Incest यह क्या हुआ - Page 11 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

मैने entry thread पर एक कहानी पोस्ट किया है पेज 7पर, कहानी 4_5 अपडेट में पुरा होगा कहानी पढ़कर बताइएगा, कैसा लगा।
 
दोस्तों मैं new threadपर यह कहानी अधूरी पोस्ट कर दी थी पर एडिट आपसन न हो ने के कारण , फिर से पोस्ट किया ।

। यह कहानी मां बेटे के बीच शारिरिक संबंध पर आधारित है। वैसे तो मां बेटे के बीच शारिरिक संबंध को समाज महा पाप मानता है। कुछ लोग तो इसे मन गडंत कहानी मानते हैं कहते हैं कि मां बेटे के बीच शारिरिक संबंध नहीं बनता, लेकिन लोगो के सोंच के विपरीत मां और बेटे के बीच शारिरिक संबंध पहले भी बनते थे और आज भी बनते हैं। हाला की ऐसी घटनाए बहुत कम होती है, वास्तविक जगत में होती है।

मां जब खूबसूरत, सेक्सी और जवान हो, और जवान बेटा मां को किसी के साथ chudte देख ले तो अधिकांश लडको का मां के प्रति विचार बदल जाता है। मां, बेटे के सपनो में आने लगता है। बेटा मां को सपने में चोदने लगता है। उसके नाम से मूठ मारकर लगता है।

। कभी कभी मां और बेटे को अकेले में समय गुजारने का मौका मिले तो वह अपनी हरकतों से सेक्स की भावना को प्रकट भी करने लगता है, कुछ माए इसका विरोध करती है, कुछ नजरअंदाज करती है तो कुछ ऐसे भी होती हैं जिसे बेटे की ऐसी हरकत अच्छा लगती है, और ऐसी ही औरत और बेटे को जब करीब आने का मौका मिलता है तो दोनो के बिच न चाहते हुए भी शारिरिक संबंध बन जाते हैं, और एक बार जब यह संबंध दोनो के बिच बन जाता है तो उनको धीरे धीरे इस खेल में इतना मजा आता है वे जब भी मौका मिले इस खेल ka मजा लेने लेते है।

चूंकि यह खेल घर के चार दिवारी के अंदर चोरी छिपे चलता है, इस लिए बाहर वालो को पता नहीं चलता, कुछ मामलों में जब ये आसावधानी बरतते हैं तो बाहर वालो को भी इसका पता चल जाता है की मां बेटे के बीच नाजायज संबंध है। लोग ऐसे विषय पर चर्चा करने से भी बचते हैं।

फिर भी अखबार एवम पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से हमे मां बेटे के बीच नाजायज संबंध की घटना कही कही पढ़ने और सुनने को मिलती रहती है।

यहां पर जो स्टोरी पोस्ट करने जा रहा हूं वह भी मां बेटे के बीच नाजायज संबंधों पर आधारित है। यह कहानी सन,1970_85के बीच की है उस समय बच्चे को भगवान की देन समझते थे। दर्जनों बच्चा पैदा करते थे। उस समय लोगो को परिवार नियोजन की जानकारी नहीं थी। कम उम्र में ही लड़के और लड़कियो की शादी हो जाती थी।

कहानी का शीर्षक है।

"गुलाबो और उसका जवान बेटा भोला (complete)

खुशहाल पुर नाम का एक छोटा सा गांव था। यहां की जनसंख्या लगभग 1000 रही होगी। यहां के लोगो का मुख्य व्यवसाय कृषि था। गांव के लोग कृषि कार्य कर अपना जीवन यापन करते थे। गांव के सभी परिवारों के पास अच्छी जमीन थी। जिसमे अनाज एवम शाक सब्जियां उगाते थे। सिंचाई के अच्छे साधन होने के कारण अच्छी पैदावार होती थी।गांव के नाम के अनुरूप यहां के लो खुशहाल थे।

इस गांव में एक के किसान परिवार रहता था। परिवार के मुखिया का नाम किशनू था उसकी पत्नी का नाम गुलाबो था। जब गुलाबो और किशनु की शादी हु़वा उस समय गुलाबो की उम्र 16वर्ष की थी,17 वर्ष की उम्र में ही वह एक लड़के की मां बन गई। उसके बाद वह एक एक करके उसने 6लड़कियो की मां बन गई। सबसे छोटी लडकी की उम्र मात्र एक वर्ष थी।

उसका लड़का भोला अब 19वर्ष का जवान हो चुका था।

सात बच्चों की मां बन जाने के बाद भी गुलाबो की शरीर में गजब की कसावट थी।जबकि वह 36वर्ष की हो चुकी थी।। गांव की महिलाए,उसकी खूबसूरती और जवानी पर जलती थी। गांव के युवा और बूढ़े गुलाबो की सेक्सी और खूबसूरत जिस्म देखकर आहे भरते थे।

उसके सपने देखते थे।

भोला तो अभी सचमुच का भोला था। वह सेक्स से अनिभिग्य ही था।

इधर उसका पति किशनू अपनी पत्नी गुलाबो की खूबसूरती का दीवाना था। kishnu दिन भर खेतो में काम करता रहता था।

वह अपनी पत्नी को खेतो में काम करने से मना करता था।

कहता था की खेतो में काम करने से तुम्हारा गोरा रंग काला पड़ जायेगा।

वह अपनी पत्नी का हर कहा मानता था। एक तरह से वह अपनी पत्नी का गुलाम था। घर में गुलाबो का ही चलता था। घर पर वही होता जो गुलाबो चाहती, उसकी किसी बात का विरोध किशुन ने आज तक नही किया था।

इधर हाई स्कूल की पढ़ाई के बाद भोला खेती के काम में अपने पिता का हाथ बटाने लगा था।

छोटी और उसकी पहले वाली लडकी को छोड़कर सभी लड़कियां पढ़ने के लिए स्कूल जाती थी।10 बजे स्कूल जाते और 4बजे के बाद स्कूल से घर आते। बड़ी लडकी का नाम रूपा था जो 11वी कक्षा में थी।

सुबह का समय भोला सोया था।

गुलाबो_अरे बेटा उठो, सुबह हो गई है कब तक सोया रहेगा। खेत नही जाना है क्या?

भोला अपनी आँखें खोलता है,

भोला _अरे मां, कुछ देर और सोने दो न।

गुलाबो _चलो उठो देखो कितना समय हो चुका है। जल्दी नहाकर नाश्ता कर लो और अपने पिता के लिए नाश्ता ले जाओ।

नाश्ता में रोटी और सब्जी बनता था,

भोला खाट से उठकर तालाब की ओर चला गया। वहा से नहाकर घर आया और नाश्ता किया। गुलाबो ने उसके हाथ में रोटी की पोटली थमा दिया जाओ बेटा तुम्हारा पिता जी इंतजार कर रहे होंगे।

भोला_ठीक है मां।

यह भोला का रोज का ही काम था।

खेत जाने के बाद।

किशनू _आ गया बेटा ।

भोला _हा बापू । रोटी लाया हूं खा लो।

भोला खेत में काम पर लग गया। इधर किशुन खेत में लगे बोर चालू कर नहा लिया और नाश्ता कर लिया। फिर थोडा आराम कर फिर से खेतो में काम करने लगा। यह उनका रोज का काम था।

आवश्यकता पड़ने पर खेतो पर काम करने के लिए मजदूर भी लगाते थे। अभी खेत में मजदूरों की आवश्यकता नहीं थी।

खेत का सारा काम दोनो बाप बेटे ही मिलकर करते थे। पहले किशनु ही अकेला खेत सम्हालता था पर अब भोला उसके कामों में सहयोग करता था, भोला उसके बराबर का काम करने लगा था।

खेतो में फसल के साथ साथ शाक सब्जियां भी लगाते थे। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के कारण, अच्छी उपज प्राप्त होती थी।

अपने परिवार के आवश्यकता के लायक शाक सब्जियां, अनाज रखकर शेष को मंडी में बेच देते थे। जिससे उनको अच्छी आमदनी होती थी।

दोपहर के समय गुलाबो खाना लेकर अपनी छोटी बच्ची के साथ खाना लेकर पहुंची।

गुलाबो खेत में बनी झोपड़ी में खाने का डिब्बा रखकर भोला को आवाज़ लगाया।

गुलाबो __बेटा, भोला,,, खाने का समय हो गया है। आकर खालो।

भोला _बापू, मां खाना लेकर आ गई है खान के लिए आवाज दे रही है।

किशनू _चलो बेटा तुम जाकर पहले खालों, मै थोडा काम निपटाकर आता हूं।

भोला _ठीक है बापू।

भोला हाथपैर धोकर झोपड़ी की ओर चला गया।

भोला _लाओ मां खाना दो जोरो की भुख लगी है।

गुलाबो _तेरा बापू नही आया।

भोला _वो हमेशा की तरह थोड़े देर बाद खाना खायेंगे कुछ काम निपटाने के बाद।

गुलाबो ने भोला के लिए थाली में खाना निकाला।

भोला खाना खाना शुरु किया।

भोला _मां खाना तो बड़ा स्वादिष्ट बना है,।

गुलाबो _तुम्हे तो हमेशा ही मेरे हाथों का बना खाना स्वादिष्ट लगता है।

भोला _आपके हाथो में जादू जो है।

भोला ने खाना खा लेने के बाद वही झोपडी लगा huwa खाट में लेटकर आराम करने लगा। खाट पर उसकी छोटी बहन भी लेटी थी।

इधर बर्तन धोने के बाद गुलाबो झोपडी में आ गई। नीचे चटाई में बैठ गई भोला और गुलाबो आपस मे बात चीत करने लगें।

तभी बच्ची की नींद खुल गई वह रोने लगी।

भोला _लगता है गुड़िया को भुख लगी है। इसे दुदू पिलादो।

गुलाबो _गुड़िया को अपने गोद में उठा कर अपने ब्लाउज की बटन खोल कर एक चूची बाहर निकाल ली, और बीना चूची को पल्लू से ढके ही गुड़िया को भोला के सामने ही दुध पिलाने लगी। यह रोज का ही काम था, गुलाबो घर के किसी भी सदस्य के सामने बीना पर्दा किए बच्ची को दुदू पिलाती थी।

घर में सभी सदस्यों के लिए ये सामान्य बात थी।

गुलाबो अपनी चूची बाहर निकालकर भोला के सामने दूध पिलाने लगी, और भोला से बतियाने लगी। भोला के लिए भी यह सामान्य बात थी, उसके लिए चूची केवल वह अंग था जिससे मां बच्चे को दूध पिलाती हैऔर वह केवल बच्चे को दूध पिलाने के काम आती हैं।

भोला, बिना चूची की ओर ध्यान दिए अपनी मां गुलाबो से बातचीत करने लगा। कुछ देर बाद किशुन भी झोपडी में आ गया।

किशनू _क्या बाते हो रही है भई मां बेटे में,

गुलाबो _कुछ नही जी, आओ बैठो मैं खाना लगाती हूं।

गुलाबो ने बच्ची को दूध पिलाते हुवे ही किशनू के लिए खाना निकाली। फिर किशनु खाना खाने लगा और आपस में तीनो बात चीत कर रहें थे। गुलाबो बात चीत करते समय बीना परदा किए अपनी दूध से भरी सुडौल बड़ी बड़ी चूचियों में से एक चूची बाहर निकालकर बच्ची को दूध पिला रही थी बच्ची दुध पीते पीते सो गई।

तब उसे भोला के बाजू में फिर से लिटा दी अभी भी उसकी एक चूची खुली थी जब वह बच्ची को खाट पे लिटा रही थी उस समय उसकी चूची राजू के सामने झूल रही थी पर राजू ने उसे देखकर भी मन में कोई गलत ख्याल नही लाया। खाना खाने के बाद कुछ देर किशनु ने आराम किया फिर भोला और किशनू दोनो फिर से काम में लग गया। इधर गुलाबो बर्तन धो कर खाली डिब्बा और बच्ची को लेकर घर चली गई।

शाम को अंधेरा छाते ही भोला भी घर चला गया। किशनु फसल की रखवारी करने खेत में ही रहता।

घर पहुंचकर , अपनी मां गुलाबो को बताकर वह निकल जाता अपने दोस्तो के साथ टहलने रात को भोजन के समय घर पहुंचता। इधर किशनु भी रात में भोजन के लिए घर आता फिर भोजन करने के बाद फसल की रखवारी करने खेत चला जाता। इस तरह इन लोगो की दिनचर्या थी।

इन लोगो का जीवन ऐसा ही गुजर रहा था की एक दिन भोला जब दोस्त रेखू के साथ टहलने के लिऐ तालाब की ओर गया था तभी रेखु ने बताया।

रेखु _अबे, जानता है न कल सरपंच का लड़का राजू के यहां जन्मोत्सव कार्यक्रम है।

भोला _हां, पर कोई खास बात है क्या।

रेखु _अरे लड़के लोग बता रहें थे की दोस्तो के कहने पर राजू ने कल रात वीडियो दिखाने का प्रोग्राम रखा है।

भोला _तो, इसमें नई बात क्या है बे। लोग तो जन्मोत्सव के दिन वीडियो दिखाने का प्रोग्राम रखते ही है।

रेखु _वो तो है, पर सुना है वह दोस्तो के कहने पर ब्लू फिल्म का वीडियो कैसेट भी मांगने वाला है।

भोला _अबे, ये ब्लू फिल्म होता क्या है?

रेखु _अबे तू तो अब तक भोला ही है। अबे chudai वाली वीडियो। पर तुम्हे तो इसमें दिलचस्पी ही नही। पिछली बार भी मैने तुम्हे जब लल्लू ने अपने बेटे के जन्म दीन पर अपने दोस्तो की फरमाइश पर ब्लू फिल्म का वीडियो मंगाया था। तब तुझे वहा देखने के लिए रूकने कहा था पर तुम वो गाइड फिल्म देखने के बाद घर चला गया था। तू एक बार तो देख कर देख ब्लू फिल्म कितना मज़ा आता है बता नही सकता?

एक बार तू देख लिया न ब्लू फिल्म तो तो ये बंबइया फिल्म देखना भुल जायेगा।

भोला _पर ये तो गंदी फिल्म होती है न सुना है ऐसी फिल्म देखने के बाद लड़के बिगड़ जाते है।

रेखु _हा, बच्चों को ये फिल्म नही देखनी चाहिए। पर हम तो जवान हो चुके है न। एक दो सालो के बाद हमारी शादी हो जायेगी। शादी से पहले कुछ सीख ले तो जवानी का अच्छे से मजा लूट सकेंगे।

भोला _अबे, घर में किसी को पता चल गया तो की गंदी फिल्म देखकर आया है, तो,,, न बाबा न, मुझे नही देखना गंदी फिल्म।

रेखु _अरे यार किसी को पता नही चलेगा। ऐसी फिल्म खुले में थोड़े ही चलाते है, वो तो बंद कमरे में कुछ खास दोस्तो के बीच दिखाया जाता है।

भोला _पर किसी ने बात फैला दी तो।

रेखु _किसकी हिम्मत है, साले की? साले की जांघ तोड़ देंगे।

भोला _ऐसी बात है तो फिर कल सोचेंगे क्या करना है?

रेखु _ये हुई न बात।

दरअसल उस समय रंगीन टीवी पर वीसीआर के माध्यम से वीडियो कैसेट चलाकर लोग विभिन्न कार्यक्रमों में वीडियो दिखाया जाता था। पास के शहर से इसे किराए पर मंगाया जाता था। इसे चलाने वाला स्वयं टीवी वी सी आर वीडियो कैसेट लेकर आते थे।

शाम को जब वीडियो दिखाया जाता तो पूरे गांव के लोग वीडियो देखने एकत्र हो जाते थे।

उस समय ब्लू फिल्म का वीडियो कैसेट भी आता था जिसे युवा लोग चोरी छिपे देखते थे।

अगले दिन राजू ने अपने बेटे के जन्म दिन पर वीडियो दिखाने के लिए शहर से किराए पर वीडियो सेट मंगाया था।

शाम को वीडियो चलाया गया। जिसमे राजेश खन्ना धर्मेंद्र एवम जितेंद्र की, अमिताभ की फिल्म के कैसेट मंगाया गया था।

वीडियो शुरू होते ही गांव के बच्चे बूढ़े महिलाए और युवा वीडियो देखने एकत्र हुवे। भीड़ बहुत अधिक थी। इधर घर में गुलाबो ही थी, जो खाना बना रही थी। छोटी बच्ची को छोड़कर सभी वीडियो देखने चले गए। भोला भी रेखु के साथ वीडियो देखने गया था।

रात में भोजन करने जब किशनू घर आया तब उसने बच्चों के बारे में पूछा की सभी कहा है, तब गुलाबो ने बताया की सभी वीडियो देखने गए है। जाओ उन्हें भोजन के लिए बुला लाओ।

किशनु बच्चों को बुला ने चला गया। वहा पर थोड़ी देर रुककर वह भी विडियो देखा फिर भोला सहित सभी बच्चों को खाना खाने के लिए चलने कहा सभी बच्चे जाना नही चाहते थे पर किशनु ने उन्हें डाट कर घर ले गए।

भोला से कहा चलो बेटा तुम भी घर जाकर खाना खा लो फिर आजाना देखने।

भोला _ठीक है बापू चलो आप चलो मैं आता हूं।

भोला जब घर जाने को huwa तब

रेखु _भोला खाना खा कर जल्दी आना, रात का मस्त प्रोग्राम है।

भोला _ठीक है बे आ जाऊंगा।

भोला भी घर चला गया।

घर पर सभी लोगो ने साथ बैठकर भोजन किया।

भोजन करने के कुछ देर बाद किशनु खेत चला गया और भोला गुलाबो को बताकर वीडियो देखने।

गुलाबो ने भी जब भोजन कर बर्तनों की सफाई कर ली, तब वह भी बच्चों को लेकर वीडियो देखने चली गई। एक फिल्म खत्म हो चुकी थी दूसरी फिल्म चल रही थी। गुलाबो वीडियो देखने वहा पहुंची।

सभी लोग मजे से फिल्म देख रहें थे। एक फिल्म देखने के बाद गुलाबो बच्चों को लेकर घर चली गई।

जैसे जैसे रात होते गई, लोगो की भीड़ कम होते गई। रात के दो बजने के बाद कुछ ही महिला बैठी थी। बांकि सब पुरूष थे।

भोला _अबे यहां तो महिला पुरूष सब अभी भी बैठे है। कुछ देर बाद तो सुबह हो जायेगी, ब्लू फिल्म का क्या huwa

रेखु _तू देखना अभी आगे क्या होता है?

राजू और उसके दोस्त आपस में कुछ बात करने लगे।

राजू ने वीडियो चलाने वाले के कान में कुछ कहा।

4फिल्म पूरी हो जाने के बाद अगली वीडियो कैसेट जब चलाने को वी सी आर पर लगाया तो वीडियो अटकने लगा।

कुछ देर तक बनाने का नाटक किया। राजू ने पूछा क्या huwa भाई, कुछ समस्या है क्या?

वीडियो चलाने वाले ने कहा हां भैया लगता है वी सी आर में कुछ खराबी आ गया है। सभी लोग निराश हो गए।

वीडियो चलाने वाले ने कहा की बड़ा मुस्कील है इसका बन पाना।

सभी लोग निराश होकर अपने अपने घर चलने लगें।

अंत में कुछ लड़के लोग ही बच गए जिन्हें पता था की उनकी प्लानिंग क्या है।

वीडियो को गांव के चौक पर चलाया जा रहा था, उसे घर के एक कमरे मे ले जाया गया।

सभा लड़के कमरे के अंदर चले गए भोला और रेखु भी।

सभी लड़के अश्लील हसी मजाक करने और वीडियो चलाने वाले से जल्दी ब्लू फिल्म लगाने बोल रहे थे।

कुछ देर बाद ब्लू फिल्म शुरु हो गया।

सभी लड़के मजे से ब्लू फिल्म देखने लगें। यह अंग्रेजी फिल्म थी। जिसमे विदेशी महिला पुरूष पूरे नंगे होकर chudai का खेल खेलने लगे।

महिला द्वारा पुरुष का land हिलाना,चूसना, पुरुष द्वारा महीला को उत्तेजित करने के लिए उसके चूची को मसल मसल कर पीना, उसके ओंठ चूसना उसकी chut चाटना।

पुरूषों द्वारा महिलाओ के बुर चोदना गांड़ मारना। महिलाओ द्वारा मजे से चीखना सिसकना ग्रुप सेक्स एक पुरुष द्वारा दो महीला को चोदना एवम एक महीला का दो पुरूषों के साथ सेक्स दृश्य को देखकर सभी लडके उत्तेजित हो गए थे। सभी आंखे फाड़े ब्लू फ़िल्म देख एवम अपने खड़े land को मसल रहे थे।

तभी एक लड़का रूम से बाहर निकला।

राजू _अरे बिरजू तू कहा जा रहा है।

रेखु _लगता है बिरजू से बर्दास्त नही हो रहा है, मुठ मारने जा रहा है।

सभी लडके हसने लगे।

बिरजू सच में बहुँत उत्तेजित हो गया था वह बाहर जाकर मुठ मारकर अपना पानी निकाला तब उसे राहत महसूस huwa, मुठ मार लेने के बाद वह फिर से कमरे में आ गया।

रेखु _क्यू बे हो गया ख़ाली।

सभी लड़के हसने लगे।

बिरजू _पता नही तुम लोग कैसे बर्दाश्त कर लेते हो मूझसे तो बर्दास्त ही नही होता भाई।

भोला ब्लू फ़िल्म पहली बार देख रहा था। वह सेक्स क्रियाओं से अनभिज्ञ था। सेक्स क्रियाओं को बड़े आश्चर्य से आंखे फाड़े देख रहा था। वह भी बहुत उत्तेजित हो गया था।

उसने देखा सभी लडके अपना land मसल रहे हैं।

कमरे में आह ऊं की आवाज़ गूंज रही थी। जो वीडियो में chudte हुवे महिलाओ के मुंह से निकल रही थी।

राजू, तो हैरान था की दुनियां में ऐसा सब कुछ भी होता है।

तभी वीडियो देखते हुवे एक लडके ने कहा अरे यार मैने कल सुधा ताई को ऐसे ही पोजीसन में chudai लिया था, सच में इस पोजीसन में चोदने से बड़ा मजा आता है।

रेखु _अबे जानते है, तू अपनी ताई का लेता है, तेरे तो बड़े मजे है एक हम हैं जो मूठ मारकर काम चला रहे है।

सभी लडके हसने लगे।

राजू _अरे रेखूं, तू भी पता ले किसी गांव की औरत को यहां तो एक से बढ़कर एक मॉल है।

रेखु _इच्छा, तो होता है राजू की किसी गांव की महीला को पटा लूं, पर लोगो को पता चले तो घर वालों की बदनामी हो जाएगी, यही सोचकर कदम पीछे खींच लेता हूं।

बिरजू _रेखु भाई ये जवानी बार बार नही आती जीतने मज़ा लूटना है लूट लो वैसे भी वो जवानी जवानी ही क्या जिसमे कोई कहानी न हो।

सभी लड़के बिरजू की बात हा में हा मिलाने लगे।

राजू _वैसे बिरजू तू तो बता रहा था न की तू अपने भाभी को लाइन में ला रहा है? क्या huwa बात आगे बड़ी की नही।

बिरजू _अरे राजू भाई, क्या बताऊं रविवार को मै भाभी का दिन में जमकर ले रहा था की मां आ गई और हमे chudai करते पकड़ ली। मां अब भाभी को अकेली नहीं छोड़ती। chudai करने का मौका ही नहीं मिलता।लगता है कोई दूसरा जुगाड करना पड़ेगा।

बिरजू _राजू भाई तेरा भी तो शादी से पहले चाची के साथ सेटिंग था न। चाची की अभी भी chudai करता है की सब बंद कर दिया।

राजू _अरे यार, चाची बड़ी मस्त मॉल है साली। क्या मजा देती हैं शाली? ऐसा मज़ा तो बीवी को चोदने में नही आता।

घर वालों ने चाची को चोदते हुए पकड़ लिया। फिर बापू ने जबर्दस्ती मेरी शादी करा दी।

फिर भी घर वालों से छुपकर अभी भी मौका पाकर चाची और मई अपनी प्यास बुझा लेते है।

बिरजू _राजू भाई मैने तो सुना है की हरिया काका अपनी ही बेटी का ले लेते हुए पकड़ा गया क्या ये सच है।

राजू _अरे, हा यार सुना तो मैं भी हू, हरिया काका तो एक नम्बर एक चोदक्कड़ है। गांव की कई महिलाओ के साथ उसके संबंध है।

रेखु _अरे यार आजकल तो लडके मौका मिले तो अपने मां का ही बजाने लगते हैं,तो बेटी क्या?

