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- Dec 5, 2013
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तो इधर होस्पीटलमे सब लोग राजीवके अगल बगलमे खडे थे.. तो कुछही देरके बाद भानुभी भुमीका पुनम ओर चंदाको लेकर होस्पीटलपे आगया.. तो चंदा राजीवको देखतेही आंसु बहाने लगी.. तो भुमीकी आंखसेभी आंसु टपक गये.. तो सृतीने दोनोको इसारोसे आंसु बहानेको मना कीया तो दोनोने जटसे अपने आंसु पोछ लीये.. जब सबलोग आगये तो मंजु रावजीवके पैरोके पास चली गइ.. ओर बीचमे उनके सामने खडी रही..
सबको लगाकी मंजु जगाह नही होनेकी वजहसे वहा चली गइ हे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी वो मनमे मंत्रोचार कर रही हे.. ओर उसने धीरेसे सबसे छुपके राजीवके पैरोको छुआ.. तो राजीवके सरीरमे अेक जुनजुहाटकी लहेर दोड गइ.. ओर उनकी आंखे बंध होनेके बावजुद अंदरकी ओर फरकने लगी.. राजीवको धीरे धीरे अपना पीछला जन्म अेक फील्मकी रीलमे माफीक दीखने लगा..
मंजु अैसा करके उनको अपने पीछले जन्मकी ओर इस जन्मकी पहेचान करवा रहीथी.. राजीवको अपने बाजुमे नीर्मलाके रुपमे पीछले जन्मकी सोनुका चहेरा दिखने लगा.. तो इस साइड उसे देवायतके अंदर वो हिमाचलके राजा राजका अंस दिखने लगा.. जो इस वक्त दोनोही उनकी अगल बगलमे बैठकर आंसु बहा रहेथे.. राजीवको पीछले जन्मका सबकुछ याद आने लगा..
वो अपने आपको पहेचान गयाकी वो पीछले जन्ममे सुनील था.. ओर अपने आखरी वक्तमे उसने राज ओर नेनुको वादा कीयाथा.. की अगले जन्ममे मे तुम्हारे मामा बनके आउगा.. ओर अब वक्त नजदीक था.. जब राज अगला जन्म लेकर वापस इस पृथ्वीपे आयेगा.. उनसे पहेले राजीवको उनके मामा बनके वापस आना हे.. क्युकी अभी तक राजने जन्म नही लीयाथा.. सबलोग उसीके जन्मकी तैयारीके रुपमे आ गयेथे.. ओर राजीवके सरीरमे हरकत होने लगी..
ओर आखीर उनकी आंखोमे अेक तेज प्रकाश छा गया.. ओर उसे मंजुके रुपमे उस माइके दर्शन हो गये.. जो सबकी जननी थी.. जीनकी दस भुजाये थी.. जो अेकदम नग्न स्वरुपमे उनके सामने खडी थी.. जीसे देखतेही राजीवका हाथ हीलने लगा.. तो सबलोग खुस होने लगे.. तब सृतीने जटसे धिरेनको डोक्टरको बुलानेको कहा.. तो धिरेन बहारकी ओर दोडके चला गया.. ओर कुछही देरमे डोक्टरको लेकर आगया..
डोक्टर : (आंखे चेक करते) देवायतजी.. लगता हे इनको होस आ रहा हे.. आप सबलोग थोडी देरके लीये बहार जाइअे.. जब इनको होस आजायेगा तब हम आप सबको अंदर बुला लेगे..
कहातो नीर्मला मंजु देवायत ओर सृतीके अलावा सबलोग बहार नीकल गये.. तब राजीवको होस आगया.. उसने धीरेसे अपनी आंखे खोलदी.. तो सामने मंजुको खडी देखा.. तो उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर धीरेसे उनको हाथ जोड लीया.. तो मंजुकी आंखसे मुस्कुरानेके बावजुद आंसु नीकल गये.. तब देवायतको पता चल गयाकी सब मंजुकी वजहसे हुआ हे.. मंजुने राजीवको अपनी पहेचान करवादी हे.. तो वो मुस्कुराने लगा.. तभी..
डोक्टर : (मुस्कुराते) हां.. तो अंकल.. अब आपको कैसा लग रहा हे.. लगता हे आपने कुछ चम्तकार कीया हे.. तभी तो आपको इतनी जल्दी होस आगया.. हें..हें..हें..
राजीव : (धीरेसे) हंम.. काफी बेटर लग रहा हे.. थेन्क्स..
