Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 9 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७३

कहातो तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी तब मंजु देवायतके पास आकर उनसे सटकर बैठ गइ.. तो चंदा ओर दया दोनोही देवायतकी ओर कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी धिरेन ओर पुनमभी शीखंड लेकर आगये.. पुनमने कहाथा इसीलीये रास्तेमे धिरेनने कोइ सरारत नहीकी.. दोनोही प्यार भरी बाते करते रहे.. तब धिरेनने अपने फ्युचरके प्लानींगके बारेमे पुनमसे ढेर सारी बाते करली.. ओर दोनो घर आगये....अब आगे

तब पुनम देवायतकी ओर कातील स्माइल करते शीखंड लेकर कीचनमे चली गइ.. तो धिरेनभी नीचे फ्रेस होने चला गया तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बैठी थी.. ओर दोनो प्यार भरी बाते कर रहेथे.. तब धिरेनभी आके बैठ गया.. तबभी मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बाते कर रहीथी तभी खानाभी बन गया ओर दया पुनम सब खाना डाइनींगपे रखने लगी.. ओर चंदाने सबको बुला लीया..

सभी डाइनींग टेबलपे आगये तब मंजु देवायतके पास बेग गइ तो दुसरी ओर पुनमभी देवायतके साथ बेठ गइ तब मजबुरन धिरेनको उनकी मम्मीके साथ बेठना पडा ओर दया सबको खाना देने लगी.. जब खाना देदीया तो चंदाने उसेभी सबके साथ बीठा दीया ओर सब डीनर करने लगे तब खाना खाते पुनम देवायतके पैरको सहेलाने लगी तभी उनके पेरपे धिरेनका पैर महेसुस हुआ जो उनके पैरको टच कर रहाथा तब पुनम समज गइ ओर सरमाते खाने लगी उसने अपना पैर नही हटाया.. ओर सबने डीनर फीनीस कर लीया..

फीर कुछ देर बैठे बाते करते रहे तबतक अंधेरा हो गयाथा.. तो मंजुने पुनमकी वजहसे देवायतको घर जानेको केह दीया तो चंदा देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगी ओर देवायत पुनमको लेके बहार नीकल गया तब दया वही रुक गइ ओर देवायत पुनम कारमे आके बेठ गये तब देवायतने कार अपने गांवकी ओर जानेदी तभी पुनम देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर बाते करने लगी..

पुनम : भाइ कल मे नही आउगी.. वो..वो धिरेनके साथ कुछ अजीबसा लगता हे.. मुजे नही लगता मे उनके साथ रेह पाउगी, उनको मुजसे मीलन करनेकी बहुत जल्दी हे.. उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. भाइ मे आपके साथ रहेना चाहती हु..

देवायत : पुनो पागल मत बन.. धिरेन तेरा होने वाला पती हे.. ओर तुमसे प्यारभी करता हे.. हमे इन सब चीजोको अ‍ेक्सेप्ट करना पडेगा.. कुुछ सालोकीतो बात हे.. ओर तेरी तो बाबाके साथ सब बाते हुइ हे.. बता कीतने साल उनके साथ रहेना हे.. ओर तु चीन्ता मत कर.. मे वहा आता जाता रहुगा.. आज नही तो कल.. जब तु उनकी बीवी होजायेगी तबतो तुजे उनके साथ सबकुछ करनाही पडेगा जो अ‍ेक बीवीका फर्ज होता हे..

पुनम : भाइ.. बाबा कुछ दो तीन सालका केह रहेथे.. फीर मे आपके पास चली आउगी.. मुजसे आपसे दुर नही रहा जायेगा.. भाइ ये दो रात हमारे पास हे.. इनमे आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो.. वरना मे धिरेनको नही रोक पाउगी.. आज बडी मुस्कीलसे पीरीयडका बहाना बनाके उनसे छुटी हु.. उनको मे ज्यादा दीन मुजसे दुर नही रख पाउगी.. भाइ कुछ ओर हो जाये इनसे पहेले आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो..

देवायत : बेबी.. सादीके बादतो तुजे ये सब करने देनाही पडेगा.. ओर तु बच्चेकी चीन्ता मत कर.. आजही मुजे पता चला हेकी तु प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. बस ये दो दीन सीर्फ हमे मजेही करने हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (जटसे अलग होते आस्चर्यसे) क्या..? मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..? ओर आपको कैसे पता चल गया..? अ‍ेक मीनीट..(कुछ सोचते) भाइ.. कही आपकी भाभीसेतो इस बारेमें बात नही हुइ..? अ‍ेक वोही हे जो सब बाते जान जाती हे.. भाइ सच बताना भाभीसे आपकी इस बारेमे बात हुइ हेनां..?

देवायत : (हसते) हां.. आज उसीने मुजे बतायाकी उनका अंस तेरे गर्भमे आ चुका हे.. पुनो मेने तुजे प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. तेरे गर्भमे हमारा बच्चा आ चुका हे.. अ‍ैसा कहा उसने.. ओर उनको हमारे बारेमे सब पता हे.. तु फीकर मत कर उनको हमारे इस रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. अब हम दोनो भाइ बहेन खुलकर प्यार कर सकेंगे.. अब मे तेरी भाभीसे कहेकर भी तुजे मीलने वहा आ सकता हु.. तब हम दोनो खुब मजे करेगें..

पुनम : (खुस होते देवायतसे लीपटके कीस करते) ओह..भाइ आइ लव यु.. लव यु सो मच.. भाभी कीतनी अच्छी हे.. मुजे पताथा हमारी सब बाते वो जानती होगी.. ओर यही हुआ.. अब मुजे कोइ डर नही हे.. अबतो मे आपसे खुलके प्यार कर सकुगी.. बस अब सीर्फ मेरी सासका खयाल ही रखना हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) पागल मत बन.. सीर्फ मंनुको पता हे तेरी सासको नही.. हम कोइ खुलके प्यार नही करेगे.. पुनो मंजुने कहा हे.. ये दो रातमे आप पुनोको खुब प्यार करना ओर उसे तृप्त कर देना.. आगे जाके पुनम ओर चंदामौसी ही आपको सम्हालेगी.. तब सब ठीक होजायेगा..

पुनम : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? भाभीने अ‍ैसा कहा..? भाइ तबतो आपको मजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. वरना मे भाभीसे सीकायत कर दुगी हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां इतना प्यार करुगाकी तु कल साम तक बेडसे उठ नही पायेगी.. हें..हें..हें.. पुरा दीन आराम करते रहेना.. हें..हें..हें.. ओर वेसेभी कल मुजे मेरे ससुराल जाना पडेगा.. वहा बापुजीकी तबीयत ठीक नही हे.. बस अ‍ेक बार तेरी सादी होजानेदे फीर देखना.. वहा आकर तुजे खुब रगड रगडके चोदुगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते कातील नजरोसे देखते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. ठीक हे दीनमे कही भी घुमो.. रातको आप मेरे पास होने चाहीये.. केह देती हु.. ओर भाइ सादीके बादभी हप्तेमे कमसे कम मुजे पांच दीन मीलोगे.. येभी केह देती हु.. दिनमे बीवी बनकर आपका इन्तजार करुगी ओर रातमे बहेन बनकर आपका बीस्तर गरम करते आपसे खुब चुदवाउगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हें.. हें..हें.. तुभी कुछ कम नही हे.. ठीक हे.. चुदवाना.. ओर हुकुम तो अ‍ेसे दे रही हे जैसे मंजु देती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (कातील स्माइल करते) हां तो फीर..? जीस तराह वो आपकी बीवी हे उसी तराह मेभी आपकी बीवी हु.. ये बात आप भुलना नही वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. हें..हें..हें..(जोरोसे हसते)

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. तुभी हुकुम चलाना.. फीर अ‍ेक ओर आजायेगी हुकुम चलाने वाली.. हें..हें..हें.. वोभी कुछ कम नही हे बीलकुल तेरी तराह मेरे पीछे पागल हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (देवायतकी ओर नैन नचाते हसते) भाइ.. सच बताना.. मे जब गइथी तबतो वो ठीकसे चल रहीथी.. तो क्या आप दोनोने.. मतलब.. दोनोका मीलन हुआ..? जब मे आइ तब वो थोडा लंगडाके चल रही थी.. हें..हें..हें.. भाइ सच बताना.. आपने उनके साथ सेक्स कीया हेनां..?

देवायत : (हसते) हां पुनो.. तुम दोनोके जाते ही वो उपर अपने रुममे मुजे इसारा करते लेगइ गइ.. ओर मेने उनको दो बार जमकर चोद लीया तो बीचारीकी चाइही बदल गइ.. हें..हें..हें.. वो आजभी अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह चुदवाती हे.. बेचारीकी हालत खराब होगइ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) हां तो हो ही जायेगीनां.. आपके गधे जेसे हथीयारको अंदर लेना कोइ बच्चोका खेल नही हे.. आपनेतो पहेली बार मुजे बेहोस ही कर दीयाथा.. कीतना बडा हथीयार हे आपका.. मुजे बेहोसी मेभी चोद लीयाथा.. आप मेरीभी हालत खराब कर देते हो.. लेकीन भाइ मजाभी बहुत आता हे.. जी चाहता हे बस दीन रात आपसे प्यार करती ही रहु.. आप क्या मस्त चुदाइ करते हो.. तभीतो सभी ओरते आपके पीछे पागल हे.. बेचारी वो रश्मीभाभी दो दीन आराम करती रही.. आप कीतनी जोसमे चुदाइ करते हो..

देवायत : पुनो याद आया.. हम दो तीन दीनसे रश्मीसे नही मीले.. वोभी मेरी बीवी हे.. चल जरा देखके जाते हे क्या कर रही हे वो..

पुनम : भाइ देर नही होजायेगी..? आप उसे कल मील लेना.. चलोना घर चले जाते हे.. आपनेतो बातोसेही मुजे गरम करदीया.. भाइ बहुत चुदवानेकी इच्छा हो रही हे.. वो धिरेननेभी गरम करदीया.. भाइ उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. मे क्या करु..?

देवायत : अब तेरा होने वाला पतीहे तो हम क्या कर सकते हे.. तु क्यु चीन्ता करती हे अ‍ेक दो सालकीतो बात हे.. फीर मेरे पास चली आना.. तब तुजे कोइ पुछेगा भी नही.. अब उसे सादी तक नही मीलना.. ओके..?

पुनम : (सरमाते) भाइ जबतक सादी नही होती तबतक आपको मुजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. आप रश्मीभाभीसे बात करलेना.. मे उनके वहा चली जाउगी तब आप आजाना.. आप कार उधर लेलो..

तब देवायत कार सीधी रश्मी यानी राघवके घर लेजाता हे.. तब पुरे गांवमे अंधेरा छाया हुआ था.. कुछ घरोमे हल्की रोशनी नजर आ रहीहे तब देवायत ओर पुनम कारको बहार खडी करके अंदर चले जाते हे तब पुनम गेइट अच्छेसे बंध करलेती हे तब रश्मी राघव वाले रुममे अपने बेडपे लेटे कुछ कीताब पढ रहीथी.. तो देवायत ओर पुनमको देखते जटसे खडी होगइ ओर खुसीसे उछलते हसते हुअ‍े देवायतके गले लग गइ..

रश्मी : (हसते) क्या बात हे.. आज इस बीवीकी याद आगइ..? वो भी मेरी इस बहेन लाइ होगी.. तभी जनाब आये हे.. हें..हें..हें.. क्यु ठीक कहानां पुनो..?

पुनम : (हसते सरारतसे जुठ बोलते) ओर नहीतो क्या..? दीदी येतो आनेकोही तैयार नही थे.. मे जबरदस्तीसे इनको खीचके लाइ हु.. हें..हें..हें.. लो करलो प्यार हमारे पतीको..

देवायत : (हसते) अच्छा.. तो फीर आज मे मेरी इस बीवीके साथ इधरही रुक जाता हु हें..हें..हें..

पुनम : (जटसे हसते) नही नही नही.. दीदी.. मे नही.. ये मुजे जबरदस्ती इधर लाये हे.. हें..हें..हें..

कहातो तीनो हसने लगे तब रश्मीने देवायतके होंठ चुमलीये ओर अलग होकर पुनमको गले लगा लीया फीर उनका हाथ पकडते बेडपे बीठादीया तब देवायत वही राघवके बेडके पास पडी चेरपे बैठ गया ओर राघवकी ओर देखते हसते हुअ‍े उनका हालचाल पुछने लगा तो राघव गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तब..

रश्मी : देखा देवु.. खटीया मे पडे हे हीलनेकी भी ताकात नही हे.. ओर गुसातो देखो.. (राघको) देखलो इनको अच्छेसे.. अब यही मेरा पती हे.. जो मुजे मां बननेका सुख देगा.. आज मे इन्हीकी वजहसे पेटसे हुइ हु.. ओर मुजे मुनीमकी जगाह नोकरीभी दे दी.. अब आपके सब करतुत मे गांव वालोके सामने लाउगी.. सबकी जमीन वापस कर दुगी.. बहुत दुख दीये हां गांव वालोको.. अब पडे भुगत रहे हे..

पुनम : (धीरेसे) भाभी छोडीयेना इनको.. अपनी करतुतोकी सजातो इनको मील गइ हे..

रश्मी : पुनोदीदी आप नही जानती.. इन कमीनेने मेरे साथ ओर गांवकी ओरतोके साथ क्या क्या जुल्म कीये हे.. अ‍ेकभी लाचार ओरतको नही छोडा.. यहा तक की बेचारे मजदुरोकी बीवीयोकोभी नही छोडा.. सामनेसे पैसे देके ब्याजके बदले उनका फायदा उठाते थे.. कइ ओरतोको तो यहा बुलकर रेपभी करलीया हे.. अपनी बहेनके साथभी इनका चकर था.. ओर मेरे पले पड गये.. अब पडे सब भुगत रहे हे..

कहा तो राघव रश्मीकी ओर देखते गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तो रश्मी राघवके सामनेही हसती हुइ देवायतकी गोदमे बेठ गइ.. ओर गलेमे दोनो हाथ डालके देवायतके होंठ चुमने लगी.. तब देवायतभी रश्मीके बुब्स मसलते होंठ चुमने लगा तो राघव दुसरी ओर मुह करते गुसेसे आग बबुला होने लगा.. तो पुनम दोनोको देखते सरमाते हसती रही.. तभी रश्मी गोदसे उठ जाती हे ओर खडी होके अपनी सारी नीकालने लगती हे.. तो राघव उसे घुरके देखने लगा..

तो रश्मी उनके सामने देखते ब्लाउसभी नीकालने लगी तभी देवायतने उनकी पेटीकोटका नाडाभी खीच लीया.. तो पेटीकोट सरकते नीचे गीर गया तब रश्मी सीर्फ टु पीसमेही रेह गइ.. जेसे कोइ अप्सरा दीखती हो.. ओर उसने देवायतका हाथ पकडके खडा करदीया ओर कातील स्माइल करते देवायतकी ओर देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. फीर पेन्टकी क्लीप खोलके उसेभी नीकाल दीया ओर हाथ पकडके देवायतको वही बेडकी ओर लेगइ..

रश्मी : जानु.. अ‍ेक बार इनके सामने ही मुजे चोदलो.. ओर मेरी बहुत इच्छाभी हे.. दीदी क्या आपभी हमारे साथ सामील होगी..? आइअ‍ेना अब हमारे बीच कैसा पर्दा..हम दोनो मीलकर हमारे पतीको खुब प्यार करेगी..

पुनम : (सरमाते हसते) नही दीदी आपही प्यार करलो.. हमतो घर जाकेही सब करेगे.. आज पुरी रात बाकी हे.. मे इनको छोडने वाली नही हु.. इनको आज सोनेही नही दुगी.. हें..हें..हें..

रश्मी : (बेडपे पीठके बल हसते हुअ‍े लेटते) हां.. भाइ.. अब भाभी नही हे तो दोनोके तो मजे हे.. आपनेतो अभी नइ नइ सादी कीहे.. तो हर रात सुहागरात होगी.. दीदी आपकी सादीसे पहेले जी भरके मजे ले लो.. फीर पता नही ये कब आपके हाथ आयेगे..

कहातो पुनम अ‍ेकदम सरमा गइ ओर मुह दुसरीओर घुमाते मुस्कराती रही.. तब देवायतने रश्मीकी ब्राभी नीकालदी ओर उनकी पेन्टीमे उंगलीया फसाके खीचते नीकालने लगा.. फीर उनकी चडीभी नीकालदी तब देवायतका वीकराल लंड रश्मीकी चुत देखके जटके मारने लगा.. ओर देवायत रश्मीके उपर जुकते लेट गया तब रश्मीने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होंठ चुमने लगी..

तब देवायतभी उनके बुब्स दबाते रश्मीका साथ देने लगा.. तब उनका लंड रश्मीकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलमे घुसनेका रास्ता ढुंढने लगा.. तो रश्मीकी चुतभी लंडको अपने बीलमे लेनेके लीये फडफडाते पानी छोडने लगी.. दोनोही आजु बाजु सब कुछ भुलकर अ‍ेक दुसरेके मुहमे मुह डालके कामातुर होगये.. तब देवायतके लंडने अपने बीलका रास्ता अपने आप ढुंढ लीया..

तो देवायतने कमरको अ‍ेक जटका मारदीया तभी रश्मीकी चीख नीकलके देवाफतके मुहमे दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ ओर देवायतको देखने लगी.. तब देवायतने मुह हटालीया ओर हाथके बल उचा होगया.. तब रश्मी जोरोसे सीसकारीया करने लगी ओर छटपटाते दर्दसे तीलमीलाती रही.. तब देवायत उसे कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा तो रश्मी अपने मुहपे हाथ रखते हल्कासा चीखने लगी.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकलने लगे..





पुनम : (देखते हसते) भाइ.. धीरे करोना.. अ‍ैसे जानवरोकी तराह भाभीको क्यु चोद रहे हो? भाभीको दर्द हो रहा हे..

देवायत : (चोदते) बेबी क्या करु इस बीवीको देखके पागल हो जाता हु.. मुजसे रहा नही जा रहा.. जी चाहता हे तेरी तराह इनको भी दीन रात चोदता ही रहु.. तुभी आजाना.. आज दोनोको यही पटक पटकके चोदलु..

रश्मी : (दर्दसे मुह बीगाडते धीरेसे चुदवाते) पुनमदीदी.. इनको जोभी करनाहे करने दीजीये.. मेनेही इसे अ‍ैसे चोदनेके लीये छुट दे रखी हे.. मुजे अ‍ैसे वाइल्ड सेक्सही पसंद हे.. क्या मस्त चोदते हे.. भलेही मुजे दर्द हो.. ओर आपभी आजाओ.. हम दोनो मीलकर पुरी रात इनसे चुदवायेगी..

पुनम : (सर्मसार होते हसते) नही भाभी.. अभी तो आपही चुदवालो.. मे घर जाकर चुदवाउगी..





देवायत रास्तेमे पुनमसे चुदाइकी बाते करते गरमतो थाही.. तब देवायत रश्मीको जोरोसे कमर हिलाते चोदने लगा तो रश्मीभी चीखे मारते देवायतसे कमर उछाल उछालके चुदाइमे साथ देने लगी.. ओर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी तब रश्मी ज्यादा देर टीक नही पाइ ओर देवायतको अपनी ओर खीचके कसके बाहोमे भीचते लीपलोक करलेती हे तो देवायतका सरीरभी अकडने लगा.. ओर उसने रश्मीकी चुतमे लंडको जडतक घुसा दीया.. ओर कमरको रुक रुककर जटके मारने लगा.. ओर दोनोही अ‍ेक साथ पानी छोडते जडने लगे..





तब रश्मी देवायतके होंठ भीचते देवायतकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर अपने गर्भपे देवायतका गरम गाढा पानी महेसुस करने लगी.. जब देवायतने होंठ छोडातो रश्मीके होंठोपे खुन उभर आया ओर उनके होंठ सुजने लगे तब देवायत रश्मीके उपरसे हट गया तो लंड फचच... आवाजके साथ बहार नीकल गया ओर वो बाथरुममे चला गया तब रश्मी कोनीके बल बेठते अपनी पेन्टीसे चुत साफ कर रहीथी.. तब पुनम उनके पास बेठते सामने देखते सरमाती हस रहीथी.. तब देवायत बहार आके अपने कपडे पहेनने लगा तो रश्मी अ‍ेसेही वापस बेडपे लेट गइ..

पुनम : (हसते) भाभी होगइ तसली.. देखो आपके होंठ सुज गये हे इतनी तकलीफ से क्यु करती हो..?

रश्मी : (सरमाते हसते होंठ चेक करते) पुनोदीदी आप नही समजोगी.. ये बहुत कम मेरे हाथमे आतेहे.. तो इनका दीया दर्द मुजे प्यारका अहेसास करवाते रहेता हे.. ओर इनकी यादोमे दीन नीकल जाता हे.. बस.. आपभी अपनी सादीके बाद कभी अ‍ैसी ट्राइ करना.. बहुत मजा आयेगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी तबकी तब देखेगे अभीतो आप आराम करलो.. अब हम घर चलते हे..

फीर दोनोही वहासे नीकलकर अपनी हवेलीपे आजाते हे.. तब हवेलीपे आज कोइ नहीथा.. ओर रजीया अकेलीथी तब मनही मन खुस होने लगीकी चलो आज दया नही हेतो बीना डरके पुरी रात लखनसे चुदवायेगी.. यही सोचते आज वो अच्छी तराह सज सवरके तैयार होगइ ताकी लखनको रीजा सके.. अबतक वो लखनसे चारसे पांच बार चुद चुकीथी.. ओर लखनके लंडसे आदी होगइ थी.. अब उसेभी लखनका साथ अच्छा लगने लगाथा.. ओर हमेसाके लीये लखनके साथ जुडनेका सपना देखने लगीथी..

क्युकी देवायत अब उसे बहुतही कम टाइम दे पाता था.. अभी पुनम देवायत नही आयेथे तब सामको लखन घरपे आया तो रजीयाको अकेला देखके पुछ लीया तो रजीयाने उसे बता दीयाकी सब कहा गये हे.. कहेके वो कीचनमे खाना नीकालने चली गइ.. तब लखन सुनकर बहुतही खुस हो गया.. ओर फ्रेस होकर सीधा कीचनमे चला गया.. ओर जातेही रजीयाको पीछेसे बाहोमे भरके दबोच लीया तब रजीया सरमाते हसते हुअ‍े पलट गइ.. तो लखन उसे अपनी बाहोमे कसके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा..

रजीया : लखनभैया प्लीज.. अभी नही वो लोग आजायेगे.. हम रातमे करेगेनां.. आज दयाभी नही हे.. पुरी रात आपके साथ रहुगी.. छोडीयेनां मुजे.. अभी मुजे काम करने दीजीये.. फीर मुजे प्यार करलेना..

लखन : (कामुक्तासे) बस.. रजीया अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार करनेदे.. आज तु कयामत लग रही हे.. मुजे बोलना चाहीयेना घरपे कोइ नही हे.. मे जल्दी आजाता.. बस अ‍ेक बार चोदलेने दे.. फीर रातमे आरामसे करेगे.. तुजे अकेली देखके बहुत मन हो रहा हे.. अभी करलेगे.. चलनां.. क्या मस्त लग रही हे तु..

कहातो रजीया सर्मसार होते मुस्कराने लगी.. ओर लखनको चुमनेमे साथ देने लगी.. उनको पताथा अभी लखन उसे चोदे बीना मानने वाला नही हे तब उनकीभी चुत फडफडाते पानी छोडने लगी.. ओर वो लखनके होंठ चुमने लगी.. तब लखन पागल जेसा होगया ओर रजीयाका टोप खीच लीया तो वो फट गया ओर रजीयाके बुब्स बहार जांकने लगे तभी लखनने उनका लोअर ओर चडीभी खीचके नीकाल दी..

ओर खुदने भी फटाफट पेन्ट नीकालदी तब रजीया समज गइकी ये उस्े चोदे बीना मानने वाला नही हे अबतो मेरी कुटाइ करतेही मानेगा.., ओर लखनने रजीयाको वही जुकाके घोडी बना लीया.. तब रजीयाभी लखनका साथ देते कीचनका प्लेटफोर्म पकडते जुक गइ.. ओर होने वाले हमलेके लीये तैयार होगइ.. तभी लखनने लंड कपडते पीछेसे चुतमे घुसा दीया तो रजीया दर्दसे मुह बीगाडने लगी..

ओर कीचनका प्लेटफोर्म कसके पकडलीया.. तब लखन उनकी कमरको पकडके सोट मारते रजीयाको चोदने लगा ओर रजीया जुकते चुदवाने लगी.. तब थोडी देरके बाद उनकोभी मजा आने लगा ओर वो सीसकारीया करते अपनी कमरको पीछे धकेलते चुदवाने लगी.. रजीयाभी बहुत कामुक्त ओरत थी.. ओर चुदवानेकी काफी सौकीनभी थी.. तब आज उजकी पहेली बार जबरन ओर जबरदस्त चुदाइ हो रहीथी..





आज लखन उसे काफी देर तक खडे खडे चोदता रहा तो रजीयाभी खुस होने लगी.. तभी अचानकही लखन तेज चोदने लगा तो रजीयाकी हालत पतली होने लगी ओर ओर दोनोही अ‍ेक साथ जडने लगे.. तब रजीया मनही मन खुस होगइ की चलो आज उनकी अच्छेसे चुदाइ हुइ हे ओर दोनो अलग होगये.. तब रजीया अ‍ेक पैर उचा करते अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी ओर सरमाते हसती रही.. तो लखनभी खुस होके हसता रहा.. ओर अपना लंड पोछते चडीमे अ‍ेडजेस्ट करने लगा.. तभी..

रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया आप बहुत नोटी हो.. अ‍ैसेभी कोइ करता हे.. हम रातमे आरामसे प्यार करतेनां.. अबतो दया मौसीके घर गइ हे तो मे अब अकेली ही हु.. ओर सायद आप दोनोकी सादीके बाद मे अकेलीही रहुगी.. दयाभी सायद पुनमदीदीके साथ जा रही हे..

लखन : (बाहोमे भरते) चलो अच्छा हे.. रजीया आज तुम अकेली थी तो दो पहोरको मुजसे कहा क्यु नही..? मे पहेलेही आजाता.. आज बहुत इच्छा हो गइथी.. ओर अबतु मुजे बहुतही अच्छी लगने लगी हे.. पता नही तुजे देखते मे पागल होजाता हु.. कही मुजे तुमसे प्यारतो नही होगया..? क्या मेरी सीक्रेट बीवी बनेगी..?

रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया हमतो आपकी नौकरानी हे.. हमारे अ‍ेसे नसीब कहा जो आप हमे प्यार करने लगे.. मुजे बीवी बनालीयातो कही मालीकको पता चल गयातो आपकोतो कुछ नही कहेगे.. लेकीन हमे मार मारके नोकरीसे जरुर नीकाल देगे.. इसीलीये ये प्यार ब्यारका चकर छोडीये.. में कहा आपको चुदवानेके लीये मना कर रही हु.. जबभी मन करे मुजे इसारा करदीजीयेगा मे हाजीर हो जाउगी.. तब जी भरके मुजे चोद लीजीयेगा.. अब मुजेभी आपसे चुदवानेमे बहुत अच्छा लगता हे..

लखन : (अपनी पेन्ट पहेनते) नही रजीया.. हमने तुम दोनोको कभी नौकरानी नही माना.. हम तुम दोनोको अपने घरकी सदस्यही मानते हे.. तु अपने आपको नीचा मत समज.. ओर सच कहु तो मुजेभी तुम्हारी आदत पड गइ हे.. जब मे तुजे दीनमे अ‍ेक बार चोद नही लेता मुजे कही चेइनही नही मीलता.. सच केह रहा हु..

रजीया : लखनभैया अब आपकी सादी होने वाली हे.. जब लताभाभी आजायेगी ओर उनसे हर रात चुदाइ करने लगोगे तब ये रजीयाको भुल जाओगे.. इसलीये केह रहीहु अपने मनसे ये प्यारका भुत उतारदो..

लखन : नही रजीया मुजे सचमे तुमसे प्यार हो गया हे.. ओर तबकी तब देखेगे.. लेकीन मे तुजे अ‍ैसेही प्यार करता रहुगा पहेले तुजे इस नजरसे नही देखाथा तबकी बात अलग हे.. लेकीन अब तु मुजसे अ‍ेक बीवीकी तराह चुदवाती हे ओर मुजे सब सीखा दीया.. तो मे तुजे अब नही छोड सकता.. तुम मुजे प्यार करो या ना करो.. मे तुमसे प्यार करता रहुगा.. भलेही लता आजाये.. मे तुजे नही भुलुगा.. ओर इसी तराह तुजे प्यार देता रहुगा.. आइ प्रोमीस.. ओर जरुरत पडी तो मे तुमसेभी सबसे जुपकर सादी करलुगा..

कहेते लखन कीचनसे बहार नीकल गया तो रजीयाभी भावुक होकर अपने कपडे पहेनने लगी तब उनका टोप फटा हुआ पाया तो वो अपने रुममे जाकर चेन्ज करके आगइ.. तबतक लखनभी डाइनींगपे आकर बैठ गया ओर रजीया खाना नीकालने लगी तो लखनने उनकाभी खाना नीकालने कहा ओर अपनी गोदमे बेठनेके लीये कहा तो रजीया सरमाते लखनकी गोदमे बेठकर उसे खाना खीलाते खुदभी खा रहीथी..

जब खाना फीनीस कीया तब लखनने रजीयाको भाइके आजानेके बार उपर तैयार होकर आनेको कहा तो रजीयाने सरमाते हसकर हां मे गरदन हीलाके हां केह दीया.. ओर मनही मन बहुत खुस होने लगी.. क्युकी आज लखनने उनसे प्यारका इजहार कीया जो वो पहेलीबार कीसीका प्यार पा रहीथी.. ओर मनही मन लखनको समर्पीत होनेका सोचते उनके सपने देखते देवायत ओर पुनमका वेइट करते बेठी थी..

तभी देर रात देवायत ओर पुनम आगये तब रजीयाने सब दरवाजे अच्छेसे बंध करलीया तब पुनमने उसे दोनो खाना खाकर आयेहे कहा.. ओर रजीयाको सोनेके लीये बोल दीया ओर देवायत पुनम अपने अपने रुममे चले गये.. जैसे कोइ अ‍ेक दुसरेसे अन्जान हो.. तब रजीयाभी अपने रुममे चली गइ ओर नहा धोके बाथरुमसे बहार आइतो उसे अपनी सादीका जोडा याद आगया.. तो उनके चहेरे पे सरमसे स्माइल आगइ ओर वो सादीके कपडे नीकालके पहेनने लगी.. फीर अच्छेसे शींगार करते तैयार होने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७४

तभी देर रात देवायत ओर पुनम आगये तब रजीयाने सब दरवाजे अच्छेसे बंध करलीया तब पुनमने उसे दोनो खाना खाकर आयेहे कहा.. ओर रजीयाको सोनेके लीये बोल दीया ओर देवायत पुनम अपने अपने रुममे चले गये.. जैसे कोइ अ‍ेक दुसरेसे अन्जान हो.. तब रजीयाभी अपने रुममे चली गइ ओर नहा धोके बाथरुमसे बहार आइतो उसे अपनी सादीका जोडा याद आगया.. तो उनके चहेरे पे सरमसे स्माइल आगइ ओर वो सादीके कपडे नीकालके पहेनने लगी.. फीर अच्छेसे शींगार करते तैयार होने लगी....अब आगे

इधर पुनमभी नहाने चली गइ देवायतभी रश्मीको चोदकर आयाथा तो वोभी नहाने चला गया.. फीर बहार आकर दोनोने अपने अपने नाइटके कपडे पहेन लीये तब पुनम मीररके सामने बेठते हल्कासा शींगार करने लगी.. वेसेभी वो नेचरल ब्युटीतो थी ही लेकीन शींगारसे वो कीसी कांचकी पुतलीकी तराह अप्सरा जैसी दीखने लगी.. जीसे देखकरही देवायत पागल हो जाता.. जब सज सवरके तैयार होगइ तो अपने रुमकी सब लाइटे बंध करके बहार आगइ ओर बहार जांककर देखा तो बहार कोइ नही दीख रहाथा.. तब वो धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध करके देवायतके रुमकी ओर चली गइ..

तब देवायत बेडपे लेटे पुनमका इन्तजार कर रहाथा.. तभी पुनम तैयार होकर आगइ ओर धीरेसे दरवाजा लाइट बंध करके देवायतके पास जाके उनकी बगलमे लेट गइ.. तो देवायतने उसे देखतेही अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उनके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा आज वो पुनमको देखकर पागल हो गयाथा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. तब थोडी देरके बाद दोनोही कामाग्नीमे जलने लगे ओर दोनोके बदनसे अ‍ेक अ‍ेक करके सभी कपडे हटने लगे.. कुछही देरमे दोनोके नाइटके कपडे ओर चडी पेन्टी ब्रा सब अ‍ेक कोनेमे साथमे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहेथे..

आज दोनोही कबसे अ‍ेक दुसरेमे समा जानेका मन बना चुके थे.. जबसे देवायतने पुनमके होंठ चुमते उनके उरोजोके साथ खेलना चालु कीया तबसे पुनमकी नाजुक चुतकी पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी थी.. वो चाहती थी उनका भाइ जल्दसे जल्द अपना मुसल हथीयार उनकी चुतमे घुसादे.. तो दुसरी ओर देवायतका लंडभी पुनमकी चुतको देखकर जटके पे जटका मारते उनके बीलमे घुसनेको बेकरार हो रहाथा..

तब दुसरी ओर थोडी देरके बाद रजीयाभी अपने रुमसे सादीके जोडेमें बहार नीकलते अंधेरे मे सब जगाह नजर घुमाते दबे पांव कीचनमे चली गइ.. ओर दो दुधका ग्लास भरके अ‍ेक ग्लासमे अपने पास पडी अ‍ेक कामोतेज्नाकी गोली डालके हीलाने लगी.. फीर धीरेसे उपरकी मंजीलकी सीडीया दबे पांव चडने लगी ओर लखनके रुमके पास आगइ.. तब अ‍ेक बार फीर चारो ओर नजर घुमाते धीरेसे दरवाजा खोलकर लखनके रुममे चली गइ तब लखन चुदाइकी वजहसे बेडपे आधी नींदमे सो रहाथा.. ओर रजीया के बारेमे सोचता रहा..

लखन : (आंख बंध करते मनमे) की रजीया कैसे उसे सेक्सका ज्ञान दे रही थी.. जैसे वो सचमे उनकी बीवी हो.. ओर दीखतीभी सेक्सी हे.. क्या सचमे मे उनसे प्यार करने लगा हु..? मुजे पहेले पता होतातो मे उसे कबका चोद चुका होता.. जो भी हो अब मे उसे रखेल नही मेरी सीक्रेट बीवी बनाके रखुगा.. भलेही मेरी दो दो बीवीया हो.. मे उसे बच्चाभी दुंगा.. ओर लताकोभी मना लुंगा..

