Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 53 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९७

कहातो बंसीने जागृतीके बुब्सको मसलते होठोको चुमकर छोड दीया.. तो जागृती बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसते हुअ‍े जटसे अपने बालो ओर कपडेको सही करने लगी.. फीर अचानक बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे कीस करके हसते हुअ‍े बहारकी ओर भाग गइ.. तब बंसी भी खुसीके मारे हसने लगा.. ओर जागृतीको जाते हुअ‍े देखता रहा.. फीर कुछ देरके बाद वो भी कंपलीट होकर बहार आगया ओर भोजनके पंडालमे चला गया....अब आगे

कल राजीवका क्रिया कर्म था.. तो पंडीत सादीसे फ्रि होगये तब देवायत ओर मंजुने उनसे सब बाते करली.. तो पंडीतने भी देवायतको सुबह जल्दी आजानेकी बातकी.. तब जवेरीलालने जीतुलाल ओर अपनी बीवी वृन्दासे श्रीधर जयश्रीकी सादीकी बात करली.. तो दोनो खुस होगये.. फीर जवेरीलाल ओर जीतुलाल देवायतको आकर मीले.. ओर उनको सादीका न्योता दीया..

फीर सभी जेन्ट्स भोजन कर रहे थे तब ज्यादातर देवायतको इस बदलावके बारेमे बाते करते रहे.. जब सभी जेन्ट्सने भोजन करलीया तो सभी लेडीस भी भोजनके लीये आगइ थी.. तब गांवकी सभी लेडीस मंजु ओर पुनमको धेरकर बाते करने लगी.. तब दोनोने हस हसके सबको गांवमे कीस तराहका बदलाव होगा सब जानकीया देती रही.. तो उनमेसे ज्यादातर लेडीस सुनकर बहुत ही खुस होने लगी..

क्युकी कीसीना कीसी ओरते वो खुद अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे बंधी हुइ थी.. ओर सब लेडीस मंजु ओर पुनमका समर्थन करने लगी.. तब मंजु ओर पुनम दोनो खुस होगइ.. इसी दौरान लता ओर भावना पुनमके साथ ही रही.. इसी तराह बंसी सांतीकी सादीके साथ साथ मंजु देवायतका मक्सद भी पुरा होगया.. कुछ लोगोको छोडकर गांवके ज्यादातर लोगोने इस बदलावको स्वीकार करलीया था..

ओर अपने अपने घरपे पनप रहे अ‍ैसे आपसी रीस्तोको स्वीकार करने लगे.. तो कुछ दुसरे गांवके लोगोको ओर कुछ सरपंचको अ‍ैसे रीस्तोमे बदलाव पसंद नही आये.. ओर वो भोजन करके सीधे अपने गांवकी ओर नीकल गये.. तो कुल मीलाकर आज गांवमे उत्सव जैसा माहोल होगया था.. जब सादी ओर भोजन संम्पन हुआ तो सब लोग सामतभाइकी इजाजत लेकर नीकलने लगे..

तब सामतभाइकी खुसीका भी ठीकाना नही था.. ओर लास्टमे लखन ओर बंसीके सभी दोस्त आपसमे मस्तीया करते भोजन पंडालका काम नीपटाने लगे.. तब मुना ओर श्रीधर सभी दोस्तो ओर हलवाइके लीये कुछ ठंडा लेने चले गये.. ओर कुछ ही देरमे सबके लीये कोल्ड्रींक्स लेकर वापस आगये.. फीर मुना ओर श्रीधर सबको ठंडा पीलाने लगे.. तब श्रीधरने भानु ओर रमेशको भी कोल्ड्रींक्स दीया..

तो दोनो पीने लगे.. तब मुना भानुकी ओर देखकर कातील मुस्कान करने लगा.. क्युकी उनका काम श्रीधरने करदीया था.. दरसल जब भानु बसंतीको इसारा करते उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहा था तब ही मुनाको गुस्सा आगया था.. क्युकी भानुने बसंतीके सामने कभी नही देखनेका देवायतसे कीया वादा तोड दीया था.. तो मुनाने घर जाकर तीन जडीबुटीके पावडरको मीलकार अ‍ेक नपुसक होनेकी दवाइ बनाली..

ओर श्रीधरसे बात करके भानुको कीसी भी बहानसे पीलानेको कहा.. तो श्रीधरने सबकी नजर बचाते छुपकेसे भानुके कोल्ड्रींक्समे वो पावडर मीलाकर भानुको पीला दीया.. अब कुछ ही दिनके बाद धीरे धीरे करते भानुका हथीयार बेकार होने वाला था.. ओर आने वाले वक्तमे इन्हीका फायदा हमारे लखन भैयाको मीलने वाला था.. जब सादीका काम नीपट गया तब देवायत भी अपना परीवार लेकर घरपे चला गया..

तब रमेश अब भी सामतभाइके घरपे जयासे आंख मीचोली खेलते बैठा रहा.. तो लखन ओर उनके सभी दोस्तो पंडालका काम समेटकर बंसी ओर सांतीकी सुहागरातकी तैयारीया करने लगे.. बंसी सांतीके रुम ओर बेडको सजाते आपसमे अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे.. लेकीन मुना ओर श्रीधरके अलावा भानु वाली बात कोइ नही जानता था.. तो दुसरी ओर ब्रीन्दाके साथ बसंती भी अपने अपने घर जा चुकी थी..

जयश्री ओर बरखाको जागृती ओर सांतीने रोक लीया था.. ताकी वो सामका भोजन उनके साथ करके सांतीको अपनी सुहागरातके लीये सजाकर जाये.. अब रमेश अकेला होगया था.. तो सामत भाइने उसे भी रातके खानेके लीये अपने घरपे रोक लीया था.. जब साम ढल चुकी तबतक लखनके सभी दोस्तोने बंसीके रुमको सजा दीया.. फीर सब लोगोने भोजन कर लीया..

तो जयश्री बरखाने सांतीको अपनी सुहागरातके लीये तैयार कर दीया.. ओर उसे बंसीके रुममे बीठा दीया.. तो जयश्री बरखा ओर सांती जागृतीकी टांग खीचाइ करती रही.. फीर वो भी अपने अपने पतीको लेकर अपने घर चली गइ.. ओर आखीर बंसीके सभी दोस्तो भी अपने अपने घरपे चले गये.. तो रमेश भी सबसे छुपकर जयाको इसारा करते अपने घरपे चला गया.. सामतभाइका पुरा घर खाली हो चुका था..

इधर घर जाते वक्त लता पुनम ओर भावना साथ चल रहीथी.. तो मंजु चंदा सृती रमा सभी बाते करते धीरे धीरे घरकी ओर जा रही थी.. तब लता पुनमसे कुछ बाते करना चाहती थी.. जो उसे पुनमने कहा था.. लेकीन तभी नीलम भी मुस्कुराते तीनोके साथ चलने लगी.. तब पुनमने नीलमकी ओर इसारा करते बादमे अपने रुममे अकेली आनेको कहा.. ओर वही बैठकर आरामसे बात करनेको कहा.. तो लता समज गइ..

सामतभाइके घरपे सीर्फ घरके लोग ही रेह गये.. तो आज सामतभाइ ओर जया भी बहुत थके हुअ‍े थे.. तो बीस्तरमे गीरते ही दोनो गहेरी नींद सो गये.. आज जागृती भी बहुत थकी हुइ थी.. इनके बावजुद उनको आज अपने भाइ भाभीकी सुहागरात देखनेकी बहुत ही इच्छा हो रही थी.. तो वो भी थकी होनेके बावजुद बीस्तरपे करवटे बदलती रही.. फीर देर रात धीरेसे उठकर बहार आंगनमे बंसीके रुमकी ओर चली गइ..
 
जैसे ही बंसीके रुमके पास आइ.. ओर खीडकीसे जांकते देखा तो आज बंसी पुरा नंगा होकर पीठके बल लेटा हुआ था.. ओर उनकी कमरपे सांती पुरी तराह नंगी होकर बैठी हुइ थी.. ओर बंसीके लंडको अपनी चुतपे फसाकर अपनी कमर हीलाते बंसीको बहुत ही कामुक तरीकेसे नसीली आंखोसे देखते धीरे धीरे बंसीको चोद रही थी.. आज सांतीने अपने सभी बाल खुले छोड रखे थे.. ओर बंसीके उपर जुकते बालोसे बंसीके चहेरेके ढकते उनके होंठ चुम रही थी..





जागृती आज पहेली बार सांतीका अ‍ैसा कामुक रुप देख रही थी.. तभी सांतीने अपने बाल जटकते पीछे करलीया.. ओर बंसीके दोनो पंजोको पकडकर अपनी कमरको आडी टेडी हीलाते बंसीको चोदने लगी.. आज सांती बंसीकी कमरपे बैठी थी तब खीडकी बीलकुल उनके चहेरेके सामने थी.. जहा इस वक्त जागृती दोनोकी चुदाइ देखते अपनी चुतको सहेलाते अ‍ेक हाथसे अपने बुब्सको मसल रही थी..

तभी अचानक सांतीकी नजर खीडकी की ओर चली गइ.. तो जागृती आंख बंध करते पुरी मदहोस होते अपनी चुतमे उंगली कर रही थी.. तो सांतीके चहेरेपे जागृतीको देखते ही कामुक स्माइल आगइ.. ओर वो बंसीको चोदते हुअ‍े जागृतीकी ओर देखती रही.. तभी जागृती आंख खोलकर अंदरका नजारा देखने लगी.. तो सांती उनको ही देखते कामुक स्माइल कर रही थी..





तब जागृती बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सांतीकी ओर देखते सरमाते मुस्कुराने लगी.. तभी अचानक सांतीने आंखोके इसारोसे जागृतीको अपने रुममे आनेका इसारा कीया.. तो जागृती वापस सर्मसार होने लगी.. ओर सरमाकर गरदनको नां मे हीलाते जागृती मना करने लगी.. तो सांती थोडी जोरोसे कामुक सीसकारीया करते बंसीकी कमरपे उछलने लगी.. ओर दर्दके मारे अपना मुह बिगाडने लगी..





जैसे जागृतीको दीखाना चाहती हो.. की देखो बंसीको वो अकेली नही जेल पा रही हे.. तभी वो ज्यादा उछलने लगी तब उनकी चुतने भी जवाब दे दीया.. ओर वो बंसीके उपर जुकते उनके होठोको लीप लोक कर लेती हे.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगती हे.. तभी बहारकी ओर जागृतीकी चुतसे भी फवारा नीकल गया.. तो अंदरकी ओर बंसी सांतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेता हे..

ओर सांतीको बाहोमे भीचते पलट जाता हे.. अब सांती बंसीके नीचे लेटी हुइ थी.. जैसेही बंसी सांतीके उपर आगया.. तब उनका ध्यान भी खीडकीपे चला गया.. जहा जागृती उनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. तो बंसीने भी सांतीकी नजर बचाते जागृतीको आंख मारके अंदर आनेका इसारा कीया.. तब जागृती वापस बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर बंसीको हसते हुअ‍े हाथ हीलाकर बाय कहेते चली गइ..

