Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 26 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १५१

कहातो दया सबको सब्जी देते पुनमकी ओर देखके सरमाते हसने लगी.. ओर कीचनमे चली गइ.. तबतक देवायतने बहुत कुछ सोच लीया.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया.. तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. क्युकी उसे पताथा की अभी देवायत उनके रुममे आराम करने चला जायेगा.. इसीलीये वो उसे अकेलेमे मीलना चाहती थी.. ओर वो अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करके हल्कासा शींगार करने लगी.. तब लखन उपर अपने रुममे चला गया.. तब देवायतभी थोडी देरके बाद पीछेसे उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे चला गया....अब आगे

लखन : (देवायतको उनके रुममे देखतेही) अरे भैया आप..? इधर..? कुछ काम था क्या..? मुजे बुलालीया होता..

देवायत : (धीरेसे दरवाजा बंध करते लखनके पास आकर बैठते) लखन.. तुमने नीचे तो सबके सामने जुठ बोल लीया.. मुजे पता हे तुजे सब मालुम हे.. अब मुजे पुरी सचाइ बतादे.. बोल कहा हे वो दोनो..?

लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. मे आपके सामने जुठ नही बोल सकता.. मेने ही उन दोनोके भागनेका इन्तजाम करदीया था.. वो अभी सहेरमे हमारे बंगलेपे ही हे.. ओर इस बारेमे सीर्फ हम तीन लोगही जानते हे..

देवायत : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. तेरे अलावा अ‍ेक उनकी सहेली जो हमारे सामतभाइकी लडकी हे.. जागृती.. ओर दुसरी खुद तेरे दोस्त श्रीधरकी मम्मी.. बोल..? तेरे अलावा यही दोनो हेनां..?

लखन : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) भाइ..? ये सब आपको कैसे पता..? हां.. मेरे अलावा यही दोनो हे.. जो इस बातको जानते हे.. ओर अ‍ेक हे बंसी.. जो उनको हमारे गांवसे बहार तक छोडके आया..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. मत भुल.. हम कौन हे.. अब ये बता.. उन दोनोको भगानेकी जरुरत क्यु पडी..? ओर इन दोनोमे से तुम कीसके साथ रीलेशनमे हो..? मुजे सब सच बताना..

लखन : (सर जुकाके अ‍ैसेही खामोस बैठा रहा) भाइ.. वो.. वो..

देवायत : (मुस्कुराते लखनके कंधेपे हाथ रखते) देख लखन.. तुजे मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मुजे सब सच बतादे.. क्युकी मेभी अ‍ैसे कइ ओरतोके साथ रीलेशनमे हु.. तो मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. मुजे पता हे हमारे खेतोमे भी कल लडकीया ओर ओरतोका तुम्हारे साथ रीलेशन हे.. आजकल तुमभी काफी रंगीन मीजाजके होगये हो.. बोल..

लखन : (सर जुकाते धीरेसे) भाइ.. वो..वो.. हमारे सामतभाइकी लडकी.. जागृती.. हम दोनो रीलेशनमे हे.. मेने उसीके कहेने पे इन दोनोको भगाया हे.. ओर इसमे खुद श्रीधरकी मम्मीने हमारी मदद कीहे..

देवायत : (हसते) लखन.. खुद श्रीधरकी मम्मीने ही अपने बेटे ओर अपनी भतीजीको भगाया हे..? ये बात कुछ हजम नही हो रही..( देवायत सबकुछ जानताथा फीरभी अनजमन बनकर लखनके मुहसे सब सुनना चाहता था)

लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. ये बात थोडी लंबी हे.. मुजे सब जागृतीने ही बताया.. ओर कुछ बात मुजे खुद श्रीधरने कही हे.. क्युकी हम सभी दोस्त आपसमे अ‍ेक दुसरेके साथ सभी बाते खुलकर सैर करते हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम दोस्तोकी बाते जानता हु मे.. बता..

लखन : भाइ.. श्रीधरके पीता ओर उनकी भाभीके बीच रीलेशन हे.. ये बात श्रीधरकी मम्मीको पता चल गइ थी.. तो उनकी मम्मीने ही बदलेकी भावनासे उनकी भतीजीको अपने बेटेके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. आपतो जानते हे.. उनकी जवानी तब पुरी तराह उफानपे थी.. तो वो आसानीसे अपनी चाचीकी जालमे फस गइ.. उसने जयश्रीको बहुतही अच्छी तराह समजाया की घरमे रीलेशनसे दोनोही सेइफ रहोगे..

ओर मीलनेमे भी आसानी रहेगी.. बहार बदनामीका डर रहेता हे.. अ‍ैसी बाते करके उसनेही जयश्रीको श्रीधरके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. ओर उनकी मम्मीने ही अ‍ेक्जामके समय दोनो भाइ बीवीके साथ घुमने जानेके बहाने उन दोनोके पहेले मीलनका इन्तजाम कर दीयाथा.. तबसे ये दोनो भाइ बहेन रीलेशनमे हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर अ‍ैसे ही रीलेशनमे तो थे.. तो फीर भागनेकी क्या जरुरत पड गइ..?

लखन : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. श्रीधर केह रहाथा की कल रात उन दोनो साथ थे तब जयश्रीको उल्टीया हुइ थी.. ओर कल दोपहोरको भी खानेके बाद जयश्री उल्टीया कर रहीथी.. तब उनकी मम्मीको कुछ आसंकाये हुइ.. तो श्रीधरकी मम्मीने खानेमे कुछ आगया होगा कहेकर बातको टाल दीयाथा.. लेकीन वो जान चुकीथी की कुछतो गडबड हे.. तब उसने रातको ही जयश्रीको वो प्रेगनेन्सीकी कीट सबसे छुपर देदी थी.. ओर सुबह चार बजेही जयश्रीने पीसाब करने गइ तब चेक कीया.. तो पता चलाकी वो श्रीधरसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..

देवायत : हंम.. तो रातमे पता चला तो दोनो भागे कब..? ओर उनको कौन छोडने गयाथा..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. सुबह ही जयश्रीने उनकी चाचीको सब बता दीया तो उसी वक्त श्रीधरकी मम्मीने उन दोनोको भाग जानेके लीये केह दीया.. सुबह श्रीधरका फोन आयाथा.. तो सामतभाइका लडका बंसीही हमारी जीप लेकर उनको छोडके आगया..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. लखन.. अगर कीसीने सुबह हमारी जीपको देख लीया होता तो..?

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेने हमारे घरका पता ओर चाबी उनको देदी थी.. ओर बंसीभी सहेरमे नही उनको बस तक छोडके ही आगया.. ओर जीप सीधेही हमारी हवेलीपे रखके चला गया.. साडे चार बजेतो जीप यही थी.. भाइ.. अगर वो लोग आयेतो आप उनको दोनोकी सादीके लीये मनाना.. वो दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. प्लीज..

देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) हंम.. लखन तुमतो जानते हो.. अब इस गावमे यही सब हमे देखनेको मीलेगा.. तो हमे यहीतो करना हे.. ओर अ‍ेक बात बता.. क्या तुम जागृतीसे सादी करने वाले हो..?

लखन : (सरमाते हसते) नही भाइ.. पहेले तो मेनेभी उनके साथ सादीका सोचा था.. लेकीन अब नही..

देवायत : (उनके सामने देखते) क्यु..? क्या सीर्फ मोज मजे करनेही उनके साथ रीलेशनमे हो..? देख लखन अगर वो सादीसुधा होतीतो बात कुछ ओरथी.. लेकीन हमे कीसीभी कुआरी लडकीके जजबातो से इस तराह खेलना नही चाहीये.. अगर तुम उसे अपनाना चाहोतो अपना सकते हो हमे कोइ अ‍ेतराज नही..

लखन : भाइ.. इरादातो मेराभी उनको अपनानेका था.. लेकीन अब नही.. क्युकी उनके साथ कोइ ओर ही सादी करना चाहता हे.. वो उनके पीछे बहुत पागल हे.. वो उसे हर हालमे पाना चाहता हे.. तो मेने मेरा इरादा बदल दीया हे.. भाइ वोभी मेरा खास दोस्त हे.. तो मे उनका दिल कैसे तोड सकता हु..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो मेरा भाइ काफी समजदार भी हो गया हे.. हें..हें..हें.. लखन ये बता क्या तेरे उन दोस्तको तुम दोनोके रीलेशनके बारेमे पता हे..? कौन हे वो दोस्त जो उनसे सादी करना चाहता हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेरे जागृतीके साथ रीलशनकी बात अभी सीर्फ हम तीनोके बीच ही हे.. अ‍ेक मे अ‍ेक जागृती.. ओर तीसरी उनकी सहेली जयश्री.. तो मेने कलही जागृती ओर जयश्रीको ये बात बतादी हे.. खुद जागृतीका भाइ ही उनकी बहेनको पाना चाहता हे.. जो अभी वो उनकी बुआके साथभी रीलेशनमे हे..

देवायत : (मुस्कुराते) जयश्रीतो ठीक हे.. लेकीन ये बात जानके जागृतीने तुजे कुछ नही कहा..? की तेरा भाइ ही तुमसे सादी करना चाहता हे..?

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. वो क्या कहेती.. मेरे साथ रीलेशनमे आनेसे पहेले वो खुदभी तो वोही चाहती थी.. लेकीन उनका भाइ बंसी उनकी बुआके साथ रीलेशनमे हे.. तो वो उनको बोल नही सकी.. ओर उसने मेरे साथ रीलेशन रखलीया..

देवायत : (मुस्कुराते जाते) हंम चल ठीक हे.. आज सामकोही श्रीधर जयश्रीके माता पीताको मीलना पडेगा.. तु आराम कर.. फीर खेतोपे जाकर सब देख लेना.. सायद मुजे रातमे आनेमे देर होजाये.. तेरी सृतीभाभी भी सायद आज साम आजायेगी.. तो मुजे भुमी आंटीको छोडने राजीव अंकलके घर जाना पडे..

