Incest यह क्या हुआ - Page 32 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

अगले दिन सीमा, निशा के घर पहुंची।सुजाता हाल में बैठी थी।

सीमा _नमस्ते आंटी।

सुजाता _नमस्ते बेटा। अच्छा huwa सीमा बेटा आ गई। मै तुम्हे ही काल करने वाली थी।

सीमा_क्या बात है आंटी? कुछ काम था क्या?

सुजाता _बेटा, निशा लंदन जाना चाहती है। मैने उसे बहुत समझाने की कोशिश की पर वो मेरा कहना नही मान रही। शायद तुम्हारा कहना मान जाए ।

सीमा _निशा कहा है आंटी, मै उससे बात करती हूं।

सुजाता _निशा ऊपर है बेटा अपने कमरे में।

सीमा, निशा के कमरे में जाने के लिए सोफे से खड़ी हुई।

तभी निशा कमरे से गाना गाने की आवाज़ सुनाई देने लगा।

निशा अपने कमरे में रखी पियानो पर बैठ कर उसमे अपना सिर रखकर गाने लगी,,,

लिखा हुआ है किस्मत में वो है एक दिन होना,,,,,,,

भूली बिसरी बातो को यारो तुम याद करोना,,,,

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2024 New Dard Bhari Ghazal Kanchan Yadav : निà¤à¤² à¤à¤¯à¤¾ दिल सॠ| Heart Touching Sad Song | à¤à¤® à¤à¤°à¥ à¤à¤¾à¤¨à¥


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धीरे धीरे सीमा और सुजाता सीडी चढ़ते हुवे निशा के कमरे की ओर जाने लगी।

उसके कमरे के दरवाज़े पर जाकर खड़ी होकर दोनो निशा की गाना सुनने लगीं।

दर्द भरी गाने को सुनकर दोनो के आंखो से आंसू निकल गए।

गाना गाती गाती, निशा पियानो पर सिर रख कर सो गई।

सीमा उसके पास जाकर। उसके कंधे पर हाथ रखकर कर निशा को आवाज़ दी,,,

सीमा _निशा,, निशा,,,

निशा ने आंखे खोली,,,

निशा _सीमा, तुम यहां, कब आई,,

सीमा _जब तुम अपनी दर्द को बया कर रही थी।

निशा, आंटी क्या कह रही है तुम लंदन जा रही हो।

निशा _मै राज को भुल जाना चाहती हूं, सीमा।

मै यहां रहूंगी तो जी नही पाऊंगी,,,

सीमा _निशा, राजेश भी एक इंसान हैं, गलती हो जातीहै, उसे एक मौका देकर देखो। शायद वो सुधर जाए।

निशा _नही सीमा, बार बार वह गंदा दृश्य मेरे आंखो के सामने आता है, जो राज, रिया और उसकी सहेलियो के साथ कर रहा है। मै उसे माफ नहीं कर सकती।

सीमा _तुम्हे लगता है कि तुम लंदन जाकर राजेश को भुल जायेगी।

निशा _हां, उसे मै दिल से निकाल चुकी हूं। कुछ भूली बिसरी बाते है उन यादों को भी भुला दूंगी।

सीमा _निशा तुम मेरे तरफ देखो।

सीमा, निशा की आंखो में देखने लगी,,,

कुछ देर बाद,,

सीमा _पता है निशा, पहले की तरह आज भी तुम्हारी आंखो में मै नही दिखाई दे रही,,

आज भी तुम्हारी आंखों में राज दिखाई दे रहा है।

निशा खड़ी हो गई।

निशा _नही तुम झूठ बोल रही हो, उस आवारा के लिए मेरे दिल में कोई जगह नही है,,

निशा _जो से चीखती हुई बोली, आई हेट, राज,,

सुनी तुमने,, आई हेट , राज,

वह बेड पर सिर रख कर रोने लगी,,,

कुछ देर बाद,,

निशा _मै लंदन जा रही, हमेशा के लिए ये मेरा अंतिम फैसला है।

मैने वीजा के लिए एप्लाई कर दिया है।

सीमा _ठीक है निशा अगर यही तुम्हारी जिद है तो, कर लो अपनी इच्छा पूरी। पर मैं तुम्हारे भले के लिए कह रही हूं। एक बार तुम राज को मौका देकर देखो,,,

निशा _नही सीमा, अब राजेश मेरी नजरो से गिर चुका है,, पहले जैसे उसे मान सम्मान नही दे सकती।

सीमा वहा से चली गईं।

सुजाता _क्या huwa बेटा, निशा मानी क्या?

सीमा _नही आंटी, वह मानने को तैयार नहीं।

सुजाता _बेटा, मुझे तुम से एक निवेदन करना था।

सीमा _बोलो आंटी,,

सुजाता _बेटा, मेरे फूल जैसी बच्ची वहा लंदन में अकेली कैसे रहेगी। मै उसकी चिंता में मर जाऊंगी। बेटा तुम भी निशा के साथ अगर लंदन चली जाती तो। मै तुम्हारा यह अहसान जिंदगी भर नही भूलूंगी।

तभी निशा वहा पर पहूंच गई थी। अपनी मां की बात सुनकर निशा बोली,,

नही मां, मुझे किसी की मदद नहीं लेनी, मै अकेली ही रह लूंगी। मै नही चाहती मेरे कारण किसी दूसरे की जिंदगी खराब हो,,,

सीमा _वाह निशा वाह, बना दी न मुझे पराया।

बचपन से मै तुम्हारे साथ हूं। मैने सहेली नही हमेशा अपनी बहन माना है। तुम्हे क्या लगता है मै तुम्हारे बिना रह पाऊंगी?

