Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 42 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८१

कहेतेही दोनो बहार आगइ.. ओर कीचनमे जाकर चुपचाप चाइ नास्ता बनाने लगी.. कुछही देर पहेले जया अपनी ननंद सांतीकी मस्तीया करते उनको छेड रही थी.. वोही जया.. अब मुरजाये हुअ‍े चहेरेके साथ चाइ नास्ता बना रही थी.. तब सांती जागृतीके रुममे चली गइ.. ओर उनको आवाज देकर जगानेका नाटक करने लगी.. तो कुछही देरके बाद जागृती भी बहार आगइ.. ओर सांतीकी ओर सवालीया नजरोसे देखकर जाडु पोछा लेकर सबके रुमकी सफाइ करने लगी....अब आगे

तो दुसरी ओर श्रीधर जयश्री ओर मुना बरखा अभी तक अपने हनीमुनसे वापस नही आये थे.. तब आज श्रीधर के घरभी सुबह सुबह हंगामा होने वाला था.. दोनो भाइ ओर दोनोकी बीवीया सुबह साथमे चाइ नास्ता कर रहे थे.. तब जीतुलाल ओर उनकी भाभी वृन्दा पहेलेसे ही अपने प्लानके मुताबीक चल रहे थे.. लेकीन उन दोनोको ये नही पताथा की उनके प्लानके बारेमे जीतुलालकी बीवी ब्रीन्दा भी पहेलेसे ही जानती थी.. तो वोभी पहेलेसे ही इस बातसे प्रीपेर होकर बीन्दास्त बैठी थी..तभी..

जीतुलाल : (धीरेसे नजरे चुराते) भैया.. मे आज आपसे मेरे ओर ब्रीन्दाके बारेमे अ‍ेक बात कहेना चाहता हु..

जवेरीलाल : (नास्ता करते सामने देखकर) हां छोटे.. बता क्या बात करनी हे..? कुछ हुआ हे क्या..? कही फीरसे दोनोके बीभ जगडा तो नही हुआ..?

जीतुलाल : (ब्रीन्दाकी ओर देखते) नही भाइ.. आपतो जानते हे.. पीछले तीन चार सालसे मेरे ओर र्ब्रीन्दाके बीच कुछ अच्छा नही चल रहा.. हमारे रीस्ते तनाव पुर्ण रहेते हे.. अब तो हम आपसमे बात तक नही करते.. तो फीर इस रीस्तेको ओर लंबा खीचनेका कोइ बतलब नही हे..

जवेरीलाल : (खाना खाते रुक गये सामने देखकर) तो..? तो फीर तुम कहेना क्या चाहते हो..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते धीरेसे) भाइ.. मे.. मे.. मे ब्रीन्दाको डीवोर्स देना चाहता हु..

जवेरीलाल : (गुस्सा होकर अपना आपा खोते) कमीने.. तुमने अ‍ैसा सोचाभी कैसे..? जा नीकल यहासे..

जीतुलाल : (थोडी सख्तीसे) हां.. नीकल जाउगा.. मुजे नही रहेना यहा.. जहा मेरा दम घुटता हो.. मेरा इस ओरत के साथ रहेकर दम घुटता हे.. इस ओरतने हमे कहीका नही छोडा.. दोनो मा बेटे मीले हुअ‍े हे.. आपको पता नही.. हमारे इन दोनो बच्चोकी सादीमे इनका कीतना बडा हाथ हे.. ये सब मुजसे बदलेकी भावनासे कीया.. भाइ आप इनको जानते नही..

जवेरीलाल : (जोरोसे चीलाते) चु..प.. चुप होजा बेसरम.. तु मेरी इस मासुम बेटीपे इल्जाम लगा रहा हे..? जा नीकलजा यहासे वरना मेरा हाथ उठ जायेगा.. आज तक हमारे घरमे कीसीने उची आवाजमे बात तक नहीकी.. ओर तु..

जवेरीलालने बहुत गुस्सेमे आकर कहातो वृन्दा भी सख्तेमे आगइ.. ओर मुह फाडकर सब तमासा देखती रही.. लेकीन ब्रीन्दा तबभी बीन्दास होकर चाइ नास्ता कर रही थी.. जैसे कुछ हुआ ही नही.. क्युकी आज जीतु गुस्सेमे जोभी बोल गया.. ब्रीन्दा उसी बातको हथीयारके तोरपे इस्तेमाल करना जानती थी.. उनके दिमागमे श्रीधरके साथ हमेसाके लीये रहेनेके लीये बहुत सारा प्लान चल रहा था.. तब जवेरीलाल गुस्ससे कांप रहेथे.. तभी..

ब्रीन्दा : भाइ.. जीतु ठीक केह रहा हे.. मुजे भी इस नीच इन्सानके साथ नही रहेना.. आखीर अपने दिलकी बात जुबापे आ ही गइ.. (जीतुकी ओर देखते) अगर तुमको लगता हेकी दोनोकी सादीमे मेरा हाथ हे.. तो भाइको ये नही बताओगे की तुम कीस बदलेकी भावनाकी बात कर रहे हो..?

कहातो जीतुलाल ओर वृन्दा दोनोकी गांड फटने लगी.. दोनोको लगाकी अभी ब्रीन्दा दोनोके नाजाइज रीस्तेके बारेमे जवेरीलालको बता देगी.. तब जीतुलालको अपनी गलतीका अहेसास हुआ.. तो दुसरी ओर ब्रीन्दा भी सीर्फ दोनोको डरा रही थी.. वोभी इन दोनोके रीस्तेको उजागर करना नही चाहती थी.. क्युकी वो खुद अपने बेटेके साथ रीलेशनमे थी.. ओर सारी जींदगी उनके साथ बीताना चाहती थी.. तभी..

जवेरीलाल : (जीतुके सामने देखते) हां जीतु.. बता.. ब्रीन्दा कीस बदलेकी भावनाकी बात कर रही हे..?

जीतुलाल : (अब बुरा फस चुकाथा) भाइ.. वो.. वो.. आप इनको ही पुछलो..

कहातो वृन्दाकी गांड फटने लगी.. वो जीतुलालकी ओर मुह फाडकर देखने लगी.. आज पहेली बार वृन्दाको जीतुलालकी मुर्खता पर गुस्सा आने लगा था.. तभी ब्र्रीन्दाने जुठ बोलकर बातको सम्हाल लीया.. तब जीतुलाल ओर वृन्दाने राहतकी सांसली..लेकीन दोनोको आस्चर्य भी हुआ.. क्युकी ब्रीन्दाके पास इतना अच्छा मौका था तो फीर जुठ क्यु बोला..? तभी वृन्दाको अब मेदानमे उतरना उचीत लगा..

ब्रीन्दा : (जुठ बोलते) भाइ.. कुछ नही.. पीछले तीन चार सालसे जीतुका सहेरमे कीसी ओरतके साथ नाजायज रीस्ता हे.. इसीलीये मुजसे डीवोर्स देना चाहते हे.. आप इनको केह दीजीये मुजे डीवोर्स देदे.. तो मेरा भी इस आदमीसे छुटकारा हो जायेगा.. मे नही रहेना चाहती इनके साथ.. हम मां बेटे कही दुर चले जायेगे..

जवेरीलाल : (थोडी सख्तीसे) क्या..? कीसी ओरतके साथ जानायज रीस्ता हे..? जीतु.. मे ये सब क्या सुन रहा हु..? क्या वही दिन देखनेके बाकी रेह गये थे..?

जीतुलाल : (ब्रिन्दाकी ओर देखते राहतकी सांस लेते) भाइ.. अब अ‍ैसा कुछ नही हे..

जवेरीलाल : ब्रीन्दा बेटा.. तुजे ओर श्रीधरको कही जानेकी कोइ जरुरत नही.. तुम इसी घरमे रहोगी..

जीतुलाल : (नजरे चुराते) लेकीन भाइ.. मे अब इनके साथ नही रहेना चाहता..

जवेरीलाल : (जोरोसे) चुप रहे बेसरम.. अ‍ेक तो बहार जाकर लफडा करते हो.. ओर उपरसे मेरी बेटी पे जुठा इल्जाम लगाते हो..? कान खोलकर सुनले.. अगर तुने इनको डिवोर्स दिया तो तु गया कामसे..

वृन्दा : (बीचमे बोलते) सुनीयेजी.. आप सांत होजाइअ‍े.. मुजे लगता हे अब वक्त आगया हे हमे इस घरका बटवारा कर देना चाहीये.. अ‍ेकतो हमारे बच्चोने हमारी नाक कटवादी.. ओर उपरसे ये दोनोके रोज रोजके जगडे.. अब मे भी यहा नही रहेना चाहती..

जवेरीलाल : (कुछ सोचते) वृन्दा.. सायद तुमने कल ठीक कहा था.. अब हमे जुदा होजाना चाहीये.. लेकीन जीतु.. अगर तुम्हारा कीसी ओरतके साथ नाजायज रीस्ता हे.. ओर इसके लीये तुम ब्रीन्दाको डीवोर्स देना चाहते हो.. तो तुम कान खोलकर सुनलो.. इस घरमे तुजे कुछ भी नही मीलेगा.. मे तेरा सारा हीस्सा मेरी इस ब्रीन्दा बेटी ओर श्रीधरके नाम कर दुगा.. फीर तुम चले जाना उस ओरतके पास..

