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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १४२/२
तो धिरेनभी आंख बंध करके मजे लेने लगा.. आज उनकी मासुका उनको ब्लुजोब दे रही थी.. ओर मजेकी बाततो यही थी की जोभी धिरेन उसे करनेको कहेता.. वो बीना कोइ विरोध उनकी हर बात मानती थी.. नीलम ओर धिरेन अपने प्यारमे अेक कदम ओर आगे बढ चुके थे.. तब कुछही देरमे धिरेनके लंडसे उनका लावा फुट पडा.. ओर नीलमके मुहमे पीचकारीया मारते उनकी हलकमे चला गया..

तो नीलमने जटसे लंडको मुहसे बहार नीकाल दीया ओर वही घांसते हुअे थुकते नीकालने लगी.. तो आगे बैठे लोग पीछे मुडकर उन दोनोकी ओर देखने लगे.. तब धिरेन ओर नीलम बहुतही सरमा गये.. ओर नीलम अपने कपडे सही करते वापस अपनी चेयरपे बैठ गइ.. अब दोनोको सरमके मारे यही बैठना मुस्कील होने लगा.. तभी नीलमने धिरेनका हाथ पकडके बहारकी ओर जानेको कहा.. ओर दोनोही बहार आगये..
तो बहार आतेही नीलम लेडीस टोयलेटकी ओर चली गइ.. ओर अंदर जातेही गेन्डीमे पानीसे अपना मुह साफ करने लगी.. आज पहेली बार अपने यारके हथीयारके पानीका स्वाद चखा था.. जो नीलमके लीये पहेला अनुभव था.. तभी पीछेसे अपनी कमरमे कीसीने हाथ डालके उसे बाहोमे भीच लीया तो नीलम गभराके पलट गइ.. देखातो धिरेन उनको बाहोमे भीचते नीलमके गलेको चुम रहाथा तब नीलम बहुतही सर्मसार होगइ..
नीलम : (सरमाते कामुक आवाजमे धीरेसे) धिरेन प्लीज.. यहा नही.. ये लेडीस टोयलेट हे.. यहा कोइभी लेडीस आ सकती हे.. छोडीये मुजे.. हम कही ओर जाते हेनां.. आप बादमे करलेना..
धिरेन : (होंठ चुमते) नही नीलु मे तेरे बगैर नही रेह सकता.. मुजे जल्दसे जल्द तुम्हारे साथ मीलन करना हे..
नीलम : (सरमाते मुस्कराते धीरेसे) जानु.. प्लीज.. यहा नही.. कोइ देखलेगा.. चलोना हम कही ओर चले जाते हे.. हम होटेलमे चले..? हंम.. मेभी आपके बगैर नही रेह सकती.. प्लीज.. आप वही करलेना..
धिरेन : नही नीलु.. अब हम दोनो सीधेही हमारी सुहागरातमे मीलेगे.. मे तुमसे जल्दी मीलन करना चाहता हु.. तुमने तो मुजे पागल कर दीया हे.. इतनातो पुनोने भी नही कीया..
नीलम : (सर्मसार होते) आजतो आपनेभी मुजे पागल करदीया हे.. धिरेन.. प्लीज.. पहेले हम बहार चले..? फीर कही बैठकर बाते करते हे.. पहेले यहासे चलो..
कहेते नीलम धिरेनकी बाहोसे छुट गइ.. ओर धिरेनका हाथ पकडके उनके सामने देखकर मुस्कुराती उसे खीचकर बहारकी ओर लेआइ.. फीर दोनोही अपनी बाइक लेकर वहासे नीकल गये.. ओर धिरेनने बाइक अेक बडीयासी रेस्टोरन्टपे लेली.. वहा दोनो अेक केबीनमे आमने सामने बैठ गये.. तब धिरेनने कुछ खानेका ओर्डर दीया.. ओर अपने पैरोसे नीलमके पैरको सहेलाने लगा तो नीलम बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी..
नीलम : (सरमाते कामुक नजरोसे देखते हसते) जानु.. आप बहुत नोटी हो.. ना जाने आज मुजसे क्या क्या करवा लीया.. आपने आज कैसी आग लगाइ थी.. जानु.. आज बहुत मजा आगया..
धिरेन : (दोनो हाथ थामते आंखोमे देखते) नीलु.. येतो कुछभी नही हे.. जब हमारा मीलन होगा तब तुम नजतकी सैर करोगी.. मे सचमे तुजे बहुत प्यार करता हु.. बस हमारी सादी होजाये.. तो हम दोनोही हमारे नये घरमे रहेगे.. तब हर रात हमारी सुहागरात होगी.. आइ प्रोमीस..
नीलम : (थोडा सीरीयस होते) आइ नो.. जानु सादीतो हम करलेगे.. लेकीन आप अपनी मम्मीको ओर मे अपने मम्मी पापाको क्या जवाब देगे..? कभी इनके बारेमे सोचा हे..? खास करके मेरी सौतनको.. हमे पुनोदीदी लता बुआ.. सबका सामना करना पडेगा.. क्या आपने कुछ इनके बारेमे तैय कीया हे..?
धिरेन : (सोचते) नीलु.. अगर तुजमे हिंमत हे ओर तुम मेरा साथ दोगी तो हम दोनो सबसे लड जायेगे.. खुद जीजुने मेरी मासे इस उमरमे दुसरी सादी करली हे.. तेरे पापानेभी अपनी मामीसे दुसरी सादी करली हे.. तो वो लोग हमारी सादीके लीये क्यु अेतराज करेगे..? अगर पुनोने कुछ कहा तो मे उनके साथ नही रहुगा.. मे हमेसाके लीये तेरे साथ इधर सहेरमे रहेने आजाउगा.. बस मुजे तेरा साथ चाहीये.. तुम मुकर मत जाना..
नीलम : (आंखोमे देखते) जानु.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. ओर मे आपसे हमारी सादीसे पहेलेही पुर्ण समर्पीत होजाउगी.. मे आपसे वादा करती हुकी मे मरते दम तक आपका साथ कभी नही छोडुगी.. फीर चाहे मुजे कीसीके साथभी क्युना लडना पडे.. बस.. आप मुजे कभी मत छोडना.. वरना मेरे लीये जीना मुस्कील होजायेगा.. मुजे कीसीभी हालमे आपके साथ रहेना हे.. फीर भलेही मुजे बीचमे पढाइ छोडनी पडे..
धिरेन : (मुस्कुराते हाथ चुमते) थेन्क्स नीलु.. बस मुजे तुमसे यही उमीद थी.. तुम पढाइ छोडनेकी बाते मत करो.. इस साल तुम अच्छेसे पढाइ करले.. फीर कोलेजतो युही चला जायेगा.. फीर मे तेरी जोब हमारी बेन्कपे लगवा दुगा.. नीलु.. हम दोनोको सेटरडे के दीन हमारा मकान देखने जाना हे.. अगर तुजे पसंद आगया तो हम ले लेगे..
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. जानु.. आप पुनोदीदीको भी दीखा देना.. ताकी पीछसे आपको कोइ प्रोबलेम ना हो.. वो बहुतही अच्छी हे.. कास वो हमारी सादीको अेक्सेप्ट करले.. तो हम तीनोही साथ रहेगे..
धिरेन : नही नीलु.. माने उनको गांवमे हमारी खेतीबाडी ओर हमारे पुर्खोके घरकी सब जीम्वेवारी दी हे.. ओर उपरसे उनको सहेरमे रहेनेके लीये मना करदीया हे तो पुनो वही रहेगी.. ओर मेभी नही चाहताकी तुम उनके साथ रहो.. वरना मे तुमको वो प्यार नही दे पाउगा जो मे तुजे देना चाहता हु..
