश कल चंद्रपुर जा रहा है।
भुवन _राजेश, मुझे लगता है की तुम्हारा अकेले जाना ठीक नही है, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा।
राजेश _भईया मुझे वहा कितने दिन लगेंगे, एक दो तीन दिनो में आ जाऊ या सप्ताह लगेंगे। कह नही सकता, यहां आपकों खेती के काम सम्हालने है। इसलिए मेरा अकेला जाना ही उचित है।
रात में सबके सो जाने के बाद पूनम राजेश के कमरे में आई।
राजेश _भाभी आप इस वक्त
पूनम _तुम भी तो इतनी रात तक जाग रहे हो।
क्या बात है देवर जी। आज आप कुछ ज्यादा ही चिंतित लग रहे हैं।
राजेश _हां भाभी, आज मैं चिंतित हूं ।
पूनम _चिंता का कारण आप अपनी भाभी को नही बताओगे।
राजेश _भाभी, बात ऐसी है जो मैं अभी किसी को नहीं बता सकता मुझे माफ करना भाभी।
पूनम _कोई बात नही देवर जी। कल आपको चंद्रपुर जाना है। आप इस तरह जागते रहेंगे तो, तबियत बिगड़ सकती है।
राजेश _अभी इन आंखो में नींद मुस्किल हैं भाभी, मुझे रात जाग कर ही बितानी होगी।
आप मेरी चिंता न कीजिए, जाइए सो जाइए।
पूनम _मै तुम्हारी नींद में कुछ मदद कर दू।
पूनम ने अपनी ब्लाउज की बटन खोलते हुए कहा,,
राजेश _भाभी आज मेरा मन नही है, प्लीज
पूनम _तुम्हारा मन नही है तो क्या,मेरा तो मन है, लगता है तुम्हारा, मन अपने भाभी से भर गया है। जब से इंटरव्यू दिलाकर आए हो। एक बार भी प्यार से गले नही लगाए होऔर कल फिर जा रहे हो। देवर जी तुम मतलबी निकले।
पूनम की आंखो में आंसू भर आए।
वह आंसू पोछते हुवे, कमरे से जानें लगी।
तभी राजेश ने उसकी हाथ को पकड़ लिया।
राजेश _भाभी , मुझसे नाराज़ हो गई क्या?
पुनम _नही, देवर जी आपको क्या लगता है, सिर्फ निशा और दिव्या ही आपसे प्यार करती है और कोई नहीं।
आपने तो कभी किसी औरत की दिल की बात जानना चाहा नही, रात को भोग कर सुबह सब भूल गए।
पर औरत के साथ ऐसा नहीं है, हा मै ये जानती हूं कि अपनी पति के अलावा दूसरे मर्द को चाहना गलत है।
पर दिल कहा किसी की सुनता है। जिसको ये दिल भाता है बस उसी का होकर रह जाता है।
तुम मर्दों को तो औरत बस मन बहलाने की चीज लगती है। कुछ दिन खेल लिए फिर जी भर गया तो भूल गए।
राजेश _भाभी मुझे माफ कर दो, आपकी भावनाओं को मैं समझ नही पाया। अभी मैं कुछ दिनो से तनाव में हूं।
पुनम _कोई बात नही देवर जी, अब मुझे जाने दो, आगे मै आपसे कोई शिकायत नहीं करूंगी।
राजेश _नही भाभी, पता नही आगे क्या होने वाला है। आगे हमे मिलने का मौका मिलेगा कि नही कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए आज की रात, अपने सारे गीले सिकवे दूर कर लो।
पुनम राजेश की आंखों में देखी, फिर वह उसके करीब गई। फिर अपनी ओंठ राजेश की ओंठ पर रख चूसने लगीं।
राजेश भी पुनम की साथ देने लगा।
दोनो के बीच कुछ देर तक चूमा चाटी चलता रहा। उसके कपड़े कब उतरे उन्हे पता ही नहीं चला। राजेश ने पूनम की दूदू को मसल मसल कर खूब निचोड़ निचोड़ कर पिया। उसकी chut चांट चांट कर उसे खूब मज़े दिए। पुनम ने भी राजेशका लंद चूस चूस कर उसका लंद खूब लंबा और मोटा कार दिया।
राजेश रात भर पुनम को पेलता रहा। उसे कामसूत्र के कोइ भी आसन नहीं बचा जिसका उसने उपयोग न किया हो।
रात भर कमरे के अदंर पुनम की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनकने की आवाज गूंजती रही।
पुनम को पूरी तरह तृप्त करने के बाद, राजेश उसकी योनि में बीज छोड़कर उसके ऊपर ढेर हो गया।
राजेश थक चुका था उसे नींद आ गई।
पुनम कुछ देर बाद उठा अपने कपड़े पहने फिर राजेश के ऊपर चादर डाल कर उसकी माथा चूम कर वहा से चली गईं।
सुबह राजेश का नींद खुला तो 7बज चूके थे।
उसे याद आया उसे तो चंद्रपुर जाना है। वह नहाने चला गया। बहाकर आया।
पुनम ने उसके लिए चाय नाश्ता की तैयार कर ली थी।
पदमा _बेटा चाय नाश्ता तैयार हो गया है, चाय नाश्ता करके ही जाना।
राजेश ने चाय नाश्ता किया फिर अपना बैग पर कुछ कपड़े और सामान लेकर जाने को तैयार हो गया।
पदमा _बेटा तुम अपना ख्याल रखना।
राजेश _जी ताई।
भुवान _यार पहुंचते ही फोन करना, और हाल चाल बताते रहना।
राजेश _जी भईया।
राजेश सन से इजाजत लेकर, चंद्रपुर के लिए अपनी बाइक से निकल पड़ा। सूरज पुर से चंद्रपुर जिला जाना था वहा एक गांव शिवपुर जो नदी किनारे बसा था। वही था सेवा आश्रम।
राजेश बाइक को तेजी से दौड़ाता huwa चले जा रहा था।
बीच बीच में लोगो से रास्ता पूछ लेता था। कही रास्ता अच्छा था तो कही खराब, उसे शिवपुर पहुंचते पहुंचते शाम हो गया।
इधर भैरव और उसके साथी, रास्ते पर जगह जगह छिपे हुए थे। राजेश की पहुंचने की जानकारी भैरव को हो चुका था। भैरव सिंह ने ही राजेश को अस्त्र शस्त्र चलाना सिखाया था। उसके ताकत से भैरव सिंह भी वाकिफ था।
भैरव सिंह एक भिखारी का रूप बना लिया और सड़क पर चलने लगा जिस मार्ग से राजेश आ रहा था।
राजेश ने जब बूढ़े व्यक्ति को देखा।
राजेश _बाबा ये सेवा शिव पुर आसपास है क्या?
