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यही सब सोचते हुए सुरभि फ्रेश हुई और खुद को शीशे में देखने लगी और खुद hi मुस्कुराने लगी
और मैं में सोच ने लगी
सुरभि- क्या सच में में आज भी इतनी खूबसूरत हु की मेरा अपना बीटा मुझ पैर फ़िदा है मुझे छोड़ना चाहता है
छियई ये में क्या सोच ने लगी अभी खुद से वादा किया था की अब ऐसा नहीं सोच न फिर भी हे भगवान् ये लड़का मुझे पागल कर देगा और ये मेरी छूट पता नहीं क्यों बात बात पे गीली होने लगती है उउउउउउफफ्फ्फ्फ़ पता नहीं क्या होगा मेरा हम्म्म्म
इन्ही बातो को बोलते हुए बहार आयी जहा माहि बैठी हुई थी
सुरभि- क्या हुआ क्यों चिल्ला रही है और वो दोनों महरानी कहा है
माहि- दीदी और बुआ तो ऊपर अपने रूम में है और मुझे कुछ पैसे चाहिए थे बुक्स के लिए
सुरभि- ठीक है अभी लाती हु ( बोलकर सुरभि अंदर चली गयी)
वही खेत पैर रूद्र चैन की नींद सू रहा था की तभी किसी की आवाज़ सुनकर उसकी आँख खुली जो की कमरे के पीछे से आ रही थी इस आवाज़ को सुनते hi रूद्र के कान खड़े हो गए क्युकी इस आवाज़ से वो भली भाति परिचित था इसलिए जल्दी से खड़ा हुआ और कमरे की खिड़की से बहार झांक कर देखने लगा और जल्द hi उसे एक नयी छूट के दर्शन हुए जो की इस बात से अनजान की उसकी छूट से निकलते मधुर संगीत ने किसी की हवस को हवा दे दी है वो बेफिक्र जोर लगा कर मूत ने में लगी हुई थी
उधर अंदर रूद्र का लुंड तो उस चिकनी छूट को देखकर hi फुंकार ने लगा था उसका बस चलता तो अभी जाते hi लुंड घुसा के छोड़ ने लगता पैर फिलहाल ये उसके बस में नहीं था तो बस खड़ा होकर उसके चेहरे के दिखने का इंतज़ार करने लगा और कुछ hi पल में वो इंतज़ार ख़तम हुआ जब उस गोरी छूट की मालकिन का चेहरा रूद्र के सामने आया वो सच में पूर्ण रूप से निर्मित काय था जिसे देख कर हर किसी का दिल उसे प्यार करने को करे
वो कोई और नहीं रूद्र के खेत में hi काम करने वाले शम्भू की बीवी रानी थी जो शायद पानी लेने के लिए इधर आयी थी मगर तेज़ प्रेशर को रोक न पायी और जल्दबाज़ी में अपनी कामुक जवानी का जलवा दिखा बैठी
रूद्र उसके खयालो में खोया था की उसकी दिमाग में घंटी बजी उसे ध्यान आया की रानी घूम कर सामने hi आएगी तो वो जल्दी से बहार निकला और अपने लुंड को बहार निकाल के मूतने लगे
उसका दिमाग आज कल बहुत तेज़ चल ने लगा था और जो उसने सोचा था वही हुआ रानी जैसे hi घूम कर सामने आयी उसकी नज़र रूद्र के लुंड पैर पड़ी और ठिठक कर वही रुक गयी और आँख फाड़े उस मुसल को देखने लगी जो आने वाले वक़्त में उसकी छूट का बजा बजने वाला था
रूद्र का काम हो चूका था इसलिए चौक ने का नाटक करते हुए बोलै
रूद्र- ारे तुम यहाँ क्या कर रही हो ओह्ह्ह्हह सॉरी( और घूम कर लुंड अंदर कर लिया)
रूद्र की आवाज़ सुनकर रानी जैसे होश में आयी
रानी- वो वोओओओ छोटे बाबू पानी लेने आयी थी इसलिए इधर आ गयी
