Incest यह क्या हुआ - Page 31 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

अगले दिन सुबह जब सुनीता उठी, वह अपने पति की ओर देखी जो गहरे नींद में सो रहा था। सुनीता बाथरुम में जाकर फ्रेस हो कर नहाने लगी नहाने के बाद पूजा कक्ष में जाकर पूजा पाठ करने लगी।

पूजा करने के बाद फिर वह अपने कमरे मे आई।

शेखर अभी भी सोया था।

सुनीता _अजी, उठो न, आज होली है, आज तो जल्दी उठ जाइए।

शेखर ने आंखे खोला।

शेखर _क्या huwa भाग्यवान।

सुनिता_याद दिलाना पड़ेगा क्या? आज होली है, और आज भी देर तक सो रहे हैं।

झूठी गुस्सा दिखाते हुए कहा।

शेखर _ओह, सॉरी डार्लिंग।

सुनीताअपने हाथो में गुलाल ले रखी थी।

उसने शेखर के माथे पर गुलाल का टिका लगाया, हैपी होली जी।

और आशीर्वाद लिया। फिर जाने लगी।

शेखर ने उसकी हाथ पकड़कर रोक लिया।

शेखर _थोड़ा इधर तो आओ मेरी जान।

शेखर ने सुनीता को अपनी गोद में बिठा लिया।

और उसकी ओंठ चूम कर कहा,,

शेखर _हैप्पी होली डार्लिंग।

शेखर ने सुनीता को बाहों मे भर लिया।

और उसकी गालों पर किस करने लगा।

सुनीता _रहने दो अपना दिखावटी प्यार, अगर इतना ही प्यार होता तो मुझे उठाना नही पड़ता।

शेखर _ओह मेरी जान नाराज हैं, सॉरी मेरी रानी।

सुनीता _अब हो गया तो छोड़ो मुझे कीचन में आज बहुत काम करना है।

शेखर _रंग तो लगा लेने दे मेरी जान।

शेखर, सुनीता की चूची को मसलने लगा।

सच में आज भी तुम कितनी जवान और सुन्दर लगती हो।

सुनीता _अच्छा, आज बड़े रोमांटिक मूड में लग रहे हो।

शेखर _आज तो है ही रोमांस करने के दिन।

शेखर ने सुनीता की ब्लाउज का बटन खोल कर चूची बाहर निकाल कर मसलने लगा। उसकी गालों पर गुलाल लगाने लगा।

सुनीता सिसकने लगीं।

सुनीता _आह छोड़ो न क्या कर रहे हैं आप।

शेखर _आज तो होली है, मेरी रानी आज तो करने दो । नही तो तुम ही बोलोगी कि मेरी तो फिक्र ही नहीं।

शेखर सुनीता की चूची मसल कर पीने लगा।

सुनीता गर्म होने लगी।

उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

आह, उन, अब बस भी करो, कितना मसलोंगै जी।

शेखर का land भी खड़ा हो चुका था।

उसके पजामा में land तन चुका था। जिसका एहसास सुनीता को huwa

सुनीता _लगता है आज अपनी पिचकारी से रंग डालने का इरादाहै।

शेखर _हां मेरी रानी, आज तो अपनी पिचकारी से तुझपे रंग डालूंगा।

चल लेट जा बेड पे।

सुनीता शेखर के गोद से उठी और बेड पे लेट गई।

शेखर उसकी पेटी कोट को उपर चढ़ा कर उसकी पेंटी निकाल दिया।

शेखर _हाय, आज तो बडी चिकनी लग रही है तेरी बुर।

शेखर, सुनीता की बुर को सहलाने लगा।

सुनीता, उत्तेजित हो कर मादक सिसकारी निकालने लगी।

सुनीता _अजी अब अब अपनी पिचकारी तो बाहर निकालो। रंग नही डालने क्या?

शेखर _अभी निकाला मेरी जान।

शेखर अपना पजामा निकाल कर land बाहर निकाल दिया।

सुनीता _आज तो आपका पिचकारी काफी बडा लग रहा है।

शेखर _तुम्हें पानी से नहलाने के लिए तैयार है मेरी जान।

सुनीता _तो डाल दीजिए न।

शेखर _ले मेरी रानी।

शेखर सुनीता की टांगे चौड़ी कर उसकी बुर पे अपना land को रगड़ा फिर उसकी छेद पे टोपा रख कर, एक जोर का धक्का मारा।

Land सरसराता huwa एक ही बार में अदंर घुस गया।

सुनीता _आह मां।

शेखर _क्या huwa मेरी जान।

सुनीता _आज तो बड़े जोश में है आप। लगता है आज के दिन के लिए ही अपना पानी बचा कर रखे थे।

शेखर _हा मेरी रानी, सही कहा।

ले chud मुझसे।

शेखर जोर जोर से land को सुनीता की बुर में अदंर बाहर करने लगा।

सुनीता की बुर की पानी से गीला होकर land फ्च fach की आवाज़ करता huwa अदंर बाहर होने लगा।

