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अपडेट-19
तुषार का लुंड दीपा की छूट से टकराने लगा था दीपा की छूट भी फिर से गीली होने लगी थी, दीपा ने पीछे हाथ लेजाकर लुंड पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पैर सेट किया और पीछे होने लगी, लुंड का टोपा दीपा की छूट में घुस गया, तुषार ने भी निचे से धक्का लगया पोजीशन सही नहीं थी लेकिन फिर भी आधा छूट में घुस गया, दीपा के दोनों पेअर जुड़े हुए थे जिस वजह से छूट और टाइट हो रही थी, जिससे दोनों को और मजा आ रहा था,
दीपा- बस ऐसे hi लेता रह न, इसे अंदर डेल हुए बहुत मजा आ रहा ह
तुषार- है यार कसम से ये तो सच में बहुत मजे आ रहा ह
दोनों बिलकुल एक दूसरे से चिपक गए, तुषार के हाथ दीपा की चूचियों पैर थे,
दीपा- टुशु मेरे मन में एक बात ह
तुषार- है बताओ क्या हुआ
दीपा- मैं इस रजनी को सबक सीखना चाहती हु
तुषार- वो तो मैं भी चाहता हु पैर क्या करना ह बता
दीपा- मैं चाहती हूत ु उसे चोदे और इतना चोदे की वो जिंदगी भर चुदाई से हाथ जोड़ ले जब भी उस रंडी की छूट में आग लगे तेरी चुदाई याद आ जाये उसके घर की हर औरत को तू चोदे और अपना बच्चा पैदा करे
तुषार- क्या बोल रही ह तुम्हारी माँ ह वो
दीपा- माँ मत बोल उस रंडी को, मेरी माँ निचे सो रही ह
तुषार- अच्छा ठीक ह नहीं बोलता लेकिन तुम अपने भाई को hi किसी और को छोड़ने को बोल रही हो
दीपा- तू मेरा भाई मेरा प्यार सब कुछ ह तेरी ख़ुशी hi मेरा धर्म ह बस और तेरा लुंड एक औरत से खुश नहीं रह सकता तू जिसे चाहे जितनी चाहे औरतो को चोदे मुझे कोई ऐतराज नहीं ह बस मुझे धोका मत देना
तुषार- कैसी बात क्र रही हो मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता आपको धोका देने की, आपकी इच्छा जरूर पूरी करूँगा मैं वक़्त आने दो,
दीपा- ठंकु, अच्छा ये बता तुझे सबसे अच्छा कोण लगता ह, सच बताना मुझे बुरा नहीं लगेगा
तुषार- ये कैसा सवाल हुआ मेरा पूरा परिवार hi सबसे अच्छा लगता ह
दीपा- मैंने तुझे बताया न मुझे कोई ऐतराज नहीं ह तू किसी और को भी छोड़ता ह तो, बता न, मैं सीमा रूचि या माँ सबसे अच्छी कोण ह
माँ का नाम आते hi तुषार के लुंड ने एक झटका मारा, दीपा के फेस पैर मुस्कान आ गई,
दीपा- अच्छा ये बता सबसे सूंदर बूब्स किसके ह सच बताना
तुषार- हम्म्म्म माँ के
दीपा- माँ के तो ह hi इतने बड़े, जो कपडे मैंने पहने थे वो माँ फेन ले तो कयामत लगेगी,
तुषार- है सच में यार
तुषार ने लुंड आगे धकेल दिया,
दीपा मुस्कुराते हुए, उसकी तो गांड भी काफी बड़ी ह, कितनी टाइट होगी न
तुषार जोश में आ गया और उसने दीपा की कमर पकड़ी और जोर का धक्का लगा दिया, दीपा की आह्ह्ह्ह निकल गई, तुषार उठा और दीपा के पेअर के बिच आ गया कांबले अलग पैक दिया और ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा, दीपा मुस्कुराते हुए मजे से अह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह छोड़ मेरे भाई छोड़, देख तेरे सामने माँ की चूचिया ह कितनी बड़ी बड़ी
तुषार ने चूचिया मुँह में भर ली और धक्के लगाने लगा,
दीपा- aahhhhhhhhhhh चूस ने पि ले माँ का दूध निचोड़ ले अहहहहहहह तेरा लुंड ऊऊफफफफफफफफफ कितना प्यारा ह ाहः
अगले 20 मिनट्स तुषार ऐसे hi छोड़ता रहा, दीपा भी मजे लेकर चुदती रही, तुषार जब झड़ने को हुआ तो वो लुंड बहार तो निकल पाया लेकिन दीपा को मौका नहीं मिला लुंड तक पहुंचने का तुषार ने दीपा के पेट पैर अपन अमाल गिरा दिया, और साइड में लेट गया, दीपा मुस्कुराती हुई अपने हाथो से तुषार का रास चाटने लगी,
तुषार ने दीपा को रास चाट ते हुए देखा
तुषार- दीदी क्या तुम्हे ये इतना पसंद ह
दीपा- है टुशु मेरे अंदर लुंड का रास पिने की इतनी बुरु आदत लग गई ह की मैं खुद को रोक ह नहीं पति,
तुषार- इससे कोई नुकसान तो नहीं ह न
दीपा- नहीं रे बिलकुल नहीं
फिर तुषार उठा और खुद को साफ़ करके आया फिर दीपा गई, फिर दोनों ऐसे hi लेट गए कांबले ओढ़ क्र,
दीपा- मजा आया न
तुषार- है बहुत मजा आया
दीपा- माँ की चूचियों के बारे में सोच क्र मेरी चुकी उखाड़ने वाला तहत ु
तुषार- दीदी आप भी न
दीपा- शर्मा क्यों रहा ह जब बहन को छोड़ सकता ह तो माँ को छोड़ने में क्या बुराई ह मुझे पता ह तुझे माँ बहुत पसंद ह
तुषार- ऐसी कोई बात नहीं ह
दीपा- फिर माँ का नाम सुनते hi तेरा ये खड़ा क्यों हो जाता ह
तुषार- वो तो ऐसे hi बस
दीपा- मुझसे झूट बोलेगा तुझे पता ह न मुझसे कोई झूट नहीं बोल सकता
तुषार- अब क्या बताऊ अच्छा बाबा है माँ मुझे पसंद ह बहुत पसंद ह इतनी पसंद की शायद दुनिया में उनके अलावा और कुछ नहीं
दीपा- हे मेरा भाई तो ासिक हो गया ह अपनी माँ का बेशरम
तुषार- देखो इसी लिए नहीं बता रहा था
दीपा- अरे मजाक क्र रही थी, मुझे ख़ुशी ह की तू माँ को पसंद करता ह हमारा परिवार ऐसा hi ह और माँ को भी जरुरत ह पापा का तुझे पता hi ह वो बेचारी कब से प्यासी होंगी, हम तो मजे ले रहे ह लेकिन उनका क्या उन्हें भी ये सुच चाहिए, और मुझ ेलगता हवा भी तुझे वैसा hi प्यार करती हैं, बस माँ ह इसलिए आगे नहीं बढ़ सकती
तुषार- मैंने कैसे बधु आगे मुझे समझ नहीं आता उनके पास जाता हु तो लुंड खड़ा हो जाता ह उन्हें भी अहसास हो जाता ह की मेरा लुंड खड़ा ह वो मुझ ेकुछ नहीं खेती फिर भी मेरी हिम्मत नहीं होती आगे बढ़ने की
दीपा- अगर वो तुझे कुछ नहीं खेती तो समझ जा वो तैयार ह तुझे hi आगे बढ़ना पड़ेगा मेरे भाई हिम्मत दिखा उन्हें वो ख़ुशी दे दे, बहुत दुःख देखे ह हमारी माँ ने
