- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,357
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ७३
कहातो तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी तब मंजु देवायतके पास आकर उनसे सटकर बैठ गइ.. तो चंदा ओर दया दोनोही देवायतकी ओर कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी धिरेन ओर पुनमभी शीखंड लेकर आगये.. पुनमने कहाथा इसीलीये रास्तेमे धिरेनने कोइ सरारत नहीकी.. दोनोही प्यार भरी बाते करते रहे.. तब धिरेनने अपने फ्युचरके प्लानींगके बारेमे पुनमसे ढेर सारी बाते करली.. ओर दोनो घर आगये....अब आगे
तब पुनम देवायतकी ओर कातील स्माइल करते शीखंड लेकर कीचनमे चली गइ.. तो धिरेनभी नीचे फ्रेस होने चला गया तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बैठी थी.. ओर दोनो प्यार भरी बाते कर रहेथे.. तब धिरेनभी आके बैठ गया.. तबभी मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बाते कर रहीथी तभी खानाभी बन गया ओर दया पुनम सब खाना डाइनींगपे रखने लगी.. ओर चंदाने सबको बुला लीया..
सभी डाइनींग टेबलपे आगये तब मंजु देवायतके पास बेग गइ तो दुसरी ओर पुनमभी देवायतके साथ बेठ गइ तब मजबुरन धिरेनको उनकी मम्मीके साथ बेठना पडा ओर दया सबको खाना देने लगी.. जब खाना देदीया तो चंदाने उसेभी सबके साथ बीठा दीया ओर सब डीनर करने लगे तब खाना खाते पुनम देवायतके पैरको सहेलाने लगी तभी उनके पेरपे धिरेनका पैर महेसुस हुआ जो उनके पैरको टच कर रहाथा तब पुनम समज गइ ओर सरमाते खाने लगी उसने अपना पैर नही हटाया.. ओर सबने डीनर फीनीस कर लीया..
फीर कुछ देर बैठे बाते करते रहे तबतक अंधेरा हो गयाथा.. तो मंजुने पुनमकी वजहसे देवायतको घर जानेको केह दीया तो चंदा देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगी ओर देवायत पुनमको लेके बहार नीकल गया तब दया वही रुक गइ ओर देवायत पुनम कारमे आके बेठ गये तब देवायतने कार अपने गांवकी ओर जानेदी तभी पुनम देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर बाते करने लगी..
पुनम : भाइ कल मे नही आउगी.. वो..वो धिरेनके साथ कुछ अजीबसा लगता हे.. मुजे नही लगता मे उनके साथ रेह पाउगी, उनको मुजसे मीलन करनेकी बहुत जल्दी हे.. उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. भाइ मे आपके साथ रहेना चाहती हु..
देवायत : पुनो पागल मत बन.. धिरेन तेरा होने वाला पती हे.. ओर तुमसे प्यारभी करता हे.. हमे इन सब चीजोको अेक्सेप्ट करना पडेगा.. कुुछ सालोकीतो बात हे.. ओर तेरी तो बाबाके साथ सब बाते हुइ हे.. बता कीतने साल उनके साथ रहेना हे.. ओर तु चीन्ता मत कर.. मे वहा आता जाता रहुगा.. आज नही तो कल.. जब तु उनकी बीवी होजायेगी तबतो तुजे उनके साथ सबकुछ करनाही पडेगा जो अेक बीवीका फर्ज होता हे..
पुनम : भाइ.. बाबा कुछ दो तीन सालका केह रहेथे.. फीर मे आपके पास चली आउगी.. मुजसे आपसे दुर नही रहा जायेगा.. भाइ ये दो रात हमारे पास हे.. इनमे आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो.. वरना मे धिरेनको नही रोक पाउगी.. आज बडी मुस्कीलसे पीरीयडका बहाना बनाके उनसे छुटी हु.. उनको मे ज्यादा दीन मुजसे दुर नही रख पाउगी.. भाइ कुछ ओर हो जाये इनसे पहेले आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो..
देवायत : बेबी.. सादीके बादतो तुजे ये सब करने देनाही पडेगा.. ओर तु बच्चेकी चीन्ता मत कर.. आजही मुजे पता चला हेकी तु प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. बस ये दो दीन सीर्फ हमे मजेही करने हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (जटसे अलग होते आस्चर्यसे) क्या..? मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..? ओर आपको कैसे पता चल गया..? अेक मीनीट..(कुछ सोचते) भाइ.. कही आपकी भाभीसेतो इस बारेमें बात नही हुइ..? अेक वोही हे जो सब बाते जान जाती हे.. भाइ सच बताना भाभीसे आपकी इस बारेमे बात हुइ हेनां..?
देवायत : (हसते) हां.. आज उसीने मुजे बतायाकी उनका अंस तेरे गर्भमे आ चुका हे.. पुनो मेने तुजे प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. तेरे गर्भमे हमारा बच्चा आ चुका हे.. अैसा कहा उसने.. ओर उनको हमारे बारेमे सब पता हे.. तु फीकर मत कर उनको हमारे इस रीस्तेसे कोइ अेतराजभी नही हे.. अब हम दोनो भाइ बहेन खुलकर प्यार कर सकेंगे.. अब मे तेरी भाभीसे कहेकर भी तुजे मीलने वहा आ सकता हु.. तब हम दोनो खुब मजे करेगें..
पुनम : (खुस होते देवायतसे लीपटके कीस करते) ओह..भाइ आइ लव यु.. लव यु सो मच.. भाभी कीतनी अच्छी हे.. मुजे पताथा हमारी सब बाते वो जानती होगी.. ओर यही हुआ.. अब मुजे कोइ डर नही हे.. अबतो मे आपसे खुलके प्यार कर सकुगी.. बस अब सीर्फ मेरी सासका खयाल ही रखना हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) पागल मत बन.. सीर्फ मंनुको पता हे तेरी सासको नही.. हम कोइ खुलके प्यार नही करेगे.. पुनो मंजुने कहा हे.. ये दो रातमे आप पुनोको खुब प्यार करना ओर उसे तृप्त कर देना.. आगे जाके पुनम ओर चंदामौसी ही आपको सम्हालेगी.. तब सब ठीक होजायेगा..
पुनम : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? भाभीने अैसा कहा..? भाइ तबतो आपको मजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. वरना मे भाभीसे सीकायत कर दुगी हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हां इतना प्यार करुगाकी तु कल साम तक बेडसे उठ नही पायेगी.. हें..हें..हें.. पुरा दीन आराम करते रहेना.. हें..हें..हें.. ओर वेसेभी कल मुजे मेरे ससुराल जाना पडेगा.. वहा बापुजीकी तबीयत ठीक नही हे.. बस अेक बार तेरी सादी होजानेदे फीर देखना.. वहा आकर तुजे खुब रगड रगडके चोदुगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते कातील नजरोसे देखते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. ठीक हे दीनमे कही भी घुमो.. रातको आप मेरे पास होने चाहीये.. केह देती हु.. ओर भाइ सादीके बादभी हप्तेमे कमसे कम मुजे पांच दीन मीलोगे.. येभी केह देती हु.. दिनमे बीवी बनकर आपका इन्तजार करुगी ओर रातमे बहेन बनकर आपका बीस्तर गरम करते आपसे खुब चुदवाउगी.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हें.. हें..हें.. तुभी कुछ कम नही हे.. ठीक हे.. चुदवाना.. ओर हुकुम तो अेसे दे रही हे जैसे मंजु देती हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (कातील स्माइल करते) हां तो फीर..? जीस तराह वो आपकी बीवी हे उसी तराह मेभी आपकी बीवी हु.. ये बात आप भुलना नही वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. हें..हें..हें..(जोरोसे हसते)
देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. तुभी हुकुम चलाना.. फीर अेक ओर आजायेगी हुकुम चलाने वाली.. हें..हें..हें.. वोभी कुछ कम नही हे बीलकुल तेरी तराह मेरे पीछे पागल हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (देवायतकी ओर नैन नचाते हसते) भाइ.. सच बताना.. मे जब गइथी तबतो वो ठीकसे चल रहीथी.. तो क्या आप दोनोने.. मतलब.. दोनोका मीलन हुआ..? जब मे आइ तब वो थोडा लंगडाके चल रही थी.. हें..हें..हें.. भाइ सच बताना.. आपने उनके साथ सेक्स कीया हेनां..?