मुझे दुख है कि तुम मुझे अब तक समझ नहीं पाई।

सीमा की आंखो से आंसू बहने लगीं।

निशा ने सीमा को अपने गले से लगा लिया,, और सीमा से बोली।

सीमा मुझे माफ कर दो मेरी बहना,,,

सीमा _निशा, तू जहां भी जाएगी मै तुम्हारे साए की तरह साथ रहूंगी। जहां निशा वहा सीमा। मुझे भी अपने साथ ले चलो निशा।

निशा और सीमा दोनो रोने लगे।

उन दोनो के बीच प्यार देखकर सुजाता की आंखे भर आई।

इधर सुनीता राजेश के कमरे में जाकर राजेश से पूछता है, जो उस समय अपने कमरे में उदास लेटा हुआ था।

सुनीता _बेटा, आखिर बात क्या है? कुछ बताता क्यू नही। क्या हो गया है तुझे, दिन भर गुमसुम सा रहता । तू जिम भी जाना बंद कर दिया है। मुझे तुम्हारी ये हालात देखी नही जाती।

राजेश _कुछ भी तो नहीं huwa है मां, मै बिल्कुल ठीक हू। तुम बेकार ही चिंता कर रही हो।

सुनीता _अभी तक नहाया भी नही है। नाश्ता का समय हो गया है।

राजेश _तुम जाओ मां, मै अभी नहाकर आता हूं।

सुजाता _जल्दी आना बेटा, हम सब टेबल पर तुम्हारा वेट कर रहे है।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश नहाकर निकला और कपड़े पहन कर डाइनिंग टेबल पर पंहुचा। जहां सभी इन्तजार कर रहे थे।

शेखर _राजेश बेटा तुम्हारी मां कह रही थीं की तुम जिम जाना बंद कर दिए, कुछ बात है क्या?

राजेश _नही पापा, ऐसी कोई बात नही कल से जाऊंगा।

शेखर _ठीक है बेटा, कोई बात हो तो हम तुम्हारे मां ता पिता है हमसे शेयर किया करो।

राजेश _ठीक है पापा।

अगले दिन से राजेश जिम के लिए निकलता लेकीन वह जिम न जाकर नदी की ओर चला जाया करता। निशा के साथ बिताए पलो को याद करता रहता।

2दिन बाद जब राजेश जिम के लिए निकला।

भगत का फोन आया,,,

भगत _भाई कैसा है?

राजेश _, मै ठीक हू भगत ,तू कैसा है? कैसा चल रहा है सब।

भगत _सब अच्छा है भाई यहां, सबका अच्छा सपोर्ट मिल रहा है।

भाई आपको पता है न?

राजेश _किस बारे में।

भगत _यही की निशा और सीमा जी हमेशा के लिए लंदन जा रही है।

राजेश _क्या?

राजेश को गहरा धक्का लगा।

भगत _भाई मुझे आज दोस्तो से पता चला तो तुमको काल किया।

राजेश _कब जा रहें हैं?

भगत _भाई, दोस्त लोग बता रहें थे की उन दोनो को एयर पोर्ट पर देखे है। पूछने पर सीमाजीउन्हे ने बताया कि वे लंदन जा रहें हैं।

राजेश ने फोन जेब में रख दिया,,

भगत ने भाई भई चिल्लाता रहा, उसे राजेश की चिन्ता होने लगीं।

इधर राजेश अपनी बाइक को तेज गति से एयर पोर्ट की ओर दौड़ा दिया।

कुछ देर में ही वह एयर पोर्ट पहूंच गया था।

वह एयर पोर्ट में पागलों की तरह निशा को ढूंढने लगा।

कुछ देर में ही निशा सुजाता और सीमा तीनो के बेंच पर बैठी हुईं दिखी।

राजेश तेज तेज सांस लेता huwa खडा होकर निशा की ओर देखने लगा।

शायद फ्लाइट थोडा लेट था तो वे वेट कर रहे थे।

सुजाता उन्हे छोड़ने आई थी।

सीमा की नजर राज पर पड़ी।

सीमा _निशा, राज आया है।

तीनो राज की ओर देखने लगें।

तभी एयर पोर्ट पर अलाउंस की लंदन वाली फ्लाइट कुछ देर में उड़ान भरने वाली है कृपया सभी यात्री प्लेन पर बैठ जाए।

सुजाता _बेटा, अब जाओ, तुम दोनो एक दूसरे का ख्याल रखना।

निशा और सीमा दोनो एयर लाइन एरिया की ओर चले गए।

राजेश उन्हे जाते हुए देखता रहा उसकी आंखो से आंसू बहने लगा।

सुजाता राजेश के पास आया।

सुजाता _राजेश तुम यहां क्यू आए हो, अब सब कुछ ख़त्म हो गया। निशा हमेशा के लिए लंदन जा रही है।

अच्छा होगा कि अब तुम भी उसे भुल जाओ और मुझे भी। यह बोलकर सुजाता रोती हुई वहा से चली गई।

