Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 111 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८६

सृती अपने हादसेके बाद ढाइ तीन महीना लखनसे दुर रही थी.. फीर लखनको भी भावीकासे परमीशन मील चुकी थी.. ओर इस रात लखनने राधीकाको दो दो बार ठंडी करते सुला दीया.. फीर सृती ओर लखन कइ दीनोके बाद मीले.. इस रात सृतीको फीरसे अपनी सुहागरातकी फीलींग्स आइ.. लखन बडी ही सावधानीसे सृतीको सुबह चार बजे तक चोदता रहा.. ओर सृतीको पुरी तरह तृप्त करदीया.. फीर दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सोगये.... अब आगे

दुसरे दीन सन्डे था.. तो पंचायतमे भी छुटी थी.. तो लखन मुनाके दीये हुअ‍े पेपर लेके सीधे ही रश्मीके नये घरपे चला गया.. देखा तो रश्मी सोफेपे बैठकर अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. लखनको देखते ही सरमा गइ.. ओर पलुसे अपना आंचल ढक लीया.. ओर हसने लगी..

रश्मी : (जोरोसे हसते) अरे देवजी.. आज आप रास्ता कैसे भुल गये..? कही मे गलत तो नही देख रही..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां.. अब आप भी मेरी खीली उडाओ.. क्या मे अपनी भाभीओको मीलने नही आ सकता..? घर भी नही देखा था.. तो सोचा दोनो काम हो जायेगे..

रश्मी : (भवे चडाते मुस्कुराते) दोनो काम..? मतलब कीसी ओर कामसे आये हे.. बैठीये..

तभी दोनोकी बाते सुनकर वंदना ओर टीना भी बहार आगइ.. जी हां.. सेटरडे सन्डे था तो दो दीनसे टीना भी अपनी कार लेकर रश्मीको मीलने आइ हुइ थी.. वो लखनकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. तो वंदना भी सरमाते लखनको नमस्ते करने लगी.. तभी..

लखन : (जोरोसे हसते) देखो.. मेरी भाभी होगइ फीर भी कैसे अजनबीकी तराह नमस्ते कर रही हे..? (पेपर देते) येलो.. आपके कामके लीये ही आया हु..

वंदना : (हसते) मे कोइ अजनबीकी तराह नमस्ते नही कर रही.. ये तो आपको इतनो दीनोके बाद देखा इसीलीये.. अब तो देवरके साथ मेरे जीजु भी होगये हो.. (पेपर लेते) कीसके पेपर हे..?

लखन : (मुस्कुराते रश्मीके पास बैठते) क्यु..? हमारे नये स्कुलके लीये.. अ‍ेक टीचरकी अ‍ेप्लीकेशन आइ हे.. इसे लेना ही पडेगा..

वंदना : (पेपर देखते) कही आपके बडे भैया केह रहेथे.. वोतो नही..? कोइ गीता नाम बता रहे थे.. हां.. वो ही हे.. ठीक हे.. मे उपर भीजवा दुगी.. अच्छा बोलो.. क्या पीयोगे..? चाइ या ठंडा..

लखन : (रश्मीकी ओर देखते हसते) भाभी.. ना चाइ पीनी हे ना ठंडा.. दुध पीला दीजीये..? हें..हें..हें..

रश्मी (दांत पीसते अ‍ेक मुका पीठमे मारते) बेसर्म कहीके.. अगर दुध पीना हेतो अपनी बीवीको कहो.. उनको भी बच्चा हुआ हे.. हें..हें..हें..

लखन : (कानमे धीरेसे) उनका तो रोज पीता हु.. आज आप ही पीला दीजीये.. हें..हें..हें..

कहा तो रश्मी सर्मसार होगइ.. ओर जुठा गुस्सा करते अपने दांत पीसते लखनकी पीठमे तीन चार मुके जड दीये.. जीसे लखन जोरोसे हसते उनसे दुर बैठ गया.. तो वंदना ओर टीना भी उन दोनोको लडते देखकर हसती रही.. तभी लखनका ध्यान टीनाकी ओर गया तो टीना बडी ललचाइ नजरोसे लखनकी ओर देखते हस रही थी..

लखन : (टीनाकी ओर देखते) भाभी.. ये.. मेने पहेचाना नही..

रश्मी : (टीनाकी ओर देखते मुस्कुराते) ओह.. ये टीना हे.. मेरी बचपनकी सहेली.. आपहीके सहेरमे बुटीक चलाती हे.. आपको कपडेका बहुत सौक हेनां..? तोये नइ नइ डीजाइन खुद बनाती हे..

लखन : (नमस्ते करते हसते) अच्छा..? तब तो पहेचान करनी पडेगी.. क्युकी कपडेकी खरीदी मेही करता हु..

रश्मी : (टीनाको) हां टीना.. ये हे लखन.. हमारे अ‍ेक लौते देवर.. ओर इनको कपडे खरीदनेका बहुत सौक हे.. घरकी सभी लेडीसके कपडे येही लेते हे.. ओर हमारे लीये भी.. हें..हें..हें..

टीना : (नमस्ते कहेते खुस होते) अच्छा..? तब तो जान पहेचान बढानी ही पडेगी.. मेरा नया कस्टमर जो मील गया.. हें..हें..हें..

रश्मी : (मुस्कुराते) हां देवरजी.. टीनाके वहा नये नये डीजाइनके कपडे मील जायेगे.. वोही सब डीजाइन करती हे.. बहुत बडी बुटीक हे इनकी.. हम वहा गये थे तब हमने इनकी बुटीक देखी थी..

टीना : (मुस्कुराते) हां लखनजी.. मे ही सब लेडीस कपडे डीजाइन करती हु.. हमेसा लेटेस्ट कपडे मील जमायेगे.. अभी मे अपना कार्ड देती हु.. कभी देखनेके लीये आइअ‍ेगा..

कहेते टीना बडे ही उत्साहसे अपने मोबाइलमे लखनको कपडेकी डीजाइन दीखाने लगी.. तभी दरवाजा खुला.. देखातो चारु नीशा ओर वसुधा मुस्कुराते अंदर आगये.. वंदना उनकी मम्मीके गले लग गइ.. कीसीको पता नही चलाकी टीना ओर लखनने अपने नंबर अ‍ेक्सचेन्ज करलीये.. फीर सबलोग टीनाको भी गले मीले.. तभी चारुकी नजर लखनपे गइ..

चारु : (जोरोसे हसते) अरे.. आज तो हमारे अ‍ेक लोते देवर भी आये हे.. हें..हें..हें..

लखन : (खडा होते गले मीलते) क्यु..? मे अपनी भाभीओको मीलने नही आ सकता क्या..? लगता हे यहा कोइ पार्टी बार्टी हे..

फीर लखन नीशाको भी गले मीला.. तो नीचे वही चुनवाला अहेसास.. नीशा बहुत ही सरमा गइ.. फीर लखन वसुधाको देखकर मुस्कुराया.. ओर उनको गले लगा.. तो वसुधाको थोडा जोरोसे भीच लीया.. जीसे वसुधा सर्मसार होगइ.. उनको भी नीचे चुंभन महेसुस हुइ.. तभी..
 
रश्मी : (मुस्कुराते) बस.. आज सन्डेकी छुटी थी.. तो सोचा सब साथमे बैठकर खाना खायेगे.. हमारी तो अ‍ैसी ही पार्टी होती हे..

वंदना : (मुस्कुराते) लखन भैया.. आपभी रुक जाओ.. मे पुनोदी ओर सृतीदीको फोन करके बुला लेती हु.. सब साथमे लंच करेगे..

लखन : (खडा होते) मुजे नही करना लंच.. येतो मे अ‍ैसे ही कामसे आया था.. अगर बुलाना ही होतातो पहेले फोनसे न्योता देकर बुलाती.. ये तो खामखा मे कबाबमे हडी बन गया..

चारु : (हाथ पकडकर जोरोसे बीठाते) अरे बैठो.. बहुत नखरे कर रहे हो.. हमारा भी अ‍ैसा कुछ खास प्लान नही था.. बस.. हमतो अ‍ैसे ही हर सन्डेको मीलते हे.. बैठो.. वरना पीटना पडेगा..

लखन : (जोरोसे हसते) अरे.. धमकी दे रही हो..?

चारु : (जोरोसे हसते गोदमे बैठते) हां दे रही हु.. अब उठकर दीखाओ.. हें..हें..हें..

