Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 69 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२५

उस रात भी डीनर करने सीर्फ धिरेन ही अकेला बैठा था.. तो आज भी दयाने उनकी सब्जीमे नींदकी गोलीया मीला दी थी.. जब धिरेनने डीनर करलीया ओर उपर चला गया तब पुनम ओर दयाने भी खाना खालीया.. आज पुनम दयाके साथ ही सोने वाली थी.. तो धिरेन आज रात भी उपर जाते ही नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर इस रात पुनम नीचे दयाके साथ सोनेके लीये उनके रुममे आगइ....अब आगे

तो सहेरमे भी डीनरके वाक्त सबलोग अ‍ेकठा बैठकर ठीनर कर रहे थे.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देखती रही.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखता था.. तो सृतीने नीचेसे अपना पैर लखनके पैरपे रखा.. तो लखनने अपना पैर पीछे खीच लीया.. तो सृती थोडी वीचलीत होगइ.. ओर खाना खाते ही वो उपर अपने रुममे सोने चली गइ.. तो आज रमा भी काफी हद तब ठीक होगइ थी..

लताने नीलमको उपर सोनेके लीये कहा तो नीलम भी उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर राधीका अपनी मम्मीके पास सो गइ.. तो लता रजीया भी लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तभी लता नीलमका फोन लेकर बहार नीकली.. जो धिरेनने नीलमको गीफ्ट दीया था.. जब दोनो पकडे गये.. तब लताने नीलमके पाससे वो फोन लेलीया था.. ओर नीलमके रुममे जाते ही फोन नीलमको दे दीया..

लता : (पास बैठकर सरपे हाथ घुमाकर फोन देते) नीलु.. बेटा.. येले तेरा फोन.. आजसे तु आजाद हे..

नीलम : (आंख गीली करते) दीदी.. आप अ‍ैसा क्यु केह रही हो..? मे तो अब धिरेनसे मीलती भी नही.. मुजे आपसे अ‍ैसे आजाद मत करो.. मे आपसे प्यार करती हु..

लता : (मुस्कुराते) नीलु.. पता हे मुजे तु मुजसे प्यार करती हे.. तभी तो मे तुजे अपनी भतीजी नही अपनी छोटी बहेन मानती हु.. अब तेरा भवीस्य तुजे तैय करना हे.. तु काफी बडी होगइ हे.. अब तुम धिरेनको मीलो तो भी कुछ फर्क पडने वाला नही हे.. क्युकी अब पुनोदी ओर धिरेन अलग हो रहे हे.. अगर तुम चाहोतो धिरेनसे सादी भ कर सकती हो.. लेकीन अपनी पढाइके बाद.. समजी..?

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) दीदी.. मानाकी मे धिरेनसे ओर धिरेन मुजसे चाहते हे.. लेकीन पहेले मुजे अपनी पढाइ करनी हे.. अपने पैरपे खडा होना हे.. फीर आप ओर जीजु चाहो वहा मे सादी कर लुगी..

लता : (मुस्कुराते खडी होते) नीलु.. कुछ रीस्ते अ‍ैसे होजाते हे जो हमारे हाथमे नही होते.. मेने भी कीसीको चाहा हे.. तो फीर मे तुजपे पाबंधी क्यु लगाउ..? ठीक हे.. सोजा अब बहुत रात हो चुकी हे.. गुड जाइट..

नीलम : (दोडकर गले लगते) दीदी.. गुडनाइट.. आइ लव यु..

लता : (मुस्कुराते सर चुमते) हंम.. गुड नाइट.. चल जा सोजा..

कहेते लता मुस्कुराते बहार नीकल गइ.. ओर अपने कमरेमे चली गइ.. तो इधर देर रात सृतीने पुनमको फोन लगा दीया जो इस वक्त पुनम ओर दया अपने घरमे नीचे लेटी हुइ थी.. तब सृतीने पुनमको लखनके साथ हुइ सभी घटनाके बारेमे पुनमको बता दीया.. तो पुनम हसने लगी.. तब सृतीने लखनको क्या कहा.. ओर लखन उनके साथ कैसा बरताव कर रहा हे वो भी बता दीया.. तब..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. आपने भी वो ही गलती की जो मेने की थी.. क्या जरुरत लखन भैयाको रोकनेकी.. करने देती उसे जो करना चाहे.. अ‍ेक दिनतो उनसे मीलना ही हे.. ओर उपरसे लखन भैयाको इतना कुछ सुनादीया..? आपको भी पता हे हम दोनोकी मंजील अब लखन भैया ही हे..

सृती : (आंख गली करते) दीदी.. क्या करु..? मे उनका वो.. वो.. देखकर बहुत डर गइ थी.. ओर उपरसे दुसरी टेन्शन थी.. दीदी.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ हे.. अब तो मेरे सामने भी नही देखते.. क्या करु..?





पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आपने तो उनका देख लीया हे.. तो क्या जाकइ बडे भैयासे भी बडा हे..? बताइअ‍ेनां.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. बडा..? ओ बापरे.. सायद देवुसे थोडा लंबा हे.. लेकीन चौडा देवुसे काफी बडा हे.. कल रात मेने ओर लताने भी देखा.. रमा भाभी कैसे चीला रही थी.. दीदी.. उनका स्टेमीना कीतना बढ गया हे.. कल.. वो पुरी रात रमा भाभीको करते रहे.. सुबह रमा भाभीकी हालत काफी खराब होगइ थी.. वो अभी भी ठीकसे चल भी नही रही.. सुबह तो उनको बुखार भी आगया था.. इसीलीये मे थोडा डरी हुइ थी..

पुनम : (खुस होते मुस्कुराते) भाभी.. क्या केह रही हो..? पुरी रात..? लगता हे वाकइ उनका स्टेमीना बढ गया हे.. भाभी.. इसमे डरने वाली कोइ बात नही थी.. हम दोनो तो बडे भैयाका ले चुकी हे.. तो हमे इतनी तकलीफ नही होगी.. आपके पास कीतना अच्छा मौका था.. जो आपने गवा दीया..

सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. तो क्या करती मे..? हम मेरी क्लीनीकपे थे.. अगर हमारे घरपे या मेरे घरपे होते तो बात कुछ ओर थी.. आपने उनका देखा नही हेनां..? इसीलीये अ‍ैसा केह रही हे.. बापरे मेतो देखते ही डर गइ थी.. जब हम मीलेगेनां.. तो वोतो पका मुजे बेहोस करदेगे.. दीदी.. हम कबसे प्लानींग कर रहेथे.. जब मौका मीला तो बात बीगड गइ.. अब तो मेरे सामने तक नही देखते..





पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब जाने दीजीये पुरानी बातको.. आप तो अब उधर ही हे.. लखन भैयाको मनाते रहीये.. वो मान जायेगे..

सृती : (थोडी परेसानीसे) अरे वो सामने देखे तबनां..? मैने कीतनी कोसीस की.. वोतो सामने भी नही देखते.. तो मे उनको कैसे मनाउ..? दीदी.. आपको तो पता हे मे इतने दिनोसे हमारे पतीसे दुर हु.. ओर जो यहा हे.. उनसे बात नही बनती.. दीदी.. प्लीज.. अगर आपसे दुबारा बात होतो उनको मनाइअ‍ेनां..

पुनम : (हसते) ठीक हे भाभी.. अब आपने मेरे लीये बहुत महेनत की.. तो मुजे भी आपके लीये महेनत तो करनी ही पडेगी.. देखती हु.. सायद दो तीन दिनमे हम सब सादीमे मीलेगे.. तब मे आपकी बात उनसे करवा दुगी..

सृती : (धीरेसे) दीदी.. मेने तो यहा सबको मना करदीया हे.. की मे नही आ सकती.. तो मे नही आ रही..

पुनम : (आस्चर्यसे) अरे पागल होगइ हो क्या..? ओर सायद आपने तो उसे ये भी केह दीया हे.. की मे अपने घर जा रही हु.. क्या ये सच हेनां..?

सृती : (आंख गली करते) हां दीदी.. तब मे उनसे थोडी नाराज थी.. तो मुहसे नीकल गया.. आपको तो सब पता चल जाता हे.. तो हम दोनोकी कौनसी बात आप नही जानती.. दीदी.. अब आप ही बताओ मे क्या करु..? अब तो उनके बीना रहा भी नही जाता..

पुनम : क्या करु मतलब..? अरे आप हमारे देवरके साथ ही सादीमे चली आइअ‍े.. तबतक वहा भुमी आंटी नीर्मला आटी भी वापस आजायेगी.. भाभी.. मुजे उसी दिन अपनी जींदगीका फैसला लेना हे.. मे धिरेनको छोडकर हमेसाके लीये वहा आपके पास आ रही हु.. फीर हमे कोइ दिकत नही होगी..

सृती : (आंख पोछते) दीदी.. कल मंजुदीके साथ बात हुइ.. तब वो भी यही केह रही थी.. क्या आप सचमे इधर आ रही हो..? तो आजाइअ‍ेना.. हम दोनो मीलकर इनको खुब प्यार देगे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सही कहा आपने.. अब जबतक हमारा विजय बडा नही होजाता तबतक हम दोनोकी मंजील सीर्फ लखन भैया ही हे.. भाभी.. अब लता हमेसाके लीये हवेलीमे रहेगी.. भाइकी बीवी बनकर.. ओर हम दोनो वहा.. हमारे लखनकी बीवीया बनकर.. क्या कहेती हो..? हें..हें..हें..

सृती : (हसते) दीदी.. ये बात आप कीतनी सहजतासे बोल गइ.. लेकीन कल मेने देखा.. हमारे देवरको जेलना हमारे लीये इतनी आसान बात नही होगी.. जीतना आप समज रही हो.. रमा भाभीके साथ कीतना जोसमे करते थे.. जो पुरी रात चीखती चीलाती रही.. सायद कल उन दोनोके रीस्तेके बारेमे नीलुको भी पता चल गया होगा..

पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. मुजे ज्यादा कुछ नही पता.. बस इतना पता हे.. नीलुको सब पहेलेसे ही पता हे.. अब उनको अपनी मांके साथ साजीसमे साथ देते पछतावा हो रहा हे.. ओर रही बात हम दोनोकी.. तो जब हम दोनोके साथ भैयाका मीलन होजायेगानां.. उनके बाद हर रात हमारे लीये सुहागरात होगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे चुतको सहेलाते) दीदी.. आपने तो बाते करते ही मुजमे जोस भर दीया.. कास मेने गलती ना की होती.. देखना अब कीसी भी हालमे मे उनका प्यार पाकर ही रहुगी.. देखती हु अब वो मुजसे कबतक दुर रेह पाते हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब आपको पता चल गयानां..? की तडप क्या होती हे..? मे भी पीछले कइ दिनो तक लखन भैयाके लीये तडप रही हु.. भाभी.. जुदाइके बाद ही मीलनका मजा आता हे.. अगर जोस भर गया हे तो भैयाको याद करते बाथरुममे चली जाइअ‍े.. नींद अच्छी आयेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) क्या दीदी आपभी.. आप भी मंजु दीदीकी तराह कमीनी हो.. क्या आप भी अ‍ैसा करती थी..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हाये.. भाभी.. मे आपसे जुठ नही बोलुगी.. जबसे हम दोनोके बीच अनबन हुइ.. तबसे मुजे भाइके प्यारकी अहेमीयतका पता चला.. दीदी.. मे उनको चाहने लगी हु.. बस.. मीलते ही मे भाइसे सामनेसे अपने प्यारका इजहार करदुगी.. मेने भाइको याद करते दो तीन बार कीया.. भाइको याद करते उंगली करते हुअ‍े बहुत मजा आता हे.. क्या आपने अ‍ैसा कीया हे..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. सच कहु.. कइ बार.. जबसे मंजुदीने हम सबको छुट दीहे.. तबसे लगभग हमारे देवर ही मनमे छाये हुअ‍े हे.. जबसे यहा आइ हु.. तबसे अ‍ेक रात भी नही छोडी.. उनको याद करते मास्टरबेट करनेके बहुत मजा आता हे.. अब तो वो मेरी आगको मीटायेगे तब ही मुजे चैन मीलेगा..

पुनम : (हसते) भाभी.. आप तो बीलकुल रेडी हो.. देखना हमारे देवरका बलात्कार मत कर देनां.. हें..हें..हें.. अच्छा ये बताओ.. आज आप दोनो रीपोर्ट करवाने गयेथे.. क्या हुआ..? हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. आप ओर मंजुदीदी.. दोनो वाकइ कमीनी हो.. दोनोको सबकुछ पता हे फीर भी पुछ रही हो.. दीदी.. रीपोर्ट पोजीटीव आइ हे.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. मे हमारे पतीके बच्चेकी मां बनने वाली हु.. लेकीन..

पुनम : (मुस्कुराते) लेकीन क्या..? भाभी.. कुछ हुआ हे क्या..? सच बताना..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. पता नही क्यु..? आम तौरपे जब कोइ पहेली बार प्रेगनेन्ट होती हे.. तो वो रीपोर्ट देखकर बहुत खुस होजाती हे.. लेकीन मुजे अ‍ैसी खुसीकी कोइ खास फीलींग्स नही हुइ.. अ‍ैसा क्यु..? आपतो सब जानती हेनां..? क्या मुजे बता सकती हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. कुछ बाते अ‍ैसी होती हे.. जो ना जानोतो ही बहेतर हे.. आगे आपको खुद पता चल जायेगा.. बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. अब हम दोनोकी जींदगी लखन भैयाके साथ जुडी हुइ हे.. फीर चाहे इस जन्ममे हो या पीछले जन्ममे.. ओर वो सब आपको मंजुदी मीलेगी तब बता देगी.. क्युकी मेरी भी बतानेकी अ‍ेक मर्यादा हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. मुजे पता हे आपकी बतानेकी मर्यादा हे.. आपको मंजुदीकी परमीशनकी जरुरत पडती हे.. मे आपकी बात समज सकती हु.. अब कहीये आगे मे क्या करु..?

पुनम : (हसते) भाभी.. ओर कुछ नही.. अब आप जीतनी हो सके लखन भैयाके पास रहे.. ओर उनके साथ ज्यादासे ज्यादा टाइम स्पेन्ड करे.. मेरे खयालसे वो मान जायेगे.. चलो अब मे रखती हु.. परसो मीलेगे आश्रमपे.. तब बात करेगे..

सृती : (आस्चर्यसे) आश्रमपे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. परसो दया बहेन ओर बडे भैयाकी सादी हे आश्रमपे.. तो आप लोग सीधा यही चले आइअ‍े.. फीर यहासे सबलोग हमारे गांव चले जायेगे..

सृती : (हसते) दीदी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन मुजे कुछ ओर जानना हे.. दीदी.. कमसे कम आपतो बता दीजीये.. क्युकी मुजे कुछ टेन्शन होने लगी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब कीस बातकी टेन्शन..? क्या जानना चाहती हे आप..? बताइअ‍े..

सृती : (धीरेसे) दीदी.. मेरे बारेमे.. मम्मीके बारेमें.. क्या आप मुजे मेरे ओर मेरी मम्मीके बारेमे बता सकती हे..? अभी मंजुदीदीने तो इस बारेमे कोइ बात नही की.. कमसे कम आप तो बता दीजीये..

पुनम : (थोडी सीरीयस होते धीरेसे) नही भाभी.. आपको भी पता हे मेरी क्या मर्यादा हे.. ये बात मंजुदीदी बताये वो ही बहेतर हे.. मे अभी आपको नही बता सकती.. फीर भी जानना हे तो पहेले दीदीसे बात करलीजीये.. फीर मे आपको सबकुछ बता दुगी.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. लेकीन अभी नही.. जब सही वक्त आयेगा.. ओर फीकर मत कीजीये.. वो वक्त भी बहुत जल्द आने वाला हे.. सायद हम गांवसे वापस आजाये तब..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. आपने तो अ‍ैसा कहेके मेरी टेन्शन ओर बढादी.. खैर जाने दीजीये.. चलो मंजुदीदीसे ही पुछ लुगी.. मे फोन रखती हु.. गुड नाइट अ‍ेन्ड स्वीट ड्रीम.. आप भी हमारे नये पतीके सपने देखीये.. हें..हें..हें..

बात करते दोनो ही सो गइ.. लेकीन आज सृतीकी आंखोसे नीद कोसो दुर थी.. क्युकी पुनमकी बातोसे उनका सक ओर मजबुत हो गया.. उनको अपने बारेमे ओर अपनी मम्मीके बारेमे जाननेकी उत्सुक्ता ओर बढ गइ.. ओर गांव जाते ही इस बारेमे पहेले मंजुसे सबकुछ जाननेका फैसला करलीया.. वो अपने ओर अपनी मम्मीके बारेमे सोचते बीस्तरपे करवटे बदलती रही..
 
अभी उसे अ‍ेक सहारेकी सख्त जरुरत महेसुस हुइ.. उसे लगा की वो अभी जाकर लखनके पास चली जाये.. आज लखन अ‍ैसे ही लता ओर रजीयाके पास सोया हुआ था.. क्युकी वो कल पुरी रात रमाके साथ धमाका करते जागा था.. सृतीको लखनसे बात करनेकी इच्छा बहुत तीर्व होगइ.. ओर वो धीरेसे बेडसे खडी होगइ.. ओर दरवाजा खोलके अपना सर बहार नीकालते इधर उधर देखने लगी..

फीर वो धीरेसे दबे पांव चलकर लखनके रुमके पास चली गइ.. ओर हाथसे दरवाजेको धका दीया.. लेकीन दरवाजा अंदरसे लोक था.. तो सृती नीरास होगइ.. ओर वापस अपने रुममे चली गइ.. ओर उसने दरवाजेको अ‍ैसे ही बीना लोक करते थोडा खुला रखा.. इस उमीदमे.. की अगर लता ओर रजीयाके पीरीयडकी वजहसे लखनको कही इच्छा होजाये तो वो आसानीसे उनके रुममे आ सके.. ओर सृती अ‍ैसे ही लेटी रही.. तब उसे कब नींद आगइ पता ही नही चला..

अ‍ैसे ही दो दिन ओर बीत गया.. ओर इस दिनोमे सब रोजकी तराह सब रुटीन हुआ.. इसदो दिन भी लखनने अ‍ेक बार भी सृतीकी ओर नही देखा.. वो हर दिनकी तराह नीलमको स्कुल छोडकर होस्टेलपे चला गया ओर वहासे फोनपे अपना बीजनेस देखते होस्टेलकी देखभाल करता रहा.. तो पुनमके घरपे भी सब यही होने लगा.. पुनम ओर धिरेन भी अ‍ेक दुसरेसे बात भी नही करते थे..

ओर दया रातमे धिरेनको नींदकी गोली पीलाकर सुला देती.. ताकी वो रातमे कोइ हंगामा करते पुनमके साथ कुछ गलत काम ना करले.. ओर ये सब पुनमके कहेने पे हो रहा था.. क्युकी अब पुनम धिरेनसे अपना रीस्ता हमेसाके लीये खतम करलेना चाहती थी.. गांवमे सामत भाइका सभी कार्य खतम हो चुका था.. तो तीसरे दिन श्रीधर ओर जयश्रीकी सादीके अगले दिनकी सभी विधीया होने वाली थी..

ओर कल सुबह दया ओर देवायतकी आश्रमपे सादी थी.. तो आज सामको ही मंजु अपना फोन लेकर बैठ गइ.. पहेले उसने पुनम ओर दयाको सुबह रेडी रहेनेके लीये कहा.. फीर क्लीनीकपे सृतीको फोन करते कल सुबह सीधे आश्रमपे ओर वहासे घर आनेकी बात करली.. तो पहेले तो सृतीने थोडी आना कानी की.. लेकीन मंजुने उसे गालीया देकर आनेको कहा.. तो वो आनेके लीये मान गइ.. फीर उसने घरपे लताको फोन लगा दीया..

लता : (खुस होते मुस्कुराते फोन उठाते) हां बडीदीदी.. कहीये.. कैसी हे आप..?

मंजुला : (मुस्कुराते) लता मे मजेमे हु.. सुन.. कल देवु ओर दयाकी आश्रमपे सादी रखी हे.. उस कुतीको भी मेने आनेके लीये कहा हे.. तो उनको भी साथ लेती आना.. ओर सुन.. अब वक्त आगया हे.. तुजे यही रहेना हे.. तो तुम तेरे कुछ कपडे वहा छोडकर बाकी तेरा सब सामान लेकर चली आना..

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. मेरा सामानतो अभी वही ही हे.. आपके देवरने लानेको मना कीया था.. मे मेरे कुछ कपडे ही इधर लाइ हु.. क्या आपने उनसे बात करली..?

