Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 33 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६३

आज जीस तराह लखनने उनका साथ दीया.. ओर उन्होने नीलमको कुछभी नही कहा.. बजाये डांटनेसे उनको प्यारसे समजा रहेथे.. तो उनको अपनी लतादीदीसे बजाये अपने लखन जीजाजी अच्छे लगने लगे.. ओर उन्होने ही नीलमको अपने साथ रखनेकी बातकी.. तब ना नीलमको पताथा ओर नाही लताको पता था.. की लखनने नीलम ओर उनकी मां रमाको पानेकी राह आसान करदी हे.. ओर आज लखनके साथ बात करके उनकी मां रमा भी लखनकी ओर पुरी तराह ढल चुकी थी....अब आगे

तीनोही हवेलीपे पहोंच गये.. तब उनको लगाकी सब लोग खाना खाकर आराम कर रहे हे.. लेकीन उनको पता नही थाकी इस वक्त देवायतके रुममे सृती ओर पुनमकी जबरदस्त धमाकेदार चुदाइ हो रही हे.. दोनोही सामको मंजुके पास चली जाने वालीथी.. तो पुनम ओर सृतीने देवायतको दोपहोरको खाना खानेके बादही दबोच लीयाथा.. देवायतने सृतीकी दो बार जमकर चुदाइ करली थी.. उनका पुरा सरीर तोडके रख दीयाथा..





तो वो अ‍ेक साइडमे दर्दके मारे कणसते अपनी चुतपे हाथ रखके सो रहीथी.. तब देवायत उछल उछलके पुनमकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. अभी तक वो पुनमकी चुतको भी अ‍ेक बार भर चुकाथा.. फीरभी बीना लंड बहार नीकाले वो अभीभी पुनमको चोद रहाथा.. तब कुछही देरमे वो पुनमकी चुतमे दुबारा जड गया.. तब साथमे पुनमभी जडने लगी.. ओर जडते देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. पुनम अबतक पांच बार जड चुकीथी.. तब पुनमको लगाकी अब देवायत उनको छोड देगा..





लेकीन फीरभी देवायतने पुनमको चोदना जारी रखा.. तब पुनम उसे प्यारसे छोडनेकी मनते करने लगी.. आज देवायतने पुनमको चोद चोदके उनकी अ‍ेक अ‍ेक नब्सको ढीली करदी.. इतना तो वो अपने भाइके साथ अपनी पहेली सुहागरात मे चुदी थी.. ओर दुसरी बार जब वो उनके भाइसे प्रेगनेन्ट हुइ तब चुदीथी.. ओर आज फीर अ‍ेक बार देवायत उनको जबरदस्त तरीकेसे चोद रहाथा.. पुनम पुरी तराह टुट चुकीथी..

तो पुनम देवायतका तीसरी बार जडनेका बेसब्रीसे इन्तजार कर रहीथी.. चुदाइ जारीथी तब उनके लंड ओर चुतके बीच रास्ता बनाते उनका कामरस बहारकी ओर बेह रहा था.. पुनमकी पुरी चुत देवायतके पानीसे भरी हुइ थी.. ओर वो बेसुध्ध जैसी हालतमे पडी देवायतसे चुद रहीथी.. पुरे रुममे सनाटा छाया हुआ था.. ओर सीर्फ फच..फच..फच..की आवाज आ रही थी.. ओर आखीर देवायत अ‍ेक बार फीर जड गया.. ओर जडतेही जोरोसे अपने लंडको पुनमकी चुतसे खीचलीया.. तब पुनम दर्दसे कांपते हील गइ..





तो बहारकी ओर लखन लता ओर नीलमके आतेही नीलमने अपना सामान लेलीया.. ओर लताके पीछे चलने लगी.. तब लखनभी उन दोनोके पीछे उपर चला गया.. लताने नीलमको उपरही अपने बगलमे अ‍ेक अलग कमरेमे ठहेराया.. ओर उसे आराम करनेको कहेकर वो अपने रुममे लखनके पास चली गइ.. तब लखनने उसे दबोच लीया.. तो लता सरमाकर उनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तब..

लता : (हसते दबी आवाजमे) जानु.. प्लीज.. अभी कुछभी नही.. इस कमीनीने मुड ही खराब कर दीया.. आप रात होनेका इन्तजार कीजीये.. आजमे आपको सोने नही दुगी.. ये तीन दिन आपसे दुर रही तो अ‍ैसा लगाकी मे तीन साल आपसे दुर रही हु.. हें..हें..हें..

लखन : लता.. अब वो इधरतो आगइ हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. फीर हम रातमे आरामसे करेगे..

लता : (सरमाते हसते) आपभीनां.. मानोगे नही.. चलीये.. लेकीन अभी सीर्फ अ‍ेकही बार.. समजे..?

लखन : (हसते) अरे हां बाबा.. सीर्फ अ‍ेकही बार.. फीर चल मुजे तुमसे कुछ जरुरी बातभी करनी हे..

लता : (लखनकी बाहोमे उनके सीनेको सहेलाते) जानु.. कीस बारेमे बात करनी हे..?

लखन : (गोदमे उठाते बेडकी ओर चलते) हमारी पुनोदीदीके बारेमे.. चल पहेले प्यार.. फीर बाते.. हें..हें..हें..

लता : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) पुनोदीदीके बारेमे..? लेकीन क्या..? क्या कुछ जरुरी बाते हे..?

लखन : (बेडपे लीटाते) अरे हां भाइ.. अब चुपचाप लेटी रहो.. कुछ भी मत बोलना.. पहेले मुजे जटसे अंदर डालनेदे..





लता : (सारीको कमर तक उची करते पैर फैलाते) बहुत कमीने हो आप.. अगर मेरे बीना रहे नही सकते तो फीर मुजे वहा रुकनेको क्यु केह रहेथे..? लो करलो..

लता बीना कपडे नीकाले अ‍ैसेही कमर तक सरीको उची करते लेट गइ तो लखननेभी सीर्फ पेन्ट नीचेकी ओर सरकादी.. ओर लताके उपर चड गया.. लताकी चुततो पहेलेसे ही गीली थी.. उसने लखनका लंड पकडकर अपनी चुतका रास्ता दीखा दीया.. तब लखनने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड लताकी चुतमे उतार दीया.. तब कुछही देरमे दोनोको बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. लता अपनी कमर उछाल उछालके लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते चुदवाती रही..





तब कुछही देरकी घमासन चुदाइके बाद दोनोही अकडने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीचते जडने लगे.. लखन जडकर लताके सीनेपे सर रखके सांत होगया.. तब लता उनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही.. लखनका लंड अबभी लताकी चुतमे था.. फीर कुछ देरके बाद दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर नहाकर फीरसे कपडे पहेनलीये ओर बेडपे आकर दोनो अ‍ेक दुसरोको चीपककर लेट गये तब..
 
लता : (बाहोमे भीचते मुस्कुराते) हां जानु.. अब कहो.. आपको पुनमदीदीके बारेमे क्या बात करनी थी..?

लखन : (गालको चुमते) लता.. आज मुजे दीदीने उनके बारेमे सबकुछ बतादीया.. उनकी सभी सचाइ बतादी.. मे आज बहुत खुस हु.. क्युकी दीदी ओर भाइने भी हमारे खानदानकी परंपरा आपसमे सादी करके नीभाइ..

लता : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? दीदीने आपको सबकुछ बता दीया..? सुनके आपको बुरा नही लगा..?

लखन : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) नही लता.. बल्की मुजेतो बहुत खुसी हुइ.. मुजे अ‍ेक प्यारीसी भाभी मील गइ.. ओर तुजे अपनी जेठानी.. इस कमीनेके साथ सादीसे तो अच्छाथा वो भाइकी सुहागन बनके इधर ही रहेती.. समजमे नही आता पुनमदीदीने भाइसे सादी करली थी तो फीर इस कमीने धिरेनके साथ सादी करनेकी क्या जरुरत थी..? दीदीकी अ‍ैसी कोनसी मजबुरी थी..? जो उनको धिरेनसे सादी करनी पडी..

लता : (मुस्कुराते) तो क्या आपने दीदीको उनकी धिरेनके साथ सादीकी मजबुरीके बारेमे नही पुछा..? हें..हें..हें..

लखन : (प्यारसे गाल सहेलाते) हां.. पुछाथा.. तो कहाकी मे आपको नही बता पाउगी.. लता मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे.. आप उन्हीसे पुछकर सबकुछ जान लेना.. लता मुजे दीदीके बारेमे सबकुछ जानना हे.. बतानां..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. अगर दीदीने नही कहा होता तो मे ये बात आपको सायद कभी नही बताती.. सुनो.. दीदीको भाइसे सादी करनेके लीये खुद बाबाने कहा था.. ताकी उनकी कोखसे जो बच्ची होगी.. उनकी बच्ची वो हमारे खानदामे पैदा होने वाले राजाकी रानी होगी..

ओर बाबाने येभी कहाथा की इसके लीये हमारे खानदानके अंससे ही बच्ची होनी चाहीये.. इसीलीये जब दीदीकी सादी धिरेनसे हुइ तब वो सादीसे पहेलेही ओल रेडी भाइसे पे्रगनेन्ट हो चुकीथी.. तो इसलीये उनकी बच्चीको बापका नाम देनेके लीये धिरेनके साथ सादी जरुरी थी..

लखन : (खुसीसे मुस्कुराते) क्या..? दीदी इस वक्त प्रेगनेन्ट हे..? तो मे मामा ओर तुम मामी होजाओगी.. हें..हें..हें.. लता.. तो इसमे दीदीको धिरेनके साथ सादी करनेकी क्या जरुरत थी.. इस बच्चीको भाइ खुद अपना नाम दे सकते थे.. इनमे कीसीसे डरनेकी क्या जरुरत थी..?

लता : (प्यारसे गाल सहेलाते) नही लखन.. आप समजते नही.. क्या आप नही जानते पीछली तीन पीढीसे हमारे खानदाके साथ कीसीभी गांवके लोगोने रीस्ता क्यु नही रखाथा..? इसीलीये क्युकी हमारे खानदानमे सभीने अपनी बहेनोसे सादी करली थी.. तो सभी गांववाले अ‍ैसे रीस्तोके खीलाफ थे..

अगर भाइ ओर पुनोदीदी भी वोही करते तो क्या होता..? आजभी गांवके साथ हमारा रीस्ता नही होता.. आज सबलोग भाइको ओर हमारे खानदानको कीतनी इजत देते हे.. वो सबलोग आजभी भाइको अपना राजा मानते हे.. इसीलीये भाइ ओर दीदीने मीलकर ये कदम उठाया..

लखन : (मुस्कुराते होंठ चुमते) लता.. बाततो तेरी सही हे.. लेकीन इस चकरमे भाइ ओर दीदीतो अलग हो गयेनां..? देखोना तुम सीर्फ तीन दिनके लीये मायके गइ.. तो ना मे तेरे बीना रेह सका ओर नाही तुम.. तो फीर सोचो भाइ ओर दीदी अलग रहेते हे.. तो उनपे क्या बीतती होगी..? इस बारेमे कभी सोचा हे..?

लता : (मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) लखन.. मुजे खुसी हुइ आप भाइ ओर दीदीके बारेमे इतना सोचते हे.. लेकीन आप फीकर मत करो.. दीदीने मुजे बस इतनाही कहा हे.. की बच्चीको जन्म देतेही वो हमेसाके लीये यहा भाइके साथ रहेने आजायेगी.. बस दीदीने मुजे सीर्फ इतना ही कहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदीभीनां.. कभी कभी वो मुजे रहस्यमय लगती हे.. मेरी प्यारीसी भाभी.. हें..हें..हें..

