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- Dec 5, 2013
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सुबह मैं दिन चढ़े उठा तो दीदी अभी भी सो रही थी. दीदी सोती हुई बहुत प्यारी लग रही थी. मैं दीदी के गाल पर एक चुम्मा लिया और बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चला गया. फ्रेश होकर आया तो दीदी अभी भी सो रही थी. मैंने दीदी को जगाया. दीदी ने उठकर बाथरूम जाने लगी, लेकिन वो अभी भी लंगड़ा रही थी. दीदी बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई और तौलिये से मुंह पोछते हुवे बहार आयी. मैंने दीदी से कहा.
मैं- क्या हुवा दीदी. लंगड़ा कर क्यों चल रही हो.
दीदी मेरी बात सुनकर मुझे मरने लगी. में अपने आपको बचने के लिए दीदी की पकड़ लिया और बिस्टेर पर धकेल दिया और उनको किश करने लगा. दीदी मेरे किश का जवाब दे रही थी. थोड़ी देर किश करने के बाद मैंने अपना हाथ बढाकर उनकी चूचियों पर रख दिया और मसलने लगा. दीदी मचलने लगाई और बोली.
सविता दी- नही अभी मत कर, नहीं तो मैं फिर से गरम हो जाउंगी. मैं अभी इस कंडीशन में नहीं हूँ की तेरा लुंड ले सकूँ, मुझे अभी आराम की जरूरत है.
दीदी की बात मानकर मैंने दीदी को छोड़ दिया और दीदी से कहा.
मैं- ऐसा करिये आप आज सारा दिन आराम कीजिये. मैं खाना बहार से माँगा लूंगा. अभी आप आराम कीजिये तब तक मैं चाय बनाकर लता हूँ.
इतना कहकर मैं दीदी को बैडरूम में छोड़कर किचन में चला गया. मैंने किठचें में जाकर छाई बनाना शुरू कर दी. मैंने एक प्लेट में कुछ बिस्किट्स और नमकीन निकल लिया और चाय बन जाने के बाद उसे छ्ह कर दो कप में निकला और ट्रे में रखकर दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. थोड़ी देर बाद मैं कमरे में था. मैंने दीदी को चाय ऑफर की. उन्होंने कप उठा लिए और पिने लगी. मैं भी बिस्टेर पर बैठकर चाय पिने लगा. चाय पिने के बाद मैंने बरतें किचन में रख और आकर दीदी के पास बैठ गया. दीदी ने पेनकिलर मांगी तो मैंने उन्हें पेनकिलर डरोएर से निकल कर दे दी. दी ने दवा खा ली और बिस्टेर पर आराम करने के लिए लेट गयी.
मैं भी दीदी के साथ लेते गया. कुछ देर लेते रहने के बाद मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने फ़ोन देखा तो वो मनीषा की कॉल थी. मैंने फ़ोन स्पीकर में डाला और दीदी को दे दिया. दीदी ने फ़ोन लेकर और कहा.
सविता दी- hello मनीषा.
मनीषा- ओह्ह्ह hello दीदी. कैसी हैं आप.
सविता दी- मैं ठीक हूँ मनीषा. तुम और सरिता कैसी हो और घर वाले कैसे हैं.
मनीषा- मैं भी ठीक हूँ दीदी और भरवले और सरिता दीदी भी बढ़िया हैं. सरिता दी तो मेरे पास hi हैं. आप बात करिये उनसे.
सविता दी- हाँ सरिता कैसी छूट ुम. पढाई कैसी चल रही है तुम दोनों की.
सरिता दी- मैं बढ़िया हूँ दीदी. और आप कैसी हैं.
सविता दी- ठीक हों मैं भी.
मैं- नहीं सरिता दीदी, सविता दीदी ठीक नहीं हैं. ये झूठ बोल रही हैं.
सरिता दी- क्यों क्या हुवे दीदी को. कही तूने तो कुछ उल्टा सीधा नहीं किया. जिससे दीदी की तबियत ख़राब हो गयी है.
मैं- मैंने क्या किया है. ये आज लंगड़ा लंगड़ा कर चाल रही हैं. और पूछने पर बता नहीं रही हैं.
जब मैंने ये बात सरिता दीदी से बोली तो सविता दीदी मुझे आँखे दिखाकर घोर रही थी. और मुझे छुप रहने का इशारा कर रही थी. सरिता दीदी मेरी बात सुनकर समझ गई की सविता दीदी की गांड का उद्घाटन हो चुक्का है. फिर भी वो दीदी माँ मज़ा लेने के लिए बोली.
सरिता दी- क्या हुवा दीदी आप लंगड़ा कर क्यों चल रही हैं. कही अभी ने कुछ उलटी सीधी हरकत की. जिससे आपको चोट लग गयी हो. जिसके कारन आप लंगड़ा कर चल रही हैं.
सविता di(mujhe घूरते हुवे). अरे नहीं सरिता. ऐसी कोई बात नहीं है. बात ये है की कल रात में मैं बाथरूम में फिसल कर गिर गयी थी. रात में तो कुछ नहीं हुवे, लेकिन अभी बहुत दर्द कर रहा है, इसलिए लंगड़ा कर चल रही हूँ.
सरिता दी- तुम बच गए अभी. नहीं तो अगर दीदी को तुम्हारी वजह से चोट आई होती तो मैं तुमको बहुत मरती. अच्छा ये सब छोडो का बा रहे हैं आप दोनों यहाँ.
सविता दी- अभी तो दो दिन मुश्किल है. मुझे ठीक होने में समय लगेगा. उसके बाद आ जाउंगी.
सरिता दी- अबे गधे. तू अब कही घूमने मत जाना और दीदी का पूरा ख्याल रखने. नहीं तो तेरी खैर नहीं.
मैं- (सविता दी को आँख मरते हुवे) अरे दीदी अब बिलकुल भी फ़िक्र मत करिये. मैं दीदी का बहुत अचे से ख्याल रखूँगा, दीदी की मैं बहुत खिदमत करूँगा. देखना दीदी खुद आपसे मेरी तारीफ करते नहीं. थकेंगी. अच्छा अब फ़ोन रखिये बाद में बात करते हैं.
इतना बोलकर मैंने फ़ोन रख दिया. फ़ोन रखने के बाद दीदी मुझे मरने लगी और बोली.