देवायत : (हसते) हां पुनो.. तुम दोनोके जाते ही वो उपर अपने रुममे मुजे इसारा करते लेगइ गइ.. ओर मेने उनको दो बार जमकर चोद लीया तो बीचारीकी चाइही बदल गइ.. हें..हें..हें.. वो आजभी अेक कुआरी लडकीकी तराह चुदवाती हे.. बेचारीकी हालत खराब होगइ.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) हां तो हो ही जायेगीनां.. आपके गधे जेसे हथीयारको अंदर लेना कोइ बच्चोका खेल नही हे.. आपनेतो पहेली बार मुजे बेहोस ही कर दीयाथा.. कीतना बडा हथीयार हे आपका.. मुजे बेहोसी मेभी चोद लीयाथा.. आप मेरीभी हालत खराब कर देते हो.. लेकीन भाइ मजाभी बहुत आता हे.. जी चाहता हे बस दीन रात आपसे प्यार करती ही रहु.. आप क्या मस्त चुदाइ करते हो.. तभीतो सभी ओरते आपके पीछे पागल हे.. बेचारी वो रश्मीभाभी दो दीन आराम करती रही.. आप कीतनी जोसमे चुदाइ करते हो..
देवायत : पुनो याद आया.. हम दो तीन दीनसे रश्मीसे नही मीले.. वोभी मेरी बीवी हे.. चल जरा देखके जाते हे क्या कर रही हे वो..
पुनम : भाइ देर नही होजायेगी..? आप उसे कल मील लेना.. चलोना घर चले जाते हे.. आपनेतो बातोसेही मुजे गरम करदीया.. भाइ बहुत चुदवानेकी इच्छा हो रही हे.. वो धिरेननेभी गरम करदीया.. भाइ उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. मे क्या करु..?
देवायत : अब तेरा होने वाला पतीहे तो हम क्या कर सकते हे.. तु क्यु चीन्ता करती हे अेक दो सालकीतो बात हे.. फीर मेरे पास चली आना.. तब तुजे कोइ पुछेगा भी नही.. अब उसे सादी तक नही मीलना.. ओके..?
पुनम : (सरमाते) भाइ जबतक सादी नही होती तबतक आपको मुजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. आप रश्मीभाभीसे बात करलेना.. मे उनके वहा चली जाउगी तब आप आजाना.. आप कार उधर लेलो..
तब देवायत कार सीधी रश्मी यानी राघवके घर लेजाता हे.. तब पुरे गांवमे अंधेरा छाया हुआ था.. कुछ घरोमे हल्की रोशनी नजर आ रहीहे तब देवायत ओर पुनम कारको बहार खडी करके अंदर चले जाते हे तब पुनम गेइट अच्छेसे बंध करलेती हे तब रश्मी राघव वाले रुममे अपने बेडपे लेटे कुछ कीताब पढ रहीथी.. तो देवायत ओर पुनमको देखते जटसे खडी होगइ ओर खुसीसे उछलते हसते हुअे देवायतके गले लग गइ..
रश्मी : (हसते) क्या बात हे.. आज इस बीवीकी याद आगइ..? वो भी मेरी इस बहेन लाइ होगी.. तभी जनाब आये हे.. हें..हें..हें.. क्यु ठीक कहानां पुनो..?
पुनम : (हसते सरारतसे जुठ बोलते) ओर नहीतो क्या..? दीदी येतो आनेकोही तैयार नही थे.. मे जबरदस्तीसे इनको खीचके लाइ हु.. हें..हें..हें.. लो करलो प्यार हमारे पतीको..
देवायत : (हसते) अच्छा.. तो फीर आज मे मेरी इस बीवीके साथ इधरही रुक जाता हु हें..हें..हें..
पुनम : (जटसे हसते) नही नही नही.. दीदी.. मे नही.. ये मुजे जबरदस्ती इधर लाये हे.. हें..हें..हें..
कहातो तीनो हसने लगे तब रश्मीने देवायतके होंठ चुमलीये ओर अलग होकर पुनमको गले लगा लीया फीर उनका हाथ पकडते बेडपे बीठादीया तब देवायत वही राघवके बेडके पास पडी चेरपे बैठ गया ओर राघवकी ओर देखते हसते हुअे उनका हालचाल पुछने लगा तो राघव गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तब..
रश्मी : देखा देवु.. खटीया मे पडे हे हीलनेकी भी ताकात नही हे.. ओर गुसातो देखो.. (राघको) देखलो इनको अच्छेसे.. अब यही मेरा पती हे.. जो मुजे मां बननेका सुख देगा.. आज मे इन्हीकी वजहसे पेटसे हुइ हु.. ओर मुजे मुनीमकी जगाह नोकरीभी दे दी.. अब आपके सब करतुत मे गांव वालोके सामने लाउगी.. सबकी जमीन वापस कर दुगी.. बहुत दुख दीये हां गांव वालोको.. अब पडे भुगत रहे हे..
पुनम : (धीरेसे) भाभी छोडीयेना इनको.. अपनी करतुतोकी सजातो इनको मील गइ हे..
रश्मी : पुनोदीदी आप नही जानती.. इन कमीनेने मेरे साथ ओर गांवकी ओरतोके साथ क्या क्या जुल्म कीये हे.. अेकभी लाचार ओरतको नही छोडा.. यहा तक की बेचारे मजदुरोकी बीवीयोकोभी नही छोडा.. सामनेसे पैसे देके ब्याजके बदले उनका फायदा उठाते थे.. कइ ओरतोको तो यहा बुलकर रेपभी करलीया हे.. अपनी बहेनके साथभी इनका चकर था.. ओर मेरे पले पड गये.. अब पडे सब भुगत रहे हे..
कहा तो राघव रश्मीकी ओर देखते गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तो रश्मी राघवके सामनेही हसती हुइ देवायतकी गोदमे बेठ गइ.. ओर गलेमे दोनो हाथ डालके देवायतके होंठ चुमने लगी.. तब देवायतभी रश्मीके बुब्स मसलते होंठ चुमने लगा तो राघव दुसरी ओर मुह करते गुसेसे आग बबुला होने लगा.. तो पुनम दोनोको देखते सरमाते हसती रही.. तभी रश्मी गोदसे उठ जाती हे ओर खडी होके अपनी सारी नीकालने लगती हे.. तो राघव उसे घुरके देखने लगा..
तो रश्मी उनके सामने देखते ब्लाउसभी नीकालने लगी तभी देवायतने उनकी पेटीकोटका नाडाभी खीच लीया.. तो पेटीकोट सरकते नीचे गीर गया तब रश्मी सीर्फ टु पीसमेही रेह गइ.. जेसे कोइ अप्सरा दीखती हो.. ओर उसने देवायतका हाथ पकडके खडा करदीया ओर कातील स्माइल करते देवायतकी ओर देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. फीर पेन्टकी क्लीप खोलके उसेभी नीकाल दीया ओर हाथ पकडके देवायतको वही बेडकी ओर लेगइ..
रश्मी : जानु.. अेक बार इनके सामने ही मुजे चोदलो.. ओर मेरी बहुत इच्छाभी हे.. दीदी क्या आपभी हमारे साथ सामील होगी..? आइअेना अब हमारे बीच कैसा पर्दा..हम दोनो मीलकर हमारे पतीको खुब प्यार करेगी..
