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- Dec 5, 2013
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श्री के पास थोड़ी देर और लेते रह ने के बाद वाणी अपने कमरे में चली गयी और रूद्र के बारे में सोच ने लगी की कैसे उसी के घर से दो छूट फाड़ ने के बाद अब तीसरी का नंबर लगाने वाला है
व्- पता नहीं कितनी छूट फाड़ेगा ये लड़का और पता नहीं कितनी फाड़ चूका होगा ओह्ह्ह इस के बारे में तो सोच न भी गलत है छूट गीली होने लगती है आअह्ह्ह्ह अब तो नहाना hi पड़ेगा वर्ण अगर गरम हुई तो बेचैन हो जाउंगी आअह्ह्ह्ह
यही बडबडते हुए अपने कपडे उतार कर नंगी हो गयी और बाथरूम की तरफ जाने लगी की सामने लगे शीशे पैर नज़र गयी तो कदम खुद hi रुक गए इस प्यासी घोड़ी के और अपनी गांड को दोनों हाथो में लेकर हिलाते हुए खुद से hi बोली
व्- कुछ भी हो गांड तो मेरी सच में लाजवाब है तभी तो बिना गांड मारे छोड़ा नहीं कमीने पैर एक बात है मेरी जैसी गांड के लिए तो उस सांड का मुसल hi सही वर्ण कोई और तो छेद तक भी न पहुंचे हाहाहा में भी पागल हो गयी हु पता नहीं क्या क्या सोच ने लग जाती हु
खुद hi अपने सर पैर हाथ मरती वो बाथरूम में घुस गयी आज ठन्डे पानी की बूँद भी उसे जन्नत का मजा दे रही थी और वो भी अपनी मस्ती में मस्त हो कर अपनी उन मोती मोती चूचियों के साथ खेलते हुए नहाने का मजा लेने लगी
और वह सुरभि निचे कड़ी हो कर आवाज़ लगा रही थी रम्य को
स- रम्य ो रम्य निचे आ जरा जल्दी से
सुरभि की आवाज़ सुनकर रम्य कुनमुनाती हुई उठी और निचे चली गयी
रब- क्या हुआ भाभी ऐसे क्यों चिल्ला रही हो
स- अरे देख न शाम होने को आयी है पैर माहि का कुछ पता hi नहीं दोपहर तक का कहकर गयी थी जरा फ़ोन लगा न उसे
सुरभि की बात सुनकर रम्य माहि को कॉल करती है पैर उसका फ़ोन ऑफ आ रहा था
रब- भाभी उसका फ़ोन तो ऑफ आ रहा है में रूद्र को बोलती हु वो देख कर आएगा उसे
स- हां ये सही रहेगा जा जल्दी से उठा उसे हे भगवान् मेरी बेटी रक्षा करना
रब- रूद्र बीटा उठ जल्दी से देख माहि घर नहीं आयी अभी तक रूद्र उठ न जल्दी से
रम्य की आवाज़ सुनकर रूद्र जल्दी से दरवाज़ा खोलता है और रम्य उसे सब बताती जिसे सुनकर रूद्र को भी चिंता होती है और वो जल्दी से माहि को खोज ने निकल जाता है
आआह्ह्ह्ह छोड़ दो मुझे वर्ण में तुम्हे जान से मार दूंगी
ल1- अरे मेरी जान तेरी कातिल जवानी को भोग ने के लिए पुरे 3 साल इंतज़ार किया है और आज जब तू हाथ आयी है तो तू कहती है तुझे छोड़ दे
