राधीका : (सरमाकर धीरेसे) लखन पागल मत बनो.. अेक बार फीर सोचलो.. ये जींदगी भरका बंधन हे.. फीर मे आपके बीना नही रेह पाउगी..
लखन : (मुस्कुराते) ओर मे तुजे अकेली रहेने भी नही दुगा.. राधु.. मुजे सब पता हे.. मे जींदगी भर तेरी ओर आंटीकी जीम्वेवारी उठानेको तैयार हु.. तुम सादीके बादभी मेरी बीवी बनकर यही आंटीके पास रहोगी.. अब मे सहरमे रहेने आ रहा हु.. ओर सुन.. अभी इस बातकी सीर्फ पुनोको खबर हे.. की मे तुमसे सादी कर रहा हु.. फीर मे तुजे मेरे परीवारमे भी सामील कर लुगा.. अगर तुम सबके साथ रहेना चाहो तो भी रेह सकती हो..
राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) लखन.. इसकी कोइ जरुरत नही हे.. मे सीर्फ आपको परख रही थी.. आप काफी मेच्योर हो गये हो.. वैसे मे यहा अैसे ही खुस हु.. ओर हमारा होस्टेल भी बहुत अच्छा चलता हे.. आपको मेरी जीम्वेवारी उठानेकी जरुरत नही हे.. बस.. हमेतो आपका प्यार चाहीये.. कमसे कम अब मे आपकी सुहागनतो कहेलाउगी..
आंटी : (जोरोसे हसते) तो फीर क्यु नखरे कर रही थी.. अब तो पहेनादे हार.. हें..हें..हें..
उनकी मम्मीने कहातो राधीका सर्मसार होगइ.. ओर नजर जुकाते मुस्कुराते लखनको हार पहेना देती हे तब लखन भी अपना हार राधीकाके गलेमे डाल देता हे.. फीर डीबीसे अेक चुटकी सींदुर लेकर राधीकाकी मांगको भर देता हे.. तब राधीकाके आंसु छलक गये.. ओर वो चुपचाप नजरे जुकाये खडी रही.. तभी आंटीने दोनोको जींदगी भर अेक दुसरेको साथ नीभानेकी कसमे खीलवाइ.. ओर आखीर लखनने बोक्षमेसे मंगलसुत्र नीकालाकर राधीकाके गलेमे डाल दीया.. तब राधीकाका सब्रका बांध टुट गया..
वो अपनी दोनो हथेलीमे मुह छुपाकर सरको लखनके सीनेपे रख देती हे.. ओर फुटफुटके रोने लगती हे.. तब लखन मुस्कुराते उनको अपनी बाहोमे भरके उनकी पीठ सहेलाता रहा.. जीसे देखकर आंटीकी आंख भी गीली होगइ.. फीर लखन राधीकाको सांत करता हे.. ओर उसे पानी पीलाता हे.. फीर दोनोही भगवानके सामने हाथ जोडकर आशीार्वद लेते हे.. ओर साथमे आकर आंटीके पांव छुते हे.. तब आंटी आंसु बहाते दोनोको आशीर्वाद देती हे..
आंटी : (मुस्कुराते) दोनो खुस रहो.. लखन बेटा.. आज तुमने इस बुढीयाकी लाज रखली.. तुमने मेरी मोतको सुधार दीया.. जीते रहो.. दोनो.. बस.. मेरी राधुको खुस रखना.. हमे ओर कुछ नही चाहीये..
लखन : (उनके पैरोके पास बैठकर) मम्मी.. अब मे आपको आंटी नही कहुगा.. आजसे आप मेरी सास नही मेरी भी मां होगइ हे.. मे वादा करता हु.. आपकी राधुको हमेसा खुस रखुगा.. आइ प्रोमीस..
आंटी : (हसते) देखा बेटी.. आज मुजे दामादके रुपमे बेटा मील गया हे.. आज तो आपने मेरी जींदगी खुसीओसे भरदी हे.. दोनो खुस रहो.. ओर अपनी जींदगी खुसीसे जीओ..
राधीका : (सरमाकर हसते) लखन.. अब आप चलीयेनां.. मुजेतो जोरोकी भुख लगी हे.. हें..हें..हें..
आंटी : (हसते) अबतो तेरा पती हो गया हे.. अबतो उसे नाम लेकर मत बुलाओ.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) नही मम्मी.. नाम लेने दीजीये.. अब जमाना बदल गया हे.. सुकर मनाइअे अब मुजे आप.. आप.. कहेकर बुलाने लगी हे.. वरना तो मेरे साथ तु तु करते बाते करती थी.. हें..हें..हें..
कहातो राधीका सरमा गइ.. ओर हसते हुअे लखनकी पीठमे अेक मुका मारकर उनका हाथ पकडकर खीचकर बहार चली गइ.. ओर अपने रुममे आकर फटाफट दरवाजा बंध करदेती हे.. ओर दरवाजा बंध करते ही जटसे लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर रुककर मुस्कुराते लखनकी आंखोमे देखने लगी.. ओर कुछ ही पलमे दोनोके होठ मील गये..