कहेते वो लखनकी गोदमे बीना जीजक बैठ गइ तो सब जोरोसे हसने लगे.. ओर लखन भी अपने दोनो हाथोसे चारुको पेटसे पकड लीया हसते उनको अपनी गोदसे धकेलनेकी कोसीस करने लगा.. लेकीन चारु नही हटी.. तो लखनने दोनो हाथोसे उनका दोनो बुब्स थाम लीया..

ओर हल्केसे दबाया तो चारु सर्मसार होते भी जोरोसे हसने लगी.. लेकीन फीर भी लखनकी गोदसे नही उठी.. क्युकी इतने दीनोके बाद उसे अपने पीछे बुछ बडी ही चुंभन महेसुस हो रही थी.. तभी लखनने उनके कानमे फुसफुसाते कुछ कहा.. तो चारु अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. ओर वो उतेजीत होने लगी..

उसे मंजुकी कही बाते याद आने लगी.. उसे पता थाकी अ‍ेक दीन लखन ही देवायतकी सब बीवीयोको सम्हालेगा.. ओर फौरन लखनकी गोदसे उठ गइ.. माहोल ओर खुसनुमा ओर होगया.. तो इनमे रश्मी के साथ वसुधा वंदना ओर नीशा भी सामील होगइ.. चारो लखनके साथ हाथापाइ करते मस्तीया करने लगी..

वंदना भी जोरोसे हसते पुनम ओर सृतीसे फोनपे बात करने लगी.. टीना चारोकी मस्तीया देखते हसती रही.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी वसुधा ओर टीनाकी नजर बार बार लखनके पेन्टके उभारकी ओर जा रही थी.. दोनो सरमाते अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते हसने लगी..

फीर सब अ‍ैक साथ सोफेपे अ‍ेडजेस्ट करके बैठ गये.. ओर अ‍ेक दुसरेकी टांग खीचाइ करते रहे.. तबतक पुनम ओर सृती भी बच्चीके साथ आगइ.. तो वंदनाने बच्चीको पुनमसे लेलीया.. ओर उनके साथ खेलने लगी.. फीर सबने बारी बारी बच्चीको प्यार दीया..

वसुधा ओर टीनाने भी पुनमकी बच्चीको गोदमे लीया.. तब दोनोके मनमे मातृत्वके भाव जागने लगे.. टीनाकी आंख तो गीली भी होगइ.. लेकीन उसने बहुत ही जल्द अपने आपको सम्हाल लीया.. फीर लखन ओर वसुधा नइ होस्पीटलको लेकर बाते करने लगे..

लखन ने बातो ही बातोमे वसुधाको साहीलकी नइ बीवीके बारेमे बता दीयाकी वो पढाइके बाद डोक्टर बनके इधर ही आ रही हे.. फीर वंदना टीना ओर नीशाने मीलकर खाना बनालीया तो सब लोग लखनकी मस्तीया करते खाना खाने लगे.. आज सबने खुलकर लखनकी मस्तीया की..

लेकीन कीसीको अ‍ेक दुसरेके मनमे बारेमे पता नही चलाकी लखनने सबके दीलके तारको छेड दीया था.. सीर्फ पुनमको पता थाकी सबके दीलमे लखनके लीये चीन्गारी सुलग चुकी हे.. ओर आगे चलकर इनके कुछ परीणाम भी होगे.. जीसे सोचते पुनम भी बहुत खुस थी..

तो दुसरी ओर सलमा सुबह पांच बजे बहुत ही जल्द उठ गइ.. ओर अपनी सुहाग सेजसे उतरके नहाने चली गइ.. कल रात अपनी सुहागरातमे पहेली बार अपने पती ओर साहीलके अलावा तीसरे मर्दसे चुदी थी.. ओर फीरोजने उसे दो बार वायग्रा खाकर चोद लीया था..

बीलकुल वैसा ही था जैसे उनको जरीनाने बताया था.. उसे साहीलका हथीयार लेनेके बाद फीरोजका हथीयार कुछ खास फील नही हुआ.. बस.. लेटे ही वो फीरोजको सेटीस्फेक्शन देनेकी कोसीस करती रही.. पुरी सुहागरातमे फीरोजने मुस्कीलसे सलमाको अ‍ेक बार जडाया था..

सलमा कंपलीट होगइ.. ओर अ‍ेक नजर फीरोजपे डालकर बहार नीकल गइ.. फीरोज अभी भी बेसुध जैसी हालतमे लेटा हुआ था.. सलमा सीधे अपने रुममे चली गइ.. देखा तो जरीना अर्ध नंगी हालतमे अपनी चुतपे हाथ रखते सोइ हुइ थी.. ओर सलमा धीरेसे मुस्कुराते उनके पास चली गइ..

सलमा जरीनाके पास बैठ गइ.. ओर अपना अ‍ेक हाथ जरीनाके सरपे रख दीया.. तो जरीनाका पुरा बदन तप रहा था.. सलमाने अ‍ेक नजर जरीनाके गरदनपे ओर उनके आधे बहार नीकले बुब्सपे डाली.. तो वहा उनको साहीलके दीये हुअ‍े लव बाइटके नीशान दीखे..

जीसे देखते ही सलमाकी मुस्कान नीकल गइ.. उसे तस्सली मील गइ.. की चलो जरीनाने उनके साहीलको अच्छी तराह सम्हाल लीया हे.. ओर दोनोका मीलन हो चुका हे.. सलमाने जरीनाके उपर चदर डालदी.. ओर उनके सरको चुम लीया.. तो जरीनाने आंख खोलदी..
 
जरीना : (मुस्कुराते) दीदी..

सलमा : (मुस्कुराते धीरेसे सरको सहेलाते) तु कुछ मत बोल.. मुजे सब पता चल गया हे.. थेन्क्यु.. मेरे साहीलको अच्छेसे सम्हालनेके लीये.. मेने तेरी हालत देखी.. कैसी हे तेरी तबीयत..?

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. अ‍ैसा लगा.. सही मायनोमे मेरी सुहागरात कल ही हुइ हे.. मेने कल रात आप दोनोका प्यार महेसुस कीया.. मेरी सबुतो धन्य होजायेगी..

सलमा : (मुस्कुराते) कुछ मत बोलो.. बस आराम करलो.. मे ना कहु तबतक कमरेसे बहार मत नीकलना.. फीरोजके जानेके बाद हम बाते करेगे.. देखो कीतना बदन तप रहा हे.. मेरे साहीलने हालत बीगाडदी तेरी.. उनके प्यारने बुखार चडा दीया तुजे.. कैसा लगा मेरा साहील..?

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. अब मेरा साहील नही.. हमारा साहील कहो.. बहुत मस्त हे.. साहील भी.. ओर उनका हथीयार भी..

सलमा : (मुस्कुराते) हां.. हमारा साहील अ‍ैसा ही हे.. तुम आराम करो.. मे सब सम्हाल लुगी.. फीरोजके जानेके बाद तुजे ठीक करती हु.. तब हम आरामसे बात करेगे..

फीर सलमा चली गइ.. वो साहीलके कमरेमे जा ही रही थी तभी उसे फीरोजके रुमके दरवाजेकी आवाज आइ.. तो सलमा कीचनमे चली गइ.. फीरोज अपना नीत्यकार्य करने लगा.. फीर नहाकर कंपलीट होगया.. ओर अंदर आगया.. वो सलमाकी ओर देखकर हसने लगा..

सलमा : (मुस्कुराते) आप बैठो मे चाइ नास्ता देती हु..

फीरोज : (मुस्कुराते) जरीना ओर साहील नही जागे..?

सलमा : (सामने देखते) साहील कल देर रात दोस्तोके साथ था.. वो लखन भैया आये हुअ‍े हे.. ओर जरीनाको थोडा बुखार जैसा हे.. तो मेने आराम करनेको कहा हे.. वो सो रही हे..

कहेते सलमा कीचनमे चली गइ.. उसने फीरोजको चाइ नास्ता दीया.. फीरोजने उनको साथ बैठनेके लीये कहा.. तो सलमाने बडी ही सीफततासे टाल दीया.. ये कहेकर की वो जरीना ओर साहील साथमे करेगे.. फीर फीरोज कोइ नही था तो सलमाको बाहोमे लेकर होठ चुमलीये..

