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- Dec 5, 2013
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अगले दिन सुबह राजेश देर तक सोया था।
सुनिता राजेश के कमरे में गई।
सुनिता _अरे बेटा काफ़ी देर तक सोया है तबियत तो ठीक है न।
प्यार से राजेश के बालो को सहलाते हुए बोली।
राजेश ने अपनी आंखें खोला।
राजेश _मां आप,,
सुनिता _आज काफ़ी देर तक सोया है तो चिंता हुई तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना।
राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं मां।
राजेश ने अपने दोनो बांहे सुनिता के गले में डाल दिया।
राजेश _सुनिता को चूमने की कोशिश करने लगा।
राजेश _अरे छोड़ क्या कर रहा है। सुबह सुबह ही बदमासी शुरू।
चलो उठो फ्रेस हो जाओ।
सुनिता ने राजेश की चादर को खींचा।
चादर के खींचते ही। उसकी नजर राजेश के लंद पर गया।
सुनिता,_हे भगवान तुम्हारा तो सुबह सुबह खड़ा हो गया है।
राजेश मुस्कुराते हुवे।
ये तो सुबह रोज ही खड़ा रहता है मां।
राजेश बेड से उठ कर बैठ गया।
सुनिता कमरे से जानें को मूढ़ी तभी राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।
सुनिता ने पीछे मुड़कर देखा।
राजेश ने खींचकर अपने गोद में बिठा लिया। और सुनिता की चूची मसलने लगा।
सुनिता _अरे छोड़ न , देखो सुबह सुबह ही ये ठीक नहीं, छोड़ो मां।
राजेश _मां मुझे जोरो की पेसाब लगीं है।
सुनिता _तो जाओ बाथरूम में जाकर पेशाब करो, मुझे क्यू अपने घोड़े पे बिठा लिया।
राजेश _मां आज आप मुझे पेशाब करा दो न।
सुनिता _छी बेशरम तू छोटा बच्चा है जो पेंट उतार कर सुसु कराऊंगी।
राजेश _मै तो तुम्हरे लिए अभी भी छोटा बच्चा हूं न।
सुनिता, हसने लगी,,,
हा हां तू तो बहुत छोटा है तेरा नुनु अभी मात्र एक इंच का है। चल अपने राजा बेटे को सुसु करा देती हूं। नही तो पेंट गिला कर देगा मेरा राजा बेटा।
सुनिता हंसने लगीं।
राजेश _मां मेरी मजाक उड़ा रही हो।
सुनिता _मजाक नही उड़ा रही, तुम्हे आइना दिखा रही, जब बेटे की ऊंचाई बाप के बराबर हों जाय तो मां को अपने बेटे के सामने पल्लू छिपा के रखना चाहिए। तू तो अपने बाप से भी ऊंचा हो गया है तुम्हारा नुनु बाप दोगुना हो गया है, और कह रहा है सुसु कराओ, चल छोड़ मुझे, कमबख्त कही का।
राजेश _नही, एक बार करा दो न सुसु। जब मेरा हाथ फ्रैक्चर huwa था उस समय कराती थी। उसे आनंद को मैं फिर से महसूस करना चाहता हूं।
सुनिता _तू बड़ा गंदा, हो गया है कैसी कैसी शौंके पालने लगा है। अब तेरी शादी करवानी पड़ेगी फिर अपनी बीवी के हाथो ही सुसु करना।
राजेश _मां मान जाओ न नही तो मैं अपना हाथ फिर से फ्रैक्चर कर लूंगा, फिर करवाना ही पड़ेगा।
सुनिता _चुप बदमाश कही का, फिर कभी फ्रैक्चर वाली बात मत कहना।
चल तेरी इच्छा पूरी कर देती हूं।
सुनिता राजेश काहाथ पकड़ के अपने साथ, बाथरूम ले गया।
सुनिता राजेश के पीछे खड़ी हो गई।
सुनिता _चलो सुसु करो।
राजेश का लंद तन कर खड़ा था।
राजेश _मां पहले नुनु को तो पकड़ो नही तो पेशाब इधर उधर कही भी गिरने लगेगा।
सुनिता ने राजेश का लंद, आगे हाथ ले जाकर पकड़ लिया। और उसे सही दिशा दिखाया ताकि पेशाब, सही जगह गिरे।
सुनिता _लो अब जल्दी करो।
राजेश ने जोर लगाया पर लंद में तनाव के कारण पेशाब बाहर नहीं आया।
सुनिता _क्या हुवा बाबा जल्दी करो।
राजेश _मां जोर तो लगा रहा हूं पर पेशाब बाहर नही आ रहा है।
सुनिता हंसने लगीं,,,
नुनु खड़ा रहेगा तो पेशाब कहा से आएगा।
राजेश _मां थोडा नुनु को हिलाओ न तब शायद, पेशाब बाहर आए।
सुनिता _हूं तेरी सब चाल समझती हूं बच्चू।
सुनिता राजेश के लंद को हिलाने लगी।
एक हाथ से अंडकोष सहलाने लगीं।
सुनिता _अब जोर लगा।
राजेश ने फिर जोर लगाया, इस बार पेशाब की तेज धार निकली और बाथरूम की दीवार पर चर र,,
की आवाज के साथ गिरने लगीं।
कुछ देर बाद पेशाब की धार रुक गई। सुनिता फिर लंद को हिलाई,,
राजेश ने फिर जोर लगाया फिर से पेशाब की तेज धार दीवार पर गिरने लगा।
सुनिता मुस्कुराने लगीं। राजेश को बहुत मजा आ रहा था।
इस तरह यही प्रक्रिया तब तक चलती रहीं जब तक राजेश के मूत्राशय का एक एक बूंद बाहर नही निकल गया।
पेशाब कर लेने के बाद भी राजेश का लंद खड़ा ही था।
सुनिता _और कितने देर तक करेगा?
राजेश _बस हो गया मां।
सुनिता _, चल अब तू नहा ले तभी ये बैठेगा।
राजेश _, मां मुझे नहला दो न।
सुनिता _अब तेरा कुछ ज्यादा नही हो रहा।
मुझे नाश्ता बनाना है।
सुनिता वहा से निकल कर स्वीटी के कमरे मे गई।
सुनिता _स्वीटी बेटा तुम ठीक तो हो न, अभी तक उठी नही है। प्यार से उसकी बालो को सहलाते हुए पूछी।
स्वीटी _मां पीछे बड़ा दर्द कर रहा है। ठीक से चल नहीं पा रही।
सुनिता _दिखा मुझे देखू, क्या हाल है तेरी,,,
स्वीटी _मां, मुझे शर्म आयेगी।
सुनिता _कल तो बड़ी उछल उछल कर ले रही थी अपनी पिछवाड़े में अपने भाई के तब तो शर्म नहीं आ रही थी।
अब दिखाने में शर्म आ रही हैं।
चल दिखा मुझे।
सुनिता ने स्वीटी को पकड़ कर घोड़ी बना दिया।
फिर उसकी नाइटी ऊपर उठा कर उसकी गाड़ को चेक करने लगीं।
सुनिता _हाय राम ये तो पूरा सूज गई है।
पता नही तू कैसे ले पा रहीं थी। पूरा हालत बिगाड़ के रख दिया है, कमबख्त ने।
मैं बर्फ से सिकाई कर क्रीम लगा देती हूं। फिर टैबलेट दूंगी उसे खा लेना। हमे दोपहर में तुम्हारे मामा के यहां भी निकलना है। वहा ठीक से रहना, किसी को कोई शक न हो।
सुनिता फ्रिज से बर्फ निकाल लाई और स्वीटी की गाड़ की सेकने लगी। उसके बाद उसमे क्रीम लगा दी। स्वीटी को राहत मिली।
सुनिता ने उसे दर्द की टैबलेट खाने को दी।
इधर राजेश नहाकर फ्रेश हो गया।
कुछ देर स्वीटी आराम की फिर वह भी नहाकर फ्रेश हो गई।
शेखर और राजेश दोनो नाश्ता करने लगे।
शेखर _आज स्वीटी नही आई नाश्ता करने,,,
राजेश _हा मां, स्वीटी कहा है?
सुनिता _उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं वो मेरे साथ करेगी, नाश्ता तुम दोनो कर लो।
आपको ऑफिस भी निकलनी है। 1 बजे छूटी लेकर आ जाना जी। हमे भईया के घर जाना है।
शेखर _हा याद है भई याद है, आ जाऊंगा छुट्टी लेकर।
वैसे भी कल संडे है। छूटी रहती है, दो एक दिन और ले लूंगा।
सुनिता _राजेश बेटा प्रिया को फोन कर दो उससे कहना, 1बजे तैयार रहे।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश ने प्रिया को काल किया।
राजेश _प्रिया दी क्या कर रही हो?
प्रिया _कुछ नही बस जानें की तैयारी ही कर रही थी।
राजेश _गुड, दीदी मां कह रही है हम 1बजे निकलेंगे।
प्रिया _राजेश, मुझे बड़ी टेंशन हो रही है।
मैं पिता जी का सामना कैसे कर पाऊंगी। यही सोच सोच कर मेरी हालत खराब हो रही।
राजेश _दीदी आप टेंशन मत लो मै हूं न। सब ठीक होगा।
प्रिया _तुम्हरे कारण ही तो हिम्मत कर पा रही, गांव जानें की, देखो राजेश, तुम सब सम्हाल लोगे न।
राजेश _दीदी, तुम्हे मुझ पर भरोसा नहीं क्या?
प्रिया _तुम पर भरोसा नहीं होता तो जाति क्या?
राजेश _दी आप बस जानें की तैयारी करो, ये न सोचों की मामा जी का सामना कैसे करोगी?
