फीर मंजु नीर्मला भुमीका अेक बार सृतीको मीलकर नीचे आ गये.. तो इस बार चंदाने भी सृतीका हाल चाल पुछ लीया.. फीर देवायत सब लोगोको लेकर वापस गांवकी ओर नीकल गया.. लखन राधीका ओर रजीया सबको विदाय देकर घरमे आगये.. तभी लखनने नीलमको अकेलेमे मीलकर अपने पेपर्स साथमे लेनेको कहा.. तो नीलम सबकुछ समज गइ.. ओर उसने अपने सभी डोक्युमेन्ट साथमे लेलीये..
फीर लखन राधीका ओर नीलमको अेक ही स्कुटरपे बीठाकर उनको होस्टेल स्कुलपे छोडने चला गया.. पहेले राधीकाको होस्टेलपे ड्रोप करके वो नीलमको स्कुल छोडकर वापस घरपे आ गया.. तो घरपे सीर्फ रजीया ओर लखनही थे.. अभी रजीया सृतीके पास थी.. जो दोनो लखनका इन्तजार कर रही थी.. जैसे ही लखन घरपे आया तो रजीयाने लखनको आवाज देकर उपर बुला लीया..
लखन : (सृतीके रुममे जाते) हां रजु.. बोल क्या काम था..?
रजीया : (धीरेसे सरमाते) लखन.. आप सृती दीदीको बाथरुममे बीठादोनां.. बाकी मे सब देख लुगी.. फीर जब कहु.. तो उनको वापस बेडपे लेआना..
लखन : (जोरोसे हसते) क्या दीदीको पोटी जाना हे..? हें..हें..हें.. तो इनमे इतना सरमा क्यु रही हो..?
सृती : (सर्मसार होते हसते तकीया फेककर मारते जोरोसे) लखन.. आप होनां.. बहुत कमीने हो.. सरम भी नही आती.. हां.. पोटी जाना हे.. ओर कुछ..?
लखन : (तकीयासे बचते जोरोसे हसते) हां तो इनमे इतना चीला क्यु रही हो.. सबको लगती हे.. हें..हें..हें..
कहेते लखन आकर सृतीको गोदमे उठा लेता हे.. तो सृती जुठा गुस्सा करते अपने दांतको पीसते लखनको मुका मारने लगी.. फीरभी लखन हसते हुअे उनको बाथरुममे लेजाकर कमोडपे बीठा देता हे.. तो रजीया भी हसते हुअे अंदर आजाती हे.. ओर लखनकी पीठमे अेक मुका मारते उनको बहार भगा देती हे.. जब सृती पोटी करलेती हे.. तो रजीया सृतीकी मदद करती हे..
ओर उनके कपडे सही करते लखनको बुलाती हे.. फीर लखन उनको वापस बेडपे बीठा देता हे.. तब सृती सरमाकर हसते सीर्फ लखनको ही देखती रहेती हे.. तभी रजीया दोनोको बाते करनेको कहेकर नीचे काम करने चली जाती हे.. तो लखन भी जाने लगता हे तो आज सृतीने हिंमत करते लखनका हाथ पकडलीया.. ओर कामुक नजरोसे देखते हाथ खीचकर अपने पास बीठा देती हे.. लखन उनकी आंखोमे देखता रहा..
सृती : (सर्मसार होते नजरे जुकाते धीरेसे) भाइ.. अैसे क्या देख रहे हो..? मुजे सरम आ रही हे..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कुछ काम था..? वरना मुजे बहार जाना हे..
सृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. क्या दो घडी अपनी इस बहेनके पास बैठ भी नही सकते..? सारा दिन सबकी सेवामे लगे रहेते हो.. अगर आप नही आते तो पता नही मेरा क्या होता.. अच्छा हुआ आपको पुनो दीदीने वहा भेज दीया.. मेने तो सोचा था आप नही आओगे..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आपने अैसा सोचा भी कैसे..? में कैसे नही आता..? पहेले तो आप भाभी थी.. लेकीन अब तो हम दोनोका खुनका रीस्ता हे.. आप मेरी बहेन हो.. मेरी पुनो दीदीकी तराह.. तो मुजे आना ही था..
सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आप पुनोदीदीको बहुत प्यार करते हो..? मे भी तो आपकी बहेन हु..
लखन : (अेक नजरसे देखते) दीदी.. प्यार तो मे आपसे भी करता हु.. आप अैसा क्यु सोच रही हे..?
सृती : (आंख गीली करते) भाइ.. उस दिनके लीये सोरी.. गलती मेरी थी.. मेने आपको खामखा डांट दीया.. अब तो पुनोदी भी आपसे सादी करलेगी.. भाइ.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..
लखन : (अेक नजरसे आंखोमे देखते मुस्कुराते) पता हे मुजे.. की आपको क्या कहेना हे..
सृती : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) क्या..? आपको पता हे मे क्या कहेने वाली हु..?
लखन : (अेक नजरसे देखते) हां..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. कहीये नां मे आपको क्या कहेने वाली थी..?
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. केह तो दुगा.. फीर आप मुजे डांटोगीतो नही..? हें..हें..हें..
सृती : (आंख गीली करते) नही भाइ.. अब मे वो सृती नही रही.. पुरानी सृतीको मेने बीती रात ही मार दीया.. ये सृती आपकी बहेन हे.. जो आपको बेइम्तहा प्यार करती हे.. अब मे आपको कभी नही डाटुंगी.. कहीयेना मे आपको क्या कहेने वाली थी..
लखन : (मुस्कुराते) बस दीदी.. यही जो अभी आपने कहा.. आइ लव यु.. क्या यही कहेने वाली थीनां..?
सृती : (आंखसे आंसु गीराते हां मे गरदन हीलाते) हां भाइ.. आइ लव यु सो मच.. पुनो दीदीकी तराह मे भी आपसे प्यार करने लगी हु.. मेरा प्यार कबुल करलो भाइ.. अब तो आपकी भाभीमाने भी परमीशन देदी हे..
लखन : (सृतीके आंसु पोछते प्यार भरी अेक नजरोसे देखते) ......
सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. क्या देख रहे हो..? अैसे ना देखो.. मुजे सरम आ रही हे..
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. मेरी होने वाली बीवीको अपनी आंखोमे बसालेने दो.. आइ लव यु टु.. क्या पुनोदीकी तराह आप भी मुजसे सादी करना चाहती होनां..?
सृती : (जोरोसे बाहोमे समाते) हां भाइ.. मे आपसे सादी करुगी.. आइ लव यु .. आइ लव यु सो मच..
इतना कहेते ही सृती लखनकी बाहोमे समा जाती हे.. ओर फुटफुटके रोने लगती हे.. तब लखन मुस्कुराते सृतीकी पीठ सहेलाने लगता हे.. सृती लखनके कंधेपे सर रखते अैसे ही बैठी रही.. फीर लखनने उनको अपने आपसे अलग कीया.. तो सृती लखनकी आंखोमे देखती रही.. लखनने उनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. ओर धीरे धीरे करते अपना चहेरा सृतीके होठोकी ओर लेजाने लगा..