राजेश का पैर लड़खड़ाने लगा,,,

वह बेंच पर बैठ कर वह उस ओर देखता रहा जहां से निशा गई, शायद वह वापस आ जाए।

पर वह नही आई।

उसकी फ्लाइट उड़ान भर चुकी थी।

फ्लाइट में निशा की आंखो में आंसू देख सीमा ने उसे कंधे का सहारा दिया।

इधर राजेश भारी कदमों के साथ एयरपोर्ट से बाहर निकला। उसकी आत्मा यह गीत गा रहा था,,

 
राजेश एयरपोर्ट के पास दुखी मन से विचारमग्न होकर पेड़ के नीचे बैठा था। तभी भगत एयर पोर्ट पहुंचा। वह राजेश का बाइक देखा, पर राजेश कही नजर नहीं आ रहा था। उसने राजेश को काल किया, राजेश ने काल नही उठाया।

उसे ध्यान ही नहीं रहा की मोबाइल की रिंग बज रही है। भगत ने राजेशको एयरपोर्ट केअंदर काफी ढूंढा , , राजेश नजर नहीं आया तो उसने एयर पोर्ट के आस पास ढूंढा। राजेश को उसने पेड़ के नीचे बैठा पाया।

वह राजेश के पास गया।

भगत _भाई आप यहां हैं मैने कहा कहा नही ढूंढा आपको।

राजेश गुमसुम सा बैठा था।

भगत _भाई, निशा जी से मिले,,,

राजेश _निशा जी, चली गई भगत,, दुखी मन से कहा,,,

भगत _भाई आपने रोकने की कोशिश नही की।

राजेश _मै उसकी नजरों में गिर चुका हूं भगत किस मुंह से उसे रुकने के लिए कहता।

भगत _भाई आप दुखी मत हो, निशा जी जरूर वापस आयेगी।

राजेश _नही भगत, अब वह वापस नहीं आएगी। अब मुझसे नफरत करती है। उसके दिल में मेरे लिए कोई जगह नही।

राजेश _तुम जाओ भगत मुझे अकेला छोड़ दो।

भगत _नही भाई मै, आपको अकेला नहीं छोड़ सकता। चलो आप मेरे साथ।

भगत कार में आया था जो पार्टी वालो ने उसके आने जाने के लिए दिया था।

वह राजेश को लेकर अपने निवास स्थान पर ले गया।

राजेश को अपने बेड रूम में ले गया।

राजेश बेड में लेट कर पुनः विचारो में डूब गया।

भगत _भाई सुबह से आप कुछ खाए नही होगे, मैने नाश्ता मंगाया है। चलो नाश्ता करलो।

राजेश _नही भगत, मेरा कुछ खाने का मन नही है, तुम खालों।

इधर जब काफी समय हो जाने के बाद भी राजेश घर नही लौटा तो सुनीता को चिंता होने लगी।

उसने राजेश को काल किया।

भगत _भाई मां जी का काल है।

राजेश _मां से कह दो की मै तुम्हारे साथ हूं, मै बाद में घर आऊंगा।

भगत _मां जी मै भगत बोल रहा हूं। राजेश भाई मेरे साथ है, वह बाद में घर पहुंचे गा।

सुनीता _बेटा, राजेश कहा है, वह बात क्यू नही कर रहा।

भगत को समझ नही आ रहा था क्या बोले तभी उसने बहाना बनाया,,

भगत _राजेश बाई बाथरुम में हैं मा जी।

सुनीता _ठीक है भगत, राजेश से कहना जल्दी घर आ जाए।

भगत _ठीक है मां जी।

इधर कालेज केअधिकांश छात्र छात्राओं को पता चल गया कि निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई।

यह बात स्वीटी को उसकी सहेलियों ने फोन पर बताई।

स्वीटी को जब पता चला तो वह अपने मां की कमरे की ओर गई। सुनीता इस समय आराम कर रही थी।और सोच में डूबी हुई थी कि आखिर राजेश उदास क्यू रहता है।

स्वीटी जब सुनीता के कमरे में पहुंची।

सुनीता _बेटा , तुम मेरे कमरे मे, कुछ काम था क्या?

स्वीटी _मां, मुझे पता चल गया कि भईया आज कल उदास क्यू रहतेहै?

सुनीता _क्या, तुम्हे पता चल गया, राजेश के उदासी का कारण।

स्वीटी _हां मां।

सुनीता _बताओ, क्या बात है?

स्वीटी _निशा, हमेशा के लिए लंदन चली गई।

सहेलियों ने बताया की भईया और निशा के बिच कुछ विवाद huwa हैं।

सुनीता _क्या? हे भगवान , आखिर वही huwa जिसका मुझे डर था। मैने राजेश को मना किया था की अमीर घर की लडकियों से दूर रहें। वह माना नही। पता नही मेरे बेटे पर क्या बीत रही होगी? पिछले कुछ दिनों से मेरे बेटे ने हंसना भूल गया है।

सुनीता रोने लगी।

स्वीटी _मां भईया, कहा है मुझे उसकी चिंता हो रही है।

सुनीता _बेटा, अभी लगाया था उसको काल, भगत ने फोन उठाया था। वह बता रहा था कि राजेश उसके साथ है। सुनीता सुबकते हुए बोली।

