Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 8 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

धन्यवाद आपका।

जो आपका कहानी के प्रति नजरिया है। वो बहुत ही काबिलेतारीफ है, लेकिन इस नजरिए के लिए ये site उचित नहीं है।

बाकी आपका जो सुझाव है। कहानी उस सुझाव को अपनाने से कहीं आगे बढ़ चुकी है।

फिर भी देखते हैं अगर कहानी में कोई मोड़ आता है। जहां आपका सुझाव सटीक बैठता होगा।

तो मैं आपके सुझाव पर जरूर विचार करूँगी।
 
अपडेट-61

मैं- ये गुमान नहीं है दीदी. इसकी ताकत के बार में जाकर नताशा से पूछो. वो आपको बताएगी इसकी ताकत. मैं उसको बहुत रगड़ रगड़ कर घंटो तक छोड़ता था. तभी तो वो मेरी गुलाम बन गई थी. जो मैं बोलता था वही करती थी वो. तुम चींथ मत करो दीदी. एक बार मैंने आपको रगड़ कर छोड़ दिया तो तुमको भी मेरे हथियार की ताकत पता चल जाएगी. और तुम भी मेरी गुलाम बन जाओगी. और मुझसे छोड़ने के लिए रोज तड़पती रहोगी.

सविता दी- छियईईई अभी तू कितने गन्दी बाटे करता है. मैं बहन हूँ तेरी.

मैं- नहीं अब तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड हो. मेरी चुड़क्कड़ मॉल हो.

मेरी ये बात सुनकर दीदी ने घूर कर मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी.

अब आगे

इतना कहकर मैंने फिर से दीदी को अपनी बहो में भर लिया. मैंने दीदी की पीठ सहलाने लगा और दीदी मेरे साइन पर हाँथ फेरने लगी. कुछ देर मेरे साइन पर हाँथ फेरने के बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखा और झुककर मेरे साइन पर चुम्बन लेने लगी. दीदी के ऐसा करने से मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई. मेरा शरीर कैंप गया और इसका सीधा असर मेरे लुंड पर हुआ वह लोअर में hi घटके मरने लगा. दीदी मेरे नंगे साइन को कभी चुम रही थी तो कभी जीभ निकल कर छत रही थी. थोड़ी देर मेरे साइन को चाटने के बाद दीदी ने मेरे निप्पल पर जीभ फिरने लगी और मेरे हाँथ से मेरे पेट को सहलाने लगी. थोड़ी देर बाद जीभ फिरने के बाद दीदी ने मेरे निप्पल को मुंह में लेकर दन्त काट लिया. मेरे मुंह से आनंद और मस्ती में दूभि शिस्कारि निकल गई.

मैं- AAAAAAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhyyyyyyyyyyyyeeeeeeee दीदी….

सरिता didi-(mere आँखों में देखते हुवे) मज़ा आया अभी.

मैंने दीदी के सवाल पर हाँ में गार्डन हिला दी. दीदी फिर से मेरे साइन को चाहते लगी. चूमने लगी. कुछ देर बाद दीदी मेरे नंगे जिस्म को चूमते चूमते पीछे की तरफ चली गई और मुझसे चिपक कर मेरी गले में बांह दाल दी. जिससे उनकी चूचिया मेरी पीठ पर धंस गई. उनकी चूचियों को अपनी पीठ पर महसूस करके मेरी सिसकी निकल gai.didi अब पूरी बेशरम बैंकर अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ने लगी और अपने होंठो से मेरी गार्डन पर किश करने लगी. थोड़ी देर किश करने के बाद दीदी मेरी गार्डन को चाटने लगी. गार्डन चाटते चाटते दीदी ने एकाएक मेरे कंधे को अपने मुंह में भरा और दन्त गदा दिया. मेरे मुंह से चीख निकल गई.

मैं- अरे साआल्ली जान लेने का इरादा है क्या. धीरे नहीं कर सकती क्या.

सविता दी- दर्द हो रहा है क्या.

मैं- नहीं मज़ा आ रहा है.

इतना बोलकर मैं पलट गया और दीदी को पलटकर उनकी पीठ से चिपक कर खड़ा हो गया. मेरा लुंड सीधी दीदी की गांड पर ठोकर मरने लगा. मैंने दीदी के पीछे खड़े होकर उनके चेहरे को पीछे किया और किश करने लगा दीदी ने भी अपने हाँथ मेरी गर्दन में दाल लिए और किश में मेरा साथ देने लगी. हम दोनों कभी किश करते तो कभी एक दूसरे की जीभ चाटते.



तो कभी एक दूसरे के चेहरे को चाटने लगते. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने दीदी को फोरस्फुल्ली किश करना शुरू कर दिया और अपने एक हाँथ से उनकी चुकी पर रखकर दबाने लगा. थोड़ी देर मैं दीदी की चुकी दबाता रहा. फिर मैंने दूसरे हाँथ को भी उनके चेहरे से हटाकर उनकी चुकी पर रख diya.thodi देर उनकी चुकी धीरे धीरे दबाने के बाद मैंने उनकी दोनों चूचियों को मुट्ठी ने भर कर पूरी ताकत से मसल दिया. दीदी के मुंह से एक आनंद और मस्ती से भरी चीख निकल गई.

सविता di-haaaaaaaaaaaaaaaaeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyy राममममममममम. Mmmmmmmaaaaaaaaaarrrrr डायलाहा रईईए. थूऊऊड्ड्ढडा ड्ढडयरीबीएई बाआआबा कामिन्न्नने. मममममेररररी जाआनंनंन्न लेगाआआ kyaaaaaaaaaaa.

मैंने फिर दीदी को उनकी गार्डन पर किश करने लगा और उनकी चूचियों को दबाने लगा. चुकी को दबाते दबाते मैंने अपने हन्हो को ऊपर करना शुरू किया और उनकी गार्डन के पार उनके कपडे में फसा दिया. और उनकी गार्डन को चूमते हुवे उनके कपडे को पूरी ताकत से खींच दिया और एक chhhhhhhhhaaaaarrrrrrrrrrrrr की आवाज़ के साथ दीदी का कपडा फटते चला गया. और मैंने दीदी के कपडे को उछाल कर दूर फेक दिया. दीदी तुरंत पलट कर मेरी तरफ हुई और मुझे देखते हुवे बोली.



सविता दी- ये क्या किया अभी. अपने गिफ्ट को क्यों फाड़ दिया.

मैं- अरे दीदी तुम्हारी इस मदमस्त और कातिल जवानी के सामने इस गिफ्ट की कोई वैल्यू नहीं है. तुम्हारी इस गदराई जवानी का रास पिने के लिए तो मैं ऐसे कई गिफ्ट फाड़ सकता हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्माने लगी और अपना सर निचे करके मुस्कुराते हुवे मेरे लुंड को देखते हुवे कहा.

सविता दी- उसके लिए तो तू कपडे उतर सकता था इसे फाड़ने की क्या जरुरत थी.

मैं- मैं तुम्हारा ये कपडा फाड़कर तुम्हे ये बताना चाहता था की बहुत hi जल्द तुम्हारी छूट को भी मैं अपने लुंड से इसी तरह से फाड़ूंगा.

मेरे बात सुनकर दीदी बुरी तरह शर्मा गई और अपने सर को मेरे साइन में छुपा लिया. दीदी का शरीर थार थार काँप रहा था. उनकी सांसे बहुत तेज़ चल रही थी.

कुछ देर बाद मैंने दीदी को अपने साइन से हटाकर अपने आगे खड़ा कर दिया और उनकी जवानी को देखने लगा. दीदी आज पहली बार मेरे सामने सिर्फ पंतय में थी. ऊपर से दीदी एकदम नंगी थी. उनकी चूचियों को देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया. इतनी बड़ी बड़ी चुकी वो भी एकदम तानी हुई. उनकी चुकी में तनिक भी लोच नहीं था. बिना ब्रा के भी दीदी की चूचिया एक डैम भले की तरह तानी हुई थी. जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुवा तो मैं दीदी की चूचियों पर टूट पड़ा और उनके निप्पल को मुंह में भरकर पिने लगा.



दीदी भी अब पूरी तरह गरम हो गई थी उनके मुंह से आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह्ह आआअह्हह्ह्ह्हह आआआहहहहहहह की आवाज़ निकल रही थी. दीदी ने मेरे सर पर अपना हाँथ रखकर अपनी चूचियों पर दबाने लगी. मैं एक चुकी को मुंह में भरकर चूस रहा था और एक चुकी को हाँथ से दबा रहा था. एक चुकी चूसने के बाद मैंने दूसरी चुकी को मुंह में भर कर चूसने लगा और पहली वाली चुकी को दबाने लगा. दीदी के मुंह से लगातार सिसकी निकल रही थी और वो बड़बड़ा रही थी.

सावित दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाआभहहहहहहयई. ईई क्याआआआआ करररररररर डीईया हीी तुममममममनटीई aaaaaapppppppppppnniiiiiiii ड़ड़ड़ड़ड़ड़डीईईडीईईई कीइइइइइइ ड़ड़ड़ड़ूऊऊओढठ्ठ पीईईई राआहाआआ haaaaaaaaaaai. पप्पिइइइइइइ जायआ भाआआई पपी जाआआ बबबबबाआआआआहूयत राछस बबहार हाऐ ीीइसआएमएईए पपपपपपूरररररा कहाआआअली काआआअररर डीएई.

मैं- (उनकी चुकी से मुंह हटाकर) हां दीदी मैं आज आपकी इन रसभरी चूचियों को पूरा निचोड़ लूंगा. पूरा रास पि जाउगा इसका.

सरिता दी- हआ भाई पि ले मेरी छःहःहूछठ्ठियो ककककका पूरा रसससस.

उसके बाद मैंने दीदी की चूचियों को पिटे हुवे एक हाँथ बढाकर उनकी छूट पर पंतय के ऊपर से रख दिया और दीदी की छूट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ छूट पर महसूस करते hi दीदी के शरीर ने एक झटका khaya.aur उनके मुंह से ssssssssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhiiiiiiiiiiiiiiiiii की आवाज़ निकल gai.main दीदी की चूचियों को पि रहा था. एक हाँथ से एक चुकी को दबा रहा था और एक हाँथ से उनकी छूट को सहला रहा था. फिर मैंने अपना हाँथ दीदी की पंतय के अंदर दाल दिया और नंगी छूट पैर हाँथ फेरा.



दीदी इतनी ज्यादा गरम हो गई थी की उनकी पूरी छूट और पंतय काम रास से भीग गई थी. कुछ देर तक मैं उनकी छूट को सहलाता हरा फिर मैंने दीदी की छूट के छेड़ पर अपनी ऊँगली रख दी और मसलने लगा. कुछ देर मसलने के बाद मैंने एक उन्गलो दीदी की छूट में घुसा दी. एक हाँथ के ऊँगली और अंगूठे से उनकी चुकी को घुंडी माँ मसाला और उनकी एक चुकी को दन्त काट लिया, मैंने तीनो हमले एक साथ किये. जिससे दीदी का शरीर मचल गया और एक जोरदार मादक सिसकी दीदी के मुंह से निकल गई.

सविता di-hhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmaaaaaaaaaaaaammmmmmmmmmmyyyyyyyyy. Mmmmmmmmaaaaaaarrrrrrrrrrrr dddddddddddallllllllllaaaaaaaaaa आआआआपक्ककककककककीीीीे बीईईतटती नेईईईई. Bbbaccccccchaaaaaaaaaaoooooo मममममममममूउउउउझह्ह्ह्हह्हे.

मैं- अभी कहा मार डाला दीदी. अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं. उसके बाद भी इतना चिल्ला रही हो. जब में अपने लुंड से आपको पिऊंगा तब आपका क्या हाल होगा.

सविता दी- चल हैट बेशरम. बड़ा आया पेलने वाला.

उसके बाद मैंने दीदी को घुमाकर अपने आगे खड़ा कर लिया और उनसे सत्कार खड़ा हो गया. मैंने अपने होंठ दीदी के गार्डन पर रखकर उन्हें किश करने लगा. एक हाँथ से मैंने दीदी की चुकी को पकड़कर मसलने लगा और एक हाँथ मैंने दीदी की पंतय में डालकर उनकी छूट की पत्तियो को मसलने लगा. मेरे इस तेन तरफ़ा हमले से दीदी वासना से भर गई. और मचलने लगी. मैं लगातार दीदी की पीठ और गार्डन पर किश कर रहा था. दन्त काट रहा था.



एक हाँथ से उनकी चुकी को मसल रहा था और एक हाँथ से उनकी छूट को मसल रहा था. फिर मैंने उनकी छूट को मसलते हुवे एक साथ दो ऊँगली उनकी छूट में घुसा दी और एक हाँथ से उनकी चुकी को जोर से मसल दिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सविता दी- AAAAAAAAaaaaaaaaaaadahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. कक्काआआमममममममीीीिनीई AAABhhhhhhhhhhhhhhhhiiiiiiiiiii . धीरीईईए काआआआआरररररर कककककककाआआआंममिन्न्नन्नन्नीई बबबबबाहाआआआंनंन्न hhooooooooooon त्तुम्म्मममहाआआअरी. ककककककककककककछ तततततो ररहाआआआं काआआअररर मेररररररीबीईई भाआआआईई.

माइए दीदी की बात को अनसुना करते हुवे 2 ऊँगली से उनकी छूट छोड़ने लगा और एक हाँथ से उनकी चूचियों को दबाने लगा. सेहत hi दीदी की गार्डन पीठ और कंधे पर लगातार कभी किश कर रहा था तो कभी दांत गदा रहा था तो कभी चाट रहा था. दीदी के मुंह से लगातार सिसकिया नीलालटी रही. वह बड़बड़ाये जा रही थी.

सविता दी- AAAAAAaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaabhhhhhhhhhhiiiiiiiii बाआआअस्सस्सस्स्स्स कककककककररररररररर मममममेरररररररीईईए bbbbbbbbhaaaaaaaaaaaiiiiii. कककककयाआआ अप्प्प्पणीईईई डडडडडडडडडी कक्कीीी jaaaaaaaaaannnnn लीगायआ क्याआ. हाआनंनं bbbbhaiiiiiiiiiii आआएसाआआआ हीईई कररररर. Bbbbbbbbbbahuat आचआआआआ laaaaaaaaaagggggg रररररहाआआ haiiiiiiiiiii. काआआआहा सी सीइकहा एई सअअअअअअब ममममेरररररररीबीईई भइईईई.

कुछः देर उनकी छूट छोड़ने के बाद मैंने दीदी मो कमरे में राखी एक कुर्शी पर बैठा दिया और उनके पेअर को बिस्टेर पर रख दिया. और फिर मैंने जो प्लान बनाया था उसको अमल करने लगा (मैं अंगूर बहार से लेकर आया था और उसे अपने कमरे में रखा था) मैंने अंगूर के गुच्छे को प्लाट से उठा लिया और दीदी के मुंह की तरफ आ गया और उनकी चेहरे पर अंगूर की गुच्छे को फेरने लगा. जब दीदी अंगूर को खाना चाहती तो मैं उसे उनके चेहरे से दूर कर लेता. मैं थोड़ी देर उनके चेहरे पर अंगूर फेरने के बाद दीदी से कहा.

मैं- दीदी एक बात बताओ क्या कभी जीजा के साथ ऐसा मज़ा आया था आपको.

सविता दी- तू उनकी बात छोड़. तू अपना काम कर.

मैं- पहले बताओ नहीं तो मैं कुछ नहीं करूँगा.

सविता di-(meri आँखों में देखते हुवे.) नहीं मेरे भाई. तेरे जैसा उन्होंने कभी नहीं किया. बस किसिंग अकेले करते हैं. उसके बाद सीधे…………….

मैं- मैं जनता था की मेरे जीजा मेरी दीदी को खुस नहीं रख रहा है. इसीलिए अब मैं अपनी दीदी को खुस रखूँगा.

उसके बाद मैंने गुच्छे में से 6-7 अंगूर तोड़े और गुच्छे को उनकी गार्डन पर फिरने लगा और अपने हाँथ को मुठी बनाकर दीदी के चेहरे के सामने कर दिया. मेरे इशारा शायद दीदी समझ गई. इसीलिए उन्होंने अपने मुंह खोल दिया. मेने अंगूर को अपने हाँथ से मसल दिया. जिससे उसका रास दीदी के मुंह में गिरने लगा तो तुरंत मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में डाली और दीदी के मुंह से अंगूर का रास पिने लगा.



उसके बाद मैंने दीदी को किश करने लगा. कुछ देर किश करने के बाद मैंने फिर से 6-7 अंगूर गुच्छे से तोड़े और फिर से उन्हें मसलक उसका रास दीदी के मुंह में दाल दिया और दीदी के मुंह से अपनी जीभ डालकर उनके मुंह को चाटने लगा. ऐसे मैंने लगभग 5 मिनट तक किया फिर मैं दीदी उनके सर के पास से हटकर उनकी कमर के पास खड़ा हो गया और गुच्छे को दोनों हांथो में पकड़ लिया और दीदी की आँखों में देखते हुवे अंगूर को निचोड़ कर उसका रास दीदी की चूचियों, उनके पेट, उनकी छूट और उनके पेअर पर गिरा दिया. अंगूर की बुँदे शरीर पर गिरना से दीदी का शरीर एक बार कैंप गया. फिर मैं बीएड पर दीदी के पेअर के पास बैठ बया और दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- मैं जो कर रहा हूँ तुमको अच्छा तो लग रहा है न दीदी. मज़ा आ रहा है की नहीं.

सविता दीदी- (एकदम नशीली आँखों से देखते huwe).bahut अच्छा लग रहा है अभी. तेरे जीजा ने ऐसा कभी नहीं किया है.

मैं- अगर जीजा ने तुम्हारे साथ ऐसा कुया होता तो तुम यहाँ नंगी मेरे सामने थोड़ी बैठी होती.

सविता दी- (थोड़ा शर्माकर कातिल निगाहो से देखते हुवे) अभी मैं नंगी नहीं हुई हु समझे( उनका इशारा अपनी पंतय की तरफ था.)

मैं- क्या बात है दीदी. बड़ी जल्दी है तुम्हे नंगी होने की. कोई बात नहीं तुम्हारी ये इच्छा भी बहुत जल्दी पूरी कर दूंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने शर्म से अपनी आँखे बंद कर ली. दीदी का चेहरा छुडास के कारन एकदम लाल हो गया था दीदी के गुलाबी, ृषभरे होंठ फड़फड़ा रहे थे. उनकी जालिम चूचिया हर साँस के साथ ऊपर निचे हो रही थी. मैंने कुछ देर दीदी के चेहरे को देखता रहा फिर मैं उनके पेअर को चूमने लगा.