कहेतेही देवायत नीचे चला गया.. तो कुछही देरके बाद लखनके रुममे रजीया हसती हुइ आगइ.. ओर दरवाजा बंध करके अ‍ेक पत्नीकी तराह लखनके बगलमे आकर लेट गइ.. तो कुछही देरके बाद रजीया लखनके नीचे नंगी होकर लैटी थी.. ओर लखन भी नंगा होकर हाथके बल उचा होते रजीयाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. आज रजीयाको दयाने सामनेसे ही कहेकर लखनके पास भेज दीयाथा..





तो देवायतभी उपरसे आतेही सीधाही अपने रुममे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके आराम करनेही जा रहाथा.. क्युकी आज वो पुरी रात वंदना ओर रश्मीके साथ था.. ओर वो चेन्ज करके अपने बेडपे सोही रहाथा की तभी उनके रुममे बाथरुमका दरवाजा खुला.. ओर अंदरसे पुनम अ‍ेकदम अप्सारी तराह सजधजके तैयार होकर बहार नीकली.. ओर देवायतकी ओर कामुक स्माइल करते उनके साथ बेडमे आकर सोगइ..

देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) अरे मेरी पुनो रानी आगइ.. तेरी सादीके कीतने दीनोके बाद हम अ‍ैसे मीले हे.. चल आजा..

पुनम : (होंठ चुमते) भाइ.. आपकी बाहोमे अ‍ेक सुकुन मीलता हे.. फीकर मत करो.. अब हम दोनो जल्दी ही मीलेगे.. चलो.. अ‍ेक बार मुजसे प्यार करलो.. कीतने दिनोके बाद हम मील रहे हे.. बस अ‍ेक बार मुजे ठंडी करदो.. फीर थोडा आरामभी करलो.. अभी सृतीभाभी ओर भुमी बुआ भी आजायेगी.. वो दोनोही सहेरसे नीकल चुकी हे.. अभी सृतीभाभीका फोन आयाथा.. आपको भुमी बुआको छोडने भी जाना हे..

देवायत : (होंठ चुमते) पुनो.. कल मेने तेरी सहेलीको पुरी तराह अपना लीया हे.. क्या उनकी तेरे साथ कोइ बात हुइ..?

पुनम : (देवायतके सर्टके बटन खोलते मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने सुबह ही उनके साथ फोनपे बात करली हे.. वो अभी रश्मीभाभीके घरपे हेनां..? मे ओर सृतीभाभी सामको उनको मीलने जा रही हे.. भाइ.. वो बहुत खुस लग रही थी.. क्या आप दोनोके बीच सबकुछ होगया..?

देवायत : (पुनमके बुब्सको मसलते) हंम.. पुनो.. हमने सादीसे पहेले ही सबकुछ करलीया.. वो अब कलीसे फुल बन चुकी हे.. चल आजा मुजसे रहा नही जाता.. वो दोनोके आनेसे पहेलेही हम सब नीपटा लेते हे..
 
कहातो पुनम बेडसे उतर गइ.. ओर फटाफट अपने सभी कपडे नीकालने लगी.. तबतक देवायतभी अपने सब कपडे नीकाल देता हे.. ओर पुनम देवायतकी बगलमे लेट गइ.. तो देवायतने जोरोसे उनको अपनी बाहोमे भीचते अपने उपर लीटा दीया.. ओर पुनम मुस्कुराते खडी होकर देवायतकी कमरपे बैठ गइ.. ओर कमरको उची करते देवायतके लंडको पकडते अपनी चुतपे सेट करने लगी.. फीर धीरेसे बैठ गइ..





तो देवायतका पुरा लंड पुनमने अपनी चुतकी गीरफ्तमे लेलीया.. ओर मदहोस होते अपनी आंख चडाके देवायतपे जुकते उनके उपर लेट गइ.. ओर देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते अपनी कमर धीरे धीरे हीलाते देवायतको सोट मारते चोदने लगी.. आज पुनम बडेही दिनोके बाद देवायतको मील रहीथी इसीलीये उसे फोर प्लेयकी कोइ जरुरत महेसुस नही हुइ.. वो जल्द ही देवायतका मुसल लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..





तब कुछही देरमे बाद दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी.. जब पुनम अ‍ेक बार जड गइ तो देवायतके सीनेपे ढेर होगइ.. तभी देवायतने उसे जोरोसे बाहोमे भीचते साइडमे लीटा दीया.. ओर अ‍ेक हाथ पुनमके गलेमे डालके दुसरे हाथ उनकी टांगेमे फसाकर पुनमकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. दोनोही कामातुर हो चुकेथे.. पुनम चुदवाते हुअ‍ेभी लगातार देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखती रही..





काफी धुआधार चुदाइके बाद दोनोही अपनी मंजीलके करीब चहोंच गये.. तब दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लीया.. देवायतने अपना पुरा लंड पुनकी चुतमे जडतक घुसा दीया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी पुनमकी चुतमे देवायतका लावा फुट पडा.. ओर पुनमकी चुतको भरने लगा.. तो पुनमभी कांपते हुअ‍े देवायतके साथ जडने लगी.. फीर दोनोही सांत होगये.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुकेथे..





फीर कुछ देरके बाद देवायत पुनमके उपरसे हड गया.. ओर बेडसे उतरकर पुनमको गोदमे उठाकर बारुममे ले गया.. ओर दोनो सावरके नीचे खडे होकर नहाने लगे.. वहा भी नहाते पुनम देवायतके लंडको पकडके सहेलाते वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. तो देवायत नहाते हुअ‍े खडे खडे अ‍ेब बार फीर पुनमकी जबरदस्त चुदाइ करलेता हे.. तब पुनम पुरी तराह संतुस्ट होगइ थी.. ओर दोनोही नहाके बहार आगये..





फीर दोनोने फटाफट अपने कपडे पहेन लीये.. ओर पुनम सरमाते देवायतके होठोको चुमकर रातको फीर सृतीके साथ मीलकर सोनेको कहेकर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर आराम करने लगी.. तबतक देवायतभी बेडपे सोतेही नींदकी आगोसमे चला गया.. अभी दोनोने अ‍ेक घंटेभी आराम नही कीया होगाकी तभी सृतीकी कारका होर्न बजा.. तो दया जटसे अपने रुमसे नीकली.. तो कारसे सृती ओर भुमीका मुस्कुराते बहार नीकली..

दया : (खुस होते) अरे आइअ‍े आइअ‍े बुआ.. आइअ‍े सृतीदीदी.. बेग मुजे दे दीजीये.. सब लोग आराम करते सो रहे हे.. हें..हें..हें.. आपभी थोडा फैस होजाइअ‍े.. तबतक मे पुनो दीदीको जगाती हु..

सृती : (मुस्कुराते जटसे) अरे नही दयाबहेन.. उनको सोने दीजीये.. तबतक हमभी थोडा आराम कर लेते हे..

भुमीका : (होलमे आते) दया.. क्या अभी घरपे सीर्फ पुनमबीटीया ही हे..? ओर कोइ नही हे..?

दया : (बेग लेकर साथ चलते) अरे नही बुआ.. बडे मालीक ओर छोटे मालीकभी देरसे आये हे तो वोभी सो रहे हे.. क्या मे बडे मालीक को जगादु..? अभी अ‍ेक घंटे पहेलेही अपने रुममे गये हे..

भुमीका : (मुस्कुराते) अरे नही.. सोनेदे सबको.. हमभी थोडा आराम करलेते हे.. मेतो सफरसे थक गइ..

तो दया गेस्ट रुममे बेग लेकर चली गइ.. तो भुमीका ओर सृती दोनोने ही फ्रेस होकर चेन्ज करलीया.. भुमीका बेडपे लेट गइ.. तब सृती सरमाकर धीरेसे बहार नीकल गइ.. ओर अपने पतीके रुममे चली गइ.. तो भुमीका समज गइकी सृती अपने पतीके पास चली गइ हे.. इधर सृतीने भी देवायतके रुममे आकर देखातो देवायत गहेरी नींदमे सो रहाथा.. तो उनको देखकर सृतीको हसी आगइ.. ओर वो धीरेसे उनकी बगलमे जाकर लेट गइ.. तब देवायतने नींदमे ही उनकी कमरमे हाथ डालके सृतीको बाहोमे भरलीया..





सभी लोग आराम कर रहेथे तब श्रीधर ओर जयश्रीके मम्मी पापा घरमे अबभी अपने अपने रुममे बेचैन होकर करवटे बदल रहे थे.. जयश्रीके पापा जवेरीलालको अभी तक उनके छोटेभाइ जीतुलाल ओर अपनी बीवी वृन्दाके बीच चल रहे नाजायज रीस्तेके बारेमे नही पताथा.. लेकीन श्रीधरके मम्मी पापा अबभी अपने रुममे अ‍ेक दुसरेके साथ बहेस कर रहेथे.. दोनो ही अपने रुममे बंध दरवाजा करते बहुतही धीमी आवाजमे जगडा कर रहेथे..

जब श्रीधरके पापा इस रीस्तेके खीलाफ बोलने लगे.. ओर श्रीधरको अपनी जमीन जायदादमे बेदखल करनेकी बात करने लगे.. तब मजबुरन श्रीधरकी मम्मीने उनके पतीको उनकी भाभीके साथ अवैध रीलेशनके बारेमे बता दीया.. तब सुनके श्रीधरके पापाको बडाही जटका लगा.. ओर श्रीधरकी मम्मीके सामने गीड गीडाते उनकी माफी मांगने लगा.. बस श्रीधरकी मम्मीके पास अपनी बाते मनवानेका जो हथीयार था..

उनमे पहेला हथीयार इस्तमाल करलीया.. तब बडीही सीफततासे श्रीधरकी मम्मीने माफी देनेके सर्तके तौर पर अपने दोनो लडकेके रीस्तेको अपनानेके लीये मना लीया.. ओर इस रीस्तेको माननेके लीये अपने भाइ भाभीको भी मनानेको कहे दीया.. कहेते हेनां मरता क्या नही करता.. तो श्रीधरके पीतानेभी मजबुरन इनकी बीवीको अपने भाइ भाभीको मनानेके लीये हां कहेदी.. तब जाके मीयी बीवीके बीच जगडा सांत हुआ..