बेटा तुम फोन लगाकर राजेश से बात करो उसे जल्दी घर आने के लिए कहो।

Switi ने राजेश को काल किया।

भगत _भाई स्वीटी का काल है।

बात करलो।

राजेश ने फोन उठाया।

स्वीटी _भईया, आप कहा है? सहेलियां बता रही थी की निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई।

मां परेशान है, तुमको लेकर आप जल्दी घर आ जाओ।

राजेश _छोटी मै ठीक हू, मां से कहना मेरी चिंता न करे। मै घर आ जाऊंगा।

राजेश ने दुखी मन से कहा।

स्वीटी _ठीक है भैया।

इधर सुनीता बहुत चिंतित थी।

शाम हो चुका था।राजेश अभी भी घर नही पंहुचा था।

सुनीता की चिंता और बड़ गई।

उसने प्रिया को फोन किया।

प्रिया इस समय हॉस्पिटल में थी।

प्रिया _प्रमाण बुवा।

सुनीता _जीती रह बेटा।

घर मे सब कैसे है?

प्रिया _सब अच्छे है बुआ। वहा सब कैसा है?

सुनीता _अब क्या बताऊं बेटा तुम्हे? मै राजेश को लेकर चिंतित हूं। सुनीता सुबकने लगी।

प्रिया _क्या huwa राजेश को बुआ सब ठीक तो है न।

सुनीता _बेटा कुछ दिनों से राजेश उदास रहता है। गुमसुम सा रहता है। आज पता चला कि निशा और उसके बीच कुछ कहासुनी हो गई है और आज निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई।

राजेश सुबह से अभी तक घर नहीं लौटा?

प्रिया _क्या? निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई। ये कैसे हो सकता है? वो तो राजेश से बहुत प्यार करती थीं।

इतना कुछ हो गया और राजेश ने मुझे कुछ बताया नही।

सुनीता _वो तो हमें भी अब तक कुछ बताया नही है। स्वीटी के दोस्तो ने बताया तब पता चला।

प्रिया _हे भगवान, राजेश पर क्या गुजर रहा होगा।

सुनीता _मुझे बडी चिंता हो रही है बेटा,

सुनीता सुबकते हुई बोली।

प्रिया _बुआ तुम चिन्ता न करो मै अभी पहुंचती हूं।

प्रिया हॉस्पिटल से सीधा राजेश के घर के लिए निकल गई।

घर पहुंचने के बाद।

सुनीता ने दरवाजा खोला।

सुनीता _आओ प्रिया।

सुनीता सुबकते हुवे प्रिया के गले लग गई।

स्वीटी भी वही खड़ी थी उसकी आंखो में भी आंसू थे।

प्रिया _बुआ आप लोग चिन्ता न करो सब ठीक हो जाएगा।

प्रिया ने राजेश को काल किया।

राजेश ने काल रिसीव किया।

प्रिया _कहा है re, मुझे सब पता चल गया है। तुम कहा हो। घर वाले सब परेशान हैं। हम लोग भगत के निवास स्थान पहूंच रहे हैं।

राजेश _नही दी आप लोग यहां मत आओ, मै घर आ रहा हूं।

प्रिय_ठीक है भगत को फोन दो।

भगत _हां दी बोलो।

प्रिया _देखो, राजेश की स्थिति अभी ठीक नहीं होगा। उसे अकेले घर आने मत देना। तुम राजेश को लेकर आओ।

भगत _ठीक है दी।

भगत राजेश को लेकर अपने कार में घर के लिए निकल गया। उसका बाइक अपने दोस्तो घर छोड़ने बोल दिया।

कुछ समय में ही वे घर पहुंच गए।

घर पहुंचने पर राजेश के चहरे की उदासी देखकर, सभी भावुक हो गए।

सुनीता _बेटा, मैने तुमसे कहा था न, अमीर घर की लडकियों से दूर रहने के लिए। आखिर छोड़ कर चली गई।

मेरे बेटे की मुस्कुराहट छीनकर।

सुनीता सुबकने लगी।

प्रिया _राजेश ये सब क्या हो गया? ये कैसे huwa ?

बताओ राजेश, खामोश क्यू हो बताओ,,,

भगत _दी भाई क्या बतायेगा? मै बताता हूं, ये सब किसके कारण huwa है।

राजेश ने भगत को रोक दिया, नही,,,

राजेश _ गीत गाने लगा,,,,

ये क्या huwa? कैसे huwa?

गाना खत्म होने के बाद।

प्रिया ने राजेश को समझाया की, राजेश तुम दुखी न हो मुझे पूरा यकीन है एक दिन निशा जरूर वापस आयेगी।

राजेश को प्रिया ने अपने हाथो से खाना खिलाया। राजेश कहता रहा कि मुझे भुख नही है पर उसने कहा की अगर तुम नही खाओगे तो कोई भी खाना नही खायेगा।

क्या तुम चाहते हो कि तुम्हारे कारण सभी भूखे रहे

राजेश _नही दी।

प्रिया _तो फिर, आज मै अपने भाई को अपने हाथो से खाना खिलाऊंगी।

प्रिया ने राजेश को खाना खिलाया फिर उसे उसके कमरे में आराम करने के लिए ले गया और उसे समझाया कि तुम्हे उदास देखकर तुम्हारे मां पापा और बहन पर क्या गुजरती होगी?

