Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 14 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-124

मनीषा- ऐसा है भैया. आप चुप hi रहिये. नहीं तो मैं अभी फ़ोन करने जा रही हूँ पापा को. आपसे बाद में बात करुँगी. पहले दीदी से तो निपट लू. हाँ तो बताइये दीदी. इस बात का तो पापा को पता चलना hi चाहिए की उनकी लाड़ली बेटी अपने भाई के साथ क्या क्या गुल खिला रही है.

सरिता di(rote हुवे)- ऐसा मत करना मनीषा. पापा को मत बताना. नहीं तो मैं मर जाउंगी. मैं पापा को मुंह नहीं दिखा पाऊँगी. मैं सकते कर लुंगी. मैं ये कलंक लेकर नहीं जी पाऊँगी. मुझे माफ़ कर दे मनीषा. तू जॉब hi सजा देगी मुझे मंज़ूर है.

दीदी की बात सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. उसने अपने प्लान की पहली सीधी पर कर ली थी.

अब आगे.

दीदी ने जो बात कही थी किट ुम जो भी सजा डौगी मुझे मंजूर होगी उसे सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी, लेकिन उसने तुरंत अपने चेहरे पर गुस्सा लाया और दीदी से मुखातिब होते हुवे कहा.

मनीषा- सजा तो आप दोनों को अब पापा देंगे. मैं अभी पापा को फ़ोन करके सब बताती हूँ.

इतना कहकर मनीषा ने अपना फ़ोन हाँथ में लिया और उसमे किछ करने लगी. सरिता दीदी ने तुरंत उसके हाँथ पकड़ लिए और मिन्नत भरी आवाज़ में बोली.

सरिता दी- प्ल्ज़ मनीषा पापा को मत बताओ. मैं पापा की नज़रो में गिरकर नहीं जीना चाहती. तू मुझे माफ़ कर दे और एक मौका दे. मैं तुझसे वडा करती हूँ की जो चाहेगी मैं वो करुँगी.

मनीषा अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लेकर बोली.

मनीषा- ठीक है दीदी जब आप इतना कह रही हैं तो मैं पापा को कुछ नहीं बताउंगी. लेकिन उसके लिए आप दोनों को सजा मिलेगी. और मैं जो कहूँगी आपको मेरी बात man-ni होगी.

सरिता दी- ठीक है मनीषा. तुम जो कहोगी मैं वो सब करुँगी, लेकिन पापा को ये बात मत बताना.

मनीषा- एक बार और सोच लो दीदी, कही मेरी बात सुनकर आप मुकर गई तो.

सरिता दी- मैं नहीं मुकरूंगी. मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी, तुम एक बार कहो तो सही.

दीदी की बात सुनकर मनीषा ने अपना हाँथ बढाकर दीदी के आँशु साफ किये. और अपना हाँथ दीदी के सर के पीछे मज़बूती से पकड़कर दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मनीषा- सच में आप मेरी हार बात मानोगी.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिला दी. तो मनीषा ने अपना सर आगे झुकाया और अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए. ऐसा करते hi दीदी को एक झटका सा लगा और वो मनीषा को अपने से दूर धकेलने लगी, लेकिन मनीषा ने दीदी का सर पकड़ा हुवा था इसलिए दीदी अपने आपको छुड़ा नहीं पाई और कसमसाने लगी. मनीषा ने लगभग 2 मिनट तक दीदी के होंठो को जोर जोर से चूसा और छोड़ दिया. दीदी मनीषा को अपने से दूर धकेला और गुस्से के साथ बोली.



सरिता दीदी- ये क्या बदतमीज़ी है मनीषा. तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो.

दीदी की बात सुनकर मैं और मनीषा मुस्कुराने लगे. दीदी मुझे हँसता देख आँखे फाडे कभी मुझे देखती और कभी मनीषा को देखती. दीदी ने मुझे हँसता देख मुझसे पूछा.

सरिता दी- तुम्हारी हंसी का मतलब है की तुम भी मनीषा के साथ मिले हुवे हो और मेरे साथ ये खेल खेल रहे हो. तुम दोनों को शर्म नहीं आती. मुझे ऐसे जलील करते हुवे.

इतना कहकर दीदी रोने लगी. दीदी को रट देख मैं और मनीषा दीदी के पास गए और उन्हें चुप करवाने लगे. दीदी बार बार मुझे अपने से दूर धकेल रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी नार्मल हुई तो उन्होंने मनीषा और मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- तुम दोनों को मुझे जलील करके क्या मिल गया. और अभी तुमने भी इसका साथ दिया. मैंने तुमको अपना सबकुछ सौप दिया. क्या कमी रह गयी थी मुझमे जो तुमने मेरे साथ ऐसा किया.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी आप पहले चुप हो जाओ. हमने आप को जलील नहीं किया. ये सब मनीषा का प्लान था की हम दोनों को वो रेंज हांथो पकडे और हम दोनों के साथ चुदाई में शामिल हो सके.

मनीषा- हाँ दीदी आप मुझे गलत समझ रही है. मैं तो बस आपको डरा रही थी की आप मेरी बात आसानी से मान जाओ. और मुझे आप दोनों के बारे में शुरू से सब पता था. जब से आप मीरा की बात मानकर भैया को सडके करना शुरू किया तब से आज तक की साडी बाते मुझे पता हैं.

मनीषा की बात सुनकर दीदी का मुंह खुला का खुला रह गया. उन्हें तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की जिन्हे वो इतना सीधा सदा समझती हैं वो बहुत पहुंची हुई चीज़ है. दीदी के मुंह से कोई बोल नहीं फुट रहे थे. मनीषा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.

मनीषा- आपको याद है की सोनम दीदी की शादी में आपको जाना था, लेकिन आपकी जगह मैं चली गई. जानती हैं क्यों, क्योंकि मैं आप सब को बहुत प्यार करती हूँ और मैं आपको खुश देखना चाहती हूँ, इसलिए मैं बहाना बनाकर वह चली गई ताकि आप दोनों को प्राइवेसी मिल सके. अगर मुझे आपको जलील करना होता तो मैं आपको शुरू में hi ऐसा करते हुवे पकड़ लेती और जलील करती.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने हाँ में गार्डन हिला दी. दीदी ने फिर से मनीषा की तरफ देखा. दीदी को अभी भी भरोषा नहीं हो रहा था की मनीषा ने शुरू से लेकर आखिर तक सबकुछ अपनी आँखों से देखा है. दीदी ने लड़खड़ाती हुई जुबान में मनीषा से फिर पूछा.

मनीषा- जब तुम्हे सब पहले से hi पता था. तो तुम पहले क्यों सामने नहीं आई. आज क्यों आई हो.

इस बार मनीषा की जगह मैं बोलै.

मैं- बात ये है दीदी की कल मैंने मनीषा को भी छोड़ दिया और जब मैंने मनीषा की गांड मरने की सोची तो मनीषा ने ये शर्त रख दी की वो मुझसे गांड तभी मरने देगी जब मैं उसकी गांड आपके सामने मरू और आप इसमें उसकी मदद करे.

मेरी बात सुनकर दीदी मुझे और मनीषा को घूर घूर कर देखने लगी और बोली.

सरिता दी- क्या………….. तुमने मनीषा को छोड़ लिया और मुझे बताया तक नहीं और मैंने तुझसे पूछा तो तुमने मन भी कर दिया की तुम दोनों देर रत तक बात करते रहे और तुम तरय करते रहे. लेकिन काम नहीं हुवा.

मनीषा- क्या………. आप दोनों भी यही चाहते थे पहले से hi.

मैं- हाँ मनीषा. मैं तुम्हे छोड़ सकू इसीलिए मैंने दीदी को शर्मा जी के यहाँ जाने के लिए कहा था.

मनीषा- लो ये तो अच्छी बात है. अब तो कोई पर्दा hi नहीं रह गया है और साडी बाटे क्लेयरे भी हो गई हैं तो क्यों न हम तीनो साथ में मिलकर ये खेल खेले.

सरिता दी- लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं हूँ.

मनीषा- क्यों दीदी. मैंने आपके लिए और आपकी ख़ुशी के लिए इतना कुछ किया. सब कुछ जानते हुवे भी कभी मैंने ये बात किसी पर जाहिर नहीं होने दी. और आप दोनों को प्राइवेसी भी दी ताकि आपको वो ख़ुशी भैया से मिल सके जो आप चाहती थी, लेकिन आप मेरी ख़ुशी के लिए इतना भी नहीं कर सकती.

सरिता दी- हाँ. मैं ये नहीं कर पाऊँगी. तुम सबकुछ जानती हो मैं इस बात से अनजान थी, लेकिन अब मुझे पता चल गया है की तुम्हे सब पता है तो मैं तुम्हारे सामने ये सब नहीं कर पाऊँगी.

मनीषा- तो इसका मतलब आप भैया से कभी नहीं छुडवाएंगी. क्योंकि अब आप भी ये जान गई हैं की मुझे सब कुछ पता चल गया है.

मनीषा की बात सुनकर दीदी खामोश हो गई. उन्होंने मनीषा के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. मनीषा ने दीदी को खामोश देखकर फिर कहा.

मनीषा- मैं जानती हूँ की आप भैया से बिना चूड़े अब नहीं रह सकती और अब मेरा भी यही हॉल है. भैया का लुंड आपको भी चाहिए और मुझे भी. तो क्यों न हम दोनों मिलकर साथ में भैया से चुदाई करवाए.

मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ देर के लिए किसी सोच में डूब गई दीदी अपने नाख़ून को अपने दांतो से कुतरने लगी. थोड़ी देर सोचने के बाद दीदी ने अपना सर ऊपर उठाया और कहा.

सरिता दी- लेकिन मनीषा ये ठीक नहीं है. मैं ये सब कैसे कर पाऊँगी. मुझे शर्म आएगी.

दीदी की बात सुनकर मनीषा को अपनी बात बनती हुई नज़र आने लगी. तो मनीषा ने इमोशनल अत्याचार दीदी के ऊपर करना शुरू कर दिया और दीदी से कहा.

मनीषा- ठीक है दीदी. मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ, इसलिए मैंने हमेशा आपकी ख़ुशी चाही है. सोनम दीदी के ः जाने के समय आपने एक वडा मुझसे किया था की मैं आपसे जो कुछ मांगूंगी आप मुझे देंगी. और मैंने उस दिन वो वडा उधर कर दिया था. इसी दिन के लिए, पर शायद आप मुझसे तनिक भी प्यार नहीं करती, इसलिए मैं आपको आपके उस वेड से मुक्त करती हूँ. आप अपनी ख़ुशी में खुश रहिये. मैं किसी को कुछ नहीं बताउंगी. मैं जा रही हूँ और आज के बाद आप दोनों के बिच नहीं आउंगी.

इतना कहकर मनीषा मुड़कर जाने लगी. मुझे भी लगा की अब मनीषा की गांड मुझे कुछ समय मिलने से रही, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था, इसलिए मैं चुप- चाप खड़ा रहा, क्योंकि मुझे कही न कही ये लग रहा था की मनीषा जैसी खुराफाती लड़की इतनी आसानी से तो man-ne वही है नहीं. उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो जरूर चल रहा होगा दीदी को रस्ते पर लेन के लिए.

अभी मनीषा दरवाज़े तक hi पहुंची थी की दीदी ने दौड़कर उसका हाँथ पकड़ लिया और उसको दीवाल से सटाकर कड़ी कर दिया और उसके चेहरे पर अपनी उंगलिया फिरते हुवे बोली.

सरिता दी- तुमने ये कैसे सोच लिए की मैं तुमसे प्यार नहीं करती. मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी इसलिए मैं मन कर रही थी. लेकिन मैंने सोचा की जब तुम मेरे लिए इतना कर सकती हो तो मैं भी तो तुम्हारी ख़ुशी के लिए थोड़ा बहुत तो कर hi सकती हूँ. वैसे भी अब हम सब के बिच कोई सेकरते तो रह नहीं गया है. इसलिए मैं तुम्हारे साथ हूँ मनीषा. अब हम तीनो मिलकर मज़ा करेंगे.

इतना बोलकर दीदी ने अपने होंठ बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया.



मनीषा ने भी अपने होंठ दीदी के होंठो से पूरा सटाकर दीदी के होंठ चूसने लगी. दोनों की होंठ चूसै का कार्यक्रम देख कर मैं बहुत खुश हुवा और चलते हुवे उन दोनों के पास पहुंच गया और पीछे से दीदी की गांड में अपने लैंड घुसकर दीदी की गार्डन को चूमें लगा. दीदी ने अपना होंठ मनीषा के होंठो से अलग किया और पलटकर मेरी तरफ हो गयी और मुझसे बोली.

सरिता दी- आज तुम्हारी छुट्टी है अभी. तुम बस चुपचाप बैठकर नज़ारे का आनंद लो. कल दिन में हम तीनो मिलकर चुदाई करेंगे. अभी तुम आराम से जाकर कुर्सी पर बैठो और हमारी रासलीला का आनंद लो.

दीदी की बात सुनकर मैं आकर कुर्सी पर बैठ गया. दीदी फिर से मनीषा की तरफ घूम गई और उसके होंठो को चूसने लगी. मनीषा ने अपने दोनों हांथो से दीदी के सर को पकड़ा और जोर जोर से दीदी के होंठ चूसने lagi.thodi देर होंठ चूसने के बाद मनीषा और दीदी अलग हुवे और दोनों अपनी अपनी जीभ बहार निकलकर आपस में लड़ने लगी.



मनीषा और दीदी की रासलीला देखते हुवे मुझे भी जोश चढ़ने लगा. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो गया. मैंने भी उन्हें देखते हुवे अपने लोअर के ऊपर से hi अपने लुंड को सहलाने लगा.

दीदी और मनीषा अपनी जीभ आपस में ऐसे लगा लहि थी जैसे दोनों के बिच कोई जुंग चल रही हो. जैसे दो तलवार आपसे में टकरा रही हैं. थोड़ी देर तक दोनों अपनी जीभ लगाती रही उसके बाद मनीषा ने दीदी की जीभ अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. दीदी ने मनीषा के सर को पीछे से पकड़ लिया और अपनी जीभ ज्यादा से ज्यादा मनीषा के मुंह में डालने लगी. मैं कुर्सी बार बैठा अपना लुंड सहला रहा था और इस हसीं नज़ारे का आनंद ले रहा था. मेरी दो मस्त जवान बहाने एक दूसरे के जिस्म से खेल रही थी. वो भी अपने भाई के सामने.

थोड़ी देर दीदी की जीभ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी के मुंह में अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर जीभ अंदर बहार करने के बाद मनीषा ने अपना पूरा मुंह दीदी के मुंह से चिपका दिया और अपनी पूरी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी.



दीदी जोर जोर से मनीषा की जीभ चूस रही थी. थोड़ी देर एक दूसरे की जीभ चूसने के बाद दोनों ने अपना मुंह हटा लिया. दोनों के होंठ एक दूसरे के थूक से साणे हुवे थे. दोनों ने दरवाज़े के पास खड़े होकर मेरी तरफ देखा. फिर दीदी ने मनीषा के कण में कुछ कहा. तो मनीषा ने मेरी तरफ देखा और कहा.



मनीषा- क्यों भैया कैसा लग रहा है अपनी बहनो का लाइव शो देखकर.

मैं- पूछो मत मनीषा. मुझे ऐसे लग रहा है की मुझसे ज्यादा किस्मत वाला कोई भाई नहीं होगा.

सरिता दी- बस तुम बैठकर शो देखो. अभी तुमको बहुत मज़ा मिलेगा.

इतना कहकर मनीषा और दीदी ने एक दुसरे की तरफ देखा और हंसने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रहने और हसने के बाद दीदी अपना होठ आगे की तरफ झुकाया तो मनीषा भी दीदी की तरफ झुककर अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और दोबारा से एक दूसरे के होंठ चलने लगी.



दोनों बहुत जोर जोर से एक दुसरे के होंठ चूस रही थी. मैं उन दोनों को देखकर बस अपना लुंड मसल रहा था. थोड़ी देर लुंड मसलने के बाद मैं कुर्सी से उठकर अपनी लोअर निचे सरका दी और कुर्सी पर बैठ कर अपने नंगे लुंड पर हाँथ फेरने लगा. मनीषा और दीदी अभी भी किश में दूभि हुई थी. दोनों एक दूसरे की जीभ को मुंह में लेकर चूस रही थी. जिससे सस्सप्प्प्प्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ स्स्स्सस्स्स्सप्प्प्पपप्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर बाद दोनों एक दूसरे से अलग हुवे और मेरी तरफ dekha.mujhe नंगा होकर लुंड मसलते देख दोनों मुस्कुराने लगे. सरिता दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दी- ये क्या कर रहे हो अभी. तुमको शर्म नहीं आती अपनी बहन के कमरे में नंगे होकर बैठे ऐसी हारकर कर रहे हो. यहाँ इतना अच्छा शो का इंतेज़ाम हम दोनों ने तुम्हारे लिए किया है, लेकिन तुम इस शो को इग्नोर करके अपने लुंड के साथ खेल रहे हो.

मैं दीदी की बात सुनकर पाने लुंड को दबाकर छोड़ दिया जिससे मेरा लुंड झटके से आकर मेरे पेट पर

ठोकर मरी. मेरे मुंह से aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सरिता निकल गया. मैंने फिर से अपने लुंड को निचे दबाकर छोड़ दिया. मेरा लुंड फिर से जाकर मेरे पेट से टकराया. मेरे मुंह से इस बार आआआहहहहहहह मनीषा निकल गया. दोनों मुझे देखकर हंसने लगी. मैंने उनको देखकर कहा.

मैं- देखो तुम दोनों ने मेरी क्या हालत कर दी है. तुम दोनों के इस कामुक खेल को देखकर मेरा लुंड कैसे हिचकोले मर रहा है. मुझपर ऐसा जुल्म मत करो तुम दोनों. मुझे भी अपने साथ शामिल कर लो. मैं बिकते बैठे बोर हो रहा हूँ.

मनीषा- कैसे भाई हो आप. अपनी बहनो की जवानी देखकर भी आप बोर हो रहे हो. तो आज आपकी यही सजा है की आप केवल दर्शक बैंकर hi इस खेल का आनंद उठाये.

इतना कहकर दोनों चलती हुई मेरे करीब आकर कड़ी हो गई और मेरे लुंड को देखने लगी. मैं भी उन की आँखों में बरी बरी से देखते हुवे लुंड को मसलने लगा. दोनों की आँखे लाल हो गई थी. दोनों की आँखों में वासना साफ दिखाई दे रही थी. कुछ देर मेरा लुंड देखने के बाद मनीषा जाकर दीदी के पीछे कड़ी हो गई और दीदी से चिपक गई. मनीषा ने दीदी की बगल से हाँथ डालकर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी.



दीदी ने भी अपने दोनों हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख लिया. मनीषा ने थोड़ी देर दीदी की चूचियों को धीरे धीरे दबाया. उसके बाद दीदी की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में भरकर जोर जोर से दबाने लगी. दीदी के मुंह से आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा oooooooooohhhhhhhhh मनीषा की सिसकारी निकलने लगी.

मनीषा दीदी की चूचिया दबाते हुवे अपने होंठो से दीदी की गार्डन चूमने लगी और कभी कभी जीभ निकलकर दीदी की गार्डन भी चाटने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi गार्डन को चूमने चाटने के बाद मनीषा ने दीदी के कान के पास अपना मुजन्ह ले जाकर उनके कण की लौ को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी और दोनों चूचियों को हथेली में भरकर जोर से मसल दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गयी.

सरिता दी- aaaaahhhhhhhhhhhhhhhh मनीषा. oooooooohhhhhhhhhh धीरी सीए. टूउउ भठी इस कमीनी की तआर्रआह्ह्ह्ह होई जोरर से दबा रही हीी. aaaaaauuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhh.

मनीषा( उनके कण में सरगोशी करते हुवे)- मुझे पता है दीदी की आपको धीरे दबवाने में मज़ा नहीं आता. तभी तो आप भैया से जोर जोर से दबवाती थी अपनी चूचिया.

मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली. मनीषा दीदी की दोनों चूचिय. जोर जोर से दबती रही और दीदी की गार्डन और कान को मुंह में भरकर चुस्ती रही. इतना कामुक नज़ारा देखकर मैं अपना लुंड जोर जोर से सहलाने लगा. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैं भी अब इस खेल में शामिल होना चाहता था. तभी मनीषा ने दीदी की चूचियों को फिर जोर से दबा दिया. दीदी मस्ती भरी सिसकारी लेती हुई बोली.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh meriiiiiiiiiiiiiiii प्यारीइइइइइइ बहाणणणणणणण. ऐसी हीईईई दब्बब्बाऊओऊ. बहुत्तट्ठ माज़आ आ ररहा हैई मुझी.

दीदी की बात सुनकर मनीषा और जोर से दीदी की चूचिया दबाने लगी. मैं भी अब उठकर मनीषा के पीछे जाकर उससे सत्कार खड़ा हो गया. मनीषा ने मेरी तरफ देखा तो उसकी आँखे लाल हो गई थी. चेहरा सुर्ख हो चुक्का था. मनीषा ने मुझे आँखों के इशारे से बैठने के लिए कहा, मगर मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड में घुसेड़कर अपना होंठ मनीषा की गार्डन पर रख दिया और उसे चूमने लगा. मनीषा ने उत्तेजना में आकर दीदी के दोनों निप्पल को पानी ऊँगली और अंगूठे के बिच में पकड़ लिया और पूरी ताकत के साथ दीदी के निप्पल को मसल दिया. दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyy. क्याआ करररर रही हैई टूउउ मनीषआआ. इतनीई जूर्रर सीए क्यूँ मसलाआ तुणीऐ. मुझी बहुत्त दररदद्ड होऊ रहा हैई. aaahhhhhhhhhhh. oooooooohhhhhhhhhhhhh.

अभी मनीषा कोई जवाब देती इससे पहले hi बहार बेल्ल बजने की आवाज़ आई. मैं तुरंत hi मनीषा के पीछे से हटा और अपना लोअर पहनकर अपने लुंड को ऊपर की तरफ दबाकर डोरी में फंसा दिया. और दोनों को अपना हुलिया दुरुस्त करने का बोलकर निचे दरवाज़ा खोलने के लिए चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-125

दरवाज़ा खोला तो मम्मी बहार कड़ी थी. पापा का पूछने पर पता चला की वो किसी काम की वजह से कही गए हुवे हैं. थोड़े समय बाद आएँगे. मां अंदर आकर अपने कमरे में चली गयी. मैं भी अपने कमरे में आ गया. देर शाम तक मैं कमरे में hi रहा. खाना खाने के समय मैं कमरे से बहार आया और डाइनिंग टेबल पर बैठ गया. हम सब खाना खाने लगे तो मैंने पापा से कहा.

मैं- पापा, कल जीजा जी का फ़ोन आया था. उनको किसी ट्रेनिंग के लिए मुंबई जाना है 2 हफ्तों के लिए तो उन्होंने मुझे आगरा बुलाया है. क्योंकि दीदी वह अकेली रहेंगी.

पापा- हाँ मेरी बात हुई है राघवेंद्र से. 3 दिन बाद चले जाना वहां.

इसके बाद सभी ने खाना फिनिश किया. मम्मी पापा अपने कमरे में चले गए मैं वही बैठकर t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी और मनीषा भी किचन समेत कर हॉल में आकर बैठ गयी. हम तीनो एक दुसरे को देखकर मुस्कुराने लगे. मनीषा ने कहा.

मनीषा- वाह भैया. आपके तो मज़े हैं. अब तो आप दीदी के पास जा रहे हैं.

मैं- हाँ वो तो है. बहुत दिन हो गए हैं दीदी से मिले हुवे. उनकी बहुत याद आती है.

मनीषा- हाँ भायी. याद क्यों नहीं आएगी. और तड़प तो दीदी भी रही होंगी वह. आखिर उन्होंने बहुत कुछ किया है आपके लिए और आपने भी तो उन्हें बहुत ख़ुशी दी है. अब दो प्रेमियों के मिलने का समय नजदीक आ रहा है.

सार्टीअ दी- ये कैसी बात कर रही हो तुम मनीषा. वो दीदी हैं हमारी. उनके लिए ऐसा क्यों बोल रही हो.

दीदी के बात सुनकर मनीषा और मैं हंसने लगे. दीदी हम दोनों की तरफ प्रश्वाचक दृस्टि से देखने लगी. थोड़ी देर देखने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- तुम दोनों हंस क्यों रहे हो. मैंने कोई जोके थोड़े कहा है.

मैं- आप न सच में बहुत भोली हैं दीदी. मनीषा जैसी दिखती है वैसी है नहीं. इसे सब पता है दीदी के बारे में.

मेरी बात सुनकर दीदी का मुंह आश्चर्य से खुल गया. वो मनीषा की तरफ देखने लगी. जैसे पूछ रही हो. की क्या ये सच है. मनीषा ने दीदी की नज़रो को पढ़ लिया और बोली.

मनीषा- हाँ दीदी मुझे आके और दीदी के बारे में शुरू से सब पता है.

सरिता दी- सच में मनीषा तू तो बहुत खतरनाक है यार. मैं तो तुझे भोली भली समझती थी, लेकिन तू तो बहुत तेज़ निकली. तुमने तो किसी को भनक hi नहीं लगने दी की तुम सब जानती हो.

मनीषा- अब तो मान लो दीदी की मनीषा इस थे ग्रेट गर्ल.

मनीषा की बायत सुनकर हम सब हंसने लगे. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी तू 2 हफ्ते दीदी के साथ रहेगा. तेरी तो मौज है वह. लेकिन ये 2 हफ्ते हम कैसे बिताएंगे.

मैं- टेंशन मत लो दीदी मैं सविता दीदी को यही लेकर आऊंगा 2 दिन बाद. तब तक आप दोनों आपस में काम chalana.fir हम सब मिलकर मौज करेंगे. सोच रहा हूँ दीदी की गांड आगरा में hi खोलू.

सरिता दी- तू न सच में कमीना है. अपनी सभी बहहो की गांड के पीछे हाँथ धोकर पड़ा है.

मैं- अब मैं क्या करू. मेरी बहनो की गांड है hi इतनी कातिल की मेरा लुंड देखते hi खड़ा हो जाता है.

सरिता दी- तू सच में बहुत कमीना है अभी. अच्छा चलो अब मैं तो चली सोने. तुम दोनों भी सो जाओ अब.

मैं- लेकिन आज मुझे दूध कौन पिलायेगा. आपको पता है न की मुझे अब इसकी आदत लग चुकी है.

सरिता दी- आज कुछ नहीं. अब जो भी होना होगा वो कल hi होगा. अच्छा मैं चली सोने.

इतना कहकर सरिता दी अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर बाद मनीषा भी अपने कमरे में चली गई. अब मैं अकेला वह बैठकर क्या करता. मैं भी वह से उठकर अपने कमरे में चला गया और लोअर उतर कर उव में hi लेट गया. आज कुछ होना नहीं था इसलिए मैंने फ़ोन निकला और सविता दीदी को कॉल कर दिया. उस समय रात के 11.30 हो रहे the.thodi देर बाद उधर से कॉल पिच हुई और दीदी की सुरीली आवाज़ आई.

सविता दी- hello कमीने. कैसा है तू.

मैं- होई डार्लिंग सविता. बहुत hi मस्त हूँ मैं. तुम बताओ कैसी हो. और जीजा जी कैसे हैं

सविता दी- मैं भी ठीक hi हूँ और तेरे जीजा जी जी बढ़िया हैं. सो रहे हैं वो. लेकिन क्या बात है आज बहुत चहक रहा है. कोई खुशखबरी है क्या.

मैं- कह तो ऐसे रही हो जैसे कुछ पता hi न हो. अरे यार जीजा जी ने तुम्हे बताया तो होगा.

सविता दी- हाँ बताया है की तुम आगरा आ रहे हो मेरे साथ रहने के लिए.

मैं- हाँ. लेकिन मैं सोच रहा हूँ की सरिता दीदी को भेज देता हूँ आपके पास रहने के लिए.

सविता दी- क्यों तू क्यों नहीं आ रहा है यहाँ.

मैं- वो क्या है न दीदी आजकल मैं बहुत ज्यादा व्यस्त हूँ. समय hi नहीं मिल प् रहा है.

सविता दी- ऐसा क्या काम करने लगा है जो अपनी दीदी के पास आने के लिए भी समय नहीं निकल प् रहा है.

मैं- वो क्या है न दीदी की एक तो जो काम करता हूँ उसमे टाइम चला जाता है और जो थोड़ा बहुत टाइम बचता है वो मैं अपनी गफ के साथ स्पेंड करता हूँ.

सविता दी- क्या तुमने गफ बना ली मेरी अनुपस्थिति में और मुझे बताया तक नहीं.

मैं- वो मुझे लगा की आप नाराज़ हो जाओगी ये जानकर इसलिए अभी तक आपको नहीं बताया था.

सविता di-to ये मुझे आज क्यों बता रहा है.

मैं- ऐसा है दीदी की मैं आपसे झूट बोलकर आने के लिए मन नहीं कर सकता था. इसलिए आपको सच बता दिया. अब आप तो समझ hi सकती हो की उसे भी टाइम देना कितना जरूरी है.

सविता दी- लेकिन अभी मैंने बहुत कुछ सोचा था की जब तू आएगा यहाँ तो तेरे साथ खूब मौज मस्ती करुँगी. लेकिन तू तो मन कर रहा है. तू ऐसे न कर भाई. मेरा बहुत मन कर रहा है.

मैं- आप का क्या मन कर रहा है दीदी.

सविता दी- तुझे तो पता है की तेरे जीजा मुझे ठीक से छोड़ नहीं पते है. तो मैं जब से यहाँ आई हूँ बहुत प्यासी हूँ मैंने सोचा था की जब तू मेरे पास आएगा तो मैं तुझसे दिल खोलकर छुडवाउंगी, लेकिन तुझे तो अपनी बहन की नहीं अपनी उस गफ की पड़ी है. क्या वो तेरे लिए मुझसे बढ़कर हो गई है.

मैं- नहीं दीदी आपसे बढाकर कोई नहीं है मेरे लिए. लेकिन मुझको वो जो देती है वो आप नहीं दे पाओगी.

सविता दी- क्यों ऐसा क्या है उसके पास जो वो तुझे देती है. वो भी तुझसे चुदवाती hi है न. और मेरे पास आने के बाद तू जितना चाहे, जैसा भी चाहे मुझे छोड़ सकता है. मैं मन थोड़ी hi करुँगी.