लेकीन उनके बडे भाइके कमरेमे जयश्रीकी मम्मी अबभी आंसु बहा रहीथी.. तब उनको नही पताथा की बाजुमे उनके देवरके कमरेमे उनकी देवरानीने अपने पतीके सामने उन दोनोके रीलेशनका भांडा फोड दीया हे.. जयश्रीकी मम्मी अपने पतीको बार बार ठाकुरसाहेबको मीलनेके लीये केह रहीथी.. ताकी उन दोनो भाइ बहेनको समजाकर घर वापस लेआये.. तब उनके पतीने सामको मीलने जाउगा कहेकते उनको आस्वासन दीया.. तब जाके जयश्रीकी मम्मी सांत हुइ..
 
तो इधर सहेरमे धिरेन ओर नीलम दोनोही चार बजे तक अ‍ेक दुसरेके साथ अपने फ्युचरके बारेमे बाते करते इधर उधर घुमते रहे.. तब धिरेनने अपने मेनेजरको फोन करदीया.. तो उसने मोबाइलपे अपना अ‍ेड्रेस सेन्ड करदीया.. तब धिरेन ओर नीलम उनकी सोसायटीकी ओर चले गये.. देखातो उनके मेनेजरका घर नीलमके स्कुलसे अ‍ेकदम नजदीक अ‍ेक हाल सोसायटीमे सृतीके घरके पीछेकी गलीमे ही था..

तब उन दोनोको पता नही थाकी उनके पीछेकी गलीमे ही देवायतका बंगलो भी हे.. जहा लखन ओर लता रहेनेके लीये आने वाले थे.. दोनोही जब मेनेजरके घरपे बहोंचे तब मेनेजर ओर उनकी दोनो बीवीयोने हसके दोनोका अच्छेसे स्वागत कीया.. क्युकी धिरेनके आनेसे पहेलेही मेनेजरने उनकी दोनो बीवीओको धिरेन ओर नीलमके बारेमे उनकी सालीकी जगाह बीवीके रुपमे परीचय दीयाथा.. तभी..

मेनेजर : (मुस्कुराते जानबुजकर) आइअ‍े धिरेनजी.. आइअ‍े आइअ‍े.. भाभीजी.. नमस्ते..

कहातो नीलम बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर धिरेनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. तभी मेनेजरकी दोनो बीवीयाभी जो आपसमे सगी बहेने थी.. वोभी दोनोका हस हसके अभीवादन करते स्वागत करती हे.. ओर सभी लोग सोफेपे बैठ जाते हे.. फीर कुछ औपचारीक बाते करते सभी लोग ठंडा पीते हे.. फीर मेनेजर ओर उनकी साली यानीकी दुसरी बीवी मीलकर धिरेन ओर नीलमको पुरा घर दीखाते हे..

घरको देखतेही नीलमको बहुत पसंद आगया.. फीर कुछ औपचारीक बाते करते धिरेन ओर नीलम वहीसे विदाय लेकर अपने गांवकी ओर चल पडे.. तब नीलम बहुतही रोमांच फील करने लगी.. वो अपनी छोटीसी बेग अपने दोनो कंधेपे लेकर धिरेनके पीछे बाइकमे उनसे चीपककर बैठ गइ.. ओर दोनोही सहेरको छोडके हाइवेपे अपने गांवकी ओर जा रहेथे.. तभी धिरेनने अपना हाथ पीछे लेजाकर नीलमका हाथ पकडके अपने हथीयारपे रख दीया..

तो नीलम बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. ओर उसने सरमाते धीरेसे पेन्टके उपरसे ही धिरेनके लंडको पकड लीया.. ओर धीरेसे सहेलाने लगी.. ओर धिरनके कंधेपे सर रखदीया.. तो धिरेनका लंड पेन्टमेही जटके मारते खडा होने लगा.. जो नीलमको साफ महेसुस होने लगा.. ओर उसने अपने दुसरा हाथ धिरेनकी कमरमे डालके धिरेनको जोरोसे भीचलीया.. ओर मस्तीमे आकर धिरेनकी गरदनमे मुह डालके अपने दांतोसे काटने लगी..

धिरेन : (मुस्कुराते) आउच.. नीलु.. अ‍ैसे मत काटोनां.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) तो फीर ये आप मुजसे क्या करवा रहे हे..? जनाब घर तक कंट्रोल नही कर सकते..? हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. आज तुम साथ आ रहीहो तो बहुत मजा आ रहा हे.. क्या वो घर तुजे पसंद आया..? हंम..? कीतना लक्जरी घर था.. नीलु.. बताना..?

नीलम : (हसते धिरेनके गलेको चुमते) हंम.. जानु बहुत मस्त घर था.. मुजेतो बहुत पसंद आगया हे.. बीलकुल मेरे ड्रिम हाउसकी तराह था.. बस.. अ‍ेक बार अपनी बीवीको दीखादो.. क्या आपको पसंद आया..?

धिरेन : हां नीलु.. मेरी उमीदसे कइ गुना अच्छा हे.. अगर तुजे पसंद हे तो हम वोही लेगे.. बस पुनोसेतो कुछ औपचारीक्तासे दीखाना हे.. बाकी मे ये घर सीर्फ हम दोनोके लीये ही ले रहा हु.. बस मेरी इस खुबसुरत रानीको पसंद आना चाहीये.. हें..हें..हें..

दोनोही अ‍ैसी बाते करते अ‍ेक दुसरेके साथ मस्ती मजाक ओर छेडछाड करते अपने गांवकी ओर जा रहेथे.. आज धिरेनके साथ उनके घर जाते वक्त नीलम बहुतही अ‍ेक्साइटेड हो रहीथी.. क्युकी उनकी जींदगीका बहुतही अहेम फैसला लेकर अपना सब कुछ यानी की अपना कौमार्य अपने यारको सोपने उनके घर जा रहीथी.. नीलम यही सब सोचते रोमांचीत हो रहीथी जीनकी वजहसे उनकी चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया अभीसे हरकतमे आकर फडफडा रहीथी.. ओर चुतसे हल्कासा पानीका रीसाव होने लगा था..





बाइकमे जाते वक्त नीलमके खुले बाल हवामे लहेराते उनसे बाते कर रहाथा.. जीनकी वजहसे नीलम आज बहुतही कामुक दीख रहीथी.. तो दुसरी ओर धिरेनभी कुछ सोचते अ‍ेक गांव जैसी जगाहपे बाइक रोक देता हे.. ओर उतरके अ‍ेक फुलोकी दुकानपे चला जाता हे.. तब कुछही देरमे अ‍ेक फुलोकी बेग लेकर नीलमको थमा देता हे फीर दोनोके लीये रातके लीये कुछ खाना पेक करवाता हे.. ओर बाइक लेकर दोनोही वापस अपने गांवकी ओर जाने लगते हे..

नीलम : (सरमाते हसते धीरेसे कानमे) जानु.. आपने ये इतने सारे फुल क्यु लीये..? ओर ये क्या हे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. ये हम दोनोका खाना हे.. ताकी रातमे हमे खानाके लीये जंजट ना करनी पडे..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. खाना मे बना देती.. मुजे बनाना आता हे.. ओर ये फुल..?

धिरेन : आज मे मेरी इस खुबसुरत रानीके साथ पहेली बार मीलन करने जा रहा हु.. तो हमारा मीलन अ‍ैसेही थोडीना होगा..? आज हम हमारा पुरा बेड सजायेगे.. इसी फुलोके उपर मे मेरी इस खुबसुरत गर्लफ्रेन्डके साथ मीलन करुगा.. ओर इसे हमेसाके लीये मेरी बनालुगा..

कहातो नीलम बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर उसने सरमाते धीरेसे धिरेनकी पीठमे मुका मार दीया.. ओर उनके कंधेपे सर रखके मुस्कुराने लगी.. ये सब सुनकर नीलमके दोनो बुब्स सख्त होगये.. ओर चुतमे मीठीसी खुजली होने लगी.. तो नीलम उनके दोनो बुब्स धिरेनकी पीठमे उनको बाहोमे भीचते रगडने लगी.. जो धिरेनभी उनके उरोजोको अपनी पीठमे साफ महेसुस करने लगा.. जीनकी वजहसे उनका लंड फीरसे जटके मारने लगा.. ओर दोनोही अ‍ैसे मस्ती मजाक करते अपने घरपे पहोंच गये..

ओर धिरेनने अपने आंगनका दरवाजा बंध करदीया.. तो नीलमकी सांसोकी धडकन बढने लगी.. ओर वो बहुतही सरमाने लगी.. जैसे आज वो पहेली बार अपने ससुराल आइहो.. तभी अचानक धिरेनने नीलमका हाथ पकडलीया ओर घरके दरवाजेकी ओर चल पडा.. तब नीलम सरमाते सीर्फ धिरेनकी ओर देखती रही.. ओर धिरेनने घरके दरवाजेका ताला खोल दीया.. तब नीलमके दिलकी धडकन अ‍ेक बार रुक गइ..

उनकी सांसे भारी होने लगी.. ओर धिरेनने जगाह देकर पहेले नीलमको घरमे आनेके लीये कहा.. तो नीलम सर्मसार होते धीरेसे घरमे आगइ.. ओर धिरेनने पीछे मुडकर मुख्य दरवाजा भी बंध करके लोक करदीया.. तब नीलमने अपने कपडेकी बेग जाकर सोफेपे रखदी.. ओर पलटके धिरेनकी ओर देखने लगी.. तो धिरेन अपनी बाहे फैलाके मुस्कुराते खडा था.. ओर नीलम दौडकर धिरेनकी बाहोमे आकर समा गइ..





