Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 21 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३४

कहेते बरखा मनमे खुस होते वापस मुनाके कमरेमे चली गइ.. ओर मुनाको बसंतीसे बात करके उनका हाथ मांगने मम्मी बुला रही हे कहा.. तब मुना बहुतही गभरा गया.. तो बरखाने उसे हीमतसे बीन्दास्त बात करनेको कहा.. तो मुना अपनी मम्मीको मीलनेके लीये तैयार होगया.. ओर वो थोडा गभराते बसंतीके रुममे चला गया.. तब बरखाभी सरमाते हसती हुइ कीचनमे चली गइ ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. तभी....अब आगे

बसंती : (मुना अंदर आगया तब धीरेसे) मुना.. दरवाजा अच्छेसे बंध करदे.. फीर इधर आ.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

मुना : (सरमाते धीरसे) जी मम्मी.. कहीये..

बसंती : (मुना दरवाजा बंध करके पास आकर बैठ गया तब) मुना.. ये सब क्या हे..? हंम..? ये सब कबसे चल रहा हे..?

मुना : (सर नीचे करते धीरेसे) जी मम्मी.. जबसे हम दोनो कोलेज मे थे तबसे.. मम्मी हम अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. मे बरखासे सादी करना चाहता हु..

बसंती : (धीरेसे जुठ मुठके गुसेसे) चुप.. अपनी ही बहेनको प्यारके नामसे प्रेगनेन्ट तक कर दीया.. सरमभी नही आइ तुजे..? हंम..? तुमने क्या सोचाथा.. की हम मान जायेगे..? बहुत आग हे तेरे मे.. हंम..?

मुना : (सरमाते धीरेसे थोडी हींमत दीखाते) मम्मी.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. वो बरखाने कहाथा आपसे उनका हाथ मांगनेको, तो आगया.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. आप हमारी सादी करवा दीजीये..

बसंती : (धीरेसे) तुजे पता हेनां.. ये नाजायज रीस्ता कहेलाता हे.. तुम दोनो भाइ बहेन हो.. हंम..? फीरभी दोनोने इतनी हीमंत करली..? सच बताना तुमने क्या सोचकर बरखाको प्यार कीया..?

मुना : (धीरेसे सरमाते) मम्मी.. बरखा बहुतही खुबसुरत हे.. मे उनको पहेलेसेही पसंद करता हु.. मे नही चाहताथा की उनकी सादी कही ओर होजाये.. मे उसे पाना चाहता था.. ओर प्यारतो कीसीसेभी ओर कभीभी हो सकता हे.. ओर कहेते हेना प्यार करनेमे नात जात पात रीस्ता उमर कुछभी नही देखते..

तो हमारे बीच भी प्यार होगया.. ओर अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. तो हमने क्या गलत कीया..? हमारे ही गांवमे अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. ओर ज्यादातर लडके उनकी बहेनसे प्यार करते हे.. तो मेने भी प्यार कीया.. तो उसमे हमने क्या गलत कीया..?

बसंती : (अपनी चाल चलते धीरेसे) तुजे यकीन हे गांवमे अ‍ैसा होने वाला हे..? हंम..? तुम अ‍ैसे नाजायज रीस्तेमे यकीन करते हो..? ये तो तुम्हारी बहेन हे.. अगर कल कोइ अपनी मांके साथभी अ‍ैसा करेगा.. तो क्या तुम इस रीस्तेको भी अ‍ेक्सेप्ट करलोगे..? हंम..? अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे ये तो तुजे पता हेनां..?

मुना : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मी.. हम दोनो पढे लीखे हे, मुजे सब पता हे अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे.. ओर आप यकीन करो.. हमारे ही गांवमे मेरे दोस्तका उनकी विधवा ताइके साथ रीस्ता हे.. ओर अ‍ेकका उनकी विधवा बुआके साथ रीलेशन हे.. ओर गांवमे अ‍ैसे ओर कइ रीस्ते पनप रहे हे.. तो मे उसे भी गलत नही मानता..

जोभी हुआ हे दोनोकी आपसी रजा मंदीसे हुआ हे.. तो इसमे क्या गलत हे..? माफ करना मम्मी.. मे इन सब बातोको ओर रीस्तेको नही मानता.. बस मुजे बरखासे सादी करनी हे.. मे उसे बहुत प्यार करता हु.. हम दोनो कोलेज मे थे तबसे ही रीलेशनमे हे.. ओर अभी जो उनके पेटमे बच्चा पल रहा हे वो मेरा ही हे..

बसंती : (कातीलाना हसते धीरेसे) हंम.. अपनी मां के सामने ही इतनी बडी बात बोलदी.. काफी हीमंत हे तुजमे.. ठीक हे.. मानलो की अगर मेने बरखाकी सादी तुमसे कर भी दी.. तो क्या मेरी बेटीको तुम खुस रख पायेगा..?

मुना : हां मम्मी.. मे जोब करता हु.. ओर सुधीर अंकल केह रहेथे.. अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडी होस्पीटल बन रही हे.. तो मुजे ओर बरखाको उन्ही होस्पीटलमे अच्छी जोब मील जायेगी.. हमारे ठाकुरसाहेबही बनवा रहे हे.. ओर डोक्टर ओर उनकी वाइफ नीशाभाभी खुद होस्पीटल सम्हालने वाले हे.. तो हमे पैसे भी अच्छे खासे मीलेगे.. फीर पापाको नोकरी करनेकी जरुरतही नही पडेगी.. ओर बरखाभी खुस रहेगी..

बसंती : (सरमाते दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) मुजे पता हे तुम दोनोने हमारे पुरे घरकी जीम्वेवारी उठाली हे.. खुस रखनेका मेरा ये मतलब नही था.. मतलब.. उनको सेटीस्फेक्शन से था.. तु समज गयानां..? वरना कल अ‍ैसा ना होकी तेरे बापुकी तराह तेरी भी कोइ गलत आदतकी वजहसे आगे जाकर बरखाका रीलेनश भी कीसी ओरके साथ..

मुना : (धीरेसे बीचमेही बात काटते) मम्मी मे आपकी सब बात समज गया.. आपका कहेनेका मतलब हमारे बीच फीजीकल रीलेशनसे हे.. आप नीस्चीत रहीये अ‍ैसा कुछभी नही होगा.. क्युकी मुजे कोइ गलत आदत नही हे.. ओर बरखा भी मुजसे बहुत खुस हे.. ओर आगेभी खुस रहेगी.. आइ प्रोमीस..

बसंती : (मुनाके पेन्टके उभारकी ओर इसारा करते देखते) मुना.. तुमतो काफी हिमंत वाले ओर खुलके बात करने वालोमे से हो.. (पेन्टकी ओर नजरोसे इसारा करते) इसे देखकर तो लगता हेकी काफी बडा होगा.. तो तुम बरखा को खुस रखते होगे.. बस मेतो अ‍ैसेही पुछ रहीथी.. मुजे अब कोइ चीन्ता नही हे..

मुना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी आप नीस्चीत रहीये.. मे खुलकर बात करनेवालो मे से हु.. बरखा इनसे बहुत खुस हे.. अबतो वोभी चाहती हेकी मे उसे जींदगीभर ये सुख देता रहु ओर उसे खुस रखु.. इसीलीये हमने ये बडा कदम उठालीया.. लेकीन आपभी मेरी मम्मी होनेके बावजुद मुजसे सब खुलके बात कर रही हे.. अ‍ैसा क्यु..? कोइ खास वजह..?

बसंती : (सरमाते मुस्कुराते) मुना.. भलेही मे तेरी मां हु.. लेकीन मां से पहेले मेभी अ‍ेक औरत हु.. ओर हम औरतोको कैसे कैसे दौरसे गुजरना पडता हे वो तुजे क्या मालुम..? तुमतो जानते हो तेरे बापुकी बुरी आदतकी वजहसे आज उनकी ये हालत हे.. तो मेभी अ‍ैसे दौरसे गुजर रही हु.. येतो अच्छा हे मेने कोइ गलत कदम नही उठाये.. तु समज गयानां..?

बरखाकी जींदगी अ‍ैसेही कीसीके हाथोमे नही सोप दुगी.. इसीलीये तुजे ये सब खुलकर पुछ रही थी.. अब मुजे यकीन हो गयाकी तु मेरी बरखाको सम्हाल पायेगा.. ओर उसे खुस भी रख पायेगा.. ओर मुजे खुसी हेकी तुम अ‍ैसे रीस्तोपे यकीन करते हो.. बस मेरी अ‍ेक ही सर्त हे.. तुजे बरखाके साथ साथ मेरा भी खयाल रखना होगा.. तु समज गयानां..?

मुना : (सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे बसंतीको देखते धीरेसे) मम्मी..? ये आप क्या बोल रही हे..? मतलब मे समजा नही.. आपतो इतना सब खुलकर बोल चुकी हे.. तो ये बात भी मुजे खुलकर बताइअ‍े..

बसंती : (मुस्कुराते धीरेसे) क्यु..? अभीतो केह रहेथे की तुमतो पढे लीखे हो..? इतनाभी ना समज नही हो.. की मेरे कहेनेका मतलब ना समजो.. ओर तुमने जोभी अभी सुना ओर समज रहे हो वोही केह रही हु.. ओर यही सच हे.. बस.. इस बारेमे बरखाको तो क्या कीसीको पता भी नही चलना चाहीये..

अब तुजपे डीपेन्ड हे.. की तुम बरखाके साथ मुजे भी खुस रख पाते होकी नही.. अगर मेरी ये सर्त मंजुर हे तो तुम बरखाके साथ रेह सकते हो.. मे तुम दोनोकी सादी भी करवा दुगी.. वरना भुलजाओ बरखाको.. चल अब चाइ नास्ता होगया होगा.. ओर हां.. अभी हमारे बीच जोभी बात हुइ हे.. वो हमारे बीचही रहेनी चाहीये.. अपनी इस बीवीको भी नही बताना.. बस यही मेरी सर्त थी..

मुना : (थोडा सकपकाते) मम्मी.. क्या ये सब जायज हे..? आइ मीन.. आप मेरी मां हो.. इसीलीये..

बसंती : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) क्यु..? मां हु तो क्या हुआ.. हु तो अ‍ेक ओरत.. अभी तो तुमने कहाकी तेरे अ‍ेक दोस्तने उनकी वीधवा ताइके साथ रीलेशन बनाया हे.. तो मुज मे क्या प्रोबलेम हे..? क्या मेभी तुजे बरखाकी तराह खुबसुरत नही लगती..? तो बतादे..

अभी तो तुम केह रहेथे की मे कीसी भी रीस्तेको गलत नही मानता.. तुम तो काफी खुले विचारके होनां..? जब मुजे तेरे साथ रीलेशन रखनेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे..? अ‍ेक बार अच्छेसे सोचले.. मुजे तेरे जवाबकी कोइ जल्दी नही हे..

मुना : (कुछ सोचते) नही मम्मी.. आपभी बरखाकी तराह बहुत खुबसुरत हो.. मे भी आपको पसंद करता हु.. लेकीन हमारे बीत मां बेटेकी कुछ मर्यादाभी हे.. तो इस बारेमे मुजे सोचनेके लीये थोडा वक्त चाहीये.. आपने तो मुजे आज जटका ही दे दीया..

बसंती : (कातीलाना समाइल करते मुनाके कंधेपे हाथ रखते) हां पता हे मुजे.. मेने तुजे आज बहुत बडा जटका दे दीया हे.. तो वक्ततो चाहीयेनां..? तो ठीक हे.. अ‍ेक बार अच्छेसे सोचले.. यहा बेटीके साथ उनकी मांभी मील रही हे.. हें..हें..हें.. ओर हां.. तुम अपनी बीवीके साथ सो सकते हो.. लेकीन मेरी सर्तके साथ.. ओर ध्यान रखना.. तेरे पापाको अभी इस बातका पता नही चलना चाहीये.. अब चल बहार.. तेरी बीवीने चाइ नास्ता बनालीया होगा.. हें..हें..हें..

मुना : (मनमे खुस होते बहार नीकलते मुस्कुराते धीरेसे) मम्मी.. लेकीन अ‍ेक दीनतो सबको पता चलही जायेगा.. हम बरखाकी बात ज्यादा दिन छुपा नही सकते.. क्या वो प्रेगनेन्ट हेनां..?

बसंती : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी वो हर रात हमसे छुपकर तेरा बीस्तर गरम करती हे तो प्रेगनेन्ट तो होही जायेगीनां..? वो सब तुम मुजपे छोडदे.. तबकी तब देखा जायेगा.. ओर वैसेभी गांवमे तुम दोनो जो केह रहे हो तो वोभी तो होजायेगा.. मे सब देख लुगी.. बस तुम मेरा खयाल रखना पडेगा.. वरना कल तुम कीसी ओरके मुहसे ये ना सुनोकी तेरी मा कीसी ओरके साथ.. तुम समज गयेनां..?

मुना : (जटसे धीरेसे) नही मम्मी.. अ‍ैसा आप कुछभी नही करोगी.. बस मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये..

बसंती : (मुस्कुराते) इसीलीये मेने ये सर्त रखी हे.. यकीन करो.. मे भी बरखा से कम नही हु.. बीस्तरमे उनकोभी टक्कर दे सकती हु.. मे तुमको नीरास नही करुगी.. वैसे तुमतो काफी समजदार हो.. इनसेतो अच्छा हे घर की बात घरमे ही रेहजाये.. मे आशा करती हु की मुजे तेरा जवाब जल्द मील जायेगा.. अब चल बहार..

फीर दोनोही बहार आगये तब बरखाको नही पताथाकी दोनोके बीच क्या बाते हुइ हे.. बरखाने तीनोके लीये चाइ नास्ता बनालीया था.. ओर तीनो ही अ‍ेकठे बैठकर चाइनास्ता करने लगे.. तब चाइ पीते मुना गहेरी सोचमे डुब गया.. आज उनकी मां बसंतीने खुलकर अपनी सर्तके बारेमे बताकर मुनाको जंजोरके रख दीयाथा.. आज उनकी मम्मी ने खुद सामनेसे उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात करदी..

अब मुना अपनी मम्मीको अ‍ेक मा की नजरसे नही अ‍ेक ओरतकी नजरसे नजरे चुराते देखने लगा.. मुनाने आज तक अपनी माको अ‍ैसे गौरसे नही देखा था.. वो अपनी नजर चुराते बसंतीके अ‍ेक अ‍ेक अंगका जायजा लेने लगा.. जब उनकी नजर बसंतीके उरोजोपे चली गब.. तब मुनाको बसंतीके ब्लाउसमे बहुत कठोर भरावदार उभार देखनेको मीला.. जो ब्लाउसके अंदरभी उसे सख्त दीख रहेथे..





तब मुनाका लंड मेन्टके अंदरही खडा होकर जटके मारने लगा.. आज मुनाको अपनी मम्मीके अंदर कीसी काम देवकी मुरत नजर आने लगी.. ओर सोचने लगाकी अगर मे मम्मीको हां कहेदु तो यही ओरत अ‍ेक दिन उनके नीचे लैटी होगी.. कमीनी आजभी अ‍ेक लडकीकी तराह जवान ओर कामुक दीखती हे.. अगर इनकी भी चुत मील जायेतो सालीको रगड रगडके चोदुगा.. यही सब सोचते मुनाकी पेन्टमे लंड जटके मारते खडा होने लगा ओर तंबु बन गया..

तो बसंती टेडी नजर करते मुनाके पेन्टके उभारको बार बार देखने लगी.. तब उसे पेन्टमे बहुत बडा नाग अपनी फेन उठाये नजर आया.. तब वो नजरे चुराते मुनाकी ओर देखते सरमाते मंद मंद मुस्कुराने कामुक स्माइल करने लगी.. वो मुनाको रीजानेकी पुरी कोसीस करने लगी.. तब मुनाभी उनकी ओर देखते अपनी माकी नजरको पहेचान गया.. तो बसंतीभी मुस्कुराते नजरोसे मुनाके पेन्टकी ओर इसारा करने लगी..

तो मुना बहुतही सरमा गया.. ओर सोचने लगाकी मम्मी उनके नीचे लेटनेके लीये पुरी तराह तैयार हे.. अगर मेने मम्मीको खुस नही रखातो वो फीरसे भानुके साथ या कीसी ओरके साथ रीलेशन रख लेगी.. इनसे तो अच्छा हे मेही इनके साथ रीलेशन रखलु.. ओर वो सोचते ही सरमाते मुस्कराता रहा.. उसने तभी मनमे अपनी मम्मीके साथ रीलेशन रखनेका तैय करलीया.. तभी..

बसंती : (नास्ता खाते) बरखा.. सुन.. आजसे तुम मेरी बेटी नही हो.. अब तुम मेरे मुनाकी बीवी हो.. मेरी बहु.. तो तुम अपनी सेहतका खयाल रखना.. आजसे मेरे बेटेकी सब जीम्वेवारी तेरी होगी..

बरखा : (सरमाते हसते धीरेसे) जी मम्मीजी.. थेन्कयु.. हें..हें..हें.. मम्मी.. आप मेरी सास के साथ मां भीतो हे.. तो भाइकी भी आप मां के साथ उनकी सासभी होगइ हे.. लेकीन मे आपके साथ सास बहु वालाही रीलेशन रखुगी.. हें..हें..हें..

बसंती : (मुनाकी ओर कातील नजरोसे देखते) अब ये सब मुनापे डीपेन्ड हे.. अगर उनको अपनी मां के साथ दीकत होती हे तो भलेही मुजे अपनी सास माने.. तो मे आशा करती हुकी तबतो इनको कोइ दिकत नही होगी.. क्यु मुना..? हें..हें..हें.. दुसरी बात.. आजसे बरखाकी भी सब जीम्वेवारी तेरी होगी.. अब तुजेभी मेरी बहुका अच्छेसे खयाल रखना पडेगा.. उसे हर महीने चेकअपके लीये सहेर लेजाना हे.. बाकी गांवमे मे सबको जवाब दे दुगी.. तुम दोनोको फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. जीलो अपनी जींदगी..

कहातो मुना समज गयाकी बसंती कीस बारे मे बात कर रही हे.. वो बसंतीकी सब बात समज गया.. दोनोही मां बेटे नजरोका खेल खेलते बात कर रहे थे.. तब बरखाको नही पताथा की दोनो मा बेटे अ‍ैसी बाते करते क्या खीचडी पका रहे हे.. बसंती मुनाके पेन्टके उभारको देखकर पुरी तराह पागल हो चुकीथी.. उनको पेन्टमे मुनाका लंड भानुके लंडसे भी बडा महेसुस हो रहाथा.. ओर मुनाभी अपने दिलकी बात केह देता हे..

मुना : (सरमाते बसंतीकी ओर देखते हसते) जी मम्मी.. मुजे मेरी सब जीम्वेवारी पता हे.. अब मे सीर्फ आपकी बहुका नही.. सास बहु दोनोका अच्छेसे खयाल रखुगा.. हें..हें..हें.. क्युकी अब आप मेरी मां के साथ मेरी सासभी हो गइ हो.. तो मुजे सास मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. ओर मां मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. मे कीसीभी रीस्तेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. हें..हें..हें..

बसंती : (मुनाकी बात समजते ही खुस होते) जी.. मुना मुजे तुमसे यही उमीद थी.. हें..हें..हें..

कहेते बसंती मुनाकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते हसती रही.. तब मुनाभी उनकी मम्मीको अ‍ेक अलगही वासना भरी नजरोसे देखते हसने लगा.. तो बरखा भी मुहको दुसरी ओर घुमाते बहुतही सरमाते हसती रही.. तभी मौकेका फायदा उठाके बरखाकी नजरे बचाते मुनाने बसंतीकी ओर आंख मार दी.. ओर हसने लगा.. तब बसंती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वोभी मुह घुमाते मुस्कुराने लगी..

तब बरखा को नही पताथाकी सर्तके तौरपे उनकी मम्मीने मुनासे क्या मांगलीया था.. ओर बरखाको पानेके लीये उसे अपनी मम्मीकी सर्त मानली थी.. ओर बातो ही बातोमे उसने अपने दिलकी बाते बसंतीको बतादी थी.. मुना बसंतीसे बात करके मनही मन खुस हो रहा था.. आज उसने बरखाका हाथ अपनी मम्मीसे मांगकर अपने लीये दो दो चुतोका इन्तजाम करलीया था.. जब चाइ नास्ता करलीया तो बरखा सब बर्तन लेकर बहार चली गइ..

तो मुनाने बसंतीकी ओर वासना भरी नजरोसे मुस्कुराकर देखा.. ओर मौका मीलतेही बसंतीकी ओर अ‍ेक बार फीर आंख मारके मुस्कुराने लगा.. तो बसंती वापस बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी नजर घुमाते सरमाते मंद मंद मुस्कुराते लगी खडी होने लगी.. तब अचानक मुनाने उनका हाथ पकडलीया.. ओर अपनी ओर खीचते बसंतीके बुब्सको दबाके मसलने लगा.. तो बसंतीने जटसे बहारकी ओर देखते हाथ खीचलीया.. ओर बहुतही सर्मसार होते हसते हुअ‍े मुनासे छुटकर जटसे अपने रुममे भाग गइ..

तब बरखा बहार आंगनमे पानीकी टंकीके पास सभी बर्तन लेकर साफ करने बैठ गइ.. तो अंदर मुना हींमत करके अपनी मम्मीके रुमकी ओर चल पडा.. तब बसंती रुममे आतेही दरवाजा खाली बंध करके उनके सहारे खडी होगइ.. ओर अपनी आंख बंध करके दोनो हाथ अपने उरोजोपे रखके अपनी सांसको कंट्रोल करने लगी.. आज अचानाक मुना उनके अंगोके साथ खेलने लगेगा उनकी उमीद तो बसंतीको भी नहीथी..





जीस तराह मुनाने अचानक उनका हाथ पकडके उसके उरोजोके साथ दबाकर मसलते खेला.. तो बसंतीकी गभराहटसे भारी सांस होगइ थी.. वो मुस्कीलसे मुनासे छुटकर अंदर भाग गइ.. तब बसंतीकी काम वासना पुरी तराह भडक चुकीथी.. उनकी चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया फडफडाते पानीका रीसाव करने लगीथी.. ओ वो मुस्कीलसे बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तो अचानक उनके रुमका दरवाजा खुल गया..

तो बसंती गभराकर पलटके देखने लगी.. तो मुना दरवाजा खोलकर अंदर आगया.. तब बसंती कुछ सोचे समजे उनसे पहेलेही मुना धीरेसे दरवाजा बंध करके बसंतीके पास आगया ओर बसंतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोपे होठ रखदीया.. तो बसंतीका चहेरा लाल होगया.. वो पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी.. ओर मुनाका चहेरा अपने हाथोमे थामकर उनको पागलोकी तराह चुमने लगी..





तभी मुना बसंतीको जोरोसे बाहोमे भीचते बाथरुमकी ओर लेगया.. ओर अंदर जातेही बसंतीको पागलोकी तराह चुमने लगा ओर अ‍ेक हाथसे जोरोसे उनके बुब्सको दबाते मसलने लगा.. तब बसंतीसे कंट्रोल करना मुस्कील होगया.. वो अभी बरखाकी वजहसे कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी..

तो वो मुनाको हाथ पकडके भारी सांसोसे मुनाको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तभी मुनाने बसंतीकी चुतको उपरसेही मुठीमे दबोच लीया.. तब बसंती उछल पडी.. ओर मुनाको धका मारते दुर करदीया.. फीर गभराते मुनासे बात करने लगी..





बसंती : (सरमाते अपने कपडे सही करते धीरेसे) मुना.. प्लीज.. अभी नही.. अभी बरखा घरपे हे.. अगर उन्होने हमे देखलीया तो सब गडबड होजायेगी.. अभी तुम बहार जाओ..

मुना : (फीरसे पास आते होंठ चुमते) मम्मी.. तुम मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. मे तुमसे मीलना चाहता हु..

बसंती : (मुनाको दुर करते बहारकी ओर देखते) नही मुना.. अभी हमारा मीलना उचीत नही हे.. तुम समजता क्यु नही..? अभी तुम जाओ.. हमे मीलनेके बहुत मौके मीलेगे.. तुम दो पहोरको आजाना.. तब मे घरपे अकेली रहेती हु.. समज गयानां..? अभी जाओ.. बरखा कभी भी आ सकती हे..

मुना : (अपना लंड पेन्टके उपरसेही मसलते) मम्मी.. तुमने तो मुुजे आग लगादी हे.. अब इनका क्या करु..? बस अ‍ेक बार..

बसंती : (सरमाते मुस्कुराते बहार धका मारते) कीतने कमीने हो.. अपनी बीवीको जाकर कहो वो तेरी आगको सांत कर देगी.. अब जाओभी.. मे रातमे तेरी आंगको सांत करनेका इन्तजाम करती हु.. अभी जाओ बहार.. बेसर्म कहीका.. हें..हें..हें..

ओर बसंतीने मुस्कीलसे मुनाको बहार भगा दीया.. ओर वो सरमाकर मुस्कुराती रही.. इस रात जो मुनाने सोचा था उनसे बहेतर नतीजा उनको देखनेको मीला.. देर रात बसंतीका पती सो गया तब बसंतीने खुद आज अपने हाथोसे बरखाको अच्छेसे हल्कासा शींगार करके दुल्हनकी तराह तैयार करदीया.. ओर वो खुद बरखाको लेकर मुनाके रुममे छोडने चली गइ.. ओर दरवाजेपे छोडके वापस आगइ.. तब मुना बहुतही खुस हुआ.. ओर इस रात दोनो भाइ बहेनने बीना डरके खुलकर प्यार कीया..





मुनाने आज बरखाको जमकर चोदलीया.. तो बरखाभी खुस होगइ.. दोनोही रातभर चुदाइ करते रहे.. तब उन दोनोको नही पताथा की अ‍ेक खीडकीसे छुपकर बसंती दोनोकी चुदाइ भरी रास लीला देख रही हे.. क्युकी आज मुनाने बसंतीको उनके रुममेही दबोच लीयाथा ओर उनके बुब्स ओर चुतके साथ छेडखानी करके उनके तनकी आगको भडका दीयाथा.. तबसे बसंतीकी काम वासना बहुतही बढी हुइ थी.. वो चाहती थीकी अब मुना उसे जल्दसे जल्द मील जाये.. ओर उनकी जमकर चुदाइ करले..

तो दुसरी ओर रमेशके घर रमेश अपने रुममे बेडपे लेटकर मोबाइल देखते आराम कर रहाथा.. तभी चारु ओर वंदनाभी घरपे आगये.. वंदना थकानकी वजहसे अपने रुममे जाकर फटाफट चेन्ज करके सोने लगी.. तब चारु सभी लाइट दरवाजा बंध करके अपने रुममे चली गइ.. ओर चेन्ज करते रमेशकी ओर गुस्सेसे देखती रही.. तभी रमेशकी नजर चारुकी ओर गइ.. तो चारु उसे खाजाने वाली नजरोसे घुर रहीथी.. ओर चारु चेन्ज करके बेडपे आगइ..

रमेश : (हसते) अरे डार्लींग.. आजतो कुछ मुड ठीक नही लगता.. बडे गुस्सेमे लग रही हो..? क्या वहा कीसीसे अन बन तो नही हुइ..? हें..हें..हें..

चारु : (रमेशको अ‍ेक घुसा मारते धीरेसे) नीकमे.. कमीने.. क्या अ‍ेक बीवीसे जी नही भरा.. जो कीसी ओर रंडीको लेकर सहेरमे घुमते हो.. कमीने.. पहेले अपनी बीवीसे तो ठीकसे चोदना सीखले बादमे दुसरी ओरतको घुमाना.. कौन थी वो रंडी..?

