Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 94 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. आपके सामने दोनोका राज खुल गया..?

रा. मम्मी : हां.. मेने खीडकीसे जांकते देखा.. तो दोनो फीजीकल थे.. बडी बहेनकी मांगमे सींदुर लगा हुआ था ओर गलेमे मगल सुत्र.. मेरा दिल टुट गया.. मेने सुबह बडी बहेनसे पुछा तो कहाकी मेने ओर रामु भैयाने सादी करली हे.. बस.. मे उसी दिन स्कुल वापस चली गइ.. मेरे ओर रामुके बीच सबकुछ खतम हो चुका था.. मुजे उनसे नफरत होने लगी थी.. ओर वापस घरपे जाना नही चाहती थी..

पुनम : ओह.. तो आप तबसे यहा हे..?

रा. मम्मी : (आंख गीली करते) नही.. मे भैयासे नाराज थी.. टुट चुकी थी.. तो यही होस्टेलपे रहेने लगी.. ओर कीशनने मुजे सम्हाला.. वो मुजे समजाता रहा.. कहेते हेना अ‍ेक बार लडकी ओरत बन जाती हे तो फीर सेक्ससे दुर नही रेह सकती..

ओर यही मेरे साथ होने लगा.. मुजे अ‍ेक मर्दकी कमी महेसुस होने लगी.. ओर यहा कीशन मुजे रामु ओर बडी बहेनको माफ करनेके लीये समजाने होस्टेलपे आजाता.. ओर मुजे कीशनका साथ अच्छा लगने लगा.. मे ओर किशन साथमे वक्त बीताने लगे..

पुनम : (मुस्कुराते) ओह.. तो तब आप दोनो रीलेशनमे आये..

रा. मम्मी : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. ज्यादा दिन सेक्स ना करनेकी वजहसे मे पागल जैसी होने लगी थी.. ओर उस दिन हम दोनो ही बाते करते बहेक गये.. पताही ना चला की हम दोनो कब अ‍ेक होगये.. फीर तो ये सीलसीला चलने लगा..





ओर मे अपने तनकी प्यास कीशनसे बुजाने लगी.. लेकीन मुजे पता थाकी हम दोनोके बीच सादी कभी नही होगी.. क्युकी कीशन रामुभाइके अच्छे दोस्त थे.. तो वो उनको कभी धोखा नही देगे.. ओर ये बात कीशनने मुजे पहेलेही बतादी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो फीर आपकी सादी..? कीसके साथ हुइ थी..?

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) पढाइ खत्म होने तक मे होस्टेलपे ही रही.. मेने ओर कीशनने खुब मजे कीये.. मेरा सब खर्चा कीशन ही देता था.. फीर उसीके कहेनेपे मे घरपे आगइ.. लेकीन मे ज्यादा दिन वहा नही रेह पाइ.. इसी बीच मेने रामुको भी कभी अपने पास नही आने दिया..

पुनम : तो फीर आपकी बडी बहुन ओर रामुकाका..?

रा. मम्मी : (फीकी मुस्कुरानसे) हां.. अबतो भाइ बहेन दोनोही खुलकर मीया बीवीकी तराह रहेने लगे थे.. रामु भैया ओर दीदी कामपे चले जाते.. मे घरपे अकेली होती.. ओर मोका मीलते ही मे कीशनसे अपने तनकी आग बुजा लेती.. अ‍ेक दिन मुजे उल्टीया होने लगी..

पुनम : (मुस्कुराते) मीन्स.. प्रेगनेन्ट..?

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. सहेरमे तो अपने पास सेफ्टीकी गोलीया रखती थी.. गांव आइ तो साथ लाना भुल गइ.. मेने ओर कीशनने वहा बहुत सेक्स कीया.. बीना सेफ्टी.. मे दीदीके साथ होस्टीलपे चली गइ.. तो पता चला मे कीशनसे प्रेगनेन्ट हो गइ हु..

दीदीने मुजे बहुत पुछा.. मेने कीशनका नाम कभी नही बताया.. वो समजी मे स्कुलसे ही कीसी बोयफ्रेन्डसे प्रेगनेन्ट होकर आइ हु.. ओर ये बात उसने रामु भैयाको बतादी.. रामु भैयाने कीशनको बता दीया.. मे ये बचा गीराना भी नही चाहती थी.. क्युकी ये मेरे कीशनकी नीशानी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर..? आपकी सादी करवादी..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. आनन फाननमे कीशनने ही मेरी सादी स्कुलके अ‍ेक क्लार्कसे करवादी.. ओर मेरा खयाल हमेसाके रखेनेका वादा कीया.. फीर कुछ दिनोके बाद पुरा होस्टेल हम दोनो मीया बीवीको सोंप दिया.. मेरा पती कमीना सराबी था.. इसीलीये कीशनने ये होस्टेस पहेलेसे ही मेरे नाम करदीया था.. ओर नौ महीनेके बाद मेने राधुको जन्म दीया.. मेरा पती समजताथा की ये बच्चा उसीका हे.. लेकीन मेने ये राज आज तक सबसे छुपाके रखा..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. आप तबसे यहा हेनां..?

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. मेरा पती होस्टेल सम्हालता ओर मे घर ओर बच्चीको.. मेरा संसार चलने लगा.. लेकीन मेरा पती भी होस्टेलसे ज्यादा पैसा आनेकी वजहसे ज्यादा दारु पीने लगा.. मेरे डरसे वो दारु पीकर होस्टेलपे ही पडा रहेता.. कीशन हप्तेमे अ‍ेक दो बार मुजे मीलने घरपे आता..

तब दोनो खुब प्यार करते.. हम दोनोका रीस्ता तब भी कायम था.. क्युकी मेने कीशनको ही अपना पती मानलीया था.. मे उसी सर्तपे अ‍ेक क्लार्कसे सादी करनेके लीये राजी हुइ थी.. ओर देखते ही देखते पांच साल बीत गये.. मेरी राधु भी चार सालकी होचुकी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) मम्मीजी.. बापुकी ओर आपकी कहानी बडी दीलचस्प हे.. फीर..?

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) कहेते हेनां.. ज्यादा खुसी भगवानसे भी देखी नही जाती.. दारुकी वजहसे मेरे पतीका लीवर खराब होगया.. ओर वो तीन महीनेमे ही गुजर गया.. लेकीन उनके चले जानेसे मुजे ज्यादा फर्क नही पडा.. मे दुनीयाकी नजरोमे अ‍ेक विधवा थी..

लेकीन तब भी मे अ‍ेक सुहागनकी जींदगी जी रही थी.. मेरा कीशन थाना मेरा खयाल रखनेके लीये.. वो मेरी हर जरुरतको पुरी करता.. मेरे घरकी.. मेरे तनकी.. अब तो हम बीना डर मीलने लगे थे.. मे होस्टेल सम्हालने लगी.. मेरी राधु भी स्कुल जाने लगी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. इसी स्कुलमे पढती थीनां..?

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. यहा फीस तो देनी नही थी.. आपके दादाका बहुत बडा डोनेशन था.. कीशन मुजे होस्टेलपे मीलने आजाता.. क्युकी अब ज्यादातर मे यही रहेती थी.. हम दोनो खुब मजे करते.. ओर नतीजेके फल स्वरुप कीशनने अ‍ेक बार फीर मुजे प्रेगनेन्ट कर दीया..





अब मुजे दुनीयाका डर नही था.. मे इस बच्चेको भी जन्म देना चाहती थी.. मेने कीशनको मना कीयाथा की हमारे बारेमे गांवमे या रामुको कभी कुछ ना कहे.. ओर वो वादेका पका था.. वो अपनी हर बात मुजसे सेर करता.. मे उनका हर राज जानती थी..

पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा..? तो बापुके बारेमे तो आपको सबकुछ पता होगा.. क्या ये सब जानकर आपको बुरा नही लगता था..?

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) नही.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. ओर मुजे उनकी नीजी जींदगीसे कोइ मतलब नही था.. वो मेरी हर ख्वाहीस ओर जरुरत पुरी करता था.. कुछ लोग मुजे कीशनकी रखैल भी मानने लगे थे.. लेकीन उनसे मुजे कोइ फर्क नही पडा.. क्युकी कीशन मेरा खयाल अ‍ैसा रखता था जैसे अ‍ेक पती अपनी पत्नीका खयाल रखते हे.. तो फीर मे उनकी जींदगीमे क्यु इन्टरफेयर करु..?
 
पुनम : (मुस्कुराते) क्या वो यहा सीर्फ आपको मीलनेके लीये ही आते थे..? कीसी ओरको नही..?

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) तुम भी सब जानती हो.. क्यु मेरे मुहसे सब उगलवाना चाहती हो..? क्या जानना हे तुजे..? भुमीकाके बारेमे..?

