Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 77 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो इधर सृती अपनी कार फास्ट चलाते अपनी क्लीनीककी ओर जा रहीथी.. उसे अब अपने कीयेपे बहुत पछतावा हो रहाथा.. वो सोचने लगी.. जब लखन उनको लेने आया तब उसे लखनके साथ की हुइ मस्ती याद आने लगी.. उसे पुनमकी कही अ‍ेक अ‍ेक बात याद आ रही थी.. पुनमने उसे आगाह भी कीया था.. की लखन लेने आये तो चली जाना.. वरना मस्तीया करते लेनेके देने ना पड जाये..

ओर वो चालु कारसे अपने फोनपे पुनमको फोन करने लगी.. उनका ध्यान फोनमे होनेकी वजहसे नही रहा.. ओर अचानक अ‍ेक ओरत अपने बच्चेको लेकर थोडी बीचमे आगइ.. जैसे ही सृतीका ध्यान उधर गया वो जोरोसे चीला उठी ओर अपना स्टेरींग जटसे घुमाते रोडसे उतर गइ.. वो अपनी कारको ब्रेक मारते कंट्रोल करती उनसे पहेले ही उनकी कार अ‍ेक साइडमे बंध पडे ट्रकसे टकरा गइ..

ओर ध..डा..म..करते जोरसे आवाज आइ.. तो लोग कारकी ओर दोडने लगे.. कारका अगला सीसा टुट गया था.. ओर लोगोने बडी मुस्कीलसे सृतीको बहार नीकाला.. सृती अ‍ेक दम गभराते कांप रही थी.. तभी उसे अपने सरपे कुछ गरम महेसुस हुआ.. वो सरपे हाथ सगाकर देखने लगी.. तो सरसे खुन नीकल रहा था.. तभी उसने दुसरा हाथ उठाया तो हाथमे बहुत दर्द करने लगा..

कीसीने पुलीसको फोन कीया तो कीसीने अ‍ेम्युलन्सको फोन करदीया.. तभी अ‍ेक आदमी कारसे उनका पर्स ओर मोबाइल लेकर सृतीके पास आने लगा.. ओर उसे कुछ याद आया तो मोबाइलपे लास्ट कीये हुअ‍े कोलको लगा दीया.. तो वो कोइ पुनमका था.. ओर उसने पुनमसे बात करली.. तो पुनमने तुरंत लखनको कोल करदीया.. लखन पुनमका फोन देखते ही मुस्कुराते रुमसे बहार नीकल गया..

उसे लगाकी पुनमने उसे चंदा भाभीकी खबर पुछनेके लीये फोन कीया होगा.. तो कुछ प्यारकी बाते भी होजायेगी.. उसने रुमसे बहार नीकलते ही फोन उठालीया.. तो पुनमने लखनको सृतीके अ‍ेक्सीडन्टके बारेमे सब जानकारीया देदी.. ओर उसे फौरन वहा जानेको कहा.. लखन सुनते ही थोडा गभरा गया.. फीर बीना कुछ सोचे समजे कीसीको कहे बगैर अपनी बाइक लेकर वहासे नीकल गया..

लखन सृतीकी क्लीनीककी ओर जाने लगा.. बीच रास्ते उसे अ‍ेक जगाहपे लोगोकी भीड दीख गइ.. ओर लखन वही पहोंच गया.. तो लोग सृतीको अ‍ेम्ब्युलन्समे सीफ्ट कर रहे थे.. सृती दर्दके मारे अ‍ेक पैर पकडकर चीला रही थी.. तो लखन फौरन सृतीके पास आया ओर उसे देखने लगा.. सृतीकी हालत देखते ही लखनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. तभी सृतीने लखनको आंसु बहाते देखलीया.. उनको लखनको देखकर थोडी तसली मीली..

सृती : (गभराते रोते) लखन भैया..

लेडीस : (बच्चेके साथ अ‍ेम्बुलन्समे बेठते) मेडम गभराइअ‍े नही मे आपके साथ चलती हु..

लखन : जोरोसे दीदी.. मे भी पीछे पीछे आ रहा हु.. गभराना नही..

फीर वोही लेडीस अपने बच्चेको लेकर सृतीके साथ बैठ गइ.. ओर लखन सृतीको उनके पीछे आ रहा हे कहेते अ‍ेम्ब्युलंन्सके पीछे चलने लगा.. अ‍ेम्ब्युलंन्स सीधी सरकारी होस्पीटलपे पहोंच गइ.. वहा इमरजन्सीमे सृतीकी ट्रीटमेन्ट सुरु होगइ.. उनके सरपे मलम पटी लगादी.. फीर सृतीको ओर जगाहपे भी चेक करलीया.. फीर सृतीको वहासे ओर्थोपेडीक वोर्डमे सीफ्ट करदीया..

तबतक वो लेडीस अपने बच्चेको लेकर सृती लखनके साथ साथ घुमती रही.. वो बार बार लखनकी ओर देखते गभरा रही थी.. लखनने वहा भी अ‍ेक स्पेसीयल रुम रख लीया.. तो वहाके डोक्टर ओर नर्स इनको पैसे वाले समजकर अच्छेसे ट्रीटमेन्ट देने लगे.. फीर वहा सृतीके हाथ ओर पैरका अ‍ेक्सरे नीकाला तब पता चला सृतीके पैरमे ओर हाथमे माइनोर फेक्चर हुआ हे..

हाथ मे तो बहुत नही था.. लेकीन पैरमे थोडा ज्यादा फेक्चर हुआ था.. सृतीके पैरमे प्लास्टर लगा दीया.. ओर हाथमे भी कोनीकी जगाह थोडा प्लास्टर लगा दीया.. जो सृतीका हाथ पटी बांधर गलेमे लटका दीया.. फीर सृतीको छे घंटेके लीये वहा रुकनेको कहा.. तभी वो लेडीस अपने बच्चेको लेकर आइ.. ओर सृतीका धन्यवाद करते उनकी माफी मांगने लगी.. तो दो पोलीस वाले भी वहा आगये..

फीर वो लेडीसने सारा वक्या सुनाया की सृतीने उनके बच्चेकी जान बचाइ हे जो उनकी नजर चुकाके रोडपे चला गया था.. क्युकी गलकी उनके बच्चेकी थी.. जो उसे सम्हालनेके चकरमे वोभी बीच रास्तेपे आगइ थी.. ओर सृतीने उनकी जान बचाइ.. तो सृतीने उसे माफ करदीया.. पुलीस वाले भी सृतीका जवाब लीखकर वहासे चले गये.. फीर सृतीने वो लेडीसको भी जानेके लीये केह दीया.. अब रुममे सीर्फ सृती ओर लखन ही थे.. तभी लखनके फोनकी रींग बजने लगी..
 
लखन : (फोन उठाते) हां दीदी.. हम होस्पीटल मे ही हे.. दीदीको हाथ ओर पैरमे थोडा फैक्चर हो गया हे.. ओर अभी सब कंपलीट ट्रीटमेन्ट होगइ हे..

पुनम : (फोनपे) भाइ.. मेने मंजुदीदीसे बात करली हे.. क्या मेरा वहा आना जरुरी हे..? कहा हे वो..? क्या वो बात कर सकती हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. कर सकती हे.. मे देता हु दीदी को..

कहेते लखनने सृतीको फोन देदीया.. ओर सृती दुसरे हापसे फोनको लेकर पुनमसे बात करने लगी..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. कैसी हे आपकी तबीयत..? कहा थानां कल सम्हालके रहेना..

