- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 138,041
अपडेट-9
कुछ दिन बड़े अच्छे गुजरे बस तुषार काफी शांत था उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी सीमा से बात करने की, सीमा ने कुछ दिन कॉलेज से छुट्टी ली, फिर जब वो कॉलेज गई तो उसके फेस की चमक देखते hi मेघा बोली
हे मेरी छमकछल्लो बड़ी चमक रही ह ये निखार कहा से आ गया कोई मुर्गा फास गया क्या,
सीमा- पागल ह क्या कैसा निखार सब नार्मल hi तो ह
मेघा- अरे छमिया मुझे मत सीखा मैं पिछले 2 साल से चुद रही हु मुझे पता ह जब लड़की की तसली होती ह तो कैसा निखार आता ह
सीमा- ऐसा कुछ नहीं ह यार तू ऐसे hi सोच रही ह
मेघा- नहीं बताना तो मत बता लेकिन झूट मत बोल
सीमा- तेरे से क्या झूट बोलूंगी यार, तू सही बोल रही ह कितने टाइम से जिस मर्द की तलाश थी वो मुझे मिल गया
मेघा- सच्ची कोण ह वो माँ का लोढ़ा जिसने तेरी सील तोड़ी
सीमा- हमारे गाओं का hi ह
मेघा- पैसे वाला ह क्या
सीमा- नहीं उसके पास पैसे नहीं ह लेकिन जो उसके पास ह वो दुनिया में शायद hi किसी के पास हो
मेघा- हे ऐसा क्या ह उसके पास पोर्न मूवी से भी बड़ा ह क्या
सीमा- पोर्न का तो मुझे पता नहीं लेकिन मैंने किसी का नहीं देखा
मेघा- सच में फिर तो उसने तेरी अच्छे से तसली की होगी, सील यादगार तरीके से तुड़वाई न
सीमा- मेघा ऐसी तोड़ी की जीवन में खुद को भूल सकती हु लेकिन पहेली चुदाई नहीं भूल पाऊँगी, सच में अगर सील तुड़वानी हो तो ऐसे hi तुड़वानी चाहिए और ऐसा मर्द मिल जाये तो दुबारा किसी की तरफ नजर hi न उठे
मेघा- अच्छा जी ऐसा क्या क्र दिया उसने जो इतनी दीवानी हो गई ह उसकी
सीमा- तुझे क्या बताऊ अगर कोई 4 बचो की माँ भी उसके निचे आ जाये तो उसका भी खून निकल दे वो
मेघा- क्यों इतना फेंक रही ह कोण ह वो मुझे भी मिलवा उसे
सीमा- वो गोअन से बहार नहीं जाता इसलिए ज्यादा चांस नहीं ह मिलने का बड़ी मुश्किल से पटाया ह उसे
मेघा- अच्छा बच्चू छुपा क्र रखना चाहती ह कही प्यार तो नहीं हो गया उसे
सीमा- सच में यार अगर उसके लिए मुझे जान भी देनी पड़े तो दे दूंगी उसके अलावा न कोई दिखाई देता ह न सुनाई देता ह, शुरुआत हवस से हुई थी लेकिन उसने दिल में ऐसा वॉर किया की अब छूट से ज्यादा दिल उसके लिए पागल ह
मेघा- कण्ट्रोल क्र सीमा तेरे गाओं का ह शादी कैसे करेगी उसे इसलिए बस यही रुक जा मजे ले इससे ज्यादा मत बढ़
सीमा- बढ़ तो अब चुकी हु और शादी हो या न हो मेरे दिल में उसके अलावा कोई नहीं होगा
मेघा- और अगर उसके दिल में तेरे अलावा कोई आ गया तो
सीमा- मुझे फरक नहीं पड़ता मैं उसकी रानी नहीं दासी बनना चाहती हु और जैसा वो ह उसकी एक रानी तो हो hi नहीं सकती वो राजा ह राजा और राजा जितनी चाहे रनिया रखे और जैसा उसका पुरुष ह वो 10 रानियों को भी खुस रख सकता ह
मेघा- यार तूने तो मेरी छूट में आग लगवा दी ऐसा क्या ह उसमे जो तेरे मुँह से इतनी तारीफे निकल रही हैं एक बार मिलवा दे न मैं भी तो देखु,
सीमा- बस तू उसके बारे में सुन देखने का मौका मिला तो दिखा दूंगी, सही समय आने दे,
मेघा के दिल में थोड़ी सी जलन हुई क्योकि वो पिछले 2 साल से अपने बर्फ से चुद रही थी उसे अब मजा आना बंद हो गया था, लेकिन उसका बर्फ काफी पैसे वाला था तो वो उसे गिफ्ट देता रहता जिससे वो खुश रहती लेकिन केवल गिफ्ट से hi लड़किया खुश नहीं रहती ये सीमा को देख क्र उसे समझ आ गया था, सबसे जरुरी ह तन की संतुष्टि और फिर मन की संतुष्टि, सीमा को दोनों हो गई थी,
एक दिन सीमा और तुषार अकेले कॉलेज जा रहे थे, ये अंजलि ने hi प्लान किया था दीपा और रूचि को रोक लिया की वो उसके साथ चले, रस्ते में तुषार ख़ामोशी से चला जा रहा था, सीमा के दिल में हलचल थी वो तुषार से बात करना चाहती थी लेकिन कहा से शुरू करे, काफी हिम्मत जूता का सीमा बोली तुषार मेरी बात सुन
सीमा के शब्द सुनते hi तुषार की आँखों में आंसू आ गए और रट हुए सीमा के पेअर पकड़ लिए दीदी मुझे माफ़ क्र दो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मैं जानवर हु मैंने आपके साथ जानवरो जैसा बर्ताव किया, मुझे सजा दो मुझे मारो जो दिल में आये वो करो
सीमा ने तुषार को खड़ा किया और बोली तुझे लगता ह तूने गलती की
तुषार- है दीदी बहुत बड़ी गलती
सीमा- तो तू उसकी सजा भुगतने को तैयार ह
तुषार- आप हुकुम करो मैं अपनी जान दे दूंगा
सीमा- मुझे जान नहीं एक वडा चाहिए
