Incest यह क्या हुआ - Page 21 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

आरके कॉलेज में कल सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। जिसमे इस सत्र जीतने भी होनहार स्टूडेंट्स थे जिसने कला, खेल एवम शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया था साथ शिक्षको को सम्मानित किया जाना था।



मुख्य अतिथि के रूप में विशाल एवम सुजाता ग्रुप्स की मालकिन और विषेश अतिथि के रूप मे रीता मेहता को आमन्त्रित किया गया है।

सभी होनहार स्टूडेंट्स को कालेज प्रशासन ने समारोह में उपस्थित रहने के लिए सूचना भेज दिया गया ।

कालेज के प्रिंसिपल को पता चला कि राजेश शहर में नही है। वह आईएएस की तैयारी के लिए बाहर गया हुआ है।

उसने भगत को राजेश को सम्मान समारोह में आने के लिए काल करने कहा था।

भगत ने राजेश को काल किया, पर राजेश ने सम्मान समारोह में उपस्थित न हो पाने की जानकारी दिया।

यह बात भगत ने कालेज के प्रिंसिपल को बताया।

कालेज के प्रिंसिपल ने भगत से राजेश का नंबर लेकर खुद राजेश को काल किया।

राजेश _हेलो,,

प्रिंसिपल _राजेश, मैं आरके कालेज का प्रिंसिपल बोल रहा हूं।

राजेश _सर आप।

Princple _हा राजेश,भगत ने बताया की तुम कल सम्मान समारोह में उपस्थित नही हो रहे हो।

राजेश _सर मैं, शहर सी बाहर हूं और कुछ व्यक्तिगत कारण भी है जिसके कारण मैं समारोह में उपस्थित नही हो पाऊंगा, मुझे क्षमा कर दीजिए।

प्रिंस्पल _ओ तो ठीक है राजेश, पर तुम ही सोचें अगर तुम उपस्थित नही रहे तो क्या यह समारोह सफल रहेगा। तुमने हमेशा कालेज के मान सम्मान बढ़ाया है। फिर क्या तुम ए चाहोगे की तुम्हारे ही वजह से सम्मान समारोह अधूरा रहे।

राजेश _नही सर मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता की मेरी वजह से कालेज के मान सम्मान को ठेस पहुंचे।

प्रिंसिपल _फिर कल तुम्हे आना ही होगा समारोह में व्यक्तिगत कारणों को दरकिनार करते हुए। मुझे तुमसे पूरी उम्मीद है।

राजेश _पर सर, मेरी भी मजबूरियां हैं,,

प्रिंसिपल _नही राजेश, तुम्हे आना ही होगा, यह समझ लो कि यह तुम्हारा समारोह में आना गुरु दक्षिणा है।

राजेश _ओह सर आपने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।

Princple _अच्छा राजेश अब मैं फोन रखता हूं। इसी उम्मीद के साथ की तुम समारोह में जरूर शामिल होगे।

राजेश _ठीक है सर,,

राजेश ने भगत को काल किया।

भगत _हा भाई,princple सर ने बात किया क्या?

राजेश _हा यार, मुझे लगता है वहा आना पड़ेगा।

भगत _ये तो बड़ी खुशी की बात है? भाई कब आ रहे हो?

राजेश _यारा मैं कल सुबह ट्रेन पकडूंगा। और शाम तक पहुंच जाऊंगा।

भगत _ठीक है भाई, मैं आपको लेने स्टेशन पहुंच जाऊंगा।

राजेश _ठीक है।

भुवन _राजेश किस्से बात हो रही थी।

राजेश _भईया, कालेज के दोस्त से, कल मुझे शहर जाना होगा।

भुवन _पर अचानक कोइ काम था क्या?

राजेश _हा, वहा कालेज में सम्मान समारोह रखा गया है, जिसमे शामिल होने के लिए, कालेज के प्रिंसिपल को मुझसे बड़ी उम्मीद है।

वहा साथ में रवि और विमल भी मौजूद थे चारो शाम को नदी की ओर टहलने निकले थे।

रवि _राजेश, हो सकता है कि वेस्ट स्टूडेंट्स का अवार्ड्स तुम्हे ही मिलने वाला हो, और तुम ही समारोह में उपस्थित नही रहे तो, समारोह फीका पड़ जायेगा। इसलिए princple ने तुम्हे समारोह में उपस्थित रहने के लिए विषेश रूप से काल किया है।

विमल _हा, राजेश रवि ठीक कह रहा है, मुझे भी ऐसा ही लग रहा है।

भुवन _राजेश, कल तुम्हे सुबह स्टेशन छोड़ दूंगा। शाम को वहा समारोह में शामिल होकर, सुबह फिर से यहां के लिए ट्रेन पकड़ लेना।

भुवन _भाई, मुझे लगता है गांव को तुम्हारी जरूरत है, यहां की हालात को तुम ही सुधार सकते हो, और मुझे लगता है ठाकुर के बच्चे से गांव के विकास कार्य तुम ही करवा सकते हो। इसलिए तुम गांव में ही कुछ समय गुजारो।

गांव वालो को भी आगे तुमसे काफी उम्मीद है।

रवि _हा राजेश, ठाकुर को सही रास्ते पर तुम ही ला सकते हो।

गांव के लोगो की भलाई के लिए तुम्हारा अभी गांव में रहना जरूरी है।

राजेश _ठाकुर को जब तक सबक नहीं सीखा लेता तब तक मैं यहां से जाऊंगा नही, ये मेरा वचन है आप लोगो से।

राजेश और भुवन दोनो शाम को टहल कर घर पहुंचे। भुवन ने पदमा को बताया की राजेश कल शहर जा रहा है।

पदमा _अरे राजेश बेटा अचानक से शहर, कुछ काम आ गया है क्या?

राजेश _हां ताई, एक जरूरी काम आ गया है? पर अगले दिन मैं गांव आ जाऊंगा।

पदमा _ओह मुझे लगा की तुम हमेशा के लिए जा रहे हो।

राजेश _ताई, आपको छोड़ कर भला कौन जाना चाहेगा?

पदमा _ऐसा क्यू?

राजेश _आप लोगो का इतना प्यार जो मिल रहा है यहां, मैं तो अब गांव में ही रहूंगा?

पदमा _चल झूठा कहीं का, कलेक्टरी की नौकरी करेगा की गांव में ही बैठा रहेगा।

राजेश _भाई आप कहे तो नौकरी छोड़ यहीं रह जाऊंगा?

पदमा _अपनी ताई के लिए नौकरी छोड़ देगा?

राजेश _आप कहे तो।

पदमा _बेटा, मैं तो यहीं चाहूंगी की तुम कलेक्टर बनकर अपनी मां का सपना पूरी करो, और हम लोग भी गर्व महसूस करेंगे? हमारा राजेश कलेक्टर बन गया है।

रही बात गांव में रहने की तो तुम आते जाते रहा करना। हम लोग इसी में संतुष्ट रह जायेंगे।

तभी पुनम वहा चाय लेकर पहुंची।

पुनम _देवर जी कहीं अपनी भौजी की सेवा में कमी तो नहीं रह गई जो शहर जा रहे हो।

राजेश _भौजी, ये आप कैसी बात कर रही हो? आपकी सेवा में कमी?

भाई आपने तो अच्छे से हमारा ख्याल रखा है?

हम तो अगले दिन ही गांव आ जायेंगे।

पुनम _सच।

राजेश _हां। अब तो हम गांव से तभी जायेंगे जब कलेक्टर बन जायेंगे?

पुनम _ये तो खुशी की बात है?

रात में भोजन के बाद राजेश अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था।

पुनम कमरे में दूध लेकर आई,,,

पुनम _लो दूध पी लो।

राजेश _भौजी, आज ताजा दूध नही पिलाओ गी।

पुनम _नही।

राजेश _पर क्यू? मुझसे कोइ गलती हो गई?

पुनम _कल शहर क्यू जा रहे?

राजेश _बताया तो था जरूरी काम है? अगले दिन आ जाऊंगा।

भाई शहर में थोड़े ही ताजा दूध पीने को मिलेगा। अब तो हमे ताजा दूध पीने की आदत हो गई है। इसलिए अगले दिन मैं गांव आ जाऊंगा।

चलो अब दूध पिलाओ।

पुनम _तु सच कह रहा है न।

राजेश _हा बाबा।

पुनम ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया उसकी बड़ी बड़ी चूचियां राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश ने दोनो चुचियों को हाथो में थाम लिया और बारी बारी दोनो को चूसने लगा।

पुनम प्यार से राजेश के बालो को सहलाने लगी।

बीच बीच मे वह सिहर जाती, उसके शरीर में उत्तेजना का संचार होने लगता। वह खुद बड़ी मुस्किल से नियंत्रण रख पा रही थी। पर आज वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गई।

वह खुद पर काबू नहीं रख सकी और राजेश की गाल और ओंठो को पागलों की तरह चूमने लगी। वह तेज़ तेज़ सांस ले रही थी।

राजेश हतप्रभ देखता रहा।

पुनम _अब देख क्या रहा है? बुझाओ मेरी प्यास। अब मैं अपने को और नही रोक सकती।

राजेश ने पुनम की आंखो में देखा उसकी आंखे वासना से भरी हुई थी। वह अपना ओंठ पुनम की ओंठ पर रख कर चूमा फिर उसकी ओंठ को मुंह में भरकर चूसने लगा।

पुनम भी उसका पूरा साथ देने लगी।

दोनो पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे।

उसके बाद पुनम ने राजेश के लोवर को खींचकर उसका लंद बाहर निकाल लिया।

वह राजेश के मोटे और तगड़े लंद को देख हैरान हुई।

उसे हाथ में लेकर सहलाने लगी।

फिर लंद का टोपा मुंह में लेकर चूसने लगी। उसके बड़े बड़े गोटे को हाथ से सहलाने लगी।

कुछ देर में लंद को पूरे मुंह में लेकर चूसना शुरु कर दी, राजेश को बहुत मजा आने लगा वह पुनम की बाल को पकड़ कर धीरे धीरे उसके मुंह में धक्के मारने लगा, पुनम घो घो करने लगी।

उसके बाद राजेश ने पुनम को बाहों में उठाया और उसे पलंग पर लिटा दिया।

अपना लोवर, कच्छा निकाल दिया।

फिर खुद पलंग पर चढ़ कर पुनम के ऊपर झुक गया और उसके प्रत्येक अंगो को चूमने चाटने लगा।

पुनम सिसकने लगी।

राजेश पुनम की चूचक को मसल मसल कर पीने के बाद। उसकी पेट को चाटने उसकी गहरी नाभी को चूमने लगा पुनम आंखे बंद कर कामुक सिसकारी भरने लगी।

राजेश आगे बड़ा और पुनम की पेटीकोट को ऊपर कर उसकी पेंटी को निकाल दिया।

फिर पुनम की मस्त फूली हुई चिकनी गुलाबी चूत को देखकर उसका लंद झटके मारने लगा, वह पुनम की बुर को चाटने लगा।

पुनम की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई।

पुनम _राजेश, अब मुझसे और बर्दास्त नही हो रहा, चोदो मुझे, फाड़ दो मेरी बुर, कुछ दिनो से बहुत परेशान कर रखा है, भोषडी।

राजेश ने पुनम की टांगो को फैला दिया। और उसके टांगो के बीच आ कर उकडू बैठ गया।

फिर उसकी बुर के छेद पर अपना लंद का टोपा रखा, और हल्का सा दबाव डाला। बुर एकदम गीली होने के कारण लंद का टोपा बुर में घुस गया।

अब राजेश ने एक जोर का धक्का मारा, लंद पुनम की बुर को चीरकर सरसराता huwa आधे से ज्यादा अंदर घुस गया।

पुनम चीख उठी, राजेश ने उसका मुंह बंद कर दिया। ताकि चीख कमरे से बाहर न जाए।

फिर राजेश पुनम की ओंठो को चूसा, उसकी चुचियों को मसल मसल कर पीने लगा।

पुनम सिसकने लगी। अब राजेश ने लंद को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा।

चूत एकदम गीली होने के कारण लंद बुर के अंतिम छोर तक पहुंच गया।

अब राजेश उकडू बैठ कर gach gach चोदना शुरू कर दिया।

पुनम को मजा आने लगा। राजेश पुनम की चुचियों को मसल मसल कर gach gach चोदना जारी रखा। पुनम अपनी आंखे बंद कर chudai का मजा लेने लगी।

इधर राजेश को भी पुनम की मस्त फूली हुई चिकनी बुर चोदने में एक अलग मजा आने लगा।

लंद बुर में fach फ़च आवाज़ करता huwa अंदर बाहर होने लगा।

लंद का टोपा पुनम की बच्चे दानी को ठोकने लगा। जिससे पुनम के अंदर एक अलग ही तरंग पैदा कर रहा था। पुनम तो स्वर्ग की सैर करने लगी।

कमरे में फाच फच, गच गच, चूड़ियों की खन खन,, और पुनम की मादक सिसकारी आह उई मां आई,,, उन,,, आह ह,,

गूंजने लगा।

पुनम को राजेश के मोटे और लम्बे लंद से चुदने में इतना मजा आ रहा था कि जिसकी उसने कभी कल्पना नही की थी।

भुवन का लंद राजेश से छोटा था। राजेश का लंद मोटा और लम्बा होने के कारण बुर की दीवारों को अच्छी तरह रगड़ रहा था, उसका टोपा उसकी गर्भसाय को ठोक रहा था। उसकी बुर की भगनाशा अच्छी तरह से घिसने के कारण, पुनम जन्नत में पहुंच चुकी थी। वह अपनी कमर उठा उठा कर राजेश की सहयोग करने लगी। वह अपने को ज्यादा देर न रोक सकी और राजेश को जोर से जकड़ कर झड़ने लगी। उसकी आंखों की पुतलियां पलट गई थी। शरीर कपकपा रहा था। मुंह से आह मां,,,,

राजेश ने चोदना बंद कर दिया और पुनम के ऊपर लेट करवह भी सुस्ताने लगा। इधर पुनम ऑर्गेज्म का अनुभव करने लगी। ऐसा अनुभव उसे पहली बार मिला था। संभोग के परम सुख को प्राप्त की थी।

कुछ देर बाद राजेश ने पुनम को फिर चूमना चाटना शुरू किया, उसकी दूध पीने लगा। बुर सहलाने लगा।

उसकी बुर चाटने लगा। पूनम की चूत में फिर आग लग गई। वह फिर सिसकने लगी।

राजेश ने उसे पलंग पर घोड़ी बना दिया, और उसकी बुर में फिर से अपना लंद डालकर चोदना शुरु कर दिया।

दोनो फिर से स्वर्ग की सैर करने लगे।

कमरे में एक बार फिर से गच गच, फच फाच, खन खन, और मादक सिसकारी आह उन आई मां आह, की आवाज़ गूंजने लगा।

दोनो संभोग के आपार आनंद को प्राप्त कर रहे थे।

राजेश _भौजी, कैसा लग रहा है, आपको मजा आ रहा है न, मुझसे चुदाने में। सच में क्या मस्त मॉल है तु। मुझे तो बहुत मजा आ रहा है तुम्हे चोदने में,, आह,, भौजी कुछ तो बोलो,,

राजेश रुक गया,,

पुनम _देवर जी रुक क्यू गए, चोदो अपनी भौजी को, सच में बता नही सकती कितना मजा आ रहा था, ऐसा मजा तो तुम्हारे भैया के चोदने से भी कभी नहीं मिला था, अब चोदो फाड़ दो मेरी चूत। गजब की मर्दानगी है तुम्हारे अंदर मैं chud कर धन्य महसूस कर रही हूं। अब मारो मैरी बुर,,

राजेश _ले भौजी, आज तो मैं तुम्हे तीनो लोको की सैर कराऊंगा।

ले और ले,

राजेश फिर से गच गच चोदना शुरू कर दिया।

पुनम के मुंह से आह उह निकल रही थी।

अचानक से राजेश अपना लंद बुर से बाहर निकाल लिया और पलंग पर लेट गया।

उसका लंद पुनम की बुर का पानी पीकर खुब लंबा और मोटा हो गया था।

राजेश ने पुनम को अपने लंद पर बैठने का इशारा किया।

पुनम पलंग पर खड़ी हुई अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार फेकी, फिर राजेश के लंद को अपने हाथो से पकड़ कर अपने बुर के छेद पर रख कर बैठ गई।

उसके बाद राजेश के सीने में दोनो हाथ रख कर उछल उछल कर chudna शुरू कर दी।

कमरे में एक बार फिर गपागप होने लगा। राजेश पुनम की कमर को पकड़ लिया और अपने लंद पर पटक पटक कर चोदने लगा।

पुनम आह उह करते हुए,, उछल उछल कर chud रही थी,, और एक बार फिर झड़ गई ।

इधर राजेश भी अब झड़ने की स्थिति में था।

वह पलंग पर बैठ गया। पुनम उसकी गोद में बैठी थी। लंद अभी भी बुर के अंदर था राजेश ने जी भर कर पुनम की ओंठो का रसपान किया फिर उसकी चूचक को मुंह में भर कर चूसने लगा।

पुनम फिर सिसकने लगी।

अब राजेश पुनम को फिर से पलंग पर लिटा दिया और उसकी दोनो टांगे अपने कंधे पर डालकर, गच गच चोदना शुरू कर दिया।

कमरे में फिर से एक बार पुनम की चूड़ियों की खनक, मादक सिसकारी गूंजने लगा।

वह राजेश की मर्दानगी का दीवानी हो गई।

उसे ऐसा मजा मिल रहा था जिसकी कल्पना भी नहीं किया जा सकता।

वह एक बार फिर झड़ने लगी, राजेश ने चोदना बंद नही किया और तेज़ तेज़ चोदता रहा।

वह पुनम के बुर में ही झड़ने लगा,,, आह आह,, आह मां,, कराहने लगा। वीर्य की लंबी लंबी पिचकारी पुनम की योनि में छोड़ने लगा।

फिर वह पुनम के ऊपर ही ढेर हो गया। पुनम प्यार से उसकी पीठ सहलाने लगा।

इधर पदमा अपने कमरे में बेचैन थी।

उसे राजेश से chude एक सप्ताह हो गया था।

उसकी बुर फिर खुजा रही थी।

उसने देखा उसका पति केशव घोड़े बेच कर सो रहा है।

वह चुपके से उठी और अपने कमरे से निकलकर राजेश के कमरे की ओर जाने लगी।

वह राजेश के कमरे को धकेली।

कमरा अंदर से बंद था।

पदमा _लगता है राजेश सो गया है।

पर कमरे का लाइट तो चालू है। वह मन में बुदबुदाने लगी।

पदमा ने दारवाजा धीरे से खटखटाया।

पुनम और राजेश चौंके।

पुनम _राजेश इस वक्त कौन होगा? अब क्या होगा देवर जी हम पकड़े जाएंगे?

राजेश _भौजी, तुम घबराओ मत मैं देखता हूं। तुम अपना कपड़ा लेकर पलंग के नीचे छुप जाओ।

पुनम ने अपना कपड़ा पलंग के नीचे डाल दिया और खुद नीचे छुप गई।

राजेश ने अपना कपड़ा पहना और दरवाजा खोला।

सामने पदमा खड़ी थी।

राजेश _ताई आप इस वक्त कुछ काम था क्या?

पदमा _बेटा लगता है तुम सो गए थे? माफ करना बेटा मैंने तुम्हे जगा दिया।

बेटा मेरा बदन दुख रहा है थोड़े मालिश कर देते ।

राजेश _ओह, क्यू नही ताई आओ बैठो।

पदमा ने सरसो का तेल राजेश को थमा दिया।

पदमा बेटा मेरे पीठ को पहले मालिश कर दो।

पदमा ने अपना ब्लाउज और साड़ी निकाल कर सिर्फ पेटीकोट में रह गई।

उसकी बड़ी बड़ी मस्त चूचियां देख कर राजेश के शरीर में फिर से रक्त संचार बढ़ने लगा।

पदमा पेट के बल लेट गई। राजेश सरसो का तेल लेकर पीठ पर मालिश करने लगा।

पदमा पहले से ही गर्म थी। राजेश के द्वारा पीठ सहलाने से उसकी उत्तेजना और बड़ गई।

पदमा अब घूम कर पीठ के बल लेट गई।

उसकी बड़ी बड़ी उन्नत चूचियां राजेश के सामने थी।

वह उन चुचियों को देखने लगा।

पदमा _अब देखता ही रहेगा की इससे खेलेगा भी।

राजेश ने पदमा की चुचियों को पकड़ कर मसलना और चूसना शुरु कर दिया।

पदमा के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगा।

पदमा की मादक सिसकारी सुनकर पुनम को यकीन नही हो रहा था कि पदमा राजेश के साथ ऐसा सब करवा सकती है।

कुछ देर बाद,,

राजेश _ताई, अब दर्द से राहत मिली,,

पदमा _बेटा, बदन का दर्द तो दूर हो गया पर मेरी बुर की प्यास बड़ा दी तूने, उस दिन की तरह जी भर कर चोदो मुझे और मेरी प्यास बुझाओ। नही तो मैं सो नहीं पाऊंगी।

पदमा पलंग से उठ कर बैठ गई।

पदमा _बेटा अपनी लोवर निकालो, मैं तुम्हे तैयार कर देती हूं।

राजेश तो अभी chudai करना नही चाहता था पर वह पदमा को मना भी नहीं कार सकता था। वह बे मन से अपना लोवर निकाल दिया। पदमा ने राजेश का कच्छा खीच कर उतार दिया।

इधर पुनम _हे भगवान ये क्या हो रहा है मां जी पहले भी राजेश से chud चुकी है।

इधर पदमा ने राजेश के आधे खड़े लंद को हाथ में लेकर सहलाया फिर मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।

राजेश का लंद कुछ देर में ही तन कर खड़ा हो गया।

राजेश बेड पर लेट गया, पदमा अपना पेटीकोट को उतार दिया और पलंग पर चढ़ गई। राजेश के लंद को पकड़ कर अपनी गीली चूत के मुख पे रख कर बैठ गई।

राजेश ने उसकी दोनो चूचियां थाम लिया और चूसने लगा।

पदमा अब सीधा हो गई और लंद पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश का लंद पदमा की बुर के अंतिम छोर तक पहुंच गया था। पदमा की बुर से पानी बहकर लंद को नहलाकर उसके टट्टो तक बह कर टपक रहा था।

फच फच की आवाज़ आ रही थी।

पदमा को बहुत मजा आ रहा था। उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

राजेश को भी मजा आने लगा वह पदमा की कमर पकड़ कर अपनी कमर उठा उठा कर अपना लंद पदमा की बुर की गहराई में ले जाने की कोशिश करने लगा। जिससे उसका लंद का टोपा गर्भाशय से टकराने लगा जिससे पदमा बदहवास होकर आह उह उन की आवाज़ निकालते हुवे उछल उछल कर चुदने लगी।

उसे जन्नत का मजा आने लगा।

इधर पुनम अपने आप से,,

मां जी तो रण्डी की तरह, बेशरम होकर अपने भतीजे से chud रही है।

अब मैं क्यू छिपु, जो होगा देखा जाएगा। आखिर मैं तो राजेश की भौजी हूं। देवर भौजी के बीच संबंध तो सामान्य है। जब टाई होकर वह chud रही है तो मैं क्यू daru अब जो भी होगा देखा जाएगा।

पुनम पलंग के नीचे से निकल आई।

इधर पदमा आंखे बंद कर उछल उछल कर chud रही थी।

पुनम _मां जी, ये आप क्या कर रही हैं?

पदमा चौंकी!

