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- Dec 5, 2013
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सुधीर : भाइ.. अच्छा हुआ आज आप आगये.. वरना सुबह मुजे आपके पास आना पडता.. कल सुबह मे दो दिनके लीये बोम्बे कोन्फरन्समे जा रहा हु.. तो आप ओर चारुभाभी नीशाका खयाल रखीयेगा..
चारु : (हसते) अरे देवरजी येभी कोइ कहेनेकी बात हे.. मे हुनां.. नीशा तो मेरी छोटी बहेन ही हे.. ओर रातमेभी मे उनके पास ही रहुगी.. तो आप फीकर मत करना..
नीशा : (सबको पानी देते) सुधीर.. तुम मेरी फीकर मत करो.. भाभी हे हमारे देवरजी हे.. रश्मीभाभी वंदु सब हे.. तो यहा मुजे कोइ तकलीफ नही हे.. बस तुम अपना खयाल रखना..
सुधीर : (खुस होते) ठीक हे ठीक हे.. मेतो बस.. अैसेही केह रहा था.. नीशा आज हम सबके लीये मस्त दुध कोल्ड्रींक बनादे.. कीतने दिनोके बाद आज देवु आया हे..
नीशा : (हसते) हां वोतो मे बना दुगी.. पहेले मुजे मेरे देवरसे कुछ पुछने तो दो.. देवरजी.. सुना हे वो साहुकारके लडका लडकी दोनो ही धरसे भाग गये हे..? क्या ये सच हे..? हें..हें..हें..
सुधीर : (जोरोसे हसते) अरे तुजे इनमे इतनी बडी दिल चस्पी क्यु हे..? पहेले इनको कुछ ठंडातो पीलाओ.. फीर वो हमसे बात करेगे.. हें..हें..हें..
चारु : (हसते हुअे खडी होते) हां नीशा.. चल पहेले हम दोनो इनके लीये कुछ बनाते हे.. फीर हम आरामसे बैठकर बाते करेगे.. चल..
कहेते दोनोही देवायतकी ओर कातील मुस्कान करते कीचनमे चली गइ.. तब सुधीर कीचनकी ओर देखते धीरेसे सरकके देवायतके पास आकर बैठ गया.. ओर दोनोही धीरेसे बाते करने लगे..
सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ.. आपने सुना.. सायद कल या परसो मुना ओर बरखा उनकी मम्मीको लेकर कही मंदिरपे जाने वाले हे.. वो इस बारेमे कल आपसे बात करेगा.. कहेता था ठाकुरसाहेबने मंदिरका इन्तजाम करदीया हे..
देवायत : हा सुधीर.. मे उनको हमारे आश्रमपे भेज रहा हु.. वहा बाबा उन दोनोकी सादी करवा देगे.. ओर सुन.. इस बारेमे अभी कीसीको पता नही चलना चाहीये.. तेरी बीवीको भी नही.. मेने बाबाको सब कहे दीया हे.. वो उन दोनोकी सादी करवा देगे..
सुधीर : भाइ आप फीकर मत करो.. अैसाही होगा.. (सरमाते धीरेसे हीच कीचाते) भाइ.. अब आपसे कैसे कहु..? वो.. वो.. भाइ.. मेने ओर नीशाने कुछ मीलके तैय कीया हे.. तो आप कल आकर अेक बार नीशाको पुछलो.. वोही आपको सब कुछ बता देगी..
देवायत : (समज गया फीरभी अनजान बनते) क्या..? इसमे क्या हे.. मे अभी इसे पुछ लेता हु..
सुधीर : (जटसे धीरेसे) नही नही भाइ.. अभी नही.. वो.. इस वक्त चारुभाभी भी साथमे हे.. तो.. प्लीज.. ये बात थोडी सीक्रेट हे.. आप कल अकेले आकर नीशाको मीललो.. वोही आपको सबकुछ बतायेगी..
देवायत : सुधीर.. सच बताना क्या तुम दोनोके बीच फीर कोइ जगडा तो नही हुआ..? कोइ सीरीयस मेटर तो नही..? अभी अभी साला रमेशके घर भी वोही सब चल रहाथा..
