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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १७७
आज सामतके घर खुसीका माहोल था.. सबको अपनी उमीद पुरी होती नजर आइ.. पर जैसेही जयाने कुछ दिन सहेर रहेनेकी बात की.. तब जागृतीके मनमे आसंकाये आने लगी.. जबसे रमेशके घरपे रमेश ओर जयाकी बात सुनकर आइ.. तबसे उसे सांतीने कही अेक अेक बात सच होते नजर आने लगी.. की आने वाले दिनोमे सायद उनको ओर सांतीको ही इस घरको सम्हालना पडेगा.. ओर आज उनका सक ओर पका होगया....अब आगे
उधर सहेर पहोचते ही लखन सबसे पहेले सृतीको उनकी क्लीनीकपे ड्रोप करदेता हे.. ओर उसे वापस आनाहो तब फोन करनेको कहेकर लता ओर रजीयाको लेकर अपने बंगलोपे आजाता हे.. ओर दोनोको यहा ड्रोप करके होटेलसे कुछ खानेका इन्तजाम करनेको कहेकर चला जाता हे.. तो अंदर आतेही रजीया ओर लता मीलकर घरकी सफाइ करने लगी.. वहा कोइ नही रहेता था तो काफी मीटी जमा होगइ थी..
तभी रजीया ओर लता अेब बेडरुममे सफाइ करने चली गइ.. तो बेडकी चदरपे कुछ धब्बे दीखाइ दीये.. ओर पुरी चदर अस्त व्यस्त थी.. तो लता ओर रजीयाको जरासा भी समजनेमे देर नही लगी.. की ये धब्बे कीसके हे.. लता गुस्सा होते बडबडाने लगी.. ओर चदरको खीचकर वोसींग मशीनमे डालने जाने लगी.. उनको पता चल गया की ये चदर अभी कोन खराब करके गया हे.. तो रजीयाभी सरमाके हस रहीथी.. तभी..
रजीया : (सरमाकर हसते) दीदी.. यहा कोन आया होगा.. हें..हें..हें..
लता : (गुस्सेसे) अरे वो कमीने होगे.. जो अभी घरसे भागकर यहा आये थे.. लखनके दोस्त ओर उनकी बहेन.. क्या नाम हे उनका..? हां श्रीधर भैया ओर उनकी बहेन जयश्री.. सालेने उनकी बहेनको ठोक ठोककर मेरी चदर खराब करदी.. येभी नही की चलो सब साफ करके जाये..
रजीया : (जोरोसे हसते) दीदी लाइअे इसे मे धो देती हु.. आप दुसरा काम देख लीजीये.. हें..हें..हें..
जब दोनो काम कर रही थी तब हमारे लखन भैया सीधेही अपनी पुरानी मासुकाको मीलने होस्टेलपे चले गये थे.. वो बोय्स होस्टेमे थे ओर पास बगलमे ही गल्र्स होस्टेल थी.. तो लखन बार बार पुनमको मीलने गल्र्स होस्टेलपे जाता था.. तब ही गल्र्स होस्टेलकी मालकीन राधीका मेडम जो पुनमकी तराह वोभी बहुत खुबसुरत.. लंबे चुतड तक बाल.. तीखे नैन नक्स.. दिखनेके बहुत सेक्सी ओर कामुक दीखती थी..
राधीका अेक त्यक्ता थी.. अपने पीताका बीजनेस वारीसमे मीला था.. क्युकी वो उनकी अेकलौती संतान थी.. ओर सादीके तीन साल बाद ही हसबन्डका दुसरी ओरतके साथ रीलेशनकी वजहसे पतीसे अलग होगइ थी.. उनके परीवारमे सीर्फ उनकी बुढी मां ही थी.. जो अभी पेरेलीसीसकी वजहसे बेडमे थी.. उनकी आंखोमे हमारे हेन्डसम ओर स्मार्ट लखन भैया बस गये थे.. तबसे दोनोके बीच टाका भीडा हुआ था..