रूद्र- ाचा ठीक है पैर किसी को बताना मत की तुम ने मुझे ऐसे देखा ( शरीफ बनते हुए)
रानी- कैसे छोटे बाबू
रूद्र- अरे मतलब बिना कपड़ो के
रानी- हम ने कुछ नहीं देखा छोटे बाबू( सर झुकार)
रूद्र- ाचा तो घर कर क्या देख रही थी तुम बोलो
रानी- वो हम तो वो आपको देख कर चौक गए थे
रूद्र- ाचा झूट बोलती हो ठीक है तो जाओ पानी भर लो मैंने तुम्हे माफ़ किया
रानी-( रूद्र की बात सुनते hi रानी शर्मा गयी और आंखे बंद किये hi बोली) जी छोटे बाबू शुक्रिया
रूद्र- कोई बात नहीं वैसे तुम भी मुझे माफ़ कर देना ( वो समझ गया था ये किसी नहीं कहेगी)
रानी- हम किसलिए माफ़ करे छोटे बाबू
रानी की बात सुनकर रूद्र उसके करीब आया और प्यार से बोलै
रूद्र- वो क्या है न अभी थोड़ी देर पहले मेरे कमरे के पीछे से बहुत hi सुरईले संगीत की आवाज़ आ रही थी तो मैंने भी खिड़की में से तुम्हे देख लिया था इसलिए
पहले तो रानी को रूद्र की बात समझ नहीं आयी पैर जैसे hi उसे ख्याल आया की रूद्र क्या कह रहा है तो वो शर्म से पानी पानी हो गयी और वह से जाने लगी तो रूद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया
रूद्र- सुनो तो भाग कहा रही हो पानी तो लेती जाओ
रानी- हमे जाने दीजिये आप बहुत गंदे है छोटे बाबू भला ऐसे किसी को देखते है ये सब करते हुए
रूद्र- ाचा जी हम गंदे है और तुम जो मेरे लुंड को खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी वो क्या था बोलो
रानी- हे राम छोटे बाबू हम ने कब देखा वो तो हम एक दम से सामने आगये इसलिए नज़र पद गयी अब छोड़िये हमें देर हो रही है
रूद्र- नज़र पद गयी थी तो हटाई क्यों नहीं या फिर कुछ जयादा hi पसंद आज्ञा था
रानी- तौबा 2 छोटे बाबू हमें अपनी उसका कबाड़ा थोड़ी करवाना है उसे लेकर हाय दिए
रूद्र- किसका कबाड़ा रानी बोलो न वैसे तुम्हारी छूट भी एक दम गोरी है हमें तो पहली नज़र में hi पसंद आए गयी बस एक hi कमी है उस में
रूद्र की बातो से रानी भी गरम होने लगी थी और उसे भी अब ाचा लग रहा था रूद्र से ऐसी बात करते हुए क्युकी उसका पति तो हमेसा पीकर धुत रहता है इसलिए शायद कही न कही वो भी प्यासी थी इसलिए वो भूल गयी की मदहोशी में वो क्या पूछ बैठी
रानी- क्यों कमी है उस में
रूद्र-( मुस्कुराते हुए फास गयी मछली जाल ंव) अरे नहीं नहीं इतनी भी कमी नहीं है वो बस तुम्हारी छूट पैर बाल बहुत है और मुझे चिकनी पसंद है बस बाकी तो मस्त है
रानी- बाल और मेरी छूट पैर हो hi नहीं सकता छोटे बाबू में रोज़ साफ़ करती हु मुझे बाल पसंद नहीं वह
रूद्र - झूट मैंने खुद देखा है अभी तो झूट क्यों बोल रही हो बस अब उसे साफ़ कर लेना चाट ने में मजा आएगा
रानी- मैंने कहा न बाल नहीं है
रूद्र- है और बहुत बाल है यकीन न हो तो खुद देख लो
रानी- में क्यों देखु जब मुझे पता है मेरे वह बाल नहीं है
रूद्र- इतना यकीन है तो दिखाओ अगर में हारा तो इस बार तुम्हारी पगार डबल ठीक है और अगर में जीता तो जो में कहूंगा वो तुम करोगी
