Incest यह क्या हुआ - Page 19 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

राजेश एयरपोर्ट के पास दुखी मन से विचारमग्न होकर पेड़ के नीचे बैठा था। तभी भगत एयर पोर्ट पहुंचा। वह राजेश का बाइक देखा, पर राजेश कही नजर नहीं आ रहा था। उसने राजेश को काल किया, राजेश ने काल नही उठाया।

उसे ध्यान ही नहीं रहा की मोबाइल की रिंग बज रही है। भगत ने राजेशको एयरपोर्ट केअंदर काफी ढूंढा , , राजेश नजर नहीं आया तो उसने एयर पोर्ट के आस पास ढूंढा। राजेश को उसने पेड़ के नीचे बैठा पाया।

वह राजेश के पास गया।

भगत _भाई आप यहां हैं मैने कहा कहा नही ढूंढा आपको।

राजेश गुमसुम सा बैठा था।

भगत _भाई, निशा जी से मिले,,,

राजेश _निशा जी, चली गई भगत,, दुखी मन से कहा,,,

भगत _भाई आपने रोकने की कोशिश नही की।

राजेश _मै उसकी नजरों में गिर चुका हूं भगत किस मुंह से उसे रुकने के लिए कहता।

भगत _भाई आप दुखी मत हो, निशा जी जरूर वापस आयेगी।

राजेश _नही भगत, अब वह वापस नहीं आएगी। अब मुझसे नफरत करती है। उसके दिल में मेरे लिए कोई जगह नही।

राजेश _तुम जाओ भगत मुझे अकेला छोड़ दो।

भगत _नही भाई मै, आपको अकेला नहीं छोड़ सकता। चलो आप मेरे साथ।

भगत कार में आया था जो पार्टी वालो ने उसके आने जाने के लिए दिया था।

वह राजेश को लेकर अपने निवास स्थान पर ले गया।

राजेश को अपने बेड रूम में ले गया।

राजेश बेड में लेट कर पुनः विचारो में डूब गया।

भगत _भाई सुबह से आप कुछ खाए नही होगे, मैने नाश्ता मंगाया है। चलो नाश्ता करलो।

राजेश _नही भगत, मेरा कुछ खाने का मन नही है, तुम खालों।

इधर जब काफी समय हो जाने के बाद भी राजेश घर नही लौटा तो सुनीता को चिंता होने लगी।

उसने राजेश को काल किया।

भगत _भाई मां जी का काल है।

राजेश _मां से कह दो की मै तुम्हारे साथ हूं, मै बाद में घर आऊंगा।

भगत _मां जी मै भगत बोल रहा हूं। राजेश भाई मेरे साथ है, वह बाद में घर पहुंचे गा।

सुनीता _बेटा, राजेश कहा है, वह बात क्यू नही कर रहा।

भगत को समझ नही आ रहा था क्या बोले तभी उसने बहाना बनाया,,

भगत _राजेश बाई बाथरुम में हैं मा जी।

सुनीता _ठीक है भगत, राजेश से कहना जल्दी घर आ जाए।

भगत _ठीक है मां जी।

इधर कालेज केअधिकांश छात्र छात्राओं को पता चल गया कि निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई।

यह बात स्वीटी को उसकी सहेलियों ने फोन पर बताई।

स्वीटी को जब पता चला तो वह अपने मां की कमरे की ओर गई। सुनीता इस समय आराम कर रही थी।और सोच में डूबी हुई थी कि आखिर राजेश उदास क्यू रहता है।

स्वीटी जब सुनीता के कमरे में पहुंची।

सुनीता _बेटा , तुम मेरे कमरे मे, कुछ काम था क्या?

स्वीटी _मां, मुझे पता चल गया कि भईया आज कल उदास क्यू रहतेहै?

सुनीता _क्या, तुम्हे पता चल गया, राजेश के उदासी का कारण।

स्वीटी _हां मां।

सुनीता _बताओ, क्या बात है?

स्वीटी _निशा, हमेशा के लिए लंदन चली गई।

सहेलियों ने बताया की भईया और निशा के बिच कुछ विवाद huwa हैं।

सुनीता _क्या? हे भगवान , आखिर वही huwa जिसका मुझे डर था। मैने राजेश को मना किया था की अमीर घर की लडकियों से दूर रहें। वह माना नही। पता नही मेरे बेटे पर क्या बीत रही होगी? पिछले कुछ दिनों से मेरे बेटे ने हंसना भूल गया है।

सुनीता रोने लगी।

स्वीटी _मां भईया, कहा है मुझे उसकी चिंता हो रही है।

सुनीता _बेटा, अभी लगाया था उसको काल, भगत ने फोन उठाया था। वह बता रहा था कि राजेश उसके साथ है। सुनीता सुबकते हुए बोली।

बेटा तुम फोन लगाकर राजेश से बात करो उसे जल्दी घर आने के लिए कहो।

Switi ने राजेश को काल किया।

भगत _भाई स्वीटी का काल है।

बात करलो।

राजेश ने फोन उठाया।

स्वीटी _भईया, आप कहा है? सहेलियां बता रही थी की निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई।

मां परेशान है, तुमको लेकर आप जल्दी घर आ जाओ।

राजेश _छोटी मै ठीक हू, मां से कहना मेरी चिंता न करे। मै घर आ जाऊंगा।

राजेश ने दुखी मन से कहा।

स्वीटी _ठीक है भैया।

इधर सुनीता बहुत चिंतित थी।

शाम हो चुका था।राजेश अभी भी घर नही पंहुचा था।

सुनीता की चिंता और बड़ गई।

उसने प्रिया को फोन किया।

प्रिया इस समय हॉस्पिटल में थी।

प्रिया _प्रमाण बुवा।

सुनीता _जीती रह बेटा।

घर मे सब कैसे है?

प्रिया _सब अच्छे है बुआ। वहा सब कैसा है?

सुनीता _अब क्या बताऊं बेटा तुम्हे? मै राजेश को लेकर चिंतित हूं। सुनीता सुबकने लगी।

प्रिया _क्या huwa राजेश को बुआ सब ठीक तो है न।

सुनीता _बेटा कुछ दिनों से राजेश उदास रहता है। गुमसुम सा रहता है। आज पता चला कि निशा और उसके बीच कुछ कहासुनी हो गई है और आज निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई।

राजेश सुबह से अभी तक घर नहीं लौटा?

प्रिया _क्या? निशा हमेशा के लिए लंदन चली गई। ये कैसे हो सकता है? वो तो राजेश से बहुत प्यार करती थीं।

इतना कुछ हो गया और राजेश ने मुझे कुछ बताया नही।

सुनीता _वो तो हमें भी अब तक कुछ बताया नही है। स्वीटी के दोस्तो ने बताया तब पता चला।

प्रिया _हे भगवान, राजेश पर क्या गुजर रहा होगा।

सुनीता _मुझे बडी चिंता हो रही है बेटा,

सुनीता सुबकते हुई बोली।

प्रिया _बुआ तुम चिन्ता न करो मै अभी पहुंचती हूं।

प्रिया हॉस्पिटल से सीधा राजेश के घर के लिए निकल गई।

घर पहुंचने के बाद।

सुनीता ने दरवाजा खोला।

सुनीता _आओ प्रिया।

सुनीता सुबकते हुवे प्रिया के गले लग गई।

स्वीटी भी वही खड़ी थी उसकी आंखो में भी आंसू थे।

प्रिया _बुआ आप लोग चिन्ता न करो सब ठीक हो जाएगा।

प्रिया ने राजेश को काल किया।

राजेश ने काल रिसीव किया।

प्रिया _कहा है re, मुझे सब पता चल गया है। तुम कहा हो। घर वाले सब परेशान हैं। हम लोग भगत के निवास स्थान पहूंच रहे हैं।

राजेश _नही दी आप लोग यहां मत आओ, मै घर आ रहा हूं।

प्रिय_ठीक है भगत को फोन दो।

भगत _हां दी बोलो।

प्रिया _देखो, राजेश की स्थिति अभी ठीक नहीं होगा। उसे अकेले घर आने मत देना। तुम राजेश को लेकर आओ।

भगत _ठीक है दी।

भगत राजेश को लेकर अपने कार में घर के लिए निकल गया। उसका बाइक अपने दोस्तो घर छोड़ने बोल दिया।

कुछ समय में ही वे घर पहुंच गए।

घर पहुंचने पर राजेश के चहरे की उदासी देखकर, सभी भावुक हो गए।

सुनीता _बेटा, मैने तुमसे कहा था न, अमीर घर की लडकियों से दूर रहने के लिए। आखिर छोड़ कर चली गई।

मेरे बेटे की मुस्कुराहट छीनकर।

सुनीता सुबकने लगी।

प्रिया _राजेश ये सब क्या हो गया? ये कैसे huwa ?

बताओ राजेश, खामोश क्यू हो बताओ,,,

भगत _दी भाई क्या बतायेगा? मै बताता हूं, ये सब किसके कारण huwa है।

राजेश ने भगत को रोक दिया, नही,,,

राजेश _ गीत गाने लगा,,,,

ये क्या huwa? कैसे huwa?

गाना खत्म होने के बाद।

प्रिया ने राजेश को समझाया की, राजेश तुम दुखी न हो मुझे पूरा यकीन है एक दिन निशा जरूर वापस आयेगी।

राजेश को प्रिया ने अपने हाथो से खाना खिलाया। राजेश कहता रहा कि मुझे भुख नही है पर उसने कहा की अगर तुम नही खाओगे तो कोई भी खाना नही खायेगा।

क्या तुम चाहते हो कि तुम्हारे कारण सभी भूखे रहे

राजेश _नही दी।

प्रिया _तो फिर, आज मै अपने भाई को अपने हाथो से खाना खिलाऊंगी।

प्रिया ने राजेश को खाना खिलाया फिर उसे उसके कमरे में आराम करने के लिए ले गया और उसे समझाया कि तुम्हे उदास देखकर तुम्हारे मां पापा और बहन पर क्या गुजरती होगी?

क्या तुम सबको दुखी देखना चाहते हो?

राजेश _नही दी, मै नही चाहता कि मेरे कारण मेरे परिवार वाले दुखी रहे।

प्रिया _फिर जो हो गया उसे भूलने की कोशिश करो और घर वालो के बारे में भी सोचो।

राजेश _ठीक है दी।

प्रिया _अच्छा भाई, मै चलता हूं। पिंकी मेरी राह देख रही होगी?

राजेश _ठीक है दी।

इधर निशा लंदन पहुंच चुकी थी उसे एयरपोर्ट पर लेने के लिए उसकी बुआ और फूफा जी पहुंचे थे।

निशा ने जब अपनी बुआ लक्ष्मी देवी और फूफा प्रीतम सिंह से मिली।

निशा ने और सीमा दोनो का पैर छूकर प्रणाम किया।

लक्ष्मी देवी _कैसी है मेरी बच्ची। उसने निशा को गले लगा लिया।

मुझे सुजाता ने सब बता दिया हैं। बेटा तुम दुखी मत हो सब ठीक है जायेगा।

चलो घर चलो।

चारो घर चलें गए।

घर जाने के बाद।

लक्ष्मी देवी _निशा बेटा देख लो कौन सा कमरा तुम लोगों को पसंद है नौकरों से मदद लेकर अपना अपना सामान वहा जमा दो।

निशा _बुवा हम दोनों अलग अलग कमरे मे नही रहेंगे। एक ही कमरे मे रहेंगे।

लक्ष्मी देवी _ठीक है बेटा ये तुम्हारा ही घर है जैसे रहो।

खाने के लिए जब बोली तो निशा ने कहा

निशा _बुवा आज भूख नहीं लग रही। सीमा जाओ तुम खा लो,

सीमा _नही सीमा, मै अकेली नही खाऊँगी। मुझे भी भूख नहीं।

लक्ष्मी देवी_देखो बेटा, जो हूवा उसे भूलने में समय तो लगेगा। भूखे रहने से सब ठीक तो नही हो जायेगा।

चलो थोडा खा पता नही सुबह से तुम लोग कुछ खाए भी हो की नही।

बुवा और सीमा के जिद करने पर निशा भोजन के लिए डाइनिंग टेबल पर पहुंची।

लक्ष्मी देवी _बेटा मुझे सुजाता ने सब बता दिया है कि तुमको खाने में क्या पसंद है। तुम्हारे पसन्द की सारी चीजे बनी है।

प्रीतम सिंह _निशा बेटा, तुम खाने पीने में संकोच न करो। ये घर तुम्हारा ही है।

सच तो यह है की विशाल भईया और सुजाता भाभी ने अगर हमारी बिजनेस में मदद नहीं किया होता तो मैं किसी कंपनी में नौकरी कर रहा होता जो कुछ भी है सब विशाल भईया की वजह से है यहां की सब कुछ को अपना ही समझो।

अगर किसी प्रकार की दिक्कत हो तो मुझे बताना।

निशा _ठीक है फूफा जी।

निशा थोडा सा भोजन की अपनी बुआ की बात रखने के लिए।

रात में निशा और सीमा दोनो बेड पर सोने की कोशिश करने लगे। उन्हे नींद नहीं आ रही थी।

सीमा ने निशा से कहा,,

सीमा _क्यू? नींद नहीं आ रही है? राजेश के बारे में सोच रही हो न।

निशा _नही, मै उसे क्यू याद करुंगी? रंडीबाज को।

सीमा _फिर क्या सोच रही हो?

निशा _अपनी मॉम और डैड, पता नही वे कैसे होंगे?

सीमा _तुम खुश रहोगी तो वे भी वहा अच्छे से रहेंगे।

दोनो सोने की कोशिश करने लगे पर सो नही पाए।

इधर राजेश सुबह उठने के बाद खुद को घर वालो के सामने खुश दिखाने की कोशिश करता।

जिम जाता।

और आईएएस की तैयारी करता।

शाम के समय वह नदी किनारे जाकर समय बिताता।

इधर निशा ने अपने फूफा जी से कहा,,

निशा _फूफा जी मुझे आपसे कुछ बात करनी थीं।

प्रीतम सिंह _बोलो बेटा,

निशा _अगर आपको दिक्कत न हो तो हम भी आपके ऑफिस जायेंगे। पढाई के साथ बिजनेस के बारे में भी सीखना चाहती हूं। दिन भर आखिर हम यहां करेंगे क्या?

प्रीतम _बेटा ये तो बडी अच्छी बात है। जैसे तुम लोग चाहो। चलो आज से ही मेरे साथ मेरे काम में हाथ बटाना।

निशा और सीमा दोनो ऑफिस चले गए। सब कुछ भूलने की कोशिश करने लगे।

कुछ दिन बाद रिया ने राजेश को फोन किया,,,

राजेश ने फोन नही उठाया,,

रिया राजेश का घर गई। पता चला राजेश घर पर नहीं है।

कही बाहर टहलने गया है।

दोस्तो से पता कराने पर पता चला की राजेश शाम के समय नदी की ओर टहलने जाता है।

वह नदी की ओर चली गई।

इधर उधर ढूंढने के बाद रिया को राजेश नदी किनारे बैठा मिला।

रिया _राजेश तुम यहां हो मैने तुम्हे कहा कहा नही ढूढा। तुम मेरा काल भी रिसीव नहीं करते।

राजेश _रिया तुम यहां क्या करने आई हो? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया। तुम अपनी चाल में कामयाब हो गई। अभी और कुछ बाकी रह गया है?

रिया, राजेश के पाव में गिर गई।

राजेश मुझे माफ कर दो।

मै नही जानती थीं की बात इतनी बिगड़ जाएगी।

मै सोंची नही थी कि निशा और तुम्हारे बीच दूरियां इतनी बड़ जाएगी।

मै निशा को सब सच बता दूंगी, कि मैने तुम्हे अपनी जाल में कैसे फसाया? मै अभी निशा के काल करती हूं।

राजेश _नही रिया, ऐसा करने की जरूरत नहीं। क्यू कि मैं निशा को धोखे में नही रख सकता। क्यू की सच तो यही है कि मेरे कई औरतों से संबंध है।

एक दिन निशा जी को यह सच्चाई पता चलना ही था।

रिया _राजेश, मुझे माफ कर दो, प्लीज।

रिया राजेश की पैर पकड़ कर माफी मांगने लगीं।

राजेश _जाओ रिया मैने तुम्हे माफ किया?

रिया _राजेश मेरे मॉम डैड ने मेरी शादी अपने दोस्त के बेटे से तय कर दी है। कल मेरी सगाई है।

राजेश अगर कल तुम मेरे सगाई पर आए तो मैं समझूंगी की तुमने मुझे माफ कर दिया है।

रिया वहा से चली गईं।

रात में सुजाता राजेश के कमरे में यह देखने आई की राजेश सोया है कि नही,,

सुनीता _बेटा तुम अभी तक सोए नही।

निशा को भुल जाओ बेटे। मेरे बेटे को निशा से भी अच्छी लड़की मिलेगी देखना।

राजेश _नही मां, निशा जी मेरी अच्छी दोस्त थी। जब मैं निराश होता था टू हमेशा मेरा हौसला बढ़ाती थी आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती थीं। वह एक सच्ची दोस्त थी मां।

सुनीता _अब बिता समय वापस तो नही आ सकता बेटा। पुरानी बातो को भुल कर हमे एक नई सिरे से सोचना चाहिए।

राजेश _हां मां मै पुरानी यादों को ही भूलने की कोशिश कर रहा हूं।

सुजाता _रात बहुंत हो गई है बेटा अब सो जाओ।

सुजाता राजेश के सिर को अपने गोद पर रख कर सुलाने की कोशिश करने लगी।

अगले दिन रिया की सगाई थी सगाई की पार्टी में उनके सारे दोस्त रिश्तेदार समय पर पहुंच चूके थे।

शहर के सारे बड़े बिजनेस मैन और उद्योग पतियों को आमंत्रित किया गया था।

रिया की सगाई में सुजाता और रीता भी आई थी।

रिया को राजेश का आने का इंतजार था।

वह बार बार दरवाज़े को ओर देख रही थीं और दोस्तो को पुछ रही थी की राजेश आया की नही।

काफी समय हो गया तब रिया को लगा की राजेश नही आयेगा। वह निराश हो गई।

अंगूठी का रस्म पूरा करने ही वाली थी की उसकी सहेलियों ने बताई की राज आ गया।

राजेश और भगत अपने दोस्तो के साथ पहुंच चुका था।

रिया बहुँत खुश हो गई।

वह राजेश की ओर देखी और आंखो हो आंखो में उसे शुक्रिया कहा।

अंगूठी की रश्म पूरा होने के बाद सभी ने रिया और उसके होने वाले पति को बधाई दिया।

सुजाता वहा मौजूद थीं। रीता ने राजेश को देखकर उसके पास गईं।

रीता _कैसे हो राज?

राजेश _ठीक हूं मैम।

रीता _निशा के बारे में सुनी बडा दुख huwa

संगीत का कार्यक्रम शुरू huwa,

रिया ने राजेश को खुशी के मौके पर गीत गाने के लिए मंच पर आमंत्रित किया।

सभी दोस्तो राज राज चिल्लाने लगे।

राजेश मंच पर गया और माइक से बोला,,,

राजेश _दोस्तो जब किसी का दिल टूटा huwa हो और उससे खुशी के मौके पर गीत गाने के लिए कहा जाए,,,

तो गीत गाने वाले की दिल का दर्द मुंह से बाहर आ ही जाता है। ऐसे खुशी के मौके पर अपने दिल की दर्द बया कर मैं आज इस खुशी की माहौल को खराब नही करना चाहता इसलिए मुझे क्षमा कीजिए।

मै गीत नही गा पाऊंगा।

सभी दोस्त उदास हो गए।

तभी रिया बोली _

राजेश तुम्हारा दिल जो कहे वो सुनाओ हम सबको अच्छा लगेगा,,,

सभी दोस्त राज राज चिल्लाना शुरू कर दिया,,,

इधर सीमा के दोस्त ने सीमा को फोन कर बता दिया की राज रिया की सगाई में आया huwa है।

उनके दोस्त गीत गाने के लिए जिद कर रहे हैं।

सीमा ने अपनी सहेली से वीडियो कालिंग कर सब दिखाने कह दी कि पार्टी में क्या हो रहा है।

वह अपनी मोबाइल से सब देखने लगी।

तभी निशा कमरे में पहुंची।

सीमा मोबाइल पर क्या देख रही है में तुम्हे कब से आवाज़ दे रही हूं?

मै भी तो देखूं?