जब लखन ओर पुनम होस्टेलमे रहेकर पढाइ कर रहे थे तब पुनम बहुत ही खुबसुरत ओर बहुत गौरी थी.. ओर अपने भाइ लखनसे उनकी बहुत पटती थी.. दोनो भाइ बहेन हर दिन मीलकर दो दो घंटे बाते कीया करते थे.. लखन हर दिन पुनमको मीलने आता था.. जीनकी वजह कुछ ओर ही थी.. दरसल हमारे लखन भैया मन ही मन अपनी बहेन पुनमको चाहने लगे थे.. इसीलीये बार बार उनको मीलने आते थे..
लेकीन पुनम उनकी बहेन थी.. तो अपने दिलकी बात पुनमको कहेने मे डर रहे थे.. लेकीन हर दिन पुनमसे बाते करते उनको रीजाकनेकी ओर अपनी ओर आकर्सीत करनेकी कोसीस करते थे.. वो पुनमका हर तराह खयाल रखते थे.. उनके कपडे लाना.. उनके मेकअपका सामान गीफ्ट करना.. यहा तक वो पुनमके अंडरगार्मेन्ट भी लेने लगे.. तब सुरुमेतो पुनम बहुत ही सरमाइ.. लेकीन फीरतो ये सब रुटीन हो गया था..
दोनो भाइ बहेन होस्टेलमे नीचे होलमे बैठकर हर तहरकी बाते खुलकर कीया करते.. लखन पुनमको इमेजींग करते उनके नामकी कइ बार मुठ मार चुका था.. वो पुनमको अक्सर सोपींगपे ओर कभी कभी फील्म दीखाने भी लेजाता.. कभी कभी पुनमको बुरा ना लगे इसीलीये वो मंजुके कपडे भी लेजाता.. लेकीन तब लखनको नही पता थाकी पुनमके दिलमे देवायत राज करता हे.. जो उसे सुरुसे ही पसंद करती थी..
जब लखन पुनमका जरुरतसे ज्यादा खयाल रखने लगा.. तब पुनमको भी आसंकाये होने लगी थी.. की कही लखन भैया उनको प्यारतो नही करने लगे..? लेकीन तब उनके दिलमे सीर्फ उनका बडा भाइ देवायत ही छाया हुआ था.. वो मन ही मन अपने भाइ देवायतको प्यार करती थी.. ओर ज्यादातर लखन ओर पुनम अपने परीवार ओर देवायतकी बाते ही कीया करते थे.. ओर लखन भैया अपने दिलकी बात पुनमको कभी नही केह पाये..
तो दुसरी ओर वहाकी मेडम यानीकी होस्टेलकी मालकीन राधीका ओर पुनमके बीच बहुत पटती थी.. मानो दोनो पक्की सहेलीया हो.. जबभी लखन पुनमको मीलने आता राधीका ओर लखनकी आंखे मीलती तब राधीका लखनको देखते मुस्कुराया करती.. तो लखन कइ बार राधीकाके लीये भी कपडे लेआता.. ओर उनको गीफ्टके तौरपे दे देता.. इसी तराह राधीका ओर लखनके बीच भी नजदीकीया बढने लगी थी..
लेकीन राधीकाको लखनकी आंखोमे कीसी ओरके लीये बेसुमार प्यार नजर आने लगा था.. उनको लखनके लीये हम दर्दी होने लगी थी.. ओर अेक दिन जब लखन पुनमको मीलने होस्टेलपे आया तब राधीकाने लखनको कहा की अेक्जामकी वजहसे आज पुनमका अेक्सट्रा क्लास हे.. तो पुनमको आनेमे देर लगेगी.. उसी दिन राधीकाको लखनसे बात करनेका मौका मील गया.. तब राधीकाने बातो बातोमे लखनसे पुछ ही लीया.. की वो इतना प्यार कीसको करते हे..?
तब लखनकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने अपने प्यारके बारमे राधीकाको नही बताया.. बस आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तब राधीकाने उसे सम्हाला.. फीर तो जबभी लखन आता राधीका उनको प्यार भरी नजरोसे देखती.. ओर अैसेही दोनोके बीच आंखो ही आंखोमे प्यार होने लगा.. वैसेतो राधीका कीसीको भाव नही देती थी.. लेकीन उनके मनमे अब लखन पुरी तराह छा चुका था.. इस बातको पुनमने भी नोटीस कीया..