तुषार ने सुर्प्रीस्ली सीमा को देखा
सीमा- बोल करेगा वडा
तुषार- बोलो दीदी क्या वडा चाहिए
सीमा- सोच ले तोड़ मत देना
तुषार- अगर ये वडा तोडा तो मैं अपनी जान दे दूंगा
सीमा- तो वडा क्र तू मुझे कभी भी छोड़ क्र नहीं जायेगा कभी मुझसे नाराज नहीं होगा हमेशा मुझसे प्यार करेगा तेरी लाइफ में चाहे कोई भी लड़की आ जाये तू अपनी बहन का साथ नहीं छोड़ेगा
तुषार- दीदी आप कैसी बात क्र रही हो मैं कभी आपसे दूर नहीं जाऊंगा चाहे कुछ भी हो जाये
सीमा- तू मेरा भाई ह लेकिन मैं तुझसे प्यार करने लगी हु टुशु ी लव ु
तुषार- ये क्या बोल रही हो दीदी ऐसा कैसे हो सकता ह
सीमा- एक भाई बहन सेक्स क्र सकते ह तो प्यार क्यों नहीं क्र सकते मैं तुझसे शादी करने के लिए नहीं बोल रही बस ये चाहती हु की तू मुझे अपनी प्रेमिका की तरह प्यार करे ये प्यार बस हम दोनों के दिल में होगा दुनिया के लिए हम भाई बहन hi ह,
तुषार खामोश खड़ा रहा
सीमा- क्या हुआ नहीं दे पायेगा अपनी इस बहन का साथ क्या मेरा प्यार अधूरा रह जायेगा
तुषार- नहीं दीदी ऐसा मत कहो मैं मरते दम तक आपके साथ हु चाहे कुछ हो जाये आपसे वडा किया ह तोडूंगा नहीं
सीमा ने तुषार को गले लगा लिया और उसके हॉट चुम लिए
तुषार- दीदी क्या करती हो कोई देख लेगा चलो यहाँ से
दोनों आगे चलने लगे
तुषार- दीदी उस दिन आपको बहुत दर्द हुआ होगा न
सीमा- तुझे क्या पता कितना दर्द हुआ था
तुषार- श्री दीदी मैं गुस्से और हवस में बहक गया था
सीमा- श्री क्यों बोल रहा ह उस दिन जो हुआ तेरी गलती नहीं ह और वैसे भी जो हुआ अच्छा हुआ क्योकि मेरे लिए मेरी पहला सेक्स यादगार बनाना चाहती थी, इससे ज्यादा यादगार नहीं हो सकता, और तू दुखी मत हो मुझे बहुत मजा आया उस दिन ऐसा सेक्स किस्मत वाली लड़कियों को मिलता ह
तुषार- दीदी सच में आपको मजा आया
सीमा शर्मा गई हैट बेशरम बार बार पूछेगा
तुषार- अच्छा जी उस दिन तो गालिया भी दे रही थी आज शर्मा रही हो,
सीमा- वो तो जब हवस छड़ी हुई थी तो पता नहीं क्या क्या बक गई
तुषार- कोई नहीं दीदी आपके मुँह से गालिया भी अच्छी लगती ह,
सीमा- अच्छे बीटा और सुनौ तुझे गालिया
तुषार- है है सुनाओ न
सीमा- तू तो पक्का बेशरम हो गया ह,
तुषार- प्लस दीदी सुनाओ न
सीमा- अच्छा एक शरत पैर
तुषार- वो क्या
सीमा- तू मुझे अकेले में सीमा बोलेगा दीदी नहीं तू मेरा प्रेमी ह, सबके सामने भाई ह अकेले में प्रेमी समझा और मैं चाहती हु तू मुझे कण्ट्रोल करे, उस दिन मुझे अहसास हुआ की मुझे कण्ट्रोल करवाना पसंद ह डोमिनाते होना पसंद ह इसलिए अकेले में तू मुझे खुल क्र डोमिनाते करेगा
तुषार- ठीक ह मेरी जान अकेले में मैं आपको सीमा बुलाऊंगा अब दो गली
सीमा- ये आपको क्या होता भेनचोद मैं तेरी प्रेमिका हु इतनी इज्जत से बोलेगा
तुषार- ठीक ह मेरी जान अब से नहीं बोलूंगा अब से तेरे मजे लूंगा,
दोनों भाई बहन ऐसे hi गन्दी अश्लील बाते करते हुए अपने अपने कॉलेज पहुंच गए, शाम को जब सब वापस आये तो घर का माहौल एक दम खुशनुमा था, जिसे देख अंजलि बहुत खुश थी, उसने इशारे में सीमा से बात की की तुषार से बात चित ठीक हो गई तो सीमा ने भी मुस्कुराते हुए है में इशारा किया,
अंजलि को अब सकूं था, उसके दिमाग में बस एक hi बात होती की उसके बच्चे एक साथ खुश रहे, सब अच्छा चल रहा था
एक दिन सुबह से लेकर रात तक बारिश होती रही वो भी बहुत तेज राजेश जा चुक्का था काम पैर बेचारा मजदूरी भी एक ऐसी मज़बूरी ह की ऐसे मौसम में भी आराम नहीं लेने देती, या राजेश खुद घर में रुकना नहीं चाहता, जो भी हो वो तो चला गया था लेकिन बाकि परिवार घर में hi था,
आज सीमा और दीपा ने मिल क्र पकोडिया बनाई थी इस परिवार के लिए पकोडिया बनना भी किसी दावत से काम नहीं था, शाम के 6 बज रहे थे अँधेरा हो चुक्का था सभी मस्ती करते हुए पकोडिया खा रहे थे तभी बहार से किसी कार के हॉर्न की आवाज आई तो रूचि कूद क्र देखने चल दी,
अंजलि- बीटा मैं देख आती हु इस टाइम कोण ह तू कहा जा रही ह
रूचि- अरे माँ आप बैठो मैं बस अभी देखती हु शायद कोई रास्ता भटक गया ह
रूचि बहार चली गई कुछ hi पालो बाद रूचि के चीखने की आवाज आई maaaaaaaaaaaaaaaaaaa
आवाज सुनते hi तुषार कूद क्र बहार आ गया तो एक कार तेजी से घर के पास से निकली, तुषार उसके पीछे भागने लगा, अंजलि भी बहार आई और माजरा समझते हुए सीमा से बोली अंदर रहना और दरवाजा बंद कर लो, अंजलि ने एक कुलधि उठाई और दौड़ने लगी.