मैं- दीदी वो मुझसे छुड़वाने के आलावा अपनी गांड भी मरवाती है उसकी गांड बहुत hi बड़ी और कातिल है. मुझे उसकी गांड मरने में बहुत मज़ा आता है. इसलिए मैं सरिता दीदी को भेजने के लिए सोच रहा हूँ.

सविता दी- ये तू क्या कह रहा है अभी. तू उसकी गांड मरता है. छियई उसमे क्या मज़ा मिलता है तुझे.

मैं- अब आपको कैसे बताऊ. मुझे बहुत मज़ा आता है गांड मरने में. मैंने आपसे भी कहा था, लेकिन जब आपने मन कर दिया तो मुझे गांड के लिए दूसरी गफ बनानी पड़ी.

सविता दी- लेकिन अभी वो तेरा कैसे लेती होगी अपनी गांड में. तेरा तो बहुत बड़ा और मोटा है. उसको तो बहुत दर्द होता होगा अंदर लेने में.

मैं- आप कैसी बात कर रही हो दीदी. बस शुरू में थोड़ा दर्द हुवा था उसको. लेकिन बाद में वो खुद उछाल उछाल कर मेरा लुंड अपने गांड में लिए. अब तो ऐसी कंडीशन हो गई है की वो अपनी छूट से ज्यादा अपनी गांड hi मरवाती है.

सविता दी- प्ल्ज़ अभी ऐसा मत कर. मुझे तेरी बहुत जरूरत है. तुझे नहीं पता मैंने अपने आपको अभी तक कैसे संभल कर रख है. मैं बहुत प्यासी हूँ अभी. ऐसा मत कर मेरे साथ.

मैं- ठीक है दी मैं कोशिश करूँगा आने की, लेकिन श्योरे नहीं हूँ की आ पाव मैं.

सविता दी- नहीं अगर तुझे मेरी तनिक भी फ़िक्र है तो तुझे आना hi होगा अभी.

मैं- अच्छा ठीक है दीदी मैं आऊंगा, लेकिन उसके बदले में मुझे क्या मिलेगा.

सविता दी- तू पहले मेरे पास आ तो सही. तुझे जो चाहिए वो सबकुछ मैं तुझे दूँगी.

मैं- कही ऐसा न हो की बाद में तुम अपनी बात से मुकर जाओ और अगर तुम अपनी बात से मुकर गई तो मैं उसी समय वापस चला आऊंगा वह से.

सविता दी- ठीक है मैं नहीं मुकरूंगी. मैं तेरी कसम कहती हूँ. तू जो मांगेगा मैं तुझे दूंगी.

मैं- अच्छा ठीक है दीदी. अपनी कुछ फोटो भेजो न. कई दिन हो गए आपको देखे हुवे.

सरिता दी- रुख थोड़ी देर. यहाँ पर तेरे जीजा जी सो रहे हैं दुसरे कमरे में जाती हूँ फिर भेजती हूँ.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना व्हाट्सप्प ओपन कर लिए .थोड़ी देर बाद दीदी ने अपने एक फोटो ब्रा में भेजी. जिसमे दीदी ने ब्लाउज पहना हुवा था लेकिन उसके बटन निचे की छोड़कर सभी खुले हुवे थे. दीदी बहुत hi सेक्सी लग रही थी. मैंने दीदी से कहा.



मैं- क्या बात है दीदी . आप बहुत hi सुन्दर लग रही ही इसमें. कोई और फोटो भेजो.

मेरी बात सुनकर दीदी नई एक और फोटो भेजी. जिसमे उन्होंने ब्लाउज उतर दिया था और सदी का पल्लू ब्रा के ऊपर डाला हुवा था. इस फोटो में दीदी बहुत hi सेक्सी लग रही थी. थोड़ी देर उस फोटो को देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- दीदी मुझे बहुत दिन हो गए आपको सेक्सी गांड देखे हुवे. प्ल्ज़ एक फोटो उसकी भी भेजो न.

मेरी बात मानकर दीदी ने थोड़ी देर बाद अपनी सेक्सी, बड़ी और कातिल गांड को फोटो भेजी. दीदी की गांड फोटो में बहुत ज्यादा बड़ी लग रही थी. मैंने दीदी की गांड देखते हुवे दीदी से कहा.



मैं- दीदी सच में आपकी गांड बहुत hi जबरदस्त है. आपकी गांड के सामने तो मेरी गिर्ल्फ्रेंड को गांड कुछ भी नहीं है. लगता है जीजा जी ने आपकी गांड मर मर के बड़ी कर दी है.

सविता दी- उसने छूट तो ठीक से मरी नहीं जाती. गांड क्या खाक मरेंगे वो मेरी.

मैं- जीजा कैसे आदमी हैं. उनके घर में इतनी मस्त और कातिल गांड मौजूद है. लेकिन वो कुछ कर hi नहीं प् रहे हैं. उनकी जगह अगर मैं आपका पति होता तो अब तक आपकी गांड मर मर कर और बड़ी कर देता. कसम से दीदी आपकी गांड देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया है. खास मैं आपकी गांड मर पता.

सविता दी- चाल हैट कमीने. बहन की गांड पर नज़र रखता है. तू यहाँ आ तेरी अचे से खबर लेती हूँ.

मैं- अच्छा दीदी एक और फोटो भेजो बिना ब्रा के.

सविता दी- तू दो मिनट रुक तो जा. तुझे बिना ब्रा के देखना है न मुझे अभी तेरे होश उड़ाती हूँ मैं.

मैं थोड़ी देर दीदी के कहे अनुसार वेट करने लगा. थोड़ी देर बाद मश्ग टन बजी. मैंने जब फोटो डाउनलोड की तो मैं उस फोटो को देखता रह गया. दीदी ने एक बहुत hi बारीक निघ्त्य टाइप कपडा पहना हुवा था.



वो इतना ज्यादा सेक्सी था की मेरे लुंड ने झटका मरना शुरू कर दिया. उसका pahan-na या न pahan-na दोनों बराबर था. उसमे से दीदी को दोनों निप्पल और लगभग पूरी चूचिया दिखाई देने लगी. मैंने अपना लुंड हिलाते हुवे एक फोटो खींची और दीदी को भेज दिया और बोलै.



मैं- ये देखो दीदी. आपकी कातिल गांड और आपकी जालिम चूचियों ने मेरा क्या हॉल कर दिया है. अगर आप अभी मेरे साथ होती तो आपको रगड़ रगड़ के छोड़ता मैं.

सविता दी- इसीलिए तो कह रही हूँ की सरिता को मत भेज मेरे पास. तू आ और मुझे रगड़ रगड़ के छोड़.

मैं- हाँ अब तो मैं हो औंग और आपको रगड़ रगड़ कर छोडूंगा और आपकी गांड भी मरूंगा.

सविता दी- नहीं अभी. मैं गांड नहीं मरवाउंगी तुझसे. तेरा बहुत बड़ा है. मुझे बहुत दर्द होगा. मैं तो मर hi जाउंगी तेरा अंदर लेने में.

मैं- कुछ नहीं होगा दीदी. मैं बहुत प्यार से आपकी गांड मरूंगा. आपको तनिक भी दर्द नहीं होगा.

सविता दी- मुझे तेरा प्यार पता है. इसीलिए तो मुझे दर लग रहा है. तू बिलकुल भी रहम नहीं करता.

मैं- मैं अगर आगरा आऊंगा तो इसी शर्त पर आऊंगा की तुम मुझे अपनी गांड डौगी, नहीं तो दीदी जाएंगी.

सविता दी- ये तो गलत है. तू मुझे ब्लैकमेल कर रहा है. अपनी बहन को.

मैं- अब आप जो समझ लो, लेकिन ये मेरी वह आने की शर्त है. अब आप डीडे कर लीजिये क्या करना है.

सविता दी- चल ठीक है. लेकिन तू अच्छा नहीं कर रहा है, मेरी मज़बूरी का फायदा उठा रहा है.

मैं- कोई फायदा नहीं उठा रहा हूँ. आपको ज़िन्दगी का भरपूर मज़ा देना चाहता हूँ, अच्छा अब मैं रख रहा हूँ. अब आगरा आकर बात करता हूँ आपसे.

इतना कहकर मैंने अपना फ़ोन रख दिया और सो गया. सुबह उठकर मैं जिम किया. उसके बाद आराम करके बाथरूम में चला गया. फ्रेश होकर मैं बहार आया तो मनीषा मेरे कमरे में बैठी हुई थी. उसने थोड़ा भड़काऊ कपडे पहने हुवे थे. फिर भी ठीक थक hi थे.



मुझे देखकर वो मुस्कुराने लगी. मैं भी अपनी लोअर उठाकर pahan-ne लगा. मनीषा की नज़र मेरे लुंड पर गयी, लेकिन वो अभी सो रहा था, इसलिए उसे कुछ देखने को नहीं मिला. मैं लोअर और t-shirt पहनकर उसके पास चला गया. मनीषा ने उठकर मुझे हूजे किया और मेरे होंठो को चूमकर मुझे मॉर्निंग किश दिया. मैंने भी अपने दोनों हांथो से मनीषा की चूचियों को दबाकर उसके होंठो को चुम लिया.

हम दोनों ऐसे hi ek-dusre की आँखों में देखने लगे. फिर मैंने अपने होंठो को बढाकर उसके होंठो को किश करने लगा और अपने हांथो से उसकी चूचिया दबाने लगा. अभी मुझे कुछ hi देर हुई थी की सरिता दीदी भी मेरे कमरे में आ गयी और बोली.

सरिता दी- तुम दोनों को बिलकुल भी शर्म नहीं है. अरे काम से काम हाँथ मुंह तो धो लेते.

सरिता दीदी की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ बढाकर उनकी कमर में दाल दिया और उन्हें खींचकर अपने साथ चिपका लिया. अब मेरे साथ दो मस्त हसीनाएं चिपकी हुई थी. एक तरफ मनीषा थी तो दूसरी तरफ सरिता दी. दोनों ने अपने हाँथ मेरे कंधे पर रखे हुवे थी. मैंने दोनों की कमर में हाँथ डालकर अपने से और ज्यादा चिपका लिया. दोनों बंदरिया की तरह मुझसे साइड से लिपटी हुई थी. मनीषा ने अपना एक पेअर उठाकर मेरी कमर में लगा दिया था. सरिता दीदी ने भी ऐसा hi किया. मेरी तो मज़े के कारन सांसे भरी हो गाइट hi. मैं कभी मनीषा को देखता तो कभी सरिता दी को.



थोड़ी देर तक दोनों ऐसे hi मुझसे चिपकी कड़ी रही फिर दोनों ने मुझे कंधे से पकड़कर निचे बैठा दिया और मेरे कंधे को पकड़कर कड़ी हो गई. मैंने भी अपने दोनों हाँथ दोनों की टैंगो के बिच से घुसकर दोनों की गांड को पकड़ लिया और दबाने लगा. थोड़ी देर दोनों की गांड बढ़ाने के बाद मैंने ऊपर की तरफ देखा तो दोनों बहाने एक दूसरे को किश कर रही थी. मैं दोनों के देखते हुवे जोर जोर से उनकी गांड दबाने लगा. थोड़ी दे रेज hi एक दूसरे को किश करने के बाद दोनों अलग हुवी. और मेरे गलो को दोनों तरफ से चूमने लगी. थोड़ी देर चूमने के बाद सरिता दीदी ने कहा.



सरिता दी- चलो अब बहुत हुवा. जल्दी से निचे आओ दोनों. आगे जो भी होना है वो दोपहर में होगा.

इतना कहकर सरिता दीदी मनीषा को लेकर निचे चली गयी. मैं ऊपर अपने लूँ को शांत करने में लग गया. थोड़ी देर बाद जब मेरा लुंड बैठ गया तो मैं भी निचे आ गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी वहां पर आ गए. मैंने दोनों को गम विश किया और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद नाश्ते का समय हो गया तो सरिता दीदी नाश्ता लेकर आई. सभी लोगो ने नाश्ता किया. नाश्ता करने के बाद मम्मी पापा अपने कमरे में चले गए. मैं वही पर बैठा रहा लगभग 30 मिनट बाद मम्मी पापा अपनी जॉब पर चले गए. मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और अपने काम पर जाने के लिए तैयार होने लगा.

थोड़ी देर बाद मैं भी तैयार होकर निचे आया और अपने काम पर चला gaya.waha पहुंचने के बाद मुझे पता चला की आज काम थोड़ा ज्यादा है तो मुझे वह 2 हॉर्स रुकना पड़ेगा. मैं मन मसोस कर वह रुका और अपना काम करने लगा. 2 हॉर्स तक अपना काम करने के बाद मैंने बचा हुवा काम समेटा और अपने घर की तरफ निकल गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-126

सरिता दी- चलो अब बहुत हुवा. जल्दी से निचे आओ दोनों. आगे जो भी होना है वो दोपहर में होगा.

इतना कहकर सरिता दीदी मनीषा को लेकर निचे चली गयी. मैं ऊपर अपने लूँ को शांत करने में लग गया. थोड़ी देर बाद जब मेरा लुंड बैठ गया तो मैं भी निचे आ गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी वहां पर आ गए. मैंने दोनों को गम विश किया और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद नाश्ते का समय हो गया तो सरिता दीदी नाश्ता लेकर आई. सभी लोगो ने नाश्ता किया. नाश्ता करने के बाद मम्मी पापा अपने कमरे में चले गए. मैं वही पर बैठा रहा लगभग 30 मिनट बाद मम्मी पापा अपनी जॉब पर चले गए. मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और अपने काम पर जाने के लिए तैयार होने लगा.

थोड़ी देर बाद मैं भी तैयार होकर निचे आया और अपने काम पर चला gaya.waha पहुंचने के बाद मुझे पता चला की आज काम थोड़ा ज्यादा है तो मुझे वह 2 हॉर्स रुकना पड़ेगा. मैं मन मसोस कर वह रुका और अपना काम करने लगा. 2 हॉर्स तक अपना काम करने के बाद मैंने बचा हुवा काम समेटा और अपने घर की तरफ निकल गया.

अब आगे..

घर आने के बाद मैंने बेल्ल बजायी. उदार से मनीषा की आवाज़ आई. मेरे आवाज़ देने पर मनीषा ने गेट खोला. मैं तो उसे देखता hi रह गया. एकदम क़यामत बैंकर मनीषा ने मेरा स्वागत किया. बदन पर सिर्फ एक पंतय और चूचियों पर hi ख़तम हो जाने वाली टॉप मनीषा ने पहना हुवा था. उसने मेरा हाँथ पकड़कर अंदर खींचा और तुरंत दरवाज़ा बंद कर दिया. मैंने पलटकर मनीषा को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, लेकिन मैं उसे इग्नोर करते हुवे ऊपर अपने कमरे में जाने लगा. मनीषा ने पीछे से आवाज़ दी.

मनीषा- क्या हुवा भैया नाराज़ हो क्या हमसे.

मैं- नहीं यार. अभी पहले काम फिनिश कर लून फिर बात करता हूँ.

इतना बोलकर मैं अपने कमरे में चला गया और कपडे उतर कर उव में बाथरूम चला गया जब बाथरूम से आया तो मनीषा बिस्टेर पर बैठी हुई थी. मैं भी जाकर बिस्टेर पर बीअत गया और लैपटॉप निकलकर अपना काम करने लगा. थोड़ी देर बाद मनीषा मेरे पीछे आ गयी और मुझसे मेरी पीठ पर लड़कर कड़ी हो गई. जिससे उसकी चूचिया मुझे अपने पीठ पर फील हो रही थी. कुछ देर वैसे hi कड़ी रहने के बाद मनीषा अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ने लगी. जिससे मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी. मनीषा मेरी गार्डन पर किश करने लगी और अपना हाँथ आगे बढाकर मेरे साइन पर फिरने लगी. मेरा लुंड अब खड़ा होने लगा था.

मैंने भी अपना लैपटॉप बंद किया और मनीषा को पकड़कर आगे की तरफ खींच लिया. मनीषा मेरी जांघो पर लेट गई. मैंने अपने दोनों हांथो से उसकी चूचियों को पकड़ लिया और जोर जोर से मसलने लगा. मनीषा ने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. थोड़ी देर मेरे होंठो को चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ मेरे होंठो पर फिरनी शुरू कर दी. मैंने मनीषा की चूचियों को अपने दोनों हथेली में भरा और पूरी ताकत से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह bhaaaiyyyyyyyyyyaaaaaaaa. धीरीईईई सीए. ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा ही.

मैं- क्युओ बड़ीई मस्ती सूझ रही है न तुम्हे. मुझे काम नहीं करने दे रही हो. अभी तुम्हे मज़ा चखता हूँ.

इतना कहकर मैंने फिर से उसकी दोनों चूचियों को पूरी ताकत से मसल दिया मनीषा फिर से चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh भैयाआआ. ooooohhhhhhhhhhhh थोड़ाए धीयड़ी दबाइएएएए. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होओओओ रहा हीी.

उसके बाद मैंने मनीषा को छोड़ दिया और उससे कहा.

मैं- मुझे थोड़ा काम करने दो मनीषा. मैं कुछ देर में काम फिनिश करके निचे आ रहा हूँ. अभी तुम jao.aur तुम और दीदी अचे से तैयार हो कर अपने यार का स्वागत करो.

जब मैंने ये बात कही तो मनीषा ने मेरे साइन पर मारा और कहा.

मनीषा- आप न भैया. बहुत hi बेशरम और गंदे हूँ. कुछ भी बोलते रहते हो.

इतना कहने के बाद मनीषा निचे चली गयी. थोड़ी देर मैंने अपना काम किया ऊके बाद मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुवा और मनीषा और सरिता दीदी की चुदाई के लिए निचे चला गया.

सबसे पहले मैं सरिता दीदी के कमरे में गया तो वह पर कोई नहीं था. उसके बाद मैं मनीषा के कमरे में गया और दरवाज़ा क्नॉच किया तो मनीषा ने दरवाज़ा खोला. मैं अंदर चला गया. मनीषा जब दरवाज़ा बंद कर के पलटी तो मैंने उसे देखा. उसने ब्रा और पंतय पहनी हुई थी. वो बड़ी कमुख नज़रो से मुझे देख रही थी. मुझे ऐसे देखते पाकर मनीषा बोली.



मनीषा- ऐसे क्या देख रहे हो bhaiya.jaise पहली बार देख रहे हो.

मैं- देखा तो कई बार है लेकिन हर बार ऐसा लगता है की मैं तुझको ब्रा पंतय में पहली बार देख रहा हूँ. वैसे तू एकदम बेम लग रही है.

manisha(muskurakar)- अरे भैया केवल बेम को hi देखोगे, एटमबम को भी देख लो. जो कब से अपना जलवा आपको देखने के लिए बेताब बैठी हुई है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने बिस्टेर की तरफ देखा तो सरिता दीदी बिस्टेर पर बैठी थी. उन्हें देखते hi मेरा लुंड उव में एकक झटके में खड़ा हो गया. सरिता दीदी इस समय ब्रा और पंतय पहन कर बिस्टेर पर बैठी थी उनकी ब्रा एकदम झीनी थी. ब्रा से उनकी चूचियों की पूरी झलक मिल रही थी और उनकी घुंडीया एकदम नंगी देख रही थी. पंतय भी एकदम पारदर्शी थी. जिसमे से दीदी की छूट साफ दिखाई दे रही थी. मैं दीदी को देखकर अपने लुंड को सहलाने लगा. दीदी ने मुझे देखते हुवे कहा.



सरिता दी- ये क्या कर रहा है अभी. तुझे शर्म नहीं आती अपनी दीदी के सामने अपना लुंड सहला रहा है.

मैं- क्या करू दीदी. तुम्हारी जवानी बहुत hi गरम है. तुम अपनी नंगी चूचिया दिखाकर मेरे लुंड को जगा रही हो तो मैं क्या कर सकता हूँ.

मेरी बात सुनकर मनीषा आकर मेरी पीठ से लिपट गई और अपना हाँथ आगे बढाकर मेरे साइन को सहलाने लगी. मैंने मनीषा की चूचिया अपनी पीठ पर फील करते हुवे कहा.

मैं- आज मैं कुछ नहीं करूँगा. तुम दोनों मुझे अपना जलवा दिखाकर इतना मजबूर कर दो की मैं तुम दोनों को रगड़ रगड़ कर छोड़ सकू. चलो अब देर न करो और शुरू हो जाओ.

इतना कहकर मैं कुर्सी पर बैठ गया. थोड़ी देर मनीषा और दीदी एक दूसरे को देखती रही फिर दीदी उठकर मनीषा के पास आई और उसके होंठो को अपने अंगूठे से मसलने लगी. थोड़ी देर मनीषा के होंठो को मसलने के बाद दीदी ने कुछ देर मनीषा को देखा फिर अपना होंठ मनीषा के होंठो पर रख दिया और किश करने लगी. मनीषा ने भी दीदी को किश करना शुरू कर दिया.



दोनों बहुत hi वाइल्ड तरीके से एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे. मैं कुर्सी पर बैठा अपना लुंड सहला रहा था. थोड़ी देर मनीषा ने दीदी का होंठ चूसा उसके बाद मनीषा ने दीदी का पूरा मुंह अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी. दीदी भी मनीषा का पूरा साथ दे रही थी. थोड़ी देर तक मनीषा ने दीदी का मुंह चूसा फिर अपनी जीभ निकल कर दीदी के मुंह में दाल दी. जिसे दीदी बड़े चाव से चूसने लगी. मनीषा ने अपने हाँथ आगे बढाकर दीदी की चूचियों पर रख दिया अरु दबाने लगी. थोड़ी देर अपने जीभ चुसवाने और दीदी की चूचिया दबाने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ दीदी के मुंह से निकल ली और मेरी तरफ देखने लगी. मैं अपना लुंड मसल रहा था. मनीषा मेरी तरफ देख कर बोली.

मनीषा- क्यों भैया मज़ा आ रहा है दोनों बहनो की रासलीला देखकर.

मैं- हाँ मनीषा बहुत मज़ा आ रहा है करती रहो तुम दोनों.

मेरी बात सुनकर मनीषा दीदी को पीछे धकेलते हुवे बिस्टेर तक ले गई और जाकर बिस्टेर पर बैठ गयी. मनीषा के बिस्टेर पर बैठने के बाद दीदी जाकर उसके सामने मुंह करके उसकी गॉड में बैठ गयी और मनीषा की आँखों में देखने लगी. थोड़ी देर मनीषा की आँखों में देखने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकली और मनीषा के होंठो पर फेरनी शुरू कर दी. मनीषा ने अपने दोनों हांथो से दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी. दीदी ने अपना हाँथ मनीषा के हाँथ पर रख दिया, लेकिन उन्होंने मनीषा को रोकने की कोशिश नहीं की.



थोड़ी देर मनीषा ने भी अपनी जीभ बहार निकल ली और दीदी की जीभ पर फिरने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi एक दूसरे की जीभ से जीभ लड़ने के बाद दीदी ने अपनी जीभ मनीषा के मुंह में दाल दी. मनीषा ने अपना मुंह बंद कर के दीदी की जीभ जोर जोर से चूसने लगी. लगभर 3 मिनट तक दीदी की जीभ चूसने के बाद मनीषा ने दीदी की जीभ छोड़ दी और अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी की चूचिया दबती रही. थोड़ी देर दोनों ने एक दूसरे की जीभ चूसने के बाद अपने होंठ एक दूसरे से अलग किये.

उसके बाद दोनों बिस्टेर से उठी और चलती हुई मेरे पास आयी और मेरे लुंड को देखने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखने के बाद सरिता दीदी ने मेरी आँखों में देखा. दीदी की आँखे लाल हो गयी थी. दीदी पर छुडास हावी हो गाइट hi. मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- देख रही हो दीदी. आप दोनों ने मेरे लुंड को एकदम बेकाबू कर दिया है. देखो आप दोनों को देखकर कैसे एकदम खड़ा हो गया है.

सरिता दी- हाँ देख रही हूँ. तुम्हारा लुंड बहुत बदमाश हो गया है. जब देखो तब खड़ा hi रहता है. रखो अभी मैं इसका इलाज़ करती हूँ.



इतना बोलकर मेरी आंखो में देखती हुई दीदी जमीं पर बैठ गयी और मेरे लुंड को अपने हांथो से पकड़ लिया. मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे झुककर मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिया और चूसने लगी. सरिता दीदी मेरे लुंड को सहला रही थी और मनीषा मेरे होंठ को चूस रही थी. मैं इस दोहरे मज़े से पागल हो रहा था. मैंने अपने एक हाँथ उठाकर सरिता दीदी के सर पर रख दिया और सहलाने लगा और एक हाँथ मैंने मनीषा की चुकी को पकड़ लिया और दबाने लगा.

तोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद दीदी ने मेरी उव को अपनी ऊँगली से फंसकर निचे खिसकने लगी. मैंने अपनी गांड थोड़ी सी उठाकर उव निचे उतरने में दीदी की मदद की. उव उतारते hi मेरे लुंड ने एक जोर का झटका मारा और आकर मेरे पेट से टकराया. आज मेरा लुंड और दिन के मुकाबले मुझको ज्यादा बड़ा लग रहा था. सरिता दीदी मेरे लुंड को देखती हुवी मुझसे बोली.

सरिता दी- क्या बात है अभी. आज तो तेरा लुंड और दिन के मुकाबले बड़ा लग रहा है.

मैं- बड़ा क्यों नहीं होगा दीदी. जब इतनी मस्त मस्त दो बहाने मुझसे छोड़ने के साथ में तैयार बैठी है तो मेरा लुंड यही सोच सोच कर बड़ा हो गया है की आज किसकी छूट छोड़ने में ज्यादा मज़ा आएगा. और छूट के अलावा इसे एक शिल्पक गांड भी मिलने वाली है. यही सोच सोच कर मेरा लुंड बड़ा हो गया है.

मेरी ये बात सुनकर मनीषा ने किश रोक कर मेरी तरी आँखों में देखने लगी. मैंने भी मनीषा की आँखों में देखते हुवे उसकी चुकी को जोर से मसल िया मनीषा के मुंह से आआआअह्हह्ह्ह्हह भैया निकल गया. थोड़ी देर ऐसे hi लुंड पकडे रहने के बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड पर रख दी. मेरे मुंह से आआअह्ह्ह सरिता. की आवाज़ निकल गयी. दीदी ने अपनी जीभ कुछ देर मेरे लुंड के टोपे पर चलायी फिर अपनी जीभ मेरे पुरे लुंड पर फिरने लगी. मैं मनीषा का होंठ चूसते हुवे उसकी चुकी को बारे बरी से दबा रहा था. थोड़ी देर दीदी ने मेरा लुंड छठा. फिर अपना मुंह खोलकर लुंड मुंह में भरकर एक चौपा लगाकर पुककक की आवाज़ के साथ लुंड छोड़ दिया. मुझे इतना ज्यादा मज़ा आया की मैंने मनीषा की चुकी जोर से मसल दी. मनीषा के मुंह से चीख निकल गयी.

मनीषा- aaaaaaahhhhhhhhhh भाइयाआआआआ. धीरी सीए दाबाहूऊऊ.

मनीषा की आवाज़ सुनकर सरिता दीदी ने मनीषा की तरफ देखा और फिर से लुंड चूसने लगी. मैं दीदी के सर को अपने हाँथ से अपने लुंड पर दबाने लगा. थोड़ी देर मनीषा ने मेरा मुंह छोड़ा और मेरे गार्डन को चूमती हुई निचे जाने लगी. मनीषा मेरी गार्डन को चूमते हुवे मेरे साइन पर आकर रुकी और मेरे साइन को चूमते हुवे मेरे निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर चूसने के बाद उसने निप्पल को अपने दांतो से दबा दिया. मेरी चीख निकल गई.

मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मनीषआआ. क्याआ काररर रहीए हैई तू. काट क्यों रही है. थोड़ा प्यार से कर न. बहुत मज़ा आ रहा है मुझे. तुम दोनों सच में बहुत जबरदस्त मॉल हो. तुम दोनों की जुगलबंदी कमल की है. अपना जलवा दिखाकर तुम दोनों ने मुझे बेकाबू कर दिया है.

मेरे इतना कहने के बाद दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह से निकला और कहा.

सरिता दी- बस तुम देखते जाओ अभी. आज्ज हम दोनों मिलकर तुझको बहुत मज़ा देने वाले हैं.

दीदी इतना बोलकर फिर से मेरे लुंड को चूसने लगी और मनीषा मेरे निप्पल को अपने मुंह में भरकर खेलने लगी. थोड़ी देर मेरे निप्पल से खेलने के बाद मनीषा मेरे साइन को चूमती हुवी निचे आई और मेरे पेट को चूमने लगी. साथ hi मनीषा ने हाँथ निचे बढाकर मेरी गोटियों को पकड़ लिया और सहलाने लगी. मेरे मुंह से आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा निकल गया. मैंने भी मनीषा की चूचियों को जोर से मसल दिया. मनीषा आआह्ह्ह्ह भैया करके सीसिया उठी. थोड़ी देर पेट चूमने के बाद मनीषा जमीन पर बैठ गयी.

मनीषा के बैठने के बाद सरिता दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह से निकला और अपने हांथो से खेलने लगी और अपने होंठ मनीषा के होंठो पर रख दिया. दोनों एक दूसरे को चुनमे में मसगूल हो गई. दोनों अपने हांथो से मेरे लुंड और गोटियों को सहला रही थी. थोड़ी देर एक दूसरे को चूमने के बाद दोनों अलग हुई और मनीषा ने झुककर मेरे लुंड को चुम लिया और आप हाँथ गोटियों से हटा लिया. दीदी ने भी अपनी जीभ निकलकर मेरे लुंड को चेतना शुरू कर दिया. अब मेरे लुंड पर दो हसीनाओ ने अपनी जीभ का कमल दिखाना शुरू कर दिया था. एक तरफ मेरा लैंड मनीषा चाट रही थी और दूसरी तरफ दीदी मेरा लुंड चाट रही थी. मनीषा ने लुंड chat-te हुवे अपना हाँथ दीदी की चुकी पर रख दिया और सहलाने लगी. दीदी ने अपने हाँथ से मेरी गोटियों को पकड़ लिया और उसे हल्का हल्का दबाने लगी. मेरे मुंह से सिसकी निकल गई.



मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhh मेरिइइइइइइ बहाँऊऊऊऊ. कीटनाआ मज़ाआ दी रही हूँ तुम दोन्यू अपनी भईईई को. ऑरररर जोररर सी चातुओ मेरी लुँड्ड्ड कोऊ. मुँहहह मी लेकर चुसू मेरी लौड़ी को. बहुतत्त माज़ा आए रहा हीी मेरीए मनीषआआआ सरिताआए डार्लिंग.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपना मुंह हीचे किया और मुंह खोलकर मेरी गोटियों को अपने मुंह में ले लिया. मनीषा ने भी लुंड चेतना बंद कर दिया और मुंह खोलकर लुंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मैं तो मस्ती के सातवे आसमानमे पहुंच गया था. मैंने दोनों का सर पकड़कर अपने लुंड और गोठियो पर दबाने लगा. थोड़ी देर तक दोनों ने मेरे लुंड और गोटियों को खूब चूसा. मैंने अपने हाँथ से मनीषा के सर को जोर से अपने लुंड पर दबाकर कुछ देर होल्ड किया. मेरा लुंड मनीषा के हलक तक पहुंच गया. कुछ देर बाद मैंने मनीषा को छोड़ दिया वो मेरे लुंड को अपने मुंह से निकल कर जोर जोर से साँस लेने लगी. और बोली.

मनीषा- क्या भैया. इतनी जोर से मेरा सर अपने लुंड पर दबाया आपने. मेरी तो साँस hi रुक गई थी.

मैं- अरे मनीषा. तुमने hi तो कहा था की तुमको भी दोनों दीदी की तरफ रफ़ चुदाई पसंद है. ये तो बस शुरुआत है. अभी बहुत कुछ होने वाला है तुम्हारे साथ.

इतना कहकर मैं कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया. सरिता दीदी ने मेरी गोटिया अपने मुंह से निकल दी. मैंने दोनों का सर सहलाने लगा. खड़ा होने के बाद मेरा लुंड एकदम सिद्ध में बन्दुक की तरह खड़ा था. दीदी और मनीषा ने एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते हुवे अपने होंठो को मेरे लुंड पर जड़ से लेकर टोपे तक रगड़ने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने अपने लुंड को दोनों के होंठो के बिच आगे पीछे करने लगा.



मैं दोनों का सर अपने लुंड पर दबाने लगा. जिससे मेरा लुंड कैसा हुवा दोनों के होंठो के बिच आगे पीछे हो रहा था. थोड़ी देर ऐसे hi उनके होंठो के बिच लुंड पेलने के बाद मैंने मनीषा को खड़ा किया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए. और एक हाँथ से दीदी का सर पकड़कर अपने लुंड पर दबाने लगा. जिससे दीदी मेरा इशारा शमझ्कर मेरा लुंड पूरा मुंह खोलकर अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

मैं एक हाँथ से दीदी के सर को अपने लुंड पर दबा रहा था और एक हाँथ से मनीषा की चुकी दबाते हुवे उसके होंठ चूस रहा था. थोड़ी देर लुंड चसवाने के बाद मैंने दीदी के बाल पकड़ लिए और दीदी के सर को अपने लुंड पर दबाकर अपनी कमर को एक झटका दिया. जिससे मेरा लुंड जड़ तक दीदी के हलक के निचे उतर गया. दीदी की आँखे बड़ी हो गयी. कुछ देर मैंने दीदी के सर को दबाये रखा उसके बाद मैंने उनका सर छोड़ दिया. दीदी मेरा लुंड अपने मुंह से निकल कर खांसने लगी. और कहने लगी.

सरिता दी- आआआआहहहहह अभियई. तू न सच में जानवर बन जाता है. थोड़ा धीरे से किया कर.

इतना बोलकर दीदी फिर से मेरा लुंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर तक मैंने दीदी को अपना लुंड चुसाया उसके बाद मैंने दीदी को उठाकर अपने आगे खड़ा किया. दीदी को खड़ा करने के बाद मैंने मनीषा को दीदी के सामने दीदी की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया. फिर मैं मनीषा के होंठो को चूसने लगा और अपना लुंड दीदी की गांड में घुसा दिया और हाँथ मनीषा की पीठ पर ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. और उसकी पीठ को सहलाने लगा. कुछ देर मनीषा के होंठ चूसने के बाद मैंने अपना हाँथ दीदी की पीठ पर फिरने लगा और फिरते फिरते दीदी की ब्रा पर रख दिया और उसका हुक खोल दिया.

अब दोनों की ब्रा खुल चुकी थी लेकिन दोनों की चूचिया आपस में दबी होने के कारन ब्रा निचे नहीं गिरी थी. फिर मनीषा ने अपना हाँथ दीदी की चूचियों पर रखकर दबाने लगी और मैं दीदी के कंधे से ब्रा हटाकर उनके कंधे को चूसने लगा. दीदी ने अपना हाँथ उठाकर मेरी गार्डन पर लप्पेट दिया और आँख बंद कर के मज़ा लेने लगी. थोड़ी देर तक ऐसे hi मज़ा लेने के बाद मैं दीदी के पीछे से हैट गया और जाकर बिस्टेर पर बैठ गया, लेकिन दीदी और मनीषा अभी भी एक दूसरे से लगी हुई थी. मैंने दोनों को अपने पास बुलाया. दोनों अपनी गांड मटकती हुई मेरे पास आकर कड़ी हो गयी.

मैंने दीदी को पकड़कर बिस्टेर पर पीठ के बल लिटा दिया और उनकी कमर के निचे 2 तकिया रख दिया मैंने मनीषा को दीदी के ऊपर पेट के बल लेटने के लिए कहा. तो दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दी- तू ये क्या कर रहा है अभी. तू करना क्या चाहता है.

मैं- अब मैं आप दोनों को मज़ा देखता हूँ. बस मैं जैसा कह रहा हूँ तुम दोनों करती जाओ. और जो मैं करना चाहता हूँ मुझे करने दो. तुम दोनों को बहुत मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने मैंने महिषा को दीदी के ऊपर लिटाया और मनीषा को खींचकर दीदी के ऊपर एडजस्ट किया. जिससे अब दीदी और मनीषा की छूट पास पास हो गई. मैं जमीन पर निचे बैठ गया और पहले दोनों की छूट पर एक एक किश किया और फिर अपनी जीब निकल कर मनीषा की छूट पर फिर दी. और उसकी छूट चाटने लगा. मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गयी.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह भाइयाँआ. ऐसी हीई कारु.

मैं मनीषा की छूट चाटने लगा और अपनी बिच वाली ऊँगली सरिता दीदी की छूट में घुसकर दीदी की छूट पेलने लगा. थोड़ी देर मनीषा की छूट चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ सरिता दीदी की छूट पर रख दी और उनकी छूट चाटने लगा और अपनी बिच वाली ऊँगली मनीषा की छूट में पेल दिया. दोनों के मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ आआआह्ह्ह्हह्ह भैय्या निकलने लगा. थोड़ी देर तक मैंने मनीषा की छूट में ऊँगली की फिर मैंने वही ऊँगली निकल कर मनीषा की गांड पर फिरने लगा. ऊँगली फिरते हुवे मैंने अपनी ऊँगली उसके ाशोले पर रख कर दबाव दिया तो मनीषा ने अपनी गांड सिकोड़ ली. मैंने अपना मुंह दीदी की छूट से हटाकर देर सारा थूक मनीषा की गांड पर गिराया और फिर से दीदी की छूट चाटने लगा और अपनी ऊँगली उसके ाशोले में डालने लगा. मेरे जोर लगाने से मेरी ऊँगली थोड़ा सा अंदर गई तो वो दर्द से चीख पड़ी.

मनीषा- आआआआह्ह्ह्हह्ह भैयाआआ. वहा नाहीईईई. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा हीी.

मनीषा के इतना कहने के बाद मैंने अपनी ऊगली उसकी गांड से हटा ली और उसकी छूट में पेल दिया और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. मैं दीदी की छूट भी जोर जोर से पूरी मुंह में भरकर चूस रहा था. फिर मैं अपनी ऊँगली दीदी की छूट में घुसा दी और मनीषा की छूट चाटने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi दोनों की छूट चाटने के बाद मैंने मनीषा को बिस्टेर पर लिटा दिया और दीदी को मनीषा की छूट चाटने के लिए कहा. दीदी ने कहा.

सरिता दी- मुझे नहीं लग रहा है अभी की मैं ये कर पाऊँगी.

मैं- अरे सरिता तुम तो बहुत कुछ कर सकती हैं और मेरे लिए आपको बहुत कुछ करना भी है. अब ज्यादा देर मत करो डार्लिंग. शुरू हो jao.bahut मज़ा आएगा तुमको.

मेरी बात सुनकर दीदी डोगग्य स्टाइल में हो गई और अपना मुंह मैश की छूट पर रख दिया और चूसने लगी. मणि भी दीदी की दोनों जांघो को पकड़कर दीदी के निचे लेट गया और अपना मुंह दीदी की छूट के सामने करके दीदी की जांघो को पकड़कर अपने मुंह पर खींच लिया. दीदी की छूट मेरे मुंह पर आ गयी तो मैंने अपनी जीभ निकलकर उनकी छूट चाटने लगा. मैं दीदी की छूट चाटने के साथ साथ अपनी बिछ वाली ऊँगली दीदी की गांड पर रख दिया और एक झटके में दीदी की गांड में पेल दिया. दीदी को हल्का सा दर्द हुवा तो उन्होंने मनीषा की छूट से अपना मुंह हटाया और सिसक कर बोली.

सरिता दी- आआआअह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ. थोड़ाआआआ धीरे डाल भाईईई. दर्द्द होता है.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-127

जब मैं दीदी की छूट chat-te हुवे अपनी ऊँगली उनकी गांड में डाली तो दीदी हल्का दर्द के कारन सिसक पड़ी. मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड में लगातार पहले धीरे धीरे फिर जोर जोर से अंदर बहार करना शुरू कर दिया. दीदी भी मनीषा की छूट को जोर जोर से चाट रही थी. थोड़ी देर मनीषा की छूट चाटने के बाद दीदी ने अपनी एक ऊँगली मनीषा की छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर मनीषा की छूट में ऊँगली करने के बाद दीदी ने अपना मुंह मनीषा की छूट से हटाया और मुझसे कहा.

सरिता दीदी- अभी. अब तू मेरी जगह मनीषा की छूट चाट मैं तेरा लुंड चुस्ती हूँ.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की छूट छोड़ दी और हैट गया . दीदी भी मनीषा की छूट से अपना मुंह हटा लिया और उठकर बैठ गई. मनीषा हम दोनों को देख रही थी. मैंने मनीषा से पुछा.

मनीषा- टेल है क्या तुम्हारे कमरे में.

मनीषा- टेल की क्या जर्रूरत है भाई.

मैं- आज तुम्हारी गांड का उद्घाटन होगा. तो उसके लिए पहले मुझे तुम्हारी गांड को चिकना करना पड़ेगा. लुंड को तुम्हारी गांड में घुसाने के लिए रास्ता बनाना पड़ेगा. उसके लिए तेल की जरुरत है.

मनीषा- क्या जरुरी है भैया मेरी गांड मरना. आज छूट छोड़ लो गांड फिर कभी मर लेना.

मैं- देखे मनीषा तुमने hi कहा था की जब सरिता दीदी तुम्हारे साथ होंगी और वो तुम्हारी गांड मरवाने में तुम्हारी मदद करेंगी तभी तुम मुझसे अपनी गांड मरवाओगी. तो अब सरिता दीदी भी हमारे साथ हैं. तो अब क्या प्रॉब्लम है तुमको.

मनीषा- प्रॉब्लम कुछ नहीं है भैया. बस थोड़ा दर लग रहा है. आपका बहुत बड़ा है न.

मैं- कुछ नहीं होगा मनीषा. सरिता तो बहुत मज़े से अपनी गांड मरवाती हैं.

सरिता di(hanskar)- हआ हआ मुझे पता है की मुझे कितना मज़ा आता है. सेल एकदम जानवर बैंकर गांड मरते हो. तनिकक भी रहम नहीं करते.

मैं- क्या यार सरिता, क्यों मनीषा को दरकार मेरे लुंड को तरसना चाहती हो. अगर मनीषा ने आज अपनी गांड मुझे नहीं दी तो मैं तुम्हारी गांड की आज धज्जिया उदा दूंगा. देख लेना.

सरिता दी- चालल हैट बड़ा आया धज्जिया उड़ने वाला. कही ऐसा न हो की मेरी गांड की धज्जिया उड़ने के चक्कर में तुम्हारे लुंड का काम न तमाम हो जाये.

मैं- वो तो अभी कुछ देर में पता चल जायेगा की मरे काम तमाम होता है की तुम्हारी गांड fat-ti है.

मनीषा- अब आप लोग बस भी करिये. जो करना है पहले उसको करिये. ये बहस बाद में कर लेना.

मैं- देखो सरिता. कुछ सीखो अपनी छोटी बहन से. सच्ची समय पर सही चीज़ करनी चाहिए.

मनीषा- उस डरोएर में है करवा तेल.

मनीषा ने एक डरोययर की तरफ इशारा करते हुवे कहा. सरिता दीदी ने डरोययर खोलकर करवा तेल निकल लिया और मुझे दे दिया. मैंने मनीषा की कमर की निचे एक मोती तकिया लगा दिया. जिससे उसकी छूट और गांड ऊपर उठ गयी. मैंने मनीषा की तंग पकड़कर उसे और अपनी तरफ खींचा और मैं निचे जमीन पर खड़ा हो गया. मैंने सरिता दीदी को बीएड के सहारे तक लगा कर बैठा दिया. अब मैं मनीषा की छूट पर झुक गया और उसकी छूट को चाटने लगा. मेरे झुकने से मेरा लुंड दीदी के मुंह के बिलकुल पास आ गया. जिसे दीदी ने अपने हांथो में लेकर सहलाने lagi.main मनीषा की छूट को चाटते हुवे अपनी एक ऊँगली उसकी छूट में घुसकर अच्छी तरह गीली कर ली और फिर उसको निकल कर उसके ाशोले पर रख दिया.

मैं अपनी ऊगली उसकी गांड की छेड़ पर घूमने लगा और जोर जोर से मनीषा की छूट चाटने लगा. मैंने एक हाँथ से बोतल उठाकर कुछ तेल मनीषा की गांड पर गिराया और अपनी ऊँगली से उसे मनीषा की गांड के छेड़ में डालने की कोशिश करने लगा. थोड़ी देर बाद जब तेल सुख गया तो मैंने फिर कुछ तेल मनीषा की गांड पर गिराया और अपनी ऊँगली अच्छी तरीके से तेल पर लप्पेट कर मनीषा की गांड के छेड़ पर रख दिया और उसे अंदर प्रेस करने लगा. उधर निचे दीदी मेरे लुंड अपने पूरा मुंह खोलकर अंदर लेकर आगे पीछे कर रही थी. और एक हाँथ से मेरी गोटिया सहला रही थी.

मैंने अपनी कमर धीरे धीरे चलनी शुरू कर दी और दीदी का मुंह छोड़ने लगा. ऊपर मैंने अपनी ऊँगली मनीषा की गांड के छेड़ पर रखकर थोड़ा जोर दिया तो पुकककककक की आवाज़ आई और मेरे ऊँगली 1 इंच मनीषा की गांड में चली गई. उस प्खकक की आवाज़ के साथ मनीषा की चीख भी सुनाई पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhh भठाईयाँआ बहारर निकालूओ अपनी ऊंगलीई मेर्रीीी गानाद्द्ड सीए. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हैई. ऊऊऊओह्ह्ह्हह भैइय्या.

मैं- बॉस मनीषा थोड़ा दर्द बर्दास्त कर लो. मैं लुंड के लिए राष्ट बना रहा हूँ.

इतना कहकर मैं फिर से मणिधा की छूट चाटने लगा और फिर थोड़ा सा तेल ुकि गांड के छेड़ पर डालकर उतनी hi ऊँगली उसकी गांड में घूमने लगा. साथ hi मैंने अपनी कमर को एक झटका दिया और अपना पूरा लुंड दीदी के मुंह में पेल दिया. और अपनी कमर को वही रोक दी. दीदी gggggguuuuuuuuuu गगगगगगगगगूउऊउउउ करने लगी. जब मुझे लगा की दीदी की साँस रुकने लगी है तो मैंने अपनी कमर पीछे कर ली और अपना लुंड दीदी के मुंह से बहार निकल लिया. लुंड निकलने के बाद दीदी खांसने लगी और बोली.

सरिता दी- क्या कमीने. थोड़ा धीरे नहीं कर सकता था. एक hi बार में पुरे हलक तक पेल दिया. सेल मुझे मरने का इरादा है क्या. अगर मैं मर गयी न तो तू छूट के लिये तरस जायेगा.

main-(chut से मुंह हटाकर). मैं तुझे ऐसे थोड़ी hi मरने दूंगा सरिता. अभी तो मैंने तुझको अच्छी तरह छोड़ा hi कहा है. अभी तो तुझे सविता दीदी के साथ मिलकर छोड़ना है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी और मनीषा दोनों चकित रह गयी. तब मनीषा ने कहा.

मनीषा- ज्यादा सपने मत देखो भैया. सविता दीदी को आप मनीषा या सरिता दीदी न समझे. वो कभी भी इसके लिए तैयार नहीं होंगी. आप उन्हें अच्छी तरह जानते हैं.

मैं- वो सब तुम मुझपर छोड़ दो. अभी उसमे बहुत समय है. अभी तो तुम दोनों को साथ में छोड़ लू.

इतना कहकर मैंने फिर से ढेर सारा तेल मनीषा की गांड पर गिरा दिया और उसकी छूट चाटते हुवे मनीषा मनीषा की गांड में अपनी ऊँगली अंदर बहार करने लगा. निचे दीदी फिर से मेरा लुंड चूसने लगी थी. मैं फिर से जोर जोर के धक्के लगाकर दीदी का मुंह छोड़ने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi मनीषा की गांड में ऊँगली करने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकली और मनीषा की छूट को पूरा अपने मुंह में भरकर जोर से चूसा और एक झटके में अपनी ऊँगली मनीषा की गांड में घुसा दी. मनीषा दर्द से चीख पड़ी.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyyy. बहररर निकालूओ भैयाआ अपनीइ ऊंगलीईईई मेरिइइइइ गांडड सीए. आआआआहहहहहहह मुझी बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा हैईईई. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाआ . मैंन मारर्र जाउँगग्गीइइइइइ. रहमममम करूओ भैईयाआ.

मनीषा चखने के साथ hi अपने शरीर को इधर उधर करके अपने आपको छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उसकी जांघो को मजबूती से पकड़ रखा था. इसलिए वो मचलने के आलावा कुछ नहीं कर सकती थी. थोड़ी देर मैंने अपनी ऊँगली उसकी गांड में रोक दी और मनीषा की छूट जोर जोर से चाटने लगा. निचे मैं अपना लुंड जोर जोर से दीदी के मुंह में पेलने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने थोड़ा सा तेल मनीषा की गांड में दाल दिया और अपनी ऊँगली धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा. मैं मनीषा की छूट जोर जोर से चूसने के साथ अब अपनी एक ऊँगली मनीषा की छूट में भी दाल दी. और उसकी छूट छोड़ने लगा.

निचे मैं अपनी कमर हचक हचक कर दीदी के मुंह में ठोकने लगा. मेरा पूरा लुंड दीदी के हालत तक घुस रहा था. मैं अब झड़ने के करीब पहुंच गया tha.maine अपने मुंह और हाँथ की गति मनीषा की छूट में बढ़ा दी थी. मनीषा भी अब झड़ने के करीब पहुंच गई. मैं अपनी ऊँगली उसकी गांड में तेज़ी से अंदर बहार करना laga.manisha आअह्ह्ह्ह भैया ऊऊऊओह्ह भैया करने लगी. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मनीषा का शरीर अकडने लगा. और वो जोर से चिल्लाते हुवे झड़ने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआ. मैंनं अअअअअ रहियी होऊणननननननन बहुतत्त मज़ाआ आए रहा ही. मुझी औरर जोररर सीई चूसिएई मेरीए छुट्ट्ट्ट कोऊ भैयाआ. कहा जेईई. डीडीईई मैं झाड़ड़ड़ रहहीइ हुन्न. भईया नई मेरीए छूटत चाट चाट कर इसका पनीई निकाल दिया. aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैयाआ मैंन gaiiiiiiiiii सलेईईईई.

इतना कहकर मनीषा झाड़ गई. मैं भी अब झड़ने की कगार पर था. तो मैंने एक पेअर उठाकर बिस्टेर पर रखा और मनीषा की छूट का रास पिटे हुवे पूरी ताकत से दीदी के मुंह को छोड़ने लगा. और दीदी को गालिया देते हुवे बड़बड़ाने लगा.

मैं- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh सवितत्ताआआआ. मेरिइइइइइइइ जाननननननन. ली मैंनं आआ रहा हूंणन्नन्नन्न. मेंननननननन झाड़ड़ड़ रहा हूंणंन्न. बहुत्तत्त छुडासीइइइइइ रहतीई हीी चू सलीईई. बहुतत्त ग्रामं मुँहहह हैई तेरा. तूने तो मेरीए लुंदड़ निछोड़ड़ड़ लिया. बहुतत्त गराम माललळ हैई टूउउ. लिए रनडीई सलिई ऑर्डर अंडरर तक्क मेरा लुंदड़ अपनी मुंह मई. आजजज मैं तेरा मुंह फाड़ डालूंगा. लिए कामिनीईई. मैं झाड़ड़ड़ रहा होऊणंन्न. पूरा माललळ पीई जा मेरे लुंदड़ का. इक्क बूँद भी नहीं गिरना चाहियेए जमीनी मी. ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सरिताआए.

इतना कहकर मैं सरिता दीदी के मुंह में झड़ने लगा. मैंने अपना लुंड अभी तक दीदी के गले में डाला हुवा था. मैंने तब तक अपना लुंड बहार नहीं निकला जब तक मेरे वीर्य की एक एक बूँद दीदी ने पि नहीं ली. जब मैंने लुंड बहार निकला तो दीदी हांफ रही थी. 5 मिनट तक मैं ऐसे hi पड़ा रहा उसके बाद मैंने खड़ा हुवा और दीदी को उठाकर खड़ा किया और बिस्टेर पर जाकर लेट गया. और दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- बहुत मज़ा आया सरिता तुम्हारा मुंह छोड़कर. ऐसा लग रहा था की मैं छूट छोड़ रहा हूँ.

सरिता दी- तुझे तो मज़ा मिलना hi था सेल. मेरा गाला फाड़ दिया तुमने. तुम दोनों का तो हो गया अब मेरे बार में भी कुछ सोचो तुम दोनों.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपने साइन पर बैठने के लिए कहा. दीदी आकर पाने पेअर दोनों तरफ रखकर मेरे साइन पर बैठ गयी. मैंने दीदी की गांड पकड़कर अपने मुंह की तरफ खींचा तो दीदी की छूट मेरे मुंह से जा लगी.



और मैं दीदी की छूट चाटने लगा. मैंने दीदी की छूट chat-te हुवे अपना दोनों हाँथ ऊपर करके दीदी की दोनों चूचियों को अपने हांथो में भर लिया और उन्हें दबाने लगा. मुझे झड़े 15 मिनट का समय हो गया था इसलिए मेरे लुंड में जान आने लगी. तभी मुझे अपने लैंड पर मनीषा का हाँथ महसूस हुवा. मेरे शरीर ने एक झटका खाया. मैंने अपने दोनों हांथो से दीदी की चूचियों को जोर से दबा दिया. दीदी मस्ती से चीख पड़ी.

सरित ा दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh भैयाआआआ. थोड़ा धिर्री दबाओओओओओओओओओ. ऊऊऊओह्ह्ह्ह और जूर्रर सीए चटूओ मेरीए छुट्ट्ट्ट aaaaahhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइइ.

दीदी इतना बोलकर मेरी तरफ देखने लगी मैंने दी जब दीदी की आँखों में देखा तो दीदी की आँखों लाल हो गयी थी. मैंने दीदी की चूचियों को जार जोर से बढ़ाते हुवे दीदी की छूट पूरी मुंह में भरकर चूसने लगा. निचे मेरा लुंड पूरा खड़ा हो गया था जिसे मनीषा अपने मुंह में लेकर चूस रही थी. थोड़ी देर लुंड चूसे के बाद मनीषा अपना पूरा मुंह खोला और तेज़ी से मेरे लुंड पर अपना मुंह पटकने लगी. मैं भी दीदी की छूट जोर जोर से चूसने लगा. छूट चूसै और चूचिया दबवाने से दीदी एकदम छुडासी हो गयी थी और वो अपने दोनों हांथो से अपने अपने बालो में फसकर इधर उधर करती हुई बिली.

सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiii मेरेईईई राजाआं. अब्ब्ब्ब चूड्डड्ड दिए मुझी चू. मेरीए छूट में खुजलिई माछह गयी हैईईई इस खहजली को चू अपनी लुंड सी मिटा दी मेरे भाईईई. छोड़ दी अपनीइ डीडीई कोऊ मेरे दिलबररर.

इतना कहकर दीदी मेरे ऊपर से हैट गयी तो मैंने हाँथ बढाकर मनीषा का सर पकड़कर अपनी कमर ऊपर उछाल उछाल कर अपना लुंड मनीषा के मुंह में पेल दिया और लगातार 8-10 जोरदार धक्के लगाकर अपना लुंड बहार खींच लिया.



मैंने दीदी को डोगग्य स्टाइल में खड़ा किया और दीदी के पीछे आ गया. मैंने मनीषा को दीदी के मुंह के पास छूट करके लेटने के लिए कहा. मनीषा मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.

manisha-(shararati मुस्कान के साथ) क्या बात हैई भैय्या. आपने दीदी को 3-4 बार hi छोड़ा है और दीदी ने आपको अपना राजा, अपना दिलबर बना लिया. पता नहीं जैसे जैसे आप दीदी को छोड़ते जाओगी वैसे वैसे दीदी आपको और पता नहीं क्या क्या बनती चली जाएँगी. देखना भैया कही ऐसा न हो की दीदी आपको अपने भैया से सैया न बना ले. फिर तो जीजा जी का पत्ता hi काट जाएगा.

सरिता दी- अच्छा अब तू ज्यादा मत बोल. और जल्दी से लेते. कब से बकर बकर कर रही है.

दीदी की बात सुनकर मैंने मनीषा से कहा.

मैं- तू चिंता मत कर मनीषा. मैं तुझे भी इतना मज़ा दूंगा की बहुत जल्दी तू भी मुझे अपना सैया बना लेगी.

मेरी बात सुनकर मनीषा दीदी के निचे पीठ के बल लेते गयी और अपनी छूट दीदी के मुंह के सामने कर दी. मैंने दीदी का सर पकड़कर मनीषा की छूट पर झुका दिया दीदी ने तुरंत अपनी जीभ निकल कर मनीषा की छूट को चाट लिया मनीषा भी गरम हो गाइट hi. उसके मुंह से सिसकी निकल गयी.



मनीषा- Aaaaaaahhhhhhhhhh didiiiiiiiiiiii. आईसीईए होई.

मैंने अपना लुंड दीदी की छूट पर रख दिया और दीदी की एक जांघ को पकड़कर उनकी छूट पर एक धक्का मारा. मेरा लुंड दीदी की छूट में आधा घुस गया. दीदी मस्ती में सिसक पड़ी और मनीषा की छूट से मुंह हटाकर बोली.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. ऐसे हीईईई छोड़ड़ड़ पनीइ डीडीईई कोऊ.

दीदी फिर से मनीषा की छूट चूसने लगी. मनीषा ने हाँथ बढाकर दीदी के सर को पकड़ लिया और अपनी छूट पर दबाने लगी. मैंने दीदी की जांघ को पकड़कर एक और धक्का दिया जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट में जड़ तक घुस गया दीदी पूरी तरह से मनीषा की छूट पर अपना मुंह जोर से दबा दिया और कुछ देर बाद अपना मुंह हटाकर चीखते हुवे बोली.

सरिता di-aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh Saaleeeeeeeeeeeee अभीयी. बस आईसीए होऊ छोड़ड़ड़ मुझी मेरे छोड़ू सनमममम. चू बहुत्त अच्छआ चुड़क्कड़ भाईई हीी. जोऊ अपनीई बहन को छोड़ता हैईईई. बहुत्त मज़ाआ आ रहा हीी. औरर जोरर सी छोड़ड़ड़ मुझेईई. मैंन आअज्ज्ज्ज तुझसेएई अपना हर्र छेईड्ड खुलवाऊंगीीी. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार खींच लिया. दीदी पलटकर मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने उन्हें इशारे से चुप रहने के लिए कहा और मनीषा को घूमकर लेटने के लिए कहा. मेरी बात मानकर मनीषा घूमकर दीदी के निचे फिर लेट गयी तो मैंने दीदी को मनीषा के ऊपर लिटा दिया अब दीदी की छूट मनीषा के मुंह की तरफ और मनीषा की छूट दीदी के मुंह की तरफ हो गई मैंने फिर से अपना लुंड सरिता दीदी की छूट पर रखा और एक hi झटके में अपने पूरा लुंड दीदी की छूट में पेल दिया दीदी दर्द और मज़े से अपनी छूट मनीषा के मुंह पर रगड़ते हुवे चिल्लाई.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अभीइइइइइइइ सलीईई. पूरा डायलललल दिए अपन्ना यी मोटा लुंदड़ मेरीए छुटत मई, पल दी मुज्झी जी भार के पीए मुझी. अपनी कुटिया बनाकररर छोड़ मुझीऐ. छोड़ड़ड़ मुझी साली. औरर जोरर सी छोड़ड़ड़. दम्मम नाहीइ हाई kyaaa.chhooodd मुज्झिये. ऑर्डर जोर जोरर सी छोड़. मुझी बहुत्त मज़ा आ रहा हैई.

मैंने हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. मनीषा अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाटने लगी. कभी कब्भी मनीषा अपना सर थोड़ा सा ऊपर करके अपनी जीभ चलती थी तो वो मेरे लुंड को भी चाट लेती थी. मनीषा ने अपनी पेअर को कैची बनाकर सरिता दीदी की गार्डन पर लप्पेट लिया और अपनी छूट पर दबाने लगी, सरिता दीदी अपनी जीभ निकल कर मनीषा की छूट चाटने लगी. थोड़ी देर छूट चाटने के बाद दीदी ने अपनी ऊँगली मनीषा की छूट में घुसा दी और जोर जोर से अंदर बहार करने लगी. मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता. तुम अपनी ऊँगली से मनीषा की गांड को भी धीरे धीरे छोड़ो. ताकि इसकी गांड भी थोड़ी ढीली हो जाये. नहीं तो इसको मेरा लुंड लेने में बहुत दर्द सहना पड़ेगा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी ऊँगली छूट से निकली और मनीषा की गांड में एक झटके में दाल दी. मनीषा के शरीर में दर्द की लहार दौड़ गई और मनीषा धीरे से चिल्ला उठी.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह diidiiiiiiiiii. आरईईए भैया तू फिररर भीई जानवर बाण जाती हैं, लेकिन आप तो मेरीए बहाणं हीी. आप तू मेरी गनददद मी धीरे से उगली दाल सक्ती थिई ना लेकिन आप भी भैया की साथ चुदाई करवा कररर एकदामम जानवर्र बन्न गयी होऊ.

