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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १५१
कहातो दया सबको सब्जी देते पुनमकी ओर देखके सरमाते हसने लगी.. ओर कीचनमे चली गइ.. तबतक देवायतने बहुत कुछ सोच लीया.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया.. तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. क्युकी उसे पताथा की अभी देवायत उनके रुममे आराम करने चला जायेगा.. इसीलीये वो उसे अकेलेमे मीलना चाहती थी.. ओर वो अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करके हल्कासा शींगार करने लगी.. तब लखन उपर अपने रुममे चला गया.. तब देवायतभी थोडी देरके बाद पीछेसे उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे चला गया....अब आगे
लखन : (देवायतको उनके रुममे देखतेही) अरे भैया आप..? इधर..? कुछ काम था क्या..? मुजे बुलालीया होता..
देवायत : (धीरेसे दरवाजा बंध करते लखनके पास आकर बैठते) लखन.. तुमने नीचे तो सबके सामने जुठ बोल लीया.. मुजे पता हे तुजे सब मालुम हे.. अब मुजे पुरी सचाइ बतादे.. बोल कहा हे वो दोनो..?
लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. मे आपके सामने जुठ नही बोल सकता.. मेने ही उन दोनोके भागनेका इन्तजाम करदीया था.. वो अभी सहेरमे हमारे बंगलेपे ही हे.. ओर इस बारेमे सीर्फ हम तीन लोगही जानते हे..
देवायत : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. तेरे अलावा अेक उनकी सहेली जो हमारे सामतभाइकी लडकी हे.. जागृती.. ओर दुसरी खुद तेरे दोस्त श्रीधरकी मम्मी.. बोल..? तेरे अलावा यही दोनो हेनां..?
लखन : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) भाइ..? ये सब आपको कैसे पता..? हां.. मेरे अलावा यही दोनो हे.. जो इस बातको जानते हे.. ओर अेक हे बंसी.. जो उनको हमारे गांवसे बहार तक छोडके आया..
देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. मत भुल.. हम कौन हे.. अब ये बता.. उन दोनोको भगानेकी जरुरत क्यु पडी..? ओर इन दोनोमे से तुम कीसके साथ रीलेशनमे हो..? मुजे सब सच बताना..
लखन : (सर जुकाके अैसेही खामोस बैठा रहा) भाइ.. वो.. वो..
देवायत : (मुस्कुराते लखनके कंधेपे हाथ रखते) देख लखन.. तुजे मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मुजे सब सच बतादे.. क्युकी मेभी अैसे कइ ओरतोके साथ रीलेशनमे हु.. तो मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. मुजे पता हे हमारे खेतोमे भी कल लडकीया ओर ओरतोका तुम्हारे साथ रीलेशन हे.. आजकल तुमभी काफी रंगीन मीजाजके होगये हो.. बोल..
लखन : (सर जुकाते धीरेसे) भाइ.. वो..वो.. हमारे सामतभाइकी लडकी.. जागृती.. हम दोनो रीलेशनमे हे.. मेने उसीके कहेने पे इन दोनोको भगाया हे.. ओर इसमे खुद श्रीधरकी मम्मीने हमारी मदद कीहे..
देवायत : (हसते) लखन.. खुद श्रीधरकी मम्मीने ही अपने बेटे ओर अपनी भतीजीको भगाया हे..? ये बात कुछ हजम नही हो रही..( देवायत सबकुछ जानताथा फीरभी अनजमन बनकर लखनके मुहसे सब सुनना चाहता था)
लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. ये बात थोडी लंबी हे.. मुजे सब जागृतीने ही बताया.. ओर कुछ बात मुजे खुद श्रीधरने कही हे.. क्युकी हम सभी दोस्त आपसमे अेक दुसरेके साथ सभी बाते खुलकर सैर करते हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम दोस्तोकी बाते जानता हु मे.. बता..
लखन : भाइ.. श्रीधरके पीता ओर उनकी भाभीके बीच रीलेशन हे.. ये बात श्रीधरकी मम्मीको पता चल गइ थी.. तो उनकी मम्मीने ही बदलेकी भावनासे उनकी भतीजीको अपने बेटेके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. आपतो जानते हे.. उनकी जवानी तब पुरी तराह उफानपे थी.. तो वो आसानीसे अपनी चाचीकी जालमे फस गइ.. उसने जयश्रीको बहुतही अच्छी तराह समजाया की घरमे रीलेशनसे दोनोही सेइफ रहोगे..