डोक्टर : (मुस्कुराते) हंम.. चलो मे सबको अंदर भेजता हु आप सबको मीललो.. लेकीन ज्यादा बोलना नही.. ओके.. आपको ट्रेस होगा..
राजीव : (जब डोकटर चला गया सब लोग वापस अंदर आगये) नीमु.. थेन्क्स.. तुमने मेरा खुब साथ दीया.. लेकीन तुम मेरी अमानत नही हो.. मेरे भांजेकी अमानत हो.. मुजे जाना पडेगा.. तभी तो मेरी भावुकी कोखसे वापस आ पाउगा.. मेरे देवुके पोतेका मामा बनके.. मेने उसे वादा कीया था.. तो नीभाना तो पडेगा.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (मुस्कुराते) मत कीजीये अैसी बाते.. आपको डोक्टरने बोलनेको मना कीया हेनां..?
राजीव : (मुस्कुराते हाथ थामते) नही नीमु.. आज बोलने दे.. फीर क्या पता दुबारा बोलनेका मौका मीले या ना मीले.. (मंजुकी ओर हाथ जोडते) मंजु बेटा.. माफ करना.. मे तुजे पहेचान नही पाया.. तुमतो हम सबकी जननी हो.. बस.. मेरी नीमु ओर मेरी भावुको सम्हाल लेना..
मंजुला : (आंसु बहाते) पापा मत कीजीये अैसी बाते.. मे तो आपकी बेटी हु.. मे वादा करती हु.. मे सबको सम्हाल लुगी.. आपको कुछ नही होगा..
राजीव : (भुमीकी ओर देखते) भुमी.. कैसीहो मेरी बहेन.. मे तुमको भी पहेचान गया हु.. हें..हें..हें.. बस.. मेरी नीमुका साथ देना.. वो अकेली ना पड जाये..
भुमीका : (अपने आंसु पोछते) भाइ.. मत करो अैसी बाते.. वो मेरी बहेन हे.. तो मे उनका खयाल रखुगी..
राजीव बारी बारी सबको याद करता हे.. धिरेनको भी पुनमका खयाल रखनेको कहेता हे.. भानुको भावनाका खयाल रखनेको कहेते सबलोग दो घंटे तब राजीवसे बाते करते रहे.. तो बीचमे हसी मजाकभी चलता रहा.. तब तक राजीवने नीर्मलाका हाथ थामे रखा.. ओर आखीर उनको बोलनेमे भी तकलीफ होने लगी.. तब राजीवने देवायतको पास बुलाकर उनका हाथभी थाम लीया.. ओर नीर्मलाके हाथको पकडकर देवायतके हाथोमे थमा दीया..
राजीव : (नीर्मलाका हाथ देवायतको थमाते) देवुबेटा.. लो सम्हालो अपनी सोनुको.. आजसे मेरी नीमुकी सब जीम्वेवारी आपकी हे.. मे आपको अपनी अमानत सोंप रहा हु..
देवायत : पापा.. आइ प्रोमीस.. मे आपकी नीमुका खयाल रखुगा..
कहातो राजीव मुस्कुराने लगा.. ओर नीर्मलाकी ओर मुह करते उनको देखता रहा.. तब नीर्मलाकी आंखसे भी आंसु नीकल गये.. राजीव अेक नजरसे नीर्मलाको बीना पलक जपकाये देखता रहा.. तब सृतीको आभास होगया.. ओर वो जटसे आकर राजीवको हीलाती हे.. तो राजीवका हाथ नीचे गीर गया.. तो सृती उनकी हाथकी नब्सको चेक करने लगी.. ओर धिरेनको जल्दीसे डोक्टरको बुलाने कहा तो मंजु समज गइ.. ओर वो रोने लगी..
तो नीर्मला जटसे खडी होगइ.. ओर राजीवको हीलाने लगी.. लेकीन राजीव अैसेही सीथील पडा रहा.. ओर सबको मनमे आसंकाअे होने लगीकी राजीव हमे छोडकर चला गया हे.. तभी डोक्टरने फटाफट आकर राजीवको चेक करलीया.. ओर सृतीकी ओर देखते नां मे गरदन हीलाते राजीवकी आंख बंध कर देते हे.. ओर उनके उपर चदर डालके देवायतके कंधेपे हाथ रखते अपना अफसोस व्यक्त करते हे..
डोक्टर : सोरी.. देवायतजी.. अब आपके ससुर नही रहे.. आप मेरी चेम्बरमे चलीये.. मे सब पेपर कंपलीट करवाता हु.. फीर इसे लेजाइअेगा..