तो दरवाजेकी आहट सुनके लखन आंख खोलकर देखने लगा तब वो जटसे बेडपे बेठ गया क्युकी रजीया अ‍ेक दुल्हनके लीबासम तैयार होकर आइथी.. तब लखन रजीकाको दुल्हनके लीबासमे देखकर खुसीके मारे पागल जैसे होने लगा तभी रजीया हसते हुअ‍े दुधका ग्लास वही टेबलपे रखके दरवाजा लाइट बंध करने लगी.. फीर वो बेडकी ओर बढ गइ ओर धीरेसे बेडके बीच पैर धुटनोसे मोडके अपने दोनो हाथ घुटनोपे रखकर घुंघट नीकालके नजर जुकाकर बैठ गइ.. तब लखन उसे मुह फाडके देखताही रहा..





रजीया : (सरमाते धीरेसे) लखनभैया अब देखतेही रहेगे की अपनी दुल्हनको प्यारभी करेगे.. देखीये में ये सब आपहीके लीये तैयार होकर आइ हु.. अब आपने मुजे अपनी सीक्रेट बीवी जो मानलीया हे.. तो मेराभी फर्ज बनताहे मे मेरे पतीको हमारी सुहागरातका अहेसास करवाउ..

लखन : (उनको बाहोमे भरते) ओह..रजीया.. आइ लव यु.. आइ लवयु सो मच.. मुजेतो यकीन ही नही हो रहाहे की मे आज तुम्हारे साथ सुहागरात मनाउगा.. क्या मस्त दुल्हन बनके आइ हो.. इस लीबासमे तु बहुतही खुबसुरत लग रही हो.. अबतो सचमे तुजे अ‍ेक बीवीकी तराहही रखुगा..

रजीया : (सरमाते हसते धीरेसे) अब घुंघट उठाइअ‍े.. इनमे बीवीको बडीया गीफ्ट देनी पडती हे.. आपको मालुमतो हेनां..? अभी आपके पास कुछ होगातो नही तो बादमे दे दीजीयेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते रजीयाके पास बेठते) हां रजीया.. तुमने मुजे बहुत कुछ ज्ञान दीया हे.. तुजे मे जरुर गीफ्ट लाकर दुंगा.. ओर अ‍ेक गीफ्टतो अ‍ैसी दुगा जो इसके लीये तु कही सालोसे तरस रही हे..

रजीया : (सरमाते हसते) अच्छा.. कोनसी गीफ्ट दोगे मुजे..? बताइअ‍ेनां..

लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. अगर भगवानने चाहातो मे तुजे हमारा अ‍ेक बच्चाभी दुंगा.. ओर उनको मेरा नामभी दुगा.. आजसे तु मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. बस कुछ महीनो ये बात सबसे छुपाले.. फीर मे तुम ओर लता हमारी अ‍ेक अलग दुनीया बसायेगे.. तब मे तुजे सबके सामने स्वीका करलुगा..

रजीया : (आंख गीली करते) लखाभैया अभी कोइ जल्द बाजी मत करना.. मुजे खुसी हे आपने मुजे अपनी बीवीका दरजा दीया ओर हमारे बच्चेको आपका नामभी देनेको तैयार होगये.. लेकीन अभी सम्हलके.. हम इस घरको छोडकर कही नही जाना चाहते.. हम आपकी बीवी बनके इधरही रहेना चाहती हे..

लखन : (हसते) ठीक हे.. तो फीर मेभी यही रहुगा.. वरना बडेभैया सहेरमे अ‍ेक बंगला लेनेकी बात कर रहे थे..

रजीया : लखनभैया आप बडेभैया ओर भाभीको कभी मत छोडना.. वो आपको ओर पुनमदीदीको बहुत प्यार करते हे..

कहातो लखन भी हसने लगा ओर रजीयाका घुंघट धीरेसे उठालीया तब रजीया बहुतही सरमाने लगी जेसे आज सचमे उनकी सुहागरात हो.. वो लखनको दुध पीलाकर बाते करते सब सीखाती रही ओर कुछ देरके बाद दोनोही जन्मजात नंगे होगये.. ओर प्यारके आगोसमे चले गये.. दोनोही आज कामातुर होके अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलने लगे ओर सीक्स नाइन पोजीसनमे प्यार करने लगे.. तब लखनके बदनमे गोलीका असर होने लगा.. ओर वो रजीयाकी चुदाइ कनेके लीये बेकरार होने लगा..





तो रजीयाभी लखनके साथ मीलन करनेके लीये बेकरार होने लगी.. ओर वो बेडपे पैर फेलाकर लेट गइ ओर लखनको खीचकर अपने उपर चडा दीया.. फीर कुछही देरके बाद दोनोका जीस्म अ‍ेक होगया ओर प्यारके नसेमे चुदाइ करने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेमे मसगुल होगये..

तब लखन होले होले रजीयाको चोदने लगा तो रजीयाभी मदहोसीके नसेमे आंधी आंख चडाते लखनसे चुदवाने लगी.. आज लखनका लंड उसे अपनी नाजुक चुतमे अ‍ेक स्टीलके रोडकी माफीक फील हो रहाथा.. आज वो सुहागरातका पुरा मजा लेना चाहती थी.. इसीलीये लखनको कहे बगैरही पहेलीबार वियाग्राकी गोली पीलादी.. ताकी लखन उनकी पुरी रात जमकर चुदाइ कर सके..





तब नीचेकी ओर देवायत ओर पुनमभी चुदाइमे मसगुल थे.. आजकल काम ओर रती देवायत ओर पुनमपे कुछ ज्यादाही महेरबान थे.. दोनोही अ‍ेक पती पत्नीकी तरार बीन्दास चुदाइ कर रहेथे.. आज हवेलीपे कोइ नहीथा तो पुनमकोभी डर नही था ओर वो जोरोसे सीसकारीया करते देवायतको अपने उपर चडाके मजेसे चुदवा रहीथी.. ओर अपनी कमर हीलाते देवायतका साथ दे रही थी.. तो देवायतभी पुनमके गलेको चुमते उसे धीरे धीरे चोद रहाथा.. तब पुनम आधी आंख चडाते चुदाइके नसेमे छाइ हुइथी..





देवायत पुरी रात अपना लंड पुरा खीचके जड तब घुसाते आगेसे.. पीछेसे.. साइडमे लीटाकर बेठे बेठे.. पुनमकी जमकर चुदाइ करता रहा.. ओर उनकी नाजुक चुतको भरता रहा.. ना जाने पुरी रातमे पुनम कीतनी बार जडी होगी.. लेकीन देवायत पुनमकी पुरी रातमे पांच बार धमासान चुदाइ कर चुकाथा.. तब पुनमकी चुत सुजकर पांव जैसी हो गइथी.. फीर दोनोही नहाके नंगे अ‍ेक दुसरेसे चीपकके वही सो गये.. तो उपरकी ओर आज लखनभी उछल उछलके रजीयाकी जमकर चुदाइ कर रहाथा ओर चुदाइका दोरभी लंबा चल रहाथा..

अब लखन चुदाइमे अनाडी नही रहा.. वो अब रजीयाको बरोबर संतुस्ट करता रहा.. लखनने पुरी रातमे रजीयाकी चार बार धमाकेदार चुदाइ करली.. ओर रजीयाकी चुतको अपने पानीसे सींचके हरी भरी करदी.. दो बारकी चुदाइमेतो रजीयाको तीन तीन बार जडा चुकाथा ओर ये सब उस गोलीका कमाल था.. लखन अबभी रजीयाकी धजमकर चुदाइ कर रहाथा तब आज पहेली बार रजीया भी चुदाइ करवाते थकके चकनाचुर हो चुकी थी.. उनके सरीरका अ‍ेक अ‍ेक अंग लखनने चोद चोदके ढीला कर दीयाथा.. ओर उनकी चुत भी दर्द कर रही थी..





आज कीतने अरसोके बाद रजीयाकी अ‍ैसी धमाकेदार चुदाइ हुइ थी.. जब दोनो साथमे जड गये तब रजीया हीलने तककी स्थीतीमे नहीथी.. तब लखन रजीयाको गोदमे उठाके बाथरुममे लेगया.. ओर दोनोने नहा लीया फीर बहार नीकले तो रजीयाकी चाल आज बदल चुकीथी.. जीसे देखके लखन बहुतही खुस हो रहाथा ओर अपनी मर्दानगी पर गौरव कर रहाथा.. ओर रजीया वही लखनके पास अ‍ेक बीवीकी भांती उनसे चीपकके सोगइ.. नेसे लखन उनका सचमे पती हो..

सुबह सभी बहुत देरसे जागे.. तब रजीया जागतेही गभरा गइ.. ओर फटाफट अपने कपडे पहेनकर नीचे अपने रुममे चली गइ.. ओर नहाने लगी अच्छा हुआ होलमे कोइ नहीथा तो बच गइ.. यही सोचते वो नहाने लगी.. तब पुनम ओर देवायत अभीभी अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकके सोयेथे.. तब बहार कीसीके चलनेकी आवाज आइतो पुनमकी आंख खुल गइ ओर वो बेडसे उतरकर अपने नाइटके कपडे पहेनने लगी..





फीर देवायतके पास चली गइ ओर उसे प्यारसे देखते होंठ चुमते जगा दीया.. तो देवायतने उसे खीचके अपने उपर गीरा दीया ओर उनको बाहोमे भरके होंठ चुमने लगा तब थोडी देर पुनमभी बहेकके उनका साथ देते गरम होने लगी.. फीर अचानक अलग होगइ ओर देवायतका हाथ खीचके खडा करदीया ओर हसते हुअ‍े बाथरुममे धकेल दीया फीर देवायतके कपडे बेडपे रखके खुदभी अपने रुममे चली गइ.. ओर बाथरुममे धुसके अपनी चुतको सहेलाते नहाने लगी..





तब रजीया फटाफट नहाके तैयार होगइ ओर सबके आनेसे पहेलेही कीचनमे घुस गइ.. उसे अभीभी अपनी चुतमे मीठासा दर्द हो रहाथा.. वो आज बहुतही खुस लग रहीथी ओर फटाफट चाइ नास्ता बनाने लगी तभी पुनमभी तैयार होके बहार आगइ ओर रजीयाके पास जाकर वापस देवायतके रुममे चली गइ तब देवायतभी कंपलीट हो चुकाथा तभी पुनम उनके पास चली गइ ओर उनके हाथमे सींदुरकी डीबी थमादी..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) चलीये पतीदेव.. फटाफट अपनी बीवीकी मांग भर दीजीये.. अबतो मे आपके हाथोसेही अपनी मांग भरवाउगी.. पता हेना वो राजाभी यही करता था.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते पुनमकी मांग भरते) तो मे थोडीनां वो राजा हु.. तेरेभी क्या क्या सोक हे..

पुनम : (मीररमे मांग छुपाते) तो फीर.. आपतो मेरे लीये वोही राजा हो.. चलो फटाफट चाइनास्ता करलो फीर आपको अपने ससुरालभी जाना हे.. तो मुजे रास्तेमे वंदनाके घर छोडदो.. अबतो आप सामकोही आयेगे..

देवायत : अरे हां.. चल उस वंदनासे बातभी होजायेगी.. फीर हमे सहेरभी तो जाना पडेगा.. तुभी साथ चल रही हेनां..? चलनां.. ताकी उनको अकेला ना लगे..

पुनम : (देवायतकी बाहोमे समाते) भाइ.. आप अ‍ेक बार उनके बारेमे सोचनां.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. मेने उसे आपको मीलवानेका वादा कीया हे.. आप उसे स्वीकार करलीजीये..

देवायत : (उनका सर चुमते) हांमम.. चल ठीक हे अब मेरी इस खुबसुरत बीवीकी बाततो माननीही हे..चल..

फीर दोनोही बहार आके डाइनींगपे बेठ गये तबतक लखनभी नीचे आके दोनोके पास बैठ गया.. वो आज काफी थका हुआ लग रहाथा.. तभी रजीया चाइ नास्ता लेकर आइ तब लखनको देखतेही सरमसे पानीपानी होने लगी.. जेसे आज सुहागरात मनाकर अपने पतीको पहेली बार देख रही हो..

ओर कातील नजरोसे उनके सामने देखते मुस्कराती रही ये बात पुनम नोटीस करने लगी.. ओर आस्चर्यसे दोनोकी ओर तीरछी नजरोसे देखने लगी.. तो लखनभी रजीयाको देखते सरमा रहाथा.. ओर रजीयाकी ओर देखकर मुस्कराने लगा.. तब पुनमको कुछ आसंकाये होने लगी.. ओर दोनोपे नजर रखनेको ठानली..

पुनम : (रजीयाकी ओर देखते) भाइ आप वंदनाको कहेना वो इधरही आजाये हम साम तक इधर साथही रहेगी.. आज मुजे कही जानेका मन नही कर रहा..

देवायत : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? ठीक हे बााबा.. केह दुगा..

कहातो लखन ओर रजीयाका मुड खराब होगया ओर दोनोके मुह सेड होगये तो पुनम देखतेही मनही मन मुस्कराने लगी.. ओर सभी चाइ नास्ता करने लगे.. तब देवायत फटाफट चाइ नास्ता करके नीकल गया..

तो लखनभी रजीयाकी ओर देखते अपने खेतोपे चला गया.. ओर पुनम अपने रुममे जाकर आराम करने लगी तो रजीयाभी घरके काममे बीजी होगइ तभी चंपाभाभी भी आगइ ओर रजीयाका हाथ बढाने लगी..

तब देवायतभी रमेशके घर चला गयातो रमेश घरपेही था.. तो देवायतको देखतेही खुस होगया ओर उनको गले लगा लीया तब चारु दोनोकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ.. ओर देवायतकी ओर कातील स्माइल करते देखती रही फीर रमेश देवायतका हाथ पकडते उसे सोफेपे बीठा देता हे ओर चारु दोनोके लीये पानी लेकर आगइ फीर ग्लास लेकर चाइ बनाने चली गइ तब रमेश देवायतकी ओर घुमता हे..

रमेश : भाइ.. कल पुरा दीन हमारे पंचायतकी ओफीसमे था.. ओर सब कागजात चेक कर रहा था.. इस कमीनोने बहुत भ्रस्टाचार कीया हे.. अब फरीयाद करकेभी कोइ फायदा नही.. अ‍ेकतो मर गया ओर दुसरा मरनेकी कगारपे हे.. वो रश्मीभाभीको भी बुला लीया था.. उन्होने बहुत सारे कागजात गलत नीकाले.. बहुतही होशीयार हे.. अच्छा कीया आप उसे मुनीमकी नोकरीपे लगा रहे हो..

देवायत : रमेश वो बहुतही नेक ओर इमानदार हे.. मुजेभी गांवके बहुत सारे गीरब मजदुरोके कागजात दीये हे.. जो उनके पतीने लोगोसे ब्याजके पैसेके बदले हथीया लीयेथे.. हमे वो सभी लोगोको बुलाके उनकी जमीनके कागजात वापस लौटाने हे.. तुम देखलो कीन कीनके कागजात हे मे कल लेकर आउगा.. मुजे पुरी लीस्ट बनाकर देना.. हम सबकी जमीन वापस दे देगे..

रमेश : भाइ कल आपको आनाही पडेगा मेने सभी पंचायतके सदस्योको बुलाया हे कुछ ठरावभी करने हे कल वो रश्मीभाभीका भी ठराव करना हे.. उनको मुनीमकी जगाह अ‍ेपोइन्ट करके लेटरभी देना हे आप आजाना..

देवायत : ठीक हे कल देखते हे.. वो वंदना कीधर हे? उनको कुछ पेपरके बारेमे कहेना हे.. उनको लेकरभी अ‍ेक बार जाना हे.. इसीलीये इधर आया हु.. फीर अभी ससुरालभी जाना हे.. तु बुला उनको..

रमेश : भाइ कलही चारु उनसे बात कर रहीथी कहेतीथी वो पुनमदीदीभी साथ आ रही हे.. उनकी सहेलीजो हे.. दोनोकी आपसमें बहुत बनती हे..

देवायत : हां यार वंदना अकेली मेरे साथ सरमायेगी.. मे साथमे चारुभाभीको लेकर जाने वालाथा लेकीन पुनम आ रहीहे तो कोइ दिकत नही हे उनकी फ्रेन्ड जो हे.. तुम उनकी टेन्शन मतलो..

तभी चारुभाभी चाइ लेकर आइ ओर देवायतको कप देते कातील स्माइल करते उनके हाथको छुलीया.. ओर देवायतकी बगलमेही बेठ गइ फीर वंदनाकोभी आवाज देकर बुलाया तो अपने रुमसे बहार आगइ ओर देवायतको देखतेही सरमाइ ओर मुस्कराती रही.. तब देवायतने उनको पेपरके बारेमे सबकुछ बता दीया तो वो समज गइ ओर उनको अभी पुनमने घर बुलाया हे.. कहा तो हां मे गरदन हीलाके वापस अंदर चली गइ..

ओर देवायत रमेश दोनो चाइ पीने लगे.. तब चारुभाभी रमेशकी नजर बचाते धीरेसे हाथ पीछे लेगइ जहासे रमेश उनकी कीसीभी हरकतको नही देख सकता था.. ओर वो देवायतकी कमरको सहेलाती रही ओर दोनोसे बाते करती रही.. तब चारुकी हरकतकी वजहसे देवायतका लंड खडा होने लगा ओर पेन्टमे तंबु होगया.. तो चाइ पीकर देवायत जटसे खडा होगया ओर जाने लगा..

चारु : (मनमे हसते) देवरजी बैठीयेनां.. आपतो आते ही भागने लगते हे.. कभी फुरसतमे आइअनां.. आपको मस्त खाना खीलाती हु.. कीतने दीन हो गये हमने साथमे खाना नही खाया.. आपके भाइतो आपको बुलायेगेही नही.. अबतो बीजीही रहेगे..

रमेश : (खडे होते हसते) अरे बाबा वो मंजुभाभीको घर आनेदे.. फीर सबको बुलाके मस्त पार्टी देगे.., अब पुनमदीदीकी सादीभी तो हे.. इनको बहोत सारे कामभी होगे.. क्यु भाइ..?

देवायत : हां यार.. अ‍ेकतो सादी उपरसे वो भानुके मामाभी चल बसे.. उनकाभी कल सब कार्य खतम होजायेगा.. ओर कल मंजुकोभी दीखाने जाना हे.. ओर अभी मेरे ससुरल जा राह हु.. वहाभी मेरे ससुरकी तबीयत ठीक नही हे.. मुजे कलही मालुम हुआ.. जाकर देखताहु क्या हुआ हे.. चल मे नीकलता हु..

तब रमेश आगे नीकल गया तो चारु देवायतके साथ चलने लगी ओर उनका हाथ उंगलीया फसाके पकड लीया ओर जोरोसे दबाते कातील नजरोसे देवायतको देखते हसने लगी.. तब देवायतनेभी हाथ पीछे लेजाते उनके नीतंब दबा दीये..

तब चारु अ‍ेकदम सर्मा गइ.. ओर कातील नजरोसे अपने बेडरुमकी ओर इसारा करते वापस आनेका इसारा करने लगी ओर मुस्कराती रही.. तब देवायतभी इसारोसे हां कहेते बहार नीकल गया ओर कार लेके चला गया तबतक रमेश ओर चारु बहार खडे उसे जाते हुअ‍े देखते रहे..

देवायतने कारको सीधेही अपने ससुरके गांवकी ओर मीड दी.. तब उनके दीलकी धडकने तेज होने लगी.. आज कही महीनोके बाद वो अकेला अपने ससुराल जा रहाथा.. क्युकी सादीके बाद वो कभी अपने ससुरालमे अकेला नही गया..

कभी मंजुको छोडने तो कभी मंजुको लेनेके लीयेही जाताथा.. बाकी वो हीसाबके लीये सीधे अपने ससुरकी दुकानपे ही जाताथा ओर वहीसे उनको मीलकर वापस लौट आताथा.. ओर कारको दोडाते अपने ससुरालके बारेमे सोचते विचारोमे डुब गया..

(फ्लेशबेक)

उनकी सादीसे पहेले अपने बापुके कहेने पर कैसे अक्सर अपने ससुरके घर जाताथा.. उनके बीजनेसका हीसाब देखता ओर उनकी मदद भी करता.. तब मंजुला ओर भावना सहेरमे होस्टेलमे रहेके कोलेजमे पढती थी..

तब देवायतको नही पताथा की मंजु ओर भावु इनकी बेटी हे.. देवायतके बापु मंजु ओर भावुकी पढाइका खर्चा भी उनके हाथो भेजते थे.. उनको आज तक समजमे नही आयाकी वो लोग कोन हे.. जो बापु उनकी बहुत मदद करते थे.. उनको बस इतनाही मालुम थाकी उनके बीजनेसमे बापु पार्टनर हे..

बस ओर ज्यादा इस जमेले मे नही पडा.. वोतो बस अ‍ेकही मक्सदसे जाता था.. उनके बापुके पार्टनर राजीवकी बीवी.. नीर्मला.. जो नीहायती खुबसुरत ओर अ‍ेकदम गोरी स्कीन.. जो कीसीकाभी मन मोह ले.. उनकी उमर ५० की होनेके बावजुद ३२ की लगतीथी..





लंबी छे फुट हाइट, उनके बालभी लंबे घुटनो तक.. अ‍ेवरेज सरीर भरावदार नीतंब.. उनके उरोज.. ना बडे ओर नाही छोटे.. बीलकुल अ‍ेक अप्सराकी तराह दीखती थी.. जो देवायतको पहेली बार देखा तबसे बार बार उनको देखनेके लीये बेचेन रहेते उनकी ओर आर्कसीत होगइ थी.. बस उनकी ओर आकर्सीत होनेका रीजन सीर्फ उनकोही पताथा..

देवायत जबभी उनके घर जाता तो वो देवायतको ही देखती रहेती.. तो दुसरी ओर देवायतभी उनकोही देखनेके लीये जाता.. बस कामतो अ‍ेक बहाना था.. उनकी आंखोमे कीतनी मासुमीयत थी.. कीतना भोलापन.. तब देवायतभी सीर्फ उनको ही देखता रहेता..

दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने कभी नही बोले.. बस दोनो आंखो ही आंखोमे अ‍ेक दुसरेकी फीलींग्सको समज लेते.. अ‍ेक बार देवायतके हाथो उनके बापुने कुछ पैसे भेजे.. तब वो उनके घर गया.. तो पता चला नीर्मलाका पती राजीव सहेर गया हुआ हे..

तब वो पैसे उसने नीर्मलाको देदीये.. तब हाथमे पैसे लेते नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. तो आज देवायतने हींमत करते आंख गीली होनेका कारण पुछही लीया.. तब वो बातको सीफततासे टाल गइ.. तो दीवायतको जबरदस्तीसे पुछना ठीक नही लगा, ओर वो उनकी इजाजत लेके नीकलने लगा..

तो उस दीन नीर्मलाने उनसे पहेली बार बातकी.. जब देवायत उनको पैसे देकर वापस जाने लगा.. तब नीर्मलाने हींमत करते देवायतको अपने घरपे जबरन रोक लीया.. ओर चाइ नास्ता करके जानेको कहा.. तब देवायतभी उनकी बातको नही टाल सका.. ओर वो आज पहेली बार रुक गया.. तो दोनोही सोफेपे बेठ गये तब बेठते ही देवायतने हीमत करके पुछा..

देवायत : नीर्मलाजी.. अगर आप बुरा ना माने ओर आपकी इजाजत होतो.. मे आज आपसे अ‍ेक बात पुछ सकता हु..?

नीर्मला : (हसते) अरे आपको मेरी इजाजत लेनेकी क्या जरुरत हे.. आपतो हमे कुछ भी पुछ सकते हो..

देवायत : मे यहा कीतनी बार आचुका हु.. मुजे आज तक पता नही चला.. तो बताइअ‍ेनां हम दोनोके फेमीलीका आपसमे क्या रीस्ता हे..? ओर मे जबभी इधर आता हु तब आप प्यार भरी नजरोसे मुजेही देखती रहेती हो.. मेने आपकी आंखोमे मेरे लीये बेसुमार प्यारको महेसुस कीया हे.. ओर मेभी आपको देखते खुस हो जाता हु.. यही मानलोनां मे सीर्फ आपका दीदार करनेही इधर आता हु.. तो मे क्या समजु..?

नीर्मला : (सरमाते सरारतसे हसते) फेमीलीका तो आप अपने बापुसेही पुछ लीजीयेगा.. वोही आपको बता सकते हे.. मुजेतो इतना ही पता हे.. मेरे पती ओर आपके बापु बीजनेसमे पार्टनर हे.. ओर दुसरा देखनेकी बात.. तो फीर आपही बताइअ‍े आप मुजे क्यु देखते रहेते हे..? इनका उतर आपही दे सकते हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) वेरी स्मार्ट.. आप बातको बडी सीफततासे टाल गइ.. कोइ बात नही.. नही बतानाहे तो मत बताइअ‍े.. लेकीन मे मेरी बात कहु तो.. आप..आप मुजे बहोत अच्छी लगती हे.. बस ओर कुछ नही..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) अच्छा..? आपतो काफी जवान हो.. पढे लीखेभी हो.. क्या अभी अभी कोलेज पुरी की हेनां आपने..? तो फीर वहा बहुत सारी लडकीयाभी होगी.. जो आपको देखतेही पागल होजाती होगी.. तो फीर मेतो अब आधेड हो चुकी हु.. तो मुजमे अ‍ैसा क्या देखलीया जो मे आपको अच्छी लगने लगी..

देवायत : (सरमाते हसते) नही.. बस आपकी ये मासुम आंखे ओर आपका मासुमीयत भरा चहेरा.. आपका भोलापन.. आपका मेरी ओर देखनेका अंदाज.. बस यही मुजे आपकी ओर आकर्सीत कर रहा हे.. ओर आपभी तो मुजे देखती रहेती हो.. बस इसीलीये आपको बार बार देखनाका दील कर रहा हे.. अगर मेने कुछ गलत बोल दीयाहो ओर आपको बुरा लगा तो सोरी..

नीर्मला : (सरारतसे हसते) अरे नही नही.. आप सोरी मत बोलो.. आप बहुत क्युट हो.. सरमीले हो.. ओर बातेभी अच्छी करते हो.. पता हे आपने जो अभी अपने दिलकी बात बताइ इसे क्या कहेते हे..? लगता हे आपने कोलजमे होनेके बावजुद भी कीसी लडकीको प्यार नही कीया हे.. क्या मे सच केह रही हुनां..?

देवायत : (सरमाते हसते) जी.. जी हां.. आपने बीलकुल सही कहा हे.. बताइअ‍ेना इसे क्या कहेते हे..

नीर्मला : अरे मेरे बुध्धु बलमा.. इसेही प्यार कहेते हे.. लेकीन.. वन साइड लव.. क्या कोलेजमे कीसी लडकीको देखते आपको अ‍ैसी फीलींग कभी नही आइ..? याद करके सच बताना.. हें..हें..हें..

देवायत : (सरमाते) अरे हां.. हे अ‍ेक लडकी.. मेरी ही कोलेजमे पढती हे.. लेकीन मेरी कोलेज खतम हो चुकी हे.. तो मे घरपे आगया.. ओर अब बापुका बीजनेसमे हाथ बटा रहा हु.. जेसे आप केह रही हे अ‍ैसी फीलींग उन लडकीको देखके आइथी.. ओर आजभी हे.. लेकीन मे मेरे दीलकी बात उनको नही बता पाया.. पता नही कौनथी वो.. मुजसे अ‍ेक साल जुनीयरथी, उनका नाम भी नही जान पाया..





नीर्मला : (सरारतसे हसते) अच्छा..? अरे बुध्धु उनको अपने दीलकी फीलींग्सके बारेमे बता देना चाहीयेनां..? क्या पता वोभी आपको चाहती हो.. जाओ.. जाके अ‍ेक बार उनसे मीलके बात करलो..

देवायत : (हसते) अब सहेर जाउगा तब देखता हु.. वो मीलती हे की नही.. मीलेगीतो जरुर बात करलुगा.. आपने हींमतजो दी हे.. लेकीन जो मीली हे वो खुद मुजे जवाब नही दे रही उसका क्या..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (बडी आंख करते हसते) कौन..? कौन मील गइ आपको जो जवाब नही देती..

देवायत : (हींमत करते केह देता हे) आप.., आपही मेरी फीलींग्सको अच्छी तराह पहेचान गइ.. जो मुजे उन लडकीके लीये आइथी.. मतलब मुजे आपसेभी वन साइड लव होगया हे.. तो अब आपसेही पुछ लेता हु.. क्या आप मेरा प्यार कबुल करती हो..? कहीये..

नीर्मला : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) प्लीज.. ये आप क्या केह रहेहे.. जानतेहो मे कौन हु..? मे अ‍ेक सादी सुधा ओरत हु.. आपके बापुके दोस्तकी बीवी हु.. (कुछ देरके बाद) क्या वाकइ आप मुजसे प्यार करने लगे हे..?

देवायत : (हीमत करते उनका हाथ थामते) जी.. जीहा.. मुजे आपसे सचमे प्यार होगया हे.. प्लीज.. आप मेरा प्यार कबुल करलो.. आपही मेरा पहेला प्यार होगी.. नीर्मलाजी.. आइ लव यु.. आइ लवयु सो मच.. प्लीज.. आप मुजे बहोत अच्छी लगती हो..

नीर्मला : (जटसे हाथ खीचते खडी होते) ये आप क्या केह रहे हे.. आप जानते हेना मे अ‍ेक सादीसुधा ओरत हु.. देवायतजी मे आधेड हो चुकी हु.. आप कीसी अच्छी लडकीसे प्यार करके सादी कर लीजीये.. मे आपका प्यार कबुल नही कर सकती.. आइ अ‍ेम सोरी.. में अ‍ेक बार.. सोरी देवायतजी.. आप बैठीये मे चाइ बनाके आती हु.. फीर आप जाइअ‍ेगा..

कहेते नीर्मला जटसे खडी होकर वहासे चाइ बनाने कीचनमे चली गइ.. तब उनके मनमे विचारोका धमासान युध्ध होने लगा.. की कैसे इस लडकेने उनकी सब फीलींग्सको पहेचान लीया.. ओर चाइ बनाते बनाते सोचने लगी..

नीर्मला : (मनमे) हे भगवान.. इस लडकेनेतो सचमे मुजसे अपने बापुकी तराह प्यारका इजहार करलीया.. उनके बापुनेभी मुजे अ‍ैसेही प्रपोज कीयाथा.. क्या पागल लडका हे.. बीलकुल अपने बापुकी तराह दीखता हे.. वोही आंखे.. वोही चहेरा.. वोही आकर्सण.. ओर मेभी इनकी ओर खीचीती चली गइ.. पता नही कही मेभीतो उनसे प्यार नही करने लगी..? नही नही.. वो उनका लडका हे.. क्या मस्त बोडी सोले डोले सब मस्त हे.. तो वो..भी.. इनके बापुकी तराह बडाही होगा.. पेन्टमे कीतना बडा उभार दीखता हे.. बस.. मेरी तो इनको देखतेही पानी छोडने लगी हे.. उनके बापुभी मुजे कैसे पटक पटकर चोदते थे.. थकतेही नही थे.. ओर हम ओरतोको चाहीये भी तो क्या..? यहीतो हमे खुस रख सकता हे.. उन्हीका लडका हे.. इनकाभी अ‍ैसेही बडा होगा.. बहारसेतो बडा दीखता हे.. क्या मे उनको हां कहेदु..? कमसे कम मे दुबारा वो चुदवानेका सुखतो पा सकुगी.. कीतने साल होगये.. मे उस सुखसे वंचीत हु.. अब मेरे पतीभीतो बुढे हो चुके हे.. उनसे सादी करना मेरीभी मजबुरी थी.. तब उनके सीवा मेरा था भी कौन..? मे बहार जाकर देवायतको थोडा तडपाउगी.. फीर देखती हु.. अगर वो कुछ आगे बढेगातो में उनका प्यार कबुल करही लेती हु.. कमसे कम वो मुजे वो खुसीतो दे पायेगा.. ओर मुजेभी वो बहोत अच्छा लगता हे कीतना सीधा सादा लडका हे.. अ‍ेकदम अपने बापुकी तराह.. मुजसे प्यार करता हे.. पागल कहीका.. हें..हें..हें..





यही सब सोचते मनमे हस रहीथी.. की चाइ उबलके बहारकी ओर नीकलने लगी तो उसने जटसे स्टव बंध करदीया.. ओर चाइ नीकालके चाइ नास्ता लेकर बहार आगइ.. देखातो वहा होलमे कोइ नही था.. तब वो थोडा गभराके वीचलीत होगइ.. ओर चाइ नास्तावही टेबलपे रखते इधर उधर देखते बहारकी ओर दोड पडी ओर यहा वहा आजु बाजु सभी जगाह देखने लगी.. तब वहा कोइ नही दीखा तब नीरास होकर वापस अंदर आकर सोफेपे बेठते अपने आपको मनमे कोसने लगी..





अपने पैरोके घुटनोपे दोनो हाथ टीकाके अपने मुहको दोनो हथेलीमे छुपाके बेठ गइ.. देवायतके प्यारको कबुल ना करनेकी गलतीको अपनी भुल मानते आंखसे आंसु बहाने लगी.. ओर वही सोफेपे बैठे अपने हाथोमे चहेरा छुपाते आंसु बहाती रही.. आज उनको अ‍ेक बार फीर अपना प्यार बीछडते हुअ‍े महेसुस होने लगा.. जो सख्सके प्यारके लीये वो कीतने सालोसे वंचीत थी.. वोही प्यार आज उनके बेटेके रुपमे उनके सामने फीरसे आगया था.. ओर वो मौका गवाते अपने आपको कोस रही थी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
Bhai Aaj net me kuchh problam hai Gif file nahi ja rahi..mai sam tak update dal duga
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७५

अपने पैरोके घुटनोपे दोनो हाथ टीकाके अपने मुहको दोनो हथेलीमे छुपाके बेठ गइ.. देवायतके प्यारको कबुल ना करनेकी गलतीको अपनी भुल मानते आंखसे आंसु बहाने लगी.. ओर वही सोफेपे बैठे अपने हाथोमे चहेरा छुपाते आंसु बहाती रही.. आज उनको अ‍ेक बार फीर अपना प्यार बीछडते हुअ‍े महेसुस होने लगा.. जो सख्सके प्यारके लीये वो कीतने सालोसे वंचीत थी.. वोही प्यार आज उनके बेटेके रुपमे उनके सामने फीरसे आगया था.. ओर वो मौका गवाते अपने आपको कोस रही थी.. तभी....अब आगे

तभी कोमन बाथरुमसे देवायत हाथ पोछते बहार नीकला जो बहुत पीसाब लगीथी तो बाथरुममे चला गयाथा.. तो नीर्मला जटसे अपना सर उठाके उसे देखती ही रेह गइ.. ओर आंखमे आंसु होनेके बावजुद देवायतको देखतेही खुसीके मारे उनकी हसी नीकल गइ.. ओर वो जटसे खडी होके देवायतकी ओर दोड पडी..

देवायत उसे आस्चर्य भावसे देखताही रहा.. वो कुछ समजता इनसे पहेलेही नीर्मलाने जटसे आकर देवायतको जोरोसे बाहोमे भर लीया ओर उनके चहेरेको सरसे पकडते पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब देवायतभी सोक्ट होके सब देखता ही रहा की नीर्मलाको अचानक क्या हुआ.. जो उसे बाहोमे भरके चुमेही जा रही हे.. उनको कुछभी समजमे नही आ रहाथा..