ओर मीलनेमे भी आसानी रहेगी.. बहार बदनामीका डर रहेता हे.. अैसी बाते करके उसनेही जयश्रीको श्रीधरके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. ओर उनकी मम्मीने ही अेक्जामके समय दोनो भाइ बीवीके साथ घुमने जानेके बहाने उन दोनोके पहेले मीलनका इन्तजाम कर दीयाथा.. तबसे ये दोनो भाइ बहेन रीलेशनमे हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर अैसे ही रीलेशनमे तो थे.. तो फीर भागनेकी क्या जरुरत पड गइ..?
लखन : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. श्रीधर केह रहाथा की कल रात उन दोनो साथ थे तब जयश्रीको उल्टीया हुइ थी.. ओर कल दोपहोरको भी खानेके बाद जयश्री उल्टीया कर रहीथी.. तब उनकी मम्मीको कुछ आसंकाये हुइ.. तो श्रीधरकी मम्मीने खानेमे कुछ आगया होगा कहेकर बातको टाल दीयाथा.. लेकीन वो जान चुकीथी की कुछतो गडबड हे.. तब उसने रातको ही जयश्रीको वो प्रेगनेन्सीकी कीट सबसे छुपर देदी थी.. ओर सुबह चार बजेही जयश्रीने पीसाब करने गइ तब चेक कीया.. तो पता चलाकी वो श्रीधरसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..
देवायत : हंम.. तो रातमे पता चला तो दोनो भागे कब..? ओर उनको कौन छोडने गयाथा..?
लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. सुबह ही जयश्रीने उनकी चाचीको सब बता दीया तो उसी वक्त श्रीधरकी मम्मीने उन दोनोको भाग जानेके लीये केह दीया.. सुबह श्रीधरका फोन आयाथा.. तो सामतभाइका लडका बंसीही हमारी जीप लेकर उनको छोडके आगया..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. लखन.. अगर कीसीने सुबह हमारी जीपको देख लीया होता तो..?
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेने हमारे घरका पता ओर चाबी उनको देदी थी.. ओर बंसीभी सहेरमे नही उनको बस तक छोडके ही आगया.. ओर जीप सीधेही हमारी हवेलीपे रखके चला गया.. साडे चार बजेतो जीप यही थी.. भाइ.. अगर वो लोग आयेतो आप उनको दोनोकी सादीके लीये मनाना.. वो दोनो अेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. प्लीज..
देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) हंम.. लखन तुमतो जानते हो.. अब इस गावमे यही सब हमे देखनेको मीलेगा.. तो हमे यहीतो करना हे.. ओर अेक बात बता.. क्या तुम जागृतीसे सादी करने वाले हो..?
लखन : (सरमाते हसते) नही भाइ.. पहेले तो मेनेभी उनके साथ सादीका सोचा था.. लेकीन अब नही..
देवायत : (उनके सामने देखते) क्यु..? क्या सीर्फ मोज मजे करनेही उनके साथ रीलेशनमे हो..? देख लखन अगर वो सादीसुधा होतीतो बात कुछ ओरथी.. लेकीन हमे कीसीभी कुआरी लडकीके जजबातो से इस तराह खेलना नही चाहीये.. अगर तुम उसे अपनाना चाहोतो अपना सकते हो हमे कोइ अेतराज नही..
लखन : भाइ.. इरादातो मेराभी उनको अपनानेका था.. लेकीन अब नही.. क्युकी उनके साथ कोइ ओर ही सादी करना चाहता हे.. वो उनके पीछे बहुत पागल हे.. वो उसे हर हालमे पाना चाहता हे.. तो मेने मेरा इरादा बदल दीया हे.. भाइ वोभी मेरा खास दोस्त हे.. तो मे उनका दिल कैसे तोड सकता हु..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो मेरा भाइ काफी समजदार भी हो गया हे.. हें..हें..हें.. लखन ये बता क्या तेरे उन दोस्तको तुम दोनोके रीलेशनके बारेमे पता हे..? कौन हे वो दोस्त जो उनसे सादी करना चाहता हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेरे जागृतीके साथ रीलशनकी बात अभी सीर्फ हम तीनोके बीच ही हे.. अेक मे अेक जागृती.. ओर तीसरी उनकी सहेली जयश्री.. तो मेने कलही जागृती ओर जयश्रीको ये बात बतादी हे.. खुद जागृतीका भाइ ही उनकी बहेनको पाना चाहता हे.. जो अभी वो उनकी बुआके साथभी रीलेशनमे हे..
