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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ६५
भलेही लखनका लंड देवायतसे काफी छोटा ओर पतला था.. लेकीन अपनी प्यास बुजानेके लीये काफी था यही सोचते वो लखनसे चुदवानेके लीये राजी होगइ.. तब थोडी देरकी धकापैनी चुदाइके बाद लखन रजीयाकी चुतको पानीसे भरके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब रजीया लखनकी कमरको पकडते अपनी चुतको आडी टेडी करने लगी.. ओर थोडी कसरतके बाद वोभी जड गइ.. ओर दोनो अेसेही पडे रहे.. तब लखनका लंड सीकुडके रजीयाकी चुतसे अपने आपही बहार नीकल गया.. तब रजीया अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी.. ओर लखनके लंडकोभी अपने हाथोसे पोछ दीया.. फीर लखन ओर रजीया बाथरुममे चले गये ओर पानीसे साफ होके बहार आगये....अब आगे
लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. यही सोजाओ सुबह जल्दी चले जाना.. हम थोडी देरके बाद फीर करेगे..
रजीया : (सरमाते धीरेसे) मालीक आप कोइ गोली बोली खालो.. बहुत जल्दी पानी नीकाल देते हो.. हमतो प्यासी रेह जाती हे.. अपनी बीवीको कैसे खुस करपाओगे..?
लखन : (सरमाते) यार मेने कहा कभी चुदाइ कीहे.. तो मुजे मालुम होगा.. अब तुही मुजे सब सीखा देनां.. तुही बता कोनसी गोली खानी हे.. मे लेकर आउगा..
रजीया : (सरमाते हसते) मुजे थोडी पता.. आप कोइ मेडीकल स्टोरपे जाके पुछलो वो लोग दे देगे..
दोनो बाते करते बेडपे अेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. तब नीचेकी ओर देवायत ओर पुनमभी चुदाइमे मसगुल थे उपर नीचे दोनो रुममे चुदाइका दोर चल रहाथा.. अेक रुममे वासना मे चुदाइ हो रहीथी तो दुसरे रुममे प्यारका अदभुत खेल खेलते चुदाइमे मसगुल थे.. देवायत ओर पुनम दोनोही अेक दुसरेमे समा जानेकी कोसीस करते चुदाइ कर रहेथे तब पुनम मदहोसीमे देवायतके गलेमे हाथ डालके चुदवा रही थी..

अब तक पुनम तीन बार जड चुकीथी फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. पुनम देवायतकी स्टेमीना देखके बहुतही खुस थी.. वो बस यही चाहतीथी की देवायत उसे पुरी रात लगातार चोदताही रहे.. जब वो जडनेको आती तब देवायतको बाहोमे भीच लेती ओर होठोको लीपलोक कर लेती.. ओर जडजाती.. फीर वापस उतेजीत होजाती ओर देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगती.. चुदवाते बस मनमे अेकही कामना करती की देवायत उसे जल्द प्रेगनेन्ट करदे..

जब देवायत जडता तब पुनम देवायतकी कमरमे पैरसे आटी लगा लेती ताकी देवायतके पानीका अेकभी बुंद बहार ना नीकले दोनो पुरी रात चुदाइ करते रहे.. तब देवायतभी पुनमको अलग अलग पोजीसमे चोदता रहा कभी पीछेसे चीपकते चोद लेता तो कभी पुनमको अपनी गोदमे बीठाते चुदाइ करता तो कभी पुनमको अपने उपर चडाके सवारी करवाता.. तो कभी दोनो आमने सामने अेक दुसरेके पैरोमे पैर फसाके बैठकर चुदाइ करते.. देवायत पुरी रात पुनमको अलग अलग तरीकेसे चोदता रहा ओर पुनमकी चुतको भरके हरी भरी करता रहा..