पदमा _बहु तुम, यहां, ओ भी नंगी।

पुनम _तुम भी तो नंगी होकर उछल उछल कर रंडियों की तरह अपने भतीजे से chud रही हो।

पदमा पास रखी अपनी साड़ी को उठाकर अपने शरीर को ढकने लगी।

पदमा _बहु तुम राजेश के कमरे में नंगी हो तुम कहा छिपी थी। गुस्से से बोली।

पुनम _मैं भी वही करने आई थी जो तुम कर रही हो।

पदमा शर्म से पानी पानी हो गई।

पुनम _मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा जिसे मैं अब तक संस्कारी समझ रही थी उसे इस हालात में देखूंगी।

पदमा _अरे करम जली धीरे बोल कहीं आरती और तुम्हारे ससुर उठ गया तो कयामत हो जाएगा।

पदमा राजेश के लंद से उठ गई, राजेश का लंद पदमा की बुर के रस से एकदम भीगा हुआ चमक रहा था।

पदमा अपने बदन पर साड़ी लपेट ली।

पुनम _मां जी मुझे आप से ये उम्मीद नही थी।

पदमा _बहु, मुझे माफ कर दो, मैं हवस में अंधी हो गई थी।

पर तुम राजेश के कमरे में नंगी। तुम्हे शर्म नही आ रही पति के होते देवर से chuda रही है।

पुनम _तुम्हारा बेटा तो खेत में मजदूरण को चोदकर अपना प्यास बुझाता है और मैं घर में प्यासी रह जाती हूं आज मेरा बड़ा मन था चुदने का तो देवर जी से अपना प्यास बुझाने आ गई।

पर तुम्हे शर्म नही आ रही पति घर में सो रहा है और चुपके से अपने ही भतीजे से चुदने आई हो। वैसे कब से chudwa रही हो अपने राजेश से।

इधर राजेश दोनो के बीच वार्तालाप का मजा ले रहा था। उसका लंद अभी भी तना हुआ हवा में ठुमके लगा रहा था।

पदमा _बहु अब तुम्हे क्या बताऊं, उस दिन जब खुब बारिश हुई थी मैं और राजेश दोनो खेत में ही फसे थे रात में दोनो को झोपड़ी पे गुजारनी पड़ी थी और एक ही खाट पर सोना पड़ा था। तब दोनो के बीच न चाहते हुए भी संबंध बन गए।

अब तुम्हारे ससुर जी बूढ़ा हो चुके हैं। औरत की प्यास बुझाने की क्षमता उसमें है नही इस लिए मजबूर होकर मैं राजेश के कमरे में आ गई।

पुनम _ओह, ये बात है, मैं समझ गई मां जी, इसमें आपकी कोइ गलती नहीं। मैं तो आपको रण्डी समझ बैठी थी।

पदमा _बहु तुम यह राज किसी और को मत बताना नही तो परिवार की बड़ी बदनामी हो जाएगी।

और तु नंगी निर्लज होकर क्यू खड़ी है क्या तुम्हे शर्म नही आ रही?

पुनम _अब शर्म कैसी? हम तीनो ही यहां नंगे है।

वैसे राजेश का घोड़ा बहुत लंबा और मोटा है खुब मजा देता है।

राजेश से जो एक बार chud जाए उसका मन बार बार चुदने का करेगा ही।

वैसे मुझे लगता है राजेश हम दोनों को सम्हाल सकता है। देखो तो उसका लंद कैसे चमक रहा है कैसे ठुमक रहा है दो दो चूत देखकर।

पदमा राजेश के लंद को देखने लगी।

पुनम राजेश के लंद को पकड़ कर मुंह में भर कर चूसने लगी।

पुनम _मां जी आपकी बुर का पानी का स्वाद तो एकदम नमकीन है।

वह राजेश की लंद को चाटने लगी।

राजेश अब लेटा ही रहेगा की मां जी की प्यास बुझाओगे।

राजेश खड़ा हो गया।

पुनम _सासु मां अब चलो घोड़ी बन जाओ। राजेश तुम्हे घोड़ी बना कर चोदेगा।

पदमा _बहु मुझे शर्म आ रही।

पुनम _अभी तो खुब सिसकारी निकाल कर रंडियों की तरह chud रही थी।

अब बहु के सामने शर्मा रही हो।

चलो घोड़ी बन जाओ नही तो ससुर जी को बता दूंगी। तुम क्या गुल खिला रही हो।

पदमा _नही बहु, ऐसा मत करना नहीं तो गजब हो जायेगा।

पुनम _ठीक है फिर जो कह रही हूं वो करो।

पदमा पलंग को पकड़ कर घोड़ी बन गई।

पुनम ने पदमा की बुर को सहलाया।

सच में मां जी तुम्हारी बुर तो अब भी कुंवारी लडकियों की तरह मस्त फूली हुईं है। लगता है ससुर की बहुत कम चोदे है।

पुनम ने पदमा की बुर में अपना जीभ डालकर चाटने लगी।

पदमा आनंद से सिसकने लगी।

उसके बाद पुनम ने राजेश का लंद पकड़ कर उसका टोपा पदमा की बुर की छेद में भिड़ा दिया और राजेश के पीछे जाकर उसके कूल्हे को धक्का मारा लंद योनि में घुस गया। राजेश लंद को बाहर खींचा, पुनम ने फिर धक्का मारा लंद फिर योनि के अंदर चला गया। कुछ देर बाद राजेश पदमा की कमर पकड़ कर जोर जोर से लंद को बुर में अंदर बाहर करने लगा।

पदमा की मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगी।

पदमा राजेश की टांगो की नीचे बैठ गई। और बुर से निकलने वाली पानी को चांट चांट कर पीने लगी।

पुनम राजेश के लंद को पकड़ कर बाहर निकाल कर चूसा फिर उसे पदमा की बुर में ठेल दिया।

इस तरह बारी बारी राजेश ने पुनम और पदमा की दो घण्टे तक जमकर chudai किया।

पदमा और पुनम और कई बार झड़े, राजेश भी अन्त में पदमा की बुर में झड़ गया। तीनो कुछ देर पलंग में लेटकर सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद,,

पदमा _बहु, हम तीनो के बीच जो huwa वह बात भूलकर भी किसी को न बताना।

पुनम _नही मां जी, ऐसी बात भी कोइ बताने लायक है? मुझे भी अपने परिवार की मान मर्यादा का की चिन्ता है।

पदमा _बहु अब तुम जाओ अपने कमरे में कहीं मुन्ना उठ न गया हो।

पुनम _ठीक है मां जी।

पुनम अपना कपड़ा पहन कर चली गईं।

पदमा भी अपने कमरे में चली गईं।


राजेश थक चुका था वह भी सो गया।
 
राजेश अगली सुबह उठते ही नहा धोकर तैयार huwa, भुवन भी खेते से आ चुका था। पुनम भी जल्दी उठ गई थी। राजेश को शहर जाना था उसके लिए वह नाश्ता तैयार कार रही थी।

पदमा भी उठ गई थी।

पुनम, पदमा और राजेश सुबह घर वालो के सामने ऐसा व्यवहार कर रहे थे, जैसे कल रात कुछ huwa ही नहीं।

राजेश नाश्ता करने के बाद, स्टेशन के लिए लक्षमण पुर निकल गया।

भुवन उसे बाइक में छोड़ने के लिए साथ में गया।

लक्षमण पुर रेलवे स्टेशन पर ट्रैन पकड़ कर राजेश शहर के लिए निकल गया आज शाम आरके कालेज में सम्मान समारोह में शामिल होना था।

शाम 5बजे तक वह शहर पहुंच गया।

राजेश को लेने के लिए भगत स्टेशन पहुंच गया था।

राजेश को देखते ही हाथ हिलाया।

राजेश अपना बैग लेकर भगट के पास पहुंचा।

भगत _कैसा है भाई? आने में कोइ परेशानी तो नहीं हुई।

राजेश _मैं बिलकुल ठीक हूं, आने में कोइ परेशानी नहीं हुई और तुम सुनाओ, कैसा चल रहा है तुम्हारा पार्टी का काम।

भगत _बहुत बढ़िया भाई। चलो अब चलते है।

भगत राजेश को अपने पार्टी द्वारा दिए कार में लेकर अपने निवास में ले गया।

भगत _भाई आप सफर से थक गए होगे थोड़ा आराम कर लो फिर फ्रेस होकर तैयार हो जाना हमे कालेज के लिए निकलना है।

राजेश _ठीक है भगत!

भगत _भाई खाने के लिए कुछ मंगा दू क्या? अगर भूख लगी हो तो।

राजेश _नही यार रहने दे।

राजेश आराम कर रहा था तभी सुजाता का फोन आया?

सुजाता _राजेश कैसा है? आज तुम पहुंच रहे न सम्मान समारोह में?

राजेश _मैं ठीक हूं मैम?

आप कैसी है?

सुजाता _कैसी रहूंगी राजेश? जिसके सहारे जी रही थी

निशा, लंदन में है और दूसरा तुम, तुम भी यहां से चले गए। मैं तो बस उस दिन के इन्तजार में जी रहीहूं तुम दोनो के बीच की गीला सिकवा दूर हो जाए पर,,

राजेश _पर क्या मैम?

सुजाता _निशा के रवैए से लगता नही वो तुम्हे माफ करेगी? अगर चाहती तो सम्मान समारोह के बहाने यहां आ सकती थी, पर उसने आने से मना कर दी।

तुम पहुंच रहे ना।

राजेश _हा मैम, मैं शहर पहुंच चुका है। समारोह में शामिल होने।

सुजाता खुश हो गई?

सुजाता _अरे मुझे पहले क्यू नही बताया? मैं तुम्हे लेने आ जाती।

राजेश _भगत मुझे लेने पहुंच चुका था मैम।

सुजाता _अच्छा, अभी तुम उसी के निवास पर हो।

राजेश _हां, मैम।

सुजाता _अच्छा, सुनो मैं वहा पहुंच रही।

राजेश _पर इस समय।

सुजाता _मुझे भी कालेज निकलना है, अथिति बनकर हम साथ में निकलेंगे।

कुछ समय में ही

सुजाता अपने ऑफिस से सीधे राजेश के पास पहुंच गई।

वह राजेश के कमरे में गई और राजेश से जाकर लिपट गई।

सुजाता _ओह राजेश तुम्हे यहां पाकर कितनी खुश हूं तुम्हे बता नही सकती।

पर तुम अपना घर क्यू नही गए? तुम्हारे घर वाले तुम्हारा इन्तजार कर रहे होंगे?

राजेश _मैने मां से कह आया था कि अब मैं घर आपके सपना पूरा होने पर ही आऊंगा।

सुजाता _ओ हो मैं तो कितनी बार कहा है कि मेरे साथ बिजनेस सम्हालो छोड़ो ये आईएएस का चक्कर, पर तुमको तो सिर्फ तुम्हारी मां के सपने ही दिखाई पड़ते हैं, मेरी कोइ चिन्ता ही नहीं, तुम्हे क्या पता मैं तुम्हे कितना मिस करती हूं।

तुम वहा गांव में जाकर बिलकुल भुल ही गए।

मुझे तो लगता है तुमने गांव मे भी चक्कर चला रखा है?

सुजाता ने नाराजगी जताते हुए कहा।

राजेश_ऐसी बात नहीं है, मेरी जान मैं भी तुम लोगो को बहुत मिस करता हूं।

सुजाता _चल झूठा कहीं की वहा जाने के बाद अपने से भी कभी फोन किया है?

देखो अब आए हो तो कुछ दिन मेरे साथ रहो, मैं तुम्हे जल्दी से जाने नही दूंगी। हम कहीं घूमने चलेंगे।

राजेश _अच्छा, कहा?

राजेश अगली सुबह उठते ही नहा धोकर तैयार huwa, भुवन भी खेते से आ चुका था। पुनम भी जल्दी उठ गई थी। राजेश को शहर जाना था उसके लिए वह नाश्ता तैयार कार रही थी।

पदमा भी उठ गई थी।

पुनम, पदमा और राजेश सुबह घर वालो के सामने ऐसा व्यवहार कर रहे थे, जैसे कल रात कुछ huwa ही नहीं।

राजेश नाश्ता करने के बाद, स्टेशन के लिए लक्षमण पुर निकल गया।

भुवन उसे बाइक में छोड़ने के लिए साथ में गया।

लक्षमण पुर रेलवे स्टेशन पर ट्रैन पकड़ कर राजेश शहर के लिए निकल गया आज शाम आरके कालेज में सम्मान समारोह में शामिल होना था।

शाम 5बजे तक वह शहर पहुंच गया।

राजेश को लेने के लिए भगत स्टेशन पहुंच गया था।

राजेश को देखते ही हाथ हिलाया।

राजेश अपना बैग लेकर भगट के पास पहुंचा।

भगत _कैसा है भाई? आने में कोइ परेशानी तो नहीं हुई।

राजेश _मैं बिलकुल ठीक हूं, आने में कोइ परेशानी नहीं हुई और तुम सुनाओ, कैसा चल रहा है तुम्हारा पार्टी का काम।

भगत _बहुत बढ़िया भाई। चलो अब चलते है।

भगत राजेश को अपने पार्टी द्वारा दिए कार में लेकर अपने निवास में ले गया।

भगत _भाई आप सफर से थक गए होगे थोड़ा आराम कर लो फिर फ्रेस होकर तैयार हो जाना हमे कालेज के लिए निकलना है।

राजेश _ठीक है भगत!

भगत _भाई खाने के लिए कुछ मंगा दू क्या? अगर भूख लगी हो तो।

राजेश _नही यार रहने दे।

राजेश आराम कर रहा था तभी सुजाता का फोन आया?

सुजाता _राजेश कैसा है? आज तुम पहुंच रहे न सम्मान समारोह में?

राजेश _मैं ठीक हूं मैम?

आप कैसी है?

सुजाता _कैसी रहूंगी राजेश? जिसके सहारे जी रही थी

निशा, लंदन में है और दूसरा तुम, तुम भी यहां से चले गए। मैं तो बस उस दिन के इन्तजार में जी रहीहूं तुम दोनो के बीच की गीला सिकवा दूर हो जाए पर,,

राजेश _पर क्या मैम?

सुजाता _निशा के रवैए से लगता नही वो तुम्हे माफ करेगी? अगर चाहती तो सम्मान समारोह के बहाने यहां आ सकती थी, पर उसने आने से मना कर दी।

तुम पहुंच रहे ना।

राजेश _हा मैम, मैं शहर पहुंच चुका है। समारोह में शामिल होने।

सुजाता खुश हो गई?

सुजाता _अरे मुझे पहले क्यू नही बताया? मैं तुम्हे लेने आ जाती।

राजेश _भगत मुझे लेने पहुंच चुका था मैम।

सुजाता _अच्छा, अभी तुम उसी के निवास पर हो।

राजेश _हां, मैम।

सुजाता _अच्छा, सुनो मैं वहा पहुंच रही।

राजेश _पर इस समय।

सुजाता _मुझे भी कालेज निकलना है, अथिति बनकर हम साथ में निकलेंगे।

कुछ समय में ही

सुजाता अपने ऑफिस से सीधे राजेश के पास पहुंच गई।

वह राजेश के कमरे में गई और राजेश से जाकर लिपट गई।

सुजाता _ओह राजेश तुम्हे यहां पाकर कितनी खुश हूं तुम्हे बता नही सकती।

पर तुम अपना घर क्यू नही गए? तुम्हारे घर वाले तुम्हारा इन्तजार कर रहे होंगे?

राजेश _मैने मां से कह आया था कि अब मैं घर आपके सपना पूरा होने पर ही आऊंगा।

सुजाता _ओ हो मैं तो कितनी बार कहा है कि मेरे साथ बिजनेस सम्हालो छोड़ो ये आईएएस का चक्कर, पर तुमको तो सिर्फ तुम्हारी मां के सपने ही दिखाई पड़ते हैं, मेरी कोइ चिन्ता ही नहीं, तुम्हे क्या पता मैं तुम्हे कितना मिस करती हूं।

तुम वहा गांव में जाकर बिलकुल भुल ही गए।

मुझे तो लगता है तुमने गांव मे भी चक्कर चला रखा है?

सुजाता ने नाराजगी जताते हुए कहा।

राजेश_ऐसी बात नहीं है, मेरी जान मैं भी तुम लोगो को बहुत मिस करता हूं।

सुजाता _चल झूठा कहीं की वहा जाने के बाद अपने से भी कभी फोन किया है?

देखो अब आए हो तो कुछ दिन मेरे साथ रहो, मैं तुम्हे जल्दी से जाने नही दूंगी। हम कहीं घूमने चलेंगे।

राजेश _अच्छा, कहा?

सुजाता _जहा सिर्फ हम दोनों हो।

राजेश _अभी तो हमे समारोह में जाना है तुम कहो तो मैं तैयार हो जाऊ।

सुजाता _हा हा क्यू नही?

राजेश ने अपने बैग से कपड़े निकाले, फिर नहाने के लिए बाथरुम में घुस गया।

राजेश बाथरुम में नहाने लगा। तभी कोइ दरवाजा खटखटाया।

राजेश _मैम क्या huwa?

सुजाता _राजेश थोड़ा दरवाजा तो खोलो?

राजेश _पर क्यू?

मैं नहा रहा हूं।

सुजाता _मुझे कुछ काम है। अब खोलो भी।

राजेश ने दरवाजा खोल कर कहा?

राजेश _बोलो क्या काम है?

पर ये क्या सुजाता दरवाजा खुल ते ही बाथरुम में घुस गई वो भी नंगी।

राजेश आश्चर्य से देखता रह गया।

सुजाता _क्या देख रहे हो? मुझे भी नहाना है।

सुजाता ने दरवाजा बंद कर दी।

सुजाता ने राजेश से लिपटकर सावर चालू कर दी।

पानी दोनो के ऊपर गिरने लगा।

सुजाता राजेश की ओंठो को मुंह में भर चूसने लगी।

सुझाता पूरी नंगी थी। उसके लिपटने से राजेश भी जोश में आने लगा उसके शरीर में रक्त संचार बढ़ गया।

वह भू सुजाता की ओंठो को मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुजाता राजेश के सीने को चूमने हुवे नीचे आई , और उसके अंडरवियर को खीच कर निकाल फेकी फिर उसके लंद को मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश का लंद कुछ ही देर में लोहे की राड की तरह सख्त हो गया।

राजेश ने सुजाता को ऊपर उठाया और उसकी मस्त बड़ी बड़ी सुडौल चुचियों को मसल मसल कर पीने लगा।

सुजाता सिसकने लगी।

सुझाता बाथरुम की दीवार पकड़ कर झुक गई। राजेश ने सुझाता की चूत चांटा फिर अपना मोटा लंद उसकी बुर पे सेट कर एक जोर का धक्का मारा लन्ड बुर चीरकर पूरा अंदर घुस गया। सुजाता चीख उठी।

अब राजेश ने सुजाता को चोदना शुरू कर दिया।

बाथरुम में सुजाता की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

आह उह उन आह,,,,

लंद सुझाता की बुर में गपागप अंदर बाहर होने लगा।

कुछ देर इसी पोजीशन में चोदने के बाद, राजेश बाथरुम में लेट गया सुजाता राजेश का लन्ड पकड़ कर अपनी बुर के छेद में रख कर नीचे बैठ गई। बुर सरसरता huwa अंदर चला गया।

सुजाता राजेश के लंद में उछल उछल कर चुदने लगी।

दोनो के ऊपर सावर का पानी गीर रहा था।

दोनो ने बाथरुम में विभिन्न आसनों में करीब आधे घंटे तक chudai किया। और अन्त में राजेश ने सुजाता की बुर में झड़ गया।

सुजाता कई बार झड़ी।

दोनो नहाकर बाथरुम से निकले और अपने अपने कपड़े पहन कर समारोह के लिए तैयार होने लगे।

कुछ देर बाद भगत कमरे में आया, दोनो तैयार हो चुके थे।

भगत _भाई समय हो गया है, कालेज के लिए।

राजेश _हां चलो चलते हैं।

सुजाता _ राजेश मैं अभी घर निकलूंगी, वहा से मैं कालेज के लिए निकलूंगी।

राजेश _ठीक है मैम।

सुजाता अपनी घर चली गईं।

कुछ देर बाद राजेश और भगत दोनो कालेज के लिए निकल पड़े।

कालेज में समारोह की सारी तैयारी हो चुकी थी।

करीब दो घंटे का कार्यक्रम रखा गया था।

सभी स्टूडेंट्स पहुंच चुके थे। राजेश कालेज के प्रिंसिपल से मिला।

प्रिंस्पल _राजेश मुझे पता था तुम जरूर आओगे। तुम मुझे निराश नहीं करोगे?

राजेश _सर आपको निराश कैसे कर सकता था?

प्रिंसिपल _राजेश, कालेज के हर फंक्सन में तुमने परफॉर्म किया है? आज भी तुमसे उम्मीद है वैसे कुछ स्टूडेंट्स कुछ तैयारिया की है, पर तुम तो जानते होतुम्हारे पर फॉर्म के बिना फंक्शन अधूरी लगती है।

राजेश _सर आपके कहने पर मैं यहां आ तो गया पर माफ करना सर मैं परफॉर्म नहीं कर पाऊंगा?

प्रिसिपल _राजेश ये अन्य स्टूडेंट की चाहत हैकि तुम परफॉर्म करो, स्टूडेंट्स तुम्हे परफॉर्म करते देखना चाहते हैं।

राजेश _सर मैने कोइ तैयारी भी नही की है? फिर कैसे हो पाएगा?

प्रिंसिपल _जो दिल में आए परफॉर्म कार देना, स्टूडेंट्स बस तुम्हे देखना चाहते हैं।

राजेश अथिति लोग पहुंच रहे हैं, मुझे जाना होगा।

बस तुम फंक्शन को यादगार बनादो।

प्रिंसिपल अतिथियों को मंच पर ले गया। सुजाता और विशाल ग्रुप्स की मालकिन और रीता दोनो पहुंच चुके थे अन्य अतिथि भी बुलाए गए थे।

मंच पर अतिथियों के स्वागत कालेज के प्रोफेसर, स्टूडेंट्स के द्वारा पुष्प गुच्छ भेंट कर किया गया।

अतिथियों के स्वागत में स्टूडेंट्स द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया गया।

उसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में बेस्ट परफार्म करने वाले स्टूडेंट्स का नाम अलाउंस किया गया और अतिथियों के पुरस्कार भेंट कर सम्मानित किया जाने लगा।

प्रथम वर्ष में कला और शिक्षा के क्षेत्र में बेस्ट परफार्म करने के लिए स्वीटी को सबसे पहले सम्मानित किया गया।

रीता ने उसे अपने हाथो से पुरस्कार भेंट किया और बधाई दिया।

इधर लंदन में निशा और सीमा अपनी दोस्तो की मदद से अपने बुआ के घर के हाल पर बैठ कर वहा लगे टीवी से कार्यक्रम को लाइव देख रहे थे।

उसकी बुवा भी वहा मौजूद थी। इधर

द्वितीय वर्ष में कला और शिक्षा के क्षेत्र में बेस्ट परफार्म करने के लिए निशा का नाम की घोषणा किया गया।

निशा वहा थी नही तो सुजाता ने यह पुरस्कार अतिथि के हाथो प्राप्त की उसके बाद पुरस्कार की घोसणा के बीच बीच में स्टूडेंट्स द्वारा नृत्य का प्रस्तुति करन किया जा रहा था।

स्वीटी और रोहन ने भी इसके लिए तैयारी की थी।

उसके बाद बेस्ट छात्र संघ नेता के लिए भगत के नाम की घोषणा किया गया। रीता के हाथो उसे पुरस्कार भेंट कर बधाई दिया।

कुछ और परफॉर्मेंस होने के बाद रोहन को खेल और कला के क्षेत्र में बेस्ट परफार्म के लिए रोहन की नाम का घोषणा किया गया। सुजाता के हाथो उसे पुरस्कार दिलाया गया।

अगले परफॉर्म के लिए माइक संचालक ने, राजेश का नाम अलाउंस किया,,

माइक संचालक _दोस्तो,अब अंतिम परफॉर्म होने जा रहा हैं, जानते हो वो किसका है? अनुमान लगाइए।

कुछ लोगो ने,,, आवाज़ दिया,,,

राज,, राज,,,, राज,,,

जिन्हा बिलकुल सही कहा आपने,,,

वैसे तो राजेश परफॉर्म के लिए तैयार नहीं था पर हमारे प्रिंसिपल महोदय के कहने पर वह मुस्किल से तैयार हो पाया है, तो जोर दार उनका स्वागत कीजिए,,

उधर निशा और सीमा एक दूसरे को देखने लगे।

निशा का दिल जोरो से धड़कने लगा था।

इधर

चारो तरफ राज राज,,,,

की आवाज़ गूंजने लगा,,,

इधर राजेश परफॉर्म करना नही चाहता था, आज उसे अपनी मां और निशा की कमी महसूस हो रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या प्रस्तुत करे। उसके नाम की घोषणा हो चुका था, इसलिए उसे मंच पर उतरना पड़ा,,,

मंच पर उतरते ही ताली की गड़गड़ाहट और शोर शराबा शुरू हो गया,,,

राजेश ने गाना शुरू किया,,,

याद आ रहा है,,,,,,,,

तेरा प्यार,,,,,,,,

इधर निशा बीच गाने में ही निशा उठ हाल से उठ कर अपने कमरे में आ गईऔर रोने लगी।

सीमा _निशा रो क्यू रही हो तुम तो भुल चुकी हो राज को अब वह तुम्हे याद करे इससे तुम्हे क्या?