सविता दी- क्या जरुरत थी सरिता से ये बात बताने की की मैं लंगड़ा कर चल रही हूँ. कही उसको कोई शक हो जाता तो. तू भी न.
मैं- कैसी बाते कर रही हो दीदी. सरिता दीदी आप पर और मुझपर शक करेंगी की हम दोनों ने चुदाई की है. इसलिए आप लंगड़ा कर चल रही हैं. ओह्ह्ह के ों यार. कुछ्ह तो लॉजिक वाली बात करो आप.
सविता दी- अच्छा चल बड़ा आया लॉजिक वाली बात करने. अब खाना आर्डर कर दे. भूख लग रही है.
दीदी की बात मानकर मैंने खाना आर्डर कर दिया. थोड़ी देर बाद खाना भी आ गया. मैंने खाना लिया और रसोई से जाकर एक प्लेट ली और उसे लेकर दीदी के बेडरूम में चला गया. मैंने वह खाना प्लेट में निकला और मैं और दीदी खाने लगे. एक दूसरे को खिलने लगे. थोड़ी देर में हम दोनों ने खाना फिनिश किया. खाना खाने के बाद मैंने प्लेट किचन में राखी और आकर दीदी के पास बैठ गया और कहा.
मैं- दीदी. टिकट तो मैंने कल दोपहर 2 बजे की निकली है. तो कल hi निकल चलते हैं घर. और टिकट अवेलेबल नहीं है एक हफ्ते के लिए.
मेरी बात सुनकर दीदी ने ोकक कह दिया. फिर हम दोनों कुछ देर बाते करने के बाद सो गए. शाम को जाकर मेरी नींद खुली तो मैंने उठकर चाय बनाई और दो कप में डालकर दीदी के पास आया और एक कप उन्हें पकड़ा दी. चाय पिने के बाद मैंने कप लेकर किचन में आया और बर्तन साफ किय और दीदी के पास आ गया. रत हुई तो मैंने फिर से खाना आर्डर किया. कुछ देर में खाना aaya.to मैंने और दीदी ने खाना खाया और बिस्टेर पर लेट गए. बिस्टेर पर लेट कर मैंने दीदी से कहा.
मैं- दीदी. मैं घर जाने से पहले आपको एक बार और छोड़ना चाहता हूँ. पता नहीं घर जाने के बाद मौका मिले या न मुले.
सविता दी- नहीं अभी. आज्ज नही. थोड़ा और आराम कर लुंगी तो बिलकुल ठीक हूँ जाउंगी. लेकिन कल जाने से पहले पक्का तेरी ख्वाहिश पूरी करुँगी. अब चुपचाप से जा.
दीदी की बात सुनकर मैं दी और करीब आ गया और अपने होंठो से उनके होंठ चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैं दीदी से अलग हुवा. फिर दीदी ने गुड़ नाईट बोलै और हम दोनों सो गए.
अगले दिन मैं शावर की आवाज़ सुनकर उठा. मैं बीएड पर वैसे hi लेता रहा. थोड़ी देर बाद बाथरूम का दरवाज़ा खुला और दीदी एक छोटी सी टॉवल अपने जिस्म में लप्पेट कर बहार आयी. उसमे से दीदी की आधी चूचिया बहार दिखाई दे रही थी. टॉवल उनकी जांघो तक hi था.
जिसमे से दीदी की सेक्सी पिण्डलिया भी दिखाई दे रही thi.ye देखते hi मेरा लुंड खड़ा हो गया और मैं उसे अपने लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और दबाने लगा. दीदी मुझे देखकर हंसने लगी. मैं उठकर दीदी के पास जाने लगा तो दीदी ने मुझे रोकक दिया और मुझसे कहा.
सविता दी- देख अभी मैंने अभी अभी स्नान किया है. और मुझे खाना बनाना है. तू अभी तू कुछ भी उल्टा सीधा करने की सोचना भी मत. अभी मुझे खाना बनाना है.
इतना कहकर दीदी दूसरे कमरे में चली गयी और कपडा बदलने लगी. मैं भी बाथरूम में चला गया और फ्रेश होने लगा. फ्रेश होने के बाद मैंने भी स्नान किया और बाथरूम से बहार आकर कपडे पहने और किचन में चला गया. दीदी किचन में खाना बना रही थी. दी ने एक लोअर और t-shirt पहन कर खाना बना रही थी. मैं भी जाकर दीदी के पीछे से चिपक कर खड़ा हो गया और उन्हें बहो में भर लिया.
दीदी ने भी कुछ नहीं कहा और खाना बनती रही. मैंने अपना होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी ने कन्धा उचककर मुझे मन किया लेकिन मैं नहीं मन और दी का कन्धा चूमते हुवे अपना हाँथ आगे बढाकर उनकी चूचियों को पकड़ा लिया और दबा दिया. दीदी ने घूमकर मेरी आँखों में देखते हुवे मुझे अपने से दूर किया और कहा.
सविता दी- खाना बनाने दे अभी. जरा भी सबर नाम की चीज नहीं है तेरे अंदर.
दीदी की बायत सुनकर मैं किचन में hi प्लेटफॉर्म से लगकर खड़ा हो गया और दीदी को खाना बनाते हुवे देखता रहा. दीदी रोटी बना रही थी. रोटी बनाते हुवे दी हिल रही थी. जिसके कारन उनकी चूचिया भी थिरक रही थी. मेरा लुंड ये देखकर खड़ा हो गया था. मैं अपने लुंड को अपने हाँथ से पकड़ लिया और लोअर के ऊपर से hi सहलाने लगा. दीदी ने जब मुझे लुंड सहलाते हुवे देखा तो वो बोली.
सविता दी- हद ही यार. बिलकुल भी सबर नहीं है तेरे अंदर. और ये तो हमेशा खड़ा रहता है.
मैं- अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ. आप हो hi ऐसी की आपको देखकर मेरा खड़ा हो जाता है.