देवायत : (मुस्कुराते) जयश्रीतो ठीक हे.. लेकीन ये बात जानके जागृतीने तुजे कुछ नही कहा..? की तेरा भाइ ही तुमसे सादी करना चाहता हे..?
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. वो क्या कहेती.. मेरे साथ रीलेशनमे आनेसे पहेले वो खुदभी तो वोही चाहती थी.. लेकीन उनका भाइ बंसी उनकी बुआके साथ रीलेशनमे हे.. तो वो उनको बोल नही सकी.. ओर उसने मेरे साथ रीलेशन रखलीया..
देवायत : (मुस्कुराते जाते) हंम चल ठीक हे.. आज सामकोही श्रीधर जयश्रीके माता पीताको मीलना पडेगा.. तु आराम कर.. फीर खेतोपे जाकर सब देख लेना.. सायद मुजे रातमे आनेमे देर होजाये.. तेरी सृतीभाभी भी सायद आज साम आजायेगी.. तो मुजे भुमी आंटीको छोडने राजीव अंकलके घर जाना पडे..
कहेतेही देवायत नीचे चला गया.. तो कुछही देरके बाद लखनके रुममे रजीया हसती हुइ आगइ.. ओर दरवाजा बंध करके अेक पत्नीकी तराह लखनके बगलमे आकर लेट गइ.. तो कुछही देरके बाद रजीया लखनके नीचे नंगी होकर लैटी थी.. ओर लखन भी नंगा होकर हाथके बल उचा होते रजीयाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. आज रजीयाको दयाने सामनेसे ही कहेकर लखनके पास भेज दीयाथा..

तो देवायतभी उपरसे आतेही सीधाही अपने रुममे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके आराम करनेही जा रहाथा.. क्युकी आज वो पुरी रात वंदना ओर रश्मीके साथ था.. ओर वो चेन्ज करके अपने बेडपे सोही रहाथा की तभी उनके रुममे बाथरुमका दरवाजा खुला.. ओर अंदरसे पुनम अेकदम अप्सारी तराह सजधजके तैयार होकर बहार नीकली.. ओर देवायतकी ओर कामुक स्माइल करते उनके साथ बेडमे आकर सोगइ..
देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) अरे मेरी पुनो रानी आगइ.. तेरी सादीके कीतने दीनोके बाद हम अैसे मीले हे.. चल आजा..
पुनम : (होंठ चुमते) भाइ.. आपकी बाहोमे अेक सुकुन मीलता हे.. फीकर मत करो.. अब हम दोनो जल्दी ही मीलेगे.. चलो.. अेक बार मुजसे प्यार करलो.. कीतने दिनोके बाद हम मील रहे हे.. बस अेक बार मुजे ठंडी करदो.. फीर थोडा आरामभी करलो.. अभी सृतीभाभी ओर भुमी बुआ भी आजायेगी.. वो दोनोही सहेरसे नीकल चुकी हे.. अभी सृतीभाभीका फोन आयाथा.. आपको भुमी बुआको छोडने भी जाना हे..
देवायत : (होंठ चुमते) पुनो.. कल मेने तेरी सहेलीको पुरी तराह अपना लीया हे.. क्या उनकी तेरे साथ कोइ बात हुइ..?
पुनम : (देवायतके सर्टके बटन खोलते मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने सुबह ही उनके साथ फोनपे बात करली हे.. वो अभी रश्मीभाभीके घरपे हेनां..? मे ओर सृतीभाभी सामको उनको मीलने जा रही हे.. भाइ.. वो बहुत खुस लग रही थी.. क्या आप दोनोके बीच सबकुछ होगया..?
देवायत : (पुनमके बुब्सको मसलते) हंम.. पुनो.. हमने सादीसे पहेले ही सबकुछ करलीया.. वो अब कलीसे फुल बन चुकी हे.. चल आजा मुजसे रहा नही जाता.. वो दोनोके आनेसे पहेलेही हम सब नीपटा लेते हे..
