Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 89 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. आप मेरे दोस्त लखनको जानती हेनां..?

पुजा : (मुस्कुराते) हां बहुत अच्छी तराह.. पापाके दोस्तका लडका हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीलीसे बीलोन्ग करता हे.. ओर तेरा दोस्त भी हे.. कइ बार हमारे घरपे आचुका हे.. तो लखनका क्या..?

धृव : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. उनकी अ‍ेक बहेन भी हे.. पुनम नाम हे उनका.. जो हमारे स्कुलमे ही पढती हे.. दरसल.. वो.. मीन्स.. लखन भैया अपनी ही बहेनको प्यार करते हे..

पुजा : (कोल्डड्रीन्क्स पीते रुकते आस्चर्यसे) व्होट..? अपनी सगी बहेनको..? मगर ये कैसे हो सकता हे..?

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. हो सकता हे.. सीर्फ इतना ही नही.. उनके खानदानमे पीछली कइ पीढीयोसे सबलोग उनकी बहेनसे ही सादी करते आये हे.. मानोना.. उनके खानदानकी ये परंपरा हे.. तो मुजे भी आपका खयाल आया.. ओर मेभी आपको अपनी मासुकाकी नजरसे देखने लगा.. तो मुजे आपमे दुनीयाकी सबसे खुबसुरत लडकी नजर आइ.. ओर मे आपसे प्यार करने लगा.. इसीलीये ये सब नाटक कीया.. दीदी.. आइ लव यु..

पुजा : (अपना सर पकडपे) ओह गोड.. मेरे भाइ ये नही हो सकता.. मे तेरी सगी बहेन हु.. ओर भाइ बहेन बीचमे ये सब नही होता.. तु अपने दिमागसे ये गंदा खयाल नीकालदे..

धृव : (आंख गीली करते) दीदी.. पता हे मुजे.. हमारा समाज अ‍ैसे रीस्तोको कभी स्वीकार नही करता.. लेकीन ये सच हे.. मे आपसे सचमे प्यार करने लगा हु.. मेने अपने दिलको समजानेकी बहुत कोसीसकीे लेकीन साला ये दिल हेकी मानता ही नही.. दीदी.. मेरा प्यार कबुल करलो.. प्लीज.. वरना मे जी नही पाउगा..

पुजा : (अपना चहेरा हाथोमे छुपाते) भाइ.. भाइ.. मे तुम्हे कैसे समजाउ..? ये तुमने मुजे कैसी उलजनमे डालदी.. मेरी तो कुछ समजमे नही आ रहा.. ये नही हो सकता..

धृव : (हाथ थामते) दी.. मे समजाता हु.. भुल जाओ मे आपका भाइ हु.. मुजे अ‍ेक लडकेकी नजरसे देखो.. मानलो मे आपका बोय फ्रेन्ड हु.. सारी उलजन खतम होजायेगी.. मे वादा करता हु.. मे सारी अयासीया छोड दुगा..

पुजा : (अपना सर पकडते) भाइ.. भाइ.. मे तुजे कैसे समजाउ.. ये गलत हे..

धृव : (हाथ थामते) दीदी अगर ये गलत होता तो लखनके खानदानमे अ‍ैसी परंपरा क्यु हे..?

अब कोल्डड्रीन्क्सने अपना असर दीखाना सुरु करदीया था.. ओर उनकी बहेनके उपर धीरे धीरे वासना हावी होने लगी थी.. जो इतनी देरतक धृव उनको मनाता रहा तब वो भाइ बहेनका हवाला देते उनके साथ रीलेशन बनानेको मानती नही थी..

ओर गोलीका असर होते ही उनका वीरोध कम होने लगा.. आखीर कामोतेजक गोलीकी वजहसे वो बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. उनकी चुत फडफडाने लगी.. ओर पुजा अपने भाइको अ‍ेक लडकेकी नजरसे देखने लगी.. ओर आखीर धृवके साथ रीलेशन बनानेको तैयार होगइ..

धृव : (इमोस्नल ब्लेकमेइल करते) दीदी.. प्लीज.. करलोना मेरा प्यार कबुल.. वरना मे आपके बीना जी नही पाउगा.. मे सचमे मर जाउगा..

पुजा : (प्यारसे देखते धीरेसे) भाइ.. तुम समजते क्यु नही..? हम समाजको क्या कहेगे..? समाजकी छोडो.. हम हमारे मम्मी पापाको क्या जवाब देगे..? अगर कीसीको पता चलानां तो हमारी नाक कट जायेगी.. ये आपने कभी सोचा हे..?

धृव : (पैरके पास बैठते) दीदी.. मेने सब सोचलीया हे.. हम कीसीको बतायेगे ही नही.. घरपे भी नही.. सबके सामने हम भाइ बहेन ही रहेगे.. दीदी.. मे आपसे सादी करनेके लीये भी तैयार हु.. हम हमारा प्यार सबसे छुपायेगे.. मे वादा करता हु.. आपका साथ जींदगी भर नीभाउगा.. चाहे कुछ भी होजाये.. मम्मी पापाकी कसम..

पुजा : (थोडी परेसान होते) भाइ.. अ‍ेक पल तो मानलो.. मे आपसे प्यार भी करने लगु.. लेकीन हमारी सादी नही हो सकती.. अगर हमारे मम्मी पापाको पता चलेगा तो वोतो हम दोनोको मार ही डालेगे..

धृव : ठीक हे दीदी.. हम सादी नही कर सकते.. मगर प्यारतो कर सकते हेनां.. मेरा यकीन मानो.. मे सचमे आपसे प्यार करता हु.. ओर वो प्यार नही.. जो मे ओर लडकीओके साथ करता था.. सच्चा प्यार.. जो मे जींदगी भर आपका साथ नीभाउगा.. फीर चाहे मेरी सादी होजाये या फीर आपकी.. मे आपसे प्यार करता रहुगा..

पुजा : (प्यारसे आंखोमे देखते) भाइ.. इतना प्यार करते हो मुजसे..? कही मुजे मजधारमे छोड दीया तो..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. तब मुजे जहेर देकर मार देना.. या फीर मे सुसाइड कर लुगा.. लेकीन आपको नही छोडुगा..

पुजा : (खडी होकर कंधेसे पकडकर खडा करते बाहोमे भीचते) भाइ.. मत करो मरनेकी बात.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. की आप मेरा साथ मरते दम तक नीभायेगे.. भाइ.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. आइ लव यु सो मच.. बस.. देखना हमारे रीस्तेके बारेमे कभी मम्मी पापाको पता ना चले.. मे दुनीयासे तो लड जाउगी.. मगर अपनोसे नही.. भाइ.. अपनालो मुजे.. आजसे ये पुजा आपकी होगइ.. बस..?

कहेते पुजा धृवके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. धृवको यकीन ही नही हो रहा थाकी उनकी बहेनने उनका प्यार कबुल करलीया हे.. दोनो अ‍ेक दुसरेके चहेरेको चुमते रहे.. ओर धृवो पुजाका चहेरा अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर उनकी आंखोमे देखने लगा तो पुजा बहुत सरमाइ.. ओर अपनी नजरे जुकाली.. धृवने धीरेसे अपने होठोको पुजाके होठोपे रख दीया.. तो पुजा सरसे पांव तक हील गइ..



 
क्युकी जींदगीमे पहेली बार कीसी लडकेने उनको कीस कीया था.. ओर वो भी अपने सगे भाइने.. पुजा बहुत ही रोमांचीत होगइ.. ओर उपरसे कामोतेजक गोलीका असर.. पुजाके उपर वासना हावी होने लगी.. वो अब धृवकी कीसीभी हरकतका विरोध नही कर रही थी.. ओर धृव करसे उनके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुम रहा था.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके तनसे कपडे हटते गये..





पुजाकी आंख लाल होगइ थी.. वो पुरी तराह वासनामे जल रही थी.. ओर उनकी चुतसे लगातार पानी बेह रहा था.. तभी धृवने पुजाको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर बेडपे लीटा दीया.. उस दिन धृवने पुजाकी चुतपे अपना मुह रखा.. ओर चुतमे दानेको खरोदने लगा.. पुजा पागल जैसी होगइ थी.. वो धृवका बाल खीचकर अपने उपर चडानेकी कोसीस करती रही..