निशा, अपनी आंसुओ को पोछते हुवे, मैं उस हवस के पुजारी के लिए नही रो रही ये आंसू तो मेरे उस राज के लिए है जिसे मैं आज भी बहुत प्यार करती हूं।

इस हवस के पुजारी से मुझे कोइ हमदर्दी नही। लेकिन मैं अपने उस राज से हमेशा प्यार करती रहूंगी। ये बहुरूपिया है मेरा राज नही है। मेरा राज तो मेरे दिल में है मैं उम्र भर उसे प्यार करती रहूंगी।

निशा, सीमा की बाहों में सिमट कर फूट फुट कर रोने लगी।

तभी उसकी बुवा ने आवाज़ लगाई। बेटा आओ लंच का समय हो गया है। लंदन में उस समय लंच का समय हुवा था।

सीमा _निशा अब अपनी आंसू पोछो और चलो आंटी बुला रही है।

निशा ने अपनी आंसू पोछी, और फिर दोनो फिर से हाल में आ गए।

इधर समारोह में,,,

माइक संचालक _दोस्तो, अब वह घड़ी आ गया है, जिसका आप सबको इन्तजार था। आप सभी जानना चाहते है कि कौन है इस वर्ष का स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर।

इसके लिए मैं हमारे कालेज के प्रबंधक को आमन्त्रित करता हूं, वे मंच पर आए और इसकी घोषणा करे।

इधर निशा और सीमा लंच करते हुवे, लाइव देख रहे थे।

प्रबंधक _दोस्तो जैसे की आप सभी को पता है, स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर बनने के लिए कला , खेल, शिक्षा तीनो क्षेत्रों में बेस्ट परफार्म करना पड़ता है।

मैं समझता हूं, यह सस्पेंस नही रह गया है कि इस बार भी स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर का असली हकदार कौन है?

सभी स्टूडेंट्स ने राज राज,,,

चिल्लाने लगे।

प्रबंधक _जी हा, आप सभी ने बिल्कुल सही कहा, राज ने न केवल इंटरकॉलेज फुटबालटूर्नामेंट में फाइनल मैच में हारी हुई बाजी जीता कर हमारे कालेज का मान बनाए रखा, बल्कि यूनिवर्सिटी में अंतिम वर्ष की परीक्षा में टॉप कर कॉलेज का गौरव बढ़ाया है। और कला के क्षेत्र में तो उसके परफार्मेंस से तो आपसभी परिचित हैं है। इसलिए पिछले दो वर्ष की तरह इस साल भी इस्टूडेंट्स ऑफ द ईयर का का खिताब राजेश को दिया जाता है।

चारो तरफ राज राज की आवाजे गूंजने लगी।

चारो तरफ तालिया बजने लगी।

प्रबंधक ने राज को मंच पर बुलाया। और उसे पुरुस्कार देने के लिए विशाल एंड सुजाता ग्रुप्स की मालकिन को आमन्त्रित किया।

सुजाता ने अपने हाथो से स्टूडेंट्स ऑफ द इयर का कप अपने हाथो से दिया और राजेश को बधाई दिया।

चारो तरफ तालिया बज रहे थे।

राजेश के आंखो में आंसू भर आए, इधर स्वीटी भी अपने भाई की इस उपलब्धि पर अत्यंत भावुक हो गई, उसकी आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे।

माइक संचालक ने राजेश को पूछा _राजेश,अपने इस उपलब्धि का श्रेय आप किसे देना चाहेंगे।

राजेश ने माइक पर लोगो से कहा,,

मेरी मां हमेशा मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, मेरी बहन मेरे पिता जी जो हमेशा मेरे हौसला बढ़ाया। मेरी एक दोस्त, एक समय जब मैं पूरी तरह निराश हो गया था, उसने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इन सभी लोगो को मैं अपनी उपलब्धि का श्रेय देता हूं।

संचालक _हमारे कालेज के स्टूडेंट्स से आप क्या कहना चाहेंगे?

राजेश _सफलता प्राप्त करने के लिए हमे जीवन में कई सारे नियमों का पालन करना होता है, इसके लिए मेहनत, लगन शीलता, धैर्य, सच्चाई और समय का सदुपयोग करने की जरूरत होती है। हमे असफलता से निराश न हो कर आशावादी बनना चाहिए। और लक्ष्य प्राप्ति तक प्रयास करते रहना चाहिए।

संचालक _आशा है हमारे स्टूडेंट्स, तुम्हारे विचारो को अपने जीवन में उतारेंगे और सफल बनेंगे। बहुत बहुत बधाई आपको इस उपलब्धि के लिए।

राजेश _थैंक यू सर।

उधर लंदन में सीमा बहुत खुश थी की राजेश ने फिर से यह उपलब्धि हासिल किया।

राजेश की बातो को सुनकर निशा की बुवा ने कहा इस लड़के ने स्टूडेंट्स से बहुत अच्छी बाते कहीं है, अगर इनकी बातो को अमल में लाया जाए तो व्यक्ति को सफल होने से कोइ नही रोक सकता।

वैसे सीमा क्या ये वही लडका है?

जिसने निशा दिल को चोट पहुंचाया है।

सीमा ने हा में सिर हिलाया।

बुवा _हु, मैं समझ चुकी थी जब तुम इसकी परफॉमेंस देखकर रोती हुई अपने कमरे में भागी थी।

दिखने में तो बड़ा संस्कारी लगता है?

निशा _ये संस्कारी नही हवसी है, बुवा तुम इसकी बातो में मत जाओ। एक औरत से इसका जी नही भरता, इसको एक साथ चार चार चाहिए।

I मैं उससे नफरत करती हूं।

बुवा _ठीक है बाबा, ठीक है अब गुस्सा मत हो और भोजन करो।

इधर ,

रीता भी राजेश को बधाई देने मंच पर आ गई।

रीता _राजेश, बहुत बहुत बधाई इस उपलब्धि के लिए।

राजेश _थैंक यू मैं।

रोहन _राजेश भाई बहुत बहुत बधाई, उसने राजेश को गले लगा लिया।

राजेश _थैंक यू रोहन।

स्वीटी राजेश से मिली और गले से लिपट कर रोने भाई,,,

स्वीटी _तुम शहर कब आए, किसी को बताया भी नहीं।

राजेश _शाम को ही ही पहुंचा स्वीटी और इधर कार्यक्रम में शामिल होने आ गया।

स्वीटी _बता भी तो सकते थे तुम आ रहे हो।

राजेश _सारी स्वीटी।

स्वीटी _भईया चलो घर चलते हैं।

रीता _राजेश घर नही जायेगा, वह मेरे साथ जायेगा।

राजेश _मैम मैं समझा नही।

रीता _ओह मैं तो बताना ही भुल गई, आज मेरा जन्मदिन है घर में छोटी सी पार्टी है खास खास लोगो को ही बुलाया है। समय भी हों चुका है इसलिए चलो सभी मेरे घर चलो।

सुजाता तुमको तो पहले ही बता दिया था। तुम भी सीधा मेरे घर ही चलो।

सुजाता _रीता, तुम पहले अपने घर पहुंचो, हम लोग पहुंच जायेंगे।

तभी रीता को उसके पति का फोन आया।

संजय _अरे भाग्यवान, इधर मेहमानो के आने का सिलसिला शुरू हो गया है और कितना समय लगेगा।

रीता _मैं बस निकल ही रही हूं जी।

बेटा चलो तुम्हारे पापा का फोन है कह रहे हैं मेहमान पहुंच रहे है।

राजेश तुम अपने दोस्तो के साथ जल्दी पहुंच जाना। मैं निकलती हूं।

राजेश _ठीक है मैम।

रोहन _स्वीटी चलो तुम मेरे साथ।

स्वीटी _रोहन, तुम चलो मैं भाई के साथ आ रही हूं।

रोहन _ठीक है।

सुजाता _राजेश, चलो मेरे साथ, साथ में चलेंगे रीता के यहां। पहले घर जाकर फ्रैस हो लेते हैं।

राजेश _मैम मैं भगत और स्वीटी के साथ वहा पहुंचता हूं।

आप वहा पहुंचिए।

सुजाता _ठीक है।

सुजाता अपनी घर चली गई।

स्वीटी _भईया मुझे तो लगा था की आप नही आयेंगे।

राजेश _आने का इरादा तो नही था स्वीटी, पर सर ने मजबूर कर दिया।

स्वीटी _भईया, चलो पहले घर चलते हैं?

राजेश _नही स्वीटी, जब तक मां मुझे घर आने नही कहेगी, मैं घर नही जा सकता।

चलो हम रोहन के घर चलते है, मां को तुम फोन कर बता दो की तुम कहा जा रही हो।

भगत, राजेश और स्वीटी तीनो एक साथ कार में रोहन के घर के लिए निकल पड़े। रास्ते में रीता को भेट देने के लिए फूलो का गुलदस्ता लिया।

रास्ते में स्वीति ने सुनीता को फोन किया।

स्वीटी _मां बधाई हो, भईया ने इस साल भी स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर का खिताब हासिल किया है?

सुनीता _क्या सच में, सुनीता खुश होते हुई बोली।

स्वीटी _हा मां,

सुनीता _तुम कहा हो जल्दी घर आ जाओ।

स्वीटी _मां मैं रोहन के घर जा रहा हूं।

सुनीता _पर क्यू, मां रोहन की मां का जन्म दिन है तो, उसमें शामिल होने।

सुनीता _किसके साथहो।

स्वीटी _मां, भाई के साथ हु।

सुनीता _क्या, राजेश शहर आया huwa है?

स्वीटी _हा मैं, कालेज के प्रिंसिपल ने उसे समारोह में आने के लिए जिद किया था तो भईया को आना पड़ा वह भी रोहन के घर जा रहा है।

सुनीता _ओह, ठीक है बेटा तुम समय पर घर आ जाना।

स्वीटी _ठीक है मां।

राजेश स्वीटी और भगत तीनो रोहन के घर पहुंचे।

वहा पर अधिकांस मेहमान पहुंच चुके थे।

राजेश भगत और स्वीटी ने गुलदस्ता भेट करते हुए रीता मेहता को जन्मदिन की शुभकामनाएं दिया।

रीता आज बहुत ही सुंदर और हॉट लग रही थी। वह पारदर्शी साड़ी पहनी हुई थी। जिसमे उसका गोरा अंग बाहर से ही प्रदर्शित हो रहा था।

कुछ देर में ही सुजाता भी पहुंच गई।

सुजाता रीता को बधाई देते हुए उसके कानो में बोली,

हाय आज तो तुम बड़ी कयामत लग रही हो।

रीता ने केक काटा।

सभी ने ताली बजाकर बधाई दिया।

उसके बाद नाचने गाने का प्रोग्राम शुरू हो गया।

वहा मौजूद लोग अपने अपने साथी के साथ डांस करने लगे।

सुजाता राजेश के पास गई और उसके साथ डांस करने लगी।

भगत कालेज के लडकियों के साथ, स्वीटी रोहन के साथ डांस करने लगी।

सभी लोग डांस करने लगे। कुछ लोग बचे थे वे लोगो के डांस देख कर ताली बजा रहे थे।

रीता, सुजाता के पास आई।

रीता _यार सुजाता, मुझे भी राजेश के साथ डांस करनी है।

सुजाता _ओह क्यू नही?

सुजाता राजेश से अलग हो गई।

अब रीता राजेश का हाथ पकड़कर डांस करने लगी।

रीता _राजेश इतने दिनो तक कहा थे? मैं तुम्हे कईबार फोन लगाया , पर नेटवर्क नही बता रहा था। स्वीटी से पूछी तो बोल रही थी की तुम आई ए एस की तैयारी करने बाहर गए हो।

राजेश _हा मैम मैं अपने दादा जी के गांव गया था। और कल सुबह मुझे गांव के लिए ट्रैन पकड़नी है।

रीता _पर आईएएस की तैयारी के लिए तुम्हे दिल्ली जाना चाहिए था। तुम गांव क्यू गए।

राजेश _दरअसल मैं सहर से दूर एकांत वातावरण चाहता था इसलिए गांव चला गया।

रीता _हूं, मैं समझ गई, तुम यहां रहते तो हम लोग तुम को परेशान करते इसलिए तुम गांव चले गए क्यू?

राजेश मुस्कुराने लगा।

दोनो धीमे म्यूजिक पर कमर हिलाते हुए डांस कर रहे थे और वार्तालाप भी।

रीता _राजेश आज मेरा जन्मदिन है, आज मुझे तुमसे बड़ी उम्मीद है।

राजेश _कैसी उम्मीद मैम?

रीता _राजेश, तुम्हे क्या पता? मैं तुम्हे रात में कितनी मिस करती हूं। कई बार सपने में तुम मेरी प्यास बुझाते हो।

आज मेरी जन्म दिन है प्लीज़ आज मुझे परमसुख प्रदान करो, मैं होली के दिन से इस सुख से वंचित हूं।

राजेश _पर मैम, यहां कैसे हो पाएगा, कोई देख लेगा तो बदनामी होगी।

रीता _राजेश मैं अपनी रूम में जा रही, तुम थोड़ी देर बाद आ जाना,,,

मेरे कमरे में मेरे इजाज़त के बगैर आने की किसी की हिम्मत नही रोहन के पापा से कह दूंगी तुम यहीं रहना मेहमानो का ख्याल रखना मेरे पेट में गड़बड़ लग रही है, मैं बाथरुम से आती हूं।

राजेश _ओह मैम और किसी ने मुझे आपके रूम में जाते देख लिया तो,, क्या कहूंगा?

रीता _कह देना मैम ने कुछ जरूरी काम से बुलाया है। मैं भी कह दूंगी कुछ काम था,

राजेश _ओह मैम मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा।

रीता_मैं कुछ नहीं जानती, तुम्हे मुझे वह सुख देना ही होगा? चाहे जो भी हो जाए। तुम नही जानते तुम्हारे लिए मैं कितनी पागल हो गई हूं।

मैं जा रही तुम आ जाना।

रीता चली गईं ,,

सुजाता की नजर राजेश और रीता पर ही था, दोनो का डांस उसे वैसे भी पसंद आ रहा था।

वह राजेश के पास आई,,

और उसे पकड़ कर डांस करने लगी,

सुजाता _क्या कह रही थी, रीता तुम्हे।

राजेश _कुछ भी तो नहीं?

सुजाता _मैने देखा बहुन्त देर तक फुसफुसा रहे थे तुम दोनो।

राजेश सुजाता को बाहों में लेकर नाचने लगा। यार तुम औरतों की न शक करने की आदत एक जैसी ही होती है,

इधर राजेश मन ही मन सोच ने लगा लगता है शाला आज मैं फिर बुरा फसने वाला हूं।

सुजाता _तुम क्या सोच रहे हो?

राजेश _यहीं की तुम आज कितनी खुबसूरत लग रही हो?

सुजाता _अच्छा, इतनी देर बाद मेरी खूबसूरती नजर आई।

, मुझे तो लगता है तुम्हारे मन में कुछ और ही चल रहा है।

राजेश _क्या?

सुजाता _अब छोड़ो। चलो आज रात तुम मेरे घर चलो।

राजेश _निशा को पता चला तो क्या जवाब दोगी उसे?

सुजाता _वो तो लंदन में है कैसे पता चलेगा, उसे।

राजेश _अच्छा एक काम करो तुम घर चलो मैं कुछ देर बाद स्वीटी को घर छोड़कर तुम्हारे घर आ जाऊंगा?

सुजाता _सच, वह खुश हो गई।

पर तुम्हारी मां से तुम क्या बोलोगे?

राजेश _यार ये तो सोंचा ही नहीं।

इधर रीता ने राजेश को मिस काल किया,,

सुजाता _तुम्हारे फोन पर कोइ काल आया है उठाओ।

राजेश _ओ हा,,

राजेश ने काल उठाया,

रीता _अरे आओ जल्दी।

राजेश _जी, कोशिश करता हूं,,

सुजाता _किसका काल था।

एक दोस्त का,,,

राजेश _ओ हो,, उह,,

सुजाता _क्या huwa?

राजेश _पेट में कुछ प्रॉब्लम है? बाथरुम जाना पड़ेगा।

सुजाता _ओह जाओ, फ्रेस होकर आओ।

राजेश वहा से चला गया।

सुजाता की नजर राजेश पर थी।

राजेश बाथरुम न जाकर रीता के कमरे की ओर जाने लगा ।

सुजाता ने जब देखा बाथरुम तो उधर है ये राजेश उस तरफ क्यू जा रहा है?

वह राजेश के पीछे गई, यह भी ध्यान रखी की वह राजेश की नजरो में न आए।

राजेश रीता के कमरे में जाकर घुस गया, दरवाजा खोल रखी थी ताकि राजेश अंदर आ सके।

रीता _तुमने इतनी देर क्यों लगा दी।

राजेश _मैम, सुजाता मैम मेरे साथ थी वह तरह तरह के सवाल कर रही थी।

हो सकता है वह मुझपर नजर रख रही हो। मुझे लगता है ये सब करने का उचित समय नही है हमे यहां से चलना चाहिए।

रीता _ये सुजाता, तो मेरी सौतन बन गई है। आज मेरे जन्म दिन है। आज के दिन भी मुझे ऐसे ही छोड़ प्यासी छोड़ दोगे।

सुजाता जाय भाड़ में उसे पता चले तो चलने दो,,

रीता राजेश के पैंट की चैन खोल कर उसका लंद बाहर निकाल कर उसे मुंह में लेकर चूसने लगी।

रीता अत्यंत कामुक लग रही थी।

राजेश का लंद कुछ ही देर में एकदम सख्त हो गया।

इधर सुजाता ने राजेश को रीता के कमरे में घुसते देख लिया।

सुजाता _ये राजेश रीता के कमरे में क्यू गया और दरवाजा भी बंद कर दिया गया।

उसका दिल धक धक करने लगा,,,

उधर राजेश जोश में आ चुका था वैसे भी रीता आज बहुत कामुक लग रही थी। रीता ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।

राजेश का लंद उसकी मस्त बड़ी बड़ी चूचियां देखकर लहराने लगा। राजेश चुचियों को मसल मसल कर पीने लगा।

रीता सिसकने लगी।

राजेश ने रीता को बेड में लिटा कर उसकी पेंटी निकाल दिया और उसकी मस्त फूली हुईं चिकनी चूत को चाटने लगी। रीता हवा में उड़ने लगी।

राजेश ने देर न करते हुए अपना लंद रीता की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया।

राजेश ने आधा घंटा तक विभिन्न आसनों में रीता की जमकर बुर चोदा। कमरे में रीता की मादक सिसकारी गूंजती रही। रीता को कई बार चरम सुख को प्राप्त की।

इधर सुजाता दरवाज़े पर कान लगा कर सुनने की कोशिश कर रही थी की आखिर अंदर चल क्या रहा है उसका दिल रोने का कर रहा था। जब उसे रीता की हल्की हल्की सिसकारी सुनाई पड़ी तो वह समझ गई की अंदर क्या चल रहा है।

काफी देर तक जब दरवाजा न खुली तो वह रोती हुई दरवाजा पीटने लगी।

राजेश झड़ चुका था दोनो सुस्ता रहे थे। दरवाजा पीटने की आवाज़ से रीता गुस्से में आ गई किसकी इतनी हिम्मत हो गई की मेरे कमरे की दरवाजा पीटे।

वह अपना साड़ी ठीक की और गुस्से से दरवाजा खोली।

सामने सुजाता को देख, घबरा गई सुजाता तुम यहां। क्या हूवा।

सुजाता _राजेश कहा है?

रीता _मुझे क्या पता होगा पार्टी में कहीं।

सुजाता _मैने उसे तुम्हारे कमरे में घुसते देखा है,

मुझे अंदर जाने दो।

रीता _देखो सुजाता मेरे कमरे में तुम्हे इस तरह नही घुसना चाहिए।

सुजाता रीता को धक्के मारते हुए अंदर घूस गई।

राजेश अपना शर्ट पहन रहा था।

सामने सुजाता को देख राजेश घबरा गया।

सुजाता दो थप्पड़ राजेश के गालों पर मारा और फुट फुट कर रोने लगी।

सुजाता _निशा ने ठीक कहा था तुम कभी नही सुधरोगे, मैं तुम्हे एक मौका देना चाहती थी। पर तुम सच में रंडीबाज निकले। तुम बाथरुम जाने का बहाना बनाकर रण्डी बाजी करने चले आए।एक औरत से तुम्हारा जी नही भरता। तुम्हे नई नई औरत चाहिए। आज के बाद मैं कभी तुम्हारी सूरत नही देखूंगी।

वह रोते रोते वहा से चली गई।

पार्टी में कुछ लोगो ने उसे रोते रोते जाते हुवे देखा उसमें से एक सीमा और निशा की सहेली थी।

इधर राजेश सिर पकड़ कर बेड में बैठ गया।

रीता _राजेश तुम्हे चिन्ता करने की कोइ जरूरत नही मेरे होते हुवे।

उधर निशा की सहेली ने निशा को फोन कर बता दी की उसकी मॉम रोते रोते पार्टी से गई है। लगता है कोइ बात हुई है।

निशा घबराकर अपनी मॉम को काल की।

निशा _मॉम आप ठीक तो है न।

सुजाता ने अपने को सम्हालते हुवे कहा?

निशा _मुझे क्या huwa है बेटा, मैं ठीक हूं। तुम तो ठीक हो न।

निशा _मॉम मैं बिल्कुल ठीक हूं, पर मेरी फ्रेंड्स कह रही थी की तुम रोते रोते पार्टी से निकली हो। क्या huwa है मॉम, बताओ मुझे।

तुझे मेरी कसम है।

सुजाता अपने आंसू रोक न सकी और सुबकने लगी।

निशा घबरा गई मॉम बताओ क्या बात है? तुम्हे मेरी कसम।

सुजाता _बेटा, वो राजेश,,,

निशा _राजेश, क्या किया तुम्हारे साथ, मैने तुम्हे उससे दूर रहने कहा था।

सुजाता _बेटा मैं भावनाओ में बहकर उसे एक मौका देना चाहती थी पर वह सच में रंडीबाज निकला।

निशा _अब क्या किया उसने?

सुजाता _वह मुझसे झूठ बोल कर रीता के साथ,,,,

निशा _क्या राजेश ने रीता आंटी को भी नही छोड़ा।

मोम उस रण्डी बाज के लिए आंसू बहाना बंद करो।

और उससे भविष्य में अब कभी मत मिलना।

निशा ने फोन रख कर फुट फुट कर रोने लगी।

सीमा _क्या huwa निशा तुम रो क्यू रही हो?

राजेश रीता आंटी को भी अपना रखैल बना रखा है?

सीमा _क्या?
 
राजेश अपना सिर पकड़ कर बैठ था।

रीता उसकी बालो को सहलाते हुए बोली।

रीता _राजेश तुम चिन्ता मत करो, मैं हूं न सुजाता जाती हैं तो जाने दो मैं तुम्हे कभी उसकी कमी महसूस नहीं होने दूंगी।

अब चलो नीचे चलते है। लोग हमे ढूंढ रहे होंगे।

राजेश और रीता पार्टी हाल में आ गए।

सभी लोग डिनर करने में व्यस्त थे।

भगत _भाई कहा चले गए थे, चलो कुछ खा लेते है।

राजेश _भगत मुझे भूख नहीं है, तुम खा लो।

भगत _भाई क्या huwa तुम्हारा चेहरा क्यू उतरा huwa है। कुछ बात हुई है क्या?