निशा ने सीमा से मोबाइल छीनकर देखने लगी।

इधर राजेश _माइक पर बोला,

दोस्तो मेरी गलती की वजह से मेरी सच्ची दोस्त मुझसे रूठ कर दूर चली गई है। पता नही वह कभी वापस आयेगी भी की नही। लेकीन मुझे पता है मैं उसे कभी नहीं भुल पाऊंगा। मै यह गीत उसकी याद में सुनाने जा रहा हूं,,,

राजेश ने गाना शुरू किया,,,

इधर निशा की दिल की धड़कन बढ़ गई थी,,

राजेश ने गाना शुरू किया,,

ओ साथी re तेरे बिना भी क्या जीना
 
राजेश के द्वारा गीत गाने के बाद वहा मौजूद सभी लोगों के आंखो में आंसू भर गए,निशा फूट फूट कर रोने लगी। सीमा ने उसे ढाढस बंधाया।

इधर गीत गाने के बाद राजेश और उसके दोस्त डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। बाजू वाले टेबल पर सुजाता और रीता बैठी थी।

वेटर विस्की का ट्रे लेकर विस्की के लिए आवाज़ लगा रहा था। तभी राजेश ने वेटर से विस्की के लिए आवाज़ लगाया।

रीता और सुजाता चौकी। वह राऐश की ओर देखने लगे।

राजेश_भाई आज रिया की सगाई है। सभी दोस्तो के लिए विस्कि लगाओ।

भगत _भाई आप शराब मत पियो।

राजेश _क्यू, आज तो खुशी का पल है।वेटर सबके लिए पेग बनाओ।

राजेश ने एक पैग उठाया और चेस कहते हुए। शराब की दो तीन पैग पी लिया।

सुजाता और राजेश की गतिविधियों को देख रही थीं।

राजेश _ये दुनियां भी कितनी अजीब है। कौन कब बदल जाय कहा नही जा सकता। कल जो हमारे बाहों से लिपटी रहती थीं। आज उन्हे हमारी ओर देखना भी पसंद नही। राजेश ने एक पैग और पी लिया।

भगत _अब बस करो तीन पैग ले चूके हो।

राजेश _शाला ये कैसा शराब है नशा ही नहीं हो रहा। राजेश ने लड़खड़ाते आवाज़ में कहा।

एक और पैग बनाओ।

राजेश ने एक पैग पी लिया।

कुछ ही देर में राजेश का नशा चढ़ गया।

राजेश _भाई हम तो ठहरे आवारा भौरा कभी इस डाली तो कभी उस डाली मंडराने की हमारी फितरत है। कोई कली पसंद आ जाए तो हम उसका रस पी लेते है।

भगत तुम शरीफ लडकियों और और औरतों से कह दो मुझसे दूर रहें।

एक पैग और बनाओ re।

शाला शराब में नशा ही नही है,,

भगत _भाई, मै आपको ओर पीने नही दूंगा।

राजेश ने लड़खड़ाते आवाज़ से कहा।

कल तक बड़े बड़े कसमें खाते थे,,, और एक पल में ही कह देते है सब कुछ खतम,,,

राजेश ने एक और पैग पीने के लिए, प्याला उठाया।

सुजाता जो बाजू टेबल पर बैठी थी ।

उससे बर्दाश्त नही huwa और उठ कर आई गिलास प्याला राजेश की हाथो से छीनते हुवे बोली।

सुजाता _राजेश और कितना पियोगे। मै तुम्हे और पीने नही दुंगी। प्याला छीनकर फेक दिया।

सभी लोग राजेश और सुजाता की ओर देखने लगे।

आप कौन हैं मोहतरमा हमे रोकने वाली। हमारी मर्जी हमारा जितना मर्जी करेगा उतना पियेंगे।

राजेश की बात सुनकर सुजाता रोने लगी। वह आंसू पोछते हुवे वहा से भागी। रीता उसको आवाज़ देते हुए पीछे गईं ।

सुजाता के वहा से जाने के बाद राजेश अपने चेयर पर बैठ गया।

बिलकुल खामोश हो गया।

रिया वहा पहुंची।

रिया _राजेश तुम ठीक तो हो न।

तभी राजेश के आंखो में आंसू देख कर। वह राजेश की अपने सीने से लगा लिया

। राजेश तुम रो रहे हों।

राजेश सब ठीक हो जाएगा।

रिया _भगत तुम राजेश को घर छोड़ आओ।

भगत राजेश को लेकर उसके घर छोड़ने चला गया।

भगत बेल दरवाज़े का बजाया।

सुनीता ने दरवाजा खोली।

सुनीता _क्या huwa मेरे बेटे को

भगत,_कुछ नही मां जी। राजेश भाई ने थोडा विस्की पी लिया है।

भगत ने राजेश को उसके कमरे तक पहुंचाया ।

उसे बेड पर लिटा दिया।

भगत _अच्छा मां जी अब मै चलता हूं।

सुनीता _ठीक है बेटा।

राजेश को होश नहीं था। वह अपने आंखे खोला सामने अपनी मां को पाया।

इधर स्वीटी भी कमरे में आ चुकी थी।

स्वीटी _मां, भाई को क्या हुआ है।

राजेश _आईएम सॉरी मां, मैंने शराब पी।

सुनीता रोने लगी।

राजेश _मां तुम रो रही हो।

सुनीता _अपने बेटे को ऐसी हालात में देखकर कौन मां नही रोएगी ।

राजेश _आई एम सॉरी मां गलती हो गई अब मैं कभी शराब नही पियूंगा।

स्वीटी राजेश की मोजे जूते उतारने लगी। उसकेशर्ट पेंट उतार दिया।

सुनीता _बेटा तुम आराम करो। तुम होश में नहीं हो।

सुनीता ने राजेश को चादर उड़ा दिया।

सुनीता _स्वीटी बेटा तुम भी अपने कमरे में जाकर आराम करो।

स्वीटी _ठीक है मां।

स्वीटी अपने कमरे में चली गई।

सुनीता , राजेश को कुछ देर सुलाने की कोशिश की फिर अपने कमरे में चली गई।

इधर स्वीटी कुछ देर बाद राजेश के कमरे मे पहुंची।

वह नाईटी में थी।

राजेश सोया huwa था।

स्वीटी _भाई मै तुम्हे निशा की कभी कमी महसूस नही होने दुंगी।

वह नाईटी उतार कर निर्वस्त्र हो गई।

और राजेश की अंडरवियर निकाल दिया।

उसके land को मुंह में लेकर चूसने लगी।

कुछ देर बाद राजेश ने आंखे खोला।

सामने स्वीटी को थी। वह अभी भी नसे में था। उसने स्वीटी को निर्वस्त्र पाया।

राजेश _स्वीटी, तुम ये ये क्या कर रही हो, जाओ यहां से।

स्वीटी _नही भईया मै निशा की याद तुम्हारे दिल से निकाल दुंगी। तुम्हे खुब प्यार दुंगी।

वह राजेश के land को अपने मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश नसे में था ज्यादा विरोध करने की स्थिति में नहीं था।

राजेश _स्वीटी ये क्या कर रही हो जाओ अपने कमरे मे।

स्वीटी _नही भईया, मै तुम्हारे दिल से निशा को निकाल के रहूंगी। तुम्हे खुब प्यार दुंगी।

वह राजेश के land को चूसती रही उसके अंडकोष को सहलाती रही।

स्वीटी की हरकतों से राजेश का land खड़ा हो गया।

स्वीटी राजेश के land को पकड़ कर अपने chut पर सेट की और उस पर बैठ गई।

फिर उसके ऊपर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश नसे में था वह ज्यादा विरोध नही कर सका।

स्वीटी की हरकतों से राजेश भी उत्तेजित हो गया।

राजेश का land स्वीटी की बुर में अंदर बाहर होने लगा

धीरे धीरे राजेश के ऊपर भी काम वासना हावी होने लगा। वह स्वीटी की कमर को अपने दोनो हाथो से थाम लिया।

इधर स्वीति कामुक सिसकारी, निकालने लगी।

आह उह आह,,,

स्वीटी राजेश के ऊपर झुक कर अपनी चूंची राजेश के मुंह में भर दी।

कहते हैं कि काम सुख के आगे व्यक्ति अपना सारा गम कुछ पलो के लिए भुल जाता है ।

राजेश भी अब काम के वशीभूत हो गया।

वह स्वीटी की क़मर पकड़ लिया और नीचे से अपनी क़मर उठा उठा कर land को स्वीटी की बुर की गहराइयों में उतारने की कोशिश करने लगा।

दोनो काम के परम आनंद को प्राप्त करने लगें।

कमरे में स्वीटी की कामुक सिसकारी गूंज रही थी। दोनो स्वर्ग की सैर कर रहें थे।

इधर सुजाता की आंखो में नींद नहीं थी।

कुछ देर बाद वह अपने कमरे से यह देखने आई की राजेश सोया है कि नही।

जब वह राजेश के कमरे के पास पहुंची तो उसके कमरे से सिसकारी की आवाज़ सुनाई दी। वह वही जम गई और धीरे से दरवाजा धकेली ।

दरवाजा थोडा खुला। सामने का दृश्य देखकर उसके पैरो तले जमीन खिसक गई।

वह उस दृश्य को ज्यादा देर तक नहीं देख सकी। वहा से हाल में आकार रोने लगी।

उसने सोचा नहीं था कि राजेश और स्वीटी के बीच ऐसा कुछ देखने को मिलेगा।

उसकी आंखों से आंसू बहने लगीं।

उसेउन दोनो पर बहुत गुस्सा आया पर राजेश की हालात को देखकर वह दोनो को रोक नहीं पाया।

इधर स्वीटी राजेश के ऊपर तब तक उछल उछल कर चुदती रही जब तक राजेश झड़ नही गया। इधर सुनीता अपने कमरे मे आकार लेट गई।

वह रात भर सो न सकी।

वहसोचती रही हे भगवान ये कैसा अनर्थ हो गया। राजेश बेटा ये तुमने क्या किया? अपनी कुंवारी बहन की सील तोड़ दी।

स्वीटी की शादी के बाद सुहागरात के दिन दूल्हे को जब पता चलेगा की स्वीटी की सील टूट चुकी है और chudai की आदी हैं। पता नही वह स्वीटी के साथ कैसा बरताव करेगा। वह बहुन्त चिंतित हो गई।

और अंत में एक फैसले पर पहुंची।

सुबह होते ही वह अपने फैसले से अपनी पति को अवगत कराई।

सुनीता _सुनो जी मुझे आपसे कुछ बाते करनी है।

शेखर _यार इतनी सुबह।

सोने दो, न।

सुनीता _तुमको तो घर परिवार की कोई चिन्ता ही नहीं ।

शेखर _बोलो क्या बात है?

सुनीता _राजेश अपनी आई ए एस की तैयारी ई पर फोकस नही कर पा रहा है। मुझे लगता है कि राजेश को दिल्ली के किसी कोचिंग सेन्टर में एडिमिसन लें लेना चाहिए। वह यहां रहेगा तो। उनकी पुरानी यादें,जीने नही दे। कल रात तो उसने शराब पीकर घर आया था।

तुम राजेश से आज बोल देना कि आई ए एस की तैयारी के लिए तुम दिल्ली जाकर वहां कोई अच्छे कोचिंग सेन्टर ज्वाइन कर लो।

शेखर _ठीक है, मै आज राजेश से इस बारे में बात करूंगा।

सुबह जब सभी डाइनिंग टेबल पर नाश्ता कर रहे थे तब शेखर ने कहा

शेखर _बेटा, तुम्हारी मां चाह रही है कि तुम दिल्ली जाकर कोई अच्छी सी कोचिंग सेन्टर ज्वाइन कर आई ए एस की तैयारी करो। तुम्हारी मां का कहना है कि तुम यहां ठीक से तैयारी नही कर पा रहे हों।

राजेश ने अपनी मां की ओर देखा।

राजेश _पापा, मुझे कोचिंग की आवश्यकता नहीं है मुझे विश्वास है कि मैं आई ए एस की परिक्षा निकाल लूंगा।

सुनीता _नही, तुम दिल्ली जाओगे, यह मेरा अंतिम फैसला है।

राजेश _पर मां मै वहा अकेला आप लोगो के बिना कैसे रह पाऊंगा?

सुनीता _अब तुम छोटे बच्चे नही हो जो हर काम के लिए मां बाप की मदद की जरूरत पड़े। यहां रह कर तुम बिगड़ते जा रहें हो। लडकियों के चक्कर में अपना कैरियर पर ध्यान नहीं दे पा रहे।

राजेश _मां दिल्ली तो बहुत भीड़ भाड़ वाली जगह है। वहा का वातावरण प्रदूषित है। वहा सांस लेना भी मुस्किल है।

सुनीता _कुछ बनने के लिए कुछ त्याग तो करना ही पड़ता है। सब कुछ तुम्हारे हिसाब से तो नही हो सकता।

तुम यहां नही रहोगे यह मेरा अंतिम फैसला है।

स्वीटी _मां भईया, जब नही जाना चाहते तो उसे क्यू जबरदस्ती भेज रहे हो।

सुनीता _तू चुप कर अच्छे बुरे की तुम्हे कोई समझ है। मेरे लाड प्यार ने तुम दोनो को बहुत बिगाड़ दिया है।

राजेश _पापा, मां का यही अंतिम फैसला है कि मैं यहां न रहूं। तो ठीक है मैं गांव चला जाता हूं वहा के एकांत वातावरण में मै आई ए एस की तैयारी भी कर लूंगा। वैसे मुझे अपने ताऊ और चाचा जी से मिलना है। मैने कितनी बार आप लोगो से कहा की गांव चलते है। आप लोग न खुद जाते हो न हमें जाने देते हो।

शेखर_बेटा गांव में कोई सुविधा नहीं वह बहुत पिछड़ा क्षेत्र है।वहा तुमअभावमें कैसे रह पाओगे।

राजेश _वहा रहने वाले लोग कैसे रहते होंगे आखिर वे भी तो हमारी तरह इंसान है न।

शेखर_बेटा, तुम अपनी मां से पूछ लो अगर वह अनुमति देती है तो,,,

राजेश _नही पापा जब मां मुझे यहां नही रहने देना चाहती है तो मैं गांव ही जाऊंगा।

और कहीं नहीं ।

मुझे आप लोग कलेक्टर बना देखना चाहते हैं न, मै वही, रहकर आप लोगो का सपना पूरा कर दिखाऊंगा।

राजेश डाइनिंग टेबल से उठ कर अपने कमरे मे चला गया।

कुछ देर बाद शेखर अपना ऑफिस चला गया।

शेखर के ऑफिस चले जाने के बाद स्वीटी कीचन में गई। जहां सुनीता काम कर रही थी।

स्वीटी _मां मै जानती हूं कि भईया को आप यहां क्यू नही रहने देना चाहते।

सुनीता _तुम क्या जानती हो?

स्वीटी _कल रात तुम भाई के कमरे में आए थे मैने आपको देख लिया था।

सुनीता _तुम्हे शर्म नही आई, अपनी भाई के साथ सोने में। तुम्हे अपनी भविष्य की कोई फिक्र ही नहीं। अपना सील अपने भाई से ही तुड़वा डाली।

स्वीटी _यही बात मै आपसे कहूं तो आपको शर्म नही आती भईया से अपनी जिश्म की भूख मिटाती हो।

सुनीता _क्या बकवास कर रही है तू?

स्वीटी _मैने अपनी आंखो से देखा है तुम्हे भईया से चुदाते हुवे।

सुनीता ने एक जोर का थप्पड़ स्वीटी के गालों पर मारा,,,

सुनीता _चुप कर बेहया, अपनी मां से ऐसी बातें करती है।

स्वीटी _क्यू क्या मै झूठ बोल रही हूं?

क्या ये सच नहीं है की तुम भईया से चुदती हो।

सुनीता _अब चुप कर बेशरम और कितना जलील करेगी मुझे।

सुनीता फफक फफक कर रोने लगी।

स्वीटी _मां मै ये सब तुमसे नही कहना चाहती थी पर भईया को यहां से जाने को कह कर मुझे सब बोलने पर मजबूर कर दी आपने।

सुनीता _*ये सब मै तुम्हारे दोनो की भलाई के लिए रही हूं बेटा ।

राजेश यहां रहेगा तो तुम्हारा जीवन भी खराब हो जायेगा।

मै तुम दोनो की जिंदगी खराब होते नही देख सकती। राजेश का यहां से जाने में ही हमारी भलाई है।

राजेश दरवाज़े पर खड़ा सब सून रहा था।

सुनीता और स्वीटी की नजर उस पर पड़ी तो दोनो सकते मेंआ गए ।

राजेश वहा से चला गया।

नदी किनारे जा कर किसी विचार में डूब गया।

इधर निशा ने राजेश की कल रात की घटना से आहत होकर उसने व्हाट्सएप मेसेज किया,,,

तुम मुझे भुल जाओ राज।अब मै कभी वापस नहीं आउंगी। अच्छा होगा तुम जिंदगी की नई शुरुवात करो। आई ए एस अफसर बनकर अपनी मां के सपने पूरा करो। इसमें मुझे भी खुशी होगी। अब मुझे याद न करना राज। मै तुम्हे भूलने की कोशिश कर रही हूं। तुम भी मुझे भुल जाओ।

राजेश ने यह मेसेज पड़ा।

आज का दिन उसके जीवनमें भूचाललेके आया था।

वह सीधा आश्रम चला गया।


सेविकाओं ने बाबा चर्मानंद को बताया की राजेश आया है।

बाबा ने सेविकाओं को राजेश को अंदर भेजने को कहा।

राजेश बाबा के कमरे में गया।

बाबा साधना में बैठे थे।

बाबा _आओ राजेश बैठो।

राजेश ने बाबा का चरण छूकर प्रणाम किया।

बाबा _जीता रह बेटा। सदा सुखी रहो। हमेशा कामयाब रहो।

राजेश बाबा के सामने बैठ गया।

बाबा _बेटा तुमबहुत उदास लग रहे हो । मुझे तुम्हारे आंखो में कई सवाल तैरते नजर आ रहे हैं।

बोलो राजेश क्या बात है?

राजेश _आपने एक दिन मुझे कहा था कि मुझे सभी ठुकरा देंगे। मेरी प्रेमिका मेरी मां, आज वहसच होगया बाबा । आज मै अपने आप को बहुंत अकेला महसूस कर रहा हूं ।

बाबा _बेटा, दुखी मत हो। जो होता है अच्छे के लिए होता है।

और जो आगे होगा वह अच्छा ही होगा।

अब तुम्हारी जिंदगी की नई शुरुवात होगी बेटा।

तुम अपने को कभी अकेला मत समझना। क्यो की जो दूसरों की मदद करता है ईश्वर उसकी मदद करता है।

तुम्हारे जिंदगी में अभी कई घटनाएं घटेगी। तुम बस एक योद्धा की तरह लड़ते रहना बेटा। ईश्वर सदा तुम्हारी मदद करेगा।

अब जाओ राजेश, तुम्हारे घर वाले चिंतित होंगे।

राजेश बाबा जी का आशीर्वाद लेकर चला गया।

राजेश ने भगत को फोन कर बता दिया की वह अपने पिता जी का गांव जा रहा है। अब कुछ समय वही रहेगा।

भगत को रेल टिकट बुक कराने कह दिया।

भगत _भाई ये अचानक से गांव जाने का फैसला।

राजेश _हां भगत सब, जिंदगी में सब अचानक ही होता है।

राजेश ने घर पहुंच कर अपनी मां को बता दिया की आज शाम को ही वह निकल जायेगा।

कल सुबह की ट्रेन है।

दोस्त लोग आज रात अपने साथ बिताने को कह रहे हैं।

राजेश अपना सामान पैक करने लगा।

स्वीटी _भईया, आप मत जाओ, मै आपके बिना नहीं रह पाऊंगी। मै भी आपके साथ जाऊंगी।

राजेश _नही स्वीटी, तुम यहीं रहोगी । मै जानता हू मां ने अपने दिल में पत्थर रख कर यह फ़ैसला लिया है। मेरे जाने के बाद पता नही मां और पापा पर क्या बीतेगी। तुम्हे उन दोनो का ख्याल रखना है।

मुझे कसम दो मेरी बहना।

तुम हमेशा मां और पापा का कहना मानेगी और उनका ख्याल रखेगी।

मुझे कसम दो,,,

स्वीटी _भईया, मै कसम देती हूं। मै हमेशा उन दोनो को खुश रखने की कोशिश करुंगी।

राजेश _मुझे तुमसे यही उम्मीद है छूटकी।

स्वीटी राजेश को गले से लगा लिया। और रोने लगी।

स्वीटी _भाई अपना ख्याल रखना।

राजेश अपना सामान लेकर घर से जाने लगा।

कीचन पर जाकर,,

राजेश _मै जा रहा हूं मां, अपना ख्याल रखना,,

राजेश ने सुनीता का पैर छूकर इजाजत लिया,,

सुनीता _रोते हुवे बोली, मुझे माफ करना बेटा मै मजबूर हूं।

भगवान तुम्हारी सदा रक्षा करे बेटा।

कल सुबह की ट्रेन है पापा से कहना स्टेशन पर मिले।

राजेश वहा से चला गया। भगत उसे लेने आया वह उसके कार से उसके घर चला गया।

सभी दोस्त राजेश से मिले रात में किसी होटल में खाने के लिए चले गए।

एक दोस्त ने कहा यार अब राजेश भाई से पता नही कब मुलाकात होगा। चलो एक एक पैग हो जाए।

विस्की का आर्डर किया और दो दो पैग पीने लगे।

रात में आज का मौसम कुछ खराब था।

बाहर बारिश होने लगी।

होटल में खाने के बाद कुछ देर और समय बिताने के बाद। सभी दोस्त एक एक कर के अपने अपने घर चलें गए।

आखरी में राजेश और भगत भी कार से अपने निवास स्थान की ओर निकलने के लिए अपने कार के पास पहुंचे ही थे की उन्हे कुछ लोग होटल के बाहर बारिश में नाचते गाते दिखे।

राजेश को बडा अच्छा लगा और वह भी उसमे शामिल हो गया।

 
अगले दिन राजेश प्रातः 11 बजे रेलवे स्टेशन पहुंच गया। भगत उसे छोड़ने गया था। ट्रेन के आने का वेट कर रहे थे। तभी fशेखर राजेश से मिलने के लिए स्टेशन पहुंचा। राजेश को स्टेशन में इधर उधर ढूंढा।

कुछ देर बाद उसे राजेश और भगत बेंच पर बैठे ट्रेन का वेट करते मिले।

वह राजेश के पास गया।

शेखर _बेटा राजेश।

राजेश _पापा आप, अच्छा हो गया आप आ गए। मै आप को ही याद कर रहा था। जब कल घर से निकला तो आप अपने ऑफिस गए हुवे थे।

शेखर _बेटा अच्छा होता की मै भी तुम्हारे साथ गांव चला जाता। पर ऑफिस में काम इतना है की छुट्टी नही मिल पा रही है।

राजेश _कोई बात नही पापा जब आपको छुट्टी मिले आ जाइएगा।

शेखर _बेटा मैने तुम्हारे ताऊ जी को फोन कर दिया है कि तुम गांव आ रहें हो। कुछ दिन वही रहोगे।

वहा स्टेशन पर लेने तुम्हारा बडा भाई भुवन पहुंच जाएगा। मैने उसका नम्बर तुम्हारे मोबाइल पे सेंड कर दिया है। तुम उससे बात करना।

राजेश _ठीक हैं पापा।

शेखर _बेटा तुम अपना ख्याल रखना और किसी भी चीज की जरूरत हो तो मुझे फोन करना।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश ने अपने पिता जी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

शेखर _जी ता रह बेटा, मेरे बेटे को भगवान कामयाब बनाए। उसने राजेश को अपने गले से लगा लिया।

शेखर के आंखो में आंसू आ गए।

राजेश _ये क्या पापा आपके आंखो में आंसू।

शेखर _पहली बार तुम दूर जा रहें हो न, अभी तक हम साथ ही थे।

अच्छा बेटा अब मैं चलता हूं।

राजेश _ठीक है पापा, आप अपना और मां का ख्याल रखना।

शेखर _बेटा तुम हमारी चिन्ता बिल्कुल मत करना।

अपने लक्ष्य पर ध्यान देना।

राजेश _ठीक है पापा।

शेखर वहा से सीधा अपना ऑफिस चला गया।

इधर ट्रेन के निकलने का समय हो जाने के बाद भी ट्रेन स्टेशन में आया नही।

तभी अलाउंस huwa की अभी जो ट्रेन यहां से निकलने वाली थी वाली थीं तकनीकी खराबी के कारण। आज नही जा पाएगी।

भगत _भाई हमे कोई दूसरी ट्रेन देखनी पड़ेगी।

जिस ट्रेन पर जाने वाले थे उसमें खराबी आ गई है।

दोनो टिकट काउंटर में जाकर पता किए तो पता चला की एक ट्रेन शाम को दिल्ली से आयेगी। उसमे एक शीट खाली है।

राजेश ने वह शीट बुक करा ली।

भगत _भाई अब ट्रेन तो शाम को 5बजे आयेगी। यहां बैठकर क्या करेंगे चलो। घर चलते हैं। शाम को ही आयेंगे। हम साथ में कुछ और वक्त बिता ले।

राजेश _तुम ठीक कह रहें हो भगत।

दोनो घर आ गए।

घर आने के बाद राजेश बेड रूम में आराम करने लगा।

भगत _भाई आप आराम करिए। पार्टी के कुछ लोग मुझसे मिलने आए हैं।

मै उनसे मिलकर आता हूं।

राजेश _ठीक है भगत।

यार सिगरेट हो तो देते जाना ।

भगत ने सिगरेट का पैकेट दे गया।

राजेश सिगरेट का कश लगाते हुवे छत बालकनी से रास्ते में आने जाने वाले को देखने लगा।

तभी कमरे में कोई दाखिल हुई।

उसने राजेश को पुकारा।

राजेश ने पीछे पलट कर देखा सामने सुजाता खड़ी थी।

राजेश _मैम आप, यहां।

सुजाता _भगत ने बताया की तुम इस शहर से जा रहें हो, उससे पूछने पर बताया की अभी तुम उनके साथ ही हो। शाम को निकलोगे ट्रेन से।

राजेश _तो आप यहां क्या करने आई है?