तो धिरेन नीलमके चहेरेको अपनी हथेलीमे थामकर उसे पागलोकी तराह चुमने लगा.. तो नीलमनेभी सभी सरम त्यागके धिरेनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. दोनोही पागल होते अ‍ेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. जैसे आजादीका सेलीब्रेट मना रहे हो.. फीर धिरेनने रुककर नीलमकी अखोमे देखा तो नीलम बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर उसने धिरेनके सीनेमे अपना सर छीपालीया.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देरतक खडे रहे..
 
तो दुसरी ओर देवायत पुरी रात वंदना ओर रश्मीके साथ चुदाइ करते जागाथा.. जीनकी वजहसे वो अपने रुममे गहेरी नींद सो रहाथा.. हवेलीमे सामको जब देवायतकी आंख खुल गइ.. तो उनकी बाहोमे अपने सीनेपे सर रखते सृतीको सोते हुअ‍े पाया.. तो देवायतके मुहसे हल्कीसी हसी नीकल गइ.. ओर उसने सोतेही जोरोसे सृतीको अपनी बाहोमे भीचलीया.. जीनकी वजहसे सृतीकी नींदभी गायब होगइ..

ओर देवायतने उनके सामने मुस्कुराते देखते अपने होठ सृतीके होंठसे मीलादीये.. तब सृती आंख बंध करते देवायतका साथ देने लगी.. फीर उनके सामने देखते मुस्कराने लगी.. ओर देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो देवायतने सृतीको खीचकर अपने उपर सुला दीया.. तब सृती कमर हीलाते अपनी चुत देवायतके लंडके साथ कपडेके उपरसे ही घीसने लगी.. ओर देवायतकी ओर देखते हसते हुअ‍े उनको चोदनेकी अ‍ेक्टींग करने लगी.. तभी..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमते) हंम.. मेरी इस खुबसुरत बीवी कब आइ..? हंम..?

सृती : (सरमाते हसते) जानु.. जब आप गहेरी नींद सो रहेथे.. तो मेने आपको जगाना उचीत नही समजा..

देवायत : हंम.. क्या अकेली आइहो..? की भुमी बुआ साथ हे..

सृती : (होंठ चुमते) हंम.. हम दोनोही आइ हे.. रास्तेमे थे तभी मंजुका फोन आयाथा.. आपको मम्मीको लेकर उनको वही छोडने जाना हे.. जानु.. वहासे जल्दी आइअ‍ेगा.. आज मे आपको सोने नही दुगी.. मुजे पुरी रात वोही प्यार चाहीये.. जो आपने हमारी सुहागरातमे दीया था.. आज हम दोनो सौतन मीलकर आपको लुटना चाहती हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (आस्चर्यसे) दोनो सौतन..? तुम कीसकी बात कर रही हो..?

सृती : (मुस्कुराते होठको चुमते) आप कीतने कमीने हो.. अपनी बहेनको ही भुल गये.. मत भुलो वोभी मेरी सौतन हे.. मुजे सब पता हे.. मेरी उनसे फोनपेही बात होगइ थी.. हमे हमारी अ‍ेक ओर सौतनको मीलने जाना हे.. जो आज आप इनके साथ अपनी सुहागरात मनाके आये हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते होंठ चुमते) अरे.. आतेही मेरे बारेमे सारी जानकारीया लेली..? हें..हें..हें..

सृती : (प्यारसे सरको सहेलाते) हंम.. मुजे सब पुनोदीदीने फोनपे बताया.. मे आकर सीधी यही चली आइ.. वोभी आराम कर रहीथी.. तो उसे नही जगाया.. हमारी बाते सीर्फ फोनपे ही हुइथी.. जानु.. क्या वोभी मेरी तराह अपनी सादीके बाद आज आपको पहेली बार मीलेगीनां..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. यानीकी तुम दोनोने पुरी प्लानींग करके रखी हे.. चल.. आजा.. फ्रेस होजाते हे.. जल्दी जाउगा तो जल्दी वापस आजाउगा..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते कातील नजरोसे) जानु.. चलो मेभी साथमे आती हु.. हम साथमे नहायेगे..

देवायत : (बेडसे खडा होकर सृतीको गोदमे उठाते) हंम.. मतलब अपनी हालत खराब करवानी हे.. हें..हें..हें..

सृती : (कातील नजरोसे देखते) हंम.. मेरा जानु कीतना समजदार हे.. हें..हें..हें..

दोनोही बाथरुममे चले गये जैसेही देवायतने सृतीको अपनी गोदसे नीचे उतारा तो सृतीने जोरोसे देवुको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. उनकी आंखे लाल होने लगी.. फीर फटाफट देवायतके सब कपडे नीकाल दीये ओर खुदकेभी कपडे नीकालकर पुरी नंगी होगइ.. तो देवायत उनका उतावला पन देखते हसताही रहा.. ओर सृती सावर चालु करके देवायतके पैरोके बीच घुटनोके बल बैठ गइ..

फीर अपना सर उचा करते देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते उनका मुसल लंड अपनी हथेलीमे थामलीया.. ओर तीरछी नजरोसे देवायतकी ओर देखतेही देवायतके पुरे लंडको अपने मुहमे भरलीया.. ओर हाथोसे होले होले सहेलाते लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. काफी देर लंड चुसते सृती बहुतही गरम होगइ.. ओर वो अपने मुहसे लंड नीकालकर खडी होगइ.. ओर देवायतको टबके उपर बीठा दीया..





फीर वो खुदभी पैर फैलाके देवायतकी गोदमे अपनी चुतपे लंडको सेट करके धीरेसे बैठ गइ.. तो देवायतका लंड धीरेसे सृतीकी चुतमे घुसने लगा.. तब उनके मुहसे दर्दके मारे हल्कीसी आहे नीकल गइ.. ओर सृती देवायतके गलेके दोनो हाथ डालकर अपनी कमरको उछालने लगी.. तब सृतीकी चुत धीरे धीरे करते देवायतका पुरा लंड नीगल गइ.. तो देवायतभी सृतीके दोनो बुब्सको मसलते चुमने लगा..





दोनोके बीच चुदाइ होते हुअ‍े भी सीर्फ आंखोसेही बाते होती रही.. ओर कुछही देरमे सृती अकडने लगी.. तो उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर देवायतके होठोको लीपलोक करलीया.. फीर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. फीर कुछही देरमे देवातके कंधेपे सर रखके सांत होगइ.. तो देवायत उनको अ‍ैसेही गोदमे बहार लेकर आगया.. ओर सृतीको बेडपेही पटक दीया..

तो सृती जोरोसे हसते उनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. वो कुछ समजे इनसे पहेलेही देवायतने सृतीकी कमरको पकडते पीछेसे ही अपना मुसल लंड सृतीकी चुतमे घुसा दीया.. ओर दोनो हाथोसे कमरको थामते सृतीको जोरोसे कमर हीलाकर चोदने लगा.. तो सृतीका मुह खुलाही रेह गया.. ओर वो बेडपे उल्टी होकर देवायतसे चुदवाते छटपटाने लगी.. देवायत उसे बहुतही जबरदस्त तरीकेसे चोद रहाथा..





सृती : (कामुक लडखडाती अवाजमे) छोडो.. कमीने.. कोइ अ‍ैसे चोदता हे..? उइइइइ मां.. मम्मीइइइ बचाओ.. इस तुमारे दामादने मेरी हालत खराब करदी.. दे..वु.. बस.. बस.. दर्द होता हे.. आरामसे चोदोनां..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. अभीभी गालीया देती हे.. हंम..? बुलाले अपनी मम्मीको.. उनके सामने तुजे अ‍ैसेही चोदुगा.. तुजे बहुत जल्दी थीनां..? हंम.. देखना रातमे तेरी ओर पुनोकी क्या हालत करता हु..

सृती : (जोरोसे हसते) कीतने जालीम हो तुम..? कोइ अपनी बीवीको अ‍ैसे चोदता हे.. प्यारसे चोदीयेनां..

कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद देवायत सृतीकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरदेता हे.. तो सृतीभी साथमे जडने लगती हे.. फीर दोनोही बेडपे ढेर होगये.. फीर अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर जोरोसे हसने लगे.. ओर सृती जुठे गुसेसे अपने दांत पीसते देवायतको मुका मारने लगी.. फीर दोनोही वापस बाथरुममे जाकर सावर लेकर बहार आगये.. फीर अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. तो सृती देवायतकी बाहोमे समा गइ..

सृती : जानु.. बहुत मजा आगया.. बस मुजे अ‍ैसेही प्यार देते रहेना.. अब चलो बहार.. सब जाग गये होगे.. फीर आपको मम्मीको छोडने भी जाना हे.. ओर हां.. वहा अ‍ैसा कुछ लगेतो हमे फोन करदेनां..

देवायत : (होंठ चुमकर) हंम.. चलो..

फीर दोनोही बहार नीकल गये.. तब भुमीका पहेलेही कंपलीट फ्रेस होकर होलमे पुनमके साथ गप्पे लगा रहीथी.. तो दया रजीया ओर चंपाभाभी तीनोही कीचनमे चाइ नास्तेकी तैयारीया कर रही थी.. तो देवायतको देखते ही भुमीकी आंखोमे चमक आगइ.. ओर वो फौरन खडी होकर देवायतके सामने दौड पडी ओर उनके गले लग गइ.. तब सृतीको लगाकी दोनोही सास दामाद प्यारसे गले मील रहे हे....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १५२

फीर दोनोही बहार नीकल गये.. तब भुमीका पहेलेही कंपलीट फ्रेस होकर होलमे पुनमके साथ गप्पे लगा रहीथी.. तो दया रजीया ओर चंपाभाभी तीनोही कीचनमे चाइ नास्तेकी तैयारीया कर रही थी.. तो देवायतको देखते ही भुमीकी आंखोमे चमक आगइ.. ओर वो फौरन खडी होकर देवायतके सामने दौड पडी ओर उनके गले लग गइ.. तब सृतीको लगाकी दोनोही सास दामाद प्यारसे गले मील रहे हे....अब आगे

लेकीन पुनम उन दोनोकी ओर देखते सरमसे मंद मंद मुस्कुराती रही.. उनको अपने भाइ.. ओर भुमीकाके रीलेशनके बारेमे सब कुछ पताथा.. फीर सब लोग सोफेपे आकर बैठ गये.. तभी उपरसे लखनभी आराम करके आ गया.. तो आतेही भुमीके पैर छुकर सरारतसे सृतीके पैर छुने लगा.. ओर उनके साथ वही बैठ गया तब सृती बहुतही सर्मसार होते हसने लगी.. ओर उसने लखनको अ‍ेक चपत लगादी..