पुनम : (सरमाते हसते) नही दीदी आपही प्यार करलो.. हमतो घर जाकेही सब करेगे.. आज पुरी रात बाकी हे.. मे इनको छोडने वाली नही हु.. इनको आज सोनेही नही दुगी.. हें..हें..हें..
रश्मी : (बेडपे पीठके बल हसते हुअे लेटते) हां.. भाइ.. अब भाभी नही हे तो दोनोके तो मजे हे.. आपनेतो अभी नइ नइ सादी कीहे.. तो हर रात सुहागरात होगी.. दीदी आपकी सादीसे पहेले जी भरके मजे ले लो.. फीर पता नही ये कब आपके हाथ आयेगे..
कहातो पुनम अेकदम सरमा गइ ओर मुह दुसरीओर घुमाते मुस्कराती रही.. तब देवायतने रश्मीकी ब्राभी नीकालदी ओर उनकी पेन्टीमे उंगलीया फसाके खीचते नीकालने लगा.. फीर उनकी चडीभी नीकालदी तब देवायतका वीकराल लंड रश्मीकी चुत देखके जटके मारने लगा.. ओर देवायत रश्मीके उपर जुकते लेट गया तब रश्मीने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होंठ चुमने लगी..
तब देवायतभी उनके बुब्स दबाते रश्मीका साथ देने लगा.. तब उनका लंड रश्मीकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलमे घुसनेका रास्ता ढुंढने लगा.. तो रश्मीकी चुतभी लंडको अपने बीलमे लेनेके लीये फडफडाते पानी छोडने लगी.. दोनोही आजु बाजु सब कुछ भुलकर अेक दुसरेके मुहमे मुह डालके कामातुर होगये.. तब देवायतके लंडने अपने बीलका रास्ता अपने आप ढुंढ लीया..
तो देवायतने कमरको अेक जटका मारदीया तभी रश्मीकी चीख नीकलके देवाफतके मुहमे दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ ओर देवायतको देखने लगी.. तब देवायतने मुह हटालीया ओर हाथके बल उचा होगया.. तब रश्मी जोरोसे सीसकारीया करने लगी ओर छटपटाते दर्दसे तीलमीलाती रही.. तब देवायत उसे कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा तो रश्मी अपने मुहपे हाथ रखते हल्कासा चीखने लगी.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकलने लगे..

पुनम : (देखते हसते) भाइ.. धीरे करोना.. अैसे जानवरोकी तराह भाभीको क्यु चोद रहे हो? भाभीको दर्द हो रहा हे..
देवायत : (चोदते) बेबी क्या करु इस बीवीको देखके पागल हो जाता हु.. मुजसे रहा नही जा रहा.. जी चाहता हे तेरी तराह इनको भी दीन रात चोदता ही रहु.. तुभी आजाना.. आज दोनोको यही पटक पटकके चोदलु..
रश्मी : (दर्दसे मुह बीगाडते धीरेसे चुदवाते) पुनमदीदी.. इनको जोभी करनाहे करने दीजीये.. मेनेही इसे अैसे चोदनेके लीये छुट दे रखी हे.. मुजे अैसे वाइल्ड सेक्सही पसंद हे.. क्या मस्त चोदते हे.. भलेही मुजे दर्द हो.. ओर आपभी आजाओ.. हम दोनो मीलकर पुरी रात इनसे चुदवायेगी..
पुनम : (सर्मसार होते हसते) नही भाभी.. अभी तो आपही चुदवालो.. मे घर जाकर चुदवाउगी..

देवायत रास्तेमे पुनमसे चुदाइकी बाते करते गरमतो थाही.. तब देवायत रश्मीको जोरोसे कमर हिलाते चोदने लगा तो रश्मीभी चीखे मारते देवायतसे कमर उछाल उछालके चुदाइमे साथ देने लगी.. ओर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी तब रश्मी ज्यादा देर टीक नही पाइ ओर देवायतको अपनी ओर खीचके कसके बाहोमे भीचते लीपलोक करलेती हे तो देवायतका सरीरभी अकडने लगा.. ओर उसने रश्मीकी चुतमे लंडको जडतक घुसा दीया.. ओर कमरको रुक रुककर जटके मारने लगा.. ओर दोनोही अेक साथ पानी छोडते जडने लगे..

तब रश्मी देवायतके होंठ भीचते देवायतकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर अपने गर्भपे देवायतका गरम गाढा पानी महेसुस करने लगी.. जब देवायतने होंठ छोडातो रश्मीके होंठोपे खुन उभर आया ओर उनके होंठ सुजने लगे तब देवायत रश्मीके उपरसे हट गया तो लंड फचच... आवाजके साथ बहार नीकल गया ओर वो बाथरुममे चला गया तब रश्मी कोनीके बल बेठते अपनी पेन्टीसे चुत साफ कर रहीथी.. तब पुनम उनके पास बेठते सामने देखते सरमाती हस रहीथी.. तब देवायत बहार आके अपने कपडे पहेनने लगा तो रश्मी अेसेही वापस बेडपे लेट गइ..
पुनम : (हसते) भाभी होगइ तसली.. देखो आपके होंठ सुज गये हे इतनी तकलीफ से क्यु करती हो..?
रश्मी : (सरमाते हसते होंठ चेक करते) पुनोदीदी आप नही समजोगी.. ये बहुत कम मेरे हाथमे आतेहे.. तो इनका दीया दर्द मुजे प्यारका अहेसास करवाते रहेता हे.. ओर इनकी यादोमे दीन नीकल जाता हे.. बस.. आपभी अपनी सादीके बाद कभी अैसी ट्राइ करना.. बहुत मजा आयेगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते) भाभी तबकी तब देखेगे अभीतो आप आराम करलो.. अब हम घर चलते हे..
फीर दोनोही वहासे नीकलकर अपनी हवेलीपे आजाते हे.. तब हवेलीपे आज कोइ नहीथा.. ओर रजीया अकेलीथी तब मनही मन खुस होने लगीकी चलो आज दया नही हेतो बीना डरके पुरी रात लखनसे चुदवायेगी.. यही सोचते आज वो अच्छी तराह सज सवरके तैयार होगइ ताकी लखनको रीजा सके.. अबतक वो लखनसे चारसे पांच बार चुद चुकीथी.. ओर लखनके लंडसे आदी होगइ थी.. अब उसेभी लखनका साथ अच्छा लगने लगाथा.. ओर हमेसाके लीये लखनके साथ जुडनेका सपना देखने लगीथी..
क्युकी देवायत अब उसे बहुतही कम टाइम दे पाता था.. अभी पुनम देवायत नही आयेथे तब सामको लखन घरपे आया तो रजीयाको अकेला देखके पुछ लीया तो रजीयाने उसे बता दीयाकी सब कहा गये हे.. कहेके वो कीचनमे खाना नीकालने चली गइ.. तब लखन सुनकर बहुतही खुस हो गया.. ओर फ्रेस होकर सीधा कीचनमे चला गया.. ओर जातेही रजीयाको पीछेसे बाहोमे भरके दबोच लीया तब रजीया सरमाते हसते हुअे पलट गइ.. तो लखन उसे अपनी बाहोमे कसके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा..
रजीया : लखनभैया प्लीज.. अभी नही वो लोग आजायेगे.. हम रातमे करेगेनां.. आज दयाभी नही हे.. पुरी रात आपके साथ रहुगी.. छोडीयेनां मुजे.. अभी मुजे काम करने दीजीये.. फीर मुजे प्यार करलेना..
लखन : (कामुक्तासे) बस.. रजीया अेक बार.. अेक बार करनेदे.. आज तु कयामत लग रही हे.. मुजे बोलना चाहीयेना घरपे कोइ नही हे.. मे जल्दी आजाता.. बस अेक बार चोदलेने दे.. फीर रातमे आरामसे करेगे.. तुजे अकेली देखके बहुत मन हो रहा हे.. अभी करलेगे.. चलनां.. क्या मस्त लग रही हे तु..