ल2- सच कहा यार तूने साली जब भी पास से गुज़रती थी तो दिल में आग लग जाती थी आज तो इसका सर रास पि जाऊंगा कसम से हाय क्या मस्त गांड है इस की ( माहि की गांड को दबाते हुए)
माहि- आठ हाथ मत कुत्ते अगर मेरे भाई को पता चला न तो तू इस हाथ से धोने के लायक भी नहीं रहेगा
ल2- हाय ये गुस्सा hi तो आज तेरी छूट को फड़वायेगा साली उसदिन सबके सामने थप्पड़ मारा था न आज देख तेरी छूट और गांड दोनों को फाड़ कर रख दूंगा
ल3- तो देर क्यों कर रहे चलो मजे करते है जल्दी से
ल1- अरे करते है जल्दी किस बात की आराम से मजे लेंगे पैर पहले शराब का मजा तो लेले फिर शबाब को भी चखेंगे
माहि वही कोने में बंधी हुई पड़ी थी बेचारी क्या सोच कर आयी थी और क्या हो गया था दरी सेहमी वो बस मैं hi मैं भगवान् को याद कर रही थी की मुझे बचालो
रूद्र सोल्लगे पहुंच चूका था जहा सन्नाटा था छाया हुआ था रूद्र गाड़ी से निकल कर गेट पैर गया तो गार्ड बोलै
गार्ड- कोण हो भाई और यहाँ क्या कर रहे हो
र- में माहि का भाई हु वो अभी तक घर नहीं पहुंची अंदर है क्या
गार्ड- यहाँ कोई नहीं अब जाओ तुम यहाँ से
रूद्र गार्ड की बात से सहमत नहीं था पैर कोई यहाँ दिख भी नहीं रहा था इसलिए वो टाइम ख़राब नहीं करना चाहता था इसलिए मुद कर वापस जाने hi लगा था की उसकी नज़र माहि की स्कूटी पैर पड़ी और वो मुट्ठी बिछता हुआ वापस गार्ड के पास गया
र- गेट खोल जल्दी से
गार्ड- अरे मैंने कहा न यहाँ कोई नहीं है समझ नहीं आता क्या
इस आगे वो कुछ बोल नहीं पाया क्युकी उसकी गर्दन रूद्र के हाथ में आगयी थी
र- बता मेरी बहिन कहा है वर्ण अभी तेरी गर्दन तोड़ दूंगा
रूद्र के यु पकड़ ने से गार्ड की तो सिटी पित्ती गम हो गयी और वो जल्दी से गेट खोल कर सिर्फ इतना hi बोल पाया
गार्ड- साहब वो ऊपर 3 लड़के है दारू पि रहे है बाकि आपकी बहिन वह है या नहीं हमें नहीं पता हमें छोड़ दो गार्ड की बात सुनते hi रूद्र ने ऊपर की तरफ दौड लगा दी
ल1- चल भाई 2 पेग हो गए अब जरा शबाब भी चख hi लिया जाए पहले में करूँगा फिर तुम ठीक
ल2- हां और में पूरी फिल्म बनता हु ताकि ये साली अपनी जुबान न खोल सके किसी के सामने
पहला लड़का माहि की तरफ बढ़ने लगा और माहि दर के मारे चीख ने लगी
माहि- बचाऊऊऊ कोई है
ल1- चिल्ला और जोर से चिल्ला या कोई नहीं तेरी आवाज़ सुन ने वाला और अब जरा अपने इस कातिल जिस्म के दर्शन करने दे मुझे ( माहि के कपडे को पकड़ते हुए)
अभी वो कुछ करता की धड़ाम की आवाज़ के साथ गेट खुल गया और अंदर दाखिल हुआ यमराज जो की सामने का नज़ारा देख कर hi शौक हो गया
ल2- ोयई कूंण.....