सृती : (हसते) हंम.. आज कल मेरा देवर बहुतही सरारती हो गया हे.. कहो.. लखनभैया कैसेहो..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अ‍ेकदम मस्त.. आपको यहा देखकर बहुत अच्छा लगता हे.. आप इधरही रहेने आजाइअ‍ेनां.. हें.. हें.. हें..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. आपके भाइ यहा अ‍ेक बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. तो मे तब आजाउगी.. लेकीन यहा आकर भी क्या फायदा.. क्युकी अबतो आप भी मेरी देवरानीको लेकर सहेरमे रहेने आ रहे हो.. हें..हें..हें..

लखन : (थोडा सेड मुह करते) हंम.. वोभी सही हे.. ठीक हे आप उधर सहेरमे ही रहेना.. हम वहा आपको मीलने आते जाते रहेगे.. हें.. हें.. हें..

भुमीका : (हसते) लखनबेटा.. अब तुमतो अपने धंधेमे बीजी रहोगे.. तो हमारा घरतो अ‍ेकही सोसायटीमे पास ही हे.. तो तुम लताको वही छोड जाना.. तो मुजेभी कंपनी मील जायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते) बुआ.. आप लताकी फीकर मत करो.. उनकी कंपनी उनके साथ ही हे.. हमारी रजीया दीदीभी साथमे जा रही हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे तो रजीयाको भी साथ लेकर आना.. हें..हें..हें..

दया : (मुस्कुराते आकर) दीदी.. चलीये सब.. चाइ नास्ता रेडी हे.. फीर बुआको जाना भी हे..

कहातो सब खडे होगये ओर डाइनींय टेबलपे जाकर बैठ गये.. तो वहा दया ओर रजीयाने सबको चाइ नास्ता दीया.. आज रजीयाने सारी पहेनीथी.. तो पुनम उनके सामने सरारत भरी नजरोसे देखते हसने लगी.. ओर छुपकेसे लखनकी ओर इसारा करते अपने दोनो नैन नचाने लगी.. तो रजीया बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वापस जाते वक्त पुनमकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते चली गइ.. तल सब लोग पुनमकी ओर सवालीया नजरोसे देखकर हसते रहे..

सृती : (हसते) पुनोदीदी क्या हुआ..? वो आपको मारके क्यु चली गइ..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते जुठ बोलते) कुछ नही भाभी.. मेने उनकी दोपहोरको टांग खीचाइ कीथी इसीलीये..

कहातो लखन सबकुछ समज गया.. ओर वो सरमाते चुपचाप फटाफट चाइ नास्ता करने लगा.. तभी देवायतको अपने दोनो पैरमे कीसीके दो दो पैर सहेलाते महेसुस होने लगे.. तो उसने टेडी नजर करते सबकी ओर देखातो पुनम ओर सृती उनकी ओर तीरछी नजरोसे मुस्कुराते चाइ नास्ता कर रहीथी.. तो देवायत सबकुछ समज गया.. ओर सब लोगोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर सोफेपे आकर बैठ गये.. तभी..

लखन : भाइ.. मे खेतोपे जा रहा हु.. अगर कुछ काम होतो मुजे फोन कर देना..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. लखन.. अगर वो तेरे दोस्तके पापा मुजसे मीलनेके लीये आये तो मुजे फोन करदेना.. तो मे रातमे आते वक्त उनके घर होकर आउगा.. उनको केह देना.. मेरा अपने घरपेही इन्तजार करे..

लखन : (जाते हुअ‍े हसते) जी भैया.. मे उसे केह दुगा..

भुमीका : (देवायतकी ओर प्यारसे देखते) देवु.. अब हमेभी नीकलना चाहीये.. वरना आपको रातमे आनेमे देर होजायेगी.. सृती अब इधरही रुक रही हे..

सृती : (सरमाते हसते) मोम.. तो मे इधरही रहुगीनां.. अब ये मेरा ससुराल हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरारतसे हसते) भैया बुआको छोडके जरा जल्दी आजायेगा.. तबतक मे ओर भाभी वंदनाकी खबर पुछने जाती हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? वंदना तुम्हारी सहेली..? अब उसे क्या हुआ हे..?

पुनम : (देवायतकी ओर सरारतसे मुस्कुराते) कुछ नही बुआ.. बस.. उनके पैरमे थोडीसी मोच आगइ हे.. तो उनकी खबर पुछने जाना हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : लोजी.. इसमे कौनसी बडी बात हे.. सीर्फ मोचही तो आइ हे.. ये कहोना इसी बहाने तुम दोनोको गांवमे घुमने जाना हे.. इनमे बेचारी वंदनाका बहाना क्यु बनाती हो..

सृती : (कपडेकी बेग लाकर देते) मम्मी.. अब आपको देर नही हो रही..? येलो अपना बेग ओर अब दोनो फुटो यहासे..

भुमीका : (बेग लेते जोरोसे हसते) देवु.. तेरी इस बीवीतो बडी तीखी हे.. हें..हें..हें.. यहा आतेही इनमे पावर आगया.. चलो.. चलो.. वरना हमपे ओर भडकेगी.. हें..हें..हें..

कहातो सृती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर जुठे गुस्सेके साथ अपने दांत पीसते उन्होने अपनी मम्मीकी पीठमे मुका जड दीया.. तो सब हसने लगे.. ओर देवायतने भुमीकी बेग अपने हाथमे लेली ओर कारकी ओर चल पडा.. तो भुमीका भी सृतीकी ओर हसते देवायतके पीछे जाने लगी.. जब देवायत पीछली सीटमे बेग रखते आगे ड्राइवींग सीटपे बैठ गया तो भुमीकाभी उनके बगल वाली सीटमे आगे बैठ गइ..

तो पुनम ओर सृती उनको हसते हुअ‍े हाथ हीलाके बाय करने लगी.. ओर देवायतने अपनी कारको अपने ससुरके गांव यानी राजीवके धरकी ओर जाने दी.. तब कारमे भुमीका बहुतही सरमाने लगी.. ओर कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते हसने लगी.. जैसेही कार गांवसे बहार नीकलकर रोडपे दोडने लगी.. तब भुमीकाने वासनाभरी नजरोसे देखते देवायतके जांगोपे अपना हाथ रख दीया.. ओर जांगको सहेलाने लगी..

देवायत : (हसते सरारतसे) बुआ.. ठीकसे बैठीयेना.. क्या कर रही हे..? हें..हें..हें..

भुमीका : (जांगपे चपत लगाते) बुआके बच्चे.. अब मे आपकी बीवी हु.. यहा कौन हे जो मुजे आप बुआ कहेते हो..? मत भुलो आपने मुजसे भी सादी की हे.. ओर हमारे प्यारकी नीशानी मेरे पेटमे पल रही हे.. जानु.. मे बहुत खुस हु.. मे हमारे बच्चेको जन्म दुगी.. बस अ‍ेक सृती सम्हल जाये.. फीर मुजे कीसीकी परवाह नही.. क्या आप दोनो दोपहोरको मीले की नही..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मीले.. वोभी बीलकुल तुमपे गइ हे.. मेरे बीना अब नही रेह पाती.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. वोभी बेचारी क्या करे..? आपका हथीयार ही इतना दमदार हेकी जोभी ओरत या लडकी इसे अ‍ेक बार चखले.. आपकी दिवानी हो जाती हे.. देवु.. क्या वो बीस्तरमे आपका साथ अच्छेसे तो देती हेनां..? क्या वो आपके इस बडे हथीयारको जेल पाती हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. अब वो तेरी लडकी हे तो तेरे जैसेही होगीनां.. क्या मस्त साथ देतीहे मेरा.. भुमी.. वोभी तेरी तराह मुजे ब्लुजोब देती हे.. तुम दोनोके उरोज.. दोनोकी कसी हुइ चुत.. मुजेतो पागल करदेती हे..

भुमीका : (कामुक नजरोसे हसते) जाओ जाओ.. जुठे कहीके.. अगर मे इतनी ही पसंद हुतो आप आजाते मेरे पास.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. जानु.. चलोना आप कारको जंगलकी ओर जाने देना.. मे आपके साथ मीलन करना चाहती हु.. मेरी बेटीको तो आतेही चोद लीया.. तो मुजेभी बहुत इच्छा हो रही हे.. फीर पता नही अ‍ैसा मौका हमे कब मीलेगा.. वरना हमे रश्मीके घर मीलना पडेगा.. चलोनां..

कहातो देवायत मुस्कुराने लगा.. ओर उसने भुमीकी ओर देखा.. तो देवायत भुमीकी ओर देखते ही पागल होगया.. भुमीके खुले बाल कारमे तेज हवाकी वजहसे हवामे लहेरा रहे थे.. भुमीका उनकी ओर कामुक नजरोसे देखते स्माइल कर रहीथी.. क्युकी अपने ब्लाउसके उपरके बटनको खोलकर अपने बुब्सकी क्लेवजको दीखा रहीथी.. तो देवायतको भुमी इस वक्त बहुतही कामी ओरत दीख रहीथी.. जैसे कामदेवकी मुरत हो..





देवायतने आगे जाकर रोडपे अ‍ेक कच्ची सडकको देखा जो घने जंगलकी ओर जा रहीथी.. तो बीना कुछ बोले कारको सीधे वही मोड लीया.. ओर जंगलकी ओर चल पडा.. तो भुमीकाके दिलकी धडकन तेज गइ.. ओर वो बहुतही सरमाने लगी.. उनके दोनो उरोज कठोर होने लगे.. ओर चुतमे अ‍ेक मीठीसी सुरसुराहट होने लगी.. ओर चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. भुमीको अपनी चुतमे गीलापन महेसुस होने लगा.. तो सरमके मारे उनकी मुस्कुराहट नीकल गइ..
 