जीतुलाल : (मनमे खुस होते) भाइ.. अब अ‍ैसा कुछभी नही हे.. ओर मुजे इस घरकी अ‍ेक फुटी कोडीभी नही चाहीये.. कर दीजीये सब इनके नाम.. वैसे भी श्रीधर भीतो मेरा ही खुन हे.. मे मेरा इन्तजाम कही ओर जोब करके कर लुगा..

वृन्दा : (बातको सम्हालते) अरे.. कही ओर क्यु जोब करोगे..? इस घरका बटवारा हो रहा हे हमारे बीजनेसका नही समजे..? बात करता हे.. (जवेरीलालको) सुनीयेजी.. आप तो कुछ कहीये..?

जवेरीलाल : (थोडा सांत होते) हां जीतु.. बात सीर्फ ये घरकी हो रही हे.. मे ओर वृन्दा सहेरमे अ‍ेक छोटा मकान लेकर चले जायेगे.. ओर ये घर मे ब्रीन्दा ओर श्रीधरके नाम कर रहा हु.. ओर बीजनेसमे अब तेरी जगाह श्रीधरका हक होगा.. अब बात खतम..

कहेते जवेरीलाल नास्ता छोडकर अपने रुममे चले गये.. तो वृन्दा भी खडी होकर ब्रीन्दाकी ओर गुस्सेसे खा जाने वाली नजरसे देखती रही.. देखकर जवेरीलालके पीछे चली गइ.. तब जीतुलाल सहेम गया.. वो गुस्सेसे तील मीलाने लगा.. ओर ब्रीन्दाकी ओर अ‍ेक नजरसे देखता रहा.. लेकीन तब भी ब्रीन्दा बीन्दास्त चाइ नास्ता कर रही थी.. जीसे डीवोर्सकी बात सुनकर इनको कुछ हुआ ही नही.. वो ब्रीन्दाकी ओर घुमते गुस्सेसे बात करने लगा..
 
जीतुलाल : (धीरेसे) होगइ तस्सली..? पड गइ दिलमे ठंडक..? क्या मीला तुजे..? हंम..? जोभी मीला मेरे बेटेको मीला हे तुजे नही समजी..? मे कोइ नुकसानमे नही हु..

ब्रीन्दा : (सख्तीसे धीरेसे) जीतु.. सुकर मनाओ मेने भाइके सामने तेरी ओर तेरी भाभीकी पोल नही खोली.. वरना अभी यहा तुम दोनो कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहेते.. समजे..? तुम दोनोको क्या लगता हे.. की ब्रीन्दाको कुछ पता नही चलेगा..? हंम..? तुम भाइको केह रहेथेनां..? की मेने सब बदलेकी भावनासे कीया हे.. तो सुनले.. हां.. मेने सचमे सब बदलेकी भावनासे कीया हे.. जाओ.. तुम दोनोसे जोभी होसके करलो..

जीतुलाल : (तीलमीलाते दबी आवाजमे) ब्रीन्दा.. मुह सम्हालके बोलो.. कीस बातका बदला लीया हे तुने..? हंम..? तुजे क्या पता चल गया हे..? हंम..? बोलो..?

ब्रीन्दा : (कातील मुस्कानसे) अच्छा..? मेरे मुहसे सुनना चाहते हो..? तो सुनो.. जयश्री तेरी ओर दीदीकी बेटी हेनां..? कमीने.. तुमने इतनी बडी बात मुजसे छुपाइ..? अगर तेरा तेरी भाभीसे ही नाजायज रीस्ताथा तो फीर मुजसे सादी करके मेरी जींदगी क्यु खराब करदी..? हंम..? तुजे तेरी भाभीको ठोकनेका बहुत सौक हेनां..?

जा.. अब देखले.. मेने तेरी ही बेटीकी सादी तेरे बेटेके साथ करवादी.. अब तेरा बेटा हर दीन तेरी बेटी यानीकी उनकी बहेनको ठोकेगा.. ओर तु दोनो देखते रहोगे.. तुजे अ‍ेक ओर खुस खबर सुनाउ..? मेरे बेटेने तेरी बेटीको ठोक ठोकके प्रेगनेन्ट भी करदीया हे.. अब तुम ओर तेरी भाभी कुछही दिनने नाना नानी भी बन जाओगे.. जा.. तुमसे जोभी हो सके करलेना..

जीतुलाल : (सहेमकर तील मीलाते) ब्रीन्दा.. क्या बक रही हो..? मुह सम्हालके बोलो.. तुजे ये सब कहेते सरम भी नही आती..? मेने सोचा भी नही थाकी तुम इतना नीचे तक भी गीर सकती हो..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) जीतु.. तुमने अभी मेरे नीचे गीरनेकी हद देखी ही नही.. जब औरतको अपनी इजतपे आंच आती हेनां..? ओर वोभी अपने पतीसे.. तो तुम सोचभी नही सकते हम क्या कर सकती हे.. ओर कहा तक गीर सकती हे.. देखना हे तुजे..? चल.. अ‍ेक दिन वोभी तुजे दिखाउगी.. की मे कहा तक गीर सकती हु.. तुमसे जो भी हो सके करलेना..

जीतुलाल : (तीलमीलाते खडा होते) तुम कीतनी कमीनी ओर गीरी हुइ औरत हो.. मुजे आजही डीवोर्स चाहीये.. मे आजही सब पेपर रेडी करवाता हु.. तुम साइन करदेनां..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते सांत लहेजेमे) हां.. करदुगी.. करदुगी.. इतनीभी क्या जल्दी हे..? पहेले इस घर ओर बीजनेसका बटवारा तो होनेदो..? फीर आरामसे जहा कहोगे साइन कर दुगी.. हें..हें..हें..

कहातो जीतुलाल गुस्सेसे तीलमीलाने लगा.. ओर टेबलपे हाथ मारते अपने रुममे चला गया.. तो दुसरी ओर जवेरीलाल अपने रुममे जातेही बीजनेसपे जानेके लीये तैयार होने लगे.. तब उनके पीछे वृन्दा भी आगइ.. ओर जवेरीलालका हाथ पकडकर बेडपे बैठ गइ.. तब जवेरीलाल गुस्सेके साथ उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगे.. तब वृन्दाने उनको सांत कीया ओर उसे प्यारसे समजाने लगी..

वृन्दा : सुनीयेजी.. आप सांत होजाये.. खामखा आपका बीपी बढ जायेगा.. अ‍ेक बार सांत होकर सोचीये.. अभी जोभी हुआ अच्छा नही हुआ.. येतो सोचो जीतु अब कहा जायेगा..?

जवेरीलाल : (थोडा सांत होते) देख वृन्दा.. तु उनकी तरफदारी मत कर.. उसने जोभी ओरतके साथ रीलेशन रखके नीच काम कीया हे वो माफीके लायक नही हे.. इतनी खुबसुरत बीवीको छोडकर वो दुसरी औरतके पीछे पडा हे..? क्या कमी हे ब्रीन्दामे.. ओर वैसे भी मेने उनका हिस्सा उनके बेटेको दिया हे कीसी ओरको नही.. समजी..?

वृन्दा : (थोडी परेसान होते) वो सबतो ठीक हे.. लेकीन जीतुके बारेमे तो सोचीये.. अब वो कहा जायेगा..? कीसके साथ रहेगा..? मे जबसे सादी करके इस घरमे आइ हु.. मेने उनको अ‍ेक बेटेकी तराह पाला हे.. वो मेरा बेटा हे..

जवेरीलाल : (सामने देखते) हां वृन्दा मे मानता हु.. तुम उनको अ‍ेक बेटेकी तराह प्यार करती हो.. लेकीन अब कुछ नही हो सकता.. मेने जोभी डीसीजन लीया हे सही लीया हे..

वृन्दा : (अपनी चाल चलते) सुनीअ‍े जी.. वैसे भी हमारा कोइ वारीस नही हे.. जो हमारे बुढापेमे सहारा बन सके.. अ‍ेक बेटी थी.. तो उसने भी हमारी नाक कटवादी.. ओर वैसेभी जीतुका हीस्सा उनका ही हे.. तो मे सोच रही थी क्युना हम जीतुको हमारे साथ रखे..? वैसे भी वो मेरे बेटे जैसा हे.. तो हमारा बीजनेस भी देखेगा.. ओर हमारा सहारा भी होजायेगा.. ओर उनको रहेनेका ठीकाना भी मील जायेगा..

जवेरीलाल : (कुछ सोचते) हंम.. बाततो तेरी सही हे.. ठीक हे.. कोइ बात नही.. जैसा तुजे ठीक लगे.. वैसे भी मेरा छोटाभाइ हे.. मे कोइ उनका दुस्मनतो हुनही.. जो उसे सडकपे भटकने दुगा.. जा.. जीतुको कहेना अब वो हमारे साथ सहेरमे ही रहेगा.. हम वहा दो बेड वाला मकान ले लेगे.. ओर मे आजही सब बटवारेका पेपर कंपलीट करवाता हु..