तुषार- अब उन्हें दुःख नहीं होने दूंगा मैं साडी खुशिया दूंगा उन्हें इस दुनिया की साडी खुशिया दूंगा मैं
दीपा- हम सब मिलकर देंगे
दीपा ने तुषार को बहो में भर लिया
तुषार- अब मैं चलता हु बहुत देर हो गई देखो 1 बज रहा ह
दीपा- थोड़ी दे रेज hi लेता रह न बड़ा सकूं मिल रहा ह
तुषार लेट गया दोनों ऐसे hi नंगे एक दूसरे से चिपके चलते रहे, ठण्ड में निवास आते hi थकन की वजह से दोनों सो गए, सुबह 4 बजे तुषार की आँख खुली तो उसका लुंड अभी भी खड़ा था दीपा की जांघो के बिच फसा हुआ था, तुषार मुस्कुराया और दीपा को किश किया और उस पैर कांबले डाला फिर अंडरवियर पहना और बाकि कपडे ऐसे hi हाथ में लिए और निचे अपने रूम में आ गया,
उसे बहुत तेज टॉयलेट आ रहा था, वो बाथरूम की तरफ भगा जैसे hi उसने दरवाजा खोला उसकी आँख मुँह गांड सब फटी रह गई, उसके सामने नजारा hi ऐसा था,
सामने अंजलि ब्रा पंतय में कड़ी थी, वैसे तो तुषार ने बचपन से अंजलि को ऐसी रूप में देखा था कपडे बदलते देखा था लेकिन अब सब कुछ बदल चुक्का था अब तुषार की नजर में अंजलि सिर्फ माँ नहीं थी वो उसमे एक औरत को अपने प्रेमिका को देखता था, वही अंजलि का नजरिया भी बिलकुल बदल चुक्का था,
उसकी नजर तुषार पैर गई और दूसरी नजर सीधे उसके लुंड पैर गई जो एक दम तना खड़ा था अंडर वियर में से,
अंजलि की तो साँस hi अटक गाइट hi, दोनों बस एक दूसरे क घूरे जा रहे थे, तुषार को समझ नहीं आ रहा था क्या करे अंजलि भी बिना कुछ बोले कड़ी थी,
तुषार के दिमाग में दीपा की बाते हतोड़े की तरह बज रही थी, की माँ बहुत प्यासी ह बहुत तकलीफ में ह वो मन नहीं करेगी वो भी पसंद करती ह, तुझे हिम्मत करनी होगी तुझे हिम्मत करनी होगी,
तुषार आगे बढ़ता गया अंजलि बस उसे देखे जा रही थी, तुषार ने अंजलि कमर में हाथ डाला और अपनी तरफ खींचा, अंजलि की भरी भरी चूचिया तुषार के सीने से टकरा गई, तुषार का लुंड अंजलि के पेट पैर रगड़ रहा था, तुषार ने कास क्र अंजलि को खुद से भींच लिया और अपने हॉट अंजलि के होतो पैर रख दिए, अंजलि एक दम शॉकेड और शांत कड़ी थी उसने कोई हरकत नहीं की थी, तुषार बस अंजलि के हॉट चूमे जा रहा था, अंजलि ने एक बार भी अपनी तरफ से कुछ नहीं किया था,
तुषार ने जोश में अंजलि के हॉट काट लिया और उसकी चुकी जोर से भींच दी, अंजलि ने तुषार को धकेला और एक जोर दर थपड तुषार के गाल पैर जड़ दिया, थपड इतना जोर डार्ट है की पूरा बाथरूम गूंज उठा, तुषार जिसे बहुत तेज मूत आया हुआ था जो अंजलि को देख क्र हवस में बदल गया था, थपड लगते hi हवस उतर गई और तुषार ने अंडरवियर में hi मूत दिया,
वो इतना दर गया था की उसकी आँखों से आंसू और लुंड से मूत निकल गया था, अंजलि ने देखा तुषार को अंडरवियर में hi मूत ते हुए तो वो बहार चली गई, तुषार कुछ देर वही खड़ा रहा उसे समझ hi नहीं आ रहा था ये क्या हुआ माँ तो उसे सपोर्ट करती थी उसे कभी नहीं रोकती थी फिर आज ऐसा क्यों किया,
फिर उसने अंडर वियर निकला और नहाया फिर अपने कमरे में आकर कपडे पहन क्र लेट गया, वो बहुत डरा हुआ था उसे बहुत पछतावा हो रहा था की उसने ऐसा क्यों किया, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, वो रोटा था और रट रट सो गया, उधर अंजलि की आँखों में भी आंसू थे, वो बहार के कॉमन बाथरूम में गई और शावर चला क्र बहुत देर तक ठन्डे पानी में नहाती रही और रोटी रही,
क्यों रो रही थी ये तो अंजलि hi बता सकती थी, वो तो तुषार के साथ खुश थी उसके साथ गरम हो जाती थी फिर आज क्या हुआ आज वो तुषार को देख क्र मोहित हो गाइट hi खुद उसमे खो गाइट hi फिर उसने तुषार को थपड क्यों मारा?
अगले दिन दीपा भी देर से उठी लेकिन आज अंजलि ने कोई धयान नहीं दिया वो तो बिना कुछ खाये पिए घर से जल्दी निकल गई, ये बाकि सभी के लिए बड़ा अजीब था अंजलि ने आज से पहले ऐसा नहीं किया था
रूचि- ये आज माँ को क्या हुआ खुद भी नाश्ता नहीं किया किसी को उठाया भी नहीं इतनी जल्दी चली गई, पापा कुछ बात हुई ह क्या
राजेश- नहीं बीटा रात तो ठीक थी सुबह नहाने गई थी फिर बाहर वाले बाथरूम में चली गई पता नहीं क्यों, मैंने उससे पूछा भी नहीं
रूचि- ठीक पापा आप नाश्ता कीजिये आपको देर हो रही होगी
राजेश नाश्ता करके चला गया
रूचि- ये दीपा और टुशु नहीं उठे अभी तक क्या बात ह आज का दिन कुछ अजीब ह पहेली बार दीपा उठने में लेट हुई ह माँ पहेली बार ऐसे घर से गई ह,
सीमा- कोई बात नहीं तू नाश्ता लगा मैं दीपा को लती हु
सीमा को पता था दीपा क्यों नहीं उठी लेकिन अंजलि ऐसे क्यों गई उसे नहीं पता था
सीमा दीपा के रूम में गई तो डीप आठ चुकी थी बीएस नाहा क्र बहार आई थी,
सीमा- क्यों ऋ कामिनी पूरी रात hi चूड़ी ह क्या जो अब तक नहीं उठी
दीपा- शर्म क्र लिया करो थोड़ी सी सुबह सुबह hi चुदाई की धुन चढ़ जाती ह तुझे
सीमा- अच्छा खुद बिना बताये पूरी रात लुंड से खेलती ह और मुझे ज्ञान दे रही ह
दीपा- है चूड़ी थी दो बार चूड़ी और बताओ और सुन्ना ह कुछ
सीमा- बाद में सुनूंगी पहले निचे चल जल्दी रूचि शोर मचा रही ह उस लोमड़ी का दिमाग तेज दौड़ता ह बहुत उससे छुपा क्र रखो ऐसी बाते वर्ण नोच खायेगी
दीपा- है है चलो
तब तक रूचि तुषार को उठाने गई, उसने जैसे hi कम्बल हटाया रूचि के फेस पैर दुनिया का सारा दर्द उभर आया, तुषार के फेस पैर आंसू सुच क्र लाइन बना चुके थे ऐसी लाइन तभी बनती ह जब कोई बहुत रोया हो, तुसाहर का फेस देखते hi रूचि खुद को सम्हाल नहीं पाई और रोने लगी, उसका आंसू तुषार के फेस पैर गिरा तो तुषार की आँखे खुल गई, आँख खुलते hi सामने रूचि वो भी आँख में आंसू लिए तुषार का तो दिमाग hi घूम गया,