जैसे hi मेरे होंठ दीदी के पेअर पर पड़े दीदी के मुंह से AAAAaaahhhhhhhhhhh अभी निकला और वो आँखे खोलकर मुझे देखने लगी. मैंने धीरे धीरे उनके पेअर को चाटते हुवे ऊपर की तरफ बढ़ने लग. मैं कभी उनके एक पेअर को चाटता तो कभी दूसरे पेअर को. मेरे चाहते से दीदी का शरीर कम्पन्न कर रहा था. और उनकी आँखे बंद होने लगी. उनके पेअर को चाटते हुवे मैं उनकी जांघो तक पहुंच गया और दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने होंटो से पंतय के ऊपर से दीदी की छूट पर हल्का सा किश कर लिया. और अपने हाँथ से उनकी पंतय को निचे करने लगा तो दीदी ने अपने हाँथ से पंतय को पकड़ लिया और मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- बस अभी ये मत उतर. नहीं तो तेरी दीदी तुझसे नज़ारे नहीं मिला पाएगी.

मैं- क्यों तुम अपने इस नायब हुस्न पर ज़ुल्म कर रही हो. ऐसा नायब हुस्न कब से कपड़ो से आजाद होना चाहता है और आप रोक रही हैं.

सविता दी- नहीं अभी रहने दे न (एकदम कमजोर आवाज़ में).

मैं- अरे दीदी क्यों अपने इस भाई को तड़पा रही हो. मैं भी तो देखु की मेरी दीदी ने पंतय के निचे जो खजाना छिपा कर रखा है वो कितना नायब है. मत तड़पाओ अपने इस आशिक़ को. और इस पंतय को उतरने दो. मैं तुमको एकदम नंगी देखने केलिए तड़प रहा हूँ.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने शरमाते हुवे अपनी पकड़ पंतय से ढीली कर दी लेकिन गार्डन को न में हिलती रही. मैंने उनकी पंतय को एक झटके में निचे कर दिया और उनके पैरो से निकल कर एक कोने में फेक दिया. अब दीदी पूरी नंगी मेरे सामने थी.



उनके जिस्म पर एक सूत भी कपडा नहीं था. मैं दीदी के नायब हुश्न को बस आँखे फाड़े देख रहा था. जब मैं कुछ देर मुंह खोले उनके नंगे जिस्म को देखता रहा तो दीदी ने कहा.

सविता दी- अभी अपना मुंह तो बंद कर ले नहीं तो मक्खी लात मार्कर चली जाएगी.

ये बात दीदी ने मजाक में कही और खिलखिलाकर हंसने लगी. उनकी बात सुनकर मैं भी मुस्कुराये बिना न रह सका.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-62

Savita didi madarjat nangi kurhi par mere samne baithi hui thi. didi ne sharmakar apne hantho se apni chuchiya chhipa li. Maine thodi der tak didi ke nashile jism ko niharta raha fir maine didi ki aankho me dekhte huwe mere munh se ek shayari nikal gai.

तुम्हारी आँखें नशीली हैं।

तुम्हारे होंठ रसीले हैं।

तुम्हारी चूची तीर की तरह चुभती है।

तुम्हारी चूत की बरसात में हम पूरे गीले हैं।



मेरे मुंह से गन्दी शायरी सुनकर दीदी शर्म से लाल हो गई. मैंने दीदी की आखो में देखते हुवे अपना मुंह दीदी की छूट पर रख दिया और चाटने लगा. मेरा मुंह अपनी छूट पर पड़ते hi दीदी ने एक मादक सिसरि ली और कहा.

सविता दी- AAaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaabbbbbbbbbbbhiiiiii. क्याआआ काआर रआआआआहाआआ हैईईई. ववूऊओ गाआआआंड्डड्डड़ी जगहःहःहःहः है आआआपणंनायआ मममममननननननहहहहहहह हाआआअआटाआआ आआआआहाआआ सी.

Main-tumhari शरीर में कोई भी जगह गन्दी नहीं है दीदी. और छूट चूसै में बहुत मज़ा आता है दीदी. जीजा ने कभी आपकी छूट नहीं चूसी क्या.

सविता दी- नहीं मेरे भाई. तुम्हारे जीजा ने कभी ऐसा नहीं किया.

मैं- तुम बस देखती जाओ. आज मैं तुम्हे वो मज़ा डोंगा जिसके लिए तुम अभी तक तरसती आयी हो मेरी सविता डार्डिंग.

मेरे मुंह से अपना नाम सुनकर दीदी ने आँख दिखते हुवे कहा.

सविता दी- मैं तेरी बड़ी बहन हूँ और तू मेरा नाम ले रहा है.

मैं- अब इतना कुछ हो गया है. तुम अपनी छूट खोलकर अपने भाई के सामने बैठी हो और कुछ hi देर में छुड़वाने वाली हो और अभी भी दीदी सुनना है. अब तो मैं तुमको सविता hi कहूंगा हमेशा.

सविता दी ने मेरी बात सुनकर एक मुस्कराहट से मेरी तरफ देखा. लेकिन बोली कुछ नहीं. फिर मैंने अपने मुंह को दीदी की छूट पर रख दिया और चूसने लगा. मेरे छूट पे मुंह रखने पर दीदी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी. मैंने कुछ देर तक उनकी छूट को छठा फिर अपनी जीभ को नोक बनाकर उनकी छूट के छेड़ में दाल दिया और चूसने लगा. मेरे ऐसा करने से दीदी के मुंह से सिसकारी निकलना तेज़ हो गई. फिर मैंने अपने एक हाँथ को उनकी छूट पर रखा और उनकी पुट्टिया मसलने लगा. और अपनी जीभ से उनकी छूट छोड़ता रहा. जिसको दीदी बर्दास्त नहीं कर प् रही थी. और वो अपने शरीर को ैठने लगी और मादक सिसकी लेते हुवे बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh bbbbbbhhhhhhhhhhhhaiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaiin माहाररररर जाआआआउगीीीी . टट्टूंणन्नीीी कईईईइसा जाआडूउऊउउउउ काआआअआर्र्डर डीईए हैईईईई ममममझहहहहहहःपर uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiii ममममममममममिययययययय maaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiii माहाआरररररररर gaaaaaaaiii.aaaaaaaaaaahhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhh अभीयी.

मैं- (मैं उनकी छूट से मुंह हटाकर)- मजा आ रहा है तुम्हे सविता.

सविता दी- हाँ बाहीईई बहुत माआजआआआ आ rahhhhhhhhhhaaa हीी.

मैंने फिर से अपने मुंह उनकी छूट में घुसेड़ दिया और उनकी छूट को अपनी जीभ से छोड़ने लगा. दीदी फिर से मचलने गली. फिर मैंने अपनी जीभ उनकी छूट से निकली और उनकी पूरी छूट को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. दीदी मेरी छूट चूसै से एकदम मस्त हो गई थी. उन्होंने अपना हाँथ लेकर मेरे सर पर रखा और अपनी छूट की तरफ दबाने लगी और एकदम छुडासी होकर बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh bbbbbbhhhhhhhhhhhhaiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaiin माहाररररर जाआआआउगीीीी uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiii ममममममममममिययययययय maaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiii माहाआरररररररर gaaaaaaaiii.aaaaaaaaaaahhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhh अभीयी. ईईईई आआआआइसस्स्सस्सीीे हीईई bbhaaaaaaaaaaaiiiiii बबबबबाआआअह्हह्ह्ह्हह्हुउउउउउत्तत्त माज़आआआआ aaaaaaaaaa राहाआआआ हैईईई ख्ह्ह्हह्हह्हआआआ jaaaaaaaaaa ममममममममेररररररररीईईई छ्हःहूऊऊऊउत्तत कूऊऊओ.

सविता दीदी के मुंह से मादक सिसकी और बाटे सुनकर मेरा जोश बढ़ गया. मैं और जोर जोर से उनकी छूट को मुंह में भर कर पूरा डैम लगाकर चूसने लगा. दीदी का बदन अकड़ने लगा. वो अंत संत बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाबबबबबबभीइइइइइ कक्खाआ jaaaaaaaaaa मीटीईएडीईई चूऊउउउउउत्ततत्तत्त कूऊऊ. बाआहुट्ट्ट्ट ताआआअआदड़ड्पाउआटीईई हैईईई ईईईई म्मुझीीी haaaaaaaaaaaayeeeeeeee मीटीडीईईई रआआआआजआआआआ बाआआहुट्ट्ट माआआआज़ाअ aaaaaaaaaa रहहहहहहहहहा हैईईई aaaaaaaaaaaaurrrrrrrrrrr जूऊऊऊरर सीईई चहहहहहहउततततततततत meeeeeeeeeeeeriiiiiiiii कच्छुतत्तततततत कुओ. Niiiiiiiiiiichoooooodddddd ड्डड्डालललललललल iiiiiiiiiiseeeeeeee.

दीदी मस्ती में बड़बड़ाये जा रही थी. और मैं उनकी छूट पूरा मुंह में लेकर चूस रहा था. लगभग 10 मिनट चूसने के बाद मैंने एक साथ दो उंगली उनकी छूट में दाल दी और तेज़ी दे अंदर बाहर काने लगा. और उनकी पत्तियो को दांतो में दवाकर काटने लगा. मेरी इस हारकर से दीदी एकदम मदहोश हो गई. वो अपने सर को इधर उधर करने लगी. ऐसा कुछ देर करने के बाद दीदी का शरीर अकड़ने लगा और वो बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh बहुत मज़्ज़ज़्ज़ज़आआआ आए रहहा हैईईई. Kkkkkkkhaaaaaaaaaa जाआआआ मीटीएडीईई चूऊउत्तत्त कूऊऊ चहहहहहह्हाबाआआ जाआआआ िस्स्सस्स्स्से ीीीिसनीये बाआआहुतत्त पाररररररररेशानंन्न किया हीीीं मुझी. Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiii maaaaaaammmmmmmmmmyyyyyyyyh. आआआआआउरर ततततततततीयेइज़्ज़्ज़्ज़ काआआअररररर भहहह्हैईईई. मममममुज्ज्ज्जीीीे कूऊउछह होओओओओ रहा हाँआंण. ाऑर्डरर तेइज़्ज़्ज़्ज़्ज़ काआआरररररर नईईईइच्छहहहहाड्ड़डडडडड लेईईई निगुओडीईईई काआअ सअअअअअअअअअअअअ रआआआस्स्स्सस.

दीदी की बात सुनकर पता लगा की वो झड़ने के बहुत करीब हैं तो मैंने अपनी उँगलियों को बहुत तेज़ी से उनकी छूट में अंदर बहार करना शुरू किया. और उनकी पत्तियों( क्लीट) को चुस्त रहा. दीदी दहाड़ने के एकदम करीब थी तो उन्होंने अपने हाथ से मेरे सर को अपनी छूट पर दबा लिया और चीखने लगी.

सविता di-aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooo आआआआउउउउउउउउर्र्ररर जूऊऊररर सीईईई मीटीरे भाआईईईई अब्बब्बबबबबभीइइइइइ ताआगआकककककक kaaaaahaaaaaaaaaa थाहा टूउऊउउउ. टट्टूंणणन्नीई पाआआअह्लेईई कक्कों नहहहहहिं कियाए ईईईई मीरीई साठहहहहह. ाऔर जोररररर सी भाआआआई मइईईईइ जहाआआअआदड़ड्नी वललललललललीईई होऊणन. Maaaaaaaaaainnnnnnnnn गाआआआआई bhhhhhhaaaaaaaiiiiiiiiiii स्स्स्सस्स्स्सम्मम्मम्मम्मभावआएलो मुझेईईई. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मइईईईन्न्नण गाआआईईईई बाआआआहाआआआंकक्कक्कक्कछूऊऊऊडड़डडडडड. सअअअअअअअभाआआअलललललल mujjjjjjjjjjjjjjheeeeeee.

और इतना कहकर दीदी की छूट ने भल भालकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया. और मैं दीदी की छूट का पानी पिने लगा. दीदी झाड़कर पूरी तरह शांत हो चुकी थी. मैंने चाट चाट कर उनकी छूट को साफ किया और अपना सर ऊपर उठाकर उनकी आँखों में देखा. तो दीदी मुझे hi देख रही थी. मेरा पूरा चेहरा दीदी की छूट के पानी से सना हुवा था. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे ऊपर की तरफ आने लगा. और उनके चेहरे के ऊपर पहुंच कर मैंने दीदी की आँखों में देखकर कहा.

मैं- क्यों सविता डार्लिंग. मज़ा आया की नहीं आपने भाई के साथ.

सविता दी- (शर्माकर नज़रे झुककर)- तू बहुत कमीना है अभी. अपनी दीदी के साथ तूने ये सब किया.

मैं- अब क्यों शर्मा रही हो सविता. बताओ न मज़ा आया की नहीं. प्ल्ज़

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी नज़ारे मुझसे मिलकर मुझे देखा और मेरे होंठ चूमकर बोली.

सविता दी- बहुत मज़ा आया अभी. लाइफ में पहली बार ऐसा मज़ा आया. तू अभी तक कहा था. तूने ये सब मेरे साथ पहले क्यों नहीं किया. तुझे नहीं पता मैं कितना तदपि हु इस मज़े के लिए.

मैं- क्या करू दीदी. मैंने तो पहले hi कोशिश की लेकिन तुमने hi मुझे थप्पड़ मर दिया और नाराज़ हो गई. नहीं तो 10 दिन पहले hi तुम मुझसे छुड़वा लेती.

फिर मैं दीदी के होंठो पर टूट पड़ा और उनके चेहरे को पकड़कर उन्हें डीपली किश करने लगा. कभी उनके होंठो पर जुबान फेरता तो कभी उनके मुंह में अपनी जीभ दाल देता. दीदी भी मेरे किसिंग में पूरा साथ दे रही थी. मैंने 5 मिनट तक उनकी किसिंग की अपनी जीभ को चुसवाया और दीदी की जीभ को चूसा.



फिर मैं उनके चेहरे को चूमना लगा. चूमते चूमते मैं उनकी गार्डन से होता हुवा उनकी चूचियों की तरफ आने लगा और अपने मुंह में उनकी एक चुकी को भरकर चूसने लगा. और एक हाँथ निचे बढाकर उनकी छूट में ऊँगली घुसा दी. दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh निकल गई.

कुछ देर तक दीदी की चुकी चूसने के बाद मैंने चुकी से मुंह हटाया. लेकिन अपनी ऊँगली से उनकी छूट को छोड़ता रहा. जिससे दीदी पर फिर से मस्ती चढ़ने लगी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

Main-Savita तुम्हारी पूरा जिस्म लाजवाब है. और तुम्हारे इस हुस्न को और लाजवाब बनती हैं ये तुम्हारी गदराई और रसभरी जालिम चूचिया. तेरी चूचिया बड़ी ठोस हैं एकदन क्रिकेट के बॉल की तरह. इन्हे देखकर मेरा मन करता है की मैं तुम्हे साडी ज़िन्दगी नंगा राखु और तुम्हारी चूचियों को दिन रात चूस चूस कर इनका रास निचोड़ लून.



सविता दी- तो चूस लो न भाई. किसने मन किया है. तेरा जब भी मन हो मेरी चूचियों को चूस लेना.

मैं- और तेरी ये छूट भी बहुत करारी है. मैं तुझे दिन रात पटक पटक के छोड़ना चाहता हूँ. बोल छुडवायेगी न अपने भाई से.

सविता दी ने मेरी बातो का कोई जवाब नहीं दिया और अपनी आँखे बंद कर ली. मैं फिर से उनकी चुकी को मुंह में भरकर चूसने लगा. और एक हाँथ से उनकी छूट को छुड़ता हरा. थोड़ी देर में दीदी फिर से गरम हो गई. छूट को छोड़ते हुवे मैंने उनकी एक चुकी की घुंडी को दांतो से काट लिया जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- AAAAaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh अभी क्या करता है. थोड़ा प्यार से कर. मैं कही भागी थोड़ी जा रही हूँ.

मैं- अच्छा. मैंने तुमको बहुत मज़ा दिया. अब तुम्हारी बरी है की तुम भी मुझको मज़ा दो.

दीदी मेरी बातो का मतलब नहीं समझी तो मैंने उन्हें कुर्सी से उठाकर जमीन में घुटनो के बल बैठा दिया और उनके सामने खड़ा हो गया. उनके सामने खड़ा होने के कारन मेरा तना हुवा लुंड ठीक उनकी आँखों के सामने लहराने लगा. जिसे दीदी बस देखे जा रही थी. कुछ देर तक जब दीदी ने कुछ नहीं किया तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- चलो सविता अब मेरे लुंड को भी मज़ा दो.

और इतना बोलकर मैंने उनका हाँथ पकड़कर अपने लुंड पर लोअर के ऊपर से रख दिया. दीदी अपना हाँथ हटाने लगी तो मैंने उनके हाँथ को दबाकर अपने लुंड पर आगे पीछे करना लगा. कुछ देर बाद मैंने अपना हाँथ उनके हाँथ से हटा लिया. लेकिन दीदी ने मेरे लुंड से हाँथ नहीं हटाया और सहलाती रही. थोड़ी देर सहलाने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- अब इसके इस कैद से आज़ाद कर दो सविता. अंदर खड़े खड़े इसका डैम घुटने लगा है. इसे लोअर से बहार निकल लो.

सविता दीदी ने तुरंत मेरे लोअर को निचे किया. लोअर निचे होते hi मेरे लुंड ने एक झटका मारा जो उनकी ठुड्डी पर लगा. मेरे लुंड को दीदी ने पहली बार इतने करीब से नंगा देखा था. मेरे लुंड को इतने पास से देखकर उनका मुंह खुल गया उन्होंने अपने मुंह पर हाथ रख लिया. और आँखे बड़ी करके बोली.

सविता दी- अरे बाप रे. ये कितना बड़ा है अभी.

मैं- क्यों ऐसा रिएक्शन दे रही हो जैसे पहली बार लुंड देखा हो. जीजा का इतना बड़ा नहीं है क्या.

सविता दी- अरे नहीं उनका तो इससे आधा hi होगा.

मैं- इसी लिए वो मेरी सविता की प्यास नहीं भुझे पते. लेकिन अब तू चिंता मत कर तेरी प्यास अब मैं बुझाऊंगा. चलो अब इसे प्यार करो ताकि ये तुम्हारी छूट की सेवा कर सके.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने मेरे लुंड को अपने दोनों हांथो में पकड़ लिया और मसलने लगी. जिससे मेरे मुंह से सिसकी निकल गई.

मैं- AAAaaaaaahhhhhhhhhhh सवीटाआ डार्लिंगगगग.

दीदी ने लगभग 5 मिनट तक मेरे लुंड को खूब सहलाया. मसाला. जिससे मेरे लुंड एकदम लाल हो गया. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- इसे मुंह में लेकर प्यार करो सविता डार्लिंग.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखा जैसे वो पूछ रही हो की इसको मुंह में भी लेना है. लेकिन जाएगा कैसे.

मैं- ऐसे क्या देख रही हो. इसे मुंह में भी लेकर प्यार किया जाता है. अब ज्यादा देर मत करो और इसे अपने मुंह में लो.

सविता दी- लेकिन अभी मैंने कभी लुंड मुंह में नहीं लिया है. और ये इतना बड़ा और मोटा है की मेरे

मुंह में जाएगा भी नहीं. मैं हाँथ से hi सहला देती हूँ न.