सृती : (धीरेसे मुस्कुराते) क्या दीदी.. आप ओर आपकी बाते.. अब क्या बताउ..? मुजे क्या पता आप इस हादसेकी बात कर रहीथी.. अगर मुजमे इतनी समज होती तो ये सब थोडीनां होता..? कहीये कैसी हे आप..? बस.. चंदादीदीको होस्पीटलपे देखने गइ थी.. ओर वापस आ रहीथी.. आपको फोन लगानेमे ध्यान नही रहा ओर ये सब हो गया.. बाकी आपको तो सब पता हे वहा क्या हुआ..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अब जो होना था होगया.. चला गया तुफान.. अब सीधे हमारे घरपे ही चली जाना.. (धीरेसे) दीदी.. क्या लखन भैयासे कोइ बात हुइ..?

सृती : (लखनके सामने देखते धीरेसे) नही.. अभी कहा.. वोतो आते ही मेरी सेवामे दोडधाम करने लगे.. कभी इधर कभी उधर.. देखो अभी भी मेरे सामने नही देखते.. दुर खडे होते भी कैसे घुर रहे हे मुजे.. जैसे अभी कच्ची चबा जायेगे मुजे.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आप भीनां.. अभी भी अपनी हकरतोसे बाज नही आओगी.. अरे यही तो मौका हे.. जरा प्यारसे बात कीजीये उनसे.. हो सकता हे आपसे बात करने लगे.. क्या वहा सबको पता हेकी नही..?

सृती : (धीरेसे) नही.. सायद मंजु दीदीको सब पता चल गया होगा.. लगता हे अब हमारा भाइ फ्रि होगया हे.. तो अब बात कर लेगा.. दीदी.. अच्छा हुआ लखन भैया आगये.. वरना मे अकेली क्या करती..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. टेन्शन मत लीजीये मेने मंजुदीसे बात करली हे.. अब भुल जाइअ‍े पीछला सबकुछ.. अब तो वहा हमारा भाइ हे.. जो अब हम दोनोके सैया होने वाले हे.. कहा हे वो..? फोन दीजीये जरा..

सृती : (मुस्कुराते) लीजीये.. दीदी बात करना चाहती हे आपसे.. बात कीजीये..

लखन : (फोन लेते थोडा दुर जाते धीरेसे) हां दीदी.. कहीये..

पुनम : भैया.. मेने मंजु दीदीको इस अ‍ेक्सीडन्टके बारेमे बता दीया हे..? क्या आपने फोन कीया..?

लखन : नही दीदी.. फोन करनेका टाइम ही नही मीला.. आपका फोन आते ही मे सीधा बहारसे ही चला आया.. मे अभी भाभीमां से बात करलेता हु.. क्या आप आ रही हो इधर..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. सबलोग वहा हे.. तो यहा भी कोइ नही हे.. विजय मेरे पास छोडकर गये हे.. भाइ.. सुनो.. मुजे आपसे अकेलेमे बात करजी हे.. तो बादमे मुजे फोन करना.. ओके.. चलो रखती हु..

लखन : (जटसे) दीदी.. सुनो.. सुनो.. सुनो.. मे अकेला ही हु.. बहार चला जाता हु.. कहीयेनां क्या बात करनी हे..? कुछ खास बात हे क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. खास बात हे.. लेकीन अभी नही.. जब आप फ्रि होकर घर चले जाओ तब फोन करना.. मे आपको सब कुछ बता दुगी.. ओके..? बाय..

फीर पुनमका फोन कट होते ही लखनने देवायतसे फोनपे बात करके सब जानकारी देदी.. तो देवायतने अभी लखनको सृतीके पास ही रहेनेकी ओर सृतीको अपने घरपे लेजानेकी बात कही.. लेकीन फीर भी मंजुको सब पता चल चुका था.. फीर भी वो खामोस रही.. नीर्मलाने ज्यादा समय लखनको नही देखा तो लखनके बारेमे पुछ ही लीया.. तो मंजुने लखन कामसे बहार गया हे कहेकर बातको टालदी..

फीर दोपहोरके खानेका देवायतने वही इन्तजाम करलीया.. तो लखन भी वहीसे खानेका इन्तजाम करके सृतीके पास आगया.. सृती अपने फोनसे क्लीनीकपे बात करते सब अ‍ेपोटमेन्ट अ‍ेक हप्तेके लीये केन्शल कर देती हे.. सृतीके दायने पैर ओर बायने हाथपे प्लास्टर लगा हुआ था.. तो उनको खानेमे कोइ दिकत होने वाली नही थी.. ओर लखनने दोनोका खाना नीकाला.. ओर सृतीको देदीया.. तब..

सृती : (सामने देखते) भाइ.. देखोनां.. हाथमे प्लास्टर लगा हुआ हे.. तो मे कैसे खाउगी..?

लखन : (सामने देखते) ज्यादा नाटक मत करो.. प्लास्टर दाये हाथमे नही बाये हाथमे लगा हे.. तो चुपचाप नखरे कीये बगैर अपने हाथसे खालो..

सृती : (थोडी रुहासी आवाजमे) यार.. इस हाथमे भी थोडा दर्द कर रहा हे.. तो अपने हाथोसे खीलाओनां.. मेरे अच्छे भैया.. प्ली..ज..

लखन : (सामने देखते खाना खीलाते) नौटंकी बाज..

सृती : (हसते) हें..हें..हें..

सामने देकर मुस्कुराते लखन सृतीको अपने हाथसे खीलाने लगा.. तो सृती प्यार भरी नजरोसे सीर्फ लखनको ही देखती रही.. जब सृतीने खाना खालीया तो लखनने उनका मुह साफ करदीया.. फीर वो भी खाने लगा.. तो सृतीने अ‍ेक नीवाला उठा लीया.. ओ लखनको खीलाने उनके मुहके पास रखदीया.. तो लखन सारा माजरा समज गया.. की सृती उनके साथ दुसरे हाथमे दर्दका नाटक कर रही थी.. तभी..
 
लखन : (थोडे गुस्सेमे) ये सब क्या हे..? हाथमे तो दर्द हो रहाथानां..? तो फीर..?

सृती : (मुस्कुराते रीक्वेस्ट करते) लखन भैया.. प्ली..ज.. खालोनां मेरे हाथसे.. मे तो मजाक कर रही थी..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. अ‍ैसा मजाक मत कीया करो.. मुजे अच्छा नही लगता.. अ‍ेक तो हाथमे दर्द हे.. ओर..

सृती : (आंख गीली करते) ओह.. सोरी.. सोरी.. सोरी.. अब नही करुगी.. लेकीन खालो तो सही..

लखन : (मुस्कुराते सृतीका नीवाला खाते धीरेसे) भाभीमां सही केह रही थी.. जीतो चाहता हे अ‍ेक खीचके कानके नीचे लगाउ.. सारा मजाक भुल जाओगी..

सृती : (मुस्कुराते अपना चहेरा आगे करते) हंम.. तो फीर खीचके अ‍ेक मारलो.. हम अभी होस्पीटलमे ही हे.. मे गालपे भी मलम पटी लगवा लुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) आप नही सुधरोगी.. अब आप मेरी भाभी नही बडी दीदी हो.. तो अब अ‍ैसा मजाक मत कीया करो.. अब देख क्या रही हो..? खीलाओ मुजे.. क्या आप सुरुसे ही अ‍ैसी हे..?

सृती : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) नही.. जब आप मेरे सामने होतो.. मुजे आपके साथ मस्तीया करनेमे बहुत मजा आता हे.. पता हे मे आपकी कौन लगती हु..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. पुनो दीदीने सब कुछ बताया मुजे.. आप भी मेरी बहेन होनां..?

सृती : (मुस्कुराते खाना खीलाते) हां.. अब मुजे दीदी ही कहेना.. अब आपकी भाभी आपकी भुमी आंटी हे.. समजे..? मे तो अब आपको भाइ ही कहुगी..

लखन : (मुस्कुराते) फीर देखना.. अगर बहेन होगइ तो फीर फस जाओगी.. आपको तो हमारे खानदानके बारेमे.. आपको सब पता हेनां..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. पता हे.. कोइ बात नही.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. फसा लीजीये मुजे..

