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काम्य मौसी की सेवा करने के बाद रूद्र अपने कमरे में जा कर सू गया
वही दूसरी तरफ काम्य जोरदार हुई चुदाई को याद करके खुद से बाते करने लगी
क- कितना प्यारा है रूद्र में तो पागल हो गयी हु उसके प्यार में पता नहीं क्या जादू कर दिया है की सामने आते hi छूट में खुजली होने लगती है कैसे रहूंगी अब उसके बिना ऊऊफफफफफफ
ऐसी hi मीठी 2 बाते करती हुई नींद के आगोश में चली गयी
सुबह रूद्र की आँख जल्दी hi खुल गयी तो वो फ्रेश हो कर निचे चला गया जहा उसकी माँ किचन में सुबह के नास्ते की तैयारी कर रही थी
निचे उतारते रूद्र की नज़र सबसे पहले नज़र अपनी माँ की बड़ी गांड पैर hi गयी जिसका वो दीवाना था जो की काम करने की वजह से थिरक रही थी
जिसे देख के रूद्र सम्मोहित सा होता हुआ सीधा अपनी माँ की तरफ चल दिया और जाते hi अपनी माँ को बाहो में भर लिया
रूद्र के ऐसे चिपकते hi सुरभि की धड़कन तेज़ हो गयी उसे पता था ये उसका बीटा hi है जो उसे अकेली देख कर मजे ले रहा है
सुरभि- ोूहः तो आगयी माँ की याद तुझे
र- भुला hi कब था आप ने hi मना किया था इस में मेरी क्या गलती है ूउम्म्माःह्ह्ह्ह ( गर्दन को चूमते हुए)
सुरभि- आआह्ह्ह्ह तो फिर आज क्यों कर रहा मैंने तो नहीं कहा तुझे करने को
र- ऊऊफफफफ तुम्हारा ये जिस्म देख कर कण्ट्रोल नहीं हुआ इसलिए मेरी स्वीट मा
सुरभि- ाचा जी गलती भी मेरे जिस्म की है ये क्यों नहीं कहता की तेरी नियत फिसल गयी मुझे अकेली देख कर हम्म्म ( रूद्र की तरफ पलट कर उसे देखते हुए बोली और स्लैप पैर बैठ गयी)
र- अब चाहे आप कुछ भी कहो पैर सच तो ये है की आपको देखकर मुझ से कण्ट्रोल नहीं होता माँ पता आपको पता नहीं कैसे रुके हुए हु में खुद को ( माँ के होठो के करीब जाते हुए)
दोनों माँ बेटे सुबह 2 की ठंडक में गरम होते हुए एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे सुरभि तो वैसे hi प्यासी थी जो जयादा देर तक रुक न पायी अपने बेटे की आँखों में अपने लिए प्यार देख कर और खुद hi अपने होठो को रूद्र के होठो से चिपका दिया
दुनिया से बेखबर हो कर दोनों एक दूसरे के होठो का रसपान करने लगे दोनों में से कोई भी हटना नहीं चाहता था जैसे की जीतने की होड़ लगी हो की कोण जायदा रास पियेगा
रूद्र के हाथ अब हरकत पैर उतर आये थे जिस से सुरभि भी मचल ने लगी थी सुबह का समय था और कोई भी निचे आ सकता था पैर जब जिस्म की आग लगी हो तो होश कहा रहता है
यही हाल अभी इन दोनों का भी था
सुरभि की दोनों टांगो को छोड़ा कर रूद्र अपनी जीब को अपनी माँ की रास बहती छूट पैर ऊपर निचे से करते हुए बड़े प्यार चाट रहा
सुरभि- आआआह्ह्ह्हह्ह रूढ़दृरा मेरे लाल ऊऊफफफफ मत कर आह्हः कोई आज्ञा तो क्या होगा ऊऊफफफफ माआ ररुकक्क जाए मुझे तुझे ये सब करने hi नहीं देना चाहिए था अअअअअअअअस मममममअअअअअअअ एई लड़का क्या जादू कर देता है uuuuufffffffffff मममममअअअअआंआंण जायआ ना आआह्ह्हह्ह्ह्ह