ओर अेक दिन मौका मीलते ही इस बारेमे पुनमने राधीकासे खुलकर बात करली.. तो राधीकाने लखनसे प्यार होनेकी बात कबुल करली.. तो सुनकर पुनम भी बहुत खुस होगइ.. ओर इसी तराह पुनमने लखनकी सेटींग राधीकासे करवा दी.. ओर अेक दिन लखन पुनमको मीलने आया तब पुनमने ही लखनको ओर राधीकाको अेकांत देनेके लीये उनके रुममे भेज दिया.. बस.. उस दिन पहेली बार लखन ओर राधीका प्यार करते करते बहेक गये..
ओर दोनोके बीच पहेली बार फीजीकल रीलेशन होगये.. राधीका कइ सालोसे इस प्यारसे वंचीत थी.. तो लखनके साथ मीलन करके राधीकाभी संतुस्ट होकर बहुत खुस होगइ.. फीर तो दोनो अक्सर मीलने लगे.. ओर दोनो खुब चुदाइ करते.. लखन ओर पुनम अक्सर राधीकाके साथ उनके घरपे भी जाने लगे.. वहा सीर्फ उनकी बुढी मां थी.. दोनो भाइ बहेन पुरा दिन वहा रहेते.. जीसे राधीकाकी मम्मी ओर लखन पुनमके बीच भी घनीस्ट रीस्ता हो गया..
अब अकेलेमे पुनम राधीकाको भाभी भाभी कहेकर छेडती.. तब राधीका जुठ मुठ गुस्सा होकर बहुत सरमाती.. लेकीन मनसे बहुत खुस होती.. वहा भी पुनम राधीकाकी मम्मीके साथ बाते करते उनको बातोमे बीजी रखती.. ओर लखन राधीकाको राधीकाके रुममे मीलनेका मौका देती.. तब लखन ओर राधीका उनके कमरेमे चले जाते.. ओर खुब प्यार करते.. लखनने राधीकाको उनके घरपे भी कइ बार चोद लीया था..
इसी बीच राधीकाने लखनसे चुदवाते चुदवाते उनके प्यारके बारेमे सभी बाते जानली.. की लखन अपनी बहेन पुनमको ही प्यार करता हे.. जीसे सुनकर अेक बारतो राधीकाभी चोंक गइ थी.. की कही भाइ बहेनके बीच प्यार होता हे..? फीर लखनने राधीकाको अपने परीवारकी बात बतादी.. की कैसे पीछली तीन पीढीसे उनके खानदानमे सबलोग अपनी बहेनसे ही सादी करते आये हे..
लखनने उनके खानदानके श्रापके बारेमे बता दीया.. जीसे सुनकर राधीकाको भी अचरज हुआ.. लेकीन लखनने उनको कसम खीलाकर इस बारेमे कीसीको ना कहेनेकी बात कहेदी.. ओर राधीकाने भी इस बातका जीक्र कीसीसे नही करनेकी कसम खाली.. इसी तराह लखन ओर पुनमकी बात हमेसा हमेसाके लीये लखन ओर राधीकाके दिलमे दफन होगइ..
जब देवायतने लखनको पुनमके रीस्तेकी बात की.. तब लखन पुरी तराह टुट चुका था.. उस रात लखनने अपने रुममे जाकर खुब आंसु बहाया.. तब राधीकाने उसे सम्हाल लीया.. वो लखनपे अपनी जान भी छीडकती थी.. जब भी लखन उनको मीलने जाता राधीका सीर्फ पुनमपे ही भरोसा करती.. ओर उनको रुमके बहार खडी रखकर रुमका ओर ओफीसका ध्यान रखनेको कहेती.. ताकी कोइ रुममे धुसकर ना आजाये.. ओर वो आरामसे लखनसे चुदवाती..
