Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 88 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

भावना : (हसते) दीदी.. लखन भैयातो सृतीदीकी बडी सेवा कर रहे हे..

पुनम : (हसते धीरेसे कानमे) दीदी.. सेवा तो करते हे.. लेकीन रातमे वसुल भी करलेते हे.. हें..हें..हें..

भावना : (खुसीसे सोक्ट होते हसते धीरेसे) व्होट..? वसुल कर लेते हे..? मतलब..? आइ मीन.. दोनो रीलेशनमे..? कबसे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) वैसे तो दोनो दश बाराह दीनसे रीलेशनमे आगये हे.. लेकीन दोनो पीछले तीन दिनसे मील रहे हे.. अब ये मेरी सौतन होने वाली हे.. तो जरा सम्हालके..

भावना : (हसते धीरेसे) दीदी.. लेकीन लखन भैयातो इनको भी दीदी.. दीदी.. कहेकर बुलाते हे..

पुनम : (हसते कानमे धीरेसे) दीदी.. लखन भैया हेना बहुत कमीने हे.. उनको अपनी बीवीसे ज्यादा बहेनको ठोकनेमे मजा आता हे.. बीलकुल हमारे बापुपे गये हे.. बडे भैया भी अ‍ैसे ही हे.. देखना उनकी अ‍ेक भी बहेन नही बचेगी.. कमीसी सब इनके पीछे पागल होजायेगी..

सृती : (बाथरुमसे थोडा जोरोसे) दीदी.. लखन भैया यहा हे क्या..? आइ अ‍ेम रेडी..

पुनम : (अंदर जाते) नही दी.. वो फ्रेस होने गये हे.. चलीये मे आपकी मदद करती हु.. चल सकोगी क्या..?

सृती : (मुस्कुराते कंधा पकडकर) हां.. बस थोडा सहारा दीजीये.. अब डोक्टरने भी थोडा थोडा चलनेको कहा हे.. तो मे वोकर लेकर चलती हु.. चलीये.. मेरे कपडे भी वहा हे..

लखन : (अंदर आते) दीदी.. ये लीजीये आपके कपडे.. आज ये पहेनीये.. मस्त लगोगी..

भावना : (जोरोसे हसते) अरे वाह.. ये भी आपको पता हे..? दीदीकी तो बडी सेवा हो रही हे..?

लखन : (हसते) भाभी.. कहोतो आपकी भी सेवा करदु..

भावना : (सृतीकी ओर देखते जोरोसे हसते) अरे ना बाबा नां.. मुजे पता हे आपकी सेवाके बारेमे.. हें..हें..हें.. मुजे नही करवानी सेवा आपसे.. अपनी बीवीओकी सेवा ही करीये..

पुनम : (सरमाते हसते) क्या दी आपभी.. मे तो हमेसा भाइके चोइसके कपडे ही पहेनती हु.. जब हम दोनो स्कुलमे पढते थे.. लाइअ‍े बच्चीको.. आप फ्रेस होजाइअ‍े..

कहा तो भावना बच्ची पुनमको देकर लखनकी ओर कातील स्माइल करते अंदर चली गइ.. लखन भी अपने कपडे लेकर वापस सृतीके रुममे चला गया.. तो पुनमने दरवाजा बंध करदीया ओर सृतीको कपडे पहेनानेमे हेल्प करने लगी.. फीर वो भी फ्रेस होकर कंपलीट होगइ.. सबलोग तैयार होगये तो लखन सृतीको वापस गोदमे उठाकर नीचे आगया ओर सृतीको सीधा डाइनींगपे बीठा दीया..

दया : (चाइ नास्ता बहार लाते) चलो चलो सबलोग आजाओ.. चाइ नास्ता रेडी हे.. फीर हमे भी तैयार होना हे..

पुनम : दीदी.. लाइअ‍े मे नीकालती हु.. आप दोनो भी बैठ जाइअ‍े.. फीर तैयार होजाना..

फीर सबलोग चाइ नास्ता कर लेते हे पुनम ओर भावना कीचनका काम देखती हे.. ओर दया रजीया तैयार होजाती हे.. लखन सबको लेकर घरको ताला लगाकर मार्केट चला जाता हे.. वहा अ‍ेक बडे मोलमे कारको पार्किंग कर देता हे.. तो लखन वहा सृतीको गोदमे उठाकर चलने लगता हे.. तो सृती बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर कारमे बेठनेकी जीद करने लगी.. लेकीन लखनने उनकी अ‍ेक नही सुनी..
 
पुनम : (हसते) दीदी.. चलीयेना.. आपकी भी खरीदी होजायेगी.. आपको सीर्फ बैठना ही तो हे.. बाकी आपकी सब खरीदी मे ओर भाइ कर लेगे..

फीर सबलोग अ‍ेक बडी शोपमे चले जाते हे.. वहा लखन सृतीको अ‍ेक चेरपे बीठा देता हे.. ओर सब लोग सारीया देखने लगते हे.. सबसे पहेले सब पुनमके लीये सीलेक्ट करते हे.. लखनने पुनमका अ‍ेक सादीका जोडा सीलेक्ट कीया जो सबको पसंद आ गया.. फीर सबके लीये सारीया ओर ओर कुछ ड्रेसीस लीये.. ओर सृती के लीये भी कपडे लीये.. जीसे लखनकी चोइस देखकर सृती बहुत खुस होने लगी..

सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आपने मेरे लीये मस्त साडी ली हे.. बीलकुल सादीके जोडे जैसी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. देखती जाइअ‍े.. मेरे सब कपडे भाइ ही लाते थे.. ओर अभी भी ले रहे हे..

फीर लखन दया रजीया ओर भावनाके लीये भी सारी ओर ड्रेसीस लेता हे.. ओर भावेश ओर भावनाकी बच्चीके लीये लेता हे.. ओर मंजु चंदा सब लोगके लीये कुछना कुछ ले लेता हे.. फीर रजीया दयाको अपने लीये ओर नीलमके लीये सारी ओर ड्रेस देखनेको कहेकर लखन बच्चीको सृतीके हाथोमे थमाकर पुनम ओर भावनाको लेकर बहार चला जाता हे..