रमेश : (सब समज गया तब डरते धीरेसे) चारु.. ये क्या बत्तमीजी हे.. कोइ बीवी अपने पतीसे अ‍ैसे गालीया देती हे..? ओर तुम क्या केह रही हो..? मे कीसको लेकर घुमता हु..? कोइ भी तो नही थी..

चारु : (गुस्सेसे) क्यु.. सहेरसे अपनी बाइकके पीछे कीसको बीठाकर आ रहेथे..? हमने तुजे रास्तेमे देखलीया था.. बोल इसका जवाब हे तेरे पास..? कमीना कहीका.. मुजसे जुठ बोलता हे.. अ‍ेकतो जवान लडकी घरमे बैठी हे.. उनका तो कुछ करते नही.. की चलो सादी लायक होगइ हेतो कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. ओर उपरसे बहार जाकर इस्कबाजी फरमाते हो.. सरम भी नही आती..?

तब रमेश सारा माजरा समज गया.. अब उस इस बातको छुपानेका कोइ फायदा नही था.. तो उसने थोडा सच बतानेको उचीत लगा.. ओर बेडपे बैठ गया.. फीर चारुकी ओर घुमते धीरेसे बात करने लगा..

रमेश : देख चारु.. तुजे गलत फेहमी होगइ हे.. वो हमारे सामतभाइकी बीवी जयाभाभी थी.. मुजे आते वक्त बसस्टेन्डपे खडी कीसी बसका इन्तजार करते दीख गइ.. तो मे उसे अपनी बाइकमे बीठाकर घर ले आया.. इसमे क्या गलत हे..? इसका मतलब ये थोडीना हेकी मेरा उनके साथ रीलेशन हे..

चारु : (सख्त लहेजेमे) अच्छा.. तो फीर उनको अपना चहेरा ढकके अपनी पहेचान छुपानेकी क्या जरुरत थी.. अ‍ैसे ही आ सकती थी.. देख रमेश.. अभी भी वक्त हे.. अगर तुम दोनोके बीच कुछ चकर हे तो अभी मुजे सच बतादे.. मे तुजे बक्स दुगी.. लेकीन बादमे मुजे कीसी ओरसे पता चलाना.. तो फीर.. तुम सोचभी नही सकते अ‍ैसा कदम मे उठाउगी.. याद रखीयो.. चल सोजाओ अब..

रमेश : (राहतकी सांस लेते चारुको बाहोमे लेनेकी कोसीस करते) हंम.. चारु यकीन करो.. जो तुम सोच रही हो अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. चल आजा.. थोडा प्यार करले..? हंम..?

चारु : (गुस्सेमे हाथको जटकते) हाथ मत लगाओ मुजे.. अब जबतक मुजे पुरा यकीन नही हो जाता तुम मुजे छुओगे भी नही.. केह देती हु.. अगर यही बात हमारे साथ होती तो..? अबतक तो मुजे डीवोर्स दे चुके होते..

रमेश : (मनते करते) चारु.. प्लीज.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. मान जाओ.. तुजे मेरी कसम.. हमारी वंदनाकी कसम.. बस..? अब तो मानजा..

चारु : (थोडा सांत होते अ‍ेक नजरसे देखते) रमेश.. तुम कीतने कमीने हो.. हमारी बच्चीकी कसम क्यु खाते हो..? उसने तुम्हारा क्या बीगाडा हे..? उस मासुम को तो छोड देते.. बेचारी सादीके लायक होगइ हे.. फीरभी हमे कुछ नही कहेती.. जरा उनकी तकलीफ के बारेमे तो सोचो..

रमशे : चारु.. तो क्या करता.. तुमजो इतने गुस्सेमे थी.. मान जाओ प्लीज.. ओर हम उनके लीये लडका ढुंढनेकी कोसीस तो कर रहे हे.. लेकीन वो सादी करनेको मना भी तो करती हे.. पता नही उनके मनमे क्या हे..

चारु : (सांत होकर धीरेसे) ठीक हे रमेश.. अभीतो तुमने वंदुकी कसम खाइ हे तो तुम्हारी बात मान लेती हु.. लेकीन याद रखना.. अगर मुजे कहीसे भी पता चलाकी सच क्या हे.. ओर तुम्हारा जयाभाभीके साथ चकर नीकला तो मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. फीर तुम ओर मे आजाद.. तुम अपने तरीकेसे जीना ओर हम मां बेटी अपनी तरीकेसे जीयेगे.. तुम हमे कुछ नही कहोगे..

रमेश : (थोडा डरते धीरेसे) चारु..? क्या आजाद..? मतलब..? क्या मुजे छोडके चली जाओगी..?

चारु : (रहस्य भरी मुस्कानसे) रमेश.. मे इतनी भी कमजोर नही हु.. की तुजे छोडकर चली जाउ.. तुमतो मुजे ठीकसे सेटीस्फाइभी नही करपाते.. फीर भी मे यही तुम्हारे साथ पडी हु.. अगर तुजे छोडना होतातो कबसे कीसीके साथ भागकर तुजे छोड चुकी होती.. अगर तुम्हारा चकर जयाभाभीके साथ नीकला..

तो तुम हमे कभी नही पुछोगे.. की हमारा रीलेशन कीसके साथ हे.. समजे..? अगर मर्दको अ‍ैसे रीस्ते रखनेका हक हेतो हम जैसी ओरतोको भी हे.. फीर तुम अपने तरीकेसे जीओगे ओर हम मा बेटी अपने तरीकेसे जीयेगी.. बस यही कहेना था.. अब सो जाओ.. बहुत देर होगइ हे.. मुजे ओर बहेस नही करनी..

कहेके चारु करवट लेकर सोगइ.. अ‍ैसा नही था की चारुको रमेश ओर जयाके रीस्तोके बारेमे नही पता था.. उनको नीशासे सब पता था.. की रमेशका जयाके साथ रीलेशन हे.. लेकीन आज चारुने बडी ही सीफततासे चाल चलकर रमेशसे अन्जान बनके अपने लीये ओर वंदनाके लीये देवायतके साथ रीलेशन रखनेके लीये रास्ता बनालीया था.. तो दुसरी ओर रमेशभी अंसमजमे चारुको देखता ही रेह गया..

उनको अब चारुसे जुठ बोलकर ओर वंदनाकी जुठी कसम खाकर पछतावा होने लगा.. लेकीन अब करेतो क्या करे..? ओर ये सच भी था की रमेशका नाजायज रीस्ता जयाके साथ था.. तो अ‍ेकना अ‍ेक दिनतो सबको पता चलनाही था.. तब रमेशने चारुसे माफी मांगनेकी ठानली.. तो वो चारुके उपर जुक गया ओर चारुको खीचकर अपनी ओर कीया.. ओर चारुको अपनी बाहोमे भीच लीया..

रमेश : (धीरेसे रुआसी आवाजमे) चारु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने तुम्हारी ओर वंदुकी जुठी कसम खाइ.. मुजे माफ करदे.. अब अ‍ैसी गलती दुबारा कभी नही होगी.. आइ प्रोमीस.. बस अ‍ेक बार मुजे माफ करदे..

चारु : (अ‍ेक नजरसे आंखोमे देखते) रमेश.. अभीभी वक्त हे मुजे सब सच बतादे.. मे तुजे माफ कर दुगी.. क्युकी मुजे मेरी नही.. मेरी बच्चीकी चीन्ता हे.. जब लोगोको पता चलेगा की उनके बापका कीसी दुसरी ओरतके साथ रीलेशन हे.. तो कौन हमारी बच्चीका हाथ थामेगा..? इसका कोइ जवाब हे तेरे पास..?

रमेश : (हां मे गरदन हीलाते) हां चारु.. सोरी.. मुजसे बहुत बडी गलती हो गइ.. लेकीन इसमे मेरी कोइ गलती नही थी.. तुमतो जानती हो सामतभाइ अब बुढे हो चुके हे.. ओर जयाभाभीकी उमरमे ओर उनकी उमरमे काफी फर्क हे.. जीनकी वजहसे जयाभाभीने खुद सामनेसे मुजसे रीलेशनके लीये कहाथा.. लेकीन अब वादा करता हु.. मे उनको कभी नही मीलुगा.. मे मेरे परीवारको बरबाद होते नही देख सकता.. चारु आइ अ‍ेम सोरी.. बस अ‍ेक बार मुजे माफ करदे..

चारु : (प्यारसे गालपे अ‍ेक चपत लगाते) रमेश.. तो पहेलेही सच बता देता.. मुजेभी तुमसे अ‍ैसे बात करना अच्छा नही लगता.. अगर उनसे रीस्ता ही रखनाथा तो मुजसे कहेकर रखता.. मे तुजे मना थोडीना करती..? क्युकी मे ओरतोकी तकलीफ भली भांती जानती हु.. मेभी इस दौरसे गुजर रही हु..

इसमे ना जयाभाभीकी गलती हे ना तुम्हारी.. अगर कहेके रीस्ता रखते तो मे तुजे खुसी खुसी हां केह देती.. चल.. जा मेने तुजे माफ करदीया.. ओर हां.. आइन्दा अ‍ैसी गलती कीना.. तो अभी तुजे प्यारसे चपत लगाइनां.. उनके बदले तुजे जोरोका चाटा लगेगा.. हें..हें..हें..

रमेश : (जोरोसे बाहोमे भीचते) थेन्कयु चारु.. तुमने मुजे माफ करदीया.. आइ प्रोमीस.. अब मे उनके साथ रीलेशन नही रखुगा..

चारु : नही रमेश मे मना नही करती.. तुम उनके साथ रीलेशन रखो.. लेकीन मुजे बताकर रीलेशन रखते.. हंम..? लेकीन अ‍ेक बात बताओ..? तुम मुजसे तो ठीकसे संतुस्ट नही कर पाते तो फीर जयाभाभीको कैसे..

रमेश : (मुस्कुराते) हंम.. चारु.. अब तुमसे कोइ बात नही छुपाउगा.. बस मेडीकलसे अ‍ेक इम्पोटेड गोली हाथ लग गइ हे.. तो वो मेरी दिवानी होगइ.. हें..हें..हें.. तुम तो मुजे गोली खाने नही देती..

चारु : (अ‍ेक नजरसे देखते) रमेश.. तुजे पता हे अ‍ैसी गोलीसे सेहत पर असर पडता हे..? खास करके अपने दिलपे.. तो दो मीनीटके मजेके लीये अ‍ैसी गोलीया मत खायाकर.. मेभी तुजे अ‍ैसी गोलीया दे सकती हु.. लेकीन मुजे तेरी सेहतसे खीलवाड करके कोइ मजे नही करने..

भलेही तुम हमे संतुस्ट ना कर सको.. लेकीन अपनी मर्दानगी दीखानेके चकरमे कही जानपे ना आजाये.. तो बी केरफुल.. हां.. देसी इलाज करवा सकते हो.. आजकल अ‍ैसी बहुतसी देसी दवाइ मीलती हे.. तुम अब सहेर जाओतो लेकर आना.. या अपना इलाज करवाना.. मुजे देसी गोलीगोसे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

रमेश : (हसते गाल चुमते) हंम.. चारु.. अगेइन आइ अ‍ेम सोरी.. तुम कीतनी अच्छी हो..

चारु : (सरमाते हसते) हंम.. अब ज्यादा मस्का मत लगा.. सीधे सीधे बोलनाकी तुजे चोदना हे.. चल आजा.. आज तुजे खुस कर देती हु.. हें..हें..हें.. ओर वोभी बीना गोली खाये.. हें..हें..हें..

तब रमेश बहुत खुस होगया ओर फटाफट अपने ओर चारुके कपडे नीकालने लगा तब उनका बचपना देखकर चारुकी भी हसी नीकल गइ.. ओर कुछही देरके बाद रमेश चारुके उपर चडके उनको चोद रहाथा.. तब चारुभी मजेसे अपनी कमर उछालते रमेशका साथ दे रही थी.. उनकोतो बस यही रमेशके साथ रहेकर देवायतके साथ अपना रीलेशन रखना था.. ओर वंदनाको देवायतके साथ सेट करना था..





उनको पताथा की रमेश उनको कभी संतुस्ट नही करपायेगा.. फीरभी रमेशसे कैसे अपनी बात मनवानी हे.. वो भली भांती जानती थी.. क्युकी ज्यादातर ओरते कीसीभी चीजके लीये अपने पतीसे डीमांन्ड करती हे तब उजके नीचे लेटकरही करती हे.. फीर चाहे वो कोइ चीज हो या अपने घरकी समस्या.. तब कुछ ही देरकी घमासान चुदाइके बाद रमेश चारुकी चुतको भरके उनके सीनेपे ढेर हो जाता हे.. तब..

चारु : (रमेशके सरको सहेलाते) रमेश.. अब वंदनाके बारेमे कुछ सोचो.. उनकी जवानी नीकली जा रही हे.. कल अ‍ैसा ना होकी उनके बारेमेभी हमे बहारसे कीसी ओरसे पता चले.. की उनकाभी कीसीके साथ रीलेशन हे.. तुम समज गयेनां..?

रमेश : (चारुकी ओर देखते गाल चुमते) हां चारु.. मे सब समजता हु.. लेकीन कोइ ठीकसे ढंगका लडका भीतो मीलना चाहीये.. ओर वंदुभी सादीके लीये मना कर रही हे.. चारु.. अ‍ेक बात पुछु..? वो कीसीको प्यार ब्यारतो नही करती..? तुम अ‍ेक बार अच्छेसे उनकी दिलकी बात जानलो.. अगर लडका अच्छा होगातो हम उनकी सादी वही कर देगे..

चारु : (प्यारसे सरको सहेलाते) जानु.. मुजेतो अ‍ैसा कुछभी नही लगता.. फीरभी अ‍ेक बार मे उनसे पुछ लुगी.. बस मुजेतो गांवमे सीर्फ अ‍ेकही लडका ढंगका दीखता हे.. ओर हमारी वंदु भी उनको पसंद करती हे..

रमेश : (चारुकी ओर देखते) कौन..? तुम कीसकी बात कर रही हो.. क्या हम उसे जानते हे..? आइ मीन क्या वो हमारे गांवका लडका हे..? तो बता.. मे उनसे बात करलुगा..

चारु : (होंठ चुमते) हंम.. हमारे गांवकाही हे.. लेकीन अब उनकी सादीया होगइ हे.. तो बेचारी वंदनाकी बात आपको कहासे करती..? फीरभी अ‍ेक बार उनको पुछलो.. आपका खास दोस्तजो हे.. अगर वो हा कहेतो मेरी वंदुकी सादी भी उनसे करवा दुगी.. इनमे हमाराभी फायदा हे.. वंदु सादी करके भी हमारे साथ रेह सकती हे..

रमेश : (थोडा परेसान होते) लेकीन बतातो सही वो लडका कौन हे..? ओर अभी तुमने कहा मेरा दोस्त हे.. उनकी सादीया होगइ हे.. मतलब क्या..? मे ठीकसे समजा नही.. तुम कीसके बारेमे बात कर रही हे..?

चारु : (सरमाते मुस्कुराते) हमारे देवरजी.. आपके खास दोस्तजो हे.. हमारे राजा.. देवायतजी..

रमेश : (जटसे धीरेसे) पागल होगइ हे क्या..? देवु.. लेकीन वो कैसे..? मानाकी देवु मुजसे बहुत छोटा हे.. लेकीन चारु अभी अभी उनकी तीसरी सादी हुइ हे.. तो फीर हमारी वंदु..? नही नही.. ये नही हो सकता.. मे उनसे बात नही कर सकता.. मानाकी वो कीतनीभी सादीया करले उनको कोइ कहेने वाला नही.. मुजे येभी पता हे हमारी वंदु वहा खुस रहेगी.. लेकीन मे उनसे इस बारेमे बात नही कर सकता.. मेरा खास दोस्तजो हे..

चारु : (प्यारसे गाल सहेलाते) जानु क्यु नही कर सकते..? हमारी बेटीकी खातीर इतना नही कर सकते..? सीर्फ अ‍ेक बार बात करकेतो देखो.. वरना आप कहोतो मे मंजुभाभीसे बात करलुगी.. वो मना नही करेगी..

रमेश : (उपरसे हटते) पागल हो गइ हो क्या..? मंजुभाभीको क्या कहोगी..? की मेरी बेटीको तुम्हारी सौतन बनालो.. चारु भुलजा उसे.. वो रोयल फेमीली हे.. हमारा ओर उनका कोइ मेल नही.. ये तो हमारी कीस्मत अच्छी हेकी हमारे साथ उनके अच्छा रीलेशन हे.. वो मुजे अपना दोस्त मानते हे.. मे बात नही कर सकता..

कहेते रमेश चारुके उपरसे हटकर बाथरुममे चला गया तो चारुभी बेडपे बैठ गइ ओर रमेशके नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. आज रमेशने अ‍ेक बार फीर उनको प्यासी रख दीया.. लेकीन आज चारुको रमेशके साथ बात करनेका मौकाभी मील गयाथा.. उनको पताथाकी अब रमेशसे अपनी बात कैसे मनवानी हे.. बस थोडीसी महेनत करनी पडेगी..

क्युकी उसे पताथाकी अब रश्मी कभी भी देवायत ओर वंदनाकी मुलाकात करवा सकती हे.. तो वो देवायतको भी अच्छी तराह जानती थी.. की जब अ‍ेक बार दोनोकी मुलाकात होजायेगी.. तब सायद वंदना अ‍ेक लडकीसे ओरत बन जायेगी.. वो खुद इस दौरसे गुजरी हे.. अबतक वोभी ना जाने देवायतके साथ कीतनी बार अपनी प्यास बुजा चुकी हे.. इस बातसे वंदना ओर चारुका दोनोका देवायतसे बार बार मीलनेका रास्ता खुल सकताथा.. तो इसकी वजहसे चारु अभीसे रमेशको मनानेमे लग गइथी..

तब हवेलीपे आज देवायत सृतीके साथ अपनी सुहागरात मनाते सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर चुके थे.. ओर इस वक्त दोनोही बाथरुममे अ‍ेक दुसरेको नहेला रहेथे.. जब नहालीया तब देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बेडपे ले आया.. ओर सृतीको पीठके बल लीटाकर खुद उनके उपर चड गया.. तब सृतीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३५/१

तब हवेलीपे आज देवायत सृतीके साथ अपनी सुहागरात मनाते सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर चुके थे.. ओर इस वक्त दोनोही बाथरुममे अ‍ेक दुसरेको नहेला रहेथे.. जब नहालीया तब देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बेडपे ले आया.. ओर सृतीको पीठके बल लीटाकर खुद उनके उपर चड गया.. तब सृतीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये....अब आगे

सृती : (लडखडाती आवाजमे) दे..वु.. बस.. अब ओर नही.. वक्त आगया हे अब आप मुजे लडकीसे ओरत बनादो.. मे कीतनीभी चीलाउ चीखु.. मुजपे कोइ रहेम मत करना.. इस सुखके लीये मे बहुतही तडपी हु.. रात रातभर मेने आपके नामकी उंगली की हे.. आज मुजे ओरत होनेका अकेसास करवादो.. देर मत करो..

देवायत : (मुस्कुराते) बस सृती थोडीसी तकलीफ होगी सहेन करलेना.. फीरतो मजेही मजे हे..

सृती : (नीचे हाथ लेजाते लंड पकडते अपनी चुतपे घीरसते) देवु.. पता हे मुजे.. आपके हथीयारको जेलना इतना आसान नही होगा.. मे इस दर्दको सहेन करलुगी.. अब डालदो अपना हथीयार मुजसे रहा नही जाता.. मे इसके लीये बहुत तडपी हु.. कास.. मेने पहेलेही मंजुकी बातको मानलीया होता..

देवायत सृतीसे चीपक कर उनके उपर लेटा हुआ था.. सृतीके कठोर उरोज देवायतके सीनेमे चुभ रहाथा.. तब देवायतने उनके होठोको चुमते अ‍ेक बुब्सको अपने मुहमे लेलीया ओर चुसने लगा तब सृती सीकारीया करते अ‍ेक हाथसे देवायतके सरको सहेला रहीथी तो दुसरे हाथमे लंड पकडकर अपनी चुतपे घीसते लंडको गीला कर रही थी.. सृतीकी चुत लगातार तरल पदार्थ छोड रहीथी.. तब..

सृती : (बहुतही कामुक आवाजमे) दे..वु.. प्लीज.. ओर मत तडपाओ मुजे.. डालदो प्लीज.. नही रहा जाता..

कहेते देवायतके लंडको अपनी चुतके लव होलमे थोडा फसा देती हे.. तब देवायतने सृतीके दोनो हाथ पंजेसे पकडकर मजबुतीसे थामलीया ओर सृतीसे लीपलोक करलीया.. तभी सृतीने देवायतकी ओर देखते अपनी आंखोसे सहमती दे दी.. ओर देवायतने अपनी कमरको थोडी उची करते सृचीतीकी चुतमे दबाव बनाते अ‍ेक जोरोका जटका मारदीया.. तब देवायतका तगडा लंड सृतीकी चुतको चीरते अंदर घुस गया..

तो सृतीके मुहसे जोरदार चीख नीकल गइ ओर उनकी आंखसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. वो अपना मुह छुडानेकी कोसीस करते अपने दोनो पैर जोरोसे बेडपे पटकने लगी.. उनकी चीख देवायतके मुहमेही दब गइ.. ओर वो गुं..गु.. करते देवायतसे लीपलोक छुडानेकी कोसीस करती रही.. वो कुछ समजे इनसे पहेलेही देवायतने दुसरा जटका मारदीया तब उनका पुरा लंड सृतीकी चुतमे घुस गया ओर सृची चीलाकर बेहोस हो गइ..





तभी देवायतने फौरन लीपलोक छोडदीया ओर हाथके बल उचा हो गया.. फीर सृतीको बेहोसीमेही जोरोसे कमर हीलाके चोदने लगा तो सृतीकी चुतसे तरल पदार्थके साथ खुनभी नीकलते देवायतके लंडको भीगोता रहा.. ओर देवायत सृतीको जोरोसे चोदता रहा.. अब बहुतही आसानीसे लंड सृतीकी चुतमे अंदर बहार हो रहाथा.. पुरे रुममे सनाटा छाया हुआथा.. तब रुममे सीर्फ फच..फच..फच..थप..थप..थप.. की आवाज गुंज रहीथी..

सृतीके दोनो बुब्स चुदाइके तालमेलमे उछल रहेथे.. कुछही देरमे सृतीका मुह बीगडने लगा तब देवायत अपना लंड सृतीक चुतमे जडतक घुसाके रुक गया.. ओर सृतीसे चीपककर उनके होठोको चुमने लगा.. तब सृतीने दर्दके मारे अपना मुह बीगाडते धीरेसे आंख खोलदी.. तो देवायत उनके दोनो बुब्सको बारी बारी चुम रहाथा.. तब सृती सर्मसार होते अपनी नजर घुमा लेती हे.. ओर आंखसे आंसु बेह रहेथे..

सृती : (आंसु बहाते दर्दभरी आवाजमे) देवु.. प्लीज इसे बहार नीकालो नही करना मुजे.. बहुत दर्द हो रहा हे.. लगता हे मेरी फट गइ हे.. यार.. बहुत जलन हो रही हे..

देवायत : (हसते) सृती.. तुमतो डोक्टर हो.. क्या तुमने आजतक कीसीकी चुत चुदाइकी वजहसे फटते हुअ‍े देखा हे..? हें..हें..हें.. बेबी कुछ नही होगा.. अभी दर्द चला जायेगा..

सृती : (सरमाते मुह बीगाडते) देवु.. प्लीज.. मजाक नही.. इसे बहार नीकालो.. हम बादमे करलेगे..

देवायत : नही सृती अभी नीकालातो तुम कभी इसे ले नही पाओगी.. तुम उनपे ध्यान मत दे बस मुजे चुमती रहे अभी दर्द चला जायेगा.. आइ प्रोमीस.. अगर दर्द नही गया तो नीकाल लुंगा..

तब देवायत सृतीके दोनो बुब्स बारी बारी चुमकर सृतीके होठोको चुमने लगा तो सृतीभी सब भुलकर देवायतका साथ देने लगी ओर कुछही देरमे सृतीका दर्द कम होगया.. उनकी चुतमे अभी देवायतका लंड सख्त लंड रोडके माफीक घुसा हुआ था.. सृतीको अपनी चुतमे कुछ अलगही फील हो रहाथा.. जीनकी वजहसे उनकी चुत लगातार पानी छोड रहीथी.. ओर वो सरमाके देवायतसे नजरे चुराने लगी.. तब..

देवायत : सृती क्या दर्द कम हो गया..?

सृती : (सरमाते) हंम.. बाबा बहुत बडा हे.. मुजे बेहोस करदीया.. क्या आपने बेहोसीमेभी कुछ कीया था..?

देवायत : (हसते) हंम.. तभीतो अभी इसे तुम आरामसे जेल रही हो.. कैसा लगता हे..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे नजरे चुराते हसते) मुजे नही पता.. आप बहुत कमीने हो.. क्या पुनमदीदीके साथ भी अ‍ैसा कीयाथा..? हें..हें..हें..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. वोभी पहेली बार बेहोस हो गइथी.. पता हे अ‍ेक पुरी रात मेरा हथीयार उनकी चुतमेही रखा.. ओर पुरी रात हम दोनो बीना बहार नीकालेही चुदाइ करते रहे..

सृती : (सरमाते हसते) ओ बापरे.. क्या पुनोदीदी इसे जेल पाइ..? उनको सुबह कुछ हुआ नही..?

देवायत : (हसते) नही.. पेइन कीलर खाके पुरे दिन आराम कीया.. तो ठीक होगइ.. क्या आज हमभी अ‍ैसे करे..? हंम..? तुजे बहुत मजा आयेगा..

सृती : (सर्मसार होते हसते) नही देवु.. आज नही.. वो कीसी ओर दिनमे हम ट्राइ करेगे.. क्युकी सुबह मुजे क्लीनीकपे जाना होगा.. दो डीलीवरी हे.. अब आप मुजसे मीलने वहा कब आओगे..?

देवायत : (बुब्स चुमते) हंम.. सोचता हु हप्तेमे कमसे कम दो दिन ओर रात तेरे साथ सोउगा..

सृती : (सरमाते हसते) देवु.. आप तीन दिन आइअ‍ेनां.. अब मुजे नही लगता मे आपके बीना रेह पाउगी..

देवायत : (बुब्सकी नीपलको चुमते) हंम.. सृती तुम सेटरडे संन्डे भुमी आंटीके साथ इधर आजाना.. हम खुब मजे करेगे..

सृती : (हसते) आइइइ.. देवु धीरेसे खीचो.. देवु.. ये आइडीया बुरा नही हे.. तबतो मे आपके साथ चार राते सो सकुगी.. हां.. मे वही करुगी सेटरडेको दो पहोरके बाद मम्मीको लेकर आजाउगी ओर मन्डे सुबह चली जाउगी.. (कमर हीलाते) देवु.. अब धीरे धीरे स्टार्ट करो.. अब बहुत अच्छा लगता हे..

तो देवायत धीरे धीरे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. तब सृतीभी उतेजीत होने लगी ओर सीसकारीया करते देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. तब कुछही देरके बाद दोनोने अपनी रफ्तार बढादी तब सृती जोरोसे सीसकारीया करते देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. आज सृतीने सही मायनोमे ओरत हो चुकीथी..