लता : (हसते गालपे चपत मारते) क्या कहा..? अगर दीदीने सुनलीया तो आपकी खुब पीटाइ करेगी.. हें..हें..हें.. लखन.. प्लीज आपको अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. अब आप इस बारेमे दीदीको ओर कुछ मत पुछना.. वो सर्मीन्दा होजायेगी.. मेरी ननंद ओर जेठानीसे ज्यादा वोभी भावना भाभीकी तराह मेरी बेस्ट सहेली हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे.. अब कोइ सवाल नही पुछुगा. बस..? मेरी प्यारी दीदी.. हें..हें..हें..

दोनोही प्यारभरी बाते कर रहेथे.. तब उनको पता नही थाकी नीलुके पास धिरेनने दिया हुआ मोबाइल फोनभी हे.. नीलम जैसेही रुमके अंदर चली गइ.. दरवाजा बंध करके सीधाही फोन नीकालकर बेडपे बैठ गइ ओर धिरेनको फोन लगाकर सब कुछ बता दीयाकी कारमे तीनोके बीच क्या बाते हुइ.. उसने धिरेनको बता दीयाकी अब लतादीदी उनको होस्टेल छुडवा रही हे.. ओर उनको अपने घरपे उनके साथ रखेगी..

वो अब घरसे ही स्कुल आती जाती रहेगी.. सुनके धिरेनने थोडी राहतकी सांसली.. उनको लगाकी वो स्कुल टाइममे नीलमको मील सकता हे.. ओर उसने कुछ सोचते नीलमको अ‍ेक बार फीर उनके सब डोक्युमेन्टकी याद दीलवाइ.. क्युकी धिरेन अब जल्दसे जल्द मकान लेकर नीलमके साथ सादी करलेना चाहता था.. तबतक दोनो इसी तराह फोनसे ही कोन्टेक मे रहेगे.. कहेते धिरेनसे बात करली..
 
तो सहेरमे दोपहोरको जब बंसी लखनकी जीप लेकर सहेरपे उनके बंगलोपे पहोंचा तब श्रीधर ओर जयश्री दोनोही उधर थे.. श्रीधर बंसीको देखतेही खुस होगया ओर उनको गले लगा लीया.. तो बंसीको देखकर जयश्री बहुतही सर्मसार होगइ.. उसने सलवार कुर्ता पहेनाथा.. मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र था.. ओर उसने सरमाते हुअ‍े बंसीको नमस्ते कीया.. ओर जागृतीके बारेमे खबर पुछली..

जयश्री : (मुस्कुराते) कहो बंसीभैया.. क्या कर रहीहे.. जागु..?

बंसी : (हसते) बस भाभी.. वो घरपेही थी.. आपको याद कर रहीथी.. जब मेने उनको कहाकी मे तेरी सहेलीको लेने जा रहा हु.. तो सुनके बहुत खुस होगइ.. कहेतीथी उनको सीधे यही लेकर आना.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सर्मसार होते धीरेसे) बंसीभैया.. मे जागुको अपनी बहेन मानती हु.. तो इस नाते आपभी मेरे भाइ हुअ‍े.. तो मुजे भाभी क्यु कहे रहे हो..? वो लखन भैयाभी मुजे भाभी भाभी कहेकर छेडते हे.. हें.. हें.. हें..

श्रीधर : (हसते) जयश्री.. मेरे सभी फ्रेन्ड मेरे भाइ भीतो हे.. तो तुजे भाभी ही कहेगे.. हें..हें..हें..

जयश्री (सरमाते हसते) सबके सब कमीने हो.. चलो ठीक हे.. वैसे बंसी भैया.. क्या आपकी जागुसे कोइ बात हुइ..? आइ..मीन.. क्या उसने आपको कुछ कहा..?

बंसी : (सब समज गया फीरभी अनजान बनते) नही भाभी.. अभीतो कुछ बात नही हुइ.. लेकीन लगता हे अ‍ेक दो दिनमे हमारी बात होजायेगी.. हें..हें..हें.. भाभी.. आपकोतो उनके बारेमे सब पता होगा.. तो फीर आपही कहीयेनां वो मुजसे क्या कहेने वाली थी.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते हसते) नही.. तो फीर वोही आपको बतायेगी.. छोडीये सब.. पहेले ये बताइअ‍े हमारे घरमे अभी कैसा माहोल हे..? क्या सचमे हमारे मम्मी पापा मान गये..?

बंसी : (मुस्कुराते) हां भाभी.. लखनभैया ने उनके बडेभाइको आपके घर आपके मम्मी पापाको समजाने भेजाथा.. तो आपके मम्मी पापा मान गये.. इतना ही नही वो आप दोनोकी सादीभी वहा धुमधामसे करवाना चाहते हे.. इसीलीये तो मे आप दोनोको लेने आया हु..

श्रीधर : (हसते) आइ कान्ट बीलीव.. ये लखनभैया ओर बडे भैयाभी कमालके हे.. हें..हें..हें.. पता नही उसने बडे पापा ओर मौसीको कैसे मनवा लीया..

जयश्री : (सरमाते हसते) भाइ.. जोभी हो.. वो मान गये यही हमारे लीये बहुत हे.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (हसते) बंसी.. हमारी बात छोड.. ये बता.. वो हमारे मुनाका क्या हुआ..? बात कुछ आगे बढी..?

बंसी : (हसते) भाइ.. मेने आज सुबह ही उनको देखा.. वो उनकी मम्मी ओर बरखा भाभीको लेकर कही बसने जा रहा था.. भाइ लगता हे.. वो कीसी मंदिरमे सादी करने गये होगे.. हें..हें..हें..

जयश्री : (हसते) लेकीन बंसीभैया.. उनकी मम्मी इतनी आसानीसे मान कैसे गइ..? क्या उनके बापुको अभी इस बारेमे कुछ नही पतानां..?

बंसी : (हसते) हां भाभी.. उनके बापुको अभी कुछ नही पता.. लेकीन उनकी मम्मी उन दोनोकी सादी जल्दी करदेना चाहती हे.. उनका केसभी आप दोनोकी तराह हे.. हें.. हें..हें..हें.. ये सब छोडो.. पहेले ये बताओ.. क्या आपने अपना सब पेपर कंपलीट करलीया हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) भाइ.. आतेही हमने अ‍ेक वकील रखलीया था.. तो दुसरे दिन सुबह हम दोनो उनके साथ अ‍ेक गांवमे चले गये थे.. वहा उन्होने गांवके मंत्रीको बुलाकर मंदिरमे हमारी सादी करवादी.. ओर वहीसे हमे अ‍ेक सादीका दाखला मील गया.. तो उसी दिन वकीलने मेरेज सर्टीके लीये कोर्टमे अ‍ेप्लीकेशन देदी थी.. तो अभी हमे वही लेने जाना हे..

बंसी : (हसते) भाइ तो आप टाइम वेस्ट मत करो.. अपना बोरीया बीस्तरा समेटलो.. ओर हम वहीसे सर्टी लेकर गांव चले जायेगे.. आपको पहेले हवेलीपे चलना हे.. वहा बडेभैया आपके मम्मी पापाको बुला लेगे.. भाइने कहा हे वो आप दोनोको कोइ सवाल नही करेगे.. अब चलीये..

जयश्री : (मनमे खुस होते) भैया.. प्लीज.. थोडी देर बैठो मे चाइ बनाकर लेआती हु.. फीर चलते हे.. (श्रीधरकी ओर देखते) भाइ.. हम जाते समय आश्रम होकर जायेगे.. हमे वहा बाबाका आशीर्वाद लेना हे..

बंसी : (जोरोसे हसते) ठीक हे भाभी.. आप अपनी सादीका मुह मीठा करवा दीजीये.. हें..हें..हें..

कहा तो जयश्री जुठा गुस्सा करते बंसीकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. वैसे बंसी उनको भाभी भाभी कहेते बात करता तो जयश्रीको बहुतही अच्छा लगता था.. फीर जयश्रीने तीनोके लीये चाइ बनादी.. फीर तीनोही चाइ पीकर अपना सामान लेकर कोर्ट पहोंच गये.. श्रीधरने सादी होतेही वकीलके जरीये कोर्टमे अ‍ेप्लीकेशन देदीथी.. तो जातेही वकीलने उनको मेरेज सर्टी दीलवा दीया..

फीर श्रीधरने वकीलको उनकी फीस देदी.. श्रीधर जयश्रीने खाना नही खायाथा.. तो तीनोही अ‍ेक बडीया होटेलमे खाना खाने चले गये.. वहा खाना खाते गांवकी बाते करते रहे.. फीर तीनोही आश्रमकी ओर चले गये.. तब उनको पता नही थाकी मुना बरखा ओर उनकी मां बसंती इधरही आश्रममे सादी करने आये हे.. वहा सुबह ही बाबाने मुना ओर बरखाकी सादी करवादी थी.. तो तीनोही खाना खाकर कुछ देर वही आराम कर रहेथे..

ओर बंसीभी श्रीधर ओर जयश्रीको लेकर वहा पहोंच गया.. तब बाबा आराम करने उनके रुममे चले गयेथे.. तो तीनो मंदिरमे दर्शन करके होलमे आगये.. ओर बाबाका इन्तजार करते वही बैठ गये.. तभी श्रीधरको मुना बरखा ओर उनकी मम्मी आराम करते दीख गये.. तो श्रीधर उनको देखतेही खुस होगया.. तब मुनाका ध्यानभी इन तीनोकी ओर गया.. तो बंसी जयश्री ओर श्रीधर उनके पास चले गये.. तो बसंती भी इनको देखकर खुस होगइ..

श्रीधर ओर जयश्री उनके पास जातेही बसंतीके पैर छुने लगे.. तब बसंतीने जयश्रीकी मांगमे सींदुर देखते उनको अखंड सौभाग्यके आशीर्वाद दीये.. तो जयश्री खुब सरमाइ.. फीर वो बरखाके पास चली गइ.. तो उनकी मांगमेभी सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र था.. तो दोनोही सरमाकर अ‍ेक दुसरेके गले लग गइ.. ओर सबसे थोडी दुर जाकर अ‍ेक दुसरेके बारेमे हस हसके बाते करने लगी.. तो मुनाभी सबको गले मीला..

बसंती : (हसते) कहो बेटा.. करली दोनोने सादी..? देखो मेनेभी इन दोनोकी सादी इधर करवादी.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरमाते हसते) हां काकी.. हमे मेरेज सर्टीभी मील गया.. अब कोइ दीकत नही.. क्या मुनाके बापु मान गये..?

बसंती : (जटसे) अरे नही नही.. उनकोतो पताभी नही हे की हम इधर आये हे.. तो आप लोगभी ध्यान रखना.. अभी कीसीको इस बातका पता ना चले.. जब सही वक्त आयेगा. तब हम इनकी सादी बडी धुम धामसे करवा देगे.. तुम लोग आजकलके बच्चे तो मानते नही.. सादीसे पहेलेही अपना संसार अ‍ेक पती पत्नीकी तराह चलाने लगे हो.. तो मुजे इनकी सादी जल्दीसे करवानी पडी.. क्या तुम्हारे मम्मी पापा मान गये..?

श्रीधर : (सरमाते हसते) हां काकी.. वो हमारे बडे ठाकुरने उनको मनालीया हे.. तो हमे बंसी लेने आया हे.. तो सोचा बाबाका आशीर्वाद लेकरही घर जाये.. तो इधर आगये..

बंसी : (हसते) काकी.. अब आप तीनो हमारे साथही चलना.. हमभी तो गांव जा रहे हे.. क्यु मुना..?

मुना : (हसते) हां मम्मी.. हम इनके साथही चले जायेगे.. अब कीसका डर.. हें..हें..हें..

बसंती : (हसते) चलो ठीक हे.. जैसे आपकी मरजी..

कहेते बसंती मुनाकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. तब मुनाने उनको आंखोके इसारेसे बंसी ओर श्रीधरकी ओर इसारा कीया.. तो बसंती सरमाते जयश्री ओर बरखाके पास चली गइ.. इधर आतेही तीनोने अपने कपडे बदल लीयेथे.. बरखा अ‍ेक दुल्हनकी तराह सजी हुइथी.. तो मुनानेभी दुल्हेका लीबास पहेना हुआथा.. तो बसंतीभी ओल मोस्ट दुल्हकी तराह सजधजके मुनाके साथ ही घुम रही थी..