आयआयएईईईईमममममआआआआ उउउउउउउफ्फ्फफ्फ्फ़ रररुडड्रॉररआआआ आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मममममाआआह्ह्ह्हम्मम्मम्मोूहःहःहःहः ममममायआ मई जानी वाली हु बेटा आअह्ह्ह्हह
कुछ hi देर में सुरभि की छूट रास बहाने वाली थी की रूद्र खड़ा हुआ और अपनी की गोरी जांघो को सहलाते हुए फिर से किश करने
के लिए आगे बढ़ा तो सुरभि बोली
सुरभि- आआअह्ह्ह्ह रुक क्यों गया मेरा होने वाला था
र- इसलिए की अब तुम्हारी सवारी करूँगा ( गांड मसलते हुए किश करके बोलै)
सुरभि- ोुह्ह्ह नहीं रूद्र देख बहुत समय हो गया कोई भी आ सकता है अब तू जा बाद में कर लेंगे प्ल्ज़
र- नहीं माँ अब तो तुम्हे छोड़ के hi जाऊंगा चाहे कुछ भी अब जल्दी से घूम जाओ बाते मत करो
सुरभि- तू समझता क्यों नहीं है रईआआह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ....
पैर इस के आगे तो चीख hi निकली क्युकी रूद्र का मुसल पीछे से अपनी माँ की छूट को चीरता हुआ गहराई नाप ने लगा था
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सुरभि- आआह्ह्ह्हह मायआ रूद्र तू समझता क्यों नही आअह्ह्ह्हह मायआ देख बाद में कर लियो ऊऊफफफफफ कोई देख लेगा तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी मेरी आआह्ह्ह्ह माआआ
र- थोड़ी देर चुप रह कर मजे ले मा कोई नई उठेगा अभी तुम बस शांत रहो वर्ण तुम्हारी चीखो को सुन कर जरूर कोई उठ जायेगा
सुरभि- पहले ये मुसल दाल दिया एक hi झटके में और अब आआह्ह्ह्हह बोल रहा है चीखो मत mmmmmaaaaaaaahhhhhhuuuuuuuuuuuufffffffff आआअह्हह्ह्ह्हह ( रूद्र की आँखों में देखते हुए)
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र- इस मुसल से hi तेरी जैसी गदरायी औरत की छूट ठंडी हो सकती है मा छोटा हथियार तो तेरी छूट खा जाएगी अब मजा ली
सुरभि- ऊऊफफफफफफ माआ में hi पागल थी पहले hi आआह्ह्ह्हह रोक दीना चाहियेए था uuuuiiiimmmmmaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह आईसीए हीईई आअह्हह्ह्ह्ह और तेज़ तेज़ कर ऊऊफफफ मेरा होने वाला हैई आआह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ
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ठप्प ठप्प की आवाज़ पुरे किठन में गूंज रही थी रूद्र भी चरम की और जा रहा था तेज़ी जबकि सुरभि झाड़ ने के बाद बड़ी मुश्किल से रूद्र के धक्के झेल रही थी
सुरभि- आआह्ह्ह्ह रूद्र बुसस कर बीटा और कितना छोड़ेगा uuuuummmmmmmhhhhhhhhhhhhaaaahhhh ोुह्ह्ह्हह्ह मम्मा ऊऊफफफफफफ
र- बस्स्स मा मी भीई ाआज्ञाऑ आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
मम्माआआह्ह्ह्ह
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सुरभि- ोुह्ह्ह्ह तू जल्दी कर मेरे लाल भर दे मेरी छूट तेरे गरम विरए से आआह्ह्ह्ह ाअज्जा बीटा इस से पहले कोई आ जाये आअह्ह्ह्हह मायआ