देवायत उनके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर सृतीकी दोनो टांग पकडते अपनी कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. तब सृती बेडकी चदरको दोनो हाथसे बपडते छटपटाती रही.. सृती बहुत सारी लडकीया ओर ओरतेकी चुतको देख चुकीथी.. तब उनको अपने कुआरेपनका बहुत दुख होताथा.. लेकीन आज अपनीही चुतमे अ‍ेक दमदार ओर तगडा लंड घुसाते वो सारे गम ओर दुख भुल चुकीथी..

सृती : (कमुक आवाजमे) देवु.. आइ.. सीइइइ बस अ‍ैसेही चोदो.. बहुत.. म..जा.. आ रहा हे.. आह..आह..आह.. आह.. आइइइइइइ बस.. बस.. मे आने वाली हु.. फास्ट देवु.. ओर.. फास्ट.. बस.. अ‍ैसेही.. आह..आह..आह..आह.. आइइइ....मां..इइइइ सीइइइइइ उउइइइइइइ.. दे..वु.. मे गइइ...





कहातो देवायत सृतीपे जुक गया तो सृती देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते जडने लगी.. जब वो सांत होगइ.. तब देवायत हाथके बल वापस उचा होगया.. ओर जोरोसे कमर हीलाते सृतीको जोरोसे चोदने लगा तब सृती मुह बीगाडते इधर उधर सर हीलाते छटपटाने लगी.. ओर देवायतसे चुदवाती रही.. ओर धीरे धीरे करते फीरसे उतेजीत होने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर अपनी कमर हीलाते देवायतका साथ देने लगी.. तो देवायत फीरसे सृतीके उपर जुक गया.. ओर सृतीने उसे जोरोसे बाहोमे कसके भीचलीया..

सृती : आह..आह..आह.. सीइइ.. बस.. बस.. देवु.. थोडा धीरे.. बहुत म..जा..आ..र..हा..हे..हे..सीइइइइ..

देवायत : (बुब्स चुमते चोदते हुअ‍े) सृती.. आज पुरी.. रा..त.. चोदना.. हेअ‍ेअ‍े... चुदाइअ‍ेगीनां..? हंम..?

सृती : हंम.. हां.. चोदलेना.. देवु.. बहुत मजा आ रहा हे.. थोडा जोरोसे चोदो.. आइ.. आह..आह..आह..

देवायत : (जोरोसे चोदते) ओर चोदु.. हंम.. करदु प्रेगनेन्ट..? हंम.. आह..

सृती : (सरमाते चुदवाते) हंम.. नही.. अभी नही.. मे ओर मजा करना चाहती हु.. बादमे करदेना..

अ‍ैसेही बाते करते दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. तब सृती अ‍ेक बार फीर अकडने लगी तो उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर होठोको लोपलोक करलीया तो देवायत जोरोसे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. ओर अचानक सृतीकी चुतमे जडतक लंड घुसाके रुक गया.. ओर रुक रुकके कमरको जटके देने लगा.. तब सृतीको अपनी बचेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ जो उनकी चुतको पुरी भर चुकाथा..





ओर सृती उतेजनासे कांपने लगी.. ओर लीपलोक छोडके नजरे चुराते देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे.. ओर जोरोसे सीसकारीया करते साथमें जडने लगती हे.. फीर दोनोही सांत होजाते हे तब सृती देवायतकी पीठ ओर उनके सरको सहेलाती रही.. तब उसे अहेसास हुआकी वो अब लडकीसे ओरत बन चुकी हे.. तब वो खुब सरमाइ ओर देवायतसे सरमाकर अपनी नजरे चुराने लगी..

देवायत : (हसते) क्या हुआ..? अ‍ैसे क्यु सरमा रही हे.. हंम..?

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. आखीर आपने मुजे लडकीसे ओरत बनाही दीया.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा की मे इसे जेलपाइ.. अभीभी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे.. देवु अ‍ैसा क्यु..? आपने कुछ कामोतेजक गोली बोलीतो नही खाइ..?

देवायत : (हसते) नही डार्लींग.. बस.. ये सब बाबाकी दी हुइ जडीबुटीका माल हे.. अभी हम वापस करेगे..

सृती : देवु.. नीचे खुन नीकला होगा.. कही आपको इन्फेक्शन ना लग जाये.. चलो अ‍ेक बार नहालेते हे.. फीर करेगे.. देखना आजतो मे आपको पुरी रात सोने नही दुगी.. कास आप मंजुको पहेली बार हमारे घरपे मीले तबही में उनके साथ आजाती.. तो आज मेभी आपकी बीवी होती ओर हमाराभी अ‍ेक बच्चा होता..

देवायत : (हसते प्यारसे सरको सहेलाते) हंम.. चलो देरसे ही सही आखीर तुम भी मेरी बीवी होगइ..

तब देवायत सृतीके उपरसे हट जाता हे तो सृती जटसे अपने नीकरसे चुतको साफ करने लगी.. ओर साफ करके नीकरको देखने लगी तो नीकरपे दोनोके कामरसके साथ खुनभी था.. ओर सृती सरमाते स्माइल करते बेडपे बैठ गइ.. ओर नीचे उतरते चलनेकी कोसीस करने लगी.. तो उनकी चुतमे बहुत जलन हुइ.. ओर वो बेडपे वापस बैठ गइ.. ओर देवायतकी ओर देखने लगी..

सृती : (सरमाते) देवु.. बहुत जलन हो रही हे.. नही चला जा रहा.. प्लीज.. हेल्प मी..

देवायत : (हसते) हंम.. तो तुजे कीसने चलनेको कहा था..? चल.. आजा..

कहेते देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बाथरुमकी ओर ले गया.. वहा दोनोने अपने अपने लंड ओर चुतको साबुनसे साफ करलीया फीर साथमे सावर लीया.. सृती देवायतको साबुन लगाते नहेलाने लगी.. ओर वो देवायतके लंडको साफ करते मसलने लगी.. ओर देवायतकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते मुस्कुराते सरमाते धीरे धीरे लंडको मुठीमे पकडकर सहेलाने लगी.. तब देवायत समज गया.. ओर सृचीके बुब्स मसलते उनके होठोको चुमने लगा..





सृती : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. साथमे नहानेका बहुत मजा आ रहा हे.. अ‍ेक बार यही करे..? हंम..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुमभी मेरी मंजु.. ओर पुनोकी तराह पागल हो.. चल लेटजा नीचे..

दोनोही फीरसे उतेजीत होगये तब देवायतने सृतीको वही फर्सपे लीटा दीया ओर खुद उनके पीछे लेट गया.. ओर सृतीकी कमर पकडते उनसे चीपक गया ओर अपना लंड पकडकर पीछेसेही सृतीकी चुतमे घुसा दीया तब सृतीकी हलकीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो मुह पीछे करते देवायतको वासनाभरी नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. ओर देवायत अपनी कमर हीलाते सृतीको पीछसेही चोदने लगा..





सृती : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. क्या पुनोकोभी अ‍ैसेही चोदते हो..? अपनी बहेनको चोदते आपको कैसा फील होता हे..? हंम..?

देवायत : (मुस्कुराते) सृती.. पुनोकीतो बातही मत कर.. उनको ओर मंजुको चोदते कइ गुना जोस बढ जाता हे.. जो जोस आज तुजे चोदते हुअ‍े बढ गया हे..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. तो मंजु भावनाको दीखाने आतेथे तब मुजे चोद लेना चाहीयेना.. मे तबभी आपसे चुदवानेके लीये रेडीथी.. आपको कीतनी हीन्ट दी.. लेकीन आप समजेही नही..

सृती इतने सालो तक इस सुखसे वचींत थी.. तो देवायतसे चुदवाते वो अ‍ेक अलगही नसेकी कसीसको महेसुस करने लगी.. वो देवायतसे हर तरेह का सुख पाना चाहती थी.. देवायत सृतीकी पीछेसे चुदाइ कर रहाथा फीरभी सृती अपना मुह पीछे करते देवायतके सरको सहेलाते उनके होठोको चुमती रही.. ओर देवायतभी सृतीके बुब्सको अपने हाथोसे मसलते चुदाइ करता रहा..

थोडी देरकी धमाकेदार चुदाइके बाद देवायतने अ‍ेक बार फीरसे सृतीकी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदी.. ओर सृतीभी साथमे जडते संतुस्टीके भावको महेसुस करने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीरसे दोनो सावर लेकर अपना तन पोछकर बहार आगये.. देवायत सृतीको गोदमेही उठाकर फीरसे बेडपे लेआया.. ओर सृती पीठके बल सुला दीया.. तब सृतीने देवायतका हाथ खीचके अपने उपर खीचलीया..

सृती : (सरमाते हसते) देवु.. प्लीज.. मुजसे अलग मत हो.. अब आपसे दुर नही रहा जाता.. मेरे उपरही लेटे रहो.. मुजे खुब प्यार करो..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. ओर मे तुमसे दुर होनाभी नही चाहता.. क्या मजा आ रहा हे..?

सृती : (सरमाते देवायतको बाहोमे भीचते) हंम.. बहुत.. मेनेतो सोचाभी नही थाकी इनमे इतना मजा आता हे.. कास हम पहेलेही मील जाते.. मेने होस्पीटलमेभी आपको कीतनी हीन्ट देदी थी.. फीरभी आप समज नही पाये.. मे तबभी आपके साथ सबकुछ करनेको रेडीथी.. आप मंजुको मेरे सामने कइ बार चोद चुके हो.. तबही मेने आपका हथीयार दुरसे देखाथा.. तबही मेने मनमे ठानलीथी की मुजे कीसीभी हालमे आपसे मीलन करना हे..





देवायत : (गलेमे चुमते) हंम.. पता हे मुजे.. लेकीन सही मौका नही मील पा रहाथा.. सृती.. जीस तराह मेने मंजु चंदा ओर पुनमकी चुदाइ की हे.. उसी तराह मे आज तुमको चोदना चाहता हु.. पुरी रात इसे बीना बहार नीकाले हम चुदाइ करते रहेगे.. आज तुजे इस तराह चोदनेका बहुत मन कर रहा हे..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जानु.. देखना इसमे मेरी हालत खराब ना हो जाये.. कल मुजे होस्पीटलभी जाना हे.. क्या कल सुबह आप हमे छोडनेतो आओगेनां..?

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. अब अपनी बीवीका हुकुम तो माननाही पडेगा.. सृती.. भुमीआंटीको भी साथ लेजाना हे.. ओर वापसीमे राजीव अंकलका सामान लेकर आउगा.. फीर उन दोनोको छोडनेभी तो जाना हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) जानु.. आप बैठ जाओनां.. मुजे अ‍ेक बार बैठे बैठे आपको चोदना हे.. देखु तो सही आपकी चुदाइ करते कैसा लगता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. कहासे जाना ये सब..?

सृती : (सरमाते हसते) वो.. ब्लु फील्मसे.. कोलेज टाइममे मेने ओर मंजुने अ‍ैसी बहुत फील्म देखी हे.. तभीतो वो सादीसे पहेले आपके साथ सेक्स कर रही थी.. मंजु बहुतही कामुक लडकी हे.. आपको देखतेही प्यार कर बैठी.. मुजेभी आप बहुत पसंद थे लेकीन मंजु ओर आप दोनो पहेलेही रीलेशनमे आ गयेथे..

देवायत : (बुब्सको चुमते) हंम.. तो तुमभी अपने प्यारका इजहार कर देती.. तो मे तुमकोभी अपना लेता.. वैसेभी मंजु तुजे साथमे ही तो रखती थी.. उसनेभी तुमको सब छुट देदी थी..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. मंजुतो जब अप दोनो मेरे घर अपनी सुहागरातमे मीले तब ही मुजे साथ रखना चाहती थी.. वोभी चाहतीथी की मे भी आपसे अपनी जवानीके मजे लुटु.. वो बहुत खुले सोच वाली हे..

देवायत : हां सृती.. मंजुने हमेसा दुसरी ओरतोके साथ मुजे रीलेशनको लेकर सहमती दी हे.. चल आजा.. आज तुम अपनी सब तम्मना पुरी करलो..

कहेते देवायत बेडपे बैठ गया तब सृती सरमाकर मुस्कुराती बेडपे बैठकर देवायतकी गोदमे आगइ.. देवायतका लंडतो अ‍ैसेही रोडके माफीक सख्त हवामे लहेरा रहा था.. तब सृती अपनी कमर थोडी उची करके धीरेसे अपनी चुतपे सेट करके बैठ गइ.. ओर देवायतका पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया ओर देवायतके गलेमे हाथ डलकर उनको अपनी बाहोमे भीचते धीरे धीरे अपनी कमरको हीलाते देवायतको चोदने लगी..





आज सृती कुछ अलगही मुडमे थी.. वो देवायतसे खुलकर प्यार कर रहीथी.. देवायतके गलेमे मुह डालकर अपनी कमरको हीला हीलाके देवायतको चोद रहीथी.. तो देवायतभी सृतीका ये चोदनेका अंदाज देखके खुस होगया.. ओर सृतीके बुब्सको अपने मुहमे लेके चुसने लगा.. तब सृती सातवे आसमानपे चली गइ.. ओर मदहोस होकर देवायतकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते अपनी कमरको जोरोसे हलाने लगी..

देवायत : (होंठ चुमते) डार्लींग.. ब्लु फील्मे देखकर तुम काफी कुछ सीखके आइ हो.. क्या मस्त चुदाइ करती हो तुम..

सृती : (सरमाते हसते) जानु आपका हथीयारही इतना मस्त हेकी इसे बहार नीकालनेका जी नही करता..

दोनोही प्यारभरी बाते करते चुदाइमे मसगुल थे तब बाजुके रुममे लखन आज वायग्रा खाकर बडीही बेहरेहमीसे लताको चोद रहाथा.. तब लता हल्कासा चीखते चीलाते लखनको जेल रहीथी.. ओर उनको प्यार भरी गालीया दे रहीथी.. ओर बार बार प्यारसे चोदनेकी मनते कर रहीथी.. लेकीन आज लखन कुछ अलगही मुडमे था.. जीसका कारण था.. रमा..

वो रमाको आज अपनी ओर ढालनेमे पहेला कदम चल चुकाथा.. लेकीन उनका मक्सद तो कुछ ओरही था.. वो रमाके जरीये नीलमको पाना चाहता था.. लेकीन उनको पताथा की नीलम धिरेनको पसंद करती हे तभी उसने रमाके जरीये नीलमको पानेकी मनमे प्लानींग करली थी.. लेकीन लखनको पता नही थाकी रमाके साथ रीलेशनसे लताके साथ उनके संबध बीगड सकते हे..

लखन लताकी तीन बजे तक चुदाइ करता रहा तब आज लताकी हालत बीगड गइ.. ओर वो लखनपे गुसे होने लगी.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गये.. तब बाजुके रुममे देवायत सृतीके उपर लेटकर सृतीको चोद रहाथा.. आज देवायत पुरी रात यानीकी रात ४ तब बीना लंड बहार नीकाले सृतीको चोदता रहा.. तो आज सृतीकी हालत भी पतली हो चुकीथी.. देवायतने उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोडके रख दीयाथा..





सृती हीलनेकी भी स्थीतीमे ना रही तबतक देवायत उनकी चुदाइ करता रहा.. सृतीकी सारी तम्मना आज देवायतने पुरी करदी.. पुरी रातमे देवायत सृतीकी चुतको पांच बार अपने गाढे पानीसे भर चुकाथा.. फीर उसे गोदमे लेकर बाथरुममे चला गया ओर दोनोने सावर लीया फीर सृतीको बहार लाकर बेडपे सुला दीया ओर उनके उपर कंबल डालके खुदभी सृतीसे चीपकर सोगया....
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३५/२

तो आज भानुभी देर रात रमाके साथ अपने घरपे पहोंच गया.. तब सरला ओर भावेस सो चुके थे.. तो दोनोही अपने रुममे जाकर चेन्ज करलेते हे.. ओर बेडपे आगये.. तब भानु रमाको अपनी बाहोमे लेकर प्यार करने लगा.. लेकीन आज रमाका मुडही नही बन रहाथा..

उनके मनमे बार बार लखनका खयाल आने लगता था.. जब भानु रमाको चोद रहाथा तबभी रमाको भानुकी जगाहपे लखन नजर आ रहाथा.. रमा बेमन भानुसे चुदवाती रही.. जब भानुने चोद लीया तो वो करवट लेकर लखनके बारेमे सोचते नींदकी आगोसमे चली गइ..





आज सुबहका सुरज अपने तैय समयपे अपने सात घोडेके रथपे सवार होकर नीकलाथा.. गांवके बडे बुजुर्ग सुबह जल्दी उठकर अपने खेतोपे कामपे चले गयेथे.. तब कुछ घरके अंदर.. अबभी जवान लडके लडकीया अपने बीस्तरपे पडे गहेरी नींद सोे रहेथे.. क्युकी आजकल काम ओर रती देवायतके गांवपे ओर आसपासके गांवोपे कुछ ज्यादाही महेरबान थे.. प्रकृती अपना काम बखुबी नीभा रहीथी..

सब लोग देरसे उठे.. तो बडी उमरकी महीलाये अपने जवान लडके ओर लडकीयोको देरसे उठने पर खरी खोटी सुना रहीथी.. लेकीन उन बडी उमरकी महीलाको मालुम नही थाकी लडकीया ओर लडके देर रात अपने यारके पास या मासुकाके पास जाकर अ‍ेक दुसरेके साथ बीस्तर गरम करके जगे हुअ‍े थे.. लखन लता ओर देवायत सृतीभी देर तक सोते रहे.. मंजुने आज सबको सोने दीया..

तभी लता उठकर थोडा लंगडाते बाथरुममे चली गइ.. ओर नीत्यक्रम करके नहाने लगी.. तब चंदा ओर मंजुभी तैयार हो चुकीथी ओर देरसे उपरकी मंजीलपे चल गइ.. तो रजीया उपरकी मंजीलपे सभी कमरोकी सफाइ कर रहीथी ओर मंजुने धीरेसे देवायतके रुमका दरवाजा खटखटाया.. तो कुछही देरके बाद देवायतने नींदसे उठकर दरवाजा खोलदीया तो मंजु मुस्कुराते अंदर आगइ ओर देवायतने फीरसे दरवाजा बंध करदीया..

तब सृती अभी भी गहेरी नींदमे सोइ हुइथी.. मंजुने उनके उपरसे कंबल हटाके देखा तो सृती पुरी नंगी होकर घोडे बेचकर सो रहीथी.. तो मंजुने देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल कीया ओर उनकी चुतकी ओर देखने लगी.. तो सृतीकी चुत सुजके पांव जैसी होगइ थी.. तभी मंजुने अपना दोनो हाथ कमरपे रखके देवायतकी ओर जुठे गुसेसे मुस्कुराते देखा.. ओर उनको मुका मारने लगी.. तब देवायतने मंजुको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये तब..

मंजुला : (हसते) देवु.. आपनेतो अ‍ेकही रातमे बेचारीकी हालत खराब करदी.. अब कमीनी दो दीन तकतो बीस्तरसे उठभी नही पायेगी.. दोनो ने बीतनी बार कीया..? कहा तक जागेथे..? देखो पुरी चदर खुनसे भरी हे.. कमसे कम इन चदरको चेन्ज करकेतो सोते..

देवायत : (मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. ४ बजे तक.. पुरी रात बीना बहार नीकाले.. बीलकुल तेरी तराह.. हें..हें..हें.. मंजु.. बहुत मजा आया.. लगता हे सृतीभी तेरी तराह चुदवानेकी बहुत सौकीन हे..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु लेकीन मेतो अब आदी हो चुकी हु.. लेकीन ये.. देखना उठते ही आपको बहुत गालीया देगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही मंजु.. सब उनके कहेनेपे ही कीया हे.. ये भी तेरी तराह बहुतही गरम हे.. बहार नीकलने मे मानती ही नही थी.. कहेतीथी अंदर लेकर बहुत मजा आ रहा हे इसे बहार मत नीकालीये..

मंजुला : (हसते धीरेसे कानमे) बीलकुल अपनी मांपे गइ हे.. क्या पुनोकी सादीके बाद उनको मीले की नही..? जानु अब उनकाभी कुछ देखलो.. बेचारी बहुतही चीन्ता कर रही थी.. सृतीको इनकी प्रेगनन्सीके बारेमे पता चले इनसे पहेलेही उनका कुछ करना होगा..

देवायत : हंम.. मंजु इस बारेमे तुजेही सृतीसे बात करनी पडेगी.. तुजेही सृतीको समजाना पडेगा.. आज इन दोनोको छोडने जा रहा हु तब भुमीको मील लुगा.. क्या तुम साथमे चल रही हो..?

मंजुला : नही जानु.. आनातो चाहती थी.. लेकीन आप अकेले चले जाओ.. फीर वापसीमे पापा मम्मीको इधर ही लेके आना.. हम कल सुबह तीनोको लेकर छोडने जायेगे.. तब आप भावुका मकानका रजीस्टरका देख लेना.. हम दोनो साम तक वही रुकेगे.. सायद हमे वहा रुकनाभी पडे.. वो वहा जातेही पता चलेगा..

देवायत : (धीरेसे) मंजु.. वो रश्मीभाभी मुजे उनके घरपे वंदनाको मीलनेको केह रहीथी.. तुम रश्मीभाभीसे बात करलेना.. मुजे उनको मीलनेमे बहुत संकोच हो रहा हे.. सीर्फ रमेशकी वजहसे..

मंजुला : (हसते) हां अब आप जाओगे तब बात करलुगी.. बेचारी आपकी आस लेके बेठी हे.. जानु अ‍ेक बार वंदुको अच्छेसे मीललो.. वैसेभी आपकी बहुत सीक्रेट बीवीयातो हे.. अ‍ेक ओर सही.. चारुभाभी भी उनकी बहुत चीन्ता करती हे.. वोभी चाहती हेकी वंदु आपसे सादी करले.. आप रमेशभाइकी चीन्ता मत कीजीये.. सायद आगे जाकर आपकोही उन मां बेटीको सम्हालना पडेगा..

देवायत : हंम.. मंजु.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या तुजे अ‍ैसी बातोसे बुरा नही लगता..? तुजे नही लगता अब ये बहुत ज्यादा हो रहा हे..? हंम..?

मंजुला : (मुसकुराते गालको चुमते) जानु सच कहु..? कभी कभी लगता हे.. अ‍ैसा लगताहेकी अब कुछ ज्यादाही हो रहा हे.. लेकीन हमारी भी मजबुरी हे.. हमे बाबाका आदेशभी मानना हे.. हमे सबकी भावनाओका खयाल रखना हे.. मत भुलो पीछले जन्ममे ये सब आपहीकी रानीया थी..

देवायत : हंम.. मंजु अभी कीतनी ओरते मेरी जींदगीमे आयगी..? क्या मुजे बता सकती हे..?

मंजुला : (मुसकुराते) क्यु.. थक गये आप..? हंम..? जानु.. गीनती मत करो.. बेचारी जोभी सामनेसे आये उनको न्याय देना आपका कर्तव्य हे.. बस इतनाही केह सकती हु.. आपको सबके साथ कहा सादी करनी हे.. अब चलो नहालो.. मे इस महारानीको जगाती हु.. कमीनी कैसे बेसर्मोकी तराह नंगी होकर पडी हे.. हें..हें..हें..

कहेते मंजुने देवायतको टोलीया पकडा दीया तो वो लेकर बाथरुममे घुस गया.. तब मंजुने सृतीको जगा दीया.. तो सृती अपनी हालत देखकर मंजुकी हाजरीसे बहुतही सरमाइ.. तब मंजुने उनको बेडपे ही उनका गाउन देदीया तो सृती बैठे बैठेही फटाफट अपना गाउन पहेनने लगी.. फीर बेडसे उठनेकी कोसीस करने लगी तब उनकी चुतमे थोडा दर्द हुआ तो वापस बेडपे बैठ गइ ओर मंजुकी ओर सरमाते देखने लगी..

मंजुला : (हसते) क्यु.. कमीनी.. रातमेतो उछल उछलके ले रहीथी.. उनको बहारभी नही नीकालने देती थी.. अब क्या हुआ..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या देवुने सब बता दीया..? तुम दोनोही कमीने हो.. कोइ अ‍ेकही रातमे इतनी हालत खराब करता हे..? मंजु.. रातमे पेइन कीलर ओर आइपील खाकर सोइ थी.. फीरभी थोडा दर्द हो रहा हे.. लगता हे घर जाकरभी आराम करना पडेगा.. मेरी फ्रन्डको फोन कर देती हु वोही क्लीनीकपे आकर डीलीवरी करजायेगी.. जालीमने पुरी रात मेरे साथ प्यार कीया..

मंजुला : (हसते) क्या आज डीलीवरी करनी थी..? सृती.. सादीथी तेरी.. अ‍ेक दो दिनकी छुटी रख लेती.. चल अभी देवु नहाकर नीकलेगा.. तब तेरी सीकाइ करदुगी तो कुछ राहत होजायेगी.. ओर चाइ नास्ता करके अ‍ेक गोली ओर लेलेना.. तो सा तक ठीक होजाओगी.. बस अ‍ेकही बारतो तकलीफ हे.. अबतो तेरे मजेही मजे हे.. हें..हें..हें.. वो चंदादीदी ओर पुनोकी हालतभी अ‍ेक बार कर चुके हे..

सृती : (हसते) मंजु.. क्या मजे..? मेरी तो हालतही खराब करदी.. जालीमने मेरा अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. लेकीन सच कहु..? रातमे मजा भी बहुत आया.. कल पता चला सुहागरात कीसे कहेते हे.. मंजु.. हमारा देवु बहुतही स्ट्रोंग हे.. तुम सच केह रही थी.. वो हम जैसी दस ओरतोको संतुस्ट कर सकता हे.. वाकय तेरी सब बाते सच लगती हे.. मंजु.. मुजे हमारे देवुके बारेमे बहुत जाना हे.. की उनका ओर कीसके साथ रीलेशन हे.. सब अ‍ैसेही इनपे लटु नही हुइ होगी..

मंजुला : (हसते) हंम.. सच कहा तुने.. इनका बहुत सारी ओरतोके साथ रीलेशन हे.. लेकीन इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. चल अब... अभी देवु बहार नीकलेगा.. तो नहाले.. सृती.. अ‍ेक दिन यही रुकजा.. आराम करलेना.. कल तुजे देवु छोड जायेगा..

सृती : नही मंजु.. अगर सामको आराम रहेगातो क्लीनीकपे जाउगी.. देखती हु वहाकी क्या हालत हे..

मंजुला : (हसते) सृती.. अ‍ेक बात कहु..? देवु यहाभी अ‍ेक लेडीसकी होस्पीटल बनवा रहे हे.. सायद इस बारेमे वो तुमसे बात करेगे.. कुछ लेडीस डोक्टरका इन्तजाम करने.. या फीर तुम ही इधर आजा.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) मंजु देखती हु इसमे क्या कर सकती हु.. अगर देवुसे दुर नही रेह पाइतो पका इधर आजाउगी.. वरना कुछ लेडी डोक्टरका अ‍ेरेन्ज कर दुगी.. अब देवुसे दुर रहेना बहुतही मुस्कील होगा..

दोनो बात कर रहीथी तब कुछही देरके बाद देवायत नहाके बहार नीकला तो मंजु देवायतको उनके कपडे देकर सृतीको लेकर बाथरुममे घुस गइ ओर उनकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. फीर सृतीने नहालीया तो दोनोही बहार आगइ.. तबतक देवायत तैयार होकर नीचे चला गया था.. सृती अभीभी थोडा लंगडाते चल रहीथी.. तब मंजुने उनको तैयार होनेमे हेल्पकी.. फीर दोनो नीचे आगइ..