शेखर भी जोश में आकर तेज तेज चोदने लगा।

सुनीता को भी बहुत मज़ा आने लगा।

वह बहुत गर्म हो गई, अपनी गाड़ ऊपर उठा उठा कर। शेखर का सहयोग करने लगी।

शेखर, भी तेज तेज चोदने लगा।

पर ये क्या शेखर खुद को ज्यादा देर तक रोक न सका और झड़ने लगा।

अपने पिचकारी का पानी सुनीता की बुर में भरने लगा।

और हांपते हुवे, बेड पर सुनीता के एक ओर लुड़क गया।

सुनीता झड़ी नहीं थी। वह चरम अवस्था में पहुंचती उसके पहले ही, शेखर ढेर हो गया।

सुनीता को बहुत गुस्सा आया पर वह कर भी क्या सकती थी।

सुनीता उठी और बाथरुम में घुस गई। अपनी बुर को पानी से धोने लगी। उंगली डाल कर बुर की सफाई करने लगीं।

जब वह बाथरुम से बाहर निकली, राजेश अपना पजामा पहन चुका था।

शेखर _मज़ा आया न मेरी जान।

सुनीता _हां जी, आज तो आप काफी जोश में थे।

शेखर _अब तो मुझसे शिकायत नहीं न।

सुनीता ने झूठी मुस्कान लाकर, हां कहा।

सुनीता कीचन में चली गईं।

इधर राजेश भी उठ कर फ्रेस हो गया था। वह हाल में आया।

उसने शेखर को देखा।

राजेश _हैप्पी होली पापा।

राजेश ने शेखर को गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिया।

शेखर _हैप्पी होली बेटा। खुश रहो।

राजेश _पापा मां कहा है?

शेखर _बेटा, तुम्हारी मां तो कीचन में होगी। कह रही थी की आज कीचन में बहुत काम है?

राजेश_पापा आपने मां को रंग लगाया कि नही।

शेखर _बेटा मैने तो तुम्हारे मां के साथ होली खेल लिया जाओ अब तुम भी अपनी मां के साथ होली खेलो, अच्छे से रंग लगाना अपनी मां को।

राजेश _जी पापा।

राजेश कीचन में चला गया।

शेखर पौधो को पानी देने गार्डन में चला गया।

राजेश जब कीचन में गया तो सुनीता बर्तन धो रही थी।

राजेश पीछे से गया और सुनीता को अपनी बाहों में भर लिया।

राजेश _हैप्पी होली मां।

राजेश ने गुलाल हाथो में ले कर उसकी गालों पर मलने लगा।

सुनीता _अरे क्या कर रहा है छोड़ो। बस हो गया और कितना लगाएगा।

राजेश _पापा ने कहा है अच्छे से रंग लगाना अपनी मां को।

सुनीता _अच्छा और क्या कहा है तुम्हारे पापा ने।

राजेश _पापा ने कहा कि मैंने तुम्हारे मां के साथ होली खेल लिया अब तुम जाकर अपनी मां के साथ होली खेलो।

सुनीता _अच्छा, ऐसा कहा।

राजेश _हां।

सुनीता मुस्कुराने लगी।

राजेश _मां, आज होली है एक चुम्मा तो दो।

राजेश ने सुनीता को अपनी बाहों मे जकड़ कर धीरे से उसकी कानो मे कहा।

सुनीता _पूरे गाल में तो रंग मल दिया अब चुम्मा कहा लेगा।

राजेश _गालों पे नही तो यहां दे दो।

राजेश ने सुनीता का पेट सहलाते हुए धीरे से कहा।

सुनीता _चल हट कोई देख लेगा न तो होली खराब हो जाएगी।

राजेश _कोई नही है, पापा तो पौधो को पानी देने बाहर गार्डन पे गया है। स्वीटी तो सो रही है।

सुनीता _पहले देखा कोई है तो नही।

राजेश देखने के लिए कीचन से बाहर आया।

कोई नजर नहीं आया।

वह फिर कीचन में चला गया। और सुनीता को अपनी बाहों मे जकड़ लिया।

राजेश _बाहर कोई नहीं है चलो अब किस करने दो।

राजेश ने सुनीता को अपनी ओर घुमा दिया।

राजेश नीचे बैठ गया और सुनीता की साड़ी को उसके पेट से हटा दिया।

फिर उसकी नाभि को चूमने लगा।

सुनीता _सिसकने लगीं।

आह उन,,,,

सुनीता राजेश की बालो को सहलाते हुए कहा,

आह उन,, अब बस कर कितना चूमेगा?