कुछ hi झटको में रूद्र भी निढाल सा अपनी माँ को चिपके हुए खड़ा था
सुरभि- आअह्ह्ह जान निकाल दी तूने तो पैर डरते हुए छोड़ने में मजा भी बहोत आया अब हैट जल्दी से और जा यहाँ से
अपनी माँ की बात सुनते hi रूद्र ने लुंड खेच लिया सुरभि की छूट से जिसके hi उसका और सुरभि का पानी भी बहार आने लगा
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जिसे साफ़ करते हुए सुरभि अपने कपडे उठा कर जल्दी से बाथरूम में चली गयी और रूद्र अपने रूम में भाग गया
सुरभि-( मन में) ये लड़का किसी दिन मरवा देगा पैर साड़ी गलती उसकी भी तो नहीं में भी तो बहक गयी थी मुस्कुराने लगती है
वही जब रूद्र रूम गया तो सामने उसकी बुआ बैठी थी सेक्सी ड्रेस में और रूद्र को देखते हुए बोली
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रब- तो सुबह - सुबह भोग लगा आया भाभी की छूट का
र- आपको हमेसा कैसे पता चल जाता है सोती नहीं हो क्या आप
रब- जिस छूट में तेरा ये लुंड चला जाए वो कैसे सो सकती है अब बुआ का भी कुछ कर दे
र- अभी नहीं बाद करता हु आपका भी इलाज़ अभी तो बस नास्ता करके पंडित जी के पास जाना है
रब- हम्म चल ठीक है पैर जल्दी करियो बहुत खुजली हो रही है ( उदास होते हुए)
र- उदास मत हो आप जल्दी hi खुजली मिटा ता हु आपकी
इतना बोल कर बाथरूम में घुस गया और कपडे बदल कर चल दिया निचे जहा अब माहि काम्य रम्य सब थे
माहि- गुड मॉर्निंग भाई
र- गुड मॉर्निंग गुड़िया न बुआ माँ मौसी
सुरभि- वरर्य गुड मॉर्निंग बीटा ( निचे मुँह करके बोली)
रब- है जी वैरी गुड मॉर्निंग hi है आज तो बस वैरी गुड नाईट पता नई कहा होगी
रम्य की बात सुनकर काम्य और सुरभि दोनों शर्मा जाते है जहा काम्य रात याद करती है तो वही सुरभि रम्य का मतलब समझ के
माहि- मतलब बुआ
रब- अरे मतलब को छोड़ नास्ता कर कुछ लोग तो कर भी चुके( सुरभि को देखते हुए)
माहि- आप और आपकी बाते वैसे भाई आप फ्री हो क्या
र- नहीं गुड़िया आज तो बहुत काम है पहले पंडित जी के पास जाना है फिर बुआ की खुजली की दवा ला कर देनी है
माहि- ok कोई बात नहीं
रम्य की खुजली की बात सुनकर सुरभि बोली
सुरभि- तूने बताया नहीं तुझे खुजली हो रही है
रब- कैसे बताती आपको आप के पास टाइम कहा अकेले 2 इंजेक्शन लगवा लिया आप ने तो मुझे बुलाती तभी तो में बताती
रम्य की बात सुनकर सुरभि चेहरा शर्म से लाल हो गया इसलिए वो बिना कुछ बोले वापस किचन में चली गयी
रूद्र भी नास्ता कर चूका था तो वो भी सब को bye बोल कर निकल गया पंडित जी के घर और दरवाज़ा खत खतया तो सामने वही मासूम चेहरा जिस देखते hi रूद्र उस में खो गया
लड़की- जी कहिये क्या काम है
रूद्र तो उसकी आवाज़ सुन hi नहीं रहा था उसका ध्यान तो उसके चेहरे और नारंगी के साइज मुम्मे पैर था जो बिना दुप्पट्टे के अपनी गहराई नाप ने को उकसा रहे थे
