Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 115 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

धृवकी मम्मी ओर धृव अ‍ेक दुसरेकी ओर देखने लगे.. उनको अभी भी यकीन नही हो रहा थाकी दोनो चुदाइ करते पकडे गये.. ओर इतना कुछ हो गया.. दोनो नीरास होते बेडपे बैठ गये.. लेकीन धृवको अब भी भावीकाके उपर यकीन नही था.. ओर उसने अ‍ेक फैसला करलीया ओर अपना फोन उठाया.. फीर कीसीसे बात करने लगा.. ओर फोन रख दीया..

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) कीसको फोन कीया..?

धृव : (सामने देखते) मोम.. अब ये हमारे लीये खतरा बन चुकी हे.. हम इनपे भरोसा नही कर सकते.. इनको अ‍ेक्सीडन्टमे..

धृवकी मम्मी : (धृवके गालपे अ‍ेक तमाचा मारते) हरामी.. तेरा बाप क्या कम था जो अब तुभी ये सब करने लगा.. तेरे बापसे तो तंग आ चुकी हु.. कमसे कम तुतो सुधरजा.. क्या तुने सुना नही उसने क्या कहा..? उसे भी अपनी जानकी परवा हे.. जब वोही डरती हे तो ये सब करनेकी क्या जरुरत हे..? उसे मना करदे.. उनको कुछ ना करे..

धृव : (सामने देखते) लेकीन मोम..

धृवकी मम्मी : (जोरोसे) अरे मना कर उसे.. तुमने सुना नही क्या..? (सांत लहेजेमे) बीटु.. मेने तेरे पापाको तो खो दीया हे.. मे तुजे खोना नही चाहती.. मेने तेरे साथ क्या क्या सपने सजाये हे.. तु कुछ मत कर.. मुजे ही कुछ सोचने दे.. कुछ अ‍ैसा.. जो साप भी ना मरे.. ओर लाठी भी टुट जाये..

धृव : (सामने देखते) मतलब..? मे कुछ समजा नही..

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) धृव.. अ‍ेक बात बता.. तु मुजे ओर तेरी बहेनको कीतना प्यार करता हे..?

धृव : (सामने देखते) अपनी जानसे भी ज्यादा.. क्यु..?

धृव : (सामने देखते) क्या जींदगीभर मेरा साथ नीभा सकता हे..? मे ओर पुजा हम दोनो ही तुजे खुस रखेगी.. मुजसे सादी करेगा..?

धृव : (सामने देखते) येस मोम.. येतो पुजादी ओर आपके कहेने पे मेने सादी की.. वरना मे आप दोनोसे ही खुस था.. आइ प्रोमीस.. मे जीदगीभर आपका साथ नीभाउगा.. जब आप कहो मे आपसे सादी भी करलुगा.. ओर मेने आपको कइ बार कहा भी हे.. की मुजसे सादी करलो..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते गले लगते) बस.. मुजे तुमसे यही उमीद थी.. सुन.. हमने आज तक जो भी कुछ कीया उनका मुजे कोइ पछतावा नही हे.. ओर असली खतरा ये लडकी नही हे..

धृव : (आस्चर्यसे देखते) तो फीर कौन हे..?

धृवकी मम्मी : (आंखोमे देखते धीरेसे) तेरे पा..पा.. जीतना डर हमे तेरे पापाका हे इतना डर इस लडकीसे नही हे.. वो अ‍ेक डोक्टर हे.. अपनी जान जोखीममे नही डाल सकती.. देखा नही डीवोर्स पेपर पहेलेसे ही रेडी रखे थे.. वो खुद डरी हुइ हे.. अब इस लडकीको भुलजा.. हम दोनो अपनी अलग दुनीया बसायेगे..

धृव : (सामने देखते) मोम.. तो फीर क्या करे..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) हमे कोइ गलत कदम नही उठाना.. अब जो भी करुना हे.. मे करुगी.. तु बस.. देखता जा ओर मेरा साथ दे.. अगर सब सही हुआ.. तो आइ प्रोमीस.. हम दोनो जींदगी भर साथ रहेगे.. फीर मुजे ओर अ‍ेर्बोसन करजानेकी जरुरत भी नही पडेगी.. मे हमारे प्यारकी नीशानी इस दुनीयामे लाउगी..

धृव : (खुस होते बाहोमे भरते) मोम सच..? आइ लव यु..

धृवकी मम्मी : (होंठ चुमते) लव यु टु मेरी जान.. जा पहेले नीचे जाकर देखले.. वो क्या कर रही हे..?

धृव : (नीचेकी ओर जाते) मोम.. कल सुबह अ‍ेक हप्तेके लीये बोम्बे अपनी कोन्फरन्स ओर ट्रेनींगके लीये जाने वाली थी.. देखकर आता हु..

धृव दोडके नीचे जाता हे.. ओर अपने कमरेमे जाकर देखता हे.. अलमारी खुली थी.. भावीकाके सभी कपडे गायब थे.. उनके सभी पेपर गायब थे.. धृव समज गयाकी भावीकाने घर छोड दीया हे.. तभी उसे सीक्युरीटी गार्ड जो अ‍ेक बडी उमरका हे वो याद आगया.. वो जटसे वही चला गया..

धृव : (जटसे) दादा.. आपने भावीकाको देखा..? उनकी कार भी नही हे..

सीक्युरीटी : (थोडी परेसानीमे) बेटा क्या हुआ..? बहु रानी तो चली गइ.. कहेती थी बहारगांव जाना हे..

धृव : साथमे कोइ सामान था..?

सीक्युरीटी : (सामने देखते) हां बेटा.. दो बडे बडे सुटकेश थे.. मेने खुद अपने हाथोसे कारमे रखवाये.. आज कार भी उन्होने बहार रखी थी.. अंदर रखनेको कहा.. तो कहाकी अभी देर रात नीकलना हे..

धृव : (वापस आते) ठीक हे दादा.. आप ध्यान रखीये..

कहेते धृव वापस अपने रुममे चला गया.. इस बार सब अलमारी चेक करने लगा.. भावीकाका अ‍ेक भी सामान नही था.. वो धृवकी सभी गीफ्ट ओर उनके दीये गहेने भी वही छोडके गइ थी.. ससुरलाका अ‍ेक भी सामान नही लीया था.. तो धृव वापस अपनी मम्मीके पास चला गया..
 
धृवकी मम्मी : (सामने देखते) क्या हुआ..?

धृव : (बेडपे पास बैठते) मोम.. वो पेपर साइन होते ही अपना सब सामान लेकर घर छोडकर चली गइ.. हमारा दीया हुआ सामान छोड दीया.. गहेने भी..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बडी खुदार लडकी हे.. ठीक हे.. भुलजा उसे.. ओर हां.. जीनको भी फोन कीया हे उसे कहेदे वो भावीकाके साथ कुछभी ना करे..

धृव : (सामने देखते) मोम.. अब क्या करे..? मतलब.. आपका नेक्स्ट प्लान..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) धृव.. अब जीतनी जल्दी हो सके हम दोनोका सामान दुसरी जगाह पे सीर्फट करदे.. अ‍ैसी जगह.. जहा हमे कोइ पहेचानते ना हो.. ओर पुजाके नजदीक भी हो.. मतलब अहेमदाबादके आस पास.. दुसरे सहेरमे.. तु समज गयानां..?

धृव : (सामने देखते धीरेसे) हां मोम.. हे अ‍ेक बंगलो.. पापाने अपने लीये खरीदा हे.. अहेमदाबाद ओर गांधीनगरके बीचमे.. अ‍ेक हाइप्रोफाइल सोसायटीमे.. जबभी पार्टीके कामके लीये गांधीनगर जाते थे तब वही रुकते हे..

धृवकी मम्मी : (आस्चर्यसे देखते) अच्छा.. उन्होने मुजे तो कभी नही बताया..?

धृव : (थोडा जीजकते) मोम.. पापाने अभी आपको बतानेके लीये मना कीया था.. वो.. वो अपनी पार्टी वर्करोके साथ वहा रुकते थे.. आप समज गइनां..?

धृवकी मम्मी : (अपने सरपे हाथ रखते) हे भगवान.. तुम दोनो बाप बेटे ना जाने कहा कहा अयासीया करते हो.. बस.. सीर्फ घरकी ओरत ही अच्छी नही लगती.. तुभी वहा गया हेनां..?

धृव : (मुस्कुराते धीरेसे) बस.. सीर्फ तीन चार बार ही.. पुजा दीदीको लेकर.. हें..हें..हें..

