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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १३४
कहेते बरखा मनमे खुस होते वापस मुनाके कमरेमे चली गइ.. ओर मुनाको बसंतीसे बात करके उनका हाथ मांगने मम्मी बुला रही हे कहा.. तब मुना बहुतही गभरा गया.. तो बरखाने उसे हीमतसे बीन्दास्त बात करनेको कहा.. तो मुना अपनी मम्मीको मीलनेके लीये तैयार होगया.. ओर वो थोडा गभराते बसंतीके रुममे चला गया.. तब बरखाभी सरमाते हसती हुइ कीचनमे चली गइ ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. तभी....अब आगे
बसंती : (मुना अंदर आगया तब धीरेसे) मुना.. दरवाजा अच्छेसे बंध करदे.. फीर इधर आ.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..
मुना : (सरमाते धीरसे) जी मम्मी.. कहीये..
बसंती : (मुना दरवाजा बंध करके पास आकर बैठ गया तब) मुना.. ये सब क्या हे..? हंम..? ये सब कबसे चल रहा हे..?
मुना : (सर नीचे करते धीरेसे) जी मम्मी.. जबसे हम दोनो कोलेज मे थे तबसे.. मम्मी हम अेक दुसरेको प्यार करते हे.. मे बरखासे सादी करना चाहता हु..
बसंती : (धीरेसे जुठ मुठके गुसेसे) चुप.. अपनी ही बहेनको प्यारके नामसे प्रेगनेन्ट तक कर दीया.. सरमभी नही आइ तुजे..? हंम..? तुमने क्या सोचाथा.. की हम मान जायेगे..? बहुत आग हे तेरे मे.. हंम..?
मुना : (सरमाते धीरेसे थोडी हींमत दीखाते) मम्मी.. अैसी कोइ बात नही हे.. वो बरखाने कहाथा आपसे उनका हाथ मांगनेको, तो आगया.. हम दोनो अेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. आप हमारी सादी करवा दीजीये..
बसंती : (धीरेसे) तुजे पता हेनां.. ये नाजायज रीस्ता कहेलाता हे.. तुम दोनो भाइ बहेन हो.. हंम..? फीरभी दोनोने इतनी हीमंत करली..? सच बताना तुमने क्या सोचकर बरखाको प्यार कीया..?
मुना : (धीरेसे सरमाते) मम्मी.. बरखा बहुतही खुबसुरत हे.. मे उनको पहेलेसेही पसंद करता हु.. मे नही चाहताथा की उनकी सादी कही ओर होजाये.. मे उसे पाना चाहता था.. ओर प्यारतो कीसीसेभी ओर कभीभी हो सकता हे.. ओर कहेते हेना प्यार करनेमे नात जात पात रीस्ता उमर कुछभी नही देखते..
तो हमारे बीच भी प्यार होगया.. ओर अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. तो हमने क्या गलत कीया..? हमारे ही गांवमे अैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. ओर ज्यादातर लडके उनकी बहेनसे प्यार करते हे.. तो मेने भी प्यार कीया.. तो उसमे हमने क्या गलत कीया..?
बसंती : (अपनी चाल चलते धीरेसे) तुजे यकीन हे गांवमे अैसा होने वाला हे..? हंम..? तुम अैसे नाजायज रीस्तेमे यकीन करते हो..? ये तो तुम्हारी बहेन हे.. अगर कल कोइ अपनी मांके साथभी अैसा करेगा.. तो क्या तुम इस रीस्तेको भी अेक्सेप्ट करलोगे..? हंम..? अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे ये तो तुजे पता हेनां..?
मुना : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मी.. हम दोनो पढे लीखे हे, मुजे सब पता हे अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे.. ओर आप यकीन करो.. हमारे ही गांवमे मेरे दोस्तका उनकी विधवा ताइके साथ रीस्ता हे.. ओर अेकका उनकी विधवा बुआके साथ रीलेशन हे.. ओर गांवमे अैसे ओर कइ रीस्ते पनप रहे हे.. तो मे उसे भी गलत नही मानता..
जोभी हुआ हे दोनोकी आपसी रजा मंदीसे हुआ हे.. तो इसमे क्या गलत हे..? माफ करना मम्मी.. मे इन सब बातोको ओर रीस्तेको नही मानता.. बस मुजे बरखासे सादी करनी हे.. मे उसे बहुत प्यार करता हु.. हम दोनो कोलेज मे थे तबसे ही रीलेशनमे हे.. ओर अभी जो उनके पेटमे बच्चा पल रहा हे वो मेरा ही हे..
बसंती : (कातीलाना हसते धीरेसे) हंम.. अपनी मां के सामने ही इतनी बडी बात बोलदी.. काफी हीमंत हे तुजमे.. ठीक हे.. मानलो की अगर मेने बरखाकी सादी तुमसे कर भी दी.. तो क्या मेरी बेटीको तुम खुस रख पायेगा..?
मुना : हां मम्मी.. मे जोब करता हु.. ओर सुधीर अंकल केह रहेथे.. अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडी होस्पीटल बन रही हे.. तो मुजे ओर बरखाको उन्ही होस्पीटलमे अच्छी जोब मील जायेगी.. हमारे ठाकुरसाहेबही बनवा रहे हे.. ओर डोक्टर ओर उनकी वाइफ नीशाभाभी खुद होस्पीटल सम्हालने वाले हे.. तो हमे पैसे भी अच्छे खासे मीलेगे.. फीर पापाको नोकरी करनेकी जरुरतही नही पडेगी.. ओर बरखाभी खुस रहेगी..
बसंती : (सरमाते दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) मुजे पता हे तुम दोनोने हमारे पुरे घरकी जीम्वेवारी उठाली हे.. खुस रखनेका मेरा ये मतलब नही था.. मतलब.. उनको सेटीस्फेक्शन से था.. तु समज गयानां..? वरना कल अैसा ना होकी तेरे बापुकी तराह तेरी भी कोइ गलत आदतकी वजहसे आगे जाकर बरखाका रीलेनश भी कीसी ओरके साथ..
मुना : (धीरेसे बीचमेही बात काटते) मम्मी मे आपकी सब बात समज गया.. आपका कहेनेका मतलब हमारे बीच फीजीकल रीलेशनसे हे.. आप नीस्चीत रहीये अैसा कुछभी नही होगा.. क्युकी मुजे कोइ गलत आदत नही हे.. ओर बरखा भी मुजसे बहुत खुस हे.. ओर आगेभी खुस रहेगी.. आइ प्रोमीस..
बसंती : (मुनाके पेन्टके उभारकी ओर इसारा करते देखते) मुना.. तुमतो काफी हिमंत वाले ओर खुलके बात करने वालोमे से हो.. (पेन्टकी ओर नजरोसे इसारा करते) इसे देखकर तो लगता हेकी काफी बडा होगा.. तो तुम बरखा को खुस रखते होगे.. बस मेतो अैसेही पुछ रहीथी.. मुजे अब कोइ चीन्ता नही हे..
मुना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी आप नीस्चीत रहीये.. मे खुलकर बात करनेवालो मे से हु.. बरखा इनसे बहुत खुस हे.. अबतो वोभी चाहती हेकी मे उसे जींदगीभर ये सुख देता रहु ओर उसे खुस रखु.. इसीलीये हमने ये बडा कदम उठालीया.. लेकीन आपभी मेरी मम्मी होनेके बावजुद मुजसे सब खुलके बात कर रही हे.. अैसा क्यु..? कोइ खास वजह..?
बसंती : (सरमाते मुस्कुराते) मुना.. भलेही मे तेरी मां हु.. लेकीन मां से पहेले मेभी अेक औरत हु.. ओर हम औरतोको कैसे कैसे दौरसे गुजरना पडता हे वो तुजे क्या मालुम..? तुमतो जानते हो तेरे बापुकी बुरी आदतकी वजहसे आज उनकी ये हालत हे.. तो मेभी अैसे दौरसे गुजर रही हु.. येतो अच्छा हे मेने कोइ गलत कदम नही उठाये.. तु समज गयानां..?
बरखाकी जींदगी अैसेही कीसीके हाथोमे नही सोप दुगी.. इसीलीये तुजे ये सब खुलकर पुछ रही थी.. अब मुजे यकीन हो गयाकी तु मेरी बरखाको सम्हाल पायेगा.. ओर उसे खुस भी रख पायेगा.. ओर मुजे खुसी हेकी तुम अैसे रीस्तोपे यकीन करते हो.. बस मेरी अेक ही सर्त हे.. तुजे बरखाके साथ साथ मेरा भी खयाल रखना होगा.. तु समज गयानां..?
मुना : (सोक्ट होते अेक नजरसे बसंतीको देखते धीरेसे) मम्मी..? ये आप क्या बोल रही हे..? मतलब मे समजा नही.. आपतो इतना सब खुलकर बोल चुकी हे.. तो ये बात भी मुजे खुलकर बताइअे..
बसंती : (मुस्कुराते धीरेसे) क्यु..? अभीतो केह रहेथे की तुमतो पढे लीखे हो..? इतनाभी ना समज नही हो.. की मेरे कहेनेका मतलब ना समजो.. ओर तुमने जोभी अभी सुना ओर समज रहे हो वोही केह रही हु.. ओर यही सच हे.. बस.. इस बारेमे बरखाको तो क्या कीसीको पता भी नही चलना चाहीये..
अब तुजपे डीपेन्ड हे.. की तुम बरखाके साथ मुजे भी खुस रख पाते होकी नही.. अगर मेरी ये सर्त मंजुर हे तो तुम बरखाके साथ रेह सकते हो.. मे तुम दोनोकी सादी भी करवा दुगी.. वरना भुलजाओ बरखाको.. चल अब चाइ नास्ता होगया होगा.. ओर हां.. अभी हमारे बीच जोभी बात हुइ हे.. वो हमारे बीचही रहेनी चाहीये.. अपनी इस बीवीको भी नही बताना.. बस यही मेरी सर्त थी..
मुना : (थोडा सकपकाते) मम्मी.. क्या ये सब जायज हे..? आइ मीन.. आप मेरी मां हो.. इसीलीये..
बसंती : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) क्यु..? मां हु तो क्या हुआ.. हु तो अेक ओरत.. अभी तो तुमने कहाकी तेरे अेक दोस्तने उनकी वीधवा ताइके साथ रीलेशन बनाया हे.. तो मुज मे क्या प्रोबलेम हे..? क्या मेभी तुजे बरखाकी तराह खुबसुरत नही लगती..? तो बतादे..
अभी तो तुम केह रहेथे की मे कीसी भी रीस्तेको गलत नही मानता.. तुम तो काफी खुले विचारके होनां..? जब मुजे तेरे साथ रीलेशन रखनेमे कोइ अेतराज नही हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे..? अेक बार अच्छेसे सोचले.. मुजे तेरे जवाबकी कोइ जल्दी नही हे..
मुना : (कुछ सोचते) नही मम्मी.. आपभी बरखाकी तराह बहुत खुबसुरत हो.. मे भी आपको पसंद करता हु.. लेकीन हमारे बीत मां बेटेकी कुछ मर्यादाभी हे.. तो इस बारेमे मुजे सोचनेके लीये थोडा वक्त चाहीये.. आपने तो मुजे आज जटका ही दे दीया..