देवायतने आजभी पुनमको चोद चोदके तृप्त करदी.. फीर दोनोही नहाके अेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. तब उपर लखनने अेक घंटेके बाद आराम करके फीरसे अेक बार रजीयाको चोदलीया.. तब रजीयाभी दो बार चुदवाके वापस अपने रुममे चली गइ ओर दयाके पास जाके चुपकेसे सो गइ.. ओर अेसेही सुबह होगइ तब आज दयाके अलावा सब देर तक सोते रहे तो रजीयाभी तबीयतका बहाना बनाके सोती रही.. तब देवायत मोका देखतेही पुनमके उपर चदर डालके अपने रुममे चला गया.. ओर सो गया..
सब लोग ९ बजे कंपलीट होकर बहार आगये आज पुनमभी धीरे धीरे थोडा लंगडाते चलके बहार आगइ आज वो पुरी रात देवायतसे चुदवाती रही.. तो उनकी चालभी बदल चुकीथी.. लेकीन उस तरफ कीसीका ध्यान नही गया क्युकी दया ओर रजीया अपने काममे बीजीथी.. तब लखनभी तैयार होकर देवायतके सामने बेठ गया ओर दोनोको गुड मोर्नींग वीस कीया.. तो पुनमभी देवायतके पास बेठीथी हसने लगी.. ओर अेक पैरसे देवायतके पैरको सहेलाते लखनसे बात करने लगी..
पुनम : (हसते) लखनभैया क्या बात हे आज सुबह सुबह गुडमोर्नींग वीस कीया.. लगता हे रातमे भाभीसे फोनपे बात होगइ लगती हे.. काफी खुस दीख रहे हो.. हें..हें..हें..
लखन : (सरमात हसते) देखा भैया सुबह सुबह ही टांग खीचने बैठ गइ.. तो क्या तु धिरेनसे बात नही करती..? तुभीतो आज बहुत खुस दीख रही हे, हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) बस.. जगडा नही सांतीसे चाइ नास्ता करलो.. लखन क्या हुआ वो माल भेज दीया..?
लखन : हां भैया वो कलही ट्रकमे भरवाके भेज दीया.. क्या आप खेतोपे आ रहे हो..? ओर वो भानुभाइ आ गये क्या..?
देवायत : हां कल उनके मामा गुजर गये.. सामकोही आगये आज खेतोपे आयेगे.. ओर सुन वो सादीकी तारीखभी आगइ हे.. दोनोकी आजसे चौदवे दीनमे सादी हे.. तो आपकी सब खरीदीकी लीस्त बनाके तैयारी करना सुरु करदो..
पुनम : (देवायतका पैर पैरसे सहेलाते) भाइ सादी कहा रखी हे.. क्या यही हवेलीपे हे..?
देवायत : हां पुनो जीस तराह तुन सबकी सगाइ रखीथी उसी तराह सादीभी रखेगे.. सब यही आजायेगे.. ओर हम सादी अेकदम सादाइसे कर रहेहे.. तुम दोनोको कोइ अेतराजतो नही..? सीर्फ हम घरकेही लोग होगे.. फीरभी तुम लोग कहोगे अैसेही सादी रखेगे..
पुनम : (खुस होते) भाइ अच्छा कीया.. हमे कोइ ढंढोरा नही पीटना.. क्यु लखन भैया..?
लखन : हां भाइ दीदी सही केह रही हे.. ये सब दुनीयाको दीखाके क्या फायदा.. हम सादी सादाइसे करगे..
देवायत : (हसते) अरे बंदर तो सुधर गया..हें..हें..हें.. चल ठीक हे इतनी भी सादाइसे नही.. समजे..
फीर तीनो मस्तीया करते चाइ नास्ता करने लगे जब चाइ नास्ता करलीया तब लखन खेतोपे चला गया.. तो पुनमने इसारेसे देवायतको रुममे बुला लीया तब देवायत उनके रुममे चला गया तो पुनमभी देवायतके रुममे पीछे चली गइ ओर दरवाजा बंध करतेही दोडके जोरोसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. फीर देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी ओर देवायतका चहेरा पुरा गीला करदीया.. ओर आखीर दोनोके होंठ मील गये.. ओर पुनमने आंख बंध करके मदहोसीमे अेक लंबा चुंबन लेलीया..