मैं- नहीं हाँथ से नहीं इसे अपने मुंह में लेकर प्यार करो. मैंने भी तो तुम्हारी छूट को मुंह में लेकर प्यार किया था. तो तुम भी इसे मुंह में लेकर प्यार करो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने झिझिकटे हुवे मेरे लुंड के टोपे को मुंह में भर लिया और पूछ की आवाज़ के साथ मुंह से बहार कर दिया. मेरी तो आनंद के कारन आँखे बंद हो गई की मेरी बड़ी बहन ने मेरे लुंड को मुंह में लिया है.

मैं- AAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh सविता. चुसो मेरे लुंड को मेरी बहन.

दीदी ने फिर से मेरे लुंड के टोपे को मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर तक टोपे को चूसने के बाद उन्होंने अपना मुंह और आगे बढ़ाया और 3” लुंड को मुंह में भर कर चूसने लगी. मैं तो मज़े से आँखे बंद कर सिसकिया लेता रहा और दीदी को और लुंड लेने के लिए कहता रहा.



Main-AAAAAaaaaaahhhhhhhhhhhhhh सविताआ. क्या लुंड चुस्ती हो. थोड़ा और अंदर लेने की कोसिस करो.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने थोड़ा और मुंह को आगे किया और 1”और लुंड मुंह में ले किया. और चूसने लगी. दीदी के लुंड चूसने से मैं मज़े के सातवे आसमान पर पहुंच गया था. मैं दीदी का हौसला बढ़ने लगा.

मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ड्डड्डड्डड्डीिड्डड्डड्डी aaaaaaaaahhhhhhhhhhh. क्या लुंड चुस्ती हो. बाआआआआहुत ाछहः दीदी. ऐसे hi चुसो थोड़ा और अंदर लेकर चूऊउउउस्सःसू. Aaaahhhhhhhhhhhhhhhh Sasviiiiiiiiiitttaa. और चूऊउउउस मम्मेराआआ लुंडडडड.

दीदी अपनी तारीफ सुनकर लुंड को और तेज़ी से चूसने लगी लेकिन उससे ज्यादा लुंड मुंह में नहीं ले रही थी. फिर मैंने दीदी के सर को पकड़ लिया और उनके मुंह को हल्का हल्का धक्का देकर छोड़ने लगा.



दीदी अभी लुंड चूसने में एक्सपर्ट नहीं थी. इसलिए कभी कभी उनके दांत मेरे लुंड में लग जाते थे. जिससे मैं ssssssssssss कर देता था. थोड़ी देर लुंड को हल्का हल्का धक्का देने के बाद मैंने दीदी के सर पर दबाव बनाया और लुंड को और अंदर करने लगा. दीदी पहली बार लुंड मुंह में ले रही थी. इसलिए उन्हें थोड़ी तकलीफ हो रही थी. वो मेरी जांघो पर हाथ रखकर मुझे पीछे करने लगी थी. तो मैंने भी मौके की नजाकत को समझते हुवे अपना लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया तो दीदी ने कहा.

सविता दी- क्या कर रहे हो अभी. मेरा मुंह फाड़ने का इरादा है क्या.

मैं- अरे नहीं सविता. तुम्हारा मुंह नहीं तुम्हारी छूट फाड़ने का इरादा है. लेकिन मेरे लुंड को जितना मुंह के अंदर लोगी उतना hi तुमको मजा आएगा.

सविता दी- लेकिन ये बहुत बड़ा है मेरे मुंह में नहीं जा रहा है.

मैं- तुम कोशिश करो और अंदर लेने की मैं तुम्हारी मदद करता हूँ.

फिर दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और लुंड को अपने मुंह में डालने लगी. दीदी पूरी कोशिश कर रही थी की ज्यादा से ज्यादा लुंड मुंह में ले सके. लेकिन उनसे नहीं हो प् रहा था. और इधर इतनी देर से फोरप्ले करने के कारन और इतने दिन से मुठ न मरने के कारन मेरा लुंड फटने को हो गया. जब मुझे लगा की मेरा लुंड जल्द hi पानी छोड़ देगा तो मैंने दीदी के सर को सख्ती से पकड़ा और अपना पूरा लुंड दीदी के मुंह में एक झटके में पेल दिया. मेरे इस झटके का लिए दीदी बिलकुल भी तैयार नहीं थी. उनके मुंह से ggggggguuuuuuuuuuuuuuuuu ggggggggggggggguuuuuuuuuuuuuu की आवाज़ निकलने लगी.



वो मेरी जांघ पर थप्पड़ मरने लगी और मुझे पीछे करने लगी. उनकी आंको में आँशु आ गए. लेकिन मैंने लुंड उनके मुंह से नहीं निकला और 4-5 तेज़ धक्के देखर उनके मुंह में hi पानी छोड़ने लगा. एक तो मेरा पूरा लुंड उनके मुंह में था ऊपर से मेरे लुंड का पानी भी उनके मुंह में गिरने लगा. तो उनको साँस लेने में तकलीफ होने लगी. उनका पूरा चेहरा लाल हो गया और आखे बड़ी बड़ी होने लगी. आँशु आखो की कोनो से बहार निकलने लगे तो मैंने एक झटके से उनके मुंह से अपना लुंड निकल लिया. मेरे लुंड निकलने से लुंड का पानी उनकी चूचियों पर उनके चेहर पर भी फिर गया. दीदी के मुंह से लुंड निकलने के बाद दीदी ने एक चैन की साँस ली और अपने मुंह से मेरे लुंड का पानी जमीन में थूक दिया और. हांफती हुई उठकर कड़ी हो गई एयर एक थप्पड़ मेरे गाल पर जमा दिया.

सविता दी- कमीने. तू पूरा जानवर है मेरी जान लेने का इरादा था क्या. तुझको तो मेरी फ़िक्र hi नहीं है.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-63

4-5 तेज़ धक्के देखर उनके मुंह में hi पानी छोड़ने लगा. एक तो मेरा पूरा लुंड उनके मुंह में था ऊपर से मेरे लुंड का पानी भी उनके मुंह में गिरने लगा. तो उनको साँस लेने में तकलीफ होने लगी. उनका पूरा चेहरा लाल हो गया और आखे बड़ी बड़ी होने लगी. आँशु आखो की कोनो से बहार निकलने लगे तो मैंने एक झटके से उनके मुंह से अपना लुंड निकल लिया. मेरे लुंड निकलने से लुंड का पानी उनकी चूचियों पर उनके चेहर पर भी फिर गया. दीदी के मुंह से लुंड निकलने के बाद दीदी ने एक चैन की साँस ली और अपने मुंह से मेरे लुंड का पानी जमीन में थूक दिया और. हांफती हुई उठकर कड़ी हो गई एयर एक थप्पड़ मेरे गाल पर जमा दिया.

सविता दी- कमीने. तू पूरा जानवर है मेरी जान लेने का इरादा था क्या. तुझको तो मेरी फ़िक्र hi नहीं है.


अब आगे

दीदी के मुंह में झड़ने और उनका मुंह छोड़ने के कारन दीदी थोड़ा नाराज़ हो गाइट hi उन्होंने जिसके लिए उन्होंने मुझे थप्पड़ मर दिया.

सविता दी- तू एकदम कमीना है. मेरी जान लेने का इरादा था क्या. तुझको मेरी फ़िक्र है या नहीं.

मैंने दीदी की तरफ देखा. तो उनका मुंह मेरे लुंड के पानी से सना हुवा था. उनके चेहरे और चूचियों पर भी लुंड का पानी लगा हुआ था. वो हांफ रही थी जिसके कारन उनकी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी. कुल मिलकर दीदी एकदम छुडासी रंडी लग रही थी. मैंने दीदी से कहा.

मैं- वो गलती से हो गया दीदी. जब मुझे जोश आता है तो ऐसा हो जाता है सॉरी मैंने ये जानबूझकर नहीं किया.

सविता दी- हां तुझसे तो हर काम गलती से hi होता है. तू मुझे छोड़ भी लेगा और कहेगा दीदी गलती हो गई मैंने जानबूझकर आपको नहीं छोड़ा.

दीदी ने ये बात मुस्कुराते हुवे कही थी जिसे सुनकर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई . तो मैं चलकर दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और दीदी से कहा.

मैं- अरे नहीं दीदी तुमको गलती से थोड़ी छोडूंगा. तुझको तो जानबूझकर हचक हचक कर इसी बिस्टेर पर छोडूंगा.

और इतना कहकर मैंने दीदी के होंठो पर अपनी उंगलिया फिरने लगा और एक हाँथ से उनकी चूचियों पर लगे मेरे स्पर्म को मलने लगा. साथ hi साथ उनकी गार्डन और कंधे को किश करने लगा. दीदी के अंदर फिर से छुडास भरने लगी. उन्होने हाँथ उठाकर अपनी बांहे मेरे गले में दाल ली. मैंने दीदी के चेहरे पर लगे लुंड के पानी को उनके गलो पर मलने लगा. थोड़ी देर मलने के बाद दीदी का चेहरा और चूचिया चमकने लगी. फिर मैंने दीदी के चेहरे को हाँथ से पकड़कर पीछे की तरफ घुमाया और उन्हें किश करने लगा और उनकी चुकी से हाँथ हटाकर उनकी बुर में एक ूनंगली दाल दी. और अंदर बहार करने laga.didi भी किश में मेरा साथ देने लगी. किश करते हुवे मैं ऊँगली से दीदी की छूट छोड़ता रहा जिससे दीदी फिर से गरम हो गई और उनके मुंह से ggggggguuuuuuuuuuuu गगगगगगगगूउऊउउउ की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने अपनी किश तोड़ी और उनकी गलो को चाटने लगा और चाटते चाटते गार्डन तक आ गया. दीदी सिसकारी भर्ती हुई बोली..

सविता दी- AAaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अभी ममममममेररररररीईईए भाआईईई ककककककयाआ जाआआअदड्डड्डड्डू हाऐ टीड़ीए हठहठों मीटीई. तूंबीए टूऊंऊं मुझहीईईई अपना ड्डड्डीीीेवाना बाणाआआआ दिया ही. हहहहातत्थ निकककककल लीईई भाआआआईई अअअअअअब्ब ससाहाआआ नहहहिं हो रहा हैईईई.

मैं- अरे सविता जादू मैंने नहीं. तुम्हारे इस नशीले जिस्म ने मुझपर किया है. तभी तो आज मैं तुझे छोड़कर बहनचोद बनाने जा रहा हूँ. तू सच में एक चुड़क्कड़ मॉल है. तुझे तो जितना रगड़ रगड़ छोड़ू उतना काम है. बहुत गर्मी है तेरे जिस्म के अंदर साली.

सविता दी- तो निकल दे मेरे जिस्म की साडी गर्मी. तुझे रोका किसने है.

मैं- हाँ साली आज मैं तेरे जिस्म की साडी गर्मी निकल दूंगा. मैं तुझे आज इतना छोडूंगा. इतना छोडूंगा की जब तू इस कमरे सा बहार जाएगी तो मेरी गुलाम सविता बैंकर जाएगी. और मुझसे हमेशा छोड़ने के लिए तैयार रहेगी.

इतना बोलकर मैंने दीदी की छूट से उंगली निकली और उन्हों बीएड के सहारे जमीन पर बैठा दिया और अपने लुंड को उनके मुंह पे रगड़ने लगा. दीदी ने भी मेरा इशारा समझ लिया और मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. दीदी के मुंह इतना मुलायम था की ऐसा लगता था की जैसे कोई छूट हो. थोड़ी देर लुंड को चूमने चाटने के बाद दीदी लुंड को और अंदर लेने की कोषिष करने लगी. लेकिन लुंड अंदर नहीं जा रहा था तो दीदी ने जितना लुंड उनके मुंह में था उसे hi चूसने लगी. मैं मस्ती में बड़बड़ाने लगा.



मैं- ह्ह्हह्ह्ह्हीीेय्यय्यययय सविता क्या लुंड चुस्ती है तू. क्या गरम मुंह है तेरा जैसे कोई भट्टी हो. अरे साली और तेज़ चूस मेरा लुंड. और तेज़ चूस.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी तेज़ी से मेरा लुंड चूसने लगी. उनके मुंह से सूउऊउउउउउद्द्दाप्पपपपप सूउऊउउउउउड़ाआआप्प्पपप्पप्प सूउऊउउउउउउडड्ढड़ड़पपपपपपपपप की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद मैंने दीदी के सर को पकड़ लिए और अपने लुंड की तरफ प्रेस्सुर देने लगा. जिससे मेरे लुंड और अंदर चला गया. दीदी ने मेरे झंघ पर दबाव देकर लुंड अपने मुंह से बहार निकल लिया और खांसते हुवे बोली.

सविता दी- खोऊऊऊऊ ख्ह्ह्हह्हह्हूऊऊऊ. क्या करता है अभी. मेरी साँस रुकने लगती है. मैं पूरा नहीं ले पाऊँगी.

मैं- मुझे तुम्हारे मुंह में इसे पूरा डालना है तुम कोशिश तो करो. तुम्हे एक बार थोड़ी तकलीफ होगी उसके बाद तुमको भी बहुत मज़ा आएगा. तुम अपने भाई के लिए इतना भी नहीं कर सकती.

मेरे इतना बोलने के बाद दीदी ने फिर से मेरा लुंड अपने मुंह में ले लिया और जितना हो सकता था लुंड को अंदर करके चूसने लगी. मैं तो लज़्ज़त की अलग hi एहसास में डूब गया था. मैं उनके सर पर हाँथ फिरने लगा और उन्हें और लुंड मुंह में लेने के लिए उकसाने लगा.



मैं- हआ डीईई aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh रे क्या लुँड्ड़डडडड चुस्ती है तू सलिई और अंदर लेईईई. क्याआ गारायअम्म्मम्म मुंह हाई टेर्रा. तू मेरे लांदड़ और ैण्डआयआर ली साअक्ति हैईईई सविता डार्लिंग. तेरे जैसाअअअअअअ लुँड्ड्ड किस्स्स्सी ने मीटीरा नहीं चुस्स्सा.

मेरे उकसाने से दीदी के अंदर और जोश आ गया. और वो और लुंड अंदर लेने को कोशिश करने लगी. वो लुंड ऐसे चूस रही थी जैसे कई दिन की भूखी हो. थोड़ी देर उनका सर सहलाने के बाद मैंने उनका सर पकड़ा और एक तेज़ झटके के साथ पूरा लुंड उनके मुंह में घुसेड़ दिया. और ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. दीदी की आँखों से आंसू बहने लगे उनके मुंह से सिर्फ ggguuuuuuuuuu ggggggggggguuuuuuuuuu की hi आवाज़ निकल रही थी. मैं दकके लगते हुवे बड़बड़ाता रहा.



मैं- ले साली और ले अंदर मेरा लैंड. बहुत गरम मुंह है तेरा. तू बहुत गरम मॉल है क्या लुंड चुस्ती है तू. तेरा मुंह बहुत हराम है. मेरे लुंड तेरे मुंह में पिघला जा रहा है. जब तेरा मुंह इतना गरम है तो तेरी छूट कितनी गरम होगी सविता साली. ले और ले अंदर तू बहुत छुडासी है. कैसे कुटिया की तरह मेरा लुंड चूस रही है. ले साली और ले अंदर.

मैं लगातार दीदी के मुंह को तेज़ तेज़ छोड़ता रहा. दीदी के मुंह से थूक निकल कर उनकी चूचियों पर गिरने लगा. वो गूऊऊऊ गूऊऊऊ की आवाज़ कर रही थी. फिर मैंने उनके सर को अपने लुंड पर दबा लिया और जिससे दीदी की डैम घुटने लगा. दीदी की आँखे बड़ी बड़ी होकर बहार निकलने को होने लगी उनका चेहरा पूरा लाल हो गया. दीदी मेरे जांघ पर थप्पड़ मरने लगी. जब मुझे लगा की दीदी का डैम घुट जाएगा तो मैंने अपने लुंड टोपे तक उनके मुंह से निकल लिया और दीदी ने जैसे hi साँस लेकर कुछ बोलना चाहा मैंने फिर से एक झटके में पूरा लुंड उनके मुंह में पेल दिया. फिर जब उनका डैम घुटना लगा तो फिर मैंने लुंड टोपे तक उनके मुंह से बहार निकल लिया. और फिर जैसे hi दीदी अपनी साँस दुरुस्त करने कुछ कहने को हुई मैंने फिर से लुंड जड़ तक उनके मुंह में पेल दिया. लगभग 5 मिनट तक मैं दीदी का मुंह इसी तरह पेलता रहा. और अनाप सनाप बकता रहा.



मैं- अरे साली तू तेरा मुंह तो इतना बड़ा है की तू गधे का लुंड भी पूरा ले लेगी और मेरा लुंड पूरा लेने में नाटक करती है. शर्माती है तू. आज मैं तुझे छोड़ छोड़ कर तेरी साडी शर्म उतर दूंगा साली सविता. ले और अंदर ले. तुझे तो तेरे मर्द ने इतना मज़ा कभी नहीं दिया होगा तभी तू अपनी तंग फैलाये मेरे सामने पड़ी है. आज मैं तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा कुटिया.

5 मिनट तक दीदी का मुंह छोड़ने के बाद मैंने दीदी के मुंह से अपना लुंड बहार खींच लिया. लुंड मुंह से बहार निकलते hi दीदी लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. मेरा लुंड दीदी के थूक से पूरी तरह सं गया था और थूक की एक पतली सी लकीर मेरे लुंड से दीदी की मुंह तक बानी हुई थी. जब दीदी की साँस थोड़ा दुरुस्त हो गई तो दीदी ने मुझसे कहा.

सविता दी- तो एकदम जानवर है अभी. तूने तो आज मेरी जान हो ले लेनी थी. तेरे जीजा ने तो कभी ऐसा नहीं किया.

मैं- सविता डार्लिंग. तुझे बिना चोदे तेरी जान जाने नहीं दूंगा. और जीजा को पता hi नहीं है की लड़की को कैसे छोड़कर संतुस्ट किया जाता है तभी तो तू छोड़ने के लिए मेरे पास आई है.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्माने लगी. मैंने दीदी को उठाकर बिस्तर पर फेक दिया और उनकी छूट पर टूट पड़ा. और उनकी छूट को मुंह में भरकर चूसने लगा और एक हाँथ से उनकी क्लीट को सहलाने laga.mere इस अप्रत्याशित हमले से दीदी की आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई. मैं कभी उनकी छूट चुस्त तो कभी उनकी पत्तियो को दन्त से पकड़कर खींच लेता. दीदी तो एकदम मदहोश होकर अपने शरीर को बिस्टेर पर ैठने लगी. और बड़बड़ाने lagi.a

सविता दी- AAAAAAAAAAAAAahhhhhhhhhhhhhhhh ाआभी मेरे भाआईई ऐसे hi चूऊउउउउउस अपनननननि बहनणननं की चहहहहउतततत को बहुत्तत्त तडपाआआती है ईईई मुझीीीी. चूस भाईईई चुस्स्सस्स्स्स. साआरआए राआआत्स नईईईईचुआड़ ली इस्स्स्सस्स्स्सकाआआआ. ऑरररर तेइज़्ज़्ज़्ज़्ज़ी सीईए भाई ऑरररररर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़.