सुजाता _राजेश, मैने पिछले दो दिनों में बहुत सोचा और पाया की तुमने हमारी कंपनी को डूबने से बचाया। अपनी जान से खेलकर मेरी इज्जत बचाई। मेरी कंपनी और इस जिस्म पर तुम्हारा हक है।। सुजाता ने राजेश को पीछे से जकड़ लिया और कहा तुम मेरे शरीर का जैसे चाहे उपयोग कर सकते हो।

राजेश मेरे चाहती हू कि तुम मेरे साथ मेरी कंपनी सम्हालो। तुम्हे कही जाने की जरूरत नहीं।

राजेश _नही मैम, मुझे अपनी मां के सपने पूरे करने है। मै सरकारी अफसर बनकर जनता की सेवा करना चाहता हूं। धन कमाना मेरा उद्देश्य नही।

और रही बात तुम्हारे जिस्म की इतना कुछ होने के बाद हम एक दूसरे से दूर रहें, वही दोनो के लिए अच्छा होगा। आप चले जाइए यहां से।

सुजाता _पर राजेश मै तुम्हारे साथ बिताए हुवे पल नही भुल पाऊंगी।

राजेश _अब सब कुछ भुल जाने में ही भलाई है मैम। तुम्हारा और मेरा दोनो का।

सुजाता _यहां से जाना क्या तुम्हारा अंतिम फ़ैसला है।

राजेश _मेरा नही, परिस्थिति चाहती है कि मैं यहां से चला जाऊ।

सुजाता _तो ठीक है राजेश, अब तुम जा रहें हो तो जाने से पहले का कुछ पल मुझे दे दो, क्यू कि इसके बाद पता नही हम कब मिलेंगे।

मै आज तुम्हारे साथ बिताए पल के सहारे जिंदगी बिता दुंगी।

सुजाता ने राजेश का हाथ पकड़ कर कमरे के अंदर ले गया।

राजेश को बेड पर बिठा दिया।

राजेश की आंखो में देखने लगा।

फिर उसके करीब गया उसके ओंठ पर अपना ओंठ रख चुसने लगी।

राजेश ने सुजाता को अपने से दूर धकेल दिया।

राजेश _नही मैम अब ये सब मुझसे नही हो पाएगा।

राजेश अपना सिर पकड़ कर बैठ गया।

सुजाता ने अपनी साड़ी खींचकर निकाल दी।

सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी।

राजेश इधर देखो क्या मुझमें पहले जैसा आकर्षण नही रहा।

राजेश ने अपना सिर उठा कर देखा।

राजेश _मैम प्लीज आप यहां से चले जाओ।

उसने फिर सिर को नीचे झुका लिया।

इधर सुजाता ने अपना ब्लाउज और ब्रा, पेटीकोट उतार कर निर्वस्त्र हो गई।

फिर राजेश के ठुड्ढी पकड़ कर ऊपर कहा, राजेश इधर देखो मेरा ये जिस्म का रोम रोम तुम्हे पुकार रही है।

राजेश ने आंखे खोल सुजाता को देखा जो मादर जात नंगी थी।

अप्सरा की तरह खुबसूरत ऊपर से नंगी औरत को देखकर नामर्द के शरीर में ही कुछ हलचल न हो, राजेश तो मर्द था।

सुजाता की नग्न शरीर को को देखकर उसका मन विचलित होने लगा।

सुजाता एक बार फिर अपनी ओंठ राजेश की ओंठ को चुसने लगी।

राजेश से अब सहन न huwa वह भी सुजाता का साथ देने लगा।

वह भी सुजाता को पागलों की तरह चूमने लगा।

इधर सुजाता राजेश के कपड़ो को एक एक कर निकालता गया और उसे निर्वस्त्र कर दिया।

फिर राजेश को बेड में लिटा कर पूरे शरीर को चूमने लगी।

अंत में राजेश का land मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजेश बहुत अधिक उत्तेजित हो गया। उसका land लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया।

अब राजेश से रहा न गया, वह सुजाता को नीचे कर खुद उसके ऊपर आ गया। उसके सुडौल मस्त चूचियों को मुंह में भर कर चूसने लगा।

मसलने लगा। सुजाता की मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगा।

राजेश सुजाता की बदन को चूमते हुवे नीचे गया और उसकी मस्त फूली हुई रसीली चिकनी chut को चाटने लगा।

सुजाता की पैर मारे उत्तेजना के कप कपाने लगा। उसे बर्दास्त करना मुस्किल हो गया। वह राजेश को पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया।

राजेश ने उसकी ओंठो को फिर जी भर कर चूसा।

फिर सुजाता की दोनो टांगो को फैला दिया।

अपना तना huwa land पकड़ का सुजाता की योनि द्वार पर रख कर एक जोर का धक्का मारा।

Land एक ही धक्के में बुर फाड़कर सरसरता huwa आधे से ज्यादा अंदर चला गया।

सुजाता की मुंह से आह मां,

निकल पड़ा।

अब राजेश सुजाता की दोनो चूचियां अपने हाथ में थामकर गच गच सुजाता को चोदना शुरू कर दिया।

कुछ ही पलों में सुजाता जन्नत की सैर करने लगी।

वह अपनी क़मर उचका कर राजेश का सहयोग करने लगी।

राजेश ने इस पोजीसन में सुजाता को जमकर काम सुख दिया। आह उह उई मां की आवाज़ से कमरा गूंजता रहा।

उसके राजेश नीचे आ गया सुजाता राजेश के ऊपर आ गई।

राजेश के land के ऊपर बैठ कर उछल उछल कर चुदने लगी।

दोनो काम के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे।

राजेश भी अपना क़मर उठा उठा कर अपने land को सुजाता की योनि में और अधिक गहराई तक ले जाने का प्रयास कर रहा था।land का टोपा सुजाता की गर्भाशय को ठोक रहा था जिससे सुजाता के जिस्म में एक अलग तरंग पैदा हो रहा था।

वह उत्तेजना की अंतिम शिखर तक पहुंच गई। और झडने लगी।

राजेश के ऊपर लुड़क गई।

कुछ देर राजेश की बाहों मे सुस्ताने लगी।

कुछ देर बाद राजेश सुजाता को नीचे किया और स्वयं ऊपर आ गया।

फिर उसकी ओंठ चूसने लगा चूचियां मसलने लगा।

नाभी जीभ से चाटने लगा।

राजेश की इस हरकत से सुजाता फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सुजाता को घोड़ी बना दिया।

अपना land पकड़ कर फिर से उसकी योनि द्वार पर रख कर ग च से पेल दिया।

Land एक ही बार में पुरा अंदर चला गया।

अब राजेश सुजाता की क़मर को पकड़ कर सुजाता की दनादन chudai शुरू कर दिया।

एक बार फिर सुजाता के मुंह से आह उह, उई मां आह की आवाज़ निकल कर कमरे मे गूंजने लगा।

राजेश ने अपना देखा की सुजाता की गाड़ फूल और पिचक रहा है। वह एक उंगली उसकी गाड़ में डाल दिया।

कुछ देर बाद दो उंगली डालकर अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर जमकर बुर मारने के बाद वह अपने land को बुर से बाहर निकाल दिया।

और सुजाता की गाड़ में रख कर दबाव बनाया

सुजाता की गाड़ धीरे धीरे फैलने लगा और राजेश का land उसमे समाते चला गया।

सुजाता को दर्द भी हो रहा था।

पर वह सारा दर्द सह ली एक समय ऐसा आया जब लन्ड ने गाड़ में अपना जगह बना लिया।

अब सुजाता का दर्द कम होने लगा।

अब राजेश सुजाता की गाड़ में land तेज तेज अंदर बाहर करने लगा।

Land गाड़ में कसा कसा अंदर बाहर होने लगा।

राजेश को भी बहुत मजा आने लगा।

राजेश अब land Ko गाड़ से निकाल योनि में डाल दिया। फिर कुछ देर जमकर बुर चोदा फिर गाड़ में डाल दिया और गाड़ मारने लगा ।

दोनो संभोग के परमसुख को प्राप्त कर रहे थे।

गाड़ की तेज रगड़ से राजेश भी अब झडने की स्थिति में आ गया ।

वह सुजाता को लिटा दिया और उसकी टांगो को अपने कंधे पर रख कर।

अपना land उसकी योनि में डाल कर जमकर चोदा।

और अपने land का पानी सुजाता की बुर में भर दिया।

गर्म गर्म वीर्य को अपनी योनि में जाता पाकर सुजाता को एक असीम आनद का अनुभव huwa और वह फिर झडने लगी।

दोनो एक दूसरे के बाहों में सो गए।

जब सुजाता आंखे खोली तो देखा दो बज रहे थे।

सुजाता _राजेश उठाे मुझे भुख लग रही है। किसी अच्छे से होटल में चलकर खाना खाते हैं।

सुजाता उठी और बाथरुम में घुस कर नहाई।

उसने देखा राजेश अभी भी सो रहा है। वह राजेश को उठा कर बाथरुम ले गई उसे नहलाई।

फिर दोनो अपने कपड़े पहन कर तैयार होने लगे।

दोनो तैयार होकर बाहर निकले। भगत को फोन कर बता दिया कि वे होटल जा रहें हैं लंच के लिए।

फाइव स्टार होटल में जाकर सुजाता ने पसंदिदा डीस आर्डर किया।

फिर दोनो ने लंच किया। लंच करने के बाद 3.30बजे तक साथ समय बिताए।

ट्रेन का समय 4बजे का था।

राजेश और सुजाता दोनो भगतके निवास स्थल आय। वहा बैग लेकर निकल पड़े।

निकलते समय भगत साथ आ रहा था कि राजेश ने कहा।

राजेश _मैम स्टेशन जा रही है, भगत तुम अपने काम देखो।

भगत _भाई, मुझे हर पल आपकी मदद की जरूरत होगी।

राजेश _किसी भी प्रकार की मदद की जरूरत हो मुझे फोन कर बताना।

भगत _ठीक है भाई। भगवान आपको कामयाब बनाए।

सुजाता और राजेश स्टेशन के लिए निकल गए।

कुछ देर में ही ट्रेन पहुंच गई।

राजेश _अच्छा मैम अब मै चलता हूं।

सुजाता _ठीक है राजेश, तुम अपना ख्याल रखना।

और समय मिले तो मुझसे फोन पर बात करना।

ट्रेन पर राजेश चढ़ गया।

ट्रेन चलने लगी।

राजेश ट्रेन के गेट पर खड़ा होकर सुजाता को टाटा कर रहा था ट्रेन दूर निकल गई।

तभी एक बहुत खुबसूरत लड़की ट्रेन के पीछे पीछे भागते हुवे ट्रेन को पकड़ने की कोशिश कर रही थी।

राजेश ने देखा लड़की ट्रेन पर चढ़ने के लिए दौड़ रही है।

राजेश उसकी मदद करना चाहा।

वह हाथ आगे बढाया।

लड़की ने अपना एक हाथ आगे बढ़ाई। और पूरे जोर लगाकर दौड़ी।

राजेश भी जितना हो सके झुक गया।

और लड़की की तरफ हाथ आगे बढाया।

लड़की ने पूरा जोर लगाकर आखिर राजेश का हाथ पकड़ने में कामयाब हो गई।

राजेश ने उसे अपनी ओर खींचा।

लड़की ट्रेन पर चढ़ गई।

लड़की हापने लगी।

लड़की _ओह थैंक्स, अगर तुमने मदद नहीं की होती तो ट्रेन छूट गई होती।

राजेश _पर आपका बैग कहा है।

लड़की _मेरा बैग मेरे सीट पर है। मै कुछ सामान लेने उतरी थी की ट्रेन स्टार्ट हो गई।

राजेश _ओह।

लड़की अपने सीट की ओर जाने लगी।

राजेश अपना टिकट चेक किया सीट नंबर देखा।

उसे ढूंढने लगा।

जब अपना सीट पाया तो देखा की उसका सीट उस लड़की के सीट का ऊपर वाला सीट था।

लड़की _आपका सीट नंबर क्या है?

राजेश _जी ये ऊपर वाला सीट मेरी है।

लड़की _ओह।

राजेश ने अपना बैग नीचे डाल दिया। और उस लड़की के सामने वाली सीट पर बैठ गया।

वह बोगी पूरी तरह यात्रियों से भर चुका था।

राजेश जिस सीट पर बैठा था। उस पर २लोग और बैठे थे।

सामने वाली सीट पर भी ३लोग बैठे थे।

राजेश अपने ऊपर के सीट पर चढ़ गया और लेट गया।

अपने विचारो में खो गया।

राजेश अपने मोबाइल पर अपनी मां पापा का फोटो देखकर उन्हें मिस करने लगा।

इधर ट्रेन सिटी बजाते हुवे तेज गति से सरपट दौड़ने लगा।

नीचे उस लड़की के बाजू में एक औरत और उसका पति बैठा था।

औरत को लगा की राजेश ऊपर से उसका फोटो खीच रही है।

औरत _सुनो जी वो लडका ऊपर चडकर मेरी फोटो खीच रहा है।

पति _क्या? मेरे सामने ही मेरी बीवी की फोटो खीच रहा है। इसकी इतनी हिम्मत।

अबे उतर, तेरी इतनी हिम्मत मेरी बीबी की फोटो ले रहा है।

नीचे उतर, तुम जैसे लफंगों से मुझे निपटना आता है।

चोरी छिपे औरतों की फोटो खिचतो हो फिर उसे यू ट्यूब पर डालते हो।

नीचे उतर।

लड़की _क्या तुमने सच मे इनकी फोटो खींची, मै तुम्हे शरीफ लडका समझ रहा था तुम तो लफंगा निकले।

राजेश _इनकी बीवी को कोई गलत फहमी huwa हैं मैने इनकी कोई तस्वीर नही लिया है।

पति _सच क्या है अभी पता चल जायेगा दिखाओ अपना मोबाइल।

राजे_मैंने कहा न मैने कोई तस्वीर नही खींची है।

लड़की _अगर तुमने कोई तस्वीर नही खींची है तो मोबाइल दिखा क्यू नही देते।

राजेश ने लड़की को अपना मोबाइल दे दिया ठीक है आप चेक कर लीजिए।

लड़की ने मोबाइल लिया और कहा _पासवर्ड क्या है?

राजेश ने मोबाइल का पासवर्ड बता दिया।

लड़की ने मोबाइल की गैलरी चेक की। उसे उस औरत की कोई फोटो नही मिला।

लड़की _इसमें तो आपकी कोई फोटो नही है।

पति _इसने जरूर फोटो कही छिपा दिया होगा।

इन जैसे बदमाशो को मैं अच्छी तरह जानता हूं।

राजेश ने अपना मोबाइल लिया और अपने सीट पर चादर ओर के सो गया।

राजेश का गांव राजधानी से 600km दूर था। लक्ष्मण पुर स्टेशन से उतरकर 15km अंदर जाना था। ट्रेन सुबह ही लक्ष्मण पुर स्टेसन पहुंचेगा।

जिस रूट पर ट्रेन चल रहा था 400km से आगे 200km तक इंटिरयल रूट था। उसके आगे केवल 2ही स्टेशन पड़ता था।400km चलते चलते अधि कांश यात्री उतर जाते थे।

बोगी में 1/3यात्री ही शेष रह जाते।

इसी का फायदा बदमाश लड़के उठाते।

400km के बाद एक स्टेशन पड़ता था। जहा बदमाशो का एक गिरोह सक्रिय था। जो औरतों और लड़कियों का शिकार करता था।

बदमाशोका गिरोह न जाने कितने लड़कियो को अपने हवस का शिकार बना चूके थे।

इनको चलती ट्रेन में लडकियों औरतों का बलात्कार करने में बड़ा मजा आता था।

इधर ट्रेन आगे बड़ने लगी। रात होने पर यात्री अपने पास रखे भोजन करके सोने लगे।

राजेश भी सो गया था।

वह लड़की और औरत भी अपने अपने सीट पर सोने की तैयारी करने लगें।

इधर जैसे जैसे स्टेशन आता यात्री उतरने लगे। बोगी खाली होता गया।

400 km के बाद जब स्टेशन आया वहा। गिरोह के बदमाश जो 8_9के संख्या मे थे।

ये गिरोह जनरल कोच का टिकट लेते थे।

फिर सभी अलग अलग एसी कोच स्लीपर कोच में चले जाते और अपनी शिकार की तलास में जुट जाते।

जब किसी सदस्य को खुबसूरत औरत या लड़की मिल जाता। और बोगी में कम लोग बैठे हो तो उसका चुनाव करता और फोन कर अपने सभी साथी को इसकी जानकारी देते। फिर वे धीरे धीरे सभी उस बोगी में एकत्र होने लगते।

इशारों में बात करते।

जब सभी यात्री सो जाते तब ये पिस्तौल, चाकू निकाल लेते। बोगी के दोनो ओर के दरवाज़े बंद कर देते। लोगो को डरा धमकाकर लडकियों औरतों का बलात्कार करते फिर अगले स्टेशन पर उतर कर भाग जाते।

जब गिरोह के एक सदस्य ने राजेश के सीट के नीचे वाली लड़की को देखा।

तो वह अपने banki साथियों को फोन कर इसकी जानकारी दिया की आज का शिकार मिल गया है।

सदस्य _भाई तुम लोग एसी कोच के 25 नंबर की बोगी में आ जाओ।

यार सच में क्या गजब की मॉल है?

दिव्या भारती से भी ज्यादा खुबसूरत मॉल है।

गिरोह के सभी सदस्य एक एक कर के उस बोगी में आने लगें।

खाली सीटो में बैठने लगे।

वे इशारों में बात करते।

इधर बोगी में कम यात्री ही बचे थे। वो भी अपने अपने सीट पर सो चूके थे।

गिरोह को लगा की यह सही मौका है।

रात के करीब 2बज चूके थे।

बदमाशो का लीडर ने अपने साथियों को इशारा किया।

उनके साथियों ने बोगी के दोनो ओर का दरवाजा बंद कर दिया। ताकि दूसरे बोगी के लोग न आ सके।

उसके बाद वह लड़की के पास गए।

लड़की का मुंह बन्द कर दिया। उसे ठाकर खाली सीट पर ले जाने लगे।

लड़की हाथ पैर चलाने लगी। चीखने की कोशिश करने लगी।

उसने पूरे जोर लगाकर कर उनका विरोध किया।

बदमाशो की पकड़ कम होने पर चीखी।

चीख सुनकर आसपास के लोग उठे।

बदमाशो ने पिस्तौल दिखा कर लोगो को धमकी दी, सभी अपने सीट पर चुप चाप लेटे रहे किसी ने कोई हरकत किया तो मारे जाओगे।

लोग डर के मारे अपने जगह पर लेटे रहे।

इधर बदमाश लड़की को खाली सीट पर उठा कर ले जाने लगे।

लड़की चीखने लगी तुम लोग कौन हो?

छोड़ो मुझे, इधर एक बदमाश कोऔरतों के साथ खेलने में ज्यादा मजा आता था।

जब लड़की के बाजू वाली सीट पर लेटी महिला पर नजर गया।

तो, यार तुम लोग उस लड़की का सील तोड़ो।

मुझे मेरा मॉल मिल गया है।

उस औरत को बदमाश ने उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया।

आजा मेरी रानी मेरी प्यास तू बुझायेगी।

क्या गदराया बदन है तुम्हारा।

उसका पति, जो लेटा था उठ गया।

छोड़ दो मेरी बीवी को।

बदमाश _तेरी बीबी को तो तेरे आंखो के सामने चोदूंगा हाय बड़ा मजा आएगा।

एक बदमाश ने उसके पति के गले में चाकू अड़ा दिया।

उसका पति डर गया।

प्लीज मेरी पत्नि को छोड़ दो।

कोई बचाव मेरी बीवी को।

औरत भी छोड़ने की रहम मांग रहि थी।

बदमाश को बड़ा मजा आ रहा था वह उसकी चूची को कपड़े के ऊपर से ही मसलने लगा।

उधर लड़की भी चीख रही थी।

बदमाश _और चीखों यहाँ तुम्हारी पुकार सुनने वाला कोई नहीं।

हा हा हा,,,,

दो बदमाश लड़की के दोनो हाथ पकड़ लिए। दो बदमाश उसके पैर।

बदमाशो का लीडर लड़की के कपड़े को पकड़ कर फाड़ने वाला ही था कि,,,

किसी ने आवाज़ दिया,,,

छोड़ दो इन लोगो को,,,

बदमाशो ने इधर उधर देखा कौने बोला बे,,

किसको मरने का है,,,

राजेश अपने सीट से उठकर बैठ गया,,,

मैने कहा छोड़ दो इन लोगो को,,,

बदमाश _लो जग गया हीरो, हीरोइन को बचाने सभी बदमाश हसने लगे।

अबे क्यू अपनी जान गवाना चाहता है।

राजेश _अगर तुम लोग अपनी जान बचाना चाहते हो तो छोड़ दो इस लड़की और औरत को।

बदमाश _अबे शाला हमे धमकाता है ।

एक बदमाश ने चाकू से प्रहार किया।

राजेश ने उसके हाथ को रोक दिया ।

फिर उसके हाथ पकड़ कर ज़ोर से खींचा की उस बदमाश का गला उसके चाकू से ही कट गया वह वही लुड़क गया।

अपने साथी को जमीन पर गिरता देख।

बदमाशो के लीडर ने कहा _मारो साले को। राजेश पर एक एक करके अटैक करने लगें।

एक चाकू राजेश के भुजा पर लगा।

उसके भुजा से खून बहने लगा।

राजेश शेर की भाती दहाड़ा।

जो भी उसके सामने आता उसे उसके प्रहार को रोक कर उसकी गर्दन को अपनी भुजा में दबाता।

दूसरे बदमाश को जोर दार मुक्का मारता एक एक कर सभी बदमाश नीचे लुढ़कते गए।

बचे बदमाश डर के मारे भागने लगे वे बोगी का दरवाजा खोल कर दूसरे बोगी की ओर भागने लगे तभी राजेश एक एक को पकड़कर उसकी गर्दन तोड़ने और ट्रेन की दरवाजा खोल बाहर फेकने लगा।

राजेश और बदमाशो के बीच tarin के दरवाजे के पास जमकर फाइट huwa बदमाश मिलकर राजेश को ट्रेन से फेकने की कोशिश करने लगें।

पर राजेश को ट्रेन से फेकने में असफल रहे राजेश ने फिर से जोर दार दहाड़ा और बदमाशो पर जोरदार प्रहार कर सबकी हाथ गर्दन तोड़ कर ट्रेन से फेकता गया।

एक एक कर सभी बदमाशो को ट्रेन से फेक दिया। ट्रैन तेज गति से चली जा रही थी।

लड़की राजेश को बदमासो से लड़ते हुए देख रही थी।

जब सभी बदमाशो को मारकर ट्रैन से फेक दिया।

राजेश लड़खड़ाता हुवा अपने सीट की ओर गया लड़की ने उसे सहारा दिया। और राजेश को सीट पर बिठाया।

लड़की _, तुम्हारी भुजाओं से तो काफी खून बह रहा है।

लड़की ने अपने बैग से उपचार की सामाग्री निकाला।

और राजेश का उपचार करने लगा।

राजेश लड़ते लड़ते थक चुका था। करीब आधे घण्टे बाद वह नार्मल महसूस किया।

उस औरत और उसके पति ने राजेश से माफी मांगने लगीं। हम लोग तुम्हे लोफर समझ कर बुरा भला कहा और तुम ने हमारी इज्जत और जान बचाया।

हमे।

उसका पति _तुम सच में हीरो हो,,,

लड़की _तुम बहुत बहादुर हो,,,

क्या नाम है तुम्हारा,,,

राजेश _राजेश,,,

लड़की _राजेश,,, हम लोगो की इज्जत बचाने के लिए,,, बहुत बहुत धन्यवाद।

राजेश _वैसे आपका नाम क्या हैं?

