Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 8 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६५

भलेही लखनका लंड देवायतसे काफी छोटा ओर पतला था.. लेकीन अपनी प्यास बुजानेके लीये काफी था यही सोचते वो लखनसे चुदवानेके लीये राजी होगइ.. तब थोडी देरकी धकापैनी चुदाइके बाद लखन रजीयाकी चुतको पानीसे भरके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब रजीया लखनकी कमरको पकडते अपनी चुतको आडी टेडी करने लगी.. ओर थोडी कसरतके बाद वोभी जड गइ.. ओर दोनो अ‍ेसेही पडे रहे.. तब लखनका लंड सीकुडके रजीयाकी चुतसे अपने आपही बहार नीकल गया.. तब रजीया अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी.. ओर लखनके लंडकोभी अपने हाथोसे पोछ दीया.. फीर लखन ओर रजीया बाथरुममे चले गये ओर पानीसे साफ होके बहार आगये....अब आगे

लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. यही सोजाओ सुबह जल्दी चले जाना.. हम थोडी देरके बाद फीर करेगे..

रजीया : (सरमाते धीरेसे) मालीक आप कोइ गोली बोली खालो.. बहुत जल्दी पानी नीकाल देते हो.. हमतो प्यासी रेह जाती हे.. अपनी बीवीको कैसे खुस करपाओगे..?

लखन : (सरमाते) यार मेने कहा कभी चुदाइ कीहे.. तो मुजे मालुम होगा.. अब तुही मुजे सब सीखा देनां.. तुही बता कोनसी गोली खानी हे.. मे लेकर आउगा..

रजीया : (सरमाते हसते) मुजे थोडी पता.. आप कोइ मेडीकल स्टोरपे जाके पुछलो वो लोग दे देगे..

दोनो बाते करते बेडपे अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. तब नीचेकी ओर देवायत ओर पुनमभी चुदाइमे मसगुल थे उपर नीचे दोनो रुममे चुदाइका दोर चल रहाथा.. अ‍ेक रुममे वासना मे चुदाइ हो रहीथी तो दुसरे रुममे प्यारका अदभुत खेल खेलते चुदाइमे मसगुल थे.. देवायत ओर पुनम दोनोही अ‍ेक दुसरेमे समा जानेकी कोसीस करते चुदाइ कर रहेथे तब पुनम मदहोसीमे देवायतके गलेमे हाथ डालके चुदवा रही थी..





अब तक पुनम तीन बार जड चुकीथी फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. पुनम देवायतकी स्टेमीना देखके बहुतही खुस थी.. वो बस यही चाहतीथी की देवायत उसे पुरी रात लगातार चोदताही रहे.. जब वो जडनेको आती तब देवायतको बाहोमे भीच लेती ओर होठोको लीपलोक कर लेती.. ओर जडजाती.. फीर वापस उतेजीत होजाती ओर देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगती.. चुदवाते बस मनमे अ‍ेकही कामना करती की देवायत उसे जल्द प्रेगनेन्ट करदे..





जब देवायत जडता तब पुनम देवायतकी कमरमे पैरसे आटी लगा लेती ताकी देवायतके पानीका अ‍ेकभी बुंद बहार ना नीकले दोनो पुरी रात चुदाइ करते रहे.. तब देवायतभी पुनमको अलग अलग पोजीसमे चोदता रहा कभी पीछेसे चीपकते चोद लेता तो कभी पुनमको अपनी गोदमे बीठाते चुदाइ करता तो कभी पुनमको अपने उपर चडाके सवारी करवाता.. तो कभी दोनो आमने सामने अ‍ेक दुसरेके पैरोमे पैर फसाके बैठकर चुदाइ करते.. देवायत पुरी रात पुनमको अलग अलग तरीकेसे चोदता रहा ओर पुनमकी चुतको भरके हरी भरी करता रहा..





देवायतने आजभी पुनमको चोद चोदके तृप्त करदी.. फीर दोनोही नहाके अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. तब उपर लखनने अ‍ेक घंटेके बाद आराम करके फीरसे अ‍ेक बार रजीयाको चोदलीया.. तब रजीयाभी दो बार चुदवाके वापस अपने रुममे चली गइ ओर दयाके पास जाके चुपकेसे सो गइ.. ओर अ‍ेसेही सुबह होगइ तब आज दयाके अलावा सब देर तक सोते रहे तो रजीयाभी तबीयतका बहाना बनाके सोती रही.. तब देवायत मोका देखतेही पुनमके उपर चदर डालके अपने रुममे चला गया.. ओर सो गया..

सब लोग ९ बजे कंपलीट होकर बहार आगये आज पुनमभी धीरे धीरे थोडा लंगडाते चलके बहार आगइ आज वो पुरी रात देवायतसे चुदवाती रही.. तो उनकी चालभी बदल चुकीथी.. लेकीन उस तरफ कीसीका ध्यान नही गया क्युकी दया ओर रजीया अपने काममे बीजीथी.. तब लखनभी तैयार होकर देवायतके सामने बेठ गया ओर दोनोको गुड मोर्नींग वीस कीया.. तो पुनमभी देवायतके पास बेठीथी हसने लगी.. ओर अ‍ेक पैरसे देवायतके पैरको सहेलाते लखनसे बात करने लगी..

पुनम : (हसते) लखनभैया क्या बात हे आज सुबह सुबह गुडमोर्नींग वीस कीया.. लगता हे रातमे भाभीसे फोनपे बात होगइ लगती हे.. काफी खुस दीख रहे हो.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमात हसते) देखा भैया सुबह सुबह ही टांग खीचने बैठ गइ.. तो क्या तु धिरेनसे बात नही करती..? तुभीतो आज बहुत खुस दीख रही हे, हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बस.. जगडा नही सांतीसे चाइ नास्ता करलो.. लखन क्या हुआ वो माल भेज दीया..?

लखन : हां भैया वो कलही ट्रकमे भरवाके भेज दीया.. क्या आप खेतोपे आ रहे हो..? ओर वो भानुभाइ आ गये क्या..?

देवायत : हां कल उनके मामा गुजर गये.. सामकोही आगये आज खेतोपे आयेगे.. ओर सुन वो सादीकी तारीखभी आगइ हे.. दोनोकी आजसे चौदवे दीनमे सादी हे.. तो आपकी सब खरीदीकी लीस्त बनाके तैयारी करना सुरु करदो..

पुनम : (देवायतका पैर पैरसे सहेलाते) भाइ सादी कहा रखी हे.. क्या यही हवेलीपे हे..?

देवायत : हां पुनो जीस तराह तुन सबकी सगाइ रखीथी उसी तराह सादीभी रखेगे.. सब यही आजायेगे.. ओर हम सादी अ‍ेकदम सादाइसे कर रहेहे.. तुम दोनोको कोइ अ‍ेतराजतो नही..? सीर्फ हम घरकेही लोग होगे.. फीरभी तुम लोग कहोगे अ‍ैसेही सादी रखेगे..

पुनम : (खुस होते) भाइ अच्छा कीया.. हमे कोइ ढंढोरा नही पीटना.. क्यु लखन भैया..?

लखन : हां भाइ दीदी सही केह रही हे.. ये सब दुनीयाको दीखाके क्या फायदा.. हम सादी सादाइसे करगे..

देवायत : (हसते) अरे बंदर तो सुधर गया..हें..हें..हें.. चल ठीक हे इतनी भी सादाइसे नही.. समजे..

फीर तीनो मस्तीया करते चाइ नास्ता करने लगे जब चाइ नास्ता करलीया तब लखन खेतोपे चला गया.. तो पुनमने इसारेसे देवायतको रुममे बुला लीया तब देवायत उनके रुममे चला गया तो पुनमभी देवायतके रुममे पीछे चली गइ ओर दरवाजा बंध करतेही दोडके जोरोसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. फीर देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी ओर देवायतका चहेरा पुरा गीला करदीया.. ओर आखीर दोनोके होंठ मील गये.. ओर पुनमने आंख बंध करके मदहोसीमे अ‍ेक लंबा चुंबन लेलीया..

पुनम : (आंसु बहाते) भाइ अब आपके बीना नही रहा जाता.. सादी तक मुजसे दुर मत जाइअ‍े..

देवायत : (प्यारसे सरको चुमते) बस बेबी सांत होजा.. मे कहा तुमसे दुर जा रहा हु.. बस यहीतो हु.. कामभी जरुरी हेनां..? क्या तेरी भाभीके पास चलेगी..? हम खाना खाके सामको जायेगे..

पुनम : हां भाइ तबतो ठीक हे तब में चलुगी.. आज तो आपने मेरी चालही बदलदी.. आप रातमे कीतना जोसमे (चुदाइ) करते थे.. मुजेतो पुरी नीचोडही ली.. अभीभी नीचे मीठासा दर्द हो रहा हे..

देवायत : (हसते) बेबी क्या करु.. तुजे देखतेही सब कंट्रोल खो बेठता हु बस यही लगता हे तुजे दिन रात चोदता ही रहु.. इतना प्यार करता हु तुजे.. पता नही जब तु चली जायेगी तब क्या करुगा मे..

पुनम : भाइ वादा करो.. जब धिरेन ओफीस चला जाये तब आप मुजसे मीलने आओगे.. मे भी आपके बीना नही रेह पाउगी.. हमारे पास पुरा साम तकका वक्त होगा.. तब हम दोनो खुब प्यार करेगे.. आओगेनां..?

देवायत : हां पुनो आनाही पडेगा.. मेभी अब तेरे बीना नही रहे पाउगा..

पुनम : भाइ वो दया केह रहीथी सादीके बाद वोभी मेरे साथ रहेगी.. क्या आपने उनको कहा हे..?

देवायत : हां पुनो ताकी तुजे अकेला ना लगे.. तुजे कंपनी मीलती रहेगी ओर काममेभी हाथ बटायेगी..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ क्या ये ठीक होगा..? मतलब हमे मीलनेमे प्रोबलेमतो नही होगी..?

देवायत : नही पुनो दयासे कोइ खतरा नही.. वो होगीतोभी हमे फर्क नही पडेगा.. मे उसे समजा दुगा.. तु उनकी टेन्शन मत ले.. मेरी खास राजदार हे मे मौका मीलतेही उनसे बात करलुगा..

पुनम : भाइ देखना कही गडबड ना होजाये वरना मे वहा अकेली रेह लुगी आप मेरी टेन्शन मत लो..

देवायत : चल आगे देखतेहे हमे क्या करना.. ओके..? चल मे चलता हु..

पुनम : (अ‍ेकदम बाहोमे समाके) भाइ आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (होंट चुमते) आइ लव यु टु.. बेबी बस अब जानेदे हम दो पहोरको मीलते हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ वो.. खानेके बाद मे आपके रुममेही रहुंगी.. आप जल्दी आजाना.. अब भाभीके आने तक मे आपके साथही रहुगी..

देवायत : हां अब ठीक हे मेरी बीवी होतो मेरे साथही रहेना चाहीयेनां..? अब जबतक तेरी भाभी नही आती तबतक रातमे भी मेरे रुममे मेरे साथही रहेना.. बाय..

पुनम : (होंठ चुमते) भैया अब आपकी बीवीभी हु तो साथही रहुगीनां..? चलो बाइ.. फोन करना..

कहेते ही देवायत रुमसे नीकल जाता हे तब पुनमभी धीरेसे अपने रुममे चली गइ ओर आयनेके सामने बेठते अपने आपको संवरने लगी.. अब पुनमकी भी देवायतके प्रती ओर देवायतकी पुनमके प्रती दीनभर दीन चाहत बढती ही जा रहीथी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके लीये पागल होने लगे.. तभी रमेश ओर चारुकी बेटी वंदना आगइ तो दयाने उनको सीधेही हसते हुअ‍े पुनमके रुमकी ओर इसारा करदीया तो वंदना हसते पुनमके रुममे चली गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६६

कहेते ही देवायत रुमसे नीकल जाता हे तब पुनमभी धीरेसे अपने रुममे चली गइ ओर आयनेके सामने बेठते अपने आपको संवरने लगी.. अब पुनमकी भी देवायतके प्रती ओर देवायतकी पुनमके प्रती दीनभर दीन चाहत बढती ही जा रहीथी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके लीये पागल होने लगे.. तभी रमेश ओर चारुकी बेटी वंदना आगइ तो दयाने उनको सीधेही हसते हुअ‍े पुनमके रुमकी ओर इसारा करदीया तो वंदना हसते पुनमके रुममे चली गइ....अब आगे

वहा पुना मीररके सामने अपने आपको संवार रहीथी तो वंदनाको देखतेही खुसीके मारे हसती हुइ खडी होगइ.. ओर दोडके वंदनाको गले लग गइ ओर उसे जोरसे बाहोमे भीच लीया तब वंदनाभी हसने लगी..

वंदना : (हसते) कुती.. छोड मार डालेगी क्या..? हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां मार डालुगी.. कमीनी.. कीतने दीनोके बाद मीलने आइ हे.. तो क्या करती..? आजा बेठ इधर बेडपे.. दोनो यही बेठकर बात करते हे.., ये बता चारुभाभी क्या कर रही हे कैसी हे वो..?

वंदना : (हसते) ठीक हे यार.. वो घरपे हे.., पुनो आज कल तेरे चहेरेपे काफी नीखार आगया हे.. क्या जीजु से बहोत मीलती हो.. हें..हें..हें.. कभी मीलने बीलने आतेहे की नही..? की मेरी बहेन अ‍ैसेही कच्ची कंवारी हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (अ‍ेकदम सरमाते वंदनाको मुका मारते) कमीनी.. हमने सगाइ की हे मीलनेतो आयेगेनां.. तेरी तराह नही जो अपने यार से बातभी नही करती.. हें..हें..हें.. (सीरीयस होते) वंदु.. क्या तेरी भाइसे बात हुइ..?

वंदना : (आंसु टपक गये) नही यार छोडनां.., मे उस बातको भुल चुकी हु.. (मुह दुसरी ओर करते आंसु पोछ लीये)

पुनम : (वंदनाके दोनो हाथ हाथमे लेते) वंदु.. रो मत यार.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे नही पताकी तु भाइको इतना प्यार करती थी.. यार तु अ‍ेक बार भाइसे बात करले.. ताकी तेरे दीलका बोज हल्का हो जाये.. कब तक अ‍ेसे घुट घुटके आंसु बहाते जीयेगी..? कहोतो मे बात करु..?

वंदना : (धीरेसे) नही यार उनकी अब सादी होचुकी हे.. अब मे इस बारेमें उनसे बात नही कर सकती.. बस तुजे यही कहेने आइथी.., सायद मुजे उनके साथ मेरी नोकरीके लीये सहेरमे जाना पडे.. क्या तुम हमारे साथ चलोगी..? मुजे उनके साथ अकेले जानेमें बहोत सरम आयेगी.., यार चलनां.. तु होगी तो मुजेभी कंपनी मीलेगी.. प्लीज..

दया : (अंदर पानी लेकर आते) लीजीये दीदी पानी पीजीये.. ओर कहीये आप क्या पीयेगी..?

वंदना : (पानी लेते) बस दयाबहेन आप चाइ ही पीलादो.. कीतने दीन होगये आपके हाथकी चाइ नही पी..

दया : (पानीका ग्लास वापस लेते) जी दीदी अभी बनाके लाइ मालकीन आपभी पीओगीनां..?

पुनम : (हसते) हां.. ओर सुन.. इनको दीदी कहेती हे तो फीर मुजे मालकीन क्यु कहेती हे..? हें..हें..हें..

दया : (हसते) अरे आप हमारी मालीकीन होतो मे क्या कहु..? हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) नही दया मालकीनतो भाभी हे.. आजसे तु मुजेभी दीदी कहेना.. ओके.. ओर जा हम दोनोके लीये मस्त चाइ बनाके लेआ.. ओर सुन.. वो दरवाजा बंध करती जाना..

दया : (खुस होते जाते) जी दीदी.. हें..हें..हें..

पुनम : (धीरेसे) देख वंदना तेरे पास अच्छा मौका हे.. तु भाइको अपने दीलकी बात बता दे.. ये मत सोच उनकी सादी होगइ हे.., ओर सुन.. तुजे अ‍ेक बात बता रही हु.. अभी कीसीको मत कहेना.. भाइ दुसरी सादी कर रहे हे.. मेरी सांसके साथ.., जो उनकी मौसीजी भी हे.. तुजेतो पता हे हमारे खानदानमे ये सब आम बात हे.. भाइतो ओरभी सादी कर सकते हे.. आखीर वो राजा जो हे.. भलेही अभी लोकसाही होगइ.. लेकीन आजभी लोग भाइको राजा मानते हे.. ओर तुजेतो पता हे पहेलेभी राजाको कीतनी सादीया करनी पडती थी..

वंदना : यार वोतो ठीक हे लेकीन अब काफी वक्त बदल चुका हे.. मुजसे ये सब नही होगा.. तु मेरे साथ चल रही हेनां..?

पुनम : नही यार.. देखती हु.. पहेले मे भाइसे पुछ लुगी.. अगर वो कहेगेतो मे जरुर चलुगी.. कब नीकलना हे..? भाइने कुछ टाइम दीया हे..?

वंदना : नही यार.. वो मुजसे बात करनेके लीये घर आने वालेथे.. तो आज कलमे ही आयेगे..

पुनम : (हसते) तुमसे बात करनेके लीये..? ओ..हो.. क्या बात हे.. मेरी बीलो रानी तो फीर आगे बढ.. हें..हें..हें..





वंदना : (सरमाते हसते) कमीनी वो कोइ प्यारकी बात करने नही आ रहे.. मेरे पेपरके बारेमे समजाने केलीये आ रहे हे.. तु क्यु मेरे पीछे पडी हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सीरीयस होते) सुन..वंदना.. वो..वो.. मेने भाइको तेरे बारेमे सब बता दीया हे.. वोभी तुमसे इस बारेमे बात करेगे.. अगर मौका मीलेतो अपने दीलकी बात बता देनां..

वंदना : (पुनमको अ‍ेक चपत लगाते) कमीनी उनसे सब क्यु कहा..? यार.. अब मे उनके सामने कैसे जाउगी..? मुजेतो बहुत सरम आयेगी.. क्यु बताया..? कमीनी अबतो तुजेभी साथ ले चलुगी.. तुभी तेरे भाइके साथ आजाना.. तबही उनके साथ मे बात करुगी..

पुनम : (थोडा गुसा करते) यार तेरी प्रोबलेम क्या हे..? क्या वो तुजे खा जायेगे..? चल ठीक हे मेभी साथ आउगी.. बस..? तु नही सुधरेगी.. अ‍ेसेही उंगली करते जीले घुट घुटके.. मेरे बापका क्या जाता हे..

वंदना : (पुनमके हाथ पकडते) यार तु नाराज मत होनां.. तु समज यार.. मुजे बहोत सरम आयेगी.. मेने कभी उनसे बात नहीकी.. मेरे दीलकी बात तुमसे नही कहुगी तो कीससे कहुगी.. यार मम्मीसे तो इस बारेमे बात नही कर सकती.. तुही बता.. मे क्या करु..? (आंसु बहाते) उनको देखती हु तब मुजसे रहा नही जाता मे रात भर करवटे बदल बदलके तंग आचुकी हु.. मेरी दीलकी बात सुनने वाला कोइ नही हे.. तु मेरी सीचुअ‍ेशन अच्छी तराह जानती हे.. तभी तो दीलका बोज हल्का करने में इधर आगइ.. पुनो नही जी सकतीमे अकेली.. अब तुही बता में क्या करु.. (चहेरेको हाथोमे छुपाते रोने लगी)

पुनम : (खडी होकर वंदनाको हग करते आंसु पोछते) बस.. रोना नही बस.. सांत होजा.. तुजे मेरी कसम..

वंदना : (रोते हुअ‍े पुनमकी पीठमे मुका मारते) कमीनी कसम क्यु देती हे..? तुजे पता हेनां मे तेरी कसम नही तोड सकती.. अब तेरे सीवा मेरा हे ही कौन जो मे अपने दिलकी बात उनके साथ सेर कर सकु.. पुनो अब तुही बता मुजे क्या करना चाहीये..

पुनम : (बेडपे बेठते वंदनाके आंसुु पोछते) वंदु मेरी अ‍ेक बात मानेगी..? जो कहु ध्यानसे सुनना.. फीर कोइ डीसीजन लेना.. यार तु भाइसे सादी करले.. ओर उनकी सीक्रेट वाइफ बनके अपनी जींदगी गुजार.. कीसीको कुछ पताभी नही चलेगा.. ओर तुजे तेरा प्यारभी मीलता रहेगा.. नही जीना पडेगा अ‍ेसे घुट घुटके..

वंदना : (अ‍ेक नजरसे देखते) पुनो.. ये तु क्या बोल रही हे..? ये सब कैसे पोसीबल हे..? अ‍ैसी बातोका लोगोको पता चल ही जाता हे.. ओर लोगोकी छोड मे मम्मी पापाको क्या कहुगी..? जब उनको सब पता चल जायेगा तब उनपे क्या बीतेगी..? ओर तुजेभी पता हे पापा ओर तेरे भाइ अच्छे दोस्त भी हे..

पुनम : देख वंदना.. वो सब तु मुजपे छोडदे.. मे तुजे अ‍ेक राजकी बात बताती हु.. कसम खा तु हम दोनोके बीचकी बात कीसीको नही कहेगी.. जो बात सीर्फ मेही जानती हु.. (कुछ सोचते) लगता हे मुजे तुजे सब सचाइ बतानी ही पडेगी..

वंदना : (अ‍ेक नजरसे पुनमकी ओर देखते) पुनो अ‍ेसी क्या बात हे जो तु मुजसे कसम खीलवा रही हे.. यार तुही मेरे सबसे करीब हे.. मे तेरी कसम खाती हु बस.. बता तु कोनसे राजकी बात बताना चाहती हे..? कोनसी सचाइ बताना चाहती हे..? जो मे नही जानती..

दया : (अंदर चाइ लेके आते) लीजीये दोनो दीदी चाइ पीजीये ठंडी होजायेगी फीर बाते करना.. हें..हें..हें..

पुनम : दयाबहेन आप चाइ छोडके जाओ हम पी लेगे.. हम अ‍ेक जरुरी बात कर रहे हे.. आप कप बादमे लेजायेगा.. ओर कोइ आयेतो बहार ही बीठाना..

दया : (हसते) ठीक हे दीदी.. मे दरवाजा बंध कर देती हु आप दोनो आरामसे बात कीजीये..

वंदना : (दया जातेही) हां पुनो.. बता मुजे सब जानना हे.. ये बात हम दोनोके बीचही रहेगी.. आइ प्रोमीस..

पुनम : वंदना भाइकी अ‍ैसी कइ सीक्रेट वाइफ हे.. ओर ये बात मंजुभाभी भी जानती हे.. फीर भी भाइको खुब प्यार करती हे.. पता हे क्यु..? क्युकी भाइ ओर भाभी कोइ सामान्य इन्सान नही हे..

वंदना : (आस्चर्यसे पुनमकी ओर देखते) वो सामान्य इन्सान नही हे..? तु क्या कहेना चाहती हे..? मुजे तु सब सच.. सच.. ओर खुलके बता..

पुनम : (वंदनाके दोनो हाथ थामते) देख वंदना.. वो अ‍ेक --का अंस हे.. तु वो हिमाचलके राजाकी कहानी तो जानती हेना..? जीनकी कइ रानीया थी.. ओर उसने वो भव्य मंदिरका नीर्माण करवाया था..

वंदना : (आस्चर्यसे) हां.. ये वोही कहानी हेनां.. (ये केसी अनुभुती) में सारी कहानी जानती हु.. मेने इस कहानीको कइ बार पढा हे.. इनकी रानीओमे उनकी खुदकी कइ बहेने ओर दादी चाची भाभी सब थी.. तो..? इस कहानीसे तेरे भाइ भाभीका क्या तालुक..?

पुनम : बस.. भाइ भाभी इन्हीका अंस हे.. ओर सायद मे भी.. वंदना.. अब वोही राजा हमारे घर जन्म लेकर आने वाला हे.. ओर पता हे भाइ भाभी ओर मे कौन हे..?

वंदना : (प्रस्नाथ भरी नजरोसे देखते) कौन..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) उन्ही राजाके दादा थे.. जो इस जन्ममेभी उनके दादा होगे.. अभी जो भाभीको लडका हुआ हेनां..? वोही लडकेका बेटा वो राजा होगा.. तब यहा सब कुछ होगा.. जो वहा हिमाचलमे होता था.. मतलब तु सब समज रही हेनां..?

वंदना : (सोक्ट होते) क्या..? मतलब यहाभी सबकुछ होगा..? आइमीन.. यहा भी सब अ‍ेसे रीस्तो मे सादीया होगी..? ओर तु कहेती हे तेरा भाइ उनका दादा होगा तो फीर उनके दादा दादी आपसमे कोन थे पता हे तुजे..?

पुनम : (सरमसे मुहको घुमाते) हां.. पता हे.. उनके दादा दादी दोनोही आपसेमे भाइ बहेन थे.. जो अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जींदगी बीताते थे.. ओर हर जन्ममे भाइ बहेन होते हुअ‍े भी पती पत्नीकी तराह आपसमे सादी करके रहेते थे.. मे भी ये सब बाते जानती हु..

वंदना : (सीरीयस होते अ‍ेक नजरसे पुनमको देखते) पुनो.. तेरे भाइ इनके दादा हे तो फीर.. नही नही.. ये नही हो सकता.. सायद मे गलत सोच रही हु.. यार सोरी.. माफ करदे..

पुनम : (वंदनाके हाथपे हाथ रखते सरमाते धीरेसे ) नही वंदना.. तु बीलकुल सही सोच रही हे.. मे ही वो दादी हु.. भाइकी बीवी..

वंदना : (सोक्ट होते देखते) पुनो.. तु ये क्या बोल रही हे..? अ‍ैसा नही हो सकता.. मेतो उस कहानीको (ये केसी अनुभुती) अ‍ेक काल्पनीक कहानी मानती थी.. क्या आजके जमानेमें अभीभी इस दुनीयामे ये सब पोसीबल हे..? मुजे तो यकीन ही नही हो रहा..