मैं भी दीदी की बात सुनकर उनकी छूट को दबा दबा कर चूसने लगा. छूट चूसते हुवे मैं उनकी छूट में दो ऊँगली दाल कर पेलने लगा. दीदी बस बिस्टेर पर अपना सर इधर उधर करती हुई aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssss uuuuuuuuuuuuuuuuuuuu aaaaaaaahhhhhhhhhhheeeeeeeeeyyyyyyyyyy कर रही थी. 5 मिनट तक छूट चूसने के बाद दीदी बहुत ज्यादा गरम हो गई और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- AAAAAAAAAhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmuuuuummmmmiyyyyyyyyyyyy ाआब बाहारदास्त नाहीई हूँ रहहह हैईईई अअअअअभीइइइइइइइ मेरे भाआई. Kuchhhhhhhhhhh काआर मीटीएराआआ बाआआअआदानंन्न जाआआ रह्हह्हह्हआआआ ही. इस्ससे ठाआआंआड़ा कररर दे अभीयी.

मैं- क्या कर्रु डीडीई. ऊँगली तो कर रही हूँ.

सविता दी- ुण्णंगगगगगगगलई माआत काआर अब्ब्ब hhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyy. अपपपपपपपनाआआ व्व्व्व्व्व ddddddddddaaaaaalllllllll डीएई भाआआअइ ोुर्र और मीटीएडीईई ाआग बहुउउझाए दी.

दीदी के ऐसा कहने पर मुझे लगा की आप दीदी को छोड़ देना चाहिए तो मैंने दीदी की तंग को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और मुंह से थूक निकल कर अपने लुंड पर मॉल दिया और अपने लुंड से दीदी की छूट पर मरने लगा. जिससे दीदी और मचलने लगी और बोली.

सविता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh ममममममममिययययययह. क्यूऊँऊं ताआअंअदपपपपप रहा है अपनीई बहन को. डाआआआआ डीईई andaaaaaaar.Abhiiiiiii

मैं अपने लुंड से दीदी की छूट पर मरते हुवे कहा.

मैं- क्याआ दाल ड्डू अंदर और कहा दालु.

सविता दी- अभीइइइइइइ क्योऊऊऊ taaaaaaadaaapaaaaaaaaaaa रहा अअअअअअअ हीी भाआआअआइईईई अपनी बहह्ह्ह्हह्ण को. तू सममममममझहहहह jaaaaaaaaaa नाआआ.

मैं- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है जो कहना है खुलकर कहो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- मुझे छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ ड़ड़ड़ड़ड भायआई ाआपपपपपपपणी ललूंड़ड़ड़ड़ड़ सीईए. घुस्स्साआ डीएई अपनाआआआ लुँड्ढड्डड़ मीरीईई छुटत meeeeeeeeee ऑररररर छोड़ड़ड़ड़ मुझेईई. ममीजीए

भूउउउजहाआआ डीई meeeeeeeeeerrrre जिसमं की pyaaaaaaaaaasss बआहुट्ट्ट्ट टाआड़पपपपपपी होऊं मैई. अप्प्प्पणीईई बहह्हह्हंणंन्न कोऊ छूवोड्ढ ड्डड्डे अपनीईई लूंणड़ड़ड़ड़ से. जाआआदी करररर ाभीईई अब बर्डध्दास्त्टटटटट नाहीईईई होऊ रहहहहहहहआ है.

मैं- मैं तुम्हे छोडूंगा तो मुझे क्या फायदा hoga.(unki छूट पर अपने लुंड घिसते हुवे)

सविता दी- hhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeee अअअअअभीइइइइइइ. आआआपपपपपपपपनीईई बाआअहाआआ कीईई जाआआआआआआआआई मिल्ल्ल्ल राहाहीईई हाई तुझहीए ऑर्डर क्याआआ छाअअअअहिये. छहोडड दिए भायआई अअअअअअब आओर मैट ताआअंअदपायआ. तू जूऊऊ काआआअह्यइइएगाआआआ मैईन वव्वव्वव्वव्व कारूंगीयी लीईकीन चू कक्कच्छोद्ड़ मुझे आआआअब बाआरास्त नाहीइइइइइइ होओओओ रह्हह्ह्ह्ह ही.

मैं- एक बार और सोच lijieeee.(chut में लुंड का टोपा दबाकर घिसते हुवे)

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मुउम्मय्य्यय्य soooochhhhhhhhhh liyaaaaaaaaaa हैईईई जोऊ टूउउउ बुलीबीजाआ ववववूऊ karunggggggggggi लेकिन पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ भाआआईईई ैण्डआयआर डायललललल डीई.

मैं- तुमको मेरी हर बात माननी पड़ेगी. मैं तुम्हे कुछ भी कहूंगा तो नाराज़ नहीं होगी. तुमको जब मैं चहु तब छोड़ू और तू मन नहीं करेगी.( छूट पर लुंड घिसते हुवे)

सविता दी- hhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh तेरा जूऊऊ माआआं काआरईईए वोओओओ काहारणा मेरी साठहहहहह. मुझीीी सब मन्नणजूऊऊर हाइइइइइइ. बस ाअब्ब चुड्ड्ढ डीएई मुझीीी.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने लुंड को उनकी छूट पर सेट किया और उनकी मदहोश और मदभरी आँखों में देखा और बोलै.

मैं- तो तुम तैयार हो मेरा लुंड लेने के लिए.

मेरी बात सुनकर सविता दी ने हां में गार्डन हिलायी. फिर मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे एक हल्का सा धक्का मारा. जिससे मेरे लुंड का सूपड़ा दीदी की छूट में चला गया. जिससे दीदी के मुंह से एक सिसकारी निकल गई.



सविता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh धीरीईईईई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-64

मेरा लुंड को टोपा जाइए hi सविता दीदी की छूट में गया. उनकी मुंह से सिसकारी निकल गई.

सविता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाभीईईई डीईईडीईए.

मैंने दीदी की बात सुनकर उनके होंठो पैर अपने होंठ रख दिए और उनकी होंठो को चूसने लगा. होंठ चूसते हुवे मैंने अपनी जवाब दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी की जुबान से खेलने लगा. साथ hi अपने हांथो से दीदी की चूचिया दबाने लगा. थोड़ी देर में दीदी मस्त हो गई और बोली.

सविता दी- अब दाल भी दे अभी. और कितना तड़पाएगा अपनी दीदी को.

मैंने दीदी की बात सुनकर अपने लुंड का दबाव दीदी की छूट पर बढ़ा दिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूटा में जाने laga.fir मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुवे एक हल्का धक्का मार दिया. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaammmyyyyyyyyyyyyy. Ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh धीरीई करो भाआआआईइइइइइइइ डरडडडडडडड होत्ता ही.

मैंने दीदी की बात को अनसुना करते हुवे अपने लैंड को बहार खींचा और फिर एक धक्का उनकी छूट पर लगा दिया. जिससे मेरा लुंड आधा दीदी की छूट में घुस गया. जिससे दीदी चिल्लाने लगी और अपनी कमर इधर उधर करने लगी.



सविता दी- AAAAAAAAAAaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaammmmmyyyyyyyyyyyyy माहाआर गाइइइइइइ माईंन्न्नन्नन्न. बाआआहाआर्र निकाआआअआलललललल लीईईई अभीइइइइइ. मुझीऐ नाहीइ चूड़वानन्णन्नआआआ. बाआहुत्त दररररद हो रहा हिअआआअ… ooooooooohhhhhhhhhhh mammyyyyyyyyyyyyyyyyy.

दीदी चिल्लाते हुवे अपने हंथ से मेरे साइन पर रख कर मुझे धकेलने लगी लेकिन मैंने दीदी को कसकर पकड़ रखा था. मैंने अपने लुंड को वही रोक दिया और तुरंत दीदी के चेहरे को चूमना चेतना शुरू कर दिया और एक हाँथ से दीदी की चूचियों को हलके हलके दबाने लगा. दीदी अभी भी सिसक रही थी और कह रही थी.

सविता दी- AAAAAaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh मरीईई प्प्याआरे भाआई. बाआअहाररर निकाएआल केईएएए मुझी बहुत्त डरडडडडडड हो रहा हिआआआआ. Oooooohhhhhhhhhhhhh

Main(unke चेहरे को चूमते हुवे)- क्या हुवा सविता तुम तो जीजा से छुड़वा चुकी हो फिर भी तुम्हे दर्द हो रहा है.

सविता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh अभी. टीएडीईए जेईएएएफ काआअ 4”का hi हीी और टीएएएएएडीईए के ाआआधायआ hi हैई. और मत्तता भीईई टीएरे से आधा हैंआआआआ. उनके सामनेईईई टीएईरायआ लुंडडडड तो मुस्सलललल है.

मैं- मुसल लुंड से hi छुड़वाने में मज़ा है दीदी. बस थोड़ा सा दर्द बर्दास्त कर लो उसके बाद तो तुम खुद मेरे लुंड पर उछाल उछाल कर छुडवाओगी.

मैंने ये कहते हुवे दीदी को किश करना शुरू कर दिया. एक हाँथ को मैंने दीदी की छूट पर रखा और उसे सहलाने लगा और एक हाँथ से दीदी की चुकी को दबाने लगा. जिससे थोड़ी देर बाद दीदी को भी अच्छा लगने लगा और वो भी किश में मेरा साथ देने लगी. अब दीदी का दर्द भी काम हो गया था. इसलिए वो अपनी गांड को उठा उठा कर लुंड को लेने की कोशिश करने लगी और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- AAaaaaaahhhhhhhhhh अभीयी मेरे भाआई sssssssssseeeeeeeeeeeee बाआआअस्ससससस अब आराम आराम से छोड़ो अपनी दीदी को. धीरे धीरे धक्के लगाओ अपनी दीदी की छूट पर और छोड़ो.

मैंने दीदी की बात सुनकर हलके हलके धक्के लगाकर दीदी को छोड़ने लगा. दीदी एकदम मस्ती में आ गई और बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssss बस ऐसे hi chodddddddddd mujheeeeeeeeee. बहुउउउउउउत अच्छाआ लग rahaaaaaaaaaa हाऐ आआआइसे hi धीरी धीरीईए छोड़दो मुझीीी भायआई अअअअअअअअअअअ अअअअअअअअअ से मैईयिन आआआआअज्ज़ आआआउर jyaaaaaaaaaada माआज़ा लेणाआ छाआआआहति हूऊओन aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh आजभीइइइइइइ छोड़ो अपनी बाआआअह्न को.

मैं- क्यों सविता जीजा के साथ मज़ा नहीं आता क्या.

सरिता दी- sssssssssssssssssssssss heeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyh उन्केईएएएए सअअअअअअतःहःहः भीईईई uuuuuuuuuuuuuuuoooiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaa. मज़्ज़ज़ा ाआआताआआआ हैईईई. लीएटीकिनन्ननननन टीएएएएएडीईईई सअअअअअअतः अअअअअलग हीईई माआआअआज़ाआआअ अअअअअअअ रहाआआ हैईईई, चूऊउड़ूऊऊ भायआई औररररररर जोरररर जोररररररर से छहोड़दो.

मैं दीदी की बात सुनकर और भी मस्ती में आ गया. और मैं दीदी की चूचियों को दोनों हांथो में पकड़कर दीदी को छोड़ने लगा. जब मैंने देखा की दीदी ज्यादा मस्ती में आ गई हैं तो मैंने अपने लुंड को बहार टोपे तक खींचा और दीदी की तरफ देखने लगा. जब कुछ देर तक मैंने लुंड छूट में नहीं डाला तो दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- छोड़ न अभी. लुंड बहार क्यों निकल लिया है. दाल दे अंदर अपना लुंड

मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनकी दोनों चूचियों की पूरी ताकत से पकड़कर एक जोरदार धक्का उनकी छूट पर लगा दिया. जिससे मेरा लुंड इनकी छूट को चीरता हुवा जब तक आदर घुस गया. मेरा धक्का इतना जोरदार था की दीदी की आँखे बड़ी हो गई. कुछ सेकंड तक तो दीदी की चीख hi अटक गई. फिर दीदी की एक जोरदार चिक्ख निकल गई.



सविता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh marrrrrrrrrr gaaaaaaaaaai माआआआं. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh बायस्क्कच्छाऊऊऊओ मुझीीी माममयीय. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मीटीईएएररररररररीईईईई चूऊउउउउत्तत्तत्त फाआआआआट गाआआअइ hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyy. इस्स्स्सस्स्स्सीीीीे baaaaaahaaaaaaaaarrrrrrrrrr niiiiiiiiikaaaaaaaaaalllllll kaaaaaaaaaamineeeeeeeeeeee mujheeeeeeeeeeee नहह्ह्ह्हह्हियी चूऊउउउउडवाआआआआआआआआ tuhseeeeeeeeee. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhh बाआआअच्छाआआआआ मुझीीीी.

सविता दीदी चीख रही थी. उनका पूरा चेहरा दर्द के कारन लाल हो गया था. आँखों से आंखो बहने लगे थे. मुझे दीदी की हालत पर बहुत तरस आ रहा था. लेकिन मैं जनता था की अगर मैंने इन्हे अभी छोड़ दिया तो फिर ये मुझे अपनी छूट में लुंड नहीं डालने देंगी. इसी लिए मैंने उनकी चीख की परवाह किये बिना फिर से उनकी दोनों चूचियों को मसलते हुवे लुंड टोपे तक बुर के बहार खींचा और पूरी ताकत से लुंड दीदी की बुर में पेल दिया. दीदी की तो हालत ख़राब हो गई. वो रोये जा रही थी. चिल्लाये जा रही थी.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaammmyyyyyyyyyyyy मुझेईई बहकाआआआ loooooooooooo. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssssss ईईई मुझेईईईई aaaaaaaaaaj माहाआर दलिएईएएगाआआ. बाआआहाररररर निकाआआअलललल लेईईई bhaaaaaaaaaaaaiii .बहुत्तत्तत्त डायआरड हो rahhhhhhhhhhhha हैईईई मीरीईईई छुट्ट्ट्ट्ट पहाआआत गाआआई हैईईई प्ल्ज़ भाआआआई राहाआआम काआआरओ अपपपपपणीइइइइइइइ डीडीइइइइइइ पररररररर.

दीदी की बार सुनकर मन उनके चेहरे पर झुका और उनके होंठो को चूसने लगा. दीदी दर्द के कारन अपना चेहरा इधर उधर करने लगी. लेकिन मैंने उनके होंठो पर अपना होंठ रख hi दिया और चूसने लगा. एक हाँथ से उनकी चूचिय को दबाने लगा और एक हाँथ से दीदी की छूट सहलाने लगा. कुछ देर तक एशिया करने के बाद मैंने फिर अपने लुंड को टोपे तक बहार खींचा और एक झटके में दीदी की छूट में पेल दिया दीदी फिर से चीख पड़ी.



सविता दी- AAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaaabhiiiiiiiiiii साआआईएएएएए कुट्टीीीी. मेरिइइइइइइ जन्न्नन लेगाआ kyaaaaaaaaaaa. कुछहहहहह तो राहाआम कार काहामिनीई. Ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh बाआआआअच्छाआआआआआओ मुझेईईई कोइइइइइइइइइ.

मैंने दीदी की चीख की परवाह न करते हुवे इसी तरह छूट को सहलाते हुवे. चुकी को दबाते हुवे लुंड टोपे तक दीदी की छूट से निकल कर वापस जड़ तक उनकी छूट में पेलता रहा. दीदी दर्द के कारन मुझे उल्टा सीधा बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- AAAAAAaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कुत्ते सलेईईई मीरीईईई छुट्ट्ट्ट फआयआयडीईएएगा क्याआआआ सअअअअअअअअलीए. Ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh माममममममममय मुझेईई bachaaaaaaaaaao isssssssssss सैंड सससससीएएएएए नाहीई तूऊऊओ ईई मीटीडीईईजाननं ले लाआएगा कमीनाआआआ साआआआआआ aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh. धिर्र्र्रे काहार बाआअहाणणन्न हूऊओन मैईन टीईएडीईईई राहाहाम्म्म्म करररर.

मैं दीदी की छूट को सहलाते और चुकी को दबाते दीदी को जोर जोर से पेलता रहा. तोड़ी देर के बाद दीदी नार्मल हो गई और निचे से अपनी गांड उठा उठा कर लुंड अंदर लेने की कोशिश करने लगी. मैंने दीदी को चूचियों को दोनों हांथो से पकड़कर लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाने लगा. जिससे मेरा बीएड हिलने लगा और छू छू की आवाज़ करने लगा. थोड़ी देर तक दीदी को इसीतरह छोड़ने के बाद मैंने अपनी स्पीड काम कर दी और अपना मुंह दीदी की चूचियों पर रखकर उन्हें पिने लगा. दीदी भी मेरे सर पर हाँथ पिराने लगी. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्यों सविता. मज़ा आ रहा है न चुदाई में.

सविता दी- तूने तो मेरी जान hi निकल दी थी. कोई ऐसे छोड़ता है क्या अपनी बहन को. मेरी तो छूट hi फाड् दी तूने.

मैं- अभी कहा पहाड़ी तुम्हारी छूट. लेकिन तुम्हारी छूट बहुत टाइट है ऐसा क्यों.

सविता दी- अभी तक मेरी छूट में तेरे जीजा का hi लुंड गया है. जो 4”का hi है. लेकिन अपना लुंड देख एकदम गधे के जैसा. तो इस लुंड के लिए मेरी छूट तो टाइट hi होगी.

मैं- अच्छा ये बताओ सविता मज़ा आ रहा है की नहीं.

सविता दी- बहुत मज़ा आ रहा है अभी. पहले तो बहुत दर्द हुवा, लेकिन बाद में मज़ा आया.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी के ऊपर लेट गया और हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. साथ साथ दीदी की मुंह में अपनी जीभ दाल दी. जिसे दीदी शौक से चूसने लगी. मेरी जोरदार चुदाई से दीदी की सांसे भरी होने लगी. उनके मुंह से aaaaaaaaaaahhhhhhhh sssssssssssssssssss की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर दीदी को इसी पोजीशन में छोड़ने के बाद मैंने दीदी की छूट से लुंड खींच लिया. मेरे लुंड निकलते hi दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा.



सविता दी- क्या हुवा अभी. छोड़ो ने. निकल क्यों लिया.

मैं- क्या निकल लिया सविता और कहा छोड़ू.

सविता दी- अपना लुंड मेरी छूट में डालकर छोड़ो.

मैं- पहले मेरे लुंड को अपने मुंह में लेकर इसे गिला तो करो. फिर मैं तुम्हारी चुदाई करता हूँ.