सुधीर : (हसते) अरे नही नही भाइ.. अैसी कोइ बात नही हे.. अबतो हम दोनोकी जींदगी मस्त चल रही हे.. बस.. बाकीका आप कल नीशाको पुछलेना.. हें..हें..हें..
देवायत : चल ठीक हे.. मे कल भाभीको मील लुगा.. ओर बता.. कुछ नया जाननेको हे..?
सुधीर : (धीरेसे) भाइ.. लगता हे हमारा रमेश अबभी नही सुधरा.. उस दिन चारुभाभीने उनको कीतनी फटकार लगाइ थी.. फीरभी वो जयाभाभीके पीछे पडा हे.. पता नही जयाभाभीने उनपे क्या जादु कर दीया हे.. वो हमारे रमेशको छोडनेके लीये तैयार ही नही हे.. साली बहुतही ठरकी औरत लगती हे..
देवायत : सुधीर.. अब हमे रमेशको कुछभी कहेनेकी जरुरत नही हे.. ओर तुमभी इस बारेमे उनसे बात मत करना.. जब उनको ठोकर लगेगी तब खुद सुधर जायेगा.. अभी उसे समजानेकी कोसीस करना बेकार हे.. ओर वैसेभी हमे उन दोनोकी असलीयके बारेमे पता नही चलता तबतक हम कीसीको दोस नही दे सकते.. वरना सोचो.. जयाभाभीके इतने बडे सादीके लायक दो दो संता हे.. फीरभी वो अैसा क्यु कर रही हे.. उनका कुछतो रीजन होगा..
सुधीर : भाइ.. ठीक कहा आपने.. मे कोसीस कर चुका हु.. वो बात माननेको तैयार ही नही हे.. सुना आजभी वो दोनो सहेरमे गयेथे.. दोनोही आगे पीछे आधे घंटेके गेपमे आये हे.. साला मेरी तराह अपनी बीवीकोतो सम्हाल नही सकता.. ओर दुसरेकी औरत के पीछे पडा हे.. फीरभी आप जो कहे रहेहो उसके बारेमे पता लगाना पडेगा..
देवायत : नही सुधीर.. तुम जो समज रहेहो बात वो नही हे.. बात कुछ ओर ही हे.. हमारा रमेश नही.. खुद जयाभाभी उनके पीछे पडी हे.. लगता हे वो रमेशको ब्लेकमेइल करके उनके साथ जबरदस्तीसे रीलेशन रखती हे.. वो अैसा क्यु कर रही हे हमे उसके बारेमे पता लगाना हे.. आज चारुभाभीकी बातोसे मुजे अैसा लगा हे..
सुधीर : भाइ.. तबतो हमारा रमेश बडी मुसीबतमे फस सकता हे.. हमे कुछ करना चाहीये..
देवायत : नही सुधीर.. वो मुसीबतमे फस सकता हे नही फस चुका हे.. अब हमे ठंडे दिमागसे सोचना पडेगा की रमेशको हम कैसे बहार नीकाले.. इसके लीये हमे कुछ समयका इन्तजार करना पडेगा.. बस तुम रमेशपे थोडा ज्यादा ध्यान रखना.. ओर उनकी सब खबर मुजे देते रहेना.. मामला अपने आपही बहार आजायेगा.. ये बात तुम मुनाको भी कहेना.. वोभी उनपे ध्यान रखेगा.. वो बहुत ही होशीयार लडका हे..
सुधीर : (हसते) ठीक हे भाइ.. लगता हे मुना आपका कुछ खास आदमी होगया हे.. हें..हे..हें.. हर वक्त आपके काममेही लगा रहेता हे.. हें..हें..हें..
देवायत : हां सुधीर.. वो कुछ देरके लीये कही जाता हे तो जाने देना.. बहुत कामका आदमी हे..