डबल पगार का सुनकर रानी भूल hi गयी की वो किस खजाने को लुटाने जा रही है और मुँह घुमा कर अपने कपडे खोल ने लगी
मगर इस से पहले की रूद्र उस ख़ज़ाने को करीब से देख पाटा शम्भू की आवाज़ आयी जिसे सुनते hi रानी की हालत पतली जो गयी और वो बिल्जी की रफ़्तार से पानी भरकर वह से चली गयी
और रूद्र बस उसे जाते हुए देखने के सिवा कुछ न कर सका रानी जा चुकी थी मगर जाते 2 रूद्र को बेचैन कर गयी थी
रूद्र- इस साले शम्भू की माँ को छोड़ू थोड़ी देर और रुक जाता तो चिड़िया फास hi गयी थी खैर कोई नहीं देखता हु कब तक बचती है पैर साला अब इस लुंड का क्या कृ हां ये ठीक रहेगा
और कुछ सोच कर वो सोनू के घर की तरफ चल दिया लेकिन वह से भी उसे खली हाथ hi लौटना पड़ा क्युकी वो सब तो खेतो में hi थे
रूद्र- अब क्या कृ इसका बुआ का भी महीना चल रहा है वर्ण उसकी hi छूट मार लेता यहाँ बुला कर अब कहा जाऊ हम्म दीदी को मिलता हु शायद वो आ जाए
पैर आज उसकी किस्मत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए मेघा ने भी फ़ोन नहीं उठाया उठती भी कैसे वो तो रम्य के रूम में थी और फ़ोन रूद्र के रूम में
बेचारा मरता क्या न करता आखिर कार टूबवेल में डुबकी लगा कर उसके ठन्डे पानी में बैठ गया और जब तक लुंड महाराज शांत नहीं हुए तब तक वही रहा इस किर्या में शाम ढल चुकी थी और उसके कदम चल पड़े थे घर की तरफ की रात को तो छूट मिलनी hi है
यही सब सोचते हुए सुरभि फ्रेश हुई और खुद को शीशे में देखने लगी और खुद hi मुस्कुराने लगी
और मैं में सोच ने लगी
सुरभि- क्या सच में में आज भी इतनी खूबसूरत हु की मेरा अपना बीटा मुझ पैर फ़िदा है मुझे छोड़ना चाहता है
छियई ये में क्या सोच ने लगी अभी खुद से वादा किया था की अब ऐसा नहीं सोच न फिर भी हे भगवान् ये लड़का मुझे पागल कर देगा और ये मेरी छूट पता नहीं क्यों बात बात पे गीली होने लगती है उउउउउउफफ्फ्फ्फ़ पता नहीं क्या होगा मेरा हम्म्म्म
इन्ही बातो को बोलते हुए बहार आयी जहा माहि बैठी हुई थी
सुरभि- क्या हुआ क्यों चिल्ला रही है और वो दोनों महरानी कहा है
माहि- दीदी और बुआ तो ऊपर अपने रूम में है और मुझे कुछ पैसे चाहिए थे बुक्स के लिए
सुरभि- ठीक है अभी लाती हु ( बोलकर सुरभि अंदर चली गयी)
वही खेत पैर रूद्र चैन की नींद सू रहा था की तभी किसी की आवाज़ सुनकर उसकी आँख खुली जो की कमरे के पीछे से आ रही थी इस आवाज़ को सुनते hi रूद्र के कान खड़े हो गए क्युकी इस आवाज़ से वो भली भाति परिचित था इसलिए जल्दी से खड़ा हुआ और कमरे की खिड़की से बहार झांक कर देखने लगा और जल्द hi उसे एक नयी छूट के दर्शन हुए जो की इस बात से अनजान की उसकी छूट से निकलते मधुर संगीत ने किसी की हवस को हवा दे दी है वो बेफिक्र जोर लगा कर मूत ने में लगी हुई थी