पुनम : (सीरीयस होते) हां वंदना.. सब पोसीबल हे.. ओर यही सचाइ हे.. भाइ ही वो दादा हे ओर मेही वो दादी हु.. ओर ये बात सीर्फ मे ओर भाभी ही जानते हे.. बाकी कोइ नही जानते.. ओर हमारे वो कुलगुरु हेनां..? वोही कहानीके बाबा.. जो आजभी जीन्दा हे.. जीसे हम अक्सर मीलने जाते हे.. बस वोही सब जानते हे.. ओर उन्होने ही हमको बताया हे.. ओर यकीन मान.. उसने जोभी कहा हे वोही सब हो रहा हे..

वंदना : (गभराते धीरेसे) पुनो.. तो क्या.. तुम ओर तेरे भाइ.. मतलब.. इस जन्ममे भी.. आपसमे..

पुनम : हां वंदना.. आज सीर्फ तुजे बता रही हु.. इस बारेमे कीसीको मत कहेना.. ये चार दीनमे बहुत कुछ बदल चुका हे.. मे अब वो पुरानी कुंआरी पुनम नही हुं.. आइ अ‍ेम मेरीड..

वंदना : (सोक्ट होते आस्चर्यसे) मतलब.. क्या तुम दोनो भाइ बहेन.. प्लीज.. पुनो तु मजे जरा खुलके बता..

पुनम : वंदना भाभी जब डीलेवरीके लीये होस्पीटलमेथी.. तब हम वापसीमे बाबाको मीलने गयेथे.. तो वही बाबाने हम दोनो भाइ बहेनकी आपसमे सादी करवादी.. (धीरेसे सरमाते) ओर.. ओर.. हम उसी रात सुहागरात मनाकर सब कुछ कर चुके हे.. ओर पीछले चार दीनसे हम दोनो पती पत्नीकी तराह साथमे रहेते हे.. जबसे हमने सादी कीहे मे भाइसे सुबह हर दिन अपनी मांग भरवाती हु.. ओर रातमे अ‍ेक साथ अ‍ेकही बीस्तर मे पती पत्नीकी तराह सोते सब कुछ करते हे.. तु सब समज रही हेना..? मे भाइकी सीक्रेट वाइफ होगइ हुं.. ओर तुजे सच कहु..? मुजे इस रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. मे इस रीस्तेसे बहुत खुस हु..





वंदना : (आस्चर्यसे) व्होट..? पुनो तु ये क्या केह रही हे..? तेरे ओर तेरे भाइके बीच.. आइ मीन तुम दोनोने सब कुछ.. मतलब.. वो..वो..(धीरेसे) क्या सेक्स कर लीया..? क्या तीन रातसे दोनो वोही कर रहे हो..? तो फीर तेरी सादी होने वाली हे वो..? तुम्हारीतो सगाइभी हो चुकी हे.. तो क्या तु सगाइ तोड देगी..?

पुनम : (धीरेसे वंदनाका हाथ थामते) नही वंदना.. आज तुजे अ‍ेक ओर सचाइ बता रही हु.. तेरी तराह मेभी भाइको बचपनसे लाइक करती थी.. जबसे मेने जवानीके दहेलीजपे कदम रखा ओर प्यारकी परीभासा समजने लगी तबसे मे भाइको लाइक करने लगी थी.. ओर मे भाइके ही सपने देखती थी.. लेकीन जब बाबाको मीली तब उन्होने मुजे सब सचाइ बतादी.. तब मे भाइसे खुलके प्यार करने लगी.. ओर आज भाइकी सेक्रेट बीवी हु.. ओर अ‍ेक बात मे धिरेनसे भी सादी कर रही हु..

वंदना : पागल होगइ हो क्या..? दो दो लडकेसे सादी..? पुनो.. अ‍ेक बात बता.. तो फीर तु अपने दीलकी बात अपने भाइसे केसे करपाइ..? इतनी हींमत कहासे आइ तुजमे..?

पुनम : वंदना.. तुजे सब सचाइ बताउगी.. तुजे पता हे..? मेरी सगाइसे पहेले उस दीन तुमसे मीलने तुम्हारे घर आइथी..? तब में भाइके साथ आइथी.. तबही मेने रास्तेमे भाइसे अपने प्यारका इजहार करलीया.. बडी मुस्कीलसे उनको मनाया.. तब जाके भाइने मेरे प्यारको अ‍ेक्सेप्ट कीया.. तब मुजे नही पताथा की अ‍ेक दीन सचमे भाइसे सादी कर लुगी.. ओर उनके साथ सुहागरात भी मनाउगी.. मुजेतो आजभी ये सब अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे.. ओर ये हकीकत हे.. की मेने अपने भाइको सीर्फ अपना कुंआरापन ही नही मेरा तन मन धन सब कुछ सोंप दीया हे.. ओर आज वो मेरा पती हे.. ओर हम दोनोही इस रीस्तेसे खुस हे..

वंदना : (आस्चर्यसे अपना सर पकडते) ओह माय गोड.. पुनो मुजेतो अभी भी यकीन नही हो रहा.. की तुम दोनो भाइ बहेनके बीच इतना कुछ होगया.. येतो सोच कीसीको पता चल गया तो क्या होगा.. ओर तु धिरेन जीजुसे सादीभी कर रही हे..? क्या उनको तु धोखा नही दे रही..?

पुनम : नही वंदना.. तुजे अ‍ेक ओर सच बात बताती हुं.. तु कीसीको कहेना मत.. इनके भी दो रीजन हे..

वंदना : (जोरोसे हसते) पुनो तु तो बहुत ही रहस्यमय होगइ हे.. हें..हें..हें.. बता अब क्या बात हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) कमीनी सुनतो सही.. अ‍ेकतो बाबाके कहेने के मुताबीक धिरेनकी आयु बहुतही कम हे.. ओर मेरी सांसभी भाइसे सादी करके इधर आ रही हे.. तब मे वहा अकेली हो जाउगी.. तु समज रही हेनां..? मे क्या कहेना चाहती हु.. ओर दुसरा रीजन.. अ‍ेक बार मेरी सादी होजायेगी फीर मे विधवा होके वहा रहु या फीर इधर रहु मुजे दुनीयाको जवाब नही देना पडेया.. क्युकी दीनीयाके लीये मे सुहागन होते हुअ‍े भी विधवा रहुगी.. ओर असलमे सुहागन बनके बाकीकी जींदगी भाइके साथ उनकी सीक्रेट वाइफ बनके बीताउगी.. इसीलीये मेने धिरेनसे सादीसे पहेले ही भाइसे सादी करली.. अब मेरी धिरेनसे सादी सीर्फ दुनीयाके लीये दीखावेकी होगी.. तो धिरेनको कहासे धोखा हुआ..?

वंदना : (गौरसे सुनते मुस्कराते) पुनो.. तुमने तो बहुत कुछ प्लान करके रखा हे.. देखना कीसीको तेरे ओर तेरे भाइके बारेमे पता ना चल जाये..

पुनम : (हसते) कीसीको कैसे पता चलेगा..? जो भी कुछ होगा वो चार दीवारोके अंदर होगा.. मुजे क्या जरुरत हे कीसीको बतानेकी.. तु पहेली लडकी हे ओर वो भी मेरी खास सहेली हे.. इसीलीये तुजे बता दीया.. वरना तुजे भी पता नही चलता.. ओर वोभी इसीलीये बताया की तुमभी मेरी तराह भाइसे प्यार करती हो..

वंदना : (सरमाते हसते पुनमका हाथ पकडते धीरेसे) पुनो.. सच कहु..? ये सब सुनके मुजे बहुत खुसी हुइ.. मानोनां मेरे दीलका बोज कुछ हल्का होगया.. की चलो कमसे कम मेरी बहेनका सपनातो पुरा हुआ..

पुनम : (वंदनाके गाल सहेलाते) वंदु.. यकीन मान.. तेराभी सपना पुरा हो सकता हे.. बस थोडीसी हींमत करले.. तुमभी भाइकी सीक्रेट वाइफ बनजा.. मे तेरा साथ दुगी.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. यहा नही तो वहा मेरे पास आती रहेना.. ओर भाइसे मीलती रहेना.. बस थोडी हींमत करले.. हमे कहा दिनीयाके सामने ढंढोरा पीटना हे.. यकीन मान.. भाइ हम दोनोको खुस रखेगा.. समज गइनां..?

वंदना : (सरमाते नजर जुकाते हसते) यार.. बस यही तो.. मुजमे हिंमत नही हे.. पता नही तु ये सब कैसे कर पाइ.. प्यारतो मे अभी भी करती हु.. कास तेरी तराह हींमत कर पाती.. पुनो तेरी सब बाते सुनते मुजे बहुत अजीब लग रहा हे.. कास मेभी तेरी तराह हींमत कर पाती..

पुनम : (हसते) यार मे तुम दोनोके साथ सहेर चल रही हु.. वंदना हम साथतो चल ही रहे हे.. बस थोडी हीमत करले.. मे बातको आगे बढाउगी.. तु बस तेरी सहमती दे देना.. बाकी सब मे सम्हाल लुगी.. होजा मेरी सौतन.. हम दोनो मीलकर भाइको खुब प्यार करेगी..

वंदना : (अ‍ेकदम सरमाते मुका मारते) कमीनी.. तुमतो मेरे पीछेही पड गइ.. चल ठीक हे मे देखती हु.. यार डर भी लग रहा हे.. कही कीसीको पता ना चल जाये.. चल कोइ बात नही लेकीन मुजसे वादा कर.. तु जींदगी भर मेरा साथ देगी.. तोही मे इस बातको आगे बढाउगी.. बोल.. क्या कहेती हो तुम..?

पुनम : (खुस होते हाथ पकडते) वंदु आइ प्रोमीस.. हम दोनो साथही रहेगे.. ओर अ‍ेक दुसरेका खयाल रखेगे.. ओर हम दोनोकी बात कभी कीसीको पता नही चलेगी.. तुम भाइसे सादी करलो.. मे तुम्हारे साथ हु..

वंदना : (सरमाते हसते) चल देखती हु.. हम जायेगे.. तब तुम सब देख लेना.. अब चल मे चलती हु.. पापाभी घरपे नही हे.. बस सरपंच क्या होगये.. सुबहसे ही घरसे नीकल गये हे.. ओर मम्मी घरपे अकेली हे..

पुनम : कमीनी कहा जायेगी..? खाना खाके जाना.. मेभी यहा अकेली हु.. फीर चली जाना.. तु भाभीको फोन करके बतादे मे खाना इधर खा लुगी.. कीतने दिनोके बादतो आइ हो..

वंदना : नही यार जानेदे मम्मीभी घरपे अकेली होगी.. मे फीर आजाउगी.. येतो देखने आइथी तु क्या कर रही हे.. मीलनेभी नही आती.. ओर वो.. मेरे पेपरके बारेमेभी पुछनाथा लेकीन तेरे भाइ ही नही हे..

पुनम : यार थोडी देरतो बैठ कीतने दीनोके बाद आइ हो आरामसे चली जाना.. वहा तेरी मम्मीको कोइ खा नही जायेगा.. ओर खाना खाकर चली जाना.. भाइभी खाना खाने आयेगे तब उनको मीलके चली जाना..

वंदना : (सरमाते) नही यार उनके सामने बहुत सरम आती हे तुही पुछ लेन सब..

पुनम : (धीरेसे सरारतसे हसते) कमीनी इतनी सरमा रही हे तो इनसे चुदेगी कैसे.. हें..हें..हें..

कहातो वंदना सरमसे पानी पानी होगइ ओर हसते हुअ‍े जटसे खडी होकर पुनमको मारने लगी.. तब पुनमभी अपने बेडपे खडी होगइ ओर वंदनासे बचते हसते हुअ‍े इधर उधर भागने लगी.. दोनो ही मस्तीया करते बाते करती रही..

तब इधर देवायत हवेलीसे नीकलते ही खेतोपे जानेसे पहेले रमेशको मीलनेके लीये नीकल गया.. ताकी वो वंदनासे मीलके उनको सब पेपरके बारेमे बता दे.. लेकीन जब रमेशके घर पहोंचा तब रमेशभी घरपे नही था ओर वंदनाभी उसी टाइम दुसरे रास्तेसे पुनमको मीलनेके लीये नीकल चुकीथी.. तब घरपे सीर्फ चारुभाभी थी तो देवायत पहोंचा ओर रमेशके बारेमे दरवाजेमे अंदर जांकके पुछा तो चारुभाभी उनको देखतेही खुस होगइ.. ओर जटसे बहारकी ओर आने लगी..

चारु : (दोडके बहार आते) आइअ‍े देवरजी.. आपतो आतेही नही हमसे दुरही भागते हो.. हें..हें..हें.. हमसे कोइ गलती होगइ क्या.. क्या इस भाभीकी याद नही आती..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही भाभी वो रमेशको ओर वंदनाको मीलने आया था वो पेपरके बारेमे बताना था..

चारु : (कामुक मुस्कानसे देवायतका हाथ खीचके अंदर लेजाते) आपके भाइतो सुबहसे ही गायब हे.. पता नही कीधर गये हे.. ओर वंदना अभी अभी पुनमको मीलने हवेलीपे गइहे उसे आनेमे देर लगेगी आजाइअ‍े.. कीतने दीनोके बाद ये मौका मीला हे.. आपकोतो मेरा खयालही नही हे.. कीतने इसारे कीये.. फीरभी..

देवायत : (हसते उनके पीछे जाते) भाभी समजोतो सही.. सबके होते हुअ‍े मे कैसे आ सकता हु..

चारु : (अंदर छोडते) आप बैठो मे दरवाजा बंध करके आती हु.. फीर बात करते हे.. आज आपको नही छोडुगी.. हें..हें..हें..

कहेते वो दरवाजा बंध करने चली गइ इनसे पहेले दरवाजेके बहार मुह नीकालके अ‍ेक बार सब देख लीयाकी कोइ देखतो नही रहा हे.. जब कोइ नहीथा तो दरवाजा अच्छेसे बंध करलीया ओर घरमे आगइ.. फीर घरका भी दरवाजा बंध करके देवायतके पास चली गइ ओर उनका हाथ पकडके उसे सीधे अपने बेडरुमकी ओर लेजाने लगी.. तबतक देवायत उसे देखते हसता रहा.. ओर अंदर आतेही पलटकर देवायतको अपनी बाहोमे भरके उनसे लीपट गइ.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी..

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६७

कहेते वो दरवाजा बंध करने चली गइ इनसे पहेले दरवाजेके बहार मुह नीकालके अ‍ेक बार सब देख लीयाकी कोइ देखतो नही रहा हे.. जब कोइ नहीथा तो दरवाजा अच्छेसे बंध करलीया ओर घरमे आगइ.. फीर घरका भी दरवाजा बंध करके देवायतके पास चली गइ ओर उनका हाथ पकडके उसे सीधे अपने बेडरुमकी ओर लेजाने लगी.. तबतक देवायत उसे देखते हसता रहा.. ओर अंदर आतेही पलटकर देवायतको अपनी बाहोमे भरके उनसे लीपट गइ.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी....अब आगे

चुम चुमके देवायतका पुरा मुह गीला कर दीया.. फीर रुकके कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखके हसती रही.. फीर आंख बंध करके धीरेसे देवायके होंठकी तरफ मुह लेगइ ओर दोनोके होंठ मील गये तब चारुके चहेरेपे नसा छागया.. ओर वो आधी आंख चडाके मदहोस होने लगी ओर देवायतके होठोका रसपान करने लगी.. तब अनायासही देवायतका हाथ उनके बुब्सपे चला गया ओर हल्केसे दबाके मसलने लगा तो चारु मदहोस होकर सीसकारीया करने लगी.. तभी देवायत उनके गलेमे मुह डालके चुमने लगा..





तब चारुकी आहे नीकल गइ ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. फीर अचानक अलग होगइ ओर खुदकी सारी नीकालने लगी.. फीर सारी नीकालतेही देवायतकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी ओर कामुक नजरोसे हसते उनकी ओर देखती रही.. तब देवायत मुस्कराते हल्केसे उनके बुब्स दबाते उनके ब्लाउसके बटन खोलने लगा.. तब चारुभाभी सरमा गइ ओर नजर चुराने लगी..

चारु : (सरमाते धीरेसे) हां कुछ महेनत आपभी कीजीये फायदेमे रहोगे.. कीतने दिनोके बाद मेरे हाथमे आये हो.. चलीये फटाफट.. नाजाने कब आपके दोस्त वापस आजाये.. आप पहेले नही मीले वरना मे आपसे ही सादी कर लेती.. हें..हें..हें.. देवु.. आइ लव यु.. मुजे आपसे प्यार हो गया हे..

देवायत : लव यु टु भाभी.. सादी तो हम अभीभी कर सकते हे हम गांधर्व सादी ही कर लेगे.. बोलो कब करनी हे सादी..? मे रेडी हु.. ओर वेसे आपकोभी पता हे अ‍ैसी मेरी कइ सीक्रेट वाइफ हे..

चारु : (कामुक नजरोसे देखते धीरेसे) सच केह रहे हो..? वैसे अ‍ैसी कीतनी सादीया की हे आपने..?

देवायत : दो तीन तो करही चुका हु.. आप कहोतो आपसेभी कर लुगा बोलो करोगी मुजसे सादी..?

चारु : (पेन्टकी क्लीप खोलते) फीर आपके भाइका क्या होगा..? सोचलो जींदगीभर मुजको जेलना पडेगा..

देवायत : (चारुके पेटीकोटका नाडा खीचते) तो मे कहा रमेशको छोडनेको केह रहा हु.. बस इनके साथ रहेके मेरी सीक्रेट बीवी बनके इधरही उनके साथ रहेना.. ओर जबभी मीलनेका दील करे मेरी अ‍ेक सीक्रेट वाइफ हे उनके घर चले जाना हम वही मीलते रहेगे.. हें..हें..हें.. वैसे आप जैसी खुबसुरत बीवी मीलेतो मे बाकायदा आपसे सादी करनेके लीये भी तैयार हु.. आप मुजे बहोत अच्छी लगती हे..

कहेते नाडा खीचलीया तो पेटीकोट सरकके नीचे गीर गया तब चारुभाभी सरमसे पानीपानी होगइ.. ओर अपनी चुतपे हाथ रखके उस्े छुपानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तभी देवायतने उनको वही दीवालसे सटालीया ओर उनके बुब्सको मसलते उनके गलेमे मुह डालके चुमने लगा तब चारु आंख बंध करते कामाग्नीमे जलने लगी ओर देवायतके लंडको चडीमेसे ही पकडते मसलने लगी.. ओर वो देवायतके पैरके पास बैठ गइ ओर उनकी चडी खीचके नीकालने लगी.. वो देवायतकी नाभीको चुमते चडीको नीचेकी ओर सरका देती हे..





तब देवायतका विकराल लंड चारुके सामने हवामे लहेराते जटके मारने लगा.. जीसे देखतेही चारु वासना भरी नजरोसे उसे देखने लगी ओर नसेकी हालतमे जाने लगी.. तब देवायतने अ‍ेक अ‍ेक पैर उठाके चडीको नीकाल दीया तब चारु लंडको मुठीमे पकडके सहेलाने लगी ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते अपनी जीभ नीकालके देवायतके लंडको चाटने लगी.. जैसे लंडके लीये वो बरसोसे प्यासी हो..





तब देवायतभी चारुकी अ‍ैसी हरकतसे वासनाकी आगमे जलने लगा.. उसने फोरन चारुको खडा करदीया ओर दीवालसे सटाकर खडा करदीया.. फीर उनके बुब्सको अपने मुहमे लेकर जोरोसे चुसने लगा.. तब चारुभी पुरी तराह मदहोस होचुकी थी ओर वो आधी आंख बंध करके देवायतके गलेमे हाथ डाल देती हे ओर देवायतको अपने बुब्सकी ओर दबाव बनाने लगती हे.. जैसे केह रही हो.. इसे चुस चुसके नीचोडलो.. आज वो खुलके देवायतसे प्यार करना चाहती थी.. लेकीन उनको अपने पतीके आनेका डरभी था..





चारु : (कामुक आवाजमे) देवरजीइइइइ बसससस बसससस ओररर नहीइइइ बस कीजीयेयेयेअ‍े मुजेजेजे कुछछछ हो रहाहाह हेहेअ‍ेअ‍ेइइइ सीसीसीइइइइइ आहहहह यारर आते क्युयुउउउउ नहीहीहीइइइइइ.. मे कइइइ दिनोसे.. आपका वेइट कर रही हुउउउ... उइइइइ मां.. धीरे चुसोनां... सीसससइइइइइ

देवायत : (लडखडाती आवाजमे) चारुउउउ बससस आउउउगाआआ मुजेअ‍ेअ‍े बुलालेनाना.. क्यायाया मस्ततत माललल हेहेहे तुुउउउ.. हंमममम बुचचच बुचचच बुचचच मस्ततत बुब्ससस हे तेरेरे...

चारु : (नसेकी हालतमे) तो आजाजानाना चाहीयेयेअ‍ेअ‍े नांनां... हंममम बससस.. बस... देवुवुउउउउ चलोलोनाना.. देररर मततत करोरोओओ.. वोवो.. आजायेयेगेगेगे... चलोलो नांनां हंमममउउउ सीसीइइइ..

कहेते दोनोही मदहोस होके प्यारके खेलमे कामातुर हो चुके थे.. तभी देवायतने अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेचाते चारुकी चुतपे रखदीया ओर चुतको सहेलाने लगा तब चारु पागल जैसे होगइ ओर जोरोसे सीकारीया करते आधी आंख चडाके अपनी कमरको जटके देने लगी अब उनसे बरदास्त करना मुस्कील होगया ओर वो जटसे पलट गइ ओर दीवारकी ओर मुह करते खडी होगइ.. तब देवायत उनकी पीठमे मुह लगाके अपने दांतोसे काटने लगा ओर उनकी चुत सहेलाते उनके बुब्सको मसलने लगा तब चारु खुस होते छटपटाते मचलने लगी.. तब उनकी चुत लगातार पानी छोडती रही..





चारु : (मदहोसीमे कामुक नजरदसे) बससस बस.. देवरजी ओर नही अब बरदास्त नही होता कुछ कीजीये.. चलीयेनां बेडपे..

देवायत : (पीठमे दात गडाके) क्या करु..? बोलनां.. क्या मस्त लग रही हे तु.. पागल करदेगी मुजे..

चारु : (सरमाके हसते) तबतो आजाते.. मेने कीतनी बार आपको हीन्ट दी आप आयेही नही.. अब चलीयेना.. वरना आपके भाइ आजायेगे.. जल्दी कीजीये मेरी आगको ठंडा कीजीये.. आपके यही प्यार करनेका अंदाज मुजे पागल कर देता हे.. चलीये.. फीर आपसे कुछ बातभी करनी हे..

कहातो देवायत चारुको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर बेडपे लेजाते लीटाके खुद उनके उपर जड जाता हे.. तब चारु उनको गलेमे हाथ डालके जोरोसे अपने सीनेपे भीचलेती हे तभी देवायतका लंड चारुकी चुतपे ठोकर मारने लगा जेसे अपने बीलमे घुसनेकी जल्दी हो.. तो चारुकी चुतभी लगातार पानी छोड रहीथी.. तब देवायत उनके पैरोके बीच चला गया तो चारुने दोनो पैर मोडके अपने हाथोमे पकडलीया ओर देवायतने उनकी चुतमे मुह लगादीया ओर उसे चुसने लगा.. तब चारु आधी आंख चडाते नसेही हालतमे चली गइ.. ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी..





चारु : (मदहलसीमे) ओहहह माइइइ लववव.. दे...वु... आइ लव यु.. आइ लव यु.. आइ लव यु..

कहेते आंख बंध करते बडबडाने लगी तब उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ चुतकी दोनो पंखडीया लंडका स्वागत करनेके लीये फडफडाने लगी.. ओर वो नसेकी हालतमे चली गइ चारु अपनी कमर हीलाते उछालने लगी तब अ‍ेक तेज धार नीकलते देवायके मुहमे चली गइ तो चारुने देवायतके सरको खीचके अपने उपर खीच लीया.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तब देवायतने अपना मुह वही तकीयेमे डालके साफ करलीया ओर चारुके होंठ चुमते उनके बुब्स मसलने लगा..

चारु : बसस.. देवरजी अब ओर बरदास्त नही हो रहा.. आप डाल दीजीये.. मे कबसे आपके मुसल हथीयारको अंदर लेनेके लीये तरस रही हु.. अब रहा नही जाता.. प्लीज.. जल्दी कीजीये.. वरना कोइ आजायेगा..





तब देवायत उनके पैरके बीच बैठ गया ओर अपना लंड पकडके चारुकी चुतपे घीसने लगा.. तब चारुकी आंख बंध होगइ ओर आने वाले पलका इन्तजार करने लगी.. तभी देवायतने लंडको दो तीन बार घीसके चारुकी चुतके लव होलमे घुसाने लगा.. तब चारुकी आंख खुलके बडी होगइ ओर वो देवायतकी ओर देखने लगी तभी देवायत थोडा लंड फसाके चारुके उपर जुकके उनपे चड गया ओर उनके होंठ लीपलोक करलीया..





तब चारु बडी आंख करते वासना भरी नजरोसे देवायतकी आंओमे देखती रही.. जैसे केह रही हो अब जल्दी घुसा भी दो.. तभी देवायतने कमरको अ‍ेक जोरोका जटका दीया तो पुरा लंड चारुकी चुतमे घुस गया.. तो चारु अचानक हुअ‍े हमलेसे चीखते हुअ‍े छटपटाने लगी ओर देवायतके सीनेमे हाथ रखते उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस कने लगी.. ओर अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. जैसे वो पहेली बार चुद रही हो.. ओर वैसेभी देवायतका विसाल ओर तगडा लंड अपनी चुतमे लेना कोइ आम बात नही थी..

चारु : (आंखमे आंसुके साथ छटपटाते) उइइइ मां.. मररर गइइइ नहीइइइ नहीइइइ नहीइइ बससस बससस रुक जाइइइअ‍ेअ‍ेअ‍े याररर मे मरर जाउउउगीगीगी.. प्लीजजजज अभीइइइ मत हीलनानां... मेरीइइइ चुत.. फाडदी.. उइइइ मां.. अभी मत चोदो.. यार.. मे मर जाउगी.. हाये.. मार डाला.. फाडदी मेरी चुत..

देवायत : (होंठोपे कीस करते) क्या हुआ..? तुम मुजसे पहेली बार थोडी चुद रही हो..? हम चार बारतो चुदाइ कर चुके हे फीरभी..? कीतना चीलाती हो.. तुम कोइ कच्ची कुआरी थोडीनां हो..