बसंती : (कातीलाना समाइल करते मुनाके कंधेपे हाथ रखते) हां पता हे मुजे.. मेने तुजे आज बहुत बडा जटका दे दीया हे.. तो वक्ततो चाहीयेनां..? तो ठीक हे.. अेक बार अच्छेसे सोचले.. यहा बेटीके साथ उनकी मांभी मील रही हे.. हें..हें..हें.. ओर हां.. तुम अपनी बीवीके साथ सो सकते हो.. लेकीन मेरी सर्तके साथ.. ओर ध्यान रखना.. तेरे पापाको अभी इस बातका पता नही चलना चाहीये.. अब चल बहार.. तेरी बीवीने चाइ नास्ता बनालीया होगा.. हें..हें..हें..
मुना : (मनमे खुस होते बहार नीकलते मुस्कुराते धीरेसे) मम्मी.. लेकीन अेक दीनतो सबको पता चलही जायेगा.. हम बरखाकी बात ज्यादा दिन छुपा नही सकते.. क्या वो प्रेगनेन्ट हेनां..?
बसंती : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी वो हर रात हमसे छुपकर तेरा बीस्तर गरम करती हे तो प्रेगनेन्ट तो होही जायेगीनां..? वो सब तुम मुजपे छोडदे.. तबकी तब देखा जायेगा.. ओर वैसेभी गांवमे तुम दोनो जो केह रहे हो तो वोभी तो होजायेगा.. मे सब देख लुगी.. बस तुम मेरा खयाल रखना पडेगा.. वरना कल तुम कीसी ओरके मुहसे ये ना सुनोकी तेरी मा कीसी ओरके साथ.. तुम समज गयेनां..?
मुना : (जटसे धीरेसे) नही मम्मी.. अैसा आप कुछभी नही करोगी.. बस मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये..
बसंती : (मुस्कुराते) इसीलीये मेने ये सर्त रखी हे.. यकीन करो.. मे भी बरखा से कम नही हु.. बीस्तरमे उनकोभी टक्कर दे सकती हु.. मे तुमको नीरास नही करुगी.. वैसे तुमतो काफी समजदार हो.. इनसेतो अच्छा हे घर की बात घरमे ही रेहजाये.. मे आशा करती हु की मुजे तेरा जवाब जल्द मील जायेगा.. अब चल बहार..
फीर दोनोही बहार आगये तब बरखाको नही पताथाकी दोनोके बीच क्या बाते हुइ हे.. बरखाने तीनोके लीये चाइ नास्ता बनालीया था.. ओर तीनो ही अेकठे बैठकर चाइनास्ता करने लगे.. तब चाइ पीते मुना गहेरी सोचमे डुब गया.. आज उनकी मां बसंतीने खुलकर अपनी सर्तके बारेमे बताकर मुनाको जंजोरके रख दीयाथा.. आज उनकी मम्मी ने खुद सामनेसे उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात करदी..
अब मुना अपनी मम्मीको अेक मा की नजरसे नही अेक ओरतकी नजरसे नजरे चुराते देखने लगा.. मुनाने आज तक अपनी माको अैसे गौरसे नही देखा था.. वो अपनी नजर चुराते बसंतीके अेक अेक अंगका जायजा लेने लगा.. जब उनकी नजर बसंतीके उरोजोपे चली गब.. तब मुनाको बसंतीके ब्लाउसमे बहुत कठोर भरावदार उभार देखनेको मीला.. जो ब्लाउसके अंदरभी उसे सख्त दीख रहेथे..

तब मुनाका लंड मेन्टके अंदरही खडा होकर जटके मारने लगा.. आज मुनाको अपनी मम्मीके अंदर कीसी काम देवकी मुरत नजर आने लगी.. ओर सोचने लगाकी अगर मे मम्मीको हां कहेदु तो यही ओरत अेक दिन उनके नीचे लैटी होगी.. कमीनी आजभी अेक लडकीकी तराह जवान ओर कामुक दीखती हे.. अगर इनकी भी चुत मील जायेतो सालीको रगड रगडके चोदुगा.. यही सब सोचते मुनाकी पेन्टमे लंड जटके मारते खडा होने लगा ओर तंबु बन गया..
तो बसंती टेडी नजर करते मुनाके पेन्टके उभारको बार बार देखने लगी.. तब उसे पेन्टमे बहुत बडा नाग अपनी फेन उठाये नजर आया.. तब वो नजरे चुराते मुनाकी ओर देखते सरमाते मंद मंद मुस्कुराने कामुक स्माइल करने लगी.. वो मुनाको रीजानेकी पुरी कोसीस करने लगी.. तब मुनाभी उनकी ओर देखते अपनी माकी नजरको पहेचान गया.. तो बसंतीभी मुस्कुराते नजरोसे मुनाके पेन्टकी ओर इसारा करने लगी..
तो मुना बहुतही सरमा गया.. ओर सोचने लगाकी मम्मी उनके नीचे लेटनेके लीये पुरी तराह तैयार हे.. अगर मेने मम्मीको खुस नही रखातो वो फीरसे भानुके साथ या कीसी ओरके साथ रीलेशन रख लेगी.. इनसे तो अच्छा हे मेही इनके साथ रीलेशन रखलु.. ओर वो सोचते ही सरमाते मुस्कराता रहा.. उसने तभी मनमे अपनी मम्मीके साथ रीलेशन रखनेका तैय करलीया.. तभी..
बसंती : (नास्ता खाते) बरखा.. सुन.. आजसे तुम मेरी बेटी नही हो.. अब तुम मेरे मुनाकी बीवी हो.. मेरी बहु.. तो तुम अपनी सेहतका खयाल रखना.. आजसे मेरे बेटेकी सब जीम्वेवारी तेरी होगी..
बरखा : (सरमाते हसते धीरेसे) जी मम्मीजी.. थेन्कयु.. हें..हें..हें.. मम्मी.. आप मेरी सास के साथ मां भीतो हे.. तो भाइकी भी आप मां के साथ उनकी सासभी होगइ हे.. लेकीन मे आपके साथ सास बहु वालाही रीलेशन रखुगी.. हें..हें..हें..
बसंती : (मुनाकी ओर कातील नजरोसे देखते) अब ये सब मुनापे डीपेन्ड हे.. अगर उनको अपनी मां के साथ दीकत होती हे तो भलेही मुजे अपनी सास माने.. तो मे आशा करती हुकी तबतो इनको कोइ दिकत नही होगी.. क्यु मुना..? हें..हें..हें.. दुसरी बात.. आजसे बरखाकी भी सब जीम्वेवारी तेरी होगी.. अब तुजेभी मेरी बहुका अच्छेसे खयाल रखना पडेगा.. उसे हर महीने चेकअपके लीये सहेर लेजाना हे.. बाकी गांवमे मे सबको जवाब दे दुगी.. तुम दोनोको फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. जीलो अपनी जींदगी..
कहातो मुना समज गयाकी बसंती कीस बारे मे बात कर रही हे.. वो बसंतीकी सब बात समज गया.. दोनोही मां बेटे नजरोका खेल खेलते बात कर रहे थे.. तब बरखाको नही पताथा की दोनो मा बेटे अैसी बाते करते क्या खीचडी पका रहे हे.. बसंती मुनाके पेन्टके उभारको देखकर पुरी तराह पागल हो चुकीथी.. उनको पेन्टमे मुनाका लंड भानुके लंडसे भी बडा महेसुस हो रहाथा.. ओर मुनाभी अपने दिलकी बात केह देता हे..
मुना : (सरमाते बसंतीकी ओर देखते हसते) जी मम्मी.. मुजे मेरी सब जीम्वेवारी पता हे.. अब मे सीर्फ आपकी बहुका नही.. सास बहु दोनोका अच्छेसे खयाल रखुगा.. हें..हें..हें.. क्युकी अब आप मेरी मां के साथ मेरी सासभी हो गइ हो.. तो मुजे सास मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. ओर मां मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. मे कीसीभी रीस्तेमे कोइ अेतराज नही हे.. हें..हें..हें..
बसंती : (मुनाकी बात समजते ही खुस होते) जी.. मुना मुजे तुमसे यही उमीद थी.. हें..हें..हें..
कहेते बसंती मुनाकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते हसती रही.. तब मुनाभी उनकी मम्मीको अेक अलगही वासना भरी नजरोसे देखते हसने लगा.. तो बरखा भी मुहको दुसरी ओर घुमाते बहुतही सरमाते हसती रही.. तभी मौकेका फायदा उठाके बरखाकी नजरे बचाते मुनाने बसंतीकी ओर आंख मार दी.. ओर हसने लगा.. तब बसंती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वोभी मुह घुमाते मुस्कुराने लगी..
तब बरखा को नही पताथाकी सर्तके तौरपे उनकी मम्मीने मुनासे क्या मांगलीया था.. ओर बरखाको पानेके लीये उसे अपनी मम्मीकी सर्त मानली थी.. ओर बातो ही बातोमे उसने अपने दिलकी बाते बसंतीको बतादी थी.. मुना बसंतीसे बात करके मनही मन खुस हो रहा था.. आज उसने बरखाका हाथ अपनी मम्मीसे मांगकर अपने लीये दो दो चुतोका इन्तजाम करलीया था.. जब चाइ नास्ता करलीया तो बरखा सब बर्तन लेकर बहार चली गइ..
तो मुनाने बसंतीकी ओर वासना भरी नजरोसे मुस्कुराकर देखा.. ओर मौका मीलतेही बसंतीकी ओर अेक बार फीर आंख मारके मुस्कुराने लगा.. तो बसंती वापस बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी नजर घुमाते सरमाते मंद मंद मुस्कुराते लगी खडी होने लगी.. तब अचानक मुनाने उनका हाथ पकडलीया.. ओर अपनी ओर खीचते बसंतीके बुब्सको दबाके मसलने लगा.. तो बसंतीने जटसे बहारकी ओर देखते हाथ खीचलीया.. ओर बहुतही सर्मसार होते हसते हुअे मुनासे छुटकर जटसे अपने रुममे भाग गइ..
तब बरखा बहार आंगनमे पानीकी टंकीके पास सभी बर्तन लेकर साफ करने बैठ गइ.. तो अंदर मुना हींमत करके अपनी मम्मीके रुमकी ओर चल पडा.. तब बसंती रुममे आतेही दरवाजा खाली बंध करके उनके सहारे खडी होगइ.. ओर अपनी आंख बंध करके दोनो हाथ अपने उरोजोपे रखके अपनी सांसको कंट्रोल करने लगी.. आज अचानाक मुना उनके अंगोके साथ खेलने लगेगा उनकी उमीद तो बसंतीको भी नहीथी..

जीस तराह मुनाने अचानक उनका हाथ पकडके उसके उरोजोके साथ दबाकर मसलते खेला.. तो बसंतीकी गभराहटसे भारी सांस होगइ थी.. वो मुस्कीलसे मुनासे छुटकर अंदर भाग गइ.. तब बसंतीकी काम वासना पुरी तराह भडक चुकीथी.. उनकी चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया फडफडाते पानीका रीसाव करने लगीथी.. ओ वो मुस्कीलसे बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तो अचानक उनके रुमका दरवाजा खुल गया..
तो बसंती गभराकर पलटके देखने लगी.. तो मुना दरवाजा खोलकर अंदर आगया.. तब बसंती कुछ सोचे समजे उनसे पहेलेही मुना धीरेसे दरवाजा बंध करके बसंतीके पास आगया ओर बसंतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोपे होठ रखदीया.. तो बसंतीका चहेरा लाल होगया.. वो पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी.. ओर मुनाका चहेरा अपने हाथोमे थामकर उनको पागलोकी तराह चुमने लगी..