बारिश बहुत तेज थी बहार का कुछ दिख नहीं रहा था कार ज्यादा तेज चल नहीं सकती थी क्योकि रास्ता कच्चा था, लेकिन तुषार और अंजलि के लिए तो ये घर था उन्हें हर रस्ते का पता था, जब कार वालो को ठीक से रास्ता नहीं दिखा तो उनका बैलेंस बिगड़ गया कार एक खेत में फिसल गई, टायर फास गए न आगे जा सके न पीछे,
तो कार में से जल्दी जल्दी 5 लोग उतरे और उनमे से एक ने रूचि को कंधे पैर उठा लिया और कार के सामने जलती लाइट के सामने ले आये, पीछे तुषार को कार की आवाज आणि बंद हो गई थी, लेकिन वो दौड़े जा रहा था, उसे दूर कार की लाइट जलती दिखाई दी लेकिन तभी वो लाइट भी बंद हो गई, उन लोगो ने कार की लाइट बंद क्र दी,
उनमे सभी ने रूचि को घेर लिया और कार के बोनट पैर लिटा दिया रूचि के मुँह पैर बारिश बहुत तेज गिर रही थी जिससे वो जैसे hi छिलने को मुँह खोलती पानी की वजह से आवाज नहीं निकल पति, तभी एक आदमी ने उसका मुँह दबा दिया, दूसरे आदमी ने उसका सूट गले से पकड़ा और खींच दिया सूट फैट ता चला गया, अँधेरे में ठीक से दिखा तो नहीं लेकिन रूचि उनके सामने ब्रा में थी, तभी एक आवाज आई क्यों साली कुटिया मुझ पैर हाथ उठाएगी आज तेरी छूट को फाड् क्र चीथड़े न उदा दिए तो मेरा नाम भूरा नहीं. जी है ये भूरा था जिसका झगड़ा हुआ था रूचि से और पंचायत ने उसे 1 महीने की सजा दी थी.
भूरा ने जैसे hi रूचि की चुकी को हाथ लगाया तभी कार के उप्पेर से तुषार कूद क्र आ गया, ऐसी रात में रूचि जो कार के बोनट पैर हाथ मर रही थी उसकी आवाज बहुत दूर तक जार hi थी जिससे सुनते और लाइट का अनुमान करते तुषार वह तक पहुंच चुक्का था,
तुषार ने एक लात भूरा के मुँह पैर मरी और जल्दी से रूचि को खींच क्र खड़ा किया, तभी उनमे से एक ने कार की लाइट जला दी, तुषार ने जल्दी से रूचि को खेत की साइड में बैठा दिया और उन सभी पैर कूद पड़ा, तुषार गाओं का पला बड़ा था उसे ऐसे मौसम में अच्छे से सम्हालना आता था लेकिन शायद उन लोगो को नहीं आता वो जैसे hi तुषार की तरफ भागते फिसल जाते जिसका फायदा तुषार अच्छे से उठा रहा था, वो कूद क्र एक घुसा कभी एक के मुँह पैर मरता तो कभी दूसरे के मुँह पैर,
कुछ hi देर में तुषार ने उनकी हालत ख़राब क्र दी थी, लेकिन तभी तुषार का पेअर फिसल गया और उसका सर कार से टकरा गया वो जब तक सम्हालता उन लोग ने तुषार को पकड़ लिया, और उसकी पिटाई करने लगे, लेकिन पीछे से एक शेरनी दौड़ती हुई आ रही थी, उसने आते hi एक कुल्हाड़ी का वॉर उन लोगो पैर जो उनमे से एक के सर पैर लगा कुल्हाड़ी उलटी थी वर्ण वो मर hi जाता,
उसके मुँह से चीख निकल गई बाकि ने पीछे देखा तो अंजलि अपनी साड़ी उठा क्र अपने पेटीकोट में उनस राखी थी हाथ में कुल्हाड़ी थी कार की लाइट में बारिश में भीगती हुई वो किसी शेरनी से काम नहीं लग रही थी, भूरा जैसे hi अंजलि की तरफ आया तो अंजलि ने भूरा की गार्डन पकड़ ली और खींच क्र जमीं में दे मारा, इधर तुषार भी सम्हाल गया, अब दोनों माँ bête ने मिलकर जो धुनाई की उन सब की, उनमे से तीन लोग भाग लिए वह से अब बचे भूरा और एक 26-27 साल का लड़का,
तुषार ने उस लड़के की गर्दन पकड़ ली और अंजलि कुल्हाड़ी लेकर भूरा की छाती पैर पेअर रख क्र कड़ी थी,
अंजलि- भूरा तूने मेरी बेटी को हाथ लगा क्र अपनी मोत को छुआ ह आज तू जिन्दा नहीं बचेगा, तेरी इतनी हिम्मत हो गई किट ु बहार के लोगो को गाओं में बुला लाया, आज रात hi पंचायत बुलाई जाएगी और तेरा फैसला होगा अउ राइज तो गाओं वाले hi मोत दे देंगे,
भूरा- हहहहह तू इसे मोत देगी जानती ह कोण ह ये
ऐसी हालत में भी भूरा के मुँह से हसी सुन क्र अंजलि बोखला गई उसने उस लड़के को गौर से देखा लेकिन पहचान नहीं पाई,
भूरा- ये ह सोहन चोपड़ा, सुरेश चोपड़ा का बीटा, J.S.S कंपनी का वरिष्ठ. जानती ह न तू सुरेश चोपड़ा को और J.S.S कंपनी को,
भूरा की बात सुनकर अंजलि का मुँह खुला रह गया उसकी आँखे लाल हो गई जो गुस्सा अभी तक उसकी बेटी के साथ ये हरकत करने का था अब उसे भी ज्यादा गुस्सा था, उसने उस लड़के की तरफ गौर से देखा और गुस्से में छिलाई, चला जा यहाँ से और भूल क्र भी यहाँ कदम मत रखना वर्ण कसम से जान से मर दूंगी, टुशु छोड़ दे उसे.
तुषार ने अचम्भे से अंजलि की तरफ देखा, लेकिन बिना कोई सवाल किये उसका गाला छोड़ दिया वो लड़का गिरता पड़ता वह से भागने लगा.
इधर भूरा है रहा था, अंजलि गुस्से में थी वो छिलाई भूरा तुझे ये नहीं करना चाहिए था नहीं करना चाहिए था इस सब से दूर hi रहना चाहिए था तुझे, छीलते हुए अंजलि ने कुल्हड़ी उठा क्र सीधे भूरा की गार्डन में मर दी.