कहातो रजीया सर्मसार होते मुस्कराने लगी.. ओर लखनको चुमनेमे साथ देने लगी.. उनको पताथा अभी लखन उसे चोदे बीना मानने वाला नही हे तब उनकीभी चुत फडफडाते पानी छोडने लगी.. ओर वो लखनके होंठ चुमने लगी.. तब लखन पागल जेसा होगया ओर रजीयाका टोप खीच लीया तो वो फट गया ओर रजीयाके बुब्स बहार जांकने लगे तभी लखनने उनका लोअर ओर चडीभी खीचके नीकाल दी..
ओर खुदने भी फटाफट पेन्ट नीकालदी तब रजीया समज गइकी ये उस्े चोदे बीना मानने वाला नही हे अबतो मेरी कुटाइ करतेही मानेगा.., ओर लखनने रजीयाको वही जुकाके घोडी बना लीया.. तब रजीयाभी लखनका साथ देते कीचनका प्लेटफोर्म पकडते जुक गइ.. ओर होने वाले हमलेके लीये तैयार होगइ.. तभी लखनने लंड कपडते पीछेसे चुतमे घुसा दीया तो रजीया दर्दसे मुह बीगाडने लगी..
ओर कीचनका प्लेटफोर्म कसके पकडलीया.. तब लखन उनकी कमरको पकडके सोट मारते रजीयाको चोदने लगा ओर रजीया जुकते चुदवाने लगी.. तब थोडी देरके बाद उनकोभी मजा आने लगा ओर वो सीसकारीया करते अपनी कमरको पीछे धकेलते चुदवाने लगी.. रजीयाभी बहुत कामुक्त ओरत थी.. ओर चुदवानेकी काफी सौकीनभी थी.. तब आज उजकी पहेली बार जबरन ओर जबरदस्त चुदाइ हो रहीथी..

आज लखन उसे काफी देर तक खडे खडे चोदता रहा तो रजीयाभी खुस होने लगी.. तभी अचानकही लखन तेज चोदने लगा तो रजीयाकी हालत पतली होने लगी ओर ओर दोनोही अेक साथ जडने लगे.. तब रजीया मनही मन खुस होगइ की चलो आज उनकी अच्छेसे चुदाइ हुइ हे ओर दोनो अलग होगये.. तब रजीया अेक पैर उचा करते अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी ओर सरमाते हसती रही.. तो लखनभी खुस होके हसता रहा.. ओर अपना लंड पोछते चडीमे अेडजेस्ट करने लगा.. तभी..
रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया आप बहुत नोटी हो.. अैसेभी कोइ करता हे.. हम रातमे आरामसे प्यार करतेनां.. अबतो दया मौसीके घर गइ हे तो मे अब अकेली ही हु.. ओर सायद आप दोनोकी सादीके बाद मे अकेलीही रहुगी.. दयाभी सायद पुनमदीदीके साथ जा रही हे..
लखन : (बाहोमे भरते) चलो अच्छा हे.. रजीया आज तुम अकेली थी तो दो पहोरको मुजसे कहा क्यु नही..? मे पहेलेही आजाता.. आज बहुत इच्छा हो गइथी.. ओर अबतु मुजे बहुतही अच्छी लगने लगी हे.. पता नही तुजे देखते मे पागल होजाता हु.. कही मुजे तुमसे प्यारतो नही होगया..? क्या मेरी सीक्रेट बीवी बनेगी..?
रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया हमतो आपकी नौकरानी हे.. हमारे अेसे नसीब कहा जो आप हमे प्यार करने लगे.. मुजे बीवी बनालीयातो कही मालीकको पता चल गयातो आपकोतो कुछ नही कहेगे.. लेकीन हमे मार मारके नोकरीसे जरुर नीकाल देगे.. इसीलीये ये प्यार ब्यारका चकर छोडीये.. में कहा आपको चुदवानेके लीये मना कर रही हु.. जबभी मन करे मुजे इसारा करदीजीयेगा मे हाजीर हो जाउगी.. तब जी भरके मुजे चोद लीजीयेगा.. अब मुजेभी आपसे चुदवानेमे बहुत अच्छा लगता हे..
लखन : (अपनी पेन्ट पहेनते) नही रजीया.. हमने तुम दोनोको कभी नौकरानी नही माना.. हम तुम दोनोको अपने घरकी सदस्यही मानते हे.. तु अपने आपको नीचा मत समज.. ओर सच कहु तो मुजेभी तुम्हारी आदत पड गइ हे.. जब मे तुजे दीनमे अेक बार चोद नही लेता मुजे कही चेइनही नही मीलता.. सच केह रहा हु..
रजीया : लखनभैया अब आपकी सादी होने वाली हे.. जब लताभाभी आजायेगी ओर उनसे हर रात चुदाइ करने लगोगे तब ये रजीयाको भुल जाओगे.. इसलीये केह रहीहु अपने मनसे ये प्यारका भुत उतारदो..
लखन : नही रजीया मुजे सचमे तुमसे प्यार हो गया हे.. ओर तबकी तब देखेगे.. लेकीन मे तुजे अैसेही प्यार करता रहुगा पहेले तुजे इस नजरसे नही देखाथा तबकी बात अलग हे.. लेकीन अब तु मुजसे अेक बीवीकी तराह चुदवाती हे ओर मुजे सब सीखा दीया.. तो मे तुजे अब नही छोड सकता.. तुम मुजे प्यार करो या ना करो.. मे तुमसे प्यार करता रहुगा.. भलेही लता आजाये.. मे तुजे नही भुलुगा.. ओर इसी तराह तुजे प्यार देता रहुगा.. आइ प्रोमीस.. ओर जरुरत पडी तो मे तुमसेभी सबसे जुपकर सादी करलुगा..
कहेते लखन कीचनसे बहार नीकल गया तो रजीयाभी भावुक होकर अपने कपडे पहेनने लगी तब उनका टोप फटा हुआ पाया तो वो अपने रुममे जाकर चेन्ज करके आगइ.. तबतक लखनभी डाइनींगपे आकर बैठ गया ओर रजीया खाना नीकालने लगी तो लखनने उनकाभी खाना नीकालने कहा ओर अपनी गोदमे बेठनेके लीये कहा तो रजीया सरमाते लखनकी गोदमे बेठकर उसे खाना खीलाते खुदभी खा रहीथी..
जब खाना फीनीस कीया तब लखनने रजीयाको भाइके आजानेके बार उपर तैयार होकर आनेको कहा तो रजीयाने सरमाते हसकर हां मे गरदन हीलाके हां केह दीया.. ओर मनही मन बहुत खुस होने लगी.. क्युकी आज लखनने उनसे प्यारका इजहार कीया जो वो पहेलीबार कीसीका प्यार पा रहीथी.. ओर मनही मन लखनको समर्पीत होनेका सोचते उनके सपने देखते देवायत ओर पुनमका वेइट करते बेठी थी..
तभी देर रात देवायत ओर पुनम आगये तब रजीयाने सब दरवाजे अच्छेसे बंध करलीया तब पुनमने उसे दोनो खाना खाकर आयेहे कहा.. ओर रजीयाको सोनेके लीये बोल दीया ओर देवायत पुनम अपने अपने रुममे चले गये.. जैसे कोइ अेक दुसरेसे अन्जान हो.. तब रजीयाभी अपने रुममे चली गइ ओर नहा धोके बाथरुमसे बहार आइतो उसे अपनी सादीका जोडा याद आगया.. तो उनके चहेरे पे सरमसे स्माइल आगइ ओर वो सादीके कपडे नीकालके पहेनने लगी.. फीर अच्छेसे शींगार करते तैयार होने लगी....