चारु : (मुह बीगाडते धीरेसे) यार कीतने दीन होगये मे आपसे नही चुदी.. ओर आज तो आपका लंड मुजे पहेलेसे थोडा मोटा ओर लंबा लग रहा हे.. तुमने क्या कीया हे जो मुजे इतना बडा लग रहा हे.. यार तुमने तो आज मेरी चुतको फाड ही दी.. ओर धीरे धीरे नही डाल सकते..? तुमनेतो अ‍ेकही बारमे घुसा दीया.. तो कैसे बरदास्त करती.. जानु थोडी देर रुक जाइअ‍े..

देवायत : (हसते बुब्स चुमते) चल अब धीरे धीरे करुगा.. भाभी क्या करु तुजे देखतेही ये तेरे अंदर जानेके लीये मचल रहाथा.. ओर तुजे देखकर मुजसेभी कंट्रोल नही होरहा था.. तो क्या करता.. घुसा दीया.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) लगता हे आजतो मेरी चुतकी धजीया उड जायेगी.. बाबा धीरे धीरे करना.. चलो अब धीरे धीरे सुरु होजाओ.. ना जाने कबसे आपसे चुदवानेका मन कर रहाथा.. ओर आज अपनी चुत फडवाली..





कहातो देवायत उनके गलेमे मुह डालके धीरे धीरे कमर हीलाते सोट मारने लगा.. तब चारु फीरसे मदहोस होने लगी ओर आंख बंध करते देवायतके कंधेको चुमते देवायतसे मजेसे चुदवाने लगी.. देवायतभी उनके गलेमे अ‍ेक हाथ डालके उनसे चीपकते चोदने लगा.. दोनोही कामाग्नीमे जलते चुदाइके महासागरमे गोते लगाने लगे.. ओर चारुभी अ‍ेसे चुदवाने लगी.. जैसे आज उनकी सुहागरात हो.. वो देवायतके हर धकेके साथ आहे भरने लगी.. तब देवायतभी हाथके बल उचा होगया ओर चारुको होले होले चोदने लगा..





चारु : (कामुक्तासे) बससस.. अ‍ैसेही चोदते रहीये बहुत मजा आ रहा हे.. क्या मस्त चोदते हे आप.. मेतो जबसे आपसे पहेली बार चुदी तबसेही आपकी दीवानी होगइ हु.. थोडा ओर जोरसे चोदीयेनां..

देवायत : (सोट मारते होंठ चुमते) भाभी.. क्या रमेश आपको नही चोदता..? हंममम बोलनां..

चारु : (सरमाते उनकी आंओमे देखते) नही.. महीनेमे अ‍ेक बार तो मुस्कीलसे करता हे.. वोभी मे जबरदस्ती करती हु तब.. तभीतो आपसे दील लगा बैठी.. ओर आप मुजे बहुत अच्छेभी लगते हो.. कास मे आपकी बीवी होती.. आप क्या मस्त चुदाइ करते हो मुजेतो नीचोडही लेते हो.. ओर प्लीज.. हम अकेले हो तब मुजे भाभी मत कहो.. आप नामसे बुलाइअ‍े मुजे अपनापन लगता हे.. आपके लीये मे सीर्फ आपकी चारु हुं..

देवायत : (हसते) ठीक हे डार्लींग अब तुजे नामसेही बुलाउगा.. क्या मस्त हे तु.. ओर ये तेरी चुत.. मेतो तुम दोनोका दीवाना होगया हुं.. जीतो चाहताहे आपको चोदताही रहु..

चारु : (सरमाते) इतनी मस्त लगती हुतो आतेतो हेनही.. आपसे चुदवाने मे हमेसा रेडी रहेती हु.. आजाया करो बाबु अब मुजे आपकोही सम्हालना पडेगा..

तभी देवायत चारुके चहेरेके जुक जाता हे ओर उनकी आंखोमे देखते थोडा जोरोसे चोदने लगता हे तब चारुका मुह खुलाही रेह गया ओर वो लगातार देवायतकी आंखोमे देखते उनके गालको सहेलाती रही.. ओर कमर हीलाते देवायतसे पुरे तालमेलमे चुदवाने लगी.. काफी देर तक दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते चुदाइ करते रहे अब चारुकोभी बडा मजा आ रहा था.. वो देवायतके पीछे ओर पागल होने लगी..





चारु : (आंखोमे प्यारसे देखते) बसस.. देवरजी मुजे अ‍ेसेही चोदते रहेना.. आप बहुत अच्छेसे चोदते हो मेतो आपकी दीवानी होगइ हुं.. मुजे हमेसा अ‍ेसेही खुस रखना.. आपका जबभी दील करे आपकी चारु चुदवानेके लीये रेडी ही रहेगी.. यहा आजाया करे ओर अपनी चारुको चोद लीया करे..

देवायत : (सोट मारते होठ चुमते) चारु.. इसीलीये केह रहा हु सादी करले मुजसे.. तुजे अ‍ेसेही चोदता रहुगा..

चारु : (सरमाते) वो.. देवरजी सादी करना क्या जरुरी हे..? आपतो अ‍ेसेही आकर मुजे कभीभी चोद सकते हो.. मे आपको कहा मना करती हु.. आपसे चुदवानेके लीयेतो मे हमेंसा रेडी रहेती हु.. बस आपही नही आते..

देवायत : चारु अभीतो मुजे चुदाइ करने दे हम बादमे बात करेगे.. क्या मस्त चुत हे तेरी बीलकुल कसी हुइ..

तभी अचानक चारु देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उनको अपने तनसे चीपका लेती हे ओर होंठ लीपलोक करते कमरको नीचेसे उछालते जटके मारने लगती हे.. तब देवायतको अपने लंडपे चारुका गरम पानी महेसुस होने लगा ओर लंडको कीसी गरम भठीमे डाल दीया हो.. अ‍ैसा फील होने लगा.. तब चारु उतेजनासे कांपते हुअ‍े आहे भरते जडती रही..





तब देवायतको उतेजनाकी वजहसे उनके सरीरमे कंपन आगया.. ओर वो चारुके गलेमे मुह डालके गलेको चुमते हुअ‍े चारुको जोरोसे कमर हीलाकर चोदने लगा.. तब थोडी देरकी जबरदस्त चुदाइके बाद चारु अ‍ेक बार फीरसे जडने लगी.. ओर देवायतके लंडको तरोताजा करते अपने गरम पानीसे भीगोने लगी.. ओर उनके गलेमे हाथ डालते अपने तनसे चीपकाने लगी.. फीरभी देवायत लगातार कमर हीलाते चारुको चोदता रहा..





तभी देवायतके सरीरमे भी तेज हलचल महेसुस होने लगी.. जैसे हजारो चीटीया उनके सरीरको रेंदते हुअ‍े उनके लंडकी ओर दोड रही हो.. अ‍ैसा महेसुस होतेही उनका सरीर अ‍ेक बार फीरसे कांपने लगा.. तब चारुभी समज गइ ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तब देवायतनेभी चारुके होंठ अपने होंठसे दबाके लीपलोक करलीया तो चारुकी आंख खुलके बडी होगइ ओर देवायतकी आंखोमे लगातार देखती रही..





ओर देवायतके नीतंबको पकडते अपनी चुतपे दबाव बनाने लगी.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुकेथे.. तभी चारुको अपने बच्चेदानीपे देवायतका लंड ठोकर मारते महेसुस होने लगा ओर उनपे देवायतके गरम विर्यकी बौछार होते महेसुस करने लगी.. तब देवायत कांपते हुअ‍े कमरको जटके मार रहाथा.. तो चारुभी उतेजीत होकर कांपते हुअ‍े अपना पानी छोडने लगी.. ओर दोनोही अ‍ेक साथ जडते रहे..

तब थोडीही देरमे देवायत चारुके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. तब चारु अ‍ेक हाथसे उनका सर तो दुसरा हाथ पीठकी ओर लेजाते उनको सहेलाती रही.. ओर दोनोही अपनी सांसे कंट्रल करते रहे.. दोनो काफी देर अपनी सांसको दुरस्त करते हुअ‍े अ‍ैसेही पडे रहे.. तब देवायतका लंड अभीभी चारुकी चुतमे अ‍ेसेही सख्त होते अंदर घुसा हुआथा.. जो आमतोरपे रमेशसे चुदती तब रमेशका लंड जडतेही सीकुडके बहार नीकल जाता.. तब चारुकोभी आज थोडा अजीब लगा.. तब उसने साइडमे पडी चदर खीचके देवायतके उपर डालदी.. ओर खुस होते देवायतसे प्यार भरी बाते करने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६८

तब थोडीही देरमे देवायत चारुके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. तब चारु अ‍ेक हाथसे उनका सर तो दुसरा हाथ पीठकी ओर लेजाते उनको सहेलाती रही.. ओर दोनोही अपनी सांसे कंट्रल करते रहे.. दोनो काफी देर अपनी सांसको दुरस्त करते हुअ‍े अ‍ैसेही पडे रहे.. तब देवायतका लंड अभीभी चारुकी चुतमे अ‍ेसेही सख्त होते अंदर घुसा हुआथा.. जो आमतोरपे रमेशसे चुदती तब रमेशका लंड जडतेही सीकुडके बहार नीकल जाता.. तब चारुकोभी आज थोडा अजीब लगा.. तब उसने साइडमे पडी चदर खीचके देवायतके उपर डालदी.. ओर खुस होते देवायतसे प्यार भरी बाते करने लगी....अब आगे





चारु : (सरमाते हसते) देवरजी अब उपरसे उतरना नही हे क्या..? कीतना पानी नीकालते हो.. कही मुजे प्रेगनेन्ट करनेका इरादातो नही हे..? हें..हें..हें.. अंदर अभी भी गरम लग रहा हे.. आपनेतो मुजे अ‍ेकही बारमे नीचोड लीया.. पता हे मे तीन बार जड चुकी हु..

देवायत : (हसते) हां करले पैदा हमारा बच्चा.. हें..हें..हें.. ओर अभी मुजे उपरसे नही उतरना.. चारु मुजे तुमसे ओर प्यार करना हे.. कीतने दिनोके बाद हमे ये मौका मीला हे.. आज मे तेरी सारी कशर पुरी कर दुगा..

चारु : (सरमाते हसते) ओ बापरे तबतो मेरी आज खैर नही.. तो पहेले आजाना चाहीयेनां.. देखना बाबा मुजे मेरी चुतको सही सलामत रखना हे.. वरना आपके भाइको में क्या जवाब दुगी..? मेतो आपकी दीवानी होगइ हु.. ओर हां आप सादीकी क्या बात कर रहे थे..? आपके दोस्तकी बीवी हु.. फीरभी मुजसे सादी करोगे..? हें..हें..हें.. फीर आपके भाइको क्या जवाब दोगे..? लेकीन आपको मुजसे सादी क्यु करनी हे..? हमतो अ‍ैसेही बीना सादी पती पत्नी वाला कामतो करही रहे हे.. मे आपको कहा मना करती हु..

देवायत : सुन चारु.. मेरा अ‍ेक सोख रहा हे.. क्युकी मे अ‍ेक राजवी खानदानसे हु तो मुजे कइ रानीयोका सोख हे.. में जीसके साथभी रीलेशन रखता हु उनको मे यातो सादी करता हु या फीर उनसे गांधर्व विवाह करके अपनी सीक्रेट बीवी बना लेता हु.. ताकी हम दोनोही आपसमे अ‍ेक दुसरेका अधीकार मानते खुलके प्यार कर सके.. क्युकी मे कीसीको रखेलकी तराह इस्तेमाल करना नही चाहता.. ओर तुजपे तो सुरुसे ही मेरा दील आगया हे.. आप बहुतही खुबसुरत हे जो मुजे पागल कर देती हे.. मे सुरुसे ही तुजे पसंद करता हु..

चारु : (सरमसे पानीपानी होते हसते) ओ..हो.. तभी आप मुजसे सादीके लीये केह रहेथे..? सोचलो फीर जींदगी भर मुजे जेलना पडेगा.. हें..हें..हें.. वैसे आपके विचार जानके मुजे खुसी हुइ.. कास आप मुजे पहेलेही मीलते.. मे आपसेही सादी कर लेती.. फीर भलेही हम दोनोकी उम्रमे कीतनाभी फर्क हो..

देवायत : (हसते गलेको चुमते) हां चारु मे चाहता हु की तुजे जबभी मेरे प्यारकी जरुरत पडे तब मुजसे खुलके मील सके.. इसीलीये मेने मेरी सीक्रेट बीवीओके लीये अ‍ेक घरका भी इन्तजाम कर लीया हे.. जहा मे मेरी सभी बीवीयोको मील सकु.. ओर सबकी इजतभी बरकरार रख सकु..





चारु : (हसते होंठ चुमते) थेन्कस देवरजी.. मुजे नही पता था आप मुजे इतना चाहते हे ओर हमारे लीये आपने बहुत सारे इन्तजामभी कर लीये हे.. लेकीन आपके भाइको पता चल गया तो मेरा क्या होगा वो कभी सोचा हे..? मुजेतो घरसेही नीकाल देगे.. ओर आपके सबंध खराब होगे वो अलग..

देवायत : हां.. तब आजाना मेरी हवेलीका दरवाजा तेरे लीये खुलाही हे.. ओर वहा नही तो मेरी अ‍ेक ओर सीक्रेट वाइफ हे उनके साथ रहेना.. बोल अब क्या जानना हे.. बाकी रमेशको कभी पताही नही चलेगा.. ओर पता चलेगातो मे देख लुगा.. बस मुजे तुम चाहीये.. मे वाकइ तुमसे प्यार करता हु..

चारु : (सरमाते खुस होते) कहीये कब करनी हे मुजसे सादी..? मे तैयार हु.. आपके लीयेतो मे कुछभी कर सकती हु.. ओर पता हे आपसे ज्यादा मे आपको प्यार करती हु.. बना लीजीये मुजे आपकी सीक्रेट वाइफ.. मे वादा करती हु जींदगीभर आपको अ‍ैसेही प्यार देती रहुगी.. ओर हां.. वेसे कीतनी सीक्रेट वाइफ हे आपकी..? ओर मे कीसके घरमे मीलुगी आपसे..?





देवायत : चारु ये बात सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. वो रश्मीभाभी.. तेरी ही तराह मेरी सादी नही हुइथी तबसे उनके साथ मेरा रीलेशन हे.. आज वो मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. मेने उनके साथभी सादी करली हे.. ओर तु उनके साथ दोस्ती करले.. ओर हम वही मीलते रहेगे.. अबतो वैसेभी वो अकेलीही हे.. तु जबभी चाहेगी हम वहा मीलते रहेगे.. बोल क्या कहेती हो..?

चारु : कोन वो रश्मी.. सरपंचकी बीवी..? वो भी आपकी बीवी होगइ..? ओर दुसरी..?

देवायत : (हसते) अभी तो सीर्फ रश्मी तक सीमीत रख.. बाकी तुजे धीरे धीरे सब पता चल जायेगा.. क्युकी आने वाले वक्तमे तुजे बहुत कुछ नया दीखनेको मीलेगा जीसकी तुमने कभी कल्पनाभी नही की होगी..

चारु : (आस्चर्य से देखते) क्या केह रहे हे आप..? क्या दीखनेको मीलेगा मे समजी नही.. आप कीसके बारेमे बात कर रहे हे..?

देवायत : चारु तब तुम कुछ अ‍ैसे रीस्तेको देखेगी जीसकी हम कभी कल्पनाभी नही कर सकते.. जो सब आपसी रीस्तोमे सादी करेगे.. तुमने वो हिमाचलके राजाकी कहानीतो (ये केसी अनुभुती) सुनी होगी..? बस.. वोही सब अब मेरे घरमे ओर यहा गांवमे होने वाला हे.. बाकी मे तुजे अभी कुछ नही बता सकता.. बस कुछ समयका इन्तजार करले.. फीर तुजे सब पता चल जायेगा..

चारु : अरे हां.. वो कहानी (ये केसी अनुभुती) तो कइ बार सुनी हे.. ओर मेने तो पुरी बुक कइ बार पढी हे.. मुजेतो बहुत अच्छी कहानी लगी.. उनमे रीस्तेकातो कोइ मायना ही नही हे.. जीसे जीनसे चाहे वो उनसे सादी कर सकता हे.. उनमेतो भाइ बहेन.. मा बेटे.. यहा तम दादीसे भी सादी करते हे.. तो क्या वो सबभी वहा होने वाला हे..? आप इतने यकीनसे कैसे केह सकते हो..? हमारे गांव वालेतो वैसे भी पुराने खयालातके हे.. वो कतइ अ‍ेसे रीस्तेको स्वीकार नही करेगे.. मे नही मानती.. कहेदो आप जुठ बोल रहे हो..

देवायत : नही चारु.. मे जुठ नही बोलता.. ये बात सच हे.. चारु वो सब मे तुजे बादमे बताउगा.. अभी इनके बारेमे बतानेका वक्त नही हे.. हमे काफी देर हो चुकी हे.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे..

चारु : (सरमाते हसते) हां.. अब उपरसे उतरो.. कबसे मेरे उपर पडे हो.. हें..हें..हें.. आपके गधे जैसा हथीयार अभी भी अंदर अ‍ैसेही हे.. क्या ये कभी बैठनेका नाम लेता हे की नही..? हें..हें..हें.. की अ‍ैसे ही खडा रहेता हे.. मे जबभी देखती हु हमेसा खडाही होता हे.. आपको पेन्टके अंदर दर्द नही होता..?

देवायत : नही इनका भी रीझन हे.. जो तुजे बादमे पता चल जायेगा.. ओर अभी नही उतरना.. मुजे अ‍ेक बार ओर तुजे चोदना हे.. चल तैयार होजा आजतो मुजे तुमपे बहोत प्यार आरहा हे..





चारु : (बुरी तराह सरमाते) ओ बापरे.. यार मे अब आपको नही जेल पाउगी.. वेसे भी आपने तो मुजे अ‍ेकही बारमे नीचोड लीया हे.. (कामुक नजरोसे देखते) क्या मेरा होनेवाला पती सचमे करना चाहते हे..?

देवायत : हां.. बस अ‍ेक बार.. फीर मुजे भी जाना हे..

कहेते देवायत अपने उपरकी चदरको हटा देता हे.. ओर चारुके होंट चुमने लता हे तब चारुभी उनका साथ देने लगती हे ओर देवायत धीरे धीरे करते वापस अपनी कमर हीलाते चारुको चोदने लगता हे.. तब चारुभी फीरसे काम अग्नीमे जलते देवायतसे अपनी कमर हीलाते साथ देने लगी.. तभी देवायत हाथके बल उचा होते उनके पैरके बीच बैठ गया ओर चारुका हाथ पकडते उसेभी खीचके अपनी गोदमे बीठा दीया.. तब चारु उनके गलेमे हाथ डालके उनको पकड लेती हे ओर अपनी कमर हीलाते देवायतसे चुदवाने लगती हे..





दोनोही अपनी अपनी कमर हीलाते तालमेलमे चुदाइ करने लगे.. तब थोडीही देरमे चारु बेठेही देवायतको अपनी बाहोमे भीचलेती हे ओर कमरको जटके मारते मुह पीछे डालके जडने लगती हे.. जब वो जड गइ तब थकके चकनाचुर होगइ.. ओर देवायतको बाहोसे आजाद करते बेडपे लैट गइ तो देवायत उनकी कमरको पकडते चारुको जोरोसे सोट मारते चोदने लगा.. तब चारु अ‍ेसे ही बेसुध जैसे पडी रही ओर देवायतके जबरदस्त धकेको सहेन करते देवायतसे चुदवाती रही..





तभी देवायत चारुके उपर चुदाइ करते जुकता हे ओर उनके सरपे हाथ रखते उनकी आंखोमे देखते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदने लगता हे तो चारुभी वापस उनका साथ कमर हीलाते देने लगती हे ओर अ‍ेक बार फीरसे दोनोके बीच घमासान चुदाइका दोर चल पडा.. तभी चारु अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर होठोको लीपलोक करते अपनी कमरको जटके मारने लगती हे ओर जडके सांत हो जाती हे..





चारु : (दर्दसे) बसस.. बसस.. यार अब बसभी करो.. कीतना चोदोगे.. आजतो चोद चोदकर मुजे थका दीया.. सीइइइ हंममममम मरगइइइ देवुउउउउ बसस.. नहीइइ सहा जाता.. कीतनी देरर हेहेहे... पानी नीकालोनां.. हंमम उउउइइइइ मां ससइइइ.. बस देवु.. मत चोदो मुजे.. बहुत जल रही हे..

तब देवायत ने चारुकी अ‍ेक ना सुनी.. ओर वो चारुके गलेमे मुह डालके पुरा जुक गया ओर कमर उछालते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदताही रहा.. तब चारुनेभी अपने दोनो पैर फैलाके घुटनोसे मोड लीया ताकी उनकी चुत थोडी खुलजाये ओर देवायतके लंडको अच्छेसे जेल पाये.. देवायतका हर धका वो आहे.. भरते बरदास्त करती रही.. क्युकी हर बार लंड उनकी बच्चेदानीसे टकरा रहाथा.. जीनकी वजहसे उनकी बच्चेदानीका मुख खुल जाताथा ओर चारुको दर्द होताथा.. इसीलीये वो ओर अ‍ेसेही पडी रहेते आहे भरते देवायतसे चुदवाती रही.. क्युकी वो जानतीथी आज देवायत उनको छोडने वाला नही हे..





तभी अचानक देवायत चोदनेकी स्पीड अ‍ेकदम बढा देता हे तब चारुकी जोरोसे चीखे नीकलने लगी ओर वो छटपटाते बेटपे पैर पटकने लगी.. क्युकी देवायतके तगडे लंडको जेलना उनके लीये मुस्कील होने लगा.. तब देवायत चारुको जोरोसे बाहोमे भर लेता हे तो चारुभी उनको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोके होठ मीलतेही लीपलोक कर लेते हे तब चारु बडी आंख करते देवायतको देखने लगती हे ओर देवायत कमरको जटके मारते लंडको जडतक घुसा देता हे ओर जडते चारुकी चुतको भरने लगता हे..





तब चारुभी अपने गर्भासयपे देवायतका गरम विर्य महेसुस करते उतेजीत हो जाती हे ओर वोभी देवायतके साथ कमरको उछालते जडने लगती हे.. तब देवायत जोरोसे कमर हीलाते चारुकी चुतको भरने लगा.. ओर वो जडतेही जटसे चारुकी चुतसे लंड नीकालते अलग होजाता हे.. तब चारु दर्दके मारे बहोसी जैसी हालतमे करवट लेके पैर सीकुड लेती हे.. ओर ओर मुह बीगाटते ढेर होजाती हे.. आज वाकइ देवायतने चारुकी चुतकी धजीया उडादी थी.. उनको चारु ओर उनकी चुत बहुत पसंदथी.. ओर वो जबभी चारुको चोदता अ‍ैसेही चारुकी हालत बीगाडते चोदता.. ओर चारुको दो दीन तक आराम करना पडता..





तब देवायत बेडसे उतर जाता हे ओर चारुको गोदमे उठाके बाथरुमकी ओर लेजाता हे.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेको साफ करते साथमे नहा लेते हे ओर बहार आके अपने अपने कपडे पहेनके तैयार हो जाते हे.. ओर बहार होलमे आजाते हे तब चारु धीरे धीरे लंगडाके चल रही थी.. ओर बहुतही सरमा रहीथी.. तब बहार आते वो देवायतकी पीठमे हसते हुअ‍े सरारतसे मुका मारने लगती हे ओर सरमाते हसने लगती हे..

चारु : (सरमाते हसते) देवरजी.. अ‍ेसेही कोइ करता हे.. कीतना जोसमे करतेथे मेतो लगभग बेहोस जेसी होगइ थी.. ओर आज आपने मुजे दर्दभी बहुत दीया हे.. मुजसे कोनसी दुस्मनी नीकाल रहे थे.. हें..हें..हें..

देवायत : (पलटके हग करते) नही चारु आज वाकइ तुमपे बहोत प्यार आरहा था.. कास तुम मेरी बीवी होकर मेरे साथ रहेती.. तब मे तुजे अ‍ेसे ही दीन रात चोदताही रहेता.. क्या मस्त लग रही हे तु.. दिलतो चाहता हे अभी भी तुमसे प्यार करता रहु.. लेकीन मुजे आज जानाभी हे.. कास तु मेरी बीवी होती..





चारु : (अ‍ेकदम सरमाते) बीवी नही हु तो होजाउगी.. हम दोनो गांधर्व विवाहतो कर ही रहे हे.. कहो.. कब मुजसे सादी करोगे मे आपसे सादी करनेके लीये रेडी हुं..? सारा इन्तजाम आपको करना पडेगा.. ओर आपके भाइको भी आपको हेन्डल करना पडेगा.. मे रेडी हु.. अबतो मे आपकी बीवी बनके ही रहुगी.. इतना प्यारतो आपके भाइने भी कभी नही दीया.. देवु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (होंठ चुमते) लव यु टु चारु.. बस चारु कुछ दीन इन्तजार करले.. फीर हम मौका मीलतेही सादी कर लेगे तबतक हम रश्मीभाभीके यहा मीलते रहेगे.. तुम उनसे बात करलेना..

चारु : नही देवरजी.. अबतो आपके भाइ सरपंच होगये हे तो आयेदीन घरसे गायब रहेगे.. ओर वंदनाभी ट्युसनपे होती हे तो अबमे घरमे अकेली ही रहुुगी.. आपको फोन करदुगी तब आजाना.. अबतो हमे बहुत सारे मोके मीलते रहेगे.. तब हम मीलेगे.. आप बैठो मे चाइ बनाके लाइ..

देवायत : नही चारु तुम आराम करो.. मे खेतोपे जा रहा हु.. वेसेभी देर होगइ हे मे वही पीलुगा..

चारु : (सरमाते) देरतो होगीनां.. जनाबको दो बारजो करना था.. आजतो मुजे पुरी नीचोडली.. अभीभी मुजे नीचे बहुत जलन हो रही हे.. मेरा पुरा सरीर आज आपने तोडके रख दीया..