वैसे जीजू जा रहे की नही।
प्रिया _उसको अभी ले जाना ठीक नहीं, पहले मैं ही हो आती हूं। पता नही मुझे देखकर पिता जी की प्रतिक्रिया कैसी होगी?
राजेश _अच्छा ठीक है दी।
प्रिया _अच्छा सुनो, तुम एक बजे के पहले घर आ जाना, हम सब एक ही कार में चलेंगे। बड़ी वाली कार में सभी आ जायेंगे।
राजेश _अच्छा ठीक है दी।
मैं समय पर पहुंच जाऊंगा।
सुनिता _क्या बोली बेटा, प्रिया?
राजेश _मां, दी बोली की एक ही कार में चलेंगे, सब मुझे दी अपने घर बुलाए है, बोल रही थी बडी कार में सभी आ जायेंगे।
सभी साथ में ही चलेंगे।
सुनिता _ठीक है बेटा तुम 12बजे प्रिया और बच्चो को ले आना।
कुछ देर बाद सुनिता स्वीटी के कमरे में गई।
सुनिता _कैसा है अब दर्द कुछ आराम मिला।
स्वीटी _हां मां आप ने जो दवाई मलहम लगाई उससे काफ़ी आराम मिला।
सुनिता _अब चलो तुम भी नहा कर तैयार हो जाओ और नाश्ता कर लो।
राजेश और तुम्हारे पापा नाश्ता कर चुके हैं।
स्वीटी _ठीक है मां।
12बजने के बाद, राजेश प्रिया के घर पहुंचा।
राजेश ने दरवाज़ा का बेल बजाया।
नौकरानी ने दरवाज़ा खोला।
राजेश _दीदी कहा है?
नौकरानी _वो तो कमरे में बच्चो को तैयार कर रही है।
राजेश, प्रिया के कमरे की ओर गया ।
राजेश _दी, कहा हो? हो गया तैयारी?
प्रिया _अरे राजेश तुम आ गए।
पिंकी को तैयार कर रही थी। सारा सामान पैक हो चुका है।
राजेश _अरे पिंकी इस ड्रेस में तो बड़ी प्यारी लग रही है।
पिंकी _थैंक यू मामा जी। मामा जी मां कह रही है की हम नाना जी के घर जा रहे हैं।
प्रिया _नाना जी के घर जानें के बात से पिंकी बड़ी खुश हैं।
राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।
हमारा भांजा रेडी huwa है की नही।
प्रिया _उसे भी तैयार कर दी है, अभी दुध पिलाई थी, वो सो रहा है।
राजेश _ओह,,
प्रिया _राजेश तुम ड्राइवर से कार की चाबी लेकर, कार निकालो फिर ये बैग कार में रख दो तब तक मैं भी रेडी होती हूं।
राजेश _ठीक है दी।
राजेश कार निकालने चला गया इधर प्रिया अपने कमरे में तैयार होने लगी।
राजेश पार्क से कार बाहर निकाला फिर सामान को ले जाकर गाड़ी के डिक्की डाला।
कुछ देर बाद राजेश प्रिया को आवाज लगाया।
राजेश _दीदी और कितना समय लगेगा?
प्रिया _बस हो गया, एक मिनट इधर आना।
राजेश कमरे में गया।
राजेश _क्या बात है दी?
प्रिया _देखो तो,मै ठीक तो लग रहीं हूं न इस साड़ी में।
राजेश _wow दी सच में तुम तो इस साड़ी में कमाल की लग रही हो।
राजेश ने प्रिया को पीछे से बाहों में भर लिया।
प्रिया _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? पिंकी आ जाएगी।
राजेश _दी सच में तुम कमाल की लग रही हो? एक किस तो दे दो।
प्रिया _न पिंकी, कभी भी आ जायेगी। छोड़ो,,
राजेश ने प्रिया के गर्दन को चूमने चाटने लगा।
दीदी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है आपके बदन से।
प्रिया _अरे छोड़ो न, समझा करो पिंकी आ जायेगी।
तभी कमरे में पिंकी की आने की आहट हुई।
राजेश ने प्रिया को छोड़ दिया।
प्रिया हसने लगी।
पिंकी _मम्मी, भाई को उठाओ न वो भी तो जायेगा नाना के घर।
प्रिया _अरे नही बेटा बाबू को मत उठाओ नही तो रोना शुरू कर देगा। ओ अपने मन से उठेगा।
राजेश _अब चलो दी हम लेट हो रहे हैं।
प्रिया _हां, मै बाबू को गोद में ले लेती हूं।
प्रिया ने नौकरानी को आवश्यक निर्देश दी।
फिर
सभी कार में जाकर बैठे।
राजेश कार को अपने घर की ओर दौड़ा दिया।
कुछ ही देर में वे घर पहुंचे।
सुनिता ने दरवाज़ा खोला
सुनिता _आ गए तुम लोग, तुम्ही लोगो का राह देख रहे थे।
प्रिया _बच्चो को तैयार करते थोडा लेट हो गया, बुआ।
सुनिता _मुन्ना सो गया है क्या? दिखाओ मुझे।
प्रिया _ये अभी इसका अभी सोने का समय है, न तो मैने इसको उठाया नही , मुन्ने को सुनिता को पकड़ाते हुए बोली।
सभी अंदर गए सोफे पर बैठ गए। शेखर भी आ चुका था, वो भी कमरे से तैयार होकर बाहर निकला।
सुनिता _राजेश बेटा सारा सामान कार में डाल दो।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश ने सारा सामान कार में डाल दिया।
सुनिता _प्रिया, कुछ खाकर निकले हो कि नही गांव पहुंचते शाम हो जाएगी।
स्वीटी कमरे से बाहर आई।
हाई दी कैसी हो, इस साड़ी में तो बहुत प्यारी लग रही हो।
प्रिया _थैंक क्यू,
तुम भी इस ड्रेस में बड़ी प्यारी लग रही हो।
प्रिया _बुवा अभी तो कुछ खाने का मन भी नहीं कर रहा।
रास्ते में ही कुछ खा लेंगे।
सुनिता _अच्छा ठीक है।
चलो अब हमें निकलना चाहिए।
सभी लोग घर से निकले,
सुनिता _किसको कहा बैठना है?
देख लो।
राजेश कार ड्राइव किया।
जब वे पहुंचे तो शाम हो चुकी थी।
गांव में राजेश के मामा मामी उन्ही लोगो के आने का इंतजार कर रहे थे।
उनके पहुंचने की खबर सुनकर सभी खुश हो गए।
राजेश _नमस्ते मामा जी।
सत्जन सिंह _अरे आओ मेरे शेर।
राजेश ने सत्जन सिंह के पैर छुए,,
सत्जन सिंह _अरे यार पैर मत छुओ गले लगो।
सुना है कुछ दिनों में कलेक्टर बनने वाले हो।
राजेश _आपका आशीर्वाद रहा तो, ज़रूर बनूंगा मामा जी।
सत्जन _अरे यार मेरा आशीर्वाद तो हमेशा तुम्हारे साथ है।
वैसे दिखने में तो एकदम फौजी लगता है। बड़ी अच्छी बॉडी बनाई है, लगता हैं सुबह खूब मेहनत करते हो।
राजेश _ये सब तो आप से ही सीखा है मामा जी। मै जब भी यहां आता था, आप दोनो मामा को सुबह दंड बैठक लगाते देखता था।
तो मैंने भी ठान लिया था की मै भी अपने मामा जी की तरह सुबह कसरत कर अपनी बॉडी बनाऊंगा।
सत्जन सिंह _तो सुबह तैयार रहना, कुस्ती करने के लिए। मै भी तो देखूं मेरा भांजा कितना ताकत वर है।
राजेश _अरे मामा जी मै भी देखना चाहूंगा आख़िर इस उम्र में भी आप कितनी ताकत रखते हैं।
तभी शेखर वहा पहुंचा।
क्या बाते हो रही है भई मामा भांजे के बीच।
सत्जन _अरे आओ शेखर आओ।
भांजे की बॉडी देखकर, भांजे से कुश्ती लड़ने की इच्छा हो गई। कल सुबह हम दोनो की कुस्ती होगी। तुम मौजूद रहना।
शेखर _अरे बिल्कुल देखेंगे भई, आखिर हमें भी तो देखना है इस उम्र में आप जवान को हरा पाते हैं की नही, जवानी में तो आप अच्छे अच्छे पहलवानों को पानी पिला देते थे। दोनो हंसने लगे।
सत्जन सिंह _वैसे तुम्हारा बैंक का काम कैसा चल रहा है।
शेखर _वैसा ही जैसे पहले, बैंक से घर फिर घर से बैंक, बस ऐसे ही जिंदगी निकल रहीं है। 25सालो से।
उधर प्रिया अपनी मां सावित्री से मिली।
सावित्री ने प्रिया को देखते ही गले लगा।
सावित्री _मेरी बच्ची कैसी है तू।
क्या तुम्हे तुम्हारी मां की कभी याद नहीं आई।
प्रिया रोने लगी।
प्रिया _मां ये क्या कह रही हो, ऐसा भी कोई दिन रहा होगा जब मैने आप लोगो को याद न किया हो,,
मै आप लोगो से मिलने के लिए तड़प रही थी मां, पर बाबू जी का सामना करने की हिम्मत मुझमें नहीं थी।
प्रिया की छोटी बहन सुप्रिया भी आई थी। वह भी दो लड़कियो की मां बन चुकी थी।
प्रिया _छोटी कैसी है तू?
सुप्रिया , प्रिया के गले से लिपट गई।
प्रिया _दी आप कैसी है?
