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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २८
कहातो नीलम अेक बरतन लेके चली गइ, इनके जातेही रमाने दरवाजा बंध करलीया ओर भानुका हाथ पकडके उसे अपने रुममे लेगइ ओर दोनोही आपसमे लीपट गये ओर अेक दुसरेको पागलोकी तराह चुमने लगे फीर रमा अपनी सारी कमर तक उची करके बेडपे लेट गइ क्युकी कपडे नीकालनेका टाइम नही था तब भानु भी पेन्टको नीचे करते चडी नीची करलेता हे ओर रमाके पैरके बीच बेठने लगता हे तो रमाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके फैला दीये.. ओर भानुके सामने कामुक नजरोसे सरमाते देखने लगी....अब आगे

दोनोही कामाग्नीमे जलते मदहोस होगये थे भानु उनके पेरके बीच बेठतेही उनके उपर जुक गया ओर रमाके ब्लाउसके बटन खोल दीया तब रमाके दोनो बुब्स उछलके बहार आगये तो भानुने उनके बुब्सको मुहमे लेलीया ओर हल्कासा होंठमे नीपलको दबाते चुसने लगा तब रमा नसीली आंख करते मदहोसीमे छागइ ओर भानुके बालको सहेलाने लगी तभी भानुने अपने होंठ रमाके होठपे रखदीया ओर दोनोही अेक दुसरेके होंठ चुमते मदहोसीके नसेमे जुमने लगे..

दोनो काफी देर अेक दुसरेके होंठ चुमते रहे ओर अेक दुसरेकी जीभ नीकालते अेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे रमा बीलकुल अपना होस खो चुकीथी अब नीलमभी आजाये तोभी वो भानुको छोडने वाली नही थी, बस उनकोतो सीर्फ सेक्स करनाथा वो अब भानुको पुर्ण समर्पीत हो चुकीथी ओर सीर्फ भानुको ही अपना पती मानती थी, उसने हाथ नीचे लेजाके लंडको हाथसे पकड लीया ओर अपनी चुतमे रखके लंडको अपनी गुफाका रास्ता दीखा दीया तब अेकही जटकेमे भानुने पुरा लंड रमाकी चुतमे उतार दीया..

भानु चुतमे लंड टालके रमाकी गरदनमे मुह रखते उनसे चीपक गया.. तो रमाभी अपनी चुतमे भानुके लंडको महेसुस करते मदहोस होने लगी ओर भानुके होंठ चुमते नसीली आंख करते चुदाइका आनंद लेने लगी भानु हाथके बल उचा होगया ओर धीरे धीरे लंडको बहार तक नीकालते जोरोसे धका मारके रमाकी चुतमे जडतक घुसाते रमाकी जोरोसे चुदाइ करने लगा तब लंड रमाकी बच्चेदानीसे टकराने लगा ओर रमाकी हर धकेके साथ आहे नीकलने लगी.. इतने तेज धकेकी वजहसे उनका बेडभी चरमारेते आवाज करने लगा..

थोडीही देरमे दोनो अेकदम उतेजीत होगये ओर रमा भानुको जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. ओर भानुने अपनी चोदनेकी स्पीड बढादी तभी रमाने जोरोसे भानुको खीचके अपने आपसे चीपका लीया ओर उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर अपना होंठ भानुके होंठोसे मीलाके लीपलोक करलीया ओर रमाकी आंख बडी करते भानुको देखती रही तभी भानुने अपने लंडपे रमाका गरम पानी महेसुस कीया..

तो भानुके लंडमेभी सुरसुराहट होने लगी ओर भानुने लंडको चुतमे जडतक घुसादीया ओर रमाके गर्भासयके उपर अपने वीर्यकी पीचकारीया मारते बोछार करने लगा.. दोनोही अेक साथ जडने लगे.. ओर भानु रमाके उपर ढेर हो गया.. ओर दोनो अपनी सांस दुरस्त करने लगे तब रमा भानुकी पीठ सहेलाती रही.. तभी भानुका लंड मुरजाके रमाकी चुतसे बहार नीकल गया ओर रमाकी चुतसे दोनोका कामरस बहेने लगा..
फीर भानु उतर गया तो रमा जटसे बेठ गइ ओर अपनी पेन्टीसे अपनी चुतको साफ करने लगी फीर भानुके लंडकोभी पोछके साफ करदीया फीर दोनोही खडे होके अपने कपडे सही करने लगे ओर रमाने कपडे सहीसे पहेन लीये ओर अपने बालोका जुडा बनाने लगी.. तबतक भानु उसे देखता रहा.. तो रमा उसे देखके खुब सरमाइ ओर आके भानुकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोके होंठ मीलगये.. तभी बहार आवाज आइ..