तुषार की आँखे फटी रह गई रूचि की तो चीख hi निकल गई, रूचि के चीखने से दोनों का धयान उसकी तरफ गया तुषार भाग क्र उसके पास पंहुचा और उसे गले से लगा लिया वो भी तुषार से चिपक गई, अंजलि भी उसके पास पहुंची अंजलि ने रूचि के सर पैर हाथ फेरा और पुचकारा बीटा घबरा मत सब ठीक ह सब ठीक ह,
अंजलि- तुषार चल यहाँ से जल्दी
तीनो जल्दी जल्दी घर की तरफ चल दिए, अंजलि के हाथ में अभी भी खून से सनी कुल्हाड़ी थी, वो घर पहुंचे वह सीमा और दीपा दोनों डरे हुए सहमे से बैठे थे, तीनो को वापस घर में आता देख उनकी आँखों से आंसू बहने लगे जो काफी देर तक रट रट रुक गए थे, जब उनकी नजर रूचि पैर गई तो दीपा भाग क्र एक दुपट्टा ले आई क्योकि रूचि का कुरता फटा हुआ था वो ब्रा में आधी नंगी तुषार से चिपकी हुई भीगी हुई चली आ रही थी उसे तो अहसास hi नहीं था उसकी क्या हालत ह उसे क्या तीनो में से किसी को भी ये अहसास नहीं था,
सीमा ने जल्दी से गरम पानी रखा दीपा ने रूचि के कपडे बदले, लेकिन अंजलि और तुषार खामोश एक दम शांत दरवाजे के पास बैठे थे अंजलि के हाथ में अभी भी वो कुल्हाड़ी थी,
किसी की कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी रूचि सुबक रही थी, दीपा उसे शांत करवा रही थी, सीमा ने बाल्टी में अंजलि को गरम पानी दिया और बोली माँ गरम पानी से नाहा लो, सीमा की आवाज सुनकर अंजलि और तुषार की धयान भांग हुआ, तभी बहार से राजेश आ गया भीगता हुआ उसे देख क्र तुषार और अंजलि खड़े हो गए,
अंजलि के हाथ में कुल्हाड़ी देख क्र राजेश घबरा गया,
राजेश- क्या हु अंजलि क्या हुआ ये सब क्या ह,
अंजलि बस राजेश को देखे जा रहे थी उसकी आँखों में आंसू थे वो रोये जा रही थी, तभी पीछे से सीमा बोली पापा कुछ लोग रूचि को कार में उठा क्र ले गए थे,
राजेश गुस्से कोण था किसने इतनी हिम्मत की
तुषार- भूरा था वो
राजेश- उसकी तनी हिम्मत मैं उसे जान से मर दूंगा आज
तुषार- मर दिया माँ ने उसे मर दिया
इतना सुनते hi राजेश का मुँह खुला रह गया सीमा के हाथ से पानी की बाल्टी गिरते गिरते बची सभी बोखलाए हुए से अंजलि को देख रहे थे,
तभी राजेश ने अंजलि को गले लगा लिया और बोलै- नहीं अंजलि कुछ नहीं हुआ तुम घबराओ नहीं कुछ नहीं होगा मैं सम्हाल लूंगा खुद को सम्हालो हिम्मत मत हारना अपना सयम मत खोना बस खुद को रोको, मैं अभी आया
तुषार- कहा जार हे हो पापा
राजेश- टुशु बीटा कहा हुआ ये सब मुझे बता मैं वह सब ठीक क्र दूंगा तुषार- पापा अब वह जाकर क्या फायदा
राजेश- बीटा तेरी माँ के खिलाफ वह कोई सबूत नहीं होना चाहिए चल जल्दी बता कहा हुआ ये सब
तुषार- मैं भी चलता हु आपके साथ
अंजलि- मैं भी चलूंगी
राजेश- नहीं अंजलि तुम बच्चियों के साथ रहो हम दोनों क्र आएंगे
अंजलि- आप मत पदों इस बार इसमें
राजेश- अंजलि शांत हो जाओ सीमा बीटा अपनी माँ को गरम पानी से नहला और कपडे बदल हम अभी आये
फिर दोनों उस जगह की तरफ भागने लगे, काफी देर तक भागते हुए भी उन्हें वह कार नहीं मिली, कार वह से जा चुकी थी अँधेरा था तो ठीक से तुषार भी अनुमान नहीं लगा प् रहा था की असली जगह कहा थी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला न hi कार न hi भूरा, काफी देर तक दोनों धुनते रहे लेकिन खली हाथ लोट आये,
घर में भरी मन से घुसे तो अंजलि ने पूछा क्या हुआ
तुषार- माँ वह कुछ नहीं ह न hi कार थीं ा hi भूरा सब गायब ह
अंजलि- वो लड़के वापस आकर कार ले गए होंगे और उस भूरा को भी
तुषार- अब क्या होगा माँ अगर उन्होंने केस क्र दिया तो हमारे पास तो कोई सबूत भी नहीं ह की उन्होंने हमारी बहन के साथ गलत किया इसलिए हमने उसे मारा
राजेश- तुम घबराओ नहीं अगर कुछ होता ह तो बस इतना कहना की तुम गाओं में नहीं थे
तुषार- ये क्या बोल रहे हो पापा
राजेश- जितना बोल रहा हु उतना की करना तुम और अंजलि गाओं से बहार गए हुए थे बारिश की वजह से वापस नहीं ा पाए
अंजलि- कोई फायदा नहीं ह सब ख़तम हो गया
अंजलि की हालत देख क्र राजेश ने सीमा से कहा बीटा सबके लिए चाय बना तुषार तू जाकर कपडे बदल दीपा रूचि के पास बैठ बीटा
सभी चले गए राजेश और अंजलि अकेले दरवाजे के पास खड़े थे,
राजेश – क्या हुआ कुछ गलत हुआ ह क्या
अंजलि- भूरा को पता चल गया, रूचि को उठाने वाला सोहन चोपड़ा था सुरेश चोपड़ा का बीटा भूरा उसे लेकर आया था
राजेश- ये कैसे हो सकता ह
अंजलि- पता नहीं अगर भूरा मर गया तो पुलिस केस होगा अगर बच गया तो इस बार बहुत लोग आएंगे,
राजेश- अब क्या करेंगे
अंजलि- हमे ये गाओं छोड़ना होगा जल्दी से जल्दी
राजेश- मैं कल पहले हालत देखता हु अगर सब ठीक रहा तो ठीक वर्ण कल रात में निकल चलेंगे,
तभी सीमा चाय लेकर आ गई