दोनोही बात कर रहेथे तब चारु ओर नीशाभी कीचनमे जातेही अेक दुसरेकी बाहोमे समा गइ.. ओर चारुने धीरेसे नीशाके बुब्स दबाते उनके होंठ चुम लीये.. तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते मुस्कुराने लगी.. तब चारु उनसे अलग होगइ.. ओर नीशाके दोनो हाथ पकडकर उनकी आंखोमे देखते हसने लगी.. तो नीशाने सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर अपनी नजरे जुकाते मुस्कुराती रही..

चारु : नीशा.. मेरी बहेन.. अब वक्त आगया हे.. कल तुमभी हमारी टीममे सामील होजाओगी.. तुम नीचे सफाइ बफाइ करके कंपलीट रहेना.. मे देवुको लेकर आजाउगी.. कल सीर्फ तुजे ही प्यार करना हे..
नीशा : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप साथमे रहेना.. मेने हमारी वंदुकी हालत देखी हे.. सुना हे इनका बहुत बडा हे.. क्या मे इसे जेल तो पाउगीनां..? रश्मी भाभी केह रहीथी.. वो हमारी चीखे नीकलवा देते हे..
चारु : (धीरेसे हसते) अरे तुम डरो मत.. मे साथ हुनां.. अैसा कुछ भी नही हे.. बस अेक बार इनका अंदर लेले.. फीरतो वो हमे जनतकी सेर करवाता हे.. जालीम बडेही जोसमे करता हे.. चीखे नीकलवाते भी हमे बहुत मजा देता हे.. उनसे अलग होनेका मनही नही करता.. बस थोडी हींमत रखना.. जब तुम उनका पहेली बार अंदर लोगीनां.. तो बस थोडा मामुली दर्द होगा.. जो हमे पहेली बार करनेमे होता हे.. ओर कुछ नही.. हम सादी सुदा औरतोको ज्यादा तकलीफ नही होती..
नीशा : (थोडा डरते) भाभी.. लेकीन मेतो अभी तक वर्जीन हु.. तो क्या मुजे ज्यादा तकलीफ नही होगी..?
चारु : (हींमत देते) अरे नही रे.. मे हुनां.. तो फीर तुम क्यु गभराती हो.. तुजे कुछ नही होगा.. चल इनके लीये कुछ बादाम अंजीर डालकर मस्त दुध बना.. ताकी कल उनमे ताकात आजाये.. हें..हें..हें..
नीशा : (सरमाकर हसते) क्या भाभी.. आपभीनां.. भाभी.. अेक बात पुछु..? आप दोनो कीतनी बार मीले हो..? आइमीन.. बीस्तरमे..
चारु : (सरमाते धीरेसे) नीशा.. हमे मीलनेके बहुत कम मौके मीलते हे.. फीरभी हम दोनोने अभी तक चारसे पांच बार मील चुके हे.. लेकीन जीतनी बार मीले मेरी जींदगीका हसीन यादगार लम्हा होजाता हे.. जालीमने मेरी हालत खराब करदेता हे.. क्या मस्त चुदाइ करता हे.. लेकीन अब फीकर नही हे.. वो वंदुसे सादी करने वाले हे.. ओर वंदु सादीके बाद भी हमारे घरपे रहेने वाली हे.. तो अब उनका हमारे घरपे आना जाना लगा रहेगा.. तो अब हमे मीलनेके बहुत मौके मीलेगे..
नीशा : (ठंडा ग्लासमे नीकालते) भाभी.. कीतना अजीब हेनां.. अेक आदमी कीतनी सारी औरतोको सम्हालके बैठा हे.. ओर अेक ये हमारे पती.. हमे ठीकसे प्यारभी नही कर पाते.. तभीतो हमे उनके पास जाना पडता हे.. चलीये.. उनको ठंडा पीला देते हे.. वरना कहेगे इतनी देर दोनो क्या कर रही हे.. हें..हें..हें..
चारु : हां चल.. (दोनो बहार ठंडा लाते) अरे.. दोनो भाइ आपसमे कबसे क्या खुसर पुसर कर रहेहो.. हमेभी बताइअेनां..
सुधीर : (हसते) अरे कुछभी नही भाभी.. बस हमतो अैसेही गांवकी बात कर रहे थे.. हें..हें..हें..