तो दोनोही जटसे बहार नीकल गये भानु बहार खटीयापे बेठ गया तब रमा दरवाजा खोलने गइ देखातो बहार नीलम सब्जी ओर दुध लेके आरही थी तब रमा जटसे कीचनमे चली गइ ओर नीलम आतेही सीधी कीचनमे सब्जी ओर दुध अपनी मांको देके बहार अपने भैयाके पास बेठ गइ ओर उनसे बाते करने लगी
नीलम : भैया मे खेतोपे गइथी वहा बापु दारु पीकर पडेथे लेकीन उनके पास जमीनपे कुछ खुनके धबे थे..
भानु : (चोंकते) कौन..? मामा..? क्या केह रही हो तुम..?
नीलम : हां बडेभैया.. मेने पुछा तो कहा उल्टी हुइ थी.. आपका बोला.. तोभी घर नही आये..
रमा : (चाइ लेके बहार आते) कहासे आते.. दारु पीली होगी.. तेरे भाइसे डरतेहे.. तो कहासे आते..
नीलम : लेकीन मम्मी बापुको खुनकी उल्टीया हुइ थी..
रमा : (गुसेसे) ये आज कलकी थोडीना होती हे.. कीतने दीनोसे हो रही हे.. अब दारु पीयेगे तो यही सब होगा.. पता नही इस आदमीसे कब छुटकारा मीलेगा.. मुजेतो ठीक हे मेरी बच्चीको भी मारने लगे हे..
भानु : मामी.. क्या इनको अस्पताल लेजाउ..?
रमा : कोइ जरुरत नही हे.. मे ले गइथी डोक्टरने मना करदीया कहा इनका लीवर खराब होगया हे बदलना पडेगा कहासे नीकाले.. खर्चाभीतो बहुत आता हे.. ओर बदलदीया तोभी क्या फायदा काम धंधातो करना नही.. बस दारु पीके पडे रहो.. अबतो इनसे छुटकारा मीलजाये तो हम मां बेटी वहा आजाये..
अेसेही बाते करते रमाने खाना बनालीया ओर तीनोने मीलके खा लीया फीर भानु रमाको कुछ पैसे देके वहासे नीकलने लगा.. नीकलनेसे पहेले नीलमको कुछ काम सोंपके दोनो अेक बार फीरसे अेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर होंठो मीलाके स्मुच करने लगे.. तो रमाने फीर अेक बार भानुके साथ सादी करके साथ रहेनेकी बात की ओर भानु उनको जल्द लेजानेका वादा करके नीकल गया..
तभी इधर देवायत गहेरी नींमे सोयाथा तभी उसे अपने होंठपे गीलापन महेसुस हुआ तो उसने आंख खोलके देखा तो ड्रेसके अंदर दो छोटे छोटे बुब्सके दर्शन होने लगे.. वो थोडी देर उसे देखता रहा.. ओर उनका लंड धीरे धीरे खडा होने लगा, फीर नजर उची करते देखातो पुनम उनपे जुकके इनके होंठ चुम रहीथी.. तो वो जटसे बेडपे बेठ गया..

देवायत : (थोडा गुसेसे) छुटकी ये क्या कर रही हे.. कोइ देख लेता तो..?
पुनम : (बेटपे बेठते) भाइ अेकदम फंटुस हो.. कोइ नही देखेगा.. भाभी वो रश्मीभाभीसे बात कर रही हे वो कीसी कामसे उनको मीलने आइ हे.. यहा सीर्फ हम दोनो अकेले ही हे..
देवायत : लेकीन बेबी कीसीने देखलीया तो गडबड होजायेगी.. अभीतो तेरी सगाइ हुइ हे..
पुनम : भाइ मुजे आपसे अकेलेमे कुछ बाते करनी हे.. मे यही होलमे आपका इन्तजार करुगी.. देर रात आजायेगा.. वरना हम पीछे सामको पार्कमे चले जायगे.. कहो कहा मीलोगे..?
देवायत : अैसी क्या बात हे जो पार्कमे बुला रही हे.. नही बेबी.. हम यही घरमेही बात करेगे..
पुनम : (गालपे कीस करते खडी होते) तो ठीक हे भाइ मे आपका यही होलमे इन्तजार करुगी भाभी सोजाये तब आजाना.. मुजे आपसे कुछ जरुरी बात करनी हे वोभी हम दोनोके बारेमे..
कहेते वो बहार चली गइ तो देवायत उसे देखतेही रेह गया ओर उनके दीलकी धडकन तेज चलने लगी.. पता नही क्यु अब उसने मानलीया था की मेरी बहेन अब बहेन नही रहेगी.. क्यु मेरे पीछे इतनी पागल हे.. जबकी लखन भीतो उनका भाइ हे.. ओर उनकीही उमरका हे.. फीरभी मेरे पीछे क्यु पडी हे..जरुर कोइ बात होगी.. ओर देवायत उसे नाराज भीतो नही करना चाहता क्युकी वो उसे बेहद प्यार करता था..