अध्याय - १७७
आज सामतके घर खुसीका माहोल था.. सबको अपनी उमीद पुरी होती नजर आइ.. पर जैसेही जयाने कुछ दिन सहेर रहेनेकी बात की.. तब जागृतीके मनमे आसंकाये आने लगी.. जबसे रमेशके घरपे रमेश ओर जयाकी बात सुनकर आइ.. तबसे उसे सांतीने कही अेक अेक बात सच होते नजर आने लगी.. की आने वाले दिनोमे सायद उनको ओर सांतीको ही इस घरको सम्हालना पडेगा.. ओर आज उनका सक ओर पका होगया....अब आगे
उधर सहेर पहोचते ही लखन सबसे पहेले सृतीको उनकी क्लीनीकपे ड्रोप करदेता हे.. ओर उसे वापस आनाहो तब फोन करनेको कहेकर लता ओर रजीयाको लेकर अपने बंगलोपे आजाता हे.. ओर दोनोको यहा ड्रोप करके होटेलसे कुछ खानेका इन्तजाम करनेको कहेकर चला जाता हे.. तो अंदर आतेही रजीया ओर लता मीलकर घरकी सफाइ करने लगी.. वहा कोइ नही रहेता था तो काफी मीटी जमा होगइ थी..
तभी रजीया ओर लता अेब बेडरुममे सफाइ करने चली गइ.. तो बेडकी चदरपे कुछ धब्बे दीखाइ दीये.. ओर पुरी चदर अस्त व्यस्त थी.. तो लता ओर रजीयाको जरासा भी समजनेमे देर नही लगी.. की ये धब्बे कीसके हे.. लता गुस्सा होते बडबडाने लगी.. ओर चदरको खीचकर वोसींग मशीनमे डालने जाने लगी.. उनको पता चल गया की ये चदर अभी कोन खराब करके गया हे.. तो रजीयाभी सरमाके हस रहीथी.. तभी..
रजीया : (सरमाकर हसते) दीदी.. यहा कोन आया होगा.. हें..हें..हें..
लता : (गुस्सेसे) अरे वो कमीने होगे.. जो अभी घरसे भागकर यहा आये थे.. लखनके दोस्त ओर उनकी बहेन.. क्या नाम हे उनका..? हां श्रीधर भैया ओर उनकी बहेन जयश्री.. सालेने उनकी बहेनको ठोक ठोककर मेरी चदर खराब करदी.. येभी नही की चलो सब साफ करके जाये..
रजीया : (जोरोसे हसते) दीदी लाइअे इसे मे धो देती हु.. आप दुसरा काम देख लीजीये.. हें..हें..हें..
जब दोनो काम कर रही थी तब हमारे लखन भैया सीधेही अपनी पुरानी मासुकाको मीलने होस्टेलपे चले गये थे.. वो बोय्स होस्टेमे थे ओर पास बगलमे ही गल्र्स होस्टेल थी.. तो लखन बार बार पुनमको मीलने गल्र्स होस्टेलपे जाता था.. तब ही गल्र्स होस्टेलकी मालकीन राधीका मेडम जो पुनमकी तराह वोभी बहुत खुबसुरत.. लंबे चुतड तक बाल.. तीखे नैन नक्स.. दिखनेके बहुत सेक्सी ओर कामुक दीखती थी..
राधीका अेक त्यक्ता थी.. अपने पीताका बीजनेस वारीसमे मीला था.. क्युकी वो उनकी अेकलौती संतान थी.. ओर सादीके तीन साल बाद ही हसबन्डका दुसरी ओरतके साथ रीलेशनकी वजहसे पतीसे अलग होगइ थी.. उनके परीवारमे सीर्फ उनकी बुढी मां ही थी.. जो अभी पेरेलीसीसकी वजहसे बेडमे थी.. उनकी आंखोमे हमारे हेन्डसम ओर स्मार्ट लखन भैया बस गये थे.. तबसे दोनोके बीच टाका भीडा हुआ था..