अंजलि- आप भी कपडे बदल लो,
फिर सभी एक साथ कपड़ो में बैठ क्र चाय पि रहे थे, एक दम ख़ामोशी थी रूचि तो उसके साथ हुए हादसे से शमी हुई थी तुषार के दिमाग में गुस्सा और अंजलि क चलाई वो कुल्हाड़ी घूम रही थी, सीमा और दीपा रूचि को सम्हालने में लगे थे, राजेश के फेस पैर चिंता साफ़ दिख रही थी, वही अंजलि के फेस पैर इतने मिले जुले भाव थे की समझ नहीं आ रहा था वो रोने वाली ह या गुस्सा करने वाली ह,
सभी ऐसे hi लेट गए सरे बच्चो को नींद आ गई राजेश भी सो गया लेकिन अंजलि जगती रही सोचती रही, क्या सोच रही थी ये तो बस अंजलि hi जानती थी,
कुछ दिन बड़े अच्छे गुजरे बस तुषार काफी शांत था उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी सीमा से बात करने की, सीमा ने कुछ दिन कॉलेज से छुट्टी ली, फिर जब वो कॉलेज गई तो उसके फेस की चमक देखते hi मेघा बोली
हे मेरी छमकछल्लो बड़ी चमक रही ह ये निखार कहा से आ गया कोई मुर्गा फास गया क्या,
सीमा- पागल ह क्या कैसा निखार सब नार्मल hi तो ह
मेघा- अरे छमिया मुझे मत सीखा मैं पिछले 2 साल से चुद रही हु मुझे पता ह जब लड़की की तसली होती ह तो कैसा निखार आता ह
सीमा- ऐसा कुछ नहीं ह यार तू ऐसे hi सोच रही ह
मेघा- नहीं बताना तो मत बता लेकिन झूट मत बोल
सीमा- तेरे से क्या झूट बोलूंगी यार, तू सही बोल रही ह कितने टाइम से जिस मर्द की तलाश थी वो मुझे मिल गया
मेघा- सच्ची कोण ह वो माँ का लोढ़ा जिसने तेरी सील तोड़ी
सीमा- हमारे गाओं का hi ह
मेघा- पैसे वाला ह क्या
सीमा- नहीं उसके पास पैसे नहीं ह लेकिन जो उसके पास ह वो दुनिया में शायद hi किसी के पास हो
मेघा- हे ऐसा क्या ह उसके पास पोर्न मूवी से भी बड़ा ह क्या
सीमा- पोर्न का तो मुझे पता नहीं लेकिन मैंने किसी का नहीं देखा
मेघा- सच में फिर तो उसने तेरी अच्छे से तसली की होगी, सील यादगार तरीके से तुड़वाई न
सीमा- मेघा ऐसी तोड़ी की जीवन में खुद को भूल सकती हु लेकिन पहेली चुदाई नहीं भूल पाऊँगी, सच में अगर सील तुड़वानी हो तो ऐसे hi तुड़वानी चाहिए और ऐसा मर्द मिल जाये तो दुबारा किसी की तरफ नजर hi न उठे
मेघा- अच्छा जी ऐसा क्या क्र दिया उसने जो इतनी दीवानी हो गई ह उसकी
सीमा- तुझे क्या बताऊ अगर कोई 4 बचो की माँ भी उसके निचे आ जाये तो उसका भी खून निकल दे वो
मेघा- क्यों इतना फेंक रही ह कोण ह वो मुझे भी मिलवा उसे
सीमा- वो गोअन से बहार नहीं जाता इसलिए ज्यादा चांस नहीं ह मिलने का बड़ी मुश्किल से पटाया ह उसे
मेघा- अच्छा बच्चू छुपा क्र रखना चाहती ह कही प्यार तो नहीं हो गया उसे
सीमा- सच में यार अगर उसके लिए मुझे जान भी देनी पड़े तो दे दूंगी उसके अलावा न कोई दिखाई देता ह न सुनाई देता ह, शुरुआत हवस से हुई थी लेकिन उसने दिल में ऐसा वॉर किया की अब छूट से ज्यादा दिल उसके लिए पागल ह
मेघा- कण्ट्रोल क्र सीमा तेरे गाओं का ह शादी कैसे करेगी उसे इसलिए बस यही रुक जा मजे ले इससे ज्यादा मत बढ़
सीमा- बढ़ तो अब चुकी हु और शादी हो या न हो मेरे दिल में उसके अलावा कोई नहीं होगा
मेघा- और अगर उसके दिल में तेरे अलावा कोई आ गया तो
सीमा- मुझे फरक नहीं पड़ता मैं उसकी रानी नहीं दासी बनना चाहती हु और जैसा वो ह उसकी एक रानी तो हो hi नहीं सकती वो राजा ह राजा और राजा जितनी चाहे रनिया रखे और जैसा उसका पुरुष ह वो 10 रानियों को भी खुस रख सकता ह
मेघा- यार तूने तो मेरी छूट में आग लगवा दी ऐसा क्या ह उसमे जो तेरे मुँह से इतनी तारीफे निकल रही हैं एक बार मिलवा दे न मैं भी तो देखु,
सीमा- बस तू उसके बारे में सुन देखने का मौका मिला तो दिखा दूंगी, सही समय आने दे,
मेघा के दिल में थोड़ी सी जलन हुई क्योकि वो पिछले 2 साल से अपने बर्फ से चुद रही थी उसे अब मजा आना बंद हो गया था, लेकिन उसका बर्फ काफी पैसे वाला था तो वो उसे गिफ्ट देता रहता जिससे वो खुश रहती लेकिन केवल गिफ्ट से hi लड़किया खुश नहीं रहती ये सीमा को देख क्र उसे समझ आ गया था, सबसे जरुरी ह तन की संतुष्टि और फिर मन की संतुष्टि, सीमा को दोनों हो गई थी,
एक दिन सीमा और तुषार अकेले कॉलेज जा रहे थे, ये अंजलि ने hi प्लान किया था दीपा और रूचि को रोक लिया की वो उसके साथ चले, रस्ते में तुषार ख़ामोशी से चला जा रहा था, सीमा के दिल में हलचल थी वो तुषार से बात करना चाहती थी लेकिन कहा से शुरू करे, काफी हिम्मत जूता का सीमा बोली तुषार मेरी बात सुन
सीमा के शब्द सुनते hi तुषार की आँखों में आंसू आ गए और रट हुए सीमा के पेअर पकड़ लिए दीदी मुझे माफ़ क्र दो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मैं जानवर हु मैंने आपके साथ जानवरो जैसा बर्ताव किया, मुझे सजा दो मुझे मारो जो दिल में आये वो करो