भैरव सिंह _हा, बेटा शिव पुर पास में ही है। तुम्हे किसके घर जाना है।
राजेश _बाबा मुझसे सेवा आश्रम जाना है।
भैरव सिंह _बेटा सेवा आश्रम तो मैं भी जा रहा हूं।
राजेश _अच्छा बाबा तो आप मेरे बाइक पर बैठिए। हम दोनों की मंजिल एक ही है।
भैरव सिंह _ठीक है बेटा।
राजेश _बाबा, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपको पहले से जानता हूं।
भैरव _अरे बेटा, दुनिया में तो एक ही सकल की कई आदमी होते है। देखा होगा किसी मेरे हमसक्ल को।
राजेश _हो सकता है बाबा।
भैरव _बेटा इस रास्ते से चलो , ये हमे आश्रम तक जल्दी पहुंचाएगी।
राजेश _पर बाबा ये रास्ता तो थोड़ी खराब लग रही है।
भैरव _आगे रास्ता ठीक है बेटा।
कुछ दूर चलने के बाद रास्ता आगे बंद था।
राजेश _बाबा, ये रास्ता तो आगे बंद है।
भैरव _बेटा मै बूढ़ा हूं न मेरी आंखें कमजोर हो गई है, लगता है हम गलत रास्ते पर आ गए। तुम गाड़ी रोको बेटा।
राजेश ने गाड़ी रोका।
भैरव सिंह अपने पास छुरा छिपाकर रखा था। उसे वह निकाल लिया।
और राजेश पीठ पर घोप दिया।
आस पास घने पेड़ों के बीच भैरव के साथी भाई छिपे थे वे भी बाहर निकल आए।
और राजेश सम्हल पाता उसके पहले ही लाठी से उसके सिर पर कई वार कर दिया। राजेश का सिर फट गया।
राजेश के आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह लोगो को पहचानने की कोशिश करने लगा। पर पहचान न सका। वह वहीं पर लहूलुहान बेहोश होकर गिर पडा।
भैरव सिंह _अब ये नही बचेगा। इसने ठाकुर खानदान के इज्जत से खेला था, उसकी सजा मिली साले को।
उसके बाद भैरव और उसके साथी वहा से चले गए। और ठाकुर को इस बात की जानकारी दिया।
भैरव _हुकुम हवेली की इज्जत से खेलने वाले को हमने खत्म कर दिया।
ठाकुर बहुत खुश huwa
इधर अंधेरा होने को था। किसान लोग खेत में काम करने वाले किसानों का घर जाने का समय था।
दो किसान अपने खेत से काम करके घर के लिए जा रहे थे। उसने रास्ते में लहूलुहान किसी व्यक्ति को पड़ा देखा।
किसान _ये कौन है? लगता है किसी ने इज पर जान लेवा हमला किया है।
एक किसान _देखो तो इसकी सांसे चल भी रही है या मर गया है।
दूसरे किसान ने राजेश का हाथ छूकर अवलोकन किया।
किसान २_ये मरा नहीं है। ये बेहोश हो गया है। इसकी सांसे अभी भी चल रही है।
किसान १_इसे हमे आश्रम ले जाना चाहिए। वहा शायद इसकी जान बच जाए।
आश्रम में एक बडा हॉस्पिटल भी था जहा आश्रम में रहने वाले लोगो के साथ साथ आस पास के गांव के लोग भी इलाज कराने के लिए आते थे।
दोनो किसानों ने किसी तरह राजेश को आश्रम तक पहुंचाया ।
हॉस्पिटल में कई डॉक्टर, नर्स एवम कर्मचारी कार्य कर रहे थे। अन्य बड़े बड़े डाक्टर भी सेवा आश्रम से जुड़े हुए थे। आवश्यकता पड़ने पर उन्हे बुलाया जाता था। दिव्या भी डॉक्टर के रूप में सेवा देने के साथ साथ अन्य जिम्मेदारी भी सम्हाल रही थी।
आश्रम के डॉक्टरों ने किसानों से पूछा _कोन है ये, इसकी ये हालात कैसे हुई?