दीदी इन सब बातो के दौरान खाना बना चुकी थी. उन्होंने रस्ते के लिए खाना पैक किय और दो थाली में खाना निकल कर उसे धक् दिया और झूठे बर्तन सिंक में रखकर धुलने लगी. दीदी बर्तन धुलने लगी और में दीदी के पीछे खड़ा दीदी की हिलती हुई गांड देखने लगा. मैं चलता हुवा दीदी के पास पहुंच गया और उनके पीछे कड़ा होकर अपना हाँथ उनके कंधे पर रख दिया. दीदी ने गार्डन घुमाकर एक नज़र मुझे देखा और फिर गार्डन आगे करके बर्तन धुलने लगी. मैं थोड़ा और आगे हुवा और दीदी से एकदम सत्कार खड़ा हो गया मैंने अपना हाँथ निचे किया और अपने लुंड को पकड़कर सीधा किया और अपने कमर को पूरी तरह उनकी गांड से चिपका दिया. मेरा लुंड लोअर समेत दीदी की गांड में घुस गया. मैंने अपना हाँथ बढाकर दीदी की दोनों चूचियों पर रख दिया. बर्तन धोते हुवे दीदी ने कहा.
सविता दी- इतना उतावला क्यों हो रहा है. मैं कही भागी तो नहीं जा रही हूँ. बर्तन तो धूल लेने दे.
मैं- तो मैं कहा आपकी मन कर रहा हूँ. आप अपना काम करिये. मैं अपना काम कर रहा हूँ.
मेरी बैठत सुनकर दीदी फिर से बर्तन धुलने लगी. मैंने अपने होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी बर्तन साफ करते हुवे आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊओह्ह्ह्हह की आवाज़ निकलने लगी. मैं दीदी की गार्डन चूमते हुवे उनके नंगे कंधे को भी चूमने लगा. मैंने दीदी की दोनों चूचियों को मुठी में भर लिया और अपने लुंड को पीछे किया और एक झटका मार्कर अपना लुंड दीदी की गांड की दरार में घुसा दिया और दोनों चूचियों को कसकर मीज दिया. दीदी दर्द से कराह उठी.
सविता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. क्या कररर रहा हीी. इतनी तीज़ज़ सी मैट दबाआ. ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी. थोड़ा धीरे se.thodaa प्यार से.
दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने उनकी चूचिया धीरे धीरे दबनी शुरू कर दी. दीदी अब तक बर्तन धो चुकी थी. मैंने दीदी को पलटकर स्लैब से चिपकाकर अपनी तरफ घुमाया और उनकी आँखों में देखने लगा. मैंने दी की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. मैंने एक हाँथ दीदी की चुकी पर रख दिया और दबाने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचिया दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ सरका कर उनकी लोअर के उप्पेर उनकी छूट पर रख दिया. दीदी का लोअर थोड़ा गिला हो गया tha.main दीदी के होंठ चूमता हुवे अपने हाँथ से दीदी की छूट को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा. दीदी मस्ती में अपने होंठ मुझसे छुड़ाकर बोली.
सविता दी- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह AAAAAAAAAAAhhhhhhhhh अभियई. मास्साललल दी मेरीए छुटत कोऊ बहुत्त परेशाननं करतीय हैई यी तेरई डीडीई कोऊ. हमेशा रोटी रहत्ती हैई. ऑर्डर जोररर सी मसअल लाल कर दी भाई इनको. तेरी लिये ही तू आज तक्क इसको बचाकर रखा हैई मिनी. ोुह्ह्हह्हह्हं
दीदी की सिसकी सुनकर मैंने अपने हांथो की गति बढ़ा दी और दीदी की छूट को मसल मसल कर लाल करने लगा. मैंने अपना होठ दीदी के होंठो से अलग किया और उनकी गार्डन को चूमने लगा. थोड़ी देर गार्डन चूमने और उनकी छूट मसलने के बाद मैंने अपने हाँथ से दीदी की t-shirt पकड़ कर ऊपर करने लगा. दीदी ने हाँथ ऊपर करके अपनी t-shirt उतरने में मेरा सहयोग करने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की t-shirt उतारकर जमीन पर फेंक दी दीदी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी नई थी इसलिए दीदी की चूचिया नंगी हो गयी थी. उनकी t-shirt उतारते hi दीदी ने अपने हांथो से मेरी t-sirt भी उतर दी और मुझसे कसकर लिपट गई.
दीदी मुझसे लिपटने के बाद अपनी चूचिया जोर जोर से मेरे साइन में रगड़ने लगी और अपने होंठो से मेरी गार्डन और कंधे को किश करने लगी. मैं हाँथ उनकी पीठ पर ले जाकर उनकी पीठ को सहलाने लगा और एक हाँथ उनकी गांड पर रखकर उनकी गांड दबाने लगा. थोड़ी देर धीरे धीरे उनकी गांड दबाने के बाद मैंने दीदी की गांड अपने हाँथ में भर ली और जोर से दबा दिया. दीदी सिसक पड़ी और सिसकते हुवे वो अपनी चुकी जोर जोर से रगड़ने लगी.
सविता दीदी- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ. ऐसी ही दबा मेरी गण्ड को. तुझी यी बहुत्त परेशां करती है न. मसल डॉल इनको. इतना मसल की ये लाल्ल्ल हो जाईए. मैं तेरे साइन से रगड़ रगड़ कर अपनी चूचिया लाल कर रही हूँ. ऊऊऊओह्ह्ह्ह भाईईई. चू बहुत्त अच्छा है री.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपने से दूर किया और उनकी एक चुकी को पकड़कर मसलते हुवे एक हाँथ से उनकी लोअर उतरने लगा. दीदी की छूट के पानी से लोअर गीली हो गयी थी. इसलिए वो उनकी छूट के साथ चिपकी हुई थी. मैंने अपने एक हाँथ से उनकी लोअर उतर दी और दीदी को नंगा कर दिया. दीदी ने अपने पैरो से लोअर निकल दी अब दीदी नागि थी. दीदी नंगी होने के बाद निचे जमीन पर बैठ गयी थी और अपने हांथो से मेरे लोअर उतरने लगी. दीदी ने मेरी लोअर उतर कर दरवाज़े के पास फेंक दी और मेरे लुंड को पकड़कर सहलाने लगी.
थोड़ी देर लुंड को सहलाने के बाद दीदी ने लुंड पर अपनी जुबान फिरै और चाटने लगी. दीदी पूरी जुबान बहार निकल कर लुंड चाट रही थी. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और लुंड को अपने मुंह में ले लिए और चूसने लगी. दिदिने अपने हांथो से मेरी गोटियों को भी सहलाना शुरू कर दिया था. दीदी मेरे लुंड को पहले धीरे धीरे चूस रही थी फिर पूरा मुंह खोलकर जोर जोर से चूसने लगी. मैं दीदी के सर को पकड़कर जोर जोर से स्ट्रोक लगाकर दीदी के मुंह को छोड़ने लगा और बोलने लगा.