नीलम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. जैसे आपकी मरजी.. धिरेन.. अेब बात पुछु..? हम दोनो सादी कब करेगे..?
धिरेन : (हसते) बहुत ही जल्द.. लेकीन इनसे पहेले मे मेरी इस खुबसुरत बीवीको अच्छेसे प्यारतो करलु..
नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. मेने थीअेटरके अंदर देखा आपका प्यार.. हें..हें..हें.. मुजे पताहे आपकी कोनसी फेन्टासी हे.. मतलब.. क्या आप सचमे.. आइ मीन.. हमारा मीलन..
धिरेन : हां नीलु.. मेरी सुरुसेही फेन्टासी रही हेकी मे सादीसे पहेले वो सबकुछ करना चाता हु जो अेक कोलेज लाइफमे मेरे सभी दोेस्तो अपनी गर्लफ्रेन्डके साथ कर चुके हे.. ओर तुम सीर्फ मेरी गर्लफ्रेन्ट नही मेरी मासुका मेरी हमसफर सबकुछ हो.. बेबी.. क्या इसके लीये तुम रेडी तो होनां..?
नीलम : (सरारतसे मुस्कुराते) जानु.. क्या आप बता सकते हेकी कोलेजमे आपके सभी दोस्तो कैसे अपनी गर्लफ्रेन्डको मीलते थे..? प्लीज.. हें..हें..हें..
धिरेन : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. डार्लीग.. वो सब यातो कीसी थीयेटर या गार्डनमे चले जाते थे.. अगर कीसीको मौका मीलतातो उनकी गर्लफ्रेन्डको कोलेजके बाथरुममेही दबोच लेते थे.. ओर उनके साथ सबकुछ करलेते थे.. उनको अपने कपडेभी नही नीकालने देतेथे.. बस उनको जुकाके उनका लोअर उचा करके पीछेसेही घुसाके चोद लेते थे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. हें..हें..हें..
धिरेन : नीलु.. बस.. यही मेरी फेन्टासी हे.. मे चाहता हु जब दुसरा या तीसरा मीलन हो.. तब तुमभी अपने स्कुलके ड्रेसमे हो.. मेभी उसी कपडोमे तुम्हारे साथ करना चाहता हु..
नीलम : (अेकदम सर्मसार होते मुस्कुराते कामुक नजरोसे धीरेसे) हंम.. मतलब सादीसे पहेले सीर्फ अेक बार नही ओरभी करना चाहते हे.. ठीक हे.. आपकी जीतनीभी मरजी हो इतनी बार करलेना.. जानु.. सच कहु..? तो मेरीभी यही फेन्टासी हे.. मे खुलकर जीना चाहती हु.. मुजे अेक आजाद पंछीकी तराह जीना हे.. मेरी होस्टेलवाली फ्रेन्डने भी कहाहे की तेरे बोयफ्रेन्टका सब प्यार बटोरले.. उसीने मुजे अेक आजाद पंछीकी तराह जीना साखाया हे.. वोभी इसी तराह जीती हे.. तो मेभी उनकी तराह खुलकर जीना चाहती हु..
धिरेन : (मुस्कुराते) अच्छा..? क्या नाम हे तेरी फ्रेन्डका.. क्या कभी मुजसे मीलवायेगी..?
नीलम : (सरारतसे हसते) नही.. बीलकुल नही.. वरना जनाबको पसंद आगइतो मेरा चान्स तो गया.. हें..हें..हें.. ओर वो कमीनी हे भी अैसी पटाका.. जानु.. मे उनको मीलवाके कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) नीलु.. तुम सब लडकीयोमे अेक दुसरेके लीये ज्वेलेसी बहुत होती हे.. इनसेतो हच्छे हम लडके हे.. सब बाते खुलकर करते हे.. मेने देखाहे जीजुके गांवमे लखनभैयाके सभी दोस्तो अपनी मासुकाको लेकर सभी तराहकी चर्चा करते हे.. ओर लखनभैया खुदभी बहुत अच्छे हे.. वोभी रंगीन मीजाजके हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (आस्चर्यसे हसते) क्या.. लखन जीजु..? ओर रंगीन मीजाज..? आइ कान्ट बीलीव.. दीखनेमे तो कीतने भोले भाले लगते हे.. हें..हें..हें.. धिरेन प्लीज.. मुजे बताओना आप लोग कीस तराहकी चर्चा करते हो.. आपको पता हे..? वो ओर लतादीदीभी अपनी सादीसे पहेले सबकुछ कर चुके हे..
धिरेन : (सरारतसे हसते) अच्छा..? सबकुछ मतलब..? क्या..?
नीलम : (सर्मसार होते हसते) जाओ.. मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो.. हें..हें..हें..
धिरेन : (धीरेसे हसते) अरे बताना.. इसमे काहेकी सरम.. हमभी तो वोही करने वाले हे.. बस अेक बार बतादे.. हें..हें..हें.. वरना मेरी कसम देदुगा.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते जटसे अेक मुका मारते) नही.. कसम मत देना.. आप बहुत कमीने हो.. मुजे तो सर्म आ रहीहे.. नही कहुगी.. हें..हें..हें..
धिरेन : (जुठमुठ रुठते मुह घुमालेता हे) ठीक हे मत बताओ.. मे समजुगा तुम मुजे प्यार नही करती..
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) अरे.. नाराज होगये..? चलो.. बताती हु.. लेकीन सीर्फ अेक बार.. आइमीन.. मेरा मतलब.. जो आप सादीसे पहेले मेरे साथ करना चाहते हे.. मतलब दोनोका मीलन.. चु..दा..इ.. अबतो खुस..?
धिरेन : (मुस्कुराते बुब्सको दबाते) हंम.. खुस.. नीलु.. हम भी मीलकर वोही करने वाले हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) आइइइइ.. जानु.. थोडा धीरेसे दबाओनां..? दर्द होता हे.. हटो.. कोइ आ रहा हे..
तभी दोनोके खानेका ओर्डर आगया तो दोनोही सही होकर बैठ गये.. तो नीलम बहुतही सरमाइ.. जब वेइटर खाना रखके चला गयातो.. दोनोही खाने लगे.. तब खाना खाते धिरेन सरारतसे नीलमके पैरको सहेलाते पैरको उनकी चुतकी ओर लेगया.. तो नीलम बहुतही सरमाइ ओर जोरोसे हसते धिरेनको मुका मारने लगी.. फीर नीलम धिरेनकी ओर मुस्कुराते कामुक नजरोसे देखती रही.. तभी धिरेनने कहा..
धिरेन : नीलु.. तुजे पता हे..? लखनभैया केह रहेथे अब उस गांवमे ओर आजुबाजु सभी गांवमे बहुत बडा बदलाव होने वाला हे.. सब लोग मीलकर उन्हीकी च र्चा कर रहेथे.. सब लोग उस बदलावका इन्तजार कर रहेहे ताकी जीनके साथ उनका टाका भीडा हुआ हे उनसे सादी कर सके..
नीलम : (मुस्कुराते) अच्छा.. अगर दोनो प्यार करते हे तो इस बदलावकी क्या आवस्यक्ता हे.. वोतो अैसेही कर सकते हे..जैसे हम दोनो करने वाले हे.. लेकीन आपने बताया नही कीस टाइपका बदलाव आने वाला हे..