कन्टीन्यु
अध्याय - ७३
कहातो तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी तब मंजु देवायतके पास आकर उनसे सटकर बैठ गइ.. तो चंदा ओर दया दोनोही देवायतकी ओर कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी धिरेन ओर पुनमभी शीखंड लेकर आगये.. पुनमने कहाथा इसीलीये रास्तेमे धिरेनने कोइ सरारत नहीकी.. दोनोही प्यार भरी बाते करते रहे.. तब धिरेनने अपने फ्युचरके प्लानींगके बारेमे पुनमसे ढेर सारी बाते करली.. ओर दोनो घर आगये....अब आगे
तब पुनम देवायतकी ओर कातील स्माइल करते शीखंड लेकर कीचनमे चली गइ.. तो धिरेनभी नीचे फ्रेस होने चला गया तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बैठी थी.. ओर दोनो प्यार भरी बाते कर रहेथे.. तब धिरेनभी आके बैठ गया.. तबभी मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बाते कर रहीथी तभी खानाभी बन गया ओर दया पुनम सब खाना डाइनींगपे रखने लगी.. ओर चंदाने सबको बुला लीया..
सभी डाइनींग टेबलपे आगये तब मंजु देवायतके पास बेग गइ तो दुसरी ओर पुनमभी देवायतके साथ बेठ गइ तब मजबुरन धिरेनको उनकी मम्मीके साथ बेठना पडा ओर दया सबको खाना देने लगी.. जब खाना देदीया तो चंदाने उसेभी सबके साथ बीठा दीया ओर सब डीनर करने लगे तब खाना खाते पुनम देवायतके पैरको सहेलाने लगी तभी उनके पेरपे धिरेनका पैर महेसुस हुआ जो उनके पैरको टच कर रहाथा तब पुनम समज गइ ओर सरमाते खाने लगी उसने अपना पैर नही हटाया.. ओर सबने डीनर फीनीस कर लीया..
फीर कुछ देर बैठे बाते करते रहे तबतक अंधेरा हो गयाथा.. तो मंजुने पुनमकी वजहसे देवायतको घर जानेको केह दीया तो चंदा देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगी ओर देवायत पुनमको लेके बहार नीकल गया तब दया वही रुक गइ ओर देवायत पुनम कारमे आके बेठ गये तब देवायतने कार अपने गांवकी ओर जानेदी तभी पुनम देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर बाते करने लगी..
पुनम : भाइ कल मे नही आउगी.. वो..वो धिरेनके साथ कुछ अजीबसा लगता हे.. मुजे नही लगता मे उनके साथ रेह पाउगी, उनको मुजसे मीलन करनेकी बहुत जल्दी हे.. उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. भाइ मे आपके साथ रहेना चाहती हु..
देवायत : पुनो पागल मत बन.. धिरेन तेरा होने वाला पती हे.. ओर तुमसे प्यारभी करता हे.. हमे इन सब चीजोको अेक्सेप्ट करना पडेगा.. कुुछ सालोकीतो बात हे.. ओर तेरी तो बाबाके साथ सब बाते हुइ हे.. बता कीतने साल उनके साथ रहेना हे.. ओर तु चीन्ता मत कर.. मे वहा आता जाता रहुगा.. आज नही तो कल.. जब तु उनकी बीवी होजायेगी तबतो तुजे उनके साथ सबकुछ करनाही पडेगा जो अेक बीवीका फर्ज होता हे..
पुनम : भाइ.. बाबा कुछ दो तीन सालका केह रहेथे.. फीर मे आपके पास चली आउगी.. मुजसे आपसे दुर नही रहा जायेगा.. भाइ ये दो रात हमारे पास हे.. इनमे आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो.. वरना मे धिरेनको नही रोक पाउगी.. आज बडी मुस्कीलसे पीरीयडका बहाना बनाके उनसे छुटी हु.. उनको मे ज्यादा दीन मुजसे दुर नही रख पाउगी.. भाइ कुछ ओर हो जाये इनसे पहेले आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो..
देवायत : बेबी.. सादीके बादतो तुजे ये सब करने देनाही पडेगा.. ओर तु बच्चेकी चीन्ता मत कर.. आजही मुजे पता चला हेकी तु प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. बस ये दो दीन सीर्फ हमे मजेही करने हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (जटसे अलग होते आस्चर्यसे) क्या..? मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..? ओर आपको कैसे पता चल गया..? अेक मीनीट..(कुछ सोचते) भाइ.. कही आपकी भाभीसेतो इस बारेमें बात नही हुइ..? अेक वोही हे जो सब बाते जान जाती हे.. भाइ सच बताना भाभीसे आपकी इस बारेमे बात हुइ हेनां..?
देवायत : (हसते) हां.. आज उसीने मुजे बतायाकी उनका अंस तेरे गर्भमे आ चुका हे.. पुनो मेने तुजे प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. तेरे गर्भमे हमारा बच्चा आ चुका हे.. अैसा कहा उसने.. ओर उनको हमारे बारेमे सब पता हे.. तु फीकर मत कर उनको हमारे इस रीस्तेसे कोइ अेतराजभी नही हे.. अब हम दोनो भाइ बहेन खुलकर प्यार कर सकेंगे.. अब मे तेरी भाभीसे कहेकर भी तुजे मीलने वहा आ सकता हु.. तब हम दोनो खुब मजे करेगें..
पुनम : (खुस होते देवायतसे लीपटके कीस करते) ओह..भाइ आइ लव यु.. लव यु सो मच.. भाभी कीतनी अच्छी हे.. मुजे पताथा हमारी सब बाते वो जानती होगी.. ओर यही हुआ.. अब मुजे कोइ डर नही हे.. अबतो मे आपसे खुलके प्यार कर सकुगी.. बस अब सीर्फ मेरी सासका खयाल ही रखना हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) पागल मत बन.. सीर्फ मंनुको पता हे तेरी सासको नही.. हम कोइ खुलके प्यार नही करेगे.. पुनो मंजुने कहा हे.. ये दो रातमे आप पुनोको खुब प्यार करना ओर उसे तृप्त कर देना.. आगे जाके पुनम ओर चंदामौसी ही आपको सम्हालेगी.. तब सब ठीक होजायेगा..
पुनम : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? भाभीने अैसा कहा..? भाइ तबतो आपको मजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. वरना मे भाभीसे सीकायत कर दुगी हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हां इतना प्यार करुगाकी तु कल साम तक बेडसे उठ नही पायेगी.. हें..हें..हें.. पुरा दीन आराम करते रहेना.. हें..हें..हें.. ओर वेसेभी कल मुजे मेरे ससुराल जाना पडेगा.. वहा बापुजीकी तबीयत ठीक नही हे.. बस अेक बार तेरी सादी होजानेदे फीर देखना.. वहा आकर तुजे खुब रगड रगडके चोदुगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते कातील नजरोसे देखते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. ठीक हे दीनमे कही भी घुमो.. रातको आप मेरे पास होने चाहीये.. केह देती हु.. ओर भाइ सादीके बादभी हप्तेमे कमसे कम मुजे पांच दीन मीलोगे.. येभी केह देती हु.. दिनमे बीवी बनकर आपका इन्तजार करुगी ओर रातमे बहेन बनकर आपका बीस्तर गरम करते आपसे खुब चुदवाउगी.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हें.. हें..हें.. तुभी कुछ कम नही हे.. ठीक हे.. चुदवाना.. ओर हुकुम तो अेसे दे रही हे जैसे मंजु देती हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (कातील स्माइल करते) हां तो फीर..? जीस तराह वो आपकी बीवी हे उसी तराह मेभी आपकी बीवी हु.. ये बात आप भुलना नही वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. हें..हें..हें..(जोरोसे हसते)
देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. तुभी हुकुम चलाना.. फीर अेक ओर आजायेगी हुकुम चलाने वाली.. हें..हें..हें.. वोभी कुछ कम नही हे बीलकुल तेरी तराह मेरे पीछे पागल हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (देवायतकी ओर नैन नचाते हसते) भाइ.. सच बताना.. मे जब गइथी तबतो वो ठीकसे चल रहीथी.. तो क्या आप दोनोने.. मतलब.. दोनोका मीलन हुआ..? जब मे आइ तब वो थोडा लंगडाके चल रही थी.. हें..हें..हें.. भाइ सच बताना.. आपने उनके साथ सेक्स कीया हेनां..?