सविता दी- लेकिन अभी ये तो गन्दा हो गया है. मैं इसे मुंह में कैसे लू.

मैं- चुदाई करते समय कुछ भी गन्दा नहीं होता सविता. इसी में तो चुदाई का मज़ा आता है. चलो अब मेरे लुंड को चूसकर गिल्ला करो.

सविता दी- लेकिन अभी इसको साफ तो कर ले. बहुत गन्दा है ये.

मैं- इतनी छुडासी होकर भी अब नखरे पेल रही हो. अब चुपचाप लुंड अपने मुंह में लो और चुसो इसे.

मैंने दी को पकड़ कर बीएड के सहारे दीदी को बैठा दिया और मैं उनके सामने खड़ा हो गया. मेरा लुंड दीदी के मुंह के सामने लहराने लगा. मेरा लुंड दीदी की छूट के राश से चमक रहा था. थोड़ी देर तक जब दीदी ने लुंड कोई हरकत नहीं की तो मैं अपने लुंड से दीदी के होंठो पर मरने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और लुंड का टोपा चाटने लगी. दीदी का मुंह लुंड पर लगते hi मेरे मुंह से sssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. थोड़ी देर तक जब दीदी सूपड़ा चाटती रही तो मैंने दीदी से कहा.



मैं- क्या कर रही हो सविता. जल्दी से लुंड चूसकर गिला करो ताकि मैं तुम्हे छोड़कर तुम्हारी प्यास बुझा सकू.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे लुंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी. कुछ देर बाद मैंने दीदी के सर के पीछे हाँथ रखा और उनके सर को अपने लुंड पर दबा दिया. और तब तक नहीं चूड़ा जब तक दीदी की साँस न अटकने लगी. दीदी की आँखों में आंसू आ गए. उनका मुंह फुल गया. जब मैंने दीदी को छोड़ा तो दीदी लुंड को मुंह से निकल कर खांसने लगी. अभी दीदी कुछ कहने के लिए मुंह खोलती उससे पहले hi मैंने दीदी के सर को पकड़कर लुंड उनके मुंह में दाल दिया और एक झटके में जड़ तक दीदी के मुंह में पेल दिया. दीदी की तो जैसे जान hi निकल गई. वो मेरी जांघो पर हाँथ मरने लगी. मैंने अपने लुंड को भर खींचा और एक झटके में फिर से पुरलकुल बा लुंड पेल दिया. दीदी के मुंह से गगगगगगूउऊउउउउउ gggggggggggguuuuuuuuuuu की आवाज़ निकल रही थी. मैं दीदी के मुंह में लुंड पेलते हुवे बड़बड़ाने लगा.

मैं- Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh क्या गरम मुंह है तेरा साली. तेरे मुंह में तो मेरा लुंड पिघल रहा है. तू बहुत कमल की है सविता. ले साली और अंदर तक ले साली. बहुत अच्छा लुंड चुस्ती है तू. लग hi नहीं रहा है किट ु पहली बार लुंड चूस रही है. ले और अनार ले कुटियाआआ.

मैं दीदी के सर को पकड़कर लगातार उनके मुंह में पूरा लुंड पेल रहा था और उनके मुंह से बस ggggggggggguuuuuuuuuuuu guuuuuuuuuuuuu की आवाज़ निकल रही थी. उनके मुंह से थूक निकलकर उनकी चूचियों पर गिर रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड पूरा पेलकर कुछ सेकंड तक रुका रहा फिर लुंड उनके मुंह से निकाल लिया. दीदी के मुंह से मेरे लुंड तक थूक की एक लकीर बन गई. लुंड निकलने के बाद दीदी खांसने लगी और अपनी सांसे दुरुस्त करके बोली.

सविता दी- तू सच में कमीना है तुझे मेरी बिलकुल भी परवाह नहीं है. एकदम जानवर की तरह बर्ताव करता है.

मैं- तू एक बार अपनी शर्म छोड़ कर जैसा मैं कर रहा हूँ बस उसमे मेरा साथ दे. देखने तुझे बहुत मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने दीदी को डोगग्य स्टाइल में कर दिया. दीदी दर गई और मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

सविता दी- वह नहीं अभी. मैं मर जाउंगी.

मैं- अरे सविता. मैं तेरी गांड भी मरूंगा. लेकिन अभी मुझे तेरी छूट मारनी है. तू बेफिक्र रह.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी डोगग्य स्टाइल में हो गई. मैं उनके पीछे आकर दीदी की छूट पर अपना मुंह रख दिया और चाटने लगा. दीदी के मुंह से सिकिया निकलने लगी. थोड़ी देर दीदी की छूट चाटने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी की छूट पर रखा और अपने दोनों हांथो से दीदी की कान्हो को मजबूती से पकड़कर एक hi झटके में अपना पूरा लुंड पीछे दे दीदी की छूट में पेल दिया. मेरा जहतका बहुत तेज़ था जिससे दीदी मुंह के बल बिस्तर पर गिर पड़ी और चीख पड़ी.



सविता दी- OOooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh muammmyyyyyyyyyyy. साआईईएई हाआरामममममममी कुटटटटटटीईईई. Maaaaaaaaaarr दलललेगाआआ kyaaaaaaaaaaa माआदाअरचूऊऊऊद. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय बाआअशाआआआओ mujheeeeeeeeeeeeee. अअअअअअअअज्ज मीटीएडीई jaaaaaaaaaannnnnnn लीईईई लिएईईएगाआआआ ईईईई kkkkkkkkkkkuttttttaaaaa.

दीदी की बात सुनकर मुझे बहुत जोश आ गया. मैंने दीदी की कमर को पकड़कर ऊपर किया और लुंड को टोपे ताख बहार निकल कर एक झटके में दीदी की छूट में पेलने लगा. दीदी दर्द से दोहरी हो रही था और बड़बड़ाये जा रही थी.

सविता दीदी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh साआईईई हाआआअआआअआमी. धीरीईए नहहहहिं कररररररर सकककककककता kyaaaaaaaaaaaaa. काआअमिनीईईए. मुफ्फफ्फ्फ्फफ्ट मइईईई बाहाआआआं कीई छुट्ट्ट्ट्ट मिलीईई हैईईई टूवू क्याआ फआयआयड डीएगा ुस्स्सस्सीीे. सलीबी. गाआआताआआआआ के किड्डड्डड़ईईईईई. राहाआआआअम्म्मम्म काआआआररररर थोड़ड्डाआंआ बाहाआआआं होऊं टीईईडीईईई वोओओओओ भीइइइइइइइ शाआडीई शूऊऊऊदआआ.

मैं दीदी की छूट को हचक हचक कर छोड़ने लगा और दीदी से बोलै.



मैं- हाँ साली सविता तू ाआब बहन नहीं है मेरी. तू मेरी चुड़क्कड़ माल है. और तू शादीशुदा है तभी तो मेरे आगे अपनी छूट फैलाकर लेती hi. क्योंकि तेरा पति तुझे ठीक से छोड़ता नहीं है. इसीलिए तू अपने भाई से छूट छुड़वा रही है. बहुत छुडासी है तू सविता. तुझे तो पटक पटक कर छोड़ना चाहिए तब तेरे छूट की प्यास बुझेगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
आपको और आपके परिवार को अंग्रेजी नए वर्ष 2021 की बहुत बहुत बधाई और शुभकामना।
 
अपडेट-65





मैं- हाँ साली सविता तू ाआब बहन नहीं है मेरी. तू मेरी चुड़क्कड़ माल है. और तू शादीशुदा है तभी तो मेरे आगे अपनी छूट फैलाकर लेती hi. क्योंकि तेरा पति तुझे ठीक से छोड़ता नहीं है. इसीलिए तू अपने भाई से छूट छुड़वा रही है. बहुत छुडासी है तू सविता. तुझे तो पटक पटक कर छोड़ना चाहिए तब तेरे छूट की प्यास बुझेगी.

अब आगे.



इतना बोलकर मैं दीदी को छोड़ने लगा. मेरी इस जोरदार चुदाई से दीदी को भी मज़ा आने लगा था. मैंने दीदी भी अब अपनी गांड पीछे की तरफ धक्का देकर चुदाई में साथ देने लगी. फिर मैंने दीदी की चुकी दोनों हांथो से पकड़कर अपनी तरफ लगाम की तरह खींचकर जोर जोर से छोड़ने लगा और बड़बड़ाने लगा.

मैं- Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh साली सअअअअअविताआआआआ क्या चूऊत्त हैईईई teeeeeeeeeeeeriiiii. एकदम तीते. लगता है जीजा ने तुझे ठिक्क से छोड़ा नहीं है. अब से मैं तुझे छोडूंगा. अब से तू मेरी मॉल है. तेरी छूट तो भहत्थी की तरह जाआ रही हैं. तू बहुत चुड़क्कड़ है साली सविता.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh हराआआमी साआआईईई. अपनी baaaaaaaaaaaahaaaaaan को इतनी बेडाआर्डडी से छोड़ड़ड़ड़ड़ रहा हिअआआअ सल्ले मुफ्त्त्त्तत्त काआअ माआआआ समममममममममझ रखा हैईईई क्याआआआ. Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhh बाआआआहुत ाएचआआआ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ता है टूउउउउ छोड़ साहाली ऑररररर जोरर सीई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़. फ्फ्फफ्फ्फ्फफ्फ़आयआयड डीईईईएमईईएडीइइइइइइइ चूऊउतायआ kooooooooooo.

मैं दीदी को झटके दे देकर पेलने लगा और बाबड़ाने लग.



मैं- ह्ह्ह्हहनननननन सल्ल्ल्ल्ली टूउउउ बाआअहुँत्तत्तत्त बाजआराममम माआआआ haaaaaaaaaai. टट्ट्टीीेरिइइइइइइ छुट्ट्ट्ट मेई आआआआअज हैआईई कामिनीईई. लीईई मीरा लैंड और अंडरररर तक लेटी. टूउउउउ ररऊऊऊऊजजजजज राआआत कुओ मीरीईए कम्मरे मीटीई आआआआजआआआआआ. मीटीएए टीएईऋ छूट को चुद करररररर थाआयंदाआआ करररर दुगाआआ.

सविता दी- oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुझीीीी ऑररररर टीज़ से छोड़ड़ड़ हाराममममी ऑरररररर टीएईज चूऊऊऊडड़डडडडड भादवईईईई. मेईयररररी चूऊउउउउउत में चीईटीयाआ रेंग raaaaaaaaaahi हैंण्ण्ण्ण्न मुझेईईई कुछहहहहहह हो रहा हिआआआआ. और टीएईज दहाआआक्की मरररररर कुट्टीीी. छोड़ अपनी दीदी को और छोड़ड़ड़ड़ड़ड़.

दीदी अब झड़ने वाली थी. तो मैंने अपने एक हाँथ. दीदी की छूट पर रखकर मसलने लगा और लम्बे लम्बे स्ट्रोक देने लगा. दीदी का शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्लाते हुवे बोली.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मममममममममिययययययय आएऔर तेज़ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ चूऊऊऊद मुझीीीी. और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ सलीईई ऑररररर टीएईज मैं झाड़नीयी वाआळी होऊं.

मैं- लिए सलीईई ऑररररर लिए अंडररररररर तू एकककदमम रंडी है सविताआआ. मैंईईईई तेरे जैसी चूडाकककड़ लड़की कह्हह्ही नाहीईई देखि. इतना मज़ाहा तो मुझेईई नताशा को भईईई छोड़ड़ड़ड़कर नहीं आया थाहा. जितना तुझीऐ छोड़कर अअअअअ रहा हिअआअ. अब सी तू मेरररी गुलाम हैईईई. मैररररररा जब मान करेगाआ तुझीऐ छोडूंगा. बोलल छुड़ेगी न मुझसे.

सरिता दी- हाआआआ aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhyyyyyyyyyyyyyyh हाआआआ ाआज से मइईईई टीएएएएएएडीइइइइइइइ गुलाआआआं hoooooooooon तू जबबबबबबब चाहाहे मुझीीी चुद लेनाआआआ. बहुत्तट्ट्ट्ट मास्त्टटटटट लुँड्ड्ड है तेरा. और तेज़ छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मेंनननन आईएईए वालीईई होओओओओ.

दीदी की बात सुनकर मैंने तेज़ी से उन्हें छोड़ना शुरू किया. मैं बहुत लम्बे लम्बे स्ट्रोक दीदी की छूट में लगाने लगा. कुछ hi देर में दीदी की छूट ने भलभलाकर पानी छोड़ दिया और दीदी चीखते हुवे झाड़ गई.

सविता di-oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssssssssss मैं गाआआअआइईईई मरीईई भाआआआईईईई. सम्भालो मुझेईईई. टीएईऋ बहहननननन झाआंआड़ रआआआहियी हैईईई. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

सविता di-oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssssssssss मैं गाआआअआइईईई मरीईई भाआआआईईईई. सम्भालो मुझेईईई. टीएईऋ बहहननननन झाआंआड़ रआआआहियी हैईईई. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.

और इतना बोलकर दीदी की छूट ने पानी चूड दिया. पानी छोड़ने के बाद दीदी निढाल बिस्टेर पर लेट गई. मैंने अपनी चुदाई बंद कर दी. कुछ देर बाद जब दीदी की सनस दुरुस्त हो गई तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्यों सविता मज़ा आया की नहीं अपने भाई से छुड़वाकर.

सरिता दी- बहुत मज़ा आया अभी लाइफ में इतना मज़ा पहली बार आया है.

मैं- तो बताओ हैं न मेरा हथियार जीजा से ज्यादा ताकतवर. देख दिया इसका स्टैमिना.

सरिता दी- सच में अभी तेरा हथियार बहुत दमदार है और बहुत स्टैमिना है तुझमे. मेरी छूट की हालत ख़राब कर दी तुमने. बहुत मज़ा आया. आज पहली बार मेरा पानी इतनी जल्दी निकला है

मैंने दीदी की बात सुनकर उनकी छूट से अपना लुंड निकल लिया और दीदी को पलटकर सीधा किया और घसीट कर बिस्तर के किनारे ले आया और उनके मुंह के सामने अपने लुंड को लहराते हुवे कहा.

मैं- लेकिन मुझे मज़ा नहीं आया सविता. मेरा पानी अभी नहीं निकला. चल मेरे लुंड को चूस ताकि मैं तुझे फिर से छोड़ सकू.

मेरी बात सुनकर दीदी चकित रह गई उन्होंने अपने मुंह पर हाँथ रखते हुवे कहा.

सविता दी- क्या बात कर रहा है अभी. अभी तू डिस्चार्ज नहीं हुवा. इतने देर में तो तेरे जीजा 2 बार झाड़ जाते.

मैं- ये तो अच्छा hi है जो वो इतनी जल्दी झाड़ जाते हैं. नहीं तो मुझे तेरी ये गरम और गदराई जवानी को पिने का मौका hi नहीं मिलता.

सविता दी- हाँ अभी अब तो तेरे लुंड ने मुझे अपना गुलाम बना लिया है. तू जब चाहे जैसे चाहे वैसे मुझे छोड़ सकता है.

मैं- तो चल चूस मेरा लुंड.

इतना कहकर मैंने दीदी के सर खींचकर बिस्टेर के एकदम कोने पर कर दिया और अपने एक पांव को बिस्टेर पर रखकर दीदी के मुंह के सामने अपने लुंड कर दिया. दीदी जीब निकल कर मेरा लुंड चाटने लगी. दीदी की जीभ का स्पर्श पाकर मेरे मुंह से sssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. थोड़ी देर लुंड चटवाने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह में दाल दिया और उनका मुंह हलके हलके धक्के मार्कर छोड़ने लगा.

दीदी भी मेरे लुंड को मुंह से दबा दबा कर चूसने लगी. थोड़ी देर मैंने हलके हलके दीदी का मुंह धीरे धीरे छोड़ता रहा. उसके बाद मैंने अपने लुंड को टोपे तक पीछे किया और एक जी झटके में पूरा दीदी के मुंह में पेल दिया. दीदी के मुंह ssssssssssssssss की आवाज़ आई. दीदी का शरीर इस झटके से अकड़ गया. फिर मैंने अपने हाँथ को बिस्टेर पर रखकर ताबड़तोड़ अपने लुंड से दीदी का मुंह छोड़ने लगा. हर झटके के साथ दीदी की सांसे भरी होने लगी. उनकी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी और उनके मुंह से ggguuuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuuuu की आवाज़ आने लगी. मैं दीदी का मुंह छोड़ते हुवे बड़बड़ा रहा था.



मैं- ले साली. बहुत गरम माल है तू. तुझे जीजा ने मेरे लिए बचाकर रखा था. तू बड़ी चुड़क्कड़ है इसलिए तेरी जवानी को जीजा नहीं संभल सका. अब तेरी जवानी को तेरा भाई संभालेगा. ले साली और अंदर ले. बहुत आग लगी है तुँझमे.

थोड़ी देर तक दीदी का मुंह पेलने के बाद मैंने अपना लुंड बहार खींचा और एक झटके में दीदी के मुंह में पेल दिया और उनके मुंह से लुंड बहार नहीं निकला. दीदी की सांसे फूलने ले. वो ggggggggggguuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuu कर रही थी. आँखों में आँशु आ गए थे. जब मुझे लगा की उनकी साँस अब घुट जाएगी तो मैंने लैंड बहार खींच लिया और जैसे hi दीदी ने साँस ली मैंने फिर लुंड मुंह में पेल दिया. और बड़बड़ाने लगा.



मैं- ले साली. बहुत गर्मी चढ़ी थी तुझपर. इसीलिए मेरे सामने तू नंगी होकर घूमती थी. अरे इतनी hi गर्मी थी तेरे अंदर तो पहले hi बोल दिया होता तूने मुझे तो मैं कब का तुझे छोड़कर ठंडा कर दिया होता. ले चुड़क्कड़ रंडी और अंदर ले मेरा लुंड. आज तुझे छोड़कर तेरी छूट की धज्जिया उदा दूंगा रंडी.

उसके बाद मैंने दीदी के मुंह से लुंड बहार खींच लिया. लुंड बहार आते hi दीदी की जान में जान आई. उन्होंने एक गहरी साँस ली और मेरी आँखों में देखा, मैं उनकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगा. फिर मैं बीएड पर बैठ गया और दीदी को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया. दीदी ने गॉड में बैठकर मेरे लुंड को अपने हांथो में पकड़ा और अपनी गांड उठाकर लुंड को अपनी छूट के मुंह पर रख लिया और धीरे धीरे निचे बैठने लगी. मैंने भी नीचे से एक जोर का धक्का लगाया. तो लुंड पूरा दीदी की छूट में समां गया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभी. मेंननननन माहाआर गाआआआईई धीरे कर. एक झटके में डालना जरुउरी थाहा क्याआआआ.

मैं- दर्द में hi तो मज़ा है दीदी. बस तुम मेरा साथ दो. मैं तुम्हे जन्नत की सैर कराऊंगा.