नीर्मला : (चुमते) देवायत.. आइ लव यु.. आइ लव यु.. आइ लवयु सो मच.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. मुजे माफ करदो.. आप कीधर चले गये थे..?

देवायत : (उनका चहेरा हाथोमे थामते उनकी आंओमे देखते) नीर्मलाजी.. नीर्मलाजी.. सम्हालीये अपने आपको.. ये अचानक आपको क्या हुआ..? मेतो बाथरुममे गयाथा.. ओर आप रो क्यु रही हे..? कुछ हुआ हे क्या..? ओर आपने मेरा प्यार कबुल करलीया..? अभीतो मुजे सोरी बोलके गइ हो.. तो फीर अचानक.. अचानक आपको क्या हुआ जो आप मेरा प्यार कबुल कर रही हो.. क्या मे कोइ सपनातो नही देख रहा..?

नीर्मला : (हसते गाल चुमते) नही.. माय लव.. ये हकीकत हे.. देवायत आइ लव यु.. बस मेरी फीरसे जगी हुइ उमीदको कभी मत तोडना.. जबसे आपको पहेली बार देखा था.. तबसेही मुजे सचमे आपसे प्यार होगया था.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुजसे कभी मत बीछडना.. वरना इस बार में जी नही पाउगी..

कहेते देवायतके चहेरेको अपनी हथेलीमे थामते धीरे धीरे अपनी आंखे बंध करते अपना मुह देवायतके चहेरेकी ओर लेजाती हे.. ओर आखीर देवायतके होठोपे अपने होंठ रख देती हे.. जैसे उनको अपना पुराना प्यार फीरसे मील गया हो.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेको चुमते हुअ‍े कामाग्नीमे जलने लगे.. जैसे आज नीर्मलाको फीरसे सबकुछ वापस मील गया हो.. उनके उरोजो सख्त होने लगे.. ओर चुतके दोनो नाजुक होंठ जो बरसोसे प्यासे थे.. वो फडफडाते पानी छोडने लगे..

तब अचानक नीर्मला देवायतसे अलग होगइ ओर जटसे होलका दरवाजा बंध करलीया.. फीर पलटकर जटसे देवायतकी ओर आगइ तब देवायत कुछ समजता इनसे पहेलेही नीर्मला उनका हाथ पकडके अपने बेडरुमकी ओर जाने लगी.. तो देवायतभी मनही मन खुस होते हसते हुअ‍े उनके साथ चलने लगा.. ओर नीर्मला देवायतको बेडरुममे लेगइ ओर उनकाभी दरवाजा बंध करके पलटकर अ‍ेक बार फीरसे देवायतकी बाहोमे समा गइ..

नीर्मला : देवायत मुजे इतना प्यार देना.. इतना प्यार देना की मे मेरा सारा अतीत ओर गम भुल जाउ.. मुजे आपकी आगोसमे लेलो.. मीटादो मेरा अस्तीत्व.. आज ये नीर्मला अपने आपको आपके हवाले करती हे..

देवायत : (बाहोमे कसते सरपे चुमते) हां नीर्मलाजी.. थेन्कयु सो मच की आपने मेरा प्यार कबुल करलीया.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. जो मेनेभी आपको पहली बार देखा तबसे ही हो गयाथा..

नीर्मला : देवायत अब नीर्मलाजी नही.. मे सीर्फ आपकी नीमु हु.. पेरा पतीभी मुजे नीमु कहेके बुलाते हे.. अबसे मे आपके लीये सीर्फ आपकी नीमु हु.. ओर मुजे पता हे आपके घरवाले आपको कीस नामसे बुलाते हे.. तो मेभी आजसे आपको इस नामसे बुलाउगी.. देवा.. मेरा प्यारा मासुम देवा जो सीर्फ मेरा हे.. क्या मे आपका पहेला प्यार हुनां..? मे कीतनी खुसनसीब हु.. देवु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे कभी मत छोडना..

देवायत : (गाल चुमते) हां.. हां नीमु.. तुम सचमे मेरा पहेला प्यार हो.. ओर मे वादा करता हु मे तुजे जींदगीभर अ‍ेसेही प्यार देता रहुगा.. चाहे मेरी कीतनीभी सादीया होजाये.. मेरा पहेला प्यार तु ही रहेगी.. मे तुजे कभी नही भुलुगा.. क्या तुम मुजसे सादी करोगी..?

नीर्मला : (बाहोमे भीचते) सादी..? ओह.. देवा आइ लव यु सो मच.. मे कीतनी बुसनसीब हु.. मुजे आपका प्यार मील गया.. मे ना जाने कीतने सालोसे इस प्यारके लीये तरस रहीथी.. जो आज मुजे फीरसे मील गया..

देवायत : (उनकी आंखोमे देखते) फीरसे मतलब.. क्या आप कीसी ओरसे प्यार करतीथी..? कोन हे वो.. खुसनसीब.. जीसे मेरी नीमु प्यार करती थी.. क्या आप दोनो अ‍ेक दुसरेसे बीछड गये हो..?

नीर्मला : (सीनेमे सर रखते) नही देवा.. मे उसे भुल चुकी हु.. उनकी सादी होगइ.. फीर मे उसे कभी नही मीली.. ओर मेने मेरे इस भा.. आइ मीन.. इस पतीसे सादी करली.. मत पुछो मेरे अतीतके बारेमे.. बडी मुस्कीलसे उसे भुला पाइ हु.. बस मुजे वो सुख देदो जीसके लीये मे बरसोसे तरस रही हु.. मे आपकी आगोसमे मेरा सारा अतीत भुल जाना चाहती हु.. अब आपही मेरा सबकुछ हो.. मुजे कभी मत छोडना.. वरना इस बार मेरा जीना मुस्कील होजायेगा.. मे आपके बीना नही जी पाउगी..





कहेते वो देवायतको अ‍ेकदम अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. फीर उनका हाथ पकडके बेडकी ओर लेगइ ओर दोनो बेडपे बैठ गये तब नीर्मला बेडपे लेटते देवायतको हाथ खीचकर उनके साथ लीटा देती हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भरते लेट गये.. ओर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे होंठ मीलाके प्यारके आगोसमे खो गये..

फीर धीरे धीरे करते दोनोही कामाग्नीमे जलने लगे.. तब नीर्मलाकी चुत कुछ ज्यादाही फडफडाते पानी छोडने लगी.. क्युकी कही महीनोसे वो सुखी पडीथी.. उसे पानीसे सींचकर हरी भरी करने वाला कोइ मील गयाथा.. नीर्मला उनके प्रेमीसे बहुत बार चुदवा चुकीथी.. ओर उनके लंडकी आदी हो गइथी.. तबसे वो कुछ ज्यादाही कामी ओरत हो गइथी.. उनको हर रात लंड लेनेकी आदत पड चुकीथी..

जब अपने प्रेमीसे बीछड गइ तब वो बीना लंड तडपने लगी.. ओर आखीरकार अपने भाइके साथ सादी करके उनकी पत्नी होगइ.. ओर अपने पतीसे चुदवाकर अपनी प्यास बुजाने लगी.. लेकीन अब वोभी उमरकी वजहसे उनको ज्यादा चोद नही पाताथा.. तबसे वो फीरसे प्यासी रहेने लगी..

आज अ‍ेक बार फीरसे उनकी चुतके लीये लंडका इन्तजाम हो गयाथा.. जो वो कीसीभी हालमे इस मौकेको गवाना नही चाहती थी.. इसीलीये आज अपने लडकेकी उमरके अपने प्रेमीके बेटेको अपना दिल दे बेठी.. ओर प्यारका इज्हार करतेही वो उसे लेकर अपने बीस्तरपे लेआइ.. अब आप सोच सकते हो नीर्मला कीतनी कामातुर ओर प्यासी ओरत थी.. बीस्तरपे आतेही दोनोही कामातुर होके अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगे..

आज नीर्मलाके जीस्म वासनासे तप रहाथा.. वो कामुक होते वासनाभरी नजरोसे देवायतको देखती रही.. उसे जल्दीथी तो बस देवायतके लंडको देखनेकी.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके जीस्मसे अ‍ेक अ‍ेक कपडे नीकलते गये.. तब नीर्मलाके गोरे गोरे कसे हुअ‍े बुब्स उछलके बहार आगये.. जीसे देखतेही देवायत पागल होगया ओर अपनी सुधबुध खो बेठा.. तब उनका वीकराल लंड चडीमे लहेराते जटके मारने लगा..

जब देवायतने अपनी चडीको नीकाल दीया तब लंड जटकेके साथ हवामे उपरकी ओर लहेराने लगा.. जीसे देखते नीर्मलाका मुह खुलाही रेह गया.. ओर खुसीके मारे उनकी आंखोमे वोही चमक वापस आगइ.. जीस चमक उसे देवायतके बापु कीशनके लंडको देखते आइ थी.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. ओर उसने फोरन देवायतके लंडको अपनी मुठीमे पकड लीया ओर देवायतकी आंखोमे देखते होले होले मसलने लगी..

वो जल्दसे जल्द इस लंडको अपने मुहमे ओर अपनी चुतमे महेसुस करना चाहती थी.. तब कुछही देरमे दोनो सीक्स नाइन पोजीसनमे होगये.. ओर अ‍ेक दुसरके कोमल अंगोके साथ मुहसे खेलने लगे.. तब नीर्मलाका पुरा सरीर कामाग्नीमे जलते तपने लगा जैसे उनको बुखार आया हो.. वो देवायतके लंडको पुरा मुह में लेकर अ‍ेक लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. तब देवायतसे कंट्रोल करना मुस्कील होगया..





कुछही देरमे दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे जडने लगे.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेका पानी गटक गये.. फीर दोनोने बाथरुममे जाकर मुहको साफ करलीया तब देवायतने वहीसे नीर्मलाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडपे पीठके बल सुलाते खुदभी उपके उपर चडके लेट गया.. तब नीर्मलाने उसे जोरोसे बाहोमे भरते उनके होठोको अपने होठोसे दबाते लीपलोक करलीया ओर अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लंडको अपनी मुठीमे पकडके अपनी चुतके लव होलपे सेट कर दीया.. वो जल्दसे जल्द अपनी चुतमे देवायतका लंड लेनेको मचल रही थी..





तभी अ‍ेकही जटकेमे देवायतका दमदार लंड नीर्मलाकी चुतमे घुस गया.. तब नीर्मलाकी जोरोसे चीख नीकल गइ जो देवायतके मुहमेही दब गइ.. ओर उनकी आंखोसे तेज आंसुओकी धारा बहेने लगी ओर अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. ओर देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तब देवायतको भी अपना लंड कीसी गरम भठीमे डाल दीयाहो अ‍ैसा महेसुस होने लगा.. मानो कीसी कची कलीकी चुतमे डाला हो..

नीर्मलाभी देवायतसे छुटनेके लीये छटपटाते अपना मुह देवायतके होठोसे छुडानेकी कोसीस करने लगी.. तभी देवायतने उनके होंठ छोड दीये ओर उनके बुब्सको मुहमे लेके चुसने लगा तब नीर्मला दर्दके मारे तडपने लगी ओर अपना मुह बीगाडते इधर उधर घुमाते मचलती देवायतसे नजरे चुराने लगी.. जो दर्द वो अपना कौमार्य खोते पहेली बार किरनसे चुदवाते महेसुस कर चुकी थी.. वोही दर्द आज उनके बेटेका लंड अपनी चुतमे लेते महेसुस करने लगी..

बीलकुल वोही अहेसास.. जो अपने प्रेमीसे पहेली बार मीलन करते चुदवाते हुआ था.. जो आजभी वही अहेसास हो रहाथा.. वो तबभी अ‍ेसेही तडपी थी.. जो आज तडप रहीथी.. तब वो सादीसे पहेलेही अपने प्रेमीको अपना कौमार्य उनसे चुदवाके सोंप चुकीथी.. फीर उनके साथ कीतनी राते चुदवाते रंगीन करती रही.. ओर अचानक उनसे बीछड गइ.. फीर कीतने सालो तक अ‍ैसी दमदमर चुदाइसे वंचीत रही..

आज इतने बरसोके बाद फीरसे चुदवाते वोही दर्द महेसुस कर रहीथी.. ओर अपने आपको देवायतके प्यारको पानेमे बहुत ही खुसकीस्मत समजने लगी.. ये भी नही सोचाकी ये अपने पुराने यारका बेटा हे.. नीर्मलाको तो बस अ‍ेक बडे ओर तगडे लंडकी जरुरतथी.. जो उनसे चुदवाना था.. फीर चाहे वो लंड बेटाका हो या उनके बापका.. आज देवायतके लंडको अपनी चुतमे लेकर अ‍ेक सुकुनसा महेसुस करने लगी..

तब थोडीही देरमे उनका दर्द कम होगया.. नीर्मला जीस लडकेका प्यार थोडी देर पहेले वो ठुकरा चुकीथी वोही लडकेका दमदार ओर तगडा लंड अपनी चुतमे लेकर उनके नीचे लेटी हुइ उनसे चुदवा रही थी.. वो यही सब सोचते देवायतसे नजरे चुराने लगी.. तब देवायत उनके चहेरेको अपने हाथोमे थामते उनकी आंखोमे देखने लगा तब नीर्मलाने सरमके मारे अपनी नजरे चुराते जुकाली.. ओर देवायतने उनके होंठको अपनी गीरफ्तमे लेलीया ओर चुसने लगा.. तब उसनेभी थोडा मुह खोल दीया..





वोभी सभी सरम त्यागके देवायतका साथ देने लगी ओर अपनी कमर हीलाने लगी तभी देवायत उनके गलेमे मुह लगाते चुमने लगा ओर उसे कमर उछालते होले होले चोदने लगा.. फीर कुछ देर अ‍ैसेही चोदता रहा तब वो हाथके बल उचा होगया ओर अ‍ेक हाथसे उनके बुब्सको मसलते थाम लीया फीर लंडको जडतक घुसाते धीरे धीरे सोट मारते चुदाइ करने लगा तब नीर्मलाको अपनी बच्चेदानीसे देवायतका लंड टकराते महेसुस होने लगा ओर वो हर धक्केके साथ आहे भरने लगी.. ओर पुरी तराह कामाग्नीमे जलते मदहोसीमे छाने लगी..





नीर्मला : (चुदवाते) उंहु..उंहु..उंहु.. आइइइइ..सीससइइइ..आहह..आहह..आहह.. जा..नुु... बससस.. अ‍ैसेहीइइइ चोदो.. मुजे.. आहइइइ.. आह..आह.. आह.. उंहु.. हंममममममम सीसससइइइइअअअअअ.. देवु.. मुजे..इइइ बस.. अ‍ैसेहीहीहीइइइइ चोदते.. रहेना.. उइइइ मां सीइइइइइइ आह..आह...आह..आह..आह..

नीर्मलाकी जींदगी मे आज देवायत तीसरा मर्द था.. जो उनकी दमदार चुदाइ कर रहाथा.. वो कोलेजमे थी तब उनका दोस्तही प्रेमीके रुपमे उनकी चुदाइ कर चुकाथा.. फीर जब उनसे बीछड गइ तब ना चाहते हुअ‍े भी वासनाकी आगमे वो उस आदमीसे चुदाइ करवाने लगी जीनके साथ बादमे सादी करनी पडी.. ओर आज तीसरा मर्द देवायतथा.. जो अभी उनकी जमकर चुदाइ कर रहाथा.. कहेतेहे की जब ओरत अपनी चुतमे तीन लंड ले लेती हे तब उसे ओर लंडकी आदत होजाती हे.. तो पता नही नीर्मलाके साथ आगे क्या होगा..

आज वो अपने आपको बहुतकी खुसकीस्मत मानने लगी ओर देवायतके नीचे लेटे उनके दमदार लंडसे चुदवा रहीथी.. तब देवायतभी नीर्मलाके पैरके बीच बेठ गया ओर उनपे जुकते चोदता रहा तो नीर्मला दोनो हाथोमे उनके चहेरेको थामते उनकी आंखोमेही देखती रही ओर चुदवाते देवायतको अपनी आंखोमे बसाने लगी ओर धीरे धीरे करते देवायतने चोदनेकी स्पीड बढादी.. तब नीर्मलाकी ओर सीसकारीया नीकलने लगी..





तभी नीर्मलाके तनमे सुरसुराहट होने लगी ओर उनका तन कांपने लगा उनको बहुतही रोमांचीत अहेसास होने लगा.. तो उसने देवायतके गलेमे हाथ डालके उनको अपने तनसे चीपका लीया.. ओर जोरोसे बाहोमे भरते लीपलोक करलीया फीर आंख बडी करते अपनी कमरको जटके देने लगी.. ओर अपने कामरससे देवायतके लंडको भीगोने लगी.. तब चुदाइ करते देवायत बेडसे उतर गया ओर नीर्मलाको कमर पकडते अपने लंडकी ओर खीच लीया, फीर नीर्मलाको जोरोसे चोदने लगा तो नीर्मला चुतपे हाथ रखते दर्दसे चीखने लगी..





अबतक नीर्मला दो बार जड चुकीथी ओर बहुत खुसभी हो रहीथी.. वो खुस होभी क्यु ना हो..? क्युकी इतने सालोके बाद उनको अब जाके सही.. ओर दमदार लंड नसीब हुआथा.. तभी अचानक देवायत नीर्मलाके उपर लेटकर उनसे चीपक गया तब नीर्मलाने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे कसके भीचलीया ओर दोनोके होंठ अ‍ेक दुसरेसे लोक होगये तब नीर्मला बडी आंख करते देवायतकी आंओमे देखती रही.. तब देवायत अपने लंडको नीर्मलाकी चुतमे जडतक घुसा देता हे ओर कमरको जटके देते अपने कामरससे नीर्मलाकी चुतको भरने लगता हे..





तब नीर्मला तीलमीलाते देवायतसे होंठ छुडालेती हे ओर दर्दसे अपने मुहको इधर उधर करने लगती हे वो जोरोसे सीसकारीया करते अपनी चुतको लंडके पाससे सहेलाने लगती हे.. तब देवायत उनके सीनेपे ढेर होजाता हे.. तब नीर्मला अ‍ेसेही पडे रहेके देवायतके सरको सहेलाती रही ओर दर्दसे सीसकारीया करती रही.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथाकी आज वाकइ इनकी जबरदस्त चुदाइ हो चुकी हे.. वो कीतने सालोके बाद तीन तीन बार जड चुकीथी.. आज वो पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी..

उनको अभीभी अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम कामरस महेसुस हो रहाथा.. जो इनके लीये बेहद सुखद अनुभव था.. इतना सुहाना अहेसासतो उनके पतीसे चुदवातेभी नही हुआथा.. आज वो मनही मन देवायतकी कायल होगइ थी.. क्युकी आधेड होनेके बावजुद भी देवायतने अ‍ेक कुआरी लडकीका अहेसास करवा दीया था.. वो अब हमेसाके लीये देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकीथी.. तब देवायत उनके उपरसे हट गया..





तो लंड.. आरामसे बहार आगया ओर मुरजा गया.. तब नीर्मला अभीभी अ‍ैसे बेसुध जैसी हालतमे पडीथी.. ओर उनकी चुतसे दोनोका मीश्रीत कामरस पैरसे होते नीचेकी ओर बेह रहाथा.. चुत अभीभी फडफडा रही थी.. तो देवायतने वही पडी अपनी चडी नीर्मलाकी चुतपे दबादी तब नीर्मलाकी आंख खुल गइ ओर दर्दसे सीसकारीया करने लगी..

फीर खुद अपनी चुतको धीरे धीरे साफ करने लगी फीर देवायतकी ओर आभारवस देखते उनके सामने हाथ उचा करलीया तब देवायत समज गया ओर उसे गोदमे उठाके बाथरुममे लेगया.. फीर अपने लंडको साफ करते वही नहाने लगा तब नीर्मलाने उसे गरम पानीका नल दीखाते उनकी चुतकी सीकाइ करनेको कहा..

क्युकी देवायतको चुदाइका कोइ ज्यादा अनुभव नही था.. तब उसने नीर्मलाकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. फीर दोनो साथमे मीलकर नहाने लगे तब नीर्मला अ‍ेकबार फीर देवायतके गले लग गइ ओर उनके चहेरेको बेइम्ताह चुमने लगी ओर दोनो नहाके बहार आगये तब..

नीर्मला : मेरे छोटे बलमा आप बैठो मे अभी खाना बनालुगी.. फीर आप खाना खाके आरामसे चले जाना..

देवायत : (हसते कपडे पहेनते) क्या मे सचमे जाउ..? मुजे भुलतो नही जाओगी..?

नीर्मला : (जोरोसे बाहोमे भीचते) देवु.. ये आप क्या केह रहेहे..? मे आपको प्यार करती हु.. भुल क्यु जाउगी..? देखना अबतो जींदगीभर आपका पीछा नही छोडुगी.. बडी मुस्कीलसे तो मीले हो..

देवायत : (हसते उनके होंठ चुमते) तो फीर सादी करले मुजसे..

नीर्मला : (जटसे अलग होते आंखोमे देखते धीरेसे) आप मेरी परीक्षा ले रहे हो..? यकीन नही हे आपको..? ठीक हे चलो मेरे साथ..

कहेते नीर्मला देवायतको उनके घरके मंदिरके सामने लेगइ फीर वहाके अ‍ेक स्टोरेजसे अ‍ेक नया मंगलसुत्र नीकाला.. ओर देवायतके सामने आगइ.. ओर उनके हाथमे थमा दीया.. तब देवायत उसे देखताही रेह गया.. तब नीर्मलाकी आंख थोडी गीली होगइ ओर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही.. तब देवायतने डीबीसे मंगलसुत्र नीकाला तो अ‍ेकदम नयाथा.. जेसे इनका कभी उपयोग ही नही कीया हो..

नीर्मला : जब उसने मुजसे अपने प्यारका इजहार कीया तभी मेने सबसे छुपके इनको लीयाथा.. ओर आज तक छुपाके रखाथा.. सोचाथा उनसे सादी करुलुगी तब उनके हाथोसेही पहेनुगी.. लेकीन कीस्मतको कुछ ओर ही मंजुर था.. तबसे सम्हालके रखा हे.. लेकीन कीस्मत देखो वो नही तो आपही सही.. आखीर इस मंगलसुत्रको पहेनाने वाला आखीर मील ही गया..

देवायत : नीमु.. मुजे उनके बारेमे जानना हे आखीर कोन हे जो इस खुबसुरत लडकीको ठुकराके चला गया..

नीर्मला : नही नही.. उन्होने मुजे नही ठुकराया.. बस सीचुअ‍ेशनही अ‍ैसीथी की..की..मेने उसे छोड दीया..

देवायत : नीमु तो फीर मुजे तेरी पुरी स्टोरी जाननी हे.. तेरे अतीतके बारेमे.. कौनहो तुम.. ओर कौन थे वो..

नीर्मला : नही देवु.. प्लीज.. मेरीभी कुछ मजबुरी हे.. मे नही बता सकती आपको.. आप जीद मत करना.. कभी वक्तने मौका दीया तो जरुर आपको सबकुछ बता दुगी.. प्लीज.. मे मेरे अतीतको भुल चुकीहु.. जो वो केवल हमे दुखही देता हे.. मत याद करवाओ मुजे.. मे इसे आपके प्यारके आगोसमे भुल जाना चाहती हु.. आज आपने मुजे कीतना प्यारा अहेसास करवाया हे.. थेन्कयु वेरी मच.. आइ लव यु देवु.. मुजे कभी मत छोडना.. वरना इस बार मे जुदाइ नही सहेन कर पाउगी..

देवायत : (हसते) लव यु टु डार्लींग.. ठीक हे नही पुछुगा कभी नही पुछुगा.. अब बता क्या करना हे इसका?

नीर्मला : (समाते हसते) क्या आप कभी कीसीके सादीमे नही गयेहे..? जो मुजसे पुछ रहेहे.. पहेना दीजीये मुजे.. भर दीजीये मांग मेरी.. मे आपसे गांधर्व सादी कर रही हु.. ताकी आपको यकीन आजाये.. देवु आज हमारे भगवानके सामने मुजे ये मंगलसुत्र पहेनाकर स्वीकार करलीजीये.. आजसे मे आपकी अर्धागीनी होजाउगी.. अब आपही मेरे पती हो..

देवायत : ओह..नीमु.. आइ लव यु सो मच.. क्या वाकइ मुजसे सादी कर रही हो..?

नीर्मला : जानु तो फीर क्या मे मजाक करनेके लीये आपको यहा लेकर आइ हु..? हां हम सादी कर रहे हे.. पहेना दीजीये ये मंगलसुत्र ओर भर दीजीये मेरी मांग.. मे कसम खाती हु.. आजके बाद ये मांगमे सीर्फ आपके नामकाही सींदुर लगेगा.. आज मे हमेसा हमेसाके लीये आपको समर्पीत होती हु..

तब देवायत उनको हसते हुअ‍े मंगलसुत्र पहेना देता हे तभी नीर्मला मंदिरसे अ‍ेक डीबी उठाती हे ओर देवायतके सामने रखते मुस्कराने लगती हे.. तब देवायत उनमेसे चुटकी सींदुर उठालेता हे ओर नीर्मलाकी मांगको भरने लगता हे तब नीर्मला आंख बंध करते आंसु बहाते खडी रहेती हे ओर देवायत उनकी मांग भर देता हे तब वो देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेतीहे ओर फुट फुटके रोने लगती हे..

देवायत : (हसते) क्या हुआ.. बेबी.. बस.. बस..सांत होजाओ.. आजसे तु मेरी सीक्रेट बीवी हे..

नीर्मला : (रोते सामने देखते) देवु मुजे कभी मत छोडना.. मे वादा करतीहु जबतक ये जींदगी रहेगी तबतक मे आपका साथ कभी नही छोडुगी.. अब मे हरदीन आपके नामकाही सींदुर लगाउगी.. फीर चाहे आप कीतनी भी सादी करलो.. आपकी पहेली बीवी मेही कहेलाउगी.. क्या आप इस बीवीको मीलनेतो आओगेनां? जानु मे हमेसा आपका वेइट करुगी.. आपको अपनी बीवी यही आपका इन्तजार करते मील जायेगी..

फीर नीर्मला देवायत दोनो मंदिरके सामने हाथ जोडके खडे रहेते हे तब नीर्मला देवायतको साथमे जीने मरनेकी ओर अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वाकार करनेकी कसमे खातेहे.. तब नीर्मला देवायतके पैरमे जुक जाती हे ओर उसे नमन करती हे तब देवायत उसे खडा करते जोरोसे बाहोमे भीच लेता हे ओर उनके होंठ चुमने लगता हे फीर दोनोही बहार होलमे आजाते हे ओर नीर्मला देवायतसे सटकर बैठ जाती हे..

ओर उनके कंधेपे सर रखते उनसे बाते करने लगती हे.. दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरेकी आगोसमे बेठे प्यारभरी बाते करते रहे.. फीर वो कीचनमे चली जातीहे ओर दोनोके लीये खाना बनाने लगती हे तब देवायत कीचनके दरवाजेके पास खडा रहेते उनको देखतेही रहेता हे तब नीर्मला खाना बनाते सरमाने लगी ओर मुस्कराती रही.. तब देवायत उनके पीछे चला गया ओर उनको पीछेसे अपनी बाहोमे भरते उनका पेट सहेलाता रहा.. तब नीर्मला हसते हुअ‍े पलट जाती हे ओर कहेती हे..

नीर्मला : देवु प्लीज.. आप बैठोनां.. मुजे खाना बनानेदो.. फीर हम खाना खाके प्यार करेगे.. प्लीज..

नीर्मला अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी माफीक देवायतसे बात करती रही.. ओर देवायत उनके सामने वही बेठा रहा जब खाना बन गया तो दोनोने अ‍ेकही थालीमे अ‍ेक दुसरेको खीलाया तब नीर्मलाकी अ‍ेकबार फीरसे आंख गीली होगइ.. आज उनको अपने नये पतीसे बहुत प्यार मील रहाथा.. उनको अ‍ेक बार फीरसे खुलके जीनेकी चाहत बढ गइ.. जब खाना खतम हुआ तो नीर्मलाने फटाफट सब काम नीपटा दीया..

तभी देवायत उनको गोदमे उठालेता हे ओर अ‍ेकबार फीर उनको बेडरुममे लेजाता हे.. तब नीर्मला खुब सरमाइ ओर मुस्कराती रही.. ओर अ‍ेक बार फीरसे दोनोके बीच धमासान चुदाइ हुइ.. इस बारभी नीर्मला दो बार जड चुकीथी ओर आखीरमे दोनो अ‍ेक साथ जड गये.. ओर काफी देर दोनो अ‍ेसेही लेटे रहे तब नीर्मला देवायतकी पीठ ओर सर सहेलाती रही.. फीर दोनो बाथरुममे जाकर नहाने लगे तब वहाभी देवायतने नीर्मलाकी खुब मस्तीकी तब नीर्मला बडी मु्सकीलसे देवायतसे छुटी ओर हसती हुइ नंगीही बहार भाग गइ..

फीर दोनोही तैयार होगये ओर देवायतके जानेका वक्त होगया.. तब नीर्मला देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर आंसु बहाने लगी.. आज वो अपने आपको देवायतको पुरी समर्पीत कर चुकीथी.. जब देवायत नीर्मलाको अपनी बाहोमे भरके खडाथा तब उनकी नजर दीवालपे टंगी अ‍ेक तस्वीरपे चली गइ.. ओर उनकी आंखमे चमकके साथ हसीभी आगइ.. क्युकी वहा दो लडकीयोकी तस्वीर टंगी हुइथी.. ओर ये वही लडकी थी जो उनकी कोलेजमे पढती थी.. जीसे देखकर उनको वोही फीलींग आतीथी जो नीर्मलाको देखकर आइ थी.. जीनका जीक्र देवायत नीर्मलाके सामने कर चुकाथा.. फीर वो वहासे चला गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७६

फीर दोनोही तैयार होगये ओर देवायतके जानेका वक्त होगया.. तब नीर्मला देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर आंसु बहाने लगी.. आज वो अपने आपको देवायतको पुरी समर्पीत कर चुकीथी.. जब देवायत नीर्मलाको अपनी बाहोमे भरके खडाथा तब उनकी नजर दीवालपे टंगी अ‍ेक तस्वीरपे चली गइ.. ओर उनकी आंखमे चमकके साथ हसीभी आगइ.. क्युकी वहा दो लडकीयोकी तस्वीर टंगी हुइथी.. ओर ये वही लडकी थी जो उनकी कोलेजमे पढती थी.. जीसे देखकर उनको वोही फीलींग आतीथी जो नीर्मलाको देखकर आइ थी.. जीनका जीक्र देवायत नीर्मलाके सामने कर चुकाथा.. फीर वो वहासे चला गया....अब आगे

दुसरेही दीन देवायत सहेर चला थगा.. ओर कोलेजमे जाकर वही खडा रहा.. तब चार पांच लडकीया हस हसके बाते करती बहारकी ओर आने लगी.. उनमे वो दोनो बहेनभी थी.. नीसमे अ‍ेक लडकीभी थी जीसके लीये देवायतके दीलमे फीलींग्स आतीथी.. तब देवायत सीर्फ उनकोही देखता रहा.. लेकीन आज उन दोनो बहेनोने उनके सामने देखा तक नही.. ओर सभी लडकीया देवायत के पाससे ही गुजर गइ..

तब देवायत वापस हवेलीपे आगया.. ओर दुसरे दिनभी वही हुआ.. अ‍ैसा लगातार तीन दीन चला.. वो कोलेज चला जाता ओर उनको देखके वापस आजाता.. तब चोथे दीन ही उनकी छोटी बहेन भावनाने नोटीस करलीयाकी ये लडका रोज यहा आता हे.. ओर हमे घुरता रहेता हे.. फीर चला जाता हे.. वो देवायतको देखतेही उनकी ओर आकर्सीत होने लगी.. फीर भी उसने अपनी बडी बहेन मंजुलाको बता दीया..

तबसे दोनो बहेने बराबर नोटीस करने लगी.. ओर देवायतको देखतेही दोनोके दीलमे हलचल तेज होने लगती.. ओर धीरे धीरे दोनोके दीलमे आग लगने लगी.. वो कोइ ओर नही मंजुला ओर भावना थी.. ओर दोनोही इनके बारेमे सोचती तब उनकी दीलकी धडकन बढ लाती.. फीरतो दोनोही देवायतकी ओर आकर्सीत होने लगी.. जबभी मंजुला देवायतके पाससे गुजरती तो सबसे नजर बचाते देवायतकी ओर देखते स्माइल करती.. ओर दोनो आंखो ही आंखोमे अ‍ेक दुसरेकी फीलींग्सको समजने लगे..

तभी अ‍ेक दीन वो बडी बहेन मंजुलाको अकेला पाकर उनके पास चला गया ओर हिंमत करके अपने दीलकी बात बतादी.. तब मंजुलाने सरमाते हसते हुअ‍े देवायतका प्यार कबुल करलीया.. फीर दोनो केन्टीनमे चले गये ओर प्यार भरी बाते करते अ‍ेक दुसरेके बारेमे जानकारी लेने लगे.. तब मंजुको पता चलाकी ये वोही अंकलका लडका हे जो हमारे पापा(राजीव)के बीजनेसमे पार्टनर हे.. ओर वो वहाके राजा हुआ करता था.. ये सब जानके मंजु बहुत खुस होगइ.. ओर देवायतको पाकर अपने आपको खुस किस्मत समजने लगी..

फीरतो आये दीन दोनो केन्टीनमे मीलने लगे.. ओर फोनपे बाते करने लगे.. ये बातकी दोनोने कीसीको भनकभी नही लगने दी.. ओर आहीस्ता आहीस्ता दोनोके बीच प्यार बढता ही गया.. दोनो फ्रि होतेही कोलेजके गार्डनमे या केन्टीनमे मीलते जब वहा कोइ नही होता तब दोनोके होंठभी मील जाते.. ओर देवायत कभी कभी होंठ चुमते मंजुके उरोजोके साथभी खेलता.. ओर दोनोके बीच धीरे धीरे कामुक्ता बढती चली गइ..





इसी बीच मंजुकी बहेन भावनाभी देवायतकी ओर काफी ढल चुकी थी.. लेकीन अब देवायत उनको कम ही दीखता था.. तब देवायतको मीलनेकी उनकी बैचेनी बढने लगी.. ओर मनही मन ठानलीकी अब देवायत मीलेगा तब वो अपने दिलकी बात उनसे केह देगी.. तो दुसरी ओर देवायतभी फोन करके नीर्मलाको दो बार ओर मील चुकाथा.. तब दोनोके बीच जमकर चुदाइ भी हो चुकीथी.. लेकीन देवायतने नीर्मलाको भी नही बतायाकी मे आपकी बेटीको प्यार करने लगा हु..

उधर मंजुने भी कीसीको अपनी दीलकी बात नही बताइ.. वो अभी देवायत ओर उनके बीचका प्यार सबसे छुपाकर रखना चाहती थी.. उनके बारेमे सीर्फ उनकी खास सहेली ही जानती थी.. वोथी.. सृती.. जो इन दोनोके प्यारकी साक्षीथी.. मंजुने उनकोभी कीसीको ना कहेनेकी कसम खीलवाइ थी.. कभी कभी सृतीको भी देवायतको देखके मंजुसे ज्वेसेसी फील होती थी..