मनीषा की बात सुनकर दीदी जोर जोर से उसकी गांड में ऊँगली करने लगी और उसकी छूट चूसने लगी. मैंने भी सरिता दीदी की कमर थामकर दीदी को हचक हचक कर छोड़ने लगा. मैं बहुत जोर जोर से धक्का मर्डर रहा था. दीदी की गांड मेरे हर धक्के से साथ थिरकने लगती थी. दीदी अब बहुत गरम हो गई थी. वो भी अपनी गांड पीछे की तरफ उछाल उछाल कर अपनी छूट छुड़वा रही थी और बोल रही थी.

सरिता दीदी- AAaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh कामिनी. धीरी कर नाहा. टूउउ कभी कभी बहुतत्त तेज़ ढक्की मरता हीी. मुझी हर्र ढक्की से ऐसी लगता हैई जैसी मेरा कलेजा मुंह को आए जायेगा. ऐसी होई छोड़ड़ड़ अपनीई रानीई कोऊ. oooooooooohhhhhhhh अभीयी.

दीदी की बात सुनकर मैंने और डैम लगाकर दीदी की छूट छोड़ने लगा. दीदी की छूट इतनी आगे पीछे हो रही थी की मनीषा के पूरा मुंह पर दीदी की छूट घिस रही थी. और मनीषा भी अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाट रही थी. थोड़ी देर तक दीदी को ऐसे hi छोड़ने के बाद दीदी झड़ने के करीब पहुंच गई इसलिए वो और जोर जोर से अपनी कमर पिचई करने लगी और गालिया देते हुवे बड़बड़ाने लगी.

सरिता दीदी- aahhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhh haaaaaaaaaaannnnnnnn मेरी राजाआं, मारर्र गईई री चूडड़ड री ऑर्डर जोरर सीए चुड़ड़ड़ड़ड़. uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्य्यय्य मैंन gayyyyyiiiiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiiiiii. ऑर्डर जोररर सी चूडड़ड बहाणं छोड़ड़ड़ड़. uiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiii manishaaaaaaaaaaa. देखहहहहह टीईर्र्र्र भईईई नीई मेरीए छुट्ट्ट्ट पहाड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई हीी री. फातटत गयी मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट. ारी हार्रामीइइइइइइइ. अपनीईई डीईडीई कोई छुटत फाडड्ड दलीय तुमनेई. टुन्नी टूवू ाजजजजजजज चुड्ड़ कर मेराआ daaammmmmmmmmm होई निक्काललल दिया रईईए.

मैंनं एककददाम्मम बिहालल होऊ गाइइइइइइइ हुन्न. बहुत्तत्तत्त मदारररचुड्ड़ होऊ तुमममम bhaaiiiiiiiiii. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुउट्ठ बाददद लुंदड़ हैई तेराआ kaminneeeee.aaahhhhhhhhhhhhh. अगारररर मैंनं तुझसी आईसीई होई ीअपनीइ अपनीई शाद्दीय तआक़्क़क़ चूड़वत्तीय रही तू मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट कोऊ टूउउ भॉसड़ा बनाकररर ही मुझी मेरेई ससुरालललल भेजिएगा. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कामिनी सल्ली मैंन झाड़नी वालीए होऊणननननन. मैनी गयी मैं gaiiiiiiiiii.

इतना कहकर डीडीई भलभलाकर झाड़ gaiiiiiiiiiiiiii.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-128

सरिता दीदी- aahhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhh haaaaaaaaaaannnnnnnn मेरी राजाआं, मारर्र गईई री चूडड़ड री ऑर्डर जोरर सीए चुड़ड़ड़ड़ड़. uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्य्यय्य मैंन gayyyyyiiiiiiiiiiiiiii Abhiiiiiiiiiiiii. ऑर्डर जोररर सी चूडड़ड बहाणं छोड़ड़ड़ड़. uiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiii manishaaaaaaaaaaa. देखहहहहह टीईर्र्र्र भईईई नीई मेरीए छुट्ट्ट्ट पहाड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ डीई हीी री. फातटत गयी मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट. ारी हार्रामीइइइइइइइ. अपनीईई डीईडीई कोई छुटत फाडड्ड दलीय तुमनेई. टुन्नी टूवू ाजजजजजजज चुड्ड़ कर मेराआ daaammmmmmmmmm होई निक्काललल दिया रईईए. मैंनं एककददाम्मम बिहालल होऊ गाइइइइइइइ हुन्न. बहुत्तत्तत्त मदारररचुड्ड़ होऊ तुमममम bhaaiiiiiiiiii. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुउट्ठ बाददद लुंदड़ हैई तेराआ kaminneeeee.aaahhhhhhhhhhhhh. अगारररर मैंनं तुझसी आईसीई होई ीअपनीइ अपनीई शाद्दीय तआक़्क़क़ चूड़वत्तीय रही तू मेरिइइइइ छुट्ट्ट्ट कोऊ टूउउ भॉसड़ा बनाकररर ही मुझी मेरेई ससुरालललल भेजिएगा. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कामिनी सल्ली मैंन झाड़नी वालीए होऊणननननन. मैनी गयी मैं gaiiiiiiiiii.

इतना कहकर डीडीई भलभलाकर झाड़ gaiiiiiiiiiiiiii.

अब आगे.

दीदी मुझे गली देती हुवी झाड़ गई, मैंने भी अपना लुंड जड़ तक दीदी की छूट में पेले दीदी के झड़ने तक पड़ा रहा, और उसके बाद लुंड बहार निकल लिया, लेकिन झड़ते हुवी उन्होंने मनीषा की छूट को कसकर अपने मुंह में भर लिया और काट लिया जिससे मनीषा के मुंह से चीख निकल पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh Saliiiiiiiiii kaminiiiiiiiiiii. मेरिइइइइइ छुट्ट्ट्ट मई क्यूओ दात्ततत्त गाडायआ दियाआआ टुन्नीयी. तुझ्कूऊऊओ थूककक तू भैया रही हीी तू इसका बदला मुझसेइ क्यों ली रहीए हीी कुटटीई. aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ooooooohhhhhhhhhhhh.

मनीषा ने दीदी को गली तो दे दी, लेकिन कुछ देर बाद जब मनीषा को रीलीज़ हुवा तो वो थोड़ा साद हो गई और दीदी को अपने ऊपर से हटाकर उठकर बैठ गयी और दीदी से माफ़ी मांगते हुवे बोली.

मनीषा- सॉरी दीदी. वो मैंने आपको जानबूझकर गली नहीं दी. मुझे बहुत तेज़ दर्द हुवा था. तो मेरे मुंह से गुस्से में अचानक से निकल गया. मुझे माफ़ कर दीजिए दीदी.

सरिता दी( उसका गाल सहलाकर) कोई बात नहीं मनीषा. अभी तो इससे भी गन्दी गन्दी गली देता है मुझे कुड़सी के समय, लेकिन चुदाई के बाद कितने सम्मान से बात करता है मुझसे. तो तू भी ये भूल जा. चुदाई के समय ये सब नार्मल है, लेकिन सिर्फ चुदाई तक hi, बाद में नहीं.

दीदी की बात सुनकर मैंने मनीषा को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके होंठो को चूमने गाला. मनीषा भी मेरा होंठ चूसने lagi.thodi देर दीदी ऐसे hi बैठी रही फिर दीदी ने झुककर मेरे लुंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं मनीषा का होंठ चूमते हुवे मनीषा की चुकी दबाने लगा. मनीषा गरम हो गयी और मुझसे बोली.

मनीषा- दीदी का तो हो गया भैया अब मेरी भी प्यास बुझा दो न.

मनीषा की बात सुनकर मैं बिस्टेर पर लेट गया और दीदी को मेरे मुंह पर अपनी छूट रखने के लिए कहा और मनीषा को लुंड छूट में लेने का इशारा किया मेरी बात सुनकर मनीषा अपने दोनों पेअर मेरी कमर के दोनों तरफ रखा और निचे बैठने लगी तो दीदी ने मेरा लुंड पकड़कर सीधा किया और उसे मनीषा के छूट के मुंह में लगा दिया. मनीषा थोड़ा वेट मेरे लुंड पर डाला तो लुंड कच्छ की आवाज़ के साथ कुछ इंच मनीषा की छूट में घुस गया. मनीषा के मुंह से आआआआअह्हह्ह्ह्हह भैया की आवाज़ निकल गयी. फिर दीदी उठकर मनीषा की तरफ मुंह करके मेरे मुंह पर अपनी छूट रखकर बैठ गयी. मैं अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट चाटने लगा. मनीषा ने फिर से अपना थोड़ा भर मेरे लुंड पर दिया और मेरा लुंड थोड़ा सा और मनीषा की छूट में चला गया. मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गयी.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह bhaiyaaaaaaaaaaaaaa.

मैं दीदी की छूट चाटते हुवे दीदी को कुछ इशारा किया दीदी मेरा इशारा समझकर मनीषा के कंधे पर अपने दोने हाँथ रख दिए इस बार जब मनीषा ने अपना भर लुंड पर डाला तो दीदी ने मुझे इशारा करके मनीषा को पकड़कर कंधे से दबा दिया और मैंने निचे से कमर उचका दी. जिससे मेरा लुंड मनीषा की छूट की दीवारों को चीरता हुवा जाड तक उसकी छूट में समां गया. मनीषा चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyyy. मैं मर्डर गाइइइइइ. aaaaaahhhhhhhhhhh. उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ्फ़ . मेरीए छूटत फ़ायत फाइइइइइ आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीयीय दिखोऊ सरित्ता डीडीई भैया की सठह मिललकर मेरी छूटत पहाड़ डीई हैई. ooooooohhhhhhhhhhhhh डीडीइइइइइ. अपनीई बहाणणणणण का ख़याललल नाहीई आया तुमकुआऊ जोऊ इस छोड़ूऊ का साठः दी राहीयहोऊ, आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह धिर्री काररर भैइयाआ. ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ राहहह हीी. उउउउउइइइइइइइ

मनीषा की बात सुनकर मैं निचे से कमर उछलने लगा. और दीदी की छूट चाटने लगा. दीदी ने भी अपने होंठ आगे बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया और चूमने लगी.

मनीषा ने भी दीदी का साथ दिया और दीदी के होंठो को चूमने लगी और हाँथ आगे बढाकर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी. दीदी ने भी मनीषा की चूचियों को पकड़ कर मरोड़ दिया. जिससे मनीषा की चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaahhhhhhhhhhh डीडीई. धीरी सी दरड़ होता ही.

इतना बोलकर मनीषा फिर से दीदी के होंठ चूसने लगी. मनीषा मेरे लुंड पर उछाल रही थी और मैं भी निचे से कमर उछाल उछाल कर मनीषा को छोड़ रहा था. थोड़ी देर बाद मनीषा ने दीदी के होंठो को छोड़ा और जोर जोर से साँस लेते हुवे कहा.

मनीषा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैइयाआ. और जोर से छोड़ो भैया बहुत्त अछ्हा लगगग रहा हैई. कितनी मर्डददानी ताकत हैई tum-mee.. छोड़ो अपनी बहन को. पूरा डैम लगाकर छोड़ो. ओह्ह्ह्हह्ह uuuuuuuiiiiiiiiiiiiiii aaaaaaaaaahhhh भाइय्य्य्यय्यआआआ फाआड़ड़ड़ड़ डालूओ.

सरिता दी- अभी तू बड़ा चिल्ला रहीए थी की दर्द हो रहा हैई. मैं मर जौंगीय. और अब देखो कामिनी को कह रही ही फाड़ दोऊ. अभी इस कामिनी को पटक पटक कर छोड़ और फाड़ दल इसकी छूट को. तब समझ में आएगा इसको की छूट छुड़वाना कोइई बच्चू का खेल नहीं है. फाड़ डल्लो भैई.

इतना कहकर दीदी ने अपना मुंह आगे बढाकर मनीषा की एक चुकी को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी और एक हाँथ से उसकी चुकी को जोर जोर से दबाने lagi.main मनीषा की छूट छोड़ता हुवा दीदी की छूट chat-ta रहा. दीदी मनीषा की चुकी को मुठीय में भरकर जोर से मसल दिया और एक चुकी को मुंह में भरकर काट लिया. मैंने भी उसी समय अपनी कमर जो जोर से ऊपर की तरफ उछाला. जिससे मेरा लुंड सीधा जाकर मनीषा की बच्चेदानी से टकराया. मनीषा को इससे बहुत ज्यादा मज़ा और दर्द मिला. वो मस्ती में सिसकते हुवे बोली.



मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैया. बहुत्त मज़ा आ रहा हीी. ऐसे hi छोडीईए मेरे ररज़ाअ. औरर जोरर से दबाओ मेरी चुकी दीदी. खा जाओ मेरी चूचियोऊ कोऊ. निचोड़ लो दीदी इनका सारा रास. आप दोनों ने मुझे पागल कर दिया ही. और जोरर से धक्का मारो भैया. निचोड़ लो मेरी छूट का सारा रास. आआअह्ह्ह्हह भैयाआ.

मनीषा की सिसकारी सुनकर मैंने दीदी को अपने ऊपर से हटा दिया और उठाकर बैठ गया और मनीषा को गॉड में लेकर बिस्तर पर खड़ा हो गया और मनीषा को पकड़कर अपने लुंड पर पटकने लगा, दीदी मनीषा के निचे बैठ गयी और अपनी जीभ निकलकर मनीषा की छूट चाटने लगी. थोड़ी देर मनीषा की छूट चाटने के बाद दी ने अपनी एक ऊँगली मनीषा की गांड में घुसा दी. गांड में ऊँगली घुसते hi मनीषा एकदम से उछलकर मेरे साइन सी लिपट गयी. मनीषा ने अपनी गार्डन मेरी गार्डन में दल दी और मैं निचे से अपनी कमर ऊपर की तरफ उचककर और मनीषा को अपने लुंड पर पटक पटक कर उसको जोर जोर से छोड़ने लगा. मनीषा मस्ती में कहने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh भैयाआ. औरर जोरर सू छोडोऊ मुझी. डैम नही ही क्या तेरी लुंड मी सेल. मुइजही भी उसी तरह सी छोड़ जिस तरहहह सी तुमने अपनीई ितममम को छोड़ था. औरर छोड़ साली मुझी भी उसी की तरह बेरहमी से चूडड़ड. और जोर से छोड़ सेल.

मैं- तुम किस आइटम की बात कर रही हूँ मनीषा जिसे मैनी बेरहमी से छोड़ा था.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह oooooooooohhhhhhh सलेटी. जाननभूझ कर अनजान बाण रहा हैई. उसी कोऊ छोड़ा तुमने बेरहमी सी जिसे छोड़कर तुम बहनचोड़ बने थी. वोऊ नीची बइठही ही औरर तुम्हारा लुंड औरर मेरी छूट चाट रही हैई ऑर्डर मेरी गांड मी अपनी उंगली दाग रही हैई. मुझे भी अपनी उसी ितीमम की तरहहह बेरहमी से छोड़ो. मुझे भी गली देकर छोड़ो भैया. मुझे बहुत्त अच्छा लगेगा.

मैं- लेकिन मैं तुम्हे बहुत्त प्यार सी छोड़ना चाहता हूँ मनीषा.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने अपनी ऊँगली जब तक मनीषा की गांड से बहार निकली और एक hi झटके में पूरी ऊँगली उसकी गांड में पेल दी और मुझसे बोली.

सरिता दी- क्यों अभी. मैं तुम्हारी बहन नही हों क्या जो मुझे बेरहमी के साथ छोड़ते हो. मुझे छोड़ते हुवे गन्दी गन्दी गली देते हो. एकदम रंडी की तरह छोड़ते हो. और जब मनीषा खुद तुम्हारी रंडी बैंकर तुमसे छुड़वाना चाहती है तो उसे प्यार से छोड़ना चाहते हो.

दीदी की बात सुनकर मनीषा ने मेरे लुंड पर उछलते हुवे मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

मनीषा- आआआआहहहहहहह सेल छोड़ मुझी. हचक्क हचक्क कर छोड़. कचूमर बनना दे मेरी छूट का. आज से मैं तेरी गुलाम हो गयी हूँ बहनचोड़. तू जब कहेगा मैं अपनी छूट खोलकर तेरे सामने लेट जाउंगी. और जोर से छोड़ो मुझे भैया और जोर से.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को बिस्टेर पर लिटा दिया और दीदी का हाँथ पकड़कर दीदी को भी उसके बगल लिटा दिया. दीदी करवट लेकर मनीषा से सत्कार लेट गयी और अपना हाँथ मनीषा के गार्डन के निचे से डालकर उसके एक हाँथ को पकड़ लिया. मैंने फिर से अपना लुंड मनीषा की छूट पर टिकाया और एक झटके में अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया. मनीषा दर्द और मस्ती से सिसक पड़ी.



मनीषा- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhh भैया दीरी सी.

मैं दीदी के एक पेअर को पकड़कर मनीषा की चोट को ठोकने आगा. दीदी ने अपना एक हाँथ मनीषा की छूट पर रखा और सहलाने लगी. थोड़ी देर तक धीरे धीरे मनीषा की छूट मरने के बाद मैं ताबड़ तोड़ मनीषा की छूट छोड़ने लगा. मनीषा मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh सलेटी. जानननननन लेकार्डर हीईई मानिएगा क्या मेरीए. चू सछह मी एक्दम्मम घोड़ा हैई. कितना हचक्क हचाकक कर छोड़ता ही. तुझीऐ कोई साधारण लड़की नाहीइ सँभाललळ saktii.tujheee तू हम्म्म जैसी गरममम औरर चुड़क्कड़ लड़कीय ही संभाल सकती हैई. ऑर्डर जोरर सी छोड़ मुझी. दम्मम लगाकर छोड़.

मैं- हाआआआह्ह्ह्हह्ह लिए सललीईई ऑर्डर अंडरर ताकककक लिए. बहुत्त शौककक हैई तुझी बेरहमी सी छोड़ने का तो आज्ज मैं तुझी दिखाऊंगा की बेरहमी सी छोड़ना किस्कु कहती हैंन. आज्ज मैं तेरई गांड बहुतत्त बुरीय तरीके सी मरूंगा की तू मानिनी बाहर चावल नही पाएगी.

इतना कहकर मैं और जोर जोर से मनीषा को छोड़ने लगा. दीदी मनीषा की गार्डन को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी और उसकी छूट को भी सहलाती रही. अब मनीषा बहुत ज्यादा गरम हो गयी थी और झड़ने के करीब पहुंच गयी थी. मेरा भी अब कीसीई भी समाया निकल सकता था इसलिए मैं पूरी ताकत से मनीषा को छोड़ रहा था. 4-5 जबरदस्त धक्के के बाद मनीषा बड़बड़ाती हुई झड़ने लगी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईयाआआ. औरर जोरर सी छोड़ू मुझी. मैंनं झड़ने वालीए हूँ. uuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मम्मीयियय. क्या घोड़ा बीटा पैडडा किया ही अपने. बहुत्त डैम ही इसमेई. आअह्ह्ह्हह भैइयाआ. मैंनं आ रहहीइ हुन्न मुझी सँभालुओ भैया auuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मैं gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.

मनीषा यह बोलकर झाड़ गई. मैं भी मनीषा की छूट में 5-6 धक्के लगाकर झड़ने लगा और बड़बड़ाने लगा.

मैं- aaaahhhhhhhhhhhhh मनिशांआ.. मैं भी आ रहा होऊं तेरी सठह. चुभी मुझी सँभालललल लिए. मुझी अपनी छूट में ग़ुस्सा लिए मैंन गया मनीषा.

मैंने अभी इतना hi कहा था की सरिता दीदी जल्दी से उठकर मनीषा की छूट के पास अपने मुंह करके मेरे लुंड को मनीषा की छूट से निकलकर अपने मुंह में भर लिया और निचोड़ निचोड़ कर मेरा लुंड चूसने लगी और बचा हुवा सारा वीर्य अपने गले के निचे उतरने लगी.

मैं भी झाड़कर वही निढाल होकर बिस्टेर पर लेट गया. थोड़ी देर तक मैंने और मनीषा ने अपनी उखड़ी हुई सांसो को दुरुस्त किया और फिर उठकर बैठ गए और एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे मैंने सारदा दीदी को भी अपने पास खींच लिया और उनके होंठो को जिसपर मेरा पानी लगा था मसलने लगा. दीदी ने मेरा हाँथ पकड़ लिया और नशीली नज़रो से मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- सच में अभी. मुझे तो थ्रीसम करने में बहुत मज़ा आया. तुम्हे कैसा लगा अभी.

मैं- मुझे तो बहुत मज़ा आया. लेकिन तुमने पहले तो इसके लिए मन कर दिया था. मनीषा के इमोशनल अत्याचार के बाद जाकर तुम मणि थी.

सरिता दी- मुझे पता था की ये ड्रामेबाज़ ड्रामा कर रही है. मैंने इसलिए मन किया था की ये सही नहीं लगता था, लेकिन मुझे ये नहीं मालूम था की थ्री सम करने में इतना मज़ा आएगा,

मनीषा- अरे यार कोई मुझसे भी तो पूछे की मुझे मज़ा आया की नहीं.

सरिता दी- तुझसे पूछने की जरूरत hi नहीं है. इस थ्रीसम की karta-dharta तुम hi थी. तो जाहिर सी बात है की तुमको मज़ा आना hi था, क्यूँ अभी.

मैं- बिलकुल सही कहा सरिता. इसको बहुत जलगी थी अपनी गांड का उद्घाटन करवाने की इसीलिए इससे एक दिन भी वेट नहीं हुवा. इसीलिए इसने अगले दिन hi थ्रीसम का प्लान भी बना डाला.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी और मनीषा हंसने लगे. थोड़ी देर हम तीनो ऐसे hi बैठे बाटे करते रहे. उसके बाद सरिता दीदी कमरे से बहार जाने लगी तो मैंने उनसे पूछा.

मैं- क्या हुवा दीदी. आपने एक hi राउंड में टाटा bye-bye बोल दिया क्या.

सरिता दी- नहीं अभी. प्यास लग गई है तो थोड़ा पानी पीकर आ रही हूँ.

इतना कहकर दीदी निचे चली गई. कुछ देर बाद वो पानी की दो बोतल लेकर कमरे में आई और हम सब ने मिलकर पानी piya.uske बाद थोड़ी देर आराम करने के बाद बिस्टेर पर तक लगाकर बैठ गया. दीदी उठकर मनीषा के पास बिस्टेर पर बैठ गयी और मनीषा को पकड़कर अपनी बहो में भर लिया और उसके होंठो को चूमने लगी. मनीषा ने दीदी के होंठो को चूमते हुवे अपना हाँथ बढाकर दीदी की चूचियों पर रख दिया और दबाने लगी. थोड़ी देर एक दुसरे के होंठ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ निकली और दीदी के होंठो पर फिरने लगी. दीदी ने मनीषा की जीभ अपने मुंह में भर ली और चूसने लगी.



दोनों बहुत जोरो से एक दूसरे को चूस रही थी और किश कर रही थी. ये नज़ारा देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया. मैंने बिस्टेर पर टेक लगाए अपने लुंड को सहला रहा था. मनीषा ने दीदी को चूचियों को दबाते हुवे मेरी तरफ देखा और मुझे लुंड सहलाता देखकर मुस्कुराने लगी. दीदी ने भी अपनी चूचियों को मनीषा से दबवाते हुवे अपना अपनी मुंह से उसकी जीभ निकल कर बोली.

सरिता दी- चल मनीषा अब अभी को भी थोड़ा मज़ा देते ही.

मनीषा- उनको क्या मज़ा देना वो देखो कैसे अपना लुंड सहलाकर मज़ा ले रहे हैं.

मनीषा की बात सुनकर दीदी हंसने लगी. मैं भी उनकी बात पर हंसने लगा. फिर दीदी ने अपनी जीभ मनीषा के चेहरे पर घूमने लगी और हाँथ बढाकर मनीषा की दोनों गांड को पकड़ लिया और दबाने लगी. दीदी मनीषा के गलो को चूमते हुवे उसकी गार्डन पर आ गयी और जीभ निकल कर मनीषा की गार्डन चाटने लगी. मनीषा ने दीदी के सर को अपने हाथो से थम लिया और अपना सर ऊपर करके अपनी गार्डन चटवाने लगी. दीदी मनीषा की गार्डन को chat-te हुवे उसकी दोनों गांड को जोर से दबा दिया और अपने मुंह में उसकी गार्डन भरकर काट लिया. जिससे मनीषा की चीख निकल गयी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh Kaminiiiiiiiiiiiii didiiiiiiiiiii. डांटत क्यूओ गाड़ा रहीए हैईईई. धीरे सीए कररराऊ दर्द्द होता हैई.

मैं- हाँ दीदी ऐसे hi करो इसको. मनीषा धीरे धीरे खेलने वाली चीज़ नहीं है.

मेरे ऐसे कहने पर दीदी ने मनीषा को गांड की दोनों पतों को पकड़कर बहार की तरफ खींचा और मसलकर छोड़ दिया और अपना मुंह मनीषा की चूचियों पर रख दिया. मनीषा मस्ती में सिसक पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh डार्लिंङ्गग डीडीई. बास ऐसे ही करूओ. मज़ा आ रहा ही.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने मनीषा की गार्डन को चूमते हुवे मनीषा की एक गांड दबाते हुवे उसकी एक गांड पर थप्पड़ मरने लगी. पहले दीदी ने हलके हलके थप्पड़ मरे. उसके बाद दीदी ने जोर जोर से थप्पड़ मनीषा की गांड पर बरसाने शुरू कर दिए.



मनीषा को दर्द तो बहुत हो रहा था, लेकिन साथ साथ मज़ा भी बहुत मिल रहा था, इसलिए मनीषा मस्ती से सिसकारी भरने लगी और बोली.

मनीषा- aaaaaaaaaabhhhhhhhhhh सरिताआ डीडीइइइइइ. बहुतत्त मज़ाआ आए रहा हीी. ऐसी हीई धीरे धीरे करूओ. अछ्हा लग रहा हैई. ेक्क्क नया मज़ा मिल रहा हीी.

मुझसे अब और बर्दास्त नहीं हुवा तो मैं भी बिस्टेर से उठकर खड़ा हुवा और जाकर उन दोनों के मुंह के पास अपना लुंड ले जाकर खड़ा हो गया और अपने लुंड से मनीषा के गलो पर मरने लगा. मनीषा ने मेरा लुंड अपनी जीभ निकल कर चाट लिया और और एक हाँथ दीदी के सर से उठाकर मेरे लुंड पर रख दिया और सहलाने लगी. दीदी अभी भी मनीषा की गांड पर थापड़ मार रही थी और मनीषा की चूचियों को बरी बरी से बदल बदल कर चूस रही थी.

मनीषा थोड़ी देर मेरा लुंड पकड़कर सहलाती रही उसके बाद उसने अपना मुंह खोलकर मेरे लुंड के टोपे को मुंह में लेकर एक जोरदार चुम्मा लिया. और पुकककक की आवाज़ के साथ टोपा उसके मुंह से बहार निकल गया. मनीषा ने ऐसा करि बात किया. थोड़ी देर बाद दीदी ने मनीषा की चूचियों को छोड़ा और अपना सर ऊपर उठाया. तो उनकी नज़र मेरे लुंड पर पड़ी. दीदी ने अपना सर और ऊपर उठाकर अपना मुंह खोला और मेरे लुंड को अपने मुंह में 4 इंच ले लिए और चूसने लगी. दीदी को देखकर मनीषा ने मेरे लुंड से पाना हाँथ हटाया और मेरे लुंड को चाटने लगी.



थोड़ी देर बाद दीदी ने जोर जोर से लुंड चूसना शुरू कर दिया. मनीषा मेरे लुंड को चाटने के साथ साथ मेरी गोटियों को भी चाट रही थी. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने अपना मुंह खोलकर मेरी गोटिया अपने मुंह में घर ली और चूसने लगी. मैंने मनीषा के सर पर अपने दोनों हाँथ रख दिया और उअका मुंह जोर जोर से छोड़ने लगा. थोड़ी देर उसका मुंह छोड़ने के बाद मैंने उसके मुंह में अपना लुंड एक झटके में पेल दिया. मेरे लुंड उनके मुंह को चीरता हुवे उसके गले के अंदर घुस गया. दीदी की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी. जिसमे आँशु के कुछ कतरे नजर आ रहे थे. थोड़ी देर तक ऐसे hi दीदी के मुंह में लुंड रखने के बाद मैंने लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया. दीदी खांसते हुवे बोली.

सरिता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह अभियई. कीसीई दिन तू मेरी जाएं लेकर ही मानेगा.

मैं- अब तो तुम लुंड चूसने में एक्सपर्ट हो गई हो सरिता. थोड़ी देर मेरा लुंड अपने गले में आदत तक दाल कर चुसो. मुझे मज़ा आएगा.

सरिता दी- सल्ले तेरे मज़े के चक्कर में किसी दिन मैं मरूंगी. साँस भी नहीं लेने देता है तू.

इतना बोलकर दीदी ने फिर से अपना मुंह खोल लिया. मैंने दीदी के बालो को पकड़कर अपना लुंड एक झटके में दीदी के मुंह में पेल दिया और जोर जोर से अंदर बहार करने लगा, मनीषा अपना मुंह जोर जोर से मेरे लुंड और गोटियों पर चला रही थी. थोड़ी देर दीदी के मुंह को छोड़ने के बाद मैंने मनीषा के मुंह में अपना लुंड दाल दिया. दीदी अब मेरी गोटियों पर अपनी जीभ फिरने लगी. थोड़ी देर मनीषा के मुंह को हलके हलके से छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड एक झटके में मनीषा के मुंह में उतर दिया और ताबड़ तोड़ मनीषा का मुंह छोड़ने लगा. और बोलने लगा.