राधीका : (होठ छोडते सरमाते) बस.. बस.. लखन रहेने दीजीये.. मे बहेक जाउगी.. फीर हम कंट्रोल नही कर पायेगे.. आपने तो मुजे गरम करदी.. आप कहे रहेथेनां ये दो दिन कुछ नही करना.. हंम..?
लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. लेकीन फीकर मत करना.. दो दिनके बाद जब हमारी सुहागरात होगी.. वो बहुत ही स्पेसीयल होगी.. इसी घरमे.. अभी तो मुजे मेरी बीवीको प्यार करनेदे.. उसे गरम भी कर दुगा ओर ठंडी भी करदुगा..
कहेते लखन फीरसे राधीकाके होठोको चुमते उनके उरोजोको मसलने लगा.. तब कुछही देरमे दोनो चुमते चुमते बेडपे चले गये.. ओर दोनोके अेक अेक वस्त्र नीकलते गये.. दोनोही पुरी तराह नंगे अेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगे.. आज राधीका मांगमे सीदुर ओर गलेमे मंगलसुत्रके साथ सुहागन होकर कयामत लग रही थी.. दोनो ही बेडपे लेट गये.. तब लखन राधीकाके बुब्सको मुहमे लेकर चुमने लगा..

ओर उनकी चुतको सहेलाते अेक उगली चुतमे घुसा देता हे.. ओर जोरोसे हीलाते राधीकाको उनकी मंजीलकी ओर लेजाने लगा.. तब कुछही देरमे राधीकाकी चुतसे अेक फवारा नीकल गया.. ओर वो अपनी सासंको दुसरस्त करते मुस्कुराने लगी.. तब लखन उसे गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. तो राधीका लखनके गलेमे हाथ डालकर उसे प्यार भरी नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. वहा दोनोने सावर लीया ओर नहाकर बहार आगये.. फीर दोनोने अपने अपने वस्त्र पहेनलीये.. तभी राधीका लखनकी बाहोमे समा गइ..
राधीका : (मुस्कुराते) जानु.. आपको पता नही आज आपने हमे कीतनी खुसी दी हे.. आज मेरी जींदगीका सबसे अनमोल दीन हे.. मे इस दिनको कभी नही भुलुगी.. ओर नाही मम्मी..
लखन : (मुस्कुराते) राधु.. मे बहुत जल्द यहा रहेनेके लीये आ रहा हु.. तो आजसे ये भी मेरा दुसरा घर हे.. तुम फीकर मत करना मे अब आये दिन तुमसे मीलनेके लीये आजाउगा.. अभी हमारी सादीके बारेमे सीर्फ पुनोको ही पता हे.. ओर सायद मंजु भाभीको.. क्युकी वो ओर पुनोदीदी सबकुछ जान जाती हे..
राधीका : (सामने अेक नजरसे देखते) जानु.. अेक बात पुछु..? जब आपने पुनोको हमारी सादीके बारेमे कहा तो वो कुछ नही बोली..? हंम..? क्या उसे पता हे आप उनको प्यार करते थे..?
लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. इस बारेमे आज ही उनसे बात हुइ.. तुजे पता हे..? पुनोको मेरे बारेमे ओर मेरी फीलींग्सके बारेमे सबकुछ पताथा.. की मे उसे प्यार करता था.. तो आज मेने भी हिमत करके उनको सबकुछ खुलकर बता दीया.. की मे आपसे प्यार करता था ओर आपसे सादी करना चाहता था..
राधीका : (सीरीयस होते सामने देखते) तो फीर.. वो कुछ नही बोली..? हंम..?
लखन : राधु.. हमारी सादीके बाद बहुत कुछ बदल गया हे.. आज इस बारेमे पुनो दीदीसे बहुत कुछ बाते हुइ.. लेकीन अभी नही.. हम दोनो होस्टेलमे आरामसे बैठकर बाते करेगे.. अभी तो चल मुजे जोरोकी भुख लगी हे.. हें..हें..हें..
राधीका : (हसते) अरे.. मेरे पतीको भुख लगी हे..? चलो चलो.. आजतो मे अपने हाथोसे खीलाउगी.. हें..हें..हें..
ओर राभीका लखनको लेकर बहार आगइ.. आकर दोनो खानेके लीये बैठ गये.. आज राधीका बडेही प्यारसे लखनको अपने हाथोसे खीला रही थी.. तो लखनभी राधीकाको अपने हाथोसे खीलाने लगा.. जब खाना खतम होगया तो दोनोही वापस होस्टेल जानेके लीये तैयार होगये.. लखन अेक बार फीर आंटीके पास चला गया ओर उनके पैर छुकर जानेकी इजाजत लेकर बहार आगया.. फीर दोनोही अपनी कारमे वापस होस्टेलपे आगये..