क्युकी देवायतका व्यक्तीत्वही अ‍ेसाथा.. सुरुसे ही इतना आकर्सण था.. ओर देखनेभी अ‍ेकदम हेन्डसम ओर स्मार्ट अ‍ेक गठीले बदनका मालीक था.. कोइभी लडकी या ओरत उनको देखतेही उनकी ओर आकर्सीत होजाती.. अ‍ैसा क्यु था.. वो सीर्फ बाबाही जानते थे खुद देवायतभी नही जानता था.. की वो कौन हे.. अ‍ैसा नहीथा की देवायतका सम्बध सीर्फ नीर्मलाके साथही था.. तब हेलीपे दयाभी नइ नइ विधवा होकर आइथी..





ओर कुछही दीन पहेले रजीयाभी आ चुकीथी.. तब ओल रेडी देवायत गांवकी कइ ओरते ओर लडकीयोको चोद चुकाथा.. उनमे रश्मीभाभी ओर चारुभाभीभी सामील थी.. लेकीन सादी कहो या गांधर्वसादी.. वो सबसे पहेले सीर्फ नीर्मलासे की.. जो अ‍ेक आधेड उमरकी महीला थी.. जो देवायत उनको सुरुसेही पसंद करता था.. जीसे आज देवायत अपनी बीवी मानने लगा था.. जो देवायतकी पहेली बीवी होगइ थी.. ओर उनसे जीस्मानी रीस्ताभी कायम होगया था.. अबतक देवायत उजको कइ बार चोद चुकाथा..





अ‍ेक बार देवायत मंजुको मीलने कोलेज गयातो कीसी कारणवर्ष मंजु ओर सृती छुटीसे पहेलेही बहार आगइ थी.. तो देवायतको देखतेही हसते हुअ‍े उनके पास जटसे आगइ.. तब तीनो केन्टीनमे चले गये ओर पहेली बार मंजुने देवायतको सृतीसे मीलवाया.. तब सृती खुब सरमाइ.. ओर देवायतको तीरछी नजरोसे देखती रही.. तब उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर वोभी मनही मन देवायतको पसंद करने लगी..

देवायतको देकर आज उसे अपनी खास सहेली मंजुसेभी ज्वेलसी फील होने लगी.. तभी देवायतने चाइ नास्तेका ओर्डर दीया तो उनका मालीक खुब दोडा दोडा आगया.. ओर देवायतके पास अदबसे हाथ जोडके खडा रहा.. तब उनका नोकर चाइनास्ता रखते देवायतके सामने मुस्कराते हुअ‍े चला गया.. जेसे सब देवायतको पहेलेसेही जानते थे..

देवायत : (हसते) कहो गोलु कैसे हो.. धंधा बंधा सब ठीक चल रहा हेनां..? कोइ तकलीफ तो नही..?

गोलु : (हो. मालीक हाथ जोडते) जी ठाकुर साहेब आपकी महेरबानीसे सब बढीया चल रहा हे.. अब कोइ परेसानी नही.. अबतो लडके लडकीयाभी बहुत अच्छे आते हे.. कोइ पंगा नही.. साहब ओर कुछ चाहीये..? तो मे उधरही बैठा हु आवाज लगा दीजीयेगा.. ये आपहीका होटेल हे..

कहेते गोलु चला गया.. वो यहा केन्टीनका मालीक था.. तब कुछ लफंगे स्टुडन्ट इनके यहासे अ‍ेसेही उधारकी खाते ओर गोलुको पैसेके बदले गालीया देते थे.. जीनकी वजहसे गोलुका धंधा काफी बीगड गया था.. ओर वो कर्जमे डुब गयाथा.. तब देवायतने उसे कुछ पैसे देकर उनका उधार खतम करवाया ओर फीरसे सब मांल डलवाया फीर देवायत ओर उनके दोस्त विरजीने उन अ‍ेक अ‍ेक लडकेको पकड पकडके दोडा दोडाकर मारा..

ओर उन सबसे पैसे वसुल करवाया.. तबसे गोलुकी केन्टीनमे सांती छा गइ.. तब कीसीको नही पताथा की इस कोलेजमे उनके पीताजी किशनका बहुत बडा डोनेशन था.. ओर वो यहाके ट्रस्टी थे.. ओर इस बातका देवायतनेभी कभी फायदा नही उठाया.. ओर नाही कीसीको पता चलने दीया.. जीनकी वजहसे यहाके प्रीन्सीपाल ओर प्रोफेसरमे देवायतकी छबी अ‍ेक नेक इन्सानकी रही.. सभी देवायतकी बहुत इजत करते थे..

मंजुला : (हसते नास्ता खाते) अरे.. आपकीतो बडी इजत करता हे.. आप यहाके दादा या गुंडे मवाली थे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही.. क्या मे आपको गुंडा मवाली दीखता हु..? सृतीजी आपने कैसी सहेली पालके रखी हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जुठे गुसेसे अ‍ेक मुका मारते) पालके रखीहे मतलब..? क्या मे आपको जानवर दीखती हु.. कमीने कहीके.. सृती इनकी बातोमे नही आना.. ये बहुत पहोंची हुइ चीज हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) पहोची हुइ चीज मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : हमारे कोलेजमे जो ठाकुर साहबकी तस्वीर लगी हुइ हेनां..? वो ये जनाबके पीताजी हे.. हें..हें..हें..

कहातो सृती देवायतको मुह फाडते देखती ही रही.. तब मंजुलाने उनके चहेरेके आगे हाथ हीलाया तब उनको होस आया.. ओर देवायतके सामने सरमींदा होते हसने लगी तब देवायतने उनको कहा..

देवायत : (सरारतसे हसते) सृतीजी गभराइअ‍े नही येतो अ‍ैसेही केह रही हे.. ओर आपको कोइ खतराभी नही हे क्युकी मे आपको कोलेजसे नही नीकलवा दुगा.. हें..हें..हें..

कहातो तीनो हसने लगे फीर वहासे खडे होगये तब देवायतने गोलुको पैसे देदीये तब गोलु मना करने लगातो देवायतने जबरदस्तीसे देदीया.. फीर तीनोही गार्डनमे चले गये.. सृती इसी सहेरमे रहेती थी अपनी मां भुमीकाके साथ.. जो उनके पीता नरेश अ‍ेक सरकारी होस्पीटलमे क्लार्क की जोब करते थे.. उनका सपनाथा की अपनी बेटीको डोक्टर बनायेगे.. लेकीन किस्मतको कुछ ओर ही मंजुर था.. वो सृतीको डोक्टर बननेसे पहेलेही इस दुनीयासे विदाय होगये..

अब सृतीकी फेमीलीकी फाइनान्सीयल हालत इतनी अच्छी नही रही.. ओर मां भी ज्यादा चल फीर नही सकती थी.. जबतक देवायतके पीता किशन जींदाथे तब उनकी मददसे फीर उनके पतीके प्रोवीडंड फंडसे वो सृतीको पढा रहीथी.. वो सृती कोलेजमे डोक्टरकी पढाइ कर रहीथी.. जो उनमे बहुत खर्च आता था.. ये बात सीर्फ मंजुही जानतीथी सृतीने आजतक उनके घरके बारेमे कीसीको नही बताया.. फीर तीनो ही गार्डनमे जाके अ‍ेक बेन्चपे बैठ गये..

मंजुला : जानु हमारी कोलेजमे अ‍ेक हप्तेके बाद दो तीन दीनका प्रवास हे.. तो हम नही जा रहे हे.. तो आप आइअ‍ेना.. हम कही ओर घुमके आजायेगे.. क्यु सृती..? तुमभी चलोगीनां..?

सृती : नही यार.. तुजेतो पता हे मम्मीका खयाल रखना पडता हे.. मे नही आसकुगी सोरी..यार.. तु भावुको साथ लेजा वो आ रही हेनां..?

मंजुला : नही यार उनकी क्लासतो चालु हे सीर्फ हमारे तीन क्लासके लोगही जा रहे हे.. ओर वेसेभी अभी भावुको या कीसी ओरको हमारे प्यारके बारेमे नही पता.. ये बात सीर्फ तुही जानती हे..

देवायत : तो फीर तुमभी सबके साथ चली जाओनां.. यहा अकेली क्या करोगी..?

मंजुला : नही..तो फीर मुजेभी कही नही जाना.. जानु आप फ्रि..

सृती : तु अ‍ेक काम क्यु नही करती..? देवायतजीके साथ अपने घर चली जाना.. वो तुजे छोड देगे.. फीर तीन दिनके बाद वापस चली आना.. ये तुजे लेजायेगे..

मंजुला : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी.. अब ये देवायतजी..नही तेरे होने वाले जीजाजी हे.. समजी..? तभीतो इनके साथ घुमने जाना चाहती हु.. सारा मुड ओफ करदीया..

सृती : कुती ये जीजा..जी.. हेतो तु मुजे कबाबमे हडी बनने साथमे क्यु लेजा रही हे..? तुम दोनो अकेलेही चले जाओ.. जाओ अ‍ैस करो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (धीरेसे हसते) नही.. नही जा सकती.. हमारे बारेमे अभी वो भावुको नही पता.. अगर तु साथ चलतीतो येतो केह सकतीकी में सृतीके साथ गइथी.. समजी.. ओर घरपेभी अकेली नही जा सकती.. मम्मी अकेली गइतो हजार सवाल करेगी..

सृती : तो फीर अ‍ेक काम कर.. तु मेरे घर चल.. जीजु वही मीलने आजायेगे.. हम घरपेही तीनो तीन दीन खुब धमाल करेगे.. क्या कहेतेहो जी..जु... हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) आइडीया बुरा नही हे.. क्यु देवु..? आप आ रहे होनां..?

देवायत : (हसते) अब मेरी होनेवाली बीवीको नाराज तो नही कर सकता.. फीर सोचलो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) जी नही.. वहा कोइ सरारत नही.. सृतीकी मम्मी होगी.. समजे.. बडे आये इस्क फरमाने वाले.. जानु.. अब आपके बीना अच्छाभीतो नही लगता.. मुजसे सादी करलो.. हें..हें..हें..

सृती : (सरारतसे हसते) जीजु आप फीकर मत करना हमारा घर पुराना हे.. लेकीन बडा हे उपरकी मंजीलमे अभी कोइ नही रेहता.. आप अपनी बीवीको लेकर उपर पडे इस्क फरमाते रहना.. मे खाना वही दे जाउगी.. हें..हें..हें..

कहातो मंजु जुठे गुसेसे दांत पीसते सृतीको मुका मारने भागने लगी.. तब सृती उछलती मेरे पीछे कंधेपे हाथ रखते जोरोसे हसती छीपने लगी.. ओर गोल गोल घुमती रही.. तब मंजुभी उनके पीछे मारनेके लीये भागती रही.. तब मेने मंजुको कमरसे पकड लीया ओर अपने पास खीचके बीठा दीया.. तब सृती अबभी हस रहीथी ओर वो हमसे थोडी दुर बैठ गइ.. तब मंजु मेरे कंधेपे सर रखके बेठ गइ.. ओर अ‍ेक हाथ मेरी कमरके पीछे लेजाते कमरको पकड लीया.. ओर सृतीकी ओर देखते हसती रही..

सृती : (हसते) जीजु तो फीर आप मेरी बहेनसे सादी कब कर रहे हो..? हमेभी बुलाओगेनां..? हें..हें..हें.. देखो आपके प्यामेतो बीलकुल पागल हो चुकी हे.. आप दोनो सादी करलो..

देवायत : (हसते) बस.. जब मेरी मंजु कहेगी तब हम करलेगे.. मुजे कहा घरपे कीसीकी परमीशन लेनी हे.. बस सीर्फ बातही करनी हे.. मेरे घरवाले खुले विचारोके हे मुजे कभी मना नही करते..

मंजुला : लेकीन जानु मुजे मम्मी पापासे बात करनी पडेगी.. अगर वो परमीशन नही देते तो हम भागके सादी कर लेगे.. लेकीन मुजे सादी सीर्फ आपसे ही करनी हे.. वरना.. मे..

सृती : (उची अवाजमे) वरना क्या..? पागल होगइ हे तु..? कुछ उल्टा सीधा मत सोचना वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. इतनी पीटुगी.. की.. की.. तेरी नानी याद आजायेगी.. बोल कब करनी हे सादी..?

मंजुला : (हसते) बस ये आखरी साल हे.. पढाइ खतम होतेही सादी करलुगी.. अब इनसे दुर भीतो नही रेह सकती.. मे इतना चाहतीहु इनको.. ओर ये हेकी.. मीलनेभी कम आते हे.. जानु पता नही.. लेकीन अब आपके बीना रहेना मुस्कील होने लगा हे.. मुजसे सादी करके अपने साथ लेजाओ..

कहेते अपनी आंख गीली करलेती हे.. तब देवायत उसे कमरमे हाथ डालके अपने तनसे चीपका लेता हे ओर उनका सर चुम लेता हे.. तब वो देवायतके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी.. तब सृतीभी उनके पास आगइ ओर उनके पास सटकर बैठते उनको हग करलीया.. फीर मंजुके आंसु पोछने लगी.. क्युकी मंजुकी असीलीयत सीर्फ वोही जानती थी.. तो मंजुभी आंसु बहाते मुस्कराने लगी.. फीर सृतीकी ओर हसते खुद अपने आंसु पोछने लगी..

मंजुला : (हसते) आइ अ‍ेम सोरी.. यार मे कंट्रोल नही कर सकी.. हम तेरे घरही चलते हे.. बस.. अब खुस..?

सृती : (हसते) हां खुस.. कमीनी कहीकी.. सुन वो..रीपोर्ट..

इतना कहाकी मंजुने सृतीका हाथ दबा दीया तो सृती बीचमेही रुक गइ.. ओर मंजुकी ओर देखती रही.. तभी मंजुने सृतीको आंखोके इसारोसे बतानेको मना कर दीया.. तभी सभी स्टुडन्ट बहार आने लगे तो मंजु जटसे खडी होगइ.. तो सृती हसने लगी तब मंजु फटाफट देवायतके होंठोपे कीस करते सृतीका हाथ पकड लीया ओर देवायतको बाय.. कहेते जल्दी गार्डनसे जाने लगी..

क्युकी दोनोके बीचका प्यार वो अभी सबसे छुपाना चाहती थी.. ओर देवायतभी दुसरे दरवाजेसे बहार नीकल गया.. ओर कार लेकर अपने गांवमे हवेलीपे आ गया.. तब देवायतके जातेही पीछेसे मंजु ओर सृती चलते बाते करने लगी..





सृती : (दोनो साथ चलते) कमीनी मुजे बीचमे क्यु रोक दीया..? तु बहुत गलत कर रही हे.. यार वो तुजे दीलोजानसे चाहते हे.. ओर तुभी उनको हदसे ज्यादा प्यार करने लगी हे.. तो उनको अंधेरेमे क्यु रखना..?

मंजुला : (साथ चलते) नही सृती मे मेरा प्यार खोना नही चाहती.. बडी मुस्कीलसे तो ये मुजे मीले हे.. जो मुजे दीलोजानसे चाहते हे.. मे अ‍ैसेही प्यार करनेवालेके इन्तजारमे थी.. ओर भगवानने मेरी सुनली.. तुजे मेरी कसम हे जो कभी कीसीके सामने इस रीपोर्टके बारेमे बात की तो.. मेरा मरा मुह देखेगी..

सृती : (परेसान होते) यार.. तु बातको समजती क्यु नही हे..? क्यु उनकी जींदगीके साथ खीलवाड कर रही हे.. वो कीतने अच्छे हे.. मुजे यकीन हे वो फीरभी तुजे अ‍ेक्सेप्ट करलेगे.. तुजे पता हे रीपोर्टमे क्या हे.. मेरी डोक्टरसे बात होगइ हे..

मंजुला : क्या हे.. यहीनां की मे कभी मां नही बन सकती.. उनको कभी अपनी कोखसे बच्चा नही दे सकती.. कोइ बात नही.. फीरभी मे उनसे सादी करुगी.. अगर उनको बच्चा चाहीयेतो मे खुद उनकी दुसरी सादी करवा दुगी.. अबतो कोइ पैबलेम नही हे..?

सृती : नही मंजु बात सीर्फ बच्चेकी नही हे तु समजती क्यु नही.. इनमे तेरी जानका खतरा हे.. तु बेसक मां बन सकती हे लेकीन.. फीर तु ज्यादा दीन जीन्दा नही रेह सकती.. स्टुपीड.. वो तेरे बीना कैसे रेह पायेगे..?

मंजुला : (अचानक रुकते अपना सर पकडते) ओह गोड.. तो फीर मे क्या करु..? उनको केहदु की मे आपको बच्चा नही दे सकती आप सीर्फ मेरे साथ मजे करो.. क्या यही कहेदु..? बात करती हे.. सृती अगर मेने बच्चा पैदा करलीया तो मेरे पास कीतना वक्त होगा..?

सृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) मंजु.. तो फीर.. धीरे धीरे तेरे सरीरमे कमजोरी आने लगेगी.. ज्यादा से ज्यादा दो से तीन साल.. तु सोच उनके बाद जीजुकी क्या हालत होजायेगी.. क्या वो तेरे बीना रेह पायेगे..?

मंजुला : (कुछ सोचते) ठीक हे.. सुन.. मे सादीके बाद चार पांच साल तक तो बच्चा पैदा नही करुगी.. फीर रही बात उनके अकेले रहेने की तो मेने इस बारेमे कुछ सोच लीया हे.. फीर मे बच्चा पैदाभी करुगी.. सृती मेरे पास सात आठ साल हे.. मे इन सालोमे उनके साथ पुरी जीदंगी जी लुगी.. नही जीना मुजे ज्यादा.. जीतनीभी जींदगी हे.. उतनी जींदगी मे खुसीया भर दु्रगी.. उनको इतना प्यार दुंगी..

सृती : (मुस्कराते धीरेसे) जीजुके प्यारमे बीलकुल पागल होगइ हो.. कमीनी उसके बादका सोचा हे..?

मंजुला : (सरारतसे हसते) हां सोच लीया हे.. मेरे जानेके बाद मेरे दुवुको तु सम्हाल लेना.. हें..हें..हें.. करलेना उनसे सादी.. हें..हें..हें.. वरना मेरे साथही तुभी इनसे सादी करले.. मेरा देवु हम दोनोको खुस रखेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते पीठमे मुका मारते) कमीनी ये तु क्या बोल रही हे.. बेसर्म कहीकी.. सरमभी नही आती.. मे उनके साथ कैसे सादी कर सकती हु..

कहेते सृती अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर हसते दांत पीसते मंजुकी पीठमे मुका मारने लगी.. अ‍ैसेही बाते करते दोनो भावना ओर दुसरी लडकीयोके साथ जाके खडी रही.. फीर सभी अपने अपने घरकी ओर चले गये ओर भावना मंजुला अपनी होस्टेलपे आगइ.. अ‍ैसेही अ‍ेक हप्ता नीकल गया.. ओर इस अ‍ेक हप्तेके बीच देवायतने अ‍ेक बार चारुभाभी तो अ‍ेक बार रश्मीभाभी को ओर तीन बार नीर्मलाकोभी चोद लीया..

ओर इसी बीच दयाभी धीरे धीरे देवायतकी ओर ढलते सेट होने लगी.. ओर देवायत जीस पार्टनरको काका कहेते बुलाता वो धंधेपे चले जाते तब उनकी बीवी नीर्मलाके पास फोन करके चला जाता ओर पुरा दीन मीया बीवीकी तराह रहेते चुदाइ करते.. अबतो नीर्मलाकोभी देवायतसे चुदनेकी आदत लग गइ.. वो भी जबभी मौका मीलता देवायतको खुद फोन करके बुला लेती ओर उनसे जबकर चुदवाती..





ओर आखीर वो दीनभी आगया ओर मंजुने सुबह ही फोन करके देवायतको बुला लीया.. ओर देवायत घरसे अपनी मां विमलाको तीन दीनका बोलके नीकल गया.. ओर सीधा कोलेज चला गया.. तब मंजु ओर सृती देवायतका वेइट करते कोलेजके बहारही खडीथी.. जब देवायत कार लेके सहेरमे पहोचा तो दोनो फटाफट देवायतकी कारमे बेठ गइ ओर सृतीके दीखाये हुअ‍े रास्तेपे कार दोडादी..

जब तीनो पहोंचे तब सहेरके मेइन रोडपे ही अ‍ेक छोटी हवेली जैसा मकान दिखा.. जो बहारसे खंडहरकी तराह दीखता था.. तब सृतीने कार सीधेही अंदर लेजानेको कहा तो अंदर बहुत बडी खाली जगाह थी तब कारसे तीनो उतर गये.. तो देवायत ओर मंजु पुरे घरको बहारसेही देखने लगे.. ओर देवायत समज गयाकी घरके मालीक कभी बहुत पैसे वाले होगे.. ओर ये विरासतमेही सृतीके पापाको मीला होगा..

सृती : (हसते) लीजीये जीजु हम आगये.. यहीहे हमारा गीरब खाना.. चलीये अंदर.. दीखाती हु आपको..

देवायत : सृती.. खबरदार जो आजके बाद घरको गरीब खाना कहातो.. अरे पगली यहीतो हमारा स्वर्ग हे.. जो हम यहा चेइनकी नींद सोते हे.. क्या तुजे ओर तेरे घरवालोको यहा अच्छा नही लगता..? अपने पुर्खोका घर हेनां..? इसे कभी गरीब खाना मत कहेनां..

सृती : (मुस्कराते) सोरी.. जीजु.. आजके बाद नही कहुगी.. आइअ‍े अंदर.. यहा सीर्फ हम मां बेटी ही रहेते हे..

तब तीनोही अंदर चले गये.. तो आज मंजुभी सृतीके घर पहेली बार आइथी तो वोभी अंदर नजर घुमाते सब देखती रही.. भलेही बहारसे खंडहर जैसे दीखता हो लेकीन अंदरसे बहुतही सुंदर सजावट थी.. तब अ‍ेक खुरसीपे सृतीकी मम्मी बैठी नजर आइ.. जो कोइ कीताब पढ रही थी.. तब मंजु ओर देवायत उनके पास चले गये ओर उनके पांव छुके वही पासमे बैठ गये.. तब सृती भी दोनोके लीये पानी लेकर आगइ ओर पानी देते उनकी मम्मीसे कहने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७७

तब तीनोही अंदर चले गये.. तो आज मंजुभी सृतीके घर पहेली बार आइथी तो वोभी अंदर नजर घुमाते सब देखती रही.. भलेही बहारसे खंडहर जैसे दीखता हो लेकीन अंदरसे बहुतही सुंदर सजावट थी.. तब अ‍ेक खुरसीपे सृतीकी मम्मी बैठी नजर आइ.. जो कोइ कीताब पढ रही थी.. तब मंजु ओर देवायत उनके पास चले गये ओर उनके पांव छुके वही पासमे बैठ गये.. तब सृती भी दोनोके लीये पानी लेकर आगइ ओर पानी देते उनकी मम्मीसे कहने लगी....अब आगे

सृती : मम्मी ये मेरी बेस्ट सहेली हे.. मंजुला.. ओर ये हे उनके पती.. देवायतजी.. पासके गांवके रहेते हे..

सृतीकी मम्मीका नाम भुमीका हे अब हम कहानीमे उसे नामसे ही जानेगे..

भुमीका : (हसते) अच्छा अच्छा.. जीते रहे बेटा.. क्या हेना तुम लोगोको कभी देखा नही हेनां.. तो पहेचान नही पाइ.. बेठो सब.. (सृतीकी ओर देखते) बेटा इनके लीये कुछ चाइ नास्ता बनाले..

सृती : (मंजुकी ओर देखते हसते) मम्मी इनकी अभी अभी नइ सादी हुइ हे.. तो दोनो मीया बीवी सहेर घुमने आये हे.. दो तीन दीन अब यही रुकेगे.. फीर मेरी कोलेजमे भी छुटी हे.. तो इधर ही बुला लीया..

भुमीका : (हसते) अच्छा कीया..

कहातो मंजु जुठे गुसेके साथ आंख बडी करते सृतीको घुरने लगी.. तब सृतीकी हसी नीकल गइ तो अपने मुहपे हाथ रखके घुम गइ ओर हसने लगी.. तब देवायतभी हसता रहा.. क्युकी उनकोभी सृतीकी अ‍ैसी सरारत अच्छी लगी.. तब सृती मंजुकी ओर हसती हुइ कीचनमे चली गइ तब मंजुभी खडी होगइ.. ओर वोभी सृतीके पीछे जाने लगी.. तो सृतीकी मम्मी हसने लगी.. ओर मेरी ओर घुम गइ.. फीर बाते करने लगी..

भुमीका : बेटा आप लोग कीस गांवसे हे..? ओर क्या करते हे आप..?

देवायत : (हसते) जी.. आंटी मे --गांवमे रहेता हु.. ओर हमारा बहुत बडा धानका कारोबार ओर खेतीबाडी हे.. ओर मंजु अभी अपनी पढाइ पुरी कर रही हे.. वो ओर सृती दोनो साथमेही पढती हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे हसते) अच्छा अच्छा.. तो आप उस गांवमे रहेते हे.., बेटा जब मे कोलेजमे थी तब उस गांवमें मेरीभी अ‍ेक सहेली थी.. नीर्मला नाम था उनका.. ओर कुछ दोस्तभी थे जो हम सब मीलके कोलेजमे बडी धमाल करते थे हें..हें..हें.. अ‍ेकतो वहाके ठाकुर साहबका लडकाथा.. किशन.. जो बहुतही नेकदील इन्सान था.. सबकी मदद करता रहेता.. फीर विरजी.. राजीव मेरा पती नरेश.. हम सब दोस्त थे.. ओर नीर्मला सायद किशनकी हवेलीमे रहेती थी..

देवायत : (आस्चर्यसे हसते) क्या आप जानती हो ठाकुर साहबको..?

भुमीका : (खुसीसे हसते) हां ठाकुर साहबको नही उनके लडकेको जानतीथी.. किशन.. मेरा मुह बोला भाइ.. जो हम सब अ‍ेकही क्लासमे साथ पढते थे.. हम सब दोस्त थे.. नीर्मलाभी उस गांवसे आतीथी.. मेरी खास सहेली.. जैसे सृतीकी ये तुम्हारी बीवी हे..

बडीही मासुम थी.. जो उन ठाकुर साहेबके लडके किशनसे प्यार करती थी.. फीर पता नही कहा चली गइ.. मुजे आजतक नही मीली.. ओर नाही उनका कोइ सुराग.. पता नही इस वक्त वो कहा होगी.. क्या तुमने उनको वहा कभी देखा हे..?

कहातो देवायत चोंक गया.. क्युकी वो उन्ही नीर्मलाकी बात कर रहीथी जीनसे देवायतने अभी अभी सादी कीथी.. तब देवायत बडाही दुवीधामे पड गयाकी उनके बारेमे सृतीकी मम्मीसे बात करनी चाहीये की नही.. अगर वो जान जायेगी की नीर्मलाकी बेटी ये मंजुही हे तो कीतनी खुस होजायेगी.. तब देवायत उनकी पहेचान छुपाके बाकी सब बातानेको राजी होगया.. ओर वो सृ.मम्मी भुमीकासे बात करने लगा..

देवायत : (हसते) हां आंटी में उनके बारेमे जानता हुं.. आपको मालुम हे ये मेरी बीवी मंजु कौन हे..? ओर आपकी सहेलीभी यही हे.. वो -- गांवमे रहेती हे ओर ये मंजु उन्हीकी बेटी हे..

भुमीका : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? ये मंजु मेरी नीमुकी बेटी हे..? हे भगवान.. देखो आखीर उसने मुजे मीलाही दीया.., कहा गइ मेरी बच्ची.. आनेदो उनको.. उनसे बहुत सारी बाते करनी हे.. पता नही वो कहा हे.. क्या आप उसी ठाकुरके गांवमे रहेते होनां..? क्या मुजे अ‍ेक बार नीमुसे मीलवा सकते हो..?

देवायत : (हसते) आंटी.. जब उनकी बेटीभी यही हेतो.. वोही आपको उनसे मीलवा देगी.. अभी आयेगी.. आप उन्हीसे बात करके सब पुछलो.. वो हमारे गांवमे नही रेहती..

सृती : (दोनो चाइनास्ता लाते) क्यु.. जीजु.. मम्मीसे क्या बाते हो रही हे.. कही मेरी बहेनकी सीकायततो नही कर रहे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (मंजुको हसते) अरे.. आ बेटी तु इधर आ.. बेठ मेरे पास.. मुजेतो पताही नही थाकी तुम मेरी नीमुकी बेटी हो.. कहा हे वो.. ओर कैसी हे वो.. जबसे कोलेज छोडदी तबसे मुजे मीलीही नही..

सृती : (आस्चर्यसे खुस होते) मम्मी.. क्या तुम जानतीहो मंजुकी मम्मीको..?

भुमीका : (हसते) हां.. बेटी.. अभी अभी हम दोनो बाते कर रहेथे तो बातो बातोमे ही मुजे पता चलाकी तेरी सहेली मेरी खास सहेली नीमुकी बेटी हे.. मेने कीतना ढुंढा उसे.. कभी मीलीही नही.. तेरे मामा किशननेभी कभी इनके बारेमे नही बताया.. ओर देखो.. आज अनायासही मील गइ.. (मंजुको) बेटी.. कैसीहे मेरी नीमु..? कहा हे वो.. मुजे उनसे मीलना हे..

मंजुला : (असंमजमे हसते) जी..आंटी.. लेकीन.. वो.. वो.. आप मेरी मम्मीको.. मतलब उनको कैसे जानती हो..?

भुमीका : (हसते) अरे बेटी.. जीस तराह तुम ओर सृती साथमे पढती हो.. उसी तराह मे ओर नीमु साथमे अ‍ेकही क्लासमे थे.. हम दोनोभी पकी सहेलीथी.. हम सबने कोलेजमे खुब धमालकी हे.. हें..हें..हें.. हमारे कुछ ओर दोस्तभी थे.. ये तेरा पतीभी उसी गांवका हे जो तेरी मम्मी ओर हमारे दोस्त उस गांवके थे..

सृती : (हसते) मम्मी तबतो ये आपके भी जमाइ हुअ‍े.. हें..हें..हें.. तबतो इनकोभी जानती होगी.. हें..हें..हें..

कहातो देवायतने सृतीकी ओर आंखोसे इसारा करते ना पुछनेको मना करदीया.. तब सृती देवायतकी ओर देखते चुप होगइ.. ओर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया इसी बीच सृतीकी मम्मी मंजुसे हस हसके बाते करती रही.. ओर नीर्मलाके बारेमे जानकारीया लेने लगी..

तब सृती सवालीया नजरोसे देवायतको देखती रही.. फीर मंजु सृती देवायत कपडेकी बेग लेके उपरकी मंजीलपे चले गये तो वहाभी बहुत सारे कमरेथे.. तो सृती दोनोको अपने अपने कमरे दीखाने लगी.. तब देवायत अपने कपडे रखने रुमके अंदर चला गया तब मौका देखतेही मंजु सृतीके पास चली गइ ओर.. सरमाते मुस्कराते..

मंजुला : (धीरेसे सरमाते) सृती.. हम दोनो अ‍ेकही कमरेमे अ‍ेडजेस्ट करलेगेनां..

सृती : (कामुक मुस्कानके साथ धीरेसे दांत पीसते) कमीनी.. मत भुल.. अभी तुम लोगोने सादी नही की हे..

मंजुला : (सरमाते हसते) तो क्या हुआ.. मे जींदगीका हर मजा लेना चाहती हु.. अगर तुजेभी आना हे तो तुभी आजा.. दोनो मीलके इनको लुट लेगे.. हें..हें..हें.. अच्छा मौका हे.. चलनां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

सृती : (सर्मसार होते मुका मारते धीरेसे) मुजे नही आना कमीनी.. जा तुही चुदवाले.. बेसर्म कहीकी.. कीतनी आग लगी हे तुजे.. देखना कही उंच नीच ना होजाये.. वरना पेट फुलाकर घुमती रहेगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) सृती.. प्लीज. ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. कोलेज खतम होतेही हम सादी करलेगे.. मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम भागके सादी करके इधरही आजायेगे.. तु इनकी टेन्शन मतले.. तुमतो मेरे बारेमे सब जानती हो..

सृती : (हसते धीरेसे) चल ठीक हे आजाना.. चलो अब कही घुमने बुमने जाना हेकी यही रहेके इनसे चुदवाना हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) कमीनी.. कहा जायेगे.. इधरतो सब जगाह देखी हे.. यही रहेते हेनां.. हमारे पास तीन दिन ओर रात हे.. तुभी चलनां.. हम दोनोही इनकी रानीया बनजायेगी..

सृती : (हसते) कुती कहीकी.. मुजे नही आना तुही चुदवाले.. मुजे पताथा तुम इनको यहा कीसलीये लेकर आइ हो.. चल कोइ बात नही.. लेकीन सुन.. देख तेरी मम्मी ओर मेरी मम्मी मील जाये इससे पहेले इनसे सादी करले वरना तुम दोनोका भांडा मेरी मम्मी तेरी मम्मीसे बात करके फोड देगी.. जीजुने तेरी मम्मीके बारेमे बताकर गडबड करदी.. ओर वो खुद उनकी पहेचान मम्मीसे छुपा रहे हे.. पता नही क्यु..

मंजुला : (सरमाते हसते) तु फीकर मत कर इनसे पहेले हम दोनो मीलकर कुछना कुछ जुगाड तो करही लेगे.. तु उनकी टेन्शन मतले.. हें..हें..हें..

सृती : चल ठीक हे.. मे नीचे जाती हु.. मंजु.. तुम जीजुसे मीलन करनेसे पहेले अ‍ेक बार फीर सोचले.. क्युकी तुम बहुत बडा रीस्क ले रही हो..

मंजुला : (मुस्कराते) सृती.. मेने सब सोचलीया हे.. अब जोभी होगा देखा जायेगा.. इसीलीयेतो तुजे मे मेरे साथ सामील होनेका केह रही हु.. ताकी मेरे बाद तु मेरे देवुको सम्हाल सके..

सृती : (सरमाते हसते) नही मंजु.. थेन्कस.. तुने मुजपे इतना विस्वास कीया.. लेकीन मे अभी इन सब चीजोके लीये तैयार नही हु.. बस अ‍ेक बार डोक्टर बनजाउ.. ओर मम्मी पापाका सपना पुरा करलु.. फीर इस बारेमे हम सोचेगे.. अब तुजा मे नीचे जाकर कुछ तैयारीया करलु..

मंजुला : (हसते) ठीक हे.. तु जा.. फीर बात करते हे..