लड़की- सुना नहीं आप ने क्या काम है
लड़की की थोड़ी तेज़ आवाज़ सुनकर रूद्र होश में आया
र- जी वो पंडित जी से मिलना है
लड़की- वो तो अभी नाहा रहे तब तक आप बैठ जाये अंदर में उन्हें बोल कर आती हु
रूद्र बस हां में गर्दन हिला अंदर जा कर बैठ गया
थोड़ी देर बाद वो लड़की आयी और बोली
लड़की- मैंने बोल दिया है मां जी को वो आ रहे है
इतना बोल कर वो अपना काम करने लगी जिस से उसका पूरा सीना रूद्र की आँखों के सामने था
जिसे देखते हुए रूद्र बोलै
र- वैसे एक बात पूछ सकता हु आप से क्या
रूद्र की आवाज़ सुनकर वो लड़की जब रूद्र की तरफ देखा तो उसे अपनी चुकी घूरते हुए देखा तो खड़े हो कर अपने कपडे ठीक करते हुए बोली
लड़की- जी पूछिए
र- आपका नाम क्या है ( सेक्सी स्माइल देते हुए)
लड़की- आपको हमारा नाम क्यों जान न है
र- अरे अब आप हमारे गाओं में hi रहने वाली है तो इतना तो पता होना चाहिए न
लड़की- आशा नाम है मेरा
र- बहुत hi सुन्दर नाम है बिलकुल आपकी तरह
रूद्र के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनकर वो शर्मा कर अंदर चली गयी
थोड़ी देर बाद पंडित जी आ गए तो रूद्र ने उन्हें बताया आने का कारन जिसे सुनकर पंडित जी कुछ देर किताब में देखने के बाद बोले
पीजे- 2 दिन बाद ाचा मुहरत है बीटा नहीं तो फिर पूर्णिमा पैर 6 दिन बाद
पूर्णिमा का नाम सुनते hi रूद्र के कान खड़े हो जाते है
र- नहीं पंडित जी 2 दिन बाद hi करेंगे गृह प्रवेश ाचा पंडित जी अब में चलता हु
पीजे- ठीक है रूद्र बीटा वैसे मुझे एक काम था
र- जी बोलिये
पीजे- वो क्या है न बीटा मेरी भांजी से तो तुम मिल hi चुके हो इस की पढाई बीच में hi छूट गयी तो क्या माहि बिटिया इसे थोड़ा पढ़ा देगी
अँधा क्या चाहे दो आँखे
दोस्तों ौग के बाद थोड़ा फ्री हो जाऊंगा तो जल्दी अपडेट दूंगा तब तक अपना प्यार बनाये रखे और साथ भी





काम्य मौसी की सेवा करने के बाद रूद्र अपने कमरे में जा कर सू गया
वही दूसरी तरफ काम्य जोरदार हुई चुदाई को याद करके खुद से बाते करने लगी
क- कितना प्यारा है रूद्र में तो पागल हो गयी हु उसके प्यार में पता नहीं क्या जादू कर दिया है की सामने आते hi छूट में खुजली होने लगती है कैसे रहूंगी अब उसके बिना ऊऊफफफफफफ
ऐसी hi मीठी 2 बाते करती हुई नींद के आगोश में चली गयी
सुबह रूद्र की आँख जल्दी hi खुल गयी तो वो फ्रेश हो कर निचे चला गया जहा उसकी माँ किचन में सुबह के नास्ते की तैयारी कर रही थी
निचे उतारते रूद्र की नज़र सबसे पहले नज़र अपनी माँ की बड़ी गांड पैर hi गयी जिसका वो दीवाना था जो की काम करने की वजह से थिरक रही थी
जिसे देख के रूद्र सम्मोहित सा होता हुआ सीधा अपनी माँ की तरफ चल दिया और जाते hi अपनी माँ को बाहो में भर लिया