राजू _अरे भोला, तू चुप चाप बैठा है? तुम भी तो कुछ बोलो। अभी तक कही मजा लिया है कि नही।

रेखु _अरे, राजू भाई भोला तो इस मामले में सच मूच में बड़ा भोला है। ये तो ब्लू फ़िल्म देखने के लिए ही काफी मुश्किल से यहां आया है।

वैसे इसका उभरा huwa पैंट बता रहा है कि इसको ब्लू फ़िल्म देखने में मज़ा आ रहा है क्यू भोला?

भोला _क्यू मजाक बना रहा है यार, मै तो ये फ़िल्म देखकर हैरान हूं की दुनियां में ऐसा भी होता है।

रेखु _चलो अब इस फ़िल्म को देखकर तो तुम कुछ सीखोगे।

राजू ने रेखू के कान में धीरे से कहा "वैसे तो गुलाबो चाची जैसी मस्त तो इस गांव में कोई है नही कास मेरी मां इतनी खूबसूरत और सेक्सी होती तो मजा आ जाता।

रेखु _राजू भाई ये क्या कह रहा है धीर बोलो, कही भोला ने सुन लिया तो गजब हो जायेगा,भुल गया क्या?मंगलू ने इसकी बहन रूपा के बारे में कुछ गंदा बोल दिया थातो। इसने उसकी कितनी पिटाई किया था।

राजू _हा, यार, पुरा सांड है शाला। अकेले ही चार पर भारी है।

इस तरह सभी लडके बात चीत करते हुए ब्लू फ़िल्म का मज़ा लेने लगे। दो बार उस फिल्म को चलाकर मजा लिया। सुबह हो जाने के बाद सभी अपने अपने घर चले गए।

भोला घर आने के बाद सोने की कोशिश करने लगा पर उसके आंखों से नींद कोसों दूर था। उसके आंखों के सामने औरतों के बड़ी बड़ी चूचियां और chut नजर आ रहे थे।chudai दृश्यों को याद करने से उसका land तनकर खड़ा हो गया था। वह अपने हाथो से land सहलाने लगा उसे बड़ा अच्छा लगने लगा। उसका हांथ कब उसके land par चलने लगा उसे पता ही नहीं चला और एक समय ऐसा भी आ गया जब वह झड़ने वाला था। वह chudai दृश्यों को याद करके अपना हाथ land पर तेजी से चलाने लगा और कुछ देर में ही उसके हाथ पैर कपकापने लगें, उसके land ने पानी छोड़ दिया था। यह भोला का पहला स्खलन था। उसने देखा की उसके land से कुछ निकला है जिसके निकलने से उसे बड़ा बड़ा मज़ा आया। वह उस चिपचिपा द्रव को अपने उंगली से छूकर और सूंघकर देखा।

उसे ब्लू फिल्म के दृश्य याद आय, जिसमे पुरषो के land से भी ऐसा ही पानी निकलता जब वे औरतों के योनी में land डालकर अन्दर बाहर करते थे।

और पुरुष इसके बाहर आने पर आनद में कहराने लगते थे। सच में इसके land से बाहर आने पर बहुत अच्छा लगता है।

कुछ देर बाद रम में उसकी मां गुलाबों आई, अरे बेटा तुम तो अभी आए हो वीडियो देखकर, खेत जाओगे की नही की रोटी पहुंचाने मै चली जाऊ।

भोला _नही मां, मै खेत जाऊंगा तुम्हे जाने की जरूरत नहीं।

गुलाबों _तो, ठीक है जाओ नहाकर आ जाओ, अपने बापू के लिए रोटी ले जाना और वही खेत की झोपड़ी में आराम कर लेना।

भोला _ठीक है मां।

भोला नहाने चला गया, नहाकर आने के बाद खुद नाश्ता कर अपने बापू के लिए रोटी लेकर खेत चला गया।

खेत में जाकर अपने बापू को बताया की उसे नींद आ रही है।

किशनु _बेटा रात भर जागे हो तो नींद तो आयेगे ही जाकर झोपडी में तुम आराम करो। नही तो तबियत खराब हो जायेगी।

भोला _ठीक है बापू।

भोला _झोपड़ी में जाकर खाट में लेट गया। सोने की कोशिश करने लगा। पर उसके आंखों में chudai दृश्य ही घूम रहे थे। काफी देर बाद उसे नींद लगी।

दोपहर के समय गुलाबो खाना लेकर बच्ची के साथ पहुंची।

उसने देखा की भोला सोया huwa है, अरे बेटा लगता है सुबह से सोया है, उठ जा, भुख लगी होगी खाना खा ले।

मां के उठाने पर भोला नींद से जागा।

भोला _अरे मां तुम आ गई।

गुलाबो _और नही तो क्या? देखो कितना समय हो गया है। चलो उठो खाना खा लो।

भोला उठ गया। वह बोर के पानी से हाथ मुंह धो लिया और अपने बापू को आवाज़ लगाया,, मां आ गई है खाना खा लो।

किशनु भी हाथ मुंह धो कर आ गया। गुलाबो ने दोनो को खाना परोसा, दोनो ने खाना खाया, कुछ देर आपस में बात चीत करते रहें फिर किशनु खेत में काम करने चला गया। इधर गुलाबो और भोला आपस मे बात चीत करने लगें, तभी बच्ची रोने लगी। हमेशा की तरह गुलाबो अपनी एक चूची ब्लाउज से बाहर निकालकर बच्ची को दुध पिलाने लगी। तभी भोला की नज़र उस पर पड़ी। भोला के नजरो में ब्लू फ़िल्म के दृश्य घूमने लगे किस तरह पुुरुष औरतों की बड़ी बड़ी चूचियों को मसल मसल कर चूस चूस कर उसकी chudai करता है। वह तो अब तक चूची को बच्चे के दुध पिलाने का अंग समझता था। पर चूची तो पुरुषो को खुब मजा देता है। पहली बार अपनी मां की चूची को देखकर उत्तेजित होने लगा। वह मां के सात बात चीत करते हुवे छोर नजरो से उसकी चूची उसकी निहारने लगा और ब्लू फिल्म में दिखाई गई औरतों से अपनी मां की चूची की तुलना करने लगा। उसने पाया की उसकी मां की चूची ब्लू फ़िल्म में दिखाई गई महिलाओ के चूची से ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक पाया।

वह मां से बात चीत करते हुए उसकी चूची को चोर नजरो से देखते हुवे नैन सुख लेने लगा। उसका शरीर गर्माने लगा।

कुछ देर बाद गुलाबो तो घर चली गईं। इधर गुलाबो के जाने के बाद भोला अपनी मां की चूची को इमेज करने लगा, क्या मस्त चूची है मां कि, उसका land तनकर खड़ा हो गया था। वह अपने लन्ड को सहलाने लगा। शाम होने के बाद वह घर चला गया।

वहा जाने के बाद वह अपनी मां के पास ही मंडराने लगा उसे मां के करीब रहना अच्छा लगने लगा। चोरी छिपे वह अपनी मां के जिस्म को निहारने लगता।

रात में वह अपने मां के मस्त चूची को इमेज कर मूठ भी मारा जिससे उसको बड़ा मजा आया।

इस तरह कुछ दिन निकल गया। उसके मन में अब मां के चूची को छूने और मसलने की इच्छा जाग गया था। पर उसे आगे बड़ने का कोई उपाय नज़र नही आ रहा था।

इधर गुलाबो को भी पता चल गया था कि भोला अब भोला नही रहा वह अब जवान हो गया है। वह जान चुकी थी की भोला चोड़ी छिपे उसके जिस्म को ताड़ता है।

हर औरत सामने वाले पुरुष की नजरो को समझ जाती की वह क्या देख रहा है। चाहे पुरुष कितनी भी सावधानी बरतें।

यह जानकर भी की भोला उसके जिस्म को चोरी छिपे निहारता है, और उसके आस पास रहने की कोशिश करता है। वह अपने व्यवहार में कोई बदलाव नहीं लाया, बल्कि न जाने क्यूं उसे भी अपने बेटे के करीब रहना अच्छा लगता था।

एक दिन भोला और रेखु शाम को टहलने के लिए तालाब की ओर गए थे। रेखु ने बताया,,,

रेखु _अबे, क्या तुम्हे पता है राजू का लड़का बीमार पड़ गया, उसे आज डॉक्टर को दिखाने शहर ले गयाथा।

भोला _क्यू बे क्या हो गया बच्चे को।

रेखु _अबे सुना है उसकी लुगाई की दुध नही आती, बच्चा कमजोर होकर बीमार हो गया।

भोला _अबे ये क्या कह रहा है?

रेखु _हा बे, ये सच है। डॉक्टर ने बच्चे को पानी में घोलकर पिलाने के लिए कोई पावडर दिया ।

भोला _अच्छा।

रेखु _डॉक्टर का कहना है की कुछ महिलाओ में ये समस्या होती है, पर चिन्ता की बात नही। डॉक्टर का दिया दुध पिलाने से बच्चा ठीक हो जायेगा।

भोला _चलो, ठीक है। पर क्या वह पावडर उतना पौष्टिक होगा जितना मां का दुध।

रेखु _क्या पता, होता होगा?

तभी तो डॉक्टर ने कहा बच्चा जल्दी ठीक हो जायेगा।

रात में भोला अपने कमरे में लेटकर रेखु के बातो के बारे में ही सोच रहा था, और कुछ सोचने के बाद मां के साथ मामले को आगे बड़ाने का एक उपाय सोचा।

अगली सुबह जब गुलाबो खाना लेकर खेत पहुंची ।

वह अपने बापू से कहा, बापू आज मुझे भूख नही लग रहा है, आप जाकर खाना खा लो मैं थोड़े देर बाद खाऊंगा।

किशनु _ठीक है बेटा।

किशनू जब खाना खा कर, काम पर लौटा तो वह भोला को जाकर खाना खाने के लिए कहा।

भोला, खाना खाने चला गया।

गुलाबो _अरे बेटा, भूख नही है क्या? तबियत तो ठीक है।

भोला _हा मां तबियत ठीक है। थोडा काम बाकी था न उसे निपटा दिया अब खाना निकालो, बड़ी भुख लगी है।

खाना खाकर भोला खाट पर लेट गया। छोटी बच्ची भी खाट पे लेटी थी, उसे चुटकी काट दिया जिससे वह रोने लगी।

भोला_मां लगता है गुड़िया को भुख लगी है। उसे दुदू पिला दो।

गुलाबो ने गुड़िया को गोद में उठा कर अपनी चूची ब्लाउज से बाहर निकाल दिया। और बच्ची के मुंह में चूची के निप्पल डालकर उसे चुप कराने लगी।

भोला अपनी मां के चूची का अपनी नजरो से रसपान करने लगा।

इधर गुलाबो ने यह जानकर भी की भोला उसकी चूची को दुसरे नजरो से देख रहा है, वह वैसे ही दुध पिलाने लगी।

भोला _मां रेखु बता रहा था की राजू का बच्चा बीमार पड़ गया है कल उसे डॉक्टर के पास ले गए थे।

गुलाबो _हा बेटा, मैने भी सुना है।

भोला _रेखु, बता रहा था की उसकी लुगाई को दुध नही आती जिससे बच्चा कमजोर हो गया था।

गुलाबो _हा मैंने भी सुना है।

भोला _पर मां उसकी लुगाई को दुध क्यू नही आ रहा है। उसको बच्चा हुवे कुछ दिन ही हुवे है। आपके तो बच्चा हुवे एक साल से ज्यादा होने के बाद भी गुड़िया के लिए भरपूर दुध आता है।

गुलाबो _बेटा उसकी लुगाई को कुछ समस्या होगी?

भोला _मां बच्चा को गाय का दुध भी तो पिला सकते होंगे।

गुलाबो _मां के दुध जितना बच्चे के लिए लाभकारी होता है उतना गाय का नही। कभी कभी तो गाय का दुध बच्चे को नुकसान भी कर देता है।

भोला _मां लगता है आपको भरपूर दुध आता है, देखो न गुड़िया पी पी कर कितना मोटी हो गई है।

गुलाबो हसने लगी,,

भोला _मां एक बात पूछूं।

गुलाबो _क्या है पूछो।

भोला _आपके सभी बच्चों में किसने आपका दुध सबसे ज्यादा पी है और कौन सबसे कम।

गुलाबो हसने लगी, क्यू जानकर क्या करेगा।

भोला _बताओ न मां मुझे जानना है।

गुलाबो _अरे तुम्हारे जन्म लेने के 2साल बाद ही रूपा का जन्म हो गया। इसलिए सबसे कम दूध तो तुमने ही पिया है।

भोला _हू, तभी तो कहूं तुम्हारे सभी बच्चों में सबसे कमजोर मै ही क्यू हूं?

रूपा को इतनी जल्दी पैदा करने की क्या जल्दी थी। मुझे ठीक से दुध भी नही पीना दिया। मेरा हक मूझसे छीन ली। भोला नाराज होते हुए कहा।

गुलाबो _बेटा, बच्चा होना तो भगवान के बस में है न मेरे बस में थोड़े ही है। मै भला क्या कर सकती थी।

भोला _लोग कहते है की मां के दुध में बहुत ताकत होती है। अगर मै ज्यादा दिनों तक दुध पिया होता तो और ताकतवर होता।

गुलाबो _तुम तो और लडको से ज्यादा ताकतवर लगते हो ।

भोला _मां क्या तुम अब मुझे अपना दुध नही पिला सकती।

गुलाबो हसने लगी,,

भोला _हस क्यू रही हो?

गुलाबो _हसू नही तो और क्या करू?

इतने बड़े होकर मां की दूध पियोगे।

भोला _क्यू नही पी सकता? क्या मैं तुम्हारा बेटा नही? क्या तुम्हारे दुध पर मेरा हक नही, बोलो।

गुलाबो हसने लगी,,

भोला_हस क्यू रही हो जवाब दो।

गुलाबो _हा बाबा तुम्हारा हक है, पर अब तुम बड़े हो गए हो। किसी ने देख लिया न मां की दुध पीते तो लोग तुम्हारा और मेरा मजाक उड़ाएंगे।

भोला _नही मां मै कुछ नही जानता, मुझे आपका दुध पीना हैचाहे कोई कुछ भी कहे।

गुलाबो हंसते हुवे,,,

गुलाबो तू तो छोटे बच्चों की तरह जिद करने लगा।

बेटा जब बड़ा हो जाय तो उसे मां का दुध नही पीना चाहिए।

लोग इसको पाप मानते हैं?

भोला _कैसा पाप, मै समझा नही।

गुलाबो _अभी नही समझेगा, जब तुम्हारी शादी होगी तब खुद ही समझ जायेगा।

भोला _पर मां मेरी शादी तो अभी लेट है। मेरी बापू तो बोल रहे थे की रूपा और मेरी शादी साथ में ही करेंगे।

गुलाबो _हा, तो क्या huwa तब तक इंतजार कर।

भोला _नही, मुझे इंतजार नही करना, मुझे दूध पीना है। नही तो मैं आपसे बात नही करूंगा?

गुलाबो _अच्छा मै भी तो देखू मूझसे कितने दिनों तक बीना बात किए रह सकता है?

कुछ देर बाद गुलाबो, घर चली गईं। भोला अपनी मां को जाते हुवे देखने लगा और मन में सोचने लगा।

मां, मै भी देखता हूं कि कितने दिन तक मुझे दूदू पीने से रोकती हो।

जब शाम को भोला घर पंहुचा। तब वह अपने मां के आस पास ही मंडराने लगा। जब आस पास कोई नही होता तब, भोला कहता,, मां मान जाओ न मुझे दुदू पीने दो।

गुलाबो मुसकुराते हुवे उसे ठेंगा दिखाती।

गुलाबो,_तुम तो मूझसे बात चीत बंद करने वाले थे न। क्या huwa

भोला _मां मै आपसे बिना बात किए क्या रह सकता हूं?

गुलाबो _क्यू नही रह सकता?

भोला _क्यू, की मां हो आप मेरे, और मै आपसे बहुत प्यार करता हूं। पर तुम मुझे प्यार नही करती?

गुलाबो _क्यू ऐसा क्यू लगता है की मैं तुम्हे प्यार नही करती?

भोला_प्यार करती तो मेरा कहना मानती मेरी ईच्छा पुरी करती।

गुलाबो _ओ हो, तो ऐसी बात है, तब तो सोचना पड़ेगा इस बारे में।

भोला _मां सच में, क्या मुझे दुदू पीने दोगी, भोला खुश होते हुए बोला।

गुलाबो _ठीक है, पी लेना पर यहां घर में नही कोई भी देख सकता है। कल खेत में।

भोला, गुलाबो को पीछे से पकड़ कर अपने बाहों में भर लिया। शुक्रिया मां।

गुलाबो _छोड़ बदमाश क्या कर रहा है? तेरे बहन लोग घर में ही है।

भोला _देख लेने दो मै कह दूंगा की अपनी मां को प्यार कर रहा हूं।

गुलाबो _अब छोड़ो नही तो सच में कोई आ जाएगा।

भोला ने गुलाबो को छोड़ दिया और बोला मां मै थोडा दोस्तो के साथ टहल कर आता हूं।

गुलाबो _ठीक है बेटा, पर जल्दी आना कुछ देर में भोजन का समय हो जायेगा।

अगले दिन खेत में भोला अपनी मां की आने का बेशब्री से इंतजार करने लगा। क्यू की आज उसको दुदू पीने देने को जो बोली है?

निर्धारित समय पर गुलाबो खाना लेकर खेत पहुंची। खाना के लिए भोला को आवाज़ लगाई।

भोला _बापू मां खाना लेकर आ गई है, आप जाकर खा लो मैं थोड़े देर बाद खाऊंगा।

किशनु _क्यू बेटा तुम भी चलो साथ में खाते हैं?

भोला _बापू अभी पेट में कुछ भारी पन है, मै थोड़े देर बाद खाऊंगा।

किशनु भोजन करने चला गया जब वह भोजन करके लौटा तो भोला से बोला, जाओ बेटा तुम भी जाकर खाना खा लो।

भोला _ठीक है बापू।

किशनू _खेत में काम करने लगा और भोला झोपडी की ओर जाने लगा।

भोला को देखकर गुलाबो बोली, क्यू भुख नही है क्या?

अपने बापू के साथ क्यू नही खाना खाया।

भोला _वो इसलिए की बापू के साथ खाना खाता तो दुदू पीने को कैसे मिलता।

तुम बोली थी की आज दुदू पिलाओगी।

गुलाबो _, न बाबा मै तो ऐसे ही कह दिया था। चलो खाना खा लो।

भोला _मां, तुम मूझसे झूठ बोली। ठीक है मुझे भी भूख नही है मैं खाना नही खाऊंगा। मै जा रहा है।

गुलाबो हंसते हुवे।

गुलाबो _अरे बाबा, तुम तो नाराज ही हो गए। अच्छा बाबा पी लेना, पर पहले खाना खा लो।

भोला _सच मां।

गुलाबो _हा

भोला _तब तो जल्दी खाना निकालो मुझे बहुत भुख लगी है।

गुलाबो ने खाना निकाला और भोला ने कुछ ही देर में खाना खत्म कर दिया।

और खाट में बैठ गया।

गुलाबो बर्तन धो कर झोपडी में आ गई।

भोला ने गुलाबो को खींचकर अपने गोद में बिठा दिया।

गुलाबो _ये क्या कर रहा है बदमाश छोड़ मुझे।

भोला _चलो दुदू पिलाओ मुझे।

भोला अपने हाथ को सामने ले जाकर ब्लाउज के बटन खोलने लगा।

गुलाबो _भोला, छोड़ो मुझे कोई देख लेगा तो गजब हो जायेगा।

भोला _मां कौन देखेगा यहां, बापू तो खेत के काम में लगा है। मेरे और तुम्हारे अलावा है कौन।

गुलाबो _ये गुड़िया तो है।

भोला हंसते हुए कहा, गुड़िया को को क्या मालूम की उसकी मां और भईया क्या कर रहे हैं।

भोला ने गुलाबो की ब्लाउज की बटन खोल दिया। और अपनी मां को एक जांघ पर बिठा कर उसकी एक चूची अपने मुंह में भरकर चुसने लगा। एक हाथ से अपने मां को सम्हाल कर दुसरे हाथ से एक चूची मसल मसल कर दूध पीने लगा।

भोला की इस हरकत से गुलाबो गर्म होने लगी।

गुलाबो _बेटा अब बस करो कोई आ जाएगा

भोला _मां यहां कोई नहीं आएगा। तुम बेकार ही डर रही हो।

भोला गुलाबो की दोनो चूची को एक एक कर मसल मसल कर पीने लगा। जिससे गुलाबो गर्म हो गई। वह आंखे बंद कर ली। और सिसकने लगी।

थोड़ी देर बाद, गुलाबो जोर लगाकर भोला के गोद से खड़ी हो गई।

भोला _मां क्या huwa?