तबतक लखन लताभी कंपलीट होकर नीचे बेठे थे.. ओर भावनाभी अपनी बच्चीको लेकर बहार बैठी उनके साथ खेल रहीथी.. फीर सब चाइ नास्ता करने बैठ गये तब रजीया बार बार लखनकी ओर देख रहीथी.. ये बात मंजुने नोटीस करली.. जब चाइ नास्ता करलीया तब सृती जानेकी तैयारीया करने लगी.. ओर मंजु रजीया उपरसे उनके कपडेकी बेग लेकर आगइ.. ओर सृती धीरे से चलते सबके साथ कारकी ओर जाने लगी.. सब लोग उनको बहार तक छोडने आगये.. तब..

चंदा : सृती घर पहोंचतेही फोन करदेना.. ओर भुमी मौसीको हमारा प्रणाम कहेना..

सृती : (सरमाते हसते) जी बडीदीदी.. हें..हें..हें.. चलो सबको बाय..

लखन : (हसते) भाभी.. अब दुबारा वापस कब आओगी..?

सृती : (सरमाते हसते) देवरजी.. अबतो यही मेरा ससुराल हेतो मेतो कभीभी आजा सकती हु.. बस हमारी देवरानी कोइ अच्छीसी खबर सुनादे.. तो फीर मे जल्दी आजाउगी.. हें..हें..हें..

कहातो सब लताकी ओर देखके हसने लगे.. तब लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुके पीछे जाकर मुस्कुराती रही.. फीर सृती सबको गले मीलकर कारमे देवायतके पास बैठ गइ ओर देवायतने कारको धिरेनके गांवकी ओर मोड दी.. तब सृती देवायतके बाजुको थामते उनके कंधेपे सर रखके बाते करने लगी..

सृती : (हसते) देवु.. थेन्क्स.. फोर ब्युटीफुल नाइट.. आज आपने मुजे सही मायनेमे ओरत होनेका सुख दीया.. मे हमारी इस नाइटको कभी नही भुलुगी.. आज पता चला सुहागरात कीसे कहेते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (कार चलाते सरको चुमते) हंम.. चलो.. अबतो मे वहा आता जाता रहुगा.. सृती हमारे गांवमे हम अ‍ेक लेडीसकी होस्पीटल बनवा रहे हे..

सृती : हां देवु.. मुजे अभी सुबह मंजुने सब बताया.. अगर मे आपसे दुर नही रेह पाइतो मे खुदही इधर चल आउगी.. वरना कुछ लेडी डोक्टरका इन्तजाम करदुगी... क्या यही कहेना चाहते थेनां आप..?

देवायत : (हसते) हंम.. सृती.. वो होस्पीटल सुधीर ओर नीशाभाभी संम्हाल लेगे अगर तुम आजाओगी तो सुधीर जनरल होस्पीटल सम्हाल लेगा.. नीशाभाभी भी कुछ आपकी हेल्प कर देगी.. सब होस्पीटलका मेइन्टेन वोही देख लेगी.. क्या कहेती हो तुम..?

सृती : जानु तबतो सोनेपे सुहागा.. अगर अ‍ैसा होता हेतो मे दोनो जगाह सम्हाल सकती हु.. आप होस्पीटलके बारेमे आगे बढो.. मे आपके साथ हु..

दोनोही बाते करते धिरेनके घर चले गये.. तबतक धिरेन भी सहेरकी ओर अपनी जोबपे चला गयाथा.. तो घरपे पुनम अ‍ेब बहु की तराह सारी पहेनकर मांगमे सींदुरके साथ कीचनमे दयाकी मदद कर रहीथी.. थी तो नीर्मला भुमीका ओर राजीव होलमे बैठकर बाते कर रहेथे.. तभी देवायत ओर सृतीभी अंदर आगये.. ओर सबके साथ होलमे बेठ गये.. तो भुमी सृतीको अ‍ैसे थोडा लंगडाते चलते देखकर मनमे बहुतही खुस होगइ..

भुमीको अंदेसा हो गयाकी दोनोने पुरी रात प्यार कीया हे.. क्युकी देवायतने उनकीभी अ‍ैसी हालत करदीथी.. ओर आज सृतीभी बहुतही सुंदर दीख रहीथी उसनेभी पुनोकी तराह पैरमे पायइ मांगमे सींदुर ओर देवायतका गीफ्ट दीया हुआ डायमंड नेकलेस पहेना हुआ था.. सृती आज अ‍ेक सादीसुधा परीपकव ओरत जैसी दीख रहीथी.. तभी दया दोनोके लीये पानी लेकर आगइ.. ओर अंदर जाके चाइ बनाने जाने लगीतो..

देवायत : दया चाइ मत बनाना.. अभी घरपे चाइ नास्ता करकेही आये हे.. (भुमीका की ओर देखते) चलो.. आंटी.. सब रेडी हे.. तो हम चलते हे..

पुनम : (बहार आते सरमाते धीरेसे) भाइ.. थोडी देर बैठोना.. अगर चाइ नही पीनी तो कुछ ओर बना दुगी..

सृती : (खडी होकर पुनमके पास जाते) पुनोदीदी चलो फटाफट कुछ बंडा बनालो.. फीर हमे नीकलनाभी हे..

पुनम : (हसते सरारतसे धीरेसे) चलीये भाभी.. आइअ‍े.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते अ‍ेक मुका मारते धीरेसे कानमे) कमीनी.. भाभी नही हु तेरी.. सोतन हु.. चल..

पुनम : (कीचनमे जाते हसते) भाभी.. सबके सामनेतो आपको भाभी ही कहुगीनां.. क्या सुहागरातमे मजे करलीये..? हें..हें..हें..

सृती : (भीरेसे हग करते) बहोत.. पुनोदीदी.. मेरी जींदगीमे इतना मजा कभी नही आया.. आपके भाइने मेरी अ‍ेक अ‍ेक नब्सको ढीली करदी.. अभीभी अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहा हे.. जालीम कीतना जोसमे करते थे.. मेने मंजुसे सुना हे.. आपकी भी सुहागरातमे अ‍ैसी हालत होगइ थी..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. भाभी.. बी केरफुल.. इस बारेमे कीसी ओरको पता नही चलना चाहीये.. आगे जाकर मुजे ओर आपकोही भाइको सम्हालना हे.. मुजे आपसे बहुत सारी बाते करनी हे.. लेकीन अभी नही..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. हमे अ‍ैसे मीलनेके बहोत मौके मीलेगे.. तब बात करेगे.. अभीतो चलो फटाफट ठंडा बनादो.. हमे नीकलनाभी हे.. अबतो आप मेरी ननंदके साथ मेरी सौतनभी होगइ हे.. हें..हें..हें..

दोनोही कीचनमे खडी होकर धीरेसे बाते कर रहीथी.. फीर दोनोने मीलकर फटाफट दुध कोल्ड्रंीक बनालीया.. ओर सबके लीये कोलड्रीन्क्स लेकर दोनोही बहार आगइ ओर सबको ठंडा देते खुदभी लेकर वही बैठ गइ.. तब..

पुनम : (हसते) पापा.. आप ओर मम्मी इधरही रुक जाइअ‍े भैया वापसीमे भुमीमौसीको छोडके आपका सामान लेकर आजायेगे.. यहीसेतो चलना हे.. फीर इधर लंच करके थोडा साम तक आराम करके नीकल जाना.. भाइ अभी इनको छोडके आजायेगे.. ओर भाइ.. आप भी इधर आकर लंच करना.. हम आपका वेइट करते हे..

नीर्मला : हां भुमी.. पुनोबेटी सही केह रही हे.. हमे खामखा उधर आना जाना.. यही बेटर हे.. देवु हमारा सामन लेकर आजायेगा.. तुम इनको हमारा सामान देदेना.. वही उपरके रुममे हमारी बेग पडी हे..

भुमीका : (हसते) अरे चलोनां दोनो अभी दो तीन दीन वही ठहेरना.. फीर देवु आपको लेने आजायेगा..

राजीव : नही भुमी.. अब घरको छोडा काफी वक्त हो गया हे.. वहा जाकर सब सेट भीतो करना पडेगा.. ओर भावुभी साथ चल रही हे.. तो सोचा मकानका रजीस्टरका कामभी हो जायेगा.. आपही चले जाओ.. अब हम कभी फीर आयेगे.. वरना नीमुतो तुजे मीलती ही रहेती हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) ठीक हे भैया.. चलो सृतीको भी क्लीनीकपे जाना हे.. वरना मेतो रुक जाती.. चलो तो हम चलते हे..

कहेते सबने कोल्ड्रींक पीलीया तब भुमीका खडी होगइ ओर नीर्मलाको गले मीलकर राजीवको गले मीली तब उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर राजीवने सगुनके तौरपे भुमीकाको ओर सृतीको पैसे दीये.. तो दोनोही मना करने लग.. लेकीन नीर्मलाने उसे जबरदस्ती देदीये.. तब पुनम सृतीकी बेग अपने हाथोमे ले लेती हे ओर सबलोग बहार आ गये.. तब भुमीका कारमे पीछे बैठ गइ ओर सृती देवायतके पास बैठ गइ.. फीर सबने अ‍ेक दुसरेको हाथ हीलाके बाय कीया ओर कार सहेरकी ओर दोडने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३६

कहेते सबने कोल्ड्रींक पीलीया तब भुमीका खडी होगइ ओर नीर्मलाको गले मीलकर राजीवको गले मीली तब उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर राजीवने सगुनके तौरपे भुमीकाको ओर सृतीको पैसे दीये.. तो दोनोही मना करने लग.. लेकीन नीर्मलाने उसे जबरदस्ती देदीये.. तब पुनम सृतीकी बेग अपने हाथोमे ले लेती हे ओर सबलोग बहार आगये.. तब भुमीका कारमे पीछे बैठ गइ ओर सृती देवायतके पास बैठ गइ.. फीर सबने अ‍ेक दुसरेको हाथ हीलाके बाय कीया ओर कार सहेरकी ओर दोडने लगी....अब आगे

भुमी पीछे बैठकर सेन्टर मीररसे देवायतकी ओर देखती रही.. तब सृती पुरी रात जागने ओर थकानकी वजहसे आंख बंध करके बैठीथी.. तब नाजाने कब उसे नींद आगइ.. तभी देवायतका ध्यानभी सृतीकी ओर चला गया तो भुमीकी ओर पीछे देखकर सृतीकी ओर इसारा करते हसने लगा.. तो भुमीकाभी देवायतकी ओर हसके अपनी आंख मारते हसने लगती हे.. ओर मुह उनके कानके पास लेजाते मीलनेके लीये कहेती हे..

भुमीका : (धीरेसे कानमे) देवु.. बेचारी बहुत थकी हुइ लगती हे.. जातेही सो जायेगी.. तो हमारे पास मीलनेका पुरा मौका हे.. आप नीचे मेरे रुममे आजाना..

देवायत : (धीरेसे) हंम.. पहेले वहा पहोचनेतो दो.. फीर देखते हे..

आखीर तीनो सहेर पहोंच गये.. तब भुमीका कारसे उतरतेही बंगलेका ताला खोलने लगी.. ओर देवायतने सृतीको हीलाते जगा दीया.. तब सृतीको पता चलाकी वो घरपे आगइ हे..ओर वो सरमाके हसने लगी ओर देवुको बाजुमे मुका मारते कारसे उतर गइ.. फीर तीनोही अंदर चले गये.. देवायत ओर सृती वही सोफेपे बैठ गये.. तबभी सृती नींदमे थकी हुइ थी.. तो भुमीने देवायतको पानी पीलाया.. तब..

सृती : मोम.. आप देवुके लीये बुछ बना देना मुजे बहुत जोरोकी नींद आरही हे.. मे उपर जाके आराम करती हु.. देवु आइअ‍े मुजे उपर छोड दीजीये.. फीर लंच करके जाना.. मुजे क्लीनीकपे फोनभी करना हे.. की मे सामको आउगी.. चलो..

देवायत : (हसते) चलो तुजे छोडतो दुगा.. लेकीन मुजे जाना हे.. पुनोने लंच बनालीया होगा.. ओर उपरसे पापाकी बेगभीतो लेनी हे..

भुमीका : (हसते) देवु.. आप बेग लेकर आजाओ.. फीर चाइ पीकर जाना मे अभी फटाफट बनालुगी..

सृती : (हसते) हां देवु.. आप चाइ पीकर जाना.. सोरी.. आज आपको अ‍ैसेही वापस भेज रही हु..

देवायत : (हसते) कोइ बात नही.. तुम आराम करलो.. हम कभी फुरसतमे बैठेगे.. चलो..

कहेते देवायतने वहीसे सृतीको गोदमे उठालीया.. तो सृती भुमीकी हाजरीसे बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर हसते हुअ‍े देवायतको सीनेपे मुका मारने लगी.. तब भुमीकाभी हसने लगी.. ओर देवायत सृतीको उपरकी मंजीलपे उनके रुममे लेगया.. ओर उसे बेडपे लीटा दीया तब सृतीने देवायतका हाथ खीचके अपने उपर गीरा दीया.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तब दोनोके होंठ मील गये.. ओर सृती मदहोस होकर देवायतको चुमती रही..





सृती : (कामुक आवाजमे) सोरी देवु.. अभी हम प्यार नही कर सकते.. वरना आपसे अलग होनेका जी नही चाहता.. अब वापस कब आओगे..? मे साम तकतो ठीक होजाओगी.. रातमे बहुत मजा आया.. थेन्क्स.. फोर ब्युटीफुल नाइट.. इस रातको मे कभी नही भुलुगी.. थेन्क्स अगेइन..

देवायत : (होंठ चुमते बुब्स मसलते) सृती.. चल मे चलता हु.. वरना मे कंट्रोल नही कर पाउगा.. ओर अभी तेरी हालतभी ठीक नही हे.. हम दोनो बहुतही जल्द मीलेगे.. बता पापाकी बेग कहा हे..?

सृती : (होंठ चुमते) जानु बाजुके रुममे होगी.. आप लेलो.. ओर हां प्लीज.. थोडा दरवाजा बंध करदेना.. बहुत नींद आ रही हे.. आपनेतो मुजे पुरी नीचोडली.. तो बहुत थक गइ हु.. सोरी जानु.. आज आपको अ‍ैसेही जाना पडेगा.. तो मुजे अच्छा नही लगता.. ओर हां आप सादीके बाद पहेली बार आये हो तो कमसे कम चाइ पीके तो जाना..

देवायत : (खडा होते गाल चुमते) हंम.. चल मे चलता हु.. चाइ पीकर जाता हु.. तुम सो जाओ.. बाय..

कहेते देवायतने अ‍ेक बार फीर सृतीके होंठ चुमलीये.. ओर दरवाजा बंध करके बाजुके रुमसे बेग लेकर नीचे आगया.. तब होलमे कोइ नही था.. ओर मेइन गेइटभी बंध था.. तब देवायत समज गया.. ओर वो बेगको वही रखके भुमीकाके रुमकी ओर चला गया.. अंदर जाकर देखा तो भुमी देवायतको देखतेही बहुतही सरमाइ.. ओर पलटके देवायतकी ओर दौड पडी.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. तब भुमीका देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर उनकी ओर देखते..





भुमीका : (होंठ चुमते) देवु.. आइ लव यु.. आज मे बहोत खुस हु.. थेन्क्स.. आपने सृतीको अपनालीया.. अब हम मां बेटी दोनोही आपकी बीवीया होगइ.. जानु.. चलोना हम नही मीले काफी दिन होगये हे.. क्या सृती सो गइ..?

देवायत : (होंठ चुमते) हां बहुत थक गइ थी.. हमने पुरी रात प्यार कीया.. देखी नही उनकी हालत..? हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाके हसते) हां.. देखा मेने.. आपनेतो उनकी चालही बदलदी.. कैसी लगी मेरी सृती..? मस्त हेनां..?

देवायत : (हसते) बहुतही मस्त.. बीलकुल तेरी तराह.. वो अभी भी वर्जीन थी.. कल उनको ओरत बना दीया..

भुमीका : जानु चलोना अ‍ेक बार प्यार करलो मुजे.. फीर आपको जानाभी हे.. मे अभी फटाफट चाइ बना लुगी.. कास आप साम तक इधरही रुकते तो हम दोनो खुब मजे करते.. आप इधर बैठो.. मे सृतीके रुमको बहारसे लोक करके आती हु.. अभी कोइ रीस्क नही लेना..

तब कुछही देरमे भुमीका सृतीका रुम बहारसेही धीरेसे लोक करके नीचे आगइ.. फीर आतेही दोनो नंगे होजाते हे.. ओर बेडपे अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते प्यार करने लगे.. दोनोही बहेकने लगे.. तब देवायत भुमीके उपर चडके उनके बुब्स मसलते चुस रहाथा तो भुमीका देवायतका सर सहेलाते धीरेसे सीसकारीया करते अपना मुह इधर उधर करते छटपटा रहीथी.. ओर देवायतने धीरेसे अपना तगडा लंड भुमीकी चुतमे उतार दीया तब भुमीकाने राहतकी सांसली.. ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी..





देवायतने हाथके बल उचा होकर भुमीकाकी जबरदस्च चुदाइ करली.. उनको दो बार जडाके खुदभी उनकी चुतको भरते हुअ‍े जड गया.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लेते हे.. ओर जब सांत हो गये तब भुमीका देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. देवायतने भुमीको अ‍ेकही बारमे संतुस्ट करदीयाथा.. तभी..

भुमीका : (सर सहेलाते धीरेसे) देवु.. अब मुजे क्या करना हे..? हमारा बच्चा मेरे पेटमे हे.. आप कुछ कीजीये.. वरना ये बात हम ज्यादा दिन सृतीसे नही छीपा सकते.. मे हमारे बच्चेको जन्म देना चाहती हु..

देवायत : (होंठ चुमते) भुमी.. मंजु सृतीसे बात करलेगी.. अगर उनको पता चल जायेतो तुम बिन्दास्त हमारे रीस्तेके बारेमे उसे सबकुछ बता देना.. अगर वो कोइ हंगामा करे तो तुम उनको कुछ कहे बगैर नीमुके घर चली जाना.. बाकी मे ओर मंजु सब सम्हाल लेगे..

भुमीका : (हसते) हंम.. मतलब आपके दिमागमे कोइ प्लान हे.. ठीक हे जानु मै वैसाही करुगी.. लेकीन मेरी वजहसे आप दोनोका रीलेशन बीगड गयातो..? जानु वो मे कतइ नही चाहती की आप दोनोके बीच रीलेशन बीगड जाये..

देवायत : भुमी.. अ‍ैसा कुछभी नही होगा जो तुम सोच रही हो.. हो सकताहे कुछ दिनके लिये वो मुजसे या तुमसे नाराज रहे.. लेकीन अब सृती ज्यादा दिन मुजसे दुर नही रेह पायेगी.. तब मंजु उसे सब समजा देगी.. तो हम दोनोके रीलेशनको वो अ‍ेक्सेप्ट करलेगी.. मुजे पुरा यकीन हे.. मंजु उसे समजालेगी..

भुमीका : (हसते चुमते) हंम.. ठीक हे जानु.. अब चलीये.. उपरसे हटीये मे आपके लीये चाइ बना देती हु.. आपको जानाभी हे.. वहा सब आपका इन्तजार करते होगे..

तब देवायत भुमीके उपरसे उतर जाता हे.. तो भुमी फटाफट बेडपे बैठकर अपनी चुतको अपने नीकरसे साफ करने लगी.. ओर बेडसे उतरके बाथरुममे चली गइ.. फीर बहार आइतो देवायतने उसे कपडे नही पहेनने दीये ओर अ‍ैसेही चाइ बनानेको कहा तो वो बहुतही सरमा गइ.. तभी देवायत उनको गोदमे उठाकर कीचनमे चला गया.. तो भुमीका बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराती रही.. तब देवायतने उसे नीचे उतार दीया.. तब..

भुमीका : (कातील नजरोसे देखते) जानु.. लगता हे अभी आपका दिल नही भरा.. देखना बाबा कही सृती नीचे ना चली आये..

देवायत : (हसते) हंम.. नही आयेगी.. बेचारी थकके सो गइ हे.. अबतो सामकोही नीचे आयेगी.. ओर तुमने उनके रुमको लोकतो कीया हे.. तो फीर क्या प्रोबलेम..?

भुमीका : (हसते सरमाते) देवु.. तो साम तक रुक जाइअ‍ेनां.. कीतने दिनोके बादतो हमे अकेले रहेनेका मौका मीला हे.. फीरतो मेरा पेट नीकलेगातो हम अ‍ैसे प्यार नही कर सकते..

देवायत : (हसते) नही.. अब तो मे इधर मेरी बीवीको मीलने आता जाता रहुगा तो हमे अ‍ैसे बहुत मौके मीलेगे.. चल आजा मुजे अ‍ेक बार ओर करना हे.. फीर मस्त चाइ पीलदे.. फीर नीकलता हु..

भुमीका : (सर्मसार होते हसते) जानु आप बहुत नोटी हो.. अभीतो कीया.. क्या अ‍ेक बारमे दिल नही भरा..?

देवायत : नही भुमी.. तु ओर मंजु मेरी अ‍ैसी बीवीया हो तुम दोनोसे दिल ही नही भरता.. ओर वैसेभी मुजे दो बार करनेकी आदत हे.. अभीतो सीर्फ अ‍ेकही बार कीया हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हंम.. आप बहुत रोमेन्टीक हो.. आपको देखतेही मुजे कुछ होने लगता हे.. पता नही मेरी सृती आपसे कैसे दुर रहे पायेगी..

देवायत : (मुस्कुराते) इसीलीये केह रहाथा.. की मेरी मंजु उसे सम्हाल लेगी.. तु उनकी फीकर मत कर..

ओर देवायतने वही भुमीको नंगीही अपनी बाहोमे भीचलीया.. वो खुदभी अभी नंगाथा.. भुमीको वही घुमाकर खडी करके कीचनके टेबलपे जुका देता हे.. ओर भुमीके पीछे जाकर पीछेसे ही उनकी चुतमे लंड घुसाके भुमीको धनाधन चोदने लगता हे.. तब भुमीका भी मदहोसीमे बडबडाते चुदाइके नसेमे मजेसे चुदवाने लगी.. तब वहाभी देवायतने भुमीको अ‍ेक बार जडाके उनको वापस जोरोसे चोदने लगा..





तब अ‍ेक बार फीर भुमीकी हालत पतली होने लगी.. ओर आखीर देवायत उनकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडते लगा.. ओर जडतेही लंड बहार नीकालता हे.. तब भुमी थोडी देर अ‍ैसेही बेसुध्ध जैसी हालतमे पडी रही.. फीर कुछ देरके बाद बडीही मुस्कीलसे खडी होपाइ.. तब उनकी चुतसे दोनोका कामरस पैरोसे होता फर्सपे गीरने लगा.. ओर भुमीकाने जटसे वही पडे कपडेसे अ‍ेक पैर उठाकर चुतको फीर फर्सपे पडे अपने विर्यको साफ करलीया.. ओर जुठे गुस्सेसे देवायतको सीनेमे मुके मारते हसने लगी..

भुमीका : (सरमाते हसते) आप बहुत कमीने हो.. कोइ इतनी जोरोसे करता हे..? आखीर अपने मनकी करली.. बाबा मेरी तो हालत खराब करदी आपने.. अब जाइअ‍े बहार बैठीये मुजे ओर कोइ जोखीम नही लेना.. मे चाइ लेकर आती हु.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही रुममे जाकर अपने कपडे पहेन लेते हे.. ओर देवायत वही भुमीको अपनी बाहोमे भरके होंठ चुमके बहार आगया.. तब भुमीका सरमाके हसते देवायतकी बाहोसे छुट गइ.. ओर कीचनमे जाकर चाइ बनाने लगी.. फीर कुछही देरमे चाइ बन गइ तो भुमी चाइ लेकर बहार आगइ.. ओर दोनोने साथमे चाइ पीली तब देवायत जानेके लीये खडा होगया तब अ‍ेक बार फीर भुमीका देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमलीया.. ओर देवायत बेग लेकर वहासे नीकल गया..

तब भुमीका अंदर जाके सृतीका दरवाजा धीरेसे खोलकर नीचे अपने रुममे चली गइ.. ओर मुस्कुराते देवायतके साथ मीलनको याद करके आराम करने लगी.. तब देवायत सहेरसे नीकलकर सीधाही जंगलकी ओर कार मोडके कबीलेकी ओर जाने लगा.. तो आधेही धंटेके बाद वो कबीलेमे बीच कार खडी करके रुक गया.. तो सभी कबीले वाले खुस होकर बहार आने लगे.. ओर देवायतको जुकके अभीवादन करने लगे.. तभी वहा मालती हरीया ओर उनकी नइ बीवीभी आगये ओर वोभी देवायतको देखकर बहुत खुस होगये..

हरीया : (हसते) आइअ‍े मालीक.. देखो हम अभी नीकलही रहेथे की आप आगये.. आइअ‍े.. आइअ‍े..

देवायत : (मुस्कुराते) हरीया क्या होगइ सादी..?

मालती : (सरमाते हसते) जी मालीक.. मीलीये.. ये हे मेरी नइ सौतन रेणु.. हें..हें..हें..

रेणु : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हाथ जोडते हसते) नमस्ते मालीक.. आइअ‍े..

देवायत : (हाथ जोडते हसते) जी.. नमस्ते.. नमस्ते.. कहीये होगइ सादी..? कोइ तकलीफ तो नही हुइ..?

हरीया : (हसते) जी नही मालीक.. सब आपकी महेरबानीसे अच्छेसे नीपट गया.. अब कोइ परेसानी नही हे..

मालती : (सरमाते धीरेसे) मालीक.. वो जमीला.. आपको देखकर अंदर चली गइ.. लगताहे आपसे नाराज हे.. आप अ‍ेक बार जाकर उनसे मीललो..

देवायत : (सबकी ओर देखते जोरोसे) युनो सब.. बस मे इसीलीये आया हु.. अब हरीया ओर उनकी दोनो बीवीया.. हमारे खेतोपे रहेगी.. तो यहाके लीये कबीलेके मुखीयाके तौरपे मे जमीलाको जीम्वेवारी देता हु.. ओर वो आजसे मेरी रानीके रुपमे यहाका ध्यान रखेगी.. इस बारेमे कीसीको कुछ कहेना हे..?

अ‍ेक आदमी : माइ बाप.. ये आप क्या केह रहे हे..? क्या जमीला आपकी रानी होगइ हे..?

हरीया : (हसते) हां काका.. जमीलातो कबसे हमारे मालीककी बीवी होगइ हे..

अ‍ेक बुढी औरत : माइ बाप.. तो फीर अभी उनके पेटमे जो बच्चा हे वो..?

देवायत : (हसते) हां माइ.. वो मेरा ओर जमीलाका बच्चा हे.. कहो इसके लीये मुजे क्या करना हे..?

बुढी ओरत : (हसते) माइ बाप.. आपतो जानते हे.. आपको हमारे रीती रीवाजके हीसाबसे हमारे मंदिरमे जाकर जमीलासे सादी करनी पडेगी.. फीर उसी पुरी रात उत्सव होगा.. आपकी ओरसे सबको भोजन होगा.. ओर आपको जमीलाके साथ उनकी कुटीयापे रात बीतानी पडेगी.. तभी हमारा रीवाज संपन होगा.. आज ये हरीयाभी अपनी नइ बीवीके साथ उनकी कुटीया पे था..