तभी मुना बसंतीको जोरोसे बाहोमे भीचते बाथरुमकी ओर लेगया.. ओर अंदर जातेही बसंतीको पागलोकी तराह चुमने लगा ओर अेक हाथसे जोरोसे उनके बुब्सको दबाते मसलने लगा.. तब बसंतीसे कंट्रोल करना मुस्कील होगया.. वो अभी बरखाकी वजहसे कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी..
तो वो मुनाको हाथ पकडके भारी सांसोसे मुनाको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तभी मुनाने बसंतीकी चुतको उपरसेही मुठीमे दबोच लीया.. तब बसंती उछल पडी.. ओर मुनाको धका मारते दुर करदीया.. फीर गभराते मुनासे बात करने लगी..

बसंती : (सरमाते अपने कपडे सही करते धीरेसे) मुना.. प्लीज.. अभी नही.. अभी बरखा घरपे हे.. अगर उन्होने हमे देखलीया तो सब गडबड होजायेगी.. अभी तुम बहार जाओ..
मुना : (फीरसे पास आते होंठ चुमते) मम्मी.. तुम मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. मे तुमसे मीलना चाहता हु..
बसंती : (मुनाको दुर करते बहारकी ओर देखते) नही मुना.. अभी हमारा मीलना उचीत नही हे.. तुम समजता क्यु नही..? अभी तुम जाओ.. हमे मीलनेके बहुत मौके मीलेगे.. तुम दो पहोरको आजाना.. तब मे घरपे अकेली रहेती हु.. समज गयानां..? अभी जाओ.. बरखा कभी भी आ सकती हे..
मुना : (अपना लंड पेन्टके उपरसेही मसलते) मम्मी.. तुमने तो मुुजे आग लगादी हे.. अब इनका क्या करु..? बस अेक बार..
बसंती : (सरमाते मुस्कुराते बहार धका मारते) कीतने कमीने हो.. अपनी बीवीको जाकर कहो वो तेरी आगको सांत कर देगी.. अब जाओभी.. मे रातमे तेरी आंगको सांत करनेका इन्तजाम करती हु.. अभी जाओ बहार.. बेसर्म कहीका.. हें..हें..हें..
ओर बसंतीने मुस्कीलसे मुनाको बहार भगा दीया.. ओर वो सरमाकर मुस्कुराती रही.. इस रात जो मुनाने सोचा था उनसे बहेतर नतीजा उनको देखनेको मीला.. देर रात बसंतीका पती सो गया तब बसंतीने खुद आज अपने हाथोसे बरखाको अच्छेसे हल्कासा शींगार करके दुल्हनकी तराह तैयार करदीया.. ओर वो खुद बरखाको लेकर मुनाके रुममे छोडने चली गइ.. ओर दरवाजेपे छोडके वापस आगइ.. तब मुना बहुतही खुस हुआ.. ओर इस रात दोनो भाइ बहेनने बीना डरके खुलकर प्यार कीया..

मुनाने आज बरखाको जमकर चोदलीया.. तो बरखाभी खुस होगइ.. दोनोही रातभर चुदाइ करते रहे.. तब उन दोनोको नही पताथा की अेक खीडकीसे छुपकर बसंती दोनोकी चुदाइ भरी रास लीला देख रही हे.. क्युकी आज मुनाने बसंतीको उनके रुममेही दबोच लीयाथा ओर उनके बुब्स ओर चुतके साथ छेडखानी करके उनके तनकी आगको भडका दीयाथा.. तबसे बसंतीकी काम वासना बहुतही बढी हुइ थी.. वो चाहती थीकी अब मुना उसे जल्दसे जल्द मील जाये.. ओर उनकी जमकर चुदाइ करले..
तो दुसरी ओर रमेशके घर रमेश अपने रुममे बेडपे लेटकर मोबाइल देखते आराम कर रहाथा.. तभी चारु ओर वंदनाभी घरपे आगये.. वंदना थकानकी वजहसे अपने रुममे जाकर फटाफट चेन्ज करके सोने लगी.. तब चारु सभी लाइट दरवाजा बंध करके अपने रुममे चली गइ.. ओर चेन्ज करते रमेशकी ओर गुस्सेसे देखती रही.. तभी रमेशकी नजर चारुकी ओर गइ.. तो चारु उसे खाजाने वाली नजरोसे घुर रहीथी.. ओर चारु चेन्ज करके बेडपे आगइ..
रमेश : (हसते) अरे डार्लींग.. आजतो कुछ मुड ठीक नही लगता.. बडे गुस्सेमे लग रही हो..? क्या वहा कीसीसे अन बन तो नही हुइ..? हें..हें..हें..
चारु : (रमेशको अेक घुसा मारते धीरेसे) नीकमे.. कमीने.. क्या अेक बीवीसे जी नही भरा.. जो कीसी ओर रंडीको लेकर सहेरमे घुमते हो.. कमीने.. पहेले अपनी बीवीसे तो ठीकसे चोदना सीखले बादमे दुसरी ओरतको घुमाना.. कौन थी वो रंडी..?
रमेश : (सब समज गया तब डरते धीरेसे) चारु.. ये क्या बत्तमीजी हे.. कोइ बीवी अपने पतीसे अैसे गालीया देती हे..? ओर तुम क्या केह रही हो..? मे कीसको लेकर घुमता हु..? कोइ भी तो नही थी..
चारु : (गुस्सेसे) क्यु.. सहेरसे अपनी बाइकके पीछे कीसको बीठाकर आ रहेथे..? हमने तुजे रास्तेमे देखलीया था.. बोल इसका जवाब हे तेरे पास..? कमीना कहीका.. मुजसे जुठ बोलता हे.. अेकतो जवान लडकी घरमे बैठी हे.. उनका तो कुछ करते नही.. की चलो सादी लायक होगइ हेतो कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. ओर उपरसे बहार जाकर इस्कबाजी फरमाते हो.. सरम भी नही आती..?
तब रमेश सारा माजरा समज गया.. अब उस इस बातको छुपानेका कोइ फायदा नही था.. तो उसने थोडा सच बतानेको उचीत लगा.. ओर बेडपे बैठ गया.. फीर चारुकी ओर घुमते धीरेसे बात करने लगा..
रमेश : देख चारु.. तुजे गलत फेहमी होगइ हे.. वो हमारे सामतभाइकी बीवी जयाभाभी थी.. मुजे आते वक्त बसस्टेन्डपे खडी कीसी बसका इन्तजार करते दीख गइ.. तो मे उसे अपनी बाइकमे बीठाकर घर ले आया.. इसमे क्या गलत हे..? इसका मतलब ये थोडीना हेकी मेरा उनके साथ रीलेशन हे..
चारु : (सख्त लहेजेमे) अच्छा.. तो फीर उनको अपना चहेरा ढकके अपनी पहेचान छुपानेकी क्या जरुरत थी.. अैसे ही आ सकती थी.. देख रमेश.. अभी भी वक्त हे.. अगर तुम दोनोके बीच कुछ चकर हे तो अभी मुजे सच बतादे.. मे तुजे बक्स दुगी.. लेकीन बादमे मुजे कीसी ओरसे पता चलाना.. तो फीर.. तुम सोचभी नही सकते अैसा कदम मे उठाउगी.. याद रखीयो.. चल सोजाओ अब..
रमेश : (राहतकी सांस लेते चारुको बाहोमे लेनेकी कोसीस करते) हंम.. चारु यकीन करो.. जो तुम सोच रही हो अैसा कुछ भी नही हे.. चल आजा.. थोडा प्यार करले..? हंम..?
चारु : (गुस्सेमे हाथको जटकते) हाथ मत लगाओ मुजे.. अब जबतक मुजे पुरा यकीन नही हो जाता तुम मुजे छुओगे भी नही.. केह देती हु.. अगर यही बात हमारे साथ होती तो..? अबतक तो मुजे डीवोर्स दे चुके होते..
रमेश : (मनते करते) चारु.. प्लीज.. अैसा कुछ भी नही हे.. मान जाओ.. तुजे मेरी कसम.. हमारी वंदनाकी कसम.. बस..? अब तो मानजा..
चारु : (थोडा सांत होते अेक नजरसे देखते) रमेश.. तुम कीतने कमीने हो.. हमारी बच्चीकी कसम क्यु खाते हो..? उसने तुम्हारा क्या बीगाडा हे..? उस मासुम को तो छोड देते.. बेचारी सादीके लायक होगइ हे.. फीरभी हमे कुछ नही कहेती.. जरा उनकी तकलीफ के बारेमे तो सोचो..
रमशे : चारु.. तो क्या करता.. तुमजो इतने गुस्सेमे थी.. मान जाओ प्लीज.. ओर हम उनके लीये लडका ढुंढनेकी कोसीस तो कर रहे हे.. लेकीन वो सादी करनेको मना भी तो करती हे.. पता नही उनके मनमे क्या हे..
चारु : (सांत होकर धीरेसे) ठीक हे रमेश.. अभीतो तुमने वंदुकी कसम खाइ हे तो तुम्हारी बात मान लेती हु.. लेकीन याद रखना.. अगर मुजे कहीसे भी पता चलाकी सच क्या हे.. ओर तुम्हारा जयाभाभीके साथ चकर नीकला तो मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. फीर तुम ओर मे आजाद.. तुम अपने तरीकेसे जीना ओर हम मां बेटी अपनी तरीकेसे जीयेगे.. तुम हमे कुछ नही कहोगे..
रमेश : (थोडा डरते धीरेसे) चारु..? क्या आजाद..? मतलब..? क्या मुजे छोडके चली जाओगी..?
चारु : (रहस्य भरी मुस्कानसे) रमेश.. मे इतनी भी कमजोर नही हु.. की तुजे छोडकर चली जाउ.. तुमतो मुजे ठीकसे सेटीस्फाइभी नही करपाते.. फीर भी मे यही तुम्हारे साथ पडी हु.. अगर तुजे छोडना होतातो कबसे कीसीके साथ भागकर तुजे छोड चुकी होती.. अगर तुम्हारा चकर जयाभाभीके साथ नीकला..
तो तुम हमे कभी नही पुछोगे.. की हमारा रीलेशन कीसके साथ हे.. समजे..? अगर मर्दको अैसे रीस्ते रखनेका हक हेतो हम जैसी ओरतोको भी हे.. फीर तुम अपने तरीकेसे जीओगे ओर हम मा बेटी अपने तरीकेसे जीयेगी.. बस यही कहेना था.. अब सो जाओ.. बहुत देर होगइ हे.. मुजे ओर बहेस नही करनी..
कहेके चारु करवट लेकर सोगइ.. अैसा नही था की चारुको रमेश ओर जयाके रीस्तोके बारेमे नही पता था.. उनको नीशासे सब पता था.. की रमेशका जयाके साथ रीलेशन हे.. लेकीन आज चारुने बडी ही सीफततासे चाल चलकर रमेशसे अन्जान बनके अपने लीये ओर वंदनाके लीये देवायतके साथ रीलेशन रखनेके लीये रास्ता बनालीया था.. तो दुसरी ओर रमेशभी अंसमजमे चारुको देखता ही रेह गया..
उनको अब चारुसे जुठ बोलकर ओर वंदनाकी जुठी कसम खाकर पछतावा होने लगा.. लेकीन अब करेतो क्या करे..? ओर ये सच भी था की रमेशका नाजायज रीस्ता जयाके साथ था.. तो अेकना अेक दिनतो सबको पता चलनाही था.. तब रमेशने चारुसे माफी मांगनेकी ठानली.. तो वो चारुके उपर जुक गया ओर चारुको खीचकर अपनी ओर कीया.. ओर चारुको अपनी बाहोमे भीच लीया..