नीशा : (सबको ठंडा देते) हां तो हमेभी सुनाइअेना..
देवायत : भाभी.. वो हमारे गांवमे साहुकारके दोनो भाइके लडका लडकी भाग गये हे.. ओर उन्होने आपसमे कोर्टमे सादी भी करली हे.. रीस्तेमे दोनो ही कजीन भाइ बहेन हे.. ओर अभी मे उनके घरसे ही आया हु.. उन दोनोके मा बापने मेरे समजानेपे इस रीस्तेको मंजुर करलीया हे.. तो अेक दो दीनमे दोनो ही वापस आजायेगे तो उनके माता पीता दोनोकी सादी बडी ही धुमधामसे कर देगे ओर कुछ जानना हे..? हें..हें..हें..
नीशा : (सरमाते हसते) अरे.. आपने तो अेकही सास मे हमे सबकुछ बता दीया.. हें..हें..हें..
सुधीर : भाभी.. अबतो आये दिन हमारे ओर आजु बाजुके गांवमे आपको अैसा बहुत कुछ सुननेको ओर दिखनेको मीलेगा.. भाइ.. लगता हे आजु बाजुके गांवमे भी अैसा बहुत कुछ चल रहा हे.. अब आप जल्दीही यहा अेक होस्पीटल खुलवादो.. हें..हें..हें..
चारु : (जोरोसे हसते) देवरजी.. आपको अैसा क्यु लगता हे की आजु बाजुके गांवमेभी अैसा हो रहा हे..?
सुधीर : (हसते) भाभी.. आपतो जानती हे.. हमारे आजु बाजुके गांवमे सीर्फ मेही अेक अकेला डोक्टर हु.. तो कइ ओरते ओर कुवारी लडकीया कीसीभी बीमारीके बहाने मेरे यहा आती हे.. ओर सबसे छुपकर मुजसे प्रेगनन्सी रोकनेकी टेबलेट लेकर चली जाती हे.. क्युकी गांवकी लडकी कीसी मेडीकल स्टोरमे अैसी टेबलेट मांगने जाये तो लोगोको उनपे सक होजाता हे.. ओर वो अैसी टेबलेट मांगनेमे भी बहुतही सरमाती हे.. इसीलीये मेरे पाससे लेजाती हे.. हें..हें..हें..
चारु : (आस्चर्यसे हसते) हे भगवान.. तबतो आने वाले दिनोमे हमे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. हें..हें..हें..
नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. अब आप गांवमे जल्द ही अेक बडी होस्पीटलके बारेमे सोचीये..
देवायत : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सायद आजकल रमेश इसीके लीये सहेरका चकर काट रहा हे.. लगता हे वो जल्ही हमे खुसखुबर देगे.. की हमे होस्पीटलके लीयेभी जमीन ह मील गइ हे..
चारु : (थोडा मुह बीगाडते) हा.. आप होस्पीटलकी जमीनका इन्तजार करते रहीये.. वोतो कही ओर बंजर जमीनको हरी भरी करनेमे लगे हुअे हे..
कहातो नीशा सुधीर ओर देवायत तीनोही अेक दुसरेके सामने देखकर जोरोसे हसने लगे.. तीनो ही चारुका इसारा समज गयेथे.. फीर तीनोको हसते हुअे देखकर चारु भी सरमाके हसने लगी.. फीर कुछ देर बाते करके देवायत वहासे नीकलनेके लीये खडा होगया.. तो साथमे चारुभाभीभी जानेके लीये खडी होगइ.. तो नीशाने सबसे छुपकर चारुभाभीकी ओर देखते हसते हुअे अेक आंख मारदी..
तो चारु बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर नीशाकी ओर बडी आंख करते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनोही बहार नीकलने लगे.. तब सुधीर आगे चलने लगा.. तो नीशा जान बुजकर पीछे रेह गइ.. ओर मौका मीलते ही वो देवायतका हाथ पकडलेती हे.. ओर उनके कानके पास मुल लेजाते उनको कल रातमे आनेको कहेती हे.. तो देवायतभी उनकी ओर देखके हसने लगा.. फीर वो ओर चारु दोनोसे विदाय लेकर अपने घरकी ओर चलने लगे.. तभी....