पुनम : (धीरेसे हसते) हां.. आपको पता हेना वो बापुकी मुह बोली बहेन थी.. दोनो साथमे पढते थे..

रा. मम्मी : (हसते) हां.. लेकीन दुनीयाकी नजरोमे.. असलमे वोभी मेरी सौतन थी.. आपके परीवारमे बहेनसे सादी करनेकी परंपरा जो थी.. मेरा कीशन मुजसे कुछ नही छीपाता था.. उन दोनोने तो सादी भी करली थी..

पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा रामुकाकाने तो आपको धोखा दीया था.. थो फीर आपकी बहडी बहेन..? उनकी क्या गलती थी.. उसे मील लेती..

रा. मम्मी : नही.. मे वहा कीसी से भी रीस्ता रखना नही चाहती थी.. उन्हीकी वजहसे मेरा रामु मुजसे दुर होगया था.. लेकीन कीस्मतने हम दोनो बहेनको अ‍ेक दिन मीला ही दीया.. अ‍ेक दिन मे मेरी प्रेगनन्सीकी रुटीन चेकअपके लीये होस्पीटलपे गइ.. वहा वोभी चेकअपके लीये आइ हुइ थी.. पता चला वोभी प्रेगनेन्ट थी.. बस.. वही मुलाकात हुइ.. फीर कभी नही मीली..

पुनम : (मुस्कुराते) आपको पता हे वो कैसे प्रेगनेन्ट हुइ थी..?

रा. मम्मी : (सामने देखते धीरेसे) हंम.. कहेते हेना हमारे कर्मोका फल इसी जन्ममे हमे मील जाता हे.. तो रामु भैयाके साथ भी अ‍ैसा हुआ.. जीस तराह रामुभैयाने मुजे धोखा दीया.. उसी तराह हमारी बडी बहेनने भी भैयाको धोखेमे रखा.. वो पहेलेसेही कीशनको चाहती थी.. ओर आपकी हवेलीपे कामपे जाते कीशनसे अपने तनकी प्यास बुजाती.. ओर उनसे ही प्रेगनेन्ट हुइ थी..





पुनम : (मुस्कुराते) बापुका कीतनी ओरतोके साथ रीस्ता था.. अच्छा वो आपके दुसरे बच्चेके बारेमे नही बताया..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) जब डीलीवरीका समय नजदीक आया तो मुजे बहुत पेइन हुआ.. कीशन मेरे साथ ही था.. लेकीन मेरा बच्चा पेटमे ही मर गया.. डोक्टरने बडी मुस्कीलसे मेरी जान बचाइ..

पुनम : तो फीर दया बहेन आपको कैसे मीली..?

रा. मम्मी : जब मे डीलीवरीके बाद होस्पीटलसे घरपे आगइ.. ओर अ‍ेक महीना हुआ था.. तब अ‍ेक दिन कीशन अ‍ेक बच्चीको लेकर मेरे घरपे आगया.. तो पता चलाकी ये मेरी बडी बहेनकी लडकी हे.. बहेनको स्तनका केन्सर था.. तो बच्चीको दुध भी नही पीला सकती..

ओर मेरा बच्चा नही रहा.. तो जबतक बच्ची थोडी बडी नही होजाती कीशनने मुजे अपना दुध पीलानेको कहा.. ओर मेने अपना दुध पीलाकर दयाको दो साल मेरे पास रखा.. ओर फीर मेरा दुध आना बंध होगया तो कीशनको वापस देदीया..

पुनम : तो फीर बडी बहेन..?

रा. मम्मी : बच्चीको लेजानेके बाद तीन महीनेके बाद उनकी मोत होगइ.. तबतक तो वहा बहुत कुछ हो चुका था.. कीनशकी बीवीको भी अ‍ेक बच्चा होचुका था.. जो आपके बडे भाइ हे.. दया ज्यादातर आपकी हजेलीपे ही रहेने लगी.. आपकी मां उनका अच्छेसे खयाल रखती थी.. बस.. यही मेरी कहानी हे.. इसके सीवा मे कुछ नही जानती.. तुमको सब जानती हो तो मुजे बता फीर क्या हुआ..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. फीर कुछ ज्यादा नही हुआ.. आपकी बडी बहेनके गुजर जानेके बाद रामुकाका ज्यादातर हमारे खेतोपे ही रहेने लगे.. ओर दया बहेन हमारे साथ रहेती.. उन्होने मेरी मांका भी दुध पीया हे.. जब वो बडी होगइ तो बापु ओर रामुकाकाने अ‍ेक अच्छा लडका देखकर उनकी सादी करदी..

लेकीन कीस्मत देखो.. सादीके छे महीनेमे ही दया बहेन वीधवा हो गइ.. ओर तबसे वो हवेलीपे हे.. ओर अ‍ेक हप्ते पहेलेही मेरे बडे भैयाने उनसे सादी करली.. अब वो मेरी भाभी हे.. हें..हें..हें..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब वो भी दोनो सौतेले भाइ बहेन हे.. ओर मील गये.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) अच्छा ये बताओ.. अभी वो यहा आइ थी.. तो आपने उसे बताया क्यु नही मे आपकी मौसी हु..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) नही.. मेरे खयालसे कुछ राजको राज ही रहेने देना चाहीये.. इसीलीये मेने राधुको भी कुछ नही बतायाकी मेरा लखन भी तुम्हारा भाइ हे.. ओर तुम उनकी बहेन.. वो दोनो भाइ बहेन भी मील गये.. अच्छा बेटा रात बहुत हो गइ हे.. अब तु सोजा.. मे भी सोजाना चाहती हु..

पुनम : (खडी होते सरको चुमते) ठीक हे मम्मीजी.. गुड नाइट.. हम सुबह मीलेगे..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) गुड नाइट बेटा..

पुनम रुमका दरवाजा बंध करके राधीकाके रुममे चली गइ.. तो राधीका पीठके बल लेटकर आंसु बहा रही थी.. पुनम राधीकाको देखकर सबकुछ समज गइ.. की उन्होने छुपकर दोनोकी बाते सुनली हे.. पुनमने रुमका दरवाजा बंध करलीया..

पुनम धीरेसे बेडपे जाकर राधीकाके पास बैठ गइ.. ओर राधीकाके सरको सहेलाने लगी.. तो राधीकाने सर उठाकर पुनमकी ओर देखा.. वो जटसे बेडपे बैठकर पुनमके कंधेपे सर रखके हल्की आवाजमे रोने लगी.. ताकी बाजुके रुममे उनकी मम्मी उनके रोनेकी आवाज ना सुनले..

पुनम उनकी पीठको सहेलाने लगी.. उसने राधीकाको रोने दीया ताकी रोकर उनका जी हल्का होजाये.. राधीका रोकर सांत होगइ.. तो अपना नाइट गाउन लेकर राधीकाको बाथरुममे ले गइ.. यहा उनका हुलीया ठीक करवाके गाउन पहेनलीया.. ओर दोनो बेडपे आकर अ‍ेक दुसरेकी ओर मुह करते लेट गइ.. राधीका पुनमकी आंखोमे देखती रही.. तभी..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) तो आखीर आपको सब पता चल गया.. सुनली हमारी बात..?

राधीका : (नजरे जुकाते हांमे गरदन हीलाते) हंम.. आप सचमे मेरी बहेन हो..? ओर लखन मेरा भाइ.. मेभी आपके खानदानके परंपराका हीस्सा होगइ.. मेरी भी सादी अपने भाइके साथ होगइ..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. जानकर आपको बुरा लगा क्या..?

राधीका : (नां मे गरदन हीलाते) नही.. मे खुद तुम दोनो भाइ बहेनको मीलवाना चाहती थी.. ओर आपसे पहेले मे उनकी जींदगीमे आइ.. मुजे नही पता थाकी ये भी मेरा भाइ हे.. अब तो हम दोनो बहेने सौतन होजायेगी..
 
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. हो जायेगी नही होगइ हे.. प्यारका इजहार करनेके बाद कल रात हम दोनो पहेली बार मीले.. हमारे बीच सबकुछ होगया.. दीदी.. वो हम सबको बहुत खुस रखेगे..

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) कोन्ग्रेच्युलेशन.. मे जानती हु वो हम सबको खुस रखनेमे काबील होचुके हे.. वो सब आपहीकी बदोलत हुआ हे.. वो जडीबुटी देकर.. थेन्क्स दीदी..

पुनम : (मुस्कुराते) ओर मम्मीजीके अतीतके बारेमे जानकर..?