राजेश _मां, आज जीभर के चूमने दो न होली है।

सुनीता _सिसकने लगीं।

सुनीता _बस कर कोई आ जाएगा।

आह उन,,,

तभी राजेशसाड़ी को पल्लू को नीचे गिरा दिया। सुनीता की पेट चूमते हुवे ऊपर की ओर गया।

फिर उसकी गर्दन को चूमने लगा।

सुनीता सिसकने लगीं।

राजेश, सुनीता को पीछे घुमा दिया और उसे कस कर जकड़ लिया। अपना land सुनीता की गाड़ में धसा दिया।

अपने दोनों हाथों से सुनीता की चूचियां मसलने लगा।

सुनीता सिसकने लगीं ।

आह मां उन,, क्या कर रहा है छोड़ो न, कोई,, आ,,, जा,,

आह मां,, उन,,

राजेश भी गर्म हो गया था उसका land तन कर लंबा और मोटा हो गया था। जिसका एहसास पाकर सुनीता की बुर पानी छोड़ने लगी। वैसे वह पहले से ही गर्म थी।

राजेश ने सुनीता की ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी चूची बाहर निकाल दिया, उसकी चूची मसल मसल कर पीने लगीं।

सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

मादक सिसकारी उसके मुंह से निकलने लगी।

सुनीता एक हाथ पीछे ले जाकर राजेश के land Ko पकड़ कर सहलाने लगी।

राजेश समझ गया कि उसकी मां chudna चाहती है।

राजेश अपना पैंट का चैन खींचकर अपना land बाहर निकाल कर सुनीता की हाथ में थमा दिया।

सुनीता land सहलाने लगी।

अब राजेश ने सुनीता को उठा कर कीचन के पाटे पर लिटा दिया।

सुनीता की टांगो को फैला दिया। सुनीता पेंटी नहीं पहनी थी।

मस्त फूली हुई चिकनी chut राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश का land हवा में ठुमकने लगा।

राजेश सुनीता की बुर चाटने लगा।

सुनीता के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

आह उन उई मां आई,, बेटा,, आह,,

सुनीता _बेटा जल्दी कर कोई आ जाएगा?

राजेश, ने अपना land को टोपा सुनीता की बुर के छेद पे रख कर एक एक जोर का धक्का मारा,

Land बुर को फाड़कर सरसराता huwa अदंर चला गया।

अब राजेश दोनो हाथो से सुनीता की दूदू को मसल मसल कर, गपागप बुर चोदने लगा।

कमरे मे फच फच की आवाज़ गूंजने लगा।

तभी शेखर पौधे पे पानी डालते हुए कीचन के खिड़की जो खुली हुई थी, के पास आ गया।

उसने राजेश को कीचन में हिलते देखा।

वह राजेश के सीने के ऊपर भाग को ही देख पा रहा था।

शेखर _अरे बेटा तू कीचन में क्या कर रहा है और ये आवाज़ कैसी है?

राजेश अपने पिता जी को देखते हुए और बुर चोदते हुए, चूचियां मसलते हुए कहा।

राजेश _पापा मै कीचन में मां की मदद कर रहा हूं। मै आटा गूथ रहा हूं।

शेखर _ये तो बडी अच्छी बात है।

पर तुम्हारी मां दिखाई नहीं दे रही।

सुनीता _मै कीचन की सफाई कर रही हूं जी।

तभी राजेश ने एक जोर का धक्का मारा land का टोपा सीधा सुनीता की बच्चेदानी से टकराया।

सुनीता _उई मां।

शेखर _क्या huwa सुनीता चीख क्यू रही हो?

सुनीता _कुछ नही जी काकरोच था।

इधर राजेश दनादन बुर में land पेले जा रहा था। सुनीता और राजेश दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था।

दोनो जन्नत का सुख भोग रहे थे।

इधर स्वीट अपने रूम से निकल कर घर के सदस्यों को ढूंढने लगी रंग लगाने।

वह कीचन पे आई। कीचन का दृश्य देखकर वह दंग रह गई।

सुनीता और राजेश दोनों chudai में लीन थे।

यह दृश्य देखकर स्वीटी भी बहुत गर्म हो गई। उसकी chut पानी छोड़ने लगी।

वह एक हाथ से अपनी बुर सहलाते हुए।chudai का खेल देखने लगी।

इधर राजेश सुनीता की बुर पे अपना land गपागपडाले जा रहा था।land boor की पानी से गीला हो कर सर सर अदंर बाहर हो रहा था जिससे दोनो को परम आनंद की प्राप्ति हो रहा था।

राजेश _पापा आटा गूथने में बडा मजा आ रहा है।

शेखर _काम को अगर मजा लेकर किया जाए तो कोई भी काम कठिन नहीं रह जाता बेटा।

सुनीता _हा जी, आपने सही कहा। राजेश तो बहुत अच्छा आटा गूथ रहा है ।

काश आप भी सिख लिए होते तो,,,

शेखर _सुनीता, तुमने तो कभी मुझसे कहा ही नहीं,, आटा गूथने,,

सुनीता _हां जी आप बैंक की ड्यूटी करके थक जाते हैं न इसलिए नही कहती।

अब राजेश है न मेरी मदद करने,,

क्यू राजेश?

राजेश _हां मां, आप जब कहे मै तैयार हूं आपकी मदद करने।

वैसे मैं अच्छे से कर रहा हु न।

सुनीता _हा बेटा, तुम बहुत अच्छे से कर रहे हों। हा ऐसे ही करते रहो।

सुनो जी राजेश तो बहुत जल्दी सीख गया।

शेखर _आखिर बेटा किसका है?

