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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १९९
इधर लखन धिरेनसे बात करके अपने रुममे आगया.. तब रमा लता ओर नीलम अपने कपडे बेगमे पेक कर रही थी.. जैसेही लखन आया तब रमा ओर नीलम दोनो ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब रमा कातील नजरोसे लखनकी ओर देखती रही.. तो नीलम भी अपनी मम्मी ओर लखनकी ओर नजर गडाके बैठ गइ.. फीर वो भी लखनकी ओर देखकर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तभी....अब आगे
लता : (मुस्कुराते) अरे लखन आप आगये..? क्या मे आपके सभी कपडे पेक करदु..? हंम..?
लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. अभी अेक हप्तेके बाद श्रीधरकी सादी भी हे.. तब हमे वापस यहा आना पडेगा.. ओर अब यहा आना जाना तो लगा ही रहेगा.. तो हमारे आधे से ज्यादा कपडे यही छोडदे.. हम वहासे नया ले लेगे..
लता : (सरमाते मुस्कुराते) ठीक हे.. आप भाभी ओर नीलुके लीये भी कपडे लेना.. क्या अभी आपको यहा आराम करना हे..? तो आज आप बाजुमे भाभी वाले रुममे चले जाइअे.. आज हमे सब पेकींग करना हे.. ओर नीलु.. तुजे भी जाना हो तो अपने रुममे चलीजा.. ओर कुछ देर आराम करले.. वरना तेरे जीजुसे बाते कर.. तबतक मे ओर भाभी सब पेकींग कर लेगे..
नीलम : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) जी दीदी.. अभी चली जाउगी..
लखन : (नीलमकी ओर इसारा करते) लता मे भाभीके रुममे चला जाता हु.. तुम लोग अपना काम नीपटालो.. चल नीलु तुभी आजा..
कहेते नीलमको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते लखन चला गया.. तो लखनकी इस हरकतको रमाने देख लीया.. तो मन ही मन खुस होते मुस्कुराने लगी.. तब नीलम भी लखनके इसारोसे बहुत ही सर्मसार होने लगी.. उनको लगाकी लखन उनके साथ कुछ छेडखानी करना चाहते हे.. इसीलीये उनको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते गये.. तभी रमाने लताकी नजर बचाते नीलमको आंखोका इसारा करते लखनके पास जानेको कीया..
रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. अगर आराम नही करना तो थोडी देर जीजुके पास बैठो.. ओर बैठकर दोनो बाते करो.. तबतक मेभी अभी पेकींग करके आती हु..
नीलम : (सरमाते खडी होते) जी मम्मी.. जाती हु मे..
कहेते नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. क्युकी खुद उनकी मां भी यही चाहती थी.. की नीलम लखनके साथ अकेलेमे टाइम स्पेन्ड करे.. ओर इस मामलेमे वो खुद आगे बढे.. नीलम रमाके कहेनेपे मजबुरन खडी होगइ.. ओर सरमाते लखनके पीछे जाने लगी.. तब उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. क्युकी आज खुद रमा उनको लखनको मीलनेके लीये भेज रही थी..
तब नीलम सरमाते धीरेसे बहार नीकली ओर लखनके पीछे उनके रुमकी ओर जाने लगी.. अभी वो अंसमजमे थी.. की लखनके रुममे जाये के ना जाये.. क्युकी जाते वक्त नीलमको वो सभी बाते याद आने लगी.. जीस दिन लखन उनको अपने घरपे छोडनेके लीये आरहा था.. तब लखनने उनको अपने खेत दिखानेके बहाने अपनी गोडाउनकी ओफीसमे अमेले कैसे दबोच लीया था..
उनको कीस करते उनके दुधु मसलने लगा था.. यहा तक उनका लंड भी पकडा दीया था.. तभी उनको लास्ट वाले रुमके बहार लखन ओर धिरेन खडे दिखाइ दीये.. तो नीलमको देखते ही धिरेन स्माइल करने लगा.. तभी लखनने नीलमको इसारोसे धिरेनको मीलनेके लीये उनके रुममे साथ जानेको कहा.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाके हसने लगी.. तब लखन भी मुस्कुराते दुसरे रुममे चला गया..