सलमा थोडी असहेज होते पीछे हट गइ.. ओर अपने मुहपे हाथ रखते कोइ देख लेगा कहेते पीछे हट गइ.. ओर फीरोज मुस्कुराते अपने खेतोकी ओर नीकल गया.. तो सलमाने जटसे बहारका दरवाजा बंध करलीया.. ओर लोक करके वो साहीलके कमरेमे चली गइ..

कुछ ही देरके बाद साहीलके कमरेसे सलमाकी जोरोसे सीसकीयोकी आवाज आने लगी.. साहील बडे ही जोसमे सलमाको घोडी बनाके पीछेसे चुतमे लंड डालकर चोद रहा था.. अ‍ेक बार दोनो साथ जड गये तो सलमा पीठके बल लेट गइ.. ओर अपने दोनो पैर साहीलके कंधेपे रख दीये..





साहील बडी ही सावधानीसे सलमाको फीरसे चोदने लगा.. सलमाने रातकी सारी अधुरी कशर साहीलसे दो बार चुदवाकर पुरी करली.. फीर दोनो साथमे सावर लेने चले गये.. बाथरुम जाते सलमाने अ‍ेक नजर बीछानेपे डाली.. तो वहा उनको खुनके धब्बे दीखाइ दीये..

जीसे देखकर सलमाके मुहसे हसी नीकल गइ.. तो साहीलने उसे अपनी गोदमे उठालीया.. ओर बाथरुममे लेगया.. वहा भी साहीलने सलमाकी खडे खडे चुदाइ करली.. फीर दोनो कंपलीट हो गये तो सलमा साहीलकी बाहोमे समा गइ..





सलमा : (सीनेमे सर रखते) जानु.. बस अ‍ैसे ही आपको प्यार देती रहुगी.. अब तो दो दो आपको सम्हालने वाली हे..

साहील : (मुस्कुराते) अम्मा.. चाची कीधर हे..?

सलमा : (सामने देखकर मुस्कुराते) कल आपके प्यारने उसे बुखार चडा दीया.. आराम कर रही हे.. हेना सबुकी तराह कडक माल.. बेचारीका खुन भी नीकाल दीया..

साहील : (मुस्कुराते) बहुत मस्त हे.. चलो देखते हे..

सलमा : (हसते साथ चलते) देखो.. अभी उनके साथ कोइ सरारत मत करना.. उनकी हालत ठीक नही हे..

साहील : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही करुगा.. चलो तो सही.. मेरी होने वाली सास हे.. उनका खयाल तो अब रखना ही पडेगा.. हें..हें..हें..

सलमा : (कातीलाना मुस्कानसे) मुजे पता हे आप उनका कैसे खयाल रखोगे.. रातमे बीचारीकी हालत खराब करदी.. अभी तक बीस्तरमे पडी हे..

अंदर जाते ही साहीलने सलमाको नाकपे उंगली रखते अ‍ेक तरफ इसारा करते छुपा दीया.. ओर वहीसे देखनेको कहा.. फीर वो जरीनाके पास जाकर बैठ गया.. ओर जुकते धीरेसे जरीनाके होठोको चुम लीया.. जरीनाने जटसे आंख खोलदी.. ओर गभराते दरवाजेकी ओर देखने लगी..

साहील : (मुस्कुराते धीरेसे) चाचा खेतोपे चले गये हे.. अब कैसी हे तबीयत..?

जरीना : (मुस्कुराते) सचमे चले गये..? खुद देखलो.. आपने कैसी हालत की हे मेरी..

कहेते जरीनाने साहीलका हाथ पकडकर अपने उपर खीचलीया.. ओर उनको जोरोसे बाहोमे भरते साहीलके होठोपे होठ रख दीये.. ओर बहुत ही गहेरा चुंबन देदीया.. जीसे देखकर सलमा भी हसने लगी.. तो जरीनाका ध्यान सलमाकी ओर गया.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कुराने लगी..

सलमा : (मुस्कुराते) जरीना.. अब हम दोनोको अ‍ैसे ही प्यार मीलता रहेगा.. चल उठजा तुजे ठीक करदु.. फीर तैयार होजा हम साथमे चाइ नास्ता करेगे..

फीर जरीनाकी सलमाने गरम पानीसे सीकाइ करदी.. ओर जरीना नहाकर कंपलीट होगइ.. वो धीरे धीरे लंटडाते चल रही थी.. फीर तोनोने साथ बैठकर चाइ नास्ता कीया.. ओर आगेकी योजनाके बारेमे बात करने लगे.. ताकी हर दीन दोनोमेसे कोइना कोइ साहीलके साथ सो सके..
 
तो दुसरी ओर उस साम लखन सबको लेकर वापस नीकलने लगा.. तो दयाने कुछ दीन रजीयाको वही रोक लीया.. ओर मंजुने भी अ‍ेक्जाम खतम होनेकी वजहसे नीलमको कुछ दीन अपने माता पीताके साथ रहेनेको कहा.. तो नीलम लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुराने लगी..

ओर हां कहेदी.. लखन सबको लेकर भानुके गांवकी ओर चला गया.. वहा सबने चाइ नास्ता कीया.. रमा ओर सरला सबको देखकर बहुत खुस हुइ.. सृतीने वही औपचारीक रमाको चेक करलीया.. फीर नीलमको कुछ दीनके लीये वहा छोडकर सब वापस सहेर चले गये..

उस दीन सामको सबानाने साहीलको फोन कीया.. कीसी कारणवस कोलेजमे चार दीनकी छुटी थी.. तो वो घरपे आनेके लीये साहीलसे बात करने लगी.. तभी साहीलने उसे अपने अबु ओर सलमाके नीकाहकी बात की.. ओर साहीलने सबानाको वो नीकाह वाली वीडीयो क्लीप मेज दी..

जीसे देखकर सबाना सोक्ट हो गइ.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. उनको अब जरीनाकी चीन्ता होने लगी.. आखीर उनको भी समज आ गयाकी उनके अबु भी अब गांवके रंगमे रंग गये हे.. उसने फीर साहीलको फोन कीया..

सबाना : (धीरेसे) साहील.. क्या हे ये सब..?

साहील : (धीरेसे) जो तुमने देखा.. चाचाने अम्मासे नीकाह करलीया.. क्युकी वो वीधवा थी.. ओर अब गांवमे कोइ अ‍ेसी महीला नही हे जो वीधवा या फीर त्यक्ता हो.. सभीने अपने ही रीस्तेदारीमे सादीया करली हे.. तो चाचा भी चाहते थेकी अम्माकी सादी उनसे हो जाये..

सबाना : (थोडा गभराते) तो फीर अब अम्मी..? क्या वो इस बातके लीये मान गइ..?

साहील : (धीरेसे) नही.. सबकुछ फोनपे नही बता सकता.. ये बताओ तुम कब आ रही हो..? चार दीनकी छुटी होने वाली हेनां..?

सबाना : हां.. अगले हप्ते.. थर्सडे टु सन्डे.. वहा आनेकी योजना बना रही थी.. लेकीन अब नही आउगी.. मुजे कुछ अजीब लगेगा..

सबाना : (कुछ सोचते) सबु.. मेरे खयालसे तुम अ‍ेक बार सृतीभाभी ओर पुनम भाभीसे बात करलो.. सायद वो कोइ सजेसन दे सकती हे..

सबाना : (मायुस होते) हां.. सायद यही ठीक रहेगा.. दोनोने हमेसा मेरा मार्गदर्सन कीया हे.. उनसे बात करके फीर आपको कोल करती हु..

कहेते सबानाने कोल कट करदीया.. वो बडी उलजनमे थी.. आखीर उसने सृतीको फोन कीया.. तो सृती सारा मामला समज गइ.. ओर उसने सबानाको पुनमसे बात करवाइ.. लेकीन पुनमको सबकुछ पता था.. वो जानती थी की सबानाको कैसे हेन्डल करना हे..

ओर उसने साहीलके जरीना ओर सलमाका साथ रीलेशनको छुपाकर सबानाको कुछ अ‍ैसा समजा दीया.. जीसे सबानाने फीरोन ओर सलमाके रीस्तेको अक्सेप्ट करलीया.. उसने सबानाको भी अपनी लाइफ खुलकर जीनेको कहा.. जीसे सबानाने भी अ‍ेक फैसला करलीया.. ओर उसने फीरसे साहीलको फोन करदीया..

साहील : (मुस्कुराते) हां सबु.. सृती भाभीसे होगइ बात..?