गुलाबो _बेटा, बहुत पी लिया। अब बस कर।

गुलाबो अपने ब्लाउज का बटन लगाने लगीं।

इधर भोला खाट में लेटकर अपनी मां को ब्लाउज का बटन लगाते हुएदेखने एवम अपनी कामयाबी पर मुस्कुराने लगा।

भोला _मां सच में तुम्हारा दुध बड़ा स्वादिष्ट है। मेरा तो इसे पीते रहने का मन करता है।

गुलाबो मुसकुराते हुवे बोली चल हट बेशरम इतना बड़ा होकर मां का दुध पीता है।

कुछ देर बाद गुलाबो बच्ची को लेकर घर चली गई।

अब तो भोला का रोज का यह काम हो गया। वह हर रोज गुलाबो को भोजनकरने केबाद अपनी गोद में बिठाकर उसकी चूची मसल मसल कर दूध पीता और उसकी चूची की तारीफ़ करता, उसका land उसके मां के गोद में बैठते ही तन जाता था जिसका एहसास गुलाबो को होते ही वह भी काफी उत्तेजित हो जाती।

घर में भी जब भी मौका मिलता गुलाबो की चूची को मसल देता, उसे पीछे से बाहों मे भर लेता। गुलाबो को भी मज़ा आता था। लेकिन घर में कोई देख न ले करके वह भोला को अपने से दूर कर देता।

मां बेटे के बीच यह खेल चलता कुछ दिन और निकल गया।

एक दिन भोला को कुछ काम था तो वह घर चला गया। इस समय घर गुलाबो छोटी बच्ची को सुलाकर खाना बनाकर घर के पीछे बने कुंआ में नहाने चली गई। यह उनका रोज का काम था। नहाकर गीले कपड़ों में घर में आती और कमरे मे कपडे बदलती।

जब घर में भोला पंहुचा तो घर का दरवाज़ा बंद था पर दरवाज़ा की कुंडी लगी नही थी तो वह दरवाज़ा खोलकर अंदर आ गया और अपनी मां को इधर उधर देखा। तो कही नही दिखी।

इस समय गुलाबो अपने कमरे मे थी और कपडे बदल रही थी।

जब भोला मां को ढूंढते हुए उसके कमरे मे पंहुचा।

तो उस समय गुलाबो सिर्फ पेटिकोट में थी।

अपनी मां को आवाज़ देते हुए जैसे ही वह कमरे मे गया अंदर का नजारा देखकर उसके शरीर में खून दो गुनी गति से दौड़ने लगा।

इधर भोला की आवाज़ सुनकर गुलाबो चौंक गई। और ब्लाउज से अपनी चूची को छुपाते हुए बोली।

अरे बेटा तू इस समय खेत से कैसे जल्दी चला आया।

भोला अपनी मां को एकटक देखता रहा, अपने बेटे को ऐसे देखते उसकी दिल की धड़कन बड़ गई।

भोला ने कहा, मां वो कुछ काम था तो घर आ गया।

और अपनी मां को पीछे से बाहों मे भर लिया।

गुलाबो _बेटा ये क्या कर रहा है छोड़ो मुझे कपडे बदलने दो, तुम जाओ यहां से।

भोला _मां, थोडा दूध तो पिला दो।

गुलाबो _अभी नही, मुझे कपडे पहन लेने दो, मुझे शर्म आ रही हैं।

भोला गुलाबो के हाथो से ब्लाउज पकड़ लिया जिससे वो चूची को छिपाने की कोशिश कर रही थी, और उसे फेक कर दोनो हाथों से उसके चूची पकड़ कर मसलने लगाफिर एक चूची मुंह में भरकर चुसने लगा।

गुलाबो _बेटा छोड़ो न क्या कर रहे हों?

कोई आ जाएगा।

भोला _मां, अभी कौन आएगा, सब स्कूल चलें गए हैं।

गुलाबो _छोटी तो है बाहर खेलने गई है आ जायेगी तो।

छोटी 5साल की थी तो वह बाहर खेलने गई थी।

भोला _वो भी तो अभी बच्ची ही है आ भी जायेगी तो क्या जानेगी की हम क्या कर रहे हैं?

भोला का लन्ड तनकरलंबा मोटा और लोहे की रॉड की तरह कड़ा हो गया था, जो गुलाबो की गाड़ में चुभ रहा था। जिसका एहसास पाकर गुलाबो भी उत्तेजित हो गई।

भोला, गुलाबो को घुमाकर अपनी ओर कर लिया और दोनो चूची को हाथ में लेकर मसलने और चूसने लगा। गुलाबो सिसकते हुवे उसके सिर के बाल को सहलाने लगा। भोला खाट में बैठकर गुलाबो को अपनी गोद में बिठा दिया। कड़क land उसके चूतड पर चुभने से गुलाबो काफी उत्तेजित हो गई। गोद में बिठा कर उसकी चूची को मसल मसल कर पीने लगा। गुलाबो उत्तेजना में सिसकने लगी।

भोला ने एक हाथ से गुलाबो की चूची मसलते हुए दूसरा हाथ उसके बुर पर ले गया और उसे सहलाने लगा।

बुर पर हाथ पड़ते ही गुलाबो सिसक उठी वह सिसकते हुवे बोली।

बेटा वहा नही उसे मत छुवो, नही बेटा वहा नही,,

पर भोला नही माना और एक हाथ से चूची एक हाथ से बुर को मसलते हुवे उसके ओंठ चुसने लगा।

गुलाबो बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थी। अब भोला को रोक पाना उसके बस में नहीं था। उसकी आंखों की पुतलियां पलटने लगी थी।

वैसे भी उसको अपने पति से chudi बहुत दिन हो गए थे। और कुछ दिनों से भोला उसकी चूची को मसल मसल कर उसे बहुत गर्म कर देता था । वह अपने पति से chudna चाहती थी पर उन्हें मौका नहीं मिल रहा था।

अभी वह इतना उत्तेजित हो गई थी की वह भोला की किसी भी हरकतों का विरोध नहीं कर पा रही थी, भोला ने अपनी मां को घुमाकर उसका मुंह अपनी और कर लिया और उसकी चूची पीने लगा।

फिर उसे गोद में उठा कर खडा हो गया और जमीन पर लिटा दिया खाट पर तकिया उठा कर गुलाबो के सिर के निचे रख दिया। फिर झुककर उसकी चूची पीने लगा।

एक हाथ से उसकी बुर सहलाने लगा।

गुलाबो की मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

गुलाबो ने आंखे बन्द कर अपने को पुरी तरह भोला के हवाले कर दिया।

अब भोला खडा huwa और अपने पेंट और चड्डी को निकालकर अलग कर दिया। उसका land तनकर झटका मार रहा था।

भोला गुलाबो पर फिर झुका और उसकी चूची पकड़कर फिर से खेलने लगा।

बोला ने अब गुलाबो की पेटिकोट को ऊपर उठाया। गुलाबो उसे रोकने की नाकाम कोशिश की।

बेटा नही ऐसा मत करो।

मगर भोला के ऊपर भी हवस हावी था उसे सुनाई ही नही दिया की उसकी मां क्या कह रही है।

वह उसकी पेटिकोट को उठाकर उसकी कमर पर चढ़ा दिया। चूंकि उस समय गांव की महीला पेंटी नहीं पहनती थी अतः पेटिकोट ऊपर उठते ही गुलाबो का झांट से भरा chut भोला के आंखों के सामने आ गया।

भोला ने एक हाथ से गुलाबो की chut को सहलाया जिससे गुलाबो सिसक उठी। एक हाथ से अपने land सहलाने लगा। गुलाबो ने तो अपनी आँखें बंद कर ली थी।

भोला गुलाबो की टांग को फ़ैला दिया और उसके बीच में बैठ गई।

अपना एक उंगली गुलाबो की बुर के छेद में डालकर अन्दर बाहर करने लगा।

गुलाबो की मुंह से सिसकारी निकलने लगी। गुलाबो बहुत ज्यादा उत्तेजित थी उसकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी। जिससे भोला की उंगली भीग गया। अब भोला से भी काफी जोश में था उसका land झटके पे झटके मार रहा था।

वह अपने लन्ड के सुपाड़े को बुर के छेद में रखक रहल्का धक्का मारा जिससे land का टोपा बुर में चला गया। फिर एक जोर का धक्का मारा बुर गीली होने के कारण, land बुर को चीरता huwa फैच की आवाज़ करता huwa आधे से ज्यादा अंदर घुस गया।

गुलाबो के मुंह से सिसक निकल गई। अबे भोला गुलाबो की चूची को पकड़ कर उसे मसलते एवम चूसते हुए धीरे धीरे land को बुर में अंदर बाहर करने लगा।

Land बुर में धीर धीरे पुरा जड़ तक अंदर घुस गया।

Land अंदर बाहर होने से गुलाबो को बहुत मजा आने लगा । वह भोला के कमर को थाम लिया और उसे तेज तेज चोदने के लिए उकसाने लगी।

भोला अब land को तेज गति से बुर में अंदर बाहर करने लगा।

Land बुर में गपागप अंदर बाहर होने लगा। जिससे भोला और गुलाबो दोनो को बहुत मजा आने लगा दोनो स्वर्ग में पहुंच गए थे।

यह भोला का पहला chudai था। वह तो बहुत अधिक जोश में आ गया और गुलाबो की कमर को पकड़ कर दनादन chudai करने लगा। कमरा गुलाबो की सिसकारी से गूंजने लगा।

भोला का यह पहली बार था। वह ज्यादा देर तक टिक न सका और जोर जोर से चोदते हुए गुलाबो की कमर को अपने land se चिपकाकर आह आह करके झड़ने लगा।

गर्म गर्म वीर्य जब गुलाबो की कोख में गया तो गुलाबो का आनद दोगुना बड़ गया और वह भी झड़ने लगी।

भोला अपने मां के ऊपर ही कुछ देर लेटा रहा फिर वह उससे अलग होकर लेट गया।

जब गुलाबो होश में आई तो अपनी हालात देखकर बहुंट लज्जित महसूस की वह तेजी से उठी और अपनी ब्लाउज उठाकर पहनने लगी।

इधर भोला अपनी मां को कपडे पहनते हुवे देख रहा था।

कपडे पहन कर वह भोला की ओर देखी भोला और गुलाबो की नजरे मिली, गुलाबो लज्जित महसूस करते हुए, शर्माते हुवे कमरे से बाहर चली गई।

भोला ने भी अपना पेंट पहना और अपनी मां से दोस्तो के साथ कही जाने की बात कहकर घर से निकल गया।

इधर गुलाबो भोजन करने के बाद , किशनु के लिए भोजन लेकर खेत चली गई।

रात में जब भोला घर आया तो गुलाबो खाना बना रही थी। वह सीधा अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा और आज अपनी मां के साथ हुई घटनाक्रम को याद कर गर्म होने लगा।

कुछ देर बाद उसके बापू भोजन करने घर आ गए। तब भोला को रूपा खाना खाने के लिए बुलाने आई। भोला बिना किसी से बात किए खाना खाया फिर अपने कमरे में आकार सो गया। 3_दिनो तक उन दोनो के बीच कोई बात चित नही huwa, बात चित करने में उन्हें शर्म महसूस हो रही थी।

पर भोला को रात में ठीक से नींद नहीं आता, उसे अपनी मां के साथ किया सेक्स याद आता तो वह अपना land हिलाने लगता। धीरे धीरे स्थिति नार्मल होने लगा। और दोनो के बीच सामान्य बात चीत सुरु हो गया। जैसे उनके बीच कुछ huwa ही नही। ऐसे ही 5_6दिन निकल गए।

एक रात भोला को सेक्स करने की बहुन्त इच्छा होने लगी। उसे नींद नहीं आ रहा था। उसका सिर दर्द करने लगा। वह अपने खाट से उठा और अपने कमरे से निकल कर सीधे अपनी मां के कमरे की ओर जाने लगा। वहा जाकर देखा कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद था। वह धीरे से दरवाजा खटखटाया।

गुलाबो की नींद खुल गई वह इस समय गहरी नींद में नही सोई थी।

उसने सोचा इतनी रात को कौन हो सकता है?

वह दरवाजा खोली तो सामने भोला खडा था।

गुलाबो _बेटा तुम इस वक्त। अभी तक सोया नही। कुछ काम था क्या?

भोला _मां आपके पास दर्द की दवाई है क्या?

भोला _मां मुझे नींद नहीं आ रही हैं। सिर दर्द कर रहा है। मैने उस दिन दर्द की दवाई लाकर दिया था, वो बची है क्या?

गुलाबो _बची तो थी बेटा, आलमारी में रखी थी देखती हूं।

गुलाबो दवाई ढूंढने लगी। तभी भोला गुलाबो के पीछे आकर उसे बाहों में भर लिया। और पीछे से उसकी चूची को पकड़ कर सहलाने लगी।

वह अपने लन्ड को जो तनकर खड़ा था, को उसके गाड़ में दबा दिया।

गुलाबो सिसक उठी।

गुलाबो _बेटा ये क्या कर रहा है छोड़ो मुझे तुम्हारी बहने उठ जाएगी तो मुसीबत हो जायेगी।

पर भोला ने अपनी मां की बातो को अनसुना कर दिया और उसकी ब्लाउज को ऊपर उठा कर चूची बाहर निकाल दिया। उसकी एक चूची को मुंह में भरकर चुसने लगा।

गुलाबो सिसक उठी और गर्म होने लगी।

गुलाबो _बेटा छोड़ो न, तुम्हारी बहने उठ जाएगी तो गजब हो जायेगा। समझा करो।

भोला _मां क्या करू, 5_6दिनो से ठीक से सोया नही हूं। सर दर्द कर रहा है।

गुलाबो _क्यू, क्या हुवा?

भोला _तुम्हे प्यार करने का बड़ा मन कर रहा है।

गुलाबो _अच्छा, तो कर लिया न प्यार अब छोड़ो कोई देख लिया तो गजब हो जायेगा।

भोला _मां मुझे उस दिन की तरह प्यार करने दो न।

गुलाबो _न बाबा अभी तुम्हारी सभी बहने घर में है?

कोई उठ गई तो मुंह दिखाने लायक नही रहूंगी।

भोला _मां अभी तो सभी सो रही है। जल्दी हो जायेगा।

गुलाबो _न मै रिस्क नहीं ले सकती। छोड़ो मुझे।

और गुलाबो ने जोर लगाकर भोला को अपने से दूर कर दिया।

भोला _ठीक है, दो मुझे दवाई। अब तो रोज दवाई खाकर ही सोने पड़ेंगे।

गुलाबो ने दर्द की दवाई दे दी।

भोला दवाई लेकर अपने कमरे मे चला गया।

दवाई खा कर सोने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद। दरवाजा धकेल कर कोई अंदर आया।

भोला ने देखा उसकी मां गुलाबो उसके कमरे मे आई है।

भोला _अरि मां तुम, सोई नहींअब तक।

गुलाबो _गुलाबो ,भोला के खाट पर आकर बैठ गई।

अरे बेटा मैं ये देखने आई थी की तुम्हारा सिर दर्द ठीक huwa की नही।

Bhola _मां सिर दर्द तो ठीक है,पर नींद नहीं आ रही हैं।

गुलाबो _जानती थी तुम सोए नही होगे मै सरसो की तेल से तुम्हारे सिर की मालिश कर देती हूं।

भोला _ठीक है मां।

गुलाबो भोला के सिर की मालिश करने लगी।

मालिश कर लेने के बाद बोली, बेटा अब कैसा लग रहा है।

बड़ हल्का लग रहा है मां। शुक्रिया।

गुलाबो _अच्छा अब मैं चलती हूं।

गुलाबो खाट से उठकर जाने लगी, तभी भोला ने उसके हाथ को पकड़ लिया।

और खाट में बैठकर अपनी मां को अपने गोद में बिठा लिया।

उसकी चूची को हाथ में लेकर मसलने लगा।

गुलाबो सिसक उठी।

गुलाबो _बेटा, दरवाजा खुला है, उसे बंद कर देती हूं। नही तो कोई देख लेगा।

भोला खाट से उठा और दरवाजा बंद करने चला गया। इधर गुलाबो खाट में लेट गई।

भोला ने देखा उसकी मां खाट पर लेटी गई है।

वह अपना लूंगी और चड्डी निकाल दिया।

उसका land तनकर हवा में झटके मारने लगा। जिसे देखकर गुलाबो भी उत्तेजित हो गई।

गुलाबो _बेटा बल्ब बुझा दो।

भोला ने बल्ब बुझा कर चिमनी जला दिया और उसे खाट के पास दीवार पर एक छोटी सी अलमारी पर रख दिया। चिमनी की रोशनी में एक दुसरे को अच्छे से देख पर रहे थे।

भोला खाट के ऊपर चढ़ गया। और अपनी मां की टांगोंको फैलाकर उसके बीच बैठ गया।

वह अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा।

वह अपनी मां को ब्लाउज खोलने के लिए कहा।

गुलाबो ने ब्लाउज का बटन खोल दिया।

ब्लाउज खोलते ही उसकी बड़ी बड़ी दूध से भरी चूचियां बाहर आ गई। भोला उससे खेलना चूसना और दबाना शुरु कर दिया। स्तन मर्दन करने से गुलाबो बहुंत गर्म हो गई। उसकी chut में पानी भर गया।

भोला भी काफी उत्तेजित हो गया था, वह अपनी मां के बुर को पेटिकोट और साड़ी उठा कर नंगी कर दिया। और एक हाथ से सहलाने लगा।

गुलाबो सिसकने आनद में सिसकने लगी।

गुलाबो _बेटा जल्दी करो कही तुम्हारी बहने उठ न जाय। फुसफुसाते हुए बोली।

भोला _ठीक है मां अपनी टांगे तो फैलाओ। फुसफुसाते हुवे कहा।

गुलाबो अपनी टांगे और फैला दी जिससे बालोसे भरी बुर का छेद स्पष्ट दिखाए देने लगा।

भोला अब अपने land को पकड़कर गुलाबों के बुर के छेद पे रख दिया, और एक धक्का मारा। बुर गीली होने के कारण एक ही धक्के मेंबुर चीरकर आधा अन्दर घूस गया। गुलाबों के मुंह से आह निकल पड़ी।

अब भोला अपनी मां की चूची को मसलने और चूसने लगा। कुछ देर तक मसलने के बाद एक जोर का धक्का land से बुर पर मारा land पूरा जड़ तक बुर में घुस गया।

अब भोला land को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।land बुर के पानी में चिकना होकर आसानी से अंदर बाहर होने लगा।

भोला और गुलाबों दोनो को मज़ा आने लगा अब दोनो की तेज chudai की इच्छा होने लगी।

जोश में आकार जैसे ही जोर जोर से गुलाबों को चोदना शुरु किया, खाट से चर चर की आवाज़ आने लगी।

गुलाबों _फुसफुसाते हुवे, बोली, बेटा रूको

भोला _क्या huwa मां।

गुलाबों _बेटा, ये खाट तो आवाज़ कर रहा है, आवाज़ सुनकर कोई उठ गया तो गड़बड़ हो जायेगी।

भोला _तो क्या करे मां।

गुलाबों _बेटा, चलो नीचे।

दोनो खाट से उठ गए।

गुलाबो ने खाट पर बिछा मोटा चादर नीचे जमीन पर बिछा दी, और तकिया लगा दी।

गुलाबों चादर पर लेट गई।

भोला एक बार फिर अपने मां के टांगों के बीच आकार उकडू बैठ गया और अपना land गुलाबो के बुर में सेट कर धक्का लगा दिया,land एक ही बार में सरसरता huwa बुर के अंदर घूस गया।

अब भोला अपनी मां की चूची को मसल मसल कर land को बुर में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

गुलाबों तो जन्नत में पहुंच गई।

कमरे में गुलाबो की चूड़ियों की खनक खन खन, लन्ड का बुर में जाने की आवाज़ fach फच , गुलाबो की सिसकने की आवाज़ गूंजने लगी।

गुलाबो झड़ने वाली थी वह भोला की कमर पकड़कर अपनी कमर ऊपर उठा उठा कर land को बुर में लेने लगी। दोनो मां बेटे किसी दूसरी दुनिया में चले गए थे।

भोला से चुदवाने में गुलाबो को जो मजा आ रहा था ऐसा मज़ा उसे अपने पति से भी नही मिला था।

वह कुछ ही देर में भोला को जकड़कर झड़ने लगी। उसके हांथ पैर कपकापने लगी।

भोला कुछ देर रुक कर गुलाबो की चूची पीने लगा। गुलाबो फिर गर्माने लगी।

अब भोला खडा हो गया और अपनी मां को उठाकर उसे kutiya बना दिया उसने ब्लू फ़िल्म में देखा था किस तरह औरते पीछे से chudwati है। गुलाबो समझ गई की भोला क्या चाहता है?

वह घोड़ी बन गई।

भोला उसके पीछे जाकर घटने में खडा होl गयाl अपनी मां की चूतड को देखा तो पागल सा हो गया उसे चूमने सहलाने लगा।

गुलाबो सिसकने लगी।

गुलाबो _बेटा जल्दी करो, कोई जग न जाय।

भोला अपने खड़ा land एक बार फिर अपने मां के बुर के छेद में रखकर अंदर पेल दिया।land सरसराता huwa अंदर चला गया।

भोला अब अपनी मां की कमर पकड़ कर दनादन बुर की chudai करने लगा। इस आसन में भोला को दोगुना मजा आने लगा।

गुलाबो भी अपनी कमर हिला हिला कर भोला का सहयोग करने लगी।

कमरे मे एक बार फिर गुलाबो की सिसकने चूड़ी khankane और चूतड की थप थप की आवाज़ गूंजने लगी।

भोला अपने को और ज्यादा देर तक न रोक सका और एक जोर का धक्का मार कर गुलाबो की चूतड को अपनी कमर से सटाकर आह मां करके कराहते हुवे वीर्य की लम्बी लम्बी पिचकारी मारकर गुलाबो की बुर को भरने लगा।

गर्म गर्म वीर्य को गर्भाशय में जाता महसूस कर गुलाबो भी एक बार झड़ गई।

कुछ देर तक इसी अवस्था में रहने के बाद दोनो चादर पर लुड़क कर सुस्ताने लगे।

कुछ देर बादजब दोनो को राहत मिला तो गुलाबो खड़ी होकर अपनी साड़ी ठीक करने लगी। अपनी ब्लाउज का बटन लगाने लगीं। अपनी मां को ब्लाउज का बटन लगाते हुए देखकर भोला का land फिर तनकर खड़ा हो गया।

वह खड़ा होकर अपनी मां को फिर से बाहों मे भर लिया।

भोला _मां आओ न एक बार फिर करते हैं।

गुलाबो _नही बेटा, काफी देर हो गई है। कोई भी जग सकती है।

भोला _मां देखो न मेरा फिर खडा हो गया है।

गुलाबो _नही अभी नही, अब कल कर लेना। अभी जाने दो।

भोला _सच मां कल दोगी न।

गुलाबो मुसकुराते हुवे बोली _कर लेना, अभी जाने दो।

भोला खुश हो गया।

दूसरे दिन जब गुलाबो खेत गई तो भोजन करने के बाद अकेले में मौका पाकर भोला गुलाबो को अपनी गोद में बिठा कर उसकी चूची पकड़कर मसलने लगा।

गुलाबो _बेटा, छोड़ो मुझे नही तो पकड़े जाएंगे।

भोला _मां आओ न करते हैं बड़ा मन कर रहा है।

गुलाबो _नही यहां नही रात में। अब मुझे जाने दो।

भोला ने अपनी मां को छोड़ दिया।

रात में भोला खाना खा लेंने के बाद जब गुलाबो बर्तन धो रही थी। तब गुलाबो के पास जाकर उसके कानो में धीरे से कहा। मां मै रात को तुम्हारा इंतजार करूंगा।

गुलाबो मुस्कुराने लगी।

गुलाबो _चल जा अपनी कमरे मे सोचूंगी।

भोला अपने कमरे मे लेटकर अपनी मां की आने का इंतजार करने लगा।

इधर जब गुलाबो ने देखा की बच्चे सब सो गए हैं वह अपने कमरे से निकली और भोला के कमरे में जाकर दरवाजा बन्द कर दी।

भोला और गुलाबो फिर से chudai का मज़ा लेने लगे।

अब दोनो को जब भी मौका मिलता छुप छुप कर अपनी प्यास बुझाने लगे।

हर बार भोला अपना वीर्य को गुलाबो के कोख में छोड़ देता। जिसका नतीजा ये huwa की गुलाबो को गर्भ ठहर गया।

जब गुलाबो का मासिक धर्म निर्धारित समय पर नहीं आया तो वह समझ गई की वह पेट से हो गई है।

रात में जब वह भोला के कमरे में चुदवाने गई तो भोला को यह बात बताई की वह पेट से है।

भोला को चिन्ता huwa मां अब क्या होगा?

