रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १६४
तब ब्रीन्दा तीनोके लीये पानी लेकर आइ.. फीर लखनकी ओर मुस्कुराते चाइका कहेकर कीचनमे चली गइ.. कुछही देरमे तीनोके लीये चाइ लेकर आगइ.. तो तीनोने चाइ पीली.. तबतक ब्रीन्दा वही खडी रही.. ओर बार बार लखन ओर श्रीधरके पेन्टके उभारको देखती रही.. तब कुछही देरके बाद लखन ओर बंसी श्रीधरको गले मीलकर चले गये.. जब लखन ओर बंसी चले गये तब श्रीधरके रुममे सीर्फ ब्रीन्दा ओर श्रीधर ही रेह गये.. तब ब्रीन्दा श्रीधरकी ओर देखते कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी....अब आगे
श्रीधर : (धीरेसे) मोम.. आपकी बहु कीधर गइ..? ओर पापा..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते उपरकी ओर उंगली करते) जागृती आइ हे.. तो उनके साथ उपर अपने रुममे हे.. ओर तेरे पापा ओर बडे भैया होलमे बैठकर तुम दोनोकी सादीकी प्लानींग कर रहे हे.. हें..हें..हें..
कहातो श्रीधर समज गयाकी अब जयश्री आधे घंटे.. अेक घंटेसे पहेले नीचे आने वाली नही हे.. तो वो मुस्कुराते खुस होकर बेडसे खडा होगया.. ओर जाकर धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध कर देता हे.. तब ब्रीन्दा समज गइ.. ओर सरमाते मुस्कुराते रुमसे बहार जाने लगी.. तो श्रीधरने उसे रास्तेमे ही रोक लीया.. ओर ब्रीन्दाकी कमरमे हाथ डालकर उसे दिवालसे सटाकर अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब ब्रींदा सरमाते हसते हुअे उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी..

कोसीस क्या..? समजोना वो सीर्फ श्रीधरकी बाहोसे छुटनेका नाटक ही कर रहीथी.. वो मनसे चाहती थी की उनका बेटा श्रीधर उसे अभी मसलदे.. वो धीरेसे हसते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तब श्रीधरने दोनो हाथोसे उनका चहेरा अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. तब ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होते सांत होगइ.. ओर उसने अपनी आंख बंध करली.. तभी उसे अपने होठोपे श्रीधरके होठ चुमते महेसुस हुअे..
ओर ब्रीन्दा मदहोस होने लगी.. तो श्रीधरने अेक हाथसे सारीके उपरसेही ब्रीन्दाके उरोजोको थाम लीया.. ओर उसे दबाते मसलते ब्रीन्दाके होठोका रसपान करने लगा.. तब ब्रीन्दाने भी उतेजीत होते श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगती हे.. दोनोही मदहोस होकर अेक दुसरेके चहेरेको चुमते प्यार करने लगे.. तब अचानक श्रीधरने अेक हाथ नीचे लेजाते ब्रीन्दाकी चुतको अपनी मुठीमे दबोच लीया.. तब ब्रीन्दा उछलते होसमे आगइ.. ओर जटसे श्रीधरसे अलग होगइ..
ब्रीन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे) बस.. बस.. बीटु.. अभी ओर कुछ नही.. तुम दरवाजा खोलदे.. अभी इधर कोइभी आ सकता हे.. हम दोनो बादमे मीलेगे.. क्या इतने दिन अपनी बहेनको मीलकर आया हे.. फीरभी तेरा दिल नही भरा..? हें..हें..हें..
श्रीधर : (बाहोमे भरते मुस्कुराते) मोम.. क्या कभी आपसे प्यार करनेमे मेरा दिल भरा हे..? बहेनकी बात अलग हे.. ओर आपकी तो बात ही कुछ ओर हे.. आप मेरा पहेला प्यार ओर मेरी पहेली बीवी हो.. मोम.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु.. बहेनसे भी ज्यादा.. मे आपसे जल्दसे जल्द मीलना चाहता हु.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. चलोना. हम भी कही भाग जाये.. हें..हें..हें..
ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते होंठ चुमकर धीरेसे) नही बीटु.. अब हमे कही भागनेकी जरुरत नही हे.. बस.. तुम सीर्फ देखते जाओ.. वैसे थेन्क्स.. मे जो चाहती थी.. तुमने कर दीखाया.. तुमने मेरा सपना पुरा कर दीया.. लेकीन अभी इस वक्त हमारा मीलना ठीक नही हे.. बस.. हमे मौका मीलने दे.. हम बादमे जरुर मीलगे.. मुजे भी तुमसे मीलना हे.. लेकीन अभी सब लोग घरपे हे.. मे नही चाहती हम दोनोके रीलेशनके बारेमे कीसीको भी पता चले.. तेरी बीवीको भी नही.. समजे..? जा दरवाजा खोलदे..
श्रीधर : (भारी मनसे दरवाजा खोलते) मोम.. आपने मुजे कुछ बतानेका वादा कीयाथा.. तो अबतो हमारी सादी भी होगइ हे.. तो अब तो आप बतादो.. आपने बहेनको मेरे साथ रीलेशन रखनेको क्यु कहाथा..? मेतो आपसे प्यार करता था.. हम जींदगीभर पती पत्नी होकर साथमे रहेने वालेथे.. हम दोनो कीतने खुस थे.. तो फीर कब बताओगी..?
ब्रीन्दा : (बहार जाते प्यासे गालपे चपत लगाते) बीटु बस.. थोडा ओर सब्र करले.. हम दोनो पती पत्नी बनकर साथही रहेगे.. मे तुजे सबकुछ बता दुगी.. जब हम दोनो अकेले होगे.. लेकीन ध्यान रखना.. हमारे बारेमे कीसीको पता ना चले.. मे हमारे इस रीस्तेको हमेसाके लीये सबसे छुपाकर रखना चाहती हु.. समजे..?
कहेते ब्रीन्दा मुस्कुराते श्रीधरको गालपे प्यारसे चपल लगाते बहार चली गइ.. तो श्रीधर भी मुस्कुराने ब्रीन्दाको जाते हुअे देखता रहा.. उनका लंड पेन्टके अंदर तनके तंबु बनाके अबभी जटके मार रहाथा.. ब्रीन्दा अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे लेट गइ.. अपना मंगलसुत्र अपने ब्लाउसमे हाथ डालकर नीकालते हाथमे लेकर उसे होठोपे लगाते चुमती हे.. ओर चुमकर लोकेट खोलकर अपनी ओर श्रीधरकी फोटो देखते मुस्कुराती हे..
ये वही मंगलसुत्र था जो उसे श्रीधरने दीयाथा.. ओर श्रीधरके कोलेजके दो साल खतम होने तक अपने पास सम्हालके रखाथा.. जैसेही श्रीधरकी कोलेज खत्म हुइ.. वो श्रीधरको लेकर घरसे दो दिनके लीये नीकल गइ थी.. फीर दोनोही सहेरसे दुर अेक जगाहपे चले गये..
वहा अेक मंदिरमे पंडीतका इन्तजाम करके उसने श्रीधरके साथ सादी करली थी.. ओर श्रीधरने वही ब्रीन्दाकी मांग भरते उसे यही मंगलसुत्र पहेनाया था.. फीर दोनोही वापस सहेरमे उसी जगाहपे आगये.. जहा दोनो पहेली बार मीलेथे.. हमारे लखनभैयाके बंगलोपे..
सादी करके अब ब्रीन्दा हमेसाके लीये श्रीधरकी अर्धांगीनी होगइ थी.. उस रात दोनोने वही फीरसे बाकायदा सादी करके अपनी सुहागरात मनाइ.. पुरी रात श्रीधर ब्रीन्दाकी चुदाइ करता रहा.. उस रात श्रीधरने ब्रीन्दाकी वाकइ हालत खराब करदी थी.. वो दुसरे दिन ठीकसे चलभी नही पा रहीथी.. यही सब सोचते ब्रीन्दा अेक हाथ अपनी आंखोपे रखते ओर दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाते अपने बेटेके साथ हुअे अपने नाजायज रीस्तेके बारेमे सोचते अतीत मे चली गइ..