तुषार- क्या हुआ रूचि क्या हुआ रो क्यों रही ह किसी ने कुछ कहा क्या हुआ
तुषार की आवाज इतनी तेज थी की सीमा और दीपा के कानो तक भी पहुंच गई, दोनों तेजी से उस तरफ भागी,
रूचि को रोटा देख दोनों घबरा गई,
क्या हुआ रूचि क्या हुआ बता बहन तू तो ठीक थी रो क्यों रही ह,
रूचि शांत हुई, आपको मेरा रोना दिख रहा ह लेकिन इसका चेरा नहीं दिख रहा ये क्यों रो रहा था
दोनों की नजर तुषार के फेस पैर गई दोनों को लगा रात में न सोने क वजह से आँखे सूज रही ह ,
दीपा- अरे वॉक अहा रो रहा ह रात को मुझसे बात क्र रहा था इसलिए आँखे सूज रही ह
तुषार- है रूचि देर से सोने की वजह से आँखे सूज सी गई ह
रूचि- ख़बरदार जो मुझसे झूट बोलै तो मैं तेरी रूह तक को पहचानती हूत ु कब खुश होता ह कब दुखी मैं सब जानती हु जल्दी से बता क्या बात ह वर्ण माँ खुद पूछेगी
तुषार- नहीं नहीं माँ को मत बताना
तुषार के ऐसे घबराते hi तीनो बहन समझ गई रूचि का शक सही ह वो रोया ह और छुपा रहा ह
सीमा- टुशु क्या हुआ दीपा पानी लाना जल्दी
दीपा दौड़ क्र पानी ले आई
ले पानी पि आराम से बैठ और बता क्या हुआ
तुषार की समझ में कुछ नहीं आ रहा था क्या बोले वो कुछ देर खामोश रहा
तीनो उससे पूछे hi जार hi थी, मज़बूरी में तुषार को कहानी बनाने पड़ी
तुषार- वो रात को लेते लेते मुझे पापा की कहानी याद आ गाइट hi फिर माँ की वो 16 साल की आगे में प्रग्नेंट होकर भागना याद आ गया माँ पापा की तकलीफ से दिल भर आया और आंसू भेने लगे, बस खुद को कोस्टा रहा मैं कितना लचर हु जो उनके लिए कुछ नहीं क्र पाया,
तीनो बहेनो ने एक साथ तुषार को गले से लगा लिया,
सीमा- तू कभी आंसू मत बहाना वर्ण हमारी जान निकल जाएगी
दीपा- है भाई सचिन और कपिल भी हमारे भाई ह लेकिन जितना प्यार हम तुझसे करती ह शायद किसी और से करे इसलिए तू दुखी होता ह तो बहुत तकलीफ होती ह
रूचि- अगर आज के बाद तू रोया तो मैं पता नहीं क्या क्र जाउंगी ख़बरदार जो तेरी आँखों में आंसू आये तो हम क्यों रोयेंगे, रोयेंग तो वो लोग जिन्होंने गलत किया ह और हम उन्हें ऐसा रुलायेंगे वो जिंदगी भर पछतायेंगे उन्होंने हमारे माँ बाप के साथ ऐसा क्यों किया,
सीमा हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, न hi उन्हें जिन्होंने माँ के साथ गलत किया ह हम उन्हें ढूंढ लेंगे चाहे कही भी घुसे हो
दीपा- न hi उस यश ठाकुर को न hi उस रजनी को उन्होंने हमारे पापा के साथ जो किया ह उसके लिए वो बहुत पछतायेंगे
रूचि- सही कहा कोई नहीं बचेगा तू चिंता मत क्र हम किसी को नहीं बख्शेंगे टुशु
दीपा- इसमें एक इंसान और ऐड हो गया ह
सीमा- कोण
दीपा ने उस रात वाली बात सबको बताई जिस रात अजय अजनाली के घर आया था
रूचि- तूने पहले क्यों नहीं बता बेवकूफ हो सकता ह वही पहेली कड़ी बन जाता माँ का पास्ट जानने में
दीपा- रात को कैसे बताती फिर हम यहाँ आ गए तो भूल गई
तुषार- आपने कुछ और देखा
दीपा- नहीं बस उसके पास रेड कार थी ****** वाली
रूचि- रेड कार हमारे गाओं में किस किस के पास ह
तुषार- ठाकुरो के पास
रूचि- फिर वही हो सकता ह मेरा शक सही हो सकता ह मुझे पूरा विश्वास ह वो hi होगा
तुषार- कोण रूचि कोण किस पैर शक ह तुझे
रूचि- अजय ठाकुर पैर
सीमा- क्यों उस पैर क्यों शक ह तुझे वो तो यहाँ रहता भी नहीं ह
रूचि- वो अब यहाँ नहीं रहता लेकिन पहले तो रहता था न, और जिस तरह से वो उस दिन माँ को मुस्कुराता हुआ देख रहा था और माँ उससे नजर चुरा रही थी, वो बड़ा अजीब था मैंने माँ को आज तक नजर चुराते नहीं देखा ह किसी से भी चाहे वो कितना भी बड़ा जिमिदार क्यों न हो
सीमा- बात में दम ह इसकी, इस लोमड़ी का दिमाग अगर कह रहा ह तो कुछ न कुछ लिंक तो होगा hi लेकिन पता कैसे चलेगा,
रूचि- चल जायेगा वो भी चल जायेगा लेकिन अब थोड़े तरीके से काम करो सब
दीपा- आप hi बता दीजिये हमारी लीडर जी कैसे काम करे कहा से करे
तुषार- दीदी मजाक नहीं वो सही कहे रही ह, बोल रूचि
रूचि- सीमा दी आप ऑफिस से जुड़ क्र जल्दी से जल्दी चोपड़ा की हिस्ट्री निकालो और दीपा तू इस रजनी की थोड़ी डिटेल इखट्टी कर, सजा तो इसे भी मिलेगी और टुशु तू पता क्र कामिनी बुआ का वो कहा ह
सीमा- कामिनी बुआ वो क्यों
रूचि- दीदी आप सबसे बड़ी होकर भी बिलकुल बावली हो
सीमा- है है हु बावली
रूचि- गुस्सा मत करो समझो, पापा की एक तकलीफ उनकी बहन भी ह जो उनसे दूर हो गई ह याद ह रक्षा बंधन पैर वो दही थे और माँ बोल रही थी सब ठीक हो जायेगा,
तुषार- है सही बोल रही ह मैं करता हु उनके बारे में पता करने की कोशिश करूँगा
दीपा- लेकिन बुआ अब वापस क्यों आएगी वो अपने परिवार में सुखी होगी न
रूचि- मैं उन्हें यहाँ बुलाने के लिए इन्ही धुंध रही
सीमा- फिर
रूचि- मेरे माँ बाप को दर्द देने वाले हर इंसान को सजा मिलेगी दी हर इंसान को, चाहे उसमे कोई भी हो बुआ को भी सजा मिलेगी अगर वो सुधर गई और पापा ने उन्हें माफ़ क्र दिया तो ठीक ह वर्ण उनकी सजा भी वैसी hi होगी जैसी गलती होगी
सीमा- तू बड़ी खतरनाक होती जा रही ह तू कितनी हसमुख सी प्यारी गुडिअ थी, अब तू कितनी खतरनाक बाते करने लगी ह
रूचि- मुझे अपना परिवार सबसे प्यारा ह, जब मैंने पापा की कहानी सुनी मेरे अंदर की ख़ुशी वही मर गई बस एक तकलीफ एक दर्द ने जगह ले ली और ये दर्द तब तक काम नहीं होगा जब तक सभी गुन्हेगार को सजा न दे दू