उसे बाबाकी सब बाते याद आने लगती हे, बाबानेही इन्डायरेक्टली अपनी बहेनसे सबंध होनेकी बात कही थी.. तो क्या मुजे मेरी बहेनसेही सब करना पडेगा.. यही सब सोचते उनका लंड खडा होने लगा अब वो अपनी बहेनको अलग नजरसे देखने लगा, वो जटसे बाथरुममे घुस जाता हे ओर फ्रेस होके बहार आता हे तब मंजु ओर रश्मी बाते कर रहीथी.. रश्मी देवायतके प्लानके मुताबीकही मंजुको मीलने आइ थी..तब देवायत मंजुके पास बेठ जाता हे तभी मंजु देवायतसे कहेती हे..
मंजुला : देवु.. ये रश्मीभाभी कुछ केह रही हे.. आप ठीकसे समजलो.. वो कोइ हमारे जमीनके कागजके बारेमे बात कर रही हे.. जो राधवजी ओर मुनीमजीने उनके घर रखे हे..
देवायत : (हसते) हां भाभी कहीये कीस कागजकी आप बात कर रही हे..?
रश्मी : (कातील स्माइल करती) देवरजी आपके भाइ ओर वो मुनीमजीने कुछ कागज रखे हे मेने देखा तो कुछ आपके नामके थे लगता हे आपकी कीसी जमीनके पेपर हे.. दोनोही मीलके कुछ खजानेकी बात कर रहेथे मेने कइ बार सुना हे.. ओर कुछ गांवके लोगोकेभी कागजात हे जो इन्होने ब्वाजके पैसे के बदले लेलीये हे.. सायद इनकीही सजा उनको मीली हे.. सब देखलो आप.. अबतो वो इनके कीसी कामके नही रहे..
देवायत : भाभी क्या गांवके लोगोकाभी हे..? कीतने कागजात हे..?
रश्मी : अरे बाबा बहोत हे पुरा बक्सा भरा हे सब कागजात देखनेमे पुरा दीन नीकल जायेगा.. आपकेभी बहोत सारे हे.. देखलो.. इनकी वजहसेही आपसे दुस्मनी मोडली.. ओर देखो.. आपही दोनोको होस्पीटल लेके गये.. देवरजी समय नीकालके देखलो ओर जीनके हे उसे देदो..
मंजुला : देवु कल कुछ खास काम ना होतो जाके देखलो.. हमारे गांवके गरीब लोगोके होगे.. देदो बेचारे खुस होजायेगे..बेचारे दो पैसे कमायेगे तो हमे दुआ मील जायेगी..
रश्मी : दीदी तबतो अच्छा हे कुछ लोगोकी दुआअे मील जायेगी.. देवरजी आप देखलो.. ओर हां दीदी इनके खानेकी चीन्ता मत करना वहा देर होजायेगी तो मेही खीला दुगी ये वही खा लेगे मे बनादुगी..
मंजुला : (हसते) ठीक हे भाभी.. ये कल आजायेगे.. देखना इस बातका ओर कीसीसे जीक्र मत करना..
रश्मी : अरे नारे.. बाबा.. तभीतो सीधेही आपके पास चली आइ.. अब जोभी करना हे आप देखलो..मुजे इन कागजोसे कोइ लेना देना नही हे..
कहेते देवायतकी ओर कातील स्माइल करते देखती रही.. फीर कुछ बाते करके फटाफट चली गइ.. क्युकी कलके लीये उन्हे बहुत सारी तैयारीया करनी थी.. ये बात सीर्फ रश्मी ओर देवायतही जानते थे.. ओर इस बातके लीये रश्मी आज काफी अेक्साइटेड थी.. उधर चंदाके गांवमे चंदाने खाना बनालीया तो चंदा धीरे धीरे चलते सब खाना बहार लेके आगइ तो धिरेन उनको देखताही रेह गया..
क्युकी वोभी जवान ओर समजदार हो गयाथा उसे अपनी मम्मीके बेडकी हालत देखके कुछ संका होने लगीथी ओर अभी इनकी मम्मीको अैसे चलते देखके संका ओरभी मजबुत होगइ.. लेकीन वो अपनी मम्मीकी सीचुअेशनके बारेमे भी सोचता था तो मन ही मन खुसभी हो रहाथा तब दोनोही खानेके लीये बेठ गये तब चंदा धिरेनको सब जोबके बारेमे पुछने लगी.. तभी धिरेनने मौका देखतेही बात छेडदी..
धिरेन : (हीचकीचाते) मोम.. सुना आपने.. दीदीको क्या प्रोबलेम हुइ हे.. मुजे दीदीने सब बतादीया..
चंदा : (थोडा जेंपते) हां.. मुजे बताया उसने.. बहुत छुपाया..उसने.. ये सब करनेकी क्या जरुरतथी उसे..
धिरेन : (धीरेसे) मोम.., आपकी दीदीसे ओर कोइ बात हुइ.. मुजसे सब बाते बताइ हे..
चंदा : (सरमाते) हां.. हुइ बात लेकीन..(रुकते) मुजे पता हे.. तु क्या कहेना चाहता हे..
धिरेन : (हीचकीचाते धीरेसे) मोम.. वो आपके बारेमे..