अ‍ेक घंटेके बाद जब बाबा बहार आकर बैठ गये तो सबलोग उनके पास जाकर आशीर्वाद लेकर बैठ गये.. तब बाबा श्रीधर ओर जयश्रीको देखकरभी बहुत खुस होगये.. इन दोनो कपलको देखकर उनको लगाकी देवायतने मंजु ओर पुनमने वहा ज्यादा महेनत की हे.. तो उनको अब कोइ समजानेमे मुस्कील नही आयेगी.. यही सब सोचकर बाबाने उन सब लोगोको गांवके बदलावके बारेमे बहुत सारी बाते करली..

फीर सबलोग जानेके लीये खडे होगये.. ओर बाबाको दक्षीणा देने लगे.. तब बसंती मुना ओर बरखाने वही अपना लीबास चेन्च करलीया.. ओर वही कपडे पहेनलीये जीसे वो पहनकर आये थे.. फीर सबलोग लखनकी जीपमे अ‍ेडजेस्ट करके बैठ गये.. ओर गांवकी ओर चले गये.. तब गांवके बहारही बसंती मुना ओर बरखा उतर गये.. ओर बंसी श्रीधर जयश्रीको लेकर हवेलीपे पहोंच गया..
 
तो वहा सृती ओर देवायत कंपलीट होकर होलमे बैठे थे.. तो पुनम अबभी देवायतके रुममे सो रहीथी.. आज वाकल देवायतने उनकी हालत खराब करदी थी.. सृतीभी थोडा लंगडाते चल रहीथी.. तो पुनमकी क्या हालत हुइ होगी..? तभी लखन लता ओर नीलमभी आराम करके कंपलीट तैयार होकर नीचे आगये थे.. ओर देवायत सृतीके पास बैठकर बंसीका इन्तजार कर रहेथा.. तभी बंसी दोनोको लेकर आगया.. तब..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. इनके मम्मी पापाको फोन करके इधर बुलाले..

लखन : (मुस्कुराते) जी भैया..

कहेतेही लखन फोन लेकर थोडी दुर चला गया.. ओर श्रीधरकी मम्मीके साथ मुस्कुराते हुअ‍े धीरेसे बाते करने लगा.. तब बंसी जयश्री ओर श्रीधर अंदर आगये.. तो आतेही श्रीधर ओर जयश्री सरमाते देवायत ओर सृतीके पांव छुने लगे.. तब सृतीने दोनोको आशीर्वाद दीया ओर जयश्रीको अपने पासही बीठा दीया.. फीर सृती ओर लता.. उनके साथ धीमी आवाजमे हस हसके बाते करते सब जानकारीया लेने लगी..

तो बंसी ओर श्रीधरभी लखनके पास बैठ गये.. तो दयाने सबको पानी पीलाया.. उधर लखनके साथ बात होतेही श्रीधरकी मम्मी ब्रीन्दाने उनकी बडी बहेन कम जेठानी वृन्दाको बता दियाकी दोनो आगये हे.. तब वृन्दा जयश्रीको मीलनेके लीये तलपापड होने लगी.. ओर दोडते हुअ‍े जाकर उनके पतीको कहा.. तब ब्रीन्दा उनकी मीलनेकी बेकरारी देखकर कातील मुस्कान करने लगी.. ओर चारो हवेलीकी ओर नीकल गये..

तबतक हवेलीपे देवायतने श्रीधर ओर जयश्रीको बता दीयाकी उनके मम्मी पापाके साथ क्या बात करनी हे.. खास करके वृन्दाके साथ.. क्युकी सीर्फ वोही अ‍ेक थी.. जो जयश्रीको इमोस्नल ब्लेकमेइल करते इस रीस्तोको तोडनेकी बात केह सकती थी.. तब कुछही देरमे जयश्रीके माता पीता जवेरीलाल वृन्दा ओर श्रीधरके माता पीता जीतुलाल ब्रीन्दा अपनी कारमे आगये.. आतेही वृन्दाने दोडकर जयश्रीको अपने गले लगा लीया.. ओर फुटफुटके रोने लगी..

तो थोडी देर सब लोग उनको देखतेही रहे.. फीर जवेरीलाल जयश्रीको गले मीले.. तब वो जयश्रीकी मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखकर सब कुछ समज गये.. फीर जयश्रीने सरपे चुनी डालके जीतुलाल ओर ब्रीन्दाके अ‍ेक बहु की तराह पांव छुअ‍े.. तब जीतुलालको ना चाहते हुअ‍े भी उनको आशीर्वाद देने पडे.. क्युकी अभी सीर्फ वो ओर जयश्रीकी मम्मी वृन्दाही जानते थेकी जयश्री उन दोनोकी लडकी हे.. ओर ब्रीन्दा दोनो हाथोसे अदब लगाते चोर नजरोसे श्रीधरकी ओर देखते मुस्कुराती रही..

वृन्दा : (रोते हुअ‍े) बेटी.. तुमने अ‍ैसा क्यु कीया..? तुमने तो हमारी इजत मीटीमे मीलाकर हमारी नाक कटवादी.. क्या तुजे पता नही थाकी ये तेरा भाइ हे..? तुजे जरासी भी सरम नही आइ..?

देवायत : (मुस्कुराते) देखो भाभीजी.. हमारी क्या बात हुइथी..? की आप इस दोनोको कुछभी नही कहोगे..

वृन्दा : (अपने आंसु पोछते) अरे सोरी सोरी.. गलती होगइ देवरजी.. अब इनको कुछ नही कहुगी..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) मम्मी.. अब हम दोनोने सादी करली हे.. ओर ये देखो हमारा मेरेज सर्टीफीकेट.. हम यहा इसीलीये आये हे.. हमे बडे ठाकुरसाहने कहाहे की आप लोगोने हमारा रीस्ता अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. ओर इस बारेमे आप हमे कोइ सवाल नही पुजेगे.. इसी सर्तपे हम आये हे..

श्रीधर : हां मौसी.. अगर आपको अभीभी हमारी सादीसे अ‍ेतराज हेतो हम दोनो वापस सहेरमे चले जायेगे.. मे वहा कोइ जोब कर लुगा.. हम दोनो हमारा संसार वही चलायेगे..

जवेरीलाल : (थोडा परेसान होते) अरे नही नही बेटा.. ये तुम क्या केह रहे हो..? हमे तुम दोनोका रीस्ता मंजुर हे.. (वृन्दाकी ओर देखते थोडा नाराज होते) भाग्यवान.. तुम चुप नही रेह सकती..? तुजे यहा आनेसे पहेले कुछभी बोलनेको मना कीयाथानां..?

वृन्दा : (अपने आंसु पोछते) सोरी.. गलती होगइ जी.. बेटे अब तुम दोनो घर चलो.. जो होनाथा होगया.. अब हम आपकी सादी धुमधामसे करवा देगे.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. चलो..

देवायत : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने कहाथानां अब गांवमे आपको अ‍ैसे कइ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. तो क्यु फीकर करती हो..? कोइ आपको पुछेगाभी नही.. क्युकी सबके घरपे अ‍ैसे रीस्ते चल रहे हे.. ओर आनेवाले दिनोमे अ‍ेसे कइ लडके लडकीया सादी करलेगे.. तो फीर क्या दिकत..? येतो बहुतही अच्छा हे लडकी घरमे आपके सामने ही रहेगी.. लडका कैसा होगा.. ससुराल कैसा होगा.. इनकी कोइ चीन्था ही नही..

जवेरीलाल : ठीक कहा आपने ठाकुरजी.. अब जोभी हो.. इनको हमारे साथ ही रखेगे..

लखन : (मुस्कुराते) जीतु अंकल.. ब्रीन्दाभाभी.. आप दोनो कुछ नही बोलेगे..? हें..हें..हें..

जीतुलाल : (मुस्कुराते वृन्दाकी ओर देखते) हें..हें..हें.. अब मे क्या बोलु.. बडेभैया ओर भाभी जो कहेगे वोही करना हे.. क्यु ब्रीन्दा..?

ब्रीन्दा : (लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराते) देवरजी.. मेनेतो बडे देवरजीने कहा.. तबसे ही जयश्रीको मेने अपनी बहुके रुपमे स्वीकार करलीया हे.. मुजे इन दोनोकी सादीसे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

तभी रजीया ओर दया सबके लीये कोल्ड्रीन्क्स लेकर आइ.. तो सबने ठंडा पीया.. तब जयश्री ब्रीन्दाके पास चली गइे ओर उनके साथ धीमी आवाजमे हस हसके बाते करने लगी.. तो वृन्दा ब्रीन्दाकी ओर सककी नजरोसे देखने लगी.. फीर सबने ठंडा पीलीया तो सबलोग खडे होगये.. तब अ‍ेक बार फीर जयश्री ओर श्रीधरने देवायत ओर सृतीके पैर छुअ‍े.. ओर सब लोग वहासे नीकलने लगे..
 
तब लखन ओर बंसी दोनो अपनी जीपमे जयश्री ओर श्रीधरको छोडने उनके घरपे चले गये.. तो जवेरीलालने अपनी कार लेली.. ओर वो चारोभी अपने घर पहोंच गये.. तब श्रीधरकी मम्मीने श्रीधर ओर जयश्रीको बहार दरवाजेपे ही खडे रहेनेको कहा.. फीर वो पानी ओर चावलका कलश लेकर आगइ.. उसने दोनोके उपर कलश घुमाकर कुछ वीधीयाकी.. फीर चावलका कलश नीचे रखके जयश्रीको पैर मारते अंदर आनेको कहा.. ओर ब्रीन्दाने जयश्रीको अ‍ेक नइ नवेली बहुके रुपमे गृह प्रवेस करवाके स्वागत कीया..

तबतक तो आधे गांवमे ये बात फैल गइकी जयश्री ओर श्रीधर दोनो सादी करके वापस अपने घरपे आगये हे.. ओर उनके माता पीताने दोनोकी सादीको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. पता चलतेही जागृती भी दोडके जयश्रीके घरपे आगइ.. तो वहा लखन ओर बंसी दोनोही थे.. लखन ओर श्रीधर बाते कर रहेथे.. तब जागृती दोनोको देखतेही सरमाते मुस्कुराने लगी.. जैसेही उनकी अपने भाइ बंसीके साथ नजरे मीली..

तब बंसीने मुस्कुराते सबकी नजर बचाते जागृतीको आंख मार दी.. तो जागृती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपना मुह दुसरी ओर करते हसने लगी.. वो जटसे जयश्रीके पास चली गइ.. ओर जागृतीको देखतेही जयश्रीने उनको अपने गले लगा लीया.. तबभी जागृती बंसीकी ओर चोर नजरोसे देखते हसती रही.. तो बंसी अबभी उनकी ओर देखते हस रहाथा.. तब जागृतीके हसनेका मतलब बंसीभी समज गया..

फीर जयश्री जागृतीको हाथ पकडकर उनके रुममे लेगइ.. ओर दरवाजा बंध करलीया.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपने गले लगा लीया.. फीर जयश्री जागृतीको लेकर बेडपे चली गइ.. ओर दोनो सहेली साथमे सटकर बैठ गइ.. तब जागृती जयश्रीकी ओर दखते हसते हुअ‍े सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तो जयश्री बहुतही सरमाइ.. ओर कहा..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) जागु.. आज मे बहुत खुस हु.. मेरा सभी सपना पुरा होगया.. तुजे पता हे..? भाइने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया हे.. हमारे प्यारकी नीशानी मेरे पेटमे पल रही हे.. जागु.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. मे भाइके बच्चेको जन्म दुगी.. इसीलीये तो हमे इमरजन्सीमे भागना पडा.. ओर हमने सादी करली..