ओर धृवने पुजाको अ‍ैसे ही जडा दीया.. तो धृवने पुजाकी चुतको चाटकर साफ करदीया ओर पुजाके उपर आकर लेट गया.. पुजाने सरमाकर मुस्कुराते धृवको अपनी बाहोमे भीच लीया.. धृव पुजाके गलेके मुह डालकर गलेको चुमने लगा.. फीर पुजाके कानकी बुटको अपने दातोसे खीचा.. पुजा फीरसे तावमे आने लगी.. ओर आखीर धृव पुजाके बुब्सको मुहमे लेकर चुसने लगा तो पुजा उनका सर सहेलाने लगी..

पुजा : (सरमाते कामुक आवाजमे धीरेसे) भाइ.. सीइइइ कुछ हो रहा हे.. मत करो प्ली..ज.. आइइइ.. भाइ.. मुजसे रहा नही जाता.. ओर कीतना तडपाओगे मुजे.. डालदोनां..?

धृव : (मुस्कुराते) नही दी.. आज मे अपनी बहेनको जनतकी सेर करवाउगा.. आइ लव यु..

पुजा : (मुस्कुराते) हंम.. आइ लव यु टु.. भाइ.. कीतना प्यारा अहेसास करवाया आपने.. अब ओर देर मत करो.. मुजे जाना भी हे..

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. आपका पहेली बार हेनां..? तो थोडा दर्द होगा.. सहेन करलेना.. वो भी सीर्फ चंद मीनीटोका.. फीर तो मजे ही मजे हे..

पुजा : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. पता हे मुजे.. बस.. खयाल रखना.. अंदर मत छोडना.. आप समज गयेनां..?

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. चीन्ता मत करो.. कोन्डम हे मेरे पास.. पेइन कीलर भी लाया हु..

पुजा : (मुस्कुराते गाल खीचते) हंम.. मतलब पुरी तैयारीया करके आये हो.. ठीक हे.. डालदो..





कहातो धृवने अपने लंडपे कोन्डम चडा दीया ओर पुजाके उपर छा गया.. पुजाकी चुतपे धृवका लंड दस्तक देने लगा.. वो भी अपने नये बीलमे घुसनेके लीये जटके मार रहाथा.. ओर धृव पुजाके पैरोके बीच बैठ गया ओर लंड पकडकर पुजाकी चुतपे घीसने लगा.. फीर धीरसे लंडका टोपा पुजाकी चुतमे थोडा पुस करते फसा दीया.. ओर पुजाके उपर लेट गया.. फीर दोनो कीस करने लगे..

पुजाकी आंखोमे वासना छाइ हुइ थी.. वो कामुक नजरोसे धृवको देखते उनके होठोको चुमती रही.. तभी धृवने पुजाके दोनो हाथ पंजोमे फसाकर जकड लीये.. ओर लीपलोक करलीये.. तो पुजाने अपनी आंखोको भीचते बंध करली.. ओर होने वाले हमलेको जेलने तैयार होगइ..

तभी धृंवने अ‍ेक जोरका जटका मारा.. तो पहेली ही बारमे लंड चुतको चीरते आधा अंदर घुस गया.. पुजाकी जोरोसे चीख नीकल गइ.. उनकी आंखोमे आंसु आगये.. ओर धृवसे मुह छुडानेकी कोसीस करते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी..





तभी देर ना करते धृवने अ‍ेक ओर जटका मारा.. तो पुरा लंड पुजाकी चुतमे घुस गया.. पुजा जोरोसे चीखते धृवको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी.. वो रोये जा रही थी.. तो धृव अ‍ैसे ही लंड घुसाके रुक गया.. ओर पुजाके होठोको चुमने लगा..

धृव : (जब पुजा सांत होगइ तब मुह हटाते) दीदी.. बस हो गया.. अब दर्द नही होगा..

पुजा : (नजरे चुराते धीरेसे आंसु बहाते) भाइ.. आपने क्या घुसा दीया.. बहुत दर्द होता हे..

उस दिन धृवने पहेली बार अपनी बहेन पुजाका कौमार्य भंग करदीया.. फीर कुछ देरके बाद धीरे धीरे कमर हीलाते धृव अपनी बहेन पुजाको चोदने लगा.. अब दर्द कम होजानेकी वजहसे पुजा भी अपनी कमर हीलाते धृवका साथ देने लगी..



 
ओर धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी.. पुजाको अ‍ैसा लगाकी वो हवामे उड रही हे.. धृवने उसे दो बार जडा दीया.. ओर आखीर कुछ देरकी घमासान चुदाइके बाद दोनो साथमे जड गये.. ओर सांत हो गये.. पुना धृवकी पीठको सहेलाती रही..





उस दिन धृवने अपनी बहेनको दो बार ओर चोदलीया.. ओर दोनो साम छे बजे तक चुदाइ करते रहे.. इसी दौरान दोनो अ‍ेक दुसरेसे अपने प्यारका इजहार करते रहे.. ओर जीवन भर साथ नीभानेका वादा कसमे खाते रहे.. फीर दोनो अलग अलग अपनी कार लेकर घरपे आ गये..

आज पुजाकी चाल बदल चुकी थी.. तबसे उनकी बहेन धृवकी दिवानी होगइ थी.. ओर घरपे अक्सर मौका मीलतेही अपने भाइसे चुदवा लेती.. दोनोने आज तक कीसीको भनक नही लगने दी.. तभी..

भावीका : (सामने देखते) धृव.. मे कबसे देख रही हु.. तुम कुछ गहेरी सोचमे डुबे हुअ‍े हो.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

धृव : (जेंपते जटसे) अरे नही नही.. आज लखन मीला तो कुछ हमारी पुरानी बात याद आगइ..

भावीका : (मुस्कुराते) अच्छा..? इतना खास दोस्त हे आपका..? जरा मेभी तो सुनु दोनोने स्कुलमे क्या क्या गुलछने उडाइ हे.. जो मेरा पती मेरे सामने तक नही देखता.. हें..हें..हें..

धृव : (हसते) भावु.. उनकी तो तुम बात ही मत कर.. तुजे घर जाकर फुरसतमे सब कुछ बताउगा.. की उसने क्या क्या कीया हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. ओर उसी स्कुल कोलेज लेडीस ओर बोय्स होस्टेल.. सबमे उनके पीताका बहुत बडा डोनेशन हे.. चल पहेले खाना खाले फीर उनसे मीलवाता हु..

कहेते धृवने बातको टाल दीया.. अभीभी उनके दिमागसे उनकी बहेन पुजा नीकलनेका नाम ही नही ले रही थी.. दोनो अ‍ेक दुसरेसे इतना प्यार करने लगे थे.. की पुजाका धृवके बगैर जीना मुस्कील होने लगा.. दोनोका अफेर दो साल तक चला..





इस दो सालोमे धृवने अपनी बहेन पुजाको खुब चोदा.. ओर पुजाका जीस्म अ‍ैक ओरत जैसा हो गया.. ओर आखीर उनके मम्मी पापाने पुजाकी सादी दुबइ स्थीत अ‍ेक अमीर लडकेसे करदी.. जो वहा उनका गोल्डका कारोबार था.. हर छे महीनेमे पुजा धृवको मीलने इन्डीया आती..

कुछ दिन ससुरालमे रहेकर अपने मायके आजाती.. तब दोनो भाइ बहेन घर वालोसे छुपकर खुब मजे करते.. अब तो पुजा जब भी इन्डीया आती थी तबसे धृवसे बीना कोन्डम ही चुदवाने लगी थी.. क्युकी वो अपने भाइ धृवके बच्चेको जन्म देना चाहती थी..





जो दोनो भाइ बहेनने मीलकर पहेलेसे ही तैय कीया था.. दोनो अ‍ेक दुसरेसे बहुत प्यार करते थे.. ओर लास्ट टाइम पुजा इन्डीयासे गइ.. तो उसने अपने भाइ धृवसे खुब चुदवाया था.. दोनो घरसे अलग अलग बहाना बनाकर गोवामे अ‍ेक छोटासा हनीमुन मनाने भी चले गये थे..