धिरेन : (मुस्कुराते खाना खाते) नीलु.. अैसा बदलावकी हम सोचभी नही सकते.. ओर ये बललाव जीजुके घरपे पीछली तीन पीढीयोसे आ चुका हे.. मतलब.. सब लोग आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. इनमे कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. जीसे जीनके साथ सादी करनीहे वो कर सकते हे..
नीलम : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) व्होट..? मतलब..? क्या कहा आपने फीरसे कहीयेतो..?
धिरेन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. सबलोग आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. ओर अभी गांवमेभी अैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. हमारे सभी दोस्तोका कीसीना कीसीके साथ रीलेशन हे.. मतलब आपसी रीस्तोमे रीलेशन.. तुम समज गइनां..?
नीलम : (सरमाते हसते) हां इतनीभी भोली नही हु.. आपसी रीस्तोके बारेमे पता तो हे.. फीरभी मुजे आप कुछ रीस्तोके बारेमे बताइअे.. मुजे जानना हे..
धिरेन : (हसते) नीलु.. कीसीका उनकी सगी बहेनके साथ तो कीसीको उनकी कजीन बहेनके साथ.. रीलेशन हे.. तो कीसीको उनकी विधवा बुआ या चाची या ताइ.. के साथ रीलेशन हे.. बस इसीकी बात कर रहा था.. सब आपसमे सादीया कर सकते हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब मेरे पापा ओर मेरी मम्मीकी तराह.. हें..हें..हें.. वो दोनोभी तो मामी भांजे थे.. हें..हें..हें.. जानु.. आपसे अेक बात कहु..? मेरे जो अभी ये पापा हेना..? वो ही मेरे असली पीता हे..
धिरेन : (अब चोंकनेकी बारी धिरेनकी थी) क्या..? मतलब भानुजीजु.. क्या वोही तेरे असली पीता हे..?
नीलम : हां धिरेन.. लेकीन आप ये बातका जीक्र अभी कीसीके सामने नही करेगे.. आपको मेरी कसम..
धिरेन : जीलु.. तुमने कसम क्यु दी..? मुजेतो कुछ ओरही आइडीया आ रहा था.. अब क्या करु..?
नीलम : (आस्चर्यसे देखते) कोनसा आइडीया..? धिरेन प्लीज.. क्या आप मुजे बता सकते हे..?
धिरेन : (सामने देखते) नीलु.. इस बातका हम हमारी सादीमे फायदा उठा सकते हे.. तेरे घरवालेको हमारी सादीको मानना ही पडेगा.. बात कुछ समजमे आइ..? तुम समज गइनां..? कुछ आइडीया आया..?
नीलम : (खुसीसे मुस्कुराते) हंम.. समज गइ.. लेकीन जानु वो सब आपको देखना पडेगा मे कुछ नही केह पाउगी.. (मुस्कुराते कातील नजरोसे) जानु आपका दिमागतो बहुत चलता हे.. हें..हें..हें..
धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी नीलु डार्लींगके लीये दिमागतो लगाना पडेगानां..? नीलु.. मुजे अेक बात बता.. अगर भानुजीजु तेरे पीता हे तो तेरी मम्मी ओर भानुजीजु दोनो रीलेशनमे कैसे आगये..?
नीलम : (सरमाते खाना खाते) जानु.. जहा तक मेने सुना हे.. तब पापाकी भावना मम्मीके साथ सादीभी नही हुइथी.. तब पापाभी जवान थे.. ओर मम्मीकीभी सादीको अेक दो साल हुअे होगे.. उनकाभी छोटी उमरमेही ब्याह हुआथा.. जब मेरे पापाका अेक्सीडन्ट हुआ तब मेरे ये पीता ओर मम्मी ही उधर होस्पीटलमे रुकेथे.. बस.. वहा दोनोकी आंख मील गइ.. तबसे दोनोका टाका भीडा हुआ हे..
जब पापा होस्पीटलमे थे तबही मेरे ये पीताने मांको प्रेगनेन्ट कर दीयाथा.. ओर नव महीनेके बाद मेरा जन्म हुआ.. बस.. तबसे दोनो रीलेशनमे हे.. पापा रेग्युलर माको बार बार मीलने आते थे.. तब मुजे नही पताथा की यही मेरे पीता हे.. ये बात मुजे यहा आकर पता चली.. बस.. जानु.. अब हमभी आसानीसे सादी कर सकते हे.. अब हमे कीसीका डर नही रखना.. अगर कीसीने अेतराज कीया तो मे आपके साथ भागनेके लीये तैयार हु.. हम भागकर सादी करलेगे..
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. थेन्क्स.. लेकीन मुजे नही लगता हम दोनोको भागकर सादी करनेकी आवस्यक्ता होगी.. हम कीसी मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. ओर सबको बतादेगे.. वो सब तुम मुजपे छोडदो..
नीलम : (थोडा जीजकते सरमाते) जानु.. आपसे अेक बात कहु..? हम दोनो सादीतो करलेगे.. फीरभी मे आपकी इलीगल बीवी कहेलाउगी.. आपके उपर पहेला हक तो हमेसा पुनोदीदीका ही रहेगा..
धिरेन : (कुछदेर सोचनेके बाद कातील मुस्कानसे) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. मेने इस बारेमे कुछ सोचलीया हे.. कुछ दिनोके बाद तुम ही मेरी कायदेसरकी बीवी कहेलाओगी.. हें..हें..हें..
नीलम : (थोडासा गभराते) जानु.. आप क्या करने वाले हो..? देखना कुछ उल्टा सीधा मत करना.. मे आपसे दुर नही रेह सकती.. जोभी करना हो सोच समजके करना..
धिरेन : (मुस्कुराते) नही नीलु.. तुम जो सोच रही हो अैसा कुछभी नही करना.. देखना पुनो सामनेसे मुजे डीवोर्स पेपरपे साइन करदेगी.. फीर हम कोर्टमे सादी करलेगे बस.. ये सब तुम मुजपे छोडदो.. तुम टेन्शन मतलो..
दोनोही अपनी सादी ओर फ््युचरकी प्लानींग कर रहेथे.. तब उनको नही पताथा की दोनो होस्टेलसे नीकलते ही उनकी मेट्रनने पुनमको फोन करदीया था.. तब पुनम अपने रुममे जाकर आंख बंध करके बैठ गइ.. ओर इन दोनोपे पुरा ध्यान लगाकर बैठी दोनोकी सब हरकत ओर बाते जान रही थी.. मंजुने ये विद्या पुनमको सीखाइ तबसे वो इसका पुरा इस्तमाल करती थी..
ओर आजभी दोनोकी करतुत ओर बाते सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. आज धिरेनने खुद पुनमका उनके भाइ देवायतके साथ रहेनेका रास्ता साफ करदीयाथा.. ओर वैसेभी अब पुनमको धिरेनसे कोइ मतलब नही था.. उनकोतो सीर्फ अपने भाइकी प्यारकी नीशानीके लीये अेक बापका नाम चाहीये था.. इसके लीये पुनमने जरुरी था इतना मीलन धिरेनके साथ करलीया था.. जो कुछही दिनमे सबको बताना था..