किसान _ये कोई अजनबी है, ये हमे रास्ते पर पड़ा मिला। लगता है इस पर किसी ने जानलेवा हमला किया है।
हमने देखा इसकी सांसे अभी भी चल रही है तो हम इसे आश्रम ले आएं। शायद इसकी जान बच जाए।
डाक्टर _इसकी हालत तो काफी खराब लग रही है।
लोगो की भीड़ देख कर दिव्या ने नर्स से पूछा।
दिव्या _क्या बात है, नीरा वहा इतनी भीड़ क्यू है।
दिव्या हॉस्पिटल में एडमिट कुछ मरीजों की हालचाल पूछ कर बाहर निकल रहीं थीं।
नर्स _दीदी, एक नया केस आया है। कोई युवा है। किसी ने उस पर जानलेवा हमला किया है। डाक्टर बता रहे थे की उसका बचना मुश्किल है।
इधर डाक्टर लोगो ने राजेश का पर्स चेक किया। उसमे रखे परिचय कार्ड से उसके बारे में पता चला कि इस युवक का नाम राजेश है और ये राजधानी का रहने वाला है।
दिव्या अन्य मरीजों को देख रही थी तभी उसके कानो पे राजेश शब्द सुनाई पढ़ा वह चौंकी।
उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।
वहकापते कदमों से, उस युवा की ओर बड़ने लगा जिसे डाक्टरों ने घेर रखा था।
दिव्या जब युवक के पास पहुंची। उसे देखते ही। चीख पड़ी।
सवहा सभी लोग चौंक पड़े।
वहा के बुजुर्ग हेड डाक्टर _दिव्या बेटी क्या तुम इसे जानते हो।
दिव्या _ये राजेश है,ये यहां पहुंचा कैसे किसने की इसकी ये हालात। राजेश, उठो,,,
दिव्या रोने लगी,,
बुजुर्ग डॉक्टर _बेटी तुम डॉक्टर होकर भावुक हो रही हो, धैर्य रखो।
दिव्या _डॉक्टर, राजेश को कुछ नहीं होना चाहिए। जल्दी इलाज सुरू करो, दिव्या चीखी।
राजेश को आपातकाल कक्ष में ले जाया गया।
वहा पर राजेश का गहन जांच किया गया। उसके पीठ पर घुपे छुरे को निकाला गया।
जांच के दौरान पाया गया कि उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है।
इधर दिव्या की हालात की बात राजवती तक पहुंची। वह भी दौड़ी भागी हॉस्पिटल पहुंची।
राजवती _बेटी क्या हुआ क्यों रो रही हो?
दिव्या _नानी राजेश की हालात काफी नाजुक हैं। पता नहीं क्या होगा?
राजवती _पर बेटी राजेश वहा आया कैसे और मेरे उसके साथ ये सब huwa कैसे?
दिव्या _मुझे कुछ नही मालूम नानी, उसकी ये हालात किसने की और वह शिव पुर पहुंचा कैसे? नानी उसे कुछ नहीं होना चाहिए।
राजवती _बेटा, धैर्य रखो, सब ठीक होगा बेटा, तुम खुद एक डॉक्टर हो। तुम तो एक साहसी लड़की हो। तुम इतनी भावूक कैसी हो सकती हो?
दिव्या _नानी मै राजेश से बहुत प्यार करती हूं, अगर राजेश ही नहीं रहा तो मेरा जीना व्यर्थ है। उसे बचा लो।
बुजुर्ग डॉक्टर आपात कालीन रूम से बाहर निकला।
राजवती _क्या huwa डॉक्टर, राजेश ठीक तो है न।
डॉक्टर _माता जी, राजेश की हालात काफी गंभीर है। उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है। आपरेशन करना पड़ेगा। और यह ऑपरेशन स्पेसलिष्ट ही कर सकता है।
राजवती _ठीक है आप उसे फोन लगाइए और मुझसे बात कराइए।
डॉक्टर ने स्पेलिस्ट डॉक्टर को फोन लगाया। राजवती ने उससे बात किया।
स्पेशलिस्ट डॉक्टर राजधानी में ही था। उसे आने में 6से 7घंटे लग सकता था। राजवती ने उसे चार्टेड प्लेन से आने को कहा, सारा खर्च आश्रम उठाएगा।
स्पेशलिस्ट डॉक्टर चार्टेड प्लेन से 2घंटे में ही आश्रम पहुंच गया।
उसने राजेश का ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन कक्ष से बाहर निकला।
राजवती _डॉक्टर राजेश ठीक तो है न।
डॉक्टर _मैने उसका ऑपरेशन कर दिया है माता जी। पर उसकी स्थिति काफी नाजुक हैं । उसे 24घंटे के अदंर होश आ गया तो ठीक, नही तो कुछ कहा नहीं जा सकता।
दिव्या _नही मेरे राजेश को कुछ नहीं हो सकता, वह जरूर उठेगा,,,
दिव्या, आश्रम अपने कमरे में रखी श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने जाकर फरियाद करने लगी।
उसने राजेश को आवाज दी।
गीता _राजेश,,
राजेश,,,
राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया, वह कही खोया हुआ था। तब गीता उसकी कंधे पर हाथ रखी,,,
गीता _राजेश,,,
राजेश, अपने ख्यालों से बाहर आया।
राजेश _गीता दी तुम यहां,,,
गीता _वहीं सवाल तो मैं तुम्हे पुछने वाली थी। तुम यहां क्या कर रहे हो।
राजेश _बस ऐसे ही,, अपना अकेला पन इन हसीन वादियों के साथ बाटने, चला आया।
पर आप यहां कैसे?