तो नीलम जटसे चलने लगी.. ओर फटाफट पीछे देखकर धिरेनके रुममे घुस गइ.. तो धिरेनने फटाफट दरवाजा बंध करलीया.. ओर पलटकर नीलमको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो पागलोकी तराह अेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तब नीलम भी धिरेनका प्यार देखकर मदहोस होते नसेकी हालतमे जाने लगी.. ओर आधी आंख चडाते धिरेनका होठ चुमते साथ देने लगी..

तब धिरेनने नीलमके बुब्सको अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर मसलने लगा तो नीलम बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर सीसकारीया करने लगी.. उनकी चुत फडफडाने लगी.. ओर उसमेसे पानीका रीसाव होने लगा.. नीलमने सरमाते धिरेनके लंडको पेन्टके उपरसे ही पकडलीया.. ओर मसलने लगी.. उसे लगाकी वो अभी के अभी धिरेनके लंडको अपनी चुतमे घुसादे.. तो धिरेनभी उतेजीत हो चुका था.. तभी..
धिरेन : (कामुक आवाजमे धीरेसे) नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. कैसी हो तुम..?
नीलम : (सरमाते सामने देखते) जानु.. लव यु टु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. बस.. आपके बीना तडप रही हु.. मुजे यहासे लेजाइअे.. ओर सादी कर लीजीये मुजसे.. मे आपके साथ रहेना चाहती हु..
धिरेन : (धीरेसे होंठ चुमते) डार्लींग.. अैसा ही होगा जैसा तुम चाहती हो.. अब मुजे पुनोके साथ नही रहेना.. नीलु.. मेने हमारे लीये वो घर लेलीया हे.. जीसे हम देखने गये थे.. अब हम दोनो सादीके बाद वही रहेगे.. ओर मेने तुमको कीतनी बार ट्राइ कीया.. तुम्हारा फोन बंध ही आरहा हे.. कहा हे वो..?
नीलम : (सामने देखते) जानु.. सोरी.. वो लता दीदीके हाथ लग गगा.. तो उन्हीके पास हे.. वो हमसे बहुत नाराज हे.. ओर आपका नंबर भी मीस होगया.. अच्छा हे उसने अभी मेरे मम्मी पापाको नही बताया.. जानु.. मुजे अब लता दीदीके साथ रहेकर ही पढना पडेगा.. आप कुछ कीजीयेनां..
धिरेन : (जेबसे चीठी नीकालकर देते) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. हम दोनो स्कुल टाइममे मीलेगे.. ये ले मेरा नंबर.. अब तेरे पास ही रखना.. मुजे भी कुछ अैसी ही आसंकाये थी.. तभी से मेरा नंबर लीखकर जेबमे रख लीया था.. अब इसे सम्हालके रखना.. हम बादमे दुसरा फोन लेलेगे.. तबतक तुम कीसी भी फोनसे बात करलेना..
नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. वो.. वो.. लखन जीजु.. अभी यहा खडे थे.. तो क्याआआ....
धिरेन : (बीचमे ही बात काटते) हां नीलु.. तु उनकी टेन्शन मतले.. वो हमारे साथ हे.. लखन भैया मेरे सालेके साथ साथ मेरे बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. हम दोनोके बारेमे सब कुछ जानते हे.. हमारा मीलन उसीने करवाया हे.. उनसे डरनेकी कोइ जरुरत नही.. ओर वहा जब भी तुजे मुजसे मीलनेका मन करे तु लखन भैयाको कहेना.. वो तुजे मुजसे मीलवा देगे..
नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. क्या ये सब उसने कहा हे..? आइ कान्ट बीलीव.. क्या उन्होने ही..? मेरी तो समजमे नही आ रहा.. क्युकी वो खुद पुनम दीदीके सगे भाइ हे.. तो वो क्यु हमारी मदद करेगे..? वो ओर लता दीदीने तो हमे रंगे हाथो पकडा था.. ओर मुजे अपने साथ ले गये थे..