लखन : (मुस्कुराते) फसनेके लीये तैयार हो..? फसनेका मतलब भी जानती होनां..?

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां.. बहुत अच्छी तराह.. जैसे पुनो दीदीको फसालीया हे.. आपको पता हे..? आपकी भाभीमां.. तुम दोनोकी सादी करवाना चाहती हे..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. अभी अभी पुनो दीदीने बताया मुजे.. दीदी.. आप भाइकी अमानत थी.. तो अ‍ेक डरसा लग रहा था.. तभी तो उस दिन आपको मना कीया था..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. अब तो नही हुनां..? अब मे बहेन हु आपकी.. मेने देवुके साथ पती पत्नीके सारे रीस्ते खतम करलीये हे.. क्या मां ओर बेटी.. दोनो अ‍ेक ही आदमीसे रीलेशन रख सकती हे..?

लखन : (सामने देखते धीरेसे) हां.. क्यु नही..? भाभीमां.. ओर नीर्मला आटी.. उनकी अच्छी मीसाल हे.. क्या वो दोनो मां बेटी भाइकी बीवीया नही हे..?

सृती : (मुस्कुराते) होगी.. लेकीन मे अ‍ैसा रीलेशन रखना नही चाहती.. मुजे अब मेरे इस भाइसे मतलब हे.. रीलेशन रखुगी तो मेरे इस क्युट भाइसे वरना सारी जींदगी अ‍ैसे अकेले काटलुगी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेरे साथ रीलेशन रखना हेतो अ‍ेक बार फीर सोचलो.. क्युकी अब मे आपकी नाराजगी ओर नही जेल सकता..? कोइ मुजसे रुठता हे तो बहुत दुख होता हे..

सृती : (मुस्कुराते हाथ थामते) सोरी भाइ.. मेने सबकुछ सोच समजके फैसला लीया हे.. अब अ‍ैसा कभी नही होगा.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बहेने रेडी हे.. अपनालो हमे.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. लेकीन इस बार अ‍ैसा फसाना.. की मे कही छुट ना पाउ.. प्यार होगया हे मुजे आपसे.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (मुस्कुराते) इतना प्यार करती हो मुजसे..?

सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. कोइ सक..? मेरी जानसे भी ज्यादा.. प्लीज.. कबुल करलो मेरा प्यार.. आइ प्रोमीस.. मे जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी.. फीर चाहे कुछ भी होजाये..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. मे इस बारेमे पुनो दीदी ओर भाभीमासे पहेले बात करलेता हु.. अगर दोनो मुजे परमीशन देगी.. तो फीर मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. पुछलेना.. मे आपके जवाबका इन्तजार कर लुगी..

कहेते सृती खुस होगइ.. ओर लखनको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. क्युकी सृतीको खुसीतो इस बातकी थी.. की अब लखन उनके साथ बोलने लगा था.. ओर उसे अपनानेको भी तैयार था.. तो दुसरी ओर पुनम ओर मंजु भी इन दोनोके उपर नजर जमाये हुइ थी.. तो सृती लखनका प्यार देखकर मंजु भी मुस्कुराने लगी.. फीर अ‍ैसे ही साम होगइ.. सृतीको पंद्नह दिन बीस्तरसे ना उठनेकी ओर अ‍ेक हप्तेके बाद दीखानेकी सुचना देकर होस्पीटलसे छुटी देदी गइ.. तो इधर लखनने टेक्सी करली.. ओर सृतीको गोदमे उठालीया..



 
लखन : (गोदमे उठाते) ओ बापरे.. दीदी आप कीतनी भारी भरखम हो.. मेरी तो कमर टुट जायेगी..

सृती : (हसते गलेमे हाथ डालते) तो क्या हुआ..? आप मेरी सेवा करना.. मे तुम्हारी कमरकी मालीस करते तुम्हारी सेवा कर दुगी.. आखीर आप मेरे बोयफ्रेन्ड जो हो गये हो.. तो गर्लफ्रेन्ड इतना तो कर सकती हे..

लखन : (मुस्कुराते) देखना बोयफ्रेन्ड गर्लफ्रेन्डके चकरमे कुछ गलत ना होजाये..

सृती : (गाल चुमते) होजाने दो.. मे इसके लीये रेडी हु..

लखन : (सरमाते धीरेसे टेक्सीमे बीठाते) दीदी.. आपतो बडी फास्ट जा रही हो.. पहेले घरपे तो चलो.. कहा छोडदु..? आपके घरपे या हमारे घरपे.. हें..हें..हें..

सृती : (जुठा गुस्सा करते) ताने मार रहे हो..? मेरे बोयफ्रेन्डके घरपे छोडदो.. अब वही मेरा घर हे..

लखन : (साथ बैठते) बडी जल्दी अकल आगइ मेरी गर्लफ्रेन्डको.. चलो..

फीर लखन भी अपनी बाइक वही छोडकर सृतीके साथ टेक्सीमे बैठ जाता हे.. ओर अपने घरपे आजाता हे.. फीर टेक्सीका कीराया देकर वापस सृतीको गोदमे उठाकर सीधा उपरकी मंजीलपे उनके रुममे छोड देता हे.. ओर फोन करके देवायतको बता देता हे.. की वो सृतीको लेकर घरपे आगया हे.. तबतक चंदाका भी सभी रीपोर्ट आगया था.. तो अ‍ेम आइ आर मे भी कोइ खास तकलीफ नही नीकली..

ओर तारण ये नीकलाकी चंदाको गहेरे सदमेकी वजहसे ये सब हुआ हे.. फीर डोक्टरने उनको दिमागको ज्यादा ट्रेस ना देनेकी सुचना देकर होस्पीटलसे डीस्चार्ज करदीया.. ओर अ‍ेक घंटेके बाद देवायत भी सबको लेकर लखनके घरपे आगया.. ओर सबलोग अंदर आजाते हे.. रजीया राधीका ओर नीलम भी सबको देखकर चंदाकी खबर पुछते हे..

तो मंजु नीर्मला ओर भुमीका राधीकाको देखते ही उनको गले लगाते हे.. राधीका भी सबके पैर छुकर सरमाते हसती रहेती हे.. फीर सबलोग होलमे सोफेपे बैठ जाते हे.. तो नीर्मला भुमीका मंजु ओर देवायत आपसमे बाते करने लगे.. रजीया राधीका ओर नीलम तीनो मीलकर खाना बनानेकी तैयारीया करने लगी.. फीर कुछ देरके बाद लखन ओर देवायत अपनी कार लेकर बहार चले गये..

लखनने होस्पीटलसे अपनी बाइक लेली.. फीर दोनो सृतीकी कारका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ था वहा चले गये.. तो देवायतने फोन करके कीसी मीकेनीकको बुला लीया.. फीर मीकेनीकल दुसरी कारके पीछे बांधकर अपने गेरेजपे लेगया.. तो लखन देवायत वापस घरपे आगये.. घर आते ही कल देवायतने लखनको दुसरी कार लेनेको कहा.. दोनो चले गये तब इसी बीच रजीयाने सबको राधीकाकी मम्मीके बारेमे बताया..

तो सुनते ही मंजु नीर्मला ओर भुमीका उनका हाल चाल पुछने रुममे चले गये.. ओर उनके पास बैठे ही थे.. तब राधीकाकी मम्मी नीर्मला ओर भुमीकाको देखकर चोंक गइ.. ओर गभराते उनकी ओर देखने लगी.. नीर्मला ओर भुमीकाने भी उनकी ओर देखते गौर कीया.. तो वो दोनो भी राधीकाकी मम्मीको देखकर पहेचान गइ.. तो मंजु सब कुछ समज गइ.. नीर्मला ओर भुमीका उनको गले लग गइ..

