रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १८५
कहेते दोनोही अेक दुसरेका हाथ पकडकर मंजुकी ओर देखते जोरोसे हसती हुइ बहार चली गइ.. ओर दरवाजा बंध कर लीया.. तब कुछ ही देरमे मंजु ओर देवायत साथमे जड गये.. तो दोनो ही हसते हुअे अेक साथ बाथरुममे घुस गये..तो वहाभी मंजुने अेक बार देवायतके साथ खडे खडे चुदवालीया.. ओर दोनो नहाके बहार आगये.. ओर तैयार होने लगे.. मंजु अपनी जींदगीका पुरा मजा बटोर रही थी.. दोनोही रुममे अकेले थे तभी....अब आगे
मंजुला : (मुस्कुराते बाल बनाते) जानु.. अब वक्त जाहीर मत करो.. आप चंदा दीदीको प्रेगनेन्ट करदो.. वो अब बहुतही कामी होचुकी हे.. आपसे मेरी ही तराह मीलना चाहती हे.. लेकीन बहुत ही सरमा रही हे.. वो अब सेक्सके बीना नही रेह सकती देखा नही आपसे चुदवाते क्या क्या बोल रही थी..? उनकी भी अब प्रेगनेन्ट होनेकी इच्छा हे..
देवायत : (सामने देखते) मंजु.. तुम जो केह रही हो इनका भी कुछ रीजन होगा.. क्या मुजे बता सकती हो..?
मंजुला : (आकर देवायतकी बाहोमे समाते) हां जानु.. हमारी चंदा दीदीकी लडकी हमारी भावुका बेटा जो भावेश हे.. उनकी बीवी हे.. अब भावेश भी तीन सालका हो गया हे.. बस.. इनके आगे मे आपको कुछ बता नही सकती..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मंजु.. इन लोगोके साथ अब लखन लता पुनम सबलोग चले जायेगे.. तो सीर्फ हम दोनो ही घरपे रेह जायेगे.. कुछ दिन तो अच्छा भी नही लगेगा..
मंजुला : (देवायतके चहेरेको देखते धीरेसे) अरे हां देवु.. सुनो.. जब मम्मी आंटी लोग हरद्वार चले जाये.. तब लखन लताके साथ सृती भी चली जायेगी.. ओर पुनो भी अपने घरपे चली जायेगी.. तब अेक दिन आप भावुसे मीललो.. यही हमारे घरपे.. तब सीर्फ हम दोनो ही यहा होगी.. पुरा दिन ओर रात सीर्फ हम तीनो ही अकेले होगे..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. समज गया.. कल मीली थी अकेलेमे.. केह रहीथी जबतक हम दोनो मील नही लेते तबतक मे भानुके घरपे नही जाउगी.. तो अब उसे मीलना जरुरी हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. आपके प्यारमे वो भी पागल हे.. पता नही भानु भाइके साथ कैसे सादी हो गइ.. मुजे पहेले पता होता तो मे ही उनकी सादी आपके साथ करवा देती.. जानु.. आपसे अेक बात ओर कहेनी थी.. अब हमने लखनको वो जडी बुटी देदी हे.. हो सकेतो अब आप लताको भी अपना लीजीये.. क्युकी अब इस घरमे बहुत कुछ होनेवाला हे.. जो आप सोच भी नही सकते..
देवायत : (सर चुमते) हंम.. वोतो कल रात तुमने मुजे सब कुछ बताकर आगाह कर दीया था.. तब भी मुजे पता चल गया था.. की यहा बहुत कुछ होने वाला हे.. ठीक हे.. लखन भी मेरा ही भाइ हे.. तो उनका काहेका दुख..? अैसा होना भी कुछ तो रीजन होगा..? तुम मुजे अैसे ही सब नही कहेती..
मंजुला : (आंख गीली करते) जानु.. बस.. अब आगे जाकर अैसे ही मेरी तराह आपको हमारी पुनम सम्हाल लेगी.. वोही आपको सब बाते बताती रहेगी.. इसीलीये तो मेने उसे मेरी सभी शक्तिया देदी हे.. वोही इस हवेलीकी महारानी होगी.. ओर इस हवेलीका सभी कारोबार वोही चलायेगी..
देवायत : (नम आंखोसे) मंजु.. मत कर अैसी बाते.. मुजे डर लग रहा हे.. अैसा लगता हे तुम हम सबको छोडके जाने वाली हो..
मंजुला : (आंसु पोछते) भाइ.. अैसे कमजोर ना हो.. मे कहा आपको छोडकर जा रही हु.. मुजे वापस भी तो आना हे.. मेरी भावुकी कोखसे.. आपकी ही बेटी बनकर वापस आउगी.. हंम..? कीतना अजीब हे.. अेक पतीकी बेटी बनकर आउगी.. ओर अपने ही बेटेकी बीवी होजाउगी.. भाइ.. हमारा विजय ही मेरा पती होगा..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब अेक ओर भाइ बहेनकी सादी.. चल ठीक हे.. वैसे भी मेरी चहीती रानीओमे तुम ओर मेरी पुनो.. तुम दोनो ही तो हो.. पुनोके बीना अब अच्छा नही लगेगा..