मैं- aaaaaaahhhhhhhhhh मनीषा. ली मेरा लुंड अपने मुंह में. बहुत गहरायी ही तेरे मुंह की. मेरा लुंड hi गायब हो जा रहा है. ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह डार्लिंगगगग. खा जा मेरे लुंड कोऊ. पी जा मेरे लुंड का जूस. निचोड़ ले मेरे लुंड को. आआआआअण्णन मनीषा.

इतना बोलकर मैंने अपना लुंड तोड़ी देर मनीषा के मुंह में गुसाई रहा. जब उसकी सांसे उखाड़ने लगी तो मैंने झटके से उसके मुंह से अपना लुंड बहार निकल लिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
अपडेट-129

मैंने मनीषा के मुंह से जब लुंड बहार निकला तो मनीषा खांसने lagi.aur अपनी सांसे समबहलती हुई बोली.

मनीषा- तुम सच में जानवर हो भैया. कोई ऐसे भी जानवरो की तरह करता है क्या.

मैं- मुझे किसी और का तो नहीं पता जानेमन, लेकिन तुम्हारा भाई ऐसे hi करता है.

इतना बोलकर मैं बिस्टेर पर लेट गया, मैंने मनीषा को पकड़कर पेट के बल पाने ऊपर 69 की पोजीशन में लिटाया और उसकी छूट चाटने लगा. मनीषा भी झुककर मेरे लुंड को अपने हांथो में पकड़ लिया और सहलाने लगी. मैंने सरिता दीदी को भी इशारा किया तो वो उठकर मेरे पैरो के बिच जाकर लेट गई और मेरी गोटियों को चाटने लगी. अब दोनों बहाने मेरा लुंड और गोटियों से खेल रही थी.



मैं मनीषा की छूट चाट रहा था. मैंने अपने बिच वाली ऊँगली अपने मुंह में दाल ली और उसे खूब गीली की और अपनी ऊगली पर ढेर सारा थोक लगाकर उसे मनीषा की गांड पर रख दिया और उसकी गांड में डालने लगा. मेरी ऊँगली आधी मनीषा की गांड में घुस गई और मनीषा सिसक पड़ी.

मनीषा- आआआआहहहहहहह भैयाआआ. धीरी धीरे डालना. मुझी दररदद्ड मैट देना.

इतना कहकर मनीषा ने मेरे लुंड को चेतना शुरू कर दिया. दीदी मेरी बोटियों को हाँथ से सहलाने लगी अरु आपजी जीभ निकलकर मेरा लुंड चाटने लगी. मैंने फिर से अपनी ऊँगली मुंह में डाली, ऊँगली गीली की और मनीषा की गांड में रखकर अपनी ऊँगली को एक झटका दिया. मेरी पूरी ऊँगली मनीषा की गांड में घुस गई. मनीषा ने मेरे लुंड को जोर से दबा दिया और चीखते हुवे बोली.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाइयाँआ. ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा हैई . थोड़ा धीरे कारु.

सरिता दीदी मेरा लुंड चूसने के साथ साथ मनीषा के होंठ भी चूस रही थी. दोनों बहाने मेरे लुंड को साथ साथ चाट रही थी और मेरे लुंड को अपने होंठो के बिच दबाकर एक दूसरे को किश कर रही thi.main एक ऊँगली से मनीषा की छूट को सहलाने लगा. थोड़ी देर छूट सहलाने के बाद मैंने वो ऊँगली उसकी छूट में दल दी. मनीषा का सरीर मज़े की अधिकता के कारन कैंप गया. अब मैं अपने दोनों हांथो की बिच वाली ऊँगली से मनीषा की छूट और गांड छोड़ रहा था और अपनी जीभ से मनीषा की छूट चाट रहा था. मनीषा बहुत गरम हो गई और मस्ती में चिल्लाने लगी.

मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्हह भैयाआ. बहुत्त अच्छा लग रहा हैई ऐसी होई करती राहु. और जोरर से अंदर डालू अपनी ऊगली भैया. मेरी छूट को अपनी ऊँगली से जोर जोर से छोड़ो.

इतना कहकर मनीषा ने मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया. दीदी फिर से मेरी गोटिया चूसने लगी. मैं मनीषा की छूट chat-te हुवे उसकी छूट और गांड अपनी ऊँगली से छोड़ रहा था. फिर मैंने अपनी ऊँगली छूट से और गांड दोनों से निकल ली और अपने लेफ्ट हैंड का अंगूठा उसकी गांड पर और सामने वाली ऊँगली उसकी छूट पर रख दिया और जोर से अंदर दाल दिया. मनीषा के मुंह से मस्ती में आवाज़ निकल गयी.

मनीषा- अअअअअअअगगगगगगग भैयाआ. अब्ब्ब बॉस कॅरियई औरर छोड़ड़ड़ दीजिये मेरी छुटत. मेरीए छुटत मई खारिशः हो रही ही. आआआअह्हह्ह्ह्हह oohhhhhhhhhhhhhh.

मैं- अभी कहाँ मेरी रानी. अभी तो तुम मेरे लुंड की अच्छी सेवा करो. उसके बाद hi तुम्हे छोडूंगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने जोर जोर से मेरे लुंड को चूसना शुरू कर दिया. मैं भी अपनी कमर धीरे धीरे ऊपर उछलने लगा. दीदी मेरी गोटिया अभी तक्क चूस रही थी. मैं मनीषा की गांड और छूट अपने अंगूठे और ऊँगली से अभी भी छोड़ रहा और छूट चाट रहा था. मनीषा जोर जोर से मेरा लुंड चूस रही थी. थोड़ी देर और लुंड चूसने के बाद मनीषा ने अपने मुंह से निकला और मुझसे कहा.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh भैयाआआ. अब्ब्ब मेर्री छूटत चाटना बन्द्द किजियई भैय्या. अब्ब्ब मुझसे आपका लुंड अपनी छूट मई चाहिये. बहुत्त खुजली हो रही ही. आआआआहहह बहिया. अब छोड़ दू मुझी और मेरीए खुजली मिटा दू.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसे अपने ऊपर से उठाया और मैं उठकर खड़ा हो गया मैंने दीदी को सीधा बीएड पर लिटाया और मनीषा को दीदी के ऊपर 69 पोजीशन में लेटने के लिए कहा. मनीषा दीदी के ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गयी. फिर मैंने अपने लुंड को मनीषा की छूट पर सेट किया. दीदी ने अपनी जीभ निकली और मेरी गोटियों को चूस ली. मैंने मनीषा की दोनों कमर पकड़ी और एक जोर के धक्के के साथ अपना लुंड मनीषा की छूट में उतर दिया. मनीषा दर्द से चिल्लाने लगी.



मनीषा- Aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh कामिनीईईई. फाड्ड्ढ डाला मेरिइइइ छूटत को. बाहर निकालल सल्ली अपनी लुंदड़ कोऊ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मैं मर्डर जौंगीय. धीरी धीरी नाहीइ डाल सक्ती थी. मैं बहनन हूँण तुम्हारीई. थोड़ा नरमी से पीशह आओ भायी.

मनीषा ये बोलकर दीदी की छूट पर अपना मुंह रख दिया और उनकी छूट चूसने लगी. दीदी अपनी जीभ निकलकर मनीषा की छूट चाटने लगी. कभी कभी वो मारा लुंड भी चाट ले रही थी. दीदी मनीषा की छूट chat-te हुवे मेरी गोटिया भी सहला रही थी. मैं एक रिठाम में मनीषा को चुने लगा. मनीषा भी मस्ती में अपनी कमर पीछे करके मेरा लुंड अपनी छूट में ले रही थी और बोल रही थी.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह भैयाआ. बॉस ऐसी हूँ चूडू मुझी. बहुत्त अछ्हा लग रहा हैई. इतना अच्छआ कैसी चूड लेते छूट ु भईई. मैं तू तुम्हारी चुदाई की अंदाज़ सी पागल हूँ रही होऊं. आपपप बहुत्त अच्छी हैं bhaiyaaa.aise hi छोडियो अपनी बहन को.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने उसकी छूट से अपना मुंह हटाया और मनीषा से बोली.

सरिता दी- ज्यादा तरीफ मत कर मनीषा. नहीं तू यी जानवर बन जायेगा. और तू जो इतनी तारीफ कर रही ही इसकी. अभी तेरी गण्ड जब मरेगा तो देखूंगी की कितनी तारीफ करती हो तुम.

manisha(didi की छूट से मुंह हटाकर)- अब तुम ज्यादा प्रधान मत बनो. चुपचाप मेरी छूट छतो. इतने दिन से भैया से अकेले छुड़वा कर मज़ा लिया है और जब भैया मुझे छोड़ रहे हैं तो भाषण दे रही हूँ. मुझे भैया जैसे भी छोड़ेंगे मैंने छुड़वा लुंगी.

इतना बोलकर मनीषा फिर से दीदी की छूट चाटने लगी. मैं धीरे धीरे मनीषा की छूट छोड़ रहा था दीदी मनीषा की छूट और मेरा लुंड चूस रही थी. मैंने मनीषा को छोड़ते हुवे अपनी बिच वाली ऊँगली दीदी की छूट में डाली और गीली करने निकल ली और उसे मनीषा की गांड पर रखकर अपना लुंड जड़ तक मनीषा की छूट से बहार निकला और अपनी ऊँगली और अपना लुंड दोनों एकसाथ और एक hi झटके में उसकी छूट और गांड में पेल दिया. मनीषा को दर्द हुवा और बो बोली.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiii मम्मीयी. मुझी बचावू. aaaaaahhhhhhhhhh ेक्क्क दम्मम ब्राहमं हैं ाप्प भइया. बहुत दर्द्द हो रहा हैई. ऐसे भी कोई छोड़ता ही क्या अपनी बहन को. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह नाहीई भैयाआ अब्ब्भी रुकक्क जाइये. थोड़ड़ा धीरे कॅरियई ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा haiii.uuuuuuuuuuffffffffffff भैयाआ. aaaaaaaaaaaahhhhhhh

मनीषा दीदी की छूट फिर से चूसने लगी और मैं मनीषा की छूट धीरे धीरे छोड़ने लगा. थोड़ी देर तक मनीषा की छूट धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड मनीषा की छूट से निकल लिया. मैंने मनीषा के छूट से लुंड निकलने के बाद मनीषा को बिस्टेर पर लिटा दिया और दीदी को मनीषा के ऊपर पेट के बल लिटा diya.ab दोनों के मुंह एक दूसरे के सामने थे. मनीषा दीदी के होंठो को चूसने लगी.



थोड़ी देर चूसने के बाद दीदी ने मनीषा के मुंह में अपनी जीभ दाल दी. मैंने थोड़ी देर दोनों की गांड सहलाने के बाद धीरे धीरे दोनों की गांड पर थप्पड़ मरने लगा. मनीषा ने अपना मुंह दीदी से अलग करते हुवे कहा.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह भाइयाँआ. मार मार कर पूरी गांड लाल कर देने का इरादा है क्या.

मैं- मेरा इरादा तो है की मैं तुम दोनों की गांड मर मर कर खोल दू अपने लुंड से.

सरिता दीदी- तो किस बात का इंतज़ार कर रहा है तू. हम दोनों अपनी गांड खोलकर तेरे निचे लेती हुई हैं अगर तेरे लुंड में डैम है तो खोल दे हम दोनों की गांड सेल.

सरिता दीदी की बात सुनकर मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट पर रखा और अपनी बिच वाली ुंली मनीषा की गांड पर राखी और एक झटका मार्कर अपनी ऊँगली मनीषा की गांड में और अपना लुंड सरिता दीदी की गांड में जड़ तक थोक दिया. दोनों के मुंह से चीख निकल गयी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh सलीबी कुत्त्तीीीी. धीरी नाहीइ दल सकता था क्या. यी टेरिइइइ बहन की छुटत हैई. किसी बहररर वालीए की नाहीइ. जो इतनी बेरहमी से छोड़ रहा हीी. aaaaaaaaaahhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय. मार डायला साली नई.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कामिनी भाइयाँआ. एकककक झटकी मई ऊंगलीई डालनी सी ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी. धीरे धीरे डालू ना. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

मैं- क्यों सरिता अभी तू बहुत्त उछलल रही थी तुम. मेरी गण्ड का दम्मम देखना चाहती थिई. अभी तुम्हारी छूट मी डाला तू यी हाल हैई. जब मैं तुम्हारी गण्ड में अपना लुंड बेरहमी सी डालूंगा तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होगा. औरर तुम मनीषा मेरीए एक ऊंगलीई अपनी गांड मी नही झेल पा रही हूँ तू मेरा ये मुसल्ल कैसी झेलोगी.

इतना कहकर मैं मनीषा की गांड अपनी ऊगली से जोर जोर से छोड़ने लगा. साथ साथ अपनी कमर को हलके हलके दीदी की छूट पर धक्का देने लगा. जिससे दीदी को मज़ा आ रहा था. दीदी मनीषा के होंठो को जोर जोर से चूसने लगी. मनीषा भी दीदी का साथ दे रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने मनीषा के मुंह में अपने जीभ दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. कुछ देर बाद मनीषा ने दीदी के मुंह में अपने जीभ दल दी. दीदी मनीषा की जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर जीभ चूसने के बाद दीदी ने मनीषा के जीभ छोड़ दी और उसके गले को किश करने लगी.

मैं मनीषा की गांड में तेज़ी से ऊँगली अंदर बहार करने लगा. थोड़ी देर ऊँगली करने के बाद मैं निचे झुककर मनीषा की गांड पर थूक दिया और अपनी ऊँगली से थोक मनीषा की गांड के अंदर डालने लगा. मैंने फिर से अपना लुंड दीदी की छूट के मुहाने तक खींचा और ऊँगली मनीषा की गांड के बहार निकली और एक hi झटके में मनीषा की गांड में ऊँगली और दीदी की छूट में अपना लुंड थोक दिया. दीदी और मनीषा के मुंह से चीख निकल गयी.

सरिता दी- aaaaaaahhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyy. मारर्र डालाअ रीई. फड़द दलीय मेरी छूटत. साला कमीना पता नाहीइ किश जन्ममं का बदला ली रहा हैई मुझसे. मुझी बचाएउ मनीषा. एई मुझी मार डालेगा. ooooohhhhhhhhhh कामिनी.

Manishaa-aaaaaaaahhhhhhhhhhh डीडीईई. एई ऊंगलीई सी मेरीए गनदद फाडड्ड रहा हीी. मैंन कैसी बचाऊउ तुमकोऊ. जाब्ब मैं अपनीइ खुद्द की गाड़ नही बचाए पाए रही हूँ.

दोनों की चीख सुनकर मैंने अपना लुंड सरित दीदी की छूट से बहार निकल लिए और उसे मनीषा की छूट पर रखकर और ऊँगली उसकी गांड के छेड़ तक निकल कर एक झटके में मनीषा की छूट में अपना लुंड और गांड में अपनी ऊँगली पेल दी. मनीषा दर्द से चीखः पड़ी.

manisha-Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyh. मारर्र डालाअ टुन्नी साली. बाहर निकालल ली हरामीई. अब्ब्ब क्या मेरीए जांणण लेकार ही दम्मम लेगा क्या. मुझी बहुतत्त दररदद्ड हूँ रहा हीी. अपना हांथिई जैसा लौड़ा मेरी छूट मी ठोंककक दिया ही सेल तुणी. जारा भी तरहहह नाहीइ खाया अपनी बहनन पारर बहनचोड़ड़ साली. टेरररा लुंड खुन्नीई लुंड ही भैयाआ. तू अपनी बहनन का खून करके होई मानेगा क्या.

मनीषा की चीख सुनकर दीदी उसके गले, गार्डन और चेहरे को चूमने चाटने लगी और मैंने ताबड़तोड़ मनीषा की चुदाई शुरू कर दी और उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुवे उसकी गांड को ऊँगली से छोड़ते हुवे बोलै.

मैं- क्या हुवा मेरी रानी. अगर दर्द हो रहा हो तो अपना लुंड तुम्हारी छूट से बहार निकल लू. मेरी बहना. क्या मैं इतनी बुरी तरह छोड़ रहा हूँ तुझे. मैं तो बहुत धीरे धीरे छोड़ रहा हूँ. लेकिन तू इतना चीख क्यों रही है.

मनीषा- सलीबी कामिनी. इतना दर्द्द देकर पूछ रहा ही की दर्द हो रहा हो तो लुद्द बहार निकल लून. और इसी धीरे धीरे छोड़ना बोलती हैं एकदम गाड़ी के पिस्टन की तरह अपना लुंड मेरी छूट में थोक रहा है तू कमीने. और अब अगर तूने अपना लुंड बहार निकला तो तेरा लुंड काटकर फेंक दूंगी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा की छूट से लुंड बहार निकल लिया और उसे दीदी की छूट में पेल दिया और हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दीदी- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Abhiiiiiiiiiiii. ऐसी होई छोड़ मेरे rajaaa.bahutt अच्छा लाग्ग रहा हैई. बहुत्त छोड़ू किसमं का इन्सांन है चू. बहुत मस्त कर डेरा है तू छोड़कर. ऐसे hi छोड़ अपनी डीडीई को. और मस्त कर दे मुझी. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह bhaiiiiiiiiiii.

अबकी बार मैंने फिर से दीदी की छूट से लुंड निकलकर मनीषा की छूट में थोक दिया और मनीषा की छूट को छोड़ने लगा. मनीषा को भी मज़ा आने लगा वो भी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- आआआआह्ह्ह्हह्ह bhaiyaaaaaaaaaaaa. अब्ब बहुत्त अच्छा लग रहा ही. पहली बहुत्त दर्द्द हुवा था. ऐसी hi छोड़ते रहो भैया अपनी बहन को आआआह्ह्ह्हह्ह भाईया छोड़ो जोरर सी औरर पेलू मुझे राजा भैया. oooooooohhhhhhhhhhhh बहुत्त ाणाण्डध्द दी रहा हैई आपका लुंड मेररिई छूट mee.oooohh मेरे saiyaa.chodd डालूओ मुजीब. चूड्डू अपनी बहन को औरर बना लो मुझी अपनी बीबी. अपनी रानी बना लो मुझी. मैंन आजजज सी तुमारीई होई होऊणन. ऊऊऊह्ह्ह्ह भाइयाँआ. आजजज सी मेरे सठह तुम्ममंजू चाही कर लू लेकिंन छोड़ती राहु.

मैंने अपना लुंड मनीषा की छूट से निकला और दीदी की छूट पर टीकाकार पूरी ताकत से दीदी की छूट पर थोक दिया. दीदी मस्ती और दर्द से चिल्ला पड़ी.

सरिता di-ooooooooohhhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhh मेरी बाललाममम. थोड़ड़ा धीरे ठोकू मेरी छूट कोऊ. ोुह्ह्ह्हह्ह मनिशांआ तुणी टूओ भैईया को एकक ही चुड़ैयी मी अपना सैया बना लिया री. मुझी भी मनीषा कोई तरहहह ही छोड़ू अभी. मुझी भी अपनी बीबी बना ले. आआआहहहहहहह ohhhhhhhhhhh.

मैं- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी छुड़द्दक्काड बहानोऊ. तुममम दोन्यू गजब की गरम्म माल होऊ. तुममम दोन्यू को मैं अपनी बीबी बनाऊंगा. खूब छोडूंगा तुम दोनों को. लो मेरा लुंड अपनी छूट मी. तुम दोनों को तो मैं अपना गुलाम बनाकर रखूँगा. और जब भी मेरा लुंड खड़ा होगा तुम दोनों की छूट और गांड में दाल दूंगा. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

दीदी की बात सुनकर मैं ऐसे hi 3-4 बार बरी बरी से दोनों को छोड़ता रहा और दोनों अंत संत बक्ति रही. फिर मैंने अपना लुंड उनकी छूट से निकल लिया और पीछे हटकर बिस्टेर पर बैठ गया तो दीदी मनीषा के ऊपर से हटकर मेरी तरफ देखा और बोली.

सरिता di-Kyaa हुवा अभी. मेरा होनी वाला था. लुंड क्यों बहार निकाल लिया तुमने.

मैं- तुम दोनों की छूट की प्यास मैं बाद में बुझाऊंगा. अभी तुम दोनों को मेरे लुंड की प्यास बुझानी होगी. मैं तुम दोनों की गांड मरने वाला हूँ अब.

सरिता दीदी मेरी बात सुनकर मनीषा की तरफ देखने लगी. थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे को देखने के बाद सरिता दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दीदी- क्या हम दोनों की छूट से तेरा मैं नहीं भरा जो हमारी गांड मरना चाहता है.

मैं- तुम दोनों की गांड है hi ऐसी की तुम दोनों की छूट छोड़कर अगर गांड न मरी जाये. तो ये तुम दोनों की गांड के साथ na-insafi होगी. और मैं ये na-insafi होने नहीं दूंगा. और ये बताओ सरिता क्या तुमको मज़ा नहीं आता जब मैं तुम्हारी गांड मरता हूँ. सच सच बताना.

सरिता दी- मज़ा तो बहुत आता है लेकिन शुरू शुरू में दर्द बहुत होता है. तू बहुत बेरहमी से जो चुदाई करता है न.

मैं- तो क्या हुवा दीदी. आपने एक कहावत तो सुनी होगी की अंत भला तो सब भला. तो अगर शुरू में दर्द सहकर बाद में इतना मज़ा मिलता है तो इसमें कोई हर्ज़ नहीं है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी मुस्कुराने लगी और मुझसे बोली.

सरिता दीदी- तू इतना बड़ा कमीना है की तुझसे बातो में कोई जीत hi नहीं सकता है.

मैं- जब आप जानती है तो आप इतना बहस क्यों करती हैं मेरे साथ. जो कहु मन लिया करो.

इतना कहकर मैंने मैंने मनीषा को बीएड पर लिटा दिया और दीदी को उसके ऊपर पेट के बल लिटा दिया. मैंने अपने ढेर सारा थुक्क दीदी की गांड पर गिराया और अपने लुंड को दीदी की गांड के मुहाने पर रख दिया मैंने दीदी की गद्देदार गांड पर थप्पड़ मरते हुवे बोलै.

मैं- क्या कहती हो सरिता. दल दू तुम्हारी गांड में अपना लौड़ा. पहाड़ दू तुम्हारी गांड.

दीदी पहले से होई पूरी गरम हो गयी थी. और अपनी चरम पर पहुंच गाइट hi. इसलिए मेरे पूछने पर दीदी गली देते हुवे बोली.

सरिता दी. पुछःह क्या रहा हैई कुट्टी. जाएब तुझी साब अपनी मैं का होई करना ही तू मार मेरी गण्ड. तुणी कभी मेरी कोइई बात मनई हीी. अगर तू पूछ रहा ही तो इस बार मेरीए बात जरुर man-na. फाड़ डल्लूओ मेरीए गण्ड को. एकदम्म बेरहमी सी छोड़ना मेरीए गांड. मुझी रंडी बनाकर मेरी गांड मरू. इतनी बुरी तरह मेरी गण्ड मरू कोई मैं चाल ना पाऊँ.

मैंने दीदी की बायत सुनकर अपने एक पेअर घुटने के बल बिस्टेर पर रखा औरएक पेअर पंजे के बल कर लिया और अपना लुंड दीदी की गांड में दबाते हुवे बोलै.

मैं- वो तो मैं मरूंगा ही. पर एक बार और सोच लो तुम. मैं तुम्हारी गांड अज्ज सछह में फाड़ दूंगा. बिलकुल भी रहम नहीं करूँगा. फिर तुम चाहे जितना भी रोवो चिल्लाओ.

हम दोनों की बायत सुनकर मनीषा इर्रिटेट हो गयी और बोली.

मनीषा- तुम दोनों एकदम चुटिया हो क्या. साला कब से देख रही हूँ एक दूसरे को चैलेंज कर रहे हो. भैया तुम अभी तक तो गांड मरने के लिए मरे जा रहे था. और अब दीदी कह रही है की जैसे चाहो वैसे उनकी गांड मारो तो बकचोदी पेल रहे हो. कही ऐसा तो नहीं की बस बकचोदी करनी hi आती है. लगता है गांड मरना तुम्हारे बस की बात नहीं है. ऐसे है तो जाओ यहाँ से.

मनीषा का ऐसा बोलना मुझे अपने लुंड की ताकत को चलेंगे करना लगा, इसलिए मैंने मनीषा के चलेंगे एक्सेप्ट कर लिया

इसके आगे की कहानी अगले भाग मैं..
 
अपडेट-130

मनीषा- तुम दोनों एकदम चुटिया हो क्या. साला कब से देख रही हूँ एक दूसरे को चैलेंज कर रहे हो. भैया तुम अभी तक तो गांड मरने के लिए मरे जा रहे था. और अब दीदी कह रही है की जैसे चाहो वैसे उनकी गांड मारो तो बकचोदी पेल रहे हो. कही ऐसा तो नहीं की बस बकचोदी करनी hi आती है. लगता है गांड मरना तुम्हारे बस की बात नहीं है. ऐसे है तो जाओ यहाँ से.

मनीषा का ऐसा बोलना मुझे अपने लुंड की ताकत को चलेंगे करना लगा, इसलिए मैंने मनीषा के चलेंगे एक्सेप्ट कर लिया

अब आगे

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना लुंड दीदी के गांड में जोर का धक्का मार्कर एक hi बार में जड़ तक घुसा दिया. दीदी दर्द से चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyy. ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह बचाए लू मुझी इस मआदार्र छोड़ड़ड़ सी मम्मीयी. सलिई कामिनीई मनीषआआ. तुझीऐ क्या जरूरतत थिई इसी उकसानी कोई. तेरी वजाहहह सी मेरी गांड फ़ायत गयी हीी. साली कुटटीई. किश जनाममम का बदला ली रही ही तू मुझसेइ. aaaaaaahhhhhhhhhh मम्मी.. ढेरी छोड़ड़ड़ अभीइइइइइ. बहुत्त दर्द्द हूँ रहा हैईईईई. मैं मारर्र जौऊनगीइइइइइइइ. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह बहणणछोड़ड़ड़ड़. ऊऊह्ह्हह्ह uuuuuuuuuufffffffffffffff oooooooooooooooooiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.

मैं- चुप्प्प सलीई रनडीई. चू कमालललल कोई माललळ हीी. तुझी तू मैंन अपनीइ बीवीए बनाकरर चुदुँगा. मुझी ललकारटीइ ही सलिई. देखह मैं आज्ज तेरई गण्ड का कचूमरर कैसे निकलता हूँ. तेरी गांड बहुत्त टीटी हैई सलीई. चू मुझी पागल कर देगीए. ी विल डिस्ट्रॉय योर गांड कामिनी. ली भाई छोड़ड़ड़ और ले अंदर मेरा लुँड्ड्ड. aaaaaaaaahhhhhhhhhh.

इतना कहकर मैंने अपने धक्के की स्पीड काम कर दी. और धीरे धीरे दीदी की गांड मरने लगा. दीदी अब मनीषा की छूट चाट रही थी. मनीषा निचे से मेरा लुंड और दीदी की छूट चाट रही थी और साथ में मेरी गोटियों को भी अपने हांथो में भरकर सहला रही थी. मैं धीरे धीरे अपने धक्के की गति तेज़ करने लगा. और फिर मैं जोर जोर से धक्के दीदी की गांड पर लगाने. दीदी भी अब मस्ती में बोलने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaahhhhhhhhhhh ाभीईई मेरे सर्टाज़ज़ मेरी गण्ड को कबाड़ा मत्तट काररूआ. मैं तुमसे रुज्ज़ अपनी गादड़ मरवाङ्गीइ मेरे raazaaa.aaraammm ारांम सी छोड़ू मुझी. तुम्हारी जैसा दमदार लाऊडड़आ किसी की पासा नही हॉग्गा. इसलीये मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ हटा हीी. औरर जोरर सी छोड़ू मुझी आअह्ह्ह्ह हहहह भाइय्याअ छोड़ू अपनी बहिनिया को.

मैं दीदी की बात सुनकर दीदी की गांड जोर जोर से मरने लगा. दी मनीषा की छूट चूसने लगी. मनीषा दीदी की छूट चूस रही थी. मैंने थोड़ी देर दीदी की गांड मरी और अपना लुंड दीदी की गांड से खींच लिया. दीदी ने सवालिया नज़रो से मुझे देखा तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- थोड़ी देर इंतज़ार करो दीदी. मैं बिना तुम दोनों को संतुस्ट किये नहीं झाड़ूंगा, लेकिन अब समय आ गया है मनीषा की गांड मरने का. मनीषा तुम तैयार हो न.

मनीषा- दीदी की गांड चुदाई देखने के बाद तो मुझे बहुत दर लग रहा है. दीदी तो कई बार गांड मरवा चुकी ही तो उनका ये हल हो गया मेरी तो अभी कुंवारी है तो पता नहीं मेरा क्या हॉल होगा. प्ल्ज़ भैया धीरे से मरना मेरी गांड.

मनीषा की बात सुनकर मैं बीएड से निचे उतर गया और मनीषा को पकड़कर बिस्टेर के किनारे खींच लिया और दो तकिया मनीषा की गांड के निचे रख दिया. अब मनीषा की गांड ऊपर की तरफ उभर आई थी. मैंने झुज्कर मनीषा की छूट का एक चुम्बन लिया और उसकी टैंगो के भींच बैठगया और अपनी जीभ निकलकर मनीषा की गांड के चीड़ पर ृक्क दिया और उसे छेड़ने लगा. मेरी जीभ अपनी गांड पर महसूस करके मनीषा छटपटाने लगी और बोली.

मनीषा- ोुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया. क्या कर रहे हूँ मुझे गुदगुदी हो रही है.

मैं- चुप चाप लेती रहो मनीषा और मैं जो कर रहा हूँ मुझे करने दो.

इतना कहकर मैंने मनीषा की गांड को फिर से चूसना शुरू कर दिया. सरिता दीदी जमीन पर बीएड के निचे लेट गई और मेरे लुंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं मनीषा की गांड पर अपनी जीभ फेर रहा था. जब मनीषा की गांड गीली हो गई तो मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली मनीषा की गांड में एक hi बार में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. मनीषा की सिसकी निकल गई.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैयाआआआ. धीरे से.

मैंने मनीषा की बात की परवाह न करते हुवे अपनी ऊँगली मनीषा की गांड में अंदर बहार करता रहा. निचे दीदी कभी मेरा लुंड चुस्ती तो कभी मेरी गोटियों को मुंह में भर लेती. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर मनीषा की गांड में ऊँगली करने के बाद मैंने ढेर सारा थूक मनीषा की गांड पर गिरा दिया और दो ऊँगली उसकी गांड के छेड़ पर रख दिया और अंदर करने लगा. जैसे hi मेरी दोनों ऊँगली एक साथ थोड़ी सी अंदर हुई. मनीषा को दर्द हुवा और उसने एक हाँथ से मेरा हाँथ पकड़ लिया और बोली.