फिर दीदी मेरी गॉड में उछलते हुवे लुंड अंदर बहार करती रही. मैंने दीदी की एक चुकी को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा तथा एक हाँथ से उनकी चुकी को दबाने लगा. और दीदी को 3 तरफ से मज़ा देना लगा. इस मज़े से दीदी गरम हो गई और आहे भरते हुवे दीदी लुंड पर उछलते हुवे बड़बड़ाने लगी.



सविता di-oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh बायहीइइइइइइ. क्याआआआ मास्ट चूड्डड्डेइइइइइइ कार्ररता हैईईई टूउउउ. तुंबीईईई तूऊऊऊ मुझीीेछोड़ड़ड़ड़ड़कररर मेरररररा दद्दील खुश करररर दिया मेरी भइईईई. क्याआआआ लुँड्ढड्डड़ हैईईई टीएईएएरा.

मैंने दीदी के बात सुनकर निचे से धक्के लगाने गाला और अपने दोनों हाथो से उनके कंधे को पकड़कर उन्हें अपने लुंड पर पटकने लगा. जिससे मेरा लुंड दीदी की बच्चेदानी पर टकराने लगा. इस पोजीशन में दीदी की छूट बहुत टाइट लग रही थी. मेरा लुंड छूट की दीवारों से रगड़ रगड़ कर छूट में जा रहा था. जिससे मुझपर भी जोश चढ़ाने लगा और मैं भी बड़बड़ाने लगा.

मैं- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh कितियाआआअ बहुत टाइट छूट हैई टेरररीई. तेरी छूट मेरे लुँड्ढड्डड़ को निछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ रही हैई salllllli.meeeeeraaaaaa लंनंड्डड्डड्डड्डड़ टीईईडीईई चूऊऊऊत मीटीए रागाड़ काआआर आयंदाआर जाआ रहा हैईईईई और तेरी बछहड़ानी सी तकरायआ रहा हिअआ. तेरई छूट बहुत गाहरी हैईईई मेररररररररी रनणण्डीी.

सविता दी- Hhhhhhhhaaaaaaaaaan bhaaaaaaaaaaaaaaiiiii सअअअअअअअअल माआआअदायआरचूडड़ड. एईई छुट्ट्ट्ट मैनीईई टीईईडीईईई लिएईईए हीईईई बाकचाकरररररर रक्खीईईईई हैईईईई, छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मुहीईईई ऑरररररजोररररर सी छूऊऊऊद. फआयआयड डीएई मेरररीईईई छुटटटटटट koooooooooo, बहुत्तत्त पणीइइइइइ बाहाआआटीईई हाआआईईईई ईईईई. ाऊऊऊर टीएएजज़्ज़्ज़्ज़ chooooood.mujheeeeeeee kuccccccccccccch हो राहाआआआ haaaaaaaaaaiiii. मेररररररीईईई चूऊउत्तत मइईईई khuuujhaaaaaaaliiiiiiiiii हो रहीइइइइइइइ है. maiiiiiiiiiin झाड्डड्डनीीे आआआआईईईई हूऊऊऊणणन्न. समममममभआआआआ मुझेईईई abhiiiiiiiiii.

इतना कहकर दीदी की छूट ने फिर पानी छोड़ दिया. अभी मेरा पानी नहीं निकला था तो मैंने दीदी को बीएड पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर उनके होंठो को चूमने लगा. जिसमे दीदी मेरा साथ देने लगी. साथ साथ दीदी की चूचिया भी चूस रहा था. जिससे दीदी फिर से गरम होने लगी. फिर मैंने दोनों हांथो में दीदी की छूछीहो को पकड़ा और कसकर मसल दिया. दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaabhiiiiiiiiiii सलेईईईई धीरे नहीं दबा सकताआआआ हैईईईई क्याआआ. तायनीकक भी राहाआम नही ाताआए मुझपर

मैं- तेरी जैसी चुड़क्कड़ औरत पर रहम करना भी नहीं चाहिए.

जब मैंने देखा की दीदी एकदम गरम हो गई हैं तो मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट पर रखा और दीदी की आँखों में देखते हुवे एक hi झटके में पूरा लुंड उनकी छूट में पेल दिया. इस झटके से दीदी के मुंह से चीख निकल गई.



सविता दी- oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh साली haaaramiiiiiiiiii धीरीईईए नाहीइइइइइइइ डाललललललललल सकताआ थाआआआ क्याआ. मेरिइइइइइइ जनन लेगा kyaaaaaaaaaa भड़वे.

मैं तेज़ तेज़ झटके लगाकर दीदी को छोड़ते हुवे बोलै

मैं- तेरी जैसी रंडी की प्यास नार्मल चुदाई से नहीं बुझेगी. तेरे जैसे रंडी को तो पटक पटक कर छोड़ना चाहिए. और मैं रंडियो को इसी तरह छोड़ता हूँ. (फिर उनकी छूट को सहलाकर छोड़ते हुवे). अब बता कौन है तू मेरी. भूल साली.

सविता दी इस दमदार चुदाई से एकदम बावली हो गई थी. उनका चेहरा एकदम लाल हो गया था बाल बिखर गए थे. सरीर कैंप रहा था. कुल मिलकर वो चुदाई का भरपूर आनंद उठा रही थी. और इस समय दीदी पर चुदाई की पूरी मस्ती और खुमारी छै हुई थी. मेरे पूछने पर दीदी ने कहा.

सविता दी- हॉँण्णन मेंननननन हूँ टीईडी ररउंडड्ड्डी. मुझीपररर परररर कोई रहममम मत्तत्तत कररररणाआ. छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ो अपनी रआआआआन्द्ड़ड्डी डीडीई को. फआयआयड डालूऊऊओ मेरिइइइ छुट्ट्ट्ट को. डीईएकहूऊऊऊ maaaaaamyyyyyyyyyyy तुम्हारा बेताऑ तुम्हहारीय बेटीईईईई को आआआअपनी रआआआआआदीीी बनाआआअकर छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ रहा hiaaaaaaaaaa.

मैं- (दीदी को पूरी ताकत से छोड़ते हुवे). Haaaaaaaaaan सलीईई रंडी ाजजज्जज माआआईई तेरी छूट फाड़ दूंगा. सलीईईई टुनीईईई अपनी जवाणीइइइइइइइ दिखाआकाररररररर मुझे बहुत तड़पाया है. आआआअज मैंनं उसकाआ सराआआ बड्ड़डडलाआ तुझीीी छोड़ड़ड़ड़कर लूंगाआआआ.

सरिता di-(mujhe चूमती हुई) हैं भाआईईई और जोर से छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ो . बहुत्तत्त अछ्हा लग रहाआआ है. फआयआयड दालुओ मेरिइइइइ छूट को. मेरिइइइइइइइइ छुट्ट्ट्ट मीटीए कुछहहहह चीटियाआआ रेंगगगगगगग रहे हैईईईई. उन्हीीीी अपनी लुंदड़ से लगाआआअआद रगाआड करररर माहार डालो अअअअअअभीयी ऑररररर जोररर से छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ो. तुममममम दुनियाआआआ केईएए सबसीईई अच्छीीीी भाआआआई hoooooooooooo जो अपणीइइइइइइ बहनणननणणन कईईईई पयास्सस्स बुझायआ रहा हीी.

फिर मैंने दीदी को बीएड से उठाकर जमीं पर खड़ा किया और उनके पीछे से जाकर दीदी की एक तंग बीएड पर राखी और और उनके दोनों हांथो को पीछे करके अपने एक हाँथ में फसकर एक हाँथ से उनकी गार्डन को पकड़कर पीछे से लुंड उनकी छूट में एक hi झटके में डालकर छोड़ने लगा. दीदी बड़बड़ाने लगी.



सविता दी- oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiii chooooooooooodd दूऊऊ अपनी randiiiiiiiiiiiiii baaddddddddddddi बहाएं को. फ़ायद दो अपनीईईई बाहाआआ की छूटत को अपनेईईई मुसाहायल सीई. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh आआआआहहहहहहह. मेरे प्याआआरी भईईई. Oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh और जोर से छोड़ो अपनी रंडी को aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइ ाआजजज्जजज सीईई तुमहाआआअररररी बाहाआआआं तुम्हाररररररररीईईई गुलाआआआं हैईईईई. Tumhariiiiiiiiii रुन्द्डडडडडडडडी हैईईई तुम्हाररररररररी कुटियाआआआ हिआआआआ. जहा भीईई जैईसे भीइइइइइइ जब भीईई तुमहारा माआआं कररररी तुम मुझेईई छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ लेनाआआआ. औरर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ चूऊउड़ूऊऊऊ भाआआआईईई मइईईईइ aaneeeeeeeeeee waliiiiiiiiii होओओओओओओ. मैं गाआआईईई अभियई. सँभालुओ मुझीऐ.

इतना कहकर दीदी फिर से झाड़ गई. इतनी देर तक चुदाई के बाद अब मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया tha.teen बार झड़ने के कारन दीदी एकदम लास्ट हो गाइट hi तो मैंने तुरंत दीदी को जमीन पर बीएड से तक लगाकर बिताया. और अपना लुंड दीदी के मुंह के सामने कर दिया. दीदी मेरा इशारा समझ गई. उन्होंने तुरंत मेरा लुंड अपने मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. जब मुझे लगा की मैं छूटने वाला हूँ तो मैंने दीदी के सर को पकड़ कर अपना लुंड दीदी के मुंह में पूरा अंदर पेल दिया और भलभलाकर झड़ने लगा. और झड़ते झड़ते कहने लगा.



में- Aaaaaaahhhhhhhhhhh रनडीईईई ohhhhhhhhhh मैं gayaaaaaaaaa.lee मेरीए लुँड्ढड्डड़ का पणीइइइइइइ. ऑररररररररर पीईईई जाआआआ. ीककककक बूंदडडडडडड भीई बहार मत्तत्तत गिरना मेरीए कुटिया.

दीदी मुझे पीछे करने की कोसिस करने लगी लेकिन मैंने दीदी के सर को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उन्होंने मेरे लुंड का पूरा पानी नहीं पि लिया. झड़ने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह पर एक थप्पड़ मरकर अपने लुंड को बहार निकला तो दीदी खांसते हुवे हांफने लगी और अजीब सा मुंह बनाते हुवे बोली.

सविता दी- ये तूने क्या किया पूरा मुंह गन्दा कर दिया. और पता नहीं इसका स्वाद कैसा था.

मैं- मैं इसको वेस्ट नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने इसे आपको पिलाया. ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा. धीरे धीरे तुमको इसकी आदत पद जाएगी. वैसे कैसे लगा दीदी अपने भाई से छुड़वाकर.

ये सुनकर दीदी ने मेरे मुंह को चूमकर मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- ये मेरे आज कर की सबसे बेस्ट चुदाई थी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-66



अभी मैं दीदी से कुछ कहता इससे पहले hi किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. हम दोनों को तो काटो खून नहीं ऐसी हालत हो गई. दीदी दर के करें बिस्टेर पर चढ़ कर बैठ गई. तभी दरवाज़ा एक बार फिर खटखटाया गया और सरिता दीदी की आवाज़ आई.

सरिता दी- अभी ो अभी.

लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था की वो अभी hi रो देंगी. हम दोनों का चुदाई का भूत पूरी तरह से उतर चुक्का था. दीदी तुरंत बीएड से उतारकर अपने कपडे ढूढ़ने लगी. लेकिन कपडे तो मैंने फाड् डेल थे. अभी उनकी एक पैंटी थी जो उनके हाँथ में थी. तभी सरिता दी की आवाज़ फिर सुनाई पड़ी.

सरिता दी- अभी दरवाज़ा खोलो. तुम्हारे साथ अंदर कौन है.

जब मैंने दीदी से पूछा था की टुनको चुदाई कैसी लगी तो दीदी ने कहा था आज तक की सबसे बेस्ट चुदाई थी ये. शायद सरिता दीदी ने वो सुन लिया था इसलिए सरिता दीदी की ये बात सुनकर मेरी तो गांड hi फैट गई. अब हम दोनों पक्का पकड़े गए थे. ये बात सुनकर दीदी की आँखों में आंसू आ गए. वो मेरी तरफ मिन्नत भरी नजरो से देख रही थी. जैसे कह रही हो की अब मेरी इज़्ज़त और ज़िन्दगी तेरे हाँथ में है. मुझे भी कोई तरीका नहीं सूझ रहा था. तभी फिर से सरिता दी की आवाज़ सुनाई दी.

सरिता दी- दरवाज़ा खोल अभी. कुछ काम है तुझसे. और अंदर कौन है तेरे साथ.

मैं- क्या है क्यों इतनी रात को परेशां कर रही हो. अच्छा रखो खोलता हूँ दरवाज़ा.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी बहुत दर गई. और मुझसे धीरे से कहने लगी.

सविता दी- नहीं अभी दरवाज़ा मत खोलना. अगर सरिता ने मुझे इस तरह देख लिया तो मैं उसे क्या मुंह दिखाउंगी. मैं तो जीते जी मर जाउंगी. कैसे नजरे मिलाऊँगी. क्या जवाब दूंगी उसके सवालो का.

मैं- आप चिंता मत करो मैं संभल लूंगा.

अब तक मेरे दिमाग में एक तरकीब आ गाइट hi. मैंने दीदी को मेरे बीएड के पीछे जो जगह थी उसके पीछे छीपा diya.aur उनसे चुप रहने का इशारा kiya.fir अपने मोबाइल में एक बहुत hi इरोटिक ब्लू फिल्म चला दी और उसका वलयमे हल्का कर दिया और फॉरवर्ड करके वह तक लाया जब चुदाई शुरू हो गाइट hi. और मोबाइल को दरवाज़े की तरफ डिस्प्ले करके रख दिया. मेरा लुंड तो अब तक बैठ गया था. इसलिए मैंने लोअर पहना और दरवाज़ा खोलने चला गया. दरवाज़ा खोलते hi सरिता दीदी को देखते hi मेरा कुछ देर पहले झाड़ा और अब बैठ चूका लुंड फिर से खड़ा हो गया. din-ba-din सरिता दीदी के कपडे उनके जिस्म पर काम होते जा रहे थे. उनके जिस्म पर इस समय एक निघ्त्य काम t-shirt थी जो उनकी चूचियों को छुपा काम दिखा ज्यादा रही थी. मैं उनकी चूचियों को देखते हुवे कहा.



मैं- क्या है इतनी रात को क्यों परेशां कर रही हो.

सरिता दी- तुम्हारे साथ कमरे में कौन है मैंने किसी की चीख सुनी थी.

मैं- आप भी न दीदी. आपके कान तो बहुत तेज़ है. चीख मेरे कमरे से hi आई थी.

सरिता दी- कौन है वो और इतनी रात में तेरे साथ क्या कर रही है.

मैं- मेरी गिर्ल्फ्रेंड है वो. और मेरे साथ वो कर रही थी जो एक गिर्ल्फ्रेंड और बॉयफ्रंड करते हैं.

इधर मेरी बात सुनकर सविता दीदी की हालत ख़राब हो गई थी. एक तो वो पूरी नंगी थी कमरे में और ऊपर से मैं ऐसी बाते कर रहा था तो उनका डरना वाज़िब था.

सरिता दी- क्या कौन है वो कलमुही जो मेरे भाई के साथ उसके कमर में इतनी रात को नैन मटक्का कर रही है. मुझे देखने है उसे.

मैं सरिता दीदी की कमर में हाँथ डालकर उन्हें अपने से सत्ता लिया. जिससे मेरा लुंड सरिता दीदी की गांड पर प्रेस होने लगा. दीदी को भी मेरे लुंड का एहसास हो गया. इसलिए वो मुझसे दूर हो कर कड़ी हो गई तब मैंने उनके कंधे पर हाँथ रखा और इशारे से मोबाइल की तरफ दिखाया जिसमे इस समय चुदाई चल रही थी.



सरिता दी- छियईईई अभी तू कितना गन्दा है. ऐसी गन्दी वीडियो देखता है. लेकिन जो आवाज़ मैंने सुनी थी. वो इसी से आई थी क्या.

मैं- अब इतनी रात में मुझे थोड़ी हो पता था की आप आ जाओगी मेरे कमर में. वो बस आज गिर्ल्फ्रेंड की याद आ रही तो बस……….. समझा करो दीदी.

सरिता दी- हाँ बस बस समझ गई.

मैं- अच्छा वो सब छोड़ो ये बताओ की आपने इतनी रत को मुझे क्यों डिस्टर्ब किया. सारा मज़ा ख़राब कर दिया.

सरिता दी- हाँ हाँ मुझे पता है की तेरा कौन सा मज़ा ख़राब हुआ. तुझे शर्म नहीं आती अपनी बहन के सामने ऐसी बात करते हुवे.

मैं- लो कर लो बात. मैं तो अपने कमरे में आराम से वीडियो देख रहा था. आप ने आकर डिस्टर्ब किया और ऊपर से मुझपर नाराज़ भी हो रही हो. अच्छ ये सब छोडो इतनी रात को क्या काम पद गया मुझसे.

सरिता दी- अरे वो क्या है न अभी. मुझे इंटरनेट से कुछ पढाई करनी है. और नेट चल नहीं रहा है. चल के देख न क्या हुआ है.

मैं- (मन में). तुम्हारी छूट में इतनी आग लगी है दीदी की सुबह तक का भी इंतज़ार नहीं कर पाई. और रात में आकर मेरा सारा मज़ा ख़राब कर दिया. नहीं तो अभी मेरा मन सविता दीदी को और छोड़ने का कर रहा था. लेकिन इसकी छूट की आग ने सारा काम ख़राब कर दिया. लगता है सविता दीदी से पहले अब इसको hi छोड़ना पड़ेगा.

मैं- अरे यार तो इसके लिए इतनी रात को कौन सा पहाड़ टूट पड़ा. ये तो मैं सुबह भी देख सकता थान न.

सरिता दी- नहीं भाई बहुत जरुरी है. इसलिए इतनी रात को परेशां किया.

मैं- अच्छा चलो मैं 5 मिनट में आता हूँ.

सरिता दी- अभी सविता दीदी कहा हैं. उनके कमरे का दरवाज़ा खुला है और वो कमरे में नहीं हैं.

सरिता दीदी की बात सुनकर मुझे सविता दीदी पर बहुत गुस्सा आ रहा था. चुदाई की इतनी जल्दी थी की दरवाज़ा भी बंद नहीं किया. अब मैं क्या जवाब दूँ इसको. उधर जब सविता दीदी ने सुना की सरिता दीदी जानती हैं की वो कमरे में नहीं हैं तो उनकी हालत और ख़राब हो गई. फिर मैंने कहा.

मैं- अरे यार मुझे क्या पता गई होंगी बाथरूम या किचेन में. आप चलो मैं आ रहा हूँ.

उसके बाद सरिता दीदी निचे चली गई तो मैंने दरवाज़ा बंद किया और दीदी को बहार आने को बोलै. दीदी जब बहार आई तो बहुत दरी हुई थी. उन्होंने मुझसे कहा.