मंजुला : (मुस्कुराते) भाइ.. फीकर मत करो.. वो बहुत ही जल्द इस हवेलीमे वापस आजायेगी.. सायद आपकी बेटीको जन्म भी यही रहेकर देगी.. भाइ.. वो जो भी कुछ नीर्णय करे उसे करने देना.. उनके काममे देखना कोइ लखल ना डाले..
देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. तेरी सब बाते सकज गया.. फीकर मत कर तुम जो केह रही हो अैसा ही होगा.. चल अब मुजे सुधीरके घर जाना हे.. कल उनका फोन आया था.. उनको मुजसे कुछ जरुरी काम हे.. ओर कल सायद मुजे धिरेनके मकानके लीये भी जाना होगा.. क्युकी दो तीन दिनके बाद तो तेरी मम्मी लोग भी हरद्वार जाने वाले हे..
मंजुला : (हसते अलग होते) हां भाइ.. उनके मकानका सौदा करके ही आना.. अब वक्त बहुतही जल्द बदल रहा हे.. जाइअे.. जाकर मील लीजीये सुधीर भाइको.. सायद आप सुधीर भाइको आखरी बाल मील रहे हे.. हें..हें..हें.. बाकी सब वोही आपको बतायेगे.. हें..हें..हें..
देवायत : (आस्चर्यसे हसते) आखरी बार मतलब..? मंजु.. बताना.. तुजेतो सब पता होगा.. हें..हें..हें..
मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे.. आपतो मेरे पीछेही पड गये.. मे क्यु बताउ..? वोही आपको मीलेगे तब बतायेगे.. जाइअे.. वहा आपकी वो दोनो बीवीया भी होगी.. उसेभी अच्छी तराह मील लेना.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते बहार चलते) ओर गोड.. क्या मुजे सारा दिन यही काम करना हे..? हें..हें..हें..
मंजुला : (साथ चलते हसते) देखा..? इसीलीये तो हमने लखनको जडीबुटी पीलाइ हे.. ताकी आपका भी कुछ बोज हल्का होजाये.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) तुम सबकी सब कमीनी हो.. पता नही मुजसे कीस बातका बदला ले रही हो.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते धीरेसे) क्यु..? भाइसे जलन हो रही हे..? अगर आप उनकी बीवीको ठोक सकते हो.. तो वोभी तो यही करेगा.. हें..हें..हें.. देखलो.. कब तक अपनी बीवीओको बचाते हो.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते धीरेसे) अच्छा.. अब समजा.. इसीलीये तुमने घरकी सभी ओरतोको सेक्स करनेकी आजादी दीलवाइ हे.. ठीक हे मेभी तुम सबको देख लुगा.. हें..हें..हें..
मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. कोइ क्षोभ मत करना.. सीर्फ सबकी अयासीके लीये छुट नही ली.. भाइ.. आपतो जानते हे.. हमारे लोकमे सीर्फ आपसी रीस्तोमे ही प्यार ओर सादीया करते हे.. तो फीर हमारे विजय ओर हमारा पोता कहा सादीया करेगा..? उनके लीये भी कोइ रास्ता बनाना होगा.. तभी तो उनकी सभी बहेने इस दुनीयामे आ पायेगी..
देवायत : ((मुस्कुराते) अरे हां.. उनका तो सोला रानीके अलावा भी बहुत कुछ रीलेशन था.. ओर सबने उनको दुसरे जन्ममे मीलनेकी कामना कीहे.. तो सबका वापस आना लाजमी हे.. मंजु.. मे तेरी सारी बात समज गया.. मुजे हमारे खानदानके आपसी रीस्तोसे अब कोइ अेतराज नही हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां भाइ.. सीर्फ अभी नही.. भुतकालमे भी अैसा बहुत कुछ हुआ हे.. क्या मेने आपको हमारे बापुकी स्टोरी नही सुनाइ..? आप ओर लखन तो सीर्फ इस घरकी ओरतोको सम्हालोगे.. लेकीन हमारे बापुने तो बहुत कुछ कीया हे.. उनका अपनी मां के साथ भी रीलेशन था.. भाइ.. अगर तुम दोनो भाइ मीलकर प्यार बाटोगे.. तो हम सबके दिन अब सुहाने होगे..
देवायत : (मुस्कुराते सर चुमते) पता हे मुजे सब.. मेतो बस अैसे ही मजाक कर रहा था.. मंजु.. मेरी बहेन.. तुजे पाकर मे तो धन्य हो गया..
मंजुला : (बाहोमे समाते) भाइ.. क्या बात हे.. आज बहेन की याद आगइ.. हें..हें..हें..

दोनोही धीरे धीरे हस हसके बाते करते मस्ती मजाक करते बहार आगये.. तबतक लखन भी तैयार होकर नीचे आचुका था.. तब सृती चंदा ओर पुनम लखनकी मस्तीया करते उनकी टांग खीचाइ कर रही थी.. तो लखन भी मुह फुलाके बैठा था.. तो सब लोग इनको देखकर हस रहे थे.. जैसेही मंजु ओर देवायत डाइनींगपे आकर बैठ गये तब लखन खडा होकर देवायतके पास आकर बैठ गया..