क्या तुम सबको दुखी देखना चाहते हो?

राजेश _नही दी, मै नही चाहता कि मेरे कारण मेरे परिवार वाले दुखी रहे।

प्रिया _फिर जो हो गया उसे भूलने की कोशिश करो और घर वालो के बारे में भी सोचो।

राजेश _ठीक है दी।

प्रिया _अच्छा भाई, मै चलता हूं। पिंकी मेरी राह देख रही होगी?

राजेश _ठीक है दी।

इधर निशा लंदन पहुंच चुकी थी उसे एयरपोर्ट पर लेने के लिए उसकी बुआ और फूफा जी पहुंचे थे।

निशा ने जब अपनी बुआ लक्ष्मी देवी और फूफा प्रीतम सिंह से मिली।

निशा ने और सीमा दोनो का पैर छूकर प्रणाम किया।

लक्ष्मी देवी _कैसी है मेरी बच्ची। उसने निशा को गले लगा लिया।

मुझे सुजाता ने सब बता दिया हैं। बेटा तुम दुखी मत हो सब ठीक है जायेगा।

चलो घर चलो।

चारो घर चलें गए।

घर जाने के बाद।

लक्ष्मी देवी _निशा बेटा देख लो कौन सा कमरा तुम लोगों को पसंद है नौकरों से मदद लेकर अपना अपना सामान वहा जमा दो।

निशा _बुवा हम दोनों अलग अलग कमरे मे नही रहेंगे। एक ही कमरे मे रहेंगे।

लक्ष्मी देवी _ठीक है बेटा ये तुम्हारा ही घर है जैसे रहो।

खाने के लिए जब बोली तो निशा ने कहा

निशा _बुवा आज भूख नहीं लग रही। सीमा जाओ तुम खा लो,

सीमा _नही सीमा, मै अकेली नही खाऊँगी। मुझे भी भूख नहीं।

लक्ष्मी देवी_देखो बेटा, जो हूवा उसे भूलने में समय तो लगेगा। भूखे रहने से सब ठीक तो नही हो जायेगा।

चलो थोडा खा पता नही सुबह से तुम लोग कुछ खाए भी हो की नही।

बुवा और सीमा के जिद करने पर निशा भोजन के लिए डाइनिंग टेबल पर पहुंची।

लक्ष्मी देवी _बेटा मुझे सुजाता ने सब बता दिया है कि तुमको खाने में क्या पसंद है। तुम्हारे पसन्द की सारी चीजे बनी है।

प्रीतम सिंह _निशा बेटा, तुम खाने पीने में संकोच न करो। ये घर तुम्हारा ही है।

सच तो यह है की विशाल भईया और सुजाता भाभी ने अगर हमारी बिजनेस में मदद नहीं किया होता तो मैं किसी कंपनी में नौकरी कर रहा होता जो कुछ भी है सब विशाल भईया की वजह से है यहां की सब कुछ को अपना ही समझो।

अगर किसी प्रकार की दिक्कत हो तो मुझे बताना।

निशा _ठीक है फूफा जी।

निशा थोडा सा भोजन की अपनी बुआ की बात रखने के लिए।

रात में निशा और सीमा दोनो बेड पर सोने की कोशिश करने लगे। उन्हे नींद नहीं आ रही थी।

सीमा ने निशा से कहा,,

सीमा _क्यू? नींद नहीं आ रही है? राजेश के बारे में सोच रही हो न।

निशा _नही, मै उसे क्यू याद करुंगी? रंडीबाज को।

सीमा _फिर क्या सोच रही हो?

निशा _अपनी मॉम और डैड, पता नही वे कैसे होंगे?

सीमा _तुम खुश रहोगी तो वे भी वहा अच्छे से रहेंगे।

दोनो सोने की कोशिश करने लगे पर सो नही पाए।

इधर राजेश सुबह उठने के बाद खुद को घर वालो के सामने खुश दिखाने की कोशिश करता।

जिम जाता।

और आईएएस की तैयारी करता।

शाम के समय वह नदी किनारे जाकर समय बिताता।

इधर निशा ने अपने फूफा जी से कहा,,

निशा _फूफा जी मुझे आपसे कुछ बात करनी थीं।

प्रीतम सिंह _बोलो बेटा,

निशा _अगर आपको दिक्कत न हो तो हम भी आपके ऑफिस जायेंगे। पढाई के साथ बिजनेस के बारे में भी सीखना चाहती हूं। दिन भर आखिर हम यहां करेंगे क्या?

प्रीतम _बेटा ये तो बडी अच्छी बात है। जैसे तुम लोग चाहो। चलो आज से ही मेरे साथ मेरे काम में हाथ बटाना।

निशा और सीमा दोनो ऑफिस चले गए। सब कुछ भूलने की कोशिश करने लगे।

कुछ दिन बाद रिया ने राजेश को फोन किया,,,

राजेश ने फोन नही उठाया,,

रिया राजेश का घर गई। पता चला राजेश घर पर नहीं है।

कही बाहर टहलने गया है।

दोस्तो से पता कराने पर पता चला की राजेश शाम के समय नदी की ओर टहलने जाता है।

वह नदी की ओर चली गई।

इधर उधर ढूंढने के बाद रिया को राजेश नदी किनारे बैठा मिला।

रिया _राजेश तुम यहां हो मैने तुम्हे कहा कहा नही ढूढा। तुम मेरा काल भी रिसीव नहीं करते।

राजेश _रिया तुम यहां क्या करने आई हो? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया। तुम अपनी चाल में कामयाब हो गई। अभी और कुछ बाकी रह गया है?