राधीका : (मुस्कुराते) वो उनका अतीत हे.. उस समय जोभी कुछ हुआ था तबकी परीस्थीती ओर मम्मीकी मरजीसे हुआ था.. तब मेरा अस्तीत्व भी नही था.. तो ये सब जानकर हम उसे बदलतो नही सकते.. तो फीर उनके बारेमे जानकर क्यु दुखी होना.. उन्होने अपनी जींदगी जीली.. मे अपनी जींदगी जी रही हु..

पुनम : (मुस्कुराते) आंटी बहुत अच्छी हे..

राधीका : हां.. मम्मीने मुजपे कभी कुछ ना करनेकी पाबंधी नही लगाइ.. यहा तक मेरी आधी उमरके लडकेको भी उसने हसी खुसी स्वीकार करलीया.. वो जानती थी लखन मेरा सौतेला भाइ हे.. फीर भी उन्होने ही मेरी सादी लखनसे करवाइ.. तो मे क्यु अ‍ेतराज करु..?

पुनम : (मुस्कुराते) सही कहा आपने.. उनको येभी पता थाकी हम दोनो भाइ बहेन उनके कीशनकी संतान हे.. तब भी उसने लखन भैयाकी सादी आपसे करवादी.. इनफेक्ट हमारे बारेमे वो सुरुसे ही जानती थी.. जब हम दोनो यहा पढते थे..

राधीका : (मुस्कुराते) दीदी.. मम्मी ये बात मुजसे छुपाना चाहती हेनां..? तो सुनो.. उनको ये कभी पता ना चलेकी उनका राज मे जानती हु.. इस राजको राज ही रहेने दो..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. मे कीसीको नही बताउगी..

राधीका : (अपना अ‍ेक पैर पुनमकी कमरमे डालते कामुक स्माइल करते) थेन्क्स.. दीदी.. बीस्तरपे कैसा लगा हमारे लखन भैया..? अब तो मुजे नीचोडके रख देते हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते बाहोमे भरते) हाये.. दीदी क्या बताउ..? भैयाने मुजे स्वर्गकी सेर करवादी.. इतना मजा मेने अपनी लाइफमे कभी नही लीया.. हम दोनो सुबह तक प्यार करते रहे.. मेरी हालत पतली करदी..

राधीका : (कामुक्तासे होठ चुमते) दीदी.. पहेले अ‍ेक ही बारमे ढेर होजाने वाला लडका.. अब मुजे अ‍ेक ही बारमे पुरी नीचोड लेता हे.. दुसरी बार करवानेकी हींमत ही नही होती.. ओर जनाब दो बार करनेसे पहेले हमारी उपरसे हटते नही.. ये जडी बुटी देनेके बाद तो ये लडकनेमे मुजे उनके प्यारमे पागल करदीया हे.. पता हे वहा हमने हमारी सुहागरात मनाइ.. पुरी रात मेरे साथ सेक्स करते रहे.. फीर भी नही थके..

पुनम : (मुस्कुराते राधीकाके बुब्सको सहेलाते) दीदी.. ये उनकी सभी बीवीओको अ‍ैसा ही प्यार देते हे..

राधीका : (मुस्कुराते) अच्छा हे इनकी इतनी बीवीया होजायेगी.. वरना इनको अकेला जेलना अ‍ेक दो बीवीओका काम नही हे.. क्या सृती दीदीभी इनसे सादी कर रही हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते होठ चुमते) बु..च.. हंम.. कल घर जाते वक्त बीच जंगलमे हमारे पुर्खोका मंदिर हे.. वही उन दोनोको सादी करवा दुगी.. फीर हम घर चले जायेगे.. ओर लखन भैया हमे छोडकर सायद वापस आजायेगे.. आपको पता हे..? वो आप दोनोको घरपे छोडने आये उसी रात सृतीदीदीसे पहेली बार मीले.. हमारी तराह पुरी रात प्यार करते उन्होने अपनी सुहागरात मनाइ..

राधीका : (सामने देखते धीरेसे) तो फीर आप दोनोकी सादी..?

पुनम : (मुस्कुराते) अभी आपने अंदर सुना नही मेने क्या कहा..? सायद हम दोनोकी सादीमे थोडा लेट होजायेगा.. क्या आप अपने मामाको आखरी बार मीलना चाहोगी..?

राधीका : (जटसे) नही.. जीस आदमीने मेरी मम्मीको धोखा दीया उसे मीलकर क्या करुगी..? अगर उनसे मीली.. ओर उनको पता चलाकी मे उनकी छोटी बहेनकी लडकी हु.. तो वो दुखी होकर जायेगे..

पुनम : (मुस्कुराते) सही कहा आपने.. चलो.. सोते हे.. सुबह हमारे पती मुजे लेने आयेगे..

राधीका : (उनके उपर चडते) अ‍ैसे ही सोजाओगी..? कीतने दिनोके बाद तो हम मीले हे हम.. चलो.. वही पुराना खेल.. ओर हां.. आप मुजसे कुछ जरुरी बात करना चाहती थी.. कहीये..

फीर पुनमने घरके अंदर कीस हालातमे रीस्तोमे बदलावका फैसला लीया पुरी कहानी राधीकाको सुनादी.. फीर भुमीका देवायतके रीस्तेको बारेमे.. ओर उनकी वजहसे जो हंगामा हुआ जीसे सृतीने देवायतसे रीस्ता तोड दीया ओर लखनको अपना लीया..

फीर नीर्मला ओर देवायतके रीस्तोके बारेमे भी बता दीया जीसे राधीका मजे लेकर सुनती रही.. क्युकी कुछ बाते उनको पहेलेसे ही पता थी.. फीर दोनो प्यारका खेल खेलने लगी.. जो स्कुल टाइममे पुनम राधीकाने कइ बार खेला था.. इसीलीये तो दोनो खास सहेलीया थी..





राधीका पुनमके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुमने लगी.. ओर दोनोके बीच लेस्बीयका वही पुराना खेल सुरु होगया.. दोनोने अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाटते अ‍ेक दुसरेको सुतुस्ट कीया.. ओर आपसमे नंगीही चीपकते सो गइ..

तो इधर लखनके घरपेभी सबलोग उपर जाते सोनेकी तैयारी करने लगे.. आज भी दया रजीयाको जबरदस्ती अपने साथ सोने लेगइ.. क्युकी दोनो सुरुसे ही लेस्बीयन थी.. ओर अ‍ेक दुसरेसे प्यार करती थी.. ओर दोनोने साथमे ही कइ बार देवायतसे अपनी प्यार बुजाइ थी..
 
भावना सृती वाले रुममे अपनी बच्चीको लेकर चली गइ.. जहा कल पुनम ओर लखनने सुहागरात मनाइ थी.. सृती लखन अपने रुममे चले गये.. लखनने अपनी गोदसे सृतीको बेडपे उतारा.. ओर सृतीका नाइट गाउन ढुंढने लगा.. सृतीने सरमाकर कहा.. वहा मेरे रुममे हे.. तो लखन सृतीके रुमके पास चला गया.. ओर नोक कीया.. तो भावनाने आकर दरवाजा खोला..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. वो.. सृतीका गाउन लेना हे..

भावना : (मुस्कुराते साइडमे हटते) ले लीजीये..

लखन सृतीका गाउन ढुंढने लगा.. भावना बेडपे बैठकर अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. भावना वासना भरी नजरोसे लखनको देखती रही.. वो तो मनमे चाहती थीकी लखन उनको अभी दबोचले.. ओर उनकी चुदाइ करले.. लेकीन वो लखनसे बहुत सरमा रही थी..





फीर भी उसने आज उसने हीमत करके जान बेजकर बच्चीके उपर कुछ कपडा नही डाला.. भावनाका बडा बुब्स दीख रहा था.. भावनाने उसे कवर करनेकी कोइ कोसीस नही की.. लखन गाउन लेकर कुछ देर भावनाके बुब्सको देखता रहा.. ओर धीरेसे बहारकी ओर जाने लगा.. तभी..

भावना : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया..

लखन : (मुडते धीरेसे) जी भाभी..

भावना : (कातील नजरसे मुस्कुराते) दरवाजा खुला रखती हु.. यहा अकेली ही हु.. कुछ चाहीये तो बीना नोक कीये लेजाना..

लखन : (सबकुछ समज गया) जी भाभी.. लेजाउगा.. आप तैयार रहेना..

फीर लखन भावनाकी ओर देखते मुस्कुराने लगा तो भावनाभी सर्मसार होगइ.. ओर अपने नजरे चुराने लगी.. लखन सृतीका गाउन लेकर अपने रुममे चला गया.. ओर लखनने सृतीको गाउन चेन्च करनेमे मददकी.. फीर वोभी चेन्ज करके रुमकी लाइट बंध करके सृतीके पास बेडपे आकर लेट गया..