मंजुला : (मुस्कुराते) लता.. सुन.. तुम मेरे देवरकी चीन्ता मत करो.. मे अभी उनसे बात करलेती हु.. उसे अब कोइ अ‍ेतराज नही होगा.. ओर तुम उनकी वहाकी चीन्ता भी मत करना.. इसीलीये तो उस कुतीको वहा भेजा हे.. ओर कुछ दिनमे पुनोभी वहा चली आयेगी.. फीर वो दोनो ही लखनको सम्हाल लेगी.. वैसे भी वहा रजीया ओर राधीका तो हेही.. लखन कहा हे अभी..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. वो रमाभाभी रजीयादीदी ओर नीलुको लेकर सहेरमे घुमने ओर कुछ खरीदारी करने गये हे.. तो रातको आजायेगे.. दीदी.. क्या अब हमेसाके लीये सचमे मुजे वहा रहेना हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां लता.. सुन.. तेरी इच्छा थीनां.. की तुम पीरीयडके बाद सीधा देवुसे मीलना चाहती थी.. इसीलीये तुजे यहा बुला रही हु.. तुम लोगोके जाते ही मेने भावु ओर देवुका गांधर्व विवाह करवाते दोनोका मीलन करवा दीया हे.. ओर तुम यहा आओगी.. तब तेरा भी उसी तराह गांधर्व विवाह करवाते देवुसे मीलन करवा दुगी.. फीर तुजे ओर भावुको ही मेरे देवुको सम्हालना हे.. समजी..?

लता : (सरमसे पानी पानी होते) जी.. जी दीदी.. मे समज गइ.. कल सुबह तैयार रहुगी.. दीदी.. मुजे आपके देवर ओर सृतीदीदीके बारेमे कुछ कहेना हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) लता.. तुम कुछ भी मत बोल.. मुजे उन दोनोके बारेमे सबकुछ पता हे.. उस कुतीको बहुत आग लगी हुइ हे.. अब हमे लखनके कीसी भी रीलेशनमे कोइ इन्टरफेयर नही करना.. वो लखन खुद समज लेगा.. समज गइ..? बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. अब सृती ओर लखनके बीचके रीलेशनकी सुरुआत हो चुकी हे.. तुम कल सुबह आनेकी तैयारीया सुरु करदो.. ओके..? चलो मे रखती हु..

कहेते मंजुने फोन काट दीया.. तो लता खुस होते राधीकाके पास उनकी मम्मीके रुममे चली गइ.. ओर उसे कल सुबह नीकलनेकी बात करली.. लेकीन राधीकातो पहेलेसे ही उनकी मम्मीकी वजहसे जानेके लीये मना कर चुकी थी.. तो दुसरी ओर ये दो दिन आराम करते रमा भी बीलकुल सही होगइ थी.. तो आज लखन रजीया रमा ओर नीलमको लेकर सहेरमे घुमने ओर सोपींगके लीये नीकल गया था..

ओर तीनो बहुत सारी जगहपे घुमकर अ‍ेक बडे मोलमे चले गये.. ओर तीनोके लीये ढेर सारी कपडोकी सोपींग करली.. तो तीनो ही बहुत खुस होगइ.. इस बार नीलमने रमाके केहेनेपे बहुत ही सोर्ट ओर सेक्सी डे्रस लीये थे.. तो लखनने रजीया ओर रमाको सारीके बजाये उनको भी लेटेस्ट डे्रस दीलवाये.. फीर रजीया रमा ओर नीलमको अपनी पसंदका ट्रान्सफरन्ट ब्रा नीकरके तीन तीन सेट भी दिलवाया..

तो तीनो खुब सरमाइ.. बादमे लखनने रजीया रमाके लीये अपनी पसंदका दो दो ट्रान्सफरन्ट नाइटी गाउन भी लेलीया.. तब नीलम सबकुछ समज गइ.. की उनकी मम्मी ओर लखन आपसमे प्यार करते हे.. ओर दोनो काफी आगे बढ चुके हे.. लेकीन नीलमको इस रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. क्युकी अब तो वो खुद लखनकी ओर ढलने लगी थी.. ओर उनका प्लान तो कुछ ओर ही था.. फीर लखन तीनोको अ‍ेक बडीया होटेलमे खानेके लीये ले गया.. ओर वहा चारोने खाना खाया..

रमा रजीया आज पहेली बार अ‍ैसी होटेलमे आइ थी.. तो दोनो ही बहुत खुस थी.. तो नीलम धिरेनके साथ अ‍ैसी होटेलमे दो तीन बार जा चुकीथी.. नीलमको आज रमासे ज्वेलेसी फील होने लगी थी.. वोभी बार बार लखनको रीजानेकी कोसीस कर रही थी.. तो दुसरी ओर रमाने भी लखनको अकेले मीलनेका मौका मीलते ही सरमाकर आज देर रातको अपने रुममे आनेके लीये कहा.. तो लखनने उसे हां कहेते स्वीकार लीया..

रातको सृती अपनी क्लीनीकसे आगइ.. तो लता राधीकाके साथ उनके रुममे राधीकाकी मम्मीको खाना खीला रही थी.. तो सृती घरमे कीसीको ना देखते राधीकाकी मम्मीके रुममे चली गइ.. ओर उनका हाल चाल पुछते घरमे सीर्फ राधीका ओर लताको देखकर उसने सबके बारेमे पुछ लीया.. तो लताने उसे बता दीया.. की लखन तीनोको लेकर घुमने ओर सोपींगके लीये गये हे..

जीसे सुनकर सृती थोडी नीरास होगइ.. क्युकी उनको उमीद थी.. की लखन उनको भी साथ लेजायेगा.. ओर वो भारी मनसे उपर अपने रुममे फ्रेस होने चली गइ.. लताने राधीकाकी मम्मीको खाना खीला दीया तबतक सृतीभी नीचे आगइ.. ओर तीनो डीनर करने बैठ गइ.. तब लताने सृतीकी ओर देखा तो वो आज कुछ नीरास लग रही थी.. फीर भी उसने मंजुके फोनके बारेमे बतादीया.. तो..

सृती : (सामने देखते) लता.. मंजुने मुजे भी आनेको कहा हे.. तो मे भी आ रही हु..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. अब मंजु दीदीने मुजे वही रहेनेके लीये केह दीया हे.. तो मे वापस नही आउगी.. अब आप ओर रजीया दीदी यहा सबकुछ सम्हाल लेना.. अब तो राधीका दीदी भी यही हे..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मे तो मम्मीके लीये इधर आइ हु.. जब वो ठीक होजायेगी.. तो मे भी चली जउगी.. ओर आप वापस नही आओगी.. मतलब..? मे कुछ समजी नही..

सृती : (मुस्कुराते) राधीका.. फीकर मत करो.. ये भी यहा आयेगी.. लेकीन कुछ दिन उनको वही रहेना पडेगा.. जब पुनो दीदी यहा आयेगी तब आप उनको पुछ लेना.. वो आपको सबकुछ बता देगी..

राधीका : (खाना खाते जोरसे हसते) दीदी.. मुजे हमारे खानदानके बारेमे थोडा बहुत तो पता हे.. लेकीन मुजे ये सब अ‍ेक रहस्यकी तराह लग रहा हे.. हें..हें..हें.. पता ही नही चलता.. क्या हो रहा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) हां सही पहेचाना आपने.. ये खानदान रहस्यमइ ही हे.. दीदी.. जब पुनोदीदी यहा आजायेगी.. तब आपको सबकुछ पता चल जायेगा.. फीर देखना आपको कीतना मजा आता हे..

राधीका : (मुस्कुराते) दीदी.. पुनोदी यहा आये तबनां..? मेभी ये सब जानेके लीये उत्सुक हु..

तीनोने खाना खालीया.. तो राधीका लताने सब काम नीपटा लीया.. फीर तीनो होलमे बाते करते बैठी रही.. तभी लखन सबको लेकर घर आगया.. ओर सब सोफेपे बैठ गये.. तब रजीया रमा ओर नीलमने सबको अपने अंडर गार्मेन्टको छोडकर अपने कपडे दीखाये.. तो नीलमके कपडे देखतेही लता ओर सृती लखनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तो लखनने लताकी ओर देखते आंख मारदी.. ओर मुस्कुराने लगा..

फीर कुछ देर बैठकर बाते करने लगे.. तो लताने लखनको मंजु दीदीके फोनके बारेमे बतादीया.. ओर कहा कल सुबह सबको नीकलना हे.. जीसे सुनकर रमा थोडी नीरास होगइ.. ओर वो लखनकी ओर देखने लगी.. तो लखनने आंखोके इसारेसे उसे रातको मीलनेकी तसली दी.. तो रमा सरमाके मुस्कुराने लगी.. जीसे सृतीने टेडी नजरसे देखलीया.. फीर सब लोग अपने अपने रुममे सोने जाने लगे.. तो लखनने राधीकाको हाथ पकडकर वही बीठा दीया..
 
राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन.. क्या कर रहे हे..? अभी सब लोग इधर ही हे..

लता : (जाते हसते) दीदी.. इसमे सरमानेकी बात क्या हे..? हमारे पती कल जा रहे हे तो आपसे अकेलेमे बात करना चाहते हे.. तो कर लीजीये.. हें..हें..हें..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) जी दीदी..

कहा तो रमा पीछे मुडकर लखनकी ओर देखते अपने रुममे चली गइ.. तो रजीया नीलम लता ओर सृती उपरकी ओर जाने लगी.. तब अ‍ेक बार पीछे मुडकर सृतीने लखनकी ओर देखलीया.. तो लखन राधीकासे चीपकरते बैठ रहा था.. जीसे देखकर सृतीको अच्छा नही लगा.. ओर उसे राधीकासे थोडी जलन होने लगी.. ओर वो भारी मनसे अपने रुममे चली गइ.. तो नीलम लताभी अपने रुममे जा चुकी थी..

लखन : (होठ चुमते) राधु.. चलना तुम भी.. वहा सबको मील लेना.. यहा रजु हे.. वो मम्मीका खयाल रख लेगी..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) अरे बाबा नही आ सकती.. कल आपभी तो जा रहे हो.. तो मुजे होस्टेलपे जाना पडेगा.. समजो यार.. मे भाभीमां को वो यहा आयेगी तब मील लुगी.. प्ली..ज..

लखन : (मुस्कुराते बुब्सको मसलते होंट चुमते) ठीक हे.. तो चल.. मुजे मेरी बीवीसे थोडा प्यार तो करने दे.. हम कीतने दिन होगये नही मीले.. वो तो छोडो हमारी सादीके बाद अभी तक हमने सुहागरात भी नही मनाइ..

राधीका : (सरमाते मुस्कुराते गाल सहेलाते) अलेले.. मेरा बेबी.. अपनी बीवीको प्यार करना हे..? लेकीन थोडा सबर करलो.. जब मम्मी ठीक होजायेगी ओर हम घर चले जायेगे तब आपको जीतना प्यार करना हो करलेना.. लेकीन हमारे घरमे.. हम अपनी सुहागरा वही मनायेगे.. बस.. आप वहासे वापस आजाओ..

