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सृती : (बहार नीकते) अरे हां लता.. मे तो भुल ही गइ थी.. मे पुनो दीदीसे बात करलुगी.. लेकीन तुम भी नीरास मत हो.. क्या तुजे पुनोदीदीने कुछ बताया नही..? हंम..? सुन.. तुजे सीर्फ हमारा देवु ही प्रेगनेन्ट कर सकता हे.. सीर्फ तुजे ही नही.. इनमे मंजु ओर पुनमदीदी भी बाकात नही हे.. तुम तीनोको या तो देवु.. या फीर स्वयं हमारे जो स्वमी आयेगे वो.. लता.. तुम तीनो हमारे स्वामीके लीये स्पेसीयल हो.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाकर मुस्कुराते बहार आते) हां भाभी.. इस बारेमे पुनम दीदी ओर मंजुदीदीसे भी बात हुइ.. भाभी.. क्या वाकइ हम सब परीया ओर अप्सराये हे..? आजके जमानेमे तो मुजे यकीन ही नही होता.. क्या आप इस बातको मानती हो..? क्युकी आप तो अेक डोक्टर भी हो..
सृती : (मुस्कुराते सोफेपे बैठते) लता.. हां लता.. सही कहा तुमने.. मे अेक डोक्टर हु.. पहेलेतो मुजे भी इन सब बातोपे यकीन नही होता था.. लेकीन अब यकीन होने लगा हे.. फीर भी दिमाग इन बातोको माननेके लीये तैयार नही हे.. सुन.. इसीलीये तो हमारे यहा कोइ रीस्ते नातेको नही मानते.. समजी..
लता : (बैठते) हां भाभी.. इस बारेमे भी बाते हुइ.. अब ये दोनो आजाये तो हम खानेपे बैठ जाये.. चलो..
दोनो बाते कर रही थी.. तभी लखन ओर रमाभी घरपे आगये.. तब रमाके बाल थोडे बीखरे हुअे लग रहे थे.. ओर वो बहुत ही सरमा रही थी.. आते ही सीधी अपने रुममे चली गइ.. तो इसे देखकर लता ओर सृती बहुत कुछ समज गइ.. ओर अेक दुसरेकी ओर देखते कातील मुस्कान करने लगी.. तब लखन सीधा ही उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लता ओर सृती दोनो कीचनमे जाकर खानेकी तैयारीया करने लगी..
तभी लखन अपने रुममे गया तो वहा रजीया आराम करते जाग रही थी.. तो लखनको देखते ही बेडसे खडी होगइ.. ओर लखनकी ओर देखकर सरमाते मुस्कुराने लगी.. तो लखनने आते ही रजीयाको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तो रजीया उनका साथ देने लगी.. फीर अचानक हसते लखनसे दुर होगइ.. ओर लखनको बाथरुमकी ओर धकेलने लगी.. तब..

रजीया : (सरमाते हसते) लखन.. अभी कोइ सरारत नही.. अब आपकी पांच दिनकी छुटी.. हे.. हें..हें.. नीचे जाइअे सब लोग आपके आनेका इन्तजार कर रहे थे.. खाना नही खाना क्या..?
लखन : (मुस्कुराते अपना सर पकडते) ओह.. गोड.. रजु तुम भी..? अब मे इसका क्या करुगा.. देख कैसे खडा हे.. बैठनेका नाम ही नही ले रहा..
रजीया : (सरमाकर मुस्कुराते) क्यु..? घरमे दो दो तीतलीया तो आइ हुइ हे.. उन मां बेटी मेसे अेकको पकड लीजीये.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. क्या बोल रही हे..? क्यु तुजे भी सब..?
रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) हां.. याद हे आपको..? आपकी सादीसे पहेले आप लता दीदीको रातमे होलमे मीलेथे.. तब नीलु आपका लाइव सो देख रही थी.. ओर मुजे लता दीदीने भी सबकुछ बता दीया हे.. जाइअे.. आज अच्छा मौका हे.. क्युकी मे ओर लता दीदीतो आपको छुने नही देगी.. आज कर दीजीये पुनम दीदीका काम.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते बाथरुममे जाते) तुम सबकी सब कमीनी हो.. मुजे कैसी बीवीया मीली हे..? सामनेसे दुसरी ओरतके पास भेजती हे.. चल तुजे खाना नही खाना क्या..?