आप ठीक तो है न।
प्रिया _मै तो बिल्कुल ठीक हूं मेरी बहना। मै जिंदगी भर आभारी रहूंगी तुम्हारी।
इस घर की मान मर्यादा को तुमने ही तो बचाया।
प्रिया _ये तो मेरा फर्ज था दी।
आज मैं आपको यहां देख कर कितना खुश हूं बता नहीं सकती दी।
प्रिया ने अपने पिता जी को दूर से देखा।
सुप्रिया _दी जाओ दी, बापू से मिलो,,
प्रिया _मुझे बापू के सामने जानें की हिम्मत नही हो रही छोटी।
सावित्री _बेटी, तुम्हारे बापू बाहर से जीतने कठोर है अंदर से उतने ही मुलायम है।
मैं जानती हूं, वो तुमसे अब भी बहुत याद करते है। मैने कई बार तुम्हारी फोटो को अकेले में देखते हुए देखा है।
जाओ बेटी,,
मां की बातो को सुनकर, प्रिया के अंदर कुछ हिम्मत आया।
वह अपने पिता की ओर आगे बडी।
जैसे ही वह उसकी पैर छूना चाही सत्जन सिंह दूर हट गया और वहां से अपने कमरे में चला गया।
सभी लोग इस घटना को देख रहे थे।
प्रिया, रोने लगी।
राजेश ने प्रिया को गले लगा लिया।
राजेश _दी चुप हो जाओ, सब ठीक हो जायेगा। मै हूं न। मुझ पर भरोसा रखो।
सुनिता _प्रिया, चुप हो जा बेटा, मै भईया से बात करूंगी। वो तुम्हे माफ कर देंगे।
सावित्री भी रो रही थी।
सतपाल सिंह, छोटा मामा।
अपनी पत्नी से।
अब देखते ही रहोगे की मेहमानों को उनका कमरा भी दिखाओगी।
सुमित्रा ने सभी लोगो को उनका कमरा दिखाया।
राजेश को एक अलग कमरा दिया गया।
सुमित्रा राजेश को कमरा दिखाने ले गई।
सुमित्रा _राजेश ये रहा तुम्हारा कमरा।
राजेश _तुम आराम करो, किसी चीज की जरूरत हो तो बताना।
राजेश _मामी ये बताओ अपनी बैग कहा रखूं।
सुमित्रा _यहां अलमारी में रख दो।
सुमित्रा अलमारी को खोल कर दिखाया।
राजेश उसके पीछे गया।
सुमित्रा की चूतड पर चिकोटी काट दी।
सुमित्रा _उई मां, बदमाश कितनी जोर से चिकोटि कांटी।
राजेश _मानी की बच्ची, सब भूल गई क्या?
मैं कब से देख रही हूं मुझे तू इग्नोर कर रही है।
राजेश ने सुमित्रा को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ कर कहा।
भूल गई क्या अपने भांजे का प्यार, मामी तू मतलबी निकली।
राजेश ने सुमित्रा को छोड़ दिया और पलंग पर लेट गया।
सुमित्रा हसने लगी।
सुमित्रा _तो तू चाहता है की मै तुम्हे देखते ही, मेरा प्यारा भांजा आ गया करके सबके सामने तेरे गोद में बैठ जाती।
सुमित्रा _बेड किनारे बैठते हुवे बोली।
बोलो क्या चाहते हो तुम?
राजेश _मामी सच में बच्चे को जन्म देने के बाद तो तुम एकदम से गदरा गई हो।
सुमित्रा _चल हठ बेशरम कितनी गंदी बातें बोलता है अपनी मामी से।
तभी राजेश ने सुमित्रा को अपने ऊपर खींच लिया।
सुमित्रा _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? कोई आ जाएगा। मुझे घर से निकलवाएगा क्या?
राजेश _कितने दिन हो गए तुम्हारे लिए हुवे।
आज तुम मस्त लग रही हो, एकदम गदरा गई हो, आज रात तुम मेरे कमरे में आवोगी।
सुमित्रा _पागल हो गया है क्या?
घर में इतने लोग है और मुझे रात में अपने कमरे मे बुला रहा है।
राजेश _मै तुम्हारा इन्तजार करूंगा।
सुमित्रा _न छोड़ो मुझे मै नही आ सकती।
अब छोड़ो भी नहीं तो भांडा अभी फूट जायेगा ।
राजेश ने पकड़ ढीली कर दी।
सुमित्रा खुद को छुड़ाकर, हंसते हुए भागी।
फिर दरवाजे के पास जाकर पलटी राजेश को जीभ दिखाकर चिढा ने लगी।
राजेश को गुस्सा आया।
राजेश _मामी की बच्ची, रुक अभी सबक सिखाता हूं।
सुमित्रा वहा से भाग गई।
राजेश अपना पैंट शर्ट चेंज कर दिया। कमरे में बाथरूम था नही।
बाथरूम घर के पीछे बनाया गया था।
राजेश फ्रेश होने घर के पीछे गया। बाथरूम पक्का था। 4लेट बाथ बना huwa था।
बाथरूम आधुनिक ढंग से बनाया गया था जैसे शहरों में होती है।
राजेश बाथरूम में फ्रेश होकर हाल में आया।
वहा अन्य लोग भी मौजूद थे।
सुप्रिया राजेश के लिए चाय पकौड़े लेकर आई।
सुप्रिया _लो राजेश चाय पकोड़ा लो।
राजेश _थैंक यू दी।
सुप्रिया _वैसे जब तुम छोटे थे तो गोल मटोल थे। प्रिया दी तो तुम्हे गोलू गोलू करके बुलाती थी। अब तो तू बडा स्मार्ट हो गया है रि। एकदम हीरो की तरह लगता हैं। काफ़ी अच्छी बॉडी बना रखी। लगता है रोज कसरत करते हो।
राजेश _दी एक बात कहूं।
सुप्रिया _हा हा बोलो।
राजेश _पहले जब मैं आता था तब तुम बिल्कुल पतली दुबली लगती थी।
अब तो एकदम खूबसूरत लगती हो। बिल्कुल प्रिया दी की कॉपी।
सुप्रिया शर्मा गई,,,
सुप्रिया _अच्छा,,
राजेश _लगता ही नहीं की आप दी बच्चो की मां हो, अब भी कुंवारी लगती हो।
सुप्रिया _चुप बेशरम।
अच्छा ये पकोड़ा कैसा लगा?
राजेश _बहुत स्वादिष्ट, जायकेदार।
सुप्रिया _अच्छा ये बता, प्रिया दी तो तुम्हारे शहर में ही रहती हैं उसके घर में तो तू आता जाता तो होगा ही।
राजेश _, हां, मै तो दीदी के हॉस्पिटल भी जाता हूं।
सुप्रिया _अच्छा, वहा क्या करता है? राजेश _दीदी से कुछ काम रहता है तो,,,
प्रिया _मामी बता रही थी दीदी तो शहर की बहुत बड़ी नामी डॉक्टर है।
शहर में बडा नाम है उनका, और यहां देखो बिलकुल सामान्य औरतों की तरह व्यवहार कर रही है।
राजेश _यही तो खासियत है दीदी की, जरा भी घमंड नहीं है उसके अंदर।
अच्छा दी मामी ने मेरे बारे में कुछ नही बताया आपको।
सुप्रिया _बताया न,
राजेश _क्या?
सुप्रिया _यही की तू बडा बदमाश है? कई लड़कियां तुम्हारे आगे पीछे घूमती है।
राजेश _बस, यही बताया आपको।
सुप्रिया _हुं।
तभी पिंकी वहा पर मौजूद सभी बच्चो को लेकर राजेश के पास आ गई।
पिंकी _मामा जी चलो न खेलते हैं।
राजेश बच्चों के साथ खेलने लगा।
सुनिता अपनी भाभी सावित्री से।
सुनिता _भाभी कल की सारी तैयारी हो गई है न।
सावित्री _वैसे तो सारी तैयारी हो चुकी है, सुनिता।
पर तू एक बार देख ले कोई, चीज छूट तो नही गया है।
कुछ देर बाद सुमित्रा राजेश के पास आया, गोद में उसका बच्चा था।
सुमित्रा _अरे राजेश, तुमने मुन्ना को देखा है कि नही।
राजेश _नही मुझे तो किसी ने दिखाया ही नहीं।
सुमित्रा _ये लो देख कर बताओ ये किस पर गया है।
राजेश ने बच्चा अपने गोद में ले लिया।
राजेश _मामी मुन्ना तो बड़ा प्यार है।
पर ये किस पे गया है, मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा।
सुमित्रा हंसने लगीं।
सुमित्रा ने राजेश के कान में धीरे से फुसफुसाते हुवे कहा, तुम पर,,
राजेश इधर उधर देखने लगा,,,
ये मामी तो मुझे पिटवा देगी।
सुमित्रा _क्या huwa जानकर ख़ुशी नहीं हुई।
राजेश _तू रात में आना तब बताऊंगा, कितनी खुशी हुई।
फुसफुसाते हुए कहा।
तभी वहां सतपाल सिंह पहुंच गया ।
सतपाल सिंह _क्या फुसुर फुसुर हो रही है मामी और भांजे के बीच भई।
राजेश _मामा, मै मामी से कह रहा था कि मुन्ने को बड़े मामा की तरह स्ट्रॉन्ग बनाना आख़िर यह इस घर की वारिस जो है।
सतपाल सिंह _हा भई ये तो है।
वैसे मुन्ना काफ़ी स्ट्रॉन्ग है। देखो कैसे हाथ पैर हिला रहा है।
औरते रात्रि भोज की तैयारी में लग गई। पुरुष लोग कल की तैयारी पे बातचीत करने लगे।
मेहमानों के स्वागत में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
रात में सभी लोगो ने एक साथ भोजन किया।
पुरषो के भोजन के बाद महिलाओं ने भी भोजन कर लिया।
राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।
राजेश ने सुमित्रा को रात को कमरे में आने को कहा था।
पर सुमित्रा ने मना कर दिया था।
राजेश सोने की कोशिश करने लगा। उसे लगा की मामी शायद ही आयेगी।
उसे नींद आ गई।
रात के करीब 1बजे सुमित्रा राजेश के कमरे में चुपके से आई।
राजेश ने दरवाज़ा खुला रखा huwa था। क्या पता मामी आ जाए।
सुमित्रा राजेश के कमरे में जाकर देखी तो राजेश सो रहा था।
सुमित्रा _लो रात में आने को कहकर मेरी नींद खराब करके खुद सो रहा है महाशय।
सुमित्रा ने राजेश का लोवर नीचे खींच कर अंडर वियर भी नीचे कर लंद बाहर निकाल दिया।
फिर अपने में लेकर चूसने लगी।
राजेश का नींद खुल गया।
राजेश _अरे मामी तुम कब आई।
सुमित्रा _बदमाश मुझे बुलाकर खुद चैन की नींद सो रहाहै।
राजेश _मामी मुझे लगा तुम नही आयेगी।
सुमित्रा _हूं, नही आती तो बाद में शिकायत करते मामी ने ठीक से खातिर दारी नही की।
राजेश का लंद तनकर खड़ा हो चुका था।
सुमित्रा _सुन जो करना है जल्दी कर, मेरे पास ज्यादा समय नहीं तुम्हरे मामा जी उठ गए न तो तमाशा हो जजायेगी।
राजेश उठ कर बैठ गया।
सुमित्रा को अपने पास बिठा लिया।
राजेश _मुझे तो आपकी दुध पीने है, जरा चख कर तो देखू आपका दुध कैसा है?