ओर राधीकाकी मम्मी खुसीके मारे आंसु बहा रही थी.. ओर तीनो बाते करने लगी.. तब बातो ही बातोमे राधीकाकी मम्मी दोनोको उनके अतीतके बारेमे राधीकाको ना कहेनेकी मनते करने लगी.. तो तीनोने भी कीसीको कुछ नही बतानेका वादा कीया.. फीर तीनो हस हसके अपने अतीतकी बाते करती रही.. मंजुने अपनी शक्तिओके माध्यमसे राधीकाके अतीतके बारेमे सबकुछ जानलीया..

तभी वहा राधीका भी अपना हाथ पोछते आगइ.. तो नीर्मलाने उनसे अपनी बेटी मंजुका परीचय करवाया.. मंजुने राधीकाकी मम्मीके पैर छुलीये.. तो राधीकाकी मम्मीने मंजुको देखकर आंसु बहाते हाथ जोड लीये.. जीसे देखकर राधीकाकी आंखोमे खुसीके आंसु आगये.. सबलोग राधीकाकी मम्मीसे बाते कर रहे थे.. तभी मंजु सबकी नजर बचाते धीरेसे उपरकी मंजीलपे चली गइ..

ओर सीधे सृतीके कमरेमे जाकर दरवाजा बंध कर लेती हे.. तो सृती लेटे आराम कर रही थी.. मंजुको देखते ही बेडपे बैठ गइ.. ओर मंजु सृतीके पास आकर बैठ जाती हे.. तो सृती मंजुको देखते ही आंसु बहाने लगी.. ओर हाथ जोडकर मंजुसे माफी मांगने लगी.. मंजुने भी सृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृती फुटफुटके रोने लगी.. तो मंजुने उनको जटसे सांत कीया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २४०

ओर सीधे सृतीके कमरेमे जाकर दरवाजा बंध कर लेती हे.. तो सृती लेटे आराम कर रही थी.. मंजुको देखते ही बेडपे बैठ गइ.. ओर मंजु सृतीके पास आकर बैठ जाती हे.. तो सृती मंजुको देखते ही आंसु बहाने लगी.. ओर हाथ जोडकर मंजुसे माफी मांगने लगी.. मंजुने भी सृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृती फुटफुटके रोने लगी.. तो मंजुने उनको जटसे सांत कीया.... अब आगे

सृती : (धीरेसे रोते) दीदी.. बस अ‍ेक बार माफ करदो मुजे.. मे आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही करुगी..

मंजुला : (सृतीके सरको सहेलाते) बस.. बस.. अब चुप होजा.. चल जा.. माफ करदीया तुजे.. कमीनी.. देख तुमने क्या हालत करली अपनी.. इतना गुस्सा करना भी ठीक नही हे..

सृती : (अ‍ेक हाथसे आंसु पोछते) दीदी.. मे नादान हु.. पुनो दीदी समय समयपे मुजे आगाह करती हे.. फीर भी मे आप लोगोकी बात नही समज पाती.. तो क्या करु..? ओर अप भी तो मुजे कुछ नही बताती..

मंजुला : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) हंम.. सुन.. आज तुजे सब कुछ साफ साफ बताती हु.. सृती.. तेरी ओर पुनोकी मंजील हमारा देवु नही हे.. मेरा बेटा हे.. मेरा लखन.. जब तुजे सब सही लगे.. तब तु लखनके साथ जाकर कीसी मंदीरमे सादी कर लेना.. मे लखनसे बात करलुगी.. देवु सीर्फ मेरा हे.. मेरी मम्मीका हे.. तेरी मम्मीका हे..

सृती : (सामने देखते) तो फीर उसने हम दोनोसे सादी क्युकी..? हम दोनोको प्रेगनेन्ट तक करदीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. मजबुरी थी.. कुछ अंस पानेके लीये.. उसने पुनमसे सादी करली पडी.. तुमतो जानती हेना.. मुजे लताको ओर पुनोको ओर कोइ प्रेगनेन्ट नही कर सकता..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) दीदी आप तीनोकी बात तो समजमे आती हेकी आप तीनोको सीर्फ देवु ही प्रेगनेन्ट कर सकता हे.. लेकीन में..? मे तो दुसरे मर्दसे भी मां बन सकती हु.. तो फीर मेरी मांका पती होनेके बाोजुद आपने मेरी सादी देवुसे क्यु करवाइ..? करवा देती लखन भैयासे..?

मंजुला : (अ‍ेक नजरसे सामने देखते) क्यु..? तु भी देवुसे प्यार नही करती थी..? ओर आंटी भीतो वही चाहती थी.. की मेरी बेटीकी सादी देवुसे होजाये.. तो हमने क्या गलत कीया..? अबतो तुम दोनोके उदरमे उनका अंस पल रहा हे.. ओर कुछ बाते हे मे तुजे बता नही सकती.. तुजे दुख होगा..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) मंजुदी.. अब क्या दुख होगा..? इतना कुछ तो होगया.. आप अभी भी मुजसे खुलकर बाते नही करती.. मानाकी पुनोदीसे अंस पानेके लीये उसने सादीकी.. ओर उसे प्रेगनेन्ट करदीया.. तो फीर मुजे प्रेगनेन्ट क्यु कीया..? हम दोनोतो उनको कीतना प्यार करती थी..? ओर वो भी हमे कीतना प्यार करते थे.. तो फीर क्या ये प्यार नही था..? कमसे कम लखन भैयाके साथ धोखातो नही होता.. मे क्या कहुगी लखन भैयाको..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरा बेटा बहुत समजदार हे.. इस बारेमे मे उनसे बात करलुगी.. रही बात देवुसे सादीकी.. तो कुछ बाते थी जो अब तुजे बतानी ही पडेगी.. सृती.. वो प्यारसे ज्यादा अ‍ेक आकर्सण था.. तेरे पीछले जन्मकी कामना थी.. ओर तुम उस राजासे पेगनेन्ट तक होगइ.. ओर मेरे बेटेको धोखा दीया था.. अब वोही आकर्सण मेरे लखनमे हे.. उनसे प्रेगनेन्ट तो तु अनायास ही होगइ हे.. जो अ‍ेक छलावा हे.. इनसे आगे नही बताउगी.. तुजे दुख होगा..

सृती : (आंसु बहाते) क्या..? मेने आपके बेटेको धोखा दीया था..? मेरा ये प्रेगनेन्ट होना अ‍ेक छलावा हे..? दीदी.. ओर कीतने दुख जेलने पडेगे मुजे..? आप अभी भी खुलकर नही केह रही.. आपके कौनसे बेटेको मेने धोखा दीया हे..? मेने तो इस बच्चेको गीराने तक सोचलीया था.. जब उस इन्सानसे रीस्ता ही खतम करलीया हे तो फीर उनके बच्चेका क्या करुगी मे..? लेकीन मेरे लखनको देखकर ये विचार भी त्याग दीया.. वो कीतने अच्छे हे.. दीदी.. मे उसे प्यार करने लगी हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. तुम हर जन्ममे प्यारमे आकर भावनाओमे बहेक जाती हो.. प्यारतो मेरे बेटेको करती हो.. ओर सादीके बाद कीसी ओरकी होजाती हो.. ओर उनसे गलत वादा करलेती हो.. ये सब इन्हीका नतीजा हे.. सुन.. अभी सीर्फ इतना केह सकती हु.. तेरा संसार सीर्फ मेरे बेटे तक सीमीत हे.. तेरे जो भी बच्चे होगे सीर्फ मेरे लखनके होगे.. बस.. इनसे आगेमे तुजे कुछ नही बता सकती..