अध्याय - १५१
कहातो दया सबको सब्जी देते पुनमकी ओर देखके सरमाते हसने लगी.. ओर कीचनमे चली गइ.. तबतक देवायतने बहुत कुछ सोच लीया.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया.. तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. क्युकी उसे पताथा की अभी देवायत उनके रुममे आराम करने चला जायेगा.. इसीलीये वो उसे अकेलेमे मीलना चाहती थी.. ओर वो अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करके हल्कासा शींगार करने लगी.. तब लखन उपर अपने रुममे चला गया.. तब देवायतभी थोडी देरके बाद पीछेसे उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे चला गया....अब आगे
लखन : (देवायतको उनके रुममे देखतेही) अरे भैया आप..? इधर..? कुछ काम था क्या..? मुजे बुलालीया होता..
देवायत : (धीरेसे दरवाजा बंध करते लखनके पास आकर बैठते) लखन.. तुमने नीचे तो सबके सामने जुठ बोल लीया.. मुजे पता हे तुजे सब मालुम हे.. अब मुजे पुरी सचाइ बतादे.. बोल कहा हे वो दोनो..?
लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. मे आपके सामने जुठ नही बोल सकता.. मेने ही उन दोनोके भागनेका इन्तजाम करदीया था.. वो अभी सहेरमे हमारे बंगलेपे ही हे.. ओर इस बारेमे सीर्फ हम तीन लोगही जानते हे..
देवायत : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. तेरे अलावा अेक उनकी सहेली जो हमारे सामतभाइकी लडकी हे.. जागृती.. ओर दुसरी खुद तेरे दोस्त श्रीधरकी मम्मी.. बोल..? तेरे अलावा यही दोनो हेनां..?
लखन : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) भाइ..? ये सब आपको कैसे पता..? हां.. मेरे अलावा यही दोनो हे.. जो इस बातको जानते हे.. ओर अेक हे बंसी.. जो उनको हमारे गांवसे बहार तक छोडके आया..
देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. मत भुल.. हम कौन हे.. अब ये बता.. उन दोनोको भगानेकी जरुरत क्यु पडी..? ओर इन दोनोमे से तुम कीसके साथ रीलेशनमे हो..? मुजे सब सच बताना..
लखन : (सर जुकाके अैसेही खामोस बैठा रहा) भाइ.. वो.. वो..
देवायत : (मुस्कुराते लखनके कंधेपे हाथ रखते) देख लखन.. तुजे मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मुजे सब सच बतादे.. क्युकी मेभी अैसे कइ ओरतोके साथ रीलेशनमे हु.. तो मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. मुजे पता हे हमारे खेतोमे भी कल लडकीया ओर ओरतोका तुम्हारे साथ रीलेशन हे.. आजकल तुमभी काफी रंगीन मीजाजके होगये हो.. बोल..
लखन : (सर जुकाते धीरेसे) भाइ.. वो..वो.. हमारे सामतभाइकी लडकी.. जागृती.. हम दोनो रीलेशनमे हे.. मेने उसीके कहेने पे इन दोनोको भगाया हे.. ओर इसमे खुद श्रीधरकी मम्मीने हमारी मदद कीहे..
देवायत : (हसते) लखन.. खुद श्रीधरकी मम्मीने ही अपने बेटे ओर अपनी भतीजीको भगाया हे..? ये बात कुछ हजम नही हो रही..( देवायत सबकुछ जानताथा फीरभी अनजमन बनकर लखनके मुहसे सब सुनना चाहता था)
लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. ये बात थोडी लंबी हे.. मुजे सब जागृतीने ही बताया.. ओर कुछ बात मुजे खुद श्रीधरने कही हे.. क्युकी हम सभी दोस्त आपसमे अेक दुसरेके साथ सभी बाते खुलकर सैर करते हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम दोस्तोकी बाते जानता हु मे.. बता..
लखन : भाइ.. श्रीधरके पीता ओर उनकी भाभीके बीच रीलेशन हे.. ये बात श्रीधरकी मम्मीको पता चल गइ थी.. तो उनकी मम्मीने ही बदलेकी भावनासे उनकी भतीजीको अपने बेटेके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. आपतो जानते हे.. उनकी जवानी तब पुरी तराह उफानपे थी.. तो वो आसानीसे अपनी चाचीकी जालमे फस गइ.. उसने जयश्रीको बहुतही अच्छी तराह समजाया की घरमे रीलेशनसे दोनोही सेइफ रहोगे..