मनीषा- oooooooohhhhhhhhhh. नाहीइ भैईयाआ. दूसरी उंगली मात gusaiyee.dardd हो रहा हैई.

मैंने मनीषा की बात मानकर एक ऊँगली से मनीषा की गांड छोड़ने लगा और बिच बिच में दूसरी ऊँगली भी डालने की कोशिशः करता, मगर मनीषा अपनी गांड तीते कर लेती. इसलिए मैंने अपनी ऊँगली मनीषा की गांड से निकल ली और उसकी गांड पर फिर से थूक कर दो ऊँगली उसकी गांड पर राखी और एक जोर के झटके के साथ दोनों ऊँगली उसकी गांड में पेल दी. मनीषा दर्द से दोहरी हो गई और चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh bhaiyaaaaaaaaaaaa बहारररररर निकललिएई अपनीइ ऊंगलीई कोऊ. मुझी नही ी मारवणी अपनी गांडडडड. uuuuuuuuuuiiiiiiiiiii मम्मीयिययियीयह. बहुत दर्द्द हो रहा haiiiii.aaaaaaahhhhhhhhh bhaiyaaaaaaaaaaa. निकलू बाहर.

मनीषा की बार सुनकर मैं उसकी छूट में ऊँगली डालकर ृक्क गया और अपना मुंह उसकी छूट पर रखकर उसकी छूट चूसने लगा. निचे दीदी जोर जोर से मेरा लुंड चूस रही थी. दीदी मेरी गोटिया भी अपने मुंह में बाहरकर चूस लेती थी. मैं थोड़ी देर मनीषा की छूट चूसते हुवे अपनी ऊँगली मनीषा की गांड में धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा. मनीषा को अब भी दर्द हो रहा था. इसलिए वह बोली.

मनीषा- oooooooooohhhhhhhhhh भैयाआआ. मुझी दर्द हूँ रहा ही. प्ल्ज़ बहार निकलल लो भैया. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ohhhhhhhhhhhhhhhhhh ाऊऊऊछःठठ्ठ.

मैं मनीषा की बात को इग्नोर करते हुवे उसकी गांड में ऊँगली अंदर बहार करता raha.kuchh देर बाद मनीषा का दर्द ख़तम हो गया. अब उसपर मस्ती चढ़ने लगी. थोड़ी देर उसकी छूट चाटने के बाद मनीषा के मुंह से आवाज़ आए.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह भैयाआ. मेरी छूट बहुत्त गारममम हूँ गयीईइ हीी. छोड़ दो मुझी. मेरी छूट को ठण्डी कर दू भैया.

मैं- मैं पहले तुम्हारी गांड मरूंगा मनीषा. उसकी बाद hi तुम्हारी छूट छोडूंगा.

मनीषा बहुत ज्यादा गरम हो गई थी. वो किसी भी कीमत पर अपनी प्यास भुझवाना चाहती थी इसलिए मेरे कहने पर उसने कहा.

मनीषा- आप को जो करना है वो कीजिये. बस मेरी प्यास बुझा दीजीएएएएए.

मनीषा की बात सुनकर मैंने दीदी को मनीषा के बगल लेटने के लिए कहा. दीदी मनीषा के बगल में लेटकर उसके होंठो को किश करने लगी. दीदी अपने एक हाँथ से मनीषा की चूचियों को सहलाने लगी. मैंने ढेर सारा थूक मनीषा की गांड पर गिराया और अपना लुंड मनीषा की गांड के छेड़ पर रख दिया. मैंने एक हाँथ से अपना लूँ पकड़ा और एक हाँथ से मानिसः की एक जांघ पकड़ ली और अपने लुंड का दबाव मनीषा की गांड पर दिया. मेरा लुंड प्खकक की आवाज़ के साथ मनीषा की गांड में टोपे तक घुस गया. मनीषा को दर्द हुवा और उसने अपना बदन ैथ लिया. चूँकि दीदी मनीषा के मुंह को चूस रही थी इसलिए मनीषा के मुंह से gggggguuuuuuuuuuuu ggggggguuuuuuuuuu की आवाज़ निकल रही थी.

मैंने अपने मुंह में धरे सारा थूक जमा किया और मनीषा की गांड पर थूक दिया. और अपने लुंड को टोपे तक बहार खींचकर मैंने एक जोर का धक्का मारा. मेरा लुंड 3 इंच तक मनीषा की गांड में उतर गया मनीषा ने दीदी के मुंह से अपना मुंह अलग किया और चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियी. मारर्र डाला मुज्झी. मुझको नहीं मरवानी अपनी गंडड. बाहर निकालूऊओ अपनी लुंदड़ को. मुझे बहुत्त दर्द्द हूँ रहा हैईईई. डीडीई भैया को बोलिये ना मेरीए गंड़द को छोड़ड़ड़ दी. छाअही तू मेरी छूट बेरहमी सी छोड़ ली. ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह मम्मीयिययियीय.

मैंने फिर से अपना लुंड बहार खींचा और जोर से मनीषा की गांड में पेल दिया इस बार मेरा लुंड 6 इंच मनीषा की गांड में घुस गया. और मनीषा की गांड से खून निकलने लगा. मनीषा को बहुत दर्द हो रहा था. उसकी आँखों से अंशु बहने लगे. वो रट हुवे जोर से चिल्लाकर बोली.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैयाआआआआ. रहममम कारु मुझपेटे. मैंनं मर्डर जंगीय. मैं हाँथ जोड़ती होऊं तुम्हारी. अपना लुंड बहार निक्काल लू. मुझी बहुत्त दरद्धू रहा हैई. मेरी गण्ड फट गई भैया. मैं अब्ब ज़िन्दड़ा नहीं बचूँगीई. मैं मर जौंगीय. ओह्ह्ह्हह्ह.

मनीषा की चीख सुनकर मैंने अपना लुंड वही रोक दिया और मनीषा के ऊपर झुक गया और उसकी एक चुकी को मुंह में भरकर चूसने लगा. एक हाँथ मैंने मनीषा की छूट पर रख दिया और उसकी क्लीट को सहलाने लगा. मनीषा की एक चुकी दीदी दबा रही थी. दीदी ने मनीषा के सर पर हाँथ फेरते हुवे उसके आँशु उसके गलो से अपनी जीभ से चाटकर साफ किया और मनीषा से बोली.

सरिता दी- बस मनीषा हूँ गया. जितना दर्द होना था वो हो गया. तुम तो एक बहादुर लड़की हो जिसने अभी का लुंड लेने का सहस किया है. कुछ देर में तुमको भी मज़ा आने लगेगा मनीषा. बस थोड़ी देर और दर्द बर्दास्त कर लो.

manisha(subukte हुवे) मुझे बहुत दर्द हो रहा ही दीदी. मैं दर्द से मर जाउंगी. भैया से कहिये न थोड़ी देर अपना लुंड निकल ले, बाद में चाहे तो फिर से दाल ले. मुझसे सच में बहुत दर्द हो रहा है दीदी. आप कहिये न भैया से.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ये जान गई की मनीषा को और गरम करना होगा तभी इसका दर्द काम होगा. इसलिए दीदी ने मनीषा के होंटो को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. और एक हाँथ से मनीषा की चुकी दबती रही. मैं भी एक हाँथ से मनीषा की क्लीट सहलाते हुवे उसकी चुकी को पि रहा था. 5 मिनट तक लगातार मनीषा के शरीर से खेलने के बाद मनीषा का दर्द कुछ काम हो गया. वो भी अब दीदी अपना एक हाँथ दीदी के सर पर और एक हाँथ मेरे सर पर रख कर हमदोनो के बालो से खेलने लगी. थोड़ी देर और मनीषा के जिस्म से हम दोनों खेलते रहे. मानिसः का दर्द अब ख़फ़ी हद तक काम हो चुक्का था. दीदी ने मनीषा के होंठ छोड़ दिया और उसकी चुकी को मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मनीषा ने अपने कमर मेरे लुंड पर पटका और मुझसे कहा.

मनीषा- अब छोड़िये भैया. लेकिन धीरे धीरे छोड़ना. मुझे अब भी थोड़ा थोड़ा दर्द है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना मुंह उसकी चूचियों से हटा लिया और अपने मुंह से थूक मनीषा की गांड पर गिराया और मनीषा की आँखों में देखते हुवी अपने लुंड को बहार निकलने लगा. मनीषा मेरी तरफ hi देख रही थी. जैसे जैसे मैं लुंड बहार निकल रहा था वैसे वैसे मनीषा के चेहरा पर दर्द की लकीर नज़र आ रही थी. मैंने पाना लुंड टोपे तक बहार निकला और लुंड पर थुक्क दिया. फिर मैंने लुंड को धीरे धीरे मनीषा की छूट में अंदर करना शुरू कर दिया. दीदी मनीषा की एक चुकी को चूस रही थी और एक चुकी को मसल रही थी. मैं धीरे धीरे मनीषा की गांड में अपने 6 इंच लुंड दाल दिया. एक हाँथ से मैं लगातार मनीषा की क्लीट मसल रहा tha.maine फिर अपने लुंड को धीरे धीरे बहार खींचा और धीरे धीरे उसे फिर से उनकी गांड में दाल दिया. मनीषा बोली.

मनीषा- ooooooooooooohhhhhhh भैया. बस ऐसे hi छोड़िये धीरे धीरे.

मनीषा की बात सुनकर मैंने धीरे धीरे मनीषा की गांड को छोड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी देर धीरे धीरे उसकी गांड छोड़ने के बाद मनीषा का दर्द बिलकुल खां हो गया था अब वो भी अपनी गांड पीछे की तरफ उछाल उछाल कर मेरा लुंड अपनी गांड में ले रही thi.isliye मैंने अपने दोनों हांथो मनीषा की कमर को पकड़ लिया और एक करारा स्ट्रोक मार्कर अपना पूरा लुंड उसकी गांड में जड़ तक थोकक दिया. मनीषा का शरीर दर्द के कारन अकड़ गया. और उसके मुंह से एक दर्द भरी चीख निकल गयी..

मनीषा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyy. मारररररररर गईइइइइइइइ मइईईईईन्न्नन. बहरररररर निक्काएआलललललल सलेईईई. कामिनीई. धिरररे नाहीइ दाहाललललललल साक्ताआ था क्या. आआह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत्तत्त दर्द्द हूऊऊ राहाआआ haiiiiiiiiiiiii. टूउउउ जननंवाररररर हैईईई बिलकुलललल. ooooohhhhhhhhhh aaaaaauuuuuuuuchhhhhhhhhhhh आआआअह्हह्ह्ह्ह सरित्तत्ताआआआ बचाऊऊऊ मुज्झिये. ईई मेरिइइइइ गंडड फाड्ड्ढड दलीयेगा.

मैंने मनीषा की चीखह सुनकर धीरे धीरे उसकी गांड मरने लगा. दीदी अपना हाँथ बढ़ाकर मनीषा की छूट पर ले आई तो मैंने अपना हाँथ हटा लिया. वो मनीषा की छूट सहलाने लगी. एक हाँथ दीदी मनीषा के होठो पर ले गई और उसकी होंठो को सहलाने लगी. और अपने मुंह से मनीषा की दोनों छूछीया बदल बदल कर पिने लगी. मैं मनीषा की गांड मरते हुवे दीदी की गांड को दबाने लगा. मैं मनीषा की गांड ठोकते हुवे मुंह में ढेर सारा थूक जमा किया और उसे मनीषा की गांड में थूक दिया. और अपनी लुंड को थोड़ी तेजी से उसकी गांड में ठोकने लगा. मनीषा का दर्द कुछ काम हो गया था इसलिए वो भी दीदी के सर को पकड़कर अपनी चुकी पर दबाने लगी और बोलने लगी.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्ह भैयाआआआ. थोड़ा धीरे करूऊओ. अभी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा haii.ooooohhhhhhhhh aaaaaaauccccccccccccchhhh भैईयाआ. आपका लुंदड़ बहूत्त बड़ा हीी भइया. मेरीए पेट मी घुस रहा हैई. ऐसे hi करती राहु. पूरा जद्द्द ताककक थूक दोऊ भैया. निचोड़ड़ लू मुझी. बनना लू मुझी अपनीई दासीई. आआआह.

मनीषा की चीखः सुनकर मैंने मनीषा की गांड से अपना लुंड बहार निकल लिया और मनीषा को पलक्कड़ डोगग्य स्टाइल में किया ूर दीदी को जमीन पर बैठा दिया. फिर मैं मनीष के पीछे आकर खड़ा हो गया. मैंने फिर से ढेर सारा थुक्क उसकी गांड पर गिराया एक हाँथ से उसकी गांड को पकड़ा और एक हाँथ उसकी पीठ पर रख दिया. निचे से दीदी ने उसकी छूट को अपनी जीभ से चाटने लगी. दीदी ने दोनों हाँथ से मनीषा की जांघू को मजबूती से पकड़ liya.maine देर न करते हुवे मनीषा की गांड में एक झटके में अपना पूरा लुंड थोकक दिया. मनीषा दर्द से चिल्लाने लगी.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह bhaiyaaaaaaaaaa. थोड़ड्डड्डड्डड़आआ धीरी कारोओओओओओओओ. आआअह्हह्ह्ह्ह मम्मीयिययी. मुझी बचावू इस गंड्डूओ सीए मैं मर्डर जाउँगीई. धीर्रे करूऊओ भायी uuuuuuuuuffffffffffff. मुझी दर्द्द हूँ रहा हाइइइइ आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. मेरीए गंड़द फाआजततत गईई. आआअह्ह्ह्हह भैइयाआ छोड़ड़ड़ दोऊ मुझी.

मैं- ooooohhhhhhhhhh मनीषआआ. किटनी तीते गांड ही टेरिइइइ. मैं तू दीवाना हो गया तेरा. बहुत्त चैलेंज कर रही थी मुझी तू की मेरे लुंड में डैम नहीं हैई. अब्ब क्या हुवा. देखू कैसी चिल्ला रही रही है. तू बहुत मस्त मॉल ही रे मनीषा. तू हचक्क हचक्क कर छोड़ने की चीज ही. मैं तुझे ऐसे hi छोडूंगा तूने मुझे अपना दीवाना बना लिया है मेरी रानी. तेरे जैसे कोई कुटिया अपनी गांड नहीं मरवा सकती. तू बहुत हसीं कुटिया ही मनीषा. आआह्ह.

मैं मनीषा की गांड को जोर जोर से ठोकने लगा. मनीषा की छूट निचे से दीदी चाट रही थी.



मैं मनीषा को चुड़ते हुवे उसकी गांड पर थप्पड़ मरने लगा. मनीषा हर थप्पड़ पर हैईईई भैया हीी भैया करती. मैं थप्पड़ लगन ेके बाद उसकी गांड भी सहला देता था. जिससे मनीषा को अच्छा भी लगता था. मैं मनीषा की गांड पर थप्पड़ मरते हुवे उसे हचक हचक कर छोड़ने लगा. मनीषा भी अब मस्त हो चुकी थी और बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- आआआहहहहह भैयाआ. औरर जोरर से मरू मेरी गण्ड को. तू बहुत्त बड़ा चुदक्कड हैई सेल. तुझसे बड़ा छोड़ू सर्रे साहार में नहीं मिलेगा. जिसने अपनी सभी बहनों को छोड़ diyaa.faaad दे मेरी गण्ड कोऊ. और जोर लगाकर चूड बहनचोड़ सेल. छोड़ मुझी अह्ह्ह्हह्हह.

मनीषा की बात सुनकर मैंने सरिता दीदी से कहा.

मैं- सरिता अब तुम वह से उठकर मनीषा के निचे लेट जाओ. मैं अब तुम दोनों को एक साथ छोड़ँगा. मेरा भी अब होने वाला है. मैं तुम दोनों को एक साथ छोड़कर झड़ना चाहता होऊं.

मेरी बात सुनकर दीदी मेरी टैंगो के बिच से जमीन से उठकर बिस्टेर पर आ गयी मैंने मनीषा की कमर को पकड़कर उसे उठाया. जिससे दीदी मनीषा के निचे लेट गयी. मैंने एक तकिया दीदी को अपनी गांड के निचे रखने के लिए कहा. अब दोनों की छूट आस पास थी. दीदी लेटने के बाद मानिसः की के होंठों को चूमने लगी. दीदी ने दोनों के बिच हाँथ डालकर मनीषा की चूचियों का पकड़ लिया और दबाने लगी. मैं भी पीछे से मनीषा की गांड ठोकने लगा. थोड़ी देर मनीषा की गांड ठोकने के बाद मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड से निकला और दीदी की गांड पर रखकर एक जोरदार झटका मार्कर उनकी गांड में उतर दिया. दीदी मस्ती और दर्द से सिसक उठी और मनीषा के मुंह से अपना मुंह हटाकर बोली.

सरिता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह अभीयी धीरी सी. मुझी ऐसा लगता ही की तू हर्र बार पहली सी ज्यादा जोर से धक्का मरता हीी. oooohhhhhhhhhhh अभियई. बास ऐसी ही थुक्क अपनी डीडीई की गण्ड koo.bahutt मज़ा आ रहा हैई. थोड़ड़ अच्छी से थोकक.

दीदी की बात सुनकर मैं उनकी गांड पर जोर जोर से स्ट्रोकक लगाने लगा. थोड़ी देर दीदी की गांड छोड़ने के बाद मैंने अपने लुंड निकला और मनीषा की गांड पर रखकर एक झटके में उसकी गांड में पेल दिया. मनीषा भी दर्द और मस्ती में बोली.



मनीषा- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे चुड़क्कड़ बहिया. बहूत्त अछ्हा छोड़ रही hoo.aisee ही छोडीया मुज्झी. ऑर्डर कसकर छोड़िये bhaiiyaaa.aaaaaaauuuuuuuuchhhhhh.

मैंने मनीषा की गांड थोड़ी देर मरी फिर अपना लुंड निकलकर माणसीः की छूट पर रखा और जोर से उसकी छूट में थोक दिया और लम्बे लम्बे शूट लगाने लगा. मनीषा भी मस्ती में अपनी गांड पीछे करके मेरा लुंड और अंदर तक्क अपनी छूट में लेने लगी. थोड़ी देर मनीषा की छूट छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उसकी छूट से निकला और सरिता दीदी की छूट पर रखकर एक बार में दीदी की छूट में पेल दिया और जोर जोर से छोड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhh अभीइइइइइ. बस्स्स ऐसी ही छोड़ मुझी. तेरी सठह छुड़वाकर मुझी बहुत्त मज़ा आता हैई साली. तू बहुत्त अच्छा छोड़ता हैई. ऐसे होई और जोर जोर से छोड़ मुझी. तेरे लुंड में बहुत डैम ही भाई. तूने हम दोनों को अपना दीवाना बना लिया ही.

मैं- और किसके सठह छुड़वाया हैई तुमने सरिता जो तुमको पता ही की मेरे लुंड में बहुत डैम हैई. और मेरे लुंड की दीवानी तुम दोनों hi नहीं सविता दीदी भी हैई.

इतना बोलकर मैंने सरिता दीदी की छूट में 5 जबरदस्त स्ट्रोकक लगाए और अपना लुंड निकलकर मनीषा की छूट में पेल दिया और पूरी ताकत से छोड़ने लगा. मनीषा अब बहुत ज्यादा गरम हो गयी थी और झड़ने के करीब पहुंच गई. 5-6 धक्के लगाने के बाद मनीषा झड़ने लगी और बड़बड़ाने लगी.



मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैयाआआआ साली. मैं गयी. मेरी छूट सी छूछह निकल रहा हैई. सम्भालो मुझको भैया आह्ह्हह्ह्ह्ह. मेरररा पनीइ निक्कल रहा हैई. आआआहहहहह भैया.

इतना कहकर मनीषा झाड़ गई मैं कुछ देर तक मनीषा की छूट में धीरे धीरे लुंड पेलता रहा फिर मैंने मनीषा की छूट से अपना लुंड निकल कर मनीषा को दीदी के ऊपर से पलटकर बिस्टेर पर कर दिया और झुक कर दीदी की दोनों चूचियों को अपनी मुट्ठी में भरकर दीदी की छूट पर लुंड सेट किया और हचक कर दीदी की छूट में पेल दिया और चूचियों को जोर से दबा दिया. दीदी मेरे इस हमले से झड़ने के करीब पहुंच गई. मेरा भी समय निकट आ गया था इसलिए मैं ताबड़तोड़ दीदी की छूट पेलता रहा. कुछ दकके बाद hi दीदी एकदम चरम पर पहुंच गई और झड़ते हुवे मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiiiiiii. मैंनं भीई आआ रही हूँण कामिनी. औरर लम्बे लम्बे स्ट्रोककक लगा मारी छूट में. मेरा पानी निक्कल रहा हैई. आआआआहहहहहहह अभियई मैंन झाड़ रहीए होऊ bhaaiiiiiiiiiii. औरर जोररर सी कामिनी. मैं गइईईई. सम्भालू मुझी.

दीदी के झड़ने के बाद मैं 5-6 कसकर स्ट्रोकक दीदी की छूट में लगाए. मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने दीदी की छूट से अपना लुंड निकला और दोनों को खींचकर जमीन पर बैठा दिया और अपने लुंड को मनीषा के मुंह में पेल दिया और 3 जोरदार धक्के लगाकर लुंड बहार निकला और दीदी के मुंह में घुसा दिया. मेरा लुंड अब छूटने लगा तो मैंने अपना लुंड बहार निकला और दोनों को मुंह खोलने के लिए कहा. दोनों ने मुंह खोल लिया तो मैं दोनों के मुंह में झड़ने लगा और बोलने लगा.

मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhh मेरिइइइइइइइ रनडीईयू मैं जहाआआअददददददद रहा होऊणननननन. पुरररा लुँड्ड्ड का पनीई पीई जउओ तुममम दोन्यू. मेंनननन गयाआ मनिशांआ. पीई जा मेरी पनीइ. सरिता मैंन गयाआआआआ.

इतना बोलकर मैं दोनों के मुंह में झाड़ा गया. कुछ बोंडे दोनों के गलो और चूचियों पर गिरी जिसे उन्होंने अपनी ऊगली से साफ किया. झड़ने के बाद मैं एकदम पास्ट हो गया और धड़ाम से बिस्टेर पर चारो खाने चित होकर गिर पड़ा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-131

मैं झाड़कर बिस्टेर पर धड़ाम से गिर पड़ा. मनीषा और सरिता दीदी जमीन पर बैठी अपने अपने होंठो पर जीभ फिर रही थी. कुछ देर ऐसा करने के बाद दीदी ने अपना होंठ आगे बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया और चूसने लगी. मनीषा ने भी दीदी के होंठो को चूसने में दीदी का साथ दिया. लगभग 5 मिनट बाद दोनों एक दूसरे को होंठो को अच्छी तरह चूसकर अलग हुई और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी. मैं भी अब सामान्य हो चुक्का था. मैं भी दोनों की तरफ देखने लगा. थोड़ी देर तक ऐसे hi एक दूसरे को देखने के बाद सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है अभी.

मैं- सच में दीदी तुम दोनों इतनी ज्यादा गरम हो की तुम दोनों को ठंडा करने में मेरी जान निकल गई.

सरिता दी- हम दोनों तो बहुत सीधे सादे अपनी दुनिया में मस्त रहने वाली थी, लेकिन तेरी ठरक ने हम दोनों को गरम कर दिया. और आज देखो हम दोनों नंगे होकर तेरे सामने बैठे हैं.

मनीषा- हाँ दीदी. आप सही बोल रही हो. मैं भी इन सब चक्करो से दूर hi रहती थी लेकिन आप दोनों को देखकर मेरी भी धरना बदल गई. और आज चुदाई भी करवा ली.

मैं- अरे यार तुम दोनों हो hi ऐसे मॉल की तुम दोनों को देखकर hi मुझपर ठरक चढ़ जाती थी. वैसे एक बात तो है बहुत मज़ा आया तुम दोनों को साथ में छोड़ने में.

मनीषा- हाँ हाँ मज़ा क्यों नहीं आएगा. मुफ्त में दो छूट और गांड जो मिल गयी छोड़ने के लिए. नहीं तो लुंड हिलता गली गली टहलता रहता छूट और गांड की तलाश में. और आखिर में मुट्ठ मार्कर hi अपने लुंड को ठंडा करना पड़ता तुम्हे. वो तो शुक्र मनाओ अपनी तीनो बहनो का जिन्होंने तुमको मुट्ठ मरने से बचा लिया. और अपनी गांड और छूट तुमको दे दी.

इतना कहकर मनीषा और दीदी जोर जोर से हंसने लगे. मैं भी उनकी बाटे सुनकर हंसने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दीदी- वैसे अभी. तू सविता दीदी के पास कब जा रहा है.

मैं- जीजा जी सैटरडे को सुबह निकालेंगे. सोच रहा हूँ की सैटरडे की सुबह 3 बजे वाली ट्रैन से दीदी के पास चला जाऊ.

सरिता दीदी- इसका मतलब है की हम लोगो के पास अभी 2 दिन का समय है.

मैं- किस बात का समय है दीदी. और वैसे भी इन दो दिनों में मैं आप दोनों को खूभ छोडूंगा. पता नहीं दीदी के आने के बाद इतना खुलकर मौका मिले या न मिले.

मनीषा- वो 2 दिन का जो समय है वो बहुत सीक्रेट है. वो आपको बाद में पता चलेगा. वैसे आप सही कह रहे हैं भैया. दीदी बहुत स्ट्रिक्ट हैं. अकेले का तो थी है वो आपसे फ्री हैं लेकिन वो हम लोगो के साथ मिलकर चुदाई बिलकुल नहीं करवाएंगी. सरिता दीदी को तो मैंने किसी तरह से इमोशनल अत्याचार करके अपनी तरफ मिला लिया. लेकिन सविता दीदी कभी नहीं मानेंगी इसके लिए. अब आपको hi कोई अलग सा प्लान बनाना होगा. क्योंकि अगर दीदी हम लोगो के साथ हो गयी तो फिर हमारे मज़े hi मज़े हैं.

मैं- ठीक है मैं कुछ न कुछ कर hi लूंगा उन्हें अपने साथ मिलाने के लिए.

सरिता दी- चलो अब बहुत समय हो गया है. आपने अपने कपडे पहने और अपने कमरे में चलो. मम्मी पापा के आने का समय हो रहा है.

दीदी की बात सुनकर मनीषा अपना कपडा pahan-ne के लिए उठी, लेकिन फिर से बैठ गयी और बोली.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह डीडीई. मुझे बहुत दर्द हो रहा है. मैं तो ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी. और मम्मी पापा को क्या बताउंगी की क्या हुवा है मुझे.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने पहले अपने कपडे पहने फिर अपने कमरे में गयी और पैन किलर और i-pill लेकर आई और मनीषा को दे दिया.

सरिता दी- ये लो मनीषा ये पैन किलर खा लो इससे तुमको आराम मिलेगा और ये वाली तबलते भी खा लेना.

मनीषा ने दीदी की हाँथ से दवा ले ली और उसे टेबल पर रख दिया, दीदी ने मनीषा को उसके कपडे पहनाये और सहारा देकर उसे बाथरूम लेकर गई और उसके शरीर को साफ किया. फिर अपने शरीर को साफ किया और उसे कमरे में लेकर आ गयी मैं अभी भी कमरे में hi नंगा बैठा हुवा था. दीदी ने मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- बेशरम इंसाने कुछ तो शर्म कर. दोनों बहनो के सामने नंगा बैठा है.

मैं- तो क्या हुवा दीदी. पिछले 2 हॉर्स से हम तीनो नंगे hi तो थे.

सरिता दी- देख अभी. उस समय की बात अलग है, लेकिन अब तू कपडे पहन और अपने कमरे में जा.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने कपडे पहन लिए और अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी आ गए. शाम को मैं अपने कमरे से निचे आया तो मम्मी पापा और दीदी हॉल में बैठे हुवे थे. मुझे देखते हुवे मम्मी ने मुझसे कहा.

मम्मी- ये मैं क्या सुन रही हूँ अभी. अब तू din-b-din बिगड़ता जार अहा है.

मम्मी की बात सुनकर मैं दर गया. कही मम्मी को कुछ पता तो नहीं चल गया. लेकिन अगर पता चलता तो मम्मी का ऐसा रिएक्शन नहीं होता. फिर भी मैंने डरते हुवे मम्मी से पूछा.

मैं- मैंने क्या किया है मम्मी. और मैं तो अब पापा के कहे अनुसार काम भी करने लगा हूँ.

मम्मी- अब ज्यादा अनजान ban-ne की कोशिश मत करो. तूने मनीषा के साथ क्या किया है.

मम्मी की बात सुनकर मेरी तो गांड hi फैट गयी. लगता है मम्मी को पता चल गया है की मैंने मनीषा की गांड मरी है, लेकिन मां का ऐसा कासुअल रिएक्शन. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. मैंने उनसे इशारे से पूछा तो दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. मम्मी ने मुझे ऐसा करते हुवे देख लिया और मुझसे कहा.

मम्मी- अब तू उसे क्या इशारे कर रहा है. उसी ने मुझे बताया है की तूने मनीषा के साथ क्या किया आज.

मम्मी की बात सुनकर मैं परेशां हो गया. अब या क्यात है. दीदी ने मम्मी को बताया, लेकिन क्या बताया. मम्मी के रिएक्शन से तो नहीं लगता था की दीदी ने आज के 3सम के बारे में मम्मी को बताया होगा, लेकिन फिर दीदी ने बताया क्या है जो मम्मी इतना ज्यादा गुस्सा हो रही हैं. मैंने मम्मी से कहा.

मैं- आखिर बात क्या है और आप मुझपर गुस्सा क्यों कर रही हैं. और मैंने मनीषा के साथ ऐसा क्या कर दिया है. मुझे तो कुछ याद नहीं.

मां- अच्छा. तू तुमने उसको धक्का क्यों दिया. तुम्हारे कारन उसकी टांड मुद गई और उसकी टैंगो में दर्द हो रहा है. और बोल रहे हो की तुमने कुछ नहीं किया.