सृती : (आंसु पोछते) क्यु नही..? दीदी मुजे सबकुछ सच जाना हे.. की मे क्या गलथी करती हु.. दीदी.. अब मे अ‍ैसी गलती दोबारा करना नही चाहती.. मे सीर्फ मेरे लखन भैयाकी अमानत हु.. मेरे लखनकी.. अब मुजे ओर कीसीकी नही होना.. मुजे मेरा भाइ देदो.. अब मेरा देवुसे कोइ वास्ता नही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. देवु तुम दोनोकी मंजील कभी थाही नही.. तुम तो सुरुसे ही मेरी लखनकी बीवीया हो.. जो कभी अ‍ेक जमानेमे उनकी बीवीया हुआ करती थी.. जो आज मेरा बेटा हे.. लखन.. जो उस जमानेमे भी मेरा बेटा था.. मेरा बबलु था.. पुनो भी तो वही हे.. उनकी पीयु.. भुल गइ उस कीताबको..?

सृती : (आस्चर्यसे सामने देखते) दीदी.. तो फीर मे कौन थी..? आप कहेती होना तब मेभी उनकी बीवी थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. वो तुम ही थी.. मेरे बबलुकी पहेली बीवी.. मालीनी.. मेरी सबसे बडी बेटी.. ओर मेरे बबलुकी बहेन.. जो दोनो भाइ बहेन प्यार करते थे.. ओर बादमे मेरी पीयुको छोडके सबकी सब उन राजाकी रानीया होगइ थी.. इसीलीये तुम देवुकी बीवीया हो.. क्या अब भी मेरी बातोपे यकीन नही होता..?

सृती : (आंख गीली करते मंजुको गले लगाते) तो क्या आप भी मेरी मां हो..? तो फीर मुजे पहेले बताया क्यु नही..? क्या मुजे मेरी मांका दर्शन नही करवाओगी..? पुनोदीको तो करवा दीया..

मंजुला : (पीठको सहेलाते) मेरी बच्ची.. कैसे बताती..? तो फीर तुम दोनो देवुसे सादी थोडीना करती..? ओर रही बात दर्शनकी.. तो करवाउगी.. जरुर करवाउगी.. लेकीन इस बातके लीये अभी काफी वक्त हे.. मेरे जानेका समय आयेगा तब मे सबको अपनी पहेचान करवाके जाउगी..
 
सृती : (आंसु बहाते पहेली बार) अब मे आपको कभी दीदी नही कहुगी.. आप मेरी मां हो.. आप जानेकी बात मत करो.. अ‍ेक माने तो धोखा दे दीया हे.. कमसे कम आपतो मत दो.. दिल गभरा जाता हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरी बच्ची.. तुजे कीसीने भी धोखा नही दीया.. ओर मे अभी कहा जा रही हु.. ओर जाना तो सबको हे.. कोइ पहेले तो कोइ बादमे.. हम सबको अ‍ेक बार फीर जन्म लेकर वापस भीतो आना हे.. तुजे मेरे बबलुको पुनोको.. तब हमारे स्वामी जवा होगे.. हम सबको अपनी पुरानी पहेचान करवायेगे.. हम सब वो ही अनुभुती करेगे.. जो कभी उस जमानेमे करते थे.. बस.. अब सीर्फ उनके आनेकी देरी हे..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. तो फीर हमारी मंदाकीनी कहा हे..? क्या आप मुजे बता सकती हो..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. सबके बारेमे मत पुछ कुछ राज राज ही रहेनेदे.. बस.. इतना जानले.. उनका जन्म अभीतक नही हुआ हे.. लेकीन होगा.. उनका तालुक भी तेरी सौतनसे हे.. जो आजकल तेरी खास सहेली हे.. तु समज गइनां..?

सृती : (मुस्कुराते) येस मोम.. मोम.. प्लीज.. मुजे सीर्फ अ‍ेक बार आपके दर्शन करवादो.. मे ओर इन्तजार नही कर सकती.. आजसे मे हमेसा आपको मोम ही कहुगी.. फीर आपको कुछ नही पुछुगी.. अब मुजे यकीन हो गया हे.. की हम सब कौन हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन मत कर दर्शन.. अगर तुम मुजे असली रुपमे देखलोगी तो तु ओर कामी होजायेगी.. ओर तेरी कामाग्नी बढ जायेगी.. फीर तुम मेरे लखनके बगैर नही रेह पायेगी.. सोचले..

सृती : (सरमाते गले मीलते धीरेसे) मोम.. मे मेरे लखनके बगैर रहेना भी नही चाहती.. मेने सब सोच लीया हे.. मे ओर पुनो दीदी.. मतलब.. हम दोनोने डीसाइड करलीया हे.. अब हम हमारे नये पतीको पुर्ण समर्पीत होजायेगी.. ओर मे वादा करती हु.. अब मे इस घरसे कभी नही जाउगी.. अब यही मेरा ससुराल हे.. आइ प्रोमीस.. प्लीज.. करादो दर्शन.. प्ली..ज..

मंजुला : (दरवाजेकी ओर देखते मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर आज रातको तैयार रहेना.. आज हम सब यही रुकने वाले हे.. तो आज मे तेरे साथ सोउगी.. सीर्फ हम दोनोही होगे.. क्युकी अब तु अकेली कैसे रहोगी..?

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. इस बोरेमे मेने लखन भैयासे बात भी करली हे.. वो आपकी ओर पुनो दीदीकी परमीशन चाहते हे.. तो फीर उनको मुजे अपनानेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. मोम.. तो फीर देवु.. आइ मीन.. वो.. आपके पती.. क्युकी आपको तो पता हे मेने लखन भैयासे क्या बातेकी..

मंजुला : (समज गइ) हंम.. हां पता हे.. सुन.. तु देवुकी फीकर मत कर.. मेरी दोनो सौतने साथमे आइ हेनां..? मतलब.. आज तेरी ओर मेरी मम्मी हेनां.. उनको सम्हाल लेगी.. बेचारीकी अपने पतीको मीलनेकी बहुत कम बारी आती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. हमारी दुनीयामे कीतना अजीब हेनां..? कल तक जो मेरा पती था.. आज वो मेरा पीता होगया.. ओर जो मेरा देवर था.. आज वो मेरा भाइ हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) तु फीकर मत कर.. वो बहुत जल्द तेरा पती भी होजायेगा.. ओर देवु तेरा ससुर भी होजायेगा.. हें..हें..हें.. बीटु.. हमारी दुनीया अ‍ैसे ही चलती हे.. यहा तो फीर भी रीस्ते नाते हे.. लेकीन वहा..? हमारी उस दुनीयामे कोइ रीस्ते नाते नही..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. मुजे हमारी उस दुनीयाके बारेमे थोडा बहुत बताओनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) हाये.. सृती क्या बताउ तुजे.. कीतनी हसीन दुनीया हे हमारी.. ना कमानेकी चीन्ता ना खाने पीनेकी चीन्ता.. सबलोग अपनी मस्तीमे जी रहे हे.. तुमने कीताब (ये केसी अनुभुती) मे पडाथानां.. मे उस राजाके साथ तीन दिन सोइ थी.. हमने लगातार तीन दिन ओर रात सेक्स कीया.. ओर सबको अनुभीती करवाइ.. वहाकी हर हेक परीया ओर अप्साको प्रेगनेन्ट करवाया.. होर हमारी उसी महेनत रंग लाइ.. ओर आज वहा हमारी संख्या कीतनी बढ गइ हे.. ओर यहा भी बहुत बदल जायेगा..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या मोम.. आपभीनां.. मुजे तो बहुत सर्म आ रही हे.. यहा भी सब कुछ कीतना जल्दी बदल गया.. ओर हमारे घरमे तो रीस्तो जैसा कुछ बचा ही नही हे..

