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लखनने दीलवाये ड्रेसमे वो बहुत ही खुबसुरत लग रही थी.. सीर्फ ड्रेस ही नही.. चंदाने अपने अंतर वस्त्र भी वही पहेने थे.. जो उनको लखनने उस रात गीफ्ट कीये थे.. फीर चंदाके पुनम ओर राधीकाको भी आज चंदाका अलग रुप दीख रहा था.. चंदाके पाससे पुनमने वीजयको लेलीया..
ओर उसे आज रात अपने साथ सुलानेकी बात करते चंदाको लखनके साथ घुमने भेज दीया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार हुइ.. ओर वो लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते कामुक स्माइल करते लखनकी बाजु वाली सीटमे बैठ गइ.. ओर लखनने कार जाने दी..
लखन : (मुस्कुराते) हांतो मेडम.. कीधर चलना हे..?
चंदा : (मुस्कुराते तीरछी नजरोसे) मुजे क्या पता.. सब आप लोगोने ही डीसाइड कीया हे.. ले चलो.. जहा आपका मन करे..
लखन : (मुस्कुराते) तो फीर मुवी देखने चले..?
चंदा : (सामने देखते मुस्कुराते) क्या अभी..? सेकन्ड सोमे..? मुजसे इतनी जल्दी छुटकारा पानेका इरादा हे क्या..? ये आपकी गर्लफ्रेन्ट इतनी जल्दी आपका पीछा छोडने वाली नही हे.. अेक बार सोचलो.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) तो फीर आपही बतादो.. वही ले चलता हु.. मुजे कोइ जल्दी नही हे.. आज पुरी साम ओर रात आपके नाम..
चंदा : (हसते) रात भी..? गुड बोय.. तो पहेले ले चलो.. वोही गार्डन.. जहा हमारे नये रीस्तोकी सुरुआत हुइ थी.. फीर कुछ खा पीलेगे.. ओर आरामसे लास्ट सो मे चलेगे.. चलेगानां..?
लखन : (मुस्कुराते) अरे चलेगा क्या.. दोडेगा.. आज मेरी मासुका जो साथमे हे..
चंदा : (तीरछी नजरोसे हसते) सोचलो ये मासुका तुमसे बहुत बडी हे.. आप मेरे धीरेनकी उम्रके बराबर हो.. चलेगी ये मासुका..?
लखन : (मुस्कुराते) ओ..हो.. तो ये दीकत हे आपको..? लेकीन मेडम.. प्यारमे उमर नही देखी जाती.. बस.. प्यार हो जाता हे.. अब आप मेरी पकी वाली मासुका हे..
चंदा : (सरमाते हसते) दीकत नही हे.. लेकीन प्यारके इजहारके बाद भी बहुत जल्द भुल जातेहो अपनी मासुकाको.. घरमे तो सामने भी नही देखते.. देखना अब जींदगी भर इस मासुकाको जेलना पडेगा.. मेने बहुत कुछ सोच साजकर फैसला लीया हे.. हम इस बारेमे आरामसे बात करेगे..
फीर लखनने कारको वोही गार्डनकी ओर लेली.. जहा दोनो पहेले भी आ चुके थे.. लखनने अेक खाली जगाह कार पार्क करदी.. चंदा उतरके जटसे लखनके पास आ गइ.. फीर दोनो गार्डनके अंदर चले गये.. तो चंदाने पहेली बार लखनके हाथमे हाथ डाल दीया..
जीसे लखन भी हसने लगा.. दोनो अैसे चल रहे थे जो नये नये प्रेमी जोडे हो.. दोनो धीरे धीरे सबकुछ देखते चल रहेथे.. लखनने उसे अेक बेन्चपे बैठनेकी पेसकस कीतो चंदाने वहा बहुत लोग हे कहेते आगे चलनेको कहा.. तो लखन भी समज गयाकी चंदाको क्या चाहीये..
काफी दुर चलते अेक छोटासा तालाब जैसा दीखा तो चंदा लखनका हाथ पकडकर उसे वहा लेगइ.. जहा लोग भी बहुत कम थे.. ओर जीतने भी थे वो सब लवर्स थे.. जो अपने अपने पार्टनरके साथ प्यार करनेमे बीजी थे.. चंदा लखनको वही लेगइ.. ओर अेक सुमसान जगहको चुनके वही नीचे घासपे बैठ गये..
चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. यहा कीतना रोमांन्टीक माहोल हेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) जा..नु..? मेडम कही मे गलत तो नही सुन रहा..?
चंदा : (सरमाते पीठमे अेक मुका मारते) क्या गलत कहा मेने..? मेरे बोयफ्रेन्डको जानु नही तो ओर क्या कहु..? लखन.. अब मेने डीसाइड करलीया हे.. की मे अपनी बाकी जींदगी खुलकर जीयुगी.. सीर्फ मेरे लीये.. बस.. अेक ही बीनती हे.. कभी मेरा साथ मत छोडना..
लखन : (पीछेसे कंधा पकडकर अपनी ओर खीचते) कभी नही.. कभी नही छोडुगा.. अब आप सब मेरी जीम्वेवारी हो..
चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. पता हे यहा आनेसे पहेले पुनोदीने मुजे क्या कहा..?
लखन : (गाल चुमते) नही तो.. क्या कहा..?
चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) कहा.. भाभी.. अपनी जींदगीकी नइ सुरुआत करने जा रही हो.. तो आपकी नइ जींदगीके लीये शुभकानाये.. क्या उनको मेरे मनकी बात भी पता चल जाती हे..?
लखन : (मुस्कुराते) सीर्फ मनकी बात नही.. उनको हमारे भुत भवीस्य ओर वर्तमानके बारेमे भी पता चल जाता हे.. मंजुमोम ओर पुनो जीनके बारेमे सोचती हे.. उनका पुरा पीक्चर उनके सामने आजाता हे..
चंदा : (मुस्कुराते) कीतना अजीब हेनां..? कोइ सोच भी नही सकतेकी आजके जमाने भी ये सब पोसीबल हे.. हमारा गांवभी कीतना अेडवान्स ओर खुली सोच वाला हो गया हे..
लखन : (मुस्कुराते चंदाके बालकी लट सही करते) डार्लींग.. सामान्य लोग.. ओर हम लोगोमे यही तो फर्क हे.. मंजु मोम सही केह रही हे.. की हम कोइ सामान्य लोग नही हे..
ओर उसे आज रात अपने साथ सुलानेकी बात करते चंदाको लखनके साथ घुमने भेज दीया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार हुइ.. ओर वो लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते कामुक स्माइल करते लखनकी बाजु वाली सीटमे बैठ गइ.. ओर लखनने कार जाने दी..
लखन : (मुस्कुराते) हांतो मेडम.. कीधर चलना हे..?
चंदा : (मुस्कुराते तीरछी नजरोसे) मुजे क्या पता.. सब आप लोगोने ही डीसाइड कीया हे.. ले चलो.. जहा आपका मन करे..
लखन : (मुस्कुराते) तो फीर मुवी देखने चले..?
चंदा : (सामने देखते मुस्कुराते) क्या अभी..? सेकन्ड सोमे..? मुजसे इतनी जल्दी छुटकारा पानेका इरादा हे क्या..? ये आपकी गर्लफ्रेन्ट इतनी जल्दी आपका पीछा छोडने वाली नही हे.. अेक बार सोचलो.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) तो फीर आपही बतादो.. वही ले चलता हु.. मुजे कोइ जल्दी नही हे.. आज पुरी साम ओर रात आपके नाम..
चंदा : (हसते) रात भी..? गुड बोय.. तो पहेले ले चलो.. वोही गार्डन.. जहा हमारे नये रीस्तोकी सुरुआत हुइ थी.. फीर कुछ खा पीलेगे.. ओर आरामसे लास्ट सो मे चलेगे.. चलेगानां..?
लखन : (मुस्कुराते) अरे चलेगा क्या.. दोडेगा.. आज मेरी मासुका जो साथमे हे..
चंदा : (तीरछी नजरोसे हसते) सोचलो ये मासुका तुमसे बहुत बडी हे.. आप मेरे धीरेनकी उम्रके बराबर हो.. चलेगी ये मासुका..?