कहातो भावना नीर्मला मंजु सबलोग राजीवको घेरकर फुट फुटके जोरोसे रोने लगे.. ओर होस्पीटलमे पुरा वातावरण गमगीन होगया.. तब भुमीका सरला भानु ओर देवायत सबको सम्हालने लगे.. फीर भानुने सामतभाइ ओर रमेशको फोन करदीया.. तो लखनभी नीलमको उनके घर छोडकर अपने खेतोपे था तो वोभी लताके साथ जीस लेडीसको आनाथा वो सभी लेडीसको लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया..
इधर सबका रोना धोना थोडा सांत हुआ.. तो भानु ओर धिरेनको कहेकर देवायतने सभी लेडीसको घर भेज दीया.. देवायत सब पेपर कंपलीट करवा देता हे.. तब डोक्टर उनको अफसोस जताते राजीवकी बोडीको घर लेजानेको कहेते हे.. तभी भानुभी सब लेडीसको छोडकर वापस आगया.. तो दोनोही राजीवकी बोडीको लेकर घरपे चले गये.. इस कार्यवाहीमे अेक घंटा बीत चुकाथा तबतक रमेश सामत लखन सबलोग आगये..
तो आतेही लता मंजुसे चीपककर रोने लगी.. तो रश्मी चारु नीशा जया सांती बसंती ब्रिन्दा सभी लेडीस सबको गले मीलकर आस्वासन देती रही.. तबतक रमेश ओर सामतने अर्थीके सामानका इन्तजाम करलीया ओर बोडीको कंपलीट करदी.. तब देवायतने सबको अेक बार फीर राजीवके अंतीम दर्शनके लीये कहा.. तब नीर्मला मंजु ओर भावना उनसे लीपटकर बहुत रोइ.. तो रश्मी चारु भुमीका सरलाने सबको सम्हाला..
फीर देवायत भानु धिरेन ओर लखनने अर्थीको उठाया.. ओर सबलोग स्मसान चले गये.. वहा देवायत ओर धिरेनने मीलकर राजीवको मुखमग्नी दी.. फीर वहाकी सब वीधीया करके सबलोग वापस घरपे आगये.. फीर साम होते होते सबलोग अपने घरकी ओर वापस जाने लगे.. सामत रमेशभी सब लेडीसको लेकर वापस नीकल गये.. तो देवायतने लखनको भी लताको साथ लेकर घर जानेको कहा.. तो भानुभी सरलाको लेकर वापस अपने घर नीकल गया....
कन्टीन्यु
सबको लगाकी मंजु जगाह नही होनेकी वजहसे वहा चली गइ हे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी वो मनमे मंत्रोचार कर रही हे.. ओर उसने धीरेसे सबसे छुपके राजीवके पैरोको छुआ.. तो राजीवके सरीरमे अेक जुनजुहाटकी लहेर दोड गइ.. ओर उनकी आंखे बंध होनेके बावजुद अंदरकी ओर फरकने लगी.. राजीवको धीरे धीरे अपना पीछला जन्म अेक फील्मकी रीलमे माफीक दीखने लगा..
मंजु अैसा करके उनको अपने पीछले जन्मकी ओर इस जन्मकी पहेचान करवा रहीथी.. राजीवको अपने बाजुमे नीर्मलाके रुपमे पीछले जन्मकी सोनुका चहेरा दिखने लगा.. तो इस साइड उसे देवायतके अंदर वो हिमाचलके राजा राजका अंस दिखने लगा.. जो इस वक्त दोनोही उनकी अगल बगलमे बैठकर आंसु बहा रहेथे.. राजीवको पीछले जन्मका सबकुछ याद आने लगा..
वो अपने आपको पहेचान गयाकी वो पीछले जन्ममे सुनील था.. ओर अपने आखरी वक्तमे उसने राज ओर नेनुको वादा कीयाथा.. की अगले जन्ममे मे तुम्हारे मामा बनके आउगा.. ओर अब वक्त नजदीक था.. जब राज अगला जन्म लेकर वापस इस पृथ्वीपे आयेगा.. उनसे पहेले राजीवको उनके मामा बनके वापस आना हे.. क्युकी अभी तक राजने जन्म नही लीयाथा.. सबलोग उसीके जन्मकी तैयारीके रुपमे आ गयेथे.. ओर राजीवके सरीरमे हरकत होने लगी..