जागृती : (धीरेसे हसते हाथ थामते) क्या..? सच..? जयश्री.. क्या इस बारेमे ब्रीन्दाचाचीको पता हे..?

जयश्री : (सरमाते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. जब मुजे उल्टीया होने लगी तब उसीमे मुजे प्रेगनेन्सी चेक करनेकी कीट दीथी.. जब उसमे पोजीटीव आया तो उसीने भाइको मुजे भगाकर लेजानेको कहा.. छोड ये सब.. अब तु बता.. क्या तेरी बंसीभैयाके साथ कुछ बात आगे बढी..?





जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. मेने आजही भाइसे इन्डायरेक्टली अपने प्यार का इजहार करदीया हे.. जयश्री.. तुजे पता हे.. मे अभी इधर आइ.. तो भाइने सबसे छुपकर मुजे आंख मारदी.. लगता हे वोभी मुजे चाहने लगे हे.. अ‍ेक दो दीनमे मामला फीट होजायेगा.. लेकीन अ‍ेक प्रोबलेम हे..

जयश्री : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) क्या..?

जागृती : (सरमाते धीरेसे) जयश्री.. भाइका हमारी बुआके साथभी रीलेशन हे.. ओर मे भाइको खोना नही चाहती.. अब तु ही बता मे क्या करु..? भाइ भी मुजे चाहने लगे हे..

जयश्री : (हसते) तो क्या हुआ.. उनकोभी अपनी सौतन बनाले.. बंसीभैयाको देखते तो लगता हे वो तुम दोनोको खुस रखेगा.. वैसेभी अब गांवमे दो दो तीन तीन सादीया तो आम बात हे.. तो फीर क्या प्रोबलेम..? तुजेतो सीफ्र तेरे भाइका लंड चाहीये.. बुआसे क्या लेना देना.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) कीतनी कमीनी हो.. छोड सब.. ये बता.. तुम दोनोने वहा कुछ मजे बजे कीये की नही..? कहा ठहेरेथे दोनो..?

जयश्री : (हसते) मजे..? अरे तु मजेकी तो बातही मत कर जागु.. यहासे जातेही हम सादी करने चले गये.. फीरतो जो हम दोनो रुममे घुसे.. मजा आगया.. हें..हें..हें.. जागु.. हम दोनो ये तीन दिन हमारे रुमसे बहार ही नही नीकले.. भाइने चोद चोदके मेरी हालत बीगाडदी.. अभी भी नीचे थोडा दर्द हो रहा हे.. क्या बताउ तुजे.. पता नही भाइको इतना जोस कहासे आजाता हे.. उनका बस चले तो मुजे दिन रात चोदते ही रहेगे..

जागृती : (सरमाते हसते) कमीने.. सभी दोस्तो अ‍ेक जैसेही हे.. लेकीन जयश्री.. तुम दोनो थे कहा..? होटेलमे थे क्या..?

जयश्री : (हसते) नहीरे.. ओ बापरे.. कीतना बडा आलीसान बंगला हे वो.. छे छे बडे रुम.. बडा होल.. कीचन.. गार्डन.. ओर अंदर कीतना बढीया इन्टीरीयर.. जागु.. तुजे पता हे वो बंगला कीसका हे..? (हसते) मेरे प्यारे देवर ओर तेरा यार लखनभैयाका.. उसने हमारी बहुत मददकी..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) क्या उनके बंगलेपे थे दोनो..? जयश्री.. तुजे पता हे..? अब वो अ‍ेक दो दिनमे वहीतो रहेने जा रहे हे.. हमेसाके लीये.. जयश्री.. आजमे उनको आखरी बार मीलने गइ थी.. जालीमने बडेही बेहरेहमीसे मुजे चोद लीया.. पता नही आज कीस बातका बदला लीया मुजसे.. मेरी तो दो बार चुदाइ करके हालतही खराब करदी.. बडी मुस्कीलसे घरतक चलकर आइ..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) जागु.. मुजे लगता हे उनको भी तुमसे बीछडनेका दुख हे.. जालीम वैसेभी तुजे वहा मीलने आता हे तो कीतना जोसमे तुजे चोदता हे.. मेने कइ बार छुप छुपकर देखा हे.. लेकीन जागु.. अब मेने ओर भाइनेभी तैय करलीया हे.. अब हम दोनोभी सहेरमे रहेगे.. तु वहा मेरे घर आना.. अगर अब तुजे उनसे मीलनेका मन होगा तो मे तुजे लखन भैयासे मीलवा दुगी.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते जुठ छुपाते) ना बाबा ना.. अगर तुजे उनसे चुदवाना हे तो चुदवा लेना.. मेरे लीयेतो अब भाइ ही ठीक हे.. जयश्री.. मेभी भाइसे सादी कर लुगी.. फीर आगे देखती हु क्या होता हे.. भाइभी बुआकी कीतने जोसमे चुदाइ करते हे.. बुआ चुदवाते चीलाने लगती हे.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते हसते धीरेसे) जागु.. क्या तुने उन दोनोकी चुदाइभी देखली..? बतानां.. तेरे भाइका कीतना बडा हे..? लखनभैयासेभी बडा हे..?

जागृती : (सर्मसार होते धीरेसे) जयश्री.. भाइका बुआकी चुतमे था.. ओर उनके रुममेभी अंधेरा था.. मे उनको ठीकसे देख नही पाइ.. तो पता नही हे.. सीर्फ दोनोकी आवाजे सनाइ दे रहीथी.. आवाजसे अ‍ैसा लगाकी बुआ भाइके लंडको बडी मुस्कुलसे जेल पा रही हे.. अब दुबार देखनेका मौका मीलेगा तो देख लुगी.. हें..हें..हें..

जागृती आज लखनसे मीलकर तैय हुइ सर्तके बारेमे जयश्रीसे छुपाना चाहती थी.. दोनो सहेली उपर अपने कमरेमे बैठ कर अपनी जींदगीकी नीजी बाते कर रही थी.. तब नीचेकी ओर जवेरीलाल ओर जीतुलाल होलमे बैठकर श्रीधर ओर जयश्री दोनोकी सादीकी प्लीनींग करने लगे.. तो वृन्दा अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करलीया.. वो अब भी दोनोकी सादीसे नाराज थी.. तब श्रीधर लखन ओर बंसीको लेकर अपने रुममे चला गया..

तब ब्रीन्दा तीनोके लीये पानी लेकर आइ.. फीर लखनकी ओर मुस्कुराते चाइका कहेकर कीचनमे चली गइ.. कुछही देरमे तीनोके लीये चाइ लेकर आगइ.. तो तीनोने चाइ पीली.. तबतक ब्रीन्दा वही खडी रही.. ओर बार बार लखन ओर श्रीधरके पेन्टके उभारको देखती रही.. तब कुछही देरके बाद लखन ओर बंसी श्रीधरको गले मीलकर चले गये.. जब लखन ओर बंसी चले गये तब श्रीधरके रुममे सीर्फ ब्रीन्दा ओर श्रीधर ही रेह गये.. तब ब्रीन्दा श्रीधरकी ओर देखते कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६४

तब ब्रीन्दा तीनोके लीये पानी लेकर आइ.. फीर लखनकी ओर मुस्कुराते चाइका कहेकर कीचनमे चली गइ.. कुछही देरमे तीनोके लीये चाइ लेकर आगइ.. तो तीनोने चाइ पीली.. तबतक ब्रीन्दा वही खडी रही.. ओर बार बार लखन ओर श्रीधरके पेन्टके उभारको देखती रही.. तब कुछही देरके बाद लखन ओर बंसी श्रीधरको गले मीलकर चले गये.. जब लखन ओर बंसी चले गये तब श्रीधरके रुममे सीर्फ ब्रीन्दा ओर श्रीधर ही रेह गये.. तब ब्रीन्दा श्रीधरकी ओर देखते कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी....अब आगे

श्रीधर : (धीरेसे) मोम.. आपकी बहु कीधर गइ..? ओर पापा..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते उपरकी ओर उंगली करते) जागृती आइ हे.. तो उनके साथ उपर अपने रुममे हे.. ओर तेरे पापा ओर बडे भैया होलमे बैठकर तुम दोनोकी सादीकी प्लानींग कर रहे हे.. हें..हें..हें..

कहातो श्रीधर समज गयाकी अब जयश्री आधे घंटे.. अ‍ेक घंटेसे पहेले नीचे आने वाली नही हे.. तो वो मुस्कुराते खुस होकर बेडसे खडा होगया.. ओर जाकर धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध कर देता हे.. तब ब्रीन्दा समज गइ.. ओर सरमाते मुस्कुराते रुमसे बहार जाने लगी.. तो श्रीधरने उसे रास्तेमे ही रोक लीया.. ओर ब्रीन्दाकी कमरमे हाथ डालकर उसे दिवालसे सटाकर अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब ब्रींदा सरमाते हसते हुअ‍े उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी..





कोसीस क्या..? समजोना वो सीर्फ श्रीधरकी बाहोसे छुटनेका नाटक ही कर रहीथी.. वो मनसे चाहती थी की उनका बेटा श्रीधर उसे अभी मसलदे.. वो धीरेसे हसते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तब श्रीधरने दोनो हाथोसे उनका चहेरा अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. तब ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होते सांत होगइ.. ओर उसने अपनी आंख बंध करली.. तभी उसे अपने होठोपे श्रीधरके होठ चुमते महेसुस हुअ‍े..

ओर ब्रीन्दा मदहोस होने लगी.. तो श्रीधरने अ‍ेक हाथसे सारीके उपरसेही ब्रीन्दाके उरोजोको थाम लीया.. ओर उसे दबाते मसलते ब्रीन्दाके होठोका रसपान करने लगा.. तब ब्रीन्दाने भी उतेजीत होते श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगती हे.. दोनोही मदहोस होकर अ‍ेक दुसरेके चहेरेको चुमते प्यार करने लगे.. तब अचानक श्रीधरने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते ब्रीन्दाकी चुतको अपनी मुठीमे दबोच लीया.. तब ब्रीन्दा उछलते होसमे आगइ.. ओर जटसे श्रीधरसे अलग होगइ..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे) बस.. बस.. बीटु.. अभी ओर कुछ नही.. तुम दरवाजा खोलदे.. अभी इधर कोइभी आ सकता हे.. हम दोनो बादमे मीलेगे.. क्या इतने दिन अपनी बहेनको मीलकर आया हे.. फीरभी तेरा दिल नही भरा..? हें..हें..हें..

श्रीधर : (बाहोमे भरते मुस्कुराते) मोम.. क्या कभी आपसे प्यार करनेमे मेरा दिल भरा हे..? बहेनकी बात अलग हे.. ओर आपकी तो बात ही कुछ ओर हे.. आप मेरा पहेला प्यार ओर मेरी पहेली बीवी हो.. मोम.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु.. बहेनसे भी ज्यादा.. मे आपसे जल्दसे जल्द मीलना चाहता हु.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. चलोना. हम भी कही भाग जाये.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते होंठ चुमकर धीरेसे) नही बीटु.. अब हमे कही भागनेकी जरुरत नही हे.. बस.. तुम सीर्फ देखते जाओ.. वैसे थेन्क्स.. मे जो चाहती थी.. तुमने कर दीखाया.. तुमने मेरा सपना पुरा कर दीया.. लेकीन अभी इस वक्त हमारा मीलना ठीक नही हे.. बस.. हमे मौका मीलने दे.. हम बादमे जरुर मीलगे.. मुजे भी तुमसे मीलना हे.. लेकीन अभी सब लोग घरपे हे.. मे नही चाहती हम दोनोके रीलेशनके बारेमे कीसीको भी पता चले.. तेरी बीवीको भी नही.. समजे..? जा दरवाजा खोलदे..