राजेश _नही, भगत कुछ भी तो नही।

चलो भगत अब यहां सी चलते हैं।

भगत _भाई लगता हैं कुछ बात हुई है जो आप मुझसे छिपा रहे हो। अच्छा ठीक है चलो घर चलते हैं।

राजेश ने स्वीटी के पास जाकर कहा, स्वीटी चलो अब चलते है।

रोहन _भाई इतनी जल्दी, थोड़ी देर और रुक जाते।

राजेश _नही रोहन, मां वेट कर रही होगी।

राजेश स्वीटी और भगत तीनो घर के लिए निकल गए।

राजेश ने भगत से कार अपने घर की ओर ले जाने कहा ताकि स्वीटी को घर छोड़ सके।

कुछ देर में ही वे घर पहुंच गए।

स्वीटी गाड़ी से उतरी,,

Switi _भईया आप घर नही आ रहे,,

राजेश _नही स्वीटी, जब तक मां मुझे घर आने नही कहेगी मैं नही आऊंगा, तुम जाओ। और ये मेरा कप ले जाओ मां को दे देना।

Switi _स्वीटी घर का दरवाजा खटखटाई, सुनीता दरवाजा खोली।

राजेश ने दूर से अपनी मां को देखा। वह भावुक हो गया।

स्वीटी _मां भईया घर नही आ रहे, कह रहा कि जब मां घर आने को कहेगी, तब ही आऊंगा।

मां भईया को बुलाओ न।

सुनीता ने राजेश को दूर से देखा।

कुछ देर तक वह राजेश को देखती रही।

स्वीटी _मां तुम भईया को बुला लो ना।

सुनीता ने राजेश को देखा और उसने अपना सिर हिला कर अंदर आने का इशारा किया।

भगत _राजेश, मां बुला रही है।

राजेश ने को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां उसे बुला रही है।

भावनाओ से उसकी आंखो में आंसू बहने लगे।

वह अपने घर की और थरथराते कदमों के साथ बढ़ने लगा।

वह जब अपनी मां के सामने पहुंचा। अपनी दोनो हाथ जोड़ लिया।

सुनीता _कैसा है re?

राजेश _, मैं ठीक हूं मां

आप ठीक तो है न,

राजेश _हूं,,

सुनीता _आओ अंदर।

भगत _नमस्ते मां जी।

सुनीता _नमस्ते बेटा।

राजेश ओर भगत दोनो अंदर गए।

उधर स्वीटी अपने पापा के कमरे में गया।

स्वीटी _पापा उठो,

शेखर _अरे स्वीटी, तुम पार्टी से आ गई,

स्वीटी _हा पापा, भईया भी आए है, चलो।

शेखर _क्या राजेश आया है,,?

शेखर का खुशी का ठिकाना न रहा,,

बेटा राजेश,,,,

पुकारते हुवे वह अपने बेड से उठकर हाल में आया, राजेश को अपने गले से लगा लिया।

शेखर _बेटा तु ठीक तो है न,।

राजेश _पापा मैं बिल्कुल ठीक हूं, आप ठीक तो है न।

शेखर _बेटा तुम्हारे जाने से घर बिलकुल सुना सुना सा लगता है, पर क्या करे? कुछ प्राप्त करने के लिए त्याग तो करना पड़ता है।

स्वीटी _मां ये लो स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर का यह कप भाई को मिला है!

शेखर _बधाई हो बेटा, आखिर तुमने अपना यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया।

राजेश _थैंक्स पापा।

भगत _नमस्ते अंकल।

शेखर _अरे भगत बेटा तु कैसा है?

भगत _मैं भी ठीक हूं अंकल।

स्वीटी _पापा भगत भईया को बेस्ट छात्र संघ नेता का अवार्ड मिला है।

शेखर _ओह ये तो खुशी की बात है?

भगत बेटा मुझे लगता है तुम राजिनित के क्षेत्र में बहुत ऊपर तक जाओगे, मेरे ओर से शुभकामनाएं है।

भगत _धन्यवाद अंकल।

शेखर _बेटा तुम लोग पार्टी वगेरा में कुछ खाकर आए हो कि नही।

भगत _भाई तो जब से शहर आया है कुछ खाया ही नहीं मैने पार्टी में खाने के लिए कहा तो मना कर दिया।

शेखर _क्या, राजेश बेटा मैं ये क्या सुन रहा हु। पता नही तुम सुबह से कुछ खाए हो कि नही।

सुनीता तुम बच्चो के लिए खाना बना दो।

सुनीता _जी, मैं शीघ्र बनाती हूं।

सुनीता कीचन में चली गईं, वह यह जानकर दुखी हुई की राजेश सुबह से कुछ नहीं खाया है उसकी आंखो से आंसू बहने लगी।

सुनीता कीचन में खाना बनाने लगी, स्वीटी भी उसकी मदद करने लगी।

इधर शेखर राजेश से गांव का हाल चाल पूछने लगा।

करीब एक घंटे में खाना तैयार हो गया। डाइनिंग टेबल पर खाना लगा दी।

शेखर _लो खाना भी तैयार हो गया, चलो बेटा तुम दोनो हाथ पाव धो लो, खाना लग गया है।

राजेश और भगत दोनो वास बेसिंग में हाथ धोकर। खाना खाने डाइनिंग टेबल में बैठ गए।

भगत _वाह बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है, खाने की।

राजेश ने अपनी मां की ओर देखा जो कीचन के चौखट पर खड़ी राजेश की ओर देख रही थी। ममता भरी भाव से।

राजेश और भगत दोनो भोजन करने लगे।

आज काफी दिनो बाद अपनी मां की हाथो का बना भोजन कर रहा था।

राजेश को भोजन करता देख सुनीता, खुशी का अनुभव कर रही थी।

राजेश और भगत दोनो ने पूरा खाना खतम कर दिया।

शेखर _अरे बेटा खाना तुम लोगो को कम तो नहीं पड़ गया।

भगत _अरे नही अंकल, मेरा पेट तो एकदम भर गया, वो क्या था न खाना एकदम टेस्टी बना था तो कुछ ज्यादा खा लिया।

शेखर _राजेश बेटा अब आए हो तो कुछ दिन रुक कर ही जाना।

राजेश _नही पापा मुझे कल सुबह ही निकलना है।

मैने कल सुबह की टिकट बूक करा रखी है।

शेखर _अरे बेटा टिकट कैंसिल करा दो।

राजेश _नही पापा, परसो गांव में ग्राम सभा रखा गया है। चाची ने कहा है कि तुम्हारा ग्राम सभा में होना बहुत जरुरी है इसलिए तुम कल ही लौट आना।

भोजन कर लेने के बाद, कुछ देर और रुका, फिर,

राजेश _अच्छा पापा अब मैं चलता हूं। आप लोग अपना ख्याल रखना। राजेश पैर छूकर कहा।

शेखर _बेटा आज रात यहीं रुको कल सुबह चले जाना।

मैं सुबह ही तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगा।

राजेश ने अपनी मां की ओर देखा,,,

सुनीता ने हा में सिर हिलाया,,,

राजेश _ठीक है पापा।

भगत _अच्छा भाई, मैं घर चलता हूं, कुछ काम हो तो बताना, सुबह मैं भी स्टेशन तुमसे मिलने आऊंगा।

राजेश _ठीक है भगत।

भगत चला गया।

शेखर _अच्छा बेटा राजेश रात बहुत हो चुकी है तुम भी थक चूके होगे अपने कमरे में जाकर आराम करो।

राजेश अपने कमरे में चला गया वह अपने कमरे में जाकर देखा की, कमरे का सारा सामान व्यवस्थित है।

सुनीता राजेश के न होने पर भी रोज कमरे की साफ सफाई करती थी।

राजेश अपना शर्ट पैंट उतार कर लोवर और टी शर्ट पहन लिया।

उसके बाद वह बेड में आराम करने लगा, दिन भर हुवे घटना क्रम को याद करने लगा।

कुछ देर बाद सुनीता, जग में पानी लेकर कमरे मे आई। ताकि राजेश को रात में पानी की जरूरत पड़े तो उसे कीचन में जाना न पड़े।

वह जग को टेबल पर रख कर जाने लगी।

तभी राजेश ने कहा,,

राजेश _मां आपको चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है मैं सुबह होते ही गांव के लिए निकल जाऊंगा।

सुनीता दरवाजे के पास रुक गई।

वह राजेश से बोली,,

सुनीता _तुम चाहो तो, कुछ दिन यहां रुक सकते हो।

राजेश _मां क्या तुमने मुझे माफ़ कर दिया।

सुनीता _अगर तुम स्वीटी वाली गलती न करने की मुझसे वादा करो तो यहीं रह कर अपनी आई ए एस की तैयारी कर सकते हो?

राजेश _मां अब आपके कहने पर भी मैं अपने को गांव जाने से रोक नहीं पाऊंगा। मुझे गांव जाना ही होगा मां गांव को मेरी जरूरत है।

सुनीता राजेश की ओर घूम गई और बोली,,

सुनीता _मैं समझी नहीं तुम कहना क्या चाहते हो?

राजेश _मां मुझे सब पता चल गया है की गांव में तुम्हारे साथ क्या हुआ था और क्यू तुम गांव नही जाना चाहती।

सुनीता _आखिर वही huwa जिसका डर था।

राजेश _मां, मैं उस ठाकुर के बच्चे को सबक सीखा कर रहुंगा उसने मेरी मां का अपमान किया है।

सुनीता _नही बेटा, तु ऐसा कुछ भी नहीं करेगा। वो ठाकुर बहुत kamina है वह तुम्हे नुकसान पहुंचा सकता है।

जो huwa है उसको भुल जाओ बेटा, इसी में भलाई है बेटा।

राजेश _मां, तुम नही जानती वह ठाकुर अब भी गांव वालो पर जुल्म ढा रहा है अपने पावर का गलत उपयोग कर रहा है, गांव वालो को मेरी मदद की जरूरत है मां इसलिए मुझे जाना ही पड़ेगा। मां तुम मेरी चिन्ता मत करना मुझे कुछ नहीं होगा।

मां तुम मुझे माफ कर दी न।

सुनीता _बेटा मैं तुम्हारी मां हू, मैं तुमसे कितनी दिन नाराज रह सकती हूं।

पर बेटा तुम मुझसे वादा करो की तुम स्वीटी के साथ के साथ जो गलती किए हो उसे दोहराओगे नही।

सुनीता ने राजेश का हाथ पकड़कर कहा।

राजेश _मां मैं आपसे वादा करता हूं। मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा जिससे स्वीटी की भविष्य पर बुरा असर पड़े।

सुनीता _धन्यवाद बेटा।

बेटा अब तुम सो जाओ रात बहुत हो चुकी है।

सुनीता राजेश को चादर ओढ़ा कर अपने कमरे में चली गईं।

उधर कमरे में जाने के बाद सुनीता सोचने लगी कि राजेश को सब पता चल गया है ठाकुर के साथ उलझने से उसे ठाकुर कोइ हानि न पहुंचा दे।

उसे नींद नहीं आ रही थी।

उधर राजेश बहुत खुश था उसकी मां ने उसे माफ कर दिया है। पर सुजाता के साथ जो हुआ उसके लिए दुखी भी था।

आज राजेश की आंखो से भी नींद गायब थी, वह बेड से उठ कर छत पर चला गया और आकाश मे तारो को देखने लगा।

इधर सुनीता को भी नींद नहीं आ रही थी, राजेश को लेकर। वह ठाकुर से टकराने जा रहा है।

वह राजेश को ठाकुर से न उलझने के लिए फिर से समझाने के लिए वह अपने बेड से उठी, उसने शेखर की ओर देखा तो वह नींद में खर्राटे भर रहा था।

वह अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे में गई।

राजेश कमरे में नही था।

सुनीता राजेश को इधर उधर ढूंढने लगी की आखिर राजेश गया कहा।

वह छत पर जाकर देखी तो राजेश उसे दिखाई पड़ा।

सुनीता _बेटा तु छत पर क्या कर रहा है, सोया नही है अब तक।

राजेश _मां मुझे नींद नही आ रही थी तो मैं छत पर चला आया।

पर आप सोई नहीं।

सुनीता _बेटा, जब से तुमने बताया है कि तुम उस ठाकुर से उलझने जा रहे मुझे तुम्हारी चिन्ता होने लगी है?

राजेश ने सुनीता को गले लगा लिया और कहा मां तुम खमोखा चिन्ता करने लगी मुझे कुछ नहीं होगा। क्या आपको मुझपर भरोसा नही।

सुनीता _बेटा मैं तुम्हारी मां हूं, एक मां को बेटे की चिन्ता तो होगी ही। बेटा तुम गांव मत जाओ।

राजेश _मां, गांव वालो को मेरी मदद की जरूरत है। उन्हे मुझसे बहुत उम्मीद है। मैं उन लोगो के लिए कुछ करूंगा। वहा सरकार से मिलने वाली योजनाओं का लाभ गांव वालो को मिल सके, ठाकुर ने जो अपनी पावर के द्वारा रोक रखा है। क्या तुम चाहती हो की तुम्हारे बेटे को कोइ बुजदिल कहे। डरपोक कहे।

सुनीता _नही बेटा।

राजेश _मां फिर मुझे आशीर्वाद दो की मैं उस ठाकुर को सबक सीखा सकू।

सुनीता ने राजेश की माथे को चूमते हुवे कहा।

मेरा आशीर्वाद तो हमेशा मेरे बेटे के साथ है।

सुनीता _बेटा चलो अब अपने कमरे में जाकर सो जाओ, आखिर कब तक जगते रहोगे।

राजेश _मां आज तुम मुझे अपने गोद में सुलाओ। शायद मुझे नींद आ जाए।

सुनीता _अच्छा चलो, तुम्हारे कमरे में।

राजेश और सुनीता दोनो नीचे चले गए।

दोनो कमरे में पहुंचे।

सुनीता बेड पर अपनी पैर फैला कर बैठ गई। राजेश ने उसकी गोद पर सिर रख कर सोने की कोशिश करने लगा।

सुनीता प्यार से उसके बालो को सहलाने लगी।

राजेश _मां तुम कितनी अच्छी हो।

मुझे तुम पर गर्व है।

सुनीता _क्यू?

राजेश _, ठाकुर ने तुम्हे कितना परेशान किया फिर भी तुम हार नही मानी।

सुनीता _बेटा मैने तो वही किया जो एक पतिव्रता और संस्कारी स्त्री को करना चाहिए।

राजेश _मां वैसे उस ठाकुर का भी दोष नही।

सुनीता _क्यू।

राजेश _जब आप आज भी इतनी खुबसूरत हो तो उस समय पता नही कितनी खुबसूरत लगती होगी। ठाकुर तो क्या पता नही कितने लोग तुम पर मरते होंगे।

राजेश _चुप कर बदमाश कहीं का। मुस्कुराते हुवे बोली।

अच्छा बेटा मैं तो तुम्हे एक बात बताना भूल गईं।

राजेश _कौन सी बात मां।

सुनीता _सुमन ने एक लड़के को जन्म दिया है।

राजेश _क्या?

सुनीता _हा, मैं बच्चे को देखने गई थी। बिलकुल तुम पर गया है।

वो बहुत खुश है। वह तुमसे मिलना चाहती थी। मैंने बताया कि तुम बाहर गए हो, आई ए एस की तैयारी करने।

वह तुम्हारी शुक्रिया अदा कर रही थी।

राजेश _ये तो बड़ी खुशी की बात है मां, अभी सुमन कहा है?

सुनीता _बेटा उसके पति का ट्रांसफर दिल्ली हो गया है तो वह शहर छोड़ कर चली गई। उसे तुमसे एक बार मिलने की बड़ी ईच्छा जाहिर कर रही थी।

राजेश _ओह।

पता है न मां कि तुमने मेरी शादी कराई थी सुमन से मंदिर में। और घर में सुहागरात भी कराई थी।

सुनीता _हा बेटा उस समय मेरा एक स्वार्थ भी था।

राजेश _कैसा स्वार्थ मां, बेटा तुम्हें चोंट लगी थी न तो मैं डर गई थी की तुम कहीं नामर्द तो नही बन गए। इसलिए मैं सुमन के बहाने देखना चाहती थी की तुम बिलकुल ठीक हो।

राजेश _ओह तो ये बात थी।

मां वैसे सुमन के साथ सुहागरात मनाने में बहुत मजा आया था, सुहाग रात के बाद तुमने बादाम वाली दूध भी पिलाई थी।

सुनीता _बेटा सुहागरात नही, सुहाग दिन था। सुनीता हसने लगी।

राजेश _मां एक बात बोलूं।

सुनीता _हां बोलो।

राजेश _रहने दो, आप बुरा मान जाएंगी।

सुनीता _नही मानूंगी, बाबा बोलो।

राजेश _सुमन सी ज्यादा मजा तो आपके साथ आता है।

सुनीता _चल हट बदमाश कहीं का। सुमन शर्म से पानी पानी हो गई।

सुनीता _वैसे गांव में तुम्हारी ताई तुम्हारे खाने पीने का ख्याल तो रखती है न।

राजेश _गांव में ताई, भईया भौजी सभी मेरे अच्छे ख्याल रखते है। भाभी टू रोज मुझे सोने से पहले दूध पीने को देती है। अब तो मुझे दूध पी कर सोने की आदत हो गई है।

सुनीता _अच्छा पहले क्यू नही बताया? इसलिए शायद तुम्हे नींद नही आ रही। मैं अभी तुम्हारे लिए बादाम वाली दूध लेकर जाती हूं।

राजेश _मां रहने दो,,

सुनीता रुकी नहीं और कीचन में चली गईं, बादाम वाली दूध लाने।

वह दूध को उबालने लगी।

तभी राजेश कीचन में आ गया और अपनी मां को पीछे से बाहों में भर लिया।

सुनीता _अरे क्या कर रहा है? छोड़ो मुझे। तु बदमाशी करना नही छोड़ेगा।

राजेश _मां आप हो ही इतनी सुंदर बदमाशी करने का मन करता है।

राजेश ने अपना खड़ा लंद सुनीता की गाड़ में सटा दिया और उसकी चूची ब्लाउज के ऊपर से मसलते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा।

सुनीता सिसकने लगी।

सुनीता _बेटा छोड़ ना, सच में तु बड़ा बिगड़ गया है।

राजेश ने सुनीता की चूची मसलना जारी रखा अपने लंद का दबाव उसकी गाड़ में डालने लगा।

सुनीता के शरीर में रक्त संचार बढ़ने लगा।

वह सिसकने लगी।

राजेश ने उसकी ब्लाउज का बटन एक एक करके खोल दिया और सुनीता को अपनी ओर घुमा कर उसकी चूची को मुंह में भर कर पीने लगा।

राजेश _मां बादाम वाली दूध तो मेहनत करने के बाद पीते हैं न, पहले मेहनत तो करने दो।

राजेश के द्वारा चूची चूसने से सुनीता उत्तेजित होने लगी।

उसकी बुर में पानी भरने लगा।

राजेश सुनीता की चूची को मसल मसल कर चूसने लगा सुनीता सिसकने लगी।

राजेश की हरकतों से सुनीता भी बहुत गर्म हो गई।

राजेश ने सुनीता का मुंह अपने मुंह में भर कर जी भर कर चूसा, सुनीता हापने लगी।

सुनीता _बेटा यहां नही तुम्हारे पापा उठ गए तो गड़बड़ हो जाएगी।

राजेश ने सुनीता को अपनी बाहों में उठा लिया और अपने कमरे में ले कर बेड पे लिटा दिया।

दरवाजा बंद कर दिया।

राजेश सुनीता ऊपर आ गया। और उसकी चूची को फिर मसल मसल कर पीने लगा।

फिर धीरे धीरे उसकी नाभि की ओर बड़ा उसकी नाभी को चाटने लगा। सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

उसकी बुर से पानी बहने लगा।

राजेश ने सुनीता की पेटीकोट और साड़ी ऊपर उठाकर उसकी पेंटी निकाल दिया।

उसकी मस्त फूली हुईं चिकनी चूत देखकर राजेश का लंद झटके मारने लगा।

राजेश ने सुनीता की चूत में अपना मुंह डाल दिया और बुर को चाटना शुरू कर दिया।

सुनीता छटपटाने लगी। वह काफी अधिक उत्तेजना महसूस करने लगी।

उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी, आह मां आह उन,, आह आई,, उन,,,,, मां,,,,

आह,,,

राजेश बेड से उतरा और अपना सारा कपड़ा उतार कर नंगा हो गया।

उसका लंद काफी मोटा और लंबा हो कर हवा में झटके मारने लगा।

राजेश _मां आओ ना मेरा लंद चूसो।

सुनीता बेड से नीचे उतर कर फर्श पर बैठ गई ओर राजेश की लंद को हाथ में पकड़ कर मूठ मारने लगी।

फिर लंद को मुंह में भर कर चूसने लगी।

इधर राजेश ने सुनीता की ब्लाउज को निकाल कर फर्श पर फेक दिया।

राजेश ने सुनीता की बालो को पकड़ कर उसके मुंह में लंद अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर तक लंद चूसने से लंद एकदम सख्त जो गया।

उसने सुनीता को ऊपर उठाया और उसकी ओंठ को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा।

कुछ देर ओंठो को चूसने के बाद।

सुनीता ने खुद ही अपनी साड़ी निकाल दिया वह सिर्फ पेटीकोट में रह गई।

राजेश ने पेटीकोट का नाडा खीच दिया।

पेटीकोट सुनीता के पैरो में गिर गया।

राजेश ने एक हाथ से सुनीता की चूची मसलते, दूसरी हाथ से उसकी बुर सहलाते हुवे उसकी ओंठ चूसने लगा।

सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

सुनीता _बेटा अब बस करो मुझसे सहन नहीं हो रहा।

सुनीता बेड के किनारे लेट गई और अपनी टांगे फैला दी।

राजेश ने अपना लंद पकड़ कर उसकी बुर के छेद में रख कर एक जोर का धक्का मारा।

लंद बुर को चीरकर एक ही बार में पूरा अंदर चला गया। क्यू की बुर एकदम गीली थी।

सुनीता सिसक उठी।

अब राजेश ने सुनीता की चूची को पकड़ लिया और उसे मसल मसल कर लंद को बुर में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

कमरे में गच गच की आवाज़, सुनीता की मादक सिसकारी उसकी चूड़ियों की खनक गूंजने लगा।

लंद सुनीता की बुर में सर सर अंदर बाहर होने लगा।

सुनीता तो जन्नत में पहुंच गई।

उसे संभोग की परम सुख प्राप्त होने लगा।

वह राजेश की कमर को पकड़ लिया।

इधर राजेश को भी बहुत मजा आ रहा था।

वह दनादन सुनीता की बुर में अपना लंद डाले जा रहा था।

इस आसन में राजेश ने तबतक चोदा जब तक वह झड़ नही गई। सुनीता चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश भी उससे लिपट कर सुस्ताने लगा अपना खोया ताकत प्राप्त करने लगा।

कुछ डर बाद राजेश फिर हरकत में आया और उसकी ओंठ मुंह में भर कर चूसने लगा। उसकी चुचियों को मसल मसल कर पीने लगा।

और जब राजेश फिर से उसकी योनि चाटने लगा तो सुनीता के शरीर में फिर रक्त संचार बढ़ गया। वह फिर से उत्तेजित हो गई।

सुनीता खड़ी हो गई और बेड को पकड़ कर झुक गई। राजेश उसके कूल्हे को सहलाया।

सुनीता चिहुंक उठी।

राजेश ने अपना लंद पकड़ कर एक बार उसकी योनि में रखा और एक जोर का धक्का मारा। लंद बुर में गप से अंदर चला गया।

राजेश ने सुनीता की कमर को पकड़ कर लंद को बुर में गप गप अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

कमरे में फिर से एक बार सुनीता की मादक सिसकारी आह उह, उई मां आह, आई,,, मां गूंजने लगी।

राजेश को भी बहुत मजा आने लगा।

राजेश _आह मां बहुत मजा आ रहा है। सच में बहुत मस्त मॉल है तु, तुम्हे चोदने का मजा ही कुछ और है।

राजेश और तेज़ तेज़ चोदने लगा।

सुनीता फिर से अपनी चरम अवस्था में पहुंचने वाली थी।

तभी राजेश ने अपना लंद बाहर निकाल दिया।

राजेश बेड पर लेट गया।

सुनीता को ऊपर आने का इशारा किया।

सुनीता बेड पर चढ़ गई ।

राजेश के लंद को पकड़ कर अपनी बुर के छेद में रखी और नीचे बैठ गई।

लंद फैच की आवाज़ के साथ अंदर चला गया।

सुनीता अब राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश ने सुनीता की कमर पकड़ लिया और उसे अपनी लंद पर पटक पटक कर चोदने लगा।