गुलाबो _अरे कुछ नहीं होगा। तुम्हारे बाप से कभी कभी chudwati हू वह समझे गा की वह उसका बच्चा है।

भोला खुश हो गया, और उस रात गुलाबो की जमकर chudai किया।

इधर गुलाबो अब बन ठन कर रहने लगी, उसकी सुंदरता दीन बदीन बढ़ती जा रही थी।

एक दिनजब गुलाबो कही बाहर जाने को तैयार हुई रूपा ने कहा,मां आज तो आप बहुत सुंदर लग रही हू। काकी भी कह रही थी की तुम्हारी मां क्या खाती हैं जो दिनबदीन जवान और सुंदर होती जा रही है।

भोला वही पर खड़ा था, गुलाबो और भोला एक दूसरे की ओर देख कर muskurane लगे।

एक रात रूपा को पेशाब लगी तो वह मूतने के लिए उठी और घर के आंगन में बने मोरी की ओर जाने लगी तभी उसे भोला के कमरे से किसी की सिसकने की आवाज़ सुनाई दी।

रूपा ने चारो ओर देखा कोई दिखाई नहीं दिया, उसने दरवाज़े की छेद से कमरे की अंदर देखने की कोशिश की। जब वह अंदर का नजारा देखी तो उसके पैरो तले जमीन खिसक गई।

उसने देखा की उसकी मां गुलाबो जमीन पर घोड़ी बनी हुई है और उसका भाई भोला उसके कूल्हे को पकड़कर धक्के मार रहा है। उसकी मां के मुंह से सिसक निकल रही थी।

वह आश्चर्य से उस दृश्य को देखने लगी, वह समझ चुकी थी की अंदर क्या चल रहा है?

उसे यकीन नहीं हो रही थी की उसकी मां गुलाबो अपने ही बेटे से यौन संबंध बना रही है।

वह आंख फाड़े अंदर के अकल्पनीय अविश्वसनीय दृश्य को बिनापलक झपकाए देखने लगी।

इधर कुछ देर में ही भोला अपनी मां के बुर में तेज धक्के मारते हुए जोर जोर से कराहते हुवे झड़ गया और मां बेटे दोनो थक कर जमीन पे ही लेट गए।

रूपा की सांसे तेज हो गई थी। जब मां बेटे के बीच chudai का खेल बंद huwa तब, रूपा यह भी भूल गई की वह क्या करने कमरे से बाहर निकली थी।

उसे मूत आना ही बंद हो गया था वह सीधे अपने रूम में जाकर अपनी खाट पर अपनी छोटी बहन के बाजू में लेट गई।

उसके आंखों के सामने वही दृश्य चलने लगा, वह रात में ठीक से सो नही पाई।

वह सुबह अपनी मां से इस बारे में बात करना चाही पर उसकी हिम्मत नही हुई।

अगली रात फिर वह अपने कमरे से चुपके से बाहर निकली, और भोला के कमरे को दरवाज़े के छेद से झांकने लगी। इस बार देखा की भोला जमीन में लेटा है और उसकी मां गुलाबो भोला के कमर पर बैठकर उछल रही है, भोला दोनो हाथो से गुलाबो की कमर को पकड़ा huwa है। इस दृश्य को देखकर रूपा भी गर्म होने लगी।chudai ka खेल बंद होने के बाद रूपा अपनी खाट पर जाके लेट गई।

और अपने मां और भईया के बीच चल रहे खेल को याद करके अपनी बुर सहलाने लगी, उसकी बुर में पानी आने लगा।

इस तरह अब रोज अपने भाई और मां के बीच चल रहें संभोग दृश्य को छुप छुप कर देखने लगी।

एक रात रूपा भोला के कमरे में झांक रही थी वह अंदर चल रहें सेक्स खेल को देखकर बहुत गरम हो गई और अपनी योनी में उंगली को अंदर बाहर करने लगी। दरवाजा की कुंडी लगी नही थी।

वह होश खो बैठी थी और दरवाज़े पर हांथ रख दी, दरवाज़े पर दबाव पड़ने से वह खुल गई।

दरवाजा खुलते ही गुलाबो और भोला की नज़र रूपा पर पड़ी। रूपा डर गई, और तुरंत अपने कमरे की खाट में जाकर लेट गई।

भोला _मां, रूपा ने हम दोनो को देख ली, अब क्या होगा?

गुलाबो _हां बेटा, वही हो गया जो नही होना चाहिए था। पर घबराओ नहीं, मै हूं न कुछ नही होगा।

भोला _अगर रूपा ने किसी को बता दिया तो।

गुलाबो _मै उससे बात करके आती हूं बेटा।

गुलाबो रूपा के कमरे में जाकर उससे बोली बेटी मेरे कमरे में आना।

रूपा डरी सहमी अपनी मां के कमरे मे चली गई।

गुलाबो _बेटी,भोला और मुझे ऐसी अवस्था में देखकर तुम्हे आश्चर्य हुई होगी। दुनियां इसे पाप जो समझती है। पर क्या करे, बेटी ये सब मुझे मजबूरी में करनी पड़ती है।

रूपा _कैसी मजबूरी मां?

गुलाबो _पहले ये बताओ तुम कब से देख रही हो?

रूपा _कुछ दिन पहले मां।

गुलाबो _बेटी किसी को इसके बारे में बताई तो नही। रूपा _नही मां, अभी तक तो नही।

गुलाबो _अच्छा की बेटी जो ये बात किसी को नहीं बताई। ऐसी बात किसी को बताई नही जाती। किसी बाहर वाले को पता चल गया तो घर की बड़ी बदनामी हो जाएगी। यह बात भुल कर भी किसी को न बताना?

रूपा _मां पर ऐसा गंदा काम आप दोनो करते क्यू हो।

गुलाबो _बताया न मजबूरी में!

रूपा _कैसी मजबूरी मां?

गुलाबो _बेटी, तुम्हारे भईया को एक बीमारी है?

रूपा _कैसी बीमारी मां?

गुलाबो _तुम्हारे भईया को नींद न आने की बीमारी हो गई है। रात में नींद न आने से उसका तबियत बिगड़ रहा था। जब डॉक्टर के पास गया तो बताया की खेतो में दिन भर मेहनत करने से उसके शरीर में गर्मी बड़ जाती है। जिससे रात में नींद नहीं आती।

हमने पूछा की इसका क्या इलाज है।

डॉक्टर ने बताया की शादी के बाद जब बीवी साथ सोएगा तो सब ठीक हो जायेगा।

हमने कहा की शादी तो अभी लेट है कोई दूसरा उपाय नहीं है क्या?

तब डॉक्टर ने नींद की गोली खाने को दी, और हिदायत दी तुम इसका आदत न बनाना नही तो बीना गोली के तुम्हे नींद नहीं आएगी। और तुम्हारा शरीर धीरे धीरे कमजोर हो जायेगा।

भोला ने एक दो रोज गोली खाकर देखा, गोली के असर सुबह तक रहने से उसके शरीर में सुस्ती रहने लगा उसे काम करने का मन नहीं करता।

तब एक रात मैं भोला के कमरे मे गई और कहा बेटा तुम ये गोली मत खाओ, इससे तुम्हारा तबियत और खराब हो जायेगा।

भोला ने कहा की मां गोली नही खाऊंगा तो नींद नहीं आएगी।

बेटा डॉक्टर ने कहा था की जब तुम अपने बीवी के साथ सोवोगे तो सब ठीक हो जायेगा?

भोला ने कहा, पर मेरी शादी नही हुई है मां।

मैने कहा मैं सोऊंगी तुम्हारे साथ।

भोला ने कहा की, पर लोग तो इसे पाप समझते हैं न। और किसी को पता चल गया तो।

गुलाबो _लोग इसे जो भी समझे पर मै अपने बेटे को ऐसी हालात में नही देख सकती।

रही बात किसी को पता चलने की तो यह बात सिर्फ हम दोनो तक ही रहेगी किसी तीसरे को इसके बारे में कुछ पता नही चलेगा ।

इसके बाद मैं रोज भोला के कमरे में जाकर उसके साथ सोने लगी। इससे उसको अच्छी नींद आने लगी जिससे वह पूरी तरह ठीक हो गया।

अब तुम ही बताओ बेटी मैने गलत किया की अच्छा।

अगर लगता है की सब गलत है तो कल से मैं भोला को उसके हाल पर छोड़ दूंगी। उसके साथ नही सोऊंगी।

रूपा _तुमने कोई गलत नहीं किया मां , तुम्हारी जगह मै भी होती तो शायद यहीं करती।

गुलाबो _मुझे मालूम था बेटी की तुम समझदार हो तुम परिस्थिति को जरूर समझोgi । पर बेटी तुम यह बात किसी को भी न बताना, अपनी बहन एवम बापू को भी।

रूपा _तुम चिन्ता न करो मां , मै किसी को नहीं बताउंगी।

गुलाबो _मुझे तुमसे यही उम्मीद है बेटी। अब तुम जाओ और अपने कमरे मे जाकर लेट जाओ।

रूपा _ठीक है मां।

रूपा चली गई।

जब गुलाबो ने देखा की रूपा अपने कमरे में जाकर दरवाजा बन्द कर दी तो वह भोला के कमरे में चली गई।

भोला _क्या huwa मां? रूपा से बात की।

गुलाबो _हा बेटा अब डरने की कोई बात नही, मैने उसे अच्छी तरह से समझा दिया है।

भोला _मां तुमने रूपा से क्या कहा?

गुलाबो ने सारी बातें बता दी कि उसने रूपा से क्या क्या कहा?

भोला _मां तुमने तो अच्छे से त्रिया चरित्र दिखाई, मान गया तुमको, ऐसा कहकर फिर से भोला ने गुलाबो की चूची दबाने लगा, और दोनो के बीच फिर से संभोग क्रिया शुरू हो गया। दोनो फिर से बेफिक्र होकर हवश का खेल खेलने लगे, कमरे में फिर से गुलाबो की सिसकारी गूंजने लगी। आह,, ऊं, उई मां, आह,, सी,, उन,,, मर गई मां,,, आह,, उन,,,, ले मां और ले ले और मज़ा ले,,, क्या मस्त मॉल है तू, कितना भी पेलो,मन ही नहीं भरता,,, तुम्हारी लेने में कितना मज़ा आ रहा है मैं बता नहीं सकता,,,,

इस तरह की आवाजे कमरे में गूंजने लगी।

अब रोज रात को मां बेटे के बीच यह खेल चलता इधर रूपा भी न चाहते हुवे भी चुपकेसे उठकर दरवाज़े की छेद से मां बेटे के बीच खेल देखकर मजा लेने लगी।

अपने बुर में उंगली डाल कर अंदर बाहर कर झड़ने लगी। वह भोला के साथ चुदवाने की सपना देखने लगी।

एक दिन खेत में गुलाबो ने भोला से कहा बेटा मुझे लगता है की रूपा रोज रात को दरवाजे की छेद से हमको देखती है।

भोला _मूझे भी लगता है मां,पर हम कर भी क्या सकते है?

गुलाबो _बेटा, रूपा की जल्द से जल्द शादी करानी पड़ेगी नही तो वह बिगड़ जाएगी। किसी के साथ कुछ गड़बड़ कर डालेगी तो घर की बदनामी होगी।

भोला_२माह बाद उसकी हाई स्कूल की परिक्षा है वह 18 की भी हो जायेगी। कोई अच्छा सा रिश्ता देख कर उसकी शादी कर देंगे।

एक रोज रूपा के लिए एक रिश्ता आया, लडके लोग अच्छे संपन्न घर से थे। लड़का भी सभी को पसंद आया तो रूपा की शादी उसकेसाथ पक्की कर दी गई। पढ़ाई रूपा की परीक्षा खत्म होने के बाद रूपा की शादी हो गई। वह अपने ससुराल चली गई।

इधर गुलाबो 7माह की गर्भ से थी। वह भोला के बच्चे की मां बनने वाली थी। दो माह बाद वह लडके को जन्म दी, किशनू को सभी लोग बधाई दिया की उसका लड़का huwa है।

इधर भोला भी खुश था की वह बाप बन गया।

बच्चे को जन्म देने के बाद गुलाबो और ने दो माह तक chudwana बंद कर दी।

इधर भोला का रात कटना मुस्किल हो गया था। पर वह कर भी क्या सकता था। किसी तरह 2माह निकाले।

इस दौरान गुलाबो खेत जाना बंद कर दी। भोला दोपहर में घर जाता और भोजन कर अपने बापू के लिए भी खाना ले आता।

जब भोला घर में खाना खाने जाता,तब सभी लडकिया स्कूल गई होती केवल गुडिया और 2माह का बच्चा ही घर में होता ।

एक दिन भोला थोडा जल्दी घर गया उस समय गुलाबो नहा कर घर में आई। तो गीले कपड़े बदलने कमरे मे गई। भोला से रहा न गया वह अपनी मां को बाहों मे भर लिया।

भोला _मां अब रहा नही जाता आख़िर और कितने दिनों तक मुझे अपने से दूर रखोगी।

वह अपनी मां की दूध से भरी चूची को मसलते हुवे कहा।

गुलाबो _बहुंत तड़प रहा है क्या?

भोला _हा मां, आज करने दो न।

गुलाबो _ठीक है जाओ बाहर का दरवाजा बंद कर दो नही तो कोई आ जायेगा।

भोला बाहर का दरवाजा बंद कर करके कमरे मे आ गया। गुलाबो गिला कपड़ा निकाल कर पेटिकोट पहन ली थी।

भोला ने उसकी पेटिकोट निकाल कर पूरी नंगी करके जी भर कर चोदा। एक माह इसी तरह chudai करने के बाद। गुलाबो एक दिन chudai करवाते समय भोला से बोली।

बेटा अब मेरा मासिक धर्म फिर से शुरू होने वाला है। तुम मेरे बुर में अपना पानी मत छोड़ना नहीं तो मेरा फिर से गर्म ठहर जायेगा।

भोला _ये तो खुशी की बात होगी न की तुम मेरे बच्चे की फिर से मां बनोगी।

गुलाबो _पर बेटा अभी बच्चा छोटा है, इतनी जल्दी फिर से मां बनना ठीक नही।

भोला _तो क्या करे मां।

गुलाबो _तुम अपने पे कंट्रोल करना सीखो और पानी बाहर निकाल देना।

भोला _पर मां जोश में कंट्रोल करना मुस्किल होगा।

मां अगर तुम चाहो तो एक उपाय है।

गुलाबो _कैसी उपाय बेटा?

भोला _मां , मैने ब्लू फ़िल्म में देखा है की औरते अपनी गाड़ भी चुदाती है और पुरुष अपना पानी उसी में छोड़ देता है। क्या तुम गाड़ नही chuda सकती।

गुलाबो _बेटा मैने भी सुना है की कुछ औरते गाड़ मरवाती है। पर मुझे डर लगता है कही गाड़ फट गई तो। छोटी सी गाड़ में इतना मोटा लण्ङ जायेगा तो गाड़ का क्या हाल होगा।

भोला _मां एक बार कोशिश करके तो देखो। धीरे धीरे छेद बड़ा हो जायेगा।

गुलाबो _ठीक है बेटा कोशिश करते हैं।

गजब गु लाबो ने पहली बार गाड़ मरवाई तो उसे बहुत दर्द huwa वह ठीक से चल नहीं पा रही थी।

फिर धीरे धीरे उसकी गाड़ का छेद चौड़ी होने लगा। अब वह भोला का land आसानी से गाड़ में लेने लगी। अब उसे गाड़ मरवाने में बड़ा मज़ा आने लगा।

भोला पहले गुलाबो की बुर जी भर कर चोदता था फिर गाड़ मारता और अपना पानी गुलाबो की गाड़ में छोड़ देता।

इधर रूपा भी पेट से हो गई थी और शादी के 10माह में ही एक लङकी की मां बन गई।

एक दिन रूपा अपनी 4माह की बेटी को लेकर पहली बार कुछ दिन रहने अपनी मायका आई।

जब भोला ने रूपा को देखा तो वह देखता , रूपा का बदन बच्ची को जन्म देने के बाद गदरा गया था।

एक दिन जब भोला दोपहर को खाना खाने घर गया तब रूपा अपनी बच्ची को दुध पिला रही थी। उसकी दूध से भरी मोटे मोटे चूचे को देखकर भोला का land तनकर खड़ा हो गया।

वह वही पर बैठकर रूपा से बात चित करने लगी। और उसके स्तन को चोरी छिपे देखने लगा। उसका land तनकर खड़ा हो गया था। वह बीच बीच में अपना land सहलाने लगता।

रूपा अपनी भाई की नज़र को भाप ली की भोला क्या देख रहा है।

उसे भी मज़ा आने लगा।

इधर गुलाबो भी भोला के लिए खाना लगाते हुवे उसके नजरो को देखी की वह क्या देख रहा है। पर बोली कुछ नहीं।

भोला जब भोजन करके खेत गया तो उसका मन रूपा के गदराया बदन और मस्त चूचों को याद कर बेचैन था उसका land बैठने का नाम नहीं ले रहा था।

रात में जब गुलाबो भोला के कमरे में चुदवाने गई, तो भोला दोगने जोश से अपनी मां को चोदने लगा।

गुलाबो _क्यू re आज तो कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया है। क्या बात है? गुलाबो चुदाती हुई बोली।

भोला अपनी मां को घोड़ी बना कर चोदते हुए बोला।

भोला _ऐसा तो कुछ भी नहीं है मां।

गुलाबो _मै सब समझती हूं, तू दोपहर में क्या देख रहा था?

भोला _कुछ भी तो नहीं मां।

गुलाबो _तुम रूपा के दुदू को चोरी छिपे देख रहा था न।

भोला का चोरी पकड़ा गया था अब झूठ बोलने का कोई फायदा नही था।

भोला _सॉरी मां मै बहक गया था। रूपा का बदन कितना गदरा गया है। कितनी खूबसूरती तो बच्चे को जन्म देने के बाद दोगुनी बड़ गई हैं।

गुलाबो _हा, वो तो है।

भोला अपनी मां की गाड़ को मारते हुवे कहा। मां अगर मै तुमसे एक बात कहूं तो तुम बुरा तो नहीं मानोगी।

गुलाबो सिसकते हुवे बोली _अरे नही रि मै भला तेरे बात को क्यू बुरा मानूंगी।

भोला _मां एक बार तुम रूपा की मुझे दिला दो न।

गुलाबो _मै जानती थी तेरे मन में क्या चल रहा है।

दिला तो दू पर रूपा की लेने के बाद मुझे तो नही भूला दोगे।

भोला _नही मां, मै तुम्हे कैसे भुला सकता हूं।

गुलाबो _जवान औरत पाकर, मुझ बुढ़िया को भूल तो नहीं जायेगा।

भोला _नही मां ये कैसी बात कर रही हो तुम अभी कहा बूढ़ी हुई हो। आज भी तुम इस गांव की सबसे खूबसूरत और सेक्सी औरत हो।

गुलाबो _अच्छा तो ठीक है, भेज दूंगी रूपा को कल तेरे कमरे में।

भोला _सच मां।

भोला खुश हो गया और जोश में आकार गुलाबो को हुमच हुमच कर चोदने लगा, कुछ देर में ही अपने land का सारा पानी गुलाबो की गाड़ में भर दिया।

अगले दिन भोला रात होने का बेशब्री से इंतजार करने लगा।

जब रात हुई तो गुलाबो रूपा के कमरे में गई।

रूपा अपनी बच्ची को दुध पिला रही थी।

रूपा _मां, तुम इस वक्त। आज भईया के के पास नही गई क्या?

गुलाबो _नही बेटी। आज मेरा पेट में दर्द है। हो सकता है की मेरा मासिक धर्म आने वाला हो।

बेटी मुझे तुमसे कुछ कहना था।

गुलाबो_बेटी, क्या तुम्हारे भइया के कमरे में मेरी जगह तुम नही जा सकती।

रूपा _मां मै, पर क्या भइया इसके लिए तैयार होंगे।

गुलाबो _मैने तुम्हारे भईया से बात कर ली है, वो तैयार है।

रूपा _क्या भईया तैयार है?

गुलाबो _हा बेटी!

रूपा मन ही मन खुश होने लगी। वह कितनी बार भईया से चुदवाने की सपना देख रही थी आज उसे मौका मिला है।

गुलाबो _बेटी, तुम तुम्हारे भईया के कमरे में जाओगी न।

रूपा _ठीक है मां, तुम कह रही हो तो चली जाती हूं।

गुलाबो _लाओ, बच्ची को मुझे देदो, तुम्हारे वापस आते तक मैं इसे सम्हालूंगी।

रूपा _ठीक है मां,

गुलाबो बच्ची को लेकर अपने कमरे में चली गई। इधर रूपा भोला के कमरे में जाने के लिए तैयार होने लगी वह नई साड़ी पहन ली और श्रृंगार कर ली। फिर वह भोला के कमरे की ओर चली गईं।

जब वह भोला के कमरे में गई तो भोला खाट पर लेटा था। रूपा को देखकर भोला बोला अरे रूपा तुम।

रूपा _भईया, ओ मां ने मुझे भेजी है।

भोला खुश हो गया। उसके शरीर में रक्त प्रवाह बड़ गया।

भोला _आओ खाट में बैठो।

रूपा खाट के किनारे बैठ गई।

भोला _आज तो तू दुल्हन की तरह लग रही है। भोला रूपा के गदराया बदन का मुआयना करने लगा। राकेश तो बड़ा किस्मत वाला है जो इतनी सुंदर बीबी पाया है। वो तुम्हे खुश तो रखता है न।

रूपा _हां, भैया। वो तो मेरे खुशी का हमेशा ख्याल रखते हैं । मेरा कहना कभी टालते नही। मेरे आगे पीछे ही मंडराता रहता है। मुझे अकेले कही जाने नही देते। बड़ी मुस्किल से मुझे मायके आने दिया।

भोला _उसकी बीवी इतनी सुंदर जो है, डरता होगा कोई उसे भगा न ले। भोला हसने लगा।

रूपा शर्मा गई।

भोला _अच्छा, तुम्हे पता है न कि मां ने तुम्हे यहां क्यू भेजा है।

रूपा ने शर्माते हुवे, हां में सिर हिलाया।

भोला के लिंग में तनाव बड़ने लगा।

भोला _तुम शादी होकर गई तो पतली दुबली सी थी। बच्ची जनने के बाद, तुम एक दम निखर गई हो। तुम्हारा बदन तो एक दम भर गया है।

भोला एक हाथ से रूपा की चूची मसलते हुवे कहा _कल तुम्हे मैने बच्ची को दुध पिलाते हुए देखा, काफी बड़े बड़े हो गए है तेरे।

लगता है राकेश का किया huwa है सब।

रूपा शर्माते हुए सिर झुका ली।

भोला _राकेश भी दूध पीता होगा। दुदू मसलते हुवे कहा।

रूपा _शर्माते हुवे बोली, उसे तो दूध पीना पसन्द नही।

भोला _पर मुझे तो बहुत पसंद है। तुमने तो देखी होंगी कि मां का दुध मै कैसे पीता हूं?