धिरेन ओर नीलमने खाना खालीया.. उनके बाद धिरेनने आजभी नीलमको मंहेगी गीफ्ट दीलवाइ.. फीर उनको वापस होस्टेलमे छोडकर वहासे अपने गांवकी ओर नीकल गया.. तो दुसरी ओर गांवमे सुधीरकी क्लीनीकपे बरखा पेसन्टके केस नीकाल रहीथी.. तब मुना अपनी केबीनमे सुधीरकी लीखी हुइ दवाइआ दे रहा था.. जब पेसन्ट कम होगये तब वो अपनी मां बसंतीने रखी हुइ सर्तके बारेमे सोचने लगा..
बसंतीने मुनाको सब बाते खुलकर बता दीथी.. ओर इसी सर्तपे वो बरखाकी सादी मुनासे करवानेके लीये राजी हुइथी.. तो मुनाने तबही बसंतीकी सर्त मानके उनको अपने रुममे दबोच लीया था.. मुनातो अेक चुत मांगने गयाथा.. ओर उनके बदलेमे दो दो चुतका इन्तजाम हो गयाथा.. वो ये सोचकर अेक्साइटेड होने लगा ओर पेन्टमे ही लंड जटके मारने लगा.. तो दुसरी ओर बरखासे उनकी मांके बारेमे उनके ओर भानुके अवैध रीस्तोके बारेमे पता चला..
तभी मुनाको ये लगने लगाकी उनकी मां बहुत कामी ओरत हे.. जो पतीके सुखके बीना नही रेह पाती.. अगर बहारके आदमीसे रीलेशन रखती हेतो तो फीर मे क्यु नही.. यही सोचते मुनाका लंड तनके खडा होगया.. ओर घडीकी ओर देखने लगा.. तो अभी साडे पांच बजनेको आये थे.. ओर वो सोचने लगाकी अभी बरखा भी दो ढाइ घंटे तक इधर रहेगी.. ओर उनके बापुभी रमेशकी दुकानपे होगे.. तो इस वक्त मां घरपे अकेली होगी..
तो मुजे घरपे जाकर अेक बार मांसे अच्छेसे मील लेना चाहीये.. हो सकताहे मा को मीलकर कुछ बात बन जाये.. जब उनके रुममे मेने उसे पकडके दबोच लीया तबभी वो कुछ नही बोली.. अगर मां खुद मेरे साथ रीलेशनमे आना चाहती हे तो मुजे क्या प्रोबलेम.. अगर मोका मीला तो अभी घर जाकर मे मा को चोद लुगा.. क्या गदराया माल हे वो.. ओर वो यही सब सोचते सुधीरके पास चला गया..
मुना : (जुठ बोलते) अंकल मुजे ठाकुरसाहबने कुछ काम सोपा हे.. तो क्या मे जाउ..? मे अेकाद घंटेमे वापस आजाउगा..
सुधीर : (मुस्कुराते) हां.. अब मे तुजे मना थोडीना कर सकता हु.. जा.. क्या बरखाभी साथ चल रही हे..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते) नही अंकल.. सीर्फ मुजे जाना हे.. मे अभी उनको कहेकर जाता हु की मेरा कामभी देख लेगी..
सुधीर : (हसते) ठीक हे जाओ..
मुना : (हसते हुआ बहार आते बरखाको धीरेसे) बरखा.. मे जरा ठाकुरसाहबके कामके लीये बहार जा रहा हु.. तुम जरा सम्हाल लेना.. अेक देढ घंटेमे वापस आजाउगा.. फीर हम दोनो साथ घर चले जायेगे..
बरखा : (सरमाते हसते) जी भैया.. मे यही हु.. आप जल्दी आजायेगा.. क्या हमारे लीये जा रहे हे..?
मुना : (मुस्कुराते) हंम.. सायद हमारी सादी जल्द होजायेगी.. बस उसी कामके लीये जा रहा हु..
बरखा : (सरमाते खुस होते) हंम.. जाइअे यहा मे सब सम्हाल लुगी..
कहातो मुना हसते हुअे वहासे चला गया.. ओर गांवकी ओर घुमते अपने बापुकी दुकानपे चला गया.. क्युकी वो कोइ रीस्क लेना नही चाहता था.. तो वही जाकर उनके बापुसे बात करके कंन्फोर्म करलेना चाहता था.. क्युकी आज वो अपनी मां को नही अपनी मासुकाको मीलने जा रहा हे.. अैसा फीर करने लगा.. ओर वो रमेशकी दुकानपे आगया.. तो उनके बापु वही बैठे कीसीका माल तोल रहेथे.. जब वो फ्री होगये तब उसने मुनाको पुछ ही लीया..
विभु : हां बेटा.. इस वक्त यहा..? होस्पीटल नही गया क्या..? कुछ काम था..?
मुना : हां बापु मे जरा कामसे बहार जा रहा हु.. हम ८ बजे घर आजायेगे.. आप कब घर जाओगे..? क्युकी अगर मुजे आनेमे देर होगइ तो रातमे मां ओर बरखा अकेली होगी तो पुछ लीया..
विभु : बेटा.. आजकल रमेशभाइ बहार रहेते हेतो आठतो बजही जायेगा.. ठीक हे मे आठ बजे दुकान बंध करके चला जाउगा.. क्यु कुछ जरुरी काम हे..? जो इतनी देर होजायेगी..?
मुना : (मुस्कुराते) हां बापु.. मुजे ठाकुरसाहेबके अेक कामके लीये बहार जाना हे.. तो चलता हु..
विभु : (मुस्कुराते खुस होते) हां बेटा.. बडेही नेक इन्सान हे.. हमपे उनका बहुत बडा अहेसान हे.. वरना हमारी जमीनतो गइथी हाथसे.. जा करदे उनका काम..
तब मुना खुस होगया.. ओर गांवमे घुमते पीछली गलीसे अपने घरपे चला गया.. तो दरवाजा बंध था.. तो मुनाकी दिलकी घरडन तेज होने लगी.. मानो आज वो अपनी माको नही.. अपनी मासुकाको मीलने आया हो.. यही सोचते उनका लंड तनके सख्त होने लगा.. उनको अैसा लगा वो आज अपने घरपे नही.. सबसे छुपाते अपनी मासुकाके घरमे घुस रहाहो.. ओर उसने भारी मनसे धीरेसे घरके दरवाजेको धका देदीया..
तो दरवाजा खुल गया तो उनको घरके अंदर कोइ दीखाइ नही दीया.. तब अेक बार पीछे मुडकर अपनी गलीमे नजर दोडाके देखने लगाकी कही कोइ देखतो नही रहा.. ओर उसने धीरेसे दरवाजा बंध करके लोक करलीया.. ओर दबे पांव घरके अंदर चला गया तो वहाभी उनको कोइ नजर नही आया.. तो वो तीनो रुममे नजर घुमाने लगा.. उनको अपनी मां बसंती कही नजर नही आइ.. ओर मुना उनके रुमकी ओर चला गया..
तो बसंतीके रुममे बाथरुमसे पानीकी आवाज आ रहीथी.. तो मुना समज गयाकी उनकी मां अंदर नहा रही हे.. ओर मुनाने हींमत करके उनके रुमका दरवाजा भी बंध करलीया.. तो पुरे रुममे अंधेरा होगया.. ओर मुना दबे पांव जाकर उनके बेडपे बैठ गया ओर बसंतीके बहार नीकलनेका इन्तजार करने लगा.. क्युकी बसंतीने खुद मुनाको खुलकर उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात कहीथी.. ओर मुनाने उसी दिन अपनी मांको उनके रुममे दबोच लीयाथा.. तो आज मुनाको कोइ डर नही लग रहाथा.. तभी....