लखन : (बाहोमे भरते कीस करते) अरे.. तबतक तो मुजे उपर उपरसे तो प्यार करनेदो.. फीर पता नही हम तीन चार दिनके बाद ही मीलेगे.. अ‍ेक मीनीट.. तुम यही बैठो मे अभी आया..

कहेते लखन होलका दरवाजा बंध करते सभी लाइट बुजा देता हे.. ओर राधीकाके पास आकर बैठ जाता हे.. तब राधीका हसते हुअ‍े बहुत सरमा रही थी.. तब लखन उनके होठोको चुमते ओर बुब्सके साथ खेलते प्यार करने लगता हे.. तो राधीका गरम होने लगती हे.. ओर लखनका साथ देते उनको प्यार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे राधीका सीर्फ ब्रा मे ही रेह गइ.. जो लखनने उनको भी खीचके नीकालदी..





दोनो काफी उतेजीत हो चुके थे.. सबकुछ भुल गये.. की वो कहा हे.. राधीका सोफेपे लेटी हुइ थी.. ओर लखन उनकी चुतको चाटते उनके दानेको छेड रहा था.. तब राधीकाकी हालत पतली होगइ.. ओर वो सीसकारीया करते लखनके बालोको सहेलाती रही.. वो इतनी उतेजीत हो गइ.. की उसने लखनको सीक्स नाइन पोजीसनमे आनेको कहा.. ओर लखन उल्टा होकर राधीकाकी चुतको खरोदने लगा..





तो राधीकाने भी लखनके लंडको अपने मुहमे लेलीया.. ओर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. तब लखनका जोस कल गुना बढ गया.. ओर वो धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते राधीकाके मुहको ही चोदने लगा.. दोनो काफी देर ओरल सेक्स करते रहे.. लखन राधीकाके मुहको चोदे ही जा रहा था जीसे राधीकाकी हालत पतली होने लगी.. फीर भी वो लखनके प्यारको बरदास्त करती रही..





तबतक लता ओर रजीया अपने रुममे चली गइ थी.. तो नीलम ओर सृती अब भी अपने बीस्तरमे करवटे ले रही थी.. आज सृतीकी आंखसे नींद गायब हो चुकी थी.. क्युकी अ‍ेक तो वो जबसे गांवसे आइ थी तबसे इस सुखसे वंचीत थी.. दुसरा.. उन्होने बडी मुस्कीलसे लखनकी नाराजगीको दुर कीया था.. उनको लखनके साथ इन्टीमेन्ट होनेका मौका भी मीला.. लेकीन वो भी उसने गवां दीया..

तबसे सृती लखनके लीये पागल होचुकी थी.. तब आज उसने लखन ओर रमाको इसारोसे बात करते देख भी लीया.. तो सृतीकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. वो अपने रुममे गइ तो भी उसने रुमका दरवाजा खुला छोडदीया.. इस उमीदमे.. की लखन उनके रुममे आजाये.. लेकीन सृतीको नीरासा ही हाथ लगी.. वो धीरेसे बेडसे खडी होगइ.. ओर धीरेसे दबे पांव बहार नीलने लगी..

फीर दरवाजेसे बहार देखने लगी.. की कही कोइ जाग तो नही रहा.. तब उसे बहार कोइ नजर नही आया तो वो दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर जैसे ही सीडीया उतरके नीचे आइ.. तो होलमे पुरा अंधेरा छाया हुआ था.. ओर सृतीको हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज सुनाइ दी.. तो वो सीढीके लास्ट वाले स्टेप पे रुक गइ.. ओर अपना सर थोडासा आगे करते होलमे देखने लगी..

तो हल्कीसी रोसनीमे उनको धुंधलीसी दो परछाइ दीखाइ दी.. जो अ‍ेक दुसरेसे प्यार कर रहे थे.. तो सृती समज गइ की लखन अपनी बीवी राधीकाको प्यार कर रहा हे.. तब रधीकाकी सीसकारीयोकी आवाजसे सृतीभी उतेजीत होने लगी.. ओर अनायास ही उनका हाथ अपनी चुतपे चला गया.. ओर वो नाइट गाउनके उपरसे ही अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर बीच बीचमे दोनोको देखने लगी..

तबतक लखन ओर राधीका भी अपने चरमो पे थे.. तो सृती अपना गाउन उचा करते अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे.. ओर आंख बंध करते तेजीसे अंदर बहार करने लगती हे.. तब कुछ ही देरमे उनकी चतसे फवारा नीकल गया.. ओर नाइट गाउन गीला करदीया.. तब सृतीको होंस आया.. ओर वो सरमाते जटसे उपरकी ओर जाने लगी.. ओर चलते हुअ‍े अपने गाउनसे अपनी चुतको पोछने लगी..

ओर वो चुतको पोछते अपने रुममे चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी नीलम अपने दरवाजेके पास खडी रहेकर उनको अंदर जाते देख रही हे.. फीर सृती बाथरुममे जाकर गाउन बदलती हे.. ओर सोजाती हे.. तब नीलम वापस अपने बेडपे चली गइ.. ओर सोचने लगी.. जीस तराह सृती अपनी चुतको साफ करते आ रही थी तो उनको सृतीपे भी आसंकाये होने लगी..

कही सृतीदीदी भी तो लखन जीजुसे चुदवाकर नही आइ.. अगर अ‍ैसा हेतो अभी लखन जीजुभी उपर आयेगे.. यही सोचते कुछ देरके बाद नीलम वापस दरवाजेके पास खडी रहेते लखनका इन्तजार करती रही.. लेकीन लखन उपरकी ओर नही आया.. तो नीलमने नीचे जानेकी ठानली.. ओर वो अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करते दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर नीचे जाते अ‍ेक बार उसने सृतीके रुमकी ओर देख लीया..

तो नीचेकी ओर अबतक लखनने राधीकाको दो बार जडा दीया था.. ओर अभी भी उनकी चुतसे छेडखानी कर रहा था.. जीसे राधीका वापस जल्दीसे उतेजीत हो जाती.. ओर लखनको ओर जोसमे प्यार करती.. तभी अचानम लखनका तन अकडने लगा.. ओर राधीकाकी ओर देखे.. इनसे पहेले ही उनके लंडसे पीचकारीया छुटने लगी.. ओर राधीकाके मुहको भरने लगी.. तो लखनका गाढा पानी राधीकाके मुहसे नीकलने लगा..





ओर वो भी कंपकपाते जडने लगी.. ओर लखनके मुहको भीगो दीया.. फीर दोनो सांत होगये.. तब लखनका बहुत सारा पानी राधीकाके मुहमे चला गया था.. अ‍ैसा नही थाकी राधीका लखनका पानी पहेली बार पी रही थी.. जब लखन स्कुलमे था.. तब दोनो अ‍ैसा खेल कइ बार खेल चुके थे.. राधीकाको लखनके पानीका स्वाद बहुत अच्छा गता था..फीर वो लखनके पानीको गठक गइ.. ओर लखनको अपने उपरसे हटाकर उनके सीनेमे मुका मारते अपने कपडे उठाकर रुममे भाग गइ..

तो लखन हसने लगा.. ओर अपने कपडे पहेनकर वो रमाकी रुमकी ओर चल पडा.. तो रमा पुरी तराह नंगी होकर अपने उपर चदर डालकर लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर लखन उनके रुममे जाते ही दरवाजा लोक करते बाथरुममे चला गया.. फीर मुहको साफ करते फ्रेस होगया.. ओर बहार आकर रमाके साथ उनकी बगलमे लेटते चदरमे घुस गया.. तो रमाने करवट लेते जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२६

तो लखन हसने लगा.. ओर अपने कपडे पहेनकर वो रमाकी रुमकी ओर चल पडा.. तो रमा पुरी तराह नंगी होकर अपने उपर चदर डालकर लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर लखन उनके रुममे जाते ही दरवाजा लोक करते बाथरुममे चला गया.. फीर मुहको साफ करते फ्रेस होगया.. ओर बहार आकर रमाके साथ उनकी बगलमे लेटते चदरमे घुस गया.. तो रमाने करवट लेते जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी.... अब आगे

रमा : (सरमाते धीरेसे) आगये अपनी बीवीको प्यार करके..? कुछ मेरे लीये भी बचाके रखा हेकी नही..?

लखन : (होंठ चुमते बुब्सको मसलते) अरे डार्लींग तेरे लीये तो मे हमेसा रेडी रहुगां.. तुम तो कंपलीट होकर लेटी हो.. चलो.. सुरु करे..?

रमा : (मुस्कुराते) हंम.. पहेले अपने कपडेतो नीकाल दीजीये.. क्या आपको यहा आनेसे कीसीने देखा तो नही..? हंम..? देखना बाबा मेरी फजीहत ना होजाये.. ओर हां.. आज सीर्फ दो ही बार.. बापरे.. उस रात तो मेरी हालत खराब करदी थी.. मे दो दिन बिस्तरसे उठ भी नही पाइ.. आप कीतना जोसमे करते थे.. ओर कल हमे जाना भी हे.. इसीलीये तो आज आपको बुलाया हे.. फीर पता नही कब हमे दोबारा मीलनेका मोका मीले..

लखन : (कपडे नीकालते रमाके उपर चडते) चल आज प्यारसे करुगा.. क्या हेना उस दिन हम दोनोका पहेला मीलन था.. लेकीन आज आपको कोइ तकलीफ नही होगी.. मे बडे प्यारसे करुगा..

तभी बहारकी ओर नीलम नीचे पहोंची तबतक राधीका अपने रुममे जा चुकी थी.. ओर लखन रमाके रुममे चला गया था.. तो नीलम ने पुरा होल ओर कीचन देखलीया.. वहा कोइ नही था.. तब उसे अचानक अपनी मम्मीका रुम याद आया ओर नीलम वही चली गइ.. तो देखा उनके मम्मीकी रुमकी लाइट जल रही थी.. ओर अंदरसे हल्कीसी बाते करनेकी आवाज आ रही थी..

तब लखन रमाको प्यार करते बाते कर रहा था.. तो कुछ ही देरमे रमा उतेजीत होगइ.. ओर उनकी चुत पानी बहाने लगी.. तब लखनने रमाकी चुतमे धीरे धीरे करते अपना पुरा लंड घुसा दीया.. फीर भी लखनका लंड उसे बहुत बडा लग रहा था.. दोनोके बीच चुदाइका तांडव होने लगा.. लखन जोरोसे कमर हीलाते रमाको चोद रहा था.. तब रमाने दोनोके उपरसे चदरको भी हटालीया था..

दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. रमाके दोनो बुब्स तालमेलमे उछल रहे थे.. ओर रमाने दोनो हाथसे चदरको कसके पकडा था.. ओर उनके मुहसे बहुत ही कामुक सीसकारीया नीकल रही थी.. तभी लखनने रमाके मुहमे चदर घुसादी.. ओर हाथके बल उचा हो गया.. ओर रमाको जोरोसे चोदने लगा.. तो इस बार भी रमाकी चीखे नीकलवा दी.. लेकीन इस बार रमाके मुहमे चदरकी वजहसे आवाज बहार नही नीकल रही थी..





तब नीलम समज गइ.. की लखन जीजु इस वक्त मम्मीके रुममे हे.. ओर सृती दीदी इनकी चुदाइ देखकर ही उपर आइ होगी.. तब नीलम जुककर दरवाजेकी की होलसे देखने लगी.. तब लखन रमाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा था.. नीलम समज गइकी उसी दिनकी तराह आज भी लखन जीजु उनकी मम्मीकी चुदाइ कर रहे हे.. तब नीलम गरम होने लगी.. ओर वोभी सृतीकी माफीक कीहोलसे देखते अपनी चुतको सहेलाते उनमे उगली करते सोचने लगी..

नीलम : (मनमे) मोम भीनां.. अब पकी चुदकड होगइ हे.. जबसे यहा आइ हे हर रात जीजुका लंड खा रही हे.. ये भी नही की चलो अ‍ेक बार अपनी बेटीको भी साथ लेले.. हम दोनोके बीच डील हुइ थी.. फीर भी अकेली अकेली चुदवा रही हे.. देखना अब तो मे भी आपकी तराह पकी वाली रंडी बनकर दीखाउगी.. आप तो कल चली जाओगी.. फीर देखती हु जीजु कैसे मुजसे बचते हे.. क्या मस्त लंड हे जीजुका.. मेतो देखते ही इनकी दिवानी हो गइ हु.. अब देखती हु.. जीजु मुजे कब मीलते हे..

वो सोचते वापस की होलमे देखने लगी.. देखा तो रमाने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते लीप लोक करलीया था.. ओर लखन रमाको चीपकते जोरोसे चोदने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनने अपना लंड रमाकी चुतमे जड तक घुसा दीया.. तो रमाकी आंख बडी होगइ.. तभी लखन अपनी कमरको जटका देते रमाकी चुतको अपने गाढे पानीसे सीचने लगा.. जीसे देखकर नीलम बहुत उतेजीत होगइ..





नीलमकी सांसे जोरोसे चलने लगी.. वो जोरोसे अपनी चुतमे उगलोको अंदर बहार करने लगी.. तभी उतेजीत होते आंख बंध करते जडने लगी.. तो उनका हाथ दरवाजेसे टकरा गया.. तब उसे यहा ज्यादा देर ठहेरना उचीत नही लगा.. ओर वो भी अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करते उपर चली गइ.. ओर बाथरुममे चुतको साफ करते सही होगइ.. फीर बेडपे बैठ गइ..





तबतक नीचेकी ओर लखन रमाके बुब्सको चुम रहा था.. ओर रमा लखनकी पीड सहेला रही थी.. आज अ‍ेक ही बारमे रमा ढेर होगइ.. लखनका लंड अब भी रमाकी चुतमे जटके मार रहा था.. तब लखन धीरे धीरे कमर हीलाते रमाकी दुसरी बार रमाकी चुदाइ करने लगा.. जीसे रमाकी हालत पतली होने लगी थी.. ओर वो लखनको धीरेसे चोदनेकी मनते कर रही थी..

रमा : (सरमाते धीरेसे नजरे चुराते) लखनजी.. प्लीज.. जरा धीरेसे.. आप बहुत जोसमे आजाते हो..

लखन : (होठको चुमते) रमा.. क्या करु.. तुम ओर तुम्हारी ये चुत मुजे भा गइ हे.. क्या मस्त चुत हे तुम्हारी.. लगता हे भानु भाइ आपको ठीकसे चोदते नही.. वरना अ‍ेक लडकी होनेके बावजुद अ‍ैसी टाइट चुत नही होती..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) अब जैसी भी हे आपकी ही हे.. सायद उपर वालेने आपके लीये समलके रखी होगी.. अब मुजे आपके भाइसे कोइ मतलब नही.. अब आप ही मेरे पती हो.. थोडासा जोरसे चोदीयेनां.. बहुत मजा आ रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे मे हवामे उड रही हु..





आज भी लखन ने जबरदस्त तरीकेसे रमाको चोद चोदके उनकी चुतको दो दो बार अपने पानीसे सीच दीया था.. लखन रमाको अ‍ेक बजे तक योदता रहा.. इन दो घंटेकी चुदाइमे लखनने रमाकी हालत पतली करदी.. फीर दुबारा मीलनेकी बात करके लखन उपरकी ओर अपने रुममे चला गया.. तब रमा बडी मुस्कीलसे बाथरुममे चली गइ.. ओर अपनी चुतकी सीकाय करते फ्रेस होते सही होगइ.. फीर वो भी आकर सो गइ..
 
लखन जब उपर पहोचां ओर सृतीके रुमकी ओर नजर डालते अपने रुममे जा ही रहा था.. तभी उसे लास्ट वाले कमरेमे अ‍ेक परछाइ दीखी.. जो उसे दरवाजेके पीछेसे छुपकर देख रही थी.. तो लखन समज गयाकी ये रुम नीलमका हे.. ओर उसने रमाकी चुदाइ करते देख लीया होगा.. ओर लखन वही रुक गया.. तो नीलनमे गरभाकर दरवाजा बंध करदीया.. ओर दिलकी भारी धडनके साथ अपने बेडपे चली गइ..

तभी उसे आभास हुआकी उनके रुमका दरवाजा कीसीने खोलदीया हे.. तो नीलम भारी धडकनोके साथ दरवाजेकी ओर देखने लगी.. देखा तो लखन उनका दरवाजा खोलकर अंदर आ गयाथा.. ओर वापस मुडकर धीरेसे दरवाजा बंध कर रहाथा.. तब नीलम गभराकर बेडपे बैठ गइ.. ओर देखने लगी.. उसे लगाकी अब लखन जीजु आज पका उनको भी चोद लेगे.. तभी लखन उनके पास आकर बैठ गया तो नीलम नजरे जुकाये बेठी रही.. उनकी सांसे तेज चल रही थी..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते) नीलु.. क्या हुआ..? तुम अभी तक सोइ नही हो..? हंम..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. वो.. वो.. मुजे नींद नही आ रही थी.. तो जाग रही हु..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. अभी नीचे दरवाजेके पास तुम ही थीनां..?

नीलम : (हडबडाते सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. वो.. वो.. मे.. पानी पीने आइ थी..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन तुमने गलतीसे पानी तेरी मम्मीके रुमके दरवाजेके पास ही गीरा दीया हे.. वहा काफी गीला था..

नीलम : (सरमीन्दा होते) जी..जु.. वो.. सोरी.. मेने मम्मीके रुमकी लाइट जल रही थी.. तो देखने आगइ.. तो अंदरसे आवाज आ रही थी तो देखलीया..

नीलम : (मुस्कुराते) देख नीलु.. मुजे घुमा फीराके बाते करनेकी आदत नही हे.. आज मे तुजे अ‍ेक सचाइ बताना चाहता हु.. सुन.. मे ओर तेरी मम्मी अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हे.. क्युकी तेरे पापा तेरी मम्मीको वो प्यार नही देपा रहे.. जीसकी उनको जरुरत हे.. ओर इनसे हमारे रीलेशनमे कोइ फर्क नही पडेगा.. तुम समज गइनां..? क्या वो तेरी मम्मीके साथ सहेली भी हेनां..?

नीलम : (सामने देखकर हांमे गरदन हीलाते) जी.. जीजु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? मुजे आपके ओर मम्मीके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. सायद आपने ठीक कहा.. आजकल मम्मी ओर पापाके बीच कुछ ठीक नही चल रहा.. जीजु.. मे तो बस मम्मीको खुस देखना चाहती हु.. उसने बहुत दुख जेले हे..

लखन : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. सुन.. जब हम गांवसे वापस आये.. तब मे तेरी ओर धिरेनकी सादी जल्दसे जल्द करवाना चाहता हु.. तुम तेरे सब पेपर रेडी रखना.. क्या तुम दोनो कल भी मीले थेनां..?

नीलम : (सर जुकाते हांमे गरदन हीलाते) हां जीजु.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. देखना हमारी सादीके बारेमे मम्मीको पता ना चले.. मे मेरी पढाइ तक ये बात सबसे छुपाकर रखना चाहती हु.. फीर आप जैसा चाहो करुगी..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) हंम.. अ‍ैसा ही होगा जो मेरी छोटी रानी चाहती हे.. ओर कुछ..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) नही.. जीजु.. हम अपना रीलेशन भी छीपायेगे.. मे वादा करती हु.. सादीके बाद भी हमारा रीलेशन कायम रहेगा.. मुजे सीर्फ आपका साथ चाहीये बाकी कुछ नही..

लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) हंम.. सीर्फ साथ..? ओर कुछ नही..

नीलम : (सीनेमे सर रखते मुस्कुराते) ओर.. ओर आपका प्यार.. जीजु.. आइ लव यु.. मे आपसे बहोत प्यार करती हु.. मुजे भी वो सुख चाहीये.. जो आप मम्मीको देते हो..

लखन : (मुस्कुराते) अरे वाह.. मेरी रानीने तो अपने प्यारका इजहा भी करलीया.. नीलु.. लव यु टु.. देखना मे तेरी जींदगी खुसीयोसे भर दुगा.. चल अभी तो मे आज मेरी रानीको थोडा प्यार देदु..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. पता हे वो प्यार करनेसे मेरी हालत खराब होजायेगी.. क्या हम मेरी मम्मीके जाने तक इन्तजार नही कर सकते..? क्युकी कल हमे नीकलना भी हे.. तो मुजे तकलीफ.. आइ मीन.. आप समज गयेनां..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन वो वाला प्यार नही जो अभी तेरी मम्मीको देकर आया हु.. हम उपर उपरसे तो कर ही सकते हे.. जीसे ओरल सेक्स करते हे.. चल आजा.. आज तेरी भी खुजली मीटाता हु..

कहेते लखनने नीलमको बेडसे खडा करदीया तब नीलमके दिलकी धडकन बढ गइ.. ओर लखनने उसे अपनी गोदमे बीठा लीया ओर अपनी बाहोमे भरते नीलमके होठोको चुमने लगा.. तो नीलम भी उतेजीत होने लगी.. ओर वो अपनी सरम त्यागकर लखनका साथ देने लगी.. लखन नीलमके होठोको चुमते उनके उरोजोके साथ खेलने लगा.. तब नीलमके मुहसे उतेजनकी वजहसे सीसकारीया नीकलने लगी..