वहा धृवने उनकी बहेन पुजाकी खुब जमकर चुदाइकी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप इस बार वो अपने भाइसे प्रेगनेन्ट होकर गइ.. हांलाकी इस बातका दोनोमेसे कीसीको पता नही था.. लेकीन वहा जाकर अ‍ेक महीनेके बाद वहा पुजाको उल्टीया होने लगी.. अ‍ेक बारतो उनके पतीने इसे खानेमे कुछ होगा.. अ‍ैसा समजकर इग्नोर करदीया..

लेकीन दुसरी बार हुइतो उनको कुछ आसंकाये हुइ.. ओर वो पुजाको लेकर अ‍ेक डोक्टरके पास गया.. जहा उनका इसी सील सीलेमे पुजासे छुपकर इलाज चल रहा था.. क्युकी डोक्टरने उनकी रीपोर्ट देखकर कहाथाकी वो कभी बाप नही बन सकता.. डोक्टरने पुजाको चेक कीया.. तो चोंक गया.. क्युकी पुजा प्रेगनेन्ट थी..

पुजाका पती : (सामने देखते) डोक्टर.. क्या हुआ..? क्या कहेती हे रीपोर्ट..?

डोक्टर : (आस्चर्यसे रीपोर्ट देखते) देखीये मीस्टर.. मुजे लगता हे आपकी रीपोर्ट मुजे फीरसे करनी पडेगी.. ये कैसे हो सकता हे..? क्युकी सी इज प्रेगनेन्ट.. इम्पोसीबल.. आप अंदर आइअ‍े.. मुजे फीरसे आपका टेस्ट करना हे.. हो सकता हे हमारे इलाजसे आपके अंदर इम्पृव हुआ हो..

पुजाका पती : (खडा होकर अंदर जाते) आइअ‍े डोक्टर.. करलीजीये टेस्ट..

पुजा : (थोडी परेसान होते) अरे आप दोनो क्या बाते कर रहे हो..? कोइ मुजे बतायेगा.. की ये सब क्या हो रहा हे..? प्रेगनेन्ट होनेकी खबर सुनके खुस होना चाहीये.. लेकीन आपतो..?

पुजाका पती : (थोडी सख्तीसे) तुम थोडी देर चुप बैठो.. ये हम दोनोके आपसकी बात हे.. चलीये डोक्टर..

पुजाको बहार बैठनेके लीये बोला गया.. आधे घंटे तक पुजा वही बैटी रही.. लेकीन जब उनका पती बहार नीकला तो उनके चहेरेपे कुछ अलग ही भाव थे.. ओर वो पुजाका हाथ पकडकर चलने लगा.. जैसे वो बहुत गुस्सेमे हो.. दोनो घरपे आगये.. तो उसने पुजाको धका मारते सोफेपे बीठा दीया.. पुजा डरके मारे सहेम गइ.. ओर वो अ‍ेक नजरसे अपनी पतीकी ओर देखती रही.. तभी उनका पती भी अ‍ेक चेर लेकर उनके सामने बैठ गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५६

पुजाको बहार बैठनेके लीये बोला गया.. आधे घंटे तक पुजा वही बैटी रही.. लेकीन जब उनका पती बहार नीकला तो उनके चहेरेपे कुछ अलग ही भाव थे.. ओर वो पुजाका हाथ पकडकर चलने लगा.. जैसे वो बहुत गुस्सेमे हो.. दोनो घरपे आगये.. तो उसने पुजाको धका मारते सोफेपे बीठा दीया.. पुजा डरके मारे सहेम गइ.. ओर वो अ‍ेक नजरसे अपनी पतीकी ओर देखती रही.. तभी उनका पती भी अ‍ेक चेर लेकर उनके सामने बैठ गया.... अब आगे

पुजा : (थोडा डरते) जानु.. ये सब क्या हो रहा हे..? आप मुजे कुछ बताते क्यु नही..?

पुजाका पती : (थोडा सख्तीसे) पुजा.. सच सच बता.. ये बच्चा कीसका हे..? मे तुजे कुछ नही कहुगा..

पुजा : (सोक्ट होते) ये आप क्या बोल रहे हे..? हमारा हे.. हम दोनोके प्यारकी नीशानी..

पुजाका पती : (जोरोसे चीलाते) चुप.. बंध करो अपनी बकवास.. ये इम्पोसीबल हे..

पुजा : (जोरसे चीलाते) क्या इम्पोसीबल हे..? ये हमारा बच्चा हे.. आप अ‍ैसा कैसे केह सकते हे..?

पुजाका पती : (अ‍ेक कागज देते) इसीलीयेकी.. येलो.. पढलो इसे.. तुजे सब पता चल जायेगा..

पुजा : (सामने देखते कागज लेते) क्या हे ये..?

पुजाका पती : (नजरे चुराते सांत लहेजेमे) मेरी मेडीकल रीपोर्ट.. पुजा.. मे कभी बाप नही बन सकता.. अ‍ेक अ‍ेक्सीडन्टकी वजहसे प्रोबलेम हो गइ थी.. मेरा तीन सालसे इसीका इलाज चल रहा हे.. सोरी.. मम्मी पापाने आपसे ये बात छुपाइ..

पुजा : (गुस्सेमे पेपर उडाते जोरोसे) क्या सोरी..? क्या.. सोरी..? लेकीन तुम मुजे मीले तब तो तुम ये बात मुजे बता सकतेथेनां..? तुमने भी मुजसे ये बात क्यु छुपाइ..? मेरा भी सपना था.. की मे मां बनु.. हमारी सादीको दो साल होगये.. क्या कभी मेरा मां बननेका मन नही करता..?

पुजाका पती : (सांत लहेजेमे समजाते) देखो पुजा.. मानता हु मुजसे गलती होगइ.. मुजे तुमसे तब ही ये बात बता देनी चाहीये थी.. पर मे मम्मी पापाके आगे मजबुर था.. ओर मे कीसी ओरके बच्चेको नही पाल सकता.. तुम ये बच्चा गीरादो..? मेरा इलाज चल रहा हे.. तो हम अपना बच्चा पैदा करेगे..

पुजा : (आंसु बहाते सामने देखते) बच्चेको गीरादु..? अगर फीर भी तुमसे बच्चा नही हुआ तो..?

पुजाका पती : (नजरे चुराते) तो फीर तुम आजाद.. तुजे जैसे अपनी जींदगी बीतानी हे बीता सकती हे.. लेकीन मे दुसरेके बच्चेको बरदास्त नही कर सकता.. यकीन मान.. सब ठीक होजायेगा.. गीरादे ये बच्चा.. मे येभी नही पुछुगाकी ये बच्चा कीसका हे.. हम पहेलेकी तराह रहेगे.. प्लीज.. ओर देखो.. ये बात अभी हम दोनो तक सीमीत रखना.. दोनोमेसे कीसीके घरवालोको पता ना चले.. क्युकी मे नही चाहता हम दोनोका रीस्ता टुट जाये..

सुनकर पुजा अपने हाथोमे चहेरा छुपाकर रोने लगी.. चाहती तो वोभी नहीथी की इनका रीस्ता टुट जाये.. अभी इस बारेमे कीसी ओरको पता नही थातो पुजाको अपना घर बचानेके लीये मजबुरन बच्चा गीरवानेका फैसला लेना पडा..

ओर दुसरे दिन दोनो मीया बीवी होस्पीटल जाकर अबोर्सन करवाके आगये.. उस दिन पुजा खुब रोइ.. क्युकी ये उनके प्यारकी नीशानी थी.. अपने धृवकी नीशानी.. उस दिनके बाद पुजा ओर उनके पतीके बीच दुरीया बढने लगी..

पुजा इस आसमे बैठी रही की इनका पती इलाजसे ठीक होजायेगा.. लेकीन रीजल्ट बेनतीजा नीकला.. ओर आखीर पुजाने हिंमत करके बच्चे गीरवानेकी बात छुपाकर बाकीकी सभी बाते अपनी मम्मीको बताइ.. ओर उनके मम्मी पापाने आपसमे डीसकस करके पुजाको इन्डीया वापस आनेके लीये केह दीया..