सृती : (लखनके सीनेपे सर रखते धीरेसे) भाइ.. मे अब काफी ठीक हो गइ हु.. अपने आप चल सकती हु.. अब कोइ दिकत नही हे..

लखन : (सृतीके सरको सहेलाते) हंम.. चलो ठीक हे.. हम वहासे आतेही अ‍ेक बार डोक्टरको दीखा देगे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) जानु.. आजमे अकेली हु.. क्या मे रजुदीदीको बुलालु..? हंम..?

लखन : (होंठ चुमकर) नही.. बहुत दिनोके बाद दया बहेनको मील रही हे.. उसे वही सोनेदो.. ओर फीकर मत करो.. कल मे ओर पुनो पुरी रात जागे हे.. दोपहरको भी आराम नही कीया.. हम सीर्फ अ‍ेक ही बार करेगे..

सृती : (सरमाकर सीनेको सहेलाते) हंम.. मुजे पता हे आपका अ‍ेक बार.. दो बार करते नही तबतक आप हमारे उपरसे उतरते ही नही.. ठीक हे.. आज हम दोनो अकेलेही मजे करेगे.. अ‍ैसा मौका बहुत कम बार मीलता हे.. चलो सुरु होजाइअ‍े.. बहुत रात होगइ हे.. हमे सुबह जाना भी हे..

फीर लखन ओर सृती प्यारके महासागरकी गहेराइओमे गोते लगाने लगे.. लखन धीरे धीरे ध्यान रखते सृतीको चोदने लगा.. तो सृतीभी मदहोसीमे आंखोकी पुतलीया चडाते लखनसे मजेसे चुद रही थी.. लखनका हर सोट सृती अ‍ेन्जोय कर रही थी..





आज दो पहोरको लंचपे भी भावना लखनकी मस्तीया करते ओर सबके बीच लखनके साथ इन्टीमेन्टकी बाते सुनकर भी काफी गरम होचुकी थी.. वोभी लखनको याद करते बेडपे नंगी होकर अपनी चुतमे उगली कर रही थी.. वो अब पुरी तराह लखनसे चुदनेको तैयार थी..





लखन सृतीकी चुतमे दो बार धमाका करके थकके सृतीसे चीपककर सो गया.. ओर सृती भी बेहोसी जैसी हालतमे नंगीही लखनसे चीपकर सोइ हुइ थी.. तो दया ओर रजीया भी हमेसाकी तराह लेस्बीयन खेलते अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट करके सोगइ थी..





लेकीन अ‍ेक बार उंगली करते जडनेके बाद भी आज भावनाको नींद नही आ रही थी.. वो अब भी उमीदमे लखनके इन्तजारमे बीस्तरपे करवटे बदलती रही.. उनको आज कीसी भी हालमे लखनसे चुदवाना था.. क्युकी गांव जानेसे पहेले यहा उनकी आखरी रात थी..





ओर भावना इस मोकेको गवाना नही चाहती थी.. उनको पता था आज पुनम भी नही हे ओर रजीया दया दोनो साथमे सोइ हुइ हे.. आज लखनके साथ सीर्फ सृती ही हे.. तो भावना अ‍ैसा चान्स गवाना नही चाहती थी.. वो लखनको खुलकर नीमंत्रण दे चुकी थी.. ओर बार बार खडी होकर दरवाजेके पास जाते लखनके रुमकी ओर देखती थी.. इस उमीदमे की लखन अ‍ेक बार बहार नीकले.. ओर मानो इश्वरने भावनाके मनकी बात सुनली....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)

Bhavna gai.....
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६३

ओर भावना इस मोकेको गवाना नही चाहती थी.. उनको पता था आज पुनम भी नही हे ओर रजीया दया दोनो साथमे सोइ हुइ हे.. आज लखनके साथ सीर्फ सृती ही हे.. तो भावना अ‍ैसा चान्स गवाना नही चाहती थी.. वो लखनको खुलकर नीमंत्रण दे चुकी थी.. ओर बार बार खडी होकर दरवाजेके पास जाते लखनके रुमकी ओर देखती थी.. इस उमीदमे की लखन अ‍ेक बार बहार नीकले.. ओर मानो इश्वरने भावनाके मनकी बात सुनली.... अब आगे

तो दुसरी ओर गांवमे भी आज मंजुने लताको अपने साथ लेलीया.. अब ज्यादातर चंदा दवाइकी वजहसे नींदकी आगोसमे ही रहेती थी.. ओर देवायत इस वक्त लताकी जोरोसे चुदाइ कर रहा था.. मंजु भी कपडे नीकालकर अपनी बारीका इन्तजार कर रही थी..





देर रात तब बारी बारी देवायत लता ओर मंजुकी चुतमे धमाके करता रहा.. आज देवायतने फीर लताकी हालत बीगाडदी.. लता भी अब देवायतसे खुलकर चुदवाती थी.. लेकीन फीर भी वो लखनको भुल नही पा रही थी.. खाली वक्तमे उसे लखनकी बहुत याद आती थी..

अब रातमे सांती ओर बंसीके साथ जागुती भी सोने लगी थी.. बंसी बारी बारी दोनोकी चुतमे धमाका करता.. लेकीन ज्यादातर सांती जागृती ओर बंसीको ही मीलनेका मौका देती.. ताकी दोनो भाइ बहेन अ‍ेक दुसरेके ओर करीब आजाये..





अबतक ना जाने बंसीने जागृतीको कीतनी बार चोद लीया था.. लेकीन जीतनी बार जागृती बंसीसे चुदवाती उतनी बार वो बंसी ओर सांतीसे छुपकर आइपीलकी गोली खा लेती.. ताकी वो बंसीसे प्रेगनेन्ट ना होसके.. उसने लखनको दीया हुआ वादा आज भी याद था..





तो इधर सहेरमे देर रात तीन बजे पुरे घरमे सनाटा छाया हुआ था.. ओर सबलोग वासनाका खेल खेलकर गहेरी नींद सो चुके थे.. सीवा लखन ओर भावना.. लखनको प्यास लगी.. तो वो आजु बाजु पानीकी बोटल ढुंढने लगा.. तभी उसे याद आयाकी भावना उनका इन्तजार करती होगी..

उसने अ‍ेक नजर सृतीकी ओर डाली.. सृती बेसुध जैसी हालतमे उनके सीनेपे हाथ रखते नंगी सो रही थी.. लखनने धीरेसे सृतीका हाथ हटाया.. ओर खडा होकर अलमारीसे भावनाके लीये लीया हुआ गीफ्ट जेबमे रख लीया.. ओर नीचे पहेले पानी पीने चला गया..

लखन फ्रिजसे पानीकी बोतल नीकालके पीने लगा.. उसे पता नही थाकी भावनाने उसे नीचे कीचनमे जाते हुअ‍े देख लीया हे.. ओर दबे पांव उनके पीछे आगइ हे.. लखन अंधेरे पानी पीकर जैसे जानेके लीये मुडा.. वो कीसीसे टकरा गया.. ओर धीरेसे सोरी सोरी बोलने लगा..

देखा तो हल्की रोसनीमे उसे भावनाका चहेरा दीखा.. तो भावना भी सर्मसार होते फ्रिजसे पानी नीकालकर पीने लगी.. लखन वही खडे रहेते उनकी ओर देखता रहा.. भावना पानी पीते हुअ‍े भी नजरे टेडी करते लखनकी ओर देखती रही.. फीर वो भी बोटल वापस रखते जाने लगी..

तभी लखनने उनका हाथ पकड लीया.. तो भावनाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो सर्मसार होते हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. लेकीन लखनने उनका हाथ कसके पकड रखा.. भावनाने हाथ छुडानेकी कोसीस छोडदी..

वो नजरे जुकाये अ‍ैसे ही खडी रही.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर हल्कासा पानी छोडते फडफडाने लगी.. वो मनसे चाहने लगीकी अभी लखन उसे पुरी तराह मसलदे.. ओर यही उसे चोदले.. लेकीन वो कुछ बोल नही पाइ.. वो चाहती थीकी पहेल लखन करे.. तभी..





भावना : (सरमाते कांपती आवाजमे धीरेसे) लखन भैया.. छोड दीजीये.. उपर मेरी बच्ची सोइ हुइ हे..

लखन : (खीचते पीछेसे बाहोमे जकडते पेटको सहेलाते) भाभी.. आप मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. आइ लव यु.. कबतक मुजसे दुर भागती रहोगी..? अ‍ेक दिनतो हम मीलने ही वाले हे..

भावना : (सरमसे लखनके हाथपे हाथ रखते) लखन भैया.. अभी मुजे जाने दीजीये.. ये सही वक्त नही हे.. कोइ हमे देख लेगा.. हम बादमे मीलते हेनां..