राजेश ने सुमित्रा कीचोली का बटन खोल दिया। बड़ी बड़ी दुध से भरी चूचियां राजेश के आंखों के सामने आ गया।
मामी, आपकी चूंची तो एकदम बड़ी बड़ी हो गई है, लगता हैं इसमें खूब दुध भरा है।
राजेश ने सुमित्रा की चूची का निप्पल ऊंगली से दबाया।
दुध की तेज धार निकल कर उसके चेहरे पर पड़ा। सुमित्रा हसने लगी।
राजेश ने चूचक मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।
वह दुध गटक गटक कर पीने लगा।
सुमित्रा भी गर्म होने लगी।
उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगी।
राजेश एक हाथ सुमित्रा के पेटीकोट के अंदर डाल दिया और boor को रगड़ने लगा।
सुमित्रा बहुत अधिक उत्तेजित हो कर मादक सिसकारी निकालने लगी।
सुमित्रा _, राजेश मेरे पास ज्यादा समय नहीं है जल्दी करो प्लीज।
राजेश सुमित्रा को बेड पकड़ा कर घोड़ी बना दिया।
फिर उसकी पेटीकोट साड़ी सहित ऊपर उठा दिया। पेंटी को नीचे खींचकर निकाल दिया।
राजेश ने chut में ऊंगली डाल कर देखा एक दम गीली थी।
उसने अपना लंद का सुपाड़ा छेद पर रखा और एक जोर का धक्का मारा, लंद boor चीरकर आधे से ज्यादा अंडर घुस गया।
सुमित्रा चिहुंक उठी।
राजेश ने फिर एक करारा शार्ट मारा, लंद boor में जड़ तक घुस गया। लंद का टोपा सुमित्रा की बच्चेदानी से टकराया।
सुमित्रा फिर चिहुंक उठी।
उसके बाद राजेश ने लंद को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
वावह सुमित्रा की कमर पकड़ कर गपागप chodna
सुरु कर दिया।
Chudai में दोनो को बहुत मजा आने लगा।
सुमित्रा कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी। कमरे मे सुमित्रा की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनक तथा फुक फुक की आज गूंज रही थी ।
सुमित्रा की boor से पाणी झरने की तरह बह रहा था।
कदोनो को संभोग में आपार सुख प्राप्त हो रहा था।
राजेश कुछ देर इसी पोजीशन में चोदने के बाद। उसे बेड किनारे लिटा दिया। टांगों को फैला कर लंद एक ही धक्के ने जड़ तक घुसा दिया
और चूची मसलते हुए कस कस कर धक्के लगाने लगा।
कमरे में फिर से मादक सिसकारी गूंजने लगा।
सुमित्रा दो बार झड़ चुकी थी।
राजेश अब बेड पे लेट गया। उसका लंद हवा में लहरा रहा था।
सुमित्रा को ऊपर आने का इशारा किया।
सुमित्रा बेड के ऊपर आ गई और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी boor में डाल कर बैठ गई।
राजेश ने उसकी चूंची पकड़ लिया।
सुमित्रा उछल उछल कर chudna सुरू कर दी। राजेश भी जोश में था वह भी सुमित्रा की कमर पकड़ कर नीचे से कमर उठा उठा कर लंद को boor की गहराई में ले जानें की कोशिश करने लगा।
कमरे में दोनो की ऊ आह ऊ आह की आवाजे गूंजने लगी।
कुछ ही देर में सुमित्रा फिर झड़ कर राजेश के ऊपर लुड़क गई।
जब वह होश में आई वह बेड से उतरी,,
सुमित्रा _राजेश अब बस करो , काफ़ी देर हो गई है। तुम्हारे मामा जी उठना जाए।
राजेश_पर मामी मेरा अभी huwa नहीं है।
सुमित्रा _तुमारा बस चले तो रात भर लेते रहोगे।
न बाबा अब मैं और नही रुक सकती।
सुमित्रा पेंटी पकड़ कर कमरे से बाहर निकल गई।
राजेश लंद हिलाता रह गया।
राजेश _ये मामी तो खुद मज़े लेकर मेरी नींद उड़ा कर चली गईं। शाला अब ऐसे में नींद कहा से आयेगी।
अब क्या करूं?
राजेश ने सोचा क्यूं न प्रिया दीदी से बात करे शायद वो मान जाए।
राजेश ने देखा 2बजने वाला था।
उसने प्रिया को काल किया।
प्रिया गहरे नींद में सो रही थी। पहले तो उसे पता नही चला किसी ने काल किया है।
राजेश ने फिर काल किया।
प्रिया की नींद खुली।
इतनी रात को किसका फोन है?
उसने फोन चेक किया। राजेश का काल, इस वक्त।
उसने काल उठाया।
राजेश _दी,,
प्रिया _राजेश इस वक्त, क्या बात है?
राजेश _दी मुझे नींद नहीं आ रही। शायद नई जगह है इसलिए। तुम्हारे पास कोई दवा है क्या? नींद आने की।
प्रिया _राजेश, नींद की दवा लेना अच्छी बात नहीं, तुम कोशिश करो, सोने की।
राजेश _दी कब से कोशिश कर रहा हूं। पर नींद आ ही नहीं रही है।
प्रिया _अच्छा ठीक है मैं ठंडे तेल से तेरी सिर की मालिश कर देती हूं, उससे फर्क पड़े।
राजेश _राजेश ठीक है दी, आ जाओ। प्रिया ने देखा बच्चे गहरी नींद में सो रहे हैं।
प्रिया ठंडे तेल की सीसी लेकर राजेश के कमरे में गया।
राजेश अपना शरीर को चादर से ढक लिया था।
राजेश _दी शरीर में गर्मी बहुत बड़ गई है। ठंडे तेल से मालिश कर दो। तो शायद राहत मिले।
प्रिया ने राजेश के ऊपर से हटाया।
उसने देखा राजेश तो नंगा है उसका लंद अकड़ा huwa है।
प्रिया _ये क्या है re?
_तुम्हे मालिश नही chut की जरूरत है।
सीधा बोल नही सकता था, तेरा बडा मन है सेक्स का, नींद नहीं आ रही है।
राजेश _दी मै सच बता देता तो आप आती क्या?
प्रिया _न, एक तो ऐसे ही पिता जी मुझसे नाराज़ ऊपर से किसी ने पकड़ लिया तो,,,,
न बाबा ना मैं जा रहीं अपने कमरे में।
राजेश _ठीक है दीदी आप जाओ, राजेश करवट लेकर लेट गया।
प्रिया _हूं, नाराज हो गया क्या?
अच्छा ठीक है, चल नाराज मत हो अपनो दीदी से।
प्रिया राजेश को सीधा की और उसका लंद पकड़ ली।
प्रिया _अरे तेरे लंद पर तो अजीब सा गंध आ रहा है किसी की boor मार रहा था क्या?
राजेश _हूं
प्रिया _किसकी?
राजेश _छोटी मामी की । वो मुझे अधूरा छोड़ कर भाग गई।
प्रिया _हूं तो ये बात है?