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) चलो.. कमसे कम मेरे सामने सच तो बोला.. अ‍ेक टाइम था.. जब वो मेरे चाचा थे.. हमारी सादी भी नही हुइ थी.. मे हाइस्कुलमे पढती थी.. तब मेरे चाचाने मेरी खुब चुदाइ की हे.. हम दोनोने छुप छुपकर तेरी तराह खुब खेल खेला हे.. ओर मुजे पेटसे करदी.. बस.. हम दोनो वहासे भागकर इधर आगये.. ओर सादी करली..

धृव : (मुस्कुराते) पुजादी वोही हेनां.. बीन ब्याह की बच्ची.. हें..हें..हें..

धृवकी मम्मी : (जोरोसे हसते) कमीने उनके सामने मत बोलना.. वरना तुजे नोच खायेगी.. हें..हें..हें.. फीर तो यहा आगये.. हम दोनो बीना डर दीन रात लगे रहेते.. कभी कभी दीनमे ही दो दो तीन तीन बार हो जाता.. तेरा बाप बहुत हवसी हे.. फीर तु आया.. बस.. तबसे मे भी हवसी होगइ हु..

धृव : (मुस्कुराते) वोतो आप अबभी हो.. हें..हें..हें.. हर दीन ओर रातमे अब भी आपको चाहीये..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. मे चुदकर होगइ हु.. तो क्या करती..? तेरे बापने आदत जो डालदी हे.. फीर तो पार्टी जोइन करली.. ओर उनको मुजमे इन्ट्रेस कम होता गया.. कम होगा भी क्यु नही..? क्युकी उनको पार्टीकी नइ नइ वर्कर जो मीलती गइ.. वो भी बेचारी क्या करती..? अपने पदोन्तीके लीये तेरे बापके नीचे लेटनेको मजबुर होगी.. ओर मे घरपे अकेली तडपती रहे गइ.. फीर अ‍ेक दीन तेरी ओर पुजाकी चुदाइ देखली..

धृव : (मुस्कुराते) अच्छा.. इसीलीये उसी रात मेरे पास आइ थी..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) नही.. फीर तो आये दीन तुम दोनोकी रासलीला देखने आजाती.. मुजे तेरा हथीयार बहुत पसंद आ गया.. बडा ओर दमदार.. ओर मेरी कामवासना फीरसे तुम दोनोने भडकादी.. अ‍ेक दीन पुजा उल्टीया कर रही थी.. ओर मेने उनसे सब सचाइ उगलवाली.. ओर उनको सादीके लीये मना लीया.. ताकी मेरा रास्ता साफ हो जाये..



धृव : (मुस्कुराते) मोम.. आपने क्या रास्ता नीकाला हे.. लाठी भी ना टुटी.. ओर साप भी मर गया.. पुजा आज भी मेरी हे.. ओर अब तो आप भी मुजे मील गइ.. तो अब..?

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) धृव.. तुम जीतनी जल्दी हो सके हम दोनोका पुरा सामान वहा पहोचा दे.. हमे जीतनी जल्दी हो सके ये घर.. ये सहेर छोडना हे..

धृव : (सामने देखते) तो फीर पापा..?

धृवकी मम्मी : (रहस्य मुस्कुानसे) बेटा.. हर कर्मोका नतीजा होता हे.. इनका भी इलाज ढुंढलीया हे मेने.. बस.. तु देखता जा.. उनको अपना पद.. पोजीसन.. अपनी इजत बहुत प्यारी हे.. जैसा मे कहु करता जा..



दोनो बाते करते फीरसे अ‍ेक होगये.. फीर नंगे ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सोगये.. अब तो उसे भावीकाका डर भी नही था.. इसी दौरान भावीका अपना सभी सामान लेकर देर रात ही लखनके घर आगइ.. सृती ओर लखन अपनी चुदाइके बाद भावीकाका ही इन्तजार कर रहे थे..

दुसरे दीन वहेली सुबह लखन पुनमको छोडने गांव चला गया.. पुनमने ज्यादातर अपना सामान लेलीया था.. क्युकी अब वो कभी कभार ही इस बंगलोपे आने वाली थी.. तो साथमे सृती ओर भावीका भी साथ जा रही थी.. भावीकाने अपनी कार लखनके बंगलोपे ही छोडदी.. ओर कुछ दीनके लीये अपने कपडे साथ लेलीये..

क्युकी पुनमसे लखन सृती ओर भावीका पुरी कहानी जान चुके थे.. ओर प्लानके हीसाबसे कुछ दीन भावीकाको गांवमे लखनकी हवेलीपे रहेना था.. उनहोने अपनी अ‍ेफडी की रसीदे बेन्कमे जमा करवा दीथी.. ओर कुछ रकम अपने खातोमे छोडकर फीरसे अपने नाम अ‍ेफडी करवाली..
 
तो गांवमे भी मंजु अब काफी दुबली ओर कमजोर होगइ थी.. तो लखन पुनम सृती ओर भावीकाको देखकर ही मंजु खुस होगइ.. मंजुने भावीकाको जोरोसे गले लगा लीया.. फीर सृती लखन ओर पुनमसे भी गले मीली.. फीर पुनमके हाथसे बच्चीको लेली.. ओर सब अंदर चले गये..

फीर लखन पुनम सृती सब नीर्मलाके पांव छुने लगे.. तो सृतीको देखते ही उनकी आंख गीली होगइ.. क्युकी वो अभी तक भुमीकाको नही भुली थी.. नीर्मला अब पहेलेसे ज्यादा देवायतका खयाल रखने लगी थी.. ओर मंजु भी अपनी मांका बरोबर खयाल रखती..

कमसे कम हप्तेमे दो बार वो देवायतको उनके कमरेमे भेज देती.. अब तो हवेलीमे भी सबको पता था.. ओर ये सब आम बात हो चुकी थी.. लता दया मंजु हमेसा अ‍ेक ही कमरेमे देवायतके साथ सोती.. आज फीर लखनको देखकर लता थोडी वीचलीत होगइ..

ओर वो लखनके सामने ही देखती रही.. सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. भावीका सबकुछ देखती ही रही.. उनको यहा आकर बहुत अच्छा लग रहा था.. जैसे वो उनकी फेमीलीके बीच आइ हो.. लखन मंजुसे सटकर बैठ गया.. ओर उनके कंधेपे सर रख दीया.. तो मंजु मुस्कुराते लखनके सरको सहेलाने लगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावीका.. मुजे सब पता हे.. बस.. तु इसे अपना ही घर समज..

लखन : (हसते) क्या मोम.. आप तो अभीसे प्रोपर्टी बांटने लगी.. देखना ये हमेसाके लीये इधर ही ना रहे जाये..

मंजुला : (सबलोग जोरोसे हसने लगे तो मंजुने हसते हुअ‍े अ‍ेक मुका मारदीया) चुप कर बदमास.. हें..हें..हें.. अगर ये हमेसाके लीये इधर रेह जाये.. तो भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. ये सबकुछ खतम करके आइ हे..

मंजुला : (सहेजतासे) अरे बच्ची तुम चीन्ता मत कर.. मुजे सब पता हे.. पहेले इनको कुछ खीला पीला.. फीर हमारी हवेली दीखा.. बादमे हम आरामसे बैठकर बाते करेगे..

फीर सृती ओर पुनमने मीलकर भावीकाको पुरी हवेली दीखाइ.. जीसे देखकर भावीका बहुत ही प्रभावीत होगइ.. मंजु पुनमकी बच्चीके साथ खेलने लगी.. तब लखन फोनपे कुछ टाइप करने लगा.. ओर कुछ ही देरमे रीप्लाय आगया तो लखन खुसीसे मुस्कुराने लगा.. फीर वो खेतोकी ओर चला गया..

देवायत अपनी ओफीसमे था.. ओर भानु बहार खटीया पे बैठकर बीडी पी रहा था.. लखनको देखते ही खुस होगया.. ओर उनको गले मीला.. देवायत भी फोनपे सौदे कर रहा था.. तो लखनकी आवाज सुनक वो भी बहार आगया.. लखनने उनके पांव छुअ‍े.. ओर दोनो गले मील गये..

देवायत : (मुस्कुराते) कैसा हे लखन..?

लखन : (भावुक होते) भाइ.. मे ठीक हु.. लेकीन आप कुछ ठीक नही लगते..

भानु : (चीन्तासे देखते) भाइ.. अब आप ही इनको समजाओ.. सारा दीन मंजु भाभीको लेकर आंसु बहाते रहेते हे..

लखन : (आंख गीली करते मुस्कुराते) भाइ.. क्यु चीन्ता करते हो.. इसीलीयेनां मोमने सबको बता दीया हे.. सोचो.. अगर हमे कुछ मालुम ही ना होता तो..? ओर वो वापस भीतो आ रही हे..