देवायत : (हसते) जी माइ.. मे तैयार हु.. कहो कब सादी करनी हे..? मे अ‍ेक हप्तेके बाद यहा आउगा तब आप हमारी सादी करवा देना.. मे नही चाहता जमीलाका बच्चा नाजायज कहेलाये.. बोलो.. ओर कुछ..?

अ‍ेक बुढा आदमी : माइ बाप.. आपकी दयासे यहा अब कोइ परेसानी तो नही लेकीन अब हम चाहते हे.. यहा.. कोइ गरुमाइ या कोइ गरुजी आजाये.. हमे अपने रीती रीवाज ओर पुजापाठमे बहुत तकलीफ होती हे.. आपतो जाने हे पहेले यहा अ‍ेक बुढी गुरुमाइ थी.. तो वोतो चल बसी.. तबसे यहा कोइ नही हे.. तो हम सब बाबाके आश्रमपे जाकर हमारा कार्य करते हे..

बुढी ओरत : बेटा इसके लीये हमने आश्रमपे जाकर बाबाको भी कइ बार कहा.. लेकीन उसने आपको मीलनेके लीये कहा.. वो केह रहेथे वहा कोइ बडी शक्ति आने वाली हे.. वोही हमारी गरुमाइ होगी.. ओर वोही आपके पोतेकी रानी होगी.. अ‍ैसा वो कुछ बता रहेथे.. इसीलीये हम आपको सब बता रहे हे.. अब आपही कोइ इन्तजाम करदो..

देवायत : (हसते) ठीक हे माइ.. मे इस बारेमे बाबासे मीलकर बात करलुगा.. फीर वो कहे उसे हम यहा लेआयेगे..

बुढी ओरत : (हसते) ठीक हे माइ बाप.. अब जाइअ‍े.. आपकी महारानीको मील लीजीये.. बेचारी कइ दिनोसे आपका इन्तजार कर रही हे.. ओर आपके नामकी माला जपती हे.. हें..हें..हें..

मालती : (सरमाते हसते) आइअ‍े मालीक.. मे आपको ले चलती हु..

देवायत : (कारसे उतरते) हरीया.. अगर तुम लोग नीकल रहे हो तो मेरे साथ --गांव तक चलो वहीसे कीसीमे चले जाना.. मेतो सामको आउगा.. मेरे साथ मेरे सास ससुर हे..

हरीया : (खुस होते) जी मालीक.. तब तो बडी महेरबानी आपकी.. हें..हें..हें..

कहेते देवायत मालतीके पीछे जाने लगा.. ओर उस कुटीयाके पास आ गया.. जहा उसने कइ बार जमीलाको जमकर चोदा था.. तब जमीलाके बापु सरपंच थे.. ओर देवायत कोलेजमे था तब जमीलाभी जवानीमे कदम रख चुकी थी.. ओर देवायतके बार बार कबीलेपे आनेसे उनकी ओर आकर्सीत होकर अपना दिल देवायतको दे बैठी थी.. तबसे जमीलाने अपने तनको कीसीको छुने तक नही दीया..

ओर अ‍ेक दिन उनके बापु चल बसे.. तबसे वो अकेली होगइ थी.. ओर देवायतको मीलती रही.. ओर आखीर अ‍ेक दिन यही कुटीयामे उसने देवायतको अपना कौमार्य सोंप दीया.. उस रात सुबह तक दोनो प्यार करते रहे.. देवायतने पुरी रातमे जमीलाको चार बार चोद लीया था.. तबसे दोनोके बीच फीजीकल रीलेशन कायम होगये थे.. ओर अ‍ेक दिन देवायतके कहेने पे उनके खेतोपे काम करने आगइ..

उसी दिन देवायतने अपनी ओफीसके रुममे जमीलाको जबरदस्त तरीकेसे चोद लीया.. ओर उसी दिन जमीलाका सपना देवायतसे प्रेगनेन्ट होकर पुरा होगया.. फीर जमीला यहा कबीलेमे वापस आगइ.. ओर इस बारेमे कीसीको कुछ नही कहा.. कबीलेमे सबके ताने सुनती रही.. लेकीन इस बारेमे सीर्फ मालती ओर हरीया ही जानते थे.. ओर उन दोनोने कबीले वालोको जमीलाको कुछभी ना कहेनेको कहा..

मालती : (सरमाते हसते) जाइअ‍े मालीक.. अंदर जाके अपनी रानीको मील लीजीये.. मे यहा बहारही खडी हु.. ताकी इधर कोइ ना आजाये.. उसे अच्छी तराह मील लीजीये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) मालती.. तुम चाहोतो तुमभी साथ अंदर आ सकती हो.. मे तुम दोनोको मील लुगा..

मालती : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) नही मालीक.. इधर नही.. हम आपके रुममेही मीलेगे.. वरना यहा सबको पता चल जायेगा तो तमासा होगा.. जाइअ‍े..

तब देवायत कुटीयामे चला गया तो जमीला.. उनके इन्तजारमे अपनी खटीया बैठी थी.. जैसेही देवायत अंदर आगया तो जमीला फौरन खडी होगइ.. ओर जटसे आकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर फुटफुटके रोने लगी.. तब देवायतने उसे बाहोमे भीच लीया ओर उनके सरको सहेलाते बडी मुस्कीलसे जमीलाको सांत कीया.. ओर उनका चहेरा हथेलीमे थामके उनकी आंखोमे देखने लगा.. तब जमीलाने सरमसे अपनी नजरे जुकाली..

देवायत : (सरको चुमते) बहुत प्यार करती हे मुजे..? हंम.. क्या मेरी रानी बनोगी..?

जमीला : (सरमाते धीरेसे) मेतो कबसे अपने आपको आपको सोंप चुकी हु.. आप बडे लोग हे.. तो मे मुजे अपनानेके लीये आपको कैसे केह सकती हु..? बस अब आपकी नीशानी मेरे पास आगइ हे वोही मेरे लीये बहुत हे.. मे इसीके सहारे पुरी जींदगी बीता दुगी.. भलेही मुजे लोगोके ताने सुनने पडे.. मुजे कीसीकी परवाह नही..

देवायत : नही जमीला.. मे हमारे बच्चेको नाजायज नही कहने दुगा.. इसे मे अपना नाम दुगा.. तुमसे सादी भी करुगा.. बस सीर्फ अ‍ेक हप्ता इन्तजार करले.. मे हमारे लोगोसे छुपकर तुमसे सादी करना चाहता हु.. फीर तुम इधरही मेरी बीवी बनके रहेगी..

जमीला : (खुसीसे हसते) जी.. मे समज गइ.. क्या आप मुजे सचमे सादी करेगे..?

देवायत : (हसते) हंम.. वो भी इस कबीलेके रीवाजके हीसाबसे.. फीर यहा तुम मेरी रानी बनकर रहोगी.. मेने तुजे यहा मेरी रानी बनाकर कबीलेकी सरदार बनाइ हे.. अभी अभी मे सबको यही कहेकर आया हु.. ओर यहा सबको केह दीयाकी ये बच्चा हम दोनोका हे.. अब तुजे इस बारेमे कोइ कुछ नही कहेगा..

जमीला : (सरमाते हसते हां मे गरदन हीलाते) जी.. लेकीन यहातो हरीयाभाइ कबीले के सरदार हे.. वो ओर मालतीभाभी मेरा बहुत खयाल रखते हे..

देवायत : (होंठ चुमते) हां.. लेकीन अब मे हरीया ओर उनकी दोनो बीवीओको हमेसाके लीये हमारे खेतोपे ले जा रहा हु.. क्युकी अब हमारा कारोबार मे बढा रहा हु.. मेरे छोटेभाइको सहेर भेज रहा हु.. उनकी बीवीके साथ.. तो अबसे तुही इस कबीलेकी सरदार हे..

जमीला : (मुस्कुराते) जी.. लेकीन आपको मुजे मीलनेके लीये यहा आना पडेगा.. मे केह देती हु..

देवायत : जमीला.. तुम अ‍ेक बार मेरी नइ बीवीको सहेरमे जाकर दीखादे मे उसे फोन कर दुगा.. हमारे बच्चेको कोइ तकलीफ ना हो.. वो तुजे दवाइ दे देगी..

जमीला : (सरमाते हसते) जी.. जब मालती दीदी आइ तब हम दोनोही सहेर जाकर दीखाकर आइ हे.. कोइ तकलीफ नही हे.. बस आप आते रहीये.. मुजे अच्छा लगेगा..

देवायत : (होंठ चुमते बुब्सपे हाथ रखते) बस.. सीर्फ अ‍ेक हप्ता.. फीर उसी रात फीर हमारी सुहागरात होगी.. उस दिन पुरी रात हम दोनोको जागना हे.. तब हम दोनो खुब प्यार करेगे.. तो अब मे चलु..?

जमीला : (सर्मसार होते धीरेसे) जाना हे..? बस.. अ‍ैसेही..? हंम.. अ‍ेक बार अपनी इस रानीको नही मीलोगे..? कीतने दिन होगये.. हम नही मीले.. बस अ‍ेक बार.. फीर हम सुहागरातमे मीलेगे..

कहातो देवायत उसे बाहोमे भरके खडीयापे लेगया.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठ चुमते बहेकने लगे.. तब कुछही देरके बाद जमीला मदहोस होते.. आंधी आख चडाते पुरे नसे जैसी हालतमे देवायतके नीचे लेटकर अपनी कमर उछाल उछालकर देवायतसे चुदवा रहीथी.. ओर देवायतभी हाथके बल जोरोसे कमर हीलाते जमीलाकी जमकर चुदाइ कर रहाथा.. तब मालती बहार खडी रहेते छुप छुपकर अंदरका नजारा देख लेती थी..





ओर अपनी चुत सहेलाते वोभी गरम होगइ थी.. इसीबीच देवायतने जमीलाको दो बार जडा दीया था.. तब अ‍ेक बार फीर जमीलाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर जडने लगी.. तब देवायतभी अकड गया.. ओर पुरा लंड जमीलाकी चुतमे घुसाकर रुक रुक कर जनीलाके होठ लीपलोक करते अपने पानीसे जमीलाकी चुतको भरने लगा.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये..

तब जमीला खुब सरमाइ.. फीर दोनोने अपने लंड चुतको साफ करके अपने अपने कपडे पहनलीये.. तो अ‍ेक बार फीर जमीला देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके होंठ चुम लीये.. फीर देवायत उसे अ‍ेक हप्तेके बार मीलनेको कहेकर बहार आगया तब जमीला उसे कुटीयाकी बहार तक छोडने आगइ.. तब उसने वहा मालतीको देखा तो उसे दखतेही जो सरमाकर हसने लगी.. ओर देवायत कारके पास आगया..

देवायत : (हसते) चलो हरीया.. आना हे क्या..?

हरीया : (अपनी बेग लेकर) जी मालीक हमतो तैयार ही बैठे हे.. हम नीकलने ही वालेथे की आप आगये.. चलीये.. चलो मालती चलो रेणु.. तुम दोनो पीछे बैठ जाओ.. हें..हें..हें..

तब मालती ओर रेणु दोनोही सरमाते पीछे बैठ गइ.. ओर हरीया खुस होकर आगे देवायतके पास बैठ गया तो गांव वाले उनको देखकर हसने लगे.. ओर देवायतने कारको गांवकी ओर जानेदी.. तब हरीया ओर मालती देवायतको सादीकी बाते करते रहे.. तब रेणु बहुतही सरमा रहीथी ओर मुस्कुरा रही थी.. अ‍ैसेही देवायत धिरेनके गांवके पास आगया.. तब वही रोडपे अ‍ेक बस खडी थी उसमेसे कुछ पेसेन्जर उतर रहेथे..

तो देवायतने वही आगे अपनी कार रोक दी.. तो हरीया मालती ओर रेणु फटाफट उतरके बसमे बैठ गये.. ओर उनके बैठतेही बस गांवकी ओर चलदी.. तब मालती हसते हुअ‍े देवायतके सामने खीडकीसे हाथ हीलाने लगी.. ओर देवायतने हसते हुअ‍े कारको धिरेनके घरकी ओर जाने दी.. ओर घरके सामने पार्क करदी.. फीर वो उतरके बेग लेकर घरके अंदर चला गया.. तो सब लोग उनकाही इन्तजार कर रहे थे.. तब..

राजीज : (हसते) क्यु भाइ.. इतनी देर होगइ..?

देवायत : (मुस्कुराते) जी.. वो थोडा जल्दी वहासे नीकल गयाथा तो कबीलेकी ओर चला गया था.. वहा कुछ काम था तो वहीसे आ रहा हु.. तो थोडी देर होगइ..

नीर्मला : (हसते) पुनम बेटा देवु आगया हे.. चलो फटाफट खाना नीकालो पेटमे चुहे दोड रहे हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (कीचनसे) जी.. मम्मीजी.. अभी लेआइ.. सब रेडी ही हे.. भाइ आप यही नीसे फ्रेस होजाओ..

तब देवायत वही कोमन बाथरुममे चला गया तब राजीव नीर्मला डाइनींगपे जाकर बैठ गये.. तबतक पुनम ओर दयाने सब खाना बहार रख दीया तो देवायतभी आ गया तो सबलोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. नीर्मलाने दयाकोभी जबरदस्तीसे साथमे बीठा दीया.. तब पुनम देवायतके पास बैठीथी.. तो दुसरी ओर नीर्मला बैठीथी.. ओर पुनमने खाना खाते धीरेसे नीचेसे अपना पैर देवायतके पैरपे रख दीया.. ओर पैरसे ही पैरको सहेलाती रही..

राजीव : (खाना खाते) देवु बेटा.. अब मे बीलकुल ठीक होगया हु.. तो सोचा अ‍ेक बार कल सुबह हम डोक्टरको दीखादे.. तो ये दवाइआ बंध होजाये.. वरना दवाइ पीतेही नींद आने लगती हे..

देवायत : (हसते) जी पापा.. बस.. हम सुबहतो जाही रहे हे.. तो पहेले हम दोनो दीखाकर आयेगे.. साम तक मे ओर मंजु वही आपके साथ ही हे..

नीर्मला : देवु.. तो हमभी साथ चलेगे.. डोक्टरको दीखाकर वहीसे सीधा रजीस्टार ओफीस चले जायेगे..

राजीव : (हसते) अरे नीमु अ‍ैसे थोडीना होता हे..? हम दोनो दीखाने जायेगे तब हम हमे हमारे वकीलको सब पेपर बनानेको कहेना पडेगाकी कीसके नाम करना हे.. तो वहा हम दोपहोरके बाद ही जापायेगे..

देवायत : (जान बुजकर नीर्मलाको छेडते) हां मम्मीजी.. हें..हें..हें.. पापा ठीक केह रहे हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जुठे गुस्सेसे जांगपे अ‍ेक चपत लगाते) मम्मीजीके बच्चे.. तुमतो तुम्हारे पापाकाही पक्ष लोगे नां..? मुजे सब पता हे.. इनको डोक्टरको दीखानेकी क्यु जल्दी हे.. आइ मीन.. उनको दवाइ पीना पसंद नही हे..

नीर्मलाने बडीही सीफततासे बातको धुमा दीया.. क्युकी असल बात सीर्फ राजीव ओर नीर्मलाही जानते थे.. की डोक्टरको दीखानेकी क्यु जल्दी हे.. राजीव नीर्मलाके साथ फीजीकर होना चाहता था ओर नीर्मला उसे डोक्टरका बहाना बनाकर मना कर रहीथी.. क्युकी वो अब सीर्फ देवायतके साथ ही फीजीकल होना चाहती थी.. जबसे देवायतके साथ सुलह होगइ तबसे वो अपने आपको देवायतको पुर्ण समर्पीत कर चुकी थी.. ओर उसेही अपना पती मानती थी..

सब बाते करते खाना खा रहेथे.. तबतक आइअ‍े देखते हे धिरेन जोबपे जाकर क्या करता हे.. वो सुबह मीठाइआ लेकर पहेले नीलमको फोन करता हे.. लेकीन रींग पुरी होनेके बावजुद भी फोन नही उठाया तब वो बेन्कपे चला गया.. वहा मेनेजरसे मीलके उनका मुह मीठा करवाया फीर छुटीका अ‍ेप्लीकेशन दीया.. तब स्टाफके सब लोग आकर उनको सादीकी बधाइआ देने लगे.. फीर वो अपने टेबलपे जाकर बैठ गया..

ओर सब कामकाज देखने लगा.. उनको साम तक फुरसतही नही मीली.. पांच बजतेही उनके फोनकी रींग बजने लगी.. तो उसने फोन उठाकर देखातो नीलमका फोन था.. ओर धिरेनने फौरन फोन उठालीया.. ओर बाथरुमकी ओर जाते उनसे धीमी आवाजमे बात करने लगा..

धिरेन : हां नीलु.. सुबह फोन कीया था.. तो तुम फोन क्यु नही उठा रही थी..?

नीलम : (हसते) जानु.. वो मे स्कुलमे थी.. वहा फोन लेजाना मना हे तो होस्टेलपेही फोन पडा था.. कहो आ गये आप..?

धिरेन :(मुस्कुराते) हां.. कल सामकोही आगये.. वो दीदीके घर था.. तो कल सृतीदीदी ओर जीजुकी सादी थी.. फीर हम कल सामकोही घर आगये.. मौसी मौसा भुमी आंटी सब घरपे रुके हुअ‍े हे.. तो तुमसे बात नही हो पाइ.. अब इधर जोबपे आगया हु.. कहो.. कैसी हो तुम.. यहा कोइ तकलीफ तो नही..?

नीलम : नही जानु.. सब ठीक हे.. ओर मेरी रुम पार्टनर (दिया) भी मस्त हे.. मेरी उनसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गइ हे.. ये सब छोडो पहेले ये बताओ आप मुजसे मीलने कब आओगे..? क्या आज आ सकते हो..?

धिरेन : नीलु.. मीलनातो तुजे चाहता हु.. लेकीन आज कामकी वजहसे बहोत थक गया हु.. तो सोचा सीधा घरपेही चला जाउ..

नीलम : (थोडा नाराज होते) ठीक हे धिरेन.. तो फीर मे फोन रखती हु.. बाय..

कहेके नीलमने फोन काट दीया.. ओर तो धिरेन थोडा परेसान होगया.. ओर उसने दुबार फोन कीया.. तो इस बार नीलमने नही उठाया.. पुरी रींग बजादी.. तो धिरेनने दुबारा ट्राइ कीया.. फीरभी नीलमने नही उठाया ओर धिरेन परेसान होने लगा.. ओर वापस अपने टेबलपे आकर बैठ गया.. फीर कुछ सोचते मेनेजरके पास चला गया.. ओर थोडी जल्दी जानेको कहा तो मेनेजरने उसे नइ सादीकी वजहसे मुस्कुराते जानेकी परमीशन देदी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३७

कहेके नीलमने फोन काट दीया.. ओर तो धिरेन थोडा परेसान होगया.. ओर उसने दुबार फोन कीया.. तो इस बार नीलमने नही उठाया.. पुरी रींग बजादी.. तो धिरेनने दुबारा ट्राइ कीया.. फीरभी नीलमने नही उठाया ओर धिरेन परेसान होने लगा.. ओर वापस अपने टेबलपे आकर बैठ गया.. फीर कुछ सोचते मेनेजरके पास चला गया.. ओर थोडी जल्दी जानेको कहा तो मेनेजरने उसे नइ सादीकी वजहसे मुस्कुराते जानेकी परमीशन देदी....अब आगे

ओर धिरेन अपनी बाइक लेकर सीधेही होस्टेलपे पहोंच गया.. ओर होस्टेलकी ओफीसमे जाकर नीलमके जीजाजीके रुपमे अपनी पहेचान देदी.. तो मेडमने इन्टरकोमसे नीलमको नीचे बुला लीया.. जब नीलम आइतो उसे धिरेनको पहेचाननेके लीये कहा तो धिरेनकी गांड फटने लगी.. की नीलम कुछ ओरही ना कहेदे.. लेकीन नीलमने हां कहेते केह दीयाकी मेरे जीजाजी हे.. तब जाके उनको धिरेनसे मीलनेकी परमीशन देदी..

धिरेन : मेडम.. क्या मे इसे अ‍ेक घंटेके लीये बहार ले जा सकता हु..? इनके लीये कुछ खरीदारी करनी हे..

मेडम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. अगर आप इनके जीजाजी हेतो इसे ले जा सकते हे.. लेकीन इसे अ‍ेक घंटेके वापस इधर छोड दीजीयेगा.. आप अपना नाम ओर मोबाइल नंबर रजीस्टरमे लीख दीजीये..

सुनतेही नीलम बहुतही सरमाइ तब धिरेन अपना नाम ओर नंबर रजीस्टरमे लीख देता हे.. ओर बहार की ओर चलने लगता हे.. तब नीलमभी सरमाते मुस्कुराते उनके पीछे चलने लगी.. ओर दोनोही बहार आगये.. नीलम पहेली बार धिरेनके साथ अ‍ैसे अकेली बहार नीकल रहीथी.. तब उनके दिलकी धडकन बढ गइ.. तभी धिरेनने अपनी बाइक स्टार्ट करदी तो नीलम दोनो ओर पैर करके धिरेनके कंधेपे हाथ रखते धिरेनके पीछे बाइकमे बैठ गइ..

धिरेन : (पीछे मुह करते) कहो मेडम अब कीधर जाना हे.. आपतो नाराज होगइ..? फोनभी नही उठाया.. पहेले दुपटेसे अपना मुह ढकलो.. वरना कोइ पहेचान वालेने देखलीया तो पंगा होजायेगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते दुपटेसे मुह ढकते) तो क्या करती..? अ‍ेकतो इतने दिनोके बाद आप आये हो.. ओर उपरसे मीलने भी नही आये.. ओर मेडमको ये क्यु कहाकी हमे खरीदी करने जाना हे..? अगर वापसीमे उसने हमारे पास कोइ सामान नही देखा तो..?

धिरेन : (बाइक चलाते) अरे अ‍ैसे कैसे खाली हाथ आते.. आज हमारी मेडम जो साथ मे चल रही हे तो इनके लीये कुछना कुछ तो ले लेगे.. कहो.. पहेले कीधर जाना हे..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) मुजे क्या पता.. मेने इधर थोडीना कुछ देखा हे.. आप मुजे लेकर जा रहे हो.. कहीपे भी लेलो.. ओर अ‍ैसी जगाहपे लेलो जहा हम आरामसे बैठकर बातचीत कर सके.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे..

धिरेन : (मुस्कुरते पीछे देखते) सीर्फ बातचीत..? ओर कुछ नही..? हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते पीठमे मुका मारते) मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो..

धिररेन : (हसते) चलो.. आज हम दोनो पहेली बार डेटपे जा रहेहे. तो मेरी रानीको कुछ मुह मीठा करवाउ.. क्या आइसक्रिम खाओगी..? चलो पहेले वही चलते हे.. फीर कुछ लेलेगे..

तब धिरेन अ‍ेक बडे आइसक्रिम पार्लर पे बाइ रोक देता हे.. ओर दोनो अंदर चले जाते हे.. तभी धिरेनको छोटी छोटी प्राइवेट केबीन दीख जाती हे तो धिरेन केबीनकी ओर चलने लगा.. तब नीलम बहुतही सरमाने लगी.. ओर मुस्कुराते उनके पीछे जाने लगी.. फीर दोनोही केबीनमे जाकर बैठ गये.. तो वेइटर आके उनको दो ग्लास पानी देगया.. ओर आइसक्रिमका ओर्डर लेकर चला गया.. तो नीलम बहुतही सरमा रहीथी..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. वहा सामने नही.. इधर मेरे पास आकर बैठजाओनां..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) नही धिरेन.. वो अभी आइसक्रिम लेकर आयेगा.. फीर आजाउगी..

धिरेन : नीलु.. मुजे पहेले तेरे होस्टेलके रुल्सके बारेमे बताओ.. क्या वहा पुरे दिनकी कुछ छुटी बुटी मीलती हे की नही..? मेनेतो सुनाथा लखनभैया ओर पुनम फीर मंजुदीदी सृतीदीदी तो इधरसे घुमनेभी नीकल जाते थे..

नीलम : (सरमाते हसते) हां मीलती हे.. लेकीन सेटर डे संन्डे को.. ये दो दिनमे लडकीया अपने घर चली जाती हे.. तो कोइ अपने रीस्तेदारके घरभी चली जाती हे.. होस्टेल १० बजेतक खुला रहेता हे.. उसी टाइमके अंदर सबको वापस आजाना हे.. अगर आपने उसे दो तीन घंटेका केह दीया होता तो भी वो परमीशन दे देती.. सीर्फ पहेचान वालोके साथ ही बहार जाने देते हे.. बाकी हमारे रुममे भी मील सकते हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. तो मतलब हम दो दिन साथमे रेह सकते हे.. हें..हें..हें.. नीलु.. मे इधर अ‍ेक छोटा मकान ले रहा हु.. सीर्फ हम दोनोके लीये.. बस पहेले तुम अच्छेसे पढ लीखके ग्रेज्युअ‍ेशन करलो.. फीर मेरी बेंन्कमे ही तुजे जोब दीलवा दुगा.. फीर हम दोनोही मीया बीवी साथमे जोबमे आते जाते रहेगे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. लगता हे आपने हमारे लीये बहुत सारी प्लानींग करके रखी हे.. अगर पुनोदीदी या कीसीको पता चल गया तो..? जोबतो क्या मेरी पढाइ ही रुकवा देगे.. तो बी केरफुल..

धिरेन : नही नीलु.. इस बारेमे मेने सबसे बात करली हे.. जीजुनेभी परमीशन देदी हे.. मेने उसे कहाकी कभी कभी रातमे देर होजाती हेतो रातमे ट्रावेल करना ठीक नही.. ओर मे हमारे मकानमे ही सो जाउगा.. कहातो मोम फौरन मान गइ ओर उसने परमीशन देदी.. अब हम सेटरडे सन्डे साथमे रेह सकते हे.. क्या आओगीना मेरे साथ रहेने..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही पता.. अगर कीसीको पता चल गया तो..?

धिरेन : नीलु.. कीसीको पता नही चलेगा.. तुम होस्टेलपे केह देनाकी दीदीके घर जा रही हु.. फीर मन्डेको सुबह तुजे छोड दुगा.. क्या कहेती हो..? आओगीनां..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) मुजे क्या पता..? फीर वहा दो दिन आप अ‍ैसेही थोडीना बैठोगे.. मेरे साथ सरारत करोगेतो..? मुजे नही आना.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) सरारत करनेतो लेजा रहा हु.. उस सादीवाले दिन हमने जो काम अधुरा छोड दीयाथा.. तो वही पुरा करेगे.. नीलु.. आइ लव यु.. मे तुमको बहोत चाहता हु.. मुजसे सादी करले.. मे तुजे रानी बनाके रखुगा.. मुजे तुम बहुत अच्छी लगती हो.. तेरे साथ पुरी जींदगी बीता दुगा.. क्या मुजसे सादी करोगीनां..?