कहातो देवायत चारुको अ‍ेकबार फीरसे बाहोमे भर लेता हे ओर दोनोके होंठ मील जातेहे.. तब देवायतका प्यार देखकर चारुकी आंख गीली होगइ.. ओर देवायत वहासे नीकल गया ओर सीधे अपने खेतोपे आगया.. तब वहा लखन टे्रक्टर चला रहाथा ओर भानु रामुकाकाके पास बेठे देवायतका वेइट कर रहाथा.. जेसेही देवायतको देखा खडा होके गोडाउनकी ओर चलने लगा ओर रीटाको चाइकी आवाज लगाने लगा.. ओर दोनो गोडाउनमे आकर बेठ गये..

भानु : क्यु भाइ आनेमे देर होगइ..? कही गयेथे क्या..? धरसेतो कबसे नीकल गये हो.. कहा अटक गयेथे..?

देवायत : घरपे फोन कीयाथा क्या..? बोल क्या कामथा..? होगइ तुम दोनो मीया बीवीमे सुलह..? हें..हें..हें..

भानु : (हसते) काहेकी सुलह.. बस अब कुछ ज्यादा बोलती नही.. ओर रमासे तो अब हस हसके बात करती हे.. भाइ इनकाभी मेरी कुछ समजमे नही आता.. की वो मुजसे क्या चाहती हे..

देवायत : (हसते) यार तु टेन्सन मत ले.. बस तुमने उनसे अपने ओर मामीके रीस्तेकी बात छुपाइ इसीलीये तुमसे थोडी नाराज हे.. ओर कुछ नही.. धीरे धीरे सब ठीक होजायेगा.. बोल कब कर रहा हे मामीसे सादी..?

भानु : (हसते) भाइ वो तीन दीनके बाद मामाक सब कार्य खतम होजायेगा.. तब कर लेगे सादी.. मेरी तराह उनकोभी (रमाको) जल्दी हे हें..हें..हें.. वैसे सादीकी खरीदारी करने कब जाना हे..? अब सादीमे दीन ही कीतने बचे हे.. भाइ पता नही सब काम कब करलेगे हम..

देवायत : भानु अ‍ेक बात कहु..? तु मामीके साथ सादी करले.. फीर तुम दोनो लता ओर नीलमको लेके चले जाना.. ओर सब खरीदी अ‍ेकही दीनमे नीपटा लेना.. तो रमाभाभीको भी अच्छा लगेगा.. ओर वो मामाको भी जल्दी भुल जायेगी.. अब तुजेही उनको सम्हालना हे..

भानु : (हसते) ठीक हे भाइ.. तो फीर आपकी खरीदारी कैसे करोगे..? क्या नइ बीवीको लेकर जाओगे.? हें..हें..हें.. लेजाओ दोनो सास बहुको.. दोनोकी खरीदारी अ‍ेक साथ होजायेगी..

देवायत : (सीरीयस होते) भानु.. हम मंजुको दीखाने जायेगे तब दोनो सीधे हमारे घरपेही आजायेगी.. मुजसे ज्यादा मंजुको जल्दी हे की मौसी जल्दी घर आजाये.. ओर हमारी सादी होजाये..

भानु : भाइ तो उसमे गलतभी क्या हे वेसेभी सादी अभी करो की सादीके बाद.. उनको आनाहेतो इसी घरमे.. तो फीर आपभी सादी करलो.. फीर हम चारोकी सादी आरामसे करेगे.. हमे कहा कोइ तामजाम करना हे..

देवायत : चल ठीक हे देखते हे आगे क्या होता हे.. फीलहाल तो दो दीन वेइट करना हे.. फीर देखतेहे क्या करना..

भानु : भाइ आप अ‍ेक बार भावुसे खुलके बात करलो की वो क्या चाहती हे.. मुजसे बात क्यु नही करती..?

देवायत : भानु तु उनकी चीन्ता मत कर.. बस कुछ वक्त लगेगा.. फीर वो तुमसे बातभी करेगी..

रीटा : (सरपे पलु डालके चाइ लाते) मालीक.. लीजीये चाइ.. मे कप बादमे लेजाउगी..

कहेते रीटा चली गइ ओर दोनो चाइ पीने लगे.. तब दुसरी ओर चारुके घरपे देवायतके जातेही चारु सब दरवाजा बंध करके धीरे धीरे लंगडाते चलते फीरसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर टबमे बेठकर अपनी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगी.. तब जाके उनको थोडी राहत महेसुस हुइ.. फीर बहार आकर अ‍ेक पेइन कीलर ओर आइपीलकी गोली खाकर अपने रुममे चली गइ.. ओर लेटकर आराम करते सोचने लगी..

चारु : (आंख बंध करते मनमे सोचते) बडाही जालीम हे.. पहेलीबार मे ही मेरी जबरदस्त चुदाइ करली.. ओर आज उनको क्या होगया की मुजे बीना बहार नीकाले दुसरी बारभी चोद लीया.. ओर चोद चोदकर मेरी हालत बीगाडके चला गया.. क्या मे वाकइ उनको इतनी अच्छी लगती हु..? दुसरी बारमे कैसे जालीमने मुजे रगड रगडके बेहरेहमीसे चोदा.. अभी भी मेरी मुनीया(चुत) जल रही हे.. ओर वो जालीम चोदता भी मस्त हे.. इतना तो रमेशने भी मुजे कभी नही चोदा हे.. रमेश का लंडतो इनसे आधा हे.. मुजसे ठीकसे चोदभी नही पाता.. ओर मुजे प्यासी रख देता हे.. ओर देवुका लंड..? ओ बापरे.. मानो कीसी गध्धेका लंड हो.. मेरी चुतकी धजीया उडा देता हे.. तभी तो मुजे अच्छा लगता हे.. क्या मे उनसे सादी करलु..? मुजे जींदगीभर अ‍ैसेही चोदकर खुस रखनेको केह रहाथा.. ओर इसमे हर्जभी क्या हे..? मुजे कोनसा उनके साथ रहेना हे.. बस यही रमेशके साथ रहेकर देवुकी सीक्रेट बीवी बनके तो रहेना हे.. ताकी मुजे आजकी तराह खुस करता रहे वोही मेरे लीये काफी हे.. (तभी चारुके फोनकी रींग बजती हे ओर वो फोन उठालेती हे)

वंदना : (फोन उठाते ही) मम्मी मे इधर पुनमके पास रुक गइ हु.. ओर खाना इधर ही खाकर आउगी.. तुम ओर पापा खा लेनां..

चारु : (धीमी आवाजमे) नही वंदना.. अभी तेरे पापाभी आजायेगे ओर मेने खानाभी नही बनाया हे.. सुन मेरी तबीयत भी अचानक खराब होगइ हे.. प्लीज आज खाना तुही बनाले.. वहा फीर कभी खा लेना..

वंदना : (थोडी चींतीत होते) मम्मी क्या हुआ..? अभीतो मे वहासे गइ तबतो आप ठीक थी..?

चारु : (धीरेसे जुठ बोलते) वंदना मे थोडी देर पहेले बाथरुम मे गइथी.. तो पैर फीसल गया.. ओर पैरमे मोच आगइ.. तो बेटा मे आराम कर रही हु.. मुजसे चला नही जाता.. ओर थोडा टेम्परेचर जैसा भी लग रहा हे.. प्लीज तु आजानां..

वंदना : (जटसे) ठीक हे मम्मी मे अभी नीकलती हु.. आप डोक्टरको दीखादो.. कही कुछ हुआ तो नही..?

चारु : अरे नही नही.. इतनाभी दर्द नही हे.. बस तु आजा.. अभी गोली खाइ हे मे बेडपे आराम कर रही हु..

तो वंदनाने फोरन फोन कट कर दीया.. ओर पुनमको कहेके वो जटसे वहासे नीकल गइ.. तब पुनमभी अपने बेडपे आराम करने लगी.. उधर वंदना घरपे पहोची तो उनकी मम्मी अपने रुम मे आराम कर रही थी..

वंदना : (चारुके पास बेठते उनके सरपे हाथ रखकर चेक करते) मम्मी क्या हुआ..? कुछ ज्यादा तो नही लगी.. डोक्टरको दीखाना हे..? ओर टेम्परेचरभी तो मामुली हे.. अच्छा हे ज्यादा नही हे..

चारु : (जुठके दर्दसे मुह बीगाडते) नही बेटी.. कुछ आराम कर लुगी तो ठीक होजाउगी.. तु टेन्शन मतले.. वरना हम सामको देखेगे.. नही आराम हुआ तो डोक्टरको दीखा देगे.. तु आज खाना बनाले.. कीतनी चीन्ता करती हे तु..

वंदना : चीन्तातो करुगीनां आपके मेरे सीवा हे ही कोन..? तो फीर मुजे अ‍ेक भाइभी दे देना चाहीयेनां.. हें..हें..हें... मम्मी अभीभी कुछ नही बीगडा हे.. सबलोग कहेते हे की आजभी आप मेरी बडी दीदी लगती हे, हें..हें..हें..

चारु : (सरमातते अ‍ेक मुका मारते) चल बदमास तु फीर सुरु होगइ.. जा पहेले खाना बनाले अभी तेरे पापा आजायेगे.. (हसते धीरेसे) भाइ चाहीये तो तु खुद सादी करले.. फीर अपना बच्चा पैदा करलेना.. तुजे भाइकी नही अ‍ेक बेटेकी जरुरत हे.. हें..हें..हें.. ओर क्या कर रही हे पुनो..? क्या उसे मीलने गइ थी..?

वंदना : (सरमाते) नही मम्मी वो देवायतजीको पुछने गइथी.. वो जरुरी पेपर सबमीट करने हे तो..

चारु : (हसते) बेटा वो तो इधर आयेथे.. सायद इसीलीये आये होगे.. लेकीन तुम नहीथी तो पानी पीकर चले गये.. (मनमे) बेटी तुजे क्या पता आज तु नहीथी तो तेरी मांको चोद चोदके वोही हालत खराब करके गये हे.. उन्हीकी वजहसे तेरी मां बेडपे पडी हे.. अच्छा हुआ मेने आइपील लेली वरना आज जालीम पका मुजे प्रेगनेन्ट करके जाता.. पता नही तु जवान होते हुअ‍े भी कैसे अकेली रेह पाती हे.. मेतो पतीके होनेके बावजुद देवायतसे चुदे बीना नही रेह सकती.. क्या तुजे अ‍ेक लंडकी जरुरत नही हे..? पता नही बीना लंडके तु कैसे अकेली रेह लेती हे.. ओर वोभीतो राजा हे वो कीतनीभी सादी कर सकते हे.. कास तेरी सादी देवुसे हो जाती.. तो हम मां बेटी दोनोको वो सम्हाल लेते..

वंदना : मम्मी क्या सोच रही हो..? वो..वो मुजे उनके साथ अ‍ेक बार जाना पडेगा.. तो पुनमको पुछने चली गइथी.. वो मेरे साथ चल रही हे..

चारु : (वंदनाकी ओर देखते) क्या पुनमभी साथ आ रहीहे..? तो फीर उनके साथही चली जाना.. वरना मेही तुम्हारे साथ आने वालीथी.. अबतो तेरे पापाको टाइमही नही मीलेगा.. ठीक हे कब नीकलना हे..?

वंदना : (हसते) अरे अभी नही.. पहेले मे सब पेपरके बारेमे जानलु फीर जब वो कहेगे तब नीकलना हे..

चारु : चल ठीक हे पुनम साथ हेतो कोइ दीकत नही हे.. तु चली जाना.. तेरे पापासे अ‍ेक बार बात करलेना..

तब वंदना खाना बनाने चली गइ.. ओर पुनमकी कही सब बातोके बारेमें सोचते खाना बनाने लगी.. आज पुनमकी बातोने उसे जंजोरके रख दीयाथा.. ओर वंदनाको अ‍ेक बार फीर आशाकी नइ कीरण नजर आने लगी.. ओर सोचते सोचते उसने पुनमके कहेने मुताबीक आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो देवायतके बारेमे फीरसे सोचने लगी.. तो उनकी चुतमे तेज हलचल सुरु होगइ.. ओर चुतकी दोनो पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६९

तब वंदना खाना बनाने चली गइ.. ओर पुनमकी कही सब बातोके बारेमें सोचते खाना बनाने लगी.. आज पुनमकी बातोने उसे जंजोरके रख दीयाथा.. ओर वंदनाको अ‍ेक बार फीर आशाकी नइ कीरण नजर आने लगी.. ओर सोचते सोचते उसने पुनमके कहेने मुताबीक आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो देवायतके बारेमे फीरसे सोचने लगी.. तो उनकी चुतमे तेज हलचल सुरु होगइ.. ओर चुतकी दोनो पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी....अब आगे

उधर भानु ओर देवायत चाइ पीते सब प्लानींग कर रहेथे तब रीटा चाइके खाली कप लेने आगइ.. तब वो देवायतके लंडकी ओर कामुकभरी तीरछी नजरसे देखते खाली कप लेके नीकल गइ.. क्युकी वो कइ दिनोसे अपने पतीसे नही चुदी थी.. पहेले वल बहुतही संस्कारी ओरत थी कीसी गैर मर्दके सामने आंख उठाकरभी नही देखती थी.. लेकीन जबसे वो सरपंच राघवके चंगुलमे कर्जके कारण फस गइ..

ओर जब अ‍ेक दिन घरपे रश्मी नहीथी.. तब राघवने रीटाके पतीको कीसी कामके बहाने दुर भेज दिया जो सामतक लोट ना सके.. तब उसी दिन रीटा अपना सबकुछ लुटा बैठी.. उसी दिन राघवने उसे कर्जके पैसेका हवाला देकर उनको जबरदस्तीसे भोद लीया.. ओर अ‍ेक दो घंटेकी अंतरालमे साम तक रीटाको चोदता रहा.. ओर रीटाकी हालत खराब करके रखदी.. तब उसी दिन रीटाको मालुम हुआकी चुदाइ क्या होती हे..

वोतो अपने पतीके छोटे लंडसेही खुस थी.. इसके बादतो राघव रीटाको आये दिन बुलाकर चोदता रहा.. ओर रीटाकोभी राघवसे चुदवानेकी आदत होगइ.. फीरतो राघवका इसारा देखतेही छुपकेसे राघवके रुममे चली जाती ओर उनसे जमकर चुदवाकर वापस बहार आजाती.. ओर अ‍ेक दिन रीटाके पतीने दोनोको रंगे हाथ पकडलीया तब रीटाने परीस्थीतीका फायदा उठाया ओर रोने लगी..

ओर उनके पतीको कहेने लगीकी राघवने कर्जके पैसेके बदले उनके साथ जबरदस्तीकी ओर उनका फायदा उठाने लगा हे.. वो सब बताके रोने लगी.. ओर छोटु उसी दिन राघवसे जगडा करके रीटा ओर उनके बच्चेको लेकर वहासे नीकल गया.. देवायतके खेतोपे काम करने लगा.. ओर जब वो अपना सामान लेने राधवके घर गया तब राघवने उनको मार मारके उनकी टांगे तोडदी.. ओर वो अभीभी खटीयापे पडा हे..

तबसे रीटाको चुदवानेकी आग लगी हुइ थी.. अब वो बीना लंड खाये नही रेह सकती थी.. जबभी बच्चा बहार खेलने जाता तब वो अपने पतीके लंडके साथ खेलने लगती ओर उनको जडाकर अपने पतीसे उनकी चुतको चटवाके ओर उंगलीसे अपनी आगको सांत करवाती.. ओर अ‍ेक दिन देवायतने उन दोनोको अ‍ैसे खेलते देखलीया तब वो खुब सरमाइ ओर अंदर रुममे जाकर छुपकेसे देवायतके पेन्टके उभारको देखलने लगी.. तब इतना बडा उभार देखतेही वो सोक्ट होगइ.. ओर देवायतका लंड देखनेके लीये इच्छुक होने लगी..

तभीसे वो देवायतकी ओर आकर्सीत होने लगी ओर आये दिन उनके पेन्टके उभारको चोर नजरोसे देखती रहेती.. ओर आजभी खाली कप लेने आइ तब देवायतके पेन्टकी ओर देखकर कप लेकर चली गइ.. उनकी आगे बढनेकी हिंमत नही हो पा रही थी.. तभी लखनभी अंदर आगया ओर भानु देवायतके पास बैठ गया.. तब भानु ओर देवायत सादीकी बाते करते सब प्लनींग कर रहेथे तब वो गौरसे सुन रहाथा.. तभी..

भानु : (लखनकी ओर) लखन जब हम खरीदारी करने जाये तब तुमभी हमारे साथ चलना.. ताकी तुम्हे जो कपडे पसंद आये तुम लेलेना.. ओर लताकोभी खरीदारीमे आसानी रहेगी..

लखन : (सरमाते हसते) भाइ इनमे मेरी क्या जरुरत हे..? आप जो लोगे मुजे पसंद हे..

भानु : (हसते) यार तु इतना सरमा क्यु रहा हे.. मेने मेरी बहेन दे दी तो क्या हुआ.. हमारा रीस्तातो वोही रहेगा.. पहेले तो मुजसे केसे खुलके बात करता था.. मे देख रहा हु जबसे तुम्हारी सगाइ हुइ हे तबसे तुम मुजसे कुछ ज्यादा ही सरमा रहे हो.. हें..हें..हें..

लखन : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) नही भाइ अ‍ैसा कुछ नही हे.. बस ये तो..

देवायत : (हसते) हां लखन भानु ठीक केह रहा हे.. तु आजभी उनका छोटा भाइ हे.. तो सरमाना कैसा..?

लखन : (हसते) ठीक हे भाइ मे साथ चलुगा.. वरना हमतो खरीदी करने जाही रहेहे तब लेलुगा.. कहो कब जाना हे..?

भानु : (हसते अ‍ेक मुका पीठमे मारते) हां ये हुइना बात.. सुन वो तीन दीनमे मामाका सब कार्य नीपटा लेगे फीर हम जानेका प्रोग्राम करते हे.. मे तुजे बता दुगा तु तैयार होजाना..

लखन : (देवायतकी ओर देखते) भाइ वो पुनमके लीयेभी तो लेना हे.. उनका क्या..?

भानु : (हसते) लखन वो तेरी नइ भाभी पुनम ओर धिरेन इनके साथ चले जायेगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. जेसे तु तेरी नइ बीवीको लेजा रहा हे..हें..हें..हें..

लखन : (हसते आस्चर्यसे) नइ बीवी..? वो कोन हे..

देवायत : (हसते) तो क्या तुजे मालुुम नही हे..? अरे कैसे मालुम होगा अभी कीसीसे बातही नही हुइ.. सुन लखन.. भानु उनकी मामीके साथ सादी कर रहा हे.. अब वो अकेली होगइ हे तो काकीने डीसाइड कीया हे की उनकी सादी भानुसे करदी जाये.. अबतो तेरी दोदो सहेलज होगइ हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अच्छा..? चलो अच्छा हे.. वो विधवाको अ‍ेक सहारा मील जायेगा.. भाइ यही करना चाहीये.. ताकी यहा कोइ विधवाही नही हो.. सब सुहागन.. उन हिमाचलके राजाकी प्रथा बहुत अच्छी हे..

भानु : (हसते) तो क्या तुमभी उन राजाके बारेमे जानते हो..?

लखन : हां भाइ होस्टेलमे था तब मेरे पास उनकी कीताब थी.. सायद अभी भी धरपे हे.. वो पढी हे मेने..

तब देवायत गंभीर हो जाता हे ओर आने वाले वक्तके बारेमे सोचमे डुब जाता हे.. तब भानु ओर लखन उन राजाके बारेमे बाते करने लगते हे.. तभी मालती ओर हरीया अ‍ेक ट्रेक्टरसे उतरते हे ओर खेतोपे आजाते हे तब दोनो ही देवायतकी ओर देखते हसने लगते हे.. तो देवायतने मालतीकी ओर सवालीया नजरोसे देखातो मालती अ‍ेकदम सर्मसार होते नां मे गरदन हीलाते अपने रुमकी ओर चली जाती हे.. ओर हरीया सबके पास आकर नीचे बेठ जाता हे तब देवायत उनको पुछता हे..

देवायत : कहो हरीया सब अचानक कीधर चले गयेथे..? ओर क्या हुआहे जमीलाको..? सुना उनकी तबीयत ठीक नही थी.. तो कुछ दवाइ बवाइ लाये की नही..? कैसी हे वो..?

हरीया : (सरमाते हसते) नही मालीक कुछ नही हुआ.. वो..वो.. औरतोकी कुछ प्रोबलेमथी.. मालीतीको सब पता हे.. वो दोनोही हस्पतालमे गइथी.. इधरसे हमारे गांवमेही वो सुधीरवा डाक्टरहे उनको दीखाके ही गये थे.. वो अभी कबीलमे रुक गइ हे.. आप जाओतो उनसे अ‍ेक बार मील लेना.. बाकी मालतीको सब पता हे.. उनसेही पुछ लेना.. वो आपको बता देगी..

भानु : (हसते) हरीया.. चलो अच्छा हुआ तुम लोग आगये.. वो खाना खाके सब मजदुरोको केहना.. खेतोमे हल चलादे.. देख तेरे छोटे मालीक ट्रेक्टर चला रहे हे.. तुम लोगोका सब काम इन्होने करदीया.. हें..हें..हें..

हरीया : (हसते हाथ जोडके) छोटे मालीक.. आप क्यु तकलीफ लेतेहो हमतो आज आनेही वाले थे..

लखन : (हसते) अरे कुछ नही बस थोडा काम करलीया.. मुजे ट्रेक्टर चलानेका बहुत सोक हे.. तो चला लीया.. अबतो तुम लोग आगये हो..

हरीया : (हसते) ठीक हे मालीक कुछ चाइ बाइ पीयेगे..? अबतो हम आगये हे.. अभी मालतीके हाथो भीजवाता हु..

देवायत : नही हरीया अभी अभी वो छोटुकी बीवी बनाके पीला गइ.. अबतो खानेका वक्त होगया हे.. तुमभी खाना खाकर थोडा आराम करलो.. फीर काम करना.. अबतो कही नही जाना हेनां..?

हरीया : जी नही मालीक.. अबतो हम यही हे.. क्या भानुभाइका खाना बन गया..? वरना अभी मालती बना लेगी..

देवायत : चल भानु आज हमारे साथ घरपेही खाना खा लेना.. कीतने दिन होगये तुम आयेही नही..

भानु : नही भाइ आप जाके खाना खालो.. मेरा खानातो रीटाने बनालीया होगा मेने सुबह ही केह दीया था..

हरीया : ठीक हे मालीक कलसे हमही बना लेगे.. चलो जय रामजीकी..

कहेते हरीया अपने रुममे चला गया तब लखन ओर देवायतभी अपने अपने बाइक ओर कारमे हवेलीकी ओर चले गये.. ओर वहा पहोंचतेही फ्रेस होने अपने अपने रुममे चले गये.. तब पुनम कारकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ ओर खानेकी तैयारीया करवाने लगी.. जीसे देखके दया ओर रजीयाभी हसने लगी.. ओर पुनम खाना नीकालनेमे उनकी मदद करने लगी.. जैसे वो इस हवेलीकी मालकीन हो.. तब दया ओर रजीयाको नही पताथाकी पुनम अ‍ैसा क्यु कर रही हे.. तब लखन ओर देवायत अपनी अपनी जगहपे बेठ जाते हे तो पुनमभी देवायतके पास आकर बैठ गइ ओर दोनोको खाना देने लगी..

दया : छोटी मालकीन आप बैठो मे खाना दे देती हु.. फीर ससुराल जाके सबको देना.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) हें..हें..हें.. दया क्या बात कही तुने.. वाह.. हें..हें..हें..

पुनम : (थोडा चीडते) भाइ तुमतो चुपही बेठना.. फीर देखती हु लताभाभीके हाथोका खाता हे या दयाके हाथोका.. हें..हें..हें.. मेरी टांग खीचनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडता..

दया : (हसते) हां तो बीवीके हाथोकाही खायेगे.. फीर हमारे हाथोका क्यु खाये.. क्यु छोटे मालीक..?

लखन : हां तो ससुराल जाके अपने पती धिरेनको खीलायेनां.. यहा क्यु हमे खीलाती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (गुसा करते) भाइ अ‍ेक मारुगीनां.. (धीरसे बडबडाते) यहीतो कर रही हु.. अपने पतीको तो खीला रही हु.. तेरी समजमे नही आयेगा.. देवरजी..

लखन : (हसते) क्या मनमे बडबडा रहीहो जरा जोरोसे बोलनां.. हमेभीतो सुनाइदे..

देवायत : (हसते) बस बस.. क्यु जगडा कर रहे हो? पुनम दे रहीहे तो क्या प्रेबलेम हे..? पुनो तु मुजे देदे अब सीर्फ मुजेही देना.. समजी.. उनको दया दे देगी..

कहेते पुनमका पैर पैरसे सहेला दीया तो पुनम सरमाते खुस होगइ ओर सब समज गइ.. वो हसते हुअ‍े देवायत ओर खुदका खाना नीकालने लगी तो दयाभी हसते हुअ‍े लखनको खाना देने लगी.. फीर तीनो खाने लगे तब नीचेकी ओर पुनम ओर देवायत अ‍ेक दुसरेके पैरको सहेलाते खाना खाते रहे ओर उतेजीत होने लगे..

तभी पुनम टेबलकी ओर जुक गइ ओर दुसरा हाथ देवायतकी जांगोपे रखदीया ओर उनके पेन्टके उभारको सहेलाते खाना खाने लगी तब देवायतका लंड हरकतमे आके जटके मारने लगा तो उनसे कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. तभी..

देवायत : लखन तुम खाना खाकर अकेला चले जाना.. मे तेरी भाभीके पास जा रहाहु.. पुनोभी साथ चल रही हे.. हम दोनो रातको देरसे वापस आजायेगे..

लखन : (हसते) हां भैया पुनोको दीखा आओ उनका ससुराल.. हें..हें..हें..

पुनम : देखा भैया.. फीर आप कहेते हो मे इनको डांटती हु.. हां ससुराल देखने जा रही हु तुभी जा..

देवायत : दया तुम दोनोभी खालो.. ओर घरका खयाल रखना.. अभी चार बजे तकतो हम हे.. फीर आराम करके चले जायेगे.. आनेमे भी देर होजायेगी कुछ काम होतो फोन करना..

दया : मालीक आपने मुजेभी साथ आनेको कहाथा.. वो मे वहा कुछ काम करलुगी.. तो मौसीको दीकत नही होगी.. क्या मेभी साथमे आजाउ..?

पुनम : (कुछ सोचते) ठीक हे दया तुमभी साथ चलना.. उधर दो दीनतो रुकना हे.. फीर हम भाभीको दीखाके उनको यही ले आरहे हे.. क्यु भैया..?