धिरेन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. ये सच हे.. लखन भैया लता भाभीके कहेनेपे साथ आये थे.. मुजे लगता हे जबतक लखन भैया हे.. तबतक हमे मीलनेमे कोइ प्रोबलेम नही होगी.. वो मेरे सालेके साथ साथ बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. देखा नही..? वो कैसे हमारी मदद कर रहे हे.. पुनोको तो बस.. यही पडे रहेना हे.. उनको अपने पतीकी कोइ चीन्ता नही हे..
नीलम : (चीठी जेबमे रखते) जानु.. मुजे जाना होगा.. मम्मी कभी भी रुममे आ सकती हे.. मुजे वहा नही देखेगी तो सक करेगी.. उनको लखन जीजुपे बहुत भरोसा हे.. तो अब हम सहेरमे ही मीलेगे.. मे आपको कोल करदुगी.. तब आजाना.. मे चलती हु.. ओर हां.. अभी आप बहार मत नीकलना.. वरना लतादीदी ओर मेरी मम्मी यही हे.. वो आपको देखेगी तो उनको भी सक होजायेगा.. वो कभी भी बहार नीकल सकती हे..
कहेते नीलम धिरेनके होठ चुमकर जटसे दबे पांव बहार नीकल गइ.. ओर बहार नीकलते ही दोनो ओर देखने लगी.. तो पासके ही रमा भाभीके रुमके पास लखन अभी भी बहार खडा रहेकर नीलमके बहार नीकलनेका इन्तजार कर रहा था.. जैसे ही नीलम उनके रुमके पास गुजरी लखनने फौरन उनका हाथ पकडकर अपने रुममे खीच लीया.. ओर जटसे दरवाजा बंध करदीया.. तो नीलम बहुत ही गभरा गइ..
अध्याय - १९९
इधर लखन धिरेनसे बात करके अपने रुममे आगया.. तब रमा लता ओर नीलम अपने कपडे बेगमे पेक कर रही थी.. जैसेही लखन आया तब रमा ओर नीलम दोनो ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब रमा कातील नजरोसे लखनकी ओर देखती रही.. तो नीलम भी अपनी मम्मी ओर लखनकी ओर नजर गडाके बैठ गइ.. फीर वो भी लखनकी ओर देखकर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तभी....अब आगे
लता : (मुस्कुराते) अरे लखन आप आगये..? क्या मे आपके सभी कपडे पेक करदु..? हंम..?
लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. अभी अेक हप्तेके बाद श्रीधरकी सादी भी हे.. तब हमे वापस यहा आना पडेगा.. ओर अब यहा आना जाना तो लगा ही रहेगा.. तो हमारे आधे से ज्यादा कपडे यही छोडदे.. हम वहासे नया ले लेगे..
लता : (सरमाते मुस्कुराते) ठीक हे.. आप भाभी ओर नीलुके लीये भी कपडे लेना.. क्या अभी आपको यहा आराम करना हे..? तो आज आप बाजुमे भाभी वाले रुममे चले जाइअे.. आज हमे सब पेकींग करना हे.. ओर नीलु.. तुजे भी जाना हो तो अपने रुममे चलीजा.. ओर कुछ देर आराम करले.. वरना तेरे जीजुसे बाते कर.. तबतक मे ओर भाभी सब पेकींग कर लेगे..
नीलम : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) जी दीदी.. अभी चली जाउगी..
लखन : (नीलमकी ओर इसारा करते) लता मे भाभीके रुममे चला जाता हु.. तुम लोग अपना काम नीपटालो.. चल नीलु तुभी आजा..