कन्टीन्यु
अध्याय - १४२/२
तो धिरेनभी आंख बंध करके मजे लेने लगा.. आज उनकी मासुका उनको ब्लुजोब दे रही थी.. ओर मजेकी बाततो यही थी की जोभी धिरेन उसे करनेको कहेता.. वो बीना कोइ विरोध उनकी हर बात मानती थी.. नीलम ओर धिरेन अपने प्यारमे अेक कदम ओर आगे बढ चुके थे.. तब कुछही देरमे धिरेनके लंडसे उनका लावा फुट पडा.. ओर नीलमके मुहमे पीचकारीया मारते उनकी हलकमे चला गया..

तो नीलमने जटसे लंडको मुहसे बहार नीकाल दीया ओर वही घांसते हुअे थुकते नीकालने लगी.. तो आगे बैठे लोग पीछे मुडकर उन दोनोकी ओर देखने लगे.. तब धिरेन ओर नीलम बहुतही सरमा गये.. ओर नीलम अपने कपडे सही करते वापस अपनी चेयरपे बैठ गइ.. अब दोनोको सरमके मारे यही बैठना मुस्कील होने लगा.. तभी नीलमने धिरेनका हाथ पकडके बहारकी ओर जानेको कहा.. ओर दोनोही बहार आगये..
तो बहार आतेही नीलम लेडीस टोयलेटकी ओर चली गइ.. ओर अंदर जातेही गेन्डीमे पानीसे अपना मुह साफ करने लगी.. आज पहेली बार अपने यारके हथीयारके पानीका स्वाद चखा था.. जो नीलमके लीये पहेला अनुभव था.. तभी पीछेसे अपनी कमरमे कीसीने हाथ डालके उसे बाहोमे भीच लीया तो नीलम गभराके पलट गइ.. देखातो धिरेन उनको बाहोमे भीचते नीलमके गलेको चुम रहाथा तब नीलम बहुतही सर्मसार होगइ..
नीलम : (सरमाते कामुक आवाजमे धीरेसे) धिरेन प्लीज.. यहा नही.. ये लेडीस टोयलेट हे.. यहा कोइभी लेडीस आ सकती हे.. छोडीये मुजे.. हम कही ओर जाते हेनां.. आप बादमे करलेना..
धिरेन : (होंठ चुमते) नही नीलु मे तेरे बगैर नही रेह सकता.. मुजे जल्दसे जल्द तुम्हारे साथ मीलन करना हे..
नीलम : (सरमाते मुस्कराते धीरेसे) जानु.. प्लीज.. यहा नही.. कोइ देखलेगा.. चलोना हम कही ओर चले जाते हे.. हम होटेलमे चले..? हंम.. मेभी आपके बगैर नही रेह सकती.. प्लीज.. आप वही करलेना..
धिरेन : नही नीलु.. अब हम दोनो सीधेही हमारी सुहागरातमे मीलेगे.. मे तुमसे जल्दी मीलन करना चाहता हु.. तुमने तो मुजे पागल कर दीया हे.. इतनातो पुनोने भी नही कीया..
नीलम : (सर्मसार होते) आजतो आपनेभी मुजे पागल करदीया हे.. धिरेन.. प्लीज.. पहेले हम बहार चले..? फीर कही बैठकर बाते करते हे.. पहेले यहासे चलो..
कहेते नीलम धिरेनकी बाहोसे छुट गइ.. ओर धिरेनका हाथ पकडके उनके सामने देखकर मुस्कुराती उसे खीचकर बहारकी ओर लेआइ.. फीर दोनोही अपनी बाइक लेकर वहासे नीकल गये.. ओर धिरेनने बाइक अेक बडीयासी रेस्टोरन्टपे लेली.. वहा दोनो अेक केबीनमे आमने सामने बैठ गये.. तब धिरेनने कुछ खानेका ओर्डर दीया.. ओर अपने पैरोसे नीलमके पैरको सहेलाने लगा तो नीलम बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी..
नीलम : (सरमाते कामुक नजरोसे देखते हसते) जानु.. आप बहुत नोटी हो.. ना जाने आज मुजसे क्या क्या करवा लीया.. आपने आज कैसी आग लगाइ थी.. जानु.. आज बहुत मजा आगया..
धिरेन : (दोनो हाथ थामते आंखोमे देखते) नीलु.. येतो कुछभी नही हे.. जब हमारा मीलन होगा तब तुम नजतकी सैर करोगी.. मे सचमे तुजे बहुत प्यार करता हु.. बस हमारी सादी होजाये.. तो हम दोनोही हमारे नये घरमे रहेगे.. तब हर रात हमारी सुहागरात होगी.. आइ प्रोमीस..
नीलम : (थोडा सीरीयस होते) आइ नो.. जानु सादीतो हम करलेगे.. लेकीन आप अपनी मम्मीको ओर मे अपने मम्मी पापाको क्या जवाब देगे..? कभी इनके बारेमे सोचा हे..? खास करके मेरी सौतनको.. हमे पुनोदीदी लता बुआ.. सबका सामना करना पडेगा.. क्या आपने कुछ इनके बारेमे तैय कीया हे..?
धिरेन : (सोचते) नीलु.. अगर तुजमे हिंमत हे ओर तुम मेरा साथ दोगी तो हम दोनो सबसे लड जायेगे.. खुद जीजुने मेरी मासे इस उमरमे दुसरी सादी करली हे.. तेरे पापानेभी अपनी मामीसे दुसरी सादी करली हे.. तो वो लोग हमारी सादीके लीये क्यु अेतराज करेगे..? अगर पुनोने कुछ कहा तो मे उनके साथ नही रहुगा.. मे हमेसाके लीये तेरे साथ इधर सहेरमे रहेने आजाउगा.. बस मुजे तेरा साथ चाहीये.. तुम मुकर मत जाना..
नीलम : (आंखोमे देखते) जानु.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. ओर मे आपसे हमारी सादीसे पहेलेही पुर्ण समर्पीत होजाउगी.. मे आपसे वादा करती हुकी मे मरते दम तक आपका साथ कभी नही छोडुगी.. फीर चाहे मुजे कीसीके साथभी क्युना लडना पडे.. बस.. आप मुजे कभी मत छोडना.. वरना मेरे लीये जीना मुस्कील होजायेगा.. मुजे कीसीभी हालमे आपके साथ रहेना हे.. फीर भलेही मुजे बीचमे पढाइ छोडनी पडे..
धिरेन : (मुस्कुराते हाथ चुमते) थेन्क्स नीलु.. बस मुजे तुमसे यही उमीद थी.. तुम पढाइ छोडनेकी बाते मत करो.. इस साल तुम अच्छेसे पढाइ करले.. फीर कोलेजतो युही चला जायेगा.. फीर मे तेरी जोब हमारी बेन्कपे लगवा दुगा.. नीलु.. हम दोनोको सेटरडे के दीन हमारा मकान देखने जाना हे.. अगर तुजे पसंद आगया तो हम ले लेगे..
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. जानु.. आप पुनोदीदीको भी दीखा देना.. ताकी पीछसे आपको कोइ प्रोबलेम ना हो.. वो बहुतही अच्छी हे.. कास वो हमारी सादीको अेक्सेप्ट करले.. तो हम तीनोही साथ रहेगे..
धिरेन : नही नीलु.. माने उनको गांवमे हमारी खेतीबाडी ओर हमारे पुर्खोके घरकी सब जीम्वेवारी दी हे.. ओर उपरसे उनको सहेरमे रहेनेके लीये मना करदीया हे तो पुनो वही रहेगी.. ओर मेभी नही चाहताकी तुम उनके साथ रहो.. वरना मे तुमको वो प्यार नही दे पाउगा जो मे तुजे देना चाहता हु..