इस आगे वो कुछ कहते की उसके मुँह से खून बहने लगा जिस देख पहला लड़का चिल्ला कर बोलै तो रूद्र उसकी तरफ गुस्से से देखते हुए
आगे बढ़ा और उसका सर पकड़ कर दिवार में मर दिया उसके भी सर से खून बहने लगा अपने दोनों साथिया का ऐसा हाल देख कर 3सरा लड़का ऐसा भगा की नज़र भी नहीं आया कुछ hi पल में सारा नज़ारा बदल गया था
माहि अब शांत आँखों से अपने भाई को देखे जा रही थी जो उसके सामने बैठा उसे
खोल रहा था
र- तू ठीक है न गुड़िया तुझे कुछ हुआ तो नहीं
पैर माहि तो जैसे कुछ सुन hi नहीं रही थी रूद्र अब उसे उठा कर खड़ा करते हुए फिर से बोलता है
र- क्या हुआ गुड़िया तू कुछ बोल क्यों नहीं रही देख अब सब ठीक है प्ल्ज़ कुछ बोल मुझे दर लग रहा है तेरी ख़ामोशी से
रूद्र की बात सुनकर माहि की सांसें तेज़ तेज़ चलने लगी और वो एक टुक्क अपने भाई को देखे जा रही थी
जैसे एक तूफ़ान रुका हुआ था उसके अंदर जो अब बहार आने को बेताब था और जब उसका सैलाब छूटा तो माहि जोर से रट हुए अपने भाई के गले लग गयी और रट रट बोली
माहि- भाई मुझे यही अपनी बाहो में रहने दो ताकि में खुद संभल सकू
र- रो मत मेरी गुड़िया तेरा भाई है न तेरे पास गलती मेरी थी की मैंने तुझे अकेले आने दिया
माहि- ऐसा मत बोलो भाई आप ने hi तो आज मुझे मरने से बचाया है वर्ण इस सब के बाद में ज़िंदा नहीं रहती भाई लव यू सू मच ( रूद्र के कंधे को चूमते हुए)
र- स्स्स्सह्ह्हह्ह बिलकुल चुप्प रट हुए तू बिलकुल भी अछि नहीं लगती समझी और मुझे पता है तुझे कैसे चुप करना है
और माहि के होठो चूमने लगता है जिस में माहि भी पूरा साथ देती है अपने भाई का इस गहरे चुम्भन के बाद रूद्र माहि को गले लगता हुआ बोलै
र- अब चले घर या यही पैर शुरू हो जाऊ हम्म
अपने भाई की बात सुनकर माहि के चेहरे पैर भी मुस्कान आगयी और मुस्कुराते हुए बोली
माहि- आपकी मर्ज़ी है आपके लिए तो में कही भी बिच जाऊ भाई बकज़ यू र माय लाइफ लव यू सोऊ मच
र- पता है मुझे मेरी गुड़िया लव यू 2 ( माहि के बाल सही करते हुए)
माहि- बाल ख़राब मत करो न भाई और अब चलो भूख भी बहुत लगी है ( रूद्र का हाथ अपने कंधे पैर डालते हुए चलने लगी)
र- चल भुक्कड़ बस घर में इस बारे में किसी को नहीं बताना समझी
माहि- समझ गयी जी
दोनों बहिन भाई ख़ुशी 2 ख़ुशी वह से गाडी में बैठकर घर के लिए निकल गए
अब गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल ने लगी थी और माहि अपनी आदत से मजबूर गाड़ी में अपनी चूचियों को सहलाती हुई बोली
माहि- ोू भाई घर जाते hi बस चढ़ जाना बड़ा मैं कर रहा है तुम्हे किश करने के बाद हाईए