सीमा ने तुषार को खड़ा किया और बोली तुझे लगता ह तूने गलती की
तुषार- है दीदी बहुत बड़ी गलती
सीमा- तो तू उसकी सजा भुगतने को तैयार ह
तुषार- आप हुकुम करो मैं अपनी जान दे दूंगा
सीमा- मुझे जान नहीं एक वडा चाहिए
तुषार ने सुर्प्रीस्ली सीमा को देखा
सीमा- बोल करेगा वडा
तुषार- बोलो दीदी क्या वडा चाहिए
सीमा- सोच ले तोड़ मत देना
तुषार- अगर ये वडा तोडा तो मैं अपनी जान दे दूंगा
सीमा- तो वडा क्र तू मुझे कभी भी छोड़ क्र नहीं जायेगा कभी मुझसे नाराज नहीं होगा हमेशा मुझसे प्यार करेगा तेरी लाइफ में चाहे कोई भी लड़की आ जाये तू अपनी बहन का साथ नहीं छोड़ेगा
तुषार- दीदी आप कैसी बात क्र रही हो मैं कभी आपसे दूर नहीं जाऊंगा चाहे कुछ भी हो जाये
सीमा- तू मेरा भाई ह लेकिन मैं तुझसे प्यार करने लगी हु टुशु ी लव ु
तुषार- ये क्या बोल रही हो दीदी ऐसा कैसे हो सकता ह
सीमा- एक भाई बहन सेक्स क्र सकते ह तो प्यार क्यों नहीं क्र सकते मैं तुझसे शादी करने के लिए नहीं बोल रही बस ये चाहती हु की तू मुझे अपनी प्रेमिका की तरह प्यार करे ये प्यार बस हम दोनों के दिल में होगा दुनिया के लिए हम भाई बहन hi ह,
तुषार खामोश खड़ा रहा
सीमा- क्या हुआ नहीं दे पायेगा अपनी इस बहन का साथ क्या मेरा प्यार अधूरा रह जायेगा
तुषार- नहीं दीदी ऐसा मत कहो मैं मरते दम तक आपके साथ हु चाहे कुछ हो जाये आपसे वडा किया ह तोडूंगा नहीं
सीमा ने तुषार को गले लगा लिया और उसके हॉट चुम लिए
तुषार- दीदी क्या करती हो कोई देख लेगा चलो यहाँ से
दोनों आगे चलने लगे
तुषार- दीदी उस दिन आपको बहुत दर्द हुआ होगा न
सीमा- तुझे क्या पता कितना दर्द हुआ था
तुषार- श्री दीदी मैं गुस्से और हवस में बहक गया था
सीमा- श्री क्यों बोल रहा ह उस दिन जो हुआ तेरी गलती नहीं ह और वैसे भी जो हुआ अच्छा हुआ क्योकि मेरे लिए मेरी पहला सेक्स यादगार बनाना चाहती थी, इससे ज्यादा यादगार नहीं हो सकता, और तू दुखी मत हो मुझे बहुत मजा आया उस दिन ऐसा सेक्स किस्मत वाली लड़कियों को मिलता ह
तुषार- दीदी सच में आपको मजा आया
सीमा शर्मा गई हैट बेशरम बार बार पूछेगा
तुषार- अच्छा जी उस दिन तो गालिया भी दे रही थी आज शर्मा रही हो,
सीमा- वो तो जब हवस छड़ी हुई थी तो पता नहीं क्या क्या बक गई
तुषार- कोई नहीं दीदी आपके मुँह से गालिया भी अच्छी लगती ह,
सीमा- अच्छे बीटा और सुनौ तुझे गालिया
तुषार- है है सुनाओ न
सीमा- तू तो पक्का बेशरम हो गया ह,
तुषार- प्लस दीदी सुनाओ न
सीमा- अच्छा एक शरत पैर
तुषार- वो क्या
सीमा- तू मुझे अकेले में सीमा बोलेगा दीदी नहीं तू मेरा प्रेमी ह, सबके सामने भाई ह अकेले में प्रेमी समझा और मैं चाहती हु तू मुझे कण्ट्रोल करे, उस दिन मुझे अहसास हुआ की मुझे कण्ट्रोल करवाना पसंद ह डोमिनाते होना पसंद ह इसलिए अकेले में तू मुझे खुल क्र डोमिनाते करेगा
तुषार- ठीक ह मेरी जान अकेले में मैं आपको सीमा बुलाऊंगा अब दो गली
सीमा- ये आपको क्या होता भेनचोद मैं तेरी प्रेमिका हु इतनी इज्जत से बोलेगा
तुषार- ठीक ह मेरी जान अब से नहीं बोलूंगा अब से तेरे मजे लूंगा,
दोनों भाई बहन ऐसे hi गन्दी अश्लील बाते करते हुए अपने अपने कॉलेज पहुंच गए, शाम को जब सब वापस आये तो घर का माहौल एक दम खुशनुमा था, जिसे देख अंजलि बहुत खुश थी, उसने इशारे में सीमा से बात की की तुषार से बात चित ठीक हो गई तो सीमा ने भी मुस्कुराते हुए है में इशारा किया,
अंजलि को अब सकूं था, उसके दिमाग में बस एक hi बात होती की उसके बच्चे एक साथ खुश रहे, सब अच्छा चल रहा था
एक दिन सुबह से लेकर रात तक बारिश होती रही वो भी बहुत तेज राजेश जा चुक्का था काम पैर बेचारा मजदूरी भी एक ऐसी मज़बूरी ह की ऐसे मौसम में भी आराम नहीं लेने देती, या राजेश खुद घर में रुकना नहीं चाहता, जो भी हो वो तो चला गया था लेकिन बाकि परिवार घर में hi था,
आज सीमा और दीपा ने मिल क्र पकोडिया बनाई थी इस परिवार के लिए पकोडिया बनना भी किसी दावत से काम नहीं था, शाम के 6 बज रहे थे अँधेरा हो चुक्का था सभी मस्ती करते हुए पकोडिया खा रहे थे तभी बहार से किसी कार के हॉर्न की आवाज आई तो रूचि कूद क्र देखने चल दी,
अंजलि- बीटा मैं देख आती हु इस टाइम कोण ह तू कहा जा रही ह
रूचि- अरे माँ आप बैठो मैं बस अभी देखती हु शायद कोई रास्ता भटक गया ह
रूचि बहार चली गई कुछ hi पालो बाद रूचि के चीखने की आवाज आई maaaaaaaaaaaaaaaaaaa
आवाज सुनते hi तुषार कूद क्र बहार आ गया तो एक कार तेजी से घर के पास से निकली, तुषार उसके पीछे भागने लगा, अंजलि भी बहार आई और माजरा समझते हुए सीमा से बोली अंदर रहना और दरवाजा बंद कर लो, अंजलि ने एक कुलधि उठाई और दौड़ने लगी.