रूपा _हूं, आप तो रोज ही पीते हो। शर्माते हुए बोली।

भोला _कल जबसे तुम्हे बच्ची को दुध पिलाते देखा है मेरा मन तेरा दूध पीने के लिए बेचैन है। क्या तू मूझे अपना दुध पिलाएगी।

रूपा शर्म से गड़ने लगीऔर मुस्कुराकरदी।

भोला अब रूपा के ब्लाउज के बटन खोलने लगा। बटन खोलने में दिक्कत huwa तो।

भोला ने रूपा से ब्लाउज खोलने कहा।

रूपा ने अपना ब्लाउज खोल दी। ब्लाउज का बटन खुलते ही उसके बड़ी बड़ी दूध से भरी सुडौल स्तन भोला के सामने आ गया। भोला का land तनकर लंबा और मोटा हो गया।

वह खाट पर उठकर बैठ गया और रूपा की चूची को दोनो हाथो में थाम लिया। जैसे ही उसने चूची दबाया दूध का फौवारा निकलकर सीधे उसके चेहरे पर गया।

भोला ने दुदू की निपल मुंह में भरकर बारी बारी से मसल मसल कर पीने लगा।

रूपा भोला की इस हरकत से उत्तेजित होने लगी।

भोला ने रूपा को खडा किया और उसकी साडी को खींचकर अलग कर दिया। अब रूपा सिर्फ पेटी कोट में थी।

भोला सिर्फ लुंगी पहना था। उसका land लूंगी में तना हुवा देखकर रूपा और ज्यादा गरम हो गई।

भोला ने रूपा को अपने गोद में उठा लिया और खाट पर बैठ गया। फिर दोनो चूची को मसल मसल कर दूध पीने लगा।

भोला का लिंग रूपा के पेटिकोट के ऊपर से बुर को दबा huwa था जिसकी लंबाई और मोटाई का एहसास पाकर रूपा की बुर पानी छोड़ने लगी।

अब भोला रूपा को खाट में लिटा कर उसके बदन को चूमने लगा। चूमते चूमते वह नाभी तक चला गया।

रूपा की मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

भोला भी जोश में आकर रूपा की पेटिकोट का नाडा खोलकर रूपा को नंगी कर दिया।

रूपा की फुली हुई चिकनी बुर को देखकर कहा,, तेरी बुर तो एकदम चिकनी है, एक भी बाल नही। साफ़ करती है क्या? मां के तो कितने बाल है।

रूपा _उसको, बाल पसंद नही है, वह खुद ही साफ कर देता है।

भोला _क्या राकेश इसे चाटता है?

रूपा शरमा गई और हा में सिर हिला दी।

भोला _राकेश का भी अजीब शौंक है दूध पीना पसंद नहीं पर बुर चाटने में मजा आता है उसको।

अच्छा तुम्हे भी पसंद है क्या बुर चटवाना।

रूपा, भईया मुझे शर्म आती हैं।

भोला, रूपा की बुर चाटने लगा। जिससे रूपा सिसकने लगी और भोला के मुंह को बुर में दबाने लगी। उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।

कुछ देर तक बुर चाटने के बाद, भोला रूपा के टांगों के बीच में बैठ गया और अपना land का टोपा बुर के छेद में रखकर एक जोर का धक्का मारा। बुर गीली होने के कारण एक ही बार में,लन्ड बुर को चीरकर आधा अनदर घुस गया।

रूपा के मुंह से उई मां निकल गई।

अब भोला रूपा की चूची मसल मसल कर पीने लगा और लन्ड को धीरे धीरे बुर में अंदर बाहर करने लगा। लन्ड धीरे धीरे सरककर पुरा जड़ तक अंदर घुस गया ।

रूपा के मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

इधर भोला को रूपा की बुर पेलने में मजा आने लगा और वह अपना स्पीड बढ़ाता गाया रूपा तो जैसे जन्नत में पहुंच गई। वह अपनी कमर ऊपर उठा उठा कर भोला का सहयोग करने लगी

उसे भोला से चुदवाने में बहुत मज़ा आ रहा था।

इधर भोला को भी एक अलग मजा आ रहा था वाह जोश में आकर रूपा के बुर में लन्ड तेज गति से अंदर बाहर कर रहा था।land बुर में सर सर अंदर बाहर आ जा रहा था। खाट के बजने से चर चर की आवाज़, रूपा की चुडियो की खन खन की आवाज़ और रूपा के मुंह से आह,, ऊं,, आई की आवाज़ कमरे में गूंजने लगा।

अचानक से भोला ने chudai बंद कर दिया और रूपा को उठा कर अपने ऊपर ले लिया रूपा बहुत उत्तेजित थी वह chudai बंद करवाने के मूड में बिलकुल नहीं थी। वो भोला के land के ऊपर उछल उछल कर चुदाने लगी। भोला भी रूपा की कमर को पकड़कर अपनी लौड़ा में पटक पटक कर चोदने लगा। कमरे में आह आह, चर चर, फच फिर, खन खन की आवाज़ गूंजने लगा।

रूपा को भोला से चुदाने में जो मज़ा आ रहा था उसकी कल्पना तक उसने नही की थी। राकेश तो बहुंत जल्दी झड़ जाता था, आनद की इस चरम अवस्था तक रूपा को वह कभी नही ले जा पाया था

रूपा तो अपनी भाई की मर्दानगी की दीवानी हो गई।

कुछ देर तक वे दोनो अपना सुध बुध खोकर chudai का खेल खेलते रहे। पर रूपा ज्यादा देर तक न रुक सकी और वह झड़ने लगी ।

वह भोला से लिपट गई।

भोला कुछ देर chudai बंद कर रूपा को अपनी बाहों में जकड़ लिया। कुछ देर बाद भोला खाट पर बैठ गया, रूपा अभी भी उसकी गोद में बैठी हुई थी। भोला फिर से रूपा की चूची दबाने लगा उसे पीने लगा रूपा फिर गर्म होने लगी। भोला ने रूपा को खाट में लिटा कर फिर उसके ऊपर आ गया। उसकी बुर चाटने लगा। रूपा फिर उत्तेजित हो गई।

अब भोला ने रूपा को खाट में घोड़ी बना दिया । भोला रूपा की मस्त चूतड देखकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया वह चूतड को चूमा फिर अपने खड़े लन्ड को रूपा के बुर मे सेट कर इक जोर का धक्का मरा।land बुर को फाड़कर एक बार में पुरा अंदर घुस गया । अब भोला रूपा की दनादन chudai करना शुरू कर दिया।

कमरे में फिर से खन खन, चर चर, थप थप, आह उई मां ई की आवाज़ गूंजने लगा ।

भोला अब झड़ने की स्थिति में आ गया, वह दोगुने स्पीड से चोदने लगा। लन्ड रूपा की बुर में पिस्टन की भाती अंदर बाहर होने लगा। भोला ने इक जोर का धक्का मारा और रूपा की कमर को अपने कमर से सटा कर अपनी बीज को रूपा की कोख में छोड़ने लगा।

गर्म गर्म वीर्य को अपने बच्चेदानी में जाता महसूस कर रूपा भी खुद को न रोक सकी और वह फिर से एक बार झड़ने लगी।

भोला कुछ देर उसी पोजीसन में खडा रहा, जब तक उसके बीज का एक एक बूंद न झड़ गया।

फिर वह अपना land रूपा के बुर से बाहर निकाला,land फूक की आवाज़ करता huwa बाहर आया। रूपा की बुर से वीर्य बहने लगा।

दोनो काफी थक चुके थे खाट पर दोनो लेट कर सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद रूपा उठी और अपनी कपडे पहनने लगी। भोला उसे कपडे पहनता देखता रहा। और अपने land ko सहलाने लगा।

रूपा ने भोला की ओर देखा तो वो शर्म से पानी हो गई और मुसकुराते हुए भोला के कमरे से चली गई।

रूपा भोला की chudai की दीवानी हो गई थी। अब रोज रात को भोला के कमरे मे जाती और भोला से जमकर चुदाती।

भोला अपने बीज से उसकी कोख भर देता।

एक दिन दोपहर में भोला खेत से घर गया।

गुलाबो अपना छोटा बच्चा को सुलाकर नहाने गई थी गई थी। गुड़िया, रूपा के कमरे मे खेलते खेलते सो गई थी। रूपा ने अपनी बच्ची को भी दूध पिलाकर सुला दी थी। तभी गुलाबो का छोटा बच्चा रोने लगा।

उसके रोने की आवाज़ सुनकर रूपा अपनी मां के कमरे में आई। और बच्चे को चुप कराने लगी। पर बच्चा रोता ही रहा तो वह अपनी दूध पिलाने लगी।

तभी भोला घर पंहुचा, उसने देखा रूपा अपना छोटा भाई को दूध पिला रही है। वह उसके बाजू में बैठ गया।

और रूपा केकी दूसरी चूची को ब्लाउज से बाहर निकाल कर पीने लगा।दोनो गरम हो गए।

भोला ने रूपा को खाट में लिटा दिया। वह बच्चे को दूध पिलाती हुई लेट गया। भोला खाट पर चड़कर रूपा की टांगों के बीच बैठ कर। रूपा को चोदना शुरु कर दिया।

खाट से फिर चर चर, चुडियो की खन खन की आवाज़ गूंजने लगी।

ठीक उसी समय गुलाबो नहा कर गीली कपडे पहने अपने कमरे मे पहुंची अंदर भोला और रूपा की chudai को देखने लगी।

इधर भोला ने जब अपनी मां को देखा तो वह रूपा को चोदना बंद नही किया। वह रूपा को चोदता ही रहा।

गुलाबो _ये क्या बेटा, तुम लोग तो मेरे कमरे मे ही सुरू हो गए। खाना खाया है की नही।

भोला _नही मां,

गुलाबो _पहले खाना तो खा लेते।

रूपा _मां मैने तो भैया से कहा था की पहले खाना खा लो पर भईया ने कहना माना नही।

गुलाबो अपनी गीली कपडे उतार कर पेटी कोट पहन रही थी।

इधर भोला की दमदार chudai से रूपा झड़ गई। भोला ने chudai रोक दिया। और खाट से नीचे आ गया।

गुलाबो इस समय पेटिकोट में थी वह ब्लाउज को पहनने के लिए आलमारी से बाहर निकाल रही थी तभी भोला उसे पीछे से पकड़ लिया और उसकी चूची पकड़कर मसलने लगा।

गुलाबो _बेटा ये क्या कर रहा है छोड़ो मुझे अभी नहाकर आई हू। रूपा का लेकर मन नहीं भरा क्या?

भोला _नही मां, मेरा पानी अभी गिरा नही है।

भोला के चूची मसलने एवम पीने से गुलाबो भी उत्तेजित हो गई वैसे तो भोला और रूपा की chudai देखकर पहले से ही गर्म हो चुकी थी।

वह भोला का विरोध न कर सकी। भोला ने उसे खाट के पास ले जाकर झुका दिया। गुलाबो , खाट को पकड़ कर झुक गई ।भोला उसके पीछे जाकर उसकी पेटिकोट ऊपर चढ़ा दिया और उसकी chut को देखा, आज ही गुलाबो ने अपनी बुर की बाल साफ की थी।

भोला ने ही बताया था की रूपा की बुर बिलकुल चिकनी रहती हैं उसके पति खुद उसकी बुर की बाल की सफाई कर्ता है। तुम भी अपनी बाल साफ़ क्यू नही कर लेती।

गुलाबो ने बेटे के कहने पर पहली बार आज बुर के बालो की सफाई की।

जब भोला ने अपनी मां की चिकनी खूबसरt बुर को देखा तो उससे रहा न गया और वह उसकी बुर चाटने लगा ।

भोला के बुर चाटने से गुलाबो बहुत ज्यादा गर्म हो गई उसकी chut पानी छोड़ने लगी।

भोला ने अपना land का टोपा गुलाबो के बुर छेद पे रख कर एक जोर का धक्का मारा। लन्ड बुर चीरकर अंदर घूस गया।

भोला ने गुलाबो की कमर पकड़ कर दनादन चोदना शुरु कर दिया। गुलाबो की सिसकने की आवाजे कमरे में गूंजने लगी। इधर मां की chudai देखकर रूपा फिर गर्म हो गई। वह खाट से उठी। बच्चे को खाट में ही लेता दिया। और भोला को पिछे से जाकर अपनी बाहों मे भर लिया।

इधर भोला गुलाबो को दनादन चोदता रहा। तभी भोला ने अपना land बाहर निकाल दिया और रूपा को चुसने कहा। रूपा नीचे बैठ कर लन्ड को मुंह में भरकर, चुसने लगी। फिर अपनी मां की बुर को चाटने लगी, गुलाबो आनंद और उत्तेजना से कांपने लगी,तभी उसने गुलाबो के बुर की छेद में land टीका दी।

भोला ने फिर से एक जोर का धक्का लगा दिया।land फिर से गुलाबो के बुर में समा गया। भोला ने गुलाबो की बुर खोदना फिर से शुरू कर दिया।

भोला ने ऐसा जमकर खुदाई किया की कुछ ही देर में गुलाबो पानी छोड़ दिया ।

गुलाबो के झड़ने के बाद भोला खुद खाट पर लेट गया और रूपा को land पर बैठ ने का इशारा किया।

रूपा लन्ड के ऊपर बैठ गई। और उछल उछल कर चुदाने लगी

इधर गुलाबो रूपा और भोला की chudai देखकर फिर गर्म होने लगी। वह अपनी बुर को मसलने लगी।

तभी भोला ने गुलाबो को इशारा किया। रूपा को अपने ऊपर से उठा दिया।

गुलाबो खाट पर चढ़ गई और अपनी बेटे के land को पकड़कर कर अपने बुर के छेद में रखकर नीचे बैठ गई। लन्ड बुर को चीरकर पुरा अन्दर समा गया।

गुलाबो, भोला के लन्ड पर उछल उछल कर chudne लगी।

कमरा फिर से गुलाबो की सिसकारी और खाट के चर चर की आवाज़ से गूंज उठी।

इस तरह भोला अपनी मां बहन को बारी बारी से चोदता रहा जब तक वह झड़ नही गया।

इस chudai में इन तीनों को इतना मज़ा आया की अब से तीनो एक साथ ही chudai करने लगे।है बार भोला अपनी बीज को रूपा के कोख में भर देता।

कुछ दिन बाद रूपा का पति उसे लेने आया। रूपा अपनी ससुराल चली गई।

रूपा को अगले माह माहवारी नही huwa वह समझ गई की उसे फिर से गर्भ ठहर गया है। जब उसने यह बात राकेश को ससुराल वालों को बयाया तो सभी खुश हो गए।

इधर रूपा रोमांचित थी की वह अपने ही भाई के बच्चे की मां बनेगी।

इधर कुछ माह बाद गुलाबो भी फिर से पेट से हो गई थी। उसने गर्भ ठहरने की बात भोला को बताई, भोला भी खुश हो गया।

रूपा और गुलाबो ने लडको को जन्म दिया। सभी खुश थे। एक साल बाद भोला ने भी शादी कर लिया। शादी हो जाने के बाद भी, रूपा जब अपनी ससुराल आती तो गुलाबो, रूपा और भोला chudai के मजे लेते। ये सब खेल चारदीवारी केमें कमरे के अंदर बड़ी सावधानी से खेला जाता , जिससे इनके संबंधों का पता किसी को न लगा।

The end
 
दोस्तोअब,यह क्या हुवा, कहानी को आगे बढ़ाते है।



सुनीता, शेखर, राजेश और स्वीटी भरतपुर घूमने गए थे चारो को वहा बहुंत अच्छा लगा। सभी ने खुब इंजॉय किया।वहा से घूम कर आने के अगले दिन राजेश सुबह जिम के लिये, निकल रहा था कि उसकी नज़र सुनिता पर पड़ी, सुनिता किचन में काम कर रही थी।

राजेश ने उसे पीछे से जाकर अपने बाहों में भर कर गुड मॉर्निंग मां कहा।

सुनिता _चौंकते हुवे, क्या कर रहा है छोड़ मुझे।

राजेश _क्या हुवा मां? तुम्हे अच्छा नहीं लगा।

सुनिता ,राजेश को पीछे धकेल कर दूर हो गई

सुनिता _तू बहुत बिगड़ गया है। मुझे तुमसे ये उम्मीद बिलकुल नहीं थी की तू हवस में आकर किसी महिला के साथ जबरदस्ती भी कर सकता है। मैंने तुम्हे थोड़ी छूट क्या देदी, तू तो पुरा आवारा बन गया।

अब के बाद मुझे छूना मत, मूझसे दूर ही रहना।

राजेश _क्या बोल रही हो मां, शीला आंटी ने तो मुझे माफ़ कर दिया है न।

सुनिता _मै तेरी मां हू, पराई औरत नही। मुझे तुमसे बड़ी उम्मीद है की तू पढ़ लिखकर बड़ा अफसर बनेगा। पर तू तो आवारा बन गया।

राजेश _मां, मुझे माफ़ कर दो अब की बार मैं किसी से जबर्दस्ती नही करूंगा। मै ये आपसे वादा करता हूं।

सुनीता _तो ठीक है, आगे से तुम सिर्फ पढ़ाई में ध्यान देना और मूझसे भी दूर ही रहना। बोलो मेरा कहना मानोge या और आवारगी करोगे।

राजेश _आप जो कहोगी,वही करूंगा मां। पर तुम मूझसे नाराज मत होना। प्लीज।

सुनिता _ठीक, ठीक है, देखते है तू कितना सुधार लाता है अपने में।

राजेश _थैंक्यू मां, मै जिम जा रहा हूं, बाई।

सुनिता _जा बदमास कही का। सुनिता मुसकुराते हुवे बोली।

राजेश जिम से आकर, नहाया, फिर नाश्ता कर स्वीटी को लेकर कालेज चला गया। वहा पर कैंटीन में भगत और अपने दोस्तो के साथ बैठा था।

भगत _राजेश भाई कैसा रहा आप लोगो का टूर?

राजेश _अरे मत पूछो यार भगत, वहा कितना मज़ा आया बता नही सकता। तू बता तू कैसे बिताया छुट्टी, गांव की भाभियो और चाचियो के साथ मज़ा किया की नही।

भगत _हां, भाई, खुब मजा किया, अगर आप भी मेरे साथ चलते तो दोनो मिलकर मजा लेते।

राजेश _मौका मिलेगा तो जरूर जाएंगे एक बार तुम्हारा गांव।

तभी भगत के मोबाइल पर एक कॉल आया।

भगत काल अटेंड किया, कॉल रखने के बाद,

राजेश _किस का कॉल था बे।

भगत _भाई, थानेदार का फोन था, कह रहा था कि हमने राजेश पर हमला करने वाले लडको को पकड़ लिया है।

आपको उन लडको की पहचान करने थाना बुलाया है।

राजेश _ये तो अच्छी बात है। आख़िर कब तक बचते रहते साले।

भगत _उन सालो को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। चलो, थाना चलते हैं उन लोगो की पहचान करने।

राजेश, भगत और उसके दोस्त सभी थाने चले गए।

वहा जाने के बाद,

थानेदार _आओ राजेश, देखो ये वही लडके है न जिन्होंने तुम पर हमला किया था।

राजेश उन लड़कों को देखने के बाद, बोला।

हा ये वही लडके है।

भगत _थानेदार साहब, इन सालो को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। किसी भी कीमत पर इनकी जमानत नही होनी चाहिए।

थानेदार _तुम लोग चिन्ता मत करो।

इन सालो को धारा 307 के तहत हाफ मर्डर केस में कड़ी से कड़ी सजा होगी।

भगत उन लड़कों के पास जाकर बोला, तुम लोग तो गए शाले लम्बे समय के लिए अंदर।

भीमा को उन लड़कों का लीडर था, बोला,

भैया, हम लोगो से गलती हो गई हमे माफ कर दो।

भगत _माफी और तुम लोगो को जितना राजेश भाई को तकलीफ पंहुचा है न उससे कई गुना ज्यादा तुम लोग भुगतो ge । बड़ा आया साले माफी मांगने वाले।

इधर जब इन लड़कों के माता पिता को पता चला, तो सभी थाने पहुंचे। उनकी माए तो थाने दार के सामने रोने लगी, थाने दार साहब हमारे बच्चों को छोड़ दीजिए।

देखो इन लोगो ने एक लडके की जान लेने की कोशिश की है। इन पर हाफ मर्डर का केश बनता है। इसे नही छोड़ा जाए सकता।

लड़को के पिता वकील लेकर पहूंच गए। फिर भी थानेदार ने छोड़ा नही। देखो हम पर भी कालेज प्रशासन और छात्र संघ का दबाव है। कही हमने इन्हे छोड़ दिया न तो ये कालेज के स्टूडेंट हम लोगो की वर्दी उतरवा देंगे।

उनकी माए रोती हुई बोली थानेदार साहब कोई तो उपाय होगा?

थानेदार को इनकी माताओं पर तरस आ गया। देखो मेरे बस में होता तो छोड़ देता।

अब तो इन लोगो को सिर्फ एक ही शक्स है जो सजा होने से बचा सकता है।

लड़को की माए बोली, थानेदार साहब बताओ कौन है वो, जो हमारी मदद कर सकता है।

थानेदार _राजेश। अगर राजेश इन सब को माफ़ कर दे तो।

माए _मगर वह लड़का क्यू माफ़ करेगा? इन करम जलो ने तो उसको बुरी तरह पीटा था।

थानेदार _देखो, माताओं में बड़ी ताकत होती हैं, जब तुम लोगो की आंसू देखकर मैं पसीज गया तो राजेश भी जरुर तुम लोगो की आंसू से पसीजेगा।

माताएं _ठीक, है थानेदार साहब हम कोशिश करेंगे। वह लड़का रहता कहा है।

तभी भीमा ने कहा मां उसका दोस्त कौशल्या चाची के घर किराए पे रहता है वह लड़का भी उसके घर आता जाता रहता है।

भीमा की मां _कौन कौशिल्या हलवाई कामता प्रसाद की बीवी।

भीमा _हा मां।

भीमा की मां _कौशिल्या, दीदी तो मुझे अच्छे से जानती है।

दरसल भीमा और उसके दोस्त जिस कालोनी में रहते थे। कौशिल्या का घर वहा से काफी पास था। चूंकि कामता प्रसाद हलवाई था तो आस पास के शभी लोग उसके दुकान से मिठाई खरीदते थे। उन लोगो के बीच अच्छी जान पहचान था।

सभी लड़को की मां अगले दिन कौशिल्या देवी के घर पहूंच गए।

कौशिल्या, ने जब दरवाजा खोला तो इन महिलाओ को सामने पाकर भीमाकी मां सेकहा कहा, अरे मालती तुम, तुम लोग यहां, कुछ काम था क्या?

मालती _हा दीदी हमे आपसे काम था।

कौशिल्या _आओ अंदर आओ सभी।

सभी अंदर आकर सोफे पर बैठ गए।

मालती _दीदी, क्या तुम राजेश को जानते हो भोला कह रहा था की वह आपके घर आता जाता रहता है और उसका दोस्त आपके यहां किराए पर रहता है।

कौशिल्या _हा मै राजेश को अच्छे से जानती हूं।

मालती ने कौशिल्या को अपने आने का प्रयोजन बताया।

कौशिल्या ने उन सबकी बातो को ध्यान से सुनने के बाद, बोली,

कौशिल्या _देखो, तुम्हारे लड़को ने बुरी तरह राजेश को पीटा था उसकी जान भाई जा सकती थी ऐसे में मेरे या तुम्हारे कहने से कैसे माफ़ कर देगा?

मालती _दीदी कुछ तो उपाय होगा बड़ी उम्मीद लेकर आपके पास आए थे।

कौशिल्या _देखो उसका दोस्त भगत अभी घर पर ही है कुछ देर बाद वह कालेज निकल जायेगा, मैं तुम लोगो को उससे मिला देती हूं वह राजेश से तुम लोगो से मिलने को राजी कर देगा।

मालती _ठीक है दीदी।

कौशिल्या ने आवाज़ दे कर भगत को नीचे बुलाया।

भगत _क्या बात है मां जी, आपने मुझे बुलाया।

कौशिल्य _हा बेटा, ये लोग आपसे मिलना चाहते है ये भीमा और उसके दोस्त के माए है!