श्रीधर : (भारी मनसे दरवाजा खोलते) मोम.. आपने मुजे कुछ बतानेका वादा कीयाथा.. तो अबतो हमारी सादी भी होगइ हे.. तो अब तो आप बतादो.. आपने बहेनको मेरे साथ रीलेशन रखनेको क्यु कहाथा..? मेतो आपसे प्यार करता था.. हम जींदगीभर पती पत्नी होकर साथमे रहेने वालेथे.. हम दोनो कीतने खुस थे.. तो फीर कब बताओगी..?

ब्रीन्दा : (बहार जाते प्यासे गालपे चपत लगाते) बीटु बस.. थोडा ओर सब्र करले.. हम दोनो पती पत्नी बनकर साथही रहेगे.. मे तुजे सबकुछ बता दुगी.. जब हम दोनो अकेले होगे.. लेकीन ध्यान रखना.. हमारे बारेमे कीसीको पता ना चले.. मे हमारे इस रीस्तेको हमेसाके लीये सबसे छुपाकर रखना चाहती हु.. समजे..?

कहेते ब्रीन्दा मुस्कुराते श्रीधरको गालपे प्यारसे चपल लगाते बहार चली गइ.. तो श्रीधर भी मुस्कुराने ब्रीन्दाको जाते हुअ‍े देखता रहा.. उनका लंड पेन्टके अंदर तनके तंबु बनाके अबभी जटके मार रहाथा.. ब्रीन्दा अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे लेट गइ.. अपना मंगलसुत्र अपने ब्लाउसमे हाथ डालकर नीकालते हाथमे लेकर उसे होठोपे लगाते चुमती हे.. ओर चुमकर लोकेट खोलकर अपनी ओर श्रीधरकी फोटो देखते मुस्कुराती हे..

ये वही मंगलसुत्र था जो उसे श्रीधरने दीयाथा.. ओर श्रीधरके कोलेजके दो साल खतम होने तक अपने पास सम्हालके रखाथा.. जैसेही श्रीधरकी कोलेज खत्म हुइ.. वो श्रीधरको लेकर घरसे दो दिनके लीये नीकल गइ थी.. फीर दोनोही सहेरसे दुर अ‍ेक जगाहपे चले गये..

वहा अ‍ेक मंदिरमे पंडीतका इन्तजाम करके उसने श्रीधरके साथ सादी करली थी.. ओर श्रीधरने वही ब्रीन्दाकी मांग भरते उसे यही मंगलसुत्र पहेनाया था.. फीर दोनोही वापस सहेरमे उसी जगाहपे आगये.. जहा दोनो पहेली बार मीलेथे.. हमारे लखनभैयाके बंगलोपे..

सादी करके अब ब्रीन्दा हमेसाके लीये श्रीधरकी अर्धांगीनी होगइ थी.. उस रात दोनोने वही फीरसे बाकायदा सादी करके अपनी सुहागरात मनाइ.. पुरी रात श्रीधर ब्रीन्दाकी चुदाइ करता रहा.. उस रात श्रीधरने ब्रीन्दाकी वाकइ हालत खराब करदी थी.. वो दुसरे दिन ठीकसे चलभी नही पा रहीथी.. यही सब सोचते ब्रीन्दा अ‍ेक हाथ अपनी आंखोपे रखते ओर दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाते अपने बेटेके साथ हुअ‍े अपने नाजायज रीस्तेके बारेमे सोचते अतीत मे चली गइ..

(थोडासा अतीतमें)

बात तबकी थी जब ब्रीन्दाको पहेली बार अपने पती ओर उनकी भाभी यानीकी उनकी जेठानी जो ब्रीन्दाकी बडी कजीन बहेनभी थी.. उनके बीच नाजायज रीलेशनका पता चला.. तब श्रीधर १६ सालका हो चुका था.. तब ब्रीन्दाको इन दोनोके रीस्तोके बारेमे पता चला तब बहुत देर हो चुकी थी.. क्युकी तब श्रीधर जवानीकी दहेलीजपे कदम रख चुकाथा.. तो वो इस उमरमे अपने पतीको डीवोर्स भी नही दे सकती.. तबसे ब्रीन्दाने अपने पतीके साथ हमेसा हमेसाके लीये दुरी बनाली थी..

वो सीर्फ उनके साथ अ‍ेक ही रुममे रहेती थी.. लेकीन दोनो ही पती पत्नी अलग अलग सोते थे.. ब्रीन्दा अपने पती जीतुलालको अपने तनको हाथभी नही लगाने देती थी.. अ‍ेक बार जीतुलालने उनके साथ जबरदस्ती करनेकी कोसीसकी.. तो ब्रीन्दाने उसे वही जोरोका चांटा गालपे जड दीया था.. ओर उसे अपनी भाभीके पास जानेको केह दीया..

तब जीतुलालभी समज गयाकी ब्रीन्दाको अपनी भाभीके साथ रीस्तोके बारेमे पता चल गया हे.. ब्रीन्दाने अ‍ैसेही अपने सारीरीक सुखके बीना दो साल नीकाल दीये.. हालाकी तब ब्रीन्दाकी उमर इतनी भी नहीथी.. की वो इस सारीरीक सुखसे वंचीत रेह सके.. वो महज ३७ सालकी थी.. इन दो सालोमे ब्रीन्दाने अपने हाथोसे काम चलाते अपने आपको संतुस्ट कीयाथा..

तो इन दो सालोके बाद श्रीधरभी १८ सालका हो चुकाथा.. ओर ब्रीन्दा बहुत पढी लीखी ओर काफी खुली सोच वाली ओरत थी.. उपरसे अ‍ैसी कोम.. जो बहुतही सीयानी.. घरमे क्या हो रहा हे कभी बहार वालेको पताही नही चलता.. उनके घरमे आज तक कीसीने उची आवाजमे बात तक नहीकी.. जोभी मसला होता वो सब लोग आपसमे बैठकर उनका नीपटारा कर लेते..

लेकीन ब्रीन्दाने आजतक घरमे कीसीको पता चलने नही दीया.. की उन्होने अपने पती जीतुलालके साथ सब रीस्ते खतम करलीये हे.. हालाकी जीतुलालके माध्यमसे उनकी भाभी वृन्दाको सब पता चल चुकाथा.. इन दो सालमे ब्रीन्दाभी सारीरक सुखसे वंचीत रही तब उनके तनकी आगभी बेकाबु हो चुकी थी.. तब ब्रीन्दाको भी अ‍ेक मर्दकी सख्त कमी महेसुस होने लगी.. ओर सारीरक सुखके बीना तडपने लगी..

वो इन दो सालोमे बीना चुदाइ बहुतही कामी औरत होगइ थी.. तब उसने देवायतके बारमे बहुत कुछ सुनाथा की कैसे उनका कइ ओरते ओर लडकीयोके साथ रीलेशन हे.. तब बाकी ओरतेकी तराह वोभी देवायतके साथ रीलेशनमे आना चाहती थी.. लेकीन उनको अपनी बदनामीका खतराभी बहुत लगता था.. ओर आखीर ब्रीन्दाने देवायतको मीलनेका खयाल छोड दीया..

ओर वो अपने तनकी आग मीटानेका दुसरा कोइ रास्ता ढुंढने लगी.. जो बीलकुल सेइफ हो.. ओर आखीर उसे अपने तनकी आग बुजानेका अ‍ेक रास्ता मील ही गया.. वो रोज सुबह अपने बेटे श्रीधरको जगाने जाती.. तब उनके गालको प्यारसे चुमकर उसे जगाने लगी.. जब श्रीधर बेडसे उठ जाता तो उनको हग करती.. फीर उनके रुमकी सफाइ करती ओर वापस चली जाती.. ये सब रोजका रुटीन हो चुकाथा..
 
तभी अ‍ेक दिन ब्रीन्दा श्रीधरको जगाने गइ.. तो उनको मुह फाडते देखते ही दंग रेह गइ.. क्युकी श्रीधर अपना तगडा लंड अपनी मुठीमे पकडकर पुरा नंगा होकर सो रहाथा.. वैसेतो ब्रीन्दा कइ बार श्रीधरके लोअरमे या उनकी पेन्टमे तंबु होते देख चुकीथी.. तब उसे लगताकी अब बेटा जवान हो गया हे.. तो ये सब आम बात हे.. लेकीन आज उसने श्रीधरके तगडे ओर बडे लंडको देख लीया..

ब्रीन्दा अपने जीवनमे पहेली बार अ‍ैसा तगडा लंड देख रहीथी.. उसने इतने बडे लंडको कभी नही देखा था.. ब्रीन्दाको अपने पती जीतुलालका लंड श्रीधरके लंडके आगे नुनी लग रहाथा.. ओर ब्रीन्दाके मनमे दो सालसे सोइ ओरत अंगडाइ लेते जागने लगी.. ब्रीन्दा अ‍ेक नजरसे पलक जबकाये बगैर श्रीधरके तगडे लंडको देखती रही.. तब ब्रीन्दाको इस लंडको अपनी चुतमे लेनेका श्रीधरको लेकर मनमे बुरे खयाल आने लगा..

ओर वो जटसे श्रीधरको जगाये बगैरही अपने रुममे चली गइ.. ओर आंख बंध करके बैडपे लेट गइ.. तबभी र्ब्रीन्दाको बार बार श्रीधरका तगडा लंड अपनी आंखोके सामने दीख रहाथा.. तभी ब्रीन्दाको अपनी चुतमे गीलापन महेसुस हुआ.. ओर उनका हाथ अनायास ही अपनी चुतपे चला गया.. देखातो उनकी पेन्टी गीली हो चुकी थी.. तब ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. की ये सब क्या हो रहा हे..? तभी उनके अंदरकी कामी ओरत जाग गइ.. ओर ब्रीन्दाके साथ मनमे बहेस करने लगी..

ब्रीन्दा : (सरमाते मनमे) हे भगवान.. ये सब क्या हो रहा हे.. वो मेरा बेटा हे.. मेरे मनमे उनके बारेमे ये कैसे गलत खयाल आ रहे हे..?

मनकी ओरत : ब्रीन्दा.. कोइ गलत खयाल नही.. क्या तुजे पता नही हे..? की कैसे तेरी बहेनने तेरा सुखी संसार उजाडा हे.. तो उनसे बदला लेनेका यही अ‍ेक मौका हे.. अपने बेटेके साथ रीलेशन रखकर तुभी तेरे पतीसे बदला लेले.. तुजे इतना तगडा लंड कही ओर नसीब नही होगा..

ब्रीन्दा : (मनमे) नही.. श्रीधर मेरा सगा बेटा हे.. मे उनके साथ रीलेशन नही रख सकती.. ओर वैसे भी समाज अ‍ैसे रीलेशनको कभी स्वीकार नही करते.. ये गलत हे..

मनकी ओरत : पागल कहीकी.. जब तेरी ही बहेनने तेरे पतीसे रीलेशन रखकर तेरा संसार उजाडा.. तो उन दोनोको तो समाजका डर नही लगा..? तुम कीस समाजकी बाते कर रही हो..? समाज सीर्फ तमासा देखना ओर बाते करना जानता हे.. उनको तेरी नीजी लाइफसे कोइ लेना देना नही हे.. तुम मरो या जीयो.. उनसे उनको कोइ फर्क पडने वाला नही हे.. तो समाजका बहाना बनाकर तु क्यु अपनी जवानी बरबाद कर रही हे..?

ब्रीन्दा : (मनमे) बात तो तेरी सही हे.. लेकीन फीरभी वो मेरा सगा बेटा हे.. हमारे बीच मा बेटेका रीस्ता हे.. तो अ‍ेक डरसा लग रहा हे..

मनकी ओरत : अच्छा..? तुमने इसी चुतसे तेरे बेटेको जन्म दीया हेनां..? देख अभी.. तेरे बेटेका तगडा लंड देखकर कैसे गीली होगइ हे.. तेरी ही चुतसे वो बहार नीकला हे.. फीरभी तेरी चुतने तो उनके साथ कोइ रीस्ता नही देखा.. तो फीर तु क्यु रीस्तेको लेकर इतनी परेसान हे.. देख अभी तु जवान हे.. खुबसुरत हे.. ओर तेरे बेटेसे अच्छा मर्द तुजे ओर कहा मीलेगा..