रूद्र के ऐसे चिपकते hi सुरभि की धड़कन तेज़ हो गयी उसे पता था ये उसका बीटा hi है जो उसे अकेली देख कर मजे ले रहा है
सुरभि- ोूहः तो आगयी माँ की याद तुझे
र- भुला hi कब था आप ने hi मना किया था इस में मेरी क्या गलती है ूउम्म्माःह्ह्ह्ह ( गर्दन को चूमते हुए)
सुरभि- आआह्ह्ह्ह तो फिर आज क्यों कर रहा मैंने तो नहीं कहा तुझे करने को
र- ऊऊफफफफ तुम्हारा ये जिस्म देख कर कण्ट्रोल नहीं हुआ इसलिए मेरी स्वीट मा
सुरभि- ाचा जी गलती भी मेरे जिस्म की है ये क्यों नहीं कहता की तेरी नियत फिसल गयी मुझे अकेली देख कर हम्म्म ( रूद्र की तरफ पलट कर उसे देखते हुए बोली और स्लैप पैर बैठ गयी)
र- अब चाहे आप कुछ भी कहो पैर सच तो ये है की आपको देखकर मुझ से कण्ट्रोल नहीं होता माँ पता आपको पता नहीं कैसे रुके हुए हु में खुद को ( माँ के होठो के करीब जाते हुए)
दोनों माँ बेटे सुबह 2 की ठंडक में गरम होते हुए एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे सुरभि तो वैसे hi प्यासी थी जो जयादा देर तक रुक न पायी अपने बेटे की आँखों में अपने लिए प्यार देख कर और खुद hi अपने होठो को रूद्र के होठो से चिपका दिया
दुनिया से बेखबर हो कर दोनों एक दूसरे के होठो का रसपान करने लगे दोनों में से कोई भी हटना नहीं चाहता था जैसे की जीतने की होड़ लगी हो की कोण जायदा रास पियेगा
रूद्र के हाथ अब हरकत पैर उतर आये थे जिस से सुरभि भी मचल ने लगी थी सुबह का समय था और कोई भी निचे आ सकता था पैर जब जिस्म की आग लगी हो तो होश कहा रहता है
यही हाल अभी इन दोनों का भी था
सुरभि की दोनों टांगो को छोड़ा कर रूद्र अपनी जीब को अपनी माँ की रास बहती छूट पैर ऊपर निचे से करते हुए बड़े प्यार चाट रहा
सुरभि- आआआह्ह्ह्हह्ह रूढ़दृरा मेरे लाल ऊऊफफफफ मत कर आह्हः कोई आज्ञा तो क्या होगा ऊऊफफफफ माआ ररुकक्क जाए मुझे तुझे ये सब करने hi नहीं देना चाहिए था अअअअअअअअस मममममअअअअअअअ एई लड़का क्या जादू कर देता है uuuuufffffffffff मममममअअअअआंआंण जायआ ना आआह्ह्हह्ह्ह्ह
आयआयएईईईईमममममआआआआ उउउउउउउफ्फ्फफ्फ्फ़ रररुडड्रॉररआआआ आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मममममाआआह्ह्ह्हम्मम्मम्मोूहःहःहःहः ममममायआ मई जानी वाली हु बेटा आअह्ह्ह्हह
कुछ hi देर में सुरभि की छूट रास बहाने वाली थी की रूद्र खड़ा हुआ और अपनी की गोरी जांघो को सहलाते हुए फिर से किश करने
के लिए आगे बढ़ा तो सुरभि बोली
सुरभि- आआअह्ह्ह्ह रुक क्यों गया मेरा होने वाला था
र- इसलिए की अब तुम्हारी सवारी करूँगा ( गांड मसलते हुए किश करके बोलै)
सुरभि- ोुह्ह्ह नहीं रूद्र देख बहुत समय हो गया कोई भी आ सकता है अब तू जा बाद में कर लेंगे प्ल्ज़
र- नहीं माँ अब तो तुम्हे छोड़ के hi जाऊंगा चाहे कुछ भी अब जल्दी से घूम जाओ बाते मत करो
सुरभि- तू समझता क्यों नहीं है रईआआह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ....