मैं- आआह्ह्ह्हह्ह सविता. ऐसी ही चुसो मेरे लुंड को. अच्छी तरह से गिला कर दो इसी ताकि मैं तुम्हरी छूट की अचे से ठुकाई कर saku.aoooooooooooohh बहना. मेरी रणीय.
मैं दीदी के मुंह में कुछ देर तक धक्के लगता रहा फिर मैंने अपना लुंड उनके मुंह से निकल लिया और उन्हें पकड़कर खड़ा किया दीदी को उठाकर सेल्फ पर बैठा दिया और उनकी टैंगो के बिच खड़ा होकर उनकी आँखों में देखने लगा.
उनकी आँखों में देखते हुवे मैं झुका और अपनी जीभ निकल कर उनकी छूट चाट लिया और एक हाँथ से उनकी चुकी को दबा दिया. दीदी की छूट एकदम पानी पानी हो गयी थी. मैं जीभ से पूरी छूट चाट रहा था और छूट को मुंह में भरकर चूस रहा था. दीदी भी मस्ती में मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबा रही थी. मैंने अपने हाँथ से दीदी की चुकी को मुट्ठी में भरकर मसल दिया और दीदी की छूट को मुंह में भर कर चूस लिया. दीदी एकदम छुडासी होकर बोल पड़ी.
सविता दी- ooooooooooohhhhhhhhh सैया. मेरीए छूट मी आग जल रही हैई. इसी बुझा दोऊ भायी. मेरी छूट में अपना हलब्बी लैंड डालकर इसकी प्यास बुझा दो. ऊऊह्ह्ह्ह
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की छूट से अपना मुंह हटा लिया और अपने लुंड को पकड़कर दीदी की छूट पर सेट किया और एक हाँथ से उनकी चुकी पकड़ ली. दिदिने भी अपना दोनों हाँथ पीछे सेल्फ पर रख दिया. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपनी कमर को झटका दिया मेरा लुंड आधा दीदीकी छूट में समां गया. दी के मुंह से आआआहहहहहहह अभी निकला और उनकी आँखे मस्ती में बंद हो गयी. मैंने अपने लुंड को टोपे तक उनकी छूट से बहार निकला और एक जोरदार धक्का उनकी छूट पर मार दिया. दीदी की चीख निकल गयी और मेरा लुंड जड़ तक उनकी छूट में समां गया.
सविता दी- ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइ. aaaaaaaaahhhhhhhhhh धीरे कररर भाआईई . माज़ा आता हैई. फारिये मेरीए छूट को भाई आआह्ह्ह्हह्ह. आह्हः ऐसे hi छोड़ो अपनी दीदी को.
मैं दीदी की चीख सुनकर अपने धक्के के स्पीड बढ़ा दी और हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. कुछ देर तक दीदी की छूट को सेल्फ पर छोड़ने के बाद मैंने दीदी की दोनों गांड को अपने हांथो से पकड़कर अपनी गॉड में उठा लिया. दीदी की गांड पकड़ने से दीदी को थोड़ा दर्द हुवे और वो सससससस सससस की आवाज़ करने लगी. मैंने दीदी की गांड से हाँथ हटाया और उनकी जांघो से दीदी को पकड़कर अपने लुंड पर बैठा लिया और खड़े खड़े दी को छोड़ने लगा. दीदी ने अपना हाँथ मेरी गर्दन पर दाल दिया. मैं झुककर दीदी की एक चुकी को मुंह में भर लिया और दीदी को छोड़ते हुवे उनकी चुकी पिने लगा.
मैं दीदी को गॉड में उठाये हुवे छोड़ रहा था. दीदी चुदाई से मस्त होकर अपनी कमर उठा उठाकर मेरे लुंड पर पटक रही थी. थोड़ी देर तक दीदी को धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने अपनी स्पीड और बछड़ा की और दीदी को उठा उठाकर अपने लुंड पर पटकने लगा. दीदी मस्ती में बोलने लगी.
सविता दी- आआआआअह्हह्ह्ह्ह अभीयी. ऐसे hi छोड़ मुझी. बहुत अच्छा लग रहा हैई राजा. ऐसे hi छोड़ो अपनी रानी को आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपनी गॉड से उतर दिया और दीदी को सेल्फ के सहारे झुककर खड़ा किया और दीदी के पीछे आकर उनकी कमर को पकड़कर उनकी छूट में अपना लुंड सेट करके एक जोरदार धक्का मारा. मेरा पूरा लुंड दीदी की छूट में समां गया. दीदी की दर्द से सिसकारी निकल गयी.
सविता di-ooooooohhhhhhhh मम्मीयिययी. मारर डाला री. oooooooooohhhhhhh ABhiiii.meri प्यासी छूट को बहुत्त दीनू बाद ऐसा मज़ा मिल रहा हैईईई. चू मेरीए प्यास भाली ही बुझा रहा haii.maagarrr मेरीए प्यास दिन बा दिन्नं बढ़तीइ जा रही हैई ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पट्ट नाहीइ मेर्री छूट कोई प्यास काबबब कामम hogiiii.uuuuuuufffffffff भईईई टेरिइइइ वजह सीए आजजज तेरई बहाणं इतनीई खूसष्ठ रहत्तीए हीी. टेरिइइइ वजाहहह सी मैंनं आजजज टेरिइइइइ रण्डी बननंगैईहूंणन आआअह्ह्ह्ह औरर जोरर सी छोड़ू बहई मैंन झाड़ड़ड़ रहियी होऊ. तेरी बहाणं का पनीइ निकालल रहा हैई. ऊऊओह्ह मैं गयी सम्भालूमुझेई अभियई आआआहहहहहहह
दीदी इतना कहकर झाड़ गई. मैं अब भी उनको हचक हचक्क कर छोड़ रहा था 10-12 जोर दर धक्के लगन ेके बाद मैं भी झड़ने वाला हो गया था. इसलिये मैं भी बड़बड़ाते हुवे उनकी छूट में झड़ने लगा.
मैं- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सविता सलीईई. चू मेरीए रद्द हीी. ली मेरा पनीइ निकाल राहहह यही तेरई छूट मई मैंन झाड़ रहा हूँ. ऊऊओह्ह्ह्हह्ह सविता. मैं भी गया ररी.