तेरे ही घरमे तेरे साथ रहेता हे.. अगर इनके साथ रीलेशन रखेगी तो कीसीको पताभी नही चलेगा.. ओर तुम दोनोके उपर कोइ सक भीतो नही करेगा.. तुम दोनोही सेइफ रहेकर अपने जवानीके मजे लुट सकते हो.. यही तो तुम चाहती थी.. ओर तु तेरे बेटेके साथ रीलेशन रखकर तेरे पती ओर तेरी बहेनसे बदला ले सकती हे.. क्या भुल गइ.. उनकी अ‍ेक जवान लडकी भी हे..

ब्रीन्दा : (मनमे) लेकीन.. वो मेरी भांजी भी हे ओर मेरी भतीजी भी हे.. मेरे साथ उनकी बहुत पटती हे.. मेरी सहेली जैसी हे.. मे उसेभी इतनी चाहती हु.. जीतना मे मेरे बेटेको चाहती हु.. तो उनको बीचमे क्यु लाती हे..? हम मां बेटेके बीच उनका क्या काम..?

मनकी ओरत : (मुस्कुराते) कमीनी कहीकी.. बुध्धु की बु्ध्धु ही रहेगी.. सुन.. तुम उनको बहोत चाहती हो इसीलीये तो तुजे तेरी बहेन ओर पतीसे बदला लेनेका अ‍ेक प्लान केह रही हु.. मानाकी तेरी भतीजी तेरे बेटेसे दो साल बडी हे.. लेकीन हे बहुत खुबसुरत.. जबतक तेरे बेटेकी सादीकी उमर नही होजाती तबतक तुम उनके साथ मजे लुटती रहे.. फीर इन दोनोको अ‍ेक दुसरेके प्यारमे फसाकर इनकी सादी करवा देना.. क्या तुम नही जानती अबतो इस गांवमेभी रीस्तोको लेकर बहुत बडा बदलाव होने वाला हे..

तो फीर इन दोनोकी सादी करवाके क्या दीकत हे..? वैसेभी तुम सारी जींदगी तेरे बेटेको ये सुखतो नही दे सकती.. जब तक तेरा मन हे अपने बेटेके साथ मजे करती रहे.. ओर वैसेभी तेरी भतीजीको भी तुम पसंदतो करती हो.. तो फीर क्या दीकत हे..? दोनो भाइ बहेनके बीच सादी करवा देना.. तो उनकी मां ओर तेरा पती.. इस रीस्तेको कभी स्वीकार नही करगे.. यहीतो उनके साथ बदला लेनेका मौका हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बात तो तेरी सही हे.. ठीक हे.. मुजे अब अ‍ैसाही करना पडेगा.. वैसेभी मे कबतक अ‍ेक मर्दके बीना रहुगी.. मुजे मेरे बेटेसे वो सुख भी मीलता रहेगा.. मेरे बेटेका घरभी बस जायेगा.. ओर मेरा बदला भी पुरा हो जायेगा.. वाह.. अ‍ेक तीरसे तीन तीन नीशान हें..हें..हें.. क्या आइडीया दीया हे..

यही सब सोचते ब्रीन्दा अपनी सोचसे बहार नीकली.. देखातो उनकी चुतसे अभीभी पानी बेह रहाथा.. तो वो सरमाकर मुस्कुराते जटसे अपने बाथरुममे चली गइ.. ओर कमोडपे बैठकर अपनी सारी कमर तक उची करदी.. ओर आंख बंध करते श्रीधरके लंडको याद करते अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे धुसा देती हे.. ओर श्रीधरको इमेजींग करते जोरोसे उंगलीको चुतमे अंदर बहार करने लगी.. ओर सोचती रही की उनकी चुदाइ.. उनका बेटा श्रीधर कर रहा हे..

तब कुछही देरमे ब्रीन्दाकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर ब्रीन्दा जड गइ.. आज पहेली बार अपने बेटेके बारेमे सोचते ब्रीन्दा संतुस्ट हुइ थी.. ओर उसने श्रीधर ओर उनकी भतीजी जयश्रीके बारमे तब भी सोचके अपना इरादा मजबुत करलीया.. ओर आखीर कडा फैसला लेते उनके सातीर दिमागमे अ‍ेक अ‍ैसा खयाल आया.. उसने अ‍ेक अ‍ैसा खतरनाक रास्ता खोज लीया.. की इस बारेमे कीसी बहार वालोको तो क्या घरमे भी कीसीको भनकभी नही लगने दी..

उसने अपने पती जीतुलाला ओर उनकी भाभी वृन्दाके बीच चल रहे नाजायज रीस्तेसे परेसान ना होते.. ठंडे दिमागसे उनसे बदला लेनेकी ठानली.. ओर अ‍ैसा बदला.. की इसके लीये.. वो खुद अपने मां बेटेके रीस्तोको तार तार करनेको तैयार होगइ.. वो अब श्रीधरको सुबह उनके रुममे जगाने जाती तब ब्लाउसके उपरके बटनको खोलकर जाती.. ओर थोडी देर श्रीधरके लोअरमे उनके खडे लंडके तंबुको देखती..

वो श्रीधरके गालको चुमकर जगाती ओर उसे हग करते अपने उरोजोको श्रीधरके तनसे रगडती.. ओर फीर रुमकी सफाइ करते अपने उरोजोको दीखाकर अपने बदनके जलवे दीखाने लगी.. तब श्रीधरको भी कुछ अजीब लगने लगा.. ओर धीरे धीरे करते श्रीधरका अपनी मांको देखनेका नजरीया बदलने लगा.. श्रीधर ब्रीन्दाके उरोजोको चोर नजरसे देखता रहेता.. उनको अब ब्रीन्दामे अपनी मां नही अ‍ेक कादेवकी मुरत नजर आने लगी..

अबतो श्रीधर स्कुल जाता तबभी.. ओर वापस आता तबभी.. ब्रीन्दा श्रीधरको हग करती.. उनको अपनी मांके अंदर अचानक आये इस बदलावसे अच्छा लगने लगा.. आखीर श्रीधर भी तो जवान था.. अबतो ब्रीन्दा जबभी श्रीधरको हग करती तब श्रीधरभी ब्रीन्दाको थोडा जोरोसे बाहोमे भीच लेता.. ओर ब्रीन्दाके उरोजोको श्रीधर अपने सीनेपे महेसुस करता.. जब ये नीत्य क्रम होगया तब श्रीधरने ओर हीमंत करनेकी ठानली..

अब वो अपनी मां को हग करते नीतंबसे पकडकर अपने तनसे सटाते उनके गालपे कीस कर देता.. तब ब्रीन्दाको अपनी सारीके उपरसेही चुतपे श्रीधरका खडा लंड महेसुस होता.. तब ब्रीन्दा उनपे गुस्से होनेकी बजाय सरमाकर उनके गालपे प्यारसे चपत लगाती.. धीरे धीरे करते दोनोही अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करने लगे.. ब्रीन्दा श्रीधरको स्कुलमे कोइ लडकी फसाइ की नही..? अ‍ैसी बाते करते श्रीधरको छेडती..

तो श्रीधरभी सरमाके उनकी मांपे जुठ मुठ गुसा होता.. ओर उनको पीछेसे बाहोमे भरके उनकी कमरपे चुटकी भरते ब्रीन्दाके साथ छेडखानी करने लगाता.. तो कभी ब्रीन्दाको अपनी गोदमे उठाकर उसे घुमाता.. ओर धीरे धीरे बात आगे बढती गइ.. ओर अ‍ेक सुबह जब ब्रीन्दा श्रीधरको जगाने आइ.. तब श्रीधरने हिंमत करके अपनी मांको हग करते गालपे कीस करनेके बजाइ ब्रीन्दाके होठोको चुम लीया.. तब ब्रीन्दा खुब सरमाइ.. ओर सरमाते श्रीधरको सीनेपे मुका मारने लगी.. ओर सरमाते मुस्कुराने लगी..

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीना.. मे मां हु तेरी कोइ गर्लफ्रेन्ड नही समजे..?

श्रीधर : (गाल चुमते) मोम.. कास.. आप मेरी गर्लफ्रेन्ड होती.. मेतो धन्य हो जाता.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) बेटा.. अगर गर्लफ्रेन्ड बनानी हे तो स्कुलमे कोइ खुबसुरत लडकी नही हे क्या..? उसे पटाले.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (हीमंत करते) मोम.. लडकीयातो बहुत हे.. लेकीन आपके जैसी खुबसुरत कोइ नही हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) वैसे फल्र्ट काफी अच्छा करलेता हे.. लेकीन ये मत भुलो.. मे तेरी मां हु.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (मुस्कुराते) यस मोम.. बस.. यही अफसोस हेकी आप मेरी मां हो.. वरना मे आपसे ही सादी करलेता.. मोम.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. जबतक आपके जैसी कोइ खुबसुरत लडकी नही मील जाती तबतक आप ही मेरी गर्लफ्रेन्ड होजाइअ‍े.. हें..हें..हें.. बहुत मजा आयेगा.. मोम.. आइ लव यु..

ब्रीन्दा : (सरमाते गालपे चपत लगाते) चल.. हट बदमास.. बडा आया मोम को गर्लफ्रेन्ड बनाने वाला.. तुतो सुरु ही होगया.. हें..हें..हें.. लव यु टु बीटु.. बस.. अ‍ैसेही खुस रहा कर..

तब श्रीधरको लगाकी मां बेटे दोनोके बीच मामला आगे बढ सकता हे.. फीरतो श्रीधरमे ओर हींमत आगइ.. अब वो हर बार ब्रीन्दाको हग कउनके होंठोको चुम लेता.. फीरतो श्रीधर कभी भी ब्रीन्दाको पकड लेता.. कभी वो कीचनमे काम करती तब.. तो कभी वो अपने रुममे सफाइ करने आती तब.. लेकीन हर बार ब्रीन्दा श्रीधरपे गुस्से होनेकी बजाइ.. सरमाकर मुस्कुराया करती.. ओर श्रीधरको प्यारसे गालपे अ‍ेक चपत लगा देती..

ब्रीन्दाकोभी श्रीधरकी हरकत अच्छी लगने लगी.. ओर वो अपने प्लानमे आगे बढती रही.. लेकीन इनसे आगे बात नही बढ रही थी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी दिलकी बाते करनेसे डर रहे थे.. ब्रीन्दा श्रीधरकी मां थी.. तो वो कैसे अपनी दिलकी बात श्रीधरसे करे..? वो चाहती थी की इस मामलेमे खुद श्रीधर आगे बढे.. तो उसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. ओर श्रीधर भी बडी असमजमे रहेने लगाकी वो अपनी मांको अपने दिलकी बात कैसे करे..? फीरभी श्रीधरने हींमत करने की ठानली.. ओर वो सही मौकेकी तलासमे रहेने लगा..
 
ओर आखीर अ‍ेक दिन दोनोही मां बेटेको मीलनेका मौका मील ही गया.. जब श्रीधरका स्कुल खत्म हुआ ओर उसे कोलेजमे दाखला लेने सहेरमे जाना था.. तब घरमे तैय हुआकी श्रीधरको कोइ अच्छी कोलेजमे दाखला दिलवाना हे.. ओर कोइ अच्छी होस्टेल मीलेतो श्रीधर वही रहेकर अपनी पढाइ करेगा.. वरना होस्टेल अच्छी नही लगेतो वो इधर गांवसे ही सहेर अप डाउन करता रहेगा..

