नीलम : (थोडी चीन्तासे) हां धिरेन.. मुजे अपनी सारी बात बतादो.. क्या हुआ.. पुनो दीदीके पास हमारी क्लीप कैसे आगइ..? कही लखन जीजुने तो.. नही नही.. वो अैसा नही कर सकते.. वो तो उल्टा हमारी मदद कर रहे हे.. जानु.. लखन जीजुने खुद मुजसे कहा हे.. वो जल्दसे जल्द हम दोनोकी सादी करवा देगे..
धिरेन : (पायलकी बात छुपाते) क्या..? लखन भैयाने खुद तुमसे कहा..? नीलु.. पुनो केह रही थी.. होस्टेलके सारे सीसी टीवीकी लीन्क उनके पास हे.. तो वो वहा कभी भी देख सकती हे..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. तो मुजे लगता हे.. अब हमे होस्टेलमे नही मीलना चाहीये.. लेकीन अब हमे मीलना ही नही चाहीये.. क्युकी ये सब मे हमारी सादीके बाद करना चाहती हु.. अगर कही बच्चा ठहेर गया.. तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. क्युकी अब तो तुम बीना कोन्डम ही करते हो.. देखना अब मे मेरी पढाइ तक कोन्डमके बीना नही करने दुगी..
धिरेन : (परेसान होते) नीलु.. ये तुम क्या बोल रही हो..? अब तो पुनो भी मुजे छुने नही देगी.. तो फीर मे कहा जाउगा..? अब सीर्फ तुम हीतो अेक सहारा हो.. नीलु.. चलना हम सादी करलेते हे.. मे तेरे बीना नही रेह सकता.. ठीक हे हम सावधानी बरतके करेगे.. मे आज कोन्डम लेकर ही आया हु..
नीलम : (समसर होते धीरेसे) धिरेन.. देखना कही उच नीच ना होजाये.. ओर अभी अेक दो दिनमे मुजे सबके साथ सादीमे गांवभी जाना हे.. ओर मम्मी भी वहासे वापस गांव चली जायेगी..
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. सीर्फ अेक दो दिनकी बात हे.. घरका रजीस्ट्रेशन भी हो गया हे.. अेक दो दिनमे हमारा बंगलो खाली होजायेगा.. फीर कोइ दिकत नही होगी.. हम वही मीलते रहेगे.. सुन.. चलना आज कीसी होटलमे चले जाये.. हंम..? बहुत मन कर रहा हे..
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे नजर जुकाते) जानु.. अगर हम टाइम पे वापस नही आये तो लखन जीजु मुजे ढुंढेगे.. क्या हम कल नही मील सकते..? हंम..?
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. अेक बात कहु..? वैसे भी पुनमको हमारे बारेमे सब पता तो चल ही गया हे.. तो क्या फर्क पडता हे.. की वो देखले.. चल हम होस्टेल ही चले जाते हे.. ओर वो हमे देखलेगी तो मुजे जल्द उनसे छुटकारा भी मील जायेगा.. तुम दियासे रुमकी चाबी लेले.. हम जल्द वापस आजायेगे..
कहा तो पहेले तो नीलम ना नुकुर करने लगी.. फीर उसने धिरेनकी बात मानली.. ओर नीलमने आज फीर दियासे उनके रुमकी चाबी लेली.. ओर दोनो होस्टेलमे चले गये.. तो आज नीलमने सभी दरवाजा ओर खीडकीको अच्छी तराहसे बंध करदीया.. ओर सब कुछ चेक करलीया.. की कही छेद तो नही.. फीर दोनो नंगे होगये.. ओर अेक बार फीर दो जीस्म अेक होगये.. तब पुरे रुममे नीलमकी सीसकारीया गुंजने लगी..

धिरेन आज कोन्डम लेकर ही आया था.. ओर दोनो मदहोस होकर चुदाइ कर रहे थे.. तब कुछ देरकी चुदाइके बाद धिरेन जडकर नीलमके उपर ढेर हो गया.. ओर अेक बार फीर नीलमको मजधारमे छोड दिया.. तो नीलम मन ही मन धिरेनको कोसने लगी.. ओर तब ही उसने लखनसे अपनी प्यास बुजानेका मन बनालीया.. नीलम इतनी बार धिरेनसे चुदवाकर ये जान चुकी थी.. की धिरेन उसे कभी संतुस्ट नही कर पायेगा..
इसीलीये तो नीलम लखनके साथ गांव जानेके लीये तैयार होगइ.. फीर दोनो सही होकर बहार आगये.. ओर धिरेनने नीलमको वापस स्कुलपे छोडदीया.. तो दुसरी ओर आराम करनेके बाद सबलोग होल मे आगये.. तब रजीयाने सबके लीये चाइ नास्ता बनालीया.. तो आज लखन चाइ नास्ता करने नही आया.. जीसे देखकर सृती नीरास होगइ.. उनको लगा की आज उसने अेक बार फीर लखनको खो दीया..
ओर वो चाइ नास्ता करके भारी मनसे अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. लेकीन आज उनका कही मन लग नही रहा था.. वो बेमन अपने पेसन्टको देखती रही.. ओर अेक डीलीवरीका केस भी करलीया.. तो इधर सृतीके जानेके बाद कुछ देरके बाद लखन भी नीचे आगया.. तो आज राधीकाने उसे चाइ नास्ता दे दीया.. ओर लखनके पास ही बैठ गइ.. तब लखन उनकी ओर देखते मुस्कुराने लगा तो राधीका बहुत सरमा गइ.. ओर उसने धीरेसे कहा..