सबाना : (मुस्कुराते) हां साहील.. लगता हे हमे भी गांवके बदलावको स्वीकार करना पडेगा.. क्या आप अ‍ेक काम कर सकते हो..?

साहील : (मुस्कुराते) हां बोलो.. क्या..?

सबाना : (मुस्कुराते) अब मे वहा नही आ रही.. बस.. कीसी भी तराह आप यहा बुधवार साम तक पहोंच जाइअ‍े.. लेकीन ध्यान रहे.. कीसीको बतानेकी जरुरत नही हेकी आप मुजसे मीलने आ रहे हो..

साहील : (मुस्कुराते) लेकीन.. क्या अम्माको भी नही..? क्युकी उसे हम दोनोके बारेमे सब कुछ पता हे.. वो कोइ अ‍ेतराज नही करेगी..

सबाना : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन सीर्फ बडी अम्माको.. बाकी कीसी ओरको नही.. समज गयेनां..? यहा आतेही कोल करना.. मे आपको लेने आजाउगी.. बाकीकी बाते मीलकर करेगे..

साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे बुधवार सामको वहा पहोंचकर फोन करुगा..

सबाना : (मु्कुराते) गुड.. आइ लव यु जान..

साहील : (मुस्कुराते) लव यु टु बेबी.. अब ओर इन्तजार नही होता.. मीलते हे बाय..

तो दुसरी ओर घरपे सीर्फ लखन पुनम सृती राधीका ओर चंदा ही थे.. इस रात सृती ओर राधीकाने मीलकर लखनको खुब प्यार दीया ओर पुनमने भी लखनको पीछेसे खुस कर दीया.. तब पुनमके अलावा कीसीको पता नही थाकी दरवाजेके बहार चंदा सबकी मस्तीया सुन रही हे..

जबसे उसने लखनसे प्यारका इजहार कीया.. ओर लखनने उसे अपनी बाहोमे भीचते प्यार कीया तबसे चंदाकी भी कामाग्नी ओर भडक गइ थी.. ओर वोभी जल्दसे जल्द लखनसे मीलना चाहती थी.. लेकीन गांव जानेकी वजहसे चंदाके पास इन्तजार करनेके अलावा कोइ रास्ता नही था..
 
दुसरे दीन सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे.. तब चंदा कुछ ज्यादा ही लखनसे सरमा रही थी.. ओर पुनम सृती चंदाकी ओर देखकर अ‍ेक दुसरेके सामने देखते मुस्कुराने लगी.. फीर लखन सबको गले मीलते राधीकाको छोडने होस्टेलपे चला गया.. तभी उनके मोबाइलपे मेसेजकी रोंग बजी..

राधीका : (मुस्कुराते) आज कल आपके फोनपे कुछ ज्यादा ही मेसेज आने लगे हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. जलन..?

राधीका : (हसते) अरे..? मे क्यु जलुगी..? जले मेरी जुती.. मुजे तो अपना प्यार मील जाता हे..

लखन : (मेसेज दीखाते) देखो कुछ भी नही हे.. गांवमे टीना मीली थी.. उसने अपने बुटीकका अ‍ेड्रेस सेन्ड कीया हे..

राधीका : (मोबाइलको धकेलते) अरे नही देखना मुजे.. इतना तो भरोसा हे मुजे.. सुनो.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी..

लखन : (मोबाइल जेबमे रखते) हां बोलो..

राधीका : (मुस्कुराते) जानु.. कोइ लडकीया नही हे.. यहा सीर्फ नइ लडकीयोकी अ‍ेडमीशनके लीये आना पड रहा हे.. मे सोच रही थी.. जब हमारा बच्चा आयेगा तब मे क्या करुगी..?

लखन : (मुस्कुराते) कुछ मेनेज होजायेगा.. तुम चीन्ता मत करो.. अगर अ‍ेडमीशनकी बात हेतो मे मेनेज कर लुगा.. तुम छुटी तक घरपे आराम करो..

राधीका : (खुस होते) तो फीर ठीक हे.. कलसे आप आना.. मे घरपे रहुगी.. आप चले जाते हो तो पुरी होस्टेलमे मेही अकेली रेह जाती हु.. अब सादी होगइ हेतो अकेले होस्टेल चलाना बहुत मुस्कील लगता हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) तो कुछ अ‍ेरेन्ज कर लेते हे.. बच्चा होजानेके बाद तो बहुत मुस्कील होगी.. तेरी मददके लीये रजुको साथ भेजु..?

राधीका : (मुस्कुराते) तब तो बहुत ही बडीया.. घरके लोग होगे तो आसानी रहेगी..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर ठीक हे.. मे इस बारेमे अ‍ेक बार पुनोसे बात कर लुगा.. तोफीर मे चलु..? दो पहरको लेने आउगा..

राधीका : (सरमाते हसते) ओर मेरे हीस्सेका प्यार..? दरवाजा लोक करके आजाओ..

तो लखन मुस्कुराने लगा.. वो दरवाजा लोक करके राधीकाको लेकर अपने पर्सनल रुममे चला गया.. राधीकाको अब हर दीन होस्टेलमे ही प्यार करनेकी आदत हो चुकी थी.. घरपे लखनसे उनको जीतना भी प्यार मीले.. वो होस्टेलपे लखनसे चुदवाये बीना नही रहेती..

तो आज भी लखनने उनकी धमाकेदार दो बार चुदाइ करली.. फीर दोनो सावर लेने गये.. तब भी राधीकाने लखनसे खडे खडे चुदवा लीया.. फीर बहार आकर दोनो कंपलीट हो गये.. फीर लखनकी बाहोमे आकर उनके होठ चुम लीया.. ओर दो पहोरको जल्दीसे लेने आनेको बोला..

फीर लखन बहार नीकलते फीरसे मोबाइल देखता हे.. दरसल मेसेज सृतीकी डोक्टर फ्रेन्ड भावीकाका मेसेज था.. ओर लखनने राधीकाको टीनाका मेसेज दीखा दीया था.. लखनने भावीकाका मेसेज देखा.. तो उनमे सीर्फ यही लीखा था.. माइ क्लीनीक.. ३:०० पी.अ‍ेम.

ओर लखन सबकुछ समज गया.. ओर मुस्कुराने लगा.. दरसल भावीकाके साथ पुरा दीन होटेलमे बीतानेके बाद आज भावीकाने फीरसे लखनको अपनी क्लीनीकपे बुलाया था.. फीर वो टीनाने सेन्ड कीया हुआ अ‍ेड्रेसपे चला गया.. देखा तो टीनाका बहुत बडा बुटीक था..

वहा कइ ओरते सीलाइ मशीनपे काम कर रही थी.. ओर टीनाका अ‍ेक अलगही ओफीस था.. लखन वहा चला गया.. तो टीना उनको देखते ही खुसीके मारे सोक्ट हो गइ.. ओर उसने लखनको गले लगा लीया.. फीर हाथ पकडकर सामनेकी चेरपे बीठाया..

टीनाने लखनके लीये ठंडा मंगवाया फीर कुछ ओपचारीक बाते करते टीनाने लखनको अपना कलेक्शन आल्बम दीखाया.. तो लखनको इनमे ही बहुत डीजाइन पसंद आइ.. फीर टीना ने लखनको पुरी बुटीक दीखाइ.. तो वहा.. चालीस से पचास महीलाये काम कर रही थी..

टीना : (मुस्कुराते) तो लखनजी.. ये हे मेरी छोटीसी बुुटीक.. कैसी लगी आपको..?

लखन : (मुस्कुराते) ये छोटी हे..? ये तो बहुत बडी हे.. आपका कलेकश्न भी बहुत बडीया ओर बडा हे.. चलीये ओफीसमे आपको ओर्डर लीखवाता हु..

टीना : (हसते) अरे.. आपको ओर्डरके लीये थोडीना बुलाया हे.. मेने तो आपको ये देखनेके लीये बुलाया था.. आप हमारी रश्मीके देवरजो हे.. आप तो अब घरके ही हे.. आपके बारेमे रश्मी ओर वंदुसे बहुत कुछ बाते हुइ.. ओर सबकी सोपींग आप ही करते हे इसीलीये..

लखन : (मुस्कुराते) आप लेडीज लोग सबकुछ जल्दी जान लेती हो.. कभी अपने बारेमे तो बताया नही..?