तो आज भावना भी बहुत खुस होगइ.. बहार नीकलते ही लखन पुनमका हाथ थाम लेता हे.. तो पुनमभी बीन्दास्त लखनका हाथ पकड लेती हे जैसे दोनो प्रेमी हो.. दोनोको अ‍ैसे देखते भावना हसने लगी.. ओर वो जटसे चलते लखनकी दुसरी साइड आकर लखनके साथ उनसे सटकर चलने लगी.. जीसे देखकर पुनम भी भावनाकी ओर देखते हसने लगती हे.. लखन दोनोको लेकर चुपकेसे अ‍ेक ज्वेलेरी शोपमे चला जाता हे..

पुनम : (समरमाते धीरेसे) भाइ.. ये भी आपकी चोइसका लुगी.. मम्मीने कहा हे सृतीदीदीके लीये भी लेना हे.. ओर दो पीस ओर लेना हे.. लता ओर वंदुके लीये..

लखन : (हसते) दीदी.. पता हे मुजे.. मम्मी मुजे भी बोलकर गइ हे.. तभी तो तुम दोनोको लेकर आया हु..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. बताइेअ‍ेतो सही.. यहा हम क्या लेने आये हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मंगलसुत्र.. पुनोदी ओर सृतीदीके लीये.. कहोतो आपके लीये भी लेले..?

भावना : (जुठे गुस्सेसे लखनको मारते) नही.. कीतने कमीने हो.. होने वाली बीवीके सामने ही.. मुजे नही लेना.. मुजे आपके भाइने पहेनाया हे.. आप ही अपनी बीवीओके लीये लेलो..

पुनम : (हसते) भाभी.. येतो मजाक कर रहे हे.. चलीये आप भी देखीये..

भावना : (लखनकी ओर कातीलाना अंदाजमे मुस्कुराते) दीदी.. मुजे भी पता हे ये मजाक कर रहे हे.. मेरे अ‍ेक लोते देवरजो होगये हे.. लेकीन आजकल कुछ ज्यादाही मजाक करने लगे हे.. अ‍ेक दिन मेरे हाथोसे पीटेगे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हाये.. हम तो कबसे पीटवानेके लीये तैयार हे.. क्यु दीदी..? आप पीटती ही नही..

भावना : (दांत पीसते दो तीन मुके जडते) बडे बेसर्म हे आप..? सचमे पीटोगे..

पुनम : (हसते) भाभी.. देखीयेनां.. बादमे पीट लेना.. पीटनेमे मे भी आपकी हेल्प करुगी.. फीर देखते हे कौन पीट जाते हे..

भावना : (सरमाते हसते) मीया बीवी दोनो अ‍ेक जैसे हो.. चलो चलो लेलो.. जो लेना हो..

फीर लखन पुनम ओर सृतीके लीये मंगलसुत्र लेता हे.. मंजुके कहेनेपे दो ओर मंगलसुत्र भी लेता हे.. फीर दोनोके लीये अ‍ेक अ‍ेक डाइमंड नेकलेस भी लेता हे.. फीर कानमे बडे अ‍ेरींग्स.. नाककी नथनी.. हाथकी चुडीया.. पैरके लीये पायल.. सबकुछ लेलेता हे.. जीसे लखनकी चोइस देखकर भावनाभी दंग रेह गइ.. फीर लखन दयाके लीये भी अ‍ेक टायमंड नेकलेश अ‍ेरींग्स.. ओर कुछ ओर ज्वेलेरी लेता हे..

जब पुनम ओर भावना अपनी बातोमे बीजी थी तब लखन पुनम भावनासे छुपकर अ‍ेक सोनेका चेइनके साथ पेन्डल भी लेता हे.. जो सीर्फ भावनाके लीये था.. ओर वो भावनाको अपनी तरफसे गीफ्ट देकर सरप्राइज देना चाहता था.. लखन सबका पेमेन्ट कर देता हे.. ओर तीनो वहासे बहार नीकल जाते हे.. फीर लखन दोनोको लेकर अ‍ेक अंडर गारमेन्टकी शोपमे चला जाता हे.. तो भावना बहुत ही सर्मसार होगइ..
 
भावना : (कातील नजरोसे सरमाते धीरेसे) देवरजी.. यहा भी आप आओगे..?

लखन : (भावनको हाथ कपडकर वही बीठाते) हां.. मे ले लुगा.. आप दोनो चुपचाप बैठो इधर.. बडी आइ सलाह देने वाली..

भावना : (जुठे गुस्सेसे अ‍ेक मुका मारते) कीतने कमीने हो.. सरम भी नही आती..

पुनम : (लखन चला गया तो सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात कहु..? जब हम स्कुलमे थे.. ओर मेने जवानीके देहलीजपे कदम रखा.. तबसे मेरे सारे अंडरगार्मेन्ट भाइ ही लेकर आते हे.. सृतीदी.. चंदा भाभी ओर मंजु मोमके लीये भी.. सब इन्हीके लाये हुअ‍े ही पहेनती हे.. अ‍ेक चीज ओर.. वो मेरे लीये पेड्स भी लाते थे..

भावना : (हसते धीरेसे) क्या..? पेड भी..? इनको सबकी साइज पता हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. भैयाको ये सब खरीदी करनेका बहुत सौक हे.. सबकी साइजका पता हे.. दया बहेन रजीया.. आपकी भी.. हें..हें..हें..

भावना : (सोक्ट होते मुह भाडते देखते) क्या..? मेरी भी..? लेकीन कैसे..? आइ मीन इनको कीसने बताया..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे कानमे) मेने..? मेने इनको सबकी साइज बताके रखी हे.. वैसे भी उनको देखकर भी पता सच जाता हे.. हें..हें..हें..

भावना : (आस्चर्यसे) बडे कमीने हे.. दीदी.. तुम भाइ बहेन बहुत डेन्जर हो.. चलीये.. आपको जो लेना हे ले लीजीये..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. हम तो अ‍ैसे ही आये हे.. देखो.. भाइ वहा हमारे लीये ले रहे हे.. मुजे ये सब लेना कहा आता हे.. दीदी.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. अभी हमने सृतीदीके लीये जो भी कुछ लीया हे.. आप उनको मत बताना.. क्युकी हम उनको सरप्राइज देना चाहते हे..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. मे कुछ समजी नही.. सरप्राइज..? लेकीन कीस चीजकी..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. दो तीन दिनके बाद हम वापस जायेगेनां.. तब सृती दीको भी साथ लेजायेगे.. ओर बीच जंगलमे हमारे पुर्खोका अ‍ेक मंदिर हे.. वहा हम लखन भैया ओर सृतीदीकी सादी करवायेगे.. ये बात सृतीदीको नही पता.. इसीलीये हम इनको सादीकी सरर्पाइज देना चाहते हे..