नीलम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. जैसे आपकी मरजी.. धिरेन.. अेब बात पुछु..? हम दोनो सादी कब करेगे..?
धिरेन : (हसते) बहुत ही जल्द.. लेकीन इनसे पहेले मे मेरी इस खुबसुरत बीवीको अच्छेसे प्यारतो करलु..
नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. मेने थीअेटरके अंदर देखा आपका प्यार.. हें..हें..हें.. मुजे पताहे आपकी कोनसी फेन्टासी हे.. मतलब.. क्या आप सचमे.. आइ मीन.. हमारा मीलन..
धिरेन : हां नीलु.. मेरी सुरुसेही फेन्टासी रही हेकी मे सादीसे पहेले वो सबकुछ करना चाता हु जो अेक कोलेज लाइफमे मेरे सभी दोेस्तो अपनी गर्लफ्रेन्डके साथ कर चुके हे.. ओर तुम सीर्फ मेरी गर्लफ्रेन्ट नही मेरी मासुका मेरी हमसफर सबकुछ हो.. बेबी.. क्या इसके लीये तुम रेडी तो होनां..?
नीलम : (सरारतसे मुस्कुराते) जानु.. क्या आप बता सकते हेकी कोलेजमे आपके सभी दोस्तो कैसे अपनी गर्लफ्रेन्डको मीलते थे..? प्लीज.. हें..हें..हें..
धिरेन : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. डार्लीग.. वो सब यातो कीसी थीयेटर या गार्डनमे चले जाते थे.. अगर कीसीको मौका मीलतातो उनकी गर्लफ्रेन्डको कोलेजके बाथरुममेही दबोच लेते थे.. ओर उनके साथ सबकुछ करलेते थे.. उनको अपने कपडेभी नही नीकालने देतेथे.. बस उनको जुकाके उनका लोअर उचा करके पीछेसेही घुसाके चोद लेते थे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. हें..हें..हें..
धिरेन : नीलु.. बस.. यही मेरी फेन्टासी हे.. मे चाहता हु जब दुसरा या तीसरा मीलन हो.. तब तुमभी अपने स्कुलके ड्रेसमे हो.. मेभी उसी कपडोमे तुम्हारे साथ करना चाहता हु..
नीलम : (अेकदम सर्मसार होते मुस्कुराते कामुक नजरोसे धीरेसे) हंम.. मतलब सादीसे पहेले सीर्फ अेक बार नही ओरभी करना चाहते हे.. ठीक हे.. आपकी जीतनीभी मरजी हो इतनी बार करलेना.. जानु.. सच कहु..? तो मेरीभी यही फेन्टासी हे.. मे खुलकर जीना चाहती हु.. मुजे अेक आजाद पंछीकी तराह जीना हे.. मेरी होस्टेलवाली फ्रेन्डने भी कहाहे की तेरे बोयफ्रेन्टका सब प्यार बटोरले.. उसीने मुजे अेक आजाद पंछीकी तराह जीना साखाया हे.. वोभी इसी तराह जीती हे.. तो मेभी उनकी तराह खुलकर जीना चाहती हु..
धिरेन : (मुस्कुराते) अच्छा..? क्या नाम हे तेरी फ्रेन्डका.. क्या कभी मुजसे मीलवायेगी..?
नीलम : (सरारतसे हसते) नही.. बीलकुल नही.. वरना जनाबको पसंद आगइतो मेरा चान्स तो गया.. हें..हें..हें.. ओर वो कमीनी हे भी अैसी पटाका.. जानु.. मे उनको मीलवाके कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) नीलु.. तुम सब लडकीयोमे अेक दुसरेके लीये ज्वेलेसी बहुत होती हे.. इनसेतो हच्छे हम लडके हे.. सब बाते खुलकर करते हे.. मेने देखाहे जीजुके गांवमे लखनभैयाके सभी दोस्तो अपनी मासुकाको लेकर सभी तराहकी चर्चा करते हे.. ओर लखनभैया खुदभी बहुत अच्छे हे.. वोभी रंगीन मीजाजके हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (आस्चर्यसे हसते) क्या.. लखन जीजु..? ओर रंगीन मीजाज..? आइ कान्ट बीलीव.. दीखनेमे तो कीतने भोले भाले लगते हे.. हें..हें..हें.. धिरेन प्लीज.. मुजे बताओना आप लोग कीस तराहकी चर्चा करते हो.. आपको पता हे..? वो ओर लतादीदीभी अपनी सादीसे पहेले सबकुछ कर चुके हे..
धिरेन : (सरारतसे हसते) अच्छा..? सबकुछ मतलब..? क्या..?
नीलम : (सर्मसार होते हसते) जाओ.. मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो.. हें..हें..हें..
धिरेन : (धीरेसे हसते) अरे बताना.. इसमे काहेकी सरम.. हमभी तो वोही करने वाले हे.. बस अेक बार बतादे.. हें..हें..हें.. वरना मेरी कसम देदुगा.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते जटसे अेक मुका मारते) नही.. कसम मत देना.. आप बहुत कमीने हो.. मुजे तो सर्म आ रहीहे.. नही कहुगी.. हें..हें..हें..
धिरेन : (जुठमुठ रुठते मुह घुमालेता हे) ठीक हे मत बताओ.. मे समजुगा तुम मुजे प्यार नही करती..
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) अरे.. नाराज होगये..? चलो.. बताती हु.. लेकीन सीर्फ अेक बार.. आइमीन.. मेरा मतलब.. जो आप सादीसे पहेले मेरे साथ करना चाहते हे.. मतलब दोनोका मीलन.. चु..दा..इ.. अबतो खुस..?
धिरेन : (मुस्कुराते बुब्सको दबाते) हंम.. खुस.. नीलु.. हम भी मीलकर वोही करने वाले हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) आइइइइ.. जानु.. थोडा धीरेसे दबाओनां..? दर्द होता हे.. हटो.. कोइ आ रहा हे..
तभी दोनोके खानेका ओर्डर आगया तो दोनोही सही होकर बैठ गये.. तो नीलम बहुतही सरमाइ.. जब वेइटर खाना रखके चला गयातो.. दोनोही खाने लगे.. तब खाना खाते धिरेन सरारतसे नीलमके पैरको सहेलाते पैरको उनकी चुतकी ओर लेगया.. तो नीलम बहुतही सरमाइ ओर जोरोसे हसते धिरेनको मुका मारने लगी.. फीर नीलम धिरेनकी ओर मुस्कुराते कामुक नजरोसे देखती रही.. तभी धिरेनने कहा..
धिरेन : नीलु.. तुजे पता हे..? लखनभैया केह रहेथे अब उस गांवमे ओर आजुबाजु सभी गांवमे बहुत बडा बदलाव होने वाला हे.. सब लोग मीलकर उन्हीकी च र्चा कर रहेथे.. सब लोग उस बदलावका इन्तजार कर रहेहे ताकी जीनके साथ उनका टाका भीडा हुआ हे उनसे सादी कर सके..
नीलम : (मुस्कुराते) अच्छा.. अगर दोनो प्यार करते हे तो इस बदलावकी क्या आवस्यक्ता हे.. वोतो अैसेही कर सकते हे..जैसे हम दोनो करने वाले हे.. लेकीन आपने बताया नही कीस टाइपका बदलाव आने वाला हे..