देवायत : हां दया चलना हे तो दो जोडी अपने कपडे लेले.. हमारे साथही वापस चली आना.. ओर मन करेतो वही रुक जाना.. वेसेभी कुछ दीन बाद पुनोभी उधर आजायेगी फीर उनको कंपनी देती रहेना हें..हें..हें..

पुनम : (जांगपे अ‍ेक चपत लगाते) भाइ अब आपभी.. मे कहा वहा अकेली हु.. सीर्फ हम दो लोगोकातो काम करना हे.. मे सब मेनेज करलुगी.. फीर आगे देखते हे.. अगर जरुरत पडीतो दयाको बुला लुंगी..

दया : (हसते) दीदी वहा कहोतो मे वहाभी साथ चली आउगी.. यहा रजीया सब सम्हाल लेगी.. वेसेभी अब चंपाकाकीभी इधर आती जाती रहेती हे.. कहेती थी अब इधर ही रहेने आजाउगी..

पुनम : (हसते) दया वो हम बादमे सोचेगे.. पहेले सादीतो होजानेदे.. फीर साथ चली आना.. हें..हें..हें..

अ‍ेसेही मस्ती मजाक करते सबने खाना खा लीया.. तब दया ओर रजीयाभी खानेके लीये बेठ गइ तो लखन अपने रुममे जाते जाते रजीयाको कुछ इसारे करता गया तो रजीया सरमसे पानीपानी होगइ ओर हसने लगी.. तब पुनमभी देवायतको इसारा करके अपने रुममे चली गइ ओर देवायतभी अपने रुममे आराम करने चला गया.. तो दया ओर रजीयाने खाना खाके सब काम नीपटा लीया ओर अपने रुममे चली गइ..

तभी पुनम मौका देखतेही अपना रुम बंध करके देवायतके रुममे छुपकेसे घुस गइ ओर धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर दबे पांव बेडकी ओर चली गइ.. तब देवायत आंखोपे हाथ रखके आराम करते सो रहा था.. तो पुनम धीरेसे उनकी बगलमे लेट गइ ओर उनके सीनेपे हाथ रखके सीनेको सहेलाने लगी.. तब देवायतने हाथ हटाके देखातो पुनमथी.. तो उसने हसकर पुनमको अपनी ओर खीच लीया ओर बाहोमे भर लीया..





तब पुनम उनकी ओर पीठ करते घुम गइ अपना नींतब देवायतकी कमरकी ओर सटालीया तब देवायतने उनको पीछेसे कसके बाहोके भीचलीया ओर उनके बुब्सपे हाथ रख दीये ओर दबाकर सहेलाने लगा.. तो पुनम छटपटाते हसने लगी.. ओर देवायत उनके गलेको चुमने लगा..





पुनम : भाइ आपकी बाहोमे सोनेमे बहुत अच्छा लगता हे.. आपको आराम करना हे क्या..? चलोना थोडा प्यार करते हे.. जबसे आपने मुजे खानेपे छेडा हे तबसे कही चेइनही नही मीलता.. मुजे अ‍ेक बार प्यार करलोनां.. बहुत मन कर रहा हे..

देवायत : नही.. पुनो अभी कुछ भी नही.. जोभी करना हे हम रातमे करेगे.. चल सोजा.. हम पुरी रात प्यार करते हे.. फीर कुछ आरामभी करना चाहीये.. वरना तेरी तबीयत बीगड जायेगी..

पुनम : ठीक हे भाइ.. अब आपके बीना मुजसे नही रहा जाता.. मे वहा आपके बीना कैसे रहुगी..?

देवायत : जैसे अभी मेरी दोनो बीवीया वहा रहेती हे.. ओर मे तुजे मीलने आता जाता रहुगा.. तु फीकर मत कर..

पुनम : भाइ वोतो ठीक हे लेकीन आपकी आगोसमे आतेही मुजे कुछ होने लगता हे.. कुछ कीजीयेना.. फीर मुजे आपसे अ‍ेक बातभी कहेनी हे.. आज वो वंदना हमारे घरपे आइ थी.. आपसे मीलने..

देवायत : क्या..? वो इधर आइथी..? मेतो उनके घरपे गयाथा तो वो घरपे नही थी.. उनको बोल देना उनके सब पेपर तीन तीन कोपीमे तैयार रखदे.. उसे सबमीट करने जाना हे उनकी नोकरी पकी होगइ हे..

पुनम : भाइ.. वो मुजेभी साथ चलनेको केह रहीथी.. वो आपसे बहुत सरमाती हे.. तभीतो अपने दीलकी बात आपको नही बता पाइ.. भाइ वो भी मेरी तराह आपको अभीभी बहुत प्यार करती हे.. आप उनका प्यार कबुल करलो.. वरना बेचारी जींदगीभर अकेलीही रहेगी..

देवायत : (आस्चर्यसे) पागल होगइ हो क्या..? ये नही हो सकता.. अब बहुत देर होगइ हे.. मुजेतो मेरी इस खुबसुरत बहेन मील गइ हे मुजेतो जींदगीभर तुमको प्यार करना हे.. बस.. क्या तुजे जलन नही होती..?

पुनम : (बुब्सपे हाथ हे वो सहेलाते) नही भाइ.. वो मेरी अ‍ेकलोती खास सहेली हे.. मानलोना मेरी बहेनही हे.. ओर मे उनके साथ अपना प्यार बांटनेके लीये तैयार हु.. भाइ बेचारीने आपके लीये सादी ना करनेकी कसम खाइ हे.. कहेतीथी अब उनकी सादी होगइ हे.. मे उनकी लाइफमे इन्टरफेयर नही करुगी अ‍ेसेही उनकी यादोमे जींदगी बीता दुगी.. भाइ वो कितनी अच्छी हे.. अपने प्यारकी खातीर सादी ना करनेका फैसला कर बैठी.. वो अकेली जींदगी कैसे काटेगी..?

देवायत : (हसते) बीलकुल तेरी तराह पागल हे.. पुनो उनको समजाओ अकेली जींदगी काटना कैसा मुस्कील हे.. वोभी ओरतोके लीये.. तभीतो मे तेरी साससे सादी कर रहा हु.. ओर सुन अ‍ेक मजेकी बात.. अब वो भानुकी मामी भी विधवा होगइ हे.. तो मौसी उनकी सादी भानुसे करवा रही हे..

पुनम : (चोंकते) व्होट.. क्या इनके लीये वो भावनाभाभी तैयार होगइ..? उसने कुछ कहा नही..?

देवायत : पुनम तुमसे अ‍ेक बात कहु.. उनको बडी मुस्कीलसे मेने मनाया हे.. क्युकी उनको पता चल गया था.. की भानु ओर उनकी मामीके बीच उनकी सादीसे पहेलेही रीलेशन हे.. दोनो पहेलेसेही प्यार करते थे.. तबतक बहुत देर हो चुकीथी ओर भावुको दो दो बच्चेभी हो गये..

पुनम : भाइ तो फीर भानुभाइने भावनाभाभीसे क्यु सादी करली.. ओर दो दो बच्चेभी दे दीये.. क्या ओरते सीर्फ बच्चे पैदा करनेके लीये ओर पुरुषके मजे करनेके लीये हे..? आपनेही उनका रीस्ता करवाया थानां..?

देवायत : हां तब मुजे नही पताथा की वो उनकी मामीके साथ रीलेशनमे हे. ओर उनको प्यार करता हे.. वरना मे भावुकी जींदगी थोडीना खराब करता.. मुजेभी अब बहुत अफसोस हो रहा हे.. पर हम क्या करे..?

पुनम : भाइ ओरतोका भी क्या क्या रुप होता हे.. वो अपने प्यारको पानेके लीये कीसीभी हद तक जा सकती हे.. येभी नही देखती उनका संसार बीखर जायेगा.. ओर यही बात पुरुष सो बार सोचता हे.. जेसे आप वंदनाके बारेमे सोच रहे हो.. वरना आप कबका उनके प्यारका फायदा उठा चुके होते.. भाइ आइ अ‍ेम प्राउड फोर यु.. मे आपसे बहुत बहुत प्यार करती हु.. भाइ प्लीज.. आप वंदनाका प्यार कबुल करलो..

देवायत : नही बेबी.. ये नही हो सकता.. मे अ‍ैसा करके कीतनोको धोखा दु.. तुम मेरी मंजु चंदा.. सबको मे क्या कहुगा.. ओर वैसेभी मेरी कइ सीक्रेट वाइफ हे जैसेकी तुम रश्मी..

पुनम : भाइ कोइ धोखा नही.. सबको पता हे आप राजा हो.. ओर सब आपको राजा मानतेभी हे.. तो आपकी कइ रानीया होना लाजमी हे.. ओर हम आपसी सहमतीसेही सब केह रही हे.. हमे कीसीको कोइ अ‍ेतराज नही.. हमे कहा बहार ढंढोरा पीटना हे.. ओर मेने वंदनाको उनका प्यार पानेका वादा कीया हे.. भाइ आप उनको मेरे घर मीलते रहेना.. वहा हम दोनो मीलकर आपको खुब प्यार करेगी..

देवायत : पुनो मत भुल अभी हमारे बारेमे कीसीको नही पता.. ओर हमे कीसीको बतानाभी नही.. तो बी केरफुल.. रही बात तेरी भाभीकी तो मेरे खयालसे वो हम सबके बारेमे सब जानती हे.. पता नही उनके पास कोनसी शक्तिया आगइ हे.. उनके बारेमे बाबाभी कुछ खुलके नही केह रहे.. तुभीतो उनके ज्यादा करीब हो.. तुमभी तो सब जानती होगी.. क्या मुजे नही बतायेगी..?

पुनम : भाइ मे बाबासे ओर.. ओर..वो..वो.. भाभीसे वचनसे बंधी हु.. जबजत बाबाका आदेश ना मीले मे आपको नही बता सकती.. बस इतना जानलो भाभी हम सबके बारेमे सब जानती हे..ओर सायद हमारी सादीके बारेमे भी.. पता नही कोन हे वो.. बस हम दोनो कुछ ही दिनोमे बाबासे मीलने वाली हे..

इतना कहातो देवायत अ‍ेक बार फीर अतीतके बारेमे सोचने लगता हे.. जो बाते वो कीसीके सामने उजागर नही करना चाहता.. जब ये सुनाकी मंजु सबकुछ जानती हे तब देवायतको अपने अतीककी बातसे अ‍ेक डरसा लगने लगा.. तभी पुनम पलट गइ ओर फटाफट देवायतका सर्ट नीकालके अपना पाइजामा नीकालने लगी ओर नीचेसे नंगी होगइ.. फीर देवायतको बाहोमे भीचके उनके होंठ चुमने लगी तो देवायतभी अपनी सोचसे बहार नीकलते हाथ नीचेकी ओर लेजाता हे.. ओर पुनमकी चुतको सहेलाने लगता हे..





कुछ देरे दोनो अ‍ैसेही प्यार करते रहे तभी पुनम देवायतको पीठके बल लीटाते उनके उपर पैर डालके चड गइ.. ओर लेट गइ वो देवायतके चहेरेको अपने हाथोमे थामके उनके होंठ चुमने लगी.. तब देवायतका लंड पुनमको पेन्टमेसे ही अपनी चुतपे महेसुस हुआ तो उनकी आंख नसीली होने लगी.. ओर आंखोमे वासनाके डोरे मडराने लगे.. तभी वो चुमते चुमते नीचेकी ओर सरक गइ ओर देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलते पेन्ट थोडा नीचे करलीया फीर चडी नीचेकी ओर करतेही उनका लंड जटकेसे बहार आगया..

ओर उपरकी ओर लहेराने लगा.. तबलंडको देखतेही पुनमकी आंखोमे चमक आगइ ओर वो वासनाभरी नजरोसे देखते अपनी जीभ नीकालते लंडको नीचेसे उपरकी ओर चाटने लगी ओर लंड चाटते देवायतको नसीली नजरोसे देखती रही..





तब देवायतका लंड सख्त होके लोहेकी रोडके माफीक होने लगा.. ओर जटकेपे जटका मारने लगा तब पुनम देखके हसने लगी ओर लंडको मुहमे भरके धीरे धीरे अंदर बहार करने लगी जेसे कीसी लोलीपोप चाट रही हो..





जब देवायतका लंड सख्त होगया तब वो फटाफट देवायतका पेन्ट नीकालने लगी ओर उनकी चडीभी खीचके नीकालदी.. फीर खुदके कपडे नीकालके पुरी नंगी होगइ ओर देवायतकी कमरपे चडके बैठ गइ.. फीर धीरेसे लंड पकडके अपनी चुतपे सेट करने लगी.. उनकी बहेनकी चुदवानेकी तडप देखकर देवायत उसे लेटे लेटे हसते हुअ‍े देख रहथा.. तभी पुनम अपनी चुतके लव होलमे लंड सेट होतेही धीरे धीरे बैठने लगी..





ओर लंडको धीरे धीरे चुतमे नीगलने लगी.. जैसे कोइ सांप चुहेको नीगल रहा हो.. जब पुरे लंडको अपनी चुतकी गीरफ्तमे ले लीया तब वो देवायतपे जुक गइ ओर उनके होठोको चुमते अपनी कमरको आगे पीछे करते देवायतको चोदने लगी.. तब देवायतभी मदहोस होते नसेही हालतमे चला गया ओर वो पुनमके सरमे हाथ डालके सरको सहेलाने लगा.. अपनीही बहेनको अ‍ैसे अपने उपर चडके चुदवाते देखकर उनकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. ओर नीचेसे अपनी कमर उछालते पुनमका चुदवानेमे साथ देने लगा..





पुनम काफी देर अ‍ेसेही देवायतको कमर हीलाके चोदती रही.. आज सुबहसेही वो अपने भाइ देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकीथी.. ओर उपरसे वंदनाके साथ अपने भाइकी बाते करते ओर कामाग्नीमे जलने लगी थी.. तो वो कबसे अपने भाइके आनेका इन्तजार कर रहीथी.. ताकी उनसे चुदवा सके.. तभी देवायत पुनमके बाहोमे भरते हाथके बल उचा होकर बेठ गया ओर पुनमको अपनी गोदमे पैरपे बीठा लीया तब पुनम अपने भाइके गलेको पकडते अपनी कमर हीला हीलाके देवायतसे चुदवाने लगी ओर उनके होंठ चुमती रही..





तभी नीचेकी ओर दयाकी आंख अभी लगही रहीथी तब रजीया धीरेसे खडी होके दरवाजा खोलके दबे पांव उपरकी ओर चली गइ.. ओर सीधे लखनके रुममे घुस गइ तब लखन नंगा होकर बेडपे लंड हीलाते रजीयाका वेइट करते बेठाथा.. तो रजीया अंदर आतेही दरवाजा बंध करके फटाफट नंगी होगइ.. ओर लखनके पास चली गइ.. जातेही लखनने उनको अपनी बाहोमे भरलीया ओर होंठ चुमलीया..

रजीया : मालीक जल्दी कीजीये वरना वो दया अभी अभी सोइ हे.. कही जागते इधर ना आजाये..

लखन : बस रजीया अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार तुजे चोदलु.. तुमने क्या जादु करदीया हे तुजे देखतेही खडा हो जाता हे.. तुजे चोदनेमे बडा मजा आता हे.. अबतो तुजे जींदगीभर अ‍ैसेही चोदता रहुगा..

रजीया : (सरमाते हसते) मालीक येतो आपकी मुजपे महेरबानी हे.. जल्दी कीजीये मेरीभी हालत आपके जैसी हे.. अब आपही मेरी आग सांत कर दीजीये.. मुजेभी आप बहुत अच्छे लगने लगे हे..

कहेते वो बेडपे नंगीही लेट गइ तब लखन बेडसे उतर गया ओर रजीयाकी कमरको पकडके कीनारे तक खीचलीया तब रजीयाके दोनो पेर बेडके नीचे लटक गये.. तभी लखन उनके दोनो पैरकोके बीच खडा होगया ओर लंडको हीलाते रजीयाकी चुतपे घीसने लगा ओर गीला करने लगा तब रजीयाने दोनो पैर लखनकी कमरपे उचा करते टीका दीया.. तब लखनने लंड पकडते रजीयाकी चुतमे लव होलपे सेट कीया..

ओर थोडा फसाके उनकी कमरको दोनो हाथोसे पकड लीया ओर अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड रजीयाकी चुतमे उतारके रजीयाके उपर जुकके हाथको बेडपे टीका दीया ओर रजीयाको कमर हीलाके चोदने लगा.. तब रजीयाभी लखनके गलेमे हाथ डालके उसे पकड लेती हे ओर आहे भरते लखनसे चुदवाने लगती हे.





दोनोही कामअग्नीमे जलते चुदाइ करने लगे.. तब नीचेकी ओर दयाकी आंख खुल गइ.. ओर रजीयाको ना देखते उनका वेइट करने लगी.. दयाने सोचाकी रजीया बाथरुम करने गइ होगी लेकीन काफी टाइम होगया वो नही आइ तब उनको कुछ आसंकाये हुइ की कही वो उनको छोडकर देवायतसे चुदवानेके लीये अकेली तो नही चली गइ..

तब वो धीरेसे दरवाजा खोलके उसे ढुढंने लगी.. फीर धीरेसे देवायतके रुमकी ओर बढ गइ.. ओर अंदर जांकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन आज देवायतके रुमके सारे बारी दरवाजा अच्छेसे बंधथा तो वो नही देख पाइ तो वो उपरकी तरफ दबे पाव चली गइ.. तभी लखनके रुममे उसे कुछ अजीबसी आवाज सुनाइदी तो वो लखनके रुमकी ओर बढने लगी.. तब लखनके रुमकी अ‍ेक बारी थोडी खुली हुइ देखली.. तो वो धीरेसे बारीके पास खडी होकर अंदर जांकने लगी....

कन्टीन्यु
 
भाइ मे सोच रहा हु मेरी पहेली कहानी.. (ये केसी अनुभुती) रीफोर्म करके जी. आइ. अ‍ेफ. इमेजके साथ फीरसे सुरु करु.. इस बारेमे मुजे आपके सुजाव चाहीये.. कृपीया कोमेन्ट करके मुजे आपके सुजाव दे..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७०

तब वो धीरेसे दरवाजा खोलके उसे ढुढंने लगी.. फीर धीरेसे देवायतके रुमकी ओर बढ गइ.. ओर अंदर जांकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन आज देवायतके रुमके सारे बारी दरवाजा अच्छेसे बंधथा तो वो नही देख पाइ तो वो उपरकी तरफ दबे पाव चली गइ.. तभी लखनके रुममे उसे कुछ अजीबसी आवाज सुनाइदी तो वो लखनके रुमकी ओर बढने लगी.. तब लखनके रुमकी अ‍ेक बारी थोडी खुली हुइ देखली.. तो वो धीरेसे बारीके पास खडी होकर अंदर जांकने लगी....अब आगे

तब वो चोंक गइ क्युकी रजीया लखनके नीचे लेटे उनसे उछल उछलकर मजेसे चुदवा रही थी.. ओर उनको रजीयापे गुस्सा आने लगा क्युकी आज रजीयाने अपना वादा तोड दीयाथा.. दोनोके बीच डील हुइथी जहाभी चुदाइ करवायेगी साथमे करवायेगी.. ओर दया छुपकेसे दोनोकी चुदाइ देखने लगी.. वो दोनोकी चुदाइ देकर उतेजीत होने लगी ओर अनायासही उनका हाथ उनकी चुतपे चला गया ओर हल्केसे सहेलाने लगी..

तभी लखन चोदते चोदते नसेकी हालतमे जाने लगा ओर आंख चडाके बडबडाते रजीयाको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगा.. तब रजीया लखनकी कमरको दोनो हाथोसे पकडते अपनी चुतपे दबाव बनाते अपनी कमरको आडी टेडी करने लगी.. ओर जडनेकी कोसीस करने लगी.. तब लखन उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब रजीयाने जडनेकी कोसीस छोडदी ओर लखनको मनही मन गुस्सा होके मनमे गालीया देने लगी..

ओर लखनकी पीठ सहेलाने लगी.. तब लखन जटसे लंड नीकाल लेता हे ओर बाथरुममे घुस जाता हे तो रजीयाभी वही पडी अपनी पेन्टी उठा लेती हे ओर अपनी चुतको साफ करने लगती हे.. तभी लखन अपना लंड साफ करते बहार आगया ओर दोनो अपने अपने कपडे पहेनने लगे तब..

रजीया : (सरमाते धीरेसे) मालीक अ‍ेक बात कहु.. आप बुरा मत मानना.. आप मुजे तीन चार बार चोद चुके हो.. ओर हर बार जल्दी पानी नीकालते जड जाते हो.. अ‍ैसेमे तो मे प्यासी रेह जाती हु.. आप कुछ अपना इलाज कीजीये.. क्युकी अभी आपकी सादी होने वाली हे.. तो अपनी बीवीको कैसे संतुस्ट कर पाओगे..?

लखन : (थोडा चीडते) तो क्या हुआ मे कोसीस तो कर रहा हु.. धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा.. तु चीन्ता मत कर.. बस तुमतो मुजे खुस रखा कर.. तबकी तक देखा जायेगा.. अगर तेरे पास कोइ रास्ता हेतो दीखाना..

रजीया : (हसते सरमाते) मालीक मेरे पास कहा रास्ता हे.. बस अ‍ेकही जीच हे.. मे अगली बार ट्राइ करुगी..

तभी दया वहासे जटसे नीकल गइ ओर नीचे आगइ.. तभी उसे कुछ याद आया तो वो देवायतके दरवाजेके पास जाके खडी होगइ ओर जुकके की होलसे देखनेकी कोसीस करने लगी.. तो देखकर अ‍ेकदम चोंक गइ.. ओर थोडी देर अ‍ेसेही जुकके देखती रही.. तब पुनम ओर देवायत दोनोही भाइ बहेन बैठे बैठे चुदाइमे मसगुल थे.. तभी अचानक पुनम देवायतके कंधेपे सर रखके ढेर होगइ तो देवायत उनको बेडपे लीटाने लगा..

ओर खुद उनके पीछे लेट गया.. तब पुनम करवट लेके देवायतकी ओर पीठ करके लेट गइ ओर देवायतने उनके गलेमे अ‍ेक हाथ डालके अपनी ओर खीचलीया ओर पुनमकी चुतमे पीछेसे लंडको घुसा दीया.. तब पुनमकी हल्कीसी चीख नीकल गइ ओर देवायतने दोनो हाथसे उनके दोनो बुब्स कसके पकड लीये बुब्स मसलते पुनमको पीछेसे कमर हीलाते धनाधन चोदने लगा तब पुनमकी हालत पतली होने लगी..





पुनम : (जोरोसे सीसकारीया करते) बससस बससस भाइ धीरे.. हंममम हां.. बससस अ‍ेसेही चोदो.. बहुत मजा आ रहा हे.. उइइइ मांइइइइइ सीसइइइइ हंमममम आज अपनी बीवीइइइको नीचोडडडड डालो.. उंहु..उंहुं.. आह..आह..आह.. आह.. इइइइइ मां.. भाइइइइ थोडा धीरे चोदो... ओह गोड...आह..इइइ सीसससइइइ...

कहातो दया चोंक गइ ओर जटसे खडी होके अपने रुममे चली गइ.. आज वो रजीयाको ढुंढने गइथी तो रजीयाके साथ उनको अ‍ेक ओर रीस्तेके बारेमे पता चल गयाथा.. जो भाइ बहेनके बीच था.. ओर वो अपने बेडपे लेटकर अपनी चुतको सहेलाते भाइ बहेनके रीस्तेके बारेमे सोचते उतेजीत होने लगी..





दया : (मनमे) छोटी मालकीनने अ‍ैसा क्यु कहाकी आज अपनी इस बीवीको नीचोडलो..? क्या दोनो भाइ बहेनने सबसे छुपकर आपसमे सादी करली हे..? ओर दोनो पती पत्नी हे..? मे इस बातका जीक्र कीसीके सामने नही करुगी.. वेसेभी मालीक मुजे उनके हर रीस्तोके बारेमे बता देते हे.. ओर मेरा बहुत खयाल रखते हे.. ताकी मे उनकी मदद कर सकु.. तो क्या इनके बारेमेभी मुजे बतायेगे.. तभीतो पुनमदीदीके साथ जानेकी बात तो नही कर रहेथे..? ओर वो लखनभैया भी रजीयाको चोद रहाथा.. तो दोनोके बीच कबसे रीलेशन होगये..? मुजेतो पताही नही चला.. मुजे इस बारेमे रजीयासे बात करनी पडेगी.. कमीनी.. मेतो सीर्फ बडे मालीकसेही चुदवाउगी.. मुजे कीसी ओर लंडकी जरुरत नही हे.. अगर बच्चा पैदा करुगीतो सीर्फ बडे मालीकसे वरना नही.. मे भलेही बांज रहु.. क्या तगडा लंड हे उनका.. मुजे कीसी ओर लंडसे नही चुदवाना..

यही सब सोचते दया अपने बेडपे लेटी अपनी चुत सहेला रहीथी.. तभी रजीया धीरेसे दरवाजा खोलके अंदर आने लगी.. तब दयाने जटसे चुतसे हाथ हटाकर आंख बंध करके सोनेका नाटक कीया.. तो रजीया उनके पास आकर अ‍ेक नजर दयाकी ओर देखकर चुपचाप लेट गइ.. तभी बहारकी ओर बुलेटकी आवाज आइ तो दया समज गइकी लखनभैया खेतोपे जा चुके हे.. अब उसे देवायत ओर पुनमके बीचके रीस्तोको छुपाना पडेगा.. यही सोचते उनकी भी आंख लग गइ..

उधर देवायतके रुममे देवायत अभीभी पुनमको पीछेसे लंड घुसाते अंदर बहार करते चोद रहाथा.. तो पुनमभी मदहोसीमे छाकर देवायतसे अपनी कमर आगे पीछे करते कामुक्तासे बडबडाते चुदाइका मजा ले रहीथी.. दोनोही कामअग्नीमे जलते चुदाइमे मसगुल थे.. तभी देवायत कसके पुनमके बुब्सको पकड लेता हे ओर जोरोसे मसलते दबाने लगता हे.. तब पुनमकी हल्की चीख नीकल गइ.. ओर देवायत उनसे पीछे चीपक गया तब पुनम अपना मुह पीछेकी ओर घुमाती हे..