गीता _मै तो जिला कार्यालय मीटिंग में गई थी, यहां सड़क किनारे तुम्हारा बाइक खड़ा देखा तो, तुम्हे ढूढते यहां चला आया।
वैसे जगह काफी खूबसूरत है, लगता है तुम यहां पहले भी किसी के साथ आते रहे हो।
राजेश _जगह ही ऐसी है दी, राही को रुकने पर मजबूर कर देता है।
गीता _पर लोग यहां अकेले तो नही आते ,,
राजेश _ये तो किस्मत की बात है दी , इंसान का समय हमेशा, एक जैसा तो नही रहता न। कभी कोई हमारे साथ होती है तो कभी हम अकेले रह जाते हैं।
गीता _तुम दिव्या को मिस कर रहे हों?
राजेश _दिव्या जी को मैने अपना सच्चा दोस्त माना था, दी, पर वह मुझे बिना बताए ही चली गई।
मतलब वह मुझे अपना दोस्त नहीं समझती थी।
पहले निशा जी, और अब दिव्या जी, शायद मेरे जीवन में अकेला पन ही लिखा है।
जब भी कोई मुझे अपना लगने लगता है, मुझे छोड़ कर चली जाती है।
वैसे आपको, इस सुन सान जगह पर नही आना चाहिए था दी।
गीता _राजेश दिव्या ने, तुमसे सच बताने से मना कि थी, पर मुझे लगता है कि सच बताना जरूरी है नही तो बहुत देर हो जायेगी।
राजेश _कैसा सच दी?
गीता _यही की दिव्या, विदेश नही गई है
राजेश _क्या?
गीता _हां, दिव्या विदेश नही गई है ।
राजेश _तो फिर कहा है दिव्या जी।
गीता _वह, नानी के पास गई है, सेवा आश्रम ।
राजेश _अगर वह नानी के पास गई है तो फिर झूठ बोलने की क्या जरूरत पड़ी?
गीता _क्यों कि वह मां बनने वाली है?
राजेश _क्या,,
दी ये आप क्या कह रही है?
गीता _वही जो सच है।
वह मां बनने वाली हैं ?
इससे पहले लोगो को पता चलता की वह बियाहे, मां बनने वाली हैं? लोग हमारे खानदान पर कीचड़ उछाले, वह यहां से चली गईं।
राजेश _पर ये कैसे हो सकता है दी, दिव्या जी ने तो मुझे कभी बताया ही नहीं की कोई उसका यार दोस्त भी है, फिर वो मां कैसे बन सकती है?
गीता _क्यों, तुम तो हो न उसके दोस्त?
राजेश _दी मै कुछ समझा नही।
गीता _राजेश उसके पेट मे जो बच्चा है वह तुम्हारा है?
राजेश _दी ये आप क्या कह रही है? दिव्या जी के पेट में मेरा बच्चा कैसे आ सकता है?
गीता _तुम चौंक गए न।
तुम्हे पता नही उस रात क्या huwa था?
राजेश _तुम किस रात की बात कर रहे हो दी?
गीता _राजेश, वह दिन याद करो जब गणेश पुर मेले का उद्घाटन था, मुझे सर पिता जी को नक्सली अपने साथ ले गए थे। तुमने और दिव्या ने अपनी जान जोखिम में डाल कर हमे बचाया, हम नदी के रास्ते लकड़ी के नाव से रात में निकल रहे थे।
राजेश _हां दी वो सब तो मुझे याद है।
गीता _तुम्हे यह भी याद होगा, नाव हम सबका भार नही उठा पाया तो तुम नदी में ही तैरते हुए, नाव को किनारे तक पहुंचाने की कोशिश करने लगे।
राजेश _हां दी ये सब तो मुझे याद है।
गीता _उसके बाद क्या हुआ था तुम्हे याद है?
राजेश _नही दी, उसके बाद तो सुबह मैं अपने आपको झोपड़ी के खाट में लेटा पाया।
गीता _राजेश तुम्हे पता नहीं है उस रात क्या हुआ था। नदी का पानी इतना ठंडा था की पानी में डूबे रहने से तुम्हारा पुरा शरीर ठंड से अकड़ गया था। तुम बेहोश हो गए थे।
तुम्हारा शरीर का खून जम गया था। नब्ज एकदम धीमा हो गया था।
हमने कई उपाये किए तुम्हे होश ही नहीं आया।
तब दिव्या ने तुम्हे बचाने के लिए वह किया जो आज उसके जीवन का अभिशाप बन गया।
राजेश _दी, दिव्या जी ने मेरी जान बचाने के लिए क्या किया?
दिव्या _वह निर्वस्त्र होकर तुम्हे अपनी जिस्म की गर्मी दिया। जिस्म की गर्मी से तुम धीरे धीरे होस में आने लगे। फिर वही huwa जिसका डर था।
तुमने उसकी कौमार्य भंग कर दिया।
राजेश _नही, ऐसा नहीं हो सकता? मै दिव्या जी के साथ ऐसा सोच भी नही सकता।
गीता _ये सच है, राजेश।
राजेश _पर ये सब चीजे मुझसे छिपाने की क्या जरूरत थी? दिव्या जी ने मुझे बताया क्यूं नही?