देवायत : (हसते) हां पुनो.. तुम दोनोके जाते ही वो उपर अपने रुममे मुजे इसारा करते लेगइ गइ.. ओर मेने उनको दो बार जमकर चोद लीया तो बीचारीकी चाइही बदल गइ.. हें..हें..हें.. वो आजभी अेक कुआरी लडकीकी तराह चुदवाती हे.. बेचारीकी हालत खराब होगइ.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) हां तो हो ही जायेगीनां.. आपके गधे जेसे हथीयारको अंदर लेना कोइ बच्चोका खेल नही हे.. आपनेतो पहेली बार मुजे बेहोस ही कर दीयाथा.. कीतना बडा हथीयार हे आपका.. मुजे बेहोसी मेभी चोद लीयाथा.. आप मेरीभी हालत खराब कर देते हो.. लेकीन भाइ मजाभी बहुत आता हे.. जी चाहता हे बस दीन रात आपसे प्यार करती ही रहु.. आप क्या मस्त चुदाइ करते हो.. तभीतो सभी ओरते आपके पीछे पागल हे.. बेचारी वो रश्मीभाभी दो दीन आराम करती रही.. आप कीतनी जोसमे चुदाइ करते हो..
देवायत : पुनो याद आया.. हम दो तीन दीनसे रश्मीसे नही मीले.. वोभी मेरी बीवी हे.. चल जरा देखके जाते हे क्या कर रही हे वो..
पुनम : भाइ देर नही होजायेगी..? आप उसे कल मील लेना.. चलोना घर चले जाते हे.. आपनेतो बातोसेही मुजे गरम करदीया.. भाइ बहुत चुदवानेकी इच्छा हो रही हे.. वो धिरेननेभी गरम करदीया.. भाइ उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. मे क्या करु..?
देवायत : अब तेरा होने वाला पतीहे तो हम क्या कर सकते हे.. तु क्यु चीन्ता करती हे अेक दो सालकीतो बात हे.. फीर मेरे पास चली आना.. तब तुजे कोइ पुछेगा भी नही.. अब उसे सादी तक नही मीलना.. ओके..?
पुनम : (सरमाते) भाइ जबतक सादी नही होती तबतक आपको मुजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. आप रश्मीभाभीसे बात करलेना.. मे उनके वहा चली जाउगी तब आप आजाना.. आप कार उधर लेलो..
तब देवायत कार सीधी रश्मी यानी राघवके घर लेजाता हे.. तब पुरे गांवमे अंधेरा छाया हुआ था.. कुछ घरोमे हल्की रोशनी नजर आ रहीहे तब देवायत ओर पुनम कारको बहार खडी करके अंदर चले जाते हे तब पुनम गेइट अच्छेसे बंध करलेती हे तब रश्मी राघव वाले रुममे अपने बेडपे लेटे कुछ कीताब पढ रहीथी.. तो देवायत ओर पुनमको देखते जटसे खडी होगइ ओर खुसीसे उछलते हसते हुअे देवायतके गले लग गइ..
रश्मी : (हसते) क्या बात हे.. आज इस बीवीकी याद आगइ..? वो भी मेरी इस बहेन लाइ होगी.. तभी जनाब आये हे.. हें..हें..हें.. क्यु ठीक कहानां पुनो..?
पुनम : (हसते सरारतसे जुठ बोलते) ओर नहीतो क्या..? दीदी येतो आनेकोही तैयार नही थे.. मे जबरदस्तीसे इनको खीचके लाइ हु.. हें..हें..हें.. लो करलो प्यार हमारे पतीको..
देवायत : (हसते) अच्छा.. तो फीर आज मे मेरी इस बीवीके साथ इधरही रुक जाता हु हें..हें..हें..
पुनम : (जटसे हसते) नही नही नही.. दीदी.. मे नही.. ये मुजे जबरदस्ती इधर लाये हे.. हें..हें..हें..
कहातो तीनो हसने लगे तब रश्मीने देवायतके होंठ चुमलीये ओर अलग होकर पुनमको गले लगा लीया फीर उनका हाथ पकडते बेडपे बीठादीया तब देवायत वही राघवके बेडके पास पडी चेरपे बैठ गया ओर राघवकी ओर देखते हसते हुअे उनका हालचाल पुछने लगा तो राघव गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तब..
रश्मी : देखा देवु.. खटीया मे पडे हे हीलनेकी भी ताकात नही हे.. ओर गुसातो देखो.. (राघको) देखलो इनको अच्छेसे.. अब यही मेरा पती हे.. जो मुजे मां बननेका सुख देगा.. आज मे इन्हीकी वजहसे पेटसे हुइ हु.. ओर मुजे मुनीमकी जगाह नोकरीभी दे दी.. अब आपके सब करतुत मे गांव वालोके सामने लाउगी.. सबकी जमीन वापस कर दुगी.. बहुत दुख दीये हां गांव वालोको.. अब पडे भुगत रहे हे..
पुनम : (धीरेसे) भाभी छोडीयेना इनको.. अपनी करतुतोकी सजातो इनको मील गइ हे..
रश्मी : पुनोदीदी आप नही जानती.. इन कमीनेने मेरे साथ ओर गांवकी ओरतोके साथ क्या क्या जुल्म कीये हे.. अेकभी लाचार ओरतको नही छोडा.. यहा तक की बेचारे मजदुरोकी बीवीयोकोभी नही छोडा.. सामनेसे पैसे देके ब्याजके बदले उनका फायदा उठाते थे.. कइ ओरतोको तो यहा बुलकर रेपभी करलीया हे.. अपनी बहेनके साथभी इनका चकर था.. ओर मेरे पले पड गये.. अब पडे सब भुगत रहे हे..
कहा तो राघव रश्मीकी ओर देखते गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तो रश्मी राघवके सामनेही हसती हुइ देवायतकी गोदमे बेठ गइ.. ओर गलेमे दोनो हाथ डालके देवायतके होंठ चुमने लगी.. तब देवायतभी रश्मीके बुब्स मसलते होंठ चुमने लगा तो राघव दुसरी ओर मुह करते गुसेसे आग बबुला होने लगा.. तो पुनम दोनोको देखते सरमाते हसती रही.. तभी रश्मी गोदसे उठ जाती हे ओर खडी होके अपनी सारी नीकालने लगती हे.. तो राघव उसे घुरके देखने लगा..
तो रश्मी उनके सामने देखते ब्लाउसभी नीकालने लगी तभी देवायतने उनकी पेटीकोटका नाडाभी खीच लीया.. तो पेटीकोट सरकते नीचे गीर गया तब रश्मी सीर्फ टु पीसमेही रेह गइ.. जेसे कोइ अप्सरा दीखती हो.. ओर उसने देवायतका हाथ पकडके खडा करदीया ओर कातील स्माइल करते देवायतकी ओर देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. फीर पेन्टकी क्लीप खोलके उसेभी नीकाल दीया ओर हाथ पकडके देवायतको वही बेडकी ओर लेगइ..
रश्मी : जानु.. अेक बार इनके सामने ही मुजे चोदलो.. ओर मेरी बहुत इच्छाभी हे.. दीदी क्या आपभी हमारे साथ सामील होगी..? आइअेना अब हमारे बीच कैसा पर्दा..हम दोनो मीलकर हमारे पतीको खुब प्यार करेगी..