मैं मम्मी की बात को समझने की कोशिश कर रहा था. मुझे दीदी ने ऐसे किसी बहाने के बारे में नहीं बताया था. और मैं कुछ बोल भी नहीं सकता था, क्योंकि आगे दीदी ने मनीषा को धक्का देने का कौन सा कारन बताया है, ये मुझे मालूम नहीं था. पता लगा मैं कुछ बोलू और दीदी और मेरी बात अलग अलग हो तो मम्मी को कौन समझायेगा आगे. इसलिए मैं खामोश रहा. मम्मी ने फिर मुझसे पूछा तो मैंने मम्मी से कहा.

मैं- मैंने कब मनीषा को धक्का दिया. वो अपने आप गिर गई होगी. मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी बोली.

सरिता दीदी- क्यों झूठ बोल रहे हो अभी. दोपहर में लूडो खेलते हुवे तुमने बेईमानी की और जब मनीषा ने देख लिया और तुमसे कहने लगी तो तुमने उसे धक्का दे दिया.

दीदी की बात सुनकर मुझे चैन की सनस आयी. मैंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.

मैं- मैंने कोई बेईमानी नहीं की थी और मैंने मनीषा को बस हल्का सा धक्का दिया था. मुझे नहीं पता था की इससे उसका पेअर मुद जायेगा. सॉरी मम्मी. मैंने जानबूझ कर नहीं किया ये.

मेरी बात सुनकर मम्मी ने मेरा कण पकड़कर मरोड़ दिया. मैं दर्द से चीखने लगा. पापा और सरिता दीदी हंसने लगे. मैंने मम्मी का हाँथ पकड़ते हुवे कहा.

मैं- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीयिययी. क्या कर रही हो. बहुत दर्द हो रहा है. छोड़ो मेरा कान.

मम्मी- अब पता चला. मेरी बाछहि को कितना दर्द हुवा होगा. ये सोचा है तुमने.

इसके बाद मम्मी और दीदी उठकर किचन में खाना बनाने चली गई और मैं वही सोफे पर बैठा रहा.

कुछ देर बाद मनीषा ने आवाज़ दी. उसको पानी चाहिए था तो मम्मी ने मुझे उसे पानी देने के लिए कहा. मैंने पानी की बोतल उठायी और उसके कमरे में चला गया. मनीषा बीएड पर लती हुई थी. मुझे देखकर वो मुस्कुराने लगी. मैंने उसे पानी की बोतल देते हुए पूछा.

मैं- तुम्हे सच में बहुत दर्द हो रहा है मनीषा.

मनीषा- हाँ दवा के कारन ज्यादा तो नहीं लेकिन फिर भी दर्द तो हो रहा है. तुमने इतनी बेरहमी से जो किया था.

मैं- मैं तो धीरे धीरे hi करना चाहता था, लेकिन तुम hi चाहती थी की मैं तुम्हारे साथ भी बेरहमी से पेश आऊं और अब तुम मुझे hi कह रही हो.

मनीषा- अरे भैया मैं तो मज़ाक कर रही थी. आप बहुत अच्छा करते हो. मुझे बहुत मज़ा आया.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने होंठ आगे करके उसके माथे को चुम लिया और उससे बोलै.

मैं- तुम अब आराम करो. थोड़ी देर में खाना बन जायेगा तो तुम्हे खाना रूम में hi दे जाऊंगा.

इतना कहकर मैं वापस निचे आ गया. थोड़ी देर में दीदी और मम्मी ने मिलकर खाना बना लिया. फिर मम्मी ने दो थाली खाना निकला और सरिता दीदी दोनों थाली लेकर मनीषा के कमरे में चली गयी. मैं पापा और मम्मी ने खाना खाया और कुछ देर हॉल में बैठने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया. कमरे में आकर मैंने अपनी लोअर उतर दी और उव में hi अपने बीएड पर लेट गया. थोड़ी बीएड पर लेटने के लगभग 1 हॉर्स बाद सरिता दीदी दूध लेकर मेरे कमरे में आयी. अब तो दीदी मेरे सामने बेशरम हो गई इसलिए वो मेरे कमरे में नाम मात्र के कपडे पहन कर आई थी. उनके जिस्म पर एक झीना सा शर्ट था. निचे उन्होंने ब्रा नहीं पहनी हुई thi.didi बस शर्ट और पंतय पहनकर मुझे दूध पिलाने आई थी. मैंने दीदी को देखते हुवे अपने लुंड को मसलते हुवे कहा.



मैं- क्यों सरिता आज्ज तो तुमने मुझको फंसा hi दिया था. मम्मी के सवाल पर तो मेरी फैट hi गई थी.

सरिता दी- मैं तो चाहती हूँ की तेरी भी एक बार फटे. और तुझे पता चले की फटने पर कैसे दर्द होता है. और मुझे तेरी शकल पर वो दर्द दिखा था मुझे. तुझे ऐसे देखकर मुझे बहुत मज़ा आया.

दीदी की बात सुनकर मैं बिस्टेर से उठा और दीदी का हाँथ पकड़कर थोड़ा मरोड़ते हुवे उनकी पीठ पर सत्ता दिया और दीदी के पीछे एकदम सत्कार खड़ा हो गया और अपना एक हाँथ आगे बढाकर उनकी चूचियों पर रख दिया और दबने लगा. निचे से लुंड दीदी की गांड पर ठोककर मैंने दीदी से कहा.



मैं- बहुत मज़ा आ रहा था तुमको मुझे दरकार. अब मैं तुम्हे बताता हूँ.

इतना बोलकर मैंने दीदी की चुकी को जोर जोर से दबाने लगा. पीछे से मैं अपना लुंड दीदी की गांड में दबाने लगा. और अपने मुंह में दीदी की गार्डन को भरकर चूसने लगा. दीदी अब हमेशा गरम रहती थी. थोड़ी hi देर में दीदी मस्त हो गयी. मैंने दीदी का हाँथ छोड़कर उनकी दूसरी चुकी पकड़ ली और अपनी कमर को थोड़ा सा पीछे कर लिया और दोनों चूचियों को जोर से मसलते हुवे अपनी कमर को एक झटके में दीदी की गांड पर दे मारा दीदी मस्ती में चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaahhhhhhhhhhh ABhiiiiiiiiiiiii. धीरीई सीए काररर चू. मुझे अच्छा लग रहा हैई. और कर भैई. तू बहुत्त अच्छा करता हैईईई ooooohhhhhhhhhhhh.

दीदी की सिसकारी सुनकर मैंने दीदी की चूचिया जोर जोर से दबाने लगा और निचे से अपना लुंड जोर जोर से दीदी की गांड पर पेलने लगा. दीदी की आँखे मस्ती में बंद हो गयी थी दीदी ने अपना हाँथ पीछे ले जाकर मेरे लुंड को उव के ऊपर से पकड़ लिया और दबाने लगी दीदी मेरा लुंड दबाते हुवे बोली.

सरिता दी- क्या बात ही अभी. तुम्हारा लुंड तो पहले के मुकाबले बड़ा लग रहा है.

मैं- (दीदी की चूचियों को मसलते हुवे). वो बड़ा नहीं हो गया है सरिता. तुम अब गरम हो गयी हो इसलिए तुमको वो बड़ा लग रहा है.

इतना कहकर मैंने दीदी की चूचियों को जोर से मसलकर अपने लुंड दीदी की गांड में दबा दिया. दीदी चीची.

सरिता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Abhiiiiiiiiiii. चू बहुतत्त अच्छा भाईई हैई री. तुझी पाटा ही की तुम्हारीई बहाणं कोऊ क्या पसंदड़ हीी. ऐसे hi करता रह अभी.

इतना कहकर दीदी मेरे लुंड को जोर जोर से दबाने लगी. जिससे मेरा लुंड और ज्यादा हार्ड हो गया. थोड़ी देर दीदी की चूचियों को दागने के बाद मैंने दीदी को धकेलता हुवा दीवाल के पास ले गया और दीदी की पीठ को दबाते हुवे उन्हें दीवाल से चिपका दिया. दीवाल से चिपकने के बाद मैंने दीदी के मुंह को पकड़ा और ऊपर की तरफ उठा दिय और किश करने लगा. अब दीदी का शरीर एकदम कमान की तरह तना हुवा था. अब सिर्फ दीदी की चूचिया hi दीवाल से सटी हुई थी. उनका मुंह मैंने पकड़ा हुवा था और गांड बहार निकली हुई थी.

दीदी ने अपना दोनों हाँथ दीवाल से लगा रखा था. मैं एक हाँथ से दीदी के मुंह को पकड़कर दीदी के होंठो को चूस रहा था. फिर मैं दीदी की गांड को सहलाने लगा. दीदी की गांड बहुत hi सॉफ्ट लग रही थी. थोड़ी देर गांड सहलाने के बाद मैंने दीदी की गांड से हाँथ हटाया और एक जोरदार थप्पड़ दीदी की गांड पर मर दिया. दीदी को दर्द हुवा और उन्होंने अपनी गांड आगे कर ली और उनकी मुंह से जूउउउउउउउ जूउउउउउउउ की आवाज़ निकलने लगी. गांड आगे करने के कुछ hi सेकंड बाद दीदी ने फिर से अपनी गांड वापस पहले की तरह कर ली. मैं दीदी के होंठ चुसंते हुवे फिर से दीदी की गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मर दिया. दीदी के मुंह से फिर guuuuuuuuuuuuuu ghuuuuuuuuuuuuuuuuu की आवाज़ निकली और उन्होंने फिर से अपनी गांड आगे कर्ली.



कुछ देर दीदी के होंठ चूसते हुवे मैं दीदी की गांड पर थप्पड़ मरता रहा फिर मैंने दीदी के होंठो से अपना मुंह हटा लिया और दीदी की आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखे लाल हो गयी थी. दीदी एकदम छुडासी हो गयी थी. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे फिर से एक जोर का थप्पड़ दीदी की गांड पर मर दिया. दीदी को फिर से दर्द हुवे और दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- आआआआहहहहह Abhiiiiiiiiii. मात कार भाईईईई. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैई.

मैंने दीदी की बात सुनकर दीदी की आँखों में देखते हुवे दीदी की गांड को सहलाने लगा. दीदी लगातार मेरी आँखों में देख रही थी. मैंने अपना हाँथ दीदी की गंदन से हटा लिया और उसे दीदी की छूट पर रख दिया और सहलाने लगा. दीदी की छूट बहुत ज्यादा गीली हो गाइट hi.jisase दीदी की पंतय आगे से पूरी भीग गई थी. दीदी अब भी अपनी गंदन ऊपर किये मेरी आँखों में देखे जा रही थी. उनकी आँख हवस के कारन लाल हो गई थी. मैंने दीदी की छूट को सहलाते हुवे दीदी की पंतय no पकड़कर निचे खिसका दी. दीदी ने अपने पैरो को थोड़ा खोल लिया मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे अपनी एक ऊँगली दीदी की छूट के मुंह पर रखकर जोर से दीदी की छूट में सरका दी और एक जोर का थप्पड़ दीदी की गांड पर लगा दिया. दीदी चीख पड़ी

सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh भैयाआआआ. थोड़ा धीरे से करो. मैंन खुद्द आई हूँ तुम्हारी पास की तुम मेरे जिस्म में खेलो. लेकिन थोड़ा प्यार से भैया.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपनी ऊगली तेजी से दीदी की छूट में अंदर बहार करनी शुरू कर दी और जोर जोर से दीदी की गांड पर मरने लगा. दीदी अपनी गार्डन उठाये मेरी आँखों में देख रही थी. दीदी का चेहरा एकदम लाल हो गया था. दीदी एकदम छुडासी हो गयी थी. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे दीदी की दीदी की छूट और गांड पर अपने हांथो का कमल दिखता रहा. मेरे थप्पड़ से दीदी की गांड लाल हो गयी थी. जब दीदी एकदम छुडासी हो गयी और उनसे बर्दास्त नहीं हुवा तो दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhh Bhaiiiiiiiiiiiiiiiii. अब्ब मुझसेइ बर्दास्त नहीं हूँ रहा हैई. मेरी छूट में आग लग चूकीय ही. छोड़ दोऊ मुझको अभी. मेरी प्यास बुझा दो अभी.

मैंने दीदी की बात सुनकर उनकी छूट से अपनी ऊँगली निकली और दीदी को पलटकर सीधा दीवाल से सटाकर खड़ा कर दिया और दीदी के होंठो को चूमकर दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.



मैं- नहीं दीदी मैं बहुत थक गया हूँ. मैं अभी आपको नहो छोड़ सकता हूँ. कल दोपहर में तुमको चुदुँगा. अभी आप जाओ कल दोपहर में आपकी छूट की प्यास बुझाऊंगा.

सरिता दी- ऐसा मत कर अभी. मैं रात भर सो नहीं सकुंगी. कुछ कर अभी. मुझको सत्ता मत.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ dii.main बहुत थक गया हूँ. वो आप को देखकर मैं कण्ट्रोल नहीं कर पता हूँ इसलिए मैंने आपके साथ इतना किया. बाकि आज छोड़ नहीं पाउँगा आपको. समझा करो दीदी.

दीदी मेरी बात सुनकर मायुश हो गयी और जाने लेन लगी. मैंने आगे बढाकर दीदी का हाँथ पकड़ लिया और उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनके कण के पास जाकर कहा.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ दीदी. मैं वाकई में थक गया हूँ. आप प्ल्ज़ नाराज़ मत होइएगा. कल दोपहर में पक्का आपकी बात मानूंगा मैं.

मेरी बात सुनकर दीदी निचे चली गयी. मैं आकर अपने बिस्टेर पर बैठ गया. ऐसा नहीं था की मैं दीदी को छोड़ नहीं सकता था. बस मैं थोड़ा दीदी को तड़पना चाहता था और कल के लिए अपने आप को और मज़बूती से तैयार करना चाहता था. मैं यही सोचते हुवे अपने बिस्टेर पर सो गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-132

मैं- मैं सच कह रहा हूँ दीदी. मैं वाकई में थक गया हूँ. आप प्ल्ज़ नाराज़ मत होइएगा. कल दोपहर में पक्का आपकी बात मानूंगा मैं.

मेरी बात सुनकर दीदी निचे चली गयी. मैं आकर अपने बिस्टेर पर बैठ गया. ऐसा नहीं था की मैं दीदी को छोड़ नहीं सकता था. बस मैं थोड़ा दीदी को तड़पना चाहता था और कल के लिए अपने आप को और मज़बूती से तैयार करना चाहता था. मैं यही सोचते हुवे अपने बिस्टेर पर सो गया.

अब आगे.

सुबह मैं सोकर उठा और अपना रोज का काम फिनिश कर निचे हॉल में आ गया. थोड़ी देर बाद नाश्ता बन गया और सबने नाश्ता किया और मम्मी पापा अपने जॉब पर जाने के लिए तैयार होने के लिए अपने कमरे में चले गए. मैं भी तैयार होने अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद मैं तैयार होकर निचे आया और अपने काम पर छलांग गया. वह पहुंचने पर पता चला की आज कोई काम नहीं है तो मैं वापस घर आ गया. घर आने के बाद दीदी ने दरवाज़ा खोला और मैं अंदर आ गया.

अंदर आकर मैं अपने कमरे में गया और जाकर फ्रेश होकर निचे हॉल में आ गया दीदी अभी वही बैठी थी. मनीषा अपने कमरे में थी. अब उसका दर्द कुछ हद तक ठीक हो गया था. मैं जाकर दीदी के पास बैठ गया. थोड़ी देर बैठे रहने के बाद भी दीदी कुछ नहीं बोली तो मैं सरक कर दीदी के पास चला गया और दीदी का हाँथ पकड़ लिया तो दीदी ने मुझसे मेरा हाँथ छुड़ा लिया. मैंने फिर से दीदी का हाँथ पकड़ा तो दीदी ने फिर से अपना हाँथ छुड़ा लिया. मैंने दीदी से पूछा.

मैं- क्या हुवा दीदी. आप मुझसे नाराज़ हैं क्या.

सरिता दीदी- मैं कौन होती हूँ तुझसे नाराज़ होने वाली.

मैं- तो फिर क्या बात है आप अपना हाँथ क्यों मुझसे छुड़ा ले रही है. आप कल की बात से खफा हैं.

सरिता दी- और क्या करू. जब तुम्हारा मन होता है तब तुम मुझे गरम कर के अपनी प्यास बुझा लेते हो और कल जब मेरा मन था की तुम मेरी प्यास बुझाओ. तो तुम भाव खाने लगे.

मैं- मैं खोई भाव नहीं खा रहा था दीदी. मैं तो बस यही छह रहा था की मैं थका हुवा था और आराम करना चाहता था. और मुझे लगा आप भी थकी हुई होंगी. इसलिए मन कर दिया. लेकिन आप जो कहेंगी मैं वो करूँगा.

सरिता दी- मैं जो कहूँगी वो तू करेगा.

मैं- आप जो कहेंगी मैं वो करूँगा. आप एक बार हुकुम तो करिये. फिर देखना आप का ये गुलाम कैसे आपके सरे हुकुम की तामील करता है.

सरिता di(muskurakar). तो फिर ठीक है आज तू मुझे शॉपिंग करवाने ले जायेगा और जो जो मैं खरीदूंगी सब का बिल तुझे पाय करना होगा. और मैंने क्या क्या ख़रीदा है ये तुम दिखने की ज़िद्द नहीं करोगे. हाँ अगर मैंने तुझपर तरस खाकर दिखा दिया तो अलग बात है. बोल मंज़ूर है तुझे.

मैं- ये तो बहुत नाइंसाफी है दीदी. एक तो मैं पैसे भी खर्च करू और कुछ देखने को भी न मिले. ये तो घाटे का सुआदा है दीदी. इसमें कुछ छूट तो दे दो अपने इस भाई को.

सरिता दी( मुझे चिढ़ाते हुवे) अपने इस भाई को. बड़ा आया. तुमने कहा था की जो मैं बोलूंगी वो तू करेगा आज. तो मेरी बात अब तुझे man-ni पड़ेगी.

मैं- ठीक है दीदी जब आप यही कह रही हैं तो यही सही.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मनीषा को आवाज़ दी. थोड़ी देर बाद मनीषा भी निचे आ गयी. अब वो ठीक लग रही थी. मैंने मनीषा को देखते हुवे पूछा.

मैं- मनीषा अब कैसी हो तुम. तुम्हारा दर्द कैसा है.

मनीषा- देखो दीदी. दर्द देने वाला hi पूछ रहा है की मेरा दर्द कैसा है. हहहहए. मज़ाक कर रही हूँ भैया. अभी एकदम से तो ठीक नहीं हुवा है, फिर भी बेहतर लग रहा है अब.

मैं- तो दवा लेकर आज और आराम कर लो फिर बिलकुल ठीक हो जाओगी.

मनीषा- हाँ भैया मुझे भी जल्दी से ठिक्क होना hai(aankh मार्कर बोली). वैसे दीदी क्या बात ही आपने मुझे क्यों बुलाया है.

सरिता दी- वो मैं अभी के साथ शॉपपिंग पर जा रही हूँ. मैंने जो बात तुमको बताई है वो ठीक से करना. कुछ गड़बड़ नहीं होनी चाहिए.

मनीषा- आप बिलकुल फ़िक्र मत करिये दीदी कुछ भी गड़बड़ नहीं होगा. और वैसे भी अभी कुछ देर पहले पापा का फ़ोन आया था. वो और मम्मी वही से कही काम से जा रहे हैं तो उन्हें आने में रात हो जाएगी. वो लोग खाना वही से खाकर आएंगे. इसलिए आप बेफिक्र रहिये. मैं सब मैनेज कर लुंगी.

मनीषा की बात सुनकर मैं सोचने लगा की दोनों किश बारे में बैठत कर रही हैं. क्या करने को कहा है दीदी ने मनीषा को और मनीषा क्या मैनेज करने की बात कर रही है. मैंने दीदी से पूछा.

मैं- क्या बात है दीदी. मुझे भी कुछ बताओ. क्या करने वाली है मनीषा.

सरिता दी- अब तू ज्यादा सीड मत बन. ये तेरे लायक बात नहीं है. और शॉपिंग से आने के बाद हम दोनों के कमर की तरफ झांकना भी मत. अब जो कुछ भी होगा रात में hi होगा.

मैं- लेकिन अभी तो आपने कहा था की दोपहर में करेंगे. और अब बोल रही हो रात में करेंगे.

सरिता दी- अब ज्यादा मत बोल तू. ये मैंने नहीं तुमने कहा था. और अब ज्यादा बकवास नहीं. मैं जो बोल रही हूँ की हम दोनों के कमरे की तरफ झांकना भी मत. नहीं तो समझ लेना. अब जा और तैयार होकर आ. शॉपिंग में भी बहुत समय लगने वाला है.

दीदी की बात सुनकर मैं अपने कमरे में तैयार होने के लिए चला गया. दीदी भी अपने कमरे में तैयार होने चली गयी. थोड़ी देर बाद मैं तैयार होकर निचे आया और दीदी का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी भी तैयार होकर निचे आ गयी. मैं तो दीदी को देखता रह गया. दीदी ने आज अपने आपको अचे से श्रृंगार कर के सजाया था. कोई फूहड़ता नहीं. सिर्फ सादगी hi दिख रही थी. उन्होंने हरे रंग का शूट पहना हुवा था. होंठो पर लिपस्टिक, आँखों के काजल. उन्होंने अपने बालो को संवर कर खुला छोड़ा हुवा था जो उनके दोनों कंधो से आगे की तरफ थे. मैं दीदी को एक तक देखने लगा. आज दीदी को देखकर मेरे मन में दीदी के लिए ठरक नहीं सिर्फ प्यार उम्दा. दीदी ने मुझे देखा तो वो बोली.



सरिता दी- क्या हुवा Abhi.aise क्या देख रहा है. क्या मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ.

main-Sach कहूँ दीदी आज आप बहुत खूबसूरत और प्यारी लग रही हैं.

सरिता दी- वो तो मैं तुझे हमेशा लगती हूँ. सेक्सी और मॉल भी लगती हूँ.

मैं- नहीं दीदी आज मेरी नियत में खोई खोट नहीं है. मैं एकदम साफ नियत से आपकी तारीफ कर रहा हूँ. आप सच में बहुत खूबसूरत लग रही हैं. आप जैसी लड़की की कामना हर लड़का अपनी पत्नी के रूप में करता है.

सरिता di(sharmate हुवे) चल हैट पागल. इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ मैं. अब चल नहीं तो बहुत देर हो जाएगी. और हमें लौटना भी है समय से.

दीदी ने मनीषा को आवाज़ दी दरवाज़ा बंद करने के लिए. मैं घर से बहार निकला और कार बहार निकली.

मनीषा ने आकर दरवाज़ा बंद कर लिया और दीदी आकर कार में बैठ गयी. मैंने कार स्टार्ट कर दी और दीदी को लेकर शॉपिंग के लिए निकल पड़ा. रस्ते में मैं दीदी से कहा.

मैं- एक बात आपको पहले से hi बता देता हूँ की शॉप पर आप मुझे भाई नहीं कहेंगी.

सरिता दी- ठीक है नहीं कहूँगी, लेकिन तू मुझसे ये करने के लिए क्यों बोल रहा है.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को मनीषा वाला पूरा वाक्य विस्तार से बता दिया. दीदी मेरी बात सुनकर जोर जोर से हंसने lagi.thodi देर बाद जब दीदी हंस कर शांत हुई तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- सच में अभी मनीषा ने तो तुम्हारी अचे से लगा दी थी. लेकिन तुम भी काम नहीं the.kya दिमाग लगाया. भैया लाल. हहहहहहह… मैं भी तुम्हे भाई hi कहुंगीय. हहहहह

दीदी की बात सुनकर मैं मुस्कुराने लगा. मैं दीदी को लेकर उसी शॉप में गया जहा पर मनीषा को लेकर गया था. जहा पर मनीषा ने मुझे भैया कहा था तो मुझे भैयालाल वाला बहाना बनाना पड़ा था. वह पहुंचकर गाड़ी पार्क करने के बाद दीदी और मैं शॉप के अंदर चले गए. संयोग से आज भी वही सेल्सगर्ल थी. जो उस दिन थी. मुझे देखते hi वो मुझे पहचान गई और मुस्कुराते हुवे बोली.

लग- अरे भैयालाल जो. ओह्ह्ह्ह सॉरी सर आप. आइये सर. अंदर आइये.

लग के मुंह से भैयालाल सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी. मैं भी उसकी बात सुनकर मुस्कुराने लगा. लग ने भी जब देखा की मैंने बुरा नहीं मन तो वो भी मुस्कुराने लगी.

मैं- अरे मैडम आपने अभी तक मेरा नाम याद रखा है और मुझे भी.

लग- अरे सर आप कोई भूलने की चीज हो. उस दिन आपके जाने के बाद मैंने अपने फ्रेंड्स लोग को आपका और आपकी गर्लफ्रेंड का किस्सा सुनाया तो सब बहुत हांसे और आपको बेचारा बोलने लगे. अब तो वो मुझसे रोज पूछते हैं की भैयालाल दोबारा आये थे क्या शॉप पर. इसलिए आप और आपका नाम मुझे याद है.

लग ने ये बात मुस्कुराते हुवे बोली थी उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुराने लगा. दीदी भी उसकी बात सुनकर मुस्कुराने लगी. दीदी ने मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- वैसे भैया तुम्हारी गफ ने तो इनके सामने तुम्हारा पोपट कर दिया था.

लग- वैसे आप कौन हैं इनकी.

सरिता दी- मैं इनकी गफ हूँ.

लग- क्या… आप भी गिर्ल्फ्रेंड हैं.

सरिता दी- क्यों आपको कोई परेशानी है मेरा इनकी गिर्ल्फ्रेंड होने में.

लग- जी मुझे क्या परेशानी हो सकती है.

सरिता दी- तो फिर जल्दी जल्दी कुछ अचे से कपडे दिखाइए. जैसे उसदिन इनकी गिर्ल्फ्रेंड ले गयी थी.

दीदी की बात सुनकर लग ने कई तरह के लेटेस्ट देसिने के सलवार शूट. जींस t-hirt टॉप लेग्गी दिखाई. उसमे से दीदी ने कुछ सेलेक्ट किया फिर उसने ब्रा और पंतय दिखाई जिसमे दीदी ने 4 ब्रा पंतय का सेट सेलेक्ट किया और ट्रेल रूम में जाने लगी. तो उन्होंने मुझे भी आवाज़ दी.

सरिता दी- अरे भैया तुम यहाँ खड़े होकर क्या करोगे. मेरे साथ आओ और बताओ की कौन से कपडे मुझे ज्यादा अचे लग रहे हैं.

दीदी की बात सुनकर मैंने लग की तरफ देखा तो उसने मुस्कुराकर जाने का इशारा किया. मैं भी दीदी के साथ ट्रेल रूम में आ गया. उस शॉप में दो जगह ट्रेल रूम बना था. एक तरफ 5 रूम ट्रेल के बने थे और एक तरफ 1 hi रूम बना था. पिछली बार जब मैं आया था तो मैंने दोनों तरफ का ट्रेल रूम देख लिया था. इसलिए मैं दीदी को लेकर सिंगल वाले ट्रेल रूम की तरफ चला गया. दीदी ट्रेल रूम में घुस गयी और मैं बहार खड़ा हो गया. थोड़ी देर खड़ा रहने के बाद दीदी एक वाइट सेक्सी सी ब्रा पंतय पहन कर ट्रैलरूम का दरवाज़ा खोला मैं तो दीदी को देखता hi रह गया. दीदी ने मुझे देखते हुवे पूछा.



सरिता दी- ये कैसी लग रही है मेरे ऊपर. जरा अचे से देखकर बताना.

मैं- बहुत अच्छी लग रही ही दीदी. फिटिंग भी बहुत बढ़िया है इसे ले लो.

दीदी मेरी बात सुनकर फिर से रूम में चली गयी थोड़ी देर बाद वो फिर से एक और रेड कलर की प्रिंटेड ब्रा पंतय पहन कर दरवाज़ा खोला और अपना हाँथ अपने सर पर एक हाँथ अपने पेट पर रखते हुवे निचे देखकर मुझसे पूछा.



सरिता दी- ये कैसी लग रही है अभी मेरे ऊपर.

दीदी को उस ब्रा पंतय में देखते hi मेरा लुंड मेरे पंत में खड़ा हो गया. जिसका उभर सामने से देखने पर नज़र आ रहा था. मैं दीदी की चूचियों को देखने लगा. दीदी ने अपनी नज़र निचे की हुई थी थो उनकी नज़र मेरे लुंड पर पड़ी. वो मेरे लुंड को देखने लगी. मैं दीदी की चूचियों को देखते हुवे अपने होंठो पर जीभ फेरकर कहा

मैं- आप इस ब्रा पंतय के बहुत कमल की लग रही हैं. इसको भी दोने कर दीजिये.

दीदी मेरी बात सुनकर फिर से ट्रेल रूम में चली गयी और कुछ देर इंतज़ार करने के बाद ट्रेल रूम का दरवाज़ा खुला और दीदी सामने आई. दीदी ने एक स्लेटी रंग की ब्रा और पंतय पहनी हुई थी ये पिछली वाली ब्रा पंतय से छोटी थी दीदी ने अपने बाल अपने कंधे के एक तरफ किया हुवा था. और अपना एक हाँथ अपने सर के पीछे किया हुवा था.



दीदी को देखते hi मेरा लुंड और जोर से तन गया. मैं दीदी की चूचिया देखने लगा और दीदी मेरे लुंड का उभर. थोड़ी डेट मेरे लुंड को देखने के बाद दीदी बोली.

सरिता दी- ये कैसी लग रही ही मुझपर.

मैं- ये तो स्पेशल आपके लिए hi बनायीं गई है. इसको भी दोने कर दीजिए.

मेरे कहने के बाद दीदी अंदर चली गयी. अब मुझसे ये हॉट नज़ारा और बर्दास्त नहीं हो रहा था. थोड़ी देर बाद दीदी ने ट्रेल रूम का दरवाज़ा खोला. दीदी ने एक ब्लैक एंड वाइट प्रिंटेड ब्रा और पंतय पहनी हुई थी. दीदी दरवाज़ा खोलकर सामने न कड़ी होकर तिरछा कड़ी होकर अपने दोनों हाँथ को अपने घुटनो पर रखकर झुक गयी और मुझे देखती हुई बोली.

सरिता दी- इस ब्रा पंतय में मैं कैसी लग रही हूँ अभी.

दीदी ने क्या पूछा मैंने वो सुना hi नहीं. दीदी जब अपने हाँथ अपने घुटने पर रखकर झुकी थी तो उनकी दोनों चूचियों की घुंडी का आधा हिस्सा बहार ब्रा के बहार नज़र आने लगा.