सुनीता _जानती हू, बेटा तुम्हारा है, पर सिखाया तो मैने न।

हा और थोडा जोर लगाओ बेटा,,

राजेश और जोर जोर से चोदने लगा।

सुनीता _हा ऐसे ही।

सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई और खुद को रोक न सकी वह राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश ने chudai करना बन्द कर दिया।

और राजेश भी सुस्ताने लगा।

इधर स्वीटी की हालात खराब हो चुकी थी।

उसे चुदने की तीव्र इच्छा होने लगीं।

वह राजेश का कीचन के बाहर आने का इंतजार करने लगीं।

 
सुनीता झडने के बाद जब होश में आई,,,

सुनीता _बेटा अब बस करो, स्वीट उठ गई होगी वह किसी भी वक्त आ सकती है, अब तुम जाओ यहां से।

राजेश _ठीक है मां,

राजेश ने जाते, अपना land सुनीता की बुर से बाहर निकाला,

Land सुनीता की बुर का पानी पीकर खूब लंबा और मोटा हो गया।

राजेश ने जैसे हीland को बाहर निकाला वह हवा में लहराने लगा।

सुनीता land Ko देखकर मुस्कुराने लगी।

राजेश _मां, थोडा चूस कर साफ़ तो कर दो।

सुनीता पाटे से उतर कर नीचे बैठ गई, और राजेश के land को मुंह में भर कर चूसने लगीं।

राजेश उसकी बालो को सहलाने लगा।

राजेश के land पे लगे बुर की पानी को चूस कर साफ़ कर दिया।

सुनीता _अब जाओ बेटा।

राजेश अपना पैंट का चैन लगा लिया।

राजेश जैसे ही कमरे से बाहर निकला, स्वीटी उस पर टूट पड़ी, हैप्पी होली भईया कहते हुए उसके गालों पर रंग मल दिया।

राजेश स्वीटी को रंग लगा पाता इससे पहले ही स्वीटी तेजी से अपने की ओर भागने लगीं।

राजेश _रुको, स्वीटी कि बच्ची, कहा भाग रही हो।

स्वीटी राजेश को जीभ निकाल कर चिड़ाते हुवे अपने कमरे मे घुस गई और बाथरुम में जाकर छुप गई।

राजेश स्वीटी के कमरे में घुसा और स्वीती को रंग लगाने के लिए ढूढने लगा।

स्वीटी कमर में दिखाई नही दिया।

राजेश _स्वीटी की बच्ची कहा छिप गई, निकल बाहर।

स्वीटी बाथरुम से बोली, न मै नही निकलने वाली।

राजेश _अच्छा तू बाथरुम में है।

राजेश बाथरुम का दरवाजा पीटने लगा।

राजेश _स्वीटी की बच्ची खोल दरवाजा।

स्वीटी ने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई।

भईया मै नहा रही अब तुम यहां से जाओ।

राजेश _ये कैसा मजाक है, अभी तो होली खेली ही नहीं और नहाने लगीं।

स्वीटी _हां, बाबा, मुझे रंग नही लगवाना। त्वचा खराब हो जाता है।

राजेश _अच्छा, होली नही खेलना था तो मुझपे रंग क्यू लगाया? चलो दरवाजा खोलो।

स्वीटी _भईया मै कह रही न मै नहा रही हूं।

अगर कहना नही मान रहे तो देख लो।

स्वीटी ने दरवाजा खोला और दरवाजा के पीछे छुप गई।

राजेश अदंर गया।

स्वीटी ने बाथरुम का दरवाजा बंद कर दिया।

राजेश ने स्वीटी को देखा, वह एकदम नंगी थी।

राजेश _स्वीटी ये कैसा मजाक है?

स्वीटी _कैसा मजाक भईया?

मैने तो पहले ही कहा था कि मैं नहा रही हूं।

देख लो।

चलो लगा दो रंग,

राजेश _चलो हटो मुझे जाने दो।

स्वीटी _क्या huwa होली नही खेलोगे मेरे साथ।

मां के साथ तो बड़े मजे से खेल रहे थे।

राजेश _ये क्या कह रही हो?

स्वीटी _मैने अपनी आंखो से देखा है कैसे तुम कीचन में मां की chudai कर रहे थे?

राजेश _ओ आज होली था न तो हम बहक गए।

चलो अब दरवाजा खोलो और मुझे जाने दो।

स्वीटी _न, अब ये दरवाजा तभी खुलेगा जब तुम मेरे साथ होली खेलोगे जैसे तुम मां के साथ खेले।

देखो मेरी बुर को, तुम लोगो की chudai देखकर कितना पानी बहा रही है। स्वीटी अपनी बुर दिखाने लगीं।

राजेश की नजर स्वीटी की मस्त चिकनी बुर पर गया। वैसे भी सुनीता की chudai कर अभी वह झड़ा नहीं था तो उसका land बुर देखकर झटके मारने लगा।

स्वीटी _भईया, अब देख क्या रहे हो? डाल दो अपनी पिचकारी मेरी बुर पे और खेलो अपनी बहन के साथ होली।

राजेश _न, अगर मां आ गई न तो होली का सारा रंग उड़ जायेगा, कई चाटे पड़ेंगे। वैसे भी तेरी शादी तय हो गई है।

स्वीटी _भईया, बस एक बार जल्दी से झाड़ दो मुझे। इतने देर में तो हो भी जाता।

प्लीज। जल्दी करो।

राजेश _ओ हो क्या मुसीबत है?