तुषार- तू चिंता मत क्र हम सब साथ ह जल्दी सब ठीक क्र देंगे
फिर सब उठ गए नाश्ता किया आज कॉलेज कोई नहीं गया, बस सब ये hi प्लानिंग करते रहे की जानकारी कहा से मिलेगी पहेली जानकारी सबसे जरुरी थी उससे आगे तभी बढ़ा जा सकता था,
सीमा के लिए तो रास्ता खुल गया था लेकिन दीपा को रजनी का गाओं पता करना था ो किस्से पूछे और तुषार को उस आदमी का पता करना था जिसके साथ कामिनी भागी थी वो तो काम करने आया था वह, उसे कैसे ढूंढे,
वही आज अंजलि बहुत दुखी थी अपने सबसे प्यारे bête पैर हाथ उठा क्र वो बहुत दुखी थी, या तुषार की हरकत से दुखी थी, उसे समझ नहीं आ रहा था, उसका क्लास में भी मन नहीं लग रहा था जैसे तैसे वो स्कूल में बैठी थी, लेकिन उससे बर्दास्त नहीं हो रहा था, तो उसने स्कूल से छुट्टी ली और निकल चली और पार्क में जाकर बैठ गई, वो बहुत देर तक वही बैठी रही, उसका घर जाने का मन नहीं क्र रहा था, लेकिन घर तो जाना hi था ो उठी और चल दी पैदल hi वो चले जार hi थी, लगभग अँधेरा सा होने लगा था सर्दी थी तो अँधेरा जल्दी हो जाता था,
काफी देर चलते हुए अंजलि को लगा कोई उसका पीछा क्र रहा ह, पहले तो अंजलि को वहां लगा लेकिन जब उसने धयान दिया तो सच में एक आदमी उसका पीछा क्र रहा था, अंजलि ने वह से निकलना hi भीतर समझा वैसे उसका घर ज्यादा दूर नहीं रहा था फिर भी उसने ऑटो पकड़ा और उसमे बैठ क्र निकल गई, वो आदमी ऑटो के पीछे दौड़ने लगा, लेकिन ऑटो तेज था निकल गया, अंजलि ने होतु अपने घर के सामने नहीं रुकवाया बल्कि उससे 4 कम आगे रुकवाया और वही कुछ देर बैठ गई और सड़क पैर धयान देने लगी वो इंसान यहाँ तो नहीं ह, जब सब कुछ नार्मल लगा तो उसने वापस होतु पकड़ लिया घर के लिए,
इस बार भी वो घर से थोड़ा पीछे उत्तरी और चारो तरफ नजर डोडा क्र आगे बढ़ने लगी वो थोड़ा घूम क्र गर के पीछे वाली गलियों में घूम क्र घर में आई, थोड़ी घबराई हुई थी, राजेश भी आ गया था सभी परेसाहन थे आज दिन अंजलि के लिए सुबह से अब तक बुरा hi था, सब टेंशन में थे, तुषार को लग रहा था की ये सब उसकी वजह से हुआ ह क्योकि सीमा ने बता दिया था की अंजलि सुबह भी अजीब बेहवे करके गाइट hi और अभी ताका आई नहीं,
पूरा परिवार घर के बहार hi खड़ा इंतजार क्र रहा था, सब घबराये हुए थे और तुषार की आँखों में आंसू थे, अंजलि घर पहुंची और पहुंचते hi डाटा लगा दी,
बहार क्यों खड़े हो सब अंदर चलो, अंदर आते hi दूर बंद क्र दिया,
राजेश- क्या हुआ अंजलि कहा रह गई थी सब परेशां हो रहे थे
अंजलि- सीमा पानी ला
सीमा दौड़ क्र पानी ले आई
अंजलि ने पानी पिया
अंजलि- वो स्कूल के ट्रस्टी के घर एक प्रोग्राम था तो वह जाना पड़ा सभी को इसलिए देर हो गई
रूचि- माँ आप िनी घबराई हुई सी क्यों हो
अंजलि- कुछ नहीं वो रात में मुझे जगह दिखाई नहीं दी तो ऑटो वाले ने आगे उतर दिया तो वह से पैदल आई हु रस्ते में कुत्ता पीछे पद गया
अंजलि बता तो रही थी लेकिन तुषार और रूचि का मन नहीं मन रहा था तुषार को यकीन था अंजलि उसकी वजह से नहीं आई और रूचि को शक था कुछ और बात ह
लेकिन सब शांत रहे फिर अंजलि फ्रेश हुई और अपने hi रूम में खाना खा लिया, जिससे तुषार के सामने न आना पड़े, वही अंजलि का दिमाग ख़राब हो रहा था कोण हो सकता ह उसके पीछे, उसने राजेश को बता दिया की कोई उसका पीछा क्र रहा था, राजेश ने सलाह दी की कुछ दिन घर पैर रहे बहार दिखा न दे कही कोई उसका एड्रेस ढूंढ रहा हो.
रात को अंजलि और तुषार दोनों की नींद गया थी, लेकिन तुम कितने भी परेशां हो नींद तो आ hi जाती ह, तो दोनों सो गए,
अगले दिन अंजलि स्कूल नहीं गई और सभी को घर रहने के लिए बोलै बस राजेश गया अपने काम पैर वो भी सम्हालते हुए,
तुषार और अंजलि एक दूसरे के सामने आने से बचते रहे, वही अंजलि के घर पैर रुकने से सबका प्लान खराब हो गया जेकरि इकठा करने का, तुषार को गयम की सफाई करने जाना था लेकिन अंजलि से कैसे कहे इसलिए चुप रह गया, पूरा दिन ऐसे hi काट गया, बाकि सब तो नार्मल थे लेकिन रूचि के दिमाग के घोड़े दौड़ रहे थे, उसे लग रहा था जरूर कुछ बात ह माँ सबसे कुछ छुपा रही ह,
अगले दिन संडे था तो तुषार ने सीमा से कहा की उसे गयम क सफाई करने जाना ह क्योकि वो कल नहीं गया था तो आज जाना होगा लेकिन माँ जाने नहीं देगी,
सीमा- तू जा मैं सम्हाल लुंगी
तुषार निकल गया अंजलि को बिना बताये, जब अंजलि को पता चला तो उसने बहुत गुस्सा किया, आज पहेली बार था जब अंजलि ने इतना गुस्सा किया था वो भी इतनी छोटी सी बात पैर सीमा के समझने पैर भी वोन hi समझी थी, राजेश ने उसे शांत किया,
राजेश- क्या हुआ ह तुम्हे इतनी गुस्से में क्यों हो
अंजलि- मुझे चिंता ह वो बहार गया ह कही उसके पीछे वो आदमी न लग जाये
राजेश- वो बच्चा नहीं ह उसे सही गलत पता ह
अंजलि- मैं जानती हु वो बच्चा नहीं ह लेकिन माँ के लिए तो बच्चा hi रहेगा न, अब ये भी तो नहीं पता की वॉक ों था किसने भेजा उसे
राजेश- क्या उसके दर से तुम हमेशा घर में छुपी रहोगी, तुम तो ऐसी नहीं हो जो ऐसे डार्क र चुप जाओगी, तुम्हारी वजह से तो मेरेऔर बचो की हिम्मत बढ़ जाती ह तुम ऐसे दर जाओगी तो बच्चो पैर भी गलत असर पड़ेगा
राजेश की बात को समझते हुए अंजलि ने खुद को सम्हाला नहीं डरूंगी जो होगा देखा जायेगा,
तुषार जल्दी hi वापस आ गया, अंजलि ने को तसली हुई लेकिन वो बोली नहीं, तुषार भी चुप चाप अपने कमरे में चला गया,