तभी देवायत पुनमके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेते कमरको जटके मारते जडने लगाता हे.. तो पुनमकोभी अपने अंदर देवायतका गरम विर्य महेसुस होताहे ओर वोभी उतेजीत होते साथमे जडने लगती हे.. फीर दोनोही सांत होजाते हे.. तब पुनम वही पडी देवायतकी चडीसे अपनी चुतको साफ करलेती हे ओर अ‍ेसेही पडी रहेती देवायतके पेरको सहेलाने लगती हे.. आज देवायतने उसे पीछेसे जबरदस्त तरीकेसे चोद लीयाथा.. जीनकी वजहसे वो काफी थक गइथी.. फीर दोनोही नींदकी अगोसमे चले जाते हे..





दोनोही चार बजे तक अ‍ेसेही नंगे अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सोते रहे.. तभी उनका दरवाजा कीसीने खटखटाया तब पुनम चोंकते जटसे जाग गइ.. ओर अपनी सीचुअ‍ेशन देखकर अ‍ेकदम सरमा गइ.. फीर वो जटसे खडी होकर बाथरुममे धुस गइ ओर नहाने लगी.. फीर नहाके बहार आगइ ओर देवायतकोभी जगा दीया तो देवायतभी बाथरुममे चला गया ओर नहाके कंपलीट होकर बहार आगया.. तबतक पुनम मीररके सामने बेठते अपने आपको सवार रहीथी.. तब देवायत उनके पीछे चला गया तो पुनमने मीररसे देखलीया.. ओर वो खडी होगइ तब देवायतने उनको पीछेसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तब पुनम मदहोसीमे जाने लगी..





ओर पलटके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते अलग होगये फीर अपने अपने कपडे पहेनकर तैयार होगये.. तब अ‍ेक बार फीर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होंठ चुमकर दोनोही अलग होते दरवाजेकी ओर बढ गये.. तब सबसे पहेले देवायत बहार नीकला तब दया कीचनकी ओर जाते देवायतकी ओर नैन नचाते कातील स्माइल करने लगी.. जब दया कीचनमे चली गइ तब देवायतने हाथके इसारेसे पुनमको बहार नीकलने कहा तो पुनम जटसे नीकलके अपने रुममे चली गइ..

तब उनको नही पताथा की दया कीचनकी खीडकीसे सब देख रही हे.. फीर देवायतभी सोफेपे जाकर बैठ गया.. तब पुनम अपने रुममे जातेही चेन्ज करने लगी ओर सारी ब्लाउस पहेनकर तैयार होने लगी.. क्युकी वो अपने ससुराल जा रहीथी जो गांवमे मोर्डन ड्रेसमे ससुराल जाना मतलब बातोका बतंगड होना.. ओर वो तैयार होकर बहार आगइ.. ओर देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तब दया उसे देखतेही खुस होगइ ओर पुनमकी ओर देखके कामुक स्माइल करने लगी..





दया : (हसते सरारतसे) अरे वाह.. दीदी आपतो अ‍ेकदम मस्त सादीसुधा ओरतकी तराह दीख रही हो.. ओर चहेरेपे भी काफी नीखार दीख रहा हे.. आखीर ससुरालजो जाना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (थोडी जेंपते सरमा गइ फीर हसते) दया.. अ‍ेक लगाउगीनां.. चल मुजे तो इन सारीमे सरम आरही हे.. कैसा अजीब लग रह हे.. सादीके बादतद मे सारी नही पहेनुगी.. मुजे अच्छा नही लगता..

दया : दीदी अ‍ेक सच बात कहु..? आप इन सारीमे बहोत खुबसुरत लग रही हे.. फीर सादीके बाद भलेही घरमे ड्रेस पहेनके घुमो.. लेकीन इनमे आप सचमे अ‍ेक सादीसुधा ओरत लग रही हे.. आपको देखके कोइ नही केह सकता की आप अ‍ेक कुंआरी लडकी हो.. देखो.. अबतो आपके चहेरेपे भी काफी नीखार आ चुका हे.. जेसे सादी सुधा ओरतोके चहेरेपे आजाता हे.. आपके सरीरमेभी काफी बदलाव दीख रहा हे.. जैसे आपकी सादी होगइ हो.. क्या धिरेन जीजुने आपको प्यार.. मतलब..





पुनम : (सरमसे पानीपानी होते) बस अब चुपभी..कर.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. तेरी अ‍ैसी बातोसे मुजे बहोत सरम आरही हे.. जोभी प्यार करना हे हम सादीके बाद करेगे.. समजी.. कमीनी कहीकी.. हें..हें..हें..

दया : (हसते) दीदी अ‍ेक बात कहु..? मुजेभी आप अपने साथ लेजाओ.. हम दोनो साथमे रहेगी तो आपकोभी अकेलापना नही लगेगा.. ओर मुजेभी आपके अच्छा लगेगा.. क्युकी मे जींदगीभर आपके साथ रहेके आपका साथ दुगी.. मुजे आपके साथ बहुत अच्छा लगता हे.. प्लीज..

पुनम : (हसते) तो फीर इधर कोन खयाल रखेगा.. भाभी भी तो अकेली होजायेगी.. हें..हें..हें..

दया : नही दीदी अब आपकी सासभी इधर आपकी नइ भाभी बनके आ रही हे.. ओर रजीया चंपाभाभी भीतो इधर हे.. प्लीज.. मुजे आपके साथ ले चलो.. मे वादा करती हु आपकी पर्सनल लाइफमे कोइ इन्टरफेयर नही करुगी..

कहातो पुनम अ‍ेक नजरसे दयाकी ओर देखने लगी.. ओर उसे मनमे कुछ आसंकाये आने लगी.. जैसे वो देवायतके ओर उनके बारेमे जान चुकी हो.. तब दया नजर जुकाते काम करने लगी.. तभी पुनमको खुलके दयाको पुछनेकी इच्छा होने लगी.. लेकीन तभी रजीयाभी कीचनमे आगइ.. तब दया उनके सामने घुरते गुस्सेसे देखती रही.. ओर पुनम कीचनसे बहार नीकल गइ ओर देवायतके पास जाके उनसे सटकर बेठ गइ.. ओर उनका सर देवायतके कंधेपे रखते धीरेसे देवायतकी जांगोपे हाथ रख दीया..

पुनम : (धीरेसे) भाइ.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. ये दया मुजे कुछ अजीब लग रही हे.. उनकी बातोसे लगता हे वो हमारे बारेमे कुछ जान गइ हे.. मुजे कैसे अजीब अजीब सवाल पुछ रही थी..

देवायत : (हसते) कोन..? दया..? तु उनकी टेन्शन मत ले.. मे उनसे बात करलुगा.. उनसे डरनेकी जरुरत नही हे.. वो मेरी खास राजदार हे.. वो मेरे हर रीस्तोके बारेमे जानती हे.. यही समजले वो मेरी दीवानी हे.. हंम..

पुनम : (राहतकी सांस लेते हसते) भाइ अपकी अ‍ैसी कीतनी दीवानी हे..? हें..हें..हें.. जहा देखो अ‍ेक दीवानी होती हे.. कीतनी ओरतोको फसाया हे आपने.. हें..हें..हें.. ओर आप होभी इतना क्युट ओर हेन्डसम.. हम जैसी लडकीभी आपको देखकर पागल होजाती हे.. तो फीर ओरतोका क्या कहेना..

देवायत : (हसते धीरेसे) अ‍ेकभी नही.. जीतनीभी फसी हे वो सामनेसे फसी हे.. यही मानलो उन्होने ही मुजे फसाया हे.. हें..हें..हें.. जैसे तुमने मुजे फसाया.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते कामुक स्माइल करते) भाइ.. मेतो कबसे आपसे फसनेके लीये तैयार थी.. बस आपही नही देखते थे.. अच्छा तो फीर वंदनामे क्या प्रोबलेम हे.. अब वो भी रेडी हे.. भाइ वोभी आपको बहोत प्यार करती हे.. आप उनकोभी अपनालो..

देवायत : (हसते) तुम फीर सुरु होगइ.. अरे बाबा ये नही हो सकता.. वो बहुत अच्छी ओर सीधी लडकी हे..

पुनम : भाइ तभीतो मे उनसे रीलेशन रखनेको केह रही हु.. आप उनसे गांधर्व विवाह करलो.. वो आपसे सादी करना चाहती हे.. उनकी इच्छाभी पुरी होजायेगी.. फीर मेरी तराह आपकी सीक्रेट वाइफ बनके रहेगी.. प्लीज.. मेरी खातीर.. हम दोनो मीलकर आपको खुब प्यार देगी..

देवायत : (सीरीयस होते) पुनो तुजेतो पता हे.. रमेश ओर चारुको पता चलेगा तो उनपे क्या बीतेगी..? ओर चारुके साथ मेरा क्या रीलेशन हे वोभी तुजे पता हे.. तो मे उनको कैसे धोखा दु..?

पुनम : भाइ कोइ धोखा नही होगा.. उनकी सब जीम्वेवारी मेरी.. ओर सबके सामने कहा सादी करनी हे.. हम हमारी सीक्रेट जगाह चले जायेगे.. जहा आपने मेरी सांस से सादी की हे.. समज गयेनां..? बाकी उनको जबभी मीलनाहो आप मेरे घर मुजे मीलने आओगे तब उनसे मील लेना.. ओर चारुभाभीको मे समजा दुगी..

देवायत : (हसते) अच्छा तो मेरी बीवी पुरी प्लानींग करके बैठी हे.. क्या वंदनासे इस बारेमे बात हुइ..?

पुनम : (खुस होते हसते) हां भाइ.. सब बाते होगइ.. बस.. सीर्फ आप हां कहेदो.. बेचारी बहुत खुस होजायेगी.. वैसे हम तीनोको साथमे सहेर जाना हे.. तब मे बातको आगे बढाउगी.. आप हां केह देनां..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. आगे जाके देखेगें.. अभीतो तेरी सादीमे फोकस करना हे.. फीर हम सोचेगे..

पुनम : (खुस होते हसते) ठीकहे भाइ.. लेकीन उनमे देर मत करना.. बाकी आप सब मुजपे छोडदो.. मे सब अ‍ेरेन्ज कर लुगी.. आपने हा कहा वोही मेरे लीये काफी हे.. थेन्कयु भाइ.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (कंधेसे पकडते अपनी ओर खीचते) लव यु टु बेबी.. बस तु खुस रहा कर..

दया : (हसते पीछेसे) दीदी चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. ओर मेभी रेडी हु.. मेने मेरे कपडे पेक करलीये हे..

देवायत : दया इधर रजीया अकेली हे.. तो चंपाभाभीको बुला लेना.. चलो पुनो..

दया : (हसते) मालीक फीकर मत करो उनको कहेलवा दीया हे वो आज या कल आजायेगी..

तब देवायत ओर पुनम चाइ नास्ता करने बेठ गये तो दया ओर रजीयाभी चाइनास्ता करने कीचनमे बेठ गइ सबने चाइ नास्ता करलीया तब पुनम ओर देवायत बहार नीकलने लगे तो दयाभी अपने कपडे लेकर आगइ ओर कारकी पीछली सीटमे बेठ गइ.. तो पुनम आगेकी सीटमे देवायतके साथ बैठ गइ ओर रजीयाको कहेके सब नीकलने लगे.. ओर देवायतने कारको चंदाके गांवकी ओर मोड दी.. ओर सब जाने लगे.. तभी..

देवायत : दया.. तु आज पुनोके ससुरालमे सब देखले.. फीर कहेना तुजे वहा अच्छा लगता हे की नही.. क्युकी अब तुजे पुनोकी सादीके बाद वही रहेना हे पुनोके साथ.. क्यु रहेगीनां..?

दया : मालीक मे तो दीदीसे पहेलेही केह चुकी हु.. फीरभी आपने पुछाहे तो बता रही हु मे दीदीके साथ कहीभी रहेना चाहती हु.. ओर वोभी अब हमेसाके लीये..

पुनम : दया.. अबतु भाइको मालीक मत कहे.. मुजे अच्छा नही लगता.. तु इनको बडे भैया नही केह सकती?

दया : (सरमाते हसते) जी.. बडे भैया..? लेकीन मे कैसे.. दीदी मालीकही ठीक हे.. हें..हें..हें.. मुजसे भैया नही कहा जायेगा.. आप नही समजोगी.. हे..हें..हें..

पुनम : (पीछे देखते हसते) मुजे सब पता हे तु भैयाको बडे भैया क्यु कहेना नही चाहती.. फीकर मत कर.. भैया फीरभी तेरा अ‍ेसेही खयाल रखेगे जैसे पहेले रखते थे.. हें..हें..हें..

कहातो दया सरमसे पानीपानी होगइ ओर मुह नीचे करते मुस्कराती रही.. तब पुनम ओर देवायतभी अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे तब पुनमने देवायतकी ओर आंख मारते दयाकी ओर इसारा कीया.. तो देवायत सबकुछ समज गया.. ओर पुनमको आंखसे इसारोसे सांत रहेने कहा.. तभी देवायतने बातोका दौर सम्हाल लीया..

देवायत : दया.. पुनम ठीक केह रही हे.. आजसे तु मुजे बडे भैया करकेही बुलायेगी.. मुजे पता हे तु क्यु मना कर रही हे.. लेकीन फीकर मत कर.. मे तेरा अ‍ेसेही खयाल रखुगा जेसे पहेले रखता था.. क्युकी मुजे मेरी सब बहेने अच्छी लगती हे..

दया : (सरमाते हसते) जी.. माली..क.. सोरी.. सोरी.. जी बडे..भैया.. हें..हें..हें.. बस..?

देवायत : (हसते) दया तुजे पता हे.. मे तुजे पुनोके साथ रहेनेके लीये क्यु केह रहा हु..? अब हमारे गांव ओर हमारी हवेलीमे बहुत कुछ बदलने वाला हे.. मतलब हमारे सभीके रीस्तो मे काफी बदलाव आने वाला हे.. जो तुजे आगे पता चलेगा.. तु सब अपनी आंखोसे देखेगी..

दया : (सरमाते हसते) जी बेडे भैया.. अ‍ेक बार हमारी मालकीनभी यही बात केह रहीथी.. लेकीन उनको काफी वक्त होगया हे.. मेने थोडा बहुत सुना हे.. अब हमारे गांवमे भी उन हिमाचलकी तराह होने वाला हे.. मुजेतो सुनकर थोडा आस्चर्य हुआ.. लेकीन मालकीनने कहाकी सब होकरही रहेगा..

पुनम : (हसते) अच्छा तुमभी वो हिमाचलके राजाकी बाते जानती हो..? तुमने भाभीकी बात छुपके से सुनली क्या..? हें..हें..हें.. दया.. तुम बहोत डेन्जर हो.. हें..हें..हें..

दया : (हसते) नही दीदी.. छुपकेसे नही मेरे सामनेही सब बाते हुइ.. वो ओर चारुभाभी इसी बातकी चर्चा कर रही थी.. तब मे उनके साथही बैठी थी.. तो सुनलीया.. ओर मेतो वो राजाकी पुरी कहानी (ये केसी अनुभुती) पहेलेसे ही जानती हु.. हें..हें..हें.. कीतना अजीब हेनां..? वहा रीस्तोका कोइ मतलब ही नही हे.. सब आपसी रीस्तोमे प्यारभी करते हे ओर उनसे सादीयाभी कर लेते हे.. वहा आजभी अ‍ेक भी विधवा ओर त्यक्ता नही हे..

देवायत : (हसते) अच्छा तो सुन.. इनकी सुरुआत हमारी हवेलीसे ही होगइ हे.. वोभी पीछले तीन पीढीसे.. इस बातका अभी कीसीके साथ कोइ जीक्र मत करना.. तुम सब चुपचाप देखती जाओ.. अब तुजे अ‍ेसे कइ रीस्तोमे बदलाव दीखनेको मीलेगे.. तब तुम वीचलीत मत होनां.. समज गइ..?

दया : (सरमाते हसते) जी भैया.. आप फीकर मत कीजीये.. ये बात भी हमेसाकी तराह राज ही रहेगी.. हें..हें..हें.. क्या मेने आज तक कीसीसे कुछ कहा हे..? आप फीकर मत करो..

देवायत : (पुनम ओर दयाकी ओर देखते) दया.. आज मे तुमसे अ‍ेक बात कहेने जा रहा हु.. ये बातका जीक्र कभी भी कीसीके सामने भुलसे भी मत करना..

दया : (सरमाते धीरेसे) जी भैया.. आप फीकर मत करो.. क्या मेने आज तक कीसीसे कुछ कहा हे..? कहो..

देवायत : (थोडी देर पुनमकी ओर देखते फीर रुकते) दया.. मेने ओर पुनमने आपसमे सादी करली हे.. पुनम अब मेरी बहेनके साथ मेरी बीवी भी हे.. जीस तराह तेरे साथ मेरा रीलेशन हे.. उसी तराह अब पुनमके साथभी हे.. पुनम अब हमेसा मेरी सीक्रेट बीवी बनके उस धिरेनके साथ रहेगी.. इसीलीये तुजे इनका खयाल रखनेके लीये साथमे भेज रहा हु.. ये बातका जीक्र कीसीके सामने भुलसेभी मत करना..

दया : (सरमाते हसते पुनमकी ओर देखते) जी बडे भैया.. मे सब समज गइ.. आप फीकर मत करना ये राज भी राज रहेगा.. क्या मेने आज तक कीसीके कोइ बात कीहे..? भैया भलेही आप मुजे जो समजना चाहे समजे.. लेकीन मेतो आपको अपना पतीही मानती हु.. ओर मानती रहुगी.. भलेही हमने सादी ना कीहो.. लेकीन मे आजभी आपको अपना पती मानकर आपसे पुर्ण समर्पीत हु.. ओर सच कहु.. मुजे आज दोपहरको ही आप दोनोके बारेमे सब पता चल गया था.. जब आप दोनो अपने रुममे अ‍ेक दुसरेके साथ प्यार कर रहेथे.. तब आप दोनोकी आवाज बहार तक सुनाइ दे रहीथी.. तब सुनकर मुजे सब पता चल गया..

कहातो पुनम सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे दयाको देखती रही.. आज उनको दयापे बहुत तरस आ रहीथी.. वो सोचने लगीकी दया भाइके प्रती कीतनी वफादार हे.. जो मनसेही अपने आपको भाइको पुर्ण समर्पीत कर चुकी हे.. यही सब सोचते वो दयाकी ओर प्यारसे देखती रही.. तब दया पुनमको अ‍ैसे देखते सरमा गइ ओर सरमाकर हसने लगी.. तब उनकी आंखोसे खुसीके मारे दो आंसु छलग गये.. तो पुनमने पीछे मुडके उनका हाथ थाम लीया.. ओर मुस्कराने लगी..

पुनम : (हसते) दयाबहेन.. तुम कीतनी अच्छी हो.. तुम फीकर मत करना.. तुमकोभी भाइका वोही प्यार वहाभी मीलता रहेगा जो यहा मीलता था.. हम दोनो मीलके भाइको खुब प्यार करेगी.. तु फीकर मत करना..

दया : (सरमाते आंसु पोछते हसते) जी दीदी.. सुक्रिया..

देवायत : (पुनमकी ओर देखते) पुनो दयाने मेरी बहुत मदद कीहे.. वो मेरी हर बात जानती हे.. जेसे मंजु जानती हे.. मेने रामुकाकासे दयाका हमेसाके लीये खयाल रखनेका वादा कीया हे.. बस अ‍ेकही अफसोस हे मे उनको कभी अपनी बीवीका दरजा नही दे पाया.. लेकीन मुजे उनका अ‍ेक कामतो करनाही पडेगा..

दया : (सरमाते) भैया आप फीकर मत करो.. आपने मेरा ओर मेरी हर जरुरतोका खयाल रखा यही बहुत हे.. भलेही आप मुजे बीवीका दरजा नही देपाये.. लेकीन मेने आपको हमेसा अपने पतीका दरजा दीया हे.. ओर हमेसा देती रहुगी.. बस अ‍ेकही तम्मना हे जो इश्वरने चाहातो वो भी पुरी होजायेगी..

पुनम : (दयाकी ओर सवालीया नजरोसे देखते) कोनसी तम्मना..? कोनसी इच्छा बाकी रेह गइ तुम्हारी..?

दया : (सरमाते नजर जुकाते) जी..वो..वो.. मे कभी मां बननेका सुख नही पा सकुगी..

पुनम : (हसते) कीसने कहा तुजे..? तु फीकर मत कर मेरे साथ रहेगी तो तेरे नसीबमे होगातो वो भी इच्छा पुरी होजायेगी.. तु फीकर मत कर.. हम दोनो हमारे बच्चे मीलकर पालेगे.. क्यु भाइ..?

देवायत : (हसते) हां.. अब मेरी इस खुबसुरत बीवीने कहाहे तो इतनातो करनाही पडेगा हें..हें..हें..

कहातो पुनम सरमाके हसने लगी ओर देवायतके बाजुमे मुके मारने लगी.. तब दयाभी सरमाती हसती रही अ‍ैसीही बाते करते तीनो चंदाके गांव आगये.. ओर कार पार्क करके अंदरकी ओर जाने लगे तब पुनमने जाकर दरवाजा खटखटाया तो चंदाने आकर दरवाजा खोला तब तीनोको देखके खुस होगइ ओर हसने लगी फीर पुनम ओर दयाको गले लगाया ओर दोनोका हाथ पकडते अंदरकी ओर चलने लगी.. तब....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७१

कहातो पुनम सरमाके हसने लगी ओर देवायतके बाजुमे मुके मारने लगी.. तब दयाभी सरमाती हसती रही अ‍ैसीही बाते करते तीनो चंदाके गांव आगये.. ओर कार पार्क करके अंदरकी ओर जाने लगे तब पुनमने जाकर दरवाजा खटखटाया तो चंदाने आकर दरवाजा खोला तब तीनोको देखके खुस होगइ ओर हसने लगी फीर पुनम ओर दयाको गले लगाया ओर दोनोका हाथ पकडते अंदरकी ओर चलने लगी.. तब..अब आगे

देवायत : (हसते) देखा.. ये दोनोको तो गले लगाया ओर मुजे आनेकोभी नही कहा.. हां भाइ अब बहु आगइ तो हमे कौन पुछेगा.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर पलटके देवायतकी ओर देखते सरमाते हसने लगी.. जब कीसीका ध्यान उनपे नहीथा तो चंदाने अपनी जीभ नीकालके देवायतको दीखादी ओर हसने लगी.. तभी मंजु सबकी आवाज सुनके बहारकी ओर नीकली तो देवायतको देखतेही उनकी ओर जटसे आने लगी ओर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब दया पुनम ओर चंदा सरमाके हसने लगी ओर मंजु अ‍ेसेही बाहोमे खडी रही.. तब दया ओर पुनम बच्चेके पास चली गइ ओर दयाने बच्चेको (विजय) अपनी गोदमे उठालीया..

मंजुला : (चंदाकी ओर देखते) दीदी अ‍ेक डंडा उठाके लाओ.. जनाबको हमसे मीलनेका टाइमही नही मीलता.. आज हम दोनो मीलके इनको पीटेगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मंजुको बाहोमे कसते) हां मेरी बीवीया नही मारेगी तो कौन मारेगी.. बोल.. कैसी हे तु.. ओर हमारा वीजय.. सोगया हे क्या..?

मंजुला : (हसते अपने रुमकी ओर इसारा करते) नही देखीये आपकी लाडली ओर दया आतेही उनको लेकर बैठ गइ.. दोनो उनके साथ खेल रही हे.. (सीनेपे सर रखते) कैसे हो बाबु..? मुजे यहासे ले चलोनां.. हम वहीसे सृतीको दीखाने चले जायेगे.. आपके बीना यहा अच्छा नही लगता..

चंदा : नही.. कही नही जाना.. बस दो दीन रुकजा फीर हम वही चले जायेगे.. देवु अब आप आ गयेहो तो इनको समजाओ.. कलसे जानेकी रट लेके बैठी हे..

मंजुला : (हसते धीरेसे) दीदी आपभी तो वहा जल्दी आना चाहती हे.. आपभी साथ चल रही हे.. तो फीर क्या प्रोबलेम.. हम दोनो वहीसे दिखाने चले जायेगे..

कहातो चंदा अ‍ेकदम सरमाके पानीपानी होने लगी.. ओर वो सराती हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. तब मंजु उनको देखके हसने लगी ओर देवायतकी ओर देखके कीचनकी ओर इसारा करने लगी.. तो देवायत मंजुका हाथ पकडके कीचनकी ओर चलने लगा.. जब वहा जाकर देखातो चंदा सरमाते कीचनमे खडी रहेते पैरके नाखुनसे जमीन खरोद रही थी.. ओर मुह नीचे करते मुस्करा रहीथी.. तब उसने मंजु ओर देवायतको कीचनमे आते देखा ओर अ‍ेकबार फीर समारने लगी..

मंजुला : दीदी अब कब तक अ‍ैसे सरमाती रहोगी.. अबतो ये आपकेभी पती हे.. देवु आज दीदीको मेरे सामनेही मीललो ताकी उनकी जीजक खतम होजाये.. जाओ वरना आपको मे कसम दे दुगी..

चंदा : (सरमाते गभराते) नही मंजु.. अभी बहार वो पुनम ओर दया हे.. कोइ देखलेगा.. हम बादमे मीलेगेनां.. क्यु इनको उकसा रही हे.. येतो कहीभी कभीभी सुरु होजाते हे.. इनको काहेकी सरम..

मंजुला : (देवातको चंदाकी ओर धकेलते) नही वो दोनो अंदर हे.. आप फीकर मत करो.. मे इधर खडी हु.. सब सम्हाल लुगी.. देखुतो सही मेरा देवु मेरी सैतनको कैसे प्यार करता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (आगे बढते) चंदा अबतो आजा.. आज मेरी बीवीने हुकुम करदीया हे.. तुभी जानती हे.. मे इनकी कसम नही तोड सकता..

चंदा : (सरमाते हसती हुइ दुर भागते) नही देवु.. अभी नही.. प्लीज..प्लीज.. उइइइ मां..मुंउउउउउ बुच..बुचच.. आह.. आइइइइ.. मुंमुंउउउउउ.. उइइइ सीइइइइ..