रमेश : (धीरेसे रुआसी आवाजमे) चारु.. आइ अेम सोरी.. मेने तुम्हारी ओर वंदुकी जुठी कसम खाइ.. मुजे माफ करदे.. अब अैसी गलती दुबारा कभी नही होगी.. आइ प्रोमीस.. बस अेक बार मुजे माफ करदे..
चारु : (अेक नजरसे आंखोमे देखते) रमेश.. अभीभी वक्त हे मुजे सब सच बतादे.. मे तुजे माफ कर दुगी.. क्युकी मुजे मेरी नही.. मेरी बच्चीकी चीन्ता हे.. जब लोगोको पता चलेगा की उनके बापका कीसी दुसरी ओरतके साथ रीलेशन हे.. तो कौन हमारी बच्चीका हाथ थामेगा..? इसका कोइ जवाब हे तेरे पास..?
रमेश : (हां मे गरदन हीलाते) हां चारु.. सोरी.. मुजसे बहुत बडी गलती हो गइ.. लेकीन इसमे मेरी कोइ गलती नही थी.. तुमतो जानती हो सामतभाइ अब बुढे हो चुके हे.. ओर जयाभाभीकी उमरमे ओर उनकी उमरमे काफी फर्क हे.. जीनकी वजहसे जयाभाभीने खुद सामनेसे मुजसे रीलेशनके लीये कहाथा.. लेकीन अब वादा करता हु.. मे उनको कभी नही मीलुगा.. मे मेरे परीवारको बरबाद होते नही देख सकता.. चारु आइ अेम सोरी.. बस अेक बार मुजे माफ करदे..
चारु : (प्यारसे गालपे अेक चपत लगाते) रमेश.. तो पहेलेही सच बता देता.. मुजेभी तुमसे अैसे बात करना अच्छा नही लगता.. अगर उनसे रीस्ता ही रखनाथा तो मुजसे कहेकर रखता.. मे तुजे मना थोडीना करती..? क्युकी मे ओरतोकी तकलीफ भली भांती जानती हु.. मेभी इस दौरसे गुजर रही हु..
इसमे ना जयाभाभीकी गलती हे ना तुम्हारी.. अगर कहेके रीस्ता रखते तो मे तुजे खुसी खुसी हां केह देती.. चल.. जा मेने तुजे माफ करदीया.. ओर हां.. आइन्दा अैसी गलती कीना.. तो अभी तुजे प्यारसे चपत लगाइनां.. उनके बदले तुजे जोरोका चाटा लगेगा.. हें..हें..हें..
रमेश : (जोरोसे बाहोमे भीचते) थेन्कयु चारु.. तुमने मुजे माफ करदीया.. आइ प्रोमीस.. अब मे उनके साथ रीलेशन नही रखुगा..
चारु : नही रमेश मे मना नही करती.. तुम उनके साथ रीलेशन रखो.. लेकीन मुजे बताकर रीलेशन रखते.. हंम..? लेकीन अेक बात बताओ..? तुम मुजसे तो ठीकसे संतुस्ट नही कर पाते तो फीर जयाभाभीको कैसे..
रमेश : (मुस्कुराते) हंम.. चारु.. अब तुमसे कोइ बात नही छुपाउगा.. बस मेडीकलसे अेक इम्पोटेड गोली हाथ लग गइ हे.. तो वो मेरी दिवानी होगइ.. हें..हें..हें.. तुम तो मुजे गोली खाने नही देती..
चारु : (अेक नजरसे देखते) रमेश.. तुजे पता हे अैसी गोलीसे सेहत पर असर पडता हे..? खास करके अपने दिलपे.. तो दो मीनीटके मजेके लीये अैसी गोलीया मत खायाकर.. मेभी तुजे अैसी गोलीया दे सकती हु.. लेकीन मुजे तेरी सेहतसे खीलवाड करके कोइ मजे नही करने..
भलेही तुम हमे संतुस्ट ना कर सको.. लेकीन अपनी मर्दानगी दीखानेके चकरमे कही जानपे ना आजाये.. तो बी केरफुल.. हां.. देसी इलाज करवा सकते हो.. आजकल अैसी बहुतसी देसी दवाइ मीलती हे.. तुम अब सहेर जाओतो लेकर आना.. या अपना इलाज करवाना.. मुजे देसी गोलीगोसे कोइ अेतराज नही हे..
रमेश : (हसते गाल चुमते) हंम.. चारु.. अगेइन आइ अेम सोरी.. तुम कीतनी अच्छी हो..
चारु : (सरमाते हसते) हंम.. अब ज्यादा मस्का मत लगा.. सीधे सीधे बोलनाकी तुजे चोदना हे.. चल आजा.. आज तुजे खुस कर देती हु.. हें..हें..हें.. ओर वोभी बीना गोली खाये.. हें..हें..हें..
तब रमेश बहुत खुस होगया ओर फटाफट अपने ओर चारुके कपडे नीकालने लगा तब उनका बचपना देखकर चारुकी भी हसी नीकल गइ.. ओर कुछही देरके बाद रमेश चारुके उपर चडके उनको चोद रहाथा.. तब चारुभी मजेसे अपनी कमर उछालते रमेशका साथ दे रही थी.. उनकोतो बस यही रमेशके साथ रहेकर देवायतके साथ अपना रीलेशन रखना था.. ओर वंदनाको देवायतके साथ सेट करना था..

उनको पताथा की रमेश उनको कभी संतुस्ट नही करपायेगा.. फीरभी रमेशसे कैसे अपनी बात मनवानी हे.. वो भली भांती जानती थी.. क्युकी ज्यादातर ओरते कीसीभी चीजके लीये अपने पतीसे डीमांन्ड करती हे तब उजके नीचे लेटकरही करती हे.. फीर चाहे वो कोइ चीज हो या अपने घरकी समस्या.. तब कुछ ही देरकी घमासान चुदाइके बाद रमेश चारुकी चुतको भरके उनके सीनेपे ढेर हो जाता हे.. तब..
चारु : (रमेशके सरको सहेलाते) रमेश.. अब वंदनाके बारेमे कुछ सोचो.. उनकी जवानी नीकली जा रही हे.. कल अैसा ना होकी उनके बारेमेभी हमे बहारसे कीसी ओरसे पता चले.. की उनकाभी कीसीके साथ रीलेशन हे.. तुम समज गयेनां..?
रमेश : (चारुकी ओर देखते गाल चुमते) हां चारु.. मे सब समजता हु.. लेकीन कोइ ठीकसे ढंगका लडका भीतो मीलना चाहीये.. ओर वंदुभी सादीके लीये मना कर रही हे.. चारु.. अेक बात पुछु..? वो कीसीको प्यार ब्यारतो नही करती..? तुम अेक बार अच्छेसे उनकी दिलकी बात जानलो.. अगर लडका अच्छा होगातो हम उनकी सादी वही कर देगे..
चारु : (प्यारसे सरको सहेलाते) जानु.. मुजेतो अैसा कुछभी नही लगता.. फीरभी अेक बार मे उनसे पुछ लुगी.. बस मुजेतो गांवमे सीर्फ अेकही लडका ढंगका दीखता हे.. ओर हमारी वंदु भी उनको पसंद करती हे..
रमेश : (चारुकी ओर देखते) कौन..? तुम कीसकी बात कर रही हो.. क्या हम उसे जानते हे..? आइ मीन क्या वो हमारे गांवका लडका हे..? तो बता.. मे उनसे बात करलुगा..
चारु : (होंठ चुमते) हंम.. हमारे गांवकाही हे.. लेकीन अब उनकी सादीया होगइ हे.. तो बेचारी वंदनाकी बात आपको कहासे करती..? फीरभी अेक बार उनको पुछलो.. आपका खास दोस्तजो हे.. अगर वो हा कहेतो मेरी वंदुकी सादी भी उनसे करवा दुगी.. इनमे हमाराभी फायदा हे.. वंदु सादी करके भी हमारे साथ रेह सकती हे..
रमेश : (थोडा परेसान होते) लेकीन बतातो सही वो लडका कौन हे..? ओर अभी तुमने कहा मेरा दोस्त हे.. उनकी सादीया होगइ हे.. मतलब क्या..? मे ठीकसे समजा नही.. तुम कीसके बारेमे बात कर रही हे..?
चारु : (सरमाते मुस्कुराते) हमारे देवरजी.. आपके खास दोस्तजो हे.. हमारे राजा.. देवायतजी..
रमेश : (जटसे धीरेसे) पागल होगइ हे क्या..? देवु.. लेकीन वो कैसे..? मानाकी देवु मुजसे बहुत छोटा हे.. लेकीन चारु अभी अभी उनकी तीसरी सादी हुइ हे.. तो फीर हमारी वंदु..? नही नही.. ये नही हो सकता.. मे उनसे बात नही कर सकता.. मानाकी वो कीतनीभी सादीया करले उनको कोइ कहेने वाला नही.. मुजे येभी पता हे हमारी वंदु वहा खुस रहेगी.. लेकीन मे उनसे इस बारेमे बात नही कर सकता.. मेरा खास दोस्तजो हे..
चारु : (प्यारसे गाल सहेलाते) जानु क्यु नही कर सकते..? हमारी बेटीकी खातीर इतना नही कर सकते..? सीर्फ अेक बार बात करकेतो देखो.. वरना आप कहोतो मे मंजुभाभीसे बात करलुगी.. वो मना नही करेगी..
रमेश : (उपरसे हटते) पागल हो गइ हो क्या..? मंजुभाभीको क्या कहोगी..? की मेरी बेटीको तुम्हारी सौतन बनालो.. चारु भुलजा उसे.. वो रोयल फेमीली हे.. हमारा ओर उनका कोइ मेल नही.. ये तो हमारी कीस्मत अच्छी हेकी हमारे साथ उनके अच्छा रीलेशन हे.. वो मुजे अपना दोस्त मानते हे.. मे बात नही कर सकता..
कहेते रमेश चारुके उपरसे हटकर बाथरुममे चला गया तो चारुभी बेडपे बैठ गइ ओर रमेशके नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. आज रमेशने अेक बार फीर उनको प्यासी रख दीया.. लेकीन आज चारुको रमेशके साथ बात करनेका मौकाभी मील गयाथा.. उनको पताथाकी अब रमेशसे अपनी बात कैसे मनवानी हे.. बस थोडीसी महेनत करनी पडेगी..
क्युकी उसे पताथाकी अब रश्मी कभी भी देवायत ओर वंदनाकी मुलाकात करवा सकती हे.. तो वो देवायतको भी अच्छी तराह जानती थी.. की जब अेक बार दोनोकी मुलाकात होजायेगी.. तब सायद वंदना अेक लडकीसे ओरत बन जायेगी.. वो खुद इस दौरसे गुजरी हे.. अबतक वोभी ना जाने देवायतके साथ कीतनी बार अपनी प्यास बुजा चुकी हे.. इस बातसे वंदना ओर चारुका दोनोका देवायतसे बार बार मीलनेका रास्ता खुल सकताथा.. तो इसकी वजहसे चारु अभीसे रमेशको मनानेमे लग गइथी..
तब हवेलीपे आज देवायत सृतीके साथ अपनी सुहागरात मनाते सीक्स नाइन पोजीसनमे अेक दुसरेको संतुस्ट कर चुके थे.. ओर इस वक्त दोनोही बाथरुममे अेक दुसरेको नहेला रहेथे.. जब नहालीया तब देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बेडपे ले आया.. ओर सृतीको पीठके बल लीटाकर खुद उनके उपर चड गया.. तब सृतीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये....