लखन : (दरवाजा खोलकर अंदर आते) अरे.. भाभीमां.. आप इधर हो..? चलो खाना रेडी हो गया हे.. दीदीका खाना अभी रजु इधर लेकर आ रही हे.. तो इनको खीला देगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) दी..दी..? अच्छा.. तो फीर तुजे सब पता हे..? हें..हें..हें.. क्या सब पुनोने बतायानां..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) हां भाभीमां..

सृती : (सरमाते धीरेसे) मोम.. मुजे बाथरुम जाना हे.. ओर डोक्टरने अभी पैरको नीचे रखनेको मना कीया हे.. तो इनको कहीयेनां मुजे अंदर लेजाये..

मंजुला : (सामने देखते) कीसको..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) इनको.. आपके लाडलेको..

मंजुला : (जोरोसे हसते) क्या..? अभीसे नाम लेना भी बंध कर दीया.. हें..हें..हें.. (लखनकी ओर देखते) बीटु.. जरा इनको बाथरुममे लेजा.. अब इनकी सेवा तुजे ही करनी हे.. ओर वो भी हमेसाके लीये.. हें..हें..हें..

लखन : (सृतीको उठाते अंदरकी ओर लेजाते) ओ बापरे.. कीतनी भारी भरखम हे.. पता नही भुमी आंटीने इनको कोनसी चकीका आटा खीलाया हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) लखन.. अब वो आंटी नही हे तेरी.. तेरी भाभी होगइ हे.. हें..हें..हें.. ओर तेरी वो भाभी नीचे ही हे.. जा जाकर पुछले..

कहातो सृती सरमाते हसने लगी.. ओर अ‍ेक हाथमे प्लास्टर था तो दुसरे हाथसे लखनके सीनेमे मुका मारने लगी.. जीसे देखकर मंजु भी जोरोसे हसने लगी.. फीर लखनने सृतीको बाथरुममे कमोडपे बीठा दीया ओर बहार नीकल गया.. ओर मंजुके पास आकर बैठ गया.. तो मंजु प्यारसे लखनके गालको सहेलाते सामने देखकर मुस्कुराने लगी.. तब लखनने पुछ ही लीया....
 
लखन : (धीरेसे) भाभीमां.. मेने सुना.. ये दीदी आपको मोम.. क्यु केह रही हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) वो कुछ ही दिनमे तुजे भी पता चल जायेगा.. सुन.. क्या तुभी तो मुजे भाभीमां कहेता हे.. तो इनकी जगह मुजे सीर्फ मोम नही केह सकता..? तुजे तो पता हेना मे भी तेरी मां हु..

लखन : (मुस्कुराते) येस.. मोम.. आइ अ‍ेम सोरी.. अबसे मे भी आपको मोम ही कहुगा.. सबकुछ कीतना बदल गया.. कास पहेले पता होता.. तो मे पहेलेसे ही आपको मम्मी कहेकर बुलाता..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुन लखन.. क्या अभी कीसीको सृतीके बारेमे पता हे..? की वो इधर हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही मोम.. भाइने मना कीया था तो अभी कीसीको नही बताया..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. अच्छा कीया.. हम अभी खाना खाकर सबको बता देते हे.. बीटु.. अब जबतक सृती ठीकसे चल नही पाती.. इनका ख्याल तुजे ही रखना पडेगा.. क्युकी रजीया ओर राधीकातो इसे उठा नही सकते..

लखन : (मुस्कुराते) हां मोम.. तभी तो इनको यही मेरे कमरेके सामने रखा हे.. रजु इनके साथ सोजायेगी.. ओर जरुरत पडनेपे मुजे बुला लेगी..

मंजुला : (धीरेसे) बीटु.. आज तो मे हु.. तो रजुको यहा सोनेकी जरुरत नही हे.. कलसे सुला देना.. सुन.. अब सृती ओर पुनोका खयाल तुजे ही रखना हे.. वो भी हमेसा हमेसाके लीये.. अगर रजुकी जगाह तुम भी यहा रहोगे तो भी कोइ दिकत नही.. तु समज गयानां..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) जी मोम.. मुजे आपसे इसी बारेमे बात करनी थी..

मंजुला : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) पता हे मुजे.. तुजे पुरी परमीशन हे.. अपनाले दोनोको.. क्या यही बात करनीथीनां..?

लखन : (सरमात मुस्कुराते धीरेसे) येस मोम.. आपको ओर पुनो दीदीको तो सब पता चल जाता हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुन बेटा.. बहुत जल्द तेरी पुनोदीकी सादी भी तुमसे करवा दुगी..

तभी सृतीने आवाज लगाइ तो लखन सृतीको गोदमे लेकर बेडपे सुला देता हे.. सृती सीर्फ लखनको ही देख रही थी.. फीर मंजु ओर लखन नीचे चले गये.. ओर सब लोग डाइनींग टेबलपे बैठ गये.. तबतक रजीया ओर राधीकाने अपनी मम्मी ओर चंदाको खाना खीला दीया था.. अब रजीयाने पुरी तराह घरको सम्हाल लीया था.. जीसे देखकर मंजु नीर्मला ओर भुमीका भी खुस होगइ..

तो मंजुने आज राधीकाको अपने पास बीठा दीया.. तो राधीकाको पता नही सबलोग उनको इतना प्यार क्यु दे रहे हे.. जबसे सबलोग आये हे तबसे नीर्मला ओर भुमीका उनके पास ही बैठी रही.. ओर अपने यतीतकी बाते करती रही.. राधीकाकी मम्मीने दोनोको राधीकाको अतीतके बारेमे बतानेको मना कीया.. लेकीन मंजु ओर पुनम उनके बारेमे सबकुछ जानती थी.. तभी खाना खाते..

नीर्मला : सृती भीनां.. कीतनी नादान हे.. अगर हमारी बात समजतती तो आज वो भी हमारे साथ होती..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. फीकर मत करो.. सृती यही हे.. उनको अपनी गलतीका अहेसास हो गया हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? सृती इधर हे..? लेकीन कहा हे वो..? दीखाइ नही देती..

मंजुला : (लखनकी ओर देखते) भुमी मौसी.. वो.. दरसल.. सृती जब वहा आइ थी.. तो वापस जाते वक्त उनका छोटासा अ‍ेक्सीडन्ट होगया था.. लेकीन आप उनकी फीकर मत करो.. वो ठीक हे.. उनको कुछ नही हुआ.. बस.. थोडीसी मामुली चोट आइ हे.. तो उपर आराम कर रही हे.. आप लोग सांतीसे खाना खालो.. फीर उनको उपर जाकर मील लेनां..

भुमीका : (थोडी परेसान होते) हे भगवान.. ये लडकी भीनां.. कीतनी लापरवाह हे.. हमारी कोइ बात नही मानती.. बहुत जीद्दी हे.. ओर कार भी कीतनी तेज चलाती हे..

नीर्मला : (लखनकी ओर देखते) अच्छा.. तभी लखन बेटा दिखाइ नही दे रहा था.. क्या तुम वहा थे..?

लखन : (मुस्कुराते) जी नानीजी.. आप लोग उनकी चीन्ता मत कीजीये वो बीलकुल ठीक हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. मुजे भी लखनका फोन आया था.. तो मेने ही इनको तुम सबको बतानेको मना कीया था.. ताकी आप लोग उनकी चीन्ता ना करे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. लेकीन तुम आज मुजे अचानक नानीजी क्यु केह रहा हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. क्युकी लखन अब मेरा देवर नही मेरा बेटा हे.. इसीलीये.. ओर अब सृतीकी चीन्ता छोडो.. अब वो हमेसाके लीये यही रहेने वाली हे.. मे अभी उनसे बात करके आइ हु.. ओर चंदा दीदीको भी कुछ नही हे.. तो उनकी भी चीन्ता नही करनी.. वो भी कुछ दिनोमे ठीक हो जायेगी.. बस.. अब घर जाकर अ‍ेक ही चीन्ता करनी हे.. मेरी पुनो ओर मेरे बेटे लखनकी सादीकी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां बेटी.. ये तुमने सही नीर्णय लीया हे.. पुनो हमारी नजरके सामने तो रहेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. सीर्फ नजरके सामने नही रहेगी.. बल्की लखनके साथ सादी करके वो इस खानदानकी महारानी भी होजायेगी.. मेरी उतराधीकारी..