गीता _क्या बताती वह, तुम तो निशा से प्यार करते हो न। दिव्या यह बता कर की वह तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हैं? तुम पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहती थी। वैसे भी तुम्हारा इंटर व्यू था।
इन सबका तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़ सकता था। दिव्या नही चाहती थी कि तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़े, वह तुम पर दबाव भी नहीं बनाना चाहती थी।
हमने उसे बच्चा गिराने के लिए कहा, पर वह नही मानी। वह तुम्हारे बच्चे को जन्म देना चाहती है!
पिता जी तो उसकी दूसरे से शादी कराने की बात कर रहे थे। पर दिव्या नही मानी।
अब दिव्या के पास कोई और चारा नहीं बचा था, इसलिए उसे यहां से जाना पड़ा।
राजेश _दिव्या जी को मेरे कारण इतना कुछ सहना पड़ा, धिक्कार है मुझे।
मुझे उसके पास जाना है, दी कहा है दिव्या जी बताओ मुझे। पता नहीं वह किस हालत में होगी ?
गीता _मैने बताया तो था, वह नानी के पास गई है। यहां से 300km दूर नानी का सेवा आश्रम है।
वह वहीं गई है।
राजेश _दिव्या जी मै आ रहा हूं, मै अकेले आपको दुनिया से संघर्ष करने नही दूंगा। चाहे जो भी हो जाए।
राजेश और गीता वहां से घर चलें आए।
रत्नवती _बेटी आज आने में देर कर दी?
गीता _हां मां, मुझे रास्ते में राजेश मिला था, वह अकेला था। नदी किनारे बैठा था। मां राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा है।
मैने राजेश को सब सच बता दिया कि दिव्या विदेश नही बल्कि नानी के घर गई है, उनकी सेवा आश्रम में।
रत्नवती _बेटी ये तूने क्या किया? दिव्या ने मना किया था, बताने को।
गीता _मैने जो किया ठीक किया मां, शायद दिव्या की इसी में भलाई है। मै जानती हूं, दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है, और दिव्या निशा के कारण राजेश से यह बात छिपाती है। मां दिव्या ने जो जो त्याग किया है उसके लिए उसे फल मिलना चाहिए मां। राजेश कल सेवा आश्रम जा रहा है, दिव्या से मिलने।
रत्नवती _बेटी, अब क्या होगा?
गीता _जो भी होगा, अच्छा ही होगा मां।
गीता और रत्नवती की बाते ठाकुर ने छुपकर सुन लिया।
ठाकुर _मुझे उस साले को रोकना होगा? वो साले दिव्या से मिले और मेरी इज्जत को मिट्टी में मिला दे, मै उस साले को ही मिट्टी में मिला दूंगा।
दिव्या जब आश्रम पहुंची, तो ठाकुर ने पहले ही, अपने आदमियों को, वहां तैनात कर दिया था। आश्रम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।
वहा की जानकारी उसको मिलती रहे।
उसने अपने खास आदमी भैरव को वहा भेजा था।
उसने भैरव को फोन लगाया।
भैरव _हुकुम आपने मुझे याद किया।
ठाकुर _हा भैरव।
वो समय आ चुका है, जिसके लिए तुम्हे वहा भेजा था। मुझे पता था वो शाला एक दिन आश्रम जरूर पहुंचेगा, वो शाला राजेश कल आश्रम पहुंच रहा है।
पर तुम्हे उसे आश्रम में पहुंचने से पहले ही ख़त्म करना होगा।
भैरव _हुकुम आप चिन्ता न करे। राजेश, आश्रम नही पहुंचेगा।
ठाकुर _भैरव, उस साले को ख़त्म करना आसान नहीं है बहुत ताकतवर है साला, उसे खत्म करने की कई बार कोशिश किया गया, पर हर बार बच निकलता है।
तुम लोग उसे सामने से नही नही हरा सकते। उसे धोखे से मारना।
भैरव _मै समझ गया हुकुम। इस बार वह नही बचेगा आप निश्चिंत रहिए।
उसके बाद भैरव, राजेश को ख़त्म करने के लिए योजना बनाने में जुट गया।
इधर राजेश घर पहुंचा,,,
पदमा _अरे बेटा तू कहा गया था?
राजेश _कही नही ताई, बस यूं ही टहलने के लिए।
पदमा _अरे बेटा कही जाता है तो बताकर जाया कर, हमे तुम्हारी चिन्ता होने लगती है।
राजेश आंगन में लगे खाट पर लेट गया।
पदमा _बहु, राजेश के लिए चाय ले आ।
पूनम _ जी मां जी,
राजेश _नही ताई चाय को रहने दो, पीने का मन नही है।
पदमा _क्या बात है बेटा, कुछ चिंतित लग रहा है?
राजेश _ताई मै कल चंद्रपुर जा रहा हूं। वहा एक गांव है शिवपुर।
पदमा _पर वहा क्या काम है बेटा?