कन्टीन्यु
अध्याय - १३४
कहेते बरखा मनमे खुस होते वापस मुनाके कमरेमे चली गइ.. ओर मुनाको बसंतीसे बात करके उनका हाथ मांगने मम्मी बुला रही हे कहा.. तब मुना बहुतही गभरा गया.. तो बरखाने उसे हीमतसे बीन्दास्त बात करनेको कहा.. तो मुना अपनी मम्मीको मीलनेके लीये तैयार होगया.. ओर वो थोडा गभराते बसंतीके रुममे चला गया.. तब बरखाभी सरमाते हसती हुइ कीचनमे चली गइ ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. तभी....अब आगे
बसंती : (मुना अंदर आगया तब धीरेसे) मुना.. दरवाजा अच्छेसे बंध करदे.. फीर इधर आ.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..
मुना : (सरमाते धीरसे) जी मम्मी.. कहीये..
बसंती : (मुना दरवाजा बंध करके पास आकर बैठ गया तब) मुना.. ये सब क्या हे..? हंम..? ये सब कबसे चल रहा हे..?
मुना : (सर नीचे करते धीरेसे) जी मम्मी.. जबसे हम दोनो कोलेज मे थे तबसे.. मम्मी हम अेक दुसरेको प्यार करते हे.. मे बरखासे सादी करना चाहता हु..
बसंती : (धीरेसे जुठ मुठके गुसेसे) चुप.. अपनी ही बहेनको प्यारके नामसे प्रेगनेन्ट तक कर दीया.. सरमभी नही आइ तुजे..? हंम..? तुमने क्या सोचाथा.. की हम मान जायेगे..? बहुत आग हे तेरे मे.. हंम..?
मुना : (सरमाते धीरेसे थोडी हींमत दीखाते) मम्मी.. अैसी कोइ बात नही हे.. वो बरखाने कहाथा आपसे उनका हाथ मांगनेको, तो आगया.. हम दोनो अेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. आप हमारी सादी करवा दीजीये..
बसंती : (धीरेसे) तुजे पता हेनां.. ये नाजायज रीस्ता कहेलाता हे.. तुम दोनो भाइ बहेन हो.. हंम..? फीरभी दोनोने इतनी हीमंत करली..? सच बताना तुमने क्या सोचकर बरखाको प्यार कीया..?
मुना : (धीरेसे सरमाते) मम्मी.. बरखा बहुतही खुबसुरत हे.. मे उनको पहेलेसेही पसंद करता हु.. मे नही चाहताथा की उनकी सादी कही ओर होजाये.. मे उसे पाना चाहता था.. ओर प्यारतो कीसीसेभी ओर कभीभी हो सकता हे.. ओर कहेते हेना प्यार करनेमे नात जात पात रीस्ता उमर कुछभी नही देखते..
तो हमारे बीच भी प्यार होगया.. ओर अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. तो हमने क्या गलत कीया..? हमारे ही गांवमे अैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. ओर ज्यादातर लडके उनकी बहेनसे प्यार करते हे.. तो मेने भी प्यार कीया.. तो उसमे हमने क्या गलत कीया..?
बसंती : (अपनी चाल चलते धीरेसे) तुजे यकीन हे गांवमे अैसा होने वाला हे..? हंम..? तुम अैसे नाजायज रीस्तेमे यकीन करते हो..? ये तो तुम्हारी बहेन हे.. अगर कल कोइ अपनी मांके साथभी अैसा करेगा.. तो क्या तुम इस रीस्तेको भी अेक्सेप्ट करलोगे..? हंम..? अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे ये तो तुजे पता हेनां..?
मुना : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मी.. हम दोनो पढे लीखे हे, मुजे सब पता हे अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे.. ओर आप यकीन करो.. हमारे ही गांवमे मेरे दोस्तका उनकी विधवा ताइके साथ रीस्ता हे.. ओर अेकका उनकी विधवा बुआके साथ रीलेशन हे.. ओर गांवमे अैसे ओर कइ रीस्ते पनप रहे हे.. तो मे उसे भी गलत नही मानता..
जोभी हुआ हे दोनोकी आपसी रजा मंदीसे हुआ हे.. तो इसमे क्या गलत हे..? माफ करना मम्मी.. मे इन सब बातोको ओर रीस्तेको नही मानता.. बस मुजे बरखासे सादी करनी हे.. मे उसे बहुत प्यार करता हु.. हम दोनो कोलेज मे थे तबसे ही रीलेशनमे हे.. ओर अभी जो उनके पेटमे बच्चा पल रहा हे वो मेरा ही हे..
बसंती : (कातीलाना हसते धीरेसे) हंम.. अपनी मां के सामने ही इतनी बडी बात बोलदी.. काफी हीमंत हे तुजमे.. ठीक हे.. मानलो की अगर मेने बरखाकी सादी तुमसे कर भी दी.. तो क्या मेरी बेटीको तुम खुस रख पायेगा..?
मुना : हां मम्मी.. मे जोब करता हु.. ओर सुधीर अंकल केह रहेथे.. अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडी होस्पीटल बन रही हे.. तो मुजे ओर बरखाको उन्ही होस्पीटलमे अच्छी जोब मील जायेगी.. हमारे ठाकुरसाहेबही बनवा रहे हे.. ओर डोक्टर ओर उनकी वाइफ नीशाभाभी खुद होस्पीटल सम्हालने वाले हे.. तो हमे पैसे भी अच्छे खासे मीलेगे.. फीर पापाको नोकरी करनेकी जरुरतही नही पडेगी.. ओर बरखाभी खुस रहेगी..
बसंती : (सरमाते दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) मुजे पता हे तुम दोनोने हमारे पुरे घरकी जीम्वेवारी उठाली हे.. खुस रखनेका मेरा ये मतलब नही था.. मतलब.. उनको सेटीस्फेक्शन से था.. तु समज गयानां..? वरना कल अैसा ना होकी तेरे बापुकी तराह तेरी भी कोइ गलत आदतकी वजहसे आगे जाकर बरखाका रीलेनश भी कीसी ओरके साथ..
मुना : (धीरेसे बीचमेही बात काटते) मम्मी मे आपकी सब बात समज गया.. आपका कहेनेका मतलब हमारे बीच फीजीकल रीलेशनसे हे.. आप नीस्चीत रहीये अैसा कुछभी नही होगा.. क्युकी मुजे कोइ गलत आदत नही हे.. ओर बरखा भी मुजसे बहुत खुस हे.. ओर आगेभी खुस रहेगी.. आइ प्रोमीस..
बसंती : (मुनाके पेन्टके उभारकी ओर इसारा करते देखते) मुना.. तुमतो काफी हिमंत वाले ओर खुलके बात करने वालोमे से हो.. (पेन्टकी ओर नजरोसे इसारा करते) इसे देखकर तो लगता हेकी काफी बडा होगा.. तो तुम बरखा को खुस रखते होगे.. बस मेतो अैसेही पुछ रहीथी.. मुजे अब कोइ चीन्ता नही हे..
मुना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी आप नीस्चीत रहीये.. मे खुलकर बात करनेवालो मे से हु.. बरखा इनसे बहुत खुस हे.. अबतो वोभी चाहती हेकी मे उसे जींदगीभर ये सुख देता रहु ओर उसे खुस रखु.. इसीलीये हमने ये बडा कदम उठालीया.. लेकीन आपभी मेरी मम्मी होनेके बावजुद मुजसे सब खुलके बात कर रही हे.. अैसा क्यु..? कोइ खास वजह..?
बसंती : (सरमाते मुस्कुराते) मुना.. भलेही मे तेरी मां हु.. लेकीन मां से पहेले मेभी अेक औरत हु.. ओर हम औरतोको कैसे कैसे दौरसे गुजरना पडता हे वो तुजे क्या मालुम..? तुमतो जानते हो तेरे बापुकी बुरी आदतकी वजहसे आज उनकी ये हालत हे.. तो मेभी अैसे दौरसे गुजर रही हु.. येतो अच्छा हे मेने कोइ गलत कदम नही उठाये.. तु समज गयानां..?
बरखाकी जींदगी अैसेही कीसीके हाथोमे नही सोप दुगी.. इसीलीये तुजे ये सब खुलकर पुछ रही थी.. अब मुजे यकीन हो गयाकी तु मेरी बरखाको सम्हाल पायेगा.. ओर उसे खुस भी रख पायेगा.. ओर मुजे खुसी हेकी तुम अैसे रीस्तोपे यकीन करते हो.. बस मेरी अेक ही सर्त हे.. तुजे बरखाके साथ साथ मेरा भी खयाल रखना होगा.. तु समज गयानां..?
मुना : (सोक्ट होते अेक नजरसे बसंतीको देखते धीरेसे) मम्मी..? ये आप क्या बोल रही हे..? मतलब मे समजा नही.. आपतो इतना सब खुलकर बोल चुकी हे.. तो ये बात भी मुजे खुलकर बताइअे..
बसंती : (मुस्कुराते धीरेसे) क्यु..? अभीतो केह रहेथे की तुमतो पढे लीखे हो..? इतनाभी ना समज नही हो.. की मेरे कहेनेका मतलब ना समजो.. ओर तुमने जोभी अभी सुना ओर समज रहे हो वोही केह रही हु.. ओर यही सच हे.. बस.. इस बारेमे बरखाको तो क्या कीसीको पता भी नही चलना चाहीये..
अब तुजपे डीपेन्ड हे.. की तुम बरखाके साथ मुजे भी खुस रख पाते होकी नही.. अगर मेरी ये सर्त मंजुर हे तो तुम बरखाके साथ रेह सकते हो.. मे तुम दोनोकी सादी भी करवा दुगी.. वरना भुलजाओ बरखाको.. चल अब चाइ नास्ता होगया होगा.. ओर हां.. अभी हमारे बीच जोभी बात हुइ हे.. वो हमारे बीचही रहेनी चाहीये.. अपनी इस बीवीको भी नही बताना.. बस यही मेरी सर्त थी..
मुना : (थोडा सकपकाते) मम्मी.. क्या ये सब जायज हे..? आइ मीन.. आप मेरी मां हो.. इसीलीये..
बसंती : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) क्यु..? मां हु तो क्या हुआ.. हु तो अेक ओरत.. अभी तो तुमने कहाकी तेरे अेक दोस्तने उनकी वीधवा ताइके साथ रीलेशन बनाया हे.. तो मुज मे क्या प्रोबलेम हे..? क्या मेभी तुजे बरखाकी तराह खुबसुरत नही लगती..? तो बतादे..
अभी तो तुम केह रहेथे की मे कीसी भी रीस्तेको गलत नही मानता.. तुम तो काफी खुले विचारके होनां..? जब मुजे तेरे साथ रीलेशन रखनेमे कोइ अेतराज नही हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे..? अेक बार अच्छेसे सोचले.. मुजे तेरे जवाबकी कोइ जल्दी नही हे..
मुना : (कुछ सोचते) नही मम्मी.. आपभी बरखाकी तराह बहुत खुबसुरत हो.. मे भी आपको पसंद करता हु.. लेकीन हमारे बीत मां बेटेकी कुछ मर्यादाभी हे.. तो इस बारेमे मुजे सोचनेके लीये थोडा वक्त चाहीये.. आपने तो मुजे आज जटका ही दे दीया..