टीना : (सरमाकर हसते) ओर आपने पुछा ही नही.. हें..हें..हें.. खैर.. उस दीन हमारी पहेली मुलाकात थी.. अब तो हम घरके होगये.. कभी मेरी सभी दीदीओको लेकर घरपे आइअ‍े.. डीनरके साथ हम खुब बाते करेगे.. रही बात मेरी.. तो मेरे बारेमे जाननेके लीये हमे कोफीपे मीलना पडेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) जी.. जरुर.. कभी कोफी पीलाने बुलाइअ‍े.. मे आजाउगा..

टीना : (सरमाकर मुस्कुराते) स्योर.. आपको जब भी टाइम मीले कोल करदेना.. हम मीलेगे.. तब ढेर सारी बाते करेगे.. आप बहुत ही दीलचस्प आदमी हो.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन आपकी कलेक्शन मुजे बहुत पसंद आइ.. इसीलीये आपको ओर्डर लीखवा रहा हु.. चलीये लीख लीजीये..

फीर दोनो वापस ओफीसमे आ गये.. टीना साथ चलते टेडी नजरसे लखनके पेन्टकी ओर देखती रही.. लखनने सबके लीये कुछना कुछ लीया.. लेकीन कुछ ओर्डर आउट ओज स्टोक था.. तो टीनाने दो दीनका समय मांगा.. फीर बहार नीकलकर धीरेनकी बेन्क पे चला गया.. तो धीरेन भी लखनको देखकर सोक्ट हो गया.. फीर दोनो बहार कोफी सोपपे चले गये..
 
धीरेन : (मुस्कुराते) क्या बात हे भाइ.. आज अचानक इस नाचीजको याद कीया..? सब ठीक तो हेनां..? (वेइटरकी ओर देखते) वेइटर.. दो कोफी..

लखन : (मुस्कुराते) हां धीरेन.. सब ठीक हे.. आज कल छुटी चल रही हे.. तो नीलु अपने गांव उनके माता पीताको मीलने गइ हे.. वहा सायद तुम्हारा कोन्टेक्ट ना होसके.. वोही बात बताने आया हु..

धीरेन : (मुस्कुराते) भाइ.. जानेसे पहेले बात हुइ थी.. मुजे सब पता हे.. अब वो कोलेजमे आजायेगी.. भाइ.. हमारे बारेमे कीसीको पता तो नही..? मीन्स.. मम्मीको.. कैसी हे वो..? मुजे याद करती हेकी नही..?

लखन : (मुस्कुराते) अब काफी बहेतर हे.. नोर्मल होगइ हे.. ओर आजकल मेरे घर मेरे साथ ही रेह रही हे.. मुजे इनके बारेमे भी बात करनी हे..

धीरेन : (थोडी चीन्तासे) यहा रेह रही हे..? सब ठीक तो हेना भाइ..?

लखन : (मुस्कुराते) वैसे सब ठीक हे.. कोइ दीकत वाली बात नही हे.. बस.. उनके इलाजके वास्ते ओर अच्छे माहोलमे रेह सके इसीलीये मे उनको यहा लेकर आया हु.. सुन.. सायद मे तुम दोनोकी मुलाकात करवाउ.. तो बीना कोइ सवाल कीये उनकी माफी मांग लेना..

धीरेन : (नजरे जुकाते) भाइ.. गलतीसे बीना सोचे समजे मेने उनको बहुत बुरा भला कहा हे.. क्या वो मुजे माफ करदेगी..?

लखन : (कोफी आते ही पीते) हां.. भैया भाभी.. ओर गुरुजीने उनको बहुत समजाया.. तब जाके माफी देने राजी हुइ हे.. लेकीन उनको अपने घर आनेकी उमीद मत करना..

धीरेन : (मुस्कुराते कोफी पीते) भाइ.. आपका घर अब उनका ससुराल हे.. वो अब मेरे घर क्यु आयेगी..? बस.. मुजे माफ करदे वोही मेरे लीये बहुत हे.. क्या वो मेरे ओर नीलुके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलेगी..?

लखन : (सामने देखते) अभी तो कीसीके सामने उनका जीक्रभी मत करना.. वरना नीलुसे हाथ धो बेठोगे.. बस.. नीलुकी कोलेज खतम होनेका इन्तजार करलो.. अगर बीचमे सीचुअ‍ेशन अच्छी रही तो मे खुद नीलुको आपके साथ भेज दुगा..

धीरेन : (मुस्कुराते) भाइ.. थेन्क्स.. आपने हमारी बहुत मदद कीहे.. जैसा आप बोलोगे वैसा ही हम करेगे..

लखन : (कोफी खतम करते खडा होते) ठीक हे धीरेन.. मे चलता हु.. अ‍ेक दीन तुजे फोन करके भाभीको लेकर तेरे घर आजाउगा.. तब उनसे माफी मांगलेना वो माफ करदेगी.. मे चलता हु..

फीर लखन राधीकाको लेकर घर वापस आ गया..आज खाना चंदा ओर पुनमने मीलकर बनाया था.. सृती भी आगइ तो पांचो खानेपे बैठ गये.. चंदा बडेही प्यारसे लखनकी ओर देख रही थी.. तो लखन टेबलके नीचे धीरेसे चंदाके पैरको अपने पैरोसे सहेलाने लगा..

चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. उसने अपने पैर हटानेकी कोसीस की लेकीन लखनने उनके पैरको अपने पैरोसे दबा दीया.. ओर अ‍ैसे खाना खा रहा था जैसे कुछ हुआ ही नही.. चंदा कामुक मुस्कानसे लखनकी ओर टेडी नजरोसे देखते खाना खाती रही..

वो लखनको सब हरकते करने देने लगी.. जीसे उनकी चुतपे गीलापन महेसुस होने लगा.. ओर वो थोडी असहज होने लगी.. तो पुनमने मुस्कुराते धीरेसे लखनकी जांगपे मुका मार दीया.. तो सृतीको भी सब पता चल गया.. ओर वो मंद मंद मुस्कुराते खाना खाने लगी.. तभी..

पुनम : (मुस्कुराते) लखन.. यहा मोल वाला थीअ‍ेटर भाभीने कभी नही देखा.. तो आज आप उसे मोलमे मुवी दीखाने लेजाइअ‍े..

चंदा : (सरमाते हसते) अरे..? सीर्फ मे ही क्यु..? हम सब चलेगेनां..

सृती : (मुस्कुराते) नही भाभी.. आज साम वो मेरी दोस्त भावीका हमसे मीलने आ रही हे.. कुछ पर्सनल कामसे.. साम छे बजे मेभी घर वापस आजाउगी.. तो आप ओर लखन ही चले जाइअ‍े.. हम सब कभी बादमे जायेगे..

पुनम : (मुस्कुराते) ओर हां.. आज मे वीजयको मेरे साथ उपर सोने लेजाउगी.. आप इनकी चीन्ता मत करना.. दोनो आरामसे आना..

चंदा : (सरमाते लखनकी ओर मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर हम दोनो ही चले जायेगे..

लखन : (मुस्कुराते) पुनो.. अगर सामको जाना हे तो मुजे तीन बजे अ‍ेक काम भी हे.. उसे अभी नीपटाना पडेगा.. मे दो घंटेमे वापस आजाउगा..

राधीका : (मुस्कुराते) आज मेरा भी होस्टेल जानेका मन नही हे.. सीर्फ आराम करना हे..

सबकी बात सुनकर पुनम मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. जैसे सबकुछ उनकी योजनाके तहत हो रहा हे.. ओर खुस तो तब हुइ जब सबसे छुपकर चंदा भी लखनके पैर सहेलाते लखनको रीस्पोन्स देने लगी थी.. आग दोनो ओर लग चुकी थी.. ढाइ बजते ही लखन कंपलीट होकर बहार जाने लगा तब..

लखन : (चंदाकी ओर कामुक मुस्कानसे) भाभी.. छे बजे तैयार रहेना.. मेरे आते ही हम नीकल जायेगे..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) ठीक हे देवरजी.. मे रेडी रहुगी..