राजेश _हां ताई, वहा कुछ काम है, जो अभी आपको नही बता सकता। वहा से आने के बाद ही आपको बताऊंगा।
पदमा _ऐसा क्या काम आ गया है बेटा, कही कोई लड़ाई झगडे वाली बात तो नही। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।
राजेश _नही ताई, ऐसी कोई बात नही है। मै जाकर जल्द ही वापस लौट आऊंगा।
रात में भोजन के समय घर के सभी लोगो को पदमा ने यह बात बताई की राजेश कल चंद्रपुर जा रहा है।
भुवन _राजेश, मुझे लगता है की तुम्हारा अकेले जाना ठीक नही है, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा।
राजेश _भईया मुझे वहा कितने दिन लगेंगे, एक दो तीन दिनो में आ जाऊ या सप्ताह लगेंगे। कह नही सकता, यहां आपकों खेती के काम सम्हालने है। इसलिए मेरा अकेला जाना ही उचित है।
रात में सबके सो जाने के बाद पूनम राजेश के कमरे में आई।
राजेश _भाभी आप इस वक्त
पूनम _तुम भी तो इतनी रात तक जाग रहे हो।
क्या बात है देवर जी। आज आप कुछ ज्यादा ही चिंतित लग रहे हैं।
राजेश _हां भाभी, आज मैं चिंतित हूं ।
पूनम _चिंता का कारण आप अपनी भाभी को नही बताओगे।
राजेश _भाभी, बात ऐसी है जो मैं अभी किसी को नहीं बता सकता मुझे माफ करना भाभी।
पूनम _कोई बात नही देवर जी। कल आपको चंद्रपुर जाना है। आप इस तरह जागते रहेंगे तो, तबियत बिगड़ सकती है।
राजेश _अभी इन आंखो में नींद मुस्किल हैं भाभी, मुझे रात जाग कर ही बितानी होगी।
आप मेरी चिंता न कीजिए, जाइए सो जाइए।
पूनम _मै तुम्हारी नींद में कुछ मदद कर दू।
पूनम ने अपनी ब्लाउज की बटन खोलते हुए कहा,,
राजेश _भाभी आज मेरा मन नही है, प्लीज
पूनम _तुम्हारा मन नही है तो क्या,मेरा तो मन है, लगता है तुम्हारा, मन अपने भाभी से भर गया है। जब से इंटरव्यू दिलाकर आए हो। एक बार भी प्यार से गले नही लगाए होऔर कल फिर जा रहे हो। देवर जी तुम मतलबी निकले।
पूनम की आंखो में आंसू भर आए।
वह आंसू पोछते हुवे, कमरे से जानें लगी।
तभी राजेश ने उसकी हाथ को पकड़ लिया।
राजेश _भाभी , मुझसे नाराज़ हो गई क्या?
पुनम _नही, देवर जी आपको क्या लगता है, सिर्फ निशा और दिव्या ही आपसे प्यार करती है और कोई नहीं।
आपने तो कभी किसी औरत की दिल की बात जानना चाहा नही, रात को भोग कर सुबह सब भूल गए।
पर औरत के साथ ऐसा नहीं है, हा मै ये जानती हूं कि अपनी पति के अलावा दूसरे मर्द को चाहना गलत है।
पर दिल कहा किसी की सुनता है। जिसको ये दिल भाता है बस उसी का होकर रह जाता है।
तुम मर्दों को तो औरत बस मन बहलाने की चीज लगती है। कुछ दिन खेल लिए फिर जी भर गया तो भूल गए।
राजेश _भाभी मुझे माफ कर दो, आपकी भावनाओं को मैं समझ नही पाया। अभी मैं कुछ दिनो से तनाव में हूं।
पुनम _कोई बात नही देवर जी, अब मुझे जाने दो, आगे मै आपसे कोई शिकायत नहीं करूंगी।
राजेश _नही भाभी, पता नही आगे क्या होने वाला है। आगे हमे मिलने का मौका मिलेगा कि नही कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए आज की रात, अपने सारे गीले सिकवे दूर कर लो।
पुनम राजेश की आंखों में देखी, फिर वह उसके करीब गई। फिर अपनी ओंठ राजेश की ओंठ पर रख चूसने लगीं।
राजेश भी पुनम की साथ देने लगा।
दोनो के बीच कुछ देर तक चूमा चाटी चलता रहा। उसके कपड़े कब उतरे उन्हे पता ही नहीं चला। राजेश ने पूनम की दूदू को मसल मसल कर खूब निचोड़ निचोड़ कर पिया। उसकी chut चांट चांट कर उसे खूब मज़े दिए। पुनम ने भी राजेशका लंद चूस चूस कर उसका लंद खूब लंबा और मोटा कार दिया।
राजेश रात भर पुनम को पेलता रहा। उसे कामसूत्र के कोइ भी आसन नहीं बचा जिसका उसने उपयोग न किया हो।
रात भर कमरे के अदंर पुनम की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनकने की आवाज गूंजती रही।
पुनम को पूरी तरह तृप्त करने के बाद, राजेश उसकी योनि में बीज छोड़कर उसके ऊपर ढेर हो गया।
राजेश थक चुका था उसे नींद आ गई।
पुनम कुछ देर बाद उठा अपने कपड़े पहने फिर राजेश के ऊपर चादर डाल कर उसकी माथा चूम कर वहा से चली गईं।
सुबह राजेश का नींद खुला तो 7बज चूके थे।
उसे याद आया उसे तो चंद्रपुर जाना है। वह नहाने चला गया। बहाकर आया।