तो बंसी भी हसने लगा.. तब उनको नही पता था की सांतीने उनकी इस हरकतको देख लीया हे.. ओर वो जागृतीको देखकर ओर जोसमे आगया.. ओर उनका लंड स्टीलके रोडके माफीक होगया.. वो सांतीको जागृती मानकर हाथके बल उचा होकर सांतीको जोरोसे चोदने लगा.. तो सांती हल्कासा मुह बीगाडते चीखने लगी.. आज उनको वाकइ बंसीको जेलना मुस्कील होने लगा.. क्युकी वो अभी अभी जडी हुइ थी..





सांतीके लीये आजकी रात कयामतकी रात थी.. उनको पता था आज पुरी रात बंसी उनको चोद चोदके थका देगा.. ओर उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख देगा.. क्युकी बंसी उसे इस वक्त अपनी बीवीको नही.. अपनी बहेनको इमेजींग करते उनको चोद रहा हे.. दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. तब कुछ ही देरके बाद सांती भी अपनी मनमे खुस होते कमर उछाल उछालके बंसीको चुदवानेमे साथ देने लगी..





ओर आखीर दोनो अकडने लगे.. तो अ‍ेक दुसरेको जोरोसे बाहोमे भीच लेते हे.. ओर बंसी कमरको जटके देते पुरा लंड सांतीकी चुतमे घुसा देता हे.. ओर पीचकारीया मारते सांतीकी चुतको भरके हरी भरी करने लगता हे.. तब सांती भी बंसीके साथ जडने लगी.. ओर दोनो अ‍ेक साथ जड गये.. तब बंसी सांतीके सीनेके उपर सर रखते ढेर होगया.. तो सांती उनकी पीठ ओर बालको सहेलाती रही.. तभी..

सांती : (सांसको कंट्रोल करते सरमाते मुस्कुराते) बंसी.. आज आप कीतने जोसमे चोद रहे थे.. आजतो मजा ही आगया.. कीतने दिनोके बाद मेरी अ‍ैसी चुदाइ हुइ हे..

बंसी : (बुब्सकी नीपलको चुमते) सांती.. आज तो हमारी सुहागरात हे.. आज मे तुजे छोडने वाला नही हु.. आज मे तुजे पुरी रात अ‍ैसे ही चोदुगा.. सुबह चलने लायक भी नही रहेगी.. मे तुमसे बहुत प्यार करता हु..

सांती : (सरमाते होंठ चुमते) हां बंसी.. आज मेरी सारी तम्मना पुरी होगइ.. हमारी सादी भी होगइ.. अब मे जींदगी भर आपको अ‍ैसेही प्यार देती रहुगी.. बंसी.. अब मुजे आइपील लेनेकी जरुरत नही हे.. अब मे प्रेगनेन्ट हो जाउ तो भी कोइ दिकत नही हे.. हम हमारे बच्चेको इस दुनीयामे लायेगे.. लेकीन बंसी.. मुजे आपसे आज अ‍ेक बात भी कहेनी हे..

बंसी : (मुस्कुराते होंठ चंमते) हंम.. कहो.. क्या बात कहेनी हे..

सांती : (सरमाते धीरेसे गाल चुमते) जानु.. बुरा मत मानना.. क्या आज आप अपनी बीवीको ही चोद रहेथेनां..?

बंसी : (थोडा जेंपते) सांती.. अ‍ैसा क्यु पुछ रही हो..? अफकोर्स मे तुजे ही चोद रहा था.. क्या यहा कोइ ओर हे..?

सांती : (मुस्कुराते) क्या हेना.. आज आप मुजे बहुत जोसमे चोद रहे थे.. इसीलीये पुछ रही थी.. मेरे खयालसे आपको जेलना मुज अकेलीका काम नही हे.. मतलब.. अब मे आपको अकेली नही जेल पाती.. अगर आप दुसरी सादी करना चाहा तो..

बंसी : (थोडा गुस्सा होते) सांती.. तेरा दिमाग तो ठीक हेनां..? अभी हम दोनोने अपनी सुहागरात भी ठीकसे नही मनाइ.. ओर तुम होकी.. (थोडा जुठ बोलते) सांती मे तुजे बहुत प्यार करता हु.. अ‍ैसा सोच भी नही सकता.. ओर तुम.. तेरे दिमागमे ये बात आइ कैसे..?

सांती : (मुस्कुराते) बंसी अगर आपको बुरा लगा तो आइ अ‍ेम सोरी.. मे तो बस आपको अ‍ैसे ही केह रही थी.. क्या हेनां आप जब भी मुजे पुरी रात चोदते होनां तो सुबह मे बहुत थक जाती हु.. ओर पुरा दिन सरीस दर्द करता हे.. इसीलीये आपको केह रही थी.. अगर आप चाहो तो मे आपके लीये दुसरी लडकीका इन्तजाम कर सकती हु.. मीन्स.. मैने करलीया हे.. आप चाहो तो उनसे भी सादी कर सकते हो..

बंसी : (थोडा चोंकते) सांती.. क्या केह रही हो तुम..? कौन हे वो..? सांती.. मे तुमसे वाकइ सचा प्यार करता हु.. मुजे नही करनी दुसरी सादी.. अगर तुम नही चाहती तो हम पुरी रात चुदाइ नही करेगे.. जब तुम कहोगी तब ही करेगे..

सांती : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. लेकीन अब तो मुजे आपसे पुरी रात चुदवानेकी आदत हो गइ हे.. तो मे बीना चुदाइ रेह भी तो नही सकती.. क्या हेना अगर दो होगी तो मुजे बीच बीचमे आराम भी मीलेगा.. इसीलीये केह रही हु.. की आप दुसरी सादी करलो.. ओर वो भी तो आपको पसंद करती हे..
 
बंसी : (आस्चर्यसे देखते) वो मुजे पसंद भी करती हे..? सांती.. कौन हे वो..? बता मुजे..

सांती : (सरमाते धीरेसे) जानु.. प्रोमीस करो.. इनका नम सुनकर आप गुस्सा मत होना.. तो ही मे उनका नाम बताउगी..

बंसी : (हसते कीस करते) अरे डार्लींग इसमे गुस्सा करनेकी क्या बात हे.. ठीक हे.. प्रोकीस.. मे गुस्सा नही करुगा.. बता मुजे..





सांती : (मुस्कुराते धीरेसे) जानु.. वो.. वो.. हमारी.. जा..गु..

बंसी : (चोकते धीरेसे) सांती.. क्या केह रही हो तुम.. वो मेरी बहेन हे.. क्या वो मुजे पसंद करती हे..?

सांती : (सीना सहेलाते मुस्कुराते) हां जानु.. बहेन हेतो क्या हुआ.. अब तो हमारे गांवमे भी अ‍ैसे रीस्तोको सभीने स्वीकार करलीया हे.. ओर आपके सभी दोस्तोने भी उनकी बहेनसे ही सादी करली हे.. तो फीर आपको क्या प्रोबलेम..? उनकी भी तम्मना हे.. की वो भी अपने भाइसे प्यार करेगी.. इसीलीये तो खीडकीसे हम दोनोकी सुहागरात देख रही थी..

बंसी : (चोंकनेका नाटक करते) क्या..? जागु हमको खीडकीसे देख रही थी..?

सांती : (जुठे गु्स्सेसे दांत पीसते सीनेमे मुका मारते) जानु.. आप कीतने कमीने हो.. कीतना अनजान बननेका नाटक कर रहे हो.. मे तो देख रही थी.. की आप क्या कहेते हो..? मुजे सब पता हे आपने भी उनको देखलीया हे.. ओर उनको क्या इसारा कर रहे थे..? अगर वो खुद आपसे चुदवाना चाहती हे.. तो फीर आपको क्या प्रोबलेम हे..? जानु.. अ‍ेक बार उस कमीनीको मेरे सामने पटक पटकके चोदलो.. फीर करलो उनसे भी सादी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

बंसी : (मनमे खुस होते धीरेसे होंठ चुमते) हें..हें..हें.. सांती.. क्या तुने सब देखलीया..? लेकीन क्या ये सही होगा..? अगर मेने उनसे भी सादी करली तो तुजे बुरा नही लगेगा क्या..? ओर हम मम्मी पापाको क्या जवाब देगे..

सांती : (होंठ चुमते) जानु.. वो सब मे सम्हाल लुगी.. बस.. आप अ‍ेक बार हां केह दिजीये.. क्युकी मे खुद चाहती हु.. की जागु मेरी ननंद नही.. मेरी छोटी बहेन बनकर मेरे साथ रहे.. बस.. आप कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. फीर सब सही होजायेगा..

बंसी : (सामने देखते) कुछ दिन मतलब..? क्या कुछ होने वाला हे क्या..?

सांती : (बातको सम्हालते) अरे नही नही.. मेरे कहेनेका मतलब.. कुछ दिनोके बाद मे खुद इस बारेमे जागुसे बात करलुगी.. कमीनी वो भी तो यही चाहती हे.. ओर इस बारेमे आपको कोइ टेन्सन लेनेकी जरुरत नही.. अगर आप आगे बढना चाहो तो बढ सकते हो.. मुजे पता हे आप भी उनको पसंद करते हो..

बंसी : (मनमे खुस होते) ठीक हे सांती.. जैसे तुम्हारी मरजी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

सांती : (मनमे खुस होते) हंम.. देखा.. बहेनका सुनकर कैसे मनमे लडु फुटने लगे.. कमीने कहीके.. सबको अपनी बहेनको ठोकनेमे ही मजा आता हे.. चलो कोइ बात नही.. इसी खुसीपे मुजे दोबारा चोदीये.. ओर इस बार मुजे अपनी बहेन मानकर नही.. अपनी बीवी मानकर चोदना.. आप क्या मस्त चुदाइ करते हे.. देखना जागु भी खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

कहा तो बंसी मुस्कुराने लगा.. तब सांतीको नही पता था.. की आज ही बंसी ओर जागृतीने दो बार मील लीया था.. ओर दोनो बार जागृती चुदाइसे बच गइ थी.. ओर धीरे धीरे कमर हीलाते बंसी वापस सांतीको चोदने लगा.. इस बार सांती भी अपनी कमर उछाल उछालके बंसीको चुदाइमे साथ देने लगी.. सांती जागृतीका नाम लेते बंसीको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साती रही..





तो बंसी भी पुरे जोसमे सांतीकी चुदाइ करता रहा.. ये दोनोके लीये आजकी वो रात थी जो कभी थमने वाली नही थी.. दोनो पुरी रात चुदाइ करते रहे.. पुरी रात मे बंसीने सांतीको चार बार चोद लीया.. ओर चोद चोदके सांतीका पुरा सरीर तोडके रख दीया था.. सांती चाहती थी की बंसी उसे आज ही प्रेगनेन्ट करदे.. लेकीन उनको नही पता था की बंसी उनको ओल रेडी पहेले प्रेगनेन्ट कर चुका हे..