भावना : (धीरेसे) दीदी.. क्या सृतीदी सचमे लखन भैयासे सादी कर रही हे..? तो फीर जीजु.. आइ मीन..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अब बडे भैया आपके जीजु नही पती हे.. ओर रही बात सृतीदीकी.. तो वो भैयासे सब रीस्ता तोडके गइ हे.. सृतीदी भाइको डीवोर्स दे रही हे.. ओर हम दोनोको लखन भैयासे प्यार होगया हे.. तबसे जब हम दोनोका डीवोर्स भी नही हुआ था.. तब सृतीदी भाइकी बीवी थी.. ओर मे धीरेनकी.. अभी दस बाराह दिन पहेलेही सृतीदीने अपने प्यारका इजहार कीया.. ओर तीन दिन पहेले दोनो पहेली बार मीले..

भावना : (खुसीसे हसते) ओह गोड..? बात यहा तक बढ गइ..? क्या इस बारेमे घरपे सबको पता हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. अभी यहा सीर्फ रजुदी ओर नीलमको.. ओर वहा सीर्फ मुजे ओर मम्मीको ही पता हे.. बाकी कीसीको नही.. भैया इनसे सादी करके सबको सरप्राइज देना चाहते हे.. इसीलीये उन्होने कीसीको नही बताया.. तो आप भी खयाल रखीयेगा.. ओर हां.. आपकी भी कुछ मम्मीसे बात हुइ हे..

भावना : (थोडी जेंपते जानकर भी अन्जान होते) मंजुदीके साथ..? कीस बारेमे..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) देखीये भाभी.. अ‍ैसे अनजान मत होइअ‍े.. अब आगे सीर्फ हम चारोको ही सबकुछ सम्हालना हे.. तो जाहीरसी बात हे.. लखन भैयाके बारेमे.. कुछ बात हुइ हेकी नही..?

भावना : (नजरे चुराते धीरेसे सरमाते) अरे हां.. वो.. वो.. अ‍ेक बात हुइ हे.. अब आपकोतो सब पता ही हे.. दीदीने मुजे थोडा डांटा भी.. ओर समजाया की अब लखन भैयाके साथ ही हम चारोको रहेना हे..

पुनम : (मुस्कुराते) तो फीर बात करनेमे इतनी सरमाती क्यु हे.. अब सच ही तो कहा हे मम्मीने.. हमे ही देखना हे.. भाभी.. आप लखन भैयाके साथ आगे बढ सकती हो..

भावना : (आंख गीली करते) दीदी.. जीजुके साथ सादी करके दस दिन भी नही हुअ‍े.. वो पहेला प्यार था मेरा.. जीसके लीये मेने भानुको भी छोड दिया.. तो ये सब इतनी जल्दी कैसे अ‍ेक्सेप्ट कर सकती हु..?

पुनम : (मुस्कुराते) क्यु नही..? क्या प्रोबलेम हे..? पता हे.. जब हम स्कुलमे थेनां..? तब लखन भैया मुजसे प्यार करते थे.. ओर मे बडे भैयाको.. मेने भाइसे सादी भी करली.. फीर धिरेनके साथ भी सादी करनी पडी.. तबभी मेने लखन भैयाके बारेमे नही सोचा.. जो मेरी सबसे बडी भुल थी..
 
भावना : (धीरेसे) तो फीर उधरेनके साथ सादी क्यु की..?

पुनम : (मुस्कुराते) धिरेन मेरा दुसरा पती था.. इस बारेमे सीर्फ मोम ही जानती थी.. लेकीन मेरा धिरेनके साथ सफर यही तक था.. ओर बडे भैयासे भी रीस्ता तोड दीया.. आखीर मुजे अपनी मंजील मील गइ.. मेरा लखन.. जो मुजसे बेहद प्यार करते हे.. हम लोगोकी जींदगी अ‍ैसी ही हे.. ओर आपकी आखरी मंजील भी लखन भैया ही हे.. तो आप कबतक उनसे दुर रहेगी..?

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. मंजुदी भी यही केह रही थी.. लेकीन मे मना भी नही कर रही.. बस.. थोडी उलजनमे हु.. तो फीर सीर्फ दस दिनके लीये जीजुसे सादी क्यु करवाइ..?

पुनम : (मुस्कुराते) बडे भैया आपका पहेला प्यार थानां..? आपको लखन भैयासे सादीके लीये नही केह रही हु.. ओर नाही बडे भैयाको छोडने.. बीवी तो आप बडे भैयाकी ही रहोगी.. मे सीर्फ रीलेशनके लीये केह रही हु.. जब बडे भैया आपको टाइम ही नही देपायेगे तो आप क्या करोगी..? बाकी आपकी मरजी.. देखते हे आप कबतक लखन भैयासे दुर रेह सकती हो..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आपकी बात सही हे.. आपने भी लखन भैयाका प्यार अ‍ेक्सेप्ट करलीया हेनां..? दोनो कहा तक आगे बढे..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. सच कहु..? सीर्फ कीस बीस.. ओर हग.. इसीलीये आज मे सीर्फ लखन भैयाको मीलने ही आइ हु.. मेने ओर सृती दीने लखन भैयाको अ‍ेक वादा कीया था.. तो मुजे आना ही था..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) क्या..? सृतीदीने भी..? दीदी.. बताइअ‍ेना कैसा वादा..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. हम दोनोने वादा कीया था.. की हमारी सादीसे पहेले हम दोनो अ‍ेक बार लखन भैयासे जरुर मीलेगे.. सृती दीदीने तो मील लीया.. आज मेरी बारी हे.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. दोनो काम होजायेगे.. सादीकी खरीदी.. ओर लखन भैयासे मीलन.. मे अपना वादा पुरा करने आइ हु..

भावना : (आस्चर्यसे देखते मुस्कुराते) क्या..? लखन भैयासे मीलन..? आइ मीन.. दोनो फीजीकल.. सचमे..? कही मजाकतो नही कर रही..?

