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तो इधर हवेलीपे भी जब देवायत घरपे आया तब अेक बार फीर थोडा हंगामा हुआ.. चंदा देवायतसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. ओर उनकी बार बार माफी मांगने लगी.. मंजुने देवायतको सभी बातोसे अवगत कराया.. तो देवायत भी सबकुछ समज गया.. ओर चंदाको समजाते उसे सब भुलजानेको कहेने लगा.. लेकीन फीर भी चंदा उसे सजा देनेकी बात करते माफी मांगती रही..
फीर सबने बडी मुस्कीलसे चंदाको सांत कीया.. आज उसने खाना भी नही खाया.. ओर विजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उसे दुध पीलाते गहेरी सोचमे डुब गइ.. उनकी हालत देखकर देवायतकी आंख भी गीली होगइ.. तभी लखन भी घरपे आगया ओर सब लोग डीनर करने बैठ गये.. तो बातो ही बातोमे लखनको भी सबकुछ पता चल गया.. की चंदाकी हालत क्यु खराब हे..
फीर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तो देवायतने भी जवेरीलालके घरपे जो कुछ हुआ सब बता दीया.. तो लखन पुनमकी ओर कातील स्माइल करते मुस्कुराने लगा.. ओर सबसे छुपकर उनको फोनपे देखनेके बहाने मेसेज टाइप करके भेजता हे.. फीर भी पुनम अपना फोन नही उठाती ओर वो लखनकी ओर देखते मुस्कुराती हे.. फीर खडी होकर अपने रुममे चली जाती हे.. तभी..
नीर्मला : (थोडी चीन्तासे) देवु.. चंदा कैसा पागलपन करती हे.. मुजे तो इनकी बहुत चीन्ता होने लगी हे..
मंजुला : (धीरेसे) देवु.. क्या हम उसे नींदकी गोली देकर सुलादे..? तो सायद सुबह तक सब ठीक होजायेगा.. वो हमारी पुनोकी वजहसे बहुत टेन्सनमे हे.. देखो.. अभी वो कैसे विजयको लेकर अकेली रुममे बैठी हे.. अगर थोडी देर सबके साथ बैठकर बाते करती तो उनका भी मन डावर्ट होता..
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) नही मंजु.. मुजे अैसी गोलीया देना अच्छा नही लगता.. उसे पुनमका ओर खुदके बारेमे सुनकर बडा सदमा लगा हे.. हम धिरेनको भी तो कुछ नही केह सकते..
नीर्मला : (गुस्सेसे सामने देखते) क्यु..? क्यु नही केह सकते..? कीतनी घटीया सोचवाला इन्सान नीकला.. अच्छा हुआ चंदा सादी करके इधर आगइ.. वरना इस आदमीके भरोसे उसे अकेली छोडना ठीक नही हे.. उनकी तो अब सकल देखनेका भी जी नही करता.. मेनेतो उसे अपना बेटा माना था..
लखन : भैया.. मुजे लगता हे वो अब डरके मारे इधर डीवोर्सके पेपर लेनेभी नही आयेगा..
देवायत : (लखनकी ओर देखते) लखन.. अभी पेपर पुनोके पास हेनां..? जा उसे लेकर आ.. हम सुबह जा रहे हे तो साथ लेजायेगे.. तुम उनको बेंकपे जाकर देदेनां.. उसे यहा बुलाना ठीक नही हे.. वरना उनको देखकर चंदाकी हालत ओर बीगड जायेगी..
भुमीका : नीमु.. देवु ठीक केह रहा हे.. लखन बेटा जा अभी पुनम बेटीके पास पेपर लेकर तुम्हारे पास रखले..
लखन : (मनमे खुस होते) जी बुआ..