कन्टीन्यु
चारु : (हसते) अरे देवरजी येभी कोइ कहेनेकी बात हे.. मे हुनां.. नीशा तो मेरी छोटी बहेन ही हे.. ओर रातमेभी मे उनके पास ही रहुगी.. तो आप फीकर मत करना..
नीशा : (सबको पानी देते) सुधीर.. तुम मेरी फीकर मत करो.. भाभी हे हमारे देवरजी हे.. रश्मीभाभी वंदु सब हे.. तो यहा मुजे कोइ तकलीफ नही हे.. बस तुम अपना खयाल रखना..
सुधीर : (खुस होते) ठीक हे ठीक हे.. मेतो बस.. अैसेही केह रहा था.. नीशा आज हम सबके लीये मस्त दुध कोल्ड्रींक बनादे.. कीतने दिनोके बाद आज देवु आया हे..
नीशा : (हसते) हां वोतो मे बना दुगी.. पहेले मुजे मेरे देवरसे कुछ पुछने तो दो.. देवरजी.. सुना हे वो साहुकारके लडका लडकी दोनो ही धरसे भाग गये हे..? क्या ये सच हे..? हें..हें..हें..
सुधीर : (जोरोसे हसते) अरे तुजे इनमे इतनी बडी दिल चस्पी क्यु हे..? पहेले इनको कुछ ठंडातो पीलाओ.. फीर वो हमसे बात करेगे.. हें..हें..हें..
चारु : (हसते हुअे खडी होते) हां नीशा.. चल पहेले हम दोनो इनके लीये कुछ बनाते हे.. फीर हम आरामसे बैठकर बाते करेगे.. चल..
कहेते दोनोही देवायतकी ओर कातील मुस्कान करते कीचनमे चली गइ.. तब सुधीर कीचनकी ओर देखते धीरेसे सरकके देवायतके पास आकर बैठ गया.. ओर दोनोही धीरेसे बाते करने लगे..
सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ.. आपने सुना.. सायद कल या परसो मुना ओर बरखा उनकी मम्मीको लेकर कही मंदिरपे जाने वाले हे.. वो इस बारेमे कल आपसे बात करेगा.. कहेता था ठाकुरसाहेबने मंदिरका इन्तजाम करदीया हे..
देवायत : हा सुधीर.. मे उनको हमारे आश्रमपे भेज रहा हु.. वहा बाबा उन दोनोकी सादी करवा देगे.. ओर सुन.. इस बारेमे अभी कीसीको पता नही चलना चाहीये.. तेरी बीवीको भी नही.. मेने बाबाको सब कहे दीया हे.. वो उन दोनोकी सादी करवा देगे..
सुधीर : भाइ आप फीकर मत करो.. अैसाही होगा.. (सरमाते धीरेसे हीच कीचाते) भाइ.. अब आपसे कैसे कहु..? वो.. वो.. भाइ.. मेने ओर नीशाने कुछ मीलके तैय कीया हे.. तो आप कल आकर अेक बार नीशाको पुछलो.. वोही आपको सब कुछ बता देगी..
देवायत : (समज गया फीरभी अनजान बनते) क्या..? इसमे क्या हे.. मे अभी इसे पुछ लेता हु..
सुधीर : (जटसे धीरेसे) नही नही भाइ.. अभी नही.. वो.. इस वक्त चारुभाभी भी साथमे हे.. तो.. प्लीज.. ये बात थोडी सीक्रेट हे.. आप कल अकेले आकर नीशाको मीललो.. वोही आपको सबकुछ बतायेगी..
देवायत : सुधीर.. सच बताना क्या तुम दोनोके बीच फीर कोइ जगडा तो नही हुआ..? कोइ सीरीयस मेटर तो नही..? अभी अभी साला रमेशके घर भी वोही सब चल रहाथा..
सुधीर : (हसते) अरे नही नही भाइ.. अैसी कोइ बात नही हे.. अबतो हम दोनोकी जींदगी मस्त चल रही हे.. बस.. बाकीका आप कल नीशाको पुछलेना.. हें..हें..हें..