धिरेन : (मुस्कुराते खाना खाते) नीलु.. अैसा बदलावकी हम सोचभी नही सकते.. ओर ये बललाव जीजुके घरपे पीछली तीन पीढीयोसे आ चुका हे.. मतलब.. सब लोग आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. इनमे कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. जीसे जीनके साथ सादी करनीहे वो कर सकते हे..
नीलम : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) व्होट..? मतलब..? क्या कहा आपने फीरसे कहीयेतो..?
धिरेन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. सबलोग आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. ओर अभी गांवमेभी अैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. हमारे सभी दोस्तोका कीसीना कीसीके साथ रीलेशन हे.. मतलब आपसी रीस्तोमे रीलेशन.. तुम समज गइनां..?
नीलम : (सरमाते हसते) हां इतनीभी भोली नही हु.. आपसी रीस्तोके बारेमे पता तो हे.. फीरभी मुजे आप कुछ रीस्तोके बारेमे बताइअे.. मुजे जानना हे..
धिरेन : (हसते) नीलु.. कीसीका उनकी सगी बहेनके साथ तो कीसीको उनकी कजीन बहेनके साथ.. रीलेशन हे.. तो कीसीको उनकी विधवा बुआ या चाची या ताइ.. के साथ रीलेशन हे.. बस इसीकी बात कर रहा था.. सब आपसमे सादीया कर सकते हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब मेरे पापा ओर मेरी मम्मीकी तराह.. हें..हें..हें.. वो दोनोभी तो मामी भांजे थे.. हें..हें..हें.. जानु.. आपसे अेक बात कहु..? मेरे जो अभी ये पापा हेना..? वो ही मेरे असली पीता हे..
धिरेन : (अब चोंकनेकी बारी धिरेनकी थी) क्या..? मतलब भानुजीजु.. क्या वोही तेरे असली पीता हे..?
नीलम : हां धिरेन.. लेकीन आप ये बातका जीक्र अभी कीसीके सामने नही करेगे.. आपको मेरी कसम..
धिरेन : जीलु.. तुमने कसम क्यु दी..? मुजेतो कुछ ओरही आइडीया आ रहा था.. अब क्या करु..?
नीलम : (आस्चर्यसे देखते) कोनसा आइडीया..? धिरेन प्लीज.. क्या आप मुजे बता सकते हे..?
धिरेन : (सामने देखते) नीलु.. इस बातका हम हमारी सादीमे फायदा उठा सकते हे.. तेरे घरवालेको हमारी सादीको मानना ही पडेगा.. बात कुछ समजमे आइ..? तुम समज गइनां..? कुछ आइडीया आया..?
नीलम : (खुसीसे मुस्कुराते) हंम.. समज गइ.. लेकीन जानु वो सब आपको देखना पडेगा मे कुछ नही केह पाउगी.. (मुस्कुराते कातील नजरोसे) जानु आपका दिमागतो बहुत चलता हे.. हें..हें..हें..
धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी नीलु डार्लींगके लीये दिमागतो लगाना पडेगानां..? नीलु.. मुजे अेक बात बता.. अगर भानुजीजु तेरे पीता हे तो तेरी मम्मी ओर भानुजीजु दोनो रीलेशनमे कैसे आगये..?
नीलम : (सरमाते खाना खाते) जानु.. जहा तक मेने सुना हे.. तब पापाकी भावना मम्मीके साथ सादीभी नही हुइथी.. तब पापाभी जवान थे.. ओर मम्मीकीभी सादीको अेक दो साल हुअे होगे.. उनकाभी छोटी उमरमेही ब्याह हुआथा.. जब मेरे पापाका अेक्सीडन्ट हुआ तब मेरे ये पीता ओर मम्मी ही उधर होस्पीटलमे रुकेथे.. बस.. वहा दोनोकी आंख मील गइ.. तबसे दोनोका टाका भीडा हुआ हे..
जब पापा होस्पीटलमे थे तबही मेरे ये पीताने मांको प्रेगनेन्ट कर दीयाथा.. ओर नव महीनेके बाद मेरा जन्म हुआ.. बस.. तबसे दोनो रीलेशनमे हे.. पापा रेग्युलर माको बार बार मीलने आते थे.. तब मुजे नही पताथा की यही मेरे पीता हे.. ये बात मुजे यहा आकर पता चली.. बस.. जानु.. अब हमभी आसानीसे सादी कर सकते हे.. अब हमे कीसीका डर नही रखना.. अगर कीसीने अेतराज कीया तो मे आपके साथ भागनेके लीये तैयार हु.. हम भागकर सादी करलेगे..
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. थेन्क्स.. लेकीन मुजे नही लगता हम दोनोको भागकर सादी करनेकी आवस्यक्ता होगी.. हम कीसी मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. ओर सबको बतादेगे.. वो सब तुम मुजपे छोडदो..
नीलम : (थोडा जीजकते सरमाते) जानु.. आपसे अेक बात कहु..? हम दोनो सादीतो करलेगे.. फीरभी मे आपकी इलीगल बीवी कहेलाउगी.. आपके उपर पहेला हक तो हमेसा पुनोदीदीका ही रहेगा..
धिरेन : (कुछदेर सोचनेके बाद कातील मुस्कानसे) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. मेने इस बारेमे कुछ सोचलीया हे.. कुछ दिनोके बाद तुम ही मेरी कायदेसरकी बीवी कहेलाओगी.. हें..हें..हें..
नीलम : (थोडासा गभराते) जानु.. आप क्या करने वाले हो..? देखना कुछ उल्टा सीधा मत करना.. मे आपसे दुर नही रेह सकती.. जोभी करना हो सोच समजके करना..
धिरेन : (मुस्कुराते) नही नीलु.. तुम जो सोच रही हो अैसा कुछभी नही करना.. देखना पुनो सामनेसे मुजे डीवोर्स पेपरपे साइन करदेगी.. फीर हम कोर्टमे सादी करलेगे बस.. ये सब तुम मुजपे छोडदो.. तुम टेन्शन मतलो..
दोनोही अपनी सादी ओर फ््युचरकी प्लानींग कर रहेथे.. तब उनको नही पताथा की दोनो होस्टेलसे नीकलते ही उनकी मेट्रनने पुनमको फोन करदीया था.. तब पुनम अपने रुममे जाकर आंख बंध करके बैठ गइ.. ओर इन दोनोपे पुरा ध्यान लगाकर बैठी दोनोकी सब हरकत ओर बाते जान रही थी.. मंजुने ये विद्या पुनमको सीखाइ तबसे वो इसका पुरा इस्तमाल करती थी..
ओर आजभी दोनोकी करतुत ओर बाते सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. आज धिरेनने खुद पुनमका उनके भाइ देवायतके साथ रहेनेका रास्ता साफ करदीयाथा.. ओर वैसेभी अब पुनमको धिरेनसे कोइ मतलब नही था.. उनकोतो सीर्फ अपने भाइकी प्यारकी नीशानीके लीये अेक बापका नाम चाहीये था.. इसके लीये पुनमने जरुरी था इतना मीलन धिरेनके साथ करलीया था.. जो कुछही दिनमे सबको बताना था..
धिरेन ओर नीलमने खाना खालीया.. उनके बाद धिरेनने आजभी नीलमको मंहेगी गीफ्ट दीलवाइ.. फीर उनको वापस होस्टेलमे छोडकर वहासे अपने गांवकी ओर नीकल गया.. तो दुसरी ओर गांवमे सुधीरकी क्लीनीकपे बरखा पेसन्टके केस नीकाल रहीथी.. तब मुना अपनी केबीनमे सुधीरकी लीखी हुइ दवाइआ दे रहा था.. जब पेसन्ट कम होगये तब वो अपनी मां बसंतीने रखी हुइ सर्तके बारेमे सोचने लगा..