ओर पुजाने अपने पतीसे डीवोर्स लेलीया.. हालाकी उनके पतीने सामनेसे पुजाको तीन करोड रुपीये दे दीये.. ओर पुजा वापस इन्डीया आगइ.. पुजा अब धृवसे नजरे नही मीला पा रही थी.. वो सबके सामनेतो नोर्मल होनेका दीखावा करती लेकीन जबभी अकेली रहेती वो गुमसुम बेठी रहेती..

ओर ये बात धृवने नोटीस करली.. आखीर अ‍ेक दिन दोनो अकेले थे.. तब धृव सीधा पुजाके रुममे चला गया.. ओर पुजाको अ‍ैसे गुमसुम बैठनेका कारण पुछा.. तो पुजा टुट गइ.. ओर धृवकी बाहोमे समाकर फुट फुटके रोने लगी.. फीर उसने धृवको सब सचाइ बतादी.. तो धृवकी आंखोमे भी आंसु आगये..
 
क्युकी पुजाने दोनोके प्यारकी नीशानीको मीटा दीया था.. धृव उनकी पीठ सहेलाते उनको हिंमत देता रहा.. ओर पुजा धृवकी माफी मांगती रही.. फीर तो धृव पुजाका विसेस खयाल रखने लगा जैसे उनकी बीवीका खयाल रखता हो.. अब पुजा नोर्मल होने लगी थी..

ओर यही बात उनकी मम्मी भी नोटीस कर रही थी.. उनको कुछ आसंकाये होने लगी.. तो दोनो भाइ बहेनपे छुपकेसे नजर रखने लगी.. क्युकी अ‍ेक वोही अकेली सारा दिन घरपे रहेती थी.. बाकीतो उनके पतीका कही ठीकाना ही नही था.. सारा दिन पार्टीके कामसे दोडधाम करता रहेता..

ओर उनका जो पार्टनरमे बीजनेस था.. वो धृव अच्छेसे सम्हालता था.. धृव अपना बीजनेस भी सम्हालता.. ओर कभी कभी अपने पापाकी मदद करते पार्टीका काम भी देखता.. तब धृवकी भावीकाके साथ सादी भी नही हुइ थी.. अ‍ेक दिन दोनो भाइ बहेन डीनरके बाद पैदल टहेलने नीकल गये.. तब..

धृव: (मुस्कुराते हाथ पकडकर चलते) दीदी.. अब आपने अपने फ्युचरके बारेमे क्या सोचा हे..?

पुजा : (सामने देखकर मुस्कुराते) क्यु..? मुजे घरसे भगानेका इरादा हे क्या..? हें..हें..हें.. मे तुजपे बोज तो नही बन रही..? मे यहा तेरे साथ बहुत खुस हु..

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. आप ये क्या बोल रही हे..? आप मेरे उपर कैसे बोज बन सकती हो..? बात वो नही हे.. मेने तो जींदगी भर आपका साथ नीभानेका वादा कीया हे.. ओर मे सचे दिलसे नीभाउगा.. लेकीन आज कल मम्मी हमपे कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी हे.. मुजे डर हेकी उनको हम दोनोके रीस्तेके बारेमे पता ना चल जाये..

पुजा : (साथ चलते मुस्कुराते) भाइ.. पता हे मुजे.. अगर हमारे बारेमे पता चल जाता हेतो चलने दो.. अब इनसे मुजे कोइ फर्क नही पडता.. बेचारी वोही तो हे.. जो हमारी चीन्ता करती हे.. वरना उमीद तो उसने पापासे भी छोडदी हे..

धृव : (आस्चर्यसे देखते) उमीद छोडदी हे मतलब..?

पुजा : अगर पापाकी इजत ओर समाजमे उनकी रेप्युटेशनका खयाल ना होताना.. तो वो कबसे पापाको छोड चुकी होती.. ओर मेभी आपसे सादी कर लेती.. वैसे बहेनसे प्यार करनेका आइडीया मस्त था.. वरना तो मेरी अ‍ेक सहेलीको भी नही छोडा.. आपको पता हे मेरी वो दोस्त मीना.. उनका तो अ‍ेबोर्सनभी करवाना पडा.. हें..हें..हें..

धृव : (हाथ दबाते मुस्कुराते) दीदी.. जबसे आपसे प्यार होगया हे तबसे मेने ये सब अयासी छोडदी हे.. बस.. मुजे सीर्फ आपका प्यार चाहीये.. वरना मे पागल होजाता हु.. पता नही ये तीन साल मेने आपके बीना कैसे काटे.. भला हो उस लखन भैयाका.. जो वो अपनी बहेनको प्यार करते हे.. बस.. उसीसे आइडीया आया.. की मे भी अनी बहेनसे प्यार करु.. ओर इसके लीये चाहे मुजे जोभी करना पडे..

पुजा : (सर्मसार होते मुस्कुराते साथ चलते) ओर आपने कीया.. मुजे पता नही थाकी फेसबुकमे तुम हो.. वोतो होटलपे आकर पता चला.. ओर उस दिन आपने मुजे बहेला फुसलाकर वो सब कुछ कर लीया.. जो अ‍ेक लडकीका सपना होता हे..

धृव : (मुस्कुराते) सच..? आप इस बातसे खुस थी..?

पुजा : (मुस्कुराते) हां.. बहुत.. थेन्क्स भाइ.. उस दिनको मे आज तक नही भुली.. वो मेरा फस्ट टाइम था.. उसी दिन आपने मुजे अ‍ेक लडकीसे ओरत बननेका सुख प्रदान कीया.. ये सोचकर मे अभी भी रोमांचीत हो जाती हु.. की मेरा कौमार्य मेरे भाइने भंग कीया.. भाइ.. आइ लव यु..

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. आइ लज यु टु.. क्या हम जींदगी भर साथ नही रेह सकते..? हंम..?

पुजा : (मुस्कुराते हाथ दबाते) हंम.. मे मेरे पतीको डीवोर्स देकर आपके पास आगइ हु.. हम दोनो साथ तो रेह रहे हे.. ओर क्या चाहीये आपको..? मेने तो उसी दिन आपको अपना पती मानलीया था.. जब आपने होटेलमे पहेली बार मेरा कौमार्य भंग कीया..

धृव : (मुस्कुराते) सचमें..? कीतना रोमांचकारी पल था.. जो हम मीले थे..

पुजा : (मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने सचमे आपको अपना पती मानलीया हे.. ओर आपने मुजे अपनी पत्नी.. दोनो अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीकी तराह ट्रीट करते हे.. आप मेरा अ‍ेक पत्नीकी तराह खयाल रखते हे ओर मे आपका पतीकी तराह.. रातमे आपका बीस्तर गरम करती हु.. क्या इतना काफी नही हे..?

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. बात वो नही हे.. कल मम्मी पापाको आपके लीये कोइ ओर लडका ढुढनेके लीये केह रही थी.. कहेती थी वीधुर या डीवोर्सीस भी चलेगा.. लगता हे ये हमे साथमे नही रहेने देगे..

पुजा : (आंख गीली करते) भाइ.. समाजने ये भाइ बहेनका कैसा रीस्ता नीकाला हे.. मम्मी पापाकी इजतकी वजहसे हम आपसमे सादी भी नही कर सकते.. वरना मे आपको लेकर कबकी भाग चुकी होती..

धृव : (सामने देखते मुस्कुराते) दीदी.. भागनेकी क्या जरुरत हे..? हम साथ तो रेहते हे..

पुजा : नही भाइ.. जब अ‍ेक बार लडकीकी सादी होजाती हेना.. ओर वो वापस आती हेतो मा बापपे बोज बन जाती हे.. भाइ लगता हे ये समाज हम दोनोको अ‍ेक नही होने देगा.. क्या आपके मनमे कोइ आइडीया हे..?

धृव : (मुस्कुराते) हंम.. हां हे.. चलो हम दोनो सादी कर लेते हे.. अब मे आपको कीसी ओरके साथ नही बाट सकता.. हमने अ‍ेक दुरेका साथ नीभानेका वादा कीया था.. मम्मी पापाको मे केह दुगा.. वो हमारा रीस्ता स्वीकार करते तो हच्छा हे.. वरना हम कही दुर जाकर हमारी नइ दुनीया बसायेगे..
 