देवायत : (सामने देखकर मुस्कुराते) डार्लींग.. क्यु हस ही हो..? हंम..

भुमीका : (सरमाते हसते) कुछ नही.. अ‍ैसा लगता हे.. हम दनीयासे छुपकर कही भाग रहे हे.. ओर मुजे मेरे पतीके साथ मीलन करनेकी जल्दी हे.. तो हसी आगइ.. जानु.. आइ लव यु सो मच.. आप मेरी जींदगीमे आये.. मेरी तो जींदगी ही सवर गइ.. भलेही मे दुनीयाकी नजरोमे विधवा हु.. लेकीन दुनीयासे छुपकर आपकी सुहागन होनेका अ‍ेक अलग ही मजा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) भुमी.. अब वो दिन दुर नही.. जब तुम ओर नीमु.. अपने माथपे मेरे नामका सींदुर लगाकर खुले आम घुमोगी..

भुमीका : (सरमाते गाल चुमते) देवु.. तबतो आपके मुहमे घी-सकर.. मे इस दिनका बेसब्रीसे इन्तजार कर रही हु.. क्या नीमु घर चली गइ इसके बाद आप दोनो मीलेकी नही..?

देवायत : (मुस्कुराते) नही भुमी.. अभी उसे राजीव अंकलपे ध्यान देना हे.. मंजुने उसे कहा हेकी वो राजीव अंकलको वो हर सुख दे.. जीसे उनकी कोइ तम्मना ही बाकी ना रहे.. तु समज गइनां..?

भुमीका : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) हंम.. सब समज गइ.. ये मंजुभीनां.. बहुत कुछ जानलेती हे..

देवायतने भुमीके साथ बाते करते कारको घने जंगलोके बीच अ‍ेक सुमसान जगहपे पेडके नीचे खडी करदी.. ओर कारसे उतर गया तो भुमीकाभी उतर गइ.. ओर दोडके देवायतके पास जाकर उनकी बाहोमे समा गइ.. फीर थोडी देर देवायतके चहेरेको देखते उनको पागलोकी तराह चुमने लगी.. ओर मदहोस होगइ.. तब देवायतभी उनके दोनो बुब्स मसलते उनके होठोको चुमने लगा.. ओर दोनोही काम वासनाकी आगमे जलने लगे..





भुमीका : (उखडती सांसोसे) बस.. बस.. देवु ओर नही.. मुजे जल्दीसे अ‍ेक बार ठंडी कर दीजीये.. मे कबसे आपके साथ मीलन करना चाहती थी.. आइअ‍े.. आप कारकी सीटका बीछाना यही खुलेमे नीचे डाल दीजीये.. हम आज खुले जंगलमे ही प्यार करेगे.. चलीये..

कहातो देवायतने पीछली सीटका बीछाना खीचलीया ओर नीचे जमीनपे बीछा दीया.. तो भुमीका खडेही अपने सब कपडे नीकालकर पीछली सीटमे सम्हालके रखने लगी.. ओर देवायतभी अपने सब कपडे नीकालते आगेकी सीटमे रखने लगा.. जब दोनोही नंगे होगये तब भुमीका देवायतका हाथ खीचकर बीछानेपे पीठके बल अपने दोनो पैर फैलाकर लेट गइ.. ओर देवायतको भी खीचकर अपने उपर चडा देती हे..

देवायत : (हसते) भुमी.. तुजे चुदवानेकी बडी जल्दी हे..हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे बाहोमे भीचते होठ चुमते) हां देवु.. आप समजे नही.. उधर सृतीने मंजुको फोन करदीया होगा.. तो हमे वहा टाइमपे पहोचना होगा.. वरना देरसे गयेतो.. आप समज गयेनां..? चलीये जल्दी डाल दीजीये.. ताकी मुजेभी चैइन मीले.. मे कबसे इसे अंदर लेना चाहती थी.. डाल दीजीयेनां..

कहेतेही भुमीकाने देवायतका तगडा लंड अपनी मुठीमे पकडलीया ओर अपनी चुतपे घीसने लगी.. चुत लगातार पानी बहा रहीथी.. जब लंड गीला होगया तो भुमीने लंडको अपनी चुतके लव होलमे फसा दीया.. ओर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालकर उसे अपने तनसे चीपका लेती हे ओर उनके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. तब देवायतभी भुमीके बुब्सको अपने मुहे लेकर चुसता हे.. ओर अपनी कमरको उची करते अ‍ेकही जोरोका जटका मारता हे..





तो घने जगंलमे भुमीका जोरोसे चीख पडी.. क्युकी देवायतने अ‍ेकही जटकेमे उनका पुरा लंड भुमीकी चुतमे घुसा दीयाथा.. ओर भुमीका छटपटाते अपने पेर पटकते आंसु बहाने लगी.. तब देवायत उनके गलेमे मुह डालकर गलेको चुमते जोरोसे अपनी कमर हीलाते भुमीकाको चोदने लगा.. तो भुमीका भी उतेजनासे देवायतकी पीठमे दोनो हाथसे सहेलाते नाखुनसे खरोदने लगी.. वो आधी आंख चडाते मदहोसीमे नसे जैसी हालतमे चली गइ..

ओर अपनी कमर उछालते देवायतका साथ देने लगी.. तब पुरे जंगलमे सन्नाटा छाया हुआथा.. ओर दोनोकी चुदाइकी वजहसे थप..थप..थप.. फच..फच..फच..की अवाज आ रहीथी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते रहे.. तो देवायत बीचमे कभी भुमीके गलेको चुमता तो कभी अपने दांतोसे भुमीके बुब्सको खीचता.. तब भुमीका दर्दसे सीसकारीया करती.. ओर भुमीने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

ओर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. तो कुछही देरमे वो सीथील होकर पडी रही.. तभी देवायत हाथके बल उचा हो गया ओर भुमीको जोरोसे चोदने लगा.. तो भुमीका चीखने लगी.. ओर कुछही देरमे वो अ‍ेक बार फीरसे उतेजीत हो गइ.. ओर अपनी कमरको उपरकी ओर उछालते देवायतका चुदवानेमे साथ देने लगी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको बहुतही कामुक तरीकेसे चोद रहेथे.. इसी तराह दोनोके बीच घमासान चुदाइ होती रही..





इसी बीच भुमीका अ‍ेक बार फीर जड चुकीथी.. फीर भी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. आज अ‍ेक ही बारमे देवायतने भुमीको जबरदस्त तरीकेसे चोद लीया.. ओर भुमीकाकी देवायतसे चुदवानेकी सारी कशर पुरी करदी.. तभी अचानक देवायतने भुमीकी चुतमे पुरा लंड घुसा दीया ओर भुमीके तनसे चीपक गया.. तो लंड भुमीकी बच्चेदानीसे टकराया.. ओर भुमीकी जोरोकी चीख नीकल गइ.. वो भीलाते छटपटाते अपना मुह इधर उधर करने लगी..

तब देवायतने भुमीके चहेरेको अपने हाथोमे थामते होठोको लीपलोक करलीया.. ओर उनकी आंख चड गइ तो भुमीका सब समज गइ.. ओर उसनेभी देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनकी पीठको जोरोसे सहेलाने लगी.. तब देवायत अपनी कमरको जटके मारते भुमीकी चुतको अपने गाढे पानीसे पीचकारीया मारते भरने लगा.. तभी भुमीको भी अपनी बच्चेदानीमे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वोभी कांपने लगी.. ओर देवायतके साथमे अ‍ेक बार फीर जडने लगी..





जब दोनो सांत होगये तो दोनोही पसीनेसे तरबदर हो चुकेथे.. भुमीका अबभी देवायतकी पीठ ओर उनके सरको सहेला रहीथी.. ओर देवायत भुमीके सीनेमे उनके बुब्सपे सर रखके ढेर होके पडा था.. भुमीकी पुरी चुत देवुके पानीसे भरी हुइथी.. फीरभी भुमीको चुतमे अबभी देवायतका लंड सख्त महेसुस हो रहाथा.. उनकोभी पताथा की ये सब बाबाकी जडीबुटीकी वजहसे हो रहा हे.. ओर येभी पता थाकी देवायत उसे दो बार चोदे बगैर उनके उपरसे उतरने वाला नही हे.. फीरभी उसने देवायतके गालको प्यारसे चुमते कहा..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) जानु.. अब उपरसे हटीयेनां.. आपनेतो मुजे अ‍ेकही बारमे पुरी नीचोडली.. देखो मेरी पुरी चुत आपके पानीसे भरी हुइ हे.. अगर मे प्रेगनेन्ट नही होती तो आज मे पका फीरसे प्रेगनेन्ट होजाती.. आपने आज कीतना पानी नीकाला हे.. हटीयेनां मुजे नीचे कुछ अजीबसा लग रहा हे..

देवायत : (सर उठाके होठ चुमते) भुमी.. आज हमारे मीलन कीतने दिनोके बाद हुआ हे.. तो तुजे देखतेही मेरा जोस कइ गुना बढ गया था.. तो अ‍ैसा होगया.. मुजे तुजको अ‍ेक बार ओर चोदना हे..

भुमीका : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. मुजे पता था आप दो बार चोदे बीना मानेगे नही.. लेकीन जानु.. देखो मेरी पुरी चुत आपके पानीसे भरी हुइ हे.. क्या मे इसे अ‍ेक बार साफ करलु..? हंम..? अभी पीसाब करलुगी तो सही होजायेगी.. फीर आप मुजे वापस चोद लेना.. हंम..?

देवायत : (मुसकुराते होठ चुमते उपरसे हटते) हंम.. चल ठीक हे.. जा करले पीसाब.. ओर कारमे पानीकी बोटल भी पडी हे..

भुमीका : (बीछानेपे बैठते) हंम.. वो बादमे.. अभी मुजे पीसाब करना हे..