कहातो वृन्दाके मनमे खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. वो मनमे बहुतही खुस होने लगी.. आखीर वो अपने प्लानमे कामयाब जो होगइ थी.. अब जीतुलाल हमेसाके लीये उनके पास रहेने वाला था.. वोभी सबसे दुर.. सहेरमे अकेले.. अब वृन्दा ओर जीतुलाल जब चाहे मीलन कर सकते थे.. वृन्दा यही सोचते अ‍ेक्साइटेड होने लगी.. लेकीन अपने चहेरे जाहीर नही होने दीया.. ओर जवेरीलाल जीतुको लेकर बीजनेसके लीये नीकल गये..
 
तो दुसरी ओर लखन ओर सृती दोनो ही कारमे अकेले थे तब सृती लखनके साथ वाली सीटपे ही बैठी थी.. लखन ओर सृती आज दोनोही खुलकर अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते जा रहेथे.. तब बीच बीचमे लखन सृतीके साथ फ्लर्ट भी कर लेता था.. तब सृती बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगती थी.. आज दोनो बीन्दास्त बाते करते सहेरकी ओर जा रहेथे.. तो आज लखनने खुलकर अपनी लाइफके बारेमे सृतीको बता दीया.. की उनके सभी दोस्तो आपसमे कीस तराह अपनी बाते सेयर करते हे..

तो सृतीको भी लखनकी बातोमे इन्ट्रेस होने लगा.. ओर उनको पता चल गया.. की उनका देवर भी अपने बडे भाइकी तराह बहुतही रंगीन मीजाजका हे.. तो वो सरमाके हसने लगी.. ओर उतेजीत होने लगती.. फीर बातोही बातोमे लखनने साहीलके चाचाकी लडकी सबानाके बारेमे बताया.. जो अ‍ेक सृतीकी तराह गायनेक डोक्टर बनना चाहती थी.. तो सृती लखनकी सभी बाते गौरसे सुनती रही..

सृती : (मनमे खुस होते) लखन भैया.. अभी वो आपके दोस्तकी बहेन क्या कर रही हे..?

लखन : (कार चलाते) भाभी.. साहील केह रहाथा अभी उनकी मेडीकल कोलेज खतम होगी.. ओर अब बेंगलोरमे मेडीकलमे फाइनलके लीये पढने जा रही हे.. अ‍ैसा कुछ साहील केह रहा था.. भाभी.. उनकी आर्थीक हालत इतनी अच्छी नही हे.. तो साहील उनकी फीसके पैसे दे रहा हे..

सृती : (सामने देखकर) अच्छा.. बेंगलोरमे..? तो फीर उनके पीताजी क्या काम कर रहे हे..?

लखन : भाभी.. वो अ‍ेक प्राइवेट फेक्टरीमे काम कर रहे हे.. घरमे अ‍ेक बडा लडका दो लडकी ओर साहीलके चाचा चाची हे.. हालही मे उनका बडा लडका अ‍ेन्जीनीयर होगया.. ओर जोबपे लग गया.. तो बेचारे चाचा चाचीको लगाकी अब उनके अच्छे दिन आयेगे.. ओर उनमेसे सबानाको पढायेगे.. लेकीन अ‍ेक हप्ते पहेलेही उनका बडा लडका उनकी बडी वाली लडकी यानीकी उनकी बहेनको लेकर भाग गया.. दोनोने तीन साल पहेलेही नीकाह करलीया था..

सृती : (जोरोसे हसते) हे भगवान.. कमीने सबलोग उनकी बहेनके पीछे ही पडे हे.. हें..हें..हें.. फीर..?

लखन : (हसते) क्या भाभी.. आप नही समजोगी.. क्युकी बहेनके प्रती अ‍ेक अलगही चाहत होती हे.. खैर.. छोडो ये सब.. जब ये दोनो भाग गये तब उनका घर टुट ही गया.. ओर सबानाकी पढाइ रुकनेकी कगारपे आगइ.. साहील भी उनका ही छोटा लडका हे..

लेकीन बचपनसे ही उनकी बडी अम्माने उनको गोद लेलीया था.. सबलोग हमारे ही गांवके हे.. ओर वही रहेते थे.. लेकीन हमारे पुराने सरपंचकी वजहसे उनकी बहुत सारी जमीन चली गइ थी.. जो हालही मे भाइने उनको वापस करदी.. ओर आपने ही अपने हाथोसे उनको सोपी हे..

सृती : (खुस होते) अच्छा.. मेने दीहे..? छोडीये सब.. अब मे जो केह रही हु उसे ध्यानसे सुनो.. मेने भी बेगलोरसे गायनेककी डीग्री ली हे.. वहा सबलोग पहेचान वाले हे.. तो सबानाको कहेना अ‍ेक बार आकर मुजसे मीले.. वैसे भी हमे आगे उनकी जरुरत पडेगी.. क्युकी अब आपके भाइ जो वहा अ‍ेक बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. तो सबानाको अ‍ेक डोक्टरके तौरपे वही जोब मील जायेगी.. आप उनको मीलो तो ये सब कहेना..

लखन : (खुस होते हसते) जी भाभी.. सायद कल ही मे साहील ओर उनकी अम्मा उनके चाचाको मीलने जा रहे हे.. फीर वापसीमे हमारे साथही वापस आजायेगे.. क्या कहेती हो..? चलेगाना..?

सृती : (हसते) ठीक हे.. मीललेना.. ओर सुनो.. वो सबकी टीकीट बुक करनी हे.. भुल मत जाना..

लखन : (हसते) ठीक हे भाभी.. आपको ड्रोप करके वही जा रहा हु.. अब जब भी वापस जाना हो मुजे फोन करदेना.. मे आजाउगा.. ओर मेरे खानेकी चीन्ता मत करना.. ओर आप भी टाइमपे खा लेना..

सृती : (मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) लखन भैया.. भाभीकी इतनी चीन्ता करते हो..? थेन्क्स..

लखन : (मुस्कुराते) अरे.. आप ओर पुनो दीदी मेरी अ‍ेक लौती प्यारीसी भाभी हो.. चीन्ता तो होगीनां..?

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) लखनभैया.. क्या अब आप पुनो दीदीको भाभी कहोगे..?

लखन : (सरमाते सामने देखकर धीरेसे) हां भाभी.. हम दोनोने तैय कीया हे.. जब हम दोनो अकेले होगे तब ही मे उनको भाभी कहुगा.. लेकीन अब आपको तो सब पता हे.. तो मे आपकी हाजरीमे भी उनको भाभी कहुगा.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर मुका मारते) आप बहुतही कमीने देवर हो.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. जोभी कहेना हो कहेना..

कहेते लखन सहेर पहोचक सृतीको उनकी क्लीनीकपे ड्रोप करके नीकल जाता हे.. ओर सीधा ही ट्रावेल्सकी ओफीसमे चला गया.. जहासे वो हनीमुनके लीये गया था.. तो वहा उनको छे दिनका खाने.. रहेने.. ओर घुमनेका पेकेज ही मील गया.. तो देवायतसे बात करके उन्होने चार टीकीटी बुक करली.. तभी उसे कुछ याद आया.. तो चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर उसने फोन नीकालक पुनमको लगा दीया..

तो हवेलीपे गांवकी बहुत सारी औरते नीर्मलाके पास बैठनेके लीये आइ थी.. तो पुनम भी मंजु चंदा भावना रश्मी वंदना सबके साथ बैठी थी.. तभी लखनका फोन आया.. जो उसने वाइब्रेट मोडपे रखा था.. तो पुनमने फोन देखते ही कट कर दीया.. ओर खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके बेडपे बैठकर वापस मुस्कुराते लखनको फोन लगा दीया..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. फोन क्यु काट दीया..? क्या वहा कोइ ओरभी था..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. मे वहा सबके साथ बैठी थी.. वहा बहुत सारी ओरत नीर्मला आंटीके पास बैठनेके लीये आइ हे.. तो मे मेरे रुममे आगइ.. यहा कोइ नही हे.. कहो.. सृती भाभीको छोड दीया..? वहा कोइ ओरतो नही..? आप अकेले होनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब अभी आप अकेली हो.. हें..हें..हें.. तबतो मे आपको भाभी केह सकता हु.. भाभी.. फीकर मत करो.. इधर भी कोइ नही हे.. कहो आपने फोन करनेको कहा था तो करदीया..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन भैया.. जब आप मुजे भाभी कहेते होनां.. तो मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. क्युकी मेरी भी अ‍ेक फेन्टासी थी.. की कोइ मेरा भी देवर हो.. ओर मे उनके साथ ढेर सारी मस्तीया करु.. भाइ.. आपने मेरी कमी पुरी करदी.. थेन्क्स..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आप बहुत खुसनसीब हो.. क्युकी सबकी फेन्टासी पुरी हो जाती हे.. बस.. सीर्फ मेरी फेन्टासी ही पुरी नही होती.. इस मामलेमे सीर्फ मे ही बाकात रेह जाता हु.. सब सपना ही रेह जाता हे.. खैर.. छोडीये.. अब मे आपको भाभी ही कहुगा..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) हां लखन.. अकेलेमे मुजे भाभी ही कहेना मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. अब मे आपको अकेलेमे भाइ नही कहुगी.. आप मेरे प्यारे ओर चहीते देवर हो.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. देखना.. अब आप मेरी भाभी हो गइ हो.. मे आपकी ढेर सारी मस्तीया करुगा.. ओर आपको तो पता हे देवर भाभीके बीच कैसी मस्तीया होती हे.. तो अब तैयार रहीयेगा.. हें..हें..हें.. भाभी.. कहीये.. क्या कुछ जरुरी बात करनी थी..? जो आपने मुजे फोन करनेको कहा था..