बसंती : (कातीलाना समाइल करते मुनाके कंधेपे हाथ रखते) हां पता हे मुजे.. मेने तुजे आज बहुत बडा जटका दे दीया हे.. तो वक्ततो चाहीयेनां..? तो ठीक हे.. अेक बार अच्छेसे सोचले.. यहा बेटीके साथ उनकी मांभी मील रही हे.. हें..हें..हें.. ओर हां.. तुम अपनी बीवीके साथ सो सकते हो.. लेकीन मेरी सर्तके साथ.. ओर ध्यान रखना.. तेरे पापाको अभी इस बातका पता नही चलना चाहीये.. अब चल बहार.. तेरी बीवीने चाइ नास्ता बनालीया होगा.. हें..हें..हें..
मुना : (मनमे खुस होते बहार नीकलते मुस्कुराते धीरेसे) मम्मी.. लेकीन अेक दीनतो सबको पता चलही जायेगा.. हम बरखाकी बात ज्यादा दिन छुपा नही सकते.. क्या वो प्रेगनेन्ट हेनां..?
बसंती : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी वो हर रात हमसे छुपकर तेरा बीस्तर गरम करती हे तो प्रेगनेन्ट तो होही जायेगीनां..? वो सब तुम मुजपे छोडदे.. तबकी तब देखा जायेगा.. ओर वैसेभी गांवमे तुम दोनो जो केह रहे हो तो वोभी तो होजायेगा.. मे सब देख लुगी.. बस तुम मेरा खयाल रखना पडेगा.. वरना कल तुम कीसी ओरके मुहसे ये ना सुनोकी तेरी मा कीसी ओरके साथ.. तुम समज गयेनां..?
मुना : (जटसे धीरेसे) नही मम्मी.. अैसा आप कुछभी नही करोगी.. बस मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये..
बसंती : (मुस्कुराते) इसीलीये मेने ये सर्त रखी हे.. यकीन करो.. मे भी बरखा से कम नही हु.. बीस्तरमे उनकोभी टक्कर दे सकती हु.. मे तुमको नीरास नही करुगी.. वैसे तुमतो काफी समजदार हो.. इनसेतो अच्छा हे घर की बात घरमे ही रेहजाये.. मे आशा करती हु की मुजे तेरा जवाब जल्द मील जायेगा.. अब चल बहार..
फीर दोनोही बहार आगये तब बरखाको नही पताथाकी दोनोके बीच क्या बाते हुइ हे.. बरखाने तीनोके लीये चाइ नास्ता बनालीया था.. ओर तीनो ही अेकठे बैठकर चाइनास्ता करने लगे.. तब चाइ पीते मुना गहेरी सोचमे डुब गया.. आज उनकी मां बसंतीने खुलकर अपनी सर्तके बारेमे बताकर मुनाको जंजोरके रख दीयाथा.. आज उनकी मम्मी ने खुद सामनेसे उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात करदी..
अब मुना अपनी मम्मीको अेक मा की नजरसे नही अेक ओरतकी नजरसे नजरे चुराते देखने लगा.. मुनाने आज तक अपनी माको अैसे गौरसे नही देखा था.. वो अपनी नजर चुराते बसंतीके अेक अेक अंगका जायजा लेने लगा.. जब उनकी नजर बसंतीके उरोजोपे चली गब.. तब मुनाको बसंतीके ब्लाउसमे बहुत कठोर भरावदार उभार देखनेको मीला.. जो ब्लाउसके अंदरभी उसे सख्त दीख रहेथे..

तब मुनाका लंड मेन्टके अंदरही खडा होकर जटके मारने लगा.. आज मुनाको अपनी मम्मीके अंदर कीसी काम देवकी मुरत नजर आने लगी.. ओर सोचने लगाकी अगर मे मम्मीको हां कहेदु तो यही ओरत अेक दिन उनके नीचे लैटी होगी.. कमीनी आजभी अेक लडकीकी तराह जवान ओर कामुक दीखती हे.. अगर इनकी भी चुत मील जायेतो सालीको रगड रगडके चोदुगा.. यही सब सोचते मुनाकी पेन्टमे लंड जटके मारते खडा होने लगा ओर तंबु बन गया..
तो बसंती टेडी नजर करते मुनाके पेन्टके उभारको बार बार देखने लगी.. तब उसे पेन्टमे बहुत बडा नाग अपनी फेन उठाये नजर आया.. तब वो नजरे चुराते मुनाकी ओर देखते सरमाते मंद मंद मुस्कुराने कामुक स्माइल करने लगी.. वो मुनाको रीजानेकी पुरी कोसीस करने लगी.. तब मुनाभी उनकी ओर देखते अपनी माकी नजरको पहेचान गया.. तो बसंतीभी मुस्कुराते नजरोसे मुनाके पेन्टकी ओर इसारा करने लगी..
तो मुना बहुतही सरमा गया.. ओर सोचने लगाकी मम्मी उनके नीचे लेटनेके लीये पुरी तराह तैयार हे.. अगर मेने मम्मीको खुस नही रखातो वो फीरसे भानुके साथ या कीसी ओरके साथ रीलेशन रख लेगी.. इनसे तो अच्छा हे मेही इनके साथ रीलेशन रखलु.. ओर वो सोचते ही सरमाते मुस्कराता रहा.. उसने तभी मनमे अपनी मम्मीके साथ रीलेशन रखनेका तैय करलीया.. तभी..
बसंती : (नास्ता खाते) बरखा.. सुन.. आजसे तुम मेरी बेटी नही हो.. अब तुम मेरे मुनाकी बीवी हो.. मेरी बहु.. तो तुम अपनी सेहतका खयाल रखना.. आजसे मेरे बेटेकी सब जीम्वेवारी तेरी होगी..
बरखा : (सरमाते हसते धीरेसे) जी मम्मीजी.. थेन्कयु.. हें..हें..हें.. मम्मी.. आप मेरी सास के साथ मां भीतो हे.. तो भाइकी भी आप मां के साथ उनकी सासभी होगइ हे.. लेकीन मे आपके साथ सास बहु वालाही रीलेशन रखुगी.. हें..हें..हें..
बसंती : (मुनाकी ओर कातील नजरोसे देखते) अब ये सब मुनापे डीपेन्ड हे.. अगर उनको अपनी मां के साथ दीकत होती हे तो भलेही मुजे अपनी सास माने.. तो मे आशा करती हुकी तबतो इनको कोइ दिकत नही होगी.. क्यु मुना..? हें..हें..हें.. दुसरी बात.. आजसे बरखाकी भी सब जीम्वेवारी तेरी होगी.. अब तुजेभी मेरी बहुका अच्छेसे खयाल रखना पडेगा.. उसे हर महीने चेकअपके लीये सहेर लेजाना हे.. बाकी गांवमे मे सबको जवाब दे दुगी.. तुम दोनोको फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. जीलो अपनी जींदगी..
कहातो मुना समज गयाकी बसंती कीस बारे मे बात कर रही हे.. वो बसंतीकी सब बात समज गया.. दोनोही मां बेटे नजरोका खेल खेलते बात कर रहे थे.. तब बरखाको नही पताथा की दोनो मा बेटे अैसी बाते करते क्या खीचडी पका रहे हे.. बसंती मुनाके पेन्टके उभारको देखकर पुरी तराह पागल हो चुकीथी.. उनको पेन्टमे मुनाका लंड भानुके लंडसे भी बडा महेसुस हो रहाथा.. ओर मुनाभी अपने दिलकी बात केह देता हे..
मुना : (सरमाते बसंतीकी ओर देखते हसते) जी मम्मी.. मुजे मेरी सब जीम्वेवारी पता हे.. अब मे सीर्फ आपकी बहुका नही.. सास बहु दोनोका अच्छेसे खयाल रखुगा.. हें..हें..हें.. क्युकी अब आप मेरी मां के साथ मेरी सासभी हो गइ हो.. तो मुजे सास मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. ओर मां मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. मे कीसीभी रीस्तेमे कोइ अेतराज नही हे.. हें..हें..हें..
बसंती : (मुनाकी बात समजते ही खुस होते) जी.. मुना मुजे तुमसे यही उमीद थी.. हें..हें..हें..
कहेते बसंती मुनाकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते हसती रही.. तब मुनाभी उनकी मम्मीको अेक अलगही वासना भरी नजरोसे देखते हसने लगा.. तो बरखा भी मुहको दुसरी ओर घुमाते बहुतही सरमाते हसती रही.. तभी मौकेका फायदा उठाके बरखाकी नजरे बचाते मुनाने बसंतीकी ओर आंख मार दी.. ओर हसने लगा.. तब बसंती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वोभी मुह घुमाते मुस्कुराने लगी..
तब बरखा को नही पताथाकी सर्तके तौरपे उनकी मम्मीने मुनासे क्या मांगलीया था.. ओर बरखाको पानेके लीये उसे अपनी मम्मीकी सर्त मानली थी.. ओर बातो ही बातोमे उसने अपने दिलकी बाते बसंतीको बतादी थी.. मुना बसंतीसे बात करके मनही मन खुस हो रहा था.. आज उसने बरखाका हाथ अपनी मम्मीसे मांगकर अपने लीये दो दो चुतोका इन्तजाम करलीया था.. जब चाइ नास्ता करलीया तो बरखा सब बर्तन लेकर बहार चली गइ..
तो मुनाने बसंतीकी ओर वासना भरी नजरोसे मुस्कुराकर देखा.. ओर मौका मीलतेही बसंतीकी ओर अेक बार फीर आंख मारके मुस्कुराने लगा.. तो बसंती वापस बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी नजर घुमाते सरमाते मंद मंद मुस्कुराते लगी खडी होने लगी.. तब अचानक मुनाने उनका हाथ पकडलीया.. ओर अपनी ओर खीचते बसंतीके बुब्सको दबाके मसलने लगा.. तो बसंतीने जटसे बहारकी ओर देखते हाथ खीचलीया.. ओर बहुतही सर्मसार होते हसते हुअे मुनासे छुटकर जटसे अपने रुममे भाग गइ..
तब बरखा बहार आंगनमे पानीकी टंकीके पास सभी बर्तन लेकर साफ करने बैठ गइ.. तो अंदर मुना हींमत करके अपनी मम्मीके रुमकी ओर चल पडा.. तब बसंती रुममे आतेही दरवाजा खाली बंध करके उनके सहारे खडी होगइ.. ओर अपनी आंख बंध करके दोनो हाथ अपने उरोजोपे रखके अपनी सांसको कंट्रोल करने लगी.. आज अचानाक मुना उनके अंगोके साथ खेलने लगेगा उनकी उमीद तो बसंतीको भी नहीथी..

जीस तराह मुनाने अचानक उनका हाथ पकडके उसके उरोजोके साथ दबाकर मसलते खेला.. तो बसंतीकी गभराहटसे भारी सांस होगइ थी.. वो मुस्कीलसे मुनासे छुटकर अंदर भाग गइ.. तब बसंतीकी काम वासना पुरी तराह भडक चुकीथी.. उनकी चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया फडफडाते पानीका रीसाव करने लगीथी.. ओ वो मुस्कीलसे बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तो अचानक उनके रुमका दरवाजा खुल गया..
तो बसंती गभराकर पलटके देखने लगी.. तो मुना दरवाजा खोलकर अंदर आगया.. तब बसंती कुछ सोचे समजे उनसे पहेलेही मुना धीरेसे दरवाजा बंध करके बसंतीके पास आगया ओर बसंतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोपे होठ रखदीया.. तो बसंतीका चहेरा लाल होगया.. वो पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी.. ओर मुनाका चहेरा अपने हाथोमे थामकर उनको पागलोकी तराह चुमने लगी..