इतना सुनतेही लखन सरमा गया ओर नीचे देखकर खाने लगा.. अ‍ैसे ही सबने डीनर करलीया.. तो सबलोग उपरकी ओर चले गये.. ओर सृतीको मीलकर उनका हाल चाल पुछने लगे.. सृती सीर्फ भुमीकाको ही देखती रही.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तभी भुमीकाने उसे गले लगालीया ओर सृती जोरोसे रोते उनकी माफी मांगती रही.. फीर उसने देवायतकी भी माफी मांगली..

सब लोग नीचे आगये ओर कुछ देर होलमे बैठकर बाते करते रहे.. इसी दौरान सबलोग राधीकाको सबकुछ पुछते जानकारीया लेते रहे.. ताकी उनको ना लगेकी उनको कोइ नही जानता.. ओर इस खानदानकी जानकारीया देते रहे.. जीसे सुनकर राधीका भी सरमा जाती थी.. ओर खुसभी हो रहीथी.. की उनकी सादी अ‍ेक रोयल फेमीलीमे हुइ हे.. वो आज मंजुको अपनी सासुमांके रुपमे देखकर बहुत खुस थी..

राधीकाकी फेमीलीके बारेमे जानकर सबको पता चला उनकी फेमीलीमे अब उनकी मम्मीके सीवा कोइ भी नही हे.. सबलोग उनका होसला बढाते उनके साथ होनेकी तसली देते रहे.. जीसे सुनकर राधीका भी बहुत खुस होगइ.. ओर सबलोग सोनेके लीये जाने लगे.. तो मंजुने नीर्मलाको इसारा करते देवायतको साथ लेजानेको कहा तो नीर्मला सरमा गइ.. आज राधीका अपनी मम्मीके साथ सोगइ..

क्युकी कल उनकी ओर लखनकी सुहागरात थी तो पुरी रात लखन उनकी चुतमे धमाका करता रहा.. जीनकी वजहसे आज राधीकाकी हालत इतनी अच्छी नही थीकी वो लखनके साथ सो सके.. फीर मंजुने लखन ओर रजीयाको उनके रुममे भेज दीया.. ओर वो खुद सृतीके पास चली गइ.. चंदाको दवाइ दीथी तो वो सो गइ थी.. मंजुने आज नीलमको चंदाका ध्यान रखनेको कहेकर उनके साथ सुला दीया..
 
आज पुरा दिन सबलोग होस्पीटलकी दोडधाम करते रहे.. इसी बीच मंजु ओर पुनमके अलावा कीसीको पता नही थाकी आज नीलमके साथ क्या हुआ था.. वो सुबह अकेली ही स्कुलपे चली गइ.. तो वहा सुबह सुबह धिरेन उनका स्कुलके गेटपे ही इन्तजार कर रहा था.. वो सीर्फ नीलमको मीलनेके लीये ओर उनसे सब बाते करनेके लीये ही आया था.. की कल उनकी लखनके साथ ओर उनकी मम्मीके साथ क्या बाते हुइ..

नीलमने धिरेनको सबकुछ बता दीया.. तो धिरेन समज गयाकी आज इसीलीये नीलम अकेली आइ हे.. तभी उसने नीलमको अपने साथ आनेके लीये कहा.. तो पहेलेतो नीलम ना नुकुर करती रही.. फीर भी धिरेन उनको समजा बुजाके अपने नये घरपे ले गया.. जहा नीलम पहेले भी घर देखनेके लीये आ चुकी थी.. ओर दोनो घरका ताला खोलकर अंदर चले गये.. तो धिरेनने दरवाजा लोक करदीया..

नीलम बहुत ही सरमाने लगी.. तभी धिरेनने उनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर नीलमको गोदमे उठाकर बेडरुमकी ओर लेजाता हे.. नीलमको आज पहेली बार अच्छा नही लग रहा था.. क्युकी कहीना कही उनके दिलमे अब लखनने जगाह लेली थी.. वो मन ही मन अब लखनसे प्यार करने लगी थी.. फीर भी उनको पता थाकी सादी तो धिरेनसे ही करनी पडेगी.. नीलमने अपने बारेमे बहुत कुछ सोच लीया था..

धिरेन : (मुस्कुराते) देखले नीलु.. अब यही हमारा आसीयाना हे.. तुम इस घरकी मालकीन हो.. अब हमे यही रहेना हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. क्या सचमे तुमने नोकीनेशनमे मेरा नाम डाला हे..? तो फीर पुनोदी..?

धिरेन : (गुस्सेमे) तु नाम ना ले उस रंडीका.. ना जाने मेरी पीठके पीछे कीनका बीस्तर गरम करती थी.. ओर मेरी मां..? वो भी जीजुके पीछे पागल थी.. तुजे पता हे..? वो उनकी सादीसे पहेले ही जीजुके साथ फीजीकल रीसेशनमे थी.. अब मेरा उन दोनोसे कोइ वास्ता नही..

नीलम : (मुस्कुराते) तो फीर गांवका घर..? आपकी तो खेतीबाडी भी हेनां..?

धिरेन : हां.. सबकुछ था.. लेकीन अब नही.. मां हमारे डीवोर्सकी वजहसे मुजसे बहुत नाराज हे.. वो सब अब पुनोके नाम करदेगी.. नही चाहीये मुजे उनका कुछ.. मेरी अच्छी खासी नोकरी हे.. हमारा गुजारा आरामसे चल जायेगा.. अब हम यही रहेगे.. चल बाते बादमे करेगे.. पहेले मेरी इस बीवीसे प्यार तो करलु..

नीलम : (सामने देखते) अ‍ेक मीनीट.. क्या प्यार करलु..? धिरेन तुजे पता हेना मेरी भी कुछ नीड हे.. मुजे सोपींग.. घुमना कीतना पसंद हे.. तुजे सब पता हेनां..? मेरा खर्चा उठा पाओगे..?

धिरेन : अरे हां यार.. मेने तुम्हारा बारेमे भी सोचा हे.. सब मेनेज होजायेगा.. तु टेन्शन मत ले.. बता कीतने पैसे चाहीये तुजे.. मे देता हु..

नीलम : (सामने देखते) पचीस हजार.. हे तेरे पास..? क्युकी मुजे कुछ कपडे ओर मेकअपका सामान लेना हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां.. अभी जाते वक्त अ‍े टी अ‍ेमसे नीकालके देता हु.. जो लेना हो ले लेना.. आखीर तुम मेरी होने वाली बीवीजो हो.. तो अब मे मेरी बीवीसे थोडासा प्यार करलु..?

नीलम : (हग करते) अलेले.. मेरे बेबीको प्यार करना हे..? चल आजा..

फीर धिरेन उनको बेडरुममे लेजाते ही उनको प्यार करने लगा.. तो नीलम भी उतेजीत होने लगी.. ओर वो भी धिरेनका साथ देने लगी.. दोनो ही चुमाचाटी करते अपने बेडपे आगये.. धिरेन नीलमके स्कर्टको उचा करते नीकरको साइडमे करदेता हु.. ओर उनकी चुतको सहेलाने लगा.. तब नीलम मदहोस होने लगी.. धिरेन नीलमकी चुतको सहेलाते उनके होठोको चुमने लगा..