र- तेरा कुछ नहीं हो सकता माहि तू सच में पागल लड़की है अभी थोड़ी देर पहले रो रही थी और अब देखो तुझे गर्मी छड़ी है चल ठीक से बैठ ( माहि के हाथ को चूमते हुए जो उसके लुंड पे आज्ञा था)
माहि- क्या करू भाई पागल भी तो आप ने hi बनाया है और सच तो ये है की आप के पास आते hi में कण्ट्रोल नहीं कर पाती
कहते hi गाल पैर किश करके सर उसके कंधे पैर रखकर सामने कार को सड़क पैर दौड़ते हुए देखने लगी
हैप्पी होली तो आल माय स्वीट फ्रेंड्स स्टे सेफ जल्द मिलेंगे
श्री के पास थोड़ी देर और लेते रह ने के बाद वाणी अपने कमरे में चली गयी और रूद्र के बारे में सोच ने लगी की कैसे उसी के घर से दो छूट फाड़ ने के बाद अब तीसरी का नंबर लगाने वाला है
व्- पता नहीं कितनी छूट फाड़ेगा ये लड़का और पता नहीं कितनी फाड़ चूका होगा ओह्ह्ह इस के बारे में तो सोच न भी गलत है छूट गीली होने लगती है आअह्ह्ह्ह अब तो नहाना hi पड़ेगा वर्ण अगर गरम हुई तो बेचैन हो जाउंगी आअह्ह्ह्ह
यही बडबडते हुए अपने कपडे उतार कर नंगी हो गयी और बाथरूम की तरफ जाने लगी की सामने लगे शीशे पैर नज़र गयी तो कदम खुद hi रुक गए इस प्यासी घोड़ी के और अपनी गांड को दोनों हाथो में लेकर हिलाते हुए खुद से hi बोली
व्- कुछ भी हो गांड तो मेरी सच में लाजवाब है तभी तो बिना गांड मारे छोड़ा नहीं कमीने पैर एक बात है मेरी जैसी गांड के लिए तो उस सांड का मुसल hi सही वर्ण कोई और तो छेद तक भी न पहुंचे हाहाहा में भी पागल हो गयी हु पता नहीं क्या क्या सोच ने लग जाती हु
खुद hi अपने सर पैर हाथ मरती वो बाथरूम में घुस गयी आज ठन्डे पानी की बूँद भी उसे जन्नत का मजा दे रही थी और वो भी अपनी मस्ती में मस्त हो कर अपनी उन मोती मोती चूचियों के साथ खेलते हुए नहाने का मजा लेने लगी
और वह सुरभि निचे कड़ी हो कर आवाज़ लगा रही थी रम्य को
स- रम्य ो रम्य निचे आ जरा जल्दी से
सुरभि की आवाज़ सुनकर रम्य कुनमुनाती हुई उठी और निचे चली गयी
रब- क्या हुआ भाभी ऐसे क्यों चिल्ला रही हो
स- अरे देख न शाम होने को आयी है पैर माहि का कुछ पता hi नहीं दोपहर तक का कहकर गयी थी जरा फ़ोन लगा न उसे
सुरभि की बात सुनकर रम्य माहि को कॉल करती है पैर उसका फ़ोन ऑफ आ रहा था
रब- भाभी उसका फ़ोन तो ऑफ आ रहा है में रूद्र को बोलती हु वो देख कर आएगा उसे
स- हां ये सही रहेगा जा जल्दी से उठा उसे हे भगवान् मेरी बेटी रक्षा करना
रब- रूद्र बीटा उठ जल्दी से देख माहि घर नहीं आयी अभी तक रूद्र उठ न जल्दी से
रम्य की आवाज़ सुनकर रूद्र जल्दी से दरवाज़ा खोलता है और रम्य उसे सब बताती जिसे सुनकर रूद्र को भी चिंता होती है और वो जल्दी से माहि को खोज ने निकल जाता है
आआह्ह्ह्ह छोड़ दो मुझे वर्ण में तुम्हे जान से मार दूंगी
