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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १९७
कहातो बंसीने जागृतीके बुब्सको मसलते होठोको चुमकर छोड दीया.. तो जागृती बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसते हुअे जटसे अपने बालो ओर कपडेको सही करने लगी.. फीर अचानक बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे कीस करके हसते हुअे बहारकी ओर भाग गइ.. तब बंसी भी खुसीके मारे हसने लगा.. ओर जागृतीको जाते हुअे देखता रहा.. फीर कुछ देरके बाद वो भी कंपलीट होकर बहार आगया ओर भोजनके पंडालमे चला गया....अब आगे
कल राजीवका क्रिया कर्म था.. तो पंडीत सादीसे फ्रि होगये तब देवायत ओर मंजुने उनसे सब बाते करली.. तो पंडीतने भी देवायतको सुबह जल्दी आजानेकी बातकी.. तब जवेरीलालने जीतुलाल ओर अपनी बीवी वृन्दासे श्रीधर जयश्रीकी सादीकी बात करली.. तो दोनो खुस होगये.. फीर जवेरीलाल ओर जीतुलाल देवायतको आकर मीले.. ओर उनको सादीका न्योता दीया..
फीर सभी जेन्ट्स भोजन कर रहे थे तब ज्यादातर देवायतको इस बदलावके बारेमे बाते करते रहे.. जब सभी जेन्ट्सने भोजन करलीया तो सभी लेडीस भी भोजनके लीये आगइ थी.. तब गांवकी सभी लेडीस मंजु ओर पुनमको धेरकर बाते करने लगी.. तब दोनोने हस हसके सबको गांवमे कीस तराहका बदलाव होगा सब जानकीया देती रही.. तो उनमेसे ज्यादातर लेडीस सुनकर बहुत ही खुस होने लगी..
क्युकी कीसीना कीसी ओरते वो खुद अैसे आपसी रीस्तोमे बंधी हुइ थी.. ओर सब लेडीस मंजु ओर पुनमका समर्थन करने लगी.. तब मंजु ओर पुनम दोनो खुस होगइ.. इसी दौरान लता ओर भावना पुनमके साथ ही रही.. इसी तराह बंसी सांतीकी सादीके साथ साथ मंजु देवायतका मक्सद भी पुरा होगया.. कुछ लोगोको छोडकर गांवके ज्यादातर लोगोने इस बदलावको स्वीकार करलीया था..
ओर अपने अपने घरपे पनप रहे अैसे आपसी रीस्तोको स्वीकार करने लगे.. तो कुछ दुसरे गांवके लोगोको ओर कुछ सरपंचको अैसे रीस्तोमे बदलाव पसंद नही आये.. ओर वो भोजन करके सीधे अपने गांवकी ओर नीकल गये.. तो कुल मीलाकर आज गांवमे उत्सव जैसा माहोल होगया था.. जब सादी ओर भोजन संम्पन हुआ तो सब लोग सामतभाइकी इजाजत लेकर नीकलने लगे..
तब सामतभाइकी खुसीका भी ठीकाना नही था.. ओर लास्टमे लखन ओर बंसीके सभी दोस्त आपसमे मस्तीया करते भोजन पंडालका काम नीपटाने लगे.. तब मुना ओर श्रीधर सभी दोस्तो ओर हलवाइके लीये कुछ ठंडा लेने चले गये.. ओर कुछ ही देरमे सबके लीये कोल्ड्रींक्स लेकर वापस आगये.. फीर मुना ओर श्रीधर सबको ठंडा पीलाने लगे.. तब श्रीधरने भानु ओर रमेशको भी कोल्ड्रींक्स दीया..
तो दोनो पीने लगे.. तब मुना भानुकी ओर देखकर कातील मुस्कान करने लगा.. क्युकी उनका काम श्रीधरने करदीया था.. दरसल जब भानु बसंतीको इसारा करते उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहा था तब ही मुनाको गुस्सा आगया था.. क्युकी भानुने बसंतीके सामने कभी नही देखनेका देवायतसे कीया वादा तोड दीया था.. तो मुनाने घर जाकर तीन जडीबुटीके पावडरको मीलकार अेक नपुसक होनेकी दवाइ बनाली..