पुनम : (सरमाते नांमे गरदन हीलाते) नही दीदी.. कोइ मजाक नही.. सच केह रही हु.. आज मे पहेली बार लखन भैयासे मीलुगी.. समजोना ये हम तीनोकी फेन्टासी हे..

भावना : (खुस होते धीरेसे हसते) वाव.. दीदी.. कीतना रोमांचकारी पल होगानां..? जब अ‍ेक बहेन अपने भाइके साथ मीलन करेगी.. वो भी उनकी सादीसे पहेले..

पुनम : (मुस्कुराते खुस होते) हां दीदी.. आइ अ‍ेम सो अ‍ेक्साइटेड.. कीतना सुहाना पल होगा.. मे तो कहेती हु यहा आइ होतो आप भी अ‍ेक बार उनसे मीललो.. आप बडे भैयाको भुल जाओगी..

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. लेकीन कैसे..? आपने तो बातोसे ही गरम करदीया यार.. मुजे बहुत सरम आ रही हे..

पुनम : (हसते धीरेसे) दीदी इसमे सरमाना क्या..? आप उसे रीजाते थोडी हीन्ट देदो.. इस मामलेमे वो बहुत कमीने हे.. वो समज जायेगे ओर खुद आगे बढेगे.. आपको ज्यादा महेनत करनेकी जरुरत नही हे.. देखो.. आज सृतीदी ओर भैया कीतने मजे कर रहे हे.. सृतीदी कीतनी खुस हे..

भावना : (सरमाते हसते धीरेसे) हां यार.. मे देख रही हु.. अब वो लखन भैयासे कुछ ज्यादा ही सरमा रही हे.. जैसे उनकी बीवी हो.. ओर लखन भैयाभी उनकी कीतनी कैर करते हे.. ठीक हे दीदी.. मे भी इस बारेमे सोचुगी.. अगर मौका मीला तो..

पुनम : (सरारतसे धीरेसे) दीदी.. वैसे कल मे राधु दीदीके घरे रहुगी.. अ‍ेक बार सोचलो.. आपके पास अच्छा मौका हे.. ये कभी मत सोचना मे अपने नये पतीको धोखा दे रही हु..

भावना : (सरमाते धीरेसे) हां दीदी.. बस मनमे भी वोही खयाल आते रहेते हे.. तभी तो हींमत नही कर पा रही..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. मत सोचो अ‍ैसा.. बडे भैया भी लताके साथ लगे रहेते हे.. वोभी तो लखन भैयाकी बीवी थी.. मंजुमोमने आज इसीलीये तो लताको हमारे साथ नही भेजा.. आज उन दोनोका भी मीलन होजायेगा.. अब लता मेरी सौतन नही आपकी सोतन होजायेगी..

भावना : (अपना सर पकडते) ओ गोड.. जीजुभीना.. सादीपे सादी कीये ही जा रहे हे.. सही कहा आपने.. उनके पास सबके लीये टाइम कहासे होगा..?

पुनम : (हसते धीरेसे) अब गील्टी फील होती हे..? तो क्या सोचा आपने..?

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) थेन्क्स दीदी.. अब गीलटी फील नही होती.. देखती हु.. आइ मेनेज.. अगर हमे मोका मीला तो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. मे आगे बढुगी..

पुनम : (खुस होते धीरेसे) हां.. ये हुइना बात.. दीदी देखना अ‍ेक बार उनसे मीलोगी तो अपने नये पतीको भी भुल जाओगी..

दोनो बाते कर रही थी तबतक लखन भी सबके लीये खरीदी करके दोनोके पास आगया.. उसने पुनम सृती ओर रजीयाके लीये चार चार ओर दया भावनाके लीये दो पीस लेटेस्ट ब्रा पेन्टीके सेट लेलीये थे.. तो पुनम ओर सृतीके लीये दो दो पीस पारदर्शी नाइटी भी लेली थी.. जो उसमे पुरा बदन दीखता हो.. सभी केरी बेग पुनम ओर भावनाको पकडा दी.. ओर तीनो वापस सारीके शो रुमपे आगये..

तो दुसरी ओर गांवमे भी सामको देवायत रामुकाकाको खेतोसे लेकर घरपे आगया.. ओर रामुकाकाको अ‍ेक रुममे सुला दीया.. मंजु नीर्मला ओर भुमीका उनका हाल चाल पुछकर उनकी देखभाल करने लगी.. क्युकी रामुकाकाकी हालत वाकइ सीरीयस थी.. फीर साम ढलते ही मंजुने रामुकाकाको खीला दीया फीर सबलोग रातका खाना खाने बैठ गये..
 
आज खानेपे सीर्फ नीर्मला भुमीकाके अलावा मंजु ओर लता ही थी.. चंदा धीरे धीरे खाते कीसी सोचमे डुबी हुइ थी.. तो मंजु उसे समजाकर खीला रही थी.. फीर सबने खाना खालीया तो देवायत नीर्मला ओर भुमीका चंदाको लेकर होलमे चले गये.. ओर बाते करने लगे.. तो मंजु मोका देखकर लताको लेकर अपने रुममे चली गइ..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. तुजे पता हेनां मेने तुजे वहा क्यु जाने नही दीया..?

लता : (सर जुकाते सरमाकर धीरेसे) जी दीदी.. पुनोदीसे बात हुइ थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) गुड.. तो फीर सुन.. आज पुनोके रुममे सोनेकी जरुरत नही हे.. घर पे सीर्फ हम ही लोग हे.. तो तुम आज सजधजके उपर अपने वाले कमरेमे चली जाओ.. मे देर रात देवुको वहा भेज दुगी.. अभी तेरा सही समय चल रहा हे.. तो तेरा काम आसानीसे होजायेगा.. ओर सुन.. लखन पुनोके साथ तेरी ओर देवुकी भी सादी करवा रही हु.. क्या तुम तेरे घरवालोको बुलाना चाहोगी..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. ये सब आप तैय करलेना..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. गुड.. मे चाहती हु वो लोग यहा रहे.. ओर सुन.. वहा नीलुने रमा भाभीको सबकुछ बता दीया हे.. उन्होने हमारे खीलाफ जो साजीस रचीथी उसे छोड दीया हे.. तो अब उनके प्रती कोइ रागदेस रखनेकी जरुरत नही हे.. रमा भाभीको अपनी गलतीका अहेसास हो चुका हे..