ल1- अरे मेरी जान तेरी कातिल जवानी को भोग ने के लिए पुरे 3 साल इंतज़ार किया है और आज जब तू हाथ आयी है तो तू कहती है तुझे छोड़ दे
ल2- सच कहा यार तूने साली जब भी पास से गुज़रती थी तो दिल में आग लग जाती थी आज तो इसका सर रास पि जाऊंगा कसम से हाय क्या मस्त गांड है इस की ( माहि की गांड को दबाते हुए)
माहि- आठ हाथ मत कुत्ते अगर मेरे भाई को पता चला न तो तू इस हाथ से धोने के लायक भी नहीं रहेगा
ल2- हाय ये गुस्सा hi तो आज तेरी छूट को फड़वायेगा साली उसदिन सबके सामने थप्पड़ मारा था न आज देख तेरी छूट और गांड दोनों को फाड़ कर रख दूंगा
ल3- तो देर क्यों कर रहे चलो मजे करते है जल्दी से
ल1- अरे करते है जल्दी किस बात की आराम से मजे लेंगे पैर पहले शराब का मजा तो लेले फिर शबाब को भी चखेंगे
माहि वही कोने में बंधी हुई पड़ी थी बेचारी क्या सोच कर आयी थी और क्या हो गया था दरी सेहमी वो बस मैं hi मैं भगवान् को याद कर रही थी की मुझे बचालो
रूद्र सोल्लगे पहुंच चूका था जहा सन्नाटा था छाया हुआ था रूद्र गाड़ी से निकल कर गेट पैर गया तो गार्ड बोलै
गार्ड- कोण हो भाई और यहाँ क्या कर रहे हो
र- में माहि का भाई हु वो अभी तक घर नहीं पहुंची अंदर है क्या
गार्ड- यहाँ कोई नहीं अब जाओ तुम यहाँ से
रूद्र गार्ड की बात से सहमत नहीं था पैर कोई यहाँ दिख भी नहीं रहा था इसलिए वो टाइम ख़राब नहीं करना चाहता था इसलिए मुद कर वापस जाने hi लगा था की उसकी नज़र माहि की स्कूटी पैर पड़ी और वो मुट्ठी बिछता हुआ वापस गार्ड के पास गया
र- गेट खोल जल्दी से
गार्ड- अरे मैंने कहा न यहाँ कोई नहीं है समझ नहीं आता क्या
इस आगे वो कुछ बोल नहीं पाया क्युकी उसकी गर्दन रूद्र के हाथ में आगयी थी
र- बता मेरी बहिन कहा है वर्ण अभी तेरी गर्दन तोड़ दूंगा
रूद्र के यु पकड़ ने से गार्ड की तो सिटी पित्ती गम हो गयी और वो जल्दी से गेट खोल कर सिर्फ इतना hi बोल पाया
गार्ड- साहब वो ऊपर 3 लड़के है दारू पि रहे है बाकि आपकी बहिन वह है या नहीं हमें नहीं पता हमें छोड़ दो गार्ड की बात सुनते hi रूद्र ने ऊपर की तरफ दौड लगा दी
ल1- चल भाई 2 पेग हो गए अब जरा शबाब भी चख hi लिया जाए पहले में करूँगा फिर तुम ठीक
ल2- हां और में पूरी फिल्म बनता हु ताकि ये साली अपनी जुबान न खोल सके किसी के सामने
पहला लड़का माहि की तरफ बढ़ने लगा और माहि दर के मारे चीख ने लगी
माहि- बचाऊऊऊ कोई है
ल1- चिल्ला और जोर से चिल्ला या कोई नहीं तेरी आवाज़ सुन ने वाला और अब जरा अपने इस कातिल जिस्म के दर्शन करने दे मुझे ( माहि के कपडे को पकड़ते हुए)
अभी वो कुछ करता की धड़ाम की आवाज़ के साथ गेट खुल गया और अंदर दाखिल हुआ यमराज जो की सामने का नज़ारा देख कर hi शौक हो गया
ल2- ोयई कूंण.....