ओर श्रीधरसे बात करके भानुको कीसी भी बहानसे पीलानेको कहा.. तो श्रीधरने सबकी नजर बचाते छुपकेसे भानुके कोल्ड्रींक्समे वो पावडर मीलाकर भानुको पीला दीया.. अब कुछ ही दिनके बाद धीरे धीरे करते भानुका हथीयार बेकार होने वाला था.. ओर आने वाले वक्तमे इन्हीका फायदा हमारे लखन भैयाको मीलने वाला था.. जब सादीका काम नीपट गया तब देवायत भी अपना परीवार लेकर घरपे चला गया..
तब रमेश अब भी सामतभाइके घरपे जयासे आंख मीचोली खेलते बैठा रहा.. तो लखन ओर उनके सभी दोस्तो पंडालका काम समेटकर बंसी ओर सांतीकी सुहागरातकी तैयारीया करने लगे.. बंसी सांतीके रुम ओर बेडको सजाते आपसमे अेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे.. लेकीन मुना ओर श्रीधरके अलावा भानु वाली बात कोइ नही जानता था.. तो दुसरी ओर ब्रीन्दाके साथ बसंती भी अपने अपने घर जा चुकी थी..
जयश्री ओर बरखाको जागृती ओर सांतीने रोक लीया था.. ताकी वो सामका भोजन उनके साथ करके सांतीको अपनी सुहागरातके लीये सजाकर जाये.. अब रमेश अकेला होगया था.. तो सामत भाइने उसे भी रातके खानेके लीये अपने घरपे रोक लीया था.. जब साम ढल चुकी तबतक लखनके सभी दोस्तोने बंसीके रुमको सजा दीया.. फीर सब लोगोने भोजन कर लीया..
तो जयश्री बरखाने सांतीको अपनी सुहागरातके लीये तैयार कर दीया.. ओर उसे बंसीके रुममे बीठा दीया.. तो जयश्री बरखा ओर सांती जागृतीकी टांग खीचाइ करती रही.. फीर वो भी अपने अपने पतीको लेकर अपने घर चली गइ.. ओर आखीर बंसीके सभी दोस्तो भी अपने अपने घरपे चले गये.. तो रमेश भी सबसे छुपकर जयाको इसारा करते अपने घरपे चला गया.. सामतभाइका पुरा घर खाली हो चुका था..
इधर घर जाते वक्त लता पुनम ओर भावना साथ चल रहीथी.. तो मंजु चंदा सृती रमा सभी बाते करते धीरे धीरे घरकी ओर जा रही थी.. तब लता पुनमसे कुछ बाते करना चाहती थी.. जो उसे पुनमने कहा था.. लेकीन तभी नीलम भी मुस्कुराते तीनोके साथ चलने लगी.. तब पुनमने नीलमकी ओर इसारा करते बादमे अपने रुममे अकेली आनेको कहा.. ओर वही बैठकर आरामसे बात करनेको कहा.. तो लता समज गइ..
सामतभाइके घरपे सीर्फ घरके लोग ही रेह गये.. तो आज सामतभाइ ओर जया भी बहुत थके हुअे थे.. तो बीस्तरमे गीरते ही दोनो गहेरी नींद सो गये.. आज जागृती भी बहुत थकी हुइ थी.. इनके बावजुद उनको आज अपने भाइ भाभीकी सुहागरात देखनेकी बहुत ही इच्छा हो रही थी.. तो वो भी थकी होनेके बावजुद बीस्तरपे करवटे बदलती रही.. फीर देर रात धीरेसे उठकर बहार आंगनमे बंसीके रुमकी ओर चली गइ..