पुनम : (सर्मसार होते हसते) हां देवरजी.. सुनो.. अब मे आपको कैसे कहु.. मुजेतो बडी सरम आ रही हे.. क्युकी इस तराह की बात सीर्फ अपनी बीवी ही बता सकती हे.. ओर आज आपको दी हुइ जडीबुटीके बारेमे अभी हम लता भाभीको भी बताना नही चाहते.. वरना वोही आपको सबकुछ बता देती.. हे भगवान.. कहा फसादी मुजे..? देवरजी.. मुजे इस बारेमे बात करनेके बहुत सरम आती हे.. लेकीन क्या करु मुजे ही सब बताना पडेगा..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. हमने पहेले भी इस तरहकी बाते खुलकर की हे.. जब आप मेरी बहेन थी.. तो फीर अब काहेकी सरम..? सायद कुछ बात अ‍ैसी होगी.. जो आप मेरी बहेन होकर नही बता पाती.. लेकीन अबतो हम दोनो देवर भाभी हे.. तो आप ओल रेडी फस चुकी हे.. हें..हें..हें.. जोभी कहेना हो बीन्दास्त कहेदो.. आप मेरी सबसे चहीती भाभी हो.. ओर मे आपका चहीता देवर हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. फीर सुरु होगये..? लगता हे मुजे ही सब बताना पडेगा.. सुनो देवरजी.. आज आपको जो जडी बुटी दी हेनां.. उस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. इनका असर होते ही दो दिनमे सब ठीक होजायेगा.. तो ये दो दीन आपको वो.. वो.. नही करना.. समज गयेनां..?

ओर अब आपको कोइ भी गोलीया खानेकी जरुरत नही हे.. आपका वो भी हे.. उनसे थोडा बडा ओर मोटा होजायेगा.. अगर आपको थोडासा दर्द जैसा लगे तो आप गभराना नही.. दो दिनमे सब ठीक होजायेगा.. आप समज गयेनां..?

लखन : (सरारतसे धीरेसे) भाभी.. मे कुछ ठीकसे समजा नही.. मुजे वो दो दिन क्या नही करना..? ओर क्या बडा होजायेगा..? हें..हें..हें..

पुनम : (बहुतही सर्मसार होते थोडे गुस्सेमे) देखा.. आप वाकइ बहुतही कमीने हो.. कुते कहीके.. करदीना देवर वाली हरकत.. इसीलीये मे आपसे बात नही करती थी.. मुजे पता हे मेरे कहेनेका मतलब आप समज गये हे.. फीर भी आप जान बुजकर अन्जान बन रहे हो.. ये सब बाते आपको अपनी बीवीको बतानी चाहीये.. लेकीन इस बारेमे हम उसे अभी बताना नही चाहते.. इसीलीये मुजे बजबुरन आपसे बात करनी पडी.. देवरजी.. आप वाकइ कमीने हो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हें..हें..हें.. सोरी सोरी भाभी.. क्या हेनां.. मेरे दिलमे आपके लीये अ‍ेक अलग ही फीलींग्स हे.. तो आपके साथ मस्ती करनेमे बहुत मजा आता हे.. कहीये..

पुनम : (सर्मसार होते हसते) देवरजी.. आपकी सभी फीलींग्सके बारेमे पता हे मुजे.. लगता हे अबतो ये बात मुजे बेसरम होके आपको कहेनी पडेगी.. वो नही करना मतलब सेक्स नही करना.. समजे..? ओर वोका मतलब आपके पेनीससे था.. आपतो मुजेभी बेसर्म बना रहे हो.. कमीने कहीके.. अ‍ेक बार घरपे आओ फीर आपकी खबर लेती हु.. अबतो आपको भाभीकी तराह खुब पीटुगी.. बात करते हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हाये.. भाभी.. मेतो कबसे आपसे पीटनेके लीये तैयार हु.. जब हम दोनो स्कुलमे थे.. कब पीटोगी मुजे..? हें.. हें.. हें.. सोरी.. सोरी.. भाभी.. मेतो मजाक कर रहा था.. क्या हेना आपके साथ ओर सृतीभाभीके साथ मस्ती करनेमे बहुत मजा आता हे.. उनके साथ भी पुरे रास्ते खुब मस्तीया की.. हें..हें..हें.. लव यु भाभी.. थेन्क्स.. मेरा खयाल रखनेके लीये.. हें..हें..हें..
 
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. मेरा प्यारासा बच्चा.. सुनो देवरजी.. मेने खास करके आपको ये जडीबुटी उन दोनो मां बेटीके लीये दी हे.. कीसीको कहेना मत.. खास करके रमाभाभी ओर नीलुके लीये.. समज गयेनां..? देवरजी.. उन दोनोकी नीयत ठीक नही हे.. उनकी नजर हमारी जायदादके उपर हे.. इसके लीये रमाभाभी आपके साथ बहुत बडा खेल खेल रही हे.. वो नीलुके जरीये बहुत कुछ हासील करना चाहती हे.. तो बी केरफुल.. उनकी कीसीभी जासेमे मत फसना.. समज गयेनां..?

लखन : (हसते) अरे मेरी भोली भाभी.. फीकर मत करो.. ये लखन इतनी आसानीसे कीसीके भी जालमे फसने वाला नही.. उन मा बेटीको तो अब मेरी उंगलीपे नचाउगा.. आप देखती जाइअ‍े.. कमीनीओको छोडुगा नही.. भाभी.. आपको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. तो फीर बताइअ‍ेना.. वो दोनो क्या प्लानींग कर रही हे..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. अब आपसे सब कैसे कहु..? मुजे तो बताने मे भी सर्म आ रही हे.. सुनीये.. रमाभाभी नीलुको हथीयारके तोरपे इस्तमाल कर रही हे.. वो नीलुको आपके प्रेम जालमे फसाकर उनको आपसे प्रेगनेन्ट करवाना चाहती हे.. ताकी उनके जरीये नीलुकी सादी बडी आसानीसे आपसे करवा सके.. ओर सादीके बाद हमारी जायदादकी कायदेसरकी वारीस होजाये..

फीर दोनो भाइके बीच बटवारा करवाकर आपकी आधी जायदादकी मालकीन बनना चाहती हे.. ओर इसके लीये दोनो मां बेटी आपके साथ सभी तराहका रीलेशन रखनेको तैयार हे.. बस.. आपको इसी बातपे चोकंना रहेना हे.. लेकीन आपको कीसीभी हालमे नीलुसे सादी नही करनी.. बाकी उन मां बेटीके साथ आपको जोभी करना चाहो बीन्दास्त कर सकते हो.. समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सबकुछ समज गया.. यही होगा जो आप चाहती हो.. उनको अपनी बेटीको प्रेगनेन्ट करवानेका बहुत सौक हेनां..? ठीक हे.. मे करदुगा.. लेकीन नीलुको नही.. उनकी मांको.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) कीतने कमीने हो.. कोइ देवर भाभीके साथ अ‍ैसी बाते करता हे..? हें..हें..हें.. देवरजी.. ठीक हे.. आपको जोभी करना हो करना.. दोनो कमीनीओकी हालत बीगाड देनां.. इसीलीये मेने आपको ये जडीबुटी पीलाइ हे.. देवरजी.. आगे जाकर हम दोनोको ही इन सबको हेन्डल करना पडेगा.. तो थोडा सर्तक रहीयेगा.. बेचारी लता भाभीको तो कुछ पता भी नही.. वो बहुत ही भोली हे.. ओर सृती भाभी भावना भाभी भी हमारे साथ हे.. तो आप उनकी टेन्शन मत लेना..

लखन : (धीरेसे) भाभी.. क्या इस बारेमे भाइको पता हे..? अगर उनको सब मालुम होजायेगा तो वो हमे कुछ कहेगे तो नही..?

पुनम : (मुस्कुराते) देवरजी.. आप भाइकी टेन्शन मत लो.. उनको मंजुभाभी सम्हाल लेगी.. समय आनेपे वो ही भाइको सबकुछ बता देगी.. ओर अभी हम दोनोने जो प्लानींग की हे.. इस बारेमे अभी कीसीको पता नही चलना चाहीये.. भाइको भी नही.. समजे..? अभी इस बारेमे सीर्फ मंजुभाभी सृती भाभी ओर हम दोनो ही जानते हे.. लेकीन अभी आप कहा हो..?