ओर उसी वक्त उनके पापा जीतुलालको अ‍ेक हप्तेके लीये बीजनेस टुरपे जाना पडा.. तो उसने ब्रीन्दाको श्रीधरके साथ जानेके लीये केह दीया.. तो सुनतेही दोनोही मां बेटे मनमे बहुत खुस होगये.. जब जीतुलाल सुबह अपनी उतर गुजरातकी बीजनेस टुरपे चला गया.. तो उसी साम वृन्दाभी जयश्रीके रीस्ते ढुंढनेके बहाने अहेमदाबाद सहेरमे अपने मायके चली गइ.. तब ब्रीन्दा सबकुछ समज गइ.. तभी..

श्रीधर : मोम.. कल सुबह हमे कोलेजके लीये जाना हे.. हो सकेतो आप हम दोनोके दो दो जोडी कपडे लेलेनां.. वहा पता नही हमे कोनसी कोलेजमे कब अ‍ेडमीसन मीले..

ब्रीन्दा : (सरारती मुस्कान करते) क्यु..? इसमे दो दिनका वक्त लगता हे क्या..? हें..हें..हें..

श्रीधर : (हग करते होठोको चुमकर) मोम.. प्लीज.. वोतो अ‍ेक दिनका काम हे.. हम दुसरे दिन सहेरमे घुमेगेनां.. मुजे कपडेभी तो लेने हे.. तो आपभी कुछ सोपींग करलेनां.. मे दिलवा दुगा.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (हसते) अच्छा..? तो फीर तु मुजे सोपींग करवायेगा..? चलो ठीक हे.. लेकीन देखना.. मे तुमसे ढेर सारा सोपींग करवाउगी.. फीर मुकर मत जाना.. हें..हें..हें.. लेकीन बीटु.. हम ठहेरेगे कहा..?

श्रीधर : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. अगर आपको अ‍ेतराज नही हेतो हम कीसी होटेलमे रुक जायेगे..

ब्रीन्दा : (जटसे सरमाते) ना बाबा नां.. कही कीसीने हमे देख लीयातो हमारी फजीहत होजायेगी..

श्रीधर : (गाल चुमते) मोम.. इसमे काहेकी फजीहत..? हम कहा कोइ लवर हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (जुठे गुस्सेसे अ‍ेक चपत लगाते) छी.. तुजे अ‍ेक लगाउगीनां.. बहुत बीगड गया हे.. बडा आया लवर वाला.. बीटु.. होटेलमे ठहेरनेका डर नही.. लेकीन हमारे कीसी गांव वालने हमे देखलीया तो क्या सोचेगे..? ओर तुजेतो पता हे आज कल हमारे गांवमे क्या क्या हो रहा हे.. तो हमे कोइ रीस्क नही लेना..

श्रीधर : (कुछ याद आतेही) ठीक हे मोम.. हम होटेलमे नही रुकेगे.. मेने हमारे ठहेरनेका इन्तजाम करलीया हे.. बस..? अबतो चलोगीनां..?

ब्रीन्दा : (आस्चर्यसे देखते) कहा..? बीटु.. तो फीर हम कहा रहेगे..?

श्रीधर : (धीरेसे) मोम.. लखनका वहा अ‍ेक बहुत बडा बंगलो हे.. ओर अभी वहा कोइ नही रहेता.. बस.. कभी कभी दिनमे देवायतभैया अपने बीजनेसके सीलसीलेमे वहा आते जाते रहेते हे.. तो हम वही ठहेरेगे.. मे लखनभैयासे बात कर लेता हु..

कहेते श्रीधर फोन नीकालकर लखनसे कुछ बात करलेता हे.. ओर बात करतेही उनके मुहपे मुस्कान आगइ.. तो ब्रीन्दा सबकुछ समज गइ.. ओर सरमाते श्रीधरकी ओर देखते हसती रही.. अब उनकोभी श्रीधरसे मीलन करनेकी अ‍ेक आशा दिखने लगी.. ओर अ‍ेक श्रीधर था जो आगे बढ ही नही रहाथा.. तो इस बार ब्रीन्दाने भी मनमे ठानलीया की अगर इस मामलेमे श्रीधर कुछ आगे बढेगा तो वो उनका साथ देगी..

ओर इस रात दोनोही मां बेटेको नींद नही आइ.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके बारेमे सोचते सारी रात अपने अपने बीस्तरपे करवटे बदलते रहे.. ओर आखीर सुबह होगइ.. तो आज ब्रीन्दा सजधजके तैयार होगइ.. जैसे वो पहेली बार अपने प्रेमीके साथ घुमने जा रही हो.. उसने सुबह उठतेही अपनी चुतके सारे बाल साफ करके सब तैयारीया करली थी.. तो वही हाल श्रीधरकाभी था..

उसनेभी अब कीसीभी हालमे आगे बढनेकी ठानली थी.. वोभी सुबह तैयार होकर लखनके पास चला गया ओर उनके बंगलेकी चाबी लेकर वापस आगया.. तो दोनोने अपनी बाइकमे जानेका तैय करलीया.. ब्रीन्दा जयश्रीको दो दिन घरका ध्यान रखनेको कहेकर श्रीधरके साथ सहेरकी ओर चली गइ.. वो अ‍ेक प्रेमीकी तराह श्रीधरके कंधेपे हाथ रखते उनके पीछे थोडी दुरी बनाके बैठ गइ..

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. थोडी नजदीक ठीकसे बैठीयेना आप गीर जाओगी.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते थोडी नजदीक बैठते) बीटु.. कुछ तो सरम कर.. इधर हमारा गांव हे.. ओर वैसेभी मे तेरी मां हु.. तेरी गर्लफ्रेन्ड नही.. समजे हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरारतसे हसते धीरेसे) मोम.. आप अ‍ेक काम करो.. वैसेभी मेरी कोइ गर्लफ्रेन्ड नही हे.. हम दोनो दो दिन घुमने जा रहे हे.. तो ये दो दिन आप मेरी गल्रफ्रेन्ड बनही जाओ.. बडा मजा आयेगा.. हें..हें..हें.. फीर देखो आपको कहा कहा घुमाता हु..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते मुस्कुराते पीठमे अ‍ेक मुका जडते) चल.. चल.. बडा आया गर्लफ्रेन्ड बनाने वाला.. अब जानेभी दे.. आज कल तु बहुत बीगड गया हे.. हें..हें..हें..

कहातो श्रीधर हसते हुअ‍े अपनी बाइक चला देता हे.. ओर दोनोही सहेरकी ओर जाने लगे.. जब दोनोही बाइक लेकर अपने गांवसे बहार नीकल गये.. तब श्रीधरको बडाही आस्चर्य हुआ.. ओर वो खुस होकर मुस्कुराने लगा.. क्युकी गांवके बहार आतेही ब्रीन्दा श्रीधरके कहे बगैर ही उनके नजदीक श्रीधरसे चीपककर बैठ गइ.. ओर अपना हाथ श्रीधरके कंधेसे हटाकर उनकी कमरमे आटी लगाके रखदीया..

जैसे वो श्रीधरकी बीवी हो.. ओर अपने उरोजोको श्रीधरकी पीठपे रगडती रही.. तो श्रीधरभी मस्तीके मुडमे आगया.. ओर वोभी तेजीसे बाइक चलाता ओर गडे या स्पीड बेकर आतेही जोरोसे ब्रक लगाता तब ब्रीन्दाके उरोज श्रीधरकी पीठमे चुभ जाता.. ओर ब्रीन्दाको थोडा दर्द होता.. तब वो सरमाके मुस्कुराते श्रीधरकी पीठमे मुका मार देती.. दोनोही मां बेटे अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते सहेर पहोंच गये.. श्रीधरने पहेलेही तैय करलीया था की कहा दाखीला लेना हे..

तो श्रीधरने बाइकको सीधे वही कोलेजमे जानेदी.. श्रीधर ब्रीन्दाको अंदर अ‍ेक जगाहपे चेरपे बीठाकर अपने सब पेपर लेकर अ‍ेक ओफीसमे चला गया.. तो कुछही देरमे वहा श्रीधरको दाखीला मील गया.. ओर मुस्कुराते हुअ‍े वापस बहार आगया.. तब ब्रीन्दा बहुत कुछ समज गइ.. की श्रीधरने सब पहेलेसेही तैयारीया करके रखी हे.. ओर वो श्रीधरकी ओर देखते सरमाते मुस्कुराने लगी.. तो श्रीधर उनसे साथ सटकर बैठ गया..

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते धीरेसे) बीटु.. तुम बहुत कमीने हो.. तुमने पहेलेसे ही सब तैय कर लीयाथानां..? तो फीर मुजे साथ लेआनेकी क्या जरुरत थी..?

श्रीधर : (सरमाते हसते धीरेसे) मोम.. आपतो सारा दिन घरमे ही रहेती हे.. पापा आपको कभी अपने साथ घुमाने नही लेजाते.. ओर वैसेभी मे देख रहा हु.. आजकल आप दोनोके बीच कुछ ठीक चल नही रहा हे.. तो मेने सोचाकी चलो.. मेही आपको घुमाने लेजाउ.. इसीलीये आपको लेकर आया हु.. क्या मे ठीक केह रहा हुनां..?

कहतो ब्रीन्दा वहा सबकुछ भुलकर श्रीधरको हग करते अपने आंसुओको रोक नही सकी.. ओर वो श्रीधरके कंधेपे अपना सर रखते धीरेसे रोने लगी.. आज उसे पता चलाकी उनका बेटा उनको कीतना प्यार करता हे.. उसे मनमे लगने लगाकी श्रीधरके साथ आगे बढकर उसने कोइ गलती नहीकी.. ओर उसने तबही अपने आपको श्रीधरको समर्पीत करनेकी ठानली.. तब श्रीधरभी उनकी पीठ सहेलाते उनको सांत करने लगा..

ब्रीन्दा : (अपने आंसु पोछते) बीटु.. मेतो तुजे पाकर धन्य होगइ.. मुजेतो पताही नही थाकी मेरे बेटेको मेरी इतनी फीकर हे.. क्या अपनी मोमसे बहुत प्यार करता हे..? हंम..?

श्रीधर : (इमोस्नल होकर हग करते) हां मोम.. अपनी जानसे भी ज्यादा.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु.. मेने पापा ओर आपके बीचके रीस्तोमे बदलाव देखा हे.. मेने आपको अपने बीस्तरमे छुप छुपकर आंसु बहाते देखा हे.. ओर इसकी वजह भी मुजे पता हे..

ब्रीन्दा : (चोंकते श्रीधरकी ओर अ‍ेक नजरसे देखते) क्या..? बीटु.. तु क्या बोल रहा हे..? तुम कौनसी वजह की बात कर रहे हो..? बता मुजे..

श्रीधर : (खडा होकर) मोम.. प्लीज.. पहेले हम कही ओर चले..? हम वहा आरामसे बात करेगे.. ओर अभी खानेका टाइमभी हो गयाहे.. तो चलोना हम पहेले होटेलमे खाना खा लेते हे.. फीर हम लखनके बंगलेपे चले जायेगे वही आराम करते बाते करेगे..

तब ब्रीन्दाको भी अ‍ैसी जाहेर जगाहपे इस बारेमे बात करना उचीत नही लगा.. ओर वोभी खडी होगइ.. फीर दोनोही बाइक लेकर अ‍ेक होटेलमे चले गये.. ओर खानेका ओर्डर देदीया.. तबतक दोनोही अ‍ेक दुसरेसे बात नही कर रहेथे.. ब्रीन्दा बडीही सोचमे डुबी हुइ थी.. जब खाना आगया तो दोनोने खालीया.. फीर बील पे करके दोनो वहासे नीकल गये.. ओर सीधे ही लखनके बंगलोपे आगये..
 
ब्रीन्दातो बंगलेको देखती ही रेह गइ.. बंगलो अ‍ेक हाइ प्रोफाइल सोसायटीमे था.. जब दोनो ताला खोलकर अंदर गये.. तो ब्रन्दातो चारो ओर देखती रेही.. तब उसे पता चलाकी देवायत ओर लखन कीतने रहीस हे.. श्रीधरने अ‍ेक रुम खोल दीया.. तो उनमे बहुत बडा डबल बेड था.. श्रीधरने रुमका अ‍े.सी. चालु करदीया ओर दोनोही बेडपे आगये.. ओर थोडी दुरी बनाकर अ‍ैसेही बैठ गये.. तब ब्रन्दाने चुपी तोडी..