पुनम : (सरमाते हसते) नही दीदी आपही प्यार करलो.. हमतो घर जाकेही सब करेगे.. आज पुरी रात बाकी हे.. मे इनको छोडने वाली नही हु.. इनको आज सोनेही नही दुगी.. हें..हें..हें..
रश्मी : (बेडपे पीठके बल हसते हुअे लेटते) हां.. भाइ.. अब भाभी नही हे तो दोनोके तो मजे हे.. आपनेतो अभी नइ नइ सादी कीहे.. तो हर रात सुहागरात होगी.. दीदी आपकी सादीसे पहेले जी भरके मजे ले लो.. फीर पता नही ये कब आपके हाथ आयेगे..
कहातो पुनम अेकदम सरमा गइ ओर मुह दुसरीओर घुमाते मुस्कराती रही.. तब देवायतने रश्मीकी ब्राभी नीकालदी ओर उनकी पेन्टीमे उंगलीया फसाके खीचते नीकालने लगा.. फीर उनकी चडीभी नीकालदी तब देवायतका वीकराल लंड रश्मीकी चुत देखके जटके मारने लगा.. ओर देवायत रश्मीके उपर जुकते लेट गया तब रश्मीने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होंठ चुमने लगी..
तब देवायतभी उनके बुब्स दबाते रश्मीका साथ देने लगा.. तब उनका लंड रश्मीकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलमे घुसनेका रास्ता ढुंढने लगा.. तो रश्मीकी चुतभी लंडको अपने बीलमे लेनेके लीये फडफडाते पानी छोडने लगी.. दोनोही आजु बाजु सब कुछ भुलकर अेक दुसरेके मुहमे मुह डालके कामातुर होगये.. तब देवायतके लंडने अपने बीलका रास्ता अपने आप ढुंढ लीया..
तो देवायतने कमरको अेक जटका मारदीया तभी रश्मीकी चीख नीकलके देवाफतके मुहमे दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ ओर देवायतको देखने लगी.. तब देवायतने मुह हटालीया ओर हाथके बल उचा होगया.. तब रश्मी जोरोसे सीसकारीया करने लगी ओर छटपटाते दर्दसे तीलमीलाती रही.. तब देवायत उसे कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा तो रश्मी अपने मुहपे हाथ रखते हल्कासा चीखने लगी.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकलने लगे..

पुनम : (देखते हसते) भाइ.. धीरे करोना.. अैसे जानवरोकी तराह भाभीको क्यु चोद रहे हो? भाभीको दर्द हो रहा हे..
देवायत : (चोदते) बेबी क्या करु इस बीवीको देखके पागल हो जाता हु.. मुजसे रहा नही जा रहा.. जी चाहता हे तेरी तराह इनको भी दीन रात चोदता ही रहु.. तुभी आजाना.. आज दोनोको यही पटक पटकके चोदलु..
रश्मी : (दर्दसे मुह बीगाडते धीरेसे चुदवाते) पुनमदीदी.. इनको जोभी करनाहे करने दीजीये.. मेनेही इसे अैसे चोदनेके लीये छुट दे रखी हे.. मुजे अैसे वाइल्ड सेक्सही पसंद हे.. क्या मस्त चोदते हे.. भलेही मुजे दर्द हो.. ओर आपभी आजाओ.. हम दोनो मीलकर पुरी रात इनसे चुदवायेगी..
पुनम : (सर्मसार होते हसते) नही भाभी.. अभी तो आपही चुदवालो.. मे घर जाकर चुदवाउगी..

देवायत रास्तेमे पुनमसे चुदाइकी बाते करते गरमतो थाही.. तब देवायत रश्मीको जोरोसे कमर हिलाते चोदने लगा तो रश्मीभी चीखे मारते देवायतसे कमर उछाल उछालके चुदाइमे साथ देने लगी.. ओर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी तब रश्मी ज्यादा देर टीक नही पाइ ओर देवायतको अपनी ओर खीचके कसके बाहोमे भीचते लीपलोक करलेती हे तो देवायतका सरीरभी अकडने लगा.. ओर उसने रश्मीकी चुतमे लंडको जडतक घुसा दीया.. ओर कमरको रुक रुककर जटके मारने लगा.. ओर दोनोही अेक साथ पानी छोडते जडने लगे..

तब रश्मी देवायतके होंठ भीचते देवायतकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर अपने गर्भपे देवायतका गरम गाढा पानी महेसुस करने लगी.. जब देवायतने होंठ छोडातो रश्मीके होंठोपे खुन उभर आया ओर उनके होंठ सुजने लगे तब देवायत रश्मीके उपरसे हट गया तो लंड फचच... आवाजके साथ बहार नीकल गया ओर वो बाथरुममे चला गया तब रश्मी कोनीके बल बेठते अपनी पेन्टीसे चुत साफ कर रहीथी.. तब पुनम उनके पास बेठते सामने देखते सरमाती हस रहीथी.. तब देवायत बहार आके अपने कपडे पहेनने लगा तो रश्मी अेसेही वापस बेडपे लेट गइ..
पुनम : (हसते) भाभी होगइ तसली.. देखो आपके होंठ सुज गये हे इतनी तकलीफ से क्यु करती हो..?
रश्मी : (सरमाते हसते होंठ चेक करते) पुनोदीदी आप नही समजोगी.. ये बहुत कम मेरे हाथमे आतेहे.. तो इनका दीया दर्द मुजे प्यारका अहेसास करवाते रहेता हे.. ओर इनकी यादोमे दीन नीकल जाता हे.. बस.. आपभी अपनी सादीके बाद कभी अैसी ट्राइ करना.. बहुत मजा आयेगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते) भाभी तबकी तब देखेगे अभीतो आप आराम करलो.. अब हम घर चलते हे..
फीर दोनोही वहासे नीकलकर अपनी हवेलीपे आजाते हे.. तब हवेलीपे आज कोइ नहीथा.. ओर रजीया अकेलीथी तब मनही मन खुस होने लगीकी चलो आज दया नही हेतो बीना डरके पुरी रात लखनसे चुदवायेगी.. यही सोचते आज वो अच्छी तराह सज सवरके तैयार होगइ ताकी लखनको रीजा सके.. अबतक वो लखनसे चारसे पांच बार चुद चुकीथी.. ओर लखनके लंडसे आदी होगइ थी.. अब उसेभी लखनका साथ अच्छा लगने लगाथा.. ओर हमेसाके लीये लखनके साथ जुडनेका सपना देखने लगीथी..
क्युकी देवायत अब उसे बहुतही कम टाइम दे पाता था.. अभी पुनम देवायत नही आयेथे तब सामको लखन घरपे आया तो रजीयाको अकेला देखके पुछ लीया तो रजीयाने उसे बता दीयाकी सब कहा गये हे.. कहेके वो कीचनमे खाना नीकालने चली गइ.. तब लखन सुनकर बहुतही खुस हो गया.. ओर फ्रेस होकर सीधा कीचनमे चला गया.. ओर जातेही रजीयाको पीछेसे बाहोमे भरके दबोच लीया तब रजीया सरमाते हसते हुअे पलट गइ.. तो लखन उसे अपनी बाहोमे कसके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा..
रजीया : लखनभैया प्लीज.. अभी नही वो लोग आजायेगे.. हम रातमे करेगेनां.. आज दयाभी नही हे.. पुरी रात आपके साथ रहुगी.. छोडीयेनां मुजे.. अभी मुजे काम करने दीजीये.. फीर मुजे प्यार करलेना..
लखन : (कामुक्तासे) बस.. रजीया अेक बार.. अेक बार करनेदे.. आज तु कयामत लग रही हे.. मुजे बोलना चाहीयेना घरपे कोइ नही हे.. मे जल्दी आजाता.. बस अेक बार चोदलेने दे.. फीर रातमे आरामसे करेगे.. तुजे अकेली देखके बहुत मन हो रहा हे.. अभी करलेगे.. चलनां.. क्या मस्त लग रही हे तु..