इतना कहकर मैं भी दीदी की छूट में झाड़ गया और दीदी के ऊपर लड़ गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
सुबह मैं दिन चढ़े उठा तो दीदी अभी भी सो रही थी. दीदी सोती हुई बहुत प्यारी लग रही थी. मैं दीदी के गाल पर एक चुम्मा लिया और बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चला गया. फ्रेश होकर आया तो दीदी अभी भी सो रही थी. मैंने दीदी को जगाया. दीदी ने उठकर बाथरूम जाने लगी, लेकिन वो अभी भी लंगड़ा रही थी. दीदी बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई और तौलिये से मुंह पोछते हुवे बहार आयी. मैंने दीदी से कहा.
मैं- क्या हुवा दीदी. लंगड़ा कर क्यों चल रही हो.
दीदी मेरी बात सुनकर मुझे मरने लगी. में अपने आपको बचने के लिए दीदी की पकड़ लिया और बिस्टेर पर धकेल दिया और उनको किश करने लगा. दीदी मेरे किश का जवाब दे रही थी. थोड़ी देर किश करने के बाद मैंने अपना हाथ बढाकर उनकी चूचियों पर रख दिया और मसलने लगा. दीदी मचलने लगाई और बोली.
सविता दी- नही अभी मत कर, नहीं तो मैं फिर से गरम हो जाउंगी. मैं अभी इस कंडीशन में नहीं हूँ की तेरा लुंड ले सकूँ, मुझे अभी आराम की जरूरत है.
दीदी की बात मानकर मैंने दीदी को छोड़ दिया और दीदी से कहा.
मैं- ऐसा करिये आप आज सारा दिन आराम कीजिये. मैं खाना बहार से माँगा लूंगा. अभी आप आराम कीजिये तब तक मैं चाय बनाकर लता हूँ.
इतना कहकर मैं दीदी को बैडरूम में छोड़कर किचन में चला गया. मैंने किठचें में जाकर छाई बनाना शुरू कर दी. मैंने एक प्लेट में कुछ बिस्किट्स और नमकीन निकल लिया और चाय बन जाने के बाद उसे छ्ह कर दो कप में निकला और ट्रे में रखकर दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. थोड़ी देर बाद मैं कमरे में था. मैंने दीदी को चाय ऑफर की. उन्होंने कप उठा लिए और पिने लगी. मैं भी बिस्टेर पर बैठकर चाय पिने लगा. चाय पिने के बाद मैंने बरतें किचन में रख और आकर दीदी के पास बैठ गया. दीदी ने पेनकिलर मांगी तो मैंने उन्हें पेनकिलर डरोएर से निकल कर दे दी. दी ने दवा खा ली और बिस्टेर पर आराम करने के लिए लेट गयी.
मैं भी दीदी के साथ लेते गया. कुछ देर लेते रहने के बाद मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने फ़ोन देखा तो वो मनीषा की कॉल थी. मैंने फ़ोन स्पीकर में डाला और दीदी को दे दिया. दीदी ने फ़ोन लेकर और कहा.
सविता दी- hello मनीषा.
मनीषा- ओह्ह्ह hello दीदी. कैसी हैं आप.
सविता दी- मैं ठीक हूँ मनीषा. तुम और सरिता कैसी हो और घर वाले कैसे हैं.
मनीषा- मैं भी ठीक हूँ दीदी और भरवले और सरिता दीदी भी बढ़िया हैं. सरिता दी तो मेरे पास hi हैं. आप बात करिये उनसे.
सविता दी- हाँ सरिता कैसी छूट ुम. पढाई कैसी चल रही है तुम दोनों की.
सरिता दी- मैं बढ़िया हूँ दीदी. और आप कैसी हैं.
सविता दी- ठीक हों मैं भी.
मैं- नहीं सरिता दीदी, सविता दीदी ठीक नहीं हैं. ये झूठ बोल रही हैं.
सरिता दी- क्यों क्या हुवे दीदी को. कही तूने तो कुछ उल्टा सीधा नहीं किया. जिससे दीदी की तबियत ख़राब हो गयी है.
मैं- मैंने क्या किया है. ये आज लंगड़ा लंगड़ा कर चाल रही हैं. और पूछने पर बता नहीं रही हैं.
जब मैंने ये बात सरिता दीदी से बोली तो सविता दीदी मुझे आँखे दिखाकर घोर रही थी. और मुझे छुप रहने का इशारा कर रही थी. सरिता दीदी मेरी बात सुनकर समझ गई की सविता दीदी की गांड का उद्घाटन हो चुक्का है. फिर भी वो दीदी माँ मज़ा लेने के लिए बोली.
सरिता दी- क्या हुवा दीदी आप लंगड़ा कर क्यों चल रही हैं. कही अभी ने कुछ उलटी सीधी हरकत की. जिससे आपको चोट लग गयी हो. जिसके कारन आप लंगड़ा कर चल रही हैं.
सविता di(mujhe घूरते हुवे). अरे नहीं सरिता. ऐसी कोई बात नहीं है. बात ये है की कल रात में मैं बाथरूम में फिसल कर गिर गयी थी. रात में तो कुछ नहीं हुवे, लेकिन अभी बहुत दर्द कर रहा है, इसलिए लंगड़ा कर चल रही हूँ.
सरिता दी- तुम बच गए अभी. नहीं तो अगर दीदी को तुम्हारी वजह से चोट आई होती तो मैं तुमको बहुत मरती. अच्छा ये सब छोडो का बा रहे हैं आप दोनों यहाँ.
सविता दी- अभी तो दो दिन मुश्किल है. मुझे ठीक होने में समय लगेगा. उसके बाद आ जाउंगी.
सरिता दी- अबे गधे. तू अब कही घूमने मत जाना और दीदी का पूरा ख्याल रखने. नहीं तो तेरी खैर नहीं.
मैं- (सविता दी को आँख मरते हुवे) अरे दीदी अब बिलकुल भी फ़िक्र मत करिये. मैं दीदी का बहुत अचे से ख्याल रखूँगा, दीदी की मैं बहुत खिदमत करूँगा. देखना दीदी खुद आपसे मेरी तारीफ करते नहीं. थकेंगी. अच्छा अब फ़ोन रखिये बाद में बात करते हैं.
इतना बोलकर मैंने फ़ोन रख दिया. फ़ोन रखने के बाद दीदी मुझे मरने लगी और बोली.
सविता दी- क्या जरुरत थी सरिता से ये बात बताने की की मैं लंगड़ा कर चल रही हूँ. कही उसको कोई शक हो जाता तो. तू भी न.