लखन : भाभी फीकर मत करना कीसीको पता नही चलेगा.. अच्छा हे आपको ओर मंजुभाभीको सब पता चल जाता हे.. आप उनकी हर खबर मुजे देती रहेना.. बाकी मे सब देख लुगा.. ओर मे अभी ट्रावेल्सकी ओफीसमे हु.. वो चारोका छे दिनका मस्त पेकेज मील गया हे.. अब मे आपकी मेडमके पास जा रहा हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) देवरजी.. बहुत ही कमीने हो आप.. मेरी मेडम हे तो फीर आपकी कुछ नही लगती..? मुजे पता हे वहा आप कीस लीये जा रहे हो.. लेकीन सुनो.. आज जाओ तो सीर्फ मीलना.. बाकी कुछ भी नही.. आप समज गयेनां..? ओर सुनो.. ये दो दिनमे सायद आपको नीचे पेनीसमे तकलीफ होगी.. लेकीन आपको कुछ नही होगा..

तो दो दिनमे ही अपने आपही ठीक होजायेगा.. ओर आपकी मेडम मीले तो मुजसे बात करवाना.. वोभी आपहीकी तराह कमीनी हे.. जब आप उसे मीलने आतेथे तब आप दोनो कैसे मुजे चोकीदारकी तराह रुमके बहार आपका ध्यान रखने खडी रखते थे..? लेकीन हे बहुत मस्त पटाका.. पता नही आपने उसे कैसे पटाली.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने नही.. उसने मुजे पटालीया था.. भाभी.. क्या मे उनसे सादी करलु..? सीर्फ आपको पुछ रहा हु.. क्युकी आप मेरी हर बातकी राजदार हे.. ओर आगेभी रहेगी.. आइ प्रोमीस.. मेरी कीसीभी बात आपसे छुपी नही हे.. ओर आगे भी नही रहेगी.. लव यु भाभी..

पुनम : (सर्मसार होते) हंम.. लव यु टु.. अपनी भाभीपे इतना बडा भरोसा..? लेकीन आपको इनके साथ सादी क्यु करनी हे..? दोनो अ‍ैसे ही मजा लुटते रहो.. वो कहा आपको मना कर रही हे..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) नही भाभी.. उनके बारेमे आपको भी सब पता हे वो इस दुनीयामे अकेली हे.. सीर्फ अ‍ेक मां हे जो उनको भी पेरेलीसीस होगया हे.. वो अपनी बेटीका घर बसते देखना चाहती हे.. तो मे उनको खुसी देना चाहता हु.. ओर जीसे मे प्यार करता था उनसे कभी अपने दिलकी फीलींग्सके बारेमे बता नही पाया.. तब राधुने मुजे सम्हाला.. वैसे भी राधु भी मुजे बहुत चाहती हे.. इसीलीये उनसे सादी करना चाहता हु..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. मेरा देवर काफी समजदार हो गया हे.. जाओ.. करलो सादी.. मुजे पताथा आप कीसको प्यार करते थे.. मे आपके बारेमे ओर आपकी फीलीग्सके बारेमे सब कुछ जानती थी..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. क्या आपको सचमे पता था..? तो बताइअ‍ेनां मे कीसको प्यार करता था..?

पुनम : (बहुत ही सर्मसार होते) हंम.. तो सुनीये.. क्या आप मुजसे प्यार करते थेनां..? सच कहेना..

लखन : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. मे आपसे जुठ नही बोलुगा.. हां.. मे आपको बहुत चाहता था.. मेने जब जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तब ही मेरी पहेली चाहत आप थी.. भाभी.. मे आपको बहुत प्यार करता था लेकीन अपने दिलकी बात कहेने की कभी हिंम नही जुटा पाया.. भाभी.. आपको सब पता था तो आपने इस बारेमे मुजसे बात क्यु नही की..? हमने तो इस बारेमे बहुत सारी चर्चा खुलकर की हे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) देवरजी.. लेकीन तब मेरी भी कुछ मजबुरी थी.. जीस तराह आपकी पहेली चाहत मे थी.. उसी तराह मेरी भी सबसे पहेली चाहत हमारे बडे भाइ थे.. देवरजी.. मे बडे भैयाको प्यार करती थी.. तो इस बारेमे आपसे कैसे बात करती..? ये मत भुलना मे अब आपके बडे भाइकी अमानत हु.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) भाभी.. आपको अपनी शक्तिओके माध्यमसे मेरे बारेमे सब पता चल गया..? हां भाभी..? मे आपसे प्यार करता था.. लेकीन मेरे दिलकी बात आपको कभी नही केह पाया.. कास.. भाइसे पहेले मेने ही थोडी हीमत करली होती.. ओर भाइकी जगाह मेने आपको पटालीया होता.. तो आज आप मेरी बीवी होती.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. देखा..? जब मेने आपको सब बता दीया तो आप अपनी भाभीके साथ फ्लर्ट करने लगेनां..? आपको अपनी भाभीके साथ अ‍ैसी बात करते सरम नही आती..? आप वाकइ बहुत कमीने हो.. हें..हें..हें.. लेकीन देवरजी.. आप गलत हो.. बडे भैयाने मुजे नही पटाया.. लेकीन मेने खुद बडे भैयाको पटाया हे..

इसके लीये मुजे क्या क्या पापड बेलने पडे हे वोतो सीर्फ मे ही जानती हु.. ओर मुजे पता थाकी आप भी मुजे पसंद करते थे.. लेकीन देवरजी.. गलती आपकी हे.. जब बडै भैया धिरेनकी बात लेकर आये तब तो आपको अपने दिलकी बात मुजे बतानी चाहीयेनां.. तो सायद मे धिरेनके बजाये आपसे सादी करलेती.. तो हमारे खानदानकी परंपरा भी अ‍ैसे ही कायम रहेती..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. लेकीन आपको तो सब पता था की मे आपसे प्यार करता हु.. आपतो भाइको चाहती थीनां..? ओर उनसे सादी भी करली हे.. तो फीर आप धिरेनके बाजये मुजसे ही सादी कर लेती.. आपने धिरेनसे सादी क्यु की..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. इस बारेमे हमारी पहेले भी चर्चा हो चुकी हे.. मैसे आपको अपनी बीवीको पुछनेके लीये कहा था.. खैर..अ‍ैसी बाते फोन पे नही होती.. जब हम दोनो अकेले मीलेगे तब इनकी चर्चा करेगे.. फीर भी मुजसे सादी करना चाहते थे.. तो आपको मुजे अपनी दिलकी बात बता देनी चाहीये थीं..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. यही सबसे बडी गलती थी मेरी.. कास मेने थोडी हिमत करली होती.. क्युकी मे आपको बहुत चाहता था.. मेरी लाइफ का पहेला प्यार थी आप.. जो मे आज भी नही भुल रहा.. खैर.. भाभी.. हम अकेले मीलेगे तब इनकी चर्चा करेगे.. भाभी.. आइ लव यु.. मे आज भी आपको इतना प्यार करता हु..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) देवरजी.. फीर भी मे आपके हाथ आने वाली नही थी.. क्युकी मे आपको नही आपके बडे भाइको पसंद करती थी.. ओर उसे बचपनसे चाहती थी.. तो आपका कोइ चान्स नही था.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) भाभी.. कोइ बात नही.. मे अगले जन्म तक आपका इन्तजार करुगा.. आप मुजे प्रोमीस करो.. अगले जन्ममे हम जरुर मीलेगे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते) तबभी आपका कोइ चान्स नही हे.. मेरी हर जन्मकी बुकींग हो चुकी हे.. हें..हें..हें.. सुनो देवरजी.. सोरी मे तो मजाक कर रही हु.. हें..हें..हें.. देवरजी.. क्या आप मुजसे प्यार करते थे इसके बारेमे राधु मेडम भी जानती थीनां..? क्युकी अभी आपने कहाना तब उसीने आपको सम्हाला था.. हंम..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) हां भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे उसे बजबुरन बताना पडा.. लेकीन उसने वादा कीया हे.. इस बातका जीक्र वो कभी कीसीसे नही करेगी.. आपसे भी नही..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. कोइ बात नही..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मुजे आपसे मीलकर कुछ बाते भी कहेनी हे.. वो.. धिरेनके बारेमे.. क्या उनके बारेमे आपको कुछ पता हे..? क्युकी आपको तो सबकुछ पता चल जाता हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. मुजे सब पता हे.. लेकीन अभी नही.. जब हम दोनो अकेले होगे तब इनकी चर्चा करेगे.. क्या आप उनसेभी बदला लेना चाहते होनां..?

लखन : (धीरेसे मुस्कुराते) हंम.. मेरी प्यारीसी भाभी ओर मेरे पहेले प्यारके साथ धोखा कीया हे.. तो बदलातो लुगानां..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम..? पहेला प्यार..? ठीक हे.. देवरजी.. आप बहुतही कमीने हो.. चलो मे फोन रखती हु.. बहुत करलीया भाभीके साथ फ्लर्ट.. हम बादमे बात करेगे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. जडी बुटीके लीये थेन्क्स.. आइ लव यु..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. मेरा प्यारा क्युट देवर.. लव यु टु.. बाय..