राधीका : (सरमाते धीरेसे) जानु.. वो.. वो सृतीभाभी पुछ रही थी.. हमारी सुहागरातके बारेमे..
लखन : (प्यारसे देखकर मुस्कुराते) अच्छा..? तो फीर चलो उपर.. सुहागरात मना लेते हे.. हें..हें..हें..
राधीका : (सर्मसार होते अेक मुका मारते) लखन.. प्लीज.. मजाक नही.. मे सीरीयसली केह रही हु..
लखन : (मुस्कुराते) अच्छा तो तुम कहो.. क्या कहा तुमने उसे..?
राधीका : (सरमाते मुस्कुराते) क्या..? मेने तो उसे केह दिया.. की जब मेरा लखन चाहेगा.. तब हम सुहागरात मनालेगे.. जानु.. क्या हेना अभी मम्मीकी तबीयत भी ठीक नही हे तो.. आप समज गयेनां..? मे ये सब अच्छे माहोलमे करना चाहती हु.. ओर वो भी हमारे घरमे.. यहा मुजे बहुत सरम आयेगी.. क्या कहेते हो..?
लखन : (प्यारसे गाल सहेलाते) ठीक हे बेबी.. जब तुम चाहो.. बस..? मुजे कोइ जल्दी नही.. बस मेरी राधु खुस रहेनी चाहीये.. ओर मम्मी भी यहा खुस हे.. तुम चाहोतो हम याभी मील सकते हे.. कोइ दिकत नही हे..
राधीका : (कंधेपे सर रखते आंख गीली करते) जानु.. मेने कोनसे पुन्य कीये होगे.. जो आप पतीके रुपमे मीले.. आपकी फेमीली.. ओह.. सोरी.. हमारी फेमीली कीतनी अच्छी हे.. मम्मी तो यहा आकर बहुत खुस हे.. कहेती थी राधु.. अब मे तो यहासे नही जाउगी.. मेरा बेटा ओर मेरी बेटीया कीतनी अच्छी हे..
लखन : (मुस्कुराते) राधु.. मे मम्मीको ओर तुजे इधरसे जाने भी नही दुगा.. अभी तो तुम मेरी भाभीमांको मीली ही नही हो.. वो तो देवी हे देवी.. राधु.. तुमसे अेक बात कहु..? क्या तुम मेरी बात मानोगी..?
राधीका : (मुस्कुराते) जानु.. अब आप मेरे पती हे.. आपकी हर बात मेरे सर आंखोपे.. कहीये..
लखन : (मुस्कुराते) राधु.. तु मेरी हर भाभीको भले ही अपनी जेठानी मानो.. लेकीन भाभीमांको अपनी जेठानी कभी मत मानना.. वो मेरी भाभी नही मेरी मां हे.. ओर तेरी सांस.. तो मे चाहता हु.. तुम जब भी उनको मीलो.. उनके पांव जरुर छुना.. क्युकी वो सच मे अेक देवी हे.. ओर उनके पांवमे जनत हे.. बस..
राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) बस.. सीर्फ इतनीसी बात..? ठीक हे जानु.. आजसे मे उसे मेरी जेठानी नही अपनी सांस मानुगी.. ओर उनका पैर पी छुउगी.. लगता हे अब तो मुजे जल्द अपनी सांसको मीलना पडेगा.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) हां मीलना.. ओर देखना.. उनको मीलते ही तु तेरे सारे गम भुल जायेगी..
दोनो प्यार भरी बाते करते रहे.. फीर लखन नीलमको लेने स्कुल चला गया.. तो आज भी नीलम बहुत खुस नजर आ रही थी.. ओर बार बार लखनकी ओर देखते सरमाकर हसने लगती थी.. तो लखन समज गया की आज भी नीलम ओर धिरेन जरुर मीले होगे.. तो लखनको कुछ अच्छा नही लगा.. ओर वो जल्दसे जल्द नीलमको अपने नीचे लीटानेकी सोचने लगा..
तो गांवमे भी श्रीधर ओर जयश्रीकी सादीकी तैयारीया लगभग होचुकी थी.. तो बंसी भी कल अपने पीता सामतभाइका क्रिया करम थोडा जल्दीसे करने वाला था.. ताकी उनके खास दोस्त श्रीधरकी सादीमे कोइ प्रोबलेम ना हो.. ओर घरके लोग भी सादीमे जा सके.. ताकी उनका भी सामतभाइके गमसे मांइन्ड डाइवर्ट होजाये.. ओर इस बारेमे उसने देवायतसे बात भी करली.. तो देवायत ओर रमेश दोनो सहमत हो गये..
तो मंजु भी दया ओर देवायतकी सादीकी तैयारीया कर रही थी.. तो यहासे दुर नीर्मला भुमीका सरलाचाची ओर चंदा भी अब घर वापसीकी तैयारीया करते अपना सामान बसमे रख रही थी.. अैसे ही साम ढल गइ.. इसी दौरान धिरेन भी घरपे आ गया.. तो पुनम दरवाजा खोलकर उनके सामने देखे बीना ही वहासे कीचनमे चली गइ.. तो धिरेन भी गुस्सेसे उपर अपने रुममे चला गया..
उस रात भी डीनर करने सीर्फ धिरेन ही अकेला बैठा था.. तो आज भी दयाने उनकी सब्जीमे नींदकी गोलीया मीला दी थी.. जब धिरेनने डीनर करलीया ओर उपर चला गया तब पुनम ओर दयाने भी खाना खालीया.. आज पुनम दयाके साथ ही सोने वाली थी.. तो धिरेन आज रात भी उपर जाते ही नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर इस रात पुनम नीचे दयाके साथ सोनेके लीये उनके रुममे आगइ....
कन्टीन्यु