मैं- कैसी बाते कर रही हो दीदी. सरिता दीदी आप पर और मुझपर शक करेंगी की हम दोनों ने चुदाई की है. इसलिए आप लंगड़ा कर चल रही हैं. ओह्ह्ह के ों यार. कुछ्ह तो लॉजिक वाली बात करो आप.
सविता दी- अच्छा चल बड़ा आया लॉजिक वाली बात करने. अब खाना आर्डर कर दे. भूख लग रही है.
दीदी की बात मानकर मैंने खाना आर्डर कर दिया. थोड़ी देर बाद खाना भी आ गया. मैंने खाना लिया और रसोई से जाकर एक प्लेट ली और उसे लेकर दीदी के बेडरूम में चला गया. मैंने वह खाना प्लेट में निकला और मैं और दीदी खाने लगे. एक दूसरे को खिलने लगे. थोड़ी देर में हम दोनों ने खाना फिनिश किया. खाना खाने के बाद मैंने प्लेट किचन में राखी और आकर दीदी के पास बैठ गया और कहा.
मैं- दीदी. टिकट तो मैंने कल दोपहर 2 बजे की निकली है. तो कल hi निकल चलते हैं घर. और टिकट अवेलेबल नहीं है एक हफ्ते के लिए.
मेरी बात सुनकर दीदी ने ोकक कह दिया. फिर हम दोनों कुछ देर बाते करने के बाद सो गए. शाम को जाकर मेरी नींद खुली तो मैंने उठकर चाय बनाई और दो कप में डालकर दीदी के पास आया और एक कप उन्हें पकड़ा दी. चाय पिने के बाद मैंने कप लेकर किचन में आया और बर्तन साफ किय और दीदी के पास आ गया. रत हुई तो मैंने फिर से खाना आर्डर किया. कुछ देर में खाना aaya.to मैंने और दीदी ने खाना खाया और बिस्टेर पर लेट गए. बिस्टेर पर लेट कर मैंने दीदी से कहा.
मैं- दीदी. मैं घर जाने से पहले आपको एक बार और छोड़ना चाहता हूँ. पता नहीं घर जाने के बाद मौका मिले या न मुले.
सविता दी- नहीं अभी. आज्ज नही. थोड़ा और आराम कर लुंगी तो बिलकुल ठीक हूँ जाउंगी. लेकिन कल जाने से पहले पक्का तेरी ख्वाहिश पूरी करुँगी. अब चुपचाप से जा.
दीदी की बात सुनकर मैं दी और करीब आ गया और अपने होंठो से उनके होंठ चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैं दीदी से अलग हुवा. फिर दीदी ने गुड़ नाईट बोलै और हम दोनों सो गए.
अगले दिन मैं शावर की आवाज़ सुनकर उठा. मैं बीएड पर वैसे hi लेता रहा. थोड़ी देर बाद बाथरूम का दरवाज़ा खुला और दीदी एक छोटी सी टॉवल अपने जिस्म में लप्पेट कर बहार आयी. उसमे से दीदी की आधी चूचिया बहार दिखाई दे रही थी. टॉवल उनकी जांघो तक hi था.
जिसमे से दीदी की सेक्सी पिण्डलिया भी दिखाई दे रही thi.ye देखते hi मेरा लुंड खड़ा हो गया और मैं उसे अपने लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और दबाने लगा. दीदी मुझे देखकर हंसने लगी. मैं उठकर दीदी के पास जाने लगा तो दीदी ने मुझे रोकक दिया और मुझसे कहा.
सविता दी- देख अभी मैंने अभी अभी स्नान किया है. और मुझे खाना बनाना है. तू अभी तू कुछ भी उल्टा सीधा करने की सोचना भी मत. अभी मुझे खाना बनाना है.
इतना कहकर दीदी दूसरे कमरे में चली गयी और कपडा बदलने लगी. मैं भी बाथरूम में चला गया और फ्रेश होने लगा. फ्रेश होने के बाद मैंने भी स्नान किया और बाथरूम से बहार आकर कपडे पहने और किचन में चला गया. दीदी किचन में खाना बना रही थी. दी ने एक लोअर और t-shirt पहन कर खाना बना रही थी. मैं भी जाकर दीदी के पीछे से चिपक कर खड़ा हो गया और उन्हें बहो में भर लिया.
दीदी ने भी कुछ नहीं कहा और खाना बनती रही. मैंने अपना होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी ने कन्धा उचककर मुझे मन किया लेकिन मैं नहीं मन और दी का कन्धा चूमते हुवे अपना हाँथ आगे बढाकर उनकी चूचियों को पकड़ा लिया और दबा दिया. दीदी ने घूमकर मेरी आँखों में देखते हुवे मुझे अपने से दूर किया और कहा.
सविता दी- खाना बनाने दे अभी. जरा भी सबर नाम की चीज नहीं है तेरे अंदर.
दीदी की बायत सुनकर मैं किचन में hi प्लेटफॉर्म से लगकर खड़ा हो गया और दीदी को खाना बनाते हुवे देखता रहा. दीदी रोटी बना रही थी. रोटी बनाते हुवे दी हिल रही थी. जिसके कारन उनकी चूचिया भी थिरक रही थी. मेरा लुंड ये देखकर खड़ा हो गया था. मैं अपने लुंड को अपने हाँथ से पकड़ लिया और लोअर के ऊपर से hi सहलाने लगा. दीदी ने जब मुझे लुंड सहलाते हुवे देखा तो वो बोली.
सविता दी- हद ही यार. बिलकुल भी सबर नहीं है तेरे अंदर. और ये तो हमेशा खड़ा रहता है.
मैं- अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ. आप हो hi ऐसी की आपको देखकर मेरा खड़ा हो जाता है.
