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तो रमा उनकी बेटीको हवेलीकी रानी बनानेका सपना देख रहीथी.. तो नीलम अपनी अैसो आरामकी जींदगीके लीये धिरेनके नीचे लेटी हुइ थी.. सबके मनके घोडे अपनी अपनी सोचके हीसाबसे दोड रहेथे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी ये सब कौन करवा रहा हे.. इसी बीच लखनने भानुको खेतोके कामके बहाने फोन करके अपने पास बुला लीया.. तब कुछही देरके बाद लताने देवायतको फोन लगा दीया.. तब..

देवायत : (मुस्कुराते) हां लता.. बोल.. वापस क्यु फोन कीया..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. पह.ल. य. बताओ वहा भानुभाइ तो नही..?
देवायत : नहीतो..? क्यु..? मे अभी अकेला हु.. कुछ काम था..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. क्या तो मे आपको अैसेही फोन नही कर सकती..? कुछ काम होगा तभी तो फोन कीया होगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. बतलब मुजे वोही मेरी पुरानी चुलबुली लता वापस मील गइ.. जो मेरे साथ बीनस्त बाते करती थी.. हें..हें..हें.. हां बोल.. क्या काम था..?
लता : (समाते) भाइ.. मे थोडी परेसान हु.. हमे नीलुको अभीके अभी उधर हमारी हवेलीपे लाना होगा.. लखनको कहोनां मुजे अभीके अभी यहासे लेजाये.. क्युकी बातही कुछ अैसी हे.. अब मे आपको कैसे कहु..?
देवायत : (मुस्कुराते) क्यु.. अब तुजे कोनसी परेसानी हे..? ओर मुजसे बात करनेमे तुजे कैसी सरम.. तु तो बीन्दास्त लडकी हे.. बोल क्या बात हे..? नीलुको कुछ हुआ हे क्या..?
लता : (जटसे) अरे नही नही.. भाइ.. क्या हेना इधर भाभी नीलुके बगैर कुछ परेसान थी तो मेने सोचा उनकी नीलुसे फोनपे बात करवादु.. तो मेने लखनको कहेकर पुनमदीदीसे होस्टेलमे फोन करवाया था.. तो पता चला वहा नीलु हे ही नही.. वोतो कलही वहासे नीकल गइहे.. भाइ.. लगता हे नीलुके कदम कुछ गलत रास्तेपे पड गये हे..
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) क्या..? तो फीर पुनोने वहा पुछा नही की नीलु इस वक्त कहा हे..? कहा गइ वो..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. पुछा.. पहेले देखलो कही आपके पास ओर कोइ तो नही हे..?
देवायत : (सीरीयस होते) नही.. लता तु बोल मे यहा अकेला ही हु.. कोइ नही हे यहा..
लता : भाइ.. पुनमदीदीने फोन कीया तो पता चलाकी वो कलही दोपहोरको उनके जीजाजीके साथ उनकी बहेनके घर चली गइ हे.. भाइ.. नीलु वहा नही हे..
देवायत : जीजाजीके साथ मतलब..? क्या लखन उनको लेने गयाथा..?
लता : (जटसे धीरेसे) अरे नही नही.. भाइ.. वो.. वो.. उनको धिरेन जीजु कल दोपहोरको ही अपने घरपे ले गये हे.. ओर इस वक्त पुनमदीदी हमारे यहा घरपे हे.. आप समज गयेनां.. अभी दोनो इस वक्त धिरेन जीजुके घरपे ही हे.. भाइ हमे उनको जल्दी लाना होगा..
देवायत : (चोंकते) व्होट..? क्या नीलु धिरेनके साथ.. आइमीन उनके घरपे हे..? वहा क्या कर रहे हे दोनो..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. अेक जवान लडका ओर जवान लडकी.. दोनोही अकेले उनके घरपे होगे तो क्या कर रहे होगे..? आपतो सब जानते हे.. भाइ.. हमे जीसका डरथा वोही होगया.. धिरेनका नीलुके साथ पुनोदीदीकी सादीसे पहेले ही चकर हो गयाथा.. सादीमे तो अेक बार हम उनको बडी मुस्कीलसे बचा पाये.. लेकीन अब नही.. भाइ अब आपही कहो हम क्या करे..? मेने लखनको कहा हे की मुजे अभी यहासे लेजाओ.. हम दोनो वहा जाकर नीलुको लेकर आते हे.. अबतो हम उनको हमारे साथ सहेरमे ही रखेगे..
देवायत : ठीक हे लता.. लेकीन वहा तुम अभी नीलु ओर धिरेनको कुछ मत कहेना.. नीलुको लेकर सीधे नीकल जाना.. ओर हवेलीपे लेकर आना.. समजी..? मे अभी लखनको तुजे लेने भेजता हु.. ओर सुन.. अभी इस बारेमे वहा कीसीको पता नही चलना चाहीये.. वरना सब लोग परेसान होगे..
लता : (मनमे खुस होते) भाइ.. थेन्क्यु.. आप लखनको भेजीये मे मेरे कपडे पेक करती हु..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. देखना कोइ आनेमे जल्द बाजी मत करना.. वरना वहा सबको तुम दोनोपे सक होजायेगा.. आरामसे आना.. अबतो जो होना था होगया..
लता : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे भाइ.. आप मुजे लेने लखनको भेजीये.. भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुंमुमु..हां..
कहेते लताने मुस्कुराते फोन काट दीया.. आज उसने पहेली बार देवायतको फोनपे कीस करनेकी हींमत की.. जीसे वो बादमे बहुत ही सरमाइ.. तो देवायतभी मुस्कुराने लगा.. क्युकी उसेभी पताथाकी लता उनको चाहने लगी हे.. ओर अेकना अेक दिन वोभी उनकी बीवी होने वाली हे.. लेकीन अभी वो उनके छोटे भाइ लखनकी बीवी थी.. तो देवायत आगे नही बढ रहाथा.. लेकीन लता देवायतको रीजानेका अेकभी मौका हाथसे जाने नही देती थी..