भगत _कहिए क्या काम था?

मालती ने अपने आने का प्रयोजन बताया।

भगत _देखो, तुम्हारे बिगड़े बेटो के कारण राजेश भाई को बहुत कस्ट झेलना पड़ा है। तुम चाहती हो की राजेश भाई तुम लोगो की बिगड़ैल कपूतो के ऐसे ही माफ़ कर दे।

मालती _बेटा एक बार राजेश से इस बारे में बात तो कर के देखो।

भगत ने अन महिलाओ की ओर देखा, सभी की उम्र 40 _45के बीच रही होगी। दिखने में भी अच्छी थी। सभी का बदन गदराया,huwa था। भगत अन महिलाओ के बदन का मुआइना करने लगा।

महिलाओ के आकर्षक बदन को देखकर उसके land में तनाव आने लगा। मालती तो एक नम्बर की कड़क मॉल थी।

इधर कौशिल्या भगत की नजरो को पहचान लिया की वह क्या देख रहा है?

भगत उन औरतों के जिस्म की मुआइना करने के बाद बोला _ठीक है मै राजेश भाई से बात करुंगा, पर इसके बदले में राजेश भाई कुछ मांगे तो क्या तुम लोग उसका कहना मानोगी।

मालती _बेटा अगर हमारी बस में हो तो हम उनका कहना जरुर मानेंगे।

भगत _ठीक है फिर मैं राजेश भाई को तुम लोगो से एक बार मिलने बोल दूंगा।

सभी महिलाए खुश हो गए।

इधर भगत जब कालेज गया तो इस बारे में भगत ने राजेश को बताया की भीमा और उन लड़को की मां तुमसे मिलना चाहती हैं।

भाई उन औरतों से एक बार मिल लो क्या मस्त मॉल है सभी। भीमा की मां मालती तो एकदम मस्त है। बोल रही थी की राजेश ने बदले में कुछ मांगा तो यदि वह उनके बस में हो तो जरुर उनका कहना मानेंगे।

राजेश ने सोचा,उन सालो के कारण मैं मादरचोद बना हू। क्यू न उन सालो को भी मादरचोद बनाया जाय। उनकी माताओं से मिलना पड़ेगा।

 
लंच ब्रेक के समय निशा, सीमा से बोली _ सीमा चलो मेरा काफी पीना का मन कर रहा है, कैंटीन चलते हैं।

सीमा _अच्छा, जी, अब तुम्हारा भी मन काफी पीने का करने लगा। पहले तो बाहर का कुछ लेती ही नही थी। वैसे काफी ही पीना है या किसी से,,,,,, सीमा मुस्कुराने लगी।

निशा _तुम कहना चाहती हो,,,

सीमा _मुसकुराते हुवे, अरे मैं तो ये कहना चाहती थी की चलो अच्छा huwa जो तुम्हे कैंटीन का काफी पीना अच्छा लगने लगा। इसी बहाने मुझे भी काफी पीने को मिलेगा। तो चले।

दोनो कैंटीन की ओर जाने लगे।

रोहन के दोस्तो ने जब निशा को कैंटीन की ओर जाते हुए देखा,,

रोहन के दोस्त _भाई रोहन, अगर ऐसे ही चलता रहा न तो निशा तुम्हारे हाथों से निकल जायेगी। वह तुम्हारी कभी नहीं बन पाएगी।

रोहन _ गुस्से से,अबे एक बार मुझे स्टूडेंट ऑफ द इयर बन जाने दे, फिर देखना निशा मेरे बाहों मे होगी। मै इस बार हर हालत में स्टूडेंट ऑफ द ईयर बन के रहूंगा। चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े।

इधर जब राजेश और भगत ने निशा और सीमा को अपने ओर आते देखा।

भगत _अरे सीमा और निशा जी आइए बैठिए। कैसी है आप लोग।

सीमा _फाइन, आप लोग बताइए क्या चल रहा है आज कल।

भगत _अ जी सब अच्छा ही चल रहा है । आप लोगो को पता है जिन लडको ने राजेश भाई पर हमला किया था वे सब पकड़े गए।

सीमा _अच्छा, ये तो बड़ी खुशी की बात है, कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए उन लड़कों को।

भगत _काफी पियेंगे आप लोग।

सीमा _कॉफी पीने के लिए ही तो आए हैं, क्यू निशा?

निशा _हां, दो कॉफी ऑर्डर कर दो।

सीमा _राजेश आप तो भरतपुर गए थे न घूमने कैसा रहा, वहा तो खुब इंजॉय किए होगे।

राजेश _हां, निशा,वहा मां, पापा और स्वीटी सभी को जाना पसंद आया। सभी इंजॉय किए।

सीमा _भई, इच्छा तो हम लोगो की भी थी क्यू निशा? पर घर वाले कहा जाने देते। फिर कही घूमने जाने का प्लान हो तो कोशिश करेंगे, घर वाले इजाजत दे दे तो।

राजेश _जी जरुर।

कुछ देर बाद लंच ब्रेक खत्म हो गया।

सीमा _लो भई क्लास की बेल बज गई। अब हम चलते हैं।

निशा और सीमा चली गई।

भगत _ तो क्या सोचा है भाई?

राजेश _किस बारे में बे।

भगत _भीमा और उसके दोस्तो की माए तुमसे मिलना चाहते हैं, इस बारे मे।

राजेश _सोच रहा हूं, क्या करना चाहिए।

भगत _भाई मै तो कहता हूं एक बार मिलके देखो। सच में सभी आकर्षक महिलाए है, और भीमा की मां मालती तो और भी गदराई हुई सेक्स बम है। एक बार देख लो शायद आपको भी पसंद आ जाए। मुझे तो लगता है मांगोge तो दे देगी साली।

राज _अबे तुम्हे तो हर वक्त सेक्स ही सूझता है।

भगत _क्या करू भाई गदराया बदन देख कर मन मचलने लगता है।

राजेश _मै कुछ और ही सोच रहा हूं।

भगत _भाई, क्या सोच रहे हो, मुझे भी तो बताओ।

राजेश _क्यू न उन लड़कों से ही उनकी मांओ को chudwaya जाय।

भगत _भाई ये तुम क्या कह रहे हो। मै तो हम लोग खुद ही मजा लेने के बारे में सोच रहा थाऔर तुम उन लड़कों के मजे के बारे में सोच रहे हो।

राजेश_अबे, कर लेना तू भी मौज।

भगत _पर भाई ये सब कैसे संभव हो पाएगा। वो लडके कैसे अपनी ही माओ को चोदने के लिए राजी होंगे।

राजेश _वही तो सोचना है।

अच्छा सुन, कोई ढोंगी बाबा है क्या तुम्हारे नजरो में।

भगत _भाई शहर से 8 किलोमीटर दूर एक नामी बाबा का आश्रम है, बाबा चरमानंद। सुना है बाबा बहुंत ज्ञानी है, वह अपनी बातो से लोगो को प्रभावित कर लेता है। बड़े बड़े घरकी औरते, पुरुष , नेता, व्यापारी उसके पास अपनी समस्या लेकर जाते है। रोज उसके आश्रम में लोगो की भीड़ लगती है।

पर मैने तो दबी जुबान यह बात भी सुनी है की खूबसूरत औरते बाबा की कमजोरी है। पूजा पाठ के आड़ में अपने आश्रम में आने वाली महिलाओ के साथ रंग रेलिया मनाता है।

पर भाई बाबा कैसे हमारी मदद कर पाएगा।

राजेश_ये बाबा हमारी मदद कर सकता है, उन लड़कों को अपनी ही मां चोदने में। पर उसके लिए उस बाबा को अपनी नियंत्रण में लेना होगा।

भगत _भाई,पर बाबा हमारे नियंत्रण में आएगा कैसे?

राजेश _इसके लिए कोई उपाय ढूंढना पड़ेगा।

भगत _क्यू न हम किसी लड़की को उस बाबा के पास भेजे, और वह बाबा का वीडियो क्लिप बना ले,

राजेश _अगर ऐसा हो गया तो वह बाबा वही करेगा जो हम कहेंगे। पर यह काम करेगी कौन? इसके लिए तो निडर और साहसी लड़की चाहिए जो दिखने में भी सुंदर हो।

भगत _लड़की मिल जायेगी भाई,पर भाई तुम अन लडको से उनकी माओ को ही क्यों chudwana चाहते हों, मुझे ये बाते समझ नहीं आई।

राजेश _भगत मै देखना चाहता हूं की कोई लड़का अपनी मां को चोदकर कैसा महसूस करता है? उसे अच्छा लगता है या इस कृत्य से शर्मिंदा होकर अपना मुंह छिपाता है।

भगत _भाई वैसे देखने में तो मजा ही आ जायेगा जब ये लडके अपनी ही मां को चोदेंगे।

राजेश अपने मन में सोचता है, उन सालो की कारण मैं मादर चोद बना अब मन को ठंडक तभी मिलेगा जब ये सभी मादरचोद बनेंगे।

 
बाबा चरमानंद का आश्रमशहर से आठ किलोमीटर दूर था,जो लगभग 8एकड़ में फैला था। उनके आश्रम में सैकड़ों सेवक एवम सेविकाए रहते थे। जो बाबा की आज्ञा का पालन करते थे।

बाबा परमानंद सुबह 9से 12बजे तक लोगो की समस्याएं सुनते थे। 12से 2बजे का समय भोजन और विश्राम करने का होता थाऔर 2से 5बजे का समय, अनुष्ठान और पूजा पाठ का होता था, जिसे लोग अपनी समस्या के समाधान हेतु करवाते थे।

लोग जो समस्यालेकर बाबा के पास आतेउनके बैठने के लिए एकबड़ा हाल था। जहां सैकड़ों लोग साथ बैठ सकते थे। हाल के सामने एक कमरा था जहा बाबा बैठता था लोगोको सेविका बारी बारी से बाबा कमरे के में अंदर जाने देता। बाबा के कमरे में जहां पर वह बैठकर लोगो की समस्या सुनता था,वहां देवी देवताओं उनके गुरु के फोटो लगे हुए थे ।उस कमरे के अंदर एक और कमरा था जिसमे बाबा आराम करता था, वह कमरा सभी प्रकार के सुविधाओं से युक्त था।

सभी प्रकार के लोग अमीर, गरीब, महिला, पुरुष नेता, व्यापारी, अफसर आदि उनके आश्रम में अपनी समस्या लेकर आते थे। बाबा उनकी समस्याओं का समाधान बताता था, जिनकी समस्या का समाधान हो जाता वे लोग बाबा के भक्त बन जातेथे, उनका प्रचार करते थे।

आज बाबा दोपहर में भोजन के बाद बाबा अपने कमरे में आराम कर रहा है। तभी वह अपनी खास सेविका को बुलाता है। सेविका बाबा के रूम में आती हैं।

सेविका _बाबा आपने मुझे बुलाया।

बाबा _आज पूनम की बारी थी न,

सेविका _हा, बाबा।

बाबा _फिर अभी तक पहुंची क्यू नही वह, फोन कर पता करो।

सेविका _ठीक है बाबा।

सेविका, पूनम के पास फ़ोन लगाती है।

पूनम काल उठाती है।

पूनम _हैलो, कौन।

सेविका _मै, बाबा के आश्रम से सेविका बोल रही, आज तुम्हारी बारी है नअब तक आश्रम क्यू नही पहुंची बाबा तुम्हारा इंतजार कर रहा है।

पूनम_वो घर में महमान आए हैं तो थोडा लेट हो गया, बाबा से कहना मै जल्द पहुंचती हू।

सेविका _ठीक है, पर तुम जल्दी पहुंचो।

पूनम _जी।

पूनम अपने एक साल के बेटे को लेकर ड्राइवर के साथ आश्रम निकल जाती है।

इधर बाबा को सेविका बता देती है की पूनम जल्द आश्रम पहूंच जायेगी।

बाबा बेड पर लेट कर पूनम की आने का बेसब्री से इंतजार करता रहता है, वह पूनम के साथ किए सेक्स को याद करता huwa अपना land सहलाता रहता है। उसका land पूरी तरह तनकर खड़ा हो चुका था।

कुछ देर बाद पूनम आश्रम पहूंच जाती है।

पूनम बाबा के कमरे मे जाने से पहले सेविका को अपना बेटा सम्हालने को देती है। पूनम बाबा के रूम में प्रवेश करती है।

बाबा इस समय अपने बेड पर लेटा था, वह पूनम को देखकर बोला।

बाबा _इतनी देर क्यू लगा दी re, क्या तुम भूल गई थी की आज तेरी बारी है।

पुनम _नही बाबा, भूली नहीं थी, वो क्या है न की घर में मेहमान आए हुए हैं न इसलिए लेट हो गई।

बाबा _अच्छा ठीक है। जल्दी अपनी साड़ी उतार के आजा। बाबा ने अपना land सहलाते हुए कहा।

पुनम अपनी साडी उतार दिया, अपनी पेटिकोट, ब्लाउज भी खोल कर पूरी तरह नंगी हो गई।

पुनम की तराशा huwa बदन देखकर उसका land झटका मारने लगा। वह अपना लूंगी उतार कर अलग कर दिया।

इधर पुनम बेड के उपर आ गई और बाबा के land को पकड़कर चूसना शुरु कर दी। कुछ देर तक बाबा के लंबे और मोटे land चुसने के बाद। वह बाबा के land के को अपनी हाथ से पकड़कर अपनी बुर के छेद में रखकर उस पर बैठ गई।land बुर के छेद को चीरकर अंदर समा गया।

बाबा ने पुनम की चूची को अपने हाथों में भर लिया। पुनम बाबा के land पर उछल उछल कर chudne लगी। बाबा से chudte हुवे वह उस समय को याद करने लगी जब वह पहली बार अपनी सास के साथ आश्रम आई थी।

दरअसल पुनम की शादी को 4वर्ष हो गए थे, पर अभी तक वह मां नही बन पाई थी। उसकी सास बहुंत चिंतित थी। उसकी सास को किसी ने बाबा के बारे में बताया था कि बाबा के पास जाने से कई औरतों को संतान सुख प्राप्त huwa है।

पुनम की सास ने पुनम को लेकर बाबा चरमानंद के आश्रम में ले आई। यहां आकर देखा की सैकड़ों लोग अपनी समस्या लेकर बाबा की आश्रम पहुंचे हैं। वे बाबा से मिलने के लिए अपनी बारी का इंतजार करने लगें। 2घंटे इंतजार करने के बाद उन लोगो की बारी आया।

सेविका ने पुनम और उसकी सास को बाबा से मिलने कमरे मे जाने की इजाजत दी।

पुनम और उसकी सास कमरे के अंदर गए। अंदर बाबा आसन जमाकर बैठ थे उसके पीछे दिवारो पर कई देवी देवताओं के फोटो लगे थे।

दोनो हाथ जोड़कर बाबा को प्रणाम किया। बाबा ने उसे सामने बैठने को कहा।

बाबा _कहिए क्या समस्या है आप लोगो की।

पुनम की सास _बाबा जी ये मेरी बहु है शादी को 4साल हो गए पर अभी तक मां नही बन पाई है।

हमने आपके बारे में बहुत सुना है कई निसंतान औरतों को आपने संतान सुख प्रदान किया है।

बाबा जी हमारा भी दुख दूर कीजिए बडी उम्मीद लेकर आपके पास आए हैं।

बाबा _देखिए समस्या है तो उसका समाधान भी है। ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान न हो। मै तो ईश्वर का एक भक्त हू, उपाय बताता हूं। बांकी सब प्रभु के ऊपर है, कामना पूर्ण होना न होना।

पुनम की सास हांथजोड़कर _बाबा जी हमे भी कुछ उपाय बताइए। ताकि हमारी मनोकामना पूर्ण हो सके।

बाबा ने कहा _आपका बेटा नही आया।

सास _बाबा जी उनको तो अपने बिजनेस से ही समय नही मिलता।

बाबा _देखिए मेरे एक परिचय का डॉक्टर है। उसके पास अपने बेटे और बहू दोनो को ले जाकर चेक अप कराइए, उसका रिपोर्ट लेकर मेरे पास आना।

फिर उसने पुनम के सास को थोडा दूर बैठने को कहा और पूनम को अपने सामने बिठाया। पास में रखा राख हांथ में लेकर,आंख बंद कर मंत्र जाप करने लगा। मंत्र पढ़ने के बाद राख से पुनम के ऊपर तीन बार फूक मारा।

एक धागा दिया उसे पुनम को क़मर में बांधने को कहा।

बाबा _अब जाइए, और डॉक्टर से रिपोर्ट लेकर आने को कहा।

पुनम की सास और पूनम दोनोबाबा को प्रणाम कर चले गए।

पूनमअपने पति को लेकर बाबा द्वारा बताए डॉक्टर के पास चली गई। वह एक लेडी डॉक्टर थी। उसके हॉस्पिटल में चेक अप की सारी सुविधाएं थी। पुनम ने डाक्टर को बताया की बाबा ने भेजा है। तब वह बोली आप लोग चिन्ता न करे बाबा के पास जाकर अच्छा किया । वह आप लोगो की समस्या का समाधान जरुर करेंगे।

फिर उन दोनो की अच्छे से जांच कर रिपोर्ट पुनम को देते हुए कहा की इसे बाबा को दिखा देना।

पुनम और उसका पति दोनो वहा से रिपोर्ट लेकर घर आ गए।

अगले दिन रिपोर्ट लेकर फिर सास बहू बाबा जी के आश्रम पहुंचे।

इधर बाबा जी जो पुनम की क़मर को पकड़ अपनेland पर पटक पटक कर चोदा रहा था।chudai बंद कर दिया। और बोला अरे कहा खो गई है तू चल उतर और घोड़ी बन जो,,

बाबा की बात सुनकर पुनम होस में आई और वह बाबा की उपर से उठकर घोड़ी बन गई।

बाबा उसके पीछे जाकर अपना मूसल एक ही बार में जोर का धक्का लगाकर बुर के अंदर कर दिया , पुनम सिसक उठी, बाबा पूनम की गच गच chudai करने लगा।

पुनम फिर से यादों में खो गई,,,,,

जब पुनम और उसकी सास रिपोर्ट लेकर बाबा के पास पहुंचे, बाबा ने रिपोर्ट देखा।

पुनम की सास _बाबा जी रिपोर्ट में क्या है, सब ठीक तो है न।

बाबा _रिपोर्ट तो ठीक है, तुम्हारी बहु मां बन सकती है, बस मेरे द्वारा बताए उपाय करने होंगे।

पुनम की सास _बाबाजी, आप जो कहेंगे हम वही करेंगे आप उपाय बताईए।

बाबा _देखिए, अगली बार जब तुम्हारी बहु को मासिक धर्म आएगी। उसके पांचवे दिन तुम आश्रम आना। मै एक मंत्र दे रहा हूं, उस मंत्र का जाप तुमऔर तुम्हारी बहु रोज सुबह नहाने के बाद 21बार करना। इस मंत्र के जाप से जो भी बाधाए है उसे प्रभु दूर करेंगे।

पुनम की सास _अब तो बाबा बस आप ही का आसरा है, हम आपके बताए अनुसार मंत्र का जाप जरुर करेंगे।

बाबा _अच्छी बात है, अब आप लोग जाइए।

अगली बार जब पुनम का मासिक धर्म आया और पांच दिन हो गए तब उसकी सास ने पुनम को लेकर फिर बाबा के पास आश्रम पहुंची।

बाबा से पुनम की सास बोली _बाबा जी आपने हमें मासिक धर्म आने के पांचवे दिन बुलाया था।

आज पुनम को मासिक धर्म आए पांच दिन हो गए बताए अब आगे क्या करना है।

बाबा अब अपनी बहू को डाक्टर के पास ले जाकर हर दूसरा दिन,उसकी गर्भाशय का सोनोग्राफी कराना पड़ेगा, ताकि पता चल सके की उसकी अंडा का विकास अच्छे से हो रहा है कि नही। और रिपोर्ट मुझे दिखाना होगा।

बाबा ने पुनम की सास को दूर बैठने को कहा और पूनम को सामने बिठाया फिर राख लेकर मंत्र बुदबुदाने लगा और पूनम के उपर तीन बार फूक मारा।

बाबा ने पुनम की पेट से साड़ी हटाने कहा। पुनम ने साड़ी हटाई फिर बाबा राख लेकर मंत्र बुदबुदाने लगा। और पूनम को खड़ा करा कर राख को उसकी पेट पर मल दिया।

पुनम को मंत्र पढ़कर एक सुपाड़ी दिया। और कहा

बाबा _ लो ये सुपाड़ी लो और इसे अपनी योनी के अंदर रख लेना, जब मैं कहूंगा तब निकालना।

पुनम ने वह सुपाड़ी ले ली।

बाबा _अब आप लोग जाइए। परसो रिपोर्ट लेकर आना।

पुनमऔर उसकी सास हर दुसरे दिन बाबा के पास सोनोग्राफी का रिपोर्ट लेकर आने लगे। बाबा वह रिपोर्ट देखता।

फिर मासिक धर्म के तेरहवें दिन अंडा पूर्ण रूप से विकसित होकर अंडाशय से अलग होकर नली में आ गया। बाबा को सोनो ग्राफी रिपोर्ट देखने से पता चल गया।

बाबा ने पुनमकी सास सेकहा_अब तीन दिनों तक गुप्त अनुष्ठान करना पड़ेगा। मै अनुष्ठान के लिए आवश्यक सामग्री लिख देता हूं तुम लोग सामग्री लेकर कल दोपहर 3बजे आ जाना।

पुनम की सास _जी बाबा हम सामान लेकर कलसमय पर पहूंच जाएंगे।

बाबा जो पुनम को घोड़ी की chudai कर रहा था । बाबा, तेरी chudai करने में एक अलग ही मजा आता है क्या गजब का बदन है सेक्सी और हॉट। पर आज तू खोई खोई सी है क्या तुम्हे मजा नही आ रहा। बोलो पुनम आज कहा खोई हो,,,

पुनम होश में आई,, बाबा आपने तो वो सुख दिया है जो मेरे पति से कभी नही मिल पाया। अगर अच्छा नहीं लगता तो क्या मैं आपके बुलाने से दौड़े चली आती। पुनम ने मुसकुराते हुवे कहा।

बाबा ने पुनम को बेड से नीचे उतरने को कहा और खुद उतर गया। फिर पुनम की जी भर कर चूची मसल मसल कर पीने के बाद उसे बेड के किनारे लिटा दिया और खुद जमीन पर खडा होकर अपना land पुनम की बुर के मुंह पर रख कर एक जोर का धक्का मारा बुर पूरी तरह गीली थी, एक ही बार में फच की आवाज़ करता huwa सरसराकर पूरा अंदर घुस गया। पुनम सिसक उठी।

अब बाबा पूनम की चूची मसलते हुए बुर पे दनादान धक्के लगाने लगा।land बुर में gach gach अंदर बाहर होने लगा।

पुनम फिर से यादों में खो गई,,,

अगले दिन दोपहर को अनुष्ठान सामग्री लेकर आश्रम पहुंची, आश्रम में सिर्फ उनके सेवक सेविकाएं ही थे।

सेविका ने बाबा को संदेश दिया की पूनम और उसकी सास आई हुई है। बाबा ने उन्हें अंदर भेजने को कहा,,

जब सास बहू अंदर गए बाबा कमरे में ध्यान मग्न बैठे थे।

वे दोनो बाबा को प्रणाम कर कमरे मे बैठ गए।

पुनम की सास _बाबा जी आपके कहे अनुसार हम अनुष्ठान के लिए सामग्री लेकर आए हैं।

बाबा _लाओ वह सामाग्री मुझे दो। बाबा ने पुनम की सास से कहा अनुष्ठान के समय तुम्हे कमरे से बाहर रहना होगा, बाहर बैठकर जब तक अनुष्ठान पूर्ण नही हो जाता तुम बताए गए मंत्र की जाप करते रहना होगा ताकि अनुष्ठान में कोई बाधा न आए।

पुनम की सास _ठीक है बाबा जी,

पुनम की सास कमरे की बाहर चली गई।

बाबा ने अपनी खास सेविका को अंदर बुलाया,,

सेविका _बाबा जी आपने मुझे बुलाया।

बाबा _जाओ पुनम को स्नान कराकर ये पीली साड़ी पहनाकर ले आओ।

सेविका _जी बाबा जी।

सेविका ने पुनम को उस कमरे में एक और कमरा बना था जिसमे बाबा आराम करता था, के अंदर ले गया। कमरे में अटैच बाथरूम था। वहा सेविका ने पुनम से अपनी सारे कपड़े निकालने कहा।

पुनम झिझक रही थी, सेविका ने कहा,, अगर ऐसी करोगी तो अनुष्ठान पूर्ण कैसे होगी?