देवायत : चल ठीक हे.. मे कल भाभीको मील लुगा.. ओर बता.. कुछ नया जाननेको हे..?
सुधीर : (धीरेसे) भाइ.. लगता हे हमारा रमेश अबभी नही सुधरा.. उस दिन चारुभाभीने उनको कीतनी फटकार लगाइ थी.. फीरभी वो जयाभाभीके पीछे पडा हे.. पता नही जयाभाभीने उनपे क्या जादु कर दीया हे.. वो हमारे रमेशको छोडनेके लीये तैयार ही नही हे.. साली बहुतही ठरकी औरत लगती हे..
देवायत : सुधीर.. अब हमे रमेशको कुछभी कहेनेकी जरुरत नही हे.. ओर तुमभी इस बारेमे उनसे बात मत करना.. जब उनको ठोकर लगेगी तब खुद सुधर जायेगा.. अभी उसे समजानेकी कोसीस करना बेकार हे.. ओर वैसेभी हमे उन दोनोकी असलीयके बारेमे पता नही चलता तबतक हम कीसीको दोस नही दे सकते.. वरना सोचो.. जयाभाभीके इतने बडे सादीके लायक दो दो संता हे.. फीरभी वो अैसा क्यु कर रही हे.. उनका कुछतो रीजन होगा..
सुधीर : भाइ.. ठीक कहा आपने.. मे कोसीस कर चुका हु.. वो बात माननेको तैयार ही नही हे.. सुना आजभी वो दोनो सहेरमे गयेथे.. दोनोही आगे पीछे आधे घंटेके गेपमे आये हे.. साला मेरी तराह अपनी बीवीकोतो सम्हाल नही सकता.. ओर दुसरेकी औरत के पीछे पडा हे.. फीरभी आप जो कहे रहेहो उसके बारेमे पता लगाना पडेगा..
देवायत : नही सुधीर.. तुम जो समज रहेहो बात वो नही हे.. बात कुछ ओर ही हे.. हमारा रमेश नही.. खुद जयाभाभी उनके पीछे पडी हे.. लगता हे वो रमेशको ब्लेकमेइल करके उनके साथ जबरदस्तीसे रीलेशन रखती हे.. वो अैसा क्यु कर रही हे हमे उसके बारेमे पता लगाना हे.. आज चारुभाभीकी बातोसे मुजे अैसा लगा हे..
सुधीर : भाइ.. तबतो हमारा रमेश बडी मुसीबतमे फस सकता हे.. हमे कुछ करना चाहीये..
देवायत : नही सुधीर.. वो मुसीबतमे फस सकता हे नही फस चुका हे.. अब हमे ठंडे दिमागसे सोचना पडेगा की रमेशको हम कैसे बहार नीकाले.. इसके लीये हमे कुछ समयका इन्तजार करना पडेगा.. बस तुम रमेशपे थोडा ज्यादा ध्यान रखना.. ओर उनकी सब खबर मुजे देते रहेना.. मामला अपने आपही बहार आजायेगा.. ये बात तुम मुनाको भी कहेना.. वोभी उनपे ध्यान रखेगा.. वो बहुत ही होशीयार लडका हे..
सुधीर : (हसते) ठीक हे भाइ.. लगता हे मुना आपका कुछ खास आदमी होगया हे.. हें..हे..हें.. हर वक्त आपके काममेही लगा रहेता हे.. हें..हें..हें..
देवायत : हां सुधीर.. वो कुछ देरके लीये कही जाता हे तो जाने देना.. बहुत कामका आदमी हे..
दोनोही बात कर रहेथे तब चारु ओर नीशाभी कीचनमे जातेही अेक दुसरेकी बाहोमे समा गइ.. ओर चारुने धीरेसे नीशाके बुब्स दबाते उनके होंठ चुम लीये.. तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते मुस्कुराने लगी.. तब चारु उनसे अलग होगइ.. ओर नीशाके दोनो हाथ पकडकर उनकी आंखोमे देखते हसने लगी.. तो नीशाने सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर अपनी नजरे जुकाते मुस्कुराती रही..