लड़की _दिव्या, दिव्या ठाकुर।

राजेश _दिव्या जी,,

आप डॉक्टर है क्या?

ये सब उपचार की सामाग्री,,

दिव्या _आप ने बिलकुल ठीक कहा मैं एक डॉक्टर हूं।

मै मुंबई के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर अपना घर जा रही हूं।

राजेश _ओह।

 
राजेश के जख्मों पर दिव्याद्वारा मरहम पट्टी करने से राजेश को दर्द से राहत मिला।

राजेश को दिव्या ने बताया कि वह एक डाक्टर है और मुंबई मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर अपनी घर जा रही है।

तभी राजेश को दिव्या पूछती है।

दिव्या _दर्द से कुछ राहत मिला।

राजेश _हा, काफी हद तक। धन्य वाद दिव्या जी ।

दिव्या _शुक्रिया तो मुझे कहना चाहिए, अगर आप नही होते तो पता नही आज क्या हो जाता?

वैसे आप जा कहा रहे है।

राजेश _मै अपने दादा जी का गांव जा रहा हूं। वैसे तो दादा दादी नही रहे। ताऊ और चाचा जी अपने परिवार के साथ रहते हैं। मेरी कालेज की पढ़ाई पूरी हो चुकी है, तो मैं कुछ दिन उनके साथ बिताने जा रहा हूं।

वैसे आप कहा उतरेंगी दिव्या जी।

दिव्या _मै लक्ष्मण पुर स्टेशन।

राजेश _लक्ष्मण पुर स्टेशन तो मुझे भी उतरना हैं।

दिव्या _क्या सचमुच?

राजेश _जी दिव्या जी। लक्ष्मण पुर स्टेशन से 15km है मेरा दादा जी का गांव, सूरज पुर।

दिव्या _क्या कहा आपने सूरज पुर, वह तो पड़ोसी गांव है।

मेरा गांव भानगढ़ है, वहा से 4 km दूर सूरज पुर है।

राजेश _ओह तब तो हम पढोसी हुवे।

दिव्या _वैसे आपके घर में कौन कौने है?

राजेश _मेरे पापा जो एक बैंक में मैनेजर है मेरी मां जो एक हाउस वाइफ है। मेरी एक छोटी बहन स्वीटी जो अभी इस वर्ष फर्स्ट ईयर की परीक्षा दिलाई है।

और मैं। 4लोग।

और आपके घर मे कौन कौने है दिव्या जी।

दिव्या _मेरे पिता जी,ठाकुर बलेन्द्र सिंहउम्र 50वर्ष, लक्ष्मण पुर विधानसभा से विधायक है,मेरी मां रत्ना वती 44वर्ष जो भानगढ़ की सरपंच है। मेरी बडी बहन गीता ठाकुर 25वर्ष जो इस धरम पुर जिला के पंचायत प्रमुख (अध्यक्ष) और मै ।

राजेश _लगता है आप बड़े जमीदार फैमली से है।

दिव्या _ जी,हमारे पूर्वज इस क्षेत्र के राजा huwa करते थे।

राजेश _पर आप अकेली मुंबई से ट्रैन में क्यू आ रही हो। आप इतनी सुंदर है किसी भी बदमाश लडको की नियत बिगड़ सकती है?

दिव्या _हंसते हुवे बोली,,,

मै मुंबई से राजधानी तक फ्लाइट से आई, राजधानी से ट्रैन पकड़ी।

पिता जी तो नौकरों को गाड़ी लेकर राजधानी भेज रहे थे। पर मैने मना कर दिया। मुझे कार में लम्बे समय तक बैठना सूट नही करती ।

राजेश _ओह।

दोनो वार्तालाप करते हुवे जा रहें थे इधर ट्रैन तेज पहाड़ों और सुरंगों से होता huwa दौड़ रही थी। लक्षमण पुर स्टेशन पहुंचने वाली थी।

दिव्या _सुबह के 6बजने वाली है,आधे घंटे में ट्रैन लक्ष्मणपुर स्टेशन पहुंच जाएगी।

राजेश, वैसे पूछना तो नही चाहिए पर,,,

राजेश_दिव्या जी, आप बेझिझक पूछिए क्या पूछना है?

दिव्या _राजेश मैने तुम्हारे मोबाइल की गैलरी चेक की थी। उसमे एक खुबसूरत लडकी की ढेर सारी तस्वीर थी।

कौन है वो।

राजेश निराश हो गया, वह उदास हो गया।

राजेश हाव भाव देखकर दिव्या ने कहा,,

ओह शायद मुझे नही पूछना चाहिए था।

दिव्या _वह निशा की तस्वीर है। राजेश गंभीर होते हुए बोला।

मेरी कालेज की दोस्त।

राजेश किसी ख्याल में खो गया।

दिव्या _क्या huwa राजेश कहा खो गए? क्या हुआ?

राजेश _कुछ दिव्या जी।

दिव्या _बहुत प्यारा नाम है तुम्हारी दोस्त का और बहुत खुबसूरत भी।

लगता है उसे बहुत प्यार करते हो?

राजेश _वो मुझे छोड़ कर चली गई।

दिव्या _क्या? कहा चली गई?

राजेश _हमेशा के लंदन।

दिव्या _पर क्यू?

राजेश _मेरी गलतियों की वजह से? वो मुझसे नाराज़ होकर हमेशा के लिए लंदन चली गई।

दिव्या _और तुम राजधानी छोडकर गांव जा रहें हो।

राजेश _अब इस बात को छोड़ो, दिव्या जी।

अब किसी के बिना जिंदगी रुक तो नही जाती न।

दिव्या _मुझे, सुनकर बड़ा दुख हुआ !

लो राजेश हमारा स्टेशन आ गया।

दोनो लक्षमण पुर स्टेशन पर पहुंचे।

दोनो को ढोल नगाड़ों की आवाज़ सुनाई पड़ी।

ठाकुर गजेंद्र सिंह अपने बेटी गीता और अपने साथियों के साथ दिव्या को लेने के लिए आए थे।

दिव्या के उतरते ही लोगो ने उसे फूलो से लाद दिया।

दिव्या ने अपने पिता जी का पैर छूकर प्रणाम किया।

दिव्या _पिता जी ये सब क्या है? इसकी क्या ज़रूरत थी।

ठाकुर _मेरी बेटी डाक्टर बनकर घर आ रही है। आज मै बहुत खुश हूं।

गीता ठाकुर भी वही पर खड़ी थी।

गीता ने दिव्या को अपने गले लगाकर कहा।

कैसी है मेरी बहना?

दिव्या _मै अच्छी हूं दी, आप कैसी है?

गीता _मै भी अच्छी हूं। बस तुम्हे ही याद करती थी की मेरी प्यारी बहना कब आयेगी।

ठाकुर _चलो बेटा, अब घर चलते है।

दिव्या _रुको पिता जी,

राजेश वही पर खड़ा था।

दिव्या _पिता जी ये राजेश है। ये हमारे पड़ोसी गांव सूरजपुर का रहने वाला है। पिता जी ट्रैन में कुछ बदमाशो ने मुझसे छेड़खानी करना चाही।

राजेश ने मुझे उन बदमाशो से बचाया।

ठाकुर _क्या? ट्रैन में ठाकुर बलेंद्र सिंह की बेटी से छेड़खानी किसकी इतनी हिम्मत हो गई। कौन थे वे लोग बेटी, मै उन कमीनो को ऐसा सजा दूंगा की दुनियां देखेगी।

दिव्या _पिता जी राजेश ने उन लोगो के उनके किए की सजा दे दी है।

ठाकुर ने शुक्रिया नौजवान, मेरी बेटी की मदद करने के लिए।

मुनीम जी राजेश को उनका इनाम दो।

मुनीम ने 500रुपए की 2बंडल राजेश को निकाल कर देने लगा।

राजेश _ठाकुर साहब इसकी आवश्यकता नहीं है। ये तो मेरा फर्ज था।

ठाकुर _लगता है बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं तुम्हारे मां बाप ने।

वैसे तुम किसके लड़के हो।

राजेश _मेरे पिता जी का नाम, शेखर वर्मा है।

ठाकुर मुनीम की ओर देखने लगा।

कुछ देर बाद फिर पूछा।

ठाकुर _तुम्हारी मां का नाम सुनीता तो नही।

राजेश _जी आपने बिलकुल सही कहा? क्या आप मेरे मां पापा को जानते हैं।

ठाकुरऔर मुनीम एक दूसरे को देखने लगे जैसे सांप सूंघ गया हो।

मुनीम _अरे बेटा तुम तो हमारे पड़ोसी गांव के हो, वहा के अधिकांश लोगो को हम जानते हैं।

दिव्या _पिता जी राजेश को भी हम अपने साथ ले चलते है।

ठाकुर _, क्यू नही?

राजेश _नही ठाकुर साहब, मेरे ताऊ जी का लडका, मेरा भाई मुझे लेने आ रहे हैं।

आप लोग जाइए।

ठाकुर _ठीक है राजेश, चलो बेटा दिव्या जीप में बैठो, हम घर चलते है घर में तुम्हारी मां तुम्हारी राह देख रही है।

ठाकुर, दिव्या और गीता जीप में बैठ गए, ठाकुर के आदमी दूसरी गाड़ी पे बैठ कर पीछे पीछे चलने लगे।

दिव्या के जाने के बाद, भुवन पंहुचा। वह मोबाइल पर भेजे गए फोटो को देखता huwa राजेश को ढूंढने लगा।

कुछ देर में ही वह राजेश को ढूंढ लिया।

भुवन _, तुम राजेश हो न,

राजेश _जी, आप कौन है?

भुवन _अरे मुझे पहचाना नहीं मै भुवन। तुम पहचानो ge कैसे पहली बार जो गांव आ रहें हो।

राजेश _अरे भुवन भाई आप।

दोनो गले मिलते है।

भुवन _घर में सब कैसे है राजेश?

राजेश _सब अच्छे है भईया।

भुवन _यार तुम पहली बार गांव आ रहे हों घर में सब तुमसे मिलने के लिए लालायित है, चलो घर चलते है।

चलो बैठो बाइक पे।

राजेश _ठीक है भईया?

राजेश और भुवन दोनो बाइक पर गांव की ओर निकल पड़े।

रास्ते में _यार, तूने बॉडी तो एक दम मस्त बनाई है फौजी की तरह! देखने में बॉलीवुड की हीरो लगता है।

गांव वाले देखना तुमको देखते रह जायेंगे।

मै भी कहूंगा? मेरा छोटा भाई है, मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो जायेगा!

सूना है तुम कलेक्टरी की तैयारी कर रहे हों!

राजेश _हां, भईया।

दोनो बातचीत करते हुए भानगढ़ तक पहुंच गए।

भुवन _ये भानगढ़ है यहां के विधायक ठाकुर बलेंद्र सिंह की हवेली पड़ती है उस तरफ।

उधर जाना मत।

राजेश _क्यू भईया?

भुवन _क्यू की हमारे गांव वाले और उनकी बनती नही है।

राजेश _ऐसा क्या हो गया, भईया।

भुवन _बाद में सब पता चल जायेगा छोटे।

भान गड़ तक रास्ता ठीक था। भानगढ़ से सुरज पुर वाले रास्ता कच्ची और खराब थी।

कुछ दूर चलते ही बाइक पंचर हो गई?

बाइक लहराने लगा।

भुवन _राजेश लगता है बाइक पंचर हो गई।

इसे बनवाना पड़ेगा।

यहां से हमारा गांव 4km है। भान गड़ में ही इसे बनाना पड़ेगा।

भुवन बाइक को पैदल धक्के लगाते ही भानगढ़ वापस ले जाने लगा।

तभी उसे सायकल से डाकिया आते दिखा।

डाकिया _क्या huwa भुवन भाई?

भुवन _अरे रुको डाकिया बाबू। गाड़ी तो पंचर हो गई है।

तुम कहा जा रहें हो।

डाकिया _मै तुम्हारा गांव जा रहा था।

ये नौजवान कौन है, नया लगता है।

भुवन _ये मेरा छोटा भाई है, राजेश आज ही शहर से गांव आया है। घर जा रहें थे की बाइक पंचर हो गया।

तुम एक काम करोगे?

डाकिया _अरे बोलो भुवन भाई।

भुवन _तुम अपनी सायकल पर राजेश को घर तक छोड़ देना।

डाकिया _ठीक है भुवन भाई।

भुवन _राजेश तुम गांव चले जाओ, डाकिया बाबू के साथ, घर में सब तुम्हारे राह देख रहे हैं। मै बाइक बनाकर आऊंगा।

राजेश _अरे भईया बाइक बनवाकर साथ चलेंगे।

भुवन _नही राजेश तू पहली बार गांव आ रहा है। पहले दिन ही ये सब,,, ठीक नही लगेगा ।

तुम डाकिया बाबू के साथ चलें जाओ।

राजेश _ठीक है भईया,,

राजेश डाकिया के सायकल पर बैठ गया।

एक दूसरे से बातचीत करते हुए सायकल से दोनो गांव की ओर जाने लगे।

राजेश _गांव की सड़क की हालात तो बहुत खराब है।

विधायक जी का गांव लगा huwa है फिर भी।

डाकिया _यहां की हालत के बारे में क्या बताऊं, भाई।

डाकिया गीत गाकर यहां की हाल बताने लगे,,,,
 
गांव पहुंचने से पहले एक मंदिर आया।

डाकिया बाबू _शहरी बाबू ये शिव जी का मंदिर है। यहां से गुजरने के पहले लोग इनके दर्शन करते है।

मै भी जब भी इस गांव में आता हूं। प्रभु का दर्शन करता हूं।

आइए मंदिर चलते है।

राजेश सायकल से उतर कर मंदिर का सीढ़ी चढ़ने लगा।

तभी अचानक तेज हवा चलने लगा।

मंदिर की घंटियां हवा की तेज झोखो से हिलने लगी।

घंटियां बजने लगी।

मंदिर का पुजारी मंदिर जो एक बुजुर्ग व्यक्ति था, वह बाहर की ओर देखने लगा। उसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था।

ये घंटियां अचानक क्यू बजने लगी।

राजेश मंदिर का सीढ़ी चढ़ गया।

डाकिया सायकल खड़ा कर राजेश के पीछे आया।

इधर पुजारी की नजर राजेश पर पड़ा।

वह राजेश को पहचानने की कोशिश करने लगा।

मंदिर की घंटियां बज रही थी।

उसे लगा की कोई फरिश्ता आया है।

पुजारी _मानव।

वह राजेश को एक टक देखने लगा।

तभी डाकिया सामने आया।

डाकिया _बाबा ये शहरी बाबू है, ये शहर से आया है।

गांव जा रहा था, तो मैंने कहा पहले मंदिर जा कर प्रभु के दर्शन कर लेते है।

राजेश ये मंदिर का पुजारी है।

पुजारी राजेश को हतप्रभ देखता रहा।

राजेश _प्रणाम बाबा।

पुजारी _जीते रहो बेटा।

पुजारी _तुम्हारे पिता जी का क्या नाम है बेटा।

राजेश _शेखर।

पुजारी _क्या तुम मानव के पोते हो?

राजेश _जी बाबा, मेरे दादा जी का नाम मानव प्रसाद था, अब वह इस दुनियां में नही है।

क्या आप उसे जानते थे?

पुजारी _तुम्हारी सकल तो तुम्हारे दादा जी से काफी मिलती है। एक पल तो मुझे लगा की तुम मानव हो।

पुजारी _हे प्रभु ऐसा लगता है तुमने मानव को फिर से वापस भेज दिया है।

ये घंटियां पहली बार ऐसे बज रही है। लगता है बेटा तुम इस गांव में फरिश्ता बन कर आए हो।

राजेश _मै कोई फरिश्ता नही बाबा, मै तो खुद जिंदगी से चोट खाकर आया हूं।

राजेश ने शिव जी का दर्शन कर अपना शीश झुकाकर प्रणाम किया।

पुजारी _लो बेटा प्रसाद।

पुजारी ने उसे प्रसाद दिया।

राजेश _बाबा आप मेरे दादा जी को जानते थे।

पुजारी _बेटा तुम्हारे दादा जी को कौन नहीं जानता।

वह बहुत सज्जन व्यक्ति थे।

ठाकुर महेंद्र सिंह और तुम्हारे दादा जी परम मित्र थे।

ठाकुर महेंद्र सिंह,तुम्हारे दादा जी की सलाह के बिना कोई कार्य नहीं करते थे। दोनो का का दूर दूर तक आदर और सम्मान था।

पर एक दिन इस मंदिर के स्थापना दिवस के दिन दोनो मंदिर में पूजा करने आए थे।

कुछ नकाब पोशो ने बंदूक से गोली मारकर उन दोनो की हत्या कर दी।

इसी मंदिर के सीढ़ी पर मेरे आंखो के सामने तुम्हारे दादा और ठाकुर महेंद्र सिंह ने दम तोड़ा था।

लोग तो उनकी हत्या को लेकर कई तरह की बाते करते हैं, पर सच्चाई क्या है वह प्रभू ही जानता है।

तुम्हारे दादा के गुजर जाने के बाद

इस गांव के बुरे दिन शुरू हो गए।

मुझे लगता है तुमअपनी इच्छा से नही, प्रभु ने तुम्हे यहां भेजा है यहां पिछड़े गरीब लोगो की मदद करने।

बाबा की बातो को सुनकर राजेश के मन में ढेर सारे सवाल उमड़ने लगे।

मां और पापा ने कभी इस बारे में मुझे बताया क्यू नही?

अब यहां आया हूं तो सारी बातें पता चल ही जाएगी।

राजेश ने बाबा को प्रणाम कर कहा,,

अच्छा बाबा अब मै चलता हूं।

डाकिया ने राजेश को उसके ताऊ जी के घर तक छोड़ा।

घर वाले उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

राजेश जैसे ही घर के आंगन में गया।

सभी लोग उसे गौर से देखने लगे।

राजेश ने उन लोगो से कहा,,

जी मै राजेश हूं।

ताई _अरे बेटा तू आ गया। मै तेरी ताई। कब से तुम्हारे आने का इंतजार कर रहे थे।

राजेश ने अपनी ताई की पैर छूकर प्रणाम किया।

ताई की उम्र थी 44 वर्ष नाम था पदमा।

पदमा _जीता रह बेटा। भुवन तो तुम्हे लाने गया था। वो मुआ कहा है।

राजेश _ताई, हम बाइक से आ रहे थे की रास्ते पर बाइक पंचर हो गया। भुवन भईया ने मुझे डाकिया बाबू के साथ गांव भेज दिया वह बाइक बनाकर आएगा।

पदमा _गांव की सड़के तो पैदल चलने के लायक नही है बेटा, तुम्हे तो बडी तकलीफ हुई होगी ऊबड़ खाबड़ सड़क से आने में।

तू थक गया होगा बेटा आ बैठ खाट पे।

पदमा ने अपनी बहु को आवाज़ लगाई।

बहु, राजेश के लिए पानी ले आ।

बहु का नाम था पूनम उम्र 22वर्ष।

पूनम पानी लेकर आई।

पूनम ने राजेश को पानी देने लगी,,

पदमा _बेटा ये तेरी भौजाई है। भुवन की लुगाई।

पूनम राजेश की पैर छूने नीचे झुकी।

राजेश _भाभी ये आप क्या कर रही है? आप मुझसे बडी है।

पदमा _बेटा, इधर भौजाई, देवर का पैर छूती है। उसे रिवाज निभाने दे।

राजेश _पर ताई ये मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

पदमा _अरे बेटा, कुछ दिनो में तुम्हे भी आदत पड़ जाएगी।

अरे आरती तू वहा खड़ी होकर क्या देख रही है चल अपनी भईया का पैर छू।

आरती, भुवन की छोटी बहन है उम्र 20वर्ष 12वो तक पढ़ाई की है।

आरती, राजेश का पैर छू कर बोली,, प्रणाम भईया।

पदमा _बेटा, ये भुवन की छोटी बहन आरती है । इसके लिए भी कोई अच्छा सा लडका मिल जाए तो इसका भी हाथ पीला कर गंगा नहाले।

भुवन की बडी बहन ज्योति पास की गांव में बिहा के गई है।

राजेश _ताई, ताऊ जी नही दिख रहे।

पदमा _बेटा तुम्हारे ताऊ जी खेत गया है।

बहु, राजेश का सामान कमरे में रख दो।

पूनम _जी मां जी।

पदमा ने राजेश के आने से पहले ही एक कमरे की सफाई करवा दी थी।

बेटा घर में सब कैसे है ?तुम्हारे मां तुम्हारे बाबू जी, तुम्हारी बहन।

राजेश _सब अच्छे है ताई।

पदमा _बेटा तू यात्रा से थक गया होगा, एक काम करो, पहले नहा लो। बहु तुम्हारे लिए नाश्ता बना देगी। नाश्ता करने के बाद तुम आराम करना।

अब बात चीत तो होती रहेगी।

राजेश _ठीक है ताई।

तभी कमरे से बच्चे की रोने की आवाज़ आई।

पदमा _बहु मुन्ना रो रहा है, लगता है उसे भूख लगी है। जाओ उसे दूध पिला दो। फिर राजेश के लिए नाश्ता बना देना।

पूनम _ठीक है मां जी।

पदमा _आरती, जाओ तुम राजेश के नहाने के लिए बोर चालू कर देना। उसे नहाने के लिए साबुन भी दे दो।

राजेश अपने कमरे मे गया। अपना लोअर और टी शर्ट पहन लिया। टावेल, अंडरवियर, बनियान लेकर।

आरती के पीछे पीछे घर के पीछे बाड़ी में चला गया।

घर के पीछे जानवरो के रहने के लिए। झोफड़ा बना था जहा गाय और भैंस को बांध कर रखा जाता था। कुछ साग सब्जियो फल फूल के पेड लगें थे।

बाड़े में एक कुवा था जिसमे मोटर पंप फिट था।

मोटर पंप के स्वीच के लिए छोटा सा ईट का रूम बना था। बाड़े में शौचालय और मूत्रालय अलग अलग बने थे।

बाड़े चारो ओर से ईट कि ऊंची दीवारों से घिरा था। बाहर वाले बाड़े के अंदर नही देख सकते थे।

आरती ने कुवे पर लगा मोटर पंप चालू कर दिया। पम्प का पानी एक छोटे से टंकी में जा रहा था। टंकी से पानी ओवर फ्लो होकर साकसब्जियो में जा रहा था।

आरती _लो भईया मैने पंप चालू कर दिया अब नहा लो।

अगर शौचालय जाना हो तो उधर है।

राजेश _ठीक है आरती, तुम अब जाओ मैं नहाकर आता हूं।

आरती _ठीक है भईया, अगर किसी चीज की आवश्यकता हो तो आवाज देना।

राजेश _ठीक है।

राजेश ने पहले टूथ पेस्ट लेकर ब्रश किया।

अपना कपड़ा उतारा । सिर्फ अंडर वियर और बनियान में आ गया।

फिर शौचालय जाकर फ्रेस हुआ।

Fresh होने के बाद टंकी में भरा पानी जग से निकाल कर नहाने लगा। यह सब उनके लिए नया अनुभव था।

नहाने के बाद अपना अंडर वियर बनियान निकाल कर धो कर सूखने के लिए डाल दिया। नया अंडर वियर और बनियान पहन कर अपना लोअर और टी शर्ट पहन लिया। फिर वहा से चला गया।

घर के आंगन में पहुंचने पर

पदमा _नहा लिया बेटा लो ये तेल और कंघी। तेल लगाकर बालो में कंघी कर लो।

तेल लगाकर कंघी करने के बाद,

पदमा _बहु, राजेश के लिए नाश्ता लगा दो।

पूनम ने राजेश के बैठने के लिए चटाई लगा दिया। सामने लकड़ी का बना एक पीड़हा रख दिया।

एक प्लेट पर घी का बना पराठा और एक प्लेट पर आलू की सब्जी लगा दिया।

पदमा चलो बेटा नाश्ता कर लो।

नाश्ता बड़ा स्वादिष्ट बना था।

राजेश _वाह भाभी नाश्ता तो बड़ा स्वादिष्ट बना है खाकर आनद आ गया।

पूनम _लो देवर जी एक और पराठा लो।

राजेश _नही भाभी मेरा हो गया।

पूनम _ये क्या देवर जी सिर्फ चार पराठे में हो गया। लगता है तुम खाने में शर्मा रहें हो।

राजेश _नही भाभी सच में हो गया।

नाश्ता कर लेने के बाद,,

पदमा _बेटा अब तुम जाकर अपने कमरे में आराम करो।

राजेश अपने कमरे में जाकर लकड़ी के पलंग जिसमें गद्दा लगा था, जाकर लेट गया।

थोड़ी देर बाद भुवन आया,

भुवन _मां, राजेश आया क्या?