पुनम शर्माते हुवे पूरी तरह नंगी हो गई।

सेविका, पुनम को नहलाने लगी, सेविका ने देखा की पुनम की बुर में हल्के बाल है।

सेविका ने कहा _देखो अनुष्ठान में बैठने के पूर्व शरीर पूर्ण रूप से साफ सुथरे होने चाहिएं। जहां जहां अनचाहे बाल है उसे साफ करना होगा।

सेविका ने अनचाहे बालों पर क्रीम लगा कर रेजर से साफ करने लगी।

पुनम बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी।

सेविका ने पुनम के शरीर के सारे अनचाहे बाल साफ़ कर दिया और उसे अच्छी तरह नहला दी। और बाबा की दी हुई, सिर्फ साड़ी को पहना दी।

बाल को खुले ही रख दिए पूरे बदन में सुगंधित तेल मल दिए।

इधर बाबा ने अनुष्ठान के लिए लाई सामाग्री को तैयार कर लिया।

सेविका ने पुनम को बाबा के सामने ले जाकर बिठा दी।

बाबा ने सेविका को बाहर जाने का इशारा किया।

सेविका कमरे की बाहर चली गई।

और दरवाजे को बाहर से बंद कर दी। स्वयं दरवाजे के एक ओर बैठ गई ताकि कमरे मे कोई जा न सके। दूसरी ओर पुनम की मां बैठी हुई मंत्र की जाप कर रही थी।

अंदर बाबा ने अनुष्ठान प्रारंभ किया। पुनम बाबा के निर्देशों का पालन करने लगी। उसे शुरु में बाबा के सामने सिर्फ एक साड़ी में बैठने में शर्म महसूस हो रही थी । धीरे धीरे वह शर्म जाने लगी। अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद बाबा ने कहा,,

पुनम,, मैने तुम्हे सुपाड़ी दिया था योनी में रखने के के लिए, वो सुपाड़ी मुझे दो,,

अब ये सारी सामाग्री को नदी में प्रवाहित करना होगा लेकिन तुम इसे नही छू सकती इसे तुम्हारी सास ही नदी में प्रवाहित करेगी।

तुम्हारी योनी में जो सुपाड़ी है उसे भी इन सामग्रियों के साथ प्रवाहित करना होगा।

तुम उस सुपाड़ी को छू नही सकती उसे मुझे ही मंत्र पढ़कर निकालना होगा।

पुनम को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे? वह शर्म से सिर झुका ली।

बाबा _क्या सोचने लगी? तुम शर्मा रही हो। मां बनना है तो शर्म त्यागना पड़ेगा।

जाओ कमरे मे मै आता हूं।

पुनम कमरे में चली गई। वह सोंचने लगी पता नही अब क्या होने वाला है।

तभी बाबा कमरे के अंदर आ गया।

बाबा _तुम खड़ी क्यू हो, बेड पर लेट जाओ, मै सुपाड़ी निकाल देता हूं।

पुनम शर्म से पानी पानी होने लगी।

वह बेड के किनारे लेट गई। बाबा ने उसके पैर को फैलाने कहा,,

पुनम शर्माते हुवे पैर फैला दी।

बाबा ने जब पुनम की चिकनी बुर देखा तो उसका land तनकर खड़ा हो गया।

बाबा ने मंत्र बुदबुदाया फिर पुनम के बुर पर फूक मारी। उसके बाद अपनी हांथ से पुनम की चिकनी बुर को सहलाने लगा। पुनम के पैर कपकपाने लगें

बाबा ने उंगली से बुर के भगनासा को थोडा रगड़ा।

पुनम सिसक उठी। उसके बुर में पानी भरने लगा।

पुनम ने अपनी आँखें बंद कर ली।

अब बाबा ने एक उंगली बुर के अंदर डाल कर देखा उसका उंगली बुर रस से गीला हो गया। वह उंगली डालकर सुपाड़ी निकालने लगा। जब एक उंगली से सुपाड़ी बाहर नहीं निकला तो अपनी दो उंगलियां बुर में घुसा दिया और बुर की दीवारों को घिसने लगा। पुनम आनंद में सिसकने लगी। उसके बुर से पानी बहने लगी।

बाबा कुछ देर तक बुर की दीवार को रगड़ने के बाद सुपाड़ी को उंगली से बहार निकाल दिया। और उसे एक पात्र में रख दिया।

इधर पुनम उत्तेजित हो गई थी।

बाबा का land भी चिकनी chut को देखकर झटके मार रहा था।

बाबा _पुनम, सुपाड़ी के साथ तुम्हारी मां बनने में जो भी बाधाए थी वो दूर हो गया है। लेकिन तुम्हारी गर्भ को पवित्र करना पड़ेगा। उसके लिऐ मेरा बीज तुम्हारे गर्भ में छोड़ना पड़ेगा।

यह अनुष्ठान की अंतिम प्रक्रिया है, लेकिन तुम चाहोगी तभी क्यू की तुम्हारी इच्छा हो तभी अनुष्ठान सफल होगा। बोलो अनुष्ठान पूर्ण कराना है की नही।

बाबा ने पुनम की नजरो में देखा। पुनम शर्मा कर सिर घुमा ली।

बाबा समझ गया की पूनम तैयार है। वह अपना लूंगी उतार कर नंगा हो गया।

उसका land हवा में लहराने लगा।

पुनम ने अपनी तिरछी नजरों से बाबा के land को देखा उसकी लंबाई मोटाई को देखकर आश्चर्य में पड़ गई उसका पति का land तो उससे आधा ही था।

बाबा ने अपना land को पकड़कर हिलाया और पूनम की बुर में रखकर पहले land के टोपे से बुर के भगनासा को रगड़ा, पुनम सिसक उठी। फिर बाबा ने land का टोपा बुर के छेद पर रख हल्का दबाव डाला। टोपा बुर के अंदर चला गया। पुनम सिसक उठी। बाबा ने अब land को हल्का सा दबाव बनाकर थोडा और अंदर घुसा दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा। पुनम को मजा आने लगा। बाबा land को धीरे धीरे पुरा अंदर कर दीया। बुर गीली होने के कारण अब आसानी से अंदर बाहर होने लगा।

बाबा ने अब पुनम की चूची को हाथो में लेकर मसलने चुसने लगा जिससे पुनम और उत्तेजित हो गई।

बाबा chudai कला में माहिर था, उसे पता था की औरत को कैसे खुश किया जाता है। पूनम को वह पूरी तरह उत्तेजित कर अब उसकी जमकर chudai करने लगा।

बाबा ने पुनम को घोड़ी बनने कहा। पूनम तो स्वर्ग में थी। वह बाबा के हर आदेशो का पालन करने लगी। बाबा ने तरह तरह के आसनों में पुनम को जमकर चोदा बाबा चर्मानंदने पुनम को चरम आनंद तक पहुंचा दिया। वह कई बार झड़ी। पूनम को समझ आ गया की बाबा का नाम चरमानंद क्यू है। वह बाबा की गुलाम बन गई। पूनम को पूरी तरह से तृप्त करने के बाद बाबा ने अपना बीज पूनम की कोख में भर दिया।

पुनम को बाबा ने पैर उठाकर कुछ देर इसी तरह लेटे रहने को कहा ताकि बीज का हर बूंद गर्भाषय में चला जाए।

कुछ देर बाद दोनो ने कपडे पहन लिए।

बाबा ने पूजा सामाग्री एक थैले में एकत्र कर पूनम की सास को नदी में प्रवाहित करने दे दिया।

दो रोज और आने को कहा।

पुनम की सास ने बहू को लेकर 2रोज और आया और बाबा ने दो दिन और पूनम की जमकर पेलाई किया।

बाबा _अब अनुष्ठान अच्छे से संपन्न हो गया है। प्रभू ने चाहा तो पूनम जल्द मां बनेगी।

पूनम और उसकी सास ने बाबा की शुक्रिया कर। उससे आशीर्वाद लेकर वहा से चले गए।

अगले माह पूनम का मासिक धर्म रुक गया। उसका गर्भ ठहर गया था।

पूनम की सास और उसका पति बहुंत खुश थे। इसकी जानकारी देने पुनम की सास ने पुनम को साथ लेकर आश्रम पहुंचे।

बाबा को जब बताया तो बाबा भी खुश हो गया बाबा ने पुनम की ओर देखा पूनम शर्मा गई।

बाबा ने पुनम की सास से कहा की पूनम को लेकर माह में एक बार तुम्हे आश्रम लाना होगा। और अनुष्ठान कराना होगा जब तक मां नही बन जाती।

पुनम की सास पुनम को माह में एक दिन आश्रम लाने लगी। अनुष्ठान के बाद दोनो जमकर chudai करते।

9माह बाद पूनम ने लडके को जन्म दिया। बच्चे को लेकर पुनम और उसकी सास आश्रम पहुंची।

बाबा ने बच्चे को आशीर्वाद दिया।

पूनम की सास _बाबा जी आपका यह उपकार हम जिंदगी भर नही भूलेंगे। आज से हमारा परिवार आपका भक्त है आप जब कहेंगे हम सेवा में हाजिर हों जाएंगे।

बाबा _मैने तो सिर्फ उपाय बताया। बाकी जो भी होता है प्रभू की इच्छा से होता है। हा तुम्हे अपनी बहु को माह में एक बार बच्चे को लेकर आश्रम भेजना होगा। ताकि बच्चे को आशीर्वाद दे सकू। इस पर कभी किसी की बुरी नज़र न लगे।

पूनम की सास _आप जैसे कहे बाबा मै बहु को बच्चे को लेकर आश्रम भेज दूंगी।

अब बच्चे को लेकर पुनम माह में एक बार निर्धारित दिन को आश्रम आने लगी। बाबा पूनम की जमकर chudai करता। कभी कभी तो बाबा का मन होता तो पूनम को फ़ोन कर बीच में ही बुला लेता। और भी औरते जो बाबा को पसंद था उसे माह में निर्धारित दिन को आश्रम में बुलाया जाता।

पूनम सपने से बाहर आई, बाबा जोर जोर से धक्का लगाकर अपना पानी पूनम की बुर में छोड़ने लगा। कुछ देर तक इसी तरह लेटे रहने के बाद बाबा बोला _क्यू re आज तुम कहा खोई थी। मज़ा नही आया क्या तुम्हे। अगर नही आया तो अब से आश्रम मत आना।

पुनम _नही बाबा, मुझे बहुत मजा आया।

आपके बीना मैं रह न पाऊंगी।

बाबा _अच्छा ठीक है अब कपडे पहन ले, और जा कुछ लोग आने वाले है अनुष्ठान कराने।

 
अगले दिन राजेश और भगत दोनो कैंटीन में बैठे थे। भगत _भाई, क्या सोचा है आपने, कब मिलना है उन लडको की मां से।

कौशल्या मां जी पूछ रही थी।

राजेश _मिलना तो पड़ेगा, कौशल्या मां जी से कहना कल शाम कोलेज के बाद मिल लेंगे।भगत _ठीक है भाई।

जब कोलेज से छुट्टी के बाद भगत घर गया,,,

कौशिल्या _भगत बेटा, वो महिलाए दोपहर में फिर आई थी, पूछ रही थी। राजेश ने मिलने के लिए समय दिया की नही।

तुमने राजेश से बात की क्या?

भगत _वो तो ठीक है मां जी, राजेश भाई मिल लेंगे उनसे, पर क्या वो तैयार होंगी जो राजेश भाई उनको कहेंगे करने के लिए? उसे वे क्या मानेंगे।

कौशिल्या _वैसे तो वे महिलाए, उनके बस में होगी तो उनका कहना मानने को तैयार है, पर मै भी तो जानू राजेश चाहता क्या है?

भगत _वो तो राजेश भाई ही बताएंगे की वह क्या चाहता है।

कौशिल्या _कही कुछ करने का इरादा तो नही है, राजेश का।भगत _हो सकता है। भगत ने हंसते हुवे कहा,,

कौशिल्या _वैसे उस दिन तुम उन महिलाओं को बड़े गौर से देख रहा था। लगता है औरते तुम्हे, पसन्द आ गए हैं।

भगत_आपको तो मर्दों की नजरो को पढ़ना अच्छे से आती है? कौशिल्या की चूची को मसलते हुवे कहा,कौशल्या _औरते, मर्दों की नजरो को पहचान लेती है कि वह क्या चाहता है?

भगत _ये तो अच्छी बात है चलो वे आख़िर समझ गई होगी की लड़को को कैसे अपनी बाते मना सकती है।

वैसे आपको लगता है की ये औरते अपनेलडको की रिहाई के बदले मांगनेपर, कुछ करने देगी।कौशिल्या _औरों केलिए तो पता नही पर राजेश के कहने पर तैयार हो जाएंगी, मुझे विश्वास है।

भगत _पर ऐसा क्यू लगता है आपको?

कौशिल्या _राजेश है ही इतना हैंडसम और प्यारा, कोई भी महिलाए उनकी ओर आकर्षित हो जायेगी।

भगत _वो तो है?

वैसे भगत भैया कल शाम को उन लोगो मिलने को तैयार हैं। उन औरतों से कहना,थोड़ा बन ठन कर आए।

कौशिल्या _ठीक है बोल दूंगी।अगले दिन दोपहर में जब महिलाए, कौशिल्या के पास पहुंची।

मालती _दीदी क्या भगत ने राजेश से बात किया।

कौशिल्या _हा, मालती, भगत ने बताया की राजेश आज शाम को तुम लोगो से मिलने का समय दिया है।

यह बात सुनते ही सभी औरते खुश हो गई।

मालती _दीदी ये तो बडी खुशी की बात है।

कौशिल्या _भगत बता रहा था कि राजेश कह रहा था कि उन औरतों से मिलकर करुंगा क्या? लडको ने गलती किया है तो उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए।

उनके कहने से मै उन लड़कों को माफ़ नही करुंगा?

मालती, चिंतित होते हुए बोली,,,

दीदी, आप हमारा कुछ सहायता कीजिए न सुना है वह यहां आता जाता रहता है, आप कहेंगे तो जरुर मान जायेगा।कौशिल्या _देखो मालती इस मामले में तो मैं भी ज्यादा कुछ कर नही सकती, क्यू की तुम्हारे लड़को ने राजेश पर जानलेवा हमला जो किया था। जो करना है आप लोगो को ही करना पड़ेगा।

मालती _दीदी हम उनके सामने हाथ जोड़कर दया की भीख मांगेंगे।

कौशिल्या _अगर फिर भी वह नही माना तो,,

मालती, कुछ देर सोचने के बाद,, दीदी आप ही कोई उपाय बताओ,,

कौशिल्या _देखो औरते मर्दों को दो प्रकार से मना सकती है,, एक तो अपना आंसू बहाकर और दूसरा,,,मालती _और दूसरा क्या दीदी? रुक क्यू गई बताओ न,,

कौशिल्या _देखो, औरतों के पास मर्दों को पिघालने के लिए दो औजार होती है एक आंसू और दूसरा हुस्न।

मालती _दीदी अब इस उम्र में एक नवयुवक को क्या अपनी हुस्न दिखाएंगे?

कौशिल्या _अरे तुम आज कल की लड़को को नही जानती, आजकल लडको को बडी उम्र की गदराई औरते कही ज्यादा पसंद आती हैं बजाय किसी नवयुवती की।

मालती _दीदी ये आप क्या कह रही हो?

कौशिल्या _अरे मै सच कह रही हूं। मै तो कहती हू तुम लोग जब शाम को राजेश से मिलने आओ तो थोडा बन ठन कर आना। क्या पता? जो काम तुम्हारे आंसू न कर पाए वो तुम्हारा हुस्न कर दे।

सभी महिलाये कौशिल्या की बातो का चिंतन मनन करने लगी।

कौशिल्या _तुम लोग क्या सोचने लगी? देखो मैंने तो तुम लोगो को एक उपाय बताया , अब आगे आप लोगो के मर्जी।

मालती _ठीक है दीदी, हम थोडा तैयार होकर आ जाएंगे। अच्छा दीदी हम लोग चलते हैं।

सभी औरते अपनी घर चली गई।

इधर कैंटीन में भगत राजेश से _भाई आज शाम को चलोगे न उन औरतों से मिलने, मैने कौशिल्या आंटी से कह दिया था की आज शाम को उन लोगो से मिलेंगे।

राजेश _ठीक है यार मिल लेंगे आज।

कोलेज से छुट्टी होने के बाद राजेश ने स्वीटी को कह दिया की उसे कुछ काम है बाद में घर आ जायेगा, तुम अपनी सहेली के साथ घर चली जाना।

राजेश और भगत कौशिल्या मां जी के घर की ओर चल पड़े।

उधर सभी औरते बन ठन कर कौशिल्या देवी के घर पहुंच गए थे और राजेश का इंतजार कर रहे थे।

कुछ समय बाद राजेश और भगत दोनो घर पहुंचे वे सीधे भगत के कमरे गए।

भगत _राजेश भाई मै नीचे जाकर देखता हूं। वे औरते आ गई है क्या?

तब तक तुम फ्रेस हो जाओ ।

राजेश _हूं,ठीक है।

भगत नीचे गया, उसने देखा सभी महिलाए आ चुकी है। उन महिलाओं को देखा तो देखता ही रह गया सभी बन ठन कर नई साड़ी पहन कर आई थी। उनकी गदराया बदन साफ़ दिखाई पड़ रहे थे। जिसे देखकर भगत के शरीर के नसों में खून का रफ्तार बड़ गया।

मालती _भगत बेटा, राजेश आया है न।

भगत _मन में सोचता huwa क्या मस्त मॉल है साली इसे रगड़ने में खुब मजा आएगा।

मालती _भगत बेटा कहा खो गया,, राजेश आया है न।

भगत हड़बड़ाते हुवे कहा,, हा हा आ गया है। उसे थोडा फ्रेश हो जाने दो फिर मिल लेना।

वैसे कौशिल्या मां जी कहा है,,,

मालती _वो तो किचन में चाय बना रही हैं।भगत किचन में गया,,

कौशिल्या देवी _अरे आ गया, राजेश आया है न साथ में।

भगत _हा, उपर फ्रेस हो रहा है। मां जी ये औरते तो बडी बन ठन कर आई है।

कौशिल्या _तुम ज्यादा खुश मत हो वह तुमसे नही राजेश से मिलने आई है। कौशिल्या देवी ने मुसकुराते हुवे कहा।

भगत ने कौशिल्या देवी को बाहों मे भर लिया और उसकी चूची को मसलते हुवे कहा,वैसे तुम भी काफी सजी संवरी हो, आज बडी हॉट लग रही हो। क्या इरादा है?

कौशिल्या _अरे छोड़ो क्या कर रहा है, कही कोई औरत अंदर आ गई तो, जाओ तुम उन हाल में बैठो अन औरतों को पटाओ शायद कोई सेट हो जाय।

मै चाय लेकर आती हू। कौशिल्या देवी मुसकुराते हुवे बोली!

भगत _एक चुम्मा तो दे दे।

कौशिल्या _चल हट अभी कुछ नही, रात में ले लेना।

भगत _ठीक है भई, अब जबरदस्ती तो कर नही सकते।

भगत हाल में जाकर औरतों से बात चीत करने लगा।

कौशिल्या, चाय लेकर हाल में आई सभी को चाय दी और बोली मैं राजेश को चाय देकर आती हूं।

और वह उपर भगत के रूम में चली गई।

दरवाजा खटखटाते हुवे बोली,, क्या कर है re

राजेश _मां जी आप आओ बैठो।

कौशिल्या _लो चाय पी लो। वैसे तुम तो अपनी मां जी को भूल ही गई, कितने दिनों बाद आए हो। लगता है कोई नया घोड़ी मिल गया है सवारी कराने के लिए।

नाराज होते हुए बोली,,

राजेश ने चाय का कप टेबल पर रख दिया और कौशल्या देवी ke हाथ पकड़ कर उसे अपने गोद में बिठा दिया और चूची मसलते हुवे कहा।

नही मां जी मैं तो तुम्हे रोज ही मिस करता हूं। आख़िर तुमने ही तो मुझे सेक्स ज्ञान दिया है।

कौशिल्या _लगता है, सेक्स ज्ञान को दूसरो में आजमा रहे हो, मेरी तो अब जरूरत ही नहीं है लगता है अब तुमको।

राजेश _आज तो आया हूं न तेरे पास।

कौशिल्या _वो तो तुम अपने दुसरे मतलब से आए हो।

राजेश _वैसे आज तो खुब हॉट लग रही हो, इस साड़ी में,।

कौशिल्या _चल झूठे, वैसे कब से तेरे मूसल लेने के लिए तरस रही हूं। तू उन औरतों से मिलने से पहले मुझे एक बार झाड़ दे,,

राजेश _पहले अपनी चूची तो पिला,,

कौशिल्या अपनी ब्लाउज का बटन खोल कर चूची बाहर निकाल ली, राजेश चूची मसल मसल कर पीने लगा।

कौशिल्या के बुर से पानी बहने लगा। राजेश खडा हो गया और अपना पेंट का चेन खीच कर land बाहर निकाल दिया, कौशिल्या land को मुंह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी ही देर में land खड़ा होकर लंबा मोटा और लोहे की तरह शख्त हो गया।

कौशल्या बेड किनारे लेट गई और अपनी टांगे खोल दी। राजेश बेड के नीचे खडा होकर अपना मूसल हाथ में पकड़ कर कौशल्या की की बुर के छेद में रखकर एक जोर का धक्का मारा।land बुर को चीरकर अंदर चला गया।

राजेश अपने दोनो हाथों से चूची पकड़ कर उसे दबाने लगा उसे पीने लगा और chut par धक्का लगाने लगा।land बुर में अंदर बाहर होने लगा। कुछ देर में land बुर के पुरा गहराई नापने लगा।land का टोपा गर्भा शय को ठोकने लगा। जिससे कौशल्या स्वर्ग में पहुंच गई।

Land बुर में गपागप अंदर बाहर होने लगा। कौशल्या की सिसकने की आवाज़ कमरे मे गूंजने लगी। कौशल्या अपने को ज्यादा देर तक न रोक सकी और राजेश को जोर से अपने बाहों में जकड़ कर झड़ने लगी।

कौशिल्या के झड़ जाने के बाद राजेश ने अपना land बुर से बाहर खींच लिया। लन्ड बुर का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था।

कौशल्या ने land को मुंह में भरकर चुसने लगी।

कौशल्या_अब इसे अंदर कर लो। ज्यादा देर तक हम नही कर सकते वो लोग मेरा नीचेआने का इंतजार कर रहे होंगे।

राजेश _पर मां जी अभी तो मेरा huwa नही है।

कौशिल्या _अरे तुम्हे झाड़ने के लिए तो पांच पांच औरते नीचे बैठी है। जो तुम्हे पसंद आए उसे रगड़ लेना।

राजेश _ मां जी क्या वो औरते देने को तैयार हैं।

कौशिल्या _अरे मेरे कहने पर वे बन सवर कर आई है। मतलब वो न नही कहेगी।

अब मैं चलती हूं।

उन लोगो को भेजती हूं।

राजेश _ठीक है।

कौशिल्या अपनी कपडे ठीक कर नीचे चली गई।

मालती _दीदी अब हम राजेश से मिल सकते हैं क्या?