ओर धीरे धीरे करते दोनोके तनसे कपडे हटते गये.. तब लखनने नीलमको गोदमे उठाकर बेडपे लीटा दीया.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. दोनो ही नंगे थे.. तब नीलमके संतरे जैसे बुब्स हल्कीसी रोसनीमे चमक रहे थे.. ओर लखन नीलमके उपर चडते छा गया.. तब नीलमने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो लंखनका लंड नीलमकी चुतपे चुभने लगा.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे मुह डालकर जीभसे पेच लडाने लगे.. तभी..





नीलम : (धारी सांसोसे धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. अगर मे बहेक जाउ तो अभी आप कंट्रोल करलेना..

लखन : (बुब्स चुमते) नीलु.. तु फीकर मत कर.. उस रात हमारी स्पेसीयल रात होगी.. जब हमारा पहेला मीलन होगा.. यही समजले वो हमारी सुहागरात होगी.. तब तुम धिरेनको भी भुल जायेगी..

नीलम : (उतेजनासे कमर उछालते) जीजु.. यही तो मे चाहती हु.. की मे धिरेनको भुल जाउ.. क्युकी मुजे आपसे प्यार हो गया हे.. धिरेनके साथ सादी करना मेरी मजबुरी हे.. वो मे बादमे आपको बताउगी.. अभी तो मुजे प्यार करो.. आज अपनी इस सालोको आपके अंदर समालो..

नीलम काफी गरम हो चुकी थी.. वो मनसे चाहने लगी.. की उसे अभी लखन चोदले.. लेकीन अभी चुदवाना उनके लीये जोखीम भरा था.. लखनने उसे बहुत ही उतेजीत कर दीया था.. वो लखनकी कीसी भी हरकतका विरोध नही कर रही थी.. लखन नीलमके बुब्सको छोडकर चुमते चुमते धीरे धीरे नीचेकी ओर सरकने लगा.. तो नीलम मछलीकी तराह तडपने लगी.. उसने चदरको कसके पकडीया.. उसे लगा वो हवामे उड रही हे..



 
ओर लखन चुमते चुमते नीलमकी चुत तक पहोंच गया.. ओर नीलमकी चुतको चाटने लगा.. तब नीलमने दोनो हाथसे चदरको पकडलीया.. ओर मुडीमे मसलने लगी.. वो आंख बंध करते मछलीकी तराह छटपटाने लगी.. तभी लखनने नीलमकी चुतमे अपनी जीभको घुसा दीया.. ओर नीलमके चुतके दानेको जीभसे खरोदने लगा.. तब नीलम पागल जैसी होने लगी.. ओर वो अपनी कमरको उछालने लगी..





नीलम : (मदहोसीमे बडबाते) ओ..ह.. जी..जु.. क्या.. कर..दीया.. आइ.. सीससस... उहं.. आइ.. मम्मी.. जीजु.. उपर आजाओनां.. मुजे कुछ हो रहा हे.. चोदलो मुजे.. नही रहा जाता.. बस.. अ‍ेक बार.. घुसादो अंदर.. मे आपसे चुदना चाहती हु.. उस भडवेमे इतना दम नही जो मुजे संतुस्ट कर सके..

लखन बीना कुछ बोलेही नीलमकी चुतको छेडता रहा.. तो कुछ ही देरमे नीलमका तन अकडने लगा..ओर वो अपनी कमर उछालते पानी छोडने लगी.. ओर लखनके मुहको भीगोने लगी.. नीलम आज बीना चुदाइके ही जड गइ.. ओर वो धडामसे अपनी कमर गीराते भारी सांसे लेते नीढाल होगइ.. ओर कुछ देर अ‍ैसे ही पडी रहेते अपनी सांसको कंट्रोल करती रही.. तब उसे होस आयाकी वो लखनके साथ हे..





लखन : (मुह साफ करते मुस्कुराते) नीलु.. कैसा लगा तुजे..? हंम.. मजा आयाकी नही..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. आपने तो मुजे स्वर्गकी सेर करादी..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. अब चल.. तेरा तो होगया.. अब मुजे भी थोडी सेर करादे.. तुमने धिरेनको ब्लु जोब तो दिया ही होगा.. चल आजा सुरु होजा.. लेकीन तुम उसे गाली क्यु दे रही थी..?

नीलम : (मुस्कुराते बेडसे खडी होते) जीजु.. वो.. वो.. बस.. मुहसे अ‍ैसे ही नीकल गया.. लेकीन जीजु.. आपका ये बहुत बडा हे.. आप ध्यान रखना..

कहेते नीलम लखनके पैरोके बीच आकर बैठ गइ.. ओर लखनका लंड मुठीमे पकडलीया.. फीर धीरे धीरे करते सहेलाने लगी.. लखनका लंड अब भी तनके हवामे जटके मार रहाथा.. तब नीलम सरमाते लखनकी ओर देखती हे.. ओर अपनी जीभ नीकालकर लखनके लंडको नीचेसे चाटने लगती हे.. फीर धीरेसे मुहमे लेकर लोली पोपकी तराह चसते मुहमे अंदर बहार करने लगी..





तो लखन भी काफी उतेजीत हो गया.. अ‍ेक पल तो उसे लगाकी वो अभी के अभी नीलमको पटक पटककर चोदले.. मगर लखनने बडा सयम रखा.. ओर नीलमको हाथ पकडकर खडी करदी.. फीर पीठके बल लेटते लखनने नीलमको अपने उपर खीचली.. ओर उसे उल्टा होकर सीक्स नाइन पोजीसनमे लंडको मुहमे लेनेके लीये कहा.. तो नीलम सीक्स नाइन पोजीसनमे आगइ.. ओर लखनके लंडको मुहमे भर लेती हे..





फीर मुहसे जोरोसे हीलाने लगती हे तब लखनभी नीलमकी कमरको पकडते उनकी चुतमे मुह लगाता हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलने लगे.. काफी देर दोनो इस खेलको खेलते रहे.. तब लखनका लंड अकडने लगा.. तो नीलमकी चुत भी लगातार पानी बहा रहीथी.. ओर लखनके लंडसे तरल पदार्थकी पीचकारीया छुटने लगी.. ओर नीलमके मुहमे जाते उनके हलकमे उतरने लगी..

तो नीलम भी पुरा लंड मुहमे लेकर अपनी कमरको जटकाते जडने लगी.. नीलमका पुरा मुह लखनके विर्यसे भर गया.. तो वो खांसने लगी.. ओर जटसे बेडसे उतरते बाथरुममे भाग गइ.. तो लखन हसने लगा.. ओर वो भी नंगा नीलमके पीछे बाथरुममे घुस गया.. ओर दोनो अपना मुह साफ करने लगे.. जब दोनो सही होगये.. तब नीलम लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर खुब सरमाते मुस्कुराती रही.. तभी..

लखन : (बाहोमे भरते) नीलु.. मजा आया..? हंम.. चल अब मे चलता हु..

नीलम : (नजरे जुकाते) जीजु.. थेन्क्स.. इतना मजा तो मुजे धिरेनके साथ भी नही आया.. मे तो आपकी दिवानी होगइ.. आज आपने बहुत कंट्रोल कर लीया.. वरना मेतो कंट्रोल खो चुकी थी.. मुजे लगा आज ही आपसे मीलन करलु..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) नीलु.. मुजे पता हे अभी हमारे मीलनके लीये सही माहोल नही हे.. ओर मे कीसीसे मजबुरीका फायदा नही उठाता.. जब सही वक्त आयेगा.. ओर तुम राजी होगी.. तब हमारा मीलन होगा.. बस.. कुछ दिन इन्तजार करले..

नीलम : (खुसीसे हांमे गरदन हीलाते) हां जीजु.. आइ प्रोमीस.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. आज आपने कंट्रोल करके मेरा दिल जीत लीया.. जीजु.. आइ लव यु.. मे आपसे प्यार करती हु..

लखन : (कमरमे हाथ डालकर बहार नीकलते हसते) नीलु.. अगर तुम मुजसे प्यार करने लगी.. तो फीर धिरेनका क्या होगा..? हें..हें..हें..

नीलम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) जीजु.. इसके बारेमे भी मेने सोच लीया हे.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बाते करनी हे.. बस.. सही मौका मीलनेदो.. मे आपको सबकुछ बता दुगी..

फीर लखन ओर नीलम अपने अपने कपढे पहेन लेते हे.. ओर लखन अ‍ेक बार फीर नीलमको बाहोमे भरके कीस करता हे.. आज नीलम लखनका प्यार देखकर उनकी ओर काफी ढल चुकी थी.. फीर लखन अपने रुममे चला जाता हे.. इस रात लखनके बंगलेपे देर रात तक वासनाका तांडव हुआ.. लखनने राधीका ओर नीलमको अ‍ैसेही संतुस्ट करते रमाको दो बार चोद लीयाथा.. फीर लखन लताके पास उनसे चीपककर सो गया.. तो लता भी करवट लेकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर अ‍ैसे ही रात बीत गइ..
 
आज सुबह हवेलीपे मंजु जल्दीसे जाग गइ.. ओर नहा धोकर कंपलीट होते ही आश्रम जानेकी तैयारीया करने लगी.. चंपाभाभी चाइ नास्ता बनाने लगी.. तबतक मंजुने बहुत सारा काम नीपटा लीया.. ओर वो देवायत ओर भावनाको जगाने चली गइ.. तब देवायत ओर भावना दोनो ही नंगे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सोये हुअ‍े थे.. तब मंजुने अंदर जाकर दोनोको जगाया.. ओर फटाफट तैयार होजानेको कहा..

तो भावना अपनी हालत देखकर सरमा गइ.. ओर फटाफट देवायतकी ओर देखते हसते हुअ‍े बाथरुममे जाने लगी.. तो देवायत समज गया.. ओर वो भी जटसे बेडसे उतर गया.. ओर भावनाके पीछे बाथरुममे घुस गया.. तो भावना जोरोसे हसते उनको बहार नीकलनेकी मनते करने लगी.. तो मंजु दोनोका सारा तमासा देखकर हसती रही.. ओर बाथरुमके पास जाकर दरवाजेसे दोनोको गालीया देने लगी..

मंजुला : (थोडा जोरोसे) देवु.. आज कोइ सरारत नही.. दोनो फटाफट नहाकर बहार आजाओ.. हमे देर हो रही हे..

देवायत : (भावनाको पकडते) मंजु.. अभी आया.. बस.. तेरी बहेनसे सीर्फ थोडासा प्यार करलु..