स्वीटी राजेश का चैन खीच कर उसका land बाहर निकाल लिया और मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश का land स्वीटी की मुंह का गर्माहट पाकर और शख्त हो गया।

वैसे भी स्वीटी बहुत ही खुबसूरत और हॉट थी।

राजेश की स्वीटी की बालो को सहलाने लगा और अपनी क़मर को आगे पीछे कर land को अदंर बाहर करने लगा।

कुछ देर चुसने के बाद स्वीटी ने चूसना बंद कर दिया और कमोड को पकड़कर झुक गई।

स्वीटी _लो भईया, अब देर न करो डाल दोअपनी पिचकारी मेरी बुर पर।

राजेश नीचे झुका और स्वीटी की बुर को थोडा चूसा।

स्वीटी पहले से ही बहुत गर्म थी राजेश के हरकत से वह मादक सिसकारी निकालने लगी।

आह भईया, आह उन मां,, भईया,,, अब,,, डा,,, ला,,, दो,,,,

राजेश ने अब समय न गवाते हुवे अपना land उसकी बुर के छेद पे सेट किया और एक जोर का धक्का मारा।

Land एक ही बार में सरसराता huwa बुर के अंदर घुस गया।

स्वीटी चीख उठी,,

उई मां,,

भईया धीरे,, एक ही बार में डाल दिए,, मेरी बुर फट गई,,, आ,,

अब राजेश नीचे झुक कर स्वीटी की चूचियां पकड़ कर मसलते हुए land को धीरे धीरे अदंर बाहर करना शुरू कर दिया।

Land बुर को चीर कर अदंर बाहर होने लगा।

राजेश कुछ देर धीरे धीरे चोदने के बाद स्वीटी के मुंह से मादक सिसकारी सुन कर अपना स्पीड बढ़ा दिया।

अब वह स्वीटी की बुर को gach gach चोदने लगा।

कमरे में स्वीटी की मादक सिसकारी के साथ, फच फच की आवाज गूंजने लगा ।

स्वीटी और राजेश दोनों को बहुत मज़ा आने लगा। दोनो स्वर्ग में पहुंच चूके थे ।

स्वीटी _आह भईया, और जोर से चोदो, आह,, उई मां आह बहुत मज़ा आ रहा है।

आह साली बहुत खुजाती हैं।

आज इसकी पूरी खुजली मिटा दो,

राजेश और जोर जोर से चोदने लगा।

Land गपागप अंदर बाहर हो रहा था।

स्वीटी _आह मां, उई आह, बहुत मज़ा आ रहा है,, आह भईया और जोर से, आह मां आह

मै आने वाली हूं,, आह भईया चोदो और जोर से,,,

आह,,

राजेश स्विति की क़मर पकड़ कर और राजेश स्वीटी को तेज गति से चोदने लगा।

राजेश के जांघो से स्वीटी की चूतड टकराने लगा। जिससे थप थप की आवाज़ आने लगा।

इधर स्वीटी जन्नत की सैर कर रही थी।

उसे बहुत मजा आ रहा था।

वह लगातार अपने मुंह से कामुक सिसकारी निकालने लगी।

और चीखते हुए झरने लगी।

राजेश को पता चल गया कि स्वीटी झड़ गई है। वह चोदना बंद कर दिया और अपना खोया ताकत फिर से प्राप्त करने लगा।

कुछ देर बाद स्वीटी के बुर से अपना land बाहर निकाल दिया। और गुलाल को स्वीटी के चेहरे पर मल दिया। फिर उसकी चूची को मसल मसल कर पीने लगा। उसकी चूची पर भी रंग मल दिया।

स्वीटी फिर से गर्म हो गई। वह राजेश को कमोड पर बिठा दिया।

और खुद उसके land को अपनी बुर पे सेट कर उसके ऊपर बैठ गई।

फिर land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश को भी मज़ा आने लगा।

वह स्वीटी की कमर पकड़ लिया और उसे अपने land पर पटक पटक कर चोदने लगा।

स्वीटी फिर से जन्नत में पहुंच गई।

उसकी मादक सिसकारी से बाथरुम गूंजने लगी।

कुछ देर में ही स्वीटी फिर से चरम अवस्था में पहुंच गई।

आह, मां उन आई,,, आह उह उन,,,,

भईया मै और जोर से चोदो बहुत मज़ा आ रहा है, आह उन,, आई मां, मै,, गई,,,

स्वीटी राजेश को जोर से जकड़ ली फिर झडने लगी।

राजेश स्वीटी को उठा कर बेड बाथरुम से कमरे मे ले आया और उसे बेड पर लिटा दिया।

फिर अपना land उसकी बुर से निकाल लिया।land fuck की आवाज़ कर बाहर निकला।

और हवा में लहराने लगा।

स्वीटी बेहोश सी हो गई थी।

राजेश को सुजाता का काल आया।

सुजाता _राजेश, तुम कहा हो मै कब से तुम्हारा वेट कर रही।

राजेश _मै अभी आया,जान।

राजेश स्वीटी को छोड़कर ,अपना पैंट का चैन लगा कर, कमरे से बाहर चला गया।

वह कीचन में गया, जहां सुनीता काम कर रही थी।

राजेश _मां मै बाहर जा रहा दोस्तो से मिलने।

सुनीता _बेटा, रीता जी का फोन आया था। होली की पार्टी रखी है। हमे इनवाइट किया है।

अब वे हमारे रिश्ते दार बनने वाले है, हमे जाना होगा।

राजेश _कितने बजे चलना है मां।

सुनीता _10बजे।

राजेश _ठीक है मां मै घर पहुंच जाऊंगा।

सुनीता _ठीक है बेटा। समय पर पहुंच जाना। हम लोग तैयार रहेंगे।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपना बाइक लेकर सीधा सुजाता के घर के लिए निकल गया।