पुनम ने उसके लिए चाय नाश्ता की तैयार कर ली थी।
पदमा _बेटा चाय नाश्ता तैयार हो गया है, चाय नाश्ता करके ही जाना।
राजेश ने चाय नाश्ता किया फिर अपना बैग पर कुछ कपड़े और सामान लेकर जाने को तैयार हो गया।
पदमा _बेटा तुम अपना ख्याल रखना।
राजेश _जी ताई।
भुवान _यार पहुंचते ही फोन करना, और हाल चाल बताते रहना।
राजेश _जी भईया।
राजेश सन से इजाजत लेकर, चंद्रपुर के लिए अपनी बाइक से निकल पड़ा। सूरज पुर से चंद्रपुर जिला जाना था वहा एक गांव शिवपुर जो नदी किनारे बसा था। वही था सेवा आश्रम।
राजेश बाइक को तेजी से दौड़ाता huwa चले जा रहा था।
बीच बीच में लोगो से रास्ता पूछ लेता था। कही रास्ता अच्छा था तो कही खराब, उसे शिवपुर पहुंचते पहुंचते शाम हो गया।
इधर भैरव और उसके साथी, रास्ते पर जगह जगह छिपे हुए थे। राजेश की पहुंचने की जानकारी भैरव को हो चुका था। भैरव सिंह ने ही राजेश को अस्त्र शस्त्र चलाना सिखाया था। उसके ताकत से भैरव सिंह भी वाकिफ था।
भैरव सिंह एक भिखारी का रूप बना लिया और सड़क पर चलने लगा जिस मार्ग से राजेश आ रहा था।
राजेश ने जब बूढ़े व्यक्ति को देखा।
राजेश _बाबा ये सेवा शिव पुर आसपास है क्या?
भैरव सिंह _हा, बेटा शिव पुर पास में ही है। तुम्हे किसके घर जाना है।
राजेश _बाबा मुझसे सेवा आश्रम जाना है।
भैरव सिंह _बेटा सेवा आश्रम तो मैं भी जा रहा हूं।
राजेश _अच्छा बाबा तो आप मेरे बाइक पर बैठिए। हम दोनों की मंजिल एक ही है।
भैरव सिंह _ठीक है बेटा।
राजेश _बाबा, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपको पहले से जानता हूं।
भैरव _अरे बेटा, दुनिया में तो एक ही सकल की कई आदमी होते है। देखा होगा किसी मेरे हमसक्ल को।
राजेश _हो सकता है बाबा।
भैरव _बेटा इस रास्ते से चलो , ये हमे आश्रम तक जल्दी पहुंचाएगी।
राजेश _पर बाबा ये रास्ता तो थोड़ी खराब लग रही है।
भैरव _आगे रास्ता ठीक है बेटा।
कुछ दूर चलने के बाद रास्ता आगे बंद था।
राजेश _बाबा, ये रास्ता तो आगे बंद है।
भैरव _बेटा मै बूढ़ा हूं न मेरी आंखें कमजोर हो गई है, लगता है हम गलत रास्ते पर आ गए। तुम गाड़ी रोको बेटा।
राजेश ने गाड़ी रोका।
भैरव सिंह अपने पास छुरा छिपाकर रखा था। उसे वह निकाल लिया।
और राजेश पीठ पर घोप दिया।
आस पास घने पेड़ों के बीच भैरव के साथी भाई छिपे थे वे भी बाहर निकल आए।
और राजेश सम्हल पाता उसके पहले ही लाठी से उसके सिर पर कई वार कर दिया। राजेश का सिर फट गया।
राजेश के आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह लोगो को पहचानने की कोशिश करने लगा। पर पहचान न सका। वह वहीं पर लहूलुहान बेहोश होकर गिर पडा।
भैरव सिंह _अब ये नही बचेगा। इसने ठाकुर खानदान के इज्जत से खेला था, उसकी सजा मिली साले को।
उसके बाद भैरव और उसके साथी वहा से चले गए। और ठाकुर को इस बात की जानकारी दिया।
भैरव _हुकुम हवेली की इज्जत से खेलने वाले को हमने खत्म कर दिया।
ठाकुर बहुत खुश huwa
इधर अंधेरा होने को था। किसान लोग खेत में काम करने वाले किसानों का घर जाने का समय था।
दो किसान अपने खेत से काम करके घर के लिए जा रहे थे। उसने रास्ते में लहूलुहान किसी व्यक्ति को पड़ा देखा।
किसान _ये कौन है? लगता है किसी ने इज पर जान लेवा हमला किया है।
एक किसान _देखो तो इसकी सांसे चल भी रही है या मर गया है।
दूसरे किसान ने राजेश का हाथ छूकर अवलोकन किया।
किसान २_ये मरा नहीं है। ये बेहोश हो गया है। इसकी सांसे अभी भी चल रही है।
किसान १_इसे हमे आश्रम ले जाना चाहिए। वहा शायद इसकी जान बच जाए।
आश्रम में एक बडा हॉस्पिटल भी था जहा आश्रम में रहने वाले लोगो के साथ साथ आस पास के गांव के लोग भी इलाज कराने के लिए आते थे।
दोनो किसानों ने किसी तरह राजेश को आश्रम तक पहुंचाया ।
हॉस्पिटल में कई डॉक्टर, नर्स एवम कर्मचारी कार्य कर रहे थे। अन्य बड़े बड़े डाक्टर भी सेवा आश्रम से जुड़े हुए थे। आवश्यकता पड़ने पर उन्हे बुलाया जाता था। दिव्या भी डॉक्टर के रूप में सेवा देने के साथ साथ अन्य जिम्मेदारी भी सम्हाल रही थी।
आश्रम के डॉक्टरों ने किसानों से पूछा _कोन है ये, इसकी ये हालात कैसे हुई?