लता : (खाना लेकर आते) नही.. आज रजुदीदी इधर ही खा लेगी.. इसे आराम करने दीजीये.. चलीये आप भी फ्रेस होजाइअे.. नीचे सब आपका इन्तजार कर रही हे.. ओर सुनीये.. अब रजु दीदीको पांच दिन हाथ मत लगाना.. समजे..?
लखन : (हसते बाथरुममे घुसते) अरे हां बाबा हां.. अभी रजुने सब बताया.. हें..हें..हें..
कहा तो लता रजीयाकी देखते हसने लगी.. ओर उनका खाना वही बेडपे रख दीया.. तब रजीयाने लताको सारी बात बतादी.. की अभी लखनसे क्या बात हुइ.. जीसे सुनकर लताभी हसने लगी.. तभी लखन भी फ्रेस होकर बहार आगया.. ओर लताको अब भी वही देखकर अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तब कुछ देरतो लताभी मदहोस होकर लखनका साथ देने लगी.. फीर अचानक उनसे अलग होकर इनका हाथ पकडकर नीचे जाने लगी..
लता : (हसते धीरेसे) लखन.. पहेले आप नीचे चलीये.. ओर हां.. अभी जो रजुदीदीने कहा.. वो सही हे.. आप देर रात भाभीके पास चले जाना.. आज कल उनको बहुत खुजली हो रही हे.. आज उनकी सारी खुजली मीटा दीजीये.. कैसे पटाका बनकर आपके साथ दोडी चली गइ.. ओर सुनो.. कमीनी दो दिन बीस्तरसे उठनी नही चाहीये.. समजे..? वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) जी रानी साहीबा.. जो हुकुम.. ओर कुछ..?
लता : (सरमाकर साथ चलते धीरेसे) हां.. वो रमा भाभी चली जाये.. तो इस नीलुको भी लाइनमे ले लेना.. बाकी सब बाते बादमे हमारे रुममे करेगे.. मुजे आपसे ओर भी जरुरी बाते करनी हे.. चलीये..
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. मुजे भी तुमसे नीलुके बारेमे कुछ बात करनी हे.. हम हमारे रुममे ही बात करेगे..
बाते करते दोनो नीचे आगये.. ओर सब लोग डाइनींगपे डीनर करने बैठ गये.. तो आज लखनके साथ लता ओर सृती बैठी थी.. तो लखनके सामने रमा ओर नीलम बैठ गइ.. लताने सबको खाना सर्व कीया.. ओर खुदभी खाना लेके लखनके पास बैठ गइ.. तब रमा लखनकी ओर बार बार देखते बहुत ही सरमा रही थी.. जीसे देखकर सृती ओर लता भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी..
सबलोग खाना खा रहे थे.. तब खाना खाते लखनको थोडी सरारत सुजी.. ओर वो नीलमके पैरको पैरसे सहेलाने लगा.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर मंद मंद मुस्कुराते टेडी नजरोसे लखनको देखने लगी.. ओर आंखोसे इनकी मम्मीकी ओर इसारा करते वो लखनको अैसा ना करनेकी मनत करने लगी.. तो लखनने पैर हटालीये.. ओर रमाके पैरोकी ओर लेगया.. ओर उनके पैरको सहेलाने लगा..
तो रमा बहुत ही सरमाने लगी.. ओर सर नीचे करते खाना खाते मुस्कुराने लगी.. उनको पता था ये सब लखनकी करतुत हे.. ओर अभी अभी वो लखनसे प्यार करके आइ थी.. तो रमाको इस खेलमे मजा आने लगा.. ओर वो भी लखनके पैरोको पैरसे सहेलाने लगी.. तो लखनने थोडा पैर उठाते उनकी जांगो मे ही फसा लीया.. ओर पैरके अनुठेसे रमाकी चुतको खरोदने लगा.. तब रमाकी हालत पतली होने लगी..
अेक बार फीर उतेजीत होते उनकी चुत पनीयाने लगी.. रमा खाना खाते थोडी आगेकी ओर सरक गइ.. ओर कीसीको पता ना चले अैसे धीरेसे नीचेसे अपनी कमरको आगे पीछे करने लगी.. ताकी लखनका पैर उनकी चुतको सहेला सके.. रमा बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. आज उसने लखनसे चुदवानेका पुरा मन बना लीया था.. वो कीसी भी हालमे आज नीलुके पास जाने वाली नही थी.. ओर वो अपनी कमर हीलाते अभीसे नीलमसे दुर रहेनेकी प्लानींग करने लगी..