लखन : (पीछे गलेको चुमते) कोइ देखता हेतो देखने दोे.. सबको पता हे अ‍ेक दिन हमारे बीच सब कुछ होने वाला हे.. तो क्या प्रोबलेम हे..? खुलके प्यार कीजीये..





भावना : (सरमाते अपने होंठ आपस भीचते धीरेसे) प्लीज.. मुजे थोडा वक्त चाहीये.. जाने दीजीये.. हम बादमे मीलते हेनां..

लखन : (दोनो हाथ बुब्सपे रखते) हंम.. बादमे भी मील लेगे.. ओर कीतना वक्त चाहीये आपको..? खाते वक्त मेरा पैर सहेलाते आपने जवाब तो देदीया था.. आपके रुममे आया था.. मुजे पता हे आप भी वोही चाहती हे जो मे चाहता हु..





भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. तो फीर इतनी देर क्यु करदी..? मे कबसे आपका इन्तजार कर रही थी.. क्या सृतीदी.. सबलोग..

लखन : (गलेको चुमते बुब्सपे हाथ रखते) भाभी.. वो सब सो गये हे.. रजु दया भाभीके पास सोइ हे.. चीन्ता मत कीजीये.. आज हम दोनोका मीलन होकर ही रहेगा..

कहेते लखन भावनाके बडे बडे बुब्सको मसलने लगा.. तो भावना मदहोस होने लगी.. वो आधी आंख चडाते पीछे लखनके कंधेपे सर डाल देती हे.. ओर लखनके हाथको पकडकर हटानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. फीर खुद आंखोकी पुतलीया पलटते लखनके हाथको अपने बुब्सपे दबाने लगी..



 
तभी अचानक अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लखनने भावनाकी चुतपे हाथ रख दीया.. तो भावनाकी सीसकारीया नीकल गइ.. उनकी चुत ओर पनीयाने लगी.. ओर अपना हाथ लखनके हाथपे रख दीया.. ओर अचानक लखनकी ओर पलटते लखनको बाहोमे भीचलीया..





लखन : (बाहोमे भीचते) भाभी.. मेने दिनमे आपकी आखोंमे मेरे लीये प्यार देखा हे.. आपका वो पैर सहेलाना.. रातकी हमारी बाते.. क्या प्यार जताना इतना काफी नही हे..? अ‍ेक बार मेरी आंखोमे देखकर कहीये.. आप मुजसे प्यार नही करती.. मे आपको छोड दुगा..

भावना : (लखनको जोरोसे बाहोमे कसते) नही नही.. आइ लव यु.. आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे.. मेने रातमे काफी इन्तजार भी कीया.. लेकीन आप आये ही नही..

लखन : (कसके बाहोमे भीचते) अभी आगयानां.. मुजे अभी मीलना हे.. चलो अभी नीचे कोइ नही हे.. हम इस रुममे चले जाते हे..





भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) यहा नही.. मे रुममे अकेली हु.. वही चलते हे.. ताकी वीभा जाग जाये तो हमे पता तो चलेगा.. फीर आप अपने रुममे चले जाना..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी..

कहेते लखनने भावनाको गोदमे उठालीया.. तो भावना सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर उसने लखनकी गरदमे हाथ डालकर सरको सीनेमे छुपा लीया.. उनकी चुत फडफडाने लगी.. दोनो बुब्स कठोर होगये.. ओर लखन भावनाको गोदमे लेकर सीडीया चडने लगा..

ओर भावना वाले कमरेमे चला गया.. भावनाको बेडपे लीटाकर दरवाजा बंध करने चला गया.. तो भावना बेडपे सोइ अपनी बच्ची वीभाको गोदमे उठाकर उसे जुलेमे डाल देती हे ताकी बेडपे लखन ओर उनको कोइ डीस्टर्ब नाहो.. फीर आकर बेडपे सीमटकर बैठते सरमाने लगी..

जैसे अपनी सुहागरातमे अपने पतीसे पहेली बार मील रही हो.. उनके चहेरेपे लज्जा ओर खुसी साफ दीख रही थी.. वो सरमाते मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. तभी लखन उनके पास आगया.. ओर भावनाको धीरेसे बेडपे लीटा दीया.. फीर खुदभी उनके उपर जुक गया..





तो भावनाने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. भावनाके उपर आते लखनने उनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. ओर उनकी आंखोमे देखने लगा.. लखनको भावनाकी आंखोमे वासना साफ दीखाइ देने लगी..

वो लखनकी आंखोमे कामु्कातेसे देखे जा रही थी.. ओर लखनने धीरेसे अपने होंठ भावनाके होंठोपे रख दीया.. भावनाके तन कांप गया.. वो आंख बंध करते लखनके होठोको चुमने लगी.. ओर उनकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते पागल होने लगे.. लखन होंठ चुमते उनके बुब्सको भी मसलने लगा..





भावना : (कामुक सीसकारीया करते) ओह.. लखन भै..या.. आइ लव यु.. सीसस... आपने तो मुजे पागल करदीया.. कुछ कीजीयेनां.. आइ.. धीरे दबाओनां.. दर्द होता हे..

लखन : (कामुक्तासे धीरेसे बुब्स चुमते) क्या करु..? हंम.. बोलोनां..? डालदु..? हंम..?

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. डाल दीजीये.. मत तडपाइअ‍े..

लखन : (बुब्सको चुमते चुत सहेलाते) डाल दुगा.. थोडा प्यार तो करलु..

भावना : (अपने उपर खीचते) न..नही.. वो सब हम बादमे करगे.. अभी इतना समय नही हे हमारे पास.. वीभु जाग जायेगी.. डालीयेनां..

लखन : (होंठ चुमते) थोडा दर्द होगा.. सेह लीजीयेगा..

भावना : (जोरोसे बाहोमे भीचते धीरेसे कानमे) नही होगा.. दो दो बच्चे हो गये हे.. आपके भाइने मुजे अ‍ेक हप्ते खुब रगडा हे.. मेरे दर्दकी परवाह मत कीजीये.. कपडे नीकालदु..? हंम..?

कहा तो लखन फटाफट भावनाके उपरसे हट गया.. ओर अपने कपडे नीकालने लगा.. तो भावना भी बेडपे बैठकर अपना गाउन नीकालने लगी.. वो रातमे पेन्टी ओर ब्रा नही पहेनती थी.. तो गाउन नीकालते ही वो पुरी नंगी होगइ..

जब लखनने कपडे नीकाल दीये तो भावनाने उनका हाथ पकडकर अपने उपर खीचते बेडपे लेट गइ.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. दोनो वासनामे अंधे होगये.. ओर अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगे.. भावना लखनके सरको अपने बुब्सपे दबाने लगी..





लखन दोनो बुब्सको बारी बारी चुमते चुमते सरकते भावनाके दोनो पैरोके बीच आ गया.. ओर भावनाकी चुतको खरोदने लगा.. तो भावना पागल जैसी होने लगी.. दोनो हाथसे चदरको पकडकर छटपटाने लगी.. अब इनसे लखनकी हरकत बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. भावना जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर लखनका हाथ खीचकर अपने उपर चडा देती हे..





भावना : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) ल..ख.न.. अब ओर नही.. डाल दीजीये.. मुजसे रहा नही जाता.. अ‍ैसा प्यार करनेके लीये हमारे पास पुरी जींदगी पडी हे.. अब आपको ही मेरा खयाल रखना हे.. चोद लीजीये मुजे..

कहेते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर लखनके लंडको पकड लेती हे.. तभी उसे अहेसास हुआ की लखनका लंडतो देवायतसे भी बडा हे.. अ‍ेक पल तो वो लंडको पकडते ही कांप गइ.. ओर उसने हिंमत करते लखनके लंडको अपनी चुतपे सेट करदीया..





ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते अपनी कमर उची करने लगी.. तभी लखनने भावनाके दोनो पंजोको कसके पकडलीया.. ओर लीपलोक करते अपनी कमरको जोरोसे जटका दीया.. अ‍ेक ही बारमे लखनने अपना आधा लंड भावनाकी चुतमे धुसा दीया..





तो भावनाकी चीख नीकल गइ.. ओर लखनके मुहमे ही दब गइ.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. तभी लखनने अ‍ेक ओर जटका मारा.. ओर पुरा लंड चुतकी गहेराइओमे धुसा दीया जो भावनाकी बच्चेदानीसे टकराया..





भावन चीखते बेहोस होगइ.. ओर लखन हाथके बल उचा होते भावनाको जोरोसे चोदने लगा.. लेकीन भावना बहुत जल्दी होसमे आगइ.. तो लखन भावनापे लेटते उनसे चीपक गया.. भावना दर्दसे मुह बीगाडते लखनकी पीठको अपने नाखुससे खरोदने लगी..