वहा पहुंचने पर देखा की सीमा हाल में बैठी थी।

राजेश _हैप्पी होली सीमा जी,

सीमा _हैप्पी होली राजेश। अच्छा huwa तुम आ गए।

देखो न यहा तो कोई होली खेलने के मूड में ही नहीं। निशा और आंटी अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकल रही।

राजेश _अच्छा, मै देखता हूं।

राजेश निशा की कमरे की ओर चला गया।

दरवाजा खटखटाया।

निशा ने दरवाजा खोला।

निशा _सीमा, मैने कहा न, मुझे होली नही खेलना।

तभी उसने देखा, सीमा नहीं, राजेश खडा है दरवाज़े पर।

राजेश _हैप्पी होली, निशा जी।

राजेश तुम,,

राजेश _हा निशा जी, सीमा बता रही थी की तुम्हारा होली खेलने का मन नही। कमरे से बाहर नहीं निकल रही।

निशा _मेरा मन नही कर रहा था होली खेलने का।

राजेश _पर क्यू?

निशा _पता नही।

राजेश _क्या मै तुम्हे गुलाल लगा दू?

निशा _राजेश की ओर देखने लगीं।

फिर अपनी आंखे बंद कर दी।

राजेश ने गुलाल लेकर निशा की गालों पर लगा दिया।

हैप्पी होली निशा जी।

नीचे चलिए न, सीमा और कई लोग होली खेलने के लिए तुम्हारा इन्तजार कर रहे हैं ।

तभी वहां सीमा भी पहुंच गई।

वह निशा को पकड़ कर उसकी गालों में रंग मलने लगी।

हैप्पी होली मैम साहिबा।

निशा_सीमा की बच्ची छोड़ो कितना लगाएगी।

राजेश _निशा लो गुलाल, तुम भी सीमा जी को अच्छे से मल दो।

निशा ने गुलाल लेकर सीमा को लगाने की कोशिश करने लगी।

सीमा भागने लगीं।

तभी राजेश ने सीमा को पकड़ लिया।

राजेश _लो निशा जी, लगा दो अच्छे से।

सीमा _राजेश छोड़ो न, हंसते हुवे बोली।

निशा _सीमा की बच्ची, अब देख तुम्हारी शकल कैसे बिगाड़ती हूं।

निशा ने ढेर सारा रंग सीमा की गालों पर मल दिया।

सीमा _राजेश, ये तुम्हारे गालों पर क्या huwa है।

राजेश _कुछ भी तो नहीं, राजेश अपनी गालों को हाथ से छूकर कहा,,

सीमा _जरा दिखाओ तो कुछ तो है?

राजेश झुका।

सीमा ने राजेश के गालों पर गुलाल मल दिया।

हैप्पी होली।

निशा, देख कर हसने लगी।

सीमा_निशु, चलो न नीचे गार्डन में चल कर होली खेलेंगे।

निशा _चलो।

राजेश _मैम कहा है?

सीमा _वह भी अपने कमरे से बाहर नहीं निकली है।

राजेश _ओह, तुम लोग नीचे गार्डन पे चलो मैं मैम को लेकर आता हूं।

सीमा _ठीक है राजेश।

राजेश सुजाता की कमरे की ओर चला गया।

वह दरवाजा खटखटाया।

सुजाता _दरवाजा खोली।

आ गए तुम,

राजेश _हैप्पी होली, जान, राजेश ने सुजाता को बाहों मे भर कर उसकी गालों को चूम कर गुलाल लगाते हुए कहा?

सुजाता_कितना देर लगा दिया? छोड़ो मुझे। झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोली।

राजेश _सॉरी जान ।

माफ कर दो।

चलो अपने हाथो से मुझे रंग लगाओ।

सुजाता _तुम तो पहले से ही रंगे हुवे हो, अब कहा लगाऊंगी मै रंग तुम्हे।

राजेश _अपनी होंठो की गुलाबी रंग मेरे पिचकारी पे लगा दो। सुजाता की चूची को मसलते हुए कहा।

सुजाता _अच्छा।

पहले अपना पिचकारी तो बाहर निकालो।

राजेश _पहले अपनी ओंठो पर रंग तो लगा लो,,

सुजाता मुस्कुराने लगी।

वह आईने के पास गईं फिर गुलाबी रंग का लिपिस्टिक अपने होंठो पर अच्छे से लगा ली।

फिर राजेश का शर्ट निकाल कर उसके पूरे बदन में चूमने लगी। उसकी ओंठो की गुलाबी रंग का निशान पूरे बदन पर पढ़ने लगा।

