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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४३
फीर साहील सबानाको लेकर वहासे नीकल जाता हे.. तो जरीना दोनोको जाते हुअे देखती हे.. ओर मनमे खुस होती हेकी दोनोकी जोडी कीतनी सुंदर लग रही हे.. तब उसे सलमाकी कही अेक अेक बाते याद आने लगती हे.. तो दुसरी ओर साहील सबानाको स्कुटरके पीछे बीठाकर लेजाने लगा.. तो सबाना बहुत ही सरमा रही थी.. वो साहीलके पीछे उनके कंधेपे हाथ रखकर बैठी थी.. जैसे उनकी गर्लफ्रेन्ड हो.. फीर दोनो लखनके घरपे आगये.... अब आगे
तो दुसरी ओर जैसे ही साहील घरसे गया.. लखन सीधाही उपर सृतीके पास चला गया.. ओर उनको गले मीलकर होठोको चुम लेता हे.. तो सृती भी सरमाके हसने लगी.. लखन उनके पास सटकर बैठ गया.. ओर सृतीकी कमरपे हाथ डालकर उनके गालको चुमने लगा.. तो सृती लखनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर उसने लखनको पुछ ही लीया..
सृती : (सरमाते धीरेसे) कहीये जनाब.. आज तो इस बहेनपे बहुत प्यार आ रहा हे..? ओर तो ओर.. आज तो बीन बुलाये इधर आगये..? जरुर कुछ काम होगा.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) क्या दीदी.. मे अैसे नही आ सकता क्या..?
सृती : (मुस्कुराते) बीलकुल आ सकते हो.. लेकीन आप अैसे तो आते नही.. आप तब ही आते हे मे या फीर रजीया आपको बुलाती हे.. या जब मुजे अंदर बाथरुममे जाना होता हे.. वरना अैसे तो कभी नही आते.. वैसे भी अब तो हम बोय फ्रेन्ड गर्ल फ्रेन्ड हो गये हे.. तो फीर क्या दीकत हे..?
लखन : (मुस्कुराते हग करते) सोरी डार्लींग.. अब अैसे ही आया करुगा.. लेकीन याद रखना.. बादमे मुजे भगा मत देनां.. समजी..? बात करती हे.. हें..हें..हें..
सृती : (अपने सीनेपे हाथ रखते) हाये.. आपके मुहसे डार्लींग सुनने केलीये कीतना तरस रही थी.. सुनकर बहुत अच्छा लगा.. हां भाइ.. मुजे अैसे ही बुलाया करो.. अच्छा लगता हे.. कहीये.. क्या काम था..
लखन : (हसते) हां.. दीदी.. वो अभी साहील ओर सबाना हमारे घरपे आ रहे हे.. तो आप उनसे बेंगलोरके बारेमे थोडी बात कर लेना.. क्युकी इसी बहाने वो सबानाको लेकर इधर आ रहा हे.. दीदी.. दोनोके बीच मामला आगे बढना हे.. ओर इसमे मुजे आपकी मदद चाहीये.. फीर दोनोको चाइ बाय पीलाकर घुमनेके लीये भेज देगे.. आप समज गइनां..?
सृती : (हसते) हंम.. समज गइ.. मे इतनी भी भोली नही हु.. तो हमारे देवर अपनी मासुकाको मीलने आये हे.. कोइ बात नही.. मे उनसे बात करलुगी.. लेकीन अेक सर्तपे.. वरना सबानाको सब कुछ सच बता दुगी..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) अरे..? पागल होगइ हो क्या..? कहो.. कोनसी सर्त हे.. अब आप भी मुजे ब्लेक मेइल करने लगी हो.. मे भी आपको देख लुगा..
सृती : (मुस्कुराते गाल चुमते) हाये.. आप कब देखेगे हमे..? देखते ही नही.. हम तो दीखानेके लीये तरस रहे हे.. हें..हें..हें.. सुनो.. पहेले तो आपको अैसे ही मुजे मीलनेके लीये आना पडेगा.. ओर दुसरा.. कल अेक हप्ता होजायेगा.. तो कल हमे दिखानेके लीये होस्पीटल भी जाना हे.. तो आप मेरे साथ चलोगे.. बस..