पुनम : (आंसु बहाते) भाइ अब आपके बीना नही रहा जाता.. सादी तक मुजसे दुर मत जाइअे..
देवायत : (प्यारसे सरको चुमते) बस बेबी सांत होजा.. मे कहा तुमसे दुर जा रहा हु.. बस यहीतो हु.. कामभी जरुरी हेनां..? क्या तेरी भाभीके पास चलेगी..? हम खाना खाके सामको जायेगे..
पुनम : हां भाइ तबतो ठीक हे तब में चलुगी.. आज तो आपने मेरी चालही बदलदी.. आप रातमे कीतना जोसमे (चुदाइ) करते थे.. मुजेतो पुरी नीचोडही ली.. अभीभी नीचे मीठासा दर्द हो रहा हे..
देवायत : (हसते) बेबी क्या करु.. तुजे देखतेही सब कंट्रोल खो बेठता हु बस यही लगता हे तुजे दिन रात चोदता ही रहु.. इतना प्यार करता हु तुजे.. पता नही जब तु चली जायेगी तब क्या करुगा मे..
पुनम : भाइ वादा करो.. जब धिरेन ओफीस चला जाये तब आप मुजसे मीलने आओगे.. मे भी आपके बीना नही रेह पाउगी.. हमारे पास पुरा साम तकका वक्त होगा.. तब हम दोनो खुब प्यार करेगे.. आओगेनां..?
देवायत : हां पुनो आनाही पडेगा.. मेभी अब तेरे बीना नही रहे पाउगा..
पुनम : भाइ वो दया केह रहीथी सादीके बाद वोभी मेरे साथ रहेगी.. क्या आपने उनको कहा हे..?
देवायत : हां पुनो ताकी तुजे अकेला ना लगे.. तुजे कंपनी मीलती रहेगी ओर काममेभी हाथ बटायेगी..
पुनम : (सरमाते हसते) भाइ क्या ये ठीक होगा..? मतलब हमे मीलनेमे प्रोबलेमतो नही होगी..?
देवायत : नही पुनो दयासे कोइ खतरा नही.. वो होगीतोभी हमे फर्क नही पडेगा.. मे उसे समजा दुगा.. तु उनकी टेन्शन मत ले.. मेरी खास राजदार हे मे मौका मीलतेही उनसे बात करलुगा..
पुनम : भाइ देखना कही गडबड ना होजाये वरना मे वहा अकेली रेह लुगी आप मेरी टेन्शन मत लो..
देवायत : चल आगे देखतेहे हमे क्या करना.. ओके..? चल मे चलता हु..
पुनम : (अेकदम बाहोमे समाके) भाइ आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..
देवायत : (होंट चुमते) आइ लव यु टु.. बेबी बस अब जानेदे हम दो पहोरको मीलते हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ वो.. खानेके बाद मे आपके रुममेही रहुंगी.. आप जल्दी आजाना.. अब भाभीके आने तक मे आपके साथही रहुगी..
देवायत : हां अब ठीक हे मेरी बीवी होतो मेरे साथही रहेना चाहीयेनां..? अब जबतक तेरी भाभी नही आती तबतक रातमे भी मेरे रुममे मेरे साथही रहेना.. बाय..
पुनम : (होंठ चुमते) भैया अब आपकी बीवीभी हु तो साथही रहुगीनां..? चलो बाइ.. फोन करना..
कहेते ही देवायत रुमसे नीकल जाता हे तब पुनमभी धीरेसे अपने रुममे चली गइ ओर आयनेके सामने बेठते अपने आपको संवरने लगी.. अब पुनमकी भी देवायतके प्रती ओर देवायतकी पुनमके प्रती दीनभर दीन चाहत बढती ही जा रहीथी.. दोनोही अेक दुसरेके लीये पागल होने लगे.. तभी रमेश ओर चारुकी बेटी वंदना आगइ तो दयाने उनको सीधेही हसते हुअे पुनमके रुमकी ओर इसारा करदीया तो वंदना हसते पुनमके रुममे चली गइ....