भावना : (जोरोसे हसते) दीदी.. इनको बहार बुलालो.. नही करना प्यार मुजे.. देखो.. ये मुजे नहाने नही दे रहे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (थोडा गुस्सेसे) देवु.. बहार नीकलो.. आज कोइ प्यार ब्यार नही.. पुरी रात तो हम दोनोको ठोकते रहे.. फीर भी जी नही भरा..? नीकलो बहार.. ओर वो भी कमीनी हे.. पीछले कइ दिनसे तो चुदवा रही हे.. फीर भी कमीनीको चुदवाना हे.. जो आपको उक्साते अंदर भाग जाती हे.. दोनो नीकलो फटाफट..

कहेते मंजु हसते हुअ‍े बहार चली जाती हे.. तबतक देवायतने भावनाको अपनी बाहोमे भरते भीच लीयाथा.. ओर उनके बुब्सको चुमते भावनाको उतेजीत कर रहा था.. तब थोडी ही देरमे भावना गरम हो चुकी थी ओर सीसकारीया करते देवायतका लंड मसलते अपनी चुतपे रगड रही थी.. तब उनसे बरदास्त नही हुआ.. ओर उसने खडे खडे ही देवायतका लंड अपनी चुतपे सेट करदीया..

भावना : (कामुक आवाजमे) जानु.. बहुत कमीने हो आप.. नही मानोगे.. अब जो भी करना हे फटाफट करलो.. आज दीदी बहुत भडकी हुइ हे.. ओर हां.. आज सीर्फ अ‍ेक ही बार.. वरना आप मेरी हालत खराब कर देते हो..

कहातो देवायत भावनकी अ‍ेक टांग उठालेता हे.. ओर जोरसे धका मारते पुरा लंड भावनाकी चुतमे घुसा देता हे.. तब भावनाकी चीख नीकल गइ.. ओर उसने दोनो हाथ देवायतके गलेमे डाल दीया.. तभी देवायत कमर हीलाते भावनाको जोरोसे चोदने लगा.. दोनो बहुत गरम हो चुके थे.. तब कुछ देरकी चुदाइके बाद दोनो ही साथमे जड गये.. फीर साथमे बाथ लेकर कंपलीट होकर बहार आ गये.. ओर कपढे पहेनने लगे..

मंजुला : (अंदर आते ही) देवु.. तुम दोनो अभी तक तैयार नही हुअ‍े..? अरे बाबा हमे आश्रमपे भी पहोंचना हे.. वो दोनो भी कंपलीट होकर हमारा इन्तजार कर रही हे.. ओर भावु.. अब तुम दो तीन दिन देवुके पास मत जाना.. उसे अब हमारी दया बहेनके साथ मजे करने दे.. आज दोनोकी सादी हे.. क्युकी दया बहेनकी अ‍ेक बरसोकी इच्छा हे.. की वो अ‍ेक बच्चेको जन्मदे.. ताकी वो मां बन सके..

भावना : (थोडी मायुस होते) क्या दीदी.. अभी तो सीर्फ चार ही दिन हुअ‍े हे हमारी सादीको.. ओर क्या मे सारा दिन यही करती हु..? हमारे पतीको भी समजाओनां.. वो ही लगे रहेते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे हां बाबा समज गया मे.. इसमे भावुका क्या दोस..? बस.. ये तो भावुपे थोडा ज्यादा प्यार आ रहा हे इसीलीये.. ओर वैसे भी अभी तुम्हारे ओर भावुके अलावा यहा हे ही कौन..?

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे ठीक हे.. अगर भावु इतजी ही अच्छी लगती हे तो कर लेते इनसे सादी.. क्यु उस कुतेके पले बांध दीया..? जो सारा दिन कीसी भी ओरतके साथ पडा रहेता हे.. अब चलो दोनो फटाफट तैयार होकर बहार आजाओ हमे नीकलना भी हे.. भावु.. तु भी चल मुजे तुमसे कुछ बात करनी हे..

कहेते मंजु बहार नीकल गइ.. तो देवायत ओर भावना अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते जोरोसे हसने लगे.. फीर दोनो कंपलीट होकर बहार आगये तो देवायत डाइनींगपे जाकर बैठ गया.. तो चंपा भाभी मौका देखकर देवनयतके पास आगइ.. ओर उसे मीलनेके लीये कहेने लगी.. तब मंजु पुनम वाले रुममे चली गइ.. तो पीछे पीछे भावना भी मुस्कुराते चली गइ.. तब दोनो ही बेडपे जाकर बैठ गइ.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) देख भावु.. कुछ दिन अपनी भावनाओपे कंट्रोल करले.. आज देवुकी सादी हे.. अब कुछ दिन दया बहेनको उनके साथ सोनेदे.. दोनोने बहुत मजे करलीये..

भावना : (थोडी मायुस होते) क्या दि..? अभी हमने कहा मजा कीया..? हमारी सादीको सीर्फ चार पांच दिनतो हुअ‍े हे.. क्या कोइ पतीसे इतने दिनोमे दुर हो सकती हे..? बात करती हे..

मंजुला : (प्यारसे समजाते) भावु.. तुम भी देवुसे प्यार करती थीनां..? इसीलीये मेने तुम दोनोकी सादी करवाइ.. लेकन मत भुलो.. तुम सबकी मंजील अब देवु नही हे.. खास करके तुम चारोकी.. तुम चारोकी मंजील मेरा लखन बेटा हे.. अब जीतनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी मेरे बेटेको भी अपनाले.. ताकी तुजे इस सुखसे ज्यादा दिन वंचीत ना रहेना पडे.. तु समज गइनां..?

भावना : (र्ससार होते धीरेसे) हां दीदी.. इस बारेमे पुनोदीदीसे काफी बात हो चुकी हे.. क्या सचमे हमारी मंजील हमारा देवर हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हमारा नही.. तुम सबका.. क्युकी वो सचमे मेरा बेटा हे.. मेरे पीछले जन्मका बबलु..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) बबलु..? वो आइसक्रिम वाला बबलु..? उन राजाका भाइ..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. ठीक पहेचाना तुमने.. सुन.. तुम अ‍ेक बार लखनको मीलेगीनां तो फीर हमारे देवुको भी भुल जायेगी.. आज कल अ‍ेक तो लाइनमे लगी हुइ हे.. जो बहुत जल्द मेरे लखन बेटेके नीचे आजायेगी.. इसीलीये केह रही हु.. तुम अब लखन बेटेको अपनाले.. वो तुजे खुस रखेगा..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? आपने हमारी सभी सौतनोको छुट दे रखी हे.. तो क्या आप भी..? मम्मी भी तो हमारी सौतन हे.. ओर आप तो उनको अपना बेटा माती हो.. तो आप ही केह रही थी मुजे अपने बेटेको जन्म देकर उनसे ही सादी करनी पडती हे.. तो वो सब बाते मीथ्या होजायेगी क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही भावु.. मे तेरे कहेनाका मतलब समज गइ.. लखन भले ही इस जन्ममे मेरी कोखसे पैदा ना हुआ हो.. फीर भी अगर लखन चाहगा तो मे रेडी हु.. लेकीन मुजे पता हे वो मेरे साथ कभी भी रीलेशन नही बनायेगा.. क्युकी वो खुद मांके प्रती अपनी मर्यादा लांधना नही चाहता.. ओर रही बात मम्मीकी.. तो उसे अ‍ैसे ही जवान रहेनेके लीये लखनके साथ रीलेशन बनाना ही होगा.. मे बस इतना केह सकती हु..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर हमारा पती उनकी इतनी बीवीया नही सम्हाल पाते.. तो क्या लखन भैया अकेले सम्हाल पायेगे..? वोभी तो वहा बीजनेस करने गये हे..

मंजुला : नही भावु.. वहा तो हमारा पहेलेसे ही अ‍ेक पार्टनर हे.. जब मेरी सादी भी नही हुइ थी.. वहाका सब बीजनेस वोही सम्हालते हे.. बस.. लखन बेटेकोतो अ‍ैसे ही वहा भेजा हे.. वो भी अ‍ेक खास मक्सदसे जो अभी उनको भी नही पता.. वो सीर्फ पुनो ओर मेही जानती हु.. ओर कोइ नही.. हमारा देवु भी नही.. वहा मेरे बेटेको यही काम करना हे.. तुम सबको सम्हालनेका.. तभी तो उसे जडी बुटी दे गइ हे..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपकी सभी बाते मे समज गइ.. मे लखनके साथ रीलेशन रखनेको तैयार हु.. लेकीन इनमे मुजे थोडा सोचनेके लीये वक्त लगेगा.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (सामने देखकर मनमे सोचते) कमीनी.. तु जीतना भी सोचना हे सोचले.. तु सोचती ही रहेगी.. इनसे पहेले ही मेरा बेटा तुजे चोदलेगा.. तुजे पता भी नही भलेगा..

भावना : (मुस्कुराते) दी.. क्या सोच रही हे..? कुछ कहेना हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. तुजे सोचनेके लीये जीतना वक्त चाहीये लेले.. आखीर तुजे अ‍ेक दिन उनको अपनाना ही पडेगा.. मेरी ये बात याद रखना.. ओर सुन.. अब यहा बहुत कुछ होने वाला हे.. कीसी भी रीस्तोमे तुम इन्टर फैयर मत करना.. फीर चाहे रीस्तोमे जो भी हो.. हमारी मम्मी ही क्युना हो.. अब चल.. हमे नीकलना हे..

कहेते मंजु ओर भावना दोनो बहार आगइ.. ओर देवायतके साथ जाकर बैठ गइ.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया.. ओर अपना सामान कारमे रखकर चंपाभाभीको कहेकर तीनो कारमे अपने खेतोकी ओर चले गये.. वहासे रामुकाकाको लेकर चारो आश्रमकी ओर नीकल गये.. तब पुनमके घरपे धिरेन चाइ नास्ता कर रहा था.. ओर दया पुनम जानेके लीये कंपलीट तैयार होकर धिरेनको चाइ नास्ता दे रही थी.. तभी..
 
धिरेन : (थोडा सखतीसे) पुनो.. मुजसे बात नही करती इसका मतलब ये नही की कही जाना हेतो अपने पतीको भी ना पुछा जाये.. कहो.. दोनो बन ठनके कीधर जा रही हो..? अपने आसीक को मीलने..?

पुनम : (गुस्सा होते) हां.. मे अपने आसीक को मीलने ही जा रही हु.. धिरेन.. थोडा तो मुह सम्हालके बोलो.. हम भैया भाभीके साथ आश्रम जा रही हे.. कही अ‍ैयासीया करने नही.. समजे..? ओर अब आपसे पुछनेका कोइ मतलब भी नही हे.. अब हमारा रीस्ता तो खतम हो गया हे.. तो फीर मे आपसे क्यु पुछु..?