फिर सुनीता ने राजेश का पेंट भी निकाल दिया।

राजेश को नंगा कर दिया।

राजेश के land Ko मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश का land सुजाता की गुलाबी ओंठ की गर्मी पाकर, तनकर खुब लंबा और मोटा हो गया।

राजेश ने सुजाता की साड़ी ब्लाउज उतार दिया, फिर कुछ देर तक उसकी चूची मसल कर चुसने के बाद। उसकी पेटीकोट भी उतार कर नंगी कर दिया।

फिर राजेश ने सुनीता की गुलाबी chut को जी भर कर चूसा।

सुजाता बहुत अधिक उत्तेजित हो कर, सिसकने लगी।

राजेश देर न करते हुए। सुजाता को बेड के किनारे लिटा दिया और उसकी टांगो को अपने कंधो पे रख दिया।

फिर उसकी chut सहलाने लगा।

सुजाता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थी।

सुजाता _अब देर न करो जान डाल दो अपनी पिचकारी मेरी बुर में।

राजेश,अपना मोटा land सुजाता की बुर में रख कर एक जोर का धक्का मारा।

Land एक ही बार में सरसराता huwa बुर फाड़कर अदंर ,

राजेश दोनो चुचियों को हाथो से मसल मसल कर।

बुर की chudai शुरू कर दिया।

कुछ ही देर में दोनो जन्नत की सैर करने लगें।

कमरे में सुजाता की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

साथ ही फच फच की आवाज़ भी गूंज रही थी।

Land बिना किसी रोक टोक के बुर की पानी में गिला होकर, गपागप अंदर बाहर हो रहा था।

दोनो को संभोग का अपार सुख प्राप्त हो रहा था। जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।

कुछ देर बाद ही सुजाता झडने लगी।

राजेश, सुनीता और स्वीटी की chudai करने के बाद भी झड़ा नहीं था।

वह दो तीन पोजीशन में सुजाता की जमकर chudai किया और अपना पानी सुजाता की कोख में छोड़ दिया।

सुजाता भी चार बार झड़ चुकी थी।

कुछ देर सुस्ताने के बाद दोनों नीचे आए।

फिर गार्डन में निशा, सीमा, सुजाता, राजेश, नौकर चाकर सभी मिलकर होली खेले। नाचे गाए।

राजेश _9बजे वहा से निकल कर अपनी प्रिया दी के घर चला गया।

 
राजेश प्रिया का घर पहुंचा। घर के बरामदे में समीर अपने दोस्ती के साथ बैठा था।

पिंकी कुछ बच्चो के साथ पिचकारी से एक दूसरे पे रंग डाल रही थी।

राजेश को देखते ही पिंकी उसके ओर दौड़ी।

पिंकी _मामू, हैप्पी होली।

और राजेश के ऊपर पिचकारी से रंग डालने लगी।

राजेश _हैप्पी होली, मेरी प्यारी भांजी।

राजेश ने पिंकी के गालों पर रंग मलते हुए कहा।

उसके बाद राजेश समीर के पास गया, जहां कुछ लोग साथ बैठे थे ।

समीर _आओ साले साहब।

राजेश _हैप्पी होली जीजा जी।

राजेश ने समीर को गुलाल लगाकर कर आशीर्वाद लिया।

समीर _हैप्पी होली जवान।

समीर ने राजेश को रंग लगा कर गले से लगाया।

समीर ने अपने दोस्तो से राजेश का परिचय कराया।

समीर _ये मेरा साला है राजेश।

वेरी इंटेलीजेंट बॉय।

आई ए एस बनना चाहता है।

राजेश ने सभी का अभिवादन किया।

इधर पिंकी ने प्रिया को जो कीचन में थी, को बता दिया की मामू आया आया है।

प्रिया ने पिंकी को अपने मामा को बुलाने कहा।

पिंकी राजेश के पास आकर।

पिंकी _मामू आपको मम्मी अंदर बुला रही है।

समीर _जाओ भई, तुम्हारी दीदी बुला रही है, अच्छे से रंग लगाना अपनी दीदी को।

सभी हसने लगे।

राजेश अंदर गया, वह कीचन में जाकर देखा।

प्रिया कीचन में कुछ बना रही थी।

एक नौकरानी भी थी।

हैप्पी होली दी।

प्रिया _अरे तू आ गया। मुझे तो लगा की तू नही आयेगा।

राजेश _ऐसा क्यू दी?