लंद पूरे गहराई तक अंदर जा रहा था।

सुनीता जोर जोर से सिसक रही थी। चीख रही थी।

आह मां आह,, उई आह,

लंद का टोपा उसकी गर्भाशय से टकरा रहा था।

जिससे उसको दोगुना मजा आ रहा था।

वह राजेश के लंद पर उछल उछल कर chud रही थी।

दोनो संभोग के आपार सुख को प्राप्त कर रहे थे जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

अब राजेश ने सुनीता को घूम कर बैठने कहा ।

सुनीता लंद उठी।

बुर से लंद fach की आवाज़ के साथ बाहर आया लंद सुनीता की बुर का पानी पीकर और ज्यादा मोटा और लंबा हो गया था।

सुनीता राजेश की ओर पीठ कर लंद को बुर में डाल कर बैठ गई।

राजेश ने सुनीता की कमर पकड़ लिया और उसे पटक पटक कर चोदने लगा।

दोनो काम के परम सुख का मजा लेने लगे।

उसके बाद राजेश ने सुनीता को बेड में ही घोड़ी बना दिया।

औरबुर में लंद गपा गप अंदर बाहर करने लगा।

सुनीता को राजेश तब तक चोदता रहा जब तक वह फिर से नही झड़ी।

सुनीता के झड़ने के बाद भी राजेश ने लंद बाहर नही निकाला, कुछ देर रुका फिर हल्के हल्के धक्के लगाने लगा।

सुनीता _बेटा अंदर मत झड़ना, मेरा अभी गर्भधारण काल चल रहा है मैं फिर से पेट से हो जाऊंगी।

राजेश _तो क्या huwa मां ये तो बड़ी अच्छी बात।

सुनीता _नही बेटा एक बार मुसीबात में फस चुकी थी और नही फसना है मुझे, प्लीज अंदर मत छोड़ना।

राजेश _तब तो तुम्हारी गाड़ चोदना पड़ेगा।

तुम्हारी गाड़ तो फिर से टाइट हो गई है।

काफी दिन हो गए हैं न शायद इसलिए।

सुनीता _हा बेटा।

राजेश ने एक उंगली सुनीता की गाड़ में डाल कर अंदर बाहर करने लगा।

फिर दो उंगली डाल दिया।

सुनीता का पूरा बदन kapkapanne लगा।

राजेश ने बेड से नीचे उतर कर अलमारी से चिकनाई वाला क्रीम निकाल कर अपने लंद पर अच्छे से लगाया फिर क्रीम को सुनीता की बुर में डाल दिया।

अब सुनीता के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ।

अबउसकी गाड़ में अपना लंद का टोपा सेट किया और दबाव डाला।

काफी प्रयास के बाद लंद का टोपा अंदर घुस गया।

सुनीता चीखना चाही पर चीख न पाई।

अब राजेश हल्का हल्का लंद को अंदर बाहर करने लगा।

लंद धीरे धीरे गाड़ में अपनी जगह बनाने लगा। गाड़ फैलने लगा।

और एक समय ऐसा आया जब राजेश का लंद पूरा गाड़ में समा गया।

अब राजेश ने कभी बुर में तो कभी गाड़ में अपना लंद डालकर gach gach चोदने लगा।

राजेश को टाइट गाड़ चोदने से बड़ा मजा आ रहा था जब उसका लगता की वह झड़ने वाला है तो लंद को बुर में डाल देता और बुर चोदने लगता। कुछ देर बाद फिर से गाड़ में लंद डाल कर चोदता। और अन्त में सुनीता की गाड़ में अपना पानी छोड़ दिया।

करीब दो घंटे तक दोनो के बीच chudai चला दोनो काफी थक चुके थे एक दूसरे के बांहों में लेटकर सो गए। दो गहरी नींद में सो गए।

सुनीता की नींद खुली तो सुबह के पांच बज रहे थे। वह बेड से उठी और अपने कपड़े उठा कर नंगी ही अपने कमरे में जाकर बाथरुम में घुस गई और नहाने लगी।

उसने अपनी बुर और गाड़ की हालात देखी। दोनो को राजेश ने सूजा दिया था। वह अपनी बुर की हालात देख मुस्कुरा रही थी।

इधर राजेश जब उठा तो सुबह 6बज चुका था वह अपनी मां को ढूंढा पर कमरे में नही थी।

उसे लगा मां चली गई।

वह भी बाथरुम में जाकर नहाने लगा।

और तैयार होकर अपनी मां से मिलने गया जो कीचन में काम कर रही थी।

उसे बाहों में भर लिया। उसकी गालों को चूमने हुवे कहा, गुडमॉर्निंग मां।

सुनीता _good मॉर्निंग बेटा।

_अरे तु तो नहा कर तैयार भी हो गया।

राजेश _हा मां, मुझे गांव के लिए निकलना है न इसलिए।

वैसे रात कैसे रही।

सुनीता शर्म से पानी पानी हो गई।

सुनीता _पूरा सूजा दिया है तूने और पूछता है रात कैसी रही? अब छोड़ कोइ आ जायेगा।

राजेश ने सुनीता को छोड़ दिया।

राजेश _मां नाश्ता जल्दी से बना दो मेरा ट्रैन छूट जायेगा।

सुनीता _बस तैयार होने वाला है। तुम्हारे पापा को उठा दो वह तुम्हे स्टेशन छोड़ आएगा।

राजेश _ठीक है मां।
 
राजेश नाश्ता करने के बाद अपने पिता जी के साथ स्टेशन के लिए निकल पड़ा। सुनीता ने उसे अपना ख्याल रखने के लिए कहा।

स्टेशन पहुंचने के कुछ देर बाद भगत भी वहा राजेश का बैग लेकर पहुंच गया। क्यों कि राजेश का बैग तो उसी के निवास पर छूटा था।

कुछ देर बाद ट्रैन भी छूट गई।

शेखर _अपना ख्याल रखना बेटा, हाथ हिलाते हुए कहा।

राजेश _जी पापा।

ट्रैन शाम 6 बजे, लक्ष्मण पुर स्टेशन पहुंच चुका था।

भगत बाइक लेकर राजेश को लेने स्टेशन पर इन्तजार कर रहा था।

दोनो बाइक में बैठ कर गांव एक दूसरे से बाते करते हुवे गांव के लिए निकल पड़े।

घर पहुंचकर दोनो घर के आंगन में रखे चारपाई पर बैठ गए।

आरती _मां, कहा हो, राजेश भाई शहर से आ गए हैं।

पदमा _अरे राजेश बेटा आ गया।

राजेश _हा ताई,

पदमा _शहर में सब ठीक तो हैं न, तुम्हारे मां बाबू जी।

राजेश _सब अच्छे है ताई। तुम लोगो को याद कर रहे थे।

पदमा _बेटा तु थक गया होगा, जाओ हाथ मुंह धोकर फ्रेस हो जाओ। और अपने कमरे में थोड़ा आराम कर लो।

राजेश _ठीक है ताई।

भुवन _राजेश तुम आराम करो मैं दोस्तो से मिलकर आता हूं।

राजेश _ठीक है भुवन भाई।

पुनम _अरे रुको जी चाय बन चुकी है पहले चाय पी लो फिर जाना।

भुवन _अच्छा ठीक है लाओ।

आरती वही पर खड़ी थी उसके साथ एक तीन साल की लड़की भी थी।

राजेश _आरती, ये लड़की कौन है?

आरती _ये मुन्नी है? ज्योति दीदी की लड़की।

पदमा _अरे बेटा मैं तो बतानी ही भुल गई।

तुम्हारी बड़ी बहन ज्योति आई हुई है। कल तुम्हारे शहर जाने के कुछ घंटे बाद, दामाद जी ज्योति को छोड़ने आए थे। ज्योति कुछ महीने यहीं रहेगी।

उसका बच्चा आने वाला है, अभी 9वा महीना शुरू हुआ है। उसकी सास तो गुजर चुकी है। वहा उसकी देखभाल करने वाला कोइ है नही न, इसलिए दामाद जी यहां छोड़ गए।

राजेश ने मुन्नी को गोद में बिठा लिया। अरे मुन्नी तुम तो बहुत क्यूट हो। जानते हो मैं तुम्हारा कौन हू?

पदमा _अरे बेटा मुन्नी तो पहली बार तुमसे मिल रही हैं। कैसे जानेगी की तुम कौन हो?

मुन्नी बेटा ये तुम्हारे छोटे मामा है।

राजेश _अच्छा बोलो मुन्नी मैं कौन हूं?

मुन्नी _मामा।

राजेश _गुड ,मुझे पहले पता होता तुम लोग आए हो तो तुम्हारे लिए चाकलेट लेके आता।

सॉरी मुन्नी।

ताई ज्योति दीदी दिखाई नही दे रही है।

पदमा _वो आरती के कमरे में आराम कर रही होगी।

तभी वहा पुनम चाय लेकर आई।

लो जी चाय।

भुवन ने चाय का कप उठाया।

पुनम _देवर जी आप मुंह हाथ धोकर फ्रेस हो जाओ। फिर आपके लिए भी चाय लाती हु।

राजेश _ठीक है भौजी।

पदमा _मुन्नी बेटा आज मेरे पास।

मुन्नी राजेश की गोद से उतरकर, पदमा के पास चली गई।

पदमा _आरती बेटा जाओ तुम मुन्नी को थोड़ा बाहर घुमा के ले लाओ।

आरती मुन्नी को लेकर अपनी सहेली मधु के घर चली गई।

राजेश अपने कमरे में गया अपना कपड़ा उतार कर टी शर्ट और लोवर पहन लिया।

फिर फ्रेश होने घर के पीछे बाड़ा में चला गया।

जैसे ही वह मुतने के लिए मूत्रालय का दरवाजा धकेला।

अंदर का नजारा देख, उसके शरीर का रक्त प्रवाह बड़ गया।

अंदर ज्योति अपनी पेटीकोट और और साड़ी को कमर तक ऊपर उठा दी थी और अपनी टांगो को फैला कर खड़े खड़े मूत रही थी।

ज्योति का मुंह सामने दीवार की ओर था।

लेकिन जैसे ही दरवाजा खुलने की आवाज़ आई उसने पलट का देखा।

राजेश और ज्योति की नजर एक दूसरे से मिली।

राजेश शर्मिंदगी महसूस करते हुवे। वह वहा से वापस चला गया और दरवाज़े को बंद कर दिया।

इधर ज्योति भी शर्मिंदा महसूस कर रही थी पर उसे पेशाब जोरो की लगी थी। वह मूतना बंद नही की।

ज्योति का पेट काफी फूल गया था। पेट में आठ माह का बच्चा जो था। उसे बैठ कर मूतने में परेशानी होती थी। वह बड़ी मुस्किल से नीचे बैठ कर सुबह शौच कर पाती थी। बैठने में उसे दिक्कत होती थी।

जब महिला पेट से होती है तो धीरे धीरे बच्चा पेट में बढ़ता जाता है और पेट फूलने लगता है जिससे मूत्राशय में दबाव बड़ जाता है। जिसके कारण गर्भवती स्त्री को बार बार पेशाब लगती है।

बार बार वह मूतने के लिए नीचे बैठने से उसे दिक्कत थी इस लिए वह खड़े खड़े ही मूत रही थी, पर उससे गलती ये हो गई कि मूत्रालय की दरवाज़े की कुण्डी नही लगाई थी। मूतने के बाद वह भी शर्मिंदगी महसूस करने लगी।

कौन है ये लडका, और मूत्रालय में घुस गया। वैसे गलती मेरी भी है मैं दरवाजे की कुण्डी नही लगाई थी।

इधर राजेश बाड़ी से सीधा अपने कमरे में आकर बेड पर लेट गया।

वह सोचने लगा।

लगता है ये ज्योति दीदी थी, पता नहीं वह मेरे बारे में क्या सोच रही होगी। वह शर्मिंदा महसूस कर रहा था।

उधर ज्योति अपने मां के पास गई। जो कीचन में पुनम की मदद कर रही थी।

ज्योति _मां घर में कोइ आया था क्या?

पदमा _अरे आया था नही आया है? तेरा छोटा भाई। अभी शहर से आया, तुम्हे तो पता था न भुवन उसे स्टेशन से लेने गया है। पर तु ऐसे क्यू पुछ रही है कुछ huwa है क्या?

ज्योति _नही, ओ मैं कमरे से किसी की आवाज़ सुनी थी।

पदमा _हूं, वो राजेश की थी वह अपने कमरे में होगा, एक काम करो ये चाय ले जाओ उसके कमरे मे उसे दे देना और मिल भी लेना।

ज्योति इस स्थिति में नहीं थी कि वह राजेश के सामने में अभी जा सके राजेश ने अभी अभी ही उसे खड़े खड़े मूत ते देखा था, उसे अभी भी बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।

ज्योति _मां, अभी मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही मैं बाद में मिलूंगी।

पदमा _अच्छा ठीक है जा तु अपने कमरे में जाकर आराम कर।

ज्योति अपने कमरे में चली गई।

पदमा _पता नही इसे क्या huwa पहले तो वह राजेश से मिलने के लिए उतावली हो रही थी। पर जब राजेश आया तो, बहाने बना रही,,,

पुनम _सासु मां, मैं देकर आ जाऊ, राजेश को चाय।

पदमा _ठीक है बहु जाओ, पर हा जाके उसके गोद में मत बैठ जाना। पहले तो आरती ही थी जिससे हमे सावधान रहना था अब तो ज्योति भी आ गई है। अगर किसी को हम लोगो के संबंधों के बारे में पता चल गया। तो किसी को मुंह दिखाने के लायक नही रहेंगे।

पुनम _ठीक है सासु मां।

पुनम चाय लेकर, राजेश के कमरे में गई।

इधर राजेश के आंखो के सामने, ज्योति जो खड़ी खड़ी खड़ी मूत रही थी, उसकी गोरी गोरी टांगे और मस्त नितंब नजर आ रहे थे। उस दृश्य को याद कर उसका लंद एकदम कठोर हो चुका था।

पुनम चाय लेकर कमरे में आई।

पुनम _देवर जी कहा खो गए हो।

राजेश होश में आया।

राजेश _कहीं नही भौजी।

पुनम _लो चाय पी लो।

वह टेबल पे चाय रख कर जाने लगी, तभी राजेश ने उसका हाथ पकड़ कर खीच कर अपने गोद में बिठा लिया।

पुनम _देवर जी ये क्या कर रहे हो, छोड़ो कोइ आ जायेगा।

राजेश ने पुनम की चूची को हाथ में पकड़ कर मसलने लगा।

पुनम राजेश के लंद के ऊपर बैठा huwa था।

उसे अहसास हुआ कि राजेश का लंद खड़ा है।

पुनम _अरे देवर जी तुम्हारा तो खड़ा हो गया है।

राजेश _हा, भौजी थोड़ा मुंह में लेकर, चूसकर इसे शांत कर दो।

पुनम _न बाबा, अभी कुछ नही कर सकती, ज्योति डी आई हुई है।

अगर उसने देख लिया, तो गजब हो जायेगा। सासु मां ने मुझे समझा कार यहां भेजी है।

अब चलो छोड़ो मुझे।

वह राजेश से अपने को छुड़ा कर भागने लगी।

दरवाजे के पास जाकर राजेश की ओर पलट कर देखी।

राजेश ने उसे अपनी दोनो हाथ फ़ैला कर आने को कहा,

पुनम _न में सिर हिलाते हुए, न अभी कुछ नही।

और वह मुस्कुराते हुवे कीचन में चली गई।

पदमा _बहु, राजेश को चाय देकर आने में इतनी देर क्यू कर दी?

पुनम _मां जी, जाते ही देवर जी ने मुझे अपने गोद में बिठा लिया।

मैने उसे छोड़ने को कहा, ज्योति दीदी आई हुई है। उसे पता चलेगा तो गजब हो जायेगा।

वो तो मान ही नहीं रहा था, कह रहा था कि बड़ा मन कर रहा है मुंह में लेकर ही शांत कर दो।

लेकिन मैंने उससे किसी तरह खुद को छुड़ा कर आ गई।

पदमा _, ठीक किया तुमने।

पुनम _पर सासु मां बेचारे का मन उतर गया।

मुझे अच्छा नही लगा। उसका लंद एकदम कठोर हो चुका था, जिसका एहसास मुझे उसके गोद पर बैठ ने से huwa था।

पदमा _अरे भावनाओ में बहकर तू दिन में उसके साथ कुछ मत करना, न उसे कुछ करने देना। नही तो पकड़ी जाएगी। खुद तो पकड़ी जाएगी और मेरा नाम उगल कर मुझे भी फसा देगी।

पुनम अपनी सास की बात को सुनकर हसने लगी।

इधर ज्योति सोच रही थी की वह राजेश के सामने कैसे जाएगी उससे कैसे बात करेगी?

करीब एक घंटे बाद भुवन बाहर घूम कर घर लौटा। और आंगन में रखे खाट पर लेट गया।

पदमा _अरे भुवन बेटा तुम आ गए।

अरे आरती जाओ राजेश को बुला लाओ।

भुवन बेटा जाओ हाथ मुंह धोकर, भोजन के लिए तैयार हो जाओ, भोजन करके तुम्हे खेत भी जाना है।

आरती, राजेश को उसके कमरे से बुला लाई।

राजेश aur भगत दोनो हाथ मुंह धोकर भोजन के लिए बैठ गए और बात चीत करने लगे।

पुनम ने दोनो को खाना परोसा।

खाना खाने के बाद, भगत खेत चला गया और राजेश अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा।

इधर कुछ देर बाद खेत से केशव भी आ गया।

सभी लोग भोजन करने लगे।

भोजन करने के बाद आरती और ज्योति कमरे में चली गई।

ज्योति, आरती के कमरे में ही सोती थी कमरा बड़ा था काफी जगह थी तो ज्योति के लिए एक खाट कमरे में और लगा दी गई थी जिसमे वह सोती थी।

मुन्नी आरती के आगे पीछे ही, मोसी मोसी करते हुए घूमती रहती थी और उसके साथ ही सोने लगी थी।

इधर पुनम सबसे आखिरी में भोजन करती थी।

तब तक पदमा बर्तनों को मांजती थी।

कीचन का सारा काम निपट जाने के बाद,,

पदमा _बहु, आज तुम दूध लेकर राजेश के कमरे में नही जाएगी।

पुनम जो दूध गर्म कर रही थी।

क्यू मां जी?

पदमा _तुम्हारा कोइ भरोसा नही। दुधारू गाय को देख कर कहीं सांड तुम पर चढ़ गया तो ,,, अभी सब जग रहे हैं।

दूध लेकर मैं जाऊंगी।

बहु _हूं, और कहीं वह तुम पर चढ़ गया तो।

पदमा _अरे वह मेरे साथ ऐसा नहीं करेगा , वह तो तभी करता है जब मैं उसे कहती हूं।

इस गलत फहमी में मत रहना, सांड जब उत्तेजित रहता है न तो सारा संस्कार भुल जाता है।

उसे गाय की बुर ही नजर आता है।

पदमा _अरे ऐसा कुछ नही होगा।

पुनम _अच्छा ठीक है जाइए।

पदम दूध लेकर राजेश के कमरे में चली गईं।

इधर पुनम को अपनी सास पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

ये बुढ़िया कबाब में हड्डी बन रही है। मैं भी इसकी बहु हू। बुढिया को अकेले मजा लेने नही दूंगी।

पदमा कमरे में पहुंची,,,

राजेश तो पुनम के आने का ही इन्तजार कर रहा था।

पर पहुंची पदमा,,

राजेश _अरे ताई आप, भौजी नही आई।

पदमा _अरे बेटा वो क्या है न की तुम्हारी भाभी कीचन में कुछ काम बचा है उसे निपटा रही है।

राजेश_ओह।

पदमा _लो दूध पी लो।

इधर राजेश तो पुनम के आने का इन्तजार कर रहा था ताकि उसकी मस्त चूचियां को मसला मसल कर उसका दूध पी सके।

उसका मूड खराब हो गया।

राजेश _ठीक है ताई रख दो पी लूंगा दूध।

पदमा _क्या huwa तुम्हारा मूड उखड़ गया क्या? अपनी भौजी के साथ कुछ करने का इरादा तो नही था।

देखो बेटा तुम्हारी ज्योति दीदी आई हुई है। आरती और तुम्हारे ताऊ जी भी घर पर है। हम तीनो के राज के बारे में अगर किसी को पता चल गया न तो मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

तुम तो काफी समझदार लड़के हो ,,,

राजेश बेड कुर्सी पर बैठा था वह खड़ा होकर पदमा को पीछे से बाहों में भर लिया।

राजेश _ताई आज मेरा बहुत मन कर रहा है?

पदमा _हूं, बहु ने बताया था मुझे? अभी सब जग रहे हैं।

सुनो मैं रात में आऊंगी तुम्हारे कमरे में तुम दरवाजा बंद मत रखना।

राजेश _और भौजी।

पदमा _हूं उसका आना जरूरी है।

राजेश _मुझे उसका दूध पीना है।

राजेश ने पदमा के कान में धीरे से कहा मैं उसकी दूध पी पी कर तुम्हे चोदूंगा।

पदमा शर्म से पानी पानी हो गई,,

पदमा _चल हट बदमाश, बोल दूंगी उसे भी रात में आने।

राजेश खूश हो गया।

पदमा कीचन में गई,,

पुनम _क्या huwa मां जी। बहुत खुश नजर आ रही हो।

पदमा _राजेश तो पूरा बदमाश हो गया है।

पुनम _क्या कर दिया देवर जी ने।

पदमा _अरे अब कुछ मत पुछ, जा अपने कमरे में जाकर सो जा।

पुनम _ठीक है मां जी जाती हूं।

पुनम जाने लगी।

ताभी पदमा बोली,,

पदमा _अच्छा सुन, तुम अपने कमरे का दरवाजा बंद मत करना।

पुनम _क्यू मां जी?

पदमा _तु राजेश से chudna चाहती हैं कि नही?

पुनम _हां मां जी।

पदमा _तो जो कह रही वो कर,,

पुनम _ठीक है सासु मां।

पुनम खुश हो गई,,,

उसकी बुर में पानी भरने लगा कि आज फिर राजेश से चुदेगी। क्या गजब का मजा आता है राजेश से चुदने में पूरे शरीर के अंदर और बाहर के सभी अंगों को हिला कर रख देता है।

वह अपने कमरे में मुस्कुराते हुवे चली गई और अपने मुन्ने को दूध पिलाने लगी और एक हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी।

वह रात होने का बेसब्री से इंतजार करने लगी ताकि सभी लोग सो जाए।

इधर पदमा भी अपने कमरे में जाकर लेट गई और अपने पति की सोने का इन्तजार करने लगी।

इधर राजेश भी पदमा और पुनम का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, आज ज्योति को खड़े खड़े अपनी टांग फैलाकर मूत ते देख काफी उत्तेजित हो चुका था।

आज पदमा और पुनम को जमकर चोदना चाहता था।

राजेश पलंग में लेटकर अपना लंद सहला रहा था जो खुब लंबा और मोटा हो चुका था।

तभी उसकी मोबाइल पर मैसेज आने की रिंग बजा।

उसने अपना मोबाइल उठा कर देखा, किसका मेसेज है।

व्हाट्सएप पर सुनीता का मेसेज आया था।

सुनीता _कैसे हो बेटा?

राजेश ने जब अपनी मां का मेसेज पड़ा, उसने जवाब देना शुरू किया

राजेश _मैं ठीक हू मां आप कैसी है?

सुनीता _मैं भी ठीक हूं बेटा। तुम्हे वहा पहुंचने में कोइ परेशानी तो नही हुई।

राजेश _नही मां ।

सुनीता _बेटा मैं कब से तुमसे बात करने ट्राई कर रही थी, लग ही नहीं पा रहा था शायद नेटवर्क का इशू था।

राजेश _हो सकता है मां।

सुनीता _बेटा तुमने भोजन किया।

राजेश _हा मां, भोजन कर सोने की कोशिश कर रहा हूं।

आप क्या कर रही है।

सुनीता _मैं भी सोने की कोशिश कर रहा हूं बेटा?

राजेश _पापा कहा है?

सुनीता _वो तो घोड़े बेच कर सो रहे हैं, हमेशा की तरह।

राजेश _ओह।

सुनिता _क्या तुम्हे अपनी मां की याद नहीं आ रही?