कहेते नीलमको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते लखन चला गया.. तो लखनकी इस हरकतको रमाने देख लीया.. तो मन ही मन खुस होते मुस्कुराने लगी.. तब नीलम भी लखनके इसारोसे बहुत ही सर्मसार होने लगी.. उनको लगाकी लखन उनके साथ कुछ छेडखानी करना चाहते हे.. इसीलीये उनको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते गये.. तभी रमाने लताकी नजर बचाते नीलमको आंखोका इसारा करते लखनके पास जानेको कीया..
रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. अगर आराम नही करना तो थोडी देर जीजुके पास बैठो.. ओर बैठकर दोनो बाते करो.. तबतक मेभी अभी पेकींग करके आती हु..
नीलम : (सरमाते खडी होते) जी मम्मी.. जाती हु मे..
कहेते नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. क्युकी खुद उनकी मां भी यही चाहती थी.. की नीलम लखनके साथ अकेलेमे टाइम स्पेन्ड करे.. ओर इस मामलेमे वो खुद आगे बढे.. नीलम रमाके कहेनेपे मजबुरन खडी होगइ.. ओर सरमाते लखनके पीछे जाने लगी.. तब उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. क्युकी आज खुद रमा उनको लखनको मीलनेके लीये भेज रही थी..
तब नीलम सरमाते धीरेसे बहार नीकली ओर लखनके पीछे उनके रुमकी ओर जाने लगी.. अभी वो अंसमजमे थी.. की लखनके रुममे जाये के ना जाये.. क्युकी जाते वक्त नीलमको वो सभी बाते याद आने लगी.. जीस दिन लखन उनको अपने घरपे छोडनेके लीये आरहा था.. तब लखनने उनको अपने खेत दिखानेके बहाने अपनी गोडाउनकी ओफीसमे अमेले कैसे दबोच लीया था..
उनको कीस करते उनके दुधु मसलने लगा था.. यहा तक उनका लंड भी पकडा दीया था.. तभी उनको लास्ट वाले रुमके बहार लखन ओर धिरेन खडे दिखाइ दीये.. तो नीलमको देखते ही धिरेन स्माइल करने लगा.. तभी लखनने नीलमको इसारोसे धिरेनको मीलनेके लीये उनके रुममे साथ जानेको कहा.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाके हसने लगी.. तब लखन भी मुस्कुराते दुसरे रुममे चला गया..
तो नीलम जटसे चलने लगी.. ओर फटाफट पीछे देखकर धिरेनके रुममे घुस गइ.. तो धिरेनने फटाफट दरवाजा बंध करलीया.. ओर पलटकर नीलमको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो पागलोकी तराह अेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तब नीलम भी धिरेनका प्यार देखकर मदहोस होते नसेकी हालतमे जाने लगी.. ओर आधी आंख चडाते धिरेनका होठ चुमते साथ देने लगी..

तब धिरेनने नीलमके बुब्सको अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर मसलने लगा तो नीलम बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर सीसकारीया करने लगी.. उनकी चुत फडफडाने लगी.. ओर उसमेसे पानीका रीसाव होने लगा.. नीलमने सरमाते धिरेनके लंडको पेन्टके उपरसे ही पकडलीया.. ओर मसलने लगी.. उसे लगाकी वो अभी के अभी धिरेनके लंडको अपनी चुतमे घुसादे.. तो धिरेनभी उतेजीत हो चुका था.. तभी..
धिरेन : (कामुक आवाजमे धीरेसे) नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. कैसी हो तुम..?
नीलम : (सरमाते सामने देखते) जानु.. लव यु टु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. बस.. आपके बीना तडप रही हु.. मुजे यहासे लेजाइअे.. ओर सादी कर लीजीये मुजसे.. मे आपके साथ रहेना चाहती हु..
धिरेन : (धीरेसे होंठ चुमते) डार्लींग.. अैसा ही होगा जैसा तुम चाहती हो.. अब मुजे पुनोके साथ नही रहेना.. नीलु.. मेने हमारे लीये वो घर लेलीया हे.. जीसे हम देखने गये थे.. अब हम दोनो सादीके बाद वही रहेगे.. ओर मेने तुमको कीतनी बार ट्राइ कीया.. तुम्हारा फोन बंध ही आरहा हे.. कहा हे वो..?