तो दुसरी ओर दो दिनमे ब्रीन्दा ओर बसंतीने भी अपने अपने बेटोके साथ जमकर चुदाइ करवाली थी.. तो वो भी संतुस्ट होकर सो रही थी.. तब मुना ओर श्रीधर अपनी अपनी बहेन जो अब उनकी बीवीया थी.. उनकी जमकर चुदाइ कर रहे थे.. पुरे गांवमे आज बदलावके बारेमे सुनकर वासनाका तांडव मचा हुआ था.. आज सब लोग खुलकर अपनी अपनी मासुकाओके साथ चुदाइमे मसगुल थे..

तब अ‍ेक सख्स अब भी अपना लंड हाथमे थामकर चुतका इन्तजाम करनेमे लगा हुआ था.. जीहा.. वो सख्स थे हमारे लखन भैया.. क्युकी वो अब खुद लताको चोदना नही चाहते थे.. क्युकी अ‍ेक तो लताका पीरीयड चल रहा था.. तो दुसरी ओर लता उनके लंडसे बहुत डरी हुइ थी.. तो वो खुद अब लतासे दुर रहेना चाहता था.. बस.. यही लता ओर लखनके बीच दुरीया बढनेकी सुरुआत थी..

लखनको आज रजीया ओर राधीकाकी बहुत याद आ रही थी.. राधीका तो उनसे दुर सहेरमे थी.. तब उसने रजीयाको फोन लगाके कोल कीया.. तो रजीया भी गहेरी नींद सो चुकी थी.. ओर उसने फोन नही उठाया.. तब लखन पागल जैसा होने लगा.. अ‍ेक पल तो उसने सोचा आज वो रमाको बुलाकर उनकी चुदाइ करले.. लेकीन उसने रमाकी चुदाइ कभी नही कीथी..

तो रमाके साथ चुदाइ करनेमे हंगामा होनेका बहुत खतरा था.. तो उसने रमासे मीलनेका विचार भी त्याग दिया.. वो अपने खेतो पे जाकर भी कीसी लडकी या फीर रीटाको चोद सकता था.. लेकीन इस वक्त रात भी बहुत हो चुकी थी.. तो वो वहा भी जाना नही चाहता था.. अब उनके पास रजीयाके पास जानेके अलावा ओर कोइ रास्ता नही था.. अ‍ेक रजीया ही थी जो उनसे हर वक्त चुदाइके लीये तैयार रहेती थी..

इस वक्त दया ओर चंपाभाभी भी गहेरी नींदमे होगी.. ओर वो रजीयाको वही चोदकर अपने रुममे चला जायेगा.. यही सब सोचते उसने रजीयाके रुममे जाकर उनकी चुदाइ कर लेनेका फैसला करलीया.. देर रात यही सब सोचते लखन हवेलीपे आगया.. पुरी हवेलीमे सनाटा छाया हुआ था.. इस वक्त हवेलीपे सभी लाइटे बंध थी.. ओर सब लोग अपने अपने कमरेमे जाकर सो चुके थे..

क्युकी कल सुबह राजीवका क्रिया कर्म था.. तो सबको जल्दी उठना था.. सीर्फ देवायत ही अपने रुममे अपनी तीनो बीवीओको चोद रहा था.. तो लखन चारो ओर देखने लगा.. ओर कुछ सोचते वो रजीया दयाके रुमकी ओर दबे पांव चला गया.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका मारा.. तो लखनके अच्छे नसीबसे दरवाजा खुल गया.. ओर लखन दबे पांव अंदर चला गया..
 
तो वहा आस पास तीन बीस्तर लगे हुअ‍े थे.. ओर तीनो अपने उपर कंबल डालकर सोइ हुइ थी.. तब लखन समज गया की रजीया दया के अलावा यहा चंपा भाभी भी सोइ हुइ हे.. पुरे रुममे अंधेरा छाया हुआ था.. तो कीसीकी सकल भी नजर नही आ रही थी.. तब लखन हिंमत करते अ‍ेक बीस्तरके पास चला गया.. ओर चहेरेके नजदीक चहेरा लेजाते गौरसे देखने लगा.. तो उनको ये चहेरा दयाका लगा..

ओर लखन वहासे धीरेसे दुर हट गया.. ओर दुसरे बीस्तके पास चला गया.. तब उनको नही पता था.. की जब वो अंदर आया तब ही दो आखोने उनको पहेचान लीया था.. जो बीना चुदाइके कही दिनोसे प्यासी थी.. जब लखन उनके पास आया ओर उनपे जुकते उनके चहेरेको देखनेकी कोसीस करने लगा. तभी अचानक कंबलसे अ‍ेक हाथ नीकला.. ओर लखनका हाथ थामते पकडलीया..

फीर अपने बीस्तरपे खीचते लखनको भी अपने साथ सुला दीया.. तो लखन भी रजीया समजकर मुस्कुराते उनके कंबलमे घुस गया.. ओर समजने लगाकी रजीयाने उनको देख लीया होगा.. ओर ये रजीया ही होगी.. जो उनको इस तराह खीचकर अपने साथ सुलाती हे.. तब लखन बीना देरी कीये उनको अपनी बाहोमे भरते उनपे चड गया.. ओर चहेरेको अपने हाथोमे थामते चुमने लगा..

लखन : (धीरेसे कानमे) रजु.. मुजे पता हे तुमने मुजे पहेचान लीया था..

कहा तो उनके होठोपे फौरन अ‍ेक उंगली आगइ.. ओर लखनको इसारोमे चुप रहेनेको कहा.. ताकी कोइ.. इनकी हल्कीसी आवाज से भी जाग ना जाये.. उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर हाथ नीचेकी ओर लेजाते लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकडनेकी कोसीस करने लगी.. तभी लखन उनके उपरसे हट गया ओर बैठकर अपनी सर्ट पेन्टको नीकाल देता हे.. ओर पुरा नंगा होकर वापस कंबलमे घुसकर उनके उपर लेट गया..

तब उसने वापस लखनको अपनी बाहोमे कस लीया ओर उनके लंडको अपनी मुठीमे थाम लीया.. तो अ‍ेक बार तो वो भी चोंक गइ.. लेकीन इतने दिनोसे चुदाइसे वंचीत थी.. तो वो कीसी भी हालमे कीसीसे भी चुदवाना चाहती थी.. जी..हां.. दोस्तो ये रजीया नही थी.. ये चंपा भाभी थी.. जो रजीयाकी बाते सुन सुनकर कही दिनोसे लखनके लंडको नोटीस कर रही थी.. ओर आज उसे लखनसे चुदवानेका मौका मील गया था..

वो लखनके लंडको पकडकर अपनी चुतपे घीसने लगी.. तब लखनको अपने लंडपे चुतकी गरमी महेसुस हुइ जो भठीकी माफीक गरम थी.. तब लखन भी तावमे आ गया.. ओर चंपा भाभीको रजीया समजकर उनके होठोको चुमते बुब्सको थाम लेता हे.. तो आज लखनको कुछ अजीब ही फील हुआ.. उनको बुब्स बहुत बडे लगे.. लेकीन इतने दिनोसे चुदाइसे वंचीत रहेते इनपे कुछ खास ध्यान नही दिया..

जब चंपाभाभीकी चुत गीली होगइ तब उसने लंडको अपनी चुतमे थोडासा पुस करते फसालीया ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तब लखनको भी पता था की आज रजीया भी इनके लंडको नही जेल पायेगी.. तब उसने लीपलोक करते अपनी कमरको जटकते अ‍ेक जटका मारा.. तो चंपा भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. वो लखनके मुहमे ही गुं..गुं..गुं.. करने लगी..





लेकीन येतो लखन था.. अ‍ैसा मौका हाथसे क्यु जाने देता..? ओर उसने देर ना करते अ‍ेक जटका ओर मारा.. तो लखनका पुरा लंड चंपा भाभीकी चुतमे उतर गया ओर वो छटपटाते लखनसे होठ छुडवानेकी कोसीस करने लगी.. तब भी लखन उनके होठोको ना छोडते चुमने लगा.. ओर उनका सर सहेलाते सांत रहेनेका इसारा करने लगा.. तब कुछ देरमे चंपा भाभी सांत होने लगी.. तभी..

लखन : (कानमे धीरेसे) बस.. बस रजु.. हो गया.. अब तुजे ओर दर्द नही होगा.. मेरा लंड थोडा बडा हो गया हे.. ओर ये सब जडी बुटीकी वजहसे हुआ हे.. ओर हम कइ दिनोसे मीले भी तो नही..

तब चंपा भाभी समज गइ.. की लखनने उनको अभी भी नही पहेचाना.. ओर वो उनकी रजीया समजकर चुदाइ कर रहे हे.. तब चंपा भाभीने भी कुछ बोलना मुनासीब नही समजा.. ओर वो अपने दोनो पैरकी आंटी लखनकी कमरपे लगा देती हे.. ताकी कुछ देर तक लखन उनकी चुदाइ ना कर सके.. ओर वो लखनकी पीठको सहेलाते उनके होठोको चुमती रही.. तो लखन भी उनका साथ देता रहा..

जब उनका दर्द कम हो गया तब उसने आंटी हटाली.. ओर लखनके नींतंबको पीछेसे पकडलीया.. ओर अपनी चुतपे दबाव बनाने लगी.. तब लखन समज गयाकी रजीयाका दर्द खतम हो गया हे.. ओर वो उसे चोदनेके लीये केह रही हे.. तब लखन धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब उनको हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज सुनाइ देने लगी.. ओर दोनोके बीच धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी..





तो कुछ ही देरमे चंपा भाभीका तन अकडने लगा.. ओर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर लीपलोक करलीया फीर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. लेकीन आज लखन हे की जडनेका नाम ही नही ले रहा था.. तभी अचानक लखन हाथके बल उचा होगया.. ओर चंपा भाभीके गलेमे मुह घुसाते उनको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..

तब पुरे कमरेमे सनाटा छाया हुआ था ओर सीर्फ थप.. थप.. ओर फच.. फच..की आवाजे सुनाइ दे रही थी.. रजीया तो गहेरी नींद सो रही थी.. लेकीन थप थपकी आवाजसे दयाकी आंख खुल गइ.. ओर वो धीरेसे अपने सरसे कंबल हटाते लेटे लेटे ही सर उचा करके देखने लगी.. तब उसे चंपा भाभीका कंबल हीलता हुआ महेसुस हुआ.. तो दया कुछ देर अ‍ैसे ही देखती रही.. तब उसे लगाकी कोइ चंपा भाभीकी चुदाइ कर रहा हे..

तो वो धीरेसे खडी होकर लाइट बोर्डकी ओर जाने लगी.. तभी अचानक लखन चंपा भाभीपे जुक गया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तब चंपा भाभीने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखन आज ढेर सारी पीचकारीया छोडते चंपा भाभीकी चुतको लबा लब भरने लगा.. ओर वो उनके सीनेपे ढेर होगया.. तो चंपा भाभी लखनकी पीठको सहेलाती रही.. तब लखन ओर चंपा भाभी.. दोनो संतुस्ट हो गये थे..