राजेश _मां तुम याद नहीं आती तो अभी तक सो चुका होता।

सुनीता _चल झूठा कहीं का।

इतने दिनो तक मेरे बैगर रह लिए थे अब कह रहे हो मेरी याद आ रही है।

राजेश _सच में मां तुम बहुत याद आ रही हो।

और तुम मुझे कितना मिस कर रही।

सुनीता _बहुंत।

राजेश _अच्छा मां तुम्हारा दर्द कम हुआ कि नही।

सुनीता शर्मा गई और लिखी,,,

सुनीता _तुमने कल बड़े बेरहमी से किया,,,

अभी भी दर्द कर रहा है, तुम बड़े बेरहम हो,

राजेश _सारी मां मैं काफी जोश में आ गया था, काफी दिनो बाद कर रहा था न,, शायद इसलिए।

एक बात पूछूं आप बुरा तो नही मानोगी।

सुनीता _पूछो , बुरा नही मानूंगी।

राजेश _कल आपको मजा आया कि नही,,

सुनीता शर्म से पानी पानी हो गई,,,

राजेश _बताओ न मां,,,

पदमा _छी बेटा ये तुम कितने गंदे प्रश्न पूछते हो।

राजेश _बताओ न,, प्लीज तुम्हे अच्छा लगा न,,

पदमा _हूं।

राजेश का लंद झटके मारने लगा।

इधर सुनीता भी इस तरह की बात चीत से गर्म होने लगी।

राजेश ने आगे लिखा,,

राजेश _मां, मुझे भी कल बहुत मजा आया आपके साथ,,,

आप तो पहले से भी ज्यादा टाइट लग रही थी, लगता है पापा बिल्कुल ख्याल नही रखते।

सुनीता _बेटा, अगर तुम्हारा पापा ख्याल रखते तो, तुम्हारा क्या होता?

राजेश _हूं, ये भी सच है, मैं तो इस परम आनद से वंचित रह जाता।

सुनीता _तुम्हे तो खुश होने चाहिए, कि तुम्हारा पिता मेरा ख्याल नही रखते और तुम्हे मौका मिला मां का ख्याल रखने का।

राजेश _नही मां, पापा अगर आपका खयाल रखते तो मैं ज्यादा खुश रहता।

सुनीता _वो क्यू?

राजेश _मेरी मां काम सुख के लिए तड़पे मैं नही चाहता।

सुनीता _अच्छा इतना प्यार करते हो मुझसे,

राजेश _हा मां,

सुनीता _अगर तुम्हारे पिता जी ने मेरा ख्याल रखना शुरू कर दिए और मैने तुम्हे नही दी तब क्या करोगे?

राजेश _मां क्या नही दोगी? मैं समझा नही।

पदमा _वही जो कल किया था।

राजेश _मां मैने क्या किया था समझा नही थोड़ा ठीक से बताओ।

सुनीता _अरे,, बाबा,,,chudai

Chudai शब्द पढ़ते ही राजेश का लंद खुब झटके मारने लगा।

सुनीता भी बहुत शर्मिंदगी महसूस करने लगी। वह बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और हवस में सब लिख बैठी।

राजेश _मां तुम्हे मुझसे चुदने में बड़ा मजा आता है कि पापा से चुदने मे।

सुनीता शर्म से गड़ी जा रही थी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। पर वह बहुत गर्म हो चुकी थी।

राजेश के बार बार पूछने पर अपनी कपकपाती हाथो से लिखी।

सुनीता _तुम्हारे करने से ज्यादा मजा आता है।

राजेश _क्या करने से मां ठीक से बताओ समझा नही,,,

बार बार पूछने पर सुनीता ने कपकपाते हाथो से लिखी

सुनीता _chudai

राजेश का लंद फिर झटका मारा

राजेश ने आगे लिखा

राजेश _मां, तुम कल बता रही थी जब मैं तुम्हे चोद रहा था कि अंदर मत छोड़ना मेरा गर्भधारण का समय चल रहा है।

क्या औरतों का इज समय चुदने की इच्छा बड़ जाती है।

राजेश के इज तरह पूछने से सुनीता और बहुत उत्तेजित हो गई। उसकी बुर से पानी बहकर उसकी टांगो में बहने लगी।

राजेश _बताओ न मां।

सुनीता _हा

राजेश _मां तो आज भी बड़ी इच्छा हो रही होगी तुम्हारे चुदने की।

एक तरफ तो सुनीता शर्म से गड़ी जा रही थी तो दूसरी ओर हवस के कारण अपने बेटे के अश्लील सवालों का जवाब भी दे रहीथी ।

राजेश_बताओन मां।

सुनीता_हा।

राजेश_मां, अगर आज मैं घर में होता तो क्या आज भी चुदाती मुझसे।

सुनीता का बुरा हाल हो गया था। वह कपकपाती हाथो से लिखी।

सुनीता _हा

सुनीता की आगे और कुछ लिखने की हिम्मत नही हुई वह मोबाइल को बेड पर रख अपनी उंगली को बुर में ले जाकर भग्नासा को रगड़ी और कुछ ही देर में चीखते हुवे झड़ने लगी।

इधर राजेश ने देखा उसकी मां अब कोइ जवाब नही दे रही है। उसका लंद अपनी मां के साथ अश्लील चैटिंग करने से महालंड बन चुका था।

इधर पदमा ने देखा घर के सभी लोग सो चूके है अपने बिस्तर से उठ कर पहले पुनम के कमरे में गई।

पुनम तो पहले ही अपनी सासू मां के आने का इन्तजार कर रही थी।

पदमा _बहु , चलो राजेश के कमरे में।

पुनम अपने बिस्तर से उठ कर पदमा के पीछे पीछे राजेश के कमरे में चली गईं।

राजेश _बहुत देर लगा दी तुम दोनो ने।

पदमा _बेटा, तुम्हारे ताऊ जीकी नींद आज देर से लगी।

राजेश _चलो दोनो नंगी हो जाओ, मुझसे रहा नही जा रहा। देखो मेरा लंद का हाल।

राजेश ने अपने लोवर से लंद को बाहर निकाल कर दिखाया।

पुनम _अरे बाप re ये तो बहुत विकराल लग रहा है। सासु मां आज तो हम दोनो की खैर नहीं।

ये तो हमारी चीखे निकाल देगी।

पदमा _बहु तुम सही कह रही हो। यहां हम chudai करेंगे तो हमारी चीख से घर वाले उठ न जाए। चलो हम घर के पीछे बाड़ी में चलते है।

पुनम _पर वहा तो अंधेरा होगा।

पदमा _अरे कंडील ले जाते है, उसे जला लेंगे।

चलो बेटा राजेश।

राजेश, पुनम और पदमा तीनो कंडील और चटाई लेकर बाड़ी में चले गए।

बाड़ी में मिट्टी से दो बड़े बड़े कमरे बने थे।

एक में जानवरों को बांधा गया था और एक में जानवरों के खाने के लिए पैरा वगैरा रखा गया था।

वे पैरा वाला कमरे में चले गए।

पदमा ने कंडील जला दी। पैरा को जमीन में फैला दी और उसके ऊपर चटाई बिछा दी।

राजेश नंगा हो गया ।

पदमा और पुनम भी अपनी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट निकाल कर नंगी हो गई।

दोनो को नंगी देखकर राजेश का लंद झटके मारने लगा।

पदमा और पुनम घुटने मोड़ कर बैठ गई। और राजेश के लंद को बारी बारी चूसने लगी।

राजेश ने दोनो के बाल जो बंधे थे उसको खोल दिए।

राजेश ने पदमा को ऊपर उठाया और दीवार पकड़ा कर झुका दिया।

उसकी चूत को चाटने लगा। पदमा तो पहले ही बहुत गीली हो चुकी थी।

पुनम ने राजेश का लंद हाथ में पकड़ कर पदमा की बुर में रखा दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

लंद बुर चीरकर एक ही बार में अंदर घुस गया।

पदमा चीख उठी।

अब राजेश पुनम की चूची को मुंह में भरकर मसला मसल कर चूसने और दूध पीने लगा।

और अपना कमर हिला हिला कर पदमा की बुर चोदने लगा।

पदमा चीखने लगी।

राजेश लगातार gach gach पदमा की बुर में अपना लंद डाल रहा था। और दूसरी ओर पुनम की दूध पी रहा था। पुनम सिसक रही थी तो पदमा चीख रही थी क्यों की लंद पूर गहराई तक का रहा था उसका टोपा पदमा की गर्भासय को ठोक रहा था।

राजेश के बिना रुके लगातार चोदने से पदमा खुद को रोक न सकी और झड़ने लगी।

झड़ने के बाद पदमा लंद को निकालने के लिए हटने की कोशिश की पर राजेश ने उसकी कमर को पकड़ कर अपने लंद में कस लिया।

राजेश _साली ऐसी ही झुकी रह, नही तो मुझसे बुरा कोइ नही होगा।

पदमा वैसे ही झुकी रही। राजेश ने पुनम की चूची को मसल मसल कर फिर दूध पीने लगा और पदमा कोफिर gach gach चोदने लगा। वह जोर जोर से धक्का लगाने लगा। पदमा फिर चीखने लगी।

पदमा बर्दास्त न कर सकी और मूतने लगी।

पुनम हसने लगी।

राजेश ने पदमा को मूत ते देख और जोश में आ गया और कश कश कर चोदने लगा। कुछ देर में ही पदमा फिर झड़ने लगी।

करीब आधे घंटा तक ऐसे ही पदमा को चोदते रहा।

जब तक पुनम की दूध खाली नहीं हो गया।

पदमा की बुर का हाल बहुत खराब हो चुका था। जब राजेश ने अपना लंद बाहर निकाला।

उसकी बुर ऐसा फैल चुका था जैसे वह अभी अभी बच्चे को जनि हो।

पदमा चटाई में लेट गई और सुस्ताने लगी इधर राजेश। अब राजेश ने पुनम को भी झुका कर अपना लंद उसकी बुर में डाल कर जोर जोर से चोदने लगा पुनम चीखने लगी।

राजेश पुनम की कमर को दोनो हाथों से पकड़ कर gach gach चोद रहा था।

पदमा अपनी बहु को चुदाते हुवे देख रही थी।

पुनम को भी राजेश ने लगातार आधे घण्टे तक ऐसे ही चोदा, पुनम कई बार झड़ी और मूत भी चुकी थी।

जब राजेश ने अपना लंद बुर से बाहर निकाला तो पुनम की बुर की भी वही हालत हो गई थी जो पदमा की बुर की हुई थी।

पदमा अपनी बहु की बुर की हालात देख मुस्कुराने लगी।

राजेश अब चटाई पर लेट गया। और पदमा को ऊपर बैठने कहा। पदमा अपनी बहु को चुदाते देख फिर से गर्म हो गईथी वह राजेश के लंद पर बैठ कर उछल उछल कर चुदने लगी।

कुछ देर बाद पुनम को अपने लंद पर बिठा लिया। पुनम भी उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश ने अब खड़ा होकर पुनम को अपने लंद पर बिठा कर हवा में उछाल उछाल कर चोदना शुरू कर दिया। पुनम पहली बार ऐसी chud रही थी।

पदमा राजेश की ताकत को देखकर आश्चर्य में थी।

राजेश ने पुनम को लंद से उतार दिया।

पुनम की हालात बहुत खराब हो चुकी थी। वह चटाई पर लेट गई।

इधर राजेश ने पदमा को भी उसकी कमर पकड़ कर ऊपर उठाया और अपने लंद उसकी बुर में डाल कर हवा में उछाल उछाल कर चोदना शुरु कर दिया।

पदमा फिर चीखने चिल्लाने लगी।

कुछ देर इसी तरह chudai करने के बाद वह पदमा को नीचे उतार दिया।

पदमा की हालात भी खराब हो गई थी वह भी पुनम की बाजू में लेट कर सुस्ताने लगी।

दोनो की बुर में दर्द होने लगी थी।

इधर राजेश झड़ा नहीं था।

वह पुनम की टांग को फ़ैला कर उसके बीच आ गया और अपना लंद उसकी बुर में डालकर फिर से दनादन अंदर बाहर करने लगा।

पुनम के मुंह से चीख निकलने लगी।

पुनम _राजेश अब बस करो मैं अब नही chud पाऊंगी। प्लीज निकाल दो,,,

राजेश ने लंद पुनम की चूत से निकाल कर पदमा के टांगो के बीच आ कर उसकी बुर में डाल दिया और दनादन चोदने लगा।

पदमा चीखने चिल्लाने लगी। यह चीख दर्द और आनंद दोनो की थी।

पदमा _बेटा अब बस करो अब मैं और नही chud पाऊंगी, मेरा बुर दर्द करने लगा है।

राजेश ने अपना लंद निकाल दिया और खड़ा हो गया।

राजेश _मैं अभी झड़ा नहीं हु, चलो चूस कर मुझे झाड़ो।

पदमा और पुनम दोनो उठ कर बैठ गए और बारी बारी से लंद चूसने लगी।

पदमा _बेटा और कितना समय लगेगा झड़ने में, काफी समय हो गया है।

पुनम _हा राजेश तुम तो आज झड़ने का नाम ही नही ले रहे कहीं कोइ दवाई तो नही खा ली है।

राजेश हसने लगा,,,

अब तो इसे झाड़ने के लिए दूसरा छेद में डालना पड़ेगा।

पदमा _बेटा मैं समझी नहीं तुम किस छेद की बात कर रहे हो।

राजेश _ताई तुम झुको।

पदमा झुक गई। राजेश ने एक उंगली उसकी गाड़ में घुसा दिया।

पदमा चिहुंक उठी।

राजेश _मैं इस छेद की बात कर रहा हु ताई।

पुनम _देवर जी क्या तुम सासु मां की गाड़ चोदेंगे।

राजेश _हा, तभी मैं झड़ पाऊंगा।

पदमा _नही बेटा, मैने औरतों से सुनी जरूर है की कुछ महिलाए अपनी गाड़ भी मरवाती है पर अब तक कभी मैने गाड़ नही मरवाई।

तुम्हारा लंद तो बहुत मोटा है और गाड़ की छेद एकदम सकरी। मेरा तो गाड़ ही फट जायेगा।

मेरी गाड़ को मत मारो।

राजेश _ताई तुम तो बेकार ही डर रही, पहले थोड़ा दर्द जरूर होगा फिर बाद में बहुत मजा आएगा, आपको गाड़ मरवाने में। वैसे भी आपकी गाड़ की छेद काफी बड़ी है। भौजी की छेद से काफी बड़ी।

पदमा _नही बेटा, कहीं मैं दर्द से मर गई तो।

अरे नही ताई कुछ नही होगा मैं बहुत आराम से करूंगा।

भौजी जाओ तुम कीचन से घी ले आओ। उससे गाड़ मारने में आसानी होगी।

पुनम _ठीक है देवर जी।

राजेश ने पदमा की बुर में उंगली डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

उधर पुनम नंगी ही कीचन में चली गई और घी का डब्बा ले आई।

पुनम _लो देवर जी घी ले आई।

पुनम _भौजी मेरे लंद में अच्छे से लगा दो।

पुनम ने डब्बे से घी निकाल कर अच्छे से राजेश के लंद पर लगा कर मूठ मारने लगी।

राजेश ने डब्बे से घी निकाल कर अपनी उंगली से पदमा की गाड़ में भर दिया।

राजेश _भौजी तुम अपनी ब्लाउज को ताई की मुंह में डाल दो।

पुनम ने पदमा के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया।

अब राजेश अपनी दो उंगलियां गाड़ में डाल कर अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर के बाद वह अपने लंद का टोपा उसकी गाड़ के छेद में रख दिया और दबाव बनाने लगा।

पुनम आश्चर्य से सब देख रही थी।

इधर राजेश ने कोशिश जारी रखा।

और कुछ देर बाद टोपा को गाड़ में घुसाने में कामयाब हो गया।

पदमा चीखना चाही पर मुंह में कपड़ा होने से घुटी घुटि आवाज़ ही निकाल पाई।

राजेश _, भौजी तुम ताई कि बुर चांटों।

पुनम पदमा के टांगो के नीचे लेट गईं और पदमा की बुर को चाटने लगी।

इधर राजेश ने हल्का हल्का दबाव बनाना जारी रखा और गाड़ फैलने लगा।

पुनम बुर चांट रही थी जिससे पदमा को दर्द के साथ मजा भी आ रहा था।

अब राजेश ने अपना लंद गाड़ में धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया।

लंद धीरे धीरे गाड़ में नीचे उतर ता चला गया।

और एक समय आया जब आधे से ज्यादा लंद गाड़ के अंदर था।

अब राजेश ने अपना स्पीड बढ़ाया।

लंद गाड़ में अंदर बाहर होने लगा।

पदमा को बहुत दर्द हो रहा था।

उधर पुनम के द्वारा बुर चाटने से मजा भी आ रहा था।

धीरे धीरे गाड़ पूरी तरह फैल कर लंद को निगल गई।

अब राजेश पदमा की कमर पकड़ कर तेज़ तेज़ गाड़ मारना शुरू कर दिया।

राजेश ने लंद निकाल कर और अच्छे से गाड़ और लंद पर घी लगाया। गाड़ का छेद फैल चुका था।

अब लंद को गाड़ में डालने में राजेश को ज्यादा दिक्कत नही huwa।

राजेश ने लंद को धीरे धीरे अंदर बाहर करते हुवे। पूरा घुसा देने के बाद अपना स्पीड बढ़ा दिया।

गाड़ पूरी तरह फैल गया अब राजेश का लंद आसानी से गाड़ में अंदर बाहर होने लगा।

पदमा को दर्द के साथ एक अलग ही मजा आने लगा जी बुर मरवाने से काफी अलग था।

गाड़ राजेश के लंद को एकदम से जकड़ा huwa था राजेश को गाड़ मारने में बहुत मजा आने लगा वह जोश में आकर जोर जोर से गाड़ मारना सुरू कर दिया।

पुनम अब खड़ी होकर राजेश को गाड़ मारते हुवे देखने लगी वह आश्चर्य से देख रही थी।

इतने बड़े लंद को गाड़ ने निगल लिया है और आसानी से लंद अंदर बाहर हो रहा है।

इधर पदमा को दर्द भी हो रहा था, और एक अलग मजा भी आ रहा था।

राजेश ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाया और हापते हुए झड़ने लगा।

फिर पुनम की ओंठो को जी भर कर चूसा और चटाई पर लुडकगया । राजेश का लंद गाड़ से बाहर निकलने पर पदमा राहत की सांस ली पर उसकी गाड़ और और बुर दोनो सूज गया था।

वह ठीक से खड़ा नही हो पा रही थी गाड़ छील गया था जिससे उसे जलन हो रही थी।

पदमा _राजेश तुमने तो मेरी गाड़ ही फाड़ दी बहुत जलन हो रही है।

राजेश _ताई आप चिन्ता न करो कल मैं दर्द का गोली लाकर तुमको दूंगा। कुछ दिनो में सूजन भी ठीक हो जाएगा। अब आपकी गाड़ खुल चुकी है इसके बाद गाड़ मरवाने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

कुछ देर तीनो सुस्ताने के बाद अपने अपने कपड़े पहन कर अपने कमरे में जाने लगे।

पदमा तो ठीक से चल भी नहीं पा रहे थी।
 
अभी मेरा समय खराब चल रहा है। पता नही अपडेट कब आएगा। माफ करना,,,
 
अभी मैं खराब दौर से गुज़र रहा हूं।
 
जैसे की आप लोगो ने अब तक पड़ा किस तरह पुनम और पदमा दोनो सास बहू दोनो साथ में राजेश से चुदवाती है। राजेश दोनो की ऐसी chudai करता है कि वे दोनो राजेश के दीवानी हो जाती है।

क्यों कि संभोग का जो सुख राजेश ने उन्हें दिया। ऐसा सुख की परिकल्पना तक दोनो ने नही की थी।

राजेश ने तो पदमा की गाड़ मारकर उसे एक अलग ही आनंद का एहसास करा दिया। वह राजेश की गुलाम बन चुकी थी।

पदमा और पुनम दोनो तो रोज ही राजेश से अपार संभोग सुख को प्राप्त करना चाहती थी। वे नही चाहते थी की इस खेल की जानकारी आरती राजेश के ताऊ जी को हो और अब तो घर में पदमा की बड़ी बेटी ज्योति जोआठ माह के गर्भ से थी वह भी अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने अपने मायका आ गई थीं। इसलिए पदमा, और पुनम दोनो मन मसोज कर दिन काटने लगीऔर मौके के तलास में रहने लगीं की राजेश से फिर से संभोग के परम सुख को प्राप्त कर सके।

इधर ज्योति को आए 5, 6दिन हो चुके थे पर ज्योति और राजेश आमने सामने आने एवम बात चीत करने से कतरा रहे थे। क्यों की राजेश ने घर के पीछे बाड़ा में बने मूत्रालय में ज्योति को धोखे से खड़े खड़े मूत करती देख लिया था। ज्योति तो बहुत ही शर्मिंदगी महसूस कर रही थी। वो अपने को ही दोषी मान रही थी कि उसने मूत्रालय का दरवाजा बंद नही किया था।

इधर राजेश को भी बहुत खराब महसूस हो रहा था, वह भी अपने को कसूर वार समझ रहा था। वह दरवाजा धकेल कर सीधा मूत्रालय में घुस गया।

पता नही दीदी मेरे बारे में क्या सोच रही होगी।

इधर राजेश सुबह उठ कर अखाड़ा जाता और वहा कसरत करता कबड्डी प्रतियोगिता की तैयारी भी जोरो से चल रही थी।

आज ग्राम पंचायत भवन में सरपंच एवम पंचों का आवश्यक बैठक रखा गया था। इस बैठक में राजेश को भी बुलाया गया था।

राजेश निर्धारित समय में बैठक में शामिल होने के लिए पंचायत भवन पहुंचा। राजेश जब वहा पहुंचा तो सरपंच और पंचगण पहले ही पहुंच चुके थे। उसके अलावा गांव के प्राथमिक शाला के प्रधान पाठिका, आंगनबाड़ी वाली दीदी भी अपनी समस्या बताने आई हुई थी।

बैठक प्रारंभ हुआ।

पंचायत सचिव ने बैठक का एजेंडा बताया। जिस पर वहा मौजूद सभी लोगो से उनके विचार जाने गए और समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया गया।

गांव की सरपंच सविता जी ने प्राथमिक शाला की प्रधान पाठिका से उनकी समस्या बैठक में रखने को कहा।

गांव की प्रधान पाठिका जिसका नाम माधुरी उम्र 32वर्ष ने अपनी स्कूल की समस्या बताया।

माधुरी _ग्रीष्म अवकाश के बाद खुलने वाली है। स्कूल कूल की समस्या से आप सभी भली भांति परिचित है । पहले यहां दो शिक्षक पदस्थ थे, उसमें से एक का ट्रांसफर हो गया, अब सिर्फ मैं ही बची हूं।आप लोगो को पता है की स्कूल में 1से 5तक कक्षा संचालित है। शाला में लगभग 150बच्चे दर्ज है।

अब एक अकेले के भरोसे स्कूल संचालित करने में कितनी परेशानी होगी।

अध्ययन अध्यापन बुरी तरह प्रभावित होगा। ग्राम पंचायत द्वारा शिक्षक की व्यवस्था किया जावे।

सरपंच _पिछले वर्ष हमने शिक्षा मंत्री से मिलकर शिक्षक का मांग किया था। पर यहा के विधायक हमारे गांव की भलाई चाहते नही है। गांव में शिक्षक भेजने के बजाए, विधायक के कहने पर मंत्री जी ने यहां पदस्थ एक शिक्षक का और ट्रांसफर करा दिया।

मुझे तो समझ ही नही आ रहा क्या करे? पंचायत के पास इतना फंड भी नही की वह स्कूल में पढ़ाने के लिए शिक्षक रख सके।

राजेश तुम इस मसले तुम कुछ रास्ता सुझा सकते हो?

राजेश _सरपंच जी, इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

सरपंच _वो कैसे?