पुनम सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तो राधीका भी उनकी कदद करने बहारकी सफाइ करने लगी.. तब चंदा वीजयको लेकर सोफेपे बैटी थी.. ओर लखनसे धीरेसे फुसफुसाते बात कर रही थी.. तभी भावीकाकी क्लीनीक जाते समय लखनने सबसे छुपकर चंदाको आंख मारदी.. जीसे चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८७

पुनम सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तो राधीका भी उनकी कदद करने बहारकी सफाइ करने लगी.. तब चंदा वीजयको लेकर सोफेपे बैटी थी.. ओर लखनसे धीरेसे फुसफुसाते बात कर रही थी.. तभी भावीकाकी क्लीनीक जाते समय लखनने सबसे छुपकर चंदाको आंख मारदी.. जीसे चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.... अब आगे

आज भावीकाने भी दो पहोरके बाद कोइ अ‍ेपोइटमेन्ट नही लीया.. इनडोरमे सीर्फ तीन पेसन्ट थे.. जीनकी हाल ही मे डीलीवरी हुइ थी.. भावीका पेसन्टको देखने जानेसे पहेले अपनी रीसेपनीस्ट आरतीको लखनके बारेमे सुचना देकर उपर गइ थी..

सृतीको यहा तीन दीन रखा था.. ओर लखन भी यहा तीन चार बार आ चुका था.. जीसे रीसेपनीस्ट आरती भी लखनको अच्छी तराह जानती थी.. जैसे ही लखन तीन बजे भावीकाकी क्लीनीकपे पहोंच गया.. ओर सीधे काउन्टरपे चला गया.. तो आरती लखनको देखकर मुस्कुराने लगी..

आरती : (मुस्कुराते) आइअ‍े लखनजी.. मेडम आपहीका इन्तजार कर रही थी.. उपर पेसन्ट देखने गइ हे.. अभी आती ही होगी.. आप उनकी ओफीसमे बैठीये..

लखन : (मुस्कुराते) अरे मेडम.. टेन्शन मतलो मे यही ठीक हु..

आरती : (हसते) अरे.. आइअ‍े मे ले चलती हु.. मेडमकी डांट खीलाओगे क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते साथ चलते) आपकी मेडम डांटती भीहे क्या..? क्या नाम हे आपका..?

रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते ओफीस खोलते) आरती नाम हे मेरा... मेडम बहुत कडक हे.. बेठीये.. मे जानती हु आपको.. सृती मेडमके हसबन्ड हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) जी.. थेन्क यु..

आरती : (मुस्कुराते) मोस्ट वेलकम सर.. बैठीये मेडम आती ही होगी..

कहेते आरती लखनको ओफीसमे बीठाकर चली गइ.. तब कुछ ही देरमे भावीका नीचे आइ तो आरतीने उनको लखनके आनेकी सुचना दी.. तो भावीकाने हसते हुअ‍े आरतीको आंख मारते अब कीसीको अंदर ना आनेकी सुचना दी.. तो आरती भी हसने लगी.. ओर भावीका ओफीसमे चली गइ..

लखनको देखते ही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. अंदर आते ही उसने दरवाजा लोक करदीया.. लखन भावीकाको देखकर खडा होगया.. अपना डोक्टरका लंबा वाइट कोट वही नीकालकर खुटेपे टांग दीया.. ओर फटाफट सेनेटाइजसे अपने हाथ धोने लगी.. फीर हाथ पोछते ही वो लखनकी ओर दोड पडी ओर लखनकी बाहोमे समा गइ..





फीर लखनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. दोनो हाथमे लखनका चहेरा थामते उनकी आंखोमे मुस्कुराते देखने लगी.. ओर धीरेसे लखनके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. लखनने भी कसके भावीकाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर चुंबन बहुत गहेरा होगया.. फीर..

भावीका : (सामने देखते) लखन.. आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार होगया हे..

लखन : (मुस्कुराते सर चुमते) आइ लव यु टु.. कहो.. कैसी हो तुम..?

भावीका : (मुस्कुराते) बस.. हम जबसे मीले हे तबसे ठीक नही हु.. आपने मेरी रातोकी नींद चुराली हे.. कही चेइन नही मीलता.. कल सृती ओर पुनोदीसे बात हुइ.. उनको आज साम मीलने जाना हे.. फीर कुछ ओर भी जरुरी बात हे.. जो आपसे करनी हे.. इसीलीये तो आज बुलाया हे..

लखन : (मुस्कुराते) चलो बैठो इधर.. बताओ क्या जरुरी बात करनी हे..

भावीका : (मुस्कुराते) बाते हम बादमे करेगे.. पहेले मे मेरे जानुको थोडा प्यार देदु..? चलो अंदर..

कहेते भावीका लखनका हाथ पकडकर उसे पेसन्ट देखनेके रुममे ले गइ.. ओर अंदर जातेही लखनकी बाहोमे समा गइ.. लखन भी उनके उरोजोको मसलते होठ चुमने लगा.. दोनोकी सासे तेज चलने लगी.. ओर कब दोनोके उपरसे कपडे हटने लगे दोनोको पता ही नही चला..

भावीका वही पेसन्टके टेबलपे बैठ गइ.. ओर लखनको अपने दोनो पैरोके बीच खीच लीया.. फीर उनका बडा हथीयार मुठीमे थामते अपनी चुतपे धीसने लगी.. दोनोके होठ लगातार अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पी रहे थे.. भावीकाने धीरेसे लंडके सुपाडेको अपनी चुतमे फसा लीया..

वो वासना भरी कातील नजरोसे लखनकी ओर देखने लगी.. ओर उसने लखनके दोनो नीतंबपे हाथ रखते अपनी चुतकी ओर दबाया.. लखनका गीला लंड चुतमे धकेलने लगी.. जब पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया फीर लखनकी कमरपे पैरोकी आंटी लगादी.. तो लखनने उसे नीतंबसे पकडते अपनी गोदमे उठा लीया..





लखन भावीकाको उछालने लगा.. भावीकाका स्थेटोस्कोप अभी भी उनके गलेमे था.. भावीका लखनके गलेमे बाहे डालते लखनके लंडपे उछलने लगी.. दोनोके उपर वासना हावी हो चुकी थी.. तो कुछ ही देरमे भावीकाकी चुतसे लावा फुट पडा.. ओर लखनके लंडको भीगो दीया..
 
भावीका सांत होगइ.. ओर लखनके कंधेपे सर डाल दीया.. लखनने उसे वही पेसन्ट देखनेके टेबलपे लीटा दीया.. तो भावीकाने अपने बाकी वस्त्रोको भी नीकाल दीया.. फीर स्टेथोस्कोप साइडमे रखते लखनको हाथ पकडकर अपने उपर खीच लीया.. लखनके होठोको जोरोसे चुसने लगी..

तभी लखनका लंड भावीकाकी चुतपे फीरसे दस्तक देते अपने बीलमे घुसनेका रास्ता ढुंढने लगा.. ओर कुछ ही देरमे उनको अंद घुसनेमे कामयाबी मील गइ.. लखन भावीकाके उपर छा गया.. ओर हाथके बल जोरोसे कमर हीलाते भावीकाकी फीरसे चुदाइ करने लगा.





भावीका मदहोसीमे आधी आंख चडाते सीसकारीया करने लगी.. ओर लखन धीरे धीरे कमर हीलाते भावीकाकी चुदाइ करता रहा.. प्यार भरी चुदाइ कुछ ही पलोमे कब अ‍ेक भयंकर चुफानी चुदाइमे तबदील होगइ पता ही नही चला.. दोनो बहुत ही कामुक चुदाइमे मसगुल होगये..

हर बारकी तराह इस बार भी लखनने भावीकाको दो दो बार जडाकर आखीरमे दोनो साथ जड गये.. भावीकाके चहेरेपे संतुस्टी भरी मुस्कान तैरने लगी.. वो लखनकी पीठ सहेलाते धीरे धीरे उनके होठोके रसको पी रही थी.. उनकी चुतसे दोनोका कामरस अपना रास्ता बनाते बहार टपक रहा था.. तभी..

भावीका : (लंड अबभी चुतमे था) मुजे आपकी आदतके बारेमे पता हे.. बडी ही फुरसतमे आपको मीलने बुलाया हे.. हमे मीले अ‍ेक हप्ता हो गया हे.. अ‍ैसा लगता हे अ‍ेक हप्ता नही अ‍ेक साल हुआ हे.. लखन.. आइ रीयली लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे.. ओर मेने कुछ डीसीजन भी लीये हे..

लखन : (मुस्कुराते) कैसा डीसीजन..?

भावीका : (मुस्कुराते) बस.. वोही सब डीसकस करने आपके घर जा रही हु.. लखन.. मे येसब इलीगल अ‍ेबोर्सनका काम छोड रही हु.. जीतना पैसा कमाना था.. कमालीये.. अब मे सुकुनकी जींदगी जीना चाहती हु.. यहासे कही दुर.. जहा मुजे कोइ पहेचानता ना हो..