ओर मीलनेमे भी आसानी रहेगी.. बहार बदनामीका डर रहेता हे.. अैसी बाते करके उसनेही जयश्रीको श्रीधरके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. ओर उनकी मम्मीने ही अेक्जामके समय दोनो भाइ बीवीके साथ घुमने जानेके बहाने उन दोनोके पहेले मीलनका इन्तजाम कर दीयाथा.. तबसे ये दोनो भाइ बहेन रीलेशनमे हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर अैसे ही रीलेशनमे तो थे.. तो फीर भागनेकी क्या जरुरत पड गइ..?
लखन : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. श्रीधर केह रहाथा की कल रात उन दोनो साथ थे तब जयश्रीको उल्टीया हुइ थी.. ओर कल दोपहोरको भी खानेके बाद जयश्री उल्टीया कर रहीथी.. तब उनकी मम्मीको कुछ आसंकाये हुइ.. तो श्रीधरकी मम्मीने खानेमे कुछ आगया होगा कहेकर बातको टाल दीयाथा.. लेकीन वो जान चुकीथी की कुछतो गडबड हे.. तब उसने रातको ही जयश्रीको वो प्रेगनेन्सीकी कीट सबसे छुपर देदी थी.. ओर सुबह चार बजेही जयश्रीने पीसाब करने गइ तब चेक कीया.. तो पता चलाकी वो श्रीधरसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..
देवायत : हंम.. तो रातमे पता चला तो दोनो भागे कब..? ओर उनको कौन छोडने गयाथा..?
लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. सुबह ही जयश्रीने उनकी चाचीको सब बता दीया तो उसी वक्त श्रीधरकी मम्मीने उन दोनोको भाग जानेके लीये केह दीया.. सुबह श्रीधरका फोन आयाथा.. तो सामतभाइका लडका बंसीही हमारी जीप लेकर उनको छोडके आगया..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. लखन.. अगर कीसीने सुबह हमारी जीपको देख लीया होता तो..?
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेने हमारे घरका पता ओर चाबी उनको देदी थी.. ओर बंसीभी सहेरमे नही उनको बस तक छोडके ही आगया.. ओर जीप सीधेही हमारी हवेलीपे रखके चला गया.. साडे चार बजेतो जीप यही थी.. भाइ.. अगर वो लोग आयेतो आप उनको दोनोकी सादीके लीये मनाना.. वो दोनो अेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. प्लीज..
देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) हंम.. लखन तुमतो जानते हो.. अब इस गावमे यही सब हमे देखनेको मीलेगा.. तो हमे यहीतो करना हे.. ओर अेक बात बता.. क्या तुम जागृतीसे सादी करने वाले हो..?
लखन : (सरमाते हसते) नही भाइ.. पहेले तो मेनेभी उनके साथ सादीका सोचा था.. लेकीन अब नही..
देवायत : (उनके सामने देखते) क्यु..? क्या सीर्फ मोज मजे करनेही उनके साथ रीलेशनमे हो..? देख लखन अगर वो सादीसुधा होतीतो बात कुछ ओरथी.. लेकीन हमे कीसीभी कुआरी लडकीके जजबातो से इस तराह खेलना नही चाहीये.. अगर तुम उसे अपनाना चाहोतो अपना सकते हो हमे कोइ अेतराज नही..
लखन : भाइ.. इरादातो मेराभी उनको अपनानेका था.. लेकीन अब नही.. क्युकी उनके साथ कोइ ओर ही सादी करना चाहता हे.. वो उनके पीछे बहुत पागल हे.. वो उसे हर हालमे पाना चाहता हे.. तो मेने मेरा इरादा बदल दीया हे.. भाइ वोभी मेरा खास दोस्त हे.. तो मे उनका दिल कैसे तोड सकता हु..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो मेरा भाइ काफी समजदार भी हो गया हे.. हें..हें..हें.. लखन ये बता क्या तेरे उन दोस्तको तुम दोनोके रीलेशनके बारेमे पता हे..? कौन हे वो दोस्त जो उनसे सादी करना चाहता हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेरे जागृतीके साथ रीलशनकी बात अभी सीर्फ हम तीनोके बीच ही हे.. अेक मे अेक जागृती.. ओर तीसरी उनकी सहेली जयश्री.. तो मेने कलही जागृती ओर जयश्रीको ये बात बतादी हे.. खुद जागृतीका भाइ ही उनकी बहेनको पाना चाहता हे.. जो अभी वो उनकी बुआके साथभी रीलेशनमे हे..