देवायत : (उनके कंधेपे सर रखते रोते) ल..ख..न.. मे उनको बहुत प्यार करता हु.. उनके बीना नही जी पाउगा..

लखन : (आंसु पोछते) भाइ.. हीमंत रखो.. अगर आप ही टुट जाओगे तो फीर मेरी बाकी भाभीओ.. ओर हम सबका क्या होगा..? ओर मोमने तो आंसु बहानेके लीये भी मना कीया हे..

देवायत : (आंसु पोछते मुस्कुराते) उनके सामने नही बहाता.. बस.. तुजे देखा तो अपने आपको रोक नही सका.. भानु.. वो मालती या रेणुको चाइका बोलदे.. मुजे लखनसे कुछ काम हे.. लखन.. चल अंदर..

फीर दोनो अंदर चले जाते हे.. पर्सनल बात थी तो भानु बहार ही रहेता हे.. अंदर ओफीसमे जाकर देवायत अलमारीसे दो तीन फाइल नीकालता हे.. ओर लखनके सामने रखता हे.. लखन बीना छुअ‍े देवायतकी ओर देखता रहा.. तो देवायतने अ‍ेक फाइल लखनके सामने खोलके रखदी..

लखन : (सामने देखते) भाइ.. क्या हे ये सब..? मुजे क्गु दीखा रहे हो..?

देवायत : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर.. तुजे सीर्फ दीखा रहा हु.. क्युकी मुजे मंजुने तुजे दीखानेके लीये कहा हे..

फीर देवायत अ‍ेक के बाद अ‍ेक फाइल दीखाता हे.. अ‍ेकमे बहुत सारी अ‍ेफडीकी रसीदे ओर सभी प्रोर्पर्टीके दस्तावेज थे.. तो अ‍ेक फाइलमे सहेरकी कइ बडी बडी नामी कंपनीओकी सुची थी.. जीनमे ये साइलन्ट पार्टनर थे.. ओर अ‍ेक फाइलमे कइ सामाजीक संस्था स्कुल कोलेज ओर होस्पीटलकी वो सुची थी.. जीनमे उनका बहुत बडा योगदान था.. ओर उनमे ट्रस्टी थे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मोमने कहा था.. तो समजो मेने देख लीया.. ये सबकुछ आप ही सम्हालीये.. कुछ दीनके बाद मेभी यहा आजाउगा.. फीर तो सहेर गांव आना जाना हमेसा लगा रहेगा.. जैसा आप कहोगे मे सहेरका वहीवटका पुरा काम सम्हाल लुगा.. मुजे ये कुछ भी नही देखना..

देवायत : (मुस्कुराते) मुजे पता था तु यही कहेगा.. लेकीन बेटा.. ये सब तुजे धीरे धीरे देखना ओर सीखना पडेगा..

लखन : (सामने देखते) भाइ.. वो हमारे खेतोके पीछे गडा कीया था.. हमने सीकायत कीथी.. क्या हुआ उनका..?

देवायत : (मुस्कुराते) वोतो अ‍ेक हप्तेके बाद ही मील गये थे.. मार मारके चमडी उखाडदी कमीनोकी.. अभी सब जेलमे हे.. लेकीन कीसने भेजा हे नाम नही बताया..

लखन : लेकीन वो लोग आये क्यु थे..? इतना बडा गडा खोदा..

देवायत : वहीसे सुरंग बनाने वाले थे.. वोही पुरानी बात.. सब खजाना ढुंढनेके लीये..

फीर लखन ओर देवायत बीजनेसकी बाते करते रहे.. तबतक मालती भी चाइ लेकर आइ.. ओर भानु भी अंदर आगया.. तो चाइ देते मालती लखनको बातोसे छेडने लगी.. लखन भी मालतीको कइ बार चोद चुका था.. फीर लखन ओर भानु उनका नया मकान देखने चले जाते हे.. तो मकान काफी कंपलीट हो चुका था..

तो इधर सहेरमे भी धृव अपने कुछ अंगत दोस्तोको बुलाकर सामान पेक करवाता हे.. ओर साम तक सब ट्रकमे लोड करके अपने गांधीनगर वाले बंगलेपे भेज देता हे.. तबतक उनकी मम्मी दुसरी तैयारीया करती हे.. धृवको नही पता थाकी उनकी मम्मी कीतना खतरनाक खेल खेल रही हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९४

तो इधर सहेरमे भी धृव अपने कुछ अंगत दोस्तोको बुलाकर सामान पेक करवाता हे.. ओर साम तक सब ट्रकमे लोड करके अपने गांधीनगर वाले बंगलेपे भेज देता हे.. तबतक उनकी मम्मी दुसरी तैयारीया करती हे.. धृवको नही पता थाकी उनकी मम्मी कीतना खतरनाक खेल खेल रही हे.... अब आगे

तो इधर गांवमे दो पहेरके खानेके बाद पुनम सृती लता ओर भावीका.. सब रश्मीके घर चले जाते हे.. वहा पुनम भावीकाको रश्मी ओर वंदनाका परीचय उनकी भाभीके रुपमे करवाती हे.. तो वंदना भी फोन करके चारु ओर नीशाको अपने घर बुला लेती हे.. आज साथमे वसुधा नही आइ..

क्युकी सुबह ही वोट्सअ‍ेप चेटके माध्यमसे लखनसे बात होगइ थी.. आज वसुधाकी दीलकी धडकन असामान्य थी.. क्युकी पीछले कइ दीनोसे वो ओर लखन चेटपे बाते करते काफी आगे बढ चुके थे.. ओर बात भावनात्मक अतरंग तक पहोंच गइ थी.. चेटके साथ दील वाला ओर कीस वाला इमोजी भेज रहे थे..

आज सुबह लखनका मेसेज आया तब ही वसुधाने उनको मीलनेके लीये घरपे अकेला बुलाया.. उन्होने अब लखनके साथ आगे बढनेका फैसला करलीया था.. उनको लखनसे मीलनेका मतलब भी पता था.. वो बीना सादी ही लखनके साथ सादीसुधा ओरतकी तराह जींदगीका हर मजा लेना चाहती थी.. ओर अच्छी कीस्मतसे आज चारु ओर नीशा भी रश्मीके घरपे चली गइ थी..

खानेके बाद वसुधा अपने आपको सवारने लगी.. उसने हल्कासा मेक अप करलीया.. क्युकी चेटपे इतनी बातोके बाद आज दोनो पहेली बार अकेले मील रहे थे.. बहार दरवाजेपे दस्तक हुइ.. वसुधाका दील तेजीसे धडकने लगा.. उनके चहेरेपे लजा छा गइ.. ओर गाल लाल होगये..



अपने आपको सही करते जटसे दरवाजा खोलने चली गइ.. जैसे ही दरवाजा खोला सामने लखन मुस्कुराते खडा था.. वसुधा सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर मुस्कुराते अ‍ेक तरफ हट गइ.. तो लखन धीरेसे अंदर चला गया.. ओर वसुधाने दरवाजा बंध करके लोक करदीया..

वसुधा कुछ समजे इनसे पहेले ही लखनने उसे गोदमे उठालीया.. तो वो सरमाकर हसते लखनकी गरदनमे हाथ डाल देती हे.. जैसे ही दोनो होलमे आगये.. ओर लखनने वसुधाको नीचे उतारा वो जोरोसे लखनकी बाहोमे समा गइ.. उनके दोनो उरोज कठोर हो गये.. ओर चुत पानी छोडने लगी..



लखन उनकी आंखोमे देखता रहा.. तो वसुधा लजा गइ.. ओर सरमसे आंख जुकाली.. वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. तभी लखनने उनके होठोपे होठ रख दीये.. तो वसुधाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दौड गइ.. उन्होने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर होंठ छुडाके लखनकी आंखोमे देखा..

दोनो अ‍ेक दुसरेको देखते रहे.. फीर अचानक दोनोने फीरसे होंठ मीला दीये.. ओर चुंबन बहुत ही अंतरंग होने लगा.. लखनने उनके संतरे जैसे बुब्सको थाम लीया.. वसुधा कांप उठी.. ओर उसने वापस जोरोसे लखनको बाहोमे भीच लीया.. तभी लखन उसे गोदमे उठाकर बेडरुममे लेगया.. ओर वसुधाको बेडपे लीटा दीया..



वसुधा : (सरमके मारे धीरेसे) लखन.. आज नही प्लीज.. मे इसे यादगार बनाना चाहती हु..

लखन : (जानते भी आनजान बनते) कीसे..? कीसे यादगार बनाना चाहती हे..?