चल मेरी chut चांट के गर्म कर मुझे।
अपनी नाईटी उतार कर बेड पर लेट गई।
राजेश उसकी टांगो के बीच आकर उसकी boor पे मुंह डाल कर चाटने लगा।
प्रिया गर्म हो गई।
वह राजेश को लिटा कर उसके लंद पर बैठ गई और उछल उछल कर चुदाने लगी।
कमरे में दोनो के मुंह से उह आह ऊ आह निकलने लगा।
दोनो को बहुत मजा आने लगा।
कुछ देर में ही प्रिया झड़ गई।
उसके बाद राजेश ने प्रिया को घोड़ी बना दिया और उसकी गाड़ मारने लगा।
वह कभी boor तो कभी गाड़ में लंद डालकर प्रिया की ठुकाई करने लगा और अंत में प्रिया की गाड़ में झड़ गया।
दोनो कुछ देर इक दूसरे की बाहों में लिपट कर सो गए।
कुछ देर बाद प्रिया उठी और अपनी नाईटी पहन कर जाने लगीं।
जब वह राजेश के कमरे से निकली तो सुप्रिया ने उसे निकलते देख ली,,,,
।
सुनिता राजेश के कमरे में गई।
सुनिता _अरे बेटा काफ़ी देर तक सोया है तबियत तो ठीक है न।
प्यार से राजेश के बालो को सहलाते हुए बोली।
राजेश ने अपनी आंखें खोला।
राजेश _मां आप,,
सुनिता _आज काफ़ी देर तक सोया है तो चिंता हुई तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना।
राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं मां।
राजेश ने अपने दोनो बांहे सुनिता के गले में डाल दिया।
राजेश _सुनिता को चूमने की कोशिश करने लगा।
राजेश _अरे छोड़ क्या कर रहा है। सुबह सुबह ही बदमासी शुरू।
चलो उठो फ्रेस हो जाओ।
सुनिता ने राजेश की चादर को खींचा।
चादर के खींचते ही। उसकी नजर राजेश के लंद पर गया।
सुनिता,_हे भगवान तुम्हारा तो सुबह सुबह खड़ा हो गया है।
राजेश मुस्कुराते हुवे।
ये तो सुबह रोज ही खड़ा रहता है मां।
राजेश बेड से उठ कर बैठ गया।
सुनिता कमरे से जानें को मूढ़ी तभी राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।
सुनिता ने पीछे मुड़कर देखा।
राजेश ने खींचकर अपने गोद में बिठा लिया। और सुनिता की चूची मसलने लगा।
सुनिता _अरे छोड़ न , देखो सुबह सुबह ही ये ठीक नहीं, छोड़ो मां।
राजेश _मां मुझे जोरो की पेसाब लगीं है।
सुनिता _तो जाओ बाथरूम में जाकर पेशाब करो, मुझे क्यू अपने घोड़े पे बिठा लिया।
राजेश _मां आज आप मुझे पेशाब करा दो न।
सुनिता _छी बेशरम तू छोटा बच्चा है जो पेंट उतार कर सुसु कराऊंगी।
राजेश _मै तो तुम्हरे लिए अभी भी छोटा बच्चा हूं न।
सुनिता, हसने लगी,,,
हा हां तू तो बहुत छोटा है तेरा नुनु अभी मात्र एक इंच का है। चल अपने राजा बेटे को सुसु करा देती हूं। नही तो पेंट गिला कर देगा मेरा राजा बेटा।
सुनिता हंसने लगीं।
राजेश _मां मेरी मजाक उड़ा रही हो।
सुनिता _मजाक नही उड़ा रही, तुम्हे आइना दिखा रही, जब बेटे की ऊंचाई बाप के बराबर हों जाय तो मां को अपने बेटे के सामने पल्लू छिपा के रखना चाहिए। तू तो अपने बाप से भी ऊंचा हो गया है तुम्हारा नुनु बाप दोगुना हो गया है, और कह रहा है सुसु कराओ, चल छोड़ मुझे, कमबख्त कही का।
राजेश _नही, एक बार करा दो न सुसु। जब मेरा हाथ फ्रैक्चर huwa था उस समय कराती थी। उसे आनंद को मैं फिर से महसूस करना चाहता हूं।
सुनिता _तू बड़ा गंदा, हो गया है कैसी कैसी शौंके पालने लगा है। अब तेरी शादी करवानी पड़ेगी फिर अपनी बीवी के हाथो ही सुसु करना।
राजेश _मां मान जाओ न नही तो मैं अपना हाथ फिर से फ्रैक्चर कर लूंगा, फिर करवाना ही पड़ेगा।
सुनिता _चुप बदमाश कही का, फिर कभी फ्रैक्चर वाली बात मत कहना।
चल तेरी इच्छा पूरी कर देती हूं।
सुनिता राजेश काहाथ पकड़ के अपने साथ, बाथरूम ले गया।
सुनिता राजेश के पीछे खड़ी हो गई।
सुनिता _चलो सुसु करो।
राजेश का लंद तन कर खड़ा था।
राजेश _मां पहले नुनु को तो पकड़ो नही तो पेशाब इधर उधर कही भी गिरने लगेगा।
सुनिता ने राजेश का लंद, आगे हाथ ले जाकर पकड़ लिया। और उसे सही दिशा दिखाया ताकि पेशाब, सही जगह गिरे।
सुनिता _लो अब जल्दी करो।
राजेश ने जोर लगाया पर लंद में तनाव के कारण पेशाब बाहर नहीं आया।
सुनिता _क्या हुवा बाबा जल्दी करो।
राजेश _मां जोर तो लगा रहा हूं पर पेशाब बाहर नही आ रहा है।
सुनिता हंसने लगीं,,,
नुनु खड़ा रहेगा तो पेशाब कहा से आएगा।
राजेश _मां थोडा नुनु को हिलाओ न तब शायद, पेशाब बाहर आए।
सुनिता _हूं तेरी सब चाल समझती हूं बच्चू।
सुनिता राजेश के लंद को हिलाने लगी।
एक हाथ से अंडकोष सहलाने लगीं।
सुनिता _अब जोर लगा।
राजेश ने फिर जोर लगाया, इस बार पेशाब की तेज धार निकली और बाथरूम की दीवार पर चर र,,
की आवाज के साथ गिरने लगीं।
कुछ देर बाद पेशाब की धार रुक गई। सुनिता फिर लंद को हिलाई,,
राजेश ने फिर जोर लगाया फिर से पेशाब की तेज धार दीवार पर गिरने लगा।
सुनिता मुस्कुराने लगीं। राजेश को बहुत मजा आ रहा था।
इस तरह यही प्रक्रिया तब तक चलती रहीं जब तक राजेश के मूत्राशय का एक एक बूंद बाहर नही निकल गया।
पेशाब कर लेने के बाद भी राजेश का लंद खड़ा ही था।
सुनिता _और कितने देर तक करेगा?
राजेश _बस हो गया मां।
सुनिता _, चल अब तू नहा ले तभी ये बैठेगा।
राजेश _, मां मुझे नहला दो न।
सुनिता _अब तेरा कुछ ज्यादा नही हो रहा।
मुझे नाश्ता बनाना है।
सुनिता वहा से निकल कर स्वीटी के कमरे मे गई।
सुनिता _स्वीटी बेटा तुम ठीक तो हो न, अभी तक उठी नही है। प्यार से उसकी बालो को सहलाते हुए पूछी।
स्वीटी _मां पीछे बड़ा दर्द कर रहा है। ठीक से चल नहीं पा रही।
सुनिता _दिखा मुझे देखू, क्या हाल है तेरी,,,
स्वीटी _मां, मुझे शर्म आयेगी।
सुनिता _कल तो बड़ी उछल उछल कर ले रही थी अपनी पिछवाड़े में अपने भाई के तब तो शर्म नहीं आ रही थी।
अब दिखाने में शर्म आ रही हैं।
चल दिखा मुझे।
सुनिता ने स्वीटी को पकड़ कर घोड़ी बना दिया।
फिर उसकी नाइटी ऊपर उठा कर उसकी गाड़ को चेक करने लगीं।
सुनिता _हाय राम ये तो पूरा सूज गई है।
पता नही तू कैसे ले पा रहीं थी। पूरा हालत बिगाड़ के रख दिया है, कमबख्त ने।
मैं बर्फ से सिकाई कर क्रीम लगा देती हूं। फिर टैबलेट दूंगी उसे खा लेना। हमे दोपहर में तुम्हारे मामा के यहां भी निकलना है। वहा ठीक से रहना, किसी को कोई शक न हो।
सुनिता फ्रिज से बर्फ निकाल लाई और स्वीटी की गाड़ की सेकने लगी। उसके बाद उसमे क्रीम लगा दी। स्वीटी को राहत मिली।
सुनिता ने उसे दर्द की टैबलेट खाने को दी।
इधर राजेश नहाकर फ्रेश हो गया।
कुछ देर स्वीटी आराम की फिर वह भी नहाकर फ्रेश हो गई।
शेखर और राजेश दोनो नाश्ता करने लगे।
शेखर _आज स्वीटी नही आई नाश्ता करने,,,
राजेश _हा मां, स्वीटी कहा है?
सुनिता _उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं वो मेरे साथ करेगी, नाश्ता तुम दोनो कर लो।
आपको ऑफिस भी निकलनी है। 1 बजे छूटी लेकर आ जाना जी। हमे भईया के घर जाना है।
शेखर _हा याद है भई याद है, आ जाऊंगा छुट्टी लेकर।
वैसे भी कल संडे है। छूटी रहती है, दो एक दिन और ले लूंगा।
सुनिता _राजेश बेटा प्रिया को फोन कर दो उससे कहना, 1बजे तैयार रहे।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश ने प्रिया को काल किया।
राजेश _प्रिया दी क्या कर रही हो?
प्रिया _कुछ नही बस जानें की तैयारी ही कर रही थी।
राजेश _गुड, दीदी मां कह रही है हम 1बजे निकलेंगे।
प्रिया _राजेश, मुझे बड़ी टेंशन हो रही है।
मैं पिता जी का सामना कैसे कर पाऊंगी। यही सोच सोच कर मेरी हालत खराब हो रही।
राजेश _दीदी आप टेंशन मत लो मै हूं न। सब ठीक होगा।
प्रिया _तुम्हरे कारण ही तो हिम्मत कर पा रही, गांव जानें की, देखो राजेश, तुम सब सम्हाल लोगे न।
राजेश _दीदी, तुम्हे मुझ पर भरोसा नहीं क्या?
प्रिया _तुम पर भरोसा नहीं होता तो जाति क्या?
राजेश _दी आप बस जानें की तैयारी करो, ये न सोचों की मामा जी का सामना कैसे करोगी?