लखन : (मुस्कुराते) बस..? सीर्फ इतनीसी बात..? ठीक हे डन.. मुजे आपकी सर्त मंजुर हे.. लेकीन पहेले ये बताओ.. आप मुजे क्या दीखानेके लीये तरस रही हो.. हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते पीठमे अेक मुका मारते) भाइ.. आप कीतने कमीने हो.. मे तो बस.. अैसे ही केह रही थी.. भाइ.. अब यहा अकेली बैठे बेठे बहुत बोर हो रही हु.. कमसे कम हाथका प्लास्टर नीकल जायेतो मे क्लीनीकपे चली जाउगी.. आप मुजे छोडने लेने आजाना.. कमसे कम वहा टाइम तो नीकल जायेगा..
लखन : (हसते) दीदी.. तो फीर वहा आपको बाथरुम जानेके लीये प्रोबलेम नही होगी..?
सृती : (मुस्कुराते गाल चुमते) होगी.. बहुत होगी.. क्या करु..? मेरे बोयफ्रेन्डको तो मेरे लीये टाइम ही नही हे.. तो बोर हो जाती हु.. फीर मेरा होनेवाला पती भी कीस दिन काम आयेगा.. मे आपको वही रोक लुगी.. हम दोनो साथमे टाइम भी स्पेन्ड करेगे ओर मे क्लीनीक भी संभालुगी.. वैसे भी आपका बीजनेसतो फोनपे ही होता हे.. तो वहीसे करलीजीयेगा..
लखन : (मुस्कुराते) हमं.. मतलब अब मुजे मेरी होने वाली बीवीकी फुल टाइम सेवा करनी पडेगी.. ठीक हे.. मे देख लुगा.. ओर मुजे वसुल करना भी आता हे.. तो वसुल भी करलुगा.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे मुस्कुराते) हां.. पता हे मुजे आप कैसे वसुल करोगे.. इस बार मे आपके जासेमे आनेवाली नही हु.. समजे..? अगर कुछ गलत सोच रहे होतो दिमागसे नीकाल देनां.. गंदा लडका.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) क्यु..? मेरी गर्लफ्रेन्ड हो.. होने वाली बीवी हो.. मे कुछ भी करु.. इनसे आपका क्या तालुक..? ओर मे अब मेरी बीवीसे थोडीना कुछ करुगा.. अब जो भी करना हे मे मेरी बहेनके साथ करुगा.. क्युकी मेरी बहेने मेरी सबसे पहेली चाहत हे.. ओर मे उनको बहुत प्यार करता हु.. समजी..?
सृती : (सरमसे लीपट जाती हे) अच्छाजी..? भाइ.. बातोमे आपको कोइ हरा नही सकता.. ठीक हे.. करलीजीयेगा अपनी बहेनसे प्यार.. भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे आपसे सचमे बहुत..बहुत..बहुत.. प्यार करती हु.. मुजे कभी छोडीयेगा मत.. वरना अब मे जी नही पाउगी..
लखन : (सृतीके मुहपे हाथ रखते) दीदी.. अैसा मत बोलो.. आइ लव यु टु.. पुनोदीदीकी तराह मे भी आपसे बहुत प्यार करता हु.. आजसे तुम दोनोके सारे गम मेरे.. आप दोनोको में इतना खुस रखुगाकी आप सोच भी नही सकती.. आइ लव यु सो मच..
सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) बस भाइ.. यही प्यार चाहीये मुजे.. अब आपको कभी सीकायतका मौका नही मीलेगा.. आइ प्रोमीस..
कहेते सृती लखनके चहेरेको चुमने लगती हे.. तो लखन उनके चहेरेको थाम लेता हे.. ओर सृतीके होठोको चुमने लगता हे तो सृती भी खुलकर लखनका साथ देने लगती हे.. लखन सृतीके होठोको चुमते पागल होने लगा.. ओर अेक हाथसे सृतीके बुब्सको थाम लेता हे.. तो सृती सरसे पांव तक कांप गइ.. ओर वो भी उतेजीत होते अपना मुह खोलकर लखनकी जीभसे जीभ मीलाकर पेच लडाने लगी..