उधर अंदर रूद्र का लुंड तो उस चिकनी छूट को देखकर hi फुंकार ने लगा था उसका बस चलता तो अभी जाते hi लुंड घुसा के छोड़ ने लगता पैर फिलहाल ये उसके बस में नहीं था तो बस खड़ा होकर उसके चेहरे के दिखने का इंतज़ार करने लगा और कुछ hi पल में वो इंतज़ार ख़तम हुआ जब उस गोरी छूट की मालकिन का चेहरा रूद्र के सामने आया वो सच में पूर्ण रूप से निर्मित काय था जिसे देख कर हर किसी का दिल उसे प्यार करने को करे
वो कोई और नहीं रूद्र के खेत में hi काम करने वाले शम्भू की बीवी रानी थी जो शायद पानी लेने के लिए इधर आयी थी मगर तेज़ प्रेशर को रोक न पायी और जल्दबाज़ी में अपनी कामुक जवानी का जलवा दिखा बैठी
रूद्र उसके खयालो में खोया था की उसकी दिमाग में घंटी बजी उसे ध्यान आया की रानी घूम कर सामने hi आएगी तो वो जल्दी से बहार निकला और अपने लुंड को बहार निकाल के मूतने लगे
उसका दिमाग आज कल बहुत तेज़ चल ने लगा था और जो उसने सोचा था वही हुआ रानी जैसे hi घूम कर सामने आयी उसकी नज़र रूद्र के लुंड पैर पड़ी और ठिठक कर वही रुक गयी और आँख फाड़े उस मुसल को देखने लगी जो आने वाले वक़्त में उसकी छूट का बजा बजने वाला था
रूद्र का काम हो चूका था इसलिए चौक ने का नाटक करते हुए बोलै
रूद्र- ारे तुम यहाँ क्या कर रही हो ओह्ह्ह्हह सॉरी( और घूम कर लुंड अंदर कर लिया)
रूद्र की आवाज़ सुनकर रानी जैसे होश में आयी
रानी- वो वोओओओ छोटे बाबू पानी लेने आयी थी इसलिए इधर आ गयी
रूद्र- ाचा ठीक है पैर किसी को बताना मत की तुम ने मुझे ऐसे देखा ( शरीफ बनते हुए)
रानी- कैसे छोटे बाबू
रूद्र- अरे मतलब बिना कपड़ो के
रानी- हम ने कुछ नहीं देखा छोटे बाबू( सर झुकार)
रूद्र- ाचा तो घर कर क्या देख रही थी तुम बोलो
रानी- वो हम तो वो आपको देख कर चौक गए थे
रूद्र- ाचा झूट बोलती हो ठीक है तो जाओ पानी भर लो मैंने तुम्हे माफ़ किया
रानी-( रूद्र की बात सुनते hi रानी शर्मा गयी और आंखे बंद किये hi बोली) जी छोटे बाबू शुक्रिया
रूद्र- कोई बात नहीं वैसे तुम भी मुझे माफ़ कर देना ( वो समझ गया था ये किसी नहीं कहेगी)
रानी- हम किसलिए माफ़ करे छोटे बाबू
रानी की बात सुनकर रूद्र उसके करीब आया और प्यार से बोलै
रूद्र- वो क्या है न अभी थोड़ी देर पहले मेरे कमरे के पीछे से बहुत hi सुरईले संगीत की आवाज़ आ रही थी तो मैंने भी खिड़की में से तुम्हे देख लिया था इसलिए
पहले तो रानी को रूद्र की बात समझ नहीं आयी पैर जैसे hi उसे ख्याल आया की रूद्र क्या कह रहा है तो वो शर्म से पानी पानी हो गयी और वह से जाने लगी तो रूद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया
रूद्र- सुनो तो भाग कहा रही हो पानी तो लेती जाओ
रानी- हमे जाने दीजिये आप बहुत गंदे है छोटे बाबू भला ऐसे किसी को देखते है ये सब करते हुए
रूद्र- ाचा जी हम गंदे है और तुम जो मेरे लुंड को खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी वो क्या था बोलो