तुषार का लुंड दीपा की छूट से टकराने लगा था दीपा की छूट भी फिर से गीली होने लगी थी, दीपा ने पीछे हाथ लेजाकर लुंड पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पैर सेट किया और पीछे होने लगी, लुंड का टोपा दीपा की छूट में घुस गया, तुषार ने भी निचे से धक्का लगया पोजीशन सही नहीं थी लेकिन फिर भी आधा छूट में घुस गया, दीपा के दोनों पेअर जुड़े हुए थे जिस वजह से छूट और टाइट हो रही थी, जिससे दोनों को और मजा आ रहा था,
दीपा- बस ऐसे hi लेता रह न, इसे अंदर डेल हुए बहुत मजा आ रहा ह
तुषार- है यार कसम से ये तो सच में बहुत मजे आ रहा ह
दोनों बिलकुल एक दूसरे से चिपक गए, तुषार के हाथ दीपा की चूचियों पैर थे,
दीपा- टुशु मेरे मन में एक बात ह
तुषार- है बताओ क्या हुआ
दीपा- मैं इस रजनी को सबक सीखना चाहती हु
तुषार- वो तो मैं भी चाहता हु पैर क्या करना ह बता
दीपा- मैं चाहती हूत ु उसे चोदे और इतना चोदे की वो जिंदगी भर चुदाई से हाथ जोड़ ले जब भी उस रंडी की छूट में आग लगे तेरी चुदाई याद आ जाये उसके घर की हर औरत को तू चोदे और अपना बच्चा पैदा करे
तुषार- क्या बोल रही ह तुम्हारी माँ ह वो
दीपा- माँ मत बोल उस रंडी को, मेरी माँ निचे सो रही ह
तुषार- अच्छा ठीक ह नहीं बोलता लेकिन तुम अपने भाई को hi किसी और को छोड़ने को बोल रही हो
दीपा- तू मेरा भाई मेरा प्यार सब कुछ ह तेरी ख़ुशी hi मेरा धर्म ह बस और तेरा लुंड एक औरत से खुश नहीं रह सकता तू जिसे चाहे जितनी चाहे औरतो को चोदे मुझे कोई ऐतराज नहीं ह बस मुझे धोका मत देना
तुषार- कैसी बात क्र रही हो मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता आपको धोका देने की, आपकी इच्छा जरूर पूरी करूँगा मैं वक़्त आने दो,
दीपा- ठंकु, अच्छा ये बता तुझे सबसे अच्छा कोण लगता ह, सच बताना मुझे बुरा नहीं लगेगा
तुषार- ये कैसा सवाल हुआ मेरा पूरा परिवार hi सबसे अच्छा लगता ह
दीपा- मैंने तुझे बताया न मुझे कोई ऐतराज नहीं ह तू किसी और को भी छोड़ता ह तो, बता न, मैं सीमा रूचि या माँ सबसे अच्छी कोण ह
माँ का नाम आते hi तुषार के लुंड ने एक झटका मारा, दीपा के फेस पैर मुस्कान आ गई,
दीपा- अच्छा ये बता सबसे सूंदर बूब्स किसके ह सच बताना
तुषार- हम्म्म्म माँ के
दीपा- माँ के तो ह hi इतने बड़े, जो कपडे मैंने पहने थे वो माँ फेन ले तो कयामत लगेगी,
तुषार- है सच में यार
तुषार ने लुंड आगे धकेल दिया,
दीपा मुस्कुराते हुए, उसकी तो गांड भी काफी बड़ी ह, कितनी टाइट होगी न
तुषार जोश में आ गया और उसने दीपा की कमर पकड़ी और जोर का धक्का लगा दिया, दीपा की आह्ह्ह्ह निकल गई, तुषार उठा और दीपा के पेअर के बिच आ गया कांबले अलग पैक दिया और ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा, दीपा मुस्कुराते हुए मजे से अह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह छोड़ मेरे भाई छोड़, देख तेरे सामने माँ की चूचिया ह कितनी बड़ी बड़ी
तुषार ने चूचिया मुँह में भर ली और धक्के लगाने लगा,
दीपा- aahhhhhhhhhhh चूस ने पि ले माँ का दूध निचोड़ ले अहहहहहहह तेरा लुंड ऊऊफफफफफफफफफ कितना प्यारा ह ाहः
अगले 20 मिनट्स तुषार ऐसे hi छोड़ता रहा, दीपा भी मजे लेकर चुदती रही, तुषार जब झड़ने को हुआ तो वो लुंड बहार तो निकल पाया लेकिन दीपा को मौका नहीं मिला लुंड तक पहुंचने का तुषार ने दीपा के पेट पैर अपन अमाल गिरा दिया, और साइड में लेट गया, दीपा मुस्कुराती हुई अपने हाथो से तुषार का रास चाटने लगी,
तुषार ने दीपा को रास चाट ते हुए देखा
तुषार- दीदी क्या तुम्हे ये इतना पसंद ह
दीपा- है टुशु मेरे अंदर लुंड का रास पिने की इतनी बुरु आदत लग गई ह की मैं खुद को रोक ह नहीं पति,
तुषार- इससे कोई नुकसान तो नहीं ह न
दीपा- नहीं रे बिलकुल नहीं
फिर तुषार उठा और खुद को साफ़ करके आया फिर दीपा गई, फिर दोनों ऐसे hi लेट गए कांबले ओढ़ क्र,
दीपा- मजा आया न
तुषार- है बहुत मजा आया
दीपा- माँ की चूचियों के बारे में सोच क्र मेरी चुकी उखाड़ने वाला तहत ु
तुषार- दीदी आप भी न
दीपा- शर्मा क्यों रहा ह जब बहन को छोड़ सकता ह तो माँ को छोड़ने में क्या बुराई ह मुझे पता ह तुझे माँ बहुत पसंद ह
तुषार- ऐसी कोई बात नहीं ह
दीपा- फिर माँ का नाम सुनते hi तेरा ये खड़ा क्यों हो जाता ह
तुषार- वो तो ऐसे hi बस
दीपा- मुझसे झूट बोलेगा तुझे पता ह न मुझसे कोई झूट नहीं बोल सकता
तुषार- अब क्या बताऊ अच्छा बाबा है माँ मुझे पसंद ह बहुत पसंद ह इतनी पसंद की शायद दुनिया में उनके अलावा और कुछ नहीं
दीपा- हे मेरा भाई तो ासिक हो गया ह अपनी माँ का बेशरम
तुषार- देखो इसी लिए नहीं बता रहा था
दीपा- अरे मजाक क्र रही थी, मुझे ख़ुशी ह की तू माँ को पसंद करता ह हमारा परिवार ऐसा hi ह और माँ को भी जरुरत ह पापा का तुझे पता hi ह वो बेचारी कब से प्यासी होंगी, हम तो मजे ले रहे ह लेकिन उनका क्या उन्हें भी ये सुच चाहिए, और मुझ ेलगता हवा भी तुझे वैसा hi प्यार करती हैं, बस माँ ह इसलिए आगे नहीं बढ़ सकती
तुषार- मैंने कैसे बधु आगे मुझे समझ नहीं आता उनके पास जाता हु तो लुंड खड़ा हो जाता ह उन्हें भी अहसास हो जाता ह की मेरा लुंड खड़ा ह वो मुझ ेकुछ नहीं खेती फिर भी मेरी हिम्मत नहीं होती आगे बढ़ने की
दीपा- अगर वो तुझे कुछ नहीं खेती तो समझ जा वो तैयार ह तुझे hi आगे बढ़ना पड़ेगा मेरे भाई हिम्मत दिखा उन्हें वो ख़ुशी दे दे, बहुत दुःख देखे ह हमारी माँ ने