ब्रीन्दा : (श्रीधरकी ओर देखते) बीटु.. ये बंगलोतो बहुत बडा हे..? ओर सानदार भी हे..? क्या ये वाकइ ठाकुरोका हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां मोम.. इनके पास बहुत प्रोपर्टी हे.. लेकीन दोनो भाइमे पैसेका कोइ धमंड नही..

ब्रीन्दा : हां बीटु.. जानती हु उसे.. तुजे पता हे.. पहेले इन लोगोके गांव वालोके साथ कोइ रीस्ता नही था.. ओर ये सब तेरे दादाकी वजहसे हुआ था.. तेरे दादाने ही गांव वालोको इनके खीलाफ भडकाया था..

श्रीधर : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. क्या दादाजीने..? लेकीन क्यु..? ये लोगतो बहुत अच्छे हे..

ब्रीन्दा : हां बीटु.. इसीलीये की ठाकुरो उनकी पीछली तीन पीढीसे अपनी सगी बहेनसे सादी करते आये हे.. ओर ये रीस्ता हमारे समाजमे कभी स्वीकार नही हे.. तब वो लोग कहेते थेकी गांवमे रीस्तोको लेकर बहुत बदलाव आने वाला हे.. इसीलीये वो आश्रमके बाबाके कहेनेपे कर रहे हे.. बस.. ये बात तेरे दादाजी नही मानते थे.. तो उसने सब गांव वालोको इनके खीलाफ करदीया..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. कीतना अजीब हेनां.. उसी समय वो बाबाने जोभी कहाथा.. आज सब सच हो रहा हे.. आज हमारे गांवमे ज्यादातर लडके उनकी बहेनको ही प्यार करते हे.. ओर उनके साथ सादी करना चाहते हे.. तो लखनके बडे भैयाने अपनी बहेनकी सादी दुसरी जगाहपे करवाकर ये परंपरा तोडदी हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) अच्छा..? क्या सचमे गांवमे अ‍ैसा हो रहा हे..? बीटु.. मुजे गांवके बारेमे कुछ बतानां..?

श्रीधर : (सरमाते मुस्कुराते) हां मोम.. मेरे ज्यादातर दोस्त उनकी बहेनको प्यार करते हे.. ओर उनसे सादी करना चाहते हे.. ओर आपको अ‍ेक सीक्रेट बात बताउ.. कभी कीसीको कहेना नही.. हमारे लखन भैया खुद अपनी बहेन पुनमदीदीको चाहते थे.. लेकीन वो अपने दिलकी बात कभी पुनमदीदीको नही बतापाये.. ओर उनके बडे भैयाने पुनमदीदीकी सादी कही ओर करदी..

ब्रीन्दा : (सरारतसे मुस्कुराते) अच्छा..? तो फीर तुम अपने सभी दोस्तोमे बाकात कैसे रेह गये..? क्या तुजे कभी नही लगाकी मे भी मेरी बहेनसे प्यार करु.. तुमभी पटालेते जयश्रीको.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या मोम.. आपभीनां.. क्या ये खुद आप केह रही हो..? मौसीको देखा हे..? मुजे कच्चाही चबा जायेगी.. हें..हें..हें.. ओर वैसे मे अ‍ैसा करता तो क्या आपकोभी बुरा नही लगता..?

ब्रीन्दा : (बडीही सीफततासे दिलकी बात करते) नही बीटु.. अब जब गांवमे ही इतना बडा बदलाव होने वाला हे.. तो फीर मे क्यु अ‍ेतराज करुगी.. मुजे अ‍ैसे रीस्तोसे कोइ अ‍ेतराज नही.. वैसेभी जयश्री सुसील हे संस्कारी हे.. ओर खुबसुरत हे.. मुजे अ‍ैसी बहु ओर कहा मीलेगी..? अगर तुमभी इस बातपे आगे बढना चाहोतो बढ सकते हो.. लेकीन ध्यान रखना.. अभी इस बातका कीसीको पता ना चले..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) मोम.. वो मेरी बडी दीदी हे.. तो मे उनको कैसे..? मतलब.. अभी नही.. वैसेभी मेरे सपनोकी रानी कोइ ओरभी हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) अच्छा..? मतलब मेरा बीटु कीसी ओरको प्यार करता हे..? बताना.. तेरे सपनोकी रानी कौन हे..? बीटु.. तुजे अपने दिलकी बात उनको केह दिनी चाहीये.. वरना कही तेराभी तेरे दोस्त लखनभैया जैसा हो सकता हे.. कुछ दिन बाद पता चलेगा.. की तेरे सपनोकी रानी तो कही ओर कीसीकी रानी होगइ हे.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरमाते हसते) नही मोम.. अ‍ैसा कभी नही होगा.. समय आने दीजीये.. मे आपको बता दुगाकी मेरे सपनोकी रानी कौन हे.. खैर ये सब छोडीये.. ये बताइअ‍े.. आप मुजसे कुछ कहेना चाहती थी.. बताइअ‍े..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां बीटु.. बता मुजे.. तु मेरे आंसुओकी कीस वजाह की बात कर रहा था..? वहा हमारी बात अधुरी रेह गइ थी.. तुम मेरे ओर तेरे पापाके बारेमे क्या जानते हो..?

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) मोम.. प्लीज.. आप बुरा मत मानना.. क्या आप.. पापा ओर मौसीके बीच रीलेशनसे परेसान होनां..?

ब्रीन्दा : (आस्चर्यसे देखते) बीटु.. तुजे ये सब कैसे पता चला..?

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. मुजे सब पता हे.. मुजे इस बारेमे मेरे दोस्तोसे पता चला.. इस बातका मेरे सारे दोस्तोको भी पता हे.. तो मुजेभी उसीके माध्यमसे सब पता चला.. क्या ये सच हेनां..?

ब्रीन्दा : (अपना सर कंधेपे रखते) हां बीटु.. ये बात सच हे.. मुजे इस रीलेशनके बारेमे बहुत देरसे पता चला.. दो साल पहेले.. वरना मे तेरे पापाको पहेले ही छोड चुकी होती.. ओर तबतक तो तुमभी बहुत बडा होगया था.. तो मे तुजे कैसे छोडके जाती..? बीटु.. मे सीर्फ तेरे लीये ही रुकी हु.. अब सीर्फ तुम ही मेरे बुढापेका सहारा हो.. मुजे कभी मत छोडना.. वरना मे जी नही पाउगी..

श्रीधर : (हग करते) मोम.. आप फीकर मत करो.. आजसे आपकी सब जीम्वेवारी मेरी.. भुल जाओ सब.. कबतक अ‍ैसे घुट घुके जीयोगी..? मोम.. आइ लव यु.. मे आपसे सचमे बहुत प्यार करता हु..

ब्रीन्दा : (अ‍ेक नजरसे देखते) बीटु.. तु ये क्या बोल रहा हे.. मे जानती हु तु अभी जवान हे.. तेरी सादीभी नही हुइ हे.. तो जवानीके जोसमे अ‍ैसा बोल रहा हे.. लेकीन ये गलत हे.. मे मां हु तेरी..

श्रीधर : (हग करते) मोम.. मे जवान हु.. लेकीन ना समज नही.. मुजे पता हे मे क्या बोल रहा हु.. अभी आप पुछ रहीथीनां..? की मेरे सपनोकी रानी कौन हे..? मोम.. वो मेरे सपनोकी रानी आप हो.. हां मोम.. सीर्फ आप.. ओर मे इस रीस्तेको गलतभी नही मानता.. मेने अ‍ैसे कइ रीस्ते देखे हे..

ब्रीन्दा : (आस्चर्यसे देखते) क्या मे..? मतलम.. कैसे रीस्ते..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. कइ रीस्ते अ‍ैसे होते हे.. जीसका कोइ नाम नही होता.. मेने अ‍ैसी कइ ओरते ओर लडकीया देखी हे.. जीसे देखकर ना मनमे कोइ वासना आती हे ओर नाही हवस.. बस.. उसे सीर्फ पुजनेका मन करता हे.. ओर उसे पानेकी चाहत होती हे.. अ‍ैसा लगता हे हम उसे देखतेही रहे.. बस.. अ‍ैसी ही ओरतोमे से अ‍ेक आप हो.. मोम.. प्लीज.. मेरा प्यार कबुल करलीजीये..

ब्रीन्दा : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) मेरा बेटा बहुत समजदार होगया हे.. कीतनी प्यारी बाते करता हे.. लेकीन बेटा.. दुनीया अ‍ैसे रीस्तेको कभी स्वीकार नही करती.. ओर तुजे पताभी हे कीसीकी जीम्वेवारी उठाना कीतना मुस्कील काम हे.. कल जब तु सादीके लायक होजायेगा तब तुजे अपनी बीवीकी भी जीम्वेवारी उठानी पडेगी.. तब तु इस मां कोभी भुल जायेगा.. मे सारी जींदगी तुजे वो सुख कभी नही देपाउगी जो तुम्हारी जरुरत हे.. इसके बारेमे कभी सोचा हे..?

श्रीधर : (हाथ थामते) मोम.. मेने सब सोचलीया हे.. मे सादी ही नही करुगा.. क्या सीर्फ सरीर सुख ही थोडा जीवन हे..? मे सारी जींदगी अ‍ैसे ही आपकी पुजा करता रहुगा.. मोम.. बन जाओ मेरी सपनोकी रानी.. हम उसी घरमे रहेकर सबसे छुपकर हमारी अलग दुनीया बसायेगे.. मे आपको बहुत खुस रखुगा.. अ‍ैसा लगता हे आपके बीना जीना ही बेकार हे.. मे आपके बीना नही जी सकता..

ब्रीन्दा : (जोरका चांटा मारते आंसु बहाते) चुप होजा.. कैसी बाते कर रहा हे..? खबरदार जो आजके बाद अ‍ैसी बाते कीतो.. तो क्या मे तेरे बीना जीन्दा रहे पाउगी..?

कहेते ब्रीन्दा श्रीधरको कसके गले लगाकर अ‍ेक बार फीर आंसु बहाने लगी.. आज वो जो चाहती थी.. वो सपना उसे पुरा होते दीखने लगा.. अबतक श्रीधर ब्रीन्दाको अपने प्यारका इजहार कीतनी बार कर चुकाथा.. फीरभी ब्रीन्दा अपने बेटेके प्यारको कबुल करनेकी हिंमत नही जुटापाइ.. थोडी देर अ‍ैसेही दोनो मां बेटे बैठे रहे.. तब श्रीधर धीरे धीरे ब्रीन्दाकी पीठको सहेलाता रहा.. तब ब्रीन्दा श्रीधरसे अलग होगइ..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. आप थोडी देर आराम करलो.. फीर मे मेरी सपनोकी रानीको कही घुमाने लेजाउगा.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाके मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) चल.. बदमास कहीका.. तु अपनी हरकोतेसे बाज नही आयेगा.. चल.. तुभी थोडा आराम करले.. फीर चलेगे..

दोनोही मां बेटे वही थोडी दुरी बनाकर लैट गये.. तब थोडीही देरमे दोनोको नींद आगइ.. दोनोही साम तक सोते रहे.. तब ब्रीन्दाकी आंख खुल गइ.. ओर वो जटसे श्रीधरकी ओर देखने लगी.. की कही उनके बेटेने उनके साथ कोइ सरारत तो नही की..? लेकीन श्रीधर गहेरी नींद सो रहाथा तब उसे श्रीधरका चहेरा बडाही मासुम लगा.. ओर वो मुस्कुराते बाथरुममे चली गइ.. ओर फे्स होकर बहार आगइ..
 
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