किसान _ये कोई अजनबी है, ये हमे रास्ते पर पड़ा मिला। लगता है इस पर किसी ने जानलेवा हमला किया है।
हमने देखा इसकी सांसे अभी भी चल रही है तो हम इसे आश्रम ले आएं। शायद इसकी जान बच जाए।
डाक्टर _इसकी हालत तो काफी खराब लग रही है।
लोगो की भीड़ देख कर दिव्या ने नर्स से पूछा।
दिव्या _क्या बात है, नीरा वहा इतनी भीड़ क्यू है।
दिव्या हॉस्पिटल में एडमिट कुछ मरीजों की हालचाल पूछ कर बाहर निकल रहीं थीं।
नर्स _दीदी, एक नया केस आया है। कोई युवा है। किसी ने उस पर जानलेवा हमला किया है। डाक्टर बता रहे थे की उसका बचना मुश्किल है।
इधर डाक्टर लोगो ने राजेश का पर्स चेक किया। उसमे रखे परिचय कार्ड से उसके बारे में पता चला कि इस युवक का नाम राजेश है और ये राजधानी का रहने वाला है।
दिव्या अन्य मरीजों को देख रही थी तभी उसके कानो पे राजेश शब्द सुनाई पढ़ा वह चौंकी।
उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।
वहकापते कदमों से, उस युवा की ओर बड़ने लगा जिसे डाक्टरों ने घेर रखा था।
दिव्या जब युवक के पास पहुंची। उसे देखते ही। चीख पड़ी।
सवहा सभी लोग चौंक पड़े।
वहा के बुजुर्ग हेड डाक्टर _दिव्या बेटी क्या तुम इसे जानते हो।
दिव्या _ये राजेश है,ये यहां पहुंचा कैसे किसने की इसकी ये हालात। राजेश, उठो,,,
दिव्या रोने लगी,,
बुजुर्ग डॉक्टर _बेटी तुम डॉक्टर होकर भावुक हो रही हो, धैर्य रखो।
दिव्या _डॉक्टर, राजेश को कुछ नहीं होना चाहिए। जल्दी इलाज सुरू करो, दिव्या चीखी।
राजेश को आपातकाल कक्ष में ले जाया गया।
वहा पर राजेश का गहन जांच किया गया। उसके पीठ पर घुपे छुरे को निकाला गया।
जांच के दौरान पाया गया कि उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है।
इधर दिव्या की हालात की बात राजवती तक पहुंची। वह भी दौड़ी भागी हॉस्पिटल पहुंची।
राजवती _बेटी क्या हुआ क्यों रो रही हो?
दिव्या _नानी राजेश की हालात काफी नाजुक हैं। पता नहीं क्या होगा?
राजवती _पर बेटी राजेश वहा आया कैसे और मेरे उसके साथ ये सब huwa कैसे?
दिव्या _मुझे कुछ नही मालूम नानी, उसकी ये हालात किसने की और वह शिव पुर पहुंचा कैसे? नानी उसे कुछ नहीं होना चाहिए।
राजवती _बेटा, धैर्य रखो, सब ठीक होगा बेटा, तुम खुद एक डॉक्टर हो। तुम तो एक साहसी लड़की हो। तुम इतनी भावूक कैसी हो सकती हो?
दिव्या _नानी मै राजेश से बहुत प्यार करती हूं, अगर राजेश ही नहीं रहा तो मेरा जीना व्यर्थ है। उसे बचा लो।
बुजुर्ग डॉक्टर आपात कालीन रूम से बाहर निकला।
राजवती _क्या huwa डॉक्टर, राजेश ठीक तो है न।
डॉक्टर _माता जी, राजेश की हालात काफी गंभीर है। उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है। आपरेशन करना पड़ेगा। और यह ऑपरेशन स्पेसलिष्ट ही कर सकता है।
राजवती _ठीक है आप उसे फोन लगाइए और मुझसे बात कराइए।
डॉक्टर ने स्पेलिस्ट डॉक्टर को फोन लगाया। राजवती ने उससे बात किया।
स्पेशलिस्ट डॉक्टर राजधानी में ही था। उसे आने में 6से 7घंटे लग सकता था। राजवती ने उसे चार्टेड प्लेन से आने को कहा, सारा खर्च आश्रम उठाएगा।
स्पेशलिस्ट डॉक्टर चार्टेड प्लेन से 2घंटे में ही आश्रम पहुंच गया।
उसने राजेश का ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन कक्ष से बाहर निकला।
राजवती _डॉक्टर राजेश ठीक तो है न।
डॉक्टर _मैने उसका ऑपरेशन कर दिया है माता जी। पर उसकी स्थिति काफी नाजुक हैं । उसे 24घंटे के अदंर होश आ गया तो ठीक, नही तो कुछ कहा नहीं जा सकता।
दिव्या _नही मेरे राजेश को कुछ नहीं हो सकता, वह जरूर उठेगा,,,
दिव्या, आश्रम अपने कमरे में रखी श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने जाकर फरियाद करने लगी।