इस आगे वो कुछ कहते की उसके मुँह से खून बहने लगा जिस देख पहला लड़का चिल्ला कर बोलै तो रूद्र उसकी तरफ गुस्से से देखते हुए
आगे बढ़ा और उसका सर पकड़ कर दिवार में मर दिया उसके भी सर से खून बहने लगा अपने दोनों साथिया का ऐसा हाल देख कर 3सरा लड़का ऐसा भगा की नज़र भी नहीं आया कुछ hi पल में सारा नज़ारा बदल गया था
माहि अब शांत आँखों से अपने भाई को देखे जा रही थी जो उसके सामने बैठा उसे
खोल रहा था
र- तू ठीक है न गुड़िया तुझे कुछ हुआ तो नहीं
पैर माहि तो जैसे कुछ सुन hi नहीं रही थी रूद्र अब उसे उठा कर खड़ा करते हुए फिर से बोलता है
र- क्या हुआ गुड़िया तू कुछ बोल क्यों नहीं रही देख अब सब ठीक है प्ल्ज़ कुछ बोल मुझे दर लग रहा है तेरी ख़ामोशी से
रूद्र की बात सुनकर माहि की सांसें तेज़ तेज़ चलने लगी और वो एक टुक्क अपने भाई को देखे जा रही थी
जैसे एक तूफ़ान रुका हुआ था उसके अंदर जो अब बहार आने को बेताब था और जब उसका सैलाब छूटा तो माहि जोर से रट हुए अपने भाई के गले लग गयी और रट रट बोली
माहि- भाई मुझे यही अपनी बाहो में रहने दो ताकि में खुद संभल सकू
र- रो मत मेरी गुड़िया तेरा भाई है न तेरे पास गलती मेरी थी की मैंने तुझे अकेले आने दिया
माहि- ऐसा मत बोलो भाई आप ने hi तो आज मुझे मरने से बचाया है वर्ण इस सब के बाद में ज़िंदा नहीं रहती भाई लव यू सू मच ( रूद्र के कंधे को चूमते हुए)
र- स्स्स्सह्ह्हह्ह बिलकुल चुप्प रट हुए तू बिलकुल भी अछि नहीं लगती समझी और मुझे पता है तुझे कैसे चुप करना है
और माहि के होठो चूमने लगता है जिस में माहि भी पूरा साथ देती है अपने भाई का इस गहरे चुम्भन के बाद रूद्र माहि को गले लगता हुआ बोलै
र- अब चले घर या यही पैर शुरू हो जाऊ हम्म
अपने भाई की बात सुनकर माहि के चेहरे पैर भी मुस्कान आगयी और मुस्कुराते हुए बोली
माहि- आपकी मर्ज़ी है आपके लिए तो में कही भी बिच जाऊ भाई बकज़ यू र माय लाइफ लव यू सोऊ मच
र- पता है मुझे मेरी गुड़िया लव यू 2 ( माहि के बाल सही करते हुए)
माहि- बाल ख़राब मत करो न भाई और अब चलो भूख भी बहुत लगी है ( रूद्र का हाथ अपने कंधे पैर डालते हुए चलने लगी)
र- चल भुक्कड़ बस घर में इस बारे में किसी को नहीं बताना समझी
माहि- समझ गयी जी
दोनों बहिन भाई ख़ुशी 2 ख़ुशी वह से गाडी में बैठकर घर के लिए निकल गए
अब गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल ने लगी थी और माहि अपनी आदत से मजबूर गाड़ी में अपनी चूचियों को सहलाती हुई बोली
माहि- ोू भाई घर जाते hi बस चढ़ जाना बड़ा मैं कर रहा है तुम्हे किश करने के बाद हाईए
र- तेरा कुछ नहीं हो सकता माहि तू सच में पागल लड़की है अभी थोड़ी देर पहले रो रही थी और अब देखो तुझे गर्मी छड़ी है चल ठीक से बैठ ( माहि के हाथ को चूमते हुए जो उसके लुंड पे आज्ञा था)
माहि- क्या करू भाई पागल भी तो आप ने hi बनाया है और सच तो ये है की आप के पास आते hi में कण्ट्रोल नहीं कर पाती
कहते hi गाल पैर किश करके सर उसके कंधे पैर रखकर सामने कार को सड़क पैर दौड़ते हुए देखने लगी
हैप्पी होली तो आल माय स्वीट फ्रेंड्स स्टे सेफ जल्द मिलेंगे