पुनमको लखनके साथ इस तराहकी बाते करते फ्लर्ट करनेके बहुत मजा आ रहाथा.. पुनमने हसते हुअ‍े फोन काट दीया.. देखातो उनकी चुत लखनके साथ फ्लर्ट करते गीली होचुकी थी.. तब पुनम बहुतही सर्मसार होगइ.. आज पहेली बार देवायतके अलावा लखनके साथ इस तराहकी बाते करके अ‍ैसा हुआ.. तब उसे मंजुकी लखनसे सतर्क रहेनेकी बात याद आगइ.. ओर पुनम सर्मसार होते जटसे अपने बाथरुममे घुस गइ.. ओर अपनी चुतको साफ करने लगी..
 
ओर चुतको साफ करते करते अनायास ही आज देवायतके बजाये लखनको इमेजींग करते चुतमे उंगली घुस गइ.. ओर आंख बंध यही सोचने लगी.. की इस वक्त लखन उनकी चुदाइ कर रहा हे.. यही सोचते वो धीरे धीरे उंगली चुतमे घुसाकर अंदर बहार करने लगी.. तो कुछ ही देरमे पुनम बहुत ही उतेजीत होगइ.. ओर उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर पुनम सांत होगइ..

तब उसे बहुतही गील्टी फील होने लगी.. जैसे उन्होने देवायतको धोखा दे दीया हो.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. ओर वो जटसे चुतको साफ करके मुह धोकर बहार नीकल गइ.. अपनी सादीसे पहेले पुनम देवायतको इमेजींग करते अ‍ैसा कइ बार कर चुकी थी.. लेकीन आज पुनमकी जींदगीमे अ‍ैसा पहेली बार हुआ.. जो उसने देवायतके अलावा दुसरे मर्दके बारेमे सोचते अ‍ैसा कीया हो..

तब सहेरमे लखन वहासे कार लेकर सीधा होस्टेलकी ओर चला गया.. रास्तेसे कुछ सामान लेलीया.. ओर सीधाही राधीकाकी ओफीसमे चला गया.. तो देखा राधीका खडी होकर कही जानेकी तैयारीया कर रही थी.. तो लखनको देखते ही खुस होगइ.. ओर वापस खुरशीपे बैठ गइ.. तब लखनने उसे पुछातो वो अपने घरही जा रही थी.. वहा इस वक्त दोनोके अलावा कोइ नही था.. होस्टेलकी सभी लडकीया डाइनींग होलमे बैठकर खाना खा रही थी..

लखन : (धीरेसे दरवाजा बंध करते) हाइ डार्लींग..कैसी हो..? कही जा रही थी..? हें..हें..हें..

राधीका : (सरमाकर धीरेसे) हां.. क्या बात हे.. अबतो रोज सरप्राइज मीलने लगी.. हें..हें..हें.. आपको तो पता हे मम्मीको पेरेलीसीस होगया हे.. तो उनको खाना खीलाना पडता हे.. तो खाना लेकर जा रही थी.. क्या आप कहीसे खाकर आये हो..?

लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. आज सोचा मे मेरी राधुके साथ लंच करुगा.. अगर धर जा रही हो तो चलो मेभी साथ चलता हु.. कीतने दिन होगये आंटीको नही मीला.. उनकी सासुमांकी खबर भी पुछ लुगा.. हें..हें..हें..

राधीका : (खुस होते मुका मारते) बहुत ही कमीने हो.. हां चलो.. मम्मी आपको देखते ही खुस होवायेगी.. मे ओर खाना पेक करवाती हु.. फीर दोनो चलते हे.. ओर ये केरी बेगमे क्या हे..? कही मंदिरसे आ रहे हो..? हार जैसा दीख रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते जुठ बोलते) हंम.. वहीसे आ रहा हु.. अबतो जबतक सामको भाभीका फोन नही आता मे मेरी राधुके पासही रहुगा..

राधीका : (सरमाकर धीरेसे) जानु.. देखना.. मम्मीके सामने कोइ सरारत मत करना.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. ये दो दिन कुछ भी नही.. ये दो दिन मुजे सयम रखना हे.. समज गइ..?

राधीका : (आस्चर्यसे देखकर मुस्कुराते) लखन.. ये आप केह रहे हो..? आइ कान्ट बीलीव.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. अब तुमभी मेरी टांग खीचलो.. हें..हें..हें.. मनत हे मेरी..

राधीका : (हसते) अच्छा..? ये बताइअ‍े ओर कीससे अपनी टांग खीचवाकर आये हे..? हें..हें..हें..

लखन : (पुनमको फोन लगाते) हेना अ‍ेक.. आपकी खास सहेली.. ओर हमारी राजदार.. लीजीये उनसे बात कीजीये.. आपसे बात करना चाहती हे..

राधीका : (फोन लेते) कौन पुनम..? (फोनपे) हाइ पुनो.. कैसी हो..?

पुनम : (फोनपे धीरेसे) हाइ भाभी.. बहुत मस्त हु.. आप कहो.. कैसी हे आंटीकी तबीयत..?

राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) बस ठीक हे.. लेकीन तुम अपनी हरकतसे बाज नही आओगी.. आज भी मुजे भाभी भाभी कहेकर छेडती हो.. क्या मे आपकी भाभी हु..? ये कहो.. तुम लखनके साथ क्यु नही आइ..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. मे बादमे आजाउगी.. मुजे आपसे कुछ सीकायत भी करनी हे.. ओर आपसे काम भी हे.. अबतो भाइ.. वही रहेने आ रहे हे.. तो अब आना जाना लगा ही रहेगा.. ये कहो.. अभी तक आपने सादी की हे.. की नही..?

राधीका : (सरमाते धीरेसे) नही पुनो.. मुजे अब सादी नही करनी.. अ‍ैसेही खुस हु.. मुजे अब मर्दसे अ‍ेक नफरतसी होगइ हे.. नही करनी सादी.. पता नही आपका भाइ लखन कैसे मुजे भा गया.. मेरा छोटा बलमा.. हें..हें..हें.. आपका भाइ बहुत भोला हे.. क्या मस्त आदमी हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. तो फीर अ‍ेक बात कहु..? आप भाइसे ही सादी करलो.. आपको तो पता हे हमारे खानदानमे कीतनीभी सादीया करले.. सब चलता हे.. सबकी सीक्रेट वाइफ होती हे.. हें..हें..हें..

राधीका : (धीरेसे मुस्कुराते) हां ये बात सही हे.. पता हे मुजे.. अ‍ेक बार आपने कहाथा.. लेकीन पुनो.. हमारी उमरमे काफी फर्क हे.. मेरा छोटा बलमा कैसा लगेगा.. हें..हें..हें.. छोडो सब.. ये कहो.. मुजसे मीलने कब आ रही हो..? क्या सीकायत हे मुजसे..? मुजे भी तुमसे ढेर सारी बाते करनी हे..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. मुजे भी आपसे बहुत कुछ बाते करनी हे.. मीलकर बताउगी.. देखती हु.. अब अ‍ेक दिन लखन भैयाके साथ कारमे बैठ जाउगी.. वो वहा भाभीको छोडने ओर लेने आते हे.. तब मे साम तक आपके पास रहुगी.. ओर आंटीको भी मील लुगी..

राधीका : (धीरेसे मुस्कुराते) हंम.. मे तेरा इन्तजार करुगी.. पुनो.. पता नही तेरे मुहसे भाभी सुनकर कीतना अच्छा लगता हे.. चल.. बाकी सब बाते हम मीलेगे तब करेगे.. मे फोन रखती हु.. कुछ काम होतो बताना..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) जी भाभी.. बाय..

कहेते पुनमने फोन काट दीया.. तो राधीकाने सरमाते हसते हुअ‍े लखनको फोन वापस देदीया.. फीर वो खडी होकर ओर ज्यादा खाना पेक करवाने कीचमे चली गइ.. ओर दो टीफीन पेक करवाके लेलीया.. फीर वो ओर लखन ओफीस बंध करके कारमे बैठ गये.. ओर कारको लखनने राधीकाके घरकी ओर जाने दी.. जो महज कुछ ही दुरी पर था.. पुरे रास्ते राधीका मुस्कुराते हुअ‍े लखनकी ओर देखती रही....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८२

कहेते पुनमने फोन काट दीया.. तो राधीकाने सरमाते हसते हुअ‍े लखनको फोन वापस देदीया.. फीर वो खडी होकर ओर ज्यादा खाना पेक करवाने कीचमे चली गइ.. ओर दो टीफीन पेक करवाके लेलीया.. फीर वो ओर लखन ओफीस बंध करके कारमे बैठ गये.. ओर कारको लखनने राधीकाके घरकी ओर जाने दी.. जो महज कुछ ही दुरी पर था.. पुरे रास्ते राधीका मुस्कुराते हुअ‍े लखनकी ओर देखती रही....अब आगे

दोनोही घरपे पहोच गये ओर अंदर चले गये.. तो लखन सीधेही राधीकाकी मम्मीके रुममे चला गया.. जो वो अपने बेडपे लेटी हुइ थी.. तो लखनको देखतेही खुसके मारे बेडसे उठनेका प्रयत्न करते अपना हाथ लंबा करके लखनको अपने पास बुलाने लगी.. तो लखनभी मुस्कुराते उनके पास चला गया ओर बेडपे बैठकर आंटीके पैर छुकर उनको हग करने लगा.. तब राधीका की मम्मीने उसे गले लगा लीया ओर लखनके सरको सहेलाने लगी..