नीलम : (सामने देखते) जानु.. सोरी.. वो लता दीदीके हाथ लग गगा.. तो उन्हीके पास हे.. वो हमसे बहुत नाराज हे.. ओर आपका नंबर भी मीस होगया.. अच्छा हे उसने अभी मेरे मम्मी पापाको नही बताया.. जानु.. मुजे अब लता दीदीके साथ रहेकर ही पढना पडेगा.. आप कुछ कीजीयेनां..
धिरेन : (जेबसे चीठी नीकालकर देते) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. हम दोनो स्कुल टाइममे मीलेगे.. ये ले मेरा नंबर.. अब तेरे पास ही रखना.. मुजे भी कुछ अैसी ही आसंकाये थी.. तभी से मेरा नंबर लीखकर जेबमे रख लीया था.. अब इसे सम्हालके रखना.. हम बादमे दुसरा फोन लेलेगे.. तबतक तुम कीसी भी फोनसे बात करलेना..
नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. वो.. वो.. लखन जीजु.. अभी यहा खडे थे.. तो क्याआआ....
धिरेन : (बीचमे ही बात काटते) हां नीलु.. तु उनकी टेन्शन मतले.. वो हमारे साथ हे.. लखन भैया मेरे सालेके साथ साथ मेरे बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. हम दोनोके बारेमे सब कुछ जानते हे.. हमारा मीलन उसीने करवाया हे.. उनसे डरनेकी कोइ जरुरत नही.. ओर वहा जब भी तुजे मुजसे मीलनेका मन करे तु लखन भैयाको कहेना.. वो तुजे मुजसे मीलवा देगे..
नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. क्या ये सब उसने कहा हे..? आइ कान्ट बीलीव.. क्या उन्होने ही..? मेरी तो समजमे नही आ रहा.. क्युकी वो खुद पुनम दीदीके सगे भाइ हे.. तो वो क्यु हमारी मदद करेगे..? वो ओर लता दीदीने तो हमे रंगे हाथो पकडा था.. ओर मुजे अपने साथ ले गये थे..
धिरेन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. ये सच हे.. लखन भैया लता भाभीके कहेनेपे साथ आये थे.. मुजे लगता हे जबतक लखन भैया हे.. तबतक हमे मीलनेमे कोइ प्रोबलेम नही होगी.. वो मेरे सालेके साथ साथ बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. देखा नही..? वो कैसे हमारी मदद कर रहे हे.. पुनोको तो बस.. यही पडे रहेना हे.. उनको अपने पतीकी कोइ चीन्ता नही हे..
नीलम : (चीठी जेबमे रखते) जानु.. मुजे जाना होगा.. मम्मी कभी भी रुममे आ सकती हे.. मुजे वहा नही देखेगी तो सक करेगी.. उनको लखन जीजुपे बहुत भरोसा हे.. तो अब हम सहेरमे ही मीलेगे.. मे आपको कोल करदुगी.. तब आजाना.. मे चलती हु.. ओर हां.. अभी आप बहार मत नीकलना.. वरना लतादीदी ओर मेरी मम्मी यही हे.. वो आपको देखेगी तो उनको भी सक होजायेगा.. वो कभी भी बहार नीकल सकती हे..
कहेते नीलम धिरेनके होठ चुमकर जटसे दबे पांव बहार नीकल गइ.. ओर बहार नीकलते ही दोनो ओर देखने लगी.. तो पासके ही रमा भाभीके रुमके पास लखन अभी भी बहार खडा रहेकर नीलमके बहार नीकलनेका इन्तजार कर रहा था.. जैसे ही नीलम उनके रुमके पास गुजरी लखनने फौरन उनका हाथ पकडकर अपने रुममे खीच लीया.. ओर जटसे दरवाजा बंध करदीया.. तो नीलम बहुत ही गभरा गइ..