 
लखन उनके बुब्सको ओर होठोको चुमता रहा.. भावनाका दर्द बहुत जल्द खतम होगया.. ओर सीसकारीया करते अपनी कमर उछालने लगी.. लखन अ‍ेक बार फीर भावनाको जोरोसे चोदने लगा.. दोनो वासनामे अंधे हो चुके थे.. कुछ देरके बाद भावनाने लखनको जोरोसे अपने तनसे चीपका लीया..





ओर लीपलोक करते अपनी कमरको उछालते जटके मारने लगी.. लखनके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगी.. तो लखन लंडपे गरमाहट महेसुस करते ओर उतेजीत हो गया.. ओर हाथके बल उचा होते भावनाकी टांगोको अपने कंधेपे लेलीया ओर भावनाको जोरोसे चोदने लगा..





भावना : (दर्दसे तीलमीलाते) ल..ख..न.. धी.. धी..रे.. चो..दो.. दर्द.. हो..ता..हे..

भावना तीलमीला उठी.. वो भी चदर पकडकर छटपटाने लगी.. लखनने भावनाको अ‍ेक बार ओर जडा दीया.. ओर भावनाके उपर लेटते भावनाकी गरदनमे हाथ डाल दीया.. भावनाको अपने तबसे चीपकाते होठ चुमते चोदने लगा.. तो भावना भी उसे जोरोसे बाहोमे भीचते कमर उछालती रही..





दोनोके बीच २० मीनीट तक घमासान चुदाइ हुइ.. ओर आखीर लखन भावनाकी चुतमे जड तब लंड घुसाते अपनी कमरको जटके देने लगा.. ओर अपने गाढे पानीसे पीचकारीया छोडते जडने लगा.. भावनाको अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ..





ओर वो उतेजनासे कांपते लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते लीपलोकर करते साथ जडने लगी.. दोनो पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. लखन भावनाके सीनेपे ढेर होते पडा था.. ओर भावना धीरे धीरे उनकी पीठ सहेलाते जुलेकी ओर देखने लगी.. की कही उनकी बच्ची जागतो नही गइ..

आखीर वो लखनसे चुद ही गइ.. जबसे पुनम ओर सृतीसे लखनके बारेमे बात सुनी तबसे ही भावना लखनके साथ रीलेशन रखनेका मन बना चुकी थी.. यहा आइ तबसे लखनके साथ मस्तीया ओर आंख मीचोली खेलते लंचके समय पैर सहेलाते मुक सहेमती देदी थी..

ओर रात मे तो लखनको खुला नीमंत्रण भी दे चुकी थी.. यही सब सोचते रातमे उसे लखनके इन्तजारमे नींद नही आ रही थी.. ओर देर रात उसने लखनको नीचे जाते देख लीया.. तो भावना भी अपने आपको रोक नही पाइ.. ओर लखनके पीछे नीचे चली गइ..

भावना : (सरमाते धीरेसे) लखन.. आइ अ‍ेम सो हेप्पी.. मजा आगया.. आखीर हम दोनोका मीलन हो ही गया.. मे कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रही थी.. जबसे आपने मुजे लंचपे नीचे छेडाथा तबसे कही चैइन नही मील रहा था.. ओर मे आपसे मीलन करनेका मन बना चुकी थी.. लखन.. आइ लव यु..

लखन : (होंठ चुमते) लव यु टु भाभी..

भावना : (मुस्कुराते) भाभी नही.. सीर्फ भावना..

लखन : (होंठ चुमते) आप मेरी भाभी हो..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभीको चोदलीया.. फीर भी भाभी कहोगे..? लखन.. आजसे मे आपकी भावना हु.. जब हम दोनो अकेलेहो तो नामसे बुलाना.. मुजे क्या पता आपका हथीयार जीजुसे भी दमदार हे.. वरना मे आपसे ही सादी कर लेती.. खैर छोडीये.. अब तो मंजुदीने हम सबको पुरी छुट देदी हे.. तो क्या फर्क पडता हे आपकी भाभी होकर चुदवाउ या आपकी बीवी.. अब उपरसे उतरना नही हे क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. पहेली बात.. मुजे बीवीसे ज्यादा अ‍ैसे रीस्तोमे रीलेशन रखना अच्छा लगता हे.. मानो बहेन.. भाभी.. चाची.. बुआ.. तो आप मेरी भाभी ही ठीक हे.. ओर दुसरी बात.. मेरी कीसी भी बीवीको पुछ लेना मे भी भाइकी तराह दो बार करता हु..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) ओ बापरे.. दोनो भाइ अ‍ैसा कहासे सीखकर आये हे..? वो भी दो बारसे पहेले मेरे उपरसे उतरते नही थे.. ओर अ‍ेक आपके साले.. कमीनेको कुछ आता ही नही हे.. बस.. उपर चडा पानी नीकाला ओर सो गया.. सुना हे आज कल वहाके मजदुरकी बीवीको रखेलकी तराह रखता हे..

लखन : (बुब्स मसलते होंठ चुमते) भाभी.. छोडोना उनको.. आप उनसे अलग तो होगइ हे.. अब उसे याद करके क्या फायदा..? आप तो बस यहा मजे करो.. अब आपकी जीम्वेवारी हमारी हे..

भावना : (गालपे हल्कीसी चपत लगाते मुस्कुराते) फीर भाभी..? अरे बाबा अब मे आपकी भावना हु.. आप प्यारसे भावु भी बोल सकते हो.. अच्छा ये बताओ.. पुनोदीदीके साथ कीतना मजा कीया..?

लखन : (होंठ चुमते) भावु.. पुछो ही मत.. दोनोने पुरी रात प्यार कीया.. मेरी अ‍ेक फेन्टासी थी.. मेने डीसाइड कीया था.. की अ‍ेक बार उपर चडुगा ओर अंदर डालुगा तो सुबह ही नीचे उतरुगा ओर तब ही नीकालुगा.. मेने पुनोको लगातार पांच बार चोदा.. तब जाके नीचे उतरा.. फीर सुबह भी गुड मोर्नींग कीया.. उसे दो बार चोदकर..

भावना : (सरमाकर हसते) तभी बेचारीकी हालत बीगडी हुइ थी.. दोनो के दोनो भाइ बडे ही कमीने हो.. जीजुको भी.. ओह.. सोरी.. सोरी.. अब तो वो भी मेरे पती हे.. उनको भी अ‍ैसी गुड मोर्नींगकी आदत हे.. ओ बापरे.. अभीभी अंदर सख्त महेसुस होता हे.. ओर जटके मार रहा हे.. अगर कोइ दिकत नही हेतो फीरसे सुरु करे..?





ओर लखन फीरसे कमर हीलाते भावनाको चोदने लगा.. इस बार भी दोनोके बीच घमासान चुदाइ हुइ.. भावनाको दोदो बार जडाते तीसरी बारमे दोनो साथमे जड गये.. भावनाका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. फीर दोनो सावर लेने बाथरुममे घुस गये..





वहा भी साथमे सावर लेते अ‍ेक दुसरेको नहेलाने लगे.. ओर फीरसे दोनो उतेजीत हो गये.. तो लखनने अ‍ेक बार फीर भावनाको खडे अडे चोद लीया.. आज भावना पुरी तराह संतुस्ट हो चुकी थी.. वो ठीकसे चल भी नही पा रही थी.. फीर दोनोने अपने कपडे पहेनलीये.. तभी..
 
भावना : (सरमाते मुस्कुराते) लखन.. आजसे ये भाभी आपकी हो गइ हे.. आपको मुजसे जब भी मीलनेका मन होतो बता देना.. मे मना नही करुगी.. आजसे मेरा खयाल आपको ही रखना पडेगा.. मुजे अ‍ैसा ही प्यार चाहीये जो अभी आपने दीया.. समज गये..?

लखन : (मुस्कुराते जेबसे सोनेका चेइन नीकालते) आपतो मेरी होगइ.. लीजीये पहेना देता हु.. हमारे पहेले मीलनकी गीफ्ट.. जो आपको हर पल हमारे मीलनकी याद दीलायेगी..

भावना : (खुस होते चेइन डलवाते) हंम.. बहुत छुपे रुस्तम हो.. अपने हाथोसे पहेना दीजीये.. आजसे ये भावना आपकी होगइ.. प्रोमीस करो हम जब चाहे मीलन कर सकते हे..





लखन : (चेइन पहेनाकर बाहोमे भरते) ठीक हे भावु.. आइ प्रोमीस.. चलो.. मे चलता हु..

ओर लखन वापस जाने लगा.. तो भावनाने उनका हाथ पकडलीया.. भावना लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर लखनके होठोको चुमते उनको थेन्क्स कहा.. फीर लखन अपने रुममे आगया.. ओर बेडपे आकर सृतीसे चीपककर सो गया.. ओर इधर भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइ.. ओर अ‍ैसे ही रात बीत गइ..