कौशिल्या _हा, जाओ, तुम लोग राजेश से मिल लो।

वे सभी औरते उपर चली गईं। भगत भी साथ चला गया।

ऊपर जाकर भगत _भाई ये उन लडको की मां है। आपसे मिलने आई है। इनसे बात कर लो मैं बाद में आता हूं।

भगत नीचे चला गया।

राजेश _कहो, आप लोग क्यू मिलना चाहती थी,?

मालती _बेटा, हम लोग तुमसे रहम की भीख मांगने आए है, सभी महिलाओ ने हाथ जोड़ रखे थे।

मालती _हमारे लड़के थाने में बंद है, जानते है की उन्हों ने गलत किया है। पर उन नलायको को एक बार माफ कर दो। नही तो जेल जाने से उनका भविष्य बर्बाद हो जायेगा।

जेल जाने के बाद वे और बिगड़ जाएंगे।

राजेश _उन लोगो को सबक मिलना जरूरी है।उसने मुझ पर जानलेवा हमला किया। उन लोगो के कारण मुझे कितना कष्ट उठाना पड़ा। कितनी चोटें आईं मुझे। क्या मैं सब भूल जाऊ।

मालती _बेटे माना की वे गुनहगार है पर जेल जाने के बाद वे और गुनाह करेंगे। अभी वे सुधर सकते हैं। तुम उन लोगो को सुधरने का एक मौका दो।

राजेश कुछदेर उनऔरतोंको गौर से देखा सभी बडी बनठनकर आईथी , उनलोगो का बदन किसी भी मर्द को आकर्षित करने योग्य थे। मालती की जिस्म में तो एक अलग ही आकर्षण था। कौशल्या देवी ने राजेश को अधूरा ही छोड़ दिया था। इन औरतों की आकर्षक बदन देखकर उसका land फिर से तन गया।

उनके बदन को निहारने के बाद राजेश बोला_

उन लोगो के कारण मुझे जो तकलीफ हो रहा है उसका क्या? क्या तुम लोग मेरी तकलीफ दूर कर सकते हो।

मालती _कैसी तकलीफ बेटे।

राजेश _अब तुम लोगो को अपनी तकलीफ कैसे बताऊं? मैं किस पीड़ा से गुजर रहा हूं।

मालती _बेटे बताओ, कैसी तकलीफ है, क्या हम लोग कुछ मदद कर सकते हैं ?

राजेश _मुझे तो अपनी तकलीफ बताने में भी शर्म आ रही है।

मालती और अन्य महिलाए _कैसी तकलीफ है बेटा बताओ हमे, हमसे शर्मआओ मत।

राजेश _तुम्हारे लडको ने मेरे गुप्तांग पर भी चोटे पहुंचाई है। जिससे गुप्तांगके अंदर अंदरुनी चोटे आई है जिसके कारण सेक्स करने पर मेरा स्खलन संबंधी समस्या आ गई है। मै घंटो बाद भी स्खलित नही हो पाता। डाक्टर का कहना है की जब तुम सेक्स करोगे तो धीरे धीरे ये तकलीफ दूर होती जायेगी। मैने अपनी गर्लफ्रेंड से सेक्स किया वह मुझे ज्यादा देर तक नही झेल पाई। अब वह मुझे देने से मना करती है। कहती है पहले अपना इलाज कराओ मै ज्यादा देर तक नही झेल सकती। कोई अकेली स्त्री मुझे स्खलित नहीअगले दिन राजेश और भगत दोनो कैंटीन में बैठे थे। भगत _भाई, क्या सोचा है आपने, कब मिलना है उन लडको की मां से।

कौशल्या मां जी पूछ रही थी।

राजेश _मिलना तो पड़ेगा, कौशल्या मां जी से कहना कल शाम कोलेज के बाद मिल लेंगे।भगत _ठीक है भाई।

जब कोलेज से छुट्टी के बाद भगत घर गया,,,

कौशिल्या _भगत बेटा, वो महिलाए दोपहर में फिर आई थी, पूछ रही थी। राजेश ने मिलने के लिए समय दिया की नही।

तुमने राजेश से बात की क्या?

भगत _वो तो ठीक है मां जी, राजेश भाई मिल लेंगे उनसे, पर क्या वो तैयार होंगी जो राजेश भाई उनको कहेंगे करने के लिए? उसे वे क्या मानेंगे।

कौशिल्या _वैसे तो वे महिलाए, उनके बस में होगी तो उनका कहना मानने को तैयार है, पर मै भी तो जानू राजेश चाहता क्या है?

भगत _वो तो राजेश भाई ही बताएंगे की वह क्या चाहता है।

कौशिल्या _कही कुछ करने का इरादा तो नही है, राजेश का।भगत _हो सकता है। भगत ने हंसते हुवे कहा,,

कौशिल्या _वैसे उस दिन तुम उन महिलाओं को बड़े गौर से देख रहा था। लगता है औरते तुम्हे, पसन्द आ गए हैं।

भगत_आपको तो मर्दों की नजरो को पढ़ना अच्छे से आती है? कौशिल्या की चूची को मसलते हुवे कहा,कौशल्या _औरते, मर्दों की नजरो को पहचान लेती है कि वह क्या चाहता है?

भगत _ये तो अच्छी बात है चलो वे आख़िर समझ गई होगी की लड़को को कैसे अपनी बाते मना सकती है।

वैसे आपको लगता है की ये औरते अपनेलडको की रिहाई के बदले मांगनेपर, कुछ करने देगी।कौशिल्या _औरों केलिए तो पता नही पर राजेश के कहने पर तैयार हो जाएंगी, मुझे विश्वास है।

भगत _पर ऐसा क्यू लगता है आपको?

कौशिल्या _राजेश है ही इतना हैंडसम और प्यारा, कोई भी महिलाए उनकी ओर आकर्षित हो जायेगी।

भगत _वो तो है?

वैसे भगत भैया कल शाम को उन लोगो मिलने को तैयार हैं। उन औरतों से कहना,थोड़ा बन ठन कर आए।

कौशिल्या _ठीक है बोल दूंगी।अगले दिन दोपहर में जब महिलाए, कौशिल्या के पास पहुंची।

मालती _दीदी क्या भगत ने राजेश से बात किया।

कौशिल्या _हा, मालती, भगत ने बताया की राजेश आज शाम को तुम लोगो से मिलने का समय दिया है।

यह बात सुनते ही सभी औरते खुश हो गई।

मालती _दीदी ये तो बडी खुशी की बात है।

कौशिल्या _भगत बता रहा था कि राजेश कह रहा था कि उन औरतों से मिलकर करुंगा क्या? लडको ने गलती किया है तो उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए।

उनके कहने से मै उन लड़कों को माफ़ नही करुंगा?

मालती, चिंतित होते हुए बोली,,,

दीदी, आप हमारा कुछ सहायता कीजिए न सुना है वह यहां आता जाता रहता है, आप कहेंगे तो जरुर मान जायेगा।कौशिल्या _देखो मालती इस मामले में तो मैं भी ज्यादा कुछ कर नही सकती, क्यू की तुम्हारे लड़को ने राजेश पर जानलेवा हमला जो किया था। जो करना है आप लोगो को ही करना पड़ेगा।

मालती _दीदी हम उनके सामने हाथ जोड़कर दया की भीख मांगेंगे।

कौशिल्या _अगर फिर भी वह नही माना तो,,

मालती, कुछ देर सोचने के बाद,, दीदी आप ही कोई उपाय बताओ,,

कौशिल्या _देखो औरते मर्दों को दो प्रकार से मना सकती है,, एक तो अपना आंसू बहाकर और दूसरा,,,मालती _और दूसरा क्या दीदी? रुक क्यू गई बताओ न,,

कौशिल्या _देखो, औरतों के पास मर्दों को पिघालने के लिए दो औजार होती है एक आंसू और दूसरा हुस्न।

मालती _दीदी अब इस उम्र में एक नवयुवक को क्या अपनी हुस्न दिखाएंगे?

कौशिल्या _अरे तुम आज कल की लड़को को नही जानती, आजकल लडको को बडी उम्र की गदराई औरते कही ज्यादा पसंद आती हैं बजाय किसी नवयुवती की।

मालती _दीदी ये आप क्या कह रही हो?

कौशिल्या _अरे मै सच कह रही हूं। मै तो कहती हू तुम लोग जब शाम को राजेश से मिलने आओ तो थोडा बन ठन कर आना। क्या पता? जो काम तुम्हारे आंसू न कर पाए वो तुम्हारा हुस्न कर दे।

सभी महिलाये कौशिल्या की बातो का चिंतन मनन करने लगी।

कौशिल्या _तुम लोग क्या सोचने लगी? देखो मैंने तो तुम लोगो को एक उपाय बताया , अब आगे आप लोगो के मर्जी।

मालती _ठीक है दीदी, हम थोडा तैयार होकर आ जाएंगे। अच्छा दीदी हम लोग चलते हैं।

सभी औरते अपनी घर चली गई।

इधर कैंटीन में भगत राजेश से _भाई आज शाम को चलोगे न उन औरतों से मिलने, मैने कौशिल्या आंटी से कह दिया था की आज शाम को उन लोगो से मिलेंगे।

राजेश _ठीक है यार मिल लेंगे आज।

कोलेज से छुट्टी होने के बाद राजेश ने स्वीटी को कह दिया की उसे कुछ काम है बाद में घर आ जायेगा, तुम अपनी सहेली के साथ घर चली जाना।

राजेश और भगत कौशिल्या मां जी के घर की ओर चल पड़े।

उधर सभी औरते बन ठन कर कौशिल्या देवी के घर पहुंच गए थे और राजेश का इंतजार कर रहे थे।

कुछ समय बाद राजेश और भगत दोनो घर पहुंचे वे सीधे भगत के कमरे गए।

भगत _राजेश भाई मै नीचे जाकर देखता हूं। वे औरते आ गई है क्या?

तब तक तुम फ्रेस हो जाओ ।

राजेश _हूं,ठीक है।

भगत नीचे गया, उसने देखा सभी महिलाए आ चुकी है। उन महिलाओं को देखा तो देखता ही रह गया सभी बन ठन कर नई साड़ी पहन कर आई थी। उनकी गदराया बदन साफ़ दिखाई पड़ रहे थे। जिसे देखकर भगत के शरीर के नसों में खून का रफ्तार बड़ गया।

मालती _भगत बेटा, राजेश आया है न।

भगत _मन में सोचता huwa क्या मस्त मॉल है साली इसे रगड़ने में खुब मजा आएगा।

मालती _भगत बेटा कहा खो गया,, राजेश आया है न।

भगत हड़बड़ाते हुवे कहा,, हा हा आ गया है। उसे थोडा फ्रेश हो जाने दो फिर मिल लेना।

वैसे कौशिल्या मां जी कहा है,,,

मालती _वो तो किचन में चाय बना रही हैं।भगत किचन में गया,,

कौशिल्या देवी _अरे आ गया, राजेश आया है न साथ में।

भगत _हा, उपर फ्रेस हो रहा है। मां जी ये औरते तो बडी बन ठन कर आई है।

कौशिल्या _तुम ज्यादा खुश मत हो वह तुमसे नही राजेश से मिलने आई है। कौशिल्या देवी ने मुसकुराते हुवे कहा।

भगत ने कौशिल्या देवी को बाहों मे भर लिया और उसकी चूची को मसलते हुवे कहा,वैसे तुम भी काफी सजी संवरी हो, आज बडी हॉट लग रही हो। क्या इरादा है?

कौशिल्या _अरे छोड़ो क्या कर रहा है, कही कोई औरत अंदर आ गई तो, जाओ तुम उन हाल में बैठो अन औरतों को पटाओ शायद कोई सेट हो जाय।

मै चाय लेकर आती हू। कौशिल्या देवी मुसकुराते हुवे बोली!

भगत _एक चुम्मा तो दे दे।

कौशिल्या _चल हट अभी कुछ नही, रात में ले लेना।

भगत _ठीक है भई, अब जबरदस्ती तो कर नही सकते।

भगत हाल में जाकर औरतों से बात चीत करने लगा।

कौशिल्या, चाय लेकर हाल में आई सभी को चाय दी और बोली मैं राजेश को चाय देकर आती हूं।

और वह उपर भगत के रूम में चली गई।

दरवाजा खटखटाते हुवे बोली,, क्या कर है re

राजेश _मां जी आप आओ बैठो।

कौशिल्या _लो चाय पी लो। वैसे तुम तो अपनी मां जी को भूल ही गई, कितने दिनों बाद आए हो। लगता है कोई नया घोड़ी मिल गया है सवारी कराने के लिए।

नाराज होते हुए बोली,,

राजेश ने चाय का कप टेबल पर रख दिया और कौशल्या देवी ke हाथ पकड़ कर उसे अपने गोद में बिठा दिया और चूची मसलते हुवे कहा।

नही मां जी मैं तो तुम्हे रोज ही मिस करता हूं। आख़िर तुमने ही तो मुझे सेक्स ज्ञान दिया है।

कौशिल्या _लगता है, सेक्स ज्ञान को दूसरो में आजमा रहे हो, मेरी तो अब जरूरत ही नहीं है लगता है अब तुमको।

राजेश _आज तो आया हूं न तेरे पास।

कौशिल्या _वो तो तुम अपने दुसरे मतलब से आए हो।

राजेश _वैसे आज तो खुब हॉट लग रही हो, इस साड़ी में,।

कौशिल्या _चल झूठे, वैसे कब से तेरे मूसल लेने के लिए तरस रही हूं। तू उन औरतों से मिलने से पहले मुझे एक बार झाड़ दे,,

राजेश _पहले अपनी चूची तो पिला,,

कौशिल्या अपनी ब्लाउज का बटन खोल कर चूची बाहर निकाल ली, राजेश चूची मसल मसल कर पीने लगा।

कौशिल्या के बुर से पानी बहने लगा। राजेश खडा हो गया और अपना पेंट का चेन खीच कर land बाहर निकाल दिया, कौशिल्या land को मुंह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी ही देर में land खड़ा होकर लंबा मोटा और लोहे की तरह शख्त हो गया।

कौशल्या बेड किनारे लेट गई और अपनी टांगे खोल दी। राजेश बेड के नीचे खडा होकर अपना मूसल हाथ में पकड़ कर कौशल्या की की बुर के छेद में रखकर एक जोर का धक्का मारा।land बुर को चीरकर अंदर चला गया।

राजेश अपने दोनो हाथों से चूची पकड़ कर उसे दबाने लगा उसे पीने लगा और chut par धक्का लगाने लगा।land बुर में अंदर बाहर होने लगा। कुछ देर में land बुर के पुरा गहराई नापने लगा।land का टोपा गर्भा शय को ठोकने लगा। जिससे कौशल्या स्वर्ग में पहुंच गई।

Land बुर में गपागप अंदर बाहर होने लगा। कौशल्या की सिसकने की आवाज़ कमरे मे गूंजने लगी। कौशल्या अपने को ज्यादा देर तक न रोक सकी और राजेश को जोर से अपने बाहों में जकड़ कर झड़ने लगी।

कौशिल्या के झड़ जाने के बाद राजेश ने अपना land बुर से बाहर खींच लिया। लन्ड बुर का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था।

कौशल्या ने land को मुंह में भरकर चुसने लगी।

कौशल्या_अब इसे अंदर कर लो। ज्यादा देर तक हम नही कर सकते वो लोग मेरा नीचेआने का इंतजार कर रहे होंगे।

राजेश _पर मां जी अभी तो मेरा huwa नही है।

कौशिल्या _अरे तुम्हे झाड़ने के लिए तो पांच पांच औरते नीचे बैठी है। जो तुम्हे पसंद आए उसे रगड़ लेना।

राजेश _ मां जी क्या वो औरते देने को तैयार हैं।

कौशिल्या _अरे मेरे कहने पर वे बन सवर कर आई है। मतलब वो न नही कहेगी।

अब मैं चलती हूं।

उन लोगो को भेजती हूं।

राजेश _ठीक है।

कौशिल्या अपनी कपडे ठीक कर नीचे चली गई।

मालती _दीदी अब हम राजेश से मिल सकते हैं क्या?

कौशिल्या _हा, जाओ, तुम लोग राजेश से मिल लो।

वे सभी औरते उपर चली गईं। भगत भी साथ चला गया।

ऊपर जाकर भगत _भाई ये उन लडको की मां है। आपसे मिलने आई है। इनसे बात कर लो मैं बाद में आता हूं।

भगत नीचे चला गया।

राजेश _कहो, आप लोग क्यू मिलना चाहती थी,?

मालती _बेटा, हम लोग तुमसे रहम की भीख मांगने आए है, सभी महिलाओ ने हाथ जोड़ रखे थे।

मालती _हमारे लड़के थाने में बंद है, जानते है की उन्हों ने गलत किया है। पर उन नलायको को एक बार माफ कर दो। नही तो जेल जाने से उनका भविष्य बर्बाद हो जायेगा।

जेल जाने के बाद वे और बिगड़ जाएंगे।

राजेश _उन लोगो को सबक मिलना जरूरी है।उसने मुझ पर जानलेवा हमला किया। उन लोगो के कारण मुझे कितना कष्ट उठाना पड़ा। कितनी चोटें आईं मुझे। क्या मैं सब भूल जाऊ।

मालती _बेटे माना की वे गुनहगार है पर जेल जाने के बाद वे और गुनाह करेंगे। अभी वे सुधर सकते हैं। तुम उन लोगो को सुधरने का एक मौका दो।

राजेश कुछदेर उनऔरतोंको गौर से देखा सभी बडी बनठनकर आईथी , उनलोगो का बदन किसी भी मर्द को आकर्षित करने योग्य थे। मालती की जिस्म में तो एक अलग ही आकर्षण था। कौशल्या देवी ने राजेश को अधूरा ही छोड़ दिया था। इन औरतों की आकर्षक बदन देखकर उसका land फिर से तन गया।

उनके बदन को निहारने के बाद राजेश बोला_

उन लोगो के कारण मुझे जो तकलीफ हो रहा है उसका क्या? क्या तुम लोग मेरी तकलीफ दूर कर सकते हो।

मालती _कैसी तकलीफ बेटे।

राजेश _अब तुम लोगो को अपनी तकलीफ कैसे बताऊं? मैं किस पीड़ा से गुजर रहा हूं।

मालती _बेटे बताओ, कैसी तकलीफ है, क्या हम लोग कुछ मदद कर सकते हैं ?

राजेश _मुझे तो अपनी तकलीफ बताने में भी शर्म आ रही है।

मालती और अन्य महिलाए _कैसी तकलीफ है बेटा बताओ हमे, हमसे शर्मआओ मत।

राजेश _तुम्हारे लडको ने मेरे गुप्तांग पर भी चोटे पहुंचाई है। जिससे गुप्तांगके अंदर अंदरुनी चोटे आई है जिसके कारण सेक्स करने पर मेरा स्खलन संबंधी समस्या आ गई है। मै घंटो बाद भी स्खलित नही हो पाता। डाक्टर का कहना है की अंदरुनी चोट के कारण गुप्तांग के नसों में रूकावटे आ गई है, पर जब तुम सेक्स करोगे तो धीरे धीरे ये तकलीफ दूर होती जायेगी। मैने अपनी गर्लफ्रेंड से सेक्स किया वह मुझे ज्यादा देर तक नही झेल पाई। अब वह मुझे देने से मना करती है। कहती है की तुम रंडियों के पास जाओ, मैं ज्यादा देर तक नही झेल सकती।

अब रंडियों के पास जाने से बदनामी का डर भी है और बीमारी का भी, वैसे भी किसी एक स्त्री के बस का भी नही मुझे झेल पाना,इसलिए मैं किसी के पास भी नहीं जा सका।

मेरी समस्या ज्यों का त्यों बना huwa है। अगर समय पर इलाज न huwa तो आगे दिक्कत और बड़ सकती है।

अब बोलो क्या तुम लोग मेरी मदद करोगी। राजेश ने झूठी कहानी बनाते हुए कहा।

सभी महिलाये एक दुसरे की ओर देखने लगी।

राजेश _देखो कोई जबरदस्ती नहीं है वो तो आप लोग मेरी तकलीफ के बारे में पूछी तो बताना पड़ा । अगर आप लोग मेरी मदद करने को तैयार हो गए तो मैं अपना केस वापस ले लूंगा। थानेदार से चार्ज सीट अदालत में दाखिल करने से रोक दूंगा।

मालती _हमे थोडा सोचने का समय दो।

राजेश _ठीक है आप लोग आपस में चर्चा कर लो, आप लोग छत पर चली जाओ। और आपस में सलाह मशविरा कर लो।

मालती _ठीक है, बेटा।

सभी औरते छत पर चली गई।

और आपस में सलाह मशविरा करने के बाद नीचे कमरे में आई।

राजेश _तो क्या सोचा है आप लोगो ने।

मालती _बेटा, अगर किसी को इन बातो का पता चल गया तो हमारी बडी बदनामी हो जाएगी।

राजेश _देखो ये बात सिर्फ हम लोगो के बीच ही रहेगी। किसी अन्य को इसके बारे में पता नही चलेगा।

हां आप लोगोमें से कोई इस बात को किसी से शेयर कर,,,

मालती _ये क्या कह रहे हो बेटा हम लोग अपनी ही बदनामी थोड़े ही करवाएंगे।

राजेश _तो आप लोग मेरे तरफ से निश्चिंत रहिए। इन बातो की खबर किसी को नहीं होगी।

मालती _तब तो ठीक है बेटा, बोलो हमे क्या करना है।

राजेश ने अपना पेंट निकाल दिया और अंडरवियर भी निकाल कर नीचे से नंगा हो गया।

राजेश का land अभी भी तना हुआ था। उसकी लंबाई और मोटाई को सभी औरते आश्चर्य से देखने लगी। उनमें से किसी औरत ने ऐसा land नही देखा था।

राजेश ने मालती को अपने पास बुलाया और बोला लो एक एक करके पहले इसे चूसो। इससे बडी राहत मिलती है।

मालती सब से पहले land को अपने हाथ में पकड़ कर देखी।land ठुमके लगाने लगा।

राजेश _अब देख क्या रही हो, पहली बार देख रही हो क्या? चूसो इसे।


मालती _ऐसा land तो पहली बार देखा है रि। पुरा घोड़े जैसा है तेरा।
 
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सभी दोस्तो को होली की हार्दिक शुभकामनाएं
 
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