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) धिरन.. सादीतो मेभी तुमसे करना चाहती हु.. फीरभी अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. मे मम्मी पापाको क्या कहुगी..? की मेने जीजुसे सादी करली..? धिरेन हमे सबको फेइस करना पडेगा.. खास करके पुनोदीदी.. बडे भैया मेरी मम्मी दादी सबलोग.. आप सबको कैसे हेन्डल करोगे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) वो सब तु मुजपे छोडदे.. बस तुम नीडर ओर तटस्थ रहेनी चाहीये.. बाकी मे सबको हेन्डल करलुगा.. मुजेतो सीर्फ तेरे साथ रहेना हे.. नीलु.. मे तेरे साथ जींदगीका हर लह्मा जीना चाहता हु.. वोभी सादीसे पहेले.. हम हमारे गांव या कीसी होटेलमे चले जायेगे.. सेटरडे सन्डे ये दो दीन हम खुब मजे करेगे..

नीलम : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. कैसे मजे..? सादीसे पहेले मे आपके साथ वहा दो दिन रहीतो.. आप अ‍ैसेही थोडीना रहोगे..? कही कुछ गलत होगया तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. क्या बीना सादी.. ये सब.. आइ मीन.. आप समज रहे हेनां..

धिरेन : नीलु.. अगर उस दिन भावुदीदी नही आइ होती तो उसी दिन हम दोनोके बीच सबकुछ हो गया होता.. तब हमने कहा सादी कीथी..? मेरा यकीन मानो.. मे तुमको कभी नही छोडुगा.. बस मेरी अ‍ेकही तम्मना हे जो पुनोने पुरी नही की.. मे सादीसे पहेले उनके साथ सबकुछ करना चाहता था.. मेने मेरी कोलेज लाइफमे जोभी सपने देखेथे.. वो मे उनके साथ पुरा करना चाहता था.. लेकीन उसने मुजे छुने तक नही दीया.. तो यही उमीद मुजे तुमसे हे.. क्या मेरी तम्मना पुरी नही करोगी..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. प्लीज.. उस दिन हम दोनोही बहेक गयेथे.. मेभी अपने आपको कंट्रोल नही करपाइ.. इसीलीये अ‍ेक डर लग रहा हे.. ओर मे आपके बीना रेहभी तो नही सकती.. मेरा दिल जानता हे.. की मेने यहा आपके बीना कैसे दिन काटे हे.. ओर आप फोनभीतो नही करतेथे..

तभी वेइटर दो कप आइसक्रिम लेकर आगया.. तो दोनोही अपनी बात रोकते चुप होगये.. ओर वेइटर आइसक्रिम रखके चला गया तो दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखने लगे तब नीलमने सरमाके अपनी नजरे जुकाली.. ओर अ‍ैसेही बैठी रही.. तब उनके मुहके पास अ‍ेक आइसक्रिमकी भरी हुइ चमच आगइ.. तब नीलमने सरमाके अपनी नजरको उठागा.. तो धिरेन उसे खीलानेके लीये चमच भरके दे रहा था..

तब नीलम सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते अपना मुह खोल दीया तो धिरेनने उसे आइसक्रिम खीलादी.. वो बडीही कस्मकस मे थी.. आज नीलमको धिरनने अपने मनकी बात बतादी.. वैसेतो नीलम कबसे धिरेनके साथ मीलन करनेको तैयार थी.. वो धिरेनको बहुत चाहने लगीथी.. जबसे लताने उसे धिरेनसे दुर करनेकी कोसीसकी.. ओर भावनाने उसे डांटके फटकाराथा.. तबसे गुस्सेमे धिरेनके साथ सबकुछ करनेकी ठानली थी..

धिरेन : नीलु.. क्या हुआ..? क्या सोच रही हे..? मे तुम्हारे साथ जबरदस्ती कोइ काम करवाना नही चाहता.. अगर तुम मुजसे प्यार नही करती तो मुजे मना कर सकती हो.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. हमारा रीस्ता दोस्तीकातो रहेगा ही.. लेकीन अ‍ेक बात खान खोलकर सुनलो.. मेने तुजे सच्चे दिलसे चाहा हे.. मे तुमसे हमेसा प्यार करता रहुगा..

नीलम : (फौरन) अरे.. नही नही.. धिरेन आप गलत सोच रहे हे.. मे भी आपको बहुत चाहती हु.. प्लीज.. मुजे गलत मत समजे.. मुजे थोडा टाइम चाहीये.. आपने सब अ‍ेकदमसे कहा तो.. आइ अ‍ेम सोरी.. (सोचते थोडी देरके बाद) ठीक हे.. जैसा आप चाहो.. लेकीन मेरा खयाल रखना.. मे मेरी जींदगीका बहुतही अहेम फैसला करने जा रही हु.. अगर आप मुजे छोड देगे तो मे कहीकी नही रहुगी.. मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही बचेगा.. आप समज रहे हेनां..? मे आपके साथ रहेनेके लीये तटस्थ रहुगी..

धिरेन : नही नीलु.. अ‍ैसी कोइ नौबत ही नही आयेगी.. भलेही इसके लीये मुजे पुनमको छोडना पडे.. मेरी बीवी सीर्फ तुम ही रहोगी.. आइ प्रोमीस मे तुमसे सादी करलुगा.. बस दो तीन दीनमे हमारा मकान देख लुगा.. मेने आते ही ब्रोकरसे बात करली हे.. फीर उनका सौदा होतेही हम दोनो कही मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. फीर तुम मेरी बीवी बनके इघरही होस्टेलमे रहेना.. हम हर सेटरडे सन्डे साथमे रहेगे.. मेरी कसम..

नीलम : (जटसे धिरेनके पास आकर बैठते) प्लीज.. धिरेन.. आप अपनी कसम मत खाओ.. मे रेडी हु.. आप जोभी कहोगे मे करुगी.. आप जैसा कहोगे मे सबको जवाब दे दुगी.. मुजेतो आपके साथ जींदगी बीतानी हे.. अब मे आपके बीना नही रेह सकती..

धिरेन : (बैठेही हग करते हसते) तो क्या अपने होनेवाले पतीका मुह मीठा नही करवाओगी..? हें..हें..हें..

कहातो नीलम अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. ओर हसते हुअ‍े उसने अ‍ेक चमच आइसक्रिम लेकर धिरेनके मुहके सामने रखदी.. तो धिरेनने उनको ओर प्यारभरी नजरोसे देखते आधी चमच खाइ ओर आधी चमच उसने नीलमको खीलादी तब नीलम बहुतही सरमाइ. ओर धिरेनने उसे बैठेही अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब दोनोके होंठ मील गये.. ओर स्मुच करते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे..

दोनोही सबकुछ भुलके प्यारके आगोसमे चले गये.. तभी नीलुको अपने बुब्सपे धिरेनका हाथ बुब्स मसलते महेसुस हुआ तो नीलम सरसे पाव तक हील गइ.. ओर आधी आंख चडाते मदहोस होने लगी.. उसने धिरेनका कोइ विरोध नही कीया.. दोनोही भुल गयेकी दोनो कहा बैठे हे.. ओर धिरेनने बुबस्को मसलते अपना मुह थोडा खोल दीया तो दोनोही मदहोसीमे अ‍ेक दुसरेकी जीभसे पेच लडाने लगे..

तभी अचानक धिरेनने बुब्सको छोडके नीलमकी चुतपे हाथ रख दीया ओर उसे उंगलीसे सहेलाने लगा.. तो नीलम सीसकारीया करते उछलने लगी.. वो हाथ नीचे लेजाते धिरेनका हाथ पकड लेती हे.. ओर गुं..गुं.. करते अपनी गरदन नां मे हिलाते धिरेनको रोकनेकी कोसीस करती रही.. नीलम बहुतही गरम हो चुकीथी.. वो मनसेतो चाहतीथी की धिरेन उसे अभी पुरी तराह मसलदे.. लेकीन अन्जान जगहकी वजहसे..

नीलम : (जटसे दुर होते) नही धिरेन.. प्लीज.. वहा नही.. इधर कोइ आजायेगा.. आप जोभी करना हो बादमे करलेना.. लेकीन यहा नही..

धिरेन : (उखडी हुइ आवाजमे) नीलु.. आइ लव यु.. मे जल्दसे जल्द तुमसे मीलना चाहता हु.. क्या हम कही कोइ होटेलमे चले..? हंम..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) लव यु टु.. धिरेन.. लेकीन आज नही.. हम सीर्फ अ‍ेक घंटेकी परमीस लेकरही आये हे.. आप समजो प्लीज.. अब मुजसे भी आपके बीना नही रहा जाता.. लेकीन यहा नही.. हम आपके घरपे मीलते हेनां..? परसोही सेटरडे हे.. आप कुछ अ‍ेरेन्ज करलो..

धिरेन : नीलु.. मे जल्दी हम दोनोके मीलनका इन्तजाम करता हु.. पुनोको कहुगा सेटरडे सन्डे मायके उनके भाइ भाभीको मीलने चली जाये.. वरना हम यही कीसी होटेलमे चले जायेगे.. मे हमारे मीलनके लीये कुछ इन्तजाम करता हु..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. देखना.. कोइ दर्द बर्दतो नही होगानां..? मे ठीकसे चलतो सकुगीनां..?

धिरेन : अरे कुछ नही होगा.. तुम खामखा गभरा रही हो.. पुनोकोभी कुछ नही हुआ था.. वोभी ठीकसे चल रहीथी.. इनमे अ‍ैसा कुछभी नही होता.. जो तुम सोच रही हो.. मे तेरे साथ हुनां..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. तो ठीक हे.. आप ही कुछ देखलो..

धिरेन : नीलु.. कलतो नही.. लेकीन परसो सेटरडे हे.. अगर पुनो माइके जायेगी तो हम मेरे घरपे ही चलेगे.. लेकीन कल हम फील्म देखने चले..? ६ से ९ बजेके सोमे.. हंम..? चलोगीनां..?

नीलम : (सरमाते) हंम.. आप आजाना मे मेडमको केह दुगी.. थोडा जल्दी आइअ‍ेगा.. रीसेसके बाद मे स्कुल नही जाउगी.. हम ४ बजे नीकल सकते हे.. पहेले हम कही गार्डनमे घुमने जायेगे.. फीर फील्म देखेगे.. लेकीन वहा ओर कोइ सरारत नही.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे) नीलु.. मेडमको कहेना.. सेटबडे सन्डे जीजुके घर दीदीके पास जाना हे..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. केह दुगी.. धिरेन.. बहुत डर लग रहा हे.. कीसीको पता तो नही चलेगानां..? देखना वरना मे कहीकी नही रहुगी.. मुजे मजधारमे मत छोडना.. मे सीर्फ आपहीके भरोसे चल रही हु.. हंम..?

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम खामखा गभरा रही हो.. अ‍ैसा कुछभी नही होगा.. मे तेरे साथ हुनां..? क्या मुजपे भरोसा नही हे..? हंम..? मे तुमसे सचमे सादी करना चाहता हु.. कहो.. मे तुमको कैसे यकीन दिलवाउ..?

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) नही धिरेन.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. अब आपही मेरे सबकुछ हो.. हंम..

फीर दोनोही अपना प्रोग्राम बनाते आइसक्रिम खाने लगे.. ओर आइसक्रिम खतम होतेही दोनो वहासे नीकल गये.. तब धिरेन बाइक सीधे अ‍ेक मोलमे लेजाता हे.. वहा नीलमको अ‍ेक बहुतही खुरसुरत ड्रेस दिलवाता हे वहा धिरेन उनकी पसंदका दो अडरगारमेन्ट भी दीलवाता हे तब नीलम बहुत ही समराइ.. फीर धिरेन नीलमके लीये कुछ नास्ता लेलेता हे.. ओर दोनो वापस होस्टेलपे आगये..

तो मेडम दोनोको देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर धिरेनभी उनकी ओर देखके हसने लगा ओर नीलमको छोडके वहासे नीकल गया.. तब मेडम उसे कातील स्माइल करते देखती रही.. नीलम ओर धिरेनको नही पता थाकी दोनोके जातेही मेडने पुनमको फोन करके बता दीया था.. तब नीलम उपर अपने रुममे चली गइ.. तो उनकी रुम पार्टनर दीया.. मोबाइलमे कुछ देख रही थी.. तब माोबाइल साइडमे रखते ही..

दीया : (मुस्कुराते) आगइ महारानी.. नीलु.. कहा घुमने गइ थी..? कौन मीलने आया था..? कही कोइ बोयफ्रेन्ड तो सेट नही करलीया..? हें..हें..हें.. क्या सोपींग करने गइथी..?

नीलम : (मुस्कुराते बेग रखते) अरे नही.. वो मेरे जीजु मीलने आयेथे तो उनके साथही चली गइ थी.. मुजे कुछ सोपींग करनीथी.. तु बता.. वापस कब आइ..? क्या अपने यारको मीलने गइ थी..?

दीया : (हसते आंख मारते) हां यार.. आज हम दोनो फील्म देखने गयेथे.. क्या मस्त फील्म थी.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते) क्या उसने तुजे फील्म देखने दी..? हें..हें..हें.. सच बताना कमीनी..

दीया : (जोरोसे हसते) कमीनी तुजे सब पतातो हे तो फीर क्यु पुछती हे.. क्या कोइ बी.अ‍ेफ. उनकी जी.अफे. के साथ फील्म देखने थोडीना जाते हे.. उनकोतो वहा कुछ ओरही करना होता हे.. सालेने आज मुजे तीन तीन बार जडा दीया.. बहुत मस्त चुसता हे.. नीलु अब तुमभी कीसीको पटाले.. यहीतो होस्टेलमे रहेनेका मजा हे.. अ‍ैसा समय तेरी जींदगीमे दुबारा कभी नही आयेगा.. तुम खुलकर अपनी लाइफ जीलो.. ओर ये क्या सोपींग करके आइ..? दीखातो जरा..

नीलम : (हसते जटसे बेग दुर हटानेकी कोसीस करते) अरे नही नही.. कमीनी रहेने दे.. मेरे कपडे हे.. हें..हें..हें..

नीलम कुछ कहेती उनसे पहेलेही उनकी रुमपार्टनर दीयाने केरीबेग उल्टी करदी.. तो सब कपडेके बोक्ष बहार आगये.. ओर सुरुमेही नीलमके अंडरगारमेन्ट्स हाथ आगये.. तो दिया बोक्ष दोलकर देखने लगी.. तब नीलु बहुतही सरमाते हसती हुइ दीयाको देखती रही.. तो दियाभी नीलमकी ओर कातील स्माइल करते सभी कपडे गौरसे देखती रही.. तभी..

दीया : (खुस होते हसते) वाव.. क्या मस्त हे.. कमीनी सच बताना वो तेरे जीजाजी ही थेनां..?

नीलम : (सरमाते हसते) तो कुतीया क्या मे जुठ बोल रही हु..? जीजाजी ही थे.. तेरी कसम..

दीया : (कातील नजरोसे देखते हसते) नीलु.. सच बताना.. अ‍ैसे कपडे जीजाजी तो नही दिलवाते.. अच्छा तो फीर अपने दिलमे हाथ रखके सबसे ज्यादा चाहती हो उनकी कसम खाकर कहो.. की ये तेरे जीजाजी हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) नही.. कमीनी.. नही खाती कसम.. तुजे मानना होतो मान.. वरना जानेदे.. मे जुठ थोडीना बोलुगी.. बात करती हे..

दीया : (सब बोक्ष वापस देते) येले कमीनी.. अब मुजसे बात मत करना.. मेरी तो सब बाते उगलवा लेती हे.. ओर खुदकी बारी आइतो नखरे कर रही हे.. कमीनी मे कहा कीसीको बताने जाउगी.. तुम दोस्तीमे भी परदा कर रही हो..

नीलम : (पासमे बेठते) यार तुमतो नाराज होगइ.. मे सच कहेती हु.. ठीक हे.. सुन.. ये बात कीसीको मत कहेना.. वो मेरे जीजाजी भी हे.. ओर मेरा बोय फ्रेन्ड भी.. सब उसीने दिलवाया हे.. ओर ये मेरा मोबाइल भी.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. जब हम दोनो उनकी सादीकी खरीदी करने यहा सहेरमे आयेथे.. तबही हम दोनोके बीच प्यार होगया.. अभी अभी उनकी सादी हुइ हे.. तो हनीमुन मनाकर वापस आतेही मुजे मीलने आये थे.. दोनो आइसक्रिंम पार्लरमे गयेथे.. सुनलीया..? अब खुस..?

दीया : (खुस होते कातील स्माइल करते) अरे.. मेरी बनो.. हां बहुत खुस.. तुमने तो जीजाजीको ही सेट करलीया..? चलो अच्छा हे.. घरकी बात घरमेही रहेगी.. कीसीको पताभी नही चलेगा.. साला मेरातो कोइ मेरी जीतनी उमरका जीजा, भाइ या कजीन भी नही हे.. साले सब बडे हे दो दो तीन तीन बच्चेके बाप.. वरना मेतो पहेले उनकोही सेट करलेती.. ताकी कीसीको पतातो ना चले.. ओर घरमे आरामसे उनसे प्यार करके चुदवाओ.. कोइ कुछ कहेने वाला नही.. ओर नाही कोइ खतरा.. सीर्फ मजेही मजे.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते) कमीनी तु बहुत ठरकी हे.. तुजे हर वक्त चुदाइकी ही बात करनी हे.. हें..हें..हें..

दीया : (हसते) अरे नीलु.. अब तुमसे क्या कहु.. तुमने अभी नीचेका स्वाद चखा नही हेनां..? इसीलीये तुम अ‍ैसा केह रही हे.. बस अ‍ेक बार अपनी चुतमे कीसीका लंड लेकरतो देख.. फीर तु उनके बीना रेह नही पायेगी.. सच कहेती हु.. क्या तुमने ओर तेरे जीजाजीने अभी तक कुछ कीया नही..? हंम..?

नीलम : (सर्मसार होते नामे गरदन हीलाते) नही.. यार.. आज आइसक्रिम पार्लरमे वो इनके लीये बहुत केह रहेथे.. लेकीन मुजेतो बहोत सरम आ रहीथी.. दिया.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या पहेली बारमे बहुत दर्द होता हे..? मेने सुना हे थोडा खुनभी नीकलता हे.. मुजे इसके बारेमे कुछ बताओनां.. आज वो बहुत फोर्स कर रहेथे..

दिया : (कातील स्माइल करते) हंम.. लगता हे.. तुम दोनोने कुछ तैय करलीया हे.. सुन..? जब पहेली बार अंदर डालते हेनां.. तो बस थोडा मामुली दर्द होता हे.. ओर वोभी कुछ ही देरमे खतम होजाता हे.. अगर तुम वर्जीन हे तो बस थोडासा खुन जैसा नीकलेगा.. बादमेतो मजे ही मजे.. हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते) कमीनी सच बताना.. अभी तक कीतने लंड खाये हे.. हें..हें..हें..

दीया : (थोडा गुस्सा करते) कुतीया.. क्या मे तुजे रंडी लगती हु.. अ‍ेकही तो बोय फ्रेन्ट हे मेरा.. हमने अब तक चार पांच बार सेक्स कीया हे.. साला बहुत मजा देता हे.. सायद हम दोनो सादी भी करले.. बस वो मेरी पढाइ खतम होनेका इन्तजार कर रहा हे.. क्या तुमने उनसे मीलन करनेकी कुछ प्लानींग ब्लानींग कीहे की नही..?

नीलम : (सरमाते हसते धीरेसे) हंम.. आजही वो केह रहेथे की हमभी सादीसे पहेले कही मीले.. दिया.. वो हमारी सादीसे पहेले मेरे साथ सबकुछ करना चाहते हे.. फीर हमदोनो सादी करलेगे.. मेरे लीये यहा अ‍ेक मकान भी ले रहे हे.. मुजे अपनी बेन्कमे जोबके लीये भी केह रहेथे.. तो मे क्या करु..? हंम..?

दीया : (खुस होते) नीलु तबतो अच्छा हे.. मेतो कहेती हु.. अ‍ेक बार उसे अच्छेसे मीलले.. इनमे कुछ नही होता.. अगर वो दुबारा सेक्सके लीये कहे तोभी हां केहदेनां.. कोइ नखरे मत करना.. इसी बातपे कइ बार लडके हमे छोड देते हे.. अगर तुम दोनो सादी करलोगे तो तेरी लाइफ अच्छेसे सेट होजायेगी.. लेकीन फीर तेरी बहेनका क्या होगा..? इसके बारेमे तुम दोनोने कुछ सोचा हे..?

नीलम : दीया.. वो मेरी सगी बहेन नही हे.. मेरी बुआ की ननंद हे.. मे उनको दीदी कहेती हु.. मेरी छोटी मां की बडी बहेन ओर मेरी सगी बुआ देवरानी जेठानी हे.. थोडा दुरका रीलेशन हेतो कोइ दीकत नही हे..

दीया : (हसते) छोटी मां मीन्स..? चाची..?

नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मेरी दो दो मां हे.. मेरे पापाने दो सादीया की हे.. मेरी सगी मां ओर अभीके जो मेरे पापा हे वो दोनो मामी भांजे थे.. दोनोके बीच पापा बीमारथे तबही रीलेशन हो गयाथा.. जब मेरे पापा गुजर गयेतो मांने उनके भांजेके साथही सादी करली.. अभी जो मेरे पापा हे उनकी पहेली बीवी हे उनको मे छोटी मां कहेती हु.. हें..हें..हें..

दीया : (हसते) वाव.. दो दो सादीया..? नीलु.. कीतना अजीब लगता हेनां.. वोभी आजके जमानेमे..

नीलम : (हसते) सुन.. वो पुनमदी हेना जो मेरी बुआकी ननंद हे.. अभी उनकी मेरे बोय फ्रेन्टके साथ सादी हुइ हे.. उनके बडे भाइने तीन तीन सादीया करली हे.. वो वहाके राजा हे.. मेरी बुआकी सादी उनके छोटेभासे ही हुइ हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. तो उनके खानदानमे दो तीन सादीया आम बात हे.. हें..हें..हें..

दीया : (मुस्कुराते) नीलु.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या अभी ये जो तेरे पापा हे वो तेरा खयाल तो रखते हेनां..?

नीलम : (फीकी मुस्कानसे) हां दिया.. मेरे घरमे सबको यही लगताहे की मुजे कुछ नही पता.. लेकीन तुमसे अ‍ेक बात कहु..? मेरे जो अभी ये पापा हेना.. वोही मेरे असली पीता हे.. मेरे बापु बीमारथे तब मेरे ये पापा हमारे घरपे बहुत आतेथे.. तबही मेरी मा ओर पापा रीलेशनमे आगये थे.. ओर पापाने मांको प्रेगनेन्ट कर दीया.. ओर मे आगइ.. यही मेरे असली पीता हे.. तो मेरा खयालतो रखेगेही..

दीया : (हसते) हंम.. तो फीर ये सब तुजे कैसे पता चला की यही तेरे असली पीता हे..?

नीलम : (सरमाते हसते) अ‍ेक बार मां.. ओर छोटीमां रुममे बाते कर रहीथी.. तब उनको नही पताथाकी मे उसी रुमके बाथरुममे हु.. ओर मेने सब सुनलीया.. दिया.. क्या तेरे साथभी कुछ अ‍ैसा हुआ हे..?

दीया : (आंख गीली करते) हां नीलु.. मेरी अभी जो मा हे वो मेरी सौतेली मां हे.. पहेले पापाकी सेक्रेटरी थी.. मेरी असली मां का उनके देवरके साथ यानी मेरे चाचाके साथ ही नाजायज रीस्ता था.. ओर उसने मांको पेटसे कर दीया.. फीर मेरा जन्म हुआ तब मांका सब भांडा फुट गया.. ओर मां चाचाके साथ भाग गइ.. अभी उनसे सादी करके दोनो अलग रेहते हे..

नीलम : (आस्चर्यसे) क्या केह रही हो तुम..? तेरे जन्मके बाद भांडा फुट गया मतलब..? कैसे..? आइमीन.. सबको कैसे पता चला..?

दीया : (तभी अपनी पीठपे अ‍ेक लाखका नीशान दीखाते) नीलु.. तुम ये देख रही हो..? हमारे खानदानमे यही नीशान इसी जगाहपे सीर्फ चाचाको हे.. ओर कीसीको नही.. तो सबको यही लगता हे की मे मेरे चाचाकी संतान हु.. ओर अभी चाचासे मेरी मांको अ‍ेक लडकी ओर हुइ हे.. उनकी पीठपे भी ये नीशान हे.. तो जाहीरसी बात हे.. सबको पता हे.. मेरे असली पीता मेरे चाचा ही हे..

नीलम : अच्छा.. तभी तेरे पापाने अपनी सेक्रेटरीसे सादी करली.. क्या उनके कोइ बच्चे हे..?

दीया : (आंख गीली करते) नही.. लेकीन फीरभी मेरे इस पापा मुजे बहोत प्यार करते हे.. लेकीन मां.. जानेदे सब.. उनकोभी कोइ संतान नही हेतो वोभी चाचाके साथ.. साला इनकी बात करके दीमाग खराब हो जाता हे.. नीलु अ‍ेक बात कहु..? तुजे जहासे भी खुसीया मीले बटोर लेना.. अपनी लाइफ खुलकर जीले.. फीर पता नही हमारी कीस्मतमे कहा मोड आजाये.. अब इस जमानेमे तो रीस्तेकी कोइ अ‍ेहमीयतही नही बची.. इनसेतो अच्छा वो राजा था.. जो सभी प्रकृतीके नीयमसे जीते थे..

नीलम : (खडी होकर दीयाको हग करते) हंम.. दिया.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे तुजे दुख हुआ.. लेकीन तुम कीस राजाकी बात कर रही हो..?

दीया : (मुस्कुराते) कमीनी.. दोस्तीमे नो सोरी.. नो थेन्क्स.. ओके..? मे उस राजाकी बात कर रही हु जो हमारे इसी सहेरमे रहेताथा.. उसने अपनी दोनो बहेनसेही सादी करली थी.. हमभी अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे सादी करके हमारी जींदगी अच्छी तराह जी सकते हे.. उसी राजाकी मेरे पास अ‍ेक कीताब (ये केसी अनुभुती) पडी हे.. फुरसतमे पढ लेना.. बहुत मजा आयेगा.. इनमे सब आपसी रीस्तोमेही सादीया करते हे.. यानी की अपनी दोनो बहेने चाची यहा तक वो राजाने उनकी दादीसेभी सादी करली.. बहुत अच्छी कीताब हे..

नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? दादीसे भी..? दीया वो कीताब मुजे देना.. मे पढना चाहती हु..

नीलम ओर दीया अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेके बारेमे पारीवारीक बाते करती रही.. फीर दियाने वो कीताब नीकालके नीलमको पढनेके लीये देदी.. तो नीलम वही पढने लगी.. तबतक धिरेन अपने गांवकी ओर नीकल गयाथा तब उनके घरपे दोपहरको सब लंच करके आराम कर रहे थे.. नीर्मलाने राजीवको अपनी दवाइ पीलाइ तो राजीव नीदकी आगोसमे चला गयाथा.. वो नीचेके रुममेही सो रहाथा.. तो साथमे नीर्मलाभी आराम करते सो गइथी.. तब देवायतको पुनमने चंदावाले रुममे आराम करने भेज दीयाथा..

फीर दया ओर पुनमने सब काम नीपटा लीया.. ओर पुनमने दयाको उनके रुममे भेज दीया.. फीर होलका दरवाजा अच्छेसे बंध करके राजीव वाले कमरेमे देखने चली गइ.. तो दोनो मीया बीवी नींदकी आगोसमे थे.. तब पुनम धीरेसे उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर देवायतके कमरेमे जांकते देखा तो देवायतभी अपनी सुहागरातमे पुरी रात जागनेकी वजहसे गहेरी नींद सो रहाथा..