तुषार- अब उन्हें दुःख नहीं होने दूंगा मैं साडी खुशिया दूंगा उन्हें इस दुनिया की साडी खुशिया दूंगा मैं
दीपा- हम सब मिलकर देंगे
दीपा ने तुषार को बहो में भर लिया
तुषार- अब मैं चलता हु बहुत देर हो गई देखो 1 बज रहा ह
दीपा- थोड़ी दे रेज hi लेता रह न बड़ा सकूं मिल रहा ह
तुषार लेट गया दोनों ऐसे hi नंगे एक दूसरे से चिपके चलते रहे, ठण्ड में निवास आते hi थकन की वजह से दोनों सो गए, सुबह 4 बजे तुषार की आँख खुली तो उसका लुंड अभी भी खड़ा था दीपा की जांघो के बिच फसा हुआ था, तुषार मुस्कुराया और दीपा को किश किया और उस पैर कांबले डाला फिर अंडरवियर पहना और बाकि कपडे ऐसे hi हाथ में लिए और निचे अपने रूम में आ गया,
उसे बहुत तेज टॉयलेट आ रहा था, वो बाथरूम की तरफ भगा जैसे hi उसने दरवाजा खोला उसकी आँख मुँह गांड सब फटी रह गई, उसके सामने नजारा hi ऐसा था,
सामने अंजलि ब्रा पंतय में कड़ी थी, वैसे तो तुषार ने बचपन से अंजलि को ऐसी रूप में देखा था कपडे बदलते देखा था लेकिन अब सब कुछ बदल चुक्का था अब तुषार की नजर में अंजलि सिर्फ माँ नहीं थी वो उसमे एक औरत को अपने प्रेमिका को देखता था, वही अंजलि का नजरिया भी बिलकुल बदल चुक्का था,
उसकी नजर तुषार पैर गई और दूसरी नजर सीधे उसके लुंड पैर गई जो एक दम तना खड़ा था अंडर वियर में से,
अंजलि की तो साँस hi अटक गाइट hi, दोनों बस एक दूसरे क घूरे जा रहे थे, तुषार को समझ नहीं आ रहा था क्या करे अंजलि भी बिना कुछ बोले कड़ी थी,
तुषार के दिमाग में दीपा की बाते हतोड़े की तरह बज रही थी, की माँ बहुत प्यासी ह बहुत तकलीफ में ह वो मन नहीं करेगी वो भी पसंद करती ह, तुझे हिम्मत करनी होगी तुझे हिम्मत करनी होगी,
तुषार आगे बढ़ता गया अंजलि बस उसे देखे जा रही थी, तुषार ने अंजलि कमर में हाथ डाला और अपनी तरफ खींचा, अंजलि की भरी भरी चूचिया तुषार के सीने से टकरा गई, तुषार का लुंड अंजलि के पेट पैर रगड़ रहा था, तुषार ने कास क्र अंजलि को खुद से भींच लिया और अपने हॉट अंजलि के होतो पैर रख दिए, अंजलि एक दम शॉकेड और शांत कड़ी थी उसने कोई हरकत नहीं की थी, तुषार बस अंजलि के हॉट चूमे जा रहा था, अंजलि ने एक बार भी अपनी तरफ से कुछ नहीं किया था,
तुषार ने जोश में अंजलि के हॉट काट लिया और उसकी चुकी जोर से भींच दी, अंजलि ने तुषार को धकेला और एक जोर दर थपड तुषार के गाल पैर जड़ दिया, थपड इतना जोर डार्ट है की पूरा बाथरूम गूंज उठा, तुषार जिसे बहुत तेज मूत आया हुआ था जो अंजलि को देख क्र हवस में बदल गया था, थपड लगते hi हवस उतर गई और तुषार ने अंडरवियर में hi मूत दिया,
वो इतना दर गया था की उसकी आँखों से आंसू और लुंड से मूत निकल गया था, अंजलि ने देखा तुषार को अंडरवियर में hi मूत ते हुए तो वो बहार चली गई, तुषार कुछ देर वही खड़ा रहा उसे समझ hi नहीं आ रहा था ये क्या हुआ माँ तो उसे सपोर्ट करती थी उसे कभी नहीं रोकती थी फिर आज ऐसा क्यों किया,
फिर उसने अंडर वियर निकला और नहाया फिर अपने कमरे में आकर कपडे पहन क्र लेट गया, वो बहुत डरा हुआ था उसे बहुत पछतावा हो रहा था की उसने ऐसा क्यों किया, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, वो रोटा था और रट रट सो गया, उधर अंजलि की आँखों में भी आंसू थे, वो बहार के कॉमन बाथरूम में गई और शावर चला क्र बहुत देर तक ठन्डे पानी में नहाती रही और रोटी रही,
क्यों रो रही थी ये तो अंजलि hi बता सकती थी, वो तो तुषार के साथ खुश थी उसके साथ गरम हो जाती थी फिर आज क्या हुआ आज वो तुषार को देख क्र मोहित हो गाइट hi खुद उसमे खो गाइट hi फिर उसने तुषार को थपड क्यों मारा?
अगले दिन दीपा भी देर से उठी लेकिन आज अंजलि ने कोई धयान नहीं दिया वो तो बिना कुछ खाये पिए घर से जल्दी निकल गई, ये बाकि सभी के लिए बड़ा अजीब था अंजलि ने आज से पहले ऐसा नहीं किया था
रूचि- ये आज माँ को क्या हुआ खुद भी नाश्ता नहीं किया किसी को उठाया भी नहीं इतनी जल्दी चली गई, पापा कुछ बात हुई ह क्या
राजेश- नहीं बीटा रात तो ठीक थी सुबह नहाने गई थी फिर बाहर वाले बाथरूम में चली गई पता नहीं क्यों, मैंने उससे पूछा भी नहीं
रूचि- ठीक पापा आप नाश्ता कीजिये आपको देर हो रही होगी
राजेश नाश्ता करके चला गया
रूचि- ये दीपा और टुशु नहीं उठे अभी तक क्या बात ह आज का दिन कुछ अजीब ह पहेली बार दीपा उठने में लेट हुई ह माँ पहेली बार ऐसे घर से गई ह,
सीमा- कोई बात नहीं तू नाश्ता लगा मैं दीपा को लती हु
सीमा को पता था दीपा क्यों नहीं उठी लेकिन अंजलि ऐसे क्यों गई उसे नहीं पता था
सीमा दीपा के रूम में गई तो डीप आठ चुकी थी बीएस नाहा क्र बहार आई थी,
सीमा- क्यों ऋ कामिनी पूरी रात hi चूड़ी ह क्या जो अब तक नहीं उठी
दीपा- शर्म क्र लिया करो थोड़ी सी सुबह सुबह hi चुदाई की धुन चढ़ जाती ह तुझे
सीमा- अच्छा खुद बिना बताये पूरी रात लुंड से खेलती ह और मुझे ज्ञान दे रही ह
दीपा- है चूड़ी थी दो बार चूड़ी और बताओ और सुन्ना ह कुछ
सीमा- बाद में सुनूंगी पहले निचे चल जल्दी रूचि शोर मचा रही ह उस लोमड़ी का दिमाग तेज दौड़ता ह बहुत उससे छुपा क्र रखो ऐसी बाते वर्ण नोच खायेगी
दीपा- है है चलो
तब तक रूचि तुषार को उठाने गई, उसने जैसे hi कम्बल हटाया रूचि के फेस पैर दुनिया का सारा दर्द उभर आया, तुषार के फेस पैर आंसू सुच क्र लाइन बना चुके थे ऐसी लाइन तभी बनती ह जब कोई बहुत रोया हो, तुसाहर का फेस देखते hi रूचि खुद को सम्हाल नहीं पाई और रोने लगी, उसका आंसू तुषार के फेस पैर गिरा तो तुषार की आँखे खुल गई, आँख खुलते hi सामने रूचि वो भी आँख में आंसू लिए तुषार का तो दिमाग hi घूम गया,