चंदा : (अब खुलके बात करलेना चाती थी) हां.. में तभी तो इधर आगइ हु, वरना मंजुको कभीभी होस्पीटल लेजाना पडता हे.. धिरेन मुजे लगता हे इस बारेमे हमे अेक बार खुलके बात करलेनी चाहीये.. तुजे पता हे तेरी दीदी क्या चाहती हे..? बस मुजे सीर्फ तेरी राय जाननी हे.. तु क्या कहेना चाहता हे..
धिरेन : (मनमें खुस होते) मोम.. मेरे खयालसे दीदी सही केह रही हे..मोम..मुजे इस सादीसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. आपको ये कदम पहेलेही उठालेना चाहीये था.. जब मे छोटा था.. खैर छोडीये उनको कबतक अेसे घुटघुटके जीयेगी.. मुजे पता हे अकेली ओरतको जींदगी काटना कीतना मुस्कील हे..
चंदा : (हसते) अच्छा..? तुजे बडा ज्ञान हे इस बारेमे..?
धिरेन : मोम.. बुरा मत मानना.. मेने अेसे दोतीन केस देखे हे.. अेक मेरी टीचर ओर अेक मेरे दोस्तकी भाभी.. बस इनके आगे मे कुछ कहेना नही चाहता.. आप जोभी नीर्णय लेगी इसमे मुजे खुसी होगी..
चंदा : (धिरेनको परखते) अेक बार फीर सोचले.. मेरे इस कदमसे तुजे लोगोके तानेभी सुनने पडेगे..
धिरेन : मोम.. मुजे कीसीकी परवा नही.. बस मे आपकी खुसी चाहता हु.. मे चाहता हु आप अपनी बाकी की लाइफ खुलके जीये.. इनमे आपकीभी जींदगी सवर जायेगी ओर मंजुदीकी भी.. वरना उनका घरतो टुटही जायेगा.. वो आपको बहुत चाहती भी हे ओर मानती भी हे..
चंदा : (हसते) चल ठीक हे.. मुजे खुसी हे मेरा बेटा मेरे बारेमे इतना कुछ सोचता हे ओर मेरी केर करता हे..
धिरेन : (हसते) थेन्कस मोम.., तो क्या आप.. सादी..
चंदा : (सरमाते हसते) नही.. अभी देर हे.. अब जोभी नीर्णय लेना हे तेरी सादीके बाद.. तेरी पुनमकोभी तो बताना पडेगा.. अब हमे उनकाभी सोचना पडेगा.. देखतेहे वो क्या कहेती हे..
धिरेन : (सरमाते) मोम.. इस बारेमे मेरी पुनमसे बात होगइ हे.. वो राजी हे.. उसे कोइ अेतराज नही..
चंदा : (सरारतसे) अच्छा.. मेरा बेटा अभीसे बीवी की राय लेने लगा.., हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मोम.. आपभीनां.. चलो ठीक हे जेसे आपकी मरजी.. मोम.. आप जोभी नीर्णय लेगी.. ओर जबभी जाना चाहेगी.. हमे मंजुर हे.. बस..?
चंदा : (हसते) हंमम.. चल ठीक हे तेरी सादीके बाद कुछ सोचेगे..
अेसीही बाते करते दोनोने लंच फीनीस कीया दोनोने खुलके बात करलीतो दोनोही अपने आपको हल्का महेसुस करने लगे.. धिरेन उपर अपने रुममे जाने लगा तो बीचमे चंदाका रुम आया तो उसे देखे बीना नही रहा गया ओर वो धीरेसे अंदर चला गया देखातो पुरा बेड अस्त व्यस्त था ओर अचानक उनकी नजर नीचे फर्सपे चली गइ तो वहा बेडसे बाथरुम तक चंदा ओर देवायतके कामरसकी बुंदे फर्सपे गीरी हुइथी..
तब धिरेनको जरासी भी संका नही रहीकी उनके जानेके बाद उनकी मम्मी चंदा ओर जीजु देवायतके बीच क्या क्या हुआ हे.. वो फोरन अपने रुममे जाके बेडपे लेट गया ओर चंदा देवायतके बारेमे सोचता रहा उनको कब नींद आगइ पताही नही चला.. तो दुसरी ओर चंदा कीचनका सब काम खतम करके उपर आइ ओर अपना बेड अेसे खुला देखके चोंक गइ..
उसे अपने बेडरुमका दरवाजा बंध ना करनेकी गलतीका अहेसास होगया.. वो सोचते बेडको सही करने लगीकी कही ये धिरेनने देख तो नही लीया..? वो यही सब सोचके बहुतही सरमीन्दा होने लगी.. की धिरेनको पता चल गया तो मे केसे उनसे आंख मीला पाउगी.. ओर दुसरी ओर देवायतके बीना वो रेह भीतो नही सकती थी.. यही सोचते उसने बेडकी चदर चेन्ज करली ओर फर्सपे पोछा लगाके सब साफ भी करलीया.. वो देवायतसे चुदाइ करवाके बहुत थक गइ थी तो आराम करते बेडपे सो भी गइ....