अध्याय - १९७
कहातो बंसीने जागृतीके बुब्सको मसलते होठोको चुमकर छोड दीया.. तो जागृती बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसते हुअे जटसे अपने बालो ओर कपडेको सही करने लगी.. फीर अचानक बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे कीस करके हसते हुअे बहारकी ओर भाग गइ.. तब बंसी भी खुसीके मारे हसने लगा.. ओर जागृतीको जाते हुअे देखता रहा.. फीर कुछ देरके बाद वो भी कंपलीट होकर बहार आगया ओर भोजनके पंडालमे चला गया....अब आगे
कल राजीवका क्रिया कर्म था.. तो पंडीत सादीसे फ्रि होगये तब देवायत ओर मंजुने उनसे सब बाते करली.. तो पंडीतने भी देवायतको सुबह जल्दी आजानेकी बातकी.. तब जवेरीलालने जीतुलाल ओर अपनी बीवी वृन्दासे श्रीधर जयश्रीकी सादीकी बात करली.. तो दोनो खुस होगये.. फीर जवेरीलाल ओर जीतुलाल देवायतको आकर मीले.. ओर उनको सादीका न्योता दीया..
फीर सभी जेन्ट्स भोजन कर रहे थे तब ज्यादातर देवायतको इस बदलावके बारेमे बाते करते रहे.. जब सभी जेन्ट्सने भोजन करलीया तो सभी लेडीस भी भोजनके लीये आगइ थी.. तब गांवकी सभी लेडीस मंजु ओर पुनमको धेरकर बाते करने लगी.. तब दोनोने हस हसके सबको गांवमे कीस तराहका बदलाव होगा सब जानकीया देती रही.. तो उनमेसे ज्यादातर लेडीस सुनकर बहुत ही खुस होने लगी..
क्युकी कीसीना कीसी ओरते वो खुद अैसे आपसी रीस्तोमे बंधी हुइ थी.. ओर सब लेडीस मंजु ओर पुनमका समर्थन करने लगी.. तब मंजु ओर पुनम दोनो खुस होगइ.. इसी दौरान लता ओर भावना पुनमके साथ ही रही.. इसी तराह बंसी सांतीकी सादीके साथ साथ मंजु देवायतका मक्सद भी पुरा होगया.. कुछ लोगोको छोडकर गांवके ज्यादातर लोगोने इस बदलावको स्वीकार करलीया था..
ओर अपने अपने घरपे पनप रहे अैसे आपसी रीस्तोको स्वीकार करने लगे.. तो कुछ दुसरे गांवके लोगोको ओर कुछ सरपंचको अैसे रीस्तोमे बदलाव पसंद नही आये.. ओर वो भोजन करके सीधे अपने गांवकी ओर नीकल गये.. तो कुल मीलाकर आज गांवमे उत्सव जैसा माहोल होगया था.. जब सादी ओर भोजन संम्पन हुआ तो सब लोग सामतभाइकी इजाजत लेकर नीकलने लगे..
तब सामतभाइकी खुसीका भी ठीकाना नही था.. ओर लास्टमे लखन ओर बंसीके सभी दोस्त आपसमे मस्तीया करते भोजन पंडालका काम नीपटाने लगे.. तब मुना ओर श्रीधर सभी दोस्तो ओर हलवाइके लीये कुछ ठंडा लेने चले गये.. ओर कुछ ही देरमे सबके लीये कोल्ड्रींक्स लेकर वापस आगये.. फीर मुना ओर श्रीधर सबको ठंडा पीलाने लगे.. तब श्रीधरने भानु ओर रमेशको भी कोल्ड्रींक्स दीया..
तो दोनो पीने लगे.. तब मुना भानुकी ओर देखकर कातील मुस्कान करने लगा.. क्युकी उनका काम श्रीधरने करदीया था.. दरसल जब भानु बसंतीको इसारा करते उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहा था तब ही मुनाको गुस्सा आगया था.. क्युकी भानुने बसंतीके सामने कभी नही देखनेका देवायतसे कीया वादा तोड दीया था.. तो मुनाने घर जाकर तीन जडीबुटीके पावडरको मीलकार अेक नपुसक होनेकी दवाइ बनाली..