रिया, राजेश के पाव में गिर गई।

राजेश मुझे माफ कर दो।

मै नही जानती थीं की बात इतनी बिगड़ जाएगी।

मै सोंची नही थी कि निशा और तुम्हारे बीच दूरियां इतनी बड़ जाएगी।

मै निशा को सब सच बता दूंगी, कि मैने तुम्हे अपनी जाल में कैसे फसाया? मै अभी निशा के काल करती हूं।

राजेश _नही रिया, ऐसा करने की जरूरत नहीं। क्यू कि मैं निशा को धोखे में नही रख सकता। क्यू की सच तो यही है कि मेरे कई औरतों से संबंध है।

एक दिन निशा जी को यह सच्चाई पता चलना ही था।

रिया _राजेश, मुझे माफ कर दो, प्लीज।

रिया राजेश की पैर पकड़ कर माफी मांगने लगीं।

राजेश _जाओ रिया मैने तुम्हे माफ किया?

रिया _राजेश मेरे मॉम डैड ने मेरी शादी अपने दोस्त के बेटे से तय कर दी है। कल मेरी सगाई है।

राजेश अगर कल तुम मेरे सगाई पर आए तो मैं समझूंगी की तुमने मुझे माफ कर दिया है।

रिया वहा से चली गईं।

रात में सुजाता राजेश के कमरे में यह देखने आई की राजेश सोया है कि नही,,

सुनीता _बेटा तुम अभी तक सोए नही।

निशा को भुल जाओ बेटे। मेरे बेटे को निशा से भी अच्छी लड़की मिलेगी देखना।

राजेश _नही मां, निशा जी मेरी अच्छी दोस्त थी। जब मैं निराश होता था टू हमेशा मेरा हौसला बढ़ाती थी आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती थीं। वह एक सच्ची दोस्त थी मां।

सुनीता _अब बिता समय वापस तो नही आ सकता बेटा। पुरानी बातो को भुल कर हमे एक नई सिरे से सोचना चाहिए।

राजेश _हां मां मै पुरानी यादों को ही भूलने की कोशिश कर रहा हूं।

सुजाता _रात बहुंत हो गई है बेटा अब सो जाओ।

सुजाता राजेश के सिर को अपने गोद पर रख कर सुलाने की कोशिश करने लगी।

अगले दिन रिया की सगाई थी सगाई की पार्टी में उनके सारे दोस्त रिश्तेदार समय पर पहुंच चूके थे।

शहर के सारे बड़े बिजनेस मैन और उद्योग पतियों को आमंत्रित किया गया था।

रिया की सगाई में सुजाता और रीता भी आई थी।

रिया को राजेश का आने का इंतजार था।

वह बार बार दरवाज़े को ओर देख रही थीं और दोस्तो को पुछ रही थी की राजेश आया की नही।

काफी समय हो गया तब रिया को लगा की राजेश नही आयेगा। वह निराश हो गई।

अंगूठी का रस्म पूरा करने ही वाली थी की उसकी सहेलियों ने बताई की राज आ गया।

राजेश और भगत अपने दोस्तो के साथ पहुंच चुका था।

रिया बहुँत खुश हो गई।

वह राजेश की ओर देखी और आंखो हो आंखो में उसे शुक्रिया कहा।

अंगूठी की रश्म पूरा होने के बाद सभी ने रिया और उसके होने वाले पति को बधाई दिया।

सुजाता वहा मौजूद थीं। रीता ने राजेश को देखकर उसके पास गईं।

रीता _कैसे हो राज?

राजेश _ठीक हूं मैम।

रीता _निशा के बारे में सुनी बडा दुख huwa

संगीत का कार्यक्रम शुरू huwa,

रिया ने राजेश को खुशी के मौके पर गीत गाने के लिए मंच पर आमंत्रित किया।

सभी दोस्तो राज राज चिल्लाने लगे।

राजेश मंच पर गया और माइक से बोला,,,

राजेश _दोस्तो जब किसी का दिल टूटा huwa हो और उससे खुशी के मौके पर गीत गाने के लिए कहा जाए,,,

तो गीत गाने वाले की दिल का दर्द मुंह से बाहर आ ही जाता है। ऐसे खुशी के मौके पर अपने दिल की दर्द बया कर मैं आज इस खुशी की माहौल को खराब नही करना चाहता इसलिए मुझे क्षमा कीजिए।

मै गीत नही गा पाऊंगा।

सभी दोस्त उदास हो गए।

तभी रिया बोली _

राजेश तुम्हारा दिल जो कहे वो सुनाओ हम सबको अच्छा लगेगा,,,

सभी दोस्त राज राज चिल्लाना शुरू कर दिया,,,

इधर सीमा के दोस्त ने सीमा को फोन कर बता दिया की राज रिया की सगाई में आया huwa है।

उनके दोस्त गीत गाने के लिए जिद कर रहे हैं।

सीमा ने अपनी सहेली से वीडियो कालिंग कर सब दिखाने कह दी कि पार्टी में क्या हो रहा है।

वह अपनी मोबाइल से सब देखने लगी।

तभी निशा कमरे में पहुंची।

सीमा मोबाइल पर क्या देख रही है में तुम्हे कब से आवाज़ दे रही हूं?