लखन : (सीरीयस होते धीरेसे) तुम हमे छोडकर जा रही हो..? तो फीर धृव..?

भावीका : (गोदमे बैठे ही बाहोमे भीचते सरको सहेलाते) सीर्फ धृवसे दुर जा रही हु.. सायद मे धृवको डीवोर्स देदु.. मे उस दलदलसे नीकलना चाहती हु.. बस.. यही सब चर्चा करने पुनोदी ओर सृतीको मीलने जा रही हु.. क्या पुनोदीको सब पता चल जाता हेनां..? आज साम उसने मुजे मीलनेके लीये बुलाया हे.. लेकीन मे आपको छोडकर कही नही जाउगी..

लखन : (बुब्स मसलते होठ चुमते) लेकीन अचानक अ‍ैसा क्या हो गया.. जो तुम इतना बडा डीसीजन ले रही हो..

भावीका : (सामने देखते धीरेसे) लखन.. जबसे धृव अपनी मम्मीका अ‍ेबोर्सन करवाके घरपे आया हे.. तबसे घरपे कुछ ठीक नही चल रहा.. सबलोग तनावमे रहेते हे.. सायद इस बातका मेरे ससुरको पता चल गया हे.. ओर मुजसे भी कोइ बात नही करते.. बस.. अ‍ेक बार मेने इसी बातको लेकर मेरे सास ससुरको बहेस करते सुन लीया था..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) कैसी बहेस..?

भावीका : (सामने देखते धीरेसे) पता नही ठीकसे सुन नही पाइ.. लेकीन अ‍ैसा लगाकी मेरी सास अपने पतीको इसी बातपे कन्वीस करा रही थी.. की ये बच्चा उन्हीका था.. तो मेरे ससुर बहेस कर रहे थेकी अगर ये हमारा बच्चा था.. तो तुमने मुजसे बात कीये बगैर इसे गीरा क्यु दीया..? बस.. इसी बातको लेकर घरमे तनाव हे..

लखन : (सामने देखते) फीर क्या हुआ..? आपके ससुरके संकाकी उनके पास कोइ तो वजह होगी..?

भावीका : (धीरेसे) पता नही.. लेकीन केह रहेथे.. की मेने डेढ महीनेसे तुजे छुआ भी नही हे.. तो बच्चा कहासे ठहेर गया..? अगर मेरा था तो मुजसे बताया क्यु नही..? बस.. इसी बातको लेकर दोनोके बीच बहेस छीड रही थी.. ओर आजकल वो पार्टीकी वजहसे भी कुछ परेसान रहेते हे..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. इनमे तुम तो कही नही होनां..? तो फीर तु क्यु टेन्शन ले रही हो..? आज पुनोको मीलनेतो जाही रही हो.. उनको सब पुछ लेना.. ओर मेरे खयालसे थोडा इन्तजार करलो.. सचाइ खुद बहार आजायेगी.. अ‍ेक बार पुनोसे मीललो.. फीर कोइ डीसीजन लेना..

इनके बाद लखनने फीर अ‍ेक बार भावीकाकी जबरदस्त घमासान चुदाइ करली.. फीर दोनो अंदरके बाथरुममे चले गये.. ओर सावर लेकर कंपलीट होगये.. देखा तो सामके पांच बज चुके थे.. भावीकाको भी लखनके घर जाना था.. लेकीन दोनोने अलग अलग जानेका फैसला कीया..

भावीका थोडा धीरे ओर लंगडाते चल रही थी.. उन्होने लखनको जोरोसे बाहोमे भरलीया.. ओर उनके होंठ चुम लीये.. फीर लखन वहासे सीधे घरकी ओर नीकल गया.. भावीका सही होगइ ओर अपनी चेरपे बैठकर बेल बजाइ.. फीर अपने बाल हाथोसे सही करने लगी.. तभी उनकी रीसेपनीस्ट आरती अंदर आगइ..
 
आरती : (रहस्य मुस्कानसे) जी मेडम..?

भावीका : (मुस्कुराते) आरती.. यार हम दोनोके लीये कोफी बनादे.. ओर कुछ खानेको बीस्कुट भी.. बहुत भुख लगी हे.. जालीमने थका दीया.. मुजे पुरी नीचोडली..

आरती : (हसते) जी मेडम.. लगता हे आपने बहुत महेनत कीहे.. हें..हें..हें.. बहुत हेन्डसम था..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बहुत ही खास.. कभी मौका मीले तो तुमसे भी मीलवाउगी.. मीलोगी क्या..?

आरती : (कोफी बनाते मुस्कुराते) जी.. जरुर.. अ‍ैसे हेन्डसासे कौन मीलना नही चाहेगा.. लगता हे आपके लीये बहुत ही स्पेसीयल हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बहुत ही स्पेसीयल.. दो बार मील चुकी हु.. जालीम अ‍ेक ही बारमे पुरी नीचोड लेता हे.. ओर दो बारसे पहेले बहार ही नही नीकालता.. हालत खराब कर देता हे..

आरती : (हसते) तब तो बहुत ही जल्द मीलना पडेगा.. हें..हें..हें.. उनकी दो बीवीया हेनां..? अ‍ेक आपकी फ्रेन्ड भी.. वो सृती मेडम..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी बहुत लकी हे.. ये अ‍ेक रोयल फेमीलीसे हे.. पता नही इनकी कीतनी बीवीया होगी.. सृती इनकी रानी हे.. सब बहुत खुले वीचारोके हे.. अगली बार आयेगे तो मे बात करुगी.. तो मील लेना..

आरती : (थोडी जीजकते धीरेसे) जी.. मेडम.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी..

भावीका : (सामने देखते) हां बोल..

आरती : (सरमाते धीरेसे) मेडम.. वो.. वो धृव सरका फोन आया था.. अगले सेटरडे सामको मुजे बुलाया हे.. वोही होटेलमे.. होटेल आलीसान.. पुरी रात.. क्या करु..?

भावीका : (दोनो हाथसे अपना सर पकडते गुस्सेसे) ओह गोड.. ये कमीनेका मे क्या करु.. इस बाप बेटेसे तो मे तंग आ चुकी हु.. कीतने बजे बुलाया हे..?

आरती : (सरमाते धीरेसे) रात दस बजे होटेलपे पहोंचनेको बोला हे.. सुबह तक रुकनेको बोल रहे थे..

भावीका : (कुछ सोचते) आरती.. मेरा अ‍ेक काम करेगी..?

आरती : (सामने देखते) जी मेडम.. क्यु सर्मीन्दा कर रही हे..? कहीये.. मेरा ओर मेरी माका तो बस.. अ‍ेक आपही सहारा हे..

भावीका : (सामने देखते) आरती.. हम ये इलीगली काम छोड रहे हे.. मुजे इस आदमीसे छुटकारा पाना हे.. ओर ये आखरी बार होगा.. फीर मे जहा भी जाउ तुजे साथ लेकर जाउगी.. बस.. तु अपनी सेफ्टीका खयाल रखना.. काम खतम होतेही तु आइपील लेना मत भुलना..

आरती : (सामने देखते) जी मेडम.. आपकी मजबुरीका वो कुछ ज्यादा ही गलत फायदा उठा रहे हे.. दो दीन पहेले हमारी वो सफाइ करने वाली नइ लडकीको भी ले गये थे.. लगताहे उनको तगडे पैसे दीये होगे.. कमीनी बहुत खुस थी.. लेकीन फीकर मत करो.. मे आपके साथ हु.. कहीये.. क्या करना हे मुजे..?

भावीका : (सामने देखते) आजसे मुजे तुम्हारे मोबाइलमे वो हर रोकोडींग चाहीये.. जीसमे तुम्हारी ओर धृवकी बाते होती हो.. ओर उस रात तुम अपना मोबाइल कही छुपाकर रखना.. उनमे सब वीडीयो रेकोडींग कर लेना.. मुजे उनके खीलाफ सबुत चाहीये..

आरती : (आस्चर्यसे देखते) मेडम.. आर यु सीरीयस..? क्या सचमे आप उसे छोडना चाहती हे..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. इस विडीयोको मे सबुतके तौरपे इस्तमाल करुगी.. बहुत डर डरके ये सब सहेते रहे.. यकीन मानो मे तुजपे कोइ आंच आने नही दुगी.. तेरा नाम कही नही आयेगा..