सविता दी- सरिता को तो सब पता चल गया की मैं कमरे में नहीं हूँ. अब मैं उसको क्या जवाब दूँगी.

मैं- घबराओ मत दीदी. अभी आप मेरे ये कपडे लो और इसे पहनकर बाथरूम में जाओ अपने आपको ठीक करो. और एकदम रिलैक्स होकर निचे जाओ. ऐसा सो करना जैसे कुछ हुवा hi नहीं hai.Sarita दीदी ने अगर पूछा तो एकदन शांति से बोल देना की पीरियड आये हुवे हैं तो बाथरूम में गई थी. उनको तनिक भी शक नहीं होगा.

उसके बाद मैंने टाइम देखा तो 12.40 हो गए थे मतलब मैं और सविता दीदी लगभग 1.30 हॉर्स से साथ थे. यही सब सोचते हुवे मैं सरिता दीदी के कमरे में चला गया. वह जाकक चेक करने पर पता चला की नेट पैक ख़तम हो गया है. तो सरिता दीदी ने जबरन मुझसे रिचार्ज करवाया. उसके बाद मैं बहार आने लगा तो सरिता दी भी बहार आ गई. और मुझसे सविता दीदी के कमरे में चलने के लिए कहने लगी. जब हम दीदी के कमरे में पहुंचे तो वो बाथरूम से अभी अभी आई थी और तौलिये से अपना मुंह पोछ रही है. मैंने उनसे पूछा.

मैं- दीदी आप दरवाज़ा खुला छोड़ कर कहाँ गाइट hi. सरिता परेशां हो रही थी.

सरिता दीदी- हाँ दीदी इतनी रात को आप कहा चली गाइट hi. आपको पता है मैं कितनी दर गाइट hi.

सविता दी- (जैसा मैंने बताया था उसी तरह)- हाँ मैं कोई छोटी बच्ची हूँ न जो गम हो जाउंगी वो कुछ प्रॉब्लम थी तो बाथरूम गई थी.

सरिता दी- क्या प्रॉब्लम है दीदी. आपकी तबियत तो ठीक है न.

सरिता दी- (उन्हें आँखे दिखाकर). अब तू बच्ची नहीं है जो तुझे हर बात बतानी पड़ेगी.

सविता दीदी का इशारा सरिता दीदी समझ गई थी. क्योंकि मैं वह खड़ा था इसलिए वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी. फिर सविता दीदी ने पूछा.

सविता दी- और तुम दोनों साथ साथ मेरे कमरे में इतनी रात को क्या कर रहे हो.

सरिता दी- वो क्या है न दीदी मुझे नेट पर बहुत काम था और नेट बंद हो गया था तो उसी को देखने के लिए अभी को बुलाकर ले हूँ.

सविता दी- तो उसे इतनी रात में जगाने की क्या जरुरत थी. कल सुबह दिखा देती.

सरिता दी- (धीरे से) ये सो थोड़ी रहा था ये तो मज़ा कर रहा था वीडियो देखकर.

जैसी मैंने और सविता दीदी ने सुन लिया. सरिता दीदी ने कहा.

सविता दी- अच्छा अब जाओ तुम दोनों. मुझे भी सोना है.

सरिता दीदी को तो भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़नी थी तो वो तुरंत hi गुड़ नाईट बोल कर चली गई. अब कमरे में हम दोनों hi थे. तो सविता दीदी ने गुस्से में कहा.

सविता दी- इसे पता नहीं ऐसा कौन सा काम करना है नेट पर की इतनी रात को डिस्टर्ब किया. सारा मज़ा ख़राब कर दिया कामिनी ने.

मैं सविता दीदी की बात सुनकर हंसने लगा. मुझे हँसता देखकर दीदी को और गुस्सा आ गया. उन्होंने कहा.

सविता दी- हंस ले तू भी हंस लो. अभी पकड़े गए होते तो साडी हंसी गगग…… में घुस जाती. लाइफ में पहली बार इतना मज़ा आ रहा था. कामिनी ने आकर सारा मज़ा ख़राब कर दिया.

मैं- अरे आप चिंता क्यों करती हैं दीदी. कल आपकोफिर से जरूर छोडूंगा. अगर घर पर नहीं तो कही और चलेंगे. लेकिन बिना आपको चोदे मुझे अब चैन नहीं आएगा. आपके इस नशीले हुस्न ने मुझपर जादू कर दिया है.

ये बात मैंने सविता दीदी का गुस्सा काम करने के लिए कहा था. मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई और सर निचे करके बोली.

सविता दी- मुझे कही बहार नहीं जाना तेरे साथ. (ये इस बात का इशारा था की दीदी बहार जाकर छोड़ने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं थी.)

मैं- अच्छा ठीक है इस बारे में हम कल बात करेंगे. अभी आप सो जाइये. गुड़ नाईट.

और इतना बोलकर मैं अपने कमरे में आ गया और बिस्टेर पर लेटकर ये सोचने लगा की अगर थोड़ी सी भी चूक हो गई होती तो आज सविता दीदी और मैं पकडे गए होते. वैसे सरिता दीदी से दर काम hi था. वो थोड़ा बहुत हंगामा करती लेकिन मां पापा को तो बिलकुल नहीं बताती. लेकिन इससे सविता दीदी को बहुत शर्मिंदा होना पड़ता. यही सब सोचते हुवे मैंने अपने सर को हल्का झटका देकर इन ख्यालो को अपने दिमाग से निकला और सोने की कोशिश करना लगा. थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई.


इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-67

और इतना बोलकर मैं अपने कमरे में आ गया और बिस्टेर पर लेटकर ये सोचने लगा की अगर थोड़ी सी भी चूक हो गई होती तो आज सविता दीदी और मैं पकडे गए होते. वैसे सरिता दीदी से दर काम hi था. वो थोड़ा बहुत हंगामा करती लेकिन मां पापा को तो बिलकुल नहीं बताती. लेकिन इससे सविता दीदी को बहुत शर्मिंदा होना पड़ता. यही सब सोचते हुवे मैंने अपने सर को हल्का झटका देकर इन ख्यालो को अपने दिमाग से निकला और सोने की कोशिश करना लगा. थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई.




अब आगे




सुबह मैं किसी के जगाने से उठा. मैं आँखे मलते हुवे उठा और जब थोड़ी आँख खोलकर देखा तो मेरे आँखे अपने आप खुल गई. क्योंकि सामने का नज़ारा hi ऐसा था. सरिता दीदी जिम करने के लिए आई थी एकदम माल बांके. उन्होंने स्पोर्ट वाले कपडे पहने हुवे थे जो उनके जिस्म पर एकदम कैसे हुवे थे. जिससे उनके जिस्म का हर एक एंड और हर एक कटाव नुमाया हो रहा था. मैं तो बस आँखे फाडे उनको देख रहा था. दीदी ने मुझे अपनी चूचियों को घूरते हुवे पाया तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और उन्होंने कहा.



सरिता दी- आँख खुली या और दिखाऊ.

इतना कहकर दीदी थोड़ा सा और झुक गई जिससे उनकी t-shirt से उनकी चूचिया और ज्यादा दिखने लगी थी. मेरी उनकी चूचियों को देखकर और बड़ी बड़ी हो गई. मैं अपने होंठो पर जीभ फिरने लगा तो दीदी ने बगल की टेबल पर रखा गिलास उठा कर मुझे दिया और बोली.

सरिता दी- अब लगता है तेरी आँख खुल गई है और तुझे प्यास भी लग रही है तो ये पानी पि ले.

मैं उनके हाँथ से पानी का गिलास लेकर पिने लगा और उनकी चूचियों को देखता रहा. मैंने पानी पि कर गिलास दीदी को वापस किया तो उन्होंने उसे टेबल पर रखकर मुझसे कहा.

सरिता दी- क्या अभी अगर इतनी देर तक सोता रहेगा तो फिर मुझे जिम कैसे सिखाएगा चल उठ और बता कैसे करना है.

मैं रात में लोअर hi पहनकर सो गया था. एक तो सुबह वैसे भी लुंड ेरेक्ट रहता है और ऊपर से दीदी की गदराई चूचियों को देखकर मेरा लुंड एकदम खड़ा हो चुक्का था. अब मुझे सरिता दीदी से कोई शर्म थी नहीं इसलिए मैं अपने बिस्टेर से उठ गया और एक जोरदार अंगड़ाई ली. जिससे मेरे लुंड लोअर से और बहार की तरफ दिखने लगा. दीदी की नज़र जब मेरे लुंड पर पड़ी तो वो उसे hi देखने लगी. दीदी अपलक मेरे लुंड को देखे जा रही थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- अब अगर देखकर दिल भर गया हो तो शुरू करे.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई और शुरू करने के लिए हाँ में गार्डन हिला दी. तो मैंने सबसे पहले उन्हें दुम्ब्ले उठाने के लिए कहा और एक दुम्ब्ले अपने हाँथ में लेकर उन्हें कैसे करना है ये बताने लगा. उसके बाद दीदी दुम्ब्ले उठाने लगी और मैं दूसरी एक्सेरसीज़े करने लगा. मैं उनकी चूचियों को देखते हुवे अपनी एक्सेरसीज़े करता रहा. दीदी दुम्ब्ले से एक्सेरसीज़े करते हुवे मरे खड़े लुंड को देखे जा रही थी. फिर मैं अपनी प्रैक्टिस बंद करके दीदी के पास आया और उनके पीछे कड़े होकर दीदी से बोलै.

मैं- क्या कर रही हैं दीदी. आपकी कलाई बेंड हो रही है. ऐसे में कलाई में मोच आ सकती है. रुकिए मैं आपकी मदद करता हूँ.

उसके बाद मैंने पीछे से hi हाँथ बढाकर दीदी के दुम्ब्ले हाँथ को पकड़ा और उन्हें बताने लगा. फिर धीरे से मैं दीदी के साथ पीछे से सत्कार खड़ा हो गया. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड में टच होने लगा. मेरा लुंड दीदी की गांड में टच होने पर दीदी के जिस्म हल्का सा हिला और दीदी पीछे मुड़कर मेरी आँखों में देखने लगी. कुछ देर मेरी आँखों में देखने के बाद उन्होंने वापस आगे देखते हुवे दुम्ब्ले से प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया. दीदी के कुछ न बोलने से मैं दीदी से एकदम सत्कार खड़ा हो गया. जिससे मेरे लुंड दीदी की गांड की दरार में घुसने लगा तो दीदी ने अपनी कमर थोड़ा सा आगे करके गार्डन घुमाकर मेरी आँखों में देखा और फिर अपनी कमर पीछे कर ली. फिर मैंने दीदी की कलाई पकड़ी और उन्हें समझने लगा.

मैं- दीदी आपको अपनी कलाई को तनिक भी ढील नहीं देनी है नहीं तो इसमें मोचा आ सकती हैं.

इतना बोलकर मैंने अपना हाँथ दीदी के हाँथ से हटाकर उनके कंधे पर रख दिया और अपने होंठ को उनकी गार्डन पर रख दिया. मगर दीदी ने कुछ नहीं कहा और वो प्रैक्टिस करती रही. जब दीदी ने कुछ नहीं बोलै तो मैं उनसे पूरा चिपक गया और अपनी कमर को थोड़ी तेज़ी से उनकी गांड पर चिपकाया. जिससे मेरा लुंड पूरा दीदी की गांड की दरार में घुस गया. और मैंने एक चुम्बन दीदी की गार्डन पर कर दिया. जिससे दीदी दीदी के मुंह से एक सिसकारी निकली. और दाम्ब्ले निचे गिर गया.



सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssssssssssss.

मैं- क्या हुवा दीदी-

सरिता दी- लगता है मेरी कलाई बेंड हो गई और दाम्ब्ले निचे गिर गया.

मैं- ऐसे एक्सेरसीज़े करेंगी तो कैसे सीखेंगी. चलो दूसरी वाली बताता हूँ उसको करिये.

फिर मैंने दीदी को दंड पेलने वाली कसरत बताने लगा की कैसे करना है. दीदी को बताकर मैं जाकर दीदी के सामने बीएड पर बैठ गया. दीदी के एकदम पैरलर झुकने के कारन दीदी की चूचिया अंदर तक मुझे नजर आ रही थी. मैं दीदी की चूचिया देख रहा था और दीदी मेरी आँखों में देखकर वो कसरत कर रही थी. कुछ देर दीदी की चूचिया देखने के बाद मैं दीदी के पास गया और उनसे बोलै.



मैं- आप ये एक्सेरसीज़े तो ठीक कर रही हैं लेकिन आपके फिनिशिंग में कुछ कमी नजर आ रही है. आप अगर कहिये तो मैं आपकी हेल्प कर दूँ.

सरिता दीदी- ठीक है.

दीदी के इतना बोलने के बाद मैं उनकी कमर के पास आकर अपने पेअर को क्रॉस करके उनके दूसरी तरफ रख लिया. अब दीदी मेरे दोनों पैरो के बिच में थी. फिर मैं झुका और दीदी की चूचियों के ठीक निचे अपनी एक बांह दाल दी और एक हाँथ उनकी पीठ पर रख दिया. और दीदी को प्रैक्टिस करने लगा. थोड़ी देर तक मैं केवल उन्हें समझाता रहा. फिर मैंने अपने हाँथ को मूवमेंट दिया और दीदी की पीठ पर अपने हंट को फेरने लगा. जो बांह दीदी की चूचियों के निचे थी उसकी अंगुलियों से मैं दीदी की चूचियों के साइड से सहलाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने मैंने अपने पेअर को उठाकर एक साइड में कर लिया और अपना पीठ वाला हाँथ सरकते हुवे उनकी गांड की तरफ बढ़ने लगा. मैंने निचे से अपनी बांह को थोड़ा बहार खींचा जिससे मेरी हथेली दीदी की एक चीची के सामने आ गयी. दीदी अपनी प्रैक्टिस कर रही थी और मेरे हाँथ की हर मूवमेंट को महसूस कर रही थी. मैंने दीदी से कहा.

मैं- आप एकदम ठीक कर रही हैं दीदी. आपको कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने रूककर मेरी तरफ देखा. उनकी साँस तेज़ चल रही थी. उनकी आँखे शुर्क हो गई थी. कुछ देर मेरी तरफ देखने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- नहीं अभी मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

दीदी के इतना बोलते hi मैंने अपनी हथेली दीदी की चूचियों और पीठ वाला हाँथ दीदी की गद्देदार गांड पर रख दिया. मेरा हाँथ दोनों जगह महसूस कर दीदी का शरीर कैंप गया. वो कुछ सेकंड तक रुकी और फिर से प्रैक्टिस करने लगी. कुछ देर हाँथ ऐसे रखने के बाद मैंने अपने दोनों हांथो को मूवमेंट दी मैंने दोनों हांथो की हथेली से दीदी की चुकी और गांड दबाने लगा और अपना सर झुककर उनके कंडे पर अपना होंठ रख दिया. दीदी का शरीर मेरे इस हरकत पर मचल गया. और एक sssssssssssssss की आवाज़ उनके मुंह से निकल गई. कुछ देर तक दीदी की चुकी और गांड को हलके हलके दबाने के बाद मैंने दीदी की गांड और चुकी को अपनी हथेली में भरा और थोड़ा तेज़ी से दबा दिया और जीभ निकल कर उनकी गार्डन को चाट लिया. दीदी के मुंह से एक सिसकारी युक्त चीख निकल गई.



सविता दी- haaaaaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeee aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ाभीईई. मैं ठीक से कर रही हूँ न.

मैं- हाँ दीदी आप बहुत अचे से कर रही हैं. अगर आप इसी तरह मन लगाकर अपनी प्रैक्टिस करती रही तो बहुत जल्द आप सिख जाओगी.

दीदी फिर से अपनी प्रैक्टिस करने लगी और मैंने फिर से उनकी गांड और चुकी को मुठी में भरकर और तेज़ी से दबा दिया. और उनकी गार्डन को मुंह में भर कर खींचकर छोड़ diya.jisase प्पआआआआ की आवाज़ निकली. जिसे दीदी सहन नहीं कर पाई और धम्म से जमीन पर लेट गई और दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई.

सरिता दी- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मी aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmaaaaaaaarrrrrrrrrrr गाआआआईईईई.

मैं- क्या हुवा दीदी.

सरिता दी- वो कुछ नहीं. मेरा बैलेंस अचानक बिगड़ गया और मैं जमीन पर गिर गई.

दीदी की सांसे एकदम फूल चुकी थी. चेहरा लाल हो गया था. नाक फूल पाचक रही थी. और आँखे नशीली हो गई थी मैं उठकर उनके सामने आकर बैठ गया. वो अभी लेती थी लेकिन उन्होंने अपने सर को ऊपर उठाकर मुझसे बात कर रही थी. जिसके कारन उनकी चुकी मुझे अंदर तक दिखाई दे रही थी. उनके सामने बैठने के कारन मेरा लुंड ठीक उनकी सामने लोअर में झटके मर रहा था जिसे दीदी बड़े गौर से देख रही थी. कुछ देर मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी उतर कड़ी हो गई और मेरे लुंड को देखते हुवे बोली.



सरिता दी- अब मैं जा रही हूँ. और प्रैक्टिस बाद में करेंगे.

इतना कहकर वो निचे चली गई और मैं फ्रेस होने बाथरूम चला गया. जब मैं फ्रेश होकर निचे आया तो मां पापा, महिषा और सविता दीदी हॉल में बैठे थे. मैं थोड़ी देर उनके पास बैठा फिर किचन में चला गया. वह पर सरिता दीदी नाश्ता बना रही थी. मैं जाकर उनके पीछे चिपक कर खड़ा हो गया. जिससे दीदी चौक गई. और तुरंत पलट कर कड़ी हो गई. जब मेरी तरफ देखा तो शांत हो गई और बोली.

सरिता दी- अरे तू किचन में. कुछ काम था क्या.

मैं- हाँ दीदी मैं आपका hi काम करने आया हूँ.

सरिता दी- मेरा कौन सा काम.

मैं- अरे दीदी मतलब ये की मैं आपकी हेल्प करने आया हूँ.

सरिता दी- अब बहाना बनाना छोड़ और सीधे सीधे ये बता की तू यहाँ किसलिए आया है.

मैं उनकी आँखों में देखते हुवे उनकी चूचियों पर नज़र गदा कर उनसे कहा.

मैं- दीदी मुझे प्यास लगी है

सरिता दी- (मेरी आँखों में देखते huwe)to पि ले न

मैं- तो पीला दो न( उनकी चूचियों की तरफ देखते हुवे.)

ये सुनकर दीदी ने जाकर फ़रीज़े से पानी लेकर मुझे दिया और हँसते हुवे कहा.

सरिता दी- लो पि लो

मैं- क्या दीदी आप भी संतरे का लालच देखर पानी पीला रही हैं.

सरिता दी- अच्छा अब तू जा और मुझे काम करने दे.

