सृती : (लंडको सहेलाते होठोको चुमते) जानु.. अेक बार फीर यहा मुजे चोदलोनां.. आपसे चुदाइ करवाते बहुत मजा आता हे.. चलो फटाफट चोदलो.. अभी होजायेगा..
देवायत : (हसते) सृती.. तुभी अब मंजुकी तराह बहुतही ठरकी हो गइ हे.. चल आजा..

कहातो सृती देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके लंडपे साबुन लगाते सहेलाने लगी.. फीर क्या..? कुछही देरमे अंदर देवायत सृतीकी खडे खडे ही जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. तो सृतीभी मजसे अपनी कमर हीलाते देवायतका चुदवानेमे साथ दे रहीथी.. तब कुछही देरकी धमाकेदार चुदाइके बाद दोनोही अेक साथ जडकर सांत होगये.. ओर अेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे.. तभी..

सृती : जानु.. अेक बात बताओ.. अभी अभी पुनोदीदीने कहा की हमारा देवर अपनी बीवीको प्यार करके बीस्तरपे पडा होगा.. तो लता तो उनके मायके गइ हे.. तो फीर पुनमदीदी कीस बीवीकी बात कर रही थी..? क्या लखनभैयाकी अेक ओर वाइफ हे..?
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. सृती अभी ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. खास करके लताको.. अभी उनको इस बारेमे कुछ नही पता.. लखनने लतासे पहेले हमारी रजीयासे गांधर्व सादी करली थी.. तबसे वो लखनकी बीवी हे.. ओर जबभी लता नही होती तब वो लखनके साथ सोती हे..
सृती : (सरमाते हसते) क्या..? दोनो के दोनो भाइ कमीने हो.. पता नही अभी कीतनी सादीया करोगे..
देवायत : (मुस्कुराते) क्यु.. तुजे बुरा लगा..? हंम..? हें..हें..हें..
सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे नही नही.. मेतो मजाकमे केह रही हु.. जानु.. कुछभी हो.. आप हमसे कभी नाराज मत होना.. मे सहेन नही करपाउगी.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. भलेही आप कीतनीभी सादीया करलो.. लेकीन हमे कभी मत भुलना.. क्युकी अैसा प्यार तो कुछ हम जैसी नसीब वाली को ही मीलता हे..
देवायत : (सर चुमते) हंम.. चल.. ठीक हे.. मुजेतो पता ही नही थाकी मेरी इस बीवी मुजे इतना चाहती हे..
सृती : जानु.. मे अपनी जानसेभी ज्यादा आपको चाहती हु.. बस.. अब कोइ ओर सवाल नही.. चलो मुजे भुख लगी हे.. हें..हें..हें..
फीर दोनोही नहाके बहार नीकल गये ओर फटाफट कंपलीट तैयार होकर बहार आगये.. तब तक पुनमने रजीयाको कहेकर लखनको जगाया.. तब रजीया बहुतही समसार होगइ.. ओर उपर जाकर लखनको जगाने लगी.. तो लखन उनके साथ प्यार करना चाहता था.. लेकीन रजीया पुनमदीदीका हवाला देकर बच गइ.. ओर हसते हुअे भागकर वापस नीचे आगइ.. तब कुछही देरमे लखनभी कंपलीट होकर नीचे आ गया ओर सबलोग अैकठे होकर चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब सृती लखनकी ओर सरारतसे हसती हे..
सृती : (सरारतसे नैन नचाते) कहो देवरजी.. क्या अपनी बीवीके बगैर आपको नींद आती हे..? हें..हें..हें..
लखन : (सर्मसार होते धीरेसे) क्या भाभी आपभीनां.. अभी भाइ हे.. तो मे आपको कुछभी नही केह सकता..
देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. मे दोपहोर तक कामसे बहार जा रहा हु.. तु तेरे दोस्तको आज पुछ लेना.. अगर उनका वहा सब काम होगया हे तो उसे बोलदे दोनो घर वापस आजाये..
लखन : (थोडा खुस होते) भाइ.. क्या कल आप उनके मम्मी पापाको मीलने गयेथेनां..? क्या वो लोग मान गये..?
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. दोनोके मम्मी पापा मान गये हे.. वो अब दोनोकी सादी बडी ही धुमधामसे कर देना चाहते हे.. तो मेने उनको दोनोको ढुंढ नीकालनेका वादा कीया हे.. तु समज गयानां..?
सृती : (लखनकी ओर देखते) अरे देवरजी.. आप दोनो कबसे कीसकी बात कर रहे हो..?
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. वो लखन भैयाका दोस्त.. श्रीधर जो उनकी कजीन बहेन जयश्रीको लेकर भाग गया हे.. बस दोनो उसीकी बात कर रहे हे..
लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. भाइ उसीकी बात कर रहे हे.. भाइ.. अगर आज उन दोनोको सर्टीफीकेट मील गया तो दोनोको आजही बुला लुगा.. बंसीको कहुगा हमारी जीप लेकर उसे सहेरसे लेकर आजायेगा..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. लखन.. अगर बंसी उसे लकर आये.. तो कहेना दोनोको सीधा यही हवेलीपे लेकर आये.. हम उनकी फेमीलीको यही बुला लेगे.. ताकी पीछेसे घरमे कोइ हंगामा ना करे..
लखन : (खुस होते हसते) हां.. ठीक हे भाइ.. मे बंसीको केह दुगा.. हें..हें..हें..
सबने बाते करते चाइ नास्ता करलीया.. तो पुनम सृतीको लेकर अपने रुममे घुस गइ.. ओर आराम करने लगी.. क्युकी रातमे देवायतने वाकइ दोनोकी हालत खराब करदी थी.. ओर सुबह सुबह भी सृतीकी दो बार चुदाइ होगइ थी.. तब लखनभी अपने खेतोपे चला गया.. ओर फोन लेकर श्रीधर ओर फीर बंसीसे बात करने लगा.. तो देवायतभी अपनी कार लेकर अपने खेतोपे आगया ओर सब कामका जायजा लेने लगा..