पुजा : (आस्चर्यसे सामने देखते) भाइ.. आर यु सीरीयस..? ये पोसीबल नही हे.. पापाकी रेप्युटेशनका तो खयाल करो.. उनकी समाजमे क्या इजत रेह जायेगी..? आज जो लोग उनको पुछे बगैर पानी नही पीते.. वोही लोग हमारे अ‍ेक कदमसे उनपे थुकेंगे.. ये कभी आपने सोचा हे..? प्यार तो मेभी आपसे करती हु.. हम दोनोने अ‍ेक दुसरेसे वादा कीया हे तो जींदगी भर आपका साथ भी नीभाउगी.. लेकीन इसका मतलब ये नहीकी हम सादी करले..

धृव : (सामने देखते) तो फीर दीदी आपही बताओ मे क्या करु..? अ‍ेक बात पकी हे.. मे अब जींदगी भर सादी नही करुगा.. ओर करुगा तो सीर्फ आपसे.. वरना अ‍ैसे ही कवारा रहुगा..

पुजा : (सुमसान रास्तेपे बाहोमे समाते) ओर मेरे भाइ.. इतना प्यार मत करो मुजसे.. मे पागल होजाउगी.. भाइ.. मे इतना यकीन दीलवा सकती हु.. भलेही मम्मी पापा मेरी सादी कही ओर करदे.. लेकीन अब ये मांगमे सींदुर आपके नामका ही लगेगा.. ओर मंगलसुत्र भी आपका होगा.. ओर सबसे पका वाला प्रोमीस.. जो हमने पहेले भी तैय कीया था.. मेरे जीतने भी बच्चे होगे.. सीर्फ हम दोनोके होगे.. ओर क्या चाहीये आपको..?

धृव : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर चलो.. हम कल ही कीसी मंदिरमे जाकर सादी कर लेते हे.. ताकी दिलको अ‍ेक तसलीतो मील जाये.. की आप मेरी बीवी हो.. तो क्या करोगी मुजसे सादी..?

पुजा : (मुस्कुराते) हंम.. लेकीन अ‍ेक सर्तपे.. मंजुर हेतो बोलो.. वरना सादी केन्शल.. हें..हें..हें..

धृव : (हसते) क्या..?

पुजा : (मुस्कुराते साथ चलते) अगर मम्मी पापा मेरी सादी कही ओर करवा देते हे.. तो ये सब तो होगा जो अभी मेने आपको वादा कीया हे.. लेकीन इसके बाद आप कोइ अच्छीसी लडकी देखकर सादी करलोगे..

धृव : (मुस्कुराते) क्या ये जरुरी हे..?

पुजा : (मुस्कुराते साथ चलते) हां.. बहोत.. क्युकी मे अपने भाइको अ‍ैसे अकेला तडपते नही देख सकती..

धृव : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. मुजे आपकी सर्त मंजुर हे.. लेकीन याद रखना.. मेरी पहेली बीवी तो आपकी कहेलाओगी.. ओर जींदगी भर हम दोनोका रीस्ता अ‍ैसे ही कायम होगा.. मंजुर हे..?

पुजा : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. मुजे मंजुर हे.. आप कल कीसी मंदिरमे जाकर देखलो.. जो हमारे सहेरसे दुर हो.. मे आपसे सादी करनेके लीये तैयार हु..

धृव : (हसते) देखना.. फीर हम दोनोकी सुहागरात भी होगी.. हें..हें..हें..

पुजा : (सरमाकर मुस्कुराते) जबसे वापस आइ हु तबसे हर रात सुहागरात हीतो मनाते आये हे.. ओर क्या चाहीये आपको..? क्या सुहागरातसे अभी भी जी नही भरा..?

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. आपसे कभी जी भरता हे क्या..? ओर दीदीसे प्यार करनेका अ‍ेक अलग ही मजा हे..

पुजा : (हसते) पता नही लखन भैयाने आपके दिमागमे क्या घुसा दीया हे.. खुदका तो अपनी बहेनसे कोइ टाका नही भीडा.. लेकीन यहा हर रात मेरी कुटाइ होजाती हे.. अब चलीये वापस.. वरना पीछे मम्मी देखने चली आयेगी.. हें..हें..हें..

उस रात दोनो चलके वापस आ रहे थे तब पुजा धृवसे बाते करते लगभग ट्रेस से बहार नीकल चुकी थी ओर वो बहुत खुस थी.. इस रात दोनो भाइ बहेनने खुब प्यार कीया.. पुरी रातमे धृवने पुजाको तीन बार चोद लीया.. दोनो भाइ बहेन सुबह चार बजे तक घमासान चुदाइ करते रहे.. तब दो आंखे दोनोकी चुदाइ देखते अपनी चुतको सहेलाते चुतमे उंगली कर रही.. जीहां.. ये पुजा धृवकी मम्मी थी.. तभी...

भावीका : (मुस्कुराते) धृव.. आज आपको क्या होगया हे..? जो बार बार सोचमे डुब जाते हो.. कोइ परेसानी हे क्या..? तो बतादो मुजे.. जबसे आयेहो अ‍ैसे गुमसुम ही बैठे हो..

धृव : (मुसकुराते गाल चुमते) नही यार बस अ‍ैसे ही.. तुम्हारे खयालोमे डुबा था.. हें..हें..हें..

भावीका : (कातील नजरसे) तुम्हारी बीवी सामने बैठी हे.. खयालमे देखनेकी क्या जरुरत हे..

धृवके खयालोमे अ‍ेक फील्मकी तराह यादोका सीन चल रहा था.. तभी भावीकाकी आवाजने उनको खयालोसे बहार नीकाला.. भावीकाने अपना डीनर खतम करलीया तो धृव भी खडा होगया.. फीर दोनो वोस रुम चले गये..

तबतक लखनके साथ सबने डीनर करलीया था.. तो लखन सबको लेकर वेइटींग रुममे बैठा था.. धृव भी भावीकाको लेकर वेइटींगपे चला गया.. तो वहा सृती भावीकाको देखते ही आस्चर्यसे सोक्ट होते खुसीसे जोरोसे बोल पडी.. तो भावीका उनकी ओर देखते गले लग गइ..
 
सृती : (जोरोसे) भावु.. तुम..?

भावीका : (हसते गले लगते) अरे सृती.. तुम यहा..? ओर ये पैरमे क्या हुआ..?

सृती : (अपने पास बीठाते) यार कुछ नही अ‍ेक छोटासा अ‍ेक्सीडन्ट होगया था.. तो हाथ पैरमे छोटासा फेक्चर होगया.. अब काफी ठीक होगइ हु.. ये बता.. तुम यहा कैसे..?

भावीका : (हसते) यार मे अपने हबीके साथ यहा डीनर करने आइ थी.. ये रहा.. (धृवकी ओर देखते) धृव.. आप जरा यहा आना..

धृव : (हसते हाथ जोडकर पास आते) हां भावु.. सबको नमस्ते जी.. हें..हें..हें..

भावीका : (हसते) धृव.. इनसे मीलो.. मेरी कोलेजकी बेस्ट फ्रेन्ड डो. सृती.. मे आपको इन्हीकी बारेमे बात कर रही थी.. इन्होने भी कीसी रोयल फेमीलीमे सादी करली हे.. कोइ इनके मामाके लडके ही हे.. हें..हें..हें.. ओर सृती.. ये हे मेरे हसबन्ड धृव..

सृती : (सरमाते हसते) जी नमस्ते..

धृव : (हसते) भावु.. वही तो हे मेरा बेस्ट फ्रेन्ड लखन.. जो खुद रोयल फेमीलीसे बीलोन्ग करता हे.. कही सृतीजी इनकी फेमीलीमे तो नही हे..? (लखनकी ओर देखते) लखन.. इधर आजा..

लखन : (आकर गले मीलते हसते) हां धृव.. मे भाभीजीको मील चुका हु.. इनकी क्लीनीकपे.. मे भाभीके साथ गया था.. हें..हें..हें..

भावीका : (आस्चर्यसे लखनकी ओर देखते हसते) अरे लखनजी आप..? कैसे हे..? हें..हें..हें.. धृव.. यही तो हे सृतीका देवर.. जो उस दिन इनके साथ आये थे..