ओर आखीर उनकी आंखोमे अेक तेज प्रकाश छा गया.. ओर उसे मंजुके रुपमे उस माइके दर्शन हो गये.. जो सबकी जननी थी.. जीनकी दस भुजाये थी.. जो अेकदम नग्न स्वरुपमे उनके सामने खडी थी.. जीसे देखतेही राजीवका हाथ हीलने लगा.. तो सबलोग खुस होने लगे.. तब सृतीने जटसे धिरेनको डोक्टरको बुलानेको कहा.. तो धिरेन बहारकी ओर दोडके चला गया.. ओर कुछही देरमे डोक्टरको लेकर आगया..
डोक्टर : (आंखे चेक करते) देवायतजी.. लगता हे इनको होस आ रहा हे.. आप सबलोग थोडी देरके लीये बहार जाइअे.. जब इनको होस आजायेगा तब हम आप सबको अंदर बुला लेगे..
कहातो नीर्मला मंजु देवायत ओर सृतीके अलावा सबलोग बहार नीकल गये.. तब राजीवको होस आगया.. उसने धीरेसे अपनी आंखे खोलदी.. तो सामने मंजुको खडी देखा.. तो उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर धीरेसे उनको हाथ जोड लीया.. तो मंजुकी आंखसे मुस्कुरानेके बावजुद आंसु नीकल गये.. तब देवायतको पता चल गयाकी सब मंजुकी वजहसे हुआ हे.. मंजुने राजीवको अपनी पहेचान करवादी हे.. तो वो मुस्कुराने लगा.. तभी..
डोक्टर : (मुस्कुराते) हां.. तो अंकल.. अब आपको कैसा लग रहा हे.. लगता हे आपने कुछ चम्तकार कीया हे.. तभी तो आपको इतनी जल्दी होस आगया.. हें..हें..हें..
राजीव : (धीरेसे) हंम.. काफी बेटर लग रहा हे.. थेन्क्स..
डोक्टर : (मुस्कुराते) हंम.. चलो मे सबको अंदर भेजता हु आप सबको मीललो.. लेकीन ज्यादा बोलना नही.. ओके.. आपको ट्रेस होगा..
राजीव : (जब डोकटर चला गया सब लोग वापस अंदर आगये) नीमु.. थेन्क्स.. तुमने मेरा खुब साथ दीया.. लेकीन तुम मेरी अमानत नही हो.. मेरे भांजेकी अमानत हो.. मुजे जाना पडेगा.. तभी तो मेरी भावुकी कोखसे वापस आ पाउगा.. मेरे देवुके पोतेका मामा बनके.. मेने उसे वादा कीया था.. तो नीभाना तो पडेगा.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (मुस्कुराते) मत कीजीये अैसी बाते.. आपको डोक्टरने बोलनेको मना कीया हेनां..?
राजीव : (मुस्कुराते हाथ थामते) नही नीमु.. आज बोलने दे.. फीर क्या पता दुबारा बोलनेका मौका मीले या ना मीले.. (मंजुकी ओर हाथ जोडते) मंजु बेटा.. माफ करना.. मे तुजे पहेचान नही पाया.. तुमतो हम सबकी जननी हो.. बस.. मेरी नीमु ओर मेरी भावुको सम्हाल लेना..
मंजुला : (आंसु बहाते) पापा मत कीजीये अैसी बाते.. मे तो आपकी बेटी हु.. मे वादा करती हु.. मे सबको सम्हाल लुगी.. आपको कुछ नही होगा..
राजीव : (भुमीकी ओर देखते) भुमी.. कैसीहो मेरी बहेन.. मे तुमको भी पहेचान गया हु.. हें..हें..हें.. बस.. मेरी नीमुका साथ देना.. वो अकेली ना पड जाये..
भुमीका : (अपने आंसु पोछते) भाइ.. मत करो अैसी बाते.. वो मेरी बहेन हे.. तो मे उनका खयाल रखुगी..
राजीव बारी बारी सबको याद करता हे.. धिरेनको भी पुनमका खयाल रखनेको कहेता हे.. भानुको भावनाका खयाल रखनेको कहेते सबलोग दो घंटे तब राजीवसे बाते करते रहे.. तो बीचमे हसी मजाकभी चलता रहा.. तब तक राजीवने नीर्मलाका हाथ थामे रखा.. ओर आखीर उनको बोलनेमे भी तकलीफ होने लगी.. तब राजीवने देवायतको पास बुलाकर उनका हाथभी थाम लीया.. ओर नीर्मलाके हाथको पकडकर देवायतके हाथोमे थमा दीया..