वैसे जीजू जा रहे की नही।
प्रिया _उसको अभी ले जाना ठीक नहीं, पहले मैं ही हो आती हूं। पता नही मुझे देखकर पिता जी की प्रतिक्रिया कैसी होगी?
राजेश _अच्छा ठीक है दी।
प्रिया _अच्छा सुनो, तुम एक बजे के पहले घर आ जाना, हम सब एक ही कार में चलेंगे। बड़ी वाली कार में सभी आ जायेंगे।
राजेश _अच्छा ठीक है दी।
मैं समय पर पहुंच जाऊंगा।
सुनिता _क्या बोली बेटा, प्रिया?
राजेश _मां, दी बोली की एक ही कार में चलेंगे, सब मुझे दी अपने घर बुलाए है, बोल रही थी बडी कार में सभी आ जायेंगे।
सभी साथ में ही चलेंगे।
सुनिता _ठीक है बेटा तुम 12बजे प्रिया और बच्चो को ले आना।
कुछ देर बाद सुनिता स्वीटी के कमरे में गई।
सुनिता _कैसा है अब दर्द कुछ आराम मिला।
स्वीटी _हां मां आप ने जो दवाई मलहम लगाई उससे काफ़ी आराम मिला।
सुनिता _अब चलो तुम भी नहा कर तैयार हो जाओ और नाश्ता कर लो।
राजेश और तुम्हारे पापा नाश्ता कर चुके हैं।
स्वीटी _ठीक है मां।
12बजने के बाद, राजेश प्रिया के घर पहुंचा।
राजेश ने दरवाज़ा का बेल बजाया।
नौकरानी ने दरवाज़ा खोला।
राजेश _दीदी कहा है?
नौकरानी _वो तो कमरे में बच्चो को तैयार कर रही है।
राजेश, प्रिया के कमरे की ओर गया ।
राजेश _दी, कहा हो? हो गया तैयारी?
प्रिया _अरे राजेश तुम आ गए।
पिंकी को तैयार कर रही थी। सारा सामान पैक हो चुका है।
राजेश _अरे पिंकी इस ड्रेस में तो बड़ी प्यारी लग रही है।
पिंकी _थैंक यू मामा जी। मामा जी मां कह रही है की हम नाना जी के घर जा रहे हैं।
प्रिया _नाना जी के घर जानें के बात से पिंकी बड़ी खुश हैं।
राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।
हमारा भांजा रेडी huwa है की नही।
प्रिया _उसे भी तैयार कर दी है, अभी दुध पिलाई थी, वो सो रहा है।
राजेश _ओह,,
प्रिया _राजेश तुम ड्राइवर से कार की चाबी लेकर, कार निकालो फिर ये बैग कार में रख दो तब तक मैं भी रेडी होती हूं।
राजेश _ठीक है दी।
राजेश कार निकालने चला गया इधर प्रिया अपने कमरे में तैयार होने लगी।
राजेश पार्क से कार बाहर निकाला फिर सामान को ले जाकर गाड़ी के डिक्की डाला।
कुछ देर बाद राजेश प्रिया को आवाज लगाया।
राजेश _दीदी और कितना समय लगेगा?
प्रिया _बस हो गया, एक मिनट इधर आना।
राजेश कमरे में गया।
राजेश _क्या बात है दी?
प्रिया _देखो तो,मै ठीक तो लग रहीं हूं न इस साड़ी में।
राजेश _wow दी सच में तुम तो इस साड़ी में कमाल की लग रही हो।
राजेश ने प्रिया को पीछे से बाहों में भर लिया।
प्रिया _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? पिंकी आ जाएगी।
राजेश _दी सच में तुम कमाल की लग रही हो? एक किस तो दे दो।
प्रिया _न पिंकी, कभी भी आ जायेगी। छोड़ो,,
राजेश ने प्रिया के गर्दन को चूमने चाटने लगा।
दीदी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है आपके बदन से।
प्रिया _अरे छोड़ो न, समझा करो पिंकी आ जायेगी।
तभी कमरे में पिंकी की आने की आहट हुई।
राजेश ने प्रिया को छोड़ दिया।
प्रिया हसने लगी।
पिंकी _मम्मी, भाई को उठाओ न वो भी तो जायेगा नाना के घर।
प्रिया _अरे नही बेटा बाबू को मत उठाओ नही तो रोना शुरू कर देगा। ओ अपने मन से उठेगा।
राजेश _अब चलो दी हम लेट हो रहे हैं।
प्रिया _हां, मै बाबू को गोद में ले लेती हूं।
प्रिया ने नौकरानी को आवश्यक निर्देश दी।
फिर
सभी कार में जाकर बैठे।
राजेश कार को अपने घर की ओर दौड़ा दिया।
कुछ ही देर में वे घर पहुंचे।
सुनिता ने दरवाज़ा खोला
सुनिता _आ गए तुम लोग, तुम्ही लोगो का राह देख रहे थे।
प्रिया _बच्चो को तैयार करते थोडा लेट हो गया, बुआ।
सुनिता _मुन्ना सो गया है क्या? दिखाओ मुझे।
प्रिया _ये अभी इसका अभी सोने का समय है, न तो मैने इसको उठाया नही , मुन्ने को सुनिता को पकड़ाते हुए बोली।
सभी अंदर गए सोफे पर बैठ गए। शेखर भी आ चुका था, वो भी कमरे से तैयार होकर बाहर निकला।
सुनिता _राजेश बेटा सारा सामान कार में डाल दो।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश ने सारा सामान कार में डाल दिया।
सुनिता _प्रिया, कुछ खाकर निकले हो कि नही गांव पहुंचते शाम हो जाएगी।
स्वीटी कमरे से बाहर आई।
हाई दी कैसी हो, इस साड़ी में तो बहुत प्यारी लग रही हो।
प्रिया _थैंक क्यू,
तुम भी इस ड्रेस में बड़ी प्यारी लग रही हो।
प्रिया _बुवा अभी तो कुछ खाने का मन भी नहीं कर रहा।
रास्ते में ही कुछ खा लेंगे।
सुनिता _अच्छा ठीक है।
चलो अब हमें निकलना चाहिए।
सभी लोग घर से निकले,
सुनिता _किसको कहा बैठना है?
देख लो।
राजेश कार ड्राइव किया।
जब वे पहुंचे तो शाम हो चुकी थी।
गांव में राजेश के मामा मामी उन्ही लोगो के आने का इंतजार कर रहे थे।
उनके पहुंचने की खबर सुनकर सभी खुश हो गए।
राजेश _नमस्ते मामा जी।
सत्जन सिंह _अरे आओ मेरे शेर।
राजेश ने सत्जन सिंह के पैर छुए,,
सत्जन सिंह _अरे यार पैर मत छुओ गले लगो।
सुना है कुछ दिनों में कलेक्टर बनने वाले हो।
राजेश _आपका आशीर्वाद रहा तो, ज़रूर बनूंगा मामा जी।
सत्जन _अरे यार मेरा आशीर्वाद तो हमेशा तुम्हारे साथ है।
वैसे दिखने में तो एकदम फौजी लगता है। बड़ी अच्छी बॉडी बनाई है, लगता हैं सुबह खूब मेहनत करते हो।
राजेश _ये सब तो आप से ही सीखा है मामा जी। मै जब भी यहां आता था, आप दोनो मामा को सुबह दंड बैठक लगाते देखता था।
तो मैंने भी ठान लिया था की मै भी अपने मामा जी की तरह सुबह कसरत कर अपनी बॉडी बनाऊंगा।
सत्जन सिंह _तो सुबह तैयार रहना, कुस्ती करने के लिए। मै भी तो देखूं मेरा भांजा कितना ताकत वर है।
राजेश _अरे मामा जी मै भी देखना चाहूंगा आख़िर इस उम्र में भी आप कितनी ताकत रखते हैं।
तभी शेखर वहा पहुंचा।
क्या बाते हो रही है भई मामा भांजे के बीच।
सत्जन _अरे आओ शेखर आओ।
भांजे की बॉडी देखकर, भांजे से कुश्ती लड़ने की इच्छा हो गई। कल सुबह हम दोनो की कुस्ती होगी। तुम मौजूद रहना।
शेखर _अरे बिल्कुल देखेंगे भई, आखिर हमें भी तो देखना है इस उम्र में आप जवान को हरा पाते हैं की नही, जवानी में तो आप अच्छे अच्छे पहलवानों को पानी पिला देते थे। दोनो हंसने लगे।
सत्जन सिंह _वैसे तुम्हारा बैंक का काम कैसा चल रहा है।
शेखर _वैसा ही जैसे पहले, बैंक से घर फिर घर से बैंक, बस ऐसे ही जिंदगी निकल रहीं है। 25सालो से।
उधर प्रिया अपनी मां सावित्री से मिली।
सावित्री ने प्रिया को देखते ही गले लगा।
सावित्री _मेरी बच्ची कैसी है तू।
क्या तुम्हे तुम्हारी मां की कभी याद नहीं आई।
प्रिया रोने लगी।
प्रिया _मां ये क्या कह रही हो, ऐसा भी कोई दिन रहा होगा जब मैने आप लोगो को याद न किया हो,,
मै आप लोगो से मिलने के लिए तड़प रही थी मां, पर बाबू जी का सामना करने की हिम्मत मुझमें नहीं थी।
प्रिया की छोटी बहन सुप्रिया भी आई थी। वह भी दो लड़कियो की मां बन चुकी थी।
प्रिया _छोटी कैसी है तू?
सुप्रिया , प्रिया के गले से लिपट गई।
प्रिया _दी आप कैसी है?