पैर इस के आगे तो चीख hi निकली क्युकी रूद्र का मुसल पीछे से अपनी माँ की छूट को चीरता हुआ गहराई नाप ने लगा था
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सुरभि- आआह्ह्ह्हह मायआ रूद्र तू समझता क्यों नही आअह्ह्ह्हह मायआ देख बाद में कर लियो ऊऊफफफफफ कोई देख लेगा तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी मेरी आआह्ह्ह्ह माआआ
र- थोड़ी देर चुप रह कर मजे ले मा कोई नई उठेगा अभी तुम बस शांत रहो वर्ण तुम्हारी चीखो को सुन कर जरूर कोई उठ जायेगा
सुरभि- पहले ये मुसल दाल दिया एक hi झटके में और अब आआह्ह्ह्हह बोल रहा है चीखो मत mmmmmaaaaaaaahhhhhhuuuuuuuuuuuufffffffff आआअह्हह्ह्ह्हह ( रूद्र की आँखों में देखते हुए)
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र- इस मुसल से hi तेरी जैसी गदरायी औरत की छूट ठंडी हो सकती है मा छोटा हथियार तो तेरी छूट खा जाएगी अब मजा ली
सुरभि- ऊऊफफफफफफ माआ में hi पागल थी पहले hi आआह्ह्ह्हह रोक दीना चाहियेए था uuuuiiiimmmmmaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह आईसीए हीईई आअह्हह्ह्ह्ह और तेज़ तेज़ कर ऊऊफफफ मेरा होने वाला हैई आआह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ
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ठप्प ठप्प की आवाज़ पुरे किठन में गूंज रही थी रूद्र भी चरम की और जा रहा था तेज़ी जबकि सुरभि झाड़ ने के बाद बड़ी मुश्किल से रूद्र के धक्के झेल रही थी
सुरभि- आआह्ह्ह्ह रूद्र बुसस कर बीटा और कितना छोड़ेगा uuuuummmmmmmhhhhhhhhhhhhaaaahhhh ोुह्ह्ह्हह्ह मम्मा ऊऊफफफफफफ
र- बस्स्स मा मी भीई ाआज्ञाऑ आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
मम्माआआह्ह्ह्ह
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सुरभि- ोुह्ह्ह्ह तू जल्दी कर मेरे लाल भर दे मेरी छूट तेरे गरम विरए से आआह्ह्ह्ह ाअज्जा बीटा इस से पहले कोई आ जाये आअह्ह्ह्हह मायआ
कुछ hi झटको में रूद्र भी निढाल सा अपनी माँ को चिपके हुए खड़ा था
सुरभि- आअह्ह्ह जान निकाल दी तूने तो पैर डरते हुए छोड़ने में मजा भी बहोत आया अब हैट जल्दी से और जा यहाँ से
अपनी माँ की बात सुनते hi रूद्र ने लुंड खेच लिया सुरभि की छूट से जिसके hi उसका और सुरभि का पानी भी बहार आने लगा
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जिसे साफ़ करते हुए सुरभि अपने कपडे उठा कर जल्दी से बाथरूम में चली गयी और रूद्र अपने रूम में भाग गया
सुरभि-( मन में) ये लड़का किसी दिन मरवा देगा पैर साड़ी गलती उसकी भी तो नहीं में भी तो बहक गयी थी मुस्कुराने लगती है
वही जब रूद्र रूम गया तो सामने उसकी बुआ बैठी थी सेक्सी ड्रेस में और रूद्र को देखते हुए बोली
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रब- तो सुबह - सुबह भोग लगा आया भाभी की छूट का
र- आपको हमेसा कैसे पता चल जाता है सोती नहीं हो क्या आप
रब- जिस छूट में तेरा ये लुंड चला जाए वो कैसे सो सकती है अब बुआ का भी कुछ कर दे
र- अभी नहीं बाद करता हु आपका भी इलाज़ अभी तो बस नास्ता करके पंडित जी के पास जाना है
रब- हम्म चल ठीक है पैर जल्दी करियो बहुत खुजली हो रही है ( उदास होते हुए)
र- उदास मत हो आप जल्दी hi खुजली मिटा ता हु आपकी