सृती : (नीचेकी ओर जाते मनमे सोचते) कैसे मंजुने उसे खुला ओफर देदीया.. मुजे सौतन बनानेकोभी तैयार होगइ.. कमीनी.. पहेले तुमतो ठीकसे चुदवालो.. फीर मुजे कहेना.. जीजुका पेन्टके अंदरसेही कीतना बडा दीखता हे.. जब वो रीयलमे तेरी फाडेगा तब तुजे पता चलेगा.. लेकीन जीजु दीखतेभी मस्त हे.. अ‍ेकदम हेन्डसम.. कास तुजसे पहेले वो मुजे मीलजाते.. तो आज तेरी जगाह मे होती.. कोइ बात नही आगे देखा जायेगा.. अगर तुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे तो फीर मुजे क्या अ‍ेतराज होगा..? देखती हु.. अगर जीजु मेरी ओर प्यारकी नजरसे देखते हेतो मेभी आगे बढनेका सोचुगीं.. क्या मस्त दीखते हे..

सोचते हुअ‍े सृती हसती हुइ नीचे आजाती हे.. तो दुसरी ओर मंजुभी सरमाते देवायतवाले कमरेमे अपने कपडे लेके अंदर चली जाती हे.. ओर धीरेसे दरवाजा बंध कर देती हे.. तब देवायत बाथरुममे फ्रेस हो रहाथा.. तो मंजु अपने कपडेकी बेग वही बेडपे रखके बैठ गइ ओर कमरेमे नजर घुमाते सब देखने लगी.. तब उसे सृतीकी आर्थीक हालत समजमे आइ.. ओर वो मनसे दुखी होने लगी.. तभी देवायत अपना सर पोछते बहार आगया.. ओर मंजुको देखते..

देवायत : (हसते) अरे मंजु तुभी इधर आगइ..? क्या सृतीको पता हे..? देखना कुछ गडबड ना होजाये..

मंजुला : (खडी होते सरमाते) हां.. अब आपकी बीवी हु तो इधर नहीतो कीधर जाउगी.. आजाओ बाबु..

कहेते देवायतकी ओर चली गइ.. तब देवायतने अपने दोनो हाथ फैला दीये तो मंजु देवायतकी बाहोमे चली गइ.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर थोडी देर अ‍ैसेही खडे रहे.. तभी देवायतने उनका चहेरा हथेलीमे थामलीया तब मंजुने अपनी दोनो आंख बंध करली ओर उनके होंठ फडफडाने लगे.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. तब मंजु मदहोस होने लगी ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे..

तभी मंजुको देवायतका हाथ अपने बुब्सपे मसलते महेसुस हुआ तो वो सरसे पांव तक हील गइ ओर कांपने लगी.. मंजुने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमें भीचलीया.. ओर उनके कंधेपे सर रखके खडी रही.. वो पुरी तराह कामवासनामे जलने लगी.. ओर उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. तब अ‍ेक बार फीर देवायतने उनके सरको पकडते होंठोसे होंठ मीला दीये.. तब मंजु आंधी आंख चडाते नसेमे देवायतका साथ देने लगी..

मंजुला : (कामुक होते) बुचचच.. बुचचच.. अंहहहह उहुंउउ उहुउउ.. देवुउउउउ.. हंमममम मंमम बुचचचच.. देवु.. मेरे.. दे..वु.. प्लीज.. कुछ करोनां.. मे आपके बीना नही रेह सकती..

देवायत : (होंठ छोडतेही) मंजु.. आज कुछ गलत ना होजाये.. अभी कंट्रोल करले.. अभी कुछ नही..

मंजुला : (सरमाते सीनेमे सर छुपाते) देवु वोहीतो नही होता.. इसीलीयेतो मे आपको इधर लाइ हु.. जानु अ‍ेक बात कहु..? अगर मम्मी पापा नही मानेतो हम क्या करेगे..? आपने दुसरे प्लानके बारेमे कुछ सोचा हे..? चलोना हम भागकर सादी करलेते हे.. हमारे पास ये तीन दिन हे..

देवायत : हां.. फीरभी हमारी सादी होजायेगी.. तुम फीरक मत करो क्युकी हमारे गुरुजीका आश्रम हे.. हम वही चले जायेगे.. ओर हम मंदिरमे सादी करलेगे.. वो हमारे कुलगुरु हे.. क्या तुम इसके लीये तैयार हो..?

मंजुला : (उत्सुक्तासे) हां.. देवु वो कीतनी दुर हे..? चलोनां हम अभी चले जाते हे.. हम वहा सादी करलेगे.. फीर मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम केह देगेकी हमने मंदिरमे सादी करली हे.. चलोनां.. हम अभी जाते हे तो सामतक लौट आयेगे.. मे सादीके लीये रेडी हु..

देवायत : (हसते) पागल होगइ हो क्या..? पहेले अपनी मम्मीसे बात तो करले.. फीर नही मानेतो हम चले जायेगे.. ओर अभी सादी करलीतो भावुभी तेरे साथ हे उसे पता चल गया तो..?

मंजुला : अरे कीसीको पता नही चलेगा चलोनां.. अभी आप यही ठहेरो.. मे अभी आइ..

कहेते मंजु जटसे नीचे चली गइ ओर सृतीसे बात करने लगी.. तो सृती उसे कुछ समजाती रही लेकीन मंजु उनसे बात करके फटाफट वापस आगइ.. ओर देवायतके सामने देखते हसते हुअ‍े बाथरुममे घुस गइ तब देवायत उसे देखताही रहा.. फीर वो कपडे पहेनके अपने बाल बना रहाथा तब सृती कुछ कपडे लेकर उपर आगइ ओर बेडपे रखके देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते सरमाके हसती हुइ नीचे चली गइ..

देवायतको पताही नही चलाकी सृती उनके सामने इतनी क्यु सरमा रही थी.. तब थोडीही देरमे मंजु नहाके बहार आगइ ओर बेडपे पडे कपडोको पहेनने लगी तबतक देवायत उसे देखताही रहा.. तब मंजु अ‍ेक लाल सारी पहेनके तैयार होगइ ओर अ‍ेक दुल्हनकी तराह शींगार करने लगी.. तभी सृतीभी वापस आकर बेठ गइ ओर मंजुको देखते हसती ही रही.. तब देवायतभी दोनोके सामने बैठे हसता रहा..

सृती : (हसते) जीजु क्या पटी पढाइ आपने इसे.. येतो बीलकुल पागल होगइ हे.. क्या आपभी तैयार होगये..?

मंजुला : (हसते चुडीया पहेनते) कमीनी.. तु अभी तक तैयार क्यु नही हुइ.. चल जा ओर तैयार होकर आजा तुभी हमारे साथ चल रही हे..

सृती : (हसते) पागल हो क्या..? इधर मम्मीका खाना कोन बनायेगा..? तुम दोनोही चले जाओ.. ओर आप दोनोका खानाभी मे इधर बना रही हु.. दोनो जल्दी वापस चले आना..

मंजुला : अरे चलनां.. तु नखरे बहुत कर रही हे.. हम अभी आजायेगे.. मम्मीके लीये रास्तेसे खाना पेक करवा लेगे.. देवु इनको बोलो तैयार होजाये.. खानाका हम बादमे सोचेगे..

देवायत : हां सृती तुमभी चलोनां.. हम दो घंटेमे वापस आजायेगे यही पासही तो हे.. हमारे गांवके बीच..

सृती : नही जीजु.. मम्मीको बहारका खाना नही देना उनकी तबीयत बीगड जाती हे आप लोग चले जाओ..

मंजुला : ठीक हे तो फीर हम दोनोका खाना मत बनाना हम लंच करके आयेगे.. क्यु देवु..?

देवायत : (हसते) हां.. बस तुम अ‍ेक बार चलोतो सही.. बाबाही हमको बीना खाने नही आने देगे..

तभी मंजु शींगार करके खडी होगइ ओर देवायतका हाथ पकडके लगभग बहारकी ओर दोढ ही पडी.. तब सृतीभी दोनोके पीछे हसती हुइ आने लगी ओर दोनो कार लेके नीकल गये.. तब रास्तेसे देवायतने दो फुलोका हार लेलीया ओर दोनो हाइवेकी ओर जाने लगे.. तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर सोचमे डुब गइ.. क्युकी आज वो इतना बडा डीसीजन लेके देवायतके साथ सादी करने जा रहीथी.. जो इस सादीको अभीके लीये सबसे छुपाके रखना चाहती थी..

तब २५ मीनीटकी ड्रइवके बाद दोनो आश्रम पंहोच गये तभी कारसे उतरतेही मंजु चारो ओर नजर घुमाते देखती रही.. ओर जाके देवायतका हाथ बाजुसे पकडलीया.. फीर दोनो अंदर जाने लगे.. मंजु आज यहा पहेली बार आइथी तो इतना बडा आश्रम देखते उनके दीलमे घभराट महेसुस करने लगी.. की आश्रम इतना बडा हेतो यहाके महंत कौन होगा.. क्या वो हमारी सादीके लीये मान जायेगे..? अ‍ैसे तराह तराहके सवाल उनके मनमे उठने लगे.. तब उनको पता नही थाकी आगे क्या होने वाला हे..

जेसेही दोनो आश्रमके होलमे गये तब सामने बाबा अपने आसनपे बीराजमान थे ओर दो सेवकसे कुछ बाते कर रहेथे.. तब देवायतके साथ मंजु वहा चली गइ ओर बाबाको गभराते देखती ही रही.. तब वहा पहोचतेही देवायतने बाबाको दंडवत कीये ओर पांव छुलीये तो मंजुनेभी देवायतका अनुकरण करते बाबाके पांव छुने लगी.. तब बाबाने उनको पांव छुनेसे रोक लीया.. तो मंजु आस्चर्य भावसे डरते उनको देखने लगी..

तब बाबा देवायतको आशीर्वाद देते मुस्कराते रहे.. वो दोनो सेवक देवायतको नमस्कार करके चले गये.. तो देवायत ओर मंजु उनके चरणोके पास बेठ गये तब बाबा देवायतके सामने देखके हसने लगे.. फीर मंजुकी ओर देखते अपना सीस नमाते उनके सामने दोनो हाथ जोड लीये.. तब मंजु ओर देवायतको बडाही आस्चर्य हुआ.. ओर दोनो बाबाके सामने हाथ जोडकर बैठे रहे.. तब बाबाने देवायतको कहा..

बाबा : (मजाकमे हसते) क्यु महाराज.. आखीर अपनी रानीसाहेबाको लेकर आही गये.. हें..हें..हें..

देवायत : (सरमाते हसते) क्या बाबा.. क्यु मजाक कर रहे हो.. अब काहेका राजा.. वो सबतो चले गये..

बाबा : (हसते) गलत.. बेटा तु चाहे जोभी कुछ कहे.. लेकीन तेरे गांववाले ओर कबीले वाले तुजे आजभी अपना राजा मानते हे.. (मंजुकी ओर देखते) क्यु बेटी.. आखीर तुमभी आही गइ.. तुने मुजे बहुत इन्तजार करवाया हे.. तुजे पताही नही होगाकी तुम कौन हो.. अब जाके सही जगह आगइ..

मंजुला : (सरमाते हसने लगी) जी.. वो..वो.. बाबा.. में..तो इधर पहेली बार आइ हुं.. क्या आप मुजे जानते हे..?

बाबा : (हसते) अरे बेटी.. इतना गभराती क्यु हो..? बाप हु तेरा.. कोइ बेटी अपने बापसे गभराती हे क्या..? इनसे सादी करना चाहती हेनां..? तो फीर इतनी क्यु गभरा रही हो..? मे अभी करवा देता हु तुम दोनोकी सादी.. बस..? फीर मुजे तुमसे ढेर सारी बात भी तो करनी हे.., तुम तो मेरी बहादुर बच्ची हे.. तुने जोभी डीसीजन लीया हे वो बीलकुल सही लीया हे.. बस अभी इतना जानले.. ये सब होनेही वाला था.. जो तुजे आगे जाकर पता चल जायेगा..

मंजुला (कुछ राहत महेसुस करते) जी.. बाबा.. हम.. हम दोनो आपसमे प्यार करते हे.. तो सादी करने आ गये.. पता नही मेरे घरवाले मांनेगे की नही.. तो.. हम इधर आगये..

बाबा : (हसते) मांनेगे क्यु नही..? इतना होनहार लडका हे.. तो जरुर मान जायेगे.. बस तुजे थोडी कसरत करनी पडेगी.. फीर मान जायेगे.. फीरभी ना मानेतो मेरा नाम लेलेना.. तेरे पास इस मंदिरमे सादी करलेनेका हथीयार हे.. इसे स्तेमाल करना फीर सब मान जायेगे.. ओर तुम्हारी सादी बडी धुमधामसे कर देगे.. क्या हार बार लाइ हो..?

मंजुला : (हसते हार देते) जी.. यही रहे.. मे साथ लेकर ही आइ हु.. लीजीये..

जबतक मंजु ओर बाबा आपसमे बाते कर रहेथे तबतक देवायत मंजुकी ओर देखते हसता ही रहा.. उनको आज मंजु बडीही मासुम ओर भोली लग रही थी.. आज उनके भोलेपनपे देवायतको बहुत प्यार आ रहा था.. वो सबकुछ भुलके मंजुकी ओर देखता ही रहा ओर मनही मन इसे पत्नीके रुपमे स्वीकार करने लगा तब बाबाने कहा..

बाबा : अब बेठे बेठे हस क्या रहा हे चलो दोनो.. तुम मंदिरमे जाओ मे अभी आता हु.. फीर तुम्हारी सादी करवाता हु.. जाओ..

तब देवायत खडा होगया तो मंजुभी मनही मन खुस होते मुस्कराते देवायतके साथ खडी होगइ.. ओर दोनो मंदिरकी ओर चलने लगे तबतक बाबा अपने रुममे चले गये ओर कुछ लेने लगे.. फीर वोभी मंदिरकी ओर चले गये.. तब वहा देवायत ओर मंजु मंदिरके सामने हाथ जोडके दर्शन कर रहेथे ओर बाबाका वेइट कर रहेथे.. जब बाबा आये तब दोनोही साइडमे हाथ जोडके खडे रहे ओर बाबाने दोनोको अंदर बुलालीया..

बाबा : मे जब कहु दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेनादोगे.. फीर मे जोभी कहु तुम दोनो मेरे साथ दोहराओगे..

दोनो अ‍ेक साथ : जी..बाबा..

तब बाबाने हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे.. ओर जल मंजुके उपर छीडक दीया तो मंजुके सरीरमे अ‍ेक कंपनके साथ अलगही शक्तीका संचार होने लगा.. जो मंजु खुद महेसुस करने लगी तब बाबाने अ‍ेक बार ओर अ‍ैसा कीया.. अ‍ैसा तीन बार कीया तबतक मंजु सबकुछ भुल चुकी हो अ‍ैसा फील करने लगी.. ओर बाबा ने दोनोको अ‍ेक दुसरेको हार पहेनानेको केहदीया.. तो दोनोने अ‍ेक दुसरेके गलेमे हार पहेना दीया तब बाबा कुछ ओर मंत्र पढने लगे..

फीर दोनोको सप्तपदीकी सब कसमे खीलवाइ ओर अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वीकार करनेकी कसमे खीलवाइ.. तब बाबाने देवायतको मंजुकी मांग भरनेको कहा तब मंजु आंख बंध करते कांपने लगी ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तभी देवायतने उनकी मांग भरदी तब अपनेही हाथोसे चहेरा ढकते फुटफुटके रोने लगी.. तो देवायतने उनको सीनेसे लगाके सम्हाला तब बाबा हस रहेथे..

बाबा : बेटी सांत होजा.. तुजे पताही नही हे की तु कौन हे.. ओर तुमने कीनसे सादी की हे..

तब मंजु अपने आंसु पोछ देती हे ओर दोनो अ‍ेक बार फीर दर्शन करके बाबाके पैरमे जुक गये ओर पैर छुने लगे.. तब बाबाने उसे अखंडसौभाग्यके आशीर्वाद दीये ओर अपने साथ होलमे चलनेको कहा तब देवायत ओर मंजुने हार गलेसे नीकालके केरी बेगमे रखलीया.. ओर दोनो बाबाके पीछे चलने लगे ओर तीनो होलमे जाके बैठ गये.. तब मंजुको अपने सरीरमे कुछ अलगही फीरल हो रहाथा..

बाबा : बेटा भोजनमे कुछ वकत हेतो तुम दोनो मेरे रुममे आओ मुजे तुम दोनोसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

तभी दोनो बाबाके पीछे उनके रुममे चले जातेहे तब बाबा अपने आसनपे बेठ जातेहे ओर ये दोनो उनके चरणोके पास बैठ जातेहे तब मंजुकीभी उत्सुक्ता बढने लगती हे..की बाबा हमे क्या कहेगे.. तब बाबा हिमाचलके उस राजाके बारेमे बताने लगते हे तो दोनोही इस कहानीको जानते थे.. फीरभी दोनो सुनते रहे..

तभी बाबाने उन राजाके पुर्न जन्मकी बात दोनोको कहेदी.. की तुम्हारा पोताही वो राजा होगा.. जो तुम्हारे घर जन्म लेगा.. तो दोनो सुनके सोक्ट होके बाबाकी ओर आसच्र्य भावसे देखने लगे.. फीर बाबाने उसे इस बारेमे बहुत कुछ बता दीया.. फीर देवायतको थोडी देर बहार कामसे भेजकर बाबाने मंजुको उनके बारेमे ओर देवायतके बारेमे ओर आने वाले समयके बारेमे बहोत सारी बाते बतादी जीसे सुनके मंजुभी अचभींत ओर सोक्ट होगइ..

तब बाबाने उनपे जब छीडकते कुछ शक्तियोसे अवगत करवाया.. ओर उन शक्तिीयोका असर अ‍ेक हप्तेके बाद सुरु होजायेगा अ‍ैसा कहेके बाबाने मंजुको अ‍ेक जडीबुटीकी पुडी देदी.. ओर इसे देवायतको छुपकेसे दुधके साथ मीलाकर देनेके लीये कहा.. तब मंजु बहुत सरमाइ.. ओर बाबाने उसे बहोत सारी बाते खुलके बतादी..

तब मंजुने भी अपनी सहमती जतादी.. ओर बाबाने उसे कुछ बाते दुसरोको ना कहेनेकी कसमेभी खीलवाइ.. फीर बाबाने मंजुकी खुदसे पहेचानभी करवाइ की वो कौन हे.. ओर कीस उदेस्यसे उनका जन्म हुआ हे.. तब मंजुको रीयलाइझ हुआकी वो कौन हे.. ओर उनका जन्म कीस उदस्यसे हुआ हे तो वो अपने आपको बहुत भाग्यसाली समजने लगी.. ओर ये सोचते बडीही रोमांचीत होने लगीकी मे इन सबकी जननी हु.. ओर मेरे ही संतानसे सादी कर रही हु..

तभी देवायतभी वापस अंदर आगया ओर बाबाने दोनोको साथमे बेठाया फीर हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे ओर दोनोके उपर छीडक दीया.. तब मंजु नसेकी हालतमे चलते वही ढल गइ ओर नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब बाबा उनके सामने देखके हस रहेथे फीर देवायतको लेकर बहार जाते अपने रुमका दरवाजा अ‍ेसेही खाली बंध करदीया ओर होलमे अपने आसनपे जाके बैठ गये तब देवायतभी थोडा गभराते उनके पास नीचे बेठ गया.. तब बाबा उनकी मनोदसा समज गये ओर हसकर उनको बताने लगे..

बाबा : बेटा उनमे कोइ गभरानेकी बात नही हे.. वो अभी बहार आजायेगी.. आज मेरा अ‍ेक मक्सद पुरा हुआ हे.. उनको कुछ देना था तो देदीया.. तु चीन्ता मत करना.. ओर आगे जोभी होता हे उसे होने देना हे.. कीसीभी बातपे कोइ बाधा नही डालनी.. तुजे धीरे धीरे करते सब ज्ञात होने लगेगा.. बस अभीके लीये तुम उसके लीये परीपकव नही हो.. जब तुमभी सब समजने लगोगे तब तुजे मेरी इस बीटीयाही सबकुछ बता देगी..

देवायत : बाबा क्या वाकइ ये सच हेकी वो राजा ओर उनकी सभी रानीया फीरसे हमारे यहा जन्म लेकर आयेगे..? मुजेतो अभी भी यकीनही नही होरहा हेकी आजके जमानेभी अ‍ैसा कुछ होगा..

बाबा : बेटा आयेगे नही आ चुके हे.. बस ये सब उन्ही राजाके जन्मके लीये पहेले पुर्व तैयारीके भागरुपे आ गइ हे.. तेरी इस बीवीभी वोही हे ओर तुमभी वोही हो.. बस अभी तुम लोगोको उनका ज्ञान नही हे.. इसीलीये तुमको यकीन नही हे.. लेकीन जब जब वक्त बीतता जायेगा तब तुमको इस बातका ज्ञान होता जायेगा.. आगेतो तुजे बहुत कुछ नया दिखनेको मीलेगा..

देवायत : (सरमाते हसते) बाबा तबतो हो सकता हे हमारे यहाभी बहुत सारे रीस्तोमे परीवर्तन आयेगा..

बाबा : (हसते) आयेगा नही आचुका हे.. बस अभी मे तुजे इस बारेमे बात नही कर सकता.. लेकीन आगे तुजे सब पता चलता जायेगा.. क्युकी तुमभी इस रीस्तोसे छुट नही सकते.. ओर उनकी सुरुआत तुमसे तीन पीढीसे पहेले ही हो चुकी हे.. बस अभी तुम्हारे लीये इतनाही जानना जरुरी हे.. बाकी मेरी इस बेटी सब जान जायेगी.. ओर वो सब रहस्य आगे जाके तुम भी जान जाओगे..

अभी दोनो बातेही कर रहेथे तब दरवाजा खोलके मंजु बहार आके दोनोके पास बैठ गइ.. तब वो देवायतकी ओर देखते खुब सरमाइ ओर चुपचाप बैठी रही.. फीर भोजनका वक्त हो गयातो बाबाने दोनोको भोजनके लीये भेज दीया.. ओर दोनो भोजन करके बाबाकी इजाजत लेके नीकल गये..

तब मंजु कारमे चुपचाप बेठे आने वाले समयके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तब देवायतभी बीच बीचमे उनकी ओर देखता रहा.. दोनोही असंमजमे खामोस बैठे रहे.. उनको पता ही नही थाकी दोनो सादीके लीये जा रहे थे तब अ‍ेक सामान्य मनुस्य थे.. ओर जब सादी करली तब वो सामान्य मानवी नही रहे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७८

अभी दोनो बातेही कर रहेथे तब दरवाजा खोलके मंजु बहार आके दोनोके पास बैठ गइ.. तब वो देवायतकी ओर देखते खुब सरमाइ ओर चुपचाप बैठी रही.. फीर भोजनका वक्त हो गयातो बाबाने दोनोको भोजनके लीये भेज दीया.. ओर दोनो भोजन करके बाबाकी इजाजत लेके नीकल गये.. तब मंजु कारमे चुपचाप बेठे आने वाले समयके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तब देवायतभी बीच बीचमे उनकी ओर देखता रहा.. दोनोही असंमजमे खामोस बैठे रहे.. उनको पता ही नही थाकी दोनो सादीके लीये जा रहे थे तब अ‍ेक सामान्य मनुस्य थे.. ओर जब सादी करली तब वो सामान्य मानवी नही रहे....अब आगे





देवायत : (हसते) बेबी.. क्या सोच रही हे..? देखता हु जबसे तुम्हारी बाबासे बात हुइ हे तबसे तुम गुम सुम बैठी हो.. कुछ हुआ हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कराते) नही.. जानु.. मे सोच रहीथी जब हम दोनो इधर आये.. तब मे कीतनी गभराइ हुइथी.. ओर अब हम वापस जा रहेहे.. तो अ‍ेक अलगही अनुभुती महेसुस कर रही हु.. मे कीतनी हीमत महेसुस कर रही हु.. कुछही वक्तमे कीतना कुछ बदल गया.. मेने तो सोचाही नही थाकी मे इतने बडे संतसे मीलुगी.. कोइ बडा संत इतना सरल हो सकता हे..? कैसे मेरे साथ अ‍ेक बेटीकी तराह बात कर रहे थे..

देवायत : अंजु तुजे नही पता वो हमारे कुलगुरु हे.. ओर मेने बापुसे सुना हे पीछली तीन पीढीसे यही गुरु हे.. उनकी उमरका कोइ पताही नही चलता.. उनके पास बहुत सारा ज्ञान हे उनके पास हमारे हर सालका जवाब हे.. हमारी हर समस्याका समाधान हे.. वो हमारे भुतकाल वर्तमान ओर भविस्यके बारेमे भी सब जानते हे.. पता नही कीस उदेस्यसे आये हे..

मंजुला : (हसते) जानु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? मुजे आज बाबाने अकेलेमे उसी उदेस्यके बारेमे बताया.. लेकीन बाबाने अभी कीसीको ना कहेनेकी मुजे कसमभी खीलवाइ हे.. तो सोरी.. मे आपको वो अभी नही बता सकती.. आगे आपको सब ज्ञात होजायेगा..

देवायत : (हसते) कोइ बात नही मंजु.. मेभी तुजे इन सब बातेको लेकर नही पुछुगा.. जब तेरी मर्जी होगी तब तुही मुजे बता देना.. क्युकी हमभी बाबाकी कोइ आज्ञाका उलंघन नही करते..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? जब हम गये तब मे अ‍ेक कुआरी लडकी थी.. जो में आपसे मीलन करनेके लीये तडप रहीथी.. इसीलीये मेने सादीकी जल्दी की.. ताकी हम दोनोका मीलन हो सके.. वैसेतो मे आपसे अ‍ैसेही मीलन कर सकती थी.. लेकीन पता नही क्यु.. मुजे आपसे सादी करनेकी बहुत इच्छा हुइ.. क्युकी मे अब हमेसा आपके साथही रहेना चाहती हु.. ओर अब मुजे लगने लगाहेकी अचानक मेरे अंदर अ‍ेक मेच्योरीटी आगइ हे.. मे अ‍ेक सादीसुधा होगइ.. ओर पता नही मेरे अंदर कोन कोनसा बदलाव आगया हे.. मुजे आज कुछ अलगही फील हो रहा हे..

अ‍ैसीही बाते करते दोनो वापस सृतीके घर आगये.. तब सृती बडी उत्सुक्ताके साथ बहार खडी रहेके दोनोका इन्तजार कर रहीथी.. दोनोके आतेही वो खुसीसे हसते हुअ‍े दोटके कारके पास आगइ.. ओर मंजु कारसे नीकलते ही सृती उनसे लीपट गइ.. फीर उनके सरकी ओर देखने लगी तो मंजुके बालोमे सींदुर लगा हुआ था ओर वो खुसीके मारे फीरसे मंजुके गले लग गइ.. फीर देवायतको ओर मंजु दोनोको हाथ मीलाकर कोन्ग्रेच्युलेशन कहेते मंजुका हाथ पकड लीया ओर उसे उपर लेगइ..

तब देवायत सृतीकी मम्मीके पास जाके बेठ गया.. तो वो उनसे हस हसके बाते करने लगी.. तब बातोही बातो मे पता चलाकी ये लोग इस घरको बेचना चाहते हे.. ओर अ‍ेक छोटा धर लेके बाकीके पैसे सृतीकी पढाइमें ओर अ‍ेक छोटा क्लीनीक लेनेकी सोच रहेथे.. क्युकी उनके पास इस मकानके रीनोवेशनके लीयेभी कुछ पैसे नही थे.. तो बेचारे ओर खर्चे कहासे करते.. धरका सब खर्चा उनके पतीके पेन्शनसेही चलाते थे.. तब देवायत बहुत कुछ सोचने लगा तब..

भुमीका : बेटा.. अब आपसे क्या छीपाउ.. अबतो आप हमारे घरके सदस्य जैसे हो.. ओर हमारे नीमुके जमाइ नीकले.. तो आपको सब बता दीया.. अब आपकी नजरमे इनका कोइ अच्छा खरीददार होतो बता देना.. ताकी मुजे सृतीकी पढाइकी कोइ चीन्ता ना रहे..

देवायत : आंटीजी मेरा अ‍ेक दोस्तहे वो यही सबका बीजनेस करता हे.. वो बील्डर हे.. अगर आप कहोतो मे उनसे बात करु..? हो सकता हे आपका काम ये अ‍ेक हप्तेमेही होजाये..

भुमीका : बेटा तबतो बडी महेरबानी तुम्हारी.. अब हम मा बेटी इनका ग्राहक कहा ढुंढने जाये.. ओर सबके लीये दुसरोपे भरोसाभी कैसे करे..? अब तुम्ही सब कर देना.. आखीर तुमभी तो हमारे नीमुके जमाइ हो.. ओर नीमु मेरी सहेलीही नही बहेन जैसी थी.. तो अब तुम हमारेभी जमाइ हो.. हमे तुमपे पुरा भरोसा हे..

देवायत : (हसते) आंटीजी तबतो ये समजलो आपका काम हो गया.. ये आपका मकान बीक गया.. आप नया मकान ढुंना सुरु करदो.. तबतक मे मेरे बील्डर दोस्तसे बात करलेता हु, आपका मकान मेइन रोडपे हे तो जल्दी बीक जायेगा.. ओर कीमतभी अच्छी खासी मीलेगी.. आप फीकर मत करना..

भुमीका : बेटा तबतो सोनेपे सुहागा.. भगवान तुमको खुब तरकी दे.. जो हमारी इतनी मदद कर रहे हो..

देवायत : (हसते) आंटीजी अबतो हम घरके लोग हे मे सृतीको अपनी सालीही मानता हु.. तो महेरबानी कीस बातकी..? देखना सृती अ‍ेक बडी डोक्टर जरुर बनेगी.. मुजे पुरा यकीन हे उनपे..

भुमीका : (खुस होते) बेटा.. आपके मुहमे घी सकर.. भगवान करे तुम्हारी बात सच होजाये.. ओर इनके पापाका सपनाभी पुरा होजाये.. उनका अ‍ेकही सपनाथा की में मेरी बेटीको अ‍ेक बडी डोक्टर बनाउगा..

देवायत : आंटीजी भगवानपे भरोसा रखीये.. ये नेकदील लोगोकी जरुर मदद करता हे.. आंटीजी अ‍ेक बात कहु..? क्या आप नीर्मलाजीके बहुत करीब थी..? तो उनके बारेमे थोडा बताइअ‍ेना..

भुमीका : (हसते) पहेलेतो मुजे आंटीजी मत कहो.. क्या मुजे अपनी सासकी तराह मम्मी जी नही केह सकते..?

देवायत : (हसते) सोरी मम्मीजी.. अबतो आपको मम्मीजी ही कहुगा.. हें..हें..हें.. अब बताइअ‍ेना.. प्लीज..

भुमीका : (हसते) हां.. हम दोनो खास सहेलीथी.. अरे सहेली क्या बहेनही समजो.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे हर बात सेर करती थी.. हमने कोलेजमे खुब धमाल की.. अब में..आपसे.. कैसे कहु..? क्युकी आपतो इनके.. मतलब अबतो हमारे जमाइ हो.. तो कुछ बाते मे आपसे नही कर सकती..

देवायत : (हसते) अरे मम्मीजी अबतो जमाना बदल गया हे.. मेने भी मंजुसे लव मेरीज की हे.. अब हमे अ‍ैसी बातोसे कोइ फर्क नही पडता.. आपके जमानेमे भीतो अ‍ैसा होता था.. सुना आप सब दोस्तो अ‍ेकही कोलेजमे थे..? इनके बारेमे कुछ बताइअ‍ेनां..

भुमीका : (सरमाते हसते) हां..हां.. हमारे जमानेमेभी होता था.. बल्की हुआ भी हे.. (सरमाते) आपकी सास.. तुम्हारे गांवके ठाकुर साहबके लडके किशनजो हमारे साथ पढता था उनको प्यार करती थी.. ओर उनसे सादीभी करने वालीथी.. फीर पता नही क्या हुआ.. वो कोलेज छोडके चली गइ.. ओर मुजे इनके बारेमे आज तब पता नही चला.. कहा चली गइ.. कीस गांवमे रहेती हे.. कीनसे सादी करली.. कुछ पता नही हे..

देवायत : (हसते) अच्छा हमारी सासुमा भी इनकी बेटीकी तराह हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : नही बेटा.. तुम दोनोने तो सादी करली हेनां.. लेकीन बेचारी उनकी नही होपाइ.. बस इतनाही पता हे.. हमारी टीममे हम दो लडकीया ओर चार लडके थे.. हम सब खास फ्रेन्ड थे.. इनमेसे अ‍ेकसे मेने भी सादी करली जो सृतीके पापा नरेश हे.. हम दोनोनेभी लव मेरीज कीहे.. ओर वो नीर्मला छोटे ठाकुरसे बहुत प्यार करती थी.. उन्हीकी हवेलीमे रहेती थी.. उनका अ‍ेक भाइभी हे वोभी हम सबका दोस्त था.. सीर्फ नीर्मलाने बीचमे कोलेज छोडदी.. बाकीतो हम सब मीलते रहे ओर पढाइ पुरी करली.. तब हम दोनोने सादी करली.. बस इतनाही पता हे.. फीर हमे सीर्फ किशनशी मीलता था.. क्युकी मेने उसे भाइ माना था..

सृती : (मंजुके साथ अंदर आते) अरे.. सासु जमाइ कबसे क्या बाते कर रहे हो.. आप दोनोकी बातेतो कभी खतमही नही होती.. ओर जीजु.. हमतो आपका वेइट उपर कर रहीथी.. चलीये दोनो.. अब चाइ नास्ता नही करना क्या..? पांच बज गयेहे.. देरसे आये..आरामभी नही कीया..

भुमीका : (हसते) हांतो बनाले.. हम दोनो बात करते हे तो तु क्यु जलती हे.. ये मेरा जमाइ हे.. मे जीतनी मर्जी बात करु तुजे क्या प्रोबलेम..? हें..हें..हें.. जा तु चाइ नास्ता बनाले..

सृती : (हसते) देखा मंजु.. अब जमाइ मील गया तो बेटीकोभी भुल गइ.. चल.. नास्ता बनाते हे.. हमारा यहा कोइ काम नही हे.. करने दे ये दोनोको बाते.. हें..हें..हें..

कहेके दोनोही हसती हुइ कीचनमें चली गइ.. दोनो बाते करते रहे.. जब नास्ता बन गया तो सृतीने दोनोको आवाज देकर बहार बुला लीया.. ओर सबने मीलके चाइ नास्ता भी करलीया.. तब बीचमे सृती बार बार देवायतको चोर नजरसे देखती रही.. ओर जब दोनोकी आंख मीलजाती तब सृती सरमाकर मुह घुमाते हसने लगती..

सबने चाइ नास्ता करते खुब मजाकभी कीया.. फीर सृती ओर मंजु अपनी स्कुटी लेके बाजारमे नीकल गइ ओर अ‍ेक घंटेके बाद कुछ सामान लेके वापसभी आगइ.. ओर सीधे उपर चली गइ तबतक देवायतने बहार नीकलकर घरपे उनके बापुसे कुछ बाते करली.. ओर भानुसे भी बात करली..

बडे ठाकुर देवायतसे बहोत प्यार करतेथे.. उसने आज तक देवायतकी कीसीभी बातको नही टाला.. उनको देवायतपे पुरा भरोसा था.. पता नही क्यु..? कभी कभी वो अकेले होते हे तो गुमसुम रहेते थे.. ओर उनकी बीवीको भी बहुत प्यार करते थे.. उनका उदास रहेनेका कारण सीर्फ वो तीन चार लोगही जानते थे..