वसुभा : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) मजाक मत करो.. आपको सब पता हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही.. सचमे नही पता.. बतादो.. फोनपे तो हमे बहुत बाते कीहे.. तब तो नही सरमाइ..

वसुधा : (मुस्कुराते नजरे चुराते धीरेसे) वो.. ओरत होनेके बाद ये मेरा पहेला मीलन हे.. मे हमारे पहेले मीलनको हमारी सुहागरातकी तराह मनाना चाहती हु.. क्युकी आपको भी पता हे मेरा आपसे तो क्या कीसीसे भी सादी करनेका इरादा नही हे..

लखन : (मुस्कुराते पास लेटते) पता हे मुजे.. अगर कीसी ओरसे सादी करनेके बारेमे सोचा भी तो तुजे मार डालुगा मे.. अब तुम सीर्फ मेरी हो.. सीर्फ मेरी अमानत.. ओर आज इस कामके लीये मेरे पास समय भी नही हे.. क्युकी इसके लीये कमकसे कम हमे चार पांच घंटे चाहीये.. ओर आपका पहेली बार हेनां..? तो हालत भी बीगड जायेगी..

वसुधा : (सरमाकर नजरे जुकाते) बस.. मे आपको मीलना चाहती थी.. क्युकी मे आपको अंधेरेमे रखना नही चाहती.. इसीलीये मे मेरे बारेमे आपको कुछ बताना चाहती हु.. आपको पता हे मे कोन हु..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. आपको पुरी तराह जानता हु.. आप भैयाके दोस्त डो. सुधीर हेनां..?

वसुधा : (आस्चर्यसे अ‍ेक नजरसे देखते) क्या..? आपको मेरी सचाइके बारेमे पता हे..? कैसे..?

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? आपको मंजु मोम.. ओर पुनोके बारेमे नही पता..? मत भुलो पुनो अब मेरी बीवी हे..

वसुधा : (मुस्कुराते) ओह.. मेतो भुल ही गइ थी.. लखन.. आपको मेरा ये रुप कैसा लगा..?

लखन : (होंठ चुमते) सच कहु..? आप वाकइ बहुत खुबसुरत लग रही हो.. अ‍ेक अप्सरा.. लेकीन अ‍ेक बात पुछु..?

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या आपको लगता हे हमारी चेटपे इतनी बातचीतके बावजुद आपको कोइ ओर परमीशन लेनेकी जरुरत हे..? पुछो..

लखन : (मुस्कुराते) जब हम बाते कर रहेथे तब आपको सायद नही पता होगाकी मे आपके बारेमे सबकुछ जानता था.. फीर भी मेने हमेसा वसुधासे ही बात कीहे.. बस.. यही पुछना चाहता था.. क्या आपको सचमे अ‍ेक लडकी की फीलींग आती हे..?

वसुधा : (मुस्कुराते) लखन.. सच बात बताउ..? जब मे सुधीर था तब भी मुजे अ‍ेक लडकी की फीलींग्स ही आती थी.. मुजे कभी लडकेकी फीलींन्स नही आइ.. इसीलीये तो मेने जेन्डर चेन्ज करवाया.. ताकी मे पुर्ण लडकी बनकर रेह सकु..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. इसीलीये आपने मुनाको चुना था.. आप सुधीर थे तब दोनोका अफैर थानां..?

वसुधा : (मुस्कुराते) ओह.. मुना..? बस.. मेरी कुछ गलत आदतोकी वजहसे उन्होने मेरी भावनाओका खुब खयाल रखा.. लेकीन मुनासे कभी प्यार नही था.. बस.. मेरी जरुरतोको पुरा करता था.. अबतो उनकी भी दो दो सादीया होगइ हे.. ओर मे नही चाहती उनके सुखी संसारपे कोइ आंच आये.. अभी तक उसे पता भी नही हेकी मेही वो सुधीर हु.. बल्की हम घरके लोगोके अलावा गांवमे कीसीको नही पता.. ओर आप कीसीको बताइअ‍ेगा भी नही.. प्लीज..
 
लखन : (मुस्कुराते) तो फीर आपका क्रस कौन था.. अगर लडकीकी फीलींग्स आती थी तो कोइ तो होगा..

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) सच कहु..? जब हम सब कोलेजमे पढते थे.. तब सीर्फ ओर सीर्फ आपके भाइ देवु.. अ‍ेक वोही था जो मेरी रक्षा करता था.. अ‍ेक वोही हे उन्होने मेरा कभी गलत फायदा नही उठाया.. बाकी सबके सब भेडीये ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन अब तो आप वसुधा होगइ हे.. अबतो अपनी फीलींग्सके बारेमे उसे बता देना चाहीये.. क्या पता वो चारुभाभी ओर नीशाभाभीकी तराह आपसे भी सादी करले..

वसुधा : (मुस्कुराते) पहेली बात.. मुजे आपके खानदानके बारेमे मुजे सबकुछ पता हे..

लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) मतलब मंजुदी भी हमारे साथ पढती थी.. वो भी मेरी सबसे अच्छी दोस्त हे.. उन्होने मुजे बहुत कुछ बाते बताइ हे.. जैसे की आपके खानदानमे कीतनी भी बीवीया करलो.. या फीर कीतना भी अफैर करो.. कोइ पुछने वाला या कुछ कहेने वाला नही.. मंजु दीदीने आपको कुछ छुट दीहेनां..? मुजे इस बारेमे भी सब पता हे.. की क्यु दी हे.. अ‍ेक दीन सबको आपके पास आना हे.. तो फीर मे डायरेक्ट ही आपके पास क्यु ना आउ..?

लखन : (सामने देखते) बहुत दुरकी सोचती हो.. क्या ये बात चारु भाभी ओर नीशा भाभी भी जानती हे..?

वसुधा : (मुस्कुराते) हां.. देवुकी सभी बीवीया.. क्युकी मंजुदीदीने उनकी सभी सौतनोको इस बारेमे पहेले ही सबकुछ बता दीया हे.. मुजे भी.. इसीलीये तो उस दीन चारु आपकी गोदमे बीना जीजक बैठ गइ थी.. वो दोनो जानती हेकी अब आप उनकी जींदगीमे आने वाले हो.. ओर दोनो इसके लीये मानसीक तैरपे तैयार भी हे..

लखन : (मुस्कुराते) ओर आप..?

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) सच कहु तो आप मुजे बहुत अच्छे लगते हो.. मंजुदीने कहा हे सीर्फ आप ही अ‍ेक सख्स हो जो मुजे पुरी लाइफ सम्हाल सकते हो.. ओर जबसे आपके बारेमे जाना तबसे मे सचमे आपसे प्यार करने लगी हु.. ओर मे चाहती हुकी ओरत होनेके बाद सीर्फ आपसे रीलेशन रखु..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या फ्युचरमे सादी करनेका इरादा नही हे..? अपने हसबन्डसे ही सब करवाती..

वसुधा : (नजरे जुकाते धीरेसे) लखन.. सीर्फ आपको बता रही हु.. मे सादी नही करुगी.. बस.. मेरी लाइफमे सीर्फ आप ही अकेले पुरुष होगे.. मुजे आपसे ही सब कुछ चाहीये..

लखन : (सामने देखते) सबकुछ मतलब..? खुलकर बतादो..

वसुधा : (सरमाकर नजर जुकाते धीरेसे) सबकुछ म..त..ल..ब.. अगर भवीस्यमे कभी जरुरत महेसुस हुइ तो आपसे बच्चा भी.. क्युकी मे अ‍ेक पुर्ण ओरत हु.. ओर मे सीर्फ आपके साथ ही रीलेशन रखना चाहती हु.. ल..ख..न.. आइ लव यु..

लखन : (बाहोमे भीचते) वसुधा.. आइ लव यु टु.. मे तुजे कभी नीरास नही करुगा..



दोनो बाते करते अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे.. वसुधा कइ दिनोसे अ‍ैसे प्यारसे वंचीत थी.. तो दोनो इतने बहेक गयेकी दोनोके उपरसे अ‍ेक अ‍ेक वस्त्र हटते गये.. लखनने वसुधाको पुरी नंगी करदी.. ओर उनके तनको देखने लगा.. वसुधा अ‍ेक काचकी पुतलीकी तराह चमक रही थी.. बहुत ही गोरी..

उनके सीनेपे संतरे जैसे मुलायम बुब्स होगये थे.. उनकी चुत भी अ‍ेक कमसीन लडकी की तराह गुलाबी कसी हुइ थी.. लखन उनको देखता ही रहा.. तब वसुधा सरमसे पानी पानी होगइ.. उसने अपने हाथोसे चुतको ढक लीया.. ओर लखनने उसे सहेलाते वहा मुह लगा दीया.. वसुधा बेडपे छटपटाने लगी..