(थोडासा अतीतमें)
बात तबकी थी जब ब्रीन्दाको पहेली बार अपने पती ओर उनकी भाभी यानीकी उनकी जेठानी जो ब्रीन्दाकी बडी कजीन बहेनभी थी.. उनके बीच नाजायज रीलेशनका पता चला.. तब श्रीधर १६ सालका हो चुका था.. तब ब्रीन्दाको इन दोनोके रीस्तोके बारेमे पता चला तब बहुत देर हो चुकी थी.. क्युकी तब श्रीधर जवानीकी दहेलीजपे कदम रख चुकाथा.. तो वो इस उमरमे अपने पतीको डीवोर्स भी नही दे सकती.. तबसे ब्रीन्दाने अपने पतीके साथ हमेसा हमेसाके लीये दुरी बनाली थी..
वो सीर्फ उनके साथ अेक ही रुममे रहेती थी.. लेकीन दोनो ही पती पत्नी अलग अलग सोते थे.. ब्रीन्दा अपने पती जीतुलालको अपने तनको हाथभी नही लगाने देती थी.. अेक बार जीतुलालने उनके साथ जबरदस्ती करनेकी कोसीसकी.. तो ब्रीन्दाने उसे वही जोरोका चांटा गालपे जड दीया था.. ओर उसे अपनी भाभीके पास जानेको केह दीया..
तब जीतुलालभी समज गयाकी ब्रीन्दाको अपनी भाभीके साथ रीस्तोके बारेमे पता चल गया हे.. ब्रीन्दाने अैसेही अपने सारीरीक सुखके बीना दो साल नीकाल दीये.. हालाकी तब ब्रीन्दाकी उमर इतनी भी नहीथी.. की वो इस सारीरीक सुखसे वंचीत रेह सके.. वो महज ३७ सालकी थी.. इन दो सालोमे ब्रीन्दाने अपने हाथोसे काम चलाते अपने आपको संतुस्ट कीयाथा..
तो इन दो सालोके बाद श्रीधरभी १८ सालका हो चुकाथा.. ओर ब्रीन्दा बहुत पढी लीखी ओर काफी खुली सोच वाली ओरत थी.. उपरसे अैसी कोम.. जो बहुतही सीयानी.. घरमे क्या हो रहा हे कभी बहार वालेको पताही नही चलता.. उनके घरमे आज तक कीसीने उची आवाजमे बात तक नहीकी.. जोभी मसला होता वो सब लोग आपसमे बैठकर उनका नीपटारा कर लेते..
लेकीन ब्रीन्दाने आजतक घरमे कीसीको पता चलने नही दीया.. की उन्होने अपने पती जीतुलालके साथ सब रीस्ते खतम करलीये हे.. हालाकी जीतुलालके माध्यमसे उनकी भाभी वृन्दाको सब पता चल चुकाथा.. इन दो सालमे ब्रीन्दाभी सारीरक सुखसे वंचीत रही तब उनके तनकी आगभी बेकाबु हो चुकी थी.. तब ब्रीन्दाको भी अेक मर्दकी सख्त कमी महेसुस होने लगी.. ओर सारीरक सुखके बीना तडपने लगी..
वो इन दो सालोमे बीना चुदाइ बहुतही कामी औरत होगइ थी.. तब उसने देवायतके बारमे बहुत कुछ सुनाथा की कैसे उनका कइ ओरते ओर लडकीयोके साथ रीलेशन हे.. तब बाकी ओरतेकी तराह वोभी देवायतके साथ रीलेशनमे आना चाहती थी.. लेकीन उनको अपनी बदनामीका खतराभी बहुत लगता था.. ओर आखीर ब्रीन्दाने देवायतको मीलनेका खयाल छोड दीया..
ओर वो अपने तनकी आग मीटानेका दुसरा कोइ रास्ता ढुंढने लगी.. जो बीलकुल सेइफ हो.. ओर आखीर उसे अपने तनकी आग बुजानेका अेक रास्ता मील ही गया.. वो रोज सुबह अपने बेटे श्रीधरको जगाने जाती.. तब उनके गालको प्यारसे चुमकर उसे जगाने लगी.. जब श्रीधर बेडसे उठ जाता तो उनको हग करती.. फीर उनके रुमकी सफाइ करती ओर वापस चली जाती.. ये सब रोजका रुटीन हो चुकाथा..