लखन : (मुस्कुराते) ओ..हो.. तो ये दीकत हे आपको..? लेकीन मेडम.. प्यारमे उमर नही देखी जाती.. बस.. प्यार हो जाता हे.. अब आप मेरी पकी वाली मासुका हे..
चंदा : (सरमाते हसते) दीकत नही हे.. लेकीन प्यारके इजहारके बाद भी बहुत जल्द भुल जातेहो अपनी मासुकाको.. घरमे तो सामने भी नही देखते.. देखना अब जींदगी भर इस मासुकाको जेलना पडेगा.. मेने बहुत कुछ सोच साजकर फैसला लीया हे.. हम इस बारेमे आरामसे बात करेगे..
फीर लखनने कारको वोही गार्डनकी ओर लेली.. जहा दोनो पहेले भी आ चुके थे.. लखनने अेक खाली जगाह कार पार्क करदी.. चंदा उतरके जटसे लखनके पास आ गइ.. फीर दोनो गार्डनके अंदर चले गये.. तो चंदाने पहेली बार लखनके हाथमे हाथ डाल दीया..
जीसे लखन भी हसने लगा.. दोनो अैसे चल रहे थे जो नये नये प्रेमी जोडे हो.. दोनो धीरे धीरे सबकुछ देखते चल रहेथे.. लखनने उसे अेक बेन्चपे बैठनेकी पेसकस कीतो चंदाने वहा बहुत लोग हे कहेते आगे चलनेको कहा.. तो लखन भी समज गयाकी चंदाको क्या चाहीये..
काफी दुर चलते अेक छोटासा तालाब जैसा दीखा तो चंदा लखनका हाथ पकडकर उसे वहा लेगइ.. जहा लोग भी बहुत कम थे.. ओर जीतने भी थे वो सब लवर्स थे.. जो अपने अपने पार्टनरके साथ प्यार करनेमे बीजी थे.. चंदा लखनको वही लेगइ.. ओर अेक सुमसान जगहको चुनके वही नीचे घासपे बैठ गये..
चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. यहा कीतना रोमांन्टीक माहोल हेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) जा..नु..? मेडम कही मे गलत तो नही सुन रहा..?
चंदा : (सरमाते पीठमे अेक मुका मारते) क्या गलत कहा मेने..? मेरे बोयफ्रेन्डको जानु नही तो ओर क्या कहु..? लखन.. अब मेने डीसाइड करलीया हे.. की मे अपनी बाकी जींदगी खुलकर जीयुगी.. सीर्फ मेरे लीये.. बस.. अेक ही बीनती हे.. कभी मेरा साथ मत छोडना..
लखन : (पीछेसे कंधा पकडकर अपनी ओर खीचते) कभी नही.. कभी नही छोडुगा.. अब आप सब मेरी जीम्वेवारी हो..
चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. पता हे यहा आनेसे पहेले पुनोदीने मुजे क्या कहा..?
लखन : (गाल चुमते) नही तो.. क्या कहा..?
चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) कहा.. भाभी.. अपनी जींदगीकी नइ सुरुआत करने जा रही हो.. तो आपकी नइ जींदगीके लीये शुभकानाये.. क्या उनको मेरे मनकी बात भी पता चल जाती हे..?
लखन : (मुस्कुराते) सीर्फ मनकी बात नही.. उनको हमारे भुत भवीस्य ओर वर्तमानके बारेमे भी पता चल जाता हे.. मंजुमोम ओर पुनो जीनके बारेमे सोचती हे.. उनका पुरा पीक्चर उनके सामने आजाता हे..
चंदा : (मुस्कुराते) कीतना अजीब हेनां..? कोइ सोच भी नही सकतेकी आजके जमाने भी ये सब पोसीबल हे.. हमारा गांवभी कीतना अेडवान्स ओर खुली सोच वाला हो गया हे..
लखन : (मुस्कुराते चंदाके बालकी लट सही करते) डार्लींग.. सामान्य लोग.. ओर हम लोगोमे यही तो फर्क हे.. मंजु मोम सही केह रही हे.. की हम कोइ सामान्य लोग नही हे..
