लखन खुस होते खडा होगया ओर आरामसे चलते पुनमके रुममे चला गया.. क्युकी सबलोग होलमे थे तो उसे पताथा की पुनम इस वक्त अपने रुममे अकेली होगी.. तो इस बहाने उनसे कुछ बात होजायेगी.. वो अंदर गया तो देखा.. पुनम फोनपे मेसेज टाइप कर रही थी.. जैसे ही लखनको देखा उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. ओर वो जटसे बेडसे खडी होगइ.. ओर सरमाने लगी..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया आप..?
जैसे ही पुनम बेडसे उतर गइ ओर लखनको देखकर सरमा गइ तभी लखनने जटसे आकर पुनमको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. उसे कीसीके आजानेका डर लगने लगा.. ओर लखनकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते..

लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भरते धीरेसे) हां.. मे मेरी गर्ल फ्रेन्डको मीलने आया हु.. सोचा थोडा मीलकर प्यार करलु.. हें..हें..हें..
पुनम : (बाहोसे छुटनेकी कोसीस छोडदी.. सर्मसार होते हसते) छोडीये मुजे.. क्या कर रहे हे..? बहार सबलोग हे.. ओर दरवाजा भी खुला छोडकर आये.. कमसे कम बंध करके तो आते..
लखन : (गालपे कीस करते धीरेसे) अच्छा.. तो अब मेरी गर्लफ्रेन्ड को अपने बोय फ्रेन्डसे प्यार करनेमे कोइ अेतराज नही हे.. दीदी.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..
पुनम : (सर्मसार होते जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. आइ लव यु टु.. मे आपसे बहुत बुहत प्यार करती हु.. बस.. थोडे दिन इन्तजार कर लीजीये.. फीर मे वहा आजाउगी.. तब आपको मुजे जीतना प्यार करना हो उतना कर लीजीयेगा.. अब मे सीर्फ आपकी हु.. भाइ.. क्या कुछ काम था..?
लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. भैयाने आपके वो डीवोर्सके पेपर मंगवाये हे.. तो मुजे दे दीजीये.. मै उस कुतेके मुहपे मारुगा.. ओर देखना उनसे अैसा बदला लुगा वो जींदगी भर याद रखेगा.. क्युकी उनकी मासुका पुरी तराह मेरे बसमे होगइ हे..
पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां भाइ.. मे जानती हु.. आपने उनकी मांके साथ बीलकुल सही कीया.. भाइ.. मे जब वहा आउगी तब मे आपको अेक बात बताउगी.. आप सुनकर खुस होजायेगे..
मंजुला : (जोरोसे आवाज लगाते) पुनो.. वो लखनको तेरे पेपर दे देनां.. उसे कल लेजाना हे..
पुनम : (जटसे लखनकी बाहोसे छुटते थोडा जोरोसे) जी भाभीमां.. बस.. वो ही दे रही हु.. (धीरेसे) ये भाभीमा भीनां.. उनको सब पता चल जाता हे.. आपसे ठीकसे मीलने भी नही देती..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कल सुबह मे जा रहा हु.. तो आज देर रात हम उपर.. मीन्स.. मेरे कमरेमे मीले..? हंम..? मे आपका इन्तजार करुगा..
पुनम : (सरमाकर गरदन हांमे मीलाते) हां भाइ.. मे आनेकी पुरी कोसीस करुगी.. लव यु..
ओर पुनम लखनकी बाहोसे छुटकर अपना पेपर बेगसे नीकालकर लखनको देती हे.. पुनमको पता था.. की मंजुने उनको क्यु आवाज देकर लखनसे अलग करदीया.. ताकी दोनो बहेकते आगे ना बढ सके.. मंजुला दोनोको अभी दुर रखते अेक दुसरेके प्रती प्रेम ओर काम वासनाको बढना चाहती थी.. ताकी दोनो अेक दुसरेके लीये तडपे.. पुनमने लखनको फटाफट पेपर नीकालकर देदीया..