बारिश बहुत तेज थी बहार का कुछ दिख नहीं रहा था कार ज्यादा तेज चल नहीं सकती थी क्योकि रास्ता कच्चा था, लेकिन तुषार और अंजलि के लिए तो ये घर था उन्हें हर रस्ते का पता था, जब कार वालो को ठीक से रास्ता नहीं दिखा तो उनका बैलेंस बिगड़ गया कार एक खेत में फिसल गई, टायर फास गए न आगे जा सके न पीछे,
तो कार में से जल्दी जल्दी 5 लोग उतरे और उनमे से एक ने रूचि को कंधे पैर उठा लिया और कार के सामने जलती लाइट के सामने ले आये, पीछे तुषार को कार की आवाज आणि बंद हो गई थी, लेकिन वो दौड़े जा रहा था, उसे दूर कार की लाइट जलती दिखाई दी लेकिन तभी वो लाइट भी बंद हो गई, उन लोगो ने कार की लाइट बंद क्र दी,
उनमे सभी ने रूचि को घेर लिया और कार के बोनट पैर लिटा दिया रूचि के मुँह पैर बारिश बहुत तेज गिर रही थी जिससे वो जैसे hi छिलने को मुँह खोलती पानी की वजह से आवाज नहीं निकल पति, तभी एक आदमी ने उसका मुँह दबा दिया, दूसरे आदमी ने उसका सूट गले से पकड़ा और खींच दिया सूट फैट ता चला गया, अँधेरे में ठीक से दिखा तो नहीं लेकिन रूचि उनके सामने ब्रा में थी, तभी एक आवाज आई क्यों साली कुटिया मुझ पैर हाथ उठाएगी आज तेरी छूट को फाड् क्र चीथड़े न उदा दिए तो मेरा नाम भूरा नहीं. जी है ये भूरा था जिसका झगड़ा हुआ था रूचि से और पंचायत ने उसे 1 महीने की सजा दी थी.
भूरा ने जैसे hi रूचि की चुकी को हाथ लगाया तभी कार के उप्पेर से तुषार कूद क्र आ गया, ऐसी रात में रूचि जो कार के बोनट पैर हाथ मर रही थी उसकी आवाज बहुत दूर तक जार hi थी जिससे सुनते और लाइट का अनुमान करते तुषार वह तक पहुंच चुक्का था,
तुषार ने एक लात भूरा के मुँह पैर मरी और जल्दी से रूचि को खींच क्र खड़ा किया, तभी उनमे से एक ने कार की लाइट जला दी, तुषार ने जल्दी से रूचि को खेत की साइड में बैठा दिया और उन सभी पैर कूद पड़ा, तुषार गाओं का पला बड़ा था उसे ऐसे मौसम में अच्छे से सम्हालना आता था लेकिन शायद उन लोगो को नहीं आता वो जैसे hi तुषार की तरफ भागते फिसल जाते जिसका फायदा तुषार अच्छे से उठा रहा था, वो कूद क्र एक घुसा कभी एक के मुँह पैर मरता तो कभी दूसरे के मुँह पैर,
कुछ hi देर में तुषार ने उनकी हालत ख़राब क्र दी थी, लेकिन तभी तुषार का पेअर फिसल गया और उसका सर कार से टकरा गया वो जब तक सम्हालता उन लोग ने तुषार को पकड़ लिया, और उसकी पिटाई करने लगे, लेकिन पीछे से एक शेरनी दौड़ती हुई आ रही थी, उसने आते hi एक कुल्हाड़ी का वॉर उन लोगो पैर जो उनमे से एक के सर पैर लगा कुल्हाड़ी उलटी थी वर्ण वो मर hi जाता,
उसके मुँह से चीख निकल गई बाकि ने पीछे देखा तो अंजलि अपनी साड़ी उठा क्र अपने पेटीकोट में उनस राखी थी हाथ में कुल्हाड़ी थी कार की लाइट में बारिश में भीगती हुई वो किसी शेरनी से काम नहीं लग रही थी, भूरा जैसे hi अंजलि की तरफ आया तो अंजलि ने भूरा की गार्डन पकड़ ली और खींच क्र जमीं में दे मारा, इधर तुषार भी सम्हाल गया, अब दोनों माँ bête ने मिलकर जो धुनाई की उन सब की, उनमे से तीन लोग भाग लिए वह से अब बचे भूरा और एक 26-27 साल का लड़का,
तुषार ने उस लड़के की गर्दन पकड़ ली और अंजलि कुल्हाड़ी लेकर भूरा की छाती पैर पेअर रख क्र कड़ी थी,
अंजलि- भूरा तूने मेरी बेटी को हाथ लगा क्र अपनी मोत को छुआ ह आज तू जिन्दा नहीं बचेगा, तेरी इतनी हिम्मत हो गई किट ु बहार के लोगो को गाओं में बुला लाया, आज रात hi पंचायत बुलाई जाएगी और तेरा फैसला होगा अउ राइज तो गाओं वाले hi मोत दे देंगे,
भूरा- हहहहह तू इसे मोत देगी जानती ह कोण ह ये
ऐसी हालत में भी भूरा के मुँह से हसी सुन क्र अंजलि बोखला गई उसने उस लड़के को गौर से देखा लेकिन पहचान नहीं पाई,
भूरा- ये ह सोहन चोपड़ा, सुरेश चोपड़ा का बीटा, J.S.S कंपनी का वरिष्ठ. जानती ह न तू सुरेश चोपड़ा को और J.S.S कंपनी को,
भूरा की बात सुनकर अंजलि का मुँह खुला रह गया उसकी आँखे लाल हो गई जो गुस्सा अभी तक उसकी बेटी के साथ ये हरकत करने का था अब उसे भी ज्यादा गुस्सा था, उसने उस लड़के की तरफ गौर से देखा और गुस्से में छिलाई, चला जा यहाँ से और भूल क्र भी यहाँ कदम मत रखना वर्ण कसम से जान से मर दूंगी, टुशु छोड़ दे उसे.
तुषार ने अचम्भे से अंजलि की तरफ देखा, लेकिन बिना कोई सवाल किये उसका गाला छोड़ दिया वो लड़का गिरता पड़ता वह से भागने लगा.
इधर भूरा है रहा था, अंजलि गुस्से में थी वो छिलाई भूरा तुझे ये नहीं करना चाहिए था नहीं करना चाहिए था इस सब से दूर hi रहना चाहिए था तुझे, छीलते हुए अंजलि ने कुल्हड़ी उठा क्र सीधे भूरा की गार्डन में मर दी.