लता : (सामने देखते) दीदी.. उनपे आप वीस्वास कर सकती हे.. मे नही.. अ‍ैसी ओरतोका वीस्वास नही कीया जाता.. वो मां बेटी बहुत ही अ‍ैयास ओर कामी ओरते हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. मुतो भुलो वो भी हम मेसे अ‍ेक हे.. फीर भी तुम उनकी फीकर मत कर.. उसे लखन ओर पुनो सम्हाल लेगे..

लता : (आंख गीली करते) दीदी.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. लगता हे मे यहा आइ तो लखन मुजसे रुठे हुअ‍े लगते हे.. वो मुजसे बात भी नही करते..

मंजुला : (सामने देखते) क्यु..? ये तेरा ही तो नीर्णय था.. की तेरे पीरीयडके बाद पहेले देवुसे मीलन करेगी.. ओर हम इसे गलत भी नही मानते.. मेरा लखन.. तुजे बहुत प्यार करने लगा था.. ओर तु अचानक उसे छोडदे.. तो दुख तो होता ही हे..

लता : (आंसु बहाते धीरेसे) दीदी.. लेकीन आपहीने कहा था.. की हम तीनोको सीर्फ बडे भैयाही प्रेगनेन्ट कर सकते हे.. मुजे बच्चा चाहीये.. तो फीर मे क्या करती..? ओर उसने भी तो बडे भैयाकी बीवीओके साथ रीलेशन रखा हे..

मंजुला : (सामने देखते) हंम.. चल मानाकी मेने सबको छुट दी हे.. तो फीर बता उसने देवुकी कौनसी बीवीके साथ रीलेशन रखा..? मेरे साथ..? चंदा दीदीके साथ..?

लता : (आंसु पोछते धीरेसे) क्यु..? सृती दीदी.. पुनोदीदी.. वोभी तो उनकी बीवी हेनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हे नही.. थी.. तुजे पता हे सृतीने देवुके साथ ओर पुनोने धिरेनके साथ सभी रीलेशन खतम करलीये हे.. तब जाके मेरे लखनने उन दोनोको अपनाया हे.. जो अब वो दोनो उनकी लीगल बीवीया हो जायेगी.. खैर जानेदो.. ये सब बाते अब बेमायने हे.. अगर तुम चाहोतो दोनोके साथ रीलेशन रख सकती हो.. अब तुम कीसीकी भी बीवी हो.. क्या फर्क पडता हे..

लता : (सर जुकाते) दीदी.. मे कदम आगे बढा चुकी हु.. ओर मे बडे भैयाको प्यार भी करती हु.. ओर बच्चेके खातीर उनसे रीलेशन बनाना जरुरी भी था.. इसीलीये ये कदम उठाया हे..

मंजुला : (खडी होकर) हंम.. तो तुजे गलत भी कौन केह रहा हे..? ठीक हे.. सही कीया हे तुमने.. जा.. मनमे कोइ क्षोभ मत रखना.. यहा हम सबको सभी तराहकी छुट हे.. तुम उपर जाकर अपनी तैयारीया करो.. आज तेरा काम होजायेगा..

लता : (सरमाते खडी होते) जी दीदी.. तो वो मुजसे नाराज क्यु हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) वो तुमसे कोइ नाराज नही हे.. मे उनसे बात करलुगी.. ठीक हे..?

लता : (मुस्कुराते) जी दीदी.. थेन्क्स..

मंजुला : (जाते जाते अचानक रुकते सामने देखकर मनमे) लता.. अब तुजे कैसे कहु..? की लखनको हमने जडी बुटी क्यु दी हे.. वो अब मेरे देवुसे भी ज्यादा सक्षम हो गया हे.. जो अब वो मुजे.. तुजे.. ओर पुनोको भी प्रेगनेन्ट कर सकता हे.. लेकीन ये बात अभी तुजे नही बता सकती.. हम तीनोको देवुका अंस चाहीये.. इसीलीये देवुसे मीलन करना जरुरी हे..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. कुछ कहेना हे क्या..? मेने कोइ गलती तो नही की..?

मंजुला : (मुस्कुराते जाते हुअ‍े) नही.. तुम आरामसे जा.. ओर खुस रहाकर..

लता उपर चली गइ.. ओर बाथरुममे जाकर अपनी तैयारीया करने लगी.. आज उसने नीचेसे उपर तक सब सफाइ करने लगी.. वो देवायतके साथ मीलनकी बात सुनकर बहुत ही अ‍ेक्साइट होने लगी.. फीर भी उसे बार बार लखनका खयाल आने लगा.. यहा आकर वो देवायतके साथ काफी आगे बढ चुकी थी.. अ‍ेक बार तो दोनोको मौका मीला तो बहेक भी गये थे.. लेकीन मील नही पाये..

तो दुसरी ओर अब भावनाका भी लखनकी ओर देखनेका नजरीया बदल गया था.. सब लोग सादीकी खरीदारीमे व्यस्त थे.. लखनने पुनम भावनाको भी नही बतायाकी उन्होने अंडर गाम्रेन्टकी शोपसे सबके लीये क्या क्या लीया हे.. फीर सब लोग मोलसे नीकल गये.. तो अ‍ेक जगहसे लखनने बच्चीके लीये अ‍ेक जुला भी लेलीया.. तो लखनकी समजदारी देखके भावना बहुत खुस होगइ..

सबकी खरीदी होगइ तबतक साम भी ढल चुकी थी.. जब भी मौका मीलता पुनम ओर लखन अ‍ेक दुसरेका हाथ थाम लेते.. अब तो ये सब सबको सामान्य लगने लगा.. फीर सब लोग अ‍ेक बडी होटलपे डीनर करने चले गये.. तो वहा भी लखनने सृतीको गोदमे उठालीया.. तो सृती फीरसे सरमाइ.. लखन सबको लेकर अंदर चला गया.. तो अ‍ेक वेइटर दोडकर आगया.. ओर सबको अ‍ेक खाली टेबलपे ले गया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५५

सबकी खरीदी होगइ तबतक साम भी ढल चुकी थी.. जब भी मौका मीलता पुनम ओर लखन अ‍ेक दुसरेका हाथ थाम लेते.. अब तो ये सब सबको सामान्य लगने लगा.. फीर सब लोग अ‍ेक बडी होटलपे डीनर करने चले गये.. तो वहा भी लखनने सृतीको गोदमे उठालीया.. तो सृती फीरसे सरमाइ.. लखन सबको लेकर अंदर चला गया.. तो अ‍ेक वेइटर दोडकर आगया.. ओर सबको अ‍ेक खाली टेबलपे ले गया.... अब आगे

वेइटर : (मुस्कुराते) सर.. आप लोग यहा बैठीये.. वोस रुम भी पास हे.. तो मेडमको भी तकलीफ नही होगी.. ओर लाइअ‍े मे आपका सामान वेइटींगमे रखता हु.. लगता हे काफी खरीदी कीहे..