जिसे देखकर मेरे सबर का बंद टूट गया और मैं आगे बढ़कर दीदी को ट्रेल रूम में किया और मैं भी ट्रेल रूम में घुस गया और दरवाज़ा बंद कर लिया. दीदी मुझे ऐसा करते देख धोड़ी दर गई और बोली.

सरिता दी- या क्या कर रहे हो अभी. पागल हो गए हो. ये घर नहीं है जो अंदर घुसे आ रहे हो. ये शॉप है अगर किसी ने देख लिया तो बदनामी हो जाएगी.

मैं- कुछ नहीं होगा दीदी. घर में तो बहुत मौज़ मस्ती कर ली अब थोड़ा बहार भी करते है. बहुत मज़ा आएगा. बस तुम शांति से कड़ी रहो. और मज़ा लो.

सरित adi(meri ाअंखो में देखकर)- तुम ने बहुत गंदे हो. इस मज़े के चक्कर में मुझे बदनाम मत कर देना.

मैं- क्या दीदी. आप सोचती हैं की मैं आपको बदनाम होने दूंगा. अरे मैं आपका भाई हूँ और आपकी इज़्ज़त की रखवाली करना मेरा फ़र्ज़ है.

सरिता दी- (शरारती मुस्कान के साथ) हाँ बहुत अचे से रखवाली करता है अपनी बहन की इज़्ज़त की.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को ट्रेल रूम के शीशे की तरफ दीदी को घुमाकर खड़ा कर दिया और दीदी के पीछे खड़ा हो गया और दीदी के बाल को उनके कंधे से हटाकर अपना होंठ उनके कंधे पर रख दिया दीदी के मुंह से ssssssssssssshhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. दीदी ने अपनी आँखे बंद कर ली.

(अब तो दीदी की कंडीशन ऐसी हो गई थी की मेरे हाँथ लगते hi दीदी एकदम छुडासी हो जाती थी) मैंने दीदी के कंधे को चूमते हुवे हाँथ आगे बढाकर दीदी की चूचियों पर रख दिया और दीदी के कानो में धीरे से कहा.

मैं- दीदी अपनी आँखे खोलो और देखो आईने में. मैं तुम्हारे जिस्म के साथ कैसे खेल रहा हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी आँखे खोली और सामने आईने में देखने लगी. मैं अपने लुंड का दबाव दीदी के गांड में बढाकर दीदी की चूचिया जोर जोर से दबाने लगा. दीदी के मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई sssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मैं दीदी के कंधे और गार्डन को अपनी जीभ निकल कर चाटने लगा. दीदी मस्ती में सिसकारी भरने लगी. मैंने दीदी की दोनों चूचियों को कसकर निचोड़ते हुवे अपना लुंड दीदी की गांड पर थोक दिया. दीदी मस्ती में सिसकार उठी.

सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh अभियई. मैट कर भाई. यहहै कोई देखह सक्ता हैईईई.

मैं- कुछः नाहीइ होगा दीदी बस स्टूम अपनी आवाज़ बहार मत निकलना.

इतना कहकर मैं दीदी की गार्डन को चूमने लगा. दोनों हांथो से दीदी की चूचिया भर कर मसलते हुवे अपना लुंड दीदी की गांड मेर जोर जोर से ठोकने लगा. दीदी ने अपने सर को मेरे कंधे पर रखा और अपना हाँथ बढाकर अपनी छूट पर रख लिया और सहलाने लगी दीदी की पंतय एकदम गीली हो गयी थी. मैं दीदी की चूचिया जोर से दबाते हुवे उनके कण में सरगोशी करते हुवे कहा.

मैं- कैसा लग रहा है ऐसे घर से बहार एक शॉपिंग मॉल के ट्रेल रूम में अपनी चूचिया दबवाकर.

सरिता दी- आआह्ह्ह्हह भईई. मज़ा तो बहुत्त आ रहा ही लेकिन दर भी लग रहा हीी. थोड़ा धीरे से.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ दीदी की चूचियों से हटाया और उनकी पीठ पर लेजाकर ब्रा की हक्क खोल दिया. दीदी ने मुझे रोकना चाहा लेकिन मैं नहीं मन और दी की ब्रा उतर कर ट्रेल रूम में तंग दी और दीदी को घुमाकर अपने सामने कर लिया. मैं दीदी की आँखों में देखने लगा. दीदी भी मेरी आंखो में देखने लगी. थोड़ी देर तक एक दूसरे को देखने के बाद मैंने दीदी की कमर में हाँथ डालकर अपनी तरफ खींचा. जिससे दीदी की चूचिया मेरे साइन से टकरा गई और दीदी के मुंह से aaaaaaaaaahhhhhhh की आवाज़ निकल गई. मैंने अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और अपना एक हाँथ निचे बढ़ाकर दीदी के हाँथ पर उनकी छूट पर रख दिया. और उनका हाँथ दबाने लगा.

दीदी भी मुझसे लिपटकर मेरा भरपूर साथ देने लगी. थोड़ी देर दीदी के होंठ चूसने के बाद मैं दीदी के चेहरे और गार्डन को चूमने लगा. दीदी की कमर से मैंने अपना हाँथ उठाकर दी की चुकी पर रखकर उसे दबाने लगा. फिर मैंने दीदी की छूट से उनका हाँथ हटाया और पंतय को साइड में करके अपनी बिच वाली ऊँगली दीदी की छूट में दाल दी और दीदी की चुकी को जोर से दबा दिया.

सरिता दी- aaaaaaahhhhhhhhhh कामिनी. धीरे से दबाए. नहीं तो कोई सुन लेगा.

मैं- ooohhhhhhhhhhhh सरिताआ. तुम बहुत मस्त चीज़ हो यार. मुझसे कंट्रोलल hi नही होता.

ये बोलकर मैं दीदी की पंतय को भी उतरने की कोशिश करने लगा तभी लग की आवाज़ सुनाई पड़ी.

लग- अरे भैया. अगर फिटिंग देख ली हो तो जल्दी से बहार आ जाइये. और कस्टमर हैं ट्रेल के लिए.

लग की आवाज़ सुनकर मैंने अपना हाँथ दी की छूट से हटा लिया और दीदी की तरफ देखा, दीदी मुझे hi देख रही थी. मैंने उन्हें जल्दी से कपडे pahan-ne के लिए कहा और ट्रेल रूम का दरवाज़ा खोलकर बहार निकल आया. बाहर वो लग कड़ी हुई thi.mujhe देखकर मुस्कुराती हुई बोली.

लग- अच्छी से फिटिंग चेक कर ली न आपने. कही कोई गड़बड़ तो नहीं है.

उसकी बात सुनकर मैं बिना कुछ बोले बहार निकलने लगा. लग भी मेरे पीछे पीछे काउंटर पर आ गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-133

मैं काउंटर पर आकर खड़ा हो गया. लग मुझे देखकर मुस्कुरा रही thi.thodi देर बाद दीदी भी सभी कपडे चेक करके अपनेकपडे चेंज करके बहार आ गयी और लग को साडी कपडे पैक करने के लिए बोल दी. लग ने कपडे लिए और पैक करने लगी. पैक करने के बाद दीदी ने लग से कहा.

सरिता दी- आप जरा एक मिनट इधर आइये. कुछ काम था आपसे. और तुम यही वेट करो मैं कुछ hi देर में आ रही हूँ. अभी कुछ कपडे और लेने हैं.

दीदी की बात सुनकर मैं वही काउंटर पर hi ृक्क गया. लग दीदी के साथ दुसरे सेक्शन में चली गयी. लगभग 30 मिनट बाद दीदी और वो लग बहार आई. दीदी के हाँथ में 2 शॉपिंग बैग थे जो पैक थे. काउंटर पर आकर दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दीदी- मैं कार के पास तुम्हारा वेट कर रही हूँ. तुम जल्दी से पेमेंट करके बहार आओ.

इतना बोलकर दी बहार चली गयी. दीदी के जाने के बाद लग ने मुस्कुराते हुवे मुझसे कहा.

लग- वैसे एक बात बताइये भैया. क्या सच में ये आपकी गफ है. मेरा मतलब है की इन्हे पहले वाली के बारे में मालूम है फिर भी इनका रिएक्शन नार्मल hi है. वैसे ये पहले वाली से ज्यादा फ्रैंक और तेज़ लग रही हैं मुझे.

मैं- हाँ ये मेरी गफ hi है. कुछ महीने बाद इनकी शादी है. तब तक इन्होने अपनी जिम्मेदारी मुझे दी है. ताकि मैं इन्हे अचे से संभाल सकू.

SG(Muskurakar) हाँ वो तो मैंने देखा अभी ट्रेल रूम में. काफी लकी हैं आप.

इन्ही सब बातो के दौरान मैंने पेमेंट किया और बचे हुवे बैग्स लेकर बहार निकल आया और कार में बैग्स रख दिया और ड्राइविंग शीट पर आकर बैठ गया. दीदी ने मुझे देखते हुवे पूछा.

सरिता दी- इतनी देर कहा लगा दी और वो लग क्या कह रही थी.

मैंने दीदी को साडी बात बता दी. जिसे sun-ne के बाद दीदी मुस्कुराने लगी. फिर मैंने कार स्टार्ट की और घर के लिए निकल पड़ा. रस्ते में हमने गोलगप्पे खाये और घर आ गए. बेल्ल बजने पर मनीषा ने दरवाज़ा खोला और मेरे हांथो से शॉपिंग बैग्स लेकर ऊपर चली गयी. मैं भी अपने कमरे में आ गया और कपडे बदलकर सोने की तयारी करने लगा. क्योंकि दीदी ने मन किया था अपने कमरे की तरफ आने से तो मैं कपडे बदलकर बिस्टेर पर लटकर सो गया. लगभग 3 बजे के करीब मेरे मोबाइल पर कॉल आई. देखा तो मनीषा किट hi. मैंने कॉल पिच की तो मनीषा ने कहा.

मैं- हाँ मनीषा बोलो क्या काम है.

मनीषा- क्या भैया आप सो रहे हो. उठो आपको दीदी ने अपने कमरे में बुलाया है.

मैं- दीदी ने तो मुझे मन किया है की उनके कमरे की तरफ न औ. तो किसलिए बुलाया है.

मनीषा- अब मुझे क्या पता की किसलिए बुलाया है. आप खुद जाकर पूछ लीजिये.

मनीषा की बात सुनकर मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुवा और उव के ऊपर एक गमछा लपेटकर दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. जब मैं निचे उतर रहा था तो मनीषा निचे हॉल में जा रही थी. मुझे देखकर मनीषा ने स्माइल kiya.jawab में मैंने भी स्माइल किया और दीदी के कमरे के पास पहुंचकर दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलते hi मैं वही जैम सा गया.

पुरे कमरे में धुप की महक आ रही थी कमरा एकदम साफ सुथरा और करने से सजा हुवा था और दीदी का बीएड ओरिजिनल और आर्टिफीसियल फूलो से सजा हुवा था और दीदी बीएड पर लग जोड़ा पहने घूँघट किये दुल्हन बानी बैठी हुई थी. मेरे लिए ये किसी सर्परीज़े से काम नहीं था. मैं दरवाज़े पर खड़ा दीदी का ये सर्परीज़े देखे जा रहा था. तभी पीछे से मनीषा आ गयी और मुझसे बोली.



मनीषा- आरा क्या हुवा भैया. आपको हम दोनों का सर्परीज़े पसंद नहीं आया क्या.

मैं मनीषा की बात सुनकर बिना पीछे मुड़े hi बस अपनी दीदी को दुल्हन बना देख रहा था. मनीषा मुझे धक्का देकर कमरे के अंदर करके दरवाज़ा बंद करते हुवे बोली.

मनीषा- अब जाइये भी भैया. दीदी आपका कब से इंतज़ार कर रही हैं. अगर किसी चीज़ की जरूरत होगी तो मुझे आवाज़ दे दीजिएगा. मैं अपने कमरे में hi हूँ.

मैं चलता हुवा बीएड के पास आ गया और बीएड पर बैठ गया. कुछ देर बैठा रहने के बाद मैंने हाँथ बढाकर दीदी का घूँघट उनके सर से हटा दिया. दीदी ने एक नज़र मेरी तरफ देखा फिर अपनी नज़ारे निचे कर ली और शर्माने लगी. मैं तो बस दीदी के इस अनुपम सौंदर्य में खो सा gaya.didi ने दुल्हन का पूरा श्रृंगार किया हुवा था. दीदी ने अपने बालो में पीछे गजरा लगाया था. मांग में मांगटिक्का था. आखों में काजल. कानो में बड़े बड़े झुमके. नक् में बड़ी सी नथनी, गले में बड़े बड़े मोतियों का हर और गोल्ड की चैन, हांथो में मेहंदी और कलाई तक पहनी हुई लाल लाल चुडिया.



मैंने दीदी को निहारता रहा. दीदी दुल्हन के रूप में बहुत खूबसूरत लग रही थी. मुझे अपनी किस्मत पर बहुत नाज़ हो रहा था. थोड़ी देर तक मैं कुछ नहीं बोलै तो दीदी ने अपनी नज़ारे उठाई और मेरी नज़रो से मिलकर कहा.

सरिता दी- क्या हुवा अभी. कुछ बोल क्यों नहीं रहा है. तेरी बोलती क्यों बंद हो गई.

मैं- कुछ नहीं दीदी. क्या है ये सब, इसको करने की क्या जरूरत थी.

सरिता दी- क्यों अभी. तुझको मेरा सरप्राइज पसंद नहीं आया क्या.

मैं- आप पसंद की बात करती हो. मुझे तो बहुत पसंद आया दीदी, लेकिन इसकी जरूरत क्यात hi.

सरिता दी- देख अभी. हम दोनों के बिच बहुत कुछ हो चुक्का है. तो मेरी दिली तमन्ना थी की मैं अपने भाई के लिए एकदन दुल्हन की तरह साजु. और मैं शादी होने से पहले एक बार मैं तेरे साथ दुल्हन की तरह saj-dhajkar चुदाई करवाना चाहती थी. इसलिए मैंने सोचा की तुझे सर्परीज़े दे दू. और मेरी जो फंतासी है उसे भी पूरा कर लून.

मैं- वह दीदी क्या बात है. आपने तो मुझे खुश कर दिया. मैं भी यही चाहता था की आप दोनों को अपनी दुल्हन बहकर छोड़ू, लेकिन डरता था की कही आप दोनों नाराज़ न हो जाये. इसलिए मैं ये सब सविता दीदी के साथ आगरा में करने वाला हूँ. लेकिन आपने मेरी तमन्ना पूरी कर दी.

सरिता दी- मनीषा का तो पता नहीं, लेकिन मैं तुझसे कभी नाराज़ नेह होउंगी. मैं तेरी हर ख्वाहिश पूरी काऊंगी भाई. आज तू अपनी दीदी के साथ सुहागरात नहीं तो शुहागदिन hi मन ले मेरे भाई. आज तू मुझे अपनी बीवी समझकर छोड़ दाल. आ जा भाई और अपनी दुल्हन की प्यास बुझा दे.

मैं- मैं तो कब से आपकी प्यास बुझाने के लिए तड़प रहा हूँ. लेकिन अगर आप पहले बता देती तो मैं भी दूल्हे की तरह तैयार होता तुम्हारी लिए, लेकिन अभी देखो उव में आया हूँ तुम्हारे पास.

सरिता दी- अगर तुझे पहले बता देती तो फिर सरपरिसे कहा से रहता फिर और वैसे भी तूने पुरे कपडे नहीं पहने हैं तो मुझे उतरने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी.

दीदी की बात सुनकर मैं हंसने लगा. दीदी भी मुस्कुराने लगी. मैंने हाँथ बढाकर दीदी की चुनरी उनके सर से उतर कर निचे फ़ेंक दी. और उन्हें सर को अपने हांथो से पकड़ लिया और उनके सर को आगे की तरफ झुकाया. मैंने अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और चूमने लगा दीदी ने भी मेरे होंठ चूमने शुरू कर दिए. हम दोनों धीरे धीरे प्यार से किश कर रहे थे. थोड़ी देर किश करने के बाद मैंने मुंह खोल कर दीदी का पूरा होंठ अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा. दीदी के होंठो पर लगी लिपिस्टिक मेरे मुंह में जाने लगी मैं दीदी के होंठ जोर जोर से चूस रहा था.

थोड़ी देर दीदी के होंठ को चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी. जिसे दीदी चूसने लगी. दीदी जोर जोर से खींच खींच कर मेरी जीभ चूस रही थी. कुछ देर के बाद दीदी ने मेरी जीभ छोड़ दी और अपनी जीभ मेरे मुंह में दाल दी. मैं दीदी की जीभ चूसने लगा. हम दोनों एक दुसरे की जीभ चूसै में लगे हुवे थे. तभी मेरी नज़र मनीषा पर पड़ी वो कमरे के अंदर आकर कुर्शी पर बैठी हुई थी. मैंने उसे देखते हुवे दीदी की जीभ को जोर जोर से चूसा और फिर मनीषा से कहा.

मैं- तुम तो बोल रही थी की जब जरूरत होगी तो बुला लुंगम लेकिन तुम तो बिना बुलाये hi आ गयी.

मनीषा- मुझे बहार अच्छा नहीं लग रहा था. इसलिए मैं अंदर चली आई. आप दोनों कंटिन्यू रखिये.

सरिता दी- मनीषा तुम प्ल्ज़ बहार जाओ. मुझे शर्म आ रही है तुम्हारे सामने.

मनीषा- ये लो. 100 चूहे खाकर बिल्ली है को चली. अभी कल hi हमने थ्रीसम किया था तब तो आपको शर्म नहीं आई और आज मेरे सामने सरम आ रही है.

सरिता दीदी- कल की बात और थी मनीषा. इस वक्त सिर्फ मैं और अभी hi रहना चाहते हैं इस कमरे में. आखिर आज मैं अपने भाई की दुल्हनिया बानी हूँ. इसलिए मुझे शर्मा aayegi.plz मन जा मनीषा.

मनीषा- ठीक है दीदी. जब आप इतना कह रही हैं तो मैं जाती हूँ, लेकिन ये आप अच्छा नहीं कर रही हैं

इतना बोलकर मनीषा मुस्कुराते हुवे कमरे से बहार चली जाती hai.manisha के जाने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- उसे बहार क्यों भेज दिया. तुम अब भी शर्मा रही हो उसके सामने.

सरिता दी- बात वो नहीं है. बात ये हैं की आज के दिन मैं तुझे किसी के साथ बाटना नहीं चाहती. आज का दिन मैं मेरे लिए स्पेशल बनाना चाहती हूँ. जिसमे सिर्फ तुम और मैं राहु. वो यहाँ रहेगी तो हम दोनों को देखकर वो भी गरम हो जाएगी और फिर वो हमको डिस्टर्ब करेगी. इसलिए मैंने उसे बहार जाने के लिए कहा है. आज के बाद फिर से हम तीनो एक साथ मस्ती करेंगे.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी को फिर से किश करने लगा. थोड़ी देर किश करने के बाद मैंने अपनी जीभ निकली और दीदी के गलो को चाटने लगा. दीदी के गलो को मैंने चाट चाट कर मैंने थूक से गिला कर दिया. दीदी के गलो को चाटने के बाद मैं दीदी से अलग हुवा और उनकी सदी पकड़कर उनकी चूचियों पर से हटा दिया. अब दीदी की पहाड़ जैसी तानी हुई चूचिया मेरी आँखों के सामने ब्लाउज में दिख रही थी.

मैं कुछ देर दीदी की चूचियों को देखता फिर मैं आगे बढ़कर मैंने दीदी के माथे से मांगटीका निकल कर बिस्टेर पर साइड में रख दिया और उनके माथे को जोर से चुम लिया. फिर मैंने दीदी के एक कण से उनका झुमका निकला और उनके कण को चूमा. फिर दूसरे कण से उनका दूसरा झुमका निकला और उनके दूसरे कण को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. थोड़ी देर दीदी के कण चूसने के बाद मैंने दीदी की नथनी उनकी नक् से निकली और दीदी की नक् को चुम लिया. और दीदी को देखने लगा. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.

सरिता दी- अभी तू सच में बहुत अच्छा भाई है. कितने प्यार से अपनी दीदी को खुस कर रहा है.

मैंने दीदी की बायत का कोई जवाब नहीं दिया और दीदी की गार्डन में हाँथ डालकर पहले दीदी की मोतियों की माला उतरी और फिर दीदी की गोल्ड की जंजीर उतारकर बिस्टेर के कोने में रख दी और दीदी की आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखों में देखते हुवे मैंने अपना होंठ आगे बढ़ाया और दीदी को किश करने लगा. दीदी को किश करंट हुवे मैं दीदी को बिस्टेर पर झुकता चला गया. अब दीदी बिस्टेर पर लेट गई थी.

मैं दीदी के बिस्टेर पर लेटने के बाद दीदी के होंठो को चूसकर छोड़ दिया और दीदी की आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखे सुरमा लगा होने के कारन बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. मैं दीदी की आखो में देखते हुवे अपना एक हाँथ दीदी के पेट पर रखा और सहलाने लगा. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे उनके पेट को सहलाते हुवे ऊपर बढ़ने लगा. दीदी ने मदहोशी में अपनी आँखे बंद कर ली और मेरे हांथो का आनंद लेने लगी.



मैं अपना हाँथ बढ़ता हुवे दीदी के ब्लाउज के ऊपर से हाँथ सकता हुवे दीदी की चूचियों पर रख दिया अपना मुंह झुककर दीदी की गार्डन को चूमने लगा और उनकी एक चुकी को हल्का सा दबा दिया. दीदी sssssssssssss ाभीईई करके सिसक पड़ी. मैं दीदी की चूचिया बरी बरी से ब्लाउज के उप्पेर से दबाने लगा और दीदी के गाल और गार्डन पर किश करने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi किश करने के बाद मैंने दीदी की चुकी को पकड़ कर जोर से मसल दिया. दीदी की सिसकी निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh Bhaaiiiiiiiiiiiiiiii. आराम सीईई.

दीदी की सिसकी सुनकर मैं दीदी की चुकी जोर जोर से दबाने लगा और दीदी की गार्डन को जीभ निकल कर चाटने लगा. थोड़ी देर दीदी की चूचिया दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ ऊपर की तरफ ले गया और दीदी की गार्डन को सहलाने लगा. दीदी की गार्डन को सहलाते हुवे हाँथ ऊपर बढाकर उनके गलो को सहलाने लगा. मैंने अपना मुंह दीदी की चूचियों की घाटी में रख दिया और इस करने लगा. दीदी सिसकते हुवे बोली.

सरिता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अभियई. बॉस ऐसी होई करूओ. बहुत्त अच्छा लग रहा हैई.

मैं दीदी की आवाज़ सुनकर अपनी एक ऊँगली दीदी के होंठो पर रख दी और रगड़ने लगा. दीदी मस्ती में सिसकारी ले रही थी. मैं दीदी के होंठो को मसलते हुवे अपने होंठ खोलकर दीदी की एक चुकी को ब्लाउज सहित मुंह में ले लिया और चूसने लगा. दीदी एकदम मस्त होकर अपने सर को इधर उधर करने लगी. थोड़ी देर दीदी की एक चुकी को चूसने के बाद मैंने दूसरी चुकी को मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मैंने दीदी के होंठो से अपना हाँथ हटाकर दीदी की दूसरी चुकी पर रख दिया और उसे दबाने लगा. थोड़ी देर हल्का हल्का दबाने के बाअद मैंने दीदी की चुकी को ब्लाउज के ऊपर से जोर से काट लिया और उनकी चुकी की घुंडी को अंगूठे और ऊँगली से पकड़कर जोर से मसल दिया. दीदी मस्ती में दर्द से चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuccccccchhhhhhhhhhhhhhh. aaaaaaaaaaaahhhhhhhh अभीइइइइइइ. थोड़ा धीरी सी. जोरर सी मैट काटत ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैईईई.

मैं- तुम्हे कैसा लग रहा है सरिता.

सरिता दी- कुछ मैट पूछह अभी. बॉस अपनी डीडीई की जिस्म सी खेलत्ता रहा. बहुत्त अच्छा लग रहा हीी. खास चू बाहुटत पहहली ही मेरे सठह शुहागडींन मना लेता. ोुह्ह्ह

दीदी की बात सुनकर मैं जोर जोर से दीदी की चुकी दबाने लगा और एक चुकी को खींच खींच कर ब्लाउज के ऊपर से पिने लगा. दीदी अब एकदम मस्त हो चुकी थी. मैंने फिर से दीदी की चुकी को जोर से दन्त से कटा और एक हंट से उनकी चुकी मसल दी. दीदी मस्ती से चीख पड़ी और उठकर बैठ गई.

सरिता दी- aaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii. बास कार भाईईई. दर्द्द होता ही.

दीदी उठकर बैठ गई और मेरे चेहरे की तरफ देखने लगी. मैं दीदी को देखते हुवे अपना होंठ दीदी के होंठो पर रखकर दीदी को फिर से चूमते हुवे वापस बिस्टेर पर लिटा दिया और अपना एक हाँथ दीदी की नाभि पर रखकर ऊँगली से कुरेदने लगा. दीदी अपने बदन को ऐठने लगी. थोड़ी देर दीदी के होंठो को चूसने के बाद मैं दीदी की गलो को किश करते हुवे दीदी की गार्डन पर आया और जोर जोर से दीदी की गार्डन को दोनों तरफ किश करने लगा. अपनी ऊँगली से दीदी की नेवेल कुरेदने के बाद मैंने अपना हाँथ सरकते हुवे दीदी की सदी की सदी और पेटीकोट के अंदर डालकर दीदी की छूट पर पहुंचने की कोशिश करने लगा. दीदी ने पेटीकोट तीते बंधा था इसलिए मैं जोर लगाकर हाँथ अंदर करने लगा तो दीदी मचलने लगी.



थोड़ी देर और कोशिश करने के बाद भी मेरा हाँथ अंदर नहीं गया तो मैंने वह से हाँथ उठाकर दीदी की चीची पर रख दिया और दबाने लगा. मैं दीदी की गार्डन को अभी भी किश कर रहा tha.thodi देर दीदी की गार्डन को किश करने और चुकी दबाने के बाद मैंने दीदी का हाँथ पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया. दीदी उठकर मुझसे लिपट गयी और अपने हाँथ मेरी नंगी पीठ पर फिरने लगी. मैंने दीदी से कहा.

मैं- सरिता अगर तुम्हारी इज़ाज़त हो तो तुम्हारा ब्लाउज तुम्हारे जिस्म से उतर दू.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मुझे और कसकर अपने साइन से लिप्त लिया, जिससे दीदी की बड़ी बड़ी चूचिया मुझे अपने लगे साइन पर महसूस होने लगी. दीदी के निप्पल तने हुवे मुझे फील हो रहे थे. दीदी मेरी पीठ पर हाँथ फेरते मदहोश आवाज़ में बोली.

सरिता दी- तुम्हे मुझसे इज़ाज़त लेने की जरूरत नहीं है अभी. मैं पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ. जैसे चाहो मेरे जिस्म के साथ खेलो. तुम्हे जैसे ठीक लगे वैसे hi करो. चाहे तो ब्लाउज खोलकर मुझे प्यार करो. चाहे मेरे सरे कपडे उतर कर प्यार करो. तुम्हारी जो इच्छा हो वो करो. बस तुम मुझे प्यार करो.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी के गार्डन पर हाँथ फिरने लगा और कुछ देर बाद उनके ब्लाउज की डोरी को दोनों हांथो से पकड़ लिया और खींचकर खोल दिया. फिर मैं दीदी के कंधे से उनका ब्लाउज थोड़ा सा सरका दिया और दीदी के कंधे को चूमने लगा. मैं अपना हाँथ दीदी की गार्डन से घूमते हुवे निचे की तरफ सरकने लगा और ले जाकर दीदी के ब्लाउज के हुकक को दोनों तरफ से पकड़ लिया और खोल दिया. दीदी का ब्लाउज उनके कंधो पर लटक गया. मैं अपने हाँथ की नंगी पीठ पर फेरने लगा और उनके कंधे को किश करता रहा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को अपनी बहो से आज़ाद किया और उनकी ब्लाउज को पकड़कर उनके शरीर से अलग कर दिया. अब दीदी ऊपर से ब्रा में मेरे सामने बैठी थी.

मैंने दीदी को देखते हुवे दीदी की सदी को पकड़ लिया और उसे खोलने लगा. दीदी भी अपने गांड उठा उठा कर अपनी सदी खोलने में मेरी मदद करने लगी. थोड़ी hi देर में मैंने दीदी की सदी खोलकर उनके जिस्म से अलग कर दी. अब दीदी ने निचले शरीर पर पेटीकोट और ऊपर ब्रा मौजूद थी. मैं को फिर से बिस्टेर पर लिटा दिया और दीदी की नेवेल पर अपने होंठ रख दिया और चूमने लगा. मैंने अपना एक हाँथ दीदी की चुकी पर रखा और दूसरा हाँथ दीदी की एक तंग पर पेटीकोट के ऊपर से रख दिया और पेटीकोट ऊपर सरकने लगा. मैंने दीदी की नाभि थोड़ी देर किश की फिर अपनी जीभ निकलकर दीदी की नाभि में दाल दी.

मेरी जीभ अपनी नाभि में लगते hi दीदी का जिस्म कैंप गया. मैं दीदी की नाभि जीभ से चाटने लगा. एक हाँथ से मैं दीदी की चुकी दबाने लगा और एक हाँथ से दीदी का पेटीकोट को उनके घुटनो से ऊपर करके दीदी की नंगी टैंगो को सहलाने लगा. मैं जोर जोर से अपनी जीभ उनकी नाभि में अंदर बहार कर रहा था. दीदी की नाभि 1 इंच गहरी थी. इसलिए मेरी जीभ आसानी से अंदर बहार हो रही थी. थोड़ी देर दीदी की नाभि चाटने के बाद मैंने अपने जीभ दीदी की नाभि से निकली और उनके पेट पर फेरने लगा. मैं अपने हाँथ से अभी भी दीदी की चुकी दबा रहा था.

थोड़ी देर दीदी का पेट चूमने के बाद मैं अपने होंठ ऊपर की तरफ बढ़ने लगा और दीदी की क्लीवेज को मुंह में भरकर चूसने लगा. एक हाँथ मैंने दीदी के सर पर रख दिया और सहलाने लगा. थोड़ी देर तक दीदी के क्लीवेज को चूसने के बाद मैं दीदी से अलग होकर बिस्टेर पर बैठ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
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