राजीव : (नीर्मलाका हाथ देवायतको थमाते) देवुबेटा.. लो सम्हालो अपनी सोनुको.. आजसे मेरी नीमुकी सब जीम्वेवारी आपकी हे.. मे आपको अपनी अमानत सोंप रहा हु..
देवायत : पापा.. आइ प्रोमीस.. मे आपकी नीमुका खयाल रखुगा..
कहातो राजीव मुस्कुराने लगा.. ओर नीर्मलाकी ओर मुह करते उनको देखता रहा.. तब नीर्मलाकी आंखसे भी आंसु नीकल गये.. राजीव अेक नजरसे नीर्मलाको बीना पलक जपकाये देखता रहा.. तब सृतीको आभास होगया.. ओर वो जटसे आकर राजीवको हीलाती हे.. तो राजीवका हाथ नीचे गीर गया.. तो सृती उनकी हाथकी नब्सको चेक करने लगी.. ओर धिरेनको जल्दीसे डोक्टरको बुलाने कहा तो मंजु समज गइ.. ओर वो रोने लगी..
तो नीर्मला जटसे खडी होगइ.. ओर राजीवको हीलाने लगी.. लेकीन राजीव अैसेही सीथील पडा रहा.. ओर सबको मनमे आसंकाअे होने लगीकी राजीव हमे छोडकर चला गया हे.. तभी डोक्टरने फटाफट आकर राजीवको चेक करलीया.. ओर सृतीकी ओर देखते नां मे गरदन हीलाते राजीवकी आंख बंध कर देते हे.. ओर उनके उपर चदर डालके देवायतके कंधेपे हाथ रखते अपना अफसोस व्यक्त करते हे..
डोक्टर : सोरी.. देवायतजी.. अब आपके ससुर नही रहे.. आप मेरी चेम्बरमे चलीये.. मे सब पेपर कंपलीट करवाता हु.. फीर इसे लेजाइअेगा..
कहातो भावना नीर्मला मंजु सबलोग राजीवको घेरकर फुट फुटके जोरोसे रोने लगे.. ओर होस्पीटलमे पुरा वातावरण गमगीन होगया.. तब भुमीका सरला भानु ओर देवायत सबको सम्हालने लगे.. फीर भानुने सामतभाइ ओर रमेशको फोन करदीया.. तो लखनभी नीलमको उनके घर छोडकर अपने खेतोपे था तो वोभी लताके साथ जीस लेडीसको आनाथा वो सभी लेडीसको लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया..
इधर सबका रोना धोना थोडा सांत हुआ.. तो भानु ओर धिरेनको कहेकर देवायतने सभी लेडीसको घर भेज दीया.. देवायत सब पेपर कंपलीट करवा देता हे.. तब डोक्टर उनको अफसोस जताते राजीवकी बोडीको घर लेजानेको कहेते हे.. तभी भानुभी सब लेडीसको छोडकर वापस आगया.. तो दोनोही राजीवकी बोडीको लेकर घरपे चले गये.. इस कार्यवाहीमे अेक घंटा बीत चुकाथा तबतक रमेश सामत लखन सबलोग आगये..
तो आतेही लता मंजुसे चीपककर रोने लगी.. तो रश्मी चारु नीशा जया सांती बसंती ब्रिन्दा सभी लेडीस सबको गले मीलकर आस्वासन देती रही.. तबतक रमेश ओर सामतने अर्थीके सामानका इन्तजाम करलीया ओर बोडीको कंपलीट करदी.. तब देवायतने सबको अेक बार फीर राजीवके अंतीम दर्शनके लीये कहा.. तब नीर्मला मंजु ओर भावना उनसे लीपटकर बहुत रोइ.. तो रश्मी चारु भुमीका सरलाने सबको सम्हाला..
फीर देवायत भानु धिरेन ओर लखनने अर्थीको उठाया.. ओर सबलोग स्मसान चले गये.. वहा देवायत ओर धिरेनने मीलकर राजीवको मुखमग्नी दी.. फीर वहाकी सब वीधीया करके सबलोग वापस घरपे आगये.. फीर साम होते होते सबलोग अपने घरकी ओर वापस जाने लगे.. सामत रमेशभी सब लेडीसको लेकर वापस नीकल गये.. तो देवायतने लखनको भी लताको साथ लेकर घर जानेको कहा.. तो भानुभी सरलाको लेकर वापस अपने घर नीकल गया....
कन्टीन्यु