फीर वो भी लखनके लंडको देखकर दंग रेह गइ.. फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलने लगे.. वसुधाने लखनको बल्यु जोब दीया.. तो लखनने भी उनका पानी नीकालकर वसुधाको संतुस्ट कीया.. फीर दोनोने साथमे सावर लीया ओर कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. ओर बहार आतेही दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये..

वसुधा : (सरमाते धीरेसे) लखन.. बस.. अ‍ैसे ही मीलने आया करो.. आजसे वसुधा आपकी होगइ.. कुछ ही दिनोमे मे आपके सहेरमे आ रही हु.. दो दीन कोन्फरन्स हे.. आपको होटेलका अ‍ेड्रेस ओर कमरा नंबर भेज दुगी.. सीर्फ हम दोनो.. बस.. उसी दिन हम दोनोका मीलन होगा.. प्लीज.. इस बारेमे कीसी ओरको पता ना चले..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन मंज ुमोम.. ओर पुनोको तो सब पता चल जाता हे..

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) मुजे पता हे उन दोनोने आपको पुरी छुट दे रखी हे.. आपकी मंजुमोमसे मेरी बात हो चुकी हे.. आपको पता हेनां हम सब साथमे पढते थे.. कीसीसे मेरा मतलब बहार वालाको.. नीशा ओर चारुभाभीने मेरा खुब साथ नीभाया हे.. उन दोनोसे मे कोइ बात नही छुपाती.. दोनोको हमारे बारेमे पता हे..

फीर ओर कुछ बाते करके लखन वहासे चला गया.. इसी बीच रश्मीके घरपे सबको पता चलाकी अब भावीका यही होस्पीटलमे सेवाके लीये आ रही हे.. तो सुनकर चारु रश्मी बहुत खुस होगये.. सभी लेडीस स्कुल होस्पीटल ओर गांवके विकासकी नइ प्लानींगके बारेमे बाते करने लगी..

क्युकी अब आने वाले दीनोमे यही सब लेडीस गांवको सम्हालने वाली थी.. चारुने भी गांवका खुब वीकास करदीया था.. गलीमे पकी सडके.. पानीकी बडी टंकी.. गांवमे हर घरमे पानीका नल.. वो सबकुछ.. जो अ‍ेक आदर्श गांवके लीये जरुरत हो.. फीर पुनम सबको लेकर हवेलीपे आगइ..

खानेकी तैयारीया हो रही थी.. सब लेडीस पुनमके कमरेमे बैठकर गप्पे लगा रही थी.. मंजुला नीर्मला होलमे पुनमकी बच्चीके साथ खेल रही थी.. ओर लखन मंजुकी कोदमे सर रखकर लेटा हुआ था.. मंजुको पता थाकी लखन उनसे कुछ बात करना चाहता हे.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे थोडा जीजक रहा था..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. चल थोडा बहार घुकर आते हे.. काफी दीन हो गया मे बहार नही गइ.. तबतक खाना भी बन जायेगा.. ओर हमारी बात भी हो जायेगी..

लखन : (खुसीसे जटसे उठते) येस मोम.. चलीये.. आप चल सकोगी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे हां चल.. मे चल सकती हु.. (जैसे ही दोनो बहार नीकले) हां बीटु.. बोल.. क्या कहेना चाहता हे तु..?

लखन : (मुस्कुराते साथ चलते) मोम.. आपको पता चल गयानां..? बस.. आपसे कुछ बात डीसकस करनी थी.. सोचा नीर्णय लेनेसे पहेले अ‍ेक बार आपसे बात करलु..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु मुजे पता हे तुम कीस बोमे बात करना चाहता हे.. हमे तुमपे ओर पुनोपे पुरा भरोसा हे.. की तुम दोनो जो भी नीर्णय लोगे उचीत ही होगा.. फीर भी बोल..
 
लखन : (मुस्कुराते) मोम.. मे देख रहा हु.. जबसे रजु यहासे वापस आइ हे.. तबसे कुछ उखडी उखडी दीख रही हे.. अ‍ैसा लगता हे वो सीर्फ पत्नी धर्म नीभा रही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सही कहा तुमने.. पुनोने तुजे सब कुछ बता तो दीया.. बीटु.. वो कोइ उखडी हुइ नही हे.. बात तबकी हे जब मेरी देवुसे सादी भी नही हुइ थी.. तब वो ओर दया पहेसे ही रीलेशनमे थे.. सादीसे पहेले दोनोने कुछ वादे कीये थे.. तब अपने तनकी जरुरतोको देवुसे पुरी करती थी.. मेरी देवुसे सादीके बाद भी.. दोनोको पता नही थाकी दोनोकी सादी इसी खानदानमे हो जायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) तब आपके पास ये शक्तिया नही थी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) थी.. लेकीन तब उनका अहेसास नही था.. फीर ये सब बाबाकी कृपासे हुआ.. जब मेने ये बात जानली तभी तो दोनोकी सादी तुम दोनो भाइसे करवाइ.. लेकीन अब सादी होगइ हे तो दोनो अपने वादोको लेकर असमजमे हे.. की अब वादेका क्या करे.. ओर रजु इधर आइ थस तब दयाने उसे अपने वादेके बारेमे याद दीलाया.. इसीलीये रजु उखडी उखडी रहेती हे.. बाकी सब तु जानता हे.. बोल क्या नीर्णय लेना चाहते हो..?

लखन : (मुस्कुरमते) मोम.. सबकुछ नही.. पुनोने कुछ बाते ही बताइ.. हम दयाभाभी ओर रजुकी भावनाओका खयाल रखेगे.. लेकीन हम उसे युही नही छोड सकते.. क्युकी वो हमारी बहेने भी हे ओर पत्नीया भी.. हम कुछ अ‍ैसा करेगे उनके नीर्णयका सन्मान भी हो.. ओर हमारी नजरोके सामने भी हो..

मंजुला : (खुस होते मुस्कुराते) गुड.. क्या करोगे तुम..?

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. उनके बच्चे होगे.. वोभी तो हमारी जीम्वेवारी होगी.. तो मे चाहता हु.. उनके पास इतना पर्याप्त पैसा हो.. जो दोनो अपने बच्चोके साथ सामान्य जीवन जी सके.. ओर बच्चोको पढा सके.. उन दोनोको कही काम करनेकी जरुरत ना पडे.. क्या कहेती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) तु बीलकुल देवुकी तराह सोचता हे.. अच्छा नीर्णय हे तेरा.. तो फीर क्या करेगा..?

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. मे चाहता हु दोनोको रहेनेके लीये वो राधु वाला घर देदु.. अगर दोनो राधुके साथ होस्टेल सम्हालले तोभी कोइ अ‍ेतराज नही.. दोनोकी इच्छा भी पुरी होजायेगी ओर हमारे नजरके सामने भी रहेगी.. ओर हमारी सादीभी बरकरार रहेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) तु वाकइ परीपकव ओर जीम्वेवार हो गया हे.. क्या तुमने इस बारेमे राधुसे बात करली..?

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. वो मेरी बीवी हे.. फीर भी उनको अ‍ेक बार पुछ लुगा.. वो मेरी बात कभी नही टालती.. मुजसे बहुत प्यार करती हे..

मंजुला : बेटा.. उन दोनोको अ‍ैसे ही मत छोड देना.. कभी कभी उनको भी तुम्हारी जरुरत होगी.. तब अपना फर्ज नीभाने चले जाना.. तु समज गयानां..?

लखन : (सामने देखते) दोनोको..? मतलब..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां दोनोको.. कमीने तुजे अ‍ैसे ही अयासीके लीये जडीबुटी नही दीहे.. अब देवुकी सभी बीवीओको तुजे ही सम्हालना पडेगा..

लखन : (सरमाते धीरेसे) यस मोम.. पता हे मुजे.. ना जाने आपने ओर पुनोने कैसी जीम्वेवारी दीहे मुजे..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्या अब चंदा दीदी खुस हे..? सब ठीक हो गयानां..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) यस मोम.. बहुत खुस.. अब वो कंपलीट होगइ हे.. उन्होने धीरेनको भी माफ करदीया.. हम दोनो साथमे उनके घरपे गये थे..

मंजुला : (रुकते सामने देखते धीरेसे) लखन.. चल वापस.. ओर ध्यानसे सुन.. अब यही समजले देवुकी सब बीवीया तेरी बीवीया हे.. कोइ संकोच मत करना.. मुजे पता हे तुम सबको अच्छेसे सम्हाल लोगे.. इसीलीये तो तुजे वो जडी बुटी दीहे.. ओर हो सकेतो ये भावीकासे भी तु हमारे पुर्खोके मंदीरमे जाके सादी करलेना.. मे दया ओर रजुसे इस बारेमे बात कर लुगी..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) मोम.. वो.. वो.. वसुधा..