लखन : (सृतीको चेरपे बीठाते) हां भाइ.. थेन्क्यु.. वैसे आपका वोस रुम कीधर हे..? मुजे जाना हे..

वेइटर : (मुस्कुराते) सर.. आपके पीछे ही हे.. आइअ‍े दीखाता हु.. फीर ओर्डर ले लुगा..

लखन सृतीको बीठाकर वोसरुमकी ओर चल पडा.. उनको कबसे जोरोकी पीसाब लगी हुइ थी.. वेइटर उनको वोशरुम दीखाकर चला गया तो लखन अंदर घुस गया.. ओर पीसाब करने लगा.. तभी बाजु मे भी अ‍ेक भदा ओर हाइट वाला लडका पीसाब कर रहा था.. दोनो अपना सर जुकाकर पीसाब कर रहेथे.. जब पीसाब होगया तो दोनो हाथ धोने गेन्डीके पास चले गये.. ओर हाथ धोते अ‍ेक दुसरेके सामने देखते हे.. तो देखते ही..

लखन : (जोरोसे हसते) अरे धृव तुम..?

धृव : (जोरोसे हसते) अरे लखन.. तु यहा क्या कर रहा हे..? कब आया सहेर..?

लखन : (हाथ पोछते) यार मेतो अब यहा ही आगया हु.. हमेसाके लीये.. तु यहा क्या कर रहा हे..? सादी बादी की हेकी नही..? की अभी भी लडकीओके चकरमे फसा हे.. हें..हें..हें..

धृव : (हाथ पोछते) यार.. करली सादी.. तेरी भाभीको लेकर डीनर करने आया हु.. आजा गले लगजा यार.. कीतने दीनोके बाद मीला हे..

लखन : (हसते जोरोसे गले लगते) आजा कमीने.. कीतने दिनोके बाद मीला हे.. ना कोइ फोन ना कोइ मेसेज..

धृव : (जोरोसे गले लगते) हां यार.. जब स्कुलसे जुदा हुअ‍े.. तो आज मील रहे हे.. बस.. सीर्फ दीदीकी सादीमे आया था.. बोल.. तुभी डीनर करने आया हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां यार.. फेमीली साथमे हे..

धृव : (हसते) यार तुमने सादी बादी कीहे की नही..? की अभी अपनी बहेनका इन्तजार कर रहा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते अलग होते हाथ थामते) हां यार.. सादी तो नहीकी.. लेकीन सादीया जरुर करली हे.. हें..हें..हें..

धृव : (जोरोसे हसते) क्या..? हां यार.. तुम लोगतो रोयल फेमीली हो.. मुजे पता हे तेरी फेमीलीके बारेमे.. सुना हे बडे भैयानेभी तीन तीन सादया करली हे.. तु बता.. कीतनी बीवीया हे तेरी..

लखन : (हसते) यार अभी तो दो हे.. ओर दो सादी ओर होजायेगी..

धृव : (हसते) कमीना चार चारको सम्हाल पायेगा..? यार तुम लोगोमे अच्छा हे.. कीतनी भी सादी करलो.. कोइ पुछने वाला नही.. पापा कभी कभी कीशन अंकलके बारेमे बात करते हे.. कहेते थे वो भी रंगीन मीजाजके थे.. उनके दोस्त जो थे.. स्कुल कोलेज सबमे उसीका डोनेशन हे.. पापाकी पार्टीको भी खुब डोनेशन दीया हे.. अंकलने बोय्स ओर अ‍ेक लेडीज होस्टेलभी बनवाइ थी.. अरे हां.. क्या हुआ वो तेरी होस्टेल वाली मेडमका..? उनको मीलता हेकी नही..?

लखन : (मुस्कुराते) हां यार.. अ‍ेक बात कहु.. मेने हालही मे उनके साथ सादी करली हे.. बेचारी अकेली हे.. सीर्फ अ‍ेक बुढी मां हे.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे प्यारजो करते थे.. तो सादी करली.. यार मे जब डीपे्रसनमे था.. मेरा खुब साथ दीया हे उसने..

धृव : (मुस्कुराते) चल अच्छा कीया तुमने उनसे सादी करली.. पता हे मुजे.. तुजे डीप्रेशनसे उसीने नीकाला हे.. सुन.. क्या हुआ पुनो दीदीका..? सुना हे उसने कही ओर सादी करली..? यार तुम्हारे खानदानमे तो सब चलता हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां यार.. तुजे तो सब मेरे बारेमे पता हे.. सुन.. वोभी यहा आइ हे.. चल पहेले डीनर करते हे.. फीर तुजे सबसे मीलवाता हु.. ये बता अंकल कैसे हे..? सुना हे मंत्री होगये हे..

धृव : (दोनो बहाकी ओर चलते) हां यार.. मे सब उन्हीका काम देखता हु.. क्या हेना उनके पास अब टाइम ही नही हे.. हमे भी मीलनेके लीये इन्तजार करना पडता हे.. यार आजाना साथमे ही डीनर करते हे.. कीतने दिनोके बादतो मीला हे..
 
लखन : (मुस्कुराते) हां यार वो भी क्या दिन थे.. हमने पुजा दीदीकी सादीमे कीतना धमाल कीया था.. कमीने उनकी सादीके अगली रात तुम दोनोने चोकीदार बना दीया था मुजे..

धृव : (मुस्कुराते) हां यार.. सुन.. इस बारेमे अभी कीसीको पता नही हे.. तो बी केरफुल..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे यार.. बाय ध वे.. कैसी हे वो..? इन्डीया बीन्डीया आती हेकी नही..? क्या उजसे बात करता हे..? मीन्स.. क्या तुम दोनो अभी भी..