अध्याय - २४३
फीर साहील सबानाको लेकर वहासे नीकल जाता हे.. तो जरीना दोनोको जाते हुअे देखती हे.. ओर मनमे खुस होती हेकी दोनोकी जोडी कीतनी सुंदर लग रही हे.. तब उसे सलमाकी कही अेक अेक बाते याद आने लगती हे.. तो दुसरी ओर साहील सबानाको स्कुटरके पीछे बीठाकर लेजाने लगा.. तो सबाना बहुत ही सरमा रही थी.. वो साहीलके पीछे उनके कंधेपे हाथ रखकर बैठी थी.. जैसे उनकी गर्लफ्रेन्ड हो.. फीर दोनो लखनके घरपे आगये.... अब आगे
तो दुसरी ओर जैसे ही साहील घरसे गया.. लखन सीधाही उपर सृतीके पास चला गया.. ओर उनको गले मीलकर होठोको चुम लेता हे.. तो सृती भी सरमाके हसने लगी.. लखन उनके पास सटकर बैठ गया.. ओर सृतीकी कमरपे हाथ डालकर उनके गालको चुमने लगा.. तो सृती लखनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर उसने लखनको पुछ ही लीया..
सृती : (सरमाते धीरेसे) कहीये जनाब.. आज तो इस बहेनपे बहुत प्यार आ रहा हे..? ओर तो ओर.. आज तो बीन बुलाये इधर आगये..? जरुर कुछ काम होगा.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) क्या दीदी.. मे अैसे नही आ सकता क्या..?
सृती : (मुस्कुराते) बीलकुल आ सकते हो.. लेकीन आप अैसे तो आते नही.. आप तब ही आते हे मे या फीर रजीया आपको बुलाती हे.. या जब मुजे अंदर बाथरुममे जाना होता हे.. वरना अैसे तो कभी नही आते.. वैसे भी अब तो हम बोय फ्रेन्ड गर्ल फ्रेन्ड हो गये हे.. तो फीर क्या दीकत हे..?
लखन : (मुस्कुराते हग करते) सोरी डार्लींग.. अब अैसे ही आया करुगा.. लेकीन याद रखना.. बादमे मुजे भगा मत देनां.. समजी..? बात करती हे.. हें..हें..हें..
सृती : (अपने सीनेपे हाथ रखते) हाये.. आपके मुहसे डार्लींग सुनने केलीये कीतना तरस रही थी.. सुनकर बहुत अच्छा लगा.. हां भाइ.. मुजे अैसे ही बुलाया करो.. अच्छा लगता हे.. कहीये.. क्या काम था..
लखन : (हसते) हां.. दीदी.. वो अभी साहील ओर सबाना हमारे घरपे आ रहे हे.. तो आप उनसे बेंगलोरके बारेमे थोडी बात कर लेना.. क्युकी इसी बहाने वो सबानाको लेकर इधर आ रहा हे.. दीदी.. दोनोके बीच मामला आगे बढना हे.. ओर इसमे मुजे आपकी मदद चाहीये.. फीर दोनोको चाइ बाय पीलाकर घुमनेके लीये भेज देगे.. आप समज गइनां..?
सृती : (हसते) हंम.. समज गइ.. मे इतनी भी भोली नही हु.. तो हमारे देवर अपनी मासुकाको मीलने आये हे.. कोइ बात नही.. मे उनसे बात करलुगी.. लेकीन अेक सर्तपे.. वरना सबानाको सब कुछ सच बता दुगी..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) अरे..? पागल होगइ हो क्या..? कहो.. कोनसी सर्त हे.. अब आप भी मुजे ब्लेक मेइल करने लगी हो.. मे भी आपको देख लुगा..
सृती : (मुस्कुराते गाल चुमते) हाये.. आप कब देखेगे हमे..? देखते ही नही.. हम तो दीखानेके लीये तरस रहे हे.. हें..हें..हें.. सुनो.. पहेले तो आपको अैसे ही मुजे मीलनेके लीये आना पडेगा.. ओर दुसरा.. कल अेक हप्ता होजायेगा.. तो कल हमे दिखानेके लीये होस्पीटल भी जाना हे.. तो आप मेरे साथ चलोगे.. बस..