मंजुला : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. सीर्फ वसुधा ही नही वो टीना भी हे.. हेनां..? लखन.. कोइ भी ओरत हो या लडकी.. अगर वो सामनेसे रीलेशन रखना चाहती हे तो कोइ संकोच मत कर.. आगे बढ जाना.. क्युकी इस दुनीया मे कइ ओरते ओर लडकीया दुखी हे.. कोइ संतानके लीये तो कोइ बदनामीके डरसे.. बस.. तु सबकी भावनाओका खयाल रख.. तुजे ओर कुछ नही कहेनां..

लखन : (सामने देखते सरमाते धीरेसे) मोम.. वो सबतो ठीक हे.. ले..की..न.. अब.. आपसे कैसे कहु..? कुछ बहारकी ओरते हे जो मुजसे रीलेशनके लीये कहेती हे.. चाहे अ‍ेक बार भी क्यु ना हो..

मंजुला : (जोरोसे हसते फीर धीरेसे) मे जानती हु बीटु.. लेकीन तु अ‍ेक बात समजले.. मे ओर तुम कोइ सामान्य इन्सान नही हे.. तुम दोनो भाइके संपर्कमे जीतनी भी लडकी या ओरते आइ हे.. या फीर आयेगी वोभी हम मेसे अ‍ेक होगी.. यातो वो परीया होगी.. या फीर अप्सराये.. हम सब उष्ण योनीकी हे..

ओर हमारा काम ही यही हे.. आज तुम दोनो भाइ हो.. कल विजय ओर तुम होगे.. फीर उनका लडका आयेगा.. तब सबकुछ चरमपे होगा.. तुम ही सब मर्द होगे जो सबको संतुस्ट करोगे.. तो कोइ संकोच मत कर.. यही समजले वो हम मेसे कोइ होगी.. तभी तो वो सामनेसे आयेगी.. फीर चाहे उनकी कोइ भी उमर हो.. ओर आगे तुजे खुद पता चल जायेगा..

फीर मंजु लखनको भवीस्यके बारेमे बहुत सारी बाते बताती रही.. फीर दोनो घरपे आगये.. ओर सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. भावीकाके साथ पुनम काफी घुल मील गइ थी.. उनको भी यहा घर जैसा लगने लगा.. फीर लखन पुनम ओर भावीकाको वही छोडकर सृतीके साथ वापस सहेर चला गया..
 
पुनम मंजुके अलावा कीसीको पता नही थाकी भावीकासे डीवोर्स लेतेही उन मां बेटे हरकतमे आगये थे.. साम तक फर्नीचरको छोडके जो जरुरी सभी सामान लोड करके गांधी नगर वाले बंगलेपे भेज दीया.. इस रात धृव ओर उनकी मम्मीकी यहा आखरी रात थी.. जब सामान चला गया तो दोनो नहानेके लीये उपर चले गये..

आज बीना डर दोनोने साथमे सावर लीया.. जाहीरसी बात हे दोनो अ‍ैसे ही चुपचाप बीना सरारत नही रेह सकते.. धृवने उनकी मम्मीके तनपे खुब साबुन रगडा.. ओर उनके अंगोको छेडता रहा.. तो उनकी मम्मीने भी धृवके तगडे हथीयारको मल मलके साबुनसे सहेलाया..



ओर नतीजेके फल स्वरुप धृवने वही नहाते उनकी मम्मीकी धमाकेदार चुदाइ करली.. फीर दोनो सावर लेकर अपने बदन पोछते बेडपे आकर अ‍ेक दुसरेसे चीपकके नंगे बैठ गये.. उनकी मम्मीने फोन हाथमे लेते नंबर लगाते नाकपे उगली रखते धृवको चुप रहेनेका इसारा कीया..

सामने (पुजा) : हेलो..? हां मम्मी.. बोलो..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बीटु.. अकेली हे क्या..? देख जरा.. आस पास कोइ हेतो नही..?

पुजा : (मुस्कुराते धीरेसे) नही मोम.. मेरे रुममे हु.. पीन्टु मौसीके साथ नीचे खेल रहा हे.. बोलीये..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बीटु.. मेने तुजे उस दीन दो पार्सल दीये थे.. क्या इसके बारेमे कीसीको पता तो नही चला..?

पुजा : (धीरेसे) नही मोम.. मेने छुपाकर रखे हे.. लेकीन क्या हे.. बताइअ‍े तो सही..?

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) बेटी.. बस.. यही समजले ये हम दोनोके उजवल भवीस्यके लीये हे.. क्या तु खुलकर धृवके साथ जीना चाहती हेनां..?

पुजा : (मुस्कुराते) येस मोम.. मेरा पहेला प्यार.. क्या कुछ हुआ..?

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) हां.. हमारे रास्तेका काटा हट गया.. भावीका धृवसे तलाक लेकर चली गइ.. बीना कोइ सोर सराबा.. सुन.. तु आज ही वो दोनो पार्सल कीसी पोस्टके डीबेमे डालदे..

पुजा : (धीरेसे) मोम.. अ‍ेक तो वही लोकल हे.. पापाकी पाटीकी ओफीसका.. दुसरा दील्हीका हे.. उनको मीलनेमे दो तीन दीन लग जायेगे..

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) पता हे बेटी.. सुन.. सहेरसे थोडी दुरकी पोस्टमे.. जहा आस पास कोइ सीसी केमेरा ना हो.. पार्सल डालते वक्त अपना चहेरा छुपा लेना.. वो चुनीसे बुर्का बांध लेना.. ओर तेरी कार भी दुर खडी रखना.. तु समज गइनां..

पुजा : (थोडा डरते) मोम.. इतना सीक्रेट..? आप क्या करने वाली हो..? मुजे तो डर लग रहा हे..

धृवकी मम्मी : : (धीरेसे मुस्कुराते) अरे डर मत.. तेरा पती मेरे साथ ही बैठा हे.. कमीना क्या मजा देता हे.. पुजा.. यही समजले.. हम दोनो हमेसाके लीये धृवके साथ रहेगी.. बीना डर.. हम तीनोकी अ‍ेक अलग ही दुनीया होगी.. हम वहा आ रहे हे.. हमेसाके लीये.. तेरे सहेरके बीलकुल पास.. ताकी तुजे हमारे घर आनेमे आसानी रहे.. समज गइनां..?

पुजा : (मनमे खुस होते) मोम.. सच केह रही हे आप..? मे अभी पार्सल डालकर आती हु.. कहा हे भाइ..? जरा उनसे बात करवाइये..

धृवकी मम्मी : (फोन धृवको देते) ले.. तेरी बीवीसे बात कर.. मे अभी आइ..

कहेते धृवकी मम्मी अपनी अलमारीके पास चली गइ.. ओर अ‍ेक पुराना फोन.. ओर अ‍ेक नया सीम लेकर आगइ.. जो उन्होने कइ दीन पहेले ही लेकर रखा था.. सीम भी दुसरेकी आइडीसे लीया हुआ था.. जो पार्टीके लोग उनके पतीको मीलने आते थे.. फीर धृवके पास आकर बैठ गइ..

पुजा : (मुस्कुराते फोनपे) हाइ ब्रधर.. कैसे हो..? सब क्या तैयारीया चल रही हे..?

धृव : (मुस्कुराते फोनपे) दीदी.. अभी कुछ नही.. बस.. जैसा मम्मी कहे उतना करदे.. ओर सुन.. जब तुजे अ‍ेक अ‍ेड्रेस सेन्ड करु.. तब वहा आजाना..

पुजा : (मुस्कुराते) आजाउगी.. आजाउगी.. पहेले ये बता जब मम्मीकी लेता हे तब मुजे याद करता हेकी नही..? कमीने क्या हथीयार हे तेरा..मेरी तराह माको भी तीन तीन बार पेटसे करदीया..

धृव : (मुस्कुराते धीरेसे) बहुत याद करता हु.. सुन.. वो दिन दुर नही हे जब तुम दोनोको अ‍ेक साथ अ‍ेक ही बीस्तरमे पेलुगा.. ले मम्मी आगइ.. उनसे बात कर..

धृवकी मम्मी : (फोन लेते) पुजा.. सायद कल हम वहा आजायेगे.. अभी फोन रखती हु.. तु आज ही पार्सल डालदे.. (फोन कट होते ही हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीने.. उसे क्या बोल रहा था..? की हम मां बेटीको अ‍ेक ही बीस्तरमे पेलेगा.. मे भी तो देखु तु उसे मेरे सामने कैसे चोदता हे.. वो सब छोड पहेले ये फोन ओर सीम पकड.. सीम डालदे इसमे..