चारु : नीशा.. मेरी बहेन.. अब वक्त आगया हे.. कल तुमभी हमारी टीममे सामील होजाओगी.. तुम नीचे सफाइ बफाइ करके कंपलीट रहेना.. मे देवुको लेकर आजाउगी.. कल सीर्फ तुजे ही प्यार करना हे..
नीशा : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप साथमे रहेना.. मेने हमारी वंदुकी हालत देखी हे.. सुना हे इनका बहुत बडा हे.. क्या मे इसे जेल तो पाउगीनां..? रश्मी भाभी केह रहीथी.. वो हमारी चीखे नीकलवा देते हे..
चारु : (धीरेसे हसते) अरे तुम डरो मत.. मे साथ हुनां.. अैसा कुछ भी नही हे.. बस अेक बार इनका अंदर लेले.. फीरतो वो हमे जनतकी सेर करवाता हे.. जालीम बडेही जोसमे करता हे.. चीखे नीकलवाते भी हमे बहुत मजा देता हे.. उनसे अलग होनेका मनही नही करता.. बस थोडी हींमत रखना.. जब तुम उनका पहेली बार अंदर लोगीनां.. तो बस थोडा मामुली दर्द होगा.. जो हमे पहेली बार करनेमे होता हे.. ओर कुछ नही.. हम सादी सुदा औरतोको ज्यादा तकलीफ नही होती..
नीशा : (थोडा डरते) भाभी.. लेकीन मेतो अभी तक वर्जीन हु.. तो क्या मुजे ज्यादा तकलीफ नही होगी..?
चारु : (हींमत देते) अरे नही रे.. मे हुनां.. तो फीर तुम क्यु गभराती हो.. तुजे कुछ नही होगा.. चल इनके लीये कुछ बादाम अंजीर डालकर मस्त दुध बना.. ताकी कल उनमे ताकात आजाये.. हें..हें..हें..
नीशा : (सरमाकर हसते) क्या भाभी.. आपभीनां.. भाभी.. अेक बात पुछु..? आप दोनो कीतनी बार मीले हो..? आइमीन.. बीस्तरमे..
चारु : (सरमाते धीरेसे) नीशा.. हमे मीलनेके बहुत कम मौके मीलते हे.. फीरभी हम दोनोने अभी तक चारसे पांच बार मील चुके हे.. लेकीन जीतनी बार मीले मेरी जींदगीका हसीन यादगार लम्हा होजाता हे.. जालीमने मेरी हालत खराब करदेता हे.. क्या मस्त चुदाइ करता हे.. लेकीन अब फीकर नही हे.. वो वंदुसे सादी करने वाले हे.. ओर वंदु सादीके बाद भी हमारे घरपे रहेने वाली हे.. तो अब उनका हमारे घरपे आना जाना लगा रहेगा.. तो अब हमे मीलनेके बहुत मौके मीलेगे..
नीशा : (ठंडा ग्लासमे नीकालते) भाभी.. कीतना अजीब हेनां.. अेक आदमी कीतनी सारी औरतोको सम्हालके बैठा हे.. ओर अेक ये हमारे पती.. हमे ठीकसे प्यारभी नही कर पाते.. तभीतो हमे उनके पास जाना पडता हे.. चलीये.. उनको ठंडा पीला देते हे.. वरना कहेगे इतनी देर दोनो क्या कर रही हे.. हें..हें..हें..
चारु : हां चल.. (दोनो बहार ठंडा लाते) अरे.. दोनो भाइ आपसमे कबसे क्या खुसर पुसर कर रहेहो.. हमेभी बताइअेनां..
सुधीर : (हसते) अरे कुछभी नही भाभी.. बस हमतो अैसेही गांवकी बात कर रहे थे.. हें..हें..हें..
नीशा : (सबको ठंडा देते) हां तो हमेभी सुनाइअेना..