पदमा _अरे मुआ तू कहा रह गया था। राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा है।

भुवन _मां बाइक पंचर हो गया था। उसे बनवा के आ रहा हूं।

पदमा _जा तू भी नहा कर नाश्ता करले।

भुवन _राजेश ने नाश्ता किया।

पदमा _हा, वह नहाकर नाश्ता करके आराम कर रहा है।

भुवन भी नहाने चला गया।

नहाकर आया तो पूनम ने उसके लिए नाश्ता बनाया।

घी का पराठा देखकर खुश हो गया।

भुवन _आह क्या खुशबू आ रही है पराठे की लगता है राजेश के आने से अब अच्छा नाश्ता खाने को मिलेगा।

वाह क्या स्वाद है मेरी जान, लगता है अपने देवर के लिए बड़ी प्यार से बनाई हो। हाय हम तो तरस ही गए थे ऐसे नाश्ता के लिए।

पूनम _देखो जी राजेश शहर से आया है पता नही उसे नाश्ता पसंद आएगा की नही इसलिए बडी मेहनत से आज नाश्ता बनाई है।

भुवन _हूं ये तो है भई।

भुवन ने नाश्ता कर लेने के बाद,,

भुवन _मां, मै सोच रहा हूं की राजेश को गांव घुमा लाऊ।

पदमा _अरे बेटा, राजेश को थोडा आराम करने दे वह भगा थोड़े ही जा रहा है। बाद में घुमा लाना।

भुवन _ठीक है मां।

भुवन भी अपने कमरे मे आराम करने लगा।

इधर जब दिव्या घर पहुंची तो उसकी मां रत्नावती थाली में फूल और दिया सजाकर उसकी आरती उतारी।

दिव्या ने उसकी पैर छूकर प्रणाम किया।

रत्नावति _जीती रह मेरी बच्ची, मै कब से तुम्हारी राह देख रही थीं। आखिर डाक्टर बनकर अपने मां और पिता का तुमने नाम रौशन कर दिया।

दिव्या _ये तो तुम्हारे आशीर्वाद का फल है मां।

रत्नावती_बेटी तू थक गई होगी जाओ अपने कमरे में जाकर फ्रेश हो जाओ। फिर साथ में नाश्ता करेंगे।

दिव्या _ठीक है मां।

इधर ठाकुर ने अपने आदमियों को अपने खास आदमी माखन को बुलाकर लाने कहा,,

कुछ देर में माखन पंहुचा,,,

माखन _मालिक आपने मुझे बुलाया।

ठाकुर _हां, माखन, तुम पता करके बताओ किन मादरचोदो कीइतनी हिम्मत हो गई की ठाकुर बलेन्द्र सिंह की बेटी की इज्जत पर हाथ डालने की कोशिश की, उन मादर चोदो को जिंदा या मुर्दा मेरे पास लाओ।

माखन,_ठीक है मालिक।

माखन वहा से चला गया।

ठाकुर _मुनीम जी हमारी छोटी बेटी की डाक्टर बनने की खुशी में कल एक पार्टी रखो। हमारे जीतने भी रिश्ते दार मित्र है उसे आमन्त्रित करो।

मुनीम _जी मलिक।

इधर भुवन अपने कमरे में आराम कर रहा था तभी बाजू में सोया बच्चा रोने लगा।

भुवन ने पुनम को आवाज़ लगाया।

भुवन _अरे कहा हो

पुनम कमरे में आई।

पुनम_क्या हुआ जी

भुवन_, मुन्ना रो रहा है लगता है इसे भूख लगी है।

पूनम पलंग पर बैठ गई

वह मुन्ने को अपने गोद में लेकर उसे प्यार करने लगा,,

पुनम _अ ले, अले मेला, बेटा क्यू रो रहा है? मेले बेटे को भूख लगी है। मेला बेटा दूदू पिएगा।

पुनम ने ब्लाउज का एक बटन खोला और चोली उठाकर एक चूची बाहर निकाल लिया, चूचक को मुन्ने के मुंह में डाल दिया। प्यार से मुन्ने का बाल सहलाने लगा।

दूध से भरी मस्त चूची को देखकर भुवन का land खड़ा हो गया।

उससे रहा न गया। उसने एक हाथ से पुनम की दूसरी चूची बाहर निकाल कर मसलने लगा।

पुनम _अजी क्या कर रहे हों? बाजू वाले कमरे में मेहमान आया huwa है और आप, कोई कमरे में आ गया तो।

भुवन _अरे मेरी जान, इस कमरे में जब दोनो हो तो कौन आएगा।

तेरी मस्त चूचियां देखकर रहा नही जाता।

मुझे भी भूख लगी है। मुझे भी दूध पिलाओ।

पुनम _अभी तो नाश्ता किए हो फिर भूख लगने लगी।

भुवन _अरे मेरी जान भूख मुझे नही इसको लगी है इसकी प्यास बुझाओ।

भुवन ने पुनम का एक हाथ पकड़कर अपने land पर रख दिया।

पुनम _इसकी भूख तो मिटती ही नहीं है, जब देखो सर उठा के खड़ा हो जाता है।

भुवन _तेरी जैसी मस्त मॉल पास हो तो भूख तो लगेगी।

भुवन ने दूसरी चूची को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा।

पुनम एक हाथ से उसका land सहलाने लगा।

इधर बच्चा दूध पीता पीता सो गया।

भूवन _लगता है मुन्ना सो गया।

चल आजा बैठ जा मेरे land पे।

पुनम ने बच्चे को पलंग के किनारे लिटा दिया।

भुवन ने अपना लूंगी और चड्डी निकाल दिया। उसका land हवा में ठुमकने लगा।

पुनम ने अपनी चड्डी, उतार दी और पलंग पर चढ़ गई।

भुवन के द्वारा चूची मसलने और पीने से वह भी गर्म हो चुकी थी। उसकी बुर पानी छोड़ रही थी।

वह भुवन के land को अपने एक हाथ से पकड़ कर अपनी बुर के छेद में रख कर बैठ गई।

Land सरसराता huwa अंदर चला गया।

भुवन अपने दोनो हाथों से पुनम की चूची थाम लिया।

पुनम land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

दोनो को बहुत मज़ा आने लगा,,,,

भुवन अपनी क़मर उठा उठा कर पुनम की योनि में land Ko गहराई तक ले जाने की कोशिश करने लगा जिससे दोनो को संभोग की अपार सुख प्राप्त होने लगा।

कमरे में पुनम की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

इधर पदमा को बहु से कुछ काम था तो वह उसे ढूंढते हुए उसके कमरे की ओर आई। दारवाजे के पास पहुंचते ही उसे मादक सिसकारी सुनाई पड़ी,,

वह समझ गई अंदर क्या चल रहा है।

पदमा _इस मुआ का तो कोई समय ही नहीं है जब देखो,chudai करने लग जाता है।

बाजू वाले कमरे में छोटा भाई मौजूद है, इसे कोई लाज शर्म है नही सुरु हो गया,,, बुर चोदने।

चोदरा कही का,,,
 
पदमा आंगन में बैठकर चावल साफ़ करने लगी। इधर कमरे में भुवन और पुनम के बीच chudai अंतिम अवस्था में पहुंच गई। भुवन ने पुनम को घोड़ी बनाकर। जमकर पेला और अन्त में अपना वीर्य उसकी बुर में छोड़ दिया।

आधा वीर्य बहकर पुनम की टांगों में बहने लगा।

वह कमरे से निकल कर बाड़ी की ओर भागी।

पदमा ने उसे घूरते हुए देखा। जब पुनम की आंख उसकी सास से मिली तो वह शर्मा गई।

बाड़ी में बनी मूत्रालय में जाकर वह बाल्टी में भरी पानी से अपनी बुर धोने लगी।

वीर्य जो टांगों में बह रही थी उसको साफ की।

फिर वह आंगन में आ गईं।

पुनम _मां जी, दो चावल को मैं साफ़ कर देती हूं।

पदमा _क्यूं re कुछ शर्म वगैरा है की नही बाजू वाले कमरे में मेहमान है और दिन में ही शुरु हों गए।

पुनम शर्माते हुवे।

पुनम _मां जी आपका बेटा कहा मानता है? मैने उसे मना किया पर वह माना नही।

पदमा _चावल मैं साफ़ कर रही हूं तुम खाना बनाओ, जाओ सब्जी कांटो।

पुनम _कौन सी सब्जी बनाऊं मां जी।

पदमा _बाड़ी से तोड़कर करेला, और भाजी लाई है, जाओ बनादो। दाल भी चढ़ा देना।

कुछ रोटियां भी सेक देना।

पुनम _ठीक है मां जी।

पुनम कीचन में जाकर खाना बनाने लगी।

कुछ देर में आरती भी पहुंची।

पदमा _तु कहा चली गई थी re,

आरती _मां मैं अपनी सहेली, मधु के घर गई थी।

पदमा _जाओ हाथ पैर धोलो और कीचन में जाकर अपनी भौजी की मदद करो।

आरती भी कीचन में चली गई और भाभी की मदद करने लगी।

जब भोजन तैयार हों गया।

पदमा राजेश के कमरे में पहुंची।

राजेश अपनें साथ कुछ पुस्तके लाया था। ताकि आई ए एस की तैयारी कर सके। वह पुस्तक पड़ रहा था।

पदमा _राजेश बेटा,,

राजेश _जी ताई, आइए बैठिए।

पदमा _अरे बेटा, भोजन तैयार हो गया है चलो हाथ मूंह धोकर आ जाओ।

राजेश _ताई, भुवन भैया आ गया।

पदमा _हा बेटा वो तो कब का आ चुका है। अपनें कमरे में आराम कर रहा है। बहुत मेहनत किया न अपनी बीबी के साथ थक गया है।

राजेश _मैं समझा नही ताई।

पदमा _बेटा, जब तेरी शादी होगी न तो तू भी समझ जाएगा। चल अब आ जा।

राजेश _ठीक है ताई।

पदमा भुवन के कमरे में गया।

अरे मुआ चल तु भी खाना खा लें फिर मुझे भी तुम्हारे बापू के लिए खाना लें जाना है, नही तो वह भूखा रह जायेगा।

भुवन _ठीक है मां।

भुवन अपनें कमरे से निकल कर राजेश के कमरे मे गया।

भुवन _अरे, राजेश चलो भोजन करते हैं। डाकिया बाबू ने तुम्हे घर तक छोड़ा न। कोइ परेशानी तो नहीं हुईं।

राजेश _ नही भाई, आने में कोई दिक्कत नही हुई।अभी अभी ताई आई थी बुलाने।

राजेश और भुवन दोनो हाथ धोकर भोजन के लिए कीचन में पहुंचते हैं।

पूनम दोनो को खाना परोश्ती है।

दाल चावल सब्जी रोटी।

भुवन _वाह, आज तो खाने में मजा आ जायेगा।

भाई राजेश तुम्हारे आने से तो हमें भी अच्छा खाना खाने को मिल रहा है।

वाह क्या खुशबू आ रही है, भोजन में।

राजेश _भाभी के हाथ में तो जादू है बड़ा स्वादिष्ट भोजन बना है।

भुवन _भाई, ये जादू तो तुम्हारे आने के बाद ही देखने को मिल रहा है। नही तो आर रूखा सूखा ही खाकर काम चलाना पड़ता है। किसी को कुछ बोलो तो, उल्टा हमें ही सुनना पड़ता था।

पुनम _क्यों जी कब तूमने रूखा सूखा खाना खाया है? आप तो ऐसे बोल रहे है कि मैं मन से खाना नही बनाती, मूंह फुलाते हुवे बोली।

भुवन _लो कुछ बोलो तो मुंह फुलाकर बैठ जाती है। कुछ बोलना ही बेकार है।

तभी पदमा पहुंची,,

पदमा _क्या हों गया re मुआ कही का क्यो आपनी लुगाई सै झगड़ रहा है?

भुवन _कुछ नही मां, मैं तो खाना की तारीफ कर रहा थाकि आज खाना बड़ा स्वादिष्ट बनाई है पुनम ने।

आरती _भईया मैने भी मदद की है खाना बनाने में भाभी की।

भुवन _अच्छा तो सब मिलकर राजेश की खातिर दारी में लगे हुवे है।

पदमा _तुम्हे जलन हो रही है क्या? तुम्हारे छोटे भाई की खातिर दारी होने से,,

भुवन _अरे नही मां, मुझे क्यू जलन होने लगा, मैं तो खुश हूं कि राजेश के आ जाने के बाद अच्छा अच्छा खाने को मिलेगा।

पदमा _बहु राजेश को दो और रोटी दो।

राजेश _नही ताई, मेरा पेट भर गया।

पदमा _अरे बेटा, तू खाने में शर्मा मत यह तुम्हारा ही घर है। वैसे भी इस घर और जमीन पर तुम्हारा उतना ही हक है जितना भुवन का।

जमीन जायदाद का बटवारा हुवा नही है।

राजेश _ताई एक बात पूछनी थी आपसे?

पदमा _पूछो, बेटा ।

राजेश _चाचा और चाची अलग क्यू रहते हैं? आप लोगो के साथ क्यू नही?

पदमा _अब क्या बताऊं बेटा, तुम्हारी चाची और हमारे बीच किसी बात को लेकर अनबन हों गई। तुम्हारे चाचा जी तो साथ ही रहना चाहते थे। पर तुम्हारी चाची के आगे उसका भी नही चलता।तुम्हारे चाची के कहने पर,अलग से घर बना लिए और वही रहते है।तुम्हारी चाची, इस गांव के सरपंच है,तुम्हारे चाचा जी दुकान चलाते है। कृषि कार्य में तो उन्हे रुचि है नही, खेत को तुम्हारे ताऊ और भुवन के जिम्मे छोड़ दिया है।

यहां आते समय जो बड़ा सा किरानाऔर निर्माण सामग्री, और कृषि खाद का दुकान देखा होगा वह सब तुम्हारे चाचा जी ही चलाते है।

भुवन और राजेश दोनो ने दोनो भोजन कर लिए, उसके बाद दोनो राजेश के कमरे में चले गए।

इधर पदमा ने भी भोजन किया उसके बाद अपनें पति के लिए भोजन लेकर खेत चली गई।

कुछ देर आराम करने के बाद,,

भुवन _राजेश चलो अब तैयार हो जाओ। तुम्हे गांव घुमा लाऊ।

राजेश कपड़े पहन कर तैयार हो गया।

जैसे ही वे गालियों में पहुंचे, गांवों वाले राजेश को देखकर पूछते, भुवन गांव में नया लगता है, ये युवक कोन है ये।

भुवन सभी को राजेश का परिचय कराता।

गांव में जो जो मुख्य चीजे थी, प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, गोठन, सभी का भ्रमण किया।

राजेश _भुवन भईया, मैं चाचा चाची से मिलना चाहता हूं, चलो उसके घर चलते है।

भुवन _राजेश, चाची तो मुझे पसन्द नही करती, मूझसे बातचीत नही करती।

चलो चाचा जी से मिलवा देता हूं।

राजेश _भुवन भईया ऐसा भी क्या बात हो गई जो चाची जी आपसे बातचीत नही करती।

भुवन _इसकेे बारे में कभी बताऊंगा, छोटे अभी मत पूछो।

लो चाचा जी का दुकान आ गया।

भुवन का चाचा माधव प्रसाद उम्र 40वर्ष।

दुकान में ही था,,

भुवन _नमस्ते चाचा जी,

माधव _अरे, भुवन आओ बैठो,

भुवन ने माधव का पैर छूकर प्रणाम किया।

राजेश ने भी पैर छूकर प्रणाम चाचा जी कहा।

माधव _अरे भुवन ये कौन है?

भुवन _चाचा जी पहचानो ये कौन है?

माधव _इसकी सकल तो बाबू जी से काफी मिलती है। कौन है ये,,

भुवन _चाचा जी, ये राजेश है, शेखर चाचा का लडका, आज सुबह ही शहर से आया है।

माधव प्रसाद _ये शेखर भईया का लडका राजेश है!

माधव का खुशी का ठिकाना न रहा,

अरे भईया भाभी और तुम लोगो से मिलने के लिए आंखे तरस रही थी।

मैं बता नही सकता की तूमको गांव में देखकर कितना खुशी महसूस कर रहा हूं।

तु अकेला आया है की भईया भाभी भी साथ में आए है।

राजेश _चाचा जी पापा को तो ड्यूटी से छुट्टी ही नही मिलता।

माधव प्रसाद _जानता हूं बेटा बैंक वालो की ड्यूटी।

वैसे तु सुबह का आया है और अब मिलने आया है।

बेटा तु इधर से ही तो गुजरा होगा। मूझसे आते ही मिल लिया होता।

राजेश _चाचा जी मैं आपको कैसे पहचानता, पहली बार जो आया हूं?

माधव _हां राजेश सच कहा तुमने।

चलो बेटा घर के अन्दर चलो, तुम्हारी चाची से मिलो।

घर दूकान से ही लगा था।

माधव ने अपनी पत्नि सविता को आवाज़ दिया।

अरे सुनती हो देखो तो कौन आया है।

दो तीन बार आवाज़ देने के बाद सविता बाहर आई।

सबिता उम्र 37 वर्ष, गांव की सरपंच है, पहले माधव सरपंच था, जब पंचायत चुनाव में सीट 50%महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया, माधव की जगह सविता सरपंच बन गई, सविता कालेज तक पढ़ी थी।

सबिता_क्या huwa जी क्यू चिल्ला रहे हो?

माधव _देखो तो कौन आया है?

सविता _, कौन है ये?

माधव _शेखर भईया का लडका, राजेश, आज ही शहर से आया है।

राजेश ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सविता _जीता रह।

वैसे इतने दिनो बाद गांव कि याद कैसे आई?

राजेश _जी चाची मैरी कालेज की पढ़ाई पूरी हो गई है तो आप लोगो से मिलने का बड़ा मन था, कुछ दिन रहने चला आया।

माधव _अरे सविता, ऐसे ही खड़े खड़े बाते करती रहेगी की घर के अन्दर ले जाकर चाय वगैरा भी पिलाएगी।

सविता _देखो जी मैं तो अभी पंचायत के काम से पंचायत भवन जा रही। अभी मेरे पास समय नहीं।

तुम चाय वाले के दुकान से चाय मंगा कर पिला दो।

सविता वहा से चली गई।

माधव _राजेश तुम आपनी चाची की बातों का बुरा मत मानना। जुबान की थोड़ी कड़वी है पर दिल की बहुंत अच्छी है।अभी जल्दी में है न इसलिए,,

माधव ने राजेश और भुवन से दुकान में रखे चेयर पर बैठने कहा।

माधव _आओ बेटा बैठो।

क्या लोगो ठंडा या गरम?

भुवन _चाचा जी अभी तो गर्मी लग रही है, चाय तो रहने दो।

माधव ने दुकान में रखें फ्रीज से ठंडा का दो बाटल निकाला, और बोला,, लो बेटा ठंडा पियो।

अच्छा राजेश, भईया भाभी कैसे है?

यहां से जाने के बाद, गांव को तो बिल्कुल भुल ही गए।

राजेश _मां और पापा वहा अच्छे से है चाचा जी, पापा तो आप लोगो को बहुत मिस करते है। पर ड्यूटी से उन्हे समय नहीं मिल पाता गांव आने के लिए।

राजेश _चाचा जी एक बात पूछनी थी आपसे, आप तो यहां के सरपंच रह चूके है। गांव इतना पिछड़ा huwa क्यू है?

माधव _गांव के विकाश के लिए मैंने बहुँत प्रयास किया, राजेश पर सरकार की योजना का लाभ मिलने के लिए विधायक जी का सहयोग मिलना जरूरी है। उसके बीना अनुमोदन के कोइ भी कार्य पास नही हो सकता। यहा के विधायक ठाकुर बलेन्द्र सिंह नही चाहते की सरकार के किसी भी योजना का लाभ इस गांव के लोगो को मिले।

राजेश _चाचा जी ऐसा क्या हो गया था कि ठाकुर साहब इस गांव के खिलाफ हो गए हैं।

माधव _समय आने पर धीरे धीरे सब पता चल जायेगा राजेश, अभी उस बात को न जानो तो ही बेहतर है।

बात चित करते हुवे काफी समय हो गया।

भुवन _अच्छा चाचा जी मैं राजेश को खेत घुमा के ले आऊं, राजेश वहा बापू से भी मिल लेगा।

माधव _क्या राजेश बड़े भईया से अभी तक नही मिले हैं?