अ‍ैसा पहेली बार हुआ लखनने जडीबुटी खाकर पहेली बार चुदाइ करली.. फीर भी उनको थकान महेसुस नही हुइ.. तभी उसे खयाल आया की वो रजीयाके रुममे हे.. तो वो फटाफट नीचे उतर गया ओर अपने कपडे पहेनने लगा.. तभी अचानक रुमकी लाइट जल गइ.. तो चंपा भाभी ओर लखन रोसनीकी वजहसे थोडा डर गये.. चंपाभाभी अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ कर रही थी.. ओर लखन अपने कपडे पहेन रहा था.. दोनोही डरते स्वीच बोर्डकी ओर देखने लगे..

की कीसने लाइट जलाइ.. तब वहा दया दोनोकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. तभी लखनका ध्यान भी चंपा भाभीकी ओर गया.. जो अभी भी सरमाते हुअ‍े अपनी चुतको मुस्कुराते साफ कर रही थी.. तो लखन उनको देखते ही चोंक गया.. ओर वो फटाफट कपडे पहेनने लगा.. तभी रजीयाकी आंख भी खुल गइ.. ओर ये सब देखकर सारा माजरा समज गइ.. ओर वो भी दया ओर चंपा भाभीके साथ जोरोसे हसने लगी.. तभी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप..? क्या हेना.. वो.. वो.. मे समजा.. रजीया होगी.. सोरी भाभी..

दया : (जोरोसे हसते) लखन भैया.. गभराइअ‍े नही हम कीसीको कुछ नही कहेगे.. आपकी बीवी इधर थी.. उधर नही समजे..? हें..हें..हें.. खामखा भाभीकी कुटाइ हो गइ.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाकर हसते) लेकीन भाभी.. आपको तो बता देना चाहीयेना.. की आपकी बीवी इधर हे..

चंपा : (सरमाकर हसते) अरे.. मे क्यु बोलु..? तेरा पती मुजे बोलनेका मौका दे तब बोलुगीनां.. वो तो आतेही सुरु हो गये.. लेकीन रजु.. तु हे बहुत नसीब वाली.. अ‍ैसा दमदार पती तुजे कहा मीलेगा..? हें..हें..हें.. आज तो मजा आगया.. हें..हें..हें.. लखन भैया अ‍ैसे ही आते रहीयेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते बहारकी ओर जाते) तुम तीनो की तीनो कमीनी हो.. मे तीनोको देख लुगा..

कहेते लखन जटसे बहार नीकल गया.. तो तीनो जोरोसे हसने लगी.. फीर लाइट बंध करके वापस सो गइ.. तो इधर लखन भी खुस होते अपने रुममे आगया.. तब लता गहेरी नींद सो रही थी.. तो लखनको उसे जगाना उचीत नही लगा ओर वो भी फ्रेस होकर नाइट ड्रेस पहेन लेता हे.. ओर लतासे चीपकर सो जाता हे.. तब लता भी नींदमे मुस्कुराते लखनसे चीपक गइ.. ओर दोनो सो गये..
 
हवेलीपे सुबह सुरज उगनेसे पहेले ही दया रजीया ओर चंपा भाभी जल्दी जाग गइ.. तब चंपा भाभी थोडा लंगडाते चल रही थी.. जीसे देखकर रजीया ओर दया दोनो हसने लगी.. तब चंपा भाभी बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर तीनो कंपलीट होकर कीचनमे आगइ.. ओर घरका सब काम फटाफट नीपटाने लगी.. तबतक नीर्मला भुमीका ओर सरला काकी भी जल्दी जाग गये थे.. ओर कंपलीट होकर बहार होलमे आकर बैठ गइ..

तब अ‍ेक अ‍ेक करके सबलोग तैयार होकर नीचे आगये.. आज सबको क्रिया कर्म खतम होने तक उपवास रखना था.. तभी पंडीतजी भी चार ओर पंडीतको लेकर आगये.. ओर क्रीया कम्रकी सब तैयारीया करने लगे.. तब कुछ ही देरमे भानु भी आगया.. तो रमा ओर नीलम दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर मुस्कुराने लगी.. तब नीर्मलाने भावनाको भी भानुके साथ बैठनेको कहा.. तो रमा थोडी नीरास होकर भावना भानुको देखने लगी..

तभी धिरेन भी अपनी बाइक लेकर आगया.. ओर जैसे ही नीलमको देखा चहेरेपे खुसी छागइ.. ओर नीलमको देखकर मुस्कुराने लगा.. तब नीलम भी खुस होते सरमा गइ ओर मुस्कुराते धिरेनको मीलनेका आंखोसे इसारा करने लगी.. तभी धिरेनने सबकी नजर बचाते नीलमको आंख मारदी.. ओर इसारोसे हां कहेते होलमे आगया.. तब उनको नही पता था की इन दोनोके उपर तीन लोग नजर रख रहे हे..

पुनम भावना ओर लता तीनो जैसे ही धिरेन आया तबसे नजर जमाये हुअ‍े खडी थी.. धिरेनकी हरकत देखकर लता ओर भावनाको गुस्सा आने लगा.. लेकीन पुनमने मुस्कुराते भावनाका हाथ थाम लीया.. जैसे उनको कोइ फर्क ही नही पडा.. ओर वो भावनाका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. ओर लता मन ही मन धिरेनको गालीया देती रही.. तब रुममे जाते ही..

भावना : (धीरेसे) दीदी.. देखा आपने..? कमीना आते ही सुरु होगया.. कैसे खुले आम नीलुको आंख मार रहा था.. जैसे हमारी हाजरीसे उनको कोइ फर्क ही नही पडा..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. छोडीयेनां गुस्सा.. अब उन दोनोको जो भी करना हे करने दीजीये.. ये सब मेरे यहा वापस आनेका रास्ता आसान कर रहे हे.. तो हम क्यु अपना दिमाग खराब करे..

भावना : (पुनमके सामने देखते धीरेसे) पुनोदी.. क्या आपको इनपे गुस्सा नही आता..? आपके पती हे वो.. कमीना कैसे खुले आम नीलुको आंख मार रहा था..

पुनम : (मुस्कुराते धिरेसे) भाभी.. मे सब जानती हु.. पता हे मुजे की वो मेरे पती हे.. लेकीन जो भी होना हे उसे ना आप रोक सकती हे ओर नाही मे.. तो फीर हम क्यु अपना दिमाग खराब करे..? हमे तो सीर्फ प्यार चाहीयेनां..? वो ही प्यार तो मेरे पहेले पतीसे मुजे खुब मील रहा हे.. जीसे मे भी बेहद प्यार करती हु.. तो फीर ये पती तो टेम्पररी हे.. इनका क्या दुख लगाना.. हें..हें..हें..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. कमाल हो आप भी.. कास इतनी समज मुजमे भी होती.. तो आज मुजे भानुसे इतना दुख नही होता.. मे भी अपने पुराने प्यारको मील लेती.. ओर उनसे सारा प्यार पा लेती.. क्या फर्क पडता.. की भानु रमासे मीले या कीसी ओरसे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. आपको भी अपना प्यार बहुत ही जल्द मील जायेगा.. इसी घरमे.. मंजु भाभीने सब इन्तजाम करलीया हे.. अब चलीये बहार मुजे भी धिरेनके साथ बैठना पडेगा.. जब तक ये मेरे पती हे.. मुजे उनकी पत्नी होनेका मेरा नाटकर जारी रखना पडेगा.. हें..हें..हें..

भावना : (खुस होते मुस्कुराते) हां चलीये.. आपको ओर दीदीको तो सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..

तब कुछ ही देरमे देवायतके साथ मंजु चंदा ओर सृती तीनो हस हसके अ‍ेक दुसरेसे बाते करते बहार आगइ.. तबतक पंडीतजीने भी सभी तैयारीया करली.. तो भानु ओर धिरेन भी धीती पहेनकर तैयार हो गये.. फीर पंडीतजीने सबको बुला लीया.. तब देवायतके साथ मंजु बैठ गइ.. इनके साथ भानु ओर भावना भी बैठ गये.. तो देवायतने मुख्य पुजाके लीये धिरेन ओर पुनमको बीठा दीया..

फीर पंडीतजी सबको क्रिया कर्मकी वीधीया कराने लगे.. तीन घंटे तक पुजा चली.. जीसमे राजीवके पीडदानको लेकर सबकुछ वीधीया हुइ.. तबतक नीर्मला अपने आंसु बहाती रही.. ओर अंतमे पुजा खतम हुइ तब तीनो कपलको नदी कीनारे पैडल चलकर जाना था.. ओर पुजाकी सभी चीजे उसमे प्रवाहीत करनी थी.. तो तीनो कपल चले गये.. जीनके साथ पंडीतजी भी गये थे.. इस पुजामे सीर्फ घरके लोग ही सामील थे.. बहारके कीसीभी लोगको नही बुलाया था..

जब सबलोग वापस आगये तब पंडीतजी अपना सब सामान समेटने लगे.. तबतक दया रजीया ओर चंपा भाभीने सबके लीये बडीया भोजन भी बना लीया था.. तो देवायतने सबसे पहेले सभी पंडीतोको भोजनके लीये बीठा दीया.. जब भोजन करलीया तब देवायतने सभी पंडीतोको तगडी दक्षीणा देदी.. तो सभी पंडीत बहुत खुस हो गये.. ओर सबको आशीर्वाद देकर चले गये.. तब घरके सभी लोग भी भोजन करने बैठ गये..

आज नीलम बडी ही अंसमजमे फसी हुइ थी.. क्युकी जबसे उसने धिरेनके लंडको अपनी चुतमे लीया था तबसे उसे कही चैइन ही नही मीलता था.. ओर वो उसे अ‍ेक बार फीर अकेलेमे मीलना चाहती थी.. तो दुसरी ओर उनको लखनको भी पटाना था.. ओर उपरसे वो अपना धिरेनके साथका रीलेशन भी रमासे छुपाना चाहती थी.. ओर इस वक्त रमा उनके साथ ही बैठी थी.. तो नीलम धिरेनकी ओर कुछ खास ध्यान नही देपाइ.. ओर उसे मजबुरन लखनकी ओर ध्यान देना पड रहा था..

तब रमा भी बार बार लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुरा रही थी.. ओर उनसे आंख मीचोलीका खेल रही थी.. तब मंजु ये सब देखकर पुनमकी ओर देखते हस रही थी.. जीसे देखकर सृती पुनमसे धीमी आवाजमे कुछ कहेने लगी.. तो भावना भी पुनमकी ओर जुकते सृतीकी बाते गौरसे सुनने लगी.. जब बात खतम होगइ तब तीनो जोरोसे हसने लगी.. ओर इसी तराह सबने भोजन करलीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९८

तब रमा भी बार बार लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुरा रही थी.. ओर उनसे आंख मीचोलीका खेल रही थी.. तब मंजु ये सब देखकर पुनमकी ओर देखते हस रही थी.. जीसे देखकर सृती पुनमसे धीमी आवाजमे कुछ कहेने लगी.. तो भावना भी पुनमकी ओर जुकते सृतीकी बाते गौरसे सुनने लगी.. जब बात खतम होगइ तब तीनो जोरोसे हसने लगी.. ओर इसी तराह सबने भोजन करलीया....अब आगे

तो नीलम फटाफट सीडीयोके पास चली गइ.. ओर सबकी नजर बचाते धिरेनकी ओर फोनका इसारा करते नंबर मांगने लगी.. ओर इसारोसे केह दियाकी उनका फोन लता दीदीके पास हे.. तब धिरेन थोडा नीरास होगया.. ओर वो जेबसे अ‍ेक चीठी नीकालकर उनपे अपना नंबर लीखने लगा.. फीर चीठीकी गडी करके अपनी जेबमे रख लीया.. ओर नीलमको इसारोसे अपनी जेबपे हाथ रखके तसली देने लगा..