आरती : (मुस्कुराते) जी मेडम.. सब समज गइ.. आप फीकर मत करो.. काम हो जायेगा..

कहेते भावीका ओर आरतीने धृवके खीलाफ अ‍ेक योजना बनाली.. ये पहेली बार नही था.. धृव कइ बार आरती ओर दुसरी नर्सोको होटेलमे बुला लेता.. ओर रात भर उनके साथ वासनाका नंगा खेल खेलता.. वो आरतीको भी अ‍ेक बार प्रेटनेन्ट भी कर चुका था..

जीसका अ‍ेबोर्सन भावीकाको ही करना पडा था.. अ‍ैसा नही थाकी आरती पहेलेसे बहुत सीधी थी.. वो इस सब चीजोकी बहुत सौकीन थी.. आरती अपनी बुढी माके साथ अकेली रहेती हे.. पहेले वो दुसरी होस्पीटलमे जोब करती थी.. ओर पतीके रहेते हुअ‍े भी जीस होस्पीटलमे जोब कर रही थी उस होस्पीटलके डोक्टरके साथ कइ बार सो चुकी थी..





ओर अ‍ेक बार उनके पतीने सकके आधारपे उन डोक्टरके साथ रंगरेलीया मनाते पकड लीया.. जीसे उनका अपने पतीसे तलाक होचुका था.. तबसे वो भावीकाके यहा नोकरी कर रही थी.. उनको भावीकाके सारे राज मालुम थे.. लेकीन अब वो अपने तलाकके बाद काफी सुधर गइ थी..

अ‍ेक बार उनको धृवने होटेलपे बुला लीया.. तो उसने सारी बात भावीकाको बतादी.. ओर भावीकाको मजबुरीमे उनको धृवके साथ होटेलमे भेजना पडा.. ओर सब अन देखा कर लीया.. फीर तो धृव आये दीन आरती ओर दुसरी नर्सको भी होटेलपे लेजाने लगा..
 
लेकीन भावीका अपने इलीगल कामकी वजहसे सब कुछ अन देखा करती रही.. जीसकी वजहसे वो खुद दो बार अपने ससुरके वासनाकी सीकार होगइ थी.. तब उसे पता चलाकी बाप बेटा दोनोही उनके पीछवाडेके सौकीन हे.. फीर उनको धृव ओर उनकी मांके बारेमे भी पता चला..

अ‍ेक बार देर रात क्लीनीकसे घर आइ तो धृवकी कार घरपे ही थी.. तो वो समज गइकी धृव घरपे ही हे.. लेकीन धृव नीचे कही दीखाइ नही दीया.. तो वो उसे ढुंढनेके लीये अनायास ही उपरकी मंजीलपे चली गइ.. देखा तो अ‍ेक कमरेसे जोरोसे सीसकारीयोकी आवाज आ रही थी..





भावीका आवाज सुनकर चौकनी हो गइ.. ओर वो दबे पांव उस कमरेकी ओर बढ गइ.. दुर्भाग्यवस दरवाजा खुला था.. उसने अंदर जाकते देखा तो दंग रेह गइ.. क्युकी धृव हाथके बल जोरोसे उनकी मम्मीकी चुदाइ कर रहा था.. फीर भावीका वापस जटसे नीचे आगइ..

तबसे वो उनकी सास ओर धृवपे नजर रख रही थी.. तब दोनोकी बातोसे उनको येभी पता चलाकी धृवका उनकी बहेनके साथ भी नाजायज रीस्ता हे.. तबसे वो इन सब चीजोसे उबर चुकी थी.. अब उसने अ‍ेक साफ सुथरी लीगल क्लीनीकके साथ कही ओर बसनेका फैसला करलीया था..

इधर जैसे ही लखन घरपे आया सीधा फ्रेस होने चला गया.. सृती अभी क्लीनीकपे थी.. तो पुनम राधीका ओर चंदा अपने बच्चोको लेकर सोफेपे बैठकर गपे लगा रही थी.. चंदा कंपलीट तैयार होकर बैठी थी.. चंदा खुले लहेराते बालोमे बहुत ही खुबसुरत ओर कयामत लग रही थी..

उसने साडीके बजाय लखनने गीफ्ट दीया सलवार सुटका ड्रेस पहेना हुआ था.. जीसमे वो अपनी उम्रसे बहुत छोटी दीख रही थी.. जैसे ही लखन आया वो बहुत ही सरमा गइ.. ओर लखन सीधा आकर राधीका ओर पुनमके बीच बैठ गया.. ओर पुनमकी बच्चीके साथ खेलने लगा..

पुनम : (कातील मुस्कानसे) आ गये आप..? आप तैयार होजाइअ‍े तबतक मे चाइ नास्ता बता देती हु.. हम सबने पहेले ही करलीया हे.. ओर भाभी भी रेडी हे.. फीर दोनो चले जाओ..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) राधु तुभी चलना..

राधीका : (मुस्कुराते) नही भाभी.. आज पुरा दीन आराम ही करना हे.. आप दोनो चले जाओ..

पुनम : (खडी होते मुस्कुराते) चलीये मे आपके कपडे देती हु.. फीर चाइ नास्ता बना दुगी.. तबतक बेबी भाभीके साथ भले खेलती.. इनसे काफी घुलमील गइ हे.. इनको बच्चे सम्हालनेका काफी अ‍ेक्स्पीरीयंस हो चुका हे.. हें..हें..हें..

कहेते पुनम उपर जाने लगी तो लखन भी दोडकर उनके पीछे चला गया.. रुममे जातेही लखनने पुनमको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. फीर पुनम सरारत भरी नजरोसे लखनकी ओर देखते हसती रही.. ओर लखन सब कुछ समज गया..

लखन : (मुस्कुराते) सोरीनां.. वो मे भावीका भाभीसे मीलने गया था.. वो सामको तुजे मीलने आ रही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. बेचारीकी हालत खराब करदी आपने.. ठीकसे चल भी नही पा रही थी.. अच्छा सुनो.. आपसे अ‍ेक बात करेनी थी..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. बोलो..

पुनम : (सीनेको सहेलाते धीरेसे) रातमे जल्दीसे आनेकी कोइ जरुरत नही हे.. आज अच्छा मौका हे.. वीजयको मे यहा साथ लेकर आउगी.. वो यहा मेरे साथ ही सो जायेगा.. हो सकेतो सब आज ही खतम करदो.. समज गयेनां..?

लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या आज ही..? तुम सब इतनी आसानीसे कैसे केह पाती हो..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मे युही सब नही केह रही.. आगे आपको सब पता चल जायेगा.. ओर मुजे पता हे मेरे पतीका खयाल मुजे कैसे रखना हे.. आप सृतीदी ओर राधीका दीदीकी टेन्शन मतलो.. उनको गांव गयेथे तब मंजुमोमने सब समजा दीया हे.. अब तो बहुत कुछ बदलने वाला हे.. बस.. आप अपना काम करते जाइअ‍े.. अपनी बीवीओकी टेन्शन मत ले..

लखन : (थोडा हीचकीचाते) पुनो.. क्या वो.. सचमे..?

पुनम : (मुस्कुराते बीचमे ही बात काटते) हां भाइ.. अभी भी क्यु जीजक रहे हो..? वो अपना मन बना चुकी हे.. वो इस बातपे बीलकुल रेडी हे.. वो खुद आगे बढनेका फैसला कर चुकी हे.. आप जाओगे तो आपको खुद पता चल जायेगा.. बस.. इनकी भावनाओका सन्मान करना.. बीना हीच कीचाये..

कहातो लखनने पुनमको बाहोमे भीच लीया.. ओर बुब्स मसलते उनके होठोको चुमने लगा.. फीर थोडीसी छेडछाडके बाद पुनमने लखनको नये कपडे देदीये ओर जल्दीसे तैयार होकर नीचे आनेका कहेकर पुनम नीचे चली गइ.. ओर लखनके लीये चाइ नास्ता बनाने लगी..

फीर लखन कंपलीट होकर नीचे आगया तो पुनमने उसे चाइ नास्ता खीला दीया.. तबतक चंदा सरमाते लखनकी ओर देखती रही.. आज उनकी आंखोमे अ‍ेक अलग ही चमक थी.. लखनको उनकी नजरमे आज प्यारके साथ वासना भी साफ दीखाइ दे रही थी..
 
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