आंटी : (मुस्कुराते) बेटा.. तुमतो स्कुल छोडकर गायब ही होगये.. बहुत दिनोके बाद आये हो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते राधीकाकी ओर देखते) आंटी मेतो आता ही रहेता हु.. आपकी बेटी मुजे इधर लाये तब आउगाना..? हें..हें..हें..

राधीका : (हृसते लखनको पीठमे मुका जडते) जुठ मत बोलो.. मम्मी.. ये मुजे भी कीतने दिनोके बाद मीले हे.. आप इनकी खबर लो.. मे आपका खाना नीकालती हु.. फीर मे ओर लखन खा लेगे..

कहेथे राधीका अ‍ेक बार फीर लखनको मारके चली गइ.. तो लखन ओर आंटी दोनो ही हसने लगे.. फीर आंटी ओर लखनने उन भाइ बहेनकी सादीको लेकर बहुत सारी बाते करली.. बातो ही बातोमे आंटीने राधीकाके अकेलापन ओर सादीको लेकर चींता जाहीरकी.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो लखनने अपने हाथोसे उनके आंसु पोछ दिये.. ओर आंटीकी ओर देखते मुस्कुराता रहा..

आंटी : (मुस्कुराते) बेटा.. क्यु हस रहा हे.. तुम्हारी तो अच्छी दोस्त हे.. ओर तुजे बहुत मानती हे.. अब तुम ही उनको समजाओ.. सादी करले.. मेरी तो अ‍ेक भी नही सुनती.. कहेती हे अब सादी नही करनी.. अब मेरा क्या भरोसा.. कब उपर चली जाउ..

लखन : (मुस्कुराते) आंटी.. अगर आप कहोतो मे उनसे सादी करलु..? आप दे दीजीये मुजे उनका हाथ..

आंटी : (सोक्ट होते) बे..टा.. क्या केह रहे हो..? वो तुमसे उमरमे काफी बडी हे.. ओर वैसे भी तुम्हारी सादी तो होगइ हे.. तो क्या दुसरी सादी करोगे..? तुम बहुत सरारती हो.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) आंटी.. मे मजाक नही कर रहा.. सच कहेता हु.. आपको तो पता हे हम अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. हमारे खानदानमे दो क्या तीन चार सादी करलो तो भी कीसीको अ‍ेतराज नही.. बडे भैयाने खुद तीन सादीया की हे.. ओर आप राधुकी चीन्ता मत करना.. वो वही आपके पास ही रहेगी.. उनकी सारी जींदगी की जीम्वेवारी मेरी.. क्या कहेती हो..?

आंटी : (आस्चर्यसे देखते मुस्कुराते) बेटा.. इतना प्यार करता हे मेरी राधुको..? देखले वो मानेगी नही.. अगर मान गइतो मे जींदगीभर तेरी अहेसान मंद रहुगी.. कमसे कम चेइनकी मोत तो मरुगी..

राधीका : (खाना अंदर लेकर आते) मम्मी.. क्यु मरनेकी बात कर रही हो..? अ‍ेकतो कीतने दिनोके बाद ये घरपे आया हे.. तो मरनेकी बात करके इसे क्यु डरा रही हो.. हें..हें..हें.. लीजीये खाना आगया.. चलो खीलाती हु.. फीर हम दोनो भी खा लेगे..

आंटी : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) कुछ नही बेटी.. हम तेरी सादीकी बात कर रहे थे.. हें..हें..हें..

राधीका : (खाना खीलाते) मम्मी आप फीर सुरु होगइ..? अरे बाबा अब मुजे नही करनी सादी..

लखन : (हसते) राधु.. क्या मुजसे भी सादी नही करनी..?

राधीका : (अ‍ेक नजरसे देखते) लखन प्लीज.. अभी मजाक नही.. मुजे मम्मीको खीलाने दो..

आंटी : नही बेटी.. लखन मजाक नही कर रहा.. मुजेभी ये लडका पसंद हे.. तुजे प्यार भी तो बहुत करता हे.. करले इनसे सादी.. कबतक अ‍ैसे अकेली घुट घुटके जीयेगी.. अभी तेरी उमर ही क्या हे..? ओर मे भी कब तक जीयुगी..? वरना कहेदे तु इसे प्यार नही करती.. मे आजके बाद तुजे कभी सादीके लीये नही कहुगी..

कहा तो राधीका उनकी मम्मीको खाना खीला रही.. ओर खाना खीलाते उनके आंसु छलकने लगे.. ओर वो चुपचाप आंसु बहाते खाना खीलाती रही.. लखन ओर राधीकाकी मम्मी राधीकाको देखते रहे.. तीनो ही नीसब्द बैठे रहे.. पुरे रुममे खामोसी छाइ रही.. ओर राधीकाने खाना खीला दीया.. तो वो खाली बर्तन लेकर कीचनमे चली गइ.. तब लखन आंटीके कानमे कुछ कहेता हे.. तो आंटी मुस्कुराने लगी.. तभी राधीका रुममे आइ तो वहा लखन नही था..

राधीका : (देखतेही गभराते) मम्मी.. कहा गया लखन..? उनको खाना खाने बुलाने आइ हु..

आंटी : (जुठ बोलते) बेटी.. वोतो तुम कुछ नही बोली तो चला गया.. कुछ कहेकर भी नही गया..

राधीका : (बहारकी ओर दोडते जोरोसे) ल..ख..न..

राधीका लखनको जोरोसे आवाज देकर बहारकी ओर दोड पडी.. बहार देखातो लखन कही नही दीख रहा था.. तो वो आंगनसे बहार दोडकर चली गइ.. तभी उनको लखनकी कार वही पडी नजर आइ तो वो वापस दोडकर घरमे आगइ.. ओर चारो ओर देखने लगी.. लखन कही नजर नही आया.. तब उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर वो वापस अपने मम्मीके पास आगइ..

राधीका : (अंदर आतेही जटसे) मम्मी.. लखन बहार कही नही हे.. घरमे भी नही हे.. उनकी कार हे.. तो कीधर गया..? क्या आपको कुछ कहेकर नही गया..? मुजे भी बताकर नही गया..

आंटी : अरे तुजे क्यु बतायेगा..? तुम होती हो कौन उनकी..? जो तुजे बताकर जायेगा.. चला गया होगा अपने घर.. ओर तुम उनके लीये इतना पगला क्यु हो रही हो..? जा जाकर खाना खाले..

राधीका : मम्मी.. चुप होजाओ.. मे प्यार करती हु उसे.. वो मुजे बताये बगैर कभी नही जा सकता..

तभी लखन मुस्कुराते अपने हाथोको पोछते बाथरुसे बहार नीकला.. तो राधीका उनको देखते ही दोडकर उनके गले लग गइ.. ओर आंसु बहाने लगी.. उनको अपनी मम्मीका भी खयाल नही आयाकी वो भी वही हे.. तब आंटी जोरोसे हसने लगी.. तो लखन भी हसने लगा.. तब राधीका समज गइकी दोनोने मीलकर उसे उलु बनाया हे.. ओर वो सरमाकर हसते लखनके सीनेमे मुका मारने लगी.. तभी..

आंटी : (हसते) बेटी.. देखा.. तुमसे लखनकी इतनीसी जुदाइ भी सहेन नही होती.. यही बात जताती हे तुम लखनको कीतना प्यार करती हो.. करले इनसे सादी.. मेरा लखन बेटा तुजे बहुत खुस रखेगा..

लखन : (प्यारसे गाल सहेलाते) हां राधु.. कहेते हे भगवानसे भी बडा होदा हमारे मां बापका होता हे.. तो इधर मां भी हे.. यहा मंदिर भी हे.. करले मुजसे सादी.. मे सब तैयारीया करके आया हु.. मे कल जब तुजे मीला तब ही तैय करलीया था.. की मे तुमसे सादी करके ही रहुगा.. तुम पुछ रहीथीनां इसमे क्या हे..? देखले..

कहेते लखनने केरी बेगसे दो सादीके लीये फुलोका हार नीकाला.. फीर अ‍ेक छोटीसी डीबी ओर अ‍ेक छोटासा ज्वेलेरी बोक्ष नीकाला.. तो आंटी ओर राधीका उसे मुह फाडते देखती ही रही.. ओर लखन राधीकाको हाथ पकडकर मंदिरके सामने ले गया.. ओर अ‍ेक हार राधीकाको हाथमे थमाते दुसरा हार खुदने रख लीया.. तब आंटीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. वो मुस्कुराते ये सब तमासा देखती रही.. तभी..
 
राधीका : (सरमाकर धीरेसे) लखन पागल मत बनो.. अ‍ेक बार फीर सोचलो.. ये जींदगी भरका बंधन हे.. फीर मे आपके बीना नही रेह पाउगी..

लखन : (मुस्कुराते) ओर मे तुजे अकेली रहेने भी नही दुगा.. राधु.. मुजे सब पता हे.. मे जींदगी भर तेरी ओर आंटीकी जीम्वेवारी उठानेको तैयार हु.. तुम सादीके बादभी मेरी बीवी बनकर यही आंटीके पास रहोगी.. अब मे सहरमे रहेने आ रहा हु.. ओर सुन.. अभी इस बातकी सीर्फ पुनोको खबर हे.. की मे तुमसे सादी कर रहा हु.. फीर मे तुजे मेरे परीवारमे भी सामील कर लुगा.. अगर तुम सबके साथ रहेना चाहो तो भी रेह सकती हो..