कन्टीन्यु
अध्याय - ६५
भलेही लखनका लंड देवायतसे काफी छोटा ओर पतला था.. लेकीन अपनी प्यास बुजानेके लीये काफी था यही सोचते वो लखनसे चुदवानेके लीये राजी होगइ.. तब थोडी देरकी धकापैनी चुदाइके बाद लखन रजीयाकी चुतको पानीसे भरके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब रजीया लखनकी कमरको पकडते अपनी चुतको आडी टेडी करने लगी.. ओर थोडी कसरतके बाद वोभी जड गइ.. ओर दोनो अेसेही पडे रहे.. तब लखनका लंड सीकुडके रजीयाकी चुतसे अपने आपही बहार नीकल गया.. तब रजीया अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी.. ओर लखनके लंडकोभी अपने हाथोसे पोछ दीया.. फीर लखन ओर रजीया बाथरुममे चले गये ओर पानीसे साफ होके बहार आगये....अब आगे
लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. यही सोजाओ सुबह जल्दी चले जाना.. हम थोडी देरके बाद फीर करेगे..
रजीया : (सरमाते धीरेसे) मालीक आप कोइ गोली बोली खालो.. बहुत जल्दी पानी नीकाल देते हो.. हमतो प्यासी रेह जाती हे.. अपनी बीवीको कैसे खुस करपाओगे..?
लखन : (सरमाते) यार मेने कहा कभी चुदाइ कीहे.. तो मुजे मालुम होगा.. अब तुही मुजे सब सीखा देनां.. तुही बता कोनसी गोली खानी हे.. मे लेकर आउगा..
रजीया : (सरमाते हसते) मुजे थोडी पता.. आप कोइ मेडीकल स्टोरपे जाके पुछलो वो लोग दे देगे..
दोनो बाते करते बेडपे अेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. तब नीचेकी ओर देवायत ओर पुनमभी चुदाइमे मसगुल थे उपर नीचे दोनो रुममे चुदाइका दोर चल रहाथा.. अेक रुममे वासना मे चुदाइ हो रहीथी तो दुसरे रुममे प्यारका अदभुत खेल खेलते चुदाइमे मसगुल थे.. देवायत ओर पुनम दोनोही अेक दुसरेमे समा जानेकी कोसीस करते चुदाइ कर रहेथे तब पुनम मदहोसीमे देवायतके गलेमे हाथ डालके चुदवा रही थी..

अब तक पुनम तीन बार जड चुकीथी फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. पुनम देवायतकी स्टेमीना देखके बहुतही खुस थी.. वो बस यही चाहतीथी की देवायत उसे पुरी रात लगातार चोदताही रहे.. जब वो जडनेको आती तब देवायतको बाहोमे भीच लेती ओर होठोको लीपलोक कर लेती.. ओर जडजाती.. फीर वापस उतेजीत होजाती ओर देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगती.. चुदवाते बस मनमे अेकही कामना करती की देवायत उसे जल्द प्रेगनेन्ट करदे..

जब देवायत जडता तब पुनम देवायतकी कमरमे पैरसे आटी लगा लेती ताकी देवायतके पानीका अेकभी बुंद बहार ना नीकले दोनो पुरी रात चुदाइ करते रहे.. तब देवायतभी पुनमको अलग अलग पोजीसमे चोदता रहा कभी पीछेसे चीपकते चोद लेता तो कभी पुनमको अपनी गोदमे बीठाते चुदाइ करता तो कभी पुनमको अपने उपर चडाके सवारी करवाता.. तो कभी दोनो आमने सामने अेक दुसरेके पैरोमे पैर फसाके बैठकर चुदाइ करते.. देवायत पुरी रात पुनमको अलग अलग तरीकेसे चोदता रहा ओर पुनमकी चुतको भरके हरी भरी करता रहा..