तभी मुना बसंतीको जोरोसे बाहोमे भीचते बाथरुमकी ओर लेगया.. ओर अंदर जातेही बसंतीको पागलोकी तराह चुमने लगा ओर अेक हाथसे जोरोसे उनके बुब्सको दबाते मसलने लगा.. तब बसंतीसे कंट्रोल करना मुस्कील होगया.. वो अभी बरखाकी वजहसे कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी..
तो वो मुनाको हाथ पकडके भारी सांसोसे मुनाको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तभी मुनाने बसंतीकी चुतको उपरसेही मुठीमे दबोच लीया.. तब बसंती उछल पडी.. ओर मुनाको धका मारते दुर करदीया.. फीर गभराते मुनासे बात करने लगी..

बसंती : (सरमाते अपने कपडे सही करते धीरेसे) मुना.. प्लीज.. अभी नही.. अभी बरखा घरपे हे.. अगर उन्होने हमे देखलीया तो सब गडबड होजायेगी.. अभी तुम बहार जाओ..
मुना : (फीरसे पास आते होंठ चुमते) मम्मी.. तुम मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. मे तुमसे मीलना चाहता हु..
बसंती : (मुनाको दुर करते बहारकी ओर देखते) नही मुना.. अभी हमारा मीलना उचीत नही हे.. तुम समजता क्यु नही..? अभी तुम जाओ.. हमे मीलनेके बहुत मौके मीलेगे.. तुम दो पहोरको आजाना.. तब मे घरपे अकेली रहेती हु.. समज गयानां..? अभी जाओ.. बरखा कभी भी आ सकती हे..
मुना : (अपना लंड पेन्टके उपरसेही मसलते) मम्मी.. तुमने तो मुुजे आग लगादी हे.. अब इनका क्या करु..? बस अेक बार..
बसंती : (सरमाते मुस्कुराते बहार धका मारते) कीतने कमीने हो.. अपनी बीवीको जाकर कहो वो तेरी आगको सांत कर देगी.. अब जाओभी.. मे रातमे तेरी आंगको सांत करनेका इन्तजाम करती हु.. अभी जाओ बहार.. बेसर्म कहीका.. हें..हें..हें..
ओर बसंतीने मुस्कीलसे मुनाको बहार भगा दीया.. ओर वो सरमाकर मुस्कुराती रही.. इस रात जो मुनाने सोचा था उनसे बहेतर नतीजा उनको देखनेको मीला.. देर रात बसंतीका पती सो गया तब बसंतीने खुद आज अपने हाथोसे बरखाको अच्छेसे हल्कासा शींगार करके दुल्हनकी तराह तैयार करदीया.. ओर वो खुद बरखाको लेकर मुनाके रुममे छोडने चली गइ.. ओर दरवाजेपे छोडके वापस आगइ.. तब मुना बहुतही खुस हुआ.. ओर इस रात दोनो भाइ बहेनने बीना डरके खुलकर प्यार कीया..

मुनाने आज बरखाको जमकर चोदलीया.. तो बरखाभी खुस होगइ.. दोनोही रातभर चुदाइ करते रहे.. तब उन दोनोको नही पताथा की अेक खीडकीसे छुपकर बसंती दोनोकी चुदाइ भरी रास लीला देख रही हे.. क्युकी आज मुनाने बसंतीको उनके रुममेही दबोच लीयाथा ओर उनके बुब्स ओर चुतके साथ छेडखानी करके उनके तनकी आगको भडका दीयाथा.. तबसे बसंतीकी काम वासना बहुतही बढी हुइ थी.. वो चाहती थीकी अब मुना उसे जल्दसे जल्द मील जाये.. ओर उनकी जमकर चुदाइ करले..
तो दुसरी ओर रमेशके घर रमेश अपने रुममे बेडपे लेटकर मोबाइल देखते आराम कर रहाथा.. तभी चारु ओर वंदनाभी घरपे आगये.. वंदना थकानकी वजहसे अपने रुममे जाकर फटाफट चेन्ज करके सोने लगी.. तब चारु सभी लाइट दरवाजा बंध करके अपने रुममे चली गइ.. ओर चेन्ज करते रमेशकी ओर गुस्सेसे देखती रही.. तभी रमेशकी नजर चारुकी ओर गइ.. तो चारु उसे खाजाने वाली नजरोसे घुर रहीथी.. ओर चारु चेन्ज करके बेडपे आगइ..
रमेश : (हसते) अरे डार्लींग.. आजतो कुछ मुड ठीक नही लगता.. बडे गुस्सेमे लग रही हो..? क्या वहा कीसीसे अन बन तो नही हुइ..? हें..हें..हें..
चारु : (रमेशको अेक घुसा मारते धीरेसे) नीकमे.. कमीने.. क्या अेक बीवीसे जी नही भरा.. जो कीसी ओर रंडीको लेकर सहेरमे घुमते हो.. कमीने.. पहेले अपनी बीवीसे तो ठीकसे चोदना सीखले बादमे दुसरी ओरतको घुमाना.. कौन थी वो रंडी..?
रमेश : (सब समज गया तब डरते धीरेसे) चारु.. ये क्या बत्तमीजी हे.. कोइ बीवी अपने पतीसे अैसे गालीया देती हे..? ओर तुम क्या केह रही हो..? मे कीसको लेकर घुमता हु..? कोइ भी तो नही थी..
चारु : (गुस्सेसे) क्यु.. सहेरसे अपनी बाइकके पीछे कीसको बीठाकर आ रहेथे..? हमने तुजे रास्तेमे देखलीया था.. बोल इसका जवाब हे तेरे पास..? कमीना कहीका.. मुजसे जुठ बोलता हे.. अेकतो जवान लडकी घरमे बैठी हे.. उनका तो कुछ करते नही.. की चलो सादी लायक होगइ हेतो कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. ओर उपरसे बहार जाकर इस्कबाजी फरमाते हो.. सरम भी नही आती..?
तब रमेश सारा माजरा समज गया.. अब उस इस बातको छुपानेका कोइ फायदा नही था.. तो उसने थोडा सच बतानेको उचीत लगा.. ओर बेडपे बैठ गया.. फीर चारुकी ओर घुमते धीरेसे बात करने लगा..
रमेश : देख चारु.. तुजे गलत फेहमी होगइ हे.. वो हमारे सामतभाइकी बीवी जयाभाभी थी.. मुजे आते वक्त बसस्टेन्डपे खडी कीसी बसका इन्तजार करते दीख गइ.. तो मे उसे अपनी बाइकमे बीठाकर घर ले आया.. इसमे क्या गलत हे..? इसका मतलब ये थोडीना हेकी मेरा उनके साथ रीलेशन हे..
चारु : (सख्त लहेजेमे) अच्छा.. तो फीर उनको अपना चहेरा ढकके अपनी पहेचान छुपानेकी क्या जरुरत थी.. अैसे ही आ सकती थी.. देख रमेश.. अभी भी वक्त हे.. अगर तुम दोनोके बीच कुछ चकर हे तो अभी मुजे सच बतादे.. मे तुजे बक्स दुगी.. लेकीन बादमे मुजे कीसी ओरसे पता चलाना.. तो फीर.. तुम सोचभी नही सकते अैसा कदम मे उठाउगी.. याद रखीयो.. चल सोजाओ अब..
रमेश : (राहतकी सांस लेते चारुको बाहोमे लेनेकी कोसीस करते) हंम.. चारु यकीन करो.. जो तुम सोच रही हो अैसा कुछ भी नही हे.. चल आजा.. थोडा प्यार करले..? हंम..?
चारु : (गुस्सेमे हाथको जटकते) हाथ मत लगाओ मुजे.. अब जबतक मुजे पुरा यकीन नही हो जाता तुम मुजे छुओगे भी नही.. केह देती हु.. अगर यही बात हमारे साथ होती तो..? अबतक तो मुजे डीवोर्स दे चुके होते..
रमेश : (मनते करते) चारु.. प्लीज.. अैसा कुछ भी नही हे.. मान जाओ.. तुजे मेरी कसम.. हमारी वंदनाकी कसम.. बस..? अब तो मानजा..
चारु : (थोडा सांत होते अेक नजरसे देखते) रमेश.. तुम कीतने कमीने हो.. हमारी बच्चीकी कसम क्यु खाते हो..? उसने तुम्हारा क्या बीगाडा हे..? उस मासुम को तो छोड देते.. बेचारी सादीके लायक होगइ हे.. फीरभी हमे कुछ नही कहेती.. जरा उनकी तकलीफ के बारेमे तो सोचो..
रमशे : चारु.. तो क्या करता.. तुमजो इतने गुस्सेमे थी.. मान जाओ प्लीज.. ओर हम उनके लीये लडका ढुंढनेकी कोसीस तो कर रहे हे.. लेकीन वो सादी करनेको मना भी तो करती हे.. पता नही उनके मनमे क्या हे..
चारु : (सांत होकर धीरेसे) ठीक हे रमेश.. अभीतो तुमने वंदुकी कसम खाइ हे तो तुम्हारी बात मान लेती हु.. लेकीन याद रखना.. अगर मुजे कहीसे भी पता चलाकी सच क्या हे.. ओर तुम्हारा जयाभाभीके साथ चकर नीकला तो मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. फीर तुम ओर मे आजाद.. तुम अपने तरीकेसे जीना ओर हम मां बेटी अपनी तरीकेसे जीयेगे.. तुम हमे कुछ नही कहोगे..
रमेश : (थोडा डरते धीरेसे) चारु..? क्या आजाद..? मतलब..? क्या मुजे छोडके चली जाओगी..?
चारु : (रहस्य भरी मुस्कानसे) रमेश.. मे इतनी भी कमजोर नही हु.. की तुजे छोडकर चली जाउ.. तुमतो मुजे ठीकसे सेटीस्फाइभी नही करपाते.. फीर भी मे यही तुम्हारे साथ पडी हु.. अगर तुजे छोडना होतातो कबसे कीसीके साथ भागकर तुजे छोड चुकी होती.. अगर तुम्हारा चकर जयाभाभीके साथ नीकला..
तो तुम हमे कभी नही पुछोगे.. की हमारा रीलेशन कीसके साथ हे.. समजे..? अगर मर्दको अैसे रीस्ते रखनेका हक हेतो हम जैसी ओरतोको भी हे.. फीर तुम अपने तरीकेसे जीओगे ओर हम मा बेटी अपने तरीकेसे जीयेगी.. बस यही कहेना था.. अब सो जाओ.. बहुत देर होगइ हे.. मुजे ओर बहेस नही करनी..
कहेके चारु करवट लेकर सोगइ.. अैसा नही था की चारुको रमेश ओर जयाके रीस्तोके बारेमे नही पता था.. उनको नीशासे सब पता था.. की रमेशका जयाके साथ रीलेशन हे.. लेकीन आज चारुने बडी ही सीफततासे चाल चलकर रमेशसे अन्जान बनके अपने लीये ओर वंदनाके लीये देवायतके साथ रीलेशन रखनेके लीये रास्ता बनालीया था.. तो दुसरी ओर रमेशभी अंसमजमे चारुको देखता ही रेह गया..
उनको अब चारुसे जुठ बोलकर ओर वंदनाकी जुठी कसम खाकर पछतावा होने लगा.. लेकीन अब करेतो क्या करे..? ओर ये सच भी था की रमेशका नाजायज रीस्ता जयाके साथ था.. तो अेकना अेक दिनतो सबको पता चलनाही था.. तब रमेशने चारुसे माफी मांगनेकी ठानली.. तो वो चारुके उपर जुक गया ओर चारुको खीचकर अपनी ओर कीया.. ओर चारुको अपनी बाहोमे भीच लीया..