सुबह रजीया ओर दया पहेले जागकर कंपलीट होगइ.. ओर आदतके हिसाबसे घरका काम नीपटाकर कीचनमे चली गइ.. ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. सृती आंख खोलकर देखती हे.. तो लखन घोडे बेचके सो रहा था.. तो सृती धीरे धीरे चलकर बाथरुममे चली गइ..

ओर अपना नीत्य करके कंपलीट होगइ.. उसे लखनको जगाना उचीत नही लगा.. ओर वो धीरे धीरे चलते नीचे चली गइ.. भावना अभी भी सो रही थी.. जब उनकी बच्ची रोने लगी.. तब जाके वो नींदसे जागी.. तो काफी देर होगइ थी.. वो उठकर बच्चीको दुध पीलाने लगी..

फीर वोभी कंपलीट होने बाथरुममे घुस गइ.. ओर अंदर जाते वक्त सृतीने दी हुइ कीट भी लेगइ.. उनपे पीसाब करके देखा तो रीजल्ट पोजीटीव था.. वो देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर भावनाके चहेरेपे खुसीकी मुस्कान आगइ.. ओर नहाकर कंपलीट होकर बच्चीको लेकर नीचे सृतीके पास आकर बैठ गइ..

भावना : (मुस्कुराते) गुड मोर्नींग अ‍ेवरी बडी..

सृती : (मु्स्कुराते) गुड मोर्नींग भावुदीदी.. क्या बात हे आज बडी खुस लग रही हो..? आप अ‍ैसे क्यु चल रही हे..? कुछ हुआ हे क्या..?

भावना : (थोडी जेंपते जुठ बोलते) नही.. न..ही.. वो.. कल रात बाथरुम जा रही थी.. बेडसे उतरते थोडा पैर मुड गया था.. तो थोडा दर्द हो रहा हे.. ओर कुछ नही..

सृती : (मुस्कुराते) ज्यादा चोटतो नही लगी..? दीदी.. वो कल मेने कीट दी थी.. चेक करलीया..?

भावना : (सरमाते मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाते) हंम.. करलीया.. सृतीदी.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट..

सृती : (खुस होते) व्होट..?

भावना : (थोडी मायुस होते) हंम.. क्या करु..? पता नही मंजुदीको इतनी जल्दी क्यु थी.. मेरी वीभाको थोडी बडे होने देती.. डेढ साल ही तो हुआ हे.. ओर फीरसे प्रेगनेन्ट..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) आपकी मंजुदीदीने सही कीया हे.. जब ये बच्चा होगा तब वीभा ओल मोस्ट ढाइ सालकी होजायेगी.. मोम अ‍ैसे ही कुछ नही कहेती.. कुछ तो रीजन होगा.. खैर वो लखन अभी भी सोये पडे हे.. उनको जगाना पडेगा.. पुनोदीको लानेके लीये जाना हे.. आप जगादोगी.. प्लीज..

भावना : (सरमाते जटसे) अरे नही नही.. आप.. रजुदीदीको कहीयेनां.. (सरमाते धीरेसे) दोनो भाइको गुड मोर्नींग मे करनेकी.. मीन्स.. आप समज गइनां..?

सृती : (जोरोसे हसते फीर धीरेसे) अरे तो क्या हुआ.. अ‍ेक दिनतो उसे मीलना ही हे.. कल रात बहुत अच्छा मौका था.. सीर्फ मे ओर लखन ही थे.. खैर छोडीये मे रजुदीको कहेती हु.. (जोरसे आवाज लगाते) रजुदी.. जरा लखनको जगा दीजीये.. उसे पुनोदीको लेने जाना हे.. फीर हमे भी नीकलना हे..

रजीया : (हाथ पोछते कीचनसे बहार आते) जी दीदी.. जगाती हु.. दया दीदी भी वोही केह रही थी..

कहेते रजीया उपर चली गइ.. ओर लखनको दुरसे ही खडी होकर हीलाकर जगाने लगी.. तो लखन सोने दोनां.. कहेते करवट लेकर सो गया.. तो रजीयाने पुनमको लेने जानेकी बात कही.. तो लखन उठकर बेडपे बैठ गया.. ओर रजीयाकी ओर सरारतसे मुस्कुराने लगा.. रजीया उनका इरादा जान गइ.. ओर जटसे दुर जाकर खडी होगइ..

रजीया : (हसते) आज कोइ गुड मोर्नींग वीस नही.. फटाफट नहा लीजीये मे बादमे कपडे देती हु..

लखन : (मुस्कुराते खडा होते) रजु.. चलना.. सीर्फ अ‍ेक बार.. यहा कोइ नही हे.. अभी हो जायगा..

रजीया : (हसते बहारकी ओर जाते) ना बाबा ना.. मुजे पता हे आपका अ‍ेक बार.. घडीमे देखो कीतने बजे हे.. नीचे सब आपका इन्तजार कर रहे हे.. ओर हमे जाना भी हे.. ओर अभी आपको पुनोदीको लेने भी जाना हे.. चलीये नहा लीजीये..

कहेते रजीया हसते हुअ‍े रुमसे बहार नीकल गइ.. ओर थोडी दुर जाकर खडी होगइ.. जैसे ही बाथरुमके दरवाजेकी बंध होनेकी अवाज आइ वो फटाफट अंदर आकर लखनके कपडे अलमारीसे नीकालती हे.. ओर बेडपे रखकर फटाफट नीचे चली गइ.. ओर हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. जीसे देखकर सृती ओर भावना भी जोरोसे हसने लगी..

सृती : (जोरोसे) रजुदीदी.. लगता हे आज आप बच गइ.. हें..हें..हें..

रजीया : (कीचनसे) ओर नही तो क्या..? इनको तो सारा दिन यही सुजता हे.. पता नही पुनोदीने इनको कौनसी जडी बुटी पीलाइ हे.. हर वक्त तैयार रहेते हे..

दया : (चाइ उबालते मुस्कुराते धीरेसे) रजु.. क्या लखन भैयाका सचमे बडा..? मीन्स..

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) अरे हां बाबा.. अभी तुमने देखा नही हे.. जब अ‍ेक बार इनका स्वाद चखोगीनां बडे भैयाको भी भुल जाओगी.. वैसे भी अब मंजुदीने सबको छुट देदी हे.. तो अ‍ेक बार आप भी सोचना..

दया : (सर्मसार होते धीरेसे) नही यार कैसे..? अभी अभी तो मेरी भाइके साथ नइ नइ सादी हुइ हे.. कुछ महीने तो इनके साथ गुजारने दे.. बाकी बादमे सोचुगी.. रजुदी.. आज हम दोनोका सपना पुरा होगया..

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) दयादी.. बस.. अब अ‍ेक ही सपना रेह गया हे.. मां बननेका.. मुजे लगता हे हम दोनोका वो सपना भी जल्द पुरा होजायेगा..

दया : (सरमाते धीरेसे) हंम.. मेरा भी.. हम दोनोका यही तो सपना था.. अरे सुन.. वो जया बहेन रमेशभाइको लेकर यहा सहेरमे आ गइ हे.. सुना हे हमारे बगलोके पास ही उनका नया घर हे..?

रजीया : (मुस्कुराते) हंम.. दोनोने कोर्टमे सादी करली हे.. यहा खानेपे आयेथे दोनो.. अभी हनीमुन मनाने गये हे.. पास ही सोसायटीमे रहेते हे..

दया : (मुस्कुराते) रजुदी.. गांवमे कीतना कुछ होने लगा.. हेनां..? सुना हे जया बहेनकी लडकीने भी उनके भाइके साथ सादी करली हे.. उनका भाइ भी लखन भैयाके दोस्त हेनां..?

दोनो गांवकी बाते करते चाइ नास्ता बनालेती हे.. तबतक लखन भी कंपलीट होकर नीचे आ गया.. ओर पुनमको फोन कीया.. तो पता चला उन्होने वही चाइ नास्ता करलीया हे.. ओर अभी लखनका इन्तजार कर रही हे.. तो सबलोग चाइ नास्ता करने बैठ गये..
 
आन भावना लखनसे नजरे चुराते बहुत सरमा रही थी.. उनकी चुत लखनको देखते ही फीरसे फडफडाने लगी.. ये सोचते की लखनने उनको दो घंटे लगातार चौदा था ओर उनकी हालत पतली करदी थी.. मंजु ओर पुनमके अलावा कीसीको पता नही थाकी भावनाने लखनसे अपनी चुदाइ करवाली हे.. तभी..