कहातो रजीया सर्मसार होते मुस्कराने लगी.. ओर लखनको चुमनेमे साथ देने लगी.. उनको पताथा अभी लखन उसे चोदे बीना मानने वाला नही हे तब उनकीभी चुत फडफडाते पानी छोडने लगी.. ओर वो लखनके होंठ चुमने लगी.. तब लखन पागल जेसा होगया ओर रजीयाका टोप खीच लीया तो वो फट गया ओर रजीयाके बुब्स बहार जांकने लगे तभी लखनने उनका लोअर ओर चडीभी खीचके नीकाल दी..
ओर खुदने भी फटाफट पेन्ट नीकालदी तब रजीया समज गइकी ये उस्े चोदे बीना मानने वाला नही हे अबतो मेरी कुटाइ करतेही मानेगा.., ओर लखनने रजीयाको वही जुकाके घोडी बना लीया.. तब रजीयाभी लखनका साथ देते कीचनका प्लेटफोर्म पकडते जुक गइ.. ओर होने वाले हमलेके लीये तैयार होगइ.. तभी लखनने लंड कपडते पीछेसे चुतमे घुसा दीया तो रजीया दर्दसे मुह बीगाडने लगी..
ओर कीचनका प्लेटफोर्म कसके पकडलीया.. तब लखन उनकी कमरको पकडके सोट मारते रजीयाको चोदने लगा ओर रजीया जुकते चुदवाने लगी.. तब थोडी देरके बाद उनकोभी मजा आने लगा ओर वो सीसकारीया करते अपनी कमरको पीछे धकेलते चुदवाने लगी.. रजीयाभी बहुत कामुक्त ओरत थी.. ओर चुदवानेकी काफी सौकीनभी थी.. तब आज उजकी पहेली बार जबरन ओर जबरदस्त चुदाइ हो रहीथी..

आज लखन उसे काफी देर तक खडे खडे चोदता रहा तो रजीयाभी खुस होने लगी.. तभी अचानकही लखन तेज चोदने लगा तो रजीयाकी हालत पतली होने लगी ओर ओर दोनोही अेक साथ जडने लगे.. तब रजीया मनही मन खुस होगइ की चलो आज उनकी अच्छेसे चुदाइ हुइ हे ओर दोनो अलग होगये.. तब रजीया अेक पैर उचा करते अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी ओर सरमाते हसती रही.. तो लखनभी खुस होके हसता रहा.. ओर अपना लंड पोछते चडीमे अेडजेस्ट करने लगा.. तभी..
रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया आप बहुत नोटी हो.. अैसेभी कोइ करता हे.. हम रातमे आरामसे प्यार करतेनां.. अबतो दया मौसीके घर गइ हे तो मे अब अकेली ही हु.. ओर सायद आप दोनोकी सादीके बाद मे अकेलीही रहुगी.. दयाभी सायद पुनमदीदीके साथ जा रही हे..
लखन : (बाहोमे भरते) चलो अच्छा हे.. रजीया आज तुम अकेली थी तो दो पहोरको मुजसे कहा क्यु नही..? मे पहेलेही आजाता.. आज बहुत इच्छा हो गइथी.. ओर अबतु मुजे बहुतही अच्छी लगने लगी हे.. पता नही तुजे देखते मे पागल होजाता हु.. कही मुजे तुमसे प्यारतो नही होगया..? क्या मेरी सीक्रेट बीवी बनेगी..?
रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया हमतो आपकी नौकरानी हे.. हमारे अेसे नसीब कहा जो आप हमे प्यार करने लगे.. मुजे बीवी बनालीयातो कही मालीकको पता चल गयातो आपकोतो कुछ नही कहेगे.. लेकीन हमे मार मारके नोकरीसे जरुर नीकाल देगे.. इसीलीये ये प्यार ब्यारका चकर छोडीये.. में कहा आपको चुदवानेके लीये मना कर रही हु.. जबभी मन करे मुजे इसारा करदीजीयेगा मे हाजीर हो जाउगी.. तब जी भरके मुजे चोद लीजीयेगा.. अब मुजेभी आपसे चुदवानेमे बहुत अच्छा लगता हे..
लखन : (अपनी पेन्ट पहेनते) नही रजीया.. हमने तुम दोनोको कभी नौकरानी नही माना.. हम तुम दोनोको अपने घरकी सदस्यही मानते हे.. तु अपने आपको नीचा मत समज.. ओर सच कहु तो मुजेभी तुम्हारी आदत पड गइ हे.. जब मे तुजे दीनमे अेक बार चोद नही लेता मुजे कही चेइनही नही मीलता.. सच केह रहा हु..
रजीया : लखनभैया अब आपकी सादी होने वाली हे.. जब लताभाभी आजायेगी ओर उनसे हर रात चुदाइ करने लगोगे तब ये रजीयाको भुल जाओगे.. इसलीये केह रहीहु अपने मनसे ये प्यारका भुत उतारदो..
लखन : नही रजीया मुजे सचमे तुमसे प्यार हो गया हे.. ओर तबकी तब देखेगे.. लेकीन मे तुजे अैसेही प्यार करता रहुगा पहेले तुजे इस नजरसे नही देखाथा तबकी बात अलग हे.. लेकीन अब तु मुजसे अेक बीवीकी तराह चुदवाती हे ओर मुजे सब सीखा दीया.. तो मे तुजे अब नही छोड सकता.. तुम मुजे प्यार करो या ना करो.. मे तुमसे प्यार करता रहुगा.. भलेही लता आजाये.. मे तुजे नही भुलुगा.. ओर इसी तराह तुजे प्यार देता रहुगा.. आइ प्रोमीस.. ओर जरुरत पडी तो मे तुमसेभी सबसे जुपकर सादी करलुगा..
कहेते लखन कीचनसे बहार नीकल गया तो रजीयाभी भावुक होकर अपने कपडे पहेनने लगी तब उनका टोप फटा हुआ पाया तो वो अपने रुममे जाकर चेन्ज करके आगइ.. तबतक लखनभी डाइनींगपे आकर बैठ गया ओर रजीया खाना नीकालने लगी तो लखनने उनकाभी खाना नीकालने कहा ओर अपनी गोदमे बेठनेके लीये कहा तो रजीया सरमाते लखनकी गोदमे बेठकर उसे खाना खीलाते खुदभी खा रहीथी..
जब खाना फीनीस कीया तब लखनने रजीयाको भाइके आजानेके बार उपर तैयार होकर आनेको कहा तो रजीयाने सरमाते हसकर हां मे गरदन हीलाके हां केह दीया.. ओर मनही मन बहुत खुस होने लगी.. क्युकी आज लखनने उनसे प्यारका इजहार कीया जो वो पहेलीबार कीसीका प्यार पा रहीथी.. ओर मनही मन लखनको समर्पीत होनेका सोचते उनके सपने देखते देवायत ओर पुनमका वेइट करते बेठी थी..
तभी देर रात देवायत ओर पुनम आगये तब रजीयाने सब दरवाजे अच्छेसे बंध करलीया तब पुनमने उसे दोनो खाना खाकर आयेहे कहा.. ओर रजीयाको सोनेके लीये बोल दीया ओर देवायत पुनम अपने अपने रुममे चले गये.. जैसे कोइ अेक दुसरेसे अन्जान हो.. तब रजीयाभी अपने रुममे चली गइ ओर नहा धोके बाथरुमसे बहार आइतो उसे अपनी सादीका जोडा याद आगया.. तो उनके चहेरे पे सरमसे स्माइल आगइ ओर वो सादीके कपडे नीकालके पहेनने लगी.. फीर अच्छेसे शींगार करते तैयार होने लगी....
कन्टीन्यु










