ओर जैसे ही लखन जानेको हुआ.. पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके गालपे कीस करदी.. फीर लखनकी ओर कामुक स्माइल करते हसने लगी.. तो लखन भी मुस्कुराते खुस होकर बहार आ गया.. ओर पेपर देवायतके हाथोमे थमा दीया.. देवायतने पेपर देखकर वापस लखनको देदीया.. ओर उसे अपने पास रखनेको कहते सुबह चार बजे तैयार रहेनेको कहा..
फीर सबने बडी मुस्कीलसे चंदाको सांत कीया.. आज उसने खाना भी नही खाया.. ओर विजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उसे दुध पीलाते गहेरी सोचमे डुब गइ.. उनकी हालत देखकर देवायतकी आंख भी गीली होगइ.. तभी लखन भी घरपे आगया ओर सब लोग डीनर करने बैठ गये.. तो बातो ही बातोमे लखनको भी सबकुछ पता चल गया.. की चंदाकी हालत क्यु खराब हे..
फीर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तो देवायतने भी जवेरीलालके घरपे जो कुछ हुआ सब बता दीया.. तो लखन पुनमकी ओर कातील स्माइल करते मुस्कुराने लगा.. ओर सबसे छुपकर उनको फोनपे देखनेके बहाने मेसेज टाइप करके भेजता हे.. फीर भी पुनम अपना फोन नही उठाती ओर वो लखनकी ओर देखते मुस्कुराती हे.. फीर खडी होकर अपने रुममे चली जाती हे.. तभी..
नीर्मला : (थोडी चीन्तासे) देवु.. चंदा कैसा पागलपन करती हे.. मुजे तो इनकी बहुत चीन्ता होने लगी हे..
मंजुला : (धीरेसे) देवु.. क्या हम उसे नींदकी गोली देकर सुलादे..? तो सायद सुबह तक सब ठीक होजायेगा.. वो हमारी पुनोकी वजहसे बहुत टेन्सनमे हे.. देखो.. अभी वो कैसे विजयको लेकर अकेली रुममे बैठी हे.. अगर थोडी देर सबके साथ बैठकर बाते करती तो उनका भी मन डावर्ट होता..
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) नही मंजु.. मुजे अैसी गोलीया देना अच्छा नही लगता.. उसे पुनमका ओर खुदके बारेमे सुनकर बडा सदमा लगा हे.. हम धिरेनको भी तो कुछ नही केह सकते..
नीर्मला : (गुस्सेसे सामने देखते) क्यु..? क्यु नही केह सकते..? कीतनी घटीया सोचवाला इन्सान नीकला.. अच्छा हुआ चंदा सादी करके इधर आगइ.. वरना इस आदमीके भरोसे उसे अकेली छोडना ठीक नही हे.. उनकी तो अब सकल देखनेका भी जी नही करता.. मेनेतो उसे अपना बेटा माना था..
लखन : भैया.. मुजे लगता हे वो अब डरके मारे इधर डीवोर्सके पेपर लेनेभी नही आयेगा..
देवायत : (लखनकी ओर देखते) लखन.. अभी पेपर पुनोके पास हेनां..? जा उसे लेकर आ.. हम सुबह जा रहे हे तो साथ लेजायेगे.. तुम उनको बेंकपे जाकर देदेनां.. उसे यहा बुलाना ठीक नही हे.. वरना उनको देखकर चंदाकी हालत ओर बीगड जायेगी..
भुमीका : नीमु.. देवु ठीक केह रहा हे.. लखन बेटा जा अभी पुनम बेटीके पास पेपर लेकर तुम्हारे पास रखले..
लखन : (मनमे खुस होते) जी बुआ..
लखन खुस होते खडा होगया ओर आरामसे चलते पुनमके रुममे चला गया.. क्युकी सबलोग होलमे थे तो उसे पताथा की पुनम इस वक्त अपने रुममे अकेली होगी.. तो इस बहाने उनसे कुछ बात होजायेगी.. वो अंदर गया तो देखा.. पुनम फोनपे मेसेज टाइप कर रही थी.. जैसे ही लखनको देखा उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. ओर वो जटसे बेडसे खडी होगइ.. ओर सरमाने लगी..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया आप..?