तुषार की आँखे फटी रह गई रूचि की तो चीख hi निकल गई, रूचि के चीखने से दोनों का धयान उसकी तरफ गया तुषार भाग क्र उसके पास पंहुचा और उसे गले से लगा लिया वो भी तुषार से चिपक गई, अंजलि भी उसके पास पहुंची अंजलि ने रूचि के सर पैर हाथ फेरा और पुचकारा बीटा घबरा मत सब ठीक ह सब ठीक ह,
अंजलि- तुषार चल यहाँ से जल्दी
तीनो जल्दी जल्दी घर की तरफ चल दिए, अंजलि के हाथ में अभी भी खून से सनी कुल्हाड़ी थी, वो घर पहुंचे वह सीमा और दीपा दोनों डरे हुए सहमे से बैठे थे, तीनो को वापस घर में आता देख उनकी आँखों से आंसू बहने लगे जो काफी देर तक रट रट रुक गए थे, जब उनकी नजर रूचि पैर गई तो दीपा भाग क्र एक दुपट्टा ले आई क्योकि रूचि का कुरता फटा हुआ था वो ब्रा में आधी नंगी तुषार से चिपकी हुई भीगी हुई चली आ रही थी उसे तो अहसास hi नहीं था उसकी क्या हालत ह उसे क्या तीनो में से किसी को भी ये अहसास नहीं था,
सीमा ने जल्दी से गरम पानी रखा दीपा ने रूचि के कपडे बदले, लेकिन अंजलि और तुषार खामोश एक दम शांत दरवाजे के पास बैठे थे अंजलि के हाथ में अभी भी वो कुल्हाड़ी थी,
किसी की कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी रूचि सुबक रही थी, दीपा उसे शांत करवा रही थी, सीमा ने बाल्टी में अंजलि को गरम पानी दिया और बोली माँ गरम पानी से नाहा लो, सीमा की आवाज सुनकर अंजलि और तुषार की धयान भांग हुआ, तभी बहार से राजेश आ गया भीगता हुआ उसे देख क्र तुषार और अंजलि खड़े हो गए,
अंजलि के हाथ में कुल्हाड़ी देख क्र राजेश घबरा गया,
राजेश- क्या हु अंजलि क्या हुआ ये सब क्या ह,
अंजलि बस राजेश को देखे जा रहे थी उसकी आँखों में आंसू थे वो रोये जा रही थी, तभी पीछे से सीमा बोली पापा कुछ लोग रूचि को कार में उठा क्र ले गए थे,
राजेश गुस्से कोण था किसने इतनी हिम्मत की
तुषार- भूरा था वो
राजेश- उसकी तनी हिम्मत मैं उसे जान से मर दूंगा आज
तुषार- मर दिया माँ ने उसे मर दिया
इतना सुनते hi राजेश का मुँह खुला रह गया सीमा के हाथ से पानी की बाल्टी गिरते गिरते बची सभी बोखलाए हुए से अंजलि को देख रहे थे,
तभी राजेश ने अंजलि को गले लगा लिया और बोलै- नहीं अंजलि कुछ नहीं हुआ तुम घबराओ नहीं कुछ नहीं होगा मैं सम्हाल लूंगा खुद को सम्हालो हिम्मत मत हारना अपना सयम मत खोना बस खुद को रोको, मैं अभी आया
तुषार- कहा जार हे हो पापा
राजेश- टुशु बीटा कहा हुआ ये सब मुझे बता मैं वह सब ठीक क्र दूंगा तुषार- पापा अब वह जाकर क्या फायदा
राजेश- बीटा तेरी माँ के खिलाफ वह कोई सबूत नहीं होना चाहिए चल जल्दी बता कहा हुआ ये सब
तुषार- मैं भी चलता हु आपके साथ
अंजलि- मैं भी चलूंगी
राजेश- नहीं अंजलि तुम बच्चियों के साथ रहो हम दोनों क्र आएंगे
अंजलि- आप मत पदों इस बार इसमें
राजेश- अंजलि शांत हो जाओ सीमा बीटा अपनी माँ को गरम पानी से नहला और कपडे बदल हम अभी आये
फिर दोनों उस जगह की तरफ भागने लगे, काफी देर तक भागते हुए भी उन्हें वह कार नहीं मिली, कार वह से जा चुकी थी अँधेरा था तो ठीक से तुषार भी अनुमान नहीं लगा प् रहा था की असली जगह कहा थी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला न hi कार न hi भूरा, काफी देर तक दोनों धुनते रहे लेकिन खली हाथ लोट आये,
घर में भरी मन से घुसे तो अंजलि ने पूछा क्या हुआ
तुषार- माँ वह कुछ नहीं ह न hi कार थीं ा hi भूरा सब गायब ह
अंजलि- वो लड़के वापस आकर कार ले गए होंगे और उस भूरा को भी
तुषार- अब क्या होगा माँ अगर उन्होंने केस क्र दिया तो हमारे पास तो कोई सबूत भी नहीं ह की उन्होंने हमारी बहन के साथ गलत किया इसलिए हमने उसे मारा
राजेश- तुम घबराओ नहीं अगर कुछ होता ह तो बस इतना कहना की तुम गाओं में नहीं थे
तुषार- ये क्या बोल रहे हो पापा
राजेश- जितना बोल रहा हु उतना की करना तुम और अंजलि गाओं से बहार गए हुए थे बारिश की वजह से वापस नहीं ा पाए
अंजलि- कोई फायदा नहीं ह सब ख़तम हो गया
अंजलि की हालत देख क्र राजेश ने सीमा से कहा बीटा सबके लिए चाय बना तुषार तू जाकर कपडे बदल दीपा रूचि के पास बैठ बीटा
सभी चले गए राजेश और अंजलि अकेले दरवाजे के पास खड़े थे,
राजेश – क्या हुआ कुछ गलत हुआ ह क्या
अंजलि- भूरा को पता चल गया, रूचि को उठाने वाला सोहन चोपड़ा था सुरेश चोपड़ा का बीटा भूरा उसे लेकर आया था
राजेश- ये कैसे हो सकता ह
अंजलि- पता नहीं अगर भूरा मर गया तो पुलिस केस होगा अगर बच गया तो इस बार बहुत लोग आएंगे,
राजेश- अब क्या करेंगे
अंजलि- हमे ये गाओं छोड़ना होगा जल्दी से जल्दी
राजेश- मैं कल पहले हालत देखता हु अगर सब ठीक रहा तो ठीक वर्ण कल रात में निकल चलेंगे,
तभी सीमा चाय लेकर आ गई
अंजलि- आप भी कपडे बदल लो,
फिर सभी एक साथ कपड़ो में बैठ क्र चाय पि रहे थे, एक दम ख़ामोशी थी रूचि तो उसके साथ हुए हादसे से शमी हुई थी तुषार के दिमाग में गुस्सा और अंजलि क चलाई वो कुल्हाड़ी घूम रही थी, सीमा और दीपा रूचि को सम्हालने में लगे थे, राजेश के फेस पैर चिंता साफ़ दिख रही थी, वही अंजलि के फेस पैर इतने मिले जुले भाव थे की समझ नहीं आ रहा था वो रोने वाली ह या गुस्सा करने वाली ह,
सभी ऐसे hi लेट गए सरे बच्चो को नींद आ गई राजेश भी सो गया लेकिन अंजलि जगती रही सोचती रही, क्या सोच रही थी ये तो बस अंजलि hi जानती थी,