भोजन करके सबलोग होलमे बैठेथे.. तब पुनम सृती ओर भावनाके कानमे कुछ कहेती हे.. तो सृती भावना हसने लगी.. ओर पुनमके साथ कीचनमे चली गइ.. तो वहा दया रजीया ओर चंपा भाभी काम नीपटाते अपने खानेकी तैयारीया कर रही थी.. जैसेही चंपाभाभी कुछ लेने के लीये चली तो पुनम सृती ओर भावना उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. तब चंपा भाभी बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सफाइ देने लगी..

चंपा : (मुस्कुराते) दीदी.. कल रात पैरमे मोच आगइ थी.. थो थोडा दर्द अभी भी हे..

पुनम : (जोरोसे हसते) अच्छा..? हें..हें..हें..

दया : (हसते धीरेसे) चुपा भाभी.. अब पुनो दीदीसे छुपानेसे कोइ फायदा नही हे.. आपको तो पता हे बडी मालकीन ओर पुनोदीदीको सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) भाभी.. कोइ बात नही.. हम कीसीसे कुछ नही कहेगे.. हम तो सीर्फ आपकी खबर पुछने आइ थी.. हें..हें..हें.. आप ठीक तो हेनां..

चंपा : (सरमाकर मुस्कुराते) देवरानीजी.. आप तो देख ही रही हे मेरी हालत कैसी हे.. क्या हेनां.. आपतो जानती हे.. हम ओरतोकी भी क्या क्या तकलीफ होती हे.. अ‍ेक तो पती नही हे.. ओर उपरसे जो मेरा खयाल रखता था वो भी गुजर गया.. ओर अब बडे देवरके पास भी हमारे लीये समय नही हे.. तो मे कइ दिनोसे अ‍ैसे ही तडप रही थी.. तो कल.. बुडी मुस्कीलसे मौका हाथ लग गया.. तो अ‍ैसी हालत होगइ..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) बडे देवर मतलब.. क्या देवु..?

पुनम : (हसते बीचमे ही रोकते) अरे हां.. सृती भाभी सुनीये तो सही.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. हां चंपा भाभी.. फीर..?

चंपा : (सरमाकर मुस्कुराते) फीर क्या..? जैसे ही छोटे देवर आये तब मेतो जाग ही रही थी.. तो मे समज गइ की ये रजुको मीलनेके लीये आये हे.. तो मेने सोचाकी दया ओर रजुतो सो गइ हे.. आज अच्छा मौका हे.. बडा देवर नही तो छोटा देवर ही सही.. क्या फर्क पडता हे.. अपनी प्यास ही तो बुजानी हे.. मैने उसे अंधेरेमे ही पकड लीया.. तब मुजे क्या पता था.. की छोटा पेक बडा धमाका करेगा.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम सृती भावनाके साथ दया ओर रजीया भी जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. तब दया ओर रजीया तो अपना दोनो हाथोसे पेट पकडकर हस रही थी.. जीसे देखकर चंपा भाभी भी सरमाकर हसने लगी.. सबकी हसीकी आवाज सुनकर मंजु ओर चंदा भी कीचनमे आगइ.. तब सृतीने दोनोको पुरी कहानी सुनाइ तो मंजु ओर चंदाभी जोरोसे हसने लगी.. हांलाकी इस बातका मंजुको पता था.. फीर सब लोग वापस होलमे आकर बैठ गये..

तब भावना रुममे जाकर हल्कासा दरवाजा बंध करके अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तो लता रमा ओर नीलम तीनो उपरकी मंजीलपे जाने लगी.. तभी लताने भावनाको अपने रुममे जाते देखा तो लता रमाको अभी आती हु.. आप दोनो मेरे कमरेमे जाकर बैठीये.. करते भावनाके रुमकी ओर जाने लगी.. तो रमा ओर नीलम मुस्कुराते उपरकी ओर जाने लगी.. ओर लता भावनाके पास आकर बैठ गइ.. तभी..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) आगइ मेरी छोटी..? बोल.. यहा कोइ तकलीफ हे..? कल रात पुनोदीदी ओर सृतीदीदी तेरे पास आइ थीनां..? क्या हुआ था तुजे..?

लता : (मुस्कुराते) हां दीदी.. बात ही मत पुछो.. लेकीन अब कोइ तकलीफ नही हे.. इतना सुख ओर प्यारतो मुजे हमारे घरपे भी नही मीलता था.. यहापे सब लोग इतना प्यार दे रहे हे मुजे.. ओर पुनोदीदी तो मेरी सहेली जैसी हे.. कल हम दोनोके बीच बहुत सारी बाते हुइ.. उन्होने मुजे सब कुछ बता दीया हे.. मतलक सबकुछ.. जो आगे जाकर होने वाला हे..

भावना : (मुस्कुराते) तो फीर.. अब क्या दिकत हे.. अब मजे करो.. हमे ही तो सम्हालना हे सबको.. क्या इस बारेमे भी बात हुइनां..?

लता : (सरमाते हां मे गरदन हीलाते धीरेसे) हां दीदी.. पुनोदीदीने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. कलतो पुनोदीदी भी चली जायेगी.. ओर हम भी चले जायेगे.. ओर वो रमाभाभी नीलु.. दोनो तो मेरे साथ ही रहेती हे.. ओर पुनो दीदीको अकेलीमे मीलनाका मौका भी नही मीलता था.. तो कल हम दोनोके बीच बहुत सारी बाते होगइ.. दीदी.. कल रात वाकइ मेरी हालत खराब होगइ थी.. इतना दर्द तो मुजे कभी नही हुआ..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. सुन.. पहेले तो ये जडीबुटी तुजे पुनो दीदीने नही दीहे.. वो मंजु दीदीके कहेनेपे तुजे पुनो दीदीने दि हे.. दुसरी बात.. वो जडी बुटी सीर्फ तेरे लीये नही हे.. उनका रीजन कुछ ओर ही हे.. वो भी तुजे पुनोदीदीने बता दीया होगा.. रही बात तेरी तकलीफकी.. तो ये दर्द अ‍ेक बारतो तुजे जेलना ही पडेगा.. जो तुने लखन भैयाके साथ पहेला मीलन करते जेला हे..

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. लेकीन इतना दर्द तो मुजे तब भी नही हुआ था.. ओर येतो इतना बडा हे.. बापरे.. अब मे आपको कैसे समजाउ..? बस.. मुजे इतना पता हे अब लखनको जेलना मुज अकेलीका काम नही हे..

भावना : दीदी.. अब तो सब पता हे तुजे.. सीर्फ तुजे ही नही.. मुजे भी इस दर्दको अ‍ेक बार जेलना पडेगा.. ओर आगे तो बहुत कुछ होगा.. ओर सुन.. उन दोनोके प्रती तेरे व्यवहारमे कुछ फर्क नही पडना चाहीये.. उन दोनोके साथ अ‍ैसेही बीहेव करना जैसे तुजे कुछ पता ही नही हे..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. आप फीकर मत करो.. अब तो उन दोनोके बारेमे मुजे सब कुछ पता चल गया हे.. मे अब इस बातका पुरा खयाल रखुगी.. अब तो उन दोनो कमीनीओको लखनको मीलनेका पुरा मौका दुगी.. ताकी मेरा लखन उन दोनोकी फाडके रखदे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) लगता हे पुनो दीदीने तुजे पुरी ट्रेनींग देदी हे.. हें..हें..हें.. जा अब उनके पास जाकर बैठ.. ओर ध्यान रखना.. अपना कोइ भी सामान खुला मत छोडना.. समजी..?

लता : (खडी होकर जाते) जी दीदी.. मेरा जोखीम वाला सामान इधरही मंजु दीदीके पास हे.. बाकी अब सब ध्यान रखुगी.. दीदी.. क्या आपने बडे भैयाको मील लीया..?

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) नही लता.. यहा मीलनेका मौका ही नही मीलता..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. कल पता चला तो बहुत अच्छा लगा.. की हम सभी आपसमे बहेने हे.. ओर मजेकी बात.. हम सभी बहेने हमारे भाइकी ही बीवीया हे.. ओर मंजु दीदीने भी कैसा फैसला लीया हे..? अब हम सभी बहेने कीसी भी भाइके साथ रीलेशन बना सकती हे.. हें..हें..हें..

भावना : (आस्चर्यसे हसते) मंजुदीदी..? क्या पुनम दीदीने तुजे ये बात भी बतादी..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. उन्होने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. सक तो मुजे पहेलेसे ही था.. की मे हमारी बापुकी संतान नही हु.. लेकीन कल पुनम दीदीसे बातकी तो सब कन्फोर्म हो गया.. की हम सब आपसमे सौतेली बहेने हे.. हें..हें..हें.. चलो अब मे चलती हु..

तब भावना हसते हुअ‍े लताको जाते हुअ‍े देखती रही.. फीर भावना वापस बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब बहारकी ओर पुनम जाकर मंजुके पास बैठकर लतासे हुइ बाते बताने लगी.. की लताको सब कुछ बता दीया हे.. ओर लताने उनकी सभी बाते मान भी लीहे.. कल पुनमने उनको सभी सचाइ बताकर मनालीया.. सुनकर मंजु भी खुस होते हसने लगी..
 
मंजुला : (धीरेसे हसते) पुनो.. क्या लता हमारी बहेन हे.. जानकर दुखी नही हुइ..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. दुखी नही.. कमीनी सुनकर तो बहुत ज्यादा खुस होगइ.. कहेती थी अगर मुजे पहेले पता होता तो मे बडे भैयासे कबसे सादी करचुकी होती.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी.. सब देवुके पीछे ही पडी हे.. आफ्टर ओल वो भी तो हमारी तराह उनकी बहेन हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. आपने ओर बडे भाइने जो नीर्णय लीया हे.. इस बारेमे अब तो हमे लखन भैयाको भी सब बताना पडेगानां..? वरना लताको प्रोबेलेम होगी..

मंजुला : (सरारतसे मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. तो तुम ही बता देना.. क्युकी अब तो तुही उनकी चहीती भाभी हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) कौन मे..? अरे नही नही.. भाभी.. प्लीज.. मे उसे नही बता पाउगी.. मेने आपको कहा तो था.. की मुजे उनको बतानेमे बहुत सरम आयेगी.. आपही उनसे बात करलोनां.. आपको तो वो अपनी मां मानता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनो.. तुम क्यु उनसे इतना डर रही हो..? अ‍ेक ना अ‍ेक दिनतो तुजे ये सब फेइस करना ही पडेगा.. जब मे नही रहुगी तब तुम क्या करोगी..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको पता तो हे वो कीतने सरारती हे.. वो कैसे मेरी मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट भी करने लगते हे.. मुजे तो बहुत सरम आती हे.. आप ही इनसे बात करलोनां..