पुनम : (हसते पास आते) हेलो.. नमस्ते.. कैसे हो धृव भैया.. पहेचाना..? हें..हें..हें..

धृव : (हाथ जोडकर हसते) अरे पनो दीदी आप..? बस.. मजेमे हु.. आप कहो.. कैसी हो..?

सृती : (बातको सम्हालते) भावु.. इनसे मीलो.. ये मेरी ननंद हे.. पुनम.. ये भावना दीदी.. ये रजीया दीदी.. मेरी देवरानी.. (सबको) ओर ये हे मेरी बेस्ट फ्रेन्ड डो. भावीका.. मेरी तराह अपना खुदका क्लीनीक हे.. ओर ये उनके हसबन्ड.. मी. धृव..

धृव : (हाथ जोडकर हसते) नमस्ते जी.. अब आप सब लोग इधर बैठो मे ओर लखन यहा बैठे हे.. कीतने दिनोके बाद मीले.. तो सबलोग घरके ही नीकले.. हें..हें..हें.. मे आइसक्रिमका बोलकर आता हु..

भावीका : (धृवके जातेही कातील नजरसे हसते) कहीये लखनजी.. कैसे हे आप..? आपतो पार्टी देनेकी बात करके गये.. बादमे तो दीखे ही नही.. हें..हें..हें.. कहीये.. कब दे रहे हे पार्टी.. वैसे मुजेतो पता ही नही थाकी आप धृवके दोस्त हे.. अब तो मुलाकात होती ही रहेगी.. कभी आइअ‍े सबको लेकर घरपे..

लखन : (हसते) जी जरुर.. अब तो आप भी मेरी भाभी हे.. तो पार्टीतो बनती ही हे.. जब आप कहो.. मे पार्टी दे दुगा..

धृव : (हसते अंदर आते) आजा लखन.. सब लेडीसको वहा बैठने दे.. हम यही बैठते हे.. कीतने दिनोके बाद मीले हे यार.. आजा..

फीर सभी लेडीस चेयर खीचकर घेरा बनाके बैठती हे.. ओर आपसमे हस हसके बाते करने लगी.. लखन ओर धृव सबसे थोडा दुर जाकर बैठ गये.. ताकी दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ अपनी प्राइवेट बाते सेर कर सके.. भावीका सबके साथ हस हसके बाते तो करती थी.. लेकीन बीच बीचमे चोर नजरसे लखनको देख लेती थी.. तो दुसरी ओर लखन ओर धृव अ‍ेक दुसरेकी खबर पुछकर अपनी बाते करने लगे..

धृव : (मुस्कुराते) हां भाइ.. बता.. आज तो पुनम दीदीभी साथ आइ हे.. क्या कर रहे हे उनके हसबन्ड..?

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. अ‍ेक बात कहु..? अभी हालहीमे अ‍ेक हप्ते पहेले उनका डीवोर्स हो गया हे..

धृव : (आसचर्यसे देखते) भाइ क्या बात कर रहे हो..? कुछ प्रोबलेम थी क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. उनके पतीमे कुछ प्रोबलेम थी.. आप समज गयेनां..? ओर पुनोदीकी सास मेरी भाभी हे.. भाइने उनकी विधवा साससे सादी करली हे.. जो रीस्तोमे उनकी मौसीजी हे.. हें..हें..हें..

धृव : (जोरोसे हसते) यार अ‍ेक तो पहेलेसे ही तेरे खानदानके बारेमे पता नही चलता.. कोन कीसका क्या लगता हे.. ओर कीनसे सादी करली हे.. सब आपसी रीस्तोमे ही सादीया करते हो.. तो अब..?

लखन : (मुस्कुराते) सुन.. तुजे अ‍ेक खुस खबर भी सुनाता हु.. मे पुनोदीसे सादी कर रहा हु..

धृव : (खुस होते हसते) क्या..? तो आखीर तेरा सपना भी पुरा होगया.. क्या वो इसीलीये यहा आइ हे..?

लखन : (सामान दीखाते) हां.. सादीकी खरीदी करने आइ हे.. सायद इस हप्ते मेरी सादी होजायेगी.. तु बता.. क्या कर रही हे पुजादी.. उनका फोन बोन आता हेकी नही..? तु बहोत नसीब वाला हे.. जो तुजे तेरी बहेनका प्यार मील गया..
 
धृव : (भारी आवाजमे धीरेसे) भाइ.. सच कहा तुने.. लेकीन तुमसे अ‍ेक खबर देना चाहता हु.. उनका भी अपने पतीसे डीवोर्स हो गया हे.. तो मम्मी पापाने अहेमदाबादमे अ‍ेक विधुरसे सादी करवादी.. मम्मीकी कजीनका लडका हे.. उमरमे भी काफी बडा हे.. लेकीन पुजाने मेरी वजहसे वहा सादी करली.. उनका अ‍ेक लडका भी हे.. अ‍ेक सालका हो गया हे..

लखन : (सामने देखते) यार क्या बोल रहा हे तु..? तो फीर उनसे तुमने सादी क्यु नही की..?

धृव : (धीरेसे) भाइ.. हमारे रीस्तोके बारेमे कीसीको आज तक पता नही हे.. आपकी भाभीको भी नही.. तो बी केर फुल.. बस.. सीर्फ मेरी मम्मीको हम दोनोके बारेमे पता चल गया था.. ओर मम्मीने जल्दीसे रीस्ता ढुंढकर उनकी दुसरी सादी करवादी.. फीर तो मेने भी सादी करली.. मेने आज तक जीतनी भी लडकीयोको प्रेगनेन्ट करदीया था.. सबका अ‍ेबोर्सन इनके पास ही करवाया था.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अच्छा अब समजा.. साला मे सोचु तुजे अ‍ेक डोक्टर कहासे मील गइ.. भाइ.. लेकीन पुजादीदीका डोवोर्स क्यु हुआ..? अच्छा खासा पैसे वाले लोग थे.. इनकी सादीमे कीतना मजा कीयाथा हमने.. कमीने तुमने सादीके दिन भी उनको नही छोडा था..

धृव : (सरमाते हसते) यार क्या करता..? हम दोनो अ‍ेक दुसरेके बगैर नही रेह सकते..

लखन : (सामने देखते) भाइ.. सच बताना.. क्या आज भी तुम दोनो रीलेशनमे हो..?

धृव : (मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हां यार.. कीसीको कहेना नही.. हम आज भी रीलेशनमे हे.. उनका जो बच्चा हे वो हम दोनोका हे..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा हे यार.. तुम दोनो आज भी अपना रीस्ता नीभाते हो.. प्यार तो अ‍ैसा ही होना चाहीये.. फीर चाहे रीस्तोमे कोइ भी क्यु ना हो..

फीर धृव लखनको पुजाके बारेमे प्यार हुआ तबसे लेकर उनका डीवोर्स हुआ.. सब कुछ बता देता हे.. डीवोर्सके बाद भी पुजा यहा दो साल रही.. तब उन दोनोके बीच क्या क्या हुआ ओर उनकी मम्मीको दोनोके बारेमे पता चला.. ओर पुजाकी कीन हालातोमे सादी करवानी पडी वो सब बाते धृव लखनको बताने लगा.. जब दोनो बाते कर रहे थे तब सबके लीये आइसक्रिम भी आगइ.. तो सब खाते बाते करने लगे..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाइ.. अब बता.. तेरी मम्मीको कैसे पता चला..?

धृव : (मुस्कुराते) भाइ.. जब वो डीवोर्स लेकर इन्डीया आइ तब आपहीकी तराह बहुत डीप्रेशनमे थी.. हर रात हम दोनो साथ ही सोते थे.. देर रात वो मेरे रुममे आजाती.. यातो मे उनके रुममे चला जाता.. हम दोनोका रीस्ता अ‍ेक पती पत्नीकी तराह होगया था.. हम रात भर साथ सोते..

लखन : (मुस्कुराते) हर रात..?