जब लखन ओर पुनम होस्टेलमे रहेकर पढाइ कर रहे थे तब पुनम बहुत ही खुबसुरत ओर बहुत गौरी थी.. ओर अपने भाइ लखनसे उनकी बहुत पटती थी.. दोनो भाइ बहेन हर दिन मीलकर दो दो घंटे बाते कीया करते थे.. लखन हर दिन पुनमको मीलने आता था.. जीनकी वजह कुछ ओर ही थी.. दरसल हमारे लखन भैया मन ही मन अपनी बहेन पुनमको चाहने लगे थे.. इसीलीये बार बार उनको मीलने आते थे..
लेकीन पुनम उनकी बहेन थी.. तो अपने दिलकी बात पुनमको कहेने मे डर रहे थे.. लेकीन हर दिन पुनमसे बाते करते उनको रीजाकनेकी ओर अपनी ओर आकर्सीत करनेकी कोसीस करते थे.. वो पुनमका हर तराह खयाल रखते थे.. उनके कपडे लाना.. उनके मेकअपका सामान गीफ्ट करना.. यहा तक वो पुनमके अंडरगार्मेन्ट भी लेने लगे.. तब सुरुमेतो पुनम बहुत ही सरमाइ.. लेकीन फीरतो ये सब रुटीन हो गया था..
दोनो भाइ बहेन होस्टेलमे नीचे होलमे बैठकर हर तहरकी बाते खुलकर कीया करते.. लखन पुनमको इमेजींग करते उनके नामकी कइ बार मुठ मार चुका था.. वो पुनमको अक्सर सोपींगपे ओर कभी कभी फील्म दीखाने भी लेजाता.. कभी कभी पुनमको बुरा ना लगे इसीलीये वो मंजुके कपडे भी लेजाता.. लेकीन तब लखनको नही पता थाकी पुनमके दिलमे देवायत राज करता हे.. जो उसे सुरुसे ही पसंद करती थी..
जब लखन पुनमका जरुरतसे ज्यादा खयाल रखने लगा.. तब पुनमको भी आसंकाये होने लगी थी.. की कही लखन भैया उनको प्यारतो नही करने लगे..? लेकीन तब उनके दिलमे सीर्फ उनका बडा भाइ देवायत ही छाया हुआ था.. वो मन ही मन अपने भाइ देवायतको प्यार करती थी.. ओर ज्यादातर लखन ओर पुनम अपने परीवार ओर देवायतकी बाते ही कीया करते थे.. ओर लखन भैया अपने दिलकी बात पुनमको कभी नही केह पाये..
तो दुसरी ओर वहाकी मेडम यानीकी होस्टेलकी मालकीन राधीका ओर पुनमके बीच बहुत पटती थी.. मानो दोनो पक्की सहेलीया हो.. जबभी लखन पुनमको मीलने आता राधीका ओर लखनकी आंखे मीलती तब राधीका लखनको देखते मुस्कुराया करती.. तो लखन कइ बार राधीकाके लीये भी कपडे लेआता.. ओर उनको गीफ्टके तौरपे दे देता.. इसी तराह राधीका ओर लखनके बीच भी नजदीकीया बढने लगी थी..
लेकीन राधीकाको लखनकी आंखोमे कीसी ओरके लीये बेसुमार प्यार नजर आने लगा था.. उनको लखनके लीये हम दर्दी होने लगी थी.. ओर अेक दिन जब लखन पुनमको मीलने होस्टेलपे आया तब राधीकाने लखनको कहा की अेक्जामकी वजहसे आज पुनमका अेक्सट्रा क्लास हे.. तो पुनमको आनेमे देर लगेगी.. उसी दिन राधीकाको लखनसे बात करनेका मौका मील गया.. तब राधीकाने बातो बातोमे लखनसे पुछ ही लीया.. की वो इतना प्यार कीसको करते हे..?
तब लखनकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने अपने प्यारके बारमे राधीकाको नही बताया.. बस आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तब राधीकाने उसे सम्हाला.. फीर तो जबभी लखन आता राधीका उनको प्यार भरी नजरोसे देखती.. ओर अैसेही दोनोके बीच आंखो ही आंखोमे प्यार होने लगा.. वैसेतो राधीका कीसीको भाव नही देती थी.. लेकीन उनके मनमे अब लखन पुरी तराह छा चुका था.. इस बातको पुनमने भी नोटीस कीया..