बसंतीने मुनाको सब बाते खुलकर बता दीथी.. ओर इसी सर्तपे वो बरखाकी सादी मुनासे करवानेके लीये राजी हुइथी.. तो मुनाने तबही बसंतीकी सर्त मानके उनको अपने रुममे दबोच लीया था.. मुनातो अेक चुत मांगने गयाथा.. ओर उनके बदलेमे दो दो चुतका इन्तजाम हो गयाथा.. वो ये सोचकर अेक्साइटेड होने लगा ओर पेन्टमे ही लंड जटके मारने लगा.. तो दुसरी ओर बरखासे उनकी मांके बारेमे उनके ओर भानुके अवैध रीस्तोके बारेमे पता चला..
तभी मुनाको ये लगने लगाकी उनकी मां बहुत कामी ओरत हे.. जो पतीके सुखके बीना नही रेह पाती.. अगर बहारके आदमीसे रीलेशन रखती हेतो तो फीर मे क्यु नही.. यही सोचते मुनाका लंड तनके खडा होगया.. ओर घडीकी ओर देखने लगा.. तो अभी साडे पांच बजनेको आये थे.. ओर वो सोचने लगाकी अभी बरखा भी दो ढाइ घंटे तक इधर रहेगी.. ओर उनके बापुभी रमेशकी दुकानपे होगे.. तो इस वक्त मां घरपे अकेली होगी..
तो मुजे घरपे जाकर अेक बार मांसे अच्छेसे मील लेना चाहीये.. हो सकताहे मा को मीलकर कुछ बात बन जाये.. जब उनके रुममे मेने उसे पकडके दबोच लीया तबभी वो कुछ नही बोली.. अगर मां खुद मेरे साथ रीलेशनमे आना चाहती हे तो मुजे क्या प्रोबलेम.. अगर मोका मीला तो अभी घर जाकर मे मा को चोद लुगा.. क्या गदराया माल हे वो.. ओर वो यही सब सोचते सुधीरके पास चला गया..
मुना : (जुठ बोलते) अंकल मुजे ठाकुरसाहबने कुछ काम सोपा हे.. तो क्या मे जाउ..? मे अेकाद घंटेमे वापस आजाउगा..
सुधीर : (मुस्कुराते) हां.. अब मे तुजे मना थोडीना कर सकता हु.. जा.. क्या बरखाभी साथ चल रही हे..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते) नही अंकल.. सीर्फ मुजे जाना हे.. मे अभी उनको कहेकर जाता हु की मेरा कामभी देख लेगी..
सुधीर : (हसते) ठीक हे जाओ..
मुना : (हसते हुआ बहार आते बरखाको धीरेसे) बरखा.. मे जरा ठाकुरसाहबके कामके लीये बहार जा रहा हु.. तुम जरा सम्हाल लेना.. अेक देढ घंटेमे वापस आजाउगा.. फीर हम दोनो साथ घर चले जायेगे..
बरखा : (सरमाते हसते) जी भैया.. मे यही हु.. आप जल्दी आजायेगा.. क्या हमारे लीये जा रहे हे..?
मुना : (मुस्कुराते) हंम.. सायद हमारी सादी जल्द होजायेगी.. बस उसी कामके लीये जा रहा हु..
बरखा : (सरमाते खुस होते) हंम.. जाइअे यहा मे सब सम्हाल लुगी..
कहातो मुना हसते हुअे वहासे चला गया.. ओर गांवकी ओर घुमते अपने बापुकी दुकानपे चला गया.. क्युकी वो कोइ रीस्क लेना नही चाहता था.. तो वही जाकर उनके बापुसे बात करके कंन्फोर्म करलेना चाहता था.. क्युकी आज वो अपनी मां को नही अपनी मासुकाको मीलने जा रहा हे.. अैसा फीर करने लगा.. ओर वो रमेशकी दुकानपे आगया.. तो उनके बापु वही बैठे कीसीका माल तोल रहेथे.. जब वो फ्री होगये तब उसने मुनाको पुछ ही लीया..
विभु : हां बेटा.. इस वक्त यहा..? होस्पीटल नही गया क्या..? कुछ काम था..?
मुना : हां बापु मे जरा कामसे बहार जा रहा हु.. हम ८ बजे घर आजायेगे.. आप कब घर जाओगे..? क्युकी अगर मुजे आनेमे देर होगइ तो रातमे मां ओर बरखा अकेली होगी तो पुछ लीया..
विभु : बेटा.. आजकल रमेशभाइ बहार रहेते हेतो आठतो बजही जायेगा.. ठीक हे मे आठ बजे दुकान बंध करके चला जाउगा.. क्यु कुछ जरुरी काम हे..? जो इतनी देर होजायेगी..?
मुना : (मुस्कुराते) हां बापु.. मुजे ठाकुरसाहेबके अेक कामके लीये बहार जाना हे.. तो चलता हु..
विभु : (मुस्कुराते खुस होते) हां बेटा.. बडेही नेक इन्सान हे.. हमपे उनका बहुत बडा अहेसान हे.. वरना हमारी जमीनतो गइथी हाथसे.. जा करदे उनका काम..
तब मुना खुस होगया.. ओर गांवमे घुमते पीछली गलीसे अपने घरपे चला गया.. तो दरवाजा बंध था.. तो मुनाकी दिलकी घरडन तेज होने लगी.. मानो आज वो अपनी माको नही.. अपनी मासुकाको मीलने आया हो.. यही सोचते उनका लंड तनके सख्त होने लगा.. उनको अैसा लगा वो आज अपने घरपे नही.. सबसे छुपाते अपनी मासुकाके घरमे घुस रहाहो.. ओर उसने भारी मनसे धीरेसे घरके दरवाजेको धका देदीया..
तो दरवाजा खुल गया तो उनको घरके अंदर कोइ दीखाइ नही दीया.. तब अेक बार पीछे मुडकर अपनी गलीमे नजर दोडाके देखने लगाकी कही कोइ देखतो नही रहा.. ओर उसने धीरेसे दरवाजा बंध करके लोक करलीया.. ओर दबे पांव घरके अंदर चला गया तो वहाभी उनको कोइ नजर नही आया.. तो वो तीनो रुममे नजर घुमाने लगा.. उनको अपनी मां बसंती कही नजर नही आइ.. ओर मुना उनके रुमकी ओर चला गया..
तो बसंतीके रुममे बाथरुमसे पानीकी आवाज आ रहीथी.. तो मुना समज गयाकी उनकी मां अंदर नहा रही हे.. ओर मुनाने हींमत करके उनके रुमका दरवाजा भी बंध करलीया.. तो पुरे रुममे अंधेरा होगया.. ओर मुना दबे पांव जाकर उनके बेडपे बैठ गया ओर बसंतीके बहार नीकलनेका इन्तजार करने लगा.. क्युकी बसंतीने खुद मुनाको खुलकर उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात कहीथी.. ओर मुनाने उसी दिन अपनी मांको उनके रुममे दबोच लीयाथा.. तो आज मुनाको कोइ डर नही लग रहाथा.. तभी....
कन्टीन्यु








