तभी अचानक तेज होर्न बजनेकी आवाज आइ.. तब देवायत गभराकर अपनी सोचकी तंद्गासे बहार आगया.. देखातो सामने अ‍ेक टड्ढक बडी मुस्कीलसे उनकी कारकी ओर आ रहाथा.. तब देवायतने बडी मुस्कीलसे कारको कंट्रोल कीया ओर ट्रक कारसे टरकारते रेह गया..

(फ्लेसबेक खत्म)

देवायत बडीही मुस्कीलसे कारको कंट्रल करते आगे बढ गया.. देखातो उनके ससुरका गांव नजदीक आगया था.. तो कार सीधे उनके गांवकी ओर मोडदी.. उनके ससुरका गांव बहुतही बडा तालुका लेवलका था.. जो अ‍ेक छोटे सहेरके बराबर था.. आजु बाजु के सब गांय वालोकी वहा बडी खरीदारी होती थी.. वही मार्केटमे उनके ससुरकी दुकान थी.. जो वो कइ बार वहाभी जाचुका हे.. ओर वही अ‍ेक बडी होस्पीटल भी थी.. जो इनके ससुर वही अ‍ेडमीट थे.. तब देवायतने कार सीधी होस्पीटल लेली.. ओर वो कार पार्क करके अंदर चला गया..

देवायत : (रीसेपनीस्ट कांउटरपे) सुनीयेजी.. वो.. यहा कोइ राजीव नामके पेसन्ट अ‍ेडमीट हे..?

नर्स : जी.. सर.. माफ कीजीयेगा आप उनके कौन हे..? क्या उनके कोइ रीस्तेदार हे..?

देवायत : जी.. मे उनका दामाद हु.. क्यु..? क्या हुआ हे उनको..?

नर्स : जी दरसल उनके साथ सीर्फ उनकी बीवी ही हे.. जो अभी अभी मुजे ध्यान रखनेको कहेके घरपे गइ हे.. कहेतीथी आधे घंटेमे आजाउगी.. यहा उनका ओर कोइ नहीथा तो आपसे पुछलीया.. अब आप आगये हे.. तो आइअ‍े मेरे साथ.. सामने ही हे.. मे आपको लेके चलती हु..

देवायत : (साथ चलते) दरसल उनको हुआ हे क्या..?

नर्स : उनको पेरालीटीक सीवीयर अ‍ेटेक आया हे.. ओर वो अभी अन्कोसीयस हे..

देवायत : (अंदर जाते) क्या कुछ रीपोर्ट वगैरे कुछ कीया हे..?

नर्स : जी सर.. अभी अभी अ‍ेम.आर.आइ करवाके आयेहे.. दो पहोरको रीपोर्ट आजायेगी.. तबही कुछ पता चलेगा.. डोक्टरभी अभी सब चेक करके गयेहे.. थोडा सुधार हे बाकी तो आप डोक्टरसेही बात करलीजीयेगा.. ओर इनके सरीरमे कुछ हल चल होतो प्लीज.. मे यही हु.. मुजे इन्फोर्म करीयेगा..

देवायत : (अंदर नसके सामने) जी मेडम.. अब मे साम तक यही हु..

कहातो नर्स सब चेक करके वापस चली गइ ओर देवायत बेडके पास चला गया.. ओर उनके ससुर राजीवको देखता ही रहा.. उनके ससुरको ओक्सीजन मास्क लगा हुआथा ओर वो आंख बंध करते अ‍ैसेही बीना हीले अ‍ेक लासकी तराह बेडपे पडेथे.. तभी देवायत वही पडी चेरपे बैठ गया.. ओर अपने हाथोसे उनके ससुरका हाथ थाम लीया.. ओर अ‍ेक नजरसे उनको देखता रहा.. तब उनकी आंख गीली होगइ.. ओर वो मनमे सोचता रहा..





क्युकी उनके सामने उनके ससुर नही.. उसे अ‍ेक लाचार बाप पडा नजर आ रहाथा.. जीनकी दो दो बेटीया ओर दामाद होनेके बावजुद अ‍ेक असाहयकी तराह जींदगीकी जंग लडते अभी बेडपे पडा हुआथा.. देवायतको फीरसे अतीतकी याद आने लगी.. राजीव अंकल बडेही नेकदील इन्सान थे.. जो बापुके बहुत करीब थे.. वो देवायतको अपने बेटेकी तराह मानते थे.. जबसे राजीव नीर्मलाने हवेलीको छोडा तबसे वो देवायतकी हवेलीपे कभी नही आये..

देवायतके बापु किशनके गुजर जानेके बाद हवेलीपे पहेली बार आये थे.. तब खुब रोये थे.. ओर देवायत मंजुको बडी हींमत देकर गये थे.. यहा तककी देवायतकी मंजुके साथ सादीके लीये अपनी बीवी नीर्मलासे बगावत करके कैसे देवायत मंजुका साथ दीया था.. क्युकी तब नीर्मलाही थी जो सबसे पहेले उसने देवायत ओर मंजुको अपने रुममे चुदाइ करते देख लीयाथा.. तब मंजु अपनी पढाइ पुरी करके घर आइथी.. देवायत मंजुके साथ बीताये पलको याद करते फीरसे अतीककी ओर चला गया..

(फीरसे थोडा फ्लेसबेकमे चलते हे)

कैसे मंजु ओर देवायत अ‍ेक दुसरोके प्यारमे पागल थे.. उस दीन दोनोने अ‍ेक दुसरेसे मीलन करनेकी लगनमे मंदिरमे जाकर सादी करली.. ओर सादी करके सृतीके घर वापस आगये ओर उसी रात सुहागरात मनाते देवायत ओर मंजुका पहेली बार मीलन हुआथा.. देवायतके लीये वो अ‍ेक अलगही अनुभव था.. वैसेतो देवायत कइ बार दुसरी ओरतोको चोद चुकाथा इनमे मंजुकी मम्मी नीर्मलाभी सामील थी..





जो देवायतकी पहेली बीवी थी.. ओर आज उनकीही बेटी देवायतकी दुसरी बीवी होगइ.. ओर देवायतके नीचे लेटी हुइ थी.. तब मंजुकी चुतमे पहेलीबार लंड घुसतेही कैसे मंजु बेहोस होगइ थी.. उस रात खुद काम ओर रतीने अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा दीयाथा.. दोनोही पुरी रात प्यार करते रहे.. रातभर देवायत मंजुको अलग अलग तरीकेसे चोदता रहा.. ओर मंजुकी चुतको अपने गाढे रससे भरता रहा..





तब नाही देवायतके लंडमे बदलाव हुआथा ओर नाही मंजुको अपनी उन शक्तियोका कोइ ज्ञान था.. फीरभी उस रात देवायतको मंजुको चोदते अ‍ेक अलगही अनुभवका अहेसास हो रहा था.. उस रातमे तीन बार चुदाइ करते दोनोही तृप्त हो चुकेथे.. दुसरे दीन मंजु चलने फीरने लायक नही रहीथी.. तब सृतीने उनकी चुतकी सीकाइ ओर गोलीया खीलाकर खुब मददकी.. ओर मंजुको साम तक ठीक कर दीया..





तब मंजुने अपनी हर बाते सृतीसे सेर की.. जीसमे मंजुने सृतीको देवायतके लंडके बारेमेभी बता दीया.. जीसे सुनकर सृतीभी सोक्ट होगइ.. ओर सृतीकी कामवासना फीरसे भडकने लगी.. ओर सृती अ‍ेक बार फीर देवायतके बारेमे सोचने लगी.. तब दुसरे दीन दोपहोरको ओर फीर रातको देवायतने मंजुको खुब रगड रगडके चौदलीया.. ओर मंजुकी हालत पतली करदी.. मंजुको पुरी तराह संतुस्ट करदीया..





उन तीन दीनमे मंजु कलीसे फुल तो अ‍ेक लडकीसे ओरत बन चुकीथी.. सृती अब पुरी तराह देवायतको समर्पीत होकर अ‍ेक पत्नीका हक अदा कर रही थी.. तीसरे दीन देवायतने सबसे छुपके उनके दोस्त भानुको फोन करके सहेर बुलालीया.. तब भानु अ‍ेक बील्डरको लेकर सृतीके घर आगया.. ओर सृतीके घरका अच्छे दामोसे सौदा करवा दीया.. तब सृती ओर उनकी मम्मी घरके अच्छे दाम मीलनेसे बहुतही खुस होगइ.. ओर बार बार देवायतका सुक्रिया अदा करती रही..

फीर देवायत मंजुको वापस होस्टेलमे छोडके अपने घर आगया.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद वापस सहेर आकर सृती ओर उनकी मम्मीकी पसंदका दुसरे घरकाभी खरीदके इन्तजाम कर दीया.. ओर दोनो मां बेटी वही रहेने चली गइ.. तब सृतीकी मम्मी देवायतसे काफी घुल मील गइथी.. ओर उनको बेटा बेटा करते थकती नही थी.. उनको देवायत बहुतही अच्छा लडका लगा.. ओर उनको भा गया.. लेकीन देवायतकी सादी मंजुसे होगइ थी.. तो अपने दीलकी बात नही केह पाइ.. वरना वो सृतीके लीये देवायतको पसंद करने लगीथी..

तब उस बील्डरने वहा पुराना मकान गीरवाके अ‍ेक आलीसान बडी बील्डींग खडी करनेका प्लान बना लीया था.. तब सृती ओर उनकी मम्मी बाकी बचे पैसेको बेन्कमे रखके ब्याजके पैसे पढाइ मे खर्च करते रहे.. अ‍ैसेही समय बीतता रहा.. फीर रवीवारको सहेरमे आकर मंजुको छुटीके दीन लेकर चला जाता.. तो मंजुभी अपनी बहेन भावनाको बहाना बनाके चकमा देकर देवायतके साथ चली जाती..

ओर दोनो कीसी होटेलमे या कभी कभी सृतीके घर जाकर प्यारका खेल खेलते खुब चुदाइ करते रहे.. जब वो गांवमे होता तो उनका खयाल रखनेके लीये रश्मी हमेसा तैयार रहेती.. तो हप्तेमे अ‍ेक दो बार वो अपनी पहीली बीवी नीर्मला यानी मंजुकी मम्मीके साथ चुदाइ करके वापस आजाता.. तो कभी अपने दोस्त रमेशकी बीवी चारुकोभी कभी कभी चोद लेताथा.. इसी तराह जींदगी कटती रही.. तबतक मंजु भावु सृती सबके अ‍ेक्जामभी खतम होगये..

तब मंजु ओर सृतीने अच्छे परसन्टसे गे्रज्युअ‍ेशन खतम करलीया.. तब सृती मेडीकलकी तैयारीयामे दुसरे सहेरमे चली गइ.. तो भावु दो सबजेक्टमे रेह गइ.. तो दोनोही कोलेजसे अपने घर वापस आगइ.. तब अ‍ेक दिन देवायतने अपने पीता किशनको जो उसे बापु ओर माता विमलाको बा कहेके बुलाता था.. अ‍ेक दीन तीनो खानेपे अकेले बैठेथे ओर खाना खा रहे थे.. तब उनकी बा विमलाने मौका देखकर देवायतके पीताको कहा..

विमला : सुनीयेजी.. अब हमारे देवुने सब काम अच्छेसे स्महाल लीया हे.. ओर अब बडा भी होगया हे.. तो अब हमे इनकी सादीके बारेमे कुछ सोचना चाहीये.. आप कीसी अच्छी लडकी देखना सुरु करदो..

किरन : (हसते) अरे हां भागवान.. पहेले इनकोतो पुछले इन्होने कोइ लडकी पसंदतो नही करली..? हें..हें..हें..

विमला : (हसते) हां देवु.. तुही बता.. अगर तुमने कोइ लडकी पसंद करली हे तो हम वही बात चलायेगे.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. तुतो जानता हेना हम सब खुले विचारोके हे.. हमारे यहा सबको अपनी पसंदकी लडकीसे या लडकेसे सादी करनेकी पुरी छुट हे.. बता कोइ पसंद करली हेतो.. हम वही तेरी बात चलायेगे..

किशन : (जोरोसे हसते मजाकमें) हां देवु.. तभी तो तुम्हारी माने मुजसे सादी करली.. हें..हें..हें.. क्युकी वो मुजे पसंद करती थी.. हें..हें..हें..

विमला : (कहेतेही वो किशनकी ओर आंखोसे ईसारा करते मना करने लगी फीर देवायतसे) हां देवु.. अगर तुजे कोइ पसंह हेतो कहेदे.. ओर हमे कोइ बीरादरी फीरदारी नही देखनी.. बस लडकी अच्छी होनी चाहीये..

देवायत : (थोडा सरमाते) बापु वो..वो.. मेने अ‍ेक लडकी पसंद करली हे.. ओर हम दोनो प्यारभी करते हे..

विमला : (खुस होते किशनको) देखा.. हें..हें..हें.. बीलकुल आपपे गया हे.. ठीक हे.. हमे बता कौन हे वो लडकी..? हम वही बात चलायेगे.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. तेरे बापु उनके पीतासे बात कर लेगे..

किशन : हां बेटा.. तु सीर्फ इतना बता वो कीसकी लडकी हे.. ओर कीस गांवकी हे.. बाकी मे सब देख लुगा..

देवायत : (सरमाते हसते) जी..वो..वो आपके दोस्त हेना.. राजीवकाका उनकी बडी लडकी.. वो मंजुला..

इतना सुनतेही देवायतके पीता खाना खाते खांसने लगे.. फीर रुकके अ‍ेक नजरसे देवायत को देखते रहे.. तब थोडी देरतो उनकी पत्नी विमलाभी सोक्ट होगइ.. ओर खाना खाते रुक गइ.. मीया बीवी दोनोही राजीवका नाम सुनकर सोक्ट होगयेथे.. क्युकी उनका रीजन सीर्फ दोनो मीया बीवीही जानते थे.. फीरभी विमलाने हिमत करके बातको सम्हाल लीया..

विमला : (हीचकीचाते) हां..हां.. तो.. तो क्या हुआ..? हम उनसेही तेरी सादी करवा देगे.. तु फीकर मत कर.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.., क्यु जी..? आपतो कुछ बोलीये..?

किशन : (जैसे स्वप्नसे बहार आते) हं..? हां.. हां.. मे राजीवसे बात कर लुगा.. तु फीकर मत कर..

कहेते किशन जल्दी जल्दी खाना खाने लगा.. ओर फटाफट खाना खाके अपने रुममे चला गया.. तब देवायतको कुछ मालुमही नही था.. वोतो अपने माता पीताकी रजामंदीसे बहुत खुस होगया.. ओर सरमाते हसता रहा.. तो उनकी मां विमलाभी सोचमे डुबी चुपचाप खाने लगी.. उनको पता था किशनको इस बातपे राजी करनेके लीये उसे क्या करना हे.. वो किशनको रीजाना अच्छी तराह जानती थी..

तब देवायत खाना खाकर बहार चला गया.. उनकोतो पताही नही थाकी राजीवकी बेटी मंजुलाकी बात करके उन्होने कीतना बडा बोम्ब फोड दीया था.. तो विमला खाना खाकर उनके पतीके पास रुममे चली गइ ओर अंदर जातेही दरवाजा बंध करके किशनके पास बेडपे जाकर बैठ गइ.. ओर धीरेसे किशेनकी बगलमे पीठ करते लेट गइ.. तब किशनने पलटकर विमलाको पीछेसे अपनी बांहो मे भरलीया..





तो विमलाने मुह घुमाते देवायतके होंठ चुमलीया.. दोनोही कामुक्तासे भरपुर थे.. मानो चुदाइ उनका सौक हो.. वो हब वक्त चुदाइ करनेके लीये रेडीही रहेते.. किशनका भी बहार कइ जगह अफैर चल रहाथा.. ये बातसे विमलाभी अच्छी तरेह वाकीफ थी.. क्युकी किशन विमलासे हर बात सैर करताथा.. ओर विमलाभी दुसरी ओरतोके साथ किशनकी चुदाइकी बाते सुनकर गरम होजाती.. फीर दोनो खुब जमकर चुदाइ करते..

विमलाने आज तक देवायतके अलावा कीसीको भावतक नही दीया.. वोतो उस बातसेही सोचते रोमांचीत होजाती की वो अपने भाइसे चुदवाती हे.. ओर आजभी रुममे वो वोही मक्सदके साथ आइथी.. ताकी किशनसे अपनी बात मनवा सके.. कुछ ही देरमे किशन ओर विमला दोनोही नंगे थे.. ओर विमला अपनी चुतमे किशनका विकराल लंड लेकर उनसे चुदवाते किशनसे बाते करने लगी..





विमला : अरे आप इतनी जल्दी खाना खाके क्यु आगये..? पुरा खा लेते.. क्या बात हे..? लडकीभी अच्छी होगी.. आपने तो उसे देखा होगा.. कहीये नां वो दिखनेमे कैसी हे..?

किशन : विमु तुजे सब पता हे फीरभी..? क्या ये सही हे..? तुजे कोइ अ‍ेतराज नही..? तुम भी जानती हेना वो कीसकी लडकी हे.. फीरभी..

विमला : (सरमाते हसते) देखो किशन.. जो तुम कहेना चाहतेहो मुजे सब पता हे.. ओर मुजे इस रीस्तेमे कोइ बुराइ भी नही लगती.. मत भुलो हम दोनो भी वही हे.. ये तो अच्छा हे इस समाजको पता नही हे.. मांने मुजे बचपनमे इस लीये आश्रममे दे दीयाथा की हमारे दादाकी जान बच जाये.. लेकीन उनको तब ये नही पताथा की दो लडके होनेसे श्राप लागु होता हे.. लडकी पैदा होनेसे नही.., ओर अबतो वैसे भी बाबा उनका नीवारण करनेतो हमारे घर आही रहे हे.. ओर अच्छा हुआ मांने मुजे बचपनमे आश्रममे छोड दीयाथा.. वरना तुम मुजे थोडीना मीलते.. ओर आपकोभी अपनी बहेन चोदनेके लीये थोडीना मीलती..

किशन : बात तो तेरी सही हे.. पता नही वो क्यु चली गइ..? तो तुम दोनो ही बहेनकी तराह साथमे रहेती.. मे तुम दोनोसे सादी करलेता.. मुजसे क्या गलती होगइ.. वोभीतो बताके नही गइ.. बस अचानक चली गइ..

विमला : जानु.. जीस तराह मुजसे देवायत हुआ.. उसी तराह उनकोभी कोइ लडका होता तो..? पीताजीका क्या होता..? येभी कभी आपने सोचा हे..? अच्छा हुआ वो चली गइ.., क्या उनके हीसेका प्यार मे आपको नही देती..? फीरभी आपकी इच्छाको मे जानती हु.. बस अ‍ेक बार हमारे बाबा उसे श्रापका नीवारण करदे.. तो मे आपकी वो इच्छा भी पुरी कर दुगी.., फीर कर दीजीयेगा मुजे फीरसे प्रेगनेन्ट.. मे आपके दुसरे बच्चेकोभी जन्म दुंगी.. भाइ मे अभी भी आपके बच्चे पैदा कर सकती हु.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

किशन : हां मेरी प्यारी बहेना इसीलीयेतो मेने कोइ जीद नहीकी.. ओर जीस तराह मे उनको प्यार करताथा.. इनसे ज्यादातो तुम मुजसे प्यार करती थी.. ओर हमारी सादीसे पहेलेही देवायत ठहेर गया.. अच्छा हुआ हमारी मां तुमको बाबाके कहेनेपे वापस लेआइ.. वरना तेरा प्यार मुजे कभी नही मीलता.. विमु मे तुजे आजभी इतना चाहता हु जीतना पहेले चाहता था.. तब मुजे नही पताथाकी तुम मेरी बहेन हो.. अगर पता होता तबभी मे तुजे प्यार करता.. क्युकी हमारे बा बापुजीनेभी वोही कीया हे.. वो दोनोभी हमारे दोनोकी दोनो बीवीयोके बच्चे थे.. जो भाइ बहेन थे..

विमला : (सरमाते हसते) हां.. भाइ.. मुजे लगता हे ये हमारे आनदानकी परंपरा होगइ हे.. आपको पता हे.. जबसे प्यार क्या होताहे समजमे आया तबसेही मे भी आपको पसंद करने लगी थी.. तब सीर्फ मुजे पताथा की हम दोनो वास्तवमे सगे भाइ बहेन हे.. ओर आपको मेने कहा तब पता चला फीरभी सब जानते हुअ‍े मुजे प्यार करते रहे.. अ‍ैसी कोइ रात आपने नही जानेदी.. जो मुजसे प्यार करनेके लीये मेरे रुममे नही आये.. सबके सोतेही आप सबकी नजर बचाके मेरे रुममे आजातेथे.. ओर रात भर पागलोकी तराह मेरी चुदाइ करते थे.. मुजे सोनेभी नही देतेथे.. जैसेकी हम दोनो मीया बीवी हो.. फीर तो मुजेभी आपकी आदत होगइ थी.. पता नही मुजे आपने चोद चोदके कब प्रेगनेन्ट कर दीया.. ओर हमारा देवायत मेरे पेटमे ठेहर गया.. अच्छा हुआ तब पीताजी ओर बा चले गये थे.. ओर हम दोनो अकेले थे.. वो भी क्या सुहाने दीन थे.. किशन.. आज भी मे आपको उतनाही प्यार करती हु.. जीतना पहेले करती थी..

किशन : हां विमला वो दिन आजभी मुजे याद हे.. लेकीन अब उमरभी होने लगी हे.. फीर भी तुजे चुदाइके बीना नींद ही नही आती.. तुम ओर मेरी नीमु.. दोनोने मुजे खुब प्यार दीया.. तुम दोनोही बहुत कामी ओरत हो..

विमला : (मुस्कराते सरमे हाथ घुमाते) इसीलीये केह रही हु भुल जाओ सब.. हम दोनोने भाइ बहेन होनेके बादजुद भी प्यार ओर सादी कीहे.. हमारे बा बापुजीनेभी वोही कीया हे.. तो हमारा बच्चाभी वोही करेतो हमे क्या फर्क पडता हे.. सीर्फ हमे ओर नीमुको पता हे मंजु आपकी बेटी हे.. राजीव भैयाको थोडीनां पता हे..? वोतो आजभी मंजुको अपनी बेटी मानते हे.. आप बीना हीचकीचाके उनसे बात कीजीये..

किशन : (हसते) विमु राजीव उतना भी नासमज नही हे.., उनकोभी पता होगा मंजु मेरी बेटी हे.. क्युकी जब वो लोग इस हवेलीको छोडके गये तब मेरी नीमुभी तेरी तराह प्रेगनेन्ट थी.. तो क्या राजीवने उनको नही पुछा होगा..? लेकीन राजीव मेरा अच्छा दोस्त हे.. मेरी नीमुके बारेमे उनसे बातभी होगइ हे..

विमला : (हसते) जानु जोभी हो.. वो भलेही आपकी बेटी हो.. मुजे वो मेरे देवुके लीये चाहीये.. वो भी भलेही उनकी बहेनके साथ.. हें..हें..हें.. आप समज गेयनां.. हें..हें..हें.. (कहेते दोनो हसने लगे)

ओर दुसरेही दीन सुबह किशन राजीवके गांव सीधे उनकी दुकानपे चला गया.. आज साथमे बीजनेस करनेके बावजुद वो पहेली बार राजीवके पास आया था.. वो निर्मलाको फेइस करना नही चाहता था.. इसीलीये रावीवकी दुकानपे चला गया.. तो उनको देखतेही राजीव खुसीके मारे आंसु बहाने लगा.. ओर उनको कसके गले लगा लीया.. फीर दोनो दोस्तने साथ बैठकर कुछ पुरानी यादे ताजा करते बाते करने लगे.. ओर बातो बातोमे ही किशनने अपने दीलकी बात राजीवको बतादी.. की वो मंजुका हाथ देवायतके लीये मांगने आया हे.. तब सुनके राजीवकी आंखसे खुसीके मारे आंसु छलक गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७९

ओर दुसरेही दीन सुबह किशन राजीवके गांव सीधे उनकी दुकानपे चला गया.. आज साथमे बीजनेस करनेके बावजुद वो पहेली बार राजीवके पास आया था.. वो निर्मलाको फेइस करना नही चाहता था.. इसीलीये रावीवकी दुकानपे चला गया.. तो उनको देखतेही राजीव खुसीके मारे आंसु बहाने लगा.. ओर उनको कसके गले लगा लीया.. फीर दोनो दोस्तने साथ बैठकर कुछ पुरानी यादे ताजा करते बाते करने लगे.. ओर बातो बातोमे ही किशनने अपने दीलकी बात राजीवको बतादी.. की वो मंजुका हाथ देवायतके लीये मांगने आया हे.. तब सुनके राजीवकी आंखसे खुसीके मारे आंसु छलक गये....अब आगे

राजीव : (हसीके साथ खुसीसे आंसु बहाते) भाइ क्या बात कर रहे हो तुम..? येतो बहुत खुसीकी बात हे.. हम दोनो दोस्त समधी होजायेगे.. मुजे ये रीस्ता मंजुर हे.. बस अ‍ेक मे मौका देखकर बार नीमुसे बात करलु..

किशन : (हसते) भाइ नीमु कैसी हे..? क्या वो मान जायेगी..? हांतो कहेगीनां..?

राजीव : (किशनका हाथ थामते) भाइ क्यु नही मानेगी..? मे तुमसे वादा करता हु.. की मेरी मंजु तेरे घरकी बहु बनेगी बस.., भाइ मेने रीस्तोमें हमारी दोस्तीको सबसे उपर रखा हे.. हम तीन पीढीयोसे दोस्त हे.. पता नही नीमु तुमसे अभी भी कीस बातके लीये नाराज हे.., जो होनाथा वो होगया.. भाइ कहेते हेना जोडीया उपरसे बनके आती हे.. तो हमारी कीस्मतमे भी वो सब लीखाथा.. तो हम उसे थोडी मीटा सकते हे.. भाइ आपने ओर मेनेभी क्या कीस्मत पाइ हे.. भाइ आपकी तराह मुजेभी मेरी बहेनसे सादी करनी पडी.. इस जमानेमें कोइ सोचेगा तो क्या कहेगे.. लेकीन तब सीचुअ‍ेशन भी अ‍ैसीथी तो हम क्या कर सकते हे..

किशन : (मुस्कराते) यार तु टेन्शन मत ले.. अ‍ैसे कइ लोग हे जो अ‍ैसे रीस्तो मे पुरी जींदगी गुजार देते हे.. मे इनको गलत नही मानता.. भाइ अबतो तुम्हारे बा बापुजी ओर मेरे बा बापुजीभी चल बसे.. वो दोनोभीतो दोस्त थे.. तेरे बापुको सब पता हे की मेरे बा बापुजी कोन थे.. वो दोनोभी तो भाइ बहेन थे.. भाइ छोड ये सब.. हमे कहा कीसीके सामने ढींढोरना पीटना हे.. अच्छा हे यहा तुजे कोइ नही जानता.. ओर नाही तुम्हारे कोइ रीस्तेदार हे.. ओर वहा हमारे गांवमे भी अभी कीसीको पता नही हेकी तेरी भाभी(विमला) मेरी बहेन हे.. तो फीकर कीस बातकी..?

राजीव : हां यार.. मुजे भी अ‍ैसे रीस्तोसे अब कोइ अ‍ेतराज नही.. तभीतो मेने तुजे मंजुके लीये हां कहेदीया.. भाइ.. तुमने मुजे हर तराहका बहोत सपोर्ट कीयाहे.. ओर अभी भी कर रहे हो.., क्या वो विरजी कभी मीलता हे की नही..? कमीना मुजेतो मीलता ही नही.. तेरे पास आता हे क्या..?

किशन : (हसते) हां.. अब वो उनके बापुकी तराह मेरी ही सब खेती बाडी सम्हालता हे.. (जोरोसे हसते) कमीना कहा जायेगा.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) भाइ.. अ‍ेक बार में सहेर गयाथा तोवो सरलाभाभीके साथ वहा आया था.. वही देखा मेने.. तो सरलाभाभी भी मुजे देखके खुस होकर हसने लगी.. मे जब दुकानमे जाकर बहार नीकला तो पता नही कमीना अचानक कहा चला गया.. मुजेतो पताही नही चला.. पता नही वो उलुका पठा कीस लीये मुजसे नाराज हे.. कमीना मुजे फोन तक नही करता..

किशन : (हसते) छोडना यार.. तुजेपो पता हे.. वो सुरुसे ही सनकी हे.. हमने कोलेजमे कम धमाल की हे? हें..हें..हें.. बस वो भुमीके साथ कुछ गलत होगया.. तबसे वो कीसीको मुह नही दीखाता.. वो इस बातके लीये आजभी सर्मींदा हे..

राजीव : (खुस होते हसते) क्या पुराने दीन थे.. जब हम कोलेजमे थे तब हमारे साथ वो नीमुकी फ्रेन्ड भुमी थी उसीकी बात कर रहे होनां..? पता चलाकी उसने कही सादी करली हे.. फीर तो कभी मीली ही नही.. कीतनी क्युटथी. हें..हें..हें.. भाइ क्या वो आपसे मीलती हेकी नही..? आपकी मुह बोली बहेन थीनां.. आपको भाइ भाइ कहेते थकतीही नही थी.. ओर नरेशभी उनके पीछे लगा रहेता था.. वो मीलता हे..?

किशन : (हसते) हां.. भाइ मुजे पता हे तुमभी उनके पीछे लगा रहेता था.. यार.. जबसे कोलेज छोडा तबसे मे कही जाताही नही हु.. बस सालमे अ‍ेक बार उनके घर राखी बंधवाने जाता हु.. ओर उसने नरेशके साथही सादी करली हे.. चल अब कुछ चाइ बाइ पीलादे फीर में चलता हु..

राजीव : (थोडा गंभीर होते) भाइ आज पहेली बार आये हो.. वो भी मेरी बेटीका रीस्ता लेकर.. तो फीर अ‍ेक बार घरपे चलोनां..? आपकी नीमुसे बातभी होजायेगी..

किशन : (मुस्कराते) नही यार.. आज रहेने दे.. इधर ही तेरी चाइ पीके मुह मीठा करते हे.. फीर सीधे मेरे देवा की जान लेकर ही आउगा.. ओर सुन.. निमुसे कोइ जोर जबरदस्तीकी बात मत करना.. उनको प्यारसे समजाना.. अगर उनको रीस्ता ना पसंद होतो मना कर देना.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. समजे..?

राजीव : भाइ क्या बात कर रहेहो..? वो क्यु मना करेगी..? डीसीजन मुजे ओर मेरी बेटीको लेना हे.. मेरी ओरसे तु ये रीस्ता पका ही समज.. मे तुजे फोन कर दुगा.. लोजी.. चाइ भी आगइ.. अभीतो मुह इनसेही मीठा करलो.. बाकी कोलेजके वो दीन कभी नही भुला.. जो हम सबने होटेलमे जाके खुब दारु भी पीली.. ओर खुब धमालभी कीया.. साला वीरजीतो बहुत पीताथा.. ओर लुढक जाता था तब हमेही उनको उठाके लाना पडता था..

किशन : (हसते चाइ पीते) कमीना आजभी उतनीही पीता हे.. अब तो वो देसीभी पीने लगा हे.. साला जल्दी मरेगा.. हें..हें..हें.. कमीनेको कीतना समजाया.. समजताही नही हे..

राजीव : (हीचकीताते) भाइ वो.. आप केह रहेथे.. आपके खानदानमें उन श्रापके बारेमे.. क्या उनका नीवारण हो गया..? भाइ आपके लीये वो जरुरी हे.. अब आप बाबासे मीलकर सब विधी करवालो..

किशन : (हसते) भाइ अच्छा याद दीलवा दीया.. सुनो अ‍ेक दो दीनमे ही बाबा वोही श्रापके नीवारणके लीये हमारे घर आ रहे हे.. अब वो समस्या नही रहेगी.. भाइ मे तेरी चीन्ता समजता हु.. देवु ओर मंजुकी सादीसे पहेलेही वो सब समस्या खतम कर दुगा तु टेन्शन मत ले..

फीर कुछ देर बाते करते किशन वापस हवेलीपे आगया ओर विमलाको राजीके साथ हुइ सब बाते बता दीया तो सुनके विमला बहुतही खुस होगइ.. तब दोपहोरको देवायत आगया सब खाना खा रहेथे तब विमलाने उनकोभी सब बतादीया तो देवायतभी सरमाते खुस होगया.. ओर खाना खाके अपने रुममे चला गया ओर फोन लगाके मंजुसे बाते करते सबकुछ बताने लगा.. तो मंजुभी खुस होगइ.. ओर उनको घरपे आनेके लीये केहते बाते करने लगी..

देवायत : मंजु आज काकाको मीलने बापुजी वहा आयेथे.. उन्होने हां केहदी..

मंजुला : (हसते) हें..हें..हें.. जनाब आपसे पहेले मेरी बापुजीसे बात होगइ हे.. मे हमारी दुकानपे उनको टीफीन देने गइथी.. तबही मुजसे आपके बारेमे सब पुछ रहेथे.. तो मेने बापुजीको केह दीयाकी हम दोनो अ‍ेकही कोलेजमे पढतेथे ओर हम दोनोमे आपसमे प्यार होगया हे.. ओर मे वही सादी करना चाहती हु.. सब बाते होगइ.. लेकीन जानु मे आपसे नाराज हु..

देवायत : (हसते) वो क्यु भला..? अब मेने क्या करदीया..?

मंजुला : आपने मुजे कभी बताया नहीकी आप किशन काकाके बेटे हो.. मुजसे ये बात क्यु छुपाइ..? क्या मे आपको मना करती..? सुनो.. आप आज दो पहोरको घरपे आजाओ.. घरपे कोइ नही हे..? मम्मी ओर भावु सहेर गेये हे कुछ खरीदी करने.. सामको देरसे आयेगे.. ओर मम्मीकोतो अभी कुछ पताही नही हे.. क्या आओगेनां..?

देवायत : अरे हमारी बीवी इतना प्यारसे बुला रहीहे ओर हम नां आये..? आजाउगा बेबी फीकर मत करो..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु आप कैसी आग लगाके गये हो.. अबतो आपके बीना रहाभी नही जाता.. कुछ करोनां.. वरना आपको लेकर मे कही भाग जाउगी.. केह देती हु.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे आ रहाहुनां बाबा.. क्या मेरी बीवीने खाना खालीया..?

मंजुला : (हसते) हां खालीया.. क्या आपने खाना खालीया..?

देवायत : हां अभी खाना खाकर ही मेरे रुममे आया हु.. खाना खा रहेथे तबही बाने मुजे हमारे बारेमे बातकी की राजीवअंकलने हा कहेदी हे.. तभीतो तुमको फोन लगालीया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) जानु आप फोन रखदो ओर फटाफट वहासे नीकलजाओ.. तबतक मे कुछ काम भी नीपटालु.. फीर हम आरामसे प्यार करगे.. आजाओ बाबु..

देवायत : (सरारतसे हसते) प्यार या चुदाइ..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सर्मसार होते हसते) छी.. कीतने गंदे लडके हो.. हें..हें..हें.. हां.. वोही.. हें..हें..हें.. मुंमममहा..