लता : (सरमाकर मुस्कुराते बहार आते) हां भाभी.. इस बारेमे पुनम दीदी ओर मंजुदीदीसे भी बात हुइ.. भाभी.. क्या वाकइ हम सब परीया ओर अप्सराये हे..? आजके जमानेमे तो मुजे यकीन ही नही होता.. क्या आप इस बातको मानती हो..? क्युकी आप तो अेक डोक्टर भी हो..
सृती : (मुस्कुराते सोफेपे बैठते) लता.. हां लता.. सही कहा तुमने.. मे अेक डोक्टर हु.. पहेलेतो मुजे भी इन सब बातोपे यकीन नही होता था.. लेकीन अब यकीन होने लगा हे.. फीर भी दिमाग इन बातोको माननेके लीये तैयार नही हे.. सुन.. इसीलीये तो हमारे यहा कोइ रीस्ते नातेको नही मानते.. समजी..
लता : (बैठते) हां भाभी.. इस बारेमे भी बाते हुइ.. अब ये दोनो आजाये तो हम खानेपे बैठ जाये.. चलो..
दोनो बाते कर रही थी.. तभी लखन ओर रमाभी घरपे आगये.. तब रमाके बाल थोडे बीखरे हुअे लग रहे थे.. ओर वो बहुत ही सरमा रही थी.. आते ही सीधी अपने रुममे चली गइ.. तो इसे देखकर लता ओर सृती बहुत कुछ समज गइ.. ओर अेक दुसरेकी ओर देखते कातील मुस्कान करने लगी.. तब लखन सीधा ही उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लता ओर सृती दोनो कीचनमे जाकर खानेकी तैयारीया करने लगी..
तभी लखन अपने रुममे गया तो वहा रजीया आराम करते जाग रही थी.. तो लखनको देखते ही बेडसे खडी होगइ.. ओर लखनकी ओर देखकर सरमाते मुस्कुराने लगी.. तो लखनने आते ही रजीयाको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तो रजीया उनका साथ देने लगी.. फीर अचानक हसते लखनसे दुर होगइ.. ओर लखनको बाथरुमकी ओर धकेलने लगी.. तब..

रजीया : (सरमाते हसते) लखन.. अभी कोइ सरारत नही.. अब आपकी पांच दिनकी छुटी.. हे.. हें..हें.. नीचे जाइअे सब लोग आपके आनेका इन्तजार कर रहे थे.. खाना नही खाना क्या..?
लखन : (मुस्कुराते अपना सर पकडते) ओह.. गोड.. रजु तुम भी..? अब मे इसका क्या करुगा.. देख कैसे खडा हे.. बैठनेका नाम ही नही ले रहा..
रजीया : (सरमाकर मुस्कुराते) क्यु..? घरमे दो दो तीतलीया तो आइ हुइ हे.. उन मां बेटी मेसे अेकको पकड लीजीये.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. क्या बोल रही हे..? क्यु तुजे भी सब..?
रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) हां.. याद हे आपको..? आपकी सादीसे पहेले आप लता दीदीको रातमे होलमे मीलेथे.. तब नीलु आपका लाइव सो देख रही थी.. ओर मुजे लता दीदीने भी सबकुछ बता दीया हे.. जाइअे.. आज अच्छा मौका हे.. क्युकी मे ओर लता दीदीतो आपको छुने नही देगी.. आज कर दीजीये पुनम दीदीका काम.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते बाथरुममे जाते) तुम सबकी सब कमीनी हो.. मुजे कैसी बीवीया मीली हे..? सामनेसे दुसरी ओरतके पास भेजती हे.. चल तुजे खाना नही खाना क्या..?
लता : (खाना लेकर आते) नही.. आज रजुदीदी इधर ही खा लेगी.. इसे आराम करने दीजीये.. चलीये आप भी फ्रेस होजाइअे.. नीचे सब आपका इन्तजार कर रही हे.. ओर सुनीये.. अब रजु दीदीको पांच दिन हाथ मत लगाना.. समजे..?