देवायत : (मुस्कुराते) हां लता.. बोल.. वापस क्यु फोन कीया..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. पह.ल. य. बताओ वहा भानुभाइ तो नही..?
देवायत : नहीतो..? क्यु..? मे अभी अकेला हु.. कुछ काम था..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. क्या तो मे आपको अैसेही फोन नही कर सकती..? कुछ काम होगा तभी तो फोन कीया होगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. बतलब मुजे वोही मेरी पुरानी चुलबुली लता वापस मील गइ.. जो मेरे साथ बीनस्त बाते करती थी.. हें..हें..हें.. हां बोल.. क्या काम था..?
लता : (समाते) भाइ.. मे थोडी परेसान हु.. हमे नीलुको अभीके अभी उधर हमारी हवेलीपे लाना होगा.. लखनको कहोनां मुजे अभीके अभी यहासे लेजाये.. क्युकी बातही कुछ अैसी हे.. अब मे आपको कैसे कहु..?
देवायत : (मुस्कुराते) क्यु.. अब तुजे कोनसी परेसानी हे..? ओर मुजसे बात करनेमे तुजे कैसी सरम.. तु तो बीन्दास्त लडकी हे.. बोल क्या बात हे..? नीलुको कुछ हुआ हे क्या..?
लता : (जटसे) अरे नही नही.. भाइ.. क्या हेना इधर भाभी नीलुके बगैर कुछ परेसान थी तो मेने सोचा उनकी नीलुसे फोनपे बात करवादु.. तो मेने लखनको कहेकर पुनमदीदीसे होस्टेलमे फोन करवाया था.. तो पता चला वहा नीलु हे ही नही.. वोतो कलही वहासे नीकल गइहे.. भाइ.. लगता हे नीलुके कदम कुछ गलत रास्तेपे पड गये हे..
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) क्या..? तो फीर पुनोने वहा पुछा नही की नीलु इस वक्त कहा हे..? कहा गइ वो..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. पुछा.. पहेले देखलो कही आपके पास ओर कोइ तो नही हे..?
देवायत : (सीरीयस होते) नही.. लता तु बोल मे यहा अकेला ही हु.. कोइ नही हे यहा..
लता : भाइ.. पुनमदीदीने फोन कीया तो पता चलाकी वो कलही दोपहोरको उनके जीजाजीके साथ उनकी बहेनके घर चली गइ हे.. भाइ.. नीलु वहा नही हे..
देवायत : जीजाजीके साथ मतलब..? क्या लखन उनको लेने गयाथा..?
लता : (जटसे धीरेसे) अरे नही नही.. भाइ.. वो.. वो.. उनको धिरेन जीजु कल दोपहोरको ही अपने घरपे ले गये हे.. ओर इस वक्त पुनमदीदी हमारे यहा घरपे हे.. आप समज गयेनां.. अभी दोनो इस वक्त धिरेन जीजुके घरपे ही हे.. भाइ हमे उनको जल्दी लाना होगा..
देवायत : (चोंकते) व्होट..? क्या नीलु धिरेनके साथ.. आइमीन उनके घरपे हे..? वहा क्या कर रहे हे दोनो..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. अेक जवान लडका ओर जवान लडकी.. दोनोही अकेले उनके घरपे होगे तो क्या कर रहे होगे..? आपतो सब जानते हे.. भाइ.. हमे जीसका डरथा वोही होगया.. धिरेनका नीलुके साथ पुनोदीदीकी सादीसे पहेले ही चकर हो गयाथा.. सादीमे तो अेक बार हम उनको बडी मुस्कीलसे बचा पाये.. लेकीन अब नही.. भाइ अब आपही कहो हम क्या करे..? मेने लखनको कहा हे की मुजे अभी यहासे लेजाओ.. हम दोनो वहा जाकर नीलुको लेकर आते हे.. अबतो हम उनको हमारे साथ सहेरमे ही रखेगे..
देवायत : ठीक हे लता.. लेकीन वहा तुम अभी नीलु ओर धिरेनको कुछ मत कहेना.. नीलुको लेकर सीधे नीकल जाना.. ओर हवेलीपे लेकर आना.. समजी..? मे अभी लखनको तुजे लेने भेजता हु.. ओर सुन.. अभी इस बारेमे वहा कीसीको पता नही चलना चाहीये.. वरना सब लोग परेसान होगे..
लता : (मनमे खुस होते) भाइ.. थेन्क्यु.. आप लखनको भेजीये मे मेरे कपडे पेक करती हु..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. देखना कोइ आनेमे जल्द बाजी मत करना.. वरना वहा सबको तुम दोनोपे सक होजायेगा.. आरामसे आना.. अबतो जो होना था होगया..
लता : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे भाइ.. आप मुजे लेने लखनको भेजीये.. भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुंमुमु..हां..
कहेते लताने मुस्कुराते फोन काट दीया.. आज उसने पहेली बार देवायतको फोनपे कीस करनेकी हींमत की.. जीसे वो बादमे बहुत ही सरमाइ.. तो देवायतभी मुस्कुराने लगा.. क्युकी उसेभी पताथाकी लता उनको चाहने लगी हे.. ओर अेकना अेक दिन वोभी उनकी बीवी होने वाली हे.. लेकीन अभी वो उनके छोटे भाइ लखनकी बीवी थी.. तो देवायत आगे नही बढ रहाथा.. लेकीन लता देवायतको रीजानेका अेकभी मौका हाथसे जाने नही देती थी..