कहेते भुमी अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर खडी होकर थोडी लंगडाते दुर जाने लगी.. तो उनके पैर लडखडाने लगे.. तो देवायतने मुस्कुराते उसे सहारा दीया.. तो भुमाकाने सरमाके देवायतको अ‍ेक मुका जड दिया.. ओर भुमीका वही नीचे बैठ गइ ओर पीसाब करने लगी.. तब वहा पीछे देवुको देखकर वो बहुत सरमाइ.. ओर पीसाब करके वो कारकी ओर जाने लगी.. तो देवायतने उसे कारमेही पीछेकी सीटमे घोडी बनाकर जुका दीया..
 
ओर खुद अ‍ेक पैर सीटपे चडाके भुमीके पीछे उनकी कमरको पकडके आगया.. भुमीका कुछ सोचे समजे उनसे पहेलेही देवायतने भुमीकी चुतमे अपना तगडा लंड पीछेसे घुसा दीया.. तो भुमीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो लडखडाती सीटपे सर डालके जुक गइ.. तब देवायत उनकी कमरको पकडते उसे जोरोसे चोदने लगा.. तो भुमीका दर्दके मारे अपना मुह बीगाडते चुदवाने लगी..





देवायतने भुमीके उपर कोइ रहेम नही कीया.. ओर इस बारभी भुमीको दो दो बार जडाके उनको जबरदस्त तरीकेसे चोद लीया.. भुमीकी हालत पतली हो चुकीथी.. देवायतने उनके सरीरकी अ‍ेक अ‍ेक नब्सको चोद चोदके ढीली करदीथी.. देवायत पीछेसे ही भुमीके दोनो बुब्सको बडे ही बेहरहेमीसे मसल रहाथा.. उनके दोनो बुब्स मसलके लाल कर दीयाथा.. फीर भी भुमीका अ‍ेक सब्द भी नही बोल पाइ..

ओर बोलेभी क्यु..? आखीर देवायतभी तो उनका पती था.. वो पत्नीका अ‍ेक अ‍ेक हक अदा कर रहीथी.. ओर आखीर दुसरी बारभी देवायतने भुमीकी चुतको अपने गरम लावेसे भरदी.. ओर उनके उपरसे हट गया तबभी भुमीका बेसुध्ध जैसी हालतमे अ‍ैसेही पडी रही.. उनकी चुतसे दोनोका कामरस पैरसे होते सीटपे गीरने लगा.. उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहाथा..देवायतने उनको सहारा दीया ओर भुमीकाने बडी मुस्कीलसे अपनी चुतको फीर सीटपे पडे दोनोके कामरसको पानीसे साफ करदीया..

फीर देवायतने खुदके कपडेभी पहेन लीये ओर भुमीकोभी कपडे पहेननेमे मददकी.. तभी देवायतको भुमीके दोनो बुब्सपे अपने दांतोके नीसान दीखे.. देवायतने अपने लव बाइटसे भुमीकाके दोनो बुब्स लाल करदीये थे.. फीरभी भुमीका कुछ नही बोली ओर उसने सरमाकर हसते हुअ‍े देवायतके सीनेमे दो तीन मुके जड दीये.. ओर दोनोही हसने लगे.. फीर दोनो अपने अपने कपडे पहेनकर सही होगये..

तब भुमीका अ‍ेक बार फीर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. जब होठोको चुमने देवायतने भुमीकाके उरोजोको मसल दीया.. तो भुमीका दर्दसे आउच.. करते हसने लगी.. तो देवायतने भी मुस्कुराते अ‍ेक बार भुमीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब दोनोके होंठ फीरसे मील गये.. ओर अ‍ेक दुसरेको स्मुच करते रहे.. फीर दोनोही कारमे बैठ गये तबभी भुमीका देवायतकी ओर कामुक्ता से देखकर मुस्कुरा रही थी..





देवायत : (मुस्कुराते) भुमी.. क्या हुआ..? हंम.. मजा आया की नही..?

भुमीका : (सर्मसार होते बाजुमे मुका मारते) बडे ही जालीम हे आप.. मेरी हालत खराब करके पुछ रहे हे की क्या हुआ..? कोइ अपनी बीवीको इतनी बेहरहेमी से चोदता हे..? जानु आपनेतो आज मुजे पुरी नीचोडली.. मेरा अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहा हे.. आपनेतो अ‍ेकही बारमे मेरी सारी कशर पुरी करदी.. अब मे वहा जाकर सबको क्या जवाब दुगी..? की मे अ‍ैसे क्यु चल रही हु.. कमीनी सबकी सब समज जायेगी..

देवायत : (मुस्कुराते कारको चलाते) केह देना कारमे बैठते वक्त पैर मुड गया तो मोच आगइ.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते कातील नजरोसे) हां.. ये सब कहेना आपके लीये आसान होगा.. लेकीन नीमु.. ओर मेरी सौतन मंजुतो सब समजही जायेगी.. दोनोही बहुत होशीयार हे.. जानु.. लेकीन मजाभी बहुत आया.. अ‍ैसा लगाकी आज मे पहेली बार आपसे चुदी हु.. मे अबभी हमारी सादी ओर हमारी सुहागरात नही भुली.. कीतना प्यारा अहेसास था वो.. हमने पुरी रात ओर पुरा दिन प्यार कीया था.. आपने तबभी मेरी हालत खराब करदी थी.. मुजे बेहोस तक करदीया था.. सचमे आप मुजे अ‍ेक लडकी होनेका अहेसास करवाते हो..

देवायत : डार्लीग.. अ‍ेक बात कहु.. मे जबभी तुजे ओर नीमुको देखता हु.. तब मेरा जोस कइ गुना बढ जाता हे.. पता नही तुम दोनो कौन हो.. ओर दुसरेकी बीवीया होनेके बावजुद तुम दोनोने मुजे बीवीसे बढकर प्यार दीया हे.. मे तुम दोनोका जींदगीभर अहेसान मंद रहुगा.. आइ लव यु सो मच..

भुमीका : (कारमेही गाल चुमते) जानु.. आप मुजसे वादा करो.. की हम दोनो हर जन्ममे मीलेगे.. देवु.. मुजे कभी मत छोडना.. फीर भलेही आप मेरी हालत खराब करदो..

देवायत : भुमी.. हमने हमारी सादीमे तो वादा कीया हे.. फीरभी अ‍ेक बार मंजुसे पुछलो.. इसके बारेमे मेरी मंजु बहोत कुछ जानती हे..

भुमीका : जानु.. मंजने मुजे बहुत कुछ बताया हे.. ओर हम दोनो हर जन्ममे मीलतेभी हे.. अ‍ैसा वो कुछ केह रहीथी.. क्युकी आपकी जींदगीमे जीतनीभी औरते आइ हे.. वो कोइ सामान्य औरत नही हे.. हम सभी अप्सरा या परीया हे.. जो यहा जन्म लेकर आपका प्यार बटोरने आइ हे.. ओर सभी औरते आपके साथ रीलेशनमे आती हे.. कोइ पहेले आगइ हे तो कोइ बादमे आयेगी.. क्या मे सच केह रही हुनां..?

देवायत : (कार चलाते अ‍ेक नजरसे दखते) भुमी.. अगर सभी औरते मेरे साथ रीलेशनमे आती हे तो क्या आपको बुरा नही लगता.. फीर भी कुछ औरत अ‍ैसी हे.. जो मे इनके साथ रीलेशन नही रख सकता.. फीरभी वो मेरी जींदगीका हीसा हे.. (थोडा जुठ बोलते) जैसेकी पुनम.. लता.. रमाभाभी.. वगैरे..

भुमीका : (सामने मुस्कुराते देखते) अ‍ेक बात.. हमे आपके कीसीभी रीलेशनसे बुरा नही लगता.. क्युकी हम जानती हेकी हम कौन हे.. दुसरी बात.. मुजे आपके ओर पुनके रीलेशनके बारेमे सबकुछ पता हे.. क्युकी आपके बारेमे हमे सब पता हेकी आप कौन हो.. इसीलीये तो पीछली तीन पीढीसे आपके खानदानमे सभीने अपनी बहेनोसेही सादीया की हे.. जहा तक मेरी मंजुसे बात हुइ हे.. तो इतनातो केह सकती हु.. की आज नही तो कल.. अ‍ेकना अ‍ेक दिन वोभी आपके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. इवन रमा ओर लता भी.. आप मेरी बात सुनके बुरा मत मानना..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब मेरी इस बीवीको सब कुछ पता हे.. लेकीन भुमी.. अभी मेरे ओर पुनमके बारेमे नीमु ओर चंदाको कुछभी नही पता.. तु समज गइनां क्यु..? तो बी केरफुल.. ठीक हे..? चलो..

कहेते दोनोही बाते करते राजीवके गांव पहोच गये.. जैसेही घरके अंदर गये.. तो नीर्मला भुमीको अ‍ैसे चलते देखकर अपने नैन नचाते जोरोसे हसने लगी.. ओर बहुत ही खुस होगइ.. ओर उसने भुमीको थोडी लंगडाते चलते हुअ‍े देखा.. तो वो सबकुछ समज गइ.. ओर देवायतकी ओर कातील मुस्कान करते ओर दोडके भुमीकाको गले लग गइ.. फीर भुमीका बारी बारी सबको गले मीली.. फीर वो ओर देवु राजीवके पास बैठ गये.. तो चंदाने दोनोको पानी दीया..

चंदा : (मुस्कुराते) लीजीये दीदी पानी पीजीये.. सफरसे थक गइ होगी.. फीर आपको मस्त चाइ पीलाती हु..

मंजुला : (मुस्काराते) बुआ.. आप थकी हुइ लगती हे.. पहेले मम्मीके साथ जाकर फ्रेस होजाइअ‍े.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हाथ थामते) हां भुमी.. मंजु ठीक केह रही हे.. चल पहेले नीचे रुममे फ्रेस होजा.. फीर चाइ नास्ता करलेना.. ताकी तेरी सारी थकान दुर होजायेगी.. फीर तेरे भाइके साथ बाते करती रहेना.. चल मे भी तेरे साथ चलती हु..