मै भी तो देखूं?

निशा ने सीमा से मोबाइल छीनकर देखने लगी।

इधर राजेश _माइक पर बोला,

दोस्तो मेरी गलती की वजह से मेरी सच्ची दोस्त मुझसे रूठ कर दूर चली गई है। पता नही वह कभी वापस आयेगी भी की नही। लेकीन मुझे पता है मैं उसे कभी नहीं भुल पाऊंगा। मै यह गीत उसकी याद में सुनाने जा रहा हूं,,,

राजेश ने गाना शुरू किया,,,

इधर निशा की दिल की धड़कन बढ़ गई थी,,

राजेश ने गाना शुरू किया,,

ओ साथी re तेरे बिना भी क्या जीना
 
राजेश के द्वारा गीत गाने के बाद वहा मौजूद सभी लोगों के आंखो में आंसू भर गए,निशा फूट फूट कर रोने लगी। सीमा ने उसे ढाढस बंधाया।

इधर गीत गाने के बाद राजेश और उसके दोस्त डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। बाजू वाले टेबल पर सुजाता और रीता बैठी थी।

वेटर विस्की का ट्रे लेकर विस्की के लिए आवाज़ लगा रहा था। तभी राजेश ने वेटर से विस्की के लिए आवाज़ लगाया।

रीता और सुजाता चौकी। वह राऐश की ओर देखने लगे।

राजेश_भाई आज रिया की सगाई है। सभी दोस्तो के लिए विस्कि लगाओ।

भगत _भाई आप शराब मत पियो।

राजेश _क्यू, आज तो खुशी का पल है।वेटर सबके लिए पेग बनाओ।

राजेश ने एक पैग उठाया और चेस कहते हुए। शराब की दो तीन पैग पी लिया।

सुजाता और राजेश की गतिविधियों को देख रही थीं।

राजेश _ये दुनियां भी कितनी अजीब है। कौन कब बदल जाय कहा नही जा सकता। कल जो हमारे बाहों से लिपटी रहती थीं। आज उन्हे हमारी ओर देखना भी पसंद नही। राजेश ने एक पैग और पी लिया।

भगत _अब बस करो तीन पैग ले चूके हो।

राजेश _शाला ये कैसा शराब है नशा ही नहीं हो रहा। राजेश ने लड़खड़ाते आवाज़ में कहा।

एक और पैग बनाओ।

राजेश ने एक पैग पी लिया।

कुछ ही देर में राजेश का नशा चढ़ गया।

राजेश _भाई हम तो ठहरे आवारा भौरा कभी इस डाली तो कभी उस डाली मंडराने की हमारी फितरत है। कोई कली पसंद आ जाए तो हम उसका रस पी लेते है।

भगत तुम शरीफ लडकियों और और औरतों से कह दो मुझसे दूर रहें।

एक पैग और बनाओ re।

शाला शराब में नशा ही नही है,,

भगत _भाई, मै आपको ओर पीने नही दूंगा।

राजेश ने लड़खड़ाते आवाज़ से कहा।

कल तक बड़े बड़े कसमें खाते थे,,, और एक पल में ही कह देते है सब कुछ खतम,,,

राजेश ने एक और पैग पीने के लिए, प्याला उठाया।

सुजाता जो बाजू टेबल पर बैठी थी ।

उससे बर्दाश्त नही huwa और उठ कर आई गिलास प्याला राजेश की हाथो से छीनते हुवे बोली।

सुजाता _राजेश और कितना पियोगे। मै तुम्हे और पीने नही दुंगी। प्याला छीनकर फेक दिया।

सभी लोग राजेश और सुजाता की ओर देखने लगे।

आप कौन हैं मोहतरमा हमे रोकने वाली। हमारी मर्जी हमारा जितना मर्जी करेगा उतना पियेंगे।

राजेश की बात सुनकर सुजाता रोने लगी। वह आंसू पोछते हुवे वहा से भागी। रीता उसको आवाज़ देते हुए पीछे गईं ।