मंजुला : (हसते धीरेसे) वो तुजे अपनी चहीती भाभी भी तो मानता हे.. ओर भाभी देवरके बीच अ‍ैसी मस्तीया तो आम बात हे.. वो तो सृतीके साथ भी फ्लर्ट करते हे.. तो क्या वो कभी सरमाइ..? चल ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. देख अब वो बेकाबु होने लगे हे.. तो थोडा ध्यानसे काम लेना.. क्या ये तीनोको बता दीया..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. लता दीदीको कल ही बता दीया.. भावना दीदी भी सबकुछ जानती हे.. ओर सृती दीदीको पहेलेसे ही बता चुकी हु.. वोतो ये सब जानकर बहुत ही खुस होगइ..

मंजुला : (हसते धीरेसे) पता हे मुजे.. कमीनी अपनी मांकी तराह ही चुदकड हे.. जब लखनका लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. कमीनीको उनकी नानी याद आजायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. क्या सबसे पहेले वाकइ वो लखन भैयासे.. मतलब..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सीर्फ वो ही नही.. तुम सभी.. खुद तुम भी.. क्या तुजे सब पता नही हे..? क्यु अ‍ेक ही सवाल बार बार पुछ रही हे..? जब तुम सब उनसे मील लोगीनां.. तो हमारे पतीको भी भुल जाओगी.. तो सभी संयमसे काम लेना.. कोइ जल्द बाजीमे गलती मत करना.. समजी..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. बस.. उसी बातका तो डर हे.. वो बार बार अपना प्यार जता रहे हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. तुम अ‍ेक बात समजलो.. तुम्हारा रीलशन देवुके साथ इस बच्ची तक ही सीमीत था.. जो अभी तेरे उदरमे पल रही हे.. अब वक्त आ गया हे.. तुम लखनके पीछे पागल होगी.. भलेही देवुके साथ तेरा रीलेशन हो.. मगर अब तुम लखनको भी उतना प्यार करोगी.. ओर उसीके लीये तडपोगी.. तो फीर उनसे क्यु डर रही हो..





कहा तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. क्युकी उसे भी पता था.. की अ‍ेक ना अ‍ेक दिन उनको भी लखनके नीचे लेटना पडेगा.. यही सब सोचते अ‍ेक बार फीर पुनमकी चुत गीली होने लगी.. पुनम ओर मंजु आपसमे बैठकर धीरेसे बाते कर रही थी.. तब वहा सब लोग बैठकर आरामसे आपसमे बाते कर रहे थे.. तब धिरेनको अपनी बात रखनेका मौका मील गया.. ओर वो मुस्कुराते देवायतसे बात करने लगा..

धिरेन : (खुस होते) जीजु.. मेरा हाउसींग लोन सेन्सन हो गया.. ओर मेरी कारकी लोन भी होगइ हे..

नीर्मला : (खुस होते) अच्छा..? खुद मेनेजरका बंगलो था.. तो सब फटाफट होगया होगा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) हां मम्मी.. जाहीरसी बात हे.. पैसा उन्हीको मीलेगा.. हें..हें..हें.. जीजु.. परसो मकानका रजीस्ट्रेशन करवाना हे..

देवायत : (मुस्कुराते) कल तो तेरी मम्मी ओर मौसी लोग हरद्वार जा रहे हे.. तो इन सबको छोडनेके लीये हमे सहेर आना पडेगा.. तो देखता हु.. अगर टाइम मीला तो आजाउगा वरना तुम ही सब करवालेना.. अब उसमे कहा हमारी जरुरत पडेगी.. तुही सब करवा लेना..

चंदा : (खुस होते) हां बीटु.. मे भी जा रही हु.. लेकीन अभी वहा रहेने तुम मत जाना.. वो सब हम वापस आयेगे तब ही देख लेगे.. क्युकी नये मकानमे अ‍ैसेही नही जाते.. वहा कुछ शुभ कार्य करना पडता हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां मोम.. वो सबतो मुजे भी पता हे.. तबतक मे ओर पुनो हमारे घरपे ही रहेगे.. क्या कल पुनो भी घर आ रही हेनां..?

देवायत : हां.. अब अंकलका सब काम होगया हे.. अगर तुम चाहोतो पुनम ओर दयाको आज ही लेजा सकते हो.. वरना वो ओर दया कल मेरे साथ ही आजायेगी.. मे उनको तुम्हारे घरपे छोड दुंगा.. कल लखन लता के साथ सृती भी जा रही हे.. वो भी भुमी बुआ वापस नही आती तबतक लखनके साथ ही रहेगी.. नीलु भी वही रहेकर पढाइ करेगी.. ओर उसे स्कुलमे लेने छोडने अभी लखन ही जायेगा..

धिरेन : (मुस्कुराते) जीजु.. मे बाइक लेकर आया हु.. तीनो अ‍ेक साथ नही आयेगे.. उनका सामान भी तो साथ होगा.. तो कल आप ही इनको छोड देना..

कहते धिरेन थोडा नीरास होगया.. ओर अपने दिमागमे नीलमको दुसरे तरीकेसे मीलनेका प्लान बनाने लगा.. तब मंजु ओर पुनम अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर कातील स्माइल करने लगी.. तो लखन भी पुनमकी ओर देखते मुस्कुराने लगा.. तभी पुनमने इसारोसे लखनको अपने रुममे मीलनेको कहा.. तो लखनको बडा आस्चर्य हुआ.. तो पुनम ओर लखन अ‍ेक अ‍ेक करते धीरेसे टहेलते पुनमके रुममे घुस गये..
 
लखन : (मुस्कुराते भावनाके पास बैठते) भाभी.. क्या बच्चीको दुध पीला रही हो..? कभी कभी हमे भी पीला दीया करो.. हें..हें..हें.. हम भी आपके देवर हे.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते अपने दांत पीसकर अ‍ेक मुका मारते) लखन.. कीतने कमीने हो आप.. कोइ भाभीके साथ अ‍ैसी मस्तीया करता हे..? मेरी ननंदको कहेना पडेगा.. की अ‍ेक बच्चा पैदा करले.. फीर उनका दुध पीते रहेना.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते धीरेसे) हां कहेना.. वो भी सनुकर खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन.. आप भाभीकी मस्तीया बादमे कर लेना.. पहेले मेने जो बात कहेने केलीये आपको बुलाया हे.. उसे ध्यानसे सुनो.. वरना कोइ अंदर आजायेगा.. तो हमारी बात अधुरी रेह जायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. कहीये.. क्या काम था..?

पुनम : (सरमाते हसते पास बैठते) लखन.. आज धिरेन ओर नीलु अ‍ेक दुसरेके साथ बहुत इसारा कर रहे थे.. लताने नीलुका फोन लेलीया हे.. तबसे दोनोकी बात नही हुइ होगी.. इसीलीये दोनो मीलकर कुछ बात करना चाहते हे.. तो मे चाहती हु.. आप सबसे छपाकर उन दोनोकी मुलाकात करवाके बात करवादो..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. क्या ये आप केह रही हे..? लेकीन क्यु..?

भावना : (आस्चर्यसे देखते) हां दीदी.. अ‍ैसा रीस्क क्यु ले रही हे..? अगर दोनोने बात करके कुछ मीलनेका प्लान करलीया तो..? देखा नही.. आज दोनो कमीने कैसे इसारा कर रहे थे..?

पुनम : (कातील मुस्कानसे धीरेसे) हां भाभी.. वही तो मे चाहती हु.. की दोनो मील जाये.. क्युकी हम उसे रोकेगे तब भी दोनो मीलके ही रहेगे.. ओर मे चाहती हु दोनो जल्दसे जल्द मील जाये.. ताकी मेरा जो प्लान हे.. वो आसान होजाये..

लखन : (मुस्कुराते भीरेसे) लेकीन दीदी.. हमारा प्लान तो.. आइ मीन.. अब कैसे कहु..? हम बादमे बात करे..?

पुनम : (सरमाते हसते) लखन.. आप भावना भाभीकी टेन्शन मत लो.. वो इस खेलमे हमारे साथ सामील हे.. इसे हमारे सारे प्लानके बारेमे ओर मेरे बारेमे सबकुछ पता हे.. तो आप हम चारोकी टेन्शन मत लेना..

भावना : (सरमाते हसते भीरेसे) हां.. इसीलीये आप पुनो दीदीको दीदी दीदी.. कहेके बुलाते होनां..? हें..हें..हें.. देवरजी.. मुजे सब कुछ पता हे.. आप मेरी टेन्शन मत लो.. इनको मेरी हाजरी मे भी भाभी केह सकते हो.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते धीरेसे) हां भाभी.. मुजे लगा आपको कुछ पता नही होगा.. तो मे भाभीको दीदी केह रहा था.. ओर पुनमदी ओर मेरे बीच डील भी हुइ हे.. की हम अकेले होगे तब ही मे इनको भाभी कहुगा.. लेकीन धीरे धीरे करते सबको पता चल गया.. हें..हें..हें..

भावना : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) आप बडे कमीने हो.. बीलकुल अपने बडे भाइकी तराह.. हें..हें..हें.. आप मेरी हाजरीमे पुनोदीको भाभी केह सकते हो.. सृती दीदीको भी सब पता हे.. ओर अब तो लतभी सबकुछ जान चुकी हे..

पुनम : (सरमाते हसते) हां देवरजी.. अब तो लताको भी सबकुछ पता हे.. मैने कल ही उनको सबकुछ बता दीया हे.. अब वो भी हमारे साथ सामील होगइ हे.. अब हम पांच होगये हे.. ओर हमे ही सबका खयाल रखना हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आपने लताको सबकुछ बता दीया तो फीर लताने कुछ नही कहा..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. लेकीन ये सब बाते बादमे.. आप फीकर मत करो.. जो आप चाहते हे वो भी सब होगा.. लेकीन अ‍ेक बार इन दोनोको मीलादो.. फीर हम बादमे तैय करेगे की हमे क्या करना हे.. आप अपनी कोसीस जारी रखो.. ओर मे जैसा कहु आप करते जाइअ‍े..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. क्या ये थोडी जल्दबाजी नही हे..? क्यु इतना बडा रीस्क ले रही हे.. इसमे उल्टा आपकी लाइफ डीस्टर्ब होगी..

पुनम : (रहस्त भरी मुस्कानसे) भाभी.. यही तो मे चाहती हु.. ताकी मे जल्दसे जल्द वापस इस हवेलीमे आ सकु.. अब मे धिरेनसे कोइ रीलेशन रखना नही चाहती.. क्युकी जो बात मे जानती हु.. उस बारेमे अभी कीसीको पता नही हे.. मे यहा जल्द वापस आना चाहती हु.. फीर यहा आकर हमे बहुत कुछ सम्हालना हे.. ओर फीकर मत कीजीये तब आप भी हमारे साथ ही होगी.. हम पांचो मीलकर सबकुछ सम्हाल लेगे.. जो काम मुजे मंजु भाभीने सौंपा हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मे कुछ समजा नही.. आप धिरेनके बारेमे क्या जान गइ हे..? ओर हम पांचो मीलकर.. मतलब..? कौन कौन..?