धिरेन : (कातील मुस्कानसे) अभी तक अकड नही गइ.. मत भुलो अभी हमारा डीवोर्स नही हुआ हे.. तुम अभी भी मेरी बीवी हो.. तो इस नाते तुमसे पुछनेका मेरा अभी भी हक हे.. समजी..? कही नही जाना बैठो दोनो घरपे.. अगर जाना हेतो डीवोर्सके पेपरमे साइन करके जाओ..

पुनम : (गुस्सा करते) कीतने कमीने हो तुम.. मेरी मजबुरीका अच्छा फायदा उठा रहे हो.. जाओ नही करती साइन क्या करलोगे तुम..? ओर हम जायेगी भी.. जो तुमसे हो सके करलेना.. मे अभी चंदा भाभीको फोन करती हु..

धिरेन : (गुस्सा होते) ठीक हे.. जाओ दोनो.. मे भी देखता हु तुम कैसे जाती हो.. मे उनसे डरता नही हु.. वो भी तेरी ही तराह हे.. रंडी कहीकी.. पता नही मेरी पीठ पीछे उसने भी तेरे भाइके साथ क्या क्या गुलछने उडाइ हे.. तुम कान खोलकर सुनलो.. अगर तुमने इस घरकी चोखटके बहार कदम भी रखा तो भुल जाना इस घरको.. ये घर हमेसा हमेसाके लीये तुम्हारे लीये बंध.. फीर जहा जाना चाहती हो चली जाना..

पुनम : (जोरसे चीलाते) हां चली जाउगी.. मुजे नही चाहीये तुम्हारा ये घर.. मे तुम्हारी सकल भी देखना नही चाहती.. कीतने कमीने हो तुम.. अपनी मांके बारेमे अ‍ैसा बोलते हो..? तुमे डीवोर्स चाहीयेनां..? लाओ पेपर मे साइन करदेती हु.. फीर नही आउगी इधर.. लेकीन याद रखीयो.. ये पेपर तुम्हे भाभीकी हाजरी मे ही मीलेगा.. सबके सामने.. अगर हीमत हे तो हवेलीपे आकर लेजाना.. (दयाकी ओर देखते) दया बहेन.. हमारा कपडे वैगेरे जो भी सामान हे साथ लेलो.. अब हमे यहा कदम भी नही रखना..

कहा तो धिरेन मनमे खुस होते उपर अपने रुममे चला गया.. ओर डीवोर्सका पेपर फटाफट लेकर आ गया.. तो पुनमने गुस्सेमे आकर उनपे साइन करदी.. तब धिरेनके चहेरेपे कातील स्माइल आगइ.. तब दया भी अपना सब सामान पेक करने लगी.. तो पुनम साइन करके पेपरको साथ लेकर उपर चली गइ.. ओर अपना कपडा बेगमे पेक करते आंसु बहाने लगी.. उसने पेपरको भी बेगमे रखलीया ओर नीचे आगइ..

धिरेन : अगर सामान लेलीया हेतो देदो पेपर.. मे आज ही कोर्टमे सबमीट करवा दुगा.. ओर तुजे तेरी कोपी मील जायेगी.. समजी..? लाओ..

पुनम : (गुस्सेसे देखते) क्यु.. सुना नही तुमने..? अब ये पेपरतो सबकी हाजरीमे ही मीलेगा.. अगर हिंमत हे तो वहा आकर लेजाना..

धिरेन : (तील मीलाते) हां हां.. लेजाउगा.. मे कीसीके बापसे डरता नही हु.. जा चलीजा.. ओर हो सके तो ये बच्चा भी गीरा देना.. पता नही कीसका पाप मेरे पले बांध दीया.. कही अ‍ैसा ना होकी कल जाके ये मेरी प्रोपर्टीमे भाग मांगले..

इतना सुनते ही पुनमने अ‍ेक जोरका तमाचा धिरेनके गालपे जड दिया.. तो अचानक गालपे पडे तमाचेसे धिरेन भी सक्तेमे आ गया.. ओर अपना गाल सहेलाते बडी ओंखोसे सीर्फ पुनमको ही देखता रहा.. तब पुनम गुस्सेसे उनको देखते आंसु बहा रही थी.. फीर अपना सोफेपे बैठकर दोनो हाथसे अपना चहेरा छीपाते जोरोसे रोने लगी.. तो धिरेन उनको देखता ही रहा..

फीर गुस्सा करते अपनी बेग लेकर घरसे नीकल गया.. तो कुछ ही देरमे देवायत अपनी बडी कार लेकर आ गया.. तब मंजुकी संज्ञानमे सबकुछ आ चुका था.. ओर वो पुनम दयाको बुलाकर आती हु कहेते सबको कारमे ही बैठे रहेनेको कहेकर अकेली पुनमके घरमे चली गइ.. ताकी अंदर जो भी कुछ हुआ हे सबको पता ना चले.. जैसे ही मंजु अंदर गइ.. तब पुनक उनको देखते ही उनसे लीपट गइ.. ओर फुटफुटके रोने लगी..

मंजुला : (सांत करते सरको सहेलाते) बस.. बस कर मेरी बची.. बहार सब खडे हमारा इन्तजार कर रहे हे.. सांत होजा.. वरना बहार सबलोग सुनलेगे.. तुजे कुछ भी कहेनेकी जरुरत नही.. मुजे सब पता हे.. अ‍ेक दिन तो ये सब होना ही था..

पुनम : (रोते) दीदी.. मे क्या करु..? मेरे बच्चे ओर चंदा भाभीके बारेमे कैसा बोल रहा था.. दीदी.. आज मे आजाद हो गइ.. मेने करदी साइन उनको..

मंजुला : (आंसु पोछते) हां मेरी बच्ची.. सही कीया तुमने.. तेरा धिरेनके साथ सफर यही तक था.. अभी सांत होजा ओर जा अपना हुलीया ठीक करले.. हमे जाना भी हे.. बहार कारमे तेरे भाइ हमारा इन्तजार कर रहे हे.. जा फटाफट..

मंजुला : (पुनमके जाते ही मुस्कुराते) दया.. क्या कंपलीट होगइ..? तुने तेरी सभी तैयारीया करली हेनां..?

दया : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी दीदी.. कल रात ही सब कंपलीट करलीया था.. दीदी.. दोनोके बीच बहुत जगडा हुआ.. हमे जीजुने यहासे जानेके लीये केह दीया हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया तुम चीन्ता मत करो.. अब वैसे भी तुम दोनोका यहासे जानेका वक्त हो गया था..

पुनम : (मुह पोछते बहार आते) दीदी.. चलीये.. मे रेडी हु.. ओर ये हमारा सामान..?

मंजुला : (मुस्कुराते) अभी इसे यही रहेने दे.. हम वापसीमे ले लेगे.. या लखन लेलेगा.. वो भी आश्रमपे आ रहा हे.. तुम ताला लगाकर चाबी भीमाभाइके वहा दे देना.. वो वहासे लेलेगा.. चलो अब.. वही आश्रमपे जाकर हम आरामसे बात करेगे.. अभी वहा कीसीको कुछ मत कहेना..

कहा तो दयाने अपना जरुरी सामानका अ‍ेक बेग लेलीया.. ओर पुनमने घरको ताला लगा दीया.. ओर सब कारमे बैठने लगे.. तो दया रामुकाकाको देखते ही खुस होगइ.. ओर सरमाते उनके पैर छुलीया.. रामुकाका देवायतकी बगल वाली सीटमे बैठे थे.. तो पुनम देवायतको देखते ही सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी.. तो देवायतभी मुस्कुराते कारमे बैठनेका इसारा करता हे.. ओर सबलोग कारमे बैठ गये..

रामुकाका : (हसते) जीती रहो बेटा.. बेटीया बापके पैर नही छुती.. ओर आज तो खुसीओका दिन हे.. चल बैठजा.. हमे जल्द आश्रमपे पहोंचना हे..

फीर सबलोग बैठ गये तो मंजुने लताको फोन करदीया ओर उसे भी जल्द आश्रमके लीये नीकलने को कहा.. तो लता फटाफट लखनको जगा देती हे.. ओर रजीयाको सोने देती हे.. क्युकी रजीयाका अभी भी पीरीयड चल रहा था.. ओर आज लताका पीरीयड भी खतम हो गयाथा.. तो वो आज नहाकर कंपलीट होना चाहती थी.. तो वो सृतीको जगाकर नीलमको जगाने चली जाती हे.. फीर वो खुद नहाने जाते लखनको कहेती हे..

लता : (मुस्कुराते आंख मारते) जानु.. मेभी नहाने जा रही हु.. तो आप अ‍ेक काम करो.. नीचे जाकर भाभीका बाथरुम युज करलो.. ओर उसे जगाभी देना.. समज गयेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (टोवेल लेकर खडा होते) लता.. तुम बहोत डेन्जर हो.. क्या सुबह सुबह अ‍ैसा काम करवा रही हो.. हें..हें..हें..

लता : (सरारतसे मुस्कुराते) अरे जाओना बाबा.. मेतो आपकी ओर पुनो दीदीकी मदद कर रही हु.. ओर वैसे भी आज भाभी अपने घर चली जायेगी.. तो क्या उनको आखरी बार नही मीलोगे..? देखना ज्यादा नही.. सीर्फ अ‍ेक बार.. वरना उनकी हालत खराब होजायेगी.. तो वहा सबको पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते बहार जाते) ओह.. गोड.. मेरी बीवीया मुजसे कैसे कैसे काम करवा रही हे..

लता : (हसते लखनको बहारकी ओर धका मारते) जाओ जाओ.. ज्यादा नौटंकी मत करो.. मुजे भी पता हे.. रातमे उनकी जमकर बजाकर आये हो.. तो आज आपको उनसे आखरी बार मीलना हे..

लखन लताकी ओर हसते जटसे नीचे चला गया.. देखा तो राधीकाका कमरा अभी भी बंध था.. जाहीरसी बात हे.. राधीका ओर रजीया जाने वाली नही थी.. तो लताने उसे इतनी जल्दी नही जगाया.. तभी लखन रमाके रुममे घुस गया ओर दरवाजा धीरेसे बंध करलीया.. देखा तो रमा पहेलेही जाग चुकी थी.. ओर अभी बाथरुममे नहा रही थी.. तो लखन मुस्कराने लगा..

ओर फटाफट अपने सकपडे नीकालके नंगा हो गया.. ओर रमाके नीकलनेका इन्तजार करते बैडपे बैठ गया.. ओर रमाको याद करते अपना लंड हीलाकर खडा करने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनके लंडमे तनाव आगया.. ओर स्टीलके रोडके माफीक सख्त हो गया.. तभी बाथरुमके दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो लखन जटसे बाथरुमके दरवाजेके पीछे चला गया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 




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