रानी- हे राम छोटे बाबू हम ने कब देखा वो तो हम एक दम से सामने आगये इसलिए नज़र पद गयी अब छोड़िये हमें देर हो रही है
रूद्र- नज़र पद गयी थी तो हटाई क्यों नहीं या फिर कुछ जयादा hi पसंद आज्ञा था
रानी- तौबा 2 छोटे बाबू हमें अपनी उसका कबाड़ा थोड़ी करवाना है उसे लेकर हाय दिए
रूद्र- किसका कबाड़ा रानी बोलो न वैसे तुम्हारी छूट भी एक दम गोरी है हमें तो पहली नज़र में hi पसंद आए गयी बस एक hi कमी है उस में
रूद्र की बातो से रानी भी गरम होने लगी थी और उसे भी अब ाचा लग रहा था रूद्र से ऐसी बात करते हुए क्युकी उसका पति तो हमेसा पीकर धुत रहता है इसलिए शायद कही न कही वो भी प्यासी थी इसलिए वो भूल गयी की मदहोशी में वो क्या पूछ बैठी
रानी- क्यों कमी है उस में
रूद्र-( मुस्कुराते हुए फास गयी मछली जाल ंव) अरे नहीं नहीं इतनी भी कमी नहीं है वो बस तुम्हारी छूट पैर बाल बहुत है और मुझे चिकनी पसंद है बस बाकी तो मस्त है
रानी- बाल और मेरी छूट पैर हो hi नहीं सकता छोटे बाबू में रोज़ साफ़ करती हु मुझे बाल पसंद नहीं वह
रूद्र - झूट मैंने खुद देखा है अभी तो झूट क्यों बोल रही हो बस अब उसे साफ़ कर लेना चाट ने में मजा आएगा
रानी- मैंने कहा न बाल नहीं है
रूद्र- है और बहुत बाल है यकीन न हो तो खुद देख लो
रानी- में क्यों देखु जब मुझे पता है मेरे वह बाल नहीं है
रूद्र- इतना यकीन है तो दिखाओ अगर में हारा तो इस बार तुम्हारी पगार डबल ठीक है और अगर में जीता तो जो में कहूंगा वो तुम करोगी
डबल पगार का सुनकर रानी भूल hi गयी की वो किस खजाने को लुटाने जा रही है और मुँह घुमा कर अपने कपडे खोल ने लगी
मगर इस से पहले की रूद्र उस ख़ज़ाने को करीब से देख पाटा शम्भू की आवाज़ आयी जिसे सुनते hi रानी की हालत पतली जो गयी और वो बिल्जी की रफ़्तार से पानी भरकर वह से चली गयी
और रूद्र बस उसे जाते हुए देखने के सिवा कुछ न कर सका रानी जा चुकी थी मगर जाते 2 रूद्र को बेचैन कर गयी थी
रूद्र- इस साले शम्भू की माँ को छोड़ू थोड़ी देर और रुक जाता तो चिड़िया फास hi गयी थी खैर कोई नहीं देखता हु कब तक बचती है पैर साला अब इस लुंड का क्या कृ हां ये ठीक रहेगा
और कुछ सोच कर वो सोनू के घर की तरफ चल दिया लेकिन वह से भी उसे खली हाथ hi लौटना पड़ा क्युकी वो सब तो खेतो में hi थे
रूद्र- अब क्या कृ इसका बुआ का भी महीना चल रहा है वर्ण उसकी hi छूट मार लेता यहाँ बुला कर अब कहा जाऊ हम्म दीदी को मिलता हु शायद वो आ जाए
पैर आज उसकी किस्मत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए मेघा ने भी फ़ोन नहीं उठाया उठती भी कैसे वो तो रम्य के रूम में थी और फ़ोन रूद्र के रूम में
बेचारा मरता क्या न करता आखिर कार टूबवेल में डुबकी लगा कर उसके ठन्डे पानी में बैठ गया और जब तक लुंड महाराज शांत नहीं हुए तब तक वही रहा इस किर्या में शाम ढल चुकी थी और उसके कदम चल पड़े थे घर की तरफ की रात को तो छूट मिलनी hi है