धृव : (आंख गीली करते) हां यार.. अभी भी घरपे कीसीको नही पता.. तुजे तो सब पता हे हम दोनोके बारेमे.. सुन.. उनका डीवोर्स हो गया हे.. हाल हीमे पापाने उनकी दुसरी सादी करदी.. अहेमदाबादमे मम्मीकी कीसी कजीनका लडका हे.. बहुत बडे इन्डट्रीयालीस्ट हे.. अ‍ेक बीमारीमे उनकी बीवी गुजर गइ थी.. तो पापाने दीदीकी सादी उनसे करवादी.. अभी भी हम दोनो रीलेशनमे हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) हां यार.. वो वादेकी पकी हे.. लेकीन पुजा दीदीका डीवोर्स कैसे हुआ..? कुछ प्रोबलेम था क्या..?

धृव : (फीकी मुस्कानसे) छोडना यार.. थोडी लंबी कहानी हे.. इस बारेमे बादमे बताता हु.. अभी तो चल साथमे डीनर करते हे..

लखन : (हसते) नही यार हम बहुत लोग हे.. यही बैठे हे.. मेरी बीवीया ओर पुनोदीदी भी हे.. तु भाभीके साथ आरामसे डीनर करले.. फीर आरामसे मीलते हे.. तुम संकोच मत कर.. अबतो मे यही हु.. हम फीर कभी साथमे डीनर करेगे.. फीर वेइटींग रुममे मीलते हे.. वहा सब आइसक्रिम बाइसक्रिम खायेगे.. चल.. मीलता हु..

तो दोनो अपने अपने टेबलकी ओर जाते हे तो सब लोगोको देखकर धृव हसते हुअ‍े हाथ जोडकर सबको नमस्ते करते अपने टेबलकी ओर चला जाता हे.. पुनम उनको देख लेती हे.. तो मुस्कुराती हे.. फीर दोनो अपने अपने टेबलपे बैठ जाते हे.. तो यहा सभी लेडीस अपनी बातोमे मसगुल थी.. तो पुनमके अलावा कीसीका धृवकी ओर ध्यान ही नही गया.. लखन पुनमके पास ही बैठा था..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. इतनी देर कहां थे..? इनके साथ थे क्या..? सायद मेने इनको कही देखा हे.. लेकीन कहा..? याद नही आता..

लखन : (हसते धीरेसे) दीदी ये मेरा खास दोस्त था.. भुल गइ..? अरे वो धृव.. याद आया..?

पुनम : (खुसीसे धीरेसे) अरे हां.. क्या ये धृव भैया थे..? लेकीन कीतने मोटे होगये हे.. मेतो इनको पहेचान भी नही पाइ.. हां कभी कभी आपके साथ होस्टेलपे आते थे.. जब आप मुजे मीलनेके लीये आते थे..

दोनो बाते कर रहेथे तभी वेइटर आकर सबका ओर्डर लेजाता हे.. तो कुछ देरके बाद सबका खाना भी आजाता हे तो सबलोग डीनर करने लगते हे.. तो दुसरी ओर धृवभी अपनी बीवीके पास चला गया.. जीहा.. ये वोही धृव हे.. मंत्रीका बेटा.. ओर सृतीकी डोक्टर फ्रेन्ड भावीकाका पती.. जो अ‍ेक जमानेमे लखन ओर धृव साथमे पढते थे.. ओर धृवके पीताजी कीशनको जानते थे.. तभी धृव बैठा ही था.. तभी..

भावीका : (मुस्कुराते) जानु.. इतनी देर कहा लगादी..? आपकी तबीयत बवीयत तो ठीक हेनां..?

धृव : (मुस्कुराते) अरे अ‍ैसा कुछ नही हे.. यहा अ‍ेक स्कुलका बहुत पुराना खास दोस्त मील गया था.. वो लोग भी वहा डीनर करने आये हे.. गांवमे अ‍ेक रोयल फेमीलीसे तालुकात हे.. उनके पीता पापाके अच्छे दोस्त थे.. स्कुल छोडनेके बाद आज अचानक मील गया मुजे.. मेने तुमको अ‍ेक बार बताया तो था उनके बारेमे..

भावीका : (मुस्कुराते) कौन..? वोही तो नही.. जो अपनी ही बहेनको प्यार करता था.. हें..हें..हें..

धृव : (हसते) हां.. वोही.. लखन नाम हे उनका.. मेरा खास दोस्त था.. मीन्स.. अभी भी हे.. चल पहेले डीनर करले.. फीर मीलवाता हु उसे..

ओर वो दोनो भी डीनर करने लगे.. लखनको मीलनेके बाद पुरे डीनरके दरम्यान आज धृव कुछ भी नही बोला.. तो भावीका कोभी थोडा अजीब लगा.. लेकीन वोभी चुप चाप खाना खाती रही.. धृव डीनर करते भी गहेरी सोचमे डुबा रहा.. उनको अपने अतीतकी याद ताजा होगइ.. जो स्कुलमे लखन पुनमको प्यार करने लगाथा तब अपनी हर बात धृवसे सेर करता था..
 
लखनकी बाते सुनकर वो भी लखनका अनुकरण करने लगा था.. ओर इसके लीये धृवको अपनी बहेनको सेट करनेके लीये कीतने पापाड बेलने पडे थे.. हालाकी उनसे तीन साल बडी थी.. पुजा नाम था उनका.. ओर तब धृवके माता पीता उनके लीये कीसी अच्छे रीस्तेकी तलासमे थे.. धृवके साथ उनकी अच्छी पटती थी.. वो धृवके बारेमे सबकुछ जानती थी.. की धृव अ‍ेक अयास लडका हे..

वाकइ धृवके अंदर लडकीयोको पटानेका अ‍ेक हुनर था.. वो कीसी भी लडकी हो या फीर ओरत.. उनको पटाकर ही दम लेता.. ओर तबतक कोसीस करता जबतक वो उनके नीचे नही लेट जाती.. इनमेसे दो तीन तो पुजाकी सहेलीया भी थी.. जो धृवके साथ उनका बीस्तर गरम करती थी.. लखन ओर पुनमका प्यार देखकर धृवको प्यारकी अहेमीयतका पता चला..