इतना बोल कर बाथरूम में घुस गया और कपडे बदल कर चल दिया निचे जहा अब माहि काम्य रम्य सब थे
माहि- गुड मॉर्निंग भाई
र- गुड मॉर्निंग गुड़िया न बुआ माँ मौसी
सुरभि- वरर्य गुड मॉर्निंग बीटा ( निचे मुँह करके बोली)
रब- है जी वैरी गुड मॉर्निंग hi है आज तो बस वैरी गुड नाईट पता नई कहा होगी
रम्य की बात सुनकर काम्य और सुरभि दोनों शर्मा जाते है जहा काम्य रात याद करती है तो वही सुरभि रम्य का मतलब समझ के
माहि- मतलब बुआ
रब- अरे मतलब को छोड़ नास्ता कर कुछ लोग तो कर भी चुके( सुरभि को देखते हुए)
माहि- आप और आपकी बाते वैसे भाई आप फ्री हो क्या
र- नहीं गुड़िया आज तो बहुत काम है पहले पंडित जी के पास जाना है फिर बुआ की खुजली की दवा ला कर देनी है
माहि- ok कोई बात नहीं
रम्य की खुजली की बात सुनकर सुरभि बोली
सुरभि- तूने बताया नहीं तुझे खुजली हो रही है
रब- कैसे बताती आपको आप के पास टाइम कहा अकेले 2 इंजेक्शन लगवा लिया आप ने तो मुझे बुलाती तभी तो में बताती
रम्य की बात सुनकर सुरभि चेहरा शर्म से लाल हो गया इसलिए वो बिना कुछ बोले वापस किचन में चली गयी
रूद्र भी नास्ता कर चूका था तो वो भी सब को bye बोल कर निकल गया पंडित जी के घर और दरवाज़ा खत खतया तो सामने वही मासूम चेहरा जिस देखते hi रूद्र उस में खो गया
लड़की- जी कहिये क्या काम है
रूद्र तो उसकी आवाज़ सुन hi नहीं रहा था उसका ध्यान तो उसके चेहरे और नारंगी के साइज मुम्मे पैर था जो बिना दुप्पट्टे के अपनी गहराई नाप ने को उकसा रहे थे
लड़की- सुना नहीं आप ने क्या काम है
लड़की की थोड़ी तेज़ आवाज़ सुनकर रूद्र होश में आया
र- जी वो पंडित जी से मिलना है
लड़की- वो तो अभी नाहा रहे तब तक आप बैठ जाये अंदर में उन्हें बोल कर आती हु
रूद्र बस हां में गर्दन हिला अंदर जा कर बैठ गया
थोड़ी देर बाद वो लड़की आयी और बोली
लड़की- मैंने बोल दिया है मां जी को वो आ रहे है
इतना बोल कर वो अपना काम करने लगी जिस से उसका पूरा सीना रूद्र की आँखों के सामने था
जिसे देखते हुए रूद्र बोलै
र- वैसे एक बात पूछ सकता हु आप से क्या
रूद्र की आवाज़ सुनकर वो लड़की जब रूद्र की तरफ देखा तो उसे अपनी चुकी घूरते हुए देखा तो खड़े हो कर अपने कपडे ठीक करते हुए बोली
लड़की- जी पूछिए
र- आपका नाम क्या है ( सेक्सी स्माइल देते हुए)
लड़की- आपको हमारा नाम क्यों जान न है
र- अरे अब आप हमारे गाओं में hi रहने वाली है तो इतना तो पता होना चाहिए न
लड़की- आशा नाम है मेरा
र- बहुत hi सुन्दर नाम है बिलकुल आपकी तरह
रूद्र के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनकर वो शर्मा कर अंदर चली गयी
थोड़ी देर बाद पंडित जी आ गए तो रूद्र ने उन्हें बताया आने का कारन जिसे सुनकर पंडित जी कुछ देर किताब में देखने के बाद बोले
पीजे- 2 दिन बाद ाचा मुहरत है बीटा नहीं तो फिर पूर्णिमा पैर 6 दिन बाद
पूर्णिमा का नाम सुनते hi रूद्र के कान खड़े हो जाते है
र- नहीं पंडित जी 2 दिन बाद hi करेंगे गृह प्रवेश ाचा पंडित जी अब में चलता हु
पीजे- ठीक है रूद्र बीटा वैसे मुझे एक काम था
र- जी बोलिये
पीजे- वो क्या है न बीटा मेरी भांजी से तो तुम मिल hi चुके हो इस की पढाई बीच में hi छूट गयी तो क्या माहि बिटिया इसे थोड़ा पढ़ा देगी
अँधा क्या चाहे दो आँखे
दोस्तों ौग के बाद थोड़ा फ्री हो जाऊंगा तो जल्दी अपडेट दूंगा तब तक अपना प्यार बनाये रखे और साथ भी