दोनोके उपर वासनाका नसा चढने लगा.. तो धिरेनने फटाफट अपने कपडे नीकाल दिये.. ओर नीलमके कपडे भी नीकालते उनको भी नंगा करदीया फीर दोनो बेडपे आकर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर धिरेन नीलमके बुब्सको मसलते उनके होटोको चुमने लगा.. तो नीलम भी मदहोसीमे आंखे चडाते धिरेनका साथ देने लगी.. धिरेन नीलमके उपर चड गया.. ओर लंडको पकडकर नीलमकी चुतपे सेट करने लगा..





जब सेट हो गया तो धिरेनने पुस कीया तो लंड फीसलके नीलमकी जांगोमे चला गया.. नीलम आज भी धिरेनके अनाडीपनपे जोरोसे हसने लगी.. तो धिरेन थोठा चीडचीडा हो गया.. ओर लंड पकडकर दुबारा चुतमे घुसानेकी कोसीस करने लगा.. इस बार नीलमने हाथ नीचे लेजाते धिरेनके लंडको थामलीया ओर अपनी चुतके लव होलमे सेट करके धिरेनको जोरोसे बाहोमे भीचलीया..





तो धिरेन कमरको जटका मारते लंडको चुतमे घुसा देता हे.. नीलमकी हल्कीसी आहे नीकल गइ.. ओर वो आंखोकी पुतलीया पलटते धिरेनको लखन समजकर बाहोमे भीच लेती हे.. धिरेन धीरे धीरे कमर हीलाते नीलमको चोदने लगा.. दोनो चुदाइ करते अपने चरमोपे पहोंचनेकी कोसीस करने लगे.. लेकीन ये तो धिरेन था.. वो नीलमको अपने चरमपे पहोचाये इनसे पहेले ही वो नीलमकी चुतमे जड गया..





तो नीलम धिरेनके कंधेको पकडकर अपनी चुतको आगे पीछे ओर साइडमे घीसते जडनेकी कोसीस करने लगी.. ओर बडी मुस्कीलसे अपने चरणोपे पहोच पाइ.. अ‍ेक बार फीर मनही मन धिरेनको कोसने लगी.. तभी उसे अपने मनमे लखनका खयाल आया.. ओर उसने अ‍ेक बार फीर लखनसे मीलन करनेका इरादा मजबुत करलीया.. नीलम जीतनी बार धिरेनसे चुदवाती उतनी ही बार लखनकी ओर ढल रही थी..

फीर दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर सही होकर वापस बेडपे आगये.. तो धिरेनने नीलमको अपने कपडे नही पहेनने दिये.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे लीपटके बाते करने लगे.. धिरेनने नीलमको लखनसे हुइ बात ओर उनकी मम्मीसे हुइ बातके बारेमे सबकुछ नीलमको बता दीया.. लेकीन नीलमने धिरेनको कुछ नही बतायाकी उनकी मम्मीको यहा होस्पीटल लेकर आये हे..

दोनो काफी देर तक बाते करते रहे.. धिरेनने फोन करके वही दोनोका खाना भी मंगवालीया.. तो कुछ देरके बाद खाना आगया.. तो धिरेनने कपडे पहेनकर खाना लेलीया.. फीर दोनोने नंगे ही खाना खाया.. इसी बीच काफी टाइम नीकल गया.. बादमे धिरेनने नीलमको घोडी बनाकर अ‍ेक बार फीर चोद लीया.. इस बार चुदाइ थोडी लंबी चली.. तो नीलमको अपने चरमपे पहोंचनेमे इतनी तकलीफ नही हुइ..





फीर दोनोने अपने अपने कपडे पहेन लीये.. आज धिरेनकी वजहसे नीलमने स्कुलको बंक कीया.. लेकीन इसके बदले आज पहेली बार नीलमने धिरेनको लुट भी लीया.. उनके लीये पचीस हजार कोइ छोटी मोटी रकम नही थी.. वो मन ही मन खुस होने लगी.. धिरेनने नीलमको कल स्कुल आते वक्त अपने डोक्युमेन्ट लेआनेको कहा ताकी वो कल कोर्टमे अपनी सादीकी अ‍ेप्लीकेशन डाल सके..

फीर धिरेन नीलमको लेकर अ‍ेक अ‍ेटी अ‍ेम सेन्टरपे ले गया ओर उनमेसे पचीस हजार नीकालकर नीलमको देदीया.. नीलम बहुत खुस होगइ.. फीर धिरेन नीलमको स्कुलके बजाये सीधा लखनके घरके पास थोडी दुर छोड देता हे.. तो नीलम पैदल ही अपने घरपे आगइ.. रजीयाके पुछनेपे उसने स्कुलसे जल्दी छुटीकी बात की.. ओर वो अपने कमरेमे चली गइ..

तो दुसरी ओर बीच बीचमे जब भी टाइम मीलता.. लखन ओर पुनम भी फोनपे चेट करते बात कर लेते.. अब पुनम ओर लखनके बीच प्यारका परवाना बराबर चढा हुआ था.. तो पुनम भी लखनको लेकर काफी अ‍ेक्साइटेड थी.. वो लखनके प्यारमे ओर कामी होने लगी थी.. दोनो फोनपे खुलकर चेट करने लगे थे.. ओर बात फोन सेक्स तक आगइ.. पुनम लखनका फोन आते ही फोनपे बाते करते बाथरुममे घुस जाती.. ओर अंदर जाकर विडीयो फोन चालु करदेती..

ओर लखनसे विडीयो कोलपे सेक्सकी बाते करते अपनी चुतमे उगली करने लगती.. ओर लखन जैसा कहे करती जाती.. पुनम अपने तनका हर जलवा लखनको दीखा चुकी थी.. लखन उनसे फोनपे बाते करते ही जडा देता.. दोनो प्यारकी बाते करते बहुत आगे बढ चुके थे.. बातो ही बातोमे पुनमने लखनको सृतीको मीलनेके लीये भी केह दीया.. तो लखनने सृतीके साथ हुइ बात भी पुनमको बतादी..

इस रात कभी ना थंभने वाली रात जैसी थी.. देवायत भुमीका ओर नीर्मलाके बीच थ्रीसमका खेल चल रहा था.. देवायत बारी बारी नीर्मला ओर भुमीकाकी धमाकेदार चुदाइ करता रहा.. तो लखन भी रजीयाकी चुतमे धमाका करता रहा.. रजीयाभी बीस्तरमे लखनकी रंडी होजाती.. ओर उछल उछलके लखनको चुदवानेमे साथ दे रहीथी.. उनको नही पता थाकी कुछ ही दिनमे उनके भी अच्छे दिन आने वाले थे.. लेकीन इन सबके बीच..

आज सोसायटीमे भी आजु बाजुके बंगलोपे वासनाका तांडव मचा हुआ था.. सभी मर्द अपनी बीवीया या फीर जीनके साथ उनके अफैर चल रहेथे सबलोग उनकी चुदाइ कर रहे थे.. ओर ये सबकी असली वजह थी मंजु.. जो आज अपना असली रुप सृतीको दिखाने जा रहीथी.. मंजुने सृतीके पास जाते ही दरवाजा लोक करलीया.. ओर खुदके कपडे नीकालकर सृतीको भी नंगा करदीया..

फीर वो नहाने चली गइ.. सृती सीर्फ उनको देखती ही रही.. फीर कुछ देरके बाद मंजु अ‍ैसे ही नहाकर बहार नीकली.. सृती उनको देखते ही रेह गइ.. क्युकी मंजु आज कुछ अलग ही लग रही थी.. सृतीने मंजुका अ‍ैसा रुप पहेले कभी नही देखा था.. वो पुरी तराह नंगी थी.. उन्होने अपना बदन भी नही पोछा था.. वो नहाकर सीधी ही नीकली थी.. ओर अ‍ेक लोटेमे जल लेकर सृतीके बेडपे चली गइ.. फीर उसने सृतीको बेडपे बीठा दीया ओर खुद भी उनके सामने सटकर बैठ गइ....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
Back
Top