देवायत : (हसते) अरे सीर्फ फोनपे ही कीस देगी की वहाभी कीस मीलेगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) नही.. यहा कुछ नही मीलेगा.. हें..हें..हें.. बाबु मे थोडीनां देती हु.. आप खुद ले लेते हो.. हें..हें..हें.. अब बातेभी करोगे की नीकलोगे भी.. अरे आजाओ बाबा क्यु टाइम वेस्ट करते हो.. मुंममहा... बाय..

कहेते मंजुने फोन रखदीया तब देवायतभी फटाफट नीचे आगया.. ओर तैयार होके अपनी बुलेट लेकर नीकल गया.. तब विमला उनको देखकर हसने लगी.. वो समज गइथी की देवा कहा जा रहा हे.. तब वोभी किशनके पास अपने बेडरुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करते बेडकी ओर चली गइ तब किशन आंखपे हाथ रखते आराम कर रहाथा ओर विमला उनकी बगलमे लेट गइ.. तब किशनने विमलाको देखकर पलटते विमलाको अपनी बाहोमे भरलीया..





किशन : (विमलाके होंठ चुमते) विमु आज मे बहुत खुस हु.. अब मेरे देवाकी भी सादी उनकी बहेनसे होजायेगी.. क्या अबतो तुम खुस होनां..?

विमला : (हसते होंठ चुमते) हां भाइ.. क्या आपकी नीमुसे बात हुइ..? वो कुछ नही बोली..?

किशन : नही विमु.. मे सीधा राजीवकी दुकानपेही गयाथा.. वो इस बारेमे खुद नीमुसे बात करलेगा.. राजीवतो इस रीस्तेसे बहुतही खुस हे.. बस अब नीमु हां कहेदे.. तो गंगा नहाये..

विमला : (सरमाते हसते) भाइ अब कल बाबा वो हमारे घर श्रापका नीवारण करदे.. तो आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो.. सबसे पहेले मेरे उपर ट्राइ करलो.. हमे इस बातपे देवासे कोइ रीस्क नही लेना.. आप मुजेही पेटसे करदेना.. ओर मेभी आपका दुसरा बच्चा चाहती हु.. मुजे आपके बच्चे पैदा करना अच्छा लगता हे..

किशन : (हसते विमलाके उपर चडते) अरे मेरी प्यारी बहेना तु कहेतो तुजे ओर बच्चेभी देदुगा.. तु आजभी अ‍ैसीही दीखती हे.. मे आज भी तेरा इतना ही दीवाना हु जो पहेले था.. चल कपडे नीकाल.. हम अभीसे ट्राइ सुरु कर देते हे.. हें..हें..हें..

विमला : (सरमाते हसते) भाइ आप आजभी उतनेही ठरकी हो.. मुजे चोदनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडते..





तब कुछही देरमे दोनो नंगे होजाते हे.. ओर किशन विमलाके उपर चड जाता हे ओर विमलाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगता हे.. तब विमलाभी किशनसे चुदवाते बीच बीचमे उनसे बाते करलेती हे.. वो किशनको बहुत प्यार करती थी.. विमलाने किशनको पुरी तराह अपने वसमे करलीया था.. क्युकी वो पुरुषको कैसे अपनी वसमे करते हे वो विद्या आश्रमसे सीखकर ही आइ थी.. ओर कुछ ही देरकी धमासान चुदाइके बाद किशन विमलाकी चुतको अपने पानीसे भरते उनके उपर ढेर होजाता हे.. ओर विमला खुस होते किशनकी पीठ सहेलाती रहेती हे..

तब दुसरी ओर देवायत घरसे नीकलतेही सीधे ही मंजुके घर चला गया.. देखाकी घरमे कोइ नही हे.. तब उसने धीरेसे दरवाजा बंध करदीया ओर मंजुके रुमकी ओर चला गया.. तब मंजु अपने रुममे मीररके सामने बैठते गाना गुनगुनाते शींगार कर रहीथी.. तब देवायत धीरेसे उनके पीछे चला गया ओर उनको पीछेसेही अपनी बाहोमे भरलीया.. तब मंजु गभरा गइ.. ओर देवायतको देखतेही खडी होगइ.. ओर पलटके उनकी बाहोमे समा गइ..

मंजुला : (सरमाते हसते) आगये मेरे जानु..? वो दरवाजा बरवाजा बंध कीयाकी नही..?

देवायत : (हसते) हां करदीया.. कहा गइ हे मम्मी ओर भावु..? सहेर खरीदी करने गइ हे..?

मंजुला : हां जानु हम तीनोके कुछ अंडरगार्मेन्ट ओर दुसरी खरीदी करनीथी.. ओर हां.. मेने आतेही मम्मीको बता दीयाथा.. वो सृतीके मम्मीके बारेमे तो सुनकर वो बहुत खुस होगइ.. ओर मेने उनको फोनपे बातभी करवादी.. तब मम्मी ओर आंटी दोनोही फोनपे रो पडी.. सायद आज उनको मीलनेके लीयेभी जाये.. उनको भुमीका आंटीने उनका पता दे दीया हे..

देवायत : (थोडी चीन्तासे) पागल होगइ हो क्या..? अगर आंटीने हमारी सादी सुधाकी बात बतादीतो..? मंजु मुजे लगता हे अगर दोनो मीलेगी तो जरुर हमारेमे बारेमे बाते करेगी.. तो तेरी मम्मीको हमारे बारेमे सब पता चल जायेगा.. मेरीही गलती हे.. जो मेने तेरी मम्मीकी बात भुमी आंटीको कहेदी..

मंजुला : ओह..गोड.. मेतो भुलही गइ..की आंटीको हमने पती पत्नीके रुपमे परीचय करवाया हे.. (मुस्कराते) जानु.. कोइ बात नही.. मे सब हेन्डल कर लुगी.. ओर वेसेभी अबतो पापा खुद उनसे बात करेगे तो अब काहेका डर..? वैसेभी उनको पतातो चलही जायेगा, आप फीकर मत करो.. मे ओर पापा सब हेन्डल करलेगे..

देवायत : (कुछ सोचते) हंमम.. चल बाततो तेरी ठीक हे.. लेकीन अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) बीलकुल डरपोक हो.. अरे बाबा मेभी नही डरती तो आपको कीस बातका डर हे.. हें..हें..हें..

तब देवायत मंजुको क्या जवाब देता की तेरी मां नीर्मलाभी मेरी बीवी हे.. तेरी सौतन, देवायतको बस अ‍ेकही बातका डरथा की जब नीर्मलाको पता चलेगाकी मे उनकी बेटीसे सादी करके उसे कइ दीनोसे चोद रहा हु तो उनका क्या रीअ‍ेक्शन होगा उन्ही बातको लेकर देवायतको डर था.. हांलाकी नीर्मलाभी जानतीथी की कभीना कभी देवायतकी कीसी ना कीसी के साथ सादीतो होगी ही..

क्युकी वो देवायतकी बीवी बनके उनका घरतो नही सम्हाल सकती.. नीर्मलाका खुदका भी परीवार था.. तो वो देवायतका घर कैसे बसा सकती थी.. उन्होनेतो देवायतसे सीर्फ प्यार कीयाथा.. ओर वोभी अपनी सारीरीक जरुरतको पुरा करने.. जो वो आये दीन देवायतको घर बुलाकर अपनी प्यास बुजवाकर पुरी करलेती थी..

ओर वो इस नाजायज रीस्तेसे काफी खुस भी थी.. उनके मनके अ‍ेक कोनेमे देवायतसे चुदवाकर किशनसे बदला लेनेका अ‍ेक संतोषभी मील रहाथा.. ओर इसके लीये वो हमेसा घरपे आइपील ओर पेइन कीलरकी टेबलेटभी रखती थी.. ताकी उसे कोइ देवायतसे प्रेगनेन्ट होनेका खतरा ना हो..

तभी मंजु देवायतको हाथ पकडकर उनके बेडकी ओर लेजाती हे.. ओर दोनो प्यार करने लगते हे.. तब कुछही देरके बाद दोनोके कपडे अ‍ेक टेबलके कोनेपे साथमे पडे दोनोकी कामलीला देख रहे थे.. कुछही देरमे दोनो नंगे होकर अ‍ेक दुसरोमे समा जानेकी कोसीस कर रहेथे.. मतलब सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेके अंगोको अपने मुहमे लेकर प्यारका खेल खेल रहेथे.. लेकीन मंजुको अपनी चुतमे लंड लेनेकी बडी जल्दीथी..

ओर वो जटसे पीठके बल लेट गइ ओर देवायतको कमरसे खीचके अपने उपर चडाने लगी.. तब देवायत मंजुके उपर चढ गया तो मंजुने अपने दोनो पैर फैला दीये.. ओर देवायत उनके पैरोके बीच बेठकर लंडको मंजुकी चुतपे टीकाते मंजुके उपर जुक गया ओर मंजुके होठोपे कीस करने लगा.. तब मंजुभी मदहोस हो चुकीथी.. ओर वो देवायतके लंड पकडके अपनी चुतके लव होलमे फसाने लगी..





मंजुला : (सरमाते धीरेसे) जानु पहेले इसे अंदर डालदो.. इनकी बडी आदत होगइ हे.. क्या मस्त हथीयार हे आपका.. बहुत मजा आता हे.. जी करता हे दीन रात इसे अंदर लेके पडी रहु.. हें..हें..हें..

देवायत : मंजु तु बहोत ठरकी होगइ हे.. तुजे कीतना चोदता हु.. फीरभी तुजे संतोष नही मीलता..

मंजुला : (सरमाते हसते) हां.. नही मीलता.. ये मेरा लंड हे.. मेरी अमानत हे.. मे जब चाहु अपनी चुतमे घुसा सकती हु आपको कोइ अ‍ेतराज..? जानु क्या मस्त लंड हे.. देखना अ‍ेक बार हमारी सादी होजाने दो.. फीर पुरा दीन पुरी रात बीना बहार नीकाले ही चुदवाउगी.. मेरी बडी तम्मना हे..की मे पुरी रात आपसे चुदती रहु..

तभी देवायत मंजुकी बातोसे ओर गरम होगया.. ओर वो उनपे जुक गया उसने मंजुके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया तब मंजुभी मुह खोलके देवायतके मुहके रसको पीने लगी.. ओर दोनोही कामवासनामे जलने लगे.. तब देवायत मंजुके उरोजोको मसलते मंजुके रसको पी रहाथा तब मंजु पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी ओर देवायतने अ‍ेक ही जटकेमे पुरा लंड मंजुकी चुतमे घुसा दीया..

तब मंजुकी चीख नीकल गइ ओर वो बेडपे अपने दोनो पैर पटकते छटपटाने लगी.. तब देवायत मंजुको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब मंजुका मुह खुलाही रेह गया.. ओर उसने अपने दोनो पैर देवायतकी कमरमे आंटी लगाके फसालीया.. ओर देवायतके हाथको ओर चदर पकडते छटपटाते मचलने लगी.. ओर उनकी दर्द भरी आहे कामुक सीसकारीयोमे तबदील होने लगी..





अब दो जीस्म अ‍ेक होचुके थे ओर देवायत मंजुकी धमासान चुदाइ कर रहाथा तब मंजुभी अपनी कमरको उछाल उछालके देवायतका पुरा साथ देने लगी.. देवायतकी चोदनेकी यही अदा उनको भा गइ थी.. जीनकी वजहसे वो देवायतसे हर वक्त चुदवानेको तैयार रहेती.. ओर अब तक वो दो बार जड चुकीथी.. ओर आखीर देवायत मंजुकी चुतमे जडतक लंड घुसाते जडने लगा तब मंजुभी अपने गर्भासयपे देवायतका गरम कामरस महेसुस करते कांपने लगी.. ओर देवायतके साथ अपना पानी छोडते जडने लगी..





तब दोनोही अपने चरम पर पहोंच गये ओर देवायत मंजुके सीनेपे ढेर होगया तब मंजु अपनी सांसे कंट्रोल करते देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. फीर दोनो बाथरुममे चले गये ओर अ‍ेक दुसरेको नहेलाने लगे तब देवायत मंजुके बुब्सपे साबुन लगाते उनको मसलने लगा तो मंजुभी कामुक नजरोेसे देखते देवायतके लंडको साबुन लगाते सहेलाने लगी तब दोनो फीरसे उतेजीत होगये ओर दोनो वही नीचे फर्सपे बेठ गये..





मंजु देवायतकी गोदमे उनकी कमरके आसपास पैर पसारके बेठ गइ ओर गलेमे हाथ डालके लंडको अपनी चुतपे सेट करने लगी.. तब देवायतके लंडने जटके मारते अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीया तो देवायतने बेठे बेठे ही मंजुकी चुतमे लंड घुसा दीया.. तब मंजुने

दोनोही अ‍ेक बार फीरसे काम वासनाकी आगमे जलते चुदाइमे मसगुल होगये.. ओर देवायतने अ‍ेक बार फीरसे मंजुकी धमासान चुदाइ करते उनकी चुतको अपने पानीसे सीचदी.. तब जाके मंजुको कुछ राहत महेसुस हुइ.. लेकीन आज उनकी देवायतने दो बार जबरदस्त चुदाइ करलीथी..





जीनकी वजहसे मंजुकी चाल काफी बीगड चुकीथी.. फीर दोनोही नहके बहार आगये ओर फटाफट कपडे पहेनके तैयार होगये.. फीर बहार होलमे आके बैठ गये तब मंजुने मेइन गेइट खोलदीया तो बहार साम ढलने आइथी.. तब मंजु देवायतके पास उनसे सटकर बेठ गइ..

मंजुला : जानु आप कल फीर वापस आओगेनां..? क्या हेनां मम्मी आपको अ‍ेक बार देख लेगी.. ओर उनको कुछ पुछनाहे तो पुछ लेगी.. प्लीज.. मेरी खातीर.. आज सामको पापा उनसे बात कर लेगे..

देवायत : (कुछ सोचते) ठीक हे बेबी.. मुजे फोन कर देना.. तब मे आजाउगा.., बेबी क्या हम भाग जाये..? चलनां हम भाग जाते हे.. अब हमने सादीतो करली हे..

मंजुला : (आस्चर्यसे) अरे.. आप पागलतो नही हो गये..? अरे बाबा.. जब हम दोनोके पापाने खुद हमारा रीस्ता पका करलीया हे तो फीर हमे क्यु भागना..? जानु थोडा सबर करलो.. कुछना कुछतो होगाही..

देवायत : ठीक हे.. क्या हेनां.. वो.. अगर.. आपकी मम्मीने मना करदीया तो..? इसीलीये केह रहा था..

मंजुला : बाबु वो सब मे हेन्डल कर लुगी.. अब पापाने केह दीयाहेतो मुजे कीसीका डर नही.. फीरभी अ‍ैसी सीचुअ‍ेशन आइ तो मे खुद भागके आपके घर आजाउगी.. बस..? अबतो कोइ टेन्शन नही..?

देवायत : (हसते) ठीक हे चलो मे चलता हु कल फोन करना.. मे आजाउगा..

फीर देवायत मंजुके होठ चुमते वहासे चला जातहे.. ओर मंजु खुस होते गाना गुनगुनाते अपने काम पे लग जाती हे.. तभी अ‍ेक रीक्सा मे उनकी मम्मी नीर्मला ओर भावना आजाती हे ओर सब केरी बेग वही सोफे पे रखते ही दोनो थक के वही बेठ जाती हे.. तब मंजु दो ग्लास पानी लेके हसती हुइ आतीहे ओर दोनोके पानी पीलाती हे.. तब नीर्मला मंजुको अ‍ैसे लंगडाते चलते देखती हे.. ओर ैनके हाथोसे पानी लेकर पानी पीते मंजुकी ओर देखती रहेती हे.. जब पानी पीलीया तब ग्लास वापस देते पुछ ही लीया..

नीर्मला : मंजु.. क्या हुआ तुजे..? अ‍ैसे लंगडाते क्यु चल रही हे..? कही गीर गइथी क्या..?

मंजुला : (सकपकाते सरमाते) जी..वो..वो.. बाथरुममे थोडा पैर फीसल गयाथा.. तो पैरमे मोच आगइ..

भावना : (थकी आवाजमे) मंजुदी जटसे खाना बनालो यार.. बहुत भुख लगीहे.. ओर नींदभी जोरोकी आ रही हे.. आजतो मम्मीने मुजे चला चलाकर थका दीया..

नीर्मला : (हसते) तुजे कहा चलना पडा हे.. सब जगाह रीक्सेमेही तो गये हे.., हें..हें..हें..

भावना : मम्मी आपने कीतना सामान लीया हे.. सब मुजेही उठाना पडा.. आजतो बेडमे गीरतेही नींद आजायेगी..

नीर्मला : (हसते) चल ठीक हे खाना खाकर जल्दी सोजाना.. मंजु.. अभी तक तेरे पापा नही आये..?

मंजुला : (घडी में देखते) बस मोम आतेही होगे.. अब टाइम होगया हे.. चलो मुजे खानाभी बनाना हे..

मंजुला : (तब मंजु कीचनमे चली गइ.. ओर मनमे सोचने लगीकी) आजतो मम्मीके सवालोसे बाल बाल बच गइ.. जालीमने आज मुजे कीतनी बेहरेहमीसे चोद लीया.. ओर वोभी दो दो बार मेरी चुदाइ करली.. उनको मनाभी तो नही कर सकती.. आखीर मेरा पती जो हे.. अब उनको केह दुगी.. की जबतक हमारी सादी नही होजाती तबतक आरामसे मेरी चुदाइ करे.. ओर मेभी तो इनके बगैर रेह नही सकती.. क्या मस्त चुदाइ करते हे.. बापरे.. कीतना बडा लंड हे उनका.. आजको मेरी चुतकी चोद चोदके धजीया उडादी..

यही सब सोचते वो मुस्कराते खाना बना रहीथी.. तब नीर्मला सोफेसे उठकर फ्रेस होने बाथरुममे चली गइ तो वहा फर्सपे नीचे मंजुकी चडी पडी दीखाइदी.. जो आम तोरपे वो खुद धोकर बहार सुखा देती हे.. तो नीर्मलाने चडी उठाके देखा तो उनके हाथमें कुछ चीपचीपासा लगा.. ओर उपरसे मंजुकी बीगडी चाल.. नीर्मलाको मंजुके उपर कुछ आसंकाये होने लगी.. फीर वो हाथ मुह धोकर बहार नीकली..

तो रुममे बेडपेभी नजर चली गइ ओर उसने बेडकी चदरको अस्त व्यस्त देखा.. तो वो वहा नजदीक जाकर देखने लगी.. तो नीर्मलाको चंदरपे भी कुछ गीले धबे दीखे.. तब नीर्मला उन धब्बेपे उंगली लगाकर चेक करने लगी.. तो उसे वही चीपचीपचसा लगा जो मंजुकी चडीपे लगाथा.. तब नीर्मलाको जरासीभी समजनेमे देर नही लगी की यहा उनकी गैर मौजुदगीमे पीछे क्या हुआ हे..

ओर उनको मंजुपे गुसा आने लगा.. लेकीन इस बारेमे मंजुसे बात करे भी तो कैसे..? क्युकी अभी राजीवके घर आनेका वक्त होगया था.. ओर वो अभी इस बारेमें हंगामा करना नही चाहतीथी.. उसने इस बारेमे कल फुरसतमे अकेली मंजुसे बात करनेका फैसला कर लीया.. ओर वो बहार आकर सोफेपे बेठ गइ.. ओर कीचनमे मंजु खाना बना रहीथी.. उनकी ओर घुरते उसे गुसेसे देखती रही..

तभी राजीवभी धर आगया ओर सीधा बाथरुममे नहाने चला गया.. फीर नहाकर नाइटके कपडे पहेनके होलमे आगया.. ओर नीर्मलाके साथ उनसे सटकर बैठ गया.. तो नीर्मला राजीवकोभी घुरके देखने लगी.. तबतक खानाभी बन चुकाथा ओर सभी अ‍ेक साथ खाने पे बैठ गये.. सब खाना खाते रहे तभी भावना फटाफट खाके उपरकी मंजीलमे अपने रुममे सोने चली गइ.. तब खाना खाते राजीव ओर मंजु अ‍ेक दुरेके सामने देखके हस रहेथे.. तो दोनोको अ‍ैसे हसते देखकर नीर्मलाको बडा आस्चर्य हुआ.. ओर वो दोनोकी ओर घुरके देखने लगी.. तब राजीवने हसते हुअ‍े बातोका दोर सम्हाला....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८०

तभी राजीवभी धर आगया ओर सीधा बाथरुममे नहाने चला गया.. फीर नहाकर नाइटके कपडे पहेनके होलमे आगया.. ओर नीर्मलाके साथ उनसे सटकर बैठ गया.. तो नीर्मला राजीवकोभी घुरके देखने लगी.. तबतक खानाभी बन चुकाथा ओर सभी अ‍ेक साथ खाने पे बैठ गये.. सब खाना खाते रहे तभी भावना फटाफट खाके उपरकी मंजीलमे अपने रुममे सोने चली गइ.. तब खाना खाते राजीव ओर मंजु अ‍ेक दुरेके सामने देखके हस रहेथे.. तो दोनोको अ‍ैसे हसते देखकर नीर्मलाको बडा आस्चर्य हुआ.. ओर वो दोनोकी ओर घुरके देखने लगी.. तब राजीवने हसते हुअ‍े बातोका दोर सम्हाला....अब आगे

राजीव : (हसते) नीमु.. आज हमारी मंजुके लीये अ‍ेक रीस्तेकी बात आइ हे.. वो लोग पहेचान वाले हे.. मानलोनां घरके ही लोग हे.. हें..हें..हें.. मेने तो हां कहेदी हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (खाना खाते अटक गइ) राजीव आपने उन लोगोको हां.. भी.. कहेदी..? मंजुको पुछे बगैर..? (मंजुकी ओर घुरते) चलो अच्छा हुआ.. मंजु अब बहुत बडी होगइ हे.. करदो सादी इनकी.. वैसे भी लडकीया अपने घर चली जाये उतनाही अच्छा हे.. वरना खामखा बदनामीका डर रहेता हे..

राजीव : (थोडा गुसे होकर) नीमु तुम ये क्या बक रही हो..? हमारी लडकीया कोइ अ‍ैसी वैसी नही हे.. ओर मेरी लडकीया मुजपे बोज नही हे समजी.. मुजे नाज हे अपनी बेटीओपे..

नीर्मला : (मंजुकी ओर घुरते) हां हां.. पता हे.. मे हमारी लडकीयोकी बात नही कर रही.. समजे..? बताओ.. कौन लोग आयेथे.., लडका कौन हे..? ये भी बताओगे की अपने मनमे ही रखके बेटीओकी सादी कर दोगे..

राजीव : (हसते) अरे मनमे क्यु रखुगा.. ओर मेने मंजुकोभी पुछ लीया हे.. मंजुकोभी ये रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. इसे लडका पसंद हे.. अरे पसंद..? वोतो दोनो अ‍ेक दुसरेको जानते भी हे.. अ‍ेकही कोलेजमे तो पढते थे.. ओर.. ओर..(धीरेसे) दोनो अ‍ेक दुसरेको आपसमे प्यारभी करते हे..

नीर्मला : (चोंकते थोडा गुसेसे) व्होट..? दोनो आपसमे प्यार करते हे..? कोन हे वो लडका..? (मंजुकी ओर घुरते) हमने दोनोको सहेरमे इसीलीये तो पढनेके लीये भेजाथा.., ताकी इच्छेसे लडकेको ढुंढके प्यारका खेल खेल सके.., हमने इन दोनोको वहा पढाइ करने थोडीना भेजाथा.. अ‍ेकतो पढाइ अधुरी छोडके फैल होकर वापस आगइ.., वहा पढाइमे क्यु ध्यान देगी.. वोभी कीसी लडकेके चकरमे पडी होगी.. तभीतो फेल हुइ हे.. ओर आपभी खुस हो रहे हो..? बडा संस्कार दीया हे अपनी बेटीओको.. देख रही हु इनकी हरकते..

राजीव : (थोडा गुसेसे) नीमु.. अब ताने मारना बंध करोगी..? अ‍ेकतो पुरी बात सुनती नही ओर बीचमे ही सुरु होगइ..

नीर्मला : (थोडा सांत होते) ठीक हे..ठीक हे.., कहो.. कौन लोग आये थे रीस्ता लेकर.. लडका कौन हे..? उनके मां बाप कोन हे.. वो कीस खानदानसे हे.. अब बताओगे भी की नहीं..?

राजीव : (मुस्कुराते) वो.. वो.. हमारा किशन.. उन्हीका अ‍ेक लौता बेटा हे देवायत.. जो अब किशनका पुरा कारोबार सम्हालता हे.. वोही.. मंजु ओर देवायत अ‍ेक दुसरेको पसंद करते हे.. अगर नही करते तो भी मे हां केह देता.. लेकीन मंजुको पुछकर.. अब मंजुके लीये इनसे बहेतर कोइ रीस्ता थोडी मीलेगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (खाना खाते मुह खुलाही रेह गया धीरेसे) क्या.. दे..वा..य..त.. वो..वो.. (मंजुकी ओर देखते) मंजु तु उनको कबसे जानती हे..? ओर तुम दोनोका कीतने दीनोसे चकर हे..? आइ.. मीन.. तुम दोनो अ‍ेक दुसरेसे कबसे प्यार कर रहे हो..? मंजु मुजे सच सच बतानां.. फीर मुजे तुमसे ओर भी बात करनी हे..

मंजुला : (नजर जुकाते धीरेसे) मोम.. वो.. हम दोनो पीछले तीन महीनेसे.. (हिंमत करते) मोम.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हे.. ओर मे उनसे ही सादी करना चाहती हु.. धेट्स ओल..

नीर्मला : (सोक्ट होकर अ‍ेक नजरसे मंजुको घुरते) देखा राजीव.. आपकी लाडलीका कैसे मुह चलता हे.. कैसे फटाफट बोल गइ.. इनको सरमभी नही आइ.. ओर आप भी..? आपको इस बारेमे अ‍ेकबार भी मुजसे पुछनेकी जरुरत नही लगी..? राजीव मत भुलो ये मेरीभी बेटी हे.. ओर..ओर.. ये दोनोके बीच सादी.. नही..नही.. में ये सादी नही होने दुगी.. आप उसे मना करदो.. मे कुछ नही जानती..

राजीव : (थोडी उची आवाजमें) यार तुम समती क्यु नही..? क्या मे किशनको मना करता..? क्या केहता उनको.. ओर उस खानदानमे क्या खराबी हे..? कीतना अच्छा खानदान हे.. हमारी तीन पीढीयोसे उनके साथ सबंध हे.. तुमभी तो सबको अच्छी तराह जानती हो.. ओर देवायतभी अक्सर घरपे आता हे.. तुमने भी उनको देखा हे.. वो कीतना अच्छा लडका हे.. ओर वो अ‍ेक रोयल फेमीलीभी हे.. क्या ये सब तुमको पता नही हे..? देखना मेरी बेटी उस घरकी रानी बनेगी.. हमारी मंजु वहा राज करेगी राज..

नीर्मला : (मनमे सोचते) राजीव.. मेरे भाइ.. अब तुजे कैसे कहु.. की अब वो मेराभी पती हे.. मे खुद उनकी रानी बन चुकी हु.. हम दोनोने यहा हमारे घरमेही मंदिरके सामने गांधर्व सादी करली हे.. ओर आये दिन यहा आकर तेरी बहेन कहु या तेरी बीवी.. आइ मीन.. मुजको चोदकर चोदकर मेरी हालत बीगाडके अ‍ेक पतीका हक अदा करता हे.. ओर मे मेरी ही बेटीको अपनी सौतन बनाउगी..? नही नही.. सोरी राजीव.. मे मेरे देवाको कीसी ओरके साथ नही बाट सकती.. चाहे वो मेरी बेटीही क्यु ना हो.. हम दोनोने मंदिरके सामने जींदगीभर अ‍ेक दुसरेका साथ नीभानेकी कसम खाइ हे.. ओर तबसे मे मेरी मांगमे देवाके नामका ही सींदुर लगाती हु.. राजीव अब मेने मेरे देवाको मेरे पहेले पतीका हक देदीया हे.. सोरी.. मे ये सादी नही होने दुगी.. वैसेभी तुजे भी पता हे.. मंजु किशनकी बेटी हे.. तो इस नाते मंजु देवाकी बहेन हुइ.. नही नही.. मे ये पाप नही होने दुंगी..

राजीव : (थोडा जोरोसे) नीमु.. कबसे क्या सोच रही हो..? कुछ..तो बोलो..

नीर्मला : (तंद्रासे बहार आते) देखो.. राजीव मेरे खयालसे हमे इस टोपीकपे अभी बात करनेकी जरुरत नही हे.. पहेले हम दोनो आपसमे सब डीसक्स कर लेगे.. फीर तुम उन लोगोको कोइ जवाब देना.. (मंजुकी ओर देखते) मंजु तु सब काम समेटके सो जाओ.. इस बारेमे मे तेरे पापाके साथ डीसक्स करके कल फैसला लुंगी.. ओर तुजे बात करके कल बता देगे.. तु सब काम नीपटाके सो जाओ..

मंजुला : (सरमाते) जी मोम..

कहेते मंजु सब बर्तन लेके वोसरुममे चली गइ.. ओर अपना काम नीपटाने लगी.. तो नीर्मला डाइनींगसे उठकर चुपचाप अपने रुममे चली गइ.. ओर अपने कपडे चेन्ज करके गाउन पहेनकर अपने बेडपे लेटते आंखोपे हाथ रखके अपने अतीतके बारेमे सोचती लेइट गइ.. तब राजीव सोफेपे जाकर बैठ गया.. ओर बेठकर टीवीपे न्युज देखने लगा.. तब मंजुनेभी सब काम नीपटा लीया ओर वो राजीवको गुडनाइट पापा.. कहेते उपरकी मंजीलपे सोने चली गइ.. तब रुममे जाकर देखातो भावना घोडे बेचके सो रहीथी..

दोनो बहेनका बेड अ‍ेकही रुममे अलग अलग था.. ओर मंजुने अपने कपडे चेन्ज करते गाउन पहेनलीया ओर बेडपे लेटतेही देवायतको फोन लगा दीया ओर उनसे धीमी आवाजमे आजके बारेमे हुइ सब बाते बताने लगी.. तब नीचेकी ओर कुछ देर न्युज देखकर राजीव टीवी बंध करके सभी लाइट दरवाजे बंध करदेता हे.. ओर अपने रुममे सोने चला जाता हे.. ओर अंदर जातेही अपने बेडरुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके पलटके देखता हे..

तब नीर्मला गंभीर होकर आंखोपे हाथ रखते लेटी हुइ राजीवका इन्तजार कर रहीथी.. तब राजीव बेडकी ओर बढ गया ओर धीरेसे नीर्मलाके बगलमे उनके पास जाकर लेट गया.. तो नीर्मला तबभी अ‍ैसेही लेटी रही.. तब राजीवने नीर्मलाकी ओर देखा.. फीर करवट लेते नीर्मलाको कमरमे हाथ डालके अपनीओर खीचलीया तब नीर्मलाभी सरकते राजीवकी बाहोमे आगइ.. ओर राजीवने नीर्मलाके सरको अपने हाथका तकीया बनाते बाहोमे भरलीया.. फीर नीर्मलाके चहेरेकी ओर देखने लगा.. तब नीर्मलाकी आंख गीली थी..

तो राजीवने नीर्मलाकी आंख अपने हाथोसे पोछकर नीर्मलाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेकी ओर देखते नीर्मलाके होंठ चुमलीया.. तब नीर्मला राजीवको कसके बाहोमे भरलेती हे.. ओर फीरसे आंसु बहाने लगती हे.. तब राजीव उनके सरको सहेलाने लगा.. क्युकी उनको पताथा नीर्मला कीस लीये ये सादी के खीलाफ हे.. तब वो नीर्मलाके चहेरेको थामते उनकी आंखोमे देखते उसे समजाने लगा..

राजीव : (सरको चुमते) नीमु.. मुजे पता हे तु इस बातसे क्यु खुस नही हे.. लेकीन सोच हमारी बेटी उनको प्यार करती हे.. ओर मंजुने मुजे साफ साफ केह दीया हे.. की सादी करुगी तो सीर्फ देवायतसे वरना सारी जींदगी कुआरी रहुगी यातो मर..ओर.. ओर.. नीमु.. मुजे मंजुकी बातोसे लगता हे वो दोनो काफी आगे बढ चुके हे.. हमे इनकी बात मान लेनी चाहीये.. मे मंजुको तेरी तराह तडपते नही देख सकता..

नीर्मला : (आंसु बहाते) भाइ.. तुम सब जानते हो.. फीर भी..? क्या तुम्हे ये रीस्ता जायज लगता हे..? मे मानती हु देवा अ‍ेक अच्छा लडका हे.. उनके लीये सब जायज हे लेकीन.. हमारी बेटीभी वोही.. राजीव जरा सोचो इनकी सादीके बाद इस रीस्तेके बारेमे मंजुको पता चलेगा तो उनपे क्या बीतेगी.. तब मे ओर तुम वहा उनको सम्हालनेके लीये नही होगे.. मेरी बेटी टुट जायेगी..

राजीव : (सरपे हाथ घुमाते) नही नीमु.. हमारी मंजु इतनी कमजोर नही हे.. ओर रही बात जायज ओर नाजायजकी तो हां.. मेने अ‍ैसा सुना हे प्यार ओर जंगमे सब जायज हे.. तुमनेभी तो किशनसे प्यार कीया था.. ओर तब किशन तुमसे सादी करके तुजे अपनानेको भी तैयार था.. लेकीन तब तेरी क्या मजबुरी थी मुजे नही मालुम.. ओर आज तक तुमनेभी तो मुजे नही बताया.. लेकीन कीशनने मुजे सब सचाइ बतादी.. उनकी भी कुछ मजबुरी थी.. तो इनकी सजा हम हमारी बेटीको क्यु दे..?

नीर्मला : राजीव.. बात सीर्फ मजबुरीकी नही हे.. जो बात सीर्फ मेरे अलावा कोइ नही जानता उनकी हे.. तुम उनकी बहेन विमलाको नही जानते.. ओर मे उस बातको कहेनाभी नही चाहती.. राजीव अब मे सीर्फ तुम्हारी बहेन ही नही तुम्हारी पत्नी भी हु.. फीरभी तुमने उनको हां कहेदी..? उनको हां कहेनेसे पहेले अ‍ेक बार मुजे पुछ लेते.. क्या तुजे अब मुजपे विस्वास नही हे..

राजीव : नही नीमु.. बात विस्वासकी नही हे.. किशन केह रहाथा इस रीस्तेके लीये खुद विमलाने कहा हे.. ओर मत भुलो हमारा किशनके साथ तीन पीढीयोसे सम्बंध हे.. ओर हम दोनो आजभी अच्छे दोस्त हे.. तो मे उनको मना नही कर सका.. इसीलीये नही की उन्होने हमारी बहुत मदद की हे.. हमारे रीस्ते आजभी पहेलेकी तराह मजबुत हे.. ओर वो पार्टनर होने के बावजुद कभी भी यहा नही आये.. ओर नाही उन्होने हमे ये जताने दीयाकी वो हमारी मदद करते हे.. आज इतने बरसोके बाद पहेली बार दुकानपेही आया.. वरना सब कामके लीये देवाको ही भेजता हे..