तो पुनमने देवायतको आराम करने देनाही बहेतर समजा.. उनकोभी पता थाकी भाइ आज पुरी रात अपनी नइ बीवीके साथ सुहागरातमे जागा होगा.. तो वो अपने कमरेमे चली गइ.. ओर आराम करने लगी.. सब आराम करते रहे तब सामके चार बजनेको आयेथे.. फीर पुनम उठकर अपने बाथरुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होकर हल्कासा सींगार करके नीचे चली जाती हे..

तभी नीर्मलाभी राजीवको जगाकर फ्रेस होकर बहार नीकली तब दया ओर पुनम दोनोही चाइ नास्ता बनाने कीचनमे चली गइ.. तभी देवायतभी कंपलीट होकर नीचे आगया.. ओर नीर्मलाके पास उनसे सटकर बैठ गया ओर उसे कंधेसे पकडकर अपनी ओर करके भीच लीया तो नीर्मला सरमाके हसने लगी.. तो राजीवभी हसने लगा.. फीर दोनो सही होकर बैठ गये.. तब..

राजीव : (हसते) क्या बात हे.. आज हमारे बेटेको सासुपे बहोत प्यार आ रहा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. पापा.. अब आप सबलोग चले जाओगे तो घर बहुत सुना सुना लगेगा.. कुछ दिन ठहेर जाइअ‍ेनां..? आप हमारे साथ हेतो बहुत अच्छा लगता हे.. आप हमारे साथ रहेने आजाओ.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) बेटा तुजेतो सब पता हे.. कीतना कुछ काम करना हे.. ओर तुम दोनोभी तो हमारे साथ चल रहेहो.. तो वहा तुम दोनोही दो तीन दिन रुक जाना.. वोभी तो आपकाही घर हे..

देवायत : (मुस्कुराते) नही पापा.. अब काम बहुत बढ गया हे.. ओर दो तीन दिनमे लखनकोभी अब सहेर भेज रहा हु.. तो अब वो वहा हमारा सब काम देखेगा.. आपकी तबीयत ठीक नही हे.. वरना आप दोनोकोभी उनके साथ रहेने भेज देता.. तो लखनकोभी आपका कुछ अनुभव मीलजाता..

राजीव : (हसते) नही.. अबतो हमारे भानुभी बहुत कुछ सीख गये हे.. वोही लखनको तैयार कर देगा.. आप फीकर मत करो.. सबकुछ अच्छेसे चल रहा हे.. कास आपके बापु जीन्दा होते.. तो वो ये सब देखके बहुत खुस होते..

नीर्मला : (बापुका जीक्र होतेही टोपीक चेन्ज करते हसते) देवु.. सुना हे आप गांवमे बडी होस्पीटल बनवा रहे हो..? क्या ये सच हे..?

राजीव : (खुस होते) भाइ तबतो बहुत ही अच्छा हे.. इस गांवमे अ‍ेक बडी होस्पीटलकी सख्त जरुरत हे.. आप सृतीकोभी इधर गांवमे बुलालो..

देवायत : (हसते) जी पापा.. देखते हे.. हमे सरकार जमीन कब दे रहीहे.. स्कुलकी जमीनतो हमे देदी.. तो वहा अ‍ेक हप्तेमे कामभी सुरु होजायेगा.. मेने इस बारेमे सृतीसे बातभी करली हे.. अब आगे देखते हे..

राजीव : बेटा.. अगर स्कुल खुल रहीहे तो आप भावुका भी देखलो.. वो भी पढी लीखी हे तो अपने पावपे खडी होके कुछ कर लेगी.. बस हमे सीर्फ उनकीही चीन्ता हे..

देवायत : (मुस्कुराते) पापा भावुकी चीन्तातो छोड ही दो.. अब सब ठीक हो गया हे.. भावुभी वहा रहेने के लीये राजी होगइ हे.. फीरभी मे हुनां.. अगर भावुको कुछ हुआतो उनको मेरे साथही रखुगा.. ओर स्कुलमेभी नोकरीपे लगा दुगा..

राजीव : (खुस होते) चलो तबतो अच्छा हे अब उनकी चीन्ता नही करनी.. बस अ‍ेकही बीनंती हे आपसे.. अगर मुजे कुछ होजाये तो आप नीमुका खयाल रखीयेगा.. मे उनको वहा अकेली रखना नही चाहता.. इनको आपके साथ रखना.. बस यही कहेनाथा आपसे..

नीर्मला : (आंख गीली करते) अरे आप कैसी बाते कर रहे हे..? आपको कुछ नही होगा.. हमारा देवु हेनां..?

देवायत : पापा आपको कुछ नही होगा.. मे हुनां..? आप अ‍ैसा क्यु गलत सोचते हे..? इनको मे मरते दम तक मेरे साथ रखुगा.. आइ प्रोमीस.. बस..? आप उल्टा सीधा सोचना छोड ही दो..

पुनम : (बहार आते) भाइ.. मम्मी पापा.. चलो.. चाइ नास्ता रेडी हे.. आकर बैठ जाओ..

कहेते पुनम वापस कीचनमे चली गइ.. तब राजीव ओर नीर्मला उनको देखतेही रहे.. ओर तीनो उठकर डाइनींगपे चले गये.. तब दया ओर पुनम चाइ नास्ता लेकर आगइ.. ओर सब बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. तो नीर्मला ओर पुनम देवायतके आसपास बगल वाली चेयरपे बैठ गइ.. तभी..

नीर्मला : पुनो बेटा.. सारा दीन घरमे अकेली रहेके बोर होजाओतो सेटर डे सन्डे अपने मायके घुमने चली जाना.. तो थोडा फ्रैस होजाओगी..

पुनम : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी..

दया : (हसते) मालकीन इसीलीये तो मे इनके साथ आइ हु.. इनको अकेली थोडीना रहेने दुगी.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) दया तुमभी साथ चली जाना.. तो वहा सबको मीलकर तुजेभी अच्छा लगेगा.. इतने सालो तक तुमभी वहा रही हो.. तो वो तेराभी घर हे..

तभी पुनमके मोबाइलकी रींग बजती हे तो वो उठकर मोबाइल के पास चली गइ.. ओर फोन उठाकर बात करने लगी.. फीर बात करके वापस आकर बैठ गइ ओर देवायतके सामने देखके कातीलाना स्माइल करने लगी.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो नीर्मला जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो राजीवभी फ्रेस होने अपने रुमके बाथरुममे चला गया.. तब पुनम देवायतको इसारेसे दुसरे रुममे बुलाती हे..

तो देवायत उठकर धीरेसे वही चला गया.. तब पुनम रुममे आतेही जटसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतके होठोको चुमने लगी.. फीर उनसे अलग होतेही धीरेसे बात करने लगी..

पुनम : (होंठ चुमते धीरेसे) भाइ.. लगता हे मे आपके पास जल्द आजाउगी..

देवायत : (मुस्कुराते) क्यु..? तुजे अ‍ैसा क्यु लगता हे..? कीसका फोन था..?

पुनम : (कातील स्माइल करते) हमारी होस्टेलकी मेडमका.. मेरी उनसे अच्छी पटती हे.. आज अभी धिरेन होस्टेल गयेथे.. नीलुको अ‍ेक घंटेके लीये कही ले गये हे.. बस ये बात अभी कीसीको मत कहेना.. आगे देखो होता हे क्या.. मे सेटर डे संन्डे उधर घरपे आ रही हु.. भाभीको कहेना.. वरना आप आकर हमे लेजाना..

देवायत : (हसते) हंम.. तुम टेन्शन मतलेना.. मंजु सब सम्हाल लेगी.. चल बहार वरना.. अभी दोनो आजायेगे..

फीर दोनोही बहार आगये.. तब कुछ देरके बाद नीर्मला ओर राजीवभी बेग लेकर बहार आगये तो देवायतने नीर्मलाके पाससे बेग लेली तब पुनम ओर दया राजीव ओर नीर्मलाके पैर छुने लगी.. तब दोनोने आशीर्वाद दीया.. ओर राजीवने दोनोको सगुनके तौरपे कुछ पैसेभी दीये.. तब पुनम देवायतके पास जाकर उनको हग करलेती हे.. ओर सबलोग बहार आगये..

फीर तीनो कारमे बैठ गये तब पुनम ओर दया वही दरवाजेपे खडी रहेकर उनको वीदा करने लगी.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. इघर धिरेन अपने गांवकी ओर आ रहाथा.. आज उसने नीलमके साथ बीताये पलसे बहुतही खुस ओर उतेजीत था.. उनको पता नही थाकी उनकी अ‍ेक अ‍ेक हरकत उनकी बीवी पुनमको पता चल जाती थी.. ओर पुनमभी इन दोनोके रीलेशन देखके मजा ले रहीथी..

पुनमको बाबाकी ओर मंजुकी अ‍ेक अ‍ेक बात सच होते दीख रहीथी.. धिरेन अब जल्दसे जल्द अ‍ेक मकान ओर अ‍ेक कारका इन्तजाम करना चाहता था.. तो दुसरी ओर देवायत आधेही घंटेमे गांवमे पहोंच गया.. ओर सीधा हवेलीपे जाके रुक गया.. तो मंजु चंदा ओर भावना.. तीनोको देखकर खुस होने लगी.. ओर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब अभी सीर्फ पांच साडे पांचही बजनेको आयेथे....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३८

पुनमको बाबाकी ओर मंजुकी अ‍ेक अ‍ेक बात सच होते दीख रहीथी.. धिरेन अब जल्दसे जल्द अ‍ेक मकान ओर अ‍ेक कारका इन्तजाम करना चाहता था.. तो दुसरी ओर देवायत आधेही घंटेमे गांवमे पहोंच गया.. ओर सीधा हवेलीपे जाके रुक गया.. तो मंजु चंदा ओर भावना.. तीनोको देखकर खुस होने लगी.. ओर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब अभी सीर्फ पांच साडे पांचही बजनेको आये थे....अब आगे

तब रजीयाने सबको पानी पीलाया ओर चाइनास्तेके लीये पुछा.. तो सब पुनमके घरपे चाइनास्ता करके ही आयेथे तो सबने मना करदीया.. फीर कुछ देर सबके साथ बैठकर देवायत अपने खेतोपे चला गया.. तो वहा भानु लखन ओर रामुकाका बैठे थे.. ओर आपसमे बाते कर रहेथे.. रामुकाका लखनको बीजनेसके बारेमे समजा रहेथे.. की कैसे तेरे बापु ओर दादा सहेरमे बीजनेस करते थे.. दोनो ही रामुकाकाकी बाते गौरसे सुन रहेथे..

देवायत : (आतेही हसते) कहो काका.. दोनोको क्या समजा रहे हो.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) अरे कुछ नही देवु.. काका हमारे बापुके बीजनेसके बारेमे सब जानकारीया दे रहे थे.. इन्होने भी उनके साथ बहुत काम कीया हे.. तो हमे सब बाते बता रहेथे.. काकासे काफी कुछ नया सीखनेको मीला..

देवायत : (हसते) हां.. काका ये दोनोको अच्छी तराह समजादो.. की आप सहेरमे क्या करते थे.. अब ये दोनो ही सहेरका हमारा बीजनेस सम्हालले तो मुजे कोइ जंजट ही नही हें..हें..हें..

काका : (हसते) बेटा मे वोही इनको केह रहा था.. अभी लखन बेटेने मुजे बताया की वो अब सहेरमे रहेने जा रहे हे.. तो मे उसे सब समजा रहाथा..

देवायत : (हसते अंदर जाते) ठीक हे काका आप लखनको अच्छी तराह समजा दीजीये.. भानु तुम चलो मेरे साथ अंदर.. मुजे तुमसे कुछ काम हे..

कहेते देवायत अपनी गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. तो पीछे भानुभी उठकर चला गया.. ओर आकर देवायतके सामनेकी चेयरपे बैठ गया.. तब बहार रमाुकाका लखनको सब डीटेलमे समजाने लगे..

भानु : हां देवु.. कहो.. कुछ अरजन्ट काम था..?

देवायत : भानु.. कल मे ओर मंजु दोनो पापाके घर जा रहे हे.. वहा भावुभी साथ चल रही हे.. तो उनके मकानका रजीस्टर वही करवा देगे.. फीर कुछ दिन भावु वहा रुककर वापस तेरे घरपे आजायेगी.. ओर सुन अब जरा उनपेभी थोडा ध्यान देना.. सीर्फ नइ बीवीके साथ मत लगे रहेना.. हें..हें..हें.. भावुको बडी मुस्कीलसे समजाया हे.. तब जाकर वो तेरे साथ रहेनेके लीये मानी हे..

भानु : (हसते) क्या यार..? चल ठीक हे मेरे लीये भावु मान गइ वोही बहोत हे..

देवायत : भानु.. अब तीन चार दिनमे लखनको भी सहेर रहेने लीये भेज रहा हु.. तो दो तीन दीनके लीये भलेही लता मायके मे रहे.. कल सुबह लखन उनको छोडने आजायेगा.. तो तुम सहेरमे उनके घरमेभी देखले.. घरमे फ्रिज टी.वी. सब चीजे अच्छी तराह देखले.. अगर जरुरत पडेतो सब नया लेले.. तुम कीसीको लेकर कल सहेर चले जाना ओर सब देख लेना..

भानु : हां भाइ.. कल सुबह हम चले जायेगे.. भाइ.. सुबह आप नही थे तो वो गांवके सुधीरेभाइके घरके पास रहेता हेनां वो.. बनवारीलाल वो आपको मीलने आया था.. दोपहेरके बाद भी दुबारा चकर लगा गया.. लगताहे उनको आपसे कोइ अरजन्ट जरुरी काम होगा.. बेचारा बहुत परेसान लग रहा था.. आप अ‍ेक बार उनको मील लेनां..

देवायत : (हसते) हंम.. चल जाते समय उनको मीलकर जाउगा.. भानु.. लगता हे अब बाबा जो कहे रहेथे उनका समय आगया हे.. अब हमारे गांवसे ही सब रीस्तोमे बदलावकी सुरुआत हो चुकी हे.. तो मुजे लगता हे ये बनवारीलाल भी इसी सीलसीले मे आया होगा..

भानु : (हसते) भाइ.. क्या उनका चकर उनकी बहु के साथ हेनां..? साला इस उमरमे भी.. ओर वोभी अपने बेटे की पत्नी.. साली ये आग ही कुछ अ‍ैसी हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखती..

देवायत : (मुस्कुराते) तो क्या हुआ..? इस उमरमे कीसीको इच्छा नही होती क्या..? हंम..? बसंतीभाभी भी तो बडी हे.. वोभी दो जवान बच्चोकी मां हे.. हें..हें..हें..

भानु : (सरमाते हसने लगा) क्या भाइ..? तो आपको सब पता चल गया..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कमीने.. मे भी इसी गांवमे रहेता हु.. मुजेतो क्या आधे गांवको पता चल गया हे.. छोडदे उसे.. अभी अभीतो बडी मुस्कीलसे भावु मानी हे.. अगर उनको तेरे दुसरे लफडेके बारेमे पता चलाना.. तो फीर हमसे भावुको दुबारा मनानेकी उमीद मत रखना.. समजे..?

भानु : (जोरोसे हाथ जोडके हसते) अरे ना बाबा ना.. बडी मुस्कीलसे तो वो मानी हे.. भाइ अब कीसीसे कोइ लफडा नही करना.. घरकी मुर्गी ही बराबर हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) ओर वोभी दो दो मुर्गीया.. हें..हें..हें.. साले बात तो तेरी समजमे आइ.. सुन भानु.. कुछ ही दिनोमे गांवमे अ‍ैसे कइ रीस्ते उजागर होगे.. यही समय हे तुम अ‍ैसे रीस्तोसे नीकल जाओ.. वरना लेने के देने पड जायेगे.. मत भुलो.. ये समयका चकै हे.. घुम फीरके वही आकर खतम होता हे.. जहासे सुरु होता हे.. बात तेरी समजमे आइ..?

भानु : (थोडा सीरीयस होते) हां भाइ.. आप सही केह रहे हे.. अब अ‍ैसा कोइ रीस्ता नही रखना.. वरना मुजे दोनो बीवीओसे हाथ धोना पडेगा.. ओर जीसके साथ लफडा होगा उनको अपनाना पडेगा वो अलग..

देवायत : (हसते) हां भानु.. अब गांवमे सब यही होगा.. इनसे तो अच्छा हे.. तुजे जोभी करना हे.. हमारे खेतोपे ही करना हे.. तुजे मालती रीटा ओर दुसरी मजदुरन कहा मना करती हे..

भानु : (जोरोसे हसते) अच्छा.. तो आपको रीटाने सब बता दीया.. भाइ.. कैसी हे वो..? साली आजभी अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह लगती हे.. वो छोटुसे संतुस्ट नही हे.. तो अ‍ेक दिन सामनेसे आगइ.. क्या आपने हाथ मारलीया..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. जब तुम ओर लखन सहेर गये थे.. बस भानु यही कहेना था.. अब जोभी करना सीर्फ इधर.. वरना बहारतो सब लेनेके देने पड जायेगा.. समजे..?

भानु : (हसते) भाइ.. अ‍ेक बात ओर आपसे कहेनी थी.. वो आपका खास दोस्त.. रमेशभाइ.. आजकल वोभी चर्चा मे हे.. जरा उसेभी समजाइअ‍े.. वो जयाभाभीके साथ बहुत सहेरमे जाता हे.. सायद अबतो उनके घरवालोको भी दोनोपे संका हे.. वो सामतभाइ आपहीके पंचायतके सदस्य हे.. सोचो अगर उनको सब पता चल गया तो क्या होगा..?तबतो रमेशभाइका सरपंचके पदसे जाना तैय हे..

देवायत : हंम.. सही कहा तुने.. चल अब थोडी देरके बाद उनको ही मीलने जाता हु.. तब बात कर लुगा.. साला पता नही सबको क्या हो जाता हे.. पावरमे आतेही सब कमीने ठरकी हो जाते हे.. ओर सुना..

भानु : (मुस्कुराते) बस ओर कुछ नही.. बहुत मजे करलीये.. अब थोडा धंधेपे भी ध्यान देना हे.. बस अ‍ेक बार लखन वहा सेट होजाये.. फीरतो धंधा करनेके बहुत मजा आजायेगा.. बस आपतो सौदा करतेही जाओ..

देवायत : भानु.. अब इधरभी थोडा ध्यान देना पडेगा.. तेरी नइ भाभीकी वजहसे कुछ महीनो मुजे हप्तेमे दो तीन बार सहेरमे जाना पडेगा.. फीरतो उनको इधर ही लाना हे.. हम यहा अ‍ेक बहुत बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. फीरतो कीसीको सहेरमे जाना ही नही पडेगा..

भानु : (हसते) क्या..? तो इसके लीये भाभी यहा रहेनेके लीये मान गइ..? भाइ सहेरमे भी उनका क्लीनीक बहुत अच्छा चलता हे.. तो फीर वो यहा क्यु आयेगी..?

देवायत : हंम.. अरे वो दुसरे डोक्टरका इन्तजाम तो कर सकती हेनां..?

भानु : (हसते) हां.. ये बात तो हे.. चलो अच्छा हे.. भाइ आपका ये आइडीया बहुतही अच्छा हे..

मालती : (चाइ लेकर आते हसते) अरे दोनो मालीक इधरही बैठे हे.. लीजीये चाइ पीजीये.. बहार उन दोनो मालीकको देकर आइ हु.. ओर भानुभाइ.. वो खाद डालना हे.. आप चार बोरीया गोडाउनसे नीकाल दीजीये..

भानु : (हसते) हां अभी चाइ पीकर नीकाल देता हु.. तुम हरीया ओर दो मजदुरोको इधर भेजदे.. लेजाये..

फीर दोनोने चाइ पीली तो मालती देवायतकी ओर कातील स्माइल करके चली गइ.. ओर तभी हरीया ओर दो मजदुर आगये तो भानु उनके साथ गोडाउनमे चला गया.. तब देवायत फोन घुमाते कुछ सौदेबाजी करने लगा.. फीर आधे घंटेके बाद वो भानुके कहेकर वहासे नीकल गया.. ओर गांवमे सीधाही सुधीरकी क्लीनीकपे चला गया.. तो वहा बरखा ओर मुना बेठे थे तो देवायतको देखतेही दोनो सरमाके हसने लगे..

देवायत : (हसते) कहो मुना कैसे हो..? कोइ तकलीफ तो नही..? कहा हे तुम्हारा डोक्टर.. हें..हें..हें..

मुना : (हसते) जी.. ठाकुर साहेब.. बस अंदर हे.. जाइअ‍े आप अभी अंदर कोइ पेसन्ट नही..

तब देवायत अंदर चला गया तो सुधीर उनको देखतेही खुस होगया.. ओर उनसे हाथ मीलाके सामनेकी चेरपे बेठनेके लीये कहा.. तो मुना दोनोके लीये पानी लेकर आगया.. फीर देकर चला गया..

सुधीर : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. मुनाकी मा को सब पता चल गया हे.. उनको संका हुइ तो कल बरखाको चेक करवाने सहेर ले गइथी.. तो सी इस.. प्रेगनेन्ट.. मुना कहेता था उनकी मां बडी मुस्कीलसे बच्चा ना गीरवनेके लीये मानी.. उनकी मां कैसे मान गइ वो उसने नही बताया.. उसने इस दोनो भाइ बहेनके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. बस अब इनके पीताजीको आप समजा देना..

देवायत : (मुस्कुराते खुस होते) चलो ये तुमने अच्छी खबरदी मुजे.. बस अ‍ैसेही धीरे धीरे हमे सबको नीपटना हे.. यार.. भानु केह रहाथा आज तेरा पडोसी बनवारीलाल दो बार मेरे खेतोपे आकर चला गया.. क्या उनको कुछ काम था..? तुजे इनके बारेमे कुछ पता हे..?

सुधीर : (हसते) पता नही भाइ.. सुबह उनको देखा तब कुछ परेसान दीख रहाथा.. लगता हे वो कोइ नइ मुसीबतमे हे.. आप अ‍ेक बार उनके घर जाकर मीललो.. मे अभी उसे फोन करके केह देता हु..

कहेते सुधीरने फोन उठाकर बनवारीलालको फोन करदीया.. ओर देवायतके क्लीनीकपे आनेकी सुचना देदी तब बनवारीलालाने देवायतको उनके घरपे अकेले भेजनेको कहा.. ओर फोन रख दीया.. तब..

सुधीर : (हसते) भाइ.. वो अपने घरपेही हे.. आपको अकेले मीलने बुलाया हे.. आप जाओ..

फीर देवायत वहासे चला गया तो बरखा उनके सामने देखकर सरमाके हसने लगी.. ओर देवायत अपनी बाइक लेकर बनवारीलालके घर चला गया.. तब गलीमे अ‍ेकल दोकर लेडीस खडी थी.. जो देवायतको देखतेही उनके सामने हसने लगी.. ओर अपने घरपे आनेके लीये कहेने लगी.. तब देवायत हसते हुअ‍े हाथ हीलाते बनवारीलालाके घरके अंदर चला गया ओर दरवाजा बंध करके उनके घरमे आगया.. तब..

बनवारीलाल : (हसते सोफेसे खडे होते हाथ मीलाते) आइअ‍े.. आइअ‍े ठाकुरजी.. बैठीये.. कैसे हे आप..?

देवायत : (सोफेपे बैठते हसते) बस मजेमे.. हें..हें..हें.. बनवारीलालजी.. अब आपतो मुजे ठाकुरजी मत कहीये.. आपके बैटे जैसा हु.. तो नामसे ही बुलाइअ‍े..

बनवारीलाल : (हसते) अरे अ‍ैसे कैसे नामसे बुलाउ.. आपतो यहाके राजा हे.. भलेही लोकतंत्र आगया हो.. लेकीन हम सब आजभी आपको हमारा राजा मानते हे.. वरना इस गांवके बारेमे इतना कोइ भला कर सकता हे..? इतना तो सरकारभी नही करती.. कहीये क्या पीयेगे..? चाइ के कुछ ठंडा..?

देवायत : (हसते) बस थोडीसी चाइ ही पीला दीजीये.. कहीये कैसे हमे याद कीया.. भानु केह रहाथा आप हमारे खेतोपे दो बार आयेथे.. कुछ अरजन्ट काम था..?

बनवारीलाल : (थोडा परेसान होते) अ‍ेक मीनीट.. (थोडी उची आवाजमे) बींदीया.. देख ठाकुरजी आये हे.. दो कप फस्टक्लास चाइ बना देना.. (देवायतकी ओर धीरेसे) ठाकुरजी.. अब मे आपसे सब कैसे कहु..?

देवायत : बनवारीलालजी.. जोभी कहेना हे बीसन्दास कहीये.. क्युकी मुजे आपके बारेमे थोडा बहुत पता हे.. जोभी कहेना बेजीजक कहीये.. ताकी हम आपकी सभी समस्याका हल नीकाल सके.. ओर आप बीलकुल चीन्ता मत कीजीये.. क्युकी अ‍ैसी सीचुअ‍ेशनमे मे ये रीस्तेको गलत नही मानता..

बनवारीलाल : (थोडा खुस होते हाथ थामते) थेन्क्यु ठाकुरजी.. बस इसीलीये मे आपको मीलने आया था.. क्युकी मुजे विस्वासथा की आपही इस मामलेको सुलजा सकते हे..

देवायत : कहीये क्या बात हे.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..? काफी परेसान दीखते हे आप..

कहातो बनवारीलाल खडे होकर अपने रुममे चले गये.. ओर कुछही देरमे अ‍ेक बडा लीफाफा लेकर आगये.. ओर देवायतके पास नजदीक बैठ गये.. फीर लीफाफा खोलकर उनमेसे कुछ तीन चार पेपर नीकाले.. ओर देवायतको पढनेके लीये दे दीये.. तो देवायत अ‍ेक अ‍ेक पेपर गौरसे पढने लगा.. तो उसे पता चलाकी ये सब पेपर उनको बेटे ओर उनकी बहुके डीवोर्सके पेपर हे.. उनमेसे तीन पेपर डीवार्सके थे.. ओर अ‍ेकमे उन्होने अपने पीताजीको चीठी लीखीथी.. तब देवायतसे सब पढलीया ओर पेपर वापस दे दीये तब..

बनवारीलाल : (थोडा परेसानीमे) देखा ठाकुरजी.. क्या इस लीये मेने इस कमीनेको पैदा कीयाथा..? उलुका पठा.. अ‍ेकतो यहा अपनी बीवीको सम्हाल नही पाया.. ओर उपरसे.. दुबइ चला गया.. यहा घरकी इजत बचानेके लीये मुजे ना चाहते हुअ‍े भी क्या क्या करना पड रहा हे.. अ‍ेक जवान लडकी कीतने दिनो तक अपने पतीसे दुर रहेती..? कहेता था वहा सेट होजाउगा तब दो तीन महीनेमे ही बींदीयाको लेजाउगा.. ओर ये..?

देवायत : (मुस्कुराते) बनवारीलालजी.. इसमे उसने लीखा हे डीवोर्सके बदलेमे वो बींदीयाको तगडी रकम देनेके लीयेभी तैयार हे.. क्या इतने दिनोमे उन्होने इतने रुपीये कमा लीये..? कौन दे गया ये आपको..?

बनवारीलाल : (गहेरी सांस लेते) ठाकुरजी अब आपसे मे क्या कहु..? कलही सहेरसे उनका वकील आकर देगया.. उसनेभी कल मुजसे फोनपे बातकी.. कल सालेने सब मुजे खुलके बता दीया.. ओर बींदीयासे भी बात करके उनकोभी सब बता दीया.. तो बेचारी कलसे रो रही हे..