आप ठीक तो है न।
प्रिया _मै तो बिल्कुल ठीक हूं मेरी बहना। मै जिंदगी भर आभारी रहूंगी तुम्हारी।
इस घर की मान मर्यादा को तुमने ही तो बचाया।
प्रिया _ये तो मेरा फर्ज था दी।
आज मैं आपको यहां देख कर कितना खुश हूं बता नहीं सकती दी।
प्रिया ने अपने पिता जी को दूर से देखा।
सुप्रिया _दी जाओ दी, बापू से मिलो,,
प्रिया _मुझे बापू के सामने जानें की हिम्मत नही हो रही छोटी।
सावित्री _बेटी, तुम्हारे बापू बाहर से जीतने कठोर है अंदर से उतने ही मुलायम है।
मैं जानती हूं, वो तुमसे अब भी बहुत याद करते है। मैने कई बार तुम्हारी फोटो को अकेले में देखते हुए देखा है।
जाओ बेटी,,
मां की बातो को सुनकर, प्रिया के अंदर कुछ हिम्मत आया।
वह अपने पिता की ओर आगे बडी।
जैसे ही वह उसकी पैर छूना चाही सत्जन सिंह दूर हट गया और वहां से अपने कमरे में चला गया।
सभी लोग इस घटना को देख रहे थे।
प्रिया, रोने लगी।
राजेश ने प्रिया को गले लगा लिया।
राजेश _दी चुप हो जाओ, सब ठीक हो जायेगा। मै हूं न। मुझ पर भरोसा रखो।
सुनिता _प्रिया, चुप हो जा बेटा, मै भईया से बात करूंगी। वो तुम्हे माफ कर देंगे।
सावित्री भी रो रही थी।
सतपाल सिंह, छोटा मामा।
अपनी पत्नी से।
अब देखते ही रहोगे की मेहमानों को उनका कमरा भी दिखाओगी।
सुमित्रा ने सभी लोगो को उनका कमरा दिखाया।
राजेश को एक अलग कमरा दिया गया।
सुमित्रा राजेश को कमरा दिखाने ले गई।
सुमित्रा _राजेश ये रहा तुम्हारा कमरा।
राजेश _तुम आराम करो, किसी चीज की जरूरत हो तो बताना।
राजेश _मामी ये बताओ अपनी बैग कहा रखूं।
सुमित्रा _यहां अलमारी में रख दो।
सुमित्रा अलमारी को खोल कर दिखाया।
राजेश उसके पीछे गया।
सुमित्रा की चूतड पर चिकोटी काट दी।
सुमित्रा _उई मां, बदमाश कितनी जोर से चिकोटि कांटी।
राजेश _मानी की बच्ची, सब भूल गई क्या?
मैं कब से देख रही हूं मुझे तू इग्नोर कर रही है।
राजेश ने सुमित्रा को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ कर कहा।
भूल गई क्या अपने भांजे का प्यार, मामी तू मतलबी निकली।
राजेश ने सुमित्रा को छोड़ दिया और पलंग पर लेट गया।
सुमित्रा हसने लगी।
सुमित्रा _तो तू चाहता है की मै तुम्हे देखते ही, मेरा प्यारा भांजा आ गया करके सबके सामने तेरे गोद में बैठ जाती।
सुमित्रा _बेड किनारे बैठते हुवे बोली।
बोलो क्या चाहते हो तुम?
राजेश _मामी सच में बच्चे को जन्म देने के बाद तो तुम एकदम से गदरा गई हो।
सुमित्रा _चल हठ बेशरम कितनी गंदी बातें बोलता है अपनी मामी से।
तभी राजेश ने सुमित्रा को अपने ऊपर खींच लिया।
सुमित्रा _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? कोई आ जाएगा। मुझे घर से निकलवाएगा क्या?
राजेश _कितने दिन हो गए तुम्हारे लिए हुवे।
आज तुम मस्त लग रही हो, एकदम गदरा गई हो, आज रात तुम मेरे कमरे में आवोगी।
सुमित्रा _पागल हो गया है क्या?
घर में इतने लोग है और मुझे रात में अपने कमरे मे बुला रहा है।
राजेश _मै तुम्हारा इन्तजार करूंगा।
सुमित्रा _न छोड़ो मुझे मै नही आ सकती।
अब छोड़ो भी नहीं तो भांडा अभी फूट जायेगा ।
राजेश ने पकड़ ढीली कर दी।
सुमित्रा खुद को छुड़ाकर, हंसते हुए भागी।
फिर दरवाजे के पास जाकर पलटी राजेश को जीभ दिखाकर चिढा ने लगी।
राजेश को गुस्सा आया।
राजेश _मामी की बच्ची, रुक अभी सबक सिखाता हूं।
सुमित्रा वहा से भाग गई।
राजेश अपना पैंट शर्ट चेंज कर दिया। कमरे में बाथरूम था नही।
बाथरूम घर के पीछे बनाया गया था।
राजेश फ्रेश होने घर के पीछे गया। बाथरूम पक्का था। 4लेट बाथ बना huwa था।
बाथरूम आधुनिक ढंग से बनाया गया था जैसे शहरों में होती है।
राजेश बाथरूम में फ्रेश होकर हाल में आया।
वहा अन्य लोग भी मौजूद थे।
सुप्रिया राजेश के लिए चाय पकौड़े लेकर आई।
सुप्रिया _लो राजेश चाय पकोड़ा लो।
राजेश _थैंक यू दी।
सुप्रिया _वैसे जब तुम छोटे थे तो गोल मटोल थे। प्रिया दी तो तुम्हे गोलू गोलू करके बुलाती थी। अब तो तू बडा स्मार्ट हो गया है रि। एकदम हीरो की तरह लगता हैं। काफ़ी अच्छी बॉडी बना रखी। लगता है रोज कसरत करते हो।
राजेश _दी एक बात कहूं।
सुप्रिया _हा हा बोलो।
राजेश _पहले जब मैं आता था तब तुम बिल्कुल पतली दुबली लगती थी।
अब तो एकदम खूबसूरत लगती हो। बिल्कुल प्रिया दी की कॉपी।
सुप्रिया शर्मा गई,,,
सुप्रिया _अच्छा,,
राजेश _लगता ही नहीं की आप दी बच्चो की मां हो, अब भी कुंवारी लगती हो।
सुप्रिया _चुप बेशरम।
अच्छा ये पकोड़ा कैसा लगा?
राजेश _बहुत स्वादिष्ट, जायकेदार।
सुप्रिया _अच्छा ये बता, प्रिया दी तो तुम्हारे शहर में ही रहती हैं उसके घर में तो तू आता जाता तो होगा ही।
राजेश _, हां, मै तो दीदी के हॉस्पिटल भी जाता हूं।
सुप्रिया _अच्छा, वहा क्या करता है? राजेश _दीदी से कुछ काम रहता है तो,,,
प्रिया _मामी बता रही थी दीदी तो शहर की बहुत बड़ी नामी डॉक्टर है।
शहर में बडा नाम है उनका, और यहां देखो बिलकुल सामान्य औरतों की तरह व्यवहार कर रही है।
राजेश _यही तो खासियत है दीदी की, जरा भी घमंड नहीं है उसके अंदर।
अच्छा दी मामी ने मेरे बारे में कुछ नही बताया आपको।
सुप्रिया _बताया न,
राजेश _क्या?
सुप्रिया _यही की तू बडा बदमाश है? कई लड़कियां तुम्हारे आगे पीछे घूमती है।
राजेश _बस, यही बताया आपको।
सुप्रिया _हुं।
तभी पिंकी वहा पर मौजूद सभी बच्चो को लेकर राजेश के पास आ गई।
पिंकी _मामा जी चलो न खेलते हैं।
राजेश बच्चों के साथ खेलने लगा।
सुनिता अपनी भाभी सावित्री से।
सुनिता _भाभी कल की सारी तैयारी हो गई है न।
सावित्री _वैसे तो सारी तैयारी हो चुकी है, सुनिता।
पर तू एक बार देख ले कोई, चीज छूट तो नही गया है।
कुछ देर बाद सुमित्रा राजेश के पास आया, गोद में उसका बच्चा था।
सुमित्रा _अरे राजेश, तुमने मुन्ना को देखा है कि नही।
राजेश _नही मुझे तो किसी ने दिखाया ही नहीं।
सुमित्रा _ये लो देख कर बताओ ये किस पर गया है।
राजेश ने बच्चा अपने गोद में ले लिया।
राजेश _मामी मुन्ना तो बड़ा प्यार है।
पर ये किस पे गया है, मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा।
सुमित्रा हंसने लगीं।
सुमित्रा ने राजेश के कान में धीरे से फुसफुसाते हुवे कहा, तुम पर,,
राजेश इधर उधर देखने लगा,,,
ये मामी तो मुझे पिटवा देगी।
सुमित्रा _क्या huwa जानकर ख़ुशी नहीं हुई।
राजेश _तू रात में आना तब बताऊंगा, कितनी खुशी हुई।
फुसफुसाते हुए कहा।
तभी वहां सतपाल सिंह पहुंच गया ।
सतपाल सिंह _क्या फुसुर फुसुर हो रही है मामी और भांजे के बीच भई।
राजेश _मामा, मै मामी से कह रहा था कि मुन्ने को बड़े मामा की तरह स्ट्रॉन्ग बनाना आख़िर यह इस घर की वारिस जो है।
सतपाल सिंह _हा भई ये तो है।
वैसे मुन्ना काफ़ी स्ट्रॉन्ग है। देखो कैसे हाथ पैर हिला रहा है।
औरते रात्रि भोज की तैयारी में लग गई। पुरुष लोग कल की तैयारी पे बातचीत करने लगे।
मेहमानों के स्वागत में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
रात में सभी लोगो ने एक साथ भोजन किया।
पुरषो के भोजन के बाद महिलाओं ने भी भोजन कर लिया।
राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।
राजेश ने सुमित्रा को रात को कमरे में आने को कहा था।
पर सुमित्रा ने मना कर दिया था।
राजेश सोने की कोशिश करने लगा। उसे लगा की मामी शायद ही आयेगी।
उसे नींद आ गई।
रात के करीब 1बजे सुमित्रा राजेश के कमरे में चुपके से आई।
राजेश ने दरवाज़ा खुला रखा huwa था। क्या पता मामी आ जाए।
सुमित्रा राजेश के कमरे में जाकर देखी तो राजेश सो रहा था।
सुमित्रा _लो रात में आने को कहकर मेरी नींद खराब करके खुद सो रहा है महाशय।
सुमित्रा ने राजेश का लोवर नीचे खींच कर अंडर वियर भी नीचे कर लंद बाहर निकाल दिया।
फिर अपने में लेकर चूसने लगी।
राजेश का नींद खुल गया।
राजेश _अरे मामी तुम कब आई।
सुमित्रा _बदमाश मुझे बुलाकर खुद चैन की नींद सो रहाहै।
राजेश _मामी मुझे लगा तुम नही आयेगी।
सुमित्रा _हूं, नही आती तो बाद में शिकायत करते मामी ने ठीक से खातिर दारी नही की।
राजेश का लंद तनकर खड़ा हो चुका था।
सुमित्रा _सुन जो करना है जल्दी कर, मेरे पास ज्यादा समय नहीं तुम्हरे मामा जी उठ गए न तो तमाशा हो जजायेगी।
राजेश उठ कर बैठ गया।
सुमित्रा को अपने पास बिठा लिया।
राजेश _मुझे तो आपकी दुध पीने है, जरा चख कर तो देखू आपका दुध कैसा है?