राजेश _, हमारी पहली प्राथमिकता बच्चो की शिक्षा होनी चाहिए। तभी गांव का विकास संभव है क्यू की बच्चो को गुणवक्ता युक्त शिक्षा मिलने पर ही वे पढ़ लिखकर आगे इंजीनियर डाक्टर या अफसर बन सकते हैं। इसके लिए प्राथमिक शिक्षा का मजबूत होना बहुत जरूरी है।

5कक्षा को एक शिक्षक के भरोसे छोड़ने से बच्चो को गुणवक्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त नही हो सकती। यहां दर्ज संख्या के हिसाब से पांच कक्षाओं के लिए पांच शिक्षक का होना बहुत जरुरी है। तभी बच्चो को गुणवक्ता पुर्ण शिक्षा मिल पाएगी।

सरपंच _वो तो हम भी समझ रहे हैं पर शिक्षक आयेंगे कहा से।

राजेश _सरकार से उम्मीद करना व्यर्थ है क्यों की पूरे राज्य में शिक्षको की कमी है, और सरकार शिक्षको की भर्ती करना नही चाह रही। इस समस्या का समाधान गांव के लोगो को ही मिलकर करना होगा।

सरपंच _पर वो कैसे?

राजेश _जनभागी दारी से,

सरपंच _हम कुछ समझे नही।

राजेश ने माधुरी मैडम से कहा,,,

राजेश _मैडम जी स्कूल में शाला विकास समिति तो गठित होगा।

माधुरी _हा गठित है पर उसके सदस्य एक्टिव नही है । समिति का बैठक आयोजित करने पर सिर्फ अध्यक्ष ही अपनी उपस्थिति देते है। बाकी सदस्य तो आते नही।

राजेश _देखिए, स्कूल के बेहतर संचालन के लिए शाला विकास समिति के सदस्यों का एक्टिव होना बहुत जरुरी है यदि शाला विकास समिति चाहे तो शिक्षको की व्यवस्था कर सकती है ।

सरपंच _पर वो कैसे!

राजेश _मैने पहले ही कहा था जनभागी दारी द्वारा। शाला विकास समिति स्कूल के विकास के लिए लोगो से फंड इकट्ठा करे, गांव के लोग अपनी क्षमता के हिसाब से शाला को फंड दान करे। समिति इस फंड का हिसाब किताब रखे। और इस फंड से,

गांव में बहुत से बहू बेटियां पढ़ी लिखी हुई है। उनमें जो योग्य एवम अपनी सेवा देने इच्छुक हो उसे शिक्षक के रूप में नियुक्त करे।

आप लोग मेरे विचार पर चिंतन कीजिए।

वहा मौजूद सभी लोग आपस में विचार विमर्श किए और एक निष्कर्ष तक पहुंचे ।

सरपंच _राजेश, हम सभी ने आपके बातो पर विचार विमर्श किया, हम सब आपके बातो से सहमत है।

पर शाला के लिए फंड इकट्ठा करना इतना आसान नहीं है।

राजेश _शाला के लिए फंड इकट्ठा करने की जवाब दारी मेरी है।

सरपंच _अगर ऐसी बात है तो शाला विकास समिति में तुमको शाला विकास सलाहकार नियुक्त किया जाता है। जो समिति को आवश्यक सलाह देगा। शाला विकास समिति का पुनर्गठन किया जावे, जिसमे एक्टिव पालकों को सदस्य बनाया जावे।

राजेश क्या तुम यह जिम्मेदारी लेने तैयार हो?

राजेश _जी सरपंच जी यहां के बच्चो को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो उसके लिए मुझसे जो भी हो सकता है मैं करूंगा?

राजेश ने माधुरी मैडम से कहा,,

मैडम जी आप शाला में पालकों का एक बैठक आयोजित कीजिए इसमें शाला विकास समिति का नया गठन कीजिए।

समिति में पंचायत का भी एक प्रतिनिधि सामिल हो।

माधुरी _ठीक है राजेश, मैं कल ही पालकों का एक बैठक आयोजित करती हूं।

अगले दिन माधुरी मैडम ने पालकों का बैठक आयोजित किया जिसमे बड़ी संख्या में पालक इकट्ठा हुवे। पंचायत की ओर से सरपंच स्वयं शामिल हुई।

शाला विकाश समिति का नया गठन किया गया। जिसमे सक्रिय पालकों को शामिल किया गया।

शाला विकास समिति के गठन के बाद राजेश ने समिति के सदस्यों को शाला की समस्या से अवगत कराया और उसके समाधान हेतु कार्ययोजना बनाया।

शाला विकाश हेतु फंड की व्यवस्था करने के लिए जनसहयोग प्राप्त करने के लिए निर्णय लिया गया कि राजेश के नेतृत्व में एक दल बनाया जाएगा जो गांव में घर घर जाकर शाला विकास हेतु लोगो से फंड इकट्ठा करेगा।

बैठक ख़त्म होने के बाद राजेश जब घर पहुंचा,,

उसे घर में कोइ नजर नही आया।

उसने भौजी कहा हो,,,,,

आवाज़ लगाया,,,

आरती के कमरे से ज्योति बाहर निकली।

ज्योति घर में अकेली थी तो न चाहते हुवे भी उसे राजेश से बात करना पड़ा,,

ज्योति _वो आरती और पुनम पड़ोस वाली काकी के घर पूजा है वहा गई हुई हैऔर मां खेत गई हुई है।

राजेश _ओह,

ज्योति _आप हाथ मुंह धो लीजिए मैं किचन में खाना लगा देती हूं। ज्योति ने राजेश से नज़रे चुराते हुवे धीरे से कहा।

राजेश भी बिना नज़रे मिलाए कहा,,,

राजेश _जी,,

राजेश पीछे बाड़ा में गया और वहा फ्रेश होकर हाथ मुंह धो कर कीचन में आया और खाने बैठ गया।

ज्योति ने राजेश के लिए भोजन की थाली लगाया।

राजेश चुपचाप भोजन करने लगा। कमरे में खामोशी था कोइ कुछ बोल नहीं रहा था।

राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि इस स्थिति से बाहर कैसे निकले तभी उसने ज्योति से कहा,,

राजेश _दीदी, मुझे माफ कर दीजिए।

ज्योति न चाहते हुवे भी बोली,,

ज्योति _वो किसलिए?

राजेश _उस दिन के लिए, मुझे पता नही था आप बॉथरूम के अंदर है? मैं बहुत पहले ही आपसे माफी मांगना चाहता था पर हिम्मत नही हुई, पता नही आप मेरे बारे में क्या सोच रही होंगी?

ज्योति शर्म से पानी पानी हो गई और न चाहते हुवे बोली,,

ज्योति _इसमें गलती मेरी भी है मुझे बाथरुम का दरवाजा बंद करना चाहिए था।

राजेश _दीदी आप मुझसे नाराज़ तो नही है न।

ज्योति _नही।

राजेश _, फिर इतने दिनो तक मुझसे बात क्यू नही की।

ज्योति शर्माते हुवे बोली।

मुझे तुमसे बात चीत करने और सामने आने में शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।

राजेश _ओह, मैं तो समझ रहा था कि आप मुझसे नाराज़ हैं। दीदी जो huwa वो एक हादसा समझ कर भुल जाओ।

वैसे आप नही गई पूजा में।

ज्योति _ऐसी हालात में मां ने के किसी के घर जाने से मना किया है।

राजेश _ओह।

राजेश _दीदी, मां जब यहां थी तब तुम तो चार वर्ष की रही होगी। आप तो मां के बारे में बहुत कुछ जानती होगी।

ज्योति _हां, चाची जब ब्याह के यहां आई थी तब मैं चार साल के और भुवन दो साल का था। चाची हमे बहुत प्यार करती थी दोनो भाई बहन हम चाची के आगे पीछे ही घूमते रहते थे।

चाची के जाने के बाद हम दोनो भाई बहन उन्हें बहुत याद किए। हम उनसे मिलना चाहते थे। पर न तो चाची फिर गांव आई न हम वहा जा पाए। आज भी मुझे चाची से मिलने की बड़ी इच्छा है।

राजेश _दीदी देखना जब तुम नए बच्चे को जन्म दोगी न तो मैं मां को यहां आने के लिए निवेदन करूंगा, और मां से मिलने की तुम्हारी इच्छा पूरी हो जाएगी।

ज्योति _क्या सच में।

राजेश _हा, दीदी।

राजेश ने भोजन कर लिया, वह उठने लगा।

ज्योति _अरे थोड़ा और चावल तो ले लो।

राजेश _नही दीदी, मेरा खाना हो गया।

राजेश हाथ धो कर अपने कमरे में चला गया और आराम करने लगा।

कुछ देर बाद कमरे में ज्योति आई।

राजेश _अरे दीदी तुम, यहां।

ज्योति _वो क्या है न कि मुझे चाची के बारे में और जानने की इच्छा हुई, वहा चाची खुश तो है न। हम लोगो को याद करती भी है कि नही।

राजेश _दीदी, मां के साथ यहां जो कुछ भी huwa है वो नही चाहती थी की इसकी जानकारी मुझे हो इसलिए वो गांव का जिक्र हमसे नही करती थी।

वैसे मैं अपनी मां को बहुत अच्छे से जानता हूं, वह बहुत प्यारी और ममता मई है मुझे पूरा यकीन है कि वह भी तुम लोगो से मिलना चाहती होगी, पर मजबूर रही होगी।

ज्योति _तुम अपने बारे में बताओ। सुना है तुम कलेक्टर बनना चाहते हो। पर तुम्हारा यहां गांव आना कुछ समझ नहीं आया?

राजेश _दीदी, मेरा गांव आना, शायद नियति यही चाहता था। जो मुझे गांव ले आया।

ज्योति _सुना है तुम काफी बहादुर हो, ठाकुर साहब अपनी बात मानने के लिए मजबूर कर दिया। पूरे गांव वाले तुम्हारे बड़ी तारीफ कर रहे हैं? तुम्हे तो दादा जी का नया जन्म मान रहे है जो उस ठाकुर के जुल्मों से गांव को बचाने आया है?

राजेश हसने लगा,,,

राजेश _दीदी यह गांव मेरा भी है और इसके भलाई के बारे में सोचना मेरा फर्ज है। यहां के लोगो के कुछ काम आ सकू ये मेरा सौभाग्य होगा।

वैसे आप अपने बारे में बताइए आपके ससुराल वाले कैसे है?

ज्योति _मैं अपने बारे में क्या बताऊं? जब मैने १२वी कक्षा पास की तो मेरी शादी तय कर दी गई। तुम्हारे जीजा जीबड़े अच्छे है वो मुझे बहुत प्यार करते हैं। शादी के एक साल बाद ही मुन्नी को मैने जन्म दिया। उसके दो साल बाद सास गुजर गई। घर में खाने पीने की कोइ कमी नहीं है। घर में चार लोग रहते है मैं तुम्हारे जीजा जी मेरे ससुर और मुन्नी।

जब मेरा 8वा महीना शुरू huwa तो घर के काम करने में मुझे दिक्कत होने लगी। और वहा कोइ महिला भी नही जो मेरा देखभाल कर सके। उन्हे डर था कुछ ऊंच नीच हो गया तो इसलिए ससुर जी के कहने पर तुम्हारे जीजा जी ने मुझे मायका छोडा ।

राजेश _दीदी, जीजा जी जब यहां आपको छोड़ने आए मैं नही था। वैसे वो करते क्या है?

ज्योति _ससुर जी तो गांव के सरपंच है। तुम्हारे जीजा जी गांव में खेती करते है और किराने की दुकान भी चलाते है।

राजेश _दीदी आप तो बहुत सुन्दर हो जीजा जी तो आप पर एकदम लट्टू होंगे।

ज्योति हसने लगी,,,

ज्योति _वैसे तु भी बड़ा स्मार्ट है, एकदम बॉलीवुड का हीरो लगता है। शहर में तो तुम्हारे कई गर्ल फ्रेंड होगी।

राजेश _हूं ।

ज्योति _और गांव में कोइ बनाया है कि नही,,

सुना है कि,,,

राजेश _क्या सुना है दीदी?

ज्योति _यही कि ठाकुर की बेटी के साथ तुम्हारा कुछ खीचड़ी है,,,

राजेश _किसने कहा आपसे? ऐसा कुछ भी नहीं है।

ज्योति _अगर ऐसा नही है तो ठीक ही है क्यों कि ये ठाकुर तो पहले से ही गांव पे कहर ढा रहा है, जब पता चलेगा की उसकी बेटी के साथ तुम्हारा लफड़ा है तो पता नही क्या करेगा?

तभी किसी की बाहर की दरवाजा खटखटाने की आवाज़ आया।

ज्योति _लगता है, पुनम और आरती घर आ गई।

ज्योति कमरे से चली गई।

रात में भोजन करने के बाद सभी अपने कमरे में सोने चले गए। राजेश भी अपने कमरे में पढ़ाई करने लगा।

इधर पुनम की आज chudwane की बड़ी इच्छा हो रही थी पूरे एक सप्ताह हो चुके थे। राजेश से chudwaye जब से ज्योति आई थी chudai बंद था।

पुनम सोने की कोशिश की लेकिन आज उसे नींद नहीं आ रही थी। वह मजबूर होकर अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे की ओर चली गई।

जब राजेश के कमरे मे पहुंची,,

राजेश _अरे भौजी तुम इस वक्त।

पुनम _देवर जी मुझे नींद नहीं आ रही।

राजेश _पर क्यू?

पुनम _आज मेरी बुरिया मुझे बहुत परेशान कर रही है। तुम्हे इसकी प्यास बुझाना होगा।

राजेश _भौजी ये क्या कह रही हो कहीं ज्योति दीदी उठ गई तो, और उसे पता चल गया तो, क्या होगा?

पुनम _मैं कुछ नही जानती, अगर मेरी प्यास नही बुझाई तो मैं रात भर सो नहीं पाऊंगी।

पुनम ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल कर अपनी बड़ी बड़ी चूचियां बाहर निकाल ली।

पुनम _क्या तुम्हे मेरे दूध पीने की इच्छा नही होती अब।

राजेश _पुनम की मस्त दूध से भरी चूचियां को देखने लगा।

पुनम राजेश का हाथ पकड़ कर अपनी चुचियों पर रख दिया।

पुनम _लो पी यो मेरा दूध।

पुनम की मस्त चूचियां देख कर राजेश के शरीर में सनसनाहट बड़ गया।land में तनाव आने लगा।

पुनम राजेश के गोद में बैठ गई।

राजेश दोनो चुचियों को मसल मसल कर बारी बारी से पीने लगा।

पुनम सिसकने लगी।

पुनम _देवर जी, आज तुम मेरी chut के साथ मेरी गाड़ की छेद भी खोल दो, जब से तुमने सासु मां की गाड़ मारी है मेरी भी गाड़ मरवाने की इच्छा हो रही है।

राजेश _पर भौजी तुम्हारी गाड़ की छेद सकरी है तुम्हे बहुत दर्द होगा।

पुनम _अब जो होगा देखा जाएगा मेरी इच्छा पूरी करो।

राजेश _पर भौजी ये सब कमरे में नही हो सकता, तुम्हारे चीखे सुनकर पूरा घर उठ जायेगा।

पुनम _चलो घर के पीछे बाड़े में चलते है।

राजेश _भौजी एक बार फिर सोच लो कहीं ज्योति या आरती या फिर ताऊ जग गए तो मुझे दोष न देना।

पुनम _नही दूंगी बाबा, सारा इल्जाम अपने सर ले लूंगी, बस अब चलो।

राजेश _ठीक है तुम एक चटाई, तकिया और घी का डब्बा लेकर बाड़े में पहुंचो मैं आता हूं।

पुनम राजेश के ओंठ को चूमते हुवे कहा,, ठीक है मेरे राजा।

पुनम अपने कमरे से चटाई, कंडील, तकिया और घी का डब्बा लेकर बाड़े में बने जानवरो के खाने के लिए रखे पैरे वाले कमरे में चली गई।

कुछ देर बाद राजेश वहा पहुंचा,

राजेश के पहुंचते ही, दोनो के बीच chudai का खेल शुरू हो गया।

राजेश पुनम की boor कीअलग अलग आसनों में जम कर कुटाई करने लगा। दोनो संभोग के परम सुख को प्राप्त करने लगे।

Chut की प्यास बुझाने के बाद राजेश ने अपने land में अच्छे से घी लगा लिया और पुनम की गाड़ में घी भर दिया।

पुनम के मुंह में उसका चोली ठूस दिया, ताकि चीख मत सके।

फिर काफी कोशिश के बाद land को गाड़ में आखिर उतार ही दिया। पुनम की गाड़ फट चुकी थी।

उसके मुंह से चीख निकलने लगी।

इधर ज्योति को पेशाब लगी थी। गर्भावस्था में मूत्राशय में दबाव बढ़ जाने के कारण उसे बार बार पेशाब लगता था।

चूंकि उसे बैठ कर मूतने में दिक्कत होती थी इस लिए खड़े खड़े मूत ती थी। वह रात में आंगन में बने मोरी के पास जाकर मूतने में कोइ देख न ले, वह बाड़े की ओर चली गई।

किंतु बाड़े का दरवाजा अंदर से बंद था।

ज्योति _अरे दरवाजा किसने बंद किया है?

लगता है बाड़े में कोइ गया है।

तभी उसे कुछ आवाजे उसे सुनाई पड़ी, वह दरवाजे पर कान लगा कर सुनने की कोशिश करने लगी।

उसे किसी के चीखने कराहने की आवाज़ सुनाई पड़ी।

ज्योति _ये किसकी आवाज़ है?

वह कुछ देर तक आवाज़ सुनने के बाद, पुनम के कमरे की ओर गई, वहा उसे पुनम नही मिली।

वह राजेश के कमरे में जाकर पता की राजेश भी कमरे में नही मिला।

ज्योति के होश उड़ गए? उसे बहुत गुस्सा आने लगा।

उसकी भाई की पत्नि अपने देवर के साथ छुप कर रंगरेलिया मना रहा है? भुवन को धोखा दे रहा है?

वह मोरी में खड़े खड़े मूत कर अपने कमरे में जाकर सोचने लगी?

घर में ये सब खेल चल रहा है? किसी को पता ही नही है? सुबह होने दो पुनम की खबर लेती हूं।

वह लेट कर सोने की कोशिश की पर नींद नहीं आ रही थी। वह अपने कमरे से निकल कर फिर से बाड़े के दरवाज़े के पास गई।

इस समय पुनम को गाड़ मरवाने में अब मजा आ रहा था।

मुंह से सिसकारी निकाल रही थी जिसे सुन कर, ज्योति भी गर्म हो गई।

उसे अपनी पति से chude काफी दिन हो चुके थे।

गर्भावस्था के दौरान उसकी सेक्स इच्छा ऐसे भी बड़ी हुई थी। पुनम की सिसकारी सुन कर वह भी गर्म हो गई। उसकी boor से पानी बहने लगी।

वह एक हाथ से अपनी boor रगड़ने लगी, उससे बर्दास्त नही huwa तो कमरे मे आकर उंगली boor में डालकर अंदर बाहर करने लगी, जब तक वह झड़ न गई।

इधर राजेश अपना सारा पानी पुनम की boor में छोड़ कर सुस्ताने लगा। और कुछ देर बाद दोनो अपने अपने कमरे मे आकर लेट गए।

अगले दिन सुबह जब राजेश अखाड़े से घर आया।

पदमा _राजेश बेटा एक काम करेगा?

राजेश _बोलो ताई क्या काम है?

पदमा _बेटा, ज्योति का 8वा माह चल रहा है। उसे एक बार स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर जांच कराना चाहिए ताकि पता चल सके की बच्चा ठीक तो है। खेत में अभी काम बहुत है भुवन का खेत जाना जरूरी है तुम ही ज्योति को ले स्वास्थ्य केंद्र ले जाते।

राजेश _ठीक है ताई। वैसे कब चलना है।

पदमा _बेटा, 10बजे चले जाना, ज्योति को लेकर।

राजेश _ठीक है ताई।

पदमा ने ज्योति को आवाज़ दिया,,,

पदमा _ज्योति,,,

ज्योति _क्या है मां?

पदमा _बेटी जाओ तुम नहा धोकर नाश्ता कर तैयार हो जाओ फिर आज तुम राजेश के साथ स्वास्थ्य केंद्र चली जाना, एक बार तुम्हारा जांच कराना जरूरी है।

ज्योति _ठीक है मां।

राजेश और ज्योति दोनो नहा धोकर नाश्ता करके तैयार होकर भुवन के बाइक लेकर लक्ष्मण पुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए चले गए।

आगे क्या हुआ अगले अपडेट में,,,
 
राजेश भुवन की बाइक लेकर, ज्योति को बैठाकर लक्ष्मण पुर स्वास्थ्यकेंद के लिए निकल पड़ा।

गांव की सड़क खराब था, जगह जगह गड्ढे।

राजेश _दीदी रास्ता बहुत खराब है सम्हलकर बैठना।

ज्योति ने एक हाथ से बाइक और एक हाथ से राजेश का कंधा पकड़ लिया।

राजेश धीरे धीरे बाइक चलाने लगा।

भानगढ़ पहुंचने के बाद रास्ता कुछ ठीक था।

ज्योति कुछ बोल नहीं रही थी, खामोश बैठी थी।

उसने राजेश के कंधे से हाथ हटा दिया।

राजेश _दीदी, तुम चुप क्यू हो, कुछ बोल क्यू नही रही?

ज्योति _जो तुम कर रहे हो न, बहुत गलत कर रहे हो।

राजेश _दीदी मैं कुछ समझा नहीं। मैं क्या गलत कर रहा हूं।

ज्योति _अपने ही भाभी के साथ, जो चोरी छिपे खेल खेल रहे हो उसके बारे में बोल रही हू। मुझे सब पता चल गया है। तुम दोनो की करतूत।

तुम लोगो को घर की मान मर्यादा की कोइ चिन्ता नही, छी।

राजेश _ओह, पर आपको कैसे पता चला?

ज्योति _पाप को आखिर कितने ही छुपाने की कोशिश करो एक दिन लोगो के सामने सच्चाई आ ही जाती है। कभी तुम लोगो ने सोचा है घर के लोगो को सच्चाई पता चलेगी तो उन पर क्या बीतेगी?

मेरा तो मन कर रहा था की मां को सब सच बता दूं, जो तुम लोग चोरी छिपे गुल खिला रहे हो।

पर सोंची कि ये बात उन्हे पता चली तो पता नहीं मां क्या करेगी?

घर में बवाल न मचा दे, और यह बात बाहर वालो को पता चला तो परिवार की कितनी बदनामी होगी। यह सोचकर मैं चुप हो गई।

बोलो कब से चल रहा है ये तुम लोगो का खेल?

राजेश चुप रहा,,

ज्योति _तुम चुप क्यू हो कुछ बोलते क्यू नही?

राजेश _दीदी, अब मैं क्या बोलूं? अब जानकर क्या करोगी, कैसे और कब से चल रहा है?

आप यह समझ लीजिए की मैं एक चोर हूं, और आपने मुझे चोरी करते पकड़ा है अब आप जो भी सजा दोगी, मुझे मंजूर होगा।

ज्योति _देखो मैं नही चाहती की तुम लोगो के कारण घर की शांति भंग हो , मैं तुम लोगो को एक मौका देना चाहती हूं की आज के बाद तुम लोग यह गलती फिर नही करोगे, अगर फिर से मैने तुम दोनो को पकड़ा तो मैं मां को सब बता दूंगी।

राजेश _ठीक है दीदी, आज के बाद मैं भाभी के साथ ऐसा कुछ भी नही करूंगा।

पर,,

ज्योति _

पर क्या?

राजेश _कही, भाभी मेरे कमरे में आकर, मुझसे जिद करेगी तो, मुझे नींद नही आ रही? मेरी प्यास बुझाओ तब।

ज्योति _मैने उसे भी समझा दिया है?

और वो मुझे भरोसा दी है कि फिर वह ऐसी गलती नही करेगी?

राजेश _ओह,तो भाभी से इस बारे में बात हो गई है।

ज्योति _हां, उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली है।

राजेश _ओह ऐसा है तो मैं भी आपको भरोसा दिलाता हूं, की अब ये गलती नही होगी।

हमे माफ कर दो, प्लीज।

ज्योति _ठीक है, पर फिर गलती किए न, तो फिर,, मैं मां को सब बता दूंगी।

राजेश _नही बाबा, अब नही करेंगे ऐसी गलती।

ज्योति _मुझे तुम लोगो से यहीं उम्मीद है?

राजेश _दीदी, आप बताई नही आखिर आपको पता कैसे चला?