भुवन _कहा, चाचा जी, बापू तो सुबह से ही खेत निकल गए थे।

माधव _ठीक है, जाओ राजेश खेत घूम आओ। बड़े भईया से भी मिल लेना, वे बहुत खुश होंगे।

राजेश _ठीक है चाचा जी। हमे इजाजत दीजिए। पैर छूकर इजाज़त लिया।

माधव _जी ता रह बेटा, आते रहना।

राजेश _अभी, तो कुछ दिन यहां रहूंगा। आता रहूंगा आपके पास बैठने।

माधव _ठिक है बेटा।

राजेश और भुवन दोनो खेत की ओर चले गए।

भुवन _राजेश यह कच्ची सड़क सीधा नदी की ओर जाता हैं।

शाम को दोस्तो के साथ टहलने जाते है।

कुछ देर में ही वे खेत पहुुंच गए।

भुवन _लो भाई हम अपना खेत पहुँच गए।

ये कटीले तार से घिरा जो जमीन है। क़रीब 30एकड़। ये हमारा खेत है। खेत के चारो ओर मेड के किनारे किनारे,फल दार पेड़ लगे थे।

खेत के अन्दर जाने के लिए लकड़ी और घांस फुश का एक दस फीट लंबा 5फीट चौड़ा दरवाजा लगा था।

दरवाजा खोलकर वे अंदर गए।

अंदर एक झोपड़ा बना था जिसकी दिवारे मिट्टी की ऑर छत खपरैल की ।

वे झोपड़े के अंदर गए।

झोपड़े में एक खाट रखा था। उस पर मोटा चादर तकिया और एक कंबल था।

झोपड़ा के बाहर मटका , रखा था जिस में पीने के लिए पानी रखा था।

भुवन _आओ, राजेश बैठो खाट में।

राजेश खाट में बैठ गया।

राजेश _अरे भुवन भईया, ताऊ जी दिखाई नहीं दे रहे।

भुवन _वो खेत में मजदूरों के साथ होंगे। मां भी होगी। बापू के लिए खाना लेके आई थी। शाम को मजदूरों के साथ ही चली जाती है।

चलो बापू से मिलवाता हूं।

भुवन राजेश को उस ओर ले गए जिधर मजदूर काम कर रहे थे।

खेत में विभिन्न प्रकार के सब्जियां फल फूल अनाज लगे हुवे थे।

गांव की महिलाए खेत में काम करने आती थी।

पास पहुंचने पर भुवन ने आवाज़ लगाया।

भुवन _बापू, ओ बापू।

भुवन के पिता का नाम केशव प्रसाद था, उम्र 50 वर्ष।

केशव _क्या huwa बेटा क्यू चिल्ला रहा है? केशव मजदूरों के साथ खेत में काम कर रहा था, वह खड़ा होकर, भुवन की ओर देखने लगा। पदमा भी देखने लगी, गांव की महिलाए जो खेत में काम कर रही थी वे भी देखने लगे, आखिर बात क्या है?

भुवन _बापू देखो कौन आया है?

पदमा _भुवन, राजेश को लेकर आया है!

केशव खेत के मेड की ओर जाने लगा।

पास जाने के बाद।

राजेश ने पैर छूकर, अपने ताऊ जी को प्रणाम किया।

केशव _खुश रह बेटा । अरे बेटा तुम यहां में क्यू चले आए।

अरे भुवन, राजेश को यहां क्यू ले आया

यहां खेत के मेड़ों पर चलने में परेशानी हुईं होगी। आवाज़ लगा दिया होता मैं झोपड़े के पास ही चला आता।

राजेश _अरे नही ताऊ जी, मैं भी आप ही लोगो की तरह इन्सान हूं। आप लोग कठिन रास्तों पर चल सकते है काम कर सकते हैं तो मैं क्यू नही?

केशव _तुम्हारी बातों से ही लगता है की सुनीता और शेखर ने तुम्हे बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं।

केशव _बेटा तुम लोगो को देखने के लिए तो आंखे तरस रहा था। अच्छा huwa जो गांव चला आया। तु तो बिलकुल अपनें दादा जी पे गया है।

ऐसा लग रहा है की बापू फिर से घर आ गए हैं।

चलो बेटा झोपड़ी पर चलकर बातचीत करते हैं।

वे झोपड़ी पे चले आए फिर कुछ देर बैठकर घर की हाल चाल पूछने एवम सुख दुख की बातें करने लगे।

कुछ देर बाद चित करने के बाद,,,

केशव _भुवन बेटा तुम राजेश को खेत दिखाओ मैं खेत में पानी पला देता हूं।

भुवन _ठीक है बापू।

भुवन राजेश को खेत घूमाने लगा, खेत मे काम करने वाले गांव की औरतों को राजेश का परिचय कराने लगे।

खेत घूमने के बाद, राजेश और भुवन दोनो झोपड़ी पे आ गए और खाट पर लेट गए।

इधर शाम ढलने से पहले महिलाए अपनी घर के लिए निकलने लगी।

सभी महिलाए जो एक साथ घर के लिए निकली।

पदमा झोपड़े के पास रुकी।

पदमा _बेटा, मैं घर जा रही हूं, कुछ देर बाद तुम भी राजेश को लेकर घर आ जाना।

भुवन _ठीक है मां।

पदमा खाली बर्तन लेकर चली गई जिसमे खाना लेकर आईं थी।

अन्य महिलाए भी कतारबद्ध चलने लगी। भुवन, उन महिलाओं को जाते हुवे देख रहा था।

और मुस्कुरा रहा था। महिलाए भी भुवन को देखकर मुस्कुरा रही थी।

जब सभी महिलाए आगे निकल गई, पीछे चलने वाली महिला जो क़मर मटका मटका के चल रही थी।

भुवन ने उसके पिछवाड़े में एक छोटा पत्थर फेक कर मारा।

उस उस औरत ने पीछे मुड़कर देखा। राजेश ने उसे हाथ से कुछ इशारा किया।

उस औरत ने मुस्कुराते हुवे सिर हिलाई। फिर चली गईं।

राजेश ने यह सब देख लिया।

महिलाओं के जाने के बाद, दोनो फिर खाट में लेट गए।

राजेश _भुवन भईया, एक बात पूछूं।

भुवन _राजेश तुम्हे जो भी पूछना रहता है सीधा पूछा करो, इजाज़त लेने की क्या जरूरत?

राजेश _भईया, ये औरत कौन थी, और क्या इशारा किया था उनको।

भुवन _ राजेश,पहले यह बताओ, तुम्हारी तो कालेज में कई गर्लफ्रेंड रही होगी, तुम तो अपने कालेज के बेस्ट स्टूडेंट थे।

राजेश _इक दो गर्ल फ्रैंड थी।

भुवन _कभी, बुर का मजा लिया है?

राजेश _भईया मैं समझा नही।

भुवन _अरे,अभी तक किसी की चूत मारा है की नही।

राजेश _भईया, ये आप क्या कह रहे है।

भुवन _अरे तु तो लडकियों की तरह शर्मा रहा है।

लगता है तु अभी तक बुर का मजा नही चखा है।

अरे बुर मारने का असली मज़ा तो इसी उम्र में आता है।

मैने जिसे इशारा किया वह सरला काकी है! क्या मस्त मॉल है शाली।chudai में खुब मजा देती है।

आज मैने उसे रात में खेत में बुलाया है।

राजेश _क्या भईया, भाभी को पता चला तो, यहा, खेत में क्या गुल खिला रहे हों , वैसे भी भाभी बहुत सुन्दर है उसके रहते ये सब,,

भुवन _अरे, तु अभी बुर का मजा नही चखा है न इसलीय ऐसा बोल रहा है। घर की मुर्गी दाल बराबर होता है। अरे असली मजा तो दूसरे का मॉल चुराकर खाने में है। मैं तो कहता हूं तु भी आज रात मेरे साथ खेत में सोने आ जाना दोनो मिलकर सरला काकी की बुर का मजा लेंगे। क्या रस छोड़ती है साली।

यह गांव पिछड़ा जरूर है लेकिन यहां की औरतें एक से बडकर एक है।

गांव का कानून भी शख्त है अगर किसी के साथ जबरदस्ती किया तो मूंह काला कर गधे में बिठाकर पूरे गांव में घुमाते है।

पर इन औरतों को पटा लो तो खुब मजा देती है।

मैने तो खेत में काम करने वालियों में कई को पटा रखा है।

सरला काकी पसंद न आए तो किसी दूसरे को पसन्द कर लेना, मैं बात करूंगा, वो मना नहीं करेगी, बोलो क्या कहते हो।

राजेश _नही भईया आप ही मजा कीजिए।

तभी भुवन का बापू झोपड़े में आया।

केशव _क्या बाते हो रही है दोनो भाईयो में।

भुवन _कुछ नही बापू, मैं राजेश को गांव के लोगो के बारे में बता रहा था। यहां के लोग बड़े सीधे साधे है।

अच्छा बापू अब हम लोग चलते है।

केशव _अच्छा बेटा रात को आ जाना सोने के लिए।

भुवन _ठीक है बापू।

भुवन और राजेश दोनो घर के लिए निकल पड़े।

घर पहुंचने के बाद,,,

पदमा _आ गए तुम दोनो।

बहु दोनो के लिए चाय ले आओ।

पुनम _जी मां जी।

पुनम चाय लेकर आई, दोनो चाय पीने लगे,,

इधर हवेली में,,

माखन, ठाकुर के पास पहुंचा।

ठाकुर _बोलो माखन पता चला उन मादर चोदो के बारे में जिन लोगो नेठाकुर बलेंद्रसिंह के बेटी के इज्जत पर हाथ डालने की कोशिश किए थे।

माखन _हा मालिक वे हमारे ही पार्टी के लड़के थे। उन्हे पता नही था की दिव्या आपकी बेटी है।

उन मादर चोदो को लेकर क्यू नही आया?

माखन _ट्रैन पे सवार कोइ लडका उन लोगो को मारकर ट्रैन से फेक दिया मालिक, एक लडका बचा है, उसी से जानकारी मिला वह लडका भी अपने अंतिम सांसे गिन रहा है, वह शायद ही बचेगा।

ठाकुर _अच्छा huwa मारे गए शाले, अगर जिन्दा बचते तो मेरे हाथो मारे जाते।

मुनीम _ठाकुर साहब मुझे तो राजेश का गांव आना कुछ अच्छा नही लग रहा। अकेले ही बदमाशो पर भारी पड़ गया।

ठाकुर _हूं, लगता है सुनीता ने मर्द को पैदा किया है वो , पर तुम चिन्ता मत करो, हमारे आदमियों से कह दो उस लड़के पर नजर रखे।

मुनीम जी कल की पार्टी की तैयारी चल रही है न।

मुनीम _आप चिन्ता न करे मालिक सब तैयारी अच्छे चल रही है।

ठाकुर _देखो मुनीम जी किसी प्रकार की कोइ कमी न रहे।

मुनीम _जी, मालिक।

मलिक आपसे एक बात पूछनी थी?

ठाकुर _बोलो, मुनीम जी क्या बात है?

मुनीम _दिव्या बेटी बोली है की कल के पार्टी में राजेश को भी निमंत्रण भेजने, क्या करना है? उसे बुलाने।

ठाकुर सोच में पड़ गया।

ये सूरजपुर वालो से तो मुझे नफरत है, पर दिव्या बेटी ने कहा है तो बुला लो, पर उस लड़के की हरकतों पर कड़ी नज़र रखने को बोल देना अपने आदमियों से।

मुनीम जी _ठीक है मालिक।

 
जहां राजेश हों वहां रोमांस भी होगा सेक्स भी और एक्शन भी।
 
चाय पीने के बाद भगत ने भुवन से कहा, राजेश चलो मैं तुम्हे अपने दोस्तो से मिलाता हूं।

पदमा _अरे मुआ, अभी तो आए और अभी फिर निकल रहे हो।

भुवन _मां आखिर घर में रहकर करेंगे भी क्या? राजेश का अपनें दोस्तो से परिचय करा देता हूं। राजेश भी उन लोगो से घुल मिल लेगा। नही तो अकेला बोर हो जायेगा गांव में। मै तो खेत चला जाऊंगा न काम पे तब राजेश अकेला बोर महसूस करेगा ।मेरे दोस्त यारों से घुल मिल जायेगा, तो उनसे मिलकर बोरियत दूर कर लेगा।

पदमा _बात तो तुमने सही कहा बेटा।

भुवन _अच्छा मां अब चलते है।

पदमा _पर बेटा समय पर आ जाना, तुम्हे भोजन कर खेत भी जाना है ।

भुवन _ठीक है मां।

भुवन, राजेश को लेकर अपने दोस्तो से मिलवाने ले गया।

सबसे पहले वह एक क्लिनिक पर ले गया।

भुवन का दोस्त रवि क्लिनिक चलाता हैं।

वह 12वी की पढाई करने के बाद, धरम पुर चला गया। वहा बड़े हॉस्पिटल में 4सालो तक कंपाउंडर के रूप में काम किया।

4सालो में चिकित्सा का अच्छा अनुभव हो जाने के बाद वह अपने गांव में क्लिनिक खोल लिया। उसके गांव के लोग ही नही अन्य गांव से भी ईलाज कराने उसके क्लिनिक पर आते है।

गांव में केवल एक ही क्लिनिक हैं।

रवि ने गांव के एक लड़के को ही अपना सहायक रख लिया है। जिसका नाम बबलू है।

जब भुवन, राजेश को लेकर क्लिनिक पर गया।

बबलू _अरे भुवन भईया आइए बैठिए।

भुवन _अरे बबलू रवि कह हैं?

बबलू _रवि भईया, अंदर मरीज का ईलाज कर रहे हैं।

आप लोग बैठिए न।

भुवन और राजेश क्लिनिक पे बैठकर रवि का इन्तजार करने लगे।

कुछ देर बाद रवि कमरे से बाहर निकला।

रवि _अरे, भुवन भाई तु कब आया?

भुवन _अबे,15मिनट हो गया, यहां आए। तु इतने देर तक अंदर क्या कर रहा था बे।

तभी कमरे से एक महिला निकली।

महिला _अच्छा, डाक्टर बाबू अब मै चलती हूं।

रवि _ ठीक है भौजी। जो दवाई दी है उसे समय पर लेते रहना। और कोइ समस्या हो तो क्लिनिक पे आ जाना।

महिला _ठीक है डाक्टर बाबू।

महिला के जाने के बाद,,

रवि _अरे भुवन भाई, ये कौन है?

भुवन _, अबे ये मेरा छोटा भाई, राजेश है। इनका कालेज का पढ़ाई पूरी हो गई है तो आज ही शहर से आया। तुमसे मिलवाने लाया हूं।

ये कुछ समय गांव में ही रहेगा।

अब गांव में किसी को जानता तो है नही, इस लिए बोर न हो इसलिए अपने दोस्तो से परिचय करा रहा हूं। ताकि बोरियत महसूस हों तो तुम लोगो के साथ टाइम पास कर सके।

ये तो बड़ा अच्छा किया।

रवि _अच्छा राजेश, हमें दोस्त समझो, अगर बोर लगे तो आ जाना हमारे क्लिनिक पे।

वैसे कालेज के बाद आगे का क्या सोचा है?

राजेश _आई ए एस की तैयारी कर रहा हूं, भाई ।

रवि _ये तो बड़ी खुशी की बात है। वैसे तुम बड़ा स्मार्ट हो, किसी फौजी जैसा बॉडी बना रखे हो, लगता है सुबह खुब पशीना बहाते हो।

राजेश _शहर में सुबह जिम जाता था।

भुवन _अरे राजेश तुम चिन्ता मत करो, यहां भी जिम का देशी जुगाड कर देगें।

राजेश _अगर ऐसा हो जाय तो बड़ी अच्छी बात होगी भुवन भईया।

रवि _राजेश, तुम यहां के युवक अखाड़ा संगठन बनाए है जो सुबह अभ्यास करते है, तुम भी उस संगठन से जुड़ जाना।

भुवन _हां राजेश, रवि ठीक कह रहा है।

मैं उन युवकों से तुम्हे मिलवाऊंगा।

अरे यार रवि चलो थोडा बाहर टहल कर आते है।

रवि _चलो यार,,

बबलू मैं थोडा टहल कर आता हूं। कोइ क्लिनिक पर आए तो बिठा कर रखना।

बबलू _ठीक है भईया,,

भुवन, राजेश और रवि तीनो टहलने निकल जाते है रास्ते में,,

भुवन _अबे रवि ये जो महिला थी जिसका तु अन्दर इलाज कर रहा था, ये बिंदिया भौजी हैं न।

कलुवा की लुगाई।

रवि _हां, भुवन भाई,,

भुवन _लगता है बड़ा अच्छे से इलाज कर रहा है बेटा उसका

क्या समस्या है उसकी,,

रवि _अबे ऐसा कुछ नही जैसा तू समझ रहा है।

भुवन _बेटा तु मूझसे छुपाएगा।

परसो जब आया था तेरे पास तो भी ये महिला तेरे क्लीनिक पर थी,, बेटा खुब मजा ले रहा है तु,,

अब सच बता भी दो,,,

रवि ने राजेश की ओर इशारा किया,,

भुवन _अबे राजेश, मेरा छोटा भाई है, अब ये तुम्हारा भी छोटा भाई है। इससे राज छुपाने की जरूरत नही।

रवि _अरे, भुवन भाई कुछ दिन पहले आई थी क्लिनिक पर बिंदिया भौजी। उसके पेट में दर्द था, इलाज कराने।

वह किसी के यहां शादी में गई थी कुछ उल्टा सीधा खा ली थी। पेट में इफेक्सन हो गया था।

पेट में गैस भर जाने के कारण उसका पेट दर्द कर रहा था।

मैंने दवाई दी, दर्द से राहत पहुंचाने के लिए, उसे उपचार कक्ष के अन्दर ले जाकर, उसके पेट की अच्छे से मालिश की।

पेट के मालिश करने से उसे काफी राहत मिली।

उसे दुसरे दिन भी बुलाया।

उसने बताया की आज उसे काफी हद तक आराम मील चुका है। आप के मालिश से बहुत आराम मिला। आज भी अच्छे से मालिश कर दो।

उस दिन बड़ी बन ठन कर आई थी।

वह मालिश कराने उपचार टेबल पर साड़ी उतार कर लेट गई।

उसकी मादक शरीर को देखकर मैं भी गर्म हों गया।

जैसे ही मैंने उसके पेट की मालिश शुरू किया, धीरे धीरे वह भी गर्म होकर सिसकने लगी।

वह एक हाथ से मेरे land को सहलाने लगी।

उसके हाथ लगने से मेरा land और तन गया।

मैने उसकी पेट के साथ साथ उसकी बड़े बड़े सुडौल चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा।

वह और गर्म हो गईं।

उसने अपनी ब्लाउज की बटन खोलकर अपनी दूदू बाहर निकाल दी।

उसकी सुडौल बड़े बड़े स्तनों को देखकर मै भी बेकाबू हो गया।

मैंने पेट की मालिश करना छोड़ कर उसकी चूची दबाने एवम पीने लगा जिससे वह और गर्म हो गई।

जब उससे बर्दास्त नही huwa तो वह बोली,,

डाक्टर बाबू अब देर न करो, मूझे चोदकर जल्दी से मैरी प्यास बुझाओ। अब बर्दास्त करना मुस्किल है।

उसने अपनी टांगे फैला दी।

उसने चड्डी नही पहनी थी। उसकी मस्त फुली हुई बुर देखकर मेरा land झटके मारने लगा , मैंने भी देर न करते हुए अपना land पैंट का चैन खोलकर बाहर निकाला और अपना land पर थूक लगा कर उसकी बुर में गच से पेल दिया।

उसकी बुर एकदम गीली थी।land बुर को चीरता huwa जड़ तक अंदर घुस

मैंने उसकी दोनों स्तनों को पकड़ कर मसलते हुवे दनादन chudai शुरु कर दी। कमरा बिंदिया की मादक सिसकारी से गूंज उठा।

दोनो जन्नत की सैर करने लगे।

कुछ देर इसी आसन में chudai करने के बाद मैंने उसे kutiya बना दिया, फिर कुत्ते की तरह गच, गाच चोदने लगा।

दोनो संभोग की असीम आनद को प्राप्त कर रहे थे।

मैने उसे जम कर भोगा और उसे शारीरिक सुख दिया।

वह मैरी दिवानी हो गईं।

उस दिन के बाद से जब भी उसका मन होता हैं वह पेट दर्द का बहाना कर मूझसे chudne आती है।

भुवन _बेटा मुझे तो पहले दिन जब बिंदिया भौजी को तुम्हारे क्लिनिक पर देखा तभी से सक था।

अच्छा सुन हमारा राजेश अभी chudai के मामले में कच्चा है। मैने इसे कहा तो, कहता है chudai करना नहीं चाहता।

तुम तो डाक्टर हो इसे कुछ समझाओ।

अभी मजा नही करेगा तो कब करेगा।

रवि _राजेश तुम्हारा खड़ा तो होता है न अगर खड़ा नही होता हो तो दवाई है मेरे पास।

राजेश _नही रवि भईया ऐसी कोई समस्या नही है।

रवि _अगर समस्या नही है तो chudai का मजा क्यू नही लेते, तुम मेरे क्लिनिक में आना मैं बिंदिया से बात करूंगा वह मना नही करेगी।

गजब की मॉल है शाली, एक बार उसकी बुर का स्वाद चख लिए तो बिना किए नींद नही आयेगी।

राजेश _अरे रवि भईया, आप लोग मजे लो ना, अगर कभी ईच्छा huwa तो जरूर बताऊंगा।

रवि _ठिक है भई। अब जबरदस्ती तो कर नही सकते।

भुवन _अरे रवि चलो विमल के पास चलते है, फिर वहां से नदी की ओर टहलने चलेंगे।

रवि _ठीक है यार चलो,,

विमल दर्जी है।

विमल 12 की पढाई करने के बाद शहर जाकर अपने मामा से सिलाई करना सीखा वहा से सिलाई का अनुभव प्राप्त कर गांव में टेलर का दुकान चलाता है।

सुरज पूर के साथ साथ पास वाले गांव के लोग भी कपड़े सिलाने विमल टेलर्स के पास आते हैं।

भुवन,राजेश और रवि तीनो विमल के दुकान में पहुंचते है।

दुकान में विमल नही दिखाई दिया उसका सहायक बैठा सिलाई कर रहा था।

भुवन _अरे, गुडडू विमल कहा है?

गुडडू _अरे भुवन भईया आप लोग आइए बैठिए न। उस्ताद तो अन्दर झुमरी भौजी की ब्लाउज का नाप ले रहा है।

रवि, राजेश और भुवन तीनो दुकान में बैठकर विमल का इन्तजार करने लगे।

कुछ देर बाद बिमल कमरे से बाहर निकला। उसके पीछे झुमरी भौजी भी अपनी साड़ी ठीक करते हुऐ बाहर निकली। रवि और भुवन को दुकान में बैठा देख विमल बोला,,

विमल _अरे यार तुम लोग कब आए।

भुवन _15मिनट हो गया, यहां बैठकर तुम्हरा इन्तजार करते हुए।

झुमरी _अच्छा टेलर बाबू मैं चलती हूं। समय पर ब्लाउज सी देना, मुझे शादी में जाना हैं।

विमल _भौजी तुम चिन्ता न करो तुम्हारा ब्लाउज समय पर तैयार हो जाएगा।

झुमरी _ठीक है टेलर बाबू कल आती हूं ब्लाउज लेने।

विमल _ठीक है भौजी।

झुमरी चली गईं।

रवि और भुवन घूर कर विमल को देखने लगे।

विमल _अरे यार मुझे ऐसे घूर कर क्यू देख रहे हो।

भुवन _काफी देर तक माफ लें रहा था बे झुमरी भौजी की।

सिर्फ ब्लाउज की माप लें रहा था या कुछ और का,,

विमल _अरे यार तुम लोग बेकार में ही शक कर रहे हो।

विमल _वे बंदा कौन है?