तुषार- क्या हुआ रूचि क्या हुआ रो क्यों रही ह किसी ने कुछ कहा क्या हुआ
तुषार की आवाज इतनी तेज थी की सीमा और दीपा के कानो तक भी पहुंच गई, दोनों तेजी से उस तरफ भागी,
रूचि को रोटा देख दोनों घबरा गई,
क्या हुआ रूचि क्या हुआ बता बहन तू तो ठीक थी रो क्यों रही ह,
रूचि शांत हुई, आपको मेरा रोना दिख रहा ह लेकिन इसका चेरा नहीं दिख रहा ये क्यों रो रहा था
दोनों की नजर तुषार के फेस पैर गई दोनों को लगा रात में न सोने क वजह से आँखे सूज रही ह ,
दीपा- अरे वॉक अहा रो रहा ह रात को मुझसे बात क्र रहा था इसलिए आँखे सूज रही ह
तुषार- है रूचि देर से सोने की वजह से आँखे सूज सी गई ह
रूचि- ख़बरदार जो मुझसे झूट बोलै तो मैं तेरी रूह तक को पहचानती हूत ु कब खुश होता ह कब दुखी मैं सब जानती हु जल्दी से बता क्या बात ह वर्ण माँ खुद पूछेगी
तुषार- नहीं नहीं माँ को मत बताना
तुषार के ऐसे घबराते hi तीनो बहन समझ गई रूचि का शक सही ह वो रोया ह और छुपा रहा ह
सीमा- टुशु क्या हुआ दीपा पानी लाना जल्दी
दीपा दौड़ क्र पानी ले आई
ले पानी पि आराम से बैठ और बता क्या हुआ
तुषार की समझ में कुछ नहीं आ रहा था क्या बोले वो कुछ देर खामोश रहा
तीनो उससे पूछे hi जार hi थी, मज़बूरी में तुषार को कहानी बनाने पड़ी
तुषार- वो रात को लेते लेते मुझे पापा की कहानी याद आ गाइट hi फिर माँ की वो 16 साल की आगे में प्रग्नेंट होकर भागना याद आ गया माँ पापा की तकलीफ से दिल भर आया और आंसू भेने लगे, बस खुद को कोस्टा रहा मैं कितना लचर हु जो उनके लिए कुछ नहीं क्र पाया,
तीनो बहेनो ने एक साथ तुषार को गले से लगा लिया,
सीमा- तू कभी आंसू मत बहाना वर्ण हमारी जान निकल जाएगी
दीपा- है भाई सचिन और कपिल भी हमारे भाई ह लेकिन जितना प्यार हम तुझसे करती ह शायद किसी और से करे इसलिए तू दुखी होता ह तो बहुत तकलीफ होती ह
रूचि- अगर आज के बाद तू रोया तो मैं पता नहीं क्या क्र जाउंगी ख़बरदार जो तेरी आँखों में आंसू आये तो हम क्यों रोयेंगे, रोयेंग तो वो लोग जिन्होंने गलत किया ह और हम उन्हें ऐसा रुलायेंगे वो जिंदगी भर पछतायेंगे उन्होंने हमारे माँ बाप के साथ ऐसा क्यों किया,
सीमा हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, न hi उन्हें जिन्होंने माँ के साथ गलत किया ह हम उन्हें ढूंढ लेंगे चाहे कही भी घुसे हो
दीपा- न hi उस यश ठाकुर को न hi उस रजनी को उन्होंने हमारे पापा के साथ जो किया ह उसके लिए वो बहुत पछतायेंगे
रूचि- सही कहा कोई नहीं बचेगा तू चिंता मत क्र हम किसी को नहीं बख्शेंगे टुशु
दीपा- इसमें एक इंसान और ऐड हो गया ह
सीमा- कोण
दीपा ने उस रात वाली बात सबको बताई जिस रात अजय अजनाली के घर आया था
रूचि- तूने पहले क्यों नहीं बता बेवकूफ हो सकता ह वही पहेली कड़ी बन जाता माँ का पास्ट जानने में
दीपा- रात को कैसे बताती फिर हम यहाँ आ गए तो भूल गई
तुषार- आपने कुछ और देखा
दीपा- नहीं बस उसके पास रेड कार थी ****** वाली
रूचि- रेड कार हमारे गाओं में किस किस के पास ह
तुषार- ठाकुरो के पास
रूचि- फिर वही हो सकता ह मेरा शक सही हो सकता ह मुझे पूरा विश्वास ह वो hi होगा
तुषार- कोण रूचि कोण किस पैर शक ह तुझे
रूचि- अजय ठाकुर पैर
सीमा- क्यों उस पैर क्यों शक ह तुझे वो तो यहाँ रहता भी नहीं ह
रूचि- वो अब यहाँ नहीं रहता लेकिन पहले तो रहता था न, और जिस तरह से वो उस दिन माँ को मुस्कुराता हुआ देख रहा था और माँ उससे नजर चुरा रही थी, वो बड़ा अजीब था मैंने माँ को आज तक नजर चुराते नहीं देखा ह किसी से भी चाहे वो कितना भी बड़ा जिमिदार क्यों न हो
सीमा- बात में दम ह इसकी, इस लोमड़ी का दिमाग अगर कह रहा ह तो कुछ न कुछ लिंक तो होगा hi लेकिन पता कैसे चलेगा,
रूचि- चल जायेगा वो भी चल जायेगा लेकिन अब थोड़े तरीके से काम करो सब
दीपा- आप hi बता दीजिये हमारी लीडर जी कैसे काम करे कहा से करे
तुषार- दीदी मजाक नहीं वो सही कहे रही ह, बोल रूचि
रूचि- सीमा दी आप ऑफिस से जुड़ क्र जल्दी से जल्दी चोपड़ा की हिस्ट्री निकालो और दीपा तू इस रजनी की थोड़ी डिटेल इखट्टी कर, सजा तो इसे भी मिलेगी और टुशु तू पता क्र कामिनी बुआ का वो कहा ह
सीमा- कामिनी बुआ वो क्यों
रूचि- दीदी आप सबसे बड़ी होकर भी बिलकुल बावली हो
सीमा- है है हु बावली
रूचि- गुस्सा मत करो समझो, पापा की एक तकलीफ उनकी बहन भी ह जो उनसे दूर हो गई ह याद ह रक्षा बंधन पैर वो दही थे और माँ बोल रही थी सब ठीक हो जायेगा,
तुषार- है सही बोल रही ह मैं करता हु उनके बारे में पता करने की कोशिश करूँगा
दीपा- लेकिन बुआ अब वापस क्यों आएगी वो अपने परिवार में सुखी होगी न
रूचि- मैं उन्हें यहाँ बुलाने के लिए इन्ही धुंध रही
सीमा- फिर
रूचि- मेरे माँ बाप को दर्द देने वाले हर इंसान को सजा मिलेगी दी हर इंसान को, चाहे उसमे कोई भी हो बुआ को भी सजा मिलेगी अगर वो सुधर गई और पापा ने उन्हें माफ़ क्र दिया तो ठीक ह वर्ण उनकी सजा भी वैसी hi होगी जैसी गलती होगी
सीमा- तू बड़ी खतरनाक होती जा रही ह तू कितनी हसमुख सी प्यारी गुडिअ थी, अब तू कितनी खतरनाक बाते करने लगी ह
रूचि- मुझे अपना परिवार सबसे प्यारा ह, जब मैंने पापा की कहानी सुनी मेरे अंदर की ख़ुशी वही मर गई बस एक तकलीफ एक दर्द ने जगह ले ली और ये दर्द तब तक काम नहीं होगा जब तक सभी गुन्हेगार को सजा न दे दू