धृव : हां.. हम दोनोको अ‍ेक दुसरेकी आदत होगइ हे.. मे उनकी अ‍ेक बीवीकी तराह केर करने लगा था.. तो हमारा व्यवहार देखके मम्मीको हम दोनोपे सक होने लगा.. लेकीन मेने उनकी ओर ध्यान नही दीया.. ओर पुजाको बहेला फुसलाकर प्यारकी बाते करते उनको ट्रेससे नीकाला.. ओर वो मुजसे सादीके लीये तैयार होगइ..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या तुम दोनोने सादी भी करली थी..?

धृव : हां.. अ‍ेक दिन रातमे हम दोनो डीनर करके पैदल टहेलने नीकले.. तो मेने उनसे सादीकी बात की.. तो वो सादीके लीये तैयार होगइ.. ओर हम दुसरे ही दिन घरपे अलग अलग बहना बनाकर दो दिनके लीये दुसरे सहेर चले गये.. वहा मेने दो दिनके लीये अ‍ेक होटेल बुक करली थी.. वहा जाकर मे अ‍ेक मंदिरमे जाकर सबकुछ तैय करके आगया.. ओर दुसरे दिन हमने मंदिरमे जाकर सादी करली..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा तो पुजा दीदी आपकी सीक्रेट बीवी हे.. फीर..? सादीके बाद कुछ कीया बीया की नही..?

धृव : (मुस्कुराते) हंम.. सादी करके उस रात हम दोनोने फीरसे हमारी सुहागरात मनाइ.. ओर हम घरपे अलग अलग ही वापस आगये.. क्युकी मम्मीको हम दोनोपे सक हो गया था.. कहेते धृव लखनको उनकी मम्मीके बीचकी बाते छोडकर पुरी बात बता देता हे..

दोनो अलग अलग बहाना बनाकर दो दिनका कहेर अपनी अपनी कार लेकर घरसे अलग अलग टाइमपे नीकल गये.. पुजाने अपनी सहेलीके फ्इेटपे अपनी कार पार्क करदी.. ओर धृवके साथ कारमे बैठ गइ.. दोनो अ‍ैसे सहेरमे चले गये जहा बहुत सारे मंदिर.. ओर साधु बावा थे..

धृवने वहा जाकर अ‍ेक बडीयासी होटेलमे दो दिनके लीये अ‍ेक रुम बुक करलीया.. ओर दोनो भाइ बहेन लंच करके मंदिर देखने चले गये.. वो दोनो अ‍ेक मंदिरमे जाकर सब तैय करके आगये.. पुजारीने दोनोको सुबह बुलाया था.. ओर साथमे दो फुल हार के साथ मंगलसुत्र भी लानेको कहा..

फीर दोनो वहा अ‍ेक ज्वेलरी शोरुमपे चले गये.. ओर पुजाने अपनी पसंदका अ‍ेक छोटासा मंगलसुत्र लेलीया.. फीर पुजाने वहा घुमनेकी बात कही.. तो धृवने मना करदीया.. क्युकी उनके पापा पार्टीमे अ‍ेक बडे होदे पे थे.. तो वहा कोइना कोइ उनको देखकर पहेचान जाते..

ये बात पुजाभी समज गइ.. ओर दोनो वापस होटेलपे आ गये.. आते ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकते सो गये.. देर साम तक दोनो आराम करते रहे.. क्युकी पुजाको पता था.. की ये दो रात उनका भाइ उसे सोने नही देगा.. फीर देर साम दोनो जागकर फ्रेस होगये..
 
धृवने रुमके अंदर ही डीनरका ओर्डर दे दीया.. डीनर फीनीस कीया तब तक बहार भी अंधेरा छा चुका था.. तो दोनो डीनर करके पैदल घुमने चले गये.. ताकी रातके अंधेरेमे कोइ उसे पहेचान ना पाये..

पुजा : (हाथ पकडकर साथ चलते सरमाके मुस्कुराते) भाइ.. कल हम दोनोकी सादीतो होजायेगी.. हम सुहागरात भी कना लेगे.. लेकीन इसके बाद आपने क्या सोचा हे..? मीन्स.. हमारे फ्युचरके बारेमे..

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. हमने सबकुछ तैय करके तो रखा हे.. अगर बाय चान्स आपकी सादी भी होगइ.. तो सीर्फ वो नामके ही आपके पती होगे.. बाकी अब बीवीतो आप मेरी ही होगी.. अब आपको देखना हे आप सब कैसे मेनेज करती हो.. आपने सर्त रखी हेकी मे भी सादी करलु.. वरना अब आपसे सादी करनेके बाद मेरी कही ओर सादी करनेकी इच्छा नही हे..

पुजा : (मुस्कुराते) भाइ.. अगर आप चाहते होकी हम दोनोका रीस्ता जींदगी भर अ‍ैसे ही बरकरार रहे.. तो आपको सादी तो करनी ही पडेगी.. आपके लीये नही.. हमारे मम्मी पापाके लीये.. ये समाजको दीखानेके लीये.. वरना क्या आपको लगता हे मे अपना प्यार कीसी ओर लडकीसे बांट सकती हु..? अ‍ेकतो मम्मीको हम दोनोपे पहेलेसे ही सक होगया हे.. मे नही चाहती उनका सक यकीनमे बदल जाये..

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. सब लडकीओकी अ‍ेक तम्मना होती हे.. की उनकी सादीके बाद उनका पती उसे हनीमुनपे लेजाये.. तो आपका मन नही करता..? आप चाहोतो हम अ‍ेक हप्तेके लीये कही जा सकते हे..

पुजा : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. बहुत मन करता हे.. लेकीन बार बार कोइ बहाना बनाकर घरसे चले जाना मुजे अच्छा नही लगता.. हनीमुनपे जानेके लीये कमसे कम अ‍ेक महीना ओर वेइट करना पडेगा.. फीर हम कुछ प्लानींग करते हे.. अब हमे मम्मीकोभी देखना पडेगा..

धृव : बस उसी बातका डर हे.. तो फीर कैसे जायेगे..?

पुजा : बस.. सही मौकेका इन्तजार करलो.. हम चलेगे.. जहा आपका मन करे.. जहा हमे कोइ पहेचानता ना हो.. अब वापस चलो.. हमे सुबह जल्दी मंदिर पहोचना भी हे..

फीर दोनो वापस होटेलपे आ गये.. उस रात दोनो प्यारके महासागरमे गोते लगाने लगे.. ओरल सेक्स करते पुजाने धृवको ब्लुजोब दीया.. फीर जबरदस्त तरीकेसे धृवने पुजाको दो बार चोद लीया.. दोनो रातके अ‍ेक बजे तक चुदाइ करते रहे.. फीर नंगेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकते सो गये..





सुबह पुजा जल्दी उठ गइ.. ओर नहाकर धृवको भी जगा दीया.. ओर खुद आयनेके सामने बैठकर शींगार करने लगी.. आज पुजा दुल्हनकी तराह सजी थी.. जब धृव भी कंपलीट हो गया तो दोनो भाइ बहेन अपनी कार लेकर मंदिर चले गये..

वहा पंडीतने पहेले ही सब तैयारीया करके रखी थी.. दोनोने अ‍ेक दुसरेको हार पहेनाया.. ओर पंडीतने दोनोकी सादी करवाइ.. सात फेरे भी लगवाये.. ओर अंतमे धृवने पुजाको मंगलसुत्र पहेनाकर उनकी मांग भी भरदी.. तब पुजाकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने धृवके पांव छुहे..

पंडीत : (मुस्कुराते) बेटा.. होगइ तुम दोनोकी सादी.. दोनोकी जोडी बहुत सुंदर हे.. भगवान तुम दोनोकी जोडीको जन्मो जन्म तक सलामत रखे.. ये मेरा आशीर्वाद हे..

फीर दोनो पंडीतको उनकी दक्षीणा देकर आशीर्वाद लेकर वापस लोटते हे.. आते वक्त रास्तेसे अ‍ेक मेडीकइ स्टोरसे धृवने कुछ कामोतेजक गोलीया लेली.. तो पुजाने भी उनको आइपीलकी गोलीया मंगवाली.. फीर दोनो अपने होटेलपे आगये..