राजीव : (हसते) हां भुमी पहेले फ्रेस होजा फीर हम बाते करेगे.. हें..हें..हें..

कहातो भुमीका सब समज गइ.. ओर मुस्कुराते खडी होगइ.. तो नीर्मलाने उनका हाथ कपडलीया.. ओर दोनो नीचे मंजुवाले रुममे चली गइ.. तो नीर्मलाने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया ओर भुमीका हाथ पकडते उसे बाथरुममे लेकर चली गइ.. तो भुमीका बहुतही सरमाइ.. ओर अंदर जातेही नीर्मलाने भुमीको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुमने लगी.. फीर उनसे अलग होकर प्यारसे मुस्कुराते उनकी ओर देखने लगी..
 
नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी.. तुम सचमे बहुत नसीब वाली हो.. क्या रास्तेमे दोनोने प्यार कीया हेना..? देख तेरी हालत देखकर ही हमे पता चल गया की हमारे पतीने तुजे बहुत प्यार दीया हे..

भुमीका : (सर्मसार होते) हां नीमु.. जालीमने बडेही बेहरहेमीसे मुजे चोदलीया.. ओर तुजेतो पता हे उनका अ‍ेक बारमे जी नही भरता.. तो दुसरी बारमे भी चोदके मेरी हालत खराब करदी.. लेकीन वो हम दोनोको प्यारभी बहुत करते हे.. कहेता था तुम ओर नीमुको मे बहुत प्यार करता हु.. तुम दोनो मेरी स्पेसीयल बीवी हो.. नीमु.. वो हम दोनोको बहुत चाहता हे..

नीर्मला : (इमोस्नल होते) क्या अ‍ैसा कहा उसने..? भुमी.. हम उन दोनो मीया बीवीको कभी समजही नही पाये.. मेरी मंजुभी अ‍ैसी ही हे.. वोभी मेरा बहुत खयाल रखती हे.. यहा आकर हम दोनोके बीच बहुत सारी बाते हुइ.. जो कभी तुजे फुरसतमे बताउगी.. चल पहेले तेरी मुनीयाकी सीकाइ करदु.. फीर हम बाते करेगी..

दोनोही बाते करती रही ओर नीर्मलाने भुमीकी चुतकी अच्छेसे सीकाइ करदी.. तब जाकर उनको नीचे कुछ राहत महहेसुस हुइ.. भुमीका नहाकर फ्रेस होगइ.. तब उसने नीर्मलाको अपने बुब्सपे देवायतके लव बाइट दीखाया.. भुमीका दोनो बुब्स अबभी मसलनेकी वजहसे लाल थे.. तब नीर्मला उसे देखकर हसने लगी.. जब भुमीका कंपलीट होगइ.. तो दोनोही वही बेडपे बैठ गइ.. तब भुमीका बहुतही सरमा रहीथी..

भुमीका : (मुस्कुराते) नीमु.. ये सब छोड.. अब तु बता.. क्या तुमने मेरे भाइको प्यार दियाकी नही..?

नीर्मला : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. भुमी.. पीछले दो दीनसे हम दोनो वही कर रहे हे.. ओर ये सब करनेके लीये मेरी मंजुनेही मुजसे कहा हे.. पता नही वो लडकी क्या जानती हे.. लेकीन उनकी बातोसे इतना तो पता चल गयाकी अब राजीव हम सबके बीच बहुत कम समयके लीये हे.. तो मे राजीवको सब खुसीया दे रही हु..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) हां नीमु.. ओर ये सब करना तेरा फर्जभी हे.. क्युकी वो तेरे भाइके साथ साथ तेरा पतीभी तो हे.. नीमु.. तुम उनकी सब इच्छा पुरी करदो.. फीरतो हमारा देवु हे ही.. वो इतना काबील हेकी हम जैसी दस औरतोको वो अकेला ही सम्हाल सकता हे..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे) भुमी.. तुम वाकइ बहुत नसीब वाली हो.. जो तुजे उनका प्यार मील जाता हे.. लेकीन अभी मुजे सीर्फ राजीवपे ही फोकस करना हे.. फीर आगे देखते हे होता हे क्या.. अब चल बहार..

भुमीका : (बेडसे खडी होते धीरेसे) नीमु.. हमारी भावुका क्या हुआ..? बात आगे बढी..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी.. उनकाभी ओल मोस्ट सब सही होगया हे.. हमने आतेही ये मकान भावुके नाम करदीया हे.. अब वो ज्यादातर इधरही रहेगी.. हमारा देवु उसे स्माल लेगा.. तु समज गइनां..? बच्चीको भी ओल मोस्ट तीन महिने होगये हे.. तो अब भावुभी रेडी हे.. तु चल बहार.. मे भावुके बारेमे तुजे सब बताती हु..

फीर दोनोही धीरे धीरे चलके बहार आकर बैठ गइ.. तब राजीव ओर मंजु देवायतके साथ बातोमे बीजी थे.. तो नीर्मला भुमीके साथ डाइनींग टेबलपे ही बैठ गइ.. तो चंदाने उसे चाइ नास्ता दीया.. ओर खुदभी वही बैठ गइ.. ओर दोनोके साथ बातोमे बीजी होगइ.. तब भावना कीचनसे सीर्फ देवायतको ही देखती रही.. उसे अब देवायतको मीलनेकी तडप बढने लगीथी.. तब देवायत भी चाइ पीकर वापस जानेके लीये खडा होगया..

मंजुला : (मुस्कुराते साथमे खडी होते) देवु.. क्या आपको जाना हे..? देरसे चले जाते..

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. गांवमे थोडा बखेडा होगया हे.. तो मुजे उसे सुलजानेके लीये जाना पडेगा..

नीर्मला : (दोनोकी ओर देखते) देवु.. क्या आप जा रहे हो..? रुकीयेनां.. देरसे डीनर करके चले जाना..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही मम्मी.. उनको गांवमे कुछ जरुरी काम हे.. तो इसे जाने दीजीये.. वो कल आयेगे..

राजीव : देवु बेटा.. अगर जरुरी काम होतो सब नीपटालो.. फीर पुनम बीटीया ओर सृती बेटीको लेकर आप इधर आजाइअ‍े.. सब साथमे होगी तो अच्छा लगेगा..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे पापा.. अगर अ‍ैसा हेतो दोनोको कल सामको या परसो सुबह लेकर आजाउगा.. तब तक मेराभी काम नीपटा लेता हु..

नीर्मला : (जोरोसे) देवु.. हो सके तो कलही दोनोको लेकर आजाओ.. ओके..? चलो बाय..

तब मंजु ओर देवायत दोनोही बाते करते बहारकी ओर आगये.. तो मंजु देवायतको बाते करते कार तक छोडने गइ.. मंजु इतनी देर तक देवायतसे दुर रही.. तो उनको देवायतके साथ मीलन करने की बहुत जल्दी थी.. देवायतकी सब बीवीयोको प्यार मील रहाथा.. तब सीर्फ मंजु ओर चंदा ही देवायतसे दुर थी.. जीनकी वजहसे वो दोनोको देवायतका प्यार नही मील रहाथा.. चंदाभी देवायतको मीलना चाहती थी लेकीन अपने भाइसे बहुत सरमा रहीथी.. इसीलीये वो अभी देवायतको बहार मीलने नही आइ.. तभी..

मंजुला : जानु.. अब आपसे दुर नही रहा जाता.. आप सबको प्यार दे रहेहो.. सीर्फ मुजे ओर चंदादीदीको ही प्यार नही मीलता.. चलीयेना.. हम दोनो कही दुर भाग जाते हे.. जहा सीर्फ हम दोनोही हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (बाहोमे भरते होंठ चुमते) मंजु.. तुम फीकर मत करो.. तुमतो मेरे लीये सदाबहार हो.. ओर यहा रुकनेका फैसला तुम्हारा था.. ओर ये जरुरी भी हे..

मंजुला : (बाहोसे छुटते) आइनो जानु ..यहा बहार क्या कर रहे हो..? हम मीलेगेनां.. जानु.. बस कुछ ही दिनोकी तो बात हे.. फीर हम खुब प्यार करेगे.. अभीतो वो दोनो मेरी सौतने वहा हे.. उसेही प्यारसे तृप्त करदो.. फीर मेतो हुही.. क्या आज रास्तेमे बुआकोभी प्यार दीयानां..? आपने बेचारीकी हालत खराब करदी.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. पता नही उनको देखतेही मेरा जोस बढ जाता हे.. मे अपने आपको कंट्रोल नही कर सका.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. जानु.. वो पीछले जन्मकी आपकी माधवी ही हे.. जो आगे जाकर वोभी आपको दुबार मीलेगी.. क्या अभी अभी उसने आपको दुबारा मीलनेकी कामना नही की..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. हां.. कीथी.. तुजे सब पता चल जाता हे.. मंजु चल अब मे चलता हु.. वहा लखनका अ‍ेक दोस्त अपनी बहेनको लेकर भाग गया हे.. तो उनका सब मामला नीपटाना हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. जाइअ‍े.. आरामसे जाना.. अब हर दिन कीसीना कीसी गांवमे ये सब तो होता ही रहेगा.. आप फीकर मत करना.. सब सही होजायेगा..

कहातो देवायतने मंजुके होठोको चुमलीया.. तो मंजु सरमा गइ.. ओर जटसे आजु बाजुकी ओर देखकर देवायतको हसते हुअ‍े अ‍ेक मुका जड दीया.. ओर देवायतको कारमे बेठते उनको कामुक नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. फीर देवायत कार लेकर नीकल गया.. तो मंजुभी घरके अंदर आगइ.. ओर नीर्मला भुमीकाके पास जाकर बैठ गइ.. जब भुमीने चाइ नास्ता करलीया तो सब लोग राजीवके पास बैठकर गप्पे लगाने लगे....

कन्टीन्यु
 
Back
Top