कन्टीन्यु
अध्याय - २८
कहातो नीलम अेक बरतन लेके चली गइ, इनके जातेही रमाने दरवाजा बंध करलीया ओर भानुका हाथ पकडके उसे अपने रुममे लेगइ ओर दोनोही आपसमे लीपट गये ओर अेक दुसरेको पागलोकी तराह चुमने लगे फीर रमा अपनी सारी कमर तक उची करके बेडपे लेट गइ क्युकी कपडे नीकालनेका टाइम नही था तब भानु भी पेन्टको नीचे करते चडी नीची करलेता हे ओर रमाके पैरके बीच बेठने लगता हे तो रमाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके फैला दीये.. ओर भानुके सामने कामुक नजरोसे सरमाते देखने लगी....अब आगे

दोनोही कामाग्नीमे जलते मदहोस होगये थे भानु उनके पेरके बीच बेठतेही उनके उपर जुक गया ओर रमाके ब्लाउसके बटन खोल दीया तब रमाके दोनो बुब्स उछलके बहार आगये तो भानुने उनके बुब्सको मुहमे लेलीया ओर हल्कासा होंठमे नीपलको दबाते चुसने लगा तब रमा नसीली आंख करते मदहोसीमे छागइ ओर भानुके बालको सहेलाने लगी तभी भानुने अपने होंठ रमाके होठपे रखदीया ओर दोनोही अेक दुसरेके होंठ चुमते मदहोसीके नसेमे जुमने लगे..

दोनो काफी देर अेक दुसरेके होंठ चुमते रहे ओर अेक दुसरेकी जीभ नीकालते अेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे रमा बीलकुल अपना होस खो चुकीथी अब नीलमभी आजाये तोभी वो भानुको छोडने वाली नही थी, बस उनकोतो सीर्फ सेक्स करनाथा वो अब भानुको पुर्ण समर्पीत हो चुकीथी ओर सीर्फ भानुको ही अपना पती मानती थी, उसने हाथ नीचे लेजाके लंडको हाथसे पकड लीया ओर अपनी चुतमे रखके लंडको अपनी गुफाका रास्ता दीखा दीया तब अेकही जटकेमे भानुने पुरा लंड रमाकी चुतमे उतार दीया..

भानु चुतमे लंड टालके रमाकी गरदनमे मुह रखते उनसे चीपक गया.. तो रमाभी अपनी चुतमे भानुके लंडको महेसुस करते मदहोस होने लगी ओर भानुके होंठ चुमते नसीली आंख करते चुदाइका आनंद लेने लगी भानु हाथके बल उचा होगया ओर धीरे धीरे लंडको बहार तक नीकालते जोरोसे धका मारके रमाकी चुतमे जडतक घुसाते रमाकी जोरोसे चुदाइ करने लगा तब लंड रमाकी बच्चेदानीसे टकराने लगा ओर रमाकी हर धकेके साथ आहे नीकलने लगी.. इतने तेज धकेकी वजहसे उनका बेडभी चरमारेते आवाज करने लगा..

थोडीही देरमे दोनो अेकदम उतेजीत होगये ओर रमा भानुको जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. ओर भानुने अपनी चोदनेकी स्पीड बढादी तभी रमाने जोरोसे भानुको खीचके अपने आपसे चीपका लीया ओर उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर अपना होंठ भानुके होंठोसे मीलाके लीपलोक करलीया ओर रमाकी आंख बडी करते भानुको देखती रही तभी भानुने अपने लंडपे रमाका गरम पानी महेसुस कीया..

तो भानुके लंडमेभी सुरसुराहट होने लगी ओर भानुने लंडको चुतमे जडतक घुसादीया ओर रमाके गर्भासयके उपर अपने वीर्यकी पीचकारीया मारते बोछार करने लगा.. दोनोही अेक साथ जडने लगे.. ओर भानु रमाके उपर ढेर हो गया.. ओर दोनो अपनी सांस दुरस्त करने लगे तब रमा भानुकी पीठ सहेलाती रही.. तभी भानुका लंड मुरजाके रमाकी चुतसे बहार नीकल गया ओर रमाकी चुतसे दोनोका कामरस बहेने लगा..
फीर भानु उतर गया तो रमा जटसे बेठ गइ ओर अपनी पेन्टीसे अपनी चुतको साफ करने लगी फीर भानुके लंडकोभी पोछके साफ करदीया फीर दोनोही खडे होके अपने कपडे सही करने लगे ओर रमाने कपडे सहीसे पहेन लीये ओर अपने बालोका जुडा बनाने लगी.. तबतक भानु उसे देखता रहा.. तो रमा उसे देखके खुब सरमाइ ओर आके भानुकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोके होंठ मीलगये.. तभी बहार आवाज आइ..
तो दोनोही जटसे बहार नीकल गये भानु बहार खटीयापे बेठ गया तब रमा दरवाजा खोलने गइ देखातो बहार नीलम सब्जी ओर दुध लेके आरही थी तब रमा जटसे कीचनमे चली गइ ओर नीलम आतेही सीधी कीचनमे सब्जी ओर दुध अपनी मांको देके बहार अपने भैयाके पास बेठ गइ ओर उनसे बाते करने लगी
नीलम : भैया मे खेतोपे गइथी वहा बापु दारु पीकर पडेथे लेकीन उनके पास जमीनपे कुछ खुनके धबे थे..