रवि _ये राजेश है, भुवन भाई का छोटा भाई, आज ही शहर से आया है।

भुवन _राजेश कुछ समय गांव में ही रहेगा। अब मुझे भी खेतो में काम रहता है। राजेश अकेला गांव में बोर न हो जाए। इसलिए तुम लोगो से मिलवाने आया हू।

तुम लोगो से मेल मुलाकात होता रहेगा तो, राजेश का मन गांव में लगा रहेगा। इसे तुम अपना छोटा भाई समझना।

विमल _बिलकुल भुवन भाई तुम्हारा भाई हमारा भाई। आज से राजेश भी हमारा दोस्त, आज सै तीन नही चार दोस्त है हम।

राजेश, तुम जब भी बोरियत महसूस करो मेरे दुकान में आ जाना। यहां हसी ठिठोली करेगें।

राजेश _जी विमल भईया।

भुवन _अरे, विमल चलो नदी तरफ थोडा टहल कर आते है।

विमल _अरे गुडडू तुम दुकान सम्हालना मैं दोस्तो के साथ नदी तरफ थोडा टहल कर आता हूं।

गुडडू _ठीक है उस्ताद।

चारो दोस्त नदी की तरफ टहलने निकल जाते है।

रास्ते में,,,

भुवन _अबे विमल तु झुमरी भौजी के साथ कमरे में क्या कर रहा था, सच बता बेटा सच बताना बेटा।

विमल _अरे यार तुम लोग तो लंगोटी यार हो, तुम लोगो से क्या छिपाना।

क्या मस्त मॉल है झुमरी भौजी, मजा आज तो मजा आ गया।

भुवन _तो हमारा शक सच निकला।

अच्छा ये तो बता उसे पटाया कैसे?

विमल _अरे यार झुमरी भौजी आज ब्लाउज सिलाने दुकान में आई थी। उसने कहा टेलर बाबू ब्लाउज सी दो। परसो मुझे शादी में जाना है।

मैने कहा, भौजी इतनी जल्दी सी नही पाऊंगा। बहुत सारा काम पड़ा huwa है । कम से कम एक सप्ताह तो लगेंगे।

झुमरी _अरे टेलर बाबू अपनें भौजी के लिए इतना भी नही कर सकते।

विमल _अब क्या बताऊं भौजी सभी लोगों को कपड़े जल्दी चाहिए।

अब सबका काम जल्दी तो नही हो सकता न। देखो न कितना सारा कपड़ा पड़ा huwa है सिलाई करने।

झुमरी _टेलर बाबू, मेरे पास ढंग का ब्लाउज नही है शादी में पहनने के लिए।

मेरा ब्लाउज पहले सी दो।

विमल _अरे भौजी, आपका ब्लाउज कल देने के लिए तो मुझे रात में जाग कर काम करना पड़ेगा।

झुमरी _अरे टेलर बाबू, अपनी भौजी के लिए एक रात जाग नही सकते।

विमल _ठीक है भौजी, आप इतना कह रही हो तो एक रात जाग ही लूंगा।

नाप लाई हो।

झुमरी _लो जल्दी जल्दी में मैं तो नाप लाना ही भुल गई।

विमल _कोइ बात नही भौजी, आप चाहे तो ऐसे ही नाप दे सकती हो।

झुमरी _टेलर बाबू यहां दुकान में नाप लेते हुए कोइ आ गया तो,,

लोग क्या कहेंगे?

विमल _अगर यहां नही दे सकती तो कमरे में चलकर नाप दे दो,, अब तुम्हारी मर्जी।

अच्छा कौन सा डिजाइन बनानी है। ये फोटो देखकर पसन्द करलो।

झुमरी _ऐसा डिजाइन का ब्लाउज सी दो की देखने वाले देखता रह जाए।

विमल _ये देखो लेटेस्ट डिजाइन।

यह तुम पर खुब जचेगी।

झुमरी _ठीक है यहीं डिजाइन का बना दो।

विमल _अच्छा चलो कमरे में नाप देने।

झुमरी कमरे में चली गईं।

विमल नाप लेने का टेप और डायरी लेकर अंदर गया।

अंदर जाने के बाद,,

विमल _भौजी, अपनी पल्लू तो हटाओ नाप लेनी है।

झुमरी ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे हटा दिया।

पल्लू के नीचे गिरते ही झुमरी के मस्त बड़े बड़े स्तन जो ब्लाउज से बाहर आने बेताब थे विमल के आंखो के सामने आ गया, जिसे देखकर, विमल के land में तनाव आने लगा।

बिमल टेप से झुमरी की ब्लाउज की नाप लेने लगा।

नाप लेते हुए विमल बोला,,

विमल _भौजी एक बात बोलूं आप बुरा तो नही मानेंगे।

झुमरी _अरे टेलर बाबू अब आपके बातो का क्या बुरा मानना?

विमल _ लल्लू भईया तो बड़े किस्मत वाले है? जो आपके जैसे लुगाई मिली है।

झुमरी _अच्छा ऐसा क्या खास है मुझमें?

विमल _, आपके साइज काफी बड़े बड़े है। मैने बहुतों का नाप लिया है, पर आपके जैसा बहुत कम लोगो का होता है।

लल्लू भैया का तो हर रात मजे होते होंगे?

झुमरी _उसके तो हर रात मजे है, पर सामने वाली को मजा देना नही जानता। झुमरी निराश होते हुवे बोली।

विमल _भौजी, मैं कुछ समझा नहीं।

क्या लल्लू भईया आपको खुश नही कर पाते?

झुमरी _अब क्या बताऊं तुम्हे, वो तो मुझे किनारे लगाने से पहले ही ख़ुद ठिकाने लग जाता है।

विमल _भौजी ये आप क्या कह रही है? दिखने में तो लल्लू भईया, काफी हट्टे कट्टे लगते है?

झुमरी _सिर्फ बाहर से ही हट्टे कट्टे है। उसका घोड़ा तो थोड़े देर दौड़ लगाने के थक जाता है।

कभी भी सामने वाली को मंजिल तक पहुंचा ही नही पाता।

विमल _ओ हो भौजी, तब तो आप रात भर करवते बदल कर गुजारती होगी।

आपको एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानोगी।

एक बार हमें भी मौका देकर देखो, हमारा घोड़ा तुम्हे मंजिल पर पहुंचाने के पहले हार नही मानेगा?

झुमरी _अच्छा इतना भरोसा है अपनें आप पर ,

विमल _एक बार आजमा के तो देखो।

झुमरी _अच्छा, अपना घोड़ा तो दिखाओ पहले, देखू सवारी करने लायक है की नही,,

विमल _अभी देख लो,

विमल ने अपन खड़ा land बाहर निकाल कर झुमरी को दिखाने लगा।

विमल का land देखकर झुमरी गर्म होने लगी,,

विमल _कैसा है?

झुमरी _दिखने में तो अच्छा है, सवारी करने के बाद ही पता चलेगा। कहा तक दौड़ता है?

विमल _तो सवारी करके देख लो ना।

झुमरी _कोइ आ गया तो,,

विमल _मेरे इजाज़त के बिना कमरे में कोइ नही आयेगा।

विमल ने झुमरी की ब्लाउज की बटन खोल कर उसके उरोज बाहर निकाल दिए।

विमल _हाय भाभी सच में क्या मस्त दूदू हैं तुम्हारी।

विमल झुमरी के दुद्दू को पागलों की तरह चूमने चाटने मसलने और चुसने लगा।

उसकी दूध को गटक गटक कर पीने लगा।

झुमरी _अरे टेलर बाबू जरा आराम से मैं कही भागे थोड़े ही जा रही,,,

 
भुवन,राजेश, विमल और रवि चारो अपनी कहानी किस्सा सुनाते हुवे, नदी की ओर टहलने के लिए निकले थे। रास्ते में कुछ। महिलाए लोटा लेकर जाते हुवे दिखाई पड़ी,,,



राजेश _भुवन भाई ये महिलाए लोटा लेकर कहा जा रही है।

भुवन _राजेश, ये महिलाए लोटा लेकर शौच करने जा रही है, इनके घर में शौचालय नहीं है न। यहां गांव में अधिकांश लोगो के यहां शौचालय नही है।

राजेश _सरकार की तो योजना है न हर घर फ्री में शौचालय बनाने की।

रवि _अरे राजेश, हमारे गांव के लोगो को सरकार की योजना का लाभ कहा मिल पाया है।

विमल _भुवन भाई आपको याद है कि भुल गए, जब हम छोटे थे तो कैसे झाड़ियों में छिपकर, हगती हुईं महिलाओं के गाड़ और बुर देखा करते थे।

और अपना land खड़ा करते थे।

भुवन_अबे, कैसे भुल सकता हूं?

पर अब तो हमें इनकी गाड़ और बुर देखने की जरूरत नहीं, ऐसे ही कई चूत हमें चोदने को मिल रहा है।

नए नए जवानी चढ़ती है न तो लड़के झाड़ियों में छिपकर औरतों की बुर और गाड़ देखते हैं हगते एवम नहाते हुवे औरतों की।

रवि _हां भाई, औरतों की बुर और गाड़ देखकर land हिलाने का मजा ही कुछ और था।

तीनो दोस्त हसने लगते है।

चारो नदी किनारे पहुंच जाते है।

नदी किनारे बैठकर गपसप करने लगते है।

विमल _अबे मेरा पेट थोडा गड़बड़ लग रहा है।

भुवन _तो जाना, झाड़ी के पीछे, उस जगह ढूंढो डब्बा होगा, जहां हम छिपा कर रखते हैं।

नदी से पानी भरके ले जा डब्बे में।

विमल _ठिक है भाई, मै पेट साफ़ करके आता हूं।

विमल डब्बे में पानी भरकर झाड़ियों की ओर जाने लगा।

भुवन _अबे उधर कहा जा रहा है, उधर महिलाए गई है हगने।

विमल _अरे भाई गड़बड़ हो गई थी, अच्छा किया बता दिया, नही तो लफड़ा हो जाता।

राजेश, भुवन और रवि तीनो बैठकर बाते कर रहे थे, तभी कुछ लड़कों की टोली वहा पहुंचा।

भुवन _अरे बिरजू, अरे यार मुझे तुम्से ही काम था। कैसा चल रहा है तुम्हारा अखाड़ा।

बिरजू _मस्त भईया।

भुवन _अच्छा huwa जो यहां मिल गया।

बिरजू _बोलो भुवन भईया क्या काम हैं।

भुवन _अरे यार, इससे मिलो ये मेरा छोटा भाई राजेश है, यह शहर से आज ही सुबह आया है। अभी कुछ समय गांव में ही रहेगा।

क्या है न कि राजेश को सुबह जिम जाने की आदत है। मै कह रहा था कि तुम अपने अखाड़ा दल में राजेश को भी शामिल कर लेते तो सुबह राजेश अभ्यास कर लेता, जिससे राजेश का फिटनेस बना रहेगा।

बिरजू _क्यू नही, भुवन भईया।

कल से राजेश तुम आखड़े पर आ जाना। वैसे तुमने बहुत अच्छा बॉडी बना रखी है।

राजेश _आपने भी बहुत अच्छा बॉडी बनाया है, बिरजू भईया। मुझे अच्छा लगेगा आप लोगो के साथ अभ्यास करने में।

भुवन _बिरजू कैसा चल रहा है?कबड्डी प्रतियोगिता की तैयारी, इस बार हमारा गांव विजेता बनना चाहिए।हर साल भानगढ़ वाले विजेता बनते है।

बिरजू _लड़के अच्छे मेहनत कर रहे है भुवन भाई, पर पता नही हमारी तैयारी में क्या कमी रह जाती है की भानगढ़ वालो से हम हर बार हार जाते है।

राजेश _कैसी कबड्डी प्रतियोगिता भुवन भईया?

भुवन _राजेश ,भानगढ़ के महराज को कबड्डी खेल बहुत पसन्द था, उसके जन्म दिन पर,प्रत्येक वर्ष भानगढ़ में जिला स्तर पर कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन होता है। जिले के विभिन्न गांव के प्रतिभागी खेल में भाग लेते है। खेल में जीतने वाले टीम को कई पुरस्कार और हवेली में साही भोज दिया जाता है। सुना है इस बार जीतने वाले टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को एक एक लाख इनाम दिया जायेगा। भानगढ़ वाले ही हमेशा चैंपियन बनते है।

तभी, विमल भी शौच करके आ गया।

रवि _भाई भुवन, चलो अब घर चलते है, बबलू का फोन आया था। मरीज लोग वेट कर रहे है।

भुवन _ठीक है चलो भाई।

रवि, भुवन, राजेश और विमल चारो घर की ओर निकल पड़ते हैं।

घर पहुंचने के बाद कुछ देर टीवी चालू कर, कोई प्रोग्राम देखने लगते।

पदमा _बेटा भोजन तैयार हो गया है चलो तुम लोग भोजन कर लो, भुवन बेटा तुम्हे खेत भी जाना है।

भुवन _ठीक, है मां।

हाथ पैर धोकर भुवन और राजेश दोनो कीचन में पहुंचते है, जहां पुनम खाना बनाकर दोनो का वेट कर रही थी।

भुवन _बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है भई क्या बना है आज।

भाई राजेश तुम्हारे आने से एक फायदा तो huwa, हमें स्वादिष्ट भोजन खाने को मिल रहा है।

पुनम _क्या जी, आप तो ऐसे बोल रहे है जैसे ऐसा भोजन पहली बार बन रहा हो,,

भुवन _भोजन तो बनता था मेरी रानी, पर ऐसा खुशबू तो आता नही था।

राजेश, और भुवन दोनो भोजन करने लगते है।

राजेश _वाह सच में भाभी आपके हाथ में तो जादू है, बड़ा स्वादिष्ट बनाई हो भोजन।

पुनम _सच में देवर जी आपको भोजन पसन्द आया। गांव में तो ज्यादा विरायटी बनती नही, दाल चावल सब्जी और रोटी, शहर में तो कई प्रकार के व्यंजन बनते होंगे।

राजेश _भाभी, दाल रोटी चावल और सब्जी, यही तो हमारे भोजन का प्रमुख आहार है, बांकी चीजे फालतू और सेहत के लिए हानिकारक होता है।

भुवन _लो भई अब तो आपके देवर ने भी आपके भोजन की तारीफ कर दी।

भोजन कर लेने के बाद,,

भुवन _अच्छा मां अब मैं खेत निकलता हूं, बापू मेरे आने का वेट कर रहा होगा।

पदमा _ठिक है बेटा।

भुवन _अच्छा भाई राजेश, कल सुबह मिलेंगे।

राजेश _ठीक है भईया।

भुवन खेत चला गया।

राजेश अपनें कमरे में जाकर पढ़ाई करने लगा।

भुवन खेत पहुंचा,

भुवन के पिता केशव _अरे आ गया बेटा।

भुवन _हा बापू, अब आप घर जाइए।

केशव _ठीक है बेटा, पर खेत का अच्छा ख्याल रखना कुछ जानवर परेशान कर रखा है।

भुवन _बापू आप बेफिक्र रहिए।

केशव घर आ गया।

घर आने के बाद।

पदमा _आ गए जी आप, चलो हाथ मूंह धो लो, भोजन के लिए।

केशव _राजेशने भोजन कर लिया।

पदमा _हां, भुवन के साथ राजेश ने भी भोजन किया।

चलो आप भी भोजन कर लो।

केशव _ठीक है।

तुम भी अपनें लिए थाली लगवा दो।

पदमा _नही जी पहले आप भोजन कर लीजिए उसके बाद मैं और बहु साथ में कर लेंगे।

बहु अपनें ससुर के लिए खाना लगाओ।

पुनम _जी मां जी।

केशव ने भोजन किया। फिर अपनें कमरे में आराम करने चला गया।

केशव के जाने के बाद पदमा और पुनमने ने भी भोजन कर लिया।

और बर्तन की सफाई करने के बाद ,,

पदमा _बहु, दूध गरम कर के राजेश को दे आ, और सोने से पहले उसके कमरे में पानी रख आना।

पुनम _जी मां जी।

उधर शहर में सुनीत ने डाइनिंग टेबल पर शेखर और स्वीटी के लिए भोजन लगाई।

स्वीटी _ने थोडा सा ही खाई, उसके बाद उठ गई,, शेखर भी,,

सुनीत _अरे ये क्या? बस थोडा सा ही खाय और दोनो उठ गए? क्या भोजन अच्छा नहीं बना है ।

स्वीटी _ओ मां भूख नहीं है न इसलिए।

सुनीता _और तुम्हे क्या हूवा जी, सुनीता मेरा भी खाने का मन नही कर रहा,,

सुनीता _देखो जी कब तक ऐसा चलेगा, हमें राजेश के बिना खाने की आदत डालनी होगी।

शेखर और स्वीटी दोनो, अपनें कमरे में चले गए।

कुछ देर बाद, सुनीता भी कमरे में पहुंची।

वह सोने की कोशिश करने लगी।

पर उसे राजेश की याद आ रही थी, वह सुबकने लगी।

शेखर भी सोया नही था।

शेखर _ये क्या, सुनीता तुम रो रही हो।

सुनीता _पता नही, राजेश गांव में कैसा होगा? खाया भी होगा की नही।

शेखर _राजेश समझदार है, भईया और भाभी भी बड़े अच्छे है। तुम्हे राजेश की चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं।

तुमने भोजन किया?

सुनीता _हां,

शेखर _खाओ मेरी कसम।

सुनीता _मुझे भूख नहीं है जी।

शेखर _मुझे पता है तुम सुबह से ही कुछ नही खाई हो।

सुनीता _आप राजेश से काल करके पूछो जी वह ठिक तो है न।

शेखर _सुबह से ही ट्राई कर रहा हूं, किसी का फोन नही लग पा रहा है। शायद वहां नेटवर्क की समस्या हो।

तुम राजेश की चिन्ता मत करो सुनीता, मुझे यकीन है वह सकुशल होगा।

इधर पुनम दूध गरम करके, राजेश के कमरे में गई।

पुनम _देवर जी क्या कर रहे हो?

राजेश _कुछ नही भाभी थोडा पढ़ाई कर रहा था।

पुनम _हूं केलेक्टरी की तैयारी चल रही है।

राजेश _भाभी, आपको किसने बताया।

पुनम _आपके भईया ने, आप कलेक्टर बन गए तो हमारी भी ठाठ हो जाएगी, लोग कहेंगे कलेक्टर की भाभी जा रही है।

लो दूध पी लो मां जी ने आपके लिए दूध भेजा है।

राजेश _भाभी मुझे दूध पीने की आदत नही है।

पुनम _देवर जी दूध पियोगे तभी तो स्वस्थ्य रहोगे, बुद्धि और ताकत बड़ेगी, तभी तो आप कलेक्टर बनोगे।

राजेश _अच्छा ये बात है, तब तो दूध पीना पड़ेगा।

वैसे सुना है गाय की दूध से ज्यादा मां की दूध बच्चे के लिए लाभकारी होता है।

पुनम _मतलब मां की दूध पीना है क्या?

उसके लिए तो पहले आपको शादी करनी पड़ेगी।

राजेश _बीना शादी किए दूध नहीं मिल सकता क्या?

पुनम _देवर जी मैं तो आपको सीधा साधा समझ रहा था, आप तो बड़े रंगीले निकले,,

राजेश _अरे भाभी मैं तो मजाक कर रहा था,,

अपनी भाभी से मजाक नहीं कर सकता क्या?

पुनम _हां भई, कर सकते हो, वैसे भी देवर को, दूसरा वर कहा जाता है। कहते है जब पति घर में न हो तो देवर ही अपने भाभी का ख्याल रखता है।

राजेश _अच्छा, ऐसी बात है क्या?

बोलो, क्या सेवा करू अपनी भाभी।

पुनम _जरूरत पड़ेगी तो बताऊंगी।

अभी तो आपके भईया ही काफी है सेवा करने के लिए।

चलो अब बाते बंद कर दूध पी लो।

राजेश ने दूध पी लिया।

गिलास लेकर पुनम चली गई।

कुछ देर बाद फिर राजेश के कमरे में फिर आई।

पुनम _देवर जी, जग में पानी रख रही हूं। रात प्यास लगे तो पी लेना।

राजेश _शुक्रिया, भाभी।

पुनम _किस बात की शुक्रिया।

राजेश _हमारा इतना ख्याल रख रहे हो इसलिए।

इतना अच्छा खाना बनाकर खिलाई, फिर दूध

पुनम _आप मेरे देवर है, देवर का ख्याल भौजी नही रखेगी तो और कौन रखेगा।

अच्छा अब मैं चलती हूं।

राजेश _ठीक है भाभी।

पुनम _भाभी नही,भौजी कहा करो, बड़ा अच्छा लगता है मुझे भौजी शब्द,

राजेश _अच्छा, तो ठीक है आज अब से भौजी ही कहा करेंगे।

उधर खेत में, भुवन, सरला काकी के आने का बेशब्री से इन्तजार कर रहा था।

भुवन _शाली इतना लेट कर रही है। आने दे उसे आज तो ऐसा बजाऊंगा उसे, चीख निकलूंगा उसकी।

उधर सरला अपनें पति के सोने का इन्तजार कर रही थी। जब उसे लगा की उसका पति गहरी नींद में सो चुका है।

वह दबे पांव बिस्तर से उठी और चादर ओढ़ कर एक लोटा में पानी लेकर, छुपते छुपाते खेत की ओर जाने लगी

, ताकि अगर कोइ पकड़ ले तो उसे बहाना बनाते हुवे कह सके की वह शौच करने जा रही है।

वह लोगो से छिपते छिपाते भुवन के खेत में पहुंची।

झोपड़े में घुसी,,

भुवन खाट पे लेटा हुआ था।

भुवन _अरे काकी, इतनी देर काहे लगादी आने में,,

सरला _अरे मुआ, तुम्हे क्या?