पुनम : (कातील नजरोसे स्माइल करते धीरेसे) मे.. सृतीभाभी.. भावना भाभी.. लता.. ओर आप.. समज गये..? हमारे प्लानके बारेमे लता भाभीको भी सबकुछ पता हे.. ओर वहा आपको उन दोनोसे मीलनेमे कोइ बाधा नही आयेगी.. समज गये..? ओर धिरेनके बारेमे आपको बादमे बता दुगी.. बस.. वहा जाकर अुछ बाते अ‍ेक बार कंन्फोर्म करनी हे.. अब आप भी अपना काम जल्द सुरु करदो.. मुजे रीजल्ट चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभी.. मे समज गया.. समजो आपका काम आजसे ही सुरु होगया.. क्युकी कल तो हम सब चले जायेगे.. तब वहा सीर्फ हम ही होगे..

भावना : (मुस्कुराते) देवरजी.. अभी अभी लता भी मुजसे मीलकर गइ.. अब वहा आपको लतासे डरनेकी जरुरत नही हे.. उनको भी रमाभाभी ओर नीलमके बारेमे सब कुछ पता चल गया हे.. कमीनीकी इतनी हालत खराब करदो.. दो दिन बीस्तरसे खडी नही होनी चाहीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) लखन.. मेने लताभाभीसे बात करली हे.. की वो भी हमारी बहेन हे.. सुनकर कमीनीको कुछ फर्क ही नही पडा.. हम खामखा उनसे डर रहे थे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हें..हें..हें.. लेकीन लता इन सबके लीये मान कैसे गइ..? उन्होने कोइ अ‍ेतराज नही जताया..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी कुछ बात हे जो आपको भी स्वीकार करनी पडेगी.. ओर वो सब बाते आपको मंजु भाभी बता देगी.. अब आप जाइअ‍े.. वरना कोइ सक करेगा..

लखन : (खडा होकर जाते जाते भावनाके बुब्सपे हाथ रखकर मसलते) जी भाभी.. बहुत मस्त हे.. हें..हें..हें..

भावना : (जुठे गुस्सेसे मारेनेके लीये खडी होते) कमीने.. रुक जरा.. बताती हु.. सरम भी नही आइ..

कहेते सर्मसार होकर मुस्कुराते खडी होने लगी.. तबतक लखन बहारकी ओर भाग चुका था.. तो पुनम लखनकी इस हरकतको देखकर जोरोसे ठहाका मारते भावनाकी ओर देखते हसने लगी.. तो भावना अ‍ेक बार फीर सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअ‍े वापस बेडपे बैठ गइ.. आज लखन उनके साथ अ‍ैसी हरकत करेगा भावनाको उनकी उमीद ही नही थी.. आज भानु देवायतके के अलावा लखन तीसरा सख्स था..

जो उनके दुधुके साथ छेडखानी करके गया.. भानुसे सादीके बाद जब भावनाने अपने रुममे देवायतको बुलाकर प्यारका इजहार कीया तब देवायतने भी उनके होठोको चुमते उनके दुधु मसल दीये थे.. यही सोचते भावनाकी चुत गीली होने लगी.. तब वो बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो वापस बैठकर अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब पुनमने रुमका दरवाजा बंध करदीया ओर आकर भावनाके पास सटकर बैठ गइ.. तब..
 
भावना : (सरमाते हसते) दीदी.. देखा हमारे देवरको.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..? मुजे तो बहुत सरम आइ.. ये तो अभीसे सुरु हो गये.. क्या ये सभी भाभीओके साथ अ‍ैसी मस्तीया करते हे..?

पुनम : (मुस्कुराते गाल चुमते) नही भाभी.. सबके साथ नही.. लगता हे हमारे देवरको आप कुछ ज्यादा ही पसंद आगइ हो.. हें..हें..हें.. ओर ये सब सुरु होनेमे क्या मुहुर्त नीकालना हे क्या..? आप तो अभीसे डर गइ..? मत भुलो अब आने वाली जींदगीमे यही दोनो भाइ हमारी जींदगीका हीस्सा हे.. ओर इनके आगे भी बहुत कुछ होगा तब आप क्या करोगी..? हें..हें..हें..

भावना : (नसीली आंखोसे मुस्कुराते) दीदी.. मे डरी नही हु.. बस.. इन्होने अ‍ैसे अचानक छेड दिया तो बहुत सरम आइ.. दीदी.. क्या सचमे हमे दोनो भाइके साथ.. आइ मीन.. लखन भैया भी..?

पुनम : (मुस्कुराते दुध मसलते) अरे हां मेरी प्यारी भाभी.. हमारे छोटे देवर भी.. सीर्फ आप ही नही.. सृती भाभी.. आप.. आइ मीन.. हमारी जीतनी भी सौतने हे.. लीगल भी.. ओर इलीगल भी.. सबको छुट मील गइ हे.. अपनी मरजीसे सब हमारे देवरके नीचे आजायेगी.. कमीनी अ‍ेक भी बाकी नही रहेगी..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. प्यार तो वो आपको भी करते हे.. मुजे लगता हे सबसे ज्यादा वो आपको पसंद करते हे.. ओर सौतनोमे तो आप भी आगइ.. आप भी तो इनकी भाभी हो.. तो क्या आप भी..? आइ मीन..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हां भाभी.. सच कहा आपने.. क्युकी वो मुजे बचपनसे प्यार करते हे.. बस.. अभी मैने उनको मुजसे जीतनी देर दुर रख सकती हु.. इतनी देर तक दुर ही रखाना हे.. इनमे अ‍ेक दिन मे भी अछुत नही रहुगी.. पता नही मेरी उनसे दुर रहेनेकी कोसीस कीतने दिन तक कामयाब रहेती हे.. फीर तो मुजे भी मजबुरन उनके नीचे आना ही पडेगा..

भावना : (सामने देखते) दीदी.. मजबुरन मतलब..? क्या मुजे ओर बता सकती हे..?

पुनम : (थोडी गंभीर होते) भाभी.. बताउगी.. आपको सबकुछ बताउगी.. लेकीन अभी नही.. जब हम दोनो अकेली होगी.. फुरसतमे आपको सब कुछ बता दुगी.. अभी दरवाजा खोलना पडेगा.. हम रातमे फुरसतमे बात करेगे.. फीर तो कल मे भी चली जाउगी.. पता नही फीर कब यहा वापस आनेको मीलेगा.. कल बंसीभाइकी सादीमे लतासे भी बहुत कुछ बाते करली..

भावना : (मुस्कुराते) हां.. अभी मुजे बता रही थी.. दीदी.. अच्छा हुआ आपने लताको दुर लेजाकर सभी बाते करली.. वरना वो मां बेटी तो उनको छोडती ही नही थी.. खास करके रमा भाभी.. कमीनी सारा दिन उनके पास ही चीपकी रहेती हे..

पुनम : (खडी होकर बहार जाते) भाभी.. फीकर मत करो.. सब सही होजायेगा.. बस.. आप तो अब बडे भाइको मीलनेकी तैयारीया सुरु करदो.. सायद कल आपकी भाइके साथ सुहागरात होगी.. हें..हें..हें..

कहेते पुनमने दरवाजा खोल दीया ओर बहार चली गइ.. तब भावना पुनमने कही बातपे रोमांचीत होते सर्मसार होने लगी.. तब देवायतके बारेमे सोचते उनकी चुत अ‍ेक बार फीर हरकतमे आगइ.. ओर चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया फडफडाते पानी बहाने लगी.. तब भावना बच्चीको जुलेके डालकर बाथरुममे चली गइ.. ओर बाथरुम बंध करते उनके पीछे आंख बंध करते खडी रही.. फीर नसीली आंख करते वही बुब्सपे हाथ रख दीया.. जीसे अभी लखन मसलके गया था.. ओर वो देवायतके बारेमे सोचते अपनी चुतमे उंगली करने लगी..

तो इधर अ‍ेक हप्तेके बाद श्रीधर ओर जयश्रीकी भी सादी थी.. तो लखनको उनकी सादी मे भी आना था.. ओर कल लखन लताके साथ रमा भी उनके साथ सहेरमे उनके घरपे सामान सेट करने जा रही थी.. जो इस वक्त लताके रुममे वो ओर नीलम लताके साथ घरका सामान पेक कर रही थी.. लेकीन आज धिरेन नीचे बैठा था.. तो नीलमका काममे मन नही लग रहा था.. ओर उनको बार बार नीचे जानेकी इच्छा हो रही थी..

क्युकी उसे धिरेनके पाससे उनके फोन नंबरकी चीठी लेनी थी.. तो दुसरी ओर धिरेनको भी नीलमको मीलनेकी इच्छा हो रही थी.. तभी भानु सबकी इजाजत लेकर खेतोपे आराम करने चला गया.. फीर अ‍ेक अ‍ेक करते सब लोग थोडी देर आराम करने अपने अपने रुममे चले गये.. तब चंदा सृती अपनी बाकी बची पेकींग भी करने लगे.. तभी लखन धिरेनको आराम करनेके बहाने उपर लेगया.. ओर धिरेनको लेकर उपरकी मंजसलमे रमाके बाजुके लास्ट रुममे चला गया.. तब..

धिरेन : (सरमाते मुस्कुराते) लखन भैया.. क्या आप भी मुजसे नाराज हे..? कुछ बोलते नही.. इसीलीये..

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. भला मे आपसे क्यु नाराज होउगा.. हम दोनो तो दोस्त हे.. ओर ये सबतो चलता ही रहेता हे.. वरना मे हमारे खेतोमे आपको वो लडकीके पास थोडीना भेजता..? आप मेरी टेन्शन मत लो.. क्या अभी नीलुसे मीलना हे..?

धिरेन : (थोडा सोक्ट होते सरमाते) अरे नही नही.. वरना वापस हंगामा होजायेगा.. नही मीलना उसे.. लता भाभीसे बहुत डर लग रहा हे.. क्या उसने कीसीको बताया तो नही..?

लखन : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) नही जीजु.. अगर हम कीसीसे सच्चे दिलसे प्यार करते हेना.. तो कीसीसे डरना नही चाहीये.. मेरे खयालसे नीलुभी आपको सच्चा प्यार करती हे.. तो अ‍ेक बार आपको उनसे मील लेना चाहीये.. आप इधर आराम करो.. मे कुछ जुगाड करके नीलुको यहा भेजता हु..

धिरेन : (मुस्कुराते खुस होते) लखन भैया.. पुनो आपकी बहेन हे.. तो क्या आपको बुरा नही लगता..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे जीजु.. इसमे बुरा क्यु लगेगा..? मुजे पता हे आप पुनोसे नही नीलुको प्यार करते हो.. बस मेरी समजमे ये नही आ रहा.. की आप उनको प्यार नही करते थे.. तो फीर आपने उनसे सादी क्यु की..? क्युकी अबतो हम दोस्त हे.. अगर आप बताना चाहो तो मुजे बता सकते हो..

धिरेन : (सर जुकाते धीरेसे) नही लखनभैया.. सुनकर आपको बुरा लगेगा.. रहेने दीजीये..