देवायतने आजभी पुनमको चोद चोदके तृप्त करदी.. फीर दोनोही नहाके अेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. तब उपर लखनने अेक घंटेके बाद आराम करके फीरसे अेक बार रजीयाको चोदलीया.. तब रजीयाभी दो बार चुदवाके वापस अपने रुममे चली गइ ओर दयाके पास जाके चुपकेसे सो गइ.. ओर अेसेही सुबह होगइ तब आज दयाके अलावा सब देर तक सोते रहे तो रजीयाभी तबीयतका बहाना बनाके सोती रही.. तब देवायत मोका देखतेही पुनमके उपर चदर डालके अपने रुममे चला गया.. ओर सो गया..
सब लोग ९ बजे कंपलीट होकर बहार आगये आज पुनमभी धीरे धीरे थोडा लंगडाते चलके बहार आगइ आज वो पुरी रात देवायतसे चुदवाती रही.. तो उनकी चालभी बदल चुकीथी.. लेकीन उस तरफ कीसीका ध्यान नही गया क्युकी दया ओर रजीया अपने काममे बीजीथी.. तब लखनभी तैयार होकर देवायतके सामने बेठ गया ओर दोनोको गुड मोर्नींग वीस कीया.. तो पुनमभी देवायतके पास बेठीथी हसने लगी.. ओर अेक पैरसे देवायतके पैरको सहेलाते लखनसे बात करने लगी..
पुनम : (हसते) लखनभैया क्या बात हे आज सुबह सुबह गुडमोर्नींग वीस कीया.. लगता हे रातमे भाभीसे फोनपे बात होगइ लगती हे.. काफी खुस दीख रहे हो.. हें..हें..हें..
लखन : (सरमात हसते) देखा भैया सुबह सुबह ही टांग खीचने बैठ गइ.. तो क्या तु धिरेनसे बात नही करती..? तुभीतो आज बहुत खुस दीख रही हे, हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) बस.. जगडा नही सांतीसे चाइ नास्ता करलो.. लखन क्या हुआ वो माल भेज दीया..?
लखन : हां भैया वो कलही ट्रकमे भरवाके भेज दीया.. क्या आप खेतोपे आ रहे हो..? ओर वो भानुभाइ आ गये क्या..?
देवायत : हां कल उनके मामा गुजर गये.. सामकोही आगये आज खेतोपे आयेगे.. ओर सुन वो सादीकी तारीखभी आगइ हे.. दोनोकी आजसे चौदवे दीनमे सादी हे.. तो आपकी सब खरीदीकी लीस्त बनाके तैयारी करना सुरु करदो..
पुनम : (देवायतका पैर पैरसे सहेलाते) भाइ सादी कहा रखी हे.. क्या यही हवेलीपे हे..?
देवायत : हां पुनो जीस तराह तुन सबकी सगाइ रखीथी उसी तराह सादीभी रखेगे.. सब यही आजायेगे.. ओर हम सादी अेकदम सादाइसे कर रहेहे.. तुम दोनोको कोइ अेतराजतो नही..? सीर्फ हम घरकेही लोग होगे.. फीरभी तुम लोग कहोगे अैसेही सादी रखेगे..
पुनम : (खुस होते) भाइ अच्छा कीया.. हमे कोइ ढंढोरा नही पीटना.. क्यु लखन भैया..?
लखन : हां भाइ दीदी सही केह रही हे.. ये सब दुनीयाको दीखाके क्या फायदा.. हम सादी सादाइसे करगे..
देवायत : (हसते) अरे बंदर तो सुधर गया..हें..हें..हें.. चल ठीक हे इतनी भी सादाइसे नही.. समजे..
फीर तीनो मस्तीया करते चाइ नास्ता करने लगे जब चाइ नास्ता करलीया तब लखन खेतोपे चला गया.. तो पुनमने इसारेसे देवायतको रुममे बुला लीया तब देवायत उनके रुममे चला गया तो पुनमभी देवायतके रुममे पीछे चली गइ ओर दरवाजा बंध करतेही दोडके जोरोसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. फीर देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी ओर देवायतका चहेरा पुरा गीला करदीया.. ओर आखीर दोनोके होंठ मील गये.. ओर पुनमने आंख बंध करके मदहोसीमे अेक लंबा चुंबन लेलीया..
पुनम : (आंसु बहाते) भाइ अब आपके बीना नही रहा जाता.. सादी तक मुजसे दुर मत जाइअे..