लखन : (मुस्कुराते) बस..? सीर्फ इतनीसी बात..? ठीक हे डन.. मुजे आपकी सर्त मंजुर हे.. लेकीन पहेले ये बताओ.. आप मुजे क्या दीखानेके लीये तरस रही हो.. हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते पीठमे अेक मुका मारते) भाइ.. आप कीतने कमीने हो.. मे तो बस.. अैसे ही केह रही थी.. भाइ.. अब यहा अकेली बैठे बेठे बहुत बोर हो रही हु.. कमसे कम हाथका प्लास्टर नीकल जायेतो मे क्लीनीकपे चली जाउगी.. आप मुजे छोडने लेने आजाना.. कमसे कम वहा टाइम तो नीकल जायेगा..
लखन : (हसते) दीदी.. तो फीर वहा आपको बाथरुम जानेके लीये प्रोबलेम नही होगी..?
सृती : (मुस्कुराते गाल चुमते) होगी.. बहुत होगी.. क्या करु..? मेरे बोयफ्रेन्डको तो मेरे लीये टाइम ही नही हे.. तो बोर हो जाती हु.. फीर मेरा होनेवाला पती भी कीस दिन काम आयेगा.. मे आपको वही रोक लुगी.. हम दोनो साथमे टाइम भी स्पेन्ड करेगे ओर मे क्लीनीक भी संभालुगी.. वैसे भी आपका बीजनेसतो फोनपे ही होता हे.. तो वहीसे करलीजीयेगा..
लखन : (मुस्कुराते) हमं.. मतलब अब मुजे मेरी होने वाली बीवीकी फुल टाइम सेवा करनी पडेगी.. ठीक हे.. मे देख लुगा.. ओर मुजे वसुल करना भी आता हे.. तो वसुल भी करलुगा.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे मुस्कुराते) हां.. पता हे मुजे आप कैसे वसुल करोगे.. इस बार मे आपके जासेमे आनेवाली नही हु.. समजे..? अगर कुछ गलत सोच रहे होतो दिमागसे नीकाल देनां.. गंदा लडका.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) क्यु..? मेरी गर्लफ्रेन्ड हो.. होने वाली बीवी हो.. मे कुछ भी करु.. इनसे आपका क्या तालुक..? ओर मे अब मेरी बीवीसे थोडीना कुछ करुगा.. अब जो भी करना हे मे मेरी बहेनके साथ करुगा.. क्युकी मेरी बहेने मेरी सबसे पहेली चाहत हे.. ओर मे उनको बहुत प्यार करता हु.. समजी..?
सृती : (सरमसे लीपट जाती हे) अच्छाजी..? भाइ.. बातोमे आपको कोइ हरा नही सकता.. ठीक हे.. करलीजीयेगा अपनी बहेनसे प्यार.. भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे आपसे सचमे बहुत..बहुत..बहुत.. प्यार करती हु.. मुजे कभी छोडीयेगा मत.. वरना अब मे जी नही पाउगी..
लखन : (सृतीके मुहपे हाथ रखते) दीदी.. अैसा मत बोलो.. आइ लव यु टु.. पुनोदीदीकी तराह मे भी आपसे बहुत प्यार करता हु.. आजसे तुम दोनोके सारे गम मेरे.. आप दोनोको में इतना खुस रखुगाकी आप सोच भी नही सकती.. आइ लव यु सो मच..
सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) बस भाइ.. यही प्यार चाहीये मुजे.. अब आपको कभी सीकायतका मौका नही मीलेगा.. आइ प्रोमीस..
कहेते सृती लखनके चहेरेको चुमने लगती हे.. तो लखन उनके चहेरेको थाम लेता हे.. ओर सृतीके होठोको चुमने लगता हे तो सृती भी खुलकर लखनका साथ देने लगती हे.. लखन सृतीके होठोको चुमते पागल होने लगा.. ओर अेक हाथसे सृतीके बुब्सको थाम लेता हे.. तो सृती सरसे पांव तक कांप गइ.. ओर वो भी उतेजीत होते अपना मुह खोलकर लखनकी जीभसे जीभ मीलाकर पेच लडाने लगी..