ओर अेक दिन मौका मीलते ही इस बारेमे पुनमने राधीकासे खुलकर बात करली.. तो राधीकाने लखनसे प्यार होनेकी बात कबुल करली.. तो सुनकर पुनम भी बहुत खुस होगइ.. ओर इसी तराह पुनमने लखनकी सेटींग राधीकासे करवा दी.. ओर अेक दिन लखन पुनमको मीलने आया तब पुनमने ही लखनको ओर राधीकाको अेकांत देनेके लीये उनके रुममे भेज दिया.. बस.. उस दिन पहेली बार लखन ओर राधीका प्यार करते करते बहेक गये..
ओर दोनोके बीच पहेली बार फीजीकल रीलेशन होगये.. राधीका कइ सालोसे इस प्यारसे वंचीत थी.. तो लखनके साथ मीलन करके राधीकाभी संतुस्ट होकर बहुत खुस होगइ.. फीर तो दोनो अक्सर मीलने लगे.. ओर दोनो खुब चुदाइ करते.. लखन ओर पुनम अक्सर राधीकाके साथ उनके घरपे भी जाने लगे.. वहा सीर्फ उनकी बुढी मां थी.. दोनो भाइ बहेन पुरा दिन वहा रहेते.. जीसे राधीकाकी मम्मी ओर लखन पुनमके बीच भी घनीस्ट रीस्ता हो गया..
अब अकेलेमे पुनम राधीकाको भाभी भाभी कहेकर छेडती.. तब राधीका जुठ मुठ गुस्सा होकर बहुत सरमाती.. लेकीन मनसे बहुत खुस होती.. वहा भी पुनम राधीकाकी मम्मीके साथ बाते करते उनको बातोमे बीजी रखती.. ओर लखन राधीकाको राधीकाके रुममे मीलनेका मौका देती.. तब लखन ओर राधीका उनके कमरेमे चले जाते.. ओर खुब प्यार करते.. लखनने राधीकाको उनके घरपे भी कइ बार चोद लीया था..
इसी बीच राधीकाने लखनसे चुदवाते चुदवाते उनके प्यारके बारेमे सभी बाते जानली.. की लखन अपनी बहेन पुनमको ही प्यार करता हे.. जीसे सुनकर अेक बारतो राधीकाभी चोंक गइ थी.. की कही भाइ बहेनके बीच प्यार होता हे..? फीर लखनने राधीकाको अपने परीवारकी बात बतादी.. की कैसे पीछली तीन पीढीसे उनके खानदानमे सबलोग अपनी बहेनसे ही सादी करते आये हे..
लखनने उनके खानदानके श्रापके बारेमे बता दीया.. जीसे सुनकर राधीकाको भी अचरज हुआ.. लेकीन लखनने उनको कसम खीलाकर इस बारेमे कीसीको ना कहेनेकी बात कहेदी.. ओर राधीकाने भी इस बातका जीक्र कीसीसे नही करनेकी कसम खाली.. इसी तराह लखन ओर पुनमकी बात हमेसा हमेसाके लीये लखन ओर राधीकाके दिलमे दफन होगइ..
जब देवायतने लखनको पुनमके रीस्तेकी बात की.. तब लखन पुरी तराह टुट चुका था.. उस रात लखनने अपने रुममे जाकर खुब आंसु बहाया.. तब राधीकाने उसे सम्हाल लीया.. वो लखनपे अपनी जान भी छीडकती थी.. जब भी लखन उनको मीलने जाता राधीका सीर्फ पुनमपे ही भरोसा करती.. ओर उनको रुमके बहार खडी रखकर रुमका ओर ओफीसका ध्यान रखनेको कहेती.. ताकी कोइ रुममे धुसकर ना आजाये.. ओर वो आरामसे लखनसे चुदवाती..