मैं किचन से बहार आकर सबके साथ बैठ गया. थोड़ी देर बाद नाश्ता करके मां पापा जॉब पर चले गए. मैं भी अपने कमरे में तैयार होने के लिए गया. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी झाड़ू लगाने के लिए आई. आज उन्होंने और भी डीप गले का शट पहना हुआ था जिसमे से उनकी ऑलमोस्ट निप्पल तक चूचिया बहार दिख रही थी. दीदी ने कमरे में आकर झाड़ू निचे रख दिया और मुझसे कहा.



सरिता दी- अभी तुम अपने कमरे की ठीक से सफाई भी नहीं कर पते देखो तो कितने जले लगी हुवे हैं ऊपर.

मैं- मैं वह तक पहुंच नहीं पता इसलिए साफ नहीं करता उसे.

सरिता दी- चल ठीक है मैं आज उसे साफ़ कर देती हूँ. चल तू मुझे उठा कर ऊपर कर तो मैं उसे साफ़ कर दू.

उनकी बात सुनकर मैं बहुत खुश हुवा की चलो इसी बहाने फिर से दीदी के जिस्म को छूने का मौका मिलेगा. लेकिन मैंने बहाना बना कर कहा.

मैं- मुझे मरना थोड़ी hi है. इतनी मोती भैस जैसी हो गई हो पता चला अगर मेरे ऊपर गिर गई तो मेरा तो ऊपर का टिकट काट jaega.(maine ये बात उनकी चूचियों को देखकर हस्ते हुवे कही)

सरिता दी- तू न अभी अब मार खायेगा मुझसे. बता मुझे कहा से मैं तुझे मोती लग रही हूँ.

मैं- रहने दो दीदी. अगर मैं बताऊंगा तो आप नाराज़ हो जाओगी. वैसे भी आप बहुत जल्दी नाराज़ हो जाती हो.

सरिता दी- अब तो तुझे बताना hi पड़ेगा. नहीं तो तू मुझसे आज मार खायेगा.

मैं- ये तो अजीब जबरदस्ती है. बताऊ तो आप नाराज़ हो जाओ और न बताऊ तो मुझे मारो

सरिता di-Achha ठीक है नहीं नाराज़ होती. प्रॉमिस. अब तो बता.

मैं- ऐसे नहीं बताऊंगा. छू कर बताउगा.

सरिता di-(mujhe आँख दिखाकर) ये तो गलत है. फिर भी चलो ठीक है छूकर hi बता दे.

ये सुनकर मैं दो राउंड दीदी के गोल गोल चक्कर लगाया और फिर जाकर दीदी के पीछे सत्कार खड़ा हो गया. दीदी को इस क़यामत रूप को देखकर मेरा लुंड पहले hi खड़ा हो गया था. दीदी की पीछे सत्कार खड़े होने से मेरा लुंड दीदी की गांड पर टच होने लगा. दीदी वैसे hi कड़ी रही. बस उनकी साँस थोड़ा तेज़ चलने लगी थी. कुछ देर ऐसे खड़ा रहने के बाद मैंने दीदी के कंधे पर हाँथ रख दिया और उनसे एकदम चिपक कर खड़ा हो गया. मेरा लुंड दीदी की गांड की पतों के बिछ घुस गया. मेरे हाँथ और लुंड के स्पर्श से दीदी के मुंह से aaaaaassssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई.

मैं दीदी के पीछे खड़ा होकर अपने होंठो को दीदी के कान के पास लाया और एक गहरी साँस लेकर छोड़ दिया. मेरे साँस की गर्मी दीदी अपनी गार्डन पर महसूस कर रही थी. मैंने दीदी के कण में सरगोशी करते हुवे कहा.

मैं- बताऊ दीदी की आप कहा कहा से मोती हो गई हैं.

सरिता दीदी- (भरी साँस लेते हुवे) हां अभी बताओ.

मैं –(उनकी गार्डन को चूमकर) आप नाराज़ तो नहीं होंगी न.

सरिता दी- आआआहहहहहहह नहीं होगी नाराज़.

फिर मैंने अपने हाँथ दीदी के कंधे से सरकते हुवे उनके पेट पर रख दिया और उनके पेट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ पेट पर पड़ते hi दीदी की aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल गई.





इसके आगे की कहानी अगले भाग में..


 
अपडेट-68



मेरा हाँथ अपने पेट पर महसूस करते hi दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. उन्होंने पीछे मुड़कर कुछ देर मुझे देखा फिर अपनी गर्दन सीधी कर ली लेकिन बोली कुछ नहीं. फिर मैंने अपना हाँथ ऊपर बढ़ाते हुवे उनकी दोनों चूचियों पर रख दिया. जिससे दीदी के शरीर में झोझूरे दौड़ गई. कुछ देर मैंने हाँथ को उनकी चूचियों पर वैसे hi रहने दिया और और अपने होंठो से दीदी के कंडे और गार्डन पर किश करने लगा. कुछ देर किश करने के बाद मैं उनकी गार्डन को चाटने लगा. कुछ देर गार्डन को चाटने से दीदी और तेज़ तेज़ साँस लेने लगी. दीदी अब गरम हो रही थी. मैंने अपना मुंह दीदी के कण के पास लेजाकर पूछा.

मैं- आप जानना चाहती हो की आप कहा से मोती हो गई हो.

मेरे ऐसा पूछने से दीदी ने अपनी गार्डन पीछे घुमाई और मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखे इस समय वासना से सुर्ख लाल हो गई थी. उनके नथुने फूल पाचक रहे थे. गलो पर लाली आ गई थी. मैं भी दीदी को hi देख रहा था. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे उखड़ी सांसो से कहा.

सरिता दी- हाँ ममैं ज्जाननाआआ चाकहति हूँ.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके गाल पर अपनी जुबान फेर दी तो दीदी ने अपना सर सीधा कर लिया. मैं फिर से दीदी की गार्डन को किश करने लगा. थोड़ी देर किश करने के बाद मैंने दीदी की दोनों चूचियों को मुठी में भरा और जोर से दबा दिया और पीछे से लुंड की उनकी गांड में दबा दिया. जिससे दीदी के मुंह से चीख भरी सिसकी निकल गई.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyy mmmmuummmmmmmmmmyyyyyyyyyyy. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

मैं- आप यहाँ से बहुत मोती हो गई हैं.

इतना बोलकर मैंने दीदी को पलटकर अपनी तरफ कर लिया और उनकी आँखों में देखने लगा. कुछ देर मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी ने अपनी नज़र निचे कर लिया और मेरे खड़े हुवे लुंड को देखने लगी. कुछ देर मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी ने फिर से मेरी आँखों में देखने लगी. अब तक दीदी की आँखे माधोसी में लाल हो गई थी. थोड़ी देर दीदी को देखने के बाद मैंने उनकी कमर में हाँथ डाला और अपनी तरफ खींच लिया जिससे दीदी की पहाड़ जैसी चूचिया मेरे साइन में डाब गई औरर मेरा लुंड सीधे दीदी की जांघो पर टकराया जिससे दीदी के मुंह से दर्द भरी चीख निकल गई

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभी.

मैं- क्या हुवा दीदी

सरिता दी- कोई इतनी तेज़ी से खींचता है क्या. मुझे कितना दर्द हुआ.

मैं- (हँसते हुवे) सॉरी दीदी. अभ धीरे से खीचूंगा.

दीदी मेरी बात सुनकर मेरे साइन पर मुक्का मरने लगी. और मुझसे छूटने की कोसिस करने लगी. लेकिन मैंने उन्हें नहीं छोड़ा और अपना हाँथ उनकी पीठ से सरककर उनकी गद्देदार गांड पर रख दिया. मेरा जैसे hi मैंने अपना हाँथ उनकी गांड पर रखा दीदी के सरीर ने एक झटका खाया. मैं कुछ देर उनकी गांड को सहलाता रहा. उसके बाद मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे उनकी दोनों गांड को मुठी में भरा और जोर लगाकर मसल दिया. दीदी दर्द से कराह उठी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyy mmmmuummmmmmmmmmyyyyyyyyyyy. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. ाबबबबबबभीइइइइइ aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. दर्द होता है.

मैं- आप यहाँ से भी मोती हो गई हैं.

उसके बाद मैंने दीदी को छोड़ दिया. दीदी की सांसे बहुत तेज़ चल रही थी. जिससे उनकी पहाड़ जैसी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी और मैं उनकी ऊपर निचे होती चूचियों को देखने लगा. कुछ देर उनकी चूचियों को देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- अब तो आपको पता चल गया न की आप कितनी मोती हो गई हैं.

सरिता di-(nazre झुककर) हूउउउउउ.

मैं- (हँसते हुवे) तो आप खुद सोचिये दीदी की अगर आप अपने इतने मोठे मोठे और बड़े बड़े सामान सहित मेरे ऊपर गिर गई तो मेरे तो ऊपर का टिकट काट जाएगा न.

सरिता दी- (मेरी बात सुनकर शरमाते हुवे) अभी तू बहुत कमीना हो गया है. बहन से कोई ऐसी शरारत भला कोई करता है क्या.

मैं- औरो का तो पता नहीं दीदी लेकिन मैं अब ऐसी शरारत आपसे रोज करूँगा.

सरिता दी- अच्छा ये सब छोड़ मुझे ऊपर उठा तो मैं जला चाफ कर देती हूँ.

फिर मैंने दीदी के सामने आकर खड़ा हो गया और उनकी कमर में हाँथ डालकर उन्हें अपने से सत्ता लिया. और उनकी आँखों में देखने लगा. उनकी आँखों में देखते हुवे मैंने दोनों हांथो से उनकी कमर पकड़ी और उन्हें ऊपर उठाने लगा. दीदी को मैंने अभी इतना उठाया था की उनकी चूचिया मेरे मुंह के पास थी. मैं दीदी को लेकर वैसे hi कहा रहा और अपने सर को दीदी की चूचियों पर दबाने लगा. किछ देर बाद मैंने अपने होंठ को चूचियों के क्लीवेज में रख दिया और चूमने लगा. मेरे होंठो का स्पर्श अपनी चूचियों के पास पाकर दीदी तड़प गई. उनके जिस्म में एक आनंद की लहार दौड़ गई. मैं उनकी क्लीवेज को चुम रहा था और बिच बिच में जीभ निकल कर उनके क्लीवेज को चाट भी रहा था. कुछ देर चाटने के बाद मैंने उनकी चूचियों के शट से बहार नज़र आ रहे हिस्से को अपने मुंह में भर लिया और दांतो से दबा दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल gayi.aur वो मेरी तरफ देखते हुवे सिसक कर बोली.

सरिता दी- AAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh अब्बब्बबभीइइइइइ hhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. अब और ऊपर uthhhhhaaaaaaaaaa हाँथ नहीं पहुंच रहा है.

मैंने फिर अपने एक हाँथ को दीदी की कमर से हटाकर उनकी गद्देदार गांड पर रखा और उससे दीदी को सहारा देखर दूसरा हाँथ भी कमर से उठकर उनकी गांड पर रखा और उनकी ऊपर उठाने लगा. अब दीदी का पेट मेरे मुंह से सामने था.

मैंने अपने होंठो को दीदी के पेट पर शट के ऊपर से रख दिया और चूमने लगा और अपने हंथ दे दीदी की गांड को दबाने लगा. कुछ देर चूमने के बाद मैंने अपनी नज़र ऊपर उठाई तो दीदी मुझे hi देख रही थी. उनकी आँखों में एक खुमारी. सांसे तेज़ी से चल रही थी. मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- और कितनी देर लगेगा दीदी. साफ हो गया की नहीं.

सरिता दी- बस इतनी hi स्टैमिना है तुझमे. थोड़ी देर में hi थक गया. अभी और समय लगेगा साफ करने में.

मैं- दीदी अभी आपने मेरा स्टैमिना देखा hi खः है. आप एक बार मौका तो दो फिर आपको दिखता हूँ की मुझमे कितना स्टैमिना है.

सरिता दी- चल चल बड़ा आया स्टैमिना वाला. मुझे उठाकर थोड़ी देर में hi थक गया और स्टैमिना की बात करता है.

मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनकी गांड को मसल दिया. जिससे दीदी के मुंह से sssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. मैंने दीदी से कहा.

मैं- आप के ये मोठे मोठे मतलब आप इतनी मोती हो और आपका वजन मेरे हाँथ के ऊपर हैं तो थोड़ी तकन तो लगेगी hi न.

सरिता दी- मैं इतनी भी मोती नहीं हूँ. और इसीलिए तो मैंने जिम करना शुरू किया है की अगर थोड़ा बहुत मोती हो गई हूँ तो वो काम हो जाये.

दीदी से बात करने के बाद मैंने फिर से दीदी के पेट को चूमने लगा. पेट चूमते चूमते मैं थोड़ी थोड़ी देर में उनके पेट को मुंह में भरकर काट लेता था. जिससे दीदी ssssssssssssssss करने लगती थी. पेट चूमते हुवे मैं अपने हाँथ से दीदी की गांड भी दबा रहा था. कुछ देर दीदी की गांड दबाने के बाद मैंने उनकी गांड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और डैम लगाकर दबा दिया. जिससे दीदी मेरे सर को अपने हांथो से पकड़कर अपने पेट में दबा लिया और चीख पड़ी.



सरिता दी- ooooooooohhhhhhhhhhhhhooooooohhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हहह heeeeeeeyyyyyyyyyy raaaaaaaaaammmm oooooooooohhhhhhhhhhhhhhh mmuuuuummyyyyyyyyyyyyyyy मररररररर gaaaaaaaaaaiiiiii. दद्धिरररररे ममममरे भाआईईई. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़िड़ीएएएए . aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

फिर मैं अपने एक हाँथ को उनकी गांड से सरका कर आगे की तरफ ले गया और उनकी सलवार के ऊपर से उनकी छूट को टटोलने लगा. जिससे दीदी मचलने लगी और अपने शरीर को इधर उधर करने लगी. ये देखकर मैंने अपने हाँथ वापस खींच लिया क्योंकि इससे दीदी गिर भी सकती थी. मैंने फिर से अपने हथेली में दीदी की गांड को थम लिया और पूरी ताकत से दबा दिया और उनके पेट को मुंह में भरकर डाट काट लिया. दीदी ने पूरी ताकत से मेरे सर को अपने पेट में दबा लिया और मुंह से जोर से आनंद युक्त चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अब्बभीइइइइइइ Aaahhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaammyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh. मुझहीईईई सँभाललललल bhaaaaaaaiiiiiiiiii मैईयीं गगगगगरररर जाआआआंगगगगगगीयी. Aaaaaaaaahhhhhhhhhhh.

मैं- आपको क्या हुआ दीदी. आप चीखी किसलिए.

सरिता दी- मेरा शरीर दर्द करने लगा है इसलिए चीख निकल गई. अब मुझे निचे उतर.

इतनी देर से दीदी के साथ मस्ती करने के कारन मेरा लुंड एकदम तनकट तम्बू बन गया था जो लोअर टैंकर बहार निकला हुवा था. मैंने एक बार फिर दीदी की गांड को जोर से दबा दिया दीदी फिर aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh कर उठी. उसके बाद मैंने दीदी को निचे उतरने लगा. निचे उतारते हुवे दीदी की चूचिया मेरे मुंह के सामने आ गयी तो मैंने दीदी को वही रोक लिया और दीदी की तरफ देखा. दीदी एकदम गरम हो गई थी और हलकी हलकी मदहोश भी हो रही थी.

मैं दीदी की आँखों में ेखते हुवे अपने होंठ दीदी की चूचियों के खुले भाग पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी बस मेरा सर पकड़े sssssssssssssssssssssssss ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh कर रही थी.



कुछ देर तक चूमने के बाद मैंने उसपर जुबान फिरनी शुरू कर दी. दीदी की आँखे मस्ती से बंद होने लगी. कुछ देर बाद मैंने अपनी जुबान दीदी के क्लीवेज में अंदर डालकर चाटने लगा. दीदी बस मेरे सर को पकड़े मस्ती में ओह्ह्ह्हह्हह ssssssssssssss आआआआअह्ह्ह्ह किये जा रही थी. फिर मैंने उनकी चूचियों के खुले भाग को डेप्ने मुंह में भर लिया और उनकी गांड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर चूचियों पर दांत करा और गांड को जोर से मसल दिया. जिससे दीदी चीख निकल गई.

सरिता दी- haaaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ररररररममममममममम अभीइइइइइइइ मेरी भाआआआईई. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh माहाअररररररररर gaaaaaaaaaaaai maiiiiiinnnnnnnnnn aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh.

मैंने सरिता दीदी की सिसकी की परवाह न करते हुवे फिर से उनकी चूचियों के ऊपरी भाग को दांतो से काट लिया और दोनों हांथो से उनके गांड को जोर लगा कर मसल दिया. दीदी फिर से चीख पड़ी

सरिता दी- haaaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ररररररममममममममम अभीइइइइइइइ मेरी भाआआआईई. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh माहाअररररररररर gaaaaaaaaaaaai maiiiiiinnnnnnnnnn aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh. डड्ढीएडीईई मीटीरे ब्बभआआआआईई डीईईडी.

फिर मैंने दीदी को निचे उतर दिया और उनके चेहरे की तरफ देखने लगा. दीदी की आँखे अभी भी बंद थी. दीदी का चेहरे लाल हो गया था और होंठ कैंप रहे थे. कुछ देर तक मैं दीदी को देखता रहा फिर दीदी को आवाज़ दी.

मैं- दीदी क्या हो गया है आपको आँखे खोलो अपनी.

दीदी ने मेरी आवाज़ सुनकर आँखे खोली और मेरी तरफ देखा. मुझसे नजर मिलते hi दीदी ने शर्माकर अपनी नज़ारे निचे झुका ली. लेकिन नज़र निचे करने पर दीदी को मेरा खड़ा लुंड नज़र आने लगा. कुछ देर तक मेरे लुंड को देखती रही और अपनी उखड़ी सांसो को काबू करती रही. कुछ देर के बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- अब मैं जा रही हूँ और काम बाद में कर दूंगी

मैं- जाने से पहले एक झप्पी नहीं डौगी दीदी. आखिर इतनी देर आपके मोठे मोठे. मतलब मोती दीदी का वजन उठाया है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी मुस्कुरा दी. और मुझे एक झप्पी दाल ली. मैंने भी तुरंत अपना एक हाँथ दीदी की गांड पर रखा और एक हाँथ दीदी की चुकी पर रख और अपना मुंह उनके कान के पास लेजाकर कहा.

मैं- वैसे दीदी आपके हैं तो बहुत मोठे मोठे, लेकिन आज आपको गॉड में उठाकर मज़ा आ गया. काश ऐसा मौका रोज़ रोज़ मिलता.

और इतना कहकर मैंने ुकि गांड और उनकी चुकी एक साथ जोर से दबा दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.



सरिता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मामयिययियीय hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyy. Maaaaaaaaaarrrrrrrrrrrr gaaaaaaaaaaaai माहाऎणंन्न.

मेरे इस हमले से दीदी ने चीखते हुवे मुझे धक्का देखर पीछे किया और मेरे कमरे से निकल कर निचे चली गई.



इसके आगे की कहानी अगले भर में..
 
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