धृव : (फोन सीम लेते सीमको डालते) मोम.. ये फोन..? अ‍ेक दम पुराना हे.. सीम भी..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. इसे इस्तमाल करके सीम नीकालकर फोन डेमेज कर देना.. फीर कीसी बहेते नदी नालेमे फेक देना हे.. ओर सुन.. इनमे सीम डाल.. ओर मे जो कहु उसे इंगलीसमे टाइप करदे.. मुजे कहा इंगलीस आती हे.. फीर मे कहु इस नंबरपे भेजदे..

धृव : (सीम डालकर) येस मोम.. बोलो.. क्या मेसेज लीखना हे..?

तभी धृवकी मम्मी धीरे धीरे बोलते मेसेज लीखवाती हे.. जैसे कोइ खुफीया खबर देते चेतावनी दे रहा हो.. मेसेजमे इडीकी रेडकी चेतावनी.. ओर उनके पार्टी वर्करके साथ नाजायज रीस्तेकी घमकी भरा लहेजा था.. ओर धृव इसे इंगलीसमे ट्रान्सलेट करते लीखता गया..
 
जैसे ही मेसेज पुरा हुआ धृवकी आंखे फटी की फटी रेह गइ.. उनको पता नही थाकी उनकी मम्मी.. जो अ‍ेक सामान्य गांवकी ओरत.. इतनी खतरनाक सोच वाली होगी.. उसने अपने ही पतीको मेसेज टाइप कीया था.. फीर धृवकी मम्मीने उसे सहेरके दुसरे कोनेपे जाकर अपने पीताके नंबरपे सेन्ड करनेको कहा..

धृव : (आस्चर्यसे) सहेरके दुसरे कोनेमे..? इतनी दुर जाके क्यु..? यहीसे होजायेगानां..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बीटु तेरे बापके साथ रहेकर इतना तो सीख ही गइ हु.. तेरा बाप बहुत पहोंच वाला हे.. उनकी हर जगह जान पहेचान हे.. वो तुरंत सायबर सेल वालेको कहेगा.. की फोन कहासे आया हे.. बस.. उनको यहाकी लोकेशन पता ना चले.. इसीलीये यहासे दुरसे सेन्ड करना.. ओर अपनी कार मत लेजाना.. कीसी ओरकी कार.. बीना नंबर प्लेटवाली.. उनको हमारा कोइ सुराग मीलना नही चाहीये..

धृव : (मुस्कुराते) मोम.. यु आर वेरी स्मार्ट.. क्या दुरकी सोचती हो.. कहासे सीखा ये सब..?

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) तेरे बापके साथ रहेकर सीख गइ हु.. सुन.. मेसेज सेन्ड करते ही फोन स्वीच ओफ कर देना.. फीर सीम नीकालकर अपने पास रख लेना.. ओर फोनको वही तोडकर कोइ नदी नालेमे फेंक देना.. हो सके तो सब कारमे बैठकर ही करना.. फीर आज रात नीचे अपने कमरेमे जाकर सोजाना.. उपर मत आना..

धृव : (कातीलाना मुस्कुराते) क्या सचमे..? अकेली सो पाओगी..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बहुत मुस्कील हे.. तेरी आदत जो होगइ हे.. अगर तेरे बापने कुछ गलत कीया हेतो तुरंत घरपे आजायेगा.. ओर अपना सबकुछ इधर उधर करने लगेगा.. तो मे नही चाहती वो हम दोनोको उपर साथ देखले.. ओर उनको हम दोनोके उपर कोइ सक हो.. समज गयानां..?

धृव : (मुस्कुराते होठ चुमते) येस मोम.. यु आर जीनीयस.. क्या दीमाग पाया हे आपने.. मे चलता हु..

फीर धृव फोन लेकर चला गया.. उधर अहेमदाबादमे भी पुजा अपने पर्समे दोनो लीफाफे सम्हालके रखती हे.. फीर बपने बच्चेको लेकर नीचे आरामसे आजाती हे.. तो उनकी सास.. जोकी उनकी मौसी भी हे.. वो टीवीपे कोइ सीरीयल देख रही थी.. तब पुजा उनको फ्रेन्डको मीलने जा रही हु कहेती हे..

पुजा : (मुस्कुराते) मौसी.. मे मेरी अ‍ेक फ्रेन्डको मीलने जा रही हु.. अभी अ‍ेक घंटेमे वापस आजाउगी..

पुजाकी सास : (मुस्कुराते) ठीक हे बेटा.. सुन.. आजकल धृव इधर दीखाइ नही देता.. उसे फोन करके बोल तुजे मौसी याद कर रही हे..

पुजा : (मुस्कुराते) जी मौसी.. सायद कल वो ओर मम्मी यहा आयेगे.. फीर भी मे फोन करदुगी..

फीर पुजा अपने बच्चेको भी साथ लेगइ.. पर्समे उसने दोनो पार्सलके लीफाफे छुपा लीये थे.. फीर अपनी कार लेकर सहेरसे दुर चली गइ..ओर सहेरके आखरी छोडपे उनको अ‍ेक लाल डीबा दीखाइ दीया.. पुजाने आजु बाजु नजर घुमाते देखा.. फीर पुजाने अपनी चुनीसे मुह ढक लीया..

ओर कारको काफी दुर खडी करदी.. फीर बच्चेको लेकर अ‍ैसे नीकली जैसे टहेलने जा रही हो.. फीर बडे ही नोर्मल तरीकेसे दोनो लीफाफे पोस्टके डीबेमे डाल दीये.. ओर आगे चली गइ.. फीर कुछ दुरीपे जाकर रोडके दुसरे कोनेपे आकर मुड गइ.. ओर दुकानोकी ओर नजर घुमाते वापस आने लगी..

दो तीन सोपमे जाकर अ‍ैसे रुकी जैसे वो कोइ सोपींग करने आइ हो.. फीर धीरेसे सरकते वापस कारके पास आगइ.. ओर बच्चेको पासकी सीटपे बीठाकर कार लेकर वापस घरकी ओर नीकल गइ.. ओर उसने रास्तेपे अपने मम्मीको कोल भी करदीया.. की काम होगया हे..

तो दुसरी ओर धृव भी अपने अ‍ेक दोस्तकी कार लेकर नंबर प्लेट नीकाल देता हे.. फीर सहेरसे दुर अ‍ेक अ‍ैसी जगहपे चला गया जहा नदी बेह रही थी.. वहा जाकर कारमे बैठे ही उन्होने अपने पापाके मंबरपे मेसेज सेन्ड करदीया.. फीर फोन स्वीच ओफ करके सीम नीकालके अपनी पोकेटमे रख लीया..

फीर फोनको पथ्थरसे तोडकर बहेती नदीमे बहा दीया ओर घरकी ओर चल पडा.. तो उधर उनके पापाको मेसेज मीलते ही वो चौक गये.. की उनको अ‍ैसा मैसेज कीसने भेजा..? पहेले तो लगा कीसीने उनके साथ मजाक कीया हे.. लेकीन दुसरे पल ही वो चौकने हो गये..

क्युकी उन्होने पार्टीमे रहेकर बहुत गलत तरीकेसे पैसे कमाये थे.. ओर घरपे अ‍ैसी जगाहपे रखे थे उनकी बीवीको भी नही पता था.. वो इस मामलेमे कोइ रीस्क लेना नही चाहते थे.. उन्होने तुरंत सायबर सेलमे अपने पहेचान वालोको फोन कीया ओर जीस नंबरसे मेसेज आया था वो नंबर दे दीया..

तो कुछ देरके बाद पता चला नंबर स्वीच ओफ आ रहा हे.. ओर मेसेज सहेरसे बहारसे भेजा गया हे.. लेकीन अपनी पार्टी वर्करकी बातने उसे परेसान कर दीया..फीर अ‍ेक घंटेके बाद फीर फोन आयाकी जहासे मेसेज भेजा हे वहा आस पास कोइ सीसी केमेरा भी नही हे..

सुनकर धृवके पापा घबरा गये.. वो इस बारेमे कीसी ओरसे बात करना नही चाहते थे.. ओर तुरंत तबीयतका बहाना बनाकर पार्टी दफतरसे घरकी ओर नीकल गये.. धृवकी मम्मीका अंदाजा बीलकुल सही नीकला.. दो घंटेके अंदर ही उनका पती घरपे आगया.. वो कुछ गभराये ओर परेसान दीख रहा था..