लखन : (हसते बाथरुममे घुसते) अरे हां बाबा हां.. अभी रजुने सब बताया.. हें..हें..हें..
कहा तो लता रजीयाकी देखते हसने लगी.. ओर उनका खाना वही बेडपे रख दीया.. तब रजीयाने लताको सारी बात बतादी.. की अभी लखनसे क्या बात हुइ.. जीसे सुनकर लताभी हसने लगी.. तभी लखन भी फ्रेस होकर बहार आगया.. ओर लताको अब भी वही देखकर अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तब कुछ देरतो लताभी मदहोस होकर लखनका साथ देने लगी.. फीर अचानक उनसे अलग होकर इनका हाथ पकडकर नीचे जाने लगी..
लता : (हसते धीरेसे) लखन.. पहेले आप नीचे चलीये.. ओर हां.. अभी जो रजुदीदीने कहा.. वो सही हे.. आप देर रात भाभीके पास चले जाना.. आज कल उनको बहुत खुजली हो रही हे.. आज उनकी सारी खुजली मीटा दीजीये.. कैसे पटाका बनकर आपके साथ दोडी चली गइ.. ओर सुनो.. कमीनी दो दिन बीस्तरसे उठनी नही चाहीये.. समजे..? वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) जी रानी साहीबा.. जो हुकुम.. ओर कुछ..?
लता : (सरमाकर साथ चलते धीरेसे) हां.. वो रमा भाभी चली जाये.. तो इस नीलुको भी लाइनमे ले लेना.. बाकी सब बाते बादमे हमारे रुममे करेगे.. मुजे आपसे ओर भी जरुरी बाते करनी हे.. चलीये..
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. मुजे भी तुमसे नीलुके बारेमे कुछ बात करनी हे.. हम हमारे रुममे ही बात करेगे..
बाते करते दोनो नीचे आगये.. ओर सब लोग डाइनींगपे डीनर करने बैठ गये.. तो आज लखनके साथ लता ओर सृती बैठी थी.. तो लखनके सामने रमा ओर नीलम बैठ गइ.. लताने सबको खाना सर्व कीया.. ओर खुदभी खाना लेके लखनके पास बैठ गइ.. तब रमा लखनकी ओर बार बार देखते बहुत ही सरमा रही थी.. जीसे देखकर सृती ओर लता भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी..
सबलोग खाना खा रहे थे.. तब खाना खाते लखनको थोडी सरारत सुजी.. ओर वो नीलमके पैरको पैरसे सहेलाने लगा.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर मंद मंद मुस्कुराते टेडी नजरोसे लखनको देखने लगी.. ओर आंखोसे इनकी मम्मीकी ओर इसारा करते वो लखनको अैसा ना करनेकी मनत करने लगी.. तो लखनने पैर हटालीये.. ओर रमाके पैरोकी ओर लेगया.. ओर उनके पैरको सहेलाने लगा..
तो रमा बहुत ही सरमाने लगी.. ओर सर नीचे करते खाना खाते मुस्कुराने लगी.. उनको पता था ये सब लखनकी करतुत हे.. ओर अभी अभी वो लखनसे प्यार करके आइ थी.. तो रमाको इस खेलमे मजा आने लगा.. ओर वो भी लखनके पैरोको पैरसे सहेलाने लगी.. तो लखनने थोडा पैर उठाते उनकी जांगो मे ही फसा लीया.. ओर पैरके अनुठेसे रमाकी चुतको खरोदने लगा.. तब रमाकी हालत पतली होने लगी..
अेक बार फीर उतेजीत होते उनकी चुत पनीयाने लगी.. रमा खाना खाते थोडी आगेकी ओर सरक गइ.. ओर कीसीको पता ना चले अैसे धीरेसे नीचेसे अपनी कमरको आगे पीछे करने लगी.. ताकी लखनका पैर उनकी चुतको सहेला सके.. रमा बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. आज उसने लखनसे चुदवानेका पुरा मन बना लीया था.. वो कीसी भी हालमे आज नीलुके पास जाने वाली नही थी.. ओर वो अपनी कमर हीलाते अभीसे नीलमसे दुर रहेनेकी प्लानींग करने लगी..


