दीदी इन सब बातो के दौरान खाना बना चुकी थी. उन्होंने रस्ते के लिए खाना पैक किय और दो थाली में खाना निकल कर उसे धक् दिया और झूठे बर्तन सिंक में रखकर धुलने लगी. दीदी बर्तन धुलने लगी और में दीदी के पीछे खड़ा दीदी की हिलती हुई गांड देखने लगा. मैं चलता हुवा दीदी के पास पहुंच गया और उनके पीछे कड़ा होकर अपना हाँथ उनके कंधे पर रख दिया. दीदी ने गार्डन घुमाकर एक नज़र मुझे देखा और फिर गार्डन आगे करके बर्तन धुलने लगी. मैं थोड़ा और आगे हुवा और दीदी से एकदम सत्कार खड़ा हो गया मैंने अपना हाँथ निचे किया और अपने लुंड को पकड़कर सीधा किया और अपने कमर को पूरी तरह उनकी गांड से चिपका दिया. मेरा लुंड लोअर समेत दीदी की गांड में घुस गया. मैंने अपना हाँथ बढाकर दीदी की दोनों चूचियों पर रख दिया. बर्तन धोते हुवे दीदी ने कहा.
सविता दी- इतना उतावला क्यों हो रहा है. मैं कही भागी तो नहीं जा रही हूँ. बर्तन तो धूल लेने दे.
मैं- तो मैं कहा आपकी मन कर रहा हूँ. आप अपना काम करिये. मैं अपना काम कर रहा हूँ.
मेरी बैठत सुनकर दीदी फिर से बर्तन धुलने लगी. मैंने अपने होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी बर्तन साफ करते हुवे आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊओह्ह्ह्हह की आवाज़ निकलने लगी. मैं दीदी की गार्डन चूमते हुवे उनके नंगे कंधे को भी चूमने लगा. मैंने दीदी की दोनों चूचियों को मुठी में भर लिया और अपने लुंड को पीछे किया और एक झटका मार्कर अपना लुंड दीदी की गांड की दरार में घुसा दिया और दोनों चूचियों को कसकर मीज दिया. दीदी दर्द से कराह उठी.
सविता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. क्या कररर रहा हीी. इतनी तीज़ज़ सी मैट दबाआ. ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी. थोड़ा धीरे se.thodaa प्यार से.
दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने उनकी चूचिया धीरे धीरे दबनी शुरू कर दी. दीदी अब तक बर्तन धो चुकी थी. मैंने दीदी को पलटकर स्लैब से चिपकाकर अपनी तरफ घुमाया और उनकी आँखों में देखने लगा. मैंने दी की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. मैंने एक हाँथ दीदी की चुकी पर रख दिया और दबाने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचिया दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ सरका कर उनकी लोअर के उप्पेर उनकी छूट पर रख दिया. दीदी का लोअर थोड़ा गिला हो गया tha.main दीदी के होंठ चूमता हुवे अपने हाँथ से दीदी की छूट को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा. दीदी मस्ती में अपने होंठ मुझसे छुड़ाकर बोली.
सविता दी- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह AAAAAAAAAAAhhhhhhhhh अभियई. मास्साललल दी मेरीए छुटत कोऊ बहुत्त परेशाननं करतीय हैई यी तेरई डीडीई कोऊ. हमेशा रोटी रहत्ती हैई. ऑर्डर जोररर सी मसअल लाल कर दी भाई इनको. तेरी लिये ही तू आज तक्क इसको बचाकर रखा हैई मिनी. ोुह्ह्हह्हह्हं
दीदी की सिसकी सुनकर मैंने अपने हांथो की गति बढ़ा दी और दीदी की छूट को मसल मसल कर लाल करने लगा. मैंने अपना होठ दीदी के होंठो से अलग किया और उनकी गार्डन को चूमने लगा. थोड़ी देर गार्डन चूमने और उनकी छूट मसलने के बाद मैंने अपने हाँथ से दीदी की t-shirt पकड़ कर ऊपर करने लगा. दीदी ने हाँथ ऊपर करके अपनी t-shirt उतरने में मेरा सहयोग करने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की t-shirt उतारकर जमीन पर फेंक दी दीदी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी नई थी इसलिए दीदी की चूचिया नंगी हो गयी थी. उनकी t-shirt उतारते hi दीदी ने अपने हांथो से मेरी t-sirt भी उतर दी और मुझसे कसकर लिपट गई.
दीदी मुझसे लिपटने के बाद अपनी चूचिया जोर जोर से मेरे साइन में रगड़ने लगी और अपने होंठो से मेरी गार्डन और कंधे को किश करने लगी. मैं हाँथ उनकी पीठ पर ले जाकर उनकी पीठ को सहलाने लगा और एक हाँथ उनकी गांड पर रखकर उनकी गांड दबाने लगा. थोड़ी देर धीरे धीरे उनकी गांड दबाने के बाद मैंने दीदी की गांड अपने हाँथ में भर ली और जोर से दबा दिया. दीदी सिसक पड़ी और सिसकते हुवे वो अपनी चुकी जोर जोर से रगड़ने लगी.
सविता दीदी- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ. ऐसी ही दबा मेरी गण्ड को. तुझी यी बहुत्त परेशां करती है न. मसल डॉल इनको. इतना मसल की ये लाल्ल्ल हो जाईए. मैं तेरे साइन से रगड़ रगड़ कर अपनी चूचिया लाल कर रही हूँ. ऊऊऊओह्ह्ह्ह भाईईई. चू बहुत्त अच्छा है री.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपने से दूर किया और उनकी एक चुकी को पकड़कर मसलते हुवे एक हाँथ से उनकी लोअर उतरने लगा. दीदी की छूट के पानी से लोअर गीली हो गयी थी. इसलिए वो उनकी छूट के साथ चिपकी हुई थी. मैंने अपने एक हाँथ से उनकी लोअर उतर दी और दीदी को नंगा कर दिया. दीदी ने अपने पैरो से लोअर निकल दी अब दीदी नागि थी. दीदी नंगी होने के बाद निचे जमीन पर बैठ गयी थी और अपने हांथो से मेरे लोअर उतरने लगी. दीदी ने मेरी लोअर उतर कर दरवाज़े के पास फेंक दी और मेरे लुंड को पकड़कर सहलाने लगी.
थोड़ी देर लुंड को सहलाने के बाद दीदी ने लुंड पर अपनी जुबान फिरै और चाटने लगी. दीदी पूरी जुबान बहार निकल कर लुंड चाट रही थी. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और लुंड को अपने मुंह में ले लिए और चूसने लगी. दिदिने अपने हांथो से मेरी गोटियों को भी सहलाना शुरू कर दिया था. दीदी मेरे लुंड को पहले धीरे धीरे चूस रही थी फिर पूरा मुंह खोलकर जोर जोर से चूसने लगी. मैं दीदी के सर को पकड़कर जोर जोर से स्ट्रोक लगाकर दीदी के मुंह को छोड़ने लगा और बोलने लगा.