जैसे ही पुनम बेडसे उतर गइ ओर लखनको देखकर सरमा गइ तभी लखनने जटसे आकर पुनमको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. उसे कीसीके आजानेका डर लगने लगा.. ओर लखनकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते..

लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भरते धीरेसे) हां.. मे मेरी गर्ल फ्रेन्डको मीलने आया हु.. सोचा थोडा मीलकर प्यार करलु.. हें..हें..हें..
पुनम : (बाहोसे छुटनेकी कोसीस छोडदी.. सर्मसार होते हसते) छोडीये मुजे.. क्या कर रहे हे..? बहार सबलोग हे.. ओर दरवाजा भी खुला छोडकर आये.. कमसे कम बंध करके तो आते..
लखन : (गालपे कीस करते धीरेसे) अच्छा.. तो अब मेरी गर्लफ्रेन्ड को अपने बोय फ्रेन्डसे प्यार करनेमे कोइ अेतराज नही हे.. दीदी.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..
पुनम : (सर्मसार होते जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. आइ लव यु टु.. मे आपसे बहुत बुहत प्यार करती हु.. बस.. थोडे दिन इन्तजार कर लीजीये.. फीर मे वहा आजाउगी.. तब आपको मुजे जीतना प्यार करना हो उतना कर लीजीयेगा.. अब मे सीर्फ आपकी हु.. भाइ.. क्या कुछ काम था..?
लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. भैयाने आपके वो डीवोर्सके पेपर मंगवाये हे.. तो मुजे दे दीजीये.. मै उस कुतेके मुहपे मारुगा.. ओर देखना उनसे अैसा बदला लुगा वो जींदगी भर याद रखेगा.. क्युकी उनकी मासुका पुरी तराह मेरे बसमे होगइ हे..
पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां भाइ.. मे जानती हु.. आपने उनकी मांके साथ बीलकुल सही कीया.. भाइ.. मे जब वहा आउगी तब मे आपको अेक बात बताउगी.. आप सुनकर खुस होजायेगे..
मंजुला : (जोरोसे आवाज लगाते) पुनो.. वो लखनको तेरे पेपर दे देनां.. उसे कल लेजाना हे..
पुनम : (जटसे लखनकी बाहोसे छुटते थोडा जोरोसे) जी भाभीमां.. बस.. वो ही दे रही हु.. (धीरेसे) ये भाभीमा भीनां.. उनको सब पता चल जाता हे.. आपसे ठीकसे मीलने भी नही देती..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कल सुबह मे जा रहा हु.. तो आज देर रात हम उपर.. मीन्स.. मेरे कमरेमे मीले..? हंम..? मे आपका इन्तजार करुगा..
पुनम : (सरमाकर गरदन हांमे मीलाते) हां भाइ.. मे आनेकी पुरी कोसीस करुगी.. लव यु..
ओर पुनम लखनकी बाहोसे छुटकर अपना पेपर बेगसे नीकालकर लखनको देती हे.. पुनमको पता था.. की मंजुने उनको क्यु आवाज देकर लखनसे अलग करदीया.. ताकी दोनो बहेकते आगे ना बढ सके.. मंजुला दोनोको अभी दुर रखते अेक दुसरेके प्रती प्रेम ओर काम वासनाको बढना चाहती थी.. ताकी दोनो अेक दुसरेके लीये तडपे.. पुनमने लखनको फटाफट पेपर नीकालकर देदीया..

ओर जैसे ही लखन जानेको हुआ.. पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके गालपे कीस करदी.. फीर लखनकी ओर कामुक स्माइल करते हसने लगी.. तो लखन भी मुस्कुराते खुस होकर बहार आ गया.. ओर पेपर देवायतके हाथोमे थमा दीया.. देवायतने पेपर देखकर वापस लखनको देदीया.. ओर उसे अपने पास रखनेको कहते सुबह चार बजे तैयार रहेनेको कहा..