देवायत : (हसते) अगर आपको अ‍ेतराज ना होतो क्या सब बाते मुजे सुरुसे बता सकते हे..?

बनवारीलाल : (हसते) भाइ इसीलीयेतो आपको मीलने आया था.. इसमे मेरा तो कुछ दिमाग ही काम नही कर रहा.. अगर आपसे सब सचाइ नही बताउगा तो आप इनका हल कैसे नीकालेगे.. कहोतो मे बींदीयासे भी आपकी बात करवाता हु.. (थोडा जोरोसे) बींदीया..

बींदीया : (कीचनसे) जी.. अभी चाइ लेकर आइ.. बन गइ हे..

तब बींदीया माथेपे पलु ढककर अ‍ेक ट्रे मे दो कत चाइ लेकर अपनी नजरे जुकाते आइ.. ओर दोनोको चाइ देकर वापस कीचनमे जाने लगी.. तो बनवारीलालाने उसे रोक दीया.. ओर वही बेठनेके लीये कहा तो बींदीया बहुतही सरमाइ.. ओर संकोच करते वही नजरे जुकाते दुर सोफेपे बैठ गइ.. तो देवायत ओर बनवारीलाल चाइ पीते बाते करने लगे..

देवायत : बनवारीलालजी.. कहीये मुजे सुरुसे सब जानना हे..

बनवारीलाल : ठाकुरजी.. बींदीया ओर मेरा बेटा अ‍ेकही कोलेजमे साथमे पढते थे.. बींदीया उनके मा बापकी अ‍ेक लौती संतान थी.. इनके पीताकी सहेरमे अ‍ेब बहुत बडी सारीकी दुकान हे.. कुल मीलाके सुखी सम्पन परीवार हे.. मेरा बेटा ओर बींदीया अ‍ेक दुसरेसे बहुत प्यार करते थे.. तीन साल तक दोनोके बीच प्यार रहा.. लेकीन इनके पीताजी बीरादरीसे बहार इनकी सादी करना नही चाहते थे.. वो दोनोके रीस्तोके खीलाफ थे..

देवायत : (हसते) तो फीर बींदीया इधर कैसे आगइ..? क्या दोनोने भागकर सादी करली..?

बींदीया : (सरमाते धीरेसे) जी ठाकुरजी.. हमारी कोलेज खतम होतेही हम दोनोने कोर्टमे जाकर मेरीज करली.. ओर मे यहा आगइ.. तो मेरे माता पीताने मुजसे सब रीस्ते खतम करलीये.. उसने मेरी साइन लेकर मुजे अपनी सभी प्रोपर्टीसे बेदखल करदीया.. तबसे मे वही हु..

बनवारीलाल : ठाकुरजी.. अब ये बेचारी अपने मायकेभी तो नही जा सकती.. ओर वो कमीना इसे मजधारमे छोडके चला गया.. कल ही पता चला वहा वो कीसी बहुत बडे गोल्डके सोरुममे नोकरी करता हे.. ओर उनके मालीककी लडकीसे ही सादी करली हे.. दोनोको अ‍ेक छोटा बच्चा भी हे.. ये बात उसने कल हम दोनोको बताइ.. इसीलीये उनके पास इतने पैसे हे.. उनकी बात सुनकर मेरातो दिमाग ही सुन हो गया.. अब आपही कहीये हम क्या करे..? मुजे मेरी चीन्ता नही इस बेचारी बींदीयाकी चीन्ता हे..

देवायत : बींदीया.. पहेले तुम कहो तुम क्या चाहती हो..?

बींदीया : (सरमाते नजर जुकाते) ठाकुरजी.. अब मे क्या कहु..? बस मुजे इतना पता हे मेरे लीये सब दरवाजे बंध हे.. मे मायके तो जा नही सकती.. अगर बाबुजीको अ‍ेतराज ना होतो मे यही रहेना चाहती हु..

बनवारीलाल : हां ठाकुरजी.. अबतो आपभी सब जानते हे.. वो मेराभी अ‍ेक लोता बेटा था.. अब हम दोनो अ‍ेक दुसरेके सहारेही अपनी जींदगी जी लेगे.. बस यही हम दोनोकी इच्छा हे.. अब आपही कहीये हम क्या करे..? क्युकी गांवमेभी सब लोग हमारे बारेमे तरेह रेहकी बाते करते हे.. तो इस हालतमे तो हमारा यहा रहेना मुस्कील होजायेगा..

हमारी थोडी बहुत खेती बाडीकी जमीनथी तो बाकीकी जमीन आपने हमे वापस दीलवादी.. ओर सहेरमे दो दुकान कीरायेपे दी हुइ हे.. तो उसीमे हम दोनोका गुजारा हो जाता हे.. बाकी पुर्खोकी मीलकत हे.. तो मे चाहता हु ये सब अब बींदीयाके नाम करदु.. ताकी भवीस्यमे उनको भी कोइ तकलीफ ना हो.. क्या कहेते हो आप..? मे अब मेरे बेटेको फुटी कोडीभी देने वाला नही हु..

देवायत : (हसते) बनवारीलालजी.. ये आपने बहुत अच्छा सोचा हे.. मेरी मानीये बींदीयाको कहोकी आपके लडकेको डीवोर्स देदे.. ओर उनके बदलेमे वो जो तगडी रकम दे रहाहे उसे ले लीजीये.. ओर आप दोनो उसे भुलजाइअ‍े.. अब मे जो आप दोनोको कहेने जा रहा हु वो ध्यानसे सुनीये..

कहातो बींदीया अ‍ेक आस भरी नजरोसे थोडा खुस होते देवायतकी ओर गौरसे देखने उनकी बाते सुनने लगी.. तभी देवायत बनवारीलाल ओर बींदीयाको आने वाले समयमे गांवमे कोनसा बदलाव आने वाला हे उनकी बात करता हे.. वो बाबाकी बातेभी बताता हे तब बनवारीलाल ओर बींदीयाके चहेरेपे अ‍ेक उमीद की चमक साफ दीखाइ देने लगी.. दोनोही चहेरेपे मुस्कानके साथ देवायतकी बाते गौरसे सुन रहेथे..

बनवारीलाल : (खुस होते) ठाकुरजी.. आप जो केह रहे हे क्या वो सब सचमे होने वाला हे..?

देवायत : (हसते) हां बनवारीलालजी.. ओर वोभी बहुत जल्द.. जीस तराह हीमाचलमे जो बदलाव हुआ हे वोही बदलाव ना सीर्फ हमारे गांवमे.. बल्की आजु बाजुके सभी गांवोमे होगा.. बस उनका अ‍ेकही मक्सद होगा.. अब यहाभी अ‍ेकभी विधवा या त्यक्ता नही रहेनी चाहीये.. सबको अपनी तराहसे खुलके जीनेका अधीकार होना चाहीये.. सब कुछ प्रकृतीके हीसाबसे चलना चाहीये.. सायद इसीलीये आप दोनो रीलेशनमे आये हो.. आजसे आप दोनो अपने दिमागसे नीकालदो.. की ये मेरी बहु हे.. या ये मेरे ससुर हे..

बनवारीलाल : (खुस होते हसते) तबतो सोनेपे सुहागा होगा.. कहीये इसके लीये हमे क्या करना होगा..?

देवायत : (मुस्कुराते) बस कुछ नही.. जीस दिन ये बात सामने आयेगी तब आप दोनोको खुलकर मेरा समर्थन करना हे.. फीर देखो म ेही आप दोनोकी सादी करवा दुगा.. (बींदीयाकी ओर देखते) बींदीया.. क्या इसके लीये तुम तैयार हो..?

बींदीया : (सरमाते हसते) जी ठाकुरजी.. मे अब इनके साथ ही रहेना चाहती हु.. मेनेतो कबसे इनको अपना पती मानलीया हे.. आप हमारी सादी करवा दीजीये.. ताकी हमे गांवमे उल्टा सीधा सुनना ना पडे.. गांवमे हमारी बहुत बदनामी हो चुकी हे.. ओर यहा जमीन जायदाद हेतो हम इस गांवकोभी तो नही छोड सकते..

देवायत : (मुस्कुराते) बस.. आपसे अ‍ेकही बीनंती हे.. मुजे पता हे आपके पेटमे अभी जो बच्चा पल रहा हे.. उसे इस खुबसुरत दुनीयामे आने दीजीये.. बाकी मे सबको जवाब दे दुगा.. अब आपको यहा कोइ तकलीफ नही होगी..

बनवारीलाल : (सरमाते धीरेसे) ठाकुरजी.. ये सब आपको कैसे पता..? आइ मीन.. बींदीया पेटसे हे..

बींदीया : (सर्मसार होते खडी होते) अब अगर मेरा कुछ काम नही हे.. तो मे अंदर जाती हु.. आप लोग बाते कीजीये..

देवायत : (जब बींदीया चली गइ) बनवारीलालजी.. आप दोनो जीस होस्पीटलपे बच्चेके लीये गयेथे वो डोक्टर मेरी बीवी हे.. आपतो मेरे भाइ बहेनकी सादीमे नही आये थे.. तो आपने उनको यहा देखा नहीनां इसीलीये आपको मालुम नही हे.. हमने दो दीन पहेलेही आश्रमपे सादी करली हे..

बनवारीलाल : (मुस्कुराते) माफ करना ठाकुरजी.. अब हम दोनो आपके यहा कीस मुहसे आते.. सबको हम दोनोके बारेमे पता हे.. तो हमे बहुत सर्मीन्दगी महेसुस होती हे.. इसलीये हम दोनो नही आये.. सोरी..

देवायत : (हसते) अरे सोरी मत कहीये.. बस मेतो सीर्फ बता रहा हु.. मेरी बात मानीये.. उनके वकीलको बुला लीलजीये.. ओर आपके बेंकके खातेमे पैसे जमा होतेही उनको साइन करके दे दीजीये.. ओर आपकी सब प्रोपर्टीमे अपने बेटेको बेदखल करनेका अ‍ेक पेपर आपभी अपने वकीलसे तैयार करवा लीजीये.. अबतो आप दोनो खुलकर अपनी लाइफ जीये.. कीसीसे डरनेकी कुछ जरुरत नही.. अ‍ैसे तो हमारे गांवमे बहुत रीस्ते पनप रहे हे.. जो आपको पताभी नही हे..

बनवारीलाल : (मुस्कुराते) हां.. थोडा बहुत पता हे मुजे.. लेकीन फीरभी हम दोनो ज्यादा घरसे बहार नही नीकलते..

देवायत : (हसते धीरेसे) बनवारीलालजी.. लेकीन बींदीया आपके साथ रीलेशनमे आनेके लीये तैयार कैसे होगइ..? क्या मुजे बता सकते हे..

बनवारीलाल : (मुस्कुराते) अब आपसे इतना कुछ जानलीया तो अब आपको बतानेमे कैसी सर्म.. सुनीये.. जबसे मेरा बेटा चला गयाहे तबसे बींदीया बहुतही मायुस लग रहीथी.. जब जब दीन नीकलते गये तब उनकीभी अपने पतीके लीये तडप बढने लगी.. फीर वो बार बार मेरे सामनेही देखती रहेती थी.. ओर हर राते अपने बीस्तरपे करवटे बदलती रहेती.. उनकी आंखोसे नींद कोसो दुर रहेने लगी.. ओर वो बहुतही तडपती थी..

देवायत : (हसते) हां मे जानता हु अ‍ेक सादी सुधा ओरतोके लीये पतीसे दुर रहेना कीतना मुस्कील होता हे..

बनवारीलाल : ठाकुरजी.. वो इतनी तडपी हेकी क्या बात करु..? रातको जब मे सो जाता तो वो दो तीन बार मेरे रुममे आके मुजे देखती रहेती.. ओर अ‍ेक दिन मेरी आंख खुल गइ तो वो गभराके अपने रुममे चली गइ.. तब मे सबकुछ समज गया.. ओर मे खडे होकर उनके रुममे चला गया.. तब वो सीर्फ मुजेही देखती रही..

बेचारी मुजे खुलके केहभीतो नही सकती.. मे उनकी नजरको पहेचान गयाकी वो क्या कहेना चाहती हे.. ओर मे उनके पास बेडपे जाकर बैठ गयातो उसने मुजे बेडपे जगाह देदी.. ओर उस दिन हम दोनोही बहेक गये.. ओर हमारा मीलन हुआ.. हम दोनोने पुरी रात प्यार कीया.. दुसरे दिन बींदीया बहुतही खुस नजर आ रहीथी.. तब उस दिन वो पुरा दिन चेइनकी नीद सोइ..

देवायत : (हसते) हंम.. तो तबसे दोनो रीलेशनमे हो..

बनवारीलाल (हसते) हां ठाकुरजी.. फीरतो ये सब रोजका हुआ.. हम दोनोही अ‍ेकही कमरेमे अ‍ेकही बीस्तरमे साथ सोने लगे.. आपतो जानते हे आपकी भाभीको गुजर गये कीतने साल होगये थे.. तो मेभी इसी आगमे जल रहाथा.. बस.. तबसे हम दोनो मीया बीवीकी तराह रहेते हे.. बींदीया दो बार प्रेगनेन्टभी हो चुकी हे.. लेकीन दुनीयाके डरसे हमे हमारा बच्चा गीराना पडा.. तब उस दिन हम दोनो बहुत आंसु बहाते थे..

खेवायत : (इमोस्नल होते हाथ थामते) बस.. बनवारीलालजी.. ओर कुछ मत कहीये.. सबको लगता होगा की आप अपनी अयासीके लीये ये सब कर रहे हे.. लेकीन असीलीयत कीसीको नही पता.. अब आपको अपने बच्चेको गीरानेकी जरुरत नही हे.. मे सृतीसे बात करलुगा हमारी नइ भाभीका अच्छेसे खयाल रखे..

बनवारीलाल : (हाथ थामते) थेन्क्स ठाकुरजी.. ना जाने कीतने महीनोसे हम दोन सीनेपे अ‍ेक बोज लेकर रहेते थे.. तो आज आपसे बात करके जी हल्का होगया.. आप आते रहेना.. अब मुजे कीसीसे नही डरना हम अपने बच्चेको इस दुनीयामे लायेगे.. अब तो भगवान भी हमारे साथ हे..

वो जोभी हमे दे उसेही अपना मानकर पालना हे.. ओर अब मे जीयुगाभी कीतना.. तो मेरे जानेके बाद इतनातो हे की बींदीया पुरी जींदगी आरामसे हमारे परीवारको पाल सके.. आप जैसे लोग इस गांवमे हे तो मुजे बींदीयाकी क्या फीकर.. हें..हें..हें..

देवायत : (खडा होते हसते) ठीक हे बनवारीलालजी.. अब आज्ञा दीजीये.. मे चलता हु.. बस अब जब भी सबको इकठा करु आप मेरा समर्थन करना.. मे आपके साथ हु..

बनवारीलाल : (साथ खडा होते) जी ठाकुरजी.. आप इस बारेमे नीस्चीत रहीये.. मे ओर बींदीया खुलकर आपका साथ देगे.. इसमे हमारा भी स्वार्थ हे.. आज आपने सब सही करदीया..

फीर देवायत वहासे नीकल गया.. ओर सीधाही पंचायतकी ओफीसमे चला गया.. तो वहा रमेश सामतभाइ ओर पंचायतके ओर सदस्यके साथ वंदना रश्मीभाभी सब बैठकर आपसमे स्कुलकी चर्चा कर रहे थे.. देवायतके आतेही उनको देखकर सबके चहेरेपे रोनक आगइ.. ओर सबने उनका अभीवादन कीया ओर उनको बेठनेके लीये चेयर देदी.. तब वंदना उनको देखतेही सरमाने लगी.. तो रश्मी देवायतको देखके हसने लगी..

रश्मी : (हसते) अरे.. आजतो देवरजीभी सही मौकेपे आगये..? आइअ‍े.. आइअ‍े.. बैठीये..

देवायत : (हसते) क्यु आज सारी मंडली बीना नोडीस अ‍ेक साथ इकठी होगइ.. कुछ हुआ हे क्या..? हें..हें..हें..

रमेश : (हसते कागज देते) हां भाइ.. सबका कोटेशन आगया हे तो उसी बातपे चर्चा कर रहेथे आपभी देखलो.. काम कीसे देना हे.. आज सही मौकेपे आगये आप.. आप कहो उन्हीका टेन्डर उपर भीजवा देते हे..

देवायत : (पेपरपे नजर डालते) रमेश सीर्फ भाव नही देखना.. कामभी अच्छा चाहीये.. ओर वो होस्पीटलके लीये भी जमीन चाहीये.. तो उनकाभी ठराव करके पेपर भेजदे.. हमे यहा जल्दसे जल्द अ‍ेक होस्पीटल बनानी हे..

१ पंचायत सदस्य : ठाकुरसाब येतो आपने बहुत अच्छा सोचा.. अब हमारे गांवमेभी इनकी सख्त जरुरत हे.. इसके लीये हमे सहेर जाना पडता हे.. सबको बहुत परेसानी होती हे.. आस करके लेडीसको..

सामत : हां ठाकुरसाब.. हम इसमे जीजानसे काम करेगे.. यहा बडी होस्पीटल होगीतो गांवकाभी बहुत वीकास होगा.. आप जल्दसे जल्द इसपे जोभी कार्यवाही करनी हे करवादो..

देवायत : (हसते) हां.. इसीलीये तो इधर आया हु.. ओर रमेश ये रश्मीभाभी के घरका क्या हुआ..?

रमेश : (हसते) भाइ.. वहा तो कबका काम सुरु हो चुका हे.. वहा मे ओर सामतभाइ काम देख रहे हे.. भाइ अभी यहा सभी सभ्य हाजर हे तो अभी ठराव लीख लेते हे.. तो सबकी साइनभी होजायेगी.. तो अ‍ेक दो दीनमे ही मे सहेर जाकर पेपर सबमीट करवा दुगा.. आप अपने जील्ला पंचात वाले दोस्तसे बात कर लीजीयेगा.. लगता हे आपकी बहुत खास दोस्त हे.. आपका नाम लेतेही सब काम फटाफट हो जाता हे..

रश्मी : (हसते) हां ये सही हे.. अभी ठहेरो मे ठराव लीख देती हु.. आप बोलते जाओ.. मे लीखती जाउगी..

कहेते रश्मी बुक लेकर ठराव लीखने लगी.. ओर रमेश उसे क्या लीखनाहे कहेता गया.. फीर सबने ठराब पढलीया ओर सबने सहमती देकर साइन करदी.. फीर सब घर जानेके लीये खडे होने लगे.. तो रश्मीने धीरेसे वंदनाको अपने घरपे आनेक लीये कहा तो वंदना सब समज गइ.. ओर उसने अपने पापाकी हाजरीकी वजहसे घर आनेको मना करदीया.. ओर रश्मीने जान बुजकर देरी की.. सब चलने लगे तब..

देवायत : रमेश.. तु घरपे ही हेनां..? मे अभी डीनर करके आता हु.. मुजे तुमसे थोडा काम हे..

रमेश : (हसते) हां भाइ आइअ‍े.. वही साथमे चाइ पीयेगे.. (कहेते चला गया)

रश्मी : (सरमाते हसते) चलीगे पतीदेव.. मुजे घर छोडने नही आयेगे..?

देवायत : (हसते) हां.. मेरी बीवीसे कीतने दिन हो गये नही मीला चल आता हु..

फीर दोनोही साथ चले गये ओर रश्मीके घर आगये.. तबतक साम ढल चुकी थी ओर अंधेरा छाया हुआ था.. दोनोही घरमे चले गये तब रश्मीने दरवाजा बंध करलीया.. ओर दोनो रुममे चले गये.. तब कुछही देरके बाद दोनोके कपडे टेबलपे अ‍ेक साथ पडे थे.. ओर देवायत रश्मीको बेडके कीनारे लीटाके नीचे खडे खडे ही रश्मीपे जुककर उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा..





अबतक रश्मी दो बार जड चुकीथी.. ओर आखीरमे दोनोही अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीचते साथमे जडने लगते हे.. फीर दोनोही बाथरुममे जाकर नहाने लगते हे तब वहाभी देवायतने रश्मीको नहाते पीछेसे लंड डालकर चोद लीया.. फीर दोनोही बहार आगये.. ओर अपने अपने कपडे पहेनकर रेडी होगये.. ओर बहार आकर सोफेपे बैठ गये तब रश्मी देवायतकी गोदमे उनके गलेके हाथ डालके बैठ गइ.. ओर होंठ चुमलीया..





रश्मी : जानु.. अब वंदना पुरी तराह रेडी हे.. आप उसे कब मीलोगे..? आज आपने उनको मीलने के लीये कहाथा.. लेकीन रमेशभाइकी वजहसे वो साथमे नही आइ..

देवायत : (गाल चुमते) नही रस्मी.. अभी आज बहुत काम हे.. बस सही मौका मीलने दे.. मुजे उनसे मंदिरमे जाकर सादीभी करनी हे.. तब हम दोनोकी सुहागरात होगी.. क्युकी वंदुकीभी कुछ तम्मना होगी की उनकी सादी होजाये.. ओर मे ये काम चारुभाभीकी हाजरीमे करना चाहता हु.. उनकीभी इच्छा हे की वंदुकी सादी मुजसे होजाये.. फीर भलेही वंदना उनके घरपे रहेती..

रश्मी : (खुस होते होंठ चुमते) जानु तबतो बहुत ही अच्छा होगा.. तब मेभी साथ चलुगी.. क्या मुजे लेजाओगे..? तो मे कुछ प्लान करती हु..

देवायत : (हसते) हां लेकीन अभी नही.. मे जब कहु.. तब हम सहेरमे चले जायेगे.. या फीर पुनोके घर चले जायेगे.. क्या कहेती हो..?

रश्मी : (हसते) जानु.. अ‍ेक बात कहु..? भलेही सादी बादमे करलो.. लेकीन मेरे खयालसे अ‍ेक बार उनको सादीसे पहेले मीललो.. क्युकी वो अब पुरी तराह रेडी हे.. वोभी पुनोदीदीकी तराह सादीसे पहेले अ‍ेक बार आपको मीलना चाहती हे..

देवायत : (हसते) तुम फीकर मत करो.. ये मौकाभी हमे बहुतही जल्दी मीलजायेगा.. चल अब चलता हु..





फीर दोनोही होंठ मीलाके चुमने लगे.. तब देवायत रश्मीके बुब्स मसलते उसे चुमने लगा.. तो रश्मी सरमाके जटसे दुर हट गइ ओर हसने लगी.. फीर देवायत वहासे नीकल गया ओर सीधाही हवेलीपे आ गया तो सब उनकाही इन्तजार कर रहेथे.. ओर राजीव लखन मंजु चंदा लता नीर्मला भावना सब अ‍ेक साथ डीनर करनेके लीये बैठ गये.. तब खाना खाते देवायतने कहा..

देवायत : लखन.. अब चार पांच दिनोके अंदर तुजे ओर लताको सहेर रहेने लीये जाना हे.. तो कल लताको उनके मायके छोड आना.. जानेसे पहेले भलेही वो वहा दो तोन दिन रुके.. क्यु लता जाओगीना अपने मायके..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) जी भैया.. आज ही मम्मीका फोन आयाथा.. वोभी यही केह रही थी.. क्या भाइसे आपकी बात हुइ थी..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. सामकोही मेने भानुको बता दीयाथा..

मंजुला : (हसते) लता हमभी कल मायके जा रही हे.. तो तुम भी चली जाओ.. हें..हें..हें.. लखन छोड देगा..

भावना : हां लता मेभी कल दीदीके साथ जा रही हु तो तुजे नही मीलपाउगी.. कुछ दिन वही रहुगी.. फीर हमारे घर चली जाउगी तब तुम वापस आना..

लता : (सरमाते हसते) जी दीदी.. आप मुजे फोन करना मे चली आउगी..

राजीव : (हसते) अरे वाह.. क्या बात हे..? भाभीसे.. दी..दी..? बेटा ये तेरी भाभी हे तो उनको दीदी क्यु कहेती हे..?

लता : (सरमाते हसते) जी..पापा.. अब ये मेरी भाभी नही हे.. मेरी बडी बहेन हे.. मेरी सादीसे पहेलेही हम बहेने हो गइ हे.. तो मे तबसे इनको दीदी ही हेती हु.. हें..हें..हें..

राजीव : (खुस होते) जीती रहो बेटा.. चलो कोइतो मेरी भावुको वहा प्यार करता हे.. बेटा कभी हमारे घर तुम भी आना.. वोभी तो तेरा ही घर हे.. यही समजले वोभी तेरा मायका हे..

नीर्मला : (हसते) हां लता.. वोभी तेरा मायका हे.. जबभी दिल करे चली आना..

लता : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी.. जरुर आउगी.. बडी दीदीके साथ.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) क्या बात हे देवरानी.. आपकोतो सब जगाहसे प्यार मील रहा हे..? हमेतो कोइ पुछता ही नही.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) चंदा.. तुजे अ‍ेक लगाउगीनां.. अरे मेरी मंजु भावुसे पहेले वो तेरा मायका हे.. तुमभी चली आना.. मे तो कहेतीहु कल तुम भी हमारे साथ चल.. तुम क्यु अ‍ैसी बाते कर रही हे..?

चंदा : (हसते) जी दीदी मेतो मजाक कर रही थी.. क्या हेना सब लताको प्यारसे केह रहेथे तो मुजे लगा सब प्यार यही बटोरके लेजायेगी.. इसीलीये कहा.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) चंदा.. तुही तो मेरी सबसे बडी बेटी हे.. मेने तुजे अपनी छोटी बहेन कभी नही माना.. तो तुम क्यु अ‍ैसा सोचती हो..? मे सीर्फ तेरा भाइ ही नही तेरा बापभी हु..

कहातो चंदाकी आंखसे आंसुओकी धारा बहेन लगी.. ओर खडी होकर राजीवको हग करलीया.. ओर राजीवके पीछे उनके कंधेपे सर रखके आंसु बहाती रही.. तब राजीवने हाथ पीछे लेजाते चंदाके सरपे हाथ रख दीया.. तभी मंजुने हसते हुअ‍े उनको पानी पीलाया.. ओर अपनी जगाहपे वापस बीठा दीया.. तब चंदा आंसु पोछते मुस्कुराने लगी..

राजीव : (हसते) अरे मेरी बेटीतो बहुतही इमोस्नल हे.. कैसे रो पडी.. जीती रहो बेटा.. बस अ‍ैसेही तुम सबका हसी खुसी संसार चलता रहे.. भगवानसे यही प्रार्थना हे.. मेरा देवु सबको सम्हाल रहा हे तो मुजे अब कीसीकी चीन्ता नही हे.. चलो भाइ मेने तो अब खा लीया हे..

फीर सबने खाना खालीया.. तो चंपाभाभी ओर रजीया सब बर्तन समेटर खानेपे बैठ गइ.. ओर बाकीके सब लोग होलमे टी.वी. चालु करके बैठ गये.. तब नीर्मलाने राजीवको उनकी दवाइआ पीलादी.. तब कुछही देरमे राजीव रुममे जाकर सोगया.. तो लखन लताभी उपर अपने रुममे सोने चले गये.. भावनाभी बच्चीको लेकर अपने रुममे जाकर दुध पीलाने लगी.. तभी विजय रोने लगा तो चंदा जटसे जाकर उनको सम्हालके सुलाने लगी.. देवायतभी बहार घुमने चला गया तब नीर्मला ओर मंजुही रेह गये.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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