देवायत : (मुस्कुराते) जयश्रीतो ठीक हे.. लेकीन ये बात जानके जागृतीने तुजे कुछ नही कहा..? की तेरा भाइ ही तुमसे सादी करना चाहता हे..?
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. वो क्या कहेती.. मेरे साथ रीलेशनमे आनेसे पहेले वो खुदभी तो वोही चाहती थी.. लेकीन उनका भाइ बंसी उनकी बुआके साथ रीलेशनमे हे.. तो वो उनको बोल नही सकी.. ओर उसने मेरे साथ रीलेशन रखलीया..
देवायत : (मुस्कुराते जाते) हंम चल ठीक हे.. आज सामकोही श्रीधर जयश्रीके माता पीताको मीलना पडेगा.. तु आराम कर.. फीर खेतोपे जाकर सब देख लेना.. सायद मुजे रातमे आनेमे देर होजाये.. तेरी सृतीभाभी भी सायद आज साम आजायेगी.. तो मुजे भुमी आंटीको छोडने राजीव अंकलके घर जाना पडे..
कहेतेही देवायत नीचे चला गया.. तो कुछही देरके बाद लखनके रुममे रजीया हसती हुइ आगइ.. ओर दरवाजा बंध करके अेक पत्नीकी तराह लखनके बगलमे आकर लेट गइ.. तो कुछही देरके बाद रजीया लखनके नीचे नंगी होकर लैटी थी.. ओर लखन भी नंगा होकर हाथके बल उचा होते रजीयाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. आज रजीयाको दयाने सामनेसे ही कहेकर लखनके पास भेज दीयाथा..

तो देवायतभी उपरसे आतेही सीधाही अपने रुममे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके आराम करनेही जा रहाथा.. क्युकी आज वो पुरी रात वंदना ओर रश्मीके साथ था.. ओर वो चेन्ज करके अपने बेडपे सोही रहाथा की तभी उनके रुममे बाथरुमका दरवाजा खुला.. ओर अंदरसे पुनम अेकदम अप्सारी तराह सजधजके तैयार होकर बहार नीकली.. ओर देवायतकी ओर कामुक स्माइल करते उनके साथ बेडमे आकर सोगइ..
देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) अरे मेरी पुनो रानी आगइ.. तेरी सादीके कीतने दीनोके बाद हम अैसे मीले हे.. चल आजा..
पुनम : (होंठ चुमते) भाइ.. आपकी बाहोमे अेक सुकुन मीलता हे.. फीकर मत करो.. अब हम दोनो जल्दी ही मीलेगे.. चलो.. अेक बार मुजसे प्यार करलो.. कीतने दिनोके बाद हम मील रहे हे.. बस अेक बार मुजे ठंडी करदो.. फीर थोडा आरामभी करलो.. अभी सृतीभाभी ओर भुमी बुआ भी आजायेगी.. वो दोनोही सहेरसे नीकल चुकी हे.. अभी सृतीभाभीका फोन आयाथा.. आपको भुमी बुआको छोडने भी जाना हे..
देवायत : (होंठ चुमते) पुनो.. कल मेने तेरी सहेलीको पुरी तराह अपना लीया हे.. क्या उनकी तेरे साथ कोइ बात हुइ..?
पुनम : (देवायतके सर्टके बटन खोलते मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने सुबह ही उनके साथ फोनपे बात करली हे.. वो अभी रश्मीभाभीके घरपे हेनां..? मे ओर सृतीभाभी सामको उनको मीलने जा रही हे.. भाइ.. वो बहुत खुस लग रही थी.. क्या आप दोनोके बीच सबकुछ होगया..?
देवायत : (पुनमके बुब्सको मसलते) हंम.. पुनो.. हमने सादीसे पहेले ही सबकुछ करलीया.. वो अब कलीसे फुल बन चुकी हे.. चल आजा मुजसे रहा नही जाता.. वो दोनोके आनेसे पहेलेही हम सब नीपटा लेते हे..


