कहतो देवायतने चंदाको पकडलीया ओर अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोपे अपना होंठ रखदीया ओर उनके उरोजोको मसलते उसे कीस करने लगा.. तब चंदा सरमसे पानीपानी होते मंजुकी ओर बडी आंख करते देखती रही ओर देवायतके होंठको अपने होठोपे महेसुस करती रही.. तब दोनोही गरम होगये तब देवायतने चंदाको कमरसे पकडके अपनी कमरसे सटा लीया तब चंदा कामुक होकर मंजुकी ओर देखती रही..





तब देवायतने उसे जोरोसे होंठ भीचलीया ओर अ‍ेकदमसे चंदाको छोडके हसने लगा.. तब मंजुभी हस रही थी.. तभी चंदा देवायतको मुका मारते अपने होठोको सारीसे पोछते मंजुकी ओर आगइ.. ओर मंजुकी पीठमे मुका जड दीया.. ओर सरमाके हसने लगी.. ओर मंजुके गले लग गइ..

मंजुला : बस दीदी.. आप इसी तराह खुस रहीये.. ओर हमारे पतीको प्यार करती रहे..

चंदा : मंजु यार.. बहुत सरम आ रही हे.. अभी हमने सादीभी नहीकी ओर ये सब.. तु सब जानती तो हे..

मंजुला : दीदी गभराइअ‍े मत.. अब सादी दुनीयाको दीखानेके लीये सीर्फ ओप्चारीक रेह गइ हे.. बाकीतो आप दोनो मीया बीवी हो.. ओर मीया बीवी वाला सब काम कर चुके हो.. तो फीर अब काहेकी सरम..? हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते मंजुको मुका मारते) मंजु चुप होजाओ.. बेसर्म कहीकी.. अब आप दोनो बहार बैठो मे हमारे पतीको चाइ नास्ता करवाती हु.. हें..हें..हें..

कहातो मंजु ओर देवायत हसते हुअ‍े बहार नीकलने लगे.. तब पीछसे चंदाने देवायतकी पीठपे अ‍ेक मुका जड दीया.. तो देवायतने हसते हुअ‍े पीछे मुडकर देखा तब चंदा उनके सामने जीभ नीकालके सरारतसे हसने लगी.. तब मंजु ओर देवायत फीरसे हसने लगे ओर बहार आकर सोफेपे बैठ गये.. तभी दरवाजेकी घंटी बजीतो मंजुने जाकर दरवाजा खोल दीया.. तो धिरेन बेंकसे आगया.. ओर देवायतको देखतेही खुसीसे उनके गले लग गया.. तब उनकी नजर पुनम ओर दया पे गइ तो..

मंजुला : (हसते) जा अपनी बीवी भी आइ हे उसेभी मीलले.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी आपभी.. में अभी फ्रेस होकर आता हु..

कहेते वो सरमाते उपर चला गया तो देवायत ओर मंजु हसते रहे.. तब अंदरकी ओर दया ओर पुनम बच्चे(विजय)के साथ हस हसके खेल रहीथी ओर विजयकोभी हसानेकी कोसीस कर रहीथी.. तभी दया बच्चेको पुनमके हाथोमे थमाकर कीचनमे चली गइ ओर चंदाका हाथ बटाने लगी..तो चंदाभी खुस होते हसने लगी.. ओर दयाको सब सामन दीखाने लगी.. तभी पुनमभी बच्चेको जुलेमे डालके बहार आगइ ओर मंजुसे चीपककर बैठ गइ.. ओर उनके कंधेपे सर रख दीया..

मंजुला : (खुस होते गाल सहेलाते) कहो मेरी प्यारी गुडीगा कैसी हो..? घरपे सब ठीक तो हेनां..?

पुनम : (सरमाते हसते) जी भाभी.. सब ठीक हे ओर मे भी मजेमे हुं.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां मे देख रही हु.. आजतो ये सारी बारी.. ओर तेरा चहेरा भी खीला हुआ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. आपभीनां.., भाभी.. आप घरपे कब आ रही हे..? चलोनां.. वहा आपके बीना अच्छा नही लगता..

मंजुला : देखते हे.. वो सृतीको दीखाके सीधे वही आयेगे.. तब तेरी सांस यानी तेरी नइ भाभीभी साथ चल रही हे.. हमेंसाके लीये.. हम आतेही तेरे भाइकी ओर उनकी सादी कर रहे हे.. वोभी सीर्फ हम घरवालोके बीच.. मे सोच रही हु दोनोकी आश्रममे जाकर सादी करदेगे..

पुनम : (सरमाते हसते) हां वही ठीक रहेगा.. भाभी.. तो फीर मे उनको क्या कहु..? मम्मीजी.. की भाभी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) इस घरमे रहो तब मम्मीजी कहेना ओर मायकेमे आओ तब भाभी कहेना हें..हें..हें..

चंदा : (चाइ लेके आते सुनलेती हे) मंजु अ‍ेक मारुगीनां तुजे.. मेरी बहुको क्या उलटी सीधी पटी पढा रही हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) कुछ नही दीदी पुनो पुछ रहीथी की मे अब मम्मीको क्या कहेके बुलाउगी..? तो मेने केह दीया.. यहा हो तब मम्मीजी कहेना ओर मायकेमे हो तब भाभी कहेना.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ ओर मंजुको चाइ रखके फीरसे अ‍ेक मुका जड दीया..

चंदा : पुनो तु चल मेरे साथ येतो बेसरम हे.. कुछभी बोलती हे इनकी संगतमे रही तो तुजेभी बीगाड देगी.. चल मेरी मदद कर.. सीर्फ नास्ता बहार रखना हे अभी धिरभी आजायेगा फीर हम सब साथमे चाइ नास्ता करते हे.. चल..

पुनम : (सरमाते हसते खडी होते) जी मम्मीजी.. चलीये..

कहेते पुनम गरदनको पीछे मुडके मंजुकी ओर हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. तबतक धिरेनभी आगया ओर पुनमको देखके खुस होने लगा.. तब पुनमभी उनकी नजरको पहेचान गइ ओर मंद मंद मुस्कराती रही.. ओर सब चाइ नास्ता करने लगे तब बातोही बातोमे मंजुने धिरेनको चंदाको घर लेजानेकी ओर सादीकी बात करली.. लेकीन धिरेनतो पुनमके पीछेही लगा हुआथा.. उनको अपनी मम्मीके यहा वहा होनेमे कोइ इन्टरेस्ट नही था.. उनकोतो सीर्फ पुनमही चाहीयेथी.. तब पुनमभी देवायतके सामने देखते रहस्यमइ मुस्कान करती रही ओर इस मुस्कानका राज चंदा ओर धिरेनके अलावा चारो लोग जानते थे..

मंजुला : धिरेन हम सृतीको दीखाके सीधा घरही चले जायेगे तब दो तीन दीनमेही तु अ‍ेक दीनकी छुटी ले लेना ताकी सहेर जाके सब खरीदारी होजाये.. तुम सीर्फ अपना कपडा बपडा ओर जो तेरा सामानहे वोही लेना बाकी हम सब देख लेगे..

धिरेन : (सरमाते हसते) जी दीदी..

मंजुला : ओर अ‍ेक बात.. अब दया इधरही रहेने वाली हे.. हंमेसाके लीये.. वो अब वहा सीर्फ सादीके लीयेही आयेगी.. क्युकी तुतो ओफीस चला जायेगा तब पुनोको यहा अकेला ना लगे ओर उनका काममे भी हाथ बट जायेगा..

दया : (हसते) दीदी मेरे होते हुअ‍े दीदी काम क्यु करेगी..? मे ही सब काम सम्हाल लुगी..

चंदा : (हसते) हां मेरी मां.. तुही काम करना पहेले नास्तातो करले.. तुजे कीचनमे सब दीखा तो दीया हे..

सभी बाते करते चाइ नास्ता कर रहेथे तभी चंदाको अपने पैरपे कीसीका पैर महेसुस हुआ तो वो समज गइ ओर नजर टेडी करते देखलीया तो वो देवायतका पैर था.. जो उनके पैरको सहेला रहाथा तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर उनकी सांसे तेज चलने लगी वो उतेजीत होते देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखने लगी.. तभी देवायत उसे नजरोसे उपरकी मंजीलमे उनके कमरेमे जानेको केह रहथा तो चंदा नजरोसे हां कहेते सहमती देते हसने लगी.. ओर सबने चाइ नास्ता करलीया..

जब चाइ नास्ता करलीया तब धिरेन इसारोसे पुनमको उपर चलनेको केहता हे तब ना चाहते हुअ‍े भी पुनमको हां कहेनी पडी.. ओर धिरेन उपर चला गया तब मंजु ओर चंदा नीचे रुममे चली गइ तो दया सब खाली बरतन कीचनमे लेजाते काम करने लगी.. तभी पुनम देवायतसे इसारोसे बता देती हे की धिरेन उनको उपर मीलनेके लीये बुला रहा हे.. तो देवायतने उसे आंखोसे परमीसन देदी ओर पुनम धिरेसे उपर चली गइ..

तो देवायतभी खडा होते मंजुके पास चला गया तब मंजु विजयको दुध पीला रहीथी ओर उनके चुचे दीख रहेथे जब देवायत आया तब मंजु सरमा गइ ओर अपने चुचे सारीके पलुसे ढक लीया.. ओर सरमाते मुस्कराने लगी.. तब चंदाभी सरमा गइ ओर देवायत बेडपे चंदाके पास बैठ गया.. ओर चंदाको कमरसे खीचके अपने पास सटाकर बीठा दीया.. तो चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर मुह दुसरी ओर घुमाके हसती रही..

मंजुला : (हसते) जानु थोडातो सबर करो.. वो धिरेन उपर हे.. ओर दरवाजा भी खुला हे.. कहोतो दोनोको बहार भेजदु..? या फीर उपर लेजाके अच्छे से मील लेना अपनी इस बीवीको.. फीर जी भरके इसे प्यार करलेनां..

देवायत : (हसते धीरेसे) मंजु इनको कबसे यहीतो केह रहा हु.. इनको बोल तेरे हिस्सेका प्यारभी मे इनसे वसुल करलुगा..

मंजुला : (हसते) तो बाबा मना कीसने कीया हे.. आप इसे उपर कमरेमे लेजाइअ‍े.. ओर कर लीजीये जीतना प्यार करना हो उतना.. ओर मेरे हिस्सेका प्यारभी इनसे वसेल करलीजीये..

कहातो चंदा अ‍ेक बार फीर बुरी तराह सर्मसार होगइ ओर हसते हुअ‍े बेठेही मंजुको अ‍ेक मुका जड दीया फीर सरमाते कहा..

चंदा : (मुस्कराते) कोइ जरुरत नही.. हम यही बैठे हे येभी बहुत हे.. अब तो दयाभी इधर आगइ हे ध्यान रखना.. वरना येतो कहीभी सुरु होजाते हे.. अभी पुनमभी इधर आजायेगी..

मंजुला : (हसते) दीदी दयाकी जरासीभी फीकर मत करो.. वो सब जानती हे.. की आप इनकी बीवी होने वाली हे.. तो उनसे डरनेकी जरुरत नही हे..

चंदा : (हसते धीरेसे) बीवी होने वाली हु नां..? हुइ तो नही.. तबकी तब सोचेगे.. जब मे इनकी बीवी होजाउ फीर जीतना प्यार करना हे करले.. लेकीन अभी नही..

देवायत : (सरारतसे मुस्कराते) अच्छा.. मेरी बीवी नही हुइ नां..? अ‍ेक बार फीरसे कहेदो..

चंदा : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) नही.. आप बहोत कमीने हो.. ये में नही केह सकती.. आपकी बीवी हु में.. हें..हें..हें.. मंजु हमने मंदिरमेतो गांधर्व सादी करली हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते धीरेसे) देवु दीदी बहोत नखरे कर रही हे.. अ‍ेक बार मेरे सामनेही उनको पटकके प्यार करलो (चोदलो).. फीर नही सरमायेगी हें..हें..हें..

चंदा : (जटसे खडी होके सरमाते हसते मंजुको मुका मारते बहार जाते) तुम दोनोही बहोत कमीने हो.. दोनोके दोनो बेसरम हो.. यहा बैठुगीतो खतरा हे.. तुम दोनो बैठो.. मे चली दयाकी मदद करने..

कहेते वो जटसे बहार भाग गइ ओर सीधी कीचनमे चली गइ.. ओर वहा दयाकी हेल्प करने लगी तब मंजु ओर देवायत जोरोसे हसने लगे.. तभी मंजुने बच्चेको उरोजोसे दुध पीते हटालीया ओर अपना ब्लाउस ठीक करके बच्चेको वही जुलेमे डालदीया.. ओर जटसे रुमका दरवाजा बंध करके देवायतको हाथ खीचके खडा करदीया.. ओर उनकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी..

तब देवायतभी मंजुको कसके बाहोमे भीच लेता हे ओर दोनोके होंठ मील जाते हे.. तब मंजु आंख बंध करते देवायतके होठोका रस पीने लगी ओर मदहोस होते आधी आंख चडाते स्मुच करती रही.. तभी देवायत उनके बुब्सको मसलते दबाने लगा ओर दोनोही कामातुर होके अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे.. तभी देवायत अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते मंजुकी चुतको सहेलाने लगा तो मंजु सीसकारीया करने लगी.. ओर देवायतको कसके बाहोमे भीचलेती हे.. फीर अचानक जटसे अलग होगइ..

मंजुला : (हाथ पकडते बेडपे बीठाते) जानु.. प्लीज.. मुजसे रहा नही जाता.. ओर मे अभी कुछ करभी नही सकती.. क्या हम उपर उपरसे प्यार नही कर सकते.. सोरी जानु मे आपको अभी नीचे नही दे सकती..

देवायत : (हसते) बेबी मुजे पता हे अभी तु ठीकसे सही नही हुइ हे.. दो तीन महीनेका वक्त लगेगा.. फीर हम दोनो मीलकर खुब प्यार करेगे

मंजुला : बस बाबु वोही चीन्ता सता रही हे.. तबतक आप क्या करोगे..? आप घर जातेही मौसीसे सादी करलो.. ताकी वो आपको सम्हाल सके.. बाकी अभी ये तीन चार दीनतो आपकी चीन्ता नही हे.. जबतक मौसी वहा नही आती.. दोनो खुब मजे करलो..

देवायत : (चोंकते) क्यु.. ये तीन चाह दीन चीन्ता क्यु नही हे..? ओर हम दोनो मतलब..?

मंजुला : (तब उसे अपनी गलतीका अहेसास हुआ ओर वो गभरा गइ) वो..वो..कुछ नही बस अ‍ेसेही मुहसे नीकल गया.. आप मुजे मीलनेतो आते हो.. इसीलीये..कहा..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे मंजुकी ओर देखते) मंजु.. मुजे कीतना चाहती हे मुजे..?

मंजुला : (उनकी आंखोमे देखते) क्यु..? अपनी जानसेभी ज्यादा.. कोइ सक हे आपको..? अ‍ैसा क्यु पुछा आपने..?

देवायत : तो फीर मुजसे बाबाकी सब बाते क्यु छुपाइ..? क्या मुजे कहेने लायक नही हे? मुजे तेरे बारेमे सब पता चल गया हे.. तु हम सबके बारेमे सबकुछ जान जानती हे.. सच बताना कौन हो तुम..? ओर कौन हु में..? बाबाने तुजे अ‍ैसी कोनसी शकित दीहे जो तुम हम सबके बारेमे जान जाती हे.. मुजे सच बताना..

कहातो मंजु देवायतके पास उनसे सटकर बैठ गइ ओर बैठेही देवायतको बाहोमे भीच लीया.. ओर उनकी आंखोसे आंसु टपकने लगे.. तब देवायतने उनके आंसु पोछ दीये ओर मंजुको बैठेही अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर ैनके सरको चुमने लगा..

मंजुला : (आंसु टपकाते) जानु.. वो..वो.. मे आपको अभी कुछ बाते नही बता सकती.. बाबासे वचनसे बंधी हु.. बस कुछ दीन इन्तजार करलो अ‍ेक बार मे बाबाको मीललु.. फीर आपको सब पता चल जायेगा..

देवायत : (बाहोमे होंठ चुमते) ठीक हे बेबी तो मत बता मुजे.. लेकीन मुजे बहुत कुछ मालुम होगया हे.. की तुम हम सबके बारेमे बहोत कुछ जानती हो.. मेतो तुजे पाकर धन्य हो गया.. क्या ये पीछले तीन चार दीनमे क्या हुआ वोभी तो तुम सब जानती होगी..? तभीतो तीन चार दीनकी चीन्ता नहीहे की बातकी.. क्या ये सच हेनां..? तुम हमारे बारेमे सब जान चुकी हेनां..?

मंजुला : (सीनेमे सर रखते) हां जानु.. जो भी कुछ हो रहा हे होने दो.. सब प्रकृतीका खेल हे.. हमे उनमे इन्टरफेयर नही करना.. ओर ये तीन चार दीनमे जोभी कुछ हुआ इनमे मुजे आपसे कोइ सीकायतभी नही हे.. ये सब होनेही वाला था.. तो आप गील्टी फील मत करना.. ओर मेभी इस गलत नही मानती ना अभीके लीये ओर नाही भुतकालके लीये.. जोभी हुआ वो होने ही वाला था.. ओर आगे जोभी होगा वो होकर ही रहेगा.. हमे सीर्फ अपना कर्म करना हे.. आप कीसीभी.. रीस्तेको लेकर कभी गील्टी फील मत करना.. फीर चाहे वो रीस्तेमे कोइभी क्यु ना हो.., क्या बाबाने खुद तुम दोनो की सादी करवाइ हेनां..?





देवायत : (बाहोमे कसते गाल चुमते) हां मंजु.. मुजेभी कुछ नही पता था.. जीस तराह तुम जानती हो.. उसी तराह वोभी बहुत कुछ जानती हे.. पता नही कौन हो तुम दोनो.. मंजु जीतना तुम मुजे चाहती हो.. उतना वोभी मुजे चाहती हे.. भले ही वो मेरी बहेन हो.. मे उनके प्यारके आगे विवस होगया मे उसे मना नही कर सका.. वो मेरे प्यारमे बीलकुल पागल हो चुकी हे.. ओर हमने सबकुछ करलीया हे.. तु समज गइनां..?

मंजुला : हां.. जानु अ‍ेक बात कहु..? जोभी हुआ या होने वाला हे.. उनमे आप कभी गील्टी फील मत करना.. मे हमेसा आपके साथ हु.. ओर साथही रहुगी.. आपके हर कार्यमे मेरी सहमती हे.. बस इतनाही केह सकती हु.. ओर अ‍ेक बात जो सायद तुम दोनो.. मतलब आप ओर पुनम नही जानते.. जो मे आपको बता रही हु.. ओर ये बात अभी हम तीनोके बीचही रखना..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हम दोनो क्या नही जानते..?

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) वो..वो..सायद.. सी इस प्रेगनेन्ट.. पुनमके गर्भमे कल ही आपका वो अंसभी आ चुका हे.. जीनका बाबा बरसोसे इन्तजार कर रहेथे.. ओर अ‍ेक सच मेरे बारेमे हे.. जो आपको जल्द पता चल जायेगा.. जो आप नही जानते.. ओर मे अभी नही बता पाउगी.. तब आपकी मेरे प्रती क्या फीलींग होगी वो मुजे नही पता.. बस मे इतना जानती हु मे आपसे बहुत प्यार करती हु ओर हंमेसा करती रहुगी.. आइ लव यु बाबु.. आइ लव यु सो मच.. बस मुजे कभी मत छोडना..

देवायत : तुम कोनसे सचकी बात कर रही हे..? जु तुम बहोत रहस्यमय बाते कर रही हे.. चल आगे देखते हे क्या होता हे.. बस मे इतना जानता हु मे मेरी मंजुसे बहोत प्यार करता हु ओर हमेसा करता रहुगा.. लव यु बेबी.. बस मे इस नये रीस्तेको लेकर तुमसे डरता था.. की मेरी मंजुको पता चलेगा तब क्या होगा.. ओर आज मे बहुत खुस हु.. लव यु बेबी.. लव यु सो मच.. बस मुजे अ‍ैसेही प्यार करती रहेनां

मंजुला : जानु आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. ये बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रखना.. अब कीसीको मत बताना.. जीतनेभी जानते हे उतने तक ही सीमीत रखना.. बस ओर कुछ नही कहेना.. आगे सब ठीक होजायेगा..

देवायत : (हसते) बेबी अ‍ेक बात टाल गइ तुम.. तुम मुजसे तुम्हारी असली पहेचान कब कराओगी..? हें..हें..हें.. मे सब जानना चाहता हु.. ना बाबा कुछ कहेते हे ओर नाही तुम..

मंजुला : (हसते) जानु चीन्ता मत करो.. मेरे जानेसे पहेले मेरी असली पहेचान करवा दुगी.. हें..हे..हे..

देवायत : (रुआसी आवाजमे) यार तुम जानेकी बात मत करो.. मे सहेन नही कर पाउगा.. क्या जरुरत थी बच्चेकी.. (आंसु टपक जाते हे तब मंजु उसे जोरोसे बाहोमे भीचते आंसु पोछते हसते हुअ‍े कहेती हे)

मंजुला : जानु चीन्ता मत करो मे कहा आपसे दुर जारही हु.. बस यही समजलो मे सीर्फ ये सरीर बदलने जा रही हु.. मे वापस आकर आपको पीछला सब ज्ञात करवा दुगी.. तब आप मुजे पहेचान जायेगे.. की वास्तवमे हम सब कौन हे.. मे आप मौसी पुनो हम सब कइ जन्मोसे आपसमे जुडे हुअ‍े हे..

देवायत : बेबी.. लेकीन तेरा प्यार मे नही भुल पाउगा.. उनका क्या..?

मंजुला : (हसते) नही जानु.. मेरा प्यार आपको मीलता रहेगा.. सायद इसीलीये अपकी जींदगीमे ये दोनो आइ हे.. मे इनके माध्यमसे आपको वही प्यार करती रहुगी.. यही समज लेना मे आपको प्यार कर रही हु.. इनके लीये मेरी पुनम ही काफी हे.. वो ओर मौसी आपको खुब प्यार देगी.. आइ प्रोमीस..

देवायत : बेबी अ‍ेक बात कहेनी हे.. वो हमारी पुनम मुजसे बहोत प्यार करती हे.. यहा तक उनकी सादी टालनेकी बाते कर रहीथी बडी मुस्कीलसे उसे समजाया हे.. तु उनसे अकेलेमे बात करलेनां.. ओर उसे समजाना.. की अ‍ैसी नादानी ना करे..

मंजुला : नही जानु उनको कहो अ‍ैसा पागलपन करनेकी जरुरत नही हे.. मे वहा आउगी तब उनको समजा दुगी.. ओर हां.. आपके पास ये दो राते हे.. तब खुब प्यार देना उनको.. उसे हर तराहसे तृप्त करदो.. फीर पता नही कब आप दोनोका मीलन होगा.. वो बाबाके आदेशका बराबर पालन कर रही हे..

देवायत : मंजु अ‍ेक बात समजमे नही आइ.. क्या तुम उनका जवाब मुजे दे पाओगी..?

मंजुला : (हसते) अब कोनसा सवाल मनमे रेह गया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : बेबी मेरी ये समजमे नही आरहा.. की बाबा अ‍ेक साधु होकर हमसे अ‍ैसा काम क्यु करवा रहे हे..? जो हर रीस्तेको तार तार करदीया.. हमारे बीच रीस्तोका कोइ मायनाही नही रहा..

मंजुला : (जोरोसे हसते) इनका जवाबतो आपको बाबाही अच्छेसे दे सकते हे..हें..हें..हें.. आप हर जन्ममे ये सवाल उनको पुछते हो.. तो वोही आपको अच्छेसे जवाब देगे हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अच्छा चल मे उनसे मीलकरही पुछ लुंगा..

मंजुला : (अचानक गंभीर होते) जानु वो..वो.. आज मम्मीका फोन आयाथा.. पापकी तबीयत बहुत खराब हे.. वो होस्पीटलमे ओक्सीजनपे हे.. अब इस हालमे मे कैसे जा पाउगी..? भावु या भानुभाइ भी तो नही जा सकते.. क्या आप.. आप जाओगे..? प्लीज.. अ‍ेक बार मेरी खातीर..

देवायत : मंजु मे तेरे बगैर कैसे..? आइ मीन.. मुजे पता हे तुम हमारे बारेमे सब जानती हो.. तो फीर.. मे हमारी सादीके बाद वहा अकेला कभी नही गया.. ओर उनकी वजहभी तुम जानती हो..

मंजुला : जानु.. लेकीन आपको कल जाना पडेगा.. पापाके खातीर.. वो आपको अपना दामाद नही अ‍ेक बेटेकी तराह मानते हे.. प्लीज.. आप चले जाओ.. ओर ज्यादा तबीयत खराब होतो उसे सहेरकी होस्पीटलमे लेजाना.., बेचारे भानुभाइभी तो नही जा सकते.. वरना उनको ही भेज देती.. ओर धिरेनकोभी छुटीकी प्रोबलेम.. आप चले जाओ.. आप मेरी चीन्ता मत करो.. क्या पता सब सही होजाये..

देवायत : नही मंजु तु फीकर मत कर मे कल सुबह ही चला जाता हु.. ओर देखता हु क्या हो सकता हे..

मंजुला : बस जानु.. आपसे अ‍ेकही रीक्वेस्ट हे.. हो सकेतो आप सबकुछ भुल जाओ.. माफ करदो उनको.. तब वो गुसेमे बोल गइ.. अब बहुत पछता रही हे.. आपसे बात करनेके लीये वो बहुत तडपी हे.. आजभी दीन रात वो आपहीके बारमे सोचती रहेती हे.. बस अ‍ेक बार मेरी खातीर उसे माफ करदो..

देवायत : मंजु तुम ये सब बाते इतनी सहजतासे कैसे कर लेती हे..? क्या तुमको हमारे बारेमे सब जानके बुरा नही लगा..?

मंजुला : (हसते) नही.. सायद आपको अभी आपके बारेमे ज्ञात नही हे.. वरना आप मुजसे ये सवाल नही पुछते.. आपका कामही यही हे.. बस इतना फर्कहे आप सब काम डरके साथ कर रहे हो.. ओर वो जब आयेगा.. तब सब चरमो पे होगा.. वो सबको खुलके प्यार करेगा.. अगर बाबने मेरी खुदकी पहेचान मुजसे नही करवाइ होती तो मे भी अ‍ेक आम ओरतकी तराह सोचती.. (जोरोसे हसते) जानु आप बहुत ही कमीने हो.. धीरे धीरे करते मुजसे सब बाते उगलवा रहेहो.. हें..हें..हें.. चलीये अब बहार सब हे तो..