ओर वो खुद मन ही मन अपनी बहेनको पसंद करने लगा.. इसके लीये उसने फेक आइडीका सहारा लेकर उनकी बहेनसे फेसबुकपे दोस्ती करली.. ओर चेट करते करते दोनो अ‍ेक दुसरेको पसंद करने लगे.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे ओर बात कीसी होटलमे मीलने तक पहोंच गइ.. उनकी बहेनको नही पताथा की वो जीसे मीलने जा रही हे वो उनका छोटा भाइ हे..

तो धृव भी कामोतेजक गोलीया.. कोन्डम.. पेइन कीलर गीलोयाके साथ पुरी तैयारी करके गया था.. वो अपने पापाकी रेप्युटेशनका बखुबी फायदा उठाना जानता था.. चाहे उनकी बहेनके साथ जबरदस्ती भी क्यु ना करले.. उनके पापाकी इजतकी वजहसे कीसीको पता नही चलेगी.. दोपहोर लंचके बादही उनकी बहेन पुजा कीसी सहेलीको मीलनेका बहाना बनाकर होटेलपे पहोंच गइ.. नीचे रीसेप्नीस्टको पुछकर जैसे ही रुममे गइ.. पुजा धृवको देखकर चोंक गइ..

पुजा : (चोंकते) अरे धृव तुम..? यहा कैसे..? मीन्स.. क्या वो तुम हो..?

धृव : (जुठ बोलते) दीदी आप..? मुजे क्या पता वो लडकी आप होगी.. सोरी.. सोरी..

पुजा : (थोडा जोरोसे) सोरीके बच्चे.. जुठ मत बोलो तुम.. तुमने ये सब जान बुजकर कीया हेनां..? मे जानती हु तुम्हे.. की तुम कीतने कमीने हो..

धृव : (गलेपे हाथ रखते) नही दीदी कसमसे.. मुजे सचमे नही पताथा की वो लडकी आप होगी.. यार बैठो तो सही.. मे सचमे नही जानता था.. कसमसे..

पुजा : (दांत पीसते अ‍ेक मुका मारते) जुठ मत बोलो.. तुम कीतने कमीने हो वो मे जानती हु..

धृव : (पुजासे बचते जोरोसे हसते) दीदी मुजे सचमे नही पता था.. आपकी कसम..? हें..हें..हें..

पुजा : (जुठे गुस्से हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीने मेरी कसम खाता हे.. अगर सचमे मुजे नही जानते थे.. तो फीर मेने तुमको मेरी पीक्चर भेजी थी वो..?

धृव : (जोरोसे हसते) यार आप बैठोतो सही.. बहुत हाथ चलाती हो.. हें..हें..हं.. वैसे कोनसी पीक्चर भेजी हे आपने..? हें..हें..हें..

पुजा : (बैठते सरमाते धीरेसे) भाइ.. तु सचमे बहुत कमीना हे.. मेने तुमको कइ पीक्चर भेजी हे.. ओर पता नही मुजे बहेला फुसलाकर कैसी कैसी पीक्चरकी डीमांड करके मेरी पीक्चर देखली हे आपने.. ओर उनमे मेरा चहेरातो दीखता था.. भाइ.. सच कहेना.. आपको मेरी कसम.. क्या आप मुजे पहेचान गये थेनां.. सच कहेना वरना मेरा मरा मुह देखोगे..

धृव : (नीचे पैरोके पास बैठते) दीदी.. कसम मत दो.. प्लीज.. आपको सब सच बताता हु.. हां.. मेने ये सब जान बुजकर कीया हे.. मे आपको पहेचान गया था.. अब आप कभी मरनेकी बात मत करना.. वरना आपसे पहेले मे मर जाउगा..

पुजा : (थोडा सखतीसे) देखो धृव.. तुमनां.. तुम्हारे लीये ये सब अच्छा नही हे.. ये सब अ‍ैयासीया छोडदो.. मेरी अ‍ेक भी दोस्तको आपने नही छोडा.. ओर उस दिन आप मीनाको लेकर उनका अ‍ेबोर्सन करवाने होस्पीटल गयेथेनां..? कुछ तो हमारे मम्मी पापाकी इजतका खयाल करो.. कब तक अ‍ैयासीया करते रहोगे.. ओर मेरे साथ भी..?

धृव : (मुस्कुराते) ओर अभी आप यहा कीसी अन्जान लडकेसे मीलने होटेलमे आगइ.. आपको मम्मी पापाकी इजतका खयाल नही आया..?

पुजा : (हसते अ‍ेक मुका मारते) कीतने कमीने हो तुम.. मे.. वो.. भाइ.. मे सचमे उस लडकेसे प्यार करने लगी थी.. लेकीन मुजे क्या पता वो लडका तुम हो.. भाइ.. अ‍ैसा क्यु कीया..? मेरी फीलींग्सके बारेमे तो सोचते..?

धृव : (मुस्कुराते) दीदी.. पहेले सांत होजाओ.. कुछ ठंडा पीते हे.. मेने मंगवाके रखा था.. फीर आपसे अ‍ेक बात पुछता हु..

पुजा : (थोडा गुस्सेसे) मुजे नही पीना तुम्हारा ठंडा.. मे जा रही हु..

धृव : यार तुम इतना गुस्सा क्यु कर रही हो..? देखो धुपमे आइहो बहुत गरमी हे.. अब आही गइ हो तो थोडी बात करले..? मे ठंडा नीकालता हु..

पुजा : (मुस्कुराते) कमीना.. ठीक हे.. नीकालो ठंडा.. वैसे गरमी भी बहुत हे.. बता क्या पुछना चाहता हे..?

धृवको डांटते उनसे बहेस करने लगी.. बडी मुस्कीलसे धृवने उनको सांत कीया ओर उसे समजाकर बेडपे बीठाया ओर बाते करते धृवने दोनोके लीये कोल्डड्रीृंक्स नीकाला.. तब उनकी बहेनको पता नही चलाकी धृवने उनके कोल्डड्रीन्क्समे छुपकेसे कामोतेजक गोली मीलादी हे.. फीर दोनो कोल्डड्रींक्स पीते बाते करने लगे.. ओर धृव बाते करते पुजाको मनाता रहा..
 
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