नीर्मला : तो वो कोइ हमपे अहेसान नही करते.., हम उसे बीजनेसमे पैसे कमाके देते हे..

राजीव : (हसते) नही नीमु.. बस.. यही तुम्हारी गलत फेहमी हे.. वो हमारी दोस्तीकी खातीर हमे अ‍ैसेही मदद कर सकते थे.. लेकीन नहीकी.. उन्होने हमारे मान सन्मानका पुरा खयाल रखा.. इसीलीये हमे बीजनेसके जरीये पार्टनर बनाकर सपोर्ट कीया.. वरना सोचो.. उनको हमारे साथ अ‍ेक छोटी दुकानमे पार्टनरमे बीजनेस करनेकी क्या जरुरत थी..? क्युकी खुदकी इतनी बडी वीरासत हे.. खेती बाडी हे.. उनका बहुत बडा कारोबारभी हे.. ओर सुनाहे अबतो देवायतने वही गोडाउन बनाके बहुत बडा धानका बीजनेस सुरु कीया हे.. तो हमारे थोडेसे पैसोकी उनको क्या जरुरत हे..? नीमु वो अच्छा लडका हे.. मुजे देवापे पुरा यकीन हे.. वो हमारे बुढापेभी हमारा सहारा बनेगा.. बीलकुी किशनपे गया हे..

नीर्मला : (कुछ सोचते) राजीव फीरभी क्यु..? मेरा दील नही मानता.. वजह तुमभी जानते हो.. मे मंजुकी सादी देवायतसे कैसे कर सकती हु..

राजीव : (हसते) हां.. जानता हु.. ओर मे इस रीस्तेको गलत भी नही मानता.. मत भुलो.. क्युकी किशन विमलाकी तराह हम दोनोभी वही रीस्तो से बंधे हुअ‍े हमारी जींदगी जी रहे हे.. तो मेरी मंजु ओर देवाभी सादी करलेतो क्या हर्ज हे.. तुजे पता हेना किशनके बा बापुजीभी वोही भाइ बहेन थे.. पता नही वो अ‍ैसे रीस्तोसे कैसे बंधे हे.. ओर हम दोनोनेभी तो वही कीया हे.. ओर आजभी तुम बीसतरमे मेरी बहेन बनजाती हो.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाते हसते) राजीव.. वो..वो.. हमारी मजबुरी थी.., ओर तुमभी तो मुजसे प्यार करने लगे थे.. ओर वो हम दोनोको अ‍ेक दुसरोकी सख्त जरुरतभी थी..भाइ.. थेन्कस.. तुमने मुजे बहुत सम्हाला हे.. ओर मेरी हर जरुरतको तुमने पुरा कीया हे.. फीर चाहे वो मेरे तनकी ही क्यु ना हो.. भाइ मे आपसे बहुत खुस हु.. (कुछ सोचते) ठीक हे.. मे अ‍ेक बार मंजुसे इस बारेमे बात करना चाहती हु.. फीर हम कोइ फैसला लेंगे..

राजीव : (हसते) ठीक हे.. तुम कल आरामसे उनसे बात करलेना.. फीर मुजे फोन कर देना.. नीमु.. पता हे किशन जाते जाते क्या कहेके गया..? कहेता था राजीव.. अगर नीमु इस रीस्तेसे खुस नही हे तो तुम उनपे कोइ जोर जबरदस्ती मत करना.. मुजे मना कर देना.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. वो तेरा आजभी उतना सन्मान करता हे..

इतना सुनतेही नीर्मला राजीवके सीनेमे सर छुपाते आंसु बहाने लगी.. तब राजीव उनके सरको सहेलाने लगा.. ओर नीर्मलाने तभी उसी वक्त मनही मन मंजु ओर देवायतकी सादीको मंजुर करलीया.. ओर वो सोचने लगीकी प्यारमे उसे अ‍ेक बार फीरसे धोखा मील गया.. पहेले बाप ओर अब बेटा.. तब नीर्मलाने मनही मन देवायतके साथ बने अपने सादीके नये रीलेशनको हमेसाके लीये खतम करनेका फैसला करलीया..

नीर्मला : (सरमाते सीनेमे सर रखते) भाइ मत करो उनकी बात.. अब मुजे सीर्फ आपसे मतलब हे.. अब आपही मेरे पती हो.. मेने जींदगीभर आपका साथ देनेका वादा कीया हे.. तो मे आपका ही साथ दुंगी.. मे आपको कभी नही छोडुगी.. भाइ आज मुजे आपके प्यारकी जरुरत हे.. मुजे आपके अंदर समालो.. मे मेरा पीछला सब अतीत भुलना चाहती हु.. जो मेरा पीछाही नही छोडता.. भाइ मुजे आपकी आगोसमे लेलो..

राजीव : (बाहोमे कसते) अरे आजा मेरी बहेना.. तेरे लीयेतो मे हंमेसा तैयार ही रहेता हु..

ओर राजीव नीर्मलाके होठोपे होंठ रख देता हे ओर दोनोही मदहोस होते अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे.. कुछ देर पहेले नीर्मलासे बात करते राजीवको नही पता थाकी थोडी देरके बाद उनकी बहेन उनके नीचे लेटनेको तैयार होजायेगी.. तब कुछही देरमे दोनो भाइ बहेनके कपडे उनसे अलग होते बेडके कोनेपे साथमे पडे थे.. ओर कुछही देरके बाद राजीव नीर्मलाकी चुतमे लंड डालते नीर्मलाको चोद रहाथा..





तब नीर्मलाभी सब बाते भुलकर राजीवका साथ अपनी कमर हीलाते देने लगी.. लेकीन पता नही आज उसे राजीवके साथ चुदाइ करते राजीवके चहेरेकी जगाह देवायतका चहेरा नजर आ रहाथा.. चुदाइ करवाते उनका मन बार बार देवायतकी ओर चला जाता था.. जबसे देवायतके साथ रीलेशनमे आइ तबसे नीर्मलाने राजीवको हाथ तक नही लगाने दीयाथा..

ओर आज कीतने दिनोके बाद फीरसे अपने भाइके नीचे लेटे उनका लंड अपनी चुतमे घुसवाके उनसे चुदवा रहीथी.. जो नीर्मलाको राजीवका लंड कुछ खास फील नही हो रहाथा.. क्युकी वो देवायतका तगडा ओर मोटा लंड कइ बार अपनी चुतमे ले चुकीथी.. इसीलीये आज राजीवसे चुदवाते नीर्मलाको बार बार देवायतकी याद आने लगी.. ओर वो अपने भाइके चहेरेमे देवायतका चहेरा इमेजींग करते कमर उछालते राजीवसे जोरोसे चुदवाने लगी.. ओर राजीवको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साती रही..

नीर्मला : (आधी आंख चडाते) भाइ.. सीसससइइ आह..आह.. ओर.. जोरसे चोदो.. मेरे अंदर.. समा जाओ..

राजीव : (नसेही हालतमे) नीमु.. मेरी बहेन.. तु आजभी मस्त दीखती हे.. जीइइइ.. चाहता.. हेहेहे.. तुजे.. चोदताहीइइइ रहुहुउउउ... हंममम.. आह... डार्लींग.. आइइइइ लव..युयुयुउउउउ....

नीर्मला : (होंठ चुमते) लव..युयुउउउउ.. टुटुटुउउउ... भाइइइइ.. ओर चोदोओओ.. मुजे.. आज.. अपनी.. बहेनको.. नीचोड डालो..

ओर राजीव जोरोसे नीर्मलाको चोदने लगता हे.. तब नीर्मलाभी जडनेकी कगारपे पहोंच गइ ओर उसने राजीवको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर आंख बडी करते राजीवके होठ लीपलोक करलीये ओर अपनी कमरको नीचे लेटे हुअ‍े जटके देने लगी.. तभी राजीवको अपने लंडपे नीर्मलाका गरम पानी लंडको भीगोते महेसुस हुआ.. ओर वोभी उतेजनासे कांपने लगा.. ओर कुछही धकोके बाद उनके लंटसे पीचकारीया छुट पडी.. ओर नीर्मलाकी चुतको भरने लगी.. तब नीर्मला राजीवको मुह खोलते जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे..

ओर राजीक जडतेही नीर्मलाके सीनेपे ढेर होगया.. तब नीर्मला सरमाते राजीवकी पीठ सहेलाती रही.. आज बडे अरसोके बाद राजीवने उनको बडे जोसके साथ चोदलीयाथा.. तो यही सब सोचकर नीर्मलाको खुसीसे हसी आ रहीथी.. ओर वो राजीवकी पीठको सहेलाती रही.. तब कुछही देरमे राजीवका लंड सीकुडकर बहार नीकल गया.. तो दोनोका कामरस नीर्मलाकी चुतसे नीकलते बेडपे गीरने लगा.. तब नीर्मलाने सरमाते हसते हुअ‍े कहा..





नीर्मला : (सरमाते सरको सहेलाते) भाइ अब उपरसे उतरोनां.. नीचे बेड गंदा हो रहा हे.. आज आप कीतना जोसमे चोद रहेथे.. इतने जोसमे तो मुजे आपने कभी नही चोदा.. क्या आज इस बहेनपे बहुत प्यार आ रहाथा..? हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) हां नीमु.. आज कीतने दिनोके बाद मेरी बहेनने मुजे सामनेसे प्यार करनेको कहा हे..

नीर्मला : (सरमाते हसते होंठ चुमते) भाइ अब आपकी बहेनकी ओरसे आपको अ‍ैसेही प्यार मीलेगा..

तब राजीव नीर्मलाके उपरसे हट जाता हे ओर बाथरुममे चला जाता हे तब नीर्मला बेडपे बैठकर नीकरसे अपनी चुत साफ करने लगती हे.. फीर बालोका जुडा बनाते वोभी उठकर बाथरुममे चली जाती हे तो वहा राजीव नहा रहाथा तो नीर्मलाको देखकर उसेभी हाथ पकडके खीचलीया तो नीर्मला सरमाते हसने लगी..ओर दोनो साथमे नहाने लगे तब राजीवने नीर्मलाके बुब्स दबाके उनसे छेडखानी की.. तो नीर्मला सरमाते उसे मना करने लगी.. ओर अपनी चुत साफ करने लगी.. ओर चुत साफ करते..

उसे अ‍ेक बार फीरसे देवायतकी याद आने लगी.. क्युकी अक्सर देवायत उनकी चुदाइ करलेता तब दोनोही साथमे नहाने जाते.. तब देवायत वहाभी नीर्मलाकी छेडखानी करते जबरदस्त चुदाइ करलेताथा.. ओर नीर्मलाकी हालत बीगाड देताथा.. ओर उसे पुरा दीन आराम करनेको मजबुर करदेता था..

तब नीर्मला देवायतका चोदनेका स्टेमीना देखकर हेरान रहे जाती थी.. फीर राजीव ओर नीर्मला नहाकर बहार आगये ओर गाउन पहेनकर अ‍ेक दुसरोके साथ चीपककर सोने लगे तब नीर्मलाको बार बार देवायतकी याद आने लगी.. फीरभी उनसे अब दुर रहेनेका मन बना चुकीथी..

वो यही सब सोचते नींदकी आगोसमे चली गइ.. सुबह मंजु जल्दी उठकर घरके सब कामोको नीपटाने लगी.. फीर वो नहाने चली गइ.. तबतक नीर्मला राजीवभी उठकर तैयार होगये थे.. तो भावना अभीभी सो रहीथी.. तब निर्मला किचनमे चाइ नास्ता बना रही थी.. जब मंजु नहाके तैयार होकर आइतो नीर्मलाका सब व्यवहार उनको नोर्मल लगा.. दोनो कीचनमे अकेली थी.. फीर भी नीर्मलाने मंजुसे कोइ बाते नहीकी..

तो मंजु मनही मन खुस होगइ.. मंजुको नही पताथाकी ये तुफानके आनेके पहेलेकी सांती थी.. ओर वो नीर्मलाका काममे हाथ बटाने लगी.. फीर तीनोने चाइ नास्ता करने बैठ गये तबभी नीर्मलाने मंजु देवायतकी बाते नही छेडी.. ओर तीनोने चुपचाप चाइ नास्ता करलीया.. तब राजीवभी राहतकी सांस लेते दुकानपे चला गया.. तभी अचानक नीर्मला मंजुको हाथ पकडके अपने रुममे लेगइ.. ओर दरवाजा बंध करलीया.. तब मंजु थोडी गभराके नीर्मलाको देखती रही..

नीर्मला : (मंजुकी ओर देखते) मंजु.. बेडपे बैठ जाओ.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

मंजुला : (थोडा गभराते) जी मोम.. कहीये..

नीर्मला : हां.. तो मंजु.. अब मुजे सब सच सच बतानां.. तुम दोनो कबसे प्यार कर रहे हो..?

मंजुला : (सर जुकाते धिरेसे) मोम.. पीछले तीन महीनोसे.. ओर हम दोनो रीलेशनमे.. मतलब हम काफी नजदीक आगये हे.. हम दोनो आपसमे सादी करना चाहते हे.. बस..

नीर्मला : (कातील मुस्कानसे) अ‍ेक बार सादी होगइ फीरभी.. दुसरी बार सादी करना चाहती हो..? क्या दुनीयाको दीखाना चाहतीहो की हमने सादी करली हे..? मे कल सृतीकी मम्मीसे मीलीथी.. मत भुलो वो मेरी खास सहेली हे.. भुमीका नाम हे उनका.. तुमने नामतो सुना होगा..

मंजुला : (हीचकीचाते) जी..जी.. वो..वो..

नीर्मला : तुजे क्या लगा.. वो मुजे कुछ नही बतायेगी..? तुजे कुछ कहेनीकी जरुरत नही.. वहा तुम दोनो तीन दीन तक पती पत्नी बनके रहेथेनां.. ओर मेने सुना दोनो अ‍ेकही कमरेमे साथमें रहेते थे.. तो फीर.. मे क्या समजु..? ओर वो कलभी इधर आयाथा नां..?

मंजुला : (अब बात छुपानेका कोइ फायदा नहीथा तब सर जुकाते सरमाते धीरेसे) जी.. सोरी मोम.. हम उनके आश्रममे गयेथे.. वहाके मंदिरमे हम दोनोने सादी करली हे.. वहाके बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. फीरभी वो चाहते हे आपही हमारी सादी करदे.. वो नही चाहते हम दोनोके खानदानको कोइ कुछ सुनाये..

नीर्मला : (अदब लगाते आस्चर्यसे) अच्छा..? तुम दोनोको हमारे खानदानकी इतनी चीन्ता हे..? क्या तुम लोगोने सचमे मंदिरमे सादी करली हे..? आइ मीन.. क्या वोही बाबाने तुम दोनोकी सादी करवाइ.. जीनके वो कुलगुरु हे..?

मंजुला : (नजर जुकाते धीरेसे) जी मोम.. वोही गुरुजीने हम दोनोकी सादी करवाइ हे..

नीर्मला : (थोडा सख्त लहेजेमें) तो फीर दोनो.. अबतक कीतनी बार मीले हो.. मतलब.. वो.. पती पत्नीके बीच होता हे.. तु समज गइनां..? कल भी दोनो यही मेरेही रुममे मेरेही बेडपे मीलेथेनां..? सब सच बताना..

मंजुला : (सरमाते नजर जुकाये धीरेसे) जी.. मोम.. अब मे उनकी पत्नी हु.. तो फीर.. उनको कैसे मना कर सकती हुं.. अबतक हम दोनो.. कइ बार मील चुके हे.. मोम.. मे उनके बगैर नही रेह सकती.. प्ली..ज..

नीर्मला : (कुछ सोचते) मतलब तुम दोनो काफी आगे बढ चुके हो.. ठीक हे.. जा कहेदे अपने पापासे.. उनको फोन करके हां कहेदे.. मे जल्दसे जल्द तुम दोनोकी सादी कर देना चाहती हु.. मे कोइ ओर रीस्क लेना नही चाहती.. लेकीन ये मत मानलेना की मे ये सादीसे सहेमत हु.. ओर ध्यान रखना.. भावुको इस बातकी भनकभी ना लगे.. मे नही चाहती भावनाको इस बारेमे कुछ पता चले.. वरना वोभी तेरी तराह.. जाओ तुम..

मंजुला : (सरमाते हींमत करके धीरेसे) मोम.. आप उनको अ‍ेक बार देखलो.. कुछ पुछाना होतो पुछलो.. आज आयेगे.. आपको मीलने.. मेने बुलाया हे उनको..

नीर्मला : (सख्तीसे नजर मीलाते) क्या तुजे लगता हे मुजे उनको मीलना चाहीये..? अब उनसे मीलनेकी कोइ जरुरत नही.. वैसेभी तुम दोनोने तो सादीभी करली हे.. ओर.. ओर.. मीलन.. तो फीर ये मुजसे मीलवानेका उनसे बात करवानेका नाटक क्यु..? मुजे उनसे अब कोइ लेना देना नही हे.. यहासे जाओ तुम..

मंजुला : (जटसे बेडसे खडी होकर जाते जाते पलटकर रुकते) मोम.. मे चाहती हु मेरी इस घरसे विदाइ हो तब सब मुजे खुसी खुसी विदाइ करे.. अगर आपने मनसे उसे स्वीकार नही कीया.. ओर हमारी सादीको मनसे स्वीकृती नही दी.. तो फीर सादीके बाद यहा आना मेरे लीये मुस्कील होगा.. तो मेनेभी फैसला करलीया हे.. जबजक आप उसे मनसे नही स्वीकार करेगी तबतक मे ये सादी नही करुगी.. धेट्स ओल..

कहेते मंजु गुस्सेसे रुमसे बहार नीकल गइ.. ओर नीर्मला मुह फाडके उनको देखतेही रेह गइ.. ओर मंजुने उपर जातेही अपने पापाको फोन करके बता दीयाकी मम्मीसे क्या बाते हुइ.. ओर वो मम्मीको क्या कहेके आगइ.. तब राजीवभी सुनके थोडा दुखी होगया.. ओर वो मंजुका फोन रखते ही निर्मलासे फोन मीलाके बात करने लगा..

तब इधर मंजुने देवायतको भी सब कुछ बता दीया.. की उनकी मोम हमने सादी करली तो हमसे कुछ नाराज हे वगैरे..वगैरे.. ओर उसने देवायतको नीर्मलाका मन बदलने तक कुछ दिन इन्तजार करनेको केह दीया.. तो देवायतभी उनकी सब बातोसे सहेमत होगया..

तब उधर हवेलीपेभी आज उस श्रापके नीवारणके लीये खुद बाबा आश्रमसे आयेथे.. ओर अभी हवेलीपे होम हवन हो रहाथा.. तब किशन ओर विमला दोनोही साथमे पती पत्नीके रुपमे बैठकर हवनमे आहुतीया डाल रहे थे.. तब उनके घरपे सीर्फ धरके सदस्योके अलावा उनका दोस्त वीरजी ओर उनकी पत्नी सरला आयेथे.. सरलाभी आज सजधजके आइथी.. ओर वो किशन ओर विमलाके पीछे बेठकर पीछेसे किशनको छुकर बेठीथी.. उनका रीजन सीर्फ किशन ओर सरलाही जानते थे..

विरजीको अभी इस बातकी भनकभी नहीथी की उनकी बीवी सरलाका कही सालोसे किशनके साथ टाका भीड हुआ हे.. ओर किशन आये दिन वीरजीको कामके बहाने सहेर भेजकर पीछसे वीरजीके घर चला जाता हे.. ओर उनके घर जाकर सरलाके साथ रंगरेलीया मनाते उनकी जमकर चुदाइ करता रहेता हे.. ओर उसीके नतीजेके फल स्वरुप सरला प्रगनेन्ट होते भानुको जन्म दे चुकी हे..





ओर आजभी दोनोके बीच वही रीस्ता कायम हे.. इस बातकी विरजीको भनकभी नही हे.. क्युकी किशनभी सरलाके साथ अ‍ेक खास मक्सदसे रीलेशनमे आयाथा.. वरना किशन अपने भाइ जेसे दोस्तको धोखा थोडीना देता.. ओर भानु भी उमरमे देवायतसे कुछ अ‍ेक दो सालही छोटाथा.. तबसे सरलानेभी मनही मन किशनको पती मानलीया था.. क्युकी वो कभी भी विरजीसे संतुस्ट नही हुइ थी.. ओर वो आजभी अपनी मांगमे किशनके नामका सींदुर लगाती हे.. ओर किशनभी सरलाकी हर जरुरतको पुरी करता हे..

तभी बाबाने हवन कार्य संपुर्ण कीया.. ओर पुरी हवेलीमे चकर लगाते जायजा लेने लगे.. तब साथमे किशनभी उनके साथ चल रहाथा.. ओर उनके चहेरेपे खुसी आगइ ओर वो मुस्कराने लगे.. ओर बाकी सब होलमे बेठे थे.. तब बाबाकी मुस्कराहट देखते किशनभी खुस होने लगा ओर आखीर बाबाको पुछही लीया..

किशन : (हसते) बाबा आप बडे खुस लग रहे हे.. क्या कुछ श्रापका उपाय होगया..?

बाबा : (हसते) किशन तु बडा नसीब वाला हे.. खामखा गभरा रहाथा.. अरे मुजे पहेले बुला लीया होता..

किशन : (खुसीसे हसते) बाबा क्या केह रहे हो..? कुछ देखा आपने.. मुजे बताइअ‍ेनां..

बाबा : (हसते) अच्छा हे हम दोनो उपरकी मंजीलमे हे.. ओर सबलोग नीचे हे.. तु इधर रुममे आजा ओर दरवाजा बंध करले.. ये बात सीर्फ तुजेही बताउगा.. ये सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. समजे..

किशन : (रुममे जातेही दरवाजा बंध करते) बाबा क्या कोइ गंभीर समस्यातो नही हे..

बाबा : (हसते) अरे नही नही.. तु आतो सही.. तुजे सब बताता हु..

किशन : (हसते) जी बाबा आइअ‍े इधर सोफेपे बेठीये मे आपके चरणोमे बेठता हु..

बाबा : (सोफेपे बेठतेही) किशन.. तुमने खामखा इतना इन्तजार कीया.. यहा मेने सब देखा.. अब इधर कोइ श्रापका साया नही हे.. ओर ये तुम छोटे थे ओर पढ रहेथे तबही उस श्रापका नीवारण हो चुका हे.. क्युकी मेने अभी अभी उन दोनो आत्माओके साथ बातकी.. जो तेरे माता पीता हे.. उसे आजही इस हवन कार्यसे गती मील जायेगी.. क्युकी उस कार्यमे सीर्फ हवन कार्यही बाकी रेह गयाथा.. वोभी उस आत्माओकी मोक्षके लीये.. जो वो खुद नही कर सकते थे.. क्युकी इस श्रापके नीवारणमे दोनोने खुदकी बली देदी थी..

किशन : (हाथ जोडते) बाबा मे कुछ ठीकसे समजा नही.. क्या आप मुजे खुलके बता सकते हे..?

बाबा : (हसते) हां.. सुन.. तुजे पता हे तुम्हारे माता पीता कौन थे..? वो दोनोही भाइ बहेन थे.. तुम्हारे दादाने दो सादीया कीथी.. ओर दोनो बीवीओकी कोखसे अ‍ेक लडका अ‍ेकको लडकी पैदा हुअ‍े थे.. ओर ये दोनोही भाइ बहेन तुम्हारे माता पीता थे.. जब वो दोनो भाइ बहेन सहेरमे साथ पढते थे तब तुम्हारे पीता बहुत बार आश्रममे आकर इस श्रापके लीये छानबीन करते रहेते थे.. वो मुजसेभी कइ बार आकर इस बारेमे जानकारीया लेते रहे.. लेकीन तब मे भी साधनाके लीये हिमालय जा रहाथा तो फीर उनसे ज्यादा मुलाकात नही हुइ.. ओर वो खुद छानभीन करते काफी कुछ जान चुके थे.. ओर उसने ये बात उनकी बहेनको बतादी.. तो वो भी इस श्रापकी मुक्तीके लीये अपने भाइसे सादी करनेको आसानीसे तैयार होगइ..

किशन : (हसते) तो बाबा.. क्या मां ओर पीता भी आपसमे प्यार नही करते थे..?

बाबा : (हसते) सुरुमे नही करते थे.. लेकीन तेरे पीताने जब ये बात उनकी बहेनको बतादी तब तेरे मांका नजरीया तेरे पीताके लीये बदल गया.. ओर वो मनही मन उनके भाइको चाहने लगी.. दोनोही सहेरमें अ‍ेक रुममे साथ रहेकर पढाइ कर रहेथे.. तब तेरी ओर तेरी इस पत्नीकी ही तराह अ‍ेक दिन वो दोनो भी मील गये.. फीर क्या.. पढाइ पुरी होजानेके बावजुदभी दोनो वहा अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. ओर इस श्रापके नीवारणके लीये दोनो भाइ बहेन साधु संतो ओर फकीरोसे से मीलते रहे.. जब दोनोको रास्ता मील गया तब दोनोने मंरिमे जाकर सादी करली.. ओर हवेलीपे आगये..

किशन : (हसते) तो क्या हमारे दादा दादीको इस बातका पता नही चलाकी दोनो भाइ बहेनने सादी करली हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) नही.. क्युकी तब तेरे दादा ओर उनकी अ‍ेक पत्नी अ‍ेक हादसेमे चल बसे थे.. तभीतो ये लोग वापस हवेलीपे आगये.. तब सीर्फ तेरे पीताकी मांही बची थी.. ओर वो तेरे पीताको कुछ नही केह पाइ.. ओर तेरे माता पीताकी सादीको स्वीकार करलीया.. तब इस हवेलीपे काम ओर रतीनेभी वास करलीया था.. जो उस महान कार्यके लीये उसे अ‍ेक अ‍ैसे जोडेकी तलासमे थे.. जो वास्तवमे दोनो भाइ बहेन होकरभी अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जींदगी जीतेहो..

किशन : बाबा आप कीस महान कार्यकी बात कर रहे हे..? ओर फीर मेरे बा बापुजीने कोनसा कार्य कीया..? जो उन दोनोकी साथमे रहस्यमय मोत होगइ..

बाबा : उस महान कार्यमे अभी देर हे.. बस इनकी सुरुआत तुम्हारे माता पीताकी सादीसे ही होगइ हे.. तब कुछ लोगोको पता चल गयाथाकी भाइ बहेनने आपसमे सादी करली हे.. तब उस लोगोने हवेलीमे आना जानाभी बंध करदीया.. क्युकी सभी जानते थेकी तुम्हारे माता पीता अ‍ेक भाइ बहेन हे ओर आपसमे सादी करके अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेते हे.. तब उस दिन हवेलीके लीये बडा संघर्सका दिन था.. सबने तुम लोगोसे रीस्ता तोड दीया था.. फीरभी तुम्हारे माता पीता उस श्रापके लीये अडग रहे.. ओर अ‍ेक दिन तुम्हारी मां पेटसे होगइ.. तबतक तेरे पीताकी मांभी चल बसी.. ओर नव महीनेके बाद तुम्हारा जन्म हुआ.. ओर दोनो पती पत्नी तुम्हारे आनेसे बहुत खुस थे.. ओर अपनी जींदगी खुसहालीसे जीने लगे.. ओर तुम बडे होते गये.. ओर तुम्हे भी तुम्हारे पीताजीने सहेरमे पढने भेज दीया..

किशन : (हसते) तो बाबा फीर ये विमला..?

बाबा : (हसते) अरे सुनतो सही.. तुम सहेरमे अ‍ेक होस्टेलमे रहेकर पढ रहेथे तब तुम्हारी मां फीरसे पेटसे होगइ.. जब उनको पता चला तब काफी देर हो चुकी थी.. फीर क्या उनको बच्चीको जन्म देना पडा.. तब दोनोही गभरा गयेकी अब क्या होगा.. क्युकी तब दोनोने उस श्रापका नीवारण नही कीया था.. ओर तुम्हारी मांको अपने पतीकी जानकी चीन्ता होने लगी.. तब कीसीके कहेनेपे उस बच्चीको लेकर अ‍ेक दिन अंधेरेमे आश्रममे छोडके चले गये.. तब मेभी १२ साल हिमालयमे रहेकर वापस आश्रमपे आगया.. ओर मेने अपनी शक्तिओके माध्यमसे जानलीयाकी ये बच्ची कीसकी हे.. मेने तेरे पीताके आनेका बहुत इन्तजार कीया लेकीन वो आयेही नही.. तब वो दोनोही पती पत्नी हवेलीमे अकेले रेह गयेथे.. वहाभी कोइ आता जाता नही था.. ओर मेने अ‍ेक दिन कीसीको भेजकर तुम्हारे माता पीताको आश्रम बुला लीया ओर उनको समजाया.. की बच्ची आनेसे श्राप लागु नही होता. तब जाके वो लोग माने.. ओर तुम्हारी बहेनको वापस हवेलीपे लेगये.. तबतक वो बच्चीभी जवान हो चुकी थी..

किशन : (हसते) अच्छा तभी मुजे पता नही चलाकी मेरी कोइ अ‍ेक बहेनभी हे.. हें..हें..हें.. मेरे पीताने बहुत कुछ मुुजसे भी छुपाया हे.. तो फीर उन दोनोकी मौत कैसे हुइ..?

बाबा : (हसते) सुनतो सही.. बेटा तुम्हारी बहेन आश्रममे रहेकर बुहत कुछ जान चुकी थी.. उनके पास बहुत सारी विद्या आ चुकी थी.. उनको येभी पताथाकी तुम उनके भाइ हो.. फीरभी वो तुम्हारी ओर आकर्सीत होगइ.. ओर तुमसे प्यार करने लगी.. ओर उनका रीजन सीर्फ अ‍ेकही था.. वो काम ओर रती.. जो उनको तुमसे प्यार करनेके लीये वीवस कर रहेथे.. क्युकी उनको सीर्फ भाइ बहेनके आपसी रीस्तेही मंजुर थे.. इसीलीयेतो तुम्हारे माध्यमसे उस अंसको इस धरतीपे लाना चाहते थे.. जो इस बातका ज्ञान तुजे नही हे.. तुजे उन हिमाचलके राजाके बारेमेतो पता हेनां..? ओर नही पता तो कीसीसे जानलेना.. बस वोही राजा तेरी चौथी पेढीमे तुम्हारे यहा जन्म लेगा.. ओर ये बात तेरे माता पीताभी जान चुके थे.. तबतक तो तुम ओर तेरी बहेनभी काफी आगे बढ चुके थे.. ओर तेरी मातानेभी अ‍ेक दिन तुम दोनोको देख लीयाथा..

किशन : बाबा तो फीर उनके मरनेका रीजन क्या हम दोनो थे..?

बाबा : नही किशन.. तुम्हारी माने उसी दिन तुम्हारे पीताको तुम दोनोकी बात कहेदी.. ओर उसी दिन दोनोने श्रापका नीवारण करनेकी ठानली.. उस्ी रात दोनोही उनका नीवारण करने बैठ गये.. ओर कुछ वीधी बहेन के साथ संभोग करते करनी थी.. जब सब वीधी संपन हुइ तब बलीकी बारी आइ.. ओर उन शक्तिने दोनो भाइ बहेनसे बलीमे दोनो भाइ बहेनको संभोग करते मांगलीया.. ओर दोनो भाइ बहेनने अपनी सहमती जताते संभोग कीया ओर खुदकी बली देदी.. क्या दोनो मर गये तब दोनो मीले हुअ‍े थेनां..?

किशन : (सरमाते धीरेसे) जी.. जी बाबा.. तब सीर्फ मे ओर विमलाही अंदर गये थे.. ओर तब हम दोनोही बहुत सरर्मींदा हुअ‍े.. हमको ये लगाकी ये दोनो हमारे रीस्तेको लेकरही मर गयेथे.. ओर हमने कीसीको ये बात नही बताइ.. ओर उनका अग्नी संसक्कार करदीया.. आज मुजे इनके मरनेकी असली वजह पता चली..

बाबा : बेटा.. तेरे खानदानका श्रापतो तबही खतम हो गयाथा.. वरना तुम अभी तक जीन्दा थोडीना रहेते..?

किशन : (प्रस्नार्थ भरी नजरसे देखते) बाबा क्यु.. मे क्यु मरता..? मेरातो अ‍ेकही बेटा हे.. देवायत..

बाबा : (हसते) ओर जो वो बहार दुसरी ओरत बैठी हे वो..? क्या उनका लडका तुम्हारा बेटा नही हे..? बेटा तु मत गभरा मुजे सब पता चल जाता हे.. क्या वो ओरत तुजे अपना पती नही मानती..? तो तुजेभी दो बेटे होगये.. तब भी तु जीन्दा हेनां.?. तुमने खामखा उन लडकीकोभी छोड दीया.. जो तेरे साथ पढती थी.. क्या उनकी बेटीभी तुम्हारी बेटी नही हे..? बस वोही बेटी सबकी जननी हे.. जो तेरे बेटेसे सादी करेगी..

किशन : (हसते धीरेसे) बाबा क्या इसीलीये पीछली दो पीढीसे हम भाइ बहेनके बीच रीस्ता बन रहा हे..?

बाबा : (हसते) हां बेटा.. अब तु सही समजा.. सुन.. अब आगेभी वोही होगा.. ओर इस रीस्ता तुम्हारे खानदानकी परंपरा होजायेगा.. सब अपनी बहेनसेही सादी करके अपना घर बसायेगे.. ओर सुन.. आगे तुम्हे अ‍ेक ओर लडका ओर अ‍ेक लडकी भी होगे.. जो लडकी उनके भाइके साथ सादी करलेगी.. अब तुम इस बातको लेकर वीचलीत मत होना.. अब ये आयेदिन तुम्हारे खानदाने मे देखनेको मीलेगा.. ओर आगे जाकर बहुत कुछ होगा.. ओर गांव वालोमे भी अब तेरी ओर इस खानदान की प्रतीष्ठा फीरसे बढेगी.. ओर सबलोग तुमसे फीरसे राजा मानने लगेगे.. यही मेरा आशीर्वाद हे.. अब चल नीचे.. मुजे आश्रममे छोडदे..

किशन : (हसते) बाबा भोजन करके जाना हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां करादे भोजन.. वैसेतो मे कीसीके यहा नही खाता लेकीन तुम कौन हो तुजे तो पता ही नही.. चल आजा भोजन करके जाउगा.. अब आगे जाकर बहुत कुछ होगा.. चल..

कहेते बाबा ओर किशन हस हसके बाते करते नीचे आगये.. तब विमला ओर सरला दोनोही खुस होते बाबाको भोजन कराने लगी.. तबतक किशन ओर विरजी बाबाकी सेवामे लगे रहे.. जब बाबाने भोजन करलीया तब किशन ओर विरजी दोनोही कार लेकर बाबाको आश्रम छोडने चले गये.. फीर वहा जाकर किशनने बाबाको तगडी दक्षीणा भी देदी.. फीर बाबाको छोडकर दोनो वापस हवेलीपे आगये.. ओर सबने साथ बैठकर भोजन करलीया.. तब रसला बार बार किशनको देखते मुस्कराती रही....

कन्टीन्यु
 
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