कहेते मंजु अपने रुमका दरवाजा खोल देती हे.. तब उपर क्या हुआ आइअ‍े देखते हे.. उपर धिरेन पुनमका वेइट करते अपने रुममे बैठा था जेसेही पुनम आइ वो जटसे खडा होगया ओर अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. फीर पलटके वापस आकर उसने पुनमको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तब पुनमकोभी कुछ अजीबसा डर लगने लगा.. ओर सरमसे धिरेनकी बाहोमे अ‍ैसेही यंत्रवत खडी रही....

कन्टीन्यु
 
सभी पाठको को मेरा नमस्कार.. इस कहानीको पढनेमे आसानी रहे इसीलीये बीच बीचमे मेने कुछ फोन्ट के कलर चेन्ज कीया हे.. धन्यवाद..

रेग्युलर कहानी ब्लेक कलरमे चलेगी.. ∙∙∙∙∙



कीसीके मनकी बात रेड कलरमे चलेगी..
∙∙∙∙∙



फ्लेसबेक कहानी ब्ल्यु कलरमे चलेगी..
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७२

कहेते मंजु अपने रुमका दरवाजा खोल देती हे.. तब उपर क्या हुआ आइअ‍े देखते हे.. उपर धिरेन पुनमका वेइट करते अपने रुममे बैठा था जेसेही पुनम आइ वो जटसे खडा होगया ओर अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. फीर पलटके वापस आकर उसने पुनमको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तब पुनमकोभी कुछ अजीबसा डर लगने लगा.. ओर सरमसे धिरेनकी बाहोमे अ‍ैसेही यंत्रवत खडी रही....अब आगे

तभी धिरेन अलग होकर उनकी आंखोमें देखता रहा फीर अचानक पुनमके चहेरेको पकडके पागलोकी तराह चुमने लगा.. तब पुनम सरमसे पानीपानी होने लगी.. ओर ना चाहते हुअ‍ेभी धिरेनको प्यार करने देने लगी.. उनकोभी पताथा आज नही तो कल उसे धिरेनको सब कुछ करना देना ही पडेगा.. ओर वो चुपचाप खडी रहेके धिरेनका साथ देने लगी.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. पुनमने अपनी आंख बंध करली ओर स्मुच करने लगे.. तब अनायासही धिरेनका हाथ पुनमके बुब्सपे चला गया..





तो पुनम कांप गइ ओर अनकंन्फर्टेबल फील करने लगी.. फीरभी उनको धिरेनका साथ देना पडा.. ओर दोनो प्यार करते बहेकने लगे तब धिरेन धीरे धीरे करते पुनमको बेडकी ओर ले चला.. ओर बेडपे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे कीस करते बैठ गये ओर धिरेनने पुनमके उरोजोको दबाते उसे बेडपे लीटा दीया ओर कामातुर होके उनपे जुककर होंठ चुमते अ‍ेक हाथ नीचेकीओर लेजाते पुनमकी चुतपे रखते उनको सहेलाने लगा..





पुनम : (जटसे धिरेनका हाथ पकडते रीक्वेस्ट करते) नही.. नही.. सीइइइ बससस.. बससस.. धिरेन वहा अभी नही.. प्लीज.. अभी नही.. सब सादीके बाद..(कहेते जटसे बेडपे बैठ गइ)

धिरेन : (गीडगीडाते धीरेसे) पुनो प्लीज.. अ‍ेक बार.. सीर्फ अ‍ेक बार.. बहोत मन कर रहा हे.. यार मे तेरे बीना नही रेह सकता.. प्लीज मानजाओ.. सीर्फ अ‍ेक बार..

पुनम : (सर्मसार होते) नही धिरेन.. अभी नही.. प्लीज.. मान जाओ.. हमारी सादी होजानेदो.. फीर मे आपको मना नही करुगी.. प्लीज.. यही समजलो आज मेरा व्रत हे.. प्लीज.. मान जाओ बाबु..

धिरेन : (आस्चर्यसे धीरेसे) पुनो.. ये कैसा व्रत..? प्लीज.. क्या तुम मुजसे प्यार नही करती..?

पुनम : (गभराते जटसे) अरे नही नही.. बहुत करती हु.. लेकीन आज नही.. प्लीज.. मेरे अच्छे बेबी मान जाओ.. यार.. अब कैसे कहु.. (सरमाते धीरेसे मुह घुमाते जुठ बोलते) वो.. वो.. मेरा पीरीयड चल रहा हे..

धिरेन : (मुस्कराते) ओह.. आइ अ‍ेम सोरी.. यार मुजे नही पताथा.. क्या हमारी सादी तक तुम ठीकतो होजाओगीनां..? पुनो तुजे देखते ही मे पागल हो जाता हु.. आइ अ‍ेम सोरी..

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. अब सादीमे दीन ही कीतने बचे हे.. येतो तीन दीनमे सब ठीक होजायेगा..

धिरेन : (सरमाते धीरेसे गाल चुमते) पुनो मे उस पलका कबसे इन्तजार कर रहा हु.. जब हमारा मीलन होगा.. मे इस बातको लेकर बहुत अ‍ेक्साइटेड हु.. क्या तुम नही हो..?

पुनम : (सरमाते मुह दुसरी ओर करते हसते) मुजे नही पता.. चलोना नीचे.. सब क्या सोचेगे..

धिरेन : यार थोडी देरतो बैठो.. तुम्हारे साथ कीतना अच्छा लगता हे.. अभी चलेगे..हंम..

पुनम : (सरमाते हसते) अरे चलोना.. वरना.. आप..आप फीरसे बहेकने लगेगे..

धिरेन : (बैठेही बाहोमे भीचते) पुनो.. आप नही.. तुम.. तुम सीर्फ मेरी होने वाली बीवीही नही.. मेरी दोस्तभी हो.. मेरी गर्लफ्रेन्ड.. पुनो तुजे पता हे मे मेरी पुरी कोलेज लाइफ आपके साथ जीना चाहता हु..

पुनम : (सरमाते हसते) आप नही.. तुम कहो.. हें..हें..हें.. धिरेन बुरा मत मानना.. मे सादीके दिन तुमको खुब प्यार दुगी.. लेकीन अभी मे नही दे सकती.. अब चलोभी.. सब क्या सोचेगे..

कहेते पुनम खडी होगइ तब धिरेनकोभी मजबुरन खडा होना पडा.. आज पुनम बडीही सीफततासे धिरेनको मीलके वापस नीचे आगइ.. तब देवायत मंजुके पास बैठाथा तो पुनम आतेही उनके सामने देखते मंजुसे नजर बचाते आंख मारते सरमाती हसने लगी ओर विजयके साथ खेलने लगी.. तब देवायत खडा होके बहार सोफेपे बैठ गया.. तो थोडी देरके बाद धिरेनभी बाथरुममे जाकर अपने आपको सांत करके नीचे आगया ओर देवायतके पास बैठ गया..

देवायत : कहो धिरेन बेंकमे सब अच्छेसे सेट होगया..? वहा कोइ प्रोबलेम तो नही..?

धिरेन : (हसते) नही जीजु.. सब स्टाफ मस्त हे.. सब बडीया चल रहा हे.. सायद कल मुजे छुटी लेनी पडे.. अ‍ेकतो सादीकी छुटी लेनी हे ओर ये.. मम्मीकोभी नही भेज सकता क्युकी यहा मंजु दीदी अकेली होजायेगी.. अभी मेने मंजु दीदीके अलावा कीसीको बतायाभी नही हे..

देवायत : (उनकी ओर देखते) कीस बारेमे..? क्या हुआ..? बता मुजे..

धिरेन : (धीरेसे) जीजु अभी कीसीको मत कहेना.. प्लीज.. मौसीने मना कीया हे.. सब चीन्तामे लग जायेगे.. वो..वो..आज बेन्कमे था तब निर्मला मौसीका फोन आयाथा.. आपकी सासुमाका.. वो मौसाजीकी तबीयत अचानक बीगड गइ हे.. ओर वो होस्पीटलमे अ‍ेडमीट हे.. सायद बात कुछ गंभीर हे..

देवायत : (चोंकते धिरेसे) व्होट..? क्या केह रहा हे तु.. तो फीर मुजे फोन करना चाहीयेनां..? मुजे या भानुको फोन क्यु नही कीया..?

धिरेन : (धीरेसे) जीजु मेनेभी वोही कहा.. तो कहाकी मंजु ओर भावनाकी डीलीवरी हेतो कोइ फ्रि नही होगे.. ओर खामखा चीन्ता करेगे.. तो मुजे बुला लीया.. में कल सुबह जा रहा हु.. क्युकी वो मुजे अपने बेटेकी तराह मानती हे.. ओर मेराभी फर्ज हे की मेही उनका खयाल रखुगा..

देवायत : तुजे कही जानेकी जरुरत नही हे.. तु कल बेन्क चलाजा.. तु उनका बेटा हे.. तो फीर हम कोन हे..? तु कल छुटी मत लेना मे सब देख लुंगा.. ओर वेसेभी मंजु इधर हेतो कोइ दिकत नही हे.. बस अभी तु ये बात कीसीको मत कहेना खामखा सब परेसान होगे..

धिरेन : (हसते) ठीक हे जीजु.. मेने सीर्फ मंजुदीदीसे बात कीहे.. तो वोभी आपकोही कहेगी.. आपही चले जाना वेसे भी काफी टाइम होगया आप ससुराल नही गये.. हें..हें..हें..

चंदा : (बहार अ‍ेक डीबा लेकर आते) धिरेन.. तु ओर पुनो जरा काका की दुकानसे शीखंड लेकर आजा.. ओर जल्दी आना.. फीर इन लोगोको गांवभी जाना हे.. रातमे देरसे जाना ठीक नही..

धिरेन : (पुनमका नाम सुनतेही खुस होते) जी मम्मी.. दीजीये अभी आजायेगे..

चंदा : क्या अभी आजायेगे..? अरे बाबा सहेर जाना हे आरामसे बाइक चलाना.. पुनम साथमे हे.. डर जायेगी.. मुजे कोइ रीस्क नही चाहीये.. समजे..

धिरेन : (हसते) अरे मम्मी मे बाइक धिरे चलाता हु.. ओर मे रोजतो सहेर जाता हु..

चंदा : (हसते) चल चल ठीक हे.. ओर पुनोका खयाल रखना उसे कुछ खीला पीला देना.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम रुममे बैठे सब सुन रहीथी तो सर्मसार होने लगी.. तब मंजुने उसे इसारा करते जानेके लीये कहा तब बडी मुस्कीलसे ना चाहते हुअ‍ेभी जानेके लीये उठ गइ.. ओर मंजुकी ओर देखते पीठमे अ‍ेक मुका मारते बहार जाने लगी.. तब मंजुकी हसी नीकल गइ.. तब मंजुको कुछ याद आगया तो पुनमको वापस बुलाते धीरेसे कहेने लगी..

मंजुला : (पुनमको रोकते पास बुलाते धीरेसे) पुनो सम्हालके.. अभी कुछ उल्टा सीधा मत करने देना.. तेरे पीछे बीलकुल पागइ होगया हे.. तुजे कुछ नही होगा.. बस ये दो तीन दीन अपना खयाल रखना..

कहातो पुनम अ‍ेक नजरसे गभराते मंजुकी ओर देखती रही.. तब मंजुने हसते हुअ‍े उसे बहार धकेल दीया तो पुनम चुपचाप बहार चली गइ.. तबतक धिरेन उनका बहार वेइट कर रहाथा तो जातेही पुनमने उसे कोइ सरारत ना करनेको केह दीया फीर दोनो बाइकमे सहेरकी ओर चले गये.. तब बहार होलमे खडी रहेते चंदा देवायतकी ओर देखके मुस्कराने लगी.. ओर धीरेसे इसाा करते उपरकी ओर चली गइ..

तब मंजुने बहार आतेही देवायतकी ओर देखते उपरकी ओर इसारा कीया ओर हसने लगी.. तो देवायतभी धीरेसे खडा होकर मंजुके पास चला गया.. ओर उसे बाहोमे भरते होंठ चुमलीया तब दया कीचनसे देखते हसने लगी ओर देवायत उपरकी ओर चला गया.. तब चंदा अपने रुममे दरवाजेके पास देवायतका वेइट कर रहीथी जेसेही देवायतको अंदर आते देखा जटसे दरवाजा बंध करके देवायतको वही बाहोमे भरते लीपट गइ..

फीर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. ओर चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. तभी अचानक अलग होगइ ओर फटाफट अपनी सारीको नीकालने लगी.. तब देवायत उसे हसते हुअ‍े देखताही रहा.. तब वो अपने कपडे नीकालते बहुतही सरमाइ.. तभी अचानक देवायतने उसे अपनी गोदमे उठालीया.. ओर बेडके पास जाकर उसे पीठके बल सुला दीया तो चंदानेभी देवायतका हाथ पकडके उसे खीचके जटका मारातो देवायत सीधा चंदाके उपर गीर गया..

चंदा : (जोरोसे हसते) ओ..बापरे.. हें..हें..हें.. मेरा जानु.. कीधर रहेते हो.. कभी इस बीवीकी याद नही आती क्या..? अबतो जटसे हमारी सादी होजाये.. तो ये इन्तजार करनेकी जंजटही खतम होजाये..

देवायत : (उपर लेटेही होंठ चुमते) अरे बहोत आती हे तभीतो तुम दोनोको मीलने इधर आया हु.. ओर सादीतो हमारी होगइ हे तो फीर आती क्यु नही..?

चंदा : (सरमाते धीरेसे) जानु मंजु केह रहीथी मुजे बाकायदा फेरे वाली सादी करके उधर आना हे.. बाबु अब जल्दी करो उन दोनो आजाये इनसे पहेले मेरी आग मुजे चोद चोदके बुजादो.. क्या करु आपको देखतेही सभी इच्छा होने लगती हे.. पहेलेतो कैसे मुजे चोदनेके लीये आजातेथे.. चलो फटाफट अपने कपडे नीकालो मे अ‍ेसेही ठीक हु.. वरना वो आजायेगे तो कपडे पहेननेकाभी टाइम नही रहेगा..

तब देवायत खडा होजाता हे ओर अपने कपडे नीकालने लगता हे.. तब चंदा अपने ब्लाउसके सभी बटन खोलने लगती हे ओर ब्साउस नीकालके अपनी ब्राको नीकालने लगती हे जेसेही ब्रा नीकाली उनके दोनो गोरे बुब्स उछलके बहार आगये.. ओर वो लेटते अपना पेटीकोटभी नीकाल लेती हे तबतक देवायतभी पुरा नंगा होते चंदाके बगलमे लेट जाता हे.. तब चंदा उसे खीचके अपने उपर चडा लेती हे.. आज उसे चुदवानेकी बहुत जल्दीथी.. वो अब देवायतसे कम मीलनेकी वजहसे दीनभर दीन कामुक होने लगीथी..

चंदा : (सरमाते लंड पकडते) देखो.. जनाबको जब देखो तब हमेसा रेडीही रहेता हे.. क्या कभी ये नीचे नही बैठता..? मेतो जबभी इनको देखती हु हमेसा खडाही होता हे क्या उनको मेरी चुत इतनी पसंद आगइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां तो फीर.. तेरे जैसी हसीनाको देखतेही अंदर जानेके लीये मचलने लगता हे..

चंदा : (सरमाते हसते) बाबु देर मत करो पहेले इसे अंदर घुसादो येभी(चुत) इसे अंदर लेनेके लीये मचल रही हे.. पता नही आपने हमपे क्या जादु करदीया हे.. जटसे मेरी आगको सांत करदो.. मुजे आपका हथीयार अंदर लेना बहुतही पसंद हे.. देखना सादीकी रात मे तुमसे पुरी रात चुदवाउगी.. ओर अ‍ेक सरप्राइजभी दुगी..

कहेते चंदा लंड पकडके अपनी चुतपे घीसने लगती हे ओर जब लंड गीला होगया तो अपनी चुतके लव होलमे थोडा फसा देती हे फीर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उसे जोरोसे अपने तनसे चीपका लेती हे ओर उनके होंठ चुमने लगती हे.. तभी देवायतने कमरको अ‍ेक जोरका जटका मारा तो चंदाकी चीख नीकल गइ.. क्युकी देवायतका पुरा लंड उनकी चुतमे घुस चुकाथा.. ओर वो दोनो हाथसे चदर पकडते बेडपे पैर पटकाते मचलने लगी.. ओर अपना मुह बीगाडते इधर उधर गरदन घुमाने लगी..

चंदा : (दर्दसे धीरेसे) जानु.. क्या कीया आपने.. धीरे धीरे नही डाल सकते..क्या.. फाडदी मेरी चुत..

देवायत : डार्लींग क्या करु.. तुजे देखतेही मे कंट्रोल नही कर सकता.. मेभी जल्द तुजमे समा जाना चाहता हु

कहातो चंदाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब देवायत उनके गलेमे मुह डालके चंदाको जोरोसे चोदने लगा.. तो चंदाभी उनके गलेमे हाथ डालते मदहोसीमे देवायतके सरको सहेलाते मजेसे चुदवाने लगी.. ओर देवायतके हर धक्केको आहे भरते जेलने लगी.. चंदाको देवायतका हर सोट.. अपनी बच्चेदानीसे टकराते महेसुस होने लगा.. ओर हर सोटके साथ उनकी चीखे नीकलने लगी.. जो नीचे तब सुनाइ देतीथी..





दोनोही कामातुर होते चुदाइमे मसगुल होगये.. तब नीचेकी ओर मंजु ओर दया दोनो चंदाकी जोरोकी चीख सुनके सीडीयोके पास आकर खडी होगइ.. चंदाकी चीखे नीचे तक सुनाइ देरही थी.. जीसे सुनके दोनो हस रहीथी.. दोनोकी बडी इच्छाथी की उपर जाकर दोनोकी चुदाइ देखे..

लेकीन मंजुकी अभी इतनी ताकात नहीथी.. की वो सीडीया चढ सके.. ओर दया मंजुकी हाजरीकी वजहसे उपर नही जा सकतीथी.. तो दोनो नीचेसेही चंदाकी चीखे सुनते मजा ले रहीथी.. तब उपरकी ओर देवायत हाथके बल उचा होके चंदाकी जोरोसे धमासान चुदाइ कर रहाथा.. ओर चंदा जोरोसे सीसकारीया करते देवायतके लंडको अपनी चुतमे जेल रही थी..





जब देवायतक अपना लंड उनकी बच्चेदानीकी जडतक घुसाकर चोदने लगा.. तब चंदा चदर पकडते चुदवाते हुअ‍े छटछपटाने लगी.. ओर उनके गलेसे आवाजही नीकलना बंध होगइ.. तभी वो देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे ओर उनका सर पकडते अपने गलेमे डालके अपनी कमरको उछालते जटके मारते जडने लगती हे..

तब देवायतको अपने लंडको भीगोते चंदाका बहुतही गरम पानी महेसुस हुआ.. तो उनका सरीर कांपने लगा ओर वो बहुतही उतेजीत होगया.. तभी चंदाकी चुतमे जडतक अपना लंड घुसाके कमरको जटके देने लगा.. तो चंदाभी कांपने लगी ओर देवायतसे अ‍ेकबार फीर चीपक गइ..





देवायतको अपनी बाहोमे कसते ही अपनी बच्चेदानीपे गरम विर्य महेसुस करने लगी.. ओर उतेजनासे उनके मुहसे अ‍ेक हल्की चीख नीकल गइ.. फीर दोनोही सांत होगये.. तब चंदा देवायतकी पीठ सहेलाती बेसुध जेसी हालतमे पडी रही.. फीर दोनोही थोडी देर अ‍ेसे सांत पडे रहे दोनोही पसीनेसे तरबोर होचुके थे.. तब चंदाको होंस आयाकी दोनो अभीभी अ‍ेसेही पडे हे ओर अभी धिरेन ओर पुनम आजायेगे..

तब वो देवायतके सीनेपे हाथ रखते उनको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी.. तब देवायत सर उचा करते चंदाको देखता हे ओर चंदाके होठ चुमते उपरसे हटने लगा.. तो लंड बहार नीकलतेही चुतसे फच..की आवाज आइ ओर चुतसे दोनोका काम रस बहारकी ओर बहेते चंदाके पैरोसे होते चदरपे गीरने लगा तब चंदाकी चुत अभीभी फडफडा रहीथी..





तो चंदा सर्मसार होते जटसे अपनी चडी खीचके चुतको साफ करने लगी तबतक देवायत बेडसे उतर गया ओर चंदा कुछ समजे उनसे पहेलेही वो चंदाको अपनी गोदमे उठाकर बाथरुमकी ओर चला गया.. फीर दोनोही सावरके नीचे खडे होगये ओर अ‍ेक दुसरेकी चुत लंडको साफ करते फीरसे बहेकने लगे..





तो देवायतने वही चंदाको अपनी ओर खीच लीया ओर दोनोके होंठ फीरसे मील गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करते फीरसे बहेकने लगे.. तभी चंदा पलटके खडी होगइ ओर थोडी जुकके पीछे देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी तो देवायतने उनकी कमरको पकडते पीछेसे उनकी चुतमे लंडको घुसा दीया..





ओर चंदाको पीछेसे कमर पकडके चोदने लगा ओर थोडीही देरमे दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी.. काफी देर चुदाइके बाद दोनोही अकडने लगे ओर अ‍ेक बार फीर दोनो साथमे जड गये.. तब चंदा जटसे अलग होगइ तो पानीकी वजहसे लंड फीसलते ही फच..की आवाज आइ तब देवायतकी हसी नीकल गइ तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ ओर दांत पीसते मुस्कराते देवायतके सीनेपे अ‍ेक मुका जड दीया..

फीर दोनो नहाके बहार आगये ओर फटाफट कपडे पहेनके रेडी होगये.. तब चंदाकी चाल थोडी बदल चुकीथी.. वो थोडी लडखडाते चल रहीथी.. तब देवायतने अ‍ेक बार फीर उनको गले लगालीया ओर उनके होंठ चुम लीया तो चंदा जुठा गुसा करते देवायतके सीनेपे अ‍ेक मुका मार देती हे..

ओर हसते हुअ‍े जटसे नीचेकी ओर भाग गइ.. तो देवायत हसते हुअ‍े धीरे धीरे सीडीया उतरते नीचे आगया.. तब चंदा सीधे मंजुके रुममे चली गइ तो वहा मंजु ओर दया दोनो बेठकर बाते कर रहीथी.. जेसेही चंदा अंदर आइ तो मंजु दया उनको देखके जोरोसे हसने लगी..

दया : (जोरोसे हसते) मौसीजी क्या हुआ..? अ‍ैसे क्यु चल रही हो..? कुछ हुआ क्या..?

चंदा : (सर्मसार होते हसते) कमीनीओ हस क्यु रही हो..? वो..वो उपर पावमे मोच आगइ..तो..

मंजु : (जोरोसे हसते) अच्छा पावमे मोच आगइ.. की कही ओर आगइ.. हें..हें..हें.. दीदी क्यु जुठ बोल रहीहो आपके चीलानेकी आवाज यहा नीचे तक आ रहीथी.. हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) तो..तो. क्या हुआ पावमे मोच आगइ तो चीलाउगी नहीतो क्या करुगी..

दया : (हसते) अच्छा..? मौसी गभराइअ‍े नही.. मालकीन ओर हमभी अ‍ैसे चीलाती हे.. हें..हें..हें.. क्यु मालकीन..?

चंदा : (बेडपे बेठते आस्चर्यसे दयाकी ओर देखते धीरेसे) हमभी मतलब..? मंजु.. ये दया क्या बोल रही हे..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) दीदी गभराइअ‍े मत.. मेनेही छुट दे रखी हे.. आपतो जानती हे हम ओरतोकी भी कुछ जरुरत होती हे.. दया सादीके बाद कुछही महीनोमे विधवा होगइ थी.. ओर वो रजीयाकोभी उनके पतीने दो सालमे तलाक देदीया तबसे दोनोही हवेलीमे काम कर रही हे.. दया हमारे रामुकाकाकी लडकी हे.. तो दोनो अपनी सरीरकी जरुरीयात देवुसे पुरी करती हे.. ओर मुजे कोइ अ‍ेतराभी नही हे..

चंदा : (आस्चर्यसे) मंजु तुम..? कीतना विशाल दीलहे तेरा.. मुजे भी स्वीकार करलीया..

मंजुला : दीदी अभी नही.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बताना हे..

दया : (आंखसे आंसु टपकाते) माफ कर दीजीये मेने आपसे इस तराह बात की.. क्युकी हम मालकीनसे कभी कभी अ‍ैसे मजाक कर लेती हे..

चंदा : (दयाको गले लगाते) दया कोइ बात नही तुमभी हम सबकी बहेन हो.. हम कहा तुजे नौकरानी मानते हे.. ओर तुजे हम सबको मालकीन कहेनेकी जरुरत नही हे हमे दीदी ही कहेके बुलाना..

मंजुला : (हसते) हां सुनां..? दीदी इनको कीतनी बार कहा हे फीरभी मुजे मालकीनही कहेती हे..

चंदा : (हसते) अब मालकीन कहेतो मुजे बताना टांगे तोड दुगी इनकी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते खडे होते) दीदी चलो हमारे पती नीचे आके अकेले बैठेहे इनको कंपनी दे दो..

चंदा : (सरमाते हसते) तुही जाके कंपनी दे.. मे उनको उपर कंपनी देकर ही आइ हु.. वो भी दो बार.. हें..हें..हें.. हालत बीगाडदी मेरी.. मुजे कंपनी देकर ओर रीस्क नही लेना.. हें..हें..हें..

कहातो तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी तब मंजु देवायतके पास आकर उनसे सटकर बैठ गइ.. तो चंदा ओर दया दोनोही देवायतकी ओर कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी धिरेन ओर पुनमभी शीखंड लेकर आगये.. पुनमने कहाथा इसीलीये रास्तेमे धिरेनने कोइ सरारत नहीकी.. दोनोही प्यार भरी बाते करते रहे.. तब धिरेनने अपने फ्युचरके प्लानींगके बारेमे पुनमसे ढेर सारी बाते करली.. ओर दोनो घर आगये....

कन्टीन्यु
 
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