देवायत : (प्यारसे सरको चुमते) बस बेबी सांत होजा.. मे कहा तुमसे दुर जा रहा हु.. बस यहीतो हु.. कामभी जरुरी हेनां..? क्या तेरी भाभीके पास चलेगी..? हम खाना खाके सामको जायेगे..
पुनम : हां भाइ तबतो ठीक हे तब में चलुगी.. आज तो आपने मेरी चालही बदलदी.. आप रातमे कीतना जोसमे (चुदाइ) करते थे.. मुजेतो पुरी नीचोडही ली.. अभीभी नीचे मीठासा दर्द हो रहा हे..
देवायत : (हसते) बेबी क्या करु.. तुजे देखतेही सब कंट्रोल खो बेठता हु बस यही लगता हे तुजे दिन रात चोदता ही रहु.. इतना प्यार करता हु तुजे.. पता नही जब तु चली जायेगी तब क्या करुगा मे..
पुनम : भाइ वादा करो.. जब धिरेन ओफीस चला जाये तब आप मुजसे मीलने आओगे.. मे भी आपके बीना नही रेह पाउगी.. हमारे पास पुरा साम तकका वक्त होगा.. तब हम दोनो खुब प्यार करेगे.. आओगेनां..?
देवायत : हां पुनो आनाही पडेगा.. मेभी अब तेरे बीना नही रहे पाउगा..
पुनम : भाइ वो दया केह रहीथी सादीके बाद वोभी मेरे साथ रहेगी.. क्या आपने उनको कहा हे..?
देवायत : हां पुनो ताकी तुजे अकेला ना लगे.. तुजे कंपनी मीलती रहेगी ओर काममेभी हाथ बटायेगी..
पुनम : (सरमाते हसते) भाइ क्या ये ठीक होगा..? मतलब हमे मीलनेमे प्रोबलेमतो नही होगी..?
देवायत : नही पुनो दयासे कोइ खतरा नही.. वो होगीतोभी हमे फर्क नही पडेगा.. मे उसे समजा दुगा.. तु उनकी टेन्शन मत ले.. मेरी खास राजदार हे मे मौका मीलतेही उनसे बात करलुगा..
पुनम : भाइ देखना कही गडबड ना होजाये वरना मे वहा अकेली रेह लुगी आप मेरी टेन्शन मत लो..
देवायत : चल आगे देखतेहे हमे क्या करना.. ओके..? चल मे चलता हु..
पुनम : (अेकदम बाहोमे समाके) भाइ आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..
देवायत : (होंट चुमते) आइ लव यु टु.. बेबी बस अब जानेदे हम दो पहोरको मीलते हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ वो.. खानेके बाद मे आपके रुममेही रहुंगी.. आप जल्दी आजाना.. अब भाभीके आने तक मे आपके साथही रहुगी..
देवायत : हां अब ठीक हे मेरी बीवी होतो मेरे साथही रहेना चाहीयेनां..? अब जबतक तेरी भाभी नही आती तबतक रातमे भी मेरे रुममे मेरे साथही रहेना.. बाय..
पुनम : (होंठ चुमते) भैया अब आपकी बीवीभी हु तो साथही रहुगीनां..? चलो बाइ.. फोन करना..
कहेते ही देवायत रुमसे नीकल जाता हे तब पुनमभी धीरेसे अपने रुममे चली गइ ओर आयनेके सामने बेठते अपने आपको संवरने लगी.. अब पुनमकी भी देवायतके प्रती ओर देवायतकी पुनमके प्रती दीनभर दीन चाहत बढती ही जा रहीथी.. दोनोही अेक दुसरेके लीये पागल होने लगे.. तभी रमेश ओर चारुकी बेटी वंदना आगइ तो दयाने उनको सीधेही हसते हुअे पुनमके रुमकी ओर इसारा करदीया तो वंदना हसते पुनमके रुममे चली गइ....
कन्टीन्यु



















