लखन : (कंधेपे हाथ रखकर मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. अगर बुरा लगता तो मेने आपको ओर नीलुको रंगे हाथ पकडा.. तभीसे आपसे बात ही नही करता.. येतो आप मेरे जीजुके साथ मेरे दोस्त भी हे इसीलीये पुछ लीया.. अगर आप बताना नही चाहते तो रहेने दिजीये.. मे आपको फोर्स नही करुगा..

धिरेन : (सरमाते धीरेसे) नही लखनभैया अ‍ैसी बात नही हे.. ठीक हे.. सीर्फ आपको बता रहा हु.. लेकीन ध्यान रखना ये बात सीर्फ अपने तक सीमीत रखना.. क्युकी आपको मे सच्चा दोस्त मानता हु.. इसीलीये आपको बता रहा हु.. प्लीज.. सुनकर गुस्सा मत करना..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते) अरे जीजु आप टेन्शन मतलो.. ये बात कीसीको पता नही चलेगी.. कहो..
 
धिरेन : (नजरे चुराते) हां लखनभैया आपकी बात सच हे.. मे पुनमको प्यार नही करता.. नीलुसे करता हु.. ओर पुनोसे सादी इसीलीये की.. क्युकी.. क्युकी.. मेरे अंदर बदलेकी भावना थी.. जो अब नही हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) जीजु.. कीस बदलेकी भावनाकी बात कर रहे हो..? क्या मुजे बता सकते हो..?

धिरेन : (हांमे सर हीलाते) हां.. क्युकी तब मम्मीकी जीजुके साथ सादी नही हुइ थी.. तब मेरी मम्मी जीजुकी मौसीजी थी.. उनकी सादीसे पहेले दोनोके बीच नाजायज रीस्ता था.. मे जब कोलेजके लीये सहेर चला जाता.. तब पीछेसे जीजु हमारे घरपे आजाते थे.. ओर दोनो साम तक खुब रंगरेलीया मनाते.. मेने भी दोनोको दो तीन बार हमारे घरपे सेक्स करते देखा हे.. मेरी मां बहुत कामी ओरत हे.. ओर मे जीजुको भी अयास आदमी समजने लगा था.. तब मुजे नही पता था की ओरतोकी भी कुछ नीड होती हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन वो दोनो तो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते थे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां लखन भैया.. फीर तो मंजु दीदीने भी मुजे सबकुछ समजाया तब पता चला दोनो आपसमे प्यार करते थे.. इसीलीये मेने ये सोचकर बदलेकी भावनासे पुनोसे सादी की.. की अ‍ेक दिन मे भी उनकी बहेनको ठोकुगा.. बस.. इसीलीये मेने पुनोसे सादी की..

लखन : (अ‍ेक नजरसे देखते) जीजु.. आप हमारे खानदानको क्या समजते हो..? आपको पता हे हमारे खानदानमे कौनसी परंपरा हे..? ओर आपको पता हे आपकी मम्मी कौन हे..? नहीनां..? इसीलीये आपको ये बदलेका खयाल आया.. अगर उस दिन मंजुभाभीसे कुछ ज्यादा जान लेते.. तो आपको ये बुरा खयाल कभी नही आता.. ओर आज पुनोदीदीकी जगाहपे नीलु आपकी बीवी होती.. खैर जाने दिजीये ये सब बाते.. अब ये बाते करना बेकार हे.. बाकी आप पुनमकी टेन्शन मत लो.. अभी सब लोग आराम कर रहे हे..

धिरेन : लखनभैया.. अभी जो बाते हुइ.. प्लीज.. देखना आपकी बहेनको पता ना चले..

लखन : (मुस्कुराते) जीजु आप इनकी टेन्शन मतलो.. ये बात सीर्फ मेरे तक सीमीत रहेगी.. जीजु आपको अ‍ेक सलाह दु..? देखना इस बातका कीसीको पता ना चले.. क्युकी आप मेरे सचे दोस्त हो.. इसीलीये आपको केह रहा हु..

धिरेन : (आस्चर्य भावसे देखते) हां लखन भैया कहीये.. क्युकी अ‍ेक आपही हो जो मेरा सपोर्ट कर रहे हो..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. अगर आप पुनोदीदीसे प्यार नही करते.. तो फीर उनको छोड क्यु नही देते..? दे दीजीये उनको डीवोर्स..

धिरेन : (सोक्ट होते) लखन भैया..? क्या ये आप केह रहे हे..? मत भुलो वो आपकी बहेन हे.. अगर मेने उनको डीवोर्स देदीया तो सब लोग मुजे कच्चा खाजेयेगे.. पहेले तो मेरी मम्मी ही मेरी मार मारके चमडी उखाड देगी.. मे अ‍ैसा सोच भी नही सकता.. कुछ ओर आइडीया होतो बतादो..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? गांड फट रही हे..? अगर कीसीसे प्यार भी करते हो तो हिंमत भी रखो.. अगर उनको डीवोर्स नही दोगे.. तो नीलुसे सादी कैसे करोगे..? मानभी लो हमारे खानदानकी तराह आप भी दो दो बीवीया रखोगे.. तो क्या दोनोके साथ खुस रेह पाओगे..? क्युकी मैने सुना हे पुनोदीदी तो आपके गांवमे ही रहेगी.. ओर आपनेतो नीलुके लीये सहेरमे अ‍ेक घर भी लीया हे.. तो दोनो जगाह पहोंच पाओगे..?

धिरेन : (आस्चर्यसे देखते) आपको कैसे पता मेने ये घर नीलुके लीये लीया हे..?

लखन : (फीकी मुस्कान करते) जीजु.. मे इतना भी भोला नही हु.. जीतना आप समज रहे हो.. सच बताना क्या ये नीलुके लीये ही लीया हेनां..?

धिरेन : (हां मे गरदन हीलाते) हां लखन भैया.. सच कहा आपने.. क्युकी मे नीलुसे सादी करना चाहता हु..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर ठीक हे.. आप अ‍ेक काम करो.. कल जब पुनो वहा आये तो आप उनको सब सच बतादो.. की मे तुजे नही नीलुको प्यार करता हु.. ओर उनके साथ ही रहेना चाहता हु.. तब वो आपसे नाराज होकर खुद ब खुद आपको छोडकर यहा चली आयेगी.. ओर आपका रास्ता साफ.. फीर नीलुसे सादी करके वहा आरामसे रहेना.. क्या कहेते हो..?

धिरेन : (अ‍ेक नजरसे देखते) हा लखन भैयां.. यही होगा जो अभी आपने कहा हे.. मे भी यही सोच रहा था.. तो फीर क्या ये सब जानकर आपको बुरा नही लगा..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी मे भी लताके अलावा दुसरी लडकीसे भी प्यार करता हु.. तो ये सब करनेकी हिंमत भी चाहीये.. जो आपके पास नही हे.. मुजे तो हर दिन अ‍ेक चुत चाहीये.. वरना आप इतने दिन तक पुनोसे दुर थोडीना रेह सकते हो.. अगर आपकी जगाह मे होता तो अबतक मेने पुनोको छोड दीया होता.. ओर नीलुको उठा लीया होता.. फीर नीलुसे सबके सामने सादी भी करली होती..

धिरेन : (हिंमत करते) नही लखन भैया.. मे भी इतना कमजोर नही हु.. जीतना आप समज रहे हो.. मे भी आपको ये सब करके दीखा दुगा.. बस.. अ‍ेक बार नीलुको सहेरमे आने दीजीये.. ओर पुनोसे दुर हुतो क्या हुआ..? वैसे भी मेने मेरा सब इन्तजाम करलीया हे.. मतलब.. वो.. वो.. चुतका.. हमारे घरपे ही.. कमीनी बहुत कडक माल हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते पीठ थप थपाते) हां.. ये हुइना बात.. मेरा सेर दोस्त.. मुजे पता था मेरे दोस्त कभी कमजोर नही होते.. कुछना कुछ जुगाड कर ही लेते हे.. हें..हें..हें.. अब बता भी दो आपने इतने दिन कैसे ओर कीसके साथ गुजारे.. फीर आपको नीलुसे भी मीलवाता हु..

धिरेन : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) लखन भैया प्लीज.. देखना कीसीको पता ना चले.. वरना उनकी ओर मेरी.. दोनोकी इजत चली जायेगी.. कमीनी बहुत मस्त माल हे.. सामनेसे आइ हे.. तो हर दिन उसीसे अपनी प्यास बुजाता हु.. ओर वो भी बहुत चुदकड हे.. जो अपने पतीसे संतुस्ट नही हे.. वो कीसी भी बहानेसे मेरे घरपे आजाती हे.. ओर हम दोनो मीया बीवीकी तराह खुब मजे करते हे..

लखन : (खुस होते मुस्कुराते) अच्छा..? कौन हे वो..? क्या आपही की गांवकी हे..?

धिरेन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. वो.. वो.. जीजुके दोस्त हेनां.. भीमा भाइ.. तो वो भीमा भाइकी नइ बीवी.. पायलभाभी.. मेरे लीये रातका खाना वोही बनाके देजाती हे.. सुबह चाइ नास्ता भी देजाती हे.. तो सुबह ओर साम दो बार हम मीलते हे.. कभी कभी भीमा भाइ बहारगांव होते हे तब वो पुरी रात मेरे साथ ही सोती हे.. ओर हम दोनो पुरी रात खुब मजे करते हे..

लखन : (मुस्कुराते) जीजु.. आप तो बडे छुपे रुस्तम नीकले.. हें..हें..हें.. ये हुइना बात.. अच्छा हुआ आपने मेरी दोस्तीकी इजत रखली.. देखो मेरे सभी दोस्तोको.. कमीनो दो दो ओरतोको सम्हालके बैठे हे.. ओर दोनोको ठोकते हे.. हें..हें..हें.. अब आप बैठो मे नीलुको बुला देता हु.. ओर हां.. वहा सहेरमे नीलुको मीलना हो तब मुजे बताना.. मे आप दोनोको मीलनेका इन्तजाम करदुंगा..

धिरेन : (मनमे खुस होते) जी लखन भैया.. भैया.. थेन्कस..

कहातो लखन मुस्कुराने लगा.. ओर धिरेन नीलमको मीलनेकी उमीदमे अपना लंड खडा करने लगा.. तब धिरेनको नही पता था की बातो ही बातोमे दोस्तीका हवाला देकर लखनने उनसे बहुत बडा राज उगलवा लीया था.. जो पुनमको धिरेनसे दुर करनेके लीये काफी था.. क्युकी खुद लखन चाहता थाकी पुनम धिरेनको छोडकर जल्द उनके पास लौट आये.. क्युकी वो खुद भी पुनमका प्यार पाना चाहता था..

इधर लखन धिरेनसे बात करके अपने रुममे आगया.. तब रमा लता ओर नीलम अपने कपडे बेगमे पेक कर रही थी.. जैसेही लखन आया तब रमा ओर नीलम दोनो ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब रमा कातील नजरोसे लखनकी ओर देखती रही.. तो नीलम भी अपनी मम्मी ओर लखनकी ओर नजर गडाके बैठ गइ.. फीर वो भी लखनकी ओर देखकर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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