सुजाता के वहा से जाने के बाद राजेश अपने चेयर पर बैठ गया।

बिलकुल खामोश हो गया।

रिया वहा पहुंची।

रिया _राजेश तुम ठीक तो हो न।

तभी राजेश के आंखो में आंसू देख कर। वह राजेश की अपने सीने से लगा लिया

। राजेश तुम रो रहे हों।

राजेश सब ठीक हो जाएगा।

रिया _भगत तुम राजेश को घर छोड़ आओ।

भगत राजेश को लेकर उसके घर छोड़ने चला गया।

भगत बेल दरवाज़े का बजाया।

सुनीता ने दरवाजा खोली।

सुनीता _क्या huwa मेरे बेटे को

भगत,_कुछ नही मां जी। राजेश भाई ने थोडा विस्की पी लिया है।

भगत ने राजेश को उसके कमरे तक पहुंचाया ।

उसे बेड पर लिटा दिया।

भगत _अच्छा मां जी अब मै चलता हूं।

सुनीता _ठीक है बेटा।

राजेश को होश नहीं था। वह अपने आंखे खोला सामने अपनी मां को पाया।

इधर स्वीटी भी कमरे में आ चुकी थी।

स्वीटी _मां, भाई को क्या हुआ है।

राजेश _आईएम सॉरी मां, मैंने शराब पी।

सुनीता रोने लगी।

राजेश _मां तुम रो रही हो।

सुनीता _अपने बेटे को ऐसी हालात में देखकर कौन मां नही रोएगी ।

राजेश _आई एम सॉरी मां गलती हो गई अब मैं कभी शराब नही पियूंगा।

स्वीटी राजेश की मोजे जूते उतारने लगी। उसकेशर्ट पेंट उतार दिया।

सुनीता _बेटा तुम आराम करो। तुम होश में नहीं हो।

सुनीता ने राजेश को चादर उड़ा दिया।

सुनीता _स्वीटी बेटा तुम भी अपने कमरे में जाकर आराम करो।

स्वीटी _ठीक है मां।

स्वीटी अपने कमरे में चली गई।

सुनीता , राजेश को कुछ देर सुलाने की कोशिश की फिर अपने कमरे में चली गई।

इधर स्वीटी कुछ देर बाद राजेश के कमरे मे पहुंची।

वह नाईटी में थी।

राजेश सोया huwa था।

स्वीटी _भाई मै तुम्हे निशा की कभी कमी महसूस नही होने दुंगी।

वह नाईटी उतार कर निर्वस्त्र हो गई।

और राजेश की अंडरवियर निकाल दिया।

उसके land को मुंह में लेकर चूसने लगी।

कुछ देर बाद राजेश ने आंखे खोला।

सामने स्वीटी को थी। वह अभी भी नसे में था। उसने स्वीटी को निर्वस्त्र पाया।

राजेश _स्वीटी, तुम ये ये क्या कर रही हो, जाओ यहां से।

स्वीटी _नही भईया मै निशा की याद तुम्हारे दिल से निकाल दुंगी। तुम्हे खुब प्यार दुंगी।

वह राजेश के land को अपने मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश नसे में था ज्यादा विरोध करने की स्थिति में नहीं था।

राजेश _स्वीटी ये क्या कर रही हो जाओ अपने कमरे मे।

स्वीटी _नही भईया, मै तुम्हारे दिल से निशा को निकाल के रहूंगी। तुम्हे खुब प्यार दुंगी।

वह राजेश के land को चूसती रही उसके अंडकोष को सहलाती रही।

स्वीटी की हरकतों से राजेश का land खड़ा हो गया।

स्वीटी राजेश के land को पकड़ कर अपने chut पर सेट की और उस पर बैठ गई।

फिर उसके ऊपर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश नसे में था वह ज्यादा विरोध नही कर सका।

स्वीटी की हरकतों से राजेश भी उत्तेजित हो गया।

राजेश का land स्वीटी की बुर में अंदर बाहर होने लगा

धीरे धीरे राजेश के ऊपर भी काम वासना हावी होने लगा। वह स्वीटी की कमर को अपने दोनो हाथो से थाम लिया।

इधर स्वीति कामुक सिसकारी, निकालने लगी।

आह उह आह,,,

स्वीटी राजेश के ऊपर झुक कर अपनी चूंची राजेश के मुंह में भर दी।

कहते हैं कि काम सुख के आगे व्यक्ति अपना सारा गम कुछ पलो के लिए भुल जाता है ।

राजेश भी अब काम के वशीभूत हो गया।

वह स्वीटी की क़मर पकड़ लिया और नीचे से अपनी क़मर उठा उठा कर land को स्वीटी की बुर की गहराइयों में उतारने की कोशिश करने लगा।

दोनो काम के परम आनंद को प्राप्त करने लगें।

कमरे में स्वीटी की कामुक सिसकारी गूंज रही थी। दोनो स्वर्ग की सैर कर रहें थे।

इधर सुजाता की आंखो में नींद नहीं थी।

कुछ देर बाद वह अपने कमरे से यह देखने आई की राजेश सोया है कि नही।

जब वह राजेश के कमरे के पास पहुंची तो उसके कमरे से सिसकारी की आवाज़ सुनाई दी। वह वही जम गई और धीरे से दरवाजा धकेली ।

दरवाजा थोडा खुला। सामने का दृश्य देखकर उसके पैरो तले जमीन खिसक गई।

वह उस दृश्य को ज्यादा देर तक नहीं देख सकी। वहा से हाल में आकार रोने लगी।

उसने सोचा नहीं था कि राजेश और स्वीटी के बीच ऐसा कुछ देखने को मिलेगा।

उसकी आंखों से आंसू बहने लगीं।

उसेउन दोनो पर बहुत गुस्सा आया पर राजेश की हालात को देखकर वह दोनो को रोक नहीं पाया।

इधर स्वीटी राजेश के ऊपर तब तक उछल उछल कर चुदती रही जब तक राजेश झड़ नही गया। इधर सुनीता अपने कमरे मे आकार लेट गई।

वह रात भर सो न सकी।

वहसोचती रही हे भगवान ये कैसा अनर्थ हो गया। राजेश बेटा ये तुमने क्या किया? अपनी कुंवारी बहन की सील तोड़ दी।

स्वीटी की शादी के बाद सुहागरात के दिन दूल्हे को जब पता चल