प्रिया _मुझे लगा की तू अपने दोस्तो के साथ होली खेल रहा होगा कहा अपनी दी को याद करेगा।

राजेश _दी, कैसे भुल सकता हूं आपको।

तभी प्रिया ने प्लेट पे नाश्ता लगा कर नौकरानी को समीर और उसके दोस्तो को देने भेज दिया।

अब कीचन में सिर्फ प्रिया और राजेश ही थे।

राजेश ने प्रिया को पीछे से बाहों मे भर कर उसकी गालों पर रंग मलने लगा।

प्रिया _रहने दे, अभी दी की याद आई। कहा थे अब तक।

राजेश _ओ निशा के घर गया था।

प्रिया _मुझे पता था, तू वही गया होगा।

निशा को अच्छे से रंग लगाया की नही।

राजेश _हां, लगाया।

प्रिया _कहा तक आगे बडा तुम्हारा प्रेम कहानी।

राजेश _दी ऐसा कुछ नहीं है।

प्रिया _, क्यू झूठ बोलता है।

खा मेरी कसम की तू उससे प्यार नही करता।

राजेश _पता नही दी, पर मुझे नही लगता कि मैं निशा से इस मामले में कुछ कह पाऊंगा।

और मुझे लगता नही की निशा मुझसे प्यार करती है।

प्रिया _अरे बुद्धु, वह भले ही तुमसे अपनी प्यार का इजहार नही कर रही। लेकिन मुझे पता है वह तुमसे बेंतहा प्यार करती है।

पर एक बात मुझे समझ नहीं आ रही कि वो तुमसे इजहार क्यू नही कर रही। पता नही वह किस उलझन में है।

राजेश _दी, वह एक सुलझी हुई लड़की है, जो भी फैसला लेगी सोच समझकर ही लेगीऔर

मुझमें इतनी हिम्मत नही कि उसे मै अपनी दिल की बात बोल सकू।

वैसे आज आप बहुत खुबसूरत और हॉट लग रही हो, राजेश ने प्रिया की ओंठ को चूमते हुवे कहा।

प्रिया _अच्छा, तुम्हारा इरादा कुछ नेक नही लग रहा।

अब छोड़ो नौकरानी, आनी वाली है।

राजेश ने प्रिया को छोड़ दिया।

नौकरानी भी कीचन में आ गई।

राजेश _अच्छा दी अब मैं चलता हूं।

प्रिया _इतनी जल्दी, अभी तो आए हो।

राजेश _दी, रीता मैम के यहां होली पार्टी रखी है तो पूरे सबको वहा आमंत्रित की है, वही निकलना।

आपको तो पता ही है, रोहन और स्वीटी की शादी की बाते चल रही है। ऐसे में मां कह रही थी की हमे जाना पड़ेगा नही तो वे नाराज हो जायेंगे।

प्रिया _ओह ये बात है।

पर कुछ खा तो लो, फिर चले जाना। भई हमारे साथ तो अभी होली खेले ही नहीं, हमने तो तुमको रंग लगाया ही नही।

राजेश _तो लगा दो न रंग।

प्रिया _यहां कीचन में पुरा रंग रंग हो जायेगा।

चलो बाहर चलते हैं।

प्रिया ने नौकरानी को कीचन का काम समझा कर कीचन के बाहर आ गया।

दोनो हाल में थे।

तभी समीर अंदर आया।

समीर _यार प्रिया मै दोस्तो के साथ, अन्य दोस्तो के घर जा रहा हूं। कुछ समय लगेगा आने में।

प्रिया _ठीक है जी।

समीर _साले सब लगता है अपनी दीदी को ठीक से रंग नही लगाए। पता ही नहीं चल रहा है। अच्छे से होली खेलो अपनी बहन और भांजीके साथ

मै आता हूं।

राजेश _ ठीक है जीजू।

समीर वहा से चला गया।

प्रिया _राजेश, तुमने सुना नही, तुम्हारे जीजू ने तुमसे क्या कहा, तुमने अपनी बहन को ठीक से रंग ही नहीं लगाया।

चलो अच्छे से रंग लगाना।

ठीक है दी,

राजेश ने रंग हाथो में लेकर प्रिया की ओर आगे बडा।

प्रिया _अरे रुको, कमरा पे रंग फैल जायेगा।

चलो ऊपर छत पर चलते हैं।

वहा अच्छे से लगा देना।

राजेश और प्रिया दोनो छत पर चले गए। साथ में रंग ले गए।

ऊपर छत पहुंचने के बाद देखा, उन दोनो को देखने वाले कोई नहीं था।

राजेश हाथो में रंग लेकर प्रिया को लगाने आगे बडा, पर प्रिया उसे जीभ दिखाते हुए भागने लगीं।

राजेश उसके पीछे पीछे भागने लगा।

तभी प्रिया की साड़ी की पल्लू राजेश के हाथो में आ गया।

राजेश ने पल्लू पकड़ कर अपनी ओर खींचा।

प्रिया पल्लू छुड़ाने की कोशिश करने लगी। और जीभ निकाल कर चिढ़ाने लगीं।

तभी राजेश ने पल्लू को जोर से खींचा।

प्रिया गोल गोल घूमने लगीं उसकी साड़ी राजेश के हाथो में आ गया।

होल गोल घूमते हुवे प्रिया गिरने को हुई तो राजेश ने उसे पकड़ लिया। प्रिया राजेश की बाहों मे झूल गई।

वे एक दूसरे के आंखो में देखने लगे।

प्रिया शर्मा गई।

वह राजेश से दूर हो है।

वह सिर्फ पेटीकोट और ब्लाऊज़ में थी।

राजेश की नजर प्रिया की बडी बडी सुडौल चुचियों पर गया जो ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थे।

अपनी चुचियों को घूरते देख प्रिया लजा