ओर श्रीधरसे बात करके भानुको कीसी भी बहानसे पीलानेको कहा.. तो श्रीधरने सबकी नजर बचाते छुपकेसे भानुके कोल्ड्रींक्समे वो पावडर मीलाकर भानुको पीला दीया.. अब कुछ ही दिनके बाद धीरे धीरे करते भानुका हथीयार बेकार होने वाला था.. ओर आने वाले वक्तमे इन्हीका फायदा हमारे लखन भैयाको मीलने वाला था.. जब सादीका काम नीपट गया तब देवायत भी अपना परीवार लेकर घरपे चला गया..
तब रमेश अब भी सामतभाइके घरपे जयासे आंख मीचोली खेलते बैठा रहा.. तो लखन ओर उनके सभी दोस्तो पंडालका काम समेटकर बंसी ओर सांतीकी सुहागरातकी तैयारीया करने लगे.. बंसी सांतीके रुम ओर बेडको सजाते आपसमे अेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे.. लेकीन मुना ओर श्रीधरके अलावा भानु वाली बात कोइ नही जानता था.. तो दुसरी ओर ब्रीन्दाके साथ बसंती भी अपने अपने घर जा चुकी थी..
जयश्री ओर बरखाको जागृती ओर सांतीने रोक लीया था.. ताकी वो सामका भोजन उनके साथ करके सांतीको अपनी सुहागरातके लीये सजाकर जाये.. अब रमेश अकेला होगया था.. तो सामत भाइने उसे भी रातके खानेके लीये अपने घरपे रोक लीया था.. जब साम ढल चुकी तबतक लखनके सभी दोस्तोने बंसीके रुमको सजा दीया.. फीर सब लोगोने भोजन कर लीया..
तो जयश्री बरखाने सांतीको अपनी सुहागरातके लीये तैयार कर दीया.. ओर उसे बंसीके रुममे बीठा दीया.. तो जयश्री बरखा ओर सांती जागृतीकी टांग खीचाइ करती रही.. फीर वो भी अपने अपने पतीको लेकर अपने घर चली गइ.. ओर आखीर बंसीके सभी दोस्तो भी अपने अपने घरपे चले गये.. तो रमेश भी सबसे छुपकर जयाको इसारा करते अपने घरपे चला गया.. सामतभाइका पुरा घर खाली हो चुका था..
इधर घर जाते वक्त लता पुनम ओर भावना साथ चल रहीथी.. तो मंजु चंदा सृती रमा सभी बाते करते धीरे धीरे घरकी ओर जा रही थी.. तब लता पुनमसे कुछ बाते करना चाहती थी.. जो उसे पुनमने कहा था.. लेकीन तभी नीलम भी मुस्कुराते तीनोके साथ चलने लगी.. तब पुनमने नीलमकी ओर इसारा करते बादमे अपने रुममे अकेली आनेको कहा.. ओर वही बैठकर आरामसे बात करनेको कहा.. तो लता समज गइ..
सामतभाइके घरपे सीर्फ घरके लोग ही रेह गये.. तो आज सामतभाइ ओर जया भी बहुत थके हुअे थे.. तो बीस्तरमे गीरते ही दोनो गहेरी नींद सो गये.. आज जागृती भी बहुत थकी हुइ थी.. इनके बावजुद उनको आज अपने भाइ भाभीकी सुहागरात देखनेकी बहुत ही इच्छा हो रही थी.. तो वो भी थकी होनेके बावजुद बीस्तरपे करवटे बदलती रही.. फीर देर रात धीरेसे उठकर बहार आंगनमे बंसीके रुमकी ओर चली गइ..