आते ही उन्होने धृवकी मम्मीको जोरोसे आवाज लगाइ.. उपर धृवकी मम्मीके चहेरेपे कुटील मुस्कान आगइ.. फीर अपने आपको सम्हालते जटसे नीचे आनेका नाटक कीया.. धृव भी अपने पापाकी जोरोकी आवाजसे अपने रुमसे बहार नीकल गया.. तो उनके पापाने दोनोकी ओर देखा..
 
धृवकी मम्मी : (गभरानेका नाटक करते) अ‍ेजी.. क्या हुआ..? इतना क्यु चीला रहे हो..?

धृवके पापा : (थोडा परेसानीमे) अरे.. तुम दोनो फटाफट कमरेमे आजाओ.. कुछ जरुरी बात करनी हे.. धृव.. तु कोइ बडे वाला बेग लेकर जल्दी आजा.. हमे आज ही सब हटाना पडेगा..

धृवकी मम्मी : (पीछे जाते) अ‍ेजी क्या बोल रहे हो..? क्या हटाना पडेगा..? कुछ कहोगे भी की नही..?

धृवके पापा : (थोडा गभराते) अरे भागवान धृवको आने दे.. फीर तुम दोनोको कुछ बताता हु..

कुछ ही देरमे धृव अपने कमरेसे अ‍ेक बडी बेग लेकर आगया.. धृवके पापा अ‍ेक अलमारीसे कुछ दस्तावेजोकी फाइले नीकालने लगे.. फीर उसी बंगलोकी फाइल अलग नीकालते बाकीकी सब बेगमे रखने लगे.. ओर साथमे धृव ओर उनकी पत्नीको उन मेसेजके बारेमे बताते रहे..

धृवकी मम्मी : (गभरानेका नाटक करते) हे भगवान.. अ‍ैसा कौन होगा.. जो आपको अ‍ैसा मेसेज भेजा.. ओर आपके पास इतना कुछ हे..? हमे तो पता ही नही था.. सुक्र मनाओ उन्होने आपको मेसेज भेजा.. अगर ये बात सच हुइ तो हम तो फस सकते हे..

धृवके पापा : (अलमारीको धकेलते) मेने कुछ पुलीस वालो.. ओर सायबर सेलको कामपे लगा दीया हे.. वो उनका पता लगा लेगे.. लेकीन हम कोइ रीस्क लेना नही चाहते.. सीर्फ हमारे कुछ नीजी खाते.. ओर इस बंगलेका दस्तावेज ही इधर रखेगे.. बाकी सबकुछ तुम दोनो लेकर नीकल जाओ..

धृवकी मम्मी : (आस्चर्यसे) हम नीकल जाये..? लेकीन कहा..?

धृवके पापा : (अलमारी पीछेसे खोलते) कही भी.. यहासे दुर.. तुम दोनो कुछ दीन पुजाके घरपे चले जाओ.. या फीर हमारे दुसरे बंगले पे.. धृवको पता हे उनके बारेमे.. ओर कीसीको नही पता..

धृवकी मम्मी : (जानते भी अन्जान होते) दुसरा बंगला..? ये कब लीया आपने..?

धृवके पापा : (थोडे गुस्सेसे) अभी ये बतानेका टाइम नही हे.. धृवको सब पता हे.. उनसे पुछ लेना.. तेरे नामपे लीया हे.. गांधीनगरसे पहेले..

धृव ओर उनकी मम्मी आस्चर्यसे सुननेका नाटक करते सब देखते रहे.. उनके पापाने अलमारीके पीछेसे अ‍ेक छुपा दरवाजा खोला.. उनमे बडी बडी रकमकी नोटोकी गडीयोका अंबार लगाके रखा था.. सब कुछ बेगमे भरने लगे.. जब बेग भर गइ तो धृव अ‍ेक दुसरी बेग लेकर आया.. उनके पापा ओर धृंवने मीलकर सबकुछ बेगमे भर लीया..

धृवके पापा : (धृव ओर उनकी पत्नीकी ओर देखते) तुम दोनो इसे लेकर सुबह होनेसे पहेले ही यहासे नीकल जाओ.. वहाका मे सबकुछ सम्हाल लुगा.. ओर तुम दोनोसे फोनसे कोन्टेक्टमे रहुगा.. अब मे घरपे ही रहुगा.. जबतक ये मामालेकी तहेकीकात जा होजाये..

धृवकी मम्मी : (चीन्तासे) अ‍ेजी.. कोइ गभरानेकी बात तो नही हेनां..? वरना मे आपके साथ रुक जाती हु..

धृवके पापा : (जटसे) अरे नही नही.. तुम दोनो सीर्फ ये सम्हाललो.. बाकी मे सब देख लुगा.. कुछ ही दिनोकी तो बात हे.. फीर सब सही होजायेगम तब तुम दोनोको वापस बुला लुगा..

धृव : (धीरेसे) पापा.. क्या हम अभी नीकल जाये..?

धृवके पापा : (सामने देखते धीरेसे) अरे अभी रातमे नही.. साथमे इतने सारे केश हे.. रास्तेपे पुलीसकी चेकींग होगी.. सुबह चार पांच बजे नीकल जाना.. अ‍ेक दो दीन पुजाके वहा रहो.. जब मे कहु तब हमारे बंगलोपे चले जाना.. अभी तीन चार घंटे आराम करलो.. ओर सोजाओ..

धृव अपनी मम्मीकी ओर देखते अपने रुममे चला गया.. उनकी मम्मी ओर पापा दोनो वही रुममे सो गये.. उस रात धृवकी मम्मीने अपने पतीको प्यार करनेकी कोसीस की.. जैसे उनको आखरी बार मीलना चाहती हो.. लेकीन टेन्शनकी वजहसे उनके पतीने प्यार करनेको मना कर दीया.. फीर दोनो सोगये..

लेकीन धृवके पापाको नींद नही आइ.. उन्होने सुबह चार बजे अपनी पत्नीको जगा दीया.. ओर उनको धृवको भी जगानेको कहा.. जैसे ही वो धृवको जगाने उनके रुममे चली गइ.. ओर धृवको जगाया तो धृवने दरवाजेकी ओर देखकर अपनी मम्मीको अपने उपर खीच लीया..



ओर खुसीके मारे उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. लेकीन उनकी मम्मीने अभी थोडा सयम रखनेको कहा.. ओर उनसे अलग होते धृवको फटाफट तैयार होजानेको कहेते खुद तैयार होनेके लीये बहार चली गइ.. मां बेटे फटाफट नहाके कंपलीट होगये.. ओर तीनो होलमे आगये..

धृवकी मम्मी : (धीरेसे) अ‍ेजी.. मे चाइ नास्ता बनादु..?

धृवकी मम्मी : (चीन्तासे) अरे नही.. सीर्फ चाइ बनादे.. आज तीनो साथ बैठकर पीयेगे.. देर होजायेगी.. मे चाहता हु सुबह होनेसे पहेले तुम दोनो इस सहेरको छोडदो.. अगर सब ठीक रहा तो मे फोन कर दुगा.. तुम दोनो हमारे बंगलोपे चले जाना.. मे वहा आजाउगा..

धृवकी मम्मी चाइ बनाने चली गइ.. तो धृवके पापा धृवसे सबकुछ समजाने लगे.. ओर अपनी प्रोपर्टीकी जानकारीया देने लगे.. जैसे उनको कुछ अघटीत होनेका अंदेसा होगया हो.. फीर तीनोने चाइ पीली.. ओर अ‍ेक दुसरेको गले मीले.. धृवने दोनो बेग सम्हालके कारमे रखदीया..

धृवकी मम्मी धृवके पास आगे बैठ गइ.. ओर अपने पतीकी ओर देखने लगी.. जैसे उनको आखरी बार देख रही हो.. उनकी आंखसे आंसु टपक गये.. जैसे अपने गुनाहोकी मांफी मांग रही हो.. फीर धृवने कार जानेदी.. धृवके पापा दोनोको जाते हुअ‍े देखते रहे.. ओर दोनो चले गये..

इडीकी रेडकी मनघडत कहानीसे दोनोने बहुत कुछ हासील करलीया.. इस बातसे धृव ओर उनकी मम्मी दोनो ही बहुत खुस थे.. लेकीन जो उसने पुजाके जरीये जो काम करवाया था.. उनका परीणाम क्या होगा वो उसने सपनेमे भी नही सोचा होगा.. उनको लगाकी इनसे उनके पापाको छोटी मोटी जेलकी सजा होगी.. ओर वो अपने बेटेसे खुलकर वासनाका खेल खेल सकेगी....

कन्टीन्यु
 
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