पुजा अपनी मांगमे सींदुर.. ओर गलेमे मंगलसुत्रमे बहुत ही सुंदर लग रही थी.. वो सादीके बाद धृवसे बहुत ही सरमा रही थी.. रुममे जातेही धृवने पुजाको अपनी बाहोमे भरलीया.. तो पुजा आज बहुत ही सरमाइ.. ओर उसने भी धृवको जोरोसे बाहोमे भीच लीया..

धृव : (होंठ चुमते) दीदी.. आज मे बहुत खुस हु.. मेरा बरसोका सपना आज पुरा होगया.. मेने अपनी बहेनसे सादी करली.. अब मे जींदगी भर आपके साथ रहेना चाहता हु..

पुजा : (मुस्कुराते) भाइ.. इतना भी इोस्नल मत होइअ‍े.. ये दुजीया हमे साथ नही रहेने देगी.. लेकीन हम दोनो अपने वचनोसे बंधे हुअ‍े हे.. हम उसे बखुबी नीभायेगे.. अब सबकुछ होगा.. हमारे बच्चे भी..

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर आपने आइ पीलकी गोली क्यु मंगवाइ..? होने देती हमारा बच्चा..

पुजा : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. जबसे मेरी सादी होगइ आप बीना कोन्डम ही करने लगे हो.. ओर लास्ट टाइम आइ तब आपने ही मुजे प्रेगनेन्ट करदीया था.. ओर उसी प्रेगनेन्सीकी वजहसे मेरा डीवोर्स हुआ.. तो अब मे जीतने दिन यहा हु ओर कोइ रीस्क लेना नही चाहती..

धृव : जीतने दीन यहा हु मतलब..? आप दुसरी सादी करोगी..?

पुजा : (मुस्कुराते) भाइ.. देखना मम्मी पापा मेरी सादी जरुर कही ओर करवा देगे.. तबतक मुजे मेरी सेफ्टीका पुरा खयाल रखना हे.. बस.. अ‍ेक बार सादी होजाये.. फीर चाहे आप जैसे भी करना चाहो कर सकते हो.. फीर कोइ खतरा नही..

फीर दोनो चेन्ज करके नीचे लंचके लीये चले गये.. धृवने पुजासे छुपकर होटेलके मेनेजरको बेड सजानेके लीये केह दीया.. तो मेनेजर समज गया.. ओर उसी वक्त दो लडकोको बुलाकर कामपे लगा दीया.. तो धृव लंच करके वहीसे सीधा पुजाको लेकर मुवी देखने चला गया.. पुजा अ‍ेक बीवीकी तराह धृवकी बाते मानने लगी थी.. वहा मुवीमे भी दोनोने थोडा रोमांस भी कीया.. ओर सामको होटेलपे आगये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५७

फीर दोनो चेन्ज करके नीचे लंचके लीये चले गये.. धृवने पुजासे छुपकर होटेलके मेनेजरको बेड सजानेके लीये केह दीया.. तो मेनेजर समज गया.. ओर उसी वक्त दो लडकोको बुलाकर कामपे लगा दीया.. तो धृव लंच करके वहीसे सीधा पुजाको लेकर मुवी देखने चला गया.. पुजा अ‍ेक बीवीकी तराह धृवकी बाते मानने लगी थी.. वहा मुवीमे भी दोनोने थोडा रोमांस भी कीया.. ओर सामको होटेलपे आगये.... अब आगे

पुरा रुम फुलोसे सजा हुआ था.. पुजा समज गइकी धृव उनको मुवी देखने क्यु ले गयाथा..? पुजाकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. वो धृवके गले लग गइ.. ओर खुसीसे आंसु बहाने लगी.. अब धृवसे रातका ओर इन्तजार नही हो रहा था..

वो पुजाको वहीसे गोदमे उठाकर बेडपे चला गया.. ओर दोजोका रोमांस सुरु होगया.. दोनो उतेजीत होते अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकालने लगे.. दोनोके सभी कपडे अ‍ेक टेबलके कोनेपे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे.. तबतक बेडपे दो जीस्म अ‍ेक हो चुके थे..





धृव होले होले कमर हीलाते पुजाके होठो ओर उनके बुब्सको चुमते चोद रहा था.. आज पुजा कीसी अप्सरासे कम नही लग रही थी.. उनकी सादी थी तो वो घरसे ही पुरी तैयारीया करके आइ थी.. डीनर तक धृव बीना नीचे उतरे पुजाकी गुफामे धमाका करता रहा.. ओर उसने पुजाको दो बार चोद लीया..





फीर धृवने नाइट ड्रेस पहेनकर डीनर ओर्डर करदीया.. पुजा अब भी नंगी थी.. जब डीनर आगया तो वो नंगी ही बाथरुममे घुस गइ.. ओर धृवने डीनर लेलीया.. फीर तो वो भी दरवाजा लोक करके नंगा हो गया ओर पुजाको बहार बला लीया..

उस रात धृवने पुजाको नंगीही अपनी गोदमे बीठाया.. ओर अपने हाथोसे खीलाया.. तो पुजाकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. इस रात कभी ना थंभने वाली रात थी.. धृव कामोतेजक गोली खाकर पुरी रात अलग अलग पोजीसनमे पुजाको चोदता रहा..





सुबह दोनो चार बजे सोये तबतक धृव पुजाकी हालत खराब कर चुका था.. इस रात धृवने पुजाको चोदते उनका अ‍ेक अ‍ेक तोडके रख दीया था.. पुजाकी अ‍ैसी सुहागरात कभी नही हुइ थी.. दुसरे दिन ग्याराह बजे तब दोनो सोते रहे..

फीर कंपलीट होकर होटेलसे चेक आउट करलीया ओर घरकी ओर नीकल पडे.. आज घर जाना थातो पुजाने अपनी मांग नही भरी... ओर मंगलसुत्र भी छुपाकर पर्समे रख लीया..

पुजा : (सरमाते धीरेसे) धृव.. मे आज बहुत बहुत खुस हु.. मुजपे यकीन करना.. मे अपना सभी वादा नीभाउगी.. ओर हमेसा तेरी पत्नी रहुगी.. फीर चाहे मेरी सादी कही ओर क्युना होजाये..

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. थेन्क्स.. आपने मेरा सपना पुरा कीया..

पुजा : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) धृव.. अब तो हम दोजोकी सादी होगइ हे.. क्या आप अब भी मुजे दीदी कहोगे..? अब नाम लेकर बुलाइअ‍ेनां..?

धृव : (मुस्कुराते) नही दीदी.. मेने अपनी बहेनसे सादी कीहे.. आप जोभी मानो.. बीस्तरमे तो आप मेरी बहेन ही होगी.. भला हो लखनका.. जो उसने मुजे आपसे प्यार करनेको प्रेरीत कीया..

पुजा : (सरमाते हसते) भाइ.. आप दोनोकी भी क्या क्या फेन्टासी हे.. आइ होप की लखन भैयाको भी उनकी बहेनका प्यार मील जाये.. धृव.. आप अ‍ेक काम करना.. मुजे मेरी फ्रेन्डके वहा छोड दीजीयेगा.. मे मेरी कार लेकर घर चली जाउगी.. फीर आप भी दो तीन घंटेके बाद चले आना.. ताकी घरपे कीसीको हमपे सक ना हो..

धृव : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? मे देख रहा हु ये हमारी सादीके बाद आप मुजे आप आप कहेकर रीस्पेक्टसे बुलाने लगी हे.. तो आप पहेलेकी तराह ही बुलाइअ‍े.. वरना मम्मीको सब पता चल जायेगा..

पुजा : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) धृव.. अब आप मेरे पती हो.. फीर भी आपकी बात सच हे.. अ‍ेक काम करती हु.. सबके सामने तो भाइ या फीर धृव कहेकर बुलाउगी.. लेकीन जब दोनो अकेले हो तब मे आपको अपना पती मानकर ही अ‍ैसे ही बुलाउगी..

दोनो बाते करते अपने सहेरपे पहोंच गये.. वहा धृवने पुजाको अपनी फ्रेन्डके वहा ड्रोप करदीया जहा उनकी कार पडी थी.. ओर पुजाको ड्रोप करके धृव अपने दोस्तोको मीलने चला गया.. पुजा अपनी कार लेकर घरपे आगइ..
 
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