तुषार- तू चिंता मत क्र हम सब साथ ह जल्दी सब ठीक क्र देंगे
फिर सब उठ गए नाश्ता किया आज कॉलेज कोई नहीं गया, बस सब ये hi प्लानिंग करते रहे की जानकारी कहा से मिलेगी पहेली जानकारी सबसे जरुरी थी उससे आगे तभी बढ़ा जा सकता था,
सीमा के लिए तो रास्ता खुल गया था लेकिन दीपा को रजनी का गाओं पता करना था ो किस्से पूछे और तुषार को उस आदमी का पता करना था जिसके साथ कामिनी भागी थी वो तो काम करने आया था वह, उसे कैसे ढूंढे,
वही आज अंजलि बहुत दुखी थी अपने सबसे प्यारे bête पैर हाथ उठा क्र वो बहुत दुखी थी, या तुषार की हरकत से दुखी थी, उसे समझ नहीं आ रहा था, उसका क्लास में भी मन नहीं लग रहा था जैसे तैसे वो स्कूल में बैठी थी, लेकिन उससे बर्दास्त नहीं हो रहा था, तो उसने स्कूल से छुट्टी ली और निकल चली और पार्क में जाकर बैठ गई, वो बहुत देर तक वही बैठी रही, उसका घर जाने का मन नहीं क्र रहा था, लेकिन घर तो जाना hi था ो उठी और चल दी पैदल hi वो चले जार hi थी, लगभग अँधेरा सा होने लगा था सर्दी थी तो अँधेरा जल्दी हो जाता था,
काफी देर चलते हुए अंजलि को लगा कोई उसका पीछा क्र रहा ह, पहले तो अंजलि को वहां लगा लेकिन जब उसने धयान दिया तो सच में एक आदमी उसका पीछा क्र रहा था, अंजलि ने वह से निकलना hi भीतर समझा वैसे उसका घर ज्यादा दूर नहीं रहा था फिर भी उसने ऑटो पकड़ा और उसमे बैठ क्र निकल गई, वो आदमी ऑटो के पीछे दौड़ने लगा, लेकिन ऑटो तेज था निकल गया, अंजलि ने होतु अपने घर के सामने नहीं रुकवाया बल्कि उससे 4 कम आगे रुकवाया और वही कुछ देर बैठ गई और सड़क पैर धयान देने लगी वो इंसान यहाँ तो नहीं ह, जब सब कुछ नार्मल लगा तो उसने वापस होतु पकड़ लिया घर के लिए,
इस बार भी वो घर से थोड़ा पीछे उत्तरी और चारो तरफ नजर डोडा क्र आगे बढ़ने लगी वो थोड़ा घूम क्र गर के पीछे वाली गलियों में घूम क्र घर में आई, थोड़ी घबराई हुई थी, राजेश भी आ गया था सभी परेसाहन थे आज दिन अंजलि के लिए सुबह से अब तक बुरा hi था, सब टेंशन में थे, तुषार को लग रहा था की ये सब उसकी वजह से हुआ ह क्योकि सीमा ने बता दिया था की अंजलि सुबह भी अजीब बेहवे करके गाइट hi और अभी ताका आई नहीं,
पूरा परिवार घर के बहार hi खड़ा इंतजार क्र रहा था, सब घबराये हुए थे और तुषार की आँखों में आंसू थे, अंजलि घर पहुंची और पहुंचते hi डाटा लगा दी,
बहार क्यों खड़े हो सब अंदर चलो, अंदर आते hi दूर बंद क्र दिया,
राजेश- क्या हुआ अंजलि कहा रह गई थी सब परेशां हो रहे थे
अंजलि- सीमा पानी ला
सीमा दौड़ क्र पानी ले आई
अंजलि ने पानी पिया
अंजलि- वो स्कूल के ट्रस्टी के घर एक प्रोग्राम था तो वह जाना पड़ा सभी को इसलिए देर हो गई
रूचि- माँ आप िनी घबराई हुई सी क्यों हो
अंजलि- कुछ नहीं वो रात में मुझे जगह दिखाई नहीं दी तो ऑटो वाले ने आगे उतर दिया तो वह से पैदल आई हु रस्ते में कुत्ता पीछे पद गया
अंजलि बता तो रही थी लेकिन तुषार और रूचि का मन नहीं मन रहा था तुषार को यकीन था अंजलि उसकी वजह से नहीं आई और रूचि को शक था कुछ और बात ह
लेकिन सब शांत रहे फिर अंजलि फ्रेश हुई और अपने hi रूम में खाना खा लिया, जिससे तुषार के सामने न आना पड़े, वही अंजलि का दिमाग ख़राब हो रहा था कोण हो सकता ह उसके पीछे, उसने राजेश को बता दिया की कोई उसका पीछा क्र रहा था, राजेश ने सलाह दी की कुछ दिन घर पैर रहे बहार दिखा न दे कही कोई उसका एड्रेस ढूंढ रहा हो.
रात को अंजलि और तुषार दोनों की नींद गया थी, लेकिन तुम कितने भी परेशां हो नींद तो आ hi जाती ह, तो दोनों सो गए,
अगले दिन अंजलि स्कूल नहीं गई और सभी को घर रहने के लिए बोलै बस राजेश गया अपने काम पैर वो भी सम्हालते हुए,
तुषार और अंजलि एक दूसरे के सामने आने से बचते रहे, वही अंजलि के घर पैर रुकने से सबका प्लान खराब हो गया जेकरि इकठा करने का, तुषार को गयम की सफाई करने जाना था लेकिन अंजलि से कैसे कहे इसलिए चुप रह गया, पूरा दिन ऐसे hi काट गया, बाकि सब तो नार्मल थे लेकिन रूचि के दिमाग के घोड़े दौड़ रहे थे, उसे लग रहा था जरूर कुछ बात ह माँ सबसे कुछ छुपा रही ह,
अगले दिन संडे था तो तुषार ने सीमा से कहा की उसे गयम क सफाई करने जाना ह क्योकि वो कल नहीं गया था तो आज जाना होगा लेकिन माँ जाने नहीं देगी,
सीमा- तू जा मैं सम्हाल लुंगी
तुषार निकल गया अंजलि को बिना बताये, जब अंजलि को पता चला तो उसने बहुत गुस्सा किया, आज पहेली बार था जब अंजलि ने इतना गुस्सा किया था वो भी इतनी छोटी सी बात पैर सीमा के समझने पैर भी वोन hi समझी थी, राजेश ने उसे शांत किया,
राजेश- क्या हुआ ह तुम्हे इतनी गुस्से में क्यों हो
अंजलि- मुझे चिंता ह वो बहार गया ह कही उसके पीछे वो आदमी न लग जाये
राजेश- वो बच्चा नहीं ह उसे सही गलत पता ह
अंजलि- मैं जानती हु वो बच्चा नहीं ह लेकिन माँ के लिए तो बच्चा hi रहेगा न, अब ये भी तो नहीं पता की वॉक ों था किसने भेजा उसे
राजेश- क्या उसके दर से तुम हमेशा घर में छुपी रहोगी, तुम तो ऐसी नहीं हो जो ऐसे डार्क र चुप जाओगी, तुम्हारी वजह से तो मेरेऔर बचो की हिम्मत बढ़ जाती ह तुम ऐसे दर जाओगी तो बच्चो पैर भी गलत असर पड़ेगा
राजेश की बात को समझते हुए अंजलि ने खुद को सम्हाला नहीं डरूंगी जो होगा देखा जायेगा,
तुषार जल्दी hi वापस आ गया, अंजलि ने को तसली हुई लेकिन वो बोली नहीं, तुषार भी चुप चाप अपने कमरे में चला गया,