राजेश ने सुमित्रा कीचोली का बटन खोल दिया। बड़ी बड़ी दुध से भरी चूचियां राजेश के आंखों के सामने आ गया।
मामी, आपकी चूंची तो एकदम बड़ी बड़ी हो गई है, लगता हैं इसमें खूब दुध भरा है।
राजेश ने सुमित्रा की चूची का निप्पल ऊंगली से दबाया।
दुध की तेज धार निकल कर उसके चेहरे पर पड़ा। सुमित्रा हसने लगी।
राजेश ने चूचक मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।
वह दुध गटक गटक कर पीने लगा।
सुमित्रा भी गर्म होने लगी।
उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगी।
राजेश एक हाथ सुमित्रा के पेटीकोट के अंदर डाल दिया और boor को रगड़ने लगा।
सुमित्रा बहुत अधिक उत्तेजित हो कर मादक सिसकारी निकालने लगी।
सुमित्रा _, राजेश मेरे पास ज्यादा समय नहीं है जल्दी करो प्लीज।
राजेश सुमित्रा को बेड पकड़ा कर घोड़ी बना दिया।
फिर उसकी पेटीकोट साड़ी सहित ऊपर उठा दिया। पेंटी को नीचे खींचकर निकाल दिया।
राजेश ने chut में ऊंगली डाल कर देखा एक दम गीली थी।
उसने अपना लंद का सुपाड़ा छेद पर रखा और एक जोर का धक्का मारा, लंद boor चीरकर आधे से ज्यादा अंडर घुस गया।
सुमित्रा चिहुंक उठी।
राजेश ने फिर एक करारा शार्ट मारा, लंद boor में जड़ तक घुस गया। लंद का टोपा सुमित्रा की बच्चेदानी से टकराया।
सुमित्रा फिर चिहुंक उठी।
उसके बाद राजेश ने लंद को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
वावह सुमित्रा की कमर पकड़ कर गपागप chodna
सुरु कर दिया।
Chudai में दोनो को बहुत मजा आने लगा।
सुमित्रा कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी। कमरे मे सुमित्रा की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनक तथा फुक फुक की आज गूंज रही थी ।
सुमित्रा की boor से पाणी झरने की तरह बह रहा था।
कदोनो को संभोग में आपार सुख प्राप्त हो रहा था।
राजेश कुछ देर इसी पोजीशन में चोदने के बाद। उसे बेड किनारे लिटा दिया। टांगों को फैला कर लंद एक ही धक्के ने जड़ तक घुसा दिया
और चूची मसलते हुए कस कस कर धक्के लगाने लगा।
कमरे में फिर से मादक सिसकारी गूंजने लगा।
सुमित्रा दो बार झड़ चुकी थी।
राजेश अब बेड पे लेट गया। उसका लंद हवा में लहरा रहा था।
सुमित्रा को ऊपर आने का इशारा किया।
सुमित्रा बेड के ऊपर आ गई और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी boor में डाल कर बैठ गई।
राजेश ने उसकी चूंची पकड़ लिया।
सुमित्रा उछल उछल कर chudna सुरू कर दी। राजेश भी जोश में था वह भी सुमित्रा की कमर पकड़ कर नीचे से कमर उठा उठा कर लंद को boor की गहराई में ले जानें की कोशिश करने लगा।
कमरे में दोनो की ऊ आह ऊ आह की आवाजे गूंजने लगी।
कुछ ही देर में सुमित्रा फिर झड़ कर राजेश के ऊपर लुड़क गई।
जब वह होश में आई वह बेड से उतरी,,
सुमित्रा _राजेश अब बस करो , काफ़ी देर हो गई है। तुम्हारे मामा जी उठना जाए।
राजेश_पर मामी मेरा अभी huwa नहीं है।
सुमित्रा _तुमारा बस चले तो रात भर लेते रहोगे।
न बाबा अब मैं और नही रुक सकती।
सुमित्रा पेंटी पकड़ कर कमरे से बाहर निकल गई।
राजेश लंद हिलाता रह गया।
राजेश _ये मामी तो खुद मज़े लेकर मेरी नींद उड़ा कर चली गईं। शाला अब ऐसे में नींद कहा से आयेगी।
अब क्या करूं?
राजेश ने सोचा क्यूं न प्रिया दीदी से बात करे शायद वो मान जाए।
राजेश ने देखा 2बजने वाला था।
उसने प्रिया को काल किया।
प्रिया गहरे नींद में सो रही थी। पहले तो उसे पता नही चला किसी ने काल किया है।
राजेश ने फिर काल किया।
प्रिया की नींद खुली।
इतनी रात को किसका फोन है?
उसने फोन चेक किया। राजेश का काल, इस वक्त।
उसने काल उठाया।
राजेश _दी,,
प्रिया _राजेश इस वक्त, क्या बात है?
राजेश _दी मुझे नींद नहीं आ रही। शायद नई जगह है इसलिए। तुम्हारे पास कोई दवा है क्या? नींद आने की।
प्रिया _राजेश, नींद की दवा लेना अच्छी बात नहीं, तुम कोशिश करो, सोने की।
राजेश _दी कब से कोशिश कर रहा हूं। पर नींद आ ही नहीं रही है।
प्रिया _अच्छा ठीक है मैं ठंडे तेल से तेरी सिर की मालिश कर देती हूं, उससे फर्क पड़े।
राजेश _राजेश ठीक है दी, आ जाओ। प्रिया ने देखा बच्चे गहरी नींद में सो रहे हैं।
प्रिया ठंडे तेल की सीसी लेकर राजेश के कमरे में गया।
राजेश अपना शरीर को चादर से ढक लिया था।
राजेश _दी शरीर में गर्मी बहुत बड़ गई है। ठंडे तेल से मालिश कर दो। तो शायद राहत मिले।
प्रिया ने राजेश के ऊपर से हटाया।
उसने देखा राजेश तो नंगा है उसका लंद अकड़ा huwa है।
प्रिया _ये क्या है re?
_तुम्हे मालिश नही chut की जरूरत है।
सीधा बोल नही सकता था, तेरा बडा मन है सेक्स का, नींद नहीं आ रही है।
राजेश _दी मै सच बता देता तो आप आती क्या?
प्रिया _न, एक तो ऐसे ही पिता जी मुझसे नाराज़ ऊपर से किसी ने पकड़ लिया तो,,,,
न बाबा ना मैं जा रहीं अपने कमरे में।
राजेश _ठीक है दीदी आप जाओ, राजेश करवट लेकर लेट गया।
प्रिया _हूं, नाराज हो गया क्या?
अच्छा ठीक है, चल नाराज मत हो अपनो दीदी से।
प्रिया राजेश को सीधा की और उसका लंद पकड़ ली।
प्रिया _अरे तेरे लंद पर तो अजीब सा गंध आ रहा है किसी की boor मार रहा था क्या?
राजेश _हूं
प्रिया _किसकी?
राजेश _छोटी मामी की । वो मुझे अधूरा छोड़ कर भाग गई।
प्रिया _हूं तो ये बात है?
चल मेरी chut चांट के गर्म कर मुझे।
अपनी नाईटी उतार कर बेड पर लेट गई।
राजेश उसकी टांगो के बीच आकर उसकी boor पे मुंह डाल कर चाटने लगा।
प्रिया गर्म हो गई।
वह राजेश को लिटा कर उसके लंद पर बैठ गई और उछल उछल कर चुदाने लगी।
कमरे में दोनो के मुंह से उह आह ऊ आह निकलने लगा।
दोनो को बहुत मजा आने लगा।
कुछ देर में ही प्रिया झड़ गई।
उसके बाद राजेश ने प्रिया को घोड़ी बना दिया और उसकी गाड़ मारने लगा।
वह कभी boor तो कभी गाड़ में लंद डालकर प्रिया की ठुकाई करने लगा और अंत में प्रिया की गाड़ में झड़ गया।
दोनो कुछ देर इक दूसरे की बाहों में लिपट कर सो गए।
कुछ देर बाद प्रिया उठी और अपनी नाईटी पहन कर जाने लगीं।
जब वह राजेश के कमरे से निकली तो सुप्रिया ने उसे निकलते देख ली,,,,
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