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) लखन.. इसकी कोइ जरुरत नही हे.. मे सीर्फ आपको परख रही थी.. आप काफी मेच्योर हो गये हो.. वैसे मे यहा अ‍ैसे ही खुस हु.. ओर हमारा होस्टेल भी बहुत अच्छा चलता हे.. आपको मेरी जीम्वेवारी उठानेकी जरुरत नही हे.. बस.. हमेतो आपका प्यार चाहीये.. कमसे कम अब मे आपकी सुहागनतो कहेलाउगी..

आंटी : (जोरोसे हसते) तो फीर क्यु नखरे कर रही थी.. अब तो पहेनादे हार.. हें..हें..हें..

उनकी मम्मीने कहातो राधीका सर्मसार होगइ.. ओर नजर जुकाते मुस्कुराते लखनको हार पहेना देती हे तब लखन भी अपना हार राधीकाके गलेमे डाल देता हे.. फीर डीबीसे अ‍ेक चुटकी सींदुर लेकर राधीकाकी मांगको भर देता हे.. तब राधीकाके आंसु छलक गये.. ओर वो चुपचाप नजरे जुकाये खडी रही.. तभी आंटीने दोनोको जींदगी भर अ‍ेक दुसरेको साथ नीभानेकी कसमे खीलवाइ.. ओर आखीर लखनने बोक्षमेसे मंगलसुत्र नीकालाकर राधीकाके गलेमे डाल दीया.. तब राधीकाका सब्रका बांध टुट गया..

वो अपनी दोनो हथेलीमे मुह छुपाकर सरको लखनके सीनेपे रख देती हे.. ओर फुटफुटके रोने लगती हे.. तब लखन मुस्कुराते उनको अपनी बाहोमे भरके उनकी पीठ सहेलाता रहा.. जीसे देखकर आंटीकी आंख भी गीली होगइ.. फीर लखन राधीकाको सांत करता हे.. ओर उसे पानी पीलाता हे.. फीर दोनोही भगवानके सामने हाथ जोडकर आशीार्वद लेते हे.. ओर साथमे आकर आंटीके पांव छुते हे.. तब आंटी आंसु बहाते दोनोको आशीर्वाद देती हे..

आंटी : (मुस्कुराते) दोनो खुस रहो.. लखन बेटा.. आज तुमने इस बुढीयाकी लाज रखली.. तुमने मेरी मोतको सुधार दीया.. जीते रहो.. दोनो.. बस.. मेरी राधुको खुस रखना.. हमे ओर कुछ नही चाहीये..

लखन : (उनके पैरोके पास बैठकर) मम्मी.. अब मे आपको आंटी नही कहुगा.. आजसे आप मेरी सास नही मेरी भी मां होगइ हे.. मे वादा करता हु.. आपकी राधुको हमेसा खुस रखुगा.. आइ प्रोमीस..

आंटी : (हसते) देखा बेटी.. आज मुजे दामादके रुपमे बेटा मील गया हे.. आज तो आपने मेरी जींदगी खुसीओसे भरदी हे.. दोनो खुस रहो.. ओर अपनी जींदगी खुसीसे जीओ..

राधीका : (सरमाकर हसते) लखन.. अब आप चलीयेनां.. मुजेतो जोरोकी भुख लगी हे.. हें..हें..हें..

आंटी : (हसते) अबतो तेरा पती हो गया हे.. अबतो उसे नाम लेकर मत बुलाओ.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) नही मम्मी.. नाम लेने दीजीये.. अब जमाना बदल गया हे.. सुकर मनाइअ‍े अब मुजे आप.. आप.. कहेकर बुलाने लगी हे.. वरना तो मेरे साथ तु तु करते बाते करती थी.. हें..हें..हें..

कहातो राधीका सरमा गइ.. ओर हसते हुअ‍े लखनकी पीठमे अ‍ेक मुका मारकर उनका हाथ पकडकर खीचकर बहार चली गइ.. ओर अपने रुममे आकर फटाफट दरवाजा बंध करदेती हे.. ओर दरवाजा बंध करते ही जटसे लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर रुककर मुस्कुराते लखनकी आंखोमे देखने लगी.. ओर कुछ ही पलमे दोनोके होठ मील गये..





राधीका : (होठ छोडते सरमाते) बस.. बस.. लखन रहेने दीजीये.. मे बहेक जाउगी.. फीर हम कंट्रोल नही कर पायेगे.. आपने तो मुजे गरम करदी.. आप कहे रहेथेनां ये दो दिन कुछ नही करना.. हंम..?

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. लेकीन फीकर मत करना.. दो दिनके बाद जब हमारी सुहागरात होगी.. वो बहुत ही स्पेसीयल होगी.. इसी घरमे.. अभी तो मुजे मेरी बीवीको प्यार करनेदे.. उसे गरम भी कर दुगा ओर ठंडी भी करदुगा..

कहेते लखन फीरसे राधीकाके होठोको चुमते उनके उरोजोको मसलने लगा.. तब कुछही देरमे दोनो चुमते चुमते बेडपे चले गये.. ओर दोनोके अ‍ेक अ‍ेक वस्त्र नीकलते गये.. दोनोही पुरी तराह नंगे अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगे.. आज राधीका मांगमे सीदुर ओर गलेमे मंगलसुत्रके साथ सुहागन होकर कयामत लग रही थी.. दोनो ही बेडपे लेट गये.. तब लखन राधीकाके बुब्सको मुहमे लेकर चुमने लगा..





ओर उनकी चुतको सहेलाते अ‍ेक उगली चुतमे घुसा देता हे.. ओर जोरोसे हीलाते राधीकाको उनकी मंजीलकी ओर लेजाने लगा.. तब कुछही देरमे राधीकाकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर वो अपनी सासंको दुसरस्त करते मुस्कुराने लगी.. तब लखन उसे गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. तो राधीका लखनके गलेमे हाथ डालकर उसे प्यार भरी नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. वहा दोनोने सावर लीया ओर नहाकर बहार आगये.. फीर दोनोने अपने अपने वस्त्र पहेनलीये.. तभी राधीका लखनकी बाहोमे समा गइ..

राधीका : (मुस्कुराते) जानु.. आपको पता नही आज आपने हमे कीतनी खुसी दी हे.. आज मेरी जींदगीका सबसे अनमोल दीन हे.. मे इस दिनको कभी नही भुलुगी.. ओर नाही मम्मी..

लखन : (मुस्कुराते) राधु.. मे बहुत जल्द यहा रहेनेके लीये आ रहा हु.. तो आजसे ये भी मेरा दुसरा घर हे.. तुम फीकर मत करना मे अब आये दिन तुमसे मीलनेके लीये आजाउगा.. अभी हमारी सादीके बारेमे सीर्फ पुनोको ही पता हे.. ओर सायद मंजु भाभीको.. क्युकी वो ओर पुनोदीदी सबकुछ जान जाती हे..

राधीका : (सामने अ‍ेक नजरसे देखते) जानु.. अ‍ेक बात पुछु..? जब आपने पुनोको हमारी सादीके बारेमे कहा तो वो कुछ नही बोली..? हंम..? क्या उसे पता हे आप उनको प्यार करते थे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. इस बारेमे आज ही उनसे बात हुइ.. तुजे पता हे..? पुनोको मेरे बारेमे ओर मेरी फीलींग्सके बारेमे सबकुछ पताथा.. की मे उसे प्यार करता था.. तो आज मेने भी हिमत करके उनको सबकुछ खुलकर बता दीया.. की मे आपसे प्यार करता था ओर आपसे सादी करना चाहता था..

राधीका : (सीरीयस होते सामने देखते) तो फीर.. वो कुछ नही बोली..? हंम..?

लखन : राधु.. हमारी सादीके बाद बहुत कुछ बदल गया हे.. आज इस बारेमे पुनो दीदीसे बहुत कुछ बाते हुइ.. लेकीन अभी नही.. हम दोनो होस्टेलमे आरामसे बैठकर बाते करेगे.. अभी तो चल मुजे जोरोकी भुख लगी हे.. हें..हें..हें..

राधीका : (हसते) अरे.. मेरे पतीको भुख लगी हे..? चलो चलो.. आजतो मे अपने हाथोसे खीलाउगी.. हें..हें..हें..

ओर राभीका लखनको लेकर बहार आगइ.. आकर दोनो खानेके लीये बैठ गये.. आज राधीका बडेही प्यारसे लखनको अपने हाथोसे खीला रही थी.. तो लखनभी राधीकाको अपने हाथोसे खीलाने लगा.. जब खाना खतम होगया तो दोनोही वापस होस्टेल जानेके लीये तैयार होगये.. लखन अ‍ेक बार फीर आंटीके पास चला गया ओर उनके पैर छुकर जानेकी इजाजत लेकर बहार आगया.. फीर दोनोही अपनी कारमे वापस होस्टेलपे आगये..
 
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