सृती : (मुस्कुराते अ‍ेक कागज देते) लखन भैया.. पुनोदीको लेने जा रहे होना..? तो प्लीज.. क्लीनीकसे मेरा कुछ सामान लेना हे.. लादोगे..?

लखन : (चीठी लेते) अभी..? जरुरी हे क्या..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे हां.. वो.. हम गांव जा रहे हेतो मम्मीका वंदना ओर कुछ दुसरी ओरतोको चेक करना हे.. आपके बडे भाइकी ओर बीवीया भी पेटसे हे.. उनको भी चेक करलुगी.. इसीलीये.. आप सामान लेकर पुनोदीदीको लेने चले जाना..

लखन : (होठ चुमकर) यस दीदी.. आइ मेनेज.. मे लेकर आता हु आप क्लीनीकपे फोन करदेना सामान तैयार रखे..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे कुछ तो सरम करो.. यहा सब हे.. हां.. वो रीसेपनीस्टको ये चीठी देना.. आपको दे देगी..

भावना : (हसते) सृतीदी.. अब सरमाना कैसे..? हम सब अ‍ेक ही कस्तीमे सवार हे..

रजीया : (हसते) भावुदी.. सीर्फ मे सृतीदी ओर पुनम दीदी सवार हे आप नही.. हें..हें..हें..

भावना : (मनमे) रजु अब तुजे कैसे कहु..? की तेरे पतीने कल रात ही मुजे भी अपनी कस्तीमे खीच लीया हे.. ओर मुजे खुब रगडा हे तेरे पतीने.. अभी भी नीचे थोडीसी जलन हो रही हे..

फीर चाइ नास्ता करते लखनने सबको रेडी रहेनेको कहेते वहासे नीकल गया.. ओर क्लीनीकसे सृतीका सामान लेकर सीधा राधीकाके घरपे पहोंच गया.. लखनने राधीकाकी मम्मीका हालचाल पुछा.. फीर राधीकाके रुममे चला गया.. तो वहा पुनम ओर राधीका बाते करते बैठी थी..

लखनको देखते ही राधीका उनसे लीपट गइ.. तभी लखनने राधीकाके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसल दीया.. तो पुनम हसने लगी.. ओर लखनने राधीकाको छोडकर पुनमको भी जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर पुनमके होंठ चुम लीये..





राधीका : (मुस्कुराते) लखन.. आपतो छुपे रुस्तम नीकले.. पुनोदी को मील लीया ओर मुजे पता भी नही चला..?

लखन : (मुस्कुराते) थेन्क्स राधु.. ये सब तुम्हारी बदौलत हुआ.. अगर मेरे दिलकी बात पुनोदी तक नही पहोंचाती तो आज मुने पुनोदी नही मीलती..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भैया.. सोरी अगेइन.. मेने आपका प्यार नही स्वीकारके बहुत बडी गलती की.. लेकीन अब मे बहुत बहुत खुस हु..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. छोडो ये बाते.. अब तो हम दोनो मील गयेनां..? देखना मे तुम सबको बहुत खुस रखुगा.. अब चलीये देर हो रही हे.. राधु.. तुम ओर मम्मी भी चलोनां..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) नही जानु आप ही चले जाओ.. मम्मीको अ‍ैसी हालतमे लेजाना ठीक नही हे..

लखन : (मुस्कुराते हग करते) हंम.. चलो तो फीर हम ही चलते हे.. दो तीन दीनके बाद वापस आजाउगा..

राधीका : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) जानु.. अ‍ैसे ही चले जाओगे..? देखो यहा आपकी दो दो बीवीया हे.. मीलोगे नही..? हंम..? देखना बहुत जल्द हम तीनो अ‍ेक साथ बीस्तरपे होगे..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) राधुदी.. प्लीज..? इनको अभी याद मत दीलाइअ‍े.. बडे बेसर्म हे ये.. वरना ये जनाब अभी यही सुरु होजायेगे.. हम दोनो कंपलीट होगइ हे.. ओर हमे यहासे सीधा हमारे मंदिरपे जाना हे.. ओर हां.. हो सके तो आप हम दोनोकी सादीमे जरुर आना.. फीर तो सादी करके मे इधर ही आ रही हु.. ओर आप भी अपना बोरीया बीस्तर बांधलो.. अब आपको हमारे साथ ही रहेना हे..

राधीका : यार मुजे तो वहा बहुत मजा आ रहा था.. पर क्या करु..? मम्मीकी वजहसे यहा आना पडा.. ओर सायद इनकी वजहसे सादीमे भी नही आपाउगी..

लखन : (हसते) दी अभी तो चलो.. हम वापस आनेके बाद देख लेगे.. देखता हु ये वहा कैसे नही आती..

राधीका : (सरमाते बाहोमे समाते) अरे आजाउगी बाबा.. मेरा भी मन आपसे जुदा होनेका नही करता.. अब तो हम दोनो आपकी सौतन होजायेगी.. देखना हम आपको खुब प्यार करेगी..

पुनम : (हग करते) ठीक हे दी हम चलते हे मम्मीजीका खयाल रखीयेगा.. चलो बाय..

कहा तो लखनने अ‍ेक बार फीर राधीकाको बाहोमे भरते होंठ चुम लीये.. फीर बाय कहेते लखन पुनमको लेकर वहासे नीकल गया.. तो कारमे बैठते ही पुनम दांत पीसते जुठे गुस्सेसे लखनकी बाजुमे मुका मारने लगी.. तो लखन जोरोसे हसते पुनमसे बचनेकी कोसीस करने लगा..

लखन : (जोरोसे हसते बचते) दीदी.. क्यु मार रही हो..? बताओतो सही मेने क्या कीया..?

पुनम : (कातील नजरोसे) क्या कीया..? भाइ मुजसे पुछ रहे होकी क्या कीया..? मे अ‍ेक रात बहार क्या रही.. अपने भावना भाभीको ठोक भी लीया.. बेचारीकी हालत खराब करदी.. ओर मुजसे केह रहे हेकी मेने क्या कीया..?

लखन : (हसते) ओह.. सोरी सोरी.. दीदी.. क्या हेना.. वो सुबहसे ही मेरी मस्ती कर रही थी.. ओर लाइन दे रही थी.. रातको सृतीका गाउन लेने गया तो मुजे नीमंत्रण देदीया.. तो रातमे हम मील गये.. ओर हमारे बीच सबकुछ हो गया.. क्या आपको बुरा लगा..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) नही भाइ.. बुरा नही लगा.. अ‍ेक दिन तो ये सबकुछ होने ही वाला हे.. बस.. थोडीसी ज्वेलेसी फील हुइ.. अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. की कही हम दोनोके बीचका प्यार कम ना होजाये.. क्युकी मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (कारमे बैठते ही हग करलीया) दीदी.. अ‍ैसा क्यु सोच रही हो..? आप मेरा पहेला प्यार हो.. आइ प्रोमीस.. आपके ओर सृतीदीदीके साथ कभी प्यार कम नही होगा.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु..

पुनम : (आंख साफ करते मुस्कुराते) भाइ.. थेन्क्स.. चलो.. सृतीदीदीके लीये कुछ सामान लेना हे.. तो कोइ दुकान दीखे तो रोक लेना..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. दीदी.. मुजे कुछ बताने वाली थी.. हमारी सरलाकाकीके बारेमे.. फीर हमे टाइम नही मीलेगा..

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) बडी जल्दी हे उनके बारेमे जाननेकी..? ठीक हे सुनो.. भाइ वो बहुत ही कामी ओरत हे.. जब जवानीकी दहेलीजपे अपना कदम रखा.. तो अपने छोटे भाइकी नुनीके साथ खेलती थी..

लखन : (मुस्कुराते) क्या छोटी उमरमे ही..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. जब भाइ भी जवान होगया.. तो उसने अपने भाइसे ही अपना कौमार्य भंग कीया.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट होगइ.. उनकी मांको सब पता चल गया तो बच्चा गीरवाके उनकी सादी छोटी उमरमे ही विरजी अंकलसे करदी गइ.. ओर सरला काकीको अपने घरपे आनेके लीये मना करदीया..

लखन : (आस्चर्यसे) तो क्या काकी उनके मायके कभी नही गइ..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. फीर तो उनका भाइ भी सादीके लायक होगया तो उनकी मांने उनकी सादी रमा भाभीसे करवादी.. वो भी पैसे देकर.. ओर यहा सरला काकी वीरजी अंकलसे संतुस्ट नही होती थी.. तो उसने हमारे बापुके साथ रीलेशन रख लीया.. ओर भानु भाइ ओर हमारी लता बापुकी ही संतान हे.. जब वीरजी अंकल ओर बापु नही रहे तो सरला काकीने बडे भैयाको फसालीया..
 
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