भानु : (चोंकते) कौन..? मामा..? क्या केह रही हो तुम..?
नीलम : हां बडेभैया.. मेने पुछा तो कहा उल्टी हुइ थी.. आपका बोला.. तोभी घर नही आये..
रमा : (चाइ लेके बहार आते) कहासे आते.. दारु पीली होगी.. तेरे भाइसे डरतेहे.. तो कहासे आते..
नीलम : लेकीन मम्मी बापुको खुनकी उल्टीया हुइ थी..
रमा : (गुसेसे) ये आज कलकी थोडीना होती हे.. कीतने दीनोसे हो रही हे.. अब दारु पीयेगे तो यही सब होगा.. पता नही इस आदमीसे कब छुटकारा मीलेगा.. मुजेतो ठीक हे मेरी बच्चीको भी मारने लगे हे..
भानु : मामी.. क्या इनको अस्पताल लेजाउ..?
रमा : कोइ जरुरत नही हे.. मे ले गइथी डोक्टरने मना करदीया कहा इनका लीवर खराब होगया हे बदलना पडेगा कहासे नीकाले.. खर्चाभीतो बहुत आता हे.. ओर बदलदीया तोभी क्या फायदा काम धंधातो करना नही.. बस दारु पीके पडे रहो.. अबतो इनसे छुटकारा मीलजाये तो हम मां बेटी वहा आजाये..
अेसेही बाते करते रमाने खाना बनालीया ओर तीनोने मीलके खा लीया फीर भानु रमाको कुछ पैसे देके वहासे नीकलने लगा.. नीकलनेसे पहेले नीलमको कुछ काम सोंपके दोनो अेक बार फीरसे अेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर होंठो मीलाके स्मुच करने लगे.. तो रमाने फीर अेक बार भानुके साथ सादी करके साथ रहेनेकी बात की ओर भानु उनको जल्द लेजानेका वादा करके नीकल गया..
तभी इधर देवायत गहेरी नींमे सोयाथा तभी उसे अपने होंठपे गीलापन महेसुस हुआ तो उसने आंख खोलके देखा तो ड्रेसके अंदर दो छोटे छोटे बुब्सके दर्शन होने लगे.. वो थोडी देर उसे देखता रहा.. ओर उनका लंड धीरे धीरे खडा होने लगा, फीर नजर उची करते देखातो पुनम उनपे जुकके इनके होंठ चुम रहीथी.. तो वो जटसे बेडपे बेठ गया..

देवायत : (थोडा गुसेसे) छुटकी ये क्या कर रही हे.. कोइ देख लेता तो..?
पुनम : (बेटपे बेठते) भाइ अेकदम फंटुस हो.. कोइ नही देखेगा.. भाभी वो रश्मीभाभीसे बात कर रही हे वो कीसी कामसे उनको मीलने आइ हे.. यहा सीर्फ हम दोनो अकेले ही हे..
देवायत : लेकीन बेबी कीसीने देखलीया तो गडबड होजायेगी.. अभीतो तेरी सगाइ हुइ हे..
पुनम : भाइ मुजे आपसे अकेलेमे कुछ बाते करनी हे.. मे यही होलमे आपका इन्तजार करुगी.. देर रात आजायेगा.. वरना हम पीछे सामको पार्कमे चले जायगे.. कहो कहा मीलोगे..?
देवायत : अैसी क्या बात हे जो पार्कमे बुला रही हे.. नही बेबी.. हम यही घरमेही बात करेगे..
पुनम : (गालपे कीस करते खडी होते) तो ठीक हे भाइ मे आपका यही होलमे इन्तजार करुगी भाभी सोजाये तब आजाना.. मुजे आपसे कुछ जरुरी बात करनी हे वोभी हम दोनोके बारेमे..
कहेते वो बहार चली गइ तो देवायत उसे देखतेही रेह गया ओर उनके दीलकी धडकन तेज चलने लगी.. पता नही क्यु अब उसने मानलीया था की मेरी बहेन अब बहेन नही रहेगी.. क्यु मेरे पीछे इतनी पागल हे.. जबकी लखन भीतो उनका भाइ हे.. ओर उनकीही उमरका हे.. फीरभी मेरे पीछे क्यु पडी हे..जरुर कोइ बात होगी.. ओर देवायत उसे नाराज भीतो नही करना चाहता क्युकी वो उसे बेहद प्यार करता था..
उसे बाबाकी सब बाते याद आने लगती हे, बाबानेही इन्डायरेक्टली अपनी बहेनसे सबंध होनेकी बात कही थी.. तो क्या मुजे मेरी बहेनसेही सब करना पडेगा.. यही सब सोचते उनका लंड खडा होने लगा अब वो अपनी बहेनको अलग नजरसे देखने लगा, वो जटसे बाथरुममे घुस जाता हे ओर फ्रेस होके बहार आता हे तब मंजु ओर रश्मी बाते कर रहीथी.. रश्मी देवायतके प्लानके मुताबीकही मंजुको मीलने आइ थी..तब देवायत मंजुके पास बेठ जाता हे तभी मंजु देवायतसे कहेती हे..