देवायत : भाभी.. वो हमारे गांवमे साहुकारके दोनो भाइके लडका लडकी भाग गये हे.. ओर उन्होने आपसमे कोर्टमे सादी भी करली हे.. रीस्तेमे दोनो ही कजीन भाइ बहेन हे.. ओर अभी मे उनके घरसे ही आया हु.. उन दोनोके मा बापने मेरे समजानेपे इस रीस्तेको मंजुर करलीया हे.. तो अेक दो दीनमे दोनो ही वापस आजायेगे तो उनके माता पीता दोनोकी सादी बडी ही धुमधामसे कर देगे ओर कुछ जानना हे..? हें..हें..हें..
नीशा : (सरमाते हसते) अरे.. आपने तो अेकही सास मे हमे सबकुछ बता दीया.. हें..हें..हें..
सुधीर : भाभी.. अबतो आये दिन हमारे ओर आजु बाजुके गांवमे आपको अैसा बहुत कुछ सुननेको ओर दिखनेको मीलेगा.. भाइ.. लगता हे आजु बाजुके गांवमे भी अैसा बहुत कुछ चल रहा हे.. अब आप जल्दीही यहा अेक होस्पीटल खुलवादो.. हें..हें..हें..
चारु : (जोरोसे हसते) देवरजी.. आपको अैसा क्यु लगता हे की आजु बाजुके गांवमेभी अैसा हो रहा हे..?
सुधीर : (हसते) भाभी.. आपतो जानती हे.. हमारे आजु बाजुके गांवमे सीर्फ मेही अेक अकेला डोक्टर हु.. तो कइ ओरते ओर कुवारी लडकीया कीसीभी बीमारीके बहाने मेरे यहा आती हे.. ओर सबसे छुपकर मुजसे प्रेगनन्सी रोकनेकी टेबलेट लेकर चली जाती हे.. क्युकी गांवकी लडकी कीसी मेडीकल स्टोरमे अैसी टेबलेट मांगने जाये तो लोगोको उनपे सक होजाता हे.. ओर वो अैसी टेबलेट मांगनेमे भी बहुतही सरमाती हे.. इसीलीये मेरे पाससे लेजाती हे.. हें..हें..हें..
चारु : (आस्चर्यसे हसते) हे भगवान.. तबतो आने वाले दिनोमे हमे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. हें..हें..हें..
नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. अब आप गांवमे जल्द ही अेक बडी होस्पीटलके बारेमे सोचीये..
देवायत : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सायद आजकल रमेश इसीके लीये सहेरका चकर काट रहा हे.. लगता हे वो जल्ही हमे खुसखुबर देगे.. की हमे होस्पीटलके लीयेभी जमीन ह मील गइ हे..
चारु : (थोडा मुह बीगाडते) हा.. आप होस्पीटलकी जमीनका इन्तजार करते रहीये.. वोतो कही ओर बंजर जमीनको हरी भरी करनेमे लगे हुअे हे..
कहातो नीशा सुधीर ओर देवायत तीनोही अेक दुसरेके सामने देखकर जोरोसे हसने लगे.. तीनो ही चारुका इसारा समज गयेथे.. फीर तीनोको हसते हुअे देखकर चारु भी सरमाके हसने लगी.. फीर कुछ देर बाते करके देवायत वहासे नीकलनेके लीये खडा होगया.. तो साथमे चारुभाभीभी जानेके लीये खडी होगइ.. तो नीशाने सबसे छुपकर चारुभाभीकी ओर देखते हसते हुअे अेक आंख मारदी..
तो चारु बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर नीशाकी ओर बडी आंख करते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनोही बहार नीकलने लगे.. तब सुधीर आगे चलने लगा.. तो नीशा जान बुजकर पीछे रेह गइ.. ओर मौका मीलते ही वो देवायतका हाथ पकडलेती हे.. ओर उनके कानके पास मुल लेजाते उनको कल रातमे आनेको कहेती हे.. तो देवायतभी उनकी ओर देखके हसने लगा.. फीर वो ओर चारु दोनोसे विदाय लेकर अपने घरकी ओर चलने लगे.. तभी....
कन्टीन्यु






