ज्योति _रात को मैं पेशाब करने उठी थी। बाड़े की ओर गया तो किसी के चीखने कराहने की आवाज़ आ रही थी? तुम दोनो के कमरे को चेक किया तुम दोनो कमरे में नही मिले, मैं समझ गई तुम दोनो चोरी छिपे क्या गुल खिला रहे हो?

राजेश _ओह।

ज्योति _पर एक बात समझ नही आई, पुनम इतनी चीख क्यू रही थी? मुझे तो एक पल ये लगा की कहीं उसके साथ मारपीट तो नही कर रहे, फिर उसकी कराहने की आवाज़ सुनाई पड़ी, मैं समझ गई बाड़े में क्या चल रहा है?

वैसे उसके साथ कर क्या रहा था? वो इतनी चीख क्यू रही थी?

राजेश _दीदी, ये भी कोइ पूछने की बात है, एक औरत तभी चीखेगी न जब उसे दर्द हो?

ज्योति _पुनम, कुंवारी तो नही, फिर वो इतनी चीख क्यू रही थी? आखिर क्या कर रहे थे उसके साथ?

राजेश _दीदी, ये बात तो आप भाभी से ही पूछना?

आखिर इतनी चीख क्यू रही थी? मैं ये सब बातें आपके सामने कैसे कह सकता हूं!

ज्योति _जरूर कोइ उल्टी सीधी हरकत किया होगा?

राजेश _लो दीदी हम लक्ष्मण पुर आ गए।

यहाँ का स्वास्थ्य केंद्र कहा पर है, आपको पता है?

ज्योति _हां, उस दिशा में कुछ दूर पर,,

राजेश बाइक को उस दिशा में मोड़ दिया कुछ देर में स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए।

राजेश स्वास्थ्य केंद्र के अंदर गया, वहा एक वार्ड बॉय से बात किया?

वार्ड बॉय ने बताया कि पहले एक पर्ची कटाना होगा?

राजेश ने पर्ची बनवाया।

नर्स से मिलने पर नर्स ने कहा की पहलेआप लोग सोनोग्राफी करा लो फिर मैडम को रिपोर्ट दिखा देना की मैडम अभी आई नही है ।

स्वास्थ्य केंद्र में वैसे तो बहुत से स्टाफ थे सभी अपनी अपनी जिम्मेदारी के अनुसार काम कर रहे थे।

राजेश और ज्योति सोनोग्राफी कक्ष की ओर गए, वहा महिलाओं की काफी भीड़ थी, जो सोनोग्राफी के लिए लाइन पर बैठे थे।

राजेश _दीदी यहां तो महिलाओं की काफी भीड़ है, अपना नंबर आने में तो काफी समय लगेगा?

आप भी लाइन पर बैठ जाओ। मैं देखता हूं कोइ जुगाड हो जाए तो।

ज्योति _ठीक है।

इधर स्वास्थ्य केंद्र पर एक कार पहुंची। कार से एक एक खूबसूरत युवती उतरी। आसपास के लोग उसे नमस्ते मैडम कह रहे थे।

राजेश ने उस युवती को देखा ,

राजेश _अपने मन से कहा, ये तो दिव्या जी है?

तब उसे याद आया की, हां दिव्या जी ने तो उसे बताया था की वह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पद ज्वाइन की है।

राजेश सोच ही रहा था तभी दिव्या उसके पास से गुजरी।

दिव्या आगे बड़ चुकी थी?

तभी वह पलट कर देखी.?

दिव्या _वह राजेश के पास आई और बोली, राजेश तुम यहां,,

राजेश _हां दिव्या जी। मैं अपनी दीदी को लेकर आया हूं, चेक अप के लिए।

दिव्या _फोन कर मुझे बताया क्यू नही, कितना समय हो गया, यहां आए।

राजेश _जी, कुछ ही समय huwa है।

दिव्या _ओह, तुम मेरे कक्ष में आओ।

राजेश दिव्या के पीछे पीछे उसके रूम में चली गई।

दिव्या ने राजेश को चेयर पे बैठने कहा।

और खुद अपने चेयर पर बैठ गई।

दिव्या _कैसे हो राजेश? कैसी चल रही है तुम्हारी आई ए एस की तैयारी?

राजेश _मैं बिल्कुल ठीक हूं दिव्या जी। आई ए एस की प्रारंभिक परीक्षा हो चुकी है, अब मुख्य परीक्षा की तैयारी में लगा हूं।

आप बताइए, लगता है आपने यहां की जिम्मेदारी बड़े अच्छे से सम्हाल ली है।

दिव्या मुस्कुराई,,

दिव्या _तुम कह रहे थे कि अपने दीदी को लेकर आए हो। वो कहा है?

राजेश _हा, दीदी प्रेगनेंट है, ताई ने कहा एक बार चेक अप करा, ले आते सब ठीक तो है, तो मैं दीदी को यहां ले आया, वो सोनोग्राफी के लिए अपनी बारी की वेट कर रही है।

ज्योति _ओह, क्या नाम है? दीदी का,,

राजेश _जी, ज्योति

दिव्या ने, सोनोग्राफी करने वाले डाक्टर को फोन किया और कहा कि वहा पर ज्योति नाम की महिला होगी। उसका पहले सोनोग्राफी कर दो और रिपोर्ट मेरे रूम में भेज दो।

और सोनोग्राफी हो जाने पर ज्योति को मेरे रूम मे भेज देना।

दिव्या _राजेश तुम तो हवेली के तरफ आना ही भुल गए।

राजेश _दिव्या जी हवेली पर जाने के लिए कोइ वजह तो होनी चाहिए न।

दिव्या _क्यू, मुझसे मिलने तो आ सकते हो? नही तो फोन पर ही हालचाल पुछ लेते।

राजेश _जी, आप यहां के राजकुमारी हैऔर मैं एक,,

वैसे भी आपकी जान बचाने की कीमत ठाकुर साहब से वसूल चुका हु, वह मुझसे ऐसे भी नाराज होंगे?

दिव्या _तुमने गांव वालो की भलाई के लिए, किया अपने लिए नही।

खैर छोड़ो, ये बताओ क्या लोगे चाय या काफी?

अरे मैं भी क्या पुछ रही? तुम्हे तो काफी ज्यादा पसंद है।

राजेश _दिव्या जी रहने दीजिए।

दिव्या _ऐसे कैसे रहने दू।

दिव्या ने अपने मेज पर रखे घंटी बजाया।

चपरासी अंदर आया।

चपरासी _कुछ काम था मैडम जी।

दिव्या _हां, देखो कैंटीन से दो बढ़िया सी कॉफी बनवाकर लाना।

चपरासी _जी मैडम जी।

इधर सोनोग्राफी रूम की नर्स बाहर आकर वहा बैठे महिलाओं के पास जाकर नाम पुकारा,,

तुम में से ज्योति कौन है?

ज्योति _जी मैं?

नर्स _तुम अंदर आ जाओ।

ज्योति को आश्चर्य huwa उसके पहले बहुत से महिलाए कतार में थी फिर अचानक से मुझे क्यू बुलाया गया?

वह अंदर गई?

डाक्टर द्वारा उनका सोनोग्राफी किया गया।

सोनोग्राफी होने के बाद नर्स ने कहा की आपको मैडम ने अपने रूम में बुलाया है। एक अन्य नर्स को रूम तक छोड़ आने को कहा!

ज्योति दिव्या के रूम में गई।

जब वह अंदर गई तो देखा राजेश वही बैठा है।

राजेश _दिव्या जी, ये है मेरी दीदी।

दिव्या _आओ दीदी बैठो।

ज्योति _जी, नमस्ते मैडम जी।

राजेश _दीदी, दिव्या जी यहां की मुख्य चिकित्सा अधिकारी है! इसी के कहने पर आपका सोनो ग्राफी पहले किया गया।

ज्योति _धन्यवाद मैडम जी।

दिव्या _दीदी इसमें धन्यवाद की क्या बात? तुम राजेश की दीदी हो, तो मेरे भी दीदी हुवे।

एआपको पता नही राजेश का कितना बड़ा अहसान है मुझपर।

तभी चपरासी, काफी लेकर आया।

दिव्या _दीदी आप कॉफी लेंगी।

ज्योति _नही मैडम जी, मैं कॉफी नही लेती।

दिव्या _चाय, मंगवा देती हूं।

चपरासी से एक चाय लाने कहा।

बात चीत करते करते काफी पीने लगे।

कुछ देर में सोनो ग्राफी का रिपोर्ट भी आ गया।

दिव्या _दीदी आपका सोनोग्राफी रिपोर्ट तो बहुत अच्छा है?

आपको कोइ समस्या तो नही होती?

ज्योति _जी कोइ समस्या तो नही पर,,

दिव्या _पर क्या? देखिए दीदी आप संकोच न करो, जो भी समस्या है निःसंकोच बताओ।

ज्योति _जी, पेशाब कुछ ज्यादा बार आती है?

दिव्या _पेशाब का बार बार आना ऐसे अवस्था में सामान्य बात है। पर कोइ इफेक्शन तो नही चेक करना होगा?

अच्छा चलो चेक अप रूम में चलते हैं? मैं चेक करती हूं।

ज्योति _जी।

दिव्या _, राजेश तुम यहीं रुको मैं चेकअप करके आती हूं। चलिए दीदी।

दिव्या और ज्योति दोनो चेकअप रूम मे चले गए।

वहा दिव्या ने ज्योति को बेड पर लेटने कहा।

दिव्या ने अपने हाथ में दस्ताना पहना, और ज्योति को पेटीकोट साड़ी ऊपर उठाने कहा, ताकि योनि की जांच कर सके।

ज्योति शर्माती हुई, अपनी पेटीकोट और साड़ी ऊपर उठा दी।

जब दिव्या ने योनि पर घने बाल देखा।

ज्योति _ये क्या दीदी, इतने बाल, ऐसी अवस्था में योनि बिल्कुल साफ़ सुथरा होनी चाहिए, नही तो इन्फेक्शन फैल सकता है।

दिव्या ने ज्योति की योनि के बाल हटाए और उसकी योनि के अंदर दो उंगली डाली।

ज्योति सिसक उठी।

दिव्या ने देखा योनि से चिपचिपा पदार्थ निकल रहा है।

ज्योति _दीदी आपकी योनि तो एकदम गीली है।

लगता है गर्भवास्था के दौरान आपकी सेक्स इच्छा बड़ी गई है।

ज्योति शर्मा गई।

दिव्या _दीदी, अधिकांश महिलाओं में ऐसी अवस्था में यौन इच्छा बड़ जाती है यह सामान्य बात है।

दिव्या ने ज्योति की boor का पानी उंगली में ले कर, उस पर कुछ टेस्ट किया, और पता किया कोइ इन्फेक्शन तो नही।

दिव्या _दीदी, योनि में कोइ इन्फेक्शन तो नही है। पर इस पर ऐसे ही बाल रहेंगे तो इन्फेक्शन फैल सकता है इन बालों को घर जाने के बाद साफ़ कर लेना।

तुम बता रही थी की बार बार पेशाब लगती है, यह भी सामान्य है, पर पेशाब लगे तो उसे रोकना मत नही तो इन्फेक्शन का डर रहता है।

और हां ऐसी अवस्था में यौन इच्छा बड़ जाने पर तुम यौन संबंध बना सकती हो पर ध्यान रखना पेट पर भार नही पड़नी चाहिए सुरक्षती आसनों का प्रयोग करना।

आपको और कोइ समस्या तो नही है।

ज्योति _जी नही।

चेकअप के बाद दोनो कमरे से बाहर आ गए।

राजेश _दिव्या जी, सब ठीक तो है न।

दिव्या _राजेश सब अच्छा है, मैं कुछ दवाई दे रही हूं उसे समय पर खाने से बच्चा और मां दोनो के लिए लाभकारी होगा उसमें कैल्शियम है जो बच्चे और मां के लिए फायदेमंद है।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

राजेश ने दिव्या जी से दवाई प्राप्त कर कहा,,

राजेश _अच्छा दिव्या जी अब हम चलते हैं।

आपको भी अन्य मरीजों को देखने है।

दिव्या _अच्छा ठीक है, पर कोइ समस्या आए तो मुझे फोन करना।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

दिव्या _वैसे तुम लोग आए किसमे हो?

राजेश _जी बाइक से।

दिव्या _राजेश, मैंने तुम्हारे गांव का रास्ता देखा है जगह जगह कितने गढ्ढे है। अगर कुछ हो गया तो।

राजेश _दिव्या जी अब कर भी क्या सकते है मजबूरी है। और कोइ साधन भी नहीं।

दिव्या _राजेश तुम एक काम करो, तुम्हे कार चलाने तो आती होगी। मेरा कार ले जाओ दीदी को घर छोड़ देना, मैं तो शाम को 5बजे के बाद ही घर जाती हूं उसके पहले कार को यहां ले आना।

राजेश _पर दिव्या जी,

दिव्या _पर वर कुछ नही, लो चाबी, और जाओ दीदी को छोड़ आओ।

राजेश _धन्यवाद दिव्या जी।

दीदी चलो कार पे बैठो।

ज्योति पीछे की दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगी।

राजेश _दीदी, सामने वाली सीट पर बैठो।

ज्योति संकोच करने लगी।

राजेश _, दीदी क्या सोचने लगी।

ज्योति _गांव वाले देखेंगे तो क्या सोचेंगे?

राजेश _गांव वाले कुछ नहीं सोचेंगे चलो आ जाओ।

ज्योति सामने वाली सीट पर बैठ गई।

राजेश ने कार चला दिया।

कुछ देर बाद,,,

राजेश _दीदी कैसा महसूस हो रहा है?

ज्योति _मैं तो शादी के समय कार पे बैठी थी, उसके बाद मौका ही नही मिला। कार पे बैठने की मेरी बड़ी इच्छा थी।

राजेश _ओह ऐसी बात है तो कहीं दूर घुमा ले आता हूं आपको कार पे। वैसे भी अभी तो 12बजे है। हमारे पास काफी समय है कार में घूमने का आपका इच्छा पूरा कर देता हूं।

ज्योति _पर जायेंगे कहा,,,

राजेश _लॉन्ग ड्राइव पर चलते है, वैसे भी यहां चारो तरफ पहाड़, घने पेड़ पौधे और ये सुहाना मौसम, ऐसे में कार चलाने और घूमने का एक अलग ही आनंद है।

ज्योति _अगर ऐसा है तो चलो पर समय पर घर पहुंचना है।

राजेश _दीदी आप बिल्कुल फिक्र न करो, हम समय पर घर पहुंच जायेंगे वैसे भी 5बजे के पहले कार वापस करना है।

राजेश ने कार हाईवे पे आगे बड़ा दिया,,

कुछ दूर चलने के बाद

सड़क के आज बाजू पहाड़ पर्वत, घने पेड़ पौधे,, कलकल करती बहती पानी बहुंत ही मनोरम नजारा था।

ज्योति _राजेश दिव्या जी कितनी सुंदर और संस्कारी है। यकीन नही होता की वह उस जालिम ठाकुर की बेटी हैं । उनके अंदर घमंड नाम की चीज नही।

राजेश _दिव्या जी ही नही उसकी मां और बहन गीता जी भी बहुत संस्कारी है।

ज्योति _पर राजेश तुम्हे नही लगता कि दिव्या तुम्हारी कुछ ज्यादा ही परवाह करती है।

राजेश _क्यू की मैने उसकी जान बचाया था न इसलिए, राजेश ने ज्योति को सारी बाते बता दी।

ज्योति _ओह तो ये बात मैं तो कुछ और ही समझ बैठी थी।

राजेश _क्या, समझ बैठी थी दीदी।

ज्योति _वही जो कुछ लोग तुम्हारे और दिव्या के बारे में कहते है खिचड़ी पकने वाली बात।

राजेश _लोगो को तो मौका चाहिए, अफवाह उड़ाने के लिए,,

दीदी उधर देखो कितनी सुंदर दृश्य है?

ज्योति _हां, वैसे तुम्हारा शुक्रिया।

राजेश _किस बात के लिए दीदी।

ज्योति _कार में घूमने की मेरी शौंक पूरा करने के लिए।

राजेश _मैं तो अपने दीदी के खुशियों के लिए कुछ भी कर सकता हूं। बताओ और कोइ शौंक हो तो उसे भी पूरा कर दू।

ज्योति _अभी तो और कोइ शौंक नही है, पर आगे कोइ हो जाए तो बताऊंगी।

राजेश _बिल्कुल बताना अपने भाई से संकोच न करना। बहन को हर ईच्छा पूरा करना भाई का फर्ज है।

ज्योति _लगता है हम काफी दूर चले आए। लगभग एक घंटा हो गया हमे।

राजेश हा 50km दूर आ गए।

ज्योति _चलो अब हम वापस चलते हैं?

राजेश _ठीक है दी,,

राजेश ने कार सड़क किनारे रोक दिया,,

राजेश _अड़े क्या huwa कार क्यू खड़ा कर दी।

राजेश _दीदी, मुझे शुशु आ रही है, तुम कार में बैठी रहो मैं कर के आता हूं।

राजेश कार से उतरकर जाने लगा, तभी,,

ज्योति _राजेश, सुनो तो,,

राजेश _क्या बात दीदी,,

ज्योति संकोच करती हुई बोली,, मुझ भी लगी है,,

राजेश _दीदी मैं करके आता हूं फिर तुम चले जाना।

ज्योति _पर यहां तो चारो तरफ घने जंगल है न बाबा मैं अकेले नही जा पाऊंगी।

राजेश _, ओह ऐसा है तो फिर चलो तुम भी मेरे साथ,,

ज्योति भी कार से उतर गई।

राजेश सड़क से उतरकर थोड़े झाड़ी के अंदर की ओर चला गया और ज्योति दे कहा,,

दीदी आप वहा पर जाकर करलो,,

मैं यहां पर कर लेता हूं।

ज्योति _यहां तो घने जंगल है कोइ जंगली जानवर आ गया तो,,

तुम पास ही रहो ज्यादा दूर मत जाओ।

राजेश _ओह दीदी इतना डर भी ठीक नहीं।

ज्योति _सुनसान जगह है और घना जंगल, मेरी जगह कोइ और हो तो वो भी डरेगी,,

देखो तुम पीछे मुंह कर लो और तुम्हे तुम्हारी दीदी की कसम है, पीछे मुड़कर मत देखना।

राजेश _ठीक है दीदी, पीछे मुड़कर मैं भी कर लेता हूं, तुम भी करलो।

ज्योति _ठीक है।

राजेश पीछे मुड़कर खड़ा हो गया।

जब ज्योति ने देखा राजेश पीछे मुड़कर खड़ा हो गया है। वह अपनी पेटी कोट और साड़ी उठाकर दोनो पैर फैला कर मूतने लगी, इधर राजेश भी अपने पैंट का चैन खोल लंद बाहर निकाला।

जब ज्योति की मूत की आवाज़ चर चर,

राजेश की कानो पर सुनाई पड़ी उसे वह दृश्य याद आ गया जब राजेश ने घर के बाड़े में बने मूत्रालय में ज्योति को खड़े खड़े मूत ते देखा था।

उसके शरीर में रक्त संचार बड़ गया।

उसका लंद तनकर खड़ा हो गया।

वह मूतने की कोशिश करने लगा पर मूत तनाव के कारण मूत बाहर नही आ पा रहा था।

इधर ज्योति ने पेशाब कर लेने के बाद। पीछे मुड़कर राजेश को देखी।

राजेश पीठ पीछे कर खड़ा था वह एक हाथ से लंद पकड़ा huwa था। पर ज्योति को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

ज्योति _राजेश जल्दी करो और कितना देर लगेगा।

राजेश _जी दीदी।

राजेश ने देखा की मूत बाहर नही आने पर अपना लंद को हाथ से आगे पीछे करने लगा।

ज्योति को पता चल गया कि राजेश अपना लंद हिला रहा है।

ज्योति _राजेश, ये तुम क्या कर रहे हो? पेशाब कर रहे हो या कुछ और,,

राजेश _दीदी पेशाब करने की कोशिश कर रहा हूं, पर पेशाब बाहर निकल नही रहा है ।

ज्योति _तुम्हे पेशाब तो लगी है न,

राजेश _हां दीदी, पेशाब तो लगी है, पर निकल नही रहा,,

ज्योति _ओ हो, यू जंगल में ज्यादा देर तक खड़ा रहना ठीक नहीं,, जल्दी करो बाबा।

राजेश _दीदी कोशिश तो कर रहा हूं, पर हो ही नही रहा।

ज्योति _ओ हो ऐसा करो तुम कहीं और कर लेना जब पेशाब नही आ रहा है तो जबरदस्ती मत करो।

राजेश _ठीक है दीदी।

राजेश अपना लंद चड्डी के अंदर डाल दिया लेकिन लंद खड़ा होने के कारण चैन लगाने में दिक्कत हुई। चैन चमड़ी को पकड़ लिया।

राजेश चीख पड़ा,, आह,,

ज्योति _क्या huwa राजेश

राजेश दर्द में बोला,, दीदी चैन पकड़ लिया,

बड़ा दर्द हो रहा है,,

ज्योति _ओहो तुम तो बिल्कुल बच्चो की तरह हरकत कर रहे हो,,

बड़ा दर्द कर रहा है क्या

राजेश _हां दीदी,,

ज्योति _ओहो मुझे दिखाओ,,

राजेश _दीदी मुझे शर्म आयेगी।

ज्योति _कल पुनम के साथ करने में तो कोइ शर्म नही आ रही थी, मेरे सामने शर्म आ रही। दिखाओ मुझे

राजेश ज्योती की ओर मुंह करके खड़ा हो गया।

ज्योति की नजर राजेश के पैंट पर सामने बना उभार पर गया।

राजेश _आह दीदी बड़ा दर्द कर रहा है।

ज्योति _दिखाओ मुझे

ज्योति नीचे झुककर चैन को देखने लगी,

चैन ने तुम्हारे अंडर वियर को पकड़ लिया और शायद अंदर की चमड़ी भी,

ज्योति चैन को खोलने की कोशिश करने लगी।

राजेश कराह उठा,,

ज्योति _देखो तुम्हे दर्द तो होगा, दर्द सहना पड़ेगा मैं चैन खोल रही हूं।

ज्योति चैन को जोर से ऊपर खींच नीचे खींच दी।

राजेश चीख पड़ा,,

ज्योति _देखो कहीं ज्यादा तो नही कट गया।

ज्योति ने अंडर वियर नीचे खिसकाया,

वह राजेश का लंद देखकर दंग रह गई। इतना बड़ा और मोटा लंद पहली बार देख रही थी वह आश्चर्य से देख रही थी।

राजेश दीदी जलन हो रहा है।

ज्योति होश में आई।

ज्योति _चमड़ी कट गई है।

ज्योति ने अपना थूक उंगली में लेकर कटे भाग में मलने लगी।

ज्योति _घर जाकर इसमें मलहम लगा लेना।

चलो पेशाब कर लो तभी तुम पैंट पहन पाओगे और वह मुस्कुराने लगी।

दर्द के कारण लंद का तनाव कम हो गया था। राजेश ज्योति के सामने ही लंद पकड़ कर मूतने लगा।

ज्योति राजेश को मूत ते हुए देखने लगी, और मुस्कुराने लगी।

मूतने के बाद लंद और छोटा हो गया।

ज्योति _चलो अब पैंट पहन लो।

राजेश ने पैंट का चैन लगा लिया।

ज्योति और राजेश वहा से जाने लगे।

ज्योति मुंह बंद कर हसने लगी,,

राजेश _दीदी हस क्यू रही हो।

ज्योति _कुछ नही।

वे दोनो कार में बैठ कर घर के लिए वापस जाने लगे।

ज्योति _अब पता चला, रात में पुनम इतनी चीख क्यू रही थी।

आधे रास्ते में,,,

राजेश _दीदी वहा पर देखो एक ढाबा है। लंच का भी समय हो गया है चलो ढाबे पर कुछ खा लेते है।

ज्योति _अच्छा चल

राजेश ने कार ढाबा के सामने खड़ा कर दिया।

दोनो ढाबा के अंदर गए।

और ज्योति का मन पसंद खाना आर्डर किया, खाना खाने के बाद वे घर के लिए निकल पड़े जब वे भानगढ़ पहुंचे तो लोग उन्हें देखने लगे वही हाल गांव पहनुचने पर था।
 
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