कैसे लोगो से छिपते छिपाते आ रही हूं तुम्हे क्या? तुम्हारे काका, आज लेट से सोए।

अब चलो जल्दी करो, कहीं तुम्हारा काका उठ गया और मुझे खाट पे नही पाया तो ढूंढने निकल जायेगा।

भुवन _अरे चाची अभी तो आई हो, मुझे बहुत इन्तजार कराई, मैं तो जी भर के लेने के बाद ही छोडूंगा।

सरला _अब बाते ही करता रहेगा की शुरु भी ।

सरला ने अपनी ओढ़ी हुईं चादर और साड़ी उतार दी।

चड्डी तो उसने पहनी ही नहीं थी।

वह सिर्फ पेटीकोट ओर ब्लाउज में खाट में लेट गई।

भुवन भी अपन लूंगी और शर्ट उतार दिया।

सिर्फ चड्डी में रह गया।

वह खाट पे चढ़ गया।

सरला की ब्लाउज का बटन खोल दिया। और उसकी बड़ी बड़ी मस्त चूचियों को आज़ाद कर दिया।

उसकी सुडौल चुचियों को मसलने लगा चुचुक को मुंह में भर कर चूसने लगा।

सरला सिसकने लगी,

उन आह उई मां, आह

बेटा थोडा धीरे आराम से कर

भुवन जी भर कर उसकी चूचियों से खेलने और चुसने के बाद।

नीचे गया और उसकी पेट और नाभी को चाटने लगा।

भुवन _काकी क्या सपाट पेट और खुबसूरत गहरी नाभी है तेरी सच में इसे देखते ही land खड़ा हो जाता हैं।

कुछ देर पेट और नाभि को चाटने के बाद, भुवन सरला की पेटी कोट की नाडा खीच दिया और उसे टांगों से खीच कर निकाल दिया।

सरला नंगी हो गई।

पेटीकोट निकलते ही सरला की मस्त फूली हुई चिकनी चूत भुवन के आंखो के सामने आ गया। जिसे देखकर भुवन का land तनकर खड़ा हो गया।

भुवन न सरला की बुर चाटना शुरु कर दिया।

सरला की मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

आह उन आई,, उई मां,, आह,

सरला बहुत ज्यादा उत्तेजीत हो गई,,,

आह, बेटा बस कर अब बर्दास्त नही हो रहा डाल दे अपना मूसल मेरी बुर में,,

Kutiya बहुत खुजाती है बुझा दे प्यास मेरी चूत की,,

भुवन _लो काकी अब तैयार हो जाओ, मेरा साप तुम्हारे बिल में जाने वाला है।

मेरा मूसल तेरी fuddi की सारी प्यास बुझा देगा।

भुवन अपन तना हुआ लौड़ा अपनें हाथो में लेकर सरला की टांगो को फैला कर बैठ गया। अपन land का टोपा सरला की योनि मुख पर रख कर एक जोर का धक्का लगाया।land एक ही धक्के में सरसराता huwa जड़ तक अन्दर घूस गया।

अब भुवन सरला की चुचियों को पकड़ कर। उकडू बैठ कर गच गछ chudai करना शुरू कर दिया।

Land बुर में तेजी से अन्दर बाहर होने लगा जिससे सरला को बहुत मजा आने लगा।

दोनो स्वर्ग की सैर करने लगे।

झोपड़े में सरला की मादक सिसकारी गूंजने लगा, आह उई आह उन उई मां,,,

चूड़ियों की खनकने की खन खन खन,,,

खाट के बजने की, चर चर चर,,,

Land का बुर में जाने की फच फ्च,,,,

सभी आवाजे माहौल को अत्यंत कामुक बना रहा था।

दोनों सबकुछ भुल कर संभोग के परम सुख में खो गए थे।

इसी आसन में जमकर मजा लेने के बाद भुवन ने land को बुर से बाहर निकाल लिया और सरला को घोड़ी बना दिया।

पीछे से अपन लौड़ा सरला की योनि में डालकर उसकी क़मर पकड़ कर दनादन चोदना शुरु कर दिया।

Land बुर में फिर से तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा जिससे सरला को फिर से बहुत मजा आने लगा वह पीछे से अपना क़मर हिला हिला कर भुवन का सहयोग करने लगी।

भुवन भी सरला की योनि में थपाथाप land पेले जा रहा था।

कमरे में सरला की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

दोनो को फिर से संभोग का परम सुख प्राप्त होने लगा।

सरला _आह उन आह बेटा और जोर लगा बहुत मजा आ रहा है, आह उन,,, मैरी बुर की प्यास बुझा दे बेटा, बहुत खुजाती है, करमजलि।

भुवन _अरे मेरी जान तु फिकर मत कर आज तो तेरी सारी प्यास बुझा दूंगा, हाय क्या मस्त मॉल है तु, तुम्हे चोदने का मजा ही कुछ और है।

सरला की योनि से रस झरने की तरह बह कर land से होता huwa अंडकोष से होकर खाट पर टपक रहा था।

भुवन मशीन के भाती धक्के लगाने लगा।land बुर में सर सर अंदर बाहर हो रहा था।

दोनों किसी दूसरे लोक में विचरण कर रहे थे जहा सिर्फ मजा ही मजा था।

तभी भुवन को लगा की वह ओर बुर मारता रहा तो झड़ जायेगा।

वह अपना land बुर से बाहर खीच दिया।

और खाट पे पीठ के बल लेट गया।

उसने सरला को land के ऊपर बैठने का इशारा किया

सरला खाट पर चढ़ गई और भुवन के land को पकड़ कर अपनी योनि में डालकर कर बैठ गई।

भुवन की सीने पर हाथ रख कर उछल उछल कर चुदाने लगी, भुवन भी सरला की क़मर पकड़ कर अपनें land पर पटक पटक कर नीचे से धक्के लगा लगा कर चोदने लगा दोनो को फिर से संभोग का परम आनद मिलने लगा।

एक बार फिर से झोपड़े मे सरला की मादक सिसकारी

आह उई मां आ उन आई,,,

खाट के बजने की चर चू चर चू,,,,

चूड़ियां खनकने की, खन खन ,,

लौड़े का बुर में जाने की फच फुच,,,,

भुवन की आनंद में कराहने की,, आवाजे एक दूसरे से ताल में ताल मिला कर मदूर संगीत बना रही थी।

जिसे सुनकर कोइ नामर्द का land भी खड़ा हो जाता।

दोनो chudai का भरपूर मजा लें रहे थे।

सरला की बुर की सारी खुजली दूर हो रही थी,,

सरला बहुत अधिक उत्तेजित हो चुकी थी वह जोर जोर से उछल उछल कर चुदने, लगी और खुद को झड़ने से रोक न सकी,,,

आह मां आह,, उन,, वह भुवन को जकड़ कर झड़ने लगी,,,

भुवन भी खुद को रोक न सका वह भी सरला की कोख मे गरम गरम अपना वीर्य छोड़ने लगा,,

आह आह,, आह हा,,,

दोनो थक चुके थे,, एक दूसरे के ऊपर ढेर होकर सुस्ताने लगे,,,

कुछ देर बाद जब दोनों को राहत मिली,,

सरला खाट से उठ खडी हुईं,,

सरला _अब मुझे जल्दी से घर पहुंचना होगा।

तुम्हारा काका उठ न गया हो।

भुवन _अरे काकी काका उठ गया हो तो बोल देना, शौच करने गई थी।

सरला के जाने के बाद भुवन का नींद कब लगा उसे पता नही चला।

इधर सुबह राजेश उठ कर अखाड़ा चला गया जहा बिरजू और उसके साथियों नेअभ्यास हेतु देसी जुगाड कर रखा था।

बिरजू ने राजेश का परिचय अपनें दोस्तो से कराया। सभी राजेश से मिलकर खुश हुवे।

राजेश को देसी जुगाड का उपयोग कर अभ्यास करने में मजा आया।

 
राजेश अखाड़े से घर पहुंचा, तब तक उसका ताऊ जी केशव खेत जा चुका था।

पदमा _आ गया बेटा, अखाड़े से।

राजेश _हा ताई।

पदमा_बेटा जा अब तू नहा ले, कुछ देर में भुवन भी खेत से आ जायेगा।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश टावेल, बनियान और अंडर वियर लेकर घर के पीछे बाड़ी में नहाने चला गया।

वहा पहले टॉयलेट में जाकर फ्रेस हो गया।

फिर बोर चालू कर नहाने लगा। वह सिर्फ उंडर वियर में था।

पदमा _अरे बहु, राजेश तो ऐसे ही नहाने चला गया, साबुन तो लें गया ही नही, जाओ उसे साबुन दे आओ।

पुनम _जी मां जी।

पुनम साबुन का डिब्बा ले कर बाड़ी में गया।

वहा जाकर, देखा राजेश सिर्फ अंडर वियर में है।

उसका फौलादी बदन को देखकर मुस्कुराने लगी।

तभी राजेश की नजर, पुनम पर गया।

राजेश _अरे भौजी तुम कब आई।

पुनम _बस अभी आई, देवर जी तुम साबुन लाना तो भुल ही गए, मां जी ने साबुन दे आने को कहा, लो साबुन लगा कर नहाओ।

राजेश _ओह शुक्रिया, भौजी।

पुनम _वैसे देवर जी एक बात कहूं?

राजेश _कहिए भौजी क्या बात करनी हैं?

पुनम _काफी अच्छी बॉडी बना रखी है आपने, पहलवानों की तरह। लगता है काफी पसीने बहाते हो अखाड़े पे।

राजेश _भौजी, लडकियों को इंप्रेस करने के लिए आज कल लड़को को अपनें बॉडी पे बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

पुनम _अच्छा देवर जी, ये बॉडी लडकियों को इंप्रेस करने के लिए बनाए हो। तब तो शहर में तुम्हारी कई गर्लफ्रेंड रही होगी आपकी।

राजेश _थी एक, पर हम दोनो में झगड़ा हो गया, वो विदेश चली गईं। और मैं यहां आ गया।

पुनम _इतना अच्छा मुंडा को छोड़कर चली गईं, आखिर ऐसा क्या बात हो तुम दोनो के बीच?

राजेश अपनें बदन पे,साबुन लगाने लगा,

पुनम की नजर राजेश के अंडर वियर पर गया, उसमें बड़ा उभार देख कर मुस्कुराने लगी।

राजेश _भौजी, अब ये लंबी कहानी है, फिर कभी बताऊंगा।

पुनम _देवर जी, शरीर के हर हिस्से पर अच्छे से साबुन लगाना। कोइ हिस्सा छूट न जाए।

राजेश _भौजी, अगर ऐसी बात है तो, मेरा हाथ पीठ पर नही पहुंच पा रहा आप ही लगा दीजिए।

पुनम _, न, बाबा, कहीं सासु मां आ गई तो, क्या समझेगी।

राजेश _कह देना, देवर को नहला रही थी।

पुनम _अच्छा, तु छोटा बच्चा थोड़ी है, जो नहलाना पड़ेगा।

मैं अब चलती हूं, नही तो सासु मां पूछेगी की इतनी देर तक क्या कर रही थी?

पुनम मुस्कुराते हुवे वहा से चली गई।

पदमा _बहु दे आई, राजेश को साबुन।

पुनम _हा मां जी।

पदमा _चल, अब आजा, नास्ता बनाने में मेरी मदद कर।

पुनम _ठीक है मां जी।

कुछ देर बाद, राजेश नहाकर आ गया।

पदमा _बेटा, वहा आलमारी में तेल, कंघी वगैरा, होगा।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश, शरीर पे तेल लगाकर, अपने बालो पे कंघी कर लिया।

अपने कमरे में आराम करने लगा।

तभी भुवन खेत से घर पहुंचा।

पदमा _आ गया बेटा खेत से।

भुवन _हा मां, आ गया। राजेश अखाड़े पर गया था कि नही।

पदमा _गया था बेटा, वह अखाड़े से आकार नहा भी लिया अपनें कमरे मे होगा।

जा तु भी नहा ले फिर राजेश और तुम, दोनो साथ में नाश्ता कर लेना।

भुवन _ठीक है मां।

कुछ देर में भुवन भी नहा कर आ गया।

पदमा, राजेश के कमरे में गई।

राजेश _अरे ताई आप।

पदमा _बेटा चलो नाश्ता कर लो।

राजेश _भुवन भईया खेत से आ गया क्या?

पदमा _हा बेटा, वह नहा भी लिया। नाश्ता के लिए तुम्हारा राह देख रहा है।

चलो आ जाओ।

राजेश, पदमा के पीछे चल पड़ा।

भुवन कीचन पर बैठ राजेश का इन्तजार कर रहा था।

राजेश जब कीचन में पहुंचा,

भुवन _आओ राजेश बैठो, कैसा रहा तुम्हारा अखाड़ा का पहला दिन।

राजेश _बहुत अच्छा भईया, लड़को ने अच्छा सपोर्ट किया? अभ्यास के लिए बहुत अच्छा देशी जुगाड किया है। मुझे अभ्यास करने में बड़ा मजा आया।

भुवन _चलो, अच्छी बात है, अब तुम्हारे जिम की चिन्ता खत्म हुईं।

पुनम, ने दोनो के लिए नाश्ता लगाई ।

दोनो ने नाश्ता किया।

भुवन _वाह भई नाश्ता करके तो मजा आ गया, क्यू भई राजेश।

राजेश _हां भाई, भौजी के हाथो में जादू है। बड़ा स्वादिष्ट नाश्ता बना था।

भुवन _भई राजेश, अब तुम घर में रह कर अपनी कलेक्टरी की तैयारी करो, बोर लगे तो दोस्तो के पास या खेत में आ जाना टहलने। मै खेत जा रहा हूं, बाबू जी के लिए नाश्ता ले कर।

राजेश _ठीक है भुवन भईया।

भुवन _मां ये आरती कहा है कहीं दिख नही रही है।

पदमा _बेटा वो अपनी सहेली मधु के घर गई है, कुछ काम था उसको।

भुवन _ये लडकी भी न दिन भर अपनी सहेली मधु के घर ही घुसी रहती है।

भुवन अपनें कमरे में गया।

भुवन _अरे पुनम जरा इधर आना,

पुनम _जी अभी आई,

पुनम अपनें ससुर के लिए नाश्ता डिब्बा में डालकर, कमरे में पहुंची।

पुनम _बोलो जी क्या बात है?

भुवन _ने पुनम को अपनी बाहों में भर लिया।

पुनम _क्या कर रहे हो जी छोड़ो न कोइ आ जायेगा।

भुवन _अरे मेरी जान, खेत जाने से पहले एक बार तेरी ले तो लू। नही तो खेत में मन नही लगेगा।

पुनम _क्यू, खेत मेंकाम करने वाली औरतें तुम्हारे मन बहलाने के लिए है न।

भुवन _हाय जो मजा तेरी लेने में आता है, वो मजा उनमें नही।

पुनम _अच्छा, ऐसा क्या खास है मुझमें।

भुवन _हाय, ये दूधदूध से भरे, स्तन मसल मसल कर, पी कर लेने में बड़ा मज़ा आता है।

पुनम _न बाबा, अब मैं आपको दूध पीने नही दूंगा।

भुवन _वो क्यू?

पुनम _आधा दूध तो तुम ही पी जाते हो, मुन्ना के लिए कम पड़ जाता है। अब वह भी ज्यादा दूध पीने लगा है।

भुवन _तुम्हारा दूध है ही इतना स्वादिष्ट, हम बेटे और बाप दोनो को बहुन्त पसंद है तुम्हारा दूध।

चल अब घोड़ी बन जा। जल्दी कर मुझे खेत जाना है, मां ढूंढे गी, कहा चला गया।

पुनम खाट को पकड़ के झुक गई।

भुवन ने उसका चड्डी नीचे खींच दिया और उसकी बुर चाटने लगा।

थोड़े ही देर में पुनम की बुर पानी छोड़ने लगी।

उसकी मूंह से सिसकारी निकलने लगी।

भुवन ने, देर न करते हुए, अपना land पे थूक लगाया और पुनम की बुर में रख कर गच से पेल दिया।

पुनम सिसक उठी।

भुवन, पुनम केक़मर को दोनो हाथों से पकड़ कर गपागप चोदना शुरु कर दिया।

कमरे में पुनम की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

इधर आरती अपनी सहेली के घर से आ गई।

पदमा _अरे, तु कहा घूम रही है सुबह सेअभीआ रही है ।जवान छोरी है, डर लगता है कहीं हमारा मूंह काला न करा दे।

आरती _मां आपको बता कर, गई थी न मधु घर जा रही हूं। फिर भी, मुझ पर तो आपको भरोसा ही नहीं।

पदमा _ठिक है, ठिक है, देख तो तुम्हारा भईया कहा रह गया, उसे खेत जाना है।

आरती _ठीक है मां।

आरती, भुवन के कमरे की ओर गई। कामरा अंदर से बंद था।

आरती दरवाज़े पर कान लगा कर सुनी।

कमरे मे पुनम की मादक सिसकारी गूंज रही थी, जिसे सुनकर आरती समझ गई की अंदर क्या चल रहा है।

वह मुस्कुराते हुए वहां से चली गई।

पदमा _अरे अपनें भाई को बोला की नही खेत के लिए लेट हो रहा है।

आरती _नही मां, भईया कमरे में है, मैं कमरे में गई नही। आरती शरमाने लगी।

पदमा_क्यू क्या huwa ?

आरती _, मां, ओ, भईया और भौजी,,,,,

पदमा _, क्या huwa तुम्हारे भईया भौजी को, शर्मा क्यू रही हो,,,

आरती _मां, कमरे के अन्दर भईया और भौजी,,

मुझे बताने में शर्म आ रही है, ख़ुद ही पता कर लो,,,

तुमसे तो एक काम भी ढंग से नहीं होता,,

पदमा ख़ुद ही चली गईं,,

वह दरवाजे के पास गई, दरवाजा धकेली, खुला नही।

उसे पुनम की मादक सिसकारी सुनाई पड़ी।

उसने अपना अपना सिर पकड़ लिया।

हे भगवान इस लड़के को मां बहन छोटा भाई किसी का कोइ लाज लहजा है? दिन में ही दारवाजा बंद कर के chudai करने लगता है।

पदमा _वहा से चली गईं।

आरती , मुस्कुराते हुवे बोली क्या हुआ मां, भैया को बोल दिए न खेत के लिए लेट हो रहा है।

वह मुंह बंद कर हसने लगी।

पदमा _चुप कर, बेशर्म कहीं कि तुझे भी अपने भाई की तरह शर्मों हया है नही।

आरती _मां, अब भईया तो रात में घर में रहते नही खेत में सोते हैं। तो अपनें बीबी को प्यार दिन में ही करेंगे न।

पदमा _अरे हमारी नही तो कम से कम राजेश का तो ख्याल करना चाहिए। उसे पता चलेगा तो क्या कहेगा? मां बहन के रहते ही बीबी के साथ शुरु हो जाता है। संस्कार नाम की चीज नही।

कुछ देर बाद भुवन कमरे से बाहर निकला।

भुवन _अच्छा मां, मैं खेत जा रहा हूं।

पदमा _ठीक है बेटा, अपने बापू के लिए नाश्ता रखा है कि नही।

भुवन _रखा हूं मां।

थोड़ी देर बाद पुनम भी बाहर निकली, और अपनी बुर धोनेबाड़ी के मूत्रालय में गई।

इधर आरती हस रही थी।

पुनम जब आई।

पदमा ने पुनम को घूरते हुए कहा,,

क्यू re तुम्हे कल भी कहा था, राजेश आया huwa है। तु भुवन को मना क्यू नही करती।

पुनम _मां जी आपका बेटा, मेरा सुनता कहा हैं।

पदमा _मैं अच्छी तरह समझती हूं, तु भी कम नही। तुम्हे भी खुब खुजली मची रहती है।

शर्मो, हया नाम का चीज ही नहीं इस घर में।

आरती _मां अब भौजी को क्यू डांट रही हो। बेटा को तो कुछ बोली नहीं।

पदमा _तु चुप रह बेशरम कहीं की।

जाओ तुम लोग भी नहा कर नाश्ता कर लो।

आरती और पुनम दोनो बाड़ी में नहाने चले गए।

दोनों नहाने लगे।

आरती _भौजी, भईया के साथ खुब मजा लें रही थी। पूरे कमरे में तुम्हारे सिसकारी गूंज रही थी।

लगता है खुब मजा आ रही थी आपको।

पुनम _जब तुम्हारी, शादी होगी न तब पता चलेगा।

कैसा लगता है?

आरती _न बाबा मुझे शादी नही करनी।

पुनम _क्यू? तुम्हारा मन नही करता क्या? सब करने का।

आरती _करता है, पर

आरती _डर लगता है कहीं मेरा पति भी मधु के पति की तरह शराबी निकल गया तो। मेरी भी जिंदगी नर्क बन जाएगी। उससे अच्छा तो उंगली से काम चला लूंगी।

पुनम _कब तक उंगली से काम चलाएगी। कब तक अपना मटका लेकर गांव में घूमती रहेगी।

शादी तो करनी ही पड़ेगी। और सभी लड़के शराबी तो नही होते न।

आरती _फिर भी मुझे डर लगता है, मेरी भी जिंदगी मधु की तरह बर्बाद न हो जाए।

दोनो नहा कर नाश्ता कर लिए

अपनें अपनें काम में लग गए।

राजेश अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था।

कुछ देर बाद किसी ने घर का दरवाजा खटखटाया।

पदमा _अरे आरती जरा देखो कौन है दरवाजे पर।

आरती ने दरवाजा खोला।

कोइ आदमी था।

आदमी _राजेश यहीं रहता है?

आरती _हां, आप कौन है?

आदमी _मुझे ठाकुर साहब ने भेजा है। आज शाम को हवेली में पार्टी रखा गया है। उसमें राजेश को आमंत्रित किया गया है।

तुम राजेश को यह जानकारी दे देना।

आरती _जी मैं राजेश भईया को, बता दूंगी।

वह आदमी चला गया।

आरती अंदर आई।

पदमा _कौन था री?

आरती _मां, ठाकुर का कोइ आदमी आया था।

पदमा _ठाकुर का आदमी, वो हे भगवान वो यहां क्यू आया था।

आरती _बता रहा था कि आज हवेली में पार्टी है राजेश भईया को आमन्त्रित किया है।

पदमा _क्या? पर उन्हें कैसे पता चला कि राजेश यहां आया है। और राजेश को क्यू बुलाया है? हे भगवान,,

पदमा राजेश के कमरे में गई,,

राजेश _ताई आप, आइए बैठिए।

क्या बात है ताई डरी सहमी लग रही है।

पदमा _अरे बेटा, ठाकुर का आदमी आया था, कह रहा था कि हवेली में पार्टी है, तुम्हे बुलाया है।

राजेश _इसमें भयभीत होने की बात क्या है?

पदमा _बेटा शायद तुम नही जानते, ठाकुर सूरजपुर वालो को अपना दुश्मन समझता है। फिर वह तुम्हे क्यू बुलाया है पार्टी में।

राजेश _ताई, दिव्या जी के कहने पर बुलाया होगा?

पदमा_कौन दिव्या बेटा?

राजेश _ठाकुर की छोटी बेटी।

पदमा _बेटा तु दिव्या को कैसे जानता है?

राजेश _ताई, जब मैं ट्रैन से गांव आ रहा था तब उस ट्रैन से दिव्या जी भी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर अपनें गांव आ रही थी।

रात में कुछ बदमाशो ने उससे छेड़खानी करने लगे, मैने उसकी मदद की।

पदमा_बेटा, तुम उसके हवेली में मत जाना। ये ठाकुर अच्छा आदमी नही है बेटा। और तुम उसकी बेटी से कोइ मेल जोल मत रखना।

कहीं उच्च नीच हो गया तो हम तुम्हारे माता पिता को क्या जवाब देंगे?

राजेश _ताई आप खमोखा परेशान हो रही हो, मुझे कुछ नही होगा।

पदमा _नही बेटा, तुम पार्टी में नही जाओगे। तुम नही जानते यहां क्या huwa है?

राजेश _ताई क्या huwa है यहां? मुझे भी बताओ। आखिर क्यू ठाकुर इस गांव के लोगो को अपना दुश्मन मानते हैं।

पदमा _बेटा मैं ये बाते तुम्हे बताना नही चाहती थी, पर अब तुम्हे बताना जरूरी हो गया है।

सुनो क्या huwa था यहां,,,,,,,,
 
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