मैं- आआह्ह्ह्हह्ह सविता. ऐसी ही चुसो मेरे लुंड को. अच्छी तरह से गिला कर दो इसी ताकि मैं तुम्हरी छूट की अचे से ठुकाई कर saku.aoooooooooooohh बहना. मेरी रणीय.
मैं दीदी के मुंह में कुछ देर तक धक्के लगता रहा फिर मैंने अपना लुंड उनके मुंह से निकल लिया और उन्हें पकड़कर खड़ा किया दीदी को उठाकर सेल्फ पर बैठा दिया और उनकी टैंगो के बिच खड़ा होकर उनकी आँखों में देखने लगा.
उनकी आँखों में देखते हुवे मैं झुका और अपनी जीभ निकल कर उनकी छूट चाट लिया और एक हाँथ से उनकी चुकी को दबा दिया. दीदी की छूट एकदम पानी पानी हो गयी थी. मैं जीभ से पूरी छूट चाट रहा था और छूट को मुंह में भरकर चूस रहा था. दीदी भी मस्ती में मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबा रही थी. मैंने अपने हाँथ से दीदी की चुकी को मुट्ठी में भरकर मसल दिया और दीदी की छूट को मुंह में भर कर चूस लिया. दीदी एकदम छुडासी होकर बोल पड़ी.
सविता दी- ooooooooooohhhhhhhhh सैया. मेरीए छूट मी आग जल रही हैई. इसी बुझा दोऊ भायी. मेरी छूट में अपना हलब्बी लैंड डालकर इसकी प्यास बुझा दो. ऊऊह्ह्ह्ह
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की छूट से अपना मुंह हटा लिया और अपने लुंड को पकड़कर दीदी की छूट पर सेट किया और एक हाँथ से उनकी चुकी पकड़ ली. दिदिने भी अपना दोनों हाँथ पीछे सेल्फ पर रख दिया. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपनी कमर को झटका दिया मेरा लुंड आधा दीदीकी छूट में समां गया. दी के मुंह से आआआहहहहहहह अभी निकला और उनकी आँखे मस्ती में बंद हो गयी. मैंने अपने लुंड को टोपे तक उनकी छूट से बहार निकला और एक जोरदार धक्का उनकी छूट पर मार दिया. दीदी की चीख निकल गयी और मेरा लुंड जड़ तक उनकी छूट में समां गया.
सविता दी- ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइ. aaaaaaaaahhhhhhhhhh धीरे कररर भाआईई . माज़ा आता हैई. फारिये मेरीए छूट को भाई आआह्ह्ह्हह्ह. आह्हः ऐसे hi छोड़ो अपनी दीदी को.
मैं दीदी की चीख सुनकर अपने धक्के के स्पीड बढ़ा दी और हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. कुछ देर तक दीदी की छूट को सेल्फ पर छोड़ने के बाद मैंने दीदी की दोनों गांड को अपने हांथो से पकड़कर अपनी गॉड में उठा लिया. दीदी की गांड पकड़ने से दीदी को थोड़ा दर्द हुवे और वो सससससस सससस की आवाज़ करने लगी. मैंने दीदी की गांड से हाँथ हटाया और उनकी जांघो से दीदी को पकड़कर अपने लुंड पर बैठा लिया और खड़े खड़े दी को छोड़ने लगा. दीदी ने अपना हाँथ मेरी गर्दन पर दाल दिया. मैं झुककर दीदी की एक चुकी को मुंह में भर लिया और दीदी को छोड़ते हुवे उनकी चुकी पिने लगा.
मैं दीदी को गॉड में उठाये हुवे छोड़ रहा था. दीदी चुदाई से मस्त होकर अपनी कमर उठा उठाकर मेरे लुंड पर पटक रही थी. थोड़ी देर तक दीदी को धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने अपनी स्पीड और बछड़ा की और दीदी को उठा उठाकर अपने लुंड पर पटकने लगा. दीदी मस्ती में बोलने लगी.
सविता दी- आआआआअह्हह्ह्ह्ह अभीयी. ऐसे hi छोड़ मुझी. बहुत अच्छा लग रहा हैई राजा. ऐसे hi छोड़ो अपनी रानी को आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपनी गॉड से उतर दिया और दीदी को सेल्फ के सहारे झुककर खड़ा किया और दीदी के पीछे आकर उनकी कमर को पकड़कर उनकी छूट में अपना लुंड सेट करके एक जोरदार धक्का मारा. मेरा पूरा लुंड दीदी की छूट में समां गया. दीदी की दर्द से सिसकारी निकल गयी.
सविता di-ooooooohhhhhhhh मम्मीयिययी. मारर डाला री. oooooooooohhhhhhh ABhiiii.meri प्यासी छूट को बहुत्त दीनू बाद ऐसा मज़ा मिल रहा हैईईई. चू मेरीए प्यास भाली ही बुझा रहा haii.maagarrr मेरीए प्यास दिन बा दिन्नं बढ़तीइ जा रही हैई ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पट्ट नाहीइ मेर्री छूट कोई प्यास काबबब कामम hogiiii.uuuuuuufffffffff भईईई टेरिइइइ वजह सीए आजजज तेरई बहाणं इतनीई खूसष्ठ रहत्तीए हीी. टेरिइइइ वजाहहह सी मैंनं आजजज टेरिइइइइ रण्डी बननंगैईहूंणन आआअह्ह्ह्ह औरर जोरर सी छोड़ू बहई मैंन झाड़ड़ड़ रहियी होऊ. तेरी बहाणं का पनीइ निकालल रहा हैई. ऊऊओह्ह मैं गयी सम्भालूमुझेई अभियई आआआहहहहहहह
दीदी इतना कहकर झाड़ गई. मैं अब भी उनको हचक हचक्क कर छोड़ रहा था 10-12 जोर दर धक्के लगन ेके बाद मैं भी झड़ने वाला हो गया था. इसलिये मैं भी बड़बड़ाते हुवे उनकी छूट में झड़ने लगा.
मैं- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सविता सलीईई. चू मेरीए रद्द हीी. ली मेरा पनीइ निकाल राहहह यही तेरई छूट मई मैंन झाड़ रहा हूँ. ऊऊओह्ह्ह्हह्ह सविता. मैं भी गया ररी.
इतना कहकर मैं भी दीदी की छूट में झाड़ गया और दीदी के ऊपर लड़ गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..