मंजुला : देवु.. ये रश्मीभाभी कुछ केह रही हे.. आप ठीकसे समजलो.. वो कोइ हमारे जमीनके कागजके बारेमे बात कर रही हे.. जो राधवजी ओर मुनीमजीने उनके घर रखे हे..
देवायत : (हसते) हां भाभी कहीये कीस कागजकी आप बात कर रही हे..?
रश्मी : (कातील स्माइल करती) देवरजी आपके भाइ ओर वो मुनीमजीने कुछ कागज रखे हे मेने देखा तो कुछ आपके नामके थे लगता हे आपकी कीसी जमीनके पेपर हे.. दोनोही मीलके कुछ खजानेकी बात कर रहेथे मेने कइ बार सुना हे.. ओर कुछ गांवके लोगोकेभी कागजात हे जो इन्होने ब्वाजके पैसे के बदले लेलीये हे.. सायद इनकीही सजा उनको मीली हे.. सब देखलो आप.. अबतो वो इनके कीसी कामके नही रहे..
देवायत : भाभी क्या गांवके लोगोकाभी हे..? कीतने कागजात हे..?
रश्मी : अरे बाबा बहोत हे पुरा बक्सा भरा हे सब कागजात देखनेमे पुरा दीन नीकल जायेगा.. आपकेभी बहोत सारे हे.. देखलो.. इनकी वजहसेही आपसे दुस्मनी मोडली.. ओर देखो.. आपही दोनोको होस्पीटल लेके गये.. देवरजी समय नीकालके देखलो ओर जीनके हे उसे देदो..
मंजुला : देवु कल कुछ खास काम ना होतो जाके देखलो.. हमारे गांवके गरीब लोगोके होगे.. देदो बेचारे खुस होजायेगे..बेचारे दो पैसे कमायेगे तो हमे दुआ मील जायेगी..
रश्मी : दीदी तबतो अच्छा हे कुछ लोगोकी दुआअे मील जायेगी.. देवरजी आप देखलो.. ओर हां दीदी इनके खानेकी चीन्ता मत करना वहा देर होजायेगी तो मेही खीला दुगी ये वही खा लेगे मे बनादुगी..
मंजुला : (हसते) ठीक हे भाभी.. ये कल आजायेगे.. देखना इस बातका ओर कीसीसे जीक्र मत करना..
रश्मी : अरे नारे.. बाबा.. तभीतो सीधेही आपके पास चली आइ.. अब जोभी करना हे आप देखलो..मुजे इन कागजोसे कोइ लेना देना नही हे..
कहेते देवायतकी ओर कातील स्माइल करते देखती रही.. फीर कुछ बाते करके फटाफट चली गइ.. क्युकी कलके लीये उन्हे बहुत सारी तैयारीया करनी थी.. ये बात सीर्फ रश्मी ओर देवायतही जानते थे.. ओर इस बातके लीये रश्मी आज काफी अेक्साइटेड थी.. उधर चंदाके गांवमे चंदाने खाना बनालीया तो चंदा धीरे धीरे चलते सब खाना बहार लेके आगइ तो धिरेन उनको देखताही रेह गया..
क्युकी वोभी जवान ओर समजदार हो गयाथा उसे अपनी मम्मीके बेडकी हालत देखके कुछ संका होने लगीथी ओर अभी इनकी मम्मीको अैसे चलते देखके संका ओरभी मजबुत होगइ.. लेकीन वो अपनी मम्मीकी सीचुअेशनके बारेमे भी सोचता था तो मन ही मन खुसभी हो रहाथा तब दोनोही खानेके लीये बेठ गये तब चंदा धिरेनको सब जोबके बारेमे पुछने लगी.. तभी धिरेनने मौका देखतेही बात छेडदी..
धिरेन : (हीचकीचाते) मोम.. सुना आपने.. दीदीको क्या प्रोबलेम हुइ हे.. मुजे दीदीने सब बतादीया..
चंदा : (थोडा जेंपते) हां.. मुजे बताया उसने.. बहुत छुपाया..उसने.. ये सब करनेकी क्या जरुरतथी उसे..
धिरेन : (धीरेसे) मोम.., आपकी दीदीसे ओर कोइ बात हुइ.. मुजसे सब बाते बताइ हे..
चंदा : (सरमाते) हां.. हुइ बात लेकीन..(रुकते) मुजे पता हे.. तु क्या कहेना चाहता हे..
धिरेन : (हीचकीचाते धीरेसे) मोम.. वो आपके बारेमे..
चंदा : (अब खुलके बात करलेना चाती थी) हां.. में तभी तो इधर आगइ हु, वरना मंजुको कभीभी होस्पीटल लेजाना पडता हे.. धिरेन मुजे लगता हे इस बारेमे हमे अेक बार खुलके बात करलेनी चाहीये.. तुजे पता हे तेरी दीदी क्या चाहती हे..? बस मुजे सीर्फ तेरी राय जाननी हे.. तु क्या कहेना चाहता हे..
धिरेन : (मनमें खुस होते) मोम.. मेरे खयालसे दीदी सही केह रही हे..मोम..मुजे इस सादीसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. आपको ये कदम पहेलेही उठालेना चाहीये था.. जब मे छोटा था.. खैर छोडीये उनको कबतक अेसे घुटघुटके जीयेगी.. मुजे पता हे अकेली ओरतको जींदगी काटना कीतना मुस्कील हे..
चंदा : (हसते) अच्छा..? तुजे बडा ज्ञान हे इस बारेमे..?
धिरेन : मोम.. बुरा मत मानना.. मेने अेसे दोतीन केस देखे हे.. अेक मेरी टीचर ओर अेक मेरे दोस्तकी भाभी.. बस इनके आगे मे कुछ कहेना नही चाहता.. आप जोभी नीर्णय लेगी इसमे मुजे खुसी होगी..
चंदा : (धिरेनको परखते) अेक बार फीर सोचले.. मेरे इस कदमसे तुजे लोगोके तानेभी सुनने पडेगे..
धिरेन : मोम.. मुजे कीसीकी परवा नही.. बस मे आपकी खुसी चाहता हु.. मे चाहता हु आप अपनी बाकी की लाइफ खुलके जीये.. इनमे आपकीभी जींदगी सवर जायेगी ओर मंजुदीकी भी.. वरना उनका घरतो टुटही जायेगा.. वो आपको बहुत चाहती भी हे ओर मानती भी हे..
चंदा : (हसते) चल ठीक हे.. मुजे खुसी हे मेरा बेटा मेरे बारेमे इतना कुछ सोचता हे ओर मेरी केर करता हे..
धिरेन : (हसते) थेन्कस मोम.., तो क्या आप.. सादी..
चंदा : (सरमाते हसते) नही.. अभी देर हे.. अब जोभी नीर्णय लेना हे तेरी सादीके बाद.. तेरी पुनमकोभी तो बताना पडेगा.. अब हमे उनकाभी सोचना पडेगा.. देखतेहे वो क्या कहेती हे..
धिरेन : (सरमाते) मोम.. इस बारेमे मेरी पुनमसे बात होगइ हे.. वो राजी हे.. उसे कोइ अेतराज नही..
चंदा : (सरारतसे) अच्छा.. मेरा बेटा अभीसे बीवी की राय लेने लगा.., हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मोम.. आपभीनां.. चलो ठीक हे जेसे आपकी मरजी.. मोम.. आप जोभी नीर्णय लेगी.. ओर जबभी जाना चाहेगी.. हमे मंजुर हे.. बस..?
चंदा : (हसते) हंमम.. चल ठीक हे तेरी सादीके बाद कुछ सोचेगे..
अेसीही बाते करते दोनोने लंच फीनीस कीया दोनोने खुलके बात करलीतो दोनोही अपने आपको हल्का महेसुस करने लगे.. धिरेन उपर अपने रुममे जाने लगा तो बीचमे चंदाका रुम आया तो उसे देखे बीना नही रहा गया ओर वो धीरेसे अंदर चला गया देखातो पुरा बेड अस्त व्यस्त था ओर अचानक उनकी नजर नीचे फर्सपे चली गइ तो वहा बेडसे बाथरुम तक चंदा ओर देवायतके कामरसकी बुंदे फर्सपे गीरी हुइथी..
तब धिरेनको जरासी भी संका नही रहीकी उनके जानेके बाद उनकी मम्मी चंदा ओर जीजु देवायतके बीच क्या क्या हुआ हे.. वो फोरन अपने रुममे जाके बेडपे लेट गया ओर चंदा देवायतके बारेमे सोचता रहा उनको कब नींद आगइ पताही नही चला.. तो दुसरी ओर चंदा कीचनका सब काम खतम करके उपर आइ ओर अपना बेड अेसे खुला देखके चोंक गइ..
उसे अपने बेडरुमका दरवाजा बंध ना करनेकी गलतीका अहेसास होगया.. वो सोचते बेडको सही करने लगीकी कही ये धिरेनने देख तो नही लीया..? वो यही सब सोचके बहुतही सरमीन्दा होने लगी.. की धिरेनको पता चल गया तो मे केसे उनसे आंख मीला पाउगी.. ओर दुसरी ओर देवायतके बीना वो रेह भीतो नही सकती थी.. यही सोचते उसने बेडकी चदर चेन्ज करली ओर फर्सपे पोछा लगाके सब साफ भी करलीया.. वो देवायतसे चुदाइ करवाके बहुत थक गइ थी तो आराम करते बेडपे सो भी गइ....
कन्टीन्यु



