रमेश : (धीरेसे रुआसी आवाजमे) चारु.. आइ अेम सोरी.. मेने तुम्हारी ओर वंदुकी जुठी कसम खाइ.. मुजे माफ करदे.. अब अैसी गलती दुबारा कभी नही होगी.. आइ प्रोमीस.. बस अेक बार मुजे माफ करदे..
चारु : (अेक नजरसे आंखोमे देखते) रमेश.. अभीभी वक्त हे मुजे सब सच बतादे.. मे तुजे माफ कर दुगी.. क्युकी मुजे मेरी नही.. मेरी बच्चीकी चीन्ता हे.. जब लोगोको पता चलेगा की उनके बापका कीसी दुसरी ओरतके साथ रीलेशन हे.. तो कौन हमारी बच्चीका हाथ थामेगा..? इसका कोइ जवाब हे तेरे पास..?
रमेश : (हां मे गरदन हीलाते) हां चारु.. सोरी.. मुजसे बहुत बडी गलती हो गइ.. लेकीन इसमे मेरी कोइ गलती नही थी.. तुमतो जानती हो सामतभाइ अब बुढे हो चुके हे.. ओर जयाभाभीकी उमरमे ओर उनकी उमरमे काफी फर्क हे.. जीनकी वजहसे जयाभाभीने खुद सामनेसे मुजसे रीलेशनके लीये कहाथा.. लेकीन अब वादा करता हु.. मे उनको कभी नही मीलुगा.. मे मेरे परीवारको बरबाद होते नही देख सकता.. चारु आइ अेम सोरी.. बस अेक बार मुजे माफ करदे..
चारु : (प्यारसे गालपे अेक चपत लगाते) रमेश.. तो पहेलेही सच बता देता.. मुजेभी तुमसे अैसे बात करना अच्छा नही लगता.. अगर उनसे रीस्ता ही रखनाथा तो मुजसे कहेकर रखता.. मे तुजे मना थोडीना करती..? क्युकी मे ओरतोकी तकलीफ भली भांती जानती हु.. मेभी इस दौरसे गुजर रही हु..
इसमे ना जयाभाभीकी गलती हे ना तुम्हारी.. अगर कहेके रीस्ता रखते तो मे तुजे खुसी खुसी हां केह देती.. चल.. जा मेने तुजे माफ करदीया.. ओर हां.. आइन्दा अैसी गलती कीना.. तो अभी तुजे प्यारसे चपत लगाइनां.. उनके बदले तुजे जोरोका चाटा लगेगा.. हें..हें..हें..
रमेश : (जोरोसे बाहोमे भीचते) थेन्कयु चारु.. तुमने मुजे माफ करदीया.. आइ प्रोमीस.. अब मे उनके साथ रीलेशन नही रखुगा..
चारु : नही रमेश मे मना नही करती.. तुम उनके साथ रीलेशन रखो.. लेकीन मुजे बताकर रीलेशन रखते.. हंम..? लेकीन अेक बात बताओ..? तुम मुजसे तो ठीकसे संतुस्ट नही कर पाते तो फीर जयाभाभीको कैसे..
रमेश : (मुस्कुराते) हंम.. चारु.. अब तुमसे कोइ बात नही छुपाउगा.. बस मेडीकलसे अेक इम्पोटेड गोली हाथ लग गइ हे.. तो वो मेरी दिवानी होगइ.. हें..हें..हें.. तुम तो मुजे गोली खाने नही देती..
चारु : (अेक नजरसे देखते) रमेश.. तुजे पता हे अैसी गोलीसे सेहत पर असर पडता हे..? खास करके अपने दिलपे.. तो दो मीनीटके मजेके लीये अैसी गोलीया मत खायाकर.. मेभी तुजे अैसी गोलीया दे सकती हु.. लेकीन मुजे तेरी सेहतसे खीलवाड करके कोइ मजे नही करने..
भलेही तुम हमे संतुस्ट ना कर सको.. लेकीन अपनी मर्दानगी दीखानेके चकरमे कही जानपे ना आजाये.. तो बी केरफुल.. हां.. देसी इलाज करवा सकते हो.. आजकल अैसी बहुतसी देसी दवाइ मीलती हे.. तुम अब सहेर जाओतो लेकर आना.. या अपना इलाज करवाना.. मुजे देसी गोलीगोसे कोइ अेतराज नही हे..
रमेश : (हसते गाल चुमते) हंम.. चारु.. अगेइन आइ अेम सोरी.. तुम कीतनी अच्छी हो..
चारु : (सरमाते हसते) हंम.. अब ज्यादा मस्का मत लगा.. सीधे सीधे बोलनाकी तुजे चोदना हे.. चल आजा.. आज तुजे खुस कर देती हु.. हें..हें..हें.. ओर वोभी बीना गोली खाये.. हें..हें..हें..
तब रमेश बहुत खुस होगया ओर फटाफट अपने ओर चारुके कपडे नीकालने लगा तब उनका बचपना देखकर चारुकी भी हसी नीकल गइ.. ओर कुछही देरके बाद रमेश चारुके उपर चडके उनको चोद रहाथा.. तब चारुभी मजेसे अपनी कमर उछालते रमेशका साथ दे रही थी.. उनकोतो बस यही रमेशके साथ रहेकर देवायतके साथ अपना रीलेशन रखना था.. ओर वंदनाको देवायतके साथ सेट करना था..

उनको पताथा की रमेश उनको कभी संतुस्ट नही करपायेगा.. फीरभी रमेशसे कैसे अपनी बात मनवानी हे.. वो भली भांती जानती थी.. क्युकी ज्यादातर ओरते कीसीभी चीजके लीये अपने पतीसे डीमांन्ड करती हे तब उजके नीचे लेटकरही करती हे.. फीर चाहे वो कोइ चीज हो या अपने घरकी समस्या.. तब कुछ ही देरकी घमासान चुदाइके बाद रमेश चारुकी चुतको भरके उनके सीनेपे ढेर हो जाता हे.. तब..
चारु : (रमेशके सरको सहेलाते) रमेश.. अब वंदनाके बारेमे कुछ सोचो.. उनकी जवानी नीकली जा रही हे.. कल अैसा ना होकी उनके बारेमेभी हमे बहारसे कीसी ओरसे पता चले.. की उनकाभी कीसीके साथ रीलेशन हे.. तुम समज गयेनां..?
रमेश : (चारुकी ओर देखते गाल चुमते) हां चारु.. मे सब समजता हु.. लेकीन कोइ ठीकसे ढंगका लडका भीतो मीलना चाहीये.. ओर वंदुभी सादीके लीये मना कर रही हे.. चारु.. अेक बात पुछु..? वो कीसीको प्यार ब्यारतो नही करती..? तुम अेक बार अच्छेसे उनकी दिलकी बात जानलो.. अगर लडका अच्छा होगातो हम उनकी सादी वही कर देगे..
चारु : (प्यारसे सरको सहेलाते) जानु.. मुजेतो अैसा कुछभी नही लगता.. फीरभी अेक बार मे उनसे पुछ लुगी.. बस मुजेतो गांवमे सीर्फ अेकही लडका ढंगका दीखता हे.. ओर हमारी वंदु भी उनको पसंद करती हे..
रमेश : (चारुकी ओर देखते) कौन..? तुम कीसकी बात कर रही हो.. क्या हम उसे जानते हे..? आइ मीन क्या वो हमारे गांवका लडका हे..? तो बता.. मे उनसे बात करलुगा..
चारु : (होंठ चुमते) हंम.. हमारे गांवकाही हे.. लेकीन अब उनकी सादीया होगइ हे.. तो बेचारी वंदनाकी बात आपको कहासे करती..? फीरभी अेक बार उनको पुछलो.. आपका खास दोस्तजो हे.. अगर वो हा कहेतो मेरी वंदुकी सादी भी उनसे करवा दुगी.. इनमे हमाराभी फायदा हे.. वंदु सादी करके भी हमारे साथ रेह सकती हे..
रमेश : (थोडा परेसान होते) लेकीन बतातो सही वो लडका कौन हे..? ओर अभी तुमने कहा मेरा दोस्त हे.. उनकी सादीया होगइ हे.. मतलब क्या..? मे ठीकसे समजा नही.. तुम कीसके बारेमे बात कर रही हे..?
चारु : (सरमाते मुस्कुराते) हमारे देवरजी.. आपके खास दोस्तजो हे.. हमारे राजा.. देवायतजी..
रमेश : (जटसे धीरेसे) पागल होगइ हे क्या..? देवु.. लेकीन वो कैसे..? मानाकी देवु मुजसे बहुत छोटा हे.. लेकीन चारु अभी अभी उनकी तीसरी सादी हुइ हे.. तो फीर हमारी वंदु..? नही नही.. ये नही हो सकता.. मे उनसे बात नही कर सकता.. मानाकी वो कीतनीभी सादीया करले उनको कोइ कहेने वाला नही.. मुजे येभी पता हे हमारी वंदु वहा खुस रहेगी.. लेकीन मे उनसे इस बारेमे बात नही कर सकता.. मेरा खास दोस्तजो हे..
चारु : (प्यारसे गाल सहेलाते) जानु क्यु नही कर सकते..? हमारी बेटीकी खातीर इतना नही कर सकते..? सीर्फ अेक बार बात करकेतो देखो.. वरना आप कहोतो मे मंजुभाभीसे बात करलुगी.. वो मना नही करेगी..
रमेश : (उपरसे हटते) पागल हो गइ हो क्या..? मंजुभाभीको क्या कहोगी..? की मेरी बेटीको तुम्हारी सौतन बनालो.. चारु भुलजा उसे.. वो रोयल फेमीली हे.. हमारा ओर उनका कोइ मेल नही.. ये तो हमारी कीस्मत अच्छी हेकी हमारे साथ उनके अच्छा रीलेशन हे.. वो मुजे अपना दोस्त मानते हे.. मे बात नही कर सकता..
कहेते रमेश चारुके उपरसे हटकर बाथरुममे चला गया तो चारुभी बेडपे बैठ गइ ओर रमेशके नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. आज रमेशने अेक बार फीर उनको प्यासी रख दीया.. लेकीन आज चारुको रमेशके साथ बात करनेका मौकाभी मील गयाथा.. उनको पताथाकी अब रमेशसे अपनी बात कैसे मनवानी हे.. बस थोडीसी महेनत करनी पडेगी..
क्युकी उसे पताथाकी अब रश्मी कभी भी देवायत ओर वंदनाकी मुलाकात करवा सकती हे.. तो वो देवायतको भी अच्छी तराह जानती थी.. की जब अेक बार दोनोकी मुलाकात होजायेगी.. तब सायद वंदना अेक लडकीसे ओरत बन जायेगी.. वो खुद इस दौरसे गुजरी हे.. अबतक वोभी ना जाने देवायतके साथ कीतनी बार अपनी प्यास बुजा चुकी हे.. इस बातसे वंदना ओर चारुका दोनोका देवायतसे बार बार मीलनेका रास्ता खुल सकताथा.. तो इसकी वजहसे चारु अभीसे रमेशको मनानेमे लग गइथी..
तब हवेलीपे आज देवायत सृतीके साथ अपनी सुहागरात मनाते सीक्स नाइन पोजीसनमे अेक दुसरेको संतुस्ट कर चुके थे.. ओर इस वक्त दोनोही बाथरुममे अेक दुसरेको नहेला रहेथे.. जब नहालीया तब देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बेडपे ले आया.. ओर सृतीको पीठके बल लीटाकर खुद